State Consumer Disputes Redressal Commission
Kishan Eet Udyog vs Gopi Chand on 22 February, 2022
Cause Title/Judgement-Entry STATE CONSUMER DISPUTES REDRESSAL COMMISSION, UP C-1 Vikrant Khand 1 (Near Shaheed Path), Gomti Nagar Lucknow-226010 First Appeal No. A/2179/2015 ( Date of Filing : 19 Oct 2015 ) (Arisen out of Order Dated 22/12/2014 in Case No. c/63/2014 of District Jyotiba Phule Nagar) 1. Kishan Eet Udyog Amroha ...........Appellant(s) Versus 1. Gopi Chand Amroha ...........Respondent(s) BEFORE: HON'BLE MR. Vikas Saxena PRESIDING MEMBER HON'BLE MRS. DR. ABHA GUPTA MEMBER PRESENT: Dated : 22 Feb 2022 Final Order / Judgement
राज्य उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग , उ0प्र0 , लखनऊ।
(सुरक्षित) अपील सं0 :- 2179 / 20 15 (जिला उपभोक्ता आयोग, अमरोहा द्वारा परिवाद सं0- 63/2014 में पारित निर्णय/आदेश दिनांक 22/12/2014 के विरूद्ध) The Kisan Ett Udyog, through owner Jawed & others Sambhal Road Tikiya, Fatteypur, District-Amroha U.P Present reside of Plot Nosir S/O Sultan Ahamad, Third Floor, Block C-9 Flat Woli New Building, Choudhiran Word No.2 Joya, District-Amroha U.P. Abdul Wahid S/O Shri Abdul Majid, r/O Vil-Fatteypur Mafi P.s Didaula, District Amroaha, U.P. Mujasim Urf. Mukhia S/O Shri Abdul Majid r/o Vil Fatteypur Mafi, P.s Didaula, District Amroha, U.P. ............Appellants Versus Gopi Chand S/O Shri Khachedu R/O Vil. Suthari Kala P.S Saidan Gali, Post Ujhari, Hasan Pur District Amroha U.P. Respondent समक्ष मा0 श्री विकास सक्सेना, सदस्य मा0 डा0 आभा गुप्ता, सदस्य उपस्थिति:
अपीलार्थीगण की ओर से विद्वान अधिवक्ता:-श्री अनिल कुमार मिश्रा, एडवोकेट प्रत्यर्थी की ओर से विद्वान अधिवक्ता:- श्री आर0डी0 क्रांति, एडवोकेट दिनांक:-23.03.2022 माननीय श्री विकास सक्सेना , सदस्य द्वारा उदघोषित निर्णय जिला उपभोक्ता आयोग, अमरोहा द्वारा परिवाद सं0 63/2014, गोपीचन्द बनाम दि किसान ईंट उद्योग व अन्य में पारित निर्णय व आदेश दिनांक 22.12.2014 के विरूद्ध यह अपील प्रस्तुत की गयी है।
प्रस्तुत अपील के साथ अपीलार्थी द्वारा देरी क्षमा किये जाने हेतु प्रार्थना पत्र प्रस्तुत किया गया है, विलम्ब प्रार्थना पत्र के साथ दाखिल शपथ पत्र में उल्लेख किया गया है कि अपीलार्थी को विद्धान जिला उपभोक्ता फोरम द्वारा पारित निर्णय एवं आदेश दिनांक 22.12.2014 की कोई जानकारी नहीं हुई न ही उसने कभी वाद से संबंधित कोई नोटिस प्राप्त हुई है। अपीलार्थी सर्वप्रथम दिनांक 10.10.2015 को जब पुलिस द्वारा वारण्ट की तामील हुई तो उसे जानकारी हुई कि उसके विरूद्ध कोई वाद निश्चित हो गया है तत्पश्चात अपीलार्थी द्वारा जिला उपभोक्ता फोरम के कार्यालय में पत्रावली का अवलोकन किया गया, जिसके द्वारा दिनांक 16.10.2015 को आदेश की सत्य प्रति प्राप्त की गयी तथा दिनांक 17.10.2015 को अपील तैयार की गयी। प्रमाणित प्रति प्राप्त होने के दिनांक से अपील में कोई विलम्ब नहीं है। अत: विलम्ब क्षमा किये जाने योग्य है।
परिवाद पत्र के अनुसार अपीलकर्तागण किसान ईंट उद्योग, सम्भल रोड़ जनपद अमरोहा में ईंट के भट्टे का कार्य संयुक्त रूप से करते हैं। माह जून 2012 में प्रत्यर्थी/परिवादी के पुत्र अनुज के दोस्त पुष्पेन्द्र कुमार के माध्यम से रू0 2,500/- प्रति हजार अव्वल ईंटो की दर से रू0 50,000/- ईंटो के लिए विपक्षीगण के पास जमा कराये थे तथा दिनांक 10.07.2012 को ईंटे देना तय हुआ था। प्रत्यर्थी/परिवादी को अपने मकान बनाने हेतु अतिरिक्त मात्रा में ईंटो की आवश्यकता थी। अत: नियत तिथि से पूर्व दिनांक 08.07.2012 को उक्त पुष्पेन्द्र कुमार के साथ प्रत्यर्थी/परिवादी अपीलार्थीगण के पास गया और अतिरिक्त ईंटो की बात की। अतिरिक्त ईंटो के बावत उसने 2,50,000/- और जमा करा दिये, जिस पर विपक्षीगण/ अपीलार्थीगण ने दिनांक 20.07.2012 को ईंट देने का वादा किया और इस संबंध में रसीद जारी की। इसके उपरान्त परिवादी बार-बार विपक्षीगण के भट्टे पर ईंटो हेतु चक्कर लगाता रहा किन्तु उसे ईंटे नहीं दी गयी। बार-बार कहने पर जब ईंटे नहीं मिली तब यह परिवाद योजित किया गया।
अपीलकर्ता पर नोटिस की तामील पर्याप्त मानी गयी, किन्तु अपीलकर्ता की ओर से परिवादी के स्तर पर जवाबदावा दाखिल नहीं हुआ एवं परिवाद की कार्यवाही एकपक्षीय रूप से अग्रसारित की गयी। अंतत: परिवाद एकपक्षीय रूप से आज्ञप्त करते हुए अपीलार्थीगण को संयुक्त एवं पृथक-पृथक रूप से रू0 3,00,000/- मय 08 प्रतिशत साधारण ब्याज की दर परिवादी को अदायगी किये जाने के आदेश पारित किये गये हैं, जिससे व्यथित होकर यह अपील प्रस्तुत की गयी है।
अपील में मुख्य रूप से यह आधार लिये गये हैं कि विद्धान जिला उपभोक्ता फोरम द्वारा उनके समक्ष प्रस्तुत किये गये साक्ष्य का मूल्यांकन उचित प्रकार से नहीं किया गया है। वास्तव में प्रत्यर्थी/परिवादी द्वारा कोई भी धनराशि जमा नहीं की गयी थी। परिवादी स्वयं अपीलार्थी के यहां मुंशी था। वह ईंटो के खरीद-फरोख्त की देखरेख करता था। उसने ईंटे की आवश्यकता दर्शायी। अपीलार्थी ने उसे ईंटे देने का वादा किया और धनराशि उसके वेतन से काटे जाने के बाद तय होकर उसे ईंटे देने का वादा किया गया था किन्तु परिवादी ने एक व्यक्ति पुष्पेन्द्र कुमार के साथ मिलकर छल द्वारा अपीलार्थी को नुकसान पहुंचाने के नियत से उपरोक्त फर्जी रसीदें तैयार कर ली। अपीलार्थी फर्म द्वारा यह छल पकड़ लिया गया और परिवादी को नौकरी से निकाल दिया गया। इस तथ्य पर विश्वास नहीं किया जा सकता है कि केवल आश्वासन पर परिवादी ने रू0 50,000/- तथा रू0 2,50,000/- एडवांस मे ही दे दिये थे। प्रत्यर्थी ने इस तथ्य को साबित करने के इतने बड़ी धनराशि को दिये जाने के संबंध में कोई उचित साक्ष्य भी प्रस्तुत नहीं किया है, जिसके आधार पर यह विश्वास किया जा सके कि प्रत्यर्थी/परिवादी ने एकदम मिथ्या तथ्य पर परिवाद प्रस्तुत किया है ताकि उसके द्वारा कोई भी धनराशि फर्म को नहीं दी गयी है। प्रत्यर्थी मित्र पुष्पेन्द्र कुमार द्वारा एक झूठे शपथ पत्र परिवादी को लाभ पहुंचाने के नियत से दिये गये हैं। अभिलेखों से स्पष्ट है कि प्रत्यर्थी को अपने मकान बनाने के लिए ईंटे प्राप्त हुए थे। स्वयं प्रत्यर्थी ने ईंटो की बकाया धनराशि फर्म को अदा नहीं की। बकाया धनराशि मांगे जाने पर परिवादी ने गलत प्रकार से पुलिस थाने में प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज करा दी, जो विवेचना पर झूठी पायी गयी और न्यायालय द्वारा भी परिवादी का प्रार्थना पत्र निरस्त कर दिया गया। परिवादी अपीलार्थी फर्म में मुंशी था तथा अपने इस हैसियत से सभी अभिलेख उसके कब्जे में होने पर मनमाने तौर पर अभिलेख में हेराफेरी उसके द्वारा की गयी है एवं झूठी रसीदे तैयार की गयी है, किन्तु फर्म के लेजर से यह स्पष्ट हो जाता है कि प्रत्यर्थी पर ईंटो की धनराशि बकाया है। यह वाद छल एवं फर्जी दस्तावेजों को तैयार करने से संबंध रखता है। अत: परिवाद उपभोक्ता विवाद की श्रेणी में नहीं आता है। अत: परिवाद निरस्त किये जाने एवं अपील स्वीकार किये जाने योग्य है।
अपीलार्थी के विद्धान अधिवक्ता श्री अनिल कुमार मिश्रा तथा प्रत्यर्थी के विद्वान अधिवक्ता श्री आर0डी0क्रांति को विस्तृत रूप से सुना गया। पत्रावली का सम्यक अवलोकन किया गया। तत्पश्चात पीठ के निष्कर्ष निम्न प्रकार से हैं:-
परिवादी का परिवाद प्रश्नगत निर्णय व आदेश में आंशिक रूप से एकपक्षीय रूप से अपीलार्थी के विरूद्ध रू0 3,00,000/- की वसूली हेतु मय वाद व्यय के आज्ञप्त किया गया है। प्रत्यर्थी/परिवादी का कथन है कि अपीलार्थी की ओर से उससे 02 बार में 3,00,000/- रूपये प्राप्त किये गये किन्तु ईंटो की सप्लाई नहीं की गयी। विद्धान जिला उपभोक्ता फोरम ने ईंटो की सप्लाई न किये जाने का तथ्य एकपक्षीय रूप से साबित मानकर यह निर्णय व आज्ञप्ति दी है।
अपीलार्थी/विपक्षीकी ओर से अपने तथ्यों को साबित करने के लिए किसान ईंट उद्योग की रसीदें दिनांकित 08.09.2012, 29.08.2012, 27.08.2012, 1.09.2012 तथा 03.09.2012 प्रस्तुत की गयी है, जिनमें भिन्न-भिन्न धनराशियां प्राप्त की गयी हैं। अपील के साथ प्रस्तुत किये गये दस्तावेज में संलग्नक के रूप में उपरोक्त रसीदों की प्रतिलिपि दी गयी है। इनके अतिरिक्त दिनांक 26.08.2012, 11.02.2013, 21.01.2013 तथा 26.01.2013 को भी विभिन्न धनराशियां रसीद के एवज में प्राप्त करना अंकित है। अपीलकर्ता की ओर से बही खाता की प्रतिलिपि प्रस्तुत की गयी है, जिसमें विभिन्न तिथियों पर गोपी चन्द व अनुज कुमार के द्वारा भिन्न-भिन्न तिथियों पर धनराशियां जमा करना अंकित है। अपील के साथ पृष्ठ 28 पर 02 रसीदें अनुज कुमार के द्वारा ईंट प्राप्त करने की प्रस्तुत की गयी है, जिसमें अनुज कुमार के हस्ताक्षर हैं। उक्त प्रपत्रों के अवलोकन से स्पष्ट होता है कि वह परिवादी गोपी चन्द एवं उसके पुत्र अनुज कुमार द्वारा विभिन्न तिथियों पर धनराशियां अपीलार्थी को प्रदान की गयी। रसीद सं0 9927503136 गोपी चन्द के पुत्र अनुज को ईंटे प्राप्त कराना अंकित है। इसी प्रकार पृष्ठ सं0 30 पर अंकित है कि उक्त रसीद मुंशी जी अर्थात गोपी चन्द को दी गयी बही खाते के पृष्ठ 2 के आरंभ में मुंशी जी पर धनराशि बाकी होने का वर्णन है तथा इस पृष्ठ के अंत में 27,000/- ईंटे मुंशी जी को प्राप्त करने एवं किराया बाकी होने का वर्णन भी है, जिससे स्पष्ट होता है कि दोनों पक्षों के मध्य ईंटो के संबंध में आदान-प्रदान हुआ किन्तु कितनी ईंटो की धनराशि प्रदान की गयी और कितने ईंटे परिवादी गोपी चन्द ने प्राप्त किये। यह परिवाद पत्र में स्पष्ट नहीं है। परिवाद पत्र में सीधे यह कथन किया गया है कि सम्पूर्ण धनराशि अपीलकर्ता ने प्राप्त करके एक भी ईंट नहीं दी। उपरोक्त दस्तावेजों की प्रतियों का कोई सम्यक उत्तर प्रत्यर्थी गोपी चन्द की ओर से नहीं दिया गया है, जिनसे यह स्पष्ट होता है कि उनके द्वारा दी गयी धनराशि के संबंध में 27,000/- या इससे अधिक ईंटे उनके पुत्र अनुज कुमार ने प्राप्त की है।
स्वयं प्रत्यर्थी/परिवादी ने स्वीकार किया है कि उन्होंने कुल 3,00,000/- रूपये ईंटो के बावत दिये थे जो रूपये 2,500/- प्रति हजार ईंट की दर से दिये गये थे। अत: साक्ष्य से यह स्पष्ट होता है कि प्रत्यर्थी/परिवादी द्वारा दिये गये धनराशि के एवज में ईंटे उन्हें प्रदान किये गये हैं किन्तु परिवादी ने एक भी ईंट देने से इंकार किया है। साक्ष्य से स्पष्ट है कि प्रत्यर्थी/परिवादी स्वच्छ हाथों से फोरम के समक्ष नहीं आया है। उसके द्वारा इस तथ्य को छिपाया गया है कि उसके द्वारा दी गयी धनराशि के एवज में उसके पुत्र अनुज कुमार ने ईंटे प्राप्त किये थे, जिनमें से 27,000/- ईंटो को प्राप्त करने का स्पष्ट साक्ष्य अभिलेख पर उपलब्ध है। इस तथ्य को नजरअंदाज करते हुए विद्धान जिला उपभोक्ता फोरम ने परिवादी का परिवाद आज्ञप्त किया है। स्वच्छ हाथों से न आने के कारण वास्तव में परिवाद निरस्त किये जाने योग्य है एवं अपील स्वीकार किये जाने योग्य है।
अपील स्वीकार की जाती है। परिवादी का परिवाद अस्वीकार एवं निरस्त किया जाता है।
उभय पक्ष वाद व्यय स्वयं वहन करेंगे।
आशुलिपिक से अपेक्षा की जाती है कि वह इस निर्णय/आदेश को आयोग की वेबसाइट पर नियमानुसार यथाशीघ्र अपलोड कर दें।
(विकास सक्सेना) (डा0 आभा गुप्ता) संदीप आशु0 कोर्ट 3 [HON'BLE MR. Vikas Saxena] PRESIDING MEMBER [HON'BLE MRS. DR. ABHA GUPTA] MEMBER