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Lok Sabha Debates

Shri Jagdambika Pal Called The Attention Of The Minister Of Home Affairs To The ... on 17 May, 2012

> Title: Shri Jagdambika Pal called the attention of the Minister of Home Affairs to the need to include Bhojpuri language in the Eighth Schedule to the Constitution  and steps being taken by the Government in this regard.   MADAM SPEAKER: Now, the House will take up Item No. 13, Calling Attention.           Shri Jagdambika Pal.

… (Interruptions)

SHRI JAGDAMBIKA PAL (DIMARIYAGANJ): I call the attention of the Minister of Home Affairs to the following matter of urgent public importance and request that he may make a Statement thereon:

“The need to include Bhojpuri language in the Eighth Schedule to the Constitution and steps being taken by the Government in this regard.”     THE MINISTER OF HOME AFFAIRS (SHRI P. CHIDAMBARAM): There are 22 languages in the Eighth Schedule of the Constitution.  The Government has received, from time to time, representations and suggestions for including more languages in the Eighth Schedule.  There are representations in respect of 38 languages for inclusion in the Eighth Schedule.  Bhojpuri is one of the 38 languages.   There was no established set of criteria for considering proposals for inclusion of languages in the Eighth Schedule. A High Powered  Committee was constituted under the Chairmanship of Shri Sitakant Mohapatra to evolve a set of objective criteria for inclusion of more languages in the Eighth Schedule. This Committee submitted its report in 2004 and suggested certain criteria for inclusion of languages in the Eighth Schedule. A final decision on these recommendations is yet to be taken.
          A proposal was mooted in 2006 for inclusion of Bhojpuri and Rajasthani languages in the Eighth Schedule of the Constitution. The inclusion of a language in the Eighth Schedule has, at present, a direct link to the examinations conducted by UPSC. Hence, it was decided that a decision on the inclusion of these languages in the Eighth Schedule may be deferred till a decision is taken by the Government on the issue of the UPSC examinations. UPSC made a request that the Eighth Schedule languages may be de-linked from the Commission’s scheme of examinations, keeping in view the problems faced by the Commission in conducting the examinations in all the Eighth Schedule languages.
          UPSC had constituted a High level Standing Committee to examine the modalities for implementing the recommendations of the Parliamentary Resolution of  1968 which had recommended that all languages  of the Eighth Schedule may be permitted as alternative media for the All India and Higher Central Services Examinations. It was decided to await the report of the said High Level Committee before a decision is taken on the Shri Sitakant Mohapatra Committee’s report regarding inclusion of more languages in the Eighth Schedule. The report of the High Level Committee constituted by the UPSC has been received by the Department of Personnel and Training in March, 2012 and it is under consideration.
                                                                                                       
श्री जगदम्बिका पाल: अध्यक्ष महोदया, माननीय मंत्री जी ने, मेरे संदर्भ के उल्लेख में, 8वीं अनुसूची में भोजपुरी या राजस्थानी को शामिल करने के संबंध में कहा कि यूपीएससी के द्वारा परीक्षाओं के लेने के संबंध में एक समिति है और जब तक उसमें निर्णय न हो जाए, तब तक इसे स्थगित किया जाता है।
                    जब भारत का संविधान बना, उस समय 8वीं अनुसूची में केवल 14 भाषाएं थीं। अगर समय-समय पर देश की जन-भावनाओं को देखते हुए इसमें 8 भाषाओं को और शामिल किया गया है और माननीय मंत्री जी ने इसे स्वीकार किया है कि आज संविधान की आठवीं अनुसूची में 22 भाषाएं हैं और 38 भाषाओं के लिए उनके सामने प्रस्ताव लम्बित हैं, जिसमें एक भोजपुरी भाषा भी है। इसी सदन में कम से कम 15 बार प्राइवेट मेम्बर बिल इस पर आ चुके हैं। यह सवाल पहली बार ध्यानाकर्षण प्रस्ताव के माध्यम से नहीं उठा है। यह वर्ष 2004 में, 2006 में भी उठ चुका है। आज मंत्री जी सदन में बयान दे रहे हैं तथा संविधान की 8वीं अनुसूची में भोजपुरी भाषा को शामिल करने के लिए यूपीएससी की परीक्षाओं की समिति का सहारा लेकर,  स्थगित करने के प्रस्ताव के संबंध में, जो बयान संदर्भित किया है, मैं समझता हूं कि यह सदन की भावनाओं को देखते हुए कदाचित उचित नहीं है।
          इसी सदन में तत्कालीन गृह मंत्री शिवराज पाटिल जी ने कहा था कि कांग्रेस यूपीए की सरकार संविधान की 8वीं अनुसूची में भोजपुरी को शामिल करने पर विचार करेगी। आज शिवराज पाटिल जी सदन के सदस्य नहीं हैं लेकिन माननीय श्रीप्रकाश जायसवाल जी आज भी कैबिनेट मिनिस्टर हैं और जब वे केन्द्रीय गृह राज्य मंत्री थे, यहीं पर उठाये गये प्रश्न के जवाब में उन्होंने कहा था कि हमारी सरकार भोजपुरी भाषा को संविधान की 8वीं अनुसूची में शामिल करेगी। ...( व्यवधान)
अध्यक्ष महोदया : आप क्यों खड़े हो गये हैं, आप बैठ जाइये।
...( व्यवधान)
MADAM SPEAKER: Nothing else will go on record.
(Interruptions)* श्री जगदम्बिका पाल: आदरणीय रघुवंश जी ने जो बात कही, उन्होंने कहा कि अगले सत्र में इसका बिल भी आ जाएगा। मैं धन्यवाद दूंगा आदरणीय रघुवंश जी को जिन्होंने बताया कि इसी सदन में ऐसा कहा गया। इस सरकार के मंत्रियों के द्वारा इस सदन में दिये गये आश्वासन क्या कुछ मायने रखते हैं। हमने कांग्रेस यूपीए की चेयर-पर्सन श्रीमती सोनिया जी को भी अप्रोच किया, हमने चिट्ठियां लिखीं और उन्होंने गृह मंत्री को चिट्ठियां मार्क कीं। इस सदन में आज पक्ष या प्रतिपक्ष का सवाल नहीं है।
 
          अध्यक्ष महोदया, मैं समझता हूं कि सदन के सभी सदस्य चाहे वे भोजपुरी न जानते हों, लेकिन भोजपुरी भाषा की मिठास, जो दुनिया के 16 मुल्कों में 20 करोड़ से ज्यादा लोग बोलते हैं, अगर आज वोटिंग हो जाए तो सम्पूर्ण सदन सम्मति से भोजपुरी भाषा को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल कर लेगा। भोजपुरी भाषा को आठवीं अनुसूची में शामिल करने के लिए कोई व्यय नहीं पड़ेगा, सरकार पर किसी प्रकार का पैसे का बोझ नहीं पड़ेगा, बल्कि यह सवाल केवल हमारी भाषा को अपनी पहचान दिलाने का है। हम सभी लोग जनता द्वारा चुनकर आते हैं, क्या हम अपनी भाषा को पहचान नहीं दिला सकते, उसे एक संविधानिक दर्जा नहीं दिला सकते हैं? जब दिल्ली में अखिल भारतीय भोजपुरी विश्व सम्मेलन होगा, अध्यक्ष महोदया आपको बुलाया जाएगा, सभी दलों के लोग बुलाए जाएंगे। आपने कहा कि सरकार विचार कर रही है, जहां स्पीकर महोदया आप हैं, पूरा सदन है लगातार इस बात का आश्वासन आ रहा है, तो क्या कारण है कि सरकार द्वारा आश्वासन देने के बाद भी भोजपुरी भाषा को आठवीं अनुसूची में शामिल नहीं किया जा रहा है। यह बहुत दुख की बात है कि हमारी भाषा मान्यता प्राप्त करने के लिए दंश झेल रही है और मारीशस में जब विश्व भोजपुरी सम्मेलन हुआ तो वहां के राष्ट्रपति जी ने वर्ष 2011 में कहा कि हम भोजपुरी भाषा को मारीशस में राष्ट्रीय भाषा के रूप में रिक्गनाइज करेंगे और उन्होंने ऐसा किया भी, तथा आज भोजपुरी वहां की सैकेंड लैंग्वेज है। दुनिया के दूसरे देशों में भारत की भाषा भोजपुरी मान्यता प्राप्त कर चुकी है और आज हम सदन में उस भाषा को मान्यता दिलाने के लिए आपसे फरियाद कर रहे हैं और सरकार से न्याय की उम्मीद कर रहे हैं। भोजपुरी भाषा, जो देश की जनभावना से जुड़ी है, ऐसा नहीं है कि केवल बिहार में, पूर्वी उत्तर प्रदेश में, झारखंड में, बंगाल में बोली जाती है बल्कि दिल्ली में हम केवल भोजपुरी भाषा बोलते ही नहीं हैं, बल्कि इस भाषा द्वारा श्री महाबल मिश्रा जी चुनकर संसद में आए हैं। मुम्बई में यह भाषा बोली ही नहीं जाती है, संजय निरुपम जी भी इसी भाषा से संबंधित हैं और चुनकर आए हैं। अगर मैं एमपीज़ और एमएलए की गिनती करूं तो एक लम्बी लिस्ट बन जाएगी। देश की राजधानी में इस भाषा को बोलने वालों की इतनी संख्या हो, जिससे संसद सदस्य चुने जा रहे हों, विधायक चुने जा रहे हों, मंत्री चुने जा रहे हों, महाराष्ट्र में, बंगाल में कोई भी ऐसा राज्य नहीं है, जहां इस भाषा को बोलने वाले लोग न रहते हों। दुनिया के देशों में आज प्रधानमंत्री बन रहे हैं, राष्ट्रपति बन रहे हैं, उस भाषा के बोलने वालों की बात कि इसे संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल कर लिया जाए, तो इसमें कोई गलत बात नहीं है।
          माननीय गृह मंत्री जी ने कहा कि एक कमेटी बना दी है, क्योंकि इसका कोई क्राइटेरिया सेट नहीं है कि संविधान की आठवीं अनुसूची में किसी भाषा को कैसे शामिल किया जाए, इसके लिए कोई क्राइटेरिया सेट नहीं है। मैं कहना चाहता हूं कि जब कोई सैट क्राइटेरिया नहीं है, तो जब पहले संविधान की आठवीं अनुसूची में 14 भाषाएं थीं, तो कैसे नेपाली, मैथिली, संथाल और कोंकणी जुड़ गई। आज जो भाषाएं जोड़ी गई हैं, वह जनभावनाओं को देखकर जोड़ी गई हैं। आठ भाषाओं को बोलने वाले लोगों की संख्या 3 करोड़ 71 लाख है। जबकि 20 करोड़ लोग भोजपुरी बोलते हैं। सरकार ने एक कमेटी बनायी थी कि संविधान की आठवीं अनुसूची में किसी भाषा या बोली को सम्मिलित किया जा सके। श्री श्रीकांत महापात्रा की अध्यक्षता में वह कमेटी बनी। उस कमेटी ने वर्ष 2004 में सरकार को रिपोर्ट प्रेषित कर दी। वर्ष 2004 से आज वर्ष 2012 है, आज आठ साल हो चुके हैं और सरकार फैसला नहीं ले पायी कि हम किस तरीके से संविधान की आठवीं अनुसूची में इसे शामिल करेंगे। यह मंत्री जी का जवाब है, मैं अपनी तरफ से इसका उल्लेख नहीं कर रहा हूं। वर्ष 2004 में सरकार द्वारा गठित समिति श्री श्रीकांत महापात्रा ने रिपोर्ट प्रस्तुत सब्मिट की और सुझाव दिया कि किस तरह से किसी भाषा को हम संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल कर सकते हैं, लेकिन वर्ष 2012 तक इस बारे में कोई निर्णय नहीं हुआ है। आठ वर्षों में इसी सरकार ने, इसी सदन में मंत्रियों ने आश्वासन दिया, लेकिन कुछ नहीं हुआ। क्या सरकार इस बारे में विचार कर रही है? अगले सत्र में हम बिल लाएंगे, लेकिन इतना कुछ होने के बावजूद भोजपुरी को शामिल क्यों नहीं किया जा रहा है? या तो इसमें कोई प्रशासनिक अड़ंगा हो, इसलिए हम इस भाषा को मान्यता देने के लिए तैयार नहीं हैं। हम इस देश के लोगों को कहते हैं कि विविधता में एकता है। इस देश की सबसे बड़ी पूंजी क्या है? वह है कि इस देश में तमाम भाषाएं और क्षेत्रीयता। कन्याकुमारी से कश्मीर तक विभिन्न भाषाएं हैं।...( व्यवधान)
श्री शरद यादव (मधेपुरा):अध्यक्ष महोदया, जगदम्बिका पाल जी ने कहा है, मैं उनकी बात के साथ अपनी बात जोड़ता हूं कि अटल जी ने मैथिली भाषा को एनाउंस किया था। किसी कमेटी की बात नहीं सुनी थी।...( व्यवधान)
अध्यक्ष महोदया : ठीक है। जगदम्बिका पाल जी, आप बोल रहे हैं या बैठ रहे हैं?
…( व्यवधान)
श्री जगदम्बिका पाल: महोदया, मैं कन्कलूड कर रहा हूं।
अध्यक्ष महोदया : फिर आप बैठ क्यों रहे हैं?
…( व्यवधान)
*m04 श्री जगदम्बिका पाल: स्पष्ट तौर पर भारत के संविधान अनुच्छेद 44(1) और 35 में भाषा की डेफिनेशन दी गई है कि भाषा को कैसे डिफाइन किया जाएगा। अगर इस देश में न्यायपालिका और कार्यपालिका की भाषा अंग्रेजी हो सकती है, हिंदी हो सकती है, क्षेत्रीय भाषाएं हो सकती हैं तो क्या आजादी के इतने सालों बाद संविधान की आठवीं अनुसूची में भोजपुरी भाषा शामिल नहीं हो सकती है? संविधान के अनुच्छेद में इस भाषा को रिकोगनिशन या मान्यता प्राप्त नहीं है। संविधान के अनुच्छेद 344(1) और 351 में भारत की संसद में शक्तियां निहित हैं। संसद में ही शक्तियां निहित हैं कि किसी भाषा को, चाहे राजस्थानी हो, मान्यता दे सकते हैं। इसमें कोई मतभेद नहीं है कि आप चाहे भोजपुरी लें, राजस्थानी लें। हम कहते हैं कि 38 भाषाएं चाहती हैं कि इस देश की आठवीं अनुसूची में शामिल हो जाएं। यह सौभाग्य होगा कि ये भाषाएं संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल हो जाएं जिससे उस भाषा को बोलने वालों को मान्यता मिलेगी। इस मान्यता से देश मजबूत होगा, एकता मजबूत होगी, अखण्डता मजबूत होगी और देश एक सूत्र में बंधेगा। भोजपुरी भाषा को मान्यता देना लगातार लंबित हो रहा है। आज भी दो बिल पेंडिंग है, ओम प्रकाश यादव का भी बिल है। संजय जी का प्राइवेट मैम्बर बिल है, हमने भी बिल लगाया है, मेघवाल जी का भी है। इस तरह से सदन कैसे चलेगा?
          महोदया, जहां तक यूपीएससी की बात है, उन्होंने प्रस्ताव दिया कि इन भाषाओं को डिलीट कर दिया जाए। मुझे समझ में नहीं आता कि उसका निर्णय इस भाषा से जोड़ने का क्या तात्पर्य है? हम इस भाषा को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल कराना चाहते हैं और आप यूपीएससी की परीक्षाओं के साथ जोड़कर लंबित रखना चाहते हैं। आप कब तक लंबित रखना चाहते हैं? आज जवाब आ गया। हम आपको बड़ी कृपापूर्वक धन्यवाद देना चाहते हैं कि आज आपने इसे स्वीकार कर लिया कि अब शायद एक या आधा साल यह विषय स्वीकार नहीं होगा। आज यह आश्वासन मिल गया कि इसे यूपीएससी एग्जाम के साथ जोड़ रखा है। यह बात तो पहली बार आ रही है कि यूपीएससी के एग्जाम के साथ जोड़ा जा रहा है। मैं कहता हूं कि आप इसे मान्यता दे दीजिए और चाहे यूपीएससी कमीशन के साथ एग्जाम में जोड़ें या न जोड़ें। आज बिहार के विश्वविद्यालयों में यह भाषा पढ़ाई जाती है। वैस्ट बंगाल में विषय है, मारीशस में है। मैं हिंदुस्तान और दुनिया के कई उदाहरण दे सकता हूं।
      महोदया, दुनिया के तमाम विश्वविद्यालयों में भोजपुरी भाषा पर शोध हो रहा है, भोजपुरी भाषा में पढाई हो रही है। जबकि हम आज अपने ही देश में भोजपुरी भाषा बोलने वाली लगभग 20 करोड़ की आबादी की भावना नहीं समझ रहे हैं। मैं कोई नई बात नहीं कह रहा हूं। मैं चाहता हूं कि सरकार दिए गए आश्वासनों को पूरा करे। प्रणब दा ने भी इस बात पर इन्टरवीन किया था। पिछली बार इस पर चर्चा हुई थी तब नेता सदन ने कहा था कि इस विषय पर नियम 193 के तहत चर्चा करके पारित करेंगे। आप एक बार राय ले लें, भावनाएं देख लें। सारा सदन इस बात से सहमत होगा कि भोजपुर को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल किया जाए।
   
श्री शैलेन्द्र कुमार (कौशाम्बी): माननीय अध्यक्ष महोदया, आपने मुझे कालिंग अटैंशन के महत्वपूर्ण विषय पर भाग लेने का मौका दिया, इसके लिए मैं आपका आभारी हूं। मुझे इस बात की खुशी है कि आपने भोजपुरी भाषा के कालिंग अटैंशन के लिए स्वीकृति दी, मैं इसके लिए भी आपको विशेष धन्यवाद देना चाहता हूं।
मैं इस सदन में तीसरी बार चुनकर आया हूं। 12वीं, 14वीं और 15वीं लोक सभा में मैं चुनकर आया हूं और लगातार मैंने देखा कि शून्यकाल में, प्राइवेट मैम्बर्स बिल के माध्यम से और कालिंग अटैंशन में हमेशा यह मांग उठती रही है कि भोजपुरी भाषा को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल किया जाए। मैं यह भी जानता हूं कि आप भी बिहार और भोजपुरी प्रदेश से चुनकर आती हैं और आपकी मनोभावना भी हम लोगों के साथ है, यह मुझे मालूम है और मैं इसका स्वागत भी करता हूं और मैं आपसे आग्रह करता हूं कि आप हम लोगों के वक्तव्य पर बल देंगी और कुछ निर्देश भी देंगी। मैं आभार व्यक्त करना चाहूंगा कि पिछली लोक सभा में श्री प्रभुनाथ सिंह जी ने प्राइवेट मैम्बर्स बिल के माध्यम से इस विषय पर इस सदन में चर्चा कराई थी। माननीय शत्रुघ्न सिंहा जी यहां बैठे हुए हैं, आपने जीरो ऑवर में यह मामला उठाया था। श्री संजय निरूपम जी बैठे हैं, आपने भी यह मामला उठाया था। ...( व्यवधान)
डॉ. रघुवंश प्रसाद सिंह (वैशाली):किसी की सुनवाई कहां है।...( व्यवधान)
अध्यक्ष महोदया : आप बैठ जाइये। आपकी बारी आ रही है, लेकिन अभी आप क्यों बोल रहे हैं?
श्री शैलेन्द्र कुमार: श्री जगदम्बिका पाल जी ने अभी इस भावना को सदन में उठाया। डा.रघुवंश प्रसाद सिंह जी बहुत आक्रोशित हैं, इन्होंने भी कई बार यह मामला सदन में उठाया। श्री उमा शंकर जी...( व्यवधान)
MADAM SPEAKER: Nothing else will go on record.
(Interruptions) * अध्यक्ष महोदया : आप चेयर को संबोधित कीजिए। आप प्रश्न पूछिये। आप स्पष्टीकरण का प्रश्न पूछिये और समाप्त कीजिए।
श्री शैलेन्द्र कुमार : मैं बोलकर ही प्रश्न पूछूंगा। अभी मैं माननीय गृह मंत्री जी का उत्तर पढ़ रहा था, उन्होंने 22 भाषाओं को आठवीं अनुसूची में शामिल कर दिया है। मैं पूछना चाहूंगा कि संघ लोक सेवा आयोग की परीक्षाओं में भाषाओं को लेकर आपने इस प्रश्न को टालने का काम कर दिया है। मैं यह पूछना चाहूंगा कि वर्तमान समय में अगर आपने 22 भाषाओं को आठवीं अनुसूची में शामिल किया है तो क्या उनकी परीक्षाएं लगातार संघ लोक सेवा आयोग में हो रही हैं या जो उच्च स्तरीय परीक्षाएं हो रही हैं, उनमें आप ले रहे हैं। आप एक बहाना ढूंढ रहे हैं कि भोजपुरी भाषा आठवीं अनुसूची में शामिल न हो, यही बहाना लेकर आप आये हैं।
          तीसरी बात मैं कहना चाहता हूं कि 38 भाषाओं को आठवीं अनुसूची में शामिल करने के लिए यहां मांग उठी है। लेकिन आज देखा जाए तो भोजपुरी भाषा को देश-विदेश के 40 करोड़ लोग बोलने का काम करते हैं। अभी श्री जगदम्बिका पाल जी ने इस विषय में विस्तार से कहा है, मैं उसमें जाना नहीं चाहूंगा। आज भोजपुरी भाषा की फिल्में आ रही हैं, भोजपुरी के गाने आ रहे हैं। यहां तक की इससे देशभक्ति की भावना भी जागृत होती है। मैं विदेश में आइसलैंड गया था, वहां बिहार का एक नौजवान थर्मल पावर प्लान्ट में काम कर रहा था, वह मुझे दूतावास में एम्बेसेडर के भोज में मिला, उसने जब मुझसे भोजपुरी भाषा में बात की तो मुझे बेहद खुशी हुई। उसे यह गर्व हुआ कि मैं हिंदुस्तान से आया हूं, उसे यह गर्व हुआ कि मैं बिहार से हूं। एक तरीके से देखा जाए तो भोजपुरी भाषा एक-दूसरे देश को जोड़ने का काम भी करती है और देशभक्ति की भावना को लाने का काम करती है।
          अभी कहा गया कि 2004 में भोजपुरी भाषा को आठवीं अनुसूची में शामिल करने के लिए श्री सीताकांत महापात्रा की अध्यक्षता में उच्च स्तरीय कमेटी बनाई गई और उसमें उन्होंने एक मानक दिया। मैं पूछना चाहूंगा कि उस रिपोर्ट को आपने आज तक सदन में प्रस्तुत क्यों नहीं किया? श्री सीताकान्त महापात्रा के क्या मानक हैं, क्या मापदंड हैं। यदि 22 भाषाएं शामिल हुई हैं तो उन भाषाओं का भी आप मूल्यांकन और मापदंड कीजिए। आज देश और विदेश के चालीस करोड़ लोग भोजपुरी भाषा बोलते हैं। लेकिन उन्हें आपने दरकिनार कर दिया है, नजरअंदाज कर दिया है। इसी सदन में 2006 को यह मामला प्रस्तुत हुआ था, उस पर माननीय श्री श्रीप्रकाश जायसवाल जी ने कहा था अगले सत्र में भोजपुरी को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल करने के लिए हम बिल लायेंगे। लेकिन आज तक वह ठंडे बस्ते में पड़ा हुआ है, जिसे हम पुरजोर तरीके से कंडैम करते हैं।
          मैं अगली बात कहना चाहता हूं कि श्री सीताकांत महापात्रा की जो रिपोर्ट है, उसे आपने कार्मिक प्रशिक्षण विभाग को सौंप दिया, उसे भी आपने ठंडे बस्ते में डालने का काम किया है। मैं आपके माध्यम से पूछना चाहूंगा कि आज पूरे सदन की भावना है और यह भाषा केवल देश ही नहीं बल्कि विदेशों में भी बोली जाती है। हमारे तमाम प्रधान मंत्री हुए हैं, अन्य देशों में वहां के सांसद हुए, विधायक हुए, काउंसलर हुए। अगर इस भाषा को इतना सम्मान देने का काम किया गया तो मैं आपके माध्यम से संरक्षण चाहूंगा कि आप भी उसे प्रदेश से आती हैं, आप भी भोजपुरी बोलती हैं। हम इस मामले में आपका संरक्षण चाहेंगे कि आप सदन में निर्देशित करें और इस बारे में कोई घोषणा हो कि संविधान की आठवीं अनुसूची में भोजपुरी को शामिल किया जाए।
          इन्हीं बातों के साथ मैं अपनी बात समाप्त करता हूं।
     
डॉ. रघुवंश प्रसाद सिंह: अध्यक्ष महोदया, भोजपुरी भाषा के लिए मुझसे पहले बोलने वाले दोनों माननीय सदस्यों ने ध्यान आकृष्ट किया कि भोजपुरी को संविधान की आठवीं अनुसूची में डाला जाए। ...( व्यवधान) लोक सभा में जितनी बार यह सवाल उठा है, आज तक इतनी बार दूसरा कोई सवाल नहीं उठा है। 15 बार प्राइवेट मेम्बर्स बिल में, ध्यानाकर्षण में और ज़ीरो आवर में विभिन्न माननीय सदस्य इसे उठाते रहे हैं। यह 20 से 25 करोड़ लोगों की भाषा है। बिहार के 7 जिलों में, उत्तर प्रदेश के 17 जिलों में, मध्य प्रदेश, और देश भर के तमाम बड़े शहरों और दिल्ली, कोलकाता, मुंबई, लुधियाना सहित विश्व के 14 देशों में भोजपुरी भाषा बोली जाती है। मॉरीशस, फिजी, सूरीनाम, त्रिनिदाद, ब्रिटिश गुएना, मालदीव, सिंगापुर, बर्मा, नेपाल, बैंकाक, जमैका, स्याम, दक्षिण अफ्रीका आदि 14 देशों में यह भाषा बोली और समझी जाती है। यह इस भाषा का महत्व है।
          महोदया, इसमें व्याकरण है। बाबू कुंवर सिंह पर आठ महाकाव्य लिखे गए। वीर गाथा, आल्हा ऊदल, लोरिकाइन, एक राजा भत्तृहरि, गोपीचंद, विभिन्न लोकगाथा, लोक गीत, लोक साहित्य, लोक नाटय़, लोकोक्तियाँ, मुहावरे आदि भरे पड़े हैं। सॉनिट भी लिखा गया है। केवल अंग्रेजी में लोग कहते हैं कि A sonnet is a poem of 14 lines.  It was developed in Italian by Petrarca.  There are two types of sonnets: Petrarchan sonnet and Shakespearean sonnet.  लेकिन भोजपुरी में सोनिट भी लिखा गया है। हिंदुस्तान के भोजपुरी के शेक्सपियर श्री बिहारी ठाकुर जी, उनकी रचना विदेशिया, बटोहिया चले। महोदया, उस इलाके से हिंदुस्तान में 50 हजार वर्ग मील में यह भाषा बोली जाती  है। एक से एक महान विभूति - देशरत्न बाबू राजेन्द्र प्रसाद, बाबू जय प्रकाश नारायण, बाबू जगजीवन राम, एक से एक महान विद्वान - डॉ. हजारी प्रसाद द्विवेदी, डॉ. नामवर सिंह, श्रीचंद्र शेखर, जो उस समय के मजदूरों के नेता थे। भूतपूर्व प्रधानमंत्रा तथा डॉ. गणेश प्रसाद विद्यार्थी ने दुनिया में नाम किया। महोदया, एक से एक महारथी भोजपुरी इलाके से इस देश को लोगों ने कंट्रीब्यूट किया है। देश की आजादी से लेकर सन् 1857 में बाबू कुंवर सिंह ने आजादी की लड़ाई की शुरूआत की। जब वहां के भोजपुरिया लोग कहे कि बाबू कुंवर सिंह तेगवा बहादुर, उड़ेला, उड़ेला गुलाल। इस तरह की वीर गाथा, आल्हा ऊदल, देखब इस मर्दानगी में कितनी क्षमता है। अनेक वीर गाथा, कुवंर विजइया के गीत, विजयमल का गीत, लोरिकाइन का गीत, एक से एक लोक साहित्य, लोक नृत्य और एक से एक विद्वान वहां पर हुए हैं।
           महोदया, महेन्द्र मिश्र के गीत ने देश भर में नाम किया है। सुग्गन जी का लोक संगीत, ग्राम गीतांजली, चंदरीक का, महेन्द्र मिश्र का महेन्द्र मंगल, पैजनिया, जयनंद ओझा जी, संकटा प्रसाद, श्रीमति विंध्यवासिनी देवी के लोक गीत कोई सुने तो आदमी रास्ता चलना रूक जाएगा। पं. राम नरेश त्रिपाठी, डॉ. उदय नारायण तिवारी, श्री झांगुर त्रिपाठी, डॉ. रसिक बिहारी ओझा निर्भीक, कैलाश नाथ इत्यादि के भोजपुरी में पर्याप्त साहित्य है। महोदया, भोजपुरी में पर्याप्त साहित्य का भंडार है।  उसमें एक से एक लेखक, कविता, महाकाव्य, व्याकरण, सभी भाषा की क्षमता रखता है। इसे सरकार ने स्वयं स्वीकार किया है, लेकिन अफसोस है, यह सदन की गरिमा, महिमा पर सरकार के द्वारा एक आघात है। ऐसा मैं क्यों कहता हूं? इन्हीं का मंत्री, इसी राज में, उन्होंने क्या कहा, वह मैं संक्षेप में बताना चाहता हूं, यह श्री श्रीप्रकाश जायसवाल, राज्य मंत्री जी का उत्तर है कि अब इसमें ज्यादा देर नहीं लगेगी, हम उम्मीद करते हैं कि आगामी सत्र में इस संबंध में यह बिल पारित कराया जाएगा। वर्ष 2006 में इस सदन में वहीं से कहा गया कि अगले सत्र में पारित कराया जाएगा।...( व्यवधान) इतना ही नहीं, इसके साथ ही इन दोनों भाषाओं, राजस्थानी और भोजपुरी भी...( व्यवधान) इस संबंध में दोनों भाषाओं को मान्यता मिलेगी, जिसके लिए लंबे समय से न केवल भोजुपरी क्षेत्र के लोग, बल्कि हमारे माननीय सदस्य भी चिंतित हैं। ...( व्यवधान)
अध्यक्ष महोदया : रघुवंश बाबू, अब समाप्त करिए।  
…( व्यवधान)
डॉ. रघुवंश प्रसाद सिंह: महोदया, इसी तरह से फिर बाद में भी सवाल उठा तो माकन जी, जो होम मिनिस्टर थे, उन्होंने वहां से कहा कि हम इस पर तुंत विचार कर रहे हैं। सीताकांत महापात्रा कमेटी आयी, यूपीएससी की कमेटी बना दी, वर्ष 2009 में उसकी रिपोर्ट बनी और मार्च में वह रिपोर्ट भी आ गयी, इन्होंने कहा कि मार्च में रिपोर्ट आ गयी।  
अध्यक्ष महोदया : अब समाप्त करिए।
डॉ. रघुवंश प्रसाद सिंह: महोदया, मैं सवाल पूछता हूं, मैं सरकार से स्पेसिफिक उत्तर चाहता हूं कि जो 14 भाषाओं के बाद 22 भाषायें बनीं, क्यों भोजपुरी के ही समय सीताकांत महापात्रा कमेटी बनी, फिर यूपीएससी की कमेटी और फिर वर्ष 2004 से लेकर आज 8 वर्ष तक अगर-मगर करके भोजपुरी को रोकने का क्या कारण है? जैसे आठ भाषाओं को शामिल किया गया, कम लोगों की बोली को शामिल कर लिया गया, लेकिन बीस से पच्चीस करोड़ लोगों की बोली का क्या हुआ? सरकार क्यों अडिग है, क्यों छल हो रहा है, क्यों कमेटी पर कमेटी बिठाकर देर करने के लिए भोजपुरिया जगत को उकसाने का काम हो रहा है?...( व्यवधान)
अध्यक्ष महोदया : ठीक है, अब समाप्त करिए।
डॉ. रघुवंश प्रसाद सिंह: मैं सरकार से यह स्पेसिफिक जानना चाहता हूं। क्या कारण है कि ये सभी कमेटियां बनने के बाद भी, वर्षों-वर्षों बीत जाने के बाद भोजपुरी शामिल नहीं हो पायी। आज विश्व भोजपुरी सम्मेलन हो रहा है, यह विश्वभाषा है, उसकी क्यों उपेक्षा हो रही है? सरकार इसे बताये, नहीं तो हाउस में बोलने का क्या लाभ है, यह फिर कागज में रह जाएगा। अगला सत्र कब आएगा? वर्ष 2006 से वर्ष 2012 आ गया, कहते थे कि अगले सत्र में पास हो जाएगा, ये लोग कैसे बोल देते हैं, क्या करते हैं?   सदन की तरफ से इन लोगों को दंड भी मिलना चाहिए, डायरेक्ट आश्वासन था तो क्यों ये सदन को आश्वस्त करके इसे नहीं कर रहे हैं।...( व्यवधान)
अध्यक्ष महोदया : अब आप स्थान ग्रहण कर लीजिए।
डॉ. रघुवंश प्रसाद सिंह: महोदया, अभी और भी भाषायें है, मच्छिका लिच्छवी रिपब्लिक की भाषा, अंगिका, मगही, ये सभी भाषायें, भोजपुरी और राजस्थानी सहित अनेक भाषायें हैं, इस पर सरकार तुंत निर्णय करे और आज हमें स्पष्ट बताये। अब टालमटोल से काम नहीं चलेगा, यातना नहीं अब रण होगा, जीवन जाये या मरण होगा, अब देखें इस भारत में कौन बड़ा वीर बलिदानी है, किसकी धमनी में खून और किसकी धमनी में पानी है।
श्री उमाशंकर सिंह (महाराजगंज):हम रउआ आभारी बानी कि रउआ हमार ध्यानाकर्षण प्रस्ताव स्वीकार कइली।  
अध्यक्ष महोदया : आप हिन्दी में बोलिये, अभी ट्रंसलेशन की सुविधा नहीं है। ट्रंसलेशन की सुविधा नहीं है।
श्री उमाशंकर सिंह:हमार निहोरा में निर्वा एकरे खातिर हम रउआ आभारी बानी, लेकिन हम ज्यादा समय न लेकर कुछ उदाहरण रउआ के सामने देहब, उदाहरण राउरे देहब।
अध्यक्ष महोदया : इंटरप्रिटेशन की सुविधा नहीं है, बहुत से लोगों को समझ में नहीं आयेगा, इसलिए आप हिन्दी में बोलिये।  
श्री उमाशंकर सिंह:अच्छा महोदया, हम हिन्दी में बोलते हैं। आपने ही 23 सितम्बर 2009 को इंडिया हैबीटेट सेंटर में इग्नू द्वारा आयोजित भोजपुरी में आधार पाठय़क्रम का विमोचन किया।­É  उस अवसर पर जो भाषण आपने दिया, वह किताब मेरे पास है। आपकी अनुमति होगी तो मैं वह किताब टेबल पर रखूँगा। यही नहीं, हज़ार वर्ष पहले का इस भाषा का इतिहास है। इस भाषा में बाबू जगजीवन राम जी लिखते थे, गागर का सागर, वह किताब भी हमारे पास है। हज़ार वर्ष पहले के भोजपुरी के इतिहास की वह सब बातें ध्यानाकर्षण में आ गई हैं। 2004 में तत्कालीन गृह मंत्री शिवराज पाटिल जी ने कहा और अभी माननीय मंत्री श्रीप्रकाश जायसवाल जी बैठे हैं। इन्होंने 2006 में कहा था 22 भाषाएँ हैं।  उनमें से आठ भाषाएँ जो आपने ली हैं, उनको 20 से 25 हज़ार लोग ही बोलते हैं  जबकि 20 से 25 करोड़ लोगों की बोलने वाली भाषा को आठवीं अनुसूची में लाने के लिए 12 वर्षों से यह बात चल रही है। आज तक यह अनुसूची में नहीं आई है। हम आपसे कहना चाहते हैं कि भोजपुरी की किताब लिखी गई है, मेरे पास वह किताब भी है। वह भोजपुरी का इतिहास है 5 जुलाई, 1984 - भोजपुरी भाषा और साहित्य, भोजपुरी भाषा का इतिहास - रास बिहारी पाण्डे, 1986; भोजपुरी ठेठ भाषा व्याकरण - पंडित शिवदास ओझा, 1983; भोजपुरी साहित्य का संक्षिप्त इतिहास - नागेन्द्र प्रसाद सिंह, 2009; भोजपुरी हिन्दी-अंग्रेज़ी शब्दकोश - केन्द्रीय हिन्दी संस्थान, संपादक - राजेन्द्र प्रसाद सिंह, 2009; इनवैस्ट ऑफ इंडियन फोक टेल्स, विदेश में भोजपुरी कहानी के अनुवाद - ओरियेन्टल ब्लैकस्मिथ, पंडित रामगरीब चौबे 2003;  भोजपुरी की लिपि, भोजपुरी अकादमी की स्थापना, मैथिली-भोजपुरी अकादमी की स्थापना।
          मैं आपको बताना चाहता हूँ कि किन किन विश्वविद्यालयों में यह भोजपुरी भाषा अभी पढ़ाई जाती है। वीर कुँवर सिंह विश्वविद्यालय, आरा, बिहार विश्वविद्यालय मुजफ्फरपुर, नालंदा ओपन विश्वविद्यालय पटना, जहाँ से डिप्लोमा और सर्टिफिकेट  दिया जाता है।  जयप्रकाश विश्वविद्यालय छपरा, बीएचयू में भोजपुरी भाषा केन्द्र के डिप्लोमा, सर्टिफिकेट में एम.ए. तक की पढाई प्रो. सदानन्द साही। इग्नू नई दिल्ली में भी भोजपुरी भाषा केन्द्र के आधार पाठय़क्रम तथा सर्टिफिकेट कोर्स की पढ़ाई - प्रो. शत्रुघ्न; जौनपुर पूर्वांचल विश्वविद्यालय में भोजपुरी एम.ए. तक विषय है। दीनदयाल उपाध्याय विश्वविद्यालय गोरखपुर में भोजपुरी हिन्दी पाठय़क्रम का हिस्सा हैं। इस तरह जो भाषा इतने विश्वविद्यालयों में पढ़ाई जा रही है और आपने विगत तीन वर्षों से जो बयान दिया है, वह बयान भी मेरे पास है। आपने विश्व भोजपुरी सम्मेलन में 2012 में, 2010 में, 2009 में भोजपुरी भाषी सांसदों से अपील की कि आप लोग सदन में विधेयक लाएँ। इस बार 25.3.2012 को हम भी मौजूद थे। आपने कहा कि आठवीं अनुसूची में भोजपुरी को शामिल करने की मांग जायज़ है और आप चाहती हैं कि भोजपुरी आठवी अनुसूची में शामिल हो। यह छठा  विश्व भोजपुरी सम्मेलन था। हम आपके माध्यम से माननीय मंत्री जी से यह पूछना चाहते हैं और आपका संरक्षण चाहते हैं कि जब आप खुद कहती हैं कि आप लोग विधेयक लाएँ तो आप क्यों नहीं निर्देश दे रही हैं कि इसको आठवीं अनुसूची में शामिल किया जाए? आपका कर्तव्य बनता है, आपने किताब का विमोचन किया है, आपने कई बार इस पर ध्यान दिया है। इसलिए मैं आपसे निवेदन करूँगा कि आप सरकार को और मंत्री जी को डायरैक्शन दीजिए कि भोजपुरी को आठवीं अनुसूची में शामिल किया जाए। इससे लोगों की भावनाओं को बल मिलेगा और आपके पिताजी बाबू जगजीवन राम जी, लोकनायक जयप्रकाश नारायण जी और डॉ. राजेन्द्र प्रसाद, य़े सारे लोग भोजपुरी भाषी थे जिन लोगों ने देश के निर्माण में, देश को आज़ादी दिलाने में अपनी कुर्बानियाँ दी हैं। ऐसे लोगों की बोलने वाली भाषा को शत्रुघ्न सिन्हा जी तथा कई सदस्यों ने कई बार उठाया लेकिन आज तक इसको 12 वर्षों से क्यों लटकाया जा रहा है, और कोई न कोई बहाना ढूँढ़ रहे हैं, यह मैं आपके माध्यम से माननीय मंत्री से जानना चाहता हूँ । मैं आपके माध्यम से, आप ही से अपील करना चाहता हूं, सदन से अपील करना चाहता हूं कि आप सरकार को निर्देश दें कि इसको आठवीं अनुसूची में जोड़ा जाए।...( व्यवधान)
अध्यक्ष महोदया : रूल परमिट नहीं करता है।
…( व्यवधान)
अध्यक्ष महोदया : कॉलिंग अटैंशन में Rule does not permit.
…( व्यवधान)
अध्यक्ष महोदया : यह ऐसे तो 193 हो जाएगा। ध्यानाकर्षण में हमारे हाथ बंधे हुए हैं, क्योंकि नियम नहीं है।
…( व्यवधान)
अध्यक्ष महोदया : ऐसा नियम नहीं है।
…( व्यवधान)
अध्यक्ष महोदया : नियम नहीं है। अभी ध्यानाकर्षण चल रहा है।
…( व्यवधान)
अध्यक्ष महोदया : हम ध्यानाकर्षण में उसी को बुलवा सकते हैं, जिसने नोटिस दिया हुआ है।
…( व्यवधान)
अध्यक्ष महोदया : आप लोग बैठ जाइए।
…( व्यवधान)
अध्यक्ष महोदया : आप लोग बोल चुके हैं और बहुत अच्छे से बोले हैं। इसलिए आप लोग बैठ जाइए।
…( व्यवधान)
अध्यक्ष महोदया : इस समय ध्यानाकर्षण चल रहा है। ध्यानाकर्षण के नियम के मुताबिक जिन माननीय सदस्यों ने नोटिस दिया हुआ है, उन्हीं को बुलवा सकते हैं और हमने उन्हें बुलवा दिया है। इससे आगे हम नहीं बढ़ सकते हैं, क्योंकि हम इस नियम में बंधे हुए हैं। कृपया आप यह समझें।
…( व्यवधान)
MADAM SPEAKER: Now, the hon. Minister, please.
… (Interruptions)
THE MINISTER OF STATE IN THE MINISTRY OF HEALTH AND FAMILY WELFARE (SHRI SUDIP BANDYOPADHYAY): Madam, we may associate… (Interruptions)
MADAM SPEAKER: I cannot do it.
… (Interruptions)
MADAM SPEAKER: Yes, Mr. Minister.
… (Interruptions)
SHRI P. CHIDAMBARAM: Madam, Speaker, it appears that, from what all the hon. speakers said, they have made out a very strong and powerful case for inclusion of Bhojpuri language in the VIII Schedule.  I am at disadvantage; I wish I could have replied, at least, in Hindi. Now, let me say in Bhojpuri that ‘hum  rauwa sabke bhavna samjhatani’.… (Interruptions)
          There has been some progress since 2006. Although I will be the first   to admit that  it has not progressed fast enough.  As I have said in the statement, in 2006, a proposal was, indeed,  moved to include Bhojpuri and another language in the VIII Schedule.  But at that time, in the Government in which my good friend, Mr. Singh was a Minister, a decision was taken – ‘Let us deal with the issue of the UPSC language first, and then take a decision on Shri Sitakant Mohapatra  Committee Report.’  Now, that is a decision taken in 2007. 
          Fortunately, as I stand up here, I can say that the UPSC Committee Report has come in March, 2012. The DoPT is examining the Report.
          I will certainly make every effort to see that a decision is taken on that Report as early as possible; and immediately after a decision is taken on that Report, I shall certainly endeavour to have the Government to take a decision on Shri Sitakant Mohapatra Committee Report. I hope that I can come back to this House with good news but for the present, please bear with me. I again repeat –हम रउआ सबके भावना समझअतनि … (Interruptions)
डॉ. रघुवंश प्रसाद सिंह: महोदया, आठ वर्षों से यह मामला चल रहा है। ...( व्यवधान) यह भोजपुरी के साथ क्यों हो रहा है? ...( व्यवधान) माननीय मंत्री जी को इसका जवाब देना पड़ेगा। ...( व्यवधान) महोदया, आपकी तरफ से निर्देश आना चाहिए। ...( व्यवधान)
अध्यक्ष महोदया : मुझे खुशी है कि हमारे गृह मंत्री जो अधिकांशतः अंग्रेजी में ही बोलते हैं, मैंने उन्हें हिन्दी में भी बोलते नहीं सुना है, लेकिन आज वे भोजपुरी में बोले हैं। उन्होंने आशा व्यक्त की है कि वे जल्दी ही एक खुशखबरी के साथ लौटेंगे। मैं आशा करती हूं कि वे जल्दी लौटेंगे।
…( व्यवधान)
डॉ. रघुवंश प्रसाद सिंह: महोदया, जल्दी मतलब कितने महीने में लौटेंगे? ...( व्यवधान)
MADAM SPEAKER: Now, we will take up Item No.14, Calling Attention---Shri Basu Deb Acharia.
… (Interruptions)
श्री उमाशंकर सिंह:महोदया, इसके लिए एक समय निर्धारित किया जाए। ...( व्यवधान)
श्री रामकिशुन (चन्दौली):महोदया, भोजपुरी को आठवीं अनुसूची में शामिल किया जाए। ...( व्यवधान)
श्री नीरज शेखर (बलिया): महोदया, इसके लिए कोई समय बताएं। आपका संरक्षण चाहिए नहीं तो फिर छः साल और इंतजार करना पड़ेगा।...( व्यवधान)
श्री शैलेन्द्र कुमार: महोदया, इस पर फैसला होना चाहिए। ...( व्यवधान)
12.47 hrs   At this stage, Shri Arjun Roy, Shri Kaushalendra Kumar, Shri Shatrughan Sinha, Shri Umashankar Singh and some other hon. Members came and stood on the floor near the Table अध्यक्ष महोदया : आप लोग वापस जाएं।
 
12.48 hrs At this stage, Shri Arjun Roy, Shri Kaushalendra Kumar, Shri Shatrughan Sinha, Shri Umashankar and some other hon. Members went back to their seats.
 

श्री लालू प्रसाद (सारण): महोदय, आप उन्हें निर्देश दीजिए।...( व्यवधान) श्री शैलेन्द्र कुमार : महोदया, मानसून सत्र में इसकी घोषणा कर दें। ...( व्यवधान) अध्यक्ष महोदया : वह हम कैसे करें?

…( व्यवधान)

  12.49 hrs    At this stage, Shri Shailendra Kumar, Shri Umashankar Singh, Shri Kaushalendra Kumar and some other hon. Members came and stood on the floor near the Table.   अध्यक्ष महोदया : आप लोग वापस जाएं।

      12.50 hrs  At this stage, Shri Shailendra Kumar, Shri Umashankar Singh, Shri Kaushalendra Kumar and some other hon. Members went back to their seats.   SHRI P. CHIDAMBARAM: Madam, we will consider these two Reports and take a decision and we will be able to announce a decision in the Monsoon Session. … (Interruptions) (Placed in the Library. See No. LT 6930/15/12)