Lok Sabha Debates
Regarding Mob Lynching Incidents In Different Parts Of The Country. on 24 July, 2018
Sixteenth Loksabha an> Title: Regarding mob lynching incidents in different parts of the country.
SHRI SUDIP BANDYOPADHYAY (KOLKATA UTTAR): Madam, I want to draw your attention regarding mob lynching. Mob lynching is creating an alarming situation in different parts of the country. All sensible persons are in a mood to condemn this incident.
Madam, it is a heinous, inhuman and brutal crime. But, a few ugly motivated people are taking advantage of it and are trying to create disturbance in the country. We demand an exemplary punishment to those who are creating this mischief and are creating a very uncertain situation. Our parliamentary democratic system is under threat. … (Interruptions) What I would say is that the Government should not keep mum and should not allow such things to happen. … (Interruptions)
Madam, we are for a united India. We want to stop lynching. We want that the Government of India, if necessary, should give directions to the State. The hon. Minister, Shri Rajnath Singh Ji, always tells us that it is a State subject. Even if it is a State subject, the Government of India should take some initiative. So, I would request the hon. Minister of Home Affairs to say a few words on this issue of lynching. We all wholeheartedly condemn such types of incidents happening in the country.
एडवोकेट जोएस जॉर्ज और श्रीमती सुप्रिया सुले को श्री सुदीप बन्दोपाध्याय द्वारा उठाए गए विषय के साथ संबद्ध करने की अनुमति प्रदान की जाती है। … (व्यवधान)
माननीय अध्यक्ष : आप सभी लोग यह समझ लीजिए कि रोज-रोज ऐसा नहीं चलेगा।
… (व्यवधान)
माननीय अध्यक्ष : हर नेता को नहीं बोलना चाहिए। कल शाम को राजनाथ सिंह जी ने यहां स्टेटमेंट दिया था। कल शाम को हमारे होम मिनिस्टर ने यहां स्टेटमेंट भी दिया था। उन्होंने कुछ कमेटी का भी गठन कि या है। हरेक को यह विषय उठाना सही नहीं है। … (व्यवधान)
माननीय अध्यक्ष : आप बैठिए। हर चीज को पोलिटिसाइज मत करो। मैं बोल रही हूं। कल शाम को माननीय होम मिनिस्टर ने स्टेटमेंट दिया था, फिर भी अगर आप दोबारा स्टेटमेंट चाहते हैं तो मैं होम मिनिस्टर जी को कहूंगी कि वह इस बारे में कहें। अगर हर नेता उसी बात को बार-बार बोलना चाहता है तो आज एक बार चर्चा हो जाए, सभी नेता आज इसी पर बोलिए , मगर रोज-रोज ऐसा नहीं चलेगा। … (व्यवधान)
माननीय अध्यक्ष : हो रहा है तो क्या करें? यहां से कुछ तो हो रहा है। जितना कर सकते हैं, कर रहे हैं। अब आप बोलोगे कि सजा दो, तो यह कोर्ट का काम है। होम मिनिस्टर ने कल भी बताया था, अभी भी बताने को तैयार हैं। … (व्यवधान)
माननीय अध्यक्ष : करण सिंह जी, आपको कल मैंने यह विषय उठाने का समय दिया था। अभी आप अपनी सीट पर जाइए। … (व्यवधान)
श्री मल्लिकार्जुन खड़गे ( गुलबर्गा) : मैडम स्पीकर, आपको धन्यवाद।
माननीय अध्यक्ष : आप बोलिए , कोई बात नहीं । आपका भी पेट भरिए ।
… (Interruptions)
माननीय अध्यक्ष : वह दे रहे हैं ।
… (व्यवधान)
माननीय अध्यक्ष : He wants to say same thing.
… (व्यवधान)
माननीय अध्यक्ष : आप लोग बैठिए । आप क्या चाहते हैं?
… (व्यवधान)
माननीय अध्यक्ष : गृह मंत्री जी बोलेंगे, लेकि न अन्य लोग भी बोलना चाहते हैं। आपके बोलने से ये लोग संतुष्ट नहीं हैं। He wants to say the same thing. … (व्यवधान)
श्री मल्लिकार्जुन खड़गे : मैडम स्पीकर, आज मॉब लिंचिंग पर चिन्ता जताई जा रही है, लेकिन सड़क पर हालात वही हैं। राजस्थान के अलवर में गो-तस्करी के आरोप में एक व्यक्ति की पीट-पीटकर हत्या कर दी गई। … (व्यवधान) माननीय अध्यक्ष : बोलने दीजिए । एक बार जितना बोलना चाहते हैं, बोल लेने दीजिए ।
श्री मल्लिकार्जुन खड़गे : मैडम, मृतक का नाम रकबर खान है। … (व्यवधान)
माननीय अध्यक्ष : नाम वगैरह पेपर्स में आ चुका है। आप उसको क्यों रिपीट कर रहे हैं?
… (व्यवधान)
श्री मल्लिकार्जुन खड़गे : मैडम स्पीकर, यह महत्वपूर्ण है और वहां पर डायरेक्ट पुलिस इसमें इनवाल्व्ड है।… (व्यवधान) माननीय अध्यक्ष : आपको ऐसा आरोप नहीं लगाना चाहिए। Nobody knows as to what is happening exactly. … (व्यवधान)
श्री मल्लिकार्जुन खड़गे : मैडम स्पीकर, वे लोग डेयरी फार्म के लिए अपनी गाय लेकर जा रहे थे, उनके ऊपर गोरक्षकों ने हमला कि या और वे गोरक्षक वहां के …* के शिष्य हैं। … (व्यवधान) माननीय अध्यक्ष : ऐसे आरोप यहां पर पेपर में पढ़कर लगाए जाते हैं तो मैं उनको रिकॉर्ड में नहीं जाने दूंगी, क्योंकि जिसकी इनवेस्टीगेशन होनी है, वह इनवेस्टीगेशन होने दीजिए । … (व्यवधान)
माननीय अध्यक्ष : नहीं, I am sorry. क्या आप वहां पर मौजूद थे?
… (व्यवधान)
श्री मल्लिकार्जुन खड़गे (गुलबर्गा): मैडम स्पीकर, यह सच्चाई है।… (व्यवधान)
माननीय अध्यक्ष : नहीं, I am sorry. आप बैठिए। इनवेस्टिगेशन होने दीजिए ।
… (व्यवधान)
माननीय अध्यक्ष : आप यह बोलिए कि कार्रवाई होने दो ।
… (व्यवधान)
श्री मल्लिकार्जुन खड़गे : मैडम स्पीकर, अगर सरकार के लोग ही उसका सपोर्ट करने लगें और मरने वालों को यहां पर रखकर, गाय के लिए ऐसा करते हैं। सरकार वहां पर इस पर रिस्पांस नहीं दे रही है। हमारी मांग है कि यहां पर होम सेक्रेटरी के नेतृत्व में कमेटी बनाने की बजाए, ग्रुप ऑफ मिनिस्टर्स जो बना है, उनको करने दीजिए, लेकि न मैं साथ ही डिमाण्ड करता हूं कि सिटिंग सुप्रीम कोर्ट जज से इन घटनाओं की इनक्वायरी की जाए और रिपोर्ट आने दीजिए और जो अपराधी हो उसे शिक्षा दीजिए । … (व्यवधान) माननीय अध्यक्ष : श्रीमती सुप्रिया सुले, श्री राजीव सातव और श्री एन. के. प्रेमचन्द्रन को श्री मल्लिकार्जुन खड़गे द्वारा उठाए गए विषय के साथ संबद्ध करने की अनुमति प्रदान की जाती है। … (व्यवधान)
माननीय अध्यक्ष : मोहम्मद सलीम जी, आप बोलिए ।
… (व्यवधान)
माननीय अध्यक्ष : अब आप बैठ जाइए। आपकी डिमाण्ड आ गयी है।
…(व्यवधान)
श्री मोहम्मद सलीम (रायगंज) : मैडम, संसद में मॉब लिंचिंग या हेट क्राइम के बारे में चर्चा करना भी हमारी मर्यादा के लिए शोभा नहीं देती है।…(व्यवधान) माननीय अध्यक्ष : नहीं, चर्चा नहीं है। आप अपनी बात कहिए।
…(व्यवधान)
श्री मोहम्मद सलीम : मैडम, सड़कों पर, गांवों में ऐसी घटनाएं, चाहे वे कि सी अफवाह के आधार पर हो, चाहे वह गोरक्षा के नाम पर हो, चाहे वह चाइल्ड-लिफ्टर के नाम पर हो, यह जो स्ट्रीट जस्टिस मॉब के द्वारा हो रहा है, इस पर चर्चा करना हमारे लिए भी बहुत मर्यादित नहीं होता है।…(व्यवधान) लेकि न पिछले कई वर्षों से…(व्यवधान) मैं यह नहीं बोल रहा हूं कि इस सरकार में हो रहा है। …(व्यवधान) हमने पहले भी जब चर्चा की थी, पिछले दस-बारह सालों में ऐसी स्थिति देश में बन रही है और बिगड़ रही है।…(व्यवधान) इसको मानना चाहिए। हमने वर्ष 2015 में सदन में चर्चा की थी। …(व्यवधान) जब अखलाक की मौत हुई थी, पहलू खान और रकबर खान का मैं नाम नहीं देना चाहता हूं, ये मीडिया में हैं। उस समय हमारे देश के लीडिंग इंटेलेक्चुअल्स ने पद्मश्री, पद्म विभूषण, जो आपके गृह मंत्रालय से दिए जाते हैं, राष्ट्रपति द्वारा दिए जाते हैं, …(व्यवधान) वे सब अवार्ड्स वापस हो रहे थे। …(व्यवधान) उस समय आपको मानना चाहिएए था। …(व्यवधान) तभी समझना चाहिएए था …(व्यवधान) न कि सुप्रीम कोर्ट यह बोले, फिर आप कमेटी बनाएं और दिल्ली के नजदीक यह हो रहा है। मैं समझता हूं कि यह फैल रहा है, जो खतरनाक है। …(व्यवधान) यह सिर्फ हिन्दू-मुसलमान का मामला नहीं है, यह गाय का मामला भी नहीं है। स्वामी अग्निवेश के ऊपर भी हमला हो रहा है। …(व्यवधान) हम अगर हत्यारे को माला पहनाएंगे, बचाएंगे, …(व्यवधान) जो बंगाल में और त्रिपुरा में कभी नहीं होता था, त्रिपुरा में चार लोगों की मॉब लिंचिंग हुई है। …(व्यवधान) बंगाल में छ: लोगों का हुआ है। …(व्यवधान) यह नफरत की आग पूरे देश में फैल रही है। …(व्यवधान) मैं कि सी एक राज्य की बात नहीं कर रहा हूं।…(व्यवधान) यह मामला सिर्फ राजस्थान का नहीं है। …(व्यवधान) यह हेट क्राइम इन पॉलिटिक्स है।…(व्यवधान) HON. SPEAKER: I can understand.
श्री मोहम्मद सलीम : मैडम, अमेरिका में काली चमड़ी के लोगों की 100 साल पहले व्हाइट सुप्रीमेसी के नाम पर हत्या की जाती थी। …(व्यवधान) वह मानवाधिकार के ऊपर लांछन था। …(व्यवधान) उसके लिए जो मेजॉरिटैरियनिज्म की पॉलिटिक्स है, वह हाथ बढ़ाती है। …(व्यवधान) माननीय अध्यक्ष :
एडवोकेट जोएस जॉर्ज, डॉ.ए. सम्पत, श्री इन्नोसेन्ट, श्री पी.के. बिजू और श्री एम. बी. राजेश को श्री मोहम्मद सलीम द्वारा उठाए गए विषय के साथ संबद्ध करने की अनुमति प्रदान की जाती है।
Nothing will go on record.
…(Interruptions)…* HON. SPEAKER: Thambidurai Ji, you start. Nothing else would go on record.
DR. M. THAMBIDURAI (KARUR): Madam Speaker, we know that so many incidents of lynching are taking place throughout the country. It is not confined to one State. So, we are very much concerned about the issue of lynching. Why is it happening? Even though law and order is a State subject, now-a-days, the States want the support of the Centre to modernize the police system. Without modernisation, we cannot find out the places where such things are happening. We have to see where it originates and how it originates. We have to study the root cause of this problem. For example, child trafficking is also taking place. In Tamil Nadu also so many things have happened. I want to highlight those things also. People are moving suspiciously in villages, with the result, some news and some stories spread. Afterwards, what happens is that people come together and beat up the person who is moving suspiciously. He may be innocent or he might have committed some crime. We do not know that. But mobs come and beat such persons. Why is it happening? What the intelligence is doing? So, it is very important to strengthen intelligence to stop such incidents.
We have been elected to serve the people. Earlier so many kings ruled the country. Even though people are kings and masters, they have sent us like kings. They cannot come here. They have sent us here. Therefore, our first priority should be law and order. All the States have to maintain law and order. If they are not able to do it, what is the role of the Centre? You have to provide intelligence input to them. We have to develop technologies throughout the country to find out criminals.
I would like to know whether we are able to use modern technologies to identify these kinds of criminals. Therefore, through you, I would like to request the hon. Minister that the Central Government should come forward to stop these kinds of incidents of mob lynching. That is what we expect from the Central Government.
HON. SPEAKER:
Shri Rabindra Kumar Jena is permitted to associate with the issue raised by Dr. M. Thambidurai.
गृह मंत्री जी, आपने कल स्टेटमेंट दिया था, मगर मैं दोबारा आप से निवेदन कर रही हूं।
…( व्यवधान)
गृह मंत्री (श्री राजनाथ सिंह): अध्यक्ष महोदया …(व्यवधान)
माननीय अध्यक्ष : आपके गृह मंत्री जी बोल रहे हैं तो आपको और विशेष कुछ बोलना है।
…( व्यवधान)
श्री राजनाथ सिंह : अध्यक्ष महोदया, लिंचिंग …( व्यवधान)
माननीय अध्यक्ष : आपने कल बोला था, आप बैठ जाइए।
…( व्यवधान)
माननीय अध्यक्ष : नो, नथिंग।
…( व्यवधान)
माननीय अध्यक्ष : ऐसा नहीं होता है, आपके लीडर ने बोला है। आप बैठ जाइए।
…( व्यवधान)
श्री राजनाथ सिंह : अध्यक्ष महोदया, मैं यह स्पष्ट करना चाहता हूं कि हम लिंचिंग की घटनाओं को लेकर चिंतित ही नहीं हैं, बल्कि इसे भारत सरकार ने बहुत ही गंभीरतापूर्वक लिया है। लिंचिंग की घटनाएं, जैसा मैंने पहले भी कहा था, आज फिर मैं अपनी बात को दोहराना चाहता हूं कि केवल चार-पांच वर्षों से यह प्रारंभ नहीं हुई है, बल्कि वर्षों से इस देश में लिंचिंग की घटनाएं चल रही हैं। …(व्यवधान) नो-कॉन्फिडेंस मोशन पर अपने विचार व्यक्त करते हुए मैंने यह भी कहा था कि सबसे बड़ी लिंचिंग की घटना इस देश में घटित हुई है तो वर्ष 1984 में घटित हुई है।…(व्यवधान) मेरा यह कहना है कि भारत सरकार ने इसे बहुत गंभीरतापूर्वक लिया है।…(व्यवधान) माननीय सुप्रीम कोर्ट ने भी अपने ऑब्जर्वेशंस दिए हैं।
माननीय अध्यक्ष : अब आप भी बार-बार बोलेंगे, आप बैठ जाइए।
…( व्यवधान)
श्री राजनाथ सिंह : अध्यक्ष महोदया, कल ही अंडर द चेयरमैनशिप ऑफ होम सेक्रेट्री, एक हाई लेवल कमेटी बनाई गई है। जिसमें सेक्रेट्री, डिपार्टमेंट ऑफ जस्टिस, सेक्रेट्री, डिपार्टमेंट ऑफ लीगल अफेयर्स, सेक्रेट्री, लैजिस्लेचर डिपार्टमेंट और सेक्रेट्री, सोशल जस्टिस एंड एम्पावरमेंट सदस्य होंगे। चार सप्ताह के अंदर यह हाई लेवल कमेटी अपनी रिकमेंडेशंस देगी और उसके बाद ग्रुप ऑफ मिनस्टिर्स, जो हमारी चेयरमैशिप में बना है। मिनिस्टर, एक्सटर्नल अफेयर्स, मिनिस्टर, रोड ट्रांसपोर्ट एंड हाइवेज, मिनिस्टर, लॉ एंड जस्टिस और मिनिस्टर, सोशल जस्टिस एंड इम्पावरमेंट उस ग्रुप ऑफ मिनिस्टर्स के सदस्य होंगे, जो कि हाई लेवल कमेटी की रिकमेंडेंशंस पर विचार करने के बाद यह अपना फैसला करेंगे कि लिंचिंग के विरुद्ध कठोर कार्रवाई करने के लिए हमें क्या-क्या कदम उठाना चाहिए। …( व्यवधान) उसके लिए जो भी प्रभावी कदम उठाना पड़ेगा, हम उठाने को तैयार हैं। यदि उसके लिए कानून बनाने की जरूरत होगी तो हम कानून भी बनाने को तैयार हैं।