Lok Sabha Debates
Papers Laid On The Table Of The House By Ministers/Members on 3 January, 2018
Sixteenth Loksabha an> Title: Papers laid on the Table of the House by Ministers/Members HON. SPEAKER: Now, Papers to be laid on the Table.
उत्तर पूर्वी क्षेत्र विकास मंत्रालयके राज्य मंत्री, प्रधान मंत्रीकार्यालयमें राज्य मंत्री, कार्मिक, लोक शिकायत और पेंशनमंत्रालयमें राज्य मंत्री, परमाणु ऊर्जा विभाग में राज्य मंत्रीतथा अंतरिक्षविभागमें राज्य मंत्री(डॉ. जितेद्रसिंह) : अध्यक्ष महोदया, मैं निम्नलिखित पत्र सभा पटल पर रखता हूं:-
(1)(एक) इंडियन इंस्टीटय़ूट आफ पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन,नई दिल्ली के वऐाऩ 2016-2017 के वाऐिाऩक प्रतिवेदन की एक प्रति (हिन्दी तथा अंग्रेजी संस्करण)तथा लेखापरीक्षित लेखे।
(दो) इंडियन इंस्टीटय़ूट आफ पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन,नई दिल्ली के वऐाऩ 2016-ाD2017 के कार्यकरण की सरकार द्वारा की समीक्षा की एक प्रति (हिन्दी तथा अंग्रेजी संस्करण)।
[Placed in Library, See No. LT 8362/16/18] (2) कंपनी अधिनियम, 2013 की धारा 394 की उप-धारा (1) के अंतर्गत निम्नलिखित पत्रों की एक-एक प्रति(हिन्दी तथा अंग्रेजी संस्करण)ः-
(एक) भारतीय नाभिकीय विद्युत निगम लिमिटेड, चेन्नई के वऐाऩ 2016-2017 के कार्यकरण की सरकार द्वारा समीक्षा ।
(दो) भारतीय नाभिकीय विद्युत निगम लिमिटेड, चेन्नई के वऐाऩ 2016-2017 का वार्ऐिाक प्रतिवेदन, लेखापरीक्षित लेखे तथा उन पर नियंत्रक-महालेखापरीक्षक की टिप्पणियां ।
[Placed in Library, See No. LT 8363/16/18] संचार मंत्रालय के राज्य मंत्री तथा रेलमंत्रालयमें राज्य मंत्री(श्री मनोजसिन्हा) : अध्यक्ष महोदया, मैं निम्नलिखित पत्र सभा पटल पर रखता हूं:-
(एक) सेंटर फार डेवलपमेंट आफ टेलीमैटिक्स,नई दिल्ली के वऐाऩ 2016-2017 के वार्ऐिाक प्रतिवेदन की एक प्रति (हिन्दी तथा अंग्रेजी संस्करण)तथा लेखापरीक्षित लेखे।
(दो) सेंटर फार डेवलपमेंट आफ टेलीमैटिक्स,नई दिल्ली के वऐाऩ 2016-2017 के कार्यकरण की सरकार द्वारा समीक्षा की एक प्रति (हिन्दी तथा अंग्रेजी संस्करण)।
[Placed in Library, See No. LT 8364/16/18] THE MINISTER OF STATE IN THE MINISTRY OF RAILWAYS (SHRI RAJEN GOHAIN): Madam, I beg to lay on the Table:-
(1) A copy of the Annual Report (Hindi and English versions) of the Rail Land Development Authority, New Delhi, for the year 2016-2017, alongwith Audited Accounts. (2) A copy of the Review (Hindi and English versions) by the Government of the working of the Rail Land Development Authority, New Delhi, for the year 2016-2017.
[Placed in Library, See No. LT 8365/16/18] विदेश मंत्रालय में राज्य मंत्री(जनरल विजय कुमार सिंह) (सेवानिवृत्त) : अध्यक्ष महोदया, मैं निम्नलिखित पत्र सभा पटल पर रखता हूं:-
(1) प्रत्यर्पणअधिनियम, 1962 की धारा 36 की उप-धारा (3) के अंतर्गतप्रत्यर्पणनियम, 2017 जो अधिसूचनासंख्यासा.का.िन. 830(अ) जो 5 जुलाई, 2017 के भारत के राजपत्रमें प्रकाशितहुए थे, की एक प्रति (हिन्दीतथा अंग्रेजीसंस्करण) ।
[Placed in Library, See No. LT 8366/16/18] (2) प्रत्यर्पण अधिनियम, 1962 की धारा 35 के अंतर्गत निम्नलिखित अधिसूचनाओं की एक-एक प्रति(हिन्दी तथा अंग्रेजी संस्करण) -
(एक) सा.का.िन. 418(अ) जो 1 मई, 2017 के भारत के राजपत्र में प्रकाशित हुए थे तथा जो भारत और थाईलैंड के बीच प्रत्यर्पण संधि के बारे में है तथा जिस पर 30.5.2013 को बैंकाक में हस्ताक्षर हुए थे और जो 29.6.2015 से प्रभावशील हुई थी।
(दो) सा.का.िन. 419(अ) जो 1 मई, 2017 के भारत के राजपत्र में प्रकाशित हुए थे तथा जो भारत और वियतनाम के बीच प्रत्यर्पण संधि के बारे में है तथा जिस पर 12.10.2011 को नई दिल्ली में हस्ताक्षर हुए थे और जो 12.08.2013 से प्रभावशील हुई थी।
(तीन) सा.का.िन. 420(अ) जो 1 मई, 2017 के भारत के राजपत्र में प्रकाशित हुए थे तथा जो भारत और मलेशिया के बीच प्रत्यर्पण संधि के बारे में है तथा जिस पर 20.01.2010 को नई दिल्ली में हस्ताक्षर हुए थे और जो 13.02.2011 से प्रभावशील हुई थी।
(चार) सा.का.िन. 421(अ) जो 1 मई, 2017 के भारत के राजपत्र में प्रकाशित हुए थे तथा जो भारत और ब्राजील के बीच प्रत्यर्पण संधि के बारे में है तथा जिस पर 16.04.2008 को ब्राजीलिया में हस्ताक्षर हुए थे और जो 20.08.2015 से प्रभावशील हुई थी।
(पांच) सा.का.िन. 566(अ) जो 6 जून, 2017 के भारत के राजपत्र में प्रकाशित हुए थे तथा जो भारत और अजरबैजान के बीच प्रत्यर्पण संधि के बारे में है तथा जिस पर 13.04.2013 को नई दिल्ली में हस्ताक्षर हुए थे और जो 20.06.2014 से प्रभावशील हुई थी।
[Placed in Library, See No. LT 8367/16/18] THE MINISTER OF STATE IN THE MINISTRY OF SCIENCE AND TECHNOLOGY AND MINISTER OF STATE IN THE MINISTRY OF EARTH SCIENCES (SHRI Y.S. CHOWDARY): Madam, I beg to lay on the Table a copy each of the following papers (Hindi and English versions) under sub-section (1) of Section 394 of the Companies Act, 2013:-
(1) Review by the Government of the working of the Central Electronics Limited, New Delhi, for the year 2016-2017.
(2) Annual Report of the Central Electronics Limited, New Delhi, for the year 2016-2017, along with Audited Accounts and comments of the Comptroller and Auditor General thereon.
[Placed in Library, See No. LT 8368/16/18] THE MINISTER OF STATE IN THE MINISTRY OF LAW AND JUSTICE AND MINISTER OF STATE IN THE MINISTRY OF CORPORATE AFFAIRS (SHRI P.P. CHAUDHARY): Madam, I beg to lay on the Table a copy of the 13th Annual Statement (Hindi and English versions) on Pending Law Commission Reports-(December, 2017).
[Placed in Library, See No. LT 8369/16/18] THE MINISTER OF STATE IN THE MINISTRY OF DEFENCE (DR. SUBHASH RAMRAO BHAMRE): Madam, I beg to lay on the Table a copy each of the following papers (Hindi and English versions) under sub-section (1) of Section 394 of the Companies Act, 2013:-
(1) Review by the Government of the working of the Mazagon Dock Shipbuilders Limited, Mumbai, for the year 2016-2017.
(2) Annual Report of the Mazagon Dock Shipbuilders Limited, Mumbai, for the year 2016-2017, alongwith Audited Accounts and comments of the Comptroller and Auditor General thereon.
[Placed in Library, See No. LT 8370/16/18] *t04 Title: Secretary-General reported a message from the Rajya Sabha that at its sitting held on the 2nd January 2018, Rajya Sabha passed the Insolvency and Bankrupcy Code (Amendment) Bill, 2017, passed by the Lok Sabha on the 29th December, 2017 with amendment and returned the Bill with the request that the concurence of Lok Sabha to the amendment be communicated to Rajya Sabh and laid on the Table the Insolvency and Bankruptcy Code (Amendment) Bill, 2017 as returned by Rajya Sabha, with amendment.
SECRETARY-GENERAL: Madam Speaker, I have to report that Rajya Sabha has returned the Insolvency and Bankruptcy Code (Amendment) Bill, 2017, as passed by Lok Sabha, with amendment.
Madam Speaker, I also lay on the Table the Insolvency and Bankruptcy Code (Amendment) Bill, 2017, as returned by Rajya Sabha, with amendment.
*t05 Title: Presentation of the 38th Report of the Committee on Private Members Bill and Resolution.
DR. M. TH AMBIDURAI (KARUR): I beg to present the Thirty-eighth Report (Hindi and English versions) of the Committee on Private Members’ Bills and Resolutions.
*t06 Title: Smt. Meenakshi Lekhi laid on the Table the 9th report of the Committee of Priviledge.
श्रीमती मीनाक्षीलेखी(नई दिल्ली) : माननीय अध्यक्ष महोदया, मैं विशेऐााधिकार समिति का नौवाँ प्रतिवेदन (हिन्दी तथा अंग्रेजी संस्करण) प्रस्तुत करती हूँ।
*t07 Title: Presentation of the 11th report of the Committee on Empowerment of women (2017-18).
SHRIMATI BIJOYA CHAKRAVARTY (GUWAHATI): I beg to present the Eleventh Report (Hindi and English versions) of the Committee on Empowerment of Women (2017-18) on the Subject ‘Women‘s Health Care: Policy Options’.
*t08 Title: Presentation of the 46th report of the Standing Committee on Finance on the subject 'Transformation towards a Digital Economy'.
SHRI M. VEERAPPA MOILY (CHIKKABALLAPUR): I beg to present the Fifty-sixth Report (Hindi and English versions) of the Standing Committee on Finance on the subject 'Transformation towards a Digital Economy'.
*t09 title: Presentation of the 21st and 22nd report of the Standing Committee on Petroleum and Natural Gas.
SHRI PRALHAD JOSHI (DHARWAD): I beg to present the following Reports (Hindi and English versions) of the Standing Committee on Petroleum and Natural Gas:-
(1) Twenty-first Report on Action Taken by the Government on the recommendations contained in the Eighteenth Report (Sixteenth Lok Sabha) of the Standing Committee on Petroleum and Natural Gas (2016-17) on ‘Demands for Grants (2017-18)’.
(2) Twenty-second Report on Action Taken by the Government on the recommendations contained in the Twentieth Report 6 (Sixteenth Lok Sabha) of the Standing Committee on Petroleum and Natural Gas (2016-17) on ‘Centre for High Technology’.
*t10 Title: Presentation of the 36th report of the Standing Committee on Coal & Steel.
श्री राकेश सिंह (जबलपुर) : माननीय अध्यक्ष महोदया, मैं कोयला मंत्रालय से संबंधित ‘कोयला का उत्पादन, विपणन और वितरण’ विऐाय पर कोयला और इस्पात संबंधी स्थायी समिति का 36वाँ प्रतिवेदन (हिन्दी तथा अंग्रेजी संस्करण) प्रस्तुत करता हूँ।
*t11 Title: Presentation of the 48th & 49th report of the Standing Committee on Social Justice and Empowernment (2017-18).
श्री रमेश बैस (रायपुर) : माननीय अध्यक्ष महोदया, मैं सामाजिक न्याय और अधिकारिता संबंधी स्थायी समिति (2017-18) के निम्नलिखित प्रतिवेदन(हिन्दी तथा अंग्रेजी संस्करण) प्रस्तुत करता हूँ :-
(1) सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय (नःशक्त व्यक्ति अधिकारिता विभाग)से संबंधित‘सहायक सामग्री/उपकरण(एडीआइपी) के खरीद/िफटिंग के लिए नःशक्त व्यक्तियों को सहायता की स्कीम का कार्यान्वयन’ के बारे में 48वाँ प्रतिवेदन।
(2) जनजातीय कार्य मंत्रालय की ‘जनजातियों के लिए शैक्षणिक योजनाएंं’ के बारे में 49वाँ प्रतिवेदन।
*t12 Title: The Minister of the State in the Ministry of Tourism and Minister of State in the Ministry of Electronics and Information Technology on behalf of the Ministry of Law and Justice; and Minister of Electronics and Information Technology laid a statement regarding the Status of implementation of the recommendations contained in the 36th Report of the Standing Committee on Information Technology on Demands for Grants (2017-18), pertaining to the Ministry of Electronics and Information Technology.
THE MINISTER OF STATE OF THE MINSTRY OF TOURISM AND MINISTER OF STATE IN THE MINISTRY OF ELECTRONICS AND INFORMATION TECHNOLOGY (DR. ALPHONS KANNANTHANAM): On behalf of Shri Ravi Shankar Prasad, I beg to lay a statement regarding the status of implementation of the recommendations contained in the 36th Report of the Standing Committee on Information Technology on Demands for Grants (2017-18), pertaining to the Ministry of Electronics and Information Technology'.
*t13 Title: The Minister of State in the Ministry of Parliamentary Affairs and Minister of State in the Ministry of Water Resource, River Development and Ganga Rejuvenation on Behalf of the Minister of Petroleum and Natural Gas and Minister of Skill Development and Enterprenuership laid a statement regarding Status of implementation of the recommendations contained in the 10th Report of the Standing Committee on Petroleum and Natural Gas on the subject 'Functioning of Petroleum Conservation Research Association', pertaining to the Ministry of Petroleum and Natural Gas.
THE MINISTER OF STATE IN THE MINISTRY OF PARLIAMENTARY AFFAIRS AND MINISTER OF STATE IN THE MINISTRY OF WATER RESOURCES, RIVER DEVELOPMENT AND GANGA REJUVENATION (SHRI ARJUN RAM MEGHWAL): On behalf of Shri Dharmendra Pradhan, I beg to lay a statement regarding the status of implementation of the recommendations contained in the 10th Report of the Standing Committee on Petroleum and Natural Gas on the subject 'Functioning of Petroleum Conservation Research Association', pertaining to the Ministry of Petroleum and Natural Gas.
12.09 hrs *t14 Title: The Minister of State in the Ministry of Communications, and Minister of State in the Ministry of Railway laid a statement regarding Status of implementation of the recommendations contained in the 35th Report of the Standing Committee on Information Technology on Demands for Grants (2017-18), pertaining to the Department of Telecommunications, Ministry of Communications.
THE MINISTER OF STATE OF THE MINISTRY OF COMMUNICATIONS AND MINISTER OF STATE IN THE MINISTRY OF RAILWAYS (SHRI MANOJ SINHA): I beg to lay a statement regarding the status of implementation of the recommendations contained in the 35th Report of the Standing Committee on Information Technology on Demands for Grants (2017-18), pertaining to the Department of Telecommunications, Ministry of Communications.
12.09 ½ hrs *t15 Title: The Minister of State in the Ministry of Science and Technology and Minister of State in the Ministry of Earth Sciences laid a statement regarding Status of implementation of the recommendations contained in the 297th Report of the Standing Committee on Science and Technology, Environment and Forests on Demands for Grants (2017-18), pertaining to the Department of Scientific and Industrial Research (DSIR), Ministry of Science and Technology.
THE MINISTER OF STATE IN THE MINISTRY OF SCIENCE AND TECHNOLOGY AND MINISTER OF STATE IN THE MINISTRY OF EARCH SCIENCES (SHRI Y.S. CHOWDARY): I beg to lay a statement regarding the status of implementation of the recommendations contained in the 297th Report of the Standing Committee on Science and Technology, Environment and Forests on Demands for Grants (2017-18), pertaining to the Department of Scientific and Industrial Research (DSIR), Ministry of Science and Technology.
12.09 ¾ hrs *t16 Title: Motion regarding the 49th report of the Business Advisory Committee presented to the house on the 2nd January 2018(Motion Adopted).
THE MINISTER OF CHEMICALS AND FERT ILIZERS AND MINISTER OF PARLIAMENTARY AFFAIRS (SHRI ANANTHKUMAR): I beg to move:
“That this House do agree with the Forty-ninth Report of the Business Advisory Committee presented to the House on the 2nd January, 2018.” HON. SPEAKER: The question is:
“That this House do agree with the Forty-ninth Report of the Business Advisory Committee presented to the House on the 2nd January, 2018.” Themotion was adopted.
माननीय अध्यक्ष : प्लीज़, एक मिनट के लिए मेरी बात सुनिए।
…( व्यवधान)
माननीय अध्यक्ष : ज्योतिरादित्य जी, आपने जो प्रिवलेज मोशन दिया है,मैं उसको कंसीडर कर रही हूँ, इसलिए, मुझे लगता है कि उसके बारे में आपको बोलने की आवश्यकता नहीं है। …( व्यवधान)
माननीय अध्यक्ष : मैं आगे बोल रही हूँ।
…( व्यवधान)
माननीय अध्यक्ष : मैं किसी को मना नहीं कर रही हूँ।
…( व्यवधान)
माननीय अध्यक्ष : मेरा पूरे सदन से यह निवेदन...
…( व्यवधान)
माननीय अध्यक्ष : सौगत राय जी,प्लीज़ मेरी बात एक सुन लीजिए।
…( व्यवधान)
*t17 Title: Observation regarding the problems faced by the country.
माननीय अध्यक्ष : महाराऐट्र में जो कुछ भी हुआ है, आप सब उसके संदर्भ में बोलना चाहते हैं। मैं किसी को बोलने के लिए मना नहीं करूँगी। मेरी आप सब लोगों से केवल एक रिक्वेस्ट है कि ये जो सारी बाते हैं और जो कुछ भी हो रहा है, उसके बारे में बोलते समय हम सभी लोग कुछ बातों का ध्यान रखें। मुझे लगता है कि हमारे यहाँ एक ज़माना ऐसा था, जब अंग्रेजों ने हमारे आपस में फूट डालकर, हमारे एक-एक शासक को पराजित करते हुए, अपना राज हमारे देश पर जमा लिया था। हम सभी जन प्रतिनिधि हैं। हम अपने-अपने क्षेत्र और पूरे भारत की जनता का प्रतिनिधित्व करते हैं। जिस प्रकार हम कहते हैं कि -‘‘स्वधर्मे निधनं श्रेयः परधर्मो भयावहः’’, उसी प्रकार मैं कहूँगी, जिसे आप लोग याद रखिएगा- ‘‘स्वराज्य निधनं श्रेयः परराज्य भयावहः’’। यह हम सब ने अनुभव किया है। आज आप लोग यहाँ जो भी विऐाय उठाएंंगे, उन्हें आप अपने-अपने अलग तरीकों से उठाइए,लेकिन हमें एक बात का ध्यान रखना होगा, कि आखिर में हम सभी जनता के प्रतिनिधि हैं। हम सभी को कहीं न कहीं एक होकर इस राऐट्र की रक्षा करनी है। इसके लिए हम यहाँ हैं। यह समस्या, जो उभर रही है, इसका निदान आरोप-प्रत्यारोप लगाकर नहीं होगा। हम सभी को यहाँ मिल-बैठकर इस समस्या का निदान करना है। मुझे जो लगा, मैं वह आप सब के सामने रख रही हूँ। …( व्यवधान)
माननीय अध्यक्ष : प्लीज़, सुरेश जी, मेरी बात सुनिए।
…( व्यवधान)
माननीय अध्यक्ष : मैं किसी को दोऐा नहीं दे रही हूँ। मैं यह कह रही हूँ कि आज देश के सामने जो भी समस्याएँ आ रही हैं, वे केवल आरोप-प्रत्यारोप से नहीं सुलझेंगी। इसलिए प्लीज़, आप सब एक रिस्पॉन्सिबिल जन प्रतिनिधि के नाते इन समस्याओं को उठाइए। मैं इसके लिए आप सब से हाथ जोड़ कर निवेदन ही कर सकती हूँ। मैं आप सब से यह निवेदन देश के लिए कर रही हूँ। इससे पहले कि आप सब बोलें, आज मुलायम सिंह जी डिफेंस के मामले में अपनी बात कहना चाहते हैं। उन्होंने कल भी रिक्वेस्ट की थी। आज उन्होंने फिर रिक्वेस्ट की है। पहले उन्हें बोलने दीजिए, फिर मैं आप को allow कर दूँगी। …( व्यवधान)
माननीय अध्यक्ष : प्लीज़, उन्होंने कल से रिक्वेस्ट की हुई है। आप उनकी बात भी समझिए। वे कुछ कहना चाहते हैं। उन्हें बोलने दीजिए। मुलायम सिंह जी, आप शॉर्ट में बोलिए।
श्री मुलायम सिंह यादव (आज़मगढ़) : अध्यक्ष महोदया, आपका बहुत-बहुत धन्यवाद। मैं अपनी बात संक्षिप्त में कहूँगा। मैं लंबा भाऐाण नहीं दूँगा। मैं आपके सामने अपनी बात रखना चाहता हूँ। मेरा सीधा सा सवाल, जो समस्या है, उसी पर है। आज जम्मू और कश्मीर की सीमा पर और आगे चीन की सीमा पर भी लगातार हमारे देश के जवान शहीद हो रहे हैं। हमारे यहाँ पाकिस्तान और चीन प्रवेश करने की कोशिश कर रहा है। यह एक गंभीर समस्या है। मैं यह बात किसी दलगत भावना से नहीं कह रहा हूँ। आपने जो कहा है, मैं उससे सहमत हूँ। मैं आपकी इस बात से सहमत हूँ कि पूरे देश के बारे में सदन में बहस की जाए। रक्षा मंत्रालय की जिम्मेवारी संभालने का मौका हमें भी मिला था, लेकिन उस समय देश की एक इंच भूमि पर भी वे कब्जा नहीं कर पाए थे। जब भी उन्होंने हमारी भूमि पर कब्जा करने की कोशिश की, तब हमारी सेना ने उनकी सीमा पर जाकर उन पर हमला किया, जिसमें उधर के कई लोग मारे गए थे। इस प्रकार की एक नहीं, बल्कि अनेक घटनाएँ हैं। मैं इन घटनाओं का लंबा उल्लेख नहीं करना चाहता हूँ। अध्यक्ष महोदया, आपको याद होगा कि उस समय इस पूरे सदन ने हमें बधाई दी थी। माननीय अटल जी ने भी हमें बधाई दी थी। हमारे हिन्दुस्तान की सेना सब से बहादुर सेना है। पूरी दुनिया में इतनी बहादुर सेना कहीं और नहीं है। मैं किसी पर आरोप नहीं लगा रहा हूँ, लेकिन सरकार यह बताए कि क्या वजह है कि हमारे जवान शहीद हो रहे हैं? मैं पहले भी कह चुका हूँ कि जब हम इतने शक्तिशाली देश हैं और हमारे देश की सेना भी इतनी शक्तिशाली है, इसके बावजूद हमारे जवान क्यों शहीद हो रहे हैं? क्या सरकार किसी दुविधा में है? मुझे ऐसा लगता है कि सरकार ने हमारे सैनिकों को खुली छूट नहीं दी हुई है, ताकि वे अपनी रक्षा के लिए कुछ कर सकें। हमने सैनिकों को यह छूट दे रखी थी, कि यदि आप पर कोई हमला करे, तो आप उनके घर में घुसकर उन पर हमला कीजिए। आपको याद होगा कि हमारी सेना ने लाहौर में जाकर मैदान में उन्हें खदेड़ दिया था। हमने उन्हें आदेश दिया था। हम यही जानना चाहते हैं कि हमारे देश के जवान आज क्यों शहीद हो रहे हैं? हमारा देश उनसे सात-आठ गुना बड़ा है, हमारी सेना इतनी बहादुर है, इसके बावजूद आज हम उनसे पिट रहे हैं? हमारे देश की दुनिया में बदनामी हो रही है कि पाकिस्तान और चीन हिन्दुस्तान की सेना को मार भी रहे हैं और हमारी जमीन पर कब्जा भी कर रहे हैं। पूरी दुनिया में हमारा अपमान हो रहा है। ऐसा कभी नहीं हुआ। जब ऐसा हुआ तो युद्ध हो गया। लेकिन आज हमारी सेना के जवान मारे जा रहे हैं। मेरा कहना है कि सरकार को सेना को दुविधा में नहीं रखना चाहिए। उनको स्पऐट आदेश होना चाहिए कि यदि आप पर हमला करें तो आप घुसकर उन पर हमला करें। माननीय अध्यक्ष : मुलायम सिंह जी, आपने अपनी बात कह ली है।
श्री मुलायम सिंह यादव : मैंने ऐसा लिखित आदेश दिया था। आप उसको देख लीजिए। यह मामूली सवाल नहीं है, यहघटना मामूली नहीं है। हमारे देश का सम्मान दुनिया में गिर रहा है, क्योंकि हम पिट रहे हैं, हमारे बहादुर सैनिक मारे जा रहे हैं। माननीय अध्यक्ष : मुलायम सिंह जी, आपकी भावना सभी तक पहुंच चुकी है। कृपया समाप्त कीजिए।
श्री मुलायम सिंह यादव : सरकार को जवाब देना चाहिए कि उसको क्या दुविधा है? जबवे हमला कर रहे हैं तब हमारे जवानों को दुविधा में रखा जा रहा है। ऐसी मेरे पास सूचना है कि अभी तक सेना को स्पऐट आदेश नहीं दिए गए हैं कि अगर आपको मारें तो आप भी मारें। HON. SPEAKER: Mulayam Singhji, please take your seat.
श्री मुलायम सिंह यादव : मैंने ऐसा कहा था, जबहमारे सात जवान शहीद हुए थे, किआप चार गुना मार गिराइए, हमउनसे आठ गुना हैं।...(व्यवधान) माननीय अध्यक्ष : मुलायम सिंह जी, आपका स्टेटमेंट रिकॉर्ड हो चुका है।
मल्लिकार्जुन खड़गे जी।
श्री धर्मेद्र यादव (बदायूँ) : अध्यक्ष जी, सरकार जवाब दे।...(व्यवधान)
माननीय अध्यक्ष : धर्मेद्र जी, आपबैठ जाइए।
श्री धर्मेद्र यादव : अध्यक्ष जी, बहुत ही गम्भीर मामला है, सरकार को जवाब देना चाहिए कि आखिर हमारे सैनिकों को छूट क्यों नहीं दी जा रही है।...(व्यवधान) माननीय अध्यक्ष : आपलोग बैठ जाइए।
…( व्यवधान)
श्री मुलायम सिंह यादव : अध्यक्ष जी, सरकार को जवाब तो देना ही चाहिए। यह देश का सवाल है।...(व्यवधान) माननीय अध्यक्ष : मैं ऐसा नहीं कर सकती हूं, जवाब देने के लिए जबरदस्ती नहीं कर सकती हूं।
…( व्यवधान)
श्री धर्मेद्र यादव : सरकार में बैठे लोगों को जवाब देना चाहिए कि हमारे सैनिक क्यों शहीद हो रहे हैं।...(व्यवधान) माननीय अध्यक्ष : धर्मेद्र जी, आपबैठ जाइए। मैं किसी को जवाब देने के लिए जबरदस्ती नहीं कर सकती हूं। …( व्यवधान)
माननीय अध्यक्ष : मैं इस तरह से रोज-रोज जवाब देने के लिए नहीं कह सकती हूं।
…( व्यवधान)
श्री मुलायम सिंह यादव : महोदया, सरकार की तरफ से जवाब आना चाहिए।...(व्यवधान)
माननीय अध्यक्ष : आपकी बात रिकॉर्ड में आ गयी है। इस तरह से नहीं होता है।
श्री मल्लिकार्जुनखड़गे : महोदया, नियम 56 केतहत हमने स्थगन प्रस्ताव का नोटिस दिया था। लेकिन वह स्थगन प्रस्ताव अस्वीकार हो गया। माननीय अध्यक्ष : एडजर्नमेंट मोशन स्वीकार नहीं हुआ है। मैंने शून्यकाल में यह बात कही है। श्री मल्लिकार्जुनखड़गे: महोदया, मैं ‘अस्वीकार’ कह रहा हूं। मुझे भी थोड़ी-थोड़ी हिन्दी आती है। माननीय अध्यक्ष : आपको मुझ से अच्छी हिन्दी आती है। शायद मेरे सुनने में तकलीफ होने लगी है और यह आप ही के कारण हो रहा है। श्री मल्लिकार्जुनखड़गे : मैं अच्छे डॉक्टर के बारे में आपको बताऊंगा।
अध्यक्ष महोदया, आपने मुझे जीरो ऑवर में एक महत्वपूर्ण मुद्दा उठाने की परमिशन दी है, इसके लिए मैं आपका आभारी हूं और मैं यह चाहता हूं कि सरकार इसका जवाब, खासकर प्रधानमंत्री जी जो स्वयं यहां आज आए थे, अगर वह इसका रिप्लायी देंगे तो सारे देश में एक अच्छा संदेश जाएगा। देश में दलितों पर अत्याचार के मामले लगातार सामने आ रहे हैं।...(व्यवधान) अत्याचार की घटनाएंं कम नहीं हो रही हैं।...(व्यवधान) माननीय अध्यक्ष : मैंने पहले ही कहा है कि मैं बोलने के लिए समय दे रही हूं, लेकिन मर्यादित तरीके से हर कोई अपनी बात रखे। श्री मल्लिकार्जुनखड़गे : कुछ फासिस्टवादी शक्तियां दलितों को समाज में सबसे नीचे पायदान पर रखना चाहती हैं। ऊना, रोहित वेमुला और अब भीमा-कोरेगांव की हिंसा दलितों के प्रति अत्याचार के उदाहरण हैं। ग्रामीण क्षेत्रों के साथ-साथ शहरी क्षेत्रों में भी दलितों के खिलाफ होने वाले अत्याचार बढ़े हैं जो कि बहुत चिंताजनक है। अध्यक्ष महोदया, मैं यह बात इसलिए कह रहा हूं कि दलित जब कभी स्वाभिमान से जीने के लिए उठते हैं और जब उनका स्वाभिमान जागृत होता है तो वे कोई कार्यक्रम करते हैं। उसमें कुछ लोग इंटरफेयर करके या चंद लोगों को उचका कर उस कार्यक्रम को विफल करने और समाज में फूट डालने की कोशिश करते हैं। आज वही भीमा कोरेगाँव में हुआ है। वऐाऩ 1818 के जो दलित सैनिक थे, उन्होंने जो लड़ाई लड़ी थी उसकी याद में वहां एक स्मारक है। वहां पर हर साल दलित लोग जाकर उसमें शामिल होकर श्रद्धांजली अर्पित करते हैं। अब तक कोई अहितकर घटना नहीं हुई, लेकिन आज जो परस्यू हुआ, यह क्यों हुआ, किसने इसमें इंटरफेयर किया, किसने उसको प्रोत्साहित किया और किसने उनको इंस्टीगेट किया, हमें यह सोचने की आवश्यकता है। जब दलित लोगों का सेना में या आर्मी में भर्ती होना हजारों सालों से प्रतिबंध था क्योंकि दलित अपने हाथ में हथियार नहीं ले सकता था। माननीय अध्यक्ष : मुझे तो नहीं लगता कि हजारों सालों से प्रतिबंधित था।
…( व्यवधान)
श्री मल्लिकार्जुनखड़गे : हमारे देश में मनुस्मृति से लेकर ब्रिटिश आने तक कोई दलित अपने हाथ में हथियार नहीं लेता था, क्योंकि उनको प्रोहिबीशन था। माननीय अध्यक्ष : शिवाजी की सेना में तो दलित थे।
…( व्यवधान)
माननीय अध्यक्ष : ऐसे ही कोई भी स्टेटमेंट मत दीजिए।
…( व्यवधान)
श्री मल्लिकार्जुनखड़गे : मैडम, मेरे पास पूरी जानकारी है। शिवाजी के वक्त क्या हुआ और पेशवाओं के साथ क्या हुआ। मैं दोनों बातें बोलता हूं। ...(व्यवधान) शिवाजी के वक्त तो दलित थे, लेकिन पेशवा के वक्त पीछे तो झाड़ू लगायी और मुंह पर दो लोगों ने थूकने के लिए मंडी लगायी।...(व्यवधान) माननीय अध्यक्ष : प्लीज़, सबको मालूम है।
श्री मल्लिकार्जुनखड़गे : आपको मालूम है ना।
माननीय अध्यक्ष : प्लीज़ कंटीन्यू।
श्री मल्लिकार्जुनखड़गे : ये चीजें पेशवा करते थे। शिवाजी के बाद उनको सेना में भर्ती होना बैन था। ब्रिटिश गवर्नमेंट में जब वह बैन उठाया गया...(व्यवधान) और उन लोगों को भर्ती करने का, सिर्फ महार रेजीमेंट का नहीं है, राजपूत रेजीमेंट है, जाट रेजीमेंट है।...(व्यवधान) माननीय अध्यक्ष : खड़गे जी, आप अपनी बात को जल्दी पूरा कीजिए। शून्यकाल में लम्बा भाऐाण नहीं होना चाहिए। …( व्यवधान)
माननीय अध्यक्ष : एक बात यह भी ध्यान में रखिए कि अगर मैं गलत नहीं हूं तो शायद इसकी ज्यूडीशियल इन्क्वायरी भी कर दी गई है। आप सब बातों का ध्यान रखकर बोलिए और संक्षिप्त में बोलिए। श्री मल्लिकार्जुनखड़गे: सबका ध्यान रखना है।
माननीय अध्यक्ष : जो आज की तारीख में रखना चाहते हैं, वह बोलिए।
…( व्यवधान)
श्री मल्लिकार्जुनखड़गे : मैं, आज यही बात कर रहा हूं। जो भीमा कोरेगाँव में हुआ है।...(व्यवधान) माननीय अध्यक्ष : मैं इस पर चर्चा नहीं करा रही हूं। आप केवल मामला उठाइए,नहीं तो मुझे किसी दूसरे सदस्य का नाम लेना पड़ेगा। श्री मल्लिकार्जुनखड़गे: मामला उठाया है। लेकिन कोरेगाँव में जो हुआ है, इससे समाज में डिवीजन करने के लिए वहां पर महार और मराठों में फूट डालने के लिए वहां के जो कट्टर हिंदुत्ववादी हैं और …* के लोग हैं।...(व्यवधान) इसके पीछे …* के लोगों का हाथ है। MAJ. GEN. B.C. KHANDURI AVSM (RETD.) (GARHWAL): Madam, this should be expunged. What he said should not go on record. …(Interruptions) श्री मल्लिकार्जुनखड़गे : इसके पीछे उनका हाथ है। उन्होंने यह काम करवाया है।
HON. SPEAKER: No, I am sorry. Do not make allegation, please.
श्री मल्लिकार्जुनखड़गे: मैं यह बात नहीं बोल रहा हूं।
HON. SPEAKER: No allegation, please. I am sorry.
श्री मल्लिकार्जुनखड़गे : खुद शरद पवार जी ने यह कहा है। वह पुणे में रहते हैं। उन्होंने यह कहा है। मैडम स्पीकर, आप सुनिए। ...(व्यवधान) HON. SPEAKER: Saugata Roy Ji.
SHRI K.C. VENUGOPAL (ALAPPUZHA): Madam, let him complete…..(Interruptions)
PROF. SAUGATA ROY (DUM DUM): Madam, I speak with a deep sense of responsibility. You have already said….(Interruptions) माननीय अध्यक्ष : ज्यादा लम्बा भाऐाण नहीं होगा। शून्यकाल में जितना उठा सकते हैं, उतना उठाइए। PROF. SAUGATA ROY : You have already said that we should say nothing here that will disturb the situation. Our leader, Mamata Banerjee and our party believe in unity among all classes. … (Interruptions) माननीय अध्यक्ष : आपअपनी बात कम्पलीट कीजिए।
…( व्यवधान)
माननीय अध्यक्ष : आपएक बात सुनिए, शून्यकाल में लम्बा भाऐाण अलाउड नहीं है। आप अपनी बात एक मिनट में पूरी कीजिए। शून्यकाल में जितना बोल सकते हैं, आपउतना ही बोलिये। श्री मल्लिकार्जुनखड़गे : मैं यहां वहां के तथ्य रख रहा हूं।
माननीय अध्यक्ष : आप दिखाओ मत, please complete it within one minute. That is okay.
… (Interruptions)
श्री मल्लिकार्जुनखड़गे : आपने पढ़ा होगा. इसीलिए जो दलितों पर...(व्यवधान)
माननीय अध्यक्ष : आप कम्पलीट करिये।
श्री मल्लिकार्जुनखड़गे : मैं आपको इतने उदाहरण दे सकता हूं, लेकिन इतना समय नहीं है। लेकिन गुजरात के ऊना में हो, महाराऐट्र में हो, राजस्थान में हो.... माननीय अध्यक्ष : नहीं होना चाहिए, आपअपनी भावना यहां रखो।
श्री मल्लिकार्जुनखड़गे : हरजगह जहां-जहां … * की गवर्नमैंट है...
HON. SPEAKER: No allegation will be allowed.
… (Interruptions)
श्री मल्लिकार्जुनखड़गे : वहां पर ज्यादा से ज्यादा अत्याचार हुए हैं।...(व्यवधान)
HON. SPEAKER: This will not go in record.
…(Interruptions) * HON. SPEAKER: I will not allow any allegation.
… (Interruptions)
माननीय अध्यक्ष : मैंने पहले ही बोला कि ज्यूडिशियल इंक्वायरी है, इसलिए नो एलिगेशन।
SHRI MALLIKARJUN KHARGE : I want that a Supreme Court Judge should be appointed. … (Interruptions) He should inquire this and not the State Government. The State Government has taken a decision. That is a different thing. … (Interruptions) It is my demand that the Prime Minister should come in the House and make a statement because he is always keeping quiet when such incidents happen. … (Interruptions) He does not take any action. … (Interruptions) He keeps mum. He used to say others …* He is a …* regarding dalits. … (Interruptions) माननीय अध्यक्ष : आप बैठिये।
HON. SPEAKER: This will not go in record.
…(Interruptions) * HON. SPEAKER: I am sorry.
… (Interruptions)
रसायन और उर्वरकमंत्रीतथा संसदीयकार्यमंत्री(श्री अनन्तकुमार): मैडम, मैं इतना ही कहना चाहूंगा कि मल्लिकार्जुन खड़गे जी जो महाराऐट्र में समस्या शुरू हुई है, उसका निदान नहीं करना चाहते हैं, बल्कि उसे भड़काना चाहते हैं...(व्यवधान) उस पर राजनीति करना चाहते हैं। ...(व्यवधान) कांग्रेस आज के दिन हताशा में है। कांग्रेस गुजरात हार चुकी है, कांग्रेस हिमाचल हार चुकी है, कांग्रेस हर जगह हार का मुंह देख रही है ...(व्यवधान) 12.28 hrs (Atthis stage, Shri K. Suresh, Shri Gaurav Gogoi and some other hon. Members came and stood onthe floor near the Table.) … (Interruptions)
इसीलिए महाराऐट्र में शांति और सुव्यवस्था के पैगाम की जो कामना करनी चाहिए, उसके लिए ऐलान करना चाहिए। जैसा आपने कहा कि ब्रिटिशर्स आए और भारत में डिवाइड एंंड रूल की पालिसी को लेकर आए। आज के दिन ब्रिटिशर्स की जगह पर कांग्रेस वाले डिवाइड एंंड रूल पालिसी कर रहे हैं...(व्यवधान) समाज को तोड़ने का काम कर रहे हैं, समाज में विद्वेऐा पैदा करने का काम कर रहे हैं। यदि आज के दिन में सबका साथ, सबका विकास यह विचार कोई सामने रखकर पूरे देश को एक साथ लेकर आगे जा रहे हैं तो वह हमारे नेता, श्री नरेद्र भाई मोदी जी लेकर जा रहे हैं...(व्यवधान) माननीय प्रधान मंत्री जी लेकर जा रहे हैं।
मैडम, आपके नेतृत्व में यह हाउस, यह सदन, यह लोक सभा शांति का पैगाम देने का काम करे और वहां सभी लोग भाईचारे के साथ रहें, यह पैगाम देने का एक फोरम होना चाहिए, एक मंच होना चाहिए। वहां जो आग लगी है, उस आग को बुझाने के बजाय आग को भड़काने का काम मल्लिकार्जुन खड़गे,राहुल गांधी और कांग्रेस पार्टी कर रही है ...(व्यवधान) इसकी हम घोर निंदा करते हैं। इसको देश बर्दाश्त नहीं करेगा। ...(व्यवधान)
माननीय अध्यक्ष : आप लोग बैठिये, मैंने पहले ही सबको कहा है कि इस पर राजनीति मत करो। This is not fair on your part.
…(Interruptions)
माननीय अध्यक्ष : आप दलितों की भलाई भी नहीं चाहते हो, चर्चा भी नहीं चाहते हो, ये तरीके नहीं होते हैं। आई एम सॉरी। मैंने इसलिए रिक्वैस्ट की थी, यह गलत बात है।
…( व्यवधान)
HON. SPEAKER: Saugata Roy ji, do you want to speak?
… (Interruptions)
HON. SPEAKER: But, please mind your language.
PROF. SAUGATA ROY: I have given a notice of Adjournment Motion under Rule 56 on the clashes that broke out in Pune, Maharashtra on January 1st. … (Interruptions)
Madam, that day the dailts had gathered in Bhima Koregaon to celebrate the visit of Dr. Ambedkar in 1927 to the spot where the dalits had fought the peshwas. … (Interruptions)
HON. SPEAKER: You do not know the incident.
… (Interruptions)
PROF. SAUGATA ROY : Madam, let me complete in two minutes. … (Interruptions)
Madam, our party and our leader, Mamata Banerjee, believes in harmony between classes. Any clash between two groups or two castes is condemnable. I think that the Maharashtra Government failed totally in anticipating the situation and preventing the violence which led to stone-throwing and arson. Many cars and vehicles were put on fire. … (Interruptions)
Madam, today there is bandh throughout Maharashtra. … (Interruptions) There is a possibility of further violence. … (Interruptions) We want this House to … (Interruptions)
HON. SPEAKER: They are doing it. The State Government is there.
Shri Adhalrao Patil Shivajirao.
… (Interruptions)
*m08 श्री आधलराव पाटील शिवाजीराव (शिरूर) : अध्यक्ष महोदया, पिछले दो दिनों से महाराऐट्र के भीमा-कोरेगाँव,जो मेरा चुनाव क्षेत्र है, जो कि पूणे से तीस किलोमीटर की दूरी है, वहां पर हिंसा हो रही है। ...(व्यवधान) भीमा-कोरेगाँव में दो सौ साल पुराना इतिहास है और 90 साल से वहां हर पहली जनवरी को जश्न मनाया जाता है। ...(व्यवधान) लेकिन पिछले दो दिनों से जो घटनाएंं घटी हैं, उनसे दलित और बाकी किसी का संबंध नहीं है। ...(व्यवधान) सिर्फ राजनीति के कारण, कुछ लोगों ने राजनीति करने के लिए और दोनों जातियों में तनाव बढ़ाने के लिए जान-बूझ कर ये कोशिश की है कि मराठा और दलित जातियों में झगड़ा हो जाए।...(व्यवधान) इसी के लिए यह तनाव किया गया है। ...(व्यवधान) इसके बावजूद सरकार से मेरी माँग है कि सरकार गृह मंत्रालय की तरफ से महाराऐट्र सरकार को सुझाव दे। ...(व्यवधान)
माननीय अध्यक्ष : ज्युडिशल इंक्वायरी हो रही है न?
…( व्यवधान)
श्री आधलराव पाटील शिवाजीराव: मैडम, वहां पिछले दो दिनों से पुलिस डिपार्टमेंट का कुछ फेल्योर हो गया है। ...(व्यवधान) Police Department could not control the mob and clashes have just taken place.
माननीय अध्यक्ष : राव साहब दानवे पाटील जी बोलिए।
…( व्यवधान)
*m09 श्री रावसाहेब पाटील दानवे (जालना) : अध्यक्ष महोदया, पूणे के पास भीमा-कोरेगाँव में जो घटना घटी है,उसका हम समर्थन नहीं करे हैं,उसकी निंदा करते हैं। ...(व्यवधान) ब्रिटिशर्स में और उनमें जो युद्ध हुआ था, उस युद्ध को दो सौ साल पूरे हो गए हैं। ...(व्यवधान) उसके सम्मान में इस बार भीड़ ज्यादा आई। ...(व्यवधान) लेकिन वहां पर राजनीति की भाऐाा इस्तेमाल की गई, जिसके कारण वहां पर यह दंगा हुआ है। ...(व्यवधान) मुझे ऐसा लगता है कि महाराऐट्र सरकार ने इसकी न्यायिक चौकसी का आदेश भी दे दिया है।...(व्यवधान) महोदया, पिछले तीन सालों से महाराऐट्र में हमारी सरकार है।...(व्यवधान) तीन सालों में एक भी दंगा महाराऐट्र में हुआ नहीं है।...(व्यवधान) हमारा विकास का एजेंडा है। ...(व्यवधान) ये लोग हमारे इस विकास के एजेंडा को रोक नहीं पाते हैं।...(व्यवधान) इसलिए ऐसे दंगे कराना इन्होंने शुरू किया है। ...(व्यवधान) हमारी सरकार इसका पूरा समर्थन करती है कि ऐसा नहीं होना चाहिए। ...(व्यवधान) मुझे लगता है कि महाराऐट्र में शांति रखने के लिए हमारी सरकार पूरी तरह कोशिश कर रही है, इसमें कोई संदेह नहीं है। ...(व्यवधान) लेकिन ये लोग विकास का एजेंडा रोकने के लिए दंगों की भाऐाा का प्रयोग कर रहे हैं। ...(व्यवधान) वहां पर कोई भी ऐसी घटना महाराऐट्र सरकार घटने नहीं देगी और न्यायिक चौकसी हो रही है। ...(व्यवधान)
HON. SPEAKER: Hon. Members, the Matters under Rule 377 shall be laid on the Table of the House. Members, who have been permitted to raise matters under Rule 377 today and are desirous of laying them, may personally hand over text of the matter at the Table of the House within twenty minutes.
Only those matters shall be treated as laid for which text of the matter has been received at the Table within the stipulated time. The rest will be treated as lapsed.
… (Interruptions)
*t18 Title: Need toallot plots tothose candidates whosenames came in drawof lotsfor landplots conducted byJharkhand StateHousing Board.
श्री सुनील कुमार सिंह (चतरा) : झारखण्ड राज्य आवास बोर्ड, रांची द्वारा दिनांक 25 एवं29.06.2011 को प्रकाशित विज्ञापन के माध्यम से भू-सम्पदाओं के आवंटन हेतु आवेदन किया गया। आवास बोर्ड द्वारा दिनांक 20-08-2011 को सैकड़ों आवेदकों एवं उनके प्रतिनिधियों की उपस्थिति में भू-सम्पदाओं के आवंटन हेतु लॉटरी का आयोजन किया गया। लॉटरी की समस्त कार्यवाही विडियोग्राफी कराते हुए विधिसम्मत,युक्तियुक्त एवं पूर्ण पारदर्शी तरीके से सम्पन्न की गई। आवास विभाग के कर्मचारियों ने ही लॉटरी में आवंटन को रद्द करने का आवेदन किया, जिस पर जाँच समिति ने जांच कर लॉटरी एवं आवंटन प्रक्रिया को सही ठहराया। इसके बावजूद आवास विभाग द्वारा दिनांक 21.03.2015 को आवंटन रद्द करने का आदेश जारी कर दिया। इस आदेश को रिट याचिका संख्या डब्ल्यू.पी.सी. 1346/2015 झारखण्ड उच्च न्यायालय, रांची ने दिनांक 08.04.2015 को विखण्डित कर दिया।
उल्लेख है कि लॉटरी प्रक्रिया के द्वारा आवंटित भू-सम्पदाओं के लिए आवंटियों द्वारा रकम लगातार आवास बोर्ड में जमा कराई जा रही थी। लगभग कुल राशि का 70औ लोग पूरा पैसा दे चुके हैं। कई आवंटियों का इकरारनामा भी कराया जा चुका है तथा कई आवंटियों को आवंटित भू-सम्पदा का मापन करा कर उन्हें चाहरदीवारी निर्माण के लिए भी दिया जा चुका है।
लॉटरी का आवंटन दिनांक 20.08.2011 को छः साल से अधिक समय हो गया है। परन्तु झारखण्ड राज्य आवास बोर्ड आवंटियों को भू-सम्पदा नहीं दे रहा है। अतः मेरी भारत सरकार से मांग है कि झारखण्ड राज्य आवास बोर्ड द्वारा दिनांक 20.08.2011 को भू-सम्पदा लॉटरी के अनुसार सभी संबंधित आवंटियों को उपलब्ध करवाने के लिए आवश्यक निर्देश जारी करें।
*t19 Title: Need to extend army benefits to paramilitary forces.
SHRIMATI MEENAKASHI LEKHI (NEW DELHI): As per the rules, next of kin of all regular personnel of the paramilitary forces like CRPF, BSF, CJSF, JTBP, SSB among others get Rs 15 lakh ascompensation if one dies infighting terrorists or Maoists or any adversaries. According togovernment data, the nine lakh personnel-strong paramilitary forces, with the CRPF being the largest, is currently deployed in more insurgency affected areas than the army. When it comes to fighting terrorists in Jammu and Kashmir, tackling Naxals in dense forests ofChhattisgarh or facing attacks ofhardcore insurgents in places like Manipur, the first person to be rushed is either from the Central Reserve Police Force or some other paramilitary force.
While in the Army anofficer is entitled to 20 casual leave and jawans are entitled for 30 casual leave, inthe CRPF all the personnel are entitled to 15 days casual leave. At entry level, jawans in paramilitary get a gross salary ofRs 21,000 while an Army jawan gets Rs 35,000. A large number ofparamilitary forces officers have quit in the last five years due to stagnation and tough working conditions. Around 9,000 personnel quit BSF, CRPF, ITBP, CISF and SSB due to unfavourable working conditions.
The ministry of Home Affairs, through the office Memorandum dated 23.11.2012, directed the state governments that they ‘may’ extend to these retired people all benefits that they’ve extended to the retired members of the defence forces. However, through an RTI reply from the MHA, it has been revealed that no state other than Goa, has extended these benefits to the retired paramilitary personnel and this happened because of the non-mandatory nature ofthe said O.M. After much pressure, the government, on 27.09.2016, announced in the print and electronic media that all the facilities available to the retired Defence personnel shall be extended to the retirees of paramilitary forces as well. But, the same has still not been implemented and as a result ofthis, some of such retirees have also sent a legal notice tothe concerned government departments and Ministries.
There needs to be a policy to extend the army benefits such as canteen facilities or martyrdom status tothe paramilitary forces as well. Agreed that the army protects the borders of the country but the paramilitary forces fight the anti-national elements within the country. A fort needs tobe defended by the sentries but italso needs watchful warriors who keep an eye out for insidious traitors within the kingdom. This is exactly what the paramilitary forces do. They too risk their lives for the well being of the citizens just like the army men. When the risk and the devotion is the same, then why this difference in the pay! *t20 Title: Need to release scholarship to girl students of senior secondary schools in Dausa Parliamentary Constituency, Rajasthan.
श्री हरीश मीना (दौसा)ः मैं केद्र व राजस्थान राज्य सरकार का ध्यान केद्र सरकार द्वारा विभिन्न योजनाओं के अंतर्गत अनुसूचित जाति/जनजाति, अन्य पिछड़े वर्ग व गरीब वर्गों के छात्रों को दी जाने वाली छात्रवृत्तियों की ओर आकर्ऐिात करना चाहूँगा।
केद्र सरकार शिक्षा के प्रोत्साहन हेतु स्कूल में पढ़ रहे अनुसूचित जाति/जनजाति,अन्य पिछड़े व गरीब वर्गों के छात्रों को छात्रवृत्ति योजनाओं के माध्यम से आर्थिक सहायता प्रदान करती है। यह सहायता राज्य सरकार के माध्यम से छात्रों तक पहुँचाई जाती है।
मेरे संसदीय क्षेत्र दौसा की राजकीय उच्च माध्यमिक बालिक विद्यालयों का दौरा करने पर ज्ञात हुआ कि केद्र व राज्य सरकार द्वारा प्रदत्त छात्रवृत्तियों का लाभ गरीब छात्राओं को पिछले दो वऐााॉ से नहीं मिल पा रहा है, जोकि छात्राओं के भविऐय के साथ खिलवाड़ स्वरूप है। इसके निराकरण के लिए माननीय प्रधानमंत्री जी व संबंधित मंत्रियों को पत्र लिख जल्द छात्राओं को छात्रवृत्ति से लाभान्वित करने हेतु अनुरोध किया था।
अतः मैं केद्र सरकार से अनुरोध करता हूँ कि कृपया इस मामले पर गौर करें और सभी राज्य/संघ शासित सरकारों को आवश्यक सूचनाएँ जारी करें ताकि केद्र सरकार द्वारा जारी राशि का उचित कार्यान्वयन सुनिश्चित किया जा सके व इसकी निगरानी रखे कि आवंटित राशि उचित तरीके से उपयोग की जाए और यह समय पर जरूरतमंद छात्रों तक पहुँचे।
*t21 Title: Need to provide compensation to villages of Garhwa district of Jharkhand falling under submergence area of Kanhar dam in Uttar Pradesh.
श्री विऐणु दयाल राम (पलामू) ः मैं सरकार का ध्यान एक अति महत्वपूर्ण विऐाय की ओर आकृऐट कराना चाहता हूं कि उत्तर प्रदेश सरकार सोनभद्र जिलान्तर्गत दुद्धी के अमवार में कनहर नदी पर डैम बना रही है। विदित है कि मेरे संसदीय क्षेत्र पलामू(झारखण्ड) का जिला गढ़वा उत्तर प्रदेश के सोनभद्र जिले से सटा हुआ है, जिसके कारण अमवार में डैम बनने से गढ़वा जिले के धुरकी प्रखण्ड के चार गांव फेफसा,भूमफोर, शुरू एवं परापानी कला डूब रहे हैं। झारखण्ड के इन चारों गांव के डूब प्रभावितों को अब तक मुआवजा नहीं मिला है जबकि उत्तर प्रदेश सरकार ने अपने यहां के डूब प्रभावितों को मुआवजा की राशि का भुगतान कर दिया है तथा उत्तर प्रदेश सरकार ने छत्तीसगढ़ सरकार की मांग पर मुआवजे की राशि उन्हें भी दे दी है। लेकिन झारखण्ड के इन चारों गांव के ग्रामीण विस्थापन के भय से परेशान है तथा अपना जल्द सर्वेक्षण कराकर मुआवजे की मांग कर रहे हैं। इस डैम के निर्माण की लागत 2239 करोड़ रूपये है। डैम का लगभग 62 परसेंट कार्य हो चुका है तथा 2019 तक इस कार्य को पूर्ण कर देना है। इस डैम से सोनभद्र जिले के दुद्धी,कोण एवं कचनरवा क्षेत्र का 35467 हैक्टेयर भूमि सिंचित होगी। उत्तर प्रदेश सरकार एवं झारखण्ड सरकार के समझौते के अनुसार इस डैम से 7000 क्यूसेक पानी झारखण्ड को दिया जायेगा। जिससे खरौंधी एवं केतार प्रखंड के क्षेत्रों में सिंचाई होगी।
अतः मैं केंद्र सरकार से मांग करता हूं कि झारखंड के गढ़वा जिले के उपरोक्त चारों गांव के डूब प्रभावितों को अविलंब मुआवजे की राशि दिलाने संबंधी आवश्यक कार्यवाही की जाये।
*t22 Title: Need to establish a research centre of Yoga and AYUSH in Uttarakhand.
डाँ. रमेश पोखरियाल निशंक (हरिद्वार)ः मैं देवभूमि उत्तराखंड से आता हूँ और यह मेरा परम सौभाग्य है कि इस गरिमामयी सदन में मैं विश्व की योग और अध्यात्म की राजधानी हरिद्वार का प्रतिनिधित्व करता हूं जहां पर संपूर्ण विश्व से लोग योग व अध्यात्म की खोज के लिए आते हैं और उसका आनंद उठाते हैं।
आयुर्वेद अर्थात् आयु का विज्ञान एक शाश्वत चिकित्सा पद्धति है जो न केवल तन का बल्कि मन और मस्तिऐक को स्वस्थ करने की बात करती है। विश्व के 60 प्रतिशत से अधिक लोग पारंपरिक दवाईयों का उपयोग करते हैं। चरकसंहिता और सूश्रूत संहिता में हजारों पादप परिवारों का वर्णन है और मुख्यतः हिमालय ही उनका उद्गम स्थल है। विकसित देशों से 40 प्रतिशत से अधिक लोग जड़ी-बूटी का सेवन करते हैं। भारत की 70 प्रतिशत से अधिक ग्रामीण जनता आयुर्वेदिक दवाईयों पर निर्भर है। आयुर्वेद की लोकप्रियता पूरे विश्व में लगातार बढ़ रही है। हम सौभाग्यशाली हैं कि प्रकृति ने हमें आयुर्वेद की जड़ी-बूटियों का असीम खजाना दिया है। पिछले कुछ वऐााॉ से आयुऐा क्षेत्र में 20-25 प्रतिशत की विकास दर देखी गई जो कि अत्यंत उत्साहजनक है। उत्तराखंड देवभूमि होने के साथ पर्यावरण की दृऐिट से अत्यंत संवेदनशील राज्य है। जैव विविधता के क्षेत्र में यह विश्व के श्रेऐठ स्थानों व हिमालय से घिरा यह प्रदेश 65 प्रतिशत से अधिक वन क्षेत्र से आच्छादित है। ऐसी स्थिति में आयुऐा संबंधी किसी भी महत्वाकांक्षी योजना के लिए स्वाभाविक केद्र है। योग एवं आयुर्वेद में संस्कृत की महता के मद्देनजर हमने उत्तराखण्ड में इसे द्वितीय राजभाऐाा बनाकर प्रदेश और देश का गौरव बढ़ाया है। मेरा संसदीय क्षेत्र हरिद्वार तथा ऋऐिाकेऐा विश्व की योग एवं आध्यात्मिक राजधानी है।
अतः मेरा केंद्र सरकार से विनम्र अनुरोध है कि उत्तराखंड में योग और आयुऐा का अंतर्राऐट्रीय शोध संस्थान स्थापित करने की कृपा करें। क्योंकि उक्त शोध संस्थान में योग एवं आयुर्वेद पर शोध के लिए अंतर्राऐट्रीय स्तर के संसाधन जुटाए जाएंं और भारत सहित विश्व के मानव का कल्याण हो सकेगा।
*t23 Title: Need to expedite development works in Maghar, a place associated with Sufi Saint Kabir in Uttar Pradesh.
श्री शरद त्रिपाठी (संत कबीर नगर)ः विश्व के महान सूफी संत कबीर के निर्वाण के पाँच सौ वऐाऩ पूरे होने पर उनके निर्वाण स्थली मगहर में भारत के प्रधानमंत्री की विशेऐा रूचि लेने के कारण पर्यटन मंत्री के रूप में डाँ. महेश शर्मा द्वारा 9 अक्टूबर, 206 को संत कबीर की निर्वाण स्थली मगहर में पर्यटन संबंधी योजनाओं का शिलान्यास किया गया था किंतु कार्यदायी संस्था की लापरवाही के कारण एक वऐाऩ से ऊपर का समय होने के बाद भी विकासपरक कार्य नहीं हो पा रहा है।
मेरा सरकार से अनुरोध है कि संत कबीर की निर्वाण स्थली मगहर (उत्तर प्रदेश)में घोऐिात पर्यटन संबंधी विकास कार्यां का शीघ्र पूरा किया जाए।
*t24 Title: Need to establish airports in Dhanbad and Bokaro in Jharkhand.
श्री पशुपति नाथ सिंह(धनबाद) ः मेरे संसदीय क्षेत्र धनबाद के अंतर्गत दो जिले धनबाद एवं बोकारो, झारखण्ड राज्य के महत्वपूर्ण और औद्योगिक जिले हैं। धनबाद कोयला का देश की राजधानी माना जाता है। वहाँ कई केंद्रीय प्रतिऐठान हैं जिसमें कोल माइंस प्रोविडण्ट फण्ड का मुख्यालय,सेण्ट्रल रिसर्च स्टेशन और वहीं पर आई.आई.टी., इण्डियन स्कूल ऑफ माइंस, डी.वी.सी. के दो प्रोजेक्ट मैथेन और पंचेत तथा बोकारो में स्टील अथॉरिटी ऑफ इण्डिया का बोकारो स्टील प्लाण्ट तथा आस-पास बहुत सी इण्डस्ट्री एवं कोलयरी है। दोनों ही स्थानों पर आधुनिक हवाई अड्डा के माध्यम से हवाई सेवाओं की नितांत आवश्यकता है। हालांकि धनबाद में पुराना व पुरानी तकनीक से बना हवाई अड्डा व हवाई पट्टी है और बी.एस.एल. का भी पुराना हवाई अड्डा पूर्व से अवस्थित है। जिनका आधुनिकीकरण करने की आवश्यकता है।
अतः मैं नागर विमानन मंत्री,भारत सरकार से माँग करता हूँ कि मेरे संसदीय क्षेत्र धनबाद और बोकारो दोनों ही स्थानों पर आधुनिक हवाई अड्डा बनाया जाए तथा हवाई सेवा चालू की जाए जिसकी वर्तमान समय में नितांत आवश्यकता है।
*t25 Title: Need to implement Diamond Quadrilateral project of Indian Railways.
श्री प्रहलाद सिंह पटेल(दमोह) ः मध्य प्रदेश जैसे राज्य के बुन्देलखण्ड, महाकौशल एवं विन्ध्य में रेल मार्गों की कमी है। अनेक सर्वे जैसे जबलपुर-पत्रा-दमोह,खजुराहो-भोपाल, श्रीधाम से रामटेक उपलब्ध है। लेकिन उन पर कार्य आगे नहीं बढ़ सका है। इस सर्वे में सबसे महत्वपूर्ण रेल क्षेत्र की हीरक चतुर्भुज योजना का उत्तर-दक्षिण को जोड़ने वाला मार्ग भी बुंदेलखण्ड के ललितपुर (उ.प्र.) से रामटेक(महाराऐट्र)व्याहा सागर-नरसिंहपुर जिलों से होकर गुजर सकता है। एन.डी.ए. के घोऐाणा-पत्र एवं सरकार के गठन के बाद रेल का हीरक चतुर्भुज बनाने का संकल्प व्यक्त किया गया था। अतः रेल के हीरक चतुर्भुज में उत्तर से दक्षिण की दूरी कम करने वाली यह योजना अतिशीघ्र प्रारंभ हो, ऐसी मांग विनम्रतापूर्वक भारत सरकार से करता हूँ।
*t26 Title: Need to display reservation chart at railway stations and in trains coaches.
श्री कौशल किशोर (मोहनलालगंज)ः मैं रेल मंत्रालय का ध्यान रेल गाड़ियों में रिजर्वेशन चार्ट नहीं लगाए जाने की तरफ आकर्ऐिात करना चाहता हूँ। पूर्व में सभी रेल गाड़ियों में एवं स्टेशन पर चार्ट बोर्ड पर रिजर्वेशन चार्ट लगाए जाते थे तथा डिजिटल डिस्प्ले प्लेटफार्म पर आरक्षित सीटों को दिखाया जाता था तथा यात्रा टिकटों का विवरण दिखाया जाता था, परंतु अब रिजर्वेशन चार्ट रेलगाड़ियों पर व स्टेशन के चार्ट बोर्ड पर न लगाए जाने से यात्रियों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। मोबाइल फोन में भी कंफर्म सीटों का विवरण पूरी तरह नहीं भेजा जा रहा है,जिसकी वजह से सभी श्रेणी के यात्रियों को बेवजह तकलीफ का सामना करना पड़ रहा है।
अतः केंद्र सरकार से आग्रह है कि माननीय रेल मंत्री जी यह बताने की कृपा करें कि चार्ट क्यों नहीं लगाया जा रहा है?
*t27 Title: Need to establish a memorial in honour of poet Dr. Ramdhari Singh Dinkar in Begusarai district, Bihar and also establish a University in his memory.
डाँ. भोला सिंह (बेगूसराय) ः राऐट्रीय क्षितिज पर राऐट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर तुलसीदास के बाद प्रकाशमान होते रहे हैं। उनकी कविताओं और उनकी रचनाओं को विश्व की 34 भाऐााओं में अनुवादित किया जा चुका है। दक्षिण भारत में वे देवता की तरह पूजनीय हैं। भारत के तत्कालीन प्रधानमंत्री श्री पं. जवाहर लाल नेहरू जी ने दिनकर की रचना संस्कृति के चार अध्याय की भूमिका लिखी है। वर्तमान प्रधानमंत्री श्री नरेद्र दामोदर दास मोदी जी ने कई अवसरों पर दिनकर की रचनाओं का अलंकृत स्वरूप अपने भाऐाण में दिया है। दिनकर सोवियत यूनियन की सूची में वहाँ के राऐट्रीय संग्रहालय में उनकी जन्मभूमि की मिट्टी और उनकी प्रतिमा श्रद्धा के साथ मैक्सिन बोर्ड के चेखब टॉलस्टॉय के साथ रखी हुई है। दिनकर भारत की सांस्कृतिक आत्मा के प्रदीप्त चिराग हैं, परंतु उनकी जन्मभूमि सिमरिया और बेगूसराय आज भी उनके सांस्कृतिक आत्मा के स्वरूप को स्थापित करने के लिए प्रतीक्षारत है। बिहार में अथवा राऐट्रीय स्तर पर दिनकर के नाम से कोई राऐट्रीय विश्वविद्यालय शिक्षा संस्थान अभी तक स्थापित नहीं हुआ है। मैं इस ओर भारत सरकार के शिक्षा मंत्री और प्रधानमंत्री जी का ध्यान आकृऐट करता हूँ।
*t28 Title: Recruitment in army from Chambal region.
DR. BHAGIRATH PRASAD (BHIND): From the last two years, the recruitment of soldiers in the army from the Chambal region is banned. The reason is that in 2015, the candidates from Chambal region created a chaos in Gwalior during the process of selection of soldiers. In fact more than 50 thousand candidates were called for the selection. The army official could not manage the crowd and failed to ensure fair process of recruitment. Thus the entire responsibility rests with the army personnel engaged in the process of selection. But the youth of Chambal region, who have the best credentials during the last 150 years, are being deprived of the opportunity to serve the nation. There is serious discontentment among the youth of the area.
*t29 Title: Need to construct a permanent bridge on Gangotri National Highway in Uttarkashi district of Uttarakhand.
श्रीमती माला राज्यलक्ष्मी शाह (टिहरी गढ़वाल) ः मैं सरकार का ध्यान अपने संसदीय क्षेत्र के जनपद उत्तरकाशी की ओर दिलाना चाहती हूँ। वऐाऩ 2017 की भीऐाण बाढ़ और आपदा में जनपद उत्तरकाशी के गंगोत्री राऐट्रीय राजमार्ग पर बना मोटर पुल बह गया था और तभी से बी.आर.ओ. ने गंगोत्री में ूवेली ब्रिज ू का निर्माण किया जो कि अस्थाई था। परंतु 14 दिसम्बर, 2017 को ूवेली ब्रिज ू भी टूट गया है,जिसके कारण चीन सीमा से लगे सैंकड़ों गांवों सहित गंगोत्री तीर्थ सहित चीन सीमा में तैनात सेना का सम्पर्क देश के साथ सड़क मार्ग से कट गया है। अस्सी गंगा में पानी कम होने के कारण बी.आर.ओ. ने आने-जाने के लिए अस्थाई व्यवस्था कर दी है। लेकिन बरसात के समय पानी का जल स्तर बढ़ने पर क्षेत्रीय जनता तीर्थ यात्रियों व सीमा पर तैनात सेना को भारी असुविधा का सामना करना पड़ेगा।
मेरा केद्रीय सड़क परिवहन मंत्री से आग्रह है कि गंगोत्री राऐट्रीय राजमार्ग पर क्षतिग्रस्त पुल के स्थान पर पक्का स्थाई मोटर पुल बनाने के लिए आवश्यक कदम उठाने की कृपा करें।
*t30 Title: Need to construct an over bridge at Jugsalai in Jamshedpur Parliamentary Constituency, Jharkhand.
श्री विद्युत वरन महतो(जमशेदपुर) ः मेरे संसदीय क्षेत्र जमशेदपुर अंतर्गत जुगसलाई ओवरब्रिज का निर्माण रेलवे अधिकारियों के गलत निर्णयों के कारण कार्य शुरू नहीं हो पा रहा है। रेलवे अधिकारियों के द्वारा पहले रेलवे की जमीन 10 हजार स्क्वायर फीट के बदले 7 करोड़ रूपये तय हुई थी,जब राज्य सरकार उक्त राशि देने को तैयार हुई और निविदा भी निकाल दी तो इसी जमीन का मूल्य अब रेलवे के द्वारा जी.एस.टी. का नाम लेकर 12 करोड़ रूपये मांग की जा रही है। इस ओवरब्रिज की मांग विगत 70 वऐााॉ से है,लेकिन रेल विभाग द्वारा इस दिशा में ठोस कार्रवाई नहीं की गई। अगर रेलवे को बनाने में दिक्कत हो रही है तो दिन में भारी आवागमन को देखते हुए मालगाड़ी को वहीं पर रोक दिया जाए क्योंकि प्रतिदिन रेलवे लाईन के पार करते समय दुर्घटनाएंं होती रहती हैं।
अतः उपरोक्त विऐाय में माननीय मंत्री जी से मांग करता हूं कि जनहित को देखते हुए अविलम्ब जुगसलाई ओवरब्रिज का निर्माण करवाने की कृपा की जाए।
*t31 Title:Need to provide stoppage of Utkal Express (Train No. 18477/78) at Sonua Railway station in Singhbhum Parliamenatry Constituency, Jharkhand.
श्री लक्ष्मण गिलुवा(सिंहभूम) ः दक्षिण पूर्व रेलवे अंतर्गत चक्रधरपुर रेलवे प्रबंधक कार्यालय अंतर्गत सोनवा रेलवे स्टेशन मेरे संसदीय क्षेत्र सिंहभूम (झारखण्ड) अंतर्गत है। इस रेलवे स्टेशन के आस-पास विशाल औद्योगिक क्षेत्र है जहां पर ओडिशा,उत्तर प्रदेश एवं बिहार के मजदूर काम करते हैं। यह रेलवे स्टेशन एक दर्शनीय स्थल के रूप में माना जाता है। सोनवा रेलवे स्टेशन के आस-पास के लोगों के बीच पुरी के जगन्नाथ मन्दिर एवं कोणार्क मन्दिर एवं भुवनेश्वर के लिंगराज मन्दिर के प्रति लोगों में काफी श्रद्धा है और प्रायः इसके लिए पुरी एवं भुवनेश्वर आते-जाते हैं। दूसरे राज्यों से अनेक लोग परिवार के साथ सोनवा रेलवे स्टेशन के आस-पास क्षेत्रों के दर्शनीय स्थानों पर घूमने के लिए आते हैं। इस सोनवा रेलवे स्टेशन पर निजामुद्दीन-पुरी के बीच चलने वाली उत्कल एक्सप्रेस अप 18477 एवं डाउन 18478 का ठहराव अति आवश्यक है। कई सालों से इसकी लगातार मांग भी की जा रही है, परंतु अभी तक उक्त रेल गाड़ी का ठहराव अभी तक नहीं किया गया है।
सरकार से अनुरोध है कि निजामुद्दीन-पुरी के बीच चलने वाली उत्कल एक्सप्रेस अप 18477 एवं डाउन 18478 का ठहराव सोनवा रेलवे स्टेशन पर किया जाये।
*t32 Title: Need to set up consulate offices of ASEAN and other East Asian countries at Guwahati.
SHRI RAMESHWAR TELI (DIBRUGARH): Assam is known as the Gateway to the East. An enhanced economic relation with the ASEAN and other East Asian Countries in terms of investment and technology would ensure greater economic activities in the region. In terms of geographical proximity also the North East is nearer to the ASEAN and the South East Asian Countries. For development of tourism and economic co-operation, it is essential to have regular communication facilities between the North Eastern States and all the above mentioned foreign countries. This would be in consonance with the Government’s Act East Policy too. In order to facilitate greater economic activities as well as for the development of tourism, we need to have Consulate Generals of ASEAN and other East Asian Countries in the North East. Assam being the gate way to the North East, I would like to request you to take appropriate steps for setting up of Consulate Generals of these countries at Guwahati.
*t33 Title:Need for special funds to improve rural road connectivity in Manipur.
SHRI THANGSO BAITE (OUTER MANIPUR): Manipur shares about 400Km long border with Myanmar. The topographical situation of the State comprises 10% valley regions and 90% hilly regions. The hilly region is inhabited predominantly by the tribals. As per the recent District reorganisation in the state by the state government, seven more new districts have been created in addition to the existing nine; which comes to a total of 16 districts in the state.
The bold step taken by the Ministry of Road Transport and Highways, which sanctioned for the construction of important highways in the state has been appreciated. lnspite of that, the district Headquarters and Sub-Division Headquarters, Block Headquarters and villages are unconnected till today. It is a well known fact that the state is financially dependent on the Centre as the state resource is very limited. The road connectivity particularly in the hill districts is very poor and is in a pitiable condition. Owing to that, it is not possible to take up proper health education programmes which are the prime need of the people living in those areas.
As a matter of fact, I would like to draw the attention of the Ministry of Rural Development to extend all possible help by providing special financial package to the tune of atleast Rs. 50,000 crore for rural connectivity in the ensuing financial year 2018-19.
*t34 Title:Need to fix a minimum 120 sittings of Parliament per year.
SHRI GAURAV GOGOI (KALIABOR): It is a matter of concern that the number of Parliament sittings per year has been decreasing since independence. During the first two decades, Lok Sabha met for an average of over 120 days. This has come down to 70 in the last decade and 50 for this year. In countries like US, UK and Canada, at the beginning of the year, a calendar of sitting days is formalised where legislative and other businesses are programmed in with an average of 100- 150 sittings a year. The volume of pending legislation is a reminder that our Parliament needs to be more proactive. The legislature is the seat of decision-making and its convening shouldn’t be subject to flexibility. I request the Minister of Parliament Affairs to ensure that the Parliament sit for a minimum period of 120 days in a year.
*t35 Title: Need to extend Salem-Karur Passenger Train upto Trichy.
SHRI P.R. SUNDARAM (NAMAKKAL): Salem - Karur Passenger Train No. 56105 is in operation since long. Traders, students, working people are largely benefitted by this train. This Train connects temples in Salem, Raispuram, Namakkal & Karur. Many passengers have expressed their concern that the Southern Railway doesn’t operate Trains in Salem Division.
I wish to state that Salem - Palani Express was extended upto Palakkad. When this train can be extended upto Palakkad, why not Salem - Karur Passenger upto Trichy?
It is said that Railways have a proposal to discontinue the operation of this train due to revenue loss and other reasons. I wish to bring to the notice of Railway Ministry that if this Train is extended upto Trichy, Railways will get more revenue and this train will generate profit.
I have spoken about this on many occasions in the Parliament and met the Hon’ble Railway Minister and requested him to extend this Train from Salem to Trichy.
I once again, request the Hon’ble Railway Minister to kindly look into this matter and extend Train No 56105 Salem - Karur Passenger to Trichy.
*t36 Title: Need to restore the earlier sharing pattern of funding to Centrally Sponsored Schemes.
SHRI BHARTRUHARI MAHTAB (CUTTACK): The State Governments welcomed the recommendations of the 14th Finance Commission which inter-alia increased the devolution of Central Taxes from 32 to 42 per cent to States. But the effect of such increased devolution has been offset to a large extent by several policy decisions of the Union Government which include delinking of eight Centrally Sponsored Schemes from Central support, abolition of Normal Central Assistance and a steep increase in State’s share in Centrally Sponsored Schemes. The Pradhan Mantri Gram Sadak Yojana (PMGSY) which was earlier fully funded by the Union Government is now required to be funded 40 per cent by the concerned State Government. Similarly, the State’s contribution to National Health Mission and Pradhan Mantri Awas Yojana has been increased from 25 to 40 per cent. I, therefore, urge upon the Union Government to restore the sharing pattern of the said Centrally Sponsored Schemes, to enable States to utilize increased devolution of Central Taxes for State’s Schemes.
*t37 Title: Need to allow Bullock Cart race celebrated in Pune district of Maharashtra SHRI ADHALRAO PATIL SHIVAJIRAO (SHIRUR): I wish to draw the kind attention of the Government towards a very important and sensitive issue pertaining to Bullock Cart Race or Bail Gada Sharyat, as locally called, which is celebrated extensively in the District of Pune in Maharashtra. This traditional festival has a history of being celebrated for the last many centuries.
However this has been banned by the Ministry of Environment and Forests citing provisions of Section 22 of the Prevention of Cruelty to Animals Act, 1960. The Hon’ble Supreme Court also gave similar judgement on 7th May, 2014. It is pertinent to mention here that a similar ordinance was passed by the Tamil Nadu Assembly in the case of Jallikattu, in which bulls are used, which was earlier banned alongwith Bullock Cart Race. This was approved by the Hon’ble President of India and has been implemented in Tamil Nadu. Jallikattu, is regularly held in Tamil Nadu now. Keeping the sentiments of the people in mind, the Maharashtra Government had also passed a resolution and issued an ordinance as in the case of Tamil Nadu, which was sent for the kind approval of the Hon’ble President of India. The Hon’ble President had given his approval. However, this could not be implemented on account of the intervention of the Hon’ble High Court of Bombay on an appeal fixed the by People for the Ethical Treatment of Animals. Thus, the people of Maharashtra have been deprived of the celebration of their festival and cultural heritage.
The farmers are agitated a lot and are taking out processions, staging agitations and other unlawful activities. They are planning major agitations throughout Maharashtra in the near future.
In view of the above, there is no other way except passing an amendment to the Act in the Parliament. Keeping in view the above, I earnestly request you to kindly table a bill of amendment to the Act in both the Houses of Parliament in the ongoing session itself so that this cultural festival is allowed in Maharashtra also as in the case of Tamil Nadu.
*t38 Title: Need to set up a National Cancer Institute at Rajahmundry in Andhra Pradesh.
SHRI M. MURLI MOHAN (RAJAHMUNDRY): The Union Government is implementing Tertiary Care Cancer Centre Scheme in the country under which State Cancer Institutes (SCI) and Tertiary Care Cancer Centres (TCCC) are being set up in different parts of the country. These Centres shall mentor all Cancer related activities including research and treatment. I understand that the Union Government had already approved in principle, the setting up of 11 State Cancer Institutes and 13 Tertiary Care Cancer Centres covering entire country except in the State of Andhra Pradesh. I would, therefore, earnestly urge upon the Union Government to set up such National Cancer Institute at Rajahmundry, Andhra Pradesh as the incidence of various types of cancer related cases is very much prevalent in all the coastal districts of Andhra Pradesh particularly in East and West Godavari Districts including Rajahmundry.
*t39 Title: Needto restoreservices of earlieroperational trains onPalakkad-Pollachi Railway line.
SHRI M.B. RAJESH (PALAKKAD): I would like to draw the attention of the Government towards an important issue of Palakkad-Pollachi Railway line. The gauge conversion of this line was completed at a cost of Rs. 400 crore over a period of 7 years. However, despite one year after the completion of gauge conversion work, no new trains have been introduced on this line. Not only that, even the existing trains which ceased to operate temporarily due to the work have not resumed their services. This line connects Southern Tamil Nadu with Kerala. There is immense potential for new trains connecting pilgrim centres like Pazhani, Madhura and Rameswaram in Tamil Nadu and Guruvayur in Kerala. Introducing new trains connecting these destinations will be of great help to tens of thousands of pilgrims. This will be beneficial for Railways too. Hence, I request the Railways to restore all the previously existing operations of trains on the Palakkad-Pollachi route.
*t40 Title: Need to removethe cap on numberof applications recommended by Members of Parliamentfor seeking financialassistance under the PrimeMinister's National ReliefFund (PMNRF).
श्री कौशलेद्र कुमार(नालंदा)ः प्रधानमंत्री सहायता कोऐा से मरीजों को आर्थिक सहायता प्रदान की जाती है। वैसे तो सांसद अपने क्षेत्र के ही गरीब मरीजों के आवेदन को पी.एम.ओ. भेजते हैं,िकन्तु यह देखा जा रहा है कि पिछले 2-3 वऐााॉ तक के आवेदन पी.एम.ओ. में पेंडिंग पड़े हुए हैं। इस तरह असाध्य रोगियों की इलाज के अभाव में मृत्यु हो जाती है। इधर यह सूचना मुझे दी गई है कि इस महीने तक आपके 12 या 20 केस पूरे हो चुके हैं, फिर अभी मेरे आवेदन पर विचार नहीं होगा। यह तो गरीब मरीजों के साथ उचित नहीं है,यह तो सरासर अन्याय प्रतीत होता है। आप सांसदों के आवेदन पर कैप लगा दिए है। यह सर्वथा उचित नहीं है। एक और समस्या गरीब मरीजों के साथ है कि वे अत्यंत गरीब ग्रामीण मरीज,जो कैंसर, हृदय रोग, न्यूरो, किडनी,लीवर, ऑर्थो जैसे गम्भीर एवं असाध्य बीमारी से ग्रसित हैं,पैसे के अभाव में दम तोड़ देते हैं, किन्तु इलाज नहीं हो पाता है, चाहे सरकारी या सरकारी सहायता प्राप्त हॉस्पिटल ही क्यों न हो। उक्त मरीजों को अभी पी.एम.ओ. आधा खर्च ही देती है या अधिकतम सीमा 3.00 लाख रूपए तक फिक्स कर दिया गया है। अब प्रश्न उठता है कि शेऐा राशि का उपाय मरीज नहीं कर पाता है और पी.एम.ओ. से फिक्स कर दिया गया है। अब प्रश्न उठता है कि शेऐा राशि का उपाय मरीज नहीं कर पाता है और पी.एम.ओ. से दी गयी सहायता भी उन गरीबों के काम नहीं आती है। कुछ केस में तो इतना विलम्ब कर दिया जाता है कि मरीज की मृत्यु के बाद पैसा हॉस्पिटल में जाता है। हॉस्पिटल तो मरीजों से पैसों का भुगतान पहले माँगती है।
अतः मैं माननीय प्रधानमंत्री जी से इस अत्यंत ही मानवीय विऐाय पर विशेऐा ध्यान देने का आग्रह करता हूँ और निवेदन करता हूँ कि आप कैप हटवा दें,पूर्ण सहायता राशि दिए जाने की सुविधा दें और साथ ही साथ आवेदन जमा होने के अधिक से अधिक 15 दिनों के अंदर आवेदन का निपटारा हो। अगर किसी वजह से आवेदन निरस्त किया जाता है तो उसकी सूचना एक सप्ताह में दी जाये।
*t41 Title: Needto check the pollutedwaste material releasedby Hindalco companyin Ranchi district, Jharkhandand also providefull service benefitsto the workers of the company.
श्री विजय कुमार हाँसदाक(राजमहल) ः मैं राँची जिलान्तर्गत मुरी स्थित हिण्डालको कम्पनी के द्वारा किये जा रहे अनुचित कार्य की ओर सरकार का ध्यान आकृऐट करना चाहता हूं। कम्पनी के द्वारा 100 एकड़ जमीन में कोस्टिक मड के द्वारा 60 फीट ऊँचा पहाड़ बना दिया गया है, जो पूरी तरह से प्रदूऐाण मापदंडों के विपरीत है। इससे क्षेत्र की जनता विभिन्न प्रदूऐाण जनित रोगों से ग्रसित हो रही है, किसानों के पशु मर रहे हैं,कृऐिा भूमि बंजर होती जा रही है। बरसात के दिनों में कम्पनी का असंशोधित अपशिऐट जल सीधा स्वर्ण रेखा नदी में छोड़ा जा रहा है तथा कोस्टिक मड भी बहकर नदी में जा रहा है,जिससे नदी का जल पीने योग्य नहीं रह गया है। वहां का क्षेत्र,जो लौह के उत्पादन में अग्रणी था अब नगण्यता पर पहुंच गया है। इसके अतिरिक्त कंपनी में संविदा पर कार्यरत मजदूर तथा दैनिक वेतनभोगी मजदूरों का शोऐाण हो रहा है। उन्हें अनुमन्य सीमा से कम वेतन का भुगतान किया जा रहा है। सामाजिक सुरक्षा योजनाओं में अपनी नौकरी की सुरक्षा से भी मज़दूर वंचित हैं। मज़दूरों की वास्तविक संख्या के स्थान पर कम मज़दूर दिखाकर बाकी मजदूरों को पी.एफ. के लाभ से भी वंचित किया जा रहा है। मजदूरों द्वारा विरोध न होने से कंपनी में लगभग 3000 मजदूरों को सामाजिक सुरक्षा का लाभ नहीं मिल पा रहा है। कंपनी के द्वारा विस्थापित लोगों को अभी तक मुआवजा अथवा नौकरी का लाभ भी नहीं दिया गया है, जिससे कंपनी के खिलाफ लोगों में असंतोऐा व्याप्त है। इस संबंध में 6 माह पूर्व मैंने केंद्र सरकार के वन एवं पर्यावरण मंत्री महोदय तथा श्रम एवं रोजगार मंत्री को उपरोक्त अनियमितताओं के बारे में पत्र भेजा जिसकी केवल पावती आई और कार्यवाही आज तक नहीं हुई है।
सरकार से अनुरोध है कि कंपनी के अनुचित क्रियाकलापों तथा कंपनी में संवेदकों की भूमिका की उच्चस्तरीय जांच करायी जाये।
*t42 Title: Needto starta PassortSeva Kendraat Kattappanain Idukkidistrict of Kerala.
ADV. JOICE GEORGE (IDUKKI): The Government has sanctioned a Passport Seva Kendra at Kattappana in Idukki District of Kerala. As of now the people living in Idukki district is depending on Cochin Passport Office for the entire passport related services, which is about 150 kilometers from the district border. So the new passport Seva Kendra will be of great help for the people living in Idukki district. The new Passport Seva Kendra is proposed to be started with the collaboration with the Postal department. The project was sanctioned 6 months ago and unfortunately it has not yet been started. As per the information received from the concerned authorities, the postal department has not yet been provided the building for the purpose. So I request the Government to intervene in this matter and do the needful.
*t43 Title: Needto allowGovernment Medical CollegeParippally to admitstudents for MBBScourse.
SHRI N.K. PREMACHANDRAN (KOLLAM): The LoP for Government Medical College Parippally was issued on 31.05.2017 as per the directions passed by oversight committee and GOT. The MCI conducted inspection on 14.09.2017 and found that the College has failed to abide by the undertaking given as per the directions of oversight committee and GOI. The executive committee of MCI held on 25.10.2017 decided to debar the College from admitting students in MBBS course for a period of two academic year 2018-19 and 2019-20. Most of the deficiencies noticed in the inspection report are operational deficiencies. The deficiencies are easily rectifiable. If the College is debarred, it will adversely affect the functioning of the College and hospital. It is pertinent to note that 35 percentage of the seats are reserved for the children of insured persons. Most of the students and patients who depend on this College and hospital are from the weaker section of the society.
माननीय अध्यक्ष : अब हम बिल ले रहे हैं, आप लोग अपनी जगह पर जाइए।
…( व्यवधान)
HON. SPEAKER: We are taking the Bill. There will be no ‘Zero Hour’ now. Please go to your seats.
… (Interruptions)
*t44 Title: RegardingConstitution (OneHundred andTwenty-Third Amendment) Bill, 2017Amendment made byRajya Sabha.
HON. SPEAKER: Hon. Members, before we take up Item No. 22, that is, consideration of Rajya Sabha Amendment to the Constitution (One Hundred and Twenty-Third Amendment) Bill, 2017, I have to inform that there is a minor printing mistake in the Government Amendment to the Bill printed in today’s revised List of Business.
… (Interruptions)
HON. SPEAKER: At Page 7, below “Clause 1”, “2017” has been misprinted as “201”.
… (Interruptions)
HON. SPEAKER: Members are requested to read it as “2017”.
… (Interruptions)
HON. SPEAKER: This is the only thing.
… (Interruptions)
12.36 hrs (Atthis stage, Shri E.T. Mohammad Basheer and some other hon. Members came and stood on the floor near the Table.) HON. SPEAKER: Now, Shri N. K. Premachandran.
… (Interruptions)
SHRI N.K. PREMACHANDRAN (KOLLAM): Madam Speaker, this is the first time in the legislative history of the Indian Parliament that the Government is moving an alternate amendment to the amendment carried out by the Council, that is, the Rajya Sabha. … (Interruptions) It has never happened before to my information or knowledge. … (Interruptions)
HON. SPEAKER: Please go to your seat.
… (Interruptions)
SHRI N.K. PREMACHANDRAN : So, I raise a Point of Order under … (Interruptions)
HON. SPEAKER: The House stands adjourned to meet again at 12.45 pm. … (Interruptions)
12.36 ½ hrs The Lok Sabha then adjourned till Forty-Five Minutes past Twelve of the Clock.
12.48 hrs TheLok Sabha re-assembled at Forty Eight Minutes past Twelve of the Clock.
(Hon. Speaker inthe Chair) … (Interruptions)
SHRI MALLIKARJUN KHARGE (GULBARGA): Madam, this is a very important issue. I want a reply from the Prime Minister on this issue. This is very important. Hon. Prime Minister should come and make a statement because such things are happening throughout the country. … (Interruptions) I would request through you, Madam, the hon. Prime Minister to make a statement. … (Interruptions)
माननीय अध्यक्ष : आप क्या कहना चाहेंगे?
…( व्यवधान)
HON. SPEAKER: I can understand that. But Maharashtra Government is doing something.
… (Interruptions)
माननीय अध्यक्ष : बैठिए।
…( व्यवधान)
माननीय अध्यक्ष : जब ज्यूडिशियल इंक्वायरी की घोऐाणा हो चुकी है, तो ऐसा नहीं करते हैं। आप लोग बैठिए।
…( व्यवधान)
माननीय अध्यक्ष : प्लीज़, बैठिए।
…( व्यवधान)
माननीय अध्यक्ष : आपने बोल दिया न! अब क्या बोलना चाहेंगे?
…( व्यवधान)
श्री मल्लिकार्जुनखड़गे: मैडम, यह बहुत ही इम्पॉर्टेन्ट इश्यू है। इसमें प्राइम मिनिस्टर को इंटरफियर करना चाहिए और उनको अपनी बात रखनी चाहिए कि वे क्या चाहते हैं।...(व्यवधान)
HON. SPEAKER: Shri Premachandran.
SHRI N.K. PREMACHANDRAN (KOLLAM): My point of order is there, Madam. … (Interruptions) My point of order is under Rule 100 (2) of the Rules of Procedures and Conduct of Business in Lok Sabha. … (Interruptions) This is the first time in the legislative history of Indian Parliament that the Government is moving an alternate amendment to the amendment carried out by the Upper House, Rajya Sabha. … (Interruptions) It has never happened before to my information and knowledge. Here, in this case, you may kindly see Lok Sabha has passed the Constitution 123rd Amendment Bill, 2017 and transmitted it to Rajya Sabha for its concurrence. … (Interruptions)
What is the amendment in Clause 3? … (Interruptions)
SHRI MALLIKARJUN KHARGE (GULBARGA) : The Prime Minister is here. You can call him and ask him to appoint a sitting Judge of the Supreme Court to enquire into this. This is very important because it is not one incident. It is a failure of the Government. It is a failure of the Maharashtra Government. … (Interruptions)
माननीय अध्यक्ष : बैठिए। आपका बोलना हो गया न।
…( व्यवधान)
SHRI N.K. PREMACHANDRAN : What is the amendment made by the Rajya Sabha? … (Interruptions)
HON. SPEAKER: I am not allowing him. आपका कहना हो गया। अब मैं बिल लेना शुरू कर दी हूँ।
…( व्यवधान)
HON. SPEAKER: You please go to your seat now.
… (Interruptions)
SHRI N.K. PREMACHANDRAN : Clause 3 is the heart and soul of the Bill. … (Interruptions) I cannot understand the rationale of legislative wisdom of the Elders by deleting Clause 3 and returning to this House. … (Interruptions)
My point of order is whether the proposed amendment is an alternative amendment. According to me, the answer is ‘no’ because the Government is reproducing the same section of the original Bill with minor changes, which were deleted by the Rajya Sabha. Hence, I seek a specific ruling on this point of order. … (Interruptions)
12.52 hrs (At this stage, Shri Mallikarjun Kharge and some other hon.Members left the House.) HON. SPEAKER: Hon. Members, a point of order has been raised that the new clause 3 being now proposed by the Government in place of amendment made by the Council for omission of clause 3 does not fall within the meaning of amendment alternative to the amendment made by Rajya Sabha. In regard to Bills returned by Rajya Sabha with amendments, sub-rule (2) of Rule 100 of the Rules of Procedure provides that three types of amendments to an amendment made by Rajya Sabha can be moved in Lok Sabha. The first being amendment relevant to the subject matter of an amendment made by Rajya Sabha, the second being amendment consequential upon an amendment made by Rajya Sabha and the last being an amendment alternative to an amendment made by Rajya Sabha. In the instant case, the Rajya Sabha has returned the Bill with an amendment seeking omission of a clause from the Bill. Hon. Members would appreciate that to an amendment seeking omission of a clause, no amendment or consequential amendment can be moved since there is no text before us for agreeing or disagreeing to such amendment. The dictionary defines the word “alternative” as “available as another possibility or choice”. The Government has proposed that in place of omission of clause from the Bill, the same clause be restored with some changes. In a way, the Government has proposed another choice in place of clause being omitted. In my opinion, therefore, the amendment tabled by the hon. Minister for restoring clause 3 with some changes falls within the category of amendment alternative to the amendment made by Rajya Sabha.
I, therefore, rule out the point of order.
… (Interruptions)
HON. SPEAKER: I have given the ruling now.
… (Interruptions)
*t45 Title: Discussion on the Amendments made by Rajya Sabha to Goverment Bill-under consideration.
HON. SPEAKER: Hon. Members, the House would now take up consideration of the amendment made by Rajya Sabha in the Constitution (One Hundred and Twenty-third Amendment) Bill, 2017, as passed by Lok Sabha. As you are aware, the hon. Minister has given notice to move an amendment alternative to the amendment made by Rajya Sabha and also further amendment regarding change of year from 2017 to 2018. I may inform you that in case the House adopts the alternative amendment, the original amendment made by Rajya Sabha would stand substituted by the alternative amendment. As such, the original amendment made by Rajya Sabha will not be proposed for vote of the House. Hon. Members, the alternative amendment seeks to insert a new clause 3 in the Bill. In this regard, I would like to invite your attention to Direction 31, which provides that “when an amendment for insertion of a new clause in a Bill is adopted by the House, the Speaker shall put the question that the new clause be added to the Bill”. Therefore, in case the alternative amendment is adopted by the House, I shall also propose the new clause 3 to the vote of the House.
Hon. Members, since we are to consider a Constitution (Amendment) Bill, I shall propose the Motion for consideration of Rajya Sabha amendment, the motion for adoption of amendment alternative to the amendment made by Rajya Sabha, adoption of new clause 3, adoption for further amendment for change of year and the motion for passing of the Bill to the vote of the House by division through special majority as required under Article 368 of the Constitution. Keeping in view the spirit of Rule 156, amendments given notice of by private Members to the alternative amendment proposed to be moved by the hon. Minister shall be decided by simple majority.
Now, I call Shri Thaawar Chand Gehlot, hon. Minister, to move that the amendment made by Rajya Sabha in the Bill further to amend the Constitution of India, as passed by Lok Sabha, be taken into consideration.
सामाजिक न्याय और अधिकारितामंत्री(श्री थावरचंद गहलोत) : अध्यक्ष महोदया, मैं प्रस्ताव करता हूं :-
(एक) कि भारत के संविधान का और संशोधन करने वाले विधेयक* , लोक सभा द्वारा यथापारित, में राज्य सभा द्वारा किए गए निम्नलिखित संशोधनों पर विचार किया जाए :-
कि पृऐठ 2 और 3, खण्ड 3 का लोप किया जाए।
HON. SPEAKER: Now, hon. Minister to move the alternate amendment to the amendment made by Rajya Sabha in the Bill, as passed by Lok Sabha. श्री थावर चंद गहलोत: अध्यक्ष महोदया, मैं प्रस्ताव करता हूं :-
(दो) कि भारत के संविधान का और संशोधन करने वाले विधेयक, लोक सभा द्वारा यथापारित, में राज्य सभा द्वारा किए गए संशोधन कि पृऐठ 2 और 3, खण्ड 3 का लोप किया जाए, के स्थान पर राज्य सभा द्वारा किए गए संशोधन के निम्नलिखित वैकल्पिक संशोधन को प्रतिस्थापित किया जाए :- कि पृऐठ 2 और 3, निम्नलिखित अंतःस्थापित किया जाए,-
3. संविधान के अनुच्छेद 338क के पश्चात् निम्नलिखित अनुच्छेद अंतःस्थापित किया जाएगा, अर्थात:-
“ 338ख.(1) सामाजिक और शैक्षिक दृऐिट से पिछड़े वर्गों के लिए राऐट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग नामक एक आयोग होगा।
(2) संसद् द्वारा इस निमित्त बनाई गई किसी विधि के उपबंधों के अध्यधीन, आयोग में एक अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और तीन अन्य सदस्य होंगे तथा इस प्रकार नियुक्त अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और अन्य सदस्यों की सेवा की शर्तें और पदावधि ऐसी होंगी,जो राऐट्रपति नियमों द्वारा अवधारित करें।
(3) आयोग के अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और अन्य सदस्य राऐट्रपति द्वारा अपने हस्ताक्षर और मुद्रा सहित अधिपत्र द्वारा नियुक्त किए जाएंंगे।
(4) आयोग को अपनी स्वयं की प्रक्रिया विनियमित करने की शक्ति होगी।
(5) आयोग के निम्नलिखित कर्तव्य होंगे-
(क) इस संविधान के अधीन या तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य विधि के अधीन या सरकार के किसी आदेश के अधीन सामाजिक और शैक्षिक दृऐिट से पिछड़े वर्गों के लिए उपबंधित रक्षापायों से संबंधित सभी मामलों का अन्वेऐाण और मानीटर करना;
(ख) सामाजिक और शैक्षिक दृऐिट से पिछड़े वर्गों के अधिकारों से वंचित किए जाने और रक्षापायों के संबंध में विनिर्दिऐट शिकायतों की जांच करना;
(ग) सामाजिक और शैक्षिक दृऐिट से पिछड़े वर्गों के सामाजिक-आर्थिक विकास में भाग लेना तथा सलाह देना तथा संघ और किसी राज्य में उनके विकास की प्रगति का मूल्यांकन करना;
(घ) राऐट्रपति को, वार्ऐिाक रूप से और ऐसे अन्य समयों पर, जो आयोग उचित समझे, उन रक्षापायों के कार्यकरण पर रिपोर्ट प्रस्तुत करना;
(ड.) ऐसी रिपोर्टों में उन उपायों के बारे में सिफारिशें करना, जो संघ या किसी राज्य द्वारा सामाजिक और शैक्षिक दृऐिट से पिछड़े वर्गों के संरक्षण, कल्याण तथा सामाजिक-आर्थिक विकास के लिए, उन रक्षापायों और अन्य उपायों के प्रभावी कार्यान्वयन के लिए,किए जाने चाहिए; और (च) सामाजिक और शैक्षिक दृऐिट से पिछड़े वर्गों के संरक्षण, कल्याण तथा सामाजिक-आर्थिक विकास के संबंध में ऐसे अन्य कृत्यों का निर्वहन करना, जो राऐट्रपति, संसद द्वारा किए गए उपबंधों के अध्यधीन नियमों द्वारा विनिर्दिऐट करें।
(6) राऐट्रपति, ऐसी सभी रिपोर्टों को, संघ से संबंधित सिफारिशों पर की गई या किए जाने के लिए प्रस्तावित कार्रवाई को स्पऐट करने वाले ज्ञापन और ऐसी किसी सिफारिश की अस्वीकृति के कारणों, यदि कोई हों, सहित संसद के प्रत्येक सदन के समक्ष रखवाएगा।
(7) जहां ऐसी कोई रिपोर्ट या उसका कोई भाग किसी ऐसे मामले से संबंधित है, जिसका संबंध राज्य सरकार से है, वहां ऐसी रिपोर्ट की एक प्रति राज्य के राज्यपाल को भेजी जाएगी, जो उसे, राज्य से संबंधित सिफारिशों पर की गई या किए जाने के लिए प्रस्तावित कार्रवाई को स्पऐट करने वाले ज्ञापन और ऐसी किसी सिफारिश की अस्वीकृति के कारणों, यदि कोई हों, सहित राज्य के विधान मंडल के समक्ष रखवाएगा।
(8) आयोग को, खंड (5) के उपखंड (क) में निर्दिऐट किसी मामले का अन्वेऐाण या उपखंड(ख) में निर्दिऐट किसी शिकायत की जांच करते समय किसी वाद का विचारण करने वाले सिविल न्यायालय की, और शिऐिटतया निम्नलिखित विऐायों की बाबत सभी शक्तियां होंगी, अर्थात्:-
(क) भारत के किसी भाग से किसी व्यक्ति को समन करना और उसको हाजिर कराना तथा उसकी शपथ पर परीक्षा करना;
(ख) किसी दस्तावेज के प्रकटीकरण और पेश किए जाने की अपेक्षा करना;
(ग) शपथपत्रों पर साक्ष्य प्राप्त करना;
(घ) किसी न्यायालय या कार्यालय से किसी लोक अभिलेख या उसकी प्रति की अध्यपेक्षा करना;
(ड.) साक्षियों और दस्तावेजों की परीक्षा के लिए कमीशन निकालना;
(च) कोई अन्य विऐाय, जो राऐट्रपति नियमों द्वारा अवधारित करें।
(9) संघ और प्रत्येक राज्य सरकार, सामाजिक और शैक्षिक दृऐिट से पिछड़े वर्गों को प्रभावित करने वाले सभी मुख्य नीति विऐायक मामलों पर आयोग से परामर्श करेगी।
HON. SPEAKER: Now, hon. Minister to move further amendment regarding change of year.
श्री थावर चंद गहलोत : अध्यक्ष महोदया, मैं प्रस्ताव करता हूं :-
(तीन) भारत के संविधान का और संशोधन करने वाले लोक सभा द्वारा यथापारित तथा संशोधन के साथ राज्य सभा द्वारा लौटाए गए विधेयक में निम्नलिखित और संशोधन किया जाए:-
कि पृऐठ 1, पंक्ति 4,-
“2017” के स्थान पर “2018” प्रतिस्थापित किया जाए”।
HON. SPEAKER: Shri N. K. Premachandran – Not present.
Now, Shri Bhartruhari Mahtab to move his amendment no. 3 to the alternate amendment moved by the hon. Minister. SHRI BHARTRUHARI MAHTAB (CUTTACK): Yes. While moving my amendment because last April, when this Bill was moved, there was a full-scale discussion. HON. SPEAKER: Now, you only move the amendment.
SHRI BHARTRUHARI MAHTAB : Okay. I beg to move:
“That in the amendment alternative to the amendment made by Rajya Sabha, page 1, in the proposed new article 338B, after clause (2),-” insert “Provided that at least one from amongst the Chairperson, Vice Chairperson and three other members shall be a woman”. (3) HON. SPEAKER: Shri Adhir Ranjan Chaowdhury – Not present.
SHRI BHARTRUHARI MAHTAB : I beg to move:
“That in the amendment alternative to the amendment made by Rajya Sabha, page 3, in the proposed new article 338B, after clause (9),- ” insert “Provided that such consideration shall not be mandatory for a State Government in respect of policy matters affecting socially and educationally backward classes, which are included in List II-State List of the Seventh Schedule to the Constitution.”. (5) HON. SPEAKER: Now, hon. Minister, say something about this Bill.
श्री थावर चंद गहलोत : अध्यक्ष महोदया, राज्य सभा में जब यह विधेयक गया था,तो वहां उन्होंने खण्ड तीन को विलोपित करने का प्रस्ताव पारित किया था और खण्ड तीन में उसके गठन से संबंधित प्रावधान, कि इतने सदस्य होंगे और इस-इस प्रकार के सदस्य होंगे, इस प्रकार का प्रावधान किया गया था।
13.00 hrs परंतु उन्होंने कहा कि इसमें एक महिला सदस्य को होना अनिवार्य है और एक अल्पसंख्यक सदस्य का होना भी अनिवार्य है। इस प्रकार का संशोधन प्रस्तुत किया, जिसे सरकार ने नहीं माना, उन्होंने वोटिंग के माध्यम से इसे विलोपित करने का निर्णय लिया। इस संबंध में हमने जो विकल्प तैयार किया है, खंड 3 में हम किसी प्रकार का कोई संशोधन नहीं कर रहे हैं, जिसे लोक सभा ने पारित किया था, हम उसी प्रकार का प्रावधान कर रहे हैं। सदस्य योग्यता के आधार पर होते हैं। मैंने लोक सभा में आश्वासन भी दिया था कि जब नियम बनाएंंगे तो महिला सदस्य का प्रावधान करेंगे और उसी आधार पर लोक सभा ने उसे स्वीकृति दी थी, लेकिन वहां उन्होंने नहीं माना, महिला सदस्य हो, इसका प्रावधान इसमें किया जाए। इसी प्रकार उन्होंने कहा था कि एक अल्पसंख्यक सदस्य भी होगा। जब ओबीसी कमीशन गठित होगा तो ओबीसी से संबंधित जो वर्ग उसमें आते हैं उसमें से ही सदस्य बनाने का प्रावधान है। ये दोनों बातें वहां से अस्वीकार कर दी। माइनारोटी कमीशन अलग से बना हुआ है,एससी कमीशन अलग से बना है, एसटी कमीशन भी अलग से बना हुआ है, उनका प्रतिनिधित्व उस आयोग में अपने आप होता है और हो रहा है।
अब हमने खंड 5 में एक संशोधन प्रस्तावित किया है, पहले प्रावधान था कि आयोग केवल सलाह देने का काम करेगा और सलाह देकर अपना प्रतिवेदन गवर्नर को देगा, लोक सभा में अनेक माननीय सदस्यों ने इस प्रकार के विऐाय रखे थे। राज्य सभा में भी यह कहा कि गवर्नर राज्य सरकार को नजरअंदाज करेंगे, इस तरह की भावना परिलक्षित होती है। हमने उसमें विकल्प दिया है कि "गवर्नर" शब्द की जगह "सरकार" शब्द जोड़ रहे हैं अर्थात सरकार की राय से ही आयोग अपना प्रतिवेदन बनाएंंगे। 338 ख, 5 ग में इस प्रकार का प्रावधान किया है। इसी प्रकार से हमने संशोधन प्रस्तुत करते हुए यह बात कही है, आयोग केवल सलाहकार के रूप में ही काम करेगा, यह अधिकार पर्याप्त नहीं है, हमने उसमें कहा कि जहां ऐसी कोई रिपोर्ट या भाग ऐसे मामले से संबंधित हैं जिसका संबंध राज्य सरकार से है, वहां ऐसी प्रति राज्य के राज्यपाल को भेजी जाएगी, जो राज्य से संबंधित सिफारिशों पर की गई या किए जाने की प्रस्तावित कार्रवाई को स्पऐट करने वाले ज्ञापन और ऐसी किसी सिफारिश की अस्वीकृति के कारण, यदि कोई हों, सहित राज्य के विधान मंडल के समक्ष रखा जाएगा। रिपोर्ट की एक प्रति राज्य सरकार को भेजी जाएगी जो उसे राज्य से संबंधित सिफारिश पर की गई या किए जाने के लिए प्रस्तावित कार्रवाई को स्पऐट करने वाले ज्ञापन और ऐसी किसी सिफारिश की स्वीकृति के कारणों, यदि कोई हो,सहित राज्य के विधान मंडल समक्ष रखा जाएगा। हमने तीन प्रकार का प्रावधान इसमें किया है, इस पर लोक सभा में विस्तार से चर्चा हो गई है। मैं अनुरोध करना चाहूंगा कि इसे पारित किया जाए।
माननीय अध्यक्ष: प्रस्ताव प्रस्तुत हुआः ू (एक) कि भारत के संविधान का और संशोधन करने वाले विधेयक, लोक सभा द्वारा यथापारित, में राज्य सभा द्वारा किए गए निम्नलिखित संशोधनों पर विचार किया जाए :-
कि पृऐठ 2 और 3, खण्ड 3 का लोप किया जाए।
(दो) कि भारत के संविधान का और संशोधन करने वाले विधेयक, लोक सभा द्वारा यथापारित, में राज्य सभा द्वारा किए गए संशोधन कि पृऐठ 2 और 3, खण्ड 3 का लोप किया जाए, के स्थान पर राज्य सभा द्वारा किए गए संशोधन के निम्नलिखित वैकल्पिक संशोधन को प्रतिस्थापित किया जाए :-
कि पृऐठ 2 और 3, निम्नलिखित अंतःस्थापित किया जाए,-
3. संविधान के अनुच्छेद 338क के पश्चात् निम्नलिखित अनुच्छेद अंतःस्थापित किया जाएगा, अर्थात:-
“ 338ख.(1) सामाजिक और शैक्षिक दृिऐट से पिछड़े वर्गों के लिए राऐट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग नामक एक आयोग होगा।
(2) संसद् द्वारा इस निमित्त बनाई गई किसी विधि के उपबंधों के अध्यधीन, आयोग में एक अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और तीन अन्य सदस्य होंगे तथा इस प्रकार नियुक्त अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और अन्य सदस्यों की सेवा की शर्तें और पदावधि ऐसी होंगी,जो राऐट्रपति नियमों द्वारा अवधारित करें।
(3) आयोग के अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और अन्य सदस्य राऐट्रपति द्वारा अपने हस्ताक्षर और मुद्रा सहित अधिपत्र द्वारा नियुक्त किए जाएंंगे।
(4) आयोग को अपनी स्वयं की प्रक्रिया विनियमित करने की शक्ति होगी।
(5) आयोग के निम्नलिखित कर्तव्य होंगे-
(क) इस संविधान के अधीन या तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य विधि के अधीन या सरकार के किसी आदेश के अधीन सामाजिक और शैक्षिक दृिऐट से पिछड़े वर्गों के लिए उपबंधित रक्षापायों से संबंधित सभी मामलों का अन्वेऐाण और मानीटर करना;
(ख) सामाजिक और शैक्षिक दृिऐट से पिछड़े वर्गों के अधिकारों से वंचित किए जाने और रक्षापायों के संबंध में विनिर्दिऐट शिकायतों की जांच करना;
(ग) सामाजिक और शैक्षिक दृिऐट से पिछड़े वर्गों के सामाजिक-आर्थिक विकास में भाग लेना तथा सलाह देना तथा संघ और किसी राज्य में उनके विकास की प्रगति का मूल्यांकन करना;
(घ) राऐट्रपति को, वार्िऐाक रूप से और ऐसे अन्य समयों पर, जो आयोग उचित समझे, उन रक्षापायों के कार्यकरण पर रिपोर्ट प्रस्तुत करना;
(ड.) ऐसी रिपोर्टों में उन उपायों के बारे में सिफारिशें करना, जो संघ या किसी राज्य द्वारा सामाजिक और शैक्षिक दृिऐट से पिछड़े वर्गों के संरक्षण, कल्याण तथा सामाजिक-आर्थिक विकास के लिए, उन रक्षापायों और अन्य उपायों के प्रभावी कार्यान्वयन के लिए,किए जाने चाहिए; और (च) सामाजिक और शैक्षिक दृिऐट से पिछड़े वर्गों के संरक्षण, कल्याण तथा सामाजिक-आर्थिक विकास के संबंध में ऐसे अन्य कृत्यों का निर्वहन करना, जो राऐट्रपति, संसद द्वारा किए गए उपबंधों के अध्यधीन नियमों द्वारा विनिर्दिऐट करें।
(6) राऐट्रपति, ऐसी सभी रिपोर्टों को, संघ से संबंधित सिफारिशों पर की गई या किए जाने के लिए प्रस्तावित कार्रवाई को स्पऐट करने वाले ज्ञापन और ऐसी किसी सिफारिश की अस्वीकृति के कारणों, यदि कोई हों, सहित संसद के प्रत्येक सदन के समक्ष रखवाएगा।
(7) जहां ऐसी कोई रिपोर्ट या उसका कोई भाग किसी ऐसे मामले से संबंधित है, जिसका संबंध राज्य सरकार से है, वहां ऐसी रिपोर्ट की एक प्रति राज्य के राज्यपाल को भेजी जाएगी, जो उसे, राज्य से संबंधित सिफारिशों पर की गई या किए जाने के लिए प्रस्तावित कार्रवाई को स्पऐट करने वाले ज्ञापन और ऐसी किसी सिफारिश की अस्वीकृति के कारणों, यदि कोई हों, सहित राज्य के विधान मंडल के समक्ष रखवाएगा।
(8) आयोग को, खंड (5) के उपखंड (क) में निर्दिऐट किसी मामले का अन्वेऐाण या उपखंड(ख) में निर्दिऐट किसी शिकायत की जांच करते समय किसी वाद का विचारण करने वाले सिविल न्यायालय की, और शििऐटतया निम्नलिखित विऐायों की बाबत सभी शक्तियां होंगी, अर्थात्:-
(क) भारत के किसी भाग से किसी व्यक्ति को समन करना और उसको हाजिर कराना तथा उसकी शपथ पर परीक्षा करना;
(ख) किसी दस्तावेज के प्रकटीकरण और पेश किए जाने की अपेक्षा करना;
(ग) शपथपत्रों पर साक्ष्य प्राप्त करना;
(घ) किसी न्यायालय या कार्यालय से किसी लोक अभिलेख या उसकी प्रति की अध्यपेक्षा करना;
(ड.) साक्षियों और दस्तावेजों की परीक्षा के लिए कमीशन निकालना;
(च) कोई अन्य विऐाय, जो राऐट्रपति नियमों द्वारा अवधारित करें।
(9) संघ और प्रत्येक राज्य सरकार,सामाजिक और शैक्षिक दृिऐट से पिछड़े वर्गों को प्रभावित करने वाले सभी मुख्य नीति विऐायक मामलों पर आयोग से परामर्श करेगी।
(तीन) भारत के संविधान का और संशोधन करने वाले लोक सभा द्वारा यथापारित तथा संशोधन के साथ राज्य सभा द्वारा लौटाए गए विधेयक में निम्नलिखित और संशोधन किया जाए:-
कि पृऐठ 1, पंक्ति 4,-
“2017” के स्थान पर “2018” प्रतिस्थापित किया जाए”। ू श्री राजीव सातव (हिंगोली) : अध्यक्ष जी, इसके पहले ही सदन में इसकी चर्चा हुई थी। आज 3 जनवरी देश की पहली शिक्षिका के रूप में सावित्री बाई फुले जी की जयंती है, इस अवसर पर हम सभी उनको नमन करते हैं। जिस प्रकार यह बिल यहां आया है। मंत्री जी सरकार की तरफ से अमेंडमेंट लेकर आए हैं। मैं ओबीसी की स्टैन्डिंग कमेटी के मेंबर के रूप में पिछले तीन सालों से हम लोग काम कर रहे हैं। सदन के सदस्य उसमें हैं।
यहां पिछले कई दिनों से ओबीसी स्टैंडिंग कमेटी ने बात रखा। हम माननीय प्रधानमंत्री जी से दो बार मिल चुके हैं। ओबीसी स्टैंडिंग कमेटी ने जो बातें सरकार के सामने रखी थीं, जो रिक्वेस्ट सरकार के सामने रखी थी, उसका संज्ञान सरकार ने नहीं लिया है। हमने ओबीसी मिनिस्ट्री के बारे में बात की थी क्योंकि देश में 50 प्रतिशत से ज्यादा आबादी है। ओबीसी स्टैंडिंग कमेटी की डिमांड रही है,युनेनिमस डिमांड रही है कि जब तक ओबीसी के लिए सैपरेट मिनिस्ट्री नहीं बनाएंंगे, सैपरेट बजट नहीं देंगे, तब तक सही मायने में ओबीसी के उत्थान की बात नहीं कर सकते हैं।
आज सदन में भीमा कोरेगांव के बारे में चर्चा हुई, मैं भी उस बारे में निऐाॊध व्यक्त करना चाहूंगा जो घटना हुई है। यहां जो बातें निकलकर पिछले तीन साल से आ रही हैं, मंत्री जी आप जवाब बहुत अच्छा देते हैं लेकिन उसमें तथ्य बहुत कम हो रहे हैं। कैसे तथ्य कम हो रहे हैं, जैसे पिछले तीन साल में पोस्ट ग्रेजुएट्स और ग्रेजुएट्स के स्टुडेंट्स की ओबीसी स्कॉलरशिप जिस प्रकार से कम हुई,पहले कभी कम नहीं हुई थी। मेरी आपसे विनती है जो स्कॉलरशिप पहले थी, उसमें बढ़ोत्तरी कीजिए,कम मत कीजिए। स्कूल में 25 रुपए स्कॉलरशिप ओबीसी बच्चों के लिए है, अगर 25 रुपए स्कॉलरशिप है तो इसमें वह क्या करेगा? वह कौन सी बुक या पैन खरीद सकेगा। आप यह बिल ला रहे हैं, हम अपनी तरफ से समर्थन जरूर करेंगे लेकिन ओबीसी के उत्थान की बात सरकार सिर्फ कह रही है,लेकिन सही मायने में अमल नहीं हो रहा है। आप कह रहे हैं कि कमीशन ला रहे हैं, बहुत अच्छी बात है, ओबीसी कमेटी ने बहुत सालों से इसके बारे में कहा है। इस बिल को तीन साल पास करने में क्यों लग रहे हैं, यह भी सवाल है? सही मायने में जिस प्रकार से सरकार को सीरियसली काम करना चाहिए था, कर नहीं पाई है।
हमने पिछली बार भी कहा था, ओबीसी कमेटी ने पिछली बार क्लियरली कहा था कि ओबीसी इन्कलूजन की इनकम की लिमिट बढ़ानी चाहिए। हमारी युनेनिमस रिकमेंडेशन थी कि जब तक इनकम लिमिट नहीं बढ़ाएंंगे, सही मायने में ओबीसी को न्याय नहीं मिल सकता है। इस बारे में सरकार कुछ नहीं कर रही है। मेरी आपके माध्यम से सरकार से विनती है, सरकार को इस बारे में सोचने की जरूरत है।
अभी मंत्री जी ने बड़ा अच्छा तर्क दिया कि माइनोरिटी कमीशन है इसलिए माइनोरिटी मैम्बर नहीं रहेगा, एससी कमीशन है इसलिए एससी मैम्बर नहीं रहेगा। इसी तरह महिला आयोग है, क्या महिला मैम्बर नहीं रखेंगे? महिला मैम्बर तो रखनी पड़ेगी, 50 प्रतिशत आबादी है। 50 प्रतिशत आबादी को आप रिप्रेंजेंट क्यो नहीं करना चाहते है, यह लॉजिक मुझे समझ में नहीं आ रहा है।
मैंने पिछली बार विनम्रता से अमेंडमेंट दिया था, आपने कहा था कि हम इसके बारे में सोचेंगे, पोजिटिवली सोचेंगे, इसलिए हमने विदड्रा किया था। वेणुगोपाल जी और मैंने अमेंडमेंट मूव किया था। अगर राज्य सभा ने इस अमेंडमेंट को स्वीकार किया है कि एक महिला मैम्बर चाहिए तो क्यों 50 प्रतिशत महिलाओं को न्याय नहीं देना चाहते हैं, यह मुझे समझ में नहीं आ रहा है। आप कह रहे है कि रूल में लेना चाहते हैं। रूल में क्यों लेना चाहते हैं? क्यों इसका प्रावधान एक्ट में नहीं करना चाहते हैं? यह सवाल है। यहां कोई अच्छी बात विपक्ष या किसी और के द्वारा आई है, तो उसे स्वीकार कर लीजिए। एक महिला मैम्बर उसमें एड हो, अगर यह अमेंडमेंट राज्य सभा का है, तो इसे एक्सेप्ट कर लीजिए। इसमें प्रेस्टिज इश्यू करने की जरूरत नहीं है। जब आप कह रहे हैं“बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ” “महिला सशक्तिकरण”, तब आप महिलाओं को एक्ट में अलाऊ नहीं कर रहे हैं। यह क्या लॉजिक है, मुझे तो समझ में नहीं आ रहा है। आप जो कहेंगे, वही कायदा बनेगा, ऐसा नहीं होगा। अगर हमारी तरफ से अच्छी बात है तो एक्सेप्ट कीजिए,यह हमारा कहना है।
6 अप्रैल, 2017 को हमने ये बातें कही थीं, आपने कहा था कि हम रूल में करेंगे। मैं यहां उदाहरण देना चाहता हूं, मेंटल हैल्थ केयर बिल में मैंने बात कही थी,माननीय मंत्री जी ने कहा था कि रूल्स में एड करेंगे, रूल्स में कुछ एड नहीं हुआ है। रूल्स बन गए, हमने जो अमेंडमेंट प्रपोज किया था, सरकार ने उसे एक्सेप्ट नहीं किया। यह मत कीजिए, जो अच्छा है, हमसे लीजिए।
यहां जो बातें डिस्कस हुई थीं, राज्य सभा में अमेंडमेंट पास हुआ, सरकार इससे कहीं न कहीं बाहर जाना चाह रही है। 50 प्रतिशत देश की आबादी अगर ओबीसी से है, तो एनसीबीसी कमीशन में पांच के बजाय सात मैम्बर होंगे, आठ मैम्बर होंगे, दस मैम्बर होंगे तो सरकार को क्या दिक्कत है, यह मेरी समझ में नहीं आ रहा है।
अगर ज्यादा मैम्बर्स होंगे, तो ज्यादा रिप्रैजेंटेशन होगा। अगर ज्यादा रिप्रैजेंटेशन होगा, तो सही मायने में वहां सबको मौका मिल सकेगा। इसलिए मेरी सरकार से विनती है कि आबादी बढ़ गयी है। यहां पर कहा जा रहा है कि एससी कमिशन में है, एसटी कमिशन में है, इसलिए हम ओबीसी कमिशन में रखना चाह रहे हैं, तो यह कोई लॉजिकल तथ्य नहीं है।
अध्यक्ष महोदया, मैं आपके माध्यम से कहना चाहता हूं कि मैम्बर्स बढ़ाने की जरूरत है। आप मैम्बर्स बढ़ाकर उन्हें एप्वाइंट करने का प्रौसेस कर रहे हैं, तो आपको रिमूवल के बारे में भी कुछ रूल्स बनाने पड़ेंगे। जो मैम्बर्स अच्छा काम कर रहे हैं, जो चेयरमैन अच्छा काम कर रहे हैं, ठीक है, उन्हें आप रिवार्ड दें। लेकिन अगर कोई काम ही नहीं कर रहा है, तो उस बारे में भी सरकार को सोचने की जरूरत है। सरकार ने ओबीसी कमेटी के रिकमेंडेशन्स की तरफ ध्यान नहीं दिया। मैं फिर से आपके माध्यम से सरकार के सामने यह बात लाना चाहता हूं कि हम इस कमिशन की बात जरूर करें। वैसे कमिशन के नाम बदलने की बात भी राज्य सभा में हुई थी। हम इस बारे में भी सरकार से स्पऐटीकरण चाहते हैं कि एजुकेशनली और बाकी बैकवर्ड क्लासेज के बारे में हम बात करेंगे, तो उसमें दिक्कत क्या है?
अध्यक्ष महोदया, मैं ज्यादा समय नहीं लूंगा,लेकिन ओबीसी के हित के बारे में सरकार को जिस प्रकार से ध्यान देना चाहिए, वैसा ध्यान नहीं दे रही है। महिलाओं के प्रति, सावित्रीभाई फुले के जन्मदिन पर आप महिलाओं के प्रति अन्याय कर रहे हैं। यह ठीक नहीं है। इसलिए आप ओबीसी के बारे में ज्यादा ध्यान दें, मैं यह विनती यहां पर करता हूं।
अध्यक्ष महोदया, आपने मुझे बोलने के लिए समय दिया, उसके लिए बहुत-बहुत धन्यवाद।
श्री गणेश सिंह (सतना) : अध्यक्ष महोदया, आपने मुझे एक बहुत महत्वपूर्ण विधेयक पर बोलने की अनुमति दी, उसके लिए आपका बहुत-बहुत धन्यवाद। यह देश के आजाद इतिहास में एक ऐतिहासिक समय है, जिसकी बहुत लंबे समय से मांग थी। देश में पिछड़े वर्ग की जनसंख्या 52 फीसदी से अधिक है, लेकिन अभी तक इस वर्ग को न्याय नहीं मिल रहा था। इस संबंध में आयोग बना, लेकिन आयोग को कोई अधिकार नहीं था। देश में कई राजनीतिक दल इस मांग को उठाते रहे कि पिछड़ा वर्ग आयोग को संवैधानिक दर्जा दिया जाये, लेकिन आज तक उस बारे में किसी ने नहीं सोचा। मैं देश के प्रधान मंत्री माननीय श्री नरेद्र मोदी जी को धन्यवाद देना चाहता हूं, उन्होंने अपने मंत्रिमंडल में यह निर्णय लिया कि जिस तरह से एससी आयोग, अल्पसंख्यक आयोग और एसटी आयोग को अधिकार है, उसी तरह से पिछड़ा वर्ग आयोग को भी संवैधानिक अधिकार मिलना चाहिए।...(व्यवधान) संविधान में पिछड़ा वर्ग लिखा भी नहीं है, लेकिन प्रधान मंत्री जी ने उसमें 123वां संशोधन करने के लिए सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय को निर्देशित किया। तब 10 अप्रैल को यह विधेयक लोक सभा में आया, उसमें लंबी बहस हुई और यह जरूरत बताई गई कि आखिकार इसमें आयोग को क्यों संवैधानिक दर्जा दिया जाये और उसके आधार पर इस सदन ने उसे पूरे बहुमत से पारित किया। लेकिन राज्य सभा में उस विधेयक को फिर से लटकाने की कोशिश हुई। राज्य सभा में बहस हुई और बहस में संशोधन आये। संशोधनों के बाद कहा गया कि पहले इस विधेयक को सलेक्ट कमेटी में भेज दिया गया। वह विधेयक सलेक्ट कमेटी में चला गया। सलेक्ट कमेटी ने अपनी अनुशंसाएंं करके भेजीं और उसके बाद उसे राज्य सभा ने पारित किया। उसमें जो संशोधन किया गया है इतना बड़ा महत्वपूर्ण विऐाय नहीं था, लेकिन इसके बावजूद भी कांग्रेस की यह इच्छा थी कि इसे कैसे रोका जाये, लटकाया जाये। यह कोशिश की गयी। मैं इसमें माननीय प्रधान मंत्री को धन्यवाद देना चाहता हूं कि उन्होंने अपने किये हुए वायदे को पूरा करने के लिए पुनः उस संशोधन में कुछ और संशोधन करके। माननीय मंत्री जी ने इस विधेयक को फिर से यहां प्रस्तुत किया है। मैं सबसे पहले उनका बहुत-बहुत धन्यवाद करता हूं। अभी श्री राजीव सातव जी कह रहे थे कि आज महिला दिवस है। ...(व्यवधान)
माननीय अध्यक्ष : आज महिला दिवस न होकर श्रीमती सावित्री भाई फुले का जन्मदिन है।
…( व्यवधान)
श्री गणेश सिंह : वह कह रहे थे कि आज श्रीमती सावित्री भाई फुले का जन्मदिवस है।
महिलाओं के सम्मान में, इसमें महिलाओं को सदस्य बनाने का प्रावधान किया जाए। मैं उन्हे बताना चाहता हूँ, माननीय मंत्री जी ने स्पऐट रूप से कहा है कि महिला सदस्य के रूप में भी नियुक्ति होगी, उसके लिए जो नियम बनाए जाएंंगे, उनमें इसका प्रावधान किया जाएगा, क्योंकि उनकी आबादी 50 फीसदी है। जहां तक अल्पसंख्यकों का मामला है, जो पिछड़े वर्गों की सूची है, उसमें कई समाज एवं धर्मों के लोग हैं, उसमें मुस्लिम समाज के लोग भी हैं। जो पिछड़ा वर्ग में आएगा, उसको निश्चित तौर से सदस्य के रूप में नियुक्ति का अधिकार रहेगा। इसके लिए अलग से कोई प्रावधान करने की जरूरत नहीं है। मैं स्पऐट रूप से कहना चाहता हूं कि कौन सा राजनीतिक दल इस वर्ग के लिए कितना सोच रहा है। भारतीय जनता पार्टी सरकार ने यह साबित करके दिखा दिया कि हम पिछड़ों के साथ हो रहे अन्याय को कतई बर्दाश्त नहीं करेंगे, उनको पूरा हक देकर रहेंगे और इस दिशा में आगे बढ़ने का काम हुआ है। मैं निवेदन करना चाहता हूं कि इसमें जो संशोधन किए गए,उनका कोई औचित्य था, अन्यथा अब तक आयोग का गठन हो जाता। प्रधान मंत्री जी ने यहां तक कहा है कि पिछड़ों में भी जो सबसे पिछड़े हैं, उनको उनका अधिकार मिलना चाहिए। इसलिए उन्होंने एक कमेटी गठित की है, जो पूरे देश में जाकर अध्ययन कर रही है कि कौन से ऐसे लोग हैं, जिनको अभी तक आरक्षण का लाभ नहीं मिल पा रहा है या उनको न्याय नहीं मिल पा रहा है और उस कमेटी की रिपोर्ट आने के बाद उनके लिए अलग से व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी। इस आयोग को संवैधानिक अधिकार मिलने जा रहा है। पिछड़ा वर्ग के विभिन्न संगठनों में काम करने वाले कर्मचारियों की शिकायतों को कोई सुनता नहीं था और दर्ज नहीं करता था। एससी आयोग के पास अधिकार था, लेकिन एससी आयोग हमेशा कहता है कि हमारे पास संसाधनों की कमी है, इसलिए हम इनकी शिकायतों एवं ग्रीवांसेज को नहीं सुन सकते हैं। हजारों की संख्या में ऐसी शिकायतें थीं। सभी विभागों में उन कर्मचारियों की हालत देखिए, वहां उनके नोडल अधिकारी तक नहीं बने हैं और उनकी शिकायतों का निराकरण नहीं हो रहा है। इस तरह की तमाम समस्याएंं थीं। वे लोग कहां जाएंं? पूरी तरह से निराशा का भाव था। आज स्कूलों-कॉलेजों को देख लीजिए, वहां आरक्षण का पूरी तरह से पालन नहीं हो रहा है। कई केद्रीय विश्वविद्यालयों में प्रोफेसर्स की नियुक्ति में एक स्तर तक उन्होंने सुधार किया है, लेकिन एक स्तर के बाद उसे छोड़ दिया है। एम्स, पटना में भी नहीं हुआ। जहां एम्स खुले हुए हैं, उनमें भी आरक्षण की व्यवस्था होनी चाहिए, लेकिन ऐसा नहीं है। ऐसे कई संस्थान मैंने राज्य सरकारों में भी देखे, जहां पर पिछड़े वर्ग के बच्चों को एडमिशन में 27 प्रतिशत आरक्षण का अधिकार है, जो उनको मिलना चाहिए, लेकिन वहां उनको वह अधिकार नहीं मिलता है। आखिरकार वे कहां जाएंं? इनमें से जो लोग मेरिट में आते हैं, उनको OBC कैटेगरी में डाल दिया जाता है, जबकि उनका अधिकार है कि मैरिट में अनेक बार कि वे जनरल कैटेगरी में जा सकते हैं, भले ही वे ओबीसी हैं। इस तरह की तमाम शिकायतों का समाधान कौन करेगा? आज पूरे देश में, जब से पिछड़ा वर्ग आयोग को संवैधानिक अधिकार देने की बात माननीय प्रधान मंत्री जी ने कही, चारों तरफ एक चर्चा का विऐाय बना हुआ है। मैं दक्षिण भारत के कई राज्यों में गया, वहां बड़े-बड़े प्रतिनिधिमंडल आकर मिलते थे और कहते थे कि सचमुच इसकी कितनी जरूरत थी। उस जरूरत को कौन पूरा कर रहा है? आज हमारी सरकार उसे पूरा कर रही है। लोगों के मन में एक आशा जगी है, एक विश्वास और भरोसा जगा है कि सभी वर्गों को साथ लेकर चलने वाले प्रधान मंत्री नरेद्र मोदी जी की सरकार है। जैसा उन्होंने कहा है- ‘सबका साथ, सबका विकास,’ सचमुच वह किसी के साथ कोई भेदभाव नहीं कर रहे हैं। ऐसी सरकार देने वाला, इस देश में मैंने पहला ऐसा प्रधान मंत्री देखा है। उन्होंने पहले दिन से जो कमिटमेंट किया है, उसे पूरा कर रहे हैं। अभी तीन तलाक का मामला आया। क्या तीन तलाक को कानूनी दायरे में नहीं लाना चाहिए? सुप्रीम कोर्ट ने जब एक आदेश दिया तो उसे हमारी सरकार ने एक विधेयक के रूप में प्रस्तुत किया। यह निश्चित तौर पर उनका हक था, उनका अधिकार है। सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय हमेशा इस बात के लिए प्रयास करता है कि सभी को सामाजिक न्याय मिले। मैंने कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर मंत्रालय को सिफारिश भेजी थी।
उस सिफारिश में मैंने कहा था कि पिछड़े-वर्ग के बच्चों को जो छात्रवृत्ति दी जाती है, वह बहुत कम है। वह सर्वाधिक राशि एस.सी. वर्ग के बच्चों को चली जाती थी। चूंकि क्लासिफिकेशन नहीं किया गया। मेरा एस.सी. वर्ग के बच्चों से कोई विरोध नहीं है। अच्छी बात है, उनको और मिलना चाहिए। लेकिन उसमें ओ.बी.सी. के बच्चों के लिए फंड की अलग से व्यवस्था होनी चाहिए। वह बात जब हमने कही तो मैं माननीय मंत्री जी और सामाजिक न्याय मंत्रालय को धन्यवाद देना चाहूंगा क्योंकि उन्होंने इस बार व्यवस्था की है। इस बार उन्होंने उनके लिए भी एक व्यवस्था की है। मैं आप सबसे कहना चाहता हूं कि यह विधेयक वास्तव में बहुत महत्वपूर्ण है।
पहले मंडल कमीशन बना, काका कालेलकर आयोग बना और इसके बाद कई राज्यों ने आयोग बनाये। उन सबने अपनी सिफारिशों में कहा था कि इस वर्ग को न्याय दिलाया जाए। इस वर्ग को न्याय पाने का हक है। सामाजिक और आर्थिक रूप से यह बहुत पिछड़ा हुआ समाज है। वऐाऩ 2011 में सेंसस जारी हुआ। मैं माननीय मंत्री जी से कहना चाहता हूं कि वऐाऩ 2011 में जब जनगणना हुई थी, सबसे पहले 1931 में हुई थी। उसके बाद फिर 2001 में हुई। इसके बाद 2011 में हुई। 2011 में जब गणना शुरू हुई तब इसी हाउस में, वरिऐठ सदस्य आदरणीय मुलायम सिंह यादव जी बैठे हुए थे और उसमें और भी सदस्य थे। सबने उस समय सदन में सवाल उठाया था। माननीय राम विलास पासवान जी भी हैं और सबने कहा था कि जो सेंसस हो रहा है, उसमें पिछड़े वर्ग का भी सेंसस कराया जाए और उनको डिक्लेअर किया जाए। उस समय माननीय प्रणव मुखर्जी जी सदन के नेता थे। उन्होंने इस बात को कबूल किया और निर्देश भी जारी किया। जहाँ तक मेरी जानकारी है सेंसस को उजागर नहीं किया गया, जो समिति बनी थी सर्वेक्षण की, जिनको अधिकार मिला था, उन्होंने अपनी सिफारिश सामाजिक न्याय मंत्रालय को दे दिया है कि वे इसे जारी कर सकते हैं।
मैं आज यहां इस सभा में माननीय मंत्री जी से निवेदन करना चाहता हूं कि आप इस सेंसस को जल्दी से जल्दी घोऐिात करें, सार्वजनिक करिए, इसको प्रकाशित करिए ताकि पिछड़े वर्ग के लोगों को न्याय दिलाया जा सके। आज जरुरत इस बात की है कि इस देश में जो महाविद्यालय हैं, जो विश्वविद्यालय हैं, उनके जो पास-आउट बच्चे हैं, आज जब वे आई.ए.एस. और आई.पी.एस. की परीक्षा या अन्य सर्विसेज की परीक्षाओं में बैठते हैं, तो मैं देखता हूं कि उनको क्रीमी लेयर की सीमा में बांध दिया जाता है। क्रीमी लेयर की यह स्थिति है कि अगर क्रीमी लेयर रहेगा तो उनकी नियुक्ति नहीं होगी, जैसे इंदिरा साहनी के केस में सुप्रीम कोर्ट ने सिर्फ इतना ही इशारा किया था कि सरकार अगर चाहे तो उसमें आर्थिक आधार लगा सकती है। यह बात सही है कि आरक्षण में जिनको एक बार मौका मिल गया, उनको बार-बार न मिले। लेकिन चतुर्थ श्रेणी का कोई चपरासी भी है तो उसको सातवां वेतन आयोग मिलना शुरु हो गया है और यदि सातवें वेतन आयोग के तहत उसके वेतन, उसकी कृऐिा आय को भी उसकी आमदनी में अगर जोड़ देंगे तो चपरासी का बच्चा आई.ए.एस. कभी नहीं बन सकता। इसीलिए क्रीमी लेयर जैसे विऐाय को हटाया जाना चाहिए।
माननीय प्रधान मंत्री जी ने जो अति पिछड़ो की पहचान के लिए समिति बनायी है उस समिति द्वारा ओ.बी.सी. के किस वर्ग को अभी तक लाभ नहीं मिला उस की पहचान की जायेगी। यह सही है। जिनको एक बार आरक्षण का मौका मिला है, बार-बार उनको न मिले। जब हम कुछ कर रहे हैं तो मेरा सुझाव है कि क्रीमी लेयर को हटाया जाना चाहिए। क्रीमी लेयर को हटाकर सामाजिक और शैक्षणिक आधार रहे, लेकिन उसमें यह आर्थिक आधार देखा जाए कि जिसको मौका मिला है, उसको दोबारा मिलने की जरूरत नहीं है।
मैं सांसद हूं। मुझे आरक्षण की जरुरत नहीं है। मेरे बच्चों को भी जरुरत नहीं है। लेकिन जिनको मौका नहीं मिला है, लेकिन यदि कोई मेरी बिरादरी का है, कोई यादव बिरादरी का है, कोई अन्य बिरादरी का है, ठीक है, राजनीतिक क्षेत्र में वह आगे हो सकता है, सर्विस क्लास में भी आगे हो सकता है। वह आर्थिक आधार पर भी मजबूत होगा लेकिन अगर कभी आरक्षण का मौका उसको नहीं मिला तो क्रीमी लेयर की सीमा में रहकर वह जीवन में उसका कभी लाभ नहीं उठा सकता। यह कहीं न कहीं न्याय नहीं है। इसको सामाजिक न्याय की श्रेणी में लाना चाहिए। अगर एक बार मौका नहीं मिला तो निश्चित तौर पर उसको मौका पाने का हक है, चाहे वह कोई भी हो।
आज जनसंख्या के आधार पर भी आरक्षण व्यवस्था पर विचार करने की जरूरत है। एससी वर्ग में बहुत ऐसे हमारे भाई-बहन हैं और एसटी वर्ग में बहुत ऐसे भाई बहन हैं, जिनको पूरी तरह से अधिकार मिलना चाहिए।
मैं अभी तमिलनाडु गया था। तमिलनाडु में ऐसे कई वर्ग के लोग हैं जो ओबीसी में आना चाहते हैं, आंध्र प्रदेश के लोग ओबीसी में आना चाहते हैं, उत्तर प्रदेश के लोग ओबीसी में आना चाहते हैं, राजस्थान के लोग ओबीसी में आना चाहते हैं, मध्य प्रदेश के लोग ओबीसी में आना चाहते हैं एवं अन्य जगहों के लोग ओबीसी में आना चाहते हैं। जब यह आयोग गठित होगा तो निश्चित तौर पर उनको यह अधिकार मिलने जा रहा है कि वे इन विऐायों पर विचार करेंगे, विचार करने के बाद यदि राज्य की सरकार का विऐाय होगा तो राज्य सरकार के पास भेजेंगे, केद्र से संबंधित होगा तो केद्र की संसद में भेजें।, यहां उसे उनको जोड़ने और बाहर निकालने का अधिकार मिल जाएगा।
निश्चित तौर पर यह बहुत महत्वपूर्ण विधेयक है, इस विधेयक का मैं पूरजोर स्वागत करता हूं और सदन के सभी माननीय सदस्यों और सभी राजनीतिक दलों से आग्रह करता हूं कि पिछड़े वर्गों के लिए आप सभी अपना पूरा सहयोग दीजिए।
माननीय अध्यक्ष : श्री कल्याण बनर्जी जी।
मैं किसी को नहीं रोक रही हूं, लेकिन मेरा इतना ही निवेदन है कि जब इस बिल पर पूरी चर्चा हो चुकी है, अगर आप अमेंडमेंट तक ही सीमित रहें तो हमारा काम जल्दी हो जाएगा।
SHRI KALYAN BANERJEE (SREERAMPUR): Madam, the Chief Whip of the BJP came to us and said that it should not take much time and that we will complete it quickly. But now I find that they have changed their stand as their speaker has spoken for 30 minutes. Nobody is opposing the Bill.
HON. SPEAKER: I am not objecting you also. I am saying that it is only an amendment.
SHRI KALYAN BANERJEE : Now this amendment has been brought to the Bill. I had also objected to it earlier. You do not claim that these facilities are being given to the OBCs by the present Government. There was almost a revolution in the country. The Mandal Commission was implemented. The matter was referred to the Supreme Court of India under article 143. The Supreme Court of India had passed the order. So neither it has been done by Modi Ji nor any other Ji. किसी जी ने यह नहीं किया है, यह माननीय सुप्रीम कोर्ट ने किया है। So you do not claim that you have done this....(व्यवधान) आप दस सालों से कहां थे?...(व्यवधान) दस सालों में क्या-कितना हुआ है,आप क्या जानते हैं?...(व्यवधान)
माननीय अध्यक्ष : बैठे-बैठे कोई चर्चा नहीं होगी।
…( व्यवधान)
SHRI KALYAN BANERJEE : You do not claim credit for something which you have not done. So as far as OBCs are concerned, the beginning point is the judgment of the Supreme Court. A Constitution Amendment was brought in the month of April 2017. The OBC Commission wanted to have constitutional status and nothing more than that. We had agreed to it that it should be given constitutional status. At that time also I participated in the discussion on that amendment. At that time also I asked as to why the report should be sent to the Governor. I had said that it should be sent to the State Government. Now good sense has prevailed on the Government and they have come up with this amendment. At that time, they did not like it but good sense has prevailed now that the report should be placed before the State Government and the State Government will forward it to the State Legislature. That was our demand. आप लोगों ने नहीं सोचा था, हम लोगों ने सोचा था, बाद में आपके दिमाग में आया, यही करना चाहिए। आप लोगों ने नहीं सोचा था। So many tall claims are being made.
The Sachar Committee had pointed out that there are OBCs in the Muslim community also and they too have to be included. मोदी जी नहीं लाए हैं, आप नहीं लाए, it was pointed out first by the Sachar Committee. You must tell the truth. The nation should know. ...(व्यवधान) आप चिल्लाएंं।...(व्यवधान)
माननीय अध्यक्ष : आपके गले बुलंद हैं लेकिन बार-बार ऐसा न करें।
...(व्यवधान)
SHRI KALYAN BANERJEE : The Sachar Committee report speaks about earmarking OBCs of the Muslim community also.
In 2011, when our Party came to power, hon. Chief Minister, Kumari Mamata Banerjee, started the process of identification of OBCs among Muslims. It has been done in 2011 itself and not in 2014. It was done long before 2014 when the Prime Minister had seen the dream, the dream itself got fulfilled in West Bengal. Long back, it had been done. Therefore, do not make tall claims. If you want to give an election speech, go there and do it.
You have faced the situation in Gujarat. What have you done there in the case of OBCs? Why are the OBCs now fighting against you in Gujarat? They are vociferous against you in Gujarat and the result has shown on how you have gone down there. It is because you have not accommodated the OBCs in Gujarat. This is the reality.
Madam, I want to point out one thing. The Commission will make the investigation – the hon. Minister is here – under article 338(5) of the Constitution. The provisions are made to investigate and monitor. There, you have not given any scope for the State Governments to speak or press the case of the State Governments. The State Government represents its own people. They understand and they know as to who will be categorised as OBCs. That opinion should be given by the State Governments. There is no scope at all in the amendment to call for the opinion of the State Governments for consideration of the National Commission.
Under Clause 7, when the Report is placed before the State Government, the State Government will place it before the respective Legislature. Acceptance and non-acceptance will be given by them. What would be the effect of it? If the State Government is not agreeing to it, what is the scope of it? Where will the State Government raise their objection? You have not made any provision for it in the amendment.
Now, there is a contra-provision. There is no scope under this Constitution Amendment at any stage for the State Government to place its view before the Commission but you have made a provision under clause 9 that the Union and every State Government shall consult the Commission on all major policy matters affecting the socially and educationally backward classes. When you are thinking about OBCs, you are not taking the views of the State Governments but you are telling that the State Governments have to take decisions in consultation with the National Commission. This is a contradiction. And you are talking about cooperative federalism! Is this an illustration of cooperative federalism? Rather, it hits cooperative federalism itself. You have to take every party into confidence. Every State should be consulted. … (Interruptions)
सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम मंत्रालय के राज्य मंत्री (श्री गिरिराजसिंह): अध्यक्ष महोदया, कल्याण बैनर्जी गलत रिपोर्ट दे रहे हैं।...(व्यवधान)
माननीय अध्यक्ष: आप बैठ जाएंं।
…( व्यवधान)
SHRI KALYAN BANERJEE : Where is the provision? Do not say like this. Let the hon. Minister give the reply on this point. Where is the clause for this in the Bill? … (Interruptions) You cannot prevent the Opposition speak. You cannot prevent the Opposition view. You have to take note of the view of the Opposition. … (Interruptions) You cannot shout in this way. … (Interruptions) Madam, what is happening here? Madam, kindly tell me as to why he is disturbing me. … (Interruptions)
HON. SPEAKER: Only Shri Kalyan Banerjee’s statement will go on record.
… (Interruptions) * HON. SPEAKER: I have not permitted you. Please sit down.
… (Interruptions)
HON. SPEAKER: What is this?
… (Interruptions)
HON. SPEAKER: What is this happening?
… (Interruptions)
SHRI KALYAN BANERJEE : He is a Minister. … (Interruptions) Is this the way the Minister would speak in the House?
HON. SPEAKER: Nothing will go on record except Shri Kalyan Banerjee’s speech.
…(Interruptions) * SHRI KALYAN BANERJEE : I am very sorry. … (Interruptions) See the body language of the Minister. … (Interruptions) This is the body language of the Minister. … (Interruptions) I am very sorry.
HON. SPEAKER: Only Shri Kalyan Banerjee’s speech will go on record.
…(Interruptions) * SHRI KALYAN BANERJEE : I have not said that. … (Interruptions)
HON. SPEAKER: You can make your point when your turn comes.
… (Interruptions)
HON. SPEAKER: Nothing will go on record.
…(Interruptions)* HON. SPEAKER: Shri Kalyan Banerjee, please conclude.
SHRI KALYAN BANERJEE : How can I speak if the Minister intervenes in this way? … (Interruptions)
माननीय अध्यक्ष : आप इस तरफ देखकर बोलिए। प्रत्येक सदस्य उठकर न बोलें।
…( व्यवधान)
श्री गणेश सिंह (सतना) : आप हाउस को गलत जानकारी दे रहे हैं। ...(व्यवधान)
SHRI KALYAN BANERJEE : हमने कुछ गलत नहीं कहा है। गलत बात आपने कही है। ...(व्यवधान)
माननीय अध्यक्ष : आप लोग आपस में मत लड़िए।
…( व्यवधान)
माननीय अध्यक्ष : गणेश सिंह जी, प्लीज बैठिए।
SHRI KALYAN BANERJEE : Madam, see how the Opposition is being threatened. … (Interruptions) This is not the way. … (Interruptions) A Minister cannot behave in this way. … (Interruptions)
माननीय अध्यक्ष : यह क्या हो रहा है?
…( व्यवधान)
HON. SPEAKER: The House stands adjourned to meet on Thursday, the 4th January, 2018 at 11 a.m. 13.38 hrs The Lok Sabha then adjourned till Eleven of the Clock OnThursday, January 4, 2018/Pausha 14, 1939 (Saka).
*र्ड्ढ म्श्र्द अ थ्ठ्ठद्धत्ड्ढड्ड ठ्ठडदृड्ढ य्ड्ढ दठ्ठथ्ड्ढ दृढ ठ्ठ ड्ढथ्र्डड्ढद्ध त्दड्डत्हठ्ठद्ड्ढद्म् य्ठ्ठद्य् य्ड्ढ घ्द्वड्ढद्य्त्दृद ध्ठ्ठद्म् ठ्ठहद्द्वठ्ठथ्न्र् ठ्ठत्ड्ढड्ड दृद य्ड्ढ ढथ्दृदृद्ध दृढ य्ड्ढ ख़्दृद्वद्ड्ढ डन्र् य्ठ्ठद्य् ड्ढथ्र्डड्ढद्ध.
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