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Lok Sabha Debates

Shri Naresh Puglia Called The Attention Of The Minister , Health And Family ... on 20 February, 2003

Title: Shri Naresh Puglia called the attention of the Minister , Health and Family Welfare regarding detection of harmful pesticide residues in certified bottled drinking water.

MR. DEPUTY-SPEAKER: The House will now take up Calling Attention.

Shri Naresh Puglia.

SHRI NARESH PUGLIA (CHANDRAPUR): Sir, I call the attention of the Minister of Health and Family Welfare to the following matter of urgent public importance and request that she may make a statement thereon:

"Situation arising out of the reported detection of harmful pesticide residues in certified bottled drinking water by Bureau of Indian Standards and steps taken by the Government in regard thereto. "

स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री तथा संसदीय कार्य मंत्री (श्रीमती सुषमा स्वराज) : उपाध्यक्ष महोदय, हाल ही में समाचार पत्रों में बोतलबंद पेयजल की गुणवत्ता के बारे में रिपोर्टें छपी हैं। ये रिपोर्टें विज्ञान और पर्यावरण केन्द्र, ४१, तुगलकाबाद इंस्टीटयूशनल एरिया, नई दिल्ली द्वारा किए गए अध्ययनों पर आधारित हैं।

रिपोर्टों के अनुसार विज्ञान और पर्यावरण केन्द्र ने नाशक जीवमार अवशिष्टों के लिए बोतलबंद पेयजल के १७ ब्रांडों की जांच की है। अध्ययनों से प्राप्त हुए परिणाम से पता चला है कि जिन नमूनों का विश्लेषण किया गया उनमें नाशक जीवमार अवशिष्ट पाए गए।

इन अध्ययनों के अनुसार निम्नलखित कारणों से बोतलबंद पेयजल में नाशक जीवमार अवशिष्ट आए हैं:- नाशक जीवमार अवशिष्ट कच्चे नमूनों (भूमिगत नमूने) में पाए गए जो कि वभिन्न निर्माताओं के लिए जल का रुाोत हैं। कच्चे पानी के लिए प्रयुक्त उपचार तकनीक कीटनाशक पदार्थों को हटाने के लिए समुचित नहीं हैं। जल के पूरे भाग पर`रिवर्स ऑस्मोसिस`नहीं किया गया;नियमों के अंतर्गत वहित खनिज मात्रा बनाए रखने के लिए जल के एक भाग पर ऑस्मोसिस किया जाता है और उसे पूर्व-उपचारित जल के साथ मिला दिया जाता है।पैक किए गए पेयजल तथा मिनरल वाटर के लिए भारतीय मानक ब्यूरो द्वारा निर्धारित मानक खाद्य अपमिश्रण निवारण नियम, १९५५ के अंतर्गत वर्ष २००० में अपनाए गए थे। खाद्य अपमिश्रण निवारण नियमों में पैक किए हुए पेयजल तथा प्राकृतिक मिनरल वाटर के लिए भारतीय मानक ब्यूरो के अनिवार्य प्रमाणन का उपबंध किया गया है। इन मानकों के अनुसार भारतीय मानक ब्यूरो द्वारा उसकी निरीक्षण और परीक्षण स्कीम में निर्धारित वधियों के अनुसार जब इनका परीक्षण किया जाए तो नाशक जीवमार अवशिष्ट ` पता लगाए जा सकने वाली सीमा से नीचे` होने चाहिए। भारतीय मानक ब्यूरो की वधि के अनुसार पैक किए गए पेयजल और मिनरल वाटर के विलेषित नमूने अपेक्षाओं के अनुरूप पाए गए। तथापि, विज्ञान और पर्यावरण केन्द्र के अध्ययन में, पानी में नाशक जीवमार अवशिष्ट अधिक संवेदनशील परीक्षण वधि के प्रयोग के परिणामस्वरूप पाए गए। यह एक ऐसी परीक्षण वधि है जो भारतीय मानक ब्यूरो द्वारा निर्धारित वधि से अधिक संवेदनशील है।

अब भारतीय मानक द्वारा किये गये प्रस्ताव इस प्रकार हैं :

( एक) विलेषण की वधियों को संशोधित करना तथा विलेषण अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर स्थापित परीक्षण वधियों का प्रयोग करके किये जायेंगे और जो अवशिष्टों की निर्धारित सीमा को पूरा करेंगे।
(दो) पैक किए गए पेयजल तथा मिनरल वाटर में नाशक जीवमार अवशिष्ट की अधिकतम सीमायें निर्धारित करना जो इस प्रकार हैं :
( क) व्यक्तिगत रूप से विचार किए गए नाशक जीवमार अवशिष्ट - ०.०००१ मि.ग्रा./ लीटर (ख) कुल नाशक जीवमार अवशिष्ट - ०.०००५ मि. ग्रा./ लीटर (तीन) निर्माता, भारतीय मानक ब्यूरो प्रमाण पत्र प्राप्त करने हेतु केन्द्रीय सरकार/ राज्य सरकार के भू-जल प्राधिकरण से प्राप्त एक अनापत्ति प्रमाण पत्र प्रस्तुत करेंगे।
चूंकि पैक किया हुआ पेयजल भारतीय मानक ब्यूरो की अनिवार्य प्रमाणन योजना के अधीन है, इसलिए पीएफए नियमों के अधीन निर्धारित मानकों और भारतीय मानक ब्यूरो द्वारा संशोधित मानकों के बीच सामंजस्य स्थापित किये जाने की आवश्यकता है।
तदनुसार, भारतीय मानक ब्यूरो की संस्तुति के अनुसार पीएफए नियम, १९५५ के अधीन पैक किए हुए पेयजल एवं मिनरल वॉटर के मानकों में संशोधन करने के लिए जनता की टिप्पणियां प्राप्त करने हेतु एक प्रारूप अधिसूचना १८.०२.२००३ की सा.का.नि. संख्या १११ के द्वारा जारी की गई है । इस अधिसूचना के द्वारा निम्नलखित संशोधन प्रस्तावित हैं :-
(एक) व्यक्तिगत रूप से विचार किए गए नाशक जीवमार अवशिष्ट- ०.०००१ मिलीग्राम/लीटर (अंतर्राष्ट्रीय रूप से स्थापित परीक्षण प्रणालियों का उपयोग करके इसमें ऊपर वनिर्दिष्ट अवशिष्ट सीमाओं को पूरा करने के लिए विश्लेषण किया जाएगा) (दो) कुल नाशक जीवमार अवशिष्ट- ०.०००५ मिलीग्राम/लीटर अंतर्राष्ट्रीय रूप से स्थापित परीक्षण प्रणालियों का उपयोग करके इसमें ऊपर वनिर्दिष्ट अवशिष्ट सीमाओं को पूरा करने के लिए किया जाएगा) (तीन) निर्माता भारतीय मानक ब्यूरो और पीएफए प्राधिकारियों से अनुज्ञप्ति अभिप्राप्त करने के लिए केन्द्रीय सरकार/ राज्य सरकार भूमिगत जल प्राधिकरण से एक अनापत्ति प्रमाण पत्र प्रस्तुत करेगा।
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श्री नरेश पुगलिया (चन्द्रपुर) : उपाध्यक्ष महोदय, माननीय मंत्री महोदया ने अपने उत्तर में जानकारी दी है किंतु पेयजल के विषय में और खासकर जो बिसलरी बॉटल्स आ रही हैं, इस विषय में अभी पिछले दो सप्ताह से खासकर वर्तमान पत्रों के माध्यम से और इलैक्ट्रॉनिक मीडिया के माध्यम से जनता के सामने जो तथ्य लाये गये हैं कि किस प्रकार से ये जनता में लूट कर रहे हैं। हम यह समझते थे कि इनका ट्रस्ट है और खासकर जो बाहर की महत्वपूर्ण कंपनियां हैं और देश की कंपनियां हैं, ऐसी ८०० कंपनियां देश में सीलबंद बोतलों में पेयजल भेज रही हैं। १००० करोड़ के ऊपर का इनका टर्न ओवर है और ये अपना एड देते समय कहती हैं। For example an advertisement in The Times of India says "Kinley 100 per cent trust meets the internationally accepted and used the World Health Organization’s guidelines for portable drinking water". सीएसई ने इसका सैम्पल टेस्िंटग किया जो १७ सैम्पल्स दिल्ली से और १३ सैम्पल्स मुम्बई से लाए हैं और उनमें बड़े पैमाने पर पेस्टीसाइड्स पाया गया है। पेस्टीसाइड्स के माध्यम से जो नुकसानदायक चीजें हैं, खासकर एक मैगजीन ने उल्लेख किया है कि इस पेस्टीसाइड्स को डिं्रकिंग वॉटर में यूज करने से किस प्रकार की शरीर में बीमारियां होती हैं और कई बीमारियों का उल्लेख उसमें किया गया है। इन सब चीजों को देखते हुए मैं माननीय मंत्री जी से अपील करूंगा कि देश में इस समय बिसलरीज के नाम पर जो देशी और विदेशी कंपनियां जनता में लूट मचा रही हैं, इस लूट को रोकने के लिए ब्यूरो ऑफ स्टैंडर्ड ‘बीआईएस’नेप्रपोज किया है कि यूरोपियन इकोनॉमिक कमीशन ‘ईईसी’ स्टैंडर्ड का ही होना चाहिए और मैं माननीय मंत्री जी से जानना चाहूंगा कि आईएसआई स्टैंडर्ड का ८ कंपनियों को मार्क है और कल ही फूड एंड सविल सप्लाई मनिस्टर ने कुछ कंपनियों को सील कर दिया है लेकिन कंपनियों को सील करने से नहीं होगा। आज जो अवेलेबल स्टॉक है, उसके विषय में माननीय मंत्री जी क्या एक्शन लेने जा रही हैं और यह जो आईएसआई मार्क दिया गया है, यह आईएसआई मार्क देने से पहले उन लोगों ने क्या लैबोरेटरीज में सैम्पल्स की जांच की है या नहीं की है और खासकर कई दिनों से यह मांग की जाती रही है कि हमारी लैबरेटरीज में खासकर टेस्िंटग ईक्विपमेंट्स पूरे न होने की वजह से इस प्रकार की धांधलियां ये कंपनीज कर रही हैं। कई कंपनियां सीधा बोरवैल से या टयूबवैल से ग्राउंड वॉटर यूज करके, उसकी पैकिंग करके जनता के बीच में भेज रही हैं और मिनरल वॉटर या बिसलरी के नाम पर जनता को लूट रही हैं। इन पर हम लोग भी बड़ा भरोसा करते थे और यहां तक बड़ी से बड़ी बीमारी वाले मरीज को भी तथा बच्चों को भी यही बिसलरी वॉटर देते थे कि यह सौ प्रतिशत प्योर है। इस प्रकार से देश के अंदर, जनता के बीच में ये कंपनियां लूट कर रही हैं तो माननीय मंत्री जी इनके खिलाफ क्या एक्शन लेंगी?
आपने कहा कि हमने आठ यूनिटों को सील कर दिया है, जो कि आईएसआई मार्क हैं। मैं पूछना चाहता हूं कि बाकी के खिलाफ आप क्या एक्शन लेने जा रही हैं ? इसके अलावा आईएसआई मार्क देने के पहले क्या उनके पानी की जांच प्रयोगशाला में की गई थी या नहीं?इसके अलावा क्या आप आईएसआई को यूरोपियन स्टेंडर्ड के बराबर लाने की कोशिश करेंगी ? आपने इस एक्ट में संशोधन लाने का जो सुझाव दिया है, उसका हम स्वागत करते हैं, किंतु पेस्टीसाइड्स बड़े पैमाने पर हमारे पीने के पानी में मिक्स हो रहा है, जो कि अत्यंत हानिकारक है। उसको देखते हुए जैसे पेस्टीसाइड को विदेशों में खासकर अमेरिका और इंग्लैंड में बंद कर दिया गया है, क्या यहां भी उसपर रोक लगाने का आप प्रयास करेंगी?
एक सर्वे में बताया गया है कि सी वाटर को भी पीने के योग्य बनाया जा सकता है। खासकर अरब देशों में डीसेलिनेशन प्लांट लगाकर इस सम्बन्ध में जांच की जा रही है। उसकी कॉस्ट पांच पैसे प्रति लिटर आ रही है, अगर वह बड़े पैमाने पर तैयार किया जाए। लेकिन हमारे यहां जो एक लिटर पानी की बोतल है, वह दस रुपए में मिलती है। उसमें रा वाटर दस नए पैसे प्रति लिटर पड़ता है। कॉस्ट आफ बैस्ट पॉसबलिटी आफ ट्रीटमेंट ३५ नए पैसे प्रति लिटर खर्चा आता है। इसके अलावा पैकिंग एंड बॉटलिंग एक रुपया दस नए पैसे, एक्सपैंडिचर एंड ट्रांसपोर्टेशन आफ बॉटलिंग दो रुपए प्रति लिटर बैठती है और रिटेलर को दो रुपए का मुनाफा बताया गया है। कुल मिलाकर देखा जाए तो ६.६५ रुपए प्रति बोतल खर्चा आता है, जिसमें काफी पैसा रिटेलर को चला जाता है। यह बोतल बाजार में दस रुपए प्रति लिटर के हिसाब से मिलती है। इस तरह से न तो हमारा कीमत पर कोई नियंत्रण है और न ही क्वालिटी पर कोई नियंत्रण है। मंत्री जी ने अभी कहा कि हमने इन कम्पनीज को सील कर दिया है, लेकिन यह पर्याप्त नहीं है। जो कम्पनीज गलत पानी लोगों को दे रही थीं, उन कम्पनीज के मालिकों के खिलाफ आप क्या एक्शन लेने जा रही हैं ?
इसके अलावा जो कम्पनीज सॉफ्ट डिं्रक्स या कोल्ड डिं्रक्स बनाती हैं, जैसे कोका कोला है, पेप्सी है, उनकी भी जांच होनी चाहिए। हो सकता है जब पानी में इतनी मिलावट है, पेस्टीसाइड्स हैं, तो इन शीतल पेय का क्या हाल होगा इसलिए इस पर भी ध्यान देना होगा। मेरा मंत्री महोदया से सवाल है कि जितनी भी इस सम्बन्ध में बड़ी यूनिट्स हैं, उनको सी वाटर प्रोसेस करके पीने का पानी बनाने की क्या आप इजाजत देंगी?आज इंडस्टि्रयल बैल्ट में देखा जाता है कि वहां दूषित पानी को बोतलों में पैक करके बड़े शहरों में बेचा जाता है, जिसकी वजह से बीमारियां बढ़ रही हैं। इस बारे में आप क्या एक्शन लेने जा रही हैं और राज्य सरकारों को क्या आपने इस सम्बन्ध में सूचना दी है?
श्री रामजीवन सिंह (बलिया, बिहार) : उपाध्यक्ष महोदय,. मैं सबसे पहले प्रैस, दूरदर्शन, आकाशवाणी और मीडिया को धन्यवाद देता हूं कि उन्होंने इस सम्बन्ध में जांच करके इन तथ्यों को जनता के सामने प्रस्तुत किया कि किस तरह से पानी में विष मिलाकर बेचा जाता है और कैसे लोगों के स्वास्थ्य और जान को खतरा पहुंचाया जाता है। मैं धन्यवाद देता हूं मानव संसाधन विकास मंत्री डां. मुरली मनोहर जोशी जी को, जिन्होंने अपने विभाग से इसकी जांच कराई और पाया कि पानी में पेस्टीसाइड्स पाए जा रहे हैं, जिससे लोगों के स्वास्थ्य को गम्भीर खतरा हो सकता है। मैं धन्यवाद देता हूं खाद्य एवम् नागरिक आपूर्ति मंत्री शरद यादव जी को जिन्होंने इस सम्बन्ध में कार्रवाई करते हुए आठ इकाइयों के आईएसआई मार्क को वापस लेने के निर्देश दिए हैं और आगे इस पर कार्रवाई कर रहे हैं। मैं धन्यवाद देता हूं स्वास्थ्य मंत्री जी को, जो संसदीय कार्य मंत्री भी हैं, जिन्होंने इस सम्बन्ध में त्वरित कार्रवाई की और जैसा अभी उन्होंने बताया कि लोगों की राय जानने के लिए इस सम्बन्ध में विज्ञापन भी दिया गया है। उसका गजेट भी निकाला है और एक महीने में उस विचार करके तद्नानुसार कार्रवाई करने की सोची है। अभी मंत्री जी ने बताया कि हमने इसकी जांच कराई है। क्या जो कच्चा पानी है उसके ट्रीटमेंट की, उसको साफ-शुद्ध और स्वास्थ्यवर्धक बनाने की, उसके ट्रीटमेंट की टैक्नोलॉजी विकसित नहीं हुई है? क्या अभी ऐसी टैक्नोलॉजी नहीं है जो पानी के विषैले तत्वों को पानी से पृथक कर सके। मेरा तो ख्याल है कि इसमें काफी विकास हुआ है और दुनिया के देशों में भी पानी बोतल में दिया जा रहा है। क्या उन देशों में इस तरह की टैक्नोलॉजी विकसित नहीं हुई है जो इन विषैले तत्वों को पानी से पृथक कर सके ? अगर विकसित हुई है तो भारत में उस टैक्नोलॉजी को लाने के लिए क्या किया जा रहा है? अगर भारत में इस तरह की कोई टैक्नोलॉजी विकसित नहीं हुई है तो इस तरह के विषैले पानी को बेचने की अनुमति क्यों दी जा रही है जिसका असर जनता के स्वास्थ्य पर पड़ रहा है।
दूसरा, सरकार ने लोगों की राय एक महीने के अंदर गजट प्रकाशित करके मांगी है। जब तक लोग अपनी राय देते हैं क्या तब तक इन लोगों को पेय के उत्पादन और वितरण की इजाजत दी जा सकती है ? क्या सरकार तब तक के लिए इस तरह के विषैले पानी पर रोक लगाने जा रही है ? हमारे देश में काफी बड़े पैमाने पर पेय-पदार्थों की खपत बढ़ती जा रही है। एक अनुमान के अनुसार इसकी खपत पिछले सालों में ४० प्रतिशत तक बढ़ी है। सन् १९९६ में इस देश में मात्र ९ करोड़ लीटर बोतल का पानी बिकता था, वह बढ़कर सन् १९९७ में ४२ करोड़ ६० लाख लीटर पर पहुंच गया। जहां पहले सन् १९९७ में केवल २०० करोड़ रुपये के पेय बेचे जाते थे अब वही आंकड़ा बढ़कर १००० करोड़ रुपये से ज्यादा हो गया है।
आज हमारे देश में चाहे होटल हो, रेस्तरां हो, पानी की बोतल का इस्तेमाल ९० प्रतिशत हो रहा है। घरों में इसका प्रतिशत २० के आस-पास है। कार्यालयों में भी पांच प्रतिशत के आसपास इसका इस्तेमाल हो रहा है। आज कोई भी समारोह हो, शादी-ब्याह हो, वहां भी बोतल के पानी का प्रचलन बढ़ता जा रहा है। इसलिए बोतल के पानी की जांच एक अहम प्रश्न है, क्योंकि इससे लोगों का स्वास्थ्य जुड़ा हुआ है। आज प्रमुख रूप से इस व्यवसाय में तीन-चार बड़ी कंपनियां हैं। कोला है, बिसलरी है। बिसलरी के बारे में मेरा कहना यह है क "On May 16, the licence of Bisleri had been cancelled by the Bureau of Indian Standards (BIS). Regardless, the brand continued manufacturing mineral water and sold it in bottles that bore ISI marks and BIS stickers… While the investigations were under way, the company allegedly wrote a letter to the PFA submitting that their licence had been renewed on May 31. "
जब १६ मई को उनका लाइसेंस रद्द कर दिया गया तो फिर १५ दिन के बाद उन्हें दुबारा लाइसेंस क्यों दिया गया? जून के महीने में चार अफसरों ने जांच की। जांच के बाद वे कह देते हैं कि पानी ठीक है। यह बात समझ में नहीं आती है कि १६ मई को पानी खराब था और ३१ मई को पानी ठीक करार दिया जाता है और लाइसेंस दे दिया जाता है। क्या मसला है। जिस मशीनरी के द्वारा सरकार ऐसी चीजों को रोकना चाहती है वही मशीनरी ऐसी गड़बड़ करे, समझ में आने वाली बात नहीं है। लगता है पानी में ही विष नहीं है प्रशासन में भी विष फैला हुआ है। इसको रोकने के लिए माननीय मंत्री जी क्या करने जा रहे हैं, यह मैं पूछना चाहता हूं।
   
श्री जी.एम.बनातवाला (पोन्नानी) :जनाबे डिप्टी स्पीकर इज्जतमाब, यह सैन्टर यकीनन सैन्टर फार साइंस एंड इन्वायर्नमेंट और मीडिया का काबिले मुबाकरबाद है कि उन्होंने बोतलबन्द पानी के बारे में चौंका देने वाले इंकेशाफ किए हैं। इनका जितना भी शुक्रिया अदा किया जाए, उतना कम है। साफ जाहिर है कि हमारा ब्युरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड और हमारी हुकूमत पानी की क्वालिटी के बारे में जबरदस्त लापरवाह रही है। इतने अहम मामले के अन्दर भी कैज्युयल एप्रोच पाई जाती है, बड़ी लापरवाही पायी जाती है। खुद मनिस्टर साहिबा के स्टेटमेंट को देखें, तो पता चलेगा कि इसमें भी इस बात का एहतराफ किया है, इस बात को माना गया है कि हमारी टैस्िंटग मैथ्डोलौजी आउट-ऑफ-डेट है। आप इस बात को खुद मान रही हैं। जब यह टैस्िंटग आउट-ऑफ-डेट थी,, तो अब तक पानी के इस अहम मामले में क्या हो रहा था? स्टेटमेंट में कहा गया है - डिं्रकिंग वाटर के सैम्पल्स को BIS में टैस्ट किया गया, तो बिलकुल ठीक पाया गया। जब इसकी टैस्िंटग सैन्टर फार साइंस एंड इन्वायर्नमेंट में की गई, चूंकि उनको बेहतर हस्सास हासिल है, लिहाजा उन्होंने यह जरासिम पाया कि पैस्टीसाइड्स हैं। यह साफ तौर पर इंकेशाफ करता है और यह माना जा रहा है कि हमारे पास सैन्सटिव मैथ्डोलौजी नहीं है। हमारे इक्विपमेंट्स आउट-ऑफ-डेट हैं। वे पैस्टीसाइड्स मालूम नहीं कर सके, जबकि बड़े पैमाने पर पैस्टीसाइड्स मौजूद हैं। एक तरफ उनको दरियाफ नहीं कर सके और दूसरी तरफ सैन्टर फार साइंस एंड इन्वायर्नमेंट की इंकेशाफ हुई है। इससे जाहिर होता है कि इस महकमें के बारे में इन्तहाई लापरवाही बरती जा रही है। मैं जानना चाहता हूं कि ब्युरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड की लैबोरेटरीज़ को उम्दा बनाने के लिए, बेहतर बनाने के लिए क्या कार्रवाई की जा रही है?बेहतर से बेहतर मशीनरी वहां पर मौजूद होनी चाहिए। मौजूदा मशीन और इक्विपमेंट की हालत काबिले रहम हैं। यह मामला दुरुस्त हो, बेहतर इक्विपमेंट मौजूद हों, इसके लिए क्या कार्यवाही की जा रही है?
जनाब, हमसे कहा गया है कि इन्टरनेशनली इस्टैबलिश्ड टैस्िंटग मैथ्ड्स को एडाप्ट किया जाएगा। अगर इन्टरनेशनली इस्टैबलिश्ड टैस्िंटग मैथ्ड्स की वजाहत जरूरी है, तो उसको क्लैरिफाई करना चाहिए। इस मैथ्ड में शायदWHOभी है, जिनके नाम्र्स निचले दर्जे के हैं। जिनमें लनियेंसी पाई जाती है और इसी इन्टरनेशनल नाम्र्स के अन्दर यूरोपियन इकोनोमिक कमीशन के नाम्र्स हैं, जोकि स्ट्रीक्ट और बेहतर माने जाते हैं। आप किनके मुताबिक चलेंगे? अगर इन्टरनेशनल मैथ्ड एडॉप्ट किए जाते हैं, तो उसकी टैस्िंटग के सिलसिले में क्या होगा?सारा मामला नाकिस और डिफैक्टिव टैस्िंटग की वजह से पैदा हो रहा है, आपको बेहतर सैन्सटिव मशीनरी, मार्डन मशीनरी लानी पड़ेगी। बेनुलअकवामी मियार पर जांच करने के लिए, इन्टरनेशनल मैथ्ड़्स के लिए वैटर इक्विपमेंट की जरूरत होगी।
बैटर इक्विपमैंट्स हासिल करने के सिलसिले में क्या कार्रवाई की जा रही है? केवल इनस्टुमैंट्स से काम नहीं चलेगा, ट्रेनिंग भी देनी चाहिए। हमारे लोग बेहतर मशीनरी और अप-टु-डेट मशीनरी के इस्तेमाल करने के सिलसिले में ट्रेंड होने चाहिए। इस सिलसिले में क्या हो रहा है और क्या किया जा रहा है? इसके बारे में भी कुछ रोशनी डाली जाए। हम से कह दिया गया कि इंटरनेशनली मैथ्डस, ऐस्टैब्लिश्ड मैथ्ड्स, टैस्टिड मैथ्ड्स इस्तेमाल किए जाएंगे लेकिन इंटरनेशनली एस्टैब्लिश्ड टैस्ट मैथ्ड्स को नाफिस करने के सिलसिले में आपको कितना वक्त लगेगा, इसके बारे में आपकी क्या तैयारियां हैं, इस सिलसिले में बयान में कोई वजाहत पाई नहीं गई।
हमें बतलाया गया है कि लैबोरेट्रीज में माइक्रो बायोलौजिस्ट या तो कम हैं या पाए नहीं जा रहे हैं। क्या यह सच है? यदि यह सच है हमारी लैबोरेट्रीज में माइक्रो बायोलॉजिस्ट की कमी है या वे पाए नहीं जा रहे हैं तो इस सिलसिले में कौन जिम्मेदार है? इस काबिले रहम सूरते हाल को दूर करने के सिलसिले में क्या किया जा रहा है?
आज के इंडियल एक्सप्रेस में कई सवालात उठाए गए हैं। उसमें १९९७-९८ की ऑडिट रिपोर्ट पर तवज्जो दिलायी है। क्या यह सच है कि कीमती इक्विपमैंट्स मंगाए गए? वे सालों-साल तक पैक्ड बंद पड़े रहे और उन्हें खोला नहीं गया। यहां तक कि आहिस्ता-आहिस्ता बहुत से औजार और पूर्जे गायब हो गए, चोरी कर लिए गए या खो गए। इस लापरवाही के सिलसिले में क्या कार्रवाई की गई? इस वाकये पर पांच साल गुजर जाना हैरानी वाली बात है। इसमें क्या किया गया है, किस को दोषी करार दिया गया है और क्या कदम उठाए गए? इस किस्म की जो लापरवाही है, मुजरिमाना फहल को दूर करने के सिलसिले में क्या किया जा रहा है? ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैडर्ड की काबलियतों को बेहतर बनाने के सिलसिले में क्या कार्रवाई की गई है?
मोहतरम डिप्टी स्पीकर साहब, आठ कम्पनियों के आईएसआई ट्रेड मार्क ले लिए गए हैं लेकिन उनके जो माल बाजार में हैं, उस सिलसिले में क्या किसी किस्म की वजाहत नहीं है? तकरीबन ७ फरवरी को सैंटर फॉर साईंस ऐंड एनवारयनमैंट की स्टडीज का इनकशाफ हुआ है और १८ फरवरी को हमारे स्टैडर्ड के सिलसिले में यह गैजट किया गया तथा कहा गया कि इंटरनैशनल मैथ्ड्स इस्तेमाल किए जाएंगे जो पहली अप्रैल से लागू होंगे। पहली अप्रैल को बहुत वक्त है। इस दरम्यान क्या इस किस्म के पैस्टिसाइड्स वाली बोतलें बाजार में बराबर बिकती रहेंगी, लूट बराबर जारी रहेगी और क्या सौदे आमा के साथ यह खेल, घिनौना खेल होता रहेगा। इस सिलसिले में अफसोस है कि स्टेटमैंट में किसी किस्म की कोई वजाहत नहीं है। मनिस्टर साहिबा को खास तौर पर खातून होने के नाते लोगों की पोजिशन का ख्याल रखना चाहिए और खसूसी तवज्जो देनी चाहिए। इस तरह सहते आमा के साथ खिलवाड़, घिनौना खिलवाड़ कब तक होता रहेगा?
15.00 hrs. यह लूट का खुला बाज़ार कब तक गर्म रहेगा? आखिर में एक बात कहते हुये मैं आपसे इज़ाज़त लूंगा और वह यही है कि जब गवर्नमेंट बैनुलअकवामी सख्त मयार मुकर्रर करेगी तो फिर इसके क्या इमकानात हैं कि कीमतें और बढ़ेंगीं। इसका मतलब यह नहीं कि नेशनल स्टैंडर्ड सही स्टैंडर्ड के साथ कौम्प्रोमाइज़ न किया जाए। मतलब यह है कि आज मुनाफाखोरी बोतलबंद पानी के बारे में इन्तहा पर पहुंची हुई है, क्लाइमैक्स पर पहुंची हुई है। इस सिलसिले में आदादो शुमार दिये गये हैं, मैं उनमें नही जाना चाहता लेकिन हुकूमत से इस बात का तअय्युन लेना चाहता हूं कि इस बात का ख्याल रखा जायेगा कि क्वालिटी पर कंट्रोल हो और जो जबरदस्त मुनाफाखोरी और लूट का बाजार गर्म है, उस पर कंट्रोल हो और उसकी कीमतों को बराबर इस तरह रखा जाये कि सही कीमतें हों।

श्रीमती सुषमा स्वराज : उपाध्यक्ष जी, मेरे तीन सांसद साथियों ने इस ध्यानाकर्षण प्रस्ताव के संबंध में प्रश्न पूछे हैं। इससे पहले कि मैं उन प्रश्नों का सिलसिलेवार उत्तर दूं, मैं इस विषय पर हो रही कुछ भ्रान्तियों को दूर करना चाहूंगी। मैं आपके माध्यम से सदन को यह बताना चाहती हूं कि सन् २००० से पहले हमारे देश में पानी को खाद्य पदार्थ माना ही नहीं जाता था। मोहत्तरम बनातवाला साहब जिस हुकूमत को लापरवाह हुकूमत कहकर मुखातिब कर रहे थे, मैं उनसे बड़े ही अदब के साथ कहना चाहूंगी कि उसी हुकूमत ने उपभोक्ताओं की परवाह करते हुये पहली बार सन् २००० में वाटर को फूड का दर्जा दिया। जहां तक इस बंद बोतल का सवाल है…( व्यवधान)

डॉ. रघुवंश प्रसाद सिंह (वैशाली):हम तो सात रुपये लीटर वाला दूध डी.एम.एस. से लेते रहे हैं…( व्यवधान)उपाध्यक्ष महोदय, जिस देश में पानी १० रुपये लीटर बिकेगा, उस देश का नाश होगा।

उपाध्यक्ष महोदय : रघुवंश बाबू, आप क्यों ख्वामखाह बात उठा रहे हैं। मंत्री महोदया ने ऐसा कुछ गलत नहीं कहा जिससे आप बोलें।

श्रीमती सुषमा स्वराज: रघुवंश बाबू, आप और हम तो नलके और कुएं का पानी पीते हैं, आप किस के चक्कर में पड़ रहे हैं? हम तमाम लोग ७ रुपये लीटर दूध और नलके का पानी पीने वाले हैं। हम बोतलबंद पानी पीने वालों की बात करते हैं। आप बोलते हुये जंचते नहीं। आप गरीबों के मसीहा हैं। यहां बात सम्पन्न लोगों के बारे में हो रही है।

उपाध्यक्ष महोदय : रघुवंश बाबू, मंत्री महोदया तो आपकी तारीफ कर रही हैं।

श्रीमती सुषमा स्वराज: जब पनघट या कुएं बावड़ी की बात आयेगी तब बात करूंगी क्योंकि सारे ईश्यूज़ पर बोलने की जरूरत नहीं होती।

उपाध्यक्ष महोदय : मैंने सबसे बड़ी गलती यह की कि ध्यानाकर्षण प्रस्ताव पर एक मैम्बर को केवल एक सवाल पूछने की इज़ाजत होती है। मैंने इतने सारे सवाल पूछने की इज़ाजत दे दी लेकिन आपके ऊपर पाबंदी लगाना ठीक नहीं है।

श्रीमती सुषमा स्वराज: उपाध्यक्ष महोदय, आप मुझ पर पाबंदी लगा दीजिये, मैं खुश हूं। कुछ बातें संकेत में होती हैं। मै आपका संकेत समझ रही हूं। इसलिये मुझे लगता है कि लगभग सवाल एक से आये हैं जिसके लिये लम्बे उत्तर की जरूरत नहीं होगी। मैं बनातवाला साहब से कहना चाहूंगी कि इसी हुकूमत ने उन उपभोक्ताओं की परवाह करते हुये जो लोग बंद बोतल का पानी पीते हैं, उस पानी को खाद्य का दर्जा दिया ओर बी.आई.एस. के अंतर्गत उसे दर्ज कराया।

जब हम पी.एफ.ए. एक्ट में किसी को फूड की संज्ञा देते हैं तो उसके स्टैंडड्र्स बनवाते हैं। हमारे यहां ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडड्र्स नाम की बड़ी प्रामाणिक संस्था उन स्टैंडड्र्स को तय करती है। हमने उनसे कहा कि इसके स्टैंडड्र्स बनाइये। जो स्टैंडड्र्स उन्होंने बनाये, उसके साथ मैथड भी उन्होंने तय किया, जिससे वे स्टैंडड्र्स जाने जाएं। बिलो डिटैक्टेबल लमिट स्टैंडर्ड उन्होंने तय किया फिर उन्होंने पैक्ड कॉलम मैथड तय किया, यानी जो बोतलबंद पानी बनाने वाली कंपनियां है, अगर उनके पानी को पैक्ड कॉलम मैथड से जांचा जाए और उसमें बिलो डिटैक्टेबल लमिट में पैस्टीसाइड्स न पाये जाएं तो वह पानी खरा माना जायेगा, वह पानी सही माना जायेगा। इसलिए जो सबसे ज्यादा चिंता रामजीवन बाबू और श्री नरेश पुगलिया जी ने व्यक्त की और जिससे संबंधित कई सवाल उन्होंने खड़े कर दिये कि अवेलेबल स्टॉक का क्या होगा, यदि एक अप्रैल से इसे लागू करेंगे तो इस बीच में क्या होगा, कंपनियों को केवल सील क्यों किया, उनका पानी आपने खत्म क्यों नहीं किया। वे लोग विष पिला रहे हैं, ऐसा नहीं है। मैंने प्रारंभ में कहा कि मैं वे भ्रांतियां दूर कर दूं। जो मैथड और स्टैंडर्ड बी.आई.एस. ने तय किये थे, हैल्थ मनिस्ट्री ने नोटिफाई किये थे, जो पी.एफ.ए. में दर्ज हैं, उन तमाम स्टैंडड्र्स और मैथड्स के ऊपर यह पानी खरा है, यह पानी विष नहीं है। यह पानी उन स्टैंडड्र्स को मीट करता है। इसलिए आज के मौजूदा कानून के तहत उन कंपनियों पर कोई एक्शन लेना नहीं बनता है।

उपाध्यक्ष महोदय, जहां तक सी.एस.ई. की बात है, जब इन्होंने यह तय किया तो इस बीच में मैं आपको यह भी बता दूं कि बी.आई.एस. जब स्टैंडड्र्स तय करता है तो उन्होंने नियमों में यह भी कह रखा है कि हम अपने स्टैंडड्र्स को पांच वर्षों के बाद रिव्यू करेंगे, उनकी समीक्षा करेंगे। क्योंकि तकनीक बदलती है, मैथड्स ज्यादा से ज्यादा स्टि्रन्जैन्ट होते जाते हैं तो हम लोगों को लगता है कि हम भी विश्व से पीछे क्यों रहें। जो अन्तर्राष्ट्रीय मंचों पर मानदंड आ रहे हैं, भारत को उन्हीं के साथ जाना चाहिए। अगर मैथड्स बेहतर हो रहे हैं तो हमें भी आगे आना चाहिए। इसलिए उन्होंने नियमों में ही रख दिया कि हर पांच साल के बाद उनका रिव्यू होगा। वैसे भी मई, २००३ में ये स्टैंडड्र्स रिव्यू होने हैं। लेकिन उससे पहले सी.एस.ई. वालों ने रिपोर्ट करके इसे उस मैथड से जांचा, जो इंटरनेशनल मैथड है। तभी मैंने अपने प्रारम्भिक वक्तव्य में कहा कि जिस मैथड से उन्होंने जांचा, वह मैथड ज्यादा सैन्सिटिव है, बजाय इस मैथड के जो हमने बी.आई.एस. से बनावाकर नोटिफाई किया था। जो मैथड हमने बनाया था, उसके बारे में मैंने बताया कि वह पैक्ड कॉलम मैथड था। जो मैथड इंटरनेशनली एक्सैप्टेबल है, उसे कैपिलरी मैथड कहते हैं। जब कैपिलरी मैथड से तय किया और क्योंकि उनकी डिटैक्टेबल लमिट मर गई तो उन्हें लगा कि इसमें पैस्टीसाइड्स हैं। तब हमें भी लगने लगा कि अगर हमारे यहां का उपभोक्ता पैसा देकर पानी पीता है तो वह वल्र्ड स्टैंडर्ड से अछूता क्यों रहे। इसलिए बी.आई.एस. वालों ने स्वयं यह तय किया। क्योंकि एक रिपोर्ट आ गई है, जिसमें उन्होंने कहा कि हमें स्टैंडर्ड भी क्वांटीफाई करने चाहिए और मैथड भी वह अपनाना चाहिए जो इंटरनेशनल हो। उन्होंने कहा कि हम अपने मैथड पर ही क्यों लगे रहें, हम भी नये स्टैंडड्र्स बनाते हैं और हैल्थ मनिस्ट्री कहती है कि उसे नोटिफाई करे और नोटिफाई करने से पहले उसे पब्लिक गजट करना पड़ता है, वह पब्लिक गजट करे।

उपाध्यक्ष महोदय, बी.आई.एस. में हमने नया प्रस्ताव दिया, जिसका दो बार जिक्र मैंने अपने प्रारम्भिक वक्तव्य में किया, जिसमें उन्होंने बिलो डिटैक्टेबल लमिट के बजाय, मिनरल वाटर के लिए भी और पैक्ड वाटर के लिए भी क्वांटीफाई कर दिया, जैसा मैंने कहा ०.०००१ मलिग्रम. प्रति लीटर और ०.०००५ मलिग्राम प्रति लीटर, तो क्वांटीफाई हो गया बजाय एम्बीगुअस होने के बिलो डिटैक्टेबल लमिट होने के ।

दूसरा उन्होंने कहा कि इंटरनेशनली एक्सैप्टेबल स्टैंडड्र्स यानी इंटरनेशनली एक्सैपटेबल शब्द रखा कि आज कैपिलरी सबसे बड़ा मैथड है। जिस तरह आज तकनीक आगे जा रही है, कल को इससे भी ज्यादा सैन्सिटिव आ जाए तो इंटरनेशनली एक्सैप्टेबल में यह भी एक गुंजाइश रहेगी कि कैपिलरी से अगर कोई बड़ा मैथड है तो वह भी हम अपना सकते हैं। बी.आई.एस. वालों ने हमें जो स्टैंडड्र्स दिये, हमने नोटिफाई कर दिये हैं। अब हम उन पर पब्लिक आपत्तियां मंगाते हैं। लॉ मनिस्ट्री को हमने कहा था कि १५ दिन में मंगा लो। उन्होंने कहा कि ३० दिन वाजिब होंगे। अब उसमें जितने स्टॉक होल्डर्स हैं, जो पानी बनाने वाली कंपनियां हैं, वे भी अपनी बात रखेंगी, उपभोक्ता भी अपनी बात रखेंगे, अपने प्रोस एंड कांस भी देंगे, वे सारी चीजें आयेंगी तो एक सैन्ट्रल कमेटी फॉर फूड स्टडीज बनी हुई है, जिसे सीसीएफएस कहते हैं। वे सारी की सारी चीजें सी.सी.एफ.एस. के सामने रख दी जायेंगी। उसके बाद वे लोग जो कुछ तय करेंगे, उसे हम नोटिफाई करेंगे। इसमें से जो बातें निकलती हैं वे केवल इतनी ही हैं कि उस समय देश की परिस्थितियां और सबको देखते हुए, बी.आई.एस. ने जो स्टैंडड्र्स बनाये, उन्हें हैल्थ मनिस्ट्री ने नोटिफाई किया, उनकी पूरी-पूरी अनुपालना हो रही है। लेकिन आज चूंकि इस रिपोर्ट के बाद यह लगा और यह रिपोर्ट न भी आती तो मई, २००३ में हो सकता है समीक्षा के बाद यह लगता कि स्टैंडड्र्स बढ़ाने चाहिए, मैथड्स भी बदलना चाहिए तो बी.आई.एस. ने जो नया मैथड दिया है, बी.आई.एस. ने जो नये स्टैंडड्र्स प्रस्ताव किये हैं, वे प्रस्तावित चीजें हमने जनता की आपत्तियां मंगाने के लिए रख दी हैं।

एक महीने में उनका जवाब आ जाएगा। जवाब के बाद सीसीएफएस की मीटिंग करनी होगी तो कर लेंगे नहीं तो उनके व्यूज लेने के बाद जो राय बनेगी, उसे हम नोटिफाइ करके एक्ट में जिस तरह के संशोधन की आवश्यकता होगी, वह करेंगे। लेकिन कोई अगर यह समझे कि आज पानी में ज़हर मिला रहे हैं या यह पानी पीने योग्य नहीं है या इस पर कोई ऐक्शन लेने की बात है तो ऐसा नहीं है। एक बात रामजीवन सिंह जी ने उठाई थी कि पहले चार लोग सस्पेन्ड किये। वे चारों लोग जाने के बाद वापस आ गए और वापस आकर उन्होंने फिर सर्टिफाइ कर दिया। मैं उनको बता दूँ कि वह केस भी इस हुकूमत से संबंधित नहीं है। वह मई, १९९२ का बिस्लेरी का केस है जहां पहले गए, पहले सस्पेन्ड किया और बाद में चालू कर दिया, १९९२ की हुकूमत वाला यहां कोई बैठा हो तो वह उसके लिए उत्तरदायी होगा। न शरद यादव जी उसके लिए उत्तरदायी हैं, न सुषमा स्वराज उत्तरदायी हैं और न मौजूदा हुकूमत उस केस के लिए उत्तरदायी है जो आपने सामने रखा था।

मुझे लगता है कि जो प्रश्न रखे गये थे, उनका समाधानकारक उत्तर मैंने दे दिया है।

SHRIMATI MARGARET ALVA (CANARA): The most polluted water is supposed to be what is being supplied by the Railways. The water bottled by the Railways and supplied by them has been found to be the most polluted and damaging of all the bottled water. इसके लिए क्या कर रहे हैं आप? This is manufactured by the Railways, under their supervision. … (Interruptions) This water is bottled by the Railways and supplied by the Railways. The report says that it is the most polluted. इसके लिए आप क्या कर रहे हैं?

MR. DEPUTY-SPEAKER: I think, the clarificatory questions asked by each hon. Member have been replied to.

… (Interruptions)

SHRIMATI MARGARET ALVA : Sir, this is also bottled water.

MR. DEPUTY-SPEAKER: I think, she wants some further clarification.

श्रीमती मार्ग्रेट आल्वा:रेलवे वाला मामला कौन देख रहा है? यह प्राइवेट नहीं है, रेलवे के सुपरविजन में बन रही है। उसके बारे में बताइए। They are supplying it to the passengers in the trains. रेलवेज़ का बॉटल्ड वाटर कौन देख रहा है? उसकी कौन जिम्मेदारी ले रहा है? रेलवेज उसको नहीं देख रहा है क्या?

श्रीमती सुषमा स्वराज : अल्वा जी, आप दोबारा सवाल रिपीट कर दें।

श्रीमती मार्ग्रेट आल्वा: मैंने कहा कि उस रिपोर्ट में जो रेलवेज़ में पानी सप्लाई होता है और रेलवेज़ के सुपरविजन में बनता है वह सबसे ज्यादा पॉल्यूटेड है, ऐसी एक रिपोर्ट निकली है। मैं पूछती हूँ कि यह हैल्थ मनिस्ट्री में आएगा या रेलवे मनिस्ट्री इसको देखेगी?

श्रीमती सुषमा स्वराज : पानी जो भी बना रहा है, चाहे रेलवेज़ उसको सप्लाई कर रहा है या देशी कंपनियां बना रही हैं या विदेशी कंपनियां बना रही हैं, सबको इन मानदंडों पर खरा उतरना होगा और हमारा ही मंत्रालय उसको मॉनीटर करेगा।

श्री नरेश पुगलिया: आपका कहना है कि उनकी कोई गलती नहीं है, फिर ८ यूनिट्स का आई.एस.आई. मार्क क्यों वापस लिया गया? इसके पीछे क्या कारण हैं?

श्रीमती सुषमा स्वराज : लाइसेन्िंसग अथॉरिटी फूड एंड कंज्यूमर अफेयर्स मनिस्ट्री है। इसलिए यह जो सील करने वाला मामला है यह उनसे संबंधित है। स्वास्थ्य मंत्रालय से इसका संबंध नहीं है।

श्री नरेश पुगलिया: इसका मतलब यह है कि क्वालिटी खराब बनाई हैं, आई.एस.आई. मार्क के बराबर नहीं बनाई इसलिए आई.एस.आई. मार्क बंद हुआ। इसका मतलब आप हाउस को मिसलीड कर रही हैं।

श्रीमती सुषमा स्वराज : मैं हाउस को बिल्कुल मिसलीड नहीं कर रही हूँ। जो स्वास्थ्य मंत्रालय से संबंधित प्रश्न थे, उनका मैंने सही जवाब दिया है। लाइसेंसिंग अथॉरिटी फूड एंड कंज्यूमर अफेयर्स मनिस्ट्री है।

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MR. DEPUTY-SPEAKER: Now we shall take up matters under rule 377.

15.17 hrs.