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State Consumer Disputes Redressal Commission

Sub Postmaster vs Raghunath Singh on 19 January, 2016

  	 Cause Title/Judgement-Entry 	    	       STATE CONSUMER DISPUTES REDRESSAL COMMISSION, UP  C-1 Vikrant Khand 1 (Near Shaheed Path), Gomti Nagar Lucknow-226010             First Appeal No. A/1997/230  (Arisen out of Order Dated  in Case No.  of District )             1. Sub  Postmaster  A ...........Appellant(s)   Versus      1. Raghunath Singh  A ...........Respondent(s)       	    BEFORE:      HON'BLE MR. Alok Kumar Bose PRESIDING MEMBER    HON'BLE MR. Sanjay Kumar MEMBER          For the Appellant:  For the Respondent:     	    ORDER   

(राज्‍य उपभोक्‍ता विवाद प्रतितोष आयोग, उ0 प्र0 लखनऊ)                 सुरक्षित                    अपील संख्‍या- 230/1997   (जिला मंच रामपुर द्वारा परिवाद सं0 181/1996 में पारित निर्णय/आदेश दिनांकित 16/01/1997 के विरूद्ध)   1- सब पोस्‍ट मास्‍टर, रामपुर ।

2- पोस्‍ट मास्‍टर, रामपुर।

 

                                                                                       ...अपीलार्थीगण/विपक्षीगण बनाम   रधुनाथ सिंह पुत्र कामता प्रसाद, निवासी- कृषि विज्ञान केन्‍द्र, डिस्‍ट्रक्टि बोर्ड, बिल्डिंग, रामपुर।

                                                 .........प्रत्‍यर्थी/परिवादी समक्ष:

       1. मा0 श्री आलोक कुमार बोस, पीठासीन सदस्‍य ।
  2. मा0 श्री संजय कुमार, सदस्‍य।
 
अपीलार्थी की ओर से उपस्थित            : विद्वान अधिवक्‍ता डा0 उदय वीर सिंह।

 

प्रत्‍यर्थी की ओर से उपस्थित              : कोई नहीं।

 

 

 

दिनांक  :- 29-01-2016

 

 मा0 श्री संजय कुमार,  सदस्‍य द्वारा उदघोषित ।

 

 

 

 निर्णय

 

     प्रस्‍तुत अपील, परिवाद सं0 181/1996 रधुनाथ सिह बनाम सब पोस्‍ट मास्‍टर, रामपुर व अन्‍य के विरूद्ध जिला फोरम, रामपुर द्वारा पारित निर्णय/आदेश दिनांक 16/01/1997 से क्षुब्‍ध होकर योजित की गई है। प्रश्‍नगत परिवाद में जिला फोरम ने परिवाद आंशिक रूप से आज्ञाप्‍त करते हुए विपक्षीगण को निर्देश दिया कि '' वे परिवादी पर बिना कोई आर्थिक दण्‍ड डाले परिवादी का आर0डी0 खाता चालू करेंगें और परिवादी को उस धनराशि को जमा करेंगे जिसे परिवादी नियमित रूप से भुगतान नहीं कर पाया था। परिवादी को एक माह का समय उस धनराशि को जमा करने के लिए दिया जाता है। विपक्षीगण से अपेक्षा की गई कि परिवादी द्वारा देय धनराशि जमा करने के 15 दिन के भीतर विपक्षीगण परिवादी का खाता नियमित करेंगे। परिवादी विपक्षीगण से रूपये 250/- क्षतिपूर्ति भी पाने का अधिकारी है। विपक्षीगण से अपेक्षा की गई कि वे इस निर्णय के शर्तों का अनुपालन निर्णय के दिनांक से निर्धारित समय के भीतर करेंगे और चूक हो जाने पर परिवादी को निष्‍पादन की कार्यवाही करने का अधिकार होगा।''        2 परिवाद का कथन संक्षेप में इस प्रकार है कि परिवादी/प्रत्‍यर्थी ने गोण्‍डा में नियुक्ति के समय उसने जय प्रभा ग्राम डार डाकघर में एक आर0डी0 खाता नम्‍बर 800399 दिनांक 07/11/92 को खोला था। माह फरवरी, 1995 में परिवादी/प्रत्‍यर्थी का स्‍थानान्‍तरण रामपुर हो गया तो परिवादी/प्रत्‍यर्थी ने विपक्षी नंबर 03 के अधीन डाकघर रामपुर में दिनांक 07/03/95 को जमा कर दी और अपना आर0डी0 खाते को स्‍थानांतरण कराने का आवेदन किया। परन्‍तु विपक्षी सं0 1 के अधीन जय प्रभा ग्राम (गोण्‍डा) ने कोई जवाब नहीं दिया। परिवादी ने दिनांक 31/03/95 को विपक्षी सं0 1 को खाता स्‍थानांतरण कराने हेतु प्रार्थना पत्र दिया। उसके बाद परिवादी/प्रत्‍यर्थी ने विपक्षी सं0 2 से अनेक बार शिकायत किया परन्‍तु कोई नतीजा नहीं आया। परिवादी/प्रत्‍यर्थी ने अपने आर0डी0 खाते में पैसा जमा करने गया तो विपक्षी सं0 2 ने उसके आर0डी0 खाते में पैसा जमा करने से इन्‍कार कर दिया।  

     विपक्षी/अपीलार्थी की ओर से जिला मंच के समक्ष उत्‍तर पत्र दाखिल किया गया जिसमें यह कहा गया है कि परिवादी/प्रत्‍यर्थी को संबंधित डाकपाल द्वारा सूचना नहीं दी गई थी कि वह अपना आर0डी0 खाते में जो बलरामपुर से प्राप्‍त नहीं हुआ था मासिक किस्‍ते निरन्‍तर जमा कर सकता है। परिवादी/प्रत्‍यर्थी ने 11 महीने तक आर0डी0 खाते में कोई धनराशि जमा नहीं की और उसके बाद विपक्षीगण/अपीलार्थीगण ने परिवादी/प्रत्‍यर्थी को उसके खाते में धनराशि जमा करने से इनकार कर दिया। परिवादी/प्रत्‍यर्थी उपभोक्‍ता की परिभाषा में नहीं आता है। विपक्षी सं0 1 जिला उपभोक्‍ता फोरम, रामपुर के स्‍थानीय क्षेत्राधिकार के बाहर है जिसके कारण परिवाद चलने योग्‍य नहीं है।

     अपीलार्थीगण/विपक्षीगण के विद्वान अधिवक्‍ता के तर्कों को विस्‍तारपूर्वक सुना गया। प्रत्‍यर्थी/परिवादी की ओर से कोई उपस्थित नहीं हुआ। अपीलार्थी के विद्वान अधिवक्‍ता ने तर्क दिया कि अपीलार्थी जिला फोरम के आदेश का अनुपालन करने के लिए तैयार है। अपीलार्थी/विपक्षी को मु0 250/ रूपये क्षतिपूर्ति के रूप में देने का आदेश दिया गया है, वह उचित नहीं है, इसे समाप्‍त कर दिया जाय।

      आधार अपील एवं संपूर्ण पत्रावली का परिशीलन किया जिससे यह प्रतीत होता है कि परिवादी/प्रत्‍यर्थी ने अपने आर0डी0 खाते में पैसा जमा करने गया तो विपक्षी सं0 2 ने उसके आर0डी0 खाते में पैसा जमा करने से इनकार कर दिया था। जिससे क्षुब्‍ध होकर जिला फोरम में परिवाद प्रस्‍तुत किया गया था। अपीलार्थी/विपक्षी के अधिवक्‍ता ने तर्क दिया कि अपीलार्थी/विपक्षी   3 जिला फोरम के आदेश का पालन करने के लिए तैयार है। क्षतिपूर्ति के रूप में जो मु0 250/ रूपये देने का आदेश जिला फोरम ने दिया है उसे समाप्‍त कर दिया जाय। जिला फोरम के आदेश का पालन करने के संबंध में अपना वर्णन करते हुए अपीलार्थी के विद्वान अधिवक्‍ता ने हस्‍ताक्षर किये। अपीलार्थी के विद्वान अधिवक्‍ता के तर्क स्‍वीकार करने योग्‍य है।

     

आदेश           अपील आंशिक रूप से स्‍वीकार की जाती है। जिला मंच रामपुर द्वारा परिवाद सं0 181/1996 में पारित निर्णय/आदेश दिनांकित 16/01/1997 में क्षतिपूर्ति के रूप में मु0 250/ रूपये की धनराशि समाप्‍त किया जाता है। शेष निर्णय/आदेश की पुष्टि की जाती है।  

                                     
     (आलोक कुमार बोस)                             (संजय कुमार)

 

      पीठासीन सदस्‍य                                  सदस्‍य                                                 

 

 

 

   सुभाष चन्‍द्र आशु0  कोर्ट नं0 3      

 

                                                      

 

 

 

    

 

 

 

 

 

              [HON'BLE MR. Alok Kumar Bose]  PRESIDING MEMBER 
     [HON'BLE MR. Sanjay Kumar]  MEMBER