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Lok Sabha Debates

Further Discussion On Resolution On Ban On Cow Slaughter Moved By Shri Prahlad ... on 11 March, 2003

16.44 hrs. Title: Further discussion on resolution on ban on cow slaughter moved by Shri Prahlad Singh Patel on 26.7.2002.

श्री प्रहलाद सिंह पटेल (बालाघाट): सभापति महोदय, २६ जुलाई, २००२ को मेरे द्वारा जो संकल्प प्रस्तुत किया गया :

‘इस सभा की यह राय है कि सरकार सम्पूर्ण देश में गौ और गोवंश के वध पर पाबंदी लगाने हेतु एक उपयुक्त विधान लाये।’ …( व्यवधान)
सभापति महोदय : श्री पटेल,क्या इसे वापस ले रहे हैं।
...( व्यवधान)
सभापति महोदय : आप लोग कृपया आसन ग्रहण कीजिये।
...( व्यवधान)
सभापति महोदय : कोई बात रिकार्ड पर नहीं जाएगी।
(Interruptions) …* श्री प्रहलाद सिंह पटेल :सभापति महोदय, मैंने पिछली बार भी आग्रह किया था और सरकार ने अपना पक्ष रखा था। पिछली बार भी इस बात को लेकर मतदान की स्थिति थी।…( व्यवधान)मेरी आपसे प्रार्थना है कि इस संकल्प पर सदन का अभिमत जान लिया जाए। अगर सदन में इस बात पर बहुमत है तो बात खत्म हो जाती है और सदन की कार्यवाही आगे बढ़ाई जा सकती है।…( व्यवधान)
श्री थावरचन्द गेहलोत (शाजापुर): अध्यक्ष महोदय, मेरा पॉइंट ऑफ ऑर्डर है। माननीय सदस्य अपना संकल्प वापस नहीं ले रहे हैं तो वोटिंग के अलावा कोई दूसरा विकल्प हमारे पास नहीं है। …( व्यवधान)
सभापति महोदय : ठीक है। आप बैठिये।
...( व्यवधान)
श्री कीर्ति झा आज़ाद (दरभंगा) : वे वापस नहीं ले रहे हैं।…( व्यवधान)
सभापति महोदय : आपको खड़े होने की ज़रूरत नहीं है। सब नियम-कायदे से होगा।
…( व्यवधान)
* Not Recorded श्री शिवराज वि.पाटील (लातूर) : सभापति महोदय, मैं भी उठकर अपना पॉइंट ऑफ ऑर्डर ही रखने जा रहा हूँ मगर मेरा पॉइंट ऑफ ऑर्डर जरा सा लंबा होगा और मैं उसके लिए आपकी अनुमति चाहूँगा। मेरा पॉइंट ऑफ ऑर्डर है कि यह रिजॉल्यूशन है, बिल नहीं है। …( व्यवधान)
कुमारी उमा भारती (भोपाल) :पहले रूल बताइए।
श्री शिवराज वि.पाटील: मैं रूल नहीं कांस्टीटयूशन बता रहा हूँ। …( व्यवधान)
कुमारी उमा भारती: बिना रूल के कैसे पॉइंट ऑफ ऑर्डर हो सकता है?…( व्यवधान)
श्री शिवराज वि.पाटील: पॉइंट ऑफ ऑर्डर कांस्टीटयूशन के नीचे होता है और कनवैन्शन्स के नीचे होता है। …( व्यवधान)
सभापति महोदय : आप पूछने के हकदार नहीं हैं। कृपा कर आसन ग्रहण कीजिए।
...( व्यवधान)
श्री शिवराज सिंह चौहान (वदिशा): पूछने के हकदार सब हैं। क्यों नहीं हैं?…( व्यवधान)
सभापति महोदय : ४०-५० एम.पी. खड़े होकर बोलेंगे तो कोई बात रिकार्ड पर नहीं जा पाएगी। आप कृपा कर आसन ग्रहण कीजिए।
...( व्यवधान)
श्री कीर्ति झा आज़ाद : आप कहते हैं एक आदमी बोलेगा तो मैं बता देता हूँ।
सभापति महोदय : आप क्या बोलते हैं, मैं ही बता देता हूँ।
...( व्यवधान)
श्री थावरचन्द गेहलोत : महोदय, मैं नियम १८१ के अंतर्गत पॉइंट ऑफ ऑर्डर रेज़ कर रहा हूँ। मैंने पहले पॉइंट ऑफ ऑर्डर रेज़ किया था। आप उनको पहले बोलने का मौका कैसे दे सकते हैं?…( व्यवधान)
सभापति महोदय, नियम १८१ के अन्तर्गत संकल्प के बारे में, मैं पाइंट आफ आर्डर उठा रहा हूं। नियमानुसार जब अनेक विषयों में से किसी एक विषय के अन्तर्गत किसी संकल्प पर चर्चा हो चुकी हो, तो अध्यक्ष संकल्प को विभाजित कर सकेगा और जैसा वह उचित समझे, प्रत्येक विषय मत के लिए अलग-अलग रखेगा। इसलिए अब यह स्टेज पर आ चुका है कि नियम इस पर किसी प्रकार की चर्चा कराने की अनुमति नहीं देता। इसलिए मेरा निवेदन है कि आप इस पर विभाजन की प्रक्रिया प्रारम्भ करें।
सभापति महोदय (Raghuvansh Prasad Singh) : जिन माननीय सदस्य का यह रिजोल्यूशन है, उनसे पूछा गया कि क्या आप वापस लेंगे, जब वे वापस नहीं लेंगे, तो प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। इसलिए आपको इस समय पाइंट आफ आर्डर उठाने की जरूरत नहीं है।
अब, कांग्रेस के श्री शिवराज वि. पाटिल का पाइंट आफ आर्डर क्या है, सुन लीजिए। इस प्रकार से आतुर होने से काम नहीं चलेगा। आप सब लोग कृपया आसन ग्रहण कीजिए।
श्री शिवराज वि.पाटील: चेयरमैन साहब, यह मौका बहुत ही अहम है और आपकी तरफ से जो रूलिंग आएगी, उससे इतिहास बनेगा।
मैं सदन के समक्ष कहना चाहता हूं कि सदन का काम यदि संविधान के अनुसार नहीं चल रहा है, तो पाइंट आफ आर्डर उठाया जाता है, यदि सदन का काम रूल्स के मुताबिक नहीं चल रहा है, तो पाइंट आफ आर्डर उठाया जाता है और यदि हाउस का काम कन्वैंशंस के मुताबिक नहीं चल रहा है, तो भी पाइंट आफ आर्डर उठाया जाता है। जो मैं कहने जा रहा हूं, उसके ऊपर यदि सदन का कोई माननीय सदस्य उठकर अपनी बात कहना चाहे, तो हम सुनने के लिए तैयार रहेंगे और सभापति महोदय, मुझे लगता है कि आपको उन माननीय सदस्य को बोलने के लिए भी अवसर देना चाहिए। हम उनको बोलने से नहीं रोकेंगे।
महोदय, मेरा कहना यह है कि यह रिजोल्यूशन है, बिल नहीं है। बिल नहीं होने और रिजोल्यूशन होने के कारण एक दिक्कत हमारे सामने आ गई है। अगर यह बिल होता, तो बिल इंट्रोडयूज करते समय हम कहते कि बिल पास करने की इस हाउस को लैजिस्लेटिव कंपीटेंस नहीं है। चूंकि यह रिजोल्यूशन है, इसलिए मैं कहना चाहता हूं कि इस सदन को इसे पास करने की कोई काम्पीटेंस नहीं है, कोई अधिकार नहीं है। यह अधिकार क्यों नहीं है, इस बारे में आप अपनी विद्वत्ता के अनुसार जोर देकर आप बता सकते हैं, इसकी मुखालिफत कर सकते हैं, मगर मैं आपको संविधान से पढ़कर बता रहा हूं कि …( व्यवधान)
जो आप कह रहे हैं, मैं उसका भी उत्तर दूंगा।
चेयरमैन साहब, मैं बताना चाहता हूं कि हमारा कांस्टीटयूशन कहता है कि हमारे यहां तीन लिस्टें हैं। पहली यूनियन लिस्ट, दूसरी स्टेट लिस्ट और तीसरी कॉन्करेंट लिस्ट। जो विषय यूनियन लिस्ट में हैं, उन विषयों पर कानून बनाने का पूरा अधिकार सदन को है। इसी प्रकार कॉन्करेंट लिस्ट में जो विषय दिए गए हैं, उनके ऊपर भी कानून बनाने का एडमनिस्ट्रेटिव अधिकार इस सदन को है, लेकिन स्टेट लिस्ट में जो विषय हैं, उनके ऊपर इस सदन को कानून बनाने या एडमनिस्ट्रेटिव आर्डर देने का कोई अधिकार संविधान के अन्तर्गत नहीं दिया गया है।
अब, जब यह सब्जैक्ट आता है और यहां आप कहने जा रहे हैं कि इस सदन को गौहत्या-बन्दी के संबंध में कानून बनाना चाहिए, तो मैं कह रहा हूं कि संविधान के प्रावधानों के अनुसार ऐसा कानून बनाने का अधिकार इस सदन को नहीं है। इस तरह का कानून बनाने का इस सदन को अधिकार तो होना चाहिए, तभी तो हम सदन से कानून बनाने की बात कह सकेंगे।
अगर उस प्रकार का अधिकार नहीं है। …( व्यवधान)आप बीच-बीच में मत बोलिये। आप उसका जवाब जरूर दीजिए। हम चुपचाप सुनेंगे। मैं कह रहा हूं कि जो कनकरैंट लिस्ट है या यूनियन लिस्ट है, उसके अंदर कोई भी यहां से उठकर बताये कि इस एंट्री के मुताबिक सदन को कानून बनाने का या एडमनिस्ट्रेटिव अधिकार जताने का कोई अधिकार है या नहीं ? कोईबतायें, हम सुनने के लिए तैयार हैं। जिसने रेज़ोल्यूशन मूव किया है, वह बताये। हम सुनने के लिए तैयार रहेंगे। मैं बोलने जा रहा हूं कि यहां पर कानून बना है। हमारे देश में …( व्यवधान)
सभापति महोदय : यह कौन सा आर्टिकल है ?
...( व्यवधान)
श्री शिवराज वि.पाटील: मैं कनकरैंट लिस्ट की बात कर रहा हूं। …( व्यवधान)मैं शैडयूल की बात कर रहा हूं। हमारे कांस्टीटयूशन की तीन लिस्ट हैं--यूनियन लिस्ट, कनकरैंट लिस्ट और स्टेट लिस्ट। यहां हमारा कांस्टीटयूशन कहता है कि हम यूनियन लिस्ट के अधिकार में ही कोई कानून बना सकते हैं। अगर यूनियन लिस्ट में नहीं है तो नहीं बनाइये। कनकरैंट लिस्ट में नहीं है तो आप नहीं बना सकते। अगर स्टेट लिस्ट में है तो वह अधिकार स्टेट के लेजिस्लेचर का है। वह इस सदन का अधिकार नहीं है। इसलिए स्टेट ने गौ हत्या बंदी पर कानून बनाया है। स्टेट लिस्ट की एंट्री नम्बर १५ के मुताबिक वह कानून बनाया हुआ है। …( व्यवधान)स्टेट लिस्ट की एंट्री १५ यह कहती है कि…( व्यवधान)
योगी आदित्यनाथ (गोरखपुर) : सभापति महोदय, गो हत्या पर प्रतिबंध लगाने संबंधी विधेयक पर इस सदन में बहस हो चुकी है। …( व्यवधान)उस पर मतदान भी हुआ है। …( व्यवधान)इस संकल्प के माध्यम से उस पर कानून बनाने की मांग हो रही है। इसमें केवल मत विभाजन के और कुछ भी स्वीकार नहीं किया जाना चाहिए। …( व्यवधान)यह केवल सदन का समय बर्बाद करने की कोशिश की जा रही है।…( व्यवधान)
श्री शिवराज वि.पाटील: हम उनकी बात सुनने के लिए तैयार हैं। …( व्यवधान)अगर इस प्रकार से रोका जायेगा और सदन में पार्लियामैंट्री अफेयर मनिस्टर बैठकर उनको नहीं रोक सकते तो हमें बतायें कि यह कैसे होगा। …( व्यवधान)
सभापति महोदय : आप आसन ग्रहण कीजिए। पहले इनको अपनी बात समाप्त करने दीजिए।
...( व्यवधान)
योगी आदित्यनाथ: सभापति जी, इसी सदन में गौ हत्या पर प्रतिबंध लगाने संबंधी विधेयक माननीय श्री गुमान मल लोढ़ा जी द्वारा लाया गया था। उस पर मत विभाजन हुआ था। …( व्यवधान)वह माननीय सदस्य स्पीकर भी रह चुके हैं। …( व्यवधान)
श्री शिवराज वि.पाटील: स्टेट लिस्ट की एंट्री १५ कहती है। …( व्यवधान)
योगी आदित्यनाथ: सभापति जी, अगर सदन में यह संकल्प स्वीकार किया गया है तो इस पर मत विभाजन का अधिकार सदन के पास होना चाहिए। यह केवल सदन के समय को बर्बाद करने का षडयंत्र हो रहा है। इस प्रकार नहीं होने देना चाहिए। …( व्यवधान)
श्री शिवराज वि.पाटील: स्टेट लिस्ट की एंट्री १५ कहती है …( व्यवधान) In the Seventh Schedule of the Constitution, under the State List, Entry No. 15 says:
"Preservation, protection and improvement of stock and prevention of animal diseases; veterinary training and practice."
 

 इस एंट्री के नीचे, सारी स्टेट गवर्नमैंट्स ने, जहां पर हमारी गवर्नमैंट भी थी, कांग्रेस की गवर्नमैंट थी, उन्होंने भी कानून बनाया। मध्य प्रदेश में कानून बना है, महाराष्ट्र में कानून बना है। बहुत सारी स्टेट्स ने इस संबंध में कानून बनाया है। आप बतायें कि यूनियन लिस्ट में या कनकरैंट लिस्ट में कौन सी एंट्री के नीचे यह कानून बनाया जा सकता है। लॉ मनिस्टर आकर बतायें, होम मनिस्टर बतायें या जिन्होंने इस संकल्प को मूव किया है, वह बतायें। जो कुछ बताना है, वह बतायें।…( व्यवधान)इसके बाद भी अगर वह कहते हैं कि यहां बैठकर …( व्यवधान)हम यहां बैठकर इसे पास करें, हम गौ हत्या बंदी के खिलाफ नहीं हैं। इस संबंध में जो कानून बना है, वह हम लोगों ने बनाया है। हमने महाराष्ट्र में कानून बनाया है, राजस्थान में कानून बनाया है, मध्य प्रदेश में कानून बनाया है।…( व्यवधान)

17.00 hrs. …( व्यवधान)श्री खारबेल स्वाइं (बालासोर): सभापति महोदय, रूल १८६ के अंतर्गत मेरा प्वाइंट ऑफ आर्डर है।…( व्यवधान)

सभापति महोदय : पहले इनकी बात सुन ली जाए।

…( व्यवधान)श्री प्रियरंजन दासमुंशी: अगर ऐसा करेंगे तो हम हाउस नहीं चलने देंगे।…( व्यवधान)

सभापति महोदय : कोई बात रिकार्ड में नहीं जाएगी।

...( व्यवधान)...* 17.01 hrs. At this stage Shri Sunderlal Tiwari and some other hon. Member Came and stood on the floor near the Table सभापति महोदय : ये प्वाइंट ऑफ आर्डर पर बोल रहे हैं।

…( व्यवधान)सभापति महोदय : आप अपनी सीट पर जाइए।

…( व्यवधान)17.03 hrs. At this stage Shri Sunderlal Tiwari and some other hon. Member went back to their seat सभापति महोदय : अब कनक्लूड किया जाए।

…( व्यवधान)श्री शिवराज वि.पाटील: ये अगर बाद में बोलना चाहें तो हम चुपचाप सुन लेंगे।

मगर हमें बोलने ही नहीं देंगे, यह बात सही नहीं है और जब हम बोलें तो हमारी बात सुनें और आपको पसन्द नहीं आए तो छोड़ दो।…( व्यवधान)मैं यही बात बोलने जा रहा था कि इस सदन को आज के कांस्टीटयूशन के मुताबिक इस प्रकार का कानून बनाने का अधिकार है या नहीं है, यह पहले देखना चाहिए।

* Not Recorded         अगर वैसा अधिकार नहीं है तो इस कांस्टीटयूशन को पहले बदलकर इस सदन को अधिकार देना पड़ेगा और उसके बाद इस प्रकार का कानून बनाया जा सकता है। हम गौ-हत्या पर प्रतिबंध के फेवर में हैं, इसीलिए हमारी सरकार ने आज नहीं,…( व्यवधान)

SHRI PRIYA RANJAN DASMUNSI : If they continue to behave like this, then we may not be able to co-operate with the Government. What is going on, Sir? … (Interruptions)

सभापति महोदय : सुन लीजिए। यह क्या हो रहा है?

श्री शिवराज वि.पाटील: गौ-हत्या का कानून कांग्रेस पक्ष की सरकारों ने आज नहीं बीस साल के पहले बनाया।…( व्यवधान)महाराष्ट्र में बनाया है, दूसरे प्रांतों में बनाया है मगर वह कानून स्टेट लेजिस्लेचर की तरफ से बना है। अगर इस सदन को कानून बनाना है तो पहले घटना की दुरुस्ती करनी पड़ेगी। उसके बाद कानून बनाया जा सकता है और यह कानून बन भी गया तो वह कानून लागू करने का काम स्टेट गवर्नमेंट को करना पड़ता है और यूनियन गवर्नमेंट की मशीनरी वहां पर नहीं है। इस हालत में यह कानून बनाना और उसको इम्पलीमेंट नहीं करना यह बात भी गलत होगी। इस मुद्दे को आप पोलटिकल मुद्दा बनाकर लोगों की इमोशंस से खेल रहे हैं, यह बात गलत है।…( व्यवधान)आर्टिकल ४८, डाइरेक्ट प्रिंसिपल क्या कहता है, वह भी देखें:

"The State shall endeavour to organise agriculture and animal husbandry on modern and scientific lines and shall, in particular, take steps for preserving and improving the breeds, and prohibiting the slaughter, of cows and calves and other milch and draught cattle."
 

 अगर आपको इस आर्टिकल के नीचे कानून बनाना है तो वह स्टेट गवर्नमेंट को लागू करना पड़ेगा और आइटम नं. १५ के मुताबिक वहां जाकर करना पड़ेगा। मैं कानूनी बात कह रहा हूं। इस सदन के अधिकार की बात कह रहा हूं। काउ-स्लॉटर को रोकने के लिए जो भी करना जरूरी है, वह पहले ही किया है, यह मैं बता रहा हूं। हम उसके खिलाफ नहीं हैं, यह बता रहा हूं। इसके बावजूद भी अगर आप लोग यहां पर इस प्रकार की बात करते हैं और इस हद तक जाते हैं कि किसी सदस्य को भी बोलने नहीं देंगे और रिजोल्यूशन पास कराएंगे तो ऐसे नहीं होगा। इस सदन में भी नहीं होगा और बाहर भी नहीं होगा और आप समझते हैं कि इससे आपका कोई फायदा होने वाला है तो ऐसा नहीं है। एक सदस्य ने बराबर कहा कि नर हत्या हो रही है यहां पर।…( व्यवधान)यह बात ठीक नहीं है। मैं यह बात भी कहता हूं कि लेजिस्लेटिव कम्पीटेंस इस पर नहीं होने की वजह से ऐसा है। मनिस्टर साहब हमें समझाकर बोलें तो हम सुनने के लिए तैयार हैं।…( व्यवधान)

स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री तथा संसदीय कार्य मंत्री (श्रीमती सुषमा स्वराज) : सभापति जी, आदरणीय पाटिल जी ने एक कानूनी मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि यह वधिसम्मत नहीं है और इस सदन को यह अधिकार नहीं है कि वह इसके संबंध में कानून बनाये। हमारे यहां तीन तरह की सूचियां हैं। यूनियन लिस्ट, स्टेट लिस्ट और कन्करेंट लिस्ट। उनका कहना है कि न यह यूनियन लिस्ट का विषय है और न कन्करेंट लिस्ट का विषय है, इसलिए इस सदन को यह अधिकार नहीं है कि वह कानून बनाए। मैं उनके कानूनी चीज का जवाब कानून से ही देना चाहूंगी और यह कहना चाहूंगी कि इस समय प्रहलाद सिंह पटेल जी ने जो चीज यहां रखी है, वह बिल नहीं है। वह प्रस्ताव है और लेजिस्लेटिव कम्पीटेंस का मुद्दा विधेयक के संदर्भ में निश्चित तौर पर उठाया जा सकता है लेकिन प्रस्ताव के माध्यम से केवल भावना ही व्यक्त की जा रही है।

कानून बनाने की बात नहीं की जा रही है। पूरे का पूरा सदन यह भावना केन्द्र सरकार को दे सकता है कि केन्द्र सरकार राज्य सरकारों को यह लिखे।…( व्यवधान) किसी भी विषय पर यह सदन अपनी भावना प्रकट करते हुए केन्द्र सरकार को यह कह सकता है कि केन्द्र सरकार राज्य सरकारों को यह लिखे…( व्यवधान)

SHRI VARKALA RADHAKRISHNAN (CHIRAYINKIL): This Resolution is giving a direction to the Central Government to pass a legislation to ban slaughter of cow.… (Interruptions)

MR. CHAIRMAN : Let her complete her speech.

SHRI VARKALA RADHAKRISHNAN : I may be permitted to say a word on this.

सभापति महोदय : पहले सुन लीजिए इसलिए अब आप आसन ग्रहण करें।

श्रीमती सुषमा स्वराज: इस सदन को यह पूरा-पूरा अधिकार हासिल है कि वह कोई प्रस्ताव पारित करके केन्द्र सरकार को कहे कि इन तमाम भावनाओं को वह राज्य सरकारों को भी लिखे और कहे कि इस तरह के कानून बनाएं। अगर जरूरत है, सदन महसूस करता है, जो लेजिस्लेटिव काम्पीटेस की बात कही है, लेजिस्लेटिव काम्पीटेंस का मुद्दा केवल और केवल बिल के सम्बन्ध में उठाया जा सकता है। प्रस्ताव पारित करने से लेजिस्लेटिव काम्पीटेंस के विषय को रोका नहीं जा सकता। इसलिए यह सदन प्रस्ताव पारित करके केन्द्र सरकार को अपनी भावना का प्रकटीकरण करना चाहता है और कहना चाहता है कि हम केन्द्र सरकार को यह कह रहे हैं कि पूरे सदन की मंशा है या बहुमत की मंशा है कि गोहत्या पर प्रतिबंध लगाओ, वह यह प्रस्ताव पारित कर सकता है। लेजिस्लेटिव काम्पीटेंस के मुद्दे पर किसी प्रस्ताव को पारित करने से नहीं रोका जा सकता। शिवराज पाटिल जी ने जो राय दी है, उस पर यह मेरा जवाब है।…( व्यवधान)

श्री शिवराज वी. पाटिल: जो मंत्री महोदया ने कहा है, उसके बारे में मैं एक मिनट लेना चाहूंगा।…( व्यवधान)

श्री रघुनाथ झा (गोपालगंज): माननीय पाटिल जी ने जिस मुद्दे को उठाया है, संसदीय कार्य मंत्री जी ने भी उससे सहमति व्यक्त की है। लेकिन हम पाटिल जी से जानना चाहते हैं, हम उस समय सदन के सदस्य नहीं थे, लेकिन उस समय गुमान मल लोढा जी सदन के माननीय सदस्य थे। वे इस तरह का प्रस्ताव सदन में लाए थे। उस समय पाटिल जी लोक सभा के अध्यक्ष थे। उस समय यह प्रस्ताव पास हुआ था।…( व्यवधान)

श्री बसुदेव आचार्य (बांकुरा): पास नहीं हुआ था। वापस ले लिया था।…( व्यवधान)

श्री रघुनाथ झा : ठीक है वोटिंग हुई थी और हार गए थे।…( व्यवधान)

श्री चिन्मयानन्द स्वामी (जौनपुर): उस समय हार गए थे, लेकिन आपने यह सब करवाया था।

श्री रघुनाथ झा : राष्ट्रपिता महात्मा गांधी, लोकमान्य तिलक और संत विनोबा भावे जी प्रारम्भ से ही इस बात को कहते रहे हैं कि गोहत्या पर प्रतिबंध लगना चाहिए। राज्य सरकार के मुख्य मंत्री श्री दिग्विजय सिंह…( व्यवधान)

श्री शिवराज वी. पाटिल: संसदीय कार्य मंत्री जी ने जो कहा है, मैंने बहुत ध्यान से सुना है। मैं उनकी सराहना करता हूं कि उन्होंने इसमें से सही रास्ता निकालने के लिए सुझाव दिए। मगर मेरे ख्याल से संसदीय कार्य मंत्री जी ने यह रिजोलुशन पढ़ा नहीं है इसलिए उनको गलतफहमी है। मैं उन्हें रिजोलुशन पढ़ कर बताता हूं। उसके बाद आप बताएं कि वह जो कह रही हैं वह लागू होता है या नही। रिजोलुशन यह है कि, "This House is of the opinion that the Government should bring forward a suitable legislation to ban slaughter of cow and its progeny throughout the country. "

 
 It is not asking for a direction to the Government. It is asking for a suitable legislation to ban slaughter of cow and its progeny throughout the country.
मंत्री महोदया ने जो कहा है, उनके एक-एक शब्द से मैं सहमत हूं, लेकिन अगर सरकार को डायरेक्शन देने के बारे में जो बात है, वह सही है, लेकिन यह रिजोलुशन है, यह लेजिस्लेचर बनाने के लिए है।
इसलिए इसको अपनाना होता है। जहां तक आपने सवाल किया, वह कौनसी बात थी, मुझे याद नहीं है, आपको याद होगी।…( व्यवधान)
श्री चिन्मयानन्द स्वामी :उस समय माननीय शिवराज पाटिल जी, आप स्पीकर थे। आप दसवीं लोक सभा की कार्यवाही मंगाकर देख लीजिए। आपकी अध्यक्षता में वह प्रस्ताव पारित हुआ था।…( व्यवधान)
श्री शिवराज वी.पाटील: मुझे याद नहीं है। उसके बारे में मैं भाषण नहीं करुंगा, मैं स्पष्ट बात करुंगा।…( व्यवधान) Do not shout at me. Please mind your language. …( व्यवधान)
जैसी गलती आपसे हुई है, वैसी गलती मेरी तरफ से नहीं होनी चाहिए।…( व्यवधान)सवाल आज का है। अगर पहले कोई गलती मैंने की हुई है तो वह गलती आप भी करेंगे।…( व्यवधान)आप हमें बोलने नहीं दे रहे हैं।…( व्यवधान)हम भी आपको बोलने नहीं देंगे।…( व्यवधान)आप बाहर लोगों को डरा रहे हैं और यहां हमें डरा रहे हैं, हम डरने वाले नहीं हैं।…( व्यवधान)आप हमें डराने की कोशिश न करें, हमारा मुंह बंद करने की कोशिश न करें।…( व्यवधान)आप आरग्यु करना चाहते हैं तो हम सुनने के लिए तैयार हैं। मैं सभापति जी से निवेदन करुंगा कि आपको बोलने दीजिए।…( व्यवधान)अगर हमें कहीं गलती दिखाई देगी तो हम आपका जवाब देंगें, नहीं तो चुप बैठ जाएंगे।…( व्यवधान)लेकिन डरेंगे नहीं।…( व्यवधान)आपसे कौन डरता है।…( व्यवधान)
SHRI VARKALA RADHAKRISHNAN (CHIRAYINKIL): Sir, I want to speak. Please give me also a chance to speak. … (Interruptions)
श्री प्रियरंजन दासमुंशी: हम लोग डरते नहीं हैं…( व्यवधान)हमको डराना नहीं,…( व्यवधान)हम डरने वाले नहीं हैं।…( व्यवधान)
श्री थावरचन्द गेहलोत : सभापति जी, मेरा पाइंट ऑफ आर्डर है। सभापति जी, अनुच्छेद १७१ के अंतर्गत …( व्यवधान)इस संकल्प को सहमति दी गयी, उस पर चर्चा हुई।…( व्यवधान)मैं कहना चाहता हूं कि समवर्ती सूची जो है…( व्यवधान)आप एक मिनट सुनिये।…( व्यवधान)क्रमांक १७ पर लिखा है कि " पशुओं के प्रति क्रूरता के निवारण संबंधी कानून बनाने का अधिकार संसद को है।"यह समवर्ती सूची के क्रमांक १७ में है। इसके बाद १७(ख) में लिखा है कि " वन्यजीव-जंतुओं और पक्षियों का संरक्षण करने संबंधी कानून बनाने का अधिकार है। " यह क्रमांक १७(ख) पर लिखा है। आदरणीय शिवराज जी, आप समवर्ती सूची का क्रमांक १७ पढ़ लें, आप अध्यक्ष भी रह चुके हैं।…( व्यवधान)
यह जो संकल्प है, यह राजसूचक है। इसलिए अध्यक्ष जी ने उसके ऊपर अनुमति दी है।…( व्यवधान)
श्री प्रहलाद सिंह पटेल :सभापति जी, मैंने जब संकल्प प्रस्तुत किया…( व्यवधान)मैं आपसे निवेदन करना चाहता हूं कि जब मैं इस सभा का सदस्य था…( व्यवधान)मेरा निवेदन है कि माननीय शिवराज जी पाटिल ने अपनी बात यहां रखी है, अब आप मेरी बात भी सुन लें। मेरा कहना है कि जिस समय मैं पहली बार संसद सदस्य बना था, गुमान मल लोढ़ा जी भी इस सदन के सदस्य थे।
मैं भी उसमें अपना पक्ष रखने वाला व्यक्ति था। मैंने एनिमल एनर्जी से संबंधित विषय पर अपनी बात रखी थी। श्रद्धेय उमा जी यहां मौजूद हैं। ये भी उस समय एक वक्ता थीं। माननीय श्री पाटिल जी हमारे लिए आदरणीय हैं, वे उपाध्यक्ष हुआ करते थे। मेरा निवेदन है, आज जिस बात पर विवाद चल रहा है, यह बात सही है कि पाटिल जी ने उस पक्ष से बात कही है और मैं इस पक्ष से बात कह रहा हूं। वास्तव में यह विशुद्ध दलीय भावना है और उसके कारण हम अपनी परिभाषा को बदलने के आदी हो गए हैं। यदि आपको लगता है कि राजनीतिक लाभ लेने के लिए मैंने यह प्रयास किया है, तो आप मेरा भाषण उठाकर देखिए। मैंने उस भाषण में ऐसा कुछ नहीं कहा है। जैसा आदरणीय सुषमा जी ने कहा है और अगर आपको लग रहा है कि मैं सरकार पर दबाव डाल रहा हूं, तो मैं संशोधन प्रस्तुत करता हूं और आप भाषा बदल दीजिए। लेकिन यह कहना गलत है कि यह संकल्प पारित नहीं हो सकता है और इस सदन को यह अधिकार नहीं है, जबकि गौ संवर्धन आयोग इसी सरकार ने बनाया है। हम जानते हैं कि कन्करैंन्ट लिस्ट क्या है और हम संविधान की भावनाओं का आदर करते हैं। आप जब उपाध्यक्ष थे, तो आपकी उपस्थिति में उस समय मतदान हुआ था। मैंने उस समय एनिमल एनर्जी से संबंधित विषय पर अपना भाषण दिया था और मैंने साफ बात कही थी। मेरे आराधय पूज्य बाबाश्री हैं, उन्होंने कहा था कि मेरा यह संकल्प कोरा संकल्प नहीं है। उस संकल्प में विकल्प अगर मानूंगा, तो महान कार्य रुक जाएगा। एक अवसर आया है, आपसे निवेदन है कि इसको राजनीति से न जोड़ें। जहां तक सवाल है, जैसा आप कह रहे हैं कि आप इतने वरिष्ट नेता हैं, तो आप मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री जी से पूछिए कि उन्होंने माननीय प्रधान मंत्री, श्री अटल जी को पत्र क्यों लिखा। हम दलीय भावना के कारण नीचे स्तर पर आ गए हैं। हम सदन में तो बहुत बड़ी-बड़ी बातें कहते हैं, लेकिन क्या हमने उसका पालन किया है। क्या अटल जी को गोमांस खाने वाला नहीं कहा गया…( व्यवधान)मैंने ऐसी बात नहीं कही है, जिससे किसी को ठेस पहुंचे। मुझे लगता है कि अब और बहस में नहीं पड़ना चाहिए।
सभापति महोदय : नियम के बारे में बताइए, भाषण मत करिए।
श्री प्रहलाद सिंह पटेल : मैं कहना चाहता हूं कि मेरे संकल्प में अगर कोई ऐसा पक्ष है, जिसके कारण हमारे किसी मित्र को आपत्ति होती है, तो मैं आदरणीय सुषमा जी के प्रस्ताव को स्वीकार करता हूं और उसमें संशोधन करने के लिए तैयार हूं। लेकिन यह कहना कि यह संकल्प पास नहीं हो सकता है, ऐसा नियम में नहीं है। …( व्यवधान)महोदय, मेरा आपसे प्रार्थना है कि इस प्रस्ताव में अगर कोई संशोधन है, तो मैं उसको मानने के तैयार हूं। अन्यथा इस प्रक्रिया को आगे न बढ़ाते हुए, इस संकल्प पर मत कराइए। यही मेरी आपसे प्रार्थना है।
SHRI VARKALA RADHAKRISHNAN : Sir, this Resolution is equivalent to a Bill because the House is asking for an encroachment on the power of the State. … (Interruptions) We are asking the Central Government to encroach upon the powers of the State. … (Interruptions) This is purely within the exclusive power of the State. The State alone can pass a Bill like that. This House has no competence to pass such a Bill. … (Interruptions)
श्री प्रकाश मणि त्रिपाठी (देवरिया) :महोदय, अब आप अपनी रुलिंग दीजिए।…( व्यवधान)
गृह मंत्रालय में राज्य मंत्री (श्री ईश्वर दयाल स्वामी) : महोदय, आदरणीय पाटिल जी और सुषमा जी को सुनने के बाद सदन इस नतीजे पर पहुंचेगा कि यह एक रिजोल्युशन है, अमेंडमेंट की जरूरत पड़े या नहीं पड़े, कन्करैन्ट लिस्ट है, इन सब बातों को छोड़कर बात को आगे बढ़ाते हुए, जब इस विषय में बिल पेश होगा, तब लीगल जुरिस्डिक्शन या कान्स्टीचूशन की बात आएगी। आज रिजोल्युशन के पास होने के वक्त कोई जुरिस्डिक्शन, कोई संविधान का प्रोवीजन आड़े नहीं आता है। The question of jurisdiction is raised at the stage of introduction of the Bill. The question of constitutional jurisdiction is specially taken care of at that time, but not at the time of passing a Resolution. … (Interruptions)
SHRI RUPCHAND PAL (HOOGLY): This is an encroachment on the rights of the State. … (Interruptions)
SHRI TARIT BARAN TOPDAR (BARRACKPORE): This House does not endorse it. … (Interruptions)
श्री कीर्ति झा आज़ाद : महोदय, आपने दोनों पक्षों को सुन लिया है। अब आप निर्णय दीजिए। …( व्यवधान)
कुमारी उमा भारती : महोदय, नियम संख्या १८१ के मुताबिक सदन में किसी भी संकल्प पर मत विभाजन हो सकता है।
नियम १८३ में लिखा है कि " प्रस्ताव पारित होने के बाद संबंधित विभाग के मंत्री को चाहिए कि उस प्रस्ताव की एक कापी माननीय सदस्य को भेज दे" नियम १८१ और १८३ के मुताबिक प्रस्ताव लाया जाता है और पास किया जाता है। माननीय शिवराज पाटिल इस सदन के माननीय सदस्य हैं। मैं व्यक्तिगत तौर पर उनका बहुत आदर करती हूं। बहुत अच्छा हुआ कि उन्होंने एक बात आज यहां स्पष्ट कर दी कि इस मामले में उनकी राय यह है कि केन्द्र को कानून बनाने का अधिकार नहीं है। मैं उनसे निवेदन करूंगी कि वह अपनी इस राय से मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री को अवगत करा दें क्योंकि वह लगातार श्री अटल बिहारी वाजपेयी को चिट्ठी लिख रहे हैं। उनसे कहा जाए कि संविधान पढ़ा करें। मध्य प्रदेश की युवक कांग्रेस की अध्यक्षा ने एक सर्कुलर भेजा है जिस में लिखा है " अटल बिहारी वाजपेयी गाय को कटवाता है और गऊ का मांस खाता है" ऐसी राजनीति बंद होनी चाहिए। मेरा निवेदन है कि श्री प्रहलाद सिंह पटेल के प्रस्ताव पर मत विभाजन होना चाहिए। …( व्यवधान)रिकॉर्ड देख लिया जाए। मेरे पास इसका सबूत है। इसकी जांच करायी जाए।…( व्यवधान)
SHRI PRIYA RANJAN DASMUNSI : Sir, I strongly contradict this. The Leader of the House, the Prime Minister, is adorned by everybody irrespective of the political differences. No such accusation has ever been made against the hon. Prime Minister from any quarter. The Member is quoting from a document manufactured by the BJP. … (Interruptions)
कुमारी उमा भारती: सभापति महोदय, नियम १८१ और १८३ के मुताबिक सदन के प्रस्ताव पर मत विभाजन होता है। इसलिए इस पर मत विभाजन कराया जाए। श्री प्रहलाद सिंह पटेल किसी कीमत पर इस प्रस्ताव को वापस नहीं लेंगे। इस प्रस्ताव पर मत विभाजन होगा। मेरा निवेदन है कि इस प्रस्ताव पर मत विभाजन होने दीजिए।…( व्यवधान)आपकी इस संबंध में जो राय है, उसे यहां व्यक्त करिए। आप एक चिट्ठी दिग्विजय सिंह जी को लिख दीजिए कि वह संविधान पढ़ा करें और गऊ माता के नाम पर राजनीति न करें। अच्छा हुआ, आपने बता दिया कि यह केन्द्र का विषय नहीं है, यह राज्य का विषय है। …( व्यवधान)
श्री शिवराज वि.पाटील (लातूर) : सभापति महोदय, मैं आखिरी बार अपनी बात कह कर बैठ जाऊंगा।…( व्यवधान)
श्री शिवराज सिंह चौहान (वदिशा): सभापति महोदय, इसी सदन में इसी विषय पर १९९० में वोटिंग हुई है। इसलिए मत विभाजन कराइए। …( व्यवधान)
श्री बसुदेव आचार्य :सभापति महोदय, मेरा व्यवस्था का प्रश्न है। …( व्यवधान)
SHRI VARKALA RADHAKRISHNAN : Do not kill the federal structure of our Constitution.… (Interruptions)
DR. RAM CHANDRA DOME (BIRBHUM): Sir, it encroaches on the authority of the State Governments. This is a violation of our Constitution.… (Interruptions)
SHRI PRIYA RANJAN DASMUNSI : Sir, I am on a point of order.… (Interruptions)
SHRI PRAKASH PARANJPE (THANE): Sir, I am also on a point of order. … (Interruptions)
डॉ.विजय कुमार मल्होत्रा (दक्षिण दिल्ली): सभापति महोदय, यदि यह प्रस्ताव इल्लिगल होता, योग्य नहीं होता तो इसे स्वीकार नहीं किया जाता। स्पीकर साहब ने इसे ऐक्सेप्ट कर लिया और इस पर डिसकशन हो गया। डिसकशन के बाद यह कहना कि अभी राय प्रकट कर रहे हैं कि क्या करना चाहिए?…( व्यवधान)जब बिल बनेगा, उस समय संविधान में संशोधन भी हो सकता है, स्टेट सबजैक्ट कनक्रैंट भी बन सकता है। दस बातें और हो सकती हैं। यदि विरोध करना है तो सीधा विरोध करें और लीगल सवाल न उठाएं। हम मांग करते हैं कि इस पर डविजन कराइए।
श्री प्रहलाद सिंह पटेल : सभापति महोदय, इसी सदन में पहले भी इसी विषय पर वोटिंग हो चुकी है। इसलिये हम डिमांड करते हैं कि वोटिंग कराई जाये।…( व्यवधान)
श्री शिवराज वि.पाटील: सभापति महोदय, मैं आपको बताना चाहता हूं कि यदि हमने विरोध करना होता तो ऐसा नहीं हो रहा होता…( व्यवधान)जब मैं महाराष्ट्र में लॉ मनिस्टर था, उस समय इस प्रकार का बिल पास किया गया था…( व्यवधान)यह मेरे समय में हुआ था। जहां तक श्री वाजपेयी का सवाल है, हम उनका आदर करते हैं। अगर उनके बारे में किसी ने कुछ कहा है तो उसे नहीं कहना चाहिये…( व्यवधान)उसी प्रकार मैं उधर के लोगों से भी कहूंगा कि अगर वे अपने मुंह से ऐसा शब्दों का उच्चारण न करते, इधर से ऐसा कोई नहीं बोलता।…( व्यवधान)
श्री प्रियरंजन दासमुंशी: सभापति महोदय, यदि बी.जे.पी. ने गौ रक्षण किया होता तो कोई…( व्यवधान)
श्री बसुदेव आचार्य :सभापति महोदय, मेरा व्यवस्था का प्रश्न है…( व्यवधान)
श्री लाल मुनी चौबे (बक्सर) : सभापति जी, मेरा पांइट ऑफ ऑर्डर है…( व्यवधान)
सभापति महोदय : आप लोगों के खड़े होने का कोई लाभ नहीं। जब माननीय सदस्य नियम के अंतर्गत सवाल उठा रहे हैं तो उसे देख लेने में क्या हर्ज है? आप लोग कृपया बैठिये।
...( व्यवधान)
सभापति महोदय : आप लोग आसन ग्रहण कीजिये।
श्री प्रियरंजन दासमुंशी : सभापति महोदय, संविधान के ऑर्टिकल ४८ में कहा गया है जिसका जिक्र श्री शिवराज पाटील जी ने भी किया है। इसके पीछे माननीय मंत्री जी बहुत कुछ जवाब दे चुके हैं This very Minister had replied to a question on this issue last week.… (Interruptions)
सभापति महोदय : पटेल जी, आप बैठिये। आपका रिज़ोल्यूशन है।
श्री लाल मुनी चौबे : सभापति जी, अभी पाटील जी ने बताया कि पांइट ऑफ ऑर्डर कब-कब उठाया जाता है। पांइट ऑफ ऑर्डर का मौका देकर नहीं बोलते हैं। मेरा आपसे निवेदन है कि पांइट ऑफ ऑर्डर के लिये मेरी समझ में सा कौन ऐसा तरीका है जिसे पाटील साहब ने रखा कि कब-कब पाइंट ऑफ ऑर्डर रखा जाता है…( व्यवधान) हम सुनने के लिय तैयार नहीं हैं।
सभापति महोदय : आप कृपया आसन ग्रहण कीजिये।
श्री लाल मुनी चौबे: सभापति महोदय, ऐसा नहीं होगा। ऐसे हाउस नहीं चलेगा कि किसी के पाइंट ऑफ ऑर्डर को सुना और किसी के पांइट ऑफ ऑर्डर को नहीं सुना…( व्यवधान)
श्री प्रियरंजन दासमुंशी: सभापति महोदय, संविधान के आर्टिकल ४८ के अनुसार पूरे हिन्दुस्तान में नार्थ ईस्टर्न स्टेट्स को छोड़कर…( व्यवधान)
श्री लाल मुनी चौबे: सभापति महोदय, मैं पांइट ऑफ ऑर्डर उठा रहा हूं और ये बार-बार कहते जा रहे हैं…( व्यवधान)
SHRI PRIYA RANJAN DASMUNSI : According to article 48 of the Constitution, in the whole of India, excepting Northeastern States and partial ban in West Bengal, there is a ban on cow slaughter by the State Legislature.… (Interruptions) From day one to this date, the Central Government did not interfere in the affairs of the State. Today, to humiliate the Christians of the Northeastern States, you know better why the Government has brought it.
I want to ask the Home Minister who is accountable for the unity of the country. Many State Legislatures have passed similar acts except the North-Eastern States.… (Interruptions). Why are they doing it? It is against the powers of the State as per the State List.… (Interruptions) I want an answer from the Minister. It is absolutely wrong. It is against the sovereign power of the State Legislatures. It is also against the desire of the people of the country.… (Interruptions). Sir, all those States, which have a particular religious community called Christians, have not implemented it.… (Interruptions) Let him consult the Chief Minister of Nagaland, Shri Rio whether he would give his consent to the Home Minister for this action… (Interruptions). Let him come out clearly. They are beating about the bush. आज तक सेन्ट्रल लॉ मनिस्ट्री से इस संबंध में स्टेट लेजिस्लेचर्स को कोई निर्देश नहीं गया।
All the States have passed such an Act except the North-Eastern States and West Bengal. Why are they doing it today?
श्री लाल मुनी चौबे: सभापति जी, मेरा पॉइंट ऑफ ऑर्डर सुन लिया जाए। …( व्यवधान)
सभापति महोदय : आप बैठ जाइए। दासमुंशी जी, अपनी बात खत्म कीजिए।
...( व्यवधान)
श्री लाल मुनी चौबे: सभापति जी, मेरा पॉइंट ऑफ ऑर्डर सुन लीजिए।…( व्यवधान)
सभापति महोदय : कुछ बताने की जरूरत नहीं है। मैं सब पॉइंट ऑफ ऑर्डर समझ गया।
...( व्यवधान)
SHRI PRIYA RANJAN DASMUNSI : I want to know from the Minister whether he has consulted the Chief Minister of Nagaland, Shri Rio.… (Interruptions). I would like to know whether the rights given to the State Legislatures as per the State List will be taken away by Parliament. That is our point.… (Interruptions) Sir, they are trying to usurp the powers of the State Legislatures of North-Eastern States by this back door method. You should understand their designs… (Interruptions) Sir, I want to know why the Members from DMK and TDP are not present… (Interruptions).
श्री श्रीप्रकाश जायसवाल (कानपुर) : महोदय, मैं एक निवेदन करना चाहता हूँ।…( व्यवधान)
सभापति महोदय : नहीं नहीं, आपकी बात रिकार्ड में नहीं जाएगी।
(Interruptions) …* श्रीमती सुषमा स्वराज : सभापति जी, एक मिनट मेरी बात सुन ली जाए।…( व्यवधान)
SHRI RUPCHAND PAL : This is a clear encroachment upon the rights of States. The timing of this Resolution is to communalise the Indian society further and exploit the situation for electoral purposes. I want to know whether they have taken the views of the NDA partners or not.… (Interruptions). This is the BJP agenda.… (Interruptions) We cannot allow the Central Government to encroach upon the rights of the State Legislatures. This is the RSS agenda to divide the Indian society on communal lines. They want to use the issue of cow slaughter for electoral purposes.… (Interruptions)
SHRI PRIYA RANJAN DASMUNSI : Sir, the States like Maharashtra, Uttar Pradesh, Bihar, etc. are already having such acts… (Interruptions)
श्रीमती सुषमा स्वराज : सभापति जी, इस प्रस्ताव के संबंध में कुछ तकनीकी मुद्दे उठाए जा रहे हैं। मैं आपसे कहना चाहती हूँ कि आप इस समय पीठ पर आसीन हैं। …( व्यवधान)एक मिनट बैठिये रूपचंद जी। …( व्यवधान)सभापति जी, मैं बहुत विनम्रता से निवेदन करना चाहती हूँ कि …( व्यवधान)
* Not Recorded     सभापति महोदय : शांति रखिये। आप आसन ग्रहण कीजिए।
…( व्यवधान)
श्रीमती सुषमा स्वराज : सभापति जी, इस प्रस्ताव के संबंध में कुछ तकनीकी मुद्दे उठाए जा रहे हैं। इस समय आप पीठासीन हैं। श्री शिवराज वि. पाटील अध्यक्ष के रूप में पीठासीन रह चुके हैं। कार्य सूची में जब कोई विषय लगाया जाता है, तो वह सभी कसौटियों पर जांचा जाता है और खरा उतरने पर ही वह विषय कार्य-सूची में आता है। जिस दिन यह विषय कार्य-सूची में लगा था, उस दिन अध्यक्ष महोदय ने सभी कसौटियों पर इसकी जांच की थी और जांच के उपरान्त सही पाए जाने पर ही यह उस दिन बहस के लिए आया। इस पर चर्चा समाप्त हो चुकी है। जो विषय कार्य-सूची में लग गया, चर्चा समाप्त हो गई और अब उस पर केवल मत-विभाजन शेष है, इस समय उस पर कोई प्रश्न नहीं उठाया जा सकता है। इसलिए नियमानुसार मेरा आपसे आग्रह है कि इस पर मत-विभाजन का आदेश देने की कृपा करें।…( व्यवधान)
SHRI PRIYA RANJAN DASMUNSI : Sir, the Government cannot interfere in the Private Members’ Business. The Government cannot give a direction in this regard… (Interruptions) It is a Private Members’ Resolution… (Interruptions) The Government cannot give a direction on an issue that relates to the Private Members’ Business… (Interruptions) It is the discretion of the private Members… (Interruptions) How can the Parliamentary Affairs Minister give the direction to the Chair for a Division… (Interruptions) She cannot do that… (Interruptions) She has no authority to give direction in a matter that relates to the private Members… (Interruptions)
सभापति महोदय : आप शोर मत कीजिए। रूलिंग सुन लीजिए। कृपया शान्ति बनाए रखें।
...( व्यवधान)
SHRI N.N. KRISHNADAS (PALGHAT): How can the hon. Parliamentary Affairs Minister give direction when she is not even a Member of this House… (Interruptions) She cannot ask for a Division on this Resolution… (Interruptions)
It is not a Government business… (Interruptions) When it is not a Government business, how can the Parliamentary Affairs Minister ask for a Division?… (Interruptions) She is not a Member of this House… (Interruptions)
सभापति महोदय : इस पर बहस हो चुकी है।
...( व्यवधान)
SHRIMATI SUSHMA SWARAJ: I have only asked for a decision from the Chair and have not asked for a Division… (Interruptions)
सभापति महोदय : अब रूलिंग का समय है। आप रूलिंग सुन लें।
...( व्यवधान)
SHRI PRIYA RANJAN DASMUNSI: Sir, how can a Member of the Rajya Sabha give her views on a private Members’ Business of the Lok Sabha… (Interruptions) It is not a Government business… (Interruptions) It is a private Members’ Business… (Interruptions) Sir, Shrimati Sushma Swaraj belongs to the other House… (Interruptions) Sir, I want your ruling on this. Can a Member of the Rajya Sabha take part in the proceedings of the Private Members’ Business of the Lok Sabha… (Interruptions) It is not a Government business… (Interruptions)
सभापति महोदय : अब रूलिंग का समय है। आप रूलिंग सुन लीजिए।
...( व्यवधान)
SHRI PRIYA RANJAN DASMUNSI : How can a Member of the Rajya Sabha intervene in a private Members’ Business of the Lok Sabha… (Interruptions)
SHRIMATI SUSHMA SWARAJ: I only asked for a decision from the Chair… (Interruptions)
श्री प्रियरंजन दासमुंशी: सभापति जी, बहस तो हो चुकी है, लेकिन मैं एक दूसरी बात आपके ध्यान में लाना चाहता हूं। एक बात तो जो श्री शिवराज वि. पाटिल जी ने कही, वह सही है। दूसरी बात मैं यह कहना चाहता हूं कि मंत्री जी बहस का जवाब नहीं दे सकते हैं। …( व्यवधान)
लेकिन मंत्री प्राइवेट मैम्बर्स बिजनेस में भाग नहीं ले सकते।…( व्यवधान)
सभापति महोदय : इस पर बहस हो चुकी है, डिवीजन को नहीं रोका जा सकता।
17.45 hrs. At this stage Shri E. Ahmed and some other hon. Member came and stood on the floor near the Table सभापति महोदय : आप लोग अपनी सीट पर वापस जाइये। हमने उनकी बात सुनी और आपकी बात भी सुनी। हमने इस पक्ष को भी सुना और उस पक्ष को भी सुना, सारा कानून देखा। अब बहस तो हो चुकी है। आप लोग अपनी सीट पर वापस जाइये।
...( व्यवधान)
सभापति महोदय : हमने यहां सब बातें सुनी हैं। कृपा कर अपनी सीट पर जाइये, अपना आसन ग्रहण कीजिए। हमने दोनों पक्षों की सारी बातें सुनी हैं और तब रूलिंग दी है।
...( व्यवधान)
सभापति महोदय : आप लोग अपनी सीट पर जाइये, सदन की कार्यवाही में बाधा मत डालिये। कृपा कर अपने आसन पर जाइये।
...( व्यवधान)
सभापति महोदय : आप अपनी-अपनी सीट पर जाइये।
...( व्यवधान)
सभापति महोदय : कृपया कर आप अपना-अपना आसन ग्रहण कीजिए।
...( व्यवधान)
सभापति महोदय : आप सब अपनी-अपनी सीट पर वापिस जाइये।
...( व्यवधान)
सभापति महोदय : यह उचित नहीं है। आप अपनी-अपनी सीट पर जाइये।
...( व्यवधान)
18.00 hrs. सभापति महोदय : कृपा करके आप सब माननीय सदस्य अपनी सीट पर वापस जाएं।
…( व्यवधान)
सभापति महोदय : हमने कानून पढ़ा है और आप लोगों को भी सुना है।
…( व्यवधान)
सभापति महोदय : रूलिंग हो गई थी। आप लोग अपनी सीट पर जाइए।
…( व्यवधान)
सभापति महोदय : अब सदन घोर अव्यवस्था की स्थिति में है। सदस्य वापस नहीं जा रहे हैं। घोर अव्यवस्था की स्थिति में सदन की कार्यवाही कल तक के लिए स्थगित की जाती है।

18.03 hrs. The Lok Sabha then adjourned till Eleven of the clock on Wednesday, 12th March 2003/Phalguna 20, 1924 (Saka) _________________