Lok Sabha Debates
Regarding Loss Of Lives Due To Storm And Hail In Several District Of Bihar. on 23 April, 2015
Sixteenth Loksabha an> Title: Regarding loss of lives due to storm and hail in several district of Bihar.
माननीय अध्यक्ष : कल बिहार में जो घटना घटी है उस पर बोलने के लिए मैं श्रीमती रंजीता रंजन और श्री अश्विनी कुमार चौबे जी को अनुमति देती हूं।
श्रीमती रंजीत रंजन (सुपौल) : अध्यक्ष महोदया, मैं एक बहुत ही गंभीर विषय पर बोलना चाहता हूं। किसान ओले की पीड़ा से त्रस्त थे। मंगलवार की रात उत्तर बिहार में कोसी और सीमांचल के इलाके में पूर्णिया, मधेपुरा, सहरसा, सुपौल, भागलपुर, दरभंगा, कटिहार और कई जिलों में चक्रवाती तूफान आया, उसे चक्रवाती तूफान भी कह सकते हैं, जो नेपाल से आया, जिसमें अभी तक 50 लोगों की मौत हुई है। पूर्णिया के एक ही प्रखंड, "डगरूआ" में सबसे ज्यादा 39 लोगों की मौत हुई है, कटिहार में 2 लोगों, सुपौल में 1 आदमी, मधेपुरा में 7 लोगों की मौत हुई है। इस तरह से लोगों की मौत की संख्या 50 पहुंच गयी है। वहां गेहूं की फसल कट कर खेतों में पड़ी हुयी थी, फसल कई हजार एकड़ भूमि पर पड़ी हुयी थी, किसानों को उसका नुकसान हुआ है। किसानों को मकई, लीची, आम और मुंग की खेती का नुकसान हुआ है। वहां कई हजार एकड़ भूमि में फसलों का नुकसान हुआ है। माननीय मुख्य मंत्री जी वहां गये और उनके लिए कुछ मुआवजे का ऐलान किया है।
मैं आपके माध्यम से भारत सरकार से आग्रह करती हूं कि वहां कमेटी जानी चाहिए और उसको राष्ट्रीय आपदा घोषित करनी चाहिए क्योंकि वह बहुत बड़ा तूफान था। अभी भी खबरें आ रही हैं कि लोगों की मौत की संख्या और बढ़ सकती है और जितना नुकसान हुआ है उससे ज्यादा भी नुकसान हो सकता है। कई घर जो फूस और टीन के बने थे, वे तूफान से बर्बाद हो गये हैं। उत्तर बिहार, बिहार का सबसे पिछड़ा और गरीब इलाका है, मैं आग्रह करूंगा कि उसको विशेष पैकेज के तौर पर राष्ट्रीय आपदा घोषित करते हुए, भारत सरकार को वहां पर जल्द ही अपनी टीम भेजनी चाहिए। आपने मुझे महत्वपूर्ण विषय पर बोलने का मौका दिया है, इसके लिए मैं आपके प्रति आभार व्यक्त करती हूं।
माननीय अध्यक्ष : श्री भैरों प्रसाद मिश्र को श्रीमती रंजीत रंजन द्वारा उठाए गए विषय के साथ संबद्ध करने की अनुमति प्रदान की जाती है।
श्री अश्विनी कुमार चौबे (बक्सर) : महोदया, बिहार के उत्तर पूर्व के 7 जिलों जैसा कि बताया गया है कि पूर्णिया, कटिहार, मधेपुरा, सहरसा, सुपौल, और भागलपुर के क्षेत्रों मे मंगलवार की रात आयी भीषण वैशाखी चक्रवाती तूफान के साथ ओले भी बरसे। वहां 65-70 लोगों की मौत हो गयी है। वहां ढाई से तीन हजार लोग बहुत बुरी तरह से घायल हुये हैं, उनके आलवा हजारों मवेशी भी मारे गये हैं। पूर्णिया जिला में चक्रवात की गति बहुत ही तेज थी उसके कारण वहां उसका कुप्रभाव अधिक दिखाई पड़ा। इस भीषण प्राकृतिक आपदा से उन क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति ठप हो गयी है तथा सड़क और रेल यातायात व्यवस्था अस्त-व्यस्त हो गयी है। साथ ही किसानों की बड़े पैमान पर हजारो हेक्टेयर्स में लगी हुयी फसलों और खलिहानों में रखी हुयी फसलों की क्षति हुयी है।
महोदया, हम आपके माध्यम से केन्द्र सरकार से आग्रह करते हैं कि उन आपदा प्रभावित क्षेत्रों का केन्द्रीय मंत्रियों का एक दल दौरा करे और उनके आंसू पोछने का काम करे। साथ ही वहां जल्द से जल्द अलग से केन्द्रीय आपदा राहत प्रबंधन टीम भेजी जाए ताकि जो क्षेत्र क्षतिग्रस्त हुए हैं, वह उनका मुआयना करे और राहत की व्यवस्था करे। राज्य सरकार भी पर्याप्त सहायता व्यवस्था कर रही है लेकिन वह बहुत कम है। इस आपदा में जिन लोगों की मृत्यु हुई है, हम उनके प्रति श्रद्धांजलि व्यक्त करते हैं और उनके परिवारों के प्रति भी संवेदना व्यक्त करते हैं। धन्यवाद।
श्री कौशलेन्द्र कुमार (नालंदा) : अध्यक्ष महोदया, हम आज अति आवश्यक विषय पर चर्चा कर रहे हैं। मैं बिहार से आता हूं। मंगलवार 21 तारीख की रात के लगभग दस बजे पूर्णिया, सहरसा, सुपौल, मधुबनी, दरभंगा समेत बिहार के उत्तरी पूर्व इलाकों में आए चक्रवर्ती तूफान से भारी तबाही हुई है। इस तूफान में सबसे ज्यादा पूर्णिया और मधेपुरा में लोगों के मरने की खबर है। लगभग 50 से 60 लोगों के मरने की खबर है। उन्हें सरकार की तरफ से अविलंब राहत और सहायता प्रदान करने की आवश्यकता है। राज्य सरकार बचाव और राहत का कार्य बहुत तेजी से कर रही है। राज्य सरकार के पास सीमित संसाधन होते हैं। माननीय मुख्य मंत्री नीतीश कुमार जी ने हैलिकॉप्टर से सर्वेक्षण किया, लोगों का हाल-चाल भी लिया और मृत लोगों के परिवारों के लिए 4-4 लाख रुपये की घोषणा की है। मेरा केन्द्र सरकार से आग्रह है कि यहां से एक टीम जाए। इसे राष्ट्रीय आपदा घोषित किया जाए और मृत लोगों के परिवारों को दस-दस लाख रुपये दिए जाएं जिससे स्थानीय लोगों को राहत मिले। बड़े पैमाने पर जो फसल का नुकसान हुआ, उसकी क्षतिपूर्ति भी की जाए।
श्री जय प्रकाश नारायण यादव (बाँका) : अध्यक्ष महोदया, बहुत ही दुखदायी और ह्रदयविदारक घटना बिहार में घटी। कोसी, सीमांचल और मिथलांचल के इलाके में मधेपुरा, सहरसा, कटिहार, सुपौल, मधुबनी, दरभंगा और इर्द-गिर्द भारी तबाही मची, ओले गिरे, पत्थर पड़े और जान-माल का भारी नुकसान हुआ। फसलों की बर्बादी हुई और किसानों के घर आदि सब तबाह हो गए। इंसान मरे, पशु मरे और घरों का भी नुकसान हुआ। हजारों-हजार करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। हमारी केन्द्र सरकार से मांग है, माननीय गृह मंत्री जी यहां बैठे हुए हैं। मैंने इनका वक्तव्य देखा। राज्य सरकार काम कर रही है। माननीय मुख्य मंत्री जी भी काम कर रहे हैं, लेकिन बड़े पामाने पर जो नुकसान हुआ है, उसके लिए एक विशेष टीम भेजी जाए। बिहार को विशेष राहत पैकेज दिया जाए। इसे राष्ट्रीय आपदा घोषित करके मिथलांचल, सीमांचल और कोसी के इलाकों में जो नुकसान हुआ है, सरकार संवेदनशील होकर तत्काल लोगों के जान-माल की रक्षा करे और नुकसान की भरपाई की जाए।
श्री तारिक अनवर (कटिहार): अध्यक्ष महोदया, अभी बिहार में तूफान से जो नुकसान हुआ है, उस पर सदस्यों ने अपनी जो भावनाएं रखीं, उनसे अपनी भावना को जोड़ते हुए मैं इतना ही कहना चाहता हूं कि कोसी क्षेत्र जिसे हम सीमांचल भी कहते हैं, बिहार का बहुत ही नैगलैक्टेड हिस्सा है। वहां जो प्राकृतिक प्रकोप, तूफान आया, वह लगभग 105 मिनट तक चलता रहा। उससे पचास लोगों की मौत हो गई और लाखों की संख्या में लोगों का नुकसान हुआ। काफी लोग गंभीर रूप से इंजर्ड भी हुए हैं। वहां के किसानों का पहले ही ओलावृष्टि और बेमौसम बारिश से काफी नुकसान हुआ। उसके बाद यह जो प्राकृतिक प्रकोप हुआ है, यह अपने आप में चिन्ता का विषय है। राज्य सरकार की तरफ से राहत पहुंच रही है, लेकिन वह नाकाफी है। हमारा केन्द्र सरकार से अनुरोध है कि वह इसे राष्ट्रीय आपदा घोषित करे। एक हाई लैवल टीम यहां से भेजी जाए जो इस बात पर विचार करे कि जो जानें गई हैं, उनकी सही मायने में कैसे पूर्ति होगी। गृह मंत्री जी यहां मौजूद हैं। हम चाहेंगे कि वे स्वंय उस क्षेत्र का दौरा करें।
श्री आर.के.सिंह (आरा) : मैडम, किसानों का गेहूं और दलहन बर्बाद हो गया है। इस तुफान से उनके घर भी उजड़ गए। सबसे तकलीफ की बात यह है कि अभी तक रिलीफ का बंटवारा शुरू नहीं हुआ है। उनको अभी तक एक पैसा भी नहीं मिला है। जिनके घर तुफान में उजड़ गए, उनको अभी तक शेल्टर नहीं मिला है। मेरा गृह मंत्री जी से अनुरोध है कि वहां तुरंत एक टीम भेजी जाए, जिसमें मंत्रालय के पदाधिकारी और एनडीआरएफ के लोग हों। वहां लोगों के रहने के लिए टेन्टे भेजे जाएं और पीने के पानी का इन्तजाम किया जाए। केन्द्र राज्य सरकार से तत्काल राहत का बंटवारा शुरू करने के लिए कहे ...(व्यवधान)।
गृह मंत्री (श्री राजनाथ सिंह) : अध्यक्षमहोदया, श्रीमती रंजीता रंजन, श्री अश्विनी चौबे, श्री कौशलेन्द्र कुमार, श्री जय प्रकाश नारायण यादव और श्री तारिक अनवर जी ने जिस विषय की ओर ध्यान आकृष्ट किया है, इस विषय का संज्ञान मैं पहले ही ले चुका हूं। जैसे ही मुझे इस घटना की जानकारी मिली, मैंने तुरंत बिहार के मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार जी टेलीफोन पर बातचीत की, उस समय वह तुफान प्रभावित क्षेत्रों का दौरा करने के लिए प्रस्थान करने वाले थे। उन्होंने कहा कि मैं प्रभावित इलाकों का जायजा लेने के बाद पटना लौटने पर आपसे बात करूंगा। नीतीश कुमार जी ने लौटने के बाद मुझे फोन किया और स्थिति की जानकारी दी। बहुत बड़ी तबाही हुई है, कई जिलों में व्यापक तबाही हुई है। 50 ही नहीं 50 से भी अधिक लोगों की जानें जाने की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता। लाखों लोगों के बेघर होने की स्थिति पैदा हो गई है। मैं स्वयं कल इस चक्रवाती तुफान और ओला से प्रभावित इलाकों का दौरा करने के लिए बिहार जा रहा हूं। मैं बिहार की जनता और बिहार सरकार को आश्वस्त करना चाहता हूं कि भारत सरकार द्वारा जिस प्रकार की सहयोग की आवयकता होगी हम उसके लिए पूरी तरह से तैयार हैं।
माननीय अध्यक्ष : यह क्या हो रहा है, मिनिस्टर ने जब इस विषय पर बोल दिया है तब भी आप ऐसे करेंगे?
श्री मल्लिकार्जुन खड़गे : हमने गृह मंत्री जी से ज्यूडिश्यल प्रोब की विनती की थी, आपने इस पर कोई रिस्पोन्स नहीं दिया, प्राइम मिनिस्टर जी ने भी कोई रिस्पोन्स नहीं दिए। हम सदन से वॉक-आऊट करते हैं।
माननीय अध्यक्ष : आप उस विषय पर वापस कैसे जा सकते हैं?
14.13 hrs. Shri Mallikarjun Kharge, Shri Kaushalendra Kumar, Shri Jai Prakash Narayan Yadav and some other hon. Members then left the House.
माननीय अध्यक्ष : आज हमें दो मंत्रालयों की डिमांड्स पर चर्चा करनी है, इसलिए अब शून्यकाल नहीं होगा, लंच के लिए भी सभा स्थगित नहीं होगी, There will be no lunch also.