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Lok Sabha Debates

Further Discussion On The Resolution Regarding Implementation Of The ... on 19 December, 2014

Sixteenth Loksabha an> Title: Further discussion on the resolution regarding implemtnation of the recommendations of the National Commission on Farmers also know as “Swaminathan Commission’ to overcome the crisis in the agricultural sector (Resolution withdrawn).

HON. DEPUTY SPEAKER: Now, we take up Item No.26, further discussion on Resolution regarding implementation of the recommendations of the National Commission on Farmers.

श्री शरद त्रिपाठी (संत कबीर नगर): उपाध्यक्ष महोदय,आपने मुझे बोलने का मौका दिया,इसके लिए मैं आपका आभारी हूं।

       महोदय,जब भी कृषि पर चर्चा होती है तो मुझे एक कवि की कुछ पंक्तियां याद आती हैं। उस कवि ने किसानों को गांव का देवता कहा था। इस देश की अर्थव्यवस्था भी किसान आधारित है। आंकड़ों के आधार पर हो सकता है कि कृषि का बहुत योगदान न हो,लेकिन अर्थव्यवस्था का आधार कृषि जरूर है। इसीलिए उस कवि ने कहा है-हे ग्राम देवता नमस्कार,सोने-चांदी से नहीं,किंतु मिट्टी से तुमने किया प्यार। हे ग्राम देवता नमस्कार। गांव के किसानों का देवता के रूप में चित्रण हमारे कवियों ने पहले से ही किया है।

16.22 hrs                            (Shri Konakalla Narayana Rao in the Chair)           भारत कृषि प्रधान देश सदियों से रहा है और यह पीड़ा के साथ कहना पड़ता है कि आज भी किसान दुर्दशा का शिकार है। आजादी के बाद अर्थव्यवस्था में कृषि की भागीदारी 66 परसेंट थी,लेकिन आज पीड़ा होती है कि विकास की इतनी योजनाओं के बावजूद भी कृषि की भागीदारी घटकर केवल 13.7 प्रतिशत पर आ कर टिक गयी है। यह बहुत चिन्तनीय है।

          अधिष्ठाता महोदय,मैं प्रधानमंत्री जी को और कृषि मंत्री जी को बधाई देना चाहूंगा कि उन्होंने किसानों की पीड़ा को समझा है। यदि किसानों की पीड़ा को हमारे प्रधानमंत्री जी ने नहीं समझा होता तो जो किसान आंदोलन के नायक कहे जाते थे,सरदार वल्लभ भाई पटेल जो भारत के गृह मंत्री भी रहे हैं,जिन्होंने किसानों की समस्याओं को लेकर बारदोलोई आंदोलन का नेतृत्व भी किया था। जिसके बाद उनको सरदार की उपाधि दी गयी थी,जो किसानों ने दी थी। हमारे प्रधानमंत्री जी ने दलीय भावना से ऊपर उठकर,देश भावना के आधार पर,किसानों की भावना के आधार पर सरदार वल्लभ भाई पटेल को सम्मानित करने का कार्य किया और पूरे विश्व में सबसे बड़ी स्टेच्यू लगायी जाएगी। उन्होंने इस कार्य का श्रीगणेश कर दिया है। इससे किसानों की भावनाओं का सम्मान किया है।

          जहां तक भारत के ऋषि और कृषि की बात है,इस संबंध में कहना चाहता हूं कि स्वामीनाथन जी भी अच्छे कृषि वैज्ञानिक रहे हैं। भारत में कृषि वैज्ञानिक सदियों से रहा करते थे। आज विज्ञान का युग है। आज विज्ञान के आधार पर उन्हें वैज्ञानिक कह दिया जाता है। पहले जब देश में ऋषि परम्परा थी,तब भी हमारे ऋषि कृषि के आविष्कारक के रूप में थे।

महोदय,मैं उत्तर प्रदेश से आता हूं। उत्तर प्रदेश में घाघ एक बहुत लोक कवि हुआ करते थे। मैं आपको बताना चाहूंगा घाघ सैंकड़ो वर्ष पहले नक्षत्रों के आधार पर किसानों के लिए जो भविष्यवाणी करके गए,आज भी वह भविष्यवाणी 90 परसेट सच साबित हो रही है। आज किसान दुर्दशा का शिकार है। आज देश में 30 परसेंट धान की खेती होने के बावजूद किसानों के पास उसे सूखाने का कोई आधुनिक तरीका नहीं है। सब्जी की फसल होने के बाद उन्हें स्टोर करने की,संरक्षित करने की कोई व्यवस्था आज भी उनके पास कोई व्यवस्था नहीं है। यह एक बहुत बड़ा विषय है कि देश की आज़ादी के इतने वर्षों के बाद भी आज अपनी दुर्दशा पर रो रहा है। मैं अपने कृषि मंत्री जी को बधाई देना चाहूंगा कि स्वामीनाथन कमेटी की सिफारिशों के आधार पर उन्होंने बहुत पहले से ही काम शुरू कर दिया है। जब से हमारी सरकार आयी है,हमारे कृषि मंत्री जी हमारे आदरणीय प्रधान मंत्री जी से प्रेरणा लेकर प्रधान मंत्री ग्रामीण सड़क योजना की ही तरह राष्ट्रीय सिंचाई आयोग की आधारशिला रख चुके हैं और उस पर अपना काम शुरू कर चुके हैं। हमें उम्मीद है कि इसी सत्र में या अगले सत्र में वह योजना मूर्त्त रूप में आ जाएगी,जिस पर स्वामीनाथन कमेटी की रिपोर्ट में चिंता जताई गयी थी।

          आज हम हमेशा किसानों की बात करते हैं। अभी महिला किसानों के सशक्तीकरण की बात आयी है। आज सबेरे इस विषय पर एक सवाल किसी माननीय सदस्य ने पूछा था। जब मैंने उसके आंकड़े देखे तो मुझे बहुत पीड़ा हुई। मैं उत्तर प्रदेश से आता हूं। उत्तर प्रदेश से महिला किसानों के सशक्तीकरण के लिए जो प्रस्ताव बन कर आए हैं,वे मात्र दस प्रस्ताव ही हैं। यह बहुत पीड़ा के साथ कहना पड़ रहा है कि उत्तर प्रदेश इस देश की सबसे बड़ी आबादी वाला प्रदेश है,सर्वाधिक किसान उत्तर प्रदेश में रहते हैं और वहां से महिला सशक्तीकरण के आधार पर जो परियोजना बनायी गयी हैं,वे मात्र दस हैं। मैं तमिलनाडु सरकार को धन्यवाद देता हूं कि छोटा प्रदेश होने के बावजूद भी उन्होंने ऐसी 73 परियोजनाएं भेजी हैं।

          हमारे प्रधान मंत्री जी ने किसानों के हित के लिए प्रधान मंत्री जन धन योजना का श्रीगणेश किया है। इस योजना के अन्तर्गत गांवों में बैठा हुआ गरीब किसान बैंक में अपना खाता खुलवा सकता है। क्रेडिट की भागीदारी कृषि में बहुत कम थी। मैं कहना चाहूंगा कि हमारी सरकार ने आज क्रेडिट कंपनियों की भागीदारी ग्रामीण स्तर पर गरीब किसानों के लिए प्रधान मंत्री जन धन योजना के अंतर्गत शुरू किया है।

          महोदय,मैं एक बहुत महत्वपूर्ण बात कहना चाहूंगा। मैं संत कबीर नगर संसदीय क्षेत्र से आता हूं। वहां पर हमारा एक विकास खण्ड खलीलाबाद है। वहां पर कार्बन डेटिंग के आधार पर कृषि तकनीक के प्रमाण मिले हैं। वहां लहुरादेवा एक ऐसा स्थान है,जो पूरे विश्व में चीन के बाद दूसरा ऐसा स्थान है,जहां कार्बन डेटिंग के आधार पर कृषि की वैज्ञानिकता के प्रमाण मिले हैं। वह आठ हजार वर्ष पुराना है। मैं उसी क्षेत्र से आता हूं।

          इसलिए मैं आपके माध्यम से अपने माननीय कृषि मंत्री जी से अनुरोध करना चाहूंगा कि हमारे उसी खलीलाबाद विकास खण्ड के अन्तर्गत चोकहर एक गांव है। उसमें सौ बीघा ज़मीन आज भी पड़ी है। वहां के सारे लोग किसान हैं। वे गन्ना की खेती करते हैं और वहां की पूरी अर्थव्यवस्था कृषि पर आधारित है। मैं आपके माध्यम से माननीय कृषि मंत्री जी से निवेदन करना चाहूंगा कि वहां पर एक तकनीकी प्रशिक्षण केन्द्र की स्थापना करें,जिससे वहां के किसानों को और सशक्त बनाया जा सके।

 

श्रीमती अनुप्रिया पटेल (मिर्ज़ापुर): सभापति महोदय, स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशें लागू होना नःसंदेह इस देश के किसानों के हित में है और ये लागू होनी चाहिए। लेकिन, इसके साथ-साथ हमें एक बात को जरूर से याद रखने की जरूरत है कि पूरे देश के तमाम राज्यों में किसानों की जो स्थिति है, वह एक जैसी नहीं है। इसलिए वन-साइज़-फिक्स-ऑल वाली नीति नहीं अपनायी जा सकती है। साथ ही, एक बहुत अहम सवाल है, जिस पर आज पूरे सदन को एक स्पष्ट नज़रिया अपनाने की जरूरत है कि आखिर इस देश में किसान है कौन? किसान की परिभाषा क्या है? क्योंकि जो मूलतः इस देश के किसान हुआ करते हैं, वे एक वक्त में बड़ी-बड़ी ज़मीनों के मालिक हुआ करते थे, भूपति हुआ करते थे। लेकिन, गुज़रते हुए वक्त के साथ-साथ पीढ़ी-दर-पीढ़ी जब वही बड़ी-बड़ी ज़मीनों का बंटवारा हुआ तो आज बंटते-बंटते उन ज़मीनों के बहुत छोटे-छोटे टुकड़े हो चुके हैं। जो एक वक्त बड़ा ज़मींदार, बड़ा भूपति हुआ करता था, वह आज एक खेतिहर और खेतिहर से बदल कर अपने ही ज़मीन के छोटे-से टुकड़े में काम करने वाला एक मज़दूर बन चुका है। यह इस देश के किसानों की परिस्थिति है। उस ज़मीन का टुकड़ा इतना छोटा है कि उस से पैदा होने वाली उपज से वह अपने परिवार का पेट नहीं पाल सकता है। यह किसान की सबसे बड़ी दुविधा है। इसके ऊपर भी एक और विडम्बना यह है कि केन्द्र और राज्य की तमाम सरकारों द्वारा कृषि को लाभान्वित करने के लिए जो योजनाएं-परियोजनाएं चलायीं जा रही हैं, उनमें से 75औ योजनाएं भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ चुकी हैं। यहां मैं सोन नहर परियोजना का उदाहरण देना चाहती हूं, जिसमें वर्ल्ड बैंक से भी बहुत सारे पैसे मिले, लेकिन वे सब भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गए।

अगर यह योजना सफल होती तो उत्तर प्रदेश,मध्य प्रदेश,बिहार और झारखंड के चार राज्यों के किसानों को फायदा मिलता। लेकिन यह योजना पूरे तरीके से भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ चुकी है। किसानों की पहली समस्या यह है कि उनकी जमीन का टुकड़ा इतना छोटा है कि उससे पैदा होने वाली उपज में वे अपने परिवार का पेट नहीं पाल सकते। दूसरी समस्या यह है कि जितनी भी योजनाएं,परियोजनाएं हैं,उनका लाभ उन तक नहीं पहुंचता। तीसरी सबसे बड़ी चुनौती किसानों के सामने यह है कि हमारे देश की तमाम सरकारें आजादी के बाद से किसानों को अगर कुछ देने का काम कर रही हैं तो वह प्रक्योरमेंट प्राइस है। लेकिन हकीकत यह है कि हमारे देश के किसानों को प्रक्योरमेंट प्राइस की आवश्यकता नहीं है,उन्हें लागत मूल्य,प्रोडक्शन कास्ट की जरूरत है। प्रोडक्शन कास्ट देने के बारे में कोई भी सरकार विचार नहीं करती है। अगर किसान के ऊपर कोई आपदा आ जाए,बाढ़,सूखे,एवं वर्षा में उसकी फसल बर्बाद हो जाए तो सरकारें किसानों को मुआवजा देने का काम करती हैं,उस मुआवजे को देने का भी कोई क्राइटीरिया नहीं है। लेकिन अगर किसानों को प्रोडक्शन कास्ट दे दी जाए तो शायद हमारा जो किसान सूखे या बाढ़ जैसी आपदाओं की स्थिति में फसल के बर्बाद होने के बाद आत्महत्या करने के लिए मजबूर है,तो हमारा किसान आत्महत्या करने के लिए मजबूर नहीं होगा। इसलिए आज हमारी संसद कृषि को उद्योग का दर्जा देने पर विचार करे। किसान को उसकी प्रोडक्शन कास्ट मिलनी चाहिए और जैसा हम मैनस्ट्रीम उद्योग को बढ़ावा देते हैं,उद्योगों को जैसा प्रोत्साहन मिलता है,वैसा ही कृषि को मिलना चाहिए। आज अगर बिजली देने की बात आती है तो तमाम सरकारों का यही नज़रिया होता है कि बिजली पहले उद्योगों को दी जाए,बाद में खेती के लिए दी जाए। अगर हम ठीक से याद करें तो 80 और 90 के दशक में कृषि आधारित ऐसे तमाम उद्योग थे। महाराष्ट्र,उत्तर प्रदेश और बिहार में कॉटन,शुगर और जूट मिलें थी। ये मिलें 80 और 90 के दशक में थीं,लेकिन आज लगभग ये सब चौपट हो चुकी हैं,बर्बाद हो चुकी हैं। सरकार द्वारा जैसा प्रोत्साहन मैनस्ट्रीम उद्योग को दिया जाता है,वैसा कृषि आधारित उद्योगों को नहीं दिया गया। यह जरूरी है कि कृषि को उद्योग की तरह बढ़ावा मिलना चाहिए,कृषि को उद्योग का दर्जा मिलना चाहिए।

          सभापति महोदय,मैं आपके माध्यम से सरकार को आज चेताना चाहती हूं कि कृषि को उद्योग का दर्जा न मिलने से,किसानों को उनकी प्रोडक्शन कास्ट न मिलने से,जिन तमाम समस्याओं का मैंने उल्लेख किया,उनका समाधान न होने से आज देश में एक ऐसी विकट समस्या पैदा हुई है। एक ऐसी परम्परा विकसित होती जा रही है कि जो भी हमारे छोटे-छोटे किसान हैं,जिनके पास जमीनों के बहुत छोटे-छोटे टुकड़े बचे हैं,उनका काम उसमें नहीं चलता,उनका पेट उसमें नहीं भरता,इसलिए अब वे अपने इन छोटे-छोटे जमीन के टुकड़ों को बड़े पूंजीपतियों को बेच कर शहरों की तरफ पलायन कर रहे हैं। आज किसान बदल चुका है,जो पूंजीपती हैं,वे छोटे-छोटे किसानों की जमीनों के टुकड़े को खरीद रहे हैं। सौ-दो सौ,पांच सौ बीघा की बड़ी-बड़ी जमीनें उनके पास आ चुकी हैं। कृषि के लिए सरकार द्वारा जितनी भी योजनाएं बन रही हैं,जो मूल रूप से किसान भारत का हुआ करते थे,उनको उनका लाभ नहीं मिल रहा है,बल्कि बड़े-बड़े पूंजीपतियों को मिल रहा है। यह इस देश के लिए शुभ संकेत नहीं है।

          इसलिए मैं इस सदन से और सदन के माध्यम से सरकार से यही अपील करती हूं कि किसानों की जो समस्याएं हैं,उनको संज्ञान में लेते हुए इन तमाम समस्याओं का समाधान करने के बारे में गंभीरता से विचार करें। स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों को लागू करें और यह जरूर तय करें कि इस देश का असली किसान कौन है और सरकार द्वारा दी जाने वाली तमाम सुविधाओं का लाभ कैसे उन तक पहुंचे। बहुत-बहुत धन्यवाद।

                                                                                                             

 16.34 hrs SHRI VINCENT H. PALA (SHILLONG): Thank you, Mr. Chairman Sir, for giving me an opportunity to speak on this issue.  First of all, I would like to congratulate my colleague, Shri Raju Shetti for moving this Resolution.  It is a very good Resolution.  I had the opportunity to work a little bit with Dr. Swaminathan when I was the Minister of Water Resources.  I could see what kind of a scientist he is and with what dedication he is serving the country.

          Dr. Swaminathan submitted five reports till October, 2006.  There are mainly 10 findings in those reports.  Out of those 10 findings, I would like to touch upon only two-three issues.  The first one is related to land reforms.  It is a very important issue.  I suggest that for the cause of farmers, agriculture should be brought under the Concurrent List. 

          Secondly, there are certain areas where land is shrinking.  More and more land has become idle due to mining and industry.  As a result, the agricultural land has become less.  We should give proper incentive to farmers so that they can reclaim their land which has been lost.

          A lot of land has been lost in my State Meghalaya because of coal mining and other activities.  I would like to request the Government to provide better incentives to the farmers to reclaim their land. There must be an announcement from the Central Government for a special package because when the mining was done the Government gained a lot of royalty.  This royalty should also be shared with the farmers to reclaim their lands. 

          Irrigation is also an area of concern. It should be properly done.  In hilly areas, if it rains heavily, within a short period of time the whole water goes back to the plains.  I suggest that there should be a recharge of aquifer.  Once the aquifer is recharged and check dams are built, then the rain water can be utilised for irrigation. 

          I would like to say certain things about bio resources.  In hilly areas, especially in the North East, there are a lot of forests enriched with medicinal plants. I want to suggest that the Government should encourage export of medicinal plants.  They should encourage farmers to cultivate not only rice, maize and wheat but also rich forest medicinal plants. In that way, we can produce medicines out of these plants and farmers will not go through a lot of tensions. 

          The MSP should also be increased by 50 per cent of the average cost of production. If we do that, it will generate a lot of employment opportunities. As agriculture is the major sector which gives employment to the people, we should look forward to encourage the farmers.  It is possible only if the Central Government pushes a lot of funds with the help of the State Government in this sector. 

          The other thing I would like to suggest is with regard to the credit insurance which we are giving to farmers. Farmers must be given credit cards.  Their crops will be damaged because of adverse climatic conditions.  A proper insurance cover should be there for their crops.  It is necessary because if anything of this kind happens, they will not suffer any loss. This will help them to survive. 

          These are a few things which I would like to raise here.  With these words, I support this Resolution.  I think, the Government will take these things seriously and implement them. Thank you, Sir.

                                              

श्री लक्ष्मी नारायण यादव (सागर): महोदय,मैं भाई राजू शेट्टी जी को इस बात के लिए धन्यवाद दूँगा कि उन्होंने इस देश के 60 प्रतिशत से ज्यादा लोग जिस काम में लगे हुए हैं और जो उनकी आजीविका का साधन है,उनके विषय को लाकर,उस पर चर्चा का अवसर सदन को प्रदान कराया है।

महोदय,अभी हमारे पूर्व वक्ता बोल रहे थे कि कम से कम लागत का  50 परसेन्ट वृद्धि कर किसान को मिलना चाहिए। स्वामीनाथन जी ने पाँच वॉल्यूम में अपनी जो रिपोर्ट दी है,वह सर्वाधिक वैज्ञानिक तथ्यों पर आधारित है। उसके आधार पर अगर हम लोग यहाँ काम करना शुरू कर दें,यह सरकार उसे पूर्णतया स्वीकार करके लागू कर दे तो मेरा अपना मानना यह है कि इस देश का का सबसे ज्यादा विकास सम्भव होगा। हम देखते हैं कि आज की तारीख में अगर कोई वर्ग सबसे अधिक विपन्न स्थिति में है तो वह इस देश का किसान है। किसान के सामने इतनी समस्याएं हैं,मैं खुद किसान हूँ,इसलिए मैं जानता हूँ और मैं ग्रामीण क्षेत्र से आता हूँ। हम लोग सब तरफ देखते हैं कि उनकी स्थिति में आज तक कोई परिवर्तन नहीं आया है। उनकी वही स्थिति है और खास तौर से मैं जिस बुन्देलखण्ड से आता हूँ,वहाँ के किसानों की स्थिति तो यह है कि वहाँ पर आज भी शायद ही कोई ऐसा सौभाग्यशाली किसान हो,जो अपना पक्का घर भी बनवा पाया हो। यह बात सही है। अभी जैसा अनुप्रिया जी बोल रही थी कि उनकी लैंड होल्डिंग और कम होती जा रही है एवं उनकी परिस्थितियां और जटिल होती जा रही हैं।

          सभापति महोदय,हम सभी इस तथ्य को स्वीकार करते हैं कि किसान को उसकी लागत का वास्तविक मूल्य नहीं मिलता है,जो उसे मिलना चाहिए। उसका सॉल्यूशन स्वामीनाथन साहब ने दिया है कि किसान की लागत मूल्य पर कम से कम 50 प्रतिशत वृद्धि करके उन्हें देना चाहिए। उसी आधार पर एम.एस.पी. निर्धारित होना चाहिए।

          सभापति महोदय,मैं उनकी एक और सिफारिश की ओर आपका ध्यान आकर्षित कराना चाहता हूं। मूलतः किसान जैसे-तैसे अपनी जीविका चलाते रहते हैं। जब उनके ऊपर कोई आपदा आती है,कोई विपत्ति आती है,चाहे वह जलवायु के कारण आयी हो या किसी कारण से आई हो,जब उनके सामने वह समस्या आती है,तब उनकी स्थिति बहुत ही दयनीय हो जाती है। हम सबको उन परिस्थितियों में सरकार के सामने,कलैक्टर के सामने और मंत्री के सामने खड़े होकर विनती करना पड़ता है कि उनको बचाओ,वे भूख से मरने की स्थिति में आ गए हैं। ओला गिर जाए,पाला पड़ जाए,अतिवृष्टि हो जाए या कमवृष्टि हो,हर बार वह सरकार की और याचक की तरह देखते हैं। हम लोगों की यह जिम्मेदारी है कि उनकी समस्याओं का निराकरण करें। यह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है कि जो इस देश का अन्न दाता है,वह छोटी-सी आपदा आने पर भी भिखारी की स्थिति में पहुंच जाता है। उसके लिए उपाय स्वामीनाथन साहब ने सुझाए हैं। उसके लिए एक बहुत अच्छा उपाय यह हो सकता है कि हम "कृषि बीमा योजना "को सुदृढ़ करें,उसको व्यवहारिक करें। आज की तारीख में कृषि बीमा योजना बहुत अव्यावहारिक है। वह किसान हितैषी नहीं है। मैं आपको बताता हूं कि किसानों से बीमा के लिए जो राशि इंस्टॉल्मेन्ट के रूप में बैंक्स दो-तीन साल में लेती है और जब उन पर विपत्ति आती है तो उनको उतनी राशि भी नहीं मिलती है। ...(व्यवधान)

          मैं आपसे प्रार्थना करता हूं कि सरकार उसको पूरा देखे। मैं दो-तीन सजैशंस देना चाहता हूं। वर्तमान बीमा योजना में सबसे बड़ी कमी यह है कि आपदा निर्धारण की इकाई क्या है। कई जगह पटवारी हल्का है,कई जगह ग्राम सभा है,इस प्रकार से वह बहुत ही विसंगतिपूर्ण है। मैं अपने प्रदेश के बारे में बताता हूं कि हमारे यहां उन्होंने पटवारी को हल्का यूनिट माना है। ...(व्यवधान)सदन यह समझे कि खेती पर जो विपत्ति आती है,वास्तव में वह पूरे एरिया में या पूरे गांव में नहीं आती है। हमारे यहां पिछले साल भारी मात्रा में ओला पड़ा। कई किसान ऐसे थे जिनके आधे खेत में ओला पड़ा और आधा खेत सुरक्षित रह गया। अब हम यह कहें कि जब पूरे गांव में ओला पड़ेगा तभी उन्हें बीमा दिया जाएगा,यह ठीक नहीं है। मैं आपसे कहना चाहता हूं कि उसके लिए यूनिट खेत होना चाहिए,खसरा होना चाहिए।...(व्यवधान)

   

SHRI MULLAPPALLY RAMCHANDRAN (VADAKARA): Hon. Chairperson, Sir, I would like to express my profound gratitude for giving me an opportunity to take part in the important discussion on the Resolution for the implementation of Swaminathan Commission recommendations to overcome the crisis in the agricultural sector.

          The Swaminathan Commission Report is a landmark Report in the agricultural development of our country. We all know that agriculture is the mainstay of the people of India and it is the backbone of our economy.  Around 70 per cent of our population depends upon agriculture for their livelihood directly or indirectly.  The committed and hardworking farmers of our country, in fact, have transformed this country into a self-reliant nation. 

We may recall that at the time of our Independence, our population was around 36 crore and we were undergoing abject poverty and want.  It was in the year 1943, just four years before our Independence our country had undergone the great famine, that is, the Bengal famine.   We all know that Prof. Amartya Sen had said that millions of people perished for want of food in that Bengal famine.  That was the condition at the time of our Independence.

          Now, Sir, can we imagine that our country has scaled bigger heights; and India is now one of the world’s top producers of wheat, rice, fruits and vegetables?

          Our country was able to enact the Food Security Act, thanks to Madam Sonia Gandhi and Dr. Manmohan Singh for ensuring food security to all sections of society including the disadvantaged and marginalised people of society.  This shows the resilience of our agricultural economy.

          It was in the Sixties that we started the strenuous journey from ‘ship to mouth’ to ‘food security to all’. The Green Revolution brought about in the Sixties, was a great leap forward in attaining self-sufficiency in food production. The  then Prime Minister, Shrimati Indira Gandhi, the then Food and Agriculture Minister, Shri C. Subramaniam and  also Dr. M.S.  Swaminathan, were the  guiding spirits behind this Green Revolution.  I am happy that Dr. Swaminathan has come out with Reports on the agricultural development of this country and the sustainable development of agriculture in the country.

          It was intended to enhance productivity, profitability and sustainability of our major farming systems in different agro-climatic regions of this country.  It aims towards attracting and retaining educated youngsters in the farming; and it also aims at  working out a comprehensive plan for food strategy and   food security.

          Sir, Dr. Swaminathan Commission recommends that Agriculture should be included in the Concurrent List of the Constitution of India. It is a very good suggestion. I welcome it. 

          Now, I would also like to focus on a couple of vital issues regarding problems being faced by the farmers of our country.  The credit crunch being faced by the farmers is a major problem.  So, my suggestion is that  the credit facilities must be ensured to the farmers through public sector banks at a low rate of interest.  Secondly, the Government of India also should, in fact, alert the State Governments  so that the State Governments alert the cooperative banks spread across the country asking them to give loans to the farmers at a very low rate of interest.  This would be one way by which we can boost agricultural production in the country. Wherever required, moratorium on the loans taken by the farmers for agricultural activities, should be declared.

          Sir, horticulture is an area, which plays an important role for the economy of our country. So, a greater amount of attention is to be paid to this sector.  This sector comprises wide array of crops from fruits and vegetables to nuts, spices, medicinal plants, flowers and plantation crops.    It provides many opportunities for income-generation. Globally, India is the second largest producer of fruits and vegetables. India is also the largest producer of mango, banana, coconut, cashew, papaya, pomegranate, etc. India is also the largest producer and exporter of spices.

          But it is sad to note that some of the agricultural produce, which we are exporting to various countries, are rejected by many countries because of the high presence  of pesticides, insecticides there.   Therefore, Sir, it is to be taken into account that we should not send such agricultural produce abroad. Otherwise, it would be bringing a bad name to our entire nation.

          Coming to the question of seeds, good seeds must be provided to the farmers at reduced rates.  What is the most important critical ingredient for agriculture?  It is water.  Every drop of water is important.  Therefore, drip irrigation system is to be encouraged. It is a well-known fact that in India,  the water table is receding every year. So, rainwater harvesting is to be encouraged on the line of what Tamil Nadu is doing. Tamil Nadu is doing exceeding well in regard to rainwater harvesting. I specially compliment the then Tamil Nadu Chief Minister, Dr. Jayalalitha for taking such innovative steps.

          Sir, crop insurance is also very important. So, crop insurance scheme is to be implemented.  The Minimum Support Price for the farmers should also be given.       I do not want to take much of the time of the House.    I am happy that the hon. Minister has said that the dairy development is being brought under the MGNREGA.  It is a very good   step.

          Lastly, Sir, in spite of all these progress and development, there is an alarming trend across the country that millions of hectares of agricultural land are being indiscriminately converted and being used for non-agricultural purposes and commercial activities.  In the last decade alone, more than 2.57 million hectares of land have been converted on account of urbanisation, industrialisation, infrastructural growth and other developmental works.   Unless we stem this trend, it would be very dangerous and disastrous for the growth of this country.

          With these few words, I conclude. Thank you very much for giving this opportunity.

                                                                                                      

श्री जय प्रकाश नारायण यादव (बाँका) :  महोदय, अतिमहत्वपूर्ण विषय पर चर्चा हो रही है, इम्पलिमिन्टेशन ऑफ द रिकोमेन्डेशन ऑफ दि नेशनल कमीशन ऑफ फार्मस, स्वामीनाथन कमेटी ने जो रिपोर्ट दी उस रिपोर्ट के आधार पर किसानों के हितों की रक्षा होनी चाहिए। किसान असंगठित है, हम सब बचपन से पढ़ते आए हैं कि भारत की आत्मा खेत, खलिहानों और किसानों के महल में बसता है। इस देश में कई महान किसान नेता हुए। बिहार में स्वामी सहजानन्द सरस्वती हुए, बडे किसान नेता रहे, दर-दर की ठोकरें खाते रहे, असंगठित किसानों को संगठित करते रहे। किसानों को आगे बढ़ाना चाहिए।

          आज देश में चौधरी चरण सिंह जी को सभी जानते हैं, चौधरी चरण सिंह जी यही कहा करते थे कि देश की समृद्धि का रास्ता देश की खुशहाली का रास्ता किसानों के खेत और खलिहानों से होकर गुजरता है। इस देश को समृद्ध बनाना है, भारत  को समृद्ध बनाना है, जब किसान खुशहाल होगा, तभी हमारी खेती बेहतर होगी। आज तकनीकी रूप से किसानों को सहयोग नहीं किया जा रहा है, मौसम का मिजाज भी बिगड़ा हुआ है, जलवायु का मिजाज भी बिगड़ा हुआ है, हम अच्छी सिंचाई का प्रबंध नहीं कर पाते हैं, अच्छे बीज का प्रबंध नहीं कर पाते हैं। हम नारा तो लगाते हैं रोटी कपड़ा और मकान मांग रहा है हिन्दुस्तान। किसान जब खुशहाल होगा तभी रोटी मिलेगी, तभी कपड़ा मिलेगा, तभी मकान मिलेगा। इसलिए आज खेत सूखा है और इंसान भूखा है।  खेत  में अगर सिंचाई का प्रबंध होगा, तभी हरियाली आएगी, तभी खुशहाली आएगी, तभी पेट की भूख मिटेगी, तभी गरीबी मिटेगी। यह नारा दिया गया कि जो जमीन को जोते-बोए, वही खेत का मालिक होए। जो खेती करता है वही खेत का मालिक हो सकता है। आज हम इससे अलग पड़े हुए हैं।

          प्रकृति के साथ भी छेड़छाड़ हो रही है। प्रकृति ने अपने मिजाज को बदला है। इसलिए किसानों के लिए जीवन बीमा होना चाहिए। राज्य अनुदान को काटा गया है। बिहार में 85 परसेंट लोग खेती पर निर्भर करते हैं। देश में कई जगह आत्महत्याएं हो रही हैं। महाराष्ट्र में कर रहे हैं, गुजरात में कर रहे हैं और उनका पलायन हो रहा है। आज दलहन, तिलहन, रबी, खरीब या मक्का हो, इन चीजों को बेहतर तरीके से कैसे उत्पादन कर सकते हैं। लिफ्ट इरिगेशन की व्यवस्था हो, सिंचाई कूप की व्यवस्था हो।

          पहले कहा जाता था कि किसान जमींदार है, किसान अब जमींदार नहीं है, वह केवल सीमांत किसान है, वह खेतिहर मजदूर है। आज उद्योगपति जमींदार हो गए हैं। यह बहुत ही खतरनाक स्थिति है। सरकार को विचार करना चाहिए कि बड़े-बड़े उद्योगपति दस हजार एकड़, बारह हजार एकड़, पन्द्रह हजार एकड़, अच्छी जमीन खरीद कर रख देता है, घेराबंदी कर देता है। हम पेट से भूखे हैं, हमें पानी नहीं, खेती नहीं। हमें खेती की उपज का उचित मूल्य मिलना चाहिए, जीवन बीमा होना चाहिए। इसके साथ साथ कम समय में अनाज के उत्पादन वाली बीज का प्रबंध होना चाहिए। चाहे फल हो, फूल हो, सब्जी हो, हमें इसके लिए बेहतर इंतजाम करना चाहिए। स्वामीनाथन साहब की रिपोर्ट को लागू करना चाहिए। किसान जब समृद्ध होगा, तभी देश समृद्ध होगा, तभी भारत बनेगा।  इसलिए भारत की समृद्धि का रास्ता किसान के खेत और खलिहानों से होकर गुजरता है। ...(व्यवधान)

कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय के राज्य मंत्री तथा संसदीय कार्य मंत्रालय में राज्य मंत्री (श्री राजीव प्रताप रूडी): एक संशोधन था, जय प्रकाश जी ने कहा कि स्वामी सहजानन्द जी बिहार के थे, इनका जन्म मूलतः गाजीपुर में हुआ था, लेकिन बिहार में इन्होंने काम किया और किसान सभा की स्थापना की। एक जाने-माने किसान नेता के तौर पर पूरे देश में जाने जाते हैं। यह सिर्फ सूचना के लिए है।

 

श्री भैरों प्रसाद मिश्र (बांदा) : माननीय सभापति जी,राजू शेट्टी जी द्वारा जो संकल्प यहां विचारार्थ लाया गया है,मैं उसके समर्थन में बोलने के लिए खड़ा हुआ हूं। निश्चित तौर से किसानों की हालत आज देश में बहुत ही खराब है। लोग इस खेती के धंधे से हट रहे हैं। बुन्देलखंड में किसानों की हालत सबसे ज्यादा खराब है। वहां लगातार कई वर्षों से कभी सूखा पड़ता है तो कभी अतिवृष्टि होती है। वहां किसान आत्महत्या कर रहे हैं। महाराष्ट्र के विदर्भ में भी किसानों की हालत खराब है,लेकिन बुन्देलखंड के किसानों की हालत उससे भी ज्यादा खराब है। केन्द्र सरकार की तरफ से जो पैकेज जाता है,उसकी कोई मौनीटरिंग संस्था न होने के कारण उसका खर्चा भी मनमाने तरीके से किया जाता है।

          पूर्व में हमारे यहां तीन से चार हजार करोड़ रुपये का एक पैकेज गया था,जिसे राज्य सरकार ने अनावश्यक मदों में खर्च कर दिया। किसानों के हित में उस पैसे को कहीं भी खर्च नहीं किया गया है। हमारा कहना है कि इसकी जांच होनी चाहिए। किसान आत्महत्या कर रहे हैं,क्योंकि उन्हें अपनी लागत वसूल नहीं हो पा रही। जो समर्थन मूल्य घोषित होता है,उसमें उन किसानों की लागत का ध्यान रखना चाहिए,तभी किसानों की हालत में सुधार हो सकता है। जैसे गेहूं का इस समय जो समर्थन मूल्य है,उससे किसान को अपनी खाद,बीज या सिंचाई की लागत भी वसूल नहीं हो पाती। जब गेहूं का समर्थन मूल्य दो हजार रुपये होगा,तभी उसे अपनी लागत वसूल हो पायेगी।

          मेरा अनुरोध है कि सरकार को धान,गेहूं का समर्थन मूल्य किसान की लागत के अऩुसार घोषित करना चाहिए। आज एक चर्चा का जवाब माननीय ग्रामीण विकास मंत्री जी दे रहे थे। उस चर्चा में एक बात आयी कि हम किसान क्रेडिट कार्ड के लिए किसानों को 7 परसेंट ब्याज पर ऋण देने का काम करते हैं। लेकिन हमारा कहना है कि यदि कोई ट्रैक्टर लेता है,तो उसे 14 परसेंट ब्याज पर ऋण मिलता है। चूंकि किसान की खेती के लिए ट्रैक्टर बहुत जरूरी है तो उसे इसके लिए 14 परसेंट ब्याज देना पड़ता है।

          मेरा सुझाव है कि जिस तरह से उसे किसान क्रेडिट कार्ड के लिए 7 परसेंट ब्याज पर ऋण दिया जाता है,उसी तरह कृषि यंत्र विशेषकर ट्रैक्टर के लिए 7 परसेंट ब्याज पर ऋण देना चाहिए। जब किसान क्रेडिट कार्ड लेने जाता है तो उसे भी शिविर लगाकर बांटने का इंतजाम करना चाहिए। जब तक किसान उन्हें 5 से 10 परसेंट तक पैसा नहीं देता तब तक उसका क्रेडिट कार्ड नहीं बनता है। कई बार यह मुद्दा उठाया जा चुका है कि किसान क्रेडिट कार्ड के लिए शिविर लगाकर पारदर्शी तरीके से बांटा जाये। उसे कम्प्यूटर में फीड किया जाये कि कितनी एप्लीकेशन्स आयी हैं,लेकिन मैनेजर जिसे चाहता है,उसे ही देता है। वह भी जब उससे 5 से 10 परसेंट हिस्सा पा जाता है तब उसे देने का काम करता है। यह बहुत ही गंभीर विषय है।

          मैं एक और सुझाव देना चाहता हूं कि आज मनरेगा पर चर्चा हो रही थी। उसमें विशेष तौर से बुन्देलखंड में,वैसे मैं हर जगह समझता हूं कि अगर मजदूरों को काम करने के लिए जगह नहीं है,तो पूरे गांव की खेतों की मेड़ों को ऊंचा करने का काम मनरेगा से होना चाहिए जिससे कम से कम वहां खेत का पानी खेत में ही रुक सके। इससे किसान को सुविधा होगी।

          मेरा एक सुझाव और है कि उत्तर प्रदेश में किसान बिजली का कनैक्शन लेने जाता है तो उसे साढ़े सात हार्स पावर से नीचे कनैक्शन नहीं दिया जाता है। उसे साढ़े सात हार्स पावर से ऊपर का पैसा देना पड़ता है,जबकि उनकी मोटर ढाई या पांच हार्स पावर की होती है। छोटे कृषक इनसे सिंचाई करते हैं। हमारा कहना है कि ऐसी व्यवस्था होनी चाहिए कि उनके यहां जितने हार्स पावर की मोटर लगी है,उतने का ही कनैक्शन दिया जाये।      

          इन्हीं सब बातों के साथ मैं अपनी बात समाप्त करता हूं।

                                                                                                 

श्री सी.आर.चौधरी (नागौर) :  माननीय सभापति महोदय, माननीय सदस्य राजू शेट्टी द्वारा स्वामीनाथन कमेटी की रिपोर्ट को लागू करने के लिए जो एक रेजोल्यूशन लाया गया है, वह बहुत अच्छी बात है, सुन्दर कार्य है। मैं किसानों से संबंधित, स्वामीनाथन कमेटी की सिफारिशों के बारे में कुछ निवेदन करना चाहूंगा। वास्तव में इस देश में more then 70 percent population is earning their livelihood through agriculture. कृ­िा पर आधारित जनसंख्या होने के बावजूद देश में ग्रीन रेवोल्यूशन की मार्फत कृ­िा की पैदावार बढ़ी है। सिंचाई के साधनों की सुविधा भी हुई है।

17.00 hrs वास्तव में किसान की स्थिति में जिस तरह से सुधार होना चाहिए,वह नहीं हुआ है। उत्पादन जरूर बढ़ा है,खाद्यान्न में आत्मनिर्भर जरूर हुए हैं लेकिन किसान की दशा खराब है। किसान ऋण में डूबा हुआ है। हम महाराष्ट्र,आंध्र प्रदेश,कर्नाटक के बारे में हर रोज सुनते हैं कि किसान आत्महत्या कर रहे हैं। इसका कारण यही है कि प्रोडक्शन तो हो रहा है लेकिन उत्पादन लागत बहुत महंगी पड़ रही है। आज की स्थिति में यदि उत्पादन लागत को कैलकुलेट किया जाए तो देखेंगे कि फार्मर अपनी खुद की लेबर को काउंट ही नहीं करता है और इसलिए वह बहुत संतुष्ट रहता है कि उसे कुछ मिल रहा है। वास्तविकता यह है कि यदि वह अपने परिवार या अपने श्रम की लागत को जोड़ ले तो आप देखेंगे कि उसे किसी भी उपज में लाभ नहीं मिल रहा है। मैं स्वामीनाथन रिपोर्ट के आधार पर सबसे पहले बिंदु के बारे में कहना चाहता हूं कि किसान को उत्पादन मूल्य मिलना चाहिए अन्यथा इसी प्रकार से आत्महत्याएं जारी रहेंगी। उसे उतनी लागत ही नहीं मिल रही है,वह जितना खर्च कर रहा है। डीज़ल महंगा,बिजली महंगी। मैं माननीय प्रधानमंत्री जी को धन्यवाद देना चाहता हूं कि उनके आने के बाद 10-12 रुपए प्रति डीज़ल का दाम कम हुआ है। पूर्व में 30-35 रुपए डीजल का रेट था और दो साल में 60 रुपए प्रति लीटर हो गया। डीज़ल,बिजली,खाद सब कुछ महंगा हो गया है। मैं आपको कॉटन का उदारहण देता हूं,राजस्थान में प्रति एकड़ चार या पांच क्विंटल कॉटन होती है और 4000 रुपए दाम मिल रहा है जबकि पिछली बार 5500 रुपए था। ऐसी कई उपज हैं जिनकी लागत ज्यादा है और उत्पादन मूल्य कम मिल रहा है। मैं आपके माध्यम से अर्ज करना चाहता हूं कि स्वामीनाथन जी ने 2006 में बहुत बड़ी रिपोर्ट दी है,इसे लागू किया जाए।  Why are you taking only the marginal and small farmers into consideration? Why do not you take the whole community of farmers into consideration?  आप सबको लैंड डेवलपमेंट,इरीगेशन,वाटर कन्जर्वेशन के लिए पैसा दीजिए। सब किसानों को एक श्रेणी में लेना चाहिए फिर चाहे वह मध्यम श्रेणी का हो या लघु किसान हो।

          मैं आपके माध्यम से कहना चाहता हूं कि यह रिजॉल्यूशन बहुत अच्छा है,स्वामीनाथन कमेटी की रिपोर्ट को भारत सरकार लागू करे। धन्यवाद।

 

HON. CHAIRPERSON: Hon. Members, five hours’ time allotted to the discussion on this Resolution is almost over. As there are three more Members who are desirous of taking part in the discussion on this Resolution, the House may extend the time for discussion on this Resolution.

          If the House agrees, the time for discussion on this Resolution may be extended till the discussion on this Resolution is over.

SEVERAL HON. MEMBERS : Yes, Sir.

HON. CHAIRPERSON: The next speaker is Dr. Arun Kumar. Please try and conclude in three minutes.

 

डॉ. अरुण कुमार (जहानाबाद) : माननीय सभापति जी,डॉ. स्वामीनाथन की रिपोर्ट सदन में आई है। स्वामी सहजानंद सरस्वति जी की चर्चा माननीय सदस्य ने की है। आज से 60 साल पहले स्वामी सहजानंद सरस्वति जी ने लिखा था कि देश का भविष्य तभी सुरक्षित रहेगा जब संसद के चिंतन के केंद्र में किसान होगा।

17.04 hrs                                (Dr. P. Venugopal in the Chair) किसान भारतीय संस्कृति,संस्कार,मूल्य,मानवता,अर्थ सबका संवाहक है। पिछले काफी दिनों से स्वामी सहजानंद सरस्वति जी के चिंतन को दरकिनार रखा गया। आज माननीय सदस्य ने चर्चा की है। स्वामी सहजानंद के बारे में चर्चा तब शुरु हुई जब जर्मनी के विद्वान प्रोफेसर डॉ. बॉल्टर हाउज़र ने शोध करके कहा कि दुनिया का सबसे ईमानदार और बड़ा किसान नेता स्वामी सहजानंद सरस्वती हैं।   तब से लोग चिन्तन करना शुरू किये। इसलिए आज जो स्वामी जी के चिन्तन में मौलिकता है,निश्चित तौर से डा. स्वामीनाथन ने उस पर एक लकीर खींचने का कार्य किया है। हमारे किसान वैज्ञानिक थे,उनकी धारणा,अवधारणा सब कुछ लाभ से जुड़ा हुआ था,मानवीय विकास से जुड़ा हुआ था,मूल्यों से जुड़ा हुआ था,लेकिन एक साज़िश के तहत उन सारी सिंचाई परियोजनाओं को ध्वस्त कर दिया गया,एक साज़िश के तहत उनके लाभांश को तोड़ा गया। आज विभिन्न कारणों से देश के किसानों का उत्पादन बढ़ा,लेकिन किसान की माली हालत खराब हुई है। इसलिए चाहे इसे समवर्ती सूची में रखें,केन्द्रीय सूची में रखें या राज्य की सूची में रखें,आज जरूरत इस बात की है,मैं प्रधानमंत्री जी को धन्यवाद देना चाहूंगा कि पहली बार,जो सिंचाई योजनाएँ हैं,उनमें सिर्फ प्रधानमंत्री सिंचाई योजना का प्रबंधन हो रहा है। सिर्फ किसानों के लिए सिंचाई का प्रबंधन कर दिया जाए,उसके फसलों की मार्केटिंग का प्रबंधन कर दिया जाए,उनके फसलों के स्टोरेज का प्रबंधन कर दिया जाए तो उनको किसी तरह के अनुदान की जरूरत नहीं है। वे सम्पूर्ण देश को खिलाने में सक्षम हैं। इसके संस्कार,संस्कृति और मूल्यों के संवाहक के रूप में,एक मजबूत धारा के रूप में स्थापित रहने में भी सक्षम हैं। राष्ट्रीय आज़ादी के जो सबसे बड़े फलक थे,वे ही आज शोषण के शिकार हो गये हैं। इसलिए हमें इस आलोक में किसान के एक समृद्ध गांव के निर्माण के लिए संकल्प लेना चाहिए। इन्हीं शब्दों के साथ आपको बहुत-बहुत धन्यवाद देता हूँ।

   

श्री नाना पटोले (भंडारा-गोंदिया) : माननीय सभापति महोदय, मैं श्री राजू शेट्टी जी का बहुत-बहुत धन्यवाद करना चाहूंगा। उन्होंने किसानों के हित के लिए, उनके संरक्षण के लिए जो स्वामीनाथन आयोग इस देश में गठित किया गया था, उस समिति की सिफारिश तुरंत लागू की जाए, इस मांग के लिए आज इस सदन में चर्चा हो रही है। मैं पूछना चाहता हूं कि किसानों के प्रश्न पर आयोग बनते हैं। आयोगों को पूरी रिपोर्ट देने में कम से कम दो-तीन साल लगते हैं। आज पूरे देश में हम किसानों की आत्महत्या की बात करते हैं। हमारे देश में ग्लोबल वार्मिंग के कारण आज जो स्थिति बनी है- बारिश समय पर नहीं आना, ओले गिरना, सूखा होना, इन परिस्थितियों से किसान कठिनाइयों में आ रहा है। हमारे देश के किसान के बारे में कहा गया था कि किसान इस देश की रीढ़ हैं। महात्मा ज्योतिबा फूले ने वर्ष 1885 में एक किताब लिखी थी, उसमें कहा गया था कि एक किसान कर्जा में पैदा होता है और कर्जा में ही मर जाता है। क्या हम लोग इतने वर्षों में इस संसद के माध्यम से किसानों के हित के लिए एक अच्छा उदाहरण बना नहीं सके। इसलिए 67 वर्षों के बाद आज भी इस सदन में किसानों की आत्महत्या रोकने के लिए, उन्हें मजबूत करने के लिए यहाँ पर चर्चा कर रहे हैं। यदि किसी उद्योगपति का दूकान जल गया या फैक्ट्री जल गया तो उसे तुरंत इंश्योरेंस का पैसा मिलता है, लेकिन किसानों की खेती में नुकसान होता है, कोई नैसर्गिक आपत्ति आती है तो हम किसानों की मदद नहीं करते हैं। मैं सरकार से इतना ही कहूंगा कि स्वामीनाथन समिति की जो सिफारिशें हैं, जिनसे हम किसानों को आत्महत्या से बचा सकते हैं, उन्हें तुरंत लागू करना चाहिए। यह मेरी मांग है। सरकार किसानों के हित में निर्णय ले क्योंकि मैं महाराष्ट्र से आता हूँ, वहाँ पर धान की खेती होती है। पाँच -छह सौ रुपए कम कीमत में वहाँ धान बिक रहा है। किसानों के अनाज के भाव निर्धारित करने का काम व्यापारियों के हाथों में है। लेकिन किसानों को मेहनत करने के बाद भी उसका कोई अधिकार नहीं रहता।

   

श्री कौशलेन्द्र कुमार (नालंदा) : माननीय सभापति महोदय,आपने कृषि के सवाल पर बोलने का मौका दिया,इसके लिए धन्यवाद। साथ ही मैं माननीय सेठी जी को भी धन्यवाद देना चाहता हूं कि किसानों की चिंता उन्होंने की और स्वामीनाथन आयोग के बारे में हम चर्चा कर रहे हैं।

          महोदय,हम लोग किसान परिवार से आते हैं और इस देश में 70 प्रतिशत के करीब किसान हैं। जब तक किसानों की हालत नहीं सुधरेगी,तब तक इस देश की तकदीर नहीं बदल सकती है। ऐसा मैं नहीं कह रहा हूं,बल्कि सभी नेताओं ने इस बात को कहा है। चाहे सहजानंद सरस्वती हों,चाहे किसानों के कितने ही बड़े नेता हुए,उन्होंने भी यह बात कही। आज किसानों की हालत दिन-प्रति-दिन खराब होती जा रही है। हम लोग किसान परिवार से आते हैं,गांव में किसानों की क्या हालत है,यह हमसे छिपी नहीं है। कभी बाढ़ और कभी सुखाड़ की मार किसानों को सहनी पड़ती है। दूसरी तरफ उद्योगपति जो अपने सामान को बनाते हैं,वे उसका मूल्य खुद ही निर्धारित करते हैं। माननीय प्रधान मंत्री जी ने वायदा किया था कि अगर हमारी सरकार बनेगी,तो निश्चित रूप से किसानों को राहत मिलेगी। किसान की उपज में जो खर्च होगा,उसका 50 प्रतिशत लाभांश हम किसानों को देंगे। आज माननीय प्रधान मंत्री जी को किसानों की चिंता करने की जरुरत है।

          सभापति जी,हम लोग बिहार से आते हैं और आज बिहार एक तरफ बाढ़ की चपेट में है,तो दूसरी तरफ सुखाड़ की चपेट में है। वहां कोई ऐसी परियोजना नहीं चल रही है जिससे किसान सुदृढ़ हों। वहां खेतों की सिंचाई के लिए टय़ूबवैल की व्यवस्था होनी चाहिए,बिजली मुफ्त मिलनी चाहिए,उत्तम बीज मिलने चाहिए। बिहार की राज्य सरकार ने जो कृषि रोड मैप बनाया है,उसके माध्यम से,निश्चित रूप से किसानों को कुछ लाभ मिल रहा है। अच्छे बीज मिल रहे हैं,अच्छी उपज हो रही है लेकिन उसका मूल्य नहीं मिल रहा है। भारत सरकार से एक पत्र गया है कि राज्य सरकार,जो किसानों को धान पर बोनस के रूप में अनुदान दे रही थी,वह भी आज बंद हो रहा है। मैं समझता हूं कि यह चिंता का विषय है। अगर किसानों को मजबूत करना है तो एक सिंचाई परियोजना,क्षेत्र की बनावट के अनुरूप,हर प्रदेश में लानी चाहिए, जिससे किसानों की हालत सुधरे।

          महोदय, आज किसान ऋण में पैदा होते हैं और ऋण में ही मर जाते हैं। अगर किसान को अपनी बेटी की शादी करनी होती है तो वह खेत बेचता है, अगर उसके घर में कोई बीमार होता है, तो वह खेत बेचता है, अगर बच्चे को पढ़ाना होता है, इंजीनियरिंग या डॉक्टरी की शिक्षा दिलानी होती है, तो वह खेत बेचता है। अगर इस देश के किसानों की हालत नहीं सुधरी, तो यह देश तरक्की नहीं कर सकता है। मैं सरकार से मांग करुंगा कि किसानों की हालत कैसे सुधरे, इस ओर चिंता करने की जरुरत है।    

 

SHRI A. ANWHAR RAAJHAA (RAMANATHAPURAM): Sir, the National Commission on Farmers was formed on 18th November, 2004.  It is also called Swaminathan Committee because Prof. M.S. Swaminathan was its Chairman.

          Now, this House is discussing about the need to implement the recommendations made by the Committee.

          The previous UPA Government gave as terms of reference the priorities listed in their Common Minimum Programme.  The final report was submitted to the previous Government in October, 2006.  The recommendations were considered as mere suggestions and were put in cold storage.  That is why, we are discussing now on a resolution to implement the recommendations.

          The pity is that we are discussing the pitiable conditions of our farmers after ten years.  When suicide deaths of farmers were rampant in States like Maharashtra and Andhra, this Committee was formed to make agricultural growth faster and inclusive.  Its key finds are incomplete land reforms, irrigation water problem, non-availability of technology, absence of formal credit facilities, lack of marketing facilities, non-availability of remunerative prices.

          I am pained to point out that even after understanding the problems, much has not been done.  The M.S. Swaminathan Committee further recommended PDS for all with one per cent of GDP, involving panchayats and local bodies in nutrition support programmes for people of different age groups.

          There has been an establishment of Women Self Help Groups based on the principle store grain and water everywhere. Another is, livelihood initiatives to improve productivity and profitability helping small and marginal farmers.        

As far as Tamil Nadu is concerned, under the able leadership of our People’s former Chief Minister, Amma, a comprehensive programme with integrated schemes were effectively implemented. When the National Food Security Act was introduced by the previous Union Government, many people were about to be removed from the BPL layer of society, whereas our leader, Amma was keen on giving people not only subsidized food grains but also free rice to the really needy people. When the Centre increased price of rice sold through PDS, even while facing great financial challenge, our leader, hon. Amma continued with subsidies. Though the Centre did not come forward to assist the State Government financially, our Tamil Nadu Government continued with additional subsidies for special PDS.

          When it comes to agricultural insurance which can protect the farmers from the losses due to climate changes, the Centre wants to increase the premium burden on the farmers. That is why, our invincible leader, Amma wants the Centre to continue the National Agricultural Insurance Scheme (NAIS) instead of the National Crop Insurance Programme (NCIP).

          Usually, Central grants are not coming in time for our rural agricultural cooperative societies. Under the National Mission for Sustainable Agriculture, our Government of Tamil Nadu has contributed its share fully whereas the Centre has not released so far more than 60 per cent of its share, approximately Rs. 10,000 crore.

          The Madras Fertilizers and the SPIC which met 40 per cent of the total urea required for Tamil Nadu remain closed. Gas based production facilities are not there. Till such time, gas is made available, naphtha based urea production must be permitted. But the Centre is neither giving permission nor are they giving urea. This leaves great distress among farmers. How can we increase agricultural production? How can we improve the conditions of farmers?

          At this juncture, I would like to request the Union Government to bear at least 50 per cent of the cost of Rs.1,500 crore for the desalination plant to be set up by the Government of Tamil Nadu in Ramanathapuram District. Since Ramanathapuram is an agro marketing centre with acute drinking water crisis, the Agriculture Ministry and the Rural Development Ministry must come forward to help the pioneering schemes of our State Government.

          Before I conclude, I would like to draw your attention to the much appreciated Farmers’ Protection Scheme which seeks to meet the needs of farmers at every stage of crop cultivation. It also takes care of the primary health care of their families and education for their children including day-care centres for infants. I would urge upon the Centre to take note of the Tamil Nadu model and to come forward to extend more financial assistance for our farmers’ welfare schemes.

          With these words, I conclude my speech.

                                                                                                           

कृषि मंत्रालय में राज्य मंत्री (डॉ. संजीव बालियान) : सभापति महोदय,मैं सबसे पहले किसानों की समस्या उठाने के लिए अपने मित्र राजू शेट्टी को बधाई देता हूं।

       महोदय,इस पर काफी सांसदों ने अपने सुझाव दिए हैं। कृषि की समस्या का सबसे बड़ा कारण है कि 2.4 परसेंट क्षेत्र हमारे पास है। 4 परसेंट वॉटर रिसोर्सिज हैं और इसके साथ-साथ टोटल पोप्यूलेशन 15 परसेंट है और 17 परसेंट पोप्युलेशन है,जो इसके ऊपर डिपेंडेंट है। इस बार भी चार राज्यों में सूखा,महाराष्ट्र,उत्तर प्रदेश और हरियाणा। स्वामीनाथन आयोग की घोषणा माननीय अटल बिहारी वाजपेयी ने 15 अगस्त 2003 को की थी। इसके बाद वर्ष 2004 में किसान आयोग बना। वर्ष 2007 में कृषि नीति तैयार हुई। मैं सदन को बताना चाहता हूं कि आयोग की 201 सिफारिशें थीं,जिसमें 175 सिफारिशें मान ली गयीं। 26 सिफारिशें पैंडिंग रहीं। इस सदन में 40 से अधिक माननीय सदस्यों ने अपनी बात रखी है। एक बात निकल कर आयी और सभी को यह लगा कि कृषि क्षेत्र की समस्याओं का निदान स्वामीनाथन आयोग में है। इस तरह का माहौल रहा है। उन 26 सिफारिशों में से दो या तीन सिफारिशों को छोड़ कर बाकी का किसान की हालत सुधारने से कोई वास्ता नहीं है। स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशें मुख्य रूप से उस समय नहीं मानी गई थीं,उनमें कुछ हैं कि To permit farmer to protect crops by killing wild animals, Nilgai; एमएसपी,सबसे महत्वपूर्ण,लागत का 50 प्रतिशत लाभकारी मूल्य।  to set up Agriculture Risk Fund; Food Guarantee Act, जो अब उसके बाद लागू हो चुका है, to establish an Indian Trade Organisation; every State should set up the State Farmer Commission; to include agriculture under Concurrent List. ये कुछ चीजें हैं,इसमें कुछ राज्य सरकार के विषय हैं। ज्यादातर राज्य सरकारों ने इसके विपरीत राय दी कि कृषि को राज्य का ही विषय रहने दिया जाए। जहां तक एमएसपी का पचास प्रतिशत लाभकारी मूल्य देने की बात है,पिछली सरकार के दौरान ही उस पर एक कमेटी बनी थी। इस कमेटी में दो राज्यों-उत्तर प्रदेश और आध्र प्रदेश के रिप्रेजेंटेटिव्स भी हैं तथा पांच किसानों के प्रतिनिधि इस समिति में हैं। 2013 में यह कमेटी बनी। लगातार इसकी पांच बैठकें हो चुकी हैं और निकट भविष्य में बहुत जल्दी यह समिति अपनी रिपोर्ट देने वाली है कि मिनिमम सपोर्ट प्राइस फिक्स करने का क्या क्राइटीरिया होगा?कुछ क्राइटीरिया पुराने थे लेकिन करीब 22 फसलों का एमएसपी हम डिक्लेअर करते हैं और एक गन्ने का भी है,जो 22 फसलों से अलग है।

           मोटे तौर पर पिछले काफी समय से सरकारों द्वारा गेहूं और चावल के अलावा,इस बार कॉटन की खरीद पांच साल के बाद हुई है नहीं तो अगर आप गेहूं और चावल की बात भी करेंगे तो उत्पादन के तीस प्रतिशत की खरीद सरकार द्वारा की जाती है,बाकी प्राइवेट एजेंसी खरीद करती हैं। इन दो तीन फसलों के अलावा किसी चीज की खरीद सरकार द्वारा नहीं की जाती। एमएसपी ही सब समस्याओं का समाधान है,इसमें मुझे ऐसा नहीं लगता कि एमएसपी घोषित कर दिया जाए। उसकी खरीद कैसे होगी,यह बहुत बड़ी समस्या है। इसके अलावा इस साल सरकार बनने के बाद जिन कुछ मुद्दों पर स्वामीनाथन जी ने लगातार प्रकाश डाला जो हो नहीं पाए थे,मैं सदन को बताना चाहूंगा और जिन पर सरकार द्वारा कार्य शुरु किया गया है,कृषि के साथ साथ कल राजू शेट्टी जी और हम आपस में दूध के गिरते हुए दाम की बात कर रहे थे।

           आज भी देश में जो 80 प्रतिशत हमारी देशी गाय हैं,उनके दूध का उत्पादन एवरेज 2.7 से 2.9 लीटर के बीच है। यानी तीन लीटर से भी कम एवरेज मिल्क प्रोडक्शन है। अगर क्रॉस ब्रीड्स की बात करेंगे तो 7 लीटर है। बफेलो- 4 लीटर है। कीमत के साथ साथ जो इस सरकार का विशेष ध्यान था कि 80 प्रतिशत हमारी देशी ब्रीड्स हैं,अगर उनमें दो-दो लीटर दूध भी हम उनका बढ़ा सकें क्योंकि उनकी तादाद काफी ज्यादा है तो शायद दूध के उत्पादन में इजाफा हो सके। एक तरीका यह है कि दूध के उत्पादन में इज़ाफा किया जाए जिससे ज्यादा दूध का उत्पादन हो तो कम कीमत में भी किसान को कुछ मिल सके। इसी के तहत देशी गायों की ब्रीडिंग के सुधार के लिए गोकुल मिशन की शुरुआत 500 करोड़ रुपये से सरकार ने की है।

          फिशरीज एक ऐसा क्षेत्र है जिसमें सात प्रतिशत की दर से लैंड फिशरीज में आज भी हमारी ग्रोथ है। उसके लिए प्रधान मंत्री जी ने विशेष जोर दिया है और उन्होंने शुरु में ही इसी बजट में ब्लू रिवोल्यूशन के नाम से एक प्रोजेक्ट फिशरीज को बढ़ावा देने के लिए शुरु किया है। 2014-2015 में किसानों के लिए संस्थागत ऋण 8 लाख करोड़ रुपये के करीब किया है जो सबसे महत्वपूर्ण मुद्दा है। हमारे देश में भंडारण का मुद्दा लगातार रहा है कि खरीद भी हो जाए तो देश में उसके लिए वेयरहाउसेज नहीं हैं कि सब चीजों को वहां रखा जा सके। इसके लिए 5000 करोड़ रुरपये का आबंटन इस बजट में किया गया है। इसके साथ साथ नाबार्ड को दीर्घ अवधि के ग्रामीण ऋण के लिए 4000 करोड़ रुपये की धनराशि दी गई है। प्रधान मंत्री सिंचाई योजना की शुरुआत सबसे महत्वपूर्ण मुद्दा है क्योंकि आज भी टोटल 45 प्रतिशत से ऊपर सिंचाई की व्यवस्था जमीन के लिए नहीं है। इसीलिए हम बारिश पर निर्भर करते हैं। इसके लिए 1000 करोड़ रुपये की धनराशि से प्रधान मंत्री ग्राम सिंचाई योजना की शुरुआत की गई है।

          एग्रीकल्चर कमोडिटीज का जो स्टेबिलाइजेशन करना होगा,उसके लिए पांच सौ करोड़ रुपये के मूल्य स्थिरीकरण कोष की स्थापना की गई है। एक सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि जब एग्रीकल्चरल प्रोडक्शन में इनपुट कास्ट की बात आती है तो सबसे महत्वपूर्ण बात फर्टिलाइजर की आती है। चाहे पंजाब हो,हरियाणा हो,वैस्टर्न यू.पी. हो,जो एवरेज 4:2:1 का रेश्यो होना चाहिए,वह आज 24:12:1 का रेश्यो है। उसके लिए इस साल सॉइल हैल्थ कार्ड की योजना सौ करोड़ रुपये से शुरु की गई है। तमिलनाडु से एक माननीय सांसद बोल रहे थे कि तमिलनाडु इस मामले में सबसे आगे है। देश के किसी प्रदेश में सॉइल हैल्थ पर अगर कहीं काम हुआ है तो वह तमिलनाडु में हुआ है। इसके साथ-साथ किसान टीवी की शुरूआत सौ करोड़ की योजना है और साथ ही साथ जिस चीज पर स्वामीनाथन जी का विशेष ध्यान था।

          एक महत्वपूर्ण मुद्दा जिस पर स्वामीनाथन जी का विशेष रूप से ध्यान था,वह कृषि के क्षेत्र में रिसर्च था,नई-नई टैक्नोलोजीज पर था। उसके लिए पहली बार दो एग्रीकल्चर युनिवर्सिटीज और दो हार्टीकल्चर युनिवर्सिटीज और दो आई.आर.ए. की स्थापना इसी में शुरू हुई है। ये कुछ योजनाएं हैं,जिनके माध्यम से सरकार बताना चाहती है कि हमें किस दिशा में जाना है। अभी माननीय मंत्री जी ने कहा है कि समय कम है,उनका आदेश हुआ है तो मैं एक बात और कहना चाहता हूं कि यहां लगातार सरदार पटेल का जिक्र हुआ,मैं भी भाई राजू शेट्टी को बताना चाहता हूं कि मैं चौ.महेन्द्र सिंह टिकैत की जन्मभूमि और चौधरी चरण सिंह जी की कर्मभूमि से आता हूं। किसानों के बारे में उनकी सोच और जितनी उन्हें उनकी चिंता थी,उतनी चिंता मुझे भी है। हम अलग से बात भी करते रहते हैं। इसीलिए मैं कहना चाहता हूं कि स्वामीनाथन कमीशन की बची हुई सिफारिशें ऐसी कोई चीज नहीं हैं,जिस एक सिफारिश की आप बात कर रहे हैं,आप मूल्य आयोग की रिपोर्ट आने दीजिए,यह कोई ऐसी चीज नहीं है कि जिससे कृषि की हालत बिल्कुल सुधर जाएगी। कृषि में समस्याएं बहुत हैं,लेकिन यह एक रामबाण नहीं हैं। मैं श्री राजू शेट्टी जी से आखिर में निवेदन करना चाहता हूं कि वह इस प्रस्ताव को वापस ले लें,हम और वह मिलकर आपस में बातें करते रहेंगे और किसानों की समस्याओं के बारे में इस पर आगे बढ़ते रहेंगे।

          मैं उनसे निवेदन करना चाहता हूं कि वह इस प्रस्ताव को वापस लें लें। धन्यवाद।

   

श्री राजू शेट्टी (हातकणंगले) : सभापति महोदय,मंत्री जी ने संक्षेप में जवाब दिया,उसके लिए मैं उन्हें धन्यवाद देता हूं। लेकिन उन्होंने कुछ मुद्दे उठाये हैं,जिनके बारे में मैं जानना चाहता हूं। आपने कहा कि एमएसपी से कोई समस्या हल नहीं हो सकती। लेकिन मैं आपसे जानना चाहता हूं कि एमएसपी से कोई समस्या हल नहीं हो सकती और आपने कहा कि एग्रीकल्चर राज्य का विषय है तो फिर सब एग्रीकल्चर प्रोडक्ट को आपने एसेंशियल कमोडिटी एक्ट में क्यों लिया और उसके तहत आप मार्केट में हस्तक्षेप करके रेट कंट्रोल करते हैं। मैं आपको उदाहरण के तौर पर बताता हूं कि इस साल आलू और प्याज के निर्यात पर आपने पाबंदी नहीं लगाई होती तो किसान आपके पास कतई एमएसपी मांगने के लिए नहीं आता। जब मार्केट में अच्छे रेट होते हैं,अच्छा दाम मिलता है,तब आम आदमी के नाम पर आप इन सब एग्रीकल्चर प्रोडक्ट के दाम को कंट्रोल करते हैं,उसके रेट गिरवाते हैं,कभी इम्पोर्ट करके डम्प करते हैं और उस वक्त किसानों का हाल क्या होता है। आज प्याज का किसान रो रहा है। आज प्याज के किसानों को ओले पड़ने से बहुत नुकसान हो रहा है और वे भीख मांग रहे हैं,आत्महत्याएं कर रहे हैं।

 

श्री राजीव प्रताप रूडी : सभापति महोदय,यह सचमुच बहुत महत्वपूर्ण सवाल है,जिस पर यह चर्चा आई है। लेकिन सदन की जानकारी के लिए मैं बता दूं कि एक और विस्तृत चर्चा नियम 193 के तहत इसी सदन में कृषि पर ली जाने वाली है। इसलिए स्वामीनाथन कमेटी की इस रिपोर्ट के अतिरिक्त भी और जो विषय़ आयेंगे,उन पर और कृषि पर चर्चा की जानी है। इसलिए मैं आपसे आग्रह करूंगा कि इस विधेयक को वापस लें।

श्री राजू शेट्टी  : लेकिन मंत्री जी ने जो जवाब दिया है,उसके बारे में मुझे बोलना चाहिए।

श्री राजीव प्रताप रूडी : उन्होंने इसका जो जवाब दिया,वह वस्तुस्थिति के हिसाब से पर्याप्त है और चूंकि इसके बाद भी एक ऐसे विषय को आगे सदन के बिजनेस में लगाना है तो मैं आपसे आग्रह करूंगा कि कृषि पर चर्चा की सीमा बांधी नहीं जा सकती है। आप इस पर चर्चा में भाग लेते रहे,अगले पांच वर्षों के लिए यह सदन आपके लिए है और आपके ज्ञान से सबको लाभ मिलता रहे।

श्री राजू शेट्टी  : मैं यह चर्चा करने के लिए नहीं आया हूं,मैं यहां किसानों के लिए न्याय मांगने के लिए आया हूं।

श्री राजीव प्रताप रूडी :महोदय,आप आगे के कार्यक्रम का आग्रह करें। ...(व्यवधान)

श्री राजू शेट्टी  : मंत्री जी ने बोला कि उस एक सिफारिश से कृषि की हालत नहीं सुधरेगी।

डॉ. संजीव बालियान : मैंने यह कहा है कि यह राम बाण नहीं है।...(व्यवधान)मैने यह कहा था कि स्वामीनाथन कमेटी की एक ही रिपोर्ट लागू होने से सारे देश में किसानों की समस्याएं दूर नहीं होंगी। राजू जी ने जो मुद्दा उठाया था मैं उसका जवाब देना चाहता हूँ। ...(व्यवधान)

HON. CHAIRPERSON: The time now is 5.30 p.m. The ‘Half-an-Hour discussion’ shall be taken up after some time. I hope the House agrees.

          The hon. Member may please continue.

श्री राजू शेट्टी  :  सभापति महोदय, जब लोक सभा के चुनाव चल रहे थे, उस वक्त हमारे प्रधान मंत्री जी महाराष्ट्र में और पंजाब में गए थे। उस वक्त उन्होंने एक आश्वासन दिया था कि स्वामीनाथन कमीशन के तहत लागत मूल्य से 50 प्रतिशत लाभकारी मूल्य का हम एमएसपी देंगे। मैं मंत्री जी ये यह पूछना चाहता हूँ कि क्या सरकार अपना आश्वासन भूल गई है? क्या सरकार की नीति बदल गई है? स्वामीनाथन आयोग, जो अटल जी की सरकार ने बनाया था, उसके सुझाव आ गए हैं, उसमें सबसे महत्वपूर्ण सुझाव था कि लागत मूल्य से 50 प्रतिशत लाभकारी मूल्य दिया जाएगा। वही अहम सुझाव है, अगर वह आप मानते हैं तो मैं रेज़ोल्युशन वापस लेने के लिए तैयार हूँ। मैं आश्वासन चाहता हूँ कि जल्द से जल्द इसका कुछ समाधान हो।

डॉ. संजीव बालियान :  सभापति जी, माननीय सदस्य ने एक बात कही कि गवर्मेंट इंटरवीन तब करती है, जब हाई प्राइस होते हैं, तब नहीं करती है, जब किसानों को समस्या होती है। मैं उन्हें याद दिलाना चाहता हूँ कि इसी सरकार ने गन्ने की इंपोर्ट डय़ूटी 15 प्रतिशत से बढ़ा कर 25 प्रतिशत किया है। सरकार ने किसान के हित के लिए इंटरवीन किया है। साथ ही साथ पोल्ट्री में उन्हें पता है, मैंने उन्हें खुद बताया था, कि जब डब्ल्यूटीओ की बात आई, पोल्ट्री इंपोर्ट की, उस पर भी सरकार ने स्टैंड लिया है। हाँ, आलू और प्याज़ की जहां तक बात थी, कृषि मंत्रालय ने अपना मत कॉमर्स मिनिस्ट्री को भेज दिया है कि आलू और प्याज़ दोनों के निर्यात से रोक हटाई जाए। यह कृषि मंत्रालय की तरफ से जा चुका है और जल्दी ही इस पर कोई निर्णय कॉमर्स मिनिस्ट्री की तरफ से होगा। जहां तक बात है, स्वामीनाथन रिपोर्ट की, तो मैंने यह कहीं भी नहीं कहा है कि इससे हल नहीं होगा। माननीय सदस्य को मैं यह बताना चाहूंगा कि मैंने यह कहा था कि जो कमेटी है, उसकी रिपोर्ट आने वाली है। अभी तक कमेटी ने यही नहीं बताया है कि एमएसपी क्या होनी चाहिए, जो नई कमेटी है, उसकी रिपोर्ट जल्द आएगी, उसके बाद इस पर विचार किया जाएगा।

HON. CHAIRPERSON: Are you withdrawing your Resolution?

श्री राजू शेट्टी :  सभापति महोदय, कृषि राज्य मंत्री यहां जवाब दे रहे हैं, मैं उनकी मर्यादा जानता हूँ, वे हमारे बहुत अच्छे मित्र हैं। लेकिन सरकार को इसके बारे में गंभीरता से सोचना चाहिए। बहुत बड़ी तादात में किसानों की आत्महत्या हो रही है। मैं आपको दो आत्महत्याओं का उदाहरण देता हूँ। अभी महाराष्ट्र में 15 दिन पहले एक आत्महत्या इस तरह से हुई कि किसान ने खुद अपनी चिता जलाई और उसमें कूद कर उसने आत्महत्या कर ली। दूसरे किसान ने अपने हाथ-पांव बांध कर इलैक्ट्रिक शॉक ले कर  आत्महत्या कर ली। आज कल किसान सिर्फ आत्महत्या कर रहा है। ...(व्यवधान)

HON. CHAIRPERSON: The hon. Minister has already replied. Now, are you withdrawing your Resolution?

श्री राजू शेट्टी  :  सभापति जी, अगर हालात ऐसे ही रहेंगे तो एक दिन यह किसान हत्या करने पर उतर आएगा। उससे पहले ही कुछ न कुछ कीजिए। मैं सरकार से यही विनती करता हूँ और यह रेज़्योल्युशन वापस लेता हूँ।

 

HON. CHAIRPERSON: Is it the pleasure of the House that the Resolution moved by Shri Raju Shetty be withdrawn?

The Resolution was, by leave, withdrawn.