State Consumer Disputes Redressal Commission
Sudha Gupta vs Sharda Pushp on 16 December, 2015
Cause Title/Judgement-Entry STATE CONSUMER DISPUTES REDRESSAL COMMISSION, UP C-1 Vikrant Khand 1 (Near Shaheed Path), Gomti Nagar Lucknow-226010 First Appeal No. A/2012/2791 (Arisen out of Order Dated in Case No. of District State Commission) 1. Sudha Gupta 11/77 Wesr Punjabi Bagh Third Floor Room No 307 New Delhi ...........Appellant(s) Versus 1. Sharda Pushp C-402 Amarpali Green 1/3 Vaibhav Khand Indrapuram Ghaziabad ...........Respondent(s) BEFORE: HON'BLE MR. Jitendra Nath Sinha PRESIDING MEMBER For the Appellant: For the Respondent: ORDER
राज्य उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग, उ0प्र0, लखनऊ।
(सुरक्षित) अपील संख्या : 2791/2012 (जिला मंच, गाजियाबाद द्धारा परिवाद सं0-192/2012 में पारित निर्णय/आदेश दिनांक 19.11.2012 के विरूद्ध) 1 Smt. Sudha Gupta, Chairperson, Mother's Pride Group, 11/77,West Punjabi Bagh, New Delhi.
2 Knowledge Tree (A Unit of Mother's Pride Education Persona Pvt. Ltd.), Throgh Sh. Anil Goel Authorized Signatory 11/77, West Punjabi Bagh, New Delhi.
3 Smt. Smriti Nanda Principal, Presidium School A-16, Indian Habitat Centre Ahinsa Khand Part-II, Indirapuram, Ghaziabad, UP 4 Presidium School A-16, Indian Habitat Centre Ahinsa Khand Part-II, Indirapuram, Ghaziabad, UP ........... Appellants/Opp.Paities.
Versus Smt. Sharda Pushp W/o Sh. Arvinder Kumar Anal, R/o C-402, Amrapali Green 1/3, Vaibhav Khand, Indirapuram Ghaziabad, Uttar Pradesh.Smt. Sharda Pushp W/o Sh. Arvinder Kumar Anal, R/o C-402, Amrapali Green 1/3, Vaibhav Khand, Indirapuram Ghaziabad, Uttar Pradesh.
.......... Respondent/Complainant समक्ष :-
मा0 श्री जितेन्द्र नाथ सिन्हा, पीठासीन सदस्य मा0 श्रीमती बाल कुमारी, सदस्य अपीलार्थी की ओर से अधिवक्ता : सुश्री सविता मेहरोत्रा प्रत्यर्थी की ओर से अधिवक्ता : श्री प्रतुल श्रीवास्तव दिनांक : 08-02-2016 मा0 श्री जे0एन0 सिन्हा, पीठासीन सदस्य द्वारा उदघोषित निर्णय परिवाद सं0 192/2012 श्रीमती शारदा पुष्प बनाम श्रीमती सुधा गुप्ता चेयरमैन परसन दि नौलिज ट्री मदर्स प्राईड एकेडमी व अन्य में जिला मंच, गाजियाबाद द्वारा दिनांक 19.11.2012 को निर्णय पारित करते हुए निम्नलिखित आदेश पारित किया गया है:-
"विपक्षीगण को आदेशित किया जाता है कि परिवादनी द्वारा जमा की गई 300000/-रूपये (तीन लाख रूपये) की धनराशि उसे वापस करें। चूंकि यह धनराशि किस्तों में अलग अलग तिथियों में जमा की गई थी इसलिए गणना की सुविधा के लिए यह आदेशित किया जाता है कि समस्त जमा धनराशि पर परिवाद दाखिल होने की तिथि से कुल भुगतान होने की तिथि तक 09, प्रतिशत प्रतिवर्ष की दर से दण्डात्मक ब्याज परिवादनी को दिया जाएगा।-2-
विपक्षीगण को यह भी आदेशित किया जाता है कि परिवादनी को पहुंचाई गई मानसिक कष्ट और शारिरिक कष्ट की प्रतिपूर्ति के रूप में 50,000/-रूपये (पचास हजार रूपये) का भुगतान किया जाए। तथा वाद व्यय के लिए उसे 2000/- का भुगतान किया जाए।"
उक्त वर्णित आदेश से क्षुब्ध होकर विपक्षीगण/अपीलार्थी पक्ष की ओर से वर्तमान अपील योजित की गई है।
अपीलार्थी की ओर से विद्वान अधिवक्ता सुश्री सविता मेहरोत्रा तथा प्रत्यर्थी की ओर से विद्वान अधिवक्ता श्री प्रतुल श्रीवास्तव उपस्थित आये। उभय पक्ष के विद्वान अधिवक्तागण को सुना तथा प्रश्नगत निर्णय व उपलब्ध अभिलेखों का गम्भीरता से परिशीलन किया गया।
परिवाद पत्र का अभिवचन संक्षेप में इस प्रकार है कि विपक्षी प्रिजिडियम स्कूल, गाजियाबाद (विपक्षी सं0-4) की प्रधानाचार्या द्वारा उक्त स्कूल में अध्यापिका के रिक्त पद के सम्बन्ध में समाचार पत्र के माध्यम से विज्ञप्ति जारी की गई थी, जिसे पढकर परिवादिनी विपक्षी सं0-4 उपरोक्त के यहॉ गई तथा अध्यापिका पद हेतु आवेदन किया और वहॉ परिवादिनी की मुलाकात विपक्षी सं0-4 की प्रधानाचार्य विपक्षी सं0-3 श्रीमती स्मृति नन्दा से हुई एवं विपक्षी सं0-3 ने परिवादिनी को यह बताया कि विपक्षी सं0-2 दि नोलिज ट्री एकेडमी की गाजियाबाद शाखा जो कि विपक्षी सं0-3 के स्कूल में भी है, के माध्यम से परिवादिनी बी.टी.एस.ई. (Bachelors in Transforma of Secondary Education) का कोर्स जो एक वर्ष की अवधि के लिए है, कर लें, तो उक्त कोर्स करने पर परिवादिनी को जॉब गारण्टी का पत्र दिया जायेगा और तत्पश्चात परिवादिनी को विपक्षी सं0-4 के स्कूल में अध्यापिका के पद पर कार्य प्रदान कर दिया जायेगा और यह भी बतायागया कि विपक्षी सं0-4 के स्कूल में उन्हीं अध्यापको की नियुक्ति की जाती है, जिन्होंने उपरोक्त कोर्स बी.टी.एस.ई. (Bachelors in Transforma of Secondary Education) कर रखा हो।
विपक्षी सं0-4 प्रिजिडियम स्कूल के प्रधानाचार्या की बातों पर विश्वास करके परिवादिनीने विपक्षी सं0-2 अर्थात दि नोलिज ट्री मदर्स प्राईड एकेडमी के बी.टी.एस.ई. (Bachelors in Transforma of Secondary Education) का कोर्स करनेके लिए विपक्षी सं0-3 के उक्त स्कूल की प्रधानाचार्या के माध्यम से दाखिला लिया और विपक्षी सं0-2 दि नोलिज ट्री मदर्स प्राईड एकेडमी को विभिन्न तिथियों पर धनराशियां अदा की गई और कुल रू0 3,00,000.00 अदा किया गया। उपरोक्त कोर्स में एडमिशन लेने के बाद विपक्षी सं0-2 की -3- संस्था की प्रधानाचार्या अर्थात विपक्षी सं0-1 श्रीमती सुधा गुप्ता द्वारा परिवादिनी को दिनांक 23.7.2011 को जॉब गारण्टी पत्र दिया गया तथा जॉब गारण्टी पत्रों की शर्तो के अनुसार यदि दाखिला लेने वाले व्यक्ति को जॉब नहीं मिलती है, तो 50 प्रतिशत फीस वापस लौटानेकी बात कही गई थी। माह फरवरी, 2012 में परिवादिनी को विपक्षी सं0-1 चेयर परसन दि नौलिज ट्री मदर्स प्राईड एकेडमी, नई दिल्ली द्वारा सूचित किया गया कि परिवादिनी का कोर्स पूरा हो गया है, परन्तु परिवादिनी को बी.टी.एस.ई. (Bachelors in Transforma of Secondary Education) कोर्स का प्रमाण पत्र नहीं दिया गया। परिवादिनी द्वारा जब प्रमाण पत्र मॉगा गया तो उक्त दि नौलिज ट्री मदर्स प्राईड एकेडमी के चेयर परसन द्वारा यह कहा गया कि परिवादिनी अध्यापिका के पद के लिए विपक्षी सं0-4 प्रिजिडियम स्कूल में आवेदन कर दे एवं परिवादिनी का उपरोक्त प्रमाण पत्र उक्त स्कूल को उपलब्ध कर दिया जायेगा। परिवादिनी द्वारा जब विपक्षी सं0-4 के स्कूल में जॉब हेतु सम्पर्क किया गया तो यह कहते हुए इंकार कर दिया गया कि स्कूल में जॉब नहीं है। परिवाद पत्र में स्पष्ट रूप से अभिवचित किया गया है कि विपक्षीगण द्वारा आपस में साजिस करके परिवादिनी का रू0 3,00,000.00 हडप लिया गया हैं और परिवादिनी का प्रमाण पत्र भी निर्गत नहीं किया। परिवाद पत्र में यह भी अभिवचित किया गया है कि विपक्षीगण ने परिवादिनी के संदर्भ में नया प्रस्ताव दिया कि परिवादिनी यदि रू0 1,00,000.00 और जमा कर दें, तो परिवादिनी को जम्मू कश्मीर यूनिवर्सिटी से बी0एड0 का कोर्स करा दिया जायेगा और इस प्रकार परिवादिनी के साथ धोखा किया गया है और रू0 3,00,000.00 हड़प लिया तथा विपक्षीगण गैर कानूनी तरीके से फर्जी संस्था चला रहे है और उपरोक्त वर्णित कार्यवाही परिवादिनी के साथ की गई और ऐसा अन्य लोगों के साथ भी किया जा रहा है। अत: परिवादिनी द्वारा परिवाद पत्र प्रस्तुत करते हुए जमा की गई फीस रू0 3,00,000.00 मय 18 प्रतिशत वार्षिक ब्याज की दर से ब्याज सहित वापस दिलाये जाने हेतु एवं मानसिक व शारीरिक कष्ट एवं क्षतिपूर्ति के लिए रू0 5,00,000.00 तथा वाद व्यय के रूप में रू0 50,000.00 का अनुतोष प्रदान किये जाने हेतु प्रश्नगत परिवाद प्रस्तुत किया गया है।
विपक्षीगण की ओर से जिला मंच के समक्ष परिवाद का विरोध किया गया और लिखित कथन प्रस्तुत कर यह अभिवचित किया गया है कि संस्था नॉलिज ट्री वास्तव में मदर्स प्राईड एकेडमी प्रा0लि0 कम्पनी द्वारा चलायी -4- जाती है। ऐसी स्थिति में परिवाद उक्त कम्पनी या संस्था के विरूद्ध प्रस्तुत किया जा सकता था एवं परिवाद श्रीमती सुधा गुप्ता एवं श्रीमती स्मृति नन्दा के विरूद्ध प्रस्तुत करना विधि अनुकूल नहीं है, ऐसी स्थिति में परिवाद विपक्षीगण 1, 3 व 4 के विरूद्ध पोषणीय नहीं है एवं परिवादिनी उपभोक्ता की श्रेणी में नहीं आती है। यह भी अभिवचित किया गया है कि बी.टी.एस.ई. कोर्स में मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय का बी.एड. डिग्री का कोर्स शामिल होता है। परिवादिनी को बी.टी.एस.ई. कोर्स के बाद बी.एड. में भी शामिल किया गया था, परन्तु यह स्वीकार किया गया है कि विपक्षी सं0-4 ने अध्यापिकाओं के रिक्त पद के लिए विज्ञापन दिया था, यह भी स्वीकार किया गया है कि विपक्षी की संस्था का कोई पंजीकरण नहीं हुआ है तथा उसके कोर्स को कहीं से मान्यता प्राप्त नहीं है, क्योंकि इसकी कोई जरूरत नहीं है अन्त में यह कहा गया कि विपक्षीगण परिवादिनी द्वारा जमा की गई फीस का 50 प्रतिशत रिफड करने के लिए तैयार है।
उभय पक्ष के अभिवचन एवं उपलब्ध अभिलेखों पर विचार करते हुए जिला मंच द्वारा उपरोक्त वर्णित निर्णय/आदेश पारित किया गया, जिससे क्षुब्ध होकर वर्तमान अपील योजित है।
अपीलार्थी के विद्वान अधिवक्ता द्वारा मुख्य रूप से यह तर्क प्रस्तुत किया गया है कि प्रश्नगत बी.टी.एस.ई. कोर्स के तीन निम्नलिखित भाग है:-
BTSE program i.e. training the applicant in teaching, child development and school management;
Enhancing the personality and communication skills by enrolling the applicant with landmark education program Assisting the applicant in getting a B.Ed. degree from a recognized university.
उपरोक्त दोनों अवस्थाओं के पूर्ण होने के पश्चात व्यक्ति विशेष जॉब गारण्टी पाने का अधिकारी होता है और इस संदर्भ में जॉब गारण्टी पत्र की शर्त एवं नियम की ओर पीठ का ध्यान आकर्षित किया गया और यह तर्क प्रस्तुत किया गया है कि प्रत्यर्थी उक्त वर्णित कोर्स में सफल नहीं रहा और वह Landmark Education Program भी पूरा नहीं कर सकी और प्रत्यर्थी बी.एड. परीक्षा में भी सम्मिलित नहीं हुई, जबकि प्रत्यर्थी को बी.एड. परीक्षा हेतु वैष्णु देवी कालेज आफ एजुकेशन रिसाइ जिसकी मान्यता जम्मू कश्मीर यूनिवर्सिटी से थी, में Enrolled कराया गया था एवं जॉब गारण्टी पत्र में इस आशय का भी स्पष्ट उल्लेख है कि यदि व्यक्ति विशेष शर्तो का पालन नहीं कर पाता है, तो उस स्थिति में जमा की गई धनराशि का 50 प्रतिशत धनराशि पाने का -5- अधिकारी होगा और ऐसी स्थिति में जो धनराशि जमा की गई उसका 50 प्रतिशत प्रत्यर्थी को वापस देने के लिए अपीलार्थी/विपक्षी तैया था और तैयार है और गलत तथ्यों के आधार पर वर्तमान परिवाद योजित किया गया है और इस प्रकार मुख्य रूप से यह तर्क प्रस्तुत किया गया है कि बी.टी.एस.ई. कोर्स में बी.एड. का कोर्स शामिल है, जो परिवादी द्वारा नहीं किया गया, अत: वह जॉब गारण्टी शर्तो के अनुसार नौकरी पाने की अधिकारिणी नहीं है और 50 प्रतिशत धनराशि पाने की अधिकारिणी है। उक्त तर्क के खण्डन में प्रत्यर्थी/परिवादी के विद्वान अधिवक्ता द्वारा यह तर्क प्रस्तुत किया गया कि जॉब गारण्टी पत्र अविवादित रूप से वर्तमान प्रकरण में परिवादिनी उपलब्ध कराया गया और उसी के अनुसार परिवादिनी द्वारा धनराशि जमा की गई एवं जॉब गारण्टी पत्र में निम्नलिखित शर्त एवं नियम निम्नलिखित है:-
1 You will be entitled to a monthly salary ranging between Rs. 20,000 to Rs. 25,000 based upon your performance.
2 You shall undergo the training program for the period of one year at any one of our Presidium branches.
3 Your fee for the entire program shall be Rs. 3,00,000.00 4 You must pay the complete fee according to the invoice, otherwise the training and placement stands cancelled.
5 Fee once paid is not refundable.
6 You must secure a minimum of 90% attendance during the training. In addition to this you must clear all tests/evaluations conducted by us and attain the desired overall performance, otherwise the job guarantee stands cancelled.
7 You are required to abide by the code of conduct laid down by the organization, otherwise you will be subjected to disciplinary action and/or cancellation of job guarantee.
8 You will be required to work according to the demand of the situation.
9 If you do not get the placement after completion of your training, 50% of the fee paid will be refunded.
10 Presidium shall be at liberty to sppoint you at any of its schools situated in Delhi/NCR. If candidate does not join on the stipulated date/month, then the job guarantee stand cancelled and the fee paid will not be refunded.
उपरोक्त शर्त एवं नियम में कही भी इस आशय का उल्लेख नहीं है कि बी.टी.एस.ई. कोर्स के अन्तर्गत बी.एड. का कोर्स भी शामिल है। जॉब गारण्टी पत्र में केवल एक वर्ष की ट्रेनिंग का प्रोग्राम है और निम्नलिखित उल्लेख जॉब गारण्टी पत्र में किया गया है:-
"This is with reference to your application and subsequent interview you had with us. We are glad to inform that you have been selected for the Bachelors in Transformantion of Secondary Education (BTSE) program -6- for a period of 1 year. After the completion of the training program, you will be placed in one of the Presidium chain of schools.
Our job guarantee offer is incumbent upon adherence of the attached requisite terms and conditions sheet overleaf.
We welcome you to The Knowledge Tree Family"
इस प्रकार परिवादिनी को जॉब गारण्टी पत्र जारी करते हुए स्पष्ट रूप से यह आश्वासन दिया गया कि परिवादिनी को किसी प्रीजिडियम स्कूल में प्लेसमेंट कर दिया जायेगा। अविवादित रूप से प्रश्नगत बी.टी.एस.ई. कोर्स प्रोग्राम पंजीकृत नहीं है और उसे मान्यता भी नहीं है। इस संदर्भ में परिवादी के विद्वान अधिवक्ता द्वारा यह कहा गया कि मान्यता की आवश्यकता नहीं है एवं वर्तमान प्रकरण में केवल पढाई कराने और केवल ट्रेनिंग के लिए ही कोर्स है, इस संदर्भ में इतना ही कहना पर्याप्त है कि यदि ट्रेनिंग और पढाई के लिए कोर्स है तो उस स्थिति में जॉब गारण्टी की बात कहना और इस संदर्भ में पैसा प्राप्त करना निश्चित ही अनुचित व्यापार प्रथा (Unfair Trade Practice) में स्वीकार किये जाने योग्य है। बिना मान्यता प्राप्त किये और बिना पंजीकृत किये जॉब गारण्टी की बात कहना और इस विज्ञापन के आधार पर दाखिला देना और प्रोग्राम चलाना किसी भी दृष्टिकोण से उचित नहीं है। प्रोग्राम के अन्तर्गत बी.एड. डिग्री का शामिल होना किसी भी दृष्टिकोण से स्वीकार किये जाने योग्य नहीं है। बिना पंजीयन एवं बिना मान्यता के इस प्रकार का कोर्स कराना और उसमें जॉच गारण्टी की बात कहना और इस तरह का विज्ञापन देना अनुचित व्यापार प्रथा (Unfair Trade Practice) के अन्तर्गत आता है, और इस संदर्भ में D.A.V. Institute of Physiotherapy Vs. Miss Navleen Kaur & Ors. I (1998) CPJ 430 उल्लेखनीय है और इस नजीर का उल्लेख जिला मंच द्वारा अपने निर्णय में भी किया गया है और इस नजीर में मा0 उच्चतम न्यायालय द्वारा प्रतिपादित सिद्धांत का उल्लेख किया गया है और जैसा पहले बताया गया कि अपीलार्थी/विपक्षी द्वारा इस प्रकार का कोर्स कराने और जॉब गारण्टी पत्र निर्गत करने तथा विज्ञापन देना अनुचित व्यापार की श्रेणी में आता है। इस संदर्भ में जिला मंच द्वारा जो निष्कर्ष दिया गया है, वह विधि अनुकूल है।
विपक्षीगण/अपीलार्थी पक्ष द्वारा जॉब गारण्टी का प्रलोभन देकर न केवल अनुचित व्यापार कारित किया गया है, बल्कि लोगों को धोखें में रखा गया है। आज के जमाने में नौकरी पाने के लिए व्यक्ति ललाइत रहता है और परेशान रहता है और ऐसी स्थिति में इस प्रकार का कोर्स और जॉब गारण्टी -7- पत्र निर्गत करना और फीस प्राप्त करना अपने आप में उचित नहीं है और फिर यह कहना कि यदि जॉब उपलब्ध नहीं करायी गई तो 50 प्रतिशत फीस वापस कर दी जायेगी अर्थात 50 प्रतिशत फीस वापस नहीं होगी, जो किसी भी दृष्टिकोण से उचित नहीं है।
अपीलार्थी की ओर से पीठ का ध्यान, Vaishali Jha Vs. Akanksha Professional Classes II (2011) CPJ 219 Chakradhar Semwal Vs. Navjot Singh Waraich & Anr. III (2000) CPJ 457 Anil Bhasin Vs. The Managing Director, Pie Solutions & Systems Ltd. & Anr. I (2002) CPJ 428 Kalka Inst. For Rese. & Advance Studies & Anr. Vs. Hitesh Kumar & Ors. 127 (2006) Delhi Law Times 606 (DB) Delhi High Court.
Ajay Sampson (Minor) Vs. Council for the Indian School Certificate Examinations & Ors. 2008 (102) DRJ 536 Neha Sharma Vs. The Vice-Chancellor & Ors. 118(2005)Delhi Law Times 518 Delhi High Court Principal, College of Applied Science for Women Vs. Rajul Jain & Anr. II (2006) CPJ 435 की ओर आकृषित कराते हुए यह कहा गया कि परिवादिनी द्वारा प्रशिक्षण संस्थान में भाग लिया गया, ऐसी स्थिति में फीस वापस दिलाये जाने के संदर्भ में जो आदेश पारित है, वह विधि सम्मत नहीं है। ऐसी स्थिति में इतना ही कहना पर्याप्त है कि वर्तमान प्रकरण में जो धनराशि प्राप्त की गई, उसको फीस के रूप में स्वीकार किया जाना उचित नहीं है, बल्कि प्रश्नगत धनराशि नौकरी दिलाये जाने के संदर्भ में आशवासन देते हुए प्राप्त की गई और उसी के संदर्भ में प्रशिक्षण की बात कही गई, अत: उपरोक्त वर्णित नजीरों में प्रतिपादित सिद्धांत का लाभ वर्तमान मुकदमें के तथ्यों को देखते हुए अपीलार्थी पक्ष को प्राप्त नहीं है।
अपीलार्थी के विद्वान अधिवक्ता द्वारा पीठ का ध्यान, 1 T.V.Sundaram Iyengar & Sons Ltd. Vs. Dr. Muthuswamy Duraiswamy & Anr. II (2003) CPJ 176 (NC) 2 Suraj Mal Ram Niwas Oil Mills Ptv. Ltd. Vs. United India Insurance Company Ltd. & Anr. (2010) 10 SCC 567 3 Polymat India (P) Ltd. & Anr. Vs. National Insurance Co. Ltd. & Other (2005) 9 SCC 174 4 Tamil Nadu Housing Board & Ors. Vs. Sea Shore Apartments AIR 2008 SC 1151 -8-
की ओर आकर्षित कराते हुए यह कहा गया कि जॉब गारण्टी पत्र में इस आशय की स्पष्ट शर्त है कि यदि परिवादिनी को प्रशिक्षण के पश्चात नौकरी नहीं उपलब्ध करायी गई तो कुल देय फीस का 50 प्रतिशत वापस हो जायेगा। ऐसी स्थिति में उभय पक्ष के बीच जो संविदा है, उसकी बाध्यता दोनों पक्षों पर है और ऐसी स्थिति में पूरा-पूरा पैसा दिलाये जाने हेतु जो आदेश जिला मंच द्वारा पारित किया गया है, वह विधि सम्मत नहीं है। वर्तमान प्रकरण में यह पाया गया कि विपक्षीगण द्वारा नौकरी का प्रलोभन देकर जॉब गारण्टी परिवादिनी को उपलब्ध करायी गयी थी और इस प्रकार का प्रशिक्षण विधि अनुकूल नहीं पाया गया और ऐसी स्थिति में उपरोक्त वर्णित नजीरों में प्रतिपादित सिद्धांत का लाभ वर्तमान प्रकरण में अपीलार्थी को प्राप्त नहीं है।
अपीलार्थी के विद्वान अधिवक्ता द्वारा मुख्य रूप से यह तर्क प्रस्तुत किया गया कि प्रश्नगत योजना के संदर्भ में पंजीकरण कराया जाना या मान्यता प्राप्त करना आवश्यक नहीं था, परिकल्पना हेतु यदि अपीलार्थी के इस तर्क को स्वीकार कर लिया जाता है, तो उस स्थिति में भी जॉब गारण्टी की बावत विपक्षीगण द्वारा जो परिवादिनी के आश्वासन दिया गया और शर्त रखी गई, जिसका उल्लेख स्पष्ट रूप से जॉब गारण्टी पत्र में है, यह किसी भी दृष्टिकोण से उचित नहीं है कि बी.एड. का कोर्स यदि परिवादिनी द्वारा कर भी लिया जाता तो उस स्थिति में भी परिवादिनी को नौकरी दिलाये जाने का जो आश्वासन दिया गया है, वह अन्य छात्र जो बी.एड. पास करते है और जो निश्चित पद के लिए पात्रता रखता है, उनके लिए परिवादिनी को नौकरी दिया जाना अन्याय होगा और इस प्रकार जॉब गारण्टी देना स्वत: में कानूनन सही नहीं है। इस प्रकार विपक्षीगण द्वारा इस तरह का कोर्स कराये जाने का जॉब गारण्टी देना अनुचित व्यापार की श्रेणी में आता है।
अपीलार्थी के विद्वान अधिवक्ता द्वारा यह तर्क भी प्रस्तुत किया गया कि संस्था के अलावा जो अन्य विपक्षीगण को फरीक बनाया गया है, वह उचित नहीं है क्योंकि संस्था के विरूद्ध परिवाद प्रस्तुत किया जा सकता है क्योंकि परिवादी को शिकायत संस्था से है। इस संदर्भ में परिवाद पत्र के अभिवचन का परिशीलन किया गया। परिवादिनी की शिकायत सभी विपक्षीगण से है और सभी विपक्षीगण द्वारा व्यक्तिगत रूप से परिवादिनी को प्रलोभन देकर दाखिला कराया गया और अभिवचित धनराशि प्राप्त की गई और इस संदर्भ में अपीलार्थी के विद्वान अधिवक्ता के तर्क में बल नहीं पाया जाता है।
-9-सम्पूर्ण विवेचना के आधार पर पीठ इस निष्कर्ष पर पहुंचती है कि जिला मंच द्वारा दिये गये निष्कर्ष एवं आदेश में किसी प्रकार की त्रुटि होना नहीं पाया जाता है एवं अपील में बल नहीं पाया जाता है। प्रस्तुत अपील खण्डित किये जाने योग्य है।
आदेश प्रस्तुत अपील खण्डित की जाती है।
(जे0एन0 सिन्हा) (बाल कुमारी) पीठासीन सदस्य सदस्य हरीश आशु., कोर्ट सं0-2 [HON'BLE MR. Jitendra Nath Sinha] PRESIDING MEMBER