Lok Sabha Debates
Further Discussion On The Railway Budget For The Year 2003-2004, Demands For ... on 6 March, 2003
nt> 12.15 hrs. Title: Further discussion on the Railway Budget for the year 2003-2004, Demands for Grants on Account in respect of Budget (Railways) for the year 2003-2004, Demands for Supplementary Grants in respect of Budget (Railways) for the year 2001-2002 and Demand for Excess Grants in respect of Budget (Railways) for the year 2000-2001. (Concluded) *SMT. SANDHYA BAURI (BANKURA): Hon. Speaker Sir, I thank you for giving me an opportunity to speak on the Rail Budget 2003-04 presented by the hon. Minister of Railways.
On the one hand it has been said that there will be no increase in passenger fare and freight charges, while on the other hand the minimum passenger fares for mail and express trains have been raised from Rs 15/- to Rs 16/-. Passenger fare for ordinary second class has been raised from Rs 3/- to Rs 4/-. So it is obvious that the major impact will be on the poor ordinary people who usually travel within short distances. On the contrary, a special discount of 10 percent has been permitted for Rajdhani trains during a particular season.
The Budget promises 50 new trains, out of which only 17 will run on a daily basis. Some of these will run twice or thrice a week. The rest 4 trains will run only after gauge conversion. 3 out of these 4 trains will run in West Bengal. There is no mention about the date of completion of gauge conversion. I would like to ask the hon. Minister when this job would be completed.
While populist announcements have been made in the Budget regarding new trains, new tracks, the overall investment in the development of railways is going down. Compared to last year, the allocation in the Budget this year has been cut in almost all fields including purchase of engine, coach, electrification, gauge conversion, laying of new tracks, repairing of lines and double line conversion. Cases of minor and major rail accidents are on the high side and the number of passengers is also coming down. I would also request to give more importance to the issue of passenger safety and security and take necessary steps in this regard.
I am sorry to mention about some railway projects in West Bengal. An amount of Rs one crore each has been allocated for at least 15 projects in the State. The fates of these projects are hanging in uncertainty. I would like to know from the hon. Minister when these projects would be completed. The foundation stone for the Bishnupur-Tarkeshwar line was laid with much fanfare by the former Minister of Railways for the convenience of the people of West Bengal. The connection between the district of Bankura and whole of South Bengal with Kolkata would be easier if this project were completed. The demands of the people have been brushed aside by allotting only rupees one crore in this case also. I request the hon. Minister to expedite the project.
On the eve of commencing the BDR rail (Bankura-Damodar River Railways) and at the time of allotting money for the same, it was announced that it would run till Sonamukhi by September 2003 and till Chanchai Road by September 2004. Rs 174 crore were to be allotted for the expenses. Though Rs 40 crore were allotted last year, the job has only been undertaken for Rs 32 crore till date. Rs 25 crore has been allotted this year, still Rs 117 crore will be needed to complete the project. I request the hon. Minister of Railways to allot more amounts in the Budget for completion of the project in time. The former Minister of Railways said that the BDR Rail line would be extended up to Mukutmanipur, but I would like to know about the progress of it from the hon. Minister. Rs 25 crore have been allotted for this project this year. I sincerely request the hon. Minister to allot more funds for early completion of the project.
The people of our district have been demanding for a long time for trains between Ranigunj and Bankura. There are train lines from Ranigunj to Durlabhpur and a connection till Bankura would be established only if a mere 20 kms of train line is added to it. A popular demand had been made for laying new railway lines from Bankura to Tata and from Bankura to Jhargram. I would request the Minister to take necessary steps for undertaking a survey of this area so that rail tracks can be laid here.
I would also like to present few more points besides these. Haldia-Asansol Express and Adra-Shalimar Express are now running for 6 days a week. I request you to take steps so that these two trains run all 7 days a week. Bankura is an agriculture based and economically backward district. The people of this district have been demanding for long that the Purulia Express be transformed into a fast passenger so that they can travel by incurring fewer amounts as fare. There should be a stoppage of Bhubaneshwar Rajdhani Express at Bankura. A Bombay bound train should be introduced via Bankura. The coach of the first class in the Howrah-Chakradharpur train should be replaced with a new one.
The development of railways is an important factor in view of the overall social and economic development of the country. I would like to draw the attention of the hon. Minister of Railways to the fact that necessary steps should be taken for drawing a network of railways all over the country to connect the different regions.
I once again thank you Sir, for giving me this opportunity to speak on the Railways Budget.
*Translation of the speech originally delivered in Bengali.
*श्री राजो सिंह ( बेगुसराय):माननीय अध्यक्ष महोदय, बजट जो प्रस्तुत किया गया है, वह हर वर्ग के लिए फायदेमंद है। इस बजअ के माध्यम से रेल मंत्री ने देश में एक नया संदेश दिया है। बिहार देश का सबसे पिछड़ा राज्य है। ऐसी स्थिति में रेलवे पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है। हमारे बेगूसराय संसदीय निर्वाचन क्षेत्र के अंतर्गत सभी स्टेशनों और हॉल्ट पर सुख सुविधाओं की व्यवस्था पर ध्यान देने की आवश्यकता है। यात्रियों को बुनियादी सुविधायें उपलब्ध हो, इसकी भी व्यवस्था की जाये। शताब्दी एक्सप्रेस पटना-हावड़ा जाने वाली ट्रेन का कोच बहुत पुराना और टूटा फूटा लगाया गया था, उस पर भी ध्यान देकर लोगों की यात्रों सुखमय बनाने की आवश्यकता है। शेखपुरा स्टेशन पर जो रेलवे द्वारा यात्री सुविधाओं के अंतर्गत जो निर्णय लिया गया था, उसे भी अमल में आना चाहिए तथा अधूरी पड़ी योजनाओं को पूरा कराने की व्यवस्था सुनिश्चित की जानी चाहिए एवं शेखपुरा स्टेशन को मॉडल स्टेशन बनाने की जो घोषणा की गयी थी उसे भी पूरा कराया जाना चाहिए। शेखपुरा स्टेशन पर सुरक्षा की द्ृष्टि से आर.पी.एफ. की व्यवस्था प्रदान की जानी चाहिए। बिहार शरीफ, बरबीघा, शेखपुरा लाइन में ली जाने वाली जमीन का (लैंड रिक्युजीशन)किया गया है, उसके तहत कितने किसानों को मुआवजा दिया गया तथा कितना काम प्रारंभ किया गया एवं इसे शीघ्र पूरा कराने की व्यवस्था की जानी चाहिए। बेगूसराय निर्वाचन क्षेत्र के अंतर्गत मनकइ रेलवे स्टेशन पर अप.डाउन ट्रेनों की ठहराव की व्यवस्था की जाये। शेखपुरा प्लेटफार्म परया शेखपुरा स्टेशन में जो भी निर्माण कार्य हो रहा है, वह बंद है।
माननीय मंत्री महोदय वहां गये थे और उन्होंने विकास कार्यो के लिए घोषणायें भी की थीं, पूरा नहीं हुअ है, उसे शीघ्र पूरा कराया जाना चाहिए। शेखपुरा स्टेशन पर जेनरेटर की व्यवस्था की जाये। करौता. पतनेर हॉल्ट स्टेशन पर आवश्यक सामान्य सुविधाओं की व्यवस्था करायी जानी चाहिए।
मैं मंत्री महोदय से निवेदन करना चाहता हूं कि सभी ट्रेनों में यात्रियों के लिए मेडिकल की सुविधा उपलब्ध करायी जानी चाहिए तथा खानपान, साफ सफाई की भी व्यवस्था करायी जानी चाहिए। गया.क्यूल रेल मार्ग का विद्युतीकरण किया जाना चाहिए। वभिन्न स्टेशनों पर यात्री आरक्षण प्रणाली के लिए कम्प्यूटरीकरण की व्यवस्था की जाये। बेगूसराय के औद्योगिक क्षेत्र बीहट गांव में एक हॉल्ट बनाने की अवश्यकता है।
मैं बिहार के बेगूसराय क्षेत्र से आता हूं। टेलीफोन बूथ और स्टाल आबंटन के बड़ी मात्रा में आवेदन दिए गए, लेकिन कुछ काम नहीं हुआ। रेलवे में खानपान की जो व्यवस्था है, वह ठीक नहीं है। पुराने डिब्बों में सुधार होना चाहिए।
*Treated as laid on the Table of the House.
* चौधरी तेजवीर सिंह(मथुरा):माननीय अध्यक्ष जी मैं आपका आभारी हूं कि आपने मुझे रेल बजट पर विचार रखने का अवसर प्रदान किया।
महोदय, पिछले ५० सालों में जितने भी रेल बजट आये हैं, यह उनसे अनूठा एवं शानदार बजट है। इसके लिए मैं मा० रेल मंत्री को बधाई देना चाहता हूं । इस बजट में सभी बिन्दुओं पर विस्तार से विचार विमर्श हुआ है और यात्रियों का विशेष ध्यान रखा गया है।
माल भाड़े की दरों में कमी करना तथा राजधानी एक्सप्रेस एवं जन शताब्दी एक्सप्रेस जैसी प्रमुख गाड़ियों का किराया घटाया जाना एक प्रशंसनीय कार्य है। वर्ष २००३-२००४ के इस बजट में यात्रियों पर किराये का कोई अतरिक्त बोझ नहीं डाला गया है। मैं माननयी प्रधानमंत्री जी का भी आभार व्यक्त करना चाहूंगा कि उन्होंने राष्ट्रीय रेल विकास योजना का शुभारीं किया है। इस पहल से राष्ट्र की जीवन रेखा कही जाने वाली भारतीय रेल के विकास में निश्चित रूप से गति आयेगी।
पिछले साल का जो लदान का लक्ष्य रखा गया था, उस लक्ष्य से भी ३.५० मीलियन टन अधिक लदान हुआ है। मुझे खुशी है कि माल यातायात में संशोधित लक्ष्य से २३५.४ करोड़ रूपये की अधिक आमदनी हुयी है।
रेलवे विभाग के द्वारा खर्च को नियंत्रित करने के प्रयास सफल हुये हैं। विभाग २८.७.०३ करोड़ रू० के साधारण संचालन व्यय को सीमित रखने में सफल हुआ है, जिससे संशोधित अनुमानों की तुलना में ३९७ करोड़ रू० की अधिक बचत संभव हो सकी।
महोदय, यह वर्ष यात्री सुविधा वर्ष के रूप में मनाया जा रहा है। इसलिये माननयी रेल मंत्री के द्वारा यात्रियों का विशेष ध्यान रखा गया है।
महोदय, दुर्घटनाओं को चिंता का विषय मानते हुए ग्रुप ‘ डी’स्तर पर रिक्त पड़े पदों को भरे जाने का महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया है, इससे २०,००० से अधिक बेरोजगारों को रोजगार प्रदान होगा तथा दुर्घटनाओं में भी कमी आयेगी।
महोदय, सतत रेल पथ परिपथन के काम को इस बजट में शामिल किये जाने का प्रस्ताव है, जिससे तोड़फोड़ की घटनाओं में निश्चित रूप से कमी आयेगी।
महोदय, इस बजट में वृद्धों एवं बीमारों का विशेष ध्यान रखते हुए उनके किराये में विशेष छूट का प्रावधान स्वागत योग्य है, इससे आम नागरिकों को काफी राहत मिलेगी।
महोदय, सुरक्षा का विशेष ध्यान रखते हुए रेलवे सुरक्षा बल में ३.५०० अतरिक्त रेलवे सुरक्षा कर्मचारियों की भर्ती करने का निर्णय स्वागत योग्य है। जिससे रेल यात्रा के दौरान होने वले अपराधों पर अंकुश लगेगा।
महोदय, माल भाड़े व यात्री किराये में बगैर वृद्धि किये हुए अर्थव्यवस्था को सुद्ृढ़ करने के लिये २०५१ करोड़ रू० की अतरिक्त आय इस बजट का मुख्य आकर्षण है, इससे निश्चित रूप से रेलवे की आर्थिक स्थिति सुद्ृढ़ होगी।
मा० अध्यक्ष जी आपके माध्यम से मैं अब मा० रेल मंत्री जी का ध्यान अपने लोक सभा क्षेत्र मथुरा की ओर आकर्षित करना चाहता हूं। मथुरा देश का एक प्रमुख धार्मिक स्थल है। यह भगवान श्री कृष्ण की जन्म स्थली एवं क्रीड़ा स्थली है। यहां देश विदेश से पर्यटक एवं श्रद्धालु लाखों लाखों की संख्या में आते हैं। अत: यहां यात्रियों की सुविधा को देखते हुए मथुरा रेलवे जंक्शन पर सभी सुपरफास्ट गाड़ियों का ठहराव नितांत आवश्यक है, जिससे यात्रियों की सुविधा के साथ साथ रेल विभाग को भी अतरिक्त राजस्व की प्राप्ति होगी।
महोदय, मथुरा जंक्शन पर शताब्दी, राजधानी तथा अप में ए.पी एक्सप्रेस का ठहराव श्रद्धालुओं की कठिनाइयों को देखते हुए नितांत आवश्यक है।
महोदय, मथुरा की जनता का इलाहाबाद में हाईकोर्ट होने के कारण प्रतदिन आना जाना होता रहता है। मथुरा से इलाहाबाद के लिये तूफान एक्सप्रेस के अलावा अन्य कोई रेलगाड़ी नहीं है। अत: मेरा रेल मंत्री जी से निवेदन है कि मथुरा से इलाहाबाद के लिए एक अतरिक्त गाड़ी की व्यवस्था करना सुनिश्चित करने का कष्ट करें।
माननीय अध्यक्ष जी अब मैं आपके माध्यम से माननीय रेल मंत्री जी का ध्यान मथुरा जनपद के कोसी एवं छाता नगर की ओर आकर्षित करना चाहता हूं। यह क्षेत्र औद्योगिक क्षेत्र है तथा यहां बड़ी बड़ी औद्योगिक इकाइयां लगी हैं तथा दिल्ली में उद्योग बंद होने के कारण दिल्ली से विस्थापित उद्योगपति कोसी एवं छाता में नयी औद्योगिक इकाइयां बड़ी मात्रा में लगा रहे हैं। अत: मेरा माननीय मंत्री जी से अनुरोध है कि उद्योग जगत एवं श्रमिक तथा दैनिक यात्रियों की समस्या का समाधान करने के लिये कोसी एवं छाता रेलवे स्टेशनों पर कुछ सुपरफास्ट रेलगाडियों के ठहराव की समुचित व्यवस्था की जाये।
महोदय, मैं आपके माध्यम से माननीय रेल मंत्री को ध्यान दिलाना चाहता हहूं कि कोसी दैनिक यात्री संघ के पदाधिकारियों के साथ कोसी स्टेशन पर ताज एक्सप्रेस के ठहराव के लिए मैं कई बार मिला हूं। मा० मंत्री जी ने मुझे ताज एक्सप्रेस के कोसी रेलवे स्टेशन पर ठहराव का आश्वासन भी दिया, परन्तु अभी तक इस पर कोई कायैवाही नहीं की गयी है। अत: मेरा मा० मंत्री जी से अनुरोध है कि ताज एक्सप्रेस का कोसी रेलवे स्टेशन पर ठहराव सुनिश्चित करने का कष्ट करें।
महोदय, मैं आपके माध्यम से रेल मंत्री जी को धन्यवाद देना चाहूंगा कि अभी कुछ समय पहले अपने मथुरा भ्रमण के दौरान मथुरा जंक्शन पर दो सुपरफास्ट ट्रेनों का, जिनमें महामाया एक्सप्रेस भी शामिल है, मेरे अनुरोध को स्वीकार करते हुए इनका ठहराव सुनिश्चित किया है।
महोदय, मैं आपके माध्यम से मा० रेल मंत्री जी से अनुरोध करता हूं कि फराह रेलवे स्टेशन से मात्र आधा किलोमीटर दूर स्थित विश्व के एकात्म मानववाद के प्रणेता पं० दीनदयाल उपाध्याय जी की जन्म स्थली नगला चन्द्रभान है। अत: रेल मंत्री जी से मेरा अनुरोध है कि फराह रेलवे स्टेशन का नाम बदल कर पं० दीन दयाल उपाध्याय रेलवे स्टेशन कर दिया जाये।
महोदय, आपके द्वारा मुझे समय दिये जाने पर आपका हार्दिक आभार व्यक्त करते हुए मैं अपनी वाणी को विराम देता हूं।
*Treated as laid on the Table of the House.
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*SHRI MANABENDRA SHAH (TEHRI GARHWAL): Sir, the Railway Budget as presented by the Hon’ble Railway Minister for 2003-2004 has greatly disappointed me because it has continued to neglect the newly created state of Uttranchel in all fields.
New lines have been announced by the Hon’ble Minister. But none in Uttranchel.
Old demand which is Pre-Independent demand and insistently demanded by me is the Rishikesh-Dehra Dun new line via Kanserao or direct via Doiwala. It has been surveyed but there is no mention of this in the Railway Budget.
The technical objection of gradience is aborting the construction of this new line. Any such objection does not hold water. It is a lesser problem then Katra-Quazigund or Quazigund-Baramulla. Surely gradiences are there too and yet the Kashmir lines have been taken up. Then why not in Uttranchel?
Similarly the assurance announced by the hon. Minister’s predecessor for extending the railway line to Kathgodam has been overlooked. Was it a sop given with no intention to implement merely because at that time luckily a Minister or State in the Railways Shri Satpal Maharaj hailed from Garhwal?
Dehra Dun to Pontha Sahib via Dak Pathar has been brushed aside, ignoring the importance of Pontha Sahib; ignoring that it is another gate way to Simla; It is also ignoring the potential of direct link between Amritsar and Hemkund Sahib via Annandpur Sahib of being constructed in the future.
Uttranchel has places of All India importance. Four pilgrim shrines Jamnotri, Gangotri Kedarnath and Badrinath drawing crowds from all over India and Hemkundsahib Gurudwara also drawing devotees from all over but none are provided a direct access by the Railways.
A suggestion was mooted by me that there should be a direct fast train from south to Rishikesh has not found favour. Similarly a direct link with the four Dhams-Jaganath, Rameshwaram, Dwarika and Badrinath i.e. Rishikesh should be there. This has not found favour with the Ministry, as it wants to shirk detailed exercise.
New trains announced by the hon. Minister are: 50 introduced, 24 extension of run of the trains new MEMU & DEHU which are to be introduced. But Uttranchel has no place.
Even linking one corner of Uttranchel with the other corner, that is East and West link, you may call it a link road or shuttle train, but I call it a fast inter city train from east-most station i.e. Kathgodam to west-most station Dehra Dun, the capital of Uttranchel has not found favour.
Merely making Dehra Dun-Kathgodam Express to now run bi-weekly means that the people should interact with the Government only twice a week. Whom are the railways trying to mislead?
Likewise there is disillusionment regarding Dehra Dun Shatabdi. When it was introduced it was running direct between Delhi and Dehra Dun with a halt at Saharanpur of 20 minutes to about-turn the Shatabdi for Dehra Dun and vice versa.
I had pointed out that 20 minutes delay vitiated the introduction of fast train connected to Delhi with important places, I was then advised that it was a temporary arrangement as a bye-pass was being constructed to bye-pass Saharanpur.
I was amazed when two-minute halt was introduced at Roorkee; was flabbergasted when Meerut was added and it became farcical when Muzaffarnagar was added.
All these halts should be abolished, bye-pass should become operative and the Saharanpur passengers, though more passengers are from Dehra Dun catch the train at Tapri.
Some miscellaneous projects have been mentioned to whom I request the following be also added.
Doubling of lines between Luxur & Dehra Dun, remodelling of traffic facilities in the yards including introduction of two more within Uttranchel, a shed at Harrawala freight terminal, overbridge at Muhkampur, extension of electrification of Railway lines from Luxur to Dehra Dun, hygienic catering service of nutritious food and automatic tea/coffee within and outside the Dehra Dun and Haridwar stations.
रेल मंत्री (श्री नीतीश कुमार) : माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं सबसे पहले उन सभी माननीय सदस्यों को धन्यवाद देना चाहता हूं, जिन्होंने रेल बजट पर चर्चा में या तो बोलकर या लिखकर हिस्सा लिया है। ऐसे कुल माननीय सदस्यों की संख्या १२० है। यह इस बात का परिचायक है कि रेलवे में पूरे सदन की कितनी दिलचस्पी है। रेलवे के विकास में और रेलवे से सम्बन्धित जो भी मसले हैं, उनमें सब सालों की भांति इस बार भी यह बात फिर से एक बार प्रमाणित हुई है कि संसद में रेलवे के प्रति सर्वाधिक दिलचस्पी है और वह स्वाभाविक है।
अध्यक्ष महोदय : आपस में बातें न करें, प्लीज।
श्री नीतीश कुमार : अध्यक्ष महोदय, इस चर्चा में भाग लेते हुए कई माननीय सदस्यों ने इस बात का उल्लेख किया है कि यात्रियों की संख्या में गिरावट आई है। इस गिरावट को संरक्षा के मुद्दे के साथ कई माननीय सदस्यों ने जोड़कर देखने की कोशिश की है। यह बताया गया कि यात्रियों की संख्या में इसलिए गिरावट आई है कि लोग रेल में यात्रा करने से डरे हुए हैं, इसलिए यात्रा करना नहीं चाहते हैं। सेफ्टी की स्थिति ठीक नहीं है, सेफ्टी पर ध्यान नहीं है। इस बाते के साथ जोड़कर कुछ बातें कही गईं, मैं यहां यह उल्लेख करना चाहूंगा कि जहां तक यात्रियों की संख्या में गिरावट का प्रश्न है। यह गिरावट लोकल पैसेंजर्स में है, सब अर्बन पैसेंजर्स में है। यह गिरावट मेल एक्सप्रैस के पैसेंजर्स में नहीं है। अगर हम अप्रैल से दिसम्बर, २००२-२००३ के फीगर्स को देखते हैं तो हम पाते हैं कि राजधानी में यात्रा करने वाले यात्रियों की संख्या में भी वृद्धि है, मेल एक्सप्रैस में यात्रा करने वाले यात्रियों की संख्या में वृद्धि हुई है, जो पैसेंजर ट्रेन हैं, सब-अर्बन, नॉन सब-अर्बन या जो सीजन टिकट पर चलते हैं, उनकी संख्या में गिरावट आई है। इनकी संख्या में गिरावट के चलते पूरा चित्र ऐसा बनता है कि कुल मिलाकर दिसम्बर तक के फीगर्स को अगर आप देखें कि २.२१ प्रतिशत की गिरावट आई है, जबकि राजधानी में ४.७५ प्रतिशत की वृद्धि मेल एक्सप्रैस जो लाँग डिस्टेंस ट्रेन होती हैं, इसमें भी वृद्धि जब हम लीड को देखते हैं, तो पर पैसेंजर लीड को देखते हैं, उसमें भी वृद्धि है। इसलिए…( व्यवधान)
श्री तरित बरण तोपदार (बैरकपुर) :एक्सीडेंट के बाद वृद्धि नहीं हुई है।…( व्यवधान)
श्री नीतीश कुमार : आपने कहा कि एक्सीडेंट के बाद, तो एक्सीडेंट के बाद हम तो हावड़ा-राजधानी का ही फिगर लेकर बैठे हुए हैं। इसके साथ लिंक करने की कोई आवश्यकता नहीं है। अप्रैल से सितम्बर तक अगर हम देखें, हमने सिर्फ नई दिल्ली-हावड़ा राजधानी का निकाला है तो २३०१ और २३०५-अप को देखें, अप्रैल से सितम्बर पैसेंजर की संख्या एवरेज प्रतिमाह २०,६०३ थी और अक्तूबर से दिसम्बर एवरेज प्रति माह पैसेंजर की संख्या २१,४२६ थी। इसी प्रकार से अगर डाउन में देखेंगे, २३०२ को और २३०६ डाउन को देखेंगे तो अप्रैल से सितम्बर प्रतिमाह पैसेंजर की संख्या १८,१९८ थी और अक्तूबर से दिसम्बर के बीच में यह संख्या १९,२७९ थी। आपने कहा कि, एक्सीडेंट के साथ, तो इसका मतलब यह नहीं है। …( व्यवधान)हम सेफ्टी पर आ रहे है। चूंकि यह बात कही गई, इसलिए सदन को और सदन के माध्यम से देश में इस प्रकार की आशंका पैदा होती है तो उसका खंडन आवश्यक है, इसलिए मैंने उल्लेख किया।…( व्यवधान)जो यहां प्वाइंट्स जिस पर सबसे अधिक कतिपय माननीय सदस्यों के द्वारा जोर दिया गया कि पैसेंजर की संख्या की कमी का सीधा संबंध सेफ्टी से है, इसलिए मैं बता देना चाहता हूं और आपने कहा तो मैंने हावड़ा-राजधानी का ही बता दिया। इसलिए उससे इसका कोई संबंध नहीं है। लोकल पैसेंजर की संख्या में कमी आई है और लोकल पैसेंजर का हम एनेलसिस करते हैं तो यह पाते हैं कि जो लो वैल्यू एमएसटी था जिसे २०००-२००१ में शुरू किया गया था, उसकी संख्या में गिरावट आई है। उसका बहुत बड़ा कंट्रीब्यूशन नम्बर ऑफ पैसेंजर्स से हम देखते हैं कि उसमें गिरावट आई है। लो वैल्यू आपको मालूम है कि सौ कि.मी. तक की दूरी के लिए पन्द्रह रुपया पास का सिस्टम २०००-२००१ में शुरू किया गया था और आपको याद होगा कि इस संबंध में कई प्रकार की शिकायतें आई थी कि उसका दुरुपयोग हो रहा है। उसमें जोड़ा गया था कि कैसे कोई लो वैल्यू एमएसटी ले सकता है। सांसद और विधायक यदि सर्टिफाई कर दे कि यह गरीबी रेखा के नीचे है तो उस हिसाब से देते थे लेकिन उसमें दिया गया था कि जो रेवेन्यू ऑफिसर है, उसका सर्टफिकेट लें और एमपी-एमएलए का रिकमेंडेशन कराएं तो उसकी संख्या में बहुत बड़ी गिरावट आई है। अगर हम कैलेंडर ईयर २००१ में जनवरी से अगस्त के बीच में देखें तो जहां ११,०२,११४ लो वैल्यू एमएसटी इश्यू हुआ था, वहीं जनवरी से अगस्त २००२ तक १३,६४२ एमएसटी इश्यू हुआ। इस प्रकार से इसको अगर हम पैसेंजर की संख्या में अगर उसको जोड़ें तो उसको मिलाकर हिसाब लगाया जाता है। इसका एक बहुत बड़ा योगदान उस आंकड़े में है कि किस प्रकार से यात्रियों की संख्या घटी है। इसलिए मैं…( व्यवधान)
श्री श्यामाचरण शुक्ल (महासमुन्द):महोदय, बिहार में टिकट लैस ट्रैवल बढ़ने से यह समस्या कम नहीं होगी।…( व्यवधान)
अध्यक्ष महोदय : यह प्रश्न कैसे आ सकता है?
…( व्यवधान)
श्री नीतीश कुमार : आप इतने बुजुर्ग नेता हैं। मुख्य मंत्री भी रहे हैं। बहुत बड़े नेता हैं। हम तो नये आदमी हैं। हमें भी कुछ बोल लेने दीजिए। फिर अगर आपके मन में कोई शंका हो तो उसका समाधान करने की अपनी क्षमता पर हम चेष्टा करेंगे। लेकिन आप तो अनुभव के भंडार हैं। इसलिए इसके संबंध में जब भी मैंने विश्लेषण किया है, इसका कोई संबंध नहीं बैठता। जो पिछले दिनों हमने इस साल २००२-२००३ में भाड़ा बढ़ाया, इसके अलावा २००१ में, पहली अक्तूबर २००१ से सेफ्टी सरचार्ज लगा। इसका कुल मिलाकर असर हो सकता है। जो शॉर्ट डिस्टेंस के लोग थे, मनिमम फेअर तीन रुपया था, वह सेफ्टी सरचार्ज लगने के बाद चार रुपया हुआ और २००२-२००३ में हमने रेशनेलाइजेशन किया तो वह बढ़कर पांच रुपया हुआ। इन चीजों का थोड़ा असर हो सकता है।…( व्यवधान)
श्री तरित बरण तोपदार:बस में सस्ता हो गया।…( व्यवधान)
श्री नीतीश कुमार : नहीं, पहली बार नहीं है। बस में सस्ता नहीं हुआ है। आप रेलवे के हितैषी रहे हैं। आप तो बराबर रेलवे में चलने वाले हैं। रेल के केस को खराब मत करिए।
ऐसा कोई पहली बार नहीं हो रहा है कि पैसेंजर्स की संख्या में गिरावट आ रही है। हमने इसके आंकड़े उपलब्ध कराए हैं, तो यह पाया गया है कि कई बार ऐसा हुआ है कि टोटल नम्बर आफ पैसेंजर्स की संख्या में कमी आई है। जब हम देखते हैं पहले के दिनों में १९७९-८० में भी ५.७ प्रतिशत गिरावट आई थी, १९८२-८३ में १.३२ प्रतिशत की गिरावट आई थी। इसी तरह से फिर १९८३-८४ में ९.०३ प्रतिशत की गिरावट आई थी। अब आगे चलें तो १९८८-८९ में ७.६४ प्रतिशत की गिरावट आई थी, फिर १९९२-९३ में ७.५६ प्रतिशत की गिरावट आई थी। उसके बाद १९९३-९४ में १.०९ प्रतिशत की गिरावट आई थी और २००२-०३ में अगर सब चीजों को ले लें तो कुल मिलाकर गिरावट अभी तक का जो प्रोजेक्शन है, २.८२ प्रतिशत है। इस बैकग्राउंड में देखें तो इसका संरक्षा से सम्बन्ध नहीं है। जब-जब इस तरह से फेयर रिवीजन होता है या और दूसरे कारण होते हैं, कभी-कभी गिरावट आती है, जो आगे के वर्षों में पिकअप कर जाती है। जहां तक अर्निंग का सवाल है, वह १३ प्रतिशत से भी ज्यादा बढ़ी है। इसलिए उसका सम्बन्ध नहीं है।
सेफ्टी का जहां तक सवाल है, उसके लिए मैंने इस सदन में इस बात का उल्लेख किया है कि सेफ्टी के हर आस्पेक्ट को लेते हुए क्या समस्या है, उसके लिए क्या कुछ किया जा रहा है, क्या कुछ और किया जाना बाकी है और क्या कुछ किया जाना चाहिए। इन सारे बिंदुओं को समेटते हुए हमारा संसद के इसी बजट सत्र में एक श्वेत पत्र लाने का विचार है। श्वेत पत्र आने के बाद अध्यक्ष महोदय आप इजाजत दें कि एक व्यापक चर्चा सेफ्टी पर हो जाए और वह कंस्ट्रक्टिव डिबेट हो। कहां क्या खामी है, कहां क्या कमी है, इस पर बहस हो। जहां तक हमने कुछ बिंदुओं का उल्लेख किया है सेफ्टी के बारे में कि रिसेंट क्या कदम उठाए हैं। स्पेशल रेलवे सेफ्टी फंड के बारे में खन्ना कमेटी ने कहा था केन्द्र सरकार को कि असेट्स का रिनुवल नहीं हो पा रहा है, क्योंकि रेलवे में इतनी सेविंग नहीं हो पा रही है और स्पेशल रेलवे सेफ्टी फंड में उतना पैसा नहीं डाला जा रहा है। इसलिए जरूरत इस बात की है कि एक अलग से ग्रांट दें। मैं प्रधान मंत्री जी को धन्यवाद देता हूं कि उन्होंने इस बिंदु पर गम्भीरता से ध्यान दिया और १७,००० करोड़ रुपए का एक स्पेशल रेलवे सेफ्टी फंड मिला। जो अप्रेल २००१ से आपरेशनलाइज हो गया है। जहां तक २००१-०२ का सवाल है, हमने १४०० करोड़ रुपए का प्रावधान किया था, उन्होंने १४३४ करोड़ रुपए खर्च किए। स्पेशलन रेलवे सेफ्टी फंड के दो कम्पोनेंट हैं। एक केन्द्र सरकार डिवीडेंड फ्री बजट्री सपोर्ट के माध्यम से ग्रांट देती है और एक हम यात्रियों पर सेफ्टी सरचार्ज लगाते हैं। २००२-०३ में छ: महीने के काल में यह अनुमान था कि पैसेंजर्स सरचार्ज से ४०० करोड़ रुपए आएंगे, लेकिन सिर्फ ९५ करोड़ रुपए आए। वह ९५ करोड़ रुपए प्लस ३४ करोड़ रुपए जो ज्यादा खर्च किए, वह हमने रेलवे के इंटरनल सोर्स से खर्च किए। इस प्रकार १२९ करोड़ रुपए का अतरिक्त खर्चा किया। इसी प्रकार से २००२-०३ में २२१० करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया था, लेकिन हमने रिवाइज एस्टीमेट किया २३१० करोड़ रुपए का यानी और बढ़ाना चाहते हैं तब, जब पैसेंजर्स सरचार्ज से उतना पैसा आने की गुंजाइश नहीं दिख रही है। जो भी कमी होगी, उसको इंटरनल रिसोर्सेज से पूरा करेंगे। २००३-०४ के लिए २३११ करोड़ रुपए का प्रावधान किया है। स्पेशल रेलवे सेफ्टी फंड के माध्यम से जो हमारी गतायु परिसम्पत्तियां हैं, उनके रिनुवल के लिए, उनके नवीकरण के लिए हम प्रयत्न कर रहे हैं।
टक्कर को रोकने के लिए देश में कोंकण रेलवे ने ईजाद की है। यह भारतीय रेलवे में पहली बार हुआ है। यह हमारे लिए गौरव की बात है। दुनिया में एक से एक माडर्न सिस्टम हैं, लेकिन उन्होंने एंटीकोलीजन डिवाइज ईजाद किया है। जो टेक्नोलॉजी है यूरोपीयन क्रेन कंट्रोल सिस्टम की, वह काफी महंगी टेक्नोलॉजी है। लेकिन कोंकण रेलवे के रेलकर्मियों ने इसको ईजाद किया है। इसका हमने एक्सटेंडेंड फील्ड कंट्रोल परीक्षण किया और वह जालंधर-अमृतसर सेक्शन पर किया। १९ जनवरी तक परीक्षण चला। उसका परिणाम संतोषजनक है। इसलि हमने निर्णय लिया कि इसको रेलवे में लागू करेंगे। अगर ए.सी.डी. लगा देंगे इंजन में, गार्ड के वाहन में और लैवल क्रासिंग पर तो टक्कर बीते दिनों की बात हो जाएगी। इसके लिए धन की आवश्यकता है। हम एक बारगी धन इकट्ठा नहीं कर सकते, न ही एक बार सारे इक्विपमैंट हम बना लेंगे। इसलिए फेजवाइज शुरु किया। पिछली बार हमने इसके लिए प्रॉवीजन किया था कि इसके लिए सर्वे करना पड़ेगा क्योंकि यह ग्लोबल पोजिशनिंग सिस्टम पर आधारित है। इसमें रेडियो मोडम होता है। इसलिए सर्वे करना पड़ता है और यह एग्युलर डविएशन काउंट प्रिंसिपल पर आधारित है। हमें पूरे यार्ड का सर्वे करना पड़ता है, उसका डविएशन काउंट सर्वे करना पड़ता है, रेडियो रिसैप्शन सर्वे करना पड़ता है, जीपीएस रिसैप्शन सर्वे करना पड़ता है। ये सब सर्वे करने के बाद हम इस इक्विपमैंट को लगा पाएंगे। इस बार हमारा रूट कुल ६३ हजार किलोमीटर है। हमने प्रस्ताव किया है कि १० हजार किलोमीटर रूट का सर्वे करेंगे और १८०० किलोमीटर रूट में एसीडी लगाने का काम प्रारम्भ कर रहे हैं। इस बार इतना ही एसीडी लगाने का प्रॉविजन किया है। एंटी कॉलिजन डिवाइज यानी कि रक्षा कवच जिस का नाम दिया गया है, उसे लगाएंगे। और भी धन की यदि आवश्यकता होगी और जिस प्रकार आपने यहां समर्थन दिया, उससे यह काम पूरा होगा। प्रधान मंत्री स्वयं यहां मौजूद हैं। रेलवे सेफ्टी के लिए धन की कोई कमी होगी, मुझे ऐसा नहीं लगता है। प्रधान मंत्री जी ने एक बैठक में १७००० करोड़ रुपए के स्पैशल रेलवे सेफ्टी फंड का फैसला लिया। एसीडी के लिए पैसे की जरूरत होगी तो मैं नहीं समझता कि केन्द्र सरकार पीछे रहेगी लेकिन उसके लिए पूरी तैयारी की आवश्यकता है जो तैयारी हमने प्रारम्भ कर दी है।
तीसरा सवाल आया कि यदि कहीं सैबोटाज होता है, कोई ट्रैक काट देता है, रेल फ्रैक्चर हो जाता है, उसके चलते डिरेलमैंट होता है और उसमें कैजुअल्टीज होती हैं तो उनको कैसे रोका जाए। हमने अपने अधिकारियों से पूछा कि जैसा रफीगंज में हुआ, आप कहते हैं कि सैबोटाज था लेकिन बाहर के लोग और कुछ कहते हैं, जांच की बात आएगी, जांच से पता लगेगा, मैं उस विषय पर अभी नहीं आ रहा हूं। क्या हमारे पास कोई ऐसा इंतजाम नहीं है कि हम समय से पहले समझ जाएं कि हमारे ट्रैक में कोई डिसकंटिन्यूटी है? लोगों ने कहा कि हां, ऐसा है। हमने कहा कि क्या है तो उन्होंने कहा कि ट्रैक सर्किटिंग। मैंने कहा कि ट्रैक सर्किटिंग तो हम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि ट्रैक सर्किटिंग स्टेशन एरियाज में कर रहे हैं। अगर कंटिन्यूस ट्रैक सर्किटिंग करेंगे तो जैसे ही रेल फ्रैक्चर होगा, यानि डिसकंटिन्यूटी होगी तो उससे सिगनल सिस्टम जुड़ा है, सर्किट ब्रेक होगा, सिगनल लाल हो जाएगा। इससे गाड़ी रोकने में पहले से सहूलियत होगी। हमने कहा कि इसे क्यों लागू नहीं किया जाता है? उन्होंने कहा कि काफी दिक्कतें हैं, पैसे की जरूरत होगी। हमने कहा कि इस पर काम शुरु हो। कंटिन्यूस ट्रैक सर्किटिंग के लिए सबसे व्यस्त मार्ग है, ए बी और सी सबर्बन रूट्स, उनके लिए इसी साल कंटिन्यूस ट्रैक सर्किटिंग का काम शुरु करें। इस प्रकार ये सर्टेन इनीशिएटिव्स लिए गए। सेफ्टी के साथ अनेक जुड़े बिन्दु हैं। हम ऐसे डिब्बे बनाने जा रहे हैं जो यात्री हिस्सा है, अगर कॉलिजन हो जाए, डिरेलमैंट हो जाए या कुछ भी हो जाए तो उस पर कम झटका आए। जो बाहर का हिस्सा है, उसी में सारा प्रैशर ऑब्जॉर्व हो जाए ताकि यात्री सुरक्षित बचे। इस प्रकार कई कदम उठाए जा रहे हैं जिस की चर्चा हम यहां ठीक ढंग से करें तो हम कर पाएंगे और जो माननीय सदस्यों के सुझाव होंगे, उनके आलोक में रेलवे सेफ्टी के लिए रेलवे और बेहतर कदम उठा पाएगी।
राजधानी गाड़ी के एक्सीडैंट की हम चर्चा करते हैं तो सवाल उठते हैं। कमिश्नर रेलवे सेफ्टी की रिपोर्ट आई और उन्होंने कहा कि मिसक्रिएंट एक्टिविटीज है, सैबोटाज है, यह विश्वास नहीं हुआ। मैंने कहा कि हमने सविल एविएशन मनिस्टर साहब को चिट्टी लिखी है और रेलवे की तरफ से कहा जा रहा है कि वह रिपोर्ट पब्लिश हो। जब वह रिपोर्ट पब्लिश होगी तो लोग बता सकते हैं कि क्या खामी है, जांच की प्रक्रिया में क्या खामी है? जांच की प्रक्रिया हमने नहीं बनायी है, एनडीए की सरकार ने नहीं बनायी है। जांच की प्रकिया पहले से बनी है। हमने उस प्रक्रिया को जारी रखा है।
श्री अधीर चौधरी (बरहामपुर, पश्चिम बंगाल): वह रिपोर्ट पब्लिश क्यों नहीं होती है?
श्री नीतीश कुमार: मेरी पूरी बात सुनने के बाद यदि कोई शंका हो तो मैं यहां उपलब्ध हूं। अध्यक्ष महोदय मुझे इजाजात देंगे तो मैं उसका जवाब देने की स्थिति में रहूंगा। …( व्यवधान)हमने कहा कि वह रिपोर्ट पब्लिश की जाए और वह होनी चाहिए। रेलवे मनिस्ट्री की राय है कि जितनी भी दुर्घटनाओं से संबंधित रिपोर्टें हैं, वे सारी पब्लिश होनी चाहिए, लेकिन वह कमीश्नर ऑफ रेलवे सेफ्टी सविल एविएशन मनिस्ट्री में है। रूल्स के मुताबिक अंतिम निर्णय उनका है कि वह उसे पब्लिश करें या नहीं करे? हमने उनको कहा है कि वह उसे पब्लिश करे ताकि लोग बहस कर सकें और किसी नतीजे पर पहुंच सकें। खन्ना कमेटी ने कुछ सुझाव दिए हैं कि कमिश्नर रेलवे सेफ्टी का पद अभी सविल इंजीनियर्स के लिए ही है, उसे खोल दिया जाए। हमने सविल एविएशन मनिस्ट्री से कहा है कि हम इसके लिए तैयार हैं कि रेलवे के बाकी सर्विसेज के लिए खोल दिया जाए।
हमने अपना सेफ्टी डायरैक्टोरेट खोलने का फैसला किया है और ट्रैफिक डिपार्टमेंट को वजिलेंस देने की कोशिश की है। हमने जनरल मैनेजर्स, डिवीजनल जनरल मैनेजर्स की पावर्स बढ़ा दी हैं। उनके लिये अकाउंटेब्लिटी तय की जा रही है। हम इन सब बिन्दुओं पर व्यापक श्वेत-पत्र लायेंगे। उस पर चर्चा हो जाये तो ज्यादा बेहतर होगा। सच पूछा जाये तो हम इस हिसाब से रेलवे की सुरक्षा को इम्पलीमेंट करने में आगे कुछ कर सकते हैं और इस बारे में कुछ फैसला ले पायेंगे।
अध्यक्ष जी, कुछ माननीय सदस्यों ने सेफ्टी के बारे में कहा है। मैं इस विषय में दो बातों का उल्लेख करना चाहूंगा कि समाचार-पत्रों में सेफ्टी के प्रश्न पर आया था कि सेफ्टी लैवल पर ग्रुप-डी के स्टाफ की कमी है। इस कारण से भी ट्रेक की ठीक से मेंटिनेंस नहीं हो पा रही है। मनिस्ट्री से इस मामले में पूरी एक्सरसाइज करायी है। रेलवे बोर्ड से कहा गया है कि जितनी वैकेन्सीज निकली हैं, वे लगभग २० हजार हैं, एक साल के अंदर पूरी की जायें। जहां तक सिक्यूरिटी का प्रश्न है, यह राज्यों का विषय है। राज्यों में जी.आर.पी. बनी हुई है। रेलवे मनिस्ट्री उनके खर्च के लिये ५० प्रतिशत और शेष ५० प्रतिशत राज्य सरकार देती है। यह राज्य सरकार की फोर्स है और उन्हें ही यह काम देखना है। जहां तक आर.पी.एफ. का प्रश्न है, यह रेलवे प्रापर्टी की हिफाज़त के लिये बनी हुई है। हम चाहते हैं कि इसके लिये एक हाई लैवल कमेटी बने। संसद के दोनों सदनों में इस संबंध में बात की जाती है। इसलिये हमारा प्रस्ताव है कि आर.पी.एफ. को इस प्रकार से बना दिया जाये कि वह रेलवे स्टेशन परिसर के अलावा चलती ट्रेन में यात्रियों की सुरक्षा का दायित्व भी वहन कर सके। इस के लिये कानून में संशोधन करने की जरूरत होगी। इसके लिये वभिन्न मंत्रालयों से विचार-विमर्श के लिये प्रस्ताव आ गये हैं। इस संबंध में सरकार का मान्य प्रोसैस है। फिर भी आर.पी.एफ. को और मजबूत करने के लिये एक साल के अंदर ३५०० कांस्टेबिलों की नियुक्ति का प्रस्ताव है जिसे पूरा किया जा रहा है।
अध्यक्ष जी, सदन में रेल बजट पर बहस के समय माननीय सदस्य प्रोजैक्ट्स की बात करते हैं। यह स्वाभाविक है और सब को चिन्ता भी होती है कि उनके क्षेत्र में प्रोजैक्ट्स जल्दी पूरे होने चाहिये। लेकिन आप जानते हैं कि रेलवे मनिस्ट्री बजटरी सपोर्ट पर निर्भर करती है। माननीय प्रधान मंत्री जी की कृपा से यह बजटरी सपोर्ट बढ़ा है लेकिन फिर भी जितनी थ्रू फार्वर्ड परियोजनायें हैं, उन सब के लिये धन की आवश्यकता होती है। जहां तक माननीय सदस्यों ने कहा है, वह स्वाभाविक है कि उनके प्रोजैक्ट को जल्दी से जल्दी धन मिलना चाहिये। रेलवे इनफ्रास्ट्रक्चर में सब की दिलचस्पी होती है। कुछ स्ट्रेटेजिक सैक्टर्स हैं जिनकी राशि धीरे-धीरे बढ़ रही है। हमारे हाई डैंन्सिटी नैटवर्क हैं जिनमें गौल्डन क्वाडिलेट्रल एंड इट्स कोलैट्ररल्स हैं, उन्हें स्ट्रेंन्थ करने के लिये चार महा सेतु का निर्माण करने के लिये, जितने पत्तन हैं, उनके हिंटरलैंड तक पहुंचने के लिये मार्ग स्थापित करना हो, माननीय प्रधान मंत्री जी ने राष्ट्रीय रेल विकास परियोजना के लिये १५ हजार करोड़ दिया है। माननीय वित्त मंत्री जी ने ८००० करोड़ रुपया गोल्डन क्वाडिलेट्रल प्रोजैक्ट के लिये बात की है। इस संबंध में रेल विकास निगम का गठन किया गया है। इस सब के बावजूद उसमें यह प्रावधान किया गया है कि ए.डी.बी. से भी ऋण ले सकते हैं। वित्त मंत्रालय से एक हिस्सा रेलवे मनिस्ट्री को दिया गया है। इस प्रकार से यह काम करेंगे। हम कई प्रोजैक्ट्स तेजी से करना चाहते हैं। हमारे जितने पैंडिंग प्रोजैक्ट्स हैं, वे समय सीमा के अंदर पूरे करने चाहिये, इसके लिये हमें अतरिक्त धन की आवश्यकता पड़ेगी। हमारे पास जितना भी धन है, उसे वभिन्न राज्यों में बांट दिया गया है। कई माननीय सदस्यों ने कहा है कि धन उपलब्ध न होने से उन्हें ऐसा लगता है कि उनके क्षेत्र का प्रोजैक्ट १५-२० साल में भी पूरा नहीं हो सकेगा। यह स्वाभाविक है लेकिन हम इसे देख रहे हैं। इस पर विचार करेंगे। माननीय प्रधान मंत्री जी यहां मौजूद हैं। मेरा ख्याल है कि जो सब की भावनायें हैं, उन्हें ध्यान में रखते हुये रेलवे को जरूर इस मामले में और मदद मिलेगी ताकि सब के मन मुताबिक काम..
श्री नरेश पुगलिया (चन्द्रपुर) : अध्यक्ष जी, माननीय प्रधान मंत्री जी रोड्स के लिये ५६ हजार करोड़ रुपया दे सकते हैं लेकिन रेल के कामों के लिय़े पैसा नहीं है। मैं सब सदस्यों की तरफ से माननीय प्रधान मंत्री जी से अपील करूंगा कि रेल की तरफ विशेष ध्यान दें…( व्यवधान)माननीय रेल मंत्री जब कबूल कर रहे हैं कि इतना पैसा मिल रहा है तो और भी ले सकते हैं।
श्री नीतीश कुमार : अध्यक्ष जी, माननीय सदस्यों के समर्थन के लिये धन्यवाद लेकिन जो हो रहा है, उसके लिये तो शाबाशी दें कि १५ हजार करोड़ रुपये में से १२ हजार करोड़ रुपया सैंट्रल गवर्नमेंट दे रही है और राष्ट्रीय रेल विकास परियोजना १५ हजार करोड़ रुपये की है।
हमारे बजट में इन बातों का समावेश है …( व्यवधान)
श्री नरेश पुगलिया:प्रधान मंत्री जी कहें कि मैं रेल के लिए पैसे की कमी नहीं होने दूँगा। …( व्यवधान)
अध्यक्ष महोदय : प्लीज़ बैठिये।
श्री नीतीश कुमार : लगभग २२ हजार करोड़ रुपये का एक साल के अंदर निर्णय दिया है। जिस प्रकार से इससे बारे में निर्णय दिया है, मुझे पूरा यकीन है कि आप सब लोगों की भावनाओं का ध्यान रखते हुए बाकी प्रोजेक्ट्स के लिए भी प्रधान मंत्री ने कहा है। दस साल में कुछ करने के बारे में चिन्तन और विचार चल रहा है। उस पर सबका सहयोग चाहिए।…( व्यवधान)
अध्यक्ष महोदय : यह कोई तरीका नहीं है।
श्री नीतीश कुमार : रेल विकास योजना के गोल्डन क्वाडि्रलेट्रल के काम को पूरा करने के लिए रेल विकास निगम नामक कंपनी ने काम करना प्रारंभ कर दिया है और उसके माध्यम से जो गोल्डन क्वाडि्रलेट्रल के अंदर प्रोजेक्ट्स हैं, उन पर काम शुरू किया जाएगा। …( व्यवधान)
अध्यक्ष महोदय : आप बैठिये।
श्री नरेश पुगलिया: चूँकि रेल मंत्री बीजेपी के नहीं है, इसलिए उनको पैसा नहीं मिलता है। जहां-जहां बीजेपी के मनिस्टर हैं, उन्हीं को धन मिलता है, यह हमारा चार्ज है। इसलिए हम प्रधान मंत्री से सुनना चाहते हैं कि रेल के लिए पैसे की कमी नहीं है। …( व्यवधान)
अध्यक्ष महोदय : प्लीज़ बैठिये। मंत्री जी का भाषण तो पूरा होने दीजिए।
…( व्यवधान)
अध्यक्ष महोदय : खैरे जी, आप तो बैठ जाइए। मंत्री जी का भाषण तो पूरा होने दीजिए। आपको जो पूछना है वह बाद में पूछें। अभी बैठिये।
…( व्यवधान)
श्री चन्द्रकांत खैरे (औरंगाबाद, महाराष्ट्र) : अध्यक्ष जी, एक मिनट।
श्री नरेश पुगलिया: प्रधान मंत्री जी कहें कि रेल के लिए पैसे की कमी नहीं होने देंगे।…( व्यवधान)
MR. SPEAKER: Nothing should go on record excepting the Minister’s speech.
(Interruptions) * अध्यक्ष महोदय : देखिये, मैं रेकार्ड पर आपकी बात नहीं ले रहा हूँ, उसका कुछ उपयोग नहीं है।
… (Interruptions)
MR. SPEAKER: Yes, Mr. Minister, please go ahead.
… (Interruptions)
अध्यक्ष महोदय : भाषण होने के बाद। भाषण के बीच में मैं किसी को इजाज़त नहीं दूँगा।
...( व्यवधान)
श्री नीतीश कुमार : पहले हम अपनी बात तो रख लें। उसके बाद आप कहियेगा।…( व्यवधान)
MR. SPEAKER: Let the speech be over. Thereafter you can ask questions.
… (Interruptions)
अध्यक्ष महोदय : प्लीज़ बैठिये। ये क्या तरीका है? यह अच्छी बात नहीं है।
...( व्यवधान)
MR. SPEAKER: Nothing should go on record excepting the Minister’s speech.
(Interruptions)* * Not Recorded.
अध्यक्ष महोदय : भूरिया जी, आप बैठिये।
...( व्यवधान)
श्री नीतीश कुमार : अध्यक्ष महोदय, कई चक्रों में मैंने यह देखा है कि यह चिन्ता प्रकट की गई है और कुछ लोगों ने इस बात का उल्लेख भी किया है कि नई लाइनें कम बन रही हैं या गेज कनवर्शन और डबलिंग कम हो रही है। एक जगह तो मैंने पढ़ लिया कि एक साल विशेष का उल्लेख करते हुए लिख दिया कि ८००० किलोमीटर एक साल बनाया गया और इस साल बहुत गम बनाया गया। इस तरह के फिगर्स आते हैं इसलिए बहुत आवश्यक है कि कुछ आंकड़ों को हम अपनी नज़र के सामने रखें। नई लाइन, गेज कनवर्शन और डबलिंग सबको ले लें तो जब से प्लान शुरू हुआ है, तब से अगर देखें तो फस्र्ट प्लान में नई लाइन १३०० किलोमीटर बनी थी। गेज कनवर्शन ५६ किलोमीटर हुआ था और डबलिंग ३७० किलोमीटर हुई थी। कुल १७२६ किलोमीटर हुआ था। इस प्रकार से डिफरेन्ट प्लान पीरियड्ज़ को हम देखते जाएं तो हम पाएंगे कि जैसे नौवीं योजना में आ जाएं तो नई लाइन का ६६२, गेज कनवर्शन २१०३, डबलिंग ९९०३७५५ है। अगर फस्र्ट प्लान से नाइन्थ प्लान तक टोटल कर लें तो नई लाइन १०२९३.३ किलोमीटर बनी है, गेज कनवर्शन १२०४८ किलोमीटर का हुआ है और डबलिंग १२४०१.३४ किलोमीटर का हुआ है। कुल मिलाकर अगर देखें तो ३५४९७.६४ है, यानी फस्र्ट प्लान से नाइन्थ प्लान तक यह एक अचीवमेंट है।
उपाध्यक्ष महोदय, एक साल में ८००० किलोमीटर नई रेल लाइन नहीं बनी है। इस बीच में कई चीजें आ गई हैं। अब जब १०वां प्लान शुरू हुआ है तो उसमें २००२-२००३ में जिसकी सम्भावना है वह १३१७ किलोमीटर नई लाइन बनाने की है जिसमें गॉज कनवर्शन है, डबलिंग है, यह सब मिलाकर ब्रॉडगेज में एड होगा। इस प्रकार से २००३-२००४ का टारगैट हमने २२५ किलोमीटर नई लाइनों का, गॉज कनवर्शन ७७५ किलोमीटर का, डबलिंग ३४० किलोमीटर का, इस प्रकार से १३४० किलोमीटर का लक्ष्य रखा है। यानी २००२-२००३ और २००३-२००४ को मिलाकर ही लगभग २,६५७ किलोमीटर ब्रॉडगेज का हम निर्माण कर पाएंगे।
इस मामले में भी प्रगति हो रही है। अब एक बात हम बड़ी आसानी से कह देते हैं कि अंग्रेज ५२-५३ हजार किलोमीटर रेल लाइन बना गए और हम आजादी के बाद केवल १० हजार किलोमीटर रेल लाइन ही बना पाए हैं। इस प्रकार से हम नाहक की अपनी आलोचना करते हैं। अंग्रेजों ने जो रेल लाइन डाली हैं, वे रेल लाइनें अब नहीं हैं। उसके बाद अब तक बहुत अपग्रेडेशन हो गया है। इतना टैक्नौलौजी इनपुट आया है। कल वाली रेल की पटरियां अब नहीं हैं। सब जगह हाई डेंसिटी नैटवर्क काम कर रहा है। अब हम १०० किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से कुछ रूट्स पर मालगाड़ियां चला रहे हैं। जब रेल विकास योजना लागू हो जाएगी और जब हाई डेंसिटी नैटवर्क चालू हो जाएगा तो पैसेंजर ट्रेन और मालगाड़ी का स्पीड डिफरेंशियल खत्म कर देंगे। इतना एडवांसमेंट हुआ है। इस पर हमें गर्व करना चाहिए। हम लोगों की आदत है कि हम अपनी आलोचना ज्यादा करते हैं। हम अपनी चीज को कम आंकते हैं और शर्म महसूस करते है। अंगरेजों ने जिस ढंग से रेल लाइन डाली थीं, वह आप सबको मालूम है। उस समय लेबर सस्ती थी, हर चीज सस्ती थी और टैक्नौलौजी इतनी उन्नत नहीं थी। इस प्रकार से उस समय की तुलना आज से नहीं की जा सकती है।
महोदय, हम जो भी काम करेंगे वह सोच समझ कर करेंगे। पब्लिक इनवैस्टमेंट है, उसको करने का एक तरीका होता है। ये सारी चीजें इसमें आती हैं। हम जो प्रगति कर रहे हैं और आगे जो हमारा प्रगति करने का लक्ष्य है, उसमें आप सबके सहयोग और समर्थन की जरूरत है। हमारा प्रयास यही है कि अधिक से अधिक लाइनें बन सकें। रेलवे लाइनों को बनाने में सारे देश की जनता की दिलचस्पी है। जहां सड़क बनती है, वहां जनता दिलचस्पी लेती है। रेल और सड़क निर्माण से देश की जनता की प्रगति होती है। इसलिए आम नागरिक इसमें रुचि लेता है। मैं जहां कहीं भी गया, मैंने सब जगह देखा कि रेल लाइन निर्माण में सब लोग रुचि लेते हैं। हम ज्यादा से ज्यादा रेल लाइनें बनाना चाहते हैं, लेकिन अभी जितना धन है, उससे जितनी अब बन सकती हैं, वे बना रहे हैं। जब और धन मिलेगा, तो हम रेल लाइनों का और ज्यादा विकास कर सकते हैं।
महोदय, कुछ बातें यहां कही गईं। मैं देख रहा हूं कि एक बात बहुत समय से चलाई जा रही है कि हमने तीन शताब्दियां बन्द कर दीं। यह बात इस प्रकार से कही जा रही है जैसे हमने ये शताब्दियां अभी बन्द की हों और उन्हें इस रेल बजट से जोड़कर देखा जा रहा है और कहा जा रहा है कि रेल मंत्रालय ने फैसला कर लिया है। मुझे कभी-कभी बहुत आश्चर्य होता है कि हम लोग किस प्रकार से ऐसी बातें कह देते हैं और किस प्रकार से उसे इस बजट से लिंक कर दिया गया। मैं आपको बताना चाहता हूं कि पंजाब के सात-आठ माननीय सदस्य मुझ से आकर मिले और उन्होंने कहा कि हमारी पहली प्राथमिकता दिल्ली-भटिंडा शताब्दी एक्सप्रैस का चलाया जाना है। हमने दिल्ली से भटिंडा के लिए शताब्दी एक्सप्रैस चला दी। इसका इतना व्यापक कार्यक्रम हुआ कि उस कार्यक्रम में पंजाब के मुख्य मंत्री भी उपस्थित हुए, लेकिन अब हम क्या करें, वह ट्रेन ठीक नहीं चल पाई। शताब्दी की आकुपेंसी ठीक नहीं रही। हमने उसे रिव्यू किया और उसकी जगह हमने एक इंटरसिटी एक्सप्रैस चला दी, इसमें क्या बुराई है ? यह भी एकदम नहीं किया गया। शताब्दी १६ अगस्त, २००२ को चलाई और १०-०३-२००३ को उसे विथड्रा किया गया। पूरे छ: महीने तक ट्रेन चलाई गई। …( व्यवधान)
श्री जे.एस.बराड़ (फरीदकोट) : महोदय, जब शताब्दी चलाई गई, तब उसमें मात्र ३० पैसेंजर जाते थे, तो क्या यह सही नहीं है कि उसे चलाने से पहले तहकीकात की जाती कि उसके लिए इतने पैसेंजर उस रुट पर उपलब्ध हैं या नहीं ?
श्री नीतीश कुमार : यह बात ठीक है। आपको मांग करने से पहले सोचना चाहिए था। दोनों बातें नहीं करनी चाहिए। जब मैंने कहा कि आप फैसला कर लीजिए, जो भी आप मांगेंगे पहले मैं उसकी तहकीकात कराऊंगा और उसके बाद देखूंगा कि वह काम फिजीबल है या नहीं या जो आप कहेंगे, वह मैं कर दूंगा। इस प्रकार आप दोनों में से एक बात कीजिए। ऐसा नहीं होना चाहिए कि आप कहें और मैं उसे शुरू कर दूं और यदि वह फिजीबल न हो, तो आप मुझे बुरा कहें और यदि तहकीकात कराऊं और यदि वह फेल हो जाए, तो आप मुझे कोसें। ऐसा नहीं होना चाहिए। दोनों में से एक बात करिए। फिर प्रयोग करने में क्या हर्ज है। छ: महीने तक प्रयोग किया गया और उसके बाद रिव्यू किया गया। उसकी जगह पर अब इंटरसिटी एक्सप्रैस चल रही है और उसकी आकुपेंसी अच्छी है।
महोदय, इसी तरह से नई दिल्ली से बरेली के बीच में एक शताब्दी चलाई गई। उसकी आकुपेंसी भी कम थी। सदस्यों की सहमति से उसकी जगह भी इंटरसिटी चला दी गई है। उसकी आकुपेंसी बड़ी अच्छी है।
टाटानगर और हावड़ा के बीच में एक शताब्दी चलती थी, मुझे बताया गया कि वह १९९५ से चल रही है। उसकी भी आकुपेंसी ठीक नहीं थी, इसलिए उसे जन शताब्दी से रिप्लेस कर दिया। हमने जनशताब्दी टाटा और रांची के बीच में चलाई थी, उसका रोड से लम्बा रेल रूट था, वहां कोई नहीं जाता था। लोगों की सहमति से हमने जनशताब्दी को हावड़ा और टाटा के बीच कर दिया और शताब्दी को विदड्रा कर दिया। रांची और टाटा के बीच में ईएमयू शुरू कर दी। अब सब खुश हैं, सब की आकुपेंसी बढ़ गई। यह जो रेशनलाइजेशन करते हैं तो इसके लिए शाबाशी मिलनी चाहिए, लेकिन आलोचना करते हैं। तीन बंद करनी पड़ीं और बंद करने वाले लोग कहते हैं कि वे क्यों नहीं देखते कि संपूर्ण क्रांति, सप्त क्रांति, शिवगंगा, श्रमशक्ति कैसी चल रही है। महोदय, जो अच्छी चल रही है, उसे नहीं देखेंगे। उसे दो-चार महीने चला कर विदड्रा कर लिया गया तो उसी के लिए मार पड़ रही है। इसका मतलब यह नहीं है कि हम आपके सुझावों पर ट्रेन नहीं चलाएंगे। मैं सबसे अधिक आप लोगों का ध्यान रखूंगा। माननीय सदस्य जो बोलते हैं वह जनभावनाओं का प्रतबिम्ब होता है, क्योंकि रोज वही क्षेत्रों में जाते हैं।…( व्यवधान)
अध्यक्ष महोदय : कृपा कर आप बैठ जाइए।
SHRI NITISH KUMAR: I will come to your point. Let me furnish my points first.
MR. SPEAKER: Please listen to me.
… (Interruptions)SHRI NITISH KUMAR: When you meet me daily smilingly, why are you angry here?… (Interruptions)s SHRI KODIKUNNIL SURESH (ADOOR): You are not giving anything for Kerala. That is why I am angry.
श्री नीतीश कुमार : अध्यक्ष महोदय, मैं एक चीज का उल्लेख करना चाहता हूं, जब हमने २००२ और २००३ का बजट रखा था तो उस समय कई ट्रेनों का ऐलान किया था, कुछ का एक्सटेंशन और कुछ की फ्रीक्वेंसी इनक्रीस करने की बात थी। वे सब चल पड़ी हैं, वह गोहाटी और दिल्ली के बीच में है। हमने ऐलान किया था कि २४३५-२४३६, नई दिल्ली, गोहाटी राजधानी एक्सप्रैस दो दिन से चार दिन की जाएगी।…( व्यवधान)
श्री मुलायम सिंह यादव (सम्भल):आपका भाषण बहुत लम्बा हो गया है। हमारा एक सुझाव है, आप बहुत अच्छा काम कर रहे हैं, आप एक काम और करा दीजिए, कम से कम प्लेटफार्म और गाड़ियों की सफाई करा दीजिए। आप टूंडला में रेल के बाथरूम में जाकर देखिए कि वहां क्या स्थिति है।…( व्यवधान)
श्री नीतीश कुमार : अध्यक्ष महोदय, मुलायम सिंह जी जो बात कहेंगे, उस पर मैं सर्वाधिक गंभीरता से विचार करने को तैयार हूं।
अध्यक्ष महोदय : मैं भी करता हूं।
…( व्यवधान)श्री कांतिलाल भूरिया (झाबुआ):क्यादूसरे सदस्यों की बात को गंभीरता से नहीं लेंगे?…( व्यवधान)
श्री नीतीश कुमार : ऐसी बात नहीं है। महोदय, २००२ और २००३ में हमने ऐलान किया था, २४३४-२४३६, नई दिल्ली, गोहाटी राजधानी एक्सप्रैस की फ्रीक्वेंसी दो दिन से चार दिन की जाएगा। नार्थ बंगाल और असम के कई माननीय सदस्यों ने अनुरोध किया है कि इस रूट से जो राजधानी जाती है, उसकी ज्यादा दूरी होती है - २०१३ किलोमीटर है, जब कि दूसरा जो अल्टरनेटिव रूट है उसमें १९५९ किलोमीटर है। इसमें चार धंटे ज्यादा लगते हैं। लोगों ने सुझाव दिया कि २४३५-२४३६ राजधानी नई दिल्ली, गोहाटी राजधानी की जगह २४२३-२४२४, नई दिल्ली, गोहाटी राजधानी एक्सप्रैस की फ्रीक्वेंसी तीन दिन से पांच दिन करें तो हमने उनके सुझाव को स्वीकार कर लिया, चूंकि बजट में पहले इस प्रस्ताव का उल्लेख था, इसलिए मैंने समझा कि सदन में ही इसकी सूचना देनी ठीक रहेगी। ऐसा करने से जो नई दिल्ली और हावड़ा के बीच में राजधानी पटना होकर दो दिन चलती है, उसे पटना की बजाए ग्रेंड कोड से चलाई जाए, यानी सातों दिन नई दिल्ली और हावड़ा के बीच में गया होकर राजधानी चलेगी।…( व्यवधान)
श्री प्रियरंजन दासमुंशी (रायगंज) : आप मालदा से भी चलाइए, उसमें टाइम कम लगेगा।…( व्यवधान)
श्री नीतीश कुमार : आप इसके लिए नार्थ, ईस्टर्न के एमपीज़ से बात कर लीजिए, मुझे इस पर कुछ नहीं कहना है। लम्बे रूट से लोगों ने मना किया है और हमने स्वीकार कर लिया है, क्योंकि उसमें चार घंटे का ज्यादा समय लगता था।…( व्यवधान)
श्री अमर राय प्रधान (कूचबिहार):बजट में आश्वासन दिया है कि राजधानी एक्सप्रैस, दिल्ली, गोहाटी सात दिन चलेगी, लेकिन अभी तक नहीं चली।…( व्यवधान)
अध्यक्ष महोदय : कृपया आप बैठ जाइए। इसकी सदन में कैसे चर्चा हो सकती है, इसके लिए आप मंत्री जी से मलिए।
( व्यवधान)
श्री नीतीश कुमार : उसी का तो हम उल्लेख कर रहे हैं, आप सुन नहीं रहे हैं। हमने जो बजट में बाइवीकली को चार दिन करने का कहा था, उसकी जगह जो सप्ताह में तीन दिन चलती है, उसे पांच दिन करने की ही तो मैं सूचना दे रहा हूं। जो आप लोगों ने मिलकर कहा, उसी की मैं सूचना दे रहा हूं। चूंकि बजट भाषण संसद में प्रस्तुत होता है, इसलिए अगर उसमें कोई संशोधन है तो उसकी सूचना हम सदन में दे रहे हैं और उस हिसाब से अब गोहाटी से नई दिल्ली के बीच में प्रतदिन राजधानी एक्सप्रैस हो जायेगी। दो दिन वाया लखनऊ और पांच दिन वाया मेन लाइन हो जायेगी। इसके चलते हावड़ा और नई दिल्ली के बीच में २३०५-२३०६ जो ट्रेन चलती थी, यह जो पटना होकर चलती थी, उसे गया होकर चलाया जायेगा। पटना के लोगों को और इस रूट के लोगों को जो सहूलियत थी, उतना भर कोटा इसके कोचेज को बढ़ाकर गोहाटी वाली राजधानी एक्सप्रैस में ही देकर, ताकि वे डिप्राइव नहीं होंगे और हावड़ा से दिल्ली आने वाले लोग भी डिप्राइव नहीं होंगे। पटना वाले रूट से उनको समय ज्यादा लगता था, पैसा भी ज्यादा लगता था। अब तो पश्चिम बंगाल के लोगों को खुश होना चाहिए।…( व्यवधान)
श्री राजो सिंह : आपने बिहार के एम.पीज. को तो पूछा नहीं कि हम हावड़ा वाली ट्रेन को चेंज कर रहे हैं। इससे हम लोगों को बड़ी असुविधा हो जायेगी। आप क्या कहते हैं।
श्री नीतीश कुमार : राजो बाबू, यह नोर्थ ईस्ट के लिए ट्रेन है। आपको तो पटना से राजधानी पकड़नी है, वह सातों दिन पटना से राजधानी मिलती रहेगी। यह आवश्यक नहीं है कि हावड़ा से दिल्ली आने वाली ट्रेन को लोंगर रूट से जाना पड़े और उनकी पहले जो चलती थी, उसे डाइवर्ट किया गया था। अब उनको…( व्यवधान)
अध्यक्ष महोदय : मंत्री जी, आप समाप्त करिये। प्लीज सुनिये।
श्री नीतीश कुमार : माननीय अध्यक्ष जी, यही बात कहकर माननीय सदस्यों का रेल बजट को जो व्यापक समर्थन मिला है, इसके लिए उनको धन्यवाद देते हुए मैं अपनीबात समाप्त करता हूं।
SHRI PRIYA RANJAN DASMUNSI : Sir, I seek your protection. I initiated the debate. I made specific questions in my debate on the accident of the Godhra and the list of passengers and the compensations paid to them. That particular chapter he has avoided.
SHRI NITISH KUMAR: I just missed the point. गोधरा के बारे में आपने सवाल पूछा था। उनके आर.सी.टी. के केसेज हैं, वे दिये जा रहे हैं, कुछ के दिये गये हैं, एक्सग्रेशिया भी पेमेण्ट किया गया था। रेलवे एक्ट के हिसाब से वे कवर्ड हैं, एक्सीडेंट हो या अनटुवर्ड इंसीडेंट हो, वे कवर्ड हैं, इसलिए उनको दिया गया था। एक्सग्रेशिया भी दिया था और कम्पेंसेशन के मामले में…( व्यवधान)
SHRI PRIYA RANJAN DASMUNSI : List of passengers mentioning how many travelled, how many killed.
श्रीनीतीश कुमार : आपने तीन बातें कही थीं, एक्सग्रेशिया, कम्पेंसेशन और लिस्ट, मैंने दो बातों की चर्चा की। लिस्ट वगैरह की जो बात है, एक समाचार-पत्र ने इस बात के बारे में जानकारी मांगी थी। हमने इसके लिए लगभग १५० रेलवे कर्मचारियों को लगाया था। जो रिजर्वेशन स्लिप होती है, उसके आधार पर वे उनके घर पर गये थे और वहां से तथ्य इकट्ठा करके, जिस समाचार-पत्र ने मांगी थी, उस समाचार-पत्र को सूचना दे दी थी। आपने सदन में मांग की है, उसमें कुछ और मोडीफिकेशन देखकर उसके बाद तथ्य और पता लगेंगे तो उस पर…( व्यवधान)
SHRI PRIYA RANJAN DASMUNSI : Mr. Speaker, Sir, this is unacceptable. On every railway accident, the Ministry of Railways furnish the report within a week mentioning who were the valid passengers travelling and who were killed or injured, and still the Minister is telling that he has yet to collect more information.
SHRI NITISH KUMAR: No, I am not telling this. .… (Interruptions)
SHRI PRIYA RANJAN DASMUNSI : This is unacceptable.
श्रीनीतीश कुमार : आप सुन तो लीजिए। मैंने कहा कि हमने आज से कई माह पहले अखबार को जो सूचना दी थी, उसके बाद १-२ मिसिंग के बारे में और इन्फोर्मेशन आई है। उसे करैक्ट करते हुए, यानी जो अखबार को सूचना दी, उसे करैक्ट करते हुए …( व्यवधान)
श्री प्रियरंजन दासमुंशी:वह कब तक मिलेगी?
श्रीनीतीश कुमार : आप कहें तो मनडे को हम उसे रख देंगे और आप कहें तो जब थर्सडे मेरा क्वश्चन डे है, तो अगले थर्सडे को हम यहां रख देंगे। जिस दिन मेरा क्वश्चन डे है, उस दिन मैं रख दूंगा।
MR. SPEAKER: I shall now put the Demands for Grants on account (Railways) for 2003-2004 to vote.
The question is :
"That the respective sums not exceeding the amounts shown in the third column of the Order Paper be granted to the President of India out of the Consolidated Fund of India, on account, for or towards defraying the charges during the year ending the 31st day of March, 2004, in respect of the heads of Demands entered in the second column thereof against Demands Nos. 1 to 16."
The motion was adopted.
---- 13.00 hrs. MR. SPEAKER: I shall now put the Supplementary Demand for Grant (Railways) for 2002-2003 to vote.
"That the respective supplementary sum not exceeding the amount shown in the third column of the Order Paper be granted to the President of India out of the Consolidated Fund of India to defray the charges that will come in course of payment during the year ending the 31st day of March, 2003, in respect of the head of Demand entered in the second column thereof against Demand No. 16."
The motion was adopted.
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MR. SPEAKER: Hon. Members, the Demands for Excess Grants (Railways) for 2000-2001 which were presented to the House on 27.2.2003 pertain to the charged expenditure only. Under article 113(1) of the Constitution, charged expenditure is not put to the vote of the House. Therefore, I will call the Minister of Railways to introduce the Appropriation (Railways) No.2 Bill and also to move a motion for consideration and passing of the Bill when item nos. 24 and 25 in today’s List of Business are reached.
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