State Consumer Disputes Redressal Commission
M/S D.A. Engineering And Developers Pvt ... vs Smt. Nirmala Sharma on 22 February, 2023
Cause Title/Judgement-Entry STATE CONSUMER DISPUTES REDRESSAL COMMISSION, UP C-1 Vikrant Khand 1 (Near Shaheed Path), Gomti Nagar Lucknow-226010 First Appeal No. A/227/2020 ( Date of Filing : 17 Mar 2020 ) (Arisen out of Order Dated 25/02/2020 in Case No. C/216/2018 of District Bareilly-II) 1. M/S D.A. Engineering and Developers Pvt Ltd To Adhikrit Adhikari Parag Milk Factory Ke Samne South City ke Pas Badaun Road Bareilly II Address V Vishanu Pur Premnagar Baareilly To SAh Darector Pramod Kumr Gupta ...........Appellant(s) Versus 1. Smt. Nirmala Sharma W/O Sri Shiv Prakash Sharma Niwasi Anupam Colony Trimurti Pailace ke Samane Bareilly ...........Respondent(s) BEFORE: HON'BLE MR. JUSTICE ASHOK KUMAR PRESIDENT HON'BLE MR. Vikas Saxena JUDICIAL MEMBER PRESENT: Dated : 22 Feb 2023 Final Order / Judgement
राज्य उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग , उ0प्र0 , लखनऊ।
(मौखिक) अपील सं0 :- 227 / 2020 (जिला उपभोक्ता आयोग, (द्वितीय) बरेली द्वारा परिवाद सं0- 216/2018 में पारित निर्णय/आदेश दिनांक 25/02/2020 के विरूद्ध) मैसर्स डी0ए0 इन्जीयरिंग एण्ड डेवलपर्स प्रा0लि0 द्वारा अधिकृत अधिकारी पराग मिल्क फैक्ट्री के सामने साऊथ सिटी के पास बदायॅू रोड़ बरेली द्वितीय पता 250,051 वी0 विष्णु पुरी प्रेमनगर, बरेली द्वारा सह डायरेक्टर प्रमोद कुमार गुप्ता।
अपीलार्थी बनाम श्रीमती निर्मला शर्मा पत्नी श्री शिव प्रकाश शर्मा, निवासी अनुपम कालोनी त्रिमूर्ति पैलेस के सामने बरेली।
प्रत्यर्थी समक्ष मा0 न्यायमूर्ति श्री अशोक कुमार, अध्यक्ष मा0 श्री विकास सक्सेना, सदस्य उपस्थिति:
अपीलार्थी की ओर से विद्वान अधिवक्ता:- कोई नहीं प्रत्यर्थी की ओर विद्वान अधिवक्ता:- श्री अरविन्द्र मिश्रा दिनांक:-22.02.2023 माननीय न्यायमूर्ति श्री अशोक कुमार , अध्यक्ष द्वारा उदघोषित निर्णय पत्रावली प्रस्तुत हुई। अपील विगत 03 वर्षों से लम्बित है। पूर्व में अनेकों तिथि पर स्थगित की जाती रही। अपीलार्थी के विद्धान अधिवक्ता द्वारा पूर्व में शपथ पत्र प्रस्तुत किये जाने की प्रार्थना की गयी है, जिस हेतु समय प्रदान किया गया, परंतु शपथ पत्र उनके द्वारा प्रस्तुत नहीं किया गया। विगत दिनांक 30.11.2022 को अपीलार्थी के विद्धान अधिवक्ता अनुपस्थित थे, जबकि प्रत्यर्थी/परिवादिनी के विद्धान अधिवक्ता श्री अरविन्द मिश्रा उपस्थित थे। अपीलार्थी को अपील में दिनांक 30.11.2022 को निम्नलिखित आदेश पारित किया गया:-
''वाद पुकारा गया। अपीलार्थी के विद्वान अधिवक्ता पिछली अनेकों तिथियों से प्रस्तुत अपील की सुनवाई हेतु अनुपस्थित पाए गये। आज पुन: अपीलार्थी के विद्वान अधिवक्ता अनुपस्थित हैं। प्रत्यर्थी/परिवादिनी श्रीमती निर्मला शर्मा के विद्वान अधिवक्ता श्री अरविन्द मिश्रा उपस्थित हुए।
न्यायहित में अपीलार्थी के विद्वान अधिवक्ता को अंतिम अवसर प्रदान किया जाता है तथा यह सुनिश्चित किया जाता है कि यदि अगली निश्चित तिथि पर अपीलार्थी के विद्वान अधिवक्ता अनुपस्थित रहेंगे तब उस दशा में अपील गुण-दोष के आधार पर निर्णीत की जावेगी साथ ही अपीलार्थी के विरूद्ध भारी हर्जाना भी योजित किया जावेगा।
प्रस्तुत अपील को पुन: सुनवाई हेतु दिनांक 22-02-2023 को सूचीबद्ध किया जावे।'' आज अपीलार्थी के विद्धान अधिवक्ता अनुपस्थित हैं। प्रत्यर्थी की ओर से विद्धान अधिवक्ता को सुना। पत्रावली का अवलोकन किया।
संक्षेप में वाद के तथ्य इस प्रकार हैं कि प्रत्यर्थी/परिवादिनी ने अपीलार्थी/विपक्षी से दिनांक 24.01.2014 को अपार्टमेंट में बुकिंग हेतु रू0 2,04,545/-जमा किये। उक्त फ्लैट का मूल्य रू0 22,50,000/- था। प्रत्यर्थी/परिवादिनी को अपीलार्थी/विपक्षी ने 30 माह के अंदर फ्लैट उपलब्ध कराने हेतु आश्वासन दिया। अपीलार्थी/विपक्षी ने प्रत्यर्थी/परिवादिनी से दिनांक 26.08.2014 तक 08 किस्तों में कुल रू0 16,36,360/- प्राप्त कर लिए हैं, परंतु अपीलार्थी/विपक्षी ने आश्वासन दिये जाने के बावजूद 04 वर्ष व्यतीत होने के उपरान्त भी निर्माण एवं विकास कार्य नहीं कराया गया, जिस कारण प्रत्यर्थी/परिवादिनी को अपने पुत्र को मासिक किराया रू0 8,000/- पर रखना पड़ रहा है। प्रत्यर्थी/परिवादिनी ने अपीलार्थी/विपक्षी को प्रसूचना पत्र भिजवाया, परंतु अपीलार्थी/विपक्षी ने लेने से इंकार कर दिया।
अपीलार्थी/विपक्षी ने प्रतिवाद पत्र में फ्लैट सं0 217 बुक किया जाना एवं 08 किश्तों में प्रत्यर्थी/परिवादिनी द्वारा अपीलार्थी/विपक्षी को रू0 16,36,360/- भुगतान किया जाना स्वीकार किया गया है तथा परिवाद के अन्य अभिकथनों का खण्डन किया है।
हमारे द्वारा प्रत्यर्थी के विद्धान अधिवक्ता को सुना गया। पत्रावली पर उपलब्ध समस्त प्रपत्रों का परिशीलन किया गया। जिला फोरम के सम्मुख प्रत्यर्थी/परिवादिनी द्वारा प्रस्तुत परिवाद पत्र का परिशीलन किया गया तथा विद्धान जिला फोरम द्वारा पारित निर्णय एवं आदेश का समुचित विवेचन एवं आंकलन करने के उपरान्त हम यह पाते हैं अपीलार्थी/विपक्षी द्वारा फ्लैट का निर्माण अनुबंध पत्र की शर्तों के अनुसार नहीं किया गया है और फ्लैट निर्माण हेतु नियत अवधि के अंतर्गत परिवादिनी से अवशेष धनराशि का भुगतान करने हेतु प्रसूचनापत्र नहीं दिया गया। अत: अपीलार्थी/विपक्षी को प्रत्यर्थी/परिवादिनी द्वारा जमा की धनराशि रू0 16,36,360/-रू0 वापस कर देनी चाहिए थी। उक्त धनराशि को वापस न करके विपक्षी द्वारा सेवा में कमी कारित की गयी है, जिससे प्रत्यर्थी/परिवादिनी को अपूर्णनीय क्षति हुई है, जिसके लिए अपीलार्थी/विपक्षी जिम्मेदार है।
विद्धान जिला उपभोक्ता उपभोक्ता फोरम ने जो निर्णय एवं आदेश पारित किया है, वह तथ्य एवं विधि के अनुकूल है, उसमें किसी प्रकार की अवैधानिकता नहीं है। विद्धान जिला उपभोक्ता आयोग द्वारा पारित आदेश में प्रत्यर्थी/परिवादिनी को अपीलार्थी/विपक्षी से फ्लैट हेतु जमा की गयी धनराशि विधिनुसार एक माह की अवधि में प्राप्त कराया जाये, बाकि की धनराशि अपीलार्थी द्वारा एक माह की अवधि में देना सुनिश्चित किया जाये अन्यथा ब्याज की गणना अपील प्रस्तुत किये जाने की तिथि से बाकी की धनराशि के भुगतान किये जाने की तिथि तक 07 प्रतिशत से बढ़कर 09 प्रतिशत देय होगी। तदनुसार अपील खारिज की जाती है। शेष निर्णय/आदेश द्वारा जिला फोरम की पुष्टि की जाती है।
धारा 15 उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम के अंतर्गत अपील में जमा धनराशि मु0 25,000/- मय अर्जित ब्याज सहित संबंधित जिला उपभोक्ता आयोग को नियमानुसार निस्तारण हेतु प्रेषित किया जाये।
आशुलिपिक से अपेक्षा की जाती है कि वह इस निर्णय/आदेश को आयोग की वेबसाइट पर नियमानुसार यथाशीघ्र अपलोड कर दें।
(न्यायमूर्ति अशोक कुमार) (विकास सक्सेना) अध्यक्ष सदस्य संदीप आशु0 कोर्ट 1 [HON'BLE MR. JUSTICE ASHOK KUMAR] PRESIDENT [HON'BLE MR. Vikas Saxena] JUDICIAL MEMBER