Lok Sabha Debates
Discussion On The Motion For Consideration Of The Uttaranchal (Alteration Of ... on 5 December, 2006
an> Title: Discussion on the motion for consideration of the Uttaranchal (Alteration of Name) Bill, 2006.
MR. DEPUITY-SPEAKER: Now, we shall take up Item No.15.
We have very limited time. Hence, I would request the hon. Members to be very brief when they make their speeches on this Bill.
THE MINISTER OF STATE IN THE MINISTRY OF HOME AFFAIRS (SHRI SHRIPRAKASH JAISWAL): Hon. Deputy-Speaker, Sir, I beg to move:
“That the Bill to alter the name of the State of Uttaranchal, be taken into consideration.” The Legislative Assembly of Uttaranchal has adopted a Resolution on 5th October, 2005 that the name of the State of Uttaranchal should be changed to Utharakhand stating inter alia that the general public of the State is of the view that on the basis of mythology and history, the name of the State should be Utharakhand. The Government of Uttaranchal also requested the Central Government to take further necessary steps to alter the name of the State. The Government of India decided to accept the request of the Legislative Assembly of Uttaranchal. The Uttaranchal (Alteration of Name) Bill, 2006 seeks to alter the name of the State of Uttaranchal to the State of Uttarakhand by amending the relevant provision of the Constitution and also by providing for consequential provisions.
I commend the Uttaranchal (Alteration of Name) Bill, 2006 to this august House for consideration and passing.
MR. DEPUTY-SPEAKER: Motion moved:
“That the Bill to alter the name of the State of Uttaranchal, be taken into consideration.” gÉÉÒ ¤ÉSÉÉÒ É˺Éc ®É´ÉiÉ '¤ÉSÉnÉ' (+ÉãàÉÉä½É): माननीय उपाध्यक्ष जी, उत्तराखंड जो शब्द है, इसके ऊपर पूरा सम्मान और अपना समर्पण का भाव व्यक्त करते हुए मैं इस बात का निवेदन करना चाहता हूं कि जब उत्तरांचल के नाम पर विचार हुआ कि राज्य को क्या नाम दिया जाए तो काफी विचार-मंथन के बाद उत्तरांचल का नाम प्रशासनिक आधार पर, ऐतिहासिक आधार पर और वहां की स्थिति के आधार पर निश्चित किया गया। यह उत्तरांचल दो शब्दों को मिलाकर सामने आया है। एक शब्द है - उत्तरा, और दूसरा शब्द है - अंचल। जो उत्तरा शब्द लिया गया है, यह उत्तराखंड का पहला अंश लिया गया और कूमार्ंचल शब्द से अंचल शब्द लिया गया क्योंकि इसके आधे भाग को कूमार्ंचल के नाम से जाना जाता है। इसके आधार परजब यहां विधाई प्रक्रिया शुरू हुई तो भारतीय जनता पार्टी चूंकि उत्तरांचल राज्य के गठन के आंदोलन में सक्रिय रही, उसकी मांग प्रशासनिक आधार पर रही, उत्तर प्रदेश की विधान सभा के भीतर भी अनेक बार संकल्प उसके द्वारा प्रस्तुत किये गये।
सर्वप्रथम २ जुलाई, १९९० को उत्तरांचल का संकल्प उत्तर प्रदेश विधान सभा में प्रस्तुत हुआ। वह स्वीकार नहीं हो सका। १२ अगस्त १९९१ को पुन: उत्तर प्रदेश विधान सभा ने संकल्प पारित किया कि उत्तरांचल राज्य का गठन हो क्योंकि सारा उत्तरांचल क्षेत्र उत्तर प्रदेश के भीतर था। वहां से यह संकल्प केन्द्र सरकार के पास आया लेकिन उस पर आगे कार्रवाई नहीं हो पाई। १९९८ में जब यहां माननीय अटल बिहारी वाजपेयी जी के नेतृत्व में एन.डी.ए. सरकार का गठन हुआ, तब ड्राफ्ट बिल संविधान के अनुच्छेद ३ के अंतर्गत उत्तर प्रदेश की विधान सभा को भेजा गया। वहां विचार-विमर्श के बाद उत्तर प्रदेश की विधान सभा ने संस्तुति की कि उत्तरांचल नाम से राज्य का गठन हो। वह बिल लैप्स हो गया क्योंकि पार्लियामैंट डिज़ॉल्व हो गई। उसके बाद पुन: १३वीं लोक सभा के समय उत्तरांचल राज्य के गठन के लिए बिल ड्राफ्ट हुआ। सन् २००० में फिर उसको भेजा गया और पुन: अपनी संस्तुतियों के साथ उत्तरांचल नाम से इसका गठन हो, यह संस्तुति उत्तर प्रदेश विधान सभा ने की। मैं यहां एक बात और ध्यान में लाना चाहूंगा कि वर्ष १९९८ का जो सरकारी विधेयक ड्राफ्ट हुआ था, उसमें भारत सरकार की ओर से प्रपोज़ल दिया गया था कि उत्तराखंड नाम ड्राफ्ट बिल में था लेकिन उत्तर प्रदेश की विधान सभा ने उसको जस्टिफाई नहीं किया यह कहकर कि उत्तरांचल नाम से गठन हो। अंततोगत्वा, ९ नवंबर २००० को इसी माननीय सदन में चर्चा और अपने प्रतिवेदनों के साथ उत्तरांचल राज्य गठन विधेयक, जो कि सन् २००० का उत्तर प्रदेश पुनर्गठन विधेयक था, ध्वनि मत से पारित हुआ। फिर महामहिम राष्ट्रपति जी की स्वीकृति उसको मिली और २५ अगस्त २००० को जब स्वीकृति मिली, तदनुरूप ९ नवंबर २००० में उत्तरांचल राज्य अस्तित्व में आया। कहीं कोई नाम-परिवर्तन का विरोध नहीं, कहीं कोई आंदोलन नहीं। आज तक की तारीख में भी कोई बंद, धरना या जेल भरो का कार्यक्रम नहीं हुआ।
यह कहा जाता है कि जो उत्तरांचल की मौजूदा विधान सभा है, उस विधान सभा में कांग्रेस पार्टी ने चुनाव से पूर्व अपने घोषणा-पत्र में यह लिख दिया था कि हम अगर सत्ता में आए तो उत्तरांचल का नाम बदल कर उत्तराखंड कर देंगे। केवल यह एक इगो प्वाइंट लेकर, कि हमारा यह कमिटमेंट है। उसमें तो कई कमिटमेंट हैं, जैसे रोजगार, विकास, उत्थान एवं जनकल्याण आदि के हैं, उनके प्रति ध्यान न देते हुए, केवल हमारा यहां संख्या बल है, उसे लेकर आए। उन्होंने अक्तूबर के महीने में एक संकल्प पारित करके इस विधेयक को आर्टीकल थ्री में भेजा, उसके साथ उन्होंने लौटाया है। मैंने जो तथ्य प्रस्तुत किए कि उत्तराखंड और कुमाऊं का कोई आधार होना चाहिए, जिसके आधार पर यह नाम तय किया गया, इसके लिए मैं उल्लेख करना चाहूंगा, चूंकि आज जो विधेयक प्रस्तुत किया गया, उसके उद्देश्य और कारणों में यह अंकित किया गया है, यह कथन है कि राज्य की साधारण जनता का यह विचार है कि पुराण और इतिहास के आधार पर राज्य का नाम उत्तराखंड होना चाहिए। इसमें एक तो पब्लिक ओपनियन एलसिट नहीं की गई है, उसे अगर हम कहीं से वेव करेंगे, जनता की क्या राय है, संसद के द्वारा अगर नाम में परिवर्तन करना है तो सन् २००४ में लोकसभा के चुनाव संपन्न हुए हैं और वहां से हमारी पार्टी के तीन माननीय सांसद चुन कर आए हैं। उनका यह कहना कि जनता का यह विचार है, जनता का यह विचार नहीं है, अगर तर्क के लिए मानें, सरकार का यह विचार है कि पुराण और इतिहास के आधार पर नाम का परिवर्तन होना चाहिए तो उन्हें यह सिद्ध करना होगा कि कौन से इतिहास में या कौन सी ऐसी घटनाओं में इस क्षेत्र का नाम उत्तराखंड रहा है।
माननीय उपाध्यक्ष जी, मैं विनम्रता पूर्वक निवेदन करना चाहूंगा कि वर्ष १९६० से पूर्व इस क्षेत्र में जब आठ जिले थे, इन आठ जिलों के क्षेत्र को केवल कुमाऊं क्षेत्र के ऩाम से जाना जाता था और इसकी एक कुमाऊं कमिश्नरी बनी थी। सन् १९४७ में देश की आजादी के बाद पहले यह प्रोविंस ऑफ कुमाऊं ब्रटिश टाइम में था और उसके बाद इसे कुमाऊं कमिश्नरी का दर्जा दिया गया। सन् १९४९ में टिहरी रियासत का भी भारत में जब विलय हुआ तो पुन: टिहरी को भी इसमें सम्मिलित किया गया और यह प्रोविंस ऑफ कुमाऊं, कुमाऊं कमिश्नरी एक कमिश्नरी के रूप में रहा। १९६० में पहली बार चेंज हुआ है। अगर हम इतिहास को देखें तो पता चलेगा कि १९६० में यह सूचना भारत सरकार के पास थी।…(व्यवधान) हमारे साथ थोड़ा सा न्याय होना चाहिए। इसका औचित्य क्या है, ऐसा तो नहीं है कि कहीं हवा में इसका नाम रख दिया गया। यह बहुत गंभीर विषय है और इसलिए यह गंभीर विषय है कि आज तक इसी संसद के द्वारा पारित किए गए किसी राज्य के नाम का परिवर्तन माननीय संसद के द्वारा नहीं किया गया। यदि मुझे इस बारे में बताया जाए तो मैं संशोधन कर लूंगा।…(व्यवधान) संसद ने गलती नहीं की है। संसद में सभी दलों के माननीय सदस्य मौजूद थे। अगर कोई ऐसी ग्रास मिस्टेक हो तो उसे जरूर सुधारना चाहिए, यह तो अधिकार है, संख्या दल के आधार पर अधिकार है।
माननीय उपाध्यक्ष जी, मैं सन् १९६० का उल्लेख कर रहा था। १९६० में जब यह लगा कि चाइना की ओर से कोई डिस्टरबेंस हो सकती है, क्योंकि हमारा उत्तरांचल का जो उत्तरी क्षेत्र है, यह तिब्बत और चाइना से लगा है। उस समय तीन नये जिले बनाए गए - चमौली, उत्तरकाशी और पिथौरागढ़। ये तीनों जिले चाइना के साथ लगे थे और इन तीन जिलों का एक नया डिवीजन बना, उसे उत्तराखंड डिवीजन का नाम दिया गया। इस प्रकार से दो डिवीजन हो गए - उत्तराखंड डिवीजन और कुमाऊं डिवीजन। नीचे का हिस्सा, जो बर्फीले क्षेत्र से नीचे था, वह कुमाऊं डिवीजन हो गया और ऊपर का हिस्सा उत्तराखंड डिवीजन हो गया। उसी समय में उत्तर प्रदेश के जितने भी विधान पारित हुए, भूमि संबंधी कानून, जो हमारे समक्ष है, मैं उसे लेकर आया हूं। यह भी जब तीन जिले बना दिए गए, उत्तराखंड डिवीजन बन गया तो वहां की जो जमींदारी है, उसके लिए जो रिफाम्र्स का कानून आया, उसे उत्तर प्रदेश की विधान सभा ने पारित किया और आज भी यह लागू है।[rep15] महोदय, उत्तरांचल सरकार ने इसे अंगीकृत किया है। उत्तरांचल की विधान सभा ने इसे चेंज नहीं किया है। इसका नाम है-
“This Act may be called the Kumaon and Uttarakhand Jamindari Abolition and Land Reforms Act, 1960. It extends to the whole of Kumaon and Uttaranchal Division.” मैं इसकी डिटेल में नहीं जा रहा हूं।
इसी तरीके से उन्होंने जो रूल फ्रेम किया। वह इस प्रकार है- The Uttarakhand and Kumaon Land Revenue Settlement Rules, 1960. इस तरीके से दर्जनों विधेयक पारित हुए हैं। उनमें दो शब्द आते रहे वे हैं 'उत्तराखंड' और 'कुमाऊं'। मैं पार्लियामेंट की ऑफीशियल साइट से एक उल्लेख करना चाहता हूं जिसका प्रिंट मैंने निकाला है। इसमें लिखा है- “The name of the socio-cultural region of Kumaon is believed to have been derived from “Kurmanchal” meaning land of the Kurma Avtar, the tortoise incarnation of Lord Vishnu, the preserver of Hindu trinity.” यानी कुमाऊं और कूमार्ंचल एक ही शब्द है और इस कारण हमने दो शब्दों का मेल कर के इसका नाम उत्तरांचल किया। जैसा मैंने पहले उल्लेख किया "उत्तराखंड" का 'उत्तरा' और "कूमार्ंचल" का 'अंचल' लिया गया और "उत्तरांचल" बना दिया गया। 'उत्तराखंड' शब्द के प्रति पूरा सम्मान व्यक्त करते हुए, मैं कहना चाहता हूं कि केवल उत्तराखंड का नाम देकर शेष कूमार्ंचल और कुमाऊं को छोड़ने से कोई भी हित सिद्ध होने वाला नहीं है और इसका कोई भी स्पष्ट उल्लेख इस विधेयक के उद्देश्य और कारणों में नहीं दिया गया है।
महोदय, अगर देखें, तो १९९४ में एक बहुत बड़ा आन्दोलन राज्य के लिए हुआ और उसमें १ और २ अक्तूबर, १९९४ को रामपुर तिराहा कांड हुआ जिसका हम लोगों को आज भी बहुत दुख है क्योंकि उसमें अनेक लोग मारे गए थे। गोलियां चलीं और बहुत बड़ा विरोध हुआ। उसके बाद ७ दिसम्बर, १९९४ को ही यहां हमारे नेतृत्व में यह आश्वासन दिया गया कि जब कभी भी हम भविष्य में शासन में आएंगे तो राज्य का निर्माण करेंगे। ७ दिसम्बर, १९९४ से आज दिन तक किसी भी प्रकार का राज्य संबंधी कोई आंदोलन नहीं हुआ और न ही किसी प्रकार का नाम संबंधी आंदोलन या विवाद खड़ा हुआ। लोग उत्तराखंड भी कहते रहे और उत्तरांचल भी कहते रहे। दोनों का समानार्थ लेकर चलते हैं। इसलिए अब इस प्रकार का संशोधन लाकर एक नया विवाद क्यों पैदा किया जा रहा है? मैं समझता हूं कि यह ठीक नहीं है। यदि आप अपना कोई पूर्वाग्रह इसके माध्यम से पूरा करना चाहते हैं और इसलिए इस विषय को ला रहे हैं, तो यह दुर्भाग्य की बात है।
महोदय, १९९४ के उस आंदोलन के बाद कई लोग कई प्रकार के भ्रम फैलाने की कोशिश करते हैं, ऐसा नहीं है। अलग राज्य का आंदोलन पहले भी था और ऐसा नहीं है कि उसमें लोग नहीं थे। उसमें सारे लोग थे। उसमें हमारे जनरल खंडूरी साहब, प्रदेश संघर्ष समति के अध्यक्ष थे, वे जेल गए। बलराज पासी जी जेल गए। हजारों लोगों ने जेलों की यात्रा की जिसके कारण राज्य के प्रति बड़ा कमिटमेंट हुआ और फिर राज्य का गठन हुआ।
उपाध्यक्ष महोदय, मैं थोड़ा सा समय ले रहा हूं क्योंकि इसमें इतिहास की बात कही गई है। इसलिए मुझे थोड़ा इतिहास बताना पड़ेगा। १७९० से पहले का यहां का इतिहास अलग है। उससे पहले यहां चंद्रवंश, पालवंश, कत्थूरीवंश और शाहवंश आदि-आदि अनेक शासक थे और यह पूरा का पूरा क्षेत्र कभी किसी एक मुगल शासक के अधिकार में नहीं रहा। इसलिए इस क्षेत्र को किसी टिपीकल या पर्टीकुलर नाम से नहीं जाना जाता था। चंद्रवंशी राजाओं का कुमाऊं राज्य था और टिहरी का राजा टिहरी नरेश था। इस प्रकार दोनों को अलग-अलग नामों से जाना जाता था। १७९० में जब गोरखाओं का आक्रमण हुआ और उसके बाद कुछ समय तक उस पर गोरखाओं का राज्य रहा। १८१५ में बटिश शासन से १९४७ तक और उसके बाद से १९६० तक टिहरी की रियासत और कुमाऊं की कमीशनरी, ये दो नाम रहे। यदि आप कोई संशोधन कर रहे होती, जैसे पुडीचेरी लेकर आये, ब्रटिशर्स का दिया हुआ नाम था, उसे संसद ने बदला है, उसका स्वागत हुआ है। तमिलनाडु ब्रटिशर्स का दिया हुआ नाम था, मद्रास यहां करैक्शन हुआ और उसका स्वागत हुआ। और भी किसी नाम का ऐसा हो, जो अंग्रेजों ने दिया हो और आम भाषा के विपरीत हो, जनभावना के खिलाफ हो, उसमें संशोधन हो जाये, जैसे कि गलती दुरुस्त करने की बात रामगोपाल जी ने कही तो जरूर करना चाहिए। लेकिन इसी माननीय संसद द्वारा पारित किये गये,राज्य के सही नाम को बिना विचार किये बदलने को कहा जाये तो यह ठीक नहीं होगा।
इसमें पुराण का उल्लेख आया है, इतिहास तो मैंने आपके सामने रख दिया। पुराण मैं लेकर आया हूं। यह स्कन्ध पुराण है, जिसका उल्लेख किया जाता है, इसके भीतर कहीं नहीं है कि यह क्षेत्र उत्तराखण्ड का क्षेत्र है। यह जो इसमें आज उद्देश्य और कारणों में दिया गया है, मैं इसके विस्तार में नहीं जा रहा हूं, क्योंकि यह बड़ी लम्बी कहानी है। इसमें नागर खण्ड, काशी खण्ड, मानस खण्ड, केदार खण्ड में केदारनाथ जी का मंदिर है, उसका केदार खण्ड है, मानसरोवर हमारे क्षेत्र में है, उसका मानस खण्ड है, नागर खण्ड है, सब हैं, लेकिन उत्तराखण्ड नहीं है। इसलिए यह कहना कि यह पुराण के आधार पर है, कतई गलत है।
एक विषय बार-बार यह भी कहा जाता है कि हिन्दू मतावलम्बी जो संकल्प लेते हैं, वे कहते हैं कि आर्यावर्ते जम्बूद्वीपे, भरतखण्डे, उत्तराखण्डे, यह गलत है। सही है, आर्यावर्ते जम्बूद्वीपे, भरतखण्डे, हिमवन्त प्रदेशे…(व्यवधान)
|ÉÉä. ®ÉàÉ MÉÉä{ÉÉãÉ ªÉÉn´É (ºÉà£ÉãÉ):नहीं-नहीं, उसमें उत्तराखण्डे है। आपने पहले जो बताया, वही सही है। हम लोग रोजाना पढ़ते हैं। …(व्यवधान)
gÉÉÒ ¤ÉSÉÉÒ É˺Éc ®É´ÉiÉ ‘बचदा’ : आप रोज पढ़ते हैं तो हेमन्त प्रदेशे हम पढ़ रहे हैं। …(व्यवधान)
gÉÉÒ ¶ÉèãÉäxp BÉÖEàÉÉ® (SÉɪÉãÉ): आपने पहले बताया, वही सही है। हम लोग प्रयाग के रहने वाले हैं, वहां जितने भी ब्राहमण हैं, वे उत्तराखण्डे ही कहते हैं।…(व्यवधान)
gÉÉÒ ¤ÉSÉÉÒ É˺Éc ®É´ÉiÉ ‘बचदा’ : यह जो पहला उत्तराखण्डे है, यह चार धामों के लिए है।…(व्यवधान)
àÉäVÉ® VÉxÉ®ãÉ (ºÉä´ÉÉÉÊxÉ´ÉßkÉ) £ÉÖ´ÉxÉ SÉxp JÉÆbÚ½ÉÒ (MÉfôÉÉãÉ): यादव जी, यह जो उत्तराखण्ड की बात है, वह हिमालय पर्वत है, उसमें कूमार्ंचल शामिल नहीं है। …(व्यवधान)
श्री बची सिंह रावत ‘बचदा’ : ये चार धाम गंगोत्री, यमुनोत्री, बद्री और केदार हैं, इसमें शिव उत्तराखण्ड है, वह विषय अलग है, लेकिन कूर्मावतार जो कूमार्ंचल है, इसीलिए हमने शुरू से कह रहे हैं कि उत्तराखण्ड और कूमार्ंचल, दो को जोड़कर पूरे क्षेत्र के लिए आप जो लेकर आएंगे तो वह उत्तरांचल नाम ही होता है। फिर उत्तराखण्ड एकांगी नाम होता है, उसमें कूमार्ंचल छूटता है, राज्य के नाम से कूमार्ंचल न छूटे। यही हमारा अनुरोध है।
अन्त में यह निवेदन करते हुए कि इसके खर्चे का हिसाब नहीं दिया गया कि खर्चा कितना होने वाला है। उसके लिए कोई फाइनेंशियल मैमोरेण्डम इसमें नहीं है। लेकिन उत्तरांचल के प्रत्येक सरकारी कार्यालय का, निजी प्रतिष्ठान, व्यापारी वर्ग आदि, शिक्षण संस्थान की स्टेशनरी, सरकारी और निजी होर्डिंग, बैंकों के खातों के लेन-देन, नक्शे, राजस्व अभिलेखों और केन्द्र और प्रत्येक राज्य में उत्तरांचल नाम को प्रकाशित करने वाली लेखन सामग्री आदि-आदि पर अरबों रुपये का खर्च होने वाला है, लेकिन उसके लिए फाइनेंशियल मैमोरेण्डम नहीं है, न उत्तरांचल की सरकार ने इस फिजूल खर्च के लिए कुछ करना है।
फिर बुनियादी सवाल रोजगार का है, बुनियादी सवाल विकास का है, उसके प्रति सरकार ने न उत्तरांचल में ध्यान दिया है, न केन्द्र की ओर से कोई निर्देश है। चुनाव नजदीक है, केवल इतने मात्र के लिए नाम परिवर्तन का शिगूफा छोड़ा गया है, जिसका समर्थन हम लोग अपने मन से चाहें भी तो नहीं कर सकते। यदि करते भी हैं तो फिर जनता उसका जवाब देगी।
श्री के.सी.सिंह ‘बाबा’ (नैनीताल):={ÉÉvªÉFÉ VÉÉÒ, +ÉÉ{ÉxÉä àÉÖZÉä =kɮɯSÉãÉ BÉEä +ÉÉã]®xÉäÉÊ]´É xÉÉàÉ BÉEä ÉʤÉãÉ {É® nÉä ¶É¤n BÉEcxÉä BÉEÉ àÉÉèBÉEÉ ÉÊnªÉÉ, <ºÉBÉEä ÉÊãÉA vÉxªÉ´ÉÉn* यह जो उत्तराखण्ड आन्दोलन चला था, यह आज का नया आन्दोलन नहीं था, यह बहुत पुराना आन्दोलन है। बल्कि जब से देश आजाद हुआ, १९४७ में, तब भी उत्तराखण्ड की मांग चली थी। उत्तराखंड की मांग इतनी पुरानी मांग होकर उस वक्त भी उत्तराखण्ड के नाम से ही चली थी और शुरूआत में वहां पर हमारे कामरेड पी.सी. जोशी भी थे, जो कि हमारे कुमाऊं के ही थे। उन्होंने उत्तराखण्ड नाम से इसकी मांग की थी।
इसके बाद इसके लिए आंदोलन चले और बहुत बार यह बिल उत्तर प्रदेश विधानसभा में भी गया। उस समय इत्तिफाक से मैं उत्तर प्रदेश विधान सभा का सदस्य भी था। यह जो हमारी डिमांड थी और जब हमारे आंदोलन चले हैं, उस समय चाहे कोई भी पार्टी हमारे साथ हो, भाजपा या अन्य पार्टी के लोग हमारे साथ थे, इस आंदोलन को हम उत्तराखंड राज्य के नाम से करते थे। चाहे वे विपक्ष के लोग हों, जिन्होंने उत्तराखंड बनने से रोकना चाहा, उन्होंने भी इसे उत्तराखंड नाम लेकर कहा कि हम उत्तराखंड नहीं बनने देंगे। दूसरी तरफ हम लोग कहते थे, जो कहते थे कि हम उत्तराखंड बना के ही रहेंगे। उत्तराखंड नाम से ही आंदोलन हुए।
मैं कहना चाहता हूं कि यह कोई कांग्रेस पार्टी का प्रेस्टीज इश्यू नहीं है। इसको हमें उत्तराखंड नाम देना है। यह जनता की आवाज थी। हमारे यहां रामपुर तिराहे में लोग मरे, ऊधमसिंह नगर, खटीमा में लोग मरे, जब यह आंदोलन चल रहा था, तो हमारे आंदोलन में केवल उत्तराखंड की आवाज आती थी, न कि उत्तरांचल की आवाज आती थी। मैं आपको यह भी बताना चाहता हूं कि यह हमारा कोई प्रेस्टीज इश्यू नहीं था। यह जनता की आवाज थी, जनता की मांग थी और उस जनता की मांग को लेकर हमारी कांग्रेस पार्टी ने इसे अपने मैनीफेस्टो में रखा था और जब हमारी पार्टी उत्तरांचल में पावर में आयी, तो उन्होंने विधानसभा में यह पास करके, आज अपना वायदा पूरा करने के लिए, जनता की आवाज को उठाने के लिए और जनता का सम्मान रखने के लिए आज यह बिल यहां पेश कराया है। मुझे बहुत खुशी है और मैं माननीय मंत्री जी का बहुत आभारी हूं कि उन्होंने यह बिल यहां पर पेश किया। इस प्रदेश का नाम उत्तरांचल नहीं, बल्कि उत्तराखंड होना चाहिए, यह हमारे पूरे उत्तराखंड के लोगों की आवाज है और हमें इसे कायम रखना है। मुझे बहुत खुशी होती है कि कांग्रेस पार्टी ने अपना वायदा पूरा किया।
SHRI VARKALA RADHAKRISHNAN (CHIRAYINKIL): Sir, I rise not to oppose the Bill, but I fail to understand the logic behind this Bill.
Now, during the last Session we have passed a Bill like this. The erstwhile State of Pondicherry was converted into Puducherry State. There also I was unable to understand the logic behind it.
Now, as you all know, the Uttaranchal State came into existence in 2000 by the Uttar Pradesh State Reorganisation Act. It is only six years since then. Now, the change of name is being done on the basis of mythology and history. Significantly, the word `political’ is missing. Now, during these six years what is the historical and mythological change that has taken place? I can understand if you had used the word `political’. Then, it is all right. … (Interruptions) It was not used.
Now, last time we had passed a Bill converting Pondicherry into Puducherry State. You all know as to what is the reality. We are still maintaining practices of colonial rule in India.
I come from the State of Kerala. There is a place called Mayyezhi in Kerala State facing the Arabian Sea. The Pondicherry is on the Southern side facing Bay of Bengal. There is nothing between them. Geographically, historically and politically there is nothing common between these two States. The Mayyezhi a village in Kerala State, is ruled in Pondicherry.
What is the basis for this? I do not understand the logic behind it. The people of Mayyezhi who are part of the present Union Territory of Puducherry have nothing in common with Puducherry. The language is different, the geographical condition is different and these two areas are two oceans apart. Now, for the simple reason that this particular village Mayazhi or the place called Mahe happened to be ruled by the French people, why should it be retained with Puducherry? What is the logic? I would say even Puducherry is not necessary because it is in Tamil Nadu. Why should it be retained as a separate Union Territory? It ought to have been merged with the State of Tamil Nadu. What prevents the Government to bring a new legislation for merging Puducherry with Tamil Nadu? That is one thing.
Now, take the case of Goa, Daman and Diu. Why are they retained separately? The Portugese do not exist there now. … (Interruptions)
MR. DEPUTY-SPEAKER: Please come to Uttaranchal now.
SHRI VARKALA RADHAKRISHNAN : I am coming to Uttarakhand. Now, the position is, the Uttaranchal Assembly has passed a Resolution and on that basis this legislation has come.
Sir, as far as West Bengal is concerned, why should it be called West Bengal? There is no East Bengal now. East Bengal has gone into the past. They are a separate, independent nation with a new name Bangladesh. So, why should we retain the name of West Bengal even now? The West Bengal Assembly had also passed a Resolution for changing their name as Bangla. What happened to that Resolution? Is there any double standard or discrimination? If the Resolution passed by the Assembly of a particular State is the criteria for changing the name of a State, then you will have to follow the Resolution passed by the West Bengal Assembly for converting that State’s name into Bangla. There is no meaning in retaining the name of West Bengal because there is no East Bengal now, but still it is being retained. That is why I am saying there is no logic behind it. You change the name of West Bengal as Bangla. I can understand that because East Bengal has become an independent nation now with a new name Bangladesh. But still the name of West Bengal is retained. So, there is no logic behind this.
In the case of Uttaranchal, six years ago, in 2000 this name Uttarakhand was available. At that time, the name of Uttaranchal was given. Now, after six years we are discussing the legislation to change the name of Uttaranchal into Uttarakhand. What is the logic? Has any historical development taken place? Has any mythology come into existence within this period of six years? The Uttar Pradesh State Reorganisation Act was passed in 2000 with the intention of creating a new State Uttaranchal. Now, after the lapse of six years the Government of India is coming before this House with this legislation saying that historically and mythologically the name will have to be changed. This is ridiculous. In these six years, what happened to history? What happened to mythology? We were the very same persons who passed that Bill in 2000 giving the name of Uttaranchal to the new State. Now we are asked to pass another Bill to give a new name Uttarakhand to that State. That is why, at the outset I said that significantly the word ‘political’ is missing from the Statement of Objects and Reasons of this Bill. So, I request the Government to please come up with some principle.
I can understand Mahe being merged with Kerala, Puducherry being merged with Tamil Nadu and Goa and other smaller States near Maharashtra being merged with Maharashtra due to their geographical vicinity. For political reasons, please do not come before this House for changing the name of a State. This is very objectionable and it cannot be justified. Having said that, I am not opposing this Bill.
15.00 hrs. श्री रामजीलाल सुमन (फ़िरोज़ाबाद) : उपाध्यक्ष महोदय, जब उत्तर प्रदेश के पहाड़ी इलाकों के साथ इंसाफ की बात हो रही थी यानी उत्तर प्रदेश से अलग पहाड़ी प्रांत बनाने का विचार चल रहा था, उस समय जो आंदोलन चल रहा था, वह उत्तरांचल के नाम से न होकर उत्तराखंड के नाम से था। अब बीजेपी और कांग्रेस के लोग तकनीकी बहस में उलझे हुए हैं। कांग्रेस के हमारे साथियों की मजबूरी है क्योंकि उन्होंने अपने चुनाव घोषणा पत्र में वायदा किया था, उनकी प्रतिबद्धता थी कि उत्तरांचल का नाम बदलकर हम उत्तराखंड कर देंगे। इसलिए अब उन्हें अपने दायित्व का निर्वाह करना है। अभी यहां श्री बची सिंह रावत जी ने ऐतिहासिक संदर्भ प्रस्तुत किये। लेकिन छ: साल पहले जब तीन राज्य उत्तरांचल, छत्तीसगढ़ और झारखंड बने थे तब इन दोनों दलों को इतनी जल्दी थी कि नाम कोई भी हो लेकिन फौरन बंटवारा हो जाना चाहिए औरतीन राज्य बन जाने चाहिए।
उपाध्यक्ष महोदय, उत्तराखंड के नाम से जब यह आंदोलन चला था, उस समय उत्तर प्रदेश विधान सभा के एक सम्मानित सदस्य श्री काशी सिंह ऐरन का उत्तराखंड क्रांति दलके नाम से एक संगठन था। मैं समझता हूं कि उत्तराखंड के नाम से जो आंदोलन संचालित हुए, उसमें सबसे बड़ा योगदान इसी संगठन का था। अब नाम के सवाल पर बात करना, मैं समझता हूं कि उसका कोई अर्थ नहीं है। जब पहाड़ी लोगों के साथ न्याय हुआ और उनका अलग प्रांत बनाने की मांग थी तब श्री मुलायम सिंह यादव दूसरी बार उत्तर प्रदेश के मुख्य मंत्री थे। उस समय उत्तर प्रदेश सरकार में एक मंत्री श्री रमा शंकर कौशिक थे। उनकी अध्यक्षता में उस समय श्री मुलायम सिंह जी ने एक कमेटी बनाई। उस समय सामाजिक, भौगोलिक और आर्थिक परिस्थिति का पूरा मूल्यांकन करने के बाद ५ अप्रैल, १९९४ को श्री रमा शंकर कौशिक ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री मुलायम सिंह यादव के सामने उस कमेटी की रिपोर्ट रखी। उस समय उत्तर प्रदेश की विधान सभा ने कमेटी की रिपोर्ट को उत्तर प्रदेश विधान मंडल के दोनों सदनों से पास कराकर उत्तराखंड राज्य के नाम का एक प्रस्ताव किया था। उसमें यह संकल्प व्यक्त किया गया था कि हरिद्वार और उधम सिंह नगर को अलग रखकर उत्तर प्रदेश में रखा जाये। उस समय यह बात सिर्फ श्री मुलायम सिंह यादव कह रहे थे। हरिद्वार और उधम सिंह के लोगों की यह भावना थी कि वह उत्तर प्रदेश का अंग बनकर रहे।
उपाध्यक्ष महोदय, जब इस सदन में तीन राज्य बनाये जा रहे थे खासकर जब उत्तरांचल का मामला सामने आया, उस समय श्री मुलायम सिंह यादव इस सदन के सदस्य थे। हमने और श्री मुलायम सिंह यादव जी ने इसका डटकर विरोध किया था कि उत्तरांचल के नाम से आप जो राज्य बना रहे हैं, आप हरिद्वार और उधम सिंह नगर को उसमें जोड़ रहे हैं, वह उन लोगों की भावनाओं के अनुकूल नहीं है। …(व्यवधान)
gÉÉÒ BÉEä.ºÉÉÒ.É˺Éc ‘बाबा’ :उधम सिंह नगर उत्तरांचल का भाग है। वह पहले भी था और अब भीहै। उधम सिंह नगर के लोगों ने कभी इस बारे में आब्जेक्शन नहीं किया। …(व्यवधान)
gÉÉÒ ®ÉàÉVÉÉÒãÉÉãÉ ºÉÖàÉxÉ : उपाघ्यक्ष महोदय, आप इन्हें बैठाइये। पता नहीं यह कहां से चले आये हैं। …(व्यवधान)
उपाध्यक्ष महोदय: बाबा जी, आप बैठ जाइये।
...(व्यवधान)
MR. DEPUTY-SPEAKER: Only the speech of Shri Ramji Lal Suman will be recorded and nothing else.
(Interruptions) …* gÉÉÒ ®ÉàÉVÉÉÒãÉÉãÉ ºÉÖàÉxÉ : उपाध्यक्ष महोदय, मैं यह निवेदन कर रहा था कि हरिद्वार के लोग …(व्यवधान) आप दोनों लोग उन्हें समझाएं। …(व्यवधान)
उपाध्यक्ष महोदय: कुंवर मानवेन्द्र जी, बंटवारा नहीं हो रहा। यहां उनके नाम पर चर्चा हो रही है। …(व्यवधान)
MR. DEPUTY-SPEAKER: Nothing should be recorded.
(Interruptions) …* मेजर जनरल (सेवानिवृत्त) भुवन चन्द्र खंडूड़ी : उपाध्यक्ष जी, यह क्या हो रहा है। इसमें हरिद्वार का नाम कहां से आ गया है? यहां नाम की बात हो रही है। …(व्यवधान)
MR. DEPUTY-SPEAKER: Nothing is being recorded.
(Interruptions) …* gÉÉÒ ®ÉàÉVÉÉÒãÉÉãÉ ºÉÖàÉxÉ : मैं निवेदन कर रहा था कि हरिद्वार उत्तर प्रदेश में रहे, हरिद्वार के लोगों की यह भावना थी। इस सवाल पर हजारों लोग जेल गए।…(व्यवधान)
MAJ. GEN. (RETD.) B. C. KHANDURI : MR. Deputy-Speaker, Sir, it should not go on record otherwise we will also start replying as to what happened in ‘Muzaffarnagar kand’… (Interruptions)
* Not recorded श्री रामजीलाल सुमन : आप यह क्या कह रहे हैं?…(व्यवधान)
MAJ. GEN. (RETD.) B. C. KHANDURI : Mr. Deputy-Speaker, Sir, I also need time to reply to all this.… (Interruptions)
उपाध्यक्ष महोदय : खण्डूरी साहब, आप बैठिए। जब आपकी बारी आएगी तब कहिए।
...(व्यवधान)
श्री रामजीलाल सुमन : महोदय, भारतीय जनता पार्टी के सम्मानित सदस्य श्री बची सिंह रावत जी उस इलाके से आते हैं। उन्होंने अपनी बात कह ली है, मेरा उनसे आग्रह है कि अब कृपया मुझे अपनी बात कहने दें अनावश्यक रूप से व्यवधान पैदा करना ठीक नहीं है।
महोदय, मैं यह निवेदन कर रहा था कि हरिद्वार उत्तर प्रदेश में रहे, हरिद्वार के लोगों की यह भावना थी, उत्तर प्रदेश का अंग बनकर रहे और इस सवाल पर आंदोलन हुए, हजारों लोग जेल गए, मगलोर गुड़मंडी पर रघुबीर नामक एक किसान की मौत हुई। हरिद्वार में हमारी राष्ट्रीय कार्यसमति की बैठक हुई, तमाम लोग मिले और सभी की यही ख्वाहिश, सभी की यही इच्छा थी कि उत्तरांचल का भाग रहकर हमारे साथ इंसाफ नहीं हो सकता है। वहां पिछड़ों का आरक्षण कम हुआ है, अनुसूचित जातियों का आरक्षण कम हुआ है। उनको लगता है कि एक ही राज्य में रहते हुए भी वे पराए हैं। इससे बड़ी बात और कोई नहीं हो सकती है। राजेन्द्र कुमार जी हरिद्वार से हमारी पार्टी के लोक सभा के सदस्य हैं। जब लोकसभा का चुनाव समाजवादी पार्टी ने लड़ा, तब हमारा एक ही मुद्दा था और एक तरह से यह जनमत संग्रह था। हमने लोगों से पूछा कि हम हरिद्वार को उत्तर प्रदेश में रखने के पक्ष में हैं। इसी सवाल पर हमने वोट मांगा था और मैं नहीं समझता कि हरिद्वार की जनता की इससे बड़ी मुहर और क्या होगी कि हरिद्वार के लोगों ने श्री राजेन्द्र कुमार को इस मुद्दे पर चुनकर लोकसभा में भेजा। मैं यह निवेदन करूंगा कि जब यह अलग राज्य बन रहा था, उस समय भी समाजवादी पार्टी ने अपना विरोध दर्ज कराया था और माननीय गृहमंत्री जी से हमारा यह निवेदन है कि हरिद्वारा की जनता की भावनाओं को ध्यान में रखते हुए हरिद्वार को उत्तर प्रदेश में शामिल किया जाए।
उत्तराखण्ड नाम पर तो हम पहले से ही पक्ष में थे। यह दोनों पार्टियां जब मिल जाती हैं, हालांकि हम उन्हें मिला हुआ ही मानते हैं, तो ये सदन में वह सब करवा लेते हैं जो नहीं होना चाहिए। जब राज्यों का विभाजन हो रहा था, तब ये दोनों साथ-साथ थे। उनको नाम की जल्दी नहीं थी। उत्तराखण्ड का नाम देने वाला दल समाजवादी पार्टी है और उस दल के नेता श्री मुलायम सिंह यादव हैं और जब मुलायम सिंह यादव जी की सरकार उत्तर प्रदेश में थी, उत्तर प्रदेश सरकार ने उत्तराखण्ड नाम की संस्तुति की थी और वधानसभा ने इस आशय का प्रस्ताव पारित किया था। अत: मैं आपसे पुरजोर अपील करना चाहूंगा कि सरकार लोगों की भावनाओं को ध्यान में रखते हुए हरिद्वारा को उत्तर प्रदेश में सम्मिलित करने का कष्ट करे।
PROF. K.M. KADER MOHIDEEN (VELLORE): Hon. Deputy-Speaker, Sir, I am very much thankful to you for giving me this opportunity to participate in this discussion on the Uttaranchal (Alteration of Name) Bill, 2006.
At the outset, I congratulate the UPA Government for bringing about this Bill. Firstly, the Legislative Assembly of Uttaranchal has passed a resolution for the change of name. It is the duty of the Central Government to accept the resolution of the State Assembly and honour the aspirations of the people of the State. In a federal structure, the Centre has to come out to maintain the federal structure by accepting the resolution and bringing about this Bill for the change of the name.[r16] The name ‘Uttarakhand’ is very popular in history as well as in mythology. We have studied in history the names of Bundelkhand, Jharkhand and Uttarakhand. In Tamil epic Kambaramayanam, Uttarakhandam is very often pronounced. Therefore, Uttarakhand is not only mythological but also historical. It is a historical name that has been brought out once again.
Sir, it is not the alteration of the name. I would like to say that it is the reversion of the old name into the present day. But, Sir, by accepting this one, the Central Government has maintained the federal structure and honoured the sentiments and aspirations of the people of Uttarakhand.
Shri Radhakrishnan ji is saying that mythology is not very important. I would like to say that mythology plays a very important part in the history of our great nation. Without history and mythology, we cannot have the human history of this country. In mythology only, we come across AdamandEve; we come across Parvathi and Paramasivam. From these historical characters, we derive the theory of creation.
Science has formulated the theory of evolution, and mythology has given the theory of creation. A long struggle is going on in this world between the theory of creation and the theory of evolution. The theory of creation is the creature of mythology. We are all human beings and have been derived from the theory of creation. Without mythology, we cannot find life in the history of this world and in the history of human history. Therefore, to say mythology is not very important is not acceptable.
Sir, in Tamil Nadu, when the Re-organisation of States Committee was formed in 1957, Tamil Nadu was not the name given at that time, and it was Madras Presidency. During the tenure of Arignar Anna, it was changed to Tamil Nadu only after some time. Similarly, when this Uttar Pradesh Re-organisation Committee was formed, it was known as Uttaranchal. Now, out of necessity and out of mythological character being brought into light, that name is changed into Uttarakhand. Therefore, I appreciate the Central Government for bringing this Bill, and I wish the Uttarakhand people to lead a happy and long life.
मेजर जनरल (सेवानिवृत्त) भुवन चन्द्र खंडूड़ी : धन्यवाद उपाध्यक्ष जी, इस नाम परिवर्तन बिल पर हम सवा घंटे से चर्चा कर रहे हैं। मेरे साथी बची सिंह जी ने बहुत अच्छे तरीके से हमारा पक्ष रखा है कि उत्तरांचल नाम क्यों रखा गया। इसमें बिल नाम बदलने के उद्देश्यों व कारणों का जिक्र है, जिसमें तीन कारण बताए गए हैं और उन्होंने अपने तर्कों से इन कारणों को ध्वस्त करने का काम किया है। इसमें लिखा है कि साधारण जनता का विचार है। जनता का क्या विचार है, यह मैं आगे बताऊंगा। हमारे साथी ने बताया कि उत्तरांचल नाम जब रखा गया था, तब जनता का क्या विचार था।
यहां पर पुराणों और इतिहास की चर्चा हुई है, मैं उसे दोहराना नहीं चाहूंगा। मैं हमारे साथी मोहिदीन जी से सहमत हूं कि पुराणों और इतिहास का अपना रोल है, लेकिन उसे डिस्ट्राट करना, उसे गलत तरीके से रखना यह ठीक नहीं है। हम यहां पुराणों और इतिहास का नाम लेकर उनका दुरुपयोग कर रहे हैं। सिर्फ नाम रखने के लिए ही इनका जिक्र करना ठीक नहीं है।
मंत्री जी ने भी इतिहास की चर्चा की है। आज जो उत्तरांचल नाम है, यह गढ़वाल और कुमाऊं दोनों को मिलाकर बना है। पहले इस क्षेत्र को पूवार्ंचल और उत्तराखंड के नाम से जाना जाता था, लेकिन मैं इस पर चर्चा नहीं करना चाहता हूं।
यहां पर जो बातें कही गई हैं, मैं उनसे अलग एक-दो बिंदुओं पर सदन का ध्यान आकर्षित करना चाहता हूं। यहां पर टाइमिंग का सवाल भी उठाया गया। हमारे पूर्व वक्ता राधाकृष्णन जी ने कहा था कि इस बिल को अभी लाने का क्या मतलब है। वह इस समय सदन में नहीं हैं, लेकिन हमारी बातों को जरूर सुन रहे होंगे। इस बिल को लाने का असली कारण वही है, जो वह कह रहे थे, वह कारण ‘पोलटिकल’ है।इन्होंने कहा है कि यह जनता की मांग है। उपाध्यक्ष जी, सन् २००२ में चुनाव हुआ था। अभी बताया गया है कि यह ९ नवम्बर २००२ को बना। फरवरी में चुनाव हुए थे और १६ मार्च को प्रदेश सरकार बनी थी। इस सरकार ने बहुत मोटा घोषणा-पत्र निकाला है। कांग्रेस वाले मोटी घोषणाएं करने में बहुत एक्सपर्ट हैं। लेकिन चुनाव के बाद घोषणाओं को पूरा नहीं करते हैं। माननीय मंत्री जी, मैं आपका ध्यान इसकी ओर चाहूंगा। पहली बात जो इसमें लिखी है वह यह है कि “जनता की भावनाओं का सम्मान करते हुए नये राज्य का नाम उत्तरांचल से उत्तराखंड नामित करवाना”। यह फरवरी २००२ का है और आप २००६ में जाग रहे हैं। अब क्यों जाग रहे हैं। आपके पास ५ अक्टूबर २००५ को यह आया लेकिन उस समय वोट नहीं लेनी थी। अब जनता का वोट लेना है। आम जनता का फोटो दिखा दिया, गरीब है कपड़े फटे हुए हैं। …(व्यवधान)
MR. DEPUTY-SPEAKER: Goyalji, please do not disturb.
… (Interruptions)
MR. DEPUTY-SPEAKER: Nothing will go on record except the speech of Maj. Gen. Khanduri.
(Interruptions) …* मेजर जनरल (सेवानिवृत्त) भुवन चन्द्र खंडूड़ी : गोयल साहब, आपका व्यवधान सामान्य बात है, आप हमेशा व्यवधान डालते हैं। मैं माननीय मंत्री जी और सदन को कहना चाहता हूं कि भावना है, उत्तराखंड होना चाहिए तो करिये, लेकिन जनता ने उत्तरांचल के नाम पर समर्थन दिया है। आप उत्तराखंड करिये। वर्ष २००२ में जनता के पास जाकर उत्तराखंड के नाम पर वोट लेते हैं लेकिन चार साल तक सोते रहते हैं। हमारे माननीय राधाकृष्णन जी बैठे हुए हैं। Mr. Radhakrishnan, you wanted to know the reason. The reason is that in February next year, you are again going to have elections there. कितनी दूर तक आप राजनीति को बदनाम करने के लिए आगे जाएंगे, जनता की भावनाओं से खिलवाड़ करेंगे, जनतो को गुमराह करके उसे फिर भूल जाएंगे। शायद यह आपकी मजबूरी है। आप उत्तरांचल के लोगों की भावनाओं के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं। यह गंदी हरकत है, अच्छी बात नहीं है। आपको अपना ध्यान विकास के कामों पर लगाना चाहिए।
वित्त मंत्रालय में राज्य मंत्री (श्री पवन कुमार बंसल) : क्या अच्छा है, क्या बुरा है, केवल यही जानते हैं।
मेजर जनरल (सेवानिवृत्त) भुवन चन्द्र खंडूड़ी : अगर मैंने कोई गलत बात कही है तो मैं बैठ जाता हूं, आप कहिये। यह सही है कि वर्ष २००२ से वर्ष २००५ के अक्टूबर माह तक प्रदेश सरकार ने प्रस्ताव नहीं भेजा।
गृह मंत्रालय में राज्य मंत्री (श्री श्रीप्रकाश जायसवाल): चार साल का अभियोग मत लगाइये, दो साल का लगाइये। केन्द्र में यह कब आया है?
मेजर जनरल (सेवानिवृत्त) भुवन चन्द्र खंडूड़ी :जनवरी २००२ में घोषणा-पत्र लिखा गया है।
श्री श्रीप्रकाश जायसवाल: हमारी सरकार केन्द्र में कब आई है?
मेजर जनरल (सेवानिवृत्त) भुवन चन्द्र खंडूड़ी : १६ मई, २००४ में।
श्री श्रीप्रकाश जायसवाल: इतनी लम्बी प्रक्रिया का दो साल तक चलना सामान्य बात है।
* Not recorded मेजर जनरल (सेवानिवृत्त) भुवन चन्द्र खंडूड़ी : १६ मार्च २००२ से अक्टूबर २००५ तक प्रदेश सरकार ने प्रस्ताव नहीं भेजा है। आप भी तो यहां १६ मई, २००४ से हैं।आप भी तो पहले आदेश दे सकते थे। चुनाव में जब दो महीने रहते हैं तब इस बिल को निकलवाने की इनको बड़ी फुर्ति रहती है। एक महीने में प्रदेश से भी बिल पास हो जाता है, राज्य सरकार से आ जाता है और केन्द्र में भी आ जाता है। यह कोई चलने वाली बात नहीं है। आपकी नीयत सही नहीं है गलत है। नाम इसलिए नहीं बदला है कि सैद्धांतिक रूप से आप ऐसा करना चाहते हैं बल्कि आप नाम इसलिए बदल रहे हैं कि पहाड़ों में रहने वाले कुछ लोगों की भावनाओं से खिलवाड़ करके शायद आपको दो-चार वोट मिल जाएंगे। लेकिन वोट आपको मिलने वाले नहीं हैं, इस प्रकार के हथकंडों को लोग समझ गये हैं और वे आपकी बातों में आने वाले नहीं हैं।
दूसरी बात यह है कि नाम परिवर्तन की जो बात आई है और कहा जा रहा है कि जनता की इच्छा है, उसके कुछ आंकड़ें मैं आपको देना चाहता हूं।[r17] यहां माननीय सुमन जी ने कहा कि हरिद्वार में जीत गए। जब उत्तर प्रदेश में उत्तरांचल था, हमारे यहां १९ विधान सभा क्षेत्र थे। इस आन्दोलन के दौरान वहां दो चुनाव हुए हैं। उत्तरांचल के नाम से हम १९ में से १५ सीटें जीते हैं और दूसरे में १९ में से १७ जीते हैं। शायद किसी प्रदेश में इस प्रकार का समर्थन किसी को नहीं मिला होगा। हम उत्तरांचल के नाम पर लड़े और १९ में से १७ सीटें जीत कर आए। १९९१ में लोक सभा का चुनाव हुआ और मैं पहली बार यहां आया था। पांच की पांच लोक सभा सीटें हमें इस नाम पर मिली हैं। आपका जन समर्थन कहां है? उत्तरांचल का नाम लोगों को पसन्द नहीं है तो तथ्य़ों के आधार पर वह सही नहीं है। उत्तरांचल के नाम पर लोगों ने हमें समर्थन दिया है। आप सरकार में हैं। आप उसका नाम बदली करें क्योंकि आपके पास अधिकार और संख्या ह,ै लेकिन इस आधार पर आप न जाएं। आज भी पांच में से तीन एमपी यहां हैं। ऐसी बात नहीं है कि उत्तरांचल के नाम पर लोग नाराज हैं और हमें देखना नहीं चाहते हैं। कांग्रेस के लोगों को उत्तरांचल या उत्तराखंड से कोई लेना-देना नहीं है। उन्होंने पहले इसका घोर विरोध किया था और सदा विरोध करते रहे। जब से इसे लेकर आन्दोलन चला उन्होंने इसका विरोध किया। मैं १९८० के दशक से देख रहा हूं और १९९१ में मैं भी इस आन्दोलन से जुड़ गया था। उस समय उत्तर प्रदेश में मुलायम सिंह जी की सरकार थी और वह कांग्रेस के समर्थन से चल रही थी। अगर आप एक दिन भी समर्थन वापस लेते तो सरकार नहीं चल सकती थी। हमारे ऊपर बहुत अत्याचार हुए। १९९४ से बराबर अत्याचार होते रहे हैं। देश के नहीं विश्व के इतिहास में वह सबसे शर्मनाक घटना होगी, जब शांतिपूर्वक आन्दोलन के दौरान महिलाओं पर अत्याचार किया गया। उन पर केवल गोली नहीं चलायी गई, बलात्कार किया गया। उस समय कांग्रेस की सरकार ने क्या किया? हम उसी दिन माननीय प्रधान मंत्री जी के पास बड़े-बड़े नेताओं को लेकर गए थे और कहा कि देखें कि उन पर क्या-क्या अत्याचार हो रहा है। महिलाओं पर खुले आम सड़कों पर बलात्कार हुआ। कोई कार्रवाई नहीं हुई । आज आप उत्तरांचल और उत्तराखंड के बड़े हितै ाी बन रहे हैं। आपने उस समय उत्तरांचल क्यों नहीं बनाया?
यहां हमारे एक साथी ने कहा कि जब प्रदेश से कोई प्रस्ताव आता है तो केन्द्र को मानना पड़ता है। दो बार उत्तर प्रदेश से प्रस्ताव आए। आपने १९९१-९६ के बीच उसे क्यों नहीं पास किया? इसलिए कि आपका मन नहीं था। उत्तरांचल किस प्रकार चल रहा है यह अलग बात है जिस के बारे में हमारे दूसरे साथी बताएंगे। उत्तरांचल का दुर्भाग्य है कि वहां इस समय वह सरकार है जिन्होंने इसका घोर विरोध किया। इनका वहां का विकास करने का मन नहीं है। इन्होंने कहा था कि उत्तरांचल वायबल नहीं है। कांग्रेस पूरी शक्ति के साथ इस काम में लगी है कि उत्तरांचल को फेल कर दिया जाए ताकि उन्होंने जो कहा था वह सच हो जाए। वहां के मुख्यमंत्री बहुत वरिष्ठ नेता हैं। मैं उनका व्यक्तिगत रूप से बहुत सम्मान करता हूं। उन्होंने एक बार कहा था कि मेरी लाश के ऊपर उत्तरांचल बनेगा। उस प्रदेश का क्या होगा जिस का मुख्यमंत्री ऐसी बात कहता है। इसलिए आपका कहीं कोई विकास करने का मन नहीं है। आप संख्या के आधार पर जो चाहें कर लें। हमें उत्तराखंड से कोई एतराज नहीं है। ७ नवम्बर को मुजफ्फरनगर कांड के बाद बहुत बड़ी रैली हुई थी। उस समय अटल जी और आडवाणी जी ने पब्लिक मीटिंग की थी। (व्यवधान) उन्होने कहा था कि हम पृथक प्रदेश चाहते हैं और उसका विकास होना चाहिए। हम लोग नाम के ऊपर नहीं जा रहे हैं। हम विकास चाहते हैं। बची सिंह जी ने बताया कि हम क्यों उत्तरांचल नाम चाहते थे? कुमाऊ और गढ़वाल सब को एक साथ इकट्ठा करके उत्तराचल बनाना चाहते थे। आप पुराणों का आधार दे रहे हैं जो ठीक नहीं है। जो ऐतिहासिक बातें लेते हैं वे भी सही नहीं हैं। जनता की राय जानना नहीं चाहते हैं। ऑबजैक्ट एंड रीजन में कोई बात सही नहीं है। फिर भी आप इसे बनाना चाहते हैं तो बनाएं। हमें उत्तरांचल या उत्तरांखंड नाम पर कोई विरोध नहीं है।
एक और बिन्दु आया था। मैं उसके विस्तार में नहीं जाना चाहता हूं। सुमन जी मेरे एक वरिष्ठ साथी हैं। उन्होंने हरिद्वार की बात उठायी। वह उनको उठानी नहीं चाहिए थी। मैं उन्हें याद दिलाना चाहता हूं कि २००२ में चुनाव हुए। उनके मुताबिक हरिद्वार आन्दोलन बहुत तेजी में था और सब हरिद्वार को मिलाने के विरोधी थे। आपने हरिद्वार से कितनी सीटें जीती हैं? (व्यवधान) इन को एक सीट भी नहीं मिली। (व्यवधान) आज भी पांच सासंदों में से तीन इधर बैठे हैं और सिर्फ एक उधर बैठा है। (व्यवधान)
MR. DEPUTY-SPEAKER: Nothing is to be recorded. Only the speech of Shri Khanduri is to be recorded.
(Interruptions) … * मेजर जनरल (सेवानिवृत्त) भुवन चन्द्र खंडूड़ी : मैंयह निर्णय हाऊस पर छोड़ता हूं, आप निर्णय लें कि ऊधमसिंह नगर और हरिद्वार का मामला बड़ी चरम सीमा पर था, आग लगी हुई थी तब सत्तर में से एक भी सीट समाजवादी पार्टी को नहीं मिली थी।
अंत में मैं माननीय गृह मंत्री जी से निवेदन करता हूं कि आप निर्णय लें लेकिन कृपया जनता की भावनाओं से खिलवाड़ करके इस प्रकार के निर्णय न लें क्योंकि अंततोगत्वा, आपको कहीं नहीं इसका नुकसान होने वाला है।
* Not recorded SHRI FRANCIS FANTHOME (NOMINATED): Thank you, Deputy-Speaker, Sir. I rise to support the Bill to change the name of Uttaranchal to Uttarakhand. … (Interruptions)
श्री रेवती रमन सिंह (इलाहाबाद): माननीय उपाध्यक्ष महोदय, हमने भी नोटिस दिया है।
श्री शैलेन्द्र कुमार (चायल): उपाध्यक्ष महोदय, सुबह आठ बजे नोटिस देने वाले सदस्यों का भी खयाल रखें।
={ÉÉvªÉFÉ àÉcÉänªÉ: càÉ JªÉÉãÉ ®JÉåMÉä ãÉäÉÊBÉExÉ®ÉàÉVÉÉÒ ãÉÉãÉ ºÉÖàÉxÉ +ÉÉ{ÉBÉEÉÒ {ÉÉ]ÉÔ BÉEÉÒ iÉ®{ÉE ºÉä ¤ÉÉäãÉ SÉÖBÉEä cé +ÉÉè® ÉÊVÉiÉxÉÉ ºÉàÉªÉ lÉÉ, =xcÉåxÉä =ºÉºÉä VªÉÉnÉ ºÉàÉªÉ ÉÊãɪÉÉ cè* MR. DEPUTY-SPEAKER: Shri Francis Fanthome, please continue your speech.
… (Interruptions)
MR. DEPUTY-SPEAKER: Please listen to him. Please sit down.
… (Interruptions)
उपाध्यक्ष महोदय : मुझे रेल की अतरिक्त अनुदान की मांगों पर चर्चा भी करानी है। आप बैठ जाएं।
...(व्यवधान)
MR. DEPUTY-SPEAKER: Please maintain silence in the House. Please sit down.
… (Interruptions)
SHRI FRANCIS FANTHOME : Sir, I am standing here to speak in support of the change of name of Uttaranchal to Uttarakhand.
I would like to draw the attention of Shri Khanduri and Shri Rawat to the fact that during the 1960s, there was an extremely important person in the State of Uttarakhand, who was leading this movement in the State of Uttarakhand. The person that I am referring to is a person who was later known as the Gandhi of Uttarakhand. He is Shri Indramani Badoni, and I would like to quote what he said just before he died :
“The people of Uttarakhand must not feel defeated, and keep on the flag of their cause flying high till they achieve their goal.” Shri Badoni, in the State of Uttarakhand, is what Mahatma Gandhi is to the nation. He had one vision in his life, from 1960 to 1999, and that is to see that the State of Uttarakhand is created. The aspirations of the people were with him, and this aspiration was eventually manifested in the resolution that we are now referring to in terms of the resolution of the Legislative Assembly adopted on 5 October 2005. It is the desire of the people that their State is called in terms of how the State is referred to; in terms of their culture; in terms of their scripture; in terms of their identity; in terms of how they relate to their land and that is, in terms of Uttarakhand. Uttaranchal was a nomenclature that was coined much later in terms of diverting the agitation to a different aspiration. It is a political domain, and I would not like to comment on it at this stage.
I would also like to mention with regard to this conversation that if we call it Uttarakhand, then the aspirations of the Kumaon region perhaps would not be adequately reflected. I would like to very humbly submit that the agitation for the creation of Uttarakhand was a movement of the people in the entire State Garhwal Himalayas as well as in the Kumaon Himalayas.[r18] There was never a conversation that these are two different people. Unfortunately, we are now witnessing perhaps a divide on this issue.
शब्दों के विरोधाभास से एक नई क्रिया जन्म ले रही है। मैं बहुत ही विनम्रता से कहना चाहता हूं कि उत्तराखंड के लोग एक हैं, उनकी आकांक्षाएं एक हैं और वे चाहते हैं कि उत्तराखंड बने।
SHRI M. APPADURAI (TENKASI): Hon’ble Deputy Speaker, Sir, I welcome this Bill to alter the name of Uttranchal to Uttarakhand. I extend my support to this Bill for the alteration of name as Uttarakhand from Uttaranchal. The long struggle of the people of Uttarakhand has been heard and their aspirations are sought to be fulfilled now. A corrective measure has been resorted to and a rectification by way of restoring the name Uttarakhand has been taken up to undo what was there for the past few years now. The dreams of the people living in that region has been accomplished. We may not be able to ensure prosperity and development by way of merely altering the name of the State. A mere change of name cannot usher in prosperity. A change of name is just an aspect. Uttarakhand region has got fertile soil in the hilly terrains. Forest wealth and water resources are there in abundance. Poverty conditions and lack of adequate health facilities affect the lives of the people living in that region that has got rich mineral wealth. Educational facilities are also not there properly. At the same time this region has got a rich potential to create tourist centres and spots that can draw the international tourists towards it. Centre may allocate enough funds to create tourist centres with a facelift. This can help the people there to give a boost to the economy. Uttarakhand has also got a vast potential with untapped water resources that can augment hydel power projects. That young State has got water resources, a fertile soil and also manpower. But still the living conditions of the people there needs to be improved and their living standards and quality of life has to be enhanced. The greenery and the climatic conditions there are ideal for setting up dairy farms with high yielding variety of livestock. With this, milk production can be increased providing gainful job opportunities to people of that hilly region. Only when we provide such facilities the people of that state can really feel proud *English translation of the speech originally delivered in Tamil.
of accomplishing their dreams. Changing the name of the State shall be meaningful only when they get opportunities to work for the prosperity of the State. Hence, I urge upon our Planning Commission and the Union Government to allocate more funds to the State to remove poverty by way of providing job opportunities, by increasing power production and by tapping natural resources. The effort of the Union Government to go in for the alteration of the name to Uttarakhand shall acquire a meaningful dimension only when they also get funds and direction to improve their lot and the standard of living. Expressing my support to this Bill, let me conclude.
श्री राजेन्द्र कुमार (हरिद्वार): उपाध्यक्ष महोदय, सर्वप्रथम मैं आपको धन्यवाद देता हूं कि आपने मुझे इस महत्वपूर्ण विधेयक पर अपने विचार व्यक्त करने का मौका दिया। मैं आपके माध्यम से सरकार को बताना चाहता हूं कि किसी भी प्रदेश का नाम बदलकर दूसरा नाम रखने में जनता की गाढ़ी कमाई का हजारों करोड़ रुपया खर्च किया जाता है। लेकिन इतना धन खर्च करने के बाद जनता को किसी भी प्रकार का लाभनहीं पहुंचता। उत्तरांचल प्रदेश में यदि कुछ बदलने की आवश्यकता है तो वह है बेरोजगारी, शिक्षा, भूखों को रोटी, नंगों को वस्त्र, मकान तथा दलित व अन्य पिछडों को उनका हक।
महोदय, जब उत्तरांचल प्रदेश का आंदोलन हुआ तो पर्वतीय क्षेत्र की जनता ने उत्तराखंड राज्य की मांग को लेकर आंदोलन किया और जब भारतीय जनता पार्टी केन्द्र में और राज्य में आई तो उन्होंने उसका नाम उत्तराखंड न रखकर उत्तरांचल रख दिया। मैं बताना चाहता हूं कि जब उत्तर प्रदेश विधान सभा से हरिद्वार, ऊधमसिंह नगर का प्रस्ताव पास नहीं था। लोक सभा में आकर जिला हरिद्वार को उत्तरांचल में शामिल कर दिया गया तभी से वहां समाजवादी पार्टी के नेतृत्व में आंदोलन चल रहा है और जैसा कि श्री मोहन सिंह जी ने बताया एक किसान मंगलोर टाउन में गुडमंडी पर शहीद हुआ। इसलिए मैं कहना चाहता हूं कि आज केन्द्र में कांग्रेस की सरकार है तो उत्तरांचल का नाम उत्तराखंड करने का मन बना लिया है। यह पूरी तरह से राजनैतिक प्रयत्न है। मैं पूछना चाहता हूं कि नाम बदलने से जनता को होने वाले किसी भी फायदे को सरकार बताए। इसलिए मैं आपके माध्यम से सरकार से अनुरोध करता हूं कि जनता की गाढ़ी कमाई का उपयोग नाम बदलने में न करके प्रदेश के विकास में किया जाए और पहाड़ी और मैदानी के भेदभाव से ग्रस्त हरिद्वार जनपद को आंदोलन से निकालकर उत्तर प्रदेश में शामिल किया जाए ताकि वहां पर प्लेन और पहाड़ वाली जो बात है, वह खत्म हो। अभी खंडूरी जी बता रहे थे कि सपा का कोई भी विधायक वहां नहीं है जिसका परिणाम यह हुआ कि लोक सभा के चुनाव हुए तो आज हरिद्वार में उसी आंदोलन पर चुनाव जीतकर मैं लोक सभा में पहुंचा हूं। इसलिए मैं आपके माध्यम से सरकार से अनुरोध करता हूं कि जिला हरिद्वार की जनता की भावनाओं का सम्मान किया जाए और हरिद्वार को उत्तर प्रदेश में शामिल किया जाए।
उपाध्यक्ष महोदय: श्री के.सी.सिंह ‘बाबा’ का नाम भी इसके साथ एशोसिएट कर दिया जाए।
SHRI BRAJA KISHORE TRIPATHY (PURI): Sir, it is a simple legislation. I stand to support the Uttaranchal (Alternation of Name) Bill, 2006. The Legislative Assembly of Uttaranchal has adopted a Resolution to this effect to change the name of Uttaranchal to Uttarakhand. But the Statement of Objects and Reasons is not very much convincing taking into account what the hon. Minister stated in the Bill itself. I would say that the Government should take more interest in the development of the State rather than engaging itself in changing the name and other things.
The name of Uttarakhand is very much synonymous to mythological and historical importance with the people of India, we are conversant with one Uttarakhand, that is, in the Ramayana. I do not know whether the Congress Party has taken over the agenda of the BJP and thereby changing the name of Uttaranchal to Uttarakhand. I want to know about this from the Congress Party. We do not mind that they have already taken over the agenda of the B.J.P. Party.
It seems that the Government is not very much serious in the development of the State rather they are very much interested in the gimmickry because elections would be held in the State. Elections are fast approaching in Uttaranchal. Just to convince the people and just to do something, the Government is acting in this manner. Anyway, this is a simple legislation and the Assembly has adopted the Resolution to change the name. Hence, we are extending the support.
श्री श्रीप्रकाश जायसवाल : उपाध्यक्ष महोदय, उत्तरांचल का नाम बदलकर उत्तराखंड रख दिया जाए, इस तरह का प्रस्ताव उत्तरांचल की असेम्बली से हमारे पास आया था जिस पर केन्द्र सरकार ने गंभीरता के साथ विचार किया और विचार करने के बाद यह तय किया कि जैसा कि उत्तरांचल की असेम्बली ने कहा है, उत्तरांचल की जनता की भावनाओं को ध्यान में रखते हुए इस राज्य का नाम उत्तरांचल की जगह पर उत्तराखंड रख दिया जाए। हमारी सरकार ने इस राय से सहमति ज़ाहिर की और हमने उस प्रस्ताव को माननीय राष्ट्रपति जी को भेज दिया। महामहिम राष्ट्रपति जी ने उस प्रस्ताव पर सहमति देते हुए उत्तरांचल विधान सभा के पास फिर भेजा कि संकल्प पारित करके भेजा जाए। उसके लिये उन्होंने समय निर्धारित किया था। समय सीमा के भीतर उतरांचल विधानसभा ने एक संकल्प पारित करके प्रेषित किया है जिसे केन्द्र सरकार मूर्त्त रूप देना चाहती है। उतरांचल की जनता की भावनाओं का ध्यान रखते हुये कि जो प्रस्ताव उतरांचल से उत्तराखंड नाम रखने के लिये आया है, उसे मूर्त्त रुप प्रदान किया जाता है।
उपाध्यक्ष जी, कई माननीय सदस्यों ने कई बातों का जिक्र किया है जिन्हें मैं दुबारा दोहराना उचित नहीं समझता। पुराणों में क्या लिखा हुआ है और रामायण में क्या लिखा हुआ है, मैं उसमें नहीं जाना चाहता हूं। श्री बच्ची सिंह रावत ने पुराणों का उल्लेख किया है और अपनी बात कहने का प्रयास किया है। मुझे इस बात की खुशी है कि हमारे दक्षिण के माननीय सदस्यों ने इस बहस में काफी रूचि दिखाई है और पुराणों का जिक्र करते हुय्रे अपना तर्क दिया है कि उतरांचल का नाम उत्तराखंड होना चाहिये। यह इस बात का संकेत है कि हमारे दक्षिण के माननीय सदस्य, चाहे यहां से हज़ारों किलोमीटर दूर रहते हों, प्रदेश की जनता की भावनाओं की उतनी ही कद्र करते हैं जितने हमारे उत्तर के माननीय सदस्य रखते हैं। इसलिये पुराणों और रामायण में क्या लिखा हुआ है, इस विवाद में जाने की आवश्यकता नहीं है।…(व्यवधान)
SHRI BRAJA KISHORE TRIPATHY: You have said it in your statement.
MR. DEPUTY-SPEAKER: Please sit down.
श्री श्रीप्रकाश जायसवाल: लोकतांत्रिक प्रक्रिया में जनता की भावनायें ही सर्वोपरि होती हैं , चाहे पुराणों का जिक्र किया गया हो या रामायण का जिक्र किया गया हो।उतरांचल विधान सभा से पारित होकर आयायह संकल्प जनता की भावनांओं को दर्शाता ा है। इसके अलावा हमारे पास ऐसी कोई अन्य भावनायें नहीं जिनसे यह आदर मिल सके। जब यह राज्य नहीं बना था तो उत्तर प्रदेश असैम्बली से भी यही संकल्प पारित करके यहां भेजा गया था कि उस राज्य का नाम उत्तराखंड होना चाहिये…(व्यवधान)
MR. DEPUTY-SPEAKER: Please do not disturb him.
श्री श्रीप्रकाश जायसवाल : हम सभी मान रहे हैं, वह नाम मान रहे हैं और आप लोग भी मान रहे हैं। आपका कहना है कि आपके कुछ वोट बढ़ जायेंगे। मेरा भी यह कहना है कि मेरे सुर से सुर मिलाकर चलिये, आपका वोट बढ़ जायेगा।
उपाध्यक्ष जी, मुझे नहीं लगता कि इस में बहस की कोई और गुंजाइश है और न हमें कोई विरोध का स्वर सुनाई पड़ा है। सभी राजनैतिक दलों ने इसका …(व्यवधान)
श्री रामजीलाल सुमन : उपाध्यक्ष जी, मेरा सवाल है कि क्या सरकार हरिद्वार को वापस उत्तर प्रदेश में मिलाना चाहती है या नहीं?
MR. DEPUTY-SPEAKER: Please sit down.
श्री श्रीप्रकाश जायसवाल: उपाध्यक्ष जी, इसके अलावा जो और बातें इस बहस में उठायी गई हैं, चाहे वह पश्चिम बंगाल की बात हो, इसका बिल से कोई संबंध नहीं है…(व्यवधान)
श्री रामजीलाल सुमन : उपाध्यक्ष जी, माननीय मंत्री जी उत्तर प्रदेश का जिक्र कर रहे थे। मैं उन्हे बताना चाहता हूं कि उत्तर प्रदेश विधान सभा से पारित होकर जब प्रस्ताव आया तो उसमें हरिद्वार नहीं था। यह बात बी.जे.पी. और कांग्रेस दोनों ने मिलकर करने की कोशिश की है। मेरा सवाल है कि क्या हरिद्वारको उत्तर प्रदेश से जोड़ने जा रहे हैं या नहीं?
MR. DEPUTY-SPEAKER: This is not related to the present Bill.
श्री श्रीप्रकाश जायसवाल: इस संबंध में कोई चर्चा नहीं है।
श्री रामजीलाल सुमन : उपाध्यक्ष जी, क्या मंत्री महोदय हरिद्वार को उत्तर प्रदेश में शामिल करने का प्रस्ताव रखते हैं.या नहीं?
श्री श्रीप्रकाश जायसवाल: सच्चाई तो यह है कि माननीय सदस्य को जवाब हां या न में देना चाहिये कि क्या वह उतरांचल से नाम बदलकर उत्तराखंड चाहते हैं या नहीं?
MR. DEPUTY-SPEAKER: Mr. Minister, I agree with you.
Shri Suman, please sit down.
gÉÉÒ ®ÉàÉVÉÉÒãÉÉãÉ ºÉÖàÉxÉ : पहले हम नहीं चाहते थे लेकिन आप चाहते थे…(व्यवधान)
MR. DEPUTY-SPEAKER: Please sit down. Please do not disturb him. [MSOffice19] MR. DEPUTY-SPEAKER: Nothing except the statement of hon. Minister will go on record.
(Interruptions) …* gÉÉÒ gÉÉÒ|ÉBÉEÉ¶É VÉɪɺɴÉÉãÉ : आप अपने भाषण में इधर-उधर की बातें कहें या जो बातें संदर्भित न हों, वे कहें तो कोई फायदा नहीं है। हमारे संविधान की प्रक्रिया से आप वाकिफ़ हैं कि अगर कहीं कोई संशोधन इस प्रकार का हो सकता है तो क्या प्रक्रिया अपनाई जानी चाहिए। उसके लिए लोक सभा में चर्चा करने की आवश्यकता नहीं है। उसके लिए उत्तर प्रदेश विधान सभा से बात करिए, उत्तरांचल की विधान सभा से बात करिये। वही दोनों संकल्प पारित कर सकते हैं। चाहे किसी क्षेत्र विशेष को शामिल करना हो या किसी क्षेत्र विशेष को अलग करने का प्रश्न हो। ...(व्यवधान)...
इसलिए यहां पर विवाद करने की कोई आवश्यकता नहीं है।
मैं आपसे अनुरोध करता हूं कि लगभग सभी राजनीतिक दलों के लोग इससे सहमत हैं। इसलिए इस विधेयक को पारित किया जाए।
gÉÉÒ ®ÉàÉVÉÉÒãÉÉãÉ ºÉÖàÉxÉ : उपाध्यक्ष महोदय, हरिद्वार के लोग चाहते हैं कि हरिद्वार को उत्तर प्रदेश में रखा जाए। हरिद्वार के लोगों की भावनाओं की उपेक्षा हो रही है। हम इसके विरोध में सदन से वाकआउट करते हैं।
15.46 hrs. (At this stage Shri Ramjilal Suman and some other hon’ble Members left the House) * Not recorded SHRI SHRIPRAKASH JAISWAL: I beg to move:
“That the Bill to alter the name of the State of Uttaranchal be taken into consideration.” MR. DEPUTY-SPEAKER: The question is:
“That the Bill to alter the name of the State of Uttaranchal be taken into consideration.” The motion was adopted.
MR. DEPUTY-SPEAKER: The House shall now take up clause by clause consideration of the Bill.
The question is:
“That clauses 2 to 8 stand part of the Bill.” The motion was adopted.
Clauses 2 to 8 were added to the Bill.
Clause 1, the Enacting Formula and the Long Title were added to the Bill.
SHRI SHRIPRAKASH JAISWAL: I beg to move:
“That the Bill be passed.” MR. DEPUTY-SPEAKER: The question is:
“That the Bill be passed.” The motion was adopted.
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