State Consumer Disputes Redressal Commission
J P Dixit vs Basmati Devi on 12 January, 2022
Cause Title/Judgement-Entry STATE CONSUMER DISPUTES REDRESSAL COMMISSION, UP C-1 Vikrant Khand 1 (Near Shaheed Path), Gomti Nagar Lucknow-226010 First Appeal No. A/1999/2681 ( Date of Filing : 30 Sep 1999 ) (Arisen out of Order Dated in Case No. of District Kushinagar) 1. J P Dixit Kushinagar ...........Appellant(s) Versus 1. Basmati Devi Kushinagar ...........Respondent(s) BEFORE: HON'BLE MR. JUSTICE ASHOK KUMAR PRESIDENT HON'BLE MR. Vikas Saxena JUDICIAL MEMBER PRESENT: Dated : 12 Jan 2022 Final Order / Judgement (मौखिक) राज्य उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग , उ0प्र0, लखनऊ अपील सं0- 2681/ 1999 1.
जय प्रकाश दीक्षित, शाखा प्रबंधक, शाखा कार्यालय-पड़रौना, सहारा इंडिया।
2. ओम प्रकाश मिश्र, एजेंट, सहारा इंडिया, शाखा कार्यालय-पड़रौना, जिला-कुशीनगर।
........अपीलार्थीगण।
बनाम मु0 बासमती देवी बेवा लक्ष्मण शुक्ल हा0 मु0 रामलीला मैदान, कस्बा पड़रौना, पोस्ट-पड़रौना, जिला-कुशीनगर।
............प्रत्यर्थी।
समक्ष:-
माननीय न्यायमूर्ति श्री अशोक कुमार, अध्यक्ष।
माननीय श्री विकास सक्सेना, सदस्य।
अपीलार्थीगण की ओर से : श्री आलोक कुमार श्रीवास्तव, विद्वान अधिवक्ता। प्रत्यर्थी की ओर से : कोई नहीं। दिनांक:- 12.01.2022 माननीय न्यायमूर्ति श्री अशोक कुमार , अध्यक्ष द्वारा उद्घोषित निर्णय/आदेश
परिवाद सं0- 489/1999 मु0 बासमती देवी बनाम जय प्रकाश दीक्षित व एक अन्य में जिला उपभोक्ता आयोग, कुशीनगर द्वारा पारित निर्णय व आदेश दि0 27.08.1999 के विरुद्ध यह अपील धारा-15 उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 1986 के अंतर्गत राज्य आयोग के समक्ष प्रस्तुत की गई है।
संक्षेप में वाद के तथ्य इस प्रकार हैं कि प्रत्यर्थी/परिवादिनी का एक खाता दि0 31.10.1992 को अपनी कथित कम्पनी की शाखा पड़रौना में गोल्डेन फिक्स डिपॉजिट योजना के अंतर्गत खोला था जिसमें कुल धनराशि 10,800/-रू0 जमा कराये गये तथा यह आश्वासन दिया गया कि 75 माह की अवधि में अर्थात उपरोक्त खाते की परिपक्वता तिथि दि0 31.01.1999 तक प्रत्यर्थी/परिवादिनी को अपीलार्थीगण/विपक्षीगण द्वारा कुल जमा धनराशि के स्थान पर दुगुनी धनराशि प्रदान की जावेगी। प्रत्यर्थी/परिवादिनी द्वारा अपीलार्थीगण/विपक्षीगण के विरुद्ध सेवा में की गई कमी को दर्शाते हुए तथा यह कि जमा की गई धनराशि अपीलार्थीगण/विपक्षीगण द्वारा उपलब्ध नहीं करायी गई के विरुद्ध शिकायत सं0- 489/1999 विद्वान जिला उपभोक्ता आयोग, कुशीनगर के सम्मुख प्रस्तुत की गई जिसमें विद्वान जिला उपभोक्ता आयोग द्वारा तथ्यों को विचारित करते हुए यह पाया गया कि प्रत्यर्थी/परिवादिनी के कथन में बल है तथा यह कि परिपक्वता तिथि 31.01.1999 अथवा उसके पश्चात अपीलार्थीगण/विपक्षीगण द्वारा परिपक्वता धनराशि प्रत्यर्थी/परिवादिनी को प्राप्त नहीं करायी गई, वरन रि-इंवेस्ट कर दिया गया। जिस मध्य प्रत्यर्थी/परिवादिनी के पति लक्ष्मण शुक्ला की मृत्यु हो गई तथा पैसे की कमी के कारणवश उसका भविष्य अंधकारमय हो गया एवं उसके पास न तो कोई सहारा बचा न ही कोई कार्य करने की स्थिति। प्रत्यर्थी/परिवादिनी ने विद्वान जिला उपभोक्ता आयोग के सम्मुख यह तथ्य प्रस्तुत किया कि अपीलार्थीगण/विपक्षीगण अर्थात अपीलार्थी सं0- 1/विपक्षी सं0- 1 जय प्रकाश दीक्षित द्वारा जमा धनराशि से सम्बन्धित सार्टीफिकेट को अपने पास रख लिया गया एवं प्रत्यर्थी/परिवादिनी से प्रपत्रों पर हस्ताक्षर करा लिए गए तथा जब जमा धनराशि को प्राप्त करने हेतु प्रत्यर्थी/परिवादिनी द्वारा अपीलार्थीगण/विपक्षीगण से सम्पर्क किया गया तब उन्होंने मात्र उसे रू0 1400/- प्राप्त कराये न कि सम्पूर्ण जमा/देय धनराशि और यह कथन किया कि उसके द्वारा जमा धनराशि रि-इंवेस्ट कर दिया गया है जिसके एफ0डी0 से सम्बन्धित कागज उसे प्राप्त कराये गये।
प्रत्यर्थी/परिवादिनी ने अपने शिकायत पत्र में विद्वान जिला उपभोक्ता आयोग के सम्मुख कथन किया कि वह एक अनपढ़ अंगूठा छाप महिला है तथा उसके पास जीवन यापन के लिए कोई जरिया नहीं है एवं उसकी जमा पूंजी की धनराशि अपीलार्थीगण/विपक्षीगण द्वारा अनैतिक रूप से अपने पास रख ली गई है तथा वे उसकी परिपक्वता धनराशि का भुगतान नहीं कर रहे हैं और बिना उसकी मर्जी के उसकी धनराशि रि-इंवेस्ट बता रहे हैं जब कि उस सम्बन्ध में कोई आधार नहीं प्रदान किया गया। विद्वान जिला उपभोक्ता आयोग द्वारा शिकायत को दुरुस्त पाया गया तथा निर्णय एवं आदेश दि0 27.08.1999 द्वारा शिकायत स्वीकार करते हुए अपीलार्थीगण/विपक्षीगण को निर्देशित किया गया कि वे प्रत्यर्थी/परिवादिनी द्वारा जमा सम्पूर्ण रकम का भुगतान प्रत्यर्थी/परिवादिनी को प्राप्त करायें तथा वापसी से सम्बन्धित जानकारी विद्वान जिला उपभोक्ता आयोग को भी अवगत करायें। उपरोक्त के अतिरिक्त परिपक्व रकम पर दि0 01.02.1999 अर्थात परिपक्वता तिथि से सम्पूर्ण धनराशि पर 18 प्रतिशत वार्षिक ब्याज की दर से ब्याज की देयता हेतु कथन किया गया। विद्वान जिला उपभोक्ता आयोग द्वारा समस्त तथ्यों को दृष्टिगत रखते हुए तथा प्रत्यर्थी/परिवादिनी की उम्र एवं परिस्थितियों को सुसंगत पाते हुए सम्पूर्ण देय धनराशि प्राप्त कराये जाने हेतु आदेशित किया गया तथा साथ ही अपीलार्थीगण/विपक्षीगण पर 500/-रू0 हर्जाना भी योजित किया गया।
हमारे समक्ष अपीलार्थीगण की ओर से विद्वान अधिवक्ता श्री आलोक कुमार श्रीवास्तव उपस्थित हुए। प्रत्यर्थी की ओर से कोई उपस्थित नहीं है। पत्रावली पर उपलब्ध समस्त प्रपत्रों का परिशीलन किया गया तथा यह पाया गया कि विद्वान जिला उपभोक्ता आयोग द्वारा जो आदेश पारित किया गया है उसमें किसी प्रकार की कोई अनियमितता नहीं है न ही किसी प्रकार की कोई त्रुटि विद्वान अधिवक्ता द्वारा हमारे सम्मुख इंगित की जा सकी, अतएव विद्वान जिला उपभोक्ता आयोग के आदेश दि0 27.08.1999 का समर्थन किया जाता है जिसका अनुपालन अपीलार्थीगण/विपक्षीगण द्वारा 01 माह की अवधि में सुनिश्चित किये जाने हेतु आदेशित किया जाता है।
तदनुसार अपील निरस्त की जाती है।
अपील में उभयपक्ष अपना-अपना व्यय स्वयं वहन करेंगे।
आशुलिपिक से अपेक्षा की जाती है कि वह इस निर्णय/आदेश को आयोग की वेबसाइट पर नियमानुसार यथाशीघ्र अपलोड कर दें।
(न्यायमूर्ति अशोक कुमार) (विकास सक्सेना) अध्यक्ष सदस्य शेर सिंह, आशु0, कोर्ट नं0- 1 [HON'BLE MR. JUSTICE ASHOK KUMAR] PRESIDENT [HON'BLE MR. Vikas Saxena] JUDICIAL MEMBER