Lok Sabha Debates
Discussion Regarding Issue Of National Security And Rise Of Militancy In Various ... on 14 December, 1999
Title: Discussion regarding issue of national security and rise of militancy in various parts of the country especially in North-east and Jammu & Kashmir. (Not concluded).
16.14 hrs. श्री विलास मुत्तेमवार (नागपुर) : माननीय सभापति महोदय, मैं आपका अत्यंत आभारी हूं कि आपने मुझे राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मामले और देश के वभिन्न भागों में विशेषकर पूवर्ोत्तर क्षेत्र और जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद के विरुद्ध अत्यंत महत्वपूर्ण मुद्दे पर बोलने की अनुमति दी है... (व्यवधान) श्री राजो सिंह (बेगूसराय) : ग्ृाह मंत्री जी आ गये हैं, उनका स्वागत है। सरदार बूटा सिंह (जालौर) : देर आयद, दुरुस्त आयद। श्री विनय कटियार (फैजाबाद) : इनके ग्ृाह मंत्री कभी यहां नहीं रहते थे। श्री कांतिलाल भूरिया (झाबुआ) : आप तो उस समय हाउस में नहीं थे। श्री विलास मुत्तेमवार श्री विलास मुत्तेमवार : सभापति महोदय, यह अत्यन्त गंभीर मामला है और न केवल गंभीर मामला है बल्िक हम सब लोगों के लिए चिन्ता का विषय भी है और यदि इसे ज्वलन्त समस्या कहा जाए, तो गलत नहीं होगा। यह एक संयोग है कि आज हम इस विषय पर बात कर रहे हैं और अगर आज के अखबार हम सब लोगों ने उठाकर देखे हों, तो हैड लाइन्स में आया है"Militants kill 8 securitymen in Srinagar" और "Pak policy to boost militancy" इस प्रकार पूरी तरह से यह साफ होता जा रहा है कि इसके पीछे पाकिस्तान का हाथ है और यह इसलिए भी गंभीर हो जाता है कि हम फिर एक बार कारगिल जैसी परस्िथति की तरफ जा रहे हैं। वास्तविकता तो यह होनी चाहिए थी कि आज सुबह ग्ृाह मंत्री जी इस संबंध में कोई वकतव्य देते। सभापति महोदय, जिस विषय पर हम चर्चा कर रहे हैं, यह अत्यन्त गंभीर है। जैसा कि मैंने कहा, मेरी पार्टी के लिए यह और भी गंभीर है कयोंकि आतंकवाद की वजह से हमारी पार्टी के दो शीर्षस्थ नेता- इंदिरा जी और राजीव जी को हमने खो दिया। पार्टी का नुकसान हुआ, देश का नुकसान हुआ और इस तरह की घटानाएं पूरे देश में अलग-अलग फोरम्स में चलती आ रही हैं। इसलिए हमें इस गंभीर प्रश्न पर पार्टी लाइन से ऊपर उठकर देखने का काम करना चाहिए, लेकिन दुर्भाग्य की बात है कि इस तरह की कोई बात सत्तारूढ़ दल की तरफ से नहीं आ रही है। यह बात भी सही है कि आजादी के बाद ५०-५२ वषर्ों में युद्ध में उतने लोग नहीं मारे गए जितने आतंकवाद में मारे गए हैं। उससे ज्यादा लोग आतंकवाद की कार्रवाई के शिकार हुए हैं। विदेश मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार पिछले १० वषर्ों में जम्मू-कश्मीर तथा पंजाब में उग्रवादी हमलों में २५,२६७ लोग मारे गए हैं जबकि १९४७ के बाद आज तक जितने भी युद्ध इस देश में हुए उनमें केवल १२,३१६ लोग मारे गए। इस संबंध में हम सरकार की प्रक़िया अवश्य जानना चाहेंगे। वभिन्न अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर प्रधान मंत्री जी ने, विदेश मंत्री जी ने आतंकवाद के खिलाफ हमारी लड़ाई जारी रहेगी, इस तरह के वकतव्य दिए हैं और कहा है कि हम आतंकवाद से लड़ने के लिए वचनबद्ध हैं। सभापति महोदय, जब हम आतंकवाद में बढ़ोत्तरी की बात करते हैं, तो यह पाया गया है कि यह जो बढ़ोत्तरी हो रही है उसमें विदेशी, अप्रवासी, जो हमारे देश में इल्लीगल ढंग से रह रहे हैं, वे भी हमारे देश में आतंकवाद के बढ़ने का एक बहुत बड़ा कारण हैं। हमारे देश में अवैधानिक ढंग से पाकिस्तान, बांग्लादेश, अफगानिस्तान, कीनिया, सूडान, रूस और श्रीलंका आदि देशों के अप्रवासी में हैं और गलत ढंग से, गैर-कानूनी ढंग से रह रहे हैं और वभिन्न प्रकार की राष्ट्रविरोधी और आतंकवादी गतवधियों में संलग्न हैं। दुर्भाग्य से सरकार ऐसे अप्रवासियों की पहचान करने में असमर्थ है। श्री विलास मुत्तेमवार जारी उससे भी दुर्भाग्य की बात यह है कि जो लोग यहां रह रहे हैं, वे बिना झिझक के रह रहे हैं। उनके लिए भारत में रहना एक स्वर्ग जैसी बात हो गई है। उन पर प्रतिबंध लगाने के लिए हमारे कानून कम पड़ते हैं कयोंकि हमारी अपनी मर्यादा है। इसलिए मैं सरकार से गंभीरतापूर्वक आग्रह करूंगा कि सरकार को इस दिशा में कारगर कदम उठाना चाहिए। सरकार ने माना है कि सीमा पार से हमारे देश में आतंकवाद को बढ़ावा देने की कार्यवाही हो रही है। विशेषकर पाकिस्तान की अब यह नीति बन गई है। उन्होंने उग्रवादियों की भर्ती की, सैनिकों को प्रशिक्षण दिया। उनको धन, अस्त्र-शस्त्र दिया तथा घुसपैठ में मदद की। सरकार ने यह भी माना है कि पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी ठआई.एस.आई" ने देश में उपद्रव और तनाव फैलाने के लिए नयी योजना बनाई है। अभी देश के वभिन्न राज्यों में जो भी आतंकवादी घटनायें हुई हैं, उसमें आई.एस.आई. का हाथ होने के कई सबूत मिले हैं। हाल ही में जो बम विस्फोट की घटनाएं हुई हैं, उसमें आई.एस.आई. का प्रत्यक्ष हाथ होने के सबूत मिले हैं। ऐसे कई मामले प्रकाश में आये हैं जिनमें पाकिस्तानी दूतावास से संबंधित, इंटैलीजैंस से जुड़े हुए लोगों का हाथ रहा है। उनकी नजरें हमेशा हमारे जो संस्थान हैं, प्रतिष्ठान हैं, उनका राज लेकर देश में आतंकवाद फैलाने की योजना रही है और सरकार उसको नियंत्रित करने में नाकामयाब रही है। भाड़े के सैनिकों की घुसपैठ के लिए देश में जो प्रस्तावित अंडर वर्लड के लोग हैं, उनका उपयोग हो रहा है, माफिया का उपयोग हो रहा है। सभापति जी, हाल ही में जाली नोट चलाने की घटनाएं हुई हैं। उसमें भी आई.एस.आई. का हाथ रहा है। सरकारी की जानकारी में सारे तथ्य हैं फिर भी दुर्भाग्य से कार्रवाई नहीं हुई ताकि घुसपैठ रोकी जा सके और हम कब तक ऐसे आतंकवाद को बर्दाश्त करें, यह प्रश्न हमारे सबके सामने है। सभापति जी, मैं माननीय मंत्री जी का ध्यान एक प्रश्न के उत्तर की तरफ दिलाना चाहूंगा जिसमें उन्होंने बताया है कि पाकिस्तानी अप्रवासी गैरकानूनी ढंग से भारत में रह रहे हैं। यह एक गहरी समस्या बनती जा रही है। मंत्रालय द्वारा दी गयी जानकारी के अनुसार २१ जुलाई, १९९९ तक ११,३२७ पाकिस्तानी नागरिक ऐसे थे, जिनकी भारत में रहने की मियाद पूरी हो जाने के बाद भी वे वापिस नहीं लौटे। इनमें से ८,७०० ओवरस्टे कर रहे हैं और २,६२७ का कुछ पता ही नहीं कि वे कहां गये। ऐसे पाकिस्तानी नागरिकों का राज्यवार ब्यौरा भी यहां मौजूद है। राजस्थान में ४,६५८ नागरिक ओवरस्टे और ७५ लापता, मध्य प्रदेश में ८६९ ओवरस्टे और २२१ लापता, जम्मू-कश्मीर जहां से पूरी जानकारी हासिल नहीं है, वहां ९४ ओवरस्टे और ५ लापता, गुजरात में ६२१ ओवरस्टे और २० लापता, केरल में २८४ ओवरस्टे और ११२ लापता, पंजाब में १३७ ओवरस्टे, उत्तर प्रदेश में ६७० ओवरस्टे और ४०० लापता, पश्िचम बंगाल में ३२९ ओवरस्टे और ३७२ लापता, हरियाणा ६११ ओवरस्टे और ११७२ लापता और दिल्ली में ७ ओवरस्टे और ९० लापता हैं। ऐसे विदेशी नागरिक देश में कानून और व्यवस्था की स्िथति को बद से बदतर कर रहे हैं। वे कई अवांछनीय गतवधियों में संलग्न हैं। पाकिस्तानी गैरकानूनी अप्रवासियों के अतरिकत बंगलादेश, अफगानिस्तान, केन्या, मलेशिया, सूडान, रूस और श्रीलंका के भी अप्रवासी इस देश में ओवरस्टे कर रहे हैं। उनकी तरफ ध्यान देना भी बहुत जरूरी है। सरकार का इस दिशा में सुरक्षा पर भी दिन-ब-दिन व्यय बढ़ता जा रहा है विशेषकर उन राज्यों पर जो आतंकवाद और उग्रवाद की जकड़ में हैं। कश्मीर और पूवर्ोत्तर राज्यों में सबसे अधिक व्यय किया गया है। १९९० से १९९९ के दौरान जम्मू कश्मीर में आतंकवाद से निपटने के लिए १३३४.७८ करोड़ रुपये खर्च किए गए जिसमें से १५२.१६ करोड़ रुपये चुनाव पर खर्च हुए। इसी अवधि के दौरान २७५.७७ करोड़ रुपये आसाम के लिए खर्च हुए हैं। १९९५ से १९९९ के बीच आतंकवाद के लिए मणिपुर पर २३.१७ करोड़ रुपये, नागालैंड पर ४३.४० करोड़ रुपये, त्रिपुरा पर ५६.८ करोड़ रुपये और हिमाचल पर ३७ लाख रुपये खर्च किए गए। इतनी सारी रकम खर्च हो रही है और उसके बावजूद देश में उग्रवादी और आतंकवादी ताकतें बढ़ती जा रही हैं। आज ३३ ऐसे उग्रवादी संगठन हैं जिनका पता चला है कि उन्होंने अलग-अलग ढंग से इस देश में आतंकवादी कार्यवाहियां शुरु की हैं। इनमें से कुछ हिजबुल मुजाहिदीन, हरकत-उल-अंसार, लश्कर-ए-तोएबा, अलबर्क, जे.के.एल.एफ., बब्बर खालसा, दल खालसा, इंटरनैशनल खालिस्तान जिन्दा फोर्स, कामा गाटा मारू दल, नैशनल डैमोक़ैटिक फ्रंट ऑफ बोडोलैंड, एन.एस.जी., एन.एस.सी.एन. ऑफ नागालैंड, मणिपुर पीपल्स लिबरेशन फ्रंट, एल.टी.टी.ई. इत्यादि, इनमें से कई संगठनों का आई.एस.आई. से सम्पर्क है। सरकार ने इन संगठनों को बैन करने के लिए अभी तक कोई भी कार्यवाही नहीं की है। कश्मीर घाटी में भाड़े के सैनिक, जो कारगिल युद्ध के दौरान घुसकर आए थे, आज भी खुले घूम रहे हैं। जो भी घटनाएं आज हो रही हैं, ये उन्हीं सैनिकों का प्रताप है। कारगिल युद्ध में हार का बदला लेने के लिए भी उग्रवादी संगठनों - हरकत-उल-अंसार और लश्कर-ए-तोएबा ने कश्मीर घाटी में गतवधियां तेज कर दी हैं। वे अब पहले से ज्यादा प्रशक्षित हैं। अत्याधुनिक अस्त्र-शस्त्र से लैस हैं और उनमें से कई संगठन उसमा बिन लादेन से सम्पर्क में हैं जो इन संगठनों को वित्तीय मदद दे रहा है। यह हम सब लोगों के लिए चिन्ता का विषय है। उसमा बिन लादेन ने तो भारत के खिलाफ जेहाद छेड़ दी है। अफगानिस्तान में प्रशक्षित कैम्पों में तैयारी चल रही है। भारी मात्रा में अत्याधुनिक शस्त्रो, विस्फोटक पदार्थ जैसे आर.डी.एकस. की देश में तस्करी हो रही है। वभिन्न शहरों में इसका भंडार है। दुर्भाग्य से हम बारूद के ढेर पर बैठे हुए हैं। यही नहीं, हम सब लोगों की चिन्ता का विषय है कि इन उग्रवादियों और आतंकवादियों ने नेपाल के तस्करों, पाकिस्तान के ड़ग माफिया और हमारे देश के अंडर वर्लड के साथ हाथ मिला लिया है। इन उग्रवादियों, माफिया का लक्षय न केवल जम्मू कश्मीर परन्तु आसाम, अरूणाचल, पूवर्ोत्तर के सभी राज्य आंध्र प्रदेश , महाराष्ट्र, गुजरात, पंजाब भी हैं जहां साम्प्रदायिक ताकतों को भी इनसे बल मिल रहा है। पिछले वर्ष अमरीका की मिसाइलों ने अफगानिस्तान में बिन लादेन के अड्डों को तहस-नहस करने का काम किया था। कया भारत सरकार भी इस तरह का कोई विचार कर रही है, यह हम मंत्री महोदय से जानना चाहेंगे? हाल ही में ग्ृाह मंत्री जी ने लोक सभा में बताया था कि इस वर्ष १५ नवम्बर तक ९४५ उग्रवादी और ७८४ नागरिक मारे गए हैं, श्री विलास मुत्तेमवार जारी जबकि इस अवधि के दौरान ८६७ नागरिक और ९९९ उग्रवादी मारे गये हैं। इस वर्ष २९५ सुरक्षाकर्मी मारे गये हैं। सरकार यह सब जानती है और फिर भी हाथ पर हाथ रखकर बैठी है। यह हमारी चिन्ता का विषय है। मैं ग्ृाह मंत्री और सरकार को विश्वास दिलाना चाहता हूं कि पूरा सदन उग्रवाद और आतंकवाद से निपटने के मामले में, उसे जड़ से उखाड़ने के मामले में, सीमा पार की घुसपैठ को रोकने के मामले में किसी भी प्रकार की कार्रवाई आप करेंगे तो उसमें पूरा सदन सहयोग करेगा, समर्थन करेगा। ऐसे मामलों में राजनैतिक मतभेदों को भुलाकर हमें सरकार का समर्थन करना चाहिए और वह करने की हमारी तैयारी है। हम सब जानते हैं कि कश्मीर में प्रॉकसी युद्ध चल रहा है। आतंकवादियों ने पाकिस्तान में तख्ता पलटने के पश्चात कश्मीर और आसपास के क्षेत्र में अपनी गतवधियां तेज कर दी हैं। विदेश मंत्री श्री जसवन्त सिंह जी ने एक प्रश्न के उत्तर में बताया कि पाकिस्तान में सत्ता परिवर्तन के पश्चात भारत के प्रति होस्टाइल नीति में कोई परिवर्तन नहीं हुआ है। नियंत्रण रेखा पर गोलीबारी जारी है। यह दुख की बात है कि उसके बावजूद भी सरकार मौन धारण करके बैठी है। पाकिस्तान द्वारा कश्मीर मामले पर दुष्प्रचार बन्द होना चाहिए। यह सही है कि कारगिल युद्ध के दौरान अन्तर्राष्ट्रीय समुदाय ने हमारी भूमिका का, हमारे देश का समर्थन किया था, हमारे दृष्िटकोण को सराहा था और कश्मीर मुद्दे को तर्कपूर्ण ढंग से निपटाने के लिए हमारी प्रशंसा की थी। आज कश्मीर और अन्य स्थानों पर आतंकवादी ग्रुप मानवाधिकारों की दुहाई दे रहे हैं। हुर्िरयत कांफ्रेंस के नेता घाटी में तैनात सुरक्षा बलों पर ज्यादतियों का आरोप लगाते हैं। दूसरी ओर लाखों हिन्दू विस्थापित जो यातनाएं भुगत रहे हैं, उनके बारे में वे चन्ितत नहीं हैं। वे घर से बाहर हुए, बेघर हुए, बहुमत मारे गये हैं और अपने ही देश में शरणार्िथयों की तरह जीवन व्यतीत कर रहे हैं। उनके बारे में उन्हें कोई चिन्ता नहीं है। घाटी में तिरंगा फहराने की वे सजा पा रहे हैं। घाटी में नौकरशाही भी समस्या को सुलझने नहीं दे रही है। वह भी इन तत्वों से मिली हुई है। मैं सरकार से अनुरोध करूंगा कि ऐसे जो अधिकारी आईडेंटीफाई किये गये हैं, जो उग्रवादियों से मिले हुए हैं, वे दोषी पाये गये हैं, उन पर कार्रवाई होनी चाहिए। कारगिल युद्ध के बारे में जितना हम कम कहें, उतना अच्छा होगा। सरकार कोई जिम्मेदारी नहीं लेना चाहती। यह बात सही है कि कारगिल युद्ध के दौरान छः महीने पहले, चार महीने पहले ब्रिगेडियर और सीमा पार तैनात सैनिकों ने कारगिल में जो होने जा रहा है, उसके बारे में सरकार को आगाह किया था, लेकिन सरकार ने उसपर ध्यान नहीं दिया। लखित सूचनाएं भी भेजी गई थीं, लेकिन उन पर ध्यान नहीं दिया गया, परिणामस्वरूप कारगिल युद्ध हुआ। आज ऐसे अधिकारियों को प्रताड़ित किया जा रहा है, प्रतिशोध की भावना से उनकी तरफ देखा जा रहा है। इससे सेना का मनोबल गिरेगा। यह हमारे लिए अच्छी बात नहीं है। कारगिल में जो हमारे जवानों ने अपने प्राणों का बलिदान दिया, मैं इस वकत उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि अर्िपत करूंगा। ऐसे सपूतों के बलिदान को हम बेकार न जाने दें, कश्मीर की जटिल समस्याओं को सुलझाने के लिए कारगर उपाय करें, यही उनके बलिदान का अर्थ है। भारतीय विदेश नीति का नया मंत्र है, उग्रवाद के दानव को मिटाना। भारत अन्तर्राष्ट्रीय समुदाय का इस सम्बन्ध में आज नेत्ृात्व कर रहा है। हालांकि वाशिंगटन ने अफगानिस्तान की सोवियत यूनियन के विरुद्ध मुजाहिदीनों की मदद की थी, लेकिन भारत अब इस भूमिका को भुलाना चाहता है। विलास जारी पाकिस्तान द्वारा हमारे देश में उग्रवाद को बढ़ावा देने के लिए उस पर प्रतिबन्ध लगाना चाहता है। भारत की नजर में अफगानिस्तान आज दुनिया में अन्तरराष्ट्रीय उग्रवाद का अड्डा बन गया है। दुनिया भर में आज उसके विरुद्ध आवाज उठ रही है। भारत ने वर्ष १९९४ में काम्प्रिहैंसिव कन्वेंशन आन इन्टरनेशनल टेररीज्म का ड़ाफट बना कर संयुकत राष्ट्र संघ को पेश किया था। इसमें किसी भी राष्ट्र द्वारा प्रोयाजित आतंकवाद पर प्रतिबन्ध लगाने का प्रावधान है। । मेरी जानकारी में सितम्बर, २००० में संयुकत राष्ट्र संघ की महासभा में अन्तरराष्ट्रीय आतंकवाद से निपटने के लिए व्यापक कन्वेंशन पर बहस होने जा रही है। कया सरकार इस मामले में सचेत हैं? कया सरकार अन्तरराष्ट्रीय समुदाय से अपने प्रस्तावित ड़ाफट कन्वेंशन पर सहमति करा पाएगी? उन्होंने इस दिशा में कया तैयारी की है, यह हम सरकार से जानना चाहेंगे? सभापति महोदय, आतंकवाद से निपटने के मामले में ला-कमीशन ने अपनी रिपोर्ट में स्थायी कानून की आवश्यकता पर बल दिया था। पिछले कुछ वषर्ों में देश की सुरक्षा की स्िथति बद से बदतर हुई है और अन्तरराष्ट्रीय उग्रवाद का यही मुख्य लक्षय रहा है। इन उग्रवादी ताकतों के पास प्रचूर धन उपलब्ध है, अत्याधुनिक हथियार, सम्पर्क साधन और संचार माध्यम है। यह संकट अत्यन्त गम्भीर है और हमें दृढ़ता से इसका सामना करना चाहिए। काश्मीर के साथ-साथ पूवर्ोत्तर क्षेत्रों में भी आतंकवाद तेजी से पनप रहा है। पूवर्ोत्तर क्षेत्रों के बारे में मेरा साथी विस्तार से जानकारी देंगे, लेकिन जहां हम आतंकवाद की बातें करते हैं, तो हमारे देश में ३० प्रतिशत राज्य ऐसे हैं, जहां आतंकवाद कोई-न-कोई रूप में अपने पैर फैला रहा है, जो पूरे देश को आगे बढ़ने में रुकावट पैदा कर रहा है, फिर वह चाहे काश्मीर का आतंकवाद हो, चाहे पंजाब का आतंकवाद हो, चाहे असम का आतंकवाद हो या आन्ध्र प्रदेश का नकसलवाद हो या महाराष्ट्र का नकसलवाद हो या मध्य प्रदेश का नकसलवाद हो। भारत जैसा विकसित देश इन सब बातों को सामने रख कर आगे नहीं बढ़ सकता है। आज आतंकवाद से निपटने के लिए ६४ हजार करोड़ रुपए खर्चा हुआ है, लेकिन हमारी प्राथमिकतायें दूसरी हैं। आज गांवों में सड़क बनाने की आवश्यकता है। आज बेरोजगार लोगों को काम देने की आवश्यकता है। आज गरीबों को मकान देने की आवश्यकता है। लेकिन इन विकास के कामों मे लगने वाला पैसा इन सब चीजों की तरफ जा रहा है। इसलिए मैं चाहूंगा कि सरकार कोई ऐसा कानून बनाए, जिससे इससे निपटा जा सके। इसके साथ ही कई मसले ऐसे हैं, जिनको सुलझाने के लिए उनके बात की जा सकती है, जैसा कि पहले भी हुआ है। मैं जानना चाहता हूं, कया इस संबंध में ग्ृाह मंत्रालय या सरकार द्वारा इस दिशा में कोई पहल हुई है और उसे निपटाने की बात हुई है? इस सारे सवालों को लेकर सरकार कोई विस्त्ृात योजना बनाए, एक समयबद्ध कार्यक़म बनाए। अगर सरकार इस संबंध में कोई लेखा-जोखा रखना चाहती है, तो मैं सरकार का आभारी रहूंगा। इन शब्दों के साथ, अपनी बात समाप्त करते हुए और आपका सम्मान करते हुए, कयोंकि आपने मुझे बोलने से रोका है, आपको धन्यवाद देता हूं कि आपने मुझे बोलने के लिए समय दिया। ">वैद्य विष्णु दत्त शर्मा (जम्मू) : सभापति महोदय, उग्रवाद एक राष्ट्रीय समस्या है। देश का हर प्रान्त, देश का हर कोना इससे त्रस्त है। पूवर्ोत्तर क्षेत्रो में भी मुझे पिछले वर्ष जाने का मौका मिला था, वहां भी हालत कम दुखदायी नहीं है।"> ">मैं जम्मू-कश्मीर प्रांत का रहने वाला हूं और भुकत भोगी हूं, इसलिए वहां के बारे में मैं विशेष चर्चा करना चाहता हूं। इस उग्रवाद ने आज जन्म नहीं लिया, इसकी शुरुआत आज से १०-१५ साल पहले हुई। वह बढ़ते-बढ़ते आज इस स्िथति में है कि हमारे प्रांत के, देश के हर कोने में लोग मारे गए। हजारों नौजवान शहीद हुए, हजारों मेरी बहनें विधवा हुईं। मेरे हजारों बुजुर्ग माता-पिता की लाठी हाथों से छिन गई। आज धरती का कोई कोना ऐसा नहीं है जो ऐसे बलिदान होने वाले लोगों के रकत से रंजित न हो, ऐसी स्िथति में यह चिन्ता का विषय है। जहां तक जम्मू-कश्मीर का प्रश्न है, वहां भी कोई क्षेत्र ऐसा नहीं है जहां उग्रवादी आघात नहीं कर सकते। किन्तु एक बात पककी है कि भारत सरकार ने भी बड़ी दृढ़ता से उनका मुकाबला करना शुरु किया है। आज उन उग्रवादियों के मुकाबले के लिए बहुत सी योजनाएं ऐसी हैं जिन पर कारगर ढंग से अमल-दरामद किया जा रहा है। परिणाम के तौर पर उग्रवाद को बढ़ने से रोकने में अब सरकार सफल हुई है। पहले डोडा, भदरवा, राजौरी और पुंछ के इलाके में छावनियां नहीं थीं और आज भदरवा में एक छावनी बनाई जा रही है, जिससे वहां के लोगों का मनोबल बढ़ा है। इसके अतरिकत गुरिल्ला वारफेयर है, वहां हमारी सुरक्षा सेनाएं युद्ध करती हैं। उनके मुकाबले में शायद वे इतनी सफल नहीं होतीं, अगर उनके मुकाबले के लिए स्थानीय लोग तैयार हों तो ज्यादा लाभ हो। परिणामस्वरूप केन्द्र सरकार ने वहां के स्थानीय लोगों को खड़ा करने के लिए, उग्रवादियों के मुकाबले के लिए गांव-गांव में जो भी देशभकत थे और जो भी युद्ध कला के जानकार थे, ऐसे रिटायर्ड सैनिकों को भर्ती करके डिफेंस कमेटियों का भिन्न-भिन्न स्थानों पर निर्माण किया है। पहाड़ी इलाकों में बड़े-बड़े गांव होते हैं, वहां सारी आबादी बिखरी रहती है। वहां जब चाहे उग्रवादी किसी गांव में किसी भी घर पर हमला कर सकते थे, आज उनकी वैसी स्िथति नहीं है। इसमें कोई शक नहीं कि उग्रवादी आज भी जम्मू-कश्मीर में मौजूद हैं, लेकिन एक बात पककी है कि जम्मू-कश्मीर में सरकार की, केन्द्र सरकार की मेहनत से और वहां के स्थानीय लोगों के प्रयास से सुधार हुआ है। उनके जुल्मोंसितम से तंग आकर जम्मू क्षेत्र के लोग और कश्मीर घाटी में रहने वाले लोगों ने भी बड़ी मात्रा में उनके खिलाफ अपनी जुबान खोलनी शुरु की है। यह बात पहले नहीं थी, अब पैदा हुई है। आज वहां यह स्िथति है कि बहुत से लोग समझ गए हैं। ऐसे उग्रवाद के खिलाफ लड़ने के लिए अगर कोई संस्था कारगर है तो वे हैं जिनके लोग इस उग्रवाद की भयंकर लड़ाई में कुर्बान हुए हैं, उस संस्था के साथ आज बड़ी मात्रा में जम्मू-कश्मीर में लोगों ने साथ देना प्रारम्भ किया है।"> "> जैसा मेरे चुनाव में इस बार पुंछ में हुआ। पुंछ वह क्षेत्र है जिसमें मुस्िलम जनसंख्या हिंदुओं के मुकाबले बहुत ज्यादा है। हिंदुओं की संख्या वहां बहुत ही कम है। लेकिन वहां भी मुसलमानों ने भारतीय जनता पार्टी का साथ दिया और वहां हमने करीब साढ़े पांच हजार से बढ़त हासिल की। पहले हमें श्रीनगर में चुनाव में सहयोग नहीं मिलता था, लेकिन इस बार हमें वहां भी चुनाव में खड़ा करने के लिए स्थानीय लोग बहुत संख्या में उपलब्ध हैं। एक घटना हुई कि जिसका हमने नोमिनेशन पेपर भरवाया, उसको उग्रवादियों ने मार दिया लेकिन इससे लोग घबराये नहीं बल्िक उसके स्थान पर दूसरे आदमी ने नोमिनेशन भर दिया। उसके बच्चों को उग्रवादियों ने अगुवा कर लिया तो उसी वकत तीसरा आदमी नोमिनेशन के लिए आगे आया। इस समय लोग उग्रवाद के खिलाफ खड़े होने की मानसिकता लेकर आगे बढ़ रहे हैं। यह स्िथति सारे क्षेत्रों की है। एक गांव लोहाटा है जिसमें गांव के दो छोटे-छोटे बच्चों ने जिनके वालदायन मारे गये थे उग्रवादियों को मार भगाया। एक गोली चलाता गया और दूसरा गोली भरता रहा। इस तरह से १०-१२ साल के छोटे-छोटे बच्चों ने उग्रवादियों को गांव में नहीं घुसने दिया। इससे पता चलता है कि आज वहां उग्रवाद के खिलाफ लड़ने की मानसिकता लेकर लोग आगे बढ़ रहे हैं। इस तरह से लोग आगे बढ़ेंगे तो उग्रवाद का खात्मा जल्दी ही हो जायेगा। साथ ही हमारी फोर्स भी उग्रवाद का खात्मा करने के लिए तैयार है।"> ">एक बात साफ तौर पर दिखाई देती है कि पहले उग्रवादी स्थानीय लोग होते थे जो पाकिस्तान से ट्रेनिंग लेकर उग्रवाद फैलाने का काम करते थे। लेकिन अब स्थानीय लोग इसमें बहुत कम दिखाई देते हैं। लेकिन अब पाकिस्तान द्वारा अफगानिस्तान, सुडान और बाहर के लोगों को हथियार देकर हालात बिगाड़ने के लिए स्टेट में भेजने का प्रयास किया जा रहा है। अब जितने उग्रवादी पकड़े या मारे जाते हैं वे सूडानी, अफगानी या पाकिस्तानी होते हैं।"> ">एक बात मैं और कहना चाहता हूं कि हमारे जो सैनिक वहां तैनात किये जाएं उन्हें गुरिल्ली वारफेयर में ट्रेंड और प्रशक्षित किया जाना चाहिए, जो उनका मुकाबला आसानी से कर सकें।"> ">तीसरी बात यह है कि वहां जो हमारा एडमनिस्ट्रेशन है उसमें भी हमें सब लोग अच्छे दिखाई नहीं देते हैं। जैसा कि मेरे पूर्वकताओं ने कहा कि वहां बहुत से ऐसे लोग हैं जिनका संबंध उग्रवादियों के साथ दिखाई देता है। उग्रवादियों के साथ उनका लेनदेन और आना-जाना भी है। ऐसे लोगों को एडमनिस्ट्रेशन से निकाल दिया जाना चाहिए। ऐसा होने से हालात पर काबू पाना आसान होगा।"> ">विलेज कमेटियों की संख्या बढ़ायी जानी चाहिए। खास तौर से जो नेशनल बार्डर हैं वहां पर उग्रवादियों की संख्या बढ़ी है। वहां पर इन विलेज कमेटियों के लोगों को बड़ी संख्या में तैनात किया जाना चाहिए। इससे सरकार को भी सुरक्षा में मदद मिलेगी और जो ड़ग्स बाहर से अंदर लाई जाती हैं वह ड़ग्स ट्रैफकिंग भी रुकेगी। इससे लोगों में उग्रवादियों का मुकाबला करने का मनोबल भी बढ़ेगा।"> ">चौथा, मौके पर जब लोहा गर्म होता है तब आघात किया जाए तो फल अच्छा मिलता है।"> "> आने वाले दिनों में सर्िदयों के मौसम में वहां बर्फ पड़ेगी और सारे पहाड़ बर्फ से ढक जाएंगे। लाइन ऑफ एकचुअल कंट्रोल के प्रवेश के रास्ते भी बंद हो जाएंगे। बाहर से आने वाले लोगों के लिए रास्ते खुले नहीं रहेंगे। जो उग्रवादी घाटी के अन्दर हैं, उन्हें समय पर तुरन्त घेर कर काबू करना चाहिए। इन चार-पांच महीनों में हालात सुधारने में सरकार को सफलता मिल सकती है। इस मामले में योजना बना कर काम किया जाए। ग्ृाह मंत्री बहुत देर से अपनी इच्छा लेकर बैठे हैं कि उग्रवाद का खात्मा कर वहां कब्रिस्तान बना देंगे जहां से यह शुरु हुआ था। वहां अभी तक घटनाएं हो रही हैं। यह पककी बात है कि वहां अभी उग्रवाद शान्त नहीं हुआ है। वहां अभी भी उग्रवादी मौजूद हैं। मौके का लाभ उठाया जाए और प्लान करके उनका पीछा किया जाए। जब तक उग्रवादियों का पीछा नहीं किया जाएगा तब तक वहां शांति कायम नहीं हो सकती। उनका पीछा किया जाना जरूरी है। इन शब्दों के साथ मैं अपनी बात समाप्त करता हूं। आपने मुझे बोलने का जो समय दिया, उसके लिए धन्यवाद।"> SHRI SAMAR CHOUDHURY (TRIPURA WEST): Mr. Chairman, Sir, according to the latest information that I received, since the elections for Thirteenth Lok Sabha was held, A heavily armed the extremist outfits of the banned National Liberation Front and the All Tripura Tiger Force,(ATTF), in Tripura have started a new phase of violent militancy against the innocent common people by mass of killings, lootings, arsoning of the houses, kidnapping with ransom, extortions since the 13th Lok Sabha election in the state had 68 per cent of polling against the terror they tried to execute the Left Front came to power with a historic win. The following accountof the situation which I have collected from Tripura,91 attacks by the extremists killed would give you a picture as to how the situation has worsened since then. In the eleven attacks that took place, during the last three months, in Tripura alone, 82 people killed, 54 people were injured and 88 people were abducted. The extremist outfits have 600 to 700 armed people and they are trained in Bangladesh across the international border with Tripura. The extremist outfits are running nearly thirty to forty extremist camps which are used by not only the Tripura extremists but also the NSCN, the ULFA and other extremist groups of the North East region. That the Central Government has all these facts in their information to the effect that these camps are operated and monitored by the foreign agencies specially ISI agents. These camps are located not only across the border of Tripura but also in other parts of region in the North-East. These 600 to 700 people are armed with sophisticated weapons, like AK-47 and AK-56 enter inside Tripura and commit crimes and terrorise with anti national attacks. To counter this the Central Government has deployed only the CRPF and that is also highly inadequate . It was deployed before the election and before Kargil incident took place. Once the Army had been deployed of three battalions. After the deployment of three Army battalions, and sence of the Assam Rifles, the counter insurgency operation became effective in maintaining peace.
">When this was going on, the Central Government decided to shift the Army from there. Some of the Assam Rifles also were taken away. The position now is, only CRPF is taking care of the insurgency problem. Out of 1010 Km. of long border of Tripura 856 Kms. border we have, with Bangladesh. Inadequate BSF has been deployed to protect this long border. One batallion is for 90 Kms. The extremists from Bangladesh camps make their entry inside Tripura through this porous border and operate their liberation struggle. They pose as if they will liberate not only Tripura but the entire North-eastern region. Secession is there slogan ... (Interruptions) Please give me at least five minutes more.
">MR. CHAIRMAN : No, it is not possible.
">SHRI SAMAR CHOUDHURY : We pray for immediate deployment of Army which was withdrawn from Tripura. Army has to be reinforced and we should be given total protection. The Home Minister is sitting here. I went to him. Three of our hon. Members from Tripura went to him. Under the leadership of Shri Somnath Chatterjee, a team visited Tripura. They came back and requested the Central Government for an immediate action. Not only the Members belonging to Left Front but other Opposition Members also put their signatures on a request drawing the attention of the Home Ministry to look into this matter. The Prime Minister also was requested repeatedly. We went to him with the same request. But till this day no effective step has been taken. We want to know what is going on in the North East? Why tribals are fighting against tribals in the North East? In Mizoram 50,000 to 60,000 Reang people have left their houses and villages for shelter in Tripura come out on street as atrocities are committed against them. A tribal can not believe the other tribal. They have lost confidence to each other. Not only that, even the Santhals, who have been residing in Assam for quite long time, are now being treated as their enemies by the Bodos and vice versa. Same is the case with Chakma tribes in Arunachal Pradesh. In such a situation different section and communities of the tribals cannot the confidence on the State and Centre. I would say that backwardness is the main reason behind it. We approached the Central Government for special development package and democracy to grass root, protection to their identity. The Tripura State Government has repeatedly requested the Central Government for giving some special package for its developmental scheme. The then Prime Minister, Shri Deve Gowda did announce some fund. This announcement from the Prime Minister"s office was well taken by the people of Tripura and they had maintained their confidence on the Centre but the funds have not been properly released by the Centre.
">17.00 hrs ">Every time it is being cut. This is the position. The welfare programmes of Scheduled Castes, Scheduled Tribes and backward people are being cut. We want to know from the hon. Prime Minister and the hon. Home Minister what is the policy of the Government to defend our country"s sovereignty and integrity. We also want to know what action has been taken to fight these extremists. We want to know whether democratic rights would be given to the common people and backward people in a well planned manner. I demand a statement from the Prime Minister explaining what is the policy of the Government for dealing with this situation. ">सभापति महोदय : श्री रवि प्रकाश वर्मा।"> ">आपको केवल सुझाव देने हैं। समय कम है और सूची लम्बी है, इसलिए केवल अपने अमूल्य सुझाव ही दीजिए।"> ">श्री रवि प्रकाश वर्मा (खीरी) : माननीय सभापति महोदय, पूवर्ोत्तर क्षेत्र तथा हिंदुस्तान के वभिन्न हिस्सों में जो आतंकवाद की समस्या फैली हुई है, उस पर बोलने के लिए आपने मुझे अवसर दिया है। इसके लिए मैं आपका आभारी हूं और साथ ही मैं श्री विलास मुत्तेमवार जी का भी आभारी हूं, जिन्होंने इस मुद्दे के महत्व समझते हुए इस पर प्रकाश डाला और इसे चर्चा में लाये।"> ">सभापति महोदय, आज जब आतंकवाद की बात आती है, हम सभी लोग उसे समझते हैं, पूरा हिंदुस्तान इस बात को समझता है कि इससे कौन लाभ उठा रहा है। वे विदेशी शकितयां जो आज हिंदुस्तान के चारों तरफ हैं, जिनके हित हिंदुस्तान के अंदर कही न कहीं समाये हुए हैं या उनके अंदर एक द्वेष की भावना है, उन लोगों को इससे लाभ मिल रहा है। उन लोगों ने ऐसे प्रयास किये हैं कि हिंदुस्तान के अंदर अस्िथरता पैदा हो, हमारी व्यवस्था खंडित हो। हम लोगों में कमजोरी आये, भेदभाव पैदा हो, असुरक्षा की भावना पैदा हो, जिससे कि उनके लक्षयों की पूर्ित हो सके। लेकिन हमें इस बात पर भी गौर करना है कि आज जब विदेशी और बाहरी शकितयां हिंदुस्तान में आतंकवाद को बढ़ाने के लिए प्रयासरत हैं, वे उपकरण खड़े कर रही हैं, उन्हें साधन दे रही हैं तो जो हमारी आंतरिक स्िथति है, जो हमारे अंदर के लोग हैं, जो हमारे अंदर की परस्िथतियां हैं वे उसमें कैसे सहायक सिद्ध हो रही हैं। यह बहुत ही सैंसटिव इश्यू है। मुझे विश्वास है कि हमारे पूरे देश की जनता इसके महत्व को समझती है और इसीलिए खास तौर से जब यह चर्चा उठाई गई है तो उन विषयों पर गौर करना बहुत ही आवश्यक हो गया है जिनके कारण हमारे हिंदुस्तान के अंदर से इन विदेशी शकितयों को मदद मिल रही है। आज आतंकवाद के साथ-साथ एक बहुत ही बड़ा मुद्दा हिंदुस्तान में भ्रष्टाचार का है। हम सभी लोग जानते हैं कि आतंकवादी बाहर से भी आये हैं। लेकिन उन्होंने लोकल रिक़ूटमैंट भी किये हैं। ऐसे हालात यहां पर बनाये हैं कि उन्हें यहां के लोगों को उसमें भर्ती करने में मदद मिली है। उन्हें ट्रेनिंग देने में मदद मिली है। हमारे बहुत से नौजवान भटके हुए हैं। वे हमारे प्रशासन के ऊपर अपनी आस्था खो बैठे हैं। उन्हें लगता है कि कहीं न कहीं पर उनके साथ अन्याय हुआ है। मुझे लगता है कि हमारे समाज के अंदर और उससे भी अधिक प्रशासन के अंदर फैला हुआ जो भ्रष्टाचार है, उस भ्रष्टाचार ने उन्हें एक बहुत बड़ा आधार मुहैया कराया है। आज जब हमारे ग्ृाह मंत्री जी और प्रधान मंत्री जी जीरो टोलरेन्स की पॉलिसी आतंकवाद के खिलाफ अपनाना चाहते हैं तो मैं आपको अवगत करा देना चाहता हूं कि हमारे समाज के अंदर या पूरी व्यवस्था के अंदर से जब तक आप भ्रष्टाटार के खिलाफ एक बहुत ही सकारात्मक और सक़िय कदम नहीं उठायेंगे, मुझे अफसोस है कि आपको मदद नहीं मिल पायेगी। सिर्फ इस बात को कह देने से काम चलने वाला नहीं है कि विदेशी शकितयां हमारे हिंदुस्तान को कमजोर करना चाहती हैं, उन्हें साधन मुहैया करा रही हैं, उन्हें पैसा मुहैया करा रही हैं।"> ">सभापति महोदय, मैंने पिछले सत्र में आपको अवगत कराया था कि उत्तर भारत में तस्करी हो रही है। तस्करी में कौन लोग लिप्त हैं, वह मैं आपको बताना चाहता हूं कि तस्करी का जो व्हीकल बनाया गया है उसमें राज कर्मचारी भी हैं।"> ">श्री रवि प्रकाश वर्मा सभापति महोदय, उनको कहीं-कहीं महीने का पैसा मिलता है। स्थानीय लोग भी हैं जो उससे लाभ कमाना चाहते हैं, ताकतवर बनना चाहते हैं। आज मुझे आपको अवगत कराना है कि इतना समय बीत जाने के बाद भी कोई प्रयास नहीं किया गया है। अखबारों में खबर छपी है कि हिन्दुस्तान के अंदर जाली नोटों का अम्बार लगा दिया गया है। कौन लोग हैं जो जाली नोट ला रहे हैं, ये कैसे आ रहे हैं? असलहे बाहर से आ रहे हैं। ये कैसे चले आए, इनको यहां कौन ले आया? मैं आपको एक बात और बताना चाहता हूं कि जिस तरह से पढ़े-लिखे नौजवानों के साथ, समझदार लोगों के साथ प्रशासन द्वारा पक्षपात का व्यवहार किया जाता है उससे ऐसा होना स्वाभाविक है। मैं ऐसे कई बेगुनाहों को जानता हूं जिनके ऊपर बड़े-बड़े मुकदमे लगा दिए गए हैं। आज अगर उनकी आस्था हिन्दुस्तान के संविधान और उसकी व्यवस्था में खत्म हो रही है, तो उसके लिए अकेले बाहर के लोग जिम्मेदार नहीं हैं बल्िक उसके लिए समूचा समाज जिम्मेदार है।"> सभापति महोदय ने कौशन दे दिया है, मैं ज्यादा नहीं बोलूंगा। कुछ बातें कह कर समाप्त कर दूंगा। मैं आपको बताना चाहता हूं कि जो हमारी आन्तरिक व्यवस्था है, जो हमारे प्रशासन की प्रणाली है, जो उन्नति और सुरक्षा की भावना समाज में आनी चाहिए, वह नहीं है। इसलिए हमें पहले उसके ऊपर काम करना पड़ेगा और हमें अपने प्रशासन को संवेदनशील बनाना होगा जिससे हमारे जो सांवैधानिक मूल्य हैं उनके अंतर्गत देशवासियों की आस्था बनी रहे, हमारा एका बना रहे। आज समाज के अंदर जो इंटर-एकशन है, जो उसके अन्तर-संबंध हैं, वे संघर्ष पर आधारित हैं। सभापति महोदय : कन्कलूड कीजिए। श्री रवि प्रकाश वर्मा : सर मैं समाप्त कर रहा हूं। आज हालत यह लगती है कि राजनीतिक स्िथतियां भी जातिगत भावनाओं से चलने लगी हैं, तो जब पक्षपात होगा, जब मनमानी होगी, तो बगावत भी होगी और जब बाकी चरित्र होंगे, तो आतंकवाद के लिए आधार खड़ा होगा। इन बातों पर हमें गौर करने की बहुत जबर्दस्त आवश्यकता है। सभापति महोदय : ठीक है। अब समाप्त करिए। श्री रवि प्रकाश वर्मा : यह सही है कि बाहर से शस्त्र आए हैं। बाहर से एकसप्लोसिव्स आया है। यहां के नौजवानों को खराब करने का प्रयास किया गया है। उनको लालच भी दिया गया है, उनको धमकी भी दी गई है, लेकिन हमें सबसे पहले इस बात का ख्याल रखना है कि जो हमारी अन्तर्राष्ट्रीय कूटनीति है, उसमें हमारी जो सरकार है वह कि तरीके से उपलब्िधयां प्राप्त कर पा रही है, यह नश्िचत सी बात है कि आतंकवाद के खिलाफ हम एक अन्तर्राष्ट्रीय माहौल बना पाएंगे और हिन्दुस्तान के अंदर व्यवस्था का नवजागरण कर पाएंगे, तो हमको उससे समाधान मिलेगा। सभापति महोदय : अब समाप्त कीजिए। श्री रवि प्रकाश वर्मा : सर, एक मिनट। इसके साथ ही मैं एक बात और कह देना चाहात हूं कि आज सरकार के सामने एक दबाव है कि वह व्यापक उद्देश्यों के लिए काम करे, लेकिन जैसा कि हम सभी लोग जानते हैं कि हिन्दुस्तान में मंदिर और मस्िजद के मामले पर समाज को विभाजित कराया गया है, राजनीतिक तौर के ऊपर, उसको देखते हुए हम कया उम्मीद कर सकते हैं कि अन्याय की भावना, जुल्म की भावना कहीं रुक पाएगी। अगर राजनीतिक स्तर पर हम बड़े उद्देश्यों को लेकर नहीं चल सकते, अगर हमको संकीर्ण उद्देश्यों पर कार्य करना है, तो हमें आपको यह भी अवगत करा देना है कि आतंकवाद के खिलाफ जो हमारे उद्देश्य हैं, उनमें हमें दिककत आएगी। हमें नश्िचतरूप से राजनीतिक रूप से भी और अधिक मानवतापूर्ण उद्देश्यों को लेकर चलना पड़ेगा और सबसे अधिक जनता में प्रशासन के प्रति, सरकार के प्रति विश्वास जगाने की बहुत आवश्यकता है। इससे भी बड़ी बात मैं कहना चाहता हूं। सभापति महोदय : कृपा कर स्थान ग्रहण कीजिए। श्री रवि प्रकाश वर्मा : माननीय सभापति जी, मैं आपके माध्यम से मैं ग्ृाह मंत्री महोदय को बता देना चाहता हूं क... (व्यवधान)
SHRI RAJESH PILOT (DAUSA): Every Member who is speaking is showing his concern. It is not that he has to get up and give suggestions only. Please take it seriously. Let them give their views very seriously. You are giving only five minutes in a discussion under Rule 193 which is not a proper thing. If there is shortage of time, please tell the House. If a Member were to speak for four or five minutes only, what can he talk about the Kashmir situation? If you do not give even five minutes to a Member coming from Tripura where the situation is so bad, how can he express his views? कितना समय है? सभापति महोदय : नियम १९३ के अधीन दो घंटे की बहस होती है। उसमें इनकी पार्टी का पांच मिनट का समय है।SHRI RAJESH PILOT : Please ask the House to extend the time. Kashmir is going through a bad time and you are ringing the bell every five minutes asking Members to give only suggestions. It is a serious situation. Please take it seriously. श्री रवि प्रकाश वर्मा : आज एक और बात पर गौर करना है कि प्रशासन और जनता के बीच की जो दूरी बढ़ रही है। प्रशासन के खिलाफ लोक कर्मचारियों के खिलाफ, पुलिस के खिलाफ केवल जनभावनाओं का उभार देना ही काफी है। इससे जनता प्रसन्न हो रही है। उसको समाधान मिल रहा है। इतनी दूरी दिखाई पड़ने लगी है कि इस पर हमें विशेषतौर से गौर करना पड़ेगा। श्री रवि प्रकाश वर्मा जारी हमारे प्रशासन और जनता के बीच जो दूरी है, जो लक्षय पूरे नहीं हुए हैं, उनको पूरा करके उस दूरी को भरा जाये। सभापति महोदय : अब आप समाप्त करिये। श्री रवि प्रकाश वर्मा : माननीय ग्ृाह मंत्री जी, जो संवेदनशील क्षेत्र हैं, मैं आपको अवगत कराना चाहता हूं कि वहां जो विकास के कार्यक़म हैं, उनको पूरी जागरूकता के साथ और जनता का सहयोग लेते हुए आप लागू कर पाये और हिन्दुस्तान के संविधान के अंदर जब आप लोगों की जन भावना और आस्था पैदा कर पायेंगे तब आपको विशेष रूप से इन मदों में मदद मिलेगी। आंतकवाद के खिलाफ लड़ाई एक अंतर्राष्ट्रीय लड़ाई है। यह खाली हमारे हिन्दुस्तान की समस्या नहीं है बल्िक पूरे विश्व की समस्या है। मुझे आशा है कि हमारे प्रयास सफल सिद्ध होंगे और आतंकवाद के खिलाफ एक निर्णायक लड़ाई में हम जीतेंगे।">1711 hrs. श्री प्रकाश मणि त्रिपाठी (देवरिया) : सभापति जी, आज का विषय बहुत गम्भीर भी है और राष्ट्रीय भी है। समय कम होने की वजह से मैं कश्मीर के बारे में ज्यादा बात करूंगा कयोंकि आतंकवाद और उग्रवाद पूर्वी क्षेत्रों में ही ज्यादा व्यापक नहीं है बल्िक ज्यादा जल्दी शुरू हुआ है। ओसामा बिन लादेन ने अभी कुछ दिन पूर्व जलालाबाद में कहा है, मैं उसे कोट कर रहा हूं:-"> ">ठ मारे सबसे बड़े दुश्मन अमरीका और भारत हैं और हमें अपने सब संसाधनों से उन्हें निशाना बनाना चाहिए।""> ">इसी के साथ उन्होंने हमारे देश के खिलाफ ज़ेहाद छेड़ने का ऐलान कर दिया है। यह लड़ाई कश्मीर में पिछले ५० साल से चल रही है। कभी कुछ समय प्रत्यक्ष रूप से युद्ध होता है तो बाकी समय आतंकवाद चलता रहता है। इसलिए कश्मीर के विषय को हम केवल आतंकवाद के दायरे में नहीं रख सकते। पिछले ५० साल में हमारे २९,१५१ सवलियन और ५,१०१ जवान मारे गये हैं और २ हजार करोड़ रुपये की सम्पत्ित की क्षति हुई है। हमारे एक मित्र ने बताया कि ६४ हजार करोड़ रुपये का खर्चा हुआ है। ७ हजार से ऊपर पाकिस्तानी घुसपैठियों ने घुसपैठ की है और २० हजार भारतीयों को पाकिस्थान द्रारा प्रशिक्षण दिया गया है। लेकिन सबसे जरूरी बात यह है कि यह युद्ध ५० साल से चल रहा है इसलिए इसको आतंकवाद की श्रेणी में नहीं रखा जा सकता। इस्लाम के बुद्धिजीवियों के अनुसार विश्व को दो कैम्प में बांटा गया है। एक, दारूल इस्लाम जहां पर इस्लाम के तरीके और उनके रूल चलते हैं और दूसरा, दारूल हर्व है। भारत को दारूल हक की श्रेणी में रखा गया है। यह कहा जाता है कि दारूल हर्व में तब तक लड़ाई चलती रहेगी जब तक कि वह दारूल हर्व इस्लाम में परिवर्ितत न हो जाये। इसलिए इस मसले को एक आतंकवाद के मसले तक ही सीमित नहीं रख देना चाहिए। इसके बहुत से कारण हैं, जिसमें मैं नहीं जाऊंगा। लेकिन कश्मीर की अगर मिसाल ली जाये तो उसमें सन् १९४९ में लड़ाई हुई। सन् १९६५ में लड़ाई हुई। सन् १९७१ में लड़ाई हुई और अभी हाल में कारगिल में एक युद्ध हुआ है। सन् १९७१ की लड़ाई के बाद पाकिस्तान के दिमाग में यह बैठ गया कि हम भारत से प्रत्यक्ष रूप से लड़ाई नहीं कर सकते। अगर हम करेंगे तो हमको बहुत नुकसान होगा। सन् १९७१ में १६ दिन की लड़ाई में भारतीय सैनिकों ने पाकिस्तान को दो हिस्से में विभाजित करके एक हिस्से को स्वतंत्र बना दिया गया । ९२ हजार सैनिक बंधक बनाकर हम यहां पर ले आये। इससे पाकिस्तान को बहुत धकका लगा। उसने तभी से योजना बनाई है कि इस देश को खोखला करने के लिए जरूरी है कि आतंकवाद बढ़ाया जाये।"> "> अगर सचमुच देखा जाए तो कश्मीर में आतंकवाद का रूप सन् १९७४ से शुरु हुआ है। हमारे माननीय सदस्य ग्ृाह राज्य मंत्री रह चुके हैं। उस समय आतंकवाद बहुत पराकाष्ठा पर था और उन्होंने भी इससे डील किया है। इसलिए हम यह समझ जाएं कि यह समस्या आम आतंकवाद और उग्रवाद की श्रेणी में नहीं है। यह एक युद्ध है। आप इसे चाहे प्रॉकसी वॉर कहें, चाहे आम वॉर कहें, यह युद्ध चल रहा है। ये उसके साथ संसाधन जुटाने का काम करें। मैं ग्ृाह मंत्री जी को बधाई देना चाहता हूं कि उनके कार्यकाल में जरूर कुछ कमी आई थी। यह बात भी खास सोचने की है कि जब आतंकवाद को अपने काबू में लाने की कोशिश कामयाब दिखती है तो लड़ाई छेड़ी जाती है। जब लड़ाई में हारा जाता है तो दुबारा आतंकवाद पर वापिस आया जाता है कयोंकि यदि १९९७ और १९९८ के आंकड़े पूरे तौर से देखे जाएं तो पता लगता है कि १९९७ और १९९८ में वारदातें कम होनी शुरु हुई थीं। कारगिल उसका नतीजा है। कारगिल में विफल हो जाने के बाद दुबारा आतंकवाद बढ़ाना कारगिल की विफलता का नतीजा है। इसलिए ये एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं और इसमें सबसे बड़ी भूमिका आई.एस.आई. की है। जब हम आई.एस.आई. की बात करते हैं तो हमको पूरे देश में व्यापक रूप से देखना पड़ेगा। जब हम व्यापक रूप से देखते हैं तो यह दिखाई पड़ता है कि चाहे वह उत्तर प्रदेश हो, चाहे बिहार का इलाका हो, अब तमिलनाडू, केरल और आंध्र प्रदेश में भी इनकी गतवधियां बढ़ रही हैं। जो आंकड़े दिए हैं, वे अपने आप में बहुत भयावह हैं कि आई.एस.आई. का जाल किस तरह बिछ चुका है। केवल आतंकवाद को छोड़कर आगे यदि युद्ध की परस्िथति आ गई और जिस तरह ये बातें चलती हैं, इतनी विस्फोटक हो गई हैं कि किसी भी समय युद्ध की परस्िथति आ सकती है। उस समय आई.एस.आई. का जाल, जो इस देश में बिछा हुआ है, बहुत खतरनाक साबित होगा, यह मैं अपने पुराने अनुभव से बता रहा हूं। मेरा यह समझना है कि यदि पिछली प्रदेश सरकारें इस बारे में गंभीर होतीं तो आई.एस.आई. का जाल आज तक इतनी तेजी से नहीं बिछ सकता था।"> ">इतिहास के पन्ने उलटने के लिए समय नहीं है लेकिन हम एक-दो चीजें बताना चाहते हैं। जब सन् ६५ का युद्ध हुआ था, कारगिल के जो दो पासेस हैं, जिन्होंने हमें बहुत परेशान किया, दो बार युद्ध हुआ था - मई में जब कच्छ में युद्ध हुआ था तब उन दो पासेस को हमने ले लिया था। वे वापिस कर दिए गए। उसके बाद दुबारा सन् ६५ में युद्ध हुआ तो हाजी पीर और ये दो पास फिर हमने ले लिये। फिर वापिस कर दिए गए। यही तीन पासेस हैं जिनके जरिए ज्यादातर आतंकी या उसके पास-पास के इलाके वहां से आते हैं। यह जो समस्या पैदा हुई है, चल रही है, बढ़ रही है, इस समस्या पर बहुत दिनों से पुरानी सरकारों ने ढिलाई से काम किया है, इसलिए यह बढ़ी है। इस बात को समझना चाहिए। मैं यह कहना चाहता हूं कि इसे एक युद्ध के स्तर पर देखा जाए, फर्क सिर्फ इतना है कि इसे राजनैतिक, आर्िथक, सामाजिक, शिक्षा और राष्ट्रीय स्तर पर"> ">लड़ना पड़ेगा। इसे केवल सेनाएं नहीं लड़ सकतीं। आई.एस.आई. का खात्मा करना पड़ेगा। इस अभियान को हमें एक नैशनल मिशन के तहत लेना पड़ेगा। इसमें प्रदेश सरकारों की बहुत अहम भूमिका है, इससे हम दूर नहीं हट सकते।"> ">आतंकवाद और उग्रवाद एक आर्िथक स्रोत नहीं बनना चाहिए। हमने यह देखा है कि जिन-जिन जगहों पर आतंकवाद होता है, वहां पर बहुत पैसा खर्च किया जाता है और वह पैसा कुछ तो काम में जाता है, कुछ उन आतंकवादियों की जेब में जाता है और जब यह एक स्रोत बन जाता है तो आतंकवाद एक व्यापार का रूप ले लेता है। इसलिए जबकि प्रगति के लिए पैसा देना जरूरी है, लेकिन इस तरह से उसका आवंटन न किया जाये कि वह हर तरह से आतंकवादियों को फायदा दे। मैं बहुत से उदाहरण दे सकता हूं, हमारा आतंकवाद से लड़ने का १५ साल का अनुभव है। भारत विरोधी प्रोपेगण्डा से पाकिस्तान के लोग बहुत प्रभावित होते हैं और उनका उन्माद बढ़ता है। हमारे यहां दुर्भाग्य से और यहां संसद में भी हमने कभी-कभी देखा है कि ऐसी बातें कही जाती हैं कि हमें कभी-कभी लगता है कि दूसरे लोग जो इसको सुनेंगे, वे सोचेंगे कि हमारी स्वयं की आलोचना भारतीय जनता पार्टी की सरकार है, वह मुसलमान विरोधी है। ये सब चीजें भी वहां पर पहुंचती हैं और बिल्कुल गलत संदेश इससे जाता है, न केवल पाकिस्तान में, उसके बारे में हमें फिक़ नहीं है, लेकिन संदेश जो कश्मीर की जनता में जाता है, वह एक बहुत गलत संदेश है और हर मौका यह ढूंढकर इस संदेश को दिया जाये कि हम मुसलमान विरोधी हैं, हम उनके खिलाफ कार्रवाई करेंगे, बार-बार ढूंढकर जो यह मौका दिया जाता है, हमारे ख्याल में यह हमारे इस विषय के लिए एक बहुत गलत चीज है।"> ">एक बात मैं कहना चाहता हूं, जो कि वैद्य जी ने भी कही है कि कश्मीर की जनता ने आतंकवाद से मुंह मोड़ लिया है। लेकिन कश्मीर का असली आतंकवाद और पंजाब का आतंकवाद करीब-करीब एक समय में शुरू हुए थे, हमें पंजाब में आतंकवाद से लड़ने का अवसर मिला था। हमने यह देखा कि आतंक तब पनपता है, जबकि वहां की जनता उसका साथ देती है और यह बात कि वहां की जनता आतंकवाद से मुंह मोड़ रही है, लेकिन अपने ऊपर इतनी शकित पैदा नहीं कर पा रही है कि वह आतंकवाद से लड़े। इस फर्क को समझना चाहिए। इसलिए यह जरूरी है कि जो लोग वहां से वापस बाहर भेज दिये गये हैं, उनको वापस फौरन ले जाया जाये, अपनी जगह पर बसाया जाये, कयोंकि सबसे जरूरी चीज आतंकवाद से लड़ने में सूचना है और सूचना के लिए हमको स्रोत चाहिए और इसलिए जो लोग निकाले गये हैं, सबसे पहले प्राथमिकता देनी पड़ेगी, उन लोगों को वापस जाकर वहां पर बसाने की, कयोंकि वे लोग स्थानीय लोगों को जानते हैं।"> ">आखिरी बात मैं यह कहना चाहता हूं कि कारगिल में हमारे जवानों के शौर्य से, उनके त्याग से १९७१ में हमने पाकिस्तान को एक सबक सिखाया था। वह सबक वह २०-२५ साल तक नहीं भूला, केवल आतंकवाद पर लगा रहा, लेकिन नई पीढ़ी आ गई, २५ साल के बाद वह १९७१ भूल गया। कारगिल का युद्ध किया, कारगिल में मुंहतोड़ जवाब मिला है, दोबारा उनको यह सबक मिलेगा कि प्रत्यक्ष रूप से लड़ाई नहीं करनी है, आतंकवाद को बढ़ावा देना है, इसलिए हमको एक राष्ट्रीय मिशन बनाकर इससे लड़ाई करनी पड़ेगी। बहुत-बहुत धन्यवाद।"> ">श्री राजेश पायलट (दौसा) : सभापति महोदय, पहले तो मैं आपका आभारी हूं। ... (व्यवधान) ये मुझसे पहले बोलना चाहते हैं? आप बोल लें, मुझे भी इनकी बात से ज्ञान मिलेगा। आप मुझसे पहले बोलना चाहें तो बोल लें।"> ">सभापति महोदय, मैं आपका आभारी हूं कि आपने इस विषय पर चर्चा प्रारम्भ की। मैंने मन से बात कही थी कि कश्मीर में कुछ समस्याएं हैं, तभी हमने यह सवाल उठाया है। आज सदन में इसलिए चर्चा हो रही है कि वहां हालत गिरी है और आंकड़ों में गिरी है। गिरी है, यह दिख रहा है कि गिरी है। कल हम जिस पर बहस कर रहे थे, कल बहस होनी चाहिए। कल रात लाल चौक में जो श्रीनगर का बिल्कुल सैण्टर है, रीगल चौक पर ब्लास्ट हुए हैं और आठ आदमी मारे गये हैं। मेरे भाई कह रहे थे, ठीक है कि आतंकवाद से नहीं जोड़ना चाहिए। मैं इस बात को मानता हूं कि कश्मीर की समस्या आतंकवाद से नहीं जुड़नी चाहिए। कश्मीर की समस्या भिन्न है और यह बात भी ठीक है, हमें सब को बैठकर उस पर बहुत ध्यान से सोचना पड़ेगा। यह अकेले सरकार की तकलीफ नहीं है।"> ">हम लोग भी सरकार में रहे हैं। यह देश की समस्या है, लेकिन दुख की बात है कि सरकार ने उतना चौकसी नहीं दिखाई इसलिए हम आपके बीच में बात करने आए हैं। हम यहां सच्चाई से चर्चा कर रहे हैं, यह नहीं कि हम विपक्ष में बैठे हैं इसलिए बोल रहे हैं। सिकयोरिटी फोर्सेज के लोग जितने पहले के साल में नहीं मरे, उससे ज्यादा पिछले साल में मरे हैं। इसी तरह पिछले साल पहले के साल से ज्यादा अटैक हुए हैं। बादामी बाग का नकशा देखें, वहां मलिटेंट दो गार्ड रूम पार करके मार कर चले गए। पहले सैबोटाज हुआ, एक ब्लास्ट भी हुआ था, जिसमें हमारे मेजर जनरल मारे गए। मैं यह नहीं कहता कि ऐसा हादसा पहले नहीं हुआ, सैबोटाज हुए हैं, लेकिन मलिटेंट आर्म केंटोनमेंट में चले जाएं और मारकर वापस चले जाएं, एक मर गया, दूसरा भाग गया, यह चिंता का विषय है। मैंने फौज में नौकरी की है। जो गार्ड रूम पार हुआ, जो हमारी सिकयोरिटी का सबसे पुख्ता दरवाजा है, उससे मलिटेंट अंदर चले गए इसलिए यह चिंता का विषय है। आज सिकयोरिटी फोर्सेज पर अटैक बढ़े हैं, हमारे भाई मरे हैं इस साल में ३५० के करीब उनकी संख्या है, जो मैंने आपके एक उत्तर में पढ़ी है। उनके पास आधुनिक हथियार जा रहे हैं, एल.एम.जी., यू.एम.जी. है, मिसाइल्स की बात चलने लगी है, उनका कम्युनिकेशन हमारी फौजों से बेहतर है। जहां तक मैंने कहीं पढ़ा है, उसके अनुसार पहले पांच मलिटेंट को मारकर हमारा एक बहादुर जवान कुर्बानी दिया करता था, लेकिन अब उनके आधुनिक हथियार आ गए हैं इस वजह से तीन मलिटेंट मारकर एक जवान कुर्बानी दे रहा है। इसमें भी बढ़ोत्तरी हो रही है। यह रेशो जो पहले एक-पांच का था, अब एक-तीन का रह गया है। सविल कैजुअल्टी आपके हिसाब से १९९८ में २२६१ थीं, अभी दिसम्मबर का महीना चल रहा है, आज २३५० हो गई हैं। इस कारण सबमें बढ़ोत्तरी हो रही है। सिकयोरिटी फोर्सेज पर अटैक ज्यादा हो रहे हैं, कम्युनिकेशन ज्यादा बढ़ रहा है, आर्मस ज्यादा बढ़ रहे हैं, घुसपैठ ज्यादा बढ़ रही है। हमारे एक भाई अभी कह रहे थे कि हम बधाई देते हैं कि इनफिलट्रेशन पर रोक लगी है। मैं बताना चाहता हूं कि वहां से ६०० यूथ ने घुसपैठ की है। बक़वाल हमेशा देश के लिए सहारा हुआ करते थे और खबर दिया करते थे। पुंछ और राजौरी में पहले घुसपैठ नहीं हुआ करती थी, आज उल्टा हो रहा है। कुपवाड़ा वगैरह से इनफिलट्रेशन हो रही है, राजौरी और पुंछ से भी लोग आने शुरू गए हैं। अगर आपको १९६५ का युद्ध याद है तो पता होगा कि ये बक़वाल सबसे पहले खबर देते थे कि घुसपैठिए आ गए हैं और फिर हमारी फौजें कार्रवाई शुरू किया करती थीं। आज वे लोग भी कयों नहीं संकेत दे रहे हैं, उन लोगों को कया तकलीफ है, यह देखना होगा। आज पुंछ और राजौरी से कयों इनफिलट्रेशन शुरू हो गई है। ये लोग राजौरी और पुंछ से आते हैं और फिर वैली में पहुंच जाते हैं। ये तीन महीने अकतूबर, नवम्बर और दिसम्बर, ऐसे हुआ करते थे कि इन दिनों पासेज बंद हो जाते थे और हम लोग तैयारी करके अटैक किया करते थे, इससे आगे के लिए बहुत सहूलियत हो जाती थी। यही पीरियड होता था जब हमारी फोर्सेज सुपीरियर हुआ करती थी। जब बर्फ पिघलने लगती थी तो उनके पासेज खुल जाते थे, इनफिलट्रेशन बढ़ जाता था, लेकिन आज दुख के साथ कहना पड़ता है कि इन तीन महीनों में भी घुसपैठ बढ़ रही है। इस बात को सरकार को ध्यान में रखकर सोचना चाहिए। इसका कारण कया है, दुख के साथ कहना पड़ता है यह बयान देना बहुत आसान है कि हालात सुधरे हैं, कश्मीर अब पुराना कश्मीर नहीं रहा। मैं बहुत भारी मन से कह रहा हूं ग्ृाह मंत्री जी, मुझे दुख है कि यह कश्मीर दुबारा १९९० की हालत में न कहीं पहुंच जाए।"> मुझे याद है १९८९ में लेट राजीव गांधी जी और देवीलाल जी का एक डेलीगेशन वहां गया था, मुझे नहीं मालूम कि आप उसमें थे या नहीं। राजीव जी लौटकर हमें बता रहे थे कि मुझे डर है कि कश्मीर हमारे पास रह पाएगा या नहीं। एक होटल में जाकर ये रुके थे। बैरे ने चाय पिलाने से मना कर दिया था। वह डर रहा था कि चाय पिलाने पर कहीं शाम को मेरे परिवार को न खत्म कर दिया जाए। कोई आदमी बात करने के लिए नहीं आता था। १९९१-९२ में मैंने प्रत्यक्ष देखा था, अगर गैस्ट हाउस में चले जाया करते थे तो कार ड़ाइवर लेकर जाता था, वह हमसे बात नहीं करता था। इन हालात से कश्मीर के हमारे भाई-बहन गुजरे हैं। जम्मू-कश्मीर के भाइयों ने बड़ी बहादुरी से काम किया है, उन्होंने बड़ी हिम्मत दिखाई है। आज भी जो लड़ रहे हैं, उनको सहारा देने के लिए उम्मीद बंधी थी इस चुनाव से कि चुनाव के बाद सरकार आ गई है, अब केन्द्र सरकार और राज्य सरकार इस तकलीफ को दूर करेंगी, लेकिन दुख के साथ कहना पड़ता है कि बपात उनती आगे नहीं बढ़ी, जितनी बढ़नी चाहिए थी। आज जम्मू काश्मीर सरकार और केन्द्र सरकार में झगड़ा चल रहा है। वे कह रहे हैं कि हमारा पैकेज नहीं दे रहे हैं और ये कह रहे हैं कि हम सब कुछ दे रहे हैं। पैकेज से रास्ता नहीं निकलेगा। वहां के मुख्य मंत्री ने एक मांग की थी, जिस तरह के पंजाब के सिकयोरिटी एकसपैंसेस को माफ कर दिया, वैसे ही काश्मीर के लिए कयों नहीं किया जा रहा है। काश्मीर की हालत पंजाब से ज्यादा बुरी है, लेकिन सरकार कोई कदम नहीं उठा रही है। अब तो आप एक हो, पहले तो फारुख अब्दुल्ला साहब हमारे साथ थे। उनके लड़के कैबिनेट में मंत्री हैं, फिर भी कदम नहीं उठाया जा रहा है। एक भाई बिनलादेन के ब्यान के बारे कह रहे थे, यह सच्चाई है। अलबर्ट का विलास जी ने जिक़ किया, चाहे JKLF हो या दूसरे युनिटस, उनसे बात करनी चाहिए। अब एक नई तंजिम बनती जा रही है और उसमें ज्यादातर फारन-मिश्नरीज़ अफागनिस्तान से आ रहे हैं। मेरे पास खबर यह है, १९९५-९६ में ८-१० परसेंट मिश्नरीज जाया करते थे और ग्ृाह मंत्री जी आज ४०-४५ प्रतिशत इन्िफलट्रेटर्स फारन-मिश्नरीज सुसाइड-स्कवैड बना रहे हैं। यह चिन्ता की बात है। इनं सुसाइड-स्कवैड ने अटैक किए हैं, चाहे कहीं से भी किए हों। बार्डर सिकयोरिटी फोर्स के हैडकवार्टर पर अटैक किया है और DIGको मार दिया गया। अगर इनके बारे में चिन्ता नहीं की गई, तो हालत और भी बिगड़ते जायेंगे। इसके बारे में एक तरीका निकाला गया था। मैं यह नहीं कह रहा हूं, जो हमने किया, वह बिल्कुल सफल हो गया। मैं यह नहीं कह रहा हूं, जो हमने किया, वही ठीक है। उसमें आप सुधार कर सकते हो। अगर आपको कहीं लगता है, हमने जो किया, वह ठीक नहीं था, तो उसमें आप सुधार कर सकते हैं। लेकिन हमने शुरुआत की थी, कोआर्िडनेशन की। अभी हमारे भाई जिक़ कर रहे थे कि हमारे पास सूचना नहीं आती है, सूचना समय पर नहीं आती है। यह बात सही है कि हम एक इनवजिबल दुश्मन से लड़ रहे हैं और बजिबल ढंग से लड़ रहे हैं। हमें खबर आती हैं और दो पलातून भेज देते हैं। गांव में देखरेख होती है, सबकी तालाशी होती है और गांव में एक शोर मच जाता है। यह सब जानबूझ कर हो रहा है। यह महीना इफतार का महीना है। लोकल रैजीडेंटस में शोर मच जाता है कि हमें तंग किया जा रहा है। सूचना लेने में मुश्िकल होती है। यह एक नई टैकटिकस है, पाकिस्तान की चालाकी है कि ऐसे मौके पर झगड़ा करो, जिससे इनकी भावना देश के खिलाफ हो जाए। आज लिब्रेट जम्मू-काश्मीर स्लोगन नहीं है, उनका स्लोगन ब्रेक इंडिया है। इस बारे में सोचिए। अब वे जम्मू-काश्मीर में ज्यादा इन्टरैस्टेड नहीं है, देश को कैसे तोड़ा जाए, यह एप्रोज उन्होंने शुरू कर दी है। हमारे साथी कह रहे थे, यह चीज उन्होंने सारे देश में शुरू कर दी है। सारे इन्सरजैंटस, मलिटेंन्टस, चाहे पंजाब के हों, चाहे त्रिपुरा के हों, चाहे नार्थ-इस्ट के हों, चाहे काश्मीर के हों, इनका ग्रुप बन गया है और आर्मस सप्लाई हो रहे हैं तथा एक युनिट से हो रहे हैं। जिस तरह से हम अपने देश में फौजों के लिए आर्मस खरीदने केलिए नैगोशिएट करते हैं, उसी तरह से आर्मस खरीद रहे हैं। मैं किसी नैगोसिएशन में बात कर रहा था, तो एक नौजवान लड़का मुझसे बोला - पायलट साहब, आप नैगोसिएशन की बात शुरू कर रहे हो, हमारे फयुचर के बारे में कभी सोचा है? मैंने कहा - कया होगा आपका? उसने बताया - हमारे बच्चे चाइना में बढ़ रहे हैं, कहीं लंदन में पढ़ रहे हैं। हम सब इनके एजेंटस हैं, आर्मस खरीदते हैं। जब यहांBSF नहीं रहेगी, तो हम अपने बच्चों को कहां ले जायेंगे, कैसे अच्छी शिक्षा दे पायेंगे। हाई-पेड जाब उनको मिल गई है, इस वजह से वे इन चीजों से स्टक हो गए हैं। काश्मीर के बारे में मेरी दो प्रार्थनायें हैं। ग्ृाह मंत्री जी, एक युनिफाइड कमांड बनी थी और बहुत सोच कर बनाई गई थी। जब बनाई गई थी, तब भी यह समस्या आई थी। पैरामलिट्री फोर्स की समस्या थी। हम आर्मी की बात नहीं सुनेंगे। आर्मी युनिफाइड कमांड में जीओसी को हैड बनाया था, इसलिए की आर्मी सबको कोआर्िडनेट करे। वह बहुत अच्छा प्रयास था और बहुत सफल रहा था। हर सुबह नौ बजे युनिफाइड कमांड की मीटिंग होती थी, जीओसी बैठता था, सारे पैरामिलीट्री के डैलीगेट और स्टेट गवर्नमेंट के डैलीगेट जाया करते थे। मैंने अखबार में पढ़ा है, आपने चीफ मनिस्टर को चेयरमैन बना दिया है। यह सही है कि चीफ मनिस्टर डैमोक़ेटिकली इलैकटेड सरकार है, अच्छी बात है, लेकिन मीटिंग तो रेग्युलर होनी चाहिए। उन मीटिंग्स की खबर तो आनी चाहिए। जैसा मैंने पिछली बार कहा था, दो-दो महीने मीटिंग नहीं होती है, जो हर मंडे को सुबह हुआ करती थी और दस बजे होम मनिस्ट्री में खबर आ जाया करती थी कि ऐसे-ऐसे चल रहा है। यह कोआर्िडनेशन डिस्टि्रकट लैवल पर शुरु की थी। मेरी प्रार्थना है कि कोआर्िडनेशन जब तक नहीं होगा, जब तक सिस्टम एकाउन्टेबल नहीं होगी, तब तक रिजल्टस सामने नहीं आयेंगे। वहां जब तक विकास की बातें नहीं चलेंगी, बेरोजगार बच्चों के लिए दो रोटी का इंतजाम नहीं कर पाएंगे तब तक हम उनको कैसे मेनस्ट्रीम में लाएंगे। हम सब भाषण तो दे रहे हैं कि कश्मीर को मैनस्ट्रीम में आना चाहिए। हमने इसके विकास के लिए कया कदम उठाए हैं। ३०,००० सोफट कम्प्यूटर ट्रेंड बच्चे वहां बैठे हैं। वहां सरकार एक सेटेलाइट का कनैकशन नहीं दे पा रही है, इसे देने से ५००० लोगों को तो उसी दिन नौकरी मिल जाएगी। इस तरीके के कदम सरकार की तरफ से उठने चाहिए। हमने एक योजना शुरु की थी, कश्मीर से बच्चे ले जाकर बाहर के प्रदेशों में हमने उनके लिए रोजगार ढूंढे थे। हम उनको एजूकेशन के लिए मेडीकल और दूसरी चीजों में बाहर के प्रदेशों में भेजते थे तो उसका प्रभाव पड़ा था लेकिन वह एकदम बंद हो गया। मुझे उम्मीद है कि आप इन चीजों पर ध्यान देंगे। आडवाणी जी, जो १९९९ का इलैकशन हुआ, उसमें मेरे साथी चुन कर आए हैं, मैं उनके बारे में कुछ कहना नहीं चाहता हूं। १९८९ में भी चुनाव के बाद तकलीफ हुई थी। १९९९ के चुनाव में कुछ ऐसे कदम उठाए गए, जिससे लोगों को चोट पहुंची। मैं लोगों से मिलता हूं, उनसे बात करता रहता हूं। इलैकशन जरूरी नहीं हैं, लोगों की भावना देश से जोड़नी जरूरी है। अगर कहीं गलतियां हुई हैं तो स्टेट गवर्नमेंट को चाहिए कि उन्हें दूर करे। मैं इसलिए कह रहा हूं, कयोंकि मुझे डर है कि कहीं १९८९ वाली हालत फिर न आ जाए। अगर १९८९ वाली हालत आ गई तो ठीक नहीं होगो। हमारी फौज पैरामलिट्री बहुत दिनों से लड़ रही है, लोग कुर्बानियां दे रहे हैं। उनमें भी यह फीलिंग आ गई है कि हम कब तक इस बंदुक को उठाए रखेंगे। इसका समाधान कयों नहीं निकालते? सरकार एक तरफ सख्ती करे लेकिन दूसरी तरफ कोई रास्ता भी निकाले। इस तरह आप कश्मीर को ज्यादा दिनों तक नहीं चला सकते, इसलिए जल्दी कोई रास्ता निकालने की कोशिश करें। महोदय, सरकार की तरफ से कोई प्रयास चले, बातचीत हो। बातचीत करने में कया हर्ज है। मैं यह नहीं कह रहा हूं कि सख्ती करना छोड़ दो, लेकिन सोफट एप्रोच और हार्ड एप्रोच ने पहले भी हल निकाले हैं। मुझे दो बातें नार्थ-ईस्ट के बारे में कहनी हैं। वहां के हालात किसी से छिपे नहीं हैं। अभी मेरे साथी बोले हैं, मुझे उम्मीद है कि हमारे और भी साथी बोलेंगे। नागालैंड, मणिपुर में हालत बिगड़ी है। हमने कोशिश की थी और मुझे खुशी है कि सरकार की भी नेगोसिएशन सीज़ फायर,NSC(I)N के साथ हुई है। लेकिन मुझे दुख है कि इस सीज़ फायर के दायरे में वे कहीं अपनी ताकत न बढ़ाएं। मेरे पास ऐसी खबर है कि एक तरफ तो सीज़ फायर चल रही है और दूसरी तरफ उनका कैडर बढ़ रहा है, कयोंकि जब सिकयुरिटी फोर्स उन पर कोई अटैक नहीं कर सकती तो सीज़ फायर का बहाना चलता है। आर्मी ज्यादा कदम नहीं उठा सकती तो सीज़ फायर के कुछ रूल्स बना देते हैं। आप अगर आंकड़े देखें तो पता चलेगा कि मणिपुर में कितनी कलिंग बढ़ी है और वह मेटीस और कुकीस की बढ़ी है, कयोंकNSCN तो डायलॉग में है, जो दूसरे लोग हैं उन पर अटेक हो रहे हैं। करीब १००-१५० मेटीस और कुकीस मारे गए हैं। मणिपुर में हालात खराब हैं। दूसरा मणिपुर में चिन्ता का विषय यह है कि इस्लामिक फंडामेंटलिज्म मणीपुर में खड़ा हो रहा है। अब अगर यह वहां खड़ा हो गया तो मुझे दुख होगा कि फिर सब कनेकिटड कश्मीर के मलिटेंटस की एक आउटपुट की जगह बन जाएगी और मणिपुर इनका सेंटर बन जाएगा। अगर इस्लामिक फंडामेंटलिस्ट मणिपुर में खड़ा हो गया तो फिर वह हमारे नार्थ-ईस्ट और नार्दन पार्ट से जुड़ जाएगा। आज भी जो हमारा नेपाल बार्डर उत्तर प्रदेश में है वह हमारे लिए बहुत खराब है। हमारे काम बिगड़ रहे हैं। जो लोग सीधे कश्मीर नहीं आ सकते वे नेपाल पहुंचते हैं और नेपाल के बार्डर से यू.पी. में घुस कर सारे देश में घूमते हैं। हमने कोशिश की, लेकिन हम उसमें सफल नहीं हो पाए। नेपाल बार्डर बिलकुल ओपन बार्डर है। वहां न कोई चैक है, न फेंसिंग है और न ही चैकपोस्ट है, जो कि बहुत जरूरी है। यू.पी. गवर्नमेंट से बात की थी तो उन्होंने कहा कि ग्ृाह मंत्रालय इसका खर्च उठाएं। वह ब्यूरोक़ेटिक एप्रोच में थोड़ा रह गया। मेरी ग्ृाह मंत्री जी से प्रार्थना है कि नेपाल बार्डर भी टाइट होना चाहिए। अगर नेपाल बार्डर टाइट होगा तो तभी हमारा प्रभाव उन पर पड़ेगा और उन्हें रोक पाएंगे। महोदय, मुझे आखिर में एक ही प्रार्थना करनी है कि डेवलपमेंट एकटीविटी बढ़ा कर उनके दिल आप जीत सकते हैं। चाहे नार्थ-ईस्ट की बात हो या जम्मू-कश्मीर की हो। एक योजना ग्ृाह मंत्रालय में बनी थी, ग्ृाह मंत्री जी उसे देख लें। इसमें हमने बेरोजगारों को स्पेशल रिक़ुटमेंट कराई थी। जब एक बारामूला का लड़का फौज और पुलिस में भर्ती होकर तमिलनाडु में जाता है तो उसे पता चलता है कि मेरा देश कया है, लेकिन बारामूला से बाहर नहीं निकलता तो उसकी लमिटेशन बारामूला तक रहती है। उस पर और शकितयों का असर ज्यादा पड़ता है और वह नेशनल मैनस्ट्रीम में आने से रोकता है। हमने शुरुआत की थी, उसमें कुछ भर्ितयां हुई थीं, अब पता नहीं उसकी कया स्िथति है। हमने लड़कों को ट्रेंड करके आईटीआई वगैरह में कुछ वेकेन्िसयां निकाली थीं। उन बच्चों को हम बाहर भेजा करते थे। मैं अपोजिशन से बोल रहा हूं, इसलिए ऐसे नहीं बोल रहा हूं। मंत्री जी, मैं बहुत चिन्ता के साथ कह रहा हूं कि कश्मीर पर बहुत ध्यान देना पड़ेगा। बयानों और बातों से गाड़ी नहीं चलेगी, प्लान बना कर, ढंग से हम सब को मिल कर इसके लिए समाधान निकालना पड़ेगा। मैं अपनी तरफ से वायदा करता हूं, १७४० बजे (अध्यक्ष महोदय पीठासीन हुए) हमसे जो भी मदद चाहे, पॉलटिकल हो चाहे दूसरी, जो भी मदद चाहिए, हम देने को तैयार हैं, लेकिन काश्मीर को देश का मुद्दा समझकर, सारे देश की समस्या समझकर इसको हल करना चाहिए। यह केवल सरकार की समस्या नहीं है, यह सारे देश की समस्या है। इसी भावना को लेकर इस समस्या का समाधान करें। हम आपसे उम्मीद करते हैं कि आप इस दिशा में उचित कदम उठाएंगे।">SHRI SANSUMA KHUNGGUR BWISWMUTHIARY (KOKRAJHAR): What about the political solution?
">SHRI RAJESH PILOT : I have said, dialogue. Did you not hear me? I have said that there should be a dialogue to know what is the problem of the North-Eastern brothers and sisters and what is the problem of Jammu and Kashmir people. Dialogue is a must and without dialogue, you really cannot exchange views. I am for the dialogue. For the dialogue, I have been pleading from the very beginning.
">With these words, I appeal to the hon. Home Minister to take the Jammu and Kashmir and the North-East insurgency and militancy seriously and take strong action against whatever is planned by the terrorists.
">1741 hours SHRI SANSUMA KHUNGGUR BWISWMUTHIARY (KOKRAJHAR): Sir, I am very much thankful to your honour for giving me this opportunity to speak on this very serious matter. ">सबसे पहले मैं हिंदी में बोलने की कोशिश करूंगा। कुछ गलतियां हो जाएं"> ">तो क्षमा करना। नार्थ-ईस्ट रीज़न में जो इन्सरजेंसी पैदा हुई, उसके बारे में मेरा अनुमान प्रैकिटकल ऑब्जर्वेशन्स पर आधारित है और उन्हीं के मुताबिक मैं बोलने जा रहा हूं।"> ">Whatever militancy groups are there, they were never being developed, funded, patronised or encouraged by any other foreign country"s mercenary people at the initial stage. ">असली कारण कया हैं? नार्थ-ईस्ट में"> ">स्थानीय लोग हैं, ट्राईबल एथनिक ग्रूप हैं और उनके जो मुद्दे हैं उन पर जिस ढंग से भारत सरकार को ध्यान देना चाहिए था, जिस ढंग से समस्याओं का समाधान करना चाहिए था, वह नहीं हो पाया। समस्याओं के समाधान का रास्ता एक और होता है और वह है अहिंसा का रास्ता।"> ">I am one of the disciples of Mahatma Gandhi and I am one of the disciples of Dalai Lama. Each and every problem should be and has to be resolved through peaceful political dialogue and negotiations. But when a movement is being attempted to be cracked down or crushed down by brute military forces and security personnel and by applying State terrorism, then some young sections of people from that particular community think of adopting certain violent methods and in that sort of a situation, militancy and insurgency come up.
">With regard to our Bodoland movement, I would like to cite certain examples. When we started the movement in 1987, our movement was quite peaceful and democratic. This movement was launched to get a separate State of Bodoland within the Indian Union only and not as a sovereign country.
">SHRI ADHIR CHODHARY (BERHAMPORE, WEST BENGAL): Are you the spokesman of Bodoland?
">SHRI SANSUMA KHUNGGUR BWISWMUTHIARY (KOKRAJHAR): Yes.
">SHRI ADHIR CHODHARY : Thank you.
">SHRI SANSUMA KHUNGGUR BWISWMUTHIARY : The then Assam Government led by Shri Prafulla Mohanta, the present incumbent, tried to crack down the peaceful and democratic Bodoland movement by applying various black Acts, by imposing TADA and other Draconian laws. In the wake of the Bodoland movement, a total of 1135 Bodos were killed by the security personnel and by some planted agent provocateurs in the name of fake encounters. A huge number of Bodo girls and women were gang-raped by certain security personnel and by some planted agent provocateurs.
">The Government was supposed to give important and proper attention to the genuine demand for a separate State of Bodoland. But that sort of importance was not being given. During our incessant struggle for a separate Bodoland state over a period of long 33 years since 1967, uptill now, we have seen ten Prime Ministers. ">इस बीच एक भी प्रधान मंत्री ने आज तक बोडोलैंड के मसले के समाधान के लिए कोई कदम नहीं उठाया।"> ">We signed the Bodo Accord in 1993 under the initiative of Shri Rajesh Pilot. But that Accord has not yet been implemented. The Government of India and the Government of Assam had backed out of their own commitment and assurance given in connection with the implementation of the Bodo Accord. The Bodo Accord has not been implemented till today, the 14th of December, 1999 even after the lapse of long 6 yars since 1993 it is not implemented. In this period of over five years, more than 500 Bodos were killed by the Bodo militants. Apart from Bodos of course some non-Bodos also killed by Bodo militants. But nobody is asking why the Bodos were killed by the Bodos themselves. This is because of the unwanted statemate and unfortunate and militancy. I have been keeping on telling the Governments since the past years about this tragic situation and requesting to take effective measures to solve the burning Bodoland issue through peaceful political negotitious.
">Last year I asked as to why there cannot be a peaceful political negotiation and dialogue with the democrat militants who are willing to come forward to the negotiating table. If the Government of India can start a dialogue with the N.S.C.N. (I.M. Group) why should they not have a dialogue with the Bodo militants or the ULFA people if they are prepared to come forward and wiling to talk? This is my serious question.
">Last year, hon. Prime Minister Shri Atal Bihari Vajpayee had entrusted the then Minister of Defence Shri George Fernandes the task of starting a political dialogue with us on the Bodoland issue. But, unfortunately, that Government fell on 17th April itself, while the discussion was to be started w.e.f. 21st April, 1998.
The other day, on 9th December,1999 I talked to the hon. Prime Minister Shri Atal Bihari Vajpayee. I requested him, time and again, to start a dialogue with us. But his response is not yet positive. Day before yesterday he made one very dangerous statement at Shimla where he told that after creating the three new States - Uttarakhand, Chattisgarh and Vananchal they will freeze the creation of smaller States. It is a very dangerous and provocative statement. I would like to request the hon. Prime Minister to review and change his policy statement. The Bodoland demand for creation of a separate state of Bodoland is a very much genuine and justified demand which is based on our birthright and historical prerogative and a justified demand.
There are two Bodo militant groups in the Bodoland. One is pro-India and the other is anti-India. The anti-India militant group is demanding to have a sovereign Bodoland. We are opposed to that very idea. We are nationalist Indians. We would like to get a separate Bodoland State within the Indian Union and we want to live in India as dignified Indian citizens with our distinct ethnic self-identity, with our rich language, culture, customs and,traditions etc. I do not have precise language to say about the way in which all the successove Governments of Assam have been suppressing the Bodos and neglecting them since after independence and about the degree or agony or the seriousness or gravity of the situation. Because of this reason our Naga brethren, Mizo brethren, Arunachal brethren, Garo, Khasi and Jayautias brethren had been compelled to go out of Assam in the Sixties and Seventies.
I would again appeal to the Government of India to start a political dialogue with the willing militants. If some group comes forward for the negotiation table, you talk to them. I would like to appeal to the Government of India, through you, to start a political dialogue afresh with the concerned democratic groups and organisations in order to resolve this burning Bodoland tangle and in order to remove the dangerous militancy and insurgency menace from the entire North-Eastern region.
MR. SPEAKER : Please conclude. You have taken ten minutes.
SHRI SANSUMA KHUNGGUR BWISWMUTHIARY : Sir, I would again appeal to this august House and to the Government of India to take a very concrete and effective action plan and policy decision to solve the burning Bodoland issue by granting a separate State of Bodoland with immediate effect.
With these words I conclude and thank you for the opportunity given.
">1750 hrs. श्री प्रभुनाथ सिंह (महाराजगंज, बिहार) : अध्यक्ष जी, पूरे देश में, खासकर जम्मू-कश्मीर और पूवर्ोत्तर राज्यों में जो आतंकवाद की स्िथति है, नश्िचत तौर पर यह चिन्ता का विषय है।"> ">आतंकवादी गतवधियां जो बढ़ रही हैं, जम्मू-कश्मीर उसका एक केन्द्रबिन्दु बन चुका है। इस केन्द्रबिन्दु के माध्यम से पूरे देश में आतंकवाद की गतवधियां फैल रही हैं। वैसे आतंकवाद एक दिन में कहीं नहीं होता है। इसकी शुरूआत १०-१५ वषर्ों पहले इस देश में हुई थी। हो सकता है कि शुरूआत के दिनों में जो सरकारें इस देश में थीं, वह महसूस नहीं करती थीं कि आगे आतंकवाद इतना बढ़ेगा। लेकिन अगर शुरू के दिनों में जिस समय देश का बंटवारा हुआ और जो छोटी सी भूल उस समय हमसे हो गई कि हमारी अपनी ज़मीन जो राजा हरि सिंह के रजवाड़े में पड़ती थी जिसकी लगभग ३८,००० वर्ग किलोमीटर ज़मीन अगर पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में न गयी होती तो शायद आतंकवाद की गतवधियां वहां से शुरू नहीं होती। जहां कश्मीर का वह हिस्सा है, वहां से सीमांकन हो चुका है और पाकिस्तानी सेना वहां रहने का काम करती है।"> ">युद्ध तो कई बार हुए। आमने-सामने के युद्ध में पाकिस्तान को बराबर मात खानी पड़ी, लेकिन अपने नर्म रुख के कारण हम जीती हुई जमीन भी वापस करते रहे। हम बंदी बनाए हुए सैनिकों को भी छोड़ते रहे। हमारा नर्म रुख हमारे लिए बराबर घातक साबित हुआ। अभी कारगिल में जो युद्ध हुआ, हम यह कहने में गर्व महसूस करते हैं कि श्री अटल बिहारी वाजपेयी के निर्देशन में और जार्ज फर्नान्डीज़ के रक्षा मंत्रित्व काल में जिस ढंग से हमने सफलता पाई है, उससे हमने पाकिस्तान का मनोबल काफी तोड़ा है, इसमें कोई दो राय नहीं हैं और उसी मनोबल टूटने का कारण हुआ है कि आज कश्मीर पुनः आतंकवाद का केन्द्रबिन्दु बनता जा रहा है और पाकिस्तान इस देश की अर्थव्यवस्था से लेकर हर व्यवस्था को तोड़ना-मरोड़ना चाहता है। पाकिस्तान सिर्फ कश्मीर को न तोड़कर देश को तोड़ने की स्िथति में नेपाल के माध्यम से आ चुका है। हम सरकार को सूचना देना चाहते हैं कि नेपाल में जो टेलीविज़न है, वहां पाकिस्तान के कार्यक़म दिखाये जाते हैं और उसके माध्यम से पाकिस्तान नेपाल की जनता का विश्वास हासिल करना चाहता है और हमारे देश के कार्यक़म नेपाल में शून्य के बराबर हैं। यह भी कारण है कि अबनेपाल की जनता की सहानुभूति थोड़ा सा पाकिस्तान की तरफ बढ़ी हुई है। हमारा इलाका भी नेपाल का सीमावर्ती इलाका है। हम बताना चाहते हैं कि बिहार और उत्तर प्रदेश आई.एस.आई. का केन्द्रबिन्दु बन चुके हैं और जो भी निकटवर्ती जिले हैं, उन जिलों में आई.एस.आई. के लोग अब काफी सक़िय हो गए हैं और हिन्दुस्तान के लोगों को, उत्तर प्रदेश, बिहार के लोगों को पैसे से खरीद रहे हैं और उसकी एक-एक भूमिका में नागरिक भी रुचि लेने लगे हैं अर्थ लाभ के कारण। इसलिए ग्ृाह मंत्री जी से मैं निवेदन करूंगा कि जो सीमावर्ती जिले हैं, उन्हें चहिनत करके सरकार को निगरानी वहां बढ़ानी चाहिए। अगर निगरानी नहीं बढ़ाई गई तो हमें लगता है कि विलास जी जैसे बोल रहे थे तो इन्होंने आंकड़े दिये थे कि २५,००० के करीब लोग मारे गए हैं, लेकिन दो राज्यों के आतंकवाद का आंकड़ा दिया।"> ">मैं आपको यह बताना चाहता हूं कि पूरे देश के आतंकवाद का अगर लेखा-जोखा किया जाए तो डेढ़ लाख से ज्यादा लोग आतंकवाद से मरे हैं और जो आतंकवादी संगठन हैं वे वभिन्न रूपों में घर कर रहे हैं।"> ">अध्यक्ष महोदय, हमने पंजाब की समस्या पर काबू पाया है और बहुत हिम्मत के साथ सरकार ने काम करके पंजाब पर जो काबू पाया है उस पर कहीं दो मत नहीं हैं। लेकिन पंजाब के अलावा अभी हम मणिपुर में काबू नहीं पा सके हैं। हमने वहां युद्ध विराम की स्िथति पैदा की हुई है। लेकिन उसे काबू किया हुआ नहीं कहा जा सकता है। राजेश जी, एक बात आपने कही हैं कि हमें थोड़ा नरम रुख अपनाना चाहिए। हिंदुस्तान की यह नीयत रही है कि हमें नरम रुख अपनाना चाहिए। लेकिन शासन और प्रशासन चलाने में ज्यादा नरम रुख अपनाने पर बहुत बड़ा खतरा रहता है। एक शहरी ने कहा है - "ऐ राही दिल्ली जाना, तो कहना अपनी सरकार से, खर्चा चलता हाथ से शासन चलता तलवार से।" इसलिए शासन, प्रशासन चलाने में और आतंकवाद से निपटने में जहां भी थोड़ा नरम रुख अख्ितयार किया जायेगा, मुझे लगता है कि उससे खतरा बढ़ता जायेगा। इसलिए मैं सरकार से निवेदन करूंगा कि अब आतंकवादियों के पास आधुनिक हथियार होते हैं और गांवों की जनता निहत्थी होती है। ये आधुनिक हथियार मुफत में पाकिस्तान से हिंदुस्तान के वभिन्न प्रदेशों में भेजे जा रहे हैं और निहत्थी जनता पर हमले किये जा रहे हैं।"> ">अध्यक्ष महोदय, बिहार में खासकर पूर्िणया में हवाई जहाज से हथियार गिराये गये और वे हथियार राज्य के कोने-कोने में भेजे गये। चूंकि आपने बिहार को आतंकवादी राज्य घोषित नहीं किया है, इसलिए उसके आंकड़े नहीं जोड़े जा रहे हैं। आप बिहार के आतंकवाद का हिसाब जोड़ दीजिए। पूरे देश के राज्यों के आतंकवाद का हिसाब एक तरफ और बिहार का एक तरफ कर दीजिए तो दोनों बराबर आयेंगे। राजेश जी, यह हम किसी बुरी भावना से नहीं बोल रहे हैं कि हम सरकार के खिलाफ हैं। पक्ष और खिलाफ में होना अलग बात है। लेकिन आज बिहार की स्िथति अन्य राज्यों के मुकाबले में सबसे ज्यादा बदतर बन गई है। इसलिए हम कहेंगे कि बिहार को आतंकवादी राज्य घोषित करना चाहिए। वहां वभिन्न टुकड़ों में वभिन्न दलों के आतंकवादी काम कर रहे हैं, जैसे मध्य बिहार में और दक्षिण बिहार में एम.सी.सी. का काम चल रहा है और अपने को पोलिटीकल पार्टीज कहने वाले लोग भी जैसे आई.पी.ए. है, वह भी आतंकवादियों का ही काम करता है। जिससे वहां के जन-जीवन पर खतरा बना हुआ है। वहीं उत्तर बिहार में टुकड़ो-टुकड़ों में एक-एक गिरोह कायम हैं, जो आतंकवादी संगठनों से मिले हुए हैं। बिहार में पुलिस के लोग मारे जा रहे हैं, पदाधिकारी मारे जा रहे हैं और जनता तथा प्रशासन में दूरी बढ़ती चली जा रही है। जनता का प्रशासन से विश्वास हटता जा रहा है। इसलिए हम बिहार की जनता को सुरक्षा देने के लिए ग्ृाह मंत्री जी से निवेदन करेंगे। बड़े लोगों को सुरक्षा की व्यवस्था होती है, हम लोगों को भी सिकयुरिटी मिली हुई है। हम लोग बिहार में कहीं आते-जाते हैं तो सिकयुरिटी के साथ आते-जाते हैं। लेकिन वहां की आम जनता शाम को चार-पांच बजे के बाद घर से निकलना बंद कर देती है। लोग बाजार में सब्जी खरीदने भी नहीं जाते हैं। गांवों में जब कभी इस पर हमसे चर्चा होती है तो लोग हमसे पूछते हैं तो हम कहते हैं कि केन्द्र सरकार इसमें कुछ नहीं कर सकती हैं, यह राज्य का मामला है। तब वहां के लोग कहते हैं कि हम केन्द्र को वोट किसलिए देते है, राज्य को कयों नहीं देंगे। इसलिए मैं ग्ृाह मंत्री जी से निवेदन करूंगा कि बिहार के मामले को आप गंभीरता से लीजिए और बिहार के जन-जीवन में सुरक्षा की व्यवस्था कीजिए। बिहार में आतंकवाद आई.एस.आई. के माध्यम से बहुत बढ़ा हुआ है, वहां उसकी गतवधियां बहुत तेज हुई हैं। हम यह निवेदन करेंगे कि अपराधियों को हथियारों के लिए लाइसेंस की जरूरत नहीं पड़ती है। वे आधुनिक हथियार लेकर खुले बाजार में घूम रहे हैं। हम आपसे कहेंगे कि आप वहां के नागरिकों को कह दीजिए कि अपनी सुरक्षा के लिए हथियार रखें और उनके लिए लाइसेंस की जरूरत नहीं है। अन्यथा आप वहां लाइसेंस देने की व्यवस्था करें, चूंकि वहां के लोगों को लाइसेंस नहीं मिल पाते हैं जिसके कारण वहां का जन-जीवन अपने को काफी असुरक्षित महसूस कर रहा है। अध्यक्ष महोदय : प्रभुनाथ जी, अब आप समाप्त कीजिए।"> ">श्री प्रभुनाथ सिंह : अध्यक्ष महोदय, आप कहते हैं तो मैं बैठ जाता हूं। धन्यवाद। आपका जैसा आदेश हो, मैं बैठ जाता हूं।"> ">अध्यक्ष महोदय : इस सब्जेकट के लिए दो घंटे अलॉट किये गये हैं। आप जल्दी कम्पलीट कीजिए।"> ">श्री प्रभुनाथ सिंह : अध्यक्ष जी, पूवर्ोत्तर राज्यों में खासकर आसाम, मणिपुर और नगालैंड की स्िथति काफी बदतर है। हमारे यहां के लोग आज भी आसाम में बहुत अधिक रहते हैं।"> ">18.00 hrs. ">अध्यक्ष महोदय, आसाम की स्िथति इतनी बदतर है कि वहां से लोग अपने घर, खेत सब कुछ छोडकर बिहार की तरफ भाग रहे हैं और दूसरे प्रान्तों में रोजी-रोटी कमाने जा रहे हैं। केवल देश का एकमात्र हिस्सा जम्मू-कश्मीर ही नहीं बल्िक आतंकवाद से अन्य प्रान्त भी प्रभावित हैं। यह ठीक है कि जम्मू-कश्मीर ज्यादा प्रभावित है कयोंकि वह पाकिस्तान से सटा हुआ है।"> ">श्री रामदास आठवले (पंढरपुर) : जरा रणवीर सेना के बारे में बताइए।"> ">श्री प्रभुनाथ सिंह : आप रणवीर सेना के बारे में जानना चाहते हैं। मैं बताना चाहता हूं कि कोई भी सेना हो, जो आतंकवाद में लिप्त है, उसे हम आतंकवादी कहते हैं, लेकिन दुर्भाग्य से रणवीर सेना को बिहार सरकार का संरक्षण प्राप्त है। इसलिए वहां ऐसा काम हो रहा है।"> ">अध्यक्ष महोदय : प्रभुनाथ सिंह जी, समाप्त करें।"> ">श्री प्रभुनाथ सिंह : उपाध्यक्ष महोदय, मैं अपनी बात समाप्त करता हूं। धन्यवाद।"> ">SHRI PRIYA RANJAN DASMUNSI (RAIGANJ): Sir, before you call the name of the next speaker, I would like to submit that we have been given to understand that the hon. Prime Minister may come anytime and make a statement. Since there is a long list of speakers to speak on national security, would you please consider a suggestion? The point is that since the hon. Prime Minister could come anytime now and make a statement, thereafter, I think, some speakers can speak on that and then the hon. Home Minister could reply to the debate.
">MR. SPEAKER: Shri Dasmunshi, there are only four to five speakers to speak on this.
">SHRI PRIYA RANJAN DASMUNSI : Sir, if you could accommodate, then there is no problem.
">SHRI ALI MOHD. NAIK (ANANTNAG): Sir, I belong to the State of Jammu & Kashmir. I have given in writing my request to you to speak on this subject. I should be allowed to speak on this.
">MR. SPEAKER: All right.
">श्री राशिद अल्वी (अमरोहा) : स्पीकर साहब, आज हाउस एक बहुत ही अहम मामले पर बहस कर रहा है। आतंकवाद ने पिछले १०-१२ साल से पूरे देश को झिंझोड़ कर रख दिया है। आतंकवाद की वजह से देश के अंदर होम मनिस्ट्री की रिपोर्ट के मुताबिक २९,१५१ सवलियन्स मारे गए, ५,१०१ सिकयोरिटी पसर्ोनैल मारे गए और इसके साथ-साथ तकरीबन २००० करोड़ रुपए का नुकसान इस देश को आतंकवाद की वजह से हुआ है। मैं तफसील में नहीं जाना चाहता हूं, लेकिन पिछले १० सालों में मिलीटेंट से रिकवरी हुई है, जो आर.डी.एकस. और दूसरे एकसप्लोसिव पदार्थ मिले हैं उनकी बड़ी तादाद है। अभी इंडो-बांगलादेश बार्डर के ऊपर तकरीबन ३० के.जी.आर.डी.एकस. पकड़ा गया। दिल्ली के अंदर ६३ के.जी.आर.डी.एकस पकड़ा गया, लेकिन स्पीकर साहब मैं बहुत दुख के साथ कहना चाहता हूं कि हमें टैररिज्म की वजुहात पर, रीजन्स पर जाना पड़ेगा। इस देश के अंदर टेररिज्म की जड़ें इतनी मजबूत कैसे हुईं, इस पर गौर करना पड़ेगा। मेरे एक साथी ने कहा कि यह काम एक दिन में नहीं होता। यह काम एक लम्बे अरसे से इस देश में होता चला जा रहा है और आहिस्ता-आहिस्ता टैररिज्म ने इस देश के अंदर जड़ें जमा लीं। टैररिज्म पैदा होने के लिए देश की आजादी के बाद से लेकर आज तक जो नौजवानों के अंदर बेरोजगारी पैदा हुई उसके ऊपर कोई तवज्जुह नहीं दी गई। इस देश के अंदर जनता में डिससैटिस्फैकशन रहा, खासकर मैं कहना चाहता हूं कि कश्मीर के अंदर पिछले कुछ सालों में दो रुपए किलो चावल देना का काम तो किया गया, वहां के लोगों के दिल जीतने का काम जिस ढंस से होना चाहिए उस तरीके से नहीं किया गया। उनको मोहताज बनाने की कोशिश की गई, लेकिन यह कोशिश कभी नहीं की गई कि उनको अपने पांव पर खड़ा किया जाए। उन्हें यह अहसास दिलाया जाए कि इस देश पर उनका उतना ही हक है जितना दूसरों का है।"> ">मुझे पूरा यकीन है कि अगर ५२ सालों के अंदर कश्मीर के लोगों को कश्मीर से बाहर निकालकर देश के दूसरे हिस्से में, इंडस्ट्रीज के अंदर, दूसरे कामों में लगाने का काम किया जाता तो आज सूरतेहाल दूसरी होती। जब तक अपने लोग शामिल नहीं होंगे तब तक टैरेरिज्म कभी मजबूत नहीं होगा। मैं बड़ी माफी के साथ कहूंगा कि पंजाब के अंदर टैरेरिज्म तब आया, कांग्रेस के लोग माफ करेंगे, जब पंजाब के अंदर आपरेशन ब्लू स्टार हुआ। पहले पंजाब के अंदर कोई टैरेरिज्म नहीं था।"> ">श्री सत्यव्रत चतुर्वेदी (खजुराहो) : यह बिल्कुल गलत बात है।... (व्यवधान)
"> ">Wrong statements should not be made. ">हम कोई राजनीतिक बात नहीं करना चाहते हैं। ... (व्यवधान) दूसरे दलों को भी ख्याल रखना चाहिए।... (व्यवधान)
"> ">श्री राशिद अल्वी : सन् १९७१ में पाकिस्तान के साथ जब हमारी जंग हुई तो बॉर्डर पर हमारे जो जवान लड़ाई लड़ रहे थे, पंजाब की बहनें और माएं अपने घरों से खाना पकाकर सरहद पर लड़ने वाले जवानों को खाना खिलाने के लिए जाती थी। वह यह तमीज नहीं करती थी कि सरहद पर लड़ने वाले जवान हिन्दू हैं, मुसलमान हैं या सिख हैं। १९७१ की लड़ाई में हमारी बहनों और माओ ने सरहद पर लड़ने वाले जवानों का साथ दिया। लेकिन उसके बाद आपरेशन ब्लू स्टार में जो कुछ हुआ।... (व्यवधान)
उसके अंदर जो राजनीति की गई।
... (व्यवधान)
जब इंसान के दिल पर चोट लगती है, वह उस चोट का बदला लेना चाहेगा। मैं आपसे कहूंगा कि इस पर गुस्सा करने की जरूरत नहीं है बल्िक इसे समझने की जरूरत है। आज हम बी.जे.पी. के खिलाफ इसलिए हैं कि बी.जे.पी. इस देश के अंदर अकिलयतों के साथ नाइंसाफी करती है। यह मुमकिन नहीं है कि कल आपने कोई गलती की है तो हम अपनी जुबान बंद कर लेंगे। आज इस हाउस के अंदर मुझे कोई सिख नजर नहीं आ रहा।
... (व्यवधान)
एक-दो बैठे हैं। मैं कोई सिखों को खुश करने के लिए नहीं कह रहा हूं। लेकिन जो कुछ उस वकत हुआ था और दिल्ली की सड़कों पर हुआ, उस तारीख को हिन्दुस्तान में कभी कोई भूल नहीं सकता। इस दिल्ली के अंदर ... (व्यवधान)
"> ">श्री माधवराव सिंधिया : आपको कांग्रेस का विरोध करने में ज्यादा दिलचस्पी है।... (व्यवधान)
"> ">श्री राशिद अल्वी : मैं उनके ऊपर भी आऊंगा। अभी आप उन्हें ताली बजाने दीजिए, उसके बाद आप ताली बजायेंगे।"> ">स्पीकर साहब, दिल्ली की सड़कों पर सिख लोगों को उन्हीं की पगड़ियों से बांधकर उनके साथ कया किया गया। उस समय सर्िदयों का वकत था, यह बात हंसी और मजाक की नहीं है, वे भी इसी तरह हिन्दुस्तानी थे जैसे हम हैं। उनको उन्हीं की पगड़ियों से बांधकर और उन्हीं के स्कूटर से पेट्रोल निकालकर आग लगा दी। इस बारे में मुझे दिल्ली पुलिस के एक बड़े अफसर ने इत्ितला दी, जो कि वहां मौजूद थे, कि लोग उनकी जलती हुई हड्डियों का तमाशा देख रहे थे।">... (व्यवधान)
">जब दिल पर चोट लगती है।"> SHRI SUDIP BANDYOPADHYAY (CALCUTTA NORTH WEST): Sir, this type of deliberations cause tremendous anger in the minds of common people in the country. This is not proper. There should be some check over such things at some point. श्री मोहन रावले : अध्यक्ष महोदय, यहां कश्मीर के ऊपर चर्चा हो रही है। ... (व्यवधान) हम भी कांग्रेस के खिलाफ हैं लेकिन हम उसमें राजनीति नहीं लाना चाहते।... (व्यवधान) श्री राशिद अल्वी : आज फिर पाकिस्तानी कमांडो फोर्स के मलिटैंट दिल्ली के अंदर पकड़े गये हैं। विदेशी ताकतें उनका साथ दे रही हैं। आज एक बार फिर इस देश में टैरोरिज्म से खतरा लाहक हो गया है। मैं कहना चाहता हूं कि एक बड़ा खतरा यह भी है कि अभी होम मनिस्ट्री की रिपोर्ट के मुताबिक १९,८०० इंडियन ऐसे हैं जिन्हें पाकिस्तान की आई.एस.आई. ने ट्रेंड किया है। मैं होम मनिस्टर साहब से कहना चाहूंगा कि १९,८०० ऐसे इंडियन हैं जिन्हें आई.एस.आई. ने ट्रेंड किया है, यह खतरनाम ऐलान है। अगर हमारे अपने लोग उसके अंदर मिल जाएंगे तो टैररिज़म को और ज्यादा मजबूत करेंगे। जब तक लोकल सपोर्ट मिलती रहेगी, टैररिज़म मज़बूत होता रहेगा। इसके साथ साथ मैं यह भी कहना चाहूंगा कि होम मनिस्ट्री का कहना है कि वैस्टर्न यूपी को आई.एस.आई. ने अपना अड्डा बना रखा है। अगर वैस्टर्न यूपी या हिन्दुस्तान के किसी भी कोने में आई.एस.आई. के लोग मौजूद हैं, उनके खिलाफ सख्त से सख्त कदम उठाने चाहिए। लेकिन मैं सरकार से यह प्रोटैस्ट भी करना चाहता हूं कि आई.एस.आई. का नाम लेकर वैस्टर्न यूपी में खास तौर से मुसलमानों को परेशान किया जाता है, असम में परेशान किया जाता है। मैंने पीलीभीत और मुजफफरनगर के ऐसे बहुत से केस किये हैं कि मासूम आदमी जिसका टैररिज़म और आई.एस.आई. से कोई ताल्लुक नहीं है, लेकिन उसका किसी पोलटिकल नेता से या किसी पुलिस अफसर से कोई झगड़ा हो गया तो उसका आई.एस.आई. से इनवॉल्वमेंट बताकर जेल में डाल दिया गया। ऐसे मैं कितने ही वाकयात इस हाउस को बता सकता हूं। टैररिज़म के नाम पर इस तरह के वाकयात नहीं होने चाहिए और देश के तमाम लोगों को कॉनफिडेन्स में लेकर इसके खिलाफ हमें लड़ाई लड़नी चाहिए। अभी पाकिस्तान में जो मलिट्री रिज़ीम आया है, मुझे पूरा यकीन है कि होम मनिस्टर साहब को वह सारी बातें मालूम होंगी जो उन लोगों ने अभी हिन्दुस्तान के खिलाफ तय की हैं।The military regime of Pakistan, on its own, utilized all possible ways to highlight the Kashmir issue at national and international levels. Pakistan would step-up political, diplomatic and moral support for self-determination of Kashmiris who would take decisions independently. इस पर भी गौर करने की ज़रूरत है। आखिर में सबसे अहम बात मैं कहना चाहता हूं कि मेरी इत्तला यह है कि आर्मी और बी.एस.एफ. में भी टैररिज़म को लेकर एक कॉनफिलकट पैदा हुआ है। अगर आर्मी और बी.एस.एफ. के अंदर इख्तलाफ होगा तो इससे देश को भी खतरा होगा और टैररिज़म को भी खतरा पैदा होगा, यही बात कहकर मैं अपनी बात समाप्त करता हूं। ">श्री अली मोहम्मद नाईक (अनन्तनाग) : स्पीकर साहब, जहां तक कश्मीर के अंदर टैररिज्म का ताल्लुक है, हमें कोई तारीखी हकाइब उनसे मुंह नहीं मोड़ना चाहिए। इसमें एक बात यह है कि हमको यह ज़हन में रखना चाहिए क"> ">Pakistan has not reconciled to the accession of Jammu and Kashmir State with India. ">यह तो बेसिक बात है। आपको याद होगा, बायनिये पाकिस्तान ये कहा करते थे कि कश्मीर एक चैक मेंरी जेब में है। लेकिन ये चैक जब कैश नहीं हुआ, तब से आज तक उनकी बराबर कोशिश है कि कश्मीर में डीस्टैबिलाइज़ेशन हो जाए और जैसे पायलट साहब ने कहा कि आज उनकी ख्वाहिश यह है कि हिन्दुस्तान टूट जाए। इसके साथ जहां पाकिस्तान के सर हम सब कुछ लादना चाहते हैं, हमें यह भी देखना चाहिए कि हमने कश्मीरियों के साथ कया सुलूक किया। कश्मीर मुसलमान मेजॉरिटी रियासत है। तकसीमे मुल्क मज़हब के नाम पर हुआ, लेकिन कश्मीरी मुसलमान ने पाकिस्तान का साथ नहीं दिया। कश्मीरी मुसलमान ने हिन्दुस्तान के साथ अपना नाता जोड़ा। कयों नाता जोड़ा? इसलिए, कि हिन्दुस्तान के कौमपरस्त लीडर जो थे, उन्होंने कश्मीरियों की तहरीक जो उनकी ऐटोक़ेसी के खिलाफ थी, उसमें साथ दिया। एक तारीखी हकीकत है, पंडित"> ">जवाहरलाल नेहरू कोहला में कश्मीरियों के लिए गिरफतार हुए जिसको कोई भूल नहीं सकता। महात्मा गांधी जी ने फरमाया कि जब सारे मुल्क में फिरकादाराना फसाद होते थे, रोशनी की किरण मुझे कश्मीर में ही दिखाई देती है।"> ">श्री अली मोहम्मद नाईक (अनन्तनाग) : स्पीकर साहब, जहां तक कश्मीर के अंदर टैररिज्म का ताल्लुक है, हमें कोई तारीखी हकाइब उनसे मुंह नहीं मोड़ना चाहिए। इसमें एक बात यह है कि हमको यह ज़हन में रखना चाहिए क"> ">Pakistan has not reconciled to the accession of Jammu and Kashmir State with India. ">यह तो बेसिक बात है। आपको याद होगा, बायनिये पाकिस्तान ये कहा करते थे कि कश्मीर एक चैक मेंरी जेब में है। लेकिन ये चैक जब कैश नहीं हुआ, तब से आज तक उनकी बराबर कोशिश है कि कश्मीर में डीस्टैबिलाइज़ेशन हो जाए और जैसे पायलट साहब ने कहा कि आज उनकी ख्वाहिश यह है कि हिन्दुस्तान टूट जाए। इसके साथ जहां पाकिस्तान के सर हम सब कुछ लादना चाहते हैं, हमें यह भी देखना चाहिए कि हमने कश्मीरियों के साथ कया सुलूक किया। कश्मीर मुसलमान मेजॉरिटी रियासत है। तकसीमे मुल्क मज़हब के नाम पर हुआ, लेकिन कश्मीरी मुसलमान ने पाकिस्तान का साथ नहीं दिया। कश्मीरी मुसलमान ने हिन्दुस्तान के साथ अपना नाता जोड़ा। कयों नाता जोड़ा? इसलिए, कि हिन्दुस्तान के कौमपरस्त लीडर जो हैं, उन्होंने कश्मीरियों की तहरीक जो उनकी ऐटोक़ेसी के खिलाफ थी, अपनी बेहतरी के लिए उसमें साथ दिया। एक तारीखी हकीकत है, पंडित जवाहरलाल नेहरू कोहला में कश्मीरियों के लिए गिरफतार हुए जिसको कोई भूल नहीं सकता। महात्मा गांधी जी ने फरमाया कि जब सारे मुल्क में फिरकादाराना फसाद होते थे, रोशनी की किरण मुझे कश्मीर में ही दिखाई देती है।"> ">कयोंकि उस जमाने में कश्मीर में किसी भी गैरमुस्िलम का जरा भर भी नुकसान नहीं पहुंचा। यही वजह है कि जब मुसलमान अकसीरियत रियासत ने हिन्दुस्तान के साथ एलाक किया तो हिन्दुस्तान के उस वकत की लीडरशिप ने कश्मीर को यह यकीन दिलाया कि हम आपका एक स्पेशल स्टेटस इस मुल्क के अन्दर रखेंगे। यह १९४७ की बात है। कश्मीरियों के सबसे बड़े कद्दावर लीडर शेख साहब ने इसका ऐलाक किया, लेकिन १९५३ में उस वकत की मरकजी सरकार ने इस शख्स को गिरफतार, जो रियासत के प्राइम मनिस्टर थे।"> ">Without being dismissed from the Office of Chief Minister, he was arrested ">और गिरफतार करके कश्मीर की पोपुलर लीडरशिप को २२ साल तक जेल में बन्द रखा। यह कितना मजाक है कि ठ्ठ ै"> ">Prime Chief Minister who was enjoying the confidence of the House was put in jail and then the Assembly was asked to pass a vote of no confidence against the Prime Minister of the state. ">जो भी गवर्नमेंट थी। उसका नतीजा यह हुआ कि शेख साहब की गैरहाजिरी में मरकजी सरकार और रियासत की, मैं कहूंगा कि कठपुतली सरकारों ने मिलकर ऐसे काम किये, जिससे आपने कश्मीरी मुसलमान को अपने से बहुत दूर कर दिया। कश्मीर का वह मुसलमान, जो १९४७ में पाकिस्तान के खिलाफ सड़कों पर आया, जो हर जंग में हिन्दुस्तान की फौज के शाना-बाशाना रहा, आज वह आपसे दूर कयों जा रहा है। यह तवारीखी हकीकत है, आपको बेशक यह मालूम करना चाहिए। मुझे यह लग रहा था कि हिन्दुस्तान में एक सैकुलर मुल्क के अन्दर हूं और मेरा सब कुछ हिन्दुस्तान के अन्दर महफूज है, लेकिन आपने जो कुछ दर्जा कश्मीरियों को दिया था, आहिस्ता-आहिस्ता उसको काट दिया। अब कश्मीरी मुसलमान को यह लग रहा है कि जिस हिन्दुस्तान में गांधी जी थे, मौलाना आजाद थे, पंडित जवाहर लाल नेहरू थे, जिन्होंने मेरे तमाम आईनी तहफजात दिये थे और जो लोग आये, उनको एक-एक करके इनको काट दिया और उसके दिल में यह शक शुबहा आपने पैदा कर दिया। उसके लिए जिम्मेदार आप हैं।"> ">The Central Government is responsible for the creation of this militancy in Kashmir. ">जो उस वकत गवर्नमेंट थी। को पाकिस्तान की सपोर्ट रही।"> ">SHRI PRIYA RANJAN DASMUNSI : Should we invite discussion separately on this matter? ">उसी वकत की लीडरशिप ने शेख अब्दुल्ला को रिहा किया। आप जो इल्जाम लगा रहे हैं।... (व्यवधान)
"> ">श्री अली मोहम्मद नाईक : कांग्रेस वाले तो कांग्रेस के पक्ष की बात कहेंगे। ... (व्यवधान)"> ">श्री प्रियरंजन दासमुंशी : आपको इसको सुनने के लिए तैयार रहना चाहिए कि शेख अब्दुल्ला साहब को किसने रिहा किया था।... (व्यवधान)
आप तैयार हैं तो आप चर्चा की मांग कीजिए। शेख अब्दुल्ला साहब को रिहा करने के बाद किसने गद्दा पर बिठाया था?
... (व्यवधान)
"> ">श्री अली मोहम्मद नाईक : मैं भी असेम्बली का मैम्बर २५ साल रहा हूं, ऐसी बात नहीं है।... (व्यवधान)
"> ">SHRI PRIYA RANJAN DASMUNSI : Don"t shout like this.
">MR. SPEAKER: Shri Priya Ranjan Dasmunsi, the hon. Member is not yielding. Let him speak.
">SHRI PRIYA RANJAN DASMUNSI : It is a subject of national integration. He is trying to go back to Sheikh Abdulla. We are prepared for a discussion. Let it be discussed. What is there? ">श्री अली मोहम्मद नाईक : मेरे कहने का यह मतलब है कि कश्मीर के जो आईनी तहफूजात थे, वे आपने खत्म कर दिये। उनको लगा कि हमारे साथ हिन्दुस्तान के अन्दर विश्वासघात हो रहा है। यहां फिरकावाराना फसाद होते हैं, इसका असर भी वहां पड़ता है, यह भी आपको हिन्दुस्तान के अन्दर देखना चाहिए। मैं मानता हूं कि पिछले दो साल से फसाद नहीं हुए, लेकिन इससे पहले जो हुए, मेरे पास तादाद है कि कितने फिरकावाराना फसाद हुए। इसका असर वहां के मुसलमानों के जेहन पर पड़ता है। आपको साइकोलोजी भी समझनी चाहिए। इतना ही नहीं, पिछले पांच कमीशन, फसादात के बारे में ताकि फसादात के कि इन फसादात में इतना ही नहीं, हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट ने फैसले दिये हैं कि जहां किसी को नुकसान पहुंचा है, उसका मुआवजा दिया जाये। मैं यह जानना चाहता हूं कि किसको मुआवजा मिला। आज तक किसी को मुआवजा नहीं मिला। मेरे कहने का मतलब यह है कि बाबरी मस्िजद की शहादत हुई। मुसलमानों के जेहन पर इसका भी एक असर पड़ता है। पाकिस्तान का रेडियो, पाकिस्तान का टेलीवीजन,"> ">you are governing the country, ... ( ">व्यवधान) नहीं, उसके लिए आप जिम्मेदार हैं, मैं जिम्मेदार नहीं हूं। आप आप शोर मचाते हैं। मैं आपसे पूछना चाहता हूं कि बाबरी मस्िजद की शहादत पर आपके किसी मनिस्टर ने इस्तीफा दिया कि हमारे मुल्क के अन्दर यह नहीं होना चाहिए।"> ">आज आप शोर डाल रहे हैं, कयोंकि यू.पी. और बिहार में चुनाव होने हैं इसलिए आप मुसलमानों के वोट हासिल करना चाहते हैं। आपने कभी इस्तीफा नहीं दिया और यह नहीं कहा कि हम सरकार छोड़ रहे हैं। दूसरी बात यह है कि मुल्क में सतही तौर पर आपको यह भी देखना है कि मुसलमानों की नौकरियों में कया हालत है, कयोंकि इसका भी उन पर प्रभाव पड़ता है। मैं तो सच्ची बात यहां रखना चाहता हूं। मैं यह कहना चाहता हूं कि कांग्रेस ने इस मुल्क पर ४०-४२ साल हुकूमत की, लेकिन आपने कश्मीरी मुसलमानों को मरकजी नौकरियों में नहीं लिया। इससे भी वहां आतंकवाद प्रभावित हुआ।"> ">One dozen ex-MLAs of the National Conference were killed by militants; one MLA was killed by militants; and thousands of workers were killed. ">पाकिस्तान समझता है कि नेशनल कांफ्रेंस कश्मीर में हमारे काम में रुकावट डाल रही है। इस कारण वैली में हमारे आदमियों को मारा जा रहा है। जब चुनाव की बात आई तो हम मैदान में निकले, चुनाव लड़ा। आज पायलट जी कहते हैं कि कश्मीर की हालत बड़ी खराब है। मैं यह नहीं कहता कि १०० फीसदी आतंकवाद खत्म हो गया है, लेकिन कमजोर हुआ है। सवाल यह है क"> ">the impression is being created by some quarters that the National Conference is against talks. ">नेशनल कांग्रेस बातचीत के खिलाफ नहीं है।"> ">मेरे कुछ सुझाव हैं जो मैं यहां रखना चाहता हूं। नेशनल कांफ्रेंस ने इस बुनियाद पर चुनाव लड़ा और हमने लोगों से कहा कि हम इंटरनल आटोनोमी की बात करेंगे और उसे हासिल करेंगे। कश्मीर के विकास के लिए, इसमें जम्मू, लद्दाख और कारगिल भी है, एक स्पेशल पैकेज होना चाहिए। वहां जो बेकार लोग हैं, उनमें ज्यादा तादाद मुसलमानों की है, उनके लिए रोजगार का इंतजाम किया जाए, कयोंकि पिछले दस सालों से हमारा सब कुछ खत्म हो गया है। इसलिए उनको मेन स्ट्रीम में लाया जाए। इससे वहां के लोगों के दिल जीते जा सकते हैं और अंदरूनी खुदमुखतारी की बात सोची जाये। । राजेश पायलट जी ने कहा कि ऐसा वातावरण पैदा किया जा रहा है कि दिल्ली मलिटेंटस से बात करना चाहती है, पाकिस्तान या हुर्िरयत से बात करना चाहती है। नेशनल कांफ्रेंस हिन्दुस्तान की तरककी चाहती है। इसलिए देश की तरककी की जब भी बात होगी,"> ">The National Conference is ready to leave the Government. We will pave the way. My Chief Minister is on record. ... (Interruptions)
">MR. SPEAKER: Nothing will go on record now except what Shri Selvaganapathy speaks.
">(Interruptions)* ">-----------------------------------------------------------------------------
">* Not Recorded.
">1825 hours SHRI T.M. SELVAGANPATHI (SALEM): Hon. Speaker, Sir, I am thankful to you for having given me this opportunity to participate in this discussion which is an important one concerning the safety and security of this nation.
">It is quite unfortunate that I have been left with only four minutes to complete my entire speech and there are many more speakers to participate also. So, I request the Chair to kindly allow us to continue this discussion further, even after the hon. Prime Minister makes his Statement regarding Ayodhya issue, because of the nature of the discussion. I would request the Chair once again to heed to my plea.
">According to an estimate nearly two lakh and one thousand people have died in Jammu and Kashmir alone due to insurgency.
">SHRI VILAS MUTTEMWAR (NAGPUR): No. It is not true.
">SHRI T.M. SELVAGANPATHI : I have not quoted the period when it happened. It is right from the beginning. Please do not misunderstand me. And thousands of political activists have been taken to task because of militancy and terrorist activities in Jammu and Kashmir. All these things could have been averted if the then Government in power, that is, the Government in power now, had a proper intelligence network or had a proper surveillance about the paramilitary forces.
">The Pakistani aggression in Kargil sector will speak volumes about the nature of the failure of intelligence system that exists in our country.
">1827 hours (Mr. Deputy-Speaker in the Chair) ">I am not going to go into the details of the Kargil issue. But I would like to draw the attention of this august House to the statement which was issued by the dynamic leader of the AIADMK Party, Madam Dr. Puratchi Thalaivi. That statement cautioned the then Government, which is the same Government which is in power now. That statement brought out the issues to light. That statement revealed the enormous attempt of large scale intrusion in the Kargil sector and the attempts being made by them with the help of Bin Laden of the terrorist organisation and the ISI.
">The Government was given due notice several months prior to the Kargil occurrence and it was painful to watch that this Government did not lend its eyes and ears. That statement was well-founded and authenticated, but it was ignored. Our leader"s statement was yelled and promptly denied by the then Government. That statement was sent to the hon. Prime Minister, the hon. Home Minister and the hon. Defence Minister. But it did not yield any fruit. Had proper care and attention been given, the whole situation would have been averted and it would have been easier for our defence forces to combat the Pakistani intrusion in a very easy manner.
">It is due to the utter callousness and inactive attitude on the part of those in power that such massive and disastrous consequences occurred in this nation. At that time, our leader"s statement was not believed, with the result we found that there were concrete bunkers and armouries on the line of control; and we also found that there were well-laid roads and well-laid helipad. This could not have been done in a day or two.
">It would have taken several months or even a year. But unfortunately the Government did not listen to the warning given at that point of time. The lack of surveillance and the inadequate intelligence information sometimes lead to such disasterous effect on the security system.
">Coming to the main issue, Shri Rajesh Pilot has rightly mentioned that the magnitude of the terrorist activities have reached unimaginable proportions in our country. In Jammu and Kashmir, so far we have seen the militants targeting the civilians. The Army was attacked only when they are on the move, like ambuishing the vehicles etc. So far they have damaged the public properties. But now-a-days their activities have reached such a proportion that they have started attacking even the military headquarters. On the 3rd of November, 1999, the 15th Corps in Badami Bagh was attacked by the militants of that area. This is a shame on our part. The militants have entered the headquarters and killed a Major and several soldiers. The fighting was going on for twelve long hours. This is the magnitude and proportion of their activities. It is surprising and beyond imagination as to how they gained entry into the headquarters. Even the military establishments are not safe. I would like to pose a question to the hon. Home Minister that when the military establishments are not safe, how can an ordinary citizen feel secure in this country?
These incidents proved beyond doubt that this Government has totally failed in cracking down the militancy and has totally failed in preventing the activities of the militants in Jammu and Kashmir and other parts of the nation. It is high time that we set up a National Security Vigilance Commission. It should be a constitutional body like the Election Commission where there are three members. It should have the sanction of the law. It should comprise of people who had served the Army. They should advise the Government with regard to the security related issues of the nation. If such a body is envisaged, it would be very useful to the country.
This culture of militancy is fast spreading to the Southern parts of the country also, particularly to the State of Tamil Nadu. Rajiv Gandhi was assassinated by a human bomb. This incident took everyone by surprise. A national leader was assassinated in the soil of Tamils. After that there is an unprecedented rise in the communal clashes in the southern districts of the State of Tamil Nadu. Several hundreds of people have lost their lives and properties worth crores of rupees have been lost in the communal clashes. The public properties, like buses and trains were smashed and burnt. There was an unprecedented bomb blast, particularly in the Coimbatore district. Even the Home Minister, Shri L.K. Advani was the target of militants attack in Coimbatore.
He was fortunate enough to have survived. ... (Interruptions) I am concluding, Sir. It is an important issue. I am speaking about Tamil Nadu. Several hundred persons lost their lives. The hon. Home Minister visited the hospital. He saw the dead bodies and injured people. Our leader demanded a CBI investigation. It is very unfortunate that knowing the proximity, the nexus between the militants and the Government, it was not ordered. The hidden relationship which they had at that point of time failed to institute a high level inquiry. After that there was the recent Central Prison, Chennai, shoot out. Almost 20 people died in prison. Police is there to maintain law and order. Here is a case where the policemen are involved. Who will save the policemen in Tamil Nadu? A jailor was burnt alive and 20 people were shot at inside the jail. The jail was taken to ransom. Such is the situation now in Tamil Nadu.
All these occurrences are unique to the DMK Government. Only after Shri Karunanidhi, the present Chief Minister took over the reigns of Tamil Nadu, the communal clashes and the Islamic fundamentalism took its ugly head. All these issues, right from the assassination of Shri Rajiv Gandhi to the Central Prison Chennai shoot out, happened during the reign of the present Chief Minister, Shri Karunanidhi. The State of Tamil Nadu and the people of Tamil Nadu are not going to be safe in the hands of the present regime.
I know the predicaments of the hon. Home Minister. Unfortunately, he needs the support of the anti-people forces but I may remind him that the history will never forget and forgive. Another important issue which happened only recently, during the last month, was `Tamizhar Peruvizha", a big festival of Tamils. A meeting was organised in Madurai. Anti-national slogans were uttered there. In this meeting one could find the supporters of LTTE. The assassin of Shri Rajiv Gandhi was glorified and was declared as the martyr. They declared that Shri Rajiv Gandhi was not killed or assassinated but--it is a shame that they said--that Shri Rajiv Gandhi was punished. Such were the utterances in the meeting. I would like to know from the hon. Home Minister, has the State Government recorded such speeches and forwarded to either the Home Minister of the Government of India. What is the Government of Tamil Nadu doing over there? In such meetings even a coalition partner of the Government, MDMK Supremo, the learned Member of this House took part. He was present in the inauguration of the meeting. After he left, one of the official orators of the Party said that Shri Rajiv Gandhi was not killed but he was punished.
Your another coalition leader proclaimed that LTTE supremo, Pirbhakaran is a respectable leader as far as he is concerned. Will the hon. Minister explain us as to whether this Government associate itself -- because they being the coalition partners -- with such type of views? Please explain this to the House.
SHRIMATI KRISHNA BOSE (JADAVPUR): Mr. Deputy-Speaker, Sir, we are discussing a very important subject today. Instead of accusing each other of different things, I think, we should concentrate on the matter that is before us. This discussion is in two parts. One is about the North East and the other is about Jammu and Kashmir. It is impossible to do justice to these two subjects in a short period of time.
">I think my fellow MPs from North Eastern region tackled the issue of North Eastern region very well. So, I will not go into that. Only in passing, I would remind the hon. Home Minister about my State of West Bengal where ISI activities and ISI infiltration have increased dangerously. I am told that our State Home Minister had a meeting with the Union Home Minister some time ago. I only hope something tangible will come out of that.
">I would like to concentrate a little more on the problem of Jammu and Kashmir. It is because every day we are told that things are improving there. But reality seems to be just the opposite. A statement was laid on the Table of the House only yesterday wherein it was stated that things were improving. But we go back from Parliament and find that in the heart of Srinagar, the militants have struck again. So, this is something which we have to tackle now. In that very statement which was laid on the Table of the House, the Minister had also mentioned the steps that the Government was taking to curb militancy. Unfortunately, almost all the steps like strengthening the Border Security Force, strengthening the Police Force, etc. were all suppressive in nature. But we want to have a last and durable peace. For that, only suppression or oppression would not do. We should have an alternative.
">Now analogy between the two conflicting situations in two different countries may not be proper. But I would like to remind the House of what is happening in Northern Ireland today. Northern Ireland also has a bitter and historically deep rooted problem like us that we have in Kashmir. Their problem also started from the partition of their country. But what we have today. We find that Northern Ireland peace process has started. They are trying to untangle that conflict. We can take heart from what is happening there. I am sure, by now, the people of Kashmir are totally weary of violence and strife. If we can offer them a political approach of peace building, I am sure that they will cooperate with us. Let us try that. As Shri Rajesh Pilot was saying, cooperation and dialogue should be our key words and not conflict. We should see to that.
">Now, to create an atmosphere of peace, I should, first of all, request our Home Minister to ask the Army for gentler handling of civil problems. Sometimes, they are alleged of very hard handling. There should be gentler handling of civil problems. We know that some of the militant outfits, namely, Hizbul Muzahideen, Lashkar-e-Toiba, are fanatic groups and they are backed by Pakistan.
">But there are other groups which are not fanatic like that. They are dissidents. They are not particularly friendly to us at this point of time. But if we try, we can bring them back to the negotiating table. Instead of provoking them, why not try to talk to them? Just now my fellow MP from Kashmir said that they are amenable to dialogue with anybody. In that case, instead of putting the Hurriat people in Jodhpur jail, as an example I should say, if we can coax them to come to the negotiating table, we may achieve something. It is a suggestion which may be considered.
">In any dialogue, the Government of India should be there, the Government of Kashmir should be there and other militant outfits which are not blatantly pro-Pakistan can be roped in. This is a suggestion I seriously ask you to consider. Why am I saying this? I have already told you that I am inspired by what is happening in northern Ireland. Let us take the northern Ireland model. They are talking about multi-dimensional process. They are going in three strands. They are taking in the moderates like social democrats, they have also taken in the extremists like the Sinfin, which, as you all know, is the political wing of Irish Republican Army and which is very very militant. But they have roped in all of them and are trying to find a lasting peace.
">What I am appealing to the Home Minister through you Mr. Deputy-Speaker is that we should think of broadening the spectrum of negotiation and we should try to bring in as many strata of people as we can. It will be helpful in having a durable and lasting peace in Kashmir, I am sure.
SHRI K.A. SANGTAM (NAGALAND): Mr. Deputy-Speaker Sir, I am very glad that many of our colleagues who had no connection with insurgency in their States have been given the opportunity and they have expressed their concern. I come from Nagaland where the insurgency is at its height. If you look at the insurgency problem in the North-East, you will find that the genesis of this insurgency problem is from Nagaland. If you look at the history of this insurgency, in Nagaland way back in 1953, Mr. A.Z. Phizo started a political movement. In the year 1951 a plebiscite was carried out to find out whether the people would like to stay within India or not. That plebiscite proved that 99 per cent of people wanted to be outside India. Anyway, the Government of India sent troops to restore law and order.
">During this time it was a small district in Assam. But later on this was formed into the State of Nagaland. A section of people thought that their fundamental rights would be protected by remaining within the Constitution of India. So, a sixteen point agreement between the Naga people and the Government of India was reached. However, a section of people continued to struggle for independence and today the State of Nagaland is enshrined in article 371 (A) of the Constitution.
">In 1965-66 the then Prime Minister Shrimati Indira Gandhi had called an insurgent group led by the federal Government of NNC and they had six rounds of talks. But, unfortunately, due to some communication gap and misunderstanding, the talk was called off and the peace process was abandoned. However, in the mean time two factions emerged after a decade or so.
">These two factions consist of NSCN (IM) and the NSCN (K). Recently, the Government of India had started a dialogue with the NSCN (IM). It was started from the days of Shri P.V. Narasimha Rao, Shri Devegowda and even Shri I.K. Gujral. Recently, I believe, Shri Atal Bihari Vajpayee also had talks with these insurgent leaders in Paris.
">Well, look at the history of this insurgency. Had we taken proper measures in this regard, the insurgency would not have spread to the present scale. It has now spread not only to Nagaland but also to Assam, Tripura, Manipur, even Arunachal Pradesh and many other States. But, I think, we have to view this from a very important angle because many of the insurgents who are operating there now are actually educated groups. They have been well-educated and they are highly placed. They are getting Degrees and Post-Graduate Degrees. Some of them are even engineers and doctors who have not got jobs. Now, they have been forced into this kind of a situation.
">I am told that some of these insurgent groups are now sending arms and ammunition to other States Like Meghalaya even to rob the banks. When these arms are sent, the other group which does the operation gets 30 per cent of the loot and the 70 per cent of it is sent back to the parent body of the insurgent groups in Nagaland.
">Now, recruitment is taking place. The youth, who are jobless, who are educated and who are frustrated are given about Rs.30,000/- They are given the A.K.47 rifles and arms and ammunition. I think, if we look at this scenario, we have a very bleak future. It is not for Nagaland only but for the North-East and for the whole country.
">We have been taking this very lightly right from the beginning. I think we should take it very seriously. Wherever possible, we should see that economic development and rehabilitation of these youth is done. Wherever the State Government needs any help from the Centre, it should be given in full measure. Otherwise, a day will come when the entire North-East will be cut off. I think they may also go into revolt so that it will be a part of another country. But there is still time. If the Central Government takes serious measures in this regard, we can still contain this insurgency problem. I think we can also look into the matter in the development aspect also.
">I would like to point out that recently there was a news item in one of the leading newspapers. It was reported by the UNI on 30th November. It says:
">"The Banned United Liberation Front of Asom (ULFA) has specially trained guerillas to operate in the urban areas and sent them in groups to different towns in the State and neighbouring West Bengal, officials sources said.
">The Guerillas were trained by LTTE cadres at a camp set up in Deothang inside the jungles of Bhutan, sources said.
">The trained guerillas in groups, led by senior cadres, had already entered Nalbari, Bongaigaon, Kokrajhar and Dhubri in Assam and set up a base close to the tea gardens in Siliguri of West Bengal. The sources said and added that their main objective was extortion of money and ensure free movement for their cadres from the camps in Bhutan to Bangladesh.
">The sources also suspect that the trained guerillas might target VVIPs and important personnel of the State Government and plant bombs at public places."
">This is a very serious report. I think VVIPs mean those people who are siting here also. We should also think of the people who are in the rural areas. But the militants are now targeting the VVIPs. So, this is a very very serious thing. In the past, we had seen that Shrimati Indira Gandhi was killed by the militants. Then, again, Shri Rajiv Gandhi was also killed by the militants. What measures have we taken after that?
">Have we taken these things very seriously? Now, this report has come and I do not know how insurgency and militancy can be stopped. I think, our intelligence network should be strengthened and there should be a review of the internal security aspect. Then, we should also strengthen our armed forces.
">Sir, I come from Nagaland and I had fought the last two Lok Sabha elections from there. At the time of elections to the 12th Lok Sabha, there was a boycott call given by NSCN (IM), but I had taken the stand to be part of the mainstream. So, I had filed my nomination on the first day and then had gone for election campaign. During the election campaign, they targeted me, they wanted to kidnap me and finish me off. During the elections to the 13th Lok Sabha also, they wanted to do the same thing. But by the grace of God - I will not say because of the Army or anybody - I managed to escape from all these attempts. So, this is very serious. Today, I am left in this city without any escort and without any SPG security. There are students studying here coming from the North East who are part of the militants. It is very much clear in the intelligence reports. But nobody has ever asked me about my security and not even a single officer from the Home Ministry rang me up and asked me about my security arrangement. Nothing of the sort has ever happened. We may be from Bihar or Uttar Pradesh or Jammu and Kashmir or Nagaland, but we are all Indian citizens and we should be protected.
">Recently, the Chief Minister of Nagaland, Shri S.C. Jamir, was attacked by militants. He travels in a very unusual manner. But even his travel programme had been detected by the underground people. From this, it becomes clear now that they are well equipped. They have got the most sophisticated arms and ammunition with them. They have got AK-47, AK-56, M-16 and rocket launchers with them. They have got all sorts of weapons with them. Today, in the forenoon, I had put a question to the hon. Home Minister as to who were behind the attack on the Chief Minister of Nagaland and what measures have been taken by the Government to prevent such incidents. But the Home Ministry people have tried to evade my question, which is very shocking. They are not even prepared to give factual information to the elected Members like us who are representing the State. This is very serious.
">So, I would request the hon. Home Minister to take very strong measures possible in Nagaland and do whatever is possible to strictly observe all the terms and conditions of during the ceasefire. I am told that 300 people lost their life during ceasefire from August, 1987 to November, 1999. If ceasefire is there to give licence for the militants to kill the people, this is very serious. I do not say that there should be no ceasefire; ceasefire should definitely be there. But the officers of the Home Ministry who are monitoring the situation should take it very seriously. They should not treat it as a holiday trip to Nagaland. They should go to Nagaland and take stock of the situation each and everyday. They should also tell the other people that they should also not violate the ceasefire and they should try to have a dialogue with them. Just as late Shrimati Indira Gandhi had taken six rounds of talks, let the present Prime Minister also start talking not only with one faction of the militants, but with all those other factions who are now waiting to be called for a dialogue. I think, the Government should take it very seriously and try to have a very peaceful solution to the Naga political problem.
">SHRI BASU DEB ACHARIA : Mr. Deputy-Speaker, Sir, we were told that the Prime Minister will make his statement at 6.30 p.m. What had happened to that?
">MR. DEPUTY-SPEAKER: I am told that he would make it after this debate.
">डॉ. रघुवंश प्रसाद सिंह (वैशाली) : उपाध्यक्ष महोदय, सदन में बहुत संवेदनशील मामले पर बहस चल रही है। देश के वभिन्न हिस्सों में खासकर के जम्मू-कश्मीर और पूर्वान्चल के उत्तरी-पूर्व के हिस्सों में उग्रवाद और आतंकवाद या जो भी कहा जाए उसकी समस्या है वह एक राष्ट्रीय समस्या है। उस समस्या से निप्रटने के लिए हम और देश भर के लोग चन्ितत रहते हैं कि कैसे निपटा जाए कयोंकि बार-बार घटनाएं सुनने को मिलती हैं। अभी अकेले जम्मू-कश्मीर में हत्याओं की सूचना मिली, फिर डोडा जिला है वहां भी आतंकवाद से मारकाट होती रहती है, त्रिपुरा में भी मारकाट होती रहती है। नागालैंड के चीफ मनिस्टर पर आतंकवादियों ने हमला किया। संयोग से वे बच गए। मणिपुर में कूकी और नगाओं की समस्या है। वहां एथनिक समस्या भी है। कहीं-कहीं कोई विचारधारा की बात भी कहते रहते हैं। यह समस्या देश के वभिन्न हिस्सों में है।"> बिहार में भी कुछ जिले आतंकवाद से प्रभावित हैं। वहां भी एम.सी.सी, के.एम.एस.एस. आदि कई तरह के संगठन हैं जिसको हिंसा में विश्वास है और वह मार-काट करता है। आंध्रा में भी पीपुल वार ग्रुप भी यह कांड करता रहता है। यहां पर आई.एस.आई. की बड़ी चर्चा होती रहती है और उस पक्ष के लोग बड़े जोर से आई.एस.आई., आई.एस.आई. की चर्चा लोगों को धमकाने, डराने के लिए भी करते हैं। लेकिन आई.एस.आई. वाले काफी आ गये, यह किसकी विफलता है। कया यह सरकार की, ग्ृाह विभाग की जिम्मेदारी नहीं है? आई.एस.आई. का फैलाव कयों बढ़ गया? उसको कयों नहीं रोका गया? कड़ाई करने से कयों नहीं रोका गया? मैं कहना चाहता हूं कि इसको राजनीतिक दृष्िट से देखने से इस समस्या का समाधान नहीं होगा। हमें राजनीति से ऊपर उठकर इस पर ध्यान होगा कयोंकि यह राष्ट्रीय सुरक्षा का मामला है। इसमें हम कोई भी कोताही नहीं कर सकते। इसको सवर्ोच्च प्राथमिकता देकर हमें इसका हल निकालना करना चाहिए।... (व्यवधान)
अभी एक सांसद सदस्य श्री विनय कटियार के यहां से बम मिला है। वह राज्य सरकार की विफलता है कि बम रखने वाला व्यकित अबी तक नहीं पकड़ा गया। अगर वह बम फट जाता तो उसमें श्री विनय कटियार की म्ृात्यु हो जाती। यह ग्ृाह विभाग की विफलता है, इसे आई.एस.आई. ने किया या किसी अपराधी ने किया, किसने किया, इसका बयान सदन में नहीं आना चाहिए। यह राज्य सरकार का कसूर है या भारत सरकार का कसूर है? इसलिए यह सब छेड़ने की कोशिश मत करिये। हमने कहा कि यह राष्ट्रीय समस्या है और हमें इससे निपटना चाहिए। जब भी हिंसा की या मार-काट की वारदातें होती हैं उसमें आम जनता, निदर्ोष जनता, बेकसूर जनता मारी जाती है इससे कलेजा पिघल जाता है। यह एक संवेदनशील मामला है। इसको राजनीति से जोड़ देने से कहा-सुनी होगी। हम उसके लिए तैयार हैं। कहा-सुनी में देखा जाये कि किसकी कहां विफलता है और कहां गड़बड़ी है और कयों गड़बड़ी है। इसलिए हम साफ तौर पर कहना चाहते हैं कि राष्ट्रीय समस्या का समाधान इस तरह से आरोप-प्रत्यारोप, कहा-सुनी से नहीं होगा। माननीय आडवाणी जी ग्ृाह विभाग के मंत्री हैं। हम आपसे कहना चाहते हैं कि मलिटैंसी को हर सूरत में खत्म करने का प्रयास होना चाहिए। यह कहते हैं कि संविधान के अंदर साम दाम और दंड विभेद। समझाने की नीति, डराने की नीति और फिर दंड देने की नीति और विभेद करने की नीति को अख्ितयार करने से हम काबू पा सकते हैं नहीं तो देश टूट सकता है। उपाध्यक्ष जी, अभी बिहार में भी कुछ जिले आतंकवाद से ग्रस्त हैं। बराबर राज्य सरकार मांग करती है कि बी.एस.एफ. दो, सी.आर.पी. और पैरा मलिट्री फोर्स दो। यहां वहां से मांग होती है दस कंपनियों की और देते हैं दो कंपनी। इनकी विफलता नहीं है। सत्ता पक्ष के एक सदस्य कह रहे थे कि ठबिहार के आतंकवादी" घोषित कर दीजिए और उधर के लोग खुश हो रहे थे। हमें लगा कि शायद उधर के लोग संवेदनशील होंगे तो टोकेंगे। लेकिन कया गलत बात सदन में कही जा सकती है? बिहार आतंकवादी हो जाएगा तो कया हिन्दुस्तान बचेगा? नहीं बच सकता है। इसलिए इस तरह की ओछी हरकत से बचना चाहिए और इस सदन में इस तरह की गैर-जवाबदेही वाला सवाल नहीं उठाना चाहिए। हमें यह कहने की इजाज़त होनी चाहिए कि अपराध और आतंकवाद बढ़ने का यह भी कारण है कि वह स्वयं आतंकवादी है जो ज्यादा आतंकवाद के बारे में बोल रहा है। देश के वभिन्न हिस्सों में वधि-व्यवस्था की जो समस्या है, उसको फेस करना चाहिए और अपराध पर काबू पाना चाहिए लेकिन राजनीतिक द्वेष के चलते, राजनीतिक मतभेद के चलते इस तरह से किसी राज्य की छवि को बरबाद किया जाए, इसकी इजाज़त नहीं दी जा सकती और यह बर्दाश्त करने लायक भी नहीं है। लेकिन यहां पर बहस चलती रहती है। बात है राष्ट्रीय समस्या की कि देश के वभिन्न हिस्सों में आतंकवाद की समस्या है इसका समाधान होना चाहिए। उसमें विदेश के लोग घुसपैठ करवा देते हैं। अनेक सीमाओं में मुस्तैदी की कमी के चलते अथवा भोगौलिक कारण, सीमा विस्तार है, हर जगह पहरा नहीं बिठा सकते, वभिन्न रूपों में घुसपैठिए आ जाते हैं। पाकिस्तान ने हमला नहीं किया तो घुसपैठियों ने जमीन दखल कर ली। कई महीनों तक लड़ाई लड़ी गई। कारगिल के बारे में अपनी पीठ थपथपा रहे हैं। लड़ाई हमारी फोर्स ने की और पीठ ये थपथपा रहे हैं जैसे बहुत बहादुरी की है। मलिटैंटस कैसे आ गए? कया यह विफलता नहीं है? मलिटैंटस को कयों आने दिया गया? कड़ा पहरा कयों नहीं बिठाया गया?... (व्यवधान)
हमारा सुझाव है कि मलिटैंसी से सख्ती से निपटना चाहिए। नार्थ ईस्ट में आसाम में उग्रवाद, उल्फा आदि, त्रिपुरा, मणिपुर, नागालैंड में ये समस्याएं हैं। पहले गांव बूढ़ा की एक प्रथा थी। हर एरिया के एक बुजुर्ग व्यकित का सरकार, प्रशासन से ताल्लुक रहता था कि जनता की कया समस्याएं हैं, उनकी जानकारी होती रहती थी। उस प्रथा को लोगों ने खत्म कर दिया। गांव बूढ़ा वाली प्रथा लागू होनी चाहिए। यह सावधानी बरतनी चाहिए कि जनता की समस्या के समाधान को प्राथमिकता मिले नहीं तो मलिटैंटस के प्रभाव में भयवश अथवा भ्रमवश जब आम जनता आ जाती है तो किसी भी सरकार के लिए मलिटैंसी से मुकाबला करना और उसे समाप्त करना कठिन हो जाता है। यह सही है कि उसके कारणों का पता लगाना चाहिए और जनमानस की समस्याओं का समाधान करने की प्राथमिकता होनी चाहिए। जब जनता मलिटैंटस से भयभीत नहीं होगी तब मलिटैंसी को जड़ से समाप्त किया जा सकता है, यह हमारा दृढ़ मत है। लेकिन हम यह मानते हैं कि हिन्दुस्तान में हिंसा और मलिटैंसी की कोई गुंजाइश नहीं है। यह देश एक रहा है, एक रहेगा। लेकिन इस समस्या का समाधान करने के लिए हम सबको राजनैतिक मतभेद से ऊपर उठकर कार्य करना चाहिए। ग्ृाह विभाग को ज्यादा चौकसी बरतनी चाहिए ताकि मलिटैंसी को समाप्त किया जा सके। राज्य सरकारों को मलिटैंसी से निपटने में मदद देनी चाहिए। पंजाब में ८०० करोड़ रुपये की माफी हुई लेकिन जम्मू कश्मीर में कयों नहीं हो रही है। इस तरह से यदि भेदभाव की नीति अपनाई जाती है तो वहां गुस्सा बढ़ जाता है और जब गुस्सा बढ़ जाता है तो वह मलिटैंसी, अपराध का रूप ले लेता है। हमारे देश में जो हवाला कांड हुआ, लोग बता रहे हैं कि कोई उग्रवादी को खोजने गया था तो उसे डायरी या कागज मिल गई। जिस देश में मंत्री लोगों को मलिटैंटस से लाभ हो वहां समस्या का समाधान कैसे होगा।... (व्यवधान)
मलिटैंसी को राष्ट्रीय समस्या समझकर, राजनैतिक मतभेद से ऊपर उठकर, यदि वार्ता की कोई गुंजाइश हो तो वार्ता भी करनी चाहिए नहीं तो सख्ती से मलिटैंसी से निपटा जा सकता है। ग्ृाह विभाग को ज्यादा चौकस होने की जरूरत है और मलिटैंसी को समाप्त करने की जरूरत है। धन्यवाद।
MR. DEPUTY-SPEAKER: Shri Hannan Mollah.
... (Interruptions)
SHRI ANIL BASU (ARAMBAGH): Mr. Deputy-Speaker, Sir, we would like to know as to when the Prime Minister is going to make a statement. This is very important. As per the announcement, he has to make a statement. ... (Interruptions) What about the Leader of the House? ... (Interruptions)
MR. DEPUTY-SPEAKER: There are three or four Members to speak on this. I am told that the Prime Minister is coming.
... (Interruptions)
SHRI ANIL BASU : Is it not contempt of the House? ... (Interruptions)
">श्री हन्नान मोल्लाह (उलूबेरिया) : माननीय उपाध्यक्ष महोदय, यह एक बहुत गम्भीर समस्या है, इस पर मैं कुछ कहना चाहता हूं।"> ">पूवर्ोत्तर क्षेत्र में जिस तरह उग्रवाद की व्ृाद्धि हुई है, उसके बारे में अभी समर चौधरी साहब ने चर्चा की है और मैं उसमें ज्यादा कुछ बात नहीं कहना चाहता हूं। समर चौधरी साहब ने उसको बताया है। मैं सिर्फ होम मनिस्टर साहब को एक बात बताना चाहूंगा कि त्रिपुरा में जैसे पैरा मलिट्री फोर्स की जो भूमिका है, उसमें लोगों का उतना भरोसा नहीं है, इसलिए वहां असम राइफल्स के साथ ही उसकी हिफाजत से ही थोड़ा उसका मुकाबला करने की संभावना है। इसलिए यह जो मांग है, इस पर थोड़ा ज्यादा ध्यान दें तो त्रिपुरा का जो उग्रवाद है, उससे मुकाबला करने में थोड़ी सुविधा होगी।"> ">मैं सिर्फ जम्मू कश्मीर के सवाल पर २-४ बातें कहना चाहूंगा। इस समस्या के बारे में तीन घंटे विस्तार से चर्चा हुई। मैं उसमें नहीं जा रहा हूं, लेकिन उसके पीछे जो पिछले दिनों में चुनाव के बाद भी वह उग्रवाद कम हुआ, ऐसी बात नहीं है, उग्रवाद का काम उन्होंने जारी रखा है और पाकिस्तान जैसे देश की उनको जो मदद मिलती है, हमारी हिन्दुस्तान में जो उग्रवादी हैं, उसके साथ-साथ अन्तर्राष्ट्रीय ताकतों की साजिश भी उनके साथ है, एल.टी.टी.ई, एन.एस.सी.एल. या खालिस्तानी, कश्मीरी मलिटेंटस या तालिबानी, इन सारी ताकतों की जोड़-तोड़ करने की अन्तर्राष्ट्रीय साजिश भी है, इसको भी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। जैसा हमने सुना है कि अंडमान में जहाज से हथियार लाने की एक खबर आई थी, वैसे ही त्रिपुरा में आई थी, जैसी पुरुलिया में हथियारों का वर्षण हुआ था, वहां हथियार गिराये गये थे। तब तो यह बताया गया था कि यह आनन्दमार्िगयों के लिए नहीं आये थे, दूसरे उद्देश्य से आये थे, मगर सी.बी.आई. की इन्कवायरी रिपोर्ट में बताया गया कि आनन्दमार्िगयों के लिए आये हैं। इसी तरह बहुत सारे संगठन जो सक़िय हैं, बहुत सख्ती से इनके साथ मुकाबला करना जरूरी है। मगर कश्मीर की जो और समस्याएं हैं। आज कश्मीर में सबसे बड़ी समस्या मर्सीनरी की है, जो चार पांच छः हजार हैं या कितने हैं, कोई सही आंकड़ा तो मिलता नहीं है, मगर ये लोग इतनी मजबूती से लड़ते हैं कि एक-एक आदमी हमारे १०० फौजियों के साथ लड़ता है। यह बहुत खतरनाक तरीके से लड़ते हैं और अच्छी बात जो दिखाई दे रही है कि आम लोगों ने इससे मुंह मोड़ना शुरू किया है। इसके पीछे तेजी से इसका इस्तेमाल करना चाहिए। इसमें आम लोगों को तेजी से सहयोग देना चाहिए और जिसको पीपुल्स रेजिस्टेंस कहा जाता है, जनता का प्रतिरोध को किस तरह संगठित किया जाये, इसके बारे में योजना तैयार करना बहुत जरूरी है और इसके लिए होम मनिस्टर से राज्य सरकार मिलकर जनता को लामबन्द करके कि कैसे प्रतिरोध किया जाये, इसके बारे में कोई योजना तैयार करना बहुत जरूरी होगा। मगर साथ-साथ जनता के अन्दर जो भरोसा कम हो रहा है, इंस्टीटयूशंस से जो भरोसा उठ रहा है, सिकयोरिटी, सरकार या आर्मी का जो भरोसा है, वह भरोसा खत्म हो रहा है, इसको भी रैस्टोर करना चाहिए। इसको दोबारा स्थापित करने के लिए सरकार को समग्र बहुत ठोस कदम उठाने जरूरी हैं। मगर इसके साथ-साथ मैं २-४ बातें कहना चाहूंगा, कयोंकि जो वहां प्राब्लम है, उसमें समस्या पर नजर देना बहुत जरूरी है। आज कश्मीर सबसे ज्यादा आर्िथक संकट से गुजर रहा है। वहां सरकार कर्मचारियों को तनख्वाह नहीं दे सकती। कर्मचारी, शिक्षक हड़ताल पर चले जाते हैं, उनको पैसा नहीं मिलता है। यह एक बड़ी समस्या है, इस तरफ जैसे पहले मांग उठाई गई, आर्िथक समस्या किस तरह हल की जाये, इस पर पहले नजर देनी चाहिए।"> ">दूसरी बात है कि जितना पैसा जाता है, उसकी बड़ा हिस्सा करप्शन में चला जाता है। बार-बार यह सवाल उठता है, मगर कश्मीर में जो करप्शन है, एडमनिस्ट्रेशन में जो करप्शन है, भ्रष्टाचार है, उसको किस तरह दूर किया जा सकता है, उसके बारे में कदम उठाना चाहिए।"> ">जो फाइनेंशियल मिसमेनेजमेंट है, वह सरकारी है। उसको कैसे दूर किया जा सकता है, इस पर प्रोपर ध्यान रखना चाहिए। यह भी देखना है कि वहां विकास के सारे काम जो ठप पड़े हैं, कैसे चालू किए जाएं। इसलिए उनको दुबारा मजबूती से शुरू करना होगा। यहां पब्िलक सेकटर में कश्मीरियों को नौकरी देने की बात कही गई, राजेश पायलट जी ने भी कहा, यह ठीक है। इससे पूरे देश के अंदर एकता की भावना पैदा करने में मदद मिलेगी। इसलिए इस योजना को लागू करना चाहिए। कश्मीर के बहुत बड़े हिस्से में सुखाड़ है। इसकी वजह से आम जनता की जो परेशानियां हैं, उनको दूर करने के लिए सरकार ने अभी तक कोई ठोस कदम नहीं उठाए हैं। इससे जनता के अंदर जो निराशा पैदा होती है उससे भी उग्रवाद की जमीन तैयार होती है। मैं आपसे निवेदन करूंगा कि वहां जो आर्िथक, सामाजिक और शिक्षा की समस्या है, उससे निपटने के लिए ठीक ढंग से योजनाएं बनाकर लागू करे। तभी हम वहां आतंकवाद से मुकाबला कर सकते हैं और वहां की समस्याएं दूर कर सकते हैं। इसके साथ-साथ सख्ती का सूझबूझ कर आपको वहां प्रयोग करना चाहिए, जिससे जनता के अंदर बुरा असर न जाए। वहां की समस्याएं दूर करने के लिए कई बार यहां चर्चा हुई है, लेकिन अभी तक हम कामयाब नहीं हुए हैं। सभी राजनैतिक दल आपके साथ हैं। आप कोई ऐसा कदम उठाएं जिससे सभी लोग आपको समर्थन दें।"> ">SHRI RAJESH PILOT : There are 15 Members. We cannot complete today.
">MR. DEPUTY-SPEAKER: Let Shri Ramdas Athawale complete first.
">... (Interruptions)
">MR. DEPUTY-SPEAKER: Order please.
">श्री रामदास आठवले (पंढरपुर): उपाध्यक्ष महोदय, बहुत ही गम्भीर विषय पर चर्चा चल रही है। जम्मू-कश्मीर में बढ़ते हुए आतंकवाद को खत्म करने के लिए देश को और सांसदों को कया करना चाहिए, इसमें कोई राजनीति लाने की आवश्यकता नहीं है। आप जो आरोप लगा रहे हैं कि इन्होंने कुछ नहीं किया, तो हम भी देखने वाले हैं कि आप इस सम्बन्ध में कया करते हैं। मैं इसे पोलटिकल प्रेस्िटज न मानते हुए इतना ही कहना चाहता हूं कि जम्मू-कश्मीर हमारे देश का अविभाज्य घटक है। वहां की जनता भारत के साथ रहना चाहती है। वहां की जो मुस्िलम आबादी है, वह चाहती है कि हम भारत के साथ रहें। लेकिन उसके बावजूद वहां के कुछ लोगों को पाकिस्तान अपने यहां ले जाकर ट्रेनिंग देकर यहां भेज देता है, इसके बारे में ग्ृाह मंत्रालय को गम्भीरता से सोचना चाहिए। रक्षा मंत्रालय को भी इसके बारे में सोचने की आवश्यकता है कि वहां से लोग कैसे पाकिस्तान जाते हैं और फिर आतंकवाद की ट्रेनिंग लेकर कैसे यहां वापस आते हैं। कारगिल प्रकरण में पूरी दुनिया ने देखा कि हमारे देश की मलिटरी ने कितने अच्छे ढंग से उसमें सफलता पाई। कारगिल इश्यू पर आप लोग सत्ता में आए, यह ठीक बात है। आपने चुनाव के समय लोगों में जाकर कहा कि कारगिल में जो काम आपने किया है, वह कोई नहीं कर सकता था। इस तरह की बात आपके मन में अब भी आ रही है। आप लोगों के बीच गए इसलिए हमसे ज्यादा वोट आपको मिल गए। कारगिल इश्यू को भारतीय जनता पार्टी और उसके सहयोगी दलों ने एक राजनीतिक इश्यू बना दिया।"> ">वोटों को आप इशू बना रहे हैं। आप समझाने का प्रयत्न कर रहे थे, लेकिन हम समझाने में थोड़ा कम पड़ गए, लेकिन इसके बाद ऐसा होने वाला नहीं है। जम्मू-काश्मीर के बारे में हमारे मित्र बोल रहे थे, आपकी सैकयुलर पार्टी थी, आपकी सैकयुलर पार्टी होने बाद भी हम फारुख अब्दुल्ला के बारे में बचपन से सुनते थे कि सैकयुलर आदमी है। हम १९९८ से देख रहे हैं, आप लोग वहां जा चुके हैं। ठीक बात है, मंत्री पद चाहिए और वहां जाना भी चाहिए। लेकिन वहां सैकयुलर नान-सैकयुलर कैसे बन गया। उपाध्यक्ष महोदय, प्रधान मंत्री जी आ गए हैं, कया मैं अपना भाषण खत्म करूं? मैंने उपाध्यक्ष महोदय को बोला था, जब तक आदरणीय प्रधान मंत्री जी सदन में नहीं आते हैं, तब तक मैं बोलता रहूंगा। आप मुझे बैठाने का प्रयत्न करेंगे, तो भी मैं बैठने वाला नहीं हूं, प्राइम मनिस्टर के आने के बाद ही मैं बैठूंगा।"> ">मैं आपको बता रहा था, जम्मू-काश्मीर के बारे में आपको ज्यादा गम्भीरता से सोचने की जरूरत है। हमारे मुम्बई में भी गैंगवार बढ़ रही है, इस गैंगवार को समाप्त करने की आवश्यकता है। ट्राइबल क्षेत्रों में नकसलाइट मूवमेंट चल रहा है। इनको आर्िथक सपोर्ट देने की आवश्यकता है और उनकी समस्याओं को देखने की आवश्यकता है। मैं आशा करता हूं, प्रधान मंत्री जी आपकी सरकार इन सब बातों को देखेगी। मैं ऐसा समझता हूं और अगर आपकी सरकार नहीं करेगी, तो हम लोगों को विचार करना होगा।"> ">श्री मोहन रावले (मुम्बई दक्षिण-मध्य) : उपाध्यक्ष महोदय, श्री विलास मुत्तेमवार और श्री राजेस पायलट जी ने राष्ट्रीय सुरक्षा और देश के वभिन्न भागों विशेषकर पुवर्ोत्तर और जम्मू-काश्मीर में, आतंकवाद बढ़ने के संबंध में चर्चा को सदन में उठाया है और चिन्ता जताई है। सारे सदन ने कहा है कि सबको एक दिलसे और मिलकर मुकाबला करना चाहिए। हम इस बात में राजनीति नहीं लाना चाहते हैं। मैं आपसे विनती करना चाहता हूं, हमें ऐसा वकतव्य नहीं देना चाहिए, जिससे हमारे नौजवानों का मनोबल घट जाए। प्रधान मंत्री जी सदन में उपस्िथ हैं, उन्होंने साउथ-ब्लाक मे"> ">तीनों सैनाओं के सामने भाषण दिया था।"> १९२३ बजे (अध्यक्ष महोदय पीठासीन हुए) उन्होंने कहा था कि काश्मीर घाटी में अघोषित युद्ध शुरू हुआ है। अनेक आतंकवादी संगठनों का सहारा लेकर बार-बार सिकयोरिटी के लोगों के ऊपर हमले किए जा रहे हैं। मैं आपको बताना चाहता हूं, १३ जुलाई को वाडीयार मेंDIG कार्यालय पर हमला हुआ; ६ अगस्त को कुपवाड़ा में फौजी कैम्प में पांच हत्यायें हुईं; ७ अगस्त को कुपवाड़ा में ब्रिगेडियर बलबीर सिंह समेत चार फौजियों की हत्यायें हुईं; २० अकटूबर को श्रीनगर में सचिवालय में हमला हुआ; २८ अकटूबर को श्रीनगर सचिवालय में तीन कर्मचारियों की हत्या हुई; ३ नवम्बर को बादामी क्षेत्र में मेजर सहित सात कर्मचारियों मारे गए। हिजबुल मुजाहिदीन, जमायते इस्लामी, हरकत-उल-अंसार, अलबर्क इन सबके लिंक जनरल मुशर्रफ परवेज से हैं। मैं माननीय प्रधान मंत्री जी और ग्ृाह मंत्री से जानना चाहता हूं कि कया आपको ऐसे संकेत मिले हैं कि तीन हजार से ज्यादा आतंकवादी आधुनिक हथियारों के साथ अफगानिस्तान से लादेन ने भेजे हैं। इस बारे में आपके द्वारा सदन को जानकारी देने की आवश्यकता है कि ऐसे संकेत आपको कब मिले हैं। मैं माननीय मंत्री जी से जानकारी देने के लिए विनती कर रहा हूं। ईस्टर्न कंट्री के बारे में यहां चर्चा हुई। महोदय, हम राजनीति नहीं लाना चाहते हैं लेकिन आज बहुत खतरा पैदा हो गया है। आज हिन्दुस्तान में कितने बंग्लादेशी लोग हैं। १९७१ में जवानों ने अपनी वीरता से हमें विजय हासिल कराई लेकिन उसी सरहद पर हमारी राजनीति की कुर्बानी हो गई। हिन्दुस्तान में करोड़ों बंग्लादेशी आए, उनको बाहर निकालना मुश्िकल हो रहा है। मणिपुर, असम, मेघालय, अरूणाचल, त्रिपुरा आदि जगहों पर बंग्लादेशी इतने बढ़ गए हैं, जिससे हिन्दुस्तान के लिए खतरा पैदा हो गया है। महोदय, वे १५ अगस्त से पहले वहां १५ दिनों तक बम फोड़ते रहे। हिन्दुस्तान को अलग करने के लिए साजिशें की गईं। आईएसआई को बंग्लादेशी और चाइना, सब बढ़ावा दे रहे हैं। म्यांमार के द्वारा प्रशिक्षण दिया जाता है। कश्मीर घाटी में प्रशिक्षण दिया जाता है। वहां जो लोग आए, आतंकवादी आए, हम सरकार से पूछना चाहते हैं कि कितने आतंकवादी आए। हिन्दुस्तान को कितना खतरा है, कयोंकि यह सीरियस बात है। इसमें सारा सदन एक हुआ है, यह खुशी की बात है। जब हमारे खिलाफ और आपके खिलाफ भी बोल रहे थे तो मैंने खुद कहा कि आप यहां राजनीति न लाइए। आज यहां लोग बहुत बोल रहे हैं। आप कश्मीर के बारे में बहुत बोल सकते हैं। कश्मीर कैसे चलेगा, हम सदन को बता सकते हैं लेकिन जब वकत आएगा, अगली बार चर्चा होगी तो हम बताएंगे कि किस की वजह से कैसे राजनीति हुई, जिससे कश्मीर हमारे हाथ से चला गया।... (व्यवधान) एक माननीय सदस्य : कहां चला गया?... (व्यवधान) श्री मोहन रावले :चला नहीं गया, लेकिन चले जाने की संभावना आपने पैदा कर दी है।... (व्यवधान)
हमारे हाथ से कभी नहीं जा सकता।
... (व्यवधान)
आजाद कश्मीर किस ने दिया, जो आजाद कश्मीर है वहां इन लोगों को ट्रेनिंग दी जाती है। हमने पढ़ा था, जानकारी देंगे तो अच्छा होगा। ४० ऐसे सेंटर्स हैं, जहां ट्रेनिंग दी जाती है। उनको प्रशक्षित करके उन्हें यहां भेजा जाता है। महोदय, असम के बारे में बहुत से लोगों को चिन्ता है, मैं आपसे विनती करता हूं कि असम के बारे में कुछ हल निकालें। हम असम में एक बार गए थे तो हमने असम में लोगों से पूछा, वे यहां रहना चाहते हैं। उल्फा के लोगों को आईएसआई द्वारा वहां आतंकवाद बढ़ाने के लिए प्रशिक्षण दे रहे हैं। लोग कहते हैं कि हमारे पास पैसा नहीं है। केन्द्र सरकार ने करोड़ों रुपया दिया, तब किस का राज था, सब को पता है। लेकिन वह पैसे लोगों तक नहीं पहुंचे। विलास जी ने बताया कि ६४,००० करोड़ रुपए कश्मीर में सेना के लिए और सब के लिए खर्च करेंगे। कश्मीर के विकास के लिए करोड़ों रुपया केन्द्र सरकार की तरफ से गया, लेकिन वह लोगों तक नहीं पहुंचा, इसके बारे में चिन्ता होनी चाहिए। इन्होंने बताया कि अंडरवर्लड के लोग इसका फायदा ले रहे हैं। मुम्बई शहर में बम विस्फोट हुए थे। हम प्रधानमंत्री जी का आदर करते हैं, उन्होंने लाहौर की बस यात्रा शुरु की। दाऊद इब्राहीम ने मुंबई में १२ बम बिस्फोट किए थे। आप चाहें तो मैं उनका मोबाइल नम्बर दे सकता हूं। मैं विदेश मंत्री जी का बहुत आदर करता हूं। जब कांग्रेस की सत्ता थी तो उसे लाने के लिए अपील की थी, तब उसे लेकर कयों नहीं आए?... (व्यवधान)
२८४ लोग मारे गए। महोदय, मैं सरकार को बधाई देना चाहता हूं, जो हमारे जवानों ने युद्ध करके वहां जीत हासिल की, लेकिन राजनीति की लड़ाई वाजपेयी जी की सरकार ने जीती है। हमने पाकिस्तान को अलग रखने के लिए, हथियार न देने के लिए जो राजनीति की, उसमें हम सफल रहे।... (व्यवधान)
पाकिस्तान आईएसआई द्वारा गतवधियां बढ़ा रहे हैं। ... (व्यवधान) इससे पहले कांग्रेस की सरकार थी। पाकिस्तान को आप टैरेरिस्ट स्टेट घोषित कयों नहीं करवाते हो। मैं जानना चाहता हूं कि आप ऐसा कौनसा प्रयास कर रहे हो जिससे पाकिस्तान आतंकवादी स्टेट घोषित हो जाए। माननीय विलास जी, मैं आपको बताना चाहता हूं कि अटल जी के प्रधान मंत्री बनने से पहले कुल १४६४९ घटनाएं हुईं। लोगों पर और सुरक्षा बलों पर १७००० हमले हुए और इसमें १७८६० लोग मारे गये। हमारे प्रधान मंत्री जी के बनने के बाद १९९८ में कुल ५५१ घटनाएं हुईं, २०१ हमले सुरक्षा बलों पर हुए और ३६१ लोग मारे गये। पायलट जी, आपने विलास जी ने और सारे सदन ने इन पर चिंता व्यकत की है। हमारे प्रधान मंत्री जी के पीछे और हमारी सरकार के पीछे सारा सदन है। मेरी विनती है कि प्रधान मंत्री जी इस बारे में कड़ी से कड़ी कार्रवाई की जाए जिससे लोगों को लगे कि हम इस सरकार के साये में सुरक्षित हैं। ">श्री भान सिंह भौरा (भटिंडा) : अध्यक्ष महोदय, नॉर्थ ईस्ट और जम्मू-कश्मीर में बढ़ते हुए आतंकवाद पर बहुत देर से बहस हो रही है। आतंकवाद के बढ़ने का कया कारण है? दूसरे लोगों ने चाहे इसे न देखा हो लेकिन पंजाब वालों ने आतंकवाद का मुकाबला किया। हमें वह दिन याद आता है जब आतंकवादी बहू-बेटियों को उठा कर ले जाते थे। उस समय हमारा दिल दहल जाता था। हम वह दिन अभी भी नहीं भूले जब बड़े-बड़े सरदार गांव छोड़ कर शहरों में चले गए। बहुत से लोग महीना देते थे। हम उस समय सोचते थे कि पंजाब में कया हो गया है? इस समय बातें इधर-उधर करने की नहीं हैं। आतंकवादियों ने २५ हजार पंजाबियों को मौत के घाट उतार दिया था।... (व्यवधान)
"> ">SHRI BASU DEB ACHARIA (BANKURA): Sir, the Home Minister should reply tomorrow.
">MR. SPEAKER: Yes, the reply is tomorrow. Today, we want to complete all the speeches.
">SHRI BASU DEB ACHARIA : Thank you, Sir. ">श्री भान सिंह भौरा : पंजाब में जो कुछ हुआ, उसके बारे में सब जानते हैं। जरनैल सिंह भिंडरावाला का कांग्रेस पार्टी ने इस्तेमाल किया। जब अकालियों में दरार पड़ गई, उसके बाद अकालियों ने उसका इस्तेमाल किया। जब पता लगा कि वह न कांग्रेसियों का था और न ही अकालियों का था तो दोनों ने उसका साथ छोड़ दिया। आतंकवाद के खिलाफ सख्ती से निपटा जाए। उन्होंने पंजाब को नुकसान पहुंचाया। इसे भुलाया नहीं जा सकता। पंजाब सरकार अपनी नीति तबदील करे। ढिंडसा साहब बैठे हैं। प्रकाश सिंह बादल तीन साल अमेरिका नहीं गए। उन्होंने डरते हुए पंजाब के इलैकशन में हिस्सा नहीं लिया। उनकी इलैकशन लड़ने की हिम्मत नहीं पड़ी। हम देख रहे हैं कि आतंकवादियों के बड़े-बड़े सरगना जैसे दीदार सिंह संधू जो अमेरिका में रहते हैं, वह आतंकवादियों को बाहर से मदद देते हैं। पंजाब सरकार उसे स्टेट गैस्ट बनाती है। मैं जब यह देखता हूं कि मेरी आंखे खुलती हैं। उसे आनन्दपुर साहब में स्पैशल स्टेटस दिया जाता है। ऐसे आदमियों को प्रश्रय देंगे तो आतंकवाद का मुकाबला नहीं कर पाएंगे। केन्द्र सरकार इस बारे में नीति बनाने के लिए इधर-उधर न देखे। पंजाब का भला होना चाहिए।"> ">MR. SPEAKER: It is not necessary. ">शहरी रोजगार और गरीबी उपशमन मंत्री (श्री सुखदेव सिंह ढिंडसा) : इन्होंने पंजाब सरकार पर यह इल्जाम लगाया कि दीदार सिंह बैस जो अमेरिका में है, वह आतंकवादी है। कभी भी उसका कहीं ऐसे नाम नहीं आया और न ही उसने ऐसा कोई काम किया। वह अमेरिका की शिरोमणि अकाली दल का प्रेजिडैंट है। जो आदमी यहां नहीं है, उस पर ऐसा इल्जाम लगाना गलत बात है। ऐसी बात नहीं होनी चाहिए।... (व्यवधान)
"> ">श्री भान सिंह भौरा : वह सहायता और रुपया देता हैं। आतंकवादियों से लड़ने के लिए कभी सियासत का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। अगर देश का भला चाहते हैं तो आतंकवाद के खिलाफ लड़ने के लिए एक नीति बनाएं और इससे सख्ती से निपटें। पंजाब में बहुत से आतंकवादियों को इसलिए छोड़ा गया कि पुलिस ने उनसे काम लिया था। एक आतंकवादी ने कत्ल किया, उसे पकड़ लिया गया। उसने दूसरे आतंकवादी को पकड़वा दिया। फिर उसे भी छोड़ दिया गया। ढिंडसा साहब, ऐसे पंजाब में सैकड़ों आतंकवादी हैं जिन को पुलिस ने इसलिए छोड़ा कि वह उनकी मदद कर रहे थे। वे फिर से आतंकवादी न बनें, ऐसा प्रयास करना चाहिए और नीति बनानी चाहिए। अभी भी गांवों में लोगों के पास हथियार हैं। आप एक स्पैशल मुहिम चलाएं। बहुत से आतंकवादियों के पास हथियार मिलेंगे। अगर किसी को खुश करने के लिए ऐसा करेंगे कि वह हमारे पास आ गया तो अपना हो गया।"> ">जब उसके खिलाफ है तो वह हमारा नहीं है। ऐसा नहीं होना चाहिए। जो आतंकवादी है, उसको आतंकवादी ही समझा जाना चाहिए। तभी आप इसका मुकाबला कर सकेंगे नहीं तो इसका मुकाबला नहीं हो सकेगा। इसलिए मैं सरकार को अपील करूंगा कि आप बातें तो बहुत कर रहे हैं मगर कांग्रेस वालों से सीख लीजिए। १९८० से लेकर १९८२ तक जो इन्होंने व्हाइट पेपर जारी किया है, १९८४ के बाद उसमें कितनी मीटिंगें की गईं? जो आतंकवादी थे, उनके साथ बातें की गईं। अकालियों के साथ सरकार में बातें की गईं, पर आखिर कया करना पड़ा? उसका कोई लाभ नहीं हुआ। यह बातचीत करने का सिलसिला लंबा करते जाएंगे तो आतंकवाद को बढ़ावा देने का काम आप करेंगे। इसलिए मैं आपसे गुजारिश करता हूं कि आतंकवाद से लड़ने के लिए सभी पार्िटयों का सहयोग लेकर एक ठोस नीति बनाइए, जिन स्टेटों में बेरोज़गारी हैं, उनको पैसा दीजिए। बेरोज़गारी एक मुख्य कारण है आतंकवाद का। दूसरी पोलटिकल पार्िटयों को इकट्ठा करके आप आतंकवाद विरोधी नीति बनाइए, तभी आप इसका मुकाबला कर सकेंगे।"> ">इन्हीं शब्दों के साथ मैं आपका धन्यवाद करता हूं।"> ">श्री जोवाकिम बखला (अलीपुरद्वारस) : माननीय अध्यक्ष जी, राष्ट्रीय सुरक्षा एवं हमारे देश में आतंकवाद की जो समस्या दिखाई दे रही है, इस विषय पर चर्चा करने के लिए आपने मुझे बोलने का जो अवसर प्रदान किया है, इसके लिए मैं आपको धन्यवाद देना चाहता हूं।"> ">आतंकवाद किसी पार्टी की समस्या नहीं है, किसी संप्रदाय की समस्या नहीं है, लेकिन राजनीति से ऊपर उठकर हमें देखना चाहिए कयोंकि राष्ट्र की सुरक्षा के लिए यह बहुत बड़ा खतरा है। राजनीति से ऊपर उठकर अगर हम आतंकवाद को समाप्त करने की कोशिश नहीं करेंगे और सभी प्रदेशों के लोगों की सहायता लेकर आम जनता को अपने विश्वास में लेकर हर प्रदेश के लोगों से सहयोग की प्रार्थना अगर हम नहीं करेंगे तो आतंकवाद की समस्या का समाधान संभव नहीं होगा। चाहे वह जम्मू-कश्मीर की समस्या हो, चाहे वह पूवर्ोत्तर राज्यों की समस्याओं का हल ढूंढने का प्रयास कयों न हो, लेकिन आम जनता की जो आर्िथक समस्याएं हैं, बुनियादी समस्याएं हैं, उनका हल ढूंढने का जब तक हम प्रयास नहीं करेंगे, तब तक आतंकवाद का ठीक से मुकाबला नहीं कर पाएंगे। आर्िथक विकास के साथ साथ हमें राजनैतिक समाधान करने के बारे में भी चिन्तन करना चाहिए। राजनैतिक समाधान के तरीके निकालने पड़ेंगे। हर पार्टी के नेताओं को, हर वर्ग को ऐक़ॉस द टेबल लाकर डायलॉग करने की आवश्यकता है। नॉर्थ ईस्ट में जो लोग हैं, जो आतंकवाद की चपेट में आ गए हैं, उनकी बुनियादी समस्याओं को जानने की आवश्यकता है। तभी हम इस समस्या का मुकाबला कर सकेंगे। इसलिए मैं सदन के सभी सदस्यों से एवं ग्ृाह मंत्री जी से निवेदन करना चाहता हूं कि हमें किसी दल के ऊपर दोषारोपण नहीं करना चाहिए कि इस दल की जब सरकार थी, उस समय इस समस्या का समाधान नहीं हुआ और समस्या बढ़ती चली गई। लेकिन किसी दल के ऊपर दोषारोपण करने की बजाय हम सभी मिलकर इस समस्या का समाधान करने के लिए कोशिश करें। पूवर्ोत्तर राज्यों से मेरे नज़दीकी संबंध हैं। जब मैं सर्िवस कर रहा था, तब मैंने नज़दीक से वहां के लोगों को देखा है। वहां के लोग बहुत सीधे हैं और मात्ृा-प्रधान संस्कृति वहां के कुछ राज्यों में है, वहां महिलाओं का सम्मान बहुत ज्यादा है। इसलिए महिलाओं को भी विश्वास में लेने की आवश्यकता है। युवा पीढ़ी को भी विश्वास में लेने की आवश्यकता है ताकि हम उनको गलत रास्ते पर जाने से रोक सकें।"> ">आज जो हम एक दूसरे पर दोषारोपण करने की कोशिश करते हैं। हमें इस रास्ते को छोड़कर समस्या का सही समाधान करने की दिशा में प्रयास करना चाहिए। अध्यक्ष महोदय, मैं आपके माध्यम से यही निवेदन विशेष रूप से प्रधान मंत्री जी और ग्ृाह मंत्री जी से करना चाहता हूं। इतना ही कहकर मैं अपना वकतव्य समाप्त करता हूं।"> SHRI ADHIR CHODHARY (BERHAMPORE, WEST BENGAL): Mr. Speaker, Sir, thank you for giving me this opportunity to speak. Today, we are dwelling on such a sensitive issue which concerns us all. There are so many political stalwarts here in this House who have already participated in this debate ventilated their views. I would just like to add a few lines to that.
">Sir, I would like to confine my speech to the Kashmir issue only. As far as Kashmir is concerned, we do always nurtured a great emotional attachment to it. I firmly believe that Kashmir is an integral and inseparable part of India. For thousands of years, it has been a part of our vision. This is a sacred land where Hazratbal, Amarnath and so many religious places are situated. In this land all kinds of religious and cultural thoughts had flourished without being interrupted and found home.
">Sir, for generations, millions of people, from across the world, have been captivated by this serene and picturesque land. Therefore, whenever we visualise Kashmir it comes to us an emblem of peace, an epitome of beauty, as a heaven on the Earth and as a crown of Mother India. But the moment we face the ground realities in Kashmir we get shocked and confounded. It is deplorable to note that that very land has been turned into a hot bed of militancy; a cradle of death and a breeding ground of fundamentalism. Therefore, we cannot afford ourselves to be complacent over Kashmir.
">Sir, militancy in Kashmir owes its genesis way back to the 1971 Indo-Pakistan war. In that war Pakistan was defeated and as a sequel to that war Bangladesh got liberated from the yoke of the coercive regime of Pakistan. Since then, in retaliation to the humiliating defeat at the hands of the Indian Army, Pakistan has been hatching conspiracies against India. Under the nomenclature of Operation Gibraltar, Operation K-2 and Operation TOPAC, Pakistan has been waging a low-intensity warfare against us.
">Therefore, in this regard I would like to recall a statement made by the Prime Minister of India, our departed leader, the late Indira Gandhi. When she was asked to comment on the Indo-Pak war, she replied:
">"The war and the victory of Bangladesh is not the victory of Bangladesh alone. All countries that attach values to the dignity of human soul must welcome the victory as a milestone in man"s march towards freedom".
">In the same breath she also exhorted us not to be complacent and to be ever vigilant on Kashmir.
">Sir, there is no denying the fact that in the wake of Pokhran II nuclear explosions we began to live in a hallucinatcny world which led us to believe that Pakistan would no longer be able to wage a war against us.
">Sir, the bus diplomacy, the Lahore Declaration had generated a false sense of confidence which was percolated down to our body polity as a result of which we were caught unawares at the Kargil sector and we witnessed that a battle was fought in the mountains over Kargil. That battle is history"s first direct combat between two nuclear powers.
">I repeat that there is no room for complacency as far as militancy in Jammu and Kashmir is concerned. If we observe carefully the evolution of militancy in Jammu and Kashmir, we may come to the conclusion that it has graduated from the liberal phase to extremity, from extremity to insurgency, from insurgency to proxy war, and from proxy war to Kargil war, I mean, Kargil conflict according to official jargon.
">We get depressed that in spite of taking measures, there is no respite in militancy. Arson, looting, mayhem, murder, rape, rocket-launching, grenade-throwing are all daily incidents affairs in Kashmir. Infiltration is rampant there. Violence is continuing unabated. Massive exodus from exchequer have been squandered away on reinforcement of security network in Kashmir. However, not even a semblance of peace is in the offing. We know that thousands of Kashmiri pandits have either been killed, or perished, or fled away. I would like to ask a specific question to hon. Home Minister. What measures has he taken to rehabilitate those Kashmiri pandits who are living in despair?
We have to admit that Kashmir is centre of both country"s identites. There is no denying that fact. We shall be living in a fools" paradise if we ever believe that Pakistan will sincerely be eager to making peace with India. Pakistan will never snap off ties with insurgents because it is their strategy that the longer the valley is held by brute force, the more convincing the rationale of partition would seem. Anti-Indianism is the mainstay of politics in Pakistan. No ruler whosoever can survive in that country without maintaining hostility towards India.
The Army is in the saddle now in Pakistan. Nuclear trigger is just a few inches away from the Army General there. In the wake of Kargil conflict, the militancy in the Valley is being revamped and refurbished by the Army General. Thousands of dreaded militants under the banner of Lashkar-e-Toiba are being released with a view to destabilize India so that India could be torn apart and India could be bled to death. This is the single objective of the Pakistani politics.
I would say that there will be no safety of either State without stability in Kashmir. And there will be no stability in Kashmir without the cooperation of people. Intensive interaction with the local people is an imperative without which we cannot achieve our desired goal. Kashmir problem cannot be solved without the support of the local people. It cannot be solved by coercing them into submission.
My last point is, as far as Kashmir is concerned we shall be suffering from political myopia if we regard it as an endemic phenomenon. I would rather say that it is a pandemic one.
Sir, the Kashmiri struggle has been Islamisized and the increased Islamization of Kashmiri struggle has undermined both Kashmiri demand of self-determination from India and Pakistan"s bid to win international mediation on this dispute.
Therefore, I would suggest and request the hon. Home Minister to have a constructive dialogue with all those countries in the world who are suffering from the same disease. We cannot depend only on America. In fact, America is the chief architect of fundamentalism in this sub-Continent. In the American view, red phobia is being disappeared and the green phobia is being appeared in the world"s political spectrum.
With these few words, I conclude my speech.
">श्री ब्रहमानन्द मंडल (मुंगेर) : अध्यक्ष महोदय, आपने मुझे अपनी बात रखने का समय दिया, इसके लिए मैं आपको धन्यवाद देता हूं। चूंकि यह सुरक्षा से संबंधित मामला है, इसके बुनियादी या जड़ रूप की ओर ध्यान देना होगा। आज पूरे भारत में, पूर्ववर्ती भारत में, कश्मीर में, बिहार में, उत्तर प्रदेश में आई.एस.आई. द्वारा आतंकवाद और उग्रवाद की गतवधियां चलती हैं। मैं समझता हूं कि सरकार और सभी राजनीतिक पार्िटयों को इस पर गंभीरता से सोचना चाहिए कि यह एक बुनियादी सवाल है, समस्या है इसको कैसे जड़ कहां है और इसको कैसे हल होना चाहिए। सबसे पहले मैं कश्मीर की समस्या के बारे में कहना चाहता हूं। पाकिस्तान लगातार कह रहा है कि जब तक कश्मीर की समस्या का निदान नहीं हो जाता है तब तक हम यह गतवधियां जारी रखेंगे और उसके लिए जो आतंकवाद को समर्थन देना पड़ेगा, वह हम देंगे। तब कश्मीर समस्या का हल कैसे होगा? मुझे याद है कि १९६५ के युद्ध के बाद ताशकंद समझौता हुआ था। जब शास्त्री जी प्रधान मंत्री थे, उस समय ताशकंद समझौता हुआ था। उसमें कहा गया था कि उसी समझौते के आधार पर बातचीत होगी। १९७१ की लड़ाई में जब हम जीते तो शिमला समझौता हुआ और यह कहा गया कि उसी समझौते के आधार पर बातचीत होगी। अभी वर्तमान प्रधान मंत्री जी ने लाहौर यात्रा की और एक समझौता हुआ। उसी समझौते के आधार पर बातचीत होगी लेकिन उस समझौते के आधार कया हैं? शिमला समझौते में कया है? ताशकंद समझौते में कया है? कश्मीर से संबंधित एक अंतर्राष्ट्रीय रेखा है और दूसरी नियंत्रण रेखा है। मुझे याद है, इसी पार्िलयामैंट में दो-तीन बार यह पास हो चुका है कि पूरा कश्मीर हमारा है और हम कोई समझौता नहीं कर सकते हैं। लेकिन जब कारगिल का युद्ध हो रहा था, उस समय कश्मीर के मुख्यमंत्री श्री फारूख अब्दुल्ला का बयान आया। मैंने उसे देखा था। उन्होंने कहा था कि समझौते में नियंत्रण रेखा को मान लेना चाहिए। इसका अर्थ यह होता है कि जो कश्मीर अभी पाकिस्तान के पास है, वह पाकिस्तान के पास रह जायेगा और जो हिस्सा हमारे पास है, वह हमारे पास ही रह जायेगा। कया इस सवाल पर आप देश में बहस चला सकते हैं? हिन्दुस्तान की जनता को इस बात के लिए तैयार कर सकते हैं? इस पर हमें सोचना चाहिए कयोंकि यह सभी राजनीतिक दलों का सवाल है। और देश का हित इससे जुड़ा है आप इस आधार पर हिन्दुस्तान की जनता को तैयार नहीं कर सकते हैं और अगर कर सकते हैं तो जनता को बताना चाहिये। तब कौन सी वार्ता है, कया बातचीत होगी? पाकिस्तान तो कह रहा है कि कश्मीर की समस्या का निदान नहीं होगा। आतंकवाद और कश्मीर को अलग करने वाली शकितयों को नैतिक और भौतिक समर्थन जारी रखेंगें। २०.०० ण्द्धद्म. ">राष्ट्रीय स्तर पर, अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर और उनकी अपनी जो स्िथति है, उनके यहां भी सबसे बड़ा सवाल यह है कि वे सरकार में कैसे आते हैं और जाते हैं। इसलिए कश्मीर समस्या बनी रहनी चाहिए, यह उनके लिए भी जरूरी है। लेकिन हमारे देश के लिए बहुत घातक हो रहा है। यहां प्रधानमंत्री जी हैं और ग्ृाह मंत्री जी भी हैं। कांग्रेस के यहां जो बड़े नेता हैं, मैं खासकर उनसे निवेदन करूंगा कि यदि सही मायने में यह चाहते हैं कि इस देश में कश्मीर की समस्या का निदान हो तो उससे बहुत से मामले तय हो जाएंगे। सभी दलों को एक होकर, इसमें राजनीति नहीं करनी होगी, यह फैसला करना होगा। तब आप वार्ता में जाएंगे तो कुछ हासिल हो सकता है।"> ">डा. लोहिया ने कहा था कि राजनीति अल्पकालीन धर्म है और धर्म दीर्घकालीन राजनीति है। मेरी समझ में यह बात नहीं आती कि इसका कया अर्थ होता है। मैं कभी-कभी जब यह सोचता हूं कि यदि धर्म का बहुत व्यापक अर्थ लगाया जाए तो मनुष्य के जो मानवोचित्त गुण होते हैं, वही धर्म है, पूजा-पाठ, मंदिर-मस्िजद यह सब नहीं है। लेकिन जब पूजा-पाठ, मंदिर-मस्िजद को ही धर्म मान लिया जाता है तो डा. लोहिया के अनुसार अगर किसी को दीर्घकालीन राजनीति करनी है और धर्म से ही राजनीति होनी है तो वे वही करेंगें जो सत्ता में पहुंचने के लिये अभी कर रहे हैं। अभी दुनिया की हालत कया है। पूरी दुनिया के पैमाने पर दो धमर्ों का युद्ध हो रहा है। बहुत से लोग कहते हैं कि उस युद्ध में हिन्दू धर्म भी शामिल है। ऐसी बात नहीं है। इसाई धर्म और इस्लाम के बीच पूरी दुनिया पर फतह करने के लिए युद्ध जारी है। हम माने या न माने, यह दुनिया की वस्तुगत परस्िथति है कि ये दो ताकतें हैं जिनका पूरी दुनिया में संग्राम चल रहा है और इसे कोई रोक नहीं पा रहा है। आप भी नहीं रोक सकते हैं। इस देश की जितनी भी राजनैतिक पार्िटयां हैं, अगर हम राष्ट्रीय सुरक्षा की बात करते हैं, इस देश के हित के बारे में बात करते हैं तो आपको एक होना पड़ेगा, मजबूती के साथ एक विचार बनाना पड़ेगा कि इस संबंध में हमारी कया राय है, हमको कया करना चाहिए। हिन्दू धर्म हिन्दुस्तान में बचाव की स्िथति में है। ... (व्यवधान) मैं समाप्त कर रहा हूं। मैं ज्यादा समय नहीं लूंगा। मैंने आपसे जान-बूझकर दो मिनट का समय लिया कयोंकि मैं अपनी बात रखना चाहता था। मैं समझता हूं कि यह बुनियादी प्रश्न है और यदि इसे हल नहीं किया गया तो आप बार-बार राष्ट्रीय सुरक्षा पर बात करते रहेंगे, यह कभी हल नहीं होगा। हमें निल-जुलकर यह फैसला करना है कि यदि बिन लादेन कहते हैं कि अमरीका और हिन्दुस्तान समान रूप से एक नम्बर दुश्मन है। वह तो कोई सरकार नहीं है, कि भारत भी हमारा दुश्मन है, अगर वे अमरीका के बारे में बोलते हैं तो बात समझ में आती है लेकिन भारत उनका दुश्मन कैसे है। अगर धार्िमक रास्ते से राजनीति होनी है तो बिन लादेन जो कहते हैं, वह सही है। इसलिए हमें मिलकर बात करनी होगी कि यदि इस देश की सुरक्षा पर धमर्ों के युद्ध की वजह से खतरा आ रहा है तो हमको कौन सी नीति अपनानी चाहिए। ठोस बात होनी चाहिए।"> ">हमारे देश की जो अंदर की समस्याएं हैं जिसकी चर्चा हमारे साथियों ने की है, मैं उसके विस्तार में नहीं जाना चाहता। उन समस्याओं में सबसे बड़ी समस्या गरीबी और भुखमरी की है। आज देश में इसके खिलाफ कोई आंदोलन नहीं है, कोई संघर्ष नहीं है। गरीबी और भुखमरी, की वजह से जो विदेशी पैसे आते हैं और आतंकवाद को हवा देते हैं, उसे भी आप नहीं रोक सकते। यदि आप इस पर कोई कार्यक़म तैयार नहीं करते कि इस देश में समाज का जो अंतिम व्यकित है, उसके लिए हम कया कर सकते हैं। यह प्रोग्राम बनना चाहिए। यदि यह बन जाता है तो मैं समझता हूं कि हमारा देश अभी भी मजबूत है, वह इतना मजबूत होगा कि कोई भी इस देश को आंख दिखाने का काम नहीं कर सकते।"> ">और जो लोग कहते हैं कि इस देश को तोड़ने की कोशिश की जा रही है और लोग देश को तोड़ देंगे तो अगर इन तीनों बिन्दुओं पर विचार हो जाये, हम लोग एकमत हो जायें तो कोई भी इस देश को तोड़ नहीं सकता है, मैं यह कह सकता हूं।"> ">इन्हीं शब्दों के साथ, मैं सदन का ज्यादा समय नहीं लेना चाहता। पुनः मैं आपको धन्यवाद देता हूं।"> ">कुंवर अखिलेश सिंह (महाराजगंज, उ.प्र.) : माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं आपका आभारी हूं कि आतंकवाद और राष्ट्रीय सुरक्षा की चर्चा पर आपने मुझे भाग लेने के लिए अनुमति दी।"> ">आज आतंकवाद ने जम्मू-कश्मीर से लेकर पूवर्ोत्तर भारत तक और तमिलनाडू तक के एक बड़े भू-भाग को अपने आगोश में चपेटने का काम किया है। इस आतंकवाद ने हमारे २-२ प्रधानमंत्रियों की बलि लेने का काम किया। अभी इस सदन में आदरणीय ग्ृाह मंत्री जी बैठे हुए हैं और ग्ृाह मंत्री जी की भी जान आतंकवाद के कारण खतरे में पड़ चुकी है। मुझे यह कहने में परहेज नहीं है कि आज आतंकवाद का जो सवाल पूरे देश के अन्दर उभरकर दिखाई दे रहा हो, इसे समय-समय पर सत्तारूढ़ राजनैतिक पार्िटयों ने उस आतंकवाद को अपने स्वार्थ के वशीभूत होकर प्रश्रय देने का कार्य किया। उसी का नतीजा है कि आज हम आतंकवाद का समूल नाश नहीं कर पा रहे हैं। अभी जम्मू कश्मीर से लेकर पूवर्ोत्तर भारत तक और तमिलनाडू की चर्चा हुई। मैं नेपाल और भूटान के अन्दर जो हमारे मित्र राष्ट्र हैं, उसमें जो देश विरोधी गतवधियां हैं और जो आतंकवादी गतवधियां पनप रही हैं, उसकी तरफ सदन का ध्यान आकर्िषत करना चाहता हूं। अभी भूटान के अन्दर उल्फा अपनी जड़ें जमाये हुए है। भारत सरकार भूटान की सरकार से उल्फा को भूटान से समाप्त करने के लिए आग्रह कर चुकी है, परन्तु अब तक भूटान से उल्फा को समाप्त करने की दिशा में कोई कारगर कदम नहीं उठाया जा सका। नेपाल के अन्दर भी आई.एस.आई. द्वारा आतंकवादी गतवधियों की बातें समाचार-पत्रों के माध्यम से और सरकारी एजेंसियों के माध्यम से समय-समय पर उभरकर आती रहती हैं। वर्ष १९९४ तक नेपाल के सहयोग से जो हमारा मित्र राष्ट्र है, कई आतंकवादी भारत की सरकार ने उत्तर प्रदेश और नेपाल की सीमा पर पकड़े हैं। १९९५ में भारत और नेपाल की सीमा पर बढ़ते हुए आतंकवादी गतवधियों को रोकने के लिए उत्तर प्रदेश के अन्दर सीमा पुलिस का गठन किया गया। उत्तर प्रदेश के अन्दर सीमा पुलिस, उत्तर प्रदेश की पुलिस और कस्टम के लोग आतंकवाद की गतवधियों और तस्करी की गतवधियों को रोकने के लिए कार्य कर रहे हैं, लेकिन आज इन तीनों एजेंसियों के अन्दर सामंजस्य स्थापित न होने के कारण अपेक्षित सफलता नहीं मिल पा रही है। और मुझे यह कहने में तनिक भी संकोच नहीं है कि आज उत्तर प्रदेश की जो पुलिस है और सीमा पुलिस है, यह इतनी भ्रष्ट हो चुकी है, इतनी ज्यादा स्वार्थ में लिप्त हो चुकी है कि उसकी नजर आतंकवादियों और आई.एस.आई. के एजेण्टों पर रह ही नहीं गई है, उनकी नजर मात्र दस रुपये बोरे पर रह गई है। वे आज तस्करी कराने के कायर्ों में लिप्त हैं। आतंकवादी गतवधियों को रोकने की दिशा में उनके द्वारा कोई कारगर कठम नहीं उठाया जा रहा है। उत्तर प्रदेश की हालत इतनी बिगड़ चुकी है कि जिस निर्वाचन क्षेत्र से मैं आता हूं, वह भारत नेपाल सीमा पर स्िथत निर्वाचन क्षेत्र है। उत्तर प्रदेश सरकार के एक राज्य मंत्री तीन बार राज्य मंत्री के पद पर रहते हुए नेपाल के दौरे कर चुके हैं और उसमें हमारी सरकार की जो खुफिया एजेंसियां हैं, उन खुफिया एजेंसियों ने उत्तर प्रदेश की सरकार को रिपोर्ट दी, उस पर आपत्ित जाहिर की, परन्तु उत्तर प्रदेश की हुकूमत को बचाये रखने के लिए उस राज्य मंत्री के खिलाफ आज तक कार्रवाई नहीं हुई। उत्तर प्रदेश की स्िथति यह है कि आज दर्जनों ऐसे मंत्री हैं, जिनके ऊपर न्यायालय में आज दर्जनों आपराधिक मुकदमे चल रहे हैं, जिन्हें मंत्री की कुर्सी पर बिठाया गया है। एक मंत्री जिनके खिलाफ १९९१-९२ में उत्तर प्रदेश की सरकार टाडा का अभियोग चला चुकी है, उन्हें केबिनेट की कुर्सी पर बिठा दिया गया है और दूसरे जिस क्षेत्र से मैं चुनकर आता हूं, वहां के राज्य मंत्री जी ने आतंकवादियों को पनाह दी और आज राजनैतिक स्वार्थ सद्धि के लिए एक वर्ग विशेष के लोगों के खिलाफ उन्होंने आई.एस.आई. के एजेण्टों की सूची के नाम पर आतंक का साम्राज्य मचा रखा है। आज आई.एस.आई. का जाल अगर नेपाल तलहटी में फैल रहा है तो इस पर सरकार को कारगर कदम उठाने चाहिए और जो लोग आई.एस.आई. के एजेण्टों को पनाह देने का काम कर रहे हैं, उन्हें फांसी के फंदे पर लटकाया जाना चाहिए, चाहे वे राजनैतिक व्यकित हों, चाहे नौकरशाह हों। किसी के साथ भी अगर भेदभाव किया जायेगा, उनहें बचाने का काम किया जायेगा तो हम आतंकवादी गतवधियों पर नियंत्रण नहीं कर पाएंगे। भारत और नेपाल की भोगौलिक स्िथति का अगर हम अध्ययन करें तो पूरे नेपाल के तराई का जो इलाका है, वह भारतीय मूल के लोगों का है। अंग्रेजों ने सुगौली की संधि में नेपाल की तराई के इलाके को नेपाल भारत से को दिया था और बदले में गढ़वाल, हिमाचल और कुमायूं नेपाल से लिए थे। आज पूरे नेपाल की ४८ प्रतिशत आबादी भारतीय मूल के लोगों की है। आज जो हमारी सुरक्षा एजेंसियां हैं, उन सुरक्षा एजेंसियों ने अपने नहित स्वार्थ के तहत भारतीय मूल और नेपाली मूल के लोगों के बीच में दरार पैदा करने का काम किया है।"> ">आज आवश्यकता इस बात की है, मैं ग्ृाह मंत्री जी से कहना चाहता हूं कि हमें नेपाल के अंदर बढ़ती हुई आतंकवादी गतवधियों पर अंकुश लगाने के लिए, उन्हें जड़ से समाप्त करने के लिए खुफिया एजेंसियों का जाल बिछाकर आई.एस.आई. के एजेंटों को बेनकाब करके उन्हें जेल की सलाखों के पीछे डालना चाहिए। इसको जड़ से समाप्त करने के लिए जिन-जिन राजनीतिज्ञों के द्वारा इस तरह की गतवधियों को बढ़ावा दिया जा रहा है और निदर्ोष नागरिकों का उत्पीड़न करने के लिए प्रशासन का इस्तेमाल किया जा रहा है, उनके खिलाफ कठोर कार्रवाई की जानी चाहिए।"> ">श्री हरीभाऊ शंकर महाले (मालेगांव): अध्यक्ष महोदय, छोटी बातें बहुत महत्वपूर्ण होती हैं। जैसे घोड़ा होता है, रास्ते पर ले जाने के लिए उसके पैरों पर नाल लगाई जाती है। आने-जाने में कभी कभार नाल निकल जाती है, इससे सवार गिर जाता है और कभी-कभी उसकी म्ृात्यु भी हो जाती है। इसलिए छोटी-छोटी बातों पर नजर रखनी चाहिए। कश्मीर में कर्ण सिंह के पिता होते थे, यह करीब ७० वर्ष पहले की बात है। एक बार वहां के सब मुसलमान उनके पास गए और उनसे कहा कि हम लोग तो पहले हिन्दू थे, अब मुसलमान बन गए हैं, आप हमें अपने धर्म में शामिल कर लो। उन्होंने कहा कि मैं अपने लोगों से पूछकर बताऊंगा। अपने लोगों से पूछकर उन्होंने उन लोगों से कहा कि ऐसा नहीं हो सकता। उस वकत अगर उन्हें अपने धर्म के अंदर ले लेते तो कश्मीर की समस्या इतनी गहन नहीं होती। उस वकत जब चुनाव हुए थे तो मोरारजी भाई पंत प्रधान थे। शांति से चुनाव कराने के लिए वे शिकारे पर घूमते थे। उन्होंने अपने वकत में काफी काम किया, लेकिन फिर भी उनका राज चला गया। उन्होंने इसकी परवाह नहीं की। राजनारायण ने उनकी पार्टी को तोड़ा और खुद भी चले गए। नेहरू जी के समय में एन.वी. गाडगिल थे। उन्होंने कहा कि क्षेत्र की स्िथति कैसी है तो उन्हें जवाब दिया गया कि यह तो देश के नकशे में है, लेकिन अन्तर्मन से लोग आपके साथ नहीं हैं। उस वकत मोरारजी भाई और ये दोनों पांच वकत वहां गए थे। मैं भी दो बार गया था। १९७९ में मोरारजी भाई ने उन लोगों के बेट-बेटियों के साथ न्ृात्य भी किया था, जिससे उनका मन, अन्तर्मन बाकी देश के साथ जुड़ सके।"> ">लगभग ४ वर्ष पहले की बात है, देश में यह देखने में आया कि गणपति की मूर्ितयों ने दूध पिया। कया ऐसा सम्भव है, मेरा मानना है कि ऐसा नहीं हो सकता।... (व्यवधान)
यह बात छोटी है, लेकिन ध्यान देने योग्य है। यहां हमारे मनोहर भाई मंत्री जी बैठे हैं, काफी होशियार आदमी हैं, इन्होंने भी गणपति को दूध पिलाया था। मैं कहना चाहता हूं कि हम सब लोग मंदिर-मस्िजद और प्रभू को छोड़ दें। इसी तरह हमें आर.एस.एस. के बारे में भी सोचना चाहिए और उनसे कहना चाहिए कि वे विवादास्पद मुद्दे त्याग कर शांति का बिगुल बजाएं। चुनाव के समय हम सब बुरी बात बोलते हैं, असत्य भी बोल जाते हैं, लेकिन यहां सभी लोग शपथ लेकर आते हैं। आपने धारा ३७० को छोड़ दिया, अच्छी बात है। राम मंदिर बनाने का मामला बंद कर दिया, ठीक है। कैलाशवासी राजीव गांधी ने लिट्टे की आतंकवादी गतवधियों को रोकने के लिए खुद का बलिदान दिया। यह गौरव की बात नहीं है, यह देश के लिए शर्म की बात है। मैं वाजपेयी जी से प्रार्थना करता हूं कि शिव सेना कुछ बोलती है, दूसरे दल कोई दूसरी बात करते हैं, यह बात ठीक नहीं है।"> SHRI BIJOY HANDIQUE (JORHAT): Sir, the proverbial lack of development is being projected as the cause for all the turmoil that assails the North-Eastern region. But is that all? No. This may be one of the major causes but not the only one. I agree that there is massive resentment among the people of North-East becuase this region has been denied its due and justice. And the fact that the three development packages announced by three successive Prime Ministers in a span of two years have yet to be given concrete shape adds to that sesentment. What worries me is the sense of alienation that afflicts the people of that region. I am afraid that accumulated alienation very often gives rise to insurgency and terrorism. We have to see as to how we can remove the causes of alienation. The climate of alienation must go if we want to prevent further spread of terrorism and insurgency. I do understand that if the State"s law and order enforcing machinery fails, it can of course summon the Army and Para-Military forces, but they must be kept in check. If they commit any excesses and commit atrocities, it is the Govt. which they should be held accountable and responsible. Government must bear in mind that it is committed to the protection of human rights. It is not enough to say that militants also violate human rights. The Government should be the model protector of human rights. Besides, without the support of the common people no operation against the terrorists can be successful. What has been happening in the North-East is that, in the process of curbing terrorism, common people are put to torture and atrocities . This has created a sense of alienation.
">Sir, when the Human Rights Commission was constituted in 1993, the nation was given to understand that the Army, the Para-Military forces, and the Police would be motivated, trained and educated on human rights. Since Para-Military forces are called quite often to help the civil administration in controlling the insurgency related situations, it is all the more reason that they should be trained, motivated and educated on human rights. So, there must be basic changes in the administration of the law and order in respect of the insurgency-related situations. I suggest, if necessary, a suitable amendment in the Armed Forces Special Powers Act, 1958 as amended in 1972 in conformity with human rights should be considered. Dialogue is the only answer to this situation. There cannot be any military solution. Let us talk with the terrorists. Let us talk with the terrorists. The Mizo Accord was signed by the last Prime Minister, Shri Rajiv Gandhi with Shri Laldenga. This was one of the most successful and effective accords. Mizoram is now one of the most peaceful States in the country.
">Assam terrorists also gave a proposal, three years ago, of having a dialogue in a third country. Today the whole world is reduced to a global village. This was not the first time that a talk like this, though informal, was to be held in a third country. In 1980, Shri Laldenga came to India, when Shrimati Indira Gandhi was the Prime Minister. He was persuaded by the Government emissaries and by representatives of the Government to come here. Though the talks failed, on his return, the emissaries of the Government and the Government representatives persuaded him and he came to India after five years, after a long persuasion, and ultimately signed an Accord with late Shri Rajiv Gandhi.
">Since there is not much time, I will restrict myself. Let us keep our mind open, door open for a meaningful dialogue, be it in our country or outside, but without any pre-condition. I recall that it was once demanded to have a dialogue in the presence of an international observer. We do not accept that pre-condition. I personally feel that when our hon. Prime Minister or Ministers go abroad, in chance meetings or even scheduled meetings they discuss this problem though in a hurry. I think that a formal talk will be more purposeful, more effective than those which are held when our Prime Minister or Ministers go there. Hon. Home Minister is here and I do believe that he will consider this proposal.
">In the Twelfth Lok Sabha also, we discussed this problem. I do believe that the hon. Home Minister will change his views, particularly, keeping in mind that there is no end to insurgency and terrorism that has assailed the North-east. I do believe that the hon. Minister will rise to the occasion. Thank you, Sir.
">MR. SPEAKER: We have exhausted the list of the speakers. The Home Minister will reply to the debate tomorrow.
">The House stands adjourned to meet at 1100 a.m. tomorrow.
">20.24 hours ">The Lok Sabha then adjourned till Eleven of the Clock on ">Wednesday, December 15, 1999/Agrahayana 24, 1921 (Saka).
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