State Consumer Disputes Redressal Commission
U P P C L vs Ram Gopal Yadav on 12 September, 2022
Cause Title/Judgement-Entry STATE CONSUMER DISPUTES REDRESSAL COMMISSION, UP C-1 Vikrant Khand 1 (Near Shaheed Path), Gomti Nagar Lucknow-226010 First Appeal No. A/2003/2618 ( Date of Filing : 29 Sep 2003 ) (Arisen out of Order Dated in Case No. of District State Commission) 1. U P P C L a ...........Appellant(s) Versus 1. Ram Gopal Yadav a ...........Respondent(s) BEFORE: HON'BLE MR. SUSHIL KUMAR PRESIDING MEMBER HON'BLE MR. Vikas Saxena JUDICIAL MEMBER PRESENT: Dated : 12 Sep 2022 Final Order / Judgement
(मौखिक) राज्य उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग , उ0प्र0, लखनऊ अपील सं0- 2618/ 2003 अधिशासी अभियंता विद्युत विभाग, उ0प्र0 पावर कार्पोरेशन, बाई पास रोड सिकंदरा, आगरा व तीन अन्य।
.........अपीलार्थीगण बनाम राम गोपाल यादव पुत्र श्री किताब सिंह व तीन अन्य।
समस्त निवासीगण बमरोली अहीर, तहसील सदर, थाना मलपुरा, जिला आगरा।
...........प्रत्यर्थीगण समक्ष:-
माननीय श्री सुशील कुमार, सदस्य।
माननीय श्री विकास सक्सेना, सदस्य।
अपीलार्थीगण की ओर से उपस्थित : श्री दीपक मेहरोत्रा के सहयोगी अधिवक्ता, श्री मनोज कुमार।
प्रत्यर्थीगण की ओर से उपस्थित : कोई नहीं।
दिनांक:- 12.09.2022 माननीय श्री विकास सक्सेना , सदस्य द्वारा उद्घोषित निर्णय
1. परिवाद सं0- 595/1998 रामगोपाल बनाम अधिशासी अभियंता विद्युत विभाग, उ0प्र0 पावर कार्पोरेशन व तीन अन्य में जिला उपभोक्ता आयोग प्रथम, आगरा द्वारा पारित निर्णय एवं आदेश दि0 26.03.2003 के विरुद्ध यह अपील धारा- 15 उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 1986 के अंतर्गत राज्य आयोग के समक्ष प्रस्तुत की गई है।
2. अपील केवल इस बिन्दु तक सीमित की गई है कि विद्वान जिला उपभोक्ता आयोग द्वारा जो हर्जा अधिरोपित किया गया है उसको अपास्त कर दिया जाए।
3. केवल अपीलार्थी के विद्वान अधिवक्ता श्री दीपक मेहरोत्रा के सहयोगी अधिवक्ता श्री मनोज कुमार को सुना गया। प्रश्नगत निर्णय व आदेश एवं पत्रावली पर उपलब्ध अभिलेखों का सम्यक परिशीलन किया गया। प्रत्यर्थी की ओर से कोई उपस्थित नहीं है।
4. विद्वान जिला उपभोक्ता आयोग द्वारा पारित निर्णय एवं आदेश के अवलोकन से ज्ञात होता है कि विद्वान जिला उपभोक्ता आयोग ने विद्युत बिल वसूल न करने के लिए आदेशित किया है जो प्रत्यर्थी/परिवादी को उपलब्ध अधिकतम अनुतोष है। इसलिए मानसिक प्रताड़ना के मद में किसी प्रकार की धनराशि अदा करने का आदेश देने का कोई औचित्य नहीं है। अत: इस धनराशि को अदा करने से अपीलार्थी/विपक्षी को उन्मोचित करना उचित है। तदनुसार अपील आंशिक रूप से स्वीकार किए जाने योग्य है।
आदेश
5. अपील आंशिक रूप से स्वीकार की जाती है। विद्वान जिला उपभोक्ता आयोग द्वारा पारित प्रश्नगत निर्णय व आदेश संशोधित करते हुए मानसिक उत्पीड़न के मद में प्रदान की गई धनराशि 2,000/-रू0 को अपास्त किया जाता है। शेष निर्णय एवं आदेश की पुष्टि की जाती है।
उभयपक्ष अपना-अपना व्यय स्वयं वहन करेंगे।
आशुलिपिक से अपेक्षा की जाती है कि वह इस निर्णय व आदेश को आयोग की वेबसाइट पर नियमानुसार यथाशीघ्र अपलोड कर दें।
(विकास सक्सेना) (सुशील कुमार) सदस्य सदस्य शेर सिंह, आशु0, कोर्ट नं0- 3 [HON'BLE MR. SUSHIL KUMAR] PRESIDING MEMBER [HON'BLE MR. Vikas Saxena] JUDICIAL MEMBER