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Lok Sabha Debates

Further Discussion On The Motion Of Thanks On The President’S Address Moved By ... on 27 February, 2015

Sixteenth Loksabha an> Title: Further discussion on the Motion of Thanks on the President’s Address moved by Shri Anurag Singh Thakur and seconded by Shri Nishikant Dubey on 24th February 2015 (Discussion Concluded).

HON. SPEAKER: Now, the House will take up further consideration of the following motion moved by ShriAnurag Singh Thakur and seconded by Shri Nishikant Dubey on 24th February, 2015:

                      “That an Address be presented to the President in the following terms:-
       ‘That the Members of the Lok Sabha assembled in this Session are deeply grateful to the President for the Address which he has been pleased to deliver to both Houses of Parliament assembled together on February 23, 2015’.”                           *श्री हरीश मीना (दौसा): मैं इस अभिभाषण का समर्थन करता हूं। माननीय राष्ट्रपति जी ने अभिभाषण की शुरूआत में ही हमारी सरकार की मूल नीति ""सबका साथ-सबका विकास"" की बात कही जिस पर हमारी सरकार पुरज़ोर से काम कर रही है और यह पूरी दुनिया देख रही है। हमारी सरकार ने बहुत से महत्वपूर्ण निर्णय देशहित व विकास के लिए किए है, चाहें वह ""स्वच्छ भारत अभियान"" के तहत भारत को स्वच्छ देश बनाने की बात हो, ""सांसद आदर्श ग्राम योजना"" के तहत हमारे गांवों के समन्वित एवं समग्र विकास, ""प्रधानमंत्री जन-धन योजना"" के तहत सभी देशवासियों को बैंकिंग सुविधाएं प्रदान करने, शिशु लिंग अनुपात में लगातार आ रही कमी को रोकने के लिए ""बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओं"" अभियान, ""मेक इन इंडिया"" तहत भारत को उत्पाद का केंद्र बनाने की बात हो या ""स्मार्ट सिटी"", ""नमामि गंगे"" जैसे अन्य अभियान को, मैं पूरे देश की तरफ से हमारी सरकार का इन कदमों के लिए आभार प्रकट करता हॅं।
        मेरी सरकार ने अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग तथा अल्पसंख्यक समुदाय को साथ लेते हुए इनके विकास को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है। समाज के अत्यंत संवेदनशील और वंचित वर्गों के छात्रों के लिए चलाई जा रही छात्रवृत्ति योजनाओं को सरल बनाने पर विशेष ज़ोर दिया है।
        मैं राजस्थान के दौसा क्षेत्र से आता हूं, जहाँ पर बड़ा हिस्सा इन्हीं वंचित वर्गो से आता है और आज आज़ादी के 67 साल बाद भी समाज में सम्मानजनक स्थिति में नहीं है। मुझे भरोसा है कि सरकार द्वारा उठाये जा रहे कदमें से इनका विकास होगा और वे समाज के अन्य वर्गों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़े हो सकेंगे।
        मैं राजस्थान से आता हूं, जहां पीने का पानी एक बहुत बड़ी समस्या है। शुद्ध पीने का पानी तो दूर की बात है पर अधिकतर क्षेत्रों में तो पानी तक उपलब्ध नहीं है। महिलाएं कई कोस का सफर कर पीने का पानी लाने के लिए मजबूर हैं। मेरा सरकार से अनुरोध है कि कम से कम हर गांव में पाइप लाइनों द्वारा पीने के लिए स्वच्छ एवं शुद्ध पानी उपलब्ध करवाएं।
        शिक्षा के बिना विकास नहीं हो सकता, शिक्षा विकास की बड़ी नींव है। हर बच्चे तक शिक्षा पहुंचे, ये सरकार की जिम्मेदारी है, जिसके लिए मेरी सरकार ने ""पढ़े भारत-बढ़े भारत"" योजना की शुरूआत की है। मेरा सरकार से अनुरोध है कि इसके तहत सरकार महिला विशेष शिक्षा संस्था पर ज़ोर दे ताकि अधिक से अधिक महिलाओं को शिक्षित किया जा सके जो किन्ही कारणों से "को-एड" शिक्षा संस्थानों में शिक्षा प्राप्त नहीं कर पाती है। इस प्रकार महिला विशेष अस्पताल भी समय की मांग है, खासकर ग्रामीण इलाको में जहां महिलाएं अस्पतालों में जाने से हिचकिचाती है।
        मेरी सरकार सभी देशवासियों के लिए वचनबद्ध है और यह नौज़वानों, किसानों, मज़दूरों, पिछड़ों और अल्पसंख्यकों की सरकार है और इस सब के लिए प्रतिबद्ध है।
*श्रीमती अंजू बाला (मिश्रिख): महामहिम राष्ट्रपति जी द्वारा दोनों सदनों के समक्ष दिये गये अभिभाषण का मैं समर्थन करती हूं। अपनी सरकार के आदरणीय प्रधानमंत्री जी को बधाई देती हूं, जिन्होंने सरकार के नौ माह के कार्यकाल में ही पूरी दुनिया को बता दिया दिया है। हमारी सबसे बड़ी शव्ति आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक विरासत है। हमारी सभ्यता का मूलभूत मंत्र "सर्वजन हिताय- वसुधैव कुटुम्बकम्" जिसके आधार पर प्रधानमंत्री जी ने "सबका साथ-सबका विकास" के साथ भारत में एक सौ पच्चीस लोगों की जनशव्ति का सदुपयोग करने के लिए एक व्यापक कार्यनीति तैयार की है, जैसे स्वच्छता को विशेष प्राथमिकता दी गई है। स्मार्ट शहर हमारी आवश्यकता हैं, गरीबी उन्मूलन हमारा संकल्प है। कौशल विकास से लेकर अंतरिक्ष विजय प्राप्त करना, व्यवसाय को आसान बनाने से लेकर नीतिगत ढांचा तैयार करना, लोगों को सशव्त बनाने से लेकर उत्तम बुनियादी सुविधायें प्रदान करना, वित्तीय असमानता को दूर करने से लेकर देश को निर्माण का केन्द्र बनाना। मुद्रास्फीति को रोकने से लेकर अर्थव्यवस्था को उननत करना। इसके अलावा प्रधानमंत्री जन-धन योजना, प्रत्यक्ष लाभ अंतरण कार्यक्रम, जिसके अंतर्गत पैंतीस स्कीमों, प्रत्यक्ष लाभ अंतरण संरचना में शामिल किया जाना। आधार आधारित नामांकन पर विशेष बल, स्वच्छ भारत मिशन, हुनरमंद भारत के लिए दीनदयाल उपाध्याय ग्रामीण कौशल योजना और दीनदयाल उपाध्याय अंत्योदय योजना, सांसद आदर्श ग्राम योजना, मिशन ""हाउसिंग फॉर ऑल""  के अंतर्गत 2022 तक सभी को मकान तथा प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना, राष्ट्रीय गोकुल मिशन, राष्ट्रीय कौशल एवं उद्यमिता विकास नीति तथा राष्ट्रीय आयुष मिशन जैसी योजनायें भारत के सवा सौ करोड़ लोगों को प्रगति की नई ऊँचाइयों पर पहुंचने में सहयोगी होगी।
        मैं प्रधानमंत्री जी को धन्यवाद करती हूं, जिन्होंने बेटी पढ़ाओ-बेटी बचाओ अभियान की शुरूआत की, जो लोगों की सोच में बदलाव के लिए है ताकि वे बेटियों के जन्म पर खुशी मनायें, क्योंकि बेटी, बेटे से कम नहीं है परन्तु उसे शिक्षा देना आवश्यक है। जब बेटी पढ़ती है तो-
        "" बेटी ही शिक्षा की मूर्ति है, वही सरस्वती, वही लक्ष्मी,         वही कल्पना चावला है, वही भारत की नयी उम्मीद है।""
        इसके लिए प्रधानमंत्री की सोच को मैं बहुत-बहुत बधाई देती हूं। इसलिए ""सुकुन्या समृद्धि खाता"" नामक एक लघु बचत योजना अधिसूचित की गई है। प्रधानमंत्री ने जन-धन योजना शुरू की है, जिसमें बैंक खाते के साथ आये डेबिट कार्ड एवं दुर्घटना बीमा की सुविधा प्रदान की गई है। मुझे यह बताते हुए हर्ष हो रहा है कि 13.2 करोड़ नये बैंक खाते, 115 करोड़ रूपये डेबिट कार्ड जारी करने और 11,000 करोड़ रूपए जन राशि के रिकॉर्ड के साथ इस योजना के अंतर्गत लगभग 100 प्रतिशत कवरेज हो गई है।
        मैं यह कहना चाहती हूं कि जन-धन योजना सिर्फ योजना नहीं है, यह लोगों की उम्मीद है, उनका हौसला है। अब जब हम क्षेत्र में जाते हैं तो हमें बहुत बुजुर्ग लोग कहते हैं कि बिटिया अब तो हम भी अपने आपको सुरक्षित मानते हैं। अब हमें किसी के आगे हाथ नहीं फैलाने हैं। अभी प्रधानमंत्री जी ने हमें मजबूत कर दिया है और हमें पूरी उम्मीद है कि हर किसी का सपना साकार होगा। इसीलिए सरकार बधाई की हकदार है।
        हमारी सरकार के लिए स्वच्छता आस्था का विषय है। प्रधानमंत्री जी ने जाति के आधार से ऊपर उठकर एक नयी दिशा नयी पहल की है, जो आज तक किसी ने नहीं की। खुद अपने हाथों में झाड़ू पकड़ी और सफाई की शुरूआत की। प्रधानमंत्री जी ने जाति की वह धारणा तोड़ी जिसमें सफाई करना एक ही समाज का काम नहीं है और ऊपर उठकर नयी दिशा दी। यह प्रधानमंत्री जी की बहुत अच्छी पहल है और यह भी कहना चाहूंगी कि जिस घरों मे झाड़ू नहीं लगती, सफाई नहीं होती, वहाँ माँ लक्ष्मी का भी वास नहीं होता अर्थात् विराजमान नहीं होती। इसलिए यहां सफाई होगी, वहाँ सब रहना पसन्द करते हैं। इसीलिए हमेशा सफाई पर ध्यान दें, तभी होगा स्वच्छ भारत मिशन।
        ""स्वच्छ विद्यालय"" अर्थात् हर विद्यालय में शौचालय होना चाहिए और यह लक्ष्य भी बहुत जल्द पूरा होगा। ऐसी सोच हम सबकी होनी चाहिए।
        आदरणीय प्रधानमंत्री जी की इच्छा है कि गुड गवर्नेंस, जिसके लिए सरकार को ऐसी व्यवस्था देने की जरूरत है, जिसके द्वारा जनता के विचार व सुझाव सरकार तक सरल तरीके से पहुंचाये जा सके। जैसे कल रेल बजट आया, माननीय रेल मंत्री जी ने बहुत सी योजनाओं की घोषणा की, परंतु यात्रियों की सुविधा, शिकायत व सुझाव के लिए आसान तरीका नहीं सुझाया गया। माननीय मंत्री जी द्वारा रेल के डिब्बों तथा यात्रा टिकट पर विज्ञापन की बात की गई, अच्छा है। परन्तु इसके साथ-साथ यात्रा टिकट व रेल डिब्बों पर यात्रियों की सुविधा के लिए सम्पर्क हेतु यदि मोबाइल नम्बर या टेलीफोन नम्बर अंकित करने का प्रावधान रहता, जिससे कोई भी यात्री सुविधा, शिकायत व सुझाव हेतु आसानी से सम्पर्क कर पाता तो और अच्छा रहता। सरकार और जनता दोनों एक-दूसरे के पूरक हैं। जब जनता को विश्वास होगा कि सरकार उसकी सुख-समृद्धि के लिए बड़े से बड़ा बलिदान दे सकती है तभी जनता सरकार व देश दोनों के लिए हर प्रकार का त्याग व बलिदान देने के लिए तैयार रहेगी, जैसे 2014 के लोक सभा आम चुनाव में हुआ।
        हम सभी देशवासियों को देश प्रेम की शव्ति से हम सबको एकजुट होकर एक सशव्त आधुनिक भारत के निर्माण हेतु कार्य करना है। 
         
*SHRI PRASANNA KUMAR PATASANI (BHUBANESWAR) : Most respected President Pranab Mukherjee's Address to the Parliament in Joint Session was really drastically different from the past.  The way he was addressing the august house remarkably created a history and also he was quoting from the time of Nehru-Gandhi's dominated past and also began with quoting from Shyama Prasad Mukherjee, founder of Jan Sangh to any spiritual leader and the civilisational heritage,  and the great values of our great history emphasising on  the universal good.  He also quoted about former PM Atal Bihari Vajpayee and the greater Pandit Nehru.  A very rare speech of the Government committed to provide affordable health care, quoting from Ayush to full fledged global laughing of Yoga, the traditional system of health including yoga. I can draw the attention of House that there was no electronic media at that time for propagation.  From year 1980 onwards, I was the first man who initiated how yoga is scientific and my guru Maharshi Mahesh Yogi was a renowned scientist who introduced Vedo-Ayurvedic, s science in European countries.  In academics to the laws of the nature, once you tune his body and mind where I am the founder father of the college of natural law named after him in Odisha  for first time  in the country.  And I had been trying since long that how yoga would be introduced as a curriculum in schools and colleges.  This  is not yet done.
          I like to draw the attention of the House that for my constituency the metro work should have been started immediately to avoid traffic congestion.  The work is too delayed.  Again, I have been raising in the Parliament through submissions, 377 to start the flyover work at Kandgir under Bhubaneswar constituency. Work on another flyover on railway under Kurda road i.e. Nirakarpur Railway flyover and the Kurda-Bolangir railway work is too much delayed for completion.  So, the step-motherly attitude of Central Government should not have been repeated as it has happened.
          For metro work it should start from Cuttack Bubhaneswar, via Kurda, Jatini to Puri to Konark. To promote international tourism, it should be the best metro.  The survey work should start immediately to complete the same.
          And in the health sector, I have taken proper initiative to request the Central Government and the land is provided by the State Government. It should have been a highly equipped technical hospital of the country and many patients enrolled out of the state throughout India.  The Central Government  should sanction more grants to facilitate Odiya people.  Therefore, we are demanding always a special category state.  Our hon. Cheif Minister, Shri Navin Patnaik organised one public meeting for the first time in Delhi to declare immediately Odisha as a special category state.  That is not done yet. 
          I am opposing Presidential Address to avoid use of Ordinances, defiant stance on land acquisition amid mounting opposition.  Land for poor people not for the rich.  Now rich people are paying more money occupying the lands of poor farmers and India is now lacking cultivation.  If the land is occupied by this, the food will not be sufficient for future generation.
          Addressing a Joint sitting of both the Houses to mark the beginning of the Budget Session, President Pranab Mukherjee called upon MPs to 'discharge their solemn responsibility in a spirit of cooperation and mutual accommodation.
          With the Opposition determined to challenge the land acquisition ordinance, he affirmed that the government attaches paramount importance to safeguard the interest of farmers and families affected by land acquisition.
          The Presidential Address was an elaborate report card of the government and hardly projected a significant fresh idea.  India, according to Mukherjee, has emerged as the fastest growing economy with an estimated 7.4 percent growth rate in 2014-15.  He said inflation was at a record low due to a number of decisive measures taken by the government.  While stating that terrorism and left-wing extremism posed a grave challenge to the internal security of the nation, the President asserted that the government was committed to dealing with them in collaboration with affected people and state governments in a holistic manner. 
          On foreign policy, he said while the government has "reinvigorated" the relations with neighbours, we speak clearly about our interests and are fully prepared to defend our borders and secure our people.
          The conclusive paragraph of the address, dwelling on the government endeavour for smooth conduct of legislative business and enactment of progressive laws in Parliament, was reflective of the compulsion of the Modi government to seek Opposition cooperation.
           
*SHRI DUSHYANT SINGH (JHALAWAR-BARAN) : The Hon'ble President stressed that we could not call ourselves developing unless every person in the country feels a sense of fulfillment.  I could not agree more with the President.  I believe the Prime Minister's Jan Dhan Yojana envisaged by our hon. Prime Minister is a guiding light in this regard.  The Government of Rajasthan too had started the 'Bhamashah Scheme' to bring about Direct Benefit Transfers to the beneficiaries.  Financial inclusion forms the base of complete economic development.  It is only by making sure that each individual is a beneficiary of the schemes of the Government that we can truly say that we have lived up to "Sabka Saath Sabka Vikas".  In this scheme, the Government has made tremendous progress by surpassing targets by miles and achieving almost universal coverage of bank accounts across the country, however, I know we will not rest until each and every citizen is covered.  The Prime Minister's Jan Dhan Yojana is a scheme that not only has immediate benefits but large positive economic externalities in the foreseeable future.  The scheme lays the foundation for Direct Benefit Transfers that will help bring down the cost and the leakages from Government programmes.  It also helps us gather more information on the financial state of each individual in the country which would help us make more prudent policies in the future.
          "Roti, Kapda, makkan" are the fundamental needs of survival of any person in the world.  Roti has already been giving through the Right to Food Act and a number of Public Distribution Systems across the country.  To make sure that each person has a "makkan" in our country, our Prime Minister has come out with a visionary "Housing for All" mission by 2022.  In this regard, he has set out fiscal and non-fiscal incentives that would help achieve this goal.  To aid investment into this sector that is currently plaugued with high interest rates, FDI has opened to make easier access to capital.  I thank the President for recognising the importance of Housing in our country. 
          Over the last year, our Government has given great impetus to Skill Development.  Skill Development is crucial for our economic progress.  It helps in creating a highly skilled labour force that can find employment not on the basis of "digging a hole and refilling it  but on the basis of their own merit.  It helps a person stand on his own two feet so that he must not depend on the Government.  It helps in easing generation of employment and weeds out the disguised unemployment plaguing the economy.  A roadmap and dedicated policy was much needed and I thank the Prime Minister for taking this visionary step that will bear fruit both immediately and for the future.  With a growing youth population, this is exactly what is required for the future generations as well.  I thank the President for recognizing the contribution of this particular step to the progress of our country.
          The Apprentice Act passed by the Government was passed by the Rajasthan to bring about cooperation between the private sector and the Government.  It too will help train the youth and bring about a sense of responsibility in the corporate sector.
          One cannot talk about the  Government without talking about the laudable initiatives to modernise the working of the Government and the initiative to bring in the suggestions of the citizenry in policy making.  In his rail budget speech, the Hon'ble Railway Minister spoke about how the Government engaged with the citizens to get feedback on the improvements they sought from the Government.  Democracy is "by the people, of the people, for the people" and so far, the people were not actively involved in the decision making process.  By bringing the voice of the people in decision making, our  Government has strengthened the roots of democracy in our country and has made it truly participative.  I would like to thank the Hon'ble Minister for taking this initiative.  In addition to this, our hon. Prime Minister has launched the My Gov Online platform which to is a path-breaking innovation.  These steps will truly contribute to a vibrant democracy. 
          The Prime Minister has launched the Digital India Programme envisaging a truly connected India in the future.  The initiative will not only connect India via the internet but will help in reducing the cost of dissemination of information across our widespread country.  In addition to this, it will help us gather information quicker and will lead to quicker decision-making.  As we know, our country saw decisions moving at a slow rate for the last 10 years.  By this programme, the Prime Minister has made sure that this Government and no future Government can ever make excuses for delaying decisions in the face of all information.  The Digital India initiative is also likely to create a second wave of digital entrepreneurs from across the country and help put the rural areas on the map by easing the burden of marketing their indigenous products to a larger market.
          In addition to these, the Government has also helped push up for growth rates and give a new lease of life to our failing industries.  My home state of Rajasthan has been a pioneer in this regard.  We have brought about a slew of changes in labour laws to ease the lacuna of laws otherwise required to do business in our state.  We have helped industry by removing obstacles from their path and revitalising industry in the state. Prior to the election of our Government, industry was hesitant to make further investment in our country and foreign investors were finding other opportunities.  Post our election, investors are lining up and there is an influx of capital that will help regenerate our economy while simultaneously furthering employment opportunities and getting work for youth who were otherwise unable to find work due to lack of employment generation.  I am happy to see that the Union Government too has decided to take this path that will no doubt lead to a more prosperous India.
          The Government also plans to make doing business simpler by removing a number of taxes and replacing it with a single goods and services tax.  In this regard, I am happy that the Government has taken the initiative to not only include the States but also to build an atmosphere of cooperative Federalism by giving the States a larger portion of voting right on the Council created for the same purpose.
          While promoting industry, our Government has made sure they have taken enough measures to protect the environment which otherwise gets denigrated in the process.  The Government has given a push to solar energy in our country and has aimed to promote 24x7 electrification of the country by 2020.  It has planned to create 100GW of power through renewable energy and this is a brilliant step in creating a sustainable future for future generations.  Our cities are right now choking under the weight of pollution and these are the steps in the right direction to create not only a clean environment but also a healthy populace.
          The Government has taken a number of steps to ease the visa approval process and encourage tourism in India as well.  Tourist Visa on Arrival has been expanded to 44 countries to make our country a tourist-friendly country.  We have also enabled Electronic Travel Authorisation to make it easier for foreigners to procure visas for our country.  We have also undertaken a number of initiatives to upgrade facilities at major tourist centres and for the maintenance of our rich cultural heritage.
          To help our farmers and increase productivity of our farm sector, the Government has made tie-ups with a number of countries for technology such as with Israel to cultivate olives indigenously.  The Government has recently launched initiatives to keep a check on soil quality which is a perfect step to create sustainability.  Many a time, human urge pushes us to exploit our environment without realisation.  This will help keep a check on that as Kisans will be better informed and will be able to maximize productivity through this.   The Pradhan Mantri Krishi Sinchai Yojana too has been launched to address irrigations requirement for every village in the country.
          With a population of over a billion people, it is surprising that our country isn't the foremost country in every sport in the world.  Our country produces many athletes of exemplary quality.  However, many talents go unnoticed in our large population.  This is a matter of deep disconcert.  However, the Government has formulated the National Sports Talent Search Scheme to overcome this difficulty.  This will help inculcate talent that will push our sports to a new frontier.  As we know, numerous sportspersons in our country are the result of discipline and training by our Defence Forces.  Our hon. Minister of I&B is one outstanding example of the same.  This will help push the scheme to other parts of our society as well. As I stressed previously in this speech, sustainability is one of the major concerns we have grappled within the past.  Given our large population, sustainability is and should be a major concern for us.  In this regard our Prime Minister has taken the visionary step of putting impetus on the creation of sustainable smart cities that would be eco-friendly.  I do believe that these steps will go a long way in preserving and growing at the same time.
          To conclude, I would like to thank the Government for the brilliant initiative for progress taken in the past year.  We have moved from a regime of creating entitlements to creating and opening a plethora of opportunities for our citizens and this is  a step in the right direction.
*श्री अश्विनी कुमार चौबे (बक्सर): मैं महामहिम राष्ट्रपति के अभिभाषण पर प्रस्तुत धन्यवाद प्रस्ताव के समर्थन में अपनी भावना व्यव्त करना चाहता हूं, जिन्होंने हमारी इस सरकार की नीतियों एवं कार्यकलाप को 23 फरवरी, 2015 को सदन के दोनों सदनों के संयुव्त सत्र के माध्यम से देश के सभी लोगों को अवगत कराने की कृपा की।
        हमारी सरकार देश की सभी समस्याओं पर गहरा चिन्तन कर उन्होंने समाधान करते हुए विकास की मुख्य धारा में लाने के लिए सतत् प्रयत्नशील है। हमारी सरकार सर्वजन हिताय के मूल चिन्तन के आधार पर अपनी सभ्यता एवं सफल लोकतंत्र के मूलमंत्र "सबका साथ-सबका विकास" की नीति पर कार्य कर रही है और इसकी सफलता तब ही संभव होगी जब हमारे देश के विशाल अनमोल जनशव्ति का समुचित सदुपयोग होगा। इसके लिए सर्वप्रथम हर शिक्षित, अशिक्षित नवयुवक को अंतर्राष्ट्रीय मानकों के अनुरूप कौशल विकास को समेकित करने के लिए "राष्ट्रीय कौशल एवं उद्यमिता विकास नीति" बनाई जा रही है।
        हमारी सरकार समाज के गरीब, कमजोर एवं लाभान्वित लोगों के कल्याण के प्रति वचनबद्ध है और इसके लिए महत्वाकांक्षी "प्रधानमंत्री जन-धन योजना" शुरू की है।
        हमारी सरकार ने स्वच्छ भारत अभियान के तहत 2019 तक ""खुले में शौच से मुव्त"" बनाने के साथ ही "स्वच्छ विद्यालय" कार्यक्रम शुरू किया है तथा इस 15 अगस्त, 2015 से पहले हर स्कूल में एक शौचालय बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। ""घर-घर में हो शौचालय का निर्माण, तभी होगा लाडली बिटिया का कन्यादान""। मैंने स्वयं स्वच्छता तथा जन-जागरण एवं शौचालय निर्माण की दिशा में बिहार सरकार में अपने मंत्रित्व काल (2007-2010) के तीन वर्षों में स्वच्छता हेतु महीनों तक चलने वाले ""बिहार ग्राम गौरव यात्रा"" के दौरान प्रतिदिन 2 घंटे श्रमदान कर 11 हज़ार शौचालय अपने हाथों से निर्माण कर एक इतिहास रचने का काम किया था, जिसमें लोक सहभागिता की भी महत्वपूर्ण भूमिका रही थी। हमें माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र भाई मोदी द्वारा देश भर में स्वच्छता अभियान चलाये जाने पर गर्व है। ज्ञातव्य हो कि स्वच्छता का राष्ट्रीय विकास पर प्रभाव पड़ेगा तथा अपशिष्ट पदार्थों का उपयोग भी किया जा सकेगा।
        हमारी सरकार ग्रामीण क्षेत्रों के सतत सामाजिक-आर्थिक विकास को सर्वोच्च प्राथमिकता देती है। "हुनरमंद भारत" को ध्यान में रखते हुए ""दीनदयाल उपाध्याय ग्रामीण कौशल योजना"", ""दीनदयाल उपाध्याय अंत्योदय योजना"" और ""सांसद आदर्श ग्राम योजना"" हमारे गांवों के समन्वित एवं समग्र विकास पर केन्द्रित है। असके अलावा मिशन "हाउसिंग फॉर ऑल" के अन्तर्गत 2022 तक सभी परिवारों खासकर अत्यधिक गरीब परिवारों को आवास की आकांक्षा को पूरा करने के लिए अडिग है।
        इस तरह हमारी सरकार ने कई ऐसी लोकोपयोगी योजनाएँ चलाई हैं, जिससे अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग तथा अल्पसंख्यक समुदाय के छात्रों के लिए छात्रवृत्ति योजनाओं को सरल बनाने पर विशेष ज़ोर दिया है। बुनियादी स्तर पर शिक्षा के परिणामों में सुधार हेतु "पढ़े भारत-बढ़े भारत" योजना शुरू की गई है। शिक्षकों की क्षमता को बढ़ाने एवं उनके सशव्तिकरण हेतु "पंडित मदन मोहन मालवीय शिक्षण एवं शिक्षक प्रशिक्षण राष्ट्रीय मिशन की शुरूआत की गई है। इसके अलावा छात्रों में वैज्ञानिक सोच को विकसित करने हेतु "राष्ट्रीय आविष्कार अभियान" की भी शुरूआत की गई है। 1961 से लगातार शिशु लिंगानुपात में निरन्तर गिरावट के रोकथाम हेतु हमारी सरकार ने " बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओं" अभियान की शुरूआत की है, ताकि लोगों की सोच में बदलाव हो तथा बेटियों की शिक्षा को प्रभावी बनाने हेतु "सुकुन्या समृद्धि खाता" नामक एक लघु बचत योजना बनाई है। "श्रमेवजयते" को महत्वपूर्ण मानते हुए अर्थव्यवस्था की रीढ़ श्रमिकों के कल्याण हेतु भी अनेक कदम उठाए गए हैं जिसमें सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों में प्रशिक्षुओं को प्रोत्साहित करने के लिए प्रशिक्षु प्रोत्साहन योजना की शुरूआत की गई है एवं ई.पी.एफ. अंशदान को सरल बनाया गया है जिसमें असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों को लाभ हुआ है। साथ ही कर्मचारी भविष्य निधि अधिनियम के तहत अधिकतम मजदूरी तथा न्यूनतम पेंशन राशि को बढ़ाकर क्रमशः रूपये 15,000/- तथा 1000/- कर दिया गया है।
        इस तरह हमारी सरकार ने ऐसी कई योजनाएँ बनाई हैं जिससे समाज के सभी वर्गों के लोगों के विकास का मार्ग प्रशस्त होगा और हमारे देश का समुचित विकास होगा। हम सभी भारतवासियों को सरकार के विकासशील योजना एवं कार्यकलाप पर गौरवान्वित होना चाहिए, जिससे कभी न कभी अन्य सभी राजनीतिक दलों को भी स्वीकारना होगा।
        हमारी सरकार नें तीर्थटन क्षेत्र में ज्योतिर्लिंग सर्किट, सुखमंगक सर्किट एवं दक्षिण धाम सर्किट के लिए विशेष पर्यटक रेलगाड़ी प्रारम्भ की है जो एक मिसाल है। ""स्वदेश दर्शन"" नामक एक नई योजना प्रारम्भ कर ""अनेकता में एकता, भारत की विशेषता"" को बल प्रदान किया है।
जल ही जीवन है। गंगा हमारे देश की सभ्यता एवं संस्कृति की जननी रही है। गंगा नदी हमारी श्रद्धा के साथ-साथ मानव जीवन की "जीवन रेखा" के रूप में सुविख्यादित है। हमारी सरकार ने ""नमामि गंगे"" का शंखनाद कर गंगा की अविरलता एवं निर्मलता को अक्षुण्ण बनाये रखने का जो संकल्प लिया है, वह गंगा संरक्षण की प्रतिबद्धता को जाहिर करता है। ""वंदे मातरम"" के साथ-साथ ""गंगे मातरम"" हमारे लिए वन्दनीय है। देश की आज़ादी को हासिल करने के लिए यदि ""वन्दे मातरम का गान गाते हुए फाँसी की सूली पर चढ़कर अनेकों लोग शहीद हो गये तो आज भारत की सभ्यता एवं संस्कृति को अक्षुण्ण बनाये रखने के लिए हमें ""वन्दे मातरम"" के साथ-साथ ""गंगे मातरम"" का भी संकल्प लेना होगा।
        हमारी सरकारी ""वसुधैव कुटुम्बकम"" की भावना से सम्पूर्ण विश्व में सुख-शांति एवं स्वस्थ रहने की कामना के साथ मानवीय मूल्यों के रक्षार्थ कृत संकल्पित है। हमारे मूल मंत्र ""सर्वे भवन्तु सुखिनः, सर्वे सन्तु निरामया, सर्वे भद्राणि पश्यन्तु, माकश्चित दुःख भागभवेत"" को प्रतिपादित करता है।
                           
*SHRI B. VINOD KUMAR(KARIMNAGAR) : The Hon'ble President in his speech has spoken of the Government working by the motto of 'Sabka Saath, Sabka Vikaas' and its commitment to the poor.  In the constructive criticism I would like to add certain points to the issues raised. 
          The Pradhan Mantri Jan Dhan Yojana has supposedly had a coverage of close to 100%.  I would like details on 100% of what exactly.  Is it the entire population that lacks financial access?  Also, for the progress done so far, I would like the Government to ensure that not only are accounts opened, but steps are taken to ensure that the accounts are used.  Financial literacy and ease of access are essential prerequisites for ensuring the sustainability of such an initiative. 
          The Direct Benefit Transfer Programme's expansion is welcome.  However, clarity is required on the Aadhaar programme - it's legal status is still unclear and has become even more uncertain after the closure of the Planning Commission.  For such a large programme, a firm legal and administrative grounding is a must.  I therefore ask the Government how it plans to clarify the status of Aadhaar, which is the foundation of the DBTP. 
          On a related note, there is the question of the National Population Registry (NPR).  This is a parallel programme which duplicates the efforts of Aadhaar.  What is going to be its future?  At present one of the two is redundant as running two programmes with the exact same objective is nothing but duplication of efforts which is a colossal waste of taxpayer money at the very least.  This also requires clarification.
          The Swachh Bharat Mission has noble  goals which none of us will disagree with.  Who does not want to see a clean and open defecation free India?  However, I must urge the Government to note that construction of toilets is only half the job done.  Repeated studies have shown that generating demand is the essential factor that guarantees the success and sustainability of any sanitation programme.  This requires that a huge awareness generation programme be the central focus of the Mission, while the current focus is on construction of toilets.  Surely,  no one wants toilets to be built and then subsequently unused. 
          Another crucial area which the Mission has ignored is the role of local governments.  PRIs and ULBs have the ultimate responsibility for tackling cleanliness and sanitation.  Any plan to ensure a clean India that remains clean must ensure a way to strengthen local governments through greater devolution of funds and decentralization.  This is another crucial aspect which the Mission does not take into account.
          The Government's claim that it attaches the highest priority to growth of rural areas and that it works for the poor has not been matched action so far.  If anything, the Land Acquisition Ordinance marks the single biggest betrayal of this promise.  The Ordinance is nothing but a pretext for large-scale land grab by private companies and land mafias.  It seeks to remove any protection that landowners have and it is even more regressive than the 1894 Act as it is not even confined by the concept of 'public purpose'.  For the sake of the future of the vast majority of this country,  I urge the Government  to withdraw this ruinous and destructive ordinance that serves only to satiate private greed.
          The initiatives taken for the farmers can be further strengthened by ensuring that three key areas for farmers are further strengthened -easy access to credit, stronger farm and non-farm insurance and a renewed thrust on market infrastructure, particularly storage and transportation.
          For strengthening the weaker sections of our society, I also urge the Government to ensure that steps be taken to ensure greater skill development and entrepreneurship amongst the Muslim community whose poverty is on par with the SC community.  The scheme of entrepreneurship for SCs can be expanded to include Muslims and STs as well.
          The Safety of women is a topmost priority for our nation and it is good to see the initiatives that have been taken. However, they are too few and more is needed. The most important change is that we need a system of education which proactively targets gender inequalities and gender biases which result in gender violence later can be nipped in the bud. We also need awareness generation programmes that target patriarchal mindsets in general and men in particular and try to promote positive mindsets amongst them.  Men should be seen as partners in the battle of gender inequality.
          The replacement of the Planning Commission with NITI Aayog throws many unanswered questions. What is going to be the future of planning in India?  Who will have the power to delegate funds which the Commission did?  These are serious questions and require clarification.
          On the subject of black money, it must be said that the main generator of black money in India-the real estate sector-has been completely untouched.  The Government should start with the possible and take strong steps to check the generation of black money in this sector rather than giving excuses for not being able to get money back from abroad.
          The unified regulatory framework for the financial sector is also something that needs to be discussed.  Can a single body handle the vast financial responsibilities before it? 
          The textile, being the second largest employer after agriculture needs a great deal of help.  Easy access to credit, tech upgradation, market linkages, skill development and insurance are major thrust areas that do not appear in the address.
          I urge the Government to take note of these points raised.
*श्री अर्जुन राम मेघवाल (बीकानेर): भारत के राष्ट्रपति द्वारा संसद के दोनों सदनों के संयुव्त सत्र में दिये गये अभिभाषण दिनांक 23 फरवरी, 2015 और उसके क्रम में लोक सभा में धन्यवाद प्रस्ताव पर हो रही चर्चा में निम्नलिखित सुझाव प्रस्तुत कर रहा हॅं।
        महामहिम राष्ट्रपति के अभिभाषण के पैरा 6 में स्वच्छ भारत मिशन का उल्लेख किया गया है और उसमें संसद सदस्यों से ये अपेक्षा की गयी है कि संसद सदस्य स्थानीय क्षेत्र विकास निधि योजना का कम से कम 50 प्रतिशत स्वच्छ भारत मिशन पर खर्च करें। वर्तमान में सांसद निधि को खर्च करने की मार्गदर्शिका जारी की गयी है ,उसमें चल सम्पत्ति खरीदने पर पाबंदी है। मैं राजस्थान के बीकानेर संसदीय क्षेत्र से आता हूं तथा बीकानेर शहर में जयनारायण व्यास कॉलोनी में आठ सेक्टरों में आठ स्वच्छता प्रहरी हैं जो माननीय प्रधानमंत्री जी की अभिप्रेरणा से तैयार हुए हैं और अपने खर्च से आठ वाहन खरीदे हैं जो प्रातः 9 बजे से 10 बजे के मध्य घरों से कचरा कलैक्शन का कार्य करते हैं और जनता का भी पूर्ण सहयोग मिल रहा है लेकिन सांसद स्थानीय क्षेत्र विकास योजना के तहत इन वाहनों हम पैसा नहीं दे पा रहे हैं।
        अतः मेरी सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय में सरकार के माध्यम से ये मांग हैं कि सांसद स्थानीय क्षेत्र विकास योजना की मार्गदर्शिका में आवश्यक संशोधन करें जिससे राष्ट्रपति अभिभाषण के पैरा 6 में सरकार द्वारा प्रकट की गयी भावना की अनुपालना संभव हो सके।
                   
*श्रीमती रंजनबेन भट्ट (बड़ोदरा): संसद के समक्ष माननीय राष्ट्रपति का अभिभाषण को मैं अभिनंदन देती हॅं। भारत की सबसे बड़ी शव्ति इसकी समृद्ध आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक विरासत है। माननीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र भाई मोदी जी नें "सबका साथ-सबका विकास" का मंत्र लेकर देश के 125 करोड़ की जनता के विकास के लिए देश की सेवा में अपनी कार्यनीति तैयार कर ली है। जैसे स्वच्छता से लेकर स्मार्ट शहर बनाना, कौशल विकास से लेकर अंतरिक्ष पर विजय प्राप्त करना, लोगों को सशव्त बनाने से लेकर उत्तम बुनियादी सुविधाएँ प्रदान करना एक अच्छी शुरूआत हो चुकी है।
        माननीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र भाई मोदी जी ने लोगों को बैंकिंग सुविधाएं प्रदान करने के लिए ""प्रधानमंत्री जन-धन योजना"" शुरू की है जिसमें बैंक खाते के साथ डेबिट कार्ड एवं दुर्घटना बीमा की सुविधा प्रदान की गई है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र भाई मोदी को अभिनन्दन देते हुए आनंद इस बात का है कि 13.2 करोड़ नए बैंक खातों, 11.5 करोड़ रूपये डेबिट कार्ड जारी करने और 11,000 करोड़ रूपए जमा राशि के साथ 100 प्रतिशत कवरेज हो गया है।
        माननीय प्रधानमंत्री ने स्वच्छता के हर एक कार्य में बल दिया है। गाँव और शहर जिसमें हर एक घर में शौचालय होना भी जरूरी है और साथ-साथ हर एक स्कूल में बेटियों के लिए और बेटों के लिए भी अलग से शौचालय होना चाहिए, इस दृष्टि से काम शुरू किया। साथ ही साथ, स्वच्छ विद्यालय का कार्यक्रम शुरू किया है।
        भारत गांवों में बसता है। माननीय प्रधानमंत्री ने ""हुनरमंद भारत"" को ध्यान में रखते हुए दीनदयाल उपाध्याय ग्रामीण कौशल योजना और दीनदयाल उपाध्याय अंत्योदय योजना की घोषणा की गई है। गांवों का विकास हो सके, इस दृष्टि से ""सांसद आदर्श ग्राम योजना"" से सांसदों की सक्रिय भागीदारी गांवों के विकास से जुड़ी रहे साथ में गरीबों को आवास मिल सके इसी योजना में कार्यरत है। प्रत्येक गांव के खेड़ों के लिए खेत में सिंचाई आवश्यकताओं को प्रभावी ढंग से निरंतर पूरा करने के लिए प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना की जा रही है। प्रधानमंत्री जी ने व्यवसाय करने को आसान बनाने के लिए अनेक पहल की है। साथ ही, मेक इन इंडिया कार्यक्रम शुरू किया है। मेक इन इंडिया पहल के अंतर्गत जहाज को डिजाईन करने की क्षमता, जहाज निर्माण और जहाज मरम्मत के कार्यों को भी सुदृढ़ करने की योजना, हमारे गुजरात में केनाल द्वारा नर्मदा के पानी को सारे गांवों को जोड़ने के कामगीरी भी की गई है। सरदार पटेल स्टेच्यु और यूनिटी को बनाने के आयोजन से पूरे देश में और विश्व में गुजरात की प्रगति और प्रशासन की गति प्रदान की है। प्रधानमंत्री जी नदियों को जोड़ने की परियोजना के प्रति पूर्णतः प्रतिबद्ध है। माननीय प्रधानमंत्री जी ने गुजरात को विकास की ओर लेकर पूरे देश में और विश्व में विकासशील गुजरात की कामना की थी। अब वह भारत देश के विकास के लिए पड़ोसी देशों के साथ संबंध सुधारते हुए और देश की शव्ति को एक भारत-श्रेष्ठ भारत का निर्माण करने जा रहे हैं। मैं माननीय प्रधानमंत्री जी को अभिनदंन देती हूं और माननीय राष्ट्रपति जी का भी अभिनंदन करती हॅं।
                                           
*श्री रामसिंह राठवा (छोटा उदयपुर):  अनुराग ठाकुर जी जो प्रस्ताव लाए हैं, मैं उस प्रस्ताव का स्वागत करता हॅं।
        आदरणीय नरेन्द्र भाई मोदी की हमारी सरकार ""सबका साथ-सबका विकास"" का नारा लेकर, 125 करोड़ देशवासी एकजुट होकर एक सशव्त और आधुनिक भारत के निर्माण हेतु प्रत्येक नागरिक की जिम्मेदारी बनती है और तभी ""एक भारत-श्रेष्ठ भारत"" बन पायेगा।  प्रजातंत्र में सबको साथ में लेकर चलने की बात बहुत बड़ी बात होती है।
        विपक्ष में बैठी कांग्रेस को देश में शासन चलाने का सबसे ज्यादा मौका मिला है। देश में 50 (पचास) साल शासन चलाने वाली कांग्रेस आज नई सरकार से जवाब मांग रही है। पहले तो कांग्रेस को 50 साल का हिसाब देना चाहिए।
        हमारे प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र भाई मोदी जी ने जन-धन योजना का शुभारंभ किया। जन-धन योजना से लोगों का अकस्मात बीमा, दुर्घटना बीमा एक लाख रूपये प्रति व्यव्ति था। यह अपने आप में एक बहुत बड़ा रिकॉर्ड है। बैंकिंग क्षेत्र के इतिहास में भी एक दिवस में करीब डेढ़ करोड़ नागरिकों का खाता खुलना, यह बहुत बड़ा रिकॉर्ड है। महात्मा गांधी ने सामाजिक छुआछूत को मिटाने की बात कही थी और गरीबी से मुव्ति पाने को हर व्यव्ति को भी बैंकिंग व्यवस्था से जोड़ना होगा। गांधी जी ने जो बात कही थी, उस बात को ध्यान में रखकर मोदी जी ने अच्छा अभूतपूर्व काम किया है।
        राष्ट्रपति जी के अभिभाषण में हमारी सरकार ने "मेक इन इंडिया" की बात कही है। देश के निर्माण क्षेत्र को बढ़ावा देने में किसी उद्योग या व्यवसाय की सबसे बड़ी आवश्यकता होती है, भरोसा और विश्वास। औद्योगिक विकास पर ध्यान देने से रोज़गार के अवसर बढ़ेंगे। देश के नौज़वानों और गरीब को रोजगार मिलने से गरीब-से-गरीब परिवार की आर्थिक स्थिति में बदलाव आयेगा।
        सांसद आदर्श ग्राम योजना को सांसद के मार्गदर्शन से गांव का विकास करके मॉडल गांव बनाने का प्रयत्न है।
        हमारे प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्रभाई मोदी ने जब संयुव्त राष्ट्र की आम सभा में योग दिवस घोषित करने का आह्वान किया तब संयुव्त राष्ट्र के 193 देशों में से 177 देशों ने समर्थन देकर 21 जून को अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस घोषित करने का ऐतिहासिक निर्णय लिया, यह हमारे लिए गर्व की बात है। पर्यटन क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए पर्यटन नीति बनाई जा रही है। आगमन पर पर्यटक वीजा को 44 देशों के लिए लागू किया है। हमारी राष्ट्रीय विरासत के पर्यटन स्थलों के लिए पर्यटक रेलगाड़ियां प्रारंभ की गई हैं। महात्मा गांधी जी स्वच्छता के आग्रही थी और हमारे माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्रभाई मोदी जी के द्वारा स्वच्छ भारत मिशन शुरू किया गया। पूरे देश में सफाई और स्वच्छता के लिए जुड़ गये। स्वतंत्रता के 75 वर्ष पूरे होने के बावजूद गरीब परिवारों को आवास नहीं मिला। कांग्रेस गरीबों को आवास, रोज़गार नहीं दे पाई, जो काम गरीबों को देना चाहिए। यह काम मोदी सरकार 2022 तक सभी परिवारों, विशेष रूप से अधिक गरीब परिवारों के लिए आवास योजना पूरी करेगी।
        बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओं अभियान गुजरात राज्य में पहले से शुरू कर दिया था। आज यही योजना देश में शामिल होने से देश की जनता की सोच में बदलाव से बेटियों के जन्म और जीवन सुरक्षा और शिक्षा पर विशेष ध्यान देने हेतु बाल अपराध से जुड़े कानून स्वागतयोग्य है।
        अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग तथा अल्पसंख्यक समुदाय की विशेष चिंता की गयी है। वन बंधु कल्याण योजना के अंतर्गत जनजातियों के संपूर्ण विकास के लिए जो योजना गुजरात सरकार में 10 साल से सफल रूप से चल रही है, उसे देश के आदिवासी परिवारों के विकास और विस्तार में तेजी आएगी।
        मैं आपका आभारी हॅं कि आपने मुझे अपने विचार रखने का मौका दिया। मैं राष्ट्रपति जी के धन्यवाद प्रस्ताव का समर्थन करता हॅं।
                 
*श्री जसवंतसिंह सुमनभाई भाभोर (दाहोद): महामहिम राष्ट्रपति द्वारा संसद के समक्ष दिए गए अभिभाषण में 16वीं लोक सभा में भारतीय जनता पार्टी की पूर्ण बहुमत वाली सरकार की जनकल्याण की मंशा, भ्रष्टाचार उन्मूलन के लिए दृढ़ संकल्प, सबको साथ लेकर चलने का प्रयास, भारतीय संस्कृति तथा विरासत को संजोए रखने की भावना स्पष्ट लक्षित होती है। माननीय मोदी जी के नेतृत्व में सरकार की नीति सबका साथ-सबका विकास है जिस पर सरकार गंभीरता से कार्य कर रही है।  125 करोड़ की जनशव्ति का सदुपयोग करते हुए कार्य योजनाएं तैयार की जा रही है।  स्वच्छता से लेकर स्मार्ट शहर बनाने, गरीबी उन्मूलन से लेकर समृद्धि की ओर बढ़ने में युवा शव्ति के कौशल का विकास करते हुए अपने लक्ष्यों को प्राप्त करने के प्रयास किए जा रहे हैं।
        हमारा देश कई राज्यों का संगठित रूप है। हमारे संविधान ने केन्द्र के साथ-साथ राज्यों के अधिकार क्षेत्र को भी सुरक्षित रखा है। हमें पूर्ण विश्वास है कि राज्य सरकारें भी माननीय प्रधानमंत्री जी के राष्ट्र निर्माण में सहयोग करेंगी तथा हम शीघ्र ही विश्व के विकसित देशों में उचित स्थान प्राप्त कर लेंगे।
        हमारे देश में छोटी-बड़ी अनेक समस्याएं हैं। पूर्व में एक धारणा बन चुकी थी कि इन समस्याओं की जड़ भ्रष्टाचार है तथा भ्रष्टाचार को कोई समाप्त नहीं कर सकता, परन्तु आज एक आशा की किरण पैदा हुई है। पूरा देश मान्यवर मोदी जी के नेतृत्व वाली बी.जे.पी. सरकार के भ्रष्टाचार मुव्त भारत निर्माण को हर भारतीय सफल करने के प्रयास में लग गया है।
        देश में मानव लिंगानुपात के अंतर की चिंता के लिए प्रधानमंत्री जी ने देश को जागृत करने का प्रयास कर हर नागरिक को आवश्यक नैतिक जिम्मेदारी का अहसास करवाया है। बालिका शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए सरकारी/गैर सरकारी शिक्षण संस्थाओं की बुनियादी आवश्यकताओं, विशेषकर विद्यालयों में शौचालयों की व्यवस्था, आवश्यक जलापूर्ति, प्रस्तावित सरकारी और गैर सरकारी विद्यालयों में भवन निर्माण शुरू करने से लेकर शिक्षण कार्य शुरू किए जाने से पूर्व सभी मानवीय आवश्यकताएं पूरी करने में आज सभी राज्य सरकारें मिलकर राष्ट्र निर्माण में लगी हैं। माननीय प्रधानमंत्री जी के स्वच्छ भारत निर्माण तथा हर बेटी की रक्षा तथा शिक्षण कार्यों को भी प्राथमिकता दी जा रही है।
        वर्तमान सरकार द्वारा जन-धन योजना शुरू किए जाने से आज हर नागरिक सरकारी/गैर सरकारी बैंकों के साथ अपने को जोड़ चुका है तथा बैंकिंग कार्य प्रणाली को समझने लगा है।
        वर्तमान सरकार द्वारा अनुसूचित जाति/जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग तथा अल्पसंख्यक समुदाय को साथ लेकर चलने का नारा " सबका साथ-सबका विकास"" को सार्थक करने के प्रयास शुरू किए जा चुके हैं।
        भारतवर्ष आज भी कृषि प्रधान देश है। भारत गाँवों में बसता है। ग्रामीणों के लिए माननीय प्रधानमंत्री जी ने सभी कल्याणकारी योजनाओं को तत्परता से लागू करने का विचार किया है। नवगठित नीति आयोग का गठन इसी उद्देश्य को लेकर किया गया है कि भारत के सभी विकास कार्यों में केन्द्र और राज्य मिलकर कार्य करें तो जन आकांक्षाओं को सदैव ध्यान में रखा जाए। गाँवों में रोज़गार के अवसर पैदा किए जाएं तथा महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोज़गार गारंटी स्कीम के संचालन को सफल बनाने के लिए सरकार भरसक प्रयास कर रही है। माननीय प्रधानमंत्री जी का राष्ट्र को "मेक इन इंडिया" का आह्वान देश को निश्चित रूप से सबल बनाएगा। हर हाथ को रोज़गार मिले, भारत हर क्षेत्र में तरक्की करे, उसके लिए सरकार द्वारा किए जा रहे कार्यों के लिए माननीय प्रधानमंत्री जी का समस्त मंत्रिमण्डल बधाई का पात्र है।
        महामहिम राष्ट्रपति जी ने संसद के समक्ष वर्तमान सरकार की कार्य योजनाओं का विस्तृत वर्णन किया है जिसके लिए मैं दाहोद संसदीय क्षेत्र की जनता के प्रतिनिधि के रूप में इस गौरवमय सदन में महामहिम के प्रति धन्यवाद प्रस्ताव का समर्थन करता हॅं।
                     
*श्री विनोद कुमार सोनकर (कौशाम्बी): मैं श्री अनुराग ठाकुर द्वारा प्रस्तुत और निशिकांत दुबे द्वारा अनुमोदित राष्ट्रपति के अभिभाषण के अनुमोदन का समर्थन करता हॅं। कांग्रेस के साथियों को पीड़ा है कि वर्तमान सरकार ने नौ महीने में ही सब कुछ कर दिया तथा पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार के योगदान को नकारा जा रहा है। मैं कांग्रेस के साथियों से कहना चाहता हँ कि देश में जो कुछ विकास हुआ उसका श्रेय आप अवश्य लें। लेकिन आपकी नीति के कारण आज देश जिस स्थिति में पहुंच गया है, यदि आपमें थोड़ी सी भी नैतिकता बाकी है तो उसकी पूरी जिम्मेदारी लें और देश से माफी मांगे। आपके नेताओं का कहना है कि देश में लोकतंत्र की बुनियाद ठीक है, जिसके कारण आपकी सरकार बनी। अगर आप लोगों का वश चलता तो इस देश में लोकतंत्र ही नहीं बचता। आपने देश में इमरजेंसी थोपी तथा लोकतंत्र की हत्या की और आप भूल गये। जहां तक बहुमत की बात करते हैं और हम पर आरोप लगाते हैं कि हम बहुमत का दुरूपयोग कर रहे हैं। यह सदन गवाह है कि बहुमत का दुरूपयोग किसने किया? शाहबानो केस में देश की सबसे बड़ी न्यायपालिका का निर्णय बहुमत के बल पर किसने बदला था? क्या आप यह भी भूल गये?
        आप हमारे ""मेक इन इंडिया"" कार्यक्रम का मज़ाक उड़ाते हैं और कहते हैं इससे कुछ होने वाला नहीं है। आपकी नीतियों के कारण आज पूरा देश चाइना के मालों से पटा पड़ा है ओर आज पूरा देश बाज़ार बनकर रह गया है। क्या आप इसकी जिम्मेदारी लेंगे। यह जिम्मेदारी किसकी है?
        हमारे देश में आज भी बहुसंख्यक लोग खुले में शौच करते हैं जो स्वास्थ्य सुरक्षा के लिए खतरा है। आज स्वच्छ भारत मिशन आपके नेता माननीय खड़गे जी को दिखावे की चीज़ लग रही है।
        हमारे सभी विद्यालयों में छात्र-छात्राओं के लिए शौचालय की व्यवस्था नहीं है। बहुत बड़ी संख्या में छात्रायें इसी कारण से विद्यालय जाना बंद कर देती हैं। क्या विद्यालय में शौचालय बनाने की योजना भी दिखावे की बातें हैं और अगर आज़ादी के इतने दिनों बाद भी यह प्रबंध अभी तक नहीं हो पाये, तो कौन जिम्मेदार हैं?
        देश के अधिकांश क्षेत्रों में खेती वर्षा पर निर्भर करती है। आधी सदी तक शासन करने वाली सरकार क्या इसके लिए जिम्मेदार नहीं है और जब हमारे माननीय प्रधानमंत्री नरेन्द्रभाई मोदी द्वारा प्रधानमंत्री सिंचाई योजना की बात की जाती है तो आपको लगता है कि इससे कुछ होने वाला नहीं है।
        क्या कारण है कि देश आज़ाद होने के बाद भी पूर्ण साक्षरता के लक्ष्य को नहीं पाया गया है। क्या कांग्रेस के लोग इसकी जिम्मेदारी लेंगे? देश में खेल के नाम पर भ्रष्टाचार का बोलबाला था। हम छोटे-छोटे देशों से भी पीछे हैं। आखिर इसका जिम्मेदार कौन है? हमारे माननीय प्रधानमंत्री ने खेल को बढ़ावा देने के लिए राष्ट्रीय खेल योजना बनाई है। इस पर भी आपका कहना है कि इससे कुछ नहीं होने वाला है। देश में बेटियों की संख्या घटती जा रही है। भ्रूण हत्या जैसे अभिशाप के लिए कौन जिम्मेदार है? देश के न्यायालयों में न्यायाधीशों की कमी है। लाखों मुकदमें लम्बित हैं। कौन जिम्मेदार है? हमने राष्ट्रीय न्यायिक नियुव्ति आयोग की स्थापना की है। जिससे समस्या का समाधान हो। इसमें भी आपको कुछ नहीं दिखता।
        हमारी पूर्ववर्ती सरकार ने गंगा सफाई योजना बनाकर अरबों रूपये खर्च कर दिये,परन्तु साफ होने के बजाए और मैली होती गई। जब हमारे आदरणीय प्रधानमंत्री नरेन्द्रभाई मोदी ""नमामि गंगे योजना"" के माध्यम से गंगा साफ करने का प्रयास कर रहे हैं तो इसमें भी आप कहते हैं कि इससे कुछ होने वाला नहीं है।
        आज भी देश की अधिकांश आबादी गरीबी रेखा के नीचे रहती है। पूर्ववर्ती सरकार इस रेखा को भी बदलती रही। गरीबी हटाओ केवल नारा रहा। गरीब बढ़ते गए। गरीब और अमीर की खाई भी बढ़ती गई। आखिर इसके लिए कौन जिम्मेदार है?
        आपके नेतागण दलितों के हितों की बात करते हैं और उनकी पीड़ा है कि नरेन्द्रभाई मोदी चाय बेचेंगे तो लोग लेंगे, लोग पियेंगे और यही चाय हम दलित लोग बेचेंगे तो कोई नहीं लेगा। आखिर आज़ादी के इतने दिनों के बावजूद देश से अस्पृश्यता खत्म नहीं हुई है तो इसका जिम्मेदार कौन है?
        कांग्रेस के साथियों को बताना चाहता हूं कि मैं भी अनुसूचित समाज से आता हॅं। बाबा साहेब डॉ. भीमराव अम्बेडकर द्वारा दलितों के लिए जो आरक्षण की व्यवस्था की गई है वह आज भी आज़ादी के इतने दिनों बाद भी कानून बनने की राह जोह रहा है। कांग्रेस के साथियों को दलितों की इतनी चिंता है तो आरक्षण को कानून का अमलीजामा क्यों नहीं पहनाया है?
        कांग्रेस के साथियों को बताना चाहता हॅं कि भारत सरकार के अधीन किसी भी मंत्रालय में सचिव स्तर का एक भी अधिकारी दलित समाज का नहीं है। इसका जिम्मेदार कौन है?
        उत्तर प्रदेश की बहुजन समाज पार्टी की नेता सुश्री मायावती के कारण देश की सबसे बड़ी न्यायपालिका ने आरक्षण में प्रमोशन समाप्त कर दिया है। जिसके कारण दलितों का प्रमोशन नहीं हो पा रहा है। कांग्रेस के साथियों को दलितों की इतनी चिंता है तो आज तक कानून बनाने का काम क्यों नहीं किया?
        मैं सरकार को बताना चाहता हॅं कि 26 जनवरी, 1950 को संविधान सभा में राष्ट्र को भारतीय संविधान समर्पित करते हुए परम पूज्य बाबा साहेब भीमराव अम्बेडकर ने कहा था कि आज से देश में सभी देशवासियों को राजनैतिक समानता का अधिकार मिल गया, लेकिन आर्थिक, शैक्षिक समानता आना शेष है। यदि इस संविधान को पूरी निष्ठा और ईमानदारी के साथ लागू किया, तो देश में बहुत जल्द ही राजनैतिक समानता के साथ-साथ आर्थिक एवं शैक्षिक समानता भी आ जाएगी। मैं कांग्रेस के साथियों से पूछना चाहता हूं कि आज़ादी के 67 साल बाद भी देश में राजनीतिक समानता के साथ-साथ आर्थिक एवं शैक्षिक समानता आयी है क्या? यदि नहीं आई तो इसका जिम्मेदार कौन है?
        अतः मैं अपने आदरणीय प्रधानमंत्री नरेन्द्रभाई मोदी को इस बात के लिए बधाई देना चाहता हूं कि राष्ट्रपति जी के अभिभाषण से देश में बाबा साहेब का सपना साकार होगा। इस राष्ट्रपति अभिभाषण में वह सब कुछ है जो देश को विकास के पथ पर आगे ले जाने वाला है। अपने प्रधानमंत्री आदरणीय नरेन्द्रभाई मोदी का नारा ""सबका साथ-सबका विकास"" इस राष्ट्रपति अभिभाषण के माध्यम से पूरी तरह चरितार्थ होता दिख रहा है।
             
*श्री जगदम्बिका पाल (डुमरियागंज):  महामहिम रा­ष्ट्रपति का अभिभा­षण हमारी सरकार की नीतियों एवं भवि­ष्य के कार्यक्रमों की रूपरेखा का दस्तावेज है । हमारी सरकार देश के 125 करोड़ देशवासियों के हित में उठाए जाने वाले कल्याणकारी योजनाओं का समावेश राष्­ट्रपति के अभिभाष्­ाण में परिलक्षित है । केन्द्र में भाजपा की सरकार बनने के बाद प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी ने देश के विकास के लिए जो संकल्प लिया उसमें उन्होंने "सबका साथ-सबका विकास" के लिए अपनी प्रतिबद्धता प्रदर्शित की है । देश के लिए प्रसन्नता की बात है कि विगत 9 माह में प्रधानमंत्री जी ने विकास को गति दी है । उन्होंने केवल समावेशी विकास की बात नहीं की है बल्कि समावेशी विकास के लिए मूलभूत आवश्यकता - वित्तीय समावेशन का भी निर्णय लेकर के देश के आम-जनमानस को मजबूत करने का काम किया है । प्रधानमंत्री जी ने वित्तीय समायोजन के लिए देश के उन परिवारों को जिनका अभी तक किसी बैंक में कोई एक भी खाता नहीं या उनको शून्य बैलेंस पर प्रधानमंत्री जनधन योजना के अंतर्गत खाता खोलने का अवसर प्रदान किया । निर्धनता उन्मूलन, बिना वित्तीय समावेशन के संभव नहीं है । मेरी सरकार ने सभी लोगों तक बैंकिंग सुविधाएं प्रदान करने के लिए महत्वाकांक्षी प्रधानमंत्री जनधन योजना शुरू की है । जिसमें बैंक खाते के साथ रूपे डेबिट कार्ड एवं दुर्घटना बीमा की भी सुविधा प्रदान की गई है । अभी तक उक्त योजना के अंतर्गत देश के 13.2 करोड़ नए बैंक खाते खुल चुके हैं । 11.5 करोड़ रूपये डेबिट कार्ड एवं दुर्घटना बीमा के अंतर्गत एक लाख रूपये आश्रित परिवार के खाते में देने की व्यवस्था सुनिश्चित किया गया है । इस योजना के अंतर्गत 11000 करोड़ रूपया जनता द्वारा जमा भी हो चुका है । यह लक्ष्य छह महीने से भी कम समय में पूरा कर लिया ।
          आज प्रधानमंत्री जनधन योजना कार्यक्रम विश्व का सबसे बड़ा कार्यक्रम बन गया है । मेरी सरकार समाज के अंतिम क्षोर पर खड़ा व्यक्ति को प्रत्यक्ष लाभ अंतरण कार्यक्रम (डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर प्रोग्राम) को उत्साह के साथ गति देने का काम किया जा रहा है । एलपीजी अनुदान के अंतरण के लिए पहल कार्यक्रम को क्रियान्वित कर रही है । पहल कार्यक्रम को 1 जनवरी 2015 से पूरे देश में लागू कर दिया गया है । जिसमें अब तक 75 प्रतिशत प्रयोक्ता परिवार शामिल हो चुके हैं । कुल मिलाकर 35 स्कीमों को प्रत्यक्ष लाभ अंतरण संरचना में शामिल किया जा चुका है । भारत गांवों में बसता है । मेरी सरकार ग्रामीण क्षेत्रों के सतत सामाजिक आर्थिक विकास को सर्वोच्च प्राथमिकता देती है । मेरी सरकार देश के हर व्यक्ति के लिए गरिमापूर्ण जीवन के लिए आवास को एक मूलभूत आवश्यकता मानती है । मेरी सरकार हमारी स्वतंत्रता के 75 व­र्ष पूरे होने पर मिशन "हाउसिंग फार ऑल" के अंतर्गत 2022 तक सभी परिवारों, विशेष्­ा रूप से अत्यधिक गरीब परिवारों की आवास की आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए अडिग है ।
          मेरी सरकार के लिए स्वच्छता आस्था का विष्­ाय है । स्वच्छता का प्रत्येक व्यक्ति, विशे­षकर गरीबों के समग्र जीवन, जीवनस्तर और स्वास्थ्य पर व्यापक प्रभाव पड़ेगा । अक्तूबर 2019 तक स्वच्छ एवं खुले में शौच से मुक्त भारत का लक्ष्य प्राप्त करने के लिए स्वच्छ भारत मिशन शुरू किया गया है । किसान हमारी खाद्य सुरक्षा का प्रहरी है । अन्नदाता सुखी भाव हमारी सभ्यता के मूलभूत सिद्धांतों में से एक है । मेरी सरकार किसानों की खुशहाली को सर्वाधिक महत्वपूर्ण मानती है । सन 1961 से ही शिशु लिंगानुपात में निरंतर कमी होना अत्यंत चिंता का विष्­ाय है । इस ट्रेड को बदलना होगा । बेटियों के जीवन, सुरक्षा एवं शिक्षा को सुनिश्चित करने के लिए मेरी सरकार ने "बेटी बचाओ एवं बेटी पढ़ाओ" को अभियान के रूप में स्वीकार किया है । बेटियों की शिक्षा को प्रभावी बनाने हेतु सुकन्या समृद्धि खाता नामक एक लघु बचत योजना अधिसूचित की गई है । पहली बार केन्द्र सरकार ने अधिकतम शासन न्यूनतम सरकार को दिशा-निर्देशक सिद्धांत है । मंत्री समूह की प्रणाली को समाप्त कर दिया गया है तथा त्वरित निर्णय लेने पर जोर दिया जा रहा है । निर्णयों में पारदर्शिता को मूलमंत्र माना गया है ।
          केन्द्र सरकार ने प्रधानमंत्री के नेतृत्व में निर्णय लिया कि भविष्य में भारत को विनिर्माण हब में बदलना है । इसीलिए मेरी सरकार ने "मेक इन इंडिया" कार्यक्रम शुरू किया है । निर्माण और विकास क्षेत्र में एफडीआई मानदंडों में छूट दी गई है । रक्षा में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) को कुछ शर्तों के अधीन 49औ तक बढ़ाया गया है । रेलवे के कुछ चुनिंदा क्षेत्रों में आवश्यक पूंजी, आधुनिक प्रौद्योगिकी और विश्वव्यापी बेहतर प्रक्रियाएं लाने के लिए प्रत्यक्ष विदेशी निवेश की अनुमति दी गई है । मेरी सरकार ने ऊर्जा के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है । व­र्ष 2014-15 के दौरान 17830 एमडब्ल्यू के लक्ष्य की तुलना में जनवरी 2015 तक 76औ क्षमता हासिल कर लिया है । मेरी सरकार ने ऊर्जा क्षेत्र में चौबीस घंटे बिजली देने के लिए ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्र में आपूर्ति के लिए 43000 करोड़ रूपये से अधिक परिव्यय दीनदयाल उपाध्याय ग्राम ज्योति योजना में स्वीकृत किया है । इसी तरह इंटीग्रेटिड पावर डेवलपमेंट स्कीम प्रारंभ करने के लिए 32600 करोड़ का परिव्यय स्वीकृत किया गया है । बिजली क्षेत्र में सुधार के लिए विद्युत संशोधन विधेयक 2014 प्रस्तुत किया गया है । केन्द्र की सरकार ने पहली बार पेट्रोलियम क्षेत्र में बड़े सुधार किए । डीजल की कीमतों को सरकार ने नियंत्रण मुक्त कर दिया है और अब कीमतें बाजार भाव पर आधारित है । पेट्रोल की कीमत में भी 17 रूपये प्रति लीटर से अधिक की कमी आई है । पेट्रोल में एथनॉल का प्रयोग प्रोत्साहित करने के लिए और गन्ना किसानों की मदद के लिए एथनॉल नीति को संशोधित किया गया है । सरकार द्वारा उठाए गए कदमों से न केवल पेट्रोल एवं डीजल के दामों में भारी कमी आई है बल्कि पिछले कुछ व­र्षों से लगातार सुरसा की तरह बढ़ रही महंगाई पर काबू पाने में हमारी सरकार को सफलता मिली है। पिछले कुछ वष्­ााॉ में इस समय मुद्रास्फीति सबसे निचले पायदान पर पहुंच गई है । जिससे गरीबों को राहत मिली ।
          हमारी सरकार पर्यटन क्षेत्र में वृद्धि के लिए नई पर्यटन नीति तैयार कर रही है । इसी दिशा में आगमन पर पर्यटक वीजा 44 देशों के लिए लागू कर दिया है । ज्योतिर्लिंग सर्किट, सुखमंगल सर्किट एवं दक्षिणधाम सर्किट के लिए विशेष्­ा पर्यटक रेलगाड़ियां प्रारंभ की है । पर्यटक सर्किटों के विकास के लिए स्वदेश दर्शन नामक एक नई योजना प्रारंभ की गई है जिसमें सरकार ने पांच सर्किट को प्राथमिकता के आधार पर शामिल किया है । कृष्­ण सर्किट, हिमालय सर्किट, तटीय सर्किट, बुद्ध सर्किट एवं उत्तर पूर्व सर्किट शामिल है । बुद्ध सर्किट के विकास से न केवल उत्तर प्रदेश एवं बिहार का विकास होगा बल्कि देश में अधिक विदेशों से गौतम बुद्ध को मानने वाले पर्यटक भारत में आएंगे जिससे पर्यटन में वृद्धि होगी तथा बौद्ध धर्म के महत्वपूर्ण स्थलों के विकास से राजस्व में वृद्धि होगी । बुद्ध सर्किट में गौतम बुद्ध जन्मस्थान, मेरे निर्वाचन क्षेत्र सिद्धार्थनगर के पिपरहवा में है । लेकिन अभी पिपरहवा के विकास के लिए समुचित योजना का क्रियान्वयन नहीं हो रहा है । इसलिए बुद्ध सर्किट पर गौतम बुद्ध से जुड़े हुए सभी स्थल पिपरहवा, कपिलवस्तु, श्रावस्ती, कुशीनगर एवं सारनाथ को विकसित करना चाहिए । सभी स्थलों को जोड़ करके राष्ट्रीय राजमार्ग एवं हवाई स्थलों से जोड़ने के लिए एक नियोजित कार्यक्रम बना करके बुद्ध सर्किट को विकसित करने का काम किया जाना चाहिए ।
          अंत में, रा­ष्ट्रपति के धन्यवाद प्रस्ताव का समर्थन करता हूं ।
               
*श्री सुनील कुमार सिंह (चतरा): राष्ट्रपति अभिभाषण के धन्यवाद प्रस्ताव के संबंध में जो चर्चा सदन में हो रही है, मैं उसके संबंध में निम्नलिखित सुझाव ले करना चाहता हॅं :-
        अभिभाषण के पैरा 06 में स्वच्छता का उल्लेख है और महामहिम राष्ट्रपति जी का अक्टूबर 2019 तक स्वच्छ एवं खुले में शौच से मुव्त भारत का लक्ष्य स्वच्छ भारत मिशन के तहत बहुत ही स्वागतयोग्य एवं सराहनीय है। केन्द्र सरकार स्वच्छ विद्यालय कार्यक्रम के तहत इसी वर्ष में हर स्कूल में एक शौचालय बनाने का काम कर रही है।
        पूर्ववर्ती केन्द्र सरकार 1999 से गांवों में शौचालय बनाने के लिए धन दे रही थी, इस धन से अब तक 9 करोड़ 73 लाख शौचालय बनाने का दावा किया गया है, लेकिन पेयजल और स्वच्छता मंत्रालय के 2012 के सर्वेक्षण से पता चलता है कि इनमें से कम-से-कम 2.764 करोड़ शौचालयों का वास्तविक जमीन पर कोई वजूद ही नहीं है और 1.415 करोड़ शौचालय बेकार पड़े हुए है जिनका इस्तेमाल करना मुमकिन नहीं है। इसका सीधा-सा अर्थ यह है कि 4.179 करोड़ से अधिक शौचालयों के निर्माण पर जो पैसा खर्च हुआ है, उससे शौचालय बनाने का लक्ष्य सरकारी फाइलों में भले पूरा हो गया हो, लेकिन इसे बनाने का मकसद पूरा नहीं हुआ है।
        इसलिए केन्द्र सरकार को अक्टूबर 2019 तक सम्पूर्ण स्वच्छता के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए योजना की समय-समय पर समीक्षा किए जाने की भी आवश्यकता ह। साथ हा,ळ पूर्व में शौचालयों पर खर्च की गई राशि का ऑडिट किया जाना चाहिए।
        अभिभाषण के पैरा 09 में भूमि अर्जन की बात का उल्लेख है। केन्द्र सरकार ने 32 राज्यों एवं केन्द्र शासित प्रदेशों के ज्ञापन में कही गई इस बात को ध्यान में रखते हुए कि वर्ष 2013 के भूमि अधिग्रहण कानून से विकास असंभव हो गया है और वे चाहते हैं कि इस कानून को संशोधित किया जाए।
        केंद्र की मौजूदा सरकार किसानों की सर्वाधिक हितैषी सरकार है और उसने किसानों के मुआवजा संबंधी किसी भी हित से कोई समझौता नहीं किया है। इसीलिए केन्द्र सरकार द्वारा भूमि अर्जन, पुनर्वासन और पुनर्व्यवस्थापन में उचित और पारदर्शिता अधिकार अधिनियम संसद में पेश किया है, जिसका सबको स्वागत करना चाहिए। विपक्ष को इस विधेयक पर कोई भी आपत्ति है तो सदन में चर्चा करनी चाहिए, मुद्दे का राजनीतिकरण नहीं किया जाना चाहिए।
        अभिभाषण के पैरा 43 व 44 में पर्यटन,कला और संस्कृति का उल्लेख है। ""स्वदेश दर्शन"" नामक नई योजना काफी प्रशंसनीय हैं। इनके अंतर्गत देश के उन पर्यटक और सांस्कृतिक स्थलों को भी जोड़ा जाना चाहिए जो आज तक उपेक्षित हैं जैसे झारखण्ड के चतरा और लातेहार जिले के इटखौरी, कौलेश्वरी नगर, नेटराहट, पलामू के आरक्षित वन, इत्यादि।
        राष्ट्रपति महोदय के अभिभाषण से एक भारत-श्रेष्ठ भारत बनाने की दिशा में सबका साथ-सबका विकास दृष्टिगत होता है। इसी पथ का अनुगामी होकर भारत वैश्विक क्षितिज पर सर्वोच्च स्थान प्राप्त करेगा।
                                   
*डॉ.यशवंत सिंह (नगीना): अपने अभिभाषण में महामहिम द्वारा जहाँ सबका साथ-सबका विकास की सरकार की नीति पर ध्यानाकृष्ण किया है, वहीं पंडित दीनदयाल उपाध्याय के हर व्यव्ति के समग्र विकास की नीति पर भी बल दिया है। किसी भी सरकार की जहाँ पर प्राथमिकता देश के विकास की होती है, वहीं उस देश के पिछड़े, वंचित एवं दलितों के विकास की भी होती है। प्रधानमंत्री जन-धन योजना एक महत्वकांक्षी योजना है, जिसकी माननीय प्रधानमंत्री जी ने एक ऊँची सोच के साथ शुरूआत की है। परंतु हमें नहीं भूलना चाहिए कि देश के करोड़ो गरीबों ने अपनी रोटी काटकर भूखा रहकर राष्ट्र निर्माण हेतु इन खातों में 11000 करोड़ रूपए भी जमा किए हैं। अब बारी सरकार की है कि इन लोगों का पेट कभी भूखा न हो। गरीबी अपने आप में गन्दगी, बीमारी, अशिक्षा एवं अन्य कई विकारों की जननी है। जहाँ माननीय राष्ट्रपति जी द्वारा सभी को 2022 तक मकान देने का संकल्प दिखाया है, उसे पूरा करने के लिए दृढ़ इच्छाशव्ति एवं ऊँची सोच एवं पहल की आवश्यकता है। गरीब घर में पैदा होना या अमीर घर में पैदा होना भगवान के हाथ में है, परंतु गरीब व्यव्ति को जरूरी बुनियादी सुविधाएं मुहैया कराना सरकार की जिम्मेदारी है और जब सरकार अपनी जिम्मेदारी में फेल होती है तो गरीब का भरोसा सरकार से उठकर भगवान पर जाता है तथा वह मृत्यु माँगता है। आज के युग में खुले में शौच एक अभिशाप है जिसका मूल कारण भी गरीबी है। मैं सरकार की 2019 तक स्वच्छ भारत मिशन के तहत स्वच्छ एवं खुले में शौच मुव्त भारत की पहल का हदृय से स्वागत करता हॅं। लेकिन इसी में मैं यह भी कहना चाहूंगा कि पूर्ववर्ती सरकारों ने भी इस मुहिम को चलाया जरूर था परंतु सभी योजनाएं भ्रष्टाचार एवं कुशासन की भेंट चढ़ गयीं। इसमें मेरा कहना है कि पूर्ण रूप से प्रदेश सरकार के नियंत्रण में ऐसी योजनाओं को छोड़ना भी खतरनाक साबित हो सकता है।
        इस देश की बड़ी आबादी लगभग 23 प्रतिशत अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति है। इस समाज को आज़ादी से पहले सामाजिक शोषण एवं आज़ादी के बाद सामाजिक असमानता का सामना करना पड़ रहा है। इस बड़ी आज़ादी को अभी तक संविधान में इनके लिये प्रावधान के बावजूद आरक्षण, छात्रवृत्ति, रोज़गार, कौशल विकास, सामाजिक बराबरी आदि की योजनाओं का लाभ प्राप्त नहीं हो पाया है। सरकार द्वारा संचालित योजनाएं सिर्फ दिखावा मात्र ही रह गई हैं। यह 23 प्रतिशत आबादी लगभग 0.5 प्रतिशत देश की सम्पदा का भी उपयोग नहीं करती हैं। ऐसी आबादी को इस सरकार से बड़ी उम्मीद हैं। सरकार के दस्तावेज में उन सभी अस्पृश्यता से छुटकारा, रोटी, कपड़ा और मकान जैसी बुनियादी आवश्यकताओं का वायदा किया गया है। मैं अपनी ओर से धन्यवाद ज्ञापित करता हॅं।
        इस देश के पढ़े-लिखे युवाओं में अपार क्षमता है परन्तु इनको क्षमता के उपयोग का अवसर प्रदान कराना सरकार की जिम्मेदारी है। स्किल डेवलपमेंट तथा मेक इन इंडिया जैसी योजनाओं की पहल से देश का नौज़वान देश के विकास में अपना योगदान देने के लिए लालायित है। इन्हीं शब्दों के साथ मैं धन्यवाद ज्ञापित करता हॅं।
                                       
प्रधान मंत्री (श्री नरेन्द्र मोदी) : आदरणीय अध्यक्ष जी, मैं राष्ट्रपति जी के अभिभाषण पर धन्यवाद देने के लिए खड़ा हुआ हूं। मैं इस सदन के माननीय सदस्यों का भी धन्यवाद करना चाहता हूं। यहां बहुत ही अच्छी चर्चा रही। करीब-करीब 60 माननीय सदस्यों के विचारों को सुनने का अवसर मिला और करीब 40 आदरणीय माननीय सदस्यों ने लिखित रूप में अपने भाव व्यक्त किए हैं। इस अर्थ में यह काफी सार्थक चर्चा रही है। इसमें अनेक विषयों की चर्चा की गयी है। विपक्ष के माननीय खड़गे जी और सभी दलों के वरिष्ठ नेताओं ने अपने विषय रखे हैं।
          राष्ट्रपति जी ने अपने अभिभाषण में देश जिन समस्याओं से जूझ रहा है, उन समस्याओं के समाधान के लिए क्या प्रयास हो रहे हैं, किस दिशा में हो रहे हैं और किस गति से हो रहे हैं, उनका उल्लेख किया है। यह बात सही है कि कई आदरणीय माननीय सदस्यों को लगता होगा कि यह होता तो अच्छा होता, यह होता तो अच्छा होता। मैं इसको सकारात्मक रूप में देखता हूं। विचार व्यक्त करने वाले माननीय सदस्य चाहे इस तरफ के हों या उस तरफ के हों, इन अपेक्षाओं का महात्म्य है। अपेक्षाओं का महात्म्य इसलिए भी है कि आपको भरोसा है कि शायद समस्याओं का समाधान इसी कालखंड में होगा। यह अच्छी बात है। कुछ ये भी बातें आईं हैं कि आप तो हमारी योजनाओं का ही नाम बदल रहे हैं। मैं नहीं मानता हूं कि मुद्दा योजना का और योजना के नाम का है। मुद्दा समस्या का है। योजना नयी है, पुरानी है, इसके ऊपर तो विवाद हो सकता है, लेकिन इसमें कोई विवाद नहीं है कि समस्या पुरानी है।   इसलिए हमें जो समस्यायें विरासत में मिली हैं,उन समस्याओं का समाधान करने के रास्ते हम खोज रहे हैं। इनको यह भी लगता है कि यह तो हमारी योजना थी,आपने इसका नाम बदल दिया। मैं समझता हूं कि ऐसे विषयों पर आलोचना नहीं करनी चाहिए। आपको गर्व करना चाहिए,आपको आनन्द होना चाहिए कि चलो भाई,समस्या के समाधान में कुछ बातों में,यहां के लोग हों या वहां के लोग हों,पहले वाले हों या नए वाले हों,सबकी सोच सही है,दिशा सही है,तो यह अपने आप में एक अच्छी बात है,मैं ऐसा मानता हूं।
          मुझे याद है कि हम पर बाहर आलोचना हुआ करती थी कि भाई आजादी के आन्दोलन में आप कहाँ थे?एक बार अटल जी ने बड़ा सटीक जवाब दिया था। अटल जी ने कहा कि अच्छा बताओ वर्ष 1857 के स्वतंत्रता संग्राम में आप कहाँ थे?ये चीजें कुछ पल के लिए ठीक लगती हैं। आप निर्मल भारत की चर्चा करते हैं और कहते हैं कि आप स्वच्छ भारत ले आए। अब मैं पूछता हूँ कि वर्ष 1999 में अटल जी ने टोटल सैनिटेशन का प्रोजेक्ट लगाया था,एक कार्यक्रम चालू किया था। क्या निर्मल भारत उसी योजना का दूसरा नाम था?मैं समझता हूँ कि मुद्दा समस्या है,नाम मुद्दा नहीं है।
          हमारे देश में स्वच्छता एक समस्या है और स्वच्छता हमारी मानसिकता से ज्यादा जुड़ी हुई है। मैं जब स्वच्छता अभियान की बात करता हूँ तब मेरे दिल,दिमाग में वह गरीब है। वर्ल्ड बैंक की रिपोर्ट कहती है कि गन्दगी के कारण जो बीमारी फैलती है,उस वक्त एक गरीब पर सात हजार रूपए का खर्च आता है। स्वच्छता की जिम्मेदारी हम सबकी ज्यादा है। अगर गरीब का औसत लें,पाँच का परिवार है तो 35 हजार रूपए होते हैं। स्वच्छता का दूसरा सम्बन्ध नारी के सम्मान के साथ है। आज भी गाँव में माँ-बहनों को खुले में शौच के लिए जाना पड़ता है,अंधेरे का इन्तजार करना पड़ता है। यह इस तरफ,उस तरफ का मुद्दा नहीं है,मुद्दा हमारी माताओं और बहनों के सम्मान का है,उनको जीने का एक अधिकार देने का है। जब उन चीजों को याद करते हैं तो कहते हैं कि भाई,यह हमें करना होगा। बालिकाएं स्कूल छोड़ देती हैं,पढ़ाई छोड़ देती हैं,क्यों?एक प्रमुख कारण ध्यान में आया और वह कारण यह था कि स्कूल में गर्ल चाइल्ड टॉयलेट नहीं है। सवाल किसी को दोष देने का नहीं है,इस समस्या का समाधान खोजने का है,इसलिए स्वच्छता के अभियान को आगे बढ़ाया है। ये तीन चीजें मेरे मन को हमेशा आन्दोलित करती हैं। स्वच्छता अभियान,यह कोई उद्घाटन समारोह नहीं है,यह निरन्तर करने का काम है और हम सबको करने का काम है। हममें से कोई नहीं है,जिसे गन्दगी पसन्द है। लेकिन स्वच्छता का आरम्भ मुझे करना चाहिए,उस पर हम जागरूक नहीं हैं। सवा सौ करोड़ देशवासियों को इस काम में जोड़ना चाहिए या नहीं जोड़ना चाहिए। मुझे खुशी हुई कि कल सुप्रिया जी ने अपने भाषण में कहा था कि यह एक अच्छा अभियान है,इससे हम एम.पी. कैसे जुड़ें?हाउस में सामने से उन्होंने पूछा कि हम इससे कैसे जुड़ें?हमें कल्पना नहीं है कि जन सामान्य स्वच्छता के काम को कितना पसन्द करता है।  मुझे मीडिया ग्रुप के लोग मिल थे। वे कह रहे थे कि हमने केदारनाथ की क्लैमिटी में काम किया,धन संग्रह किया,हमें 4 करोड़ रुपये मिले। गुजरात में भूकम्प हुआ तो हम लोगों ने काम किया,लोगों ने हमको 3 करोड़ रुपये दिये। अभी हमने स्वच्छता को लेकर टेलीविजन के माध्यम से अभियान चलाया तो हमें लोगों ने 400 करोड़ रुपये दिये। जो लोग राजनीति में हैं,मैं उन लोगों से कहूंगा कि अगर आप वोट के हिसाब से भी यह करते हैं तो समाज का यह बहुत ही मनपसन्द काम है। अगर समाजनीति से यह काम करते हैं तो इससे बड़ा स्वान्तः सुखाय कोई काम नहीं हो सकता है। इसका नाम यह रहे या वह रहे,इससे ऊपर उठ करके,समस्या न रहे,उस पर हम ध्यान केन्द्रित करेंगे। मैं समझता हूं कि हम बहुत कुछ कर सकते हैं।
          आदरणीय मुलायम सिंह जी ने एक बहुत अच्छी बात कही है। उन्होंने कहा कि मोदी जी स्वच्छता की बात करते हैं, "अस्सी घाट" की सफाई करने गये थे,वह कार्य अभी भी पूरा नही हुआ है। मुझे समझ नहीं आया कि मैं हसूं या रोऊं,इसलिए कि आदरणीय मुलायम सिंह जी उत्तरप्रदेश सरकार की रिपोर्ट कार्ड दे रहे थे या केन्द्र सरकार की रिपोर्ट कार्ड दे रहे थे। ...(व्यवधान)करीब 3 महीने से "अस्सी घाट" की सफाई चल रही है। आप कल्पना कर सकते हैं कि कितनी गन्दगी होगी,जिस "अस्सी घाट" को लेकर वाराणसी की पहचान है।...(व्यवधान)
श्री मुलायम सिंह यादव (आज़मगढ़) :  सफाई मैंने शुरू की है।...(व्यवधान)
श्री नरेन्द्र मोदी  :  मैं आपका आभारी हूं। मैं मुलायम सिंह जी की बात को मानता हूं। लोहिया जी स्वच्छता का आंदोलन चलाते थे। आप लोहिया जी की कोई भी बात देखेंगे तो देश में स्वच्छता के लिए महात्मा गांधी जी के बाद, पूरी ताकत से अगर किसी ने आवाज उठायी थी तो लोहिया जी ने आवाज उठायी थी। लोहिया जी ने यह आवाज उठायी थी, इसलिए मोदी जी को उसमें हाथ नहीं लगाना चाहिए, ऐसा नहीं हो सकता। अगर लोहिया जी ने अच्छी बात कही है तो मोदी जी को भी उस रास्ते पर चलने में गर्व करना चाहिए।
          इतने समय के बाद भी वहां बहुत कुड़ा-कचरा था। आपको सुनकर हैरानी होगी कि विदेशों में हमारी एम्बैसिज हैं। सुष्मा जी ने सभी देशों में हमारी ऐम्बैसिज को चिट्ठी लिखीं कि "स्वच्छता अभियान" भारत में शुरु हुआ है, आपकी एम्बैसी का जरा हाल देखिए। मुझे एम्बैसिज के जो फोटोग्राफ्स आये हैं कि उनके हाल पहले क्या थे और अब क्या है? जहां हमारे लोग रहते थे, वहां गन्दगी के ढेर थे। कागज पानी में भीग कर पत्थर से बन गए थे। क्या सरकारी दफ्तरों में व्यवस्था नही है, व्यवस्था है, लेकिन स्वभाव नहीं है। इसलिए यह एक पवित्र काम है जिसके लिए हम इसमें लगे हैं। यह काम इस सरकार का या इस सरकार के मुखिया का नही है, यह काम सवा सौ करोड़ देशवासियों का है। आपने जिस नाम से इस काम को बढ़ाया है, मैं उसका भी अभिवादन करता हूं। आपने अब तक जो किया है, मैं उसका अभिवादन करता हूं। इन चीजों में विवाद का विषय नहीं हो सकता है। लाल किले पर से यह कहने का सामर्थ्य मुझमें था, मैंने कहा था कि इस देश में अब तक जितने प्रधानमंत्री रहे हैं, अब तक जितनी सरकारें रही हैं, यह देश उन सब के योगदान से आगे बढ़ा है। लाल किले की प्राचीर से मैंने भारत की सभी सरकारों की बात कही। मैं यह भी कहना चाहता हूं कि हमनें नौ महीनों में सब कुछ कर दिया है, हम ऐसा दावा करने वाले नहीं हैं और न ही, हम यह बात मानते हैं कि देश 15 अगस्त, 1947 को पैदा हुआ था। यह देश हजारों साल की विरासत है। ऋषियो, मुनियों, आचार्यों, भगवन्तों, शिक्षकों, मजदूरों और किसानों ने इस देश को बनाया है। सरकारों ने देश नहीं बनाया है।  सरकारें आती हैं,जाती हैं। सरकारें देश नहीं बनातीं,देश जनता-जनार्दन की सामर्थ्य से बनता है,जनता-जनार्दन की शक्ति से बनता है और राष्ट्र अपनी गति से चलता है,अपनी फिलॉस्फी से चलता है। आइडियोलॉजी आती है और जाती है,बदलती रहती है। मूल तत्व देश को चलाता है। भारत का मूल तत्व है -एकम सत्य विप्र:बहुधा वदन्ति,भारत का मूल तत्व है -
                                       सर्वे भवन्तु सुखिन: सर्वे सन्तु निरामया:।
                                       सर्वे भद्राणि पश्यन्तु मा कश्चित दु:ख भाग्भवेत।।
 
यह भारत का मूल तत्व है,सबकी भलाई की बात यहां होती है। इसलिए यह देश आज जहां भी है,सरकारें आएंगी,जाएंगी,बनेंगी,बिगड़ेंगी। कुछ लोगों को लगता है कि दिल्ली में आपका क्या हुआ। मैं पूछना चाहता हूं कि पिछले तीन हफ्ते से मध्य प्रदेश में अलग-अलग चुनावों के नतीजे आ रहे हैं पंचायतों,नगरपालिका,महा नगरपालिका के,क्या हुआ था। असम में इतनी भव्य विजय हो रही है। क्या हुआ?पंजाब,राजस्थान,क्या इसी का हिसाब लगाएंगे. बोलने में बहुत अच्छा लगता है। अगर यही बात है,इतना लैंड एक्विजिशन एक्ट लेकर मैदान में गए थे,हिस्ट्री में कांग्रेस की इतनी कम सीटें कभी नहीं आई थीं। यहां तक कि आपातकाल इतना भयंकर संकट था,लेकिन कांग्रेस के हालात इतने बुरे नहीं हुए,जितने इस बार हुए हैं। अगर एक्ट के कारण आप जीतने वाले होते और किसानों को पसंद आया होता तो आप जीत जाते। इसलिए कृपया करके आप वह तर्क न करें,बोलने में ठीक लगता है लेकिन उस तर्क से आप सत्य को सिद्ध नहीं कर सकते। इसलिए मैं कहना चाहूंगा कि हमें समस्याओं का समाधान खोजना है,यहां मंथन करके रास्ते खोजने हैं।
          कभी-कभार यह कहा जाता है कि आप मनरेगा बंद कर देंगे या आपने मनरेगा बंद कर दिया है। मैं इतना विश्वास जरूर करता हूं कि आप लोगों को मेरी क्षमता के विषय में शक होगा,आपका अभिप्राय भी अलग-अलग हो सकता है कि इसमें मोदी को ज्यादा ज्ञान नहीं है,इसमें कम अनुभव है। यह सब होगा,लेकिन एक विषय में आप जरूर मानते होंगे कि मेरी राजनीतिक सूझ-बूझ तो है। मेरी राजनीतिक सूझ-बूझ कहती है कि मनरेगा कभी बंद मत करो। मैं ऐसी गलती नहीं कर सकता,क्योंकि मनरेगा आपकी विफलताओं का जीता-जागता स्मारक है। आजादी के साठ साल बाद आपको लोगों को गड्ढे खोदने के लिए भेजना पड़ा। यह आपकी विफलताओं का स्मारक है और मैं गाजे-बाजे के साथ इस स्मारक का ढोल पीटता रहूंगा। दुनिया को बताऊंगा कि ये गड्ढे जो आप खोद रहे हैं,उन साठ साल के पापों का परिणाम है। इसलिए मेरी राजनीतिक सूझ-बूझ पर आप शक मत कीजिए। मनरेगा रहेगा,आन-बान-शान के साथ रहेगा और गाजे-बाजे के साथ दुनिया में बताया जाएगा। हां,एक बात और जरूर होगी क्योंकि मैं देश हित के लिए जीता हूं,देश हित के लिए जीना चाहता हूं। इसलिए इसमें से देश का अधिक भला कैसे हो,उन गरीबों का भला कैसे हो,उसमें जो कुछ आवश्यक जोड़ना पड़ेगा,निकालना कुछ नहीं है,आप चिन्ता मत कीजिए,जो जोड़ना पड़ेगा,जोड़ेंगे,जो ताकत देनी पड़ेगी,हम देंगे क्योंकि हम मानते हैं कि लोगों को पता चले कि ऐसे-ऐसे खंडहर छोड़कर कौन गया है। इतने सालों के बाद भी आपको ये गड्ढे खोदने के लिए मजबूर किसने किया है। यह उनको पता रहना चाहिए,इसलिए यह बहुत आवश्यक है,आपने बहुत अच्छा काम किया है। आप अपने फुटप्रिंट छोड़ कर गए हैं,जिससे लोगों को पता चल सके। जब कभी भी भ्रष्टचार की चर्चा होती है,मैं मानता हूं कि भ्रष्टाचार ने हमारे देश को तबाह करके रख दिया है। देश में भ्रष्टचार की चर्चा राजनीतिक दायरे में न करें,क्योंकि राजनीति के दायरे में चर्चा करके हम इस भयंकर समस्या को तू-तू,मैं मैं में उलझा देते हैं। किसकी शर्ट ज्यादा सफेद,यहीं पर हम सीमित हो जाते हैं। मैं उधर आरोप लगाऊंगा,वे इधर आरोप लगाएंगे और माल खाने वाले कहीं न कहीं खाते रहेंगे। अगर हम सब मिल जाएं,पुराने भ्रष्टाचार का क्या होगा,आगे हम मिलकर यह तय करें कि इसे आगे नहीं होने देंगे तभी भ्रष्टाचार जा सकता है। क्या देश में ऐसी कोई समस्या नहीं है जो राजनीतिक विवादों से परे हो,क्या देश में ऐसी कोई समस्या नहीं है जो तू-तू मैं-मैं से बाहर निकल कर उसके समाधान के रास्ते खोजे जा सकें। भ्रष्टाचार एक समस्या है,उसका उपाय जो शासन में बैठे हैं,उनकी जिम्मेवारी है कि वे पॉलिसी ड्रिवेन स्टेट चलाएं। जब नीति आधारित व्यवस्थाएं होती हैं तो ग्रे एरिया मिनिमम रहता है। मैं यह दावा नहीं करूंगा,परमाप्ता ने हम सबको इतनी बुद्धि दी है,कि हम ऐसे कानून बनाएं,जिसमें कोई कमी ही न रहे,मनुष्य का इतना सामर्थ्य नहीं है। हो सकता है आज समस्या न हो,लेकिन पांच महीने या पांच साल बाद कोई समस्या उभर कर न आए,लेकिन मिनिमम ग्रे एरिया रहे,जब मिनिमम ग्रे एरिया रहता है तब यह बात तय होती है कि जो अफरशाही है,उसको इंटरप्रिटेशन करने का अवसर नहीं रहता है। प्रॉइरिटी करने का मौका ही नहीं रहता है। हमारी कोशिश है कि सरकारें पॉलिसी ड्रिवेन हो,इंडिविज्युअल विजन के आधार पर देश नहीं चल सकता है,न सरकारें चल सकती हैं। भारत के संविधान दायरे में सब चीजें होनी चाहिए,तभी समस्याओं के समाधन हो सकते हैं।
          उदाहरण के तौर पर कोयले का आबंटन,जब सीएजी ने रिपोर्ट दी,रिपोर्ट लिखने वालों को भी लगता है कि इतना तो नही हो सकता। पहले कभी 600 करोड़ रुपये के भ्रष्टाचार का सुना था। 500 करोड़ रुपये का भ्रष्टाचार सुना था। लेकिन 1,86,000 करोड़ रुपये का भ्रष्टचार,इस पर देश भी चौंक गया था। राजनीति में बोलने के लिए काम तो आता था,लेकिन फिर भी मन में आता था कि 1,86,000 करोड़ का कैसे हो सकता है। जब कोयले का आबंटन हुआ उसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने 204 कोल ब्लॉक को रद्द कर दिया। अभी तक 18 या 19 ऑक्शन ही हुए हैं। उनमें करीब एक लाख करोड़ रुपये से ज्यादा आ चुका है। जब 204 ऑक्शन हो जाएंगी तब सीएजी ने जो सोचा था,उससे भी बड़ी आय इस ऑक्शन से आने वाली है। उस समय जीरो थ्योरी की बात चली थी। मैं यह नहीं कहना चाहता हूं कि जिनके समय में यह हुआ,उनको क्या करना चाहिए। वह मेरा विषय नहीं है। वह आप जाने,आपका परमात्मा जाने। अगर हम इस दिशा में चलते हैं,तो मुझे लगता है कि रास्ते खोजे जा सकते हैं। यह सीधा-सादा उदाहरण है कि भ्रष्टाचार मुक्त व्यवस्थाएं विकसित की जा सकती हैं। ऐसी व्यवस्थाओं को विकसित किया जा सकता है,जिनमें भ्रष्टाचार का अवसर कम होता जाये। इसके लिए आप उत्तम से उत्तम से सुझाव दें। इस विषय को लेकर मेरा समय मांगेंगे,तो मैं आपको समय दूंगा। मैं आपसे समझना चाहूंगा और आप भी हमें गाइड कीजिए कि इस भयंकर समस्या से निकलने के लिए ये-ये चार रास्ते हैं। शासन व्यवस्था उसे देखेगी,लेकिन हम सब मिलकर प्रयास करें कि इस बदी से देश को मुक्त करायें। हम मानकर चलें कि हो क्या रहा है?
           यहां पर अधिकतम आदरणीय सदस्यों ने काले धन की चर्चा की। जिस काले धन की चर्चा करने से लोग कतराते थे,काले धन की बात आते ही मुंह पर रंग बदल जाता था,जब उनके मुंह से आज काले धन की चर्चा सुनता हूं,तो मुझे इतना आनंद होता है,जिस आनंद की कल्पना नहीं कर सकते। मैं मानता हूं कि हमारी सबसे सिद्धि यह है कि हमने देश को काले धन पर बोलने के लिए मजबूर कर दिया। सुप्रीम कोर्ट की बातें तो बहुत होती हैं,लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने काले धन पर एस.आई.टी. बनाने के लिए कहा था। सुप्रीम कोर्ट का सम्मान करने से हम चूक गये। क्या हमारी जिम्मेदारी नहीं थी कि जब सुप्रीम कोर्ट ने काले धन के लिए एस.आई.टी. बनाने के लिए कहा था तो बिना समय बिताये हम एस.आई.टी. बना देते?हमने तीन साल तक एस.आई.टी. नहीं बनायी,सुप्रीम कोर्ट के कहने के बावजूद भी नहीं बनायी। नयी सरकार बनने के बाद पहली कैबिनेट मीटिंग में पहला निर्णय काले धन पर एस.आई.टी. बनाने के लिए किया। जब काले धन की बात आती ह,् तो स्विस बैंक की चर्चा आती है।
          मैं श्रीमान् अरूण जेटली जी को बधाई देता हूं कि उन्होंने कानूनों का अध्ययन किया,अंतर्राष्ट्रीय कानूनों का अध्ययन किया और स्विटजरलैंड गवर्नमैंट को हमें मह्त्वपूर्ण जानकारियां एक्सचेंज करने के लिए राजी कर लिया। अब उसके कारण वहां के बैंकों की जानकारियां पाने के लिए हमारे लिए रास्ता खुला है। मैं वित्त मंत्री जी का अभिनंदन करता हूं। इतना ही नहीं,जी-20समिट में आप भी जाते थे। हम तो पहली बार गये हैं। हमारे लिए तो कइयों के चेहरे भी पहली बार देखने का अवसर आया था। हमने जी-20समिट का क्या उपयोग किया?जी-20समिट के अंदर जो संयुक्त डेक्लरेशन हुआ,उसमें हमने आग्रह किया कि ब्लैकमनी,ड्रग ट्रैफिकिंग के खिलाफ जी-20को जिम्मेदारी के साथ कदम उठाना चाहिए और उसमें हम सहयोग करेंगे। काले धन को रोकने के लिए हम एक दूसरे के साथ सहयोग करेंगे। हमें मिलकर जिस पर दबाव डालना है,डालेंगे। हमने इसका निर्णय जी-20समिट में करवाया। यह हमारी कोशिश थी। इस रास्ते से हम भटकने वाले भी नहीं हैं,हटने वाले भी नहीं हैं और कोई इससे बचेगा नहीं,यह मैं आपको कह कर रखता हूं।
          कृपा करके कोई यह न कहे कि हम विंडक्टिव थे,इसलिए किया है। हम वादा करके आये हैं। वह व्यक्ति,जरूरी नहीं कि सब राजनेता हों,लेकिन जिसने भी किया है,देश का तो नुकसान किया ही है। इसलिए उस संबंध में सरकार की इच्छाशक्ति चाहिए,हमारी है। सरकार के प्रयास होने चाहिए,हम कर रहे हैं और अंतिम विजय प्राप्त करने तक करते रहेंगे,यह मैं इस सदन को विश्वास दिलाता हूं। कभी कभी यह कहा जाता है कि आपने नया क्या किया?मैं एक उदाहरण देता हूं कि काम को कैसे किया जाए। हम एक तरफ किसान की बहुत बात करते हैं लेकिन किसान को मुसीबतों से बाहर निकालने के लिए रास्ता खोजेंगे कि नहीं खोजेंगे?कई उपाय हैं। जैसे हम काम लेकर निकले हैं -पर ड्रॉप,मोर क्रॉप। हमारे देश में पानी की कमी है,सारी दुनिया पानी के संकट से जूझने वाली है। क्या सरकारों की जिम्मेदारी नहीं है कि आने वाले 30-40 साल के भविष्य को देखकर कुछ बातें करें?तत्कालीन लाभ के लिए ही करेंगे?हो सकता है राजनीतिक लाभ हो जाए लेकिन राष्ट्रनीति की तराजू में वह बात बैठेगी नहीं। हमने सॉएल हैल्थ कार्ड की बात कही है। हमने मंत्र दिया है -स्वस्थ धरा तो खेत हरा। लेकिन हम सिर्फ विज्ञान भवन में रिब्बन काटकर और दीया जलाकर काम नहीं करते हैं। यह सरकार कैसे काम करती है?मैंने अधिकारियों को सूचना दी। जैसे आज किसी भी डॉक्टर के पास जाएं तो वह पहले ब्लड टैस्ट करवाने के लिए कहता है,युरिन टैस्ट करवाने के लिए कहता है और उसके बाद ही वह दवाई के लिए सोचता है। वह सारे टैस्ट करवाता है और तब तक वह दवाई नहीं देता है। जिस प्रकार से शरीर के स्वास्थ्य के लिए इन चीजों की जरूरत है क्या हम देश में किसानों के लिए यह बात पहुंचा सकते हैं कि आप फसल पैदा करने से पहले,जमीन से फायदा उठाने से पहले जमीन की तबियत कैसी है,यह जान लें। जिसे हम भारत मां कह रहे हैं,उस भारत मां का हाल क्या है,उस धरा का हाल क्या है,पृथ्वी माता का हाल क्या है,वह तो पहले जानो। कहीं हमारे पापों के कारण हमारी धरा बीमार तो नहीं हो गई है?हमने इतना यूरिया डाला,यूरिया का झगड़ा करते रहे। क्या हमने कहीं यूरिया डालकर हमारी धरा को तबाह तो नहीं कर दिया है?यह कब समझ में आएगा,जब हम सॉएल टैस्टिंग करेंगे। अब सॉएल टैस्टिंग का कार्ड निकालेंगे,दे देंगे,इससे बात नहीं बनेगी। मैंने कहा है कि क्यों न हम गांव-गांव सॉएल टैस्टिंग लैब के लिए एन्टरप्रोन्योर तैयार करें?गांव के नौजवान जो थोड़े बहुत पढ़े लिखे हैं,उनको ट्रेनिंग दें। गांव में अगर वह लैब बनाता है तो उसे बैंक की तरफ से ऋण दिया जाए ताकि गांव के लोगों की उस लैब्रोटरी में जाने की आदत बन जाए और वे हर साल बारिश के सीज़न से पहले अपनी जमीन चैक करवा लें,मार्गदर्शन प्राप्त करें,माइक्रो न्यूट्रिशन की डिटेल जा लें।
    अध्यक्ष महोदया,हमारे यहां दसवीं,बारहवीं विज्ञान के स्कूल और कॉलेज में लैबोरेटिरी है। लेकिन हमारे देश में करीब फरवरी से जुलाई तक लैबोरेटिरी बंद रहती है क्योंकि बच्चे एग्जाम में लग जाते हैं और स्कूल खुलने में जून-जुलाई महीना आ जाता है। इस तरह करीब तीन-चार महीने के महत्वपूर्ण समय में स्कूल की लैब खाली पड़ी रहती है। सॉएल टैस्टिंग कोई बहुत बड़ी टैक्नोलाजी नहीं है,इसे आराम से किया जा सकता है। हमने कहा कि उन दसवीं और बारहवीं के विद्यार्थियों को भी ट्रेनिंग दीजिए। स्कूलों में वैकेशन्स में सॉएल टैस्टिंग लैब के रूप में इसे कन्वर्ट कीजिए। इससे स्कूल को तो इनकम होगी ही और गांव के नौजवानों को भी इनकम होगी। हमारा देश गरीब है,क्या हम कोई रातों-रात लैब बना देंगे,पैसे खर्च देंगे?हम ऑप्टिमम यूटिलाइजेशन ऑफ ऑवर इफ्रास्ट्रक्चर करेंगे। यह है गुड गवर्नेंस,ये हैं तरीके,इन तरीकों से समस्याओं का समाधान किया जा सकता है। जब एक बार किसान को पता चल जाएगा कि मेरी जमीन इस फसल के योग्य नहीं है तो मैं मानता हूं कि हमारा किसान तुरंत विश्वास से काम करेगा और आज किसान का जो खर्चा होता है वह खर्चे से बच जाएगा।
          अध्यक्ष महोदया,कभी यहां पर बात आई कि क्रूड ऑयल के अंतर्राष्ट्रीय भाव घटे हैं लेकिन आपने पेट्रोल और डीजल के दाम क्यों कम नहीं किए?तब हम भूल जाते हैं,जब हम सरकार में आये,तो सूखे की स्थिति थी,बारह प्रतिशत बारिश कम थी। तब हमने निर्णय किया कि डीजल में जो सब्सिडी दी जाती है,उसमें 50 प्रतिशत और बढ़ोत्तरी की जाए,बिजली के दाम में जो पैसे लिये जाते हैं,उसकी सब्सिडी में 50 प्रतिशत और बढ़ोत्तरी की जाए और उसके कारण डीजल पर,सरकार पर बहुत बड़ा आर्थिक बोझ आया है। हमने किसानों को दिया है,जो कहते हैं कि नहीं दिया है,तो ऐसा नहीं है,हमने दिया है। लेकिन आपको पिछले मई,जून,जुलाई का याद नहीं रहता,आपको इस अक्तूबर,नवम्बर,दिसम्बर का याद रहता है। ऐसा नहीं है जी!सरकार आखिर किसके लिए है!यह सरकार गरीब के लिए है,यह गरीबों को समर्पित सरकार है। हम हैं,जिन्होंने एक्सपेंडीचर कम करने के लिए एक्सपेंडीचर कमीशन बनाया है क्योंकि हम चाहते हैं कि शासन में जो अनाप-शनाप खर्चे हो रहे हैं,उसको रोकना चाहिए ताकि वे पैसे गरीब के काम आएं,गरीब के कल्याण के काम आएं,उस पर काम कर रहे हैं। हम गुड गवर्नेन्स की ओर जा रहे हैं। आप देखिए,हम ऐसे लोग हैं,अब आप यह नहीं कहेंगे कि हमारे ज़माने से हैं,मैं बचपन से अभी तक भी नहीं समझ पाता था कि ज़ीरोक्स का ज़माना आया,फिर भी मेरे सर्टिफिकेट को सर्टिफाई कराने के लिए किसी गजेटेड ऑफिसर के पास जाना पड़ता था,किसी एम.एल.ए. के घर के बाहर कतार में खड़ा रहना पड़ता था,किसी एम.पी. के घर के बाहर कतार में खड़ा रहना पड़ता था। एम.एल.ए. या एम.पी. अवेलेबल न हो तो भी उनका एक एक छोटा-सा आदमी रहता था,वह सिक्का मार देता था कि हाँ भाई,आपका सर्टिफिकेट ठीक है। हम उस पर तो भरोसा करते हैं,लेकिन देश के नागरिक पर भरोसा नहीं करते हैं। हमने नियम बनाया कि सेल्फ अटेस्ट करके आप दे दीजिए और जब फाइनल रिजल्ट होगा,तब आप ऑरिजीनल डॉक्युमेंट दिखा दीजिए। आप कहेंगे कि यह छोटी चीज है,लेकिन यह देश के सामान्य मानवों में विश्वास पैदा करती है कि सरकार मुझ पर भरोसा करती है।
          हमारे यहाँ एक-एक काम में तीस-चालीस पेज के फॉर्म भरा करते थे। मैंने आते ही कहा कि भाई,इतने लम्बे-लम्बे फॉर्म की क्या जरूरत है,सरकार की फाइलें बढ़ती चली जा रही हैं,जितना ऑन-लाइन हो सकता है,उसे ऑन-लाइन किया जाए और मिनिमम कर दो,तो मिनिमम कर दिया। कई जगह पर फॉर्म की प्रक्रिया को एक पेज में लाकर रख दिया है। हम व्यवस्थाओं के सरलीकरण में विश्वास करते हैं,रैड टेप को हम कम करना चाहते हैं ताकि सामन्य मानवों को उसकी सुविधा मिले,उस दिशा में हम प्रयास कर रहे हैं। एक के बाद एक काम हम करते चले जा रहे हैं और उसका लाभ मिलने वाला है।
          हमारे यहाँ जो सरकारी मुलाज़िम रिटायर होते हैं,उनको हर वर्ष पेंशन लेने के लिए नवम्बर महीने में जिन्दा होने का सबूत देना पड़ता है। दफ्तर में जाकर एक्स-एम.पी. को भी देना पड़ता है। एक आयु तक तो ठीक है,उसी बहाने बाहर जाने का मौका मिल जाता है,लेकिन एक आयु के बाद वहाँ जाना सम्भव नहीं होता है। क्या हम इन व्यवस्थाओं को नहीं बदल सकते हैं?वह टेक्नोलॉजी का प्रयोग करते हुए,अपने घर में बैठकर भी,अपने जिन्दा होने का प्रमाण दे सकता है,उसका पेंशन पहुंच जाए,इसका पूरा मैकेनिज्म बना दिया है। यह हमारे गरीब पेंशनर का सम्मान है।
          आपको लगेगा कि यह इतना बड़ा देश है और मोदी छोटी-छोटी बातें करते हैं। मुसीबतों की जड़ तो ये छोटी-छोटी बातें ही होती हैं,जो बाद में वटवृक्ष बन जाती है,विष-वृक्ष बन जाती है,जो समस्याओं में सभी को लपेट लेती है। यह इसलिए आवश्यक होती है।
          मुझे याद है,कभी-कभार,पिछले सत्र में,हमारा बहुत मजाक उड़ाया गया। मैं नहीं जानता हूं कि इस तरह की भाषा का प्रयोग कर रहे थे,उचित था या नहीं?यहां तक कह दिया कि आपको पार्लियामेंट में आने का वीज़ा दे रहे हैं। इस प्रकार के शब्दों का प्रयोग करने वालों को मैं और तो कुछ नहीं कहता,लेकिन इतना कहना चाहता हूं कि अंतर्राष्ट्रीय स्थानों पर कुछ काम निर्धारित होते हैं,जिन्हें करना पड़ता है।
          उन मीटिंग्स में पहले के प्रधानमंत्रियों को भी जाना पड़ता था,इस प्रधानमंत्री को भी जाना पड़ेगा और भविष्य में जो प्रधानमंत्री आएगा,उसे भी जाना पड़ेगा। लेकिन अगर वही मजाक का विषय बन जाए,तो क्या हमारी राजनीति इतनी नीचे आ गयी है कि हम ऐसी बातों की चर्चा कर रहे हैं?क्या आपके पास मेरी आलोचना करने के लिए कोई और मुद्दे नहीं बचे?मैं कहना चाहता हूं,अगर आपको देश की इतनी चिन्ता थी,अगर इस देश का प्रधानमंत्री विदेश गया है तो कितना समय कहां बिताया,कभी उसकी भी जांच कर लेते,कभी उसकी भी इनक्वायरी कर लेते। मैं आज कहना चाहता हूं,मैं जापान गया,जापान के अपने कार्यक्रम में मैंने एक कार्यक्रम यह जोड़ा। मैं वहां एक नोबेल लॉरिएट साइंटिस्ट यामानाका को मिलने गया। क्यों?क्या फोटो निकलवाने के लिए?मैं इसलिए गए कि उन्होंने स्टेम सेल के अंदर रिसर्च की है। मैंने जितना पढ़ा है,मेरे मन में आया था कि शायद इनकी यह खोज हमारे काम आ सकती है क्योंकि मैं जानता हूं कि मेरे देश के आदिवासियों को परम्परागत रूप से सिकल-सेल की भयंकर बीमारी से जूझना पड़ रहा है। सिकल-सेल की बीमारी कैंसर से भी भयंकर होती है। सिकल-सेल बीमारी वालों के विषय पूछें तो पता चलेगा कि यह कितनी पीड़ादायक होती है और पीढ़ी दर पीढ़ी चलती है। अभी तक उसकी कोई दवा नहीं मिली है। एक आशा लगी है कि स्टेम सेल के द्वारा सिकल-सेल बीमारी से मुक्ति मिल जाए। मैं गया,वहां जाकर मैंने उनसे चर्चा की। बैंगलौर के हमारे साइंस इंस्टीटय़ूट के साथ आज उस दिशा में काम हो रहा है कि स्टेम सेल के द्वारा हमारे युवा साइंटिस्ट्स कुछ खोज करें ताकि मेरे आदिवासी भाइयों को पीढ़ी दर पीढ़ी जिन परेशानियों में जिन्दगी गुजारनी पड़ती है,उनसे वे बाहर आ सकें।
          हम आस्ट्रेलिया गए,जी-20समिट में गए। वहां मैं उन एग्रीकल्चर साइंटिस्ट्स से मिलने उनके लैब में गया जिन्होंने प्रति हेक्टेअर ज्यादा चना उगाने का और सबसे खराब धरती पर चना उगाने का सफल प्रयोग किया था,रिसर्च किया था। कभी मैंने पढ़ा था। मैं उनके पास गया। हम पल्सेस के मामले में बहुत पीछे हैं,हमारे देश को पल्सेस की बहुत जरूरत है। गरीब आदमी को न्यूट्रिशन फूड के लिए प्रोटीन की जरूरत है,हमारे देश के गरीब को प्रोटीन मिलता है दाल में से,पल्सेस में से मिलता है। अगर हमारा किसान अच्छी मात्रा में पल्सेस पैदा कर सकता है,प्रति हेक्टेअर ज्यादा पल्सेस पैदा कर सकता है तो उसको भी अच्छी आय मिलेगी और हमारे उस गरीब का भला होगा। इसीलिए मैंने उन साइंटिस्ट्स के पास जाकर यह समझने के लिए कुछ घण्टे बिताए कि बताइए,मेरे देश के किसानों को ज्यादा पल्सेस पैदा करने के लिए क्या रास्ता हो सकता है,ज्यादा चना पैदा करने के लिए क्या रास्ता हो सकता है,अरहर पैदा करने के लिए क्या रास्ता हो सकता है। इसके लिए मैंने समय बिताया। मैं एक अन्य साइंटिस्ट के पास गया,इस बात के लिए मिलने गया कि उन्होंने केले में कुछ नई खोज की थी। मैं समझना चाहता था,मुझे पूरा पता नहीं था,इसलिए मैं ऐसे ही चला गया,उनके साथ बैठा,उनकी लैब देखी,उनके प्रयोग देखे। उन्होंने केले में न्यूट्रिशन वैल्यू बढ़ाने में बहुत सफलता पाई है। अधिक विटामिन पाने में सफलता पाई है। केला अमीरों का फल नहीं है मेरे भाइयो-बहनो,केला,गरीब से गरीब का फल होता है। अगर केले में न्यूट्रिशन वैल्यू बढ़ती है,विटामिन ज्यादा मिलते हैं और इस प्रकार की खोज के साथ केला बनता है तो मेरे देश का गरीब से गरीब व्यक्ति केला खाएगा,उसको ज्यादा ताकत मिलेगी। अगर विदेश जाते हैं तो इस काम के लिए जाते हैं,देश का गरीब हमारे दिमाग में होता है,देश का आदिवासी हमारे दिमाग में होता है,देश का किसान हमारे दिमाग में होता है और दुनिया में जो भी अच्छा है,जो मेरे देश के गरीबों के काम आए,उसको लाने की तड़प होती है। उस तड़प के लिए हम कोशिश करते हैं और इसीलिए समय का सदुपयोग करते हुए हम किस प्रकार से अपने देश को आगे ले जाएं,उसके लिए सोचते हैं,उसके लिए प्रयास करते रहते हैं। यहां पर जन धन योजना को लेकर कहा गया कि यह तो हमारे यहां हर समय थी। बैंकों का राष्ट्रीयकरण हुए 40 साल हो गए। बैंकों का राष्ट्रीयकरण गरीबों के लिए किया गया था,लेकिन आज भी इस देश का गरीब बैंक के दरवाजे से दूर था।
          बैंकिंग सिस्टम और फाइनैंशियल व्यवस्था की मेन धारा बन गयी है। अगर हम आगे चल कर योजनाएं बनाना चाहते हैं तो शुरूआत यहीं से होती है। हमने 15 अगस्त को यह ऐलान किया था और कहा था कि 26 जनवरी को हम झण्डा फहराएंगे,उससे पहले यह काम पूरा करेंगे। समय रहते काम पूरा किया या नहीं किया। जिस बैंक के अंदर गरीब को जाने का अवसर नहीं मिलता था,उस बैंक के मुलाजिम जो कोट-पैंट-टाई पहनते हैं,एयर कंडीशंड कमरों से बाहर नहीं निकलते हैं,बैंक का वह मुलाजिम,मेरा साथी गरीब की झौपड़ी तक गया,गरीब के घर तक गया,क्या इसके लिए सरकार प्रेरणा नहीं दे सकती है,क्या इसके लिए सरकार परिवर्तन नहीं ला सकती,हम यह परिवर्तन लाए हैं। मैं आज विशेष रूप से बैंकिंग सेक्टर के ऊपर से नीचे तक के सभी महानुभावों का अभिनंदन करता हूं कि उन्होंने इस बात को उठा लिया। उन्होंने केवल इस बात को माना ही नहीं,बल्कि उसे पूरा भी किया। जब यह व्यवस्था हो गई है। मनरेगा के लिए कहा गया था कि इसमें लीकेजिज़ बहुत हैं। अब हम मनरेगा का पैसा भी जन-धन योजना के तहत देंगे,आधार कार्ड है,इससे लीकेज कम से कम हो जाएगा और पैसा सीधे गरीब के खाते में जाएगा। हमारे दिमाग में गरीब है,लेकिन गरीबों के नाम पर हमारे दिमाग में राजनीति नहीं है। गरीबों के नाम पर हमारे दिलो-दिमाग के अंदर ईश्वर की सेवा करने का अवसर है। इसलिए हम जब हर काम करते हैं तो इस बात को लेकर करते हैं कि हम गरीब के कल्याण के लिए क्या कर सकते हैं और उसी दिशा में हमारा प्रयास रहता है।
          मैं जब शौचालय की बात कर रहा था,तो मैं आपको बताना चाहता हूं कि कितना काम हुआ है। करीब सवा चार लाख शौचालयों की स्कूलों में जरूरत है। करीब सवा चार लाख में से डेढ़ लाख के करीब नए शौचालय बनाने पड़ेंगे और बाकी शौचालयों को रिपेयर करने की आवश्यकता है। एक अलग आन लाइन पोर्टल बनाया गया है। उसका मैपिंग की गई है। एड्रेस पक्का पता है कि यहां इतने शौचालय चाहिए। सारी डिटेल वर्क आउट की गई है। मुझे संतोष के साथ कहना है कि अब तक करीब-करीब 60-65 हजार लड़कियों के लिए टायलेट बनाने का काम पूरा हो चुका है। मैं सभी एम.पीज़. का भी अभिनंदन करता हूं कई एम.पीज़. ने इस काम को एक्टिवली किया है। अपने इलाके में एम.पी. लैड फंड का भी उपयोग किया है। सी.एस.आर. में भी उपयोग हुआ है। जहां डिस्ट्रिक्ट के अफसर सक्रिय हैं,उन्होंने तेज गति से काम किया है। मुझे विश्वास है कि आने वाले दिनों में जो वैकेशन है,अगर हम सभी तय करें,आप अपने यहां कलैक्टर को पूछें,अपने डिस्ट्रिक्ट में अधिकारियों को पूछें कि बताओ कि इस काम का क्या हुआ। आप चिट्ठी डाल दीजिए,मुझे विश्वास है कि जून महीने में जब नया सत्र शुरू होगा,उसके पहले इस वैकेशन के बाद टायलेट बनाने का काम पूरा हो जाएगा। यह संतोष केवल यहां के लिए नहीं है,यह संतोष वहां के लिए भी है,हम सभी के लिए है। आप इस काम को करेंगे,ऐसा मुझे पूरा विश्वास है।
          स्वच्छता का कैसा असर है?इसका टूरिज्म पर बहुत प्रभाव पड़ रहा है। हमने ऑन लाइन वीज़ा, ‘अराइवल आन वीजा’किया है और दूसरा स्वच्छता। इन दोनों का सयुंक्त प्रभाव टूरिज्म पर पड़ रहा है। पिछले साल की तुलना में टूरिज्म में बहुत अच्छी बढ़ोतरी हुई है। कई बातों में नेगेटिव प्रचार होने के बावजूद भी कुछ चीजें ऐसी पैदा होती हैं,जिनके कारण हमारे यहां टूरिज्म को काफी नुकसान हो जाता है। लेकिन उसके बावजूद भी इन व्यवस्थाओं के कारण टूरिज्म में काफी बढ़ावा हुआ है।
          अब हम कहेंगे कि आपदा प्रबंधन का क्या हुआ?आप बताएं कि ऐसी कौन-सी सरकार होगी,जिसके समय में आपदा नहीं आई,हर सरकार के समय आपदा आई है। उस आपदा के लिए हर सरकार को कुछ न कुछ करना पड़ा है। लेकिन आपदा प्रबंधन के तरीके भी बदले जा सकते हैं। जब जम्मू-कश्मीर में बाढ़ आई,तो मैंने पहला काम यह किया कि भारत सरकार में जम्मू-कश्मीर के जितने अधिकारी हैं,पहले उनकी सूची बनाओ और उनको सबसे पहले वहां भेजो। उस समय के होम सैक्रेटरी पुराने समय के जम्मू-कश्मीर कैडर के थे,उन्हें मैंने वहां भेज दिया और हफ्ते भर वहां रखा। क्यों?क्या भारत सरकार का यही दायित्व है कि सिर्फ इतना चैक दे दिया,उतना चैक दे दिया,नहीं,इतने से बात नहीं बनती।
          हमें पूरी ताकत से उसके साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ा होना पड़ता है। मैं स्वयं कश्मीर गया और कितने ही ग्रुपों के साथ मैंने बारीकी से बातें की। मैंने अपनी दीवाली उन लोगों के साथ जाकर मनाई। क्यों?ताकि सरकार में बैठे हुए और लोग भी सेंसिटाइज हों कि हमारा दायित्व बनता है और ऐसा नहीं है कि बात पूरी हो गई तो उनको उनके नसीब पर छोड़ दिया जाए। यह हमारा दायित्व बनता है और इसलिए हमारी पॉजीटिव एप्रोच भी है। प्राकृतिक आपदा का समय तू तू मैं मैं का नहीं होता है। उसमें हमें एक अपनेपन की जिम्मेदारी के साथ काम करना होता है और हमारे पास जो भी शक्ति होती है,कैसे उसका सही ढंग से उपयोग करते हुए हम समस्या से बाहर निकलें?हमारा प्रयास यही रहता है। हम उसी ओर जाना चाहते हैं।
           यहां पर लैंड एक्विजीशन एक्ट को लेकर बढ़िया बातें मैं सुन रहा हूं। हमें इतना अहंकार नहीं होना चाहिए कि हमने जो किया,उससे अच्छा इस दुनिया में कुछ और हो ही नहीं सकता। जब लैंड एक्विजीशन एक्ट बना था,तब हम भी तो आपके साथ कंधे से कंधा मिलाकर उसको पारित करने के लिए खड़े रहे थे। हम जानते थे कि इसका राजनीतिक फायदा लेने के लिए ही सब लोग जल्दबाजी कर रहे हैं। उसके बावजूद भी हम आपके साथ खड़े रहे थे। लेकिन हम आपसे पूछना चाहते हैं कि 1894 में जो कानून बना,उसकी कमियां देखते देखते आपका 2013 आ गया और 120 साल बीत गये। आज़ादी के बाद भी 60 साल तक इस देश के किसान उसी कानून के भरोसे जीते थे जो सन् 1894 में बना था। अगर किसानों का बुरा हुआ तो किसके कारण हुआ?जब यह कानून बना तो हम आपके साथ थे। कानून बनने के बाद जब हमारी सरकार बनी तो सभी राज्यों के सभी दलों के मुख्य मंत्री,किसी एक दल के मुख्य मंत्री नहीं,सभी दलों के मुख्य मंत्री एक आवाज से कह रहे थे कि साहब,आप किसानों के लिए कुछ सोचिए। किसान बिना पानी के मर जाएगा। उसको सिंचाई चाहिए। इसको इरीगेशन नहीं,इंफ्रास्ट्रक्चर चाहिए। गांवों में उसको सड़क चाहिए। गांवों के गरीब को रहने के लिए घर चाहिए और आपने ऐसा कानून बनाया है,आप भाजपा वाले भी साथ में थे जिसके कारण हमारा भला नहीं हो रहा है।
     यह बात हिन्दुस्तान के सभी राज्यों के सभी मुख्य मंत्रियों ने कही। यह देश जो फैडरल कोआपरेशन की बात करता है,यह देश जो फैडरेलिज्म की बात करता है,क्या हम इतने अहंकारी हो गये हैं कि हम अपने राज्यों के मुख्य मंत्रियों की बात को नहीं सुने?क्या हम इतने अहंकारी हो गये हैं कि हमारे राज्यों के मुख्य मंत्री परेशान हैं और हम उनकी बातों को न सुनें?क्या हमें उनकी बातें नहीं सुननी चाहिए और उनकी जो भावना है,क्या उनकी उस भावना का हमें सकारात्मक रूप से आदर नहीं करना चाहिए?उनकी मांग क्या है?मुझे सेना के अधिकारी मिले। वे बोले कि हम क्या करें?यह जो आपने कानून बनाया है और वे तो हमको ही कहते हैं क्योंकि हमने साथ दिया था। वे कहते हैं कि साहब,हमें जो डिफेंस प्रोजेक्ट्स करने होते हैं,अब जो आपका कानून बना है,उसके तहत हो ही नहीं पाएगा। हमें हमारी न्यूक्लिअर व्यवस्थाओं को,यानी जो हमें इंफ्रास्ट्रक्चर खड़ा करना है,क्या हम पूछने जाएंगे,क्या हम लिखेंगे कि हमें यह इस काम के लिए चाहिए?तो अच्छा है कि हम पाकिस्तान को ही लिख दें कि हम इस पते पर ये काम कर रहे हैं,...(व्यवधान)डिफेंस के,हमारी सेना के अधिकारी इतने परेशान हैं कि साहब,क्या होगा?यह नहीं है कि किसी ने कोई गुनाह किया है,कोई पाप किया है। लेकिन गल्ती रह गई। गलती करैक्ट करना क्या हमारी जिम्मेदारी नहीं है?यह छोटा सा उपाय है कि इस गलती को करैक्ट करना है। आपने जो किया है,हम नकारते नहीं हैं। आपने जो कोशिश की है,उसमें कुछ रह गया है,तो उसमें हम कुछ जोड़ना चाहते हैं।
          कृपा करके इसे राजनीति के तराजू से मत तोलिये और मैं आपको विश्वास दिलाता हूं कि इसमें अभी भी यदि आपको लगता है कि किसानों के खिलाफ एक भी चीज है,मैं उसमें बदलाव करने के लिए तैयार हूं। मैं सबसे ज्यादा पूर्वी उत्तर प्रदेश,बिहार,पश्चिम बंगाल,असम,नार्थ ईस्ट,उड़ीसा,पूर्वी आंध्र की तरफ ध्यान आकर्षित करना चाहता हूं। हिन्दुस्तान के पश्चिमी छोर पर तो गांवों में भी छोटा-मोटा इंफ्रास्ट्रक्चर है,गांवों में सड़के बनी हैं। हमारे इस कानून का सबसे बड़ा नुकसान अगर किसी का हुआ है तो पूरे पूर्वी हिंदुस्तान का हुआ है,पूर्वी भारत का हुआ है। ये जो मुख्य मंत्री आकर चीख रहे थे,इसी बात को लेकर चीख रहे थे कि हमारा कुछ आगे बढ़ने का अभी समय आया है,उसी समय आप ब्रेक लगा रहे हो। क्या हमारे पूर्वी भारत के इलाकों को भी पश्चिम में गांवों का जो इंफ्रास्ट्रक्चर है,वह उनको मिलना चाहिए कि नहीं मिलना चाहिए,उन्हें वह सुविधा मिलनी चाहिए कि नहीं मिलनी चाहिए। इसलिए मैं कहता हूं कि आपने जो किया है,हमारे सर-आंखों पर,मैं आप पर गर्व करता हूं। मैं आपसे आग्रह करता हूं कि उसमें जो कमियां रही हैं,समय है कि उन्हें थोड़ा ठीक कर लें,यह सिर्फ कमियों को ठीक करने का प्रयास है और वह भी सिर्फ किसानों के लिए है। मैं सदन के सभी सदस्यों से आग्रह करता हूं कि इसे प्रतिष्ठा का विषय न बनायें और इसके बनने के बाद भी मैं सारा क्रेडिट उस समय जिन्होंने कानून बनाया था,उन्हीं को दूंगा,सार्वजनिक रूप से दूंगा,यह राजनीति के लिए नहीं है।
          मैंने मुख्य मंत्रियों को सुना है,उनकी कठिनाई सुनी है और मैं भी मुख्य मंत्री रहा हूं। मुझे पता है कि हम दिल्ली में बैठकर कोई कानून बना देते हैं,उन राज्यों को कितनी परेशानी होती है,कभी हमें अंदाज नहीं होता है। मैं एक प्रकार से उनका प्रतिनिधि भी हूं,क्योंकि मैं उसी टोली में लम्बे अरसे तक रहा हूं और इसलिए मैं उनके दर्द को जानता हूं। हां,किसान के खिलाफ एक भी चीज हो,हम ठीक करने के लिए तैयार हैं। हो सकता है,यह काम करते समय हमारी भी कुछ कमी रहो हो,लेकिन हमारा काम कमियां दूर करना है,हमारा काम यह थोड़े है। हां,इसका राजनीतिक फायदा आप लीजिए,मुझे कोई प्रॉब्लम नहीं है। आप इसके लिए जुलूस निकालिये,रैली कीजिए,लेकिन देश के लिए निर्णय भी कीजिए। इसलिए मैं आग्रह करूंगा कि उस दिशा में जाने की बजाय उसके ऊपर जाइये।
          हमारा नार्थ ईस्ट,हम एक्ट ईस्ट पालिसी को लेकर चल रहे हैं। मैं अभी भी मानता हूं,मैं जीवन में एक परिव्राजक रहा हूं। मेरा सौभाग्य रहा है,करीब-करीब हिंदुस्तान के सभी जिलों में मुझे रात गुजारने का अवसर मिला है। मैं जिंदगी के चालीस साल परिव्राजक के रूप में घूमा हूं,इसलिए मैं जानता हूं। मैं नार्थ ईस्ट में बहुत रहा हूं। वहां इतने विकास की संभावना है,वह देश का आर्गेनिक कैपिटल बन सकता है,वहां इतनी ताकत है। मैं अभी बार-बार नार्थ ईस्ट जा रहा हूं। अगर मेरा राजनीतिक उद्देश्य होता तो जहां 60-80 सीटों का बल्क होता,मैं वहीं चला जाता। लेकिन जहां एक-एक सीट है,वहां जाकर दो-दो दिन बिताता हूं। यह मैं राजनीतिक मकसद से नहीं करता हूं। यह मेरे देश की अमानत है। उनकी चिंता करनी पड़ेगी,उनके साथ जुड़ना पड़ेगा और इसीलिए मेरा यह मकसद है कि हिंदुस्तान का पश्चिमी छोर जिस तेजी से बढ़ा है,हमें बहुत जल्दी से हिंदुस्तान के इस पूर्वी छोर को कम से कम उसकी बराबरी में लाना पड़ेगा। चाहे मेरा बिहार हो,चाहे मेरा बंगाल हो,चाहे मेरा आसाम हो,चाहे मेरा नार्थ हो,चाहे मेरा पूर्वी उत्तर प्रदेश हो,उसकी बराबरी में लाना पड़ेगा। हम इस देश को एक तरफ अपंग रखकर एक तरफ समृद्ध बनाकर देश को आगे नहीं बढ़ाये जा सकते और इसलिए मैं विकास में उसकी ओर बल देना चाहता हूं। मैं चाहूंगा कि आप इसमें मदद करें।
          अब देखिये कोऑपरेटिव फैडरलिज्म,फैडरलिज्म की बातें बहुत हुई हैं। क्या होता था,हमें याद है,रेलवे में ब्रिज बन गया है,लेकिन दोनों तरफ कनेक्टिविटी नहीं है। दो-दो साल ब्रिज ऐसे ही लटका पड़ा है। कभी दोनों ओर कनेक्टिविटी बनी है तो ब्रिज नहीं बन रहा है। क्यों,या तो वह सरकार हमें पसंद नहीं है या एक डिपार्टमैन्ट दूसरे डिपार्टमैन्ट की सुनता नहीं है,फाइलो में काम चल रहा है। सैकड़ों प्रोजैक्ट्स हैं,इतना ही नहीं,एक गांव में रेल जाती है,अब गांव में रेल के उस तरफ बस्ती बनने लग गई। अब पीने का पाइप ले जाने की पाइप डालनी है। रेल वाले अड़ जाते हैं,दो-दो साल तक पाइप ले जाने की परमीशन नहीं देते।
15.00 hrs. बताइए भाई उसका क्या गुनाह है सरकार किसी की भी हो,लेकिन उस गांव वाले का क्या गुनाह है कि रेल के नीचे पाइप ले जा कर के बेचारे को पानी देना होता था। उसे नहीं देते थे। सरकार में आ कर पहला हुक्म मैंने किया कि ये जितनी चीजें हैं,उनको क्लियर करो और आज मैं गर्व से कहता हूँ कि हमने सबको क्लियर कर दिया है। यह नहीं देखा कि वहां किस लैवल की सरकार बैठी है। विकास ऐसे होता है,इसलिए हमने उस दिशा में प्रयास किया है। हमारे यहां कुछ चीजें तो परमिशन में लटक जाती हैं। रेलवे को मैंने सभी विभागों के साथ जोड़ दिया है। मैंने कहा है कि सब विभागों के साथ मिल कर काम करो। सभी राज्यों के साथ मिल कर काम करो। रेल जा रही है,वे सारे लोग रोके जाएं,ऐसा काम नहीं हो सकता है। हम विकास की उस परिभाषा को ले कर चले थे। इसलिए मैं कोऑपरेटिव फैड्रलिज्म की बात करता हूँ क्योंकि उन राज्यों की समस्याओं को हमें एड्रस करना चाहिए। उसने यह किया,वह किया,नहीं किया,इसके आधार पर देश नहीं चलता है। देश को आगे बढ़ाना है तो राज्यों को आगे बढ़ाना पड़ेगा। मैं जब राज्य का मुख्यमंत्री था तो हमेशा कहा करता था कि भारत के विकास के लिए गुजरात का विकास जरूरी है। यह मंत्र मैंने हमेशा अपने जीवन में रखा था और मैं सबको बताता था। आज मैं कहता हूँ कि देश को समृद्ध बनाने के लिए राज्यों को समृद्ध बनाना है। देश को सशक्त बनाने के लिए राज्यों को सशक्त बनाना होगा। हम यह कल्पना करते हैं। हमने आते ही ये खनिज रॉयल्टी वगैरह डेढ़ गुना कर दिया। वह पैसा किसको जाएगा?राज्यों को जाएगा। वे राज्य कौन हैं?ये वे राज्य हैं,जहां सबसे ज्यादा खनिज है। यह जो मैं पूर्वी हिंदुस्तान के विकास की बात करता हूँ,उनकी जड़ उसमें हैं। क्योंकि,वह खनिज सबसे ज्यादा हमारे देश के पूर्वी इलाके में है। वहां उनको इससे लाभ होने वाला है। कोयला ऑक्शन हुआ तो उसका पैसा किसको जाएगा?यह सारा का सारा पैसा राज्य के खजाने में जाने वाला है। कुछ राज्यों ने कल्पना तक नहीं की होगी कि उनके बजट से ज्यादा पैसा उनके सामने पड़ा होगा। हम यहां तक पहुंच पाएंगे। क्या यह फैडरल स्ट्रक्चर में राज्यों को मजबूत करने का तरीका है या नहीं है?

          अभी हमने फाइनेंस कमीशन की रिपोर्ट को स्वीकार किया है और राज्यों को 42 पर्सेंट दे रहे हैं,जबकि फाइनेंस इस पर कमीशन एकमत नहीं है। फाइनेंस कमीशन के मैंबर्स के अंदर भी डिस्प्यूट्स हैं। हम उसका फायदा उठा सकते थे,लेकिन हम नहीं उठाना चाहते हैं,क्योंकि तत्वतः हमारा कमिटमेंट है कि राज्य समृद्ध होने चाहिए,राज्य मजबूत होने चाहिए। इसलिए हम 42 पर्सेंट दे रहे हैं। यह अमाउंट छोटा नहीं है। जब आप अमाउंट सुनेंगे तो आप हैरान हो जाएंगे कि इतना सारा रूपया आया है। कुछ राज्यों के पास तो तिजोरी के साईज नहीं हैं,इतने रूपये रखे हैं। ...(व्यवधान)इतना ही नहीं,उसके उपरांत पंचायतों के लिए अलग,नगर पालिकाओं के लिए अलग,महानगर पालिकाओं के लिए अलग,इतना ही नहीं डिज़ास्टर होता है,कोई प्राकृतिक आपदा आती है,उसके लिए अलग,यह सब मैं मिलाऊं तो करीब-करीब 47-48 पर्सेंट हो जाता है। आजादी के बाद पहली बार यह जान कर आपको भी आनंद होगा और शायद उन राज्यों में बैठे हुए हमारे मुखियाओं को भी होगा,बल्कि मैं कहता हूँ कि शायद उनको भी ध्यान नहीं होगा,आजादी के बाद पहली बार हिंदुस्तान के राज्यों के पास जो खजाना है और भारत सरकार के पास जो खजाना है,उस पूरे खजाने का अगर टोटल लगाया जाए और हिसाब लगाएंगे तो निकलेगा कि 62 पर्सेंट खजाना राज्यों के पास है और केवल 38 पर्सेंट खजाना भारत सरकार के पास है। पहली बार देश में उल्टा क्रम हमने किया है कि दिल्ली सरकार का खजाना हमने कम किया है और राज्यों का खजाना भरा है। हमारा मानना है कि राज्यों को हमें ताकतवर बनाना चाहिए,राज्यों को विकास के लिए अवसर देना चाहिए। उस काम को हम कर रहे हैं और राजनीति से परे हो कर रहे हैं। इसका दल,उसका दल और झंडे के रंग देख कर के देश की प्रगति के निर्णय नहीं होते हैं। हमें तो अगर झंडे का रंग दिखता है तो सिर्फ तिरंगा दिखता है और कोई रंग नहीं दिखता है। उसी को ले कर हम चलते हैं।

अध्यक्ष महोदया,हमारे देश में राजनीतिक कारणों से सांप्रदायिकता का जहर घुलता चला जा रहा है। यह आज से नहीं चला आ रहा है,यह लम्बे अरसे से चला आ रहा है,जिसने देश को तबाह करके रखा हुआ है,दिलों को तोड़ने का काम किया है,लेकिन सवाल हमसे पूछे जा रहे हैं कि हमारी भूमिका क्या है?मैं आज इस सदन को कहना चाहता हूँ, 27 अक्टूबर 2013, मैं पटना के गाँधी मैदान में था। बम धमाके हो रहे थे,निर्दोष लोग मौत के घाट उतारे गए थे,लाखों की भीड़ थी। बड़ा ही कलुषित माहौल था,रक्त की धाराएं बह रही हैं,उस समय जब इन्सान के हृदय से बातें निकलती हैं,वे सच्चाई की तराजू पर शत-प्रतिशत सही निकलती हैं। उसमें कोई लाग-लपेट नहीं होता है। बम,बन्दूक के बीच रक्त बह रहा था,लोग मर रहे थे,उस समय मेरा जो भाषण है,उसमें मैंने कहा था कि मैं पूछना चाहता हूँ कि बताइये हिन्दुओं को किसके साथ लड़ना है,क्या मुसलमान के साथ लड़ना है या गरीबी के साथ लड़ना है। मैं मुसलमानों से पूछता था कि आपको हिन्दुओं के साथ लड़ना है या गरीबी के खिलाफ लड़ना है। मैंने कहा था कि आइये बहुत लड़ लिया,हिन्दू-मुसलमान एक होकर के हम गरीबी के खिलाफ लड़ाई करें। पटना के गाँधी मैदान में बम,बन्दूक,पिस्तौल और गोलियों के बीच में उठाई हुई आवाज है और इसलिए कृपा करके हम उन काल्पनिक बातों को लेकर के,बयानबाजी कर-कर के...(व्यवधान)

माननीय अध्यक्ष : आप नहीं बोलेंगे।

…( व्यवधान)

माननीय अध्यक्ष : रंजीत रंजन जी, आप बैठिए।

…( व्यवधान)

श्री नरेन्द्र मोदी : इसलिए भारत को प्रेम करने वाले हर व्यक्ति के लिए यह बात साफ है कि यह देश विविधताओं से भरा हुआ है। विविधता में एकता हमारे देश की पहचान है, यही हमारी ताकत है। हम एकरूपता के पक्षकार नहीं हैं, हम एकता के पक्षकार हैं और सभी सप्रदायों का फलना-फूलना भारत की धरती पर ही सम्भव होता है। यह भारत की विशेषता है। मैं यह कहना चाहता हूँ कि हमारा जो संविधान बना है, वह संविधान हजारों साल के हमारे चिन्तन की अभिव्यक्ति है। हमारा जो संविधान बना है, वह हमारे भारत के सामान्य मानव की, आशा, आकांक्षाओं को प्रतिबिम्बित करने वाला संविधान है और इस संविधान की मर्यादा में रहकर ही देश चल सकता है। देश संविधान की मर्यादाओं के बाहर नहीं चल सकता है। किसी को भी कानून हाथ में लेने का अधिकार नहीं होता है। किसी को भी सप्रदाय के आधार पर किसी के साथ डिस्क्रिमनेशन करने का अधिकार नहीं होता है। हर किसी को अपने साथ चलने का अधिकार है और मेरी जिम्मेदारी है, मैं सरकार में बैठा हूँ, सरकार कैसे चलेगी उसकी मेरी जिम्मेदारी है। इसलिए मैं आपको कहना चाहता हूँ, मैं बार-बार कहता आया हूँ, सप्रदाय के नाम पर अनाप-शनाप बातें करने वालों को कहना चाहता हूँ, मैं आज यह कहना नहीं चाहता हूँ, आपका मुँह बन्द करने के लिए मेरे पास हजारों चीजे हैं, मैं समय बर्बाद नहीं करना चाहता हूँ। इसके लिए मैं समय बर्बाद नहीं करता हूँ, लेकिन मैं आपको कहना चाहता हूँ कि हमारा कमिटमेंट क्या है। मैंने बार-बार कहा है कि मेरी सरकार का एक ही धर्म है इन्डिया फर्स्ट। मेरी सरकार का एक ही धर्म है भारत का संविधान, मेरी सरकार का एक ही धर्मग्रन्थ है, भारत का संविधान, मेरी सरकार की एक ही भक्ति है, भारत भक्ति, मेरी सरकार की एक ही पूजा है, सवा सौ करोड़ देशवासियों का कल्याण, मेरी सरकार की एक ही कार्यशैली है, सबका साथ-सबका विकास। इसलिए हम संविधान को लेकर,संविधान की सीमा में रहकर देश को आगे बढ़ाना चाहते हैं। ‘एकम् सत् विप्राः बहुधा वदन्ति’हमारा तत्वज्ञान रहा है। “Truth is one, the wise call it by many names.” सत्य एक है,विद्वान लोग उसको अलग अलग तरीके से कहते हैं,यह कहने वाले लोगों में से हम हैं। और इतना ही नहीं,यही देश है जहाँ गुरु नानक देव ने कहा है - 

‘सब में ही रब रेहिया,प्रभु एकाई। पेठ पेठ नानक बिकसाई।’ “The one God is pervading in all. Beholding him in all, Nanak is delighted.” यह हमारा तत्वज्ञान रहा है,यह हमारी परंपरा रही है। ...(व्यवधान)और इसलिए हम वे लोग हैं जहाँ पर ’तेन त्यक्तेन भुंजिथा,’इसी मंत्र को लेकर काम करने वाले हम लोग हैं। इसलिए जब मैं कहता हूँ कि सबका साथ,सबका विकास,तो यह सबका साथ,सबका विकास में मुझे आपका भी साथ चाहिए क्योंकि सबका विकास करना है।

          मैं फिर एक बार,जिन-जिन महानुभावों ने विचार रखे हैं,उनका भी धन्यवाद करता हूँ और जो उत्तम बातें आपके माध्यम से आई हैं,उनका भी परीक्षण करके देश के हित में कहाँ-कहाँ लागू किया जाए,उसके लिए हम प्रयास करेंगे। मैं फिर एक बार आदरणीय राष्ट्रपति जी का हृदय से धन्यवाद करता हूँ और चाहता हूँ और आगे भी उनका मार्गदर्शन हमें मिलता रहे,यह अपेक्षा करता हूँ।

          बहुत बहुत धन्यवाद।

श्री मल्लिकार्जुन खड़गे (गुलबर्गा) : अध्यक्ष जी, इसमें कोई शक नहीं है कि बहुत ही अच्छा भाषण उन्होंने दिया है, ...(व्यवधान)पर भाषण से पेट नहीं भरता। ...(व्यवधान)वे तो भाषण की कला जानते हैं और शब्दों का प्रयोग किस वक्त कैसे करना है,यह भी जानते हैं। ...(व्यवधान)

शहरी विकास मंत्री, आवास और शहरी गरीबी उपशमन मंत्री तथा संसदीय कार्य मंत्री (श्री एम. वैंकैय्या नायडू) : अध्यक्ष जी, चर्चा पूरी होने के बाद दोबारा नहीं बोलते। यह पूरा हो गया है। ...(व्यवधान)

HON. SPEAKER: Do you have any clarifications to seek?

…( व्यवधान)

श्री मल्लिकार्जुन खड़गे: आप यह देखिये कि मनरेगा जैसा कार्यक्रम जो है,आपने उसका बहुत मज़ाक उड़ाया। क्योंकि गरीबों के हित में यह प्रोग्राम है तो उसका मज़ाक उड़ाने का यह तरीका ठीक नहीं है। ...(व्यवधान)आपने कहा कि यह आपका स्मारक है,इसको मैं आगे बढ़ाऊँगा,यह ठीक नहीं है। (व्यवधान)मैं पूछना चाहता हूँ कि अगर गरीबी दूर हो गई तो 20 साल गुजरात में आपकी सरकार ...(व्यवधान)

HON. SPEAKER: Nothing is going on record.

(Interruptions) … * HON. SPEAKER: If you want to seek any clarification, you may do so.

…( व्यवधान)

माननीय अध्यक्ष :  आप सब बैठ जाइए।

…( व्यवधान)

श्री एम. वैंकैय्या नायडू : सभापति जी, 50 साल में कभी ऐसा नहीं हुआ। ...(व्यवधान)

माननीय अध्यक्ष :  मुझे मालूम है,मैं बता रही हूँ।

…( व्यवधान)

माननीय अध्यक्ष : खड़गे जी,आपको कोई एक क्लैरिफिकेशन पूछना है तो पूछ सकते हैं,भाषण नहीं दे सकते हैं। आप भाषण दे रहे हैं। भाषण नहीं हो सकता। आप क्लैरिफिकेशन पूछिये।

…( व्यवधान)

माननीय अध्यक्ष : कृपया आप बैठ जाएं।

…( व्यवधान)

श्री मल्लिकार्जुन खड़गे:जब आप लोग बोलते हैं,तो आपको सुनने की ताकत भी रखनी चाहिए।...(व्यवधान)हम एक घंटा पन्द्रह मिनट से आपको सुन रहे हैं।...(व्यवधान)

माननीय अध्यक्ष : खड़गे जी,सभी ने भाषण कर लिया है और आपका भाषण भी हो गया है। मैंने आपको बोलने का मौका इसलिए दिया था कि अगर आपका कोई क्लैरीफिकेशन है तो आप पूछ सकते हैं। I am allowing you only for clarification.  आपने भाषण देना शुरू कर दिया है। आप स्पष्टीकरण पूछ सकते हैं। मैं आपको भाषण देना अलाऊ नहीं कर सकती हूं।

…( व्यवधान)

श्री निशिकान्त दुबे (गोड्डा) : महोदया,मेरा एक प्वायंट आफ आर्डर है।...(व्यवधान)

माननीय अध्यक्ष : आप बैठ जाएं, खड़गे जी एक क्लैरीफिकेशन पूछ रहे हैं।

…( व्यवधान)

श्री मल्लिकार्जुन खड़गे:मैं क्लैरीफिकेशन ही पूछ रहा था। किसी योजना के तहत अगर कोई कार्यक्रम चलता है,वह कार्यक्रम सौ साल से भी चल सकता है,पचास साल से भी चल सकता है,आप भी गुजरात के मुख्यमंत्री थे,वहां की गरीबी अभी भी दूर नहीं हुई है।...(व्यवधान)मनरेगा वही कार्यक्रम है जो गरीबों को ऊपर उठाने के लिए बनाया गया था।...(व्यवधान)

माननीय अध्यक्ष : आप बैठ जाएं।

…( व्यवधान)

श्री मल्लिकार्जुन खड़गे  :आपने विजिलेंस कमीशन अभी तक नहीं बनाया है।...(व्यवधान)

माननीय अध्यक्ष : आप स्पष्टीकरण नहीं पूछ रहे हैं।

…( व्यवधान)

श्री मल्लिकार्जुन खड़गे:आपने इंफोर्मेशन कमीशन के सामने जा कर नहीं बताया कि कौन करप्ट है,ब्लैक मनी किसके पास है,सभी को आप घेर सकते हैं।...(व्यवधान)

माननीय अध्यक्ष : आप बैठ जाएं।

…( व्यवधान)

माननीय अध्यक्ष : माइक नहीं चल रहा है,आप किस लिए बोल रहे हैं। कुछ भी रिकार्ड में नहीं जा रहा है।

…( व्यवधान)

HON. SPEAKER: Members, a number of amendments have been moved by Members to the Motion of Thanks.  Shall I put all the amendments to the vote of the House together or does any hon. Member want any particular amendment to be put separately?

… (Interruptions)

SHRI BHARTRUHARI MAHTAB (CUTTACK): Madam, I have one amendment to be put separately. … (Interruptions)

माननीय अध्यक्ष : आपने अपनी बात कह दी है,इस समय भाषण नहीं देते हैं।

…( व्यवधान)

श्री मुलायम सिंह यादव (आज़मगढ़) : मैं माननीय मंत्री जी से सवाल पूछना चाहता हूं कि क्या किसानों का कर्जा माफ करेंगे?उत्तर प्रदेश ने अभी किसानों का 1650 करोड़ रुपयों का कर्जा माफ किया है और एक कानून बना दिया है।...(व्यवधान)क्या आप लोग शोर मचा कर हमें दबा लेंगे?आप सभी एक हो जाओ,तब भी हमें नहीं दबा सकते हो।...(व्यवधान)हम यहां से अकेले शोर मचाएंगे और आपको नहीं बोलने देंगे। मैं प्रधानमंत्री जी से कहना चाहता हूं कि किसानों का कर्जा माफ किया जाए। किसानों की जमीन नीलाम हो रही है और अमीर लोगों का कर्जा किसानों से ले रहे हैं। हमने इसी कारण उत्तर प्रदेश में किसानों का 1650 करोड़ रुपयों का कर्जा माफ कर दिया है और कानून बना दिया है कि किसान पर चाहे सरकारी कर्जा हो या गैर सरकारी कर्जा हो,किसानों की जमीन नीलाम नहीं की जा सकती है। हमने उत्तर प्रदेश में ऐसा कानून बना दिया है और साढ़े सोलह सौ करोड़ रुपए का उनका कर्जा माफ कर दिया है। क्या प्रधानमंत्री जी ऐसा हिंदुस्तान के किसानों के लिए करेंगे?

 

SHRI BHARTRUHARI MAHTAB : I want my Amendment No. 173 to be put separately to the vote of the House.

It says that there is no mention in the Address about the need to provide funds for development of tribal areas of Koraput, Rayagada, Nawarangpur and Malkangiri, Kalahandi, Nawapada, Bolangir, Sonepur and Baragarh. This is the most neglected part of this country. When we talk about tribal areas, it is not just about the North-East. There are large sections of tribals who live in the Central part of the area, that is, the KBK region. I would expect the Prime Minister to have more attention to this region.

HON. SPEAKER: Shri Jay prakash Narayan ji, do you want to move your amendment? जय प्रकाश नारायण यादव जी,आप अपना अमेंडमेंट नम्बर बताएं।

श्री जय प्रकाश नारायण यादव (बाँका) : मैं अमेंडमेंट नम्बर 1, 4, 5, और 15 अलग से रखूंगा।

          अध्यक्ष महोदया,मैं प्रस्ताव करता हूं कि अभिभाषण में बिहार को विशेष राज्य का दर्ज़ा देने का और साथ-साथ जिसकी चर्चा आदरणीय प्रधान मंत्री जी ने की कि पूर्व के राज्यों को हमें देखना है,तो आज मेरा सदन में माननीय प्रधान मंत्री जी से आग्रह है कि वे बिहार के लिए विशेष राज्य का दर्ज़ा देने की घोषणा करें और साथ ही पूर्व के सभी प्रदेशों को भी विशेष राज्य का दर्ज़ा दें।

          अध्यक्ष महोदया,इसके साथ-साथ हमारा जो बांका संसदीय क्षेत्र है,वहां पीने के पानी का घोर अभाव है।...(व्यवधान)वह आदिवासी इलाका है। ...(व्यवधान)

माननीय अध्यक्ष : आप बैठ जाइए।

… (Interruptions)

PROF. SAUGATA ROY (DUM DUM): Madam, I want my Amendment Nos. 226, 234 and 239 to be put separately to the vote of the House.

          My Amendment No. 234 says:

 “That at the end of the motion, the following be added, namely:--  
but regret that there is no mention in the Address about the need to maintain the secular fabric of the country being threatened by incidents of ‘Ghar Wapsi’ and attacks on Churches.”   You have lectured us on maintaining communal harmony. That lecture should be addressed to RSS and the Vishwa Hindu Parishad. … (Interruptions)
SHRI KODIKUNNIL SURESH (MAVELIKKARA): I am moving Amendment Nos. 142, 144, 154, and 157.  Amendment No. 144 is very important. There is no mention in the Address about making provision of reservation for the Scheduled Castes and the Scheduled Tribes in the private sector.
HON. SPEAKER: No, you have already moved your two Amendments. Now you cannot move your other Amendments.
… (Interruptions)
THE MINISTER OF URBAN DEVELOPMENT, MINISTER OF HOUSING AND URBAN POVERTY ALLEVIATION AND MINISTER OF PARLIAMENTARY AFFAIRS (SHRI M. VENKAIAH NAIDU): Madam Speaker, a Member has got every right to move the amendment. But there is no procedure for giving a speech. That has to be taken note of. … (Interruptions)
HON. SPEAKER: I will put all the amendments to vote.
… (Interruptions)
HON. SPEAKER: I am sorry. Please sit down. You only tell me the Amendment Number. That is all.
… (Interruptions)
HON. SPEAKER: Only Amendment Numbers will go on record. Nothing else will go on record.
(Interruptions) … * श्री राजीव सातव (हिंगोली) : अमेंडमेंट नंबर 29। महाराष्ट्र में किसान सूखे से परेशान है।
HON. SPEAKER: Rajeev Satavji, you were not present at that time when the Amendments were moved. Your Amendment was not moved at all. I am sorry, it is not here.
… (Interruptions)
HON. SPEAKER: I shall now put Amendments No.1, 4, 5 and 15 moved separately by Shri Jai Prakash Narayan Yadav to the vote of the House.
The Amendments were put and negatived.
… (Interruptions)
HON. SPEAKER: I shall now put Amendment No. 173 moved separately by Shri Bhartruhari Mahtab to the vote of the House. 
The Amendment was put and negatived.
… (Interruptions)
HON. SPEAKER: I shall now put Amendments No. 226, 234 and 239 moved by Prof. Saugata Roy to the vote of the House.
The Amendments were put and negatived.
PROF. SAUGATA ROY: Madam, I want Division on Amendment No.234.
HON. SPEAKER: Now Division. Let the Lobbies be cleared. :–   ANNOUNCEMENT RE: AUTOMATIC VOTE RECORDING SYSTEM HON. SPEAKER: Now the Secretary General will explain how to vote. The Members may please listen to him.
SECRETARY GENERAL: Kind attention of hon. Members is invited to the following points in the operation of Automatic Vote Recording System.  Before a division starts, every hon. Member should occupy his or her own seat and operate the system from that seat only.  When the hon. Speaker says ‘Now Division’, the Secretary General will activate the voting button whereupon red bulbs above display boards on both sides of the hon. Speaker’s Chair will glow and a ‘gong’ sound will be heard simultaneously.  For voting, hon. Members may please press the following two buttons simultaneously only after the sound of ‘gong’, I repeat, only after the sound of the ‘gong’- Red vote button in front of every hon. Member on the head of the phone plate and any one of the following buttons fixed on the top of the desk of the seat:
For ‘aye’, green colour button For ‘no’, red colour button For ‘abstentia’, yellow colour button           It is essential to keep both the buttons pressed till another gong is heard and the red bulbs above plasma display are off.
          Hon. Members may please note that their votes will not be registered if buttons are pressed before the first gong and both buttons are not kept simultaneously pressed till the second gong.
          Hon. Members can actually see their vote on the display installed on either side of the hon. Speaker’s Chair. In case the vote is not there, they may call for the voting through slips.
HON. SPEAKER: Okay, now, I shall put the amendment moved by Prof. Saugata Royji to the vote of the House.
          The question is:
“That Amendment No. 234 moved by Prof. Saugata Roy be adopted.”   HON. SPEAKER: I think, the ‘Noes’ have it; the ‘Noes’ have it; the ‘Noes’ have it.
… (Interruptions)
PROF. SAUGATA ROY:  Madam, I want Division. … (Interruptions)
HON. SPEAKER: Now, the Lobbies have been cleared.
          The question is:
“That Amendment No. 234 moved by Prof. Saugata Roy be adopted.” The Lok Sabha divided :
 DIVISION                                 AYES                 15:32 hrs.  

   

Ahamed, Shri E.                                                             

*Ali, Shri Idris                                                               

*Antony, Shri Anto                                                          

Anwar, Shri Tariq                                                            

Baite, Shri Thangso                                                          

Banerjee, Shri Kalyan                                              

Basheer, Shri E. T. Mohammad                                   

Bhonsale, Shri Chh. Udayanraje                                             

Biju, Shri P. K.                                                              

Chaudhary, Shri Santokh Singh    

Dev, Kumari Sushmita                                                      

Dhruvanarayana, Shri R.                                                     

Faizal, Mohammed                                                           

Gandhi, Shri Dharam Vira                                                   

Gandhi, Shrimati Sonia                                                      

George, Adv. Joice                                                           

Ghosh, Shrimati Arpita                                             

Gogoi, Shri Gaurav                                                           

Gowda, Shri S.P. Muddahanume                                           

Haque, Shri Mohd. Asrarul                                                  

Hooda, Shri Deepender Singh                                

*Innocent, Shri                                                              

*Karunakaran, Shri P.                                                        

Khan, Shri Md. Badaruddoza                                      

Khan, Shri Saumitra                                                         

Kharge, Shri Mallikarjun                                                     

Kumar, Shri Kaushalendra                                                   

Kumar, Shri Shailesh                                                        

Mahato, Dr. Mriganka                                                       

Majhi, Shri Balbhadra                                                        

Mani, Shri Jose K.                                                           

Meinya, Dr. Thokchom                                                     

Moily, Shri M. Veerappa                                           

Mondal, Shri Sunil Kumar                                     

Mondal, Shrimati Pratima                                          

Mukherjee, Shri Abhijit                                                     

Nagesh, Shri Godam                                                         Owaisi, Shri Asaduddin               

Pala, Shri Vincent H.                                                         

Patil, Shri Bheemrao B.                                                      

Prabakaran, Shri K. R. P.                                                   

*Premachandran, Shri N.K.    

Raghavan, Shri M.K.                                                        

Rajesh, Shri M. B.                                                           

Ramachandran, Shri Mullappally                                   

*Ranjan, Shri Rajesh                                                         

Ranjan, Shrimati Ranjeet                                                    

*Reddy, Shri A.P. Jithender                                       

Reddy, Shri Konda Vishweshwar                              

Roy, Prof. Saugata                                                           

Roy, Shrimati Sandhya                                                      

Sahu, Shri Tamradhwaj                                                       

Salim, Shri Mohammad                                                      

*Sampath, Dr. A.                                                            

*Sanghamita, Dr. Mamtaz                                      

Satav, Shri Rajeev                                                           

Satpathy, Shri Tathagata                                           

*Scindia, Shri Jyotiraditya M.                                                

Singh, Shri Ravneet                                                         

Sinha, Shrimati Renuka                                                     

Sule, Shrimati Supriya                                                       

Suresh, Shri D.K.                                                  

Suresh, Shri Kodikunnil                                                     

*Teacher, Shrimati P.K. Shreemathi                            

Thomas, Prof. K.V.                                                 

Venugopal, Shri K. C.                                             

Yadav, Shri Jai Prakash Narayan                                   

Yadav, Shri Mulayam Singh                                        

Yellaiah, Shri Nandi                   

   
  

    Noes  

   

Adsul, Shri Anandrao                                                        

Advani, Shri L.K.                                                           

Agrawal, Shri Rajendra                                                       

Ahir, Shri Hansraj Gangaram                                   

Ahlawat, Shrimati Santosh                                                   

Ahluwalia, Shri S.S.                                                         

*Amarappa , Shri Karadi Sanganna                            

Ananthkumar, Shri                                                           

Angadi, Shri Suresh C.                                                      

Azad, Shri Kirti                                                              

Babu, Dr. Ravindra                                                          

Baheria, Shri Subhash Chandra                                    

Bais, Shri Ramesh                                                           

Bala, Shrimati Anju                                                          

Balyan, Dr. Sanjeev                                                          

Bhabhor, Shri Jasvantsinh Sumanbhai  

Bhagat, Shri Bodh Singh                                                    

Bhagat, Shri Sudarshan                                                      

Bhamre, Dr. Subhash Ramrao                                               

Bhatt, Shrimati Ranjanben                                                   

Bhole, Shri Devendra Singh                                                 

*Bhuria, Shri Dileep Singh                                                  

*Bidhuri, Shri Ramesh                                                      

*Birla, Shri Om                                                              

*Bohra, Shri Ramcharan                                                     

Chakravarty, Shrimati Bijoya                                                 

Chand, Shri Nihal                                                           

Chaudhary, Shri C. R.                                                      

Chaudhary, Shri P.P.                                                        

Chaudhary, Shri Pankaj                                                      

Chaudhary, Shri Ram Tahal                                                 

Chauhan, Shri Devusinh                                                    

*Chauhan, Shri P. P.                                                        

Chavan, Shri Harishchandra                                                 

Chavda, Shri Vinod Lakhmashi                                    

Chhewang, Shri Thupstan                                                  

Chhotelal, Shri                                                               

Choubey, Shri Ashwini Kumar                                              

*Choudhary, Shri Babulal                                                    

Chudasama, Shri Rajeshbhai                                                

@Dattatreya, Shri Bandaru                                          

Deka, Shri Ramen                                                           

Devi, Shrimati Rama                                                         

Dhotre, Shri Sanjay                                                          

Diwakar, Shri Rajesh Kumar                                                

Dubey, Shri Nishikant                                                      

Dwivedi, Shri Harishchandra alias Harish                     

Fatepara, Shri Devjibhai G.                                    

Gaikwad, Dr. Sunil Baliram                                                 

Gaikwad, Prof. Ravindra Vishwanath                          

*Galla, Shri Jayadev                                                          

Gandhi, Shri Dilipkumar Mansukhlal   

Gangwar, Shri Santosh Kumar                                               

Geete, Shri Anant Gangaram                                                

Geetha, Shrimati Kothapalli                                                  

Girri, Shri Maheish                                                          

Gohain, Shri Rajen                                                          

Gowda, Shri D.V. Sadananda                                   

Gupta, Shri Shyama Charan                                                 

Gupta, Shri Sudheer                                                         

Haribabu, Dr. Kambhampati                                   

Jaiswal, Dr. Sanjay                                                 

Jardosh, Shrimati Darshana Vikram              

*Jat, Prof. Sanwar Lal                                                        

Jigajinagi, Shri Ramesh                                             

Joshi, Shri Chandra Prakash                                                 

Joshi, Shri Pralhad                                                           

Jyoti, Sadhvi Niranjan                                                       

Kachhadia, Shri Naranbhai                                                   

Karandlaje, Kumari Shobha                                    

Kashyap, Shri Dinesh                                                       

Kashyap, Shri Virender                                                       

Kaswan, Shri Rahul                                                          

Kateel, Shri Nalin Kumar                                      

Katheria, Dr. Ramshankar                                                   

Khanduri AVSM, Maj. Gen. (Retd.) B.C.                   

Khanna, Shri Vinod                                                          

Kher, Shrimati Kirron                                              

Kinjarapu, Shri Ram Mohan Naidu                            

Kishore, Shri Jugal                                                           

Kishore, Shri Kaushal                                              

Koli, Shri Bahadur Singh                                          

Koshyari, Shri Bhagat Singh                                   

Kristappa, Shri N.                                                   

Kulaste, Shri Faggan Singh                                        

Kumar, Dr. Arun                                                            

Kumar, Shri Dharmendra                                                    

*Kundariya, Shri Mohanbhai Kalyanjibhai  

Kushawaha, Shri Ravinder                                                   

Lekhi, Shrimati Meenakashi                                                 

Lokhande, Shri Sadashiv                                                    

Maadam, Shrimati Poonamben                                     

Mahajan, Shrimati Poonam   

Mahato, Dr. Banshilal                                                        

Mahato, Shri  Bidyut Baran                                        

Malviya, Prof. Chintamani                                                   

Manjhi, Shri Hari                                                            

Maurya, Shri Keshav Prasad                                                 

*Meena, Shri Arjun Lal                                                      

Meghwal, Shri Arjun Ram                                                   

Mishra, Shri Bhairon Prasad                                                 

Mishra, Shri Daddan                                                         

Mishra, Shri Janardan                                                        

*Mishra, Shri Kalraj                                                          

Modi, Shri Narendra                                                         

Mohan, Shri M. Murli                                             

Mohan, Shri P.C.                                                            

Munda, Shri Karia                                                           

Munde, Dr. Pritam Gopinath                                      

Nagar, Shri Rodmal                                                          

Naik, Shri Shripad Yesso                                                     

*Narasimham, Shri Thota                                                    

Nishad, Shri Ajay                                                  

Nishad, Shri Ram Charitra                                                  

Nishank, Dr. Ramesh Pokhriyal                                   Oram, Shri Jual                         

Paatle, Shrimati Kamla                                             

Pal, Shri Jagdambika                                                         

Pandey, Dr. Mahendra Nath                                       

Pandey, Shri Hari Om                                             

*Pandey, Shri Rajesh                                                        

*Pandey, Shri Ravindra Kumar                                              

Paraste, Shri Dalpat Singh                                         

Paswan, Shri Chhedi                                                        

Paswan, Shri Chirag                                                         

Paswan, Shri Kamlesh                                                       

*Paswan, Shri Ram Chandra                                                 

Paswan, Shri Ramvilas                                                       

Patel, Dr. K. C.                                                            

Patel, Shri Lalubhai Babubhai                                                                  

Patel, Shri Natubhai Gomanbhai                                            

Patel, Shri Prahlad Singh                                                    

Patel, Shri Subhash                                                          

Patel, Shrimati Anupriya                                                     

Patel, Shrimati Jayshreeben                                        

Patil, Shri A.T. Nana                                                         

Patil, Shri C. R.                                                             

Patil, Shri Kapil Moreshwar                                                  

Patil, Shri Sanjay Kaka                                                       

*Patole, Shri Nana                                                  

*Prasad, Dr. Bhagirath                                                       

Pratap, Shri Krishan                                                         

Rai, Shri Nityanand                                                           

*Raj, Dr. Udit                                                                

*Raj, Shrimati Krishna                                              

Rajput, Shri Mukesh                                                        

Raju, Shri Ashok Gajapathi                                    

Ram, Shri Janak                                                             

*Ram, Shri Vishnu Dayal                                                    

*Rao, Shri Konakalla Narayana                                 

Rao, Shri M. Venkateswara                                        

Rao (Avanthi), Shri Muthamsetti Srinivasa   

Rathod, Shri D.S.                                                           

Rathore, Col. Rajyavardhan                                        

Rathore, Shri Hariom Singh                                                 

Rathwa, Shri Ramsinh                                                       

Raut, Shri Vinayak Bhaurao                                   

Ray, Shri Bishnu Pada   

Ray, Shri Ravindra Kumar                                         

Reddy, Shri Ch. Malla                                             

Reddy, Shri J.C. Divakar                                                   

Renuka, Shrimati Butta                                                      

Rijiju, Shri Kiren                                                    

Rudy, Shri Rajiv Pratap                                                     

Sahu, Shri Lakhan Lal                                                      

Sai, Shri Vishnu Dev                                                        

Saini, Shri Rajkumar                                                         

Sampla, Shri Vijay                                                  

Sanjar, Shri Alok                                                             

Sarmah, Shri Ram Prasad                                                    

Sarswati, Shri Sumedhanand                                                 

Sawant, Shri Arvind                                                          

Sharma, Dr. Mahesh                                               

Sharma, Shri Ram Kumar                                                   

Sharma, Shri Ram Swaroop                                                  

Shekhawat, Shri Gajendra Singh                                            

Shetty, Shri Gopal                                                                     

Shetty, Shri Raju                                                            

Shirole, Shri Anil                                                            

Shyal, Dr. Bhartiben D.                                                     

Siddeshwara, Shri G. M.                                           

Sigriwal, Shri Janardan Singh                                  

Singh, Dr. Nepal                                                            

@Singh, Dr. Yashwant                                                       

*Singh, Kunwar Bharatendra                                                

Singh, Shri Abhishek                                                        

*Singh, Shri Bharat                                                          

Singh, Shri Bhola                                                            

Singh, Shri Brijbhushan Sharan                                    

Singh, Shri Dushyant                                                        

Singh, Shri Ganesh                                                          

Singh, Shri Giriraj                                                            

Singh, Shri Hukum                                                          

Singh, Shri Kirti Vardhan                                                    

Singh, Shri Lallu                                                            

Singh, Shri Nagendra                                                        

Singh, Shri Pashupati Nath                                                  

Singh, Shri R. K.                                                            

Singh, Shri Rajnath                                                          

Singh (Raju Bhaiya), Shri Rajveer                                

Singh, Shri Rakesh                                                          

Singh, Shri Satyapal                                                         

Singh, Shri Sunil Kumar                                                    

Singh, Shri Sushil Kumar                                                   

Singh, Shri Uday Pratap                                           

Sinha, Shri Jayant                                                            

Sinha, Shri Manoj                                                            

Solanki, Dr. Kirit P.                                               

Somaiya, Dr. Kirit                                                           

Sonkar, Shri Vinod Kumar                                                   

Sonker, Shrimati Neelam                                                    

Sonowal, Shri Sarbananda                                          

Srinivas, Shri Kesineni                                              

Supriyo, Shri Babul                                                          

*Swaraj, Shrimati Sushma                                          

Tadas, Shri Ramdas C.                                                      

Tamta, Shri Ajay                                                             

Tanwar, Shri Kanwar Singh                                        

Teli, Shri Rameshwar                                                        

*Teni, Shri Ajay Misra                                                       

Thakur, Shri Anurag Singh   

*Tiwari, Shri Manoj                                                

Tomar, Shri Narendra Singh                                       

Tripathi, Shri Sharad                                               

Udasi, Shri Shivkumar                                                       

*Usendi, Shri Vikram                                                        

*Vardhan, Dr. Harsh                                               

Vasava, Shri Manshukhbhai Dhanjibhai   

Vasava, Shri Parbhubhai Nagarbhai                            

@Verma, Shri Bhanu Pratap Singh                                 

*Verma, Shri Parvesh Sahib Singh                             

Verma, Shri Rajesh                                                          

Verma, Shrimati Rekha                                                      

Vichare, Shri Rajan                                                          

@Wanga, Shri Chintaman Navasha                                 

Yadav, Shri Hukmdeo Narayan                                              

Yadav, Shri Laxmi Narayan                                                           

Yadav, Shri Ram Kripal                                                      

*Yediyurappa, Shri B.S.                                                      

    

 ABSTAIN  

   

Jayavardhan, Dr. J.  

Maragatham, Shrimati K.   

Sathyabama, Shrimati V.  
  

HON. SPEAKER: Subject to correction*, the result of the Division is:  

                             Ayes: 61  

                             Noes: 203  

The amendment was put and negatived.  

HON. SPEAKER: I shall put all the other amendments which have been moved together to the vote of the House.
          The question is:
“That all the other amendments which have been moved be adopted.” The amendments were put and negatived.
HON. SPEAKER: I shall now put the Motion of Thanks on the President’s Address to the vote of the House.
          The question is:
“That an Address be presented to the President in the following terms:-
 
  ‘That the Members of the Lok Sabha assembled in this Session     are deeply grateful to the Preisdent for the Address which he has    been pleased to deliver to both Houses of Parliament Assembled    together on February 23, 2015.”   The motion was adopted.
 
… (Interruptions)
HON. SPEAKER: Please maintain order in the House.
The House shall now take up Private Members’ Business.