Lok Sabha Debates
Shri Sis Ram Ola Called The Attention Of The Minister Of Rural Development And ... on 21 May, 2012
> Title: Shri Sis Ram Ola called the attention of the Minister of Rural Development and Minister of Drinking Water and Sanitation to the situation arising out of shortage of Drinking Water in Jhunjunu and Churu Districts of Rajasthan and steps taken by the Government in this regard. श्री शीश राम ओला (झुंझुनू) : अध्यक्ष महोदया, मैं पेयजल और स्वच्छता मंत्री का ध्यान अविलम्बनीय लोक महत्व के निम्न विषय की ओर दिलाता हूं और प्रार्थना करता हूं कि वह इस संबंध में वक्तव्य दें “ देश में विशेषकर राजस्थान के झुंझुनू और चुरु जिलों में पेयजल के अभाव से उत्पन्न स्थिति तथा इस संबंध में सरकार द्वारा उठाए गए कदम।” ग्रामीण विकास मंत्री तथा पेयजल और स्वच्छता मंत्री (श्री जयराम रमेश): महोदया, मेरा एक लंबा वक्तव्य है, जो मैंने सदन के पटल पर रख दिया है। अध्यक्ष महोदया : शीश राम ओला जी, क्या आपने इसे पढ़ लिया है? *श्री जयराम रमेशः माननीय संसद सदस्य ने करोड़ों लोगों के जीवन पर असर डालने वाला अहम मुद्दा उठाया है। पेयजल की आपूर्ति जीवन की सबसे बड़ी जरूरत है। भारत में सिंचाई, बढ़ते औद्योगिकीकरण, शहरीकरण और जनसंख्या के कारण हर गुजरते साल के साथ जल संसाधनों पर विभिन्न मांगों का दबाव बढ़ता जा रहा है। यह दबाव तब और बढ़ जाता है, जब जलवायु में परिवर्तन के कारण वर्षा पर पड़ने वाले प्रभाव से पानी की उपलब्धता कम हो जाती है। हालांकि जल राज्य का विषय है, फिर भी भारत सरकार पेयजल उपलब्ध कराने के राज्यों के प्रयासों को बढ़ावा देने के लिए हर संभव वित्तीय और तकनीकी सहायता प्रदान कर रही है। गर्मी के महीनों में मानव आबादी और पशुओं को पर्याप्त पेयजल उपलब्ध कराने की चुनौती और बढ़ जाती है। इसके अलावा, 80औ पेयजल आपूर्ति जमीन के नीचे से पानी निकालकर की जाती है। जमीन से नीचे का पानी का स्तर हर वर्ष गर्मी के महीनों में और नीचे चला जाता है। इस चुनौती का मुकाबला करने के लिए सरकार ने पुनर्भरण संरचनाओं के स्रोतों और खानों की पहचान करने के लिए भूजल संभावना मानचित्र तैयार करने, भविष्य में पर्याप्त जल उपलब्ध कराने के लिए भूमिगत एक्विफरों की मैपिंग और देश भर में ग्राम जल सुरक्षा योजनाएं तैयार करने जैसे कई उपाय किये हैं। इन योजनाओं को तैयार करने का उद्देश्य आम लोंगों को पानी की मांग और उपयोग की निगरानी और नियमन करके उपलब्ध जल के उपयोग की योजना बनाने और प्रबंधन करने के लिए प्रेरित करना है। राजस्थान, पंजाब, हरियाणा, गुजरात, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश और कर्नाटक नामक 10 राज्यों में अति दोहित जल स्रोतों वाले 15 ब्लॉकों में प्रायोगिक योजनाएं शुरू की गई हैं। 1.4.2012 तक प्राप्त रिपोर्टों के अनुसार, देश भर में 16.64 लाख ग्रामीण बसावटों में से 12.72 लाख बसावटों में प्रतिदिन प्रति व्यक्ति कम से कम 40 लीटर सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराया जा रहा है। लेकिन अब भी लगभग 2.92 लाख बसावटों में प्रतिदिन प्रति व्यक्ति 40 लीटर से कम पेयजल उपलबध कराया जा रहा है और लगभग 99,000 बसावटों में पेयजल स्रोत जल गुणवत्ता की समस्याओं से ग्रस्त है। देश के पश्चिमी और दक्षिणी भू‑भाग अधिकतर रेगिस्तानी हैं और वहां सूखे की आशंका भी अधिक होती है, इसलिए ये क्षेत्र पेयजल की कमी से सबसे ज्यादा प्रभावित हैं। राष्ट्रीय ग्रामीण पेयजल कार्यक्रम (एनआरडीडब्ल्यूडी) के अंतर्गत राज्यों को वर्ष की शुरूआत में वार्षिक कार्य‑योजनाएं तैयार करनी होती हैं, जिनमें कवर की जाने वाली उन बसावटों और क्षेत्रों की प्राथमिकता तय की जाती है, जहां जलापूर्ति अपर्याप्त है। सरकार ने यह सुनिश्चित करने का प्रयास किया है कि राज्यों को दीर्घावधिक उपायों तथा आवश्यक अल्पकालिक उपायों एवं तात्कालिक कार्रवाई के लिए पर्याप्त संसाधन उपलब्ध हो। भारत निर्माण के प्रारंभ होने से लेकर अब तक ग्रामीण पेयजल क्षेत्र के लिए किए गए आवंटन में काफी अधिक वृद्धि हुई है। इस क्षेत्र के लिए आवंटन 2004‑05 में 2900 करोड़ रूपये से बढ़कर 2012‑13 में 10,500 करोड़ हो गया है। ग्रामीण क्षेत्रों में जल आपूर्ति उपलब्ध कराने के लिए राज्यों को 11वीं पंचवर्षीय योजना में 37,277 करोड़ रूपये रिलीज किए गए। इसी दौरान राज्य सरकारों ने भी अपने संसाधनों में लगभग समान राशि खर्च की। यह संभावना है कि 12वीं पंचवर्षीय योजना में ग्रामीण पेयजल क्षेत्र के परिव्यय में और अधिक वृद्धि देखने को मिल सकती है। सरकार न केवल पेयजल आपूति के लिए बल्कि मध्यम तथा दीर्घावधिक समाधानों की योजना बनाने के लिए राज्यों को तत्काल सहायता प्रदान कर रही है जिनमें स्पॉट स्कीम्स, एकल तथा बहु‑ग्रामीण योजनाएं शुरू करना, जलशोधन संयंत्रों की स्थापना करना तथा जल संरक्षण उपाय शुरू करना शामिल है जिससे भू‑जल का पुनर्भरण किया जा सकता है तथा वर्षा जल एकत्रीकरण जैसे जल एकत्रीकरण व्यवस्था शुरू की जा सकती है। मैं, माननीय संसद सदस्य का ध्यान इस ओर आकृष्ट करना चाहूंगा कि एनआरडीडब्ल्यूपी निधियों के आवंटन के मानदंड में मरुभूमि क्षेत्रों तथा सूखा‑प्रवण क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दिया जाता है। इसके अलावा, एनआरडीडब्ल्यूपी निधियों के आवंटन में मरुभूमि क्षेत्रों तथा सूखा‑प्रवण क्षेत्रों आदि के तहत आने वाले क्षेत्रों को 40औ वेटेज दी जाती है। 10औ एनआरडीडब्ल्यूपी निधियां 233 मरुभूमि विकास कार्यक्रम ब्लॉकों के लिए निर्धारित की गई हैं जिनमें से राजस्थान में 85 ब्लॉक हैं और इनमें से 8 ब्लॉक झुंझूनु में और 6 ब्लॉक चूरू जिले में हैं। राजस्थान को 2012‑13 में एनआरडीडब्ल्यूपी के अंतर्गत 1346 करोड़ रूपये का अनंतिम आवंटन किया गया है जो कि राष्ट्रीय आवंटन का 12.82औ है। मंत्रालय ने नागौर जिले में पेयजल आपूर्ति परियोजनाओं के लिए जापान इंटरनेशनल को‑ऑपरेशन एजेंसी (जेआईसीए) सहायता तथा भीलवाडा जिले में पेयजल आपूर्ति परियोजनाओं के लिए विश्व बैंक सहायता की सिफारिश भी की है। माननीय सदस्य द्वारा राजस्थान के झुंझूनु और चुरू जिलों में स्थिति के संबंध में उठाए गए मामलों पर राजस्थान सरकार से जानकारी एकत्र की गई है। झुंझूनु जिले में 12 शहर और 856 गांव हैं। हालांकि, सभी शहरों में पाईप के जरिए जल की आपूर्ति की जाती है लेकिन गांवों में आपूर्ति के अलग‑अलग स्रोत हैं। खेतड़ी के अलावा, सभी शाहरों में अब प्रतिदिन जल की आपूर्ति की जा रही है। खेतड़ी शहर में प्रत्येक 48 घंटे में एक बार जल की आपूर्ति की जाती है। खेतड़ी में जल आपूर्ति को बेहतर बनाने के लिए 47 लाख रूपए की लागत वाली एक परियोजना मंजूर की गई है जिसके तहत नए टयूबवेल तथा ऊंचाई पर जलाशय बनाने का प्रस्ताव किया गया है। अब तक, जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में सभी आबाद गांवों में जल आपूर्ति की काम‑चलाऊ व्यवस्था है और कहीं भी टैंकर के जरिए जल की आपूर्ति नहीं की जा रही है। झुंझूनु तहसील की अलसीशर पंचायत समिति में 14 गांव हैं जहां जल गुणवत्ता की समस्या है, जिसके लिए चुरू‑बिसाऊ नहर परियोजना से जल की आपूर्ति की जा रही है। चुरू जिले में 10 शहर और 854 गांव हैं। यहां भी सभी शहरों में पाईप के जरिए जल की आपूर्ति की जाती है जबकि गांवों में आपूर्ति के अलग‑अलग स्रोत हैं। सुजानगढ़ और राजगढ़ के अलावा, सभी शहरों में अब प्रतिदिन जल की आपूर्ति की जा रही है। सुजानगढ़ में प्रत्येक 48 घंटे में तथा राजगढ़ में प्रत्येक 72 घंटे में एक बार जल की आपूर्ति की जाती है। सभी आबाद गांवों में जल आपूर्ति की काम‑चलाऊ व्यवस्था है। 2012‑13 में "आपनी योजना" के दूसरे चरण के अंतर्गत, रतनगढ़‑सुजानगढ़ परियोजना के लिए 325 करोड़ रूपए आवंटित किए गए हैं जबकि, राजगढ़‑बूंगी परियोजना के लिए 248 करोड़ रूपए आवंटित किए गए हैं। ऐसी संभावना है कि 2014‑15 तक पूरे चुरू जिले में "आपनी योजना" के अंतर्गत पर्याप्त रूप से स्वच्छ पेयजल की आपूर्ति कर दी जाएगी। मेरा मंत्रालय, ग्रामीण क्षेत्रों में सभी लोगों को पर्याप्त रूप से स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने के लिए प्रयत्नशील है। मैं, इस प्रयास में माननीय सदस्यों के सहयोग की अपेक्षा करता हूं। विवरण‑1 दिनांक 1.4.2012 की स्थिति के अनुसार पेयजल आपूर्ति के बारे में ग्रामीण बसावटों की स्थिति विवरण‑2 2012‑13 में बसावटों के कवरेज के लिए राज्यवार लक्ष्य विवरण‑3 11वीं योजनावधि में ग्रामीण जल आपूर्ति के लिए निधियों का आवंटन, रिलीज और व्यय विवरण‑4 एनआरडीडब्ल्यूपी के अंतर्गत 2012‑13 के लिए राज्य‑वार अनंतिम आवंटन विवरण‑ I दिनांक 1.4.2012 की स्थिति के अनुसार पेयजल आपूर्ति के बारे में ग्रामीण बसावटों की स्थिति क्र.स.
राज्य कुल बसावटें बसावटें पूर्णतः कवर आंशिक रूप से कवर गुणवत्ता प्रभावित 1 2 3 4 5 6 1 आंध्र प्रदेश 72407 44469 27542 396 2 बिहार 107642 82772 10392 14478 3 छत्तीसगढ़ 72329 40392 25632 6305 4 गोवा 347 302 45 0 5 गुजरात 34415 34033 381 1 6 हरियाणा 7385 6169 1206 10 7 हिमाचल प्रदेश 53201 42111 11090 0 8 जम्मू व कश्मीर 12826 5815 6986 25 9 झारखंड 120154 118652 1109 393 10 कर्नाटक 59532 29750 23678 6104 11 केरल 11883 10969 0 914 12 मध्य प्रदेश 127197 90803 33976 2418 13 महाराष्ट्र 98842 88780 8541 1521 14 उड़ीसा 141928 74861 53800 13267 15 पंजाब 15338 12236 3057 45 16 राजस्थान 121133 70919 22365 27849 17 तमिलनाडु 94500 91914 2154 432 18 उत्तर प्रदेश 260110 245868 13838 404 19 उत्तराखंड 39142 28035 11093 14 20 प. बंगाल 95395 87668 3746 3981 21 अरूणाचल प्रदेश 5612 3076 2536 0 22 असम 86976 49010 22736 15230 23 मणिपुर 2870 1588 1280 2 24 मेघालय 9326 5528 3700 98 25 मिजोरम 777 711 66 0 26 नागालैंड 1432 1015 287 130 27 सिक्किम 2498 1805 693 0 28 त्रिपुरा 8132 2722 47 5363 29 अ. व नि. द्वीप समूह 491 433 58 0 30 चंडीगढ़ 18 18 0 0 31 दादर व नागर हवेली 70 0 70 0 32 दमन व दीव 21 0 21 0 33 दिल्ली 0 0 0 0 34 लक्षद्वीप 9 0 9 0 35 पुदुचेरी 248 244 4 0 कुल 1664186 1272668 292138 विवरण‑ II 2012-13 के दौरान बसावटों के कवरेज के (बसावटों की संख्या) लिए राज्यवार लक्ष्य क्र.स.
राज्य / संघ शासित प्रदेश आंशिक रूप से कवर गुणवत्ता प्रभावित कुल 1 आंध्र प्रदेश 4882 384 5266 2 अरूणाचल प्रदेश 279 0 279 3 असम 3807 3423 7230 4 बिहार 4170 5200 9370 5 छत्तीसगढ़ 5505 4173 9678 6 गोवा 0 0 0 7 गुजरात 795 225 1020 8 हरियाणा 943 7 950 9 हिमाचल प्रदेश 2524 0 2524 10 जम्मू व कश्मीर 1042 236 1278 11 झारखंड 16156 480 16636 12 कर्नाटक 6039 2148 8187 13 केरल 641 61 702 14 मध्य प्रदेश 19540 825 20365 15 महाराष्ट्र 4980 774 5754 16 मणिपुर 150 100 250 17 मेघालय 417 0 417 18 मिजोरम 60 0 60 19 नागालैंड 77 30 107 20 उड़ीसा 6709 2407 9116 21 पंजाब 1440 33 1473 22 राजस्थान 1284 1378 2662 23 सिक्किम 270 0 270 24 तमिलनाडु 6538 462 7000 25 त्रिपुरा 18 1034 1052 26 उत्तर प्रदेश 23150 850 24000 27 उत्तराखण्ड 1075 0 1075 28 प. बंगाल 846 1623 2469 29 अ. व नि. द्वीपसमूह 0 0 0 30 दादरा व नगर हवेली 0 0 0 31 दमन व दीव 0 0 0 32 दिल्ली 0 0 0 33 लक्षद्वीप 0 0 0 34 पुडुचेरी 17 0 17 35 चंडीगढ़ 0 0 0 कुल 113354 25853 139207 विवरण‑ III 11वीं योजना के दौरान एन आर डी डब्ल्यू पी के अंतर्गत आंबटन, रिलीज और व्यय (रू. करोड़ में) राज्य / संघ शासित प्रदेश 2007-08 2008-09 2009-10 2010-11 2011-12 कुल 11 वीं योजना ( 2007-2012) आबंटन रिलीज व्यय आबंटन रिलीज व्यय आबंटन रिलीज व्यय आबंटन रिलीज व्यय आबंटन रिलीज व्यय आबंटन रिलीज व्यय आंध्र प्रदेश 295.30 305.24 388.41 394.53 395.05 398.05 437.09 537.37 394.45 491.02 558.74 423.38 546.32 462.47 446.37 2164.26 2258.87 2050.66 अरूणाचल प्रदेश 112.41 112.41 121.31 146.12 162.46 160.97 180.00 178.20 193.80 123.35 199.99 176.55 120.56 184.83 213.38 682.44 837.89 866.01 असम 189.59 189.59 117.26 246.44 242.78 265.40 301.60 323.50 269.34 449.64 487.48 480.55 435.58 522.44 468.6 1622.85 1765.79 1601.15 बिहार 279.37 169.69 0.00 425.38 452.38 73.30 372.21 186.11 279.36 341.46 170.73 425.91 374.98 330.02 367.3 1793.40 1308.92 1145.87 छत्तीसगढ़ 95.95 95.95 104.16 130.42 125.26 112.42 116.01 128.22 104.06 130.27 122.01 97.77 143.57 139.06 141.12 616.22 610.50 559.53 गोवा 3.31 1.66 2.31 3.98 0.00 0.00 5.64 3.32 0.50 5.34 0.00 1.16 5.20 5.01 1.16 23.47 9.99 5.13 गुजरात 205.89 205.89 219.12 314.44 369.44 289.33 482.75 482.75 515.69 542.67 609.10 610.50 478.89 571.05 467.62 2024.64 2238.23 2102.26 हरियाणा 93.41 93.41 109.54 117.29 117.29 117.29 207.89 206.89 132.35 233.69 276.90 201.57 210.51 237.74 344.71 862.79 932.23 905.46 हिमाचल प्रदेश 117.46 130.42 132.45 141.51 141.51 141.49 138.52 182.85 160.03 133.71 194.37 165.59 131.47 146.03 145.97 662.67 795.18 745.53 जम्मू व कश्मीर 329.92 329.92 361.41 397.86 396.49 176.67 447.74 402.51 383.49 449.22 468.91 506.52 436.21 420.42 394.91 2060.95 2018.25 1823.00 झारखंड 113.88 84.46 117.51 160.67 80.33 18.85 149.29 111.34 86.04 165.93 129.95 128.19 162.52 148.17 169.84 752.29 554.25 520.43 कर्नाटक 278.51 283.16 286.57 477.19 477.85 449.15 573.67 627.86 473.71 644.92 703.80 573.93 687.11 667.78 782.85 2661.40 2760.45 2566.20 केरल 82.93 84.25 83.46 103.33 123.33 106.56 152.77 151.89 150.56 144.28 159.83 137.97 144.43 113.39 126.98 627.74 632.69 605.54 मध्य प्रदेश 251.62 251.62 267.56 370.47 380.47 368.61 367.66 379.66 354.30 399.04 388.33 324.94 371.97 292.78 339.59 1760.76 1692.86 1655.00 महाराष्ट्र 404.40 404.40 378.38 572.57 648.24 511.06 652.43 647.81 625.59 733.27 718.42 713.48 728.35 718.35 642.79 3091.02 3137.22 2871.31 मणिपुर 38.59 45.59 34.71 50.16 45.23 36.33 61.60 38.57 30.17 54.61 52.77 69.27 53.39 47.60 47.03 258.35 229.76 217.50 मेघालय 44.46 55.29 56.61 57.79 107.79 74.50 70.40 79.40 68.57 63.48 84.88 70.47 61.67 95.89 85.44 297.80 423.25 355.59 मिजोरम 31.88 38.88 30.16 41.44 54.19 45.48 50.40 55.26 51.11 46.00 61.58 58.02 39.67 38.83 54.03 209.39 248.74 238.80 नागालैंड 32.72 39.75 27.39 42.53 42.53 39.60 52.00 47.06 71.58 79.51 77.52 80.63 81.68 80.91 81.82 288.44 287.77 301.02 उड़ीसा 168.85 171.95 233.60 298.68 298.68 273.12 187.13 226.66 198.87 204.88 294.76 211.11 206.55 171.05 239.6 1066.09 1163.09 1156.30 पंजाब 52.91 51.80 40.28 86.56 86.56 96.68 81.17 88.81 110.15 82.21 106.59 108.93 88.02 123.44 122.32 390.87 457.20 478.36 राजस्थान 606.72 606.72 619.67 970.13 971.83 967.95 1036.46 1012.16 671.29 1165.44 1099.48 852.82 1083.57 1153.76 1429.18 4862.32 4843.95 4540.91 सिक्किम 13.42 20.13 15.36 17.45 32.45 28.85 21.60 20.60 28.98 26.24 23.20 19.51 28.10 69.19 24.49 106.81 165.57 117.19 तमिलनाडु 190.90 190.90 190.90 241.82 287.82 230.58 320.43 317.95 370.44 316.91 393.53 303.41 330.04 429.55 287.6 1400.10 1619.75 1382.93 त्रिपुरा 39.43 54.43 54.30 51.25 41.01 36.99 62.40 77.40 77.35 57.17 74.66 67.20 56.20 83.86 108.39 266.45 331.36 344.24 उत्तर प्रदेश 401.51 401.51 421.14 539.74 615.78 514.54 959.12 956.36 967.38 899.12 848.68 933.28 843.30 802.32 754.2 3642.79 3624.65 3590.54 उत्तराखण्ड 89.30 89.30 114.14 107.58 85.87 61.09 126.16 124.90 67.24 139.39 136.41 55.44 136.54 75.57 118.72 598.97 512.05 416.63 प. बंगाल 191.37 191.37 230.55 389.39 389.39 371.62 372.29 394.30 87.76 418.03 499.19 363.31 343.60 342.51 519.48 1714.68 1816.76 1572.72 अ. व नि. द्वीपसमूह 0.00 0.00 4.72 0.00 0.00 30.78 0.00 0.00 0.00 1.01 0.00 0.00 0.00 0.00 1.01 0.00 35.50 दादरा व नगर हवेली 0.38 0.00 0.00 0.00 0.00 0.00 0.00 0.00 0.00 1.09 0.00 0.00 0.00 0.00 1.47 0.00 0.00 दमन व दीव 0.00 0.00 0.00 0.00 0.00 0.00 0.00 0.00 0.00 0.61 0.00 0.00 0.00 0.00 0.61 0.00 0.00 दिल्ली 0.31 0.00 0.00 0.00 0.00 0.00 0.00 0.00 0.00 4.31 0.00 0.00 0.00 0.00 4.62 0.00 0.00 लक्षद्वीप 0.00 0.00 0.00 0.00 0.00 0.00 0.00 0.00 0.00 0.24 0.00 0.00 0.00 0.00 0.24 0.00 0.00 पुडुचेरी 0.31 0.00 0.00 0.00 0.00 1.00 0.00 0.00 0.00 1.54 0.00 0.00 0.00 0.00 1.85 0.00 1.00 चंडीगढ़ 0.00 0.00 0.00 0.00 0.00 0.00 0.00 0.00 0.00 0.40 0.00 0.00 0.00 0.00 0.40 0.00 0.00 कुल 4757.01 4699.67 4762.96 6896.72 7172.01 5998.28 7986.43 7989.72 6924.16 8550.00 8941.81 8161.41 8330.00 8474.02 8925.49 36520.16 37277.23 34772.30 विवरण‑ IV 2012-13 में प्रस्तावित एनआरडीडब्ल्यूपी आवंटन ( रू. करोड़ में) क्र.सं.
राज्य अनंतिम आवंटन 1 बिहार 497.50 2 छत्तीसगढ़ 169.08 3 गोवा 6.07 4 झारखंड 190.84 5 केरल 173.53 6 मध्य प्रदेश 449.33 7 महाराष्ट्र 881.35 8 उड़ीसा 246.78 9 पंजाब 102.70 10 तमिलनाडु 387.75 11 उत्तर प्रदेश 1102.48 12 उत्तराखंड 159.72 13 प. बंगाल 510.81 14 आंध्र प्रदेश 643.47 15 गुजरात 565.95 16 हरियाणा 249.41 17 हिमाचल प्रदेश 153.90 18 जम्मू एवं कश्मीर 510.76 19 कर्नाटक 858.70 20 राजस्थान 1346.06 21 अंडमान व निकोबार द्धीप समूह 1.15 22 पुदुचेरी 1.75 23 अरूणाचल प्रदेश 143.89 24 असम 550.53 25 मणिपुर 63.72 26 मेघालय 73.66 27 मिजोरम 47.54 28 नागालैंड 98.88 29 सिक्किम 34.07 30 त्रिपुरा 68.62 कुल 10290.00 श्री शीश राम ओला: महोदया, मैंने वक्तव्य को पढ़ा है। अच्छा होता कि यह वक्तव्य कल रात को मुझे मिलता तो मैं इसे तसल्ली से पढ़ लेता। कोई बात नहीं, मंत्री जी बड़े विद्वान हैं, उन्होंने बड़ी विद्वत्ता से उत्तर दिया है। लेकिन आज दिल्ली में, बॉम्बे में, कलकत्ता में या किसी बड़े शहर में पीने का पानी 48 घंटे नहीं मिले तो क्या कोई इसे बर्दाश्त करेगा। हम तो गांव के लोग हैं, गांव में रहते हैं। हमारे यहां मंत्री जी ने माना है, चुरू में दो जगह राजगढ़ और सुजानगढ़ और झुंझुनू जिले की खेतड़ी में 48 घंटे में पानी मिलता है। मैं आपके माध्यम से मंत्री जी से यह कहना चाहूंगा कि झुंझुनू जिले में और मेरी कांस्टीच्युंसी के सीकर जिले की फतेहपुर असेम्बली कांस्टीच्युंसी में और चुरू में कई जगह इतना खारा पानी है, उसमें दाल भी नहीं बन पाती है, लोग उस पानी को पीते हैं तो उन्हें हैजा हो जाता है। बारिश का पानी यदि कभी आता है, बारिश हमारे यहां हमेशा नहीं आती है तो हम उसका पानी इकट्ठा करते हैं, जहां चूहे पड़ते हैं, छिपकली पड़ती है, ऊंट का मींगना पड़ता है, बकरी की मिंगनी, भेड़ की मिंगनी और गाय, भैंस का गोबर पड़ता है, उस पानी को हम लोग, वे लोग पीते हैं, जो वहां बसते हैं। आज 64 साल की आजादी के बाद हमको शुद्ध पेयजल उपलब्ध नहीं हो पा रहा है। मंत्री जी ने बड़ी आसानी से यह फरमा दिया कि मैंने एक वक्तव्य डिटेल में रख दिया है। लेकिन असलियत कुछ और है, वक्तव्य कुछ और है।...( व्यवधान) बताऊंगा, आप मुझे हमेशा डिस्टर्ब करने की कोशिश मत कीजिएगा, मैं आपकी बहुत इज्जत करता हूं। हमारे यहां झुंझुनू जिले में और चुरू जिले की खास तौर से मैंने चर्चा की है, लेकिन बीकानेर, चुरू, झुंझुनू, नागौर, सीकर, बाड़मेर, जैसलमेर, टोंक, अजमेर ये सारे जिले ड्राउट प्रोन हैं। यहां माननीय मंत्री जी ने कुछ धन ज्यादा ड्राउट प्रोन एरिया में देने का जिक्र किया है, लेकिन अभी बाड़मेर के उत्तरलाई एयरपोर्ट पर आर्मी की एक एक्सरसाइज हो रही थी। राजस्थान की भूमि लगभग 11-12 सौ किलोमीटर हिन्दूमल कोट से लगाकर जो गंगा नगर के पास, वहां से बाड़मेर, रणओफकछ तक पाकिस्तान से लगती है। यह उत्तरलाई एयरपोर्ट भी पाकिस्तान के बॉर्डर पर बाडमेर में स्थित है। वहां पायलेट्स को पीने का पानी नहीं मिला, ऐसी खबर अखबारों में आयी, लोगों ने मुझे बताया। यह हालत राजस्थान में पीने के पानी की है। सबसे अधिक राष्ट्र की रक्षा के लिए कोई देश की सीमाओं पर तैनात हैं, तो वे राजस्थान के नौजवान हैं। उनको पीने का पानी नहीं मिले, इससे बड़ी और गंभीर कोई समस्या नहीं हो सकती। माननीय मंत्री जी ने चुरू बिसाऊ योजना का ज़िक्र किया। चुरू बिसाऊ योजना के 1 अरब 33 करोड़ रुपये मैंने मंज़ूर करवाए थे 1997-98 में। वे सौ गाँव मंडावा विधान सभा क्षेत्र और पंचायत समिति अलसीसर, वहाँ पर 15-16 गाँव अब भी बचे हैं जो उस योजना से जुड़े हुए हैं पर उनको अब तक पानी नहीं मिल रहा है। वहाँ पीने का पानी नहीं है, खारा पानी है। उनके लिए पीने का पानी उपलब्ध नहीं है। वे गाँव हैं - मंडावा विधान सभा क्षेत्र के दमकौर, जवाहरपुरा, होरी, मुखेकाबाद, बुद्धे बांस दूरपुरा, राणासर, बालूराम की ढाणी, जाबासर, नाथपुर, सोपरा, गोखरी, चारणों की ढाणी आदि। इसी प्रकार से सीकर ज़िले का फतेहपुर विधान सभा क्षेत्र, जो मेरे लोक सभा क्षेत्र में आता है, वहाँ गाँव हैं - सेखीसर, बोद्देसर, कलाणपुरा, ढाणी बेदणा, रामसीसर, जुगलपुरा, पालास, नैथवा, बैरास, चाचीवाठ, खेजिया, रोसावाँ, रोलसाबसर, गोबिन्दपुरा, हरदयालपुरा, देवास आदि, जहाँ पीने का पानी कड़वा है, खारा है और उपलब्ध नहीं है। ये सारे जिले जो मैंने राजस्थान के बताए हैं, ये ड्राउट प्रोन एरिया के हैं। यदि इनको पानी नहीं दिया गया तो ये वहाँ बसावट कैसे करेंगे, इन्हें प्लांट करना पड़ेगा। अब न कहीं ज़मीन मिलेगी, न कोई बसने की ज़मीन देगा, न खेती की देगा। इसलिए मेरा आपके माध्यम से माननीय मंत्री जी से यह निवेदन होगा कि वे इस सारे मसले पर गंभीरता से विचार करें और जो गाँव बिछाऊ चुरू योजना बनी थी, उससे बच गए हैं, अलसीसर पंचायत समिति के, उन सबको उसमें जोड़ा जाए, धन उपलब्ध कराया जाए और बाकी जो गाँव और ज़िले मैंने बताए हैं, उनके बारे में मंत्री जी क्या विचार रखते हैं, उनका मंत्रालय क्या सोच रहा है? क्या कोई योजना बनाई है या बनाने पर विचार कर रहे हैं, इसका स्पष्ट उत्तर आपके माध्यम से मैं मंत्री जी से चाहता हूँ। अध्यक्ष महोदया : धन्यवाद। मंत्री जी, जवाब दें। …( व्यवधान)
अध्यक्ष महोदया : आप बैठ जाइए। अभी ध्यानाकर्षण चल रहा है। Nothing will go on record. (Interruptions) …* अध्यक्ष महोदया : आप वरिष्ठ सदस्य हैं, आप नियम जानते हैं। आप बैठ जाइए। श्री जयराम रमेश: अध्यक्ष महोदया, मैं माननीय सदस्य को धन्यवाद देना चाहता हूं कि उन्होंने यह मुद्दा यहां उठाया है। मैं उनकी पीड़ा और संकट को समझ सकता हूं, क्योंकि मैंने खुद खेतड़ी और सुजानगढ़ का दौरा किया है। मैं जानता हूं कि राजस्थान में पानी की बहुत समस्या है। जिस मात्रा में पानी शहरों और गावों में उपलब्ध होना चाहिए, वह नहीं हुआ है। इसके अलावा पानी की गुणवत्ता की समस्या है, कई जगहों पर खारा पानी ही खास तौर से ज्यादा मिलता है। श्री शीश राम ओला : फ्लोराइड की भी मात्रा पानी में ज्यादा है, जिसकी वजह से दांत खराब हो जाते हैं। श्री जयराम रमेश : मैं फ्लोराइड का भी ज़िक्र करूंगा। अध्यक्ष महोदया, मैं आपसे माफी मांगना चाहता हूं कि मुझे कहा गया था कि आज दस बजे के पहले अगर वक्तव्य पहुंच जाएगा तो वक्तव्य बांटा जाएगा। वक्तव्य तो परसों ही तैयार था। चूंकि कल छुट्टी थी, इसलिए हमने आज पहुंचाया है। मैं माफी चाहता हूं कि इनको कल उसे देखने का मौका नहीं मिला। महोदया, ऐसा तो मैंने पहले भी कई सवालों के जवाब में कहा है कि हम मंत्रालय की ओर से जो राष्ट्रीय पेयजल कार्यक्रम चलाते हैं, उससे हम राज्य सरकारों को मदद देते हैं। राज्य सरकार जिलेवार प्रस्ताव तैयार करती है। वे प्रस्ताव हमारे पास आते हैं और हम उनको अनुमोदन देते हैं। माननीय सदस्य को यह जानकर खुशी होगी कि इस साल, यानी वर्ष 2012-13 में पेयजल और स्वच्छता के आवंटन के लिए बजट में 40 प्रतिशत की वृद्धि की गई है।...( व्यवधान) सुनिए! सुनने का थोड़ा कष्ट कीजिए। इस साल सारे देश में दस हजार पांच सौ करोड़ रुपए नेशनल रूरल ड्रिकिंग प्रोग्राम के लिए रखे गए हैं। राजस्थान के लिए 1300 करोड़ रुपए का प्रबंध किया गया है यानी 13 प्रतिशत बजटरी एलोकेशन सिर्फ राजस्थान में ही खर्च होगा और यह नंबर वन स्थान पर है, क्योंकि हम जानते हैं कि यहां पानी की समस्या बहुत गम्भीर है। मैडम स्पीकर, जब हम समर्थन देते हैं तो राज्य के स्तर पर समर्थन देते हैं। राज्य सरकार प्रस्ताव लाती है और हम राज्य सरकार के एनुअल एक्शन प्लान को समर्थन देते हैं। अगर आप राजस्थान सरकार के एनुअल एक्शन प्लान देखें तो पचास फीसदी खर्च, पिछले साल और इस साल भी, वह बाड़मेर, नागौर, जोधपुर, जैसलमेर, जयपुर और झालावाड़ जिलों में होता है। हमारे एनआरडीडब्ल्यूपी झुंझुनू में करीब 70 करोड़ रुपए और चुरू में करीब पचास करोड़ रुपए जाएंगे और राज्य सरकार का भी उसमें इतना ही कंट्रीब्यूशन होगा। झुंझुनू में करीब 140 करोड़ रुपए और चुरू में करीब सौ करोड़ रुपए खर्च होंगे। मैं मानता हूं और यह स्वीकार करता हूं कि आज भी राजस्थान में कई जिलों में चालीस लीटर प्रति व्यक्ति पानी हम नहीं दे पाए हैं। कई जगह पानी की गुणवत्ता की समस्या है, फ्लोराइड की समस्या है और खारे पानी की समस्या है। फ्लोराइड में नागौर और भीलवाड़ा कें लिए वर्ल्ड बैंक को एक अलग से विशेष प्रोजैक्ट तैयार करके हमने भेजा है और मैं उम्मीद करता हूं कि हमें शीघ्र ही उसकी अनुमति मिलेगी। इसके अलावा जब कभी राज्य सरकार से प्रस्ताव आते हैं और राज्य सरकार हम से विशेष तरह की मांग करती है कि हमें कुछ और अतिरिक्त धनराशि की जरूरत है तो हम अवश्य देने को तैयार हैं। मैं माननीय सदस्या को बताना चाहता हूं कि हमारे फार्मुले या मानक में मरुस्थल जिलों को प्राथमिकता दी जाती है। हमारे साढ़े दस हजार करोड़ रूपए में से करीब बीस प्रतिशत पैसा केवल मरुस्थल ब्लॉक्स के लिए ही है। इससे राजस्थान को बहुत फायदा होगा। जहां तक झुंझुनू और चुरू का सवाल है, मैं माननीय सदस्य को जानकारी देना चाहता हूं कि चुरू में खेतड़ी की जो समस्या है, वह अगले दो-तीन साल तक दूर होने की उम्मीद है और झुंझुनू में जो प्रोजैक्ट राज्य सरकार की ओर से लिए गए हैं, जिनके लिए सहायता दी जा रही है, मुझे कहा गया है कि वर्ष 2014-15 तक यह योजनाएं पूरी तरीके से समाप्त हो जाएंगी। जिन समस्याओं को माननीय सदस्य ने झुंझुनू और चुरू के संदर्भ में उठाया है, वे अगले दो-तीन साल में मैं उम्मीद करता हूं कि ओनगोइंग कार्यक्रम के द्वारा उनमें कुछ सफलता देखने को मिलेगी। अगले दो-तीन साल में गुणवत्ता की समस्या है, कई बसावटों को पेयजल सही मात्रा में नहीं मिल रहा है, उनमें भी कुछ परिवर्तन देखने को मिलेगा। श्री शीश राम ओला : माननीय मंत्री जी, बिसाउ चुरू स्कीम में 100 गांवों को इन्दिरा गांधी कैनाल का पानी आप झुंझनू में दे रहे हैं, 65 गांवों को चुरू जिले में दे रहे हैं। उसमें मैंने ये जो पन्द्रह-सोलह गांवों के बारे में आपसे निवेदन किया है, आप चाहें तो मैं दुबारा पढ़ दूं या मैं अलग से आपको चिट्ठी लिख दूंगा, उन गांवों का उस योजना में उनसे जुड़ना जरूरी था। उस योजना में ये खारे पानी वाले गांव हैं जो बच गए हैं। इनको अलग से जोड़ने के लिए आप अपना हिस्सा राज्य सरकार को भेजें और राज्य सरकार को यह आदेश भी दें कि वे भी अपना हिस्सा देकर उन गांवों को भी इसमें जोड़ दें जो गांव इसमें बच गए हैं। हमारे यहां पानी इतना नीचे चला गया है कि सारा जिला डर्ट ज़ोन में है। हम वहां कुआं खोद नहीं सकते। वहां हजार फीट पर भी पानी मिल नहीं सकता। आप कहां से उन्हें पानी देंगे? अध्यक्ष महोदया : आप माननीय मंत्री जी को ये सूचनाएं भेज दीजिए। 1 2.22 hrs (Dr. M. Thambidurai in the Chair) श्री जयराम रमेश : महोदया, 24 और 25 मई को सारे राज्यों के पेयजल मंत्रियों की बैठक हो रही है। उसमें मैं राजस्थान सरकार से विशेष तौर से चुरू और झुंझनू की बात उठाऊंगा और जो जानकारी वे भेजेंगे, मैं माननीय सदस्य को भेज दूंगा। ...( व्यवधान) (Placed in Library, See No. LT 6983/15/12)