Lok Sabha Debates
Statement By The Minister Of Health And Family Welfare Regarding Reported ... on 21 August, 2003
12.04 hrs. STATEMENT BY MINISTER Reported Detection of pesticides in Soft Drinks Title: Statement by the Minister of Health and Family Welfare regarding reported detection of pesticides in soft drinks and clarifications sought by the members relating thereto.
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री तथा संसदीय कार्य मंत्री (श्रीमती सुषमा स्वराज) : अध्यक्ष महोदय, मैं आपकी अनुमति से साफ्ट डिं्रक्स में पेस्टीसाइड के अवशिष्ट होने के बारे में जो समाचार-पत्रों में रिपोर्ट छपी है, उसके संबंध में वक्तव्य सदन में रखना चाहती हूं।
अध्यक्ष महोदय, सेंटर फार साइंस एंड एन्वायरमेंट द्वारा सी.एस.ई. के नाम से जाना जाता है। दिल्ली आधारित एक गैर-सरकारी संगठन है, जिसके द्वारा साफ्ट डिं्रक्स में कीटनाशकों के विश्लेषण पर एक रिपोर्ट हाल ही में मीडिया द्वारा प्रमुखता के साथ छापी गई थी। सी.एस.ई. के प्रवक्ता ने उक्त रिपोर्ट में आरोप लगाया था कि शीतल पेय के १२ ब्रांडों, जिनके उन्होंने नमूने लिए थे, वह सी.एस.ई. ने कीटनाशकों के अवशिष्ट पाए थे, जो यूरोपियन यूनियन के मानदंडों से अधिक मात्रा में थे, लगभग ११ से ७० गुणा तक अधिक थे। माननीय सदस्यगण कृपया याद करेंगे कि शीतल पेयों की गुणवत्ता और स्वास्थ्य की द्ृष्टि से उनकी निरापदता के संबंध में सदन में दिनांक ६ अगस्त, २००३ को बहुत गंभीर आशंकाएं व्यक्त की गई थीं, विशेष रूप से पेप्सी और कोका कोला जैसे ब्रांडों के संबंध में, जो देश में तैयार किए जते हैं और बेचे जाते हैं।
अध्यक्ष महोदय, सबसे पहले मैं माननीय सदस्यों को अपने देश में शीतल पेयों की निरापदता के मानकों के संबंध में कानूनी स्थिति से अवगत कराना चाहूंगी। शीतल पेय अमादक पेय पदार्थ हैं, यानी नान अल्कोहलिक बिवरेज़, जो खाद्य अपमिश्रण निवारण नियमों के अंतर्गत मधुरीकृत कार्बनीकृत जल के रूप में श्रेणीबद्ध है। शुक्रोज के रूप में अभिव्यक्त कुल चीनी की प्रतिशतता, प्रति मिली लीटर की कुल प्लेट काउंट, १०० मिली लीटर में कोलिफार्म काउंट और प्रति मिली लीटर खमीर और माउल्ड काउंट के बारे में मानक निर्धारित है। कार्बनीकृत जल के लिए खाद्य अपमिश्रण निवारण नियमों में लैड, तांबा, संखिया, टिन, जिन्क, कैडमिअम और पारे नामक धातु (कन्टैमीनेन्ट्स) की मात्रा के संबंध में अलग-अलग सीमाएं निर्धारित की गई हैं। सी.एस.ई. नियमों में मधुरीकृत कार्बनीकृत जल, जिसमें सभी सॉफ्ट डिं्रक्स शामिल हैं, सी.एस.ई. के नियमों में इस समय पेस्टीसाइड के अवशिष्टों के संबंध में अलग से कोई सीमाएं निर्धारित नहीं की गयी हैं।
मृदु पेय वनिर्माण खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय द्वारा अधिशासित फल उत्पाद आदेश, १९५५ के अंतर्गत कवर होता है। उक्त आदेश के भाग-II (घ) में, शीतल पेय वातित (एरेटिड) जल के रूप में परिभाषित हैं जिसका अभिप्राय ऐसे पीने योग्य पानी से है जो कार्बनडाइआक्साइड द्वारा दबाव के अधीन संसेचित हो और अच्छी तरह से सीलबंद पात्र में बंद हो। भारतीय मानक ब्यूरो भी कार्बनीकृत पेय पदार्थों के संबंध में मानक निर्धारित करता है परन्तु वे जल के लिए कोई मानक निर्धारित नहीं करता। जहां तक अन्य अवयवों का संबंध है, इस बारे में मानक पूर्वोक्त खाद्य अपमिश्रण निवारण विर्निदेशों के संगत है। "पीने योग्य पानी " शब्दों का खाद्य अपमिश्रण निवारण नियमों में उल्लेख है जो कहता है कि खाद्य की वस्तु के बनाने या उसे तैयार करने में जहां भी पानी का प्रयोग होता है, वह पानी ऐसे सूक्ष्म जीवों से मुक्त होगा जिनसे रोग पैदा होने की संभावना हो और ऐसे रासायनिक अवयवों से भी मुक्त होगा जो स्वास्थ्य को हानि पहुंचाते हों।
सदन को याद होगा कि भारत सरकार ने हाल ही में एक अधिसूचना जारी की है जिसके द्वारा डिब्बाबंद (पैकेज्ड) पीने के पानी में पेस्टीसाइड की मात्राएं निर्धारित की गयी हैं। ये सीमाएं यूरोपियन यूनियन के मानदण्डों के अऩुसार है और १ जनवरी, २००४ से लागू हो जाएंगी। यह एफडीए तथा यूरोपियन यूनियन मानदंडों सहित वभिन्न राष्ट्रीय वधियों के अंतर्गत मानकों की जांच करने के लिए स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा गठित एक विशेषज्ञ समूह की सिफारिश के आधार पर की गयी।
मैं माननीय सदस्यों को अपने द्वारा की गयी कार्रवाई के बारे में सूचित करना चाहूंगी जो हमने सी.एस.ई. की रिपोर्ट प्रकाशित होने के बाद की है। हमने शीतल पेयों के १२ ब्रांड जो उन्हीं बोटलिंग इकाइयों के हैं जिनसे सी.एस.ई. ने नमूने एकत्रित किए थे, के नमूने बाजार से हमने विश्लेषण के लिए एकत्र किए। नमूनों के दो सेट--एक केन्द्रीय खाद्य प्रौद्योगिकीय अनुसंधान संस्थान यानी सी एफ टी आर आई, मैसूर और केन्द्रीय खाद्य प्रयोगशाला, सी एफ एल, कोलकाता को विश्लेषण के लिए भेजे। इन दोनों प्रयोगशालाओं से परिणाम प्राप्त हो गये हैं। सी एफ टी आर आई ने रिपोर्ट दी है कि १२ नमूनों में से तीन नमूनों में पेस्टीसाइड के अवशिष्ट यूरोपियन यूनियन की सीमाओं से कम हैं लेकिन बाकी ९ नमूनों में, जिनमें पेस्टीसाइड के अवशिष्ट सीमा से अधिक पाए गए हैं, में यूरोपियन यूनियन सीमाओं से अधिक पाए गए अवशिष्ट जितने गुणा अधिक हैं, उनकी सीमा १.६ से ५.२ है यानी यूरोपियन यूनियन से वह जितने ज्यादा हैं, वह १.६ से ५.२ के बीच में आती है। जबकि सीएसई की रिपोर्ट में अवशिष्टों के जितने गुणा अधिक होने का आरोप है वह ११ से ७० गुणा के बीच है। यानी सी एफ टी आर आई ने कहा था कि ये पेस्टीसाइड यूरोपियन यूनियन की सीमा से ११ गुणा से ७० गुणा तक अधिक है। जो रिपोर्ट हमें सी एफ टी आर आई से आई है, उन्होंने कहा है कि ये अवशिष्ट १.६ से ५.२ तक अधिक हैं। सीएफएल कोलकाता का परिणाम भी यह बताता है कि तीन नमूनों में पेस्टीसाइड अवशिष्ट की कुल मात्रा यूरोपियन यूनियन की सीमा से नीचे है जबकि अन्य नौ नमूनों में अवशिष्ट १.२ से ५.२२ तक ज्यादा है। इन दोनों प्रयोगशालाओं की एक अन्य महत्वपूर्ण टिप्पणी यह है कि मेलाथियन, जिसके सी.एस.ई. की रिपोर्ट के अनुसार यूरोपियन यूनियन की सीमा से ८७ गुणा ज्यादा होने का आरोप था, वह नमूनों में अनुपस्थित है। केन्द्रीय खाद्य प्रौद्योगिकीय अनुसंधान संस्थान (सी एफ टी आर आई) ने नमूनों में पाए गए सभी कीटनाशको (पेस्टीसाइड) की आणविक संरचना यानी मोलीक्यूलर स्ट्रक्चर की पहचान करने के लिए जी सी एम एस वधि का प्रयोग करते हुए एक अतरिक्त परिष्कृत जांच भी की है। यह एक पुष्टिकारक जांच है यानी कंफरमेट्री टैस्ट है जो कि लगता है कि सी.एस.ई. ने नहीं की।
परिणाम स्पष्ट रूप से दर्शाते हैं कि सभी १२ नमूनों में कीटनाशक अवशिष्ट अधिक मात्रा में नहीं हैं जैसा कि सी.एस.ई की रिपोर्ट में आरोप लगाया गया था। कुछ मामलों में तो वे यूरोपियन यूनियन के मानकों से कम हैं और कुछ अन्य मामलों में यूरोपियन यूनियन की सीमा से कुछ गुणा अधिक है। तथापि, खाद्य अपमिश्रण निवारण नियमों के अंतर्गत निर्धारित मानकों के अनुसार डिब्बाबंद पीने के पानी के मौजूदा मानकों के अनुसार ये सभी निरापदता की सीमाओं के भीतर है।( व्यवधान)
श्री राम विलास पासवान (हाजीपुर) : अध्यक्ष महोदय, अखबार में रोज फोटो के साथ निकल रहा है।( व्यवधान)
श्रीमती सुषमा स्वराज : मुझे पहले स्टेटमैंट पूरी करने दें।( व्यवधान)अध्यक्ष जी, स्टेटमैंट के बीच में नहीं बोलना चाहिए।( व्यवधान)
अध्यक्ष महोदय : पासवान जी, पहले उनकी स्टेटमैंट पूरी होने दें।
...( व्यवधान)
डॉ. रघुवंश प्रसाद सिंह (वैशाली): अध्यक्ष महोदय, पहले से ही आशंका व्यक्त की गई थी।( व्यवधान)
हम इसे कैसे विश्वसनीय मान लें। उनकी जांच को सही मानें या इनकी बात मानें।( व्यवधान)
श्रीमती सुषमा स्वराज : रघुवंश जी, पहले स्टेटमैंट सुनिए।( व्यवधान)
श्री राम विलास पासवान: उस दिन आप चिन्ता व्यक्त कर रही थीं और अब सर्टीफिकेट दे रही हैं।( व्यवधान)
श्रीमती सुषमा स्वराज : आप बैठकर सुनेंगे तब पता लगेगा।( व्यवधान)सर्टीफिकेट कौन दे रहा है।( व्यवधान)
यह भी ध्यान में रखने योग्य बात है कि सॉफ्ट डिं्रक्स बनाने वाली कम्पनियों का यह दावा कि उनका उत्पाद यूरोपियन यूनियन की सीमाओं के भीतर है, उनके १०० प्रतिशत नमूनों से सही साबित नहीं हुआ। ...( व्यवधान)
इसी बीच माननीय सदस्य अवगत हैं कि दिल्ली उच्च न्यायालय ने मैसर्स पेप्सी के प्रतनधियों द्वारा दायर की गई एक याचिका पर अपने दिनांक ११ अगस्त, २००३ के आदेश में केन्द्रीय सरकार को याची (पेटीश्नर) द्वारा वनिर्मित उत्पादों के नमूनों की ऐसी प्रयोगशाला में जांच कराने के लिए कहा है जहां नमूनों की जांच करने के लिए साधन हों। उन्होंने परिणाम तीन सप्ताह के अंदर उपलब्ध कराने के लिए कहा है।...(व्यवधान)
मैं माननीय सदस्यों को आश्वस्त करना चाहूंगी कि जांचे गए शीतल पेय, डिब्बाबंद (पैकेज्ड) पीने के पानी के लिए निरापदता की वर्तमान में निर्धारित सीमाओं के अंदर ही हैं। मैं माननीय सदस्यों को यह भी आश्वस्त करना चाहूंगी कि बावजूद इस तथ्य के कि मृदु पेय वनिर्माताओं द्वारा निरापदता के मौजूदा मानकों की पूर्ति की जाती है, सरकार मानकों में सामंजस्य बैठाने के लिए मृदु पेयों में पानी की मात्रा के लिए यूरोपियन यूनियन के मानदण्डों को उसी तथ से लागू करने पर विचार कर रही है जिस तथि से वे डिब्बाबंद (पैकेज्ड) पीने के पानी के लिए लागू किए जाएंगे। सरकार खाद्य मानकों से संबंधित केन्द्रीय समति (सीसीएफएस) को इन मानकों को उन अन्य पेय पदार्थों, जहां पानी मुख्य अवयव हैं, पर लागू करने की जांच करने के लिए भी कहेगी। धन्यवाद।...(व्यवधान)
डॉ. रघुवंश प्रसाद सिंह : इसे कैसे विश्वसनीय माना जाए।( व्यवधान)
अध्यक्ष महोदय : प्लीज़ बैठिए।
...( व्यवधान)
MR. SPEAKER: For the information of the House, I am reading Rule 372. The Rule is clear on the issue. It says:
"A statement may be made by a Minister on a matter of public importance with the consent of the Speaker but no question shall be asked at the time the statement is made."
इस प्रकार की स्टेटमैंट के बाद आप प्रश्न नहीं पूछ सकते। हमारे सदन में यह सुविधा नहीं है। इसलिए आपको प्रश्न पूछने की इजाजत देना मेरे लिए मुमकिन नहीं है। यदि आप मानने को तैयार हैं तो मैं ऐज़ ए स्पैशल केस, केवल दो-तीन सदस्यों को प्रश्न पूछने दूंगा, सबको नहीं पूछने दूंगा।
...( व्यवधान)
श्री मदन लाल खुराना (दिल्ली सदर): अध्यक्ष महोदय, हमने यहां बिल पेश कर दिया है लेकिन दिल्ली की मुख्य मंत्री श्रीमती शीला दीक्षित कहती हैं कि कांग्रेस उसे सपोर्ट नहीं करती।( व्यवधान)
MR. SPEAKER: Let me listen to the Minister. Please sit down. There should be discipline in the House. Let the Minister say whatever she wants to say.
श्रीमती सुषमा स्वराज : अध्यक्ष जी, यह सवाल बहुत गंभीर है और चूंकि स्टेटमैंट के ऊपर कहीं न कहीं इन लोगों को यह लगता है कि शायद बड़ी कम्पनियों के साथ मिलकर यह स्टेटमैंट दी गई है।( व्यवधान)मैं आपसे प्रार्थना करना चाहती हूं कि भले ही हमारे नियमों में स्टेटमैंट पर क्लैरीफिकेशन की बात न हो, इसलिए मैं आपसे स्वयं आग्रह करती हूं कि आप दो-तीन प्रश्नों तक सीमित मत करिए। अगर आप फुल-फ्लैज्ड डिसकशन चाहते हैं,( व्यवधान)जितने माननीय सदस्य सवाल पूछना चाहते हैं, उन्हें पूछने दीजिए। मैं सबके प्रश्नों का उत्तर देने के लिए तैयार हूं क्योंकि मैं स्वयं चाहूंगी कि जो आरोप इन्होंने लगाये हैं, मैं उनका जवाब दूं।( व्यवधान)आप सबको सवाल पूछने दीजिए, मैं जवाब दूंगी।( व्यवधान)
अध्यक्ष महोदय : बैठिए। प्वाइंट ऑफ ऑर्डर नहीं होता। देखिए, हमारे सामने एक प्रश्न है।
( व्यवधान)
श्रीमती सुषमा स्वराज :अध्यक्ष जी, आप सबको सवाल पूछने दीजिए। मैं सबके प्रश्नों का जवाब दूंगी।( व्यवधान)
श्री मुलायम सिंह यादव (सम्भल): अध्यक्ष जी, हम लोगों को सवाल यह पूछना है,( व्यवधान)हम एक बात कहना चाहते हैं। अभी पिछले सप्ताह हम लखनऊ से शताब्दी में आए और पानी की बोतल का नाम हम भूल गए हैं। लेकिन वह अच्छी बोतल मानी जाती है। एक छोटे से उद्योगपति भी उस ट्रेन में थे और उनके सामने बोतल रखी गई तो जैसे ही उन्होंने पानी निकाला तो पानी में कीड़े मिले। जो कर्मचारी सेवा कर रहे थे, उनको जब पता चला तो वे दौड़कर आए। हम उनसे बोतल लेने ही वाले थे कि आपको दिखा देंगे लेकिन वे लेकर भाग गए। हम चाहते हैं कि आप उत्तर दें। जेपीसी बैठे। यह मामला किसी दल का नहीं है। न आपके दल का है, न मेरे दल का है। देश के करोड़ों लोगों की जान खतरे में है, इससे संबंधित यह मामला है। कितनी बीमारियां हो रही हैं और आज हम जैसे लोग ही आंख मूंदे हुए हैं।( व्यवधान)पोल्यूशन तो सब है ही लेकिन इतना गंदा पानी पिलाया जा रहा है और स्टेशनों से लेकर हर जगह चाहे वह जहाज में आप चले जाइए।( व्यवधान)इससे यह साबित हो गया है कि गंदा पानी पिलाया जा रहा है। यह आपका सवाल नहीं है। आप अच्छा काम करेंगी। जेपीसी बैठे और उसके बाद सारे तथ्य सामने आ जाने चाहिए, यही हमारी प्रार्थना है।( व्यवधान)
SHRI K. YERRANNAIDU (SRIKAKULAM): Sir, I have a point of order (Interruptions)
SHRI SATYAVRAT CHATURVEDI (KHAJURAHO): Sir, what is the point of order here? (Interruptions)
अध्यक्ष महोदय : हां, यह तो आपको बताना पड़ेगा कि कौन से रूल के तहत है?
SHRI K. YERRANNAIDU : Sir, my point of order is under Rule 372. The Minister has made a statement and in response to that you are allowing only two to three Members to ask questions. In that case we would lose the opportunity to ask questions. This is an alarming issue and so a discussion should be allowed on this (Interruptions)
श्रीमती सुषमा स्वराज: मैंने कह दिया कि दो-तीन नहीं, सबसे सवाल पुछवाइए।( व्यवधान)
SHRI K. YERRANNAIDU : Yes, correct.
Sir, you please allow a discussion on this issue. Everybody will participate and then Members can make a demand either for a JPC or for an investigation and Government can respond to that. But if you are allowing only two to three Members to ask questions on this then, we are losing the opportunity to express our views. That is my point of order.
श्री राज बब्बर (आगरा) : अध्यक्ष जी, जेपीसी की मीटिंग होनी चाहिए।( व्यवधान)
अध्यक्ष महोदय : राज बब्बर जी, आप बैठिए। देखिए, विपक्ष के लोग चाहते हं कि इस विषय पर प्रश्न पूछने चाहिए।
( व्यवधान)
श्रीमती सुषमा स्वराज: आपको जेपीसी बिठानी है, जेपीसी बिठाइए। ( व्यवधान)मुझे किसी को बचाना नहीं है।( व्यवधान)
अध्यक्ष महोदय : यहां कोई शोर मचाने जैसा प्रश्न नहीं है। इस प्रोसीजर के बारे में बोल रहा हूं क्योंकि आप प्रश्न पूछना चाहते हैं, मंत्री जी चाहती हैं कि इस विषय पर चर्चा भी हो तो वह तैयार हैं। लेकिन हमारे पास समय की पाबंदी है। इसलिए मैंने तय किया है कि कुछ सदस्यों को मैं प्रश्न पूछने की इजाजत दे रहा हूं। एक के बाद एक सदस्य को इजाजत दूंगा। बिल्कुल प्रश्न ठीक तरह से आ जाएंगे और उत्तर भी आ जाएंगे।
( व्यवधान)
श्री सत्यव्रत चतुर्वेदी :अध्यक्ष जी, आपने परम्परा से थोड़ा सा हटकर और आपने अपनी सहमति भी दी है, इसके लिए मैं आपको धन्यवाद देना चाहता हूं। एक छोटा सा और सीधा सा प्रश्न पूछने जा रहा हूं। हो सकता है कि मंत्री जी, शायद आपको इसका उत्तर देने में कुछ जानकारियों का अभाव हो।
हो सकता है, अगर ऐसा है तो आप पहले जानकारी लेकर बाद में मुझे सूचित कर दें, पर जितनी जानकारी हो, उसके आधार पर बता सकती हैं। मेरा केवल इतना ही पूछना है कि यह रिपोर्ट इस सदन में पढ़ने से पहले तक इस मामले में कितना चंदा दिया गया है ?
श्रीमती सुषमा स्वराज: किसको चंदा दिया गया है, यह भी बता दूंगी।( व्यवधान)
अध्यक्ष महोदय : आप बैठ जाएं। मंत्री जी का उत्तर सुनिए।
( व्यवधान)
अध्यक्ष महदोय : मंत्री जी उत्तर देने में सक्षम हैं, आप बैठिए।
( व्यवधान)
MR. SPEAKER: You cannot say that this should be allowed or this should not be allowed.
( व्यवधान)
MR. SPEAKER: No. I cannot allow everybody.
डॉ. विजय कुमार मल्होत्रा (दक्षिण दिल्ली): आपके समय में पेप्सी कोला जब आई थी, तो कितना चंदा लिया था, यह बताएं( व्यवधान)
अध्यक्ष महोदय : आप बैठिए।
श्री सत्यव्रत चतुर्वेदी : मेरा छोटा सा सवाल है, छोटा सा जवाब दे दें।( व्यवधान)
अध्यक्ष महोदय : आपको मंत्री जी उत्तर दे रही हूं, आप क्यों खड़े हैं।
( व्यवधान)
MR. SPEAKER: She is standing to reply to you. Do you not want to hear her? वह जो उत्तर देना चाहती हैं, पहले सुन लें।
( व्यवधान)
अध्यक्ष महोदय : मैंने आपको इजाजत नहीं दी है।
श्री श्रीप्रकाश जायसवाल (कानपुर) : मुलायम सिंह जी ने जो सुझाव दिया है कि इस मामले की जांच के लिए एक जे.पी.सी. गठित की जाए, मैं भी अपने को उससे सम्बद्ध करता हूं।( व्यवधान)
MR. SPEAKER: Shri Satyavrat Chaturvedi has raised a question.पासवान जी, आप क्यों खड़े हैं, मंत्री जी उत्तर दे रही हैं।
( व्यवधान)
MR. SPEAKER: Nothing will go on record.
(Interruptions)* श्रीमती सुषमा स्वराज: सबसे पहले मैं कहना चाहूंगी कि मैंने स्वयं आफर किया कि सवाल पूछिए, परम्परा से हटकर सवाल पूछे जाएं। उसके बाद मैंने यह आफर किया कि एक, दो या तीन नहीं, जितने सांसद सवाल पूछना चाहें, पूछ सकते हैं। उसके बाद उन्होंने कहा कि इस मामले की जांच के लिए जे.पी.सी. बनाई जाए। मैंने कहा कि नारा लगाने की जरूरत नहीं है, आप तुरंत जे.पी.सी. बनाना चाहते हैं तो आप बनाएं। मैं आफर कर रही हूं।( व्यवधान) अध्यक्ष जी, भाई सत्यव्रत चतुर्वेदी जी सवाल के लिए खड़े हुए( व्यवधान) रघुवंश जी अगर मैं मना कर रही हूं तो आप बोलें। कोई मना नहीं कर रहा है।आप बनाएं जे.पी.सी. और सरकार का कोई आदमी उसमें न रखें, विपक्ष के सदस्य उसमें रहें और रघुवंश जी को उसका अध्यक्ष बनाएं।( व्यवधान)जे.पी.सी. में कोई सरकारी पक्ष का सदस्य नहीं होगा, केवल विपक्ष के सदस्यों की जे.पी.सी. बनाएं।( व्यवधान)
SHRI ANIL BASU (ARAMBAGH): Let her come up with a Motion.
श्रीमती सुषमा स्वराज: नई परम्परा स्थापित करें। केवल विपक्ष की कमेटी बनाएं। उसमें सरकारी पक्ष का कोई भी सदस्य नहीं होगा। लेकिन मैं उनकी बात का जवाब देना चाहती हूं। जिस समय सत्यव्रत चतुर्वेदी जी खड़े हुए, मुझे बिल्कुल अपेक्षा नहीं थी कि वह ऐसा सवाल पूछेंगे। मैं उनको बहुत जिम्मेदार सांसद मानती हूं, लेकिन उनकी जानकारी के आधार पर मैं एक जानकारी उनको दे दूं।( व्यवधान)
*Not Recorded.
यह जो रिपोर्ट आई है, यह सरकार की ओर से नहीं आई है। यह सीएफटीआरआई लैबोरेट्री, मैसूर की तरफ से आई है जो हैल्थ मनिस्ट्री की लैब भी नहीं है। सीएफटीआरआई हिंदुस्तान में अकेली अक्रैडेटेड लैब है जो हैल्थ मनिस्ट्री की लैब नहीं है। यह उसकी रिपोर्ट है।( व्यवधान)जब आप कहते हैं कि चंदा लिया है तो सीधे-सीधे यह आरोप उस लैब पर लगता है जो हिंदुस्तान की एक-मात्र एक्रैडेटेड लैब है।( व्यवधान)
MR. SPEAKER: When the Minister is giving reply, you have no patience to listen to her.
श्रीमती सुषमा स्वराज : अध्यक्ष जी, उस लैब की विश्वसनीयता को खत्म करने का काम किया गया है।( व्यवधान)अध्यक्ष जी, इनके एक वाक्य से उसकी विश्वसनीयता पर प्रश्नचिन्ह लग जाता है।( व्यवधान)अपने राजनैतिक स्वार्थों की पूर्ति के लिए यह ऐसा कह रहे हैं( व्यवधान)अध्यक्ष जी, अंतर्राष्ट्रीय जगत में भारत की वह एक प्रतिष्ठा प्राप्त लैब है( व्यवधान)जिसकी छवि खराब की गयी है।( व्यवधान)आप जेपीसी बैठाना चाहते हैं तो बैठाइये, मुझे कोई एतराज नहीं है।( व्यवधान)
अध्यक्ष महोदय : मैंने रामविलास पासवान जी को इजाजत दी है, उनके अलावा किसी की बात रिकार्ड पर नहीं जाएगी। राज बब्बर जी,आप बैठ जाइये। बार-बार कहने की जरुरत नहीं है।
( व्यवधान)
MR. SPEAKER: Shri Ram Vilas Paswan will put his question now.
SHRI K. YERRANNAIDU : The Government is ready for any inquiry. You just decide about it.
श्री राम विलास पासवान: अध्यक्ष जी, स्वास्थ्य का मामला किसी का भी हो लेकिन पार्लियामेंट में उसकी जवाबदेही( व्यवधान)
अध्यक्ष महोदय : दोनों बोलेंगे तो मैं समझूंगा नहीं। आप बैठ जाइये।
( व्यवधान)
अध्यक्ष महोदय : मैं दो-तीन प्रश्नों की इजाजत दूंगा और जेपीसी बनाऊंगा।
( व्यवधान)
MR. SPEAKER: After Shri Ram Vilas Paswan’s question is replied to, I will go to form the JPC. Let me know what Shri Ram Vilas Paswan has to ask.
श्री राम विलास पासवान: अध्यक्ष जी, इसमें कोई ज्यादा बहस की आवश्यकता नहीं है। माननीय सुषमा स्वराज जी मंत्री हैं। लोगों के स्वास्थ्य की रक्षा करना और उसका परिवर्धन करना स्वास्थ्य मंत्रालय का काम है।( व्यवधान)कोई भी लैब हो लेकिन संसद में स्वास्थ्य मंत्री जी जवाबदेह हैं। इसलिए जो भी जानकारी माननीय मंत्री जी लेना चाहें ले लें। किसी के प्रति सदन अन्याय नहीं करना चाहता । कोका-कोला, कैम्पा, पैप्सी सब बंद हो गयी हैं क्योंकि लोग स्वास्थ्य के प्रति चिंतित हैं। अभी भी अखबार में रोज समाचार आ रहे हैं, बोतल के साथ आ रहे हैं, टीवी पर दिखलाया जा रहा है कि बोतल कितना गंदा है और उसको आपने सर्टफिकेट देने का काम किया है, चाहे लैब के माध्यम से ही किया हो।
श्रीमती सुषमा स्वराज : पहले स्टेटमेंट आप पढ़ लें। जो रिपोर्ट आई है उसे पढ़ लें। मैं रिपोर्ट को अपने आप नहीं बना सकती हूं। आप रिपोर्ट पढ़कर फिर बताइये।( व्यवधान)
श्री राम विलास पासवान: इन्होंने सर्टफिकेट दिया है।( व्यवधान)इनको बोलने की आदत है।( व्यवधान)पूरे सदन ने सुना है।( व्यवधान)
श्री सुदीप बंद्योपाध्याय (कलकत्ता उत्तर पश्चिम) : उन्होंने रिपोर्ट दी है, सर्टफिकेट कहां दिया हैं। बोलने की आदत तो आपको है।…( व्यवधान)
श्री राम विलास पासवान: यदि मंत्री जी जेपीसी के लिए तैयार हैं तो उसे यहां टेबल पर लखित रूप में रखा जाए। किसी संस्थान के कारण मल्टीनेशनल कंपनीज को अरबों रुपये का धक्का लगा है। मैं पूछना चाहता हं कि क्या उसके पहले भारत सरकार ने या स्वास्थ्य मंत्रालय ने कभी जांच कराकर रिपोर्ट दी है। ( व्यवधान)भारत सरकार द्वारा जांच कराई गयी है या नहीं।
एनजीओ किसी को सर्टफिकेट देगी, तो अच्छा हो जाएगा और वह सर्टफिकेट नहीं देगी, तो खराब हो जाएगा। मैं जानना चाहता हूं कि सरकार की तरफ से कब जांच कराई गई ? ( व्यवधान)
SHRI ANIL BASU : Sir, please allow me to speak. (Interruptions)
MR. SPEAKER: Can I not allow the Minister to speak? Do not you know the rules? Let the Minister reply when the question is asked. She has to reply. Please sit down. आप सिमप्ल रूल्स भी नहीं जानते हैं। एक प्रश्न आया है, उसका उत्तर आने दीजिए।
श्रीमती सुषमा स्वराज: अध्यक्ष जी, उन्होंने पूछा है कि इससे पहले क्या जांच कराई है, मैं उनको बताना चाहती हूं कि जिस समय बोटल वाटर का मामला उठा था ( व्यवधान)
श्री राम विलास पासवान: उससे पहले।
श्रीमती सुषमा स्वराज: यह मामला नहीं, मैं उससे पहले की बात कह रही हूं। मैं सोफ्ट डिं्रक्स की बात नहीं कह रही हूं। इससे पहले जब डिब्बा बन्द साफ पानी का मामला उठा था ( व्यवधान)अध्यक्ष जी, सोफ्ट डिं्रक्स अलग है और बोटल वाटर अलग है। ( व्यवधान)आप सुनते नहीं है। सारे बेइमान हैं और सारा ज्ञान का भण्डार आपके पास है। बोलने नहीं देंगे और बीच में खड़े हो जायेंगे।( व्यवधान)
MR. SPEAKER: Shri Paswan, you are expected to listen to the entire reply.
(Interruptions)
श्रीमती सुषमा स्वराज: अध्यक्ष जी, मैं कहना चाहती हूं कि इससे पहले जब डिब्बा बन्द बोतल पानी का मामला उठा था, तब आपने पूछा था कि एनजीओ से पहले सरकार ने जांच कराई या नहीं? एनजीओ की रिपोर्ट आने से पहले इसी CFTRI नेकोकाकोला और पैप्सी के ब्रान्ड उठाकर अपने आप जांच की थी, तब संसद में यह मामला नहीं उठा था। जब CSE की रिपोर्ट आई थी, उस समय भी CFTRI ने वही पाया था, जो आज इनके १२ ब्रान्ड्स में पाया है। इसी CFTRI की लैब ने CSE की रिर्पोट आने से पहले जांच अपने आप की थी और उस जांच में भी यही रिपोर्ट थी, जो आज आई है।
MR. SPEAKER: Please sit down. Rule No. 2 says that when the Chair stands, the Member has to sit down. This is rule No.2. The third rule is, the Member can ask a question and the Minister can reply.
Now, I am making my observation.
(Interruptions)
MR. SPEAKER: Nobody can prohibit me from making an observation.
Hon. Members have asked for appointment of JPC in the matter. I have permitted one or two Members to put their questions also. Since the JPC is to investigate the whole matter, I would request the Minister to follow the procedure. The procedure is, you have to bring a Motion. You can bring a Motion for appointment of JPC. The Speaker has absolutely no objection. You can do that and the Report can be brought by the Committee as early as possible. The Government will bring a Motion and I think this is the best procedure in the given circumstances.
Therefore, I go to the next item. The matter is over.
Shrimati Sushma Swaraj may move the Motion.
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