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Lok Sabha Debates

Further Discussion On The Motion Of Thanks On The President'S Address, Moved By ... on 7 February, 2017

Sixteenth Loksabha an> Title: Further discussion on the Motion Thanks on the President's Address, moved by Dr. Mahesh Sharma on 3rd February, 2017.

*श्री हरि मांझी (गया) ः हमारी सरकार का एक ही लक्ष्य है गरीबी उन्मूलन तथा स्वास्थ्य क्षेत्र में विकास एवं नई योजनाओं को अमल में लाना, जिससे "स्वस्थ भारत का निर्माण हो। " साथ ही साथ, अनुसूचित जाति, जनजाति तथा पिछड़े वर्ग का उत्थान हो सके, हम इस पर विचार एवं योजना का स्वागत करते हैं तथा पूर्ण समर्थन करते हैं।

          माननीय राष्ट्रपति जी के अभिभाषण में पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी के एकात्म मानवता दर्शन में अंत्योदय की परिकल्पना का उल्लेख है, जिसका उद्देश्य अंतिम व्यक्ति तक अवसर प्रदान करते हुए उसे सशक्त करना है। माननीय राष्ट्रपति जी के इस अभिभाषण के अनुसार सरकार के सभी कार्यक्रम अंत्योदय के सिद्धांत पर आधारित हैं। यह सरकार गरीबों की उन्नति, किसानों की समृद्धि और युवाओं को रोज़गार दिलाने पर केन्द्रित है। यह सरकार खाद्य सुरक्षा, सबके लिए आवास एवं ऐसी सब्सिडियों पर अधिक ज़ोर देती है, जो सबसे अधिक जरूरतमंद को तब जरूर मिले जब उसे उनकी सर्वाधिक आवश्यकता है। गर्व की बात है कि प्रधानमंत्री जन-धन योजना के अंतर्गत लगभग 25 करोड़ से भी अधिक खाते खोले गये, जिनमें 15 करोड़ खाते चालू हालत में हैं और इनमें कुल मिलाकर 32 हज़ार करोड़ रूपए जमा हैं। यह सरकार सामाजिक सुरक्षा उपलब्ध कराने के लिए तीन नई योजनाएं प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना, प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना एवं अटल पेंशन योजना लाई है, जो समाज के अब तक वंचित वर्गों को बीमा सुरक्षा एवं पेंशन मुहैया कराएगी।

          सरकार  ने नई यूरिया नीति 2015 अधिसूचित की है, जिसका उद्देश्य स्वदेशी उत्पादन और ऊर्जा के सही उपयोग को बढ़ावा देना है। इससे अगले तीन वर्षों के दौरान प्रतिवर्ष 17 लाख मीट्रिक टन अतिरिक्त यूरिया का उत्पादन होगा। इससे यूरिया के अवैध प्रयोग पर रोक लगेगी। वर्ष 2016 में यूरिया का सर्वाधिक उत्पादन हुआ है।

          इस सरकार ने भ्रष्टाचार पर पूरी तरह से लगाम लगाया है और भ्रष्टाचारियों को दंड देने में नरमी नहीं बरती है और भ्रष्टाचार निरोधी अधिनियम में कड़े संशोधन भी किए जा रहे हैं। इस सरकार ने कोयला क्षेत्र में गतिशील और व्यापक सुधार किए हैं और पारदर्शी नीलामी प्रणाली द्वारा 70 से अधिक कोयला ब्लॉकों का आवंटन किया है। आने वाले वर्षों में इससे पूर्वी राज्यों को अत्यधिक लाभ होगा। कोयला उत्पादन को बढ़ाने पर अत्यधिक बल देने के कारण कोल इंडिया के कोयला उत्पादन में रिकॉर्ड 9.8 प्रतिशत की वृद्धि हुई है, जो अब तक का सर्वाधिक उत्पादन है।

          चार दशकों पुरानी मांग-एक लाख सात हजार करोड़ प्रतिवर्ष के भारी वित्तीय भार के बावजूद यह सरकार सैनिकों के हित में एक ऐतिहासिक कदम- एक रैंक-एक पेंशन योजना लागू करके एक महान साहसी कार्य करने में सफल रही है। इससे देश के सभी सैनिकों के दिल की मुराद पूरी हो गई है।

          सरकार का ध्येय होगा कि 2022 तक सभी परिवार वालों का पक्का घर तथा बिजली आपूर्ति की सुविधा मुहैया कराई जाये, जो अत्यंत सराहनीय कदम है।

          यह सरकार रेलवे के आधुनिकीकरण के साथ-साथ आंतरिक संरचना में सुधार को लेकर एक योजनाबद्ध तरीके से कार्य कर रही है। सरकार ने रेलवे के आमान-परिवर्तन, नई रेल लाईन बिछाने, विद्युतीकरण कार्य एवं रेलवे में क्षमता वृद्धि संबंधी कार्यों तथा स्वच्छ भारत मिशन को ध्यान में रखते हुए सफलता प्राप्त की है एवं हमारी सरकार प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के तहत हरेक गरीब परिवार को रसोई गैस सिलेंडर  मुफ्त में दे रही है। साथ ही साथ, एक व्यापक चुनाव सुधार प्रणाली पर चर्चा करनी चाहती है जिससे चुनावी प्रक्रिया में सुधार हो सके।

         

*श्री विनोद लखमाशी चावड़ा (कच्छ) ः मैं महामहिम राष्ट्रपति जी को हृदय से धन्यवाद देता हूँ जिन्होंने संसद के दोनों सदन की संयुक्त बैठक को संबोधित करते हुए देश की गौरवप्रद आर्थिक, सामाजिक और राजनैतिक व्यवस्था की सही तस्वीर सामने रखी है। माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्रभाई मोदी जी के नेतृत्व वाली सरकार ने जिस प्रकार गाँव, गरीब, किसान, नवजवानों और महिला सशक्तीकरण के लिए कदम उठायें, इस अभिभाषण में हमारी सरकार की नीतियां एवं भविष्य के कार्यक्रमों की रूपरेखा का दस्तावेज है। महामहिम राष्ट्रपति जी के अभिभाषण में यशस्वी प्रधानमंत्री जी के कुशल नेतृत्व में एन.डी.ए. सरकार द्वारा तैयार की गई नीति की तस्वीर है। देश के सभी क्षेत्र, सभी बिन्दुओं पर प्रकाश डाला है। सरकार ने प्रशासन में आते ही देश में सुशासन स्थापित करके अनेकों योजनाएं लागू करके लोगों में उत्साह व ऊर्जा का संचार किया है। उस अभिभाषण में वह सब कुछ है जो देश को विकास के पथ पर आगे ले जाने वाला है।

          मैं इस सरकार को धन्यवाद देना चाहूंगा जिसने अत्यंत अल्प समय में भारत को विकास के दीर्घकालीन मार्ग पर अग्रसर किया है। आज देश की जनता के बीच हमारी सरकार के प्रति अत्यंत विश्वास और श्रृद्धा है। इस सरकार की बुनियाद इतनी मजबूत है कि कृत्रिम झंझावतों से इस पर कोई असर नहीं होने वाला है।

          मैं अत्यंत विश्वास के साथ कहना चाहूँगा कि देश सेवा का जो जज्बा है इससे भारत न केवल आंतरिक स्तर पर नहीं बल्कि वैश्विक स्तर पर अपनी क्षमताओं का ध्वज लहरा रहा है। हमारी सरकार विश्वास का सिद्धांत "सबका साथ-सबका विकास ", "गरीबों की उन्नति ", "किसानों की समृद्धि " और  "युवाओं को रोज़गार " देने पर प्रतिबद्ध है।

          प्रधानमंत्री जी की दूरदर्शी नीतियों का ही परिणाम है कि प्रधानमंत्री जन-धन योजना, जो विश्व की सबसे सफल वित्तीय समावेशन योजना बन चुकी है, के माध्यम से देश के वंचितों और गरीबों के 21 करोड़ से अधिक बैंक एकाउंट खोले गए। इसमें करीब मेरे संसदीय क्षेत्र कच्छ में 3,09,263 एकाउंट खुले हैं। इतना ही नहीं, हमारी सरकार का लक्ष्य है कि 2022 तक सबकी आवास की मूलभूत आवश्यकता पूरी हो। इस कार्यकाल में मेरे संसदीय क्षेत्र में 294 आवास बन चुके हैं। सरकार ने 9 करोड़ अधिक रकम की ग्रांट भी दे दी है और 13979 आवास बनाने का सर्वेक्षण किया गया है।

          वित्तीय समावेशन के साथ सामाजिक सुरक्षा और गरीबों के प्रति अति मानवीय चरित्र का प्रदर्शन करते हुए हमारी सरकार ने प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना, प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना, अटल पेंशन योजना शुरू की हैं। उसके तहत मेरे संसदीय विस्तार में प्रधानमंत्री जन-धन योजना अंतर्गत 30,9,263 एकाउंट, प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना अंतर्गत 60231 एकाउंट, सुरक्षा बीमा योजना अंतर्गत 189003 एकाउंट और अटल पेंशन योजना अंतर्गत 6500 और प्रधानमंत्री मुद्रा योजना के अंतर्गत 77161 शौचालय बनाने का काम 90 प्रतिशत पूर्ण हो चुका है। यहां की जनता की माँग थी कि भुज-नालिया ब्रॉडगेज बने, वह काम भी अतिवेग से चलता है, जो इस साल के आखिरी समय तक पूर्ण हो जायेगा। मेरे क्षेत्र के बरसों से रूके हुए घदुली-सांतलपुर हाईवे का काम पूरे जोश में चालू है। पासपोर्ट सेवा केंद्र को मंजूरी दे दी गई है। अत्यंत आनंद के साथ बताना चाहूँगा कि हमारे विस्तार में एफ.एम. रेडियो सेवा शुरू हो चुकी है।

          मेरे मत क्षेत्र में दो बड़े महा बंदरगाह, अनगिनत छोटी-बड़ी इंडस्ट्रीज, विपुल खनिज क्षेत्र हैं। जिसे सरकार ने लक्ष्य दिया और पालनपुर-गांधीधाम डबल ट्रैक, नेशनल हाईवे 6 लेन का काम पूर्णता की ओर अग्रसर हैं। महाभूकंप में जर्जर जवाहर नवोदय विद्यालय का डुमरा नया बनाने के लिए तीन करोड़ से अधिक मंजूर करके जनहित और प्रजावत्सल होने का सबूत दिया है।

          राष्ट्रीयता मानव जाति के उच्चतम आदर्शों, सत्यम् शिवम् सुन्दरम से प्रेरित हमारी सरकार के अभिगम का महामहिम राष्ट्रपति जी ने निरूपण किया है। इसलिए मैं उनका धन्यवाद करता हूँ।

*श्रीमती रंजीत रंजन (सुपौल) ः राष्ट्रपति के अभिभाषण में आंगनबाड़ी केन्द्रों में कार्य करने वाली सहायिका एवं सेविका के मानदेय कम से कम 15000 (पंद्रह हजार रूपये) करने एवं सेविका के कार्यों की महत्ता को देखते हुए स्थायीकरण,आंगनबाड़ी केन्द्रों में मिलने वाली आहार की गुणवत्ता एवं पौष्टिकरण के लिए बजट बढ़ाने, आशा एवं ममता कर्मी के मानदेय बढ़ाने,सर्वशिक्षा अभियान के तहत कार्य करने वाले कर्मियों के मानदेय बढ़ाने, ग्रामीण क्षेत्रों के विकास में सांसदों की सहभागिता के उद्देश्य से शुरू की गई सांसद स्थानीय विकास योजना मद की राशि बढ़ाने, कृषि उत्पाद का न्यूनतम समर्थन मूल्य लागत का डेढ़ गुना बढ़ाए जाने, कोसी महासेतु से सटे सुरक्षा गाइड बांध जो डाउन स्ट्रीम पूरब और पश्चिम में मात्र 500 मीटर बनाकर छोड़ दिया गया है, इसे सुरक्षा  की दृष्टि से 12-15 किलोमीटर करने की आवश्यकता, केन्द्रीय शिक्षण संस्थानों एवं अन्य शिक्षण संस्थानों में शिक्षकों के सभी रिक्त पड़े पदों को तत्काल भरे जाने की आवश्यकता, केन्द्रीय शिक्षण संस्थानों में शिक्षकों के सभी रिक्त पड़े पदो को तत्काल भरे जाने की आवश्यकता, बिहार के कोसी नदी पर बाढ़ से स्थाई निवारण एवं किसानों के अच्छी सिंचाई के साथ-साथ विद्युत उत्पादन के लिए हाई डैम बनाने के लिए विशेष पैकेज उपलब्ध करान, खेल एवं खिलाड़ी को प्रोत्साहन एवं बढ़ावा देने के उद्देश्य से बजट बढ़ाने, देशभर में खतरनाक स्तर पर पहुँच चुकी प्रदूषण की समस्या से निपटने तथा देशभर में भण्डारण के अभाव में प्रत्येक साल बर्बाद हो रहे अन्न की बर्बादी को रोकने के लिए भण्डारण क्षमता बढ़ाने के बारे में कोई उल्लेख नहीं है।

               

*श्री सुनील कुमार सिंह (चतरा) ः मैं महामहिम राष्ट्रपति जी के अभिभाषण पर हो रही चर्चा में अपनी बात रखना चाहता हूँ। माननीय राष्ट्रपति जी का दिनांक 31 जनवरी, 2017 को अभिभाषण हुआ। परम्परानुसार सबसे पहले अभिभाषण पर धन्यवाद के लिए चर्चा होती है। राष्ट्रपति जी का अभिभाषण सरकार का सभी क्षेत्र में आगामी वर्ष के लिए एजेंडा होता है।

          महामहिम राष्ट्रपति जी के अभिभाषण में सभी प्रमुख विषयों का समावेश किया गया है। महामहिम राष्ट्रपति जी के अभिभाषण में आतंकवाद, कालाधन, नोटबंदी, सर्जिकल स्ट्राइक, चुनाव सुधार आदि विषयों पर सरकार द्वारा की गई कार्रवाई की सराहना की है। राष्ट्रपति जी के अभिभाषण से स्पष्ट है कि श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में सरकार गरीब, दलित, पीड़ित, शोषित, वंचित, किसान, श्रमिक और युवाओं के कल्याण के लिए काम कर रही है।

          महामहिम राष्ट्रपति जी के अभिभाषण से स्पष्ट है कि वर्तमान सरकार "सबका साथ-सबका विकास " की विचारधारा के तहत आगे बढ़ रही है। पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी द्वारा प्रतिपादित "एकात्म मानवता दर्शन में अंत्योदय " सिद्धांत पर काम कर रही है। पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी की जन्म शताब्दी को गरीब कल्याण वर्ष के रूप में गरीबों के लिए कई योजनाएं चला रही हैं।

          सरकार ने 26 करोड़ से अधिक जन-धन खाते खोले और लोगों को बैंकिंग व्यवस्था में जोड़ा गया। सरकार ने युवाओं को स्वरोज़गार के लिए प्रेरित किया है। प्रधानमंत्री मुद्रा योजना के तहत 5.6 करोड़ ऋण के जरिए दो लाख करोड़ रूपये से ज्यादा उपलब्ध कराया। सरकार, प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत कम ब्याज दरों पर आवास ऋण प्रदान कर बेघर परिवारों को घर उपलब्ध करवाने की दिशा में काम कर रही है। वर्ष 2022 तक सभी को घर देने का लक्ष्य रखा गया है।

          महामहिम राष्ट्रपति जी के अभिभाषण के पैरा संख्या 13 में स्पष्ट है कि प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के तहत 5 करोड़ गरीब घरों को एल.पी.जी. गैस कनेक्शन नःशुल्क उपलबध कराए जा रहे हैं। सरकार देश के सभी गाँवों में बिजली पहुंचाने के लिए काम कर रही है। दीनदयाल उपाध्याय ग्राम ज्योति योजना के तहत 11000 गाँवों में आज़ादी के बाद पहली बार बिजली पहुंचाई है।

          सरकार किसानों की आय दोगुनी करने की दिशा में काम कर रही है। किसानों के लिए प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में बीमा राशि को दो गुना किया गया है। ई-राष्ट्रीय कृषि बाज़ार के माध्यम से किसानों को अपनी फसल का सही दाम मिलेगा। किसानों के लिए सस्ता ऋण, बीज एवं उर्वरकों की आपूर्ति, सिंचाई सुविधाओं एवं मृदा स्वास्थ्य कार्ड के माध्यम से बेहतर उत्पादन करने का काम किया जा रहा है। प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के तहत हर खेत को पानी पहुंचाने की दिशा में सरकार काम कर रही है। किसान क्रेडिट कार्ड को रूपे डेबिट कार्डों में बदला जायेगा जिससे किसानों को पैसा निकालने के लिए बैंक नहीं जाना पड़ेगा।

          महामहिम राष्ट्रपति जी ने अभिभाषण में जिक्र किया है कि सरकार महिलाओं के कल्याण के लिए कई योजनाएँ चला रही है, चाहे वह "बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओं योजना " हो या "सुकुन्या समृद्धि योजना "। इसके अलावा, प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान के तहत सभी गर्भवती महिलाओं को आर्थिक सहायता देने का काम सरकार कर रही है।

          युवाओं को रोज़गार प्रदान करने के लिए एन.डी.ए. सरकार प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना चला रही है और प्रधानमंत्री युवा योजना भी प्रारंभ की गई है, जिसमें शिक्षण एवं प्रशिक्षण को बढ़ावा मिलेगा। सरकार 6000 करोड़ के पैकेज से 1.1 करोड़ रोज़गार उपलब्ध कराने के लिए काम कर रही है।

          जनजातीय आबादी, आदिवासी एवं पिछड़े क्षेत्रों में जहां पर खनिज संपदा पर्याप्त है, सरकार ने प्रधानमंत्री खनिज क्षेत्र कल्याण योजना लागू की है। इस योजना से देश के कई क्षेत्रों में तथा मेरे संसदीय क्षेत्र चतरा के आदिवासियों और गरीबों के लिए कई काम करवाये जा रहे हैं। सरकार ने जनजातीय कल्याण के लिए "वन बंधु कल्याण योजना " लागू की है, जिससे देश के चौदह क्षेत्रों के जनजातीय लोगों को फायदा होगा। सरकार ने प्रधानमंत्री ऊर्जा गंगा परियोजना चालू की है। इस योजना के तहत जगदीशपुर-हल्दिया-बोकारो-धामरा प्राकृतिक गैस पाइपलाइन परियोजना को पूरा किया जायेगा।

          सरकार ने एक भारत-श्रेष्ठ भारत कार्यक्रम शुरू किया है। एन.डी.ए. सरकार ने अपने दो साल के कार्यकाल में कई योजनायें लागू की हैं। "एक राष्ट्र-एक कर " के लिए वस्तु एवं सेवा कर अधिनियम पारित किया है और इसे शीघ्र लागू किया जायेगा।

          महामहिम राष्ट्रपति जी के अभिभाषण के अनुरूप सरकार द्वारा 01 फरवरी 2017, बसंत पंचमी के दिन आम बजट प्रस्तुत किया गया है। सरकार ने महामहिम राष्ट्रपति जी के अभिभाषण में उल्लेखित बिंदुओं के साकार करने वाला बजट पेश किया गया है। इन सभी योजनाओं के आधार पर देश उत्तरोत्तर वृद्धि करेगा। दलित, अल्पसंख्यक, युवाओं, किसानों, गरीब, शोषित, वंचित व मजदूरों के लिए "सबका साथ-सबका विकास " की अवधारणा में पूर्ण भागीदारी प्राप्त होगी। महामहिम राष्ट्रपति जी के अभिभाषण में सरकार के मुख्य उद्देश्यों को प्रदर्शित करता है, जिससे भारत पूर्ण विकास और आत्मनिर्भरता हासिल करेगा। मैं महामहिम राष्ट्रपति जी को उनके अभिभाषण पर धन्यवाद ज्ञापित करता हूँ।

   

*DR. KULMANI SAMAL (JAGATSINGHPUR): Hon'ble President has mentioned so many achievements of this Government in his address. In this regard, I would like to emphasize upon certain aspects. It is noteworthy to be mentioned here tat this Government through the President's address has highlighted the achievements, it has come across during the period of more than two and half years. First of all, the Government has taken a lot of initiatives for welfare and development of poor and disadvantaged groups by introducing plans, policies and programmes. The most important among all the programmes the Government has shown interest is Mahatma Gandhi National Rural Employment guarantee Act under which the budgetary allocation for 2016-17 financial year is almost double. In this regard, I suppose it is because of the adverse impact of demonetization process on poor and disadvantaged people of our country. The Government has made the allocation twice compared to that of last financial year only to control the damage it faced due to demonetization. The intension to move demonetization process of Government might be to check black money, fake currency, terror financing or to facilitate digitalization in transaction process. But ultimate sufferer is poor since they had to face the wrath of the process. Because the poor labourer class engaged in urban areas and depending upon daily wages were being paid in cash and due to demonetization process they were unable to be paid by the employers thereby being forced to go back to the rural native places in search of survival. So, when the Government realized that the demonetization process has affected the poor and disadvantaged mostly in rural areas, they without any second thought enhanced the allocation under MGNREGA having intention to manage the adverse effect inflicted on poor and disadvantaged groups. Secondly, I would like to put emphasis upon one of the gravest problems that we are facing currently over two years is cross border terrorism, especially from the areas along the  border of Pakistan. Our relation with our neighboring countries is not at par with our status of a strong nation in South Asia. Our relation with our traditional friend that is Russia, the country which had always backed us during the time of need whether from the view point of defence or technology, is no more cordial because of the faulty diplomatic policy of this Government. So, my earnest request is along with having cordial relationship with USA, we should also extend healthy relationship with Russia only to keep China and Pakistan in control. We have given emphasis on Make in India, Stand up India, Skill India type of slogans but implementation to fulfill the dreams under these policies is not being made appropriately. The slogan 'Sabka Saath Sabka Vikash' is also not at its end because the very concept or ideology behind these words have been defeated by the scrupulous intention of this Government which has been resulted in the initiative of  'Ghar Wapsi', religious conversion, riots etc. We can see the incidents of atrocities on Women, SCs and STs have increased manifold over the period of last two years in various parts of the country. So, at this juncture when we are talking about development of all, it is necessary to think in part of the Government to overcome the insecurity that has been generated since long due to inequality among the people. Under the Vanbandhu kalyan Yojana, various welfare measures are being taken for development of tribal people. For educational development of the tribal girls and boys, the ashram schools has been established in backward tribal areas of the country. But those schools are not fulfilling the basic aim to inculcate education which would make them to earn their livelihood. The menace of Naxalism is also increasing inspite of various steps taken by the Government to check it. So, emphasis over implementation of programmes meant for tribal people of Odisha should be made with heart rather than pen and paper. It is necessary to bring the tribal youth to the mainstream society with a view to avoid their entrance into such terror outfit.

          The Government is talking about cooperative federalism which is a clear eyewash. For political mileage, it has interfered in affairs of so many States which is derogatory to the federal structure which has been enshrined in our constitution.

           

However, inspite of certain loopholes, the Government has initiated enormous steps unlike the previous Government to curb black money, corruption, to check terror activities, to have transparency in economic transaction, to develop sports activities with heart and soul. Hence, I wholeheartedly support the motion of thanks on Presidents Address.

 

* SHRI S. P. MUDDAHANUME GOWDA (TUMKUR):          The people of the country have a lot of hopes on the President's Address because this document is the roadmap, resolution and intentions of the Government.

          The President's speech does not mention most of the imprtant issues facing the nation. There is no mention in the President's speech as to how he will fight the shadow or proxy war in Kashmir. The President's speech does not even mention a word about the sad death of these 150 people who have died as a result of demonetization. There is not a word mentioned in the President's speech about the persons dying in various railway accidents.

          First, I would like to come to the merger of Railway Budget with General Budget. The Government has failed to give proper reason for merging of Railway Budget with General Budget. Most of the people failed to understand the reasons for the merger of Rail Budget with the General Budget. Railway is a public service institution, not a commercial service organization. 92-93 years old practice was suddenly discontinued. It is not the objective of the Railway to earn revenue for the department of finance, whereas its objective is to provide maximum facilities to the common men by charging minimum fare. They said that a bullet train will be started from Ahmedabad to Mumbai with a corpus of Rs. 1 lakh crore, but no concrete work has been undertaken in this direction. A budgetary provision of Rs. 10 thousand crore has been made even without acquiring land for this purpose. The Government have badly failed to deliver on promises made by them. There is no mention in the President's Address about the frequent railway accidents. 62 rail derailments took place last year which is more than 70 per cent as compared to the previous year. Moreover, efforts are not being made to avert the accidents. The autonomy of the Railway should have been kept intact.

          Secondly, I would like to state that the Government's decision on Demonetization is one of the most senseless, cruel, heartless and reckless step taken by any Government since 70 years of Independence. It has disrupted our economy. It was said that the aim of demonetization is to prevent black money. What is the need to kill the whole economy to control black money? What success did the Government have in bringing black money stacked abroad? The Government has destroyed the lives of poor people.

          The President has talked about the banks. They are in a worst condition. The total non-performing assets of the banks are Rs. 8,00,000 crore. The Government has failed to reveal the names of those who are big debtors from the banks. I urge upon the government to do the same immediately.

          The Country is today facing jobless growth. Lack of jobs is the biggest problem. Even after the Demonetization, the position of unemployment has increased than ever before. The President does not mention the word unemployment in his speech.

          On the one hand, the NDA Government talks of according top priority to the welfare of farmers, and on the other hand, the NDA Government wants to acquire their land forcibly. This has created fear in their mind and, it is the duty of the Government to assure them in this regard.

          The NDA Government talks of country's GDP growing at 7.75% and food inflation are at a record low. But what about the plight of poor, disadvantaged people? What is the policy initiative of the Government towards ameliorating the pain and agony of poor and downtrodden? In spite of petrol prices decreased drastically, the prices of essential commodities, vegetables, fruits have gone up.

          As far as water disputes in the country are concerned, it has not been mentioned in the President's Address. It is a matter of great concern that the entire country is facing great difficulty in sharing waters between various States. I would like to state burning issue in this context that recent happening in the Cauvery dispute is causing great disturbance in Southern States, particularly between Karnataka and Tamil Nadu. When it comes to inter-State water issue, Karnataka has always been meted out with injustice. Now, the point is that Tamil Nadu is insisting the Union Government to constitute Cauvery Management Board to ensure release of Cauvery water. On the other hand, there are large parts of Karnataka facing drought like situation. So, this has been the case for the last few years. The matter is sub-judice in the Apex Court. In this context, the Government of Karnataka has made a request not to constitute the Cauvery Management Board. I would like to impress upon the Union Government that it should not constitute any such Board because water is a State subject, as per the constitution. If the Centre sets up a Management Board, then it would affect the very federal structure of our nation. These problems should be dealt with a national point of view. Since we do not have a national policy on Water to deal with the disputes of water sharing, such issues are being raised every now and then. Sometimes, it would create law and order situation and end up with grave situation like damaging public property and killing of innocent lives. That is why, I would like to suggest that the need of the hour is to have a national policy for water sharing between the states concerned. So, there should be a permanent solution to such contentious issues. The Union Government should take all necessary steps in this regard.

          On the issue of improving relations with our immediate neighbours especially Pakistan, the Government must outline the policy.

          There is absolutely no mention in this address how the concerns of minorities will be addressed with their education, religious freedom etc. will be preserved. Communal harmony is shaky since this NDA Government took over the reins of the country. It has failed to instill confidence among minorities on communal harmony and peace. This Government has not taken into confidence the minorities, the backward classes and the scheduled castes of this country. This Government has done nothing for them so far.

          Another point I would like to mention is that a number of States in our country have repeatedly facing drought of famine conditions. The Union government has opened the Food corporation of India to rescue the affected people by distributing the foodgrains from the FCI. Whereas cattle and other livestock's are concerned, there is no such Fodder Bank which are to be set up to rescue them at the time of distress. Therefore, I would like to urge upon the Union Government to earmark adequate funds for setting up of Food Bank at every cluster of villages to rescue our livestock's during drought and other natural calamities.

           I hope that the Union Government will come up to the expectation and aspirations of the people of our nation.

                                           

*श्री चन्द्र प्रकाश जोशी (चित्तौड़गढ़) ः राष्ट्रपति द्वारा अपने अभिभाषण में सरकार की कार्य योजनाओं, सरकार द्वारा किये जा रहे प्रयासों और भविष्य में की जाने वाली जन कल्याणकारी योजनाओं को प्रस्तुत किया गया है, मैं उसका समर्थन करता हूँ। हमारी सरकार ने बहुत सी जन कल्याणकारी योजनाओं को प्रस्तुत किया गया, उसमें प्रमुख रूप से हमारी सरकार ने सिर्फ घोषणा ही नहीं बल्कि उसे कार्यान्वित भी कर दिखाया है। हमारे 70 साल की आज़ादी के बाद भी 18452 गांवों में बिजली नहीं थी, लेकिन हमारी सरकार ने मात्र 2 सालों के अंदर 11 हज़ार गांवों में बिजली पहुंचा दी। जन-धन योजना के तहत 26 करोड़ 68 लाख खाते खुले, जिनमें से 21 करोड़ पर रूपे डेबिट कार्ड जारी कर दिए गए हैं। 9 करोड़ 90 लाख लोगों द्वारा प्रधानमंत्री सुरक्षा योजना के अंतर्गत प्रतिभाग किया है, तीन करोड़ व्यक्तियों द्वारा प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना के अंतर्गत प्रतिभाग किया है, जिसमें 54 हज़ार दावे हमें प्राप्त हुए और 50000 दावों का भुगतान किया जा चुका है। प्रधानमंत्री मुद्रा योजना के अंतर्गत दो करोड़ 45 लाख व्यक्तियों को 81 हज़ार 310 करोड़ रूपये के ऋण स्वीकृत किये जा चुके है। इस बात से पता चलता है कि हमारी सरकार सिर्फ वादे ही नहीं उसे पूरा भी करती है।

                             

*SHRI D.K. SURESH (BANGALORE RURAL): The Central Government has prepared a totally wrong statement to hide their failure in all spheres of common man's life of the country due to their anti-poor policies and its implementation. The Government overruled the existing precedence and customs by adopting un-ethical policies and practices. Modi Government failed to deliver on promises of economic growth and job creation. The President Pranab Mukherjee's address to Parliament is "verbose" with the Modi Government.

          I would like to point out that His Excellency President did not mention in his speech about the hardship faced by the poor. Due to unilateral decision of Hon'ble Prime Minister to ban Rs. 500 and Rs. 1000 Notes on November 8, 2016, about 100 people have died for various reasons owing to this act of demonetization. Hon'ble President has not even condoled or mentioned a single word on the tragic death of over 100 people and  even not announced adequate compensation to the families of those who lost their lives while standing in queue to withdraw their own hard earned money from banks/ATMs. Hon'ble President applauded the decision of demonetization, but has not mentioned how much black money has been seized/recovered through demonetization.

          Demonetization has been the most hotly debated topic since November 8, when Prime Minister announced that the high denomination notes then in circulation would cease to be legal tender. In a single stroke, nearly 86% of the currency in an economy powered by cash transactions, with 54% people without bank accounts, was wiped out. The move disrupted the lives of ordinary people, led to widespread hardship for the poor, major job losses and over a hundred deaths. Despite the huge distress and disruption, the Government is still highlighting the decision. One of Mr. Modi's big campaign promises was to end corruption. But that did not happen. There is growing criticism of the Government's failure to deliver on the promises of bringing back black money stashed abroad and depositing Rs. 15 lakh into every bank account as promised at the time of Lok Sabha polls.

          The Economic Survey made it clear that the Indian economy was in the "doldrums" and on a "downword trajectory" on account of mismanagement by the Modi Government. Lack of financial acumen and understading of Indian economy's strength and fault lines by Prime Minister Narendra Modi and his team have led to the sorry state reflected in the Economic Survey of falling exports, vanishing jobs, reduction in credit growth, depleting capital formation and massive downslide in demands and corporate sales. The President's address was misleading as the current economic situation of the country and facts in the Address were a mismatch. The Address creates a false impression about the achievements whereas the fundamentals of the Indian Economy are very weak.

          Unfortunately, there was no word on the continuous attacks on dalits/scheduled castes and schedules tribes in various parts of the country. University campuses are having no freedom of expression and who raise slogans against the communal forces are being harassed and forced to commit suicide. Even world renowned Jawaharlal Nehru University of Delhi is also facing serious threat on student's rights and expression of opinion. Hon'ble President does not mention anything about this in his speech. Lack of freedom of opinion will lead to a type of anarchism in the country and it gradually develops anti--social group's involvement in the society. The Government has not spared any word in the dictionary- Dalits, exploited, suffering, deprived, farmers, soldiers, youth have been used in the President's Address.

          The Government is trying to make a general climate of fear, the Government's intolerance of dissent, to deter people from expressing opposition against Government's anti-people policies. Government is always offered the trope of nationalism so that anyone opposing demonetization is denounced as corrupt and anti-national. The Hyper-nationalism and grandiloquent rhetoric are constant responses of this Government, every time it finds itself on the defensive.

          I would like to point that the President's Address did not spell out about the farmers committing suicide due to agricultural crisis in the country. Thousands of farmers are committing suicide due to the burden of farm loan and crop failure due to natural calamities in many parts of the country especially in the state of Karnataka. The state has cultivated area of 122.67 lakh hactare. Agricultural crops are cultivated more in rained condition as the irrigated area is very less in the state. My Parliamentary constituency Bangalore Rural is located in the hailing distance from the state capital Bengaluru. All the regions in my constituency receive very scanty and unevenly distributed rainfall. Most of the districts in the state of Karnataka including my Lok Sabha constituency depend on surface water resources for irrigation and drinking water needs. However, majority of the regions of the state have been reeling under drought condition for the last one and a half decade. As a result, surface water is not available on the one hand and on the other hand ground water table has gone down drastically. This has led to the failure of the crops and hundreds of farmers committed suicide in the state. However, there is no word on sanction of drought relief to the drought hit farmers in the country including Karnataka. There is not even a mention of the drought in the State. The interest of farmers of the country have been completely neglected in the" President's Address,"

          Hon'ble President in his Address to the joint Session of the Parliament in the year 2016 indicated that Government was committed to giving high priority to ensure water security in the country. However, the President's address this year remains silent on inter-linking of rivers. India is one of the few countries in the world gifted with considerable water resources. Being a monsoon country, the land frequently witnesses erratic rainfall causing considerable damage to social, economic, ecological conditions of the country.
          Recent tensions between Karnataka and Tamil Nadu over sharing of Cauvery River waters, is a better example to understand the problem. In the year 2015-16 season alone,  more than 10 major states like Karnataka, Maharashtra, Uttar Pradesh were hardly hit by drought. Hence there is an urgent need of taking some urgent measures to solve the water disputes between many states in the country including Karnataka and Tamil Nadu. Against this backdrop, the Interlinking of Rivers Programme should be given top priority by the Union Government in order to address twin problems of floods and droughts.
          With regard to Farm Loan Waiver, I would like to state that our farmers are already reeling under drought, crop loss and suicides. They  expect some big announcements for the agriculture sector. Farmers are demanding the waiver of all crop loans sanctioned by nationalized banks. As per the available data, farmers of the Karnataka availed about Rs. 29000 crores loan from Nationalized Banks. However, the President in his Address has not mentioned any scheme for waiving the farm loan availed by our farmers from the Nationalised Banks.
          I would also point out that there is no word about implementing the M.S. Swaminathan Commission recommendations on fixation of farm produce price for providing 50% profit over and above the cost of production. It shows that the Government do not want to do anything concrete to solve the problems of farmers of the country by accepting the recommendations of renowned scientist and experts in the field concerned.
          There is no mention of ensuring remunerative prices for farm produces. Farmers are putting hard work to produce fruits, vegetables, and cash crops, but do not get at least the cost of expenditure made on raising these crops as he has to sell the produce at throw away prices. However, the President in his Address to the Parliament has not mentioned anything to provide remunerative prices for farm produces. Therefore, I would like to urge that the Government should take steps to ensure adequate remunerative prices to all the farm produces to encourage our farmers;
          I expect this Government to be apologetic about demonetization and  hope to see some signs of remorse. But even in the President's Address they are gloating about demonetization. RBI made some sort of a Guinness record by issuing 135 circulars within 50 days. Experts were not consulted, ATMs ran dry. There  is reverse migration from cities to remote villages. The ruling party was aware of the decision of demonetization that is why they bought land with cash in so many places just days before demonetization.
          The Government seems chastened after the debacle of demonetization and has not done anything reckless or disruptive. The demonetization and inevitable consequences have demoralized the Government. Government has retreated from reforms and has no answer to the severe challenges faced by the economy.
          The Government must take immediate steps to control the attacks on backward communities of the country and ensure communal harmony among all sections of the society. The President's Address the report card of the present Government is a total failure.
*श्री लखन लाल साहू (बिलासपुर) ः अभिभाषण के माध्यम से न सिर्फ सदनों को, वरन देश-विदेश को भारत के गौरव, गरिमा से अवगत कराया गया है, देश के उत्तम विकास की गतियों एवं भारत के लोगों की जो अपेक्षाएं हैं, उसकी पूर्ति करने के प्रयास और उसका एक विस्तार से बयान, सम्माननीय राष्ट्रपति जी ने हमारे समक्ष प्रस्तुत किया है। मैं उनको श्रृद्धापूर्वक धन्यवाद ज्ञापित करता हूँ।
          सबका साथ-सबका विकास के तहत माननीय प्रधानमंत्री के नेतृत्व में वर्तमान सरकार की अनेकों विकास योजनाओं को एक सर्वोच्च कदम बताया गया है। जन-धन से जन-सुरक्षा की ओर बढ़ती हुई सरकार की उपलब्धि करीब 13 करोड़ गरीब जनता को अनेक सामाजिक सुरक्षा योजनाओं में शामिल किया गया है।
          देश के विभिन्न क्षेत्रों में डाक नेटवर्क बहुत व्यापक है, ऐसे डाक घर पोस्टल बैंक के रूप में काम करेंगे। बैंकों द्वारा नियुक्त 1 लाख से अधिक बैंक-मित्रों के साथ-साथ ढाई लाख ग्राम डाक सेवक भी बैंक की सेवाएं देंगे।
          प्रधानमंत्री मुद्रा योजना के अंतर्गत 2 लाख 56 हज़ार करोड़ रूपए का ऋण उपलब्ध कराया गया है, जिससे जरूरतमंद लोगों को कर्ज देकर व्यवसायों को प्रोत्साहन दिया गया। इस योजना का 70 प्रतिशत लाभ महिला उद्यमियों ने उठाया है।
          स्वच्छ   भारत अभियान का उद्देश्य विशेष रूप से गरीबों का स्वास्थ्य और स्वच्छता सुनिश्चित करना है। इस मिशन से 3 करोड़ से अधिक शौचालयों का निर्माण किया गया है।
          प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना का लक्ष्य गरीब परिवारों के स्वास्थ्य की सुरक्षा करना और धुआँ भरी रसोई और ईंधन इकट्ठा करने में लगने वाले समय के दुष्परिणामों से बचाना है। 5 करोड़ गरीब घरों को गैस कनेक्शन नःशुल्क उपलब्ध कराये जा रहे हैं। मौजूदा वर्ष 1.5 करोड़ कनेक्शन उपलब्ध कराये गए हैं।
          दीनदयाल उपाध्याय ग्राम ज्योति योजना के तहत स्वतंत्रता से अब तक अंधेरे में रह रहे 18000 गांवों में से 11000 गांवों में रिकॉर्ड समय पर बिजली पहुँचाई गई है। साथ ही, 20 करोड़ से अधिक एल.ई.डी. बल्ब वितरित किए जा चुके हैं जिससे गरीबों के बिजली बिलों में 10000 करोड़ रूपए की बचत हुई है।
          उपरोक्त जैसे अनेकों योजनाओं को सभी वर्ग के लिए ध्यान में रखकर खाका तैयार किया गया है।
*श्रीमती रक्षाताई खाडसे (रावेर) ः संसद के दोनों सदनों की साझा बैठक के समक्ष दिनांक 31 जनवरी, 2017 को भारत के महामहिम राष्ट्रपति महोदय के अभिभाषण पर सदन में माननीय सदस्य तथा संस्कृति मंत्रालय के राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) और पर्यटन मंत्रालय के राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. महेश शर्मा जी ने जो धन्यवाद प्रस्ताव रखा, उसका मैं समर्थन करती हूँ। भारत की चिरकाल सभ्यता- सहनाववतु, सह नौ भुनक्तु सिद्धांत से प्रेरित है, को याद करके हमारी सरकार ने "सबका साथ-सबका विकास " का एक आलोकित पथ, सामाजिक परिवर्तन और सुधार का पथ, जो सबके लिए प्रकाश स्तंभ है, सरकार के लिए प्रेरणादायी बनाया है। जन-धन के 26 करोड़ खाते खोलने का जिक्र करते हुए सरकार की तारीफ करके इतने सारे गरीबों को बैंक से जुड़ने की व्यवस्था इस सरकार ने बहुत ही थोड़े समय में की और उन्हें सामाजिक सुरक्षा योजनाओं के साथ जोड़ लिया गया तथा यह सुविधा तुरंत गांव-गांव तक पहुँचाने के लिए बैंक क्षेत्रों को डाक सेवा के साथ जोड़ दिया गया। सरकार ने एक और ऐतिहासिक कदम विमुद्रीकरण का उठाया है, जिसमें 500 एवं 1000 के करेंसी नोट को बंद किया गया है। इससे कैशलेस व्यवहार करने वालो को प्रोत्साहन मिला तथा डाक सेवा से बैंकिंग सेवा देने से कैशलेस व्यवहार के लिए सुलभ होगा। इस कैशलेस सुविधा को सर्वरूप से सशक्त बनाने, बैंकिंग सेवा को मजबूत बनाने, इंटरनेट सुविधा विशेष रूप से नेट कनेक्टिविटी को बढ़ाने और इन सुविधाओं को और सुदृढ़ बनाने हेतु सरकार को इस दिशा में काम करने की आवश्यकता है। इस कैशलेस सुविधा से साइबर  क्राइम भी अपनी जड़ें मजबूत करने की कोशिश करेगा, जोकि सरकार को रोकनी होगी और मुझे पूरा विश्वास है कि हमारी सरकार इस चैलेंज का सही उपाय तथा इस तरह के काम करने के लिए कटिबद्ध है।
          हमारी सरकार ने किसान के जीवन में बदलाव लाने के लिए कई कदम उठाए, जिससे किसानों को अपने उत्पाद को बेचने के लिए ई-राष्ट्रीय कृषि बाज़ार की व्यवस्था, जमीन के रख-रखाव हेतु मृदा स्वास्थ्य कार्ड हर किसान की जमीन के लिए, जिससे किसान अपनी उपजाऊ जमीन की अच्छी निगरानी करके अपना अगला उत्पाद सुनिश्चित कर सकता है और अपनी आमदनी बढ़ा सकता है। किसान के उत्पाद को जोखिम से बचाने के लिए बीमा राशि को दोगुना किया और इसलिए बीमा राशि के लिए किश्त भी न्यूनतम स्तर पर लाने का काम हमारी सरकार ने किया है। मेरे क्षेत्र में केले का उत्पाद देश में सबसे ज्यादा होने से, इस उत्पाद पर प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत बीमा करवरेज भी कम से कम प्रीमियम के साथ जोखिम लागू करने की मांग मैं किसानों की प्रगति के लिए सरकार के सामने रखती हूँ और केले को फल का दर्जा देकर उसे नेशनल हॉर्टीकल्चर मिशन में शामिल करने की मांग करती हूँ। नेशनल हॉर्टीकल्चर मिशन के तहत हॉर्टी ट्रेन तथा वी.पी.यू. गुड्स रैक किसानों को कन्सेशनल टैरिफ रेट में उपलब्ध करने से मेरे जिले के किसान अपनी फसल, केले के उत्पाद को भारत की बड़ी फल मंडी में बेचने के लिए ला सकते हैं जिसका उचित दाम किसान को मिलने से किसान के कल्याण में राष्ट्र की समृद्धि जैसी हमारी सरकार की सोच को और भी बढ़ावा मिलेगा। इसलिए मेरे क्षेत्र से गुड्स ट्रैन की योजना, भुसावल रेल मंडल के अंतर्गत कार्यरत करने की मांग करती हूँ। हर बूंद अधिक फसल तथा हर खेत को पानी को ध्यान में रखते हुए प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के तहत मेरे क्षेत्र की सिंचाई योजनाओं को कार्यान्वित करने हेतु ज्यादा उचित राशि आवंटित करने की मांग में करती हूँ।
          हमारी सरकार ने नारी शक्ति को देश की विभिन्न विकास यात्राओं का अभिन्न अंग बनाया है। इस नींव को और आगे मजबूत करने के लिए महिला किसानों को पूर्ण रूप से सशक्त बनाने हेतु ऐसी महिलाओं के लिए भी कृषि क्षेत्र में उचित योजना, जिसमें केले एवं अन्य फलों की खेती करने वाली महिलाओं को विशेष रूप से  उर्वरकों की आपूर्ति एवं सस्ता ऋण उपलब्ध करने की योजना बनाने का सुझाव रखती हूँ।
          प्रधानमंत्री  कौशल विकास योजना के अंतर्गत कई लाख युवकों को प्रशिक्षित करने से युवक बेहतर  रोज़गार  से लाभांवित हुए हैं। इस नींव को और अधिक मजबूत करने के लिए 2012 से 2016 तक रेलवे भर्ती की नई पॉलिसी, जोकि 21 जून, 2016 से कार्यान्वित की है। इसके पूर्व पास अप्रेन्टिस जो कि आई.टी.आई. की विभिन्न ट्रेडों से पढ़े हुए तथा रेल की स्टेबलिशमेंट में अप्रेन्टिसशिप किये हुए युवकों को रेलवे की बढ़ती हुई स्किल कामगार की मांग और कई रिक्त पदों में जल्द से जल्द सरकारी सेवा में शामिल करने की मांग करती हूँ जिससे कौशल विकास योजना और भी मजबूत होगी और युवकों में देश के प्रति विश्वास दृढ़ होगा।
          आधारभूत संरचना व अत्याधुनिक बुनियादी ढांचे के सृजन पर हमारी सरकार ने विशेष ध्यान दिया है, इसे आगे मजबूत करने के लिए रेलवे के आधुनिकीकरण के अंतर्गत नैरोगेज का बदलाव करके ब्रॉडगेज के तहत मेरे क्षेत्र में 1918 में कार्यांवित नैरोगेज पाचोरा-जामनेर रेलवे लाइन को विश्व में प्रसिद्ध अजंता गुफा तक और आगे बोदबड़ होकर मलकापुर तक बढ़ाने से इस क्षेत्र को रेल की कनेक्टिविटी की मांग में सरकार से करती हूँ जिसका फायदा विश्वभर से आने वाले टूरिस्ट को होगा। छोटे नगरों को वायुयान से कनेक्टिविटी को मेरी सरकार ने अत्यधिक गति दी है। इस राष्ट्रीय नागर विमानन के अंतर्गत जो एयरपोर्ट संरचना कॉमर्शियल ट्रैफिक हैंडल करने के लिए सर्वरूप से तैयार है, जैसे जलगाँव एयरपोर्ट मेरे क्षेत्र महाराष्ट्र राज्य में तुरंत जोड़ने तथा इस मार्ग पर जल्द से जल्द वायुयान यातायात शुरू कराने की माँग करती हूँ जिसका उचित फायदा माइक्रो व स्मॉल इंडस्ट्री, ग्रामीण क्षेत्र एवं किसानों को मिलेगा।
          हमारी सरकार किसानों के कल्याण हेतु व कौशल विकास के लिए कटिबद्ध है, जिसके अंतर्गत सरकार ने बहुत उचित कदम उठाए है। मेरे रावेर क्षेत्र से केला फल देशभर में अधिक मात्रा में सप्लाई होते हैं और इसे और मजबूत करने हेतु केला फल के लिए एक संशोधन केंद्र मेरे निर्वाचन क्षेत्र में स्थापित करने तथा इस क्षेत्र में कपास की खेती ज्यादा होती है जिसके चलते इस क्षेत्र में कॉटन जिनिंग व स्पीनिंग बहुत अधिक स्थापित है। इस कपास की खेती को बढ़ावा देने हेतु कपास संशोधन केंद्र इस क्षेत्र में विकसित करने की मांग करती हूँ।
          सरकार का ऐतिहासिक निर्णय, जो ग्रामीण भारत से एक नई कैशलेस इकॉनोमी तथा डिजिटल इंडिया की तरह उभर रहा है, जिसके चलते भारत की इकॉनोमी यूनाइटेड किंगडम (यू.के.) जैसे देश को सरपास करके विश्व में पांचवें स्थान पर ले जाने में हमारी सरकार को सफलता मिली है। हमारी सरकार किसान, वर्कर्स, गरीब, शेडय़ूल कास्ट, शेडय़ूल ट्राइब, महिला तथा समाज के असुरक्षित घटकों की उन्नति के लिए लगातार प्रयत्नशील है और रहेगी, यह पूरा विश्वास मुझे है। इसलिए भारत के महामहिम राष्ट्रपति महोदय के अभिभाषण पर सदन में माननीय सदस्य डॉ. महेश शर्मा जी ने जो धन्यवाद प्रस्ताव रखा है, उसका पुनः समर्थन करती हूँ।   
*श्रीमती संतोष अहलावत (झुंझनू) ः मैं  गर्व के साथ कह रही हूँ और मुझे पूर्ण विश्वास है कि सदन के मौजूद सभी सदस्य चाहे वे पक्ष में है या विपक्ष में- एक बात सब जानते और मानते हैं कि देश प्रगति की ओर अग्रसर है।
          मुझे खुशी है कि हमारी सरकार द्वारा चलायी जा रही सभी योजनाएँ "सबका साथ-सबका विकास " के सिद्धांत पर है, कारण बड़ा साफ है- हमारे माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी- जिन्होंने समाज के सभी पहलुओं को बड़े करीब से देखा, महूसस किया और जिया है।
          वर्तमान सरकार की किसी भी योजना को उठाकर देख ले आप को चार-पाँच बातें देखने को जरूर मिलेंगीः-गरीबों का उत्थान, किसानों की समृद्धि, युवाओं का विकास, भ्रष्टाचार मुक्त देश, मजबूत विदेश नीति और मजबूत आर्थिक नीति।
          वर्तमान सरकार  की सफलता  का मूलमंत्र है कि यदि देश का विकास करना है तो यह सुनिश्चित करना होगा कि सरकार देश के हर उस नागरिक तक पहुंचे जो समाज के सबसे निचले स्तर पर है। वर्तमान सरकार की नीतियों का केंद्र बिंदु गरीब, दलित, पीड़ित, शोषित, वंचित, किसान, श्रमिक और युवाओं का कल्याण करना है और यही कारण है कि आज देश में करीब 1.2 करोड़ से अधिक उपभोक्ताओं ने रसोई गैस सब्सिडी स्वेच्छा से छोड़ी है, जिससे वंचित लोगों को रसाई गैस कनेक्शन मुहैया कराये गये। यह देशवासियों का सरकार में विश्वास ही है जिसके द्वारा हाल में देश में हुई नोटबंदी में सरकार को सफलता मिली। यह देशवासियों का सरकार में विश्वास ही है जिसने स्वच्छ भारत मिशन को एक जन आंदोलन में बदला और देश के 1.4 लाख गांव, 450 से ज्यादा शहर, 77 जिले और 3 राज्य खुले में शौच से मुक्त हो पाए।
          वर्तमान सरकार द्वारा गरीबी उन्मूलन के लिए मजबूत वित्तीय ढांचे को खड़ा करने का काम किया है। 26 करोड़ से अधिक जन-धन खाते खोलकर लोगों को बैंकिंग व्यवस्था से पहली बार जोड़ा गया है, कैशलेस भुगतान के लिए 20 करोड़ से अधिक रूपे डेबिट कार्ड जारी किए गए। " जन-धन से जन-सुरक्षा " की दिशा में तेजी से आगे बढ़ते हुए लगभग 13 करोड़ गरीबों को विभिन्न सामाजिक सुरक्षा योजनाओं में शामिल करना सरकार की देश में गरीबी कम करने की इच्छाशक्ति को दर्शाता है।
          महिलाओं की सुरक्षा, विकास और सम्मान की बात करे तो मैं माननीय प्रधानमंत्री जी को विशेष धन्यवाद देना चाहूंगी जिन्होंने महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने का काम किया है। सरकार पहले दिन से ही महिलाओं के विकास और महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए वचनबद्ध दिखी। प्रधानमंत्री मुद्रा योजना के अंतर्गत 2 लाख करोड़ रूप के 5.6 करोड़ ऋण में सत्तर प्रतिशत लाभ महिला उद्यमियों को देने की बात हो या दीनदयाल अंत्योदय योजना के अंतर्गत महिलाओं, विशेष रूप से वंचित समुदायों की महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए सोलह हज़ार करोड़ रूपए का प्रावधान करना हो, सरकार ने महिलाओं को मजबूत करने का काम किया है।
          मैं सरकार का धन्यवाद करना चाहूंगी कि सरकार ने प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के तहत महिलाओं को धुएं भरी रसोई से निज़ात दिलाते हुए 1.5 करोड़ गरीब घरों को नःशुल्क गैस कनेक्शन उपलब्ध कराए जिसमें 37 प्रतिशत उज्ज्वला लाभार्थी अनुसूचित जाति व अनुसूचित जनजातियों में से है।
          घटते चाइल्ड सेक्स रेशियो के समाधान हेतु शुरू की गई बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओं योजना के अच्छे परिणाम प्राप्त होने लगे हैं। मुझे सदन को यह बताते हुए हर्ष महसूस हो रहा है कि हाल ही में बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओं योजना के अंतर्गत देश के 10 जिलों को सराहनीय प्रदर्शन के लिए सम्मानित किया गया जिसमें मेरा संसदीय क्षेत्र झुंझनू भी एक था। सरकार द्वारा लड़कियों के लिए सुरक्षित भविष्य सुनिश्चित करने की दृष्टि से सुकन्या समृद्धि योजना, प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान के तहत सभी गर्भवती महिलाओं को सक्षम चिकित्सा परिचरों द्वारा एंटेनेटल केयर की सुविधाएं प्रदान करना तथा मातृत्व सुविधा अधिनियम में संशोधन और प्रसूति अवकाश अवधि को 12 सप्ताह से बढ़ाकर 26 सप्ताह सरकार की महिलाओं के प्रति सम्मान को दर्शाता है।
          भारत की प्रगति सदैव से किसानों की प्रगति पर निर्भर रही है और इस बात को हमारी सरकार ने भली-भांति समझा है। किसानों के लिए प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना इसी का एक जीवंत उदाहरण है। किसानों के लिए सबसे कम प्रीमियम दर पर फसल बीमा देने के लिए सरकार का सबसे बड़ा अंशदान है और अब देश के अन्नदाता को और अधिक मजबूती देने के उद्देश्य से सरकार द्वारा जोखिम कवरेज को विस्तृत किया गया है, बीमा राशि को दोगुना किया गया है और किसानों के लिए प्रीमियम राशि को अब तक के न्यूनतम स्तर पर लाने का काम किया है। किसान क्रेडिट कार्डों को डिजिटल बनाने के उद्देश्य से मौजूदा कार्डों के अलावा तीन करोड़ कार्डों को जल्द ही रूपे डेबिट कार्डों में बदलना तथा नाबार्ड निधि की राशि को दोगुना करके सभी किसानों को आसानी से ऋण उपलब्ध करने का जो काम वर्तमान सरकार ने किया है वह एक सराहनीय कदम है।
          मेक इन इंडिया, स्टार्ट-अप इंडिया, स्टैंड-अप इंडिया, डिजिटल इंडिया जैसी योजनाओं ने भारतीय जनमानस को विकास से जोड़ा है। आज भारत इन योजनाओं के माध्यम से अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर अपनी एक अलग पहचान बनाने में कामयाब हुआ है।
          मेरा संसदीय क्षेत्र झुंझनू सैनिकों का ज़िला है, झुंझनू ज़िले से सर्वाधिक सैनिक देश की सीमाओं पर तैनात हैं। अगर शहीदों की बात करें तो झुंझनू ज़िले का कोई भी ऐसा गांव नहीं है जिसमें एक या दो शहीद न हो। वर्तमान सरकार ने सैनिकों के महत्व को समझा और सम्मान देते हुए चार दशक पुरानी मांग-पूर्व सैनिकों की "एक रैंक- एक पेंशन " (ओ.आर.ओ.पी.) को पूरी करने का काम किया है जिसके लिए सरकार धन्यवाद की पात्र है।
          क्षेत्रीय संप्रभुता के बार-बार उल्लंघन करने का मुँहतोड़ जवाब देने के लिए वर्तमान सरकार ने निर्णयात्मक कदम उठाए हैं। आतंकवादियों द्वारा घुसपैठ रोकने के लिए 29 सितंबर, 2016 को हमारे रक्षा बलों ने नियंत्रण रेखा पर अनेक लांच पैड पर सफलतापूर्वक सर्जिकल स्ट्राइक किया। हमारे रक्षा कर्मियों के इस अदम्य साहस और पराक्रम पर हमें गर्व है और हम उनके प्रति कृतज्ञ और ऋणी है।
               
*डॉ. भारतीबेन डी. श्याल (भावनगर) ः हमारी सरकार ने सभी चुनौतियों का सामना करते हुए आगे बढ़ने का प्रयास किया है। गरीबों को जिनको अब तक बैंकिंग सुविधा उपलब्ध नहीं थी, उन आम लोगों को जन-धन बैंकिंग से जोड़ा और अब उनके लिए जन-धन से जन-सुरक्षा की ओर तेजी से कार्य बढ़ाया जा रहा है। हमारी सरकार में गरीब, दलित, पीड़ित, शोषित और वंचितों के कल्याण हेतु अनेकों कदम उठाए जा रहे हैं। आज मुझे गर्व का अनुभव हो रहा है कि हमारे प्रधानमंत्री जी के कुशल प्रयासों के कारण भारत दुनिया में सुपर पावर देश बनने की ओर कदम बढ़ा रहा है। मुझे खुशी है कि हमारे देश में भ्रष्टाचार लगभग-लगभग समाप्त होने की दिशा में बढ़ रहा है, लोगों ने प्रधानमंत्री जी के निर्णयों में आस्था जताई है और ईमानदारी की ओर जनता प्रेरित हो रही है। मैं केंद्र सरकार के कैशलेस को बढ़ावा देने के निर्णय का स्वागत करती हूँ, जितना कैशलेस का चलन बढ़ेगा उतना भ्रष्टाचार पर अंकुश लगता चला जाएगा।
          केंद्र सरकार की प्रधानमंत्री मुद्रा योजना, आवास योजना, उज्ज्वला योजना, फसल बीमा योजना, दीनदयाल उपाध्याय ग्राम ज्योति योजना आदि अनेकों योजनाओं के सफलतापूर्वक परिणामों के लिए मैं माननीय प्रधानमंत्री जी को बधाई देती हूँ।
*श्री रोड़मल नागर (राजगढ़) ः मैं माननीय राष्ट्रपति जी के अभिभाषण पर धन्यवाद ज्ञापित करना चाहता हूँ। वर्तमान सरकार पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी के अंत्योदय विचाराधारा के मार्ग दर्शन पर चल रही है। जो आम जन मानस के विकास और उन्नति के लिए सुगम और सहज है।
          इस सरकार ने गांव, गरीब, मजदूर, किसान, युवा, महिला सशक्तिकरण के हित में जो कार्य किये हैं वे अभूतपूर्व हैं। प्रत्येक गांव को बिजली देने का संकल्प, पक्की डामरीकृत सड़कें, हर खेत को पानी के लिए प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना, खेती को घाटे के धंधे से ऊपर उठाकर 5 वर्ष में उसकी आमदनी दोगुनी करना, बिजली, खाद, मिट्टी परीक्षण के साथ प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना से जोड़ना, नुकसान 50 प्रतिशत से घटाकर 33 प्रतिशत करना, उसकी आमदनी को बढ़ाने का कार्य किया है, जन-धन योजना के माध्यम से हर गरीब को बैंक से जोड़ने का कार्य हमारी सरकार ने कर दिखाया है। हाल ही में नोटबंदी के समर्थन में हमारे देशवासियों ने विशेषकर गरीब एवं ईमानदार तबके के लोगों ने काले धन के विरूद्ध संघर्ष में असाधारण शक्ति का और सहनशीलता का परिचय दिया है। भीम एप के माध्यम से हमारी सरकार ने कैशलेस व्यवस्था को सुगम और सरल बनाने का प्रयास किया है।
          माननीय प्रधानमंत्री जी के एक आह्वान पर देश के लगभग 1 करोड़ से अधिक उपभोक्ताओं ने रसोई गैस सब्सिडी स्वेच्छा से छोड़ी है। जिसके माध्यम से 5 करोड़ गरीब घरों को गैस कनेक्शन नःशुल्क उपलब्ध कराए जा रहे हैं। हमारी सरकार के कार्य को सफल बनाने के लिए जनशक्ति ने स्वच्छ भारत मिशन को एक जन आंदोलन में बदल दिया है। अब तक 1 लाख गांवों, 450 से ज्यादा शहरों, 77 जिलों एवं 3 राज्यों ने अपने क्षेत्र को खुले में शौच से मुक्त घोषित किया है। "इन्द्रधनुष मिशन " के द्वारा हर बच्चे को हर जगह निवारणीय बीमारियों से टीकाकरण के लिए सरकार प्रतिबद्ध है।
          हमारी सरकार ने हर बूंद अधिक फसल तथा हर खेत को पानी ध्यान में रखते हुए प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना का कवरेज बढ़ाया है। 12 लाख हैक्टेयर से ज्यादा भूमि पर सूक्ष्म सिंचाई की व्यवस्था की गई है। अगले चार वर्षों में एक करोड़ युवकों को प्रशिक्षित करने के लिए 12 हज़ार करोड़ के बजट परिव्ययन के साथ प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना प्रारंभ की गयी है। जिसके माध्यम से 20 लाख से अधिक युवाओं को लाभांवित किया जा चुका है। आने वाले समय में हमारी सरकार के द्वारा चुनाव प्रक्रिया में सुधार करते हुए एक साथ चुनाव करवाना अनुकरणीय है। हमारी सरकार 1159 अप्रासांगिक कानूनों को समाप्त कर वित्तीय समायोजन एवं संस्थागत सुधारों का पर्याय बन चुकी है।
          भारत नैट प्रोजेक्ट के तहत "ऑप्टिकल फाइबर केबिल " के माध्यम से अब तक 75,700 से अधिक ग्राम पंचायतों तक पहुंचाया जा चुका है। सरकार ने प्रयास करके एक देश-एक टैक्स और एक देश-एक बाज़ार के माध्यम से बढ़ावा देते हुए संसद के दोनों सदनों में जी.एस.टी. पारित कर 17 राज्यों ने बहुत कम समय में सहमति दी है। हमारी सरकार ने आवासहीन लोगों को प्रधानमंत्री आवास योजना के माध्यम से 2022 तक आवास उपलब्ध कराने का कार्य प्रारंभ कर दिया है।
          अंत में मैं माननीय राष्ट्रपति जी के अभिभाषण का समर्थन करते हुए कहना चाहूंगा........
चलो जलाएं दीप वहां, जहां अभी भी अंधेरा है।
                                       
*श्री आलोक संजर (भोपाल) ः  बसंत ऋतु के पावन अवसर पर राष्ट्रपति महोदय के श्रीमुख से बजट पूर्व अभिभाषण सुनने का सौभाग्य मिला।  वास्तव में बसंत मन में एक सुरूचिपूर्ण सौन्दर्य बोध जगाता है, हवा के बदलते ही मन बदलने लगता है।  बसंत पंचमी से एक ऋतु आरंभ होती है-सहजता से, शांति से, सौम्यता से प्रेम करने की दिशा में ।
          इस अभिभाषण को सुनकर एहसास हुआ कि वर्तमान समय नये युग के सृजन करने को आतुर है, देश एक नयी सकारात्मक दिशा में तीव्र गति से कदमों को बढ़ा रहा है, इस भव्य नारे के साथ  " सबका साथ-सबका विकास " उस अभिभाषण में एक विशेष बात सुनने को मिली कि हमारी पुरानी परंपरा, पुरानी सभ्यता के  प्रतीक हमारे महान संतो, महापुरूषों व चिंतकों की जयंती पर सरकार दृढ़ संकल्पित है सुधार पथ पर-विकास की राह सबल हो ।  किसी ने ठीक कहा है कः-
          बंद किस्मत के लिए कोई ताली नहीं होती,           सुखी उम्मीदों की कोई डाली नहीं होती,           जो झुक जाये भारत माता के चरणों में,           उसकी झोली कभी खाली नहीं होती ।।
 
          देश के प्रधानमंत्री जी ने वर्ष 2014 को संसद को इस लोक तंत्र को मात्र एक भवन नहीं माना बल्कि इस भवन को लोकतंत्र का मंदिर माना और अपने कर्तव्य को पूजा ।  मैं सदन को याद दिलाना चाहता हूं जब प्रथम बार प्रधानमंत्री सदन में आये तो लोकतंत्र के मंदिर की प्रथम सीढ़ी पर उन्होंने प्रथम चरण नहीं रखा वरन् दुनिया को दिखाया कि हमारा लोकतंत्र, हमारे कानून, हमारी व्यवस्था, हमारा देश उनकी निगाह में कितना महत्वपूर्ण है और उन्होंने प्रथम सीढ़ी पर अपना मस्तक रख दिया ।  तभी से देश एक दिशा में चल पड़ा है ।
          तभी से देश की दशा और दिशा पर आमजन चर्चा कर रहा है ।  70 साल में "" देश की दशा अर्थात्- " द " से दयनीय "शा" से शासन ।  दयनीय शासन के कारण देश बदहाल था और विकास अवरूद्ध था, सपने दिखाये गये और सिर्फ दिखाये ही गये ।  गरीबी हटाने जैसे लोक लुभावन नारे अनेकों प्रश्नों के साथ खड़े रह गये ।  वहीं " देश की दिशा " अर्थात् " दि " से दिव्य और "शा" से शासन, आज देश दिव्य शासन के साथ प्रगतिशील कदमों के सहारे बढ़ रहा है । पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी का दिव्य मंत्र  " चैरेवेति-चैरेवेति " के साथ वर्तमान सरकार मोदी जी के नेतृत्व वाली सरकार की कार्यशैली समझ आयी है -  देश दुनिया स्वागत कर रही है कि कार्यशैली में सपनों का पुलिंदा नहीं है, कार्यशैली आमजन के हितों की कार्यशैली है ।  राष्ट्रपति महोदय के अभिभाषण में स्पष्ट था कि वर्तमान सरकर गरीबों की सरकार है, किसानों की सरकार है, श्रमिकों की सरकार है, माताओं-बहनों की सरकार है, विद्यार्थियों व युवाओं की सरकार है, सीमा पर तैनात सैनिकों की सरकार है, सभी वर्गों के लोगों के भविष्य की चिंता करने वालो की सरकार है।  तभी तो यह सरकार पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी की अन्त्योदय विचारधारा के मार्गदर्शन पर चल रही है,  चल ही नहीं बल्कि उनकी जयंती वर्ष में जनशताब्दी वर्ष के रूप में " गरीब कल्याण वर्ष " के रूप में मनाने जा रही है ।
          विश्व की छठे हिस्से से भी अधिक आबादी वाले देश के तौर पर हमारे देश का अपना एक अलग महत्व और वजन है  लेकिन वर्ष 2013 के एक लेख में शीर्षक याद आता है - " भारत की कमजोर विदेश नीति " । उस लेख में लिखा गया था कि तत्कालीन सरकार के कारण, उनकी नीतियों के कारण, उनकी कार्यशैली, कार्य क्षमता के कारण भारत किस तरह अपनी प्रगति में खुद ही बाधक है और किस तरह राजनैतिक दूरदर्शिता की कमियों के कारण खुद ही अनेक अनुतरित प्रश्नों की श्रृंखला  के साथ खड़ा है।
          वर्ष 2014 में एक नयी सुबह हुई मोदी जी के नेतृत्व वाली सरकार ने उन प्रश्नों के जवाब अपनी कार्यक्षमता व दूरदर्शिता से देना प्रारंभ किया ।  सबसे पहले जन जन का विश्वास जीता, जनधन खाते खुलवाये, देश के लगभग 26 करोड़ देशवासियों को बैंकों से जोड़ा, आज अधिकांश लोग कैशलेस भुगतान के रूपये डेबिट का उपयोग करने लगे हैं ।  स्वच्छता अभियान के साथ-साथ गरीबों को आवास, सस्ता स्वास्थ्य संरक्षण, आदि की चिंता करने वाली सरकार ने 3 करोड़ से अधिक शौचालयों का निर्माण करवाया है, लोगों को नये युग से जुड़ने की प्रेरणा दी है ।  प्रधानमंत्री उज्जवला योजना गांव-शहर की माता बहनों के लिए सौगात है, वह भी सपना देखा करती थी कि कब इस जान लेवा धुआं, बीमारियों की सौगात देने वाले धुएं से मुक्ति पायेगा।  आज प्रशंसा करनी चाहिये इस योजना की कि गैसे के 1.5 करोड़ गैस कनेक्शन प्राप्त करने के बाद वह सभी माता-बहनें देश की सरकार को देश के प्रधानमंत्री जी को आर्शीवाद दे रही है, मुक्त कंठ से प्रशंसा कर रही है ।
          पूर्व की सरकारों ने लुभावने वादे किए सपने दिखाये, लेकिन नीति और नीयत खराब होने के कारण सपने-सपने ही रह गये या चकनाचूर हो गये ।  उसके विपरीत मोदी जी के नेतृत्व वाली सरकार ने सपने नहीं दिखाये, बिना सपना दिखाये उन गरीबों की मनोकामना को पूरा करने का काम किया है ।  कितनी बार आरोप प्रत्यारोंपों को  हमने सुना है, प्रशंसा करने वाले सूक्ष्म अध्ययन चिंतन के बाद प्रशंसा कर रहे हैं ।  किसी ने लिखा है कः-
          " विश्वास करो तुम मोदी पर,           वह नव युग का निर्माता है,           ऐसा नेता इस मातृभूमि पर,           युगो-युगों के बाद आता है ।
          अगर-समझ गये इन बातों को,           गुणगान तुम्हारा भी होगा,           यह मौका गर बीत गया तो,           नुकसान हर हाल में तुम्हारा होगा ।।
          विपक्ष जो कभी सत्ता में था, सत्ता जाने के बाद सत्ता पाने की लालसा में अनर्गल प्रलाप कर रहा है, नकारात्मकता की पतवार से झूठ के भंवर में फंसी नाव को किनारे  लाने का असफल प्रयास कर रहा है, गोस्वामी तुलसीदास जी ने रामायण में लिखा है कि-
          " जो जस करहि, सो तस फल चाखा "

जो जैसा करता है उसे वैसा ही फल प्राप्त होता है ।  विपक्ष के नेता अपने भाषणों में यशस्वी प्रधान मंत्री जी पर लक्ष्य विहीन शब्द  बाणों से प्रहार करने का प्रयास कर रहे हैं लेकिन माननीय मोदी जी का विकास कवच इतना मजबूत है कि सभी बाण बेकार हो गये है बल्कि उनका तरकश भी शून्य हो गया है ।  यशस्वी प्रधानमंत्री जी ने सिर्फ एक  बाण चलाया,  " विमुद्रीकरण का  बाण " ऐसा सश्क्त  बाण क्या चलाया कि देश के आंतरिक और बाहरी दुश्मन और उनकी ताकते क्षीण हो गयी, सबकी नींद हराम हो गयी , अभी भी वह बिलबिला रहे हैं, प्रयास में हैं कि विकास की आंधी को रोका जाये ।  लेकिन प्रधानमंत्री जी ने कहा कि परवाह नहीं, चाहे जमाना कितना भी खिलाफ हो, चलूंगा, उसी राह पर, जो राष्ट्र हित में, सीधी और साफ हो ।  सर्जिकल स्ट्राईक के बाद, देश की सरकार के काम करने की शक्ति बढ़ी है, देश का सर उंचा हुआ है, देश की सीमा पर तैनात भारत माता के वीर सपूतों का मनोबल भी बढ़ा है । दुश्मन देश हतोत्साहित है, आतंकवाद के बढ़ते कदम शिथिल हो गये हैं, हिम्मत टूट गयी है ।  विमुद्रीकरण भी उसी सिक्के का दूसरा पहलू है, देश के विकास की दिशा में सार्थक कदम है, देश के अंदर की नकारात्मक शक्ति का नाश हुआ है । देश की आम जनता की सराहना करनी चाहिए कि विमुद्रीकरण के समय जनता ने अपनी परेशानियों को देश के आंतरिक बाहरी संकट से बहुत छोटा माना ।  देश के राष्ट्रपति के भाषण में देश के सुंदर भविष्य, हमारी सभ्यता, संस्कृति के साक्षात् दर्शन हुए हैं, आने वाला समय देश के विकास का समय है, गरीबों को उत्थान का समय है, किसानों की प्रगति का समय है ।  अंत में अभिभाषण का स्वागत व समर्थन करते हुए, आदरणीय मोदी जी के लिए दो लाइन कहता हूं कि           माना तेरी नजर में काबिल नहीं हूं,           जाकर पूछ उनको, जिनको हासिल नहीं हूं ।

*श्रीमती अंजू बाला (मिश्रिख) ः   मैं माननीय राष्ट्रपति के अभिभाषण का स्वागत और समर्थन करती हूं। राष्ट्रपति जी के अभिभाषण में न केवल सरकार की योजनाओं और उपलब्धियों का उल्लेख होता है, अपितु उसमें भविष्य के भारत की तस्वीर भी होती है। इस दृष्टि से देखा जाए तो हमें इस अभिभाषण में एक बेहतर और उज्ज्वल भारत की तस्वीर दिखाई दे रही है।

          माननीय राष्ट्रपति के अभिभाषण में साफ दिखाई दे रहा है कि किस तरह देश में बड़े पैमाने पर आर्थिक बदलाव हो रहे हैं। किस तरह देश के 20 करोड़ से अधिक लोगों को पहली बार जन धन खाते खोलकर बैंकिंग व्यवस्था से जोड़ा गया। देश की वित्तीय व्यवस्था में इन लोगों का समावेश करने से इन्हें सरकार द्वारा चलाई जा रही योजनाओं का लाभ सीधे तौर पर मिलेगा। ग्रामीण क्षेत्रों में पशुधन की कमी और वृक्षों तथा वनों के न के बराबर होने से वहां जलावन की लकड़ी और ईंधन की भयंकर समस्या थी। हमारी सरकार ने समय रहते इस समस्या की ओर ध्यान दिया और अनुसूचति जाति तथा अनुसूचित जनजाति और अन्य निर्धन परिवारों को मुफ्त में गैस कनेक्शन उपलब्ध कराए। इससे ग्रामीण महिलाओं को काफी राहत ली है और उन्हें प्रदूषण मुक्त स्वच्छ ईंधन उपलब्ध हुआ है। हमारे यशस्वी प्रधान मंत्री माननीय नरेन्द्र मोदी जी ने जिस स्वच्छ भारत अभियान की घोषणा की थी और उसे अंजाम तक पहुंचाने का अपना संकल्प व्यक्त किया था, अभिभाषण में उसका भी उल्लेख है।

          विगत ढाई वर्षों में देश के एक लाख चालीस हजार गांवों, 450 से अधिक शहरों, 77 जिलों और तीन राज्यों को खुले में शौच से मुक्त घोषित किया जा चुका है। इस दिशा में शेष भारत को खुले में शौच से मुक्त करने का कार्य तेजी से आगे बढ़ रहा है। मोदी सरकार ने देश की जनता के कल्याण और विकास के लिए कई योजनाएं चला रही है ताकि "सबका साथ सबका विकास" का लक्ष्य प्राप्त किया जा सके ।  प्रधानमंत्री मुद्रा योजना, दीनदयाल अन्त्योदय योजना, प्रधानमंत्री आवास योजना, प्रधानमंत्री उज्जवला योजना, दीनदयाल उपाध्याय ग्राम ज्योति योजना, प्रधानमंत्री भारतीय जन औषधि योजना, प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना, प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना, बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ, सुकन्या समृद्धि योजना, प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व योजना, प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना, राष्ट्रीय प्रशिक्षुता प्रोत्साहन योजना, प्रधानमंत्री युवा योजना, प्रधानमंत्री खनिज क्षेत्र कल्याण योजना, वनबंधु कल्याण योजना, निरामय स्वास्थ्य बीमा योजना जैसी अनेक योजनाएं शुरू की गई हैं । इन योजनाओं से देश के प्रत्येक वर्ग के लोगों को लाभ पहुंचेगा ।  चाहे दिव्यांगजन हों, चाहे बेरोजगार हों, चाहे किसान या खेतिहर मजदूर हों, चाहे वृद्ध और बीमार हों, चाहे गर्भवती महिलाएं और नवजात शिशु हों, चाहे आदिवासी और जनजातीय लोग हों, या फिर निर्धन, असहाय और अशक्त हों, इन योजनाओं से सभी लोगों को लाभ पहुंचेगा और देश में खुशहाली आयेगी ।

          सरकार ने देश में कालाधन के खिलाफ एक जंग छेड़ी हुई है ।  इसके लिए प्रभावी कदम उठाये गये हैं ।  इसी के तहत सरकार ने नवंबर, 2016 से पांच सौ और एक हजार के पुराने नोटों को बंद करने का निर्णय लिया ।  सरकार ने अज्ञात विदेशी आय और बेनामी संपत्तियों को जब्त करने संबंधी कानूनों में बदलाव कर इन्हें और सख्त बनाया है ।

          सरकार ने गरीबों के हित में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी स्कीम के लिए वर्ष 2016-17 में सैंतालीस हजार करोड़ रूपये आवंटित किये ताकि गाँवों में स्थायी परिसंपत्तियों के साथ-साथ ग्रामीण आधारभूत संरचना तेयार की जा सके ।  सरकार ने डिजिटल लेन-देन को बढ़ावा के लिए कई कदम उठाये हैं ।  गरीबों के मसीहा बाबा भीमराव अंबेडकर के नाम पर एक मोबाइल-एप-भीम लाया गया है ।  इससे पैसों का भुगतान करने में काफी सहूलियत होगी ।

           सरकार ने देश की सुरक्षा की दृष्टि से भी कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए हैं ।  वर्षों से रूकी पड़ी रक्षा उपकरणों की खरीद में तेजी लाई गई है और देश के सैनिकों के कल्याण की दिशा में कदम उठाए गए हैं ।

          उपरोक्त सभी कदमों के मद्देनजर में माननीय राष्ट्रपति के अभिभाषण का पुरजोर समर्थन करती हूं और हृदय से स्वागत करती हूं ।

   

* DR. RATNA DE (NAG) (HOOGHLY): India is facing an uphill task of bringing back economy on growth path after demonetization. The forecast of the Economic Survey is that economy would grow between 6.75% and 7.5% in the next financial year. But it is uncertain due to growing NPAs and the decision of Donald Trump administration concerning H-1B visas which would immensely affect India's IT industry. With this background, no one can hazard a guess that economy would be in good shape in the coming months when growth rate is slipping. Budget  presented by our Finance Minister painted a rosy picture of the economy.

           Inequalities have grown enormously if we go by what is stated officially by the government - that only 76 lakh Indians make over Rs. 5 lakh per year officially. There is a need to ensure that the growth and development reaches the poor and downtrodden who are at the lowest rung of society. At present, it is not so. Rich are getting richer and poor are getting poorer.

          It is astonishing to find out that the Budget seeks to provide a record Rs. 10 lakh crore in loans to farmers, boost funds for rural employment guarantee programme and bring one crore households out of poverty and promised to build one crore houses by 2019. This is no doubt aimed at farmers in Uttar Pradesh to influence the voters. On the ground, where is the money? May I know from the Government as to what it has done on these counts for the past 2 and a half years? We could see rise in farmers suicides under this Government with no sight of any policy or programme to address the issues concerning farmers or to pay compensation to the family of farmers who have committed suicide or to waive off their loans with the result the Supreme Court asked the Centre to formulate a policy to address the farmers suicides. Is it not a fact that farmers suicides have gone up by a 45 per cent during the 2 years rule of NDA II under Modi ji? What would be the Government's response on farmers suicides.

          What about providing jobs to the youth? Modi ji promised heavens to the youth and got elected. Immediately after that, he has forgotten the youth and a paltry 1.5 lakh jobs were created in 2015-16 but promised 5 core jobs in 5 years. Youth were stranded with unemployment on the rise. Government has failed miserably in providing jobs. There is no policy to address youth unemployment.

          The Government claims that economy is on the right path and it would grow. The IMF has recently slashed its India growth project for the current fiscal year by a full point to 6.6 per cent. Would the Government respond to the slashing of IMF specifically without giving jugglery of figures to bring home the point?

          There is a cap on cash donation to parties at Rs. 2,000 from the earlier Rs. 20,000 and poll bonds were proposed. Unless we could get to know the details of the scheme on poll bonds one cannot jump to the conclusion as to how this would bring transparency or what is the intention of the Government on these aspects.

          It seems only the Government is appreciating the Budget and a few of its partners not one Opposition party welcomed the Budget. Shiv Sena, an ally of BJP, wanted to know where is acche din, which was promised by the BJP? Left parties alleged that the figures highlight by the Government do not match the reality on the ground. This budget would further shrink economic activity and would not boost demand. Lalu Prasad described Mr. Modi as a 'twin brother' of new US President Donald trump, who is now famous for 'taking wayward decisions'.

          Our leader, Kumari Mamata Banerjee remarked that this Budget is not only clueless and action-less but also heartless for various reasons. This Budget is full of jugglery of numbers and hollow words and hence misleading, according to our leader.

          This Budget has promised a lot. For example, boosting employment and the idea of infrastructure development. But where is the money.

          With the Budget provided to the Railways, it would take a long time for the Bullet Train to come on the track. Instead of focusing on safety and security of railway passengers, more than 4 major accidents have taken place in the recent past, this Government is directionless, and started making tall claims of bringing Bullet Train in the country. How can it be possible without huge finances at the disposal of the Railways?

          There is nothing concrete on black money in the Budget. I wish the Government before it completes its tenure would come out with a scheme which would ensure basic income to every person below the poverty line. The allocations made to the HRD is a mere Rs. 79,686 crore; and Ministry of Women and Child Development is Rs. 22,095 crore, and Health and Family Welfare is Rs. 48,853 crore. Is this enough when we for sure know the plight on these three counts? Government needs to explain a lot in this regard. I hope the hon. Minister would make attempts to hike the allocations to these important Ministries which would go a long way in ensuring education, safety and growth of women and children, and health sector getting a much needed boost. Much emphasis needs to be paid to health and education. I hope the hon. Finance Minister would look into these aspects, along with the welfare, safety and security of women and children in these days of upheavals heaped on them.

*SHRIMATI SUPRIYA SULE (BARAMATI): I  would  like  to  thank   the President for addressing the members of the Parliament in a joint session on 31st  January, 2017. The  address  summarised  the  achievements  of  the  Government and  briefed  about  the  progress  in  various  social indicators for the financial year 2016-17.

          But I regret that some crucial issues which are central to the welfare of the farmers, rural economy and common man in general were missed out.

          The farmers' suicides continued to increase in 2016-17 due to drought. According to the National Crime Records Bureau statistics, Maharashtra contributes to more than half the total suicides by the cultivators, with Marathwada and Vidarbha regions being affected the most. The Special Task Force on agrarian crisis appointed by the Maharashtra Government estimated that the suicides in the first four months of 2016 were more than 400. Given the intensity of the matter, it should have been mentioned in the President's address and so are the policies of the Government for the bereaved families of the farmers.

          The year 2016 was conspicuous by the fluctuations in the prices of the farm output. Be it the high price rise of grams, vegetables during the monsoon season; or the drastic fall in the prices because of abundant rainfall and bountiful crop (especially onions) in September and October, 2016.

          To cap it all, the demonetisation happened at the crucial juncture when the rural economy was reeling under the stress of falling prices. The rural economy and the informal sector, which deal majorly in cash were hit hard. The prices of the perishables fell dramatically in the days following the demonetisation announcement. Farmers had to default on the loan repayments and undertaking of new loans for the Rabi sowing. Also, with the last week of October to the first week of November being the Kharif harvest season, the farmers found themselves with wads of cash, which has lost its value as a store of account and medium of exchange. Since the cooperative banks are restricted from accepting loan repayments in old currency, the interest rate on the past loans keeps accumulating. The hardships faced by the cultivators and the common man, the measures taken to neutralise its effects found no mention in the Address. The Address does not accept any of these ill impacts of demonetisation.

          The minutes of the RBI meeting that decides on the demonetisation are not in the public domain. In fact the Reserve Bank of India has rejected the RTI application to asking for the proceedings of the meeting.

          The Government has come up with schemes like Skill India to train the youth with employable skills. But nowhere in the President's Address is a mention of the employment growth of the youth from these initiatives. How and where the Centre plans to employ these youth skilled through the Government initiatives, is something that the Address must have contained.

          MGNREGA is a social welfare scheme that provides dignity in labour and livelihood to the households in rural India. But there are arrears in the payment of wages for the current financial year 2016-17 that are being carried forward to the next year. Developmental works like improving the rural roads, digging of tanks for water storage, de-silting the canals are being undertaken under MGNREGA. The Union Government increased the number of days of guaranteed employed under MGNREGA by 50 days to 150. But despite this, according to the Rural Development Ministry, the average number of work days for 2015-16 is only 47.8 work days. Also, the funds required for the payment of wages are not devolved to the States promptly, leading to delay in the payment of wages and pile up of arrears. An estimate of the expenditure needed for the payment of the arrears and the average number of work days finds no mention in the Address.

          The state of the farm ponds and other works, constructed under MGNREGA, the progress of the works undertaken should have been included in the President's Address.

          Investment as proportion to GDP has been stagnant for the past two years. I would like to ask the Government how it plans to stimulate investment.

          The Government and the Judiciary are stuck in an impasse over the process of judicial appointments. This has delayed the filling of vacancies for the various posts of judges in the high Courts and the Supreme Court. This is an issue that needs urgent attention, as justice delayed denies the fundamental right of every citizen to speedy justice.

          The Government has promulgated many Ordinances during 2016-17 like The Specified Bank Notes (Cessation of Liabilities) Ordinance, The payment of Wages (Amendment) Ordinance; and even repromulgated the Enemy Property (Amendment and Validation) Fifth Ordinance. This undermines the Legislature as it seeks to bypass the democratic legislative process of the Parliament.

          The above important issues find no mention in the President's Address and should have been included in it.

 

*श्री देवजी एम. पटेल (जालौर) ः यह एक ऐतिहासिक संयुक्त सत्र है, जिसमें स्वतंत्र भारत में पहली बार बजट सत्र के निर्धारित समय को इस वर्ष आगे लाया गया है एवं आम बजट के साथ रेल बजट का विलय किया जा रहा है। हम एक ऐसे लोकतंत्र के उत्सव के लिए पुनः एकत्र हुए हैं, जिसके मूल्य और संस्कृति इस देश के लंबे इतिहास के हर दौर में फलते-फूलते रहे हैं। वास्तव में इसी संस्कृति ने मेरी सरकार को सबका साथ-सबका विकास की ओर प्रेरित किया है। हमारी सभ्यता चिरकाल से ही सहनाववतु, सह नौ भुनक्तु जैसे महान सिद्धांत से प्रेरित रही है जिसका अर्थ है कि हम परस्पर दोनों साथ-साथ एक दूसरे की रक्षा करें, हम दोनों का साथ-साथ पोषण करें। इस वर्ष महान सिख गुरू गोविंद सिंह जी की तीन सौ पचासवीं जयंती है। हम महान संत दार्शनिक रामानुजाचार्य की सहस्रवीं जयंती भी मना रहे हैं। इन महान विभूतियों द्वारा दिखाया गया आलोकिक पथ सामाजिक परिवर्तन और सुधार का पथ, जो सबके लिए प्रकाश स्तंभ है, मेरी सरकार के लिए प्रेरणादायी है।

          हमारे देश के नागरिकों ने, विशेषकर गरीब तबके के लोगों ने, हाल ही में काले धन के विरूद्ध संघर्ष में असाधारण शक्ति और सहनशीलता का परिचय दिया है। रसोई गैस के मामले में गिव ईट अप अभियान की सफलता के पीछे भी यही प्रेरक भावना रही है। 1.2 करोड़ से अधिक उपभोक्ताओं ने रसोई गैस सब्सिडी स्वेच्छा से छोड़ी है, जिससे वंचित लोगों को रसोई गैस कनेक्शन मुहैया कराने में बहुत मदद हुई है। इसी "जनशक्ति " ने स्वच्छ भारत मिशन को एक जन आंदोलन में बदल दिया है। 1.4 लाख गाँवों, 450 से ज्यादा शहरों, 77 जिलों तथा 3 राज्यों ने अपने क्षेत्र को खुले में शौच से मुक्त घोषित कर दिया है। मेरी सरकार जनशक्ति को शत-शत नमन करती है और प्रण करती है कि हम इस शक्ति का राष्ट्र निर्माण में रचनात्मक प्रयोग करेंगे। गरीब, दलित, पीड़ित, शोषित, वंचित, किसान, श्रमिक और युवाओं का कल्याण ही मेरी सरकार की नीतियों का केंद्र बिंदु है।

          मेरी सरकार पंडित दीनदयाल उपाध्याय की अंत्योदय विचारधारा के मार्गदर्शन में चल रही है। उनकी जन्म शताब्दी को गरीब कल्याण वर्ष के रूप में मनाया जा रहा है। गरीब और अब तक जिनको बैंकिंग सेवाएं उपलब्ध नहीं हैं ऐसे लोगों तक बैंकिंग सुविधाएं पहुंचाने के लिए भारतीय डाक भुगतान बैंक (इंडियन पोस्टल पेमेंट बैंक) प्रारंभ किया गया है। भारत में डाक नेटवर्क बहुत व्यापक है, जिसमें डेढ़ लाख डाक घर गांव-गांव तक फैले हुए हैं। ये डाक घर पोस्टल बैंक के रूप में कार्य करेंगे। बैंकों द्वारा नियुक्त किए गए एक लाख से अधिक बैंक मित्रों के साथ-साथ, ढाई लाख ग्राम डाक सेवक भी बैंकिंग सेवाएं प्रदान करेंगे।

          मेरी सरकार ने किसानों के जीवन में बदलाव लाने के लिए कई कदम उठाए हैं। हमारा ध्यान कृषि क्षेत्र के संपूर्ण विकास पर केंद्रित है जैसे सस्ता ऋण उपलब्ध कराना, बीज और उर्वरकों की आपूर्ति सुनिश्चित करना, सिंचाई सुविधाओं को बेहतर बनाना, व्यापक जोखिम सुरक्षा, मृदा स्वास्थ्य कार्ड के माध्यम से बेहतर उत्पादकता, ई-राष्ट्रीय कृषि बाजार (ई-एन.ए.एम.) के माध्यम से उत्पाद के लिए सुनिश्चित बाजार और लाभकारी कीमतें आदि। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में जोखिम कवरेज को विस्तृत किया गया है, बीमा राशि को दोगुना किया गया है और किसानों के लिए प्रीमियम राशि को अब तक के न्यूनतम स्तर पर लाया गया है। 2016 खरीफ फसल की अवधि के दौरान लगभग 3.66 करोड़ किसानों के लिए 1.4 लाख करोड़ की राशि का बीमा किया गया। किसान क्रेडिट कार्डों को डिजिटल बनाने के उद्देश्य से मौजूदा कार्डों के अलावा तीन करोड़ कार्डों को जल्द ही रूपे डेबिट कार्डों में बदला जाएगा। नाबार्ड निधि की राशि को दोगुना करके इकतालीस हज़ार करोड़ किया गया है ताकि सभी किसानों को आसानी से ऋण उपलब्ध हो सके। हर बूंद अधिक फसल तथा हर खेत को पानी को ध्यान में रखते हुए प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना का कवरेज बढ़ाया गया है। पिछले दो वर्षों के दौरान 12.7 लाख हैक्टेयर से ज्यादा भूमि पर सूक्ष्म सिंचाई की व्यवस्था की गई है। हमारी सरकार किसानों की आय को दोगुना करने के लिए वचनबद्ध है।  किसानी के साथ-साथ डेयरी का समुचित विकास हो इसके लिए लगातार प्रयासरत है। लाखों ग्रामीण परिवारों के लिए दुग्ध व्यवसाय आय का दूसरा महत्वपूर्ण स्रोत बन गया है। रोज़गार प्रदान करने और आय के साधन पैदा करने में दुग्ध व्यवसाय की भूमिका अत्यन्त महत्वपूर्ण हो गई है। देश के लगभग 7 करोड़ ग्रामीण परिवार दुग्ध व्यवसाय में लगे हुए हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में करीब 70 प्रतिशत मवेशी छोटे, मझौले और सीमांत किसानों के पास हैं, जिसकी पारिवारिक आमदनी का बहुत बड़ा हिस्सा दूध बेचने से प्राप्त होता है। इस सैक्टर की प्रगति से ग्रामीण अर्थव्यवस्था का अधिक संतुलित विकास होगा। दूध ग्रामीण इलाकों में रहने वालों के लिए खाद्य सुरक्षा और पोषण सुरक्षा के साथ ही जीवन की सुरक्षा भी देता है। दूध देने वाली एक गाय या भैंस पालना किसानों को आत्महत्या करने तक से बचा सकता है। हमारी सरकार ने डेयरी के विकास के लिए आज़ादी के पहली बार अलग से आगामी तीन वर्षों में 8000 करोड़ रूपये की संचित निधि से नाबार्ड में एक दुग्ध प्रसंस्करण एवं संरचना निधि स्थापित की है। आज डेयरी किसानों के लिए अतिरिक्त आमदनी का एक महत्वपूर्ण स्रोत है। देश में सबसे अधिक ग्रोथ के साथ भारत का डेयरी सेक्टर दुनिया के किसी भी देश में चलाए गए एग्रो इकोनॉमिक प्रोग्राम से अधिक सफल रहा है। इतना कार्य होने के बावजूद समय की मांग है कि डेयरी की आय को कृषि आय घोषित किया जाए जिससे हमारा डेयरी व्यवसाय विश्व में नं. 1 बन सके।

          आज हमारी सरकार ने सुरक्षा के लिए किसी प्रकार से समझौता नहीं करने का संकल्प लिया है। पाकिस्तान द्वारा आतंकवाद को लगातार बढ़ावा दिया जा रहा है तथा देश में जगह-जगह आतंकी वारदातें हो रही थी। हमारे सैंकड़ों सैनिक व आम नागरिक इन आतंकी हिंसा के शिकार हो रहे थे। हर जगह यह चर्चा थी कि हमारी सरकार इस सिलसिले में कोई कड़ा कदम उठाने में असफल रही है। परंतु इन सभी अफवाहों का मुंहतोड़ जवाब देते हुए हमारी सरकार ने सेना को पाकिस्तान में सर्जिकल स्ट्राइक करने का निर्देश जारी किया तथा हमारी जाबांज सेना ने पाकिस्तान में घुसकर सर्जिकल स्ट्राइक कर सैकड़ों आतंकवादियों तथा उनके कई ठिकानों को नेस्तनाबूद कर दिया।

          चिकित्सा क्षेत्र में बच्चों को अनेकों बीमारियों से छुटकारा दिलाने व टीकाकरण सुनिश्चित करने के लिए इन्द्रधनुष कार्यक्रम लागू किया जा रहा है तो दूसरी ओर आम जनता को सस्ती कीमत पर दवाईयां उपलब्ध करवाने के लिए जन-औषधि केंद्र खोले गए हैं। देश में भ्रूण हत्या की घटनाओं को समाप्त करने के लिए सरकार ने बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओं योजना को पूरी प्रतिबद्धता से लागू किया है तथा साथ ही साथ उनके सशक्तिकरण हेतु सुकन्या समृद्धि योजना तथा सुरक्षित मातृत्व अभियान जैसी योजना लागू की हैं। इस प्रकार सरकार देश के सभी वर्गों के कल्याण के लिए पूरी जिम्मेदारी के साथ काम कर रही है ताकि सबका साथ-सबका विकास के उसके नारे को मूर्त रूप दिया जा सके। निश्चय ही हमारी सरकार इन सभी योजनाओं के लिए बधाई की पात्र है।

          इन शब्दों के साथ मैं एक बार पुनः राष्ट्रपति के अभिभाषण पर मेरे सहयोगी डॉ. महेश शर्मा द्वारा पेश किए गए धन्यवाद प्रस्ताव का समर्थन करता हूँ।

                 

*SHRI GAJENDRA SINGH SHEKHAWAT (JODHPUR): The honourable President in his Address mentioned about the season of Basant being a time of renewal and resurgence.

          Basant is indeed as a time of transition, winter transiting to spring, the long cold nights transition into sunny mornings. It is indeed a time to recognise and honour the spirit of new and remember and take lessons from the past. 2016 shall always be known as a time when the cashless era began. With the commencement of Basant season, I can say that the country has transitioned from old to new, a transformation from old cash based economy to a vibrant and digitised one. I salute the people who showed such resilience during this great movement, those who participated in this as our Prime Minister calls it, The Maha Yagna. I thank the President of having mentioned the "Give it up" campaign where 12 million people willingly gave up LPG subsidy. Years from now if someone asks me to pick out two things to explain the true spirit of Indian people, it is undoubtedly going to be the patience and commitment of my people during the demonetisation drive and the give it up campaign. These are the things that give meaning to India, rare occasions when one's head bows down with humility yet it goes up with pride as well. I thank the president for having mentioned both these topics in his address.

          Last year shall be known as a year when a Government gave new definition to the word bold. The surgical strikes showed to the world that India is a country that shall right the wrong done to its soldiers. While the surgical strikes and crack down on corruption were some of the tough stance taken by the Government, there were plenty of calibrated steps taken by this Government to empower people at the bottom of the pyramid to live an honourable life. Our Government has constantly pursued increasing the standard of living for the poor and downtrodden. Imagine a country where the government gives so much importance to sanitation that the Swachh Bharat Abhiyan finds its place in the new notes. I am proud to say that this Government is such a government that places sanitation at such a high pedestal in its policy frameworks. Empowering the Girl child through Beti Bachao, Beti Padhao Abhiyan, The Deen Dayal Antyodaya Yojana to empower women through Self Help Groups, Mission Indradhanush to vaccinate every child, The Pradhan Mantri Jan Aushadhi program to give the poor access to medicines. These policies are some of the examples of how this Government has included every section of the society, every one, the Garib, Dalit, Peedit, Shoshit, Vanchit, Kisan, Shramik and Yuva, everyone is now the main character of the story of growth, Sabka Saath Sabka Vikas is not just a tagline, it is the main motivation behind the Government. I thank the president for having mentioned these aspects.

          A great saying goes like this "Create with the heart; build with the mind." At the heart of this Government there is a passion to reach out to the unreached, to touch the untouched, to give service to the not serviced and on the mind of this government is a vision to actualise the words and thoughts of the great social reformer, Pandit Deen Dayal Upadhaya. I thank the president for having pointed out the various ways by which the Government is trying to create  a strong yet inclusive country. I hope that his words shall act as a guide for the policy makers of this country who shall do everything in their ambit to stand up to the high ideals set by Honourable President's speech.

*श्री रामचरण बोहरा (जयपुर शहर) ः मेरी नज़र में यह एक ऐतिहासिक बजट सत्र है, जिसमें कई बोल्ड स्टैप्स हमारी सरकार द्वारा लिये गये और यह पहली बार ऐसा हुआ है कि भारत के इतिहास में एक संयुक्त बजट जिसमें आम बजट व रेल बजट साथ मिलकर पेश किया गया है, वह भी करीब एक महीने पहले। इससे बजट में किये गये प्रावधानों के क्रियान्वयन के लिए सरकार को ज्यादा समय मिलेगा।

          मैं माननीय प्रधानमंत्री जी को विमुद्रीकरण जैसे साहसी कदम उठाने के लिए बधाई देना चाहता हूँ। इस कदम से न केवल काले धन पर नकेल कसी गयी है बल्कि आतंकवाद व भ्रष्टाचार पर प्रभावी रोक लगी है। मुद्रा विमुद्रीकरण की संपूर्ण विश्व ने प्रशंसा कर इसे एक ऐतिहासिक कदम बताया है। यह बिल्कुल सही है कि विमुद्रीकरण से अल्प अवधि में आम जनता को कई तकलीफे आयी हैं जिनको आम जनता ने देश के हित में खुशी-खुशी स्वीकार किया, इसके लिए भारतीय जनता पार्टी की सरकार एवं समूचा भारतवर्ष ऋणी रहेगा। मगर इसी विमुद्रीकरण के दीर्घकालीन अवधि में कई फायदे होंगे और भारत के विकास के लिए एक मील का पत्थर साबित होगा।

          हमारी सरकार का मुख्य लक्ष्य एकात्म मानववाद के प्रेणता पंडित दीनदयाल उपाध्याय की अंत्योदय विचारधारा को लागू कर आमजन, गरीब, असहाय, नःशक्तजन एवं पिछड़े वर्ग को समाज की मुख्य धारा से जोड़कर रोज़गार के साधन सृजन करना है।

          मैं सरकार का ध्यान आकर्षित करना चाहता हूँ कि मेरे निर्वाचन क्षेत्र जयपुर शहर में प्रधानमंत्री मुद्रा योजना से करीब 56,487 युवा प्रत्यक्ष रूप से लाभांवित हुए हैं और अप्रत्यक्ष रूप से करीब 1.50 लाख युवा लाभांवित हुए हैं और इसी तरह जन-धन योजना के द्वारा राजस्थान प्रदेश ने पूरे देश में प्रथम स्थान प्राप्त किया है जिससे ज्यादा से ज्यादा लोग बैंकिंग प्रणाली से सीधे तौर पर जुड़े हैं। पूरे भारत में करीब 26 करोड़ जनता को जन-धन योजना के माध्यम से बैंकिंग खाते खुलवाये गये हैं।

          भारतीय जनता पार्टी का मुख्य लक्ष्य शहर ही नहीं अपितु गांव के विकास, जिसमें प्रत्येक गांव में बिजली, शुद्ध पेयजल जैसी मूलभूत सुविधा उपलब्ध कराना है। इसी दिशा में विचार रखते हुए माननीय प्रधानमंत्री जी ने पंडित दीनदयाल उपाध्याय ग्राम ज्योति योजना के तहत 2018 में संपूर्ण गांव के विद्युतीकरण का लक्ष्य रखा है, इसके लिए मैं उनका आभार व्यक्त करता हूं। क्योंकि इससे गांव रोशन होगा तो देश स्वतः ही रोशन होगा।

          माननीय वित्त मंत्री जी द्वारा हाल ही में पेश किये गये बजट के दौरान फ्लोराईड युक्त पानी के लिए बजट में विशेष प्रावधान किया गया है जिससे मुख्य तौर पर राजस्थान जो कि फ्लोराईड युक्त पानी की समस्या से ग्रस्त है। इन प्रावधानों से राजस्थान प्रदेश की इस विकट समस्या से निज़ात मिलेगी। मैं इसके लिए माननीय वित्त मंत्री जी का आभार व्यक्त करना चाहता हूँ। साथ ही आग्रह करता हूँ कि राजस्थान को फ्लोराईड मुक्त करने के लिए ज्यादा से ज्यादा राशि का आवंटन करायें।

          इसी के साथ मैं सभी सदस्यों से अपील करना चाहूँगा कि वे सदन को सुचारू रूप से चलने में सहयोग प्रदान करें तथा साथ ही माननीय राष्ट्रपति जी के अभिभाषण पर उनका आभार व्यक्त करता हूँ।

                                           

*डॉ. किरिट पी. सोलंकी (अहमदाबाद) ः   मैं आपका आभारी हूं कि मुझे आपने इस महत्वपूर्ण विषय पर बोलने की अनुमति दी ।  राष्ट्रपति जी का भाषण, सरकार  आगे आनेवाले वर्ष में किन मुद्दो पर आगे बढ़ेगी और सरकार का रोडमैप क्या रहेगा उसे उजागर करता है।

          मैं महामहिम राष्ट्रपति जी का धन्यवाद करता हूं, हमारे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी की सरकार ने कुछ सदियों में एक बार लेनेवाले अहम निर्णय, विमुद्रीकरण का  एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है ।  उस प्रकार की राजकीय ईच्छाशक्ति के लिए धन्यवाद करता हूं । इस निर्णय की बजट से कालेधन पर रोक लगेगी । और भ्रष्टाचार पर नकेल लगेगी तथा आतंकवाद, नक्सलवाल तथा फेक करेंसी समाप्त होगी ।  मैं सरकार को अभिनंदन करता हूं कि, इतना बड़ा निर्णय होते हुए भी, देश की जनता ने मुसीबतों को झेलकर भी उस निर्णय का समर्थन किया है । यह निर्णय इस देश के आम आदमी और गरीब इंसान के हित में लिया गया है । पूरे देश की जनता, खासकर गरीब लोग इस निर्णय से खुश है और उन्होंने कठिनाईयां झेलकर भी इस निर्णय का स्वागत किया है। आनेवाले समय में इस निर्णय की वजह से देश की वित्तीय व्यवस्था और मजबूत होगी, कालेधन पर रोक लगेगी और ज्यादा से,ज्यादा लोग टैक्स के दायरे में आएंगे ।   जिससे जो धन सरकार की तिजोरी में जमा होगी, उसका उपयोग गरीबों के कल्याणकारी योजना में किया जाएगा।   उनके लिए, "गरीब कल्याण कोष " बनेगा और पंडित दिन दयाल जी के जन्म शताब्दि वर्ष जो  " गरीब कल्याण वर्ष " के तहत मनाया जाता है उससे सामान्य लोगों के लिए बहुत सारे आयाम बनेंगें ।

          जहां तक  " केश लेस" सोसायटी और डीजिटल बैंकिंग का सवाल है, आनेवाले समय में उसको बढ़ावा मिलेगा ।  हमारे प्रधानमंत्री जी ने, डा0 बाबा साहब आंबेडकर जी के नाम से  "भीम एप " बनाई है, उसकी वजह से गरीब ग्रामीण और अनपढ़ लोगों को भी थंब इप्रेशन की वजह से नेट बैंकिंग की सुविधा मिलेगी । महामहिम राष्ट्रपति जी ने लोक सभा तथा विधानसभा के चुनाव साथ रखने का प्रस्ताव रखा है ।  मैं उसका स्वागतम करता हूं तथा इसकी वजह से चुनावी रीफार्म होगा और चुनाव सुविधायुक्त होगा तथा चुनावी खर्च भी बहुत कम होगा ।

          मैं राष्ट्रपति जी के भाषण का स्वागत करता हूँ और समर्थन भी करता हूँ ।

                                                                                               

*श्रीमती रमा देवी (शिवहर) ः माननीय राष्ट्रपति जी ने इस वर्ष राज्य सभा एवं लोक सभा के संयुक्त अधिवेशन में जो अभिभाषण दिया है, उससे सबका साथ-सबका विकास का उद्देश्य पूरी तरह से स्पष्ट होता है कि देश में वर्तमान सरकार के गठन के बाद देश के विकास को तेज करने के लिए अथक प्रयास किये गये हैं इससे देश के जो क्षेत्र पिछड़े हैं, उनको विकास के अवसर मिलेंगे साथ ही जो वर्ग राष्ट्रीय विचाराधारा से पीछे रह गये है उनको भी राष्ट्रीय विचाराधारा में शामिल करने में सहायता मिलेगी।

          हमारा भारत देश दूसरे देशों की सुरक्षा का हितैषी है इसके लिए जरूरतमंद देशों की रक्षा एवं अपनी रक्षा करने के लिए सदियों से प्रयासरत है। भारत सरकार ने इस क्षेत्र में काम करने वाले महापुरूषों को सदैव याद किया है और उनकी राह पर चलने का प्रण भी किया है इसके लिए सरकार बधाई की पात्र है। इस वर्ष चंपारण सत्याग्रह की शताब्दी का आयोजन वर्तमान सरकार कर रही है जिन्होंने आज़ादी की लड़ाई को नई दिशा दी थी। इस सत्याग्रह ने देश की आज़ादी की लड़ाई लड़ने वालों में नई शक्ति प्रदान की थी जिससे देश की आज़ादी की लड़ाई में तेजीपन लाया गया। इस शताब्दी से हम उन शूरवीरों को याद करेंगे जिनकी मदद से भारत को अंग्रेजों से आज़ादी मिली थी।

          पिछले साल नवंबर के महीने में नोटबंदी के अंतर्गत 500 रूपए एवं 1000 रूपए के पुराने नोटों का विमुद्रीकरण करने का माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी द्वारा ऐतिहासिक कदम उठाया गया जिससे देश में व्याप्त भ्रष्टाचार पर लगाम लगाई जा सके एवं काले धन की समांतर सरकार का खात्मा किया गया है। देश के गरीब, किसान, व्यापारी ने नोटबंदी से उत्पन्न किल्लत में अदम्य सहनशीलता का परिचय दिया जिसका सीधा मतलब है कि देश की जनता प्रधानमंत्री जी के आर्थिक सुधार के साथ है। जब जनता को फायदा होगा तभी तो समर्थन करेगी। इस नोटबंदी से कई भ्रष्ट अफसरों का पता लगा, काले धन का पता लगा और देश में भ्रष्टाचार फैलाने वालो का पता लगा।

          देश की वर्तमान सरकार ने गरीब, वंचित, शोषित एवं सुविधा से वंचित लोगों के कल्याण के लिए विशेष कदम उठाये हैं। माननीय प्रधानमंत्री जी के हार्दिक निवेदन पर देश में स्वेच्छा से एल.पी.जी. की सब्सिडी  छोड़ने वालों की संख्या 1.2 करोड़ रही। इससे गरीब परिवार की महिलाओं को धुएं के वातावरण में काम करने से छुटकारा मिला। तीन साल पूर्व देश में खुले में शौच करने से व्याप्त गंदगी होती थी और महिलाओं को खुले में शौच करने में काफी दिक्कत महसूस होती थी इस समस्या के लिए माननीय प्रधानमंत्री जी ने वर्तमान सरकार की बागडोर संभालने के बाद तीन महीनों में स्वच्छ भारत अभियान की उत्साहपूर्वक शुरूआत की। यह स्वच्छ भारत मिशन एक जन आंदोलन में तब्दील हो गया है। अब तक देश के 1.4 लाख गांव, 450 से ज्यादा शहरों में लोगों को खुले में शौच करने से मुक्ति मिली है क्योंकि इन क्षेत्रों के लोगों के लिए 3 करोड़ शौचालय बन गये हैं। भारत में सफाई के लिए जो प्रयास किये हें उसमें देश के लोग सरकार का आभार व्यक्त कर रहे हैं।

          देश के किसान, गरीब, पीड़ित, शोषित एवं वंचित युवा वर्ग एवं निर्धन वर्ग की महिलाओं को समुचित सम्मान मिले इसके लिए कई कल्याणकारी कार्य किये जा रहे है साथ ही पंडित दीनदयाल द्वारा किये गये सामाजिक कल्याण संबंधी कार्य को आधार बनाने के लिए पंडित दीनदयाल जन्म शताब्दी पर हमारी सरकार द्वारा गरीब कल्याण वर्ष का आयोजन किया जा रहा है। देश में नारी को सम्मान दिलाने और उनके योगदान को देश के विकास से जोड़ने के लिए इस सरकार ने कई कार्य किये हैं। देश में महिला शक्ति की कामयाबी से विश्व में खेलकूद में भारतीय महिलाओं ने कई पदक जीते हैं और भारत की लाज बचाई है। आज महिलाओं को सही सशक्तिकरण मिले तो नारी प्रतिभा एवं नारी कौशल का उपयोग राष्ट्रहित में कर सकते हैं। माननीय प्रधानमंत्री जी की पहल पर बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओं कार्यक्रम नारी के बढ़ते कदम को दर्शा रहा है। इस सरकार ने भारतीय महिलाओं की दशा सुधारने के लिए सुकन्या समृद्धि योजना एव प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान का आरंभ किया है जिससे गर्भवती महिलाआं को कार्य स्थल पर सहायता दी जा सकेगी। देश में आंगनबाड़ी कार्यक्रम से महिलाओं को प्रशिक्षण दिया जा रहा है जिससे गांव में बाल विकास कार्य अच्छे ढंग से चलाये जा सके। सरकार से मेरा अनुरोध है कि आंगनबाड़ी में कार्यरत महिलाओं को कम वेतन मिलता है उनका वेतन बढ़ाया जाना चाहिए।

          देश के विकास के लिए समुचित वित्तीय व्यवस्था एक आवश्यक घटक है। अच्छी व्यवस्था से देश की गरीबी को दूर कर सकती है और देश में व्याप्त भ्रष्टाचार को दूर किया जा सकता है और काले धन के प्रचलन को रोका जा सकता है। भ्रष्टाचार और काला धन देश के विकास के रास्ते को रोकने का काम करता है। इसी दिशा में माननीय प्रधानमंत्री जी ने पिछले साल नवंबर के महीने में नोटबंदी का ऐतिहासिक एवं साहसिक कदम उठाया और देश की जनता ने उसमें बिना किसी संकोच के साथ समर्थन किया।

          इस देश की जनता को पूरा विश्वास है कि नोटबंदी से देश के बेईमान लोगों का पर्दाफाश किया जा सकता है इसके लिए नोटबंदी से होने वाली दिक्कतों को दिल से सामना किया और अपनी सहनशीलता का परिचय दिया है। देश के डाकघरों को वित्तीय कार्य में धीरे-धीरे लगाया जा रहा है जिससे ग्रामीण वित्तीय व्यवस्था को एक नया आयाम मिलेगा जो ग्रामीण विकास में योगदान करेगा।

          राष्ट्रपति अभिभाषण का सारांश भारत देश के तीव्र विकास की ओर संकेत है और सरकार ने अपने द्वारा किये वायदे को निभाया है, मैं राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव का समर्थन करती हूँ।

 

*SHRIMATI POONAMBEN MAADAM (JAMNAGAR): I extend my sincere thanks to the Hon'ble President of India for delineating the road map for India's future and also emphasising how far we have come in accomplishing our goal of "sabka saath sabka vikas." I am glad that the Government's resolve has been underlined and emphasised through his address.

          The people of the country have a lot of hope on the President's Address because this outlines the resolution and intentions of the Government. It was particularly exemplary that the Address reflected on the spirit of cooperative federalism restored by the present Government - a relationship that had been diluted in previous years. I am sure such cooperative federalism would be very useful in furthering the development agenda of States and the nation as a whole.

          My starting point to the motion will refer to the historic moment that our nation witnessed, when our Hon'ble Prime Minster Shri Narendra Modi ji waged a war against black money, corruption and terrorism. The currency demonetization has mostly won a accolades across India, albeit the criticism by the opposition.

I take this opportunity to congratulate the Prime Minister for taking such a brave step. I believe his step against black money is no less than a surgical strike. It will not only be deterrent to those keeping black money, but also give a major blow to those indulging in the business of fake currency. And people, who are still questioning the demonetization move, should remind themselves, that right from the start our Government has been committed to fight black money and corruption. However, a transformation in any society or any country takes time but will give long term gains. The present "reset" button of the economy which was marred by corruption and coal scam and 2G scam and Commonwealth scam. The list can go on .... but what is important here, is to focus on the Indian economy that has been provided a new lease of life with a economic growth estimated to be stable at 7.1 percent in the current fiscal and with GST on the anvil, India is already on the cusp of higher growth in the medium to long term.

          The Government has adopted transformational policy measures in the last 3 years courtesy which India is ranked third in the list of top prospective host economies for 2016-18 as per the World Investment Report 2016. To mention a few of these initiatives, the Government's priority for financial inclusion has been the key to poverty alleviation. An unprecedented 26 crore plus Jan Dhan accounts have been opened for the unbanked. Over 20 crore Rupay debit cards have been issued to enable cashless payments. Moving swiftly from "Jan Dhan to Jan Suraksha" close to 13 crore poor have been covered under various social security schemes. The Government has also launched 'Digi Dhan Abhiyan' to provide financial literacy and educate 1 crore citizens from rural India on cashless transactions.

          Hand in hand with the economic sector, the Government is committed to the agricultural sector, which is the backbone of our nation. The 'Pradhan Mantri Fasal Bima Yojana' has been successfully running ensuring lowest ever premium rates for farmers to end the farm distress. Pradhan Mantri Fasal Bima Yojana expanded the ambit of risk-coverage, doubled the sum insured, and facilitated lowest-ever premium for the farmers. During kharif 2016, around 3.66 crore farmers were insured for a sum of Rs. 1.4 lakh crore.

          With the objective of digitisation of all the live Kisan Credit Cards, another three crore cards will be converted into RuPay debit cards soon The corpus of NABARD  fund has been doubled to Rs. 41 thousand crore to ensure easy credit access to farmers. The National Agriculture Market is working towards setting up a common e-market platform to connect 585 wholesale markets across the country. Both the new digital agri-market platform and crop insurance scheme are welcome initiatives.

          However, reforms are still needed in the agriculture sector. Two-thirds of our people live in rural areas and agriculture is the main source of livelihood for majority of our people. The economic contribution of agriculture to India's GDP is steadily declining with the country's broad-based economic growth. Still, agriculture is demographically the broadest economic sector and plays a significant role in the overall socio-economic fabric of India. In the past, we have seen our farmers committing suicides die to a drought and other adverse situations like insufficient or risky credit system, difficulty of farming in semi-arid regions, poor agricultural income, absence of alternative income opportunities and the absence of suitable counseling services. This government has recognized these issues and as my suggestion I would request the Government to increase investment in agricultural spending and deploy scientific practices, by streamlining the pricing and procurement procedure, by implementing crop insurance and post-harvest management by setting up of food processing industries.

          I am sure that this Government will usher in the second green revolution which will bring the much needed smile to our farmers.

          With a view to trickle down benefits to the economically weak, the 'Give-It-Up campaign' along with the 'Give Back programme' has provided subsidized fresh connections to BPL families. Over 1.2 crore consumers have voluntarily given up their LPG subsidy, which has helped the underprivileged in accessing LPG connections.

          Pradhan Mantri Awas Yojana is committed to provide shelter to every houseless poor through the scheme with appropriate interest subvention on housing credit.

          This scheme will benefit slum dwellers, urban poor and people from economically weaker section of society.

          For rural development: Shyama Prasad Mukherji Urban Mission has been launched for 300 rural clusters, out of which 'Vadinar' village of my constituency Jamnagar has also been adopted. The Mission will aid skill development and local entrepreneurship, in addition to providing infrastructure amenities. Under Pradhan Mantri Gram Sadak Yojana rural habitations are to be connected with all-weather roads. Construction of 73,000 Kilometres of road has been done so far in rural areas.

          I would like to highlight this Government's promise of ensuring that our women are empowered and safe. The President has already highlighted in his speech about our commitment to "Beti Bachao- Beti Padhao". Female feticide is heinous sin. The root cause for female  feticide lies within the cultural norms as well as the socio-economic policies of this country. In India, the number of girls per 1000 boys was on a decline, however, with the Government's timely intervention sex ratio has improved significantly in critical states. This disparity may prove critical for the country's development in political, economic and social spheres. As per my suggestion, further to strengthen programmes like 'Beti Bachao Beti Padhao' we have to take initiatives to introduce programmes in schools where children are engaged, exposed and introduced to concepts like equality and consent. Also we have to run gender sensitization programmes across cities and villages regarding 'the right to consent' and respecting women and their choices.

          For the first time ever, minimum wages have been increased by 42 percent in both agricultural and non-agricultural sectors. Workers employed in the informal sector will benefit the most from the Government's decision to enable employers to pay wages to their employees through banks. This will increase compliance of payment of minimum wages.

          The Government realises that rural and urban development has to go parallel and accordingly, the Government is taking steps to cater to the nation's development needs. Over Rs 2 Lakh Crore has been provided through 'Pradhan Mantri Mudra Yojana' for small and medium enterprises.

          While referring to MSMEs; it is my duty to uphold some reflections of my Parliamentary Constituency, Jamnagar. After registering a decade long of nominal growth, the Jamnagar based brass parts industry has witnessed a turnaround on the back of increased exports recently.

          Surged European export orders have revived the Jamnagar brass industry. Apparently, five years ago, total exports formed a mere 3-4% of the industry's overall business.

          However, the same has gradually increased to almost 20% in the last two years. In 2014-15, the industry registered exports of about Rs. 2,000 crore to regions like USA and Europe, along with African countries. Exports have also extended to Asian countries like UAE, Saudi Arabia.

          However, this was made possible with the timely help and intervention of our very own Prime Minister, Shri Narendra Modi ji and the Finance Minister, Shri Arun Jaitley ji.

          The Government of India had reduced the earlier levied 4% SAD on import of Brass Scraps to 2%. The Government has reduced SAD on imports of brass scrap even at the cost of huge revenue outgo to benefit the Jamnagars Brass Industries. The benefits of duty reduction would go directly towards the efforts of revenue generation through manufacturing activities to the working class people engaged in the sector.

          There are 4,000 brass-making units in Jamnagar, over 80 per cent of them in the small-scale category. The industry employs over 200,000 people, directly and indirectly.

          On behalf of the people, I take this opportunity to wholeheartedly acknowledge the efforts of present Government to strongly revive Indian manufacturing sector and MSME.

          India's young population cares about jobs and economic opportunities. They believe in the leadership of Shri Narendra modi ji. Our honourable Prime Minister is known as a man, who rose from humble beginnings by his own efforts. Young generation wants to see India as a strong nation and as a man of his words our Hon'ble Prime Minister and the Bharatiya Janta Party have prioritized external and internal defence of our country; and as the Hon'ble President has rightly highlighted that the surgical strikes were a befitting reply to cross border terror and in our national interest.

          Against this backdrop and track record of the Government, I can confidently say that very soon India will emerge as an economic super-power under the leadership of our Prime Minister Shri Narendra Modi ji, There has been tremendous economic transformation and the holistic approach to development as adopted by the Government will take this country to greater heights. The Government is creating a policy environment which is predictable, transparent and fair. I firmly believe that the era of change has begun. A change from despair to hope; a hope ignited by the vision of our Hon'ble Prime Minister Shri Narendra Modi ji, a vision that would bring a smile on the face of every Indian; a smile of contentment, honour and dignity but to achieve this, each one of us will have to contribute to the cause of nation-building and put together the India of our dreams.

                               

*श्री राहुल कस्वां (चुरू) ः मैं महामहिम राष्ट्रपति जी के अभिभा­षण पर धन्यवाद प्रेषित करता हूँ। महामहिम राष्ट्रपति जी द्वारा भारत सरकार की जन कल्याणकारी योजनाओं के बारे में भारत की जनता को अवगत कराया गया। महामहिम राष्ट्रपति महोदय ने कहा कि भारत सरकार का एक मात्र उद्देश्य गरीब, दलित, पीड़ित, शोषित, वंचित, किसान, श्रमिक एवं युवा का कल्याण करना है। भारत सरकार माननीय पंडित दीनदयाल उपाध्याय के द्वारा दिये गये अंत्योदय की विचारधारा का निर्वहन करते हुए देश एवं समाज कल्याण की योजनाओं पर कार्य कर रही है। यह इस देश का सौभाग्य है कि भारत में सरकार अंतिम व्यक्ति तक सभी योजनाओं का लाभ पहुंचाने के लिए कटिबद्ध है जैसा कि महामहिम राष्ट्रपति महोदय ने भारत सरकार की अनेक कल्याणकारी योजनाओं का जिक्र करते हुए देश को बताया कि किस प्रकार भारत सरकार आम जन के विकास एवं कल्याण की योजनाओं को क्रियान्वित करने में अग्रसर है।

          भारत सरकार की अनेक योजनाएँ देश को प्रगति के पथ पर ले जा रही हैं। माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी द्वारा पिछले 2 सालों में अनेकों जन कल्याणकारी योजनाओं का शुभारम्भ एवं क्रियान्वयन किया गया, जे.ए.एम./जनधन, आधार व मोबाइल तीनों ने मिलकर इस देश को जनधन से जनसुरक्षा की ओर ले जाने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। नोटबंदी जैसा बेहतरीन व क्रांतिकारी कदम उठाकर देश के प्रधानमंत्री ने बताया कि देश को अब नगदी का कम प्रयोग करते हुए देश को आगे बढ़ाना है। इस कार्य में जनधन, आधार व मोबाइल ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हुए देश को कैशलेस अर्थव्यवस्था की ओर बढ़ाने का कार्य किया है। प्रधानमंत्री मुद्रा योजना के द्वारा अनेक युवाओं को रोज़गार व उद्यमिता के क्षेत्र में आगे बढ़ने का मौका दिया गया। हमारे देश की 65 प्रतिशत जनसंख्या युवाओं की है और माननीय प्रधानमंत्री जी का उद्देश्य युवाओं को प्रगति के पथ पर ले जाने का है। जिसके लिए कड़ी से कड़ी मिलाते हुए युवाओं को कौशल विकास से शुरू कर उन्हें उद्यमिता एवं रोज़गार के क्षेत्र में ले जाने के लिए अनेक योजनाएं शुरू की हैं।

          प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना के तहत भारत सरकार ने अगले तीन सालों में एक करोड़ युवाओं के कौशल विकास का लक्ष्य रखा है। प्रधानमंत्री मुद्रा योजना, स्टैण्ड-अप इंडिया, स्टार्ट-अप इंडिया जैसी योजनाओं के द्वारा रोज़गार देने का कार्य भी भारत सरकार द्वारा किया जा रहा है। मैं इसके लिए माननीय प्रधानमंत्री जी को धन्यवाद देना चाहता हूँ।

          किसानों के लिए प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना, राष्ट्रीय कृषि मंडी एवं प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना व किसान क्रेडिट कार्ड को रूपे डेबिट कार्ड से जोड़ने की योजना के क्रियान्वयन से किसानों को सीधे फायदा पहुंचाने के लिए भारत सरकार द्वारा किये जा रहे प्रयास भी अत्यंत सराहनीय है। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत खरीफ 2016 के लिए 3.66 करोड़ किसानों के लिए 1.4 लाख करोड़ की राशि आवंटित की गई है जिससे कि निश्चित तौर पर देश के आम किसान को सीधा फायदा पहुंचेगा। "पर ड्रोप-मोर क्रोप " व हर खेत को पानी के विचार पर ध्यान देते हुए अगले दो वर्षों में 12.7 लाख हैक्टेयर क्षेत्र को सिंचित करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है जो एक अनुकरणीय कार्य है। भारत सरकार द्वारा दलहन की कीमतों को नियंत्रित करते हुए आम आदमी को तो फायदा पहुंचाया है लेकिन साथ ही किसान को भी पूरा हक दिलाने का प्रयास किया है।

          बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ की योजना को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने सुकन्या समृद्धि योजना की शुरूआत की और बेटियों के नाम पर देश में आम जन के द्वारा एक करोड़ से अधिक खाते खोले गये जिसमें बच्चियों के भविष्य की सुरक्षा के लिए भारत सरकार द्वारा सर्वाधिक फायदा दिया जा रहा है। सुरक्षित मातृत्व अभियान के तहत शिशु मृत्यु दर व मातृ मृत्यु दर में कमी लाने हेतु योग्य चिकित्सा अधिकारियों की देखरेख में प्रसव करवाये जा रहे हं एवं कार्यरत महिलाओं को भी 12 से 26 सप्ताह का मातृत्व छुट्टियां दी जा रही है। मिशन इन्द्रधनुष योजना के तहत देश के भी बच्चों को टीकाकरण द्वारा असाध्य रोगों की रोकथाम हेतु उन्हें दवाईयां उपलब्ध करवाई जा रही है।

          मैं पुनः महामहिम राष्ट्रपति महोदय जी को धन्यवाद देना चाहता हूँ कि देश की प्रगति के लिए लागू की गई जन कल्याणकारी योजनाएँ राष्ट्र को उन्नति की ओर अग्रेसित करेगा।

                       

*SHRI PREM SINGH CHANDUMAJRA (ANANDPUR SAHIB): Prem Singh Chandumajra:  I want to bring my views on behalf of my party S.A.D. on the President’s Address.

          President Address has shown a clear indication of the Government policies in the coming years.

          I want to suggest that Agriculture is the backbone of our country.  It should be considered on priority basis.       To make agriculture more profitable and sustainable, Government should implement the Swaminathan Commission’s Report specially in regard to fixation of M.S.P.          Irrigation sector should be taken in infrastructure sector.

          To solve unemployment, there should be a permanent solution.  Small units based on agriculture sector in villages should be taken on priority.

          Border areas like Punjab should be given priority and there should be special incentives for border States.

          Shri Anandpur Sahib is the most suitable place for tourism specially in the  religion sector.

 

*SHRI VARAPRASAD RAO VELAGAPALLI (TIRUPATI): I am tabling my written speech to thank the Hon. President for his address to the Parliament on 31.1.2017 as I have not got an opportunity to speak in the Lok Sabha due to paucity of time.

          I thank the Hon. President for his speech which highlighted several government projects and schemes enacted by the Government like Indian Postal Payment Bank, Mudra yojana, Anthyodaya Yojana, Indradhanush Fasal Bima Yojana and Beti Bacchao Beti Padhao.

          But I have few reservations on the following issues and request the Government to take my views into consideration and bring in modifications while implementing the schemes/projects to benefit the vulnerable sections.

          ODF (Open Defecation Free) claims by the Government at the Centre and the State are false and amounting to fooling the people.

          I have visited nearly 1000 habitations belonging mostly to SC/ST/OBC communities during last 2 and a half years.  My onset observation is that not even one habitation from these weaker sections has total individual household latrines (1HHL) in each house to prevent them open defecation.  Where a few latrines are completed, the payment is not made and many latrines are half completed.  I have a feeling that  the money meant for the 1HHL is being diverted by the State Government for other purposes.         Hence, without the provision of the 1HHL, declaring the villages/mandals ODF is only fake and unrealistic.

          Provision of free gas connection to SC/ST families of 55,000 is too small and inadequate when compared to their needs and population levels.

          While I appreciate the admiring of the Nari Shakthi for Women (Ms. Sindhu, Sakshi and Deepa) for getting medals in Rio Olympics, the Government is not taking any steps to create exclusive infrastructure in rural areas to bring more nari shakthi to limelight.

          Opening  of  26 crore Jan Dhan accounts is welcome, but till date no purpose has been served through these accounts except to use them as conducts to convert black money into white.  Because these accounts were opened at Government pressure and the holders have no money to operate the accounts on day to day basis.

          Stand-up India Scheme is good in concept but in allocation of funds and sanctioning of loans to SC/ST and women of 2 ½ lakhs is grossly inadequate.  It comes to only 50,000 for SC/STs.  Hence the allocation and sanctioning of loans may be enhanced matching need and requirements of these sections.

          Merging of Railway budget with the General Budget will lead to lack of focus and autonomy in Railways.  Since it is the most important single department of Government, a separate budget for Railways is ideal to help the common man.

          Allocation of  Rs. 48,000 crore to MNREGA scheme is grossly inadequate and claiming that it is the highest allocation is misleading.  Because, during last year the spending under this Scheme is Rs. 47,000 crore and by increasing a paltry sum of Rs. 1,000 crore makes the latter claims misleading taking the inflation into consideration.

Further, often  the  State Government is diverting the funds from MNREGA meant for food for work and livelihood in villages to other State schemes like CC roads and digging of tanks using machines and without using manpower.

No single mandal in my Tirupali Constituency has provided 100-150 man days employment in a year to the needy poor to the full extent.  The worst affected are the SC & ST sections in this process.

          The mindless unplanned demonetization has done more harm to the poor, daily wagers, small/medium industries than good.  This act has knocked off all the monetary authority and autonomy of the RBI  and made the latter just another wing of Government which is suicidal in the long run.

It only has benefited the rich and super rich and corporates and harmed the poor.

Hence, expressing a word of sympathy by the Government towards the people will assuage the wounds of the affected.

The real black money is with politicians, corporates, businessmen, gold operators, hawala operators, in real estate and in foreign assets.  Demonetising the poor will not bring out any black money nor stopped counterfeit notes.

Since, the terrorists can get their booty from the above black money hoarders, terrorism is also not curtailed.

Hence, it did not serve any useful purpose except torturing the poor and the small businessmen and farmers.

          Merging of plan and non-plan expenditure exercise without adequate planning has done great harm to the weaker sections like the ST and ST people.

          This has resulted in discontinuance of 38 schemes for SCs and 46 for STs like the rehabilitation and settlement of bonded labour and manual scavengers.  The amount lost in this process is Rs. 44,246 crore for SCs and Rs. 18,073 crore for STs.

          Hence, allocation in this budget (2017-2018) of Rs. 52,393 crore for SCs and Rs. 31,920 crore   STs is less and the claims of the Government that it is highest allocation is misleading the nation.  The allocation for these sections after merging the Plan and non-plan should have been above Rs. 96,000 cr. For SCs and Rs. 49,000 or for STs.  This is nothing but doing injustice to the SC/STs.

          Making it compulsory the biometric aadhaar for distribution of ratio and other subsidies is causing havoc as the finger prints are not matching in the villages depriving them of their legitimate ration.  The poor can not fight with the officials and the ration dealers.

          Since, the poor in villages are not yet ready, making biometric compulsory needs further examination taking the illiteracy into consideration.

          Adequate focus and attention has not been given to the youth.  65% of the Indian population is below 35 years old.  Adequate employment opportunities are not created for the youth although the claims of the government are very high.

          Similarly, adequate measures are not contemplated for the development of women in villages.  There are no steps taken to mitigate the problems of the farmers and to stop their suicides in villages, weaker sections like weavers and fishermen are not protected.

          The Government has made tall promises of houses for all houseless by 2020.  No house are being constructed in ST & ST habilitations.  The gap between the rich and the poor already existing in India is widening further.  Hence adequate focus and allocation may be done in housing for the poor in urban schemes and in rural areas.

          Last but not least is the absence of declaration of special status to the State of Andhra Pradesh.  This amounts to cheating of the people of Andhra Pradesh.  Hence the announcement may be done immediately declaring special status to the State of Andhra as promised by all prominent national parties and leaders.

          Similarly, as enshrined in the Andhra Pradesh State Reorganization Act,  a separate Railway Zone may be created at VIZAG in Andhra Pradesh at once.

          Hence, I urge upon the Union Government to show more action for the development of the rural areas and uplift the weaker sections viz  SC/ST/BC and minorities, women and the farmers than coining more slogans and making rhetorics.

          I thank the Chair for giving me this opportunity.       

*श्री राम कुमार शर्मा (सीतामढ़ी) ः वित्तीय वर्ष के प्रारंभ में संसद के संयुक्त अधिवेशन में सबसे पहले राष्ट्रपति जी के भाषण से सत्र शुरू करने की यह परंपरा के पीछे एक उद्देश्य है कि सरकार अपनी रीति, नीति एवं समस्याओं के समाधान हेतु प्राथमिकताएं स्पष्ट करती है ताकि आम जनता उनसे परिचित होने के साथ-साथ उनमें सहयोग कर सके।

          इसलिए मैं महामहिम राष्ट्रपति के भाषण को सरकार की रीति-नीति का आईना मानता हूँ। मेरी दृष्टि से भारत का यदि सर्वांगीण विकास करना है तो हमें कृषि क्षेत्र को विकसित करना होगा। किसानों की दोगुनी आय आगामी वर्षों में करने के लक्ष्य का मैं स्वागत करता हूँ। मैं चाहता हूं कि सरकार इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए ठोस रचनात्मक कार्य योजना क्रियान्वित करें।

          आज यह स्पष्ट है कि देश में खाद्यान्न उत्पादन की मात्रा तो निश्चित रूप से बढ़ रही है किंतु इस उत्पादन वृद्धि का लाभ उत्पादक को नहीं हो रहा है। किसान आज भी कर्ज के तले दबकर आत्महत्याएं करने को विवश हैं। इन भयानक परिस्थितियों के कारण देश के उच्चतम न्यायालय ने हाल ही में हस्तक्षेप कर सरकार को आगाह किया है कि वह राष्ट्रीय स्तर पर किसानों की आत्महत्याओं की समस्या पर नीति बनाएं। देश में कैसी विडंबना है कि कृषि उत्पादन में काम आने वाली सभी सामाग्रियों के कारोबार वर्ष दर वर्ष बढ़ोत्तरी पर है चाहे वह बीज हो या रासायनिक खाद व कीटनाशक। किंतु इनकी सहायता से उत्पादन होने वाले खाद्यान्न आज अलाभकारी बनकर रह गया है।

          मेरी सोच से इसी समस्या को प्राथमिकता देकर समाधान करना आवश्यक है कि किस प्रकार कृषि उत्पादन की लागत को कम किया जाए। कृषि उत्पादन की लागत कम होगी तभी किसान के लाभ में बढ़ोत्तरी संभव है। इसके साथ देश में खाद्यान्नों की उत्पादन दर भी बढ़ानी होगी। भारत कृषि प्रधान देश होने के बावजूद उत्पादन दर की दृष्टि से भारत विश्व में निचले पायदान पर है।

          राष्ट्रपति जी ने अपने भाषण में एक स्थान पर स्वच्छता को देश के गरीब वर्ग से जोड़ते हुए कहा है कि देश में गरीबी होने का एक कारण अस्वच्छता भी है। इस दोष को देश से दूर करने के लिए हमारे माननीय प्रधानमंत्री जी ने भारत स्वच्छता अभियान की शुरूआत लगभग दो वर्ष पूर्व की थी और इस अभियान के अंतर्गत देश में शौचालय निर्माण करने के लक्ष्य निर्धारित किए गए। सरकारी सूत्रों से पता चलता है कि अभी तक तीन करोड़ शौचालय का निर्माण हो चुका है और भी भविष्य में निर्माण होंगे इसमें संदेह नहीं।

          परंतु मेरा इस अभियान के अंतर्गत एक सुझाव है कि जब तक देश में स्थानीय स्तर पर स्वच्छता का माहौल पैदा नहीं होगा स्वच्छता के अभियान की सफलता संदिग्ध रहेगी। मैं देखता हूँ कि स्थानीय निकाय इस अभियान के लिए माहौल नहीं बना रहे हैं। इस कारण जो धरातल पर स्वच्छता का जो असर दिखना चाहिए वह नहीं दिख रहा है। गांव में या शहरों में जो नए शौचालय निर्माण हो रहे हैं उनमें उत्पन्न होने वाला मानव अपशिष्ट की निकासी की योजना के क्रियान्वयन पर बल नहीं है। गांव में और छोटे शहरों में अभी भी खुले नाले-नालियां हैं, उनमें बहने वाला गंदा जल और कूड़ा-कचरा के निष्पादन के प्रभावी व्यवस्था के अभाव में यत्र-तत्र बिखरा आज भी दिखाई देता है। मेरी यह सोच है कि जब तक स्वच्छता अभियान में इस कुप्रबंधन को बल नहीं जाएगा स्वच्छता का माहौल नहीं बन सकता और निर्धनों के मलिन बस्तियों का सपना अधूरा रह जाएगा।

          बेरोज़गारी आज देश की विकट समस्या है। देश में 65 प्रतिशत से ज्यादा लोग युवा है जिन्हें रोज़गार चाहिए। रोज़गार के अभाव में देश के परिवार आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं। इस तथ्य से स्पष्ट है कि आज भारत के प्रत्येक निवासी 38,000 रूपए के कर्ज के बोझ से दबा है। निश्चित ही देश की स्थिति भयावह है। इस भयावह स्थिति को लाने में बेरोज़गारी अहम भूमिका निभा रही है। मेरी सोच है कि देश के नौजवानों की वृहद् आबादी को सरकार रोज़गार नहीं दे सकती बल्कि वह देश में वातावरण जरूर पैदा कर सकती है कि देश में काम चाहने वाले नवयुवकों को रोजी-रोटी उपलब्ध कराने का अवसर प्रदान कर सकें। भारत कृषि प्रधान देश और कृषि यहां का पारंपरिक उद्योग है।

          अतः कृषि के ईर्द-गिर्द आर्थिक गतिविधियां चाहे वह सेवा क्षेत्र की हो या पिर उद्योग क्षेत्र की जो प्रोत्साहन देने वाली नीति क्रियान्वित हो। पशुपालन, दुग्ध उत्पादन, औषधि उत्पादन और खाद्यान्नों पर आधारित ग्रामीण अंचलों में सूक्ष्म उद्योग स्थापित करने का प्रयत्न किया जाए।

          आज कृषि क्षेत्र के विकास के लिए खाद्य प्रसंस्करण उद्योग को बढ़ावा देने की नीति चल रही है किंतु यह नीति देश में गत 25 वर्षों से लागू है। धरातल की वास्तविकता यह है कि यह नीति देश के किसान को लाभान्वित करने में सफल नहीं हुई। इसलिए जरूरत है इस नीति में बदलाव लाने की। मेरा सुझाव है कि देश में कृषि उत्पादों के आधार पर सूक्ष्म उद्योग लगाने को बढ़ावा दिया जाए ताकि अधिकतम रोज़गार के अवसर सृजन हो जिनमें असंगठित क्षेत्र के परंपरागत श्रमिकों को भी रोज़गार मिल सके और पूंजी प्रधानता को इस क्षेत्र में नियंत्रित करने के लिए इस खाद्य प्रसंस्करण उद्योग को सूक्ष्म उद्योग क्षेत्र के लिए आरक्षित कर दिया जाए।

          अंत में, मैं कहना चाहूंगा कि देश में भ्रष्टाचार मुख्य समस्या है और सरकार ने जो इसे समूल नष्ट करने का संकल्प लिया है, वह सराहनीय है उसका सभी ओर से समर्थन होना चाहिए। यहां पर एक बात गंभीरता से सोचने की आवश्यकता है कि भारतीय समाज दान देने में आगे हैं। आप देखें मंदिरों में, गुरूद्वारों में, मकबरों पर दान देने वालों का तांता लगा हुआ है। मुझे संकोच नहीं है कहने में कि इन संस्थाओं में जो दान के माध्यम से धन उपलब्ध होता है वह सरकार के राजस्व से ज्यादा है। देश का नागरिक स्वेच्छा  से बिना किसी दबाव के प्रसन्नतापूर्वक सहज भाव में धन का त्याग करता है किंतु वही नागरिक सरकारी खज़ाने में अपनी जिम्मेदारी में क्यों पीछे रह जाता है।

          यद्यपि राष्ट्रपति जी के अभिभाषण में इस जन शक्ति की मनोभावना को विकसित करने की बात कही गई है।

          मैं चाहता हूँ कि  सरकार मेरे इस उपरोक्त कथन पर गंभीर रूप से विचार करेगी तो निश्चित रूप से देश में भ्रष्टाचार समूल नष्ट हो जाएगा।

          अंत में, मैं राष्ट्रीय लोक समता पार्टी की ओर से राष्ट्रपति जी के अभिभाषण का समर्थन करता हूँ।

*श्री विष्णु दयाल राम (पलामू) ः महामहिम राष्ट्रपति जी ने संसद के संयुक्त सत्र को संबोधित करते हुए अपने अभिभाषण में सरकार की उपलब्धियों और भविष्य में इसके क्रियाकलापों की जो तस्वीर रखी है उससे एक बात स्पष्ट है कि देश की जनता को दशकों बाद ऐसा नेतृत्व मिला है जिसके इरादों पर जनता को पूर्ण रूप से भरोसा है और जिसके आग्रह को जनता देशहित में सर आँखों पर लेती है। हाल ही में काले धन के विरूद्ध संघर्ष में असाधारण सहनशीलता, रसोई गैस के मामले में "गिव ईट अप " अभियान की सफलता के पीछे की प्रेरक भावना, स्वच्छ भारत मिशन का एक जनांदोलन बनना इस बात का मजबूत प्रमाण है। मैं ऐसी जनशक्ति को शत-शत नमन करता हूँ।

          मैंने इस सदन में विपक्ष के लोगों को इस अभिभाषण पर सवाल उठाते हुए सुना। मैं कुछ पंक्तियों के माध्यम से उन लोगों को समझाने की कोशिश करना चाहता हूँ-ः चमन को सींचने में पत्तियां कुछ झड़ गयी होंगी, यहीं इल्जाम हम पर लगा है बेवफाई का, पर कलियों को जिसने रौंद डाला अपने पैरों से, वही दावा कर रहे हैं इस चमन की रहनुमाई का।

          सत्तर साल में देश को गरीब बनाये रखने वाली नीतियों पर चलने वाले लोगों को हमारी सरकार की गाँव, गरीब, किसान, युवा, मजदूर, व्यवसायी, शोषित, वंचित को केंद्र में रखकर बनाई गई नीतियाँ पसंद नहीं आना स्वाभाविक है।

          राष्ट्रपति जी के अभिभाषण से स्पष्ट है कि गरीबी मिटाने के लिए हमारी सरकार पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी के अंत्योदा विचारधारा के मार्गदर्शन में चल रही है। वित्तीय समावेशन गरीबी उन्मूलन की कुंजी है। इसी के मद्देनज़र जन-धन खाते खोलकर 26 करोड़ से अधिक लोगों को बैंकिंग व्यवस्था से जोड़ना, 20 करोड़ से अधिक रूपे डेबिट कार्ड जारी करना, 13 करोड़ गरीबों को विभिन्न सामाजिक सुरक्षा योजनाओं में शामिल करना अभूतपूर्व उपलब्धि है। प्रधानमंत्री मुद्रा योजना के अंतर्गत 2 लाख करोड़ रूपए के 5.6 करोड़ जरूरतमंद उद्यमियों को बिना कोई ऋणाधार ऋण उपलब्ध करा छोटे व्यवसायियों को प्रोत्साहन देना, दीनदयाल अंत्योदय योजना के अंतर्गत स्वयं सहायता समूहों को 16 हज़ार करोड़ का प्रावधान विशेषकर वंचित समुदाय के महिलाओं को सशक्त बनाने हेतु चालू वित्त वर्ष में करना, आवास, किफायती स्वास्थ्य संरक्षण, सुरक्षित पेयजल और स्वच्छता, प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना एवं अन्य माध्यम से स्वच्छ ऊर्जा की उपलब्धता से गरीबों की जीवन शैली बेहतर बनाने के लिए अनेक उपाय, गरीबों की स्वास्थ्य और स्वच्छता सुनिश्चित करने की कड़ी में 3 करोड़ से अधिक शौचालयों का निर्माण, दीनदयाल उपाध्याय ग्राम ज्योति योजना के तहत स्वतंत्रता से अब तक अंधेरे में रह रहे 18000 गांवों में से 11000 गांवों में बिजली पहुंचाना, अपने देश के प्रत्येक नागरिक के लिए विशेषकर गरीबों के लिए स्वास्थ्य सुविधाएँ सुगम एवं किफायती बनाने के लिए इन्द्रधनुष मिशन, जन-औषधि परियोजना का प्रारंभ, ये सब दर्शाता है कि सरकार गरीबों को अपने एजेंडे में प्राथमिकता देने के लिए प्रतिबद्ध है।

          कृषि क्षेत्र के संपूर्ण विकास हेतु सस्ता ऋण उपलब्ध कराना, बीज एवं उर्वरकों की आपूर्ति सुनिश्चित करना, सिंचाई व्यवस्था को बेहतर बनाने के गंभीर और तीव्र प्रयास, व्यापक जोखिम फसल बीमा, मृदा कार्ड के माध्यम से उत्पाद के लिए सुनिश्चित बाज़ार और लाभकारी कीमतें, प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना का कवरेज बढ़ाना, सरकार की हमारे अन्नदाताओं के जीवन को उन्नत बनाने की सोच की दृढ़ता का दर्पण है। महिला सशक्तिकरण की दिशा में बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओं, सुकन्या समृद्धि योजना, मातृत्व सुविधा अधिनियम, युवा ऊर्जा के प्रभावी उपयोग के लिए हर हाथ को हुनर के उद्देश्य से उन्हें कुशल बनाने और रोज़गार के योग्य बनाने के लिए कई कदम उठाना जैसे प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना, राष्ट्रीय प्रशिक्षुता प्रोत्साहन योजना एवं प्रधानमंत्री युवा योजना आरम्भ करना दर्शाता है कि यह सरकार युवा सशक्तिकरण के लिए लगातार ठोस प्रयास कर रही है।

          देश में राज्य की विधानसभाओं और लोक सभा के चुनाव एक साथ कराने, जिससे बार-बार चुनाव से होने वाले आर्थिक और अन्य संसाधनों की क्षति से बचा जा सके हेतु सरकार द्वारा पहल और प्रयास, सर्जिकल स्ट्राइक से दुश्मनों को दहशत और दुनिया को रिसर्च करने के लिए मजबूर करने वाले हमारे सैनिकों को वन रैंक-वन पेंशन, महिलाओं, दिव्यांग-जन, श्रम, प्रशिक्षुओं, फैक्ट्रियों, बेनामी लेन-देन, आवास, सहयोगपूर्ण संघवाद की भावना को एक राष्ट्र-एक कर और एक राष्ट्र-एक बाज़ार के माध्यम से मजबूती प्रदान करने के लिए सबसे बड़े कर सुधार का कानून वस्तु एवं सेवा कर संसद के दोनों सदनों में पारित करवाना तथा बेनामी सम्पदा (रियल एस्टेट) आदि क्षेत्रों से संबंधित कानून सरकार के पारदर्शिता तथा सामाजिक न्याय के वादे पर अमल करने का प्रमाण है।

          राष्ट्रपति जी ने संसद के दोनों सदनों के संयुक्त सत्र के संबोधन में जो बातें कहीं है, उनसे स्पष्ट है कि सरकार सामाजिक न्याय की अवधारणा पर चलकर सबका साथ-सबका विकास के सिद्धांत के दृष्टिगत देश में चल रहे अच्छे दिन को भविष्य में भी संरक्षित करने हेतु मजबूती और तेजी से सही दिशा में अग्रसर है और सरकार ने जनता के भरोसे को बरकरार रखते हुए इसे और भी मजबूती दी है।

          मैं, महामहिम राष्ट्रपति जी के प्रति सरकार के सर्वग्राह्य और सबके साथ से सबका विकास करने वाली नीतियों और कार्यों को अपने संबोधन के माध्यम से देश के सामने रखने के लिए आभार प्रकट करता हूँ तथा धन्यवाद देता हूँ।

 *DR. PRABHAS KUMAR SINGH (BARGARH): I would like to lay the following in respect of the Motion of Thanks in respect of Hon’ble President’s Address on the eve of the Budget Session 2017-18.  I may please be allowed for the same.

          I appreciate the high sounding slogans of the NDA Government like Sabka Saath, Sabka Vikas, welfare measures for garib, dalit, vanshit, kisan, saamik, Swachh Bharat Mission, Jan Dhan Yojana, Pradhan Mantri Fasal Bima Yojana, Har Ghar Khet ko Pani, Beti Bachao Beti Padao, Deen Dayal Gram Jyoti Yojana etc.  But I am in doubt about the implementation of those welfare schemes in letter and spirit.

          I also like to thank for celebration of 350th Birth anniversary of the Great sikh Guru Gobind Singhji, 300th Martyrdom anniversary of Baba Banda Singh Bahadur.

          My special thanks due to celebration of 1817 Pink Rebellion launched by Bakshi Jagabandu of Odisha.  However I would be more happy if we celebrate the sacrifices made by National Hero Veer Surendra Sae of odisha, Shaheed Madho Singh and others who have spent more than 37 years in jails.

The steps taken for containing black money including demonetization is a welcome step but the Government should have taken proper preparatory measures before taking such decision.  The people should not suffer to get their white money.  Banking facilities in the rural areas, National Banks should have opened branches in the Gram Panchayat levels.

          I appreciate the presentation of Budget on 1st February, 2017 and bringing Railways along with the General Budget.  It not only bring harmony with Railways but also bring synergy with other mode of transportation like Airways, Roads, waterways etc.           In respect of Agriculture, the welfare measures taken for the farmers is not sufficient.  When the Government is planning for increasing the agricultural production double in 5 years at the same time MSP of Paddy should be increased to Rs. 2500 per quintal.  MSP of other agricultural products should be increased as per the recommendations of Dr. Swaminathan Committee report.

          River Mahanadi Dispute between Odisha and Chhatisgarh should be resolved with the appointment of Tribunal.  Constitution of multiple dam in upstream of river Mahanadi in Chhatisgarh should be stopped immediately.  Mahanadi is the life line of Odisha.  Hon’ble Prime Minister should intervene in the matter and bring solution keeping in mind the interest of both the States.

          I highly appreciate the idea of conducting the election of Lok Sabha and State Assemblies simultaneously.  Proper focus should be given for employment of youth.

          I would like to thank Hon’ble President for his address to both the Houses of Parliament.

     

प्रधान मंत्री (श्री नरेन्द्र मोदी) :  आदरणीय अध्यक्ष जी, राष्ट्रपति जी ने संसद के दोनों सदनों को वर्ष 2017 के प्रारम्भ में ही सम्बोधित किया। भारत किस तेजी से बदल रहा है, देश की जनशक्ति का सामर्थ्य क्या है, गांव, गरीब किसान की जिन्दगी किस प्रकार से बदल रही है, उसका एक विस्तार से खाका सदन में रखा था। मैं राष्ट्रपति जी के अभिभाषण पर धन्यवाद देने के लिए आपके समक्ष उपस्थित हुआ हूं। मैं उनका हृदय से आभार व्यक्त करता हूं।

          इस चर्चा में आदरणीय श्री मल्लिकार्जुन जी, श्री तारिक अनवर जी, श्री जयप्रकाश नारायण जी, तथागत सत्पथी, श्री कल्याण बनर्जी, ज्योतिरादित्य सिंधिया इत्यादि कई वरिष्ठ महानुभावों ने चर्चा को प्राणवान बनाया। कई पहलुओं को उजागर करने का प्रयास किया है और मैं इसके लिए चर्चा में शरीक होने वाले सभी आदरणीय सदस्यों का आभार व्यक्त करता हूं।

          कल भूकंप आया। इस भूकंप के कारण जिन-जिन क्षेत्रों में असुविधा हुई है, मैं उनके प्रति अपनी भावना व्यक्त करता हूं। केन्द्र सरकार राज्य के पूरे सम्पर्क में है। स्थिति में कोई आवश्यकता होगी तो और कुछ टीमें वहां पहुंच भी गई हैं, लेकिन आखिर भूकंप आ ही गया।...(व्यवधान) मैं सोच रहा था कि यह भूकंप आया कैसे ? ...(व्यवधान) क्योंकि धमकी तो बहुत पहले सुनी थी। कोई तो कारण होगा कि धरती मां इतनी रूठ गई होगी।...(व्यवधान)

HON. SPEAKER: Nothing will go on record.

…(Interruptions)…* माननीय अध्यक्ष : केवल प्रधान मंत्री जी का भाषण रिकार्ड में जाएगा।

...(व्यवधान)

माननीय अध्यक्ष : कल्याण जी, यह ठीक नहीं है।

…( व्यवधान)

श्री नरेन्द्र मोदी :  कल्याण जी, आपका सी.आर. ठीक हो रहा है, आपका कल्याण होगा। ...(व्यवधान)

HON. SPEAKER: Nothing will go on record.

…(Interruptions)… * HON.SPEAKER: Kalyanji, this is not the way. Please take your seat.

… (Interruptions)

                                                         

श्री नरेन्द्र मोदी :  कल का भूकम्प...(व्यवधान)

माननीय अध्यक्ष : यह ठीक नहीं है, आप बैठ जाइए।

 …( व्यवधान)

 माननीय अध्यक्ष : यह क्या है? आप थोड़ी शांति रखिए।

…( व्यवधान)

शहरी विकास मंत्री, आवास और शहरी गरीबी उपशमन मंत्री तथा सूचना और प्रसारण मंत्री (श्री एम. वैंकैय्या नायडू) : देश के प्रधानमंत्री जी के सामने ऐसे बोलते हैं।...(व्यवधान)सदन की गरिमा होती है।...(व्यवधान)

HON. SPEAKER: Mr. Kalyan Banerjee, this is not the way.

                                                … (Interruptions)              

THE MINISTER OF CHEMICALS AND FERTILIZERS  AND MINISTER OF PARLIAMENTARY AFFAIRS (SHRI ANANTHKUMAR): Madam, he cannot interrupt like this… (Interruptions) We have heard you.  Now, please do not interrupt… (Interruptions)  

HON. SPEAKER: Mr. Kalyan Banerjee, please.  This is not the way.  Now, I am warning you.

… (Interruptions)

HON. SPEAKER: Now, please take your seat.

                                                … (Interruptions)           

माननीय अध्यक्ष : कृपया आप ऐसा न करें। कल आपने अच्छा भाषण दिया था, सबने उसे सुना। आज आप बिल्कुल शांति से रहें।

...(व्यवधान)

HON. SPEAKER: Now, please take your seat.

                                                       … (Interruptions)          

श्री नरेन्द्र मोदी : अध्यक्ष महोदया,  मैं सोच रहा था कि आखिर भूकंप आया क्यों? जब कोई स्कैम में भी सेवा का भाव देखता है, स्कैम में भी नम्रता का भाव देखता है तो सिर्फ मां ही नहीं, बल्कि धरती मां भी दुःखी हो जाती है और तब जा कर भूकंप आता है।...(व्यवधान) इसलिए, राष्ट्रपति जी ने अपने अभिभाषण में जनशक्ति का ब्योरा दिया है। हम यह जानते हैं कि कोई भी व्यवस्था, लोकतांत्रिक हो या अलोकतांत्रिक, जनशक्ति का मिजाज कुछ और ही होता है। कल मल्लिकार्जुन जी ने कहा था कि कांग्रेस की कृपा है कि अब भी लोकतंत्र बचा है और आप प्रधानमंत्री बन पाये। वाह! क्या शेर सुनाया है। ...(व्यवधान) आपने इस देश पर बहुत बड़ी कृपा की है, लोकतंत्र बचा लिया है, कितने महान लोग हैं, लेकिन उस पार्टी के लोकतंत्र को देश भली-भाँति जानता है। पूरा लोकतंत्र एक परिवार को आहूत कर दिया गया है।...(व्यवधान)

          वर्ष 1975 का कालखंड, जब देश पर आपातकाल थोप दिया गया था, हिन्दुस्तान को जेलखाना बना दिया गया था, देश के गणमान्य वरिष्ठ नेता जयप्रकाश बाबू समेत लाखों लोगों को जेल की सलाखों में बंद कर दिया गया था, अखबारों पर ताले लगा दिये गये थे, लेकिन उन्हें अंदाज नहीं था कि जनशक्ति क्या होती है? लोकतंत्र को कुचलने के ढेर सारे प्रयासों के बावजूद भी इस देश की जनशक्ति का सामर्थ्य था कि लोकतंत्र पुनः प्रस्थापित हुआ।

यह जनशक्ति की ताकत है कि गरीब माँ का बेटा भी इस देश का प्रधानमंत्री बन सकता है। राष्ट्रपति जी ने जनशक्ति का उल्लेख करते हुए कहा है कि चम्पारण सत्याग्रह शताब्दी का वर्ष है। इतिहास सिर्फ किताबों की अटारी में पड़ा रहे, तो समाज जीवन को प्रेरणा नहीं देता है। हर युग में इतिहास को जानने का, इतिहास को जीने का प्रयास आवश्यक होता है। उस समय हम थे या नहीं थे, हमारे कुत्ते भी थे या नहीं थे, औरों के कुत्ते हो सकते हैं। हम कुत्तों वाली परम्परा से पले-बड़े नहीं हैं, लेकिन देश के कोटि-कोटि लोग थे। जब कांग्रेस पार्टी का जन्म भी नहीं हुआ था, वर्ष 1857 का स्वतंत्रता संग्राम देश के लोगों ने जान की बाजी लगाकर लड़ा और सभी ने मिलकर लड़ा था। सप्रदाय की कोई भेद रेखा नहीं थी, तब भी कमल था और आज भी कमल है।...(व्यवधान) यहां ऐसे बहुत-से लोग हैं, जो मेरी तरह आजादी के बाद पैदा हुए है और हमारे में से बहुत लोग हैं, जिनको आजादी की लड़ाई में अपना योगदान देने का सौभाग्य नहीं मिला, लेकिन देश के लिए जीने का तो सौभाग्य मिला है और हम जीने की कोशिश कर रहे हैं।...(व्यवधान)  देश ने अपार जनशक्ति के दर्शन किए हैं।

          लाल बहादुर शास्त्री जी की अपनी गरिमा थी। युद्ध के दिन थे। हर हिंदुस्तानी के दिल में भारत विजय के भाव से भरा हुआ माहौल था और उस समय जब लाल बहादुर शास्त्री जी ने कहा था, तब देश ने अन्न त्याग के लिए पहल की थी। सरकार बनने के बाद आज के राजनीतिक वातावरण को हम जानते हैं, ज्यादातर राज व्यवस्थाओं ने, राजनेताओं ने, राज्य सरकारों ने, केंद्र सरकारों ने जन सामर्थ्य को करीब-करीब पहचानना छोड़ दिया है और यह लोकतंत्र के लिए सबसे बड़ा चिंता का विषय भी रहता है। मुझ जैसे सामान्य व्यक्ति ने बातों-बातों में कह दिया था कि जो अफोर्ड कर सकते हैं, वे गैस की सब्सिडी छोड़ दें। जब हम जनता से कट जाते हैं, जन-मन से कट जाते हैं, वर्ष 2014 में जब हम चुनाव लड़ रहे थे तब एक दल इस मुद्दे पर चुनाव लड़ रहा था कि एक साल में 9 सिलेंडर देंगे या 12 सिलेंडर देंगे। हम 9 और 12 सिलेंडर की चर्चा को कहां ले गए, हमने कहा कि जो अफोर्ड कर सकते हैं, क्या वे सब्सिडी छोड़ सकते हैं। हमने सिर्फ कहा था और इस देश के एक करोड़ बीस लाख से ज्यादा लोग गैस सब्सिडी छोड़ने के लिए आगे आए। यह विषय इस सरकार और यहाँ बैठे हुए लोगों के गर्व तक सीमित नहीं है। यह सवा सौ करोड़ देशवासियों की शक्ति का परिचायक है। राष्ट्रपति जी के उद्धबोधन के माध्यम से मैं इस सदन से प्रार्थना करना चाहता हूं और देश के राजनीतिक जीवन में निर्णायक की अवस्था में बैठे हुए निर्णय प्रक्रिया के भागीदार सबका आवाह्न करता हूँ कि, हम हमारे देश की जनशक्ति और उसके सार्मथ्य को पहचानें। हम भारत को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए जनांदोलन की अवधारणा लेते हुए एक सकारात्मक माहौल बनाकर देश को आगे बढ़ाने की दिशा में काम कर रहे हैं। आप देखिए जो परिणाम हमें पहले नहीं मिले, उनसे ज्यादा परिणाम अब मिलेंगे। इसके कारण देश की ताकत अनेक गुना बढ़ जाएगी। इनमें से कोई भी ऐसा नहीं है, जो आने वाला कल बुरा देखना चाहता है या हिंदुस्तान का बुरा चाहता है। हर कोई यह चाहता है कि गरीब का भला हो। हर कोई चाहता है कि गाँव, गरीब और किसान को कुछ मिले। मैं ऐसा कहने वालों में से नहीं हूँ कि किसी ने पहले प्रयास नहीं किए।

          मैं इस सदन में यह बार-बार कह चुका हूँ। मैं लाल किले से भी बोल चुका हूँ कि अब तक जितनी सरकारें  आईं और जितने प्रधानमंत्री आए, हर किसी का इसमें अपना-अपना योगदान है। उस तरफ बैठे हुए लोगों से कभी यह सुनने को नहीं मिला है कि इस देश में कोई चाफेकर बंधु भी हुआ करते थे, जिनकी आजादी में शहादत थी। इनके मुँह से कभी सुनने को नहीं मिला है कि कोई सावरकर जी भी थे, जिनके काला पानी की सजा भुगतने के बाद यह देश आजाद हुआ है। इनके मुँह से कभी सुनने को नहीं मिला है कि कोई भगत सिंह और चन्द्रशेखर आजाद भी थे, जिन्होंने देश के लिए बलिदान दे दिया। उनको लगता है कि आजादी सिर्फ एक परिवार ने दिलवाई है। समस्या की जड़ वहाँ है। हम देश को उसकी पूर्णता में स्वीकार करें और उसकी जनशक्ति को जोड़ें। हमारे यहाँ शास्त्रों में कहा गया है :

अमंत्रं अक्षरं नास्ति, नास्ति मूलं अनौषधं।
अयोग्यः पुरुषः नास्ति, योजकः तत्र दुर्लभः।।
 
इसका अर्थ है, कोई अक्षर ऐसा नहीं होता है, जिसमें किसी मंत्र में जगह पाने का पोटैंशियल न हो। कोई मूल ऐसा नहीं होता है, जिसमें औषध में जगह पाने का पोटैंशियल न हो। कोई इंसान ऐसा नहीं होता है, जो कुछ कर के समाज और देश को दे न सके। जरूरत होती है योजक की - योजकः तत्र दुर्लभः।
           इस सरकार ने हर शक्ति को सवांरकर जोड़ने और जनशक्ति के भरोसे उसको आगे बढ़ाने का प्रयास किया है। स्वच्छता अभियान पर मैं हैरान हूँ। क्या हमें यह नहीं सोचना चाहिए कि हमें आजाद हुए इतने साल हो गए हैं। हम महात्मा गांधी का नाम लेते हैं। गांधी जी को दो चीजें प्रिय थीं। वे कहते थे कि आजादी से पहले अगर मुझे कुछ पाना है, तो वह स्वच्छता है। गांधी जी की स्वच्छता की बात को लेकर हम देश के सामने आए। इतनी सरकारें आईं और इतने संसद सत्र चले, लेकिन क्या कभी संसद में स्वच्छता के विषय पर चर्चा तक हुई? यह सरकार आने के बाद पहली बार ऐसा हुआ है। क्या स्वच्छता को भी हम राजनीति के एजेंडे का हिस्सा बनाएंगे? आपमें से कौन है जो गंदगी में जीना चाहता है? आप में से कौन होंगे, जो गन्दगी में जीना चाहता है। आपके इलाके में कौन होगा, जो गन्दगी चाहता है। इसे आप भी नहीं चाहते हैं, यहाँ वाले भी नहीं चाहते हैं और वहाँ वाले भी नहीं चाहते हैं। लेकिन क्या हम मिलकर एक स्वर में समाज को इस पवित्र कार्य से जोड़कर गांधी जी के सपने को पूरा करने के लिए आगे नहीं बढ़ सकते? हमें कौन रोकता है?
          माननीय अध्यक्षा जी, इस अपार जनशक्ति को आगे लेते हुए इस बार एक चर्चा होनी चाहिए। यह तो सही है कि जब राष्ट्रपति जी के उद्बोधन पर चर्चा होती है और उस समय बजट भी आया होता है, तो उसमें बजट की बातें भी आ जाती हैं और राष्ट्रपति जी के उद्बोधन की बातें भी आ जाती हैं। जब बजट पर चर्चा होगी, तो वित्त मंत्री जी उस पर विस्तार से कहेंगे, लेकिन एक चर्चा आयी है कि बजट जल्दी क्यों लाया गया।
          भारत एक कृषि प्रधान देश है। हमारा पूरा आर्थिक कारोबार कृषि पर आधारित है। ज्यादातर कृषि की स्थिति दीवाली तक पता चल जाती है। हमारे देश की एक कठिनाई है। हम अंग्रेजों की विरासत को ही लेकर चल रहे हैं। मई में बजट की प्रक्रिया से बाहर निकलते हैं। 1 जून के बाद हिन्दुस्तान में बारिश आनी शुरू हो जाती है। तीन महीने तक बजट का उपयोग होना असंभव हो जाता है। एक प्रकार से हमारे पास कार्य करने का समय बहुत बच जाता है। जब समय होता है, तब आखिरी दिनों में पूर्ति करने के लिए, जिसे हर सरकार जानती है कि दिसम्बर से मार्च तक किस प्रकार से बिल कटते हैं और रुपये कैसे खर्च हुए, ये दिखाये जाते हैं। अब हमें यह सोचना चाहिए, मैं किसी की आलोचना नहीं करना चाहता हूँ। अभी भी किसी को समझ में आता है कि क्या कारण था कि आज़ादी के कई वर्षों तक बजट शाम को पाँच बजे आता था। इस पर किसी ने सोचना नहीं, बस पाँच बजे चल रहा है, तो चल रहा है। यह क्यों चल रहा है? पाँच बजे बजट इसलिए चलता था क्योंकि यू.के. की पार्लियामेंट की टाईम के हिसाब से हिन्दुस्तान में अंग्रेजों के जमाने से शाम को पाँच बजे बजट आया। हमने उसे ही चालू रखा। यह बहुत कम लोगों को मालूम होगा, यदि हम घड़ी ऐसे पकड़ते हैं, तो इंडियन टाईम होता है, लेकिन घड़ी ऐसे पकड़ते हैं, तो लंदन टाईम होता है। यदि आपके पास घड़ी है, तो देख लीजिए। ...(व्यवधान)
श्री मल्लिकार्जुन खड़गे (गुलबर्गा) :  आपने इसीलिए अपनी घड़ी खोली।
श्री नरेन्द्र मोदी  : जी हाँ क्योंकि कई लोगों को बहुत चीजें समझ नहीं आतीं, उन्हें पता नहीं चलता है। ...(व्यवधान) जब अटल जी की सरकार आयी, तब बजट का समय बदला गया। इसलिए हमारा भी प्रयास है। जब आपकी सरकार थी, तब आप लोगों ने भी बजट के समय के संबंध में एक कमेटी बनायी थी। उसकी विस्तृत रिपोर्ट है। आप भी चाहते थे कि यह समय बदलना चाहिए। उन्होंने जो प्रपोजल दिया है, हमने उसी को पकड़ा है। लेकिन आप लोग इसे नहीं कर पाए क्योंकि आपकी प्रायरिटी अलग है। आप नहीं चाहते थे, ऐसी बात नहीं है, लेकिन उसका प्रायरिटी में नम्बर कब लगेगा? इसलिए जो बातें आपके समय में हुई है, उन बातों को बड़े गर्व से आपको कहना चाहिए। उसका फायदा उठाइए। कहिए कि यह तो हमारे समय में हुआ था। अब यह भी आप भूल जाते हैं, लेकिन चलिए मैंने याद दिला दिया। आप इसका भी लाभ दीजिए। ...(व्यवधान)
          रेलवे के संबंध में विस्तृत चर्चा बजट पर चर्चा के दौरान होगी। लेकिन हम एक बात समझें कि 90 साल पहले जब रेल बजट आता था, तब ट्रांसपोर्टेशन का एक प्रमुख मोड सिर्फ रेलवे ही था। आज ट्रांसपोर्टेशन एक बहुत बड़ी अनिवार्यता बन गयी है। इकलौता रेलवे ही नहीं है, बल्कि ट्रांसपोर्टेशन के कई प्रकार के मोड हैं। जब तक हम कंप्रिहेंसिवली ट्रांसपोर्ट - इस विषय को जोड़कर नहीं चलेंगे, तो हम समस्याओं से जूझते रहेंगे।  अब इसलिए मुख्य धारा में रेलवे व्यवस्था भी रहेगी, उसमें प्राइवेटाइजेशन को कोई तकलीफ नहीं, उसकी स्वतंत्रता को कोई तकलीफ नहीं है, लेकिन सोचने के लिए सरकार एक साथ कॉप्रिहेन्सिव, हर प्रकार के, mode of transport को देखना शुरु करे, यह आवश्यक है। हम जब से आए हैं, हमने रेलवे में बजट में बदलाव किया है। आप जानते हैं कि पहले बजट में हमारे गौड़ा जी ने बताया था कि करीब 1500 घोषणाएं हुई थीं और कौन मजबूत हैं, कौन हाउस में ज्यादा परेशान करता है, उनको ध्यान में रखकर, उनको खुश रखकर एक-आधी गोली दी जाती थी, वह भी ताली बजा देता था और अपने इलाके में जाकर बता देता था कि यह काम हो गया है। हमने देखा कि 1500 ऐसी चीजें हुई थीं, जिनका कागज पर ही मोक्ष हो गया था। ऐसा हम क्यों करते हैं, मैं जानता हूँ इससे हमें राजनीतिक दृष्टि से नुकसान होता है, लेकिन किसी को तो जिम्मा लेना पड़ेगा कि देश में जो गलत चीजें डेवलप हो चुकी हैं, उन्हें हम रोकें। ब्यूरोक्रेसी को ये चीजें सूट करती हैं। ऐसी चीजें उनको सूट करती हैं कि राजनेता ताली बजा दें और उनकी गाड़ी चलती रहे। मुझे नहीं चलानी है। देश के सामान्य नागरिक की आशा, आकांक्षाओं के लिए फैसले लेने हैं, अच्छे फैसले लेने का प्रयास है, अच्छी तरह कार्य करने का प्रयास है। इसलिए हम उस दिशा में आगे बढ़ रहे हैं, हम इस काम को कर रहे हैं।
          एक विषय नोटबंदी का आया, पहले दिन से यह सरकार कह रही है कि हम नोटबंदी पर चर्चा करने के लिए तैयार हैं, लेकिन आप लोगों को लगता था कि टी.वी. पर कतार देखते हैं, कल कभी न कभी कुछ हो जाएगा, तब देखेंगे। आपको लग रहा था कि इस समय चर्चा करने से शायद मोदी फायदा उठा जाएगा और इसीलिए चर्चा के बजाय आपने टी.वी. बाइट देने में ही इन्ट्रेस्ट दिखाया। जिस वजह से चर्चा नहीं हुई। अच्छा है इस बार आपने थोड़ा बहुत स्पर्श किया है।...(व्यवधान)
HON. SPEAKER: Nothing will go on record. Only the Prime Minister’s statement will go on record.
…(Interruptions) …* श्री नरेन्द्र मोदी : कितना बड़ा बदलाव आया है। अब मुझे विश्वास है कि जो बारीकी से चीजों का अध्ययन करते हैं, अब तक उनका ध्यान नहीं गया है तो मैं चाहूँगा कि उनका ध्यान जाए। मई, 2014 के पहले का वक्त आप देख लीजिए, वहां से आवाज उठती थी कि कोयले में कितना खाया, 2जी में कितना गया, जल करप्शन में कितना गया, वायु करप्शन में कितना गया, आसमान के करप्शन में कितना गया, कितने लाख गए, यही वहां से आवाज आती थी। यह मेरे लिए कितनी खुशी की खबर है कि जब वहां से आवाज आती थी कि मोदी जी कितना लाए। तब आवाज उठती थी कि कितना गया, अब आवाज उठ रही है कि कितना लाए। इससे बड़ा जीवन का संतोष क्या हो सकता है।...(व्यवधान) यही तो सही कदम है।...(व्यवधान)
          दूसरा जो हमारे खड़गे जी ने कहा कि कालाधन हीरे-जवारात में है, सोने-चाँदी में है, प्रॉपर्टी में है, मैं आपकी बात से सहमत हूँ। लेकिन यह सदन जानना चाहता है कि यह ज्ञान आपको कब हुआ? क्योंकि इस बात का कोई इंकार नहीं कर सकता कि भ्रष्टाचार का प्रारंभ नकद से होता है। उसकी शुरूआत नकद से होती है, परिणाम में प्रोपर्टीज होती हैं, परिणाम में ज्वैलरी होती हैं, परिणाम में गोल्ड होता है, लेकिन शुरूआत नकद से होती है। आपको मालूम है कि यही बुराइयों के केन्द्र में है, बेनामी प्रोपर्टीज हैं, जवाहरात हैं, गोल्ड है, चांदी है। जरा आप लोग बताइये कि 1988 में जब श्रीमान राजीव गांधी देश के प्रधान मंत्री थे, पंडित नेहरू से भी ज्यादा बहुमत इस सदन में आपके पास था, दोनों सदनों में आपके पास था। पंचायत से पार्लियामैन्ट तक सब कुछ आपके कब्जे में था। आप ही आप थे, दूसरा कोई नहीं था। वर्ष 1988 में आपने बेनामी सम्पत्ति का कानून बनाया। आपको जो ज्ञान आज हुआ है, क्या कारण था कि 26 साल तक उस कानून को नोटिफाई नहीं किया गया, क्या कारण था कि उसे दबा दिया गया? अगर उस समय उसे नोटिफाई किया होता तो जो ज्ञान आज आपको हुआ है, 26 साल पहले की स्थिति थोड़ी ठीक थी, देश के बहुत जल्दी साफ-सुथरा होने की दिशा में एक अच्छा काम हो जाता। वे कौन लोग थे, जिन्हें कानून बनने के बाद ज्ञान हुआ कि अब कानून दबाने में फायदा है?...(व्यवधान) वे किस परिवार...(व्यवधान) आप इससे बच नहीं सकते। आप किसी का नाम देकर बच नहीं सकते, आपको देश को जवाब देना पड़ेगा। जो ज्ञान आपको आज हुआ है और यह सरकार है, जिसने नोटबंदी से पहले पहला कदम उनके खिलाफ उठाया है, कानून बनाया है।
          मैं आज इस सदन के माध्यम से भी देशवासियों को कहना चाहता हूं, आप कितने ही बड़े क्यों न हो, गरीब के हक का आपको लौटाना ही पड़ेगा और मैं इस रास्ते से पीछे लौटने वाला नहीं हूं। मैं गरीबों के लिए लड़ाई लड़ रहा हूं और गरीबों के लिए लड़ाई लड़ता रहूंगा। इस देश की गरीबी के मूल में...(व्यवधान) देश के पास प्राकृतिक सम्पदा की कमी नहीं थी, देश के पास मानव संसाधनों की कमी नहीं थी, लेकिन देश में एक ऐसा वर्ग पनपा, जो लोगों का हक लूटता रहा, यह उसी का नतीजा है कि देश जिस ऊंचाई पर पहुंचना चाहिए था, नहीं पहुंच पाया। आप कहते हैं, कुछ लोग...(व्यवधान) उसकी जिनकी एजेन्सी होगी, वे बोलेंगे। ...(व्यवधान) एक बात मैं कहना चाहूंगा...(व्यवधान) हम यह जानते हैं कि अर्थव्यवस्था को ...(व्यवधान) इस बात से कोई इनकार नहीं कर सकता है कि एक समान्तर अर्थव्यवस्था डैवलप हुई थी और ऐसा नहीं है यह काम भी आपके संज्ञान में पहले भी आया था। यह विषय आप ही की सरकार की आप ही की कमेटियों ने भी आपको सुझाया था। जब इंदिरा जी राज करती थीं, तब यशवंतराव जी चव्हाण यह विषय लेकर उनके पास गये थे। तब उन्होंने कहा था कि क्यों भाई, क्या कांग्रेस को चुनाव नहीं लड़ना है।
आपका निर्णय गलत नहीं था, बल्कि चुनाव का डर था। हमें चुनाव की चिंता नहीं है, देश की चिंता है, इसलिए हमने यह निर्णय लिया है। ...(व्यवधान) यह बात निश्चित है, कोई इस बात से इंकार नहीं कर सकता है कि किसी भी व्यवस्था में कैश कितना है, चैक कितना है, यह कारोबार विकसित हो चुका है और एक प्रकार से जीवन का हिस्सा बन गया है। जब तक आप उसको गहरी चोट नहीं लगाओगे, तब तक स्थिति से बाहर नहीं आओगे। इसलिए हमने जो फैसले किए हैं, वे सही हैं। आपने किस प्रकार से देश चलाया है? ऐसा लगता है कि कुछ दलों के दिलों दिमाग में चार्वाक का मंत्र उनकी जिंदगी में बहुत काम आ गया है। ...(व्यवधान) उन्होंने चार्वाक के ही मंत्र को लेकर ही काम किया है। तभी जा कर कोई अंग्रेजी कवि को उल्लेख कर के बड़े-बड़े व्यक्ति यह भी कह देते हैं कि मरने के बाद क्या है, क्या देखा है? अब यह तो चार्वाक का तत्व ज्ञान है। मैं उस सदन में जाऊंगा, तब इसका उल्लेख बराबर डिटेल में करूंगा। लेकिन चार्वाक कहते थे -
“ यावत् जीवेत् सुखम् जीवेत् ऋणम् कृत्वा, धृतम् पीवेत् । भस्मीभूतस्य देहस्य, पुनरागमनम् कुतः ।।  ”   जब तक जीओ, मौज करो। ...(व्यवधान) चिंता किस बात की है, कर्ज लो और घी पीओ। भाई भगवंत मान, ये उस जमाने में संस्कार थे, इसलिए घी कहा, नहीं तो और कुछ पीने का कहते। ...(व्यवधान) उस समय ऋषियों के संस्कार थे तो उन्होंने घी पीने की बात कही थी। शायद आज का जमाना होता तो कुछ और पीने की चर्चा करनी पड़ती। लेकिन इस प्रकार की फिलॉसफी से, कुछ लोगों को लगता है कि जब अर्थव्यवस्था इतनी अच्छी चल रही थी, तब आपने ऐसे समय में ऐसा निर्णय क्यों किया? यह बात सही है। आप जानते हैं कि अगर आपको कोई बीमारी हो और डॉक्टर कहता है कि ऑपरेशन करना है। ऑपरेशन बहुत जरूरी है, फिर भी वह कहता है कि पहले शरीर ठीक करना पड़ेगा। डायबटीज़ कंट्रोल करना पड़ेगा, यह कंट्रोल करना पड़ेगा, सात-आठ दिन और मशविरा चलेगा, फिर बाद में ऑपरेशन होगा। जब तक वह स्वस्थ नहीं होता है, तब तक डॉक्टर ऑपरेशन करना पसंद नहीं करता है, चाहे कितनी भी गंभीर स्थिति हो। डीमॉनिटाइज़ेशन के लिए यह समय इतना पर्याप्त था कि देश की अर्थव्यवस्था तंदरुस्त थी। अगर दुर्बल होती तो हम यह कतई सफलतापूर्वक नहीं कर पाते। यह तब सफल हुआ है, जब अर्थव्यवस्था मज़बूत थी। दूसरा, ऐसा मत सोचिए कि हड़बड़ी में होता है। इसके लिए आपको मोदी का अध्ययन करना पड़ेगा। ...(व्यवधान) आप देखिए कि हमारे देश में साल भर में जितना व्यापार होता है, करीब-करीब उतना ही व्यापार दीवाली के दिनों में हो जाता है। 50 प्रतिशत दिवाली के दिनों में और 50 प्रतिशत साल भर में होता है। एक प्रकार से पूरा उद्योग-व्यापार, किसानी, सब काम दीवाली के आस-पास पीक पर पहुंच जाता है। उसके बाद नेचुरल लल पीरियड हमारे देश में हमेशा होता है। दीवाली के अलावा दुकानदार भी 15-15 दिन दुकान बंद कर के बाहर चले जाते हैं, लोग घूमने चले जाते हैं। यह प्रॉपर टाइम था जब कि सामान्य कारोबार ऊंचाई पर पहुंच गया था, उसके बाद अगर 15-20 दिन दिक्कत होती है और फिर 50 दिन में ठीक-ठाक हो जाएगा। मैं आप देख रहा हूँ कि जो मैंने हिसाब-किताब कहा था, उसी प्रकार से गाड़ी चल रही है। ...(व्यवधान)       
          आप जानते हैं, एक जमाना था इन्कम टैक्स डिपार्टमेंट की मनमर्जी पर...(व्यवधान) एक समय था जब देश में इन्कम टैक्स अधिकारी मनमर्जी पड़े वहाँ जाकर धमकते थे और बाकी क्या होता था, पुराने इतिहास को मुझे दोहराने की जरूरत नहीं है। नोटबन्दी के बाद सारी चीजें रिकॉर्ड पर हैं, कहाँ से आया, किसने लाया, कहाँ रखा, अब उसमें से टॉप नाम टेक्नोलॉजी के द्वारा, डाटा माइनिंग के द्वारा निकाल दिये गये हैं। अब इन्कम टैक्स ऑफिसर को कहीं जाना नहीं है, सिर्फ एस.एम.एस. करके पूछना है कि जरा बताइए कि डिटेल क्या है। आप देखिए किसी भी प्रकार की अफसरशाही के बिना जिसको भी मुख्यधारा में आना है, उसके लिए एक अवसर प्राप्त हो चुका है और मैं मानता हूँ कि इससे क्लीन इन्डिया, जैसे स्वच्छ भारत का मेरा अभियान चल रहा है, वैसे ही आर्थिक जीवन में स्वच्छ भारत का अभियान भी बहुत तेजी से आगे बढ़ रहा है।...(व्यवधान) बेनामी सम्पत्ति का कानून पास हो चुका है, नोटिफाई हो चुका है।
          जैसा खड़गे जी ने कहा कि वहीं पर सब कुछ है, अच्छा सुझाव आपने दिया है, हम भी कुछ करके दिखायेंगे और जो भी सुन रहे हैं, वे भी समझें और इसके प्रावधान पढ़ लें कि कितना बड़ा कठोर कानून है। जिसके पास भी बेनामी सम्पत्ति है, उनसे मेरा आग्रह है, अपने चार्टेड एकाउन्टेंट से जरा पूछ लें कि आखिर वे प्रावधान क्या हैं। इसीलिए मेरा सबसे आग्रह है कि मुख्यधारा में आइये, देश के गरीबों का भला करने के लिए आप भी कुछ कन्ट्रिब्यूट कीजिए।...(व्यवधान) कभी-कभी लगता है कि यह निर्णय अचानक हुआ क्या? मैं जरा जानकारी देना चाहता हूँ, जिस दिन हमारी सरकार बनी, हमने कैबिनेट में सबसे पहला काम एस.आई.टी. बनाने का किया। सुप्रीम कोर्ट ने कहा था और लम्बे अरसे तक लटका पड़ा था कि विदेश के काले धन के लिए एस.आई.टी. बनाओ। हमने बनाई, सुप्रीम कोर्ट ने कहा था उस प्रकार से बनाई।...(व्यवधान) सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा था :
 
“… Since 1947, for 65 years, nobody thought of bringing the money stashed away in foreign banks to the country. The Government has failed in its role for 65 years.” This court. feels that you have failed in your duty and so it gave an order for the appointment of the committee headed by former judges of this court. Three years have passed, but you have not done anything to implement the order. What have you done except for filing one report? You have done nothing…”.
 
          यह 24 मार्च 2014 को सुप्रीम कोर्ट ने उस सरकार को कहा है।...(व्यवधान)
SHRI M.I. SHANAVAS (WAYANAD): How much money have you brought? … (Interruptions)
श्री नरेन्द्र मोदी : वही तो मैं कह रहा था, वह जमाना था तब आवाज उठती थी, कितना गया, अब आवाज उठ रही है, कितना आया और आकर रहेगा, आता रहेगा।...(व्यवधान)
SHRI M.I. SHANAVAS: Nothing is brought. … (Interruptions)
श्री नरेन्द्र मोदी : आप देखिए एक के बाद एक, विदेश में जमा काले धन के खिलाफ नया कठोर कानून बनाया, प्रॉपर्टी जब्त करने की बात कही, इस बार भी बजट में एक नये कानून की बात कही गयी है, सजा भी 7 साल से 10 साल कर दी है। टैक्स हैवन जो थे मॉरीशस, सिंगापुर वगैरह, जो पुराने नियम आप बनाकर गये थे, हमने बातचीत की, उनको समझाया, उन्हें हमारी परिस्थितियाँ समझायीं, उसको हम ले आए। हमने स्विट्जरलैंड से समझौता किया कि अगर कोई भी हिन्दुस्तानी नागरिक पैसा रखेगा तो वे हमें रिएल टाइम इन्फर्मेशन देंगे तो उसका पता चल जायेगा। 
13.00 hours           हमने अमेरिका सहित कई देशों के साथ इस प्रकार के समझौते किए हैं। जहां भी हमारा कोई भी भारतीय नागरिक, भारतीय मूल का व्यक्ति पैसे रखेगा तो उसकी जानकारी भारत सरकार को मिलेगी।

          उसी प्रकार प्रॉपर्टी बिक्री में 20 हजार रुपए से ज्यादा नकद नहीं, इसका फैसला हमने लिया। हमने रियल एस्टेट बिल को पास किया। ज्वैलरी के मार्केट में भी एक प्रतिशत एक्साइज टैक्स डाला, क्योंकि चीज़ों को स्ट्रीमलाइन करना था, किसी को परेशान नहीं करना था। आप ही लोग हैं इस सदन में, इधर के हों या उधर के हों। मुझे चिट्ठियां आई हैं, जब हमने कहा कि दो लाख रुपए से ज्यादा की अगर कोई ज्वैलरी परचेज करता है तो उसे पैन नम्बर देना होगा। मैं हैरान हूं। काले धन और भ्रष्टाचार के खिलाफ भाषण देने वाले लोग मुझे चिट्ठियां लिखते थे कि पैन नम्बर मांगने का नियम रद्द कर दीजिए, ताकि लोग कैश मनी से सोना लेते रहें, गहने लेते रहें और काला बाज़ार चलता रहे। पर, हम टिके रहे। हमने उसे करके दिखाया। एक-एक कदम उठाया। मैं जानता हूं कि राजनीतिक फायदे के लिए कोई ऐसा काम नहीं कर सकता, वरना तो आप पहले कर लेते। इसमें कठिनाई है, लेकिन, देश का भला करने के लिए निर्णय करने थे और गरीबों का भला करना था, इसलिए निर्णय किए।

          दो लाख रुपए से ज्यादा के किसी सामान पर और दस लाख रुपए से ज्यादा महंगी गाड़ी पर एक प्रतिशत अतिरिक्त टैक्स लगा दिया। हम ‘इन्कम टैक्स डिक्लेरेशन स्कीम’ भी लाए। अब तक इस स्कीम में सबसे ज्यादा पैसा लोगों ने डिक्लेयर किया। 1100 से ज्यादा पुराने कानून हमने खत्म किए। यहां नोटबंदी के संबंध में बताया गया, कोई कहता है 150 बार, कोई कहता है 130 बार, सब अलग-अलग आंकड़े बोलते हैं कि आपने इतने नियम बदले।

प्रो. सौगत राय (दमदम) : 150 बार।

श्री नरेन्द्र मोदी : बहुत अच्छा याद रखते हैं।...(व्यवधान)

प्रो. सौगत राय: 150 आदमी मर गये, 150 बार नियम बदले गए।...(व्यवधान)

श्री नरेन्द्र मोदी : अब मैं आपको बताना चाहता हूं कि यह तो एक ऐसा काम था, जिसमें जनता की कोई तक़लीफ तुरन्त समझने के बाद हम रास्ता खोजने का प्रयास करते थे। दूसरा, जिन लोगों को सालों से लूटने की आदत लगी है, वे रास्ता खोजते थे और हमें वे रास्ते बंद करने के लिए कुछ-न-कुछ करना पड़ता था। लड़ाई का मौसम था। एक तरफ देश को लूटने वाले थे और एक तरफ देश को ईमानदारी की तरफ ले जाने का मोर्चा लगा हुआ था। लड़ाई पल-पल चल रही थी। ‘तू डाल-डाल, मैं पात-पात’ इस प्रकार से लड़ाई चल रही थी।

          जो आप लोगों का बड़ा प्रिय कार्यक्रम है, जिसको लेकर आप बड़ी पीठ थपथपा रहे हैं, वैसे उसके लिए आपको हक़ नहीं है, क्योंकि जब इस देश में राजा-रजवाड़ों का शासन था, तब भी गरीबों के लिए राहत काम के नाम से योजनाएं चलती थीं। उसके बाद भी हिन्दुस्तान में ‘फूड-फॉर-वर्क’ के नाम से कई योजनाएं थीं। देश आज़ाद होने के बाद नौ प्रकार के अलग-अलग नामों से चली हुई योजना चलते-चलते उसे एक नाम दिया गया, जिसे मनरेगा कहते हैं। यह कई यात्राएं करके आया हुआ है। हर राज्य में, जहां कम्युनिस्टों की सरकार थी, उन्होंने भी पश्चिम बंगाल में किया था, जब शरद पवार की सरकार थी, उन्होंने भी इसे महाराष्ट्र में किया था, गुजरात में भी कांग्रेस की सरकार ने किया था। आजादी के बाद हर राज्य में किसी न किसी ने इस प्रकार के काम किए थे। यह कोई नई चीज़ नहीं थी, लेकिन नाम नया था। देश को और आपको खुद को भी जानकर आश्चर्य होगा कि शांत रूप से इतने सालों से चली हुई योजना के बाद भी मनरेगा में 1035 बार परिवर्तन किए गए, 1035 बार नियम बदले गए। आप कभी अपने आईने में तो झांकिए। उस समय तो लड़ाई नहीं थी, इतने बड़े दबाव में काम नहीं करना था। पर, क्या कारण था कि मनरेगा जैसी योजना, जो एक लम्बे अर्से से चल रही थी, उसे भी लाने के बाद आपको उसमें 1035 बार परिवर्तन करने पड़े।...(व्यवधान)

श्री मल्लिकार्जुन खड़गे : वह एक्ट था।...(व्यवधान)

श्री नरेन्द्र मोदी : नियमों में परिवर्तन किए गए, एक्ट तो एक बार हो गया।...(व्यवधान) एक्ट 1035 बार परिवर्तित नहीं हुआ है।...(व्यवधान)

SHRI ANANTHKUMAR: You listen to the hon. Prime Minister. We have listened to you.… (Interruptions) हमने सुना है आपको। आप भी शांति से सुनिए।...(व्यवधान)

श्री नरेन्द्र मोदी :  इसलिए आज मैं आपसे कहता हूं कि आपको 40 मिनट के बजाय पौने दो घंटे मिल चुके थे...(व्यवधान) मैं आपको काका हाथरसी के कविता की शब्द सुनाता हूं और मैं काका हाथरसी को याद करता हूं तो कोई इसे उत्तर प्रदेश के चुनाव के साथ न जोड़े।...(व्यवधान)

HON. SPEAKER: He is not yielding. बैठिए।

… (Interruptions)

श्री नरेन्द्र मोदी : क्योंकि उनके हर चुनाव में काका हाथरसी की बात तो चलती रहती थी।...(व्यवधान)

HON. SPEAKER: He is not yielding. प्लीज बैठ जाइए।

… (Interruptions)

श्री नरेन्द्र मोदी : काका हाथरसी ने कहा था - अंतर पट में खोजिए, छिपा हुआ है खोट और इन्होंने आगे कहा है - मिल जाएगी आपको बिल्कुल सत्य रिपोर्ट           आदरणीय अध्यक्षा जी, मैं एक बात की ओर ध्यान देना चाहता हूं। सरकार नियमों से चलती है, संवैधानिक जिम्मेवारियों के साथ चलती है। जो नियम आपके लिए थे, वह नियम हमारे लिए भी हैं, लेकिन फर्क कार्य‑संस्कृति का होता है। नीतियों की ताकत भी नीयत से जुड़ी हुई होती है। अगर नीयत में खोट है तो नीतियों की ताकत जीरो छोड़ो, माइन्स में चली जाती है। इसलिए हमारे देश में उस कार्य‑संस्कृति को भी समझने की जरुरत है। मैं यहां से जब भी कुछ बोलता हूं तो लोग कहते हैं कि यह तो हमारे समय था, यह तो हमारे समय था। मुझे ऐसा लग रहा है कि आज मैं भी इसी पर थोड़ा खेलूं। आज मैं आपके मैदान में खेलना पसंद करुंगा।

          इसलिए मैं कहना चाहता हूं कि ऐसा क्यों हुआ। ऐसा तो नहीं है कि आपको ज्ञान नहीं था। ऐसा थोड़े ही था कि आपको कल ही ज्ञान हुआ है। आपको जानकारी थी। महाभारत में इस प्रकार से कहा गया हैः जानामि धर्मम् न च में प्रवृत्तः जानामि अधर्मम् न च में निवृत्तः।

 

          धर्म क्या है, यह तो आप जानते हैं, लेकिन वह आपकी प्रवृत्ति नहीं थी। अधर्म क्या है, वह भी जानते थे, लेकिन उसे छोड़ने का आपको सामर्थ्य नहीं था। मैं आपको बताता हूं कि नेशनल ऑप्टिकल फाइबर नेटवर्क...(व्यवधान) अगर मैं इसके लिए कुछ भी कहूंगा तो वहां से आवाज उठाई गई कि यह तो हमने शुरू किया। मैं यहीं से शुरू करना चाहता हूं। आप देखिए, वर्ष 2011 से वर्ष 2014, यानि इन तीन सालों में सिर्फ 59 गांवों में नेशनल ऑप्टिकल फाइबर नेटवर्क लगा और उसमें भी लास्ट माइल कनेक्टिविटी का प्रावधान नहीं था। प्रोक्योरमेंट भी पूरी तरह से सेन्ट्रलाइज्ड था। इसका क्या कारण था, सब लोग जानते हैं। अब आप देखिए, हमने पूरी कार्य‑संस्कृति कैसे बदली है, एप्रोच कैसे बदली है। इसके लिए सभी राज्यों को साथ में लिया। लास्ट माइल कनेक्टिविटी, यानि स्कूल में ऑप्टिकल फाइबर नेटवर्क मिलना चाहिए, अस्पताल में मिलना चाहिए और पंचायत घर में भी मिलना चाहिए। हमने इस प्राथमिकता को तय किया। हमने प्रोक्योरमेंट को भी डिसेन्ट्रलाइज्ड कर दिया और परिणाम यह आया कि इतने कम समय में अब तक 76 हजार गांवों में ऑप्टिकल फाइबर नेटवर्क लास्ट माइल कनेक्टिविटी के साथ पूरा हो गया।...(व्यवधान)

          दूसरा, अभी यहां पर कल बताया जा रहा था कि आप लेशकैश सोसायटी या कैशलेश सोसायटी के लिए बोल रहे हैं। लोगों के पास क्या है, लोगों के पास क्या है, मोबाइल नहीं है? मैं हैरान हूं, मैंने तो वर्ष 2007 के बाद से जितनी चुनाव सभाएं सुनी हैं, आपके नेता गांव-गांव जाकर कहते हैं कि राजीव गांधी कंप्यूटर रिवोल्यूशन लाए, राजीव गांधी मोबाइल फोन लाए, राजीव गांधी ने गांव-गांव कनेक्टिविटी कर दी, आप ही का भाषण है। जब मैं आज कह रहा हूं कि उस मोबाइल का उपयोग बैंक में भी कनवर्ट किया जा सकता है तो आप कह रहे हैं मोबाइल फोन ही कहां है। यह समझ नहीं आ रहा है, भाई। ...(व्यवधान) आप ही कह रहे हैं कि हमने इतना कर दिया और जब मैं उसमें कुछ अच्छा जोड़ रहा हूं तो कहते हैं कि वह तो है ही नहीं। यह आप क्या समझा रहे थे, ऐसा क्यों कर रहे हैं?

          दूसरी बात, यह आप भी मानते हैं, मैं भी मानता हूं कि पूरे देश के पास नहीं है। मान लीजिए कि चालीस पर्सेंट के पास है तो क्या हम चालीस पर्सेंट लोगों को इस आधुनिक व्यवस्था से जोड़ने की दिशा में सबका सामूहिक प्रयत्न रहना चाहिए या नहीं? साठ पर्सेंट का, चलो बाद में देखेंगे, कहीं तो शुरू करें। इसका लाभ है। डिजिटल करेंसी को हम कम न आंकें। एक-एक एटीएम को संभालने के लिए एवरेज पांच पुलिस वाले लगते हैं। करेंसी को एक जगह से दूसरी जगह ले जाने के लिए, सब्जी और दूध के मोबेलाइजेशन के लिए जितना खर्च होता है, उससे ज्यादा उसके मोबेलाइजेशन में खर्च होता है। अगर हम इन बातों को समझें तो जो कर सकते हैं, सब नहीं कर पाएंगे, हम समझ सकते हैं, लेकिन जो कर सकते हैं, उनको करने के लिए प्रोत्साहित करना, यह नेतृत्व का काम होता है, चाहे वह किसी भी दल का हो। इससे लोगों का भला होने वाला है।

          मुझे कोई बता रहा था कि एक सब्जी वाले ने इसे शुरू किया। कल ही मुझे कोई रिपोर्ट देकर गया। उसको पूछा कि तुम्हारा क्या फायदा है। वह बोला कि पहले क्या होता था, एक तो मेरे ग्राहक परमानेंट थे, मैं सबको जानता था। मान लीजिए कि 52 रुपए की सब्जी ली, तो फिर मैडम कहती थी कि पचास रुपए का नोट है, इसे ले लो, तो बोला कि मेरे दो रुपए चले जाते थे और मैं भी बोल नहीं पाता था। मैं हिसाब लगाता था साल भर में मेरे 800-1000 रुपए, रुपया - दो रुपया न देने में ही हो जाता था। भीम लगाने के बाद 52 रुपए है तो 52 रुपए मिलते हैं, 53 रुपए हैं तो 53 मिलते हैं, 48 रुपए 45 पैसे हैं, तो पूरे मिलते हैं। वह बोला कि मेरे तो 800-1,000 रुपए बच गए। देखिए, चीजें कैसे बदलती हैं। ...(व्यवधान) आप मोदी का विरोध कर रहे हैं, कोई बात नहीं, आपका काम भी है, करना भी चाहिए, लेकिन जो अच्छी चीज है, उसे आगे बढ़ाइए। मान लीजिए, यह गांव में नहीं है, अगर शहरों में है तो उसे आगे बढ़ाओ, उसमें योगदान करो, देश का भला होगा, इसमें किसी और व्यक्ति का भला नहीं है। मैं आग्रह करूंगा कि ऐसी चीजों में हम मदद कर सकते हैं, तो मदद करनी चाहिए।

          कार्य संस्कृति कैसे बदलती है। रोड बनाना क्या हमारे आने के बाद हुआ। यह तो टोडरमल के जमाने से चल रहा है, शेरशाह सूरी के जमाने से चल रहा है। यह कहना कि यह तो हमारे जमाने से था, हमारे जमाने से था, कहां-कहां तक जाएंगे। लेकिन फर्क क्या है। पिछली सरकार में प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना प्रतिदिन 69 किलोमीटर होती थी, हमारे आने के बाद 111 किलोमीटर होती है, यह फर्क है। ...(व्यवधान) हमने रोड बनाने में स्पेस टेक्नॉलाजी का उपयोग किया है। स्पेस टेक्नॉलाजी से फोटोग्राफी होती है, मानिटरिंग होती है। हमने रेलवे में ड्रोन का उपयोग किया है। फोटोग्राफी करते हैं, काम का हिसाब लेते हैं कि कार्य संस्कृति में टेक्नॉलाजी की मदद से कैसे बदलाव लाया जा सकता है।

          ग्रामीण आवास योजना, राजनीतिक फायदा उठाने के लिए नामों को जोड़कर उसका जो उपयोग हुआ, वह हुआ, लेकिन फिर भी आपके समय में एक साल में 10,83,000 घर बनते थे, इस सरकार में एक वर्ष में 22,27,000 घर बने। नेशनल अर्बन रिन्युअल मिशन में एक महीने में 8,017 घर बने।   हमारी योजना से 13,530 घर बने। पहले ब्रॉडगेज रेलवे की कमिशनिंग एक साल में 1500 किलोमीटर हुआ करती थी। पिछले साल यह बढ़कर 3000 किलोमीटर यानी डबल हो गई। ...(व्यवधान) इसलिए ये परिणाम अचानक नहीं आए। योजनाबद्ध तरीके से हर पल, हर चीज को मोनीटर करते-करते यही लोग, यही कानून, यही मुलाजिम, यही फाइल, यही माहौल, उसके बाद भी बदलाव लाने में हम तेज गति से आगे बढ़ रहे हैं। यह अचानक नहीं होता है, इसके लिए पुरूषार्थ करना पड़ता है। इसलिए हमारे शास्त्रों में कहा गया है--

उद्यमेन हि सिध्यन्ति कार्याणि न मनोरथै:।

न हि सुप्तस्य सिंहस्य प्रविशन्ति मुखे मृगा:।।

          उद्यम से ही कार्य सिद्ध होते हैं न कि मनोरथों से। सोए हुए सिंह के मुख में हिरण आकर प्रवेश नहीं करता, उसे भी शिकार करना पड़ता है।

          आदरणीय अध्यक्ष महोदया, कुछ मूलभूत परिवर्तन कैसे आते हैं। हम जानते हैं कि राज्यों के इलैक्ट्रिसिटी बोर्ड डिस्कॉम सारे राज्य संकट में हैं। कभी हिन्दुस्तान में लाल किले से एक प्रधान मंत्री द्वारा इसकी चिन्ता की गई थी, इतनी हद तक हालत बिगड़ी हुई थी। पिछले दो सालों में बिजली उत्पादन में क्षमता बढ़ी। कन्वैंशनल एनर्जी को जोड़ा गया। ट्रांसमिशन लाइन को बढ़ाया गया। सोलर एनर्जी को लाया गया।  2014 में वह 2700 मेगावाट थी, आज हमने उसे 9,100 मेगावाट तक पहुंचा दिया। सबसे बड़ी बात डिस्कॉम योजना के कारण हुई। उदय योजना के तहत राज्य जब योजना सफल कर पाएंगे तो उनकी तिजोरी में करीब-करीब एक लाख 60 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा रकम बचने वाली है। राज्यों के साथ जोड़कर अगर भारत सरकार ने एक लाख 60 हजार करोड़ रुपये की घोषणा कर दी होती तो चारों तरफ कहा जाता कि वाह, मोदी सरकार ने इतना पैसा दिया। हमने योजना ऐसी बनाई कि राज्यों के खजाने में एक लाख 60 हजार करोड़ रुपये उदय योजना द्वारा बचत होने वाली है, जो उनके विकास में काम आने वाली है और वे ऊर्जा क्षेत्र के बोझ से बचने वाले हैं।

          कोयला - आप जानते हैं कि जहां से कोयला निकलता था, उसके नजदीक नहीं दिया जाता था। क्यों? कहा गया कि रेलवे को थोड़ी कमाई हो जाए। हमने कहा, कमाल हो गया, रेलवे की कमाई के लिए इतना सब करें। हमने रैशनलाइज़ कर दिया, जहां नजदीक है, वहीं से कोयला मिलेगा, कोयले का खर्च हो, उस दिशा में प्रयास किया। उसके कारण कोयले में करीब-करीब 1300 करोड़ रुपये ट्रांसपोर्टेशन खर्च कम हुआ है।

          एलईडी बल्ब - हम यह नहीं कहते कि एलईडी बल्ब हम लाए। वैज्ञानिक शोध हुई, आपने भी शुरू किया। लेकिन आपके समय में एलईडी बल्ब करीब 300 रुपये, साढ़े तीन सौ रुपये, 380 रुपये में मिलते थे। एलईडी बल्ब से एनर्जी सेविंग होती है, हमने मिशन रूप में काम किया। पिछले आठ-नौ महीने से इस योजना को बल दिया गया है। इतने कम समय में हमने 21 करोड़ एलईडी बल्ब लगाने में सफलता पाई है और तेज गति से आगे बढ़ रहे हैं। अब तक जो एलईडी बल्ब लगे हैं, उसके कारण परिवारों में जो बिजली का बिल आता था, उसमें 11 हजार करोड़ रुपये की बचत हुई है।          अगर किसी सरकार ने बजट में ग्यारह हजार करोड़ रुपये बिजली उपभोक्ताओं को देना तय किया होता तो अखबारों की हेडलाइन बन जाती। एलईडी बल्ब लगाने मात्र से ग्यारह हजार करोड़ रुपये बिजली का बिल सामान्य जनों के घरों में कम हुआ है। जब कार्य संस्कृति अलग होती है तो कैसा परिवर्तन आता है इसका यह नमूना है। ...(व्यवधान) विपक्ष के नेता शिडय़ूल कास्ट के बजट को लेकर भाषण कर रहे थे लेकिन बड़ी चतुराईपूर्वक वर्ष  2013-14 के आंकड़े के ऊपर बोलना अच्छा नहीं माना, वर्ष 2013-14 आता था तब अटक जाते थे। शिडय़ूल कास्ट सब प्लॉन कुल आबंटन वर्ष 2012-13 37,113 करोड़ रुपये, वर्ष 2013-14 41,561 करोड़  रुपये, वर्ष 2016-17 38,833 करोड़ रुपये, 2016-17 40,920 करोड़ रुपये, 33.7 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। इस साल के बजट में 52,393 करोड़ रुपये है।

श्री मल्लिकार्जुन खड़गे: ....* श्री नरेन्द्र मोदी : आपको शब्द सुनने की हिम्मत चाहिए, सत्य सुनने की हिम्मत चाहिए।...(व्यवधान) यह भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई लड़ने वाली सरकार है। भ्रष्टाचार की लड़ाई लड़ने के समय किस प्रकार से काम किए जाते हैं। ...(व्यवधान) 17 मंत्रालयों की 84 योजनाओं  को डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसर्फर योजना के साथ जोड़ कर आगे किया। 32 करोड़ लोगों को 1,56,000 करोड़ रूपये डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसर्फर योजना में दिया गया। उससे क्या लाभ हुआ है? किस प्रकार से हर गली मोहल्ला में चोरी और लूट की व्यवस्था थी। इतनी बारीकी से हर जगह पर चोरी और लूट को रोकूंगा तो मेरे ऊपर कितना तुफान आएगा। मैंने गोवा में बोला था कि मैं ऐसे निर्णय करता हूं तो मेरे ऊपर क्या बीतेगी मुझे मालूम है। ऐसे बड़े-बड़े लोगों को तकलीफ हो रही है और ज्यादा होने वाली है। उसके कारण मुझे अंदाज है कि मेरे ऊपर क्या-क्या जुल्म होने वाले हैं उसके लिए हम तैयार हैं। मैंने देश के लिए प्रण किया है इसलिए मैं कदम उठा रहा हूं। पहल योजना, हमारे यहां गैस सिलेंडर जाते थे और सब्सिडी मिलती थी जब उसको आधार योजना से जोड़ा तो उसका लिकेजेज करीब 26 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा लिकेज रुका। जिसकी वजह से हम डेढ़ करोड़ परिवारों को गैस का कनेक्शन देने में हम सफल हुए।   ...(व्यवधान)

  आप अध्ययन कर लीजिए। मैं जब सदन में बोलता हूं तो जिम्मेदारी के साथ बोलता हूं।...(व्यवधान) पिछले ढाई वर्षों में गरीब आदमी के हक को छीनने का काम फर्जी राशन कार्ड वाले करते थे। गरीब को जो मिलना चाहिए, बिचौलिए अपने यहां फर्जी राशन कार्ड के ठप्पे रखते थे, माल चुरा लेते थे और कालाबाजारी में बेचते थे। जब से हमने टेक्नोलाजी का उपयोग किया, आधार का उपयोग किया, करीब चार करोड़ यानी 3 करोड़ 95 लाख फर्जी राशन कार्ड पकड़े गए। इससे करीब 14 हजार करोड़ की रकम, जो बिचौलिए गरीब के हक की खाते थे, मुख्य धारा में आई और गरीबों की तरफ गई।

          मनरेगा में आधार से पेमेंट दी जाती है। पैसा डायरेक्ट ट्रांसफर होता है, करीब 94 परसेंट सक्सेस मिली है। इसका परिणाम यह हुआ है कि 7,633 करोड़ रुपए का लीकेज बच पाया है। यह एक वर्ष में नहीं, आने वाले वर्षों में भी बचने वाला है। नेशनल सोशल असिस्टेंस प्रोग्राम, एनएसएपी, करीब 400 करोड़ रुपया, जिसका कोई लेनदार नहीं मिल रहा है, लेकिन पैसे जाते थे। ऐसी कुछ चीजें पाई गईं, जिस बेटी का जन्म नहीं हुआ, वह बेटी विधवा भी हो गई और खजाने से धन भी जा रहा है। हम इन सबको रोकने की कार्य संस्कृति लेकर चले हैं। स्कालरशिप जैसी कई चीजें हैं। मैं मोटा अंदाज लगाता हूं, अभी तो शुरुआत है, हर वर्ष 49,500 करोड़ रुपए बिचौलियों के पास जाते हुए रुक गए। आप कल्पना कर सकते हैं कि करीब 50,000 करोड़ रुपया जो गरीबों के हक का था, बिचौलिए खा जाते थे, करप्शन के नाम पर, लूट के नाम पर, उसे रोकने के लिए बड़ी हिम्मत लगती है, हमने करके दिखाया है।

          अध्यक्ष जी, मैं कार्य संस्कृति का एक उदाहरण भी देना चाहता हूं। किसानों की बड़ी-बड़ी बातें करते हैं। हर वर्ष राज्यों के मुख्यमंत्री भारत सरकार को इस बात की चिट्ठी लिखते थे कि हमें यूरिया मिलना चाहिए। जब मैं भी मुख्यमंत्री था, लिखता रहता था, क्योंकि यूरिया पाने में बहुत बड़ी दिक्कत होती थी। मैं आज बड़े संतोष के साथ कहता हूं कि पिछले दो साल से किसी मुख्यमंत्री को यूरिया के लिए चिट्ठी नहीं लिखनी पड़ी, कहीं यूरिया के लिए कतार नहीं लगी है, कहीं यूरिया के लिए लाठीचार्ज नहीं हुआ है। यह बात हम भूले नहीं, पुराने अखबार निकाल लीजिए, किसानों को यूरिया पाने के लिए कितनी तकलीफ होती थी। अब मुझे बताइए क्या नीम कोटिंग का ज्ञान हमें ही है, आपको नहीं था? आपको था। 5 अक्टूबर, 2007 को यूरिया नीम कोटिंग की चर्चा ग्रुप आफ मिनिस्टर द्वारा प्रिंसीपली एप्रूव हुई। 5 अक्टूबर, 2007 से लेकर अब तक क्या हुआ, करीब छः साल, एक तो आपने कैप  35 परसेंट लगाई कि इससे ज्यादा नीम कोटिंग नहीं करनी है। जब तक 100 परसेंट नहीं करते हैं, तब तक उसका कोई लाभ ही नहीं होता है क्योंकि यूरिया चोरी होता है, कारखानों में चला जाता है, किसान के नाम पर सब्सिडी के बिल कटते हैं, लेकिन किसान को लाभ नहीं मिलता था। यूरिया का दुरुपयोग सिंथेटिक मिल्क बनाने में होता था, इसके कारण गरीब बच्चों की जिंदगी के साथ खेला जाता था। यूरिया को 100 परसेंट नीम कोटिंग किया। आपने निर्णय किया था, छः साल में आप 35 प्रतिशत का कैप लगाने के बाद 35 प्रतिशत तक नहीं पहुंच पाए, सिर्फ 20 प्रतिशत नीम कोटिंग की। हमने आकर इस बात को हाथ में लिया, आपका 6 साल और मेरा छः महीना, हिन्दुस्तान में 100 परसेंट यूरिया नीम कोटिंग कर दिया। इम्पोर्टिड यूरिया को भी नीम कोटिंग कर दिया। आपकी कार्य-संस्कृति और हमारी कार्य-संस्कृति में फर्क इतना है। नीम कोटिंग की बात आती है तो आप खड़े हो जाते हैं कि यह तो हमारे जमाने का है। मैंने आज आपके मैदान में खेलना तय किया है, मैं खेलकर दिखाता हूं कि आपका हाल क्या है। नीम कोटिंग का हमने अध्ययन करवाया, एग्रीकल्चर डेवलपमेंट एंड रूरल ट्रांसफार्मेशन सैंटर ने एनालिसिस करके रिपोर्ट दी है। किसानों का कितना भला हो रहा है, देखिए, धान के उत्पादन में पांच प्रतिशत वृद्धि, गन्ने के उत्पादन में 15 प्रतिशत वृद्धि। आप कल्पना कर सकते हैं कि किसानों का इसके कारण कितना खर्चा बच रहा है।

          अध्यक्ष जी, किस प्रकार से महामहिम राष्ट्रपति जी ने हम सबसे आह्वान किया है कि लोकसभा और विधानसभा के चुनाव साथ-साथ होने की दिशा में सोचने का समय आ गया है। इसे राजनीतिक तराजू से न तौला जाए। तत्कालीन हर किसी को थोड़ा बहुत नुकसान होगा, लेकिन इस विषय पर गंभीरता से सोचने की आवश्यकता है। हर वर्ष पांच-सात राज्यों में चुनाव होते ही रहते हैं। एक करोड़ से ज्यादा सरकारी मुलाजिम कभी न कभी चुनावों में लगे ही रहते हैं। शिक्षा क्षेत्र से जुड़े अध्यापकों और प्राध्यापकों को चुनाव के काम में जाना पड़ता है, बार-बार चुनाव के कारण सबसे ज्यादा भविष्य की पीढ़ी को नुकसान हो रहा है। इसके कारण खर्च में भी बहुत बड़ी वृद्धि हो रही है। वर्ष 2009 के चुनाव में 1100 करोड़ का खर्च हुआ और 2014 के लोकसभा के चुनाव में 4000 करोड़ से भी ज्यादा खर्च हुआ। आप कल्पना कर सकते हैं कि इस गरीब देश पर कितना बोझ पड़ रहा है।

      अध्यक्ष जी, आज कानून व्यवस्था की दृष्टि से अनेक नई चुनौतियां आ रही हैं। प्राकृतिक संकटों के कारण सिक्योरिटी फोर्स की मदद लगती है। दुनिया भर में फैल रहा आतंकवाद और हमारे दुश्मन देश जिस तरह हरकतें कर रहे हैं, सिक्योरिटी फोर्स को उसमें लगा देते हैं। इतना बड़ा काम बढ़ता जा रहा है। दूसरी तरफ सिक्योरिटी की ज्यादातर शक्ति चुनावी प्रबंधन में लगाई जाती है, उनको भेजना पड़ता है। हम इन संकटों को समझें। एक दीर्घदृष्टा के रूप में कोई एक दल इसका निर्णय नहीं कर सकता है, सरकार इसका निर्णय कतई नहीं कर सकती है, लेकिन अनुभव के आधार पर जिम्मेदार लोगों को मिलकर इस समस्या का समाधान खोजना होगा, हमें रास्ता खोजना होगा। महामहिम राष्ट्रपति जी ने जो चर्चा निकाली है, हमें उस चर्चा को आगे बढ़ाना चाहिए। उनके धन्यवाद के लिए हमें प्रयास करना चाहिए।...(व्यवधान)

श्री एम.बी.राजेश (पालक्काड) :  आपने एनपीए के बारे में कुछ नहीं कहा। ...(व्यवधान)

श्री कल्याण बनर्जी :  स्टेट फंडिंग कर दीजिए। ...(व्यवधान)

श्री नरेन्द्र मोदी:  हमारे देश के ग्रामीण अर्थ कारण को मजबूत किए बिना देश का अर्थ कारण आगे नहीं बढ़ सकता है। मैं हैरान हूं, विपक्ष के नेता को महामहिम राष्ट्रपति जी के संबोधन में दलित, पीड़ित, शोषित, वंचित, युवा, मजदूर के उल्लेख से भी परेशानी हुई। क्या इस देश में दलित, पीड़ित, शोषित, वंचित लोगों का महामहिम राष्ट्रपति जी के अभिभाषण में स्थान नहीं होना चाहिए, उसे पीड़ा होनी चाहिए? मैं हैरान हूं कि ऐसी पीड़ा क्यों होती है।

SHRIMATI P.K. SHREEMATHI TEACHER (KANNUR): Why there is no mention of the Women’s Reservation Bill in the Address?… (Interruptions)

श्री नरेन्द्र मोदी: हमने कृषि सिंचाई योजना पर बल दिया। आप देखिए, मनरेगा में कैसा मूलभूत परिवर्तन आया, आपने तीन साल में सिर्फ 600 करोड़ रुपया बढ़ाया था और हमने आकर दो साल में 11000 करोड़ रुपया बढ़ा दिया। हमने स्पेस टेक्नोलॉजी का उपयोग किया। हमने उसके अंदर जियो टैगिंग की व्यवस्था की है। हमने तालाब बनाने पर भी बल दिया है, क्योंकि सिंचाई सबसे बड़ी बात है। मत्स्य पालन के लिए भी छोटे-छोटे तालाब काम में आ सकते हैं। गरीब व्यक्ति कमा सकता है। उसके कारण हम करीब दस लाख से ज्यादा तालाब बनाने का संकल्प लेकर चल रहे हैं। पिछली बार भी हमने तालाब बनाने के लिए बल दिया था। इससे हमारे किसानों को एक बहुत बड़ा लाभ होने की संभावना है। जियो टैगिंग के कारण मौनीटरिंग की व्यवस्था है। इसका भी लाभ होगा।

          स्पेस टेक्नोलॉजी में सैटेलाइट के अंदर बहुत चीजें होने के बावजूद भी हम उनका उपयोग नहीं कर पाये। हमने सैटेलाइट छोड़कर अखबारों में, सुर्खियों में जगह बनाने का प्रयास किया। इस सरकार ने लगातार भरपूर प्रयास किया है। हम उसे भी आगे बढ़ाने का काम करें।

          प्रधान मंत्री फसल बीमा योजना - फसल बीमा योजना पहले भी थी, लेकिन फसल बीमा लेने के लिए किसान तैयार नहीं था। फसल बीमा योजना पहले भी थी, लेकिन किसान के हकों की रक्षा नहीं होती थी। हम सब सार्वजनिक जीवन में काम करने वाले लोग हैं। राजनीतिक दल के सिवाय भी समाज के प्रति हमारी एक जिम्मेदारी है। इस सदन के सब लोग प्रधान मंत्री फसल बीमा योजना का अध्ययन करें कि हमारे इलाके के किसानों को कैसे मदद मिल सकती है। वे उसका फायदा उन तक पहुंचायें। पहली बार  प्राकृतिक आपदा के कारण बुआई न हुई हो, तब भी वह बीमा का हकदार बना है। फसल काटने के बाद भी अगर पन्द्रह दिनों के अंदर कोई और आपदा आयी, तब भी वह फसल बीमा का हकदार बने, यह निर्णय छोटा नहीं है। ...(व्यवधान) इसलिए हम सबका दायित्व  बनता है कि किसानों को यह जो लाभ मिला है, उस लाभ को हम उन तक पहुंचायें।

          सॉयल हैल्थ कार्ड में राजनीतिक मतभेद हो सकता है। लेकिन आप अपने इलाके के किसानों को सॉयल हैल्थ कार्ड के बारे में समझाइये। इससे उनका फायदा होगा। उनकी लागत कम हो जायेगी। सही भूमि पर सही फसल से उपयुक्त लाभ होगा, यह सीधा-सीधा विज्ञान है। उसमें राजनीति करने की कोई जरूरत नहीं है। इसे हमें आगे बढ़ाना चाहिए। मैं चाहूंगा कि इसमें छोटे-छोटे इंटरप्रिन्योर्स आगे आयें। वे खुद अपनी प्राइवेट लैब बनायें और खुद सर्टिफाइड लैब के द्वारा धीरे-धीरे गांवों में एक नये रोजगार का क्षेत्र भी खुले, उस दिशा में हमें काम करना चाहिए।

          आदरणीय अध्यक्ष महोदया, यहां पर युवाओं को रोजगार देने के अवसर पर चर्चा हुई। मुद्रा योजना से करीब-करीब दो करोड़ से ज्यादा लोगों को बिना किसी गारंटी के धन दिया गया है। उससे वह खुद अपने पैरों पर खड़ा हुआ है। अगर वह पहले से खड़ा था, तो उसमें एक से अधिक व्यक्तियों को रोजगार देने की ताकत आयी है। हम लोगों की यही सोच रही कि जब तक हम देश में रोजगार के अवसर नहीं बढ़ायेंगे तब तक कुछ नहीं होगा। हमारी नीतियां ऐसी होनी चाहिएं कि हर जगह रोजगार की संभावनाएं बढ़ें और हमने उस नीति को अपनाया। हमने स्किल डेवलपमैंट में बल दिया है। इसका लाभ है कि हमारे यहां कृषि क्षेत्र में अब प्रधान मंत्री कृषि सिंचाई योजना है। हम जब प्रधान मंत्री कृषि योजना लागू कर रहे हैं, तो क्या उस काम में लोगों को रोजगार नहीं मिलेगा। हमने प्रधान मंत्री ऊर्जा गंगा योजना के साथ पूर्वी भारत को गैस पाइप लाइन से जोड़ने की दिशा में बड़ा अभियान चलाया है। सैंकड़ों किलोमीटर की गैस पाइपलाइन लगने वाली है। क्या उसमें नौजवान को रोजगार की संभावना नहीं है। इसलिए विकास की वह दिशा होनी चाहिए, जिसमें नौजवानों को रोजगार मिले।

          हमने अभी टेक्सटाइल और जूतों के क्षेत्र में अनेक इनीशियेटिव्स लिये हैं, जिसके कारण लोगों को नये रोजगार और नये-नये क्षेत्रों में रोजगार की संभावना हुई है। देश के छोटे उद्योगों को बढ़ावा देना बहुत जरूरी है। इस बजट में भी बहुत महत्वपूर्ण फैसले किये गये हैं। छोटे-छोटे उद्योगों को जितना बल मिलेगा, उसके कारण हमारे देश में रोजगार की संभावनाएं बढ़ेंगी। अगर हम जीरो इफैक्ट को अपने प्रोडक्शन का क्राइटीरिया रखें, तो हम दुनिया की मार्केट को भी कैप्चर कर सकते हैं। हमारे छोटे उद्योगकारों की एक्सपोर्ट करने की ताकत होती है। बड़े-बड़े उद्योगकारों में छोटे-छोटे पुर्जे लगते हैं, जो छोटे-छोटे कारखानों से मिलते हैं। हम इससे इंजीनियरिंग की दुनिया में मिरकेल कर सकते हैं। सरकार अभी नये बजट में जो योजनाएं लायी है, उनका लाभ 96 परसेंट उद्योगकारों को मिलने वाला है।    चार प्रतिशत बड़े लोग बाहर रह गए, लेकिन जो 50 करोड़ रुपये से कम वाले करीब 96 प्रतिशत लोग हैं, उन सब को फायदा मिल रहा है और बहुत बड़ा फायदा मिल रहा है। उसके कारण रोजगार के लिए बहुत बड़ी संभावनाएं बनने वाली हैं।

          यहां पर सर्जिकल स्ट्राइक की बात आई। मैं हैरान हूं, अपने सीने पर हाथ रखकर पूछिए। सर्जिकल स्ट्राइक के पहले 24 घण्टे में राजनेताओं ने कैसे-कैसे बयान दिए, कैसी भाषा का प्रयोग किया, लेकिन जब देखा कि देश का मिजाज अलग है तो उनको अपनी भाषा बदलनी पड़ी। मैं आपसे आग्रह करता हूं, यह बहुत बड़ा निर्णय था और इस निर्णय के बारे में कोई मुझसे पूछता नहीं है। नोटबन्दी के बारे में पूछते हैं कि मोदी जी, इसे सीक्रेट क्यों रखा। बोलते हैं कि कैबिनेट को भी नहीं बताया। सर्जिकल स्ट्राइक के बारे में कोई नहीं पूछ रहा है।

          भाइयो-बहनो, देश की सेना का जितना गुणगान करें,...(व्यवधान)  हम अपने देश की सेना का जितना गुणगान करें, उतना कम है। ...(व्यवधान) इतनी सफल सर्जिकल स्ट्राइक की है।...(व्यवधान) मैं जानता हूं कि सर्जिकल स्ट्राइक आपको परेशान कर रही है।...(व्यवधान) सर्जिकल स्ट्राइक आपको परेशान कर रही है। सर्जिकल स्ट्राइक के बारे में आपकी मुसीबत यह है कि पब्लिक में जाकर बोल नहीं पाते हैं और अंदर पीड़ा अनुभव कर रहे हैं। यह आपकी मुसीबत है।...(व्यवधान) लेकिन आप मानकर चलिए कि यह देश, ...(व्यवधान) हमारी सेना इस राष्ट्र की रक्षा के लिए पूरी सामर्थ्यवान है, पूरी शक्तिवान है।...(व्यवधान)

          आदरणीय अध्यक्ष महोदया, मुझे विश्वास है कि इस सदन में संवाद हो, नए-नए शोध हों, नए-नए विचारों को रखा जाए, क्योंकि हम लोग ज्ञान के पुजारी हैं, विचारों का स्वागत करने वाले लोग हैं। जितने नए विचार मिलेंगे, किसी भी दिशा से विचार आएं, जरूरी नहीं है कि विचार इसी दिशा से आएं, किसी भी दिशा से विचार आएं, उत्तम विचारों का स्वागत है, क्योंकि हम सभी का मिलकर अल्टीमेट उद्देश्य है - अपने देश को आगे बढ़ाना। अल्टीमेटली हम सभी का उद्देश्य देश को बुराइयों से मुक्त कराना है । अल्टीमेटली हमारा उद्देश्य है देश को नई उंचाइयों पर ले जाना। आज विश्व के अंदर एक अवसर आया है, ऐसे अवसर बहुत कम आते हैं। आज विश्व की जो अवस्था है, उसमें भारत के लिए एक अवसर आया है, अगर हम इस अवसर का फायदा उठाएं, एक स्वर से, एक ताकत के साथ हम दुनिया के सामने प्रस्तुत हों तो मुझे विश्वास है कि हमारे पूर्वज जो सपना देखकर चले थे, उसको हम पूरा कर सकते हैं।

          आदरणीय अध्यक्ष महोदया, आपने मुझे समय दिया, सदन ने मेरी बात सुनी, इसके लिए मैं आभारी हूं। मैं फिर एक बार आदरणीय राष्ट्रपति जी का हृदय से अभिनन्दन करते हुए अपनी बात को समाप्त करता हूं। धन्यवाद।

 

...(व्यवधान)

माननीय अध्यक्ष: आप लोग बैठ जाइए, कल इस विषय पर बहुत अच्छे से चर्चा हुई है।

...(व्यवधान)

HON. SPEAKER: Hon. Members, a number of amendments have been moved by Members to the Motion of Thanks.  Shall I put all the amendments to the vote of the House together or any Member wants to move a particular amendment separately?

 Shri Mahtab, do you want to press your amendments?

SHRI BHARTRUHARI MAHTAB (CUTTACK):  Yes. I want to press amendment No. 179 relating to the simmering discontent between Chhattisgarh and Odisha regarding Mahanadi.   There is no mention about it by the Prime Minister.  My appeal to the Prime Minister to consider the request from the State of Odisha relating to Mahanadi.… (Interruptions)

HON. SPEAKER:  I shall now put amendment Nos.  179 to 183, 192 to196, 201 to 208 moved by Shri Bhartruhari Mahtab to the vote of the House.

The amendments were put and negatived.

… (Interruptions)

HON. SPEAKER: Shri N.K. Premachandran, are you pressing your amendments?

SHRI N.K. PREMACHANDRAN (KOLLAM):  Yes, Madam.  … (Interruptions)

HON. SPEAKER: I shall now put amendment Nos. 140 to 173 moved by Shri N.K. Premachandran to the vote of the House.

The amendments were put and negatived.

… (Interruptions)

HON. SPEAKER: Shri Jai Prakash Yadav, are you pressing your amendments?

श्री जय प्रकाश नारायण यादव (बाँका) : जी हां, अध्यक्ष जी।...(व्यवधान)

HON. SPEAKER:  I shall now put amendment Nos. 1 to 29 moved by Shri Jai Prakash Yadav to the vote of the House.

The amendments were put and negatived.

… (Interruptions)

माननीय अध्यक्ष : बोलने का समय नहीं मिलेगा। No, I am sorry.

…( व्यवधान)

HON. SPEAKER: Now, Shri Jyotiraditya M. Scindia, do you want to press your amendment?

… (Interruptions)

श्री ज्योतिरादित्य माधवराव सिंधिया (गुना) :  जी हां, मैडम।...(व्यवधान)

HON. SPEAKER: I shall now put amendment No. 381 moved by Shri Jyotiraditya M. Scindia to the vote of the House.

The amendment was put and negatived.

माननीय अध्यक्ष : नहीं,हर कोई नहीं बोलेगा।

…( व्यवधान)

         

13.48 hours (At this stage, Shri Jyotiraditya M. Scindia came and stood  on the floor near the Table.) … (Interruptions)

HON. SPEAKER:  Shri Kodikunnil Suresh, are you pressing your amendments?

… (Interruptions)

SHRI KODIKUNNIL SURESH (MAVELIKKARA):  Yes, Madam.… (Interruptions)

13.48 ½  hours (At this stage, Shri Jyotiraditya M. Scindia  went back to his seat.) … (Interruptions)

HON. SPEAKER:  I shall now put amendment Nos. 382 to 390 moved by Shri Kodikunnil Suresh to the vote of the House.

… (Interruptions)

The amendments were put and negatived.

13.49 hours (At this stage, Shri Jyotiraditya M. Scindia and Shri Mekapati Raja Mohan Reddy  came and stood  on the floor near the Table.)   माननीय अध्यक्ष : बोलते नहीं हैं। अब हो गया न। देखिए, आप शांति से बैठोगे तो मैं सुन पाऊंगी। इस शोर में मुझे कुछ नहीं सुनाई देता। आप बैठते क्यों नहीं हो? सब लोग खड़े हों, ऐसा नहीं होता है। मैं नहीं सुनूंगी।

…( व्यवधान)

 

13.49 ½  hours (At this stage, Shri Jyotiraditya M. Scindia and  Shri Mekapati Raja Mohan Reddy went back to their seats.) … (Interruptions)

माननीय अध्यक्ष : नहीं, शोर में मुझे नहीं सुनना है।

…( व्यवधान)

माननीय अध्यक्ष : मैं हरेक का नाम ले रही हूं। पहले आप अपनी जगह पर जाइए। देखिए, आप शांति से बैठिए। मैं हरेक को पूछ रही हूं, लेकिन आप सब लोग हल्ला कर रहे हैं। मुझे कुछ नहीं समझ में आएगा और इसलिए गड़बड़ हो रही है। It is because of you only.

...(व्यवधान)

माननीय अध्यक्ष : आप शांति से बैठिए। मैं एक-एक का नाम लेकर पूछ रही हूं।

…( व्यवधान)

माननीय अध्यक्ष : ऐसे मुझे कुछ भी समझ में नहीं आयेगा। इसलिए गड़बड़ हो रही है। It is because of you only. मैं शांति से एक-एक का नाम लेकर पूछ रही हूं। It is because of you only it happened.

… (Interruptions)

HON. SPEAKER: Prof. Saugata Roy, are you pressing your amendments?

PROF. SAUGATA ROY: Yes. … (Interruptions)

माननीय अध्यक्ष : अभी बोलने का मौका किसी को नहीं मिलेगा, कल चर्चा हो गयी थी।

…( व्यवधान)

HON. SPEAKER: I shall now put amendment Nos. 174 to 178 moved by Prof. Saugata Roy to the vote of the House.

The amendments were put and negatived माननीय अध्यक्ष : आप सभी बैठिए। आप सभी हल्ला कर रहे हैं। कल्याण जी बैठ जाइए।

…( व्यवधान)

माननीय अध्यक्ष : आप सभी बैठ जाइए, चिल्लाने से कुछ नहीं होगा।

…( व्यवधान)

माननीय अध्यक्ष : राज मोहन रेड्डी जी आप नम्बर बोलिए।

…( व्यवधान)

HON. SPEAKER: Shri Kalyan Banerjee, I cannot hear.

… (Interruptions)

माननीय अध्यक्ष : मैंने आपका नाम नहीं लिया, राज मोहन रेड्डी जी का नाम लिया है।

…( व्यवधान)

माननीय अध्यक्ष : आप प्रोसिजर को समझिए।

…( व्यवधान)

माननीय अध्यक्ष : कल्याण जी आपको क्या हो गया है? एक समर्थ रामदास के शिष्य कल्याण थे, उन्हें याद करें।

…( व्यवधान)

HON. SPEAKER: Shri Mekapati Raja Mohan Reddy, are you pressing your amendment?

… (Interruptions)

SHRI MEKAPATI RAJA MOHAN REDDY (NELLORE): Yes. … (Interruptions)

HON. SPEAKER: I shall now put amendment No. 380 moved by Shri Mekapati Raja Mohan Reddy to the vote of the House.

The amendment was put and negatived.

 

13.52 hours (At this stage, Shri K.C. Venugopal and some other hon. Members came and stood  on the floor near the Table.)   HON. SPEAKER: Shri Rajesh Ranjan, are you pressing your amendments?

SHRI RAJESH RANJAN (MADHEPURA): Yes.

HON. SPEAKER: I shall now put amendment Nos. 30 to 85 and 98 to 115 moved by Shri Rajesh Ranjan to the vote of the House. 

The amendments were put and negatived.

… (Interruptions)

13.53 hours (At this stage, Shri K.C. Venugopal and some other hon. Members went back to their seats.) … (Interruptions)

 

HON. SPEAKER: Shrimati Ranjeet Ranjan, are you pressing your amendments?

SHRIMATI RANJEET RANJAN (SUPAUL): Yes.

HON. SPEAKER: I shall now put amendment Nos. 133 to 142 moved by Shrimati Ranjeet Ranjan to the vote of the House.

The amendments were put and negatived.

… (Interruptions)

 

HON. SPEAKER: I shall now put all the other amendments which have been moved together to the vote of the House.

The amendments were put and negatived.

… (Interruptions)

HON. SPEAKER: I shall now put the Motion of Thanks on the President’s Address to the vote of the House.

The question is:

“That an Address be presented to the President in the following terms:--
 
'That the Members of the Lok Sabha assembled in this Session are deeply grateful to the President for the Address which he has been pleased to deliver to both Houses of Parliament assembled together on January 31, 2017'.”   The motion was adopted.
 
HON. SPEAKER: Now, the House stands adjourned to meet again at 3 o’clock.
 
13.55 hours The Lok Sabha then adjourned till Fifteen of the Clock.
     
15.06 hours The Lok Sabha re-assembled at Six Minutes past Fifteen of the Clock.

(Shri Ramen Deka in the Chair)