Lok Sabha Debates
Further Discussion On The Budget (General), 2015-16 And Demands For Grants For ... on 28 April, 2015
Sixteenth Loksabha an> Title: Further discussion on the Budget (General), 2015-16 and Demands for Grants for Ministry of Home Affairs.
DEMANDS FOR GRANTS (GENERAL), 2015-16
(i)Ministry of Home Affairs – Contd.
HON. SPEAKER: Now, we shall take up Item No. 26 – Further discussion and voting on the Demands for Grants under the control of the Ministry of Home Affairs for 2015-16.
श्रीमती दर्शना विक्रम जरदोश (सूरत)ःमैं मान्यवर मंत्रीजी का ध्यान आजकल बढ़ रहे साइबर क्राईम की ओर आकर्िात करना चाहती हूं। पिछले कुछ समय से साईबर क्राइम की संख्या में बहुत बढ़ोतरी हुई है। इस बढ़ोतरी का एक कारण यह है कि आम जनता में जो जागरूकता होनी चाहिए वो नहीं है एवं फाइनान्सीयल इन्सटीटय़ूशन एवं पुलिस विभाग के बीच, एक पुलिस स्टेशन और एक बैंक की ब्रांच के स्तर पर जो तालमेल होना चाहिए उतना तालमेल हमारे देश में अभी तक बैठा नहीं है। मेरा मंत्रीजी से सुझाव है कि पुलिस विभाग में पुलिस स्टेशन के स्तर पर कार्य करने वाले कर्मचारी एवं अधिकारियों को भी इस विाय की जानकारी देने की योजना बनाई जानी चाहिए। साथ ही साथ, साईबर क्राइम के प्रति संवेदनशीलता बढ़ाने की भी आवश्कता है, क्योंकि कई बार एक ही व्यक्ति से दो या तीन बार चीटींग के भी केसीस सामने आते हैं। तब एक व्यक्ति पहले बैंक में सूचना देता है और उसके बाद पुलिस स्टेशन में सूचना देने जाता है। तब उसे पता चलता है कि इस पुलिस स्टेशन की ज्यूरीसडीक्शन में वह ब्रांच नहीं आती। जब वो उस पुलिस स्टेशन में जाता है तब तक आरोपी नौ दो ग्यारह हो चुका होता है। इसलिए यह जरूरी बनता है कि बैंक में सूचना जाने के बाद बैंक की ओर से तुरंत उस विस्तार का जो भी पुलिस स्टेशन है उसमें फोन द्वारा इस क्राइम की सूचना दी जानी चाहिए। बाद में आम व्यक्ति उस दिन में कभी भी पुलिस स्टेशन पर संपर्क कर सके। इसलिए बैंकों के साथ तालमेल बढ़ाना और आम जनता में साइबर क्राइम के प्रति जागरूकता लाने हेतु कार्यक्रमों की योजना बनाना और साईबर क्राईम की डीटेक्शन इन तीन बातों पर विशेा मुहिम चलाई जाए।
*SHRI S.R. VIJAYAKUMAR (CHENNAI CENTRAL): I thank our beloved leader Honourable Makkalin Mudalvar Idhaya Deivam Puratchi Thalaivi Dr. Amma for having given me an opportunity to represent Central Chennai Lok Sabha Constituency in this august House and also for enabling me to express my views on the Demands for Grants for the Ministry of Home Affairs for the year 2015-16.
The Ministry of Human Resource Development comprises the Department of Internal Security, Department of States, Department of Home, Department of Jammu & Kashmir Affairs, Department of Border Management, Department of Official Language. The Office of the Registrar General and Census Commissioner of India also come under this Ministry.
The Budget Estimates for the Ministry of Home Affairs stands at Rs. 62,124.52 crores out of which Rs. 7,371.90 crores for Plan outlay and Rs. 54,752.54 crores for Non-Plan outlay. The total Budget Estimates for this Department has seen a modest increase of 10.2 per cent over the outlay of the last fiscal 2014-15. Special focus has been given to women safety, rehabilitation of Kashmiri Pandits and Internal Security. Extra allocation of Rs. 1000 crore to the Nirbhaya Fund Corpus is a welcome step. Any step in safety of women is welcome by us as the AIADMK party led by Dr. Amma has always championed the cause of safety of women and girl children. Cradle Baby Scheme of Dr. Amma was to ensure the safe upbringing of unfortunate unwanted abandoned children. The scheme is to ensure that even if the biological parents disown the infants, the Government will take care of them.
The hike in allocation for the Central Armed Police Forces (CAPF) is a welcome step. These Forces deployed at times of extreme civil disturbance, violence due to terrorist, communal and naxal elements play a commendable role and the hike in outlay is deserving.
Increase in outlays of CBI and Lokpal by 10 and 7 per cent respectively is a progressive step.
Narcotics Control Bureau under this Ministry should be modernized and should be equipped to meet the growing challenges from the drug traffickers.
The Home Ministry has written to tell the State Governments that no fresh proposal under the modernization of police forces (MPF) will be entertained in the fiscal. It is a sad development. This crucial area of police modernization, in fact, needs enhancement of allocation. I would urge the Government to rethink on this issue and continue to allocate substantial funds to continue the Police Modernization work of the State Governments. Here I would like to mention that Tamil Nadu Government guided by Honourable Dr. Amma has been doing a commendable work like setting up of All Women Police Stations and it is on record that the Tamil Nadu Police is highly sensitized about women safety. I would like the Centre to take a cue from the vigilant Tamil Nadu Government in ensuring communal harmony.
Coastal Security is a major issue. Tamil Nadu with a long coastline require more central assistance to strengthen coastal security. More funds may be allocated to Tamil Nadu for setting up of more Marine Police Stations, jetties, Marine Operation Centres, Boats, Rigid Inflatable Boats, Four Wheelers and Motorcycles etc. The need of the hour is to ensure unity and integrity of the country by following the best practices of internal security measures.
SHRI ARJUN RAM MEGHWAL (BIKANER): I want to lay the following points on the Demand for Grants for Home Affairs:-
(1) The BADP should be reviewed properly. The limit from Border 1-10 km. should be increased upto 20 km. or whole Block should be made eligible under BADP.
(2) Police Reforms should be taken on priority.
श्री विद्युत वरन महतो (जमशेदपुर)ः मैं आपको धन्यवाद देता हूं कि आपने मुझे गृह मंत्रालय की वाऩ 2015-16 की अनुदानों की मांगों पर अपने विचार व्यक्त करने का मौका दिया। हमारा देश बहुत बड़ा है और भारतवाऩ को यह सौभाग्य प्राप्त है कि यह दुनिया का सबसे बड़ा लोकतांत्रिक देश है। लेकिन मैं समझता हूं कि विगत कुछ वााॉ में हमारे देश के सामने कई तरह की समस्याएं उत्पन्न हो गई हैं, जैसे नक्सलवाद, आतंकवाद, साप्रदायिक दंगे तथा कानून व्यवस्था से संबंधित अनेक समस्याएं हैं। यह हम सबका दायित्व बनता है। अगर देश में इसी तरह की राजनीति की जाती रहेगी, तो देश की जो राट्रीय समस्या है, जिस समस्या पर किसी सरकार का नहीं, किसी एक दल का नहीं, बल्कि सब लोगों को मिल करके इस समस्या का निदान करना पड़ेगा, वरना देश की स्थिति ठीक नहीं रहेगी। आज अपराध बढ़े हैं, समस्याएं हमारे सामने हैं।
पूरे झारखंड में नक्सलवाद ने व्यापक ढंग से घर करने का काम किया। छत्तीसगढ़ में अभी हाल ही में दुखद घटना घटी। उड़ीसा में भी यह घटना घट रही है। कई ऐसे इलाके हैं, जहां नक्सलवाद की गतिविधियां बढ़ती जा रही हैं। इस समस्या का निदान कैसे होगा, क्या इस पर हमने गहन चिन्तन करने का काम किया है? हमारे देश में कई तरह की असमानताएं हैं। गरीबी और अमीरी में इतना अंतर आ गया है, जिसकी वजह से वहां के लोग, किसान, बेरोजगार नौजवान अपनी हालत सुधारने के लिए इन सब गतिविधियों में आने का काम कर रहे हैं। जब तक देश में असमानता रहेगी, तब तक हम नक्सलवाद की गतिविधियां बंद नहीं कर सकते। हमारी असमानता में समानता कैसे आए, गैर-बराबरी कैसे दूर हो, विकास कैसे हो। प्रदेश के कई ऐसे जिले हैं, जहां आज भी सड़कों, जल, बिजली एवं शिक्षा का अभाव है। इसलिए यह चिन्ता का विाय है और इस पर निश्चत तौर पर कारगर कदम उठाने चाहिए।
श्री देवजी एम. पटेल (जालौर)ः गृह मंत्रालय की अनुदानों की मांगें, 2015-16 पर अपने विचार व्यक्त करते हुए यह कहना चाहता हूं कि पुलिस अनिवार्यतः एक सार्वजनिक सेवा है और लोकतंत्र में जनता के प्रति जवाबदेह होती है। यह ऐसी सार्वजनिक संस्था है जो सरकार की किसी भी अन्य एजेंसी की तुलना में जनसंख्या के बड़े हिस्से को उनके रोजमर्रा के जीवन में व्यापक रूप से प्रभावित करती है। पुलिस, नागरिक के लिए संपर्क का पहला प्रत्यक्ष बंन्दु है। यह एकमात्र एजेंसी है जिसके पास लोगों के साथ संपर्क का सबसे व्यापक अवसर है। इसलिए सार्वजनिक संस्था के रूप में पुलिस का गठन तथा सशक्तीकरण कानून द्वारा होता है। अतः पुलिस को जनता के प्रति उत्तरदायी होना चाहिए।
राजस्थान में आम लोगों के बीच पुलिस की छवि को लेकर हुए एक अध्ययन से निम्न तथ्य उजागर हुआ। लोगों का मत था कि 11 प्रतिशत लोग ही कभी पुलिस से मिले जबकि 89 प्रतिशत लोगों का पुलिस से कभी सामना नहीं हुआ। इनमें से 24 प्रतिशत लोग शहरी और 17 प्रतिशत लोग ग्रामीण क्षेत्र के थे। केवल 5 प्रतिशत महिलाएं ही पुलिस से कभी मिली थी। यह जाहिर करता है कि समाज का एक बड़ा हिस्सा पुलिस से मिलने या बात करने से हिचकता है। इसमें 87 प्रतिशत लोगों ने कहा कि पुलिस से कार्य कराने के बदले उन्होंने पुलिस को घूस दी है। अध्ययन में बताया गया कि लोग जब अपनी शिकायतें लेकर पुलिस के पास जाते हैं तो पुलिस का रवैया बहुत उदासीन रहता है। इस कारण पैसा देकर अपना काम कराने को मजबूर होते हैं। मजेदार बात यह है कि इनमें 70 प्रतिशत लोगों ने घूस देने के अतिरिक्त पुलिस से अपना काम सीधे नहीं बल्कि ऊपर से दबाव डालकर अथ्वा दलाल के माध्यम से करवाया। आज भ्रटाचार से पुलिस के प्रति जनता का विश्वास घटता है साथ ही कानून के शासन की प्रतिठा गिरती है और कई अपराधों को बढ़ावा मिलता है। इससे किसी पुलिस कर्मी के साथ पुलिस संगठन की छवि और प्रतिठा भी प्रभावित होती है। मेरा मानना है कि जब पुलिस राज्य सरकार के किसी अन्य सार्वजनिक कार्यालय यथा राजस्व नगरपालिका जलविभाग और विद्युत विभाग की तरह ही एक सार्वजनिक सेवा है तब लोग पुलिस थाने जाने और पुलिस से मिलने से डरते क्यों हैं? आज पुलिस स्टेशनों को ऐसे जन स्वागत केन्द्र में तब्दील करने की आवश्यकता है जहाँ लोग अपनी जरूरत पड़ने पर जा सके। अब समय की मांग है कि थानों का आधुनिकीकरण किया जाए। जहां सभी सुविधा उपलब्ध हो। इसी के अंतर्गत हमारी सरकार ने गृह मंत्रालय को पिछले वाऩ के मुकाबले इस वाऩ अधिक धन दिया है। यह आवंटन महिलाओं की सुरक्षा कश्मीरी पंडितों के पुनर्वास और आंतरिक सुरक्षा पर विशेा ध्यान देते हुए किया गया है। जागरूकता के कार्यक्रम को समर्थन देने के प्रयासों के तहत निर्भया फंड के लिए और 1000 करोड़ रुपए देने का फैसला किया गया है। हमारी सरकार 17 राज्यों के 104 जिले के 367 ब्लॉकों में सीमावर्ती क्षेत्र विकास कार्यक्रम कार्यान्वित किया जा रहा है। सीमावर्ती क्षेत्र के विकास के अंतर्गत राज्यों को निधियां अवसंरचना, आजीविका, शिक्षा, स्वास्थ्य, कृिा से संबंधित विकास के कार्य पर जोर दिया जाता है परन्तु कुछ तकनीकी कारणों से मेरे संसदीय क्षेत्र स्थित सांचौर तहसील को इसका लाभ नहीं मिल पा रहा है जबकि सांचौर तहसील को दिनांक 12 मार्च 1996 को सांचौर चितलवाना सर्वना पुलिस स्टेशन के अंतर्गत स्थित क्षेत्र को अंतर्राट्रीय सीमा के रूप में अधिसूचित क्षेत्र घोिात किया गया था। साचौर और चितलवाना प्रखंड के नागरिकों को प्रवेश और निकास पर प्रतिबंध लगा हुआ है। अंतर्राट्रीय सीमा से 1.5 किमी की दूरी पर चार गांव हैं, 10-15 किमी पर आठ गांव तथा 15-20 किमी पर 13 गांव स्थित हैं। इन गांवों में मूलभूत सुविधा का नितांत अभाव है। मुझे पूरा विश्वास है कि इस बजट वाऩ से सांचौर तहसील को इस फंड से विकास कार्य प्रारम्भ हो जाएंगे।
ठीक इसी प्रकार, देश की सीमाओं की निगरानी व देश के अंदर विभिन्न तरह से सुरक्षा में लगे अर्द्धसैनिक बल राट्र की सेवा में समर्पित सेवा बल है। पाक, बंगलादेश, चीन, श्रीलंका, नेपाल, भूटान से लगी सीमा की सुरक्षा पूर्ण रूप में अर्द्धसैनिक बल हर जगह मुस्तैदी से तैनात है। हमारे देश के एक सजग प्रहरी है। देश के अंदर भी आतंकवाद, नक्सलवाद, दंगा, प्राकृतिक विपदा, तीर्थ स्थलों की सुरक्षा एवं विाम परिस्थितियों में ये जवान राट्र सेवा में डटे हुए हैं। लेकिन इन जवानों को वो सुविधा नहीं मिलती है जो सेना के जवानों को मिलती है। अतः मेरा आग्रह है कि अर्द्धसैनिक बलों को निम्न सुविधा जल्द से जल्द देने के लिए सरकार को गम्भीरता से सोचना चाहिए।
10 वाऩ पूर्व अर्द्ध सैनिक बलों के जवानों को कैंटीन सर्विस डिपार्टमेंट के तहत सेना के डिपो से दैनिक जरूरत का सामान मिलता है, परन्तु आजकल ये सुविधा बंद है जिससे अर्द्ध सैनिक बल के जवानों को काफी असुविधा होती है। यह सुविधा गृह मंत्रालय और रक्षा मंत्रालय के तालमेल नहीं होने के कारण बहाल होने में देरी हो रही है। अतः कैंटीन सर्विस डिपार्टमेंट से अर्द्ध सैनिक बलों के जवानों व उनके परिवार को दैनिक उपयोग के सभी समान उपलब्ध कराए जाए।
अर्द्ध सैनिक बलों के जवान हमेशा परिवार से दूर रहते हैं। अतः इनके बच्चों को नवोदय विद्यालय, केन्द्रीय विद्यालय और सैनिक विद्यालय में कोटा देकर इनका सतप्रतिशत नामंकन की सुविधा उपलब्ध कराई जाए।
अर्द्ध सैनिक बलों के जवानों के लिए प्रत्येक जिला में अर्द्ध सैनिक कल्याण बोर्ड की स्थापना की जाए, जिससे रिटार्यमेंट के बाद इनके पुनर्वास का पूरा ख्याल रखा जाए। सरकार की सभी योजनाओं की जानकारी समय पर उपलब्ध कराने की व्यवस्था हा,ॊ जिससे इनको पेंशन स्वास्थ्य और रोजगार उपलब्ध कराने में पूरी मदद हो सके।
SHRI S.P. MUDDAHANUME GOWDA (TUMKUR): The Ministry of Home Affairs is one of the most important Ministries which play a vital role in the administration of this country. This is a flagship Ministry and it comes under priority sector because the question of maintenance of peace and harmony in the country is very important for any democratic country. Unfortunately, the Government of India, in this present budget for the year 2015-16, has reduced the allocation of funds to the various schemes of the Ministry of Home Affairs.
The most important area where the Ministry of Home Affairs has to take things into consideration is the modernization of police force in the country. The facilities given for the police and the arms and ammunitions provided to them to cope with the uphill task of maintenance of peace and harmony in the country has to be looked into very seriously. Again, unfortunately, in this year's budget, not much funds are allocated for the national scheme of modernization of police force.
If we look at the problems being faced by the police personnel in the country, not much youngsters are preferring to enter this field because the facilities provided to them is not attractive or lucrative. Young and energetic people should be appointed for the police force. One of the major problems being faced by the police is the housing problem. People generally do not give houses for the police personnel on rent. In all the places, the Government of India is not providing housing facilities to the police personnel. To make the police personnel work effectively, it is also very important that they should be given housing facility.
The Government of India has also not provided sufficient funds for the border area development programme for the border management. More funds ought to have been allocated for this programme for creating good infrastructure and also facilities because the personnel working in this area generally faces very tough situation. As such, it is the duty and responsibility of the Government of India to take care of the personnel who are working in the border area. Hence, more and sufficient funds should be allocated for the border management keeping in views the interest of the nation into consideration.
The Ministry of Home Affairs is not fully equipped to face the situation which arises from the natural disaster, like cyclones, earthquakes, etc. If we look at the allocation of funds for this natural disaster management, once again there is an utter disappointment. Recently, we have faced a tough situation during the cyclone Huddud in Orissa, Andhra Pradesh, West Bengal, etc. And also in the recent earthquakes in West Bengal, Bihar, Uttar Pradesh, etc., lot of losses to the lives and properties occurred, though the respective State Governments managed the situation well, much expectations and responsibilities were also there on the Union Government. Hence, it is necessary for allocation of more funds for the disaster management also.
The naxal activities in some portions of the country is also another alarming factor which creates fear among the general public. The Government of India should also take more interest in strengthening the anti-naxal force by providing and allocating more money.
डॉ. वीरेन्द्र कुमार (टीकमगढ़)ःजैसाकि हम सभी जानते हैं कि केन्द्रीय गृह मंत्रालय की जिम्मेदारियों में प्रमुख रूप से आंतरिक सुरक्षा, केन्द्रीय सशस्त्र पुलिस बलों के प्रबंधन, सीमा प्रबंधन, केन्द्र-राज्य संबंध, संघ राज्य क्षेत्रों के प्रशासन और आपदा प्रबंधन आदि शामिल हैं। संविधान के अनुच्छेद 355 में संघ का यह कर्त्तव्य निर्धारित किया गया है कि वह बाह्य आक्रमण और आंतरिक अशांति से प्रत्येक राज्य की संरक्षा करें और प्रत्येक राज्य की सरकार का इस संविधान के उपबंधों के अनुसार चलाया जाना सुनिश्चित करें।
गृह मंत्रालय के उत्तरदायित्वों में राज्य पुलिस बलों का आधुनिकीकरण, मानवाधिकारों के सिद्धांतों का संरक्षण एवं उन्हें बढ़ावा देना, अंतर्राट्रीय सीमा और तटवर्ती रेखा का प्रभावी रूप से प्रबंधन, आपदाओं से पैदा होने वाली कठिनाइयों को कम करना तथा राहत प्रदान करना, स्वतंत्रता सेनानियों के कल्याण के लिए कार्य करना, 10 वाावय जनगणना करना, मादक पदार्थों के अवैध व्यापार एवं दुरूपयोग की रोकथाम एवं नियंत्रण करना एवं राजभााा नीति का कार्यान्वयन के साथ-साथ भारतीय पुलिस सेवा नियमों के अनुसार भारतीय पुलिस सेवा संवर्ग का उचित प्रशासन सुनिश्चित करना है।
किसी भी देश में व्यक्तियों के विकास, समाज की अपेक्षाओं को पूरा करने के लिए एवं मजबूत, स्थिर एवं खुशहाल राट्र के निर्माण के लिए शांति एवं सद्भावना अनिवार्य अपेक्षाएं होती हैं। इस उद्देश्य के लिए यह परिकल्पना की गई है कि गृह मंत्रालय निम्नलिखित बातों के लिए पूरा प्रयास करेगा।
इसके तहत किए जाने वाले भावी कार्यों का विवरण निम्न प्रकार है, जिसमें आंतरिक सुरक्षा को होने वाले सभी खतरों को समाप्त करना, समाज को अपराधमुक्त वातावरण मुहैया कराना, सामाजिक और सामुदायिक सौहार्द का परिरक्षण, संरक्षण और उन्नयन, कानून का शासन लागू करना और एक प्रभावी अपराधिक न्याय प्रणाली उपलब्ध कराना, मानवाधिकारों के सिद्धांतों की मर्यादा को बनाए रखना, केन्द्र राज्य संबंधों को सौहार्दपूर्ण बनाना तथा सुशासन को बनाए रखना, प्राकृतिक तथा मानव जनहित आपदाओं के परिणामस्वरूप कटों का प्रशमन करना तथा सरकारी काम-काज में राजभााा का प्रयोग अनुकूल बनाना है।
सरकार के लिए वर्तमान में वामपंथी उग्रवाद एक चुनौती बना हुआ है। इस संबंध में सरकार का दृिटकोण वामपंथी उग्रवाद की गतिविधियों से समग्र तरीके से निपटने का है जो कि एक प्रशंसनीय कदम है। क्योंकि किसी भी तरह की विध्वंसक गतिविधि से किसी भी राट्र के विकास को आघात पहुंचना है। दशकों पुरानी इस समस्या से निपटने में संबंधित राज्य सरकारों से विचार-विमर्श और बातचीत के बाद यह उचित समझा गया है कि इस संबंध में एक ऐसी एकीकृत योजना बनाई जाए जिसके अपेक्षित परिणाम निकले और इस दिशा में सरकार पूरी प्रतिबद्धता से अपना काम कर रही है।
अंतर्राट्रीय घुसपैठ को रोकने के लिए सरकार अंतर्राट्रीय सीमाओं पर बाड़ लगाने का काम तेजी से कर रही है और सड़कों, सीमा चौकियों का निर्माण एवं तेज रोशनी करने का कार्य भी तीव्रता से कर रही है।
इस बार केन्द्रीय बजट में गृह मंत्रालय को 62124.52 करोड़ रुपए का आवंटन किया गया है, जो पिछले वित्त वाऩ के आवंटन से 10.2 प्रतिशत ज्यादा है। इसके लिए मैं सरकार को धन्यवाद देता हूं। यह आवंटन महिलाओं की सुरक्षा, कश्मीरी पंडितों के पुनर्वास और आंतरिक सुरक्षा पर विशेा ध्यान देते हुए किया गया है। महिलाओं की सुरक्षा और जागरूकता के कार्यक्रमों को समर्थन देने के प्रयासों के तहत निर्भया फंड के लिए एक हजार करोड़ रुपए देने का फैसला किया गया है।
जम्मू-कश्मीर के प्रवासियों के राहत और पुनर्वास के लिए बजट में 580 करोड़ रुपए का आवंटन किया गया है जो कि पिछले वित्त वाऩ में 342.50 करोड़ रुपए का था। विश्व के विशालतम अर्द्ध सैनिक बल सीआरपीएफ जिन्हें अक्सर नक्सल विरोधी अभियान सहित आंतरिक सुरक्षा डय़ूटी के लिए तैनात किया जाता है, को 14089.38 करोड़ रुपए का आवंटन किया गया है। पिछले वित्त वाऩ के दौरान इस बल को 12866.12 करोड़ रुपए दिए गए थे। इस लिहाज से इस बार के आवंटन में काफी वृद्धि की गई है।
भारत-पाक और भारत-बांग्लादेश सीमा की सुरक्षा करने के लिए तैनात किए जाने वाले बीएसएफ को इस बार 12517.72 करोड़ रुपए दिए गए हैं, जबकि इस बल के लिए पिछले वित्त वाऩ में आवंटन 11717.46 करोड़ रुपए था। इसी तरह भारत-चीन सीमा पर सुरक्षा के लिए तैनात आईटीबीपी के लिए पिछले वाऩ 3404.93 करोड़ रुपए के मुकाबले इस बार 3736.47 करोड़ रुपए का आवंटन किया गया है। इसके साथ ही, सरकार ने देश के ज्यादातर हवाई अड्डों, औद्योगिक आधारभूत ढांचों, परमाणु केन्द्रों, दिल्ली मेट्रो के अलावा कई अन्य की सुरक्षा के लिए भी तैनात किए जाने वाले सीआईएसएफ के लिए पिछले वाऩ के 4937.91 करोड़ रुपए की अपेक्षा इस बार 5196.65 करोड़ रुपए का आवंटन किया है जो कि एक स्वागतयोग्य कदम है।
इसके लिए मैं माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी और माननीय गृह मंत्री श्री राजनाथ सिंह जी तथा माननीय वित्त मंत्री श्री अरूण जेटली जी का हार्दिक अभिनंदन करता हूं। इसी के साथ, मैं गृह मंत्रालय द्वारा प्रस्तुत वाऩ 2015-16 की अनुदान मांगों का पुरजोर समर्थन करता हूं।
*SHRI R. DHRUVANARAYANA (CHAMARAJANAGAR): Ministry of Home Affairs is one of the most important Ministries of the Government. It has the most wide ranged responsibilities in terms of ensuring security, and safety of citizens. Its budgetary allocation has increased by 11.52% as compared to revised estimates of 2014-15. Even as compared to budgeted estimates, the allocation has been increased by 4.78%. However, there are various issues that I want to bring to the notice of the Government.
First and foremost, is the issue of Left Wing Extremism, which is the most pressing security issue that the country is dealing with today. In 2014 alone, there were 1,091 instances of Left Wing Extremism from across the country. Most of these happened in Jharkhand (384) and Chhattisgarh (328). In these incidents numerous lives have been lost year after year. In 2014, Left Wing Extremism left 222 innocent civilians and the 87 security forces dead. Again, in just the first one and a half months of 2015, 28 civilians and 8 security personnel have lost their lives.
The government has deployed paramilitary forces to tackle violence but the focus on development seems to be lacking. In 2008, the Experts' Group report to the Planning Commission on 'development challenges in extremist-affected areas' made an assessment of the causes and nature of the growing Maoist violence and recommended that LWE be looked as a development issue. I urge the Minister to work with other Ministries as well to ensure that in LWE areas, development and governance is made a priority. Most of the areas where LWE is prevalent are absolutely cut off from the country. The Government's focus on the issue is not comforting. As per NHAI, in the case of road projects in Left Wing Extremism (LWE) impacted areas, about 60 out of 100 projects faced delay. This covered about 2,200 km and the cost comes close to Rs. 3,418 crore.
UPA Government had brought forth an extremely important policy - Additional Central Assistance, to counter Left Wing Extremism through creation of crucial infrastructure in 10 states. However, the Government has conveniently transferred the scheme to the States. This move is condemnable and even the Ministry's Home Secretary has admitted, in the Standing Committee Report that such a move is a compromise on security. The Ministry itself does not agree with the Ministry of Finance on the issue. How can a scheme that is critical to the internal security situation of the entire country, be left to the responsibility of states?
Another disturbing trend is the situation of increasing instances of crimes against civilians and exploitation of tribals by naxalites. Numerous instances of sexual exploitation, forced marriage, molestation and forced recruitment of children from families of poor and marginalized segments of the society have been reported from Odisha, Maharashtra, Bihar, Jharkhand. What is the Government doing to deal with these issues?
In the year 2013, crimes against persons belonging to scheduled caste and schedule tribes have increased by 17.1% as compared to 2012 and the total number of cases reported has been 39,408. This increase has been under all major crime heads including dacoity, rape, hurt, kidnapping and under the SC/ST prevention of atrocities Act. It is very unfortunate, that even today such crimes are taking place and are in fact increasing. Amidst this trend of increasing atrocities against scheduled castes and scheduled tribes, the responsiveness of police administration is very important. It is very important to ensure that the police machinery and justice system are sensitive to these communities.
As per the Standing Committee report and case studies of the National Commission for Schedule Caste's report, there have been instances of delay in reporting crimes against SCs and STs or failure to register such crime, delay in visits to the scene of offence and delays in charge sheeting. There have also been instances where cases have not been filed under the stricter Prevention of Atrocities Act and have instead been filled under other sections. Failure to register first information reports in these cases has led to perpetrators being let off with lesser sentences and victims not getting compensation. I hope the Ministry would take not of the issue and take appropriate action so that the various law enforcement agencies act to eliminate atrocities against scheduled caste and scheduled tribes.
Modernization of Police Forces is one of the most important aspects that the Ministry of Home Affairs has been taking up. Infact, it has been seen in the past that given constraints of the states and their consequent low allocation to police force, the Ministry of home Affairs has been a prime force in strengthening their efforts on the front of modernization of police forces. However, this budget comes as a huge disappointment on that front. The Standing Committee Report has pointed out that although there is an increase of 10.2% in budgeted expenditure 2015-16 in comparison to revised estimates 2014-15 for police forces, 89.13% of total allocation is utilized for salaries and ration and only 10.87% is being utilized for various schemes. How will the ministry sustain its operational efficiency in such a case?
This year onwards, the Government has also transferred the National Scheme for Modernization of police and other Forces' to the States, except for its Natural Disaster Component. Thus, at present there is no scheme of the Ministry of Home Affairs focused on development or modernization of police forces. There is also no guarantee that the state Governments would channelize a portion of these funds into the requirements of policing or public order or security. This can be a huge problem for the state in the long run. Thus, I urge the Minister to take up the issue with the Ministry of Finance again, so that the scheme can be continued again with budgetary support from the Center.
Coastal security is a major area of concern for all states on the coast, including Karnataka, which has a coastline of 320 kms. After the 26/11 attack at Mumbai, most states including Karnataka have prioritized coastal security. However, this is one area where a lot of support from the Center is required.
Recently, a CAG audit in Maharashtra on coastal security found glaring loopholes. 57% of the non-technical staff posted in the coastal police stations did not possess even swimming skills. The report added that the five coastal districts had a manpower shortage of 40.02% posts with the gap in deployment of technical staff for boat operations being 51.21%. The audit also observed that GPS systems, which could have helped the crew understand the navigational channels and locations of the boats in the sea, were not installed in 34 of the 69 operational boasts.
The fact is that similar situations exists across states, especially in terms of facilities such as jetties and manpower requirements. An important issue, such as this, must not be left only to the states. I urge the minister to take note of the issue, allocate funds and monitor the developments on coastal security in the country.
*SHRI GAJENDRA SINGH SHEKHAWAT (JODHPUR): In the Arthashastra, Kautilya wrote that a state could be at risk from four types of threats - internal, external, externally-aided internal, and internally-aided external. He advised that of these four types, internal threats should be taken care of immediately, for internal troubles, like the fear of the lurking snake, are far more serious than external threats. The most dangerous enemy is the enemy within. Kautilya's teachings on internal security and his skillful expression of the warp and weft of internal and external security has great relevance in the globalised 21st century. Destabilizing a country through internal disturbances is more economical and less objectionable, particularly when direct warfare is not an option and international borders cannot be violated. External adversaries, particularly the weaker ones, find it easier to create and aid forces which cause internal unrest and instability.
India's history is full of such experiences. Since Independence, we have faced many such situation, initiated by China, Pakistan and others in the Northeast and even in th western sectors of the country since the mid-60s. But only after the events of 11 September 2001, the world has started looking at these external and internal linkages more seriously. Presently, almost all the countries of South Asia - India, Nepal, Bangladesh, Sri Lanka, Maldives, Pakistan and Afghanistan - are experiencing internal security problems, due to insurgency movements, ethnic conflicts, religious fundamentalism, or just discussed political polarization. India is a country exemplified by diversity - over one billion people are spread over approximately 3.1 million square kilometres of territory. The people of the country speak 16 major languages in over 200 dialects. There are about one dozen ethnic groups, seven major religion communities with several sects and sub-sects, and 68 socio-cultural sub regions. When a socio-political and socioeconomic equilibrium is maintained in such a scenario, there is unity in diversity. But if there is even the slightest imbalance, we have more diversity and less unity. This has been a hallmark of India's history and it has always been exploited by external elements. Even after 67 years of Independence, our secular, internal troubles, like the fear of the lurking snake, are far more serious than external threats. Synergy is essential to deal with India's complex internal security operations. Post 26/11, there appears to be a conscious effort to ensure better networking of agencies involved in these operations.
Strategically, India cannot afford to be perceived to be buckling down under internal security or externally induced terrorist pressures. That would be disastrous. Neither can it afford to depend on other nations to take care of its internal security problems. Hard decisions, based on hard analysis of options in the current trend of internal security activities, have to be taken. We need a comprehensive centre-state strategy to deal with different insurgencies and communal terrorism. It should include broad-based domains of national and state policies including accelerated economic development and social justice, security and media policies. Most importantly, it should address dedicated and effective governance through good administration, prompt and fair judiciary and a law and order machinery that inspires public confidence.
*SHRI ARKA KESHARI DEO (KALAHANDI): My Parliamentary constituency Kalahandi in the State of Odisha is coming under the left wing extremists. The remote pockets of my constituency are very poor in infrastructural connection, as a result of which there is no well co-ordination among different government agencies at the time of the incident. So, I may suggest the following points to be included by the Minister at the time of passing the Demands for Grants.
The Government may consider to double the Central assistant for Integrated Action Plan (IAP) for the development of Tribal and backward districts for LEW affected districts. The Cabinet Committee on Economic Affairs on 2nd April, 2013 has approved funds for upgradation and critical gap filling for special forces of the worst affected states like Bihar, Chhattisgarh, Odisha and Jharkhand.
I request Hon'ble Minister to set up CRPF unit at district headquarter Bhawani Patna of my constituency, so that mobilisation of paramilitary force could be done efficiently to the affected area very quickly.
The local people participation in all developmental activities may be more successful than ignoring involvement in developing their areas.
The unemployed benefits to the educated youths of tribals and other backward castes of these affected LWE areas may be given so that these youths never feel that they are neglected by the Government. This unemployed benefit can stop these youths to join anti-social activities to a great extent.
Modernisation and upgradation of police force, and sharing of intelligence data with state police force is must to counter the anti social activities in the LWE affected areas. All schools of these affected areas may kindly be linked with mobile towers so that information and data can be sent to the school by utilizing social networking to minimize the casualties of the people.
The tribal handicrafts may be encouraged and easy availability of funds to develop handicraft centres and most important is the marketing of these handicrafts, so that these tribal people could improve their living standards.
The education of skill development like -carpenter, pottery, blacksmith, stone craving and farming like-floriculture, fishing/fishiculture, bee hiving and fruits farming may be given to the school children to make them self sufficient and self employed. Here the Government should think of small cold storage by utilizing solar energy in order to store the perishable goods for long time with added value.
Clean and green energy like solar, wind and bio-gas may vigorously be taken up with PPP model by minimizing the damage to environment.
Odisha has a long coast line, so that Central Government should think of safety and secured coal line by upgrading the coastal surveillance.
I request the Hon'ble Home Minister for setting up of National Investigation Agency (NIA) branch at Bhubaneswar for better co-ordination between state and centre to counter terrorism and provide peace and security to the citizens of the country.
Roads, schools, hospitals, railway links, irrigation, electricity and supply of drinking water which are considered as the basic necessities of people in present world may kindly be given prime importance by allocating more funds and involving the locals as well as state machineries to achieve the targets. In my opinion any sincere effort in these fields would definitely change the face of rural India.
*SHRI RAMESHWAR TELI (DIBRUGARH): I support the Demand for Grants under the Ministry of Home Affairs. Our hon’ble Home Minister has taken laudable steps for the improvements in functioning of various agencies under its jurisdiction to maintain law and order situation in the country. Madam, I would like to say a few words on the issues concerning my State, Assam which need urgent attention. Madam, a proposal was mooted to establish an Indo-Tibetan Border Police Battalion in Lahowal in Dibrugarh District of Assam. I suggest that it should be set up at Kabir Sea Estate. I would request the Home Ministry to take appropriate steps for the setting up of the ITBP Battalion at Lahowal as soon as possible. If this is done expeditiously, the ITBP facility will certainly provide business and employment avenues to hundreds of people. Another issue to which I wish to draw the attention of the hon’ble Minister is that on December, 23, 2014, many people lost their lives while hundreds were injured when NDFB(s) militants opened fire on the innocent villagers at several places in Assam, while I appreciate the hon’ble Home Minister for making all out effort for bringing the situation under control, I wish to request the Ministry to provide adequate compensation to the people affected in this dastardly acts of the terrorists. Madam, Speaker, Assam has a long international border with neighboring Bangladesh. But the border is porous at various places through which illegal Bangladeshi migrants are intruding into our territory. Besides, through the porous border cattle from various parts of Assam are also being smuggled into Bangladesh through both land and riverine route. I appeal to the hon’ble Minister to put up border fencing to stop migration of illegal Bangladeshi nationals. At the same time, forces manning the Border Outposts (BoPs) should be issued strong instruction to keep a strict vigil along the Indo-Bangla border.
One more serious issue which needs to be urgently addressed is * Speech was laid on the Table the problem of militancy in Assam. Militant outfits like Maoists, ULFA and NDFB have unleashed a reign of terror in various parts of our State. Trained Maoists are having their cadre in tea garden areas. Steps should be initiated to contain the militants so that their activities are checked.
Lastly, I would like to request the hon’ble Home Minister for inducting 6,000 youths from NE region into the various paramilitary forces as had been decided by the Ministry earlier.
श्री विणु दयाल राम (पलामू)ः गृह मंत्रालय मुख्य रूप से आंतरिक सुरक्षा, केन्द्रीय सशस्त्र पुलिस बल के प्रबंधन, सीमा प्रबंधन, केन्द्र राज्य संबंध, संघ राज्य क्षेत्रों के प्रशासन एवं आपदा प्रबंधन आदि के लिए जिम्मेदार है। संविधान के अनुच्छेद 355 में संघ का यह कर्तव्य निर्धारित किया गया है कि वह बाह्य आक्रमण और आंतरिक अशांति से प्रत्येक राज्य की संरक्षा करे और प्रत्येक राज्य की सरकार का संविधान के उपबंधों के अनुसार चलाया जाना सुनिश्चित करे। इन दायित्वों के अनुसरण में गृह मंत्रालय, राज्यों के संवैधानिक अधिकारों का अतिक्रमण किए बिना स्थिति की निरन्तर निगरानी करता है, उचित सलाह देता है, सुरक्षा, शांति तथा सद्भाव को बनाए रखने के लिए राज्य सरकारों को मानव शक्ति एवं वित्तीय सहयोग, मार्गदर्शन एवं विशेाज्ञता प्रदान करता है। तथापि भारत के सातवीं अनुसूची में लोक व्यवस्था और पुलिस राज्य के विाय हैं।
यद्यपि गृह मंत्रालय के अंतर्गत कई घटक विभाग हैं परन्तु मैं अपनी बातों को देश की आंतरिक सुरक्षा से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर ही केन्द्रित करना चाहूंगा।
आंतरिक सुरक्षा से जुड़े चार थियेटर हैं - जम्मू कश्मीर, पूर्वोत्तर राज्य, नक्सलवाद, आतंकवाद।
जम्मू कश्मीर में घुसपैठ की समस्या अहम है। जम्मू एवं कश्मीर राज्य सरकार के साथ मिलकर भारत सरकार ने सीमा पार से घुसपैठ पर नियंत्रण लगाने के एक बहुआयामी दृिटकोण अपनाया है, जिसमें अन्य बातों के साथ-साथ सीमा प्रबंधन का सुदृढ़ीकरण, बाड़ का निर्माण, सुरक्षा बलों के लिए बेहतर तकनीक, हथियार और उपकरण, बेहतर सूचना के प्रवाह की सक्रियशीलता शामिल है। इसी का नतीजा है कि हाल ही में हुए लोक सभा चुनाव एवं विधान सभा चुनावों में वहां की जनता ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया, शांतिपूर्ण मतदान हुआ और जिसकी प्रशंसा दुनियाभर ने की। आज जम्मू-कश्मीर की स्थिति पहले से काफी बेहतर हुई है और हमारी सरकार ने कश्मीरी पंडितों के घर वापसी का मार्ग प्रशस्त किया है।
पूर्वोत्तर राज्यों में विद्रोही और उग्रवादी गतिविधियों से निपटने के लिए सरकार ने एक बहुआयामी रणनीति अपनाई है, जिसमें अन्य बातों के साथ-साथ वार्ता का द्वार भी खोला है, बशर्ते कि वे हिंसा का परित्याग करें एवं भारत के संविधान के दायरे में रहकर अपनी मांगों का समाधान कराये। सरकार द्वारा की गई पहल तथा वार्ता नीति के अनुसरण में पूर्ववर्ती राज्यों में शांति वार्ता के लिए अनेक उग्रवादी संगठन अपनी शिकायतों के समाधान के लिए सामने आए हैं। पूर्वोत्तर राज्यों के विकास के लिए एवं विकास के जरिए उन्हें मुख्य धारा में लाने के लिए सरकार प्रतिबद्ध है। 10 महीनों में प्रधानमंत्री की इन राज्यों को दो-दो बार यात्रा एवं उस क्षेत्र के विकास के लिए घोिात योजनाएं इस प्रतिबद्धता को दर्शाता है। वाऩ 2014 में विभिन्न उग्रवादी संगठनों के 965 काडर ने 282 आर्म्स के साथ समपर्ण किया है।
आज से कुछ वाऩ पूर्व देश के तत्कालीन प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह ने उग्रवाद को देश की आंतरिक सुरक्षा के लिए सबसे बड़ा खतरा बताया था। देश के 9 राज्यों में उग्रवाद की समस्या आज भी बनी हुई है। हालांकि गतिविधियों एवं हिंसक घटनाओं में उल्लेखनीय कमी आई है।
1967 में जब नक्सलवाद की शुरूआत हुई तो भारत सरकार ने इसे महज एक विधि-व्यवस्था की समस्या माना एवं तत्कालीन गृह मंत्री वाई.बी. चव्हाण ने 13 जुलाई, 1967 में इस लोक सभा में वक्तव्य देते हुए नक्सलवादी घटना को लॉलेसनेस की संज्ञा दी। वााॉ बाद सरकार ने यह महसूस किया कि नक्सलवाद की समस्या एक महज विधि व्यवस्था की समस्या नहीं है और केवल बल प्रयोग से इस समस्या का समाधान नहीं हो सकता है। इसके सामाजिक एवं आर्थिक पहलुओं पर भी गहन चिंतन की आवश्यकता है। इसी सोच के परिणामस्वरूप नक्सलवाद की समस्या से निपटने के लिए ट्विन थ्योरी सामने उभरकर आई, जिसके अनुसार सिक्योरिटी के साथ-साथ डेवलपमेंट की भी बात कही गई। यह कहा गया कि नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में विकास के लिए उस क्षेत्र से नक्सलियों को बाहर करना होगा और साथ ही साथ उस क्षेत्र को विकसित करना होगा। परन्तु हुआ क्या? हुआ ये कि उस क्षेत्र से नक्सलियों को बाहर तो कर दिया गया परन्तु उस क्षेत्र का विकास नहीं हुआ और सुरक्षा बलों के हटते ही पुनः नक्सली उस क्षेत्र में आ घुसे। समस्या ज्यों की त्यों बनी रही। सरकार ने इस बात को महसूस किया है और नक्सल समस्या से निपटने के लिए बहुआयामी स्ट्रेटिजी अख्तियार किया है।
सिक्योरिटी फ्रंट पर भारत सरकार ने सुरक्षा से संबंधित उपायों में केन्द्रीय सशस्त्र पुलिस बल की 100 से अधिक बटालियनों को राज्य पुलिस की सहायता के लिए नक्सलवाद प्रभावित 9 राज्यों में तैनाती की है। इसके अतिरिक्त काउंटर इनसर्जेन्सी एवं जंगल वारफेयर में दक्ष एवं विशेा प्रशिक्षित कोबरा की 10 बटालियन तैनात की है।
सिक्योरिटी रिलेटिड एक्सपेंडिचर के तहत 9 राज्यों के 106 जिलों में सुरक्षा संबंधी खर्चों को रिअम्बर्स करती है, जिसमें उग्रवादी हिंसा में मारे गए नागरिकों/सुरक्षा बल के जवानों के परिवारों को अनुग्रह अनुदान (एक्सग्रेसिया पेमेंट), पुलिस कर्मियों की बीमा राशि, सुरक्षा बलों के प्रशिक्षण, समर्पण करने वाले उग्रवादियों की मुआवजे की राशि, सामुदायिक पुलिस व्यवस्था, विलेज डिफेंस कमेटी पर होने वाले खर्च की राशि, प्रचार सामग्री से संबंधित खर्चे की राशि शामिल है।
पुलिस स्टेशनों के सुदृढ़ीकरण के लिए भारत सरकार प्रति पुलिस स्टेशन 2 करोड़ की राशि प्रदान करती है। 45 पुलिस स्टेशनों के सुदृढ़ीकरण की स्वीकृति प्रदान की गई है। एसएसआई (स्कीम फॉर स्पेशल इफ्रास्ट्रक्चर) पुलिस स्टेशनों की गतिशीलता एवं संचार व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने के लिए गाड़ियों एवं वितंतु सेटों पर होने वाले खर्च, दुर्गम स्थलें पर जाने के लिए सड़कों के निर्माण, सिक्योर कैम्पिंग ग्राउन्ड करने पर होने वाले खर्च एवं हेलीपेड बनाने तथा हेलीकॉप्टर एवं यू ऐ वी का वहन भारत सरकार करती है।
इंडिया रिजर्व बटालियन - नक्सल प्रभावित क्षेत्रों के नौजवानों को चयनित कर इंडिया रिजर्व बटालियन के गठन का भार राज्य सरकारों को दिया गया और इसके लिए 37 इंडिया रिजर्व बटालियन की स्वीकृति प्रदान की गई है, जिसके तहत अब तक 36 बटालियन का गठन किया जा चुका है।
ये तो सिक्योरिटी से संबंधित किए गए उपायों का मैंने जिक्र किया। अब विकास से संबंधित किए गए उपायों पर भी एक नज़र डालना आवश्यक है। पीएमजीएसवाई, एनआरएल एम, एमएनआरईजीए, सर्व शिक्षा अभियान, नेशनल रूरल ड्रिंकिंग वाटर प्रोग्राम (एनआर डी डब्ल्यूपी), इंटीग्रेटेड चाइल्ड डेवलपमेंट स्कीम (आईसीडीएस), इंदिरा आवास योजना (आईएवाई), फोरेस्ट एक्ट, 2006 इत्यादि योजनाओं के जरिए भारत सरकार नक्सल प्रभावित राज्यों में गरीब एवं आवश्यकता मंद लोगों के जीवन स्तर में सुधार लाने का प्रयत्न कर रही है। इसके पीछे भारत सरकार का एकमात्र उद्देश्य है कि गरीब, पिछड़े क्षेत्रों के गरीब, दलित, शोिात आदिवासी बंधु नक्सलियों के विचारों से प्रभावित होकर या उनके दबाव में आकर उग्रवादी संगठन में शामिल न हो। परन्तु इन सारे उपायों के बावजूद नक्सलवाद को समाप्त करने के लिए जिन बातों पर ध्यान देने की आवश्यकता है उनमें महत्वपूर्ण बात यह है कि नक्सलियों के द्वारा उगाही की जाने वाली राशि या उनको की जाने वाली फंडिंग पर प्रभावकारी निंयत्रण स्थापित किया जाए। उनको समाप्त किया जाए। बाल दस्ते को प्रतिबंधित किया जाए। फोरेस्ट एक्ट, 2006 के प्रावधानों को प्रभावकारी ढंग से लागू किया जाए। वन उत्पादों पर वनों में रहने वाले आदिवासी लोगों का एकाधिकार हो। फोरेस्ट एक्ट, 2006 के प्रावधानों का सख्ती से अनुपालन हो क्योंकि आज भी अधिनियम के स्थापित हो जाने के बावजूद इन गरीब आदिवासियों को वन विभाग के अधिकारियों द्वारा तरह-तरह से प्रताड़ित किया जाता है। वन क्षेत्रों में काम करने वाली आयरन ओर कंपनियों द्वारा सीएसआर के अंतर्गत उनके विकास के लिए कुछ भी लाभकारी कार्य नहीं किया जा रहा है।
सरकार को गरीब आदिवासियों एवं जंगलों में रहने वाले अन्य लोगों में एक विश्वास पैदा करना होगा कि उनकी जिन्दगी सरकार के साथ ज्यादा महफूज़ होगी, बनिस्पत नक्सलियों का साथ देने में। आदिवासियों के विरुद्ध बल प्रयोग, नक्सली संगठन में सम्मिलित नहीं होने के लिए बैकफायर करेगा। सरकार को इन क्षेत्रों में शांति व्यवस्था स्थापित करनी होगी जो कम्युनिटी पुलिसिंग के माध्यम से की जा सकती है। सीआरपीएफ के द्वारा इस क्षेत्र में सराहनीय कार्य किया जा रहा है। अतः इसके लिए ज्यादा राशि उपलब्ध करानी होगी। उस क्षेत्र का विकास करके ही संभव है। सरकार नक्सलियों के कुकृत्यों एवं अपनी उपलब्धियों को वृहद पैमाने पर और प्रभावकारी ढंग से प्रचारित/प्रसारित करें एवं विकास से जुड़े पदाधिकारियों खासकर बीडीओ/सीओओ को विशेा रूप से प्रशिक्षित कर इन क्षेत्रों में तैनाती की जाए जो जंगल में रहने वाले लोगों खासकर आदिवासी लोगों के प्रति एवं उनके कार्यों के प्रति ज्यादा संवेदनशील हों उनके कार्यों को अपना कार्य समझकर सम्पादित करें।
आदिवासी क्षेत्रों/नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में होने वाले विकास कार्यों की गहन समीक्षा की जाए। गृह मंत्रालय के अंतर्गत इसके लिए एक पृथक घटक/विभाग बनाया जाए या सरकार के अधीन एक पृथक मंत्रालय बनाया जाए जो नक्सल प्रभावित क्षेत्रों के विकास के कार्यों को देखें।
राज्यों को नक्सल गतिविधियों में आयी कमी का यह अर्थ नहीं निकालना चाहिए कि नक्सलियों द्वारा हिंसक घटनाओं को अंजाम देने में उनकी क्षमता समाप्त हो चुकी है। इस अवधि का इस्तेमाल जैसा नक्सली करते हैं पुलिस बल को अपनी क्षमता बढ़ाने के लिए करना चाहिए। अपने जवानों का कमिटमेंट लेवल बढ़ाने के लिए, उनमें प्रशिक्षण के माध्यम से आत्मविश्वास बढ़ाने के लिए, मार्क्समैनशीप उन्नत करने के लिए क्योंकि आमने-सामने की लड़ाई में ये तीनों चीजें अति महत्वपूर्ण होती है।
सरकार इस बात को स्वीकार करती है कि आतंकवाद का खतरा न तो समाप्त हुआ है और न ही कम हुआ है। सरकार यह सुनिश्चित कराने के लिए भी कटिबद्ध है कि न केवल बड़े आतंकवादियों बल्कि आतंकवादी कुकृत्यों में संलिप्त उनके मार्गदर्शक एवं ाडयंत्रकारियों को भी कानून के कटघरे में खड़ा किया जाए। जैसे मास्टरमाइंड के अतिरिक्त मोस्ट वान्टेड आतंकवादी अब्दुल सुभान तथा सईद शेख की गिरफ्तारी आतंकवाद से लड़ाई में एक बड़ी सफलता है तथा देश के विरुद्ध अपराध करने वाले व्यक्तियों को सजा दिलाने के सरकार के संकल्प को भी दर्शाती है।
बावजूद इसके देश के विभिन्न राज्यों में कार्यरत स्लीपर सेल्स पर कड़ी नज़र रखनी होगी।
अंत में, मैं बताना चाहूंगा कि गृह मंत्रालय का 2015-16 का बजट जो 78470.35 करोड़ निर्धारित किया गया और 2014-15 के बजट (बी.ई.) 74884.29 करोड़ से ज्यादा है परन्तु सी.एस.एस. को राज्यों को हस्तांतरित किए जाने के निर्णय पर पुनर्विचार की आवश्यकता दिखाई पड़ती है ताकि देश की आंतरिक सुरक्षा से जुड़े इन कार्यक्रमों में किसी प्रकार का व्यवधान उत्पन्न नहीं होने पाए या उनके कार्यान्वयन की गति धीमी न पड़े।
श्री सुनील कुमार सिंह (चतरा) : मैं गृह मंत्रालय की अनुदान की मांगों (2015-16) पर अपनी बात रखना चाहता हूं । गृह मंत्रालय द्वारा 10 अनुदान मांगों को सदन की स्वीकृति के लिए रखा गया है । 2015-16 के लिए गृह मंत्रालय की दस अनुदान मांगों के लिए कुल आवंटन 78470.35 करोड़ रूपये है । जो 2014-15 के संशोधित प्राक्कलन की राशि 70358.34 करोड़ रूपये के बनस्पित 11.53 प्रतिशित अधिक है । बजट प्राक्कलन 2015-16 में आवंटित 78470.35 करोड़ रूपये में से रू. 14586.98 करोड़ योजना मद और रू. 63883.37 करोड़ गैर-योजना मद में निर्दिट है । गृह मंत्रालय की अनुदान की मांगों के विश्लेाण से शीाऩवार वृद्धि इस प्रकार है, गृह मंत्रालय में 24.08औ, पुलिस में 10.20औ, अन्य व्यय गृह मंत्रालय 25.70औ, संघ राज्य क्षेत्रों को अंतरण 3.97औ, जबकि मंत्रिमंडल पर 9.06औ की कमी हुई है । उसी प्रकार गैर-विधान सभा वाले संघ राज्यों क्रमशः अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में 15.51औ, चंडीगढ़ में 15.79औ, दादरा और नगर हवेली में 15.13औ, दमन और दीव में 27.87औ, लक्षद्वीप में 17.80औ सहित कुल मिलाकर 11.80औ की वृद्धि हुई है ।
इस प्रकार स्पट है कि गृह मंत्रालय ने देश की आंतरिक सुरक्षा को जहां मजबूत बनाने की प्रक्रिया को और तेज किया है वहीं मंत्रिमंडल पर किए जाने वाले व्यय में 9.06 प्रतिशत की कमी का अर्थ है स्थापना मद में खर्च को कम करने के प्रति सरकार का संकल्प ।
मैं माननीय मंत्री जी का ध्यान आकृट करते हुए कहना चाहता हूं कि मंत्रालय ने वामपंथी उग्रवाद वाले राज्यों में चल रही विशेा अवसंरचना योजना को अन्य योजनाओं के साथ मिलाकर एक समग्र योजना बना दिया गया है। देश की आंतरिक सुरक्षा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण इन योजनाओं का दायित्व अब राज्य सरकारों पर होगा । मेरा आग्रह है कि सरकार ऐसी योजनाओं, जिनका राट्रीय स्तर पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है, को राज्यां को सौंपते समय सावधानी बरतनी चाहिए । किसी केन्द्रीय प्रायोजित योजना को राज्यों को अंतरित किया भी जाता है तो केन्द्र सरकार उन योजनाओं के कार्यान्वयन को प्रगति पर ठोस निगरानी की प्रणाली बनानी चाहिए ।
वामपंथी उग्रवाद से प्रभावित क्षेत्रों (एलडब्ल्यूई) में सुरक्षा संबंधी उपायों में आधुनिक प्रौद्योगिकी का प्रयोग, पुलिस आधुनिकीकरण, पुलिस और प्रशासनिक भवन निर्माण, सड़कों के सुधार हेतु सड़क आवश्यकता योजना जैसी विकासात्मक योजनाओं का क्रियान्वयन, मोबाईल टावरर्स स्थापित करने हेतु परियोजनाएं, रेल संपर्क का सुधार, शिक्षा, स्वास्थ्य अवसंरचना इत्यादि पर विशेा ध्यान देते हुए इनके लिए अलग से कार्यक्रम चलाया जाना चाहिए । साथ इन क्षेत्रों में लघु वनोपज (एमपीएफ) हेतु न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) के क्रियान्वयन तथा अनुसूचित जनजाति और अन्य परंपरागत वन निवासियों को भू-स्वामित्व का अधिकार देना चाहिए । वन अधिनियम, 2006 की समीक्षा करनी चाहिए । वामपंथी उग्रवाद को समाप्त करने के लिए सुरक्षा संबंधी उपायों, विकास संबंधी उपायों, अधिकारों तथा पात्रताओं व भूमिका को सुनिश्चित करने संबंधी उपायों और जन-सहभागितापूर्ण प्रबंधन सहित एक समग्र और एकात्म कार्यनीति का निर्माण कर उसे कार्यरूप दिया जाना चाहिए । आधारभूत अवसंरचना तथा अन्य सुविधाएं प्रदान करने से वामपंथी उग्रवाद के प्रभाव को बढ़ने से रोका जा सकता है ।
झारखंड राज्य का संथाल परगना सहित पूरा राज्य आज बंगलादेशी घुसपैठियों के कारण जनसंख्या के असंतुलन का संकट झेल रहा है । इससे कानून-व्यवस्था से जुड़े पहलुओं पर गंभीर संकट खड़ा हो गया है । अतः इस पर अंकुश लगाने हेतु आवश्यक है कि बंगलादेशी घुसपैठियों को चिन्हित कर उन्हें वापस भेजने की कार्रवाई सहित दंडात्मक निाॊध भी लगाया जाए । यहां यह उल्लेखनीय होगा कि बंगलादेशी घुसपैठियों को चिन्हित करते समय हिन्दू शरणार्थियों को विशेा राहत पहुंचाते हुए उन्हें भारत की नागरिकता देनी चाहिए ।
झारखंड में नक्सलियों के आत्मसमर्पण को लेकर घोटाले की चर्चा है । ऐसा कहा जा रहा है कि उन्हें नौकरी दिलाने के नाम पर झांसा दिया गया था । इसकी किसी समर्थवान एजेंसी द्वारा जांच करवानी चाहिए ।
मैं माननीय मंत्री से आग्रह करूंगा कि झारखंड में बहुमत की पहली सरकार बनी है । उस सरकार में लोगों का भरोसा है । सरकार वामपंथी उग्रवाद के प्रभाव को समाप्त करने में सफल होगी । इसके लिए उसे केन्द्र से सुरक्षा संबंधी सहित हर प्रकार की सहायता उपलब्ध करानी चाहिए ।
*SHRI B.N. CHANDRAPPA (CHITRADURGA): I would like to express my views on the issue of law and order. The issue of law and order has gained importance in the country due to various types of anti-social activities taking place right from Kashmir to Kanyakumari. On one side, we have the separatist movement gaining ground and on the other, the Naxalites are creating trouble in Chhattisgarh, Jharkhand and are gradually spreading their wings in Southern parts of India also. Naxalism is posing real threats to internal security of the country. This Naxalism problem is not only a law and order problem but it is also a socio-economic problem. It is the socio-economic needs of some community that has led to creating of naxal movement. I would suggest the Government to tackle this menace right from the grass roots level by first developing villages onwards. Once people are made socio-economically sound, they would not resort to this sort of anti-social activities.
Another important issue that has shaken the whole country is the attacks on women. These incidents are increasing day by day in each and every corner of our country. The Government did take some action after the Nirbhaya incident. But that is not enough. Even now, we have been witnessing increasing attacks on women. There was a case in Bengaluru in one of the ATM booth of a Bank where a woman during day time was attacked by some miscreant elements. We have to deal with this subject with a firm hand. The police force and other para-military organizations should be strengthened to deal with this issue. The Government should make optimum use of technological gadgets to trap these miscreants.
There is an urgent need to modernize the police force in the country. We are still following the same old system for tackling with the law and order situation. I would suggest that the Government should think of modernizing the police force including the welfare aspect of personnel. Right now, what we find is that the police organization throughout the country is working almost on half of its strength. What steps have been taken by the Government to fill up the vacancies? Why can it the campus interviews and other methods be adopted to fill up the posts? The Government must ponder over this aspect in right earnest.
I thank you for allowing me to put forth my views on this important Demands for Grants.
श्री गजानन कीर्तिकर (मुम्बई उत्तर पश्चिम)ः नवम्बर, 2008 को मुम्बई में हुए आतंकवादी हमले के बाद समुद्र किनारों से सटे राज्य में नेशनल मैरिन पुलिस अकादमी स्थापन करने का निर्णय तत्कालीन केन्द्र सरकार ने लिया था। इसके लिए महाराट्र के पालघर में 305 एकड़ भूमि निर्धारित की थी। राज्य सरकार ने अल्प रेंट से सदर भूमि देने का निर्णय लिया। तत्कालीन केन्द्रीय गृह मंत्री ने पालघर में जाकर उस भूमि का निरीक्षण भी किया था।
पालघर मध्यवर्ती स्थान रहने के कारण महाराट्र, गुजरात, गोवा, कर्नाटक व केरल राज्यों के समुद्री किनारों की सुरक्षा प्रणाली को ट्रेनिंग के लिए सुविधाजनक स्थान है। इसके बावजूद पालघर महाराट्र राज्य के अलावा पीन्डारा (देवभूमि) द्वारका जिले के अत्यंत दुर्गम स्थान में सदन अकादमी को स्थानांतरित करने का केन्द्र सरकार का निर्णय अनुचित है।
अतः मेरा सरकार से अनुरोध है कि इस पर विचार करे।
*SHRI PRALHAD JOSHI (DHARWAD): It gives me an immense pride to be speaking about Home Ministry because of the relentless efforts of the Prime Minister, Shri Narendra Modiji and Home Minister, Shri Rajnath Singh ji who have reached out to our neighbour and the states which have got affected by the terrible earthquake and have given every possible help that is in their power to Nepal and affected states of India in this moment of tragedy. This Government has proven once more that "actions do speak louder than mere words".
Our Prime Minister has seen the 2001 Bhuj earthquake very closely. He understands how a natural disaster can destroy lives, tear apart families and take away everything from a person. This is the reason why his sensitivity towards natural disasters is worthy of appreciation. During the cyclone "Hudhud" which hit Andhra Pradesh and Orissa last year, the response of the central government was more preventive than curative. The Union Government along with the State Governments had helped in saving many lives. The Government not only evacuated people but was sympathetic towards animals and was successful in timely and safe evacuation of many animals along with their owners. Further, due to advance disaster preparations and quick actions, the loss of life was far lower than other storms of this magnitude.
In addition to its efforts, the Government has also given Rs. 416 crores to National Cyclone Risk Mitigation Project with the assistance of the World Bank. This program aims to reduce the vulnerability of coastal communities in Andhra Pradesh and Orissa to cyclone and other hydro meteorological hazards.
During, the tenure of the UPA Government, there has been constant cases of violation of ceasefires from across the border. However, the Government could not give the much deserved reply to our neighbouring country, Pakistan. We can never forget the incident of 2013 where our Indian Soldiers were beheaded by the Pakistani Army. Since the BJP led NDA Government has come to the power, India has been giving befitting replies to the Pakistani armies. Our troops have been retaliating strongly whenever Pakistan has violated the ceasefire and shall continue to do so.
This Government understands that this country sleeps peacefully because our jawans lie awake and protect us from our enemies. This is why there has been an increase in the budgetary allocation of border management. The government has increased the border management budget from Rs. 810.64 crores as revised budget 2014-15 to Rs. 1382 crores, a total of 70.49% increase.
We can never forget the incident of 26/11. How the terrorists entered our soil and took away the lives of our fellow countrymen. A lapse in coastal security had resulted in India's worst terrorist attack. This Government is willing to go to the extra mile to maintain the security of the Nation. On new year's eve of 2015, a Pakistani boat blew itself because of the vigilance of our coast guards who intercepted it. Therefore, the government understands the importance of coastal security and has increased its budget from Rs. 39.37 crores to whopping Rs. 710 crores.
Not just the border security, the Government is fully committed to fight against internal insurgencies which have grappled the growth and development of the Nation. The Government is dealing with Left Wing Extremism in a holistic manner. The Government provides assistance to states through schemes like Security Related Expenditure Scheme (SRE), the Special Infrastructure Scheme (SIS), setting up of Counter Insurgency and Anti-Terrorist (CIAT) schools and raising Indian Reserve Battalions. Further the 92 battalions which work in these areas are equipped for counter insurgencies and jungle warfare operations which are named as Commando Battalions for Resolute Actions (COBRA). Further, 10 unattended ground system Censors have been sanctioned to Indo-Tibetan Border Police Forces deployed in LWE operations. Also 184 such systems have been approved under Modernization plan of Border Security Forces. Further, there has been an increase from Rs. 42306.76 crores to Rs. 46060.85 crores in the budget of Police in 2015-16. There has also been an increase by Rs. 1000 crores in the budget for construction of buildings for police.
Women safety has always been a priority for this Government. Therefore, Schemes on backend integration of distress signal from victims with mobile vans and control rooms have been created from Nirbhaya Fund to strengthen our pledge of women safety. The Hon'ble Home Minister has launched a women safety mobile application called HIMMAT on 1 January 2015. The app is freely available for Android mobile phones and can be downloaded from Delhi Police website.
In addition to this, India is planning to have a single number '112' that can be used for all emergency phone calls across the country including for police, fire and ambulance similar to '911' in United States of America. This would help the people as the victims can get the emergency services in a more efficient and swift manner.
The Prime Minister believes in "Sabka Saath, Sabka Vikaas".
The Home Ministry constituted a committee called Bezbarauh committee to look into the concerns of the people of North East. The Ministry has accepted a slew of recommendations proposed in the committee. For example, Delhi Police will appoint police personnel from northeastern states and police exchange programmes will be initiated with these states. These measures are going to further strengthen the unity of the country and provide the security to the north eastern people.
As Sardar Vallabhbhai Patel, our first Home Minister had said "Manpower without Unity is not a strength unless it is harmonized and united properly, then it becomes a spiritual power". It gives me immense pleasure to see that the current Home Minister under the able leadership and guidance of our Prime Minister is following the footsteps of Sardar Patel and taking this country ahead in a progressive manner.
गृह मंत्री (श्री राजनाथ सिंह) : अध्यक्ष महोदया, सबसे पहले तो मैं आपके प्रति आभार व्यक्त करना चाहता हूं कि आप ने गृह मंत्रालय की अनुदान मांगों पर चर्चा करने का हमें अवसर दिया है। मैं उन सभी सम्मानित सदस्यों के प्रति भी आभार व्यक्त करना चाहता हूं, जिन्होंने इस चर्चा में हिस्सा लिया है। मेरी जो जानकारी है, उस जानकारी के आधार पर लगभग 22 मेम्बर्स ने गृह मंत्रालय की अनुदान मांगों पर हुई चर्चा में पार्टीसिपेट किया है। साथ ही साथ, 33 मेम्बर्स ने अपनी रिटेन स्पीच सदन के पटल पर रखी है।
अध्यक्ष महोदया, मैं सभी सम्मानित सदस्यों के भााण को सुन रहा था और मुझे इस बात की खुशी है कि किसी को अपने नज़रिए से यदि कोई कमी नज़र आई तो उस ओर मेरा ध्यान आकर्िात करने की उन्होंने कोशिश की है।...(व्यवधान)
श्री मुलायम सिंह यादव (आज़मगढ़) : अध्यक्ष महोदया, मैं तो इस विाय पर बोल ही नहीं पाया।...(व्यवधान)कल इस पर चर्चा खत्म हो गयी थी तो हम चले गए।...(व्यवधान)हम इस पर बोल ही नहीं पाए। आज के लिए कह दिया था। यह क्या बात है?...(व्यवधान)क्या हम इस विाय पर नहीं बोलेंगे?
माननीय अध्यक्ष : ऐसा नहीं है।
…( व्यवधान)
श्री मुलायम सिंह यादव : यह गलत बात है। क्या हम इस विाय पर नहीं बोलेंगे?
माननीय अध्यक्ष : प्लीज़, बैठिए।
श्री मुलायम सिंह यादव : कुछ और भी मेम्बर इस पर बोल नहीं पाए।...(व्यवधान)
माननीय अध्यक्ष : मुलायम सिंह जी, आप जानते हैं कि ऐसा नहीं होता है। सब के भााण हो गए थे। अब माननीय मंत्री जी रिप्लाई कर रहे हैं। अगर आपको कुछ भी पूछना हो तो इनकी रिप्लाई के बाद मैं कुछ पूछने के लिए आपको एक मिनट का समय दे दूंगी।
श्री मुलायम सिंह यादव: मुझे अभी छः मिनट का समय दे दीजिए।
माननीय अध्यक्ष : नहीं, ऐसा नहीं होता है।
…( व्यवधान)
माननीय अध्यक्ष : इनकी रिप्लाई के बाद आप पूछ सकते हैं।
…( व्यवधान)
श्री मुलायम सिंह यादव: हम बाद में क्या बोलेंगे? माननीय मंत्री जी उसका जवाब अभी देंगे।...(व्यवधान)
माननीय अध्यक्ष : अभी सभी पार्टियों के लोग बोल चुके हैं। ऐसा नहीं होता है।
श्री मुलायम सिंह यादव : आज बोलने के लिए कह दिया था।...(व्यवधान)
माननीय अध्यक्ष : नहीं, ऐसा नहीं है। यहां कुछ भी नोटिंग नहीं है। प्लीज़, आप बैठिए।
श्री मुलायम सिंह यादव : क्या इतने महत्वपूर्ण सवाल पर हम नहीं बोलेंगे?...(व्यवधान)
माननीय अध्यक्ष : ऐसा नहीं होता है। प्लीज़, आप बैठिए।
श्री मुलायम सिंह यादव: स्पीकर साहब, यह गलत है।...(व्यवधान)फिर तो मेरा इस सदन में आने का कोई मतलब ही नहीं है।...(व्यवधान)अगर हम इस विाय पर भी नहीं बोलेंगे तो फिर क्या मतलब है?...(व्यवधान)
शहरी विकास मंत्री, आवास और शहरी गरीबी उपशमन मंत्री तथा संसदीय कार्य मंत्री (श्री एम. वैंकैय्या नायडू) : मुलायम जी, जब बोलने का वक्त था, उस समय आप यहां नहीं थे। इसलिए आप नहीं बोल पाए।
माननीय अध्यक्ष : वेंकैया जी, आप बैठिए।
…( व्यवधान)
माननीय अध्यक्ष : मुलायम जी, ऐसा नहीं होता है। मैं बाद में कुछ क्लैरिफिकेशन के लिए आपको समय दूंगी। अभी आप बैठिए।
…( व्यवधान)
श्री राजनाथ सिंह : अध्यक्ष महोदया, मैं जानता हूं कि श्री मुलायम सिंह यादव इस सदन के एक वरिठ सदस्य हैं और अनुभवी नेता हैं। इसलिए यहां जो भी चर्चा हुई है, उस पर मेरे द्वारा विचार व्यक्त किए जाने के बाद उनके द्वारा जो कुछ भी कहा जाएगा अथवा जो भी प्रश्न पूछे जाएंगे, उनका भी मैं उत्तर दूंगा। इतना मैं आपको आश्वस्त करना चाहता हूं।
माननीय अध्यक्ष : उसके लिए तो मैंने बोला ही है।
श्री राजनाथ सिंह : अध्यक्ष महोदया, मैंने सभी माननीय सदस्यों के प्रति आभार व्यक्त किया है, जिन्होंने अपने रचनात्मक सुझाव दिए हैं। मैं उनके प्रति भी आभार व्यक्त किया है, जिन्होंने हमारे गृह मंत्रालय के कामकाज की आलोचना की है, क्योंकि एक स्वस्थ लोकतांत्रिक व्यवस्था में आलोचना का भी अपना एक महत्व होता है। आलोचना को भी हमने सकारात्मक तरीके से लिया है। साथ ही साथ, जो सुझाव दिए गए हैं, उन्हें भी हमने सकारात्मक तरीके से लिया है।
जहां तक गृह मंत्रालय का प्रश्न है, गृह मंत्रालय को कई प्रकार की जिम्मेदारियों का निर्वहन करना पड़ता है। इंटर्नल सिक्यूरिटी से रिलेटेड बहुत सारी ऐसी जिम्मेदारियां हैं, जिनका उसे निर्वाह करना पड़ता है। वहीं पर बॉर्डर मैनेजमेंट, सेन्टर-स्टेट रिलेशंस, इंटर स्टेट रिलेशंस, यूनियन टेरिटरीज़ का एडमिनिस्ट्रेशन और इसके साथ ही साथ सेंट्रल आर्म्ड पुलिस फोर्स का भी प्रबंधन गृह मंत्रालय के अन्तर्गत आता है। इसके अतिरिक्त डिजास्टर मैनेजमेंट की जिम्मेदारी भी गृह मंत्रालय को ही संभालनी पड़ती है।
13.00 hrs मैं उन सारी चीजों का यहां बहुत डिटेल में जाकर उल्लेख नहीं करना चाहता हूं, क्योंकि इसमें लंबा समय लगेगा। इंटेलिजेंस विभाग के बारे में मैं कहना चाहूंगा कि यह बहुत ही इफेक्टिविली काम कर रहा है। तकनीकी दृिट से इसकी ताकत को और कैसे इंप्रूव किया जा सकता है, हम उसे करने की पूरी तरह से कोशिश कर रहे हैं।
एक महत्वपूर्ण जिम्मेदारी गृह मंत्रालय को निभानी पड़ाती है कि समाज का जो वलनरेबल सेक्शन है, जो कमजोर वर्गों के लोग हैं, चाहे वे महिलाएं हों, चाहे वे अनुसूचित वर्ग के लोग हों, आदिवासी हों या चाहे अल्पसंख्यक समुदाय के लोग हों, सबको सुरक्षा की गारन्टी देना। इसे मैं स्वीकार करता हूँ कि इसमें एक महत्वपूर्ण भूमिका राज्यों की भी होती है, क्योंकि लॉ एंड ऑर्डर का सवाल केवल सेंटर का सब्जेक्ट नहीं है, बल्कि यह स्टेट सब्जेक्ट है। मैं किसी राज्य की आलोचना नहीं करना चाहता हूँ। सभी राज्यों की लॉ एंड ऑर्डर की सिचुएशन को मेंटेन रखने के जो भी संसाधन उनके पास उपलब्ध हैं, उनके माध्यम से वे उसकी कोशिश करते हैं।
हमारे सामने बैठे हुए कांग्रेस लोक सभा दल के नेता श्रीमान मल्लिकार्जुन खड़गे जी एक बहुत ही अनुभवी नेता हैं। उन्होंने गृह मंत्रालय को लेकर उन्होंने अपनी चिन्ताएं व्यक्त की हैं। पहली चिन्ता श्रीमान खड़गे जी की यह रही है कि जो राट्रपति जी का अभिभााण था, उस अभिभााण में गृह मंत्रालय का जितना विस्तारपूर्वक उल्लेख किया जाना चाहिए था, उतना नहीं किया गया है। साथ ही उन्होंने यह भी चिन्ता की कि बजट अलोकेशन पहले की अपेक्षा कम हुआ है। मैं बजट अलोकेशन के बारे में बतलाना चाहता हूँ कि बजट अलोकेशन पहले से कम नहीं हुआ है, पहले से बजट अलोकेशन बढ़ा है। वाऩ 2013-14 में बजट अलोकेशन जहाँ 67,978 करोड़ 15 लाख था, वहीं वाऩ 2014-15 में बढ़कर 74,884 करोड़ हो गया और वाऩ 2015-16 में बढ़कर 78,470 करोड़ तक पहुँच गया है। यदि रिवाइज्ड एस्टीमेट के हिसाब से देखें तो एप्रॉक्सिमेटली 11.52 परसेंट की इसमें वृद्धि हुई है। इसलिए किसी भी प्रकार से गृह मंत्रालय को कहीं से कोई कमजोर कर रहा हो अथवा उसकी उपेक्षा कर रहा हो, यदि यह आशंकाखड़गे जी को है, तो उन्हें इसे दूर करना चाहिए। उन्होंने स्वयं ही इस बात को कहा है कि यदि हम किसी देश का विकास करना चाहते हैं, तो जब तक उस देश की सिक्योरिटी इंश्योर नहीं होगी, तब तक विकास किसी भी सूरत में संभव नहीं है। यह हमारी सरकार की प्राथमिकता है कि यह देश सुरक्षित रहना चाहिए, इस देश के लोग सुरक्षित रहने चाहिए और इस देश की सीमाएं सुरक्षित रहनी चाहिए।
जहां तक इस देश की आंतरिक सुरक्षा का प्रश्न है, जैसा मैंने पहले कहा कि आंतरिक सुरक्षा को इंश्योर करना हमारी सरकार की जिम्म्दारी है। इसके अंतर्गत जम्मू-कश्मीर, नार्थ ईस्ट एवं माओवाद से प्रभावित जो कुछ ऐसे क्षेत्र हैं, इन क्षेत्रों में भी शांति की बहाली के लिए हमारे मंत्रालय की तरफ से भरपूर कोशिश की जा रही है। मैं यह कह सकता हूं कि चाहे वह देश के हिंटरलैंड में हो, चाहे जम्मू-कश्मीर हो, चाहे नार्थ ईस्ट के राज्य हों या माओवाद से प्रभावित राज्य हों, सभी स्थानों पर सिक्योरिटी इंश्योर करने के लिए हम अपनी भरपूर कोशिश कर रहे हैं।
मैं आंकड़ों पर बहुत यकीन नहीं करता हूं और आंकड़ों के आधार पर मैं आश्वस्त नहीं होना चाहता हूं। सुरक्षा से संबंधित जो आंकड़े होते हैं, कभी किसी महीने बढ़ जाते हैं, कभी किसी महीने घट जाते हैं। माओवाद की घटनाएं भी किसी महीने बढ़ जाती हैं, किसी महीने घट जाती हैं। लेकिन फिर भी चूंकि इस बात की चर्चा हुई है, इसलिए उसका उल्लेख करना भी मैं आवश्यक समझता हूं कि माओवादी क्षेत्रों में टोटल किलिंग्स कितनी हुई हैं, टोटल किलिंग्स ऑफ सिविलियन एंड सिक्योरिटी फोर्सेज, वाऩ 2013 में 397 किलिंग्स हुई हैं, वाऩ 2014 में 309 किलिंग्स हुई हैं, वाऩ 2015 में अप टू 15.04.2015 79 किलिंग्स ही हुई हैं। यानी 22 percent less killings in year 2014 as compared to the year 2013. टोटल नम्बर ऑफ सिक्योरिटी फोर्सेज, उनकी कितनी किलिंग्स हुई हैं, वाऩ 2013 में 115 किलिंग्स हुई है, वाऩ 2014 में 87 किलिंग्स हुयी हैं, लेकिन वाऩ 2004 में एक बड़ी वारदात छत्तीसगढ़ की हुयी है, जो हमारे लिए केवल चिन्ता का ही विाय नहीं है बल्कि उसे हमने एक चुनौती के रूप में भी स्वीकार किया है। वाऩ 2014 में अब तक केवल 34 किलिंग्स हुयी हैं। जहां तक सिविलियन्स के मारे जाने का प्रश्न है, वाऩ 2013 में 282 सिविलियन्स मारे गये हैं, वहीं वाऩ 2014 में 222 सिविलियन्स मारे गये हैं।...(व्यवधान) वाऩ 2015 में केवल 45 लोगों की जानें गयीं हैं। जहां तक एल.डब्ल्यू.ई. कैडर की किलिंग्स का सवाल है, उनके भी फीगर्स हैं लेकिन बहुत-सारे फीगर्स देने की मैं आवश्यकता नहीं समझता हूं।
माओवाद से प्रभावित क्षेत्रों से माओवाद का संकट समाप्त हो, यह हमारा लक्ष्य है। मैं जानता हूं कि केवल लोगों को मौत के घाट ही उतार कर, हम यह कामयाबी कभी नहीं हासिल कर सकते हैं। मैं यह भी स्पट कर देना चाहता हूं कि यदि अनुसूचित वर्ग और अनुसूचित जनजाति वर्ग की कोई हत्या करने की कोशिश करेगा तो हमारी सरकार उसे किसी भी सूरत में माफ नहीं करेगी, लेकिन मैं इस हकीकत को भी स्वीकार करता हूं कि आज तक जो क्षेत्र आर्थिक दृिट से पिछड़े रह गये हैं, उन पिछड़े हुए क्षेत्रों का भी विकास होना चाहिए। हम लोगों ने पिछड़े हुये क्षेत्रों के विकास के लिए भी प्रभावी तरीके से योजना चलाने की व्यवस्था कर ली है। जहां तक माओवाद का प्रश्न है, यह साल, दो साल, चार साल, दस साल या 15 साल की समस्या नहीं है, यह समस्या वाऩ 1980 के बाद तेजी से इस देश में बढ़ी है और इसके पहले भी कई सरकारें रही हैं। मैं किसी सरकार को कोई दोा नहीं देना चाहता हूं, किसी को लांक्षित नहीं करना चाहता हूं कि उन्होंने बखूबी अपनी जिम्मेदारी का निर्वाह नहीं किया है, लेकिन आज मैं इस सदन में सभी राजनीतिक पार्टियों के नेताओं से विनम्रतापूर्वक यह अपील करना चाहता हूं कि माओवाद का यह संकट केवल सरकार के लिए चुनौती नहीं है बल्कि यह देश के लिए चुनौती है, हम सभी के लिए चुनौती है, हम सबको मिल-जुल कर इसका मुकाबला करना चाहिए, ताकि हम माओवाद के संकट से देश को निजात दिला सकें। यह हमारी कोशिश अपनी तरफ से होनी चाहिए। इस संकट को दूर करने के लिए यहां पर मैंने इस बात की चर्चा की है कि उन क्षेत्रों में हम विकास का कार्य तेजी से चला रहे हैं और वहां पर हमने कम्यूनिकैशन फैसिलिटी को बढ़ाने का काम किया है। मैं केवल मौखिक रूप से ऐसा नहीं कह रहा हूं बल्कि आपको जानकर खुशी होगी कि कम्यूनिकैशन फैसिलिटी को मजबूत करने के लिए लगभग 2000 टावर्स उन क्षेत्रों में लगाने का काम तेजी से प्रारंभ हो गया है, क्योंकि मैंने 9 फरवरी को एक मीटिंग की थी, उसमें दस राज्यों के कुछ मुख्य मंत्री थे, सभी राज्यों के चीफ सेक्रट्रीज और उनके ऑफिसर्स थे। केन्द्रीय मंत्रालय के लगभग सात-आठ मंत्रिगण और उनसे संबंधित अधिकारी भी उसमें मौजूद थे, मैंने उनके साथ एक बैठक की थी। माओवाद से प्रभावित क्षेत्रों से विकास के लिए किस-किस डिपार्टमेन्ट के सहयोग की आवश्यकता होगी, उसके संबंध में चर्चा हुई है। आज मुझे इस बात का संतोा है और मैं खुशी का भी इजहार करना चाहता हूं कि जिन-जिन मंत्रालयों के ऊपर जो भी जिम्मेदारी सौंपी गई थी, सबने अपना काम प्रारंभ कर दिया है, उन्हीं में से रोड ट्रांसपोर्ट ने अपना काम प्रारंभ कर दिया है, कम्यूनिकैशन डिपार्टमेन्ट ने भी अपना काम प्रारंभ कर दिया है और टावर्स लगाने का काम प्रारंभ हो गया है। जहां तक रोड्स का सवाल है, आर.आर.पी. फर्स्ट फेज में 3700 किलोमीटर्स रोड का निर्माण हो चुका है। आर.आर.पी. सेकेण्ड फेज में भी 10,000 करोड़ का प्रोविजन किया गया है। इसलिए देश को इस संकट से निजात दिलाने के लिए सभी के सहयोग की आवश्यकता है और मुझे सबका सहयोग प्राप्त होगा, यह मुझे विश्वास है।
जहां तक नार्थ ईस्ट का प्रश्न है, यह बात सच है कि विगत कुछ वााॉ में एक सैंस ऑफ एलिएनेशन, एक दुराव का भाव नार्थ ईस्ट के लोगों में पैदा होना प्रारंभ हुआ। यदि कोई हमसे पूछे कि नार्थ ईस्ट का सबसे बड़ा चैलेंज आपके सामने क्या है, तो मैं कहना चाहूंगा कि सैंस ऑफ एलिएनेशन को दूर करना और नार्थ ईस्ट में रहने वाले लोगों के अंदर सैंस ऑफ कॉन्फीडैंस पैदा करना, यही हमारी सबसे बड़ी चुनौती है।
उग्रवाद का संकट है। उग्रवाद का संकट भी एक बहुत बड़ी चुनौती है। लेकिन उग्रवाद आज से नहीं है, आजादी हासिल होने के पहले से ही उग्रवाद का सिलसिला वहां प्रारंभ हुआ और आज भी वह सिलसिला निरंतर चल रहा है। लेकिन मुझे बताते हुए खुशी है कि हमें काफी हद तक उस उग्रवाद के संकट पर काबू पाने में सफलता हासिल हुई है। इंटरलौकुटर्स वााॉ से, दूसरी सरकारें थीं तब भी लगे हुए थे। वहां के उग्रवादी, इनसर्जैंट ग्रुप्स के साथ उनकी बातचीत चल रही थी, लेकिन समाधान संतोाजनक नहीं रहा है। आज भी मैं यह दावा नहीं करना चाहता कि हम जो कर रहे हैं, पूरी तरह से समाधान हो गया। आज भी हमारे इंटरलौकुटर्स बात कर रहे हैं। मैं बातचीत का पक्षधर हूं, बातचीत होनी चाहिए। लेकिन हाल ही में एनडीएफबी (नेशनल डेमोक्रेटिक फ्रंट बोडोलैंड) एस ग्रुप ने वहां 62 निर्दोा आदिवासियों की हत्या कर दी। मैंने उसी दिन गुवाहाटी की धरती पर जाकर कहा था कि जो समाज के कमजोर वर्गों की हत्या करते हैं, उनके साथ हमारी सरकार किसी भी सूरत में बीतचीत नहीं करेगी। आप हत्या करते रहें और बातचीत भी करते रहें, यह दोनों चीजें साथ नहीं चल सकतीं। लेकिन मुझे आज सदन को यह बताते हुए खुशी है कि उनमें से लगभग पौने तीन सौ से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। जिन लोगों ने हमारे जवानों के ऊपर इस बीच आक्रमण करने की कोशिश की, उनमें से 10-11 लोगों को अपनी जिंदगी भी गंवानी पड़ी।...(व्यवधान)
प्रो. सौगत राय (दमदम) : क्या उसके लीडर को गिरफ्तार किया?...(व्यवधान)
श्री राजनाथ सिंह : सौगत राय जी, थोड़ी प्रतीक्षा कीजिए, परिणाम आएंगे। अध्यक्ष महोदया, श्रीमन् सौगत राय जी बहुत ही अच्छे वक्ता हैं। आप बहुत अच्छा बोलते हैं, तर्कसम्मत बोलते हैं। उल्फा और एनएससीएन-आईएम के साथ जो बातचीत चल रही है, उसकी क्या प्रोग्रैस है, इसके बारे में उन्होंने जानकारी चाही है। जैसे मैंने पहले ही कहा कि यह साठ साल से ज्यादा पुरानी प्राब्लम है। हमें उम्मीद है कि अब इसमें अधिक समय नहीं लगेगा। हम इस संबंध में जल्दी ही आपको परिणाम देने वाले हैं।
जहां तक अलफा के परवेज बरुआ की बात है, उसने सरेआम घोाणा की है कि वह अपनी बात पर अड़ा रहेगा, उसे शान्ति वार्ता वगैरह में कोई रूचि नहीं है। कहा है, लेकिन फिर भी आपको परिणाम देंगे।
पूर्वोत्तर राज्यों में एनएससीएन-आईएम एंव अन्य समूहों के साथ वार्ता की जो स्थिति है, किन-किन ग्रुप्स के साथ हमारी क्या बातचीत चल रही है, उसकी क्या प्रोग्रैस है, यदि मैं उस बारे में बताऊंगा तो बहुत लम्बी चर्चा हो जाएगी। यदि आपकी इजाजत होगी और सदन के सम्मानित सदस्य चाहेंगे तो मैं यहां उसकी विस्तृत जानकारी भी दे सकता हूं।...(व्यवधान) आप कहें तो मैं अभी बताना शुरू कर दूंगा, लेकिन कम से कम आधा घंटा, 45 मिनट उसी में लग जाएगा।
श्रीमान् खड़गे जी ने वहां डोनर मिनिस्ट्री की चर्चा की थी। पहले कभी था। मैं ऐसा नहीं कहना चाहता कि खड़गे जी को जानकारी नहीं है। खड़गे जी पूरी जानकारी रखते हैं। डोनर नार्थ ईस्ट के विकास की जिम्मेदारी का निर्वाह करता है। इसका एक मंत्रालय अलग से है। वह उसके विकास की जिम्मेदारी संभाल रहा है। कई बार नार्थ ईस्ट के चीफ मिनिस्टर्स के साथ उसकी मीटिंग्स भी हो चुकी हैं, उसकी मुझे जानकारी है।
मैं यहां आंध्र और तेलंगाना की चर्चा भी इसलिए करना चाहता हूं कि आंध्र प्रदेश एक बहुत बड़ा राज्य था। लंबे अर्से से वहां विभाजन की मांग हो रही थी, अब अलग राज्य तेलंगाना बन चुका है। रिआर्गनाइजेशन एक्ट, 2014 का इम्पलीमेंटेशन सबसे अह्म सवाल है। उस एक्ट को प्रोपरली एम्लीमेंट करने के लिए लगातार मोनिटरिंग हो रही है कि यह प्रोपरली इम्पलीमेंट हो रहा है या नहीं हो रहा है। पिछले वाऩ आंध्र प्रदेश रिआर्गनाइजेशन एक्ट में कुछ संशोधन किए गए हैं। दोनों राज्यों के बीच कुछ पेंडिंग इश्यूज हैं, जिनको रिजोल्व करने के लिए मैंने विभाग के संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया है। आंध्र प्रदेश और तेलंगाना के चीफ सेकेटरी या संबंधित अधिकारी के साथ बैठ कर इसे जल्दी रिजोल्व किया जाए। यह आग्रह मैंने उनसे किया है।
महोदया, मैं गोरखालैंड की भी चर्चा करना चाहता हूं। सभी माननीय सदस्यों को जानकारी होगी कि यहां ट्राइपटाइट एग्रीमेंट भारत सरकार, वेस्ट बंगाल और गोरखालैंड टेरिटोरिएल एडमिनिस्ट्रेशन के मध्य हुआ था। इस एग्रीमेंट का प्रोपरली एम्लीमेंटेशन हो रहा है या नहीं हो रहा है, इसकी भी मोनिटरिंग विभाग द्वारा की जा रही है। मैं यहां सभी विायों की चर्चा नहीं कर रहा हूं, केवल मेजर चैलेंजेज की चर्चा करना चाहता हूं। साइबर क्राइम केवल भारत के लिए ही नहीं बल्कि विश्व के लिए बहुत बड़ा चैलेंज है। भारत दुनिया के बड़े देशों में एक है। जनसंख्या की दृिट से भारत चीन के बाद दूसरा बड़ा देश है। सरकार भारत में साइबर क्राइम को चेक करने के लिए बेहद चिंतित है। विडंबना यह है कि सर्वर हमारे पास नहीं है। दुनिया के कई बड़े देशों के पास भी सर्वर नहीं है। साइबर क्राइम को रोकने के लिए इफेक्टिव सिस्टम की कमी है। हमने दो कमेटी बनाई है जिसे सुझाव देने के लिए कहा है कि साइबर क्राइम को रोकने के लिए क्या-क्या कदम उठाने चाहिए, चाहे वह कदम खर्चीला ही क्यों न हो। साइबर क्राइम को हम चुनौती मानते हैं। इस वित्तीय वाऩ में हम इंस्टीटय़ूश्नल स्ट्रक्चर को मजबूत करेंगे। इस संबंध में हमने इंडियन साइबर क्राइम कॉर्डिनेशन सेंटर कायम करने का भी फैसला किया है।
महोदया, देश के वलनरेबल सेक्शन में महिलाएं शामिल हैं, लेकिन महिलाओं को कमजोर नहीं मानना चाहिए। प्राचीन भारत के इतिहास के पन्नों को पलट कर अगर कोई देखे तो महिलाओं को शक्ति के प्रतीक के रूप में माना जाता था।
श्री मल्लिकार्जुन खड़गे (गुलबर्गा) : मैडम स्पीकर, यह सब किताबों, वेदों और पुराणों में ठीक है लेकिन प्रैक्टिकली 5000 हजार साल से हम देख रहे हैं, जब ह्यूमन हिस्ट्री, एंथ्रोपोलॉजी और सोसियोलॉजी को देखें तो महिलाओं की स्थिति के बारे में आपको मालूम चल जाएगा।
श्री राजनाथ सिंह : अध्यक्ष महोदया, मैं वैसा कोई उत्तर नहीं देना चाहता हूं जिससे कोई हर्ट हो। मैं सभी का रचनात्मक और सकारात्मक सहयोग चाहता हूं। खड़गे जी, आपकी सरकार ने भी कदम उठाया था। निर्भया कांड आपके ही समय हुआ था। उस समय भी आप लोगों ने कुछ प्रभावी कदम उठाये थे। हम उसे आगे बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं। मैं ऐसा नहीं कहना चाहता कि आपने कुछ गलत किया हुआ है। हमने इन्वेस्टीगेशन के संबंध में एक महत्वपूर्ण काम किया है। वूमैन क्राइम के इन्वेस्टीगेशन में काफी विलंब होता है। हमने पहला फैसला यह किया कि चाहे हमारी स्टेट्स हों, यूनियन टेरिटरीज हों, उनमें हमने फर्स्ट फेज में लगभग 150 इकाइयों को कायम किये जाने का फैसला किया है। इन्वेस्टिगेटिव यूनिट्स ऑन क्राइम्स अगेन्स्ट वूमैन, यानी आईयूसीएडब्ल्यू एक ऐसी इन्वेस्टिगेटिंग यूनिट देश भर में एस्टैब्लिश किये जाने के संबंध में भी हमने फैसला किया है। साथ ही साथ गृह मंत्रालय ने कम्प्यूटर ऐडेड डिस्पेच टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करके एक इमर्जेंसी रिस्पांस सिस्टम कायम करने के भी कदम उठाये हैं। महिलाओं से जुड़े हुए मामले अदालतों में जाते हैं, लेकिन लम्बे समय तक उन पर फैसला नहीं हो पाता और वे पेंडिंग पड़े रहते हैं। हमने फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाने के संबंध में भी राज्यों को एडवाइजरी दी है। अब जैसे दिल्ली में सभी जनपदों में फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाये जा चुके हैं। महिलाओं पर एसिड से जुड़े हुए जो हमले होते हैं, उस संबंध में भी हमने कई प्रभावी कदम उठाये हैं। मैं बहुत डिटेल में नहीं जाना चाहता हूं, लेकिन मैं अपनी उस खुशी का इजहार कर देना चाहता हूं, जिसमें हमें राज्यों का सहयोग प्राप्त हुआ है। इस देश के सभी राज्यों ने विक्टिम कम्पेनसैशन स्कीम को नोटीफाई कर दिया है। गृह मंत्रालय से जो सुझाव दिया गया था, उसे सभी राज्यों ने नोटीफाई कर दिया है। हमने सीआरपीसी में भी कुछ परिवर्तन किये हैं। जैसे एसिड अटैक की कोई विक्टिम यदि किसी अस्पताल जाती है, वह चाहे प्राइवेट अस्पताल हो या गवर्नमैंट अस्पताल हो, उसमें कोई भी डाक्टर उसका इलाज करने से मना कर देता है, तो उसे भी पनिश करने की व्यवस्था उसमें है। उसे भी दंडित किया जायेगा। संभवतः यदि मैं भूल नहीं रहा हूं तो शायद सात साल या दस साल तक की सजा है। हो सकता है कि इसमें कुछ त्रृटि हो, लेकिन संभवतः इतनी है। साथ ही एसिड अटैक की जो पीड़ित महिला होगी, उसका मुफ्त इलाज किया जायेगा। हमने यह भी एक व्यवस्था की है।
अध्यक्ष महोदया, एसिड की सेल को कंट्रोल करने के संबंध में भी हमने कुछ व्यवस्था की है। इसके लिए हमने कुछ नियम नोटीफाई किये जाने का अनुरोध किया है। साथ ही साथ हम एक साफ्टवेयर भी बना रहे हैं, ताकि एसिड सेल को रेगुलेट किया जा सके। इसके अलावा अन्य बहुत सारे उपाय किये गये हैं। जहां तक दिल्ली का सवाल है, तो दिल्ली की डीटीसी बसों में सीसीटीवी कैमरे लगवाने, पब्लिक सर्विस व्हीकल्स क्रूज के लिए फोटो पहचान पत्र जारी करना, पार्किंग की जगहों पर, शापिंग मॉल्स पर सीसीटीवी कैमरे, बैक कैमरा लगवाना आदि। हमने एक नया ऐप हिम्मत जारी किया है। अगर महिला से कोई किसी भी प्रकार से छेड़खानी करने की कोशिश करता है तो वह तुरंत बटन दबाये, लेकिन सभी प्रकार के मोबाइल्स पर इस प्रकार की व्यवस्था नहीं है। मैंने यहां के पुलिस विभाग और पुलिस कमिश्नर को यही निर्देश दिया है कि अब यह व्यवस्था की जानी चाहिए कि हर प्रकार के मोबाइल्स में इस प्रकार का बटन होना चाहिए, जिसे दबाने पर पीसीआर वैन अधिकतम से अधिकतम पांच से लेकर सात मिनट तक उस पीड़िता की रक्षा के लिए वहां पर पहुंच सके। इसके अतिरिक्त बहुत सारी बातें कही गयीं। निर्भया फंड के यूटीलाइजेशन के संबंध में भी कहा गया। निर्भया फंड का यूटीलाइजेशन नहीं हुआ था। उसके यूटीलाइजेशन का सिलसिला भी हमने यहां पर प्रारंभ कर दिया है। अब होम मिनिस्ट्री ने अब तक क्या तैयारी की है, उस संबंध में मैं यहां संक्षेप में बताना चाहूंगा।
Home Ministry has prepared three more proposals for funding under Nirbhaya Fund - proposal to set up a Central Victim Compensation Fund with Rs. 200 crore corpus fund to assist the women victims of the heinous crimes like rape, acid attack etc.; proposal to set up Investigative Units on Crimes Against Women in 564 districts of the country costing approximately Rs. 500 crore; proposal to set up Indian Cyber Crime Coordination Centre with an investment of Rs. 88 crore for the remaining two years of the current Five Year Plan. हमने ऐसे कई प्रभावी कदम उठान का फैसला किया है।
जहां तक जेलों के सुधार का प्रश्न है, वैसे यह पूरी तरह से स्टेट सब्जैक्ट है। जेलों के अंदर अंडर ट्रायल प्रिज़नर्स की क्राउड बढ़ता जा रहा है, भीड़ बढ़ती जा रही है। हमने एक एडवाइजरी जारी की है, सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया था, मैंने उस समय लॉ मिनिस्टर को भी कहा था कि आपकी तरफ से एडवाइजरी जानी चाहिए कि ऐसे अंडर ट्रायल प्रिज़नर्स, जिस धारा के अंतर्गत बंद हैं, यदि 50 परसेंट से अधिक समय तक वे जेल में रह चुके हैं तो उनकी रिहाई कैसे हो सकती है, इसे एश्योर करें। मैंने इस संबंध में राज्य के सभी मुख्यमंत्रियों को अपनी तरफ से पत्र लिखा है।
ह्यूमेन ट्रेफिकिंग के बारे में चर्चा आई थी। मैं यहां ह्यूमेन ट्रेफिकिंग की चर्चा करना चाहता हूं, हमने इस संकट से निजात दिलाने के लिए कई एजेंसियों की मदद ली है। सरकार का प्रस्ताव है कि एंटी ह्यूमेन ट्रेफिकिंग सॉफ्टवेयर एप्लीकेशन को डैवलप किया जाए और यह काम हम लोगों ने प्रारंभ कर दिया है। हमने ह्यूमेन ट्रेफिकिंग को रोकने के लिए बेज़बरुआ कमेटी की रिकमेंडेशन को स्वीकार कर लिया है।
अब प्रश्न धार्मिक स्थलों की सुरक्षा का सवाल आता है। मैं देखता हूं कि धार्मिक स्थलों की सुरक्षा के सवाल पर हम लोगों पर आरोप लगाए जाते हैं कि हम धार्मिक स्थलों की सुरक्षा नहीं कर पा रहे हैं। मैं आंकड़ें देना नहीं चाहता हूं क्योंकि इससे बहुत लोगों की भावनाएं आहत होंगी। यदि कहेंगे तो दे दूंगा। ...(व्यवधान) इसी समय धार्मिक स्थलों पर आक्रमण हुए हैं, ऐसा नहीं है। मंदिरों में भी इस प्रकार की घटनाएं हुई हैं, आक्रमण की नहीं हैं, हमलों की नहीं हैं, चोरी की भी हो जाती हैं, कुछ वैंडेलिज्म की भी हो जाती हैं। कुछ इस प्रकार की छोटी-मोटी घटनाएं हो जाती हैं, इसे जरूरत से ज्यादा तूल दिया जाता है। मैं समाज के सभी धर्मों को मानने वाले लोगों से विनम्रतापूर्वक अपील करना चाहता हूं कि जब कभी ऐसे सैंसटिव इश्यू आएं तो हम उसे पोलिटिसाइज करने की कोशिश न करें। बल्कि हमारा प्रयत्न होना चाहिए कि यदि कहीं किसी धार्मिक स्थल पर...(व्यवधान)
SHRI K.C. VENUGOPAL (ALAPPUZHA): What action has been taken by you as Home Minister? … (Interruptions) You had assured the House. … (Interruptions)The Home Minister himself assured on the floor of the House. … (Interruptions)
SHRI KODIKUNNIL SURESH (MAVELIKKARA): You are the Home Minister of this country, and not a Leader of the BJP. … (Interruptions) There was attack on minorities in the country, but you have not mentioned about the minority attack. … (Interruptions)
THE MINISTER OF STATE OF THE MINISTRY OF SKILL DEVELOPMENT AND ENTREPRENEURSHIP AND MINISTER OF STATE IN THE MINISTRY OF PARLIAMENTARY AFFAIRS (SHRI RAJIV PRATAP RUDY): One minority is attacking the other minority. … (Interruptions) What to do? … (Interruptions) What has happened in Agra? … (Interruptions)
SHRI K.C. VENUGOPAL: So, you should take action. … (Interruptions)
HON. SPEAKER: Nothing will go on record. Only the Minister’s statement will go on record.
… (Interruptions)… श्री राजनाथ सिंह : माननीय अध्यक्ष जी, आगरा में हो जाए, तमिलनाडु में हो जाए, आंध्र प्रदेश में हो जाए, तेलंगाना में हो जाए, केरल में हो जाए, कहीं भी हो जाए, क्या सीधे सैंट्रल गवर्नमेंट, हम स्टेट के मामलों में इंटरवीन करें? क्या संसद हमें इस बात की इजाजत देगा? क्या संसद को इस बात की जानकारी नहीं है कि यह स्टेट सब्जैक्ट है?...(व्यवधान)
SHRI K.C. VENUGOPAL: What about Delhi? … (Interruptions)
श्री राजनाथ सिंह : अब दिल्ली पर आइए। अब मैं दिल्ली की बात कहता हूं। मैं जानकारी देना चाहता हूं। ...(व्यवधान)
SHRI KODIKUNNIL SURESH: The Sangh Parivar is doing this. … (Interruptions)
SHRI RAJIV PRATAP RUDY: How can he make that statement? … (Interruptions) What do you mean by Sangh Parivar is doing this? … (Interruptions) How can he make that sentence? He is making an allegation through it. … (Interruptions)
HON. SPEAKER: Only the Minister’s statement will go on record.
… (Interruptions)… * SHRI KODIKUNNIL SURESH : If it is not so, then why are you closing your eye? … (Interruptions)
HON. SPEAKER: Yes, Mr. Minister. Only your statement is going on record and no other interference.
… (Interruptions)
श्री राजनाथ सिंह : माननीय अध्यक्ष जी, 2012, 2013 और 2014 में और इससे पहले, चाहे मंदिर हो, मस्जिद हो, चर्च हो, गुरुद्वारा हो, सभी स्थानों पर कुछ न कुछ घटनाएं हुई हैं। मैंने कहा कि हमें यदि पोलिटिकल बेनिफिट लेना होता तो सचमुच मैं इन आंकड़ों को यहां रख देता।...(व्यवधान)
SHRI K.C. VENUGOPAL: Now, you are the Home Minister. … (Interruptions)
HON. SPEAKER: Please, this is not fair.
… (Interruptions)
SHRI KODIKUNNIL SURESH: You are not a BJP Leader. … (Interruptions) Your are now the Home Minister of this country. … (Interruptions)
SHRI M.I. SHANAVAS (WAYANAD): What action have you taken? Our question is what action you have taken against them. … (Interruptions)
श्री राजनाथ सिंह: अगर माननीय सदस्यों को आंकड़े चाहिए तो मैं दे दूंगा। मैं आंकड़ों का उल्लेख इसलिए नहीं करना चाहता क्योंकि अनावश्यक इसके कारण बवाल खड़ा होता है। ऐसा मैं क्यों कर रहा हूं? मैं बार-बार सदन में कह चुका हूं और सदन के बाहर भी कह चुका हूं कि हम लोग राजनीति केवल सरकार बनाने और चलाने के लिए नहीं करते बल्कि हम राजनीति समाज बनाने के लिए करते हैं, देश बनाने के लिए करते हैं इसलिए मैं इसका उल्लेख नहीं करना चाहता।
मैं विशेाकर माइनोरिटीज़ को इतना आश्वस्त करना चाहता हूं कि वह भी भारत के नागरिक हैं, माइनोरिटी के लोग भारत माता की कोख से पैदा हुए हैं। हम उनको अपने से अलग नहीं मानते हैं। मैं समझता हूं कि शायद अगर डीएनए टैस्ट कराया जाए तो काफी हद तक मिलेगा भी। अब क्या होगा, मैं नहीं कह सकता, मैं यह नहीं कह रहा हूं मिलेगा ही, मैं कह रहा हूं कि मिल सकता है।...(व्यवधान)
SHRI E. AHAMED (MALAPPURAM): Madam Speaker, may I put a question? I would like to say that it is the duty of the Government to provide protection, safety and security to everybody, especially to minorities and the weaker sections of society. … (Interruptions)
SHRI KALYAN BANERJEE (SREERAMPUR): Madam, I have one request to the hon. Minister. … (Interruptions)
HON. SPEAKER: You can ask him after completion of his speech, but not like this.
… (Interruptions)
HON. SPEAKER: Nothing will go on record.
… (Interruptions)… श्री राजनाथ सिंह : माननीय अध्यक्ष जी, यदि कहीं पर कोई कम्युनल टैंशन होती है या कहीं पर कम्युनल वाएलेंस होता है, हमने उस संकट से निपटने के लिए स्टैंडिंग आपरेटिंग प्रोसीजर निर्धारित किए हैं। मैं फिर से अपनी बात दोहराना चाहता हूं, भारत का जहां तक सवाल है। भारत दुनिया का इकलौता देश है, ऐसा मैं क्यों कहता हूं क्योंकि यहां हिंदूओं, मुसलमानों, सिखों, ईसाइयों, पारसियों और यहां तक यहूदियो तक के साथ पहले भी कोई भेदभाव नहीं हुआ है। मैं समझता हूं आज भी हम सबको मिलकर कोशिश करनी चाहिए कि किसी प्रकार का भेदभाव न होने पाए। क्यों? आप सब शांतिपूर्वक मेरी बात सुन लीजिए और उसके बाद जो बोलना होगा बोलिएगा। यहां मोहम्मद सलीम साहब बैठे हैं, ई. अहमद साहब बैठे हैं। अहमद साहब बहुत सीनियर पोलिटीशियन हैं। औवेसी साहब यहां अभी नहीं हैं। आपको मालूम होगा कि इस्लाम के 72 फिरके होते हैं। भारत दुनिया का इकलौता देश है जहां इस्लाम के 72 के 72 फिरके पाए जाते हैं। यह दुनिया के किसी और देश में नहीं पाए जाते हैं।...(व्यवधान)
SHRI KODIKUNNIL SURESH: That is not your contribution.
श्री राजनाथ सिंह : दुनिया का सबसे पुराना चर्च केरल में है। दूसरी या तीसरी सैंक्चुरी में यहां सैंट थामस चर्च की स्थापना हुई थी। एक-दूसरे के प्रति सम्मान, एक-दूसरे के प्रति उनकी आस्था, एक-दूसरे के प्रति उनके विश्वास को सम्मान देने की भावना हमारे यहां पहले से ही रही है।
जहां तक इजरायल का सवाल है, सैकड़ों वााॉ तक दुनिया के भिन्न भिन्न देशों में यहूदी लोग रहे। लेकिन जब यहूदियों का देश इज़रायल बना तो इज़रायल ने जो इतिहास लिखा है, उस इतिहास के पन्नों को कोई पलटकर देखें तो उस समय यहूदी ने कहा था कि दुनिया के सभी देशों में हमारे ऊपर जुल्म और अत्याचार हुए थे। दुनिया का इकलौता देश यदि कोई था तो भारत था जहां पर यहूदियों के ऊपर कोई अत्याचार और जुल्म नहीं हुए।...(व्यवधान)
यह ऑन रिकार्ड है। मैं पारसी धर्म की बात करना चाहता हूं। उनकी जन्मभूमि ईरान है। लेकिन आज सचमुच केवल सम्मानजनक तरीके से ही पारसी यहां नहीं रह रहा है बल्कि यहां तक कि सेना प्रमुख के रूप में भी पारसी समुदाय के लोग जिम्मेदारी संभाल चुके हैं। यह भारत की विशेाता है।...(व्यवधान)इसलिए मैं सभी सम्मानित सदस्यों से निवेदन करना चाहता हूं कि हर इश्यू पर राजनीति करें, उनको राजनीति करनी है तो करें, हमें इसमें कोई आपत्ति नहीं है। लेकिन देश की एकता औऱ अखंडता को ध्यान में रखते हुए कृपया इस मुद्दे पर राजनीति न करें।...(व्यवधान)
अध्यक्ष महोदया, घर-वापसी और धर्मान्तरण का जहां तक संबंध है, इन सब पर सारी कार्रवाई की अपेक्षा हमेशा केन्द्र सरकार से ही की जाती है कि दिल्ली में बैठी हुई केन्द्रीय सरकार सभी राज्यों में भी जो घटनाएं हो रही हैं, उन पर केन्द्रीय सरकार कार्रवाई करे। अध्यक्ष महोदया, आप इस हकीकत को जानती हैं कि यह संभव नहीं है।...(व्यवधान)
राज्य सरकारें कम्युनल हॉरमनी को मजबूत करने के लिए जो कार्रवाई करना चाहती हैं, वे कार्रवाई करें। हम उनके साथ हैं। घर-वापसी और धर्मान्तरण के बारे में बहुत सारी बातें होती हैं लेकिन दुनिया का भारत ही इकलौता देश है जो कभी कंवर्जन के भी सवाल को लेकर अपनी डैमोक्रेसी प्रोफाइल बदल देगा, इसकी भी चिंता कभी अगर जिस देश ने नहीं की है तो वह भारत ने नहीं की है।...(व्यवधान)दुनिया का कोई भी देश अपनी डैमोक्रेसी प्रोफाइल को बदलने की किसी भी सूरत में इजाजत नहीं देगा। आज यह हो रहा है।...(व्यवधान)
दुनिया का इकलौता देश भारत ही है कि ...(व्यवधान)सब नहीं हैं। बाकी थ्योरिटीकल कंट्रीज हैं। सैकुलर कंट्री भारत है।...(व्यवधान) दुनिया के हर देश में धर्मान्तरण रोकने की मांग, एंटी-कंवर्जन बिल लाने की मांग यदि होती है तो माइनॉरिटीज के द्वारा होती है। लेकिन भारत में ऐसा नहीं होता है। भारत में माइनॉरिटीज यह मांग नहीं करती हैं कि एंटी-कंवर्जन बिल लाया जाना चाहिए और मैं समझता हूं कि घर-वापसी हो। धर्मान्तरण को लेकर, कम्युनल हॉरमनी को लेकर जो प्रश्न-चिन्ह समय समय पर लगता रहता है और यदि इसको दूर करना चाहते हैं, यदि यह समस्त सदन सहमत हो और यदि एक बार फैसला कर दे कि हम यहां एंटी-कंवर्जन बिल सर्व सम्मति से सदन में पारित करेंगे तो मैं समझता हूं कि फैसला हो गया।...(व्यवधान)इस संकट से निजात मिल गया।...(व्यवधान)
हमारे चंदूमाजरा जी ने ...(व्यवधान)अहमद साहब, मैं आपका जवाब दूंगा। यदि अध्यक्ष महोदया की इजाजत होगी तो मैं आपके सवाल का जवाब दूंगा।...(व्यवधान)वाऩ 1984 में सिख विरोधी जो दंगा हुआ था, उसमें पीड़ितों की सहायता के लिए हम लोगों ने भी कुछ प्रभावी कदम उठाये हैं और हमने कहा है कि पांच पांच लाख रुपये ऐसे सभी परिवारों को एडीशनल मुआवजा दिया जाना चाहिए। उसके आदेश निर्गत कर दिये गये हैं। मैं सभी राज्य सरकारों से भी इस सदन के माध्यम से अपील करना चाहता हूं कि तुरंत ही 1984 के सिख दंगों के जो भी पीड़ित हों, उनको तत्काल 5-5 लाख रुपये का एडीशनल कमपनसेशन मुहैया कराएं और उसका रीइम्बर्समेंट केन्द्रीय सरकार के द्वारा शीघ्र कर दिया जाएगा।
माननीय अध्यक्ष महोदया जी, 1984 के कई दंगा पीड़ितों की यह शिकायत थी कि उस पर हमारे साथ इंसाफ नहीं हुआ है। जब से मैं गृह मंत्री बना हूं, मेरे सामने आ कर महिलाएं आंसू बहाती रही हैं। हम लोगों ने तुरंत फैसला किया कि उनकी शिकायतों पर विचार करने के लिए जस्टिस पी.पी. माथुर की अध्यक्षता में 23/12/2014 को हमने एक कमेटी बना दी। जस्टिस माथुर की इस कमेटी की सिफारिशों के आधार पर सरकार ने अन्य बातों के साथ-साथ उन उपर्युक्त रूप से गंभीर आपराधिक मामलों की छानबीन करने और फिर से छानबीन करने के लिए श्री प्रमोद अस्थाना, आईपीएस की अध्यक्षता में 12/02/15 को एक विशेा एसआईटी का गठन कर दिया गया है जो कि 1984 के दंगों के सिलसिले में राट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली में दायर किए गए थे और अब बंद कर दिए गए हैं।
महोदया, प्राकृतिक आपदा का विाय भी हमारे मंत्रालय के साथ जुड़ा हुआ है। हमारी सरकार ने प्राकृतिक आपदा को बहुत ही गंभीरता से लिया है और भारत तथा नेपाल में जो कुछ भी हुआ है, उसके पहले भी प्राकृतिक आपदाएं चाहे वह जम्मू-कश्मीर में आई हो, चाहे उड़ीसा में आई हो, हमारे प्रधानमंत्री जी ने भी अपनी भूमिका निभाई है। उस पर पुनः चर्चा करने का कोई औचित्य नहीं है लेकिन वाऩ 2013-14 वित्तीय वाऩ के ईएफपीआरएफ आवंटन में पांच परसेंट का हम लोगों ने इज़ाफा किया है। वाऩ 2013-14 और 2014-15 में पांच परसेंट का इजाफा हुआ है लेकिन वाऩ 2015-16 में वार्िाक इज़ाफा 50 परसेंट का हुआ है। ...(व्यवधान)पहले इस चैलेंज से निपटने के लिए जितना धन रहता था, उसे बढ़ाकर हम लोगों ने डेढ़ गुना कर दिया है। यह काम हमारी सरकार ने अभी किया है। सभी राज्यों को जो धनराशि आवंटित हुई है उसकी डिटेल में चर्चा करने की जरूरत नहीं है। लोगों को सहायता प्रदान के लिए जो पैरामीटर्स होते हैं उनमें भी काफी परिवर्तन कर दिया है। जिनकी जिंदगी चली जाती है उनके परिवार वालों को चार लाख रुपया देने का फैसला किया है। इसमें 75 परसेंट कंट्रीब्यूशन सैंट्रल गवर्नमेंट का राज्यों के लिए रहता था और 25 परसेंट राज्यों का रहता था लेकिन सम्भवतः वह 90/10 परसेंट हो गया है। यूटीज़ के लिए पहले से ही 90/10 परसेंट रहा है। नेशनल डिजास्टर मैनेजमेंट ऑथोरिटी को भी हम लोगों ने री-ओरिएंटेशन और री-ऑरगेनाइजेशन किया है। उसको काफी इफैक्टिव बनाया है जिसके कारण कामयाबी हासिल हुई है। इस बार हमारे प्रधान मंत्री जी ने भी एक बैठक में कहा कि इस बार की जो घटना हुई है, इसमें लोगों को संकट से उबारमें में तो हम मदद करें ही लेकिन साथ ही साथ हम इस घटना से सीख लें ताकि भविय में इस प्रकार की घटना की पुनरावृत्ति यदि होती है तो उसे कैसे रोका जा सकता है, वैसा सिस्टम भी हम अपने यहां डवलप करने की कोशिश करें।
अध्यक्ष महोदया, बॉर्डर मैनेजमेंट और कोस्टल सिक्योरिटी का बहुत बड़ा काम भी गृह मंत्रालय के पास है। इसमें हम लोगों ने इसे प्रायरिटी दी है। पिछले वाऩ के रिवाइज्ड एस्टीमेट 1785 करोड़ रुपये की तुलना में इस वाऩ बजट एस्टीमेट में 3340.82 करोड़ रुपये की व्यवस्था की गयी है। यहाँ मैं इस बात से भी अवगत कराना उचित समझता हूँ कि रिवाइज्ड एस्टीमेट के 1785 करोड़ रुपये की तुलना में ऐक्चुअल एक्सपेंडीचर 1645 करोड़ रुपये हो गया है।
श्री तथागत सत्पथी (धेंकानाल) : उसमें सैलरी का कितना है?
श्री राजनाथ सिंह : कृपया उस विाय पर मत जाइए। मो. सलीम साहब ने कुछ प्रश्न उठाये थे। मैं उनके संज्ञान में कुछ नये फैक्ट्स लाना चाहता हूँ। भारत-बंगलादेश सीमा की स्वीकृत 3326 किलोमीटर की फेंसिंग का 88 प्रतिशत काम पूरा कर दिया गया है। 293 किलोमीटर की सीमा पर फेंसिंग के कई कारण हैं। एक कारण यह है कि लैंड एक्वीजिशन में डिले हो रहा है, दूसरा फॉरेस्ट वाइल्ड लाइफ क्लीयरेंस और इंवायरमेंट क्लीयरेंस का मुद्दा है। लेकिन अब एंवायरमेंट क्लीयरेंस की कोई प्रोब्लम नहीं रह गयी है। ...(व्यवधान)
एक माननीय सदस्य : अब बैठ जाइए। ...(व्यवधान)
श्री राजनाथ सिंह : आपकी वजह से यह पूरा नहीं हो सका है। लेकिन उसे भी मैं पूरा करने की कोशिश कर रहा हूँ।
भारत-बंगलादेश सीमा पर अतिरिक्त स्वीकृति 383 कंपोजिट बॉर्डर आऊट पोस्ट में 74 पूरी तरह से पूरे हो गये हैं और 86 पर तेजी से काम चल रहा है और लैंड एक्वीजिशन में डिले होने की वजह से ऐसा हुआ है।
बी.एस.एफ. के जवानों के संबंध में यह बात आयी कि बॉर्डर पर कैटल स्मग्लिंग हो रही है। मैं विनम्रतापूर्वक सभी से अनुरोध करना चाहता हूँ कि हमें संसद में भी ऐसी कोई बात नहीं बोलनी चाहिए, जिससे हमारी आर्मी, पैरा मिलिट्री फोर्सेज़ हों, जो किसी भी सूरत में डिमोर्लाइज़ हों। कहीं पर कोई घटना हो सकती है, कहीं किसी ने कुछ किया हो, लेकिन यदि सार्वजनिक रूप से हम किसी भी फोर्स को बदनाम करने की कोशिश करेंगे, तो उसके मोराल पर क्या असर होगा? इसका सहज रूप से अनुमान लगाया जा सकता है। फोर्स के मोराल को बनाकर रखना, मैं समझता हूँ कि इस देश की सुरक्षा के लिए भारत के हर नागरिक की यह जिम्मेदारी बनती है, जिसकी हमें चिन्ता करनी चाहिए। कैटल स्मग्लिंग हमारे लिए भी एक चुनौती है। मैं कैटल स्मग्लिंग के संबंध में यह बतलाना चाहता हूँ कि जब हमने मंत्रालय की जिम्मेदारी संभाली, तो उसके पाँच-छः महीने के बाद ही जो प्रोग्रेस हुई है, मैं उसके बारे में जानकारी देना चाहता हूँ। पहले जितनी कैटल स्मग्लिंग होती थी, उसमें अब 33 प्रतिशत की कमी आयी है। ऐसा केवल मैं नहीं कह रहा हूँ। हमारा पड़ोसी देश बंगलादेश भी इस हकीकत को स्वीकार कर रहा है। सीमाओं की सुरक्षा और मैनेजमेंट के लिए भी हमने बहुत सारे कदम उठाये हैं। मैं अब बहुत डिटेल में नहीं जाऊँगा।
अब मैं कोस्टल सिक्योरिटी के विाय पर आ जाता हूँ। कोस्टल सिक्योरिटी को इंश्योर करने के लिए हमने जो कार्य किये हैं, उसकी मैं चर्चा कर दूँ। एक तो जो फिशिंग वेसल्स हैं, जिन पर नावों से मछुआरे मछली पकड़ने का काम करते हैं, उनकी संख्या इस समय 1.19 लाख है। हम लोगों ने प्रोविज़न किया है कि जिस फिशिंग वेसल्स का रजिस्ट्रेशन नहीं होगा, वह फिशिंग के काम के लिए नहीं जा सकता है। 155 मेरीन पुलिस स्टेशन बनाये गये हैं, 97 चेक पोस्ट बनाये गये हैं, 58 आऊट पोस्ट बनाये गये हैं, बैरक्स, बोट्स बनाये गये हैं। 204 लोगों को बोट्स प्रोवाइड किये गये हैं। फोर व्हिलर्स और टू व्हिलर्स की व्यवस्था भी की गयी है। साथ ही एक मुकम्मल व्यवस्था भी की गयी है, जो एक फिशर मैन के लिए भी आवश्यक है और देश की सुरक्षा के लिए भी आवश्यक है। फिशर मैन की बोट, जो 20 मीटर से कम होती है, उसकी ट्रैकिंग की व्यवस्था, वह कहाँ गयी, कहीं उसे किसी ने किडनैप तो नहीं कर लिया, कहीं कोई गलत काम तो नहीं हो रहा है, इसकी ट्रैकिंग करने के लिए ट्रांसपौंडर्स लगाने का फैसला किया है और पूरी कोस्टल मैपिंग भी करा रहे हैं। सभी फिशर मेन के लिए हम लोगों ने बायोमीट्रिक कार्ड तैयार करने का काम भी हम लोगों ने शुरू कर दिया है। उसे कभी कोई पड़ोसी देश अपने साथ ले गया, तो यह जानकारी हो सके कि वह कौन है, कहाँ का है, कैसे है और उसके परिवार के सदस्यों से भी उसका कांटैक्ट हो सके।
अध्यक्ष महोदया, पैरा-मिलिटरी फोर्सेज के बारे में जैसा सौगत राय जी ने कहा, हमारे पास छः-सात ऐसी पैरा-मिलिटरी आर्गनाइजेशन्स हैं। किसी माननीय सदस्य ने कहा था कि असम राइफल्स को भी इनमें शामिल करना चाहिए। इनके मॉडर्नाइजेशन के लिए गृह मंत्रालय पूरी तरह से काम कर रहा है। एक्सट्रीम कोल्ड में भी सीएपीएफ के हमारे जवानों को बेहतर सुविधा मुहैया कराने के लिए पिछले वाऩ क्लोदिंग एंड इक्विपमेंट्स के लिए 143 करोड़ रुपये दिए। आर्म्स एंड एम्यूनिशन प्रोक्योर करने के लिए भी हमने धनराशि बढ़ाई है। पहले आर्म्ड फोर्सेज के डीजी के पास पांच करोड़ रुपये तक की खरीद का अधिकार था कि आवश्यकता पड़ने पर वे आर्म्स एंड एम्यूनिशन्स खरीद सकते हैं। आते ही मैंने उसे पांच करोड़ रुपये से बढ़ाकर 20 करोड़ रुपये कर दिया। उनका अधिकार बढा दिया है। सीएपीएफ के लिए एलडब्ल्यूई एवं जम्मू-कश्मीर के लिए ज्यादा से ज्यादा एके-47 एसाल्ट राइफल्स अब स्वीकृत की गयी हैं, क्योंकि राइफल्स पुरानी होने के कारण उनको प्राब्लम होती थी। सीएपीएफ की ट्रेनिंग हमारे लिए बहुत महत्वपूर्ण है, उसके लिए भी हमने कदम उठाए हैं। वाऩ 2015-16 में एक लाख 34 हजार 599 कर्मियों को ट्रेनिंग देने की प्लानिंग हमने की है। इसके अतिरिक्त कई प्रभावी कदम उठाए गए हैं, जिनसे पैरा-मिलिटरी फोर्सेज के हमारे जवानों का मोराल बना रहे। जो जवान हताहत होते हैं, उनके परिवारों को कंपनसेशन पहले 15 लाख रुपये मिलते थे, अब उसे कैसे बढ़ाया जाए, इसके बारे में हम लोग गंभीरतापूर्वक विचार कर रहे हैं। हम अपने जवानों को अन्य क्या इंसेंटिव्स दे सकते हैं, वह भी विचाराधीन है, उस पर बातचीत चल रही है। लेकिन मुझे चिन्ता है, जैसे भी हो, हमारे देश के जवानों का मोराल कभी डाउन नहीं होना चाहिए।
यहां पर पुलिस मॉडर्नाइजेशन की बात आई। पुलिस मॉडर्नाइजेशन के लिए गृह मंत्रालय के पास फण्ड रहता था, समय-समय पर हम उसे राज्यों को देते थे। 14वें फाइनेंस कमीशन की रिपोर्ट में इसे समाप्त कर दिया गया है। इसी तरह इंटीग्रेटेड एक्शन प्लान, जिसे अब एसीए कहते हैं, उसे भी समाप्त कर दिया गया है। सीसीटीएनएस को भी समाप्त कर दिया है, लेकिन इस संबंध में प्रधानमंत्री जी और वित्त मंत्री जी से मेरी बात हुई है। हम लोग यह सोच रहे हैं कि इसका विकल्प कैसे तैयार किया जाए, कैसे इसका समाधान निकाला जाए। इस पर हम गंभीरतापूर्वक विचार कर रहे हैं। वैसे पहले टोटल रेवेन्यू का 32 प्रतिशत राज्यों को मिलता था, उसे फाइनेंस कमीशन की रिकॅमेंडेशन के आधार पर बढ़ाकर 42 प्रतिशत कर दिया गया है। इससे राज्यों को पहले की तुलना में ज्यादा धनराशि स्वतः प्राप्त हो गयी है, इसलिए पुलिस मॉडर्नाइजेशन की दृिट से भी उसे राज्य खर्च कर सकते हैं।...(व्यवधान)
अध्यक्ष महोदया, वीजा की प्रक्रिया को भी हमने काफी हद तक सिम्पलीफाई कर दिया है, मॉडर्नाइज कर दिया है। सभी सम्मानित सदस्यों को जानकारी होगी की ई-टूरिस्ट वीजा स्कीम हम लोगों ने प्रारम्भ कर दी है। यह स्कीम फिलहाल 45 देशों से आने वाले लोगों पर लागू होती है, लेकिन इसको बढ़ाकर 150 देशों तक हम ले जाना चाहते हैं। अब तक इस ई-टूरिस्ट वीजा स्कीम का लाभ लगभग एक लाख पन्द्रह हजार यात्री उठा चुके हैं। यह एक नई योजना है। साथ ही साथ, पीआईओ और ओसीआई, दोनों का विलय कर दिया गया है क्योंकि एनआरआईज की यह बराबर शिकायत रहती थी कि इसके कारण उनको बहुत प्राब्लम होती है। इसलिए हमने इन दोनों को मर्ज कर दिया है, अब लोगों के पास केवल ओसीआई कार्ड होगा।
पाकिस्तान से मछुआरों की नौकाओं की वापसी की संबंध में एक माननीय सदस्य ने प्रश्न उठाया था। मैं बताना चाहता हूं कि मार्च, 2015 में 1.27 करोड़ रुपये के व्यय के साथ चार वााॉ में पाकिस्तान द्वारा पकड़ी गयी, 57 भारतीय मछुआरा नौकाएं वापस लाई गयी हैं। यह कार्य लगभग 11 वााॉ के अंतराल पर हुआ है। इससे पहले वाऩ 2003-04 में पाकिस्तान द्वारा 53 भारतीय मछुआरा नौकाएं छोड़ी गयी थीं। सरकार की पहल से प्रक्रिया की शुरूआत हुई है, जिसके तहत भारत दोनों देशों द्वारा पकड़ी गई नौकाओं को छोड़े जाने के सम्बन्ध में पाकिस्तान के साथ निरंतर बातचीत का माध्यम अपना सकता है।
जहां तक आगामी योजनाओं की बात है, तो योजनाएं बहुत सारी हैं, सबके बारे में बताने में काफी समय लगेगा। सीमाओं के प्रबंधन में भी हमारी आगे की योजनाएं हैं।...(व्यवधान) जैसे पंजाब सेक्टर में भारत-पाकिस्तान सीमा 983.01 करोड़ रुपए की लागत से लगभग 711 किलोमीटर की लैट्रल और एक्सीएल सड़क के निर्माण का प्रस्ताव है। गुजरात और पश्चिम बंगाल में सुरक्षा और चौकसी बढ़ाने के लिए 400 करोड़ रुपए की अनुमानित लागत से गुजरात के सरक्रीक में 30 और पश्चिम बंगाल के सुंदरबन में छः फ्लोटिंग सीमा चौकियों की स्थापना सम्बन्धी एक प्रस्ताव पर कार्यवाही की जा रही है। इसके अलावा सीमाओं पर चौकसी बढ़ाने के लिए 523 करोड़ रुपए की अनुमानित लागत से भारत-पाकिस्तान और भारत-बांग्लादेश सीमा पर निरीक्षण चौकियां यानि आउटपोस्ट्स हैं और एसीपीज़ जैसे आश्रय स्थलों का निर्माण कर रहे हैं। इसके अलावा हम अपनी फेंसिंग को जहां फ्लड लाइटिंग होती है, उसकी संख्या काफी बढ़ाई है और आगे भी बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं। भारत-चीन सीमा पर 34 लगभग 800 किलोमीटर सड़कों का निर्माण करने के लिए सीपीडब्ल्यूडी को जिम्मा सौंपा गया है। वैसे ही मैरिन पुलिस ट्रेनिंग के सम्बन्ध में हम लोगों ने एक प्रपोजल तैयार किया है और उसका अनुमोदन भी हमने दे दिया है। ऐसे कई कदम हम लोगों ने उठाए हैं।
अध्यक्ष महोदया, कुछ माननीय सदस्यों ने यूनियन टैरिटरीज के बारे में कहा था। लक्षद्वीप के माननीय सदस्य ने वहां पर विधान सभा के गठन की बात कही थी। मैं उन्हें बताना चाहता हूं कि कुछ ऐसे प्रशासनिक कारण हैं, जिनकी वजह से वहां विधान सभा गठित करना सम्भव नहीं है। लेकिन जो भी माननीय सदस्य हैं मैं उन्हें आश्वस्त करना चाहता हूं कि वहां की जो समस्याएं हैं, उन्हें लेकर हमसे मिलते रहिए, हमारे राज्य मंत्री किरन रिजीजू या हरि भाई चौधरी दोनों मौजूद हैं, उनसे भी मिल सकते हैं। यूनियन टैरिटरीज से जुड़ी सभी समस्याओं का समाधान करने की हम लोग अपनी तरफ से पूरी कोशिश करेंगे। जितनी भी यूनियन टैरिटरीज हैं, उनके विकास के लिए कई ऐसे प्रस्ताव जो अब तक विचाराधीन पड़े थे, कुछ नए प्रस्ताव भी हमने तैयार किए हैं और उन सब पर अंतिम निर्णय ले लिया है।
माननीय अध्यक्ष: उसमें अंडमान और निकोबार द्वीप समूह भी आता है।
श्री राजनाथ सिंह : उसमें अंडमान और निकोबार द्वीपसमूह भी है, दादर नगर हवेली है, पुडुचेरी भी है और चंडीगढ़ भी है। मल्लिकार्जुन खड़गे जी ने जो कुछ कहा, कमोबेश सबका जवाब मैंने देने की कोशिश की है। सेंसस में कटौती के बारे में इन्होंने कहा है कि कुछ की गई है। रिवाइज एस्टीमेट में कुछ हुआ होगा, उसे मैं देख लूंगा कि क्या हुआ है, क्योंकि यह छूट गया है और देख नहीं पाया हूं।
अलगाववादियों के खिलाफ सरकार का नरम रुख है, ऐसा यहां पर कहा गया। मैं कहना चाहता हूं खड़गे जी से कि ऐसा नहीं है। सरकार किसी की भी रही हो, वहां कुछ लोग बराबर पाकिस्तान जिंदाबाद के नारे लगाते रहे हैं। कुछ अलगाववादी हरकतें वहां चलती रहीं, लेकिन हम चाहते हैं कि ये हरकतें बंद होनी चाहिए। आपने देखा कि एक घटना हुई, उस पर तुरंत हमारी सरकार ने सख्त कार्रवाई की और उन्हें बिहाइंड बार किया गया है।
हुकुम सिंह जी ने आईएसआईएस के कारण जो संकट सारे विश्व में पैदा हुआ है, उसकी चर्चा की है। मैं बताना चाहता हूं कि भारत इस मामले में सौभाग्यशाली है। दुनिया में भले ही दूसरे देशों में आईएसआईएस की गतिविधियों से लोग प्रभावित हुए हों, लेकिन भारत के मुस्लिम समाज के बारे में मैं कहना चाहता हूं कि यहां के मुस्लिम समाज के लोगों ने इसे डिस्क्रेज करने का काम किया है।
14.00 hrs अपने परिवार के सदस्यों ने, उनके माता-पिता ने उनको बराबर डिसक्रेज किया है। मैं उनका सदन के माध्यम से अभिनंदन करना चाहता हूं और बधाई देना चाहता हूं। यह कोई छोटी बात नहीं है, बहुत बड़ी उपलब्धि है। ई.अहमद साहब और सलीम साहब यह बहुत बड़ा काम हुआ है।...(व्यवधान) हुकुम सिंह जी ने नारी सुरक्षा और पुलिस जवानों के लिए बैटर इक्वीपमेंट्स के बारे में कहा, जिस पर मैं बोल चुका हूं। प्रेमचंद्रन जी ने प्रशिक्षण के लिए पर्याप्त धनराशि के बारे में बोला है, इसके लिए पर्याप्त धनराशि दी गयी है, जिसका मैं उल्लेख कर चुका हूं। मछुआरों की समस्या के बारे में आपने कहा, जिसका मैं उल्लेख कर चुका हूं। सौगत राय जी ने कानून-व्यवस्था की चर्चा की, जो कि राज्य का विाय है। जहां तक माओवाद की समस्या का सवाल है, आपने पश्चिम बंगाल की चर्चा की है। हमारा इसमें दो मत नहीं है कि राज्य सरकार ने माओवाद से निजाद के लिए कार्रवाई की है और मैं उसका स्वागत करूंगा। मैं इसके लिए वहां की सरकार को बधाई देना चाहूंगा। सरकार चाहे किसी भी दल की हो, हमें इस बात की चिंता नहीं है, क्योंकि मैं जानता हूं कि आप भी देश के लिए काम कर रहे हैं और हम भी देश के लिए काम कर रहे हैं। यदि हम सब मिलकर काम करेंगे तो हम भारत को विश्व की एक महाशक्ति के रूप में स्थापित कर सकते हैं। गोरखालैंड की चर्चा मैं कर चुका हूं। मोहम्मद सलीम साहब की बात का जवाब भी आ चुका है।...(व्यवधान)
श्री मोहम्मद सलीम (रायगंज) : वाऩ 2014-15 के रिवाइज़ बजट में कटौती हुई थी, उसके बारे में मैंने पूछा था।...(व्यवधान)
श्री राजनाथ सिंह : हो सकता है कि पहले जितना खर्च करना चाहिए था, उतना नहीं किया गया। निर्धारित समय में जितना खर्च करना चाहिए था, उतना नहीं किया गया हो, इसलिए रिवाइज़ एस्टीमेट में कम हो गया था। यह तो आप जानते ही हैं।...(व्यवधान)
HON. SPEAKER: Mr. Minister, you do not reply to each and every thing.
SHRI RAJNATH SINGH: I have already mentioned in my reply regarding protection of the Scheduled Castes and Scheduled Tribes.… (Interruptions)लक्षद्वीप के बारे में मैं जवाब दे चुका हूं। लक्षद्वीप में महिला विधान सभा के बारे में मैं उत्तर दे चुका हूं और गुजरात के समुद्री रास्ते से जो आते हैं। श्री विजय पांडा जी ने भी कुछ सवाल किए थे कि आवंटन में कमी आ रही है, एलोकेशन की बात भी कही है, लेकिन उन्होंने अच्छी बात कही है कि माओवादी क्षेत्रों में डेवलपमेंट होना चाहिए। बजट के बारे में भी उन्होंने चर्चा की है। सुरक्षा बलों के परिवार वालों की अधिकतम मदद करनी चाहिए और एनडीआरएफ की चर्चा की है। कश्मीरी पंडितों के पुनर्वास के बारे में भी कहा है। मैं सदन को जानकारी देना चाहता हूं कि हमारी सरकार की प्रतिबद्धता है कि जो कश्मीरी पंडित जम्मू-कश्मीर की धरती से किसी दूसरे राज्य में चले गए हैं, उनका पुनर्वास करना हमारी प्रतिबद्धता है।...(व्यवधान) वहां के मुख्यमंत्री आए थे। उनसे हमारी बात हो गई है और पहली किश्त में उन्होंने पचास एकड़ जमीन देने का आश्वासन दिया है।...(व्यवधान) शैलेश कुमार जी, जयप्रकाश जी, आर.के. सिंह जी, चंदूमाजरा जी और एम.आई. शहनवाज साहब आदि सदस्यों ने भी जो समस्याएं उठाई थीं कमोबेश मैंने सबका जवाब दे दिया है। ई. अहमद साहब का भााण मैं उस समय सुन नहीं पाया था लेकिन बाद में मुझे जानकारी प्राप्त हुई है। मैंने अपनी तरफ से सभी सदस्यों के प्रश्नों का उत्तर देने का प्रयास किया है।...(व्यवधान)
अरूणाचल प्रदेश के बारे में मैं कहना चाहता हूं कि आर्म्ड फोर्स स्पेशल पावर एक्ट पहले केवल असम की सीमा तक ही सीमित था लेकिन कभी-कभी कुछ उग्रवादी तत्व जो अरूणाचल में चले जाते थे शायद उसके कारण बीस किलोमीटर तक लग गया है। लेकिन समय पर उसे हम रिव्यू भी कर सकते हैं। सौगत राय जी आपने एल.डब्ल्यू.ई. एरियाज में सरेंडर और रिहैबिलिटेशन पालिसी के बारे में चर्चा की है। मैं कहना चाहता हूं कि हमारी एक सरेंडर पालिसी बनी है और मैं यह भी बता देना चाहता हूं कि पहले टुकड़ों में एल.डब्ल्यू.ई. का पालिसी थी, पहली बार हमने एक बहुत ही कप्रिहेंसिव और इंटिग्रेटिड एल.डब्ल्यू.ई. की पालिसी तैयार की है और सभी स्टेट्स को भी उसे भेजा है, यदि आपको इस पर अपनी कोई ओपिनियन देनी हो तो आप दे सकते हैं। हम उसे और परफैक्ट करने की कोशिश कर रहे हैं। श्री विनायक राउत जी ने कश्मीरी पंडितों की बात कही थी, टी.नरसिम्हन जी ने भी सवाल उठाये थे। सोशल मीडिया को डबल एज सोर्ड, दुधारी तलवार कहा, डिसेप्टिव कंट्रोल की बात कही है, साइबर क्राइम से रिलेटिड ये सारी चीजें हैं। मौ.सलीम साहब के द्वारा भी उठाये गये लगभग सारे सवालों का जवाब आ गया है। श्री वाई.एस. अविनाश रेड्डी, श्री शैलेश कुमार, श्री प्रेम सिंह चन्दूमाजरा के सवालों के जवाब भी आ गये हैं। श्री ओवैसी साहब ने भी यहां कुछ सवाल खड़े किये हैं, उन्होंने कहा कि मक्का मस्जिद ब्लास्ट के संबंध में ...(व्यवधान) अब वह यहां हैं नहीं, इसलिए रहने देते हैं। लेकिन संदेश पहुंच जायेगा। हमने कोई काम गैरकानूनी नहीं किया है, अटार्नी जनरल और लॉ डिपार्टमैन्ट से ओपीनियन लेकर ही कोई काम हुआ है, हमने उसके बियांड जाने की कोशिश नहीं की है। श्री एम. शाहनवाज, श्री आर.राधाकृणन ने भी पांडिचेरी को स्टेटहुड देने की बात कही है, लेकिन फिलहाल अभी हम उसे नहीं कर पा रहे हैं, हम उसे भविय में देखेंगे।
ई. अहमद साहब चाहते हैं कि कम्युनल हार्मनी रहे, यह सारा देश चाहता है और हम भी चाहते हैं। श्री जॉयस साहब केरल के सांसद हैं, उन्होंने नेशनल इंटिग्रिटी एवं कम्युनल हार्मनी पर चर्चा की है। सत्यपाल सिंह जी संभल से हैं, उन्होंने पुलिस की सैलरी और एलोकेशन की बात की है, पुलिस रिफार्म्स की बात की है। मैं इन सारी बातों के कमोबेश उत्तर दे चुका हूं और हो सकता है कि किसी का नाम यदि छूट गया हो तो यदि उसकी भी कोई आशंका होगी तो मैं उसका समाधान देने के लिए तैयार हूं।
श्री मुलायम सिंह यादव : अध्यक्ष महोदया, मुझे भााण नहीं देना है। मैं दो-तीन बातें कहकर अपनी बात खत्म करना चाहता हूं। गृह मंत्री जी ने विस्तार से बहुत सारी बातें कह दी हैं, इसलिए अब मुझे उन पर जाने की आवश्यकता नहीं है। मैं खास तौर से यह कहना चाहता हूं कि आपने भााण में कहा है, लेकिन देश भर में खास तौर से मुसलमान और ईसाई अल्पसंख्यक हैं, इनके मन में जो एक भय धर्म परिवर्तन के नाम पर पैदा हो गया है, इस पर आपको विश्वास दिलाना पड़ेगा।...(व्यवधान)
श्री जय प्रकाश नारायण यादव (बाँका) :स्पीकर महोदया ने श्री मुलायम सिंह जी को बोलने का समय दिया है, आप लोग बीच में ऐसा क्यों कर रहे हैं।
श्री मुलायम सिंह यादव: हमने गृह मंत्री जी को कितने ध्यान से सुना। खास तौर से इन दोनों के धर्म परिवर्तन के बारे में आपने जिक्र तो किया है, लेकिन आपको इस पर खुद पहल करने की जरूरत है और यह सवाल न उठे, क्योंकि इससे हमारे देश की एकता पर असर पड़ेगा।
दूसरी बात हम आपसे कहना चाहते हैं कि चर्चों में तोड़फोड़ के बारे में आपने कहा है। अब मुझे ज्यादा नहीं कहना है, लेकिन अब जब आपकी जानकारी में आ ही गया है तो इस पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। किसी धर्म पर या किसी के धर्म स्थल पर किसी को किसी तरह का हमला करने का अधिकार नहीं है और न उसको बर्बाद करना चाहिए। वह देश की एकता के लिए हैं। जहां तक कहीं माओवाद और कहीं नक्सलवाद के नाम पर जो हो रहा है, उस पर गृह मंत्री जी मैं एक राय दे रहा हूं कि निर्दोा आदिवासियों को न मारा जाए, यह आप ध्यान रखिये। चूंकि अभी निर्दोा आदिवासी मारे गये हैं, इसलिए मैं आपके ध्यान में लाना चाहता हूं कि तमिलनाडु में बीस लोगों को चंदन के तस्कर बताकर मार दिया गया। यह बिल्कुल गलत किया गया है। वे लोग तस्कर नहीं थे। आपने जांच कराई होगी, आपकी जानकारी में आ गया होगा, हमारी जानकारी में है, यहां तमिलनाडु के लोग बैठे हुए हैं, लेकिन तस्करों के नाम पर इतनी बड़ी तादात में निर्दोा लोगों की हत्या करना देश के लिए शर्म की बात है, इसलिए इस पर गंभीरता से विचार करना चाहिए। प्रधान मंत्री जी ने जो वायदे किए हैं, उसमें एक बात मैं आपसे कहना चाहता हूँ कि उन वायदों को पूरा आप कर रहे हैं, बातचीत कर रहे हैं, लेकिन यह विश्व हिंदू परिाद् क्या बोल रही है? इसको बंद कीजिए। अखबरों में छपा है कि विश्व हिंदू परिाद् क्या बोल रही है, इस पर आपको गंभीरता से ध्यान देना चाहिए। विश्व हिंदू परिाद् के प्रमुख कह रहे हैं कि पृथ्वी राज चौहान के बाद हिंदू राट्र भारत में बनेगा। इस पर आपकी तरफ से कोई रिएक्शन नहीं दिया गया। क्यों नहीं दिया गया? जब सब जगहों पर यह बात आई है, उस पर गंभीरता से बात करनी चाहिए। आप सबका हैड इस तरह की बात कहेगा तो यह अच्छी बात नहीं है। इसलिए मैं ज्यादा कोई सवाल नहीं करना चाहता हूँ, मैंने लंबा भााण नहीं दिया है, आपने सारे वालों के उत्तर भी दे दिए हैं, लेकिन इन दो-तीन बातों पर मैंने जो कहा है, उनको आप नोट कर लीजिए क्योंकि इसका असर अच्छा नहीं जाएगा, न आपके लिए, न देश के लिए और न आपकी सरकार के लिए अच्छा होगा।
श्री जय प्रकाश नारायण यादव : महोदया, मैं मुलायम सिंह जी की बात का समर्थन करता हूँ।
DR. M. THAMBIDURAI (KARUR): Madam Speaker, the Home Minister, in his speech, mentioned about modernization of police forces by the State Governments. He himself accepted that assistance to this kind of a programme has been taken away from the Budget now. He also mentioned that since the 14th Finance Commission has recommended an increase from 32 per cent to 42 per cent as assistance to the State Governments, the devolution has been made. He has said that due to this reason, it was taken away.
I want to bring to his notice that because of this devolution, Rs. 1,42,000 crore will be given to the State Governments. At the same time, in the Budget, Rs. 1,33,000 crore has been cut down. Therefore, only about Rs. 8000 crore is going to be available to the State Governments.
He is saying that law and order is more important and it is a State subject. Though it is a State subject, if he wants to have good internal security in India, modernization of State Police is more important, as he has also mentioned about border security.
Most of the State Governments are facing financial crisis. Unless the Central Government gives assistance to the State Governments to modernize the police forces, it will be very difficult for them to do that. He has just now assured the House that he is considering the issue, he will consult with the Prime Minister and do something about it. I hope that he will give a good amount for the modernization of police forces.
Secondly, I am happy that the hon. Member, Shri Mulayam Singh Yadav has raised an issue which we have also raised often in the House regarding the killing of 20 tribal labourers of Tamil Nadu in Andhra Pradesh. The National Human Rights Commission has already taken up the issue. But what about the stand of the Central Government? When he made a statement last time, he said that he would get the facts, come before the House and give the information. This is an inter-State issue where tribals have been killed. Can he share the information which he has got with the House? He cannot be lethargic. When the National Human Rights Commission has taken up the issue, what about the action taken by the Central Government as tribals are involved in this massacre by the Andhra Pradesh Police?
I hope that he will give some information about the 20 tribals, who are labourers from Tamil Nadu who have been murdered in Andhra Pradesh. I want to get a reply on this issue from the hon. Home Minister.
HON. SPEAKER: Shri Kharge, please ask only one clarification. लंबे भााण दोबारा नहीं होंगे।
श्री मल्लिकार्जुन खड़गे: अध्यक्ष महोदया, मैं आपके नोटिस में लाना चाहता हूँ और गृह मंत्री जी ने यहां पर उत्तर में यह कहा है कि बजट में कट नहीं हुआ है। लेकिन बजट का टेबल आइटम फेसिंग बजट कट्स अगर आप देखेंगे तो एक्स्पेन्डिचर के जो आइटम हैं, उनमें 25 आइटम्स के ऊपर आपने कट किया है। अगर यह असत्य है तो आप जो भी शिक्षा देंगे, उसे मैं मानूँगा, लेकिन अगर यह सत्य है तो महोदया आप गृह मंत्री को क्या शिक्षा देंगी।
माननीय अध्यक्ष : मैं किसी को सजा नहीं दे सकती हूँ।
श्री मल्लिकार्जुन खड़गे: यहाँ असत्य चीजें नहीं रखनी हैं। इन 25 आइटम्स में उन्होंने जो कुछ कमियाँ कीं, माडर्नाइजेशन से लेकर सभी चीजों पर की हैं, यह आपके सामने है, मैं आपके माध्यम से उनको यह देना चाहता हूँ।...(व्यवधान) यह हँसने की बात नहीं है, आप कहते कुछ हैं और करते कुछ हैं। यह आपका डॉक्यूमेंट है, मेरा नहीं है।...(व्यवधान)
माननीय अध्यक्ष : खड़गे जी, आप क्लेरिफिकेशन पूछिए।
श्री मल्लिकार्जुन खड़गे : दूसरी चीज, जो अभी माइनोरिटीज के बारे में खासकर चर्च हो या माइनोरिटी मुस्लिम्स के विाय में हो, विशेाकर दलितों के विाय में हो, ये सारी चीजें हैं। आपको एक स्ट्रांग मैसेज अपने लोगों को भी देना चाहिए और देश में जो भी ऐसे विाय पर हमेशा बात करते हैं या लोगों को उकसाते हैं, उनको भी एक मैसेज जाना चाहिए। वह मैसेज आपने यहाँ पर कभी नहीं दिया है। सिर्फ आपने इतना ही कहा कि यह कहना ठीक नहीं है।
महोदया, आपको मालूम है कि प्रधानमंत्री जी ने भी यहाँ पर बार-बार कहा। इनके नवरत्न, मैं फोटो के साथ देता हूँ, आपके नवरत्न ने क्या-क्या बातें बोली हैं, खासकर समाज तोड़ने की बात हमेशा बोलते रहे हैं, लेकिन आप हमेशा यह कहते रहे हैं, उनको हमने वार्न किया हैं, हमने उनको बोला है।...(व्यवधान)
माननीय अध्यक्ष : खड़गे जी, भााण मत करिए।
…( व्यवधान)
SHRI MALLIKARJUN KHARGE: What message is he going to give? It means that his instructions are not being followed. यह बात अगर कोई बाहर करते हैं तो मैं मान लूँगा कि इनके कंट्रोल में वह नहीं है, लेकिन आपके लोग जब बार-बार बोलते हैं और फिर भी वे हमेशा वही बात करते हैं तो क्या वे आपके कंट्रोल में नहीं हैं, क्या वे आपकी बात सुनते नहीं हैं? ऐसे लोगों को या तो पार्टी से निकालो या ऐसे लोगों को बर्खास्त करो।...(व्यवधान) You disown them....(व्यवधान) ये चीजें आपके सामने हैं। ...(व्यवधान) सभी हैं। ...(व्यवधान)
माननीय अध्यक्ष : आप बैठिए।
…( व्यवधान)
श्री मल्लिकार्जुन खड़गे: मैं जानना चाहता हूँ कि इनके बारे में आपने क्या एक्शन लिया है? ...(व्यवधान) इसके बारे में जो एक्शन लिया है, वह बताना चाहिए। ...(व्यवधान)
तीसरी चीज, जो जम्मू-कश्मीर का मामला है, मशरत आलम के बारे में, उनके ऊपर जो एक्शन लिया है, वह भी आपको स्पट करना चाहिए।...(व्यवधान) उसको जो रिलीज किया है, उसके बारे में भी उन्होंने नहीं बताया, वह भी आपको स्पटता के साथ बताना चाहिए।...(व्यवधान)
HON. SPEAKER: You can only seek clarifications, if any.
श्री मल्लिकार्जुन खड़गे : आखिर में मैं यह कहूँगा कि वाऩ 1999 से लेकर 2004 तक आप ही थे।...(व्यवधान)
माननीय अध्यक्ष : यह क्या हो रहा है? आपकी बात हो गई है। ऐसा नहीं होता है। आप बैठिए।
…( व्यवधान)
श्री मल्लिकार्जुन खड़गे: वाऩ 1999 से लेकर वाऩ 2004 तक तो आप ही थे। उस वक्त सिखों के बारे में कम्पैशनिएट ग्राउंड पर जो-जो करना था, आप वह कर सकते थे, लेकिन बार-बार यह मुद्दा पॉलिटिकली आप उठाते हैं।...(व्यवधान)
माननीय अध्यक्ष : खड़गे जी, आपकी बात हो गई है।
…( व्यवधान)
श्री मल्लिकार्जुन खड़गे: आप पॉलिटिक्स नहीं करते, लेकिन पॉलिटिक्स में उसे लाने की कोशिश करते हैं।...(व्यवधान)
माननीय अध्यक्ष : खड़गे जी, फिर से नहीं, यह दोबारा भााण नहीं हो रहा है।
…( व्यवधान)
श्री मल्लिकार्जुन खड़गे: यह मीठी गोली है।...(व्यवधान)
माननीय अध्यक्ष : आपको क्लेरिफिकेशन पूछना है, फिर से दोबारा भााण नहीं करना है।
…( व्यवधान)
श्री मल्लिकार्जुन खड़गे: महोदया, उन्होंने तो कहा है, इसलिए मुझे कहना पड़ेगा।...(व्यवधान)
इसीलिए मैं यह कहना चाहता हूँ कि ये जो चार मुद्दे मैंने आपके सामने रखे हैं, सिर्फ मीठी गोली देने से काम नहीं चलता है। आपको सख्त इसके बारे में कहना पड़ेगा ताकि ऐसी चीजें सारे देश में बन्द हों और शान्ति रहे।...(व्यवधान)
माननीय अध्यक्ष : अब आपकी बात हो गई।
…( व्यवधान)
श्री मल्लिकार्जुन खड़गे: शान्ति बनाए रखना आपका कर्त्तव्य है। आखिरी में एक शेर कहकर मैं अपनी बात समाप्त करता हूँ।...(व्यवधान) मैं कविता कहूँगा और उनको बताऊँगा।...(व्यवधान)
“उदित प्रभात हुआ, फिर भी छाई चारों ओर उदासी, अंधेरा।
ऊपर मेघ भरे बैठे हैं, किन्तु धरा प्यासी की प्यासी।
जब तक सुख के स्वप्न अधूरे, पूरा अपना काम न समझो।
विजय मिली, विश्राम न समझो।” आपको विजय मिली है, आप कुछ भी कर सकते हैं, लेकिन विश्राम से मत सोओ। इतनी समस्याएँ आपके सामने हैं। सत्य से दूर मत जाओ, सत्य से कहो। इसलिए जो चीज़ आपके सामने है, देश के हित में, आप यह सब क्लैरिफिकेशन हमारे सामने रखिये।
SHRI KALYAN BANERJEE: Madam, I have a very small request to the hon. Home Minister.… (Interruptions)
HON. SPEAKER: Only one clarification is allowed.
SHRI KALYAN BANERJEE : I have a request to the hon. Home Minister for the consideration of setting up of a Special Court under the statute in relation to any offence caused in respect of any woman including those women who are suffering in their in-law’s houses. There is no Special Court at present. Sir, please think about that.
I would also request you to think about providing only one mobile number all over the country so that the mobile number can go into the ears of the women of the country. If, at any time, any offence is caused including to a woman living in her in-law’s house, even at 11 or 12 of the clock in the night, if she gives a call, the appropriate police officer must take steps in respect thereof. If there is a failure on the part of the police officer, there should be a penal clause to proceed against that police officer. This is most important. It is coming up.
In the modern day, please think of the mental injury of a woman suffered in her in-law’s house. We have to rethink of the definition of a mental injury of a woman even in her in-law’s house. I have a request to you to think of this.
श्री गजानन कीर्तिकर (मुम्बई उत्तर पश्चिम):अध्यक्ष महोदया, माननीय मंत्री जी ने मरीन एकैडमी के निर्माण का उल्लेख किया। 2008 में जो आतंकवादी हमला हुआ था, उस समय सैन्ट्रल गवर्नमैंट ने जो रिवीज़न लिया, कोस्ट गार्ड को अपटुडेट ट्रेनिंग देने के लिए मरीन गार्ड के निर्माण के काम का आश्वासन दिया। महाराट्र के पालघर में 308 एकड़ ज़मीन उसके लिए दी गई। तत्कालीन गृह मंत्री सुशील कुमार शिन्दे जी ने वहाँ जाकर, विजिट करके सब फाइनल किया लेकिन अभी समझ में आता है कि यह मरीन गार्ड की एकैडमी द्वारका में एस्टैबलिश करने का सरकार प्रयास कर रही है। मैं उस पर आब्जैक्शन लेता हूँ क्योंकि महाराट्र के पालघर से इस ऐकैडमी को उधर ले जाना उचित नहीं है। क्योंकि पश्चिमी तट पर महाराट्र, कर्नाटक, गोवा और केरल के बीच में पालघर है और इस मरीन एकैडमी में नेशनल कोस्ट गार्ड का भी हक रखा जाएगा, ऐसा उस समय आतंकवादी हमले के बाद डिक्लेयर किया था। माननीय मंत्री जी से मेरी मांग है कि ...(व्यवधान)
माननीय अध्यक्ष : हो गया। बार बार वही बात नहीं बोलें। उन तक बात पहुँच गई है।
…( व्यवधान)
श्री गजानन कीर्तिकर: यह जो बदलाव किया है, इसको रद्द करके पालघर में यह मरीन एकैडमी एस्टैबलिश करनी चाहिए।
SHRI TATHAGATA SATPATHY (DHENKANAL): I want to bring to the information of the hon. Home Minister through you, Madam, that Odisha has 400-plus kms. of coast line. Unfortunately, there is no proper guarding of the coast line. There is no Coast Guard Station because of which we are having a lot of infiltration coming in from certain neighbouring countries which I do not wish to name here.
I would request the hon. Minister to consider setting up of a proper Coast Guard set up in Odisha headquartered preferably at Gopalpur or Paradip which should be operating and guarding the coastal areas of Odisha.
श्री जय प्रकाश नारायण यादव: अध्यक्ष महोदया, बिहार नक्सल प्रभावित उग्रवादी क्षेत्र है और बिहार के कई जिले इससे प्रभावित हैं। जिस बांका क्षेत्र से हम आते हैं, वह और भागलपुर, मुंगेर, जमुई, लखीसराय इत्यादि उग्रवाद प्रभावित इलाके हैं। हम माननीय गृह मंत्री जी से मांग करते हैं कि उनके एक्शन प्लान के तहत बांका को लेकर उसके चतुर्दिक विकास के कामों को अंजाम देने का काम किया जाये। ...(व्यवधान)
माननीय अध्यक्ष : विधूड़ी जी, आप क्या पूछ रहे थे? अब हो गया, आपके ही गृह मंत्री हैं। वे बात करेंगे, बैठिये।
श्री रमेश बिधूड़ी (दक्षिण दिल्ली) : दिल्ली पुलिस के बारे में यदि कोई एक्सीडेंट हो जाता है या कोई ब्रॉट डैडबॉडी मिलती है तो पुलिस वाले सिपाही उसको हॉस्पीटल लेकर जाते हैं। उनको सरकार कोई खर्चा नहीं देती, उसे सिपाही अपनी जेब से देते हैं। अगर वे जेब से देते हैं तो उन्हें भ्रटाचार करने का मौका मिलता है, इसलिए सरकार की तरफ से यह व्यवस्था हो और ए.सी.पी. के स्तर का कोई अधिकारी उसके बिल को सिपाही को, कांस्टेबल को दे, जिससे वह आराम से स्कूटर में डालकर पेशेण्ट को ले जाये, कई एक्सीडेंट के मामले होते हैं तो वे देखते रहते हैं, किसकी गाड़ी पकड़ें, किसकी न पकड़े, क्योंकि, कांस्टेबल या हवलदार अपनी जेब से कहां से पैसा देगा, यह मेरा निवेदन है। ऐसा एक्सपेंडीचर दिल्ली पुलिस के बारे में बढ़ाना चाहिए, इस बात को लेकर मेरा निवेदन है।
श्री राजनाथ सिंह: अध्यक्ष महोदया, श्री मुलायम सिंह जी यादव ने एक तो आध्र प्रदेश की जो घटना हुई है, जिसमें 20 लोग मारे गये हैं, उसकी चर्चा की है। पिछली बार जब यह विाय सदन में उठा था तो मैंने आपको आश्वस्त किया था कि जब कभी आपका निर्देश होगा तो इस सम्बन्ध में आकर मैं विस्तृत जानकारी दूंगा, जो भी राज्य सरकार के द्वारा प्राप्त होगी, वह मैं सदन को दे दूंगा। यदि आप कहेंगी तो मैंने इसकी रिपोर्ट मंगवा ली है, उसको भी मैं प्रस्तुत कर सकता हूं। ...(व्यवधान) उन्होंने एस.आई.टी. बना दी है और एक पी.आई.एल. भी वहां की कोर्ट में फाइल हुआ है, लेकिन इसमें और मुझे क्या करना चाहिए, हम क्या कर सकते हैं। मैं तो यह जानना चाहता हूं कि जो भी कांस्टीटय़ूशनल प्रोवीज़ंस हैं, आप मुझे बताइये कि मुझे क्या करना चाहिए। जो आप बताएंगे, वह मैं कर दूंगा। ...(व्यवधान)
श्री मल्लिकार्जुन खड़गे: आप सी.बी.आई. इन्क्वायरी बिठा दीजिए।...(व्यवधान)
श्री राजनाथ सिंह: कैसे सी.बी.आई. इन्क्वायरी, कैसे कर दें, नहीं कर सकते। ...(व्यवधान)
माननीय अध्यक्ष : आप जितना एक्सप्लेन कर सकते हैं, उतना करिये।
श्री राजनाथ सिंह: खड़गे जी, आप जानते हैं कि कैसे हो सकता है। स्टेट के मामले में विदाउट स्टेट रिकमेंडेशन हम उठाकर किसी की सी.बी.आई. इन्क्वायरी कर दें तो क्या हालत होगी। कहां जाकर इण्टर स्टेट रिलेशन खड़ा होगा? आप जानते हैं, मैं इनजस्टिस नहीं कर सकता। ...(व्यवधान)
अध्यक्ष महोदया, आदिवासियों के सम्बन्ध में मैं कहना चाहता हूं, किसी निर्दोा आदिवासी की यदि हत्या होती है, यदि जानकारी मिल जायेगी तो उस सम्बन्ध में मैं सभी राज्य सरकारों से भी अपील करना चाहता हूं कि सख्त कार्रवाईकी जाये और यदि मेरे संज्ञान में कोई मामला आएगा तो मैं सम्बन्धित मुख्यमंत्रियों से बात करूंगा। चाहे कोई कितना भी बड़ा आर्गेनाइजेशन क्यों न हो, यदि आदिवासियों की हत्या करेगा तो मैं किसी भी सूरत में उसे माफ नहीं करूंगा। यही हुआ है और हम यही करेंगे।
उन्होंने कहा है कि चर्चेज़ के ऊपर अटैक हो रहे हैं तो हमारी सभी राज्य सरकारों से अपील है कि इसमें हमें ध्यान देना चाहिए। चाहे मस्जिद हो, चर्च हो, मंदिर हो, कहीं पर भी ऐसे जो सेंसिटिव लोकेशंस हैं, वहां पर यदि किसी प्रकार का कोई अटैक होता है अथवा उसकी प्रतिठा को चोट पहुंचाने की कोशिश की जाती है तो उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए। यह हम करेंगे। आगरा में ही जो घटना उत्तर प्रदेश में घटित हुई है, उससे मुझे बेहद पीड़ा हुई है, अध्यक्ष महोदया, लेकिन उस राज्य सरकार ने क्या कार्रवाई की है, उसके सम्बन्ध में मैं फिलहाल नहीं कह सकता हू।ं...(व्यवधान)
थम्बी दुरई जी ने पुलिस माडर्नाइजेशन की बात कही है, मैंने कहा है कि 14वें फाइनेंस कमीशन की रिकमेण्डेशंस के कारण यह प्रोवीज़न अब नहीं है, लेकिन इस सम्बन्ध में मैंने प्रधानमंत्री जी से भी बात की है और वित्त मंत्री जी से भी हमारी बातचीत हुई है। हम देखेंगे कि इसका क्या विकल्प हो सकता है। हम चाहते हैं कि पुलिस माडर्नाइजेशन हो, यह आवश्यक है, होना चाहिए। खड़गे जी ने एक्सपेंडीचर कट की बात कही है। इस समय बजट के ऊपर डिबेट नहीं हो रही है, लेकिन मैंने टोटल आपको बताया कि बजट एलोकेशन में कोई कमी नहीं हुई है, क्योंकि, पहले 74 हजार करोड़ था, वह बढ़कर 78 हजार करोड़ हो गया। किस मद में कितना रुपया कम हुआ, कितना अधिक हुआ, मैं समझता हूं कि इस डिटेल में जब कभी कोई केवल इसके बजट पर ही चर्चा होने लगेगी तो मैं वह करने को तैयार हूं।...(व्यवधान)
श्री मल्लिकार्जुन खड़गे: उसी के ऊपर तो हमने बोला है।
श्री राजनाथ सिंह : नहीं। खड़गे जी, अगर आप उसे प्वायंट-आउट कर दीजिएगा तो मैं आपको पत्र लिखकर उसका जवाब भेज दूंगा।
दूसरी चीज़, यहां पर कम्युनल हार्मोनी, सांप्रदायिक सौहार्द का सवाल खड़ा हुआ। खड़गे साहब ने अपेक्षा की है कि इस संबंध में सरकार की तरफ से स्ट्राँग मैसेज दिया जाना चाहिए। मैं गृह मंत्री के नाते, सरकार की ओर से कहता हूं और सभी राज्य सरकारों से अपील करते हुए यह बात कहना चाहता हूं कि कहीं भी कोई अगर कम्युनल हार्मोनी को तोड़ने की कोशिश करता है तो राज्य सरकारों को उस पर प्रभावी कार्रवाई करनी चाहिए। राज्य सरकारें प्रभावी कार्रवाई क्यों नहीं करती हैं? अगर दिल्ली में कोई करेगा तो हम उस पर कार्रवाई करेंगे। यदि और कहीं कोई इसे करता है तो आप कार्रवाई कीजिए।
श्री मल्लिकार्जुन खड़गे : चर्च के ऊपर हमले यहीं हुए हैं।
श्री राजनाथ सिंह : उसके ऊपर हमने कार्रवाई की है। लेकिन, देश के किसी भी राज्य में अगर किसी के द्वारा कम्युनल हार्मोनी को तोड़ने का प्रयत्न होता है और उसकी पूरी जिम्मेदारी अगर सीधे केन्द्र सरकार के ऊपर फिक्स की जाती है तो मैं समझता हूं कि केन्द्र की सरकार के साथ यह इंसाफ नहीं होगा।...(व्यवधान)
श्री मुलायम सिंह यादव: क्या आप इसमें हस्तक्षेप करेंगे?...(व्यवधान)
माननीय अध्यक्ष : माननीय मंत्री जी, आप अपना उत्तर देते जाइए। अब कोई क्लैरिफिकेशन नहीं होगा। इस तरह तो बहुत समय लगेगा।
श्री राजनाथ सिंह : नहीं, हम कहीं भी हस्तक्षेप नहीं करेंगे।
कल्याण बनर्जी जी ने एक इश्यू उठाया था।...(व्यवधान)
माननीय अध्यक्ष : अब वे चले गए हैं। He is not serious.
… (Interruptions)
श्री राजनाथ सिंह : वे कोई भी नवरत्न हों, यह पता नहीं कि वे नवरत्न किसके हैं, क्या हैं, इसे भगवान जानें।...(व्यवधान)लेकिन, इसे रोकने के लिए हम सभी को सहयोग करना चाहिए। मैं बस इतना ही कहूंगा।
कीर्तिकर जी ने मेरिन गॉड एकैडमी की बात कही है कि वह महाराट्र में था और अभी दूसरे स्थान पर चला गया है। कीर्तिकर जी, मैं इसे दिखवाऊंगा कि यह क्या है? इस समय मुझे इसकी कोई जानकारी नहीं है।
तथागत सत्पथी जी ने कोस्ट गार्ड के सिस्टम को और स्ट्रेंथेन करने की बात कही है। हम उसे देखेंगे।
जय प्रकाश नारायण यादव जी ने सिक्यूरिटी रिलेटेड एक्सपेंडिचर (एस.आर.ई.) के अंतर्गत बाँका के विकास की बात कही है। हम इसे देखेंगे कि इसकी क्या स्थिति है।
अध्यक्ष महोदया, इससे ज्यादा कुछ न कहते हुए मैं पुनः सभी माननीय सदस्यों, जिन्होंने गृह मंत्रालय की अनुदान मांगों पर चर्चा में हिस्सा लिया है, उन सब के प्रति आभार व्यक्त करते हुए सभी से निवेदन करना चाहता हूं कि गृह मंत्रालय से संबंधित डिमांड्स फोर ग्रांट्स को वे पारित करने की कृपा करें।
HON. SPEAKER: Hon. Members, a number of Cut Motions have been moved by Members to the Demands for Grants relating to the Ministry of Home Affairs. Shall I put all the Cut Motions to the vote of the House together?
SHRI BHARTRUHARI MAHTAB (CUTTACK): Madam, we want our Cut Motions to be put separately.
HON. SPEAKER: All right.
I shall now put Cut Motion Nos. 1 to 4 and 28 to 30 moved by Shri Kodikunnil Suresh to the vote of the House.
The cut motions were put and negatived.
… (Interruptions)
HON. SPEAKER: I shall now put Cut Motion Nos. 5 to 11 moved by Shri N.K. Premachandran to the vote of the House.
The cut motions were put and negatived.
… (Interruptions)
HON. SPEAKER: I shall now put Cut Motion Nos. 12 to 19 and 24 moved by Shri Jaiprakash Narayan Yadav to the vote of the House.
The cut motions were put and negatived.
… (Interruptions)
माननीय अध्यक्ष : कोई बोलना नहीं होता है, सब क्लेरिफिकेशंस हो चुके हैं।
…( व्यवधान)
HON. SPEAKER: Prof. Saugata Roy, are you pressing for your cut motions?
PROF. SAUGATA ROY: Madam, I am pressing and I seek a small clarification for one minute. If you allow me, I will be happy.… (Interruptions)
HON. SPEAKER: I shall now put Cut Motions Nos. 25 and 26 moved by Prof. Saugata Roy to the vote of the House.
The cut motions were put and negatived.
… (Interruptions)
माननीय अध्यक्ष : मूव हो चुका है।
…( व्यवधान)
HON. SPEAKER: Shri Bhartruhari Mahtab ji, are you pressing for your cut motion?
SHRI BHARTRUHARI MAHTAB: Madam, after the clarification of the Home Minister, I am not pressing for my cut motion.
HON. SPEAKER: So, he is not pressing.
I shall now put the Cut Motion No. 31 moved by Shri Bhartruhari Mahtab to the vote of the House.
The cut motion was put and negatived.
HON. SPEAKER: I shall now put Cut Motion Nos. 32 and 33 moved by Shri K.C. Venugopal to the vote of the House.
The cut motions were put and negatived.
… (Interruptions)
HON. SPEAKER: I shall now put the Demands for Grants relating to the Ministry of Home Affairs to the vote of the House.
“That the respective sums not exceeding the amounts on Revenue Account and Capital Account shown in the fourth column of the Order Paper be granted to the President of India, out of the Consolidated Fund of India, to complete the sums necessary to defray the charges that will come in course of payment during the year ending the 31st day of March, 2016, in respect of the heads of Demands entered in the Second column thereof against Demand Nos. 53 to 57 and 99 to 103 relating to the Ministry of Home Affairs.” Demands for Grants 2015-16 in respect of the Ministry of Home Affairs voted by Lok Sabha No. of Demand Name of Demand Amount of Demand for Grant voted by the House Revenue (Rs.) Capital (Rs.) 53 Ministry of Home Affairs 253,68,00,000 26, 40,00,000 54 Cabinet 69,50,00,000
-55
Police 9179,75,00,000 2297,59,00,000 56 Other expenditures of Ministry of Home Affairs 480,17,00,000 66,43,00,000 57 Transfers to Union Territory Governments 282,67,00,000 12,00,00,000 99 Andaman and Nicobar Islands 547,79,00,000 95,61,00,000 100 Chandigarh 538,88,00,000 95,16,00,000 101 Dadra and Nagar Haveli 99,75,00,000 51,49,00,000 102 Daman and Diu 229,59,00,000 67,32,00,000 103 Lakshadweep 162,47,00,000 30,00,00,000 The motion was adopted.
HON. SPEAKER: The Demands for Grants relating to the Ministry of Home Affairs are passed.
14.38 hrs