Lok Sabha Debates
Combined Discussion On The Budget (Railways), 2005-2006; Demands For Grants On ... on 15 March, 2005
Title: Combined discussion on the Budget (Railways), 2005-2006; Demands for Grants on Account Nos. 1 to 16 in respect of Budget (Railways), 2005-2006; and Supplementary Demands for Grants (Railways) in respect of Budget (Railways) for 2004-2005. (Demands voted in full and discussion concluded).
13.02 ½ hrs. RAILWAY BUDGET, 2005-06 -- GENERAL DISCUSSION DEMANDS FOR GRANTS ON ACCOUNTS – (RAILWAYS) 2005-06 AND DEMANDS FOR SUPPLEMENTARY GRANTS – (RAILWAYS), 2004-05 - Contd.
MR. SPEAKER: Now we come to the final stage of Railway Budget discussion. Those hon. Members who could not lay their written speeches on the Table earlier, can do so now. Shri Basu Deb Acharia would speak for only five minutes. You just mention the points because we are running against time.
SHRI BASU DEB ACHARIA (BANKURA): Sir, the industries of West Bengal are facing a crisis. During the last four to five years, a large number of iron ore and steel industries have come up but the rakes are not being made available, as a result of that, these industries are not getting raw material like iron ore and coal. Due to this, many of these units are now on the verge of closure. Even most of the thermal power plants in the State of West Bengal have less than one week stock of coal.
I urge upon the Railway Minister to take urgent steps to provide rakes for the movement of coal and iron ore to the industries of West Bengal. The Minister has announced 46 new trains. There was a demand for a train connecting North Bengal with Kolkata. Siliguri is the fastest growing city in North Bengal. From New Jalpaiguri to Siliguri, a metre gauge line has been converted into a broad gauge line. There is a demand for a fast train like Jan Shatabdi from Sealdah to Siliguri. When the Shatabdi trains can run from Delhi to Bhopal, and Patna to Howrah, why can there not be a Jan Shatabdi between Sealdah and Siliguri?
The suburban passengers of both Sealdah and Howrah Divisions are facing problems. All the EMU trains are overcrowded. There is a demand to convert these EMU trains to 12 coaches EMU trains. The acquisition programme which is there in the next year’s Railway Budget, it is for only 350 EMU coaches.
This will not solve the problem of the suburban commuters. Thirty per cent of these coaches are over-aged. There is need not only for additional coaches for increasing the number of coaches in the EMU trains, but also for replacement of the over-aged coaches.
Sir, MEMU trains have been introduced. These trains are meant for short-distance travel. But these trains are running for more than five hours without its coaches having any toilet facilities. How can passengers, particularly, lady passengers travel in such coaches without toilet facilities? Now, to travel from Adra to Howrah, it takes six hours. I participated in the last Budget discussion and had pointed out that toilet facilities should be provided in such long-distance MEMU trains, or the rakes used in these trains should be changed to the conventional mode.
Sir, there is an acute shortage of staff in the Railways. The hon. Railway Minister has announced that he would fill up around 80,000 vacant posts in the Railways. As a result of shortage of staff, the maintenance of rakes are not being properly done at present. Therefore, immediate steps should be taken to fill up the existing vacancies.
Sir, there is now a problem of congestion at the Howrah station. There was a proposal to increase the number of platforms. We also are expecting that construction of at least five new platforms would be sanctioned in the next year’s Budget to help ease out the congestion at Howrah Station. Delhi has five coaching terminals; Mumbai has six coaching terminals but Kolkata has only two coaching terminals. Now, a new coaching terminal at Chitpur has been proposed. But funds allocated for this project is only Rs. 13 crore. I do not know as to what work would be done with a meagre amount of Rs. 13 crore.
Sir, there was a proposal sent by the State Government for construction of a new coaching terminal at Majerhat. That coaching terminal was proposed for the South Eastern Railways so that trains running in that sector could directly go to Kolkata and from there to Majerhat which would help in the dispersal of passengers. The proposal to have a terminal at Shalimar was conceived in the 80s. After more than 20 years, two platforms only have been built. I would like to request the hon. Railway Minister that this terminal should be completed and made functional at the earliest.
Sir, finally I would like to submit that there is a need for recognition of the unions in the Railways… (Interruptions) The hon. Minister mooted the idea… (Interruptions)
MR. SPEAKER: I thought he was very friendly to you.
SHRI BASU DEB ACHARIA : I am sure he will accept my proposal. दो फैडेरेशन्स हैं। इसका सीक्रेट बैलट अडाप्शन होना चाहिए। उन्होंने यह सुझाव दिया था, इसको मान लेंगे। … (Interruptions)
MR. SPEAKER: Now, this is your last point. You said, `finally’.
SHRI BASU DEB ACHARIA : Sir, my last point is about Purulia. I would like to request the hon. Minister to start a new line from Jhargram to Purulia. This will connect three districts… (Interruptions)
MR. SPEAKER: Coming from the State of West Bengal, I cannot allow you to monopolise.
SHRI BASU DEB ACHARIA : Sir, there are tribal people who have not seen trains and railway lines. आप जल्दी से जल्दी आदिवासी लोगों के लिए झाडग्राम से पुरुलिया रेल लाइन जोड़ दें ।
*श्री हंसराज जी.अहीर (चन्द्रपुर) : अध्यक्ष महोदय, रेल मंत्री जी ने रेल बजट में पूरे देश को न्याय देने वाला बजट पेश नहीं किया है। इस बजट में सभी राज्यों का रेल संबंधी विकास व न्याय नहीं दिया गया है।
महाराष्ट्र तथा विदर्भ के क्षेत्र में आने वाले मेरे निर्वाचन क्षेत्र में विकास की मांगों पर बिल्कुल ही विचार नहीं किया गयाहै। चंद्रपुर व गडचिरोली इन दोनों जिलों में रेल संबंधी अनेक मांगें व समस्यायें हैं।
रेल मंत्रालय नयी रेल सेवा प्रारंभ करने हेतु उन आदिवासी व खनिज संपदा से विपुल तथा दुर्गम क्षेत्र के विकास हेतु प्राथमिकता की बातें करता है, वहीं हमने मांग करने पर भी गडचिरोली जिले की प्रचुर मात्रा में उपलब्ध लोह अयस्क लाईम स्टोन व अन्य खनिज संपदा के साथ भारी वन क्षेत्र में होने वाले उच्च प्रत्ति के सागवान की उपज से परिपूर्ण क्षेत्र के विकास तथा राष्ट्र के आवश्यक सभी खनिज संपदा के उपयोग व दोहन हेतु इस क्षेत्र में मांगी गयी बल्लारशहा से आगे सुरजागढ़ तक रेलवे सेवा तथा उसका सर्वेक्षण तथा वडसा से आगे गडचिरोली तक की रेलवे चलाने की मांग मंजूर नहीं की गयी। उसे तुरंत मान्यता देने की मैं मांग कर रहा हूं। इस क्षेत्र में (जनजातीय गरीब वर्ग) भारी संख्या में रहता है। नक्सलवादी गतवधियां बढ़ रही हैं। उद्योग नहीं होने से यहां नौजवान नक्सलवादी गतवधियों से जुड़ सकता है। इसलिये यहां रेल सेवा उपलब्ध करा देने की अत्यंत आवश्यकता है।
हाल ही में बड़ी लाइन में किया गया आमान परिवर्तन चांदाफोर्ट नागभिड लाइन का किया गया लेकिन इस लाइन पर एक-दो गाड़ियां चलायी जा रही हैं। इस नयी परिवर्तित लाइन पर चांदाफोर्ट होकर दक्षिण से चलने वाली गाड़ियां बनारस गोरखपुर हैदराबाद व बैंगलोर से चलाने की तथा हावड़ा से हैदराबाद या बंगलौर गाड़ियां चलाने की मांग कर रहा हूं। इस मार्ग से अंतर भी कम होगा। वैसे ही हैदराबाद से चलने वाली भाग्यनगरी गाड़ी चांदाफोर्ट तक चलायी जाये।
चंद्रपुर शहर महाराष्ट्र का आंध्रा प्रदेश की सीमा से जुड़ा हुआ एक जिला है। उद्योगों से व्याप्त इस जिले को मुम्बई के लिए सीधी रेल बल्लारपुर शहर अथवा चंद्रपुर स्टेशन से चलायी जाये। इस क्षेत्र में अनेक शहर तथा रास्तों में ऊपरी पुल की अत्यंत आवश्यकता है। वरोरा शहर में व चंद्रपुर शहर के बाबूपेठ रेलवे लाइन पर ओवरब्रिज तथा चंद्रपुर-राजूरा रोड पर ओवरब्रिज तथा भांदक स्टेशन व बाबूपेठ स्टेशन पर उपरी पुल ( एफ ओ बी) गडचिरोली जिला केन्द्र पर बनाए जाये।
*Speech was laid on the Table चंद्रपुर, बल्लारशहा, भांदक, वरोरा व अन्य स्टेशनों पर रख-रखाव स्वच्छता हेतु व स्टेशनों के विकास, प्लेटफार्मो पर शेड, स्टाल व पाणी की सुविधा गाड़ियों के लिए स्टंड शेड इत्यादि के लिये रेल बजट में अधिक प्रावधान की मांग आपके माध्यम से करता हूं।
इस बजट में मेरे निर्वाचन क्षेत्र चंद्रपुर, गडचिरोली के लिए तथा महाराष्ट्र को न्याय नहीं मिला है इसका मुझे दुख है तथा इस बजट को राष्ट्रीय द्ृष्टिकोण में नहीं रखा गया, इसका मैं निषेध करता हूं तथा मेरी मांगों को बजट में सम्मिलित करें यह विनती करता हूं।
श्री सुरेश चन्देल (हमीरपुर, हि.प्र.) : महोदय, मैं रेल बजट का विरोध करता हूं।
रेलें देश की एकता की प्रतीक महोदय, रेलें देश की जीवन रेखाएं हैं। रेलें सामाजिक सौहार्द की प्रतीक हैं। रेलें भारत के एक कोने को दूसरे कोने से जोड़ती हैं और उत्तर से दक्षिण, पूर्व से पश्चिम तक रेलें एक से दूसरे प्रदेश में गुजरते हुए भारत को एक सूत्र में बांधने का काम करती हैं। रेलों में सभी भाषाओं, सभी वर्गों और अमीर-गरीब सभी वर्गों के लोग यात्रा करते हैं।
जनता के हित के लिए नई सुविधाएं महोदय, रेल मंत्री ने ४६ नई ट्रेनें चलाने, २७ ट्रेनों के मार्ग का विस्तार करने और १० ट्रेनों के फेरों में वृद्धि करने की घोषणा की है। इसके अतरिक्त देश भर में चल रही लोकप्रिय रेलगाड़ियों में ४०० अतरिक्त सवारी डिब्बे लगाकर ट्रेनों की क्षमता बढ़ाने की घोषणा की है। उन्होंने ३० से अधिक गाड़ियों की गति बढ़ाने तथा चेन्नै एक्सप्रेस को सुपर फास्ट एक्सप्रैस में बदलने का प्रस्ताव किया है। कंप्यूट्रीकृत रेल आरक्षण का समय बढ़ाया गया है। निश्चय ही इनसे जनता को राहत मिलेगी। रेल मंत्री ने यात्री किराया तथा मालभाड़ा नहीं बढ़ाकर जनता को जहां खुश करने का प्रयास किया है। वहीं उन्होंने सेफ्टी के बारे में कुछ नहीं किया है। सेफ्टी का बिन्दु रेलों के आधुनिकीकरण से सीधा जुड़ा हुआ है।
रेलों में सुरक्षा की अनदेखी महोदय, वर्तमान रेल मंत्री और पूर्व रेल मंत्रियों द्वारा सेफ्टी के बिन्दु की अनदेखी कर नित नई-नई रेलगाड़ियां चलाने की धोषणाएं अंधाधुंद की जाती रही हैं जिनका परिणाम विगत कुछ वर्षों में रेल दुर्घटनाओं में वृद्धि के रूप में हमें देखने को मिला है और रेल हादसों में वृद्धि हुई है। रेल दुर्घटनाओं में जहां अरबों रुपए की सरकारी सम्पत्ति नष्ट होती है वहीं अनेक यात्रियों की बहुमूल्य जानें चली जाती हैं और अनेक परिवार उजड़ जाते हैं। उजड़े हुए परिवारों को नियत समय पर मुआवजा अथवा रोजगार दिए जाने का भी कोई फूलप्रूफ तरीक नहीं है। प्राय: देखने में आता है कि अन्य प्रदेशों के मुकाबले में जिस प्रदेश के रेल मंत्री होते हैं, उस प्रदेश के लोग यदि दुर्घटना में मरते हैं, तो उन्हें सारी सुविधाएं प्रदान कर दी जाती हैं, अन्य प्रदेश के लोगों को उतनी सुविधाएं नहीं दी जाती हैं।
*Speech was laid on the Table ६० प्रतिशत से अधिक दुर्घटनाएं मानवीय भूलों के कारण महोदय, मैं आपके माध्यम से रेल मंत्री के ध्यान में लाना चाहता हूं कि ६० प्रतिशत से अधिक दुर्घटनाओं का मुख्य कारण मानवीय भूलों का होना है। पिछली जितनी दुर्घटनाएं हुई हैं यदि उनका बारीकी से अध्ययन किया जाए निष्कर्ष निकाला जाए, तो यही निष्कर्ष निकलता है। रेल हादसों में मरने वालों की संख्या हालांकि सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली संख्या से कम होती है, लेकिन चूंकि रेलों की दुर्घटनओं में सामूहिक रूप से बड़े पैमाने पर लोगों की मृत्यु होती है। इसलिए इस पर ज्यादा शोर मचाया जाता है। रेल प्रशासन, केन्द्र सरकार का हिस्सा है। इसलिए जब भी कोई रेल दुर्घटना होती है, तो रेल मंत्री का बयान, सुरक्षा तंत्र की नाकामी पर बहस, रेल मंत्री के इस्तीफे की मांग, रेल मंत्रालय द्वारा दुर्घटना की जांच और जिम्मेदार कर्मचारियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई के ऐलान जैसी रूटीन और स्टीरियो टाइप घिसी-पिटी पुरानी रट लगाई जाती है। इससे न रेल दुर्घटनाएं रुकी हैं और न रुकेंगी।
रेल वर्किंग फोर्स पर बड़े अधिकारियों के दबाव के कारण दुर्घटनाओं में वृद्ध रेल मंत्रालय में कार्यरत लगभग १४ लाख कर्मचारियों में से लगभग ८.५ लाख कर्मचारी उस वर्किंग फोर्स के हिस्सा होते हैं जो रेल संचालन से सीधे तौर से जुड़े रहते हैं और ये प्राय: तृतीय एवं चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारी होते हैं। इसी वर्किंग फोर्स के तालमेल से ट्रेनों का सुरक्षित संचालन सम्भव होता है। रेलवे बोर्ड से लेकर द्वितीय क्षेणी तक के अफसरों द्वारा दिए गए आदेशों, निर्देशों और नियमों का जमीनी अमल इसी वर्ग द्वारा किया जाता है। जहां कहीं इस वर्किंग फोर्स के किसी हिस्से द्वारा जरा सी चूक, असावधानी या जल्दबाजी बरती गई, वहां नतीजा दुर्घटना के रूप में सामने आता है। ऐसी जल्दीबाजी, चूक या असावधानी कोई जानबूझकर नहीं करता, लेकिन दुर्घटनाएं तो होती ही हैं। इसलिए यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि आखिर ऐसी गलतियां क्यों होती हैं।
अधिक यात्री और माल ढुलाई की आपाधापी के कारण दुर्घटनाएं महोदय, रेल मंत्रालय और सुरक्षा से जुड़े सभी विभागों के कर्मचारियों को नियमित रूप से ट्रेनिंग, रिफ्रेशर सुरक्षा शविरों और सुरक्षा गोष्ठियों के अलावा वभिन्न सर्कुलरों के जरिये नियमों में हुए बदलावों की जानकारी दी जाती है। रेलवे में रेल सुरक्षा तंत्र का एक काफी बड़ा विभाग है, लेकिन सुरक्षा का यह तंत्र बिना दांत और नाखून वाला शेर है। इसके पास सुरक्षा नियम बनाने की जिम्मेदारी तो है, लेकिन उन्हें लागू कराने की ताकत नहीं है। वह आधुनिक सुरक्षा के लिए नियम तो बना सकता है, लेकिन उन नियमों को लागू कराने का जिम्मा रेलवे के तमाम विभागीय प्रमुखों का है, लेकिन विभागीय प्रमुखों को कम से कम समय और कम लागत में माल ढुलाई और यात्री परिवहन का निर्धारित लक्ष्य हासिल कर के अपनी कार्यक्षमता दिखानी होती है। इसी आपाधापी भरी होड़ में सुरक्षा मानकों का उल्लंघन होगा या उन्हें बाईपास करने की कोशिश की जाएगी, परिणाम स्वरूप दुर्घटनाएं होती हैं।
सुरक्षा मानकों की अनदेखी और बाईपास करने के कारण दुर्घटनाएं महोदय, रेल सुरक्षा नियमों को बाईपास करने या शार्टकट अपनाने का दबाव रोजाना के रेल संचालन में देखा जा सकता है। यह दबाव लगभग सभी विभागों के अफसरों द्वारा डाला जाता है। लाइन पर कार्यरत तृतीय और चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी, अपने बड़े अफसरों द्वारा दिए गए आदेशों, भले ही वे नियमविरुद्ध ही क्यों न हों, पालन करने को विवश होते हैं क्योंकि यही अफसर उनके सर्वेसर्वा हैं। ऐसे अफसरों के पास कर्मचारियों के ट्रांसफर-प्रमेशन के ही नहीं, बल्कि किसी विभागीय कार्रवाई में फैसला करने के भी अधिकार हैं। अगर कोई कर्मचारी अपने अफसर के ऐसे आदेशों का पालन करने से इनकार कर देता है, तो इस हिमाकत की सजा उसे भुगतनी पड़ सकती है। बल्कि ऐसे कर्मचारी अब गिनेचुने ही रह गए हैं, क्योंकि हर कोई यह समझता है कि अब कर्मचारियों की भर्ती और प्रमोशन का आधार योग्यता या क्षमता नहीं, बल्कि वभिन्न किस्म की कोटा प्रणाली और भ्रष्टाचार है। ऊपर से तीसरे पे कमीशन की सिफारिशों के मुताबिक कर्मचारियों की तादाद में १० प्रतिशत की कटौती किए जाने के फैसले ने कहर ढाया है। इस कटौती की बड़ीमार तृतीय और चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारियों पर पड़ी है।
रेल दुर्घटनाओं को रोकने हेतु महत्वपूर्ण सुझाव महोदय, रेलों के हादसे न हों, इसके लिए रेल विशेषज्ञों के अनुसार यह जरूरी है कि रेल संचालन और सुरक्षा से जुड़े सभी कर्मचारियों को बिना किसी भय या दबाव के नियमानुसार अपना काम करने की आजादी मिले। सुरक्षा से जुड़े सभी उपकरणों की तत्काल बिना अड़चन के सप्लाई होती रहे। वर्क फोर्स रेलवे की संचालन और सुरक्षा जरूरतों के हिसाब से तय हो न कि वल्र्ड बैंक के हुक्म से। सबसे ज्यादा जरूरत इस बात की है कि रेलवे के सुरक्षा तंत्र को इतनी ताकत मिले कि वह खुद के बनाए नियमों का पालन करा सके।
रेलवे यातायात का प्रदूषण मुक्त साधन महोदय, रेलवे सबसे अच्छा, सस्ता और प्रदूषण रहित यातायात का साधन है। इसका जितना विस्तार किया जाएगा, उतना ही राष्ट्र के हित में रहेगा। रेलों के बढ़ने से पहाड़ों में वृक्षों का कटान नहीं होगा और इससे इकलौजिक बैलेंस बना रहेगा। देश में रेलों का विस्तार इको-फ्रैडली होगा।
हिमाचल प्रदेश में रेलें महोदय, अब मैं अपने प्रदेश हिमाचल के साथ रेल मंत्रालय द्वारा किए जा रहे दुव्र्यवहार के बारे में संक्षेप में कहना चाहता हूं। हिमाचल प्रदेश में अंग्रेजों के समय में जितना रेलों का विस्तार और विकास हुआ उसमें आजादी के बाद से अब तक लगभग ५७ वर्षों में कोई विशेष प्रगति नहीं हुई है। महोदय, रेलों के हिमाचल प्रदेश में नगण्य विकास के कारण जनता को यह सोचने पर विवश होना पड़ रहा है कि शायद केन्द्र सरकार हमारे सीधेपन और शांतप्रिय होने का अनावश्यक लाभ उठा रही है और हमें भी जम्मू-काश्मीर की तरह ही उग्रवाद की ओर अग्रसर होने के लिए मजबूर कर रही है। जैसे जम्मू-कश्मीर में उग्रवाद का मुख्य कारण रेलों का विकास नहीं होना है और जम्मू से श्रीनगर रेल मार्ग विशेष प्राथमिकता के आधार पर बनाया जा रहा है उसी प्रकार से हिमाचल प्रदेश को भी रेलों के विकास और विस्तार हेतु प्राथमिकता दी जानी चाहिए ताकि हिमाचल प्रदेश की जनता को लगे कि केन्द्र सरकार और रेल मंत्री को हिमाचल प्रदेश की जनता की परवाह है और वह वास्तव में पहाड़ी, पिछड़े और सीमान्त प्रदेश की जनता को रेल सुविधा पहुंचाना चाहती है।
हिमाचल में आधारभूत ढांचा निर्माण हेतु रेलों के विकास की आवश्यकता महोदय, हिमाचल प्रदेश में रेलों का विस्तार एवं विकास क्यों आवश्यक है इस संबंध में मैं कुछ प्रमुख तथ्य माननीय रेल मंत्री एवं सदन के माध्यम से पूरे देश के ध्यान में लाना चाहता हूं - हि.प्र. के फलों एवं आफ सीजन सब्जियों के लिए रेलों का विकास आवश्यक २. रेलवे का सामाजिक कल्याण की द्ृष्टि से हि.प्र. में विस्तार आवश्यक ३. हि.प्र. में रेलों का विकास और विस्तार सामरिक द्ृष्टि से आवश्यक ४. हि.प्र. में पर्यटन को बढ़ावा देने हेतु रेलों का विकास आवश्यक ५. हि.प्र. में आजादी के बाद केवल दो रेल लाइनों के निर्माण की स्वीकृति इसलिए रेलवे का समग्र विकास आवश्यक ६. हि.प्र. में औद्योगिक विकास के लिए रेलवे आवश्यक ७. सीमेंट कंपनियों के विकास और विस्तार हेतु हि.प्र. में रेलों की आवश्यकता ८. हि.प्र. के भाखड़ा बांध विस्थापितों के कल्याण हेतु रेलों का विस्तार आवश्यक कालका से हिमाचल प्रदेश के सोलन जिले में नालागढ़ तक रेल लाइन का निर्माण किया जाए। देहरादून-पांवटा साहब-यमुना नगर रेल लाइन का निर्माण किया जाए।
पठानकोट-जोगेन्द्र नगर नैरोगेज रेल लाइन पर नन्दपुर भटोली और त्रिप्पल में रेलवे क्रासिंग बनाए जाएं। ह.प्र. को भेजे जाने वाले सामान जैसे अनाज, चीनी, मिट्टी का तेल, लकड़ी और कोयला आदि कीरतपुर साहब स्टेशन पर न उतारा जाकर हिमाचल क्षेत्र के राए मैहतपुर अथवा नंगल रेलवे स्टेशन अथवा पर उतारा जाए।
ऊना को होशियारपुर के साथ बड़ी लाइन से जोड़ा जाए।
ऊचाहार गाड़ी जो वर्तमान में इलाहाबाद व अम्बाला छावनी के मध्य चलती है, उसे ऊना तक बढ़ाया जाए।
गाड़ी संख्या १ एसयूएन/२ एसयूएन, जो वर्तमान में नंगलडैम व सहारनपुर के मध्य चलती है, उसे ऊना तक बढ़ाया जाए।
ऊना में बहुत स्थान उपलब्ध है। इसलिए वहां शताब्दी तथा जनशताब्दी एक्सप्रैस गाड़ियों की मरम्मत का कारखाना खोला जाए ताकि हिमाचल निवासियों को रोजगार के साधन उपलब्ध हो सकें।
पठानकोट से नूरपुर तक छोटी लाइन के स्थान पर बड़ी लाइन बनाई जाए। वर्तमान में छोटी लाइन की गाड़ियों की मरम्मत आदि का जो काम पठानकोट में किया जाता है, उसे नूरपुर में स्थानांतरित किया जाए।
गाड़ी सं.४६४५ शालीमार एक्सप्रैस का पठानकोट पहुंचने का समय प्रात: ४.१० बजे है तथा पठानकोट से जोगेन्द्र नगर जाने वाली गाड़ी के चलने का समय प्रात: ४.०० बजे है। इसलिए हिमाचलवासी शालीमार एक्सप्रैस गाड़ी से उतर कर जोगेन्द्र नगर वाली गाड़ी नहीं पकड़ पाते हैं तथा उन्हें वहां तीन घंटे प्रतीक्षा करनी पड़ती है क्योंकि अगली गाड़ी सुबह ७.०० बजे चलती है। इसलिए शालीमार एक्सप्रैस का पठानकोट पहुंचने का समय प्रात: ३.३० बजे किया जाए ताकि हिमाचलवासी जोगेन्द्र नगर वाली रेल पकड़ सकें।
इलाहाबाद-अम्बाला के बीच परिचालित ४७१७/४५१८ ऊंचाहार एक्सप्रेस का विस्तार सरहिन्द के रास्ते ऊना तक किया जाए जिससे दिन में इस क्षेत्र की जनता को लम्बी दूरी की रेल सुविधा विद्युतीकरण के बाद प्राप्त हो सके। इस ट्रेन से वातानुकूलित कोच हटाकर साधारण श्रेणी जी एस कोच जोड़कर २४ कोच का रैक बनाकर ट्रेन को चलाया जाए तथा इलाहाबाद तक विस्तार किया जाए। इस नीति से छोटे स्टेशनों को भी विकास हो सकेगा।ऊना-पठानकोट के बीच प्रस्तावित रेल मार्ग का शीघ्रता के साथ निर्माण किया जाए जिससे शाखा लाइन का स्वरूप समाप्त होकर प्रमुख महानगर से जोड़कर जम्मू के लिए सामरिक द्ृष्टि से वैकल्पिक रेल मार्ग सुलभ कराया जा सके तथा इस पिछड़े क्षेत्र का आर्थिक विकास हो सके तथा मालगड़ियों की परस्पर मात्रा जम्मू के लिए बढ़ाई जा सके।जम्मू-बारामूला रेल मार्ग का डबल ब्रॉडगेज रेल मार्ग के रूप में तीव्र गति से निर्माण कराया जाए तथा रेल मार्ग का विद्युतीकरण भी कराया जाए जिससे हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर में उपलब्ध विद्युत का उपयोग कर के सस्ती यातायात सुविधा प्रदूषण मुक्त रूप में राज्य को प्राप्त हो सके।
हिमाचल एक्सप्रैस ४५५३/४५५४ का विस्तार दिन में दिल्ली से आगे मथुरा-बयाना-कोटा के रास्ते नीमच तक किया जाए जिससे राज्य को मध्य प्रदेश के सीमेंट क्षेत्र से जोड़ कर दिल्ली का टर्मीनल भाग कम कर सकें तथा रैक को २४ कोच का रैक बनाकर परिचालित किया जा सके।पठानकोट-जोगेन्द्र रेलवे लाइन पर नन्दपुर भटोली नामक स्थान पर रेलवे क्रासिंग फाटक बनाया जाए।
ज्वालामुखी, जिला कांगड़ा-हि.प्र. में रेलवे का कंप्यूटराइज्ड टिकट बुकिंग सेंटर स्थापित किया जाए।
पठानकोट से जोगेन्द्र नगर छोटी रेलवे लाइन की पुलिया नं.२८६ के नीचे से सभी प्रकार के वाहन गुजारने की स्वीकृति प्रदान की जाए और ग्राम नन्दपुर भटोली में कि.मी.६८/२-३ पर रेलवे क्रासिंग का निर्माण किया जाए।
कांगड़ा वैली छोटी रेल लाइन पर ग्राम त्रिप्पल के निकट रेलवे क्रॉसिंग पर गेट बनाया जाए।
ऊना से मुम्बई और मुम्बई से ऊना सीधी रेल सेवा उपलब्ध कराई जाए।
मुम्बई में हिमाचल मित्र मंडल कार्यालय नें कंप्यूट्रीकृत रेल आरक्षण केन्द्र स्थापित किया जाए।
लखनऊ-चंडीगढ़ एक्सप्रैस नं. ४२३१ को चंडीगढ़ से कालका तक बढ़ाया जाए।
कालका-परवाणु ब्रॉड गेज रेल लाइन का निर्माण शीघ्र पूरा किया जाए।
चंडीगढ़-जगाधरी-पौंटा साहिब-देहरादून रेल लाइन का निर्माण किया जाए।
घनौली-पिंजौर वाया नालागढ़ बद्दी रेल लाइन का निर्माण किया जाए।
कुमारहट्टी हिमाचल प्रदेश देहरादून रेल लाइन का निर्माण किया जाए।
कालका से नालागढ़ के बीच ४० किलोमीटर रेल लाइन का निर्माण किया जाए।
ऊना-तलवाड़ा-पठानकोट के बीच नवीन रेल मार्ग का निर्माण, जिससे शाखा लाइन का स्वरूप समाप्त होकर यह मैन लाइन बनकर यातायात का विकेन्द्रीकरण कर सके। इस योजना के मुख्य अभियंता का दफ्तर चंडीगढ़ के स्थान पर ऊना में स्थापित किया जाए।.
जम्मू-हरिद्वार से बीच परिचालित एक्सप्रैस रेलगाड़ी का विस्तार देहरादून-ऋषिकेष तक किया जाए।
मनाली (कुल्लू) को ब्रॉडगेज रेल लाइन से जोड़ा जाए।
जिला किन्नौर मुख्यालय के रिकांगपिओ में कम्प्यूट्रीकृत रेल आरक्षण स्थापित किया जाए।
३११/३१२ मेरठ-अम्बाला शटल का विस्तार पुन: सरहिन्द के रास्ते ऊना तक किया जाए तथा मेरठ से आगे खुर्जा-हापुड़ के रास्ते हाथरस किला तक किया जाए।
महोदय, मैं रेल बजट का विरोध करता हूं।
श्री भाल चन्द्र यादव (खलीलाबाद) : महोदय, भारतीय रेल देश की अर्थव्यवस्था को निरन्त प्रगतिशील बनाये रखने में अहम भूमिका निभाती है। समाज के आर्थिक रूप से कमजोर वर्गो के हितों को ध्यान में रखकर इस विततीय वर्ष के रेल बजट में यात्री किराये में किसी प्रकार की वृद्धि नहीं करने का निर्णय आम आदमी के अनुकूल है, इसका पूरे देश की जनता ने सहर्ष स्वागत किया है।
रेल की व्यवस्था को चुस्त-दुरूस्त और अधिक उपयोगी बनाने के लिए ४६ नयी रेल गाड़ियों को चलाने, २७ रेलगाड़ियों के मार्गो के विस्तार तथा १० प्रमुख रेलगाड़ियों के फेरे बढ़ाने के साथ साथ तीन दर्जन रेल गाड़ियों की रफ्तार बढ़ाने की घोषणा रेल बजट प्रस्तु करते समय माननीय रेल मंत्री द्वारा की गयी है। उपरोक्त घोषणाओं के क्रियान्वयन हो जाने पर रेल यात्रा और अधिक सुगम और विश्वसनीय हो जायेगी।
कुछ नये रेल मार्गो के लिए सर्वेक्षण, छोटी लाइन को बड़ी लाइन में परिवर्तन, महत्वपूर्ण रेल मार्गो के दोहरीकरण, रेल पथ आधुनिकीकरण और उसके रख-रखाव की पद्धति, पुल प्रबंधन प्रणाली, सिग्नल प्रणाली, बिजली तथा आपदा प्रबंधन प्रणाली का आधुनिकीकरण, आधुनिकीकरण की दिशा में उठाया गया गया सराहनीय कदम है। प्रस्तुत रेल बजट में २४००० करोड ( चौबीस हजार करोड) रूपये रेलवे के आधुनिकीकरण पर खर्च किया जाना है। पिछले दो सालों में यात्री किराये में कोई वृद्धि किये बिना भी रेलवे का कामकाज विगत आठ सालों के अनुपात में इस साल सबसे अच्छे स्तर पर है।
सरकारी अस्पतालों में इलाज के दौरान मरने वाले रोगियों के शवों को उनके निवास स्थान के निकटतम रेलवे स्टेशन तक ले जाने के लिये किराये में ५० प्रतिशत की रियायत, राजकीय ग्रामीण स्कूलों के विद्यार्थियों को वर्ष में एक बार शैक्षणिक भ्रमण के लिए की जाने वाली यात्रा के लिए दूसरे दर्जे के किराये में ७५ प्रतिशत की रियायत तथा ग्रामीण क्षेत्रों के राजकी विद्यालयों में पढ़ने वाली बालिकाओं को चकित्सा, इंजीनियरिंग एवं अन्य व्यवसायिक पाठयक्रमों की राष्ट्रीय स्तर की प्रवेश परीक्षा में सम्मिलित होने के लिए की जाने वाली यात्रा में दूसरे दर्जे में ७५ प्रतिशत की रियायत दिये जाने का प्रस्ताव रेल बजट में किया गया है। मैं इस प्रस्ताव की सराहना करता हूं। गोधरा कांड की निष्पक्ष जांच करवाकर रिपोर्ट जनता के समक्ष रखी गयी, जिससे वास्तविकता जनता को मालूम हुयी। मैं इसके माननीय रेल मंत्री जी को धन्यवाद देता हूं।
*Speech was laid on the Table पूवार्ंचल उत्तर प्रदेश का एक महत्वपूर्ण क्षेत्र है। बिहार तथा पूर्वोत्तर राज्यों के लिए अधिकतर रेलगाड़ियां लखनऊ गोरखपुर रेल मार्ग से होकर जाती है और इस रेल मार्ग पर अत्यधिक रेलगाड़ियों का परिचालन होता है। अभी तक लखनऊ गोरखपुर रेल मार्ग विद्युतिकरण नहीं हुआ है। लखनउ-गोरखपुर रेल मार्ग का विद्युतिकरण हो जाने पर विद्युत चालित रेलगाड़ियों का परिचालन करके बहुत सी रेलगाड़ियों की रफ्तार बढ़ायी जा सकती है तथा परिचालन व्यय में भी कमी आयेगी। अत: मैं मांग करता हूं कि अतिशीघ्र लखनऊ- गोरखपुर रेल मार्ग का विद्युतिकरण कराया जाये। लखनऊ- गारेखपुर रेल मार्ग के दोहरीकरण का कार्य विगत कई वर्षो से बड़ी मंथर गति से चलाया जा रहा है। इस गति से इस मार्ग के दोहरीकरण का कार्य आगामी कई वर्षो में पूर्ण नहीं होगा। अत: मैं माननीय रेल मंत्री का ध्यान आकृष्ट करते हुए अनुरोध करता हूं कि लखनऊ गोरखपुर रेल मार्ग के दोहरीकरण कार्य को अतिशीघ्र पूरा कराने की व्यवस्था करायें।
महोदय, लखनऊ-गोरखपुर रेल मार्ग पर अत्यधिक रेलगाड़ियों का परिचालन होता है। पूवार्ंचल के अनेकों स्थानों पर रेल मार्ग सड़क मार्ग को पार करता है। रेलगाड़ियों के आने से पूर्व रेल फाटक बंद करके सड़क यातायात जाम हो जाता है। प्राय: रेलगाड़ियों का आवागमन होता रहता है और फाटक बंद रहने के कारण जाम लगता रहता है। राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या-२८ को लखनऊ गोरखपुर रेल मार्ग, सिहापार हाल्ट के पास क्रासा करता है तथा मेरे संसदीय क्षेत्र के खलीलाबाद में क्रासा करता है। उपरोक्त दोनों क्रासिंगों पर प्रतदिन भीषण जाम लगा रहता है। मेरा माननीय रेल मंत्री जी से साग्रह अनुरोध है कि राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या-२८ पर सिहापार क्रासिंग पर तथा खलीलाबाद-घनघटा मार्ग के खलीलाबाद क्रासिंग पर ओवर ब्रिज का निर्माण करायें, जिससे भीषण जाम की समस्या से छुटकारा मिल सके।महोदय, अभी तक लखनऊ गोरखपुर रेल मार्ग से होकर कोई राजधानी अथवा शताब्दी एक्सप्रेस नहीं चलायी जा सकी है। मैं माननीय रेल मंत्री जी से दिल्ली से लखनऊ गोरखपुर होकर हाजीपुर तक राजधानी एक्सप्रेस चलाये जाने की मांग करता हूं।
माननीय रेल मंत्री जी ने गोरखपुर नयी दिल्ली के बीच चलने वाली गोरखधाम एक्सप्रेस को प्रतदिन चलाये जाने की घोषणा की है। गोरखधाम एक्सप्रेस जनपद मुख्यालय संत कबीर नगर से होकर गुजरती है, परन्तु इसका ठहराव संत कबीर नगर जनपद मुख्यालय के रेलवे स्टेशन खलीलाबाद में नहीं होता है। मैं माननीय रेल मंत्री जी से गोरखधाम एक्सप्रेस का ठहराव खलीलाबाद रेलवे स्टेशन पर करने का अनुरोध करता हूं।
डॉ. वल्लभभाई कथीरिया (राजकोट) : महोदय रेलवे बजट पढ़ने के बाद मुझे ऐसा लगता है कि बिहार में चुनावों के कारण रेलवे मंत्री जी बजट को मोड़ देने के लिए पूरा समय नहीं दे पाये हैं। केवल एन.डी.ए सरकार के पूर्व बजट को ध्यान में रखते हुए सभी जगह १०-२० प्रतिशत बढ़ा दिया गया है। रेलवे इंफ्रास्ट्रक्चर, अपग्रेडेशन, टेली कम्यूनिकेशन सिस्टम, ऐसे सभी क्षेत्रों का रूटीन में बढ़ावा किया गया है। सही मायने में निश्चित विस्तार की विकास, भौगोलिक परिस्थिति, रिवेन्यू जेनरेशन, वर्क लोड, फ््यूचर डेवलमेंट पर कोई विशेष ध्यान नहीं दिया गया है। बजट केवल पॉपुलेरिटी को बढ़ाने के लिए बनाया गया है।उपर्युक्त स्टेटमेंट के बार में मैं केवल अपने क्षेत्र की कुछ बातें रखना चाहूंगा और आशा रखता हूं कि माननीय रेल मंत्री इस पर गंभीरता से अभी भी बजट में अपना प्रावधान करेंगे।पहली बात पूरे देश में जो नयी ट्रेनें शुरू की गयी हैं, वे लम्बे अंतर की कम हैं तथा ज्यादा लोकल ट्रेनें हैं। जो वैसे भी चालू की जा सकती हैं।
वेस्टर्न जोन ( पश्चिम रेलवे) में गुजरात का एक भी नये लम्बे अंतर की ट्रेन नहीं दी गयी है। जबकि पूरे देश में पश्चिम रेलवे सबसे ज्यादा रिवेन्यू जेनरेटिड एरिया है। आज भी पूरे सौराष्ट्र से मुम्बई जाने के लिए केवल तीन ट्रेन ( फास्ट) पिछले २७ साल से चल रही है। जबकि आज ट्रैफिक इतना बढ़ गया है कि २०-३० दिन का वेट लिस्ट रहता है और एक बात आपके ध्यान में रखना चाहूंगा कि पिछले सालों के बाद राजकोट-सोमनाथ रेलवे ट्रैक का मीटरगेज से ब्राडगेज कनवर्जन हो गया। आज मालगाड़ियां और लोकल ट्रेन पिछले एक साल से चल रही है। केवल एक ट्रेन ( जबलपुर-राजकोट) का सोमनाथ-वेरावल तक विस्तार किया गया है। जबकि सोमनाथ जो कि एक ऐतिहासिक स्थल है। बहुत सी इंडस्ट्री से जुड़ा हुआ है। बहुत से शहर जैसे सोमनाथ, वेरावल, जूनागढ़, राजकोट इस रूट से जुड़े हैं। सोमनाथ को देश से अलग अलग भाग से जोड़ने के लिए हमने और एन.जी.ओ चैम्बर ऑफ कामर्स एंड इंडस्ट्री, पैसेंजर एसोसियेशन पिछले एक साल से आपको पत्र, मुलाकात से माननीय रेल मंत्री जी को अवगत कराया है। अलग अलग स्टेज पर निवेदन किया गया है लेकिन एक भी नयी ट्रेन इस बजट में नहीं दी गयी है। न राजकोट से न ही अहमदाबाद से विस्तार किया गया है। अभी भी पूरी संभावना है कि सोमनाथ-वेरावल को देश के वभिन्न भागों से जोड़ा जाये जैसे कि मुम्बई, दिल्ली, हरिद्वार, जगन्नाथपुरी, हावड़ा, चेन्नई, हैदराबाद आदि। मेरा आपके माध्यम से निवेदन है कि इस बारे में पुन: विचार किया जाये और सौराष्ट्र की जनता को न्याय दिया जाये* *Speech was laid on the Table MR. SPEAKER: Now Railway Minister to reply the debate.
प्रो. विजय कुमार मल्होत्रा (दक्षिण दिल्ली) : महोदय, श्री लालू प्रसाद जी ने कहा था कि मैं कैबिनेट की बैठक में नहीं जा रहा हूं । हमने सोचा था कि शायद रेल मंत्री ने अपना इस्तीफा दे दिया होगा, मगर ये तो यहां बैठें हैं, इसलिए हम लोग सदन से वाक आऊट करते हैं ।
13.11 hrs. (At this stage Prof. Vijay Kumar Malhotra and some other hon’ble Members left the House) *SHRI ANANTHA VENKATARAMI REDDY (ANANTAPUR): Mr. Speaker, Sir, I thank you for giving me an opportunity to speak on the Demands for Grants pertaining to the Ministry of Railways for the year 2005-06. I may be permitted to lay a copy of the speech on the Table of the House so that the entire details are brought on the record. I congratulate the Hon’ble Minister of Railways, Shri Lalu Prasad, for his dynamic and people-friendly Budget in which he tried to accommodate the demands and aspiration of all sections of the people. Sir, it may be a fact that in the Railway Budget presented on 26th February, 2005 the fares were not hiked which is a welcome feature for the common people all over the country who whom Railways is the only mode of transport. I would like to appreciate and welcome this aspect when the Hon’ble Minster of Railways has not put any burden on the common people. It is a good Budget in that sense. He has given a lot of subsidies to the rural people, 75% fare concession to the girl students of rural areas who travel for attending interviews etc., 50% concession to the milk vendors etc. The Minister of Railways has done a great favour by abolishing the selection of Group ‘D’ people through Railway Recruitment Board and allotted the powers of recruitment to the local authorities. It is a welcome measure. Sir, I would like to submit that in Andhra Pradesh, Rayalaseema region is the most backward region and more so the backwardness of Anantapur district is known to all. The Guntakal division in South Central Railway, which earns an estimated amount of Rs. 4,000 crore per year, which is the third largest Division in the country, falls in this district. A number of important junctions and the diesel loco shed at Gooty are in my constituency. I can say that Railways is the main source of revenue and also a necessity for the people of my district.But this Guntakal division has been sanctioned a meagre sum for its all-round development and further activities. The allocation of funds for the on-going projects is on a nominal scale and not a single work or project is likely to be completed in this financial year with these allocations. I would like to bring to your kind notice the following important factors which have been side-stepped by the Hon’ble Minister of Railways in his proposal for the year 2005-06 and I would humbly request him to kindly give his personal attention to the same and come to the rescue of the people of this region. There is an urgent need for conversion from meter gauge to broad gauge the segment between Pakala and Dharmavaram. This would provide a direct link to the people of Anantapur and nearby places to go to Tirupati and further to Chennai. Now, there is only a passenger service on metre gauge which takes quite a lot of time. This work is pending for quite a long time and allocation of funds and taking it up on priority basis is needed. The segment from Kallur to Guntakal needs to be converted from metre gauge to broad gauge. Currently all trains from Anantapur to Guntakal have to take a long route via Gooty because the Kallur-Guntakal section is not converted into broad gauge. A number of goods trains take a lot of time and are stopped at various places in between since there is only a single line and priority is given to passenger traffic. Movement of goods to Hospet and Bangalore and further is delayed by hours and also it involves more than 40 kilometres of excessive travel. If there is a broad gauge line from Guntakal to Kallur, it would greatly help in reduction of journey time and save enormous amount in freight charges. This proposal is also pending for long time and needs immediate priority of the Railway Board. There is no train service between Anantapur and Hyderabad in the day time. The train from Bangalore mostly passes through Anantapur district and yet there is no train and reservation is less for the people of this district. The Prashanti Niyalam to Secunderabad train which was serving the needs of the people of Anantapur is also now extended to Yeshwantpur thus depriving the people of this region the reservation facility from the Station in the district. The Tungabhadra Express which runs between Kacheguda and Kurnool should be extended upto Guntakal or Dharmavam as it is a day train and it will greatly help the people of Anantapur district to go to State capital. There is a long-pending demand for extending the Bangalore-Jaipur train upto Ajmer. This would greatly facilitate the people of Anantapur district to visit religious places in Ajmer like Darga of Khwaja Moinuddin Chisti and also Puskhar near Ajmer. I am sure the revenues of railways would greatly improve by this extension of line. There has been a long-pending demand to stop the 2627/2628 Karnataka Express at Gooty at least for one minute. Gooty is an important junction in the zone and the diesel loco shed is situated here. Thousands of people form the surrounding areas who wish to go to Delhi are suffering a lot as they have to go to Anantapur or Guntakal to board this train. Similarly the Cennai-Mumbai Chennai Express should also be given a stoppage for at least one minute at Gooty. This will greatly facilitate the people of Gooty and surrounding areas to go to Chennai and Mumbai. Similarly, Tadipatri is an important station in the district. A large number of medium and large industries are located in Tadipatri like cement, slab industries etc. The Hazrat Nizamuddin-Secunderabad Sampark Kranti Express has been extended now upto Tirupati. It serves Kurnool and Cuddpaah districts with stoppages in those districts. But though the train passes through most of the places in Anantapur district, there is not a single stop proposed in this district. It will greatly hamper the transport needs of the people of Anantapur district. It is requested that stoppage, at least for a minute, should be given to this train at both Gooty and Tadipatri which will greatly benefit the people of this area.
There is one train running from Bangalore to Secunderabad which passes through most of the places in Anantapur district. It was serving mostly the passengers of either Bangalore or Secunderabad. For the benefit of the people of Anantapur district, earlier there was one train (7603/7604) between Kacheguda to Guntakal which was first extended to Prashanti Nilayam and in this Budget again to Bangalore (Yeshwantpur). This has resulted in deprivation of direct train form the Anantapur and Guntakal passengers in this train. Moreover, there is no AC 2 tier coach in this train which is greatly affecting the passengers. Hence it is requested that three coaches may be reserved in the above train for passengers of Anantapur district in addition to provision of one AC 2 tier coach. There is an urgent need for survey work of Rayadurg-Tumkur line via Kalyanadurg and Madakasira. This will provide direct link to Tumkur and further places in Karnataka. The people of Anantapur district as also those in neighbouring Karnataka would greatly be benefited by this line. Hence there is an urgent need to take up the survey work of this line. This could be done in the Budget now. At Gooty junction, which is an important station having a diesel loco shed where good number of trains cross the station, there is no proper drinking water facility. In the hot summer season, the passengers are facing innumerable problems as they do not have drinking water at the station and are forced to by mineral water bottles. In Telugu district it is said ‘not Goody station but Utty station’ namely it is just a station for the name-sake without any facility. This problem should be rectified immediately.
Sir, these are but some of the very important and top priority needs of the people of Anantapur district, Andhra Pradesh which I have been raising with the Ministry of Railways for quite some time. I would like to bring to the kind notice of the Hon’ble Minister of Railways that despite every need and despite being raised by the Members of Parliament of this region about the same, the Minister of Railways could not consider these things in his Budget speech. I would humbly request you, sir, to kindly look into the above genuine needs of the people of this backward district and immediately take appropriate action for directing the Railway Board to take up and complete the above works on an expeditious and priority basis. I once again thank you for giving me this opportunity to bring before the notice to the Railway Board some of the genuine concerns and needs of the people of Anantapur district and would earnestly request him to attend to these problems at the earliest.
रेल मंत्री (श्री लालू प्रसाद) : महोदय, बजट में लगभग १८७ माननीय सदस्यों ने हिस्सा लिया है और विगत रात्रि १२ बजे तक माननीय सदस्यों ने बजट में हिस्सा लेते हुए कई महत्वपूर्ण सुझाव दिए और जो रेलवे के लिए हमने काम किया है, उसकी प्रसंशा की है । मैं उन तमाम माननीय सदस्यों को, जिन्होंने मौखिक और लखित रूप से अपने क्षेत्रों और इलाकों के बारे में रेल बजट २००५-०६ के वित्तीय वर्ष की चर्चा में अपने बहुमूल्य सुझाव दिए हैं, मैं उन सबका आदर व आभार व्यक्त करता हूं । मुझे प्रसन्नता है कि माननीय सदस्यों ने यात्री भाड़े में वृद्धि नहीं करने की सराहना की है । सम्मानित सदस्यों ने बेरोजगार नवयुवकों, किसानों, दूध उत्पादकों, ग्रामीण छात्रों और छात्राओं के द्वारा द्वितीय श्रेणी में की जाने वाली यात्राओं में दी गई रियायतों का भी स्वागत किया है । साथ ही माननीय सदस्यों द्वारा अनेक महत्वपूर्ण सुझाव भी दिए गए हैं । मैं सदन को आश्वस्त करना चाहूंगा कि माननीय सदस्यों की तरफ से जो भी सुझाव आए हैं, उन पर गंभीरतापूर्वक विचार किया जाएगा । बहस में भाग लेते हुए कई विद्वान खास करके भारतीय जनता पार्टी के एक नेता के द्वारा रेल बजट पर की गई बहस को मैंने ध्यानपूर्वक सुना है । उन्होंने यह कहा है कि देश की अर्थव्यवस्था में भारतीय रेल की महत्वपूर्ण भूमिका पर सवालिया निशान लगाते हुए एक अलग रेल बजट को प्रस्तुत करने के औचित्य को नकार दिया है । हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि भारतीय रेल अभी भी देश की अर्थव्यवस्था की जीवन रेखा है और फील गुड का नारा देने वाले चार्टर प्लेन एवं हेलीकॉप्टर पर चलने वाले इन भारतीय जनता पार्टी के नेताओं ने अभी तक अपनी करारी हार से सबक नहीं सीखा है और यह अभी तक अपने सपनों का महल बना रहे हैं द्भ " दिल को बहला ले इजाजत है लेकिन इतना न उड़, रोज सपने देख मगर इस कदर तारे न देख" ।
महोदय, फील गुड कहना और सुनहरे सपने देखना बुरी बात नहीं है । लेकिन हेलीकॉप्टर में यात्रा करते हुए रेल से सफर करने वाले देश के करोड़ों लोगों को कीड़ा-मकोड़ा समझना एवं रेल बजट के औचित्य पर सवाल उठाना सदन को कदापि स्वीकार नहीं होगा । चालू वर्ष के दौरान यूपीए सरकार ने बिना कोई भाड़ा बढ़ाए, बिना कोई बोझ डाले कीर्तिमान स्थापित किया है । महोदय, माननीय सदस्य श्री रामजी लाल सुमन ने अपने विद्वतापूर्ण भाषण में माल परिवहन में भारतीय रेल की साल दर साल घटती हिस्सेदारी पर चिंता व्यक्त की है । हमने भारतीय रेल को निष्पादन के हर क्षेत्र में चीन की रेल के जैसा दक्ष बनाने का सुझाव दिया है । हमारे लिए गौरव का विषय है कि लम्बी अवधि के बाद चालू वर्ष में रेट लोडिंग के क्षेत्र में भारतीय रेल ने अर्थव्यवस्था की प्रगति दर से अधिक वृद्धि दर हासिल कर माल परिवहन के बाजार में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाई है । इसे ध्यान में रखते हुए हमने चालू वित्तीय वर्ष में माल लदान के लक्ष्य को ५८० मलियन टन से बढ़ा कर ६०० मलियन टन कर दिया है ।
महोदय, इस वर्ष के यात्री यातायात में ३ प्रतिशत वृद्धि के बजट लक्ष्य की तुलना में दुगनी, अर्थात् ६ प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। इसी प्रकार कुल आमदनी में पिछले वर्ष दर्ज की गई ४ प्रतिशत की वृद्धि दर की तुलना में दुगनी, अर्थात् ८.३ प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। महोदय, रेलवे परिवहन के क्षेत्र में हासिल की गई इस बेहतरीन वृद्धि के कारण ही आम जनता पर यात्री भाड़े का बोझ बढ़ाए बिना ऑपरेटिंग रेश्यो सुधर कर ९१.२ प्रतिशत तक पहुंच गया है, जो पांचवें वेतन आयोग की सिफारिशें लागू होने के बाद सबसे अच्छा अवसर है। हमें इस उपलब्धि से संतुष्ट नहीं होना चाहिए, क्योंकि अभी भी हमें ऑपरेटिंग कार्य-कुशलता में चीन जैसी दक्षता हासिल करने के लिए लम्बा सफर तय करना होगा। भारतीय एवं चीन की रेलों की परिस्थितियां समरूप नहीं होने के कारण कई एक पैमानों पर इस प्रकार की तुलना करने का शायद कोई औचित्य नहीं होगा, फिर भी मैं सदन को आश्वस्त करना चाहता हूं कि हम कार्य-कुशलता के प्रत्येक क्षेत्र में भारतीय रेल को विश्व की सर्वोत्तम रेलों के समान बैंच मार्क करने का प्रयास करेंगे।महोदय, हमने मालगाड़ियों के टर्न ओवर राउंड को सात दिन से घटाकर पांच दिन पर लाने के लिए अनेक कदम उठाए हैं, जिनका उल्लेख हमने अपने बजट भाषण में किया था। मुझे सम्मानित सदन को सूचित करते हुए हर्ष हो रहा है कि मालगाड़ियों की राउंड अवधि फरवरी और मार्च के महीने में घटकर लगभग साढ़े पांच दिन के ऐतिहासिक अवसर पर पहुंच गई है। हम इसे पांच दिन के स्तर पर लाने और भारतीय रेल की कार्य-कुशलता को प्रत्येक क्षेत्र में विश्व के सबसे अच्छे स्तर पर लाने का हर सम्भव प्रयास करेंगे।
महोदय, सार्वजनिक निजी भागीदारी के संबंध में मैंने बजट प्रस्तुत करते हुए भारतीय रेल के विकास के लिए गैर-परम्परागत रुाोतों से अतरिक्त संसाधन जुटाने एवं ग्राहकों को अच्छी सुविधाएं प्रदान करने के उद्देश्य से सार्वजनिक भागीदारी की अनेक योजनाएं प्रारम्भ करने की घोषणा की थी जिनमें कम्प्यूटराइज्ड ट्रेन इन्क्वायरी सिस्टम भी एक है। माननीय सदस्य, श्रीमती परमजीत कौर गुलशन, यह सोचकर आश्चर्यचकित हैं कि बिना वित्तीय प्रावधान के जादुई छड़ी को घुमाकर अगले वर्ष पूरे देश में इस योजना को कैसे लागू किया जाएगा। मैं माननीय सदन को जानकारी देना चाहता हूं कि सार्वजनिक निजी भागीदारी की इस नई योजना में कॉल सेंटर लगाने एवं चलाने के खर्चे का वहन निजी भागीदार को ही करना है एवं भारतीय रेल को अपने कंप्यूटराइज्ड नैटवर्क के माध्यम से ट्रेन इन्क्वायरी से संबंधित सभी सूचनाएं उपलब्ध करवानी हैं। इतना ही नहीं कॉल सेंटर चलाने वाली टेलीकॉम कंपनियों को टेलीफोनों की कॉलों से जो आय होगी, उसका एक हिस्सा भारतीय रेल को उपलब्ध कराना होगा। भारतीय रेल का हिस्सा कितना होगा, इसे खुली नविदा के द्वारा निर्धारित किया जाएगा और जो कंपनी सर्वाधिक प्रति कॉल रेश्यो रेलवे को देगी, उसे कॉल सेंटर चलाने की अनुमति दी जाएगी। बिहार राज्य के लिए स्थापित किए गए कॉल-सेंटरों को प्राप्त होने वाली राशि में से भारतीय संचार निगम लमिटेड प्रति कॉल १५ पैसे रेलवे को उपलब्ध कराती है। महोदय, सार्वजनिक निजी भागीदारी की यह व्यवस्था इस कहावत को चरितार्थ करती है कि द्भ "हल्दी लगे न फिटकरी और रंग चोखा आ जाए।"
महोदय, अब मैं वार्षिक योजना के बारे में बताना चाहता हूं। माननीय सदस्यों ने वर्ष २००५-०६ की वार्षिक योजना में बजटीय सहायता एवं परिवहन में की गई कटौती पर चिन्ता व्यक्त की है और यह जानना चाहा है कि रेल आधुनिकीकरण योजनाओं के लिए धनराशि की व्यवस्था कैसे की जाएगी। मैं इस संबंध में विश्वास के साथ सदन को सूचित करना चाहता हूं कि चालू वर्ष में संशोधित अनुमानों के अनुसार भारतीय रेल को ८,८५७ करोड़ रुपए की बजटीय सहायता प्राप्त हुई है। अगले वर्ष मात्र ७,२३१ करोड़ रुपए की बजटीय सहायता प्राप्त होने का अनुमान है, लेकिन चालू वर्ष के संशोधित अनुमानों में ऊधमपुर-श्रीनगर-बारामूला की नई रेल लाइन के लिए ७०० करोड़ रुपए की राशि भी सम्मिलित है, जब कि अगले वर्ष की अनुमानित योजनाओं में परिवहन क्षेत्र के अन्तर्गत पूर्वोत्तर क्षेत्र के लिए घोषित नई रेल परियोजनाओं एवं जम्मू-कश्मीर की उक्त योजनाओं को प्राप्त होने वाली १३६५ करोड़ रुपए की सम्भावित राशि सम्मिलित नहीं है। इन योजनाओं के लिए अतरिक्त राशि का आबंटन वित्त मंत्रालय, चालू वर्ष के दौरान होने वाली कार्य-प्रगति को देखकर करेगा।
योजना आयोग द्वारा भी लाभप्रद योजनाओं के लिए स्पेशल परपस व्हीकल (एसपीवी) के माध्यम से वर्ष के दौरान ३ हजार करोड़ रुपए अतरिक्त उपलब्ध कराए जा सकते हैं। इसके अतरिक्त रेलवे के वित्तीय निष्पादन में आए सुधार के फलस्वरूप योजना परिव्यय के लिए आंतरिक संसाधनों से प्राप्त होने वाली राशि ३७७५ करोड़ रुपए से बढ़ा कर ४७१८ करोड़ रुपए होने की संभावना है। इतना ही नहीं हमने विकास नधि में वर्ष २००४-०५ के ७१५ करोड़ रुपए के बजटीय अनुमान की तुलना में संशोधित अनुमानों में १७२५ करोड़ रुपए और वर्ष २००५-०६ में १८५३ करोड़ रुपए के वनियोग का प्रावधान किया है। विकास नधि में वर्ष २००५-०६ के अंत में कुल १९५३ करोड़ रुपए का अवशेष रहने की संभावना है, जिसका उपयोग वर्ष के दौरान ली जाने वाली थ्रु पुट संवर्धन योजनाओं के लिए आवश्यकतानुसार किया जा सकता है।महोदय, मैं सदन को आश्वस्त करना चाहूंगा कि किसी भी परिस्थिति में वर्ष २००५-०६ में हमारा योजना परिव्यय चालू वर्ष से कम नहीं रहने दिया जाएगा एवं रेलवे की आधुनिकीकरण योजना के क्रियान्वयन को राशि की कमी के कारण बाधित नहीं होने दिया जाएगा।
रेल संरक्षा एवं सुरक्षा, कुछ माननीय सांसदों ने रलवे पर संरक्षा तथा सुरक्षा की स्थिति एवं संरक्षा के लिए पर्याप्त आबंटन उपलब्ध नहीं कराने पर अपनी चिंता व्यक्त की है। रेलवे पर संरक्षा तथा सुरक्षा हमारी सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में से एक है। हमने रेल संरक्षा की द्ृष्टि से कई महत्वपूर्ण कदम उठाए गए हैं, जिनके कारण परिणामी गाड़ी दुर्घटनाओं में काफी कमी आई है।
महोदय, विशेष रेल संरक्षा नधि में ३५२२ करोड़ रुपए और रेल संरक्षा नधि के अंतर्गत ७११ करोड़ रुपए अर्थात् कुल ४२३३ करोड़ रुपए के प्रावधान किए गए हैं, जो कि कुल योजना परिव्यय के २८ प्रतिशत के बराबर है। इसके अलावा संरक्षा से संबंधित योजना शीर्षों पर आंतरिक रुाोतों से भी पर्याप्त परिव्यय की व्यवस्था की गई है। जहां तक सुरक्षा का सवाल है, यात्रियों और उनके सामान की सुरक्षा के लिए रेल सुरक्षा बल में रिक्तियों को भरने के लिए भर्ती अभियान एवं रेल सुरक्षा बल की आधुनिकीकरण योजना पूरे जोर से चल रही है।महोदय, परियोजनाओं के लिए धन का आबंटन, कुछ माननीय सदस्यों द्वारा ऐसी आशंकाएं व्यक्त की गई हैं कि इस रेल बजट में कुछ राज्यों की उपेक्षा की गई है। इस संबंध में मैं स्पष्ट करना चाहूंगा कि परियोजनाओं के लिए राशि उपलब्ध कराने में किसी राज्य विशेष के साथ पक्षपात नहीं किया गया है और वभिन्न राज्यों में चल रही परियोजनाओं के लिए धन का वितरण पूर्व निर्धारित नीति के अनुसार किया गया है, जो कि राज्यों की जनसंख्या, क्षेत्रफल इत्यादि पर आधारित है। जैसा कि सदन को ज्ञात है कि रेलवे को चालू परियोजनाओं को पूरा करने के लिए लगभग ४६,००० करोड़ रुपए की जरूरत है, जो ऑन गोइंग है।
महोदय, प्रतिवर्ष इन लंबित योजनाओं को पूरा करने के लिए जितनी राशि की व्यवस्था की जाती है, उससे इन योजनाओं को समयबद्ध तरीके से पूरा करना संभव नहीं प्रतीत होता है। इस वर्ष हमने लगभग ३००० करोड़ रुपए की व्यवस्था की है, जिसका एक हिस्सा प्रतिवर्ष बढ़ती महंगाई के कारण हुई लागतों में वृद्धि को पूरा करने में ही लग जाता है। ये योजनाएं लंबे अरसे से चल रही हैं, जो कि हमें एनडीए सरकार से विरासत में मिली हैं। रेलवे अधिक से अधिक परियोजनाओं के लिए पर्याप्त धनराशि उपलब्ध कराने का हर संभव प्रयास कर रही है, लेकिन माननीय सदस्य इस तथ्य से सहमत होंगे कि सारी परियोजनाओं को न तो एक साथ हाथ में लिया जा सकता है और न ही पूरा किया जा सकता है। हमें इन योजनाओं को पूरा करने के लिए एक नई रणनीति पर विचार करना होगा और सभी प्रकार के परम्परागत एवं गैर परम्परागत रुाोतों से इस प्रकार धन जुटाना होगा, जिससे इन्हें अगले पांच वर्षों में पूरा किया जा सके। इस द्ृष्टिकोण से हमने लंबित परियोजनाओं को पांच साल के अंदर पूरा करने के लिए सुदूर क्षेत्र रेल संपर्क योजना प्रारंभ करने का निर्णय लिया है।
महोदय, माननीय सदस्यों ने गत बजट में घोषित कुछ संपर्क क्रांति एक्सप्रेस एवं अन्य गाड़ियों के अभी तक प्रारंभ नहीं होने पर चिंता व्यक्त की है। महोदय, सदन अवगत है कि कुछ राज्यों में हाल ही में संपन्न विधान सभा चुनावों में आचार संहिता लागू होने के कारण कुछ गाड़ियां प्रारंभ नहीं की जा सकीं। ऐसी कुछ गाड़ियां पिछले सप्ताह शुरू की जा चुकी हैं और शेष को भी इसी माह शुरू किया जाएगा। माननीय सदस्यों के अन्य सुझाव मुख्यत: अपने क्षेत्र या किसी खास स्थान के लिए नई रेलगाड़ी चलाने का अनुरोध, किन्हीं खास स्टेशनों पर किसी खास गाड़ी के ठहराव की बात है।
जहां तक नई रेल गाड़ियां चलाने की बात है, मैंने ५४ अतरिक्त गाड़ियां चलाने का प्रावधान इस बजट में किया है। साथ ही कई गाड़ियों का विस्तार एवं फेरे भी बढ़ाये हैं। ३० गाड़ियों की रफ्तार बढ़ाई गई है। अधिक लोकप्रिय गाड़ियों में लगभग ४०० अतरिक्त सवारी डिब्बे लगाए जाएंगे। जहां तक और अधिक नई गाड़ियां चलाने की मांग है, माननीय सदस्य इस तथ्य से सहमत होंगे कि प्रत्येक नई गाड़ी चलाने के लिए क्षमता के विस्तार की भी आवश्यकता होती है, जो तात्कालिक आधार पर करना सम्भव नहीं हो पाता है। फिलहाल माननीय सांसदों के अनुरोध को ध्यान में रखते हुए मैं कानपुर से मुम्बई के बीच एक मेल एक्सप्रैस गाड़ी चलाने का प्रस्ताव करता हूं।केरल राज्य के अनेक माननीय सांसदों एवं माननीय मुख्यमंत्री जी ने रेल बजट में केरल के हितों को नजरअंदाज करने की ओर मेरा ध्यान आकृष्ट किया है। मैं सदन को आश्वस्त करना चाहूंगा कि केरल के हितों का पूरा ध्यान रखा जायेगा एवं पूर्व निर्धारित स्थिति के अनुसार केरल राज्य को जो धनराशि देय होती है, उसे उपलब्ध कराया जायेगा। केरल के माननीय सांसदों की भावनाओं के मद्देनजर मैं केरल के लिए निम्न प्रस्तावों की घोषणा करता हूं: २६२५/२६२६ केरला एक्सप्रैस पूर्व की भांति दिल्ली से त्रिवेन्द्रम के बीच चलेगी और इसका चंडीगढ़ तक विस्तार नहीं किया जायेगा। पंजाब एवं हरियाणा राज्य के लोगों की मांग पर इसी महीने दिल्ली से त्रिवेन्द्रम के बीच शुरू होने वाली केरल सम्पर्क क्रान्ति एक्सप्रैस का विस्तार चंडीगढ़ तक किया जायेगा। एर्णाकुलम और बैंगलौर के बीच एक साप्ताहिक गाड़ी चलाई जाएगी। ६६०३/ ६६०४ त्रिवेन्द्रम-मंगलौर मावेली एक्सप्रैस को सप्ताह में दो से बढ़ाकर तीन दिन चलाने का प्रस्ताव है।
SHRI VARKALA RADHAKRISHNAN (CHIRAYINKIL): It is running for only one day-a-week. You increase the frequency to four days-a-week.
SHRI LALU PRASAD: The status quo of your prime train will be maintained. … (Interruptions)
MR. SPEAKER: You have succeeded in your efforts. You should be happy.… (Interruptions)
MR. SPEAKER: No running commentary please.… (Interruptions)MR. SPEAKER: You have effectively put forward your State’s case and he has conceded to your demand.
श्री लालू प्रसाद : क्विलोन-पुन्नलूर आमान परिवर्तन के कार्य को वर्ष २००५-२००६ में ही पूरा किया जायेगा। त्रिवेन्द्रम से और अधिक गाड़ियां चलाने की मांग को ध्यान में रखते हुए एर्णाकुलम से कोट्टायम के रास्ते कायमकुलम की इकहरी लाइन के तीन डबलिंग कार्य पहले ही गति पर हैं। इनके अलावा इस मार्ग पर ५० किलोमीटर लम्बे दो नये डबलिंग कार्य स्वीकृत किये जा रहे हैं। Every demand of your State has been fulfilled. Work in respect of 52 ROBs in the State of Kerala is going on. In addition, 5 new ROBs have been sanctioned. In all, a total of 57 ROBs have already been sanctioned for Kerala and I will complete them according to time schedule, जो कि सभी राज्यों में सर्वाधिक हैं।
हालांकि मैंने माननीय सदस्यों द्वारा उठाए गए सभी मुद्दों को अपने इस उत्तर में शामिल करने का प्रयास किया है, पर हो सकता है कि कुछ नगण्य मुद्दे छूट गए हों। सदस्यों द्वारा उठाए गए स्थानीय मुद्दों पर सम्बन्धित सदस्य को पत्र लिखकर मैं वस्तुस्थिति से अवगत करा दूंगा। महोदय, रेल बजट को आम जनता एवं माननीय सदस्यों का व्यापक समर्थन मिला है, जिसके लिए मैं सभी का तहे दिल से शुक्रिया अदा करता हूं।
श्री मदन लाल शर्मा (जम्मू) : जम्मू की राजधानी का क्या हुआ ?
श्री लालू प्रसाद : सात तारीख को ऊधमपुर वाला?…( व्यवधान)
श्री मदन लाल शर्मा : सात लाख यात्री हर वर्ष जम्मू जाते हैं, उनको वहां परेशानी होती है।
श्री लालू प्रसाद : ठीक है, उसे देखेंगे।…( व्यवधान) MR. SPEAKER: Go to your seats.
श्री लालू प्रसाद : महोदय, बड़े सरकारी अस्पतालों में उपचार के दौरान मरने वाले रोगियों के शवों को नजदीकी रेलवे स्टेशन तक ले जाने वाली रियायत जो ५० प्रतिशत बजट भाषण में कही गई थी अब उसको सौ प्रतिशत कर दिया गया है। उसको अब नि:शुल्क ले जा सकते हैं।MR. SPEAKER: Unless permitted, no other intervention will be recorded. Hon. Minister to continue.(Interruptions)* … श्री मदन लाल शर्मा : वैष्णों देवी के लिए दो ट्रेनें तो रोज़ होनी चाहिए। पिछले आठ-दस महिनों से हम रेल मंत्रालय से भी निवेदन कर रहे हैं। …( व्यवधान)
MR. SPEAKER: Very well, let him conclude. … (Interruptions)
MR. SPEAKER: Those who are standing will have to suffer.… (Interruptions)
MR. SPEAKER: You are not speaking from your seat. Please sit down. This is a very bad habit.… (Interruptions)
MR. SPEAKER: I am requesting all of you, after the hon. Minister concludes, if there is time, I shall permit some hon. Members, if any valid questions are there. But do not interrupt in this way, it is not a responsible behaviour.… (Interruptions)
MR. SPEAKER: Shri Varkala Radhakrishnan, please go to your seat.… (Interruptions)
श्री लालू प्रसाद : महोदय, बजट में और बजट भाषण के दौरान जो माननीय सदस्य बोलते थे कि हमको यहाँ राजधानी ट्रेन दीजिए, वहाँ राजधानी ट्रेन दीजिए। जम्मू-कश्मीर है या गोरखपुर की जो बात हो रही है, इन सारी बातों को हम ध्यान में रखेंगे। यह तो हमारा काम है। रेलवे एक कमर्शियल आर्गेनाइजेशन है और लोगों को ज्यादा से ज्यादा सुविधा देना ही हमारा काम है। माननीय बसुदेव आचार्य ने जिस बात की तरफ__________________________________________________________________*Not recorded.
इशारा किया है और यदि बिना सोचे समझे ही हम यहाँ घोषणा कर दें और उस पर कल को कोई इम्पलीमेंटेशन न हो।…( व्यवधान)
श्री बसुदेव आचार्य : सियालदाह, सिलीगुढ़ी से कर दीजिए।
श्री लालू प्रसाद : अभी कैसे बोल दें? आपसे बात करेंगे, उसके बाद करेंगे।…( व्यवधान)
MR. SPEAKER: Hon. Minister, please conclude. … (Interruptions)
MR. SPEAKER: Nothing will be recorded.(Interruptions)* … MR. SPEAKER: In 35 years, I have not seen any Railway Minister who has satisfied everyone.
श्री लालू प्रसाद: महोदय, बजट भाषण के दौरान ऑफशियल और क्लैरिकल की वजह से एक गलती हो गई, जिसको भूल सुधार किया गया है। अमान परिवर्तन के कार्यों की प्रगति का विवरण देते हुए बजट भाषण में हमने कहा था कि रुप्सा-बांगड़ी, पोसी, रुप्सा-बारीपदा के अमान परिवर्तन का काम चालू वर्ष में पूरा किया जा चुका है। यह उड़ीसा में पड़ता है। लेकिन यह बात सच नहीं थी। इस विवरण् में थोड़े संशोधन की जरूरत है। रुप्सा-बांगड़ी पोसी के रुप्सा-बारीपदा के अमान परिवर्तन का कार्य पूरा होने के अंतिम चरण में है तथा इस खण्ड पर रेल पथ का कार्य माह के अंत तक पूरा कर लिए जाने की संभावना है। इस संशोधन से माननीय सदस्यों को हुई असुविधा के लिए मैं खेद प्रकट करता हूँ। मुझे इस सदन को बताते हुए प्रसन्नता हो रही है कि रांची-लोहरदगा के अमान परिवर्तन का कार्य पूर्ण किया जा चुका है और जो माननीय सदस्य अपने इलाकों में जो पापुलर ट्रेन चलाने की बात कहते हैं, हम उनसे बात करके उसका कोई रास्ता निकालेंगे।
__________________________________________________________________*Not recorded .… (Interruptions)
MR. SPEAKER: Please sit down. Please co-operate. The hon. Minister has said he has an open mind. He will consider the cases of all the areas of this country. He has made some announcements. Please co-operate.
Now I shall put the Demands for Grants on Account (Railways) for 2005-2006 to vote.
The question is:
"That the respective sums not exceeding the amounts shown in the third column of the Order Paper, be granted to the President of India, out of the Consolidated Fund of India, on account, for or towards defraying the charges during the year ending on the 31st day of March, 2006, in respect of heads of demands entered in the second column thereof against Demand Nos. 1 to 16.
"The motion was adopted .MR. SPEAKER: The Demands for Grants on Account (Railways) for 2005-2006 are passed.
MR. SPEAKER: I shall now put the Supplementary Demands for Grants (Railways) for 2004-2005 to vote.
The question is :"That the respective supplementary sums not exceeding the amounts shown in the third column of the Order Paper be granted to the President of India, out of the Consolidated Fund of India, to defray the charges that will come in course of payment during the year ending the 31st day of March, 2005, in respect of the heads of Demands entered in the second column thereof against Demand Nos. 3, 4, 10, 11, 13, 14 and 16."The motion was adopted .MR. SPEAKER: The Supplementary Demands for Grants (Railways) for 2004-2005 are passed.
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