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Lok Sabha Debates

Combined Discussion On Demands For Grants No.1 To 16 In Respect Of The Budget ... on 20 April, 2005

Title: Combined discussion on Demands for Grants No.1 to 16 in respect of the Budget (Railways) for 2005-2006 and Resolution regarding approval of recommendations in the 1st Report of Railway Convention Committee.

14.24 hrs. RAILWAY BUDGET – DEMANDS FOR GRANTS – 2005-06 AND RESOLUTION RE: APPROVAL OF RECOMMENDATIONS IN THE FIRST REPORT OF RAILWAY CONVENTION COMMITTEE MR. DEPUTY-SPEAKER: The House will now take up discussion and voting on the Demands for Grants in respect of the Budget (Railways) for the year 2005-2006.

Hon. Members present in the House whose Cut Motions to the Demands for Grants in respect of the Budget (Railways) for the year 2005-2006 have been circulated may, if they desire to move their Cut Motions, send slips to the Table within 15 minutes indicating the serial numbers of the Cut Motions they would like to move. Those Cut Motions only will be treated as moved.

A list showing the serial numbers of the Cut Motions treated as moved will be put up on the Notice Board shortly thereafter. In case any Member finds any discrepancy in the list, he may kindly bring it to the notice of the officer at the Table immediately.

Motion moved:

"That the respective sums not exceeding the amounts shown in the fourth column of the Order Paper be granted to the President of India out of the Consolidated Fund of India, to complete the sums necessary to defray the charges that will come in the course of payment during the year ending the 31st day of March, 2006 in respect of the heads of demands entered in the second column thereof against Demand Nos. 1 to 16. "

MR. DEPUTY SPEAKER : Shri Lalu Prasad to move the Resolution.

THE MINISTER OF RAILWAYS (SHRI LALU PRASAD): I beg to move:

"That this House approves the recommendations contained in Paras 45, 46, 47, 48, 49, 50, 51 and 53 of the First Report of Railway Convention Committee (2004) appointed to review the rate of dividend payable by the Railway Undertaking to General Revenues etc., which was presented to the Lok Sabha on 21st December, 2004."

श्री खारबेल स्वाईं (बालासोर) : उपाध्यक्ष महोदय, हम लालू प्रसाद जी को नहीं सुनेंगे। एन.डी.ए. की तरफ से हमने तय किया है कि रेल बजट अथवा अनुदान की मांगों के संबंध में लालू प्रसाद जी जब भी पढ़ेंगे, उन्हें हम नहीं सुनेंगे। इसलिए हम इस पर ऑब्जैक्शन करते हैं। …( व्यवधान)

MR. DEPUTY-SPEAKER: Not to be recorded.

(Interruptions)* … MR. DEPUTY-SPEAKER: Motion moved:

"That this House approves the recommendations contained in Paras 45, 46, 47, 48, 49, 50, 51 and 53 of the First Report of Railway Convention Committee (2004) appointed to review the rate of dividend payable by the Railway Undertaking to General Revenues etc., which was presented to the Lok Sabha on 21st December, 2004."

Now, I request Shri Ratilal Kalidas Varma to speak.

*Not Recorded.

श्री रतिलाल कालीदास वर्मा (धंधुका) : उपाध्यक्ष महोदय, रेल मंत्री जी ने रेल बजट प्रस्तुत करते समय भी बहुत सारी बातें कही थीं और अब अनुदानों की मांगें स्वीकृति हेतु लेकर आए हैं। मैं शुरूआत सबसे पहले अपने क्षेत्र से करना चाहूंगा। यह मेरा छठवीं लोक सभा का काल चल रहा है। मैं प्रारम्भ से रेलवे के संबंध में अपने संसदीय क्षेत्र के लिए रेलवे के बारे में अनेक जरूरी सुविधाओं की मांग करता आया हूं, लेकिन दुख के साथ कहना पड़ता है कि जो भी रेल मंत्री बनते हैं, वे अपने राज्य और अपने संसदीय क्षेत्र की तरफ ही ध्यान देते हैं। जैसे ओझा जब नारियल फेंकना होता है, तो वह यह देखता है कि उसके परिवार वाले किधर खड़े हैं और वह उधर ही नारियल फेंकता है। ऐसे ओझा ज्यादा समय तक नहीं चलते।

माननीय उपाध्यक्ष महोदय, मैं धंधुका संसदीय क्षेत्र से चुनकर आता हूं। मैं बहुत समय से बोटाट से अहमदाबाद रेल लाइन को ब्रॉडगेज करने की मांग करता आ रहा हूं, लेकिन उस तरफ मंत्रालय का ध्यान नहीं जा रहा है। इसके कारण पूरा सौराष्ट्र गुजरात से अलग हो जाता है। इसकी बार-बार मैं मांग करता रहा हूं और इस बार भी मैंने रेल मंत्री जी से प्रार्थना की थी, लेकिन इस ओर कोई कार्रवाई नहीं की गई है। एक रेल लाइन एन.डी.ए. सरकार के समय में जरूर हमारे क्षेत्र में ब्रॉडगेज हुई। वह सूरत नगर से भाव नगर रेल लाइन है, लेकिन प्लेटफार्म छोटा ही रह गया। रेलवे लाइन के साथ-साथ उसे ऊंचा नहीं उठाया गया। इसका परिणाम यह हो रहा है कि रेल के डिब्बों से उतरते वक्त प्लेटफॉर्म नीचा होने की वजह से रोजाना बुजुर्ग और विद्यार्थी फिसल जाते हैं और दुर्घटनाग्रस्त हो जाते हैं। जब रेल लाइन ब्रॉडगेज की गई, तो उसी समय प्लेटफॉर्म को भी क्यों ऊंचा नहीं उठाया गया अथवा बड़ा नहीं किया गया, यह बात मेरी समझ में नहीं आ रही है। यह बात उसी समय रेल मंत्रालय के ध्यान में क्यों नहीं आई कि रेलवे लाइन के साथ-साथ उसे भी ऊंचा उठाया जाता। यहां भी यदि कोई गड़बड़ी हुई है या कोई घोटाला हुआ है, तो उसकी जांच की जाए। …( व्यवधान)

श्री लालू प्रसाद : आप कहां के प्लेटफार्म को ऊंचा करने की बात कह रहे हैं ?

श्री रतिलाल कालीदास वर्मा : मंत्री जी, मैं भावनगर-सूरतनगर ब्रॉडगेज रेलवे लाइन की बात कर रहा हूं, जिसे एन.डी.ए. सरकार के समय में ब्रॉडगेज बनाया गया, लेकिन रेलवे प्लेटफॉर्म छोटा और नीचा है जिसके कारण बुजुर्ग एवं विद्यार्थी लोग रेल से उतरते समय फिसल कर गिर जाते हैं और दुर्घटनाएं हो रही हैं। उस लाइन के प्लेटफॉर्म को बड़ा एवं ऊंचा बनाया जाए।

उपाध्यक्ष महोदय, इसके साथ-साथ मैं यह निवेदन भी करना चाहता हूं कि सौराष्ट्र आने-जाने का खर्च बहुत ज्यादा आता है। इसलिए मेरी प्रार्थना है कि दसा से बोटाट एक नई रेलवे लाइन जोड़ी जाए जिससे अमरेली और कच्छ आदि के सब लोगों को एक आसान रास्ता मिल जाएगा। इससे समय की भी बचत होगी और खर्च भी कम होगा और पूरे राज्य के अंदर रेलवे की पूर्ण सुविधा उपलब्ध हो सकती है।

महोदय, इसके साथ-साथ मैं कहना चाहता हूं कि धंधुका से भावनगर छ: घंटे लगते हैं और घूमकर जाना पड़ता है। बहुत समय पहले एक सर्वेक्षण हुआ था।

डायरेक्ट धंधुका से भावनगर का जो सर्वे हुआ है, उसको निकालकर के उसकी जांच की जानी चाहिए। रेलवे को भी उससे बहुत बड़ा फायदा होगा और आम जनता को भी इससे बड़ा फायदा होगा।

उपाध्यक्ष महोदय, नयी-नयी पटरियां बिछायी जाती है, लाइनों को ब्राडगैज किया जाता है, लेकिन उसके साथ गांव वालों के जो छोटे-छोटे फाटक होते हैं, उनको बंद कर दिया जाता है। उसके लिए गांव वालों से राय नहीं ली जाती है। इससे किसानों को दस-दस किलोमीटर तक घूमकर जाना पड़ता है। जिन गांवों के पुराने फाटक थे उनको चालू रखना चाहिए। कभी-कभी तो ऐसा हुआ है कि किसी फाटक को बंद करके उसकी चाबी रेलवे स्टेशन पर ले जाते हैं, जब किसान तीन किलोमीटर जाकर उसकी चाबी लेकर आता है, तब वह फाटक खुलता है। मेरी प्रार्थना है कि दिन में वे फाटक खुले रहने चाहिए और वहां पर गेट-कीपर की व्यवस्था भी की जानी चाहिए। इसके साथ-साथ प्लेटफार्म टूटे पड़े हुए हैं। उनकी मरम्मत होनी चाहिए। यात्रियों के लिए बैठने की और उनके लिए पीने के ठंडे पानी की व्यवस्था की जानी चाहिए, प्रत्येक स्टेशन पर कम्प्यूटरीकृत आरक्षण की व्यवस्था की जानी चाहिए। इसके साथ-साथ जो रात्रि गाड़ियां चलती हैं उनमें कुछ बदमाश लोग मां-बहनों और छोटे-मोटे लोगों को परेशान करते हैं या लूट लेते हैं। मेरी आपसे मांग है कि जहां-जहां रात्रिगाड़ियां चलती हैं उनमें पुलिस की व्यवस्था की जानी चाहिए। साथ ही साथ जिस प्रकार से मुम्बई की लोकल ट्रेनों में महिलाओं के लिए अलग डिब्बों की व्यवस्था है, उसी प्रकार से महिलाओं के लिए अलग डिब्बों की व्यवस्था की जानी चाहिए। बुजुर्गों और सीनियर सीटिजन के लिए भी अलग डिब्बों की व्यवस्था की जानी चाहिए।

उसके साथ मैं हर बार अपने निर्वाचन क्षेत्र के ढोलका, सांनद, बावला, बोटाद इत्यादि स्टेशनों पर कोटा बढ़ाने की बार-बार मांग करता आया हूँ। ये सब व्यापारियों के स्थल हैं। बोटाद जीरा, कपास, कोटन इत्यादि का बहुत बड़ा केन्द्र है। जो लोग मुम्बई या दिल्ली आना-जाना चाहते हैं उनके लिए कोटा बढ़ाने की मैं हमेशा मांग करता आया हूँ। विरमगांव से मेहसाना तक का गैज परिवर्तन हो गया है किन्तु अभी तक ट्रेन नहीं चलायी गई है। ५० गांव इसकी वजह से बेकार बैठे हैं। वहां पर सब काम पूरा हो गया है लेकिन ट्रैन अभी तक शुरू नहीं की गई है। आज ६ महीने बीत चुके हैं। लेकिन ट्रैन शुरू नहीं की गई है। वहां पर ट्रैन शुरू की जानी चाहिए। इसके साथ-साथ जो लोग वहां पर बैठे हैं, पुराने व्यापारी बैठे हैं, उनको भी अच्छी जगह पर बैठाया जाना चाहिए। कई स्थानों पर रेल की पटरी के नीचे के नाले बंद हो जाते हैं जिससे उसका पानी आस-पास की बस्तियों में चला जाता है। यदि नगरपालिका के लोग सफाई करने जाते हैं तो रेलवे अधिकारी कहते हैं कि यह उनके प्रिमाइसिस से बाहर है। आप यहां पर नहीं आ सकते हैं। इससे इन बस्तियों में पानी भर जाता है जिससे लोग बीमार हो रहे हैं। किन्तु नगरपालिका को सफाई नहीं करने देते हैं, उन्हें सफाई करने से रोकते हैं। जहां-जहां भी पानी की पाइपलाइन डालनी होती है या केबल डालनी होती है उसके लिए पहले डीआरएम की मंजूरी लेनी पड़ती है। जब डीआरएम मंजूरी देगा तब वह काम शुरू होगा। जिससे काम के कार्यान्वयन में विलम्ब होता है। मेरी यह मांग है कि रेल मंत्रालय से एक आदेश जाना चाहिए कि जहां भी बिजली की या पानी की या टेलीफोन की लाइन डाली जानी हो उसे तुरन्त परमीशन दी जाए। फिर बाद में उसकी परमीशन रेलव से या डीआरएम से ली जा सकती है।

मेरा माननीय मंत्री जी से यह भी अनुरोध है कि जो इंटरसिटी भावनगर से अहमदाबाद जाती है, वह खाली जाती है। उसके चार डिब्बे राजकोट चले जाते हैं और चार डिब्बे भावनगर चले जाते हैं, लेकिन बीच के महत्वपूर्ण स्टेशन छूट जाते हैं। इन सबको ध्यान में रखा जाए। इसके साथ आपने अपने बजट में बताया कि माल ढुलाई के लिए वृद्धि दर बढ़ी है लेकिन छोटे स्टेशनों पर माल ढुलाई को आपने बंद कर दिया है।

इससे लोग काफी परेशान हैं। आपने डीजल साइडिंग का भी विद्युतीकरण करने के लिए कहा है। गुजरात में जो-जो लाइनें बाकी हैं, उनका विद्युतीकरण किया जाए।

गुजरात में नमक उद्योग बहुत बड़ा है। आपने कहा कि हम उसे ज्यादा ऋण देंगे, लेकिन समय पर ऋण न मिलने के कारण गुजरात का नमक उद्योग ठप्प होता जा रहा है। उसे ऋण दिया जाए। कोयला लाने के लिए भी ऋण दिया जाए। गुजरात में कई जगह रेलवे ने पटरियां निकाल दी हैं। जहां से पटरियां निकाली गई हैं, उन जगहों को उनके मूल मालिकों को वापिस दिया जाए।

मंत्री जी ने अपने मुद्दा नम्बर २२ में बताया है कि महानगरों के स्टेशनों के विस्तार के लिए उन्हें आधुनिक स्टेशन के साथ विकसित करेंगे। अहमदाबाद काफी बड़ा स्टेशन है। आप उसे भूल गए हैं। आपने उसके विस्तारीकरण के लिए कुछ नहीं किया। उसके बगल में साबरमती रेलवे स्टेशन है। उसका विकास होने वाला था। एनडीए सरकार में कहा गया था कि दिल्ली से जाने वाली गाड़ियां वहां रुकेंगी, लेकिन आज तक वहां कोई गाड़ी नहीं रुकती।…( व्यवधान)

आपने गांधी आश्रम से डांडी यात्रा निकाली और उसी गांधीनगर को अपमानित कर रहे हैं। गांधीनगर गुजरात की राजधानी है। आपने २५ किलोमीटर की नई रेल लाइन डालने के लिए लिखा है। आपने इसमें छ: प्रपोजल रखे, जिसमें गांधीनगर का प्रपोजल अंत में रखा है। अगर कलोन से गांधीनगर तक नई रेल लाइन डाल दी जाती है तो राजधानी टू राजधानी सम्पर्क हो सकता है। आपने पांच दूसरे प्रपोजल रखे और इसे अंतिम समय में रखा। मैं समझता हूं कि आप इसे जल्द से जल्द पूरा करेंगे।

आपने पब्लिक-प्राइवेट भागीदारी को प्रोत्साहन देने की बात की। गुजरात व्यापारियों का राज्य है। दुनिया में ऐसा कोई देश नहीं है जहां गुजराती लोग न हों। आप गुजरात के व्यापारियों के साथ आइए, वहां के चैम्बर ऑफ कामर्स को बुलाइए और हर स्टेशन पर आपने जो सुविधा देने के लिए कहा है, जैसे हैंडलिंग, वेयरहाउसिंग तथा सड़क सम्पर्क इत्यादि का काम गुजरात में बहुत अच्छा हो सकता है। आपको सिर्फ काम करना है। चैम्बर ऑफ कामर्स को बुलाकर उनके साथ मिलना है।…( व्यवधान)

MR. DEPUTY-SPEAKER: Not to be recorded. No comments please.

(Interruptions)* … श्री रतिलाल कालीदास वर्मा : जब आप अलग से टाइम टेबल बनाते हैं, मेरा अनुरोध है कि आप वहां की लोकल पैसेंजर एसोसिएशन को विश्वास में लें। उनको विश्वास में लेकर टाइम टेबल चेंज करें ताकि हम आपके पास बार-बार न आएं।

प्रतीक्षा सूची के बारे में सिर्फ आधे घंटे पहले मालूम पड़ता है। लोग अपने परिवार के साथ स्टेशन जाते हैं। उनकी टिकट कन्फर्म नहीं होती तो अब वे कहां जाएं।…( व्यवधान)

MR. DEPUTY-SPEAKER: Not to be recorded.

(Interruptions)* … MR. DEPUTY SPEAKER: First you address the Chair otherwise that will not be recorded. If you say anything in the House without my permission, that will not be recorded.

श्री रतिलाल कालीदास वर्मा : देश के अंदर रेलवे की अनगिनत सम्पत्ति पड़ी है। कौन से स्टेशन में क्या पड़ा है, वह आपको मालूम नहीं है। सामान की चोरी हो रही है, उसे मिट्टी खा रही है। जब ऑक्शन होता है तो अच्छी-अच्छी चीजें बेच दी जाती हैं। छोटे-छोटे स्टेशनों में करोड़ों रुपये की सम्पत्ति बेकार पड़ी है। आप कभी उसे जाकर देखिए। देश की सम्पत्ति का दुरुपयोग नहीं होना चाहिए।

स्क्रैप में अच्छा माल बेचा जाता है, जिससे रेलवे को घाटे में डाल दिया जाता है। इसे सही तरह से देखा जाए।

*Not Recorded.

आपने छोटी-मोटी नौकरियों में ठेकेदारी पद्धति अपना ली है। अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति के लोग ठेकेदारों के यहां नौकरी करते हैं। उनको पूरे दाम नहीं दिए जाते। ठेकेदारी पद्धति दूर की जाए और अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और पिछड़े वर्ग के लोग, जो रेलवे के ठेकेदारों के अंडर काम करते हैं, उनको आप रेलवे के कर्मचारी बनाएं। आप पिछड़े वर्ग के लोगों की बात करते हैं। मैं उम्मीद करता हूं कि आप उन सबको कर्मचारी बनाकर उचित न्याय दिलवाएंगे।

रेलवे में काफी एक्सीडैंट्स होते हैं। कहीं गाड़ी आमने-सामने टकरा जाती है, कहीं पटरी से नीचे उतर जाती है, कभी रेलगाड़ी चलते-चलते नदी में गिर जाती है और कभी मालगाड़ी के सामने जाकर गले मिल जाती है।

इससे निर्दोषों की जान जाती है। आप उनके लिए एक लाख रुपये का मुआवजा देने का आश्वासन दे देते हैं लेकिन गये हुए मां-बाप, भाई-बहन, बहू-बेटे वापिस नहीं मिलते। इसलिए एक लाख रुपये की खैरात देने से अच्छा है कि आप उन लोगों की जान बचाने का काम करें।

मंत्री जी ने अपने रेल भाषण में जो रियायतें दी हैं, वह सराहनीय हैं। उन्होंने जो रियायतें दी हैं, मैं उसके लिए उनकी प्रशंसा करता हूं, लेकिन रियायतें सही इंसान तक पहुंचे, सही लोगों को मिले और सही लोग उसका लाभ उठा सकें, यह काम आपको करना चाहिए।

मेरी आपसे एक मांग और है कि अहमदाबाद-भावनगर, इंटरसिटी को स्टापेज दिया जाये। वाकानेर जंक्शन को कम्प्यूटराइज किया जाये। विश्वामित्र स्टेशन पर मुम्बई से आने वाली गाड़ियों को रोका जाये।

उपाध्यक्ष महोदय, माननीय मंत्री जी ने अपने भाषण के अंत में दो शेर कहे थे। मैं उनका उल्लेख करके अपनी बात समाप्त करूंगा। मंत्री जी ने कहा था क उठना है और भी ऊपर, है ऊंचाइयां पुकारतीं है अपार क्षमताएं, आशाएं तुम्हें निहारतीं।

मैं उसका जवाब देना चाहता हूं कि -

पुकारते पुकारते ऊंचाइयां थक गईं रेल बजट को सुनकर आस निराश भई दक्षिण भारत को छोड़कर सारी रेल बिहार चली गयीं है अपार क्षमता फिर भी काम पूर्ण करने में अक्षमता दिखाई गयी।

मंत्री जी ने दूसरा शेर कहा था कि -

सिर्फ हंगामा खड़ा करना मेरा मकसद नहीं मेरी कोशिश है कि यह सूरत बदलनी चाहिए इसके जवाब में मेरा कहना है कि -

सिर्फ हंगामा खड़ा करना ही रेल भाषण का मकसद है, अगर दिल और दिमाग से कोशिश है तो रेल की सूरत तो क्या, सारा देश खूबसूरत हो जायेगा।

अंत में ब्राडगेज की बात कहना चाहूंगा कि उसे पूरा करना चाहिए। गोधरा-इंदौर-देवास के ब्राडगेज का काम रूका हुआ है। मैं पूछना चाहता हूं कि वह क्यों रुका हुआ है और वह कब तक पूरा हो जायेगा। …( व्यवधान)

MR. DEPUTY-SPEAKER: This will not go on record. वर्मा जी, अब आपका भाषण रिकार्ड में नहीं जा रहा है।

...( व्यवधान)

श्री रतिलाल कालीदास वर्मा : गुजरात के साथ अन्याय हुआ है। भले ही वहां भाजपा का राज है लेकिन वहां के आधे सांसद कांग्रेस से चुनकर आये हैं। उनकी भी बात नहीं सुनी जाती। गुजरात के जो रेल मंत्री थे, वे भी दुखी हैं। उनके साथ हम भी दुखी हैं।

CUT MOTIONS श्री अविनाश राय खन्ना (होशियारपुर) : मैं प्रस्ताव करता हूं :

कि रेलवे         बोर्ड शीर्ष के अंतर्गत मांग में १०० रूपए         कम किए जायें।               

होशियारपुर में रेलवे के लिए       कलपुर्जो के वनिर्माण के लिए उद्योगों       को स्थापित किए जाने की आवश्यकता।                  

कि रेलवे         बोर्ड शीर्ष के अंतर्गत मांग में १०० रूपए         कम किए जायें।               

होशियारपुर और दिल्ली के       बीच एक सीधी रेल गाड़ी चलाए जाने की       आवश्यकता।        

अमृतसर और श्री आनंदपुर साहिब       को रेल लाइन से जोड़े जाने की       आवश्यकता।        

जम्मू तवी एक्सप्रेस में एक पेंट्री       कार लगाए जाने की आवश्यकता।        

होशियारपुर से चलने वाली       रेलगाड़ियों में आरक्षण कोटा बढ़ाए जाने       की आवश्यकता।                  

कि         परिसंपत्तियां - अधिग्रहण, निर्माण और         बदलाव शीर्ष के अंतर्गत मांग में १०० रूपए         कम किए जायें।               

जेजो और ऊना रेलवे स्टेशनों       के बीच एक नयी रेल लाइन का निर्माण       किए जाने की आवश्यकता।        

होशियारपुर रेलवे स्टेशन पर       और प्लेटफार्म का निर्माण किए जाने की       आवश्यकता।         

             

SHRI BACHI SINGH RAWAT ‘BACHDA’ (ALMORA): I beg to move:                            

THAT THE DEMAND UNDER THE HEAD RAILWAY BOARD         BE REDUCED BY RS. 100.               

Need to run more trains from Delhi to Kathgodam via       Moradabad with AC 1st Class compartment.        

Need to run daily Shatabdi trains from New Delhi to Ram Nagar and New       Delhi to Kathgodam.        

Need to run as express train between Kathgodam and Jammu Tawi via       Ambala.                  

THAT THE DEMAND UNDER THE HEAD GENERAL SUPERINTENDENCE AND SERVICES ON         RAILWAYS BE REDUCED BY RS. 100.               

Need to transfer the Ramnagar Railway Station and surrounding area       from the jurisdiction of North-Eastern Railway, Moradabad to Northern Railway, Izatnagar,       Bareilly.                  

THAT THE DEMAND UNDER THE HEAD STAFF WELFARE AND AMENITIES BE         REDUCED BY RS. 100.               

Need to establish a 100-bed Railway Hospital at Kathgodam for the       welfare of railway employees.        

                   

THAT THE DEMAND UNDER THE HEAD ASSETS ACQUISITION, CONSTRUCTION AND         REPLACEMENT BE REDUCED BY RS. 100.               

Need to convert all narrow gauge lines into broad gauge lines in       the State of Uttaranchal.        

Need to provide computerized reservation facilities at all railway       stations in the State of Uttaranchal.        

Need to make adequate arrangements for drinking water, refreshment       rooms and to maintain cleanliness at all the railway stations in the State of Uttaranchal.        

Need to construct new rail line between Lalkuan and Khatima.        

Need to introduce computerized reservation system in Almora,       Gangolihat, Berinag, Didihat, Bhikiyasain, Chaukhutia, Dharuchula, Munsyari, Kapakote,       Tehsil Headquarters in the Kumaon Division of Uttaranchal.        

Need to construct railway line from Ram Nagar to Chaukhutia via       Marehula Distt. Almora.        

Need to construct railway line between Kathgodam and Mumbai and between       Kathgodam and Ahmedabad.        

Need to construct railway line from Tanakpur to Champawat and       Bageshwar.        

Need to construct new rail line connecting       Tanakpur-Kathgodam-Ramnagar-Kotdwar-Hardwar-Dehradun.        

Need to construct over-bridge between Rampur and Moradabad railway       crossing for smooth traffic.        

         

         

         

         

            

    

श्री प्रभुनाथ सिंह (महाराजगंज, बिहार) : उपाध्यक्ष महोदय, हमे भाषण नहीं देना है। चूंकि रेल मंत्री जी अपनी कांस्टीट्एंसी की बात स्वयं नहीं बोल सकते इसलिए हम उनकी कांस्टीट्एंसी की बात बोलना चाहते हैं। हमको लगता है कि वे उसका रिस्पांस देंगे। …( व्यवधान)

उपाध्यक्ष महोदय : आप पहले उनसे कंसल्ट कर लीजिए।

...( व्यवधान)

श्री प्रभुनाथ सिंह : हम आपके माध्यम से मंत्री जी से कह रहे हैं कि पटना गंगा नदी पर जो पुल बन रहा है, वहां से जो रेलवे स्टेशन है, वह परमानंद में मिल रहा है। माननीय मंत्री जी का जो निर्वाचन क्षेत्र है, वहीं से सीधे तरइयां होते हुए मसरक जाती है। हमने इस संबंध में एक पत्र भी आपको लिखा था कि आप मसरक से लेकर परमानंद पुल का सर्वेक्षण करा दीजिए क्योंकि ग्रामीण इलाकों में इससे काफी कठिनाई है। आपके निर्वाचन क्षेत्र के तरइयां, परसा, गड़खा और सोनपुर चार विधान सभा क्षेत्र के बीच से यह निकलना है। हम चाहेंगे कि उसका सर्वेक्षण कराकर आप उस पर कार्रवाई कीजिए।

उपाघ्यक्ष महोदय, हम भाषण नहीं दे रहे हैं। हम केवल मंत्री जी की कांस्टीट्एंसी के बारे में बता रहे हैं। जब श्री नीतीश कुमार जी रेल मंत्री थे, उस समय मसरक से महाराजगंज तक रेल परियोजना की स्वीकृति हुई थी। वह परियोजना बजट में भी आ गयी थी। उस पर प्लानिंग कमीशन की स्वीकृति भी मिल गयी तथा उसका शिलान्यास भी हो गया। अभी आपको जब हमने इस बारे में पत्र लिखा तो हमें उत्तर मिला कि उसके लिए दो करोड़ रुपये मुक्त गये हैं। लेकिन उसे आपके मंत्रालय ने प्राथमिकता सूची में शामिल नहीं किया है। मैं चाहूंगा कि जमीन की व्यवस्था करके वहां जो स्वीकृत योजना है, उसे पूरा किया जाये। इससे ज्यादा मैं कुछ नहीं कहना चाहता। मंत्री जी, आपके निर्वाचन क्षेत्र वाला जो मामला है, हमको लगता है कि आप अपने जवाब में इन दोनों बिन्दुओं पर चर्चा करके जरूर बतायेंगे। कम से कम अपने क्षेत्र का निदान जरूर करेंगे। बहुत-बहुत धन्यवाद।

MR. DEPUTY-SPEAKER: Nothing will be recorded except the speech of Shri Madan Lal Sharma.

(Interruptions)* … *Not Recorded.

श्री मदन लाल शर्मा (जम्मू) : मोहतरम् डिप्टी स्पीकर साहब, मैं आपका मशकूर हूं कि मुझे आपने आज रेलवे की ग्रांट्स पर बोलने का मौका दिया।

मैं सबसे पहले अपनी तरफ से और अपनी रियासत के लोगों की तरफ से अपनी यूपीए सरकार, प्रधान मंत्री जी और खासकर माननीय रेल मंत्री श्री लालू प्रसाद यादव का धन्यवाद करना चाहता हूं जिन्होंने वैसाखी के त्यौहार के दिन मरहूम श्रीमती इंदिरा गांधी के सपने को साकार किया और हरी झंडी देकर वहां से रेल रवाना की। उसके साथ ही इन्होंने वहां अपनी तकरीर के दौरान, उस उद्घाटन के मौके पर, रियासत जम्मू-कश्मीर में रेलवे के जो काम ऊधमपुर से काजीकुंड और काजीकुंड से बारामूला तक रेल ले जाने का वादा किया और वहां काम भी चल रहा है और यह भी कमिटमेंट दिया कि सन् २००७ तक ऊधमपुर से काजीकुंड और काजीकुंड से बारामूला तक रेल चलेगी। मैं समझता हूं कि जहां पिछले वर्षों में जो १५ वर्ष गुजरे हैं जबकि रियासत जम्मू-कश्मीर में मलिटेंसी का दौर था लेकिन आज जब वहां हर विभाग और खासकर रेल विभाग की तरफ से वहां तरक्की के काम काफी जोरों से जारी हैं जिससे आज लोगों को रोजगार भी मिलता है और यह महसूस होता है कि आज हिन्दुस्तान की सरकार और रेलवे विभाग जम्मू-कश्मीर के कटे हुए इलाकों को सारे देश के साथ जोड़ना चाहती है तो उसके लिए मैं लालू जी का धन्यवाद करता हूं।

हमारी रियासत जम्मू-कश्मीर एक टूरिस्ट स्टेट है और यह दुरुस्त बात है कि पिछले सालों में लोग मलिटेंसी के खौफ से वहां नहीं जाते थे लेकिन जब रेल चालू हो जाएगी और देश के कोने-कोने से लोग रेल के माध्यम से कश्मीर में पहुंचेंगे तो इससे बहुत फायदा होगा। वैसे तो जम्मू में मां वैष्णो देवी की कृपा से जब वहां ६० लाख यात्री आज के दिन पहुंचते हैं और कटरा में २००६ में रेल पहुंचाने का फैसला भी इन्होंने किया है तो मैं इनसे विनम्रता पूर्वक निवेदन करना चाहता हूं कि उसी लिंक को रजौरी और पुंछ जो दो जिले आगे पड़ते हैं, उनको भी रेल से जोड़ा जाए और यह इसलिए भी जरूरी हैं कि वहां हमारे बहुत सारे फौजी डिवीजन है, सारा लाइन ऑफ कंट्रोल है जो पाकिस्तान के बॉर्डर के साथ एक्चुअल लाइन ऑफ कंट्रोल और देश के कोने-कोने से हमारे फौजी जवान सरहदों पर तैनात हैं और उनको आने-जाने में जब बहुत दिक्कत होती है और यहीं नहीं, पिछले साल जब वे बसों और ट्रकों से जम्मू-कश्मीर रेलवे स्टेशन पर पहुंचते थे तो रास्ते में कई ऐसे हादसे होते थे जिनमें बहुत सारी जानें भी गईं हैं।

14.49 hrs. [Shri Arjun Sethi in the Chair] मैं कहूंगा कि बहुत पहले रेल विभाग ने रजौरी-पूंछ रेल पहुंचाने का एक सर्वे भी किया था लेकिन पिछले साल मैंने उसके बारे में पिछली बार जब प्रश्न पूछा था तो उनका जवाब आय़ा कि अभी हमारी ऐसी कोई योजना नहीं है। लेकिन रेल विभाग और खासकर माननीय रेल मंत्री जी ने जो उत्साह दिखाया है, उससे जम्मू-कश्मीर के अवाम का मनोबल ऊंचा हुआ है। मैं कहूंगा कि रजौरी-पुंछ जो बड़े जिले हैं, उनको जोड़ना भी लाजमी बनता है और इससे वहां के लोगों के लिए रोजगार के अवसर भी पैदा होंगे क्योंकि वहां सोर्स ऑफ इंकम कोई नहीं है।

वे लोग जमींदारी पर निर्भर करते हैं और अगर वहाँ रेलवे लाइन काम शुरू हो जाए तो एक तो लोगों को रोजगार मिलेगा, लोगों को आने-जाने के साधन मिलेगा और देश के कोने-कोने से आए हुए जो बहादुर जवान वहाँ तैनात हैं, उन्हें भी आने-जाने में सहूलियत मिलेगी। इस क्षेत्र में बहुत-से तीर्थ स्थान हैं, जहाँ हर साल लाखों की संख्या में तीर्थयात्री आते हैं, उनको भी सहूलियत होगी। मैंने पिछली बार भी इसी हाउस में यह कहा था कि हमारे जिला हैडक्वार्टर्स पर रिजर्वेशन काउण्टर नहीं हैं, जैसे पुंछ और राजौरी। मैं रेलवे मंत्री जी द्वारा रेलवे बजट ग्राण्ट्स प्रस्तुत करते समय की गयी उस घोषणा के लिए शुक्रगुजार हूँ जिसमें उन्होंने कहा था कि दूसरे राज्यों में रोजगार की तलाश करने के लिए या इन्टरव्यु के लिए जाने वाले नौजवानों को ट्रेन के किराए में छूट दी जाएगी। मैं समझता हूँ कि हमारी रियासत के नौजवान इसका उपयोग प्रदेश के बाहर तो कर सकते हैं, लेकिन अपने राज्य में इसका लाभ नहीं उठा सकते हैं क्योंकि उनको रिजर्वेशन करवाने के लिए तीन सौ किलोमीटर का फासला तय करके जम्मू जाना पड़ता है। इसलिए मेरी मांग है कि रियासते जम्मू-कश्मीर में प्रत्येक जिला हैडक्वार्टर पर कम्प्युटराइज्ड रिजर्वेशन सेन्टर खोले जाएं ताकि वहाँ के लोगों के साथ-साथ फौजी जवानों को भी लाभ मिल सके।

महोदय, हमारे यहाँ राजधानी एक्सप्रेस जम्मू तक जाती है लेकिन हफ्ते में एक बार जाती है। मैं माननीय मंत्री जी से यह गुजारिश करूंगा कि वैष्णो माता के दर्शन के लिए जाने वाले यात्रियों पर आपकी बड़ी इनायत होगी अगर उस राजधानी को प्रतदिन कर दिया जाए। इससे लोगों को बहुत फायदा होगा। मैं यह उम्मीद करता हूँ कि इस राजधानी एक्सप्रेस को पूरे हफ्ते रोज़ाना चलाया जाएगा।

महोदय, माननीय रेलमंत्री जी और उनका विभाग, रियासते जम्मू-कश्मीर में बहुत बड़ा काम कर रहे हैं। इसी के साथ मैं माननीय मंत्री जी से निवेदन करना चाहता हूँ कि जम्मू में, जो कि हमारी शीतकालीन राजधानी भी है, में एक रेलवे डिवीजन कायम किए जाने की जरूरत है क्योंकि हमारी रेलवे डिवीजन फिरोजपुर है और फिरोजपुर तथा कश्मीर-बारामूला के बीच कितनी दूरी है, इसे आप समझते हैं। इससे रेलवे को भी अपने कामों की नजदीक से मॉनिटरिंग करने में बहुत सहूलियत होगी और लोगों को रोजगार मिलने के साथ ही जम्मू शहर का भी विकास होगा। इससे लोगों को रेलवे विभाग की तरफ से बहुत बड़ी राहत मिलेगी। आज हमारी रियासत के लोग मौजूदा यूपीए सरकार, प्रधानमंत्री जी और रेलमंत्री जी के बड़े शुक्रगुजार हैं जो हाल ही में वहाँ गए थे। मैं ज्यादा लम्बी तक़रीर न करते हुए, रेलमंत्री जी और उनके विभाग द्वारा किए गए कामों के लिए उनकी तारीफ करूंगा। मैं उम्मीद करता हूँ कि मैंने यहाँ जो सजेशन्स दिए हैं, उन पर माननीय मंत्री जी गौर करेंगे और मेरी रियासत, खासकर मेरे चुनावी हलके - जम्मू, पुंछ और राजौरी तक रेल पहुंचाने की मेहरबानी करेंगे।

 

DR. RAM CHANDRA DOME (BIRBHUM): Thank you, Mr. Chairman.

Sir, I rise to support the Demands for Grants in respect of Railways for the year 2005-06. I must congratulate the Railway Minister for presenting a people-friendly Railway Budget.

The first phase discussion of the Budget was over already and now, in the second phase, a detailed discussion on the Demands for Grants is being taken up. Here, I have some specific submissions and suggestions to make. In the list of Demands, the total number of Heads is sixteen.

The major problem today in our country, particularly in the backward areas, is expansion of new railway projects. For the past few years we have seen that the budgetary support for expansion of railway network in the country, particularly in the backward areas, has been neglected. This year also, though hon. Railway Minister has tried his level best, yet the budgetary support for taking up the new projects, particularly in the backward areas, is not satisfactory.

The second and the most important part is, maintenance and repair of old railway lines, that is modernisation of the railway tracks. It is not satisfactory at all. There are a number of old bridges and the railway accidents are the order of the day. Though our Minister claims that particularly in the last one year the number of accidents has been minimised, yet he should not be complacent because many of the rail accidents are due to poor maintenance of tracks and bridges. So, this should be attended adequately. Adequate funds should be allocated for this. Otherwise, an important part of our Railway services is neglected. The negative fall out of this is, derailment, accidents and damage to both life and property.

Similarly, our Railway Safety Programme is also being neglected. Though a Special Railway Safety Fund has been created yet for the past few years we have seen that this fund has not been utilised and the programme of safety network is not progressing satisfactorily. My humble request to the Railway Minister is that the safety part should be given top priority and funds should not be any constraint in that.

Our operating expenses, particularly fuel expenses, are also increasing every year because of the rise in prices of fuel in the international market. So, the immediate substitute for fuel, that is electrification of railway tracks, should be taken up. But that also is not satisfactory.

15.00 hrs. The major parts of the Railway network are uncovered with electrification programme. As long as we delay our electrification programme, our fuel expenses will go high. It will go beyond our control which would result in cutting down our expenses on new developmental programmes.

As regards gauge conversion programme, in every Railway Budget, we see that surveys are going on. These sorts of surveys are endless. These are not done on the basis of a time-bound programme. These programmes are like consolation prizes. That is why, my suggestion is that gauge conversion programme should be taken up seriously. In the case of new projects for conversion where survey works are going on, that should be done in a time-bound manner.

With regard to passenger amenities and facilities, I must say that this part is also neglected, particularly in the passenger trains people are not getting proper facilities. Only the old bogies are there. Light is not there; window panes are not closed; toilet facilities are not maintained; and adequate drinking water facilities are not there at the stations. The toilet facility should be introduced in the DMU and EMU services. On-going projects particularly in the backward and north-eastern parts of our country should be taken up on priority. Guwahati-Lumding and Guwahati-Dharamnagar Railway projects are long pending projects. The work is going on at snails pace. That should be taken up on top priority. Our Prime Minister has said that the Railway projects in the north-east will be taken up as national projects. I must congratulate him but this should be implemented in a time-bound manner.

The wagon factories are being neglected, particularly in West Bengal. Our wagon factories are sick even though they are in the public sector. More orders for wagons are needed. Day-by-day, orders for wagons are reducing. This should be looked into. Our locomotive factory at Chittaranjan is a nice factory. It is producing so many nice engines but the orders are getting reduced. These types of plants should be protected and no privatisation and commercialisation should be given priority. I must mention here a few on-going projects and a few services. One of the important railway services is Andal-Palasthali Railway Service. That is under suspension for more than two and half years now. This Railway line connects the most backward areas, namely, Bardhaman, Birbhum and nearby Jharkhand areas. Unfortunately, in spite of repeated representations, this service has not been restored.

There was only one train service on this line. That service has now been suspended for two and a half years. I would specially like to request the hon. Railway Minister to restore the train service in the Andal – Palasthali railway route. This is one of the most backward areas in the State. The toiling masses used this service to go to their work places. I would like to once again request him to do something for the restoration of train service on this route.

My next point is about the water-logging problem at Bandel station. That is a perennial problem. This issue has been raised by the Member of Parliament representing the area. But the matter has not been taken up seriously by the Railway authorities. Remedial measures to remove water-logging in Bandel station should be initiated immediately.

The other point is about construction of a railway flyover at Durgapur station. This is a very important area. But that project has not been taken up. Construction of railway flyovers at many other such stations should be taken up exclusively by the Railway Department.

Sir, I would also like to mention here about the Dumka – Rampurhat railway line. This railway line connects backward areas of Dumka in Jharkhand and Birbhum in West Bengal. That project is also pending for a long time. Due consideration has not been given to this project. This project should be implemented in a time-bound manner. Similarly, the electrification of the Andal – Sainthia railway track should also be taken up at the earliest.

The proposed Janshatabdi express that runs from Howrah to New Jalpaiguri should be run via Siuri. The Azimganj – Andal railway service should also be restored immediately. The narrow gauge conversion programme between Amodpur – Katwa and Katwa -- Bardhaman is long pending. Survey work is nearly complete. I would like to urge upon the hon. Minister to take up the conversion programme of this route immediately.

My next point is about terminal facilities at Siuri. Siuri is an important district headquarter and also is an industrial town but there are no terminal facilities at Siuri. There should be terminal facilities at Siuri. The Kolkata metro project extension programme should be implemented in a time-bound manner.

The last point that I would like to mention is about giving licences to the railway hawkers. Though the hon. Minister has made a commitment about giving licences to the railway hawkers, yet it needs to be implemented immediately. It is because in the absence of a proper licence our railway hawkers are being harassed by the railway police everyday. This harassment by the police should be checked and a proper licence should be issued to them.

Sir, with these few words, I once again support the Demands for Grants for the Ministry of Railways for the year 2005-06.

श्री थावरचंद गेहलोत (शाजापुर) : सभापति महोदय, हम २००५-०६ की रेल बजट की अनुदान मांगों को पारित करने के बारे में चर्चा कर रहे हैं। मैं माननीय मंत्री जी का कुछ बातों की ओर विशेष ध्यान दिलाना चाहूंगा। कृपया वह इस वर्ष के बजट और पिछले वर्षों के बजट को देखें। उनके कारण जो स्थिति सामने आई है, उनका अध्ययन करके ही उन्होंने यह बजट बनाया है। जिन मांगों को वह स्वीकृति देने वाले हैं, उनके बारे में गम्भीरता से कार्य योजना बनानी होगी। यदि कार्य योजना नहीं बनाएंगे तो पिछले वर्ष की तुलना में यह बजट भी निरर्थक सिद्ध होगा।

मुझे लगता है इससे रेल के क्षेत्र में कोई विकास नहीं होगा । मैं माननीय रेल मंत्री जी का वर्ष २००३-०४ के बजट की कुछ मदों संख्या की ओर आपका ध्यान दिलाना चाहता हूं, अगर वे इस पर ध्यान देंगे तो निश्चित रूप उनके ध्यान में आएगा कि इसमें कुछ और सुधार की गुंजाइश है । वविध प्राप्तियों की मांग संख्या में वर्ष २००३-०४ की तुलना में वर्ष २००४-०५ में कमी आई है। इसमें वविध प्राप्तियां केवल चार पैसा अर्थात् सौ पैसे में चार पैसे अर्थात् चार प्रतिशत है । इसी तरह से रेल विकास नधि वनियोग में कमी आई है ।

रेल मंत्री जी ने बजट प्रस्तुत किया है उसमें रेल के विकास की द्ृष्टि से दो पैसे हैं । अगर हम कल्पना करें कि इतना बड़ा देश है और रेल की बहुत आवश्यकता है । सड़क मार्ग के अलावा सारा आवागमन रेल मार्ग पर निर्भर करता है परंतु उसमें भी विकास की मद के लिए दो पैसे रखे जाते हैं तो हम कल्पना कर सकते हैं कि रेल मंत्रालय किस प्रकार से विकास करेगा, इसमें वृद्धि करने की आवश्यकता है। हम और माननीय रेल मंत्री जी रेलवे सुरक्षा की द्ृष्टि से हर समय सदन में और बाहर चिंता व्यक्त करते हैं लेकिन रेल सुरक्षा नधि वनियोग में कमी आई है । रेलवे संरक्षा के मद में तीन प्रतिशत का प्रावधान किया गया है । मैं मानता हूं कि यह धनराशि बहुत कम है, इसमें वृद्धि किए बिना रेल सुरक्षा में सुधार नहीं कर सकते हैं ।

मैं मध्य प्रदेश से आता हूं । मध्य प्रदेश आवागमन की द्ृष्टि से और आबादी के घनत्व की द्ृष्टि से बहुत अधिक जनसंख्या वाला प्रदेश है । मध्य प्रदेश देश के मध्य में स्थित है, यहां चारों ओर से देश के एक कोने से दूसरे कोने तक जाने के लिए रेल लाईनों की बहुत आवश्यकता है । यह संयोग की बात है कि देश की आजादी के बाद से अभी तक केवल दो बार रेल मंत्री मध्य प्रदेश से चुने गए हैं । एक बार श्री प्रकाश चन्द्र सेठी जी, शायद वर्ष १९७२ के आसपास या पहले चुने गए थे और दूसरे श्री माधवराव सिंधिया जी चुने गए थे, उन्होंने मध्य प्रदेश में रेलवे विकास की द्ृष्टि से कुछ प्रयास किए थे । उनके अलावा यदि किसी ने विकास के क्रम को अग्रसर करने का काम किया तो केवल श्री नीतीश कुमार जी ने किया ।

माननीय रेल मंत्री श्री लालू प्रसाद जी के द्वारा रेल बजट प्रस्तुत किया गया है । बजट में पूर्व योजनाएं तो स्वीकृत हैं लेकिन उन योजनाओं को पूरा करने के लिए पर्याप्त बजट प्रावधान नहीं किया गया है । मैं उदारहण के तौर पर कहना चाहता हूं मकसि-देवास और इन्दौर-गोधरा रेल लाईन के लिए पिछले वर्ष २५ से ३० करोड़ का बजट प्रावधान था । इस वर्ष इन्दौर-गोधरा रेल लाईन के बजट प्रावधान में कमी आई है । पिछले वर्ष २५ करोड़ के लगभग बजट प्रावधान किया गया था लेकिन उसका कोई उपयोग नहीं हुआ । पेड़-पौधों को काट कर रास्ता साफ करने का काम किया था लेकिन वह पैसा ऐसे ही रह गया । इसी प्रकार से अजमेर-खंडवा छोटी रेल लाईन का आमान परिवर्तन करने का काम चल रहा है, इस परिवर्तन के लिए पिछले वर्ष ज्यादा बजट का प्रावधान किया गया था, इससे पहले कुछ काम भी हुआ था लेकिन जो बजट प्रावधान पिछले वर्ष किया गया था उसका कोई उपयोग नहीं हुआ । पुल बनकर तैयार हैं, पटरियां वगैरह खरीदकर, स्लीपर डालकर रतलाम तक जोड़ने का काम था, वह अब तक नहीं हुआ । उज्जैन से आगर तक आजादी से पहले से नैरो गेज रेल लाईन थी, जब देश में आपातकाल लगा था, उस समय किसी को कोर्ट कचहरी में निवेदन करने का प्रावधान नहीं था । ऐसी स्थिति में उज्जैन से आगर तक जो रेल लाईन थी, उसे उखाड़ दिया गया । रेल लाईन उखाड़ने के बाद जब जन प्रतनधियों ने मांग की तो उन्हें आश्वासन दिया गया कि रेल लाईन को फिर से डालने का काम करेंगे । एनडीए सरकार के समय में हमने श्री नीतीश कुमार जी को और श्री रामविलास पासवान जी से अनुरोध किया था । श्री रामविलास पासवान जी ने उसकी स्वीकृति दी थी और श्री नीतीश कुमार जी ने सर्वे के लिए बजट प्रावधान किया था ।

उसका सर्वे पूरा हो चुका है और उसकी रिपोर्ट अप्रेल, २००० से रेल मंत्रालय के पास है। मैं रेल मंत्री जी से जाकर मिला था और उनसे निवेदन किया था कि इस लाईन की स्वीकृति दी जाये लेकिन स्वीकृति प्रदान करने के बजाय पिछले बजट में उन्होंने अद्यतन सर्वे की स्वीकृति प्रदान की थी। मेरी जानकारी के अनुसार यह कार्य पूरा हो गया है। मैं इस बजट में उम्मीद करता था कि इस लाईन की स्वीकृति देकर निर्माण कार्य के लिये बजट में राशि प्रदान करेंगे लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं हुआ। मैं उनसे अनुरोध करना चाहूंगा कि उज्जैन-आगर-रामगंजमंडी-झालावाड़ रोड के लिये नई रेल लाइन की स्वीकृति प्रदान करें और इसके लिए सप्लीमेंटरी बजट में राशि स्वीकृत करें।

इसी प्रकार मैं माननीय रेल मंत्री जी का ध्यान एक और बात की ओर दिलाना चाहूंगा। कहने के लिये हिन्दुस्तान में २५० सुपर फास्ट ट्रेनें हैं जिन पर यात्रियों से सुपर फास्ट एक्सप्रैस का किराया लिया जा रहा है। रेल मंत्रालय ने स्वयं इस बात को स्वीकार किया है कि इन २५० सुपर फास्ट ट्रेनों में से केवल ७० ट्रेनें ऐसी हैं जो सुपर फास्ट मानदंड के अनुसार चलती है लेकिन यात्रियो से सभी २५० सुपर फास्ट ट्रेनों का किराया लिया जा रहा है। इसका सीधा अर्थ यह है कि १८० सुपर फास्ट ट्रेनें है जो सुपर फास्ट मानदंड के अनुसार नहीं चल रही है। मेरा निवेदन है कि या तो सभी सुपर फास्ट गाड़ियों को उनके मानदंड के अनुसार चलाया जाये वरना यात्रियों से सुपर फास्ट का किराया न लिया जाये।

सभापति जी, पश्चिम एक्सप्रेस, जिसका पुराना नाम डीलक्स एक्सप्रेस था, वर्षों से मुम्बई-अमृतसर के बीच में चल रही है। इसका मथुरा पहुंचने का समय सुबह ७.०० बजे है और दिल्ली पहुंचने का समय १०.३० बजे है। मथुरा से दिल्ली आने वाली सभी एक्सप्रेस ट्रेनें पौने दो घंटे में या दो घंटें में पहुंचती हैं लेकिन यह गाड़ी साढ़े तीन घंटे में पहुंचती है। इसे नई दिल्ली ९.०० बजे तक पहुंचने के लिये मैनें तथा डा. सत्य नारायण जटिया, डा. लक्ष्मी नारायण पाण्डेय, श्री कान्ति लाल भूरिया ने लिखा क्योंकि यह सुपर फास्ट ट्रेन है। एक एक घंटे का मार्जिन ४२ किलोमीटर की दूरी तय करने के लिये इस ट्रेन को दिया गया है। मेरा निवेदन है कि इसे ठीक किया जाये।

सभापति जी, ललितपुर-सिंगरौली रेल लाइन की स्वीकृति करने के लिये माननीय रेल मंत्री जी से निवेदन किया जा चुका है। उन्होंने पिछले बजट में घोषणा भी की थी। इस बार के रेल बजट में ४६ नई ट्रेनें चलाने की घोषणा की गई है लेकिन उनमें १४ ट्रेनें ऐसी हैं जिनके लिये आमान परिवर्तन किया जाना है। मुझे यह बताने की कृपा की जाये कि यह आमान परिवर्तन कब तक हो जायेगा। यदि इस वर्ष के लक्ष्य के अनुसार उन रेल लाइनों का आमान परिवर्तन नहीं किया जाता तो नई ट्रेनें कैसे चलेंगी? कृपया अधिकारियों से इस बात की जांच करायें कि यह आमान परिवर्तन कब तक हो सकेगा? उन्होंने कह दिया और मंत्री जी ने दस्तखत कर दिया, इस तरह काम कैसे होगा?

सभापति जी, माननीय रेल मंत्री जी कुल्हड़ के नाम पर बड़ा हल्ला किया करते थे कि कुल्लहड़ में चाय पीयेंगे, पानी पीयेंगे और रेलों में कुल्हड़ का उपयोग किया जायेगा। यहां तक कि आगरा स्टेशन पर काफा हल्ला किया गया लेकिन उन्हें देखना चाहिये कि आज कुल्हड़ में न चाय मिलती है और न पानी मिलता है। आज प्लास्टिक या कागज के गिलास में चाय मिल रही है। मेरा अनुभव है कि ऐसी घोषणा केवल उन्होंने ही नहीं की, ऐसी घोषणा श्री नीतीश कुमार जी ने भी की थी।

तत्कालीन रेल मंत्री, श्री जॉर्ज फनार्ंडीज ने भी घोषणा की थी कि रेलगाड़ियों में जो बैडरोल्स और चादरे हैं, वे सब खादी की बनी हुई खरीदेंगे। परंतु उस बात पर अमल नहीं किया जा रहा है। आप घोषणाएं तो करते हैं, लेकिन उन पर अमल का भी ध्यान रखें। आप जरा पता करके देख लीजिए कि कितने स्टेशनों पर कुल्हड़ों का उपयोग हो रहा है। वहां कोई कुल्हड़ों का उपयोग नहीं किया जा रहा है। मैं आपसे कहना चाहता हूं कि यदि आपको इस बात पर विश्वास न हो तो आप इसकी जांच करा लें।

मैं अपने क्षेत्र की दो-तीन समस्याओं की ओर आपका ध्यान आकर्षित करना चाहता हूं। मक्सी से गुना-बीना तक सिंगल रेल लाइन है। मैंने आपसे निवेदन किया है कि इसका दोहरीकरण तथा विद्युतीकरण करा दें। …( व्यवधान)

श्री लालू प्रसाद : जब आप ये सब बातें बोलेंगे, तो क्या आपके क्षेत्र में कोई काम होगा?

श्री थावरचंद गेहलोत : उज्जैन से इंदौर के बीच सिंगल लाइन है, इसका विद्युतीकरण नहीं हुआ है। मेरा आपसे अनुरोध है कि इसका दोहरीकरण तथा विद्युतीकरण करा दें, क्योंकि उज्जैन और इंदौर में आबादी और आवागमन का घनत्व सर्वाधिक है। इंदौर मध्य प्रदेश की व्यापारिक राजधानी के रूप में माना जाता है। वहां बहुत लोग आते-जाते हैं। वहां उज्जैन तक तो इलैक्टि्रक इंजन आता है, परंतु आगे इलैक्टि्रफिकेशन न होने के कारण इंजन चेंज होता है, जिसमें आधा-पौना घंटा लग जाता है, इसके कारण मालगाड़ियों को भी पिटना पड़ता है। रेलवे के और जनता के हित में आप बहुत चिंता करते हैं, आप ऐसा हमेशा कहकर प्रदर्शित करते हैं। हमारा अनुरोध है कि इनका विद्युतीकरण और दोहरीकरण करने का काम करें तो ज्यादा अच्छा रहेगा।

मेरा एक निवेदन यह भी है कि देवास, उज्जैन और नागदा में २१ और २४ डिब्बों वाली ट्रेनें आती हैं। उन गाड़ियों के १५ से १७ डिब्बे प्लेटफार्म पर रहते हैं, परंतु नौ-दस डिब्बे प्लेटफार्म के बाहर रहते हैं, जिसके कारण यात्रियों को उतरने में कठिनाई होती है। यात्रियों में से किसी का पांव टूटता है, किसी का पांव कटता है, किसी को चोट लगती है। इसलिए मेरा निवेदन है कि ऐसे स्टेशनों पर जहां २१ और २४ डिब्बों वाली ट्रेनें आती हैं, आप उनके प्लेटफार्मों की लम्बाई बढ़ाने की कृपा करेंगे तो बहुत अच्छा रहेगा। इस अवसर पर कहने के लिए तो बहुत कुछ है, परंतु आपने माल भाड़े में वृद्धि न करने की जो बात कही है, उसमें आपने माल यातायात के लिए श्रेणीकरण किया है। आपने १९० से १०० श्रेणियां बनाई हैं। यह पहले सौ से १९० के बीच में होती थीं। परंतु इसके कारण माल भाड़े में निश्चित रूप से वृद्धि होगी और इसका असर सारे देशवासियों पर होगा। कृपया इस पर भी आप पुनर्विचार कर लें। इस बजट में आपने जो-जो प्रावधान किये हैं, उनकी चरणबद्ध कार्य योजना बनाकर उसके अमल की आप स्वयं समीक्षा करें। अन्यथा कागजों में सारे पैसे का प्रावधान होगा और मौके पर खर्च नहीं होगा और फिर अगले साल अगले बजट में आप इसी प्रकार की बातें पढ़ेंगे। इसलिए मैं आपसे अनुरोध करता हूं कि बजट पर अमल करने के लिए चरणबद्ध कार्य योजना बनाकर आप स्वयं परीक्षण करें। यदि इसमें आपको समय-समय पर सांसदों की जरूरत महसूस हो तो उनका भी उपयोग किया जा सकता है। इसी के साथ मैं अपना वक्तव्य समाप्त करता हूं।

श्री वी.के. ठुम्मर (अमरेली) : माननीय सभापति महोदय, वर्ष २००५-२००६ की रेलवे की अनुपूरक अनुदान की मांगों पर चर्चा में भाग लेने के लिए मैं खड़ा हुआ हूं। रेल मंत्री, लालू जी, रेल राज्य मंत्री श्री रठवा जी और वेलु जी ने बहुत अच्छा रेल बजट प्रस्तुत किया है, इसके लिए मैं इनका अभिनंदन करने के लिए खड़ा हुआ हूं। बजट में रेल मंत्री जी द्वारा छोटी रेलों का बहुत ख्याल किया गया है, इसलिए मैं रेल मंत्री जी और यू.पी.ए. सरकार को सबसे ज्यादा धन्यवाद देना चाहता हूं। पहली बार गुजरात से चुने हुए श्री रठवा जी को रेल मंत्रालय में काम करने का मौका मिला है, जिसके लिए मैं सोनिया जी और प्रधान मंत्री जी को धन्यवाद देता हूं कि उन्होंने गुजरात की ओर इतना ध्यान दिया है। गुजरात की ओर रेलवे द्वारा ध्यान देने का इस सरकार ने बहुत बड़ा प्रयास किया है।

माननीय सभापति जी, अब मैं अपने संसदीय क्षेत्र की बात करूंगा। महुआ-राजुलाधोला रेलवे स्टेशन के लिए पिपावा पोर्ट के साथ जॉइंट वैन्चर किया गया था और गुड्ज़ ट्रेन के लिए बनाया गया था। एनडीए सरकार ने डिमांड की कि वहां रेल सेवा शुरू की जाए। तब उन्होंने कहा कि पिपावा पोर्ट के साथ जॉइंट वैन्चर केवल गुड्ज़ ट्रेन के लिए किया गया है, यहां पैसेन्जर ट्रेन शुरू नहीं हो सकती है। मैं सबसे ज्यादा धन्यवाद इसलिए देना चाहता हूं कि राठवा जी ने कश्मीर की ट्रेन शुरू करने के दूसरे दिन यह ट्रेन शुरू करके अमरेली की जनता को जो सुविधा दी है, यदि ऐसा काम और पांच साल हिन्दुस्तान में चलेगा तो देश का सही विकास हो सकता है।

माननीय सभापति जी, मैं दो-तीन बातें सौराष्ट्र के संबंध में कहना चाहता हूं। सौराष्ट्र में गायकवाड़ सरकार के समय, अंग्रेज़ों के समय में जब गवर्नर स्टेट था, तब भी वहां छोटी ट्रेन चलती थी। आज वहां इतने बड़े रेलवे स्टेशन मौजूद हैं जिनका उपयोग किया जा सकता है। छोटी रेलवे लाइन का गेज कनवर्शन करके यदि बड़ी लाइऩ चालू की जाए तो उससे भी फायदा हो सकता है। जैतलसर-दशा रेलवे लाइन जो मेरे सौराष्ट्र एरिया में लगती है, उसमें दो-तीन काम हो सकते हैं। इसके गेज कनवर्शन के काम के लिए मैंने एक प्रश्न भी दिया था और रेलवे की ओर से मुझे जवाब दिया गया है कि सर्वे का काम शुरू किया गया है। इसका सर्वे जल्दी से जल्दी पूरा किया जाए। जो रेलवे अंग्रेजों के समय पर चल रही थी, वह रेलवे स्टेशन इतने बढि़या बनाए हुए हैं कि उनका भी उपयोग किया जा सकता है। केवल गेज कनवर्शन करके वहां पैसेन्जर ट्रेन चलाई जाए तो गुजरात की तरक्की हो सकती है। इसके लिए रेलवे मंत्रालय इस ओर विशेष ध्यान दे।

गुजरात में सूरत आज डायमंड के लिए प्रसिद्ध है। टैक्सटाइल के क्षेत्र में सबसे बड़ा शहर आज सूरत बन गया है। उस रूट पर जो राजधानी एक्सप्रैस चलती थी, बहुत से लोगों ने उसका स्टापेज सूरत पर देने के लिए लिखा था लेकिन स्टापेज नहीं मिल रहा था। इस बार सूरत में राजधानी एक्सप्रैस का स्टापेज करके सूरत की ओर ध्यान देने का काम रेल मंत्रालय ने किया है। राजधानी एक्सप्रैस का पहले मेहसाणा में भी स्टापेज नहीं था। वह स्टापेज देकर भी गुजरात की जनता के लिए बहुत अच्छा काम रेल मंत्रालय ने किया है। इसके लिए मैं उनको धन्यवाद देना चाहता हूँ। बोटक-अहमदाबाद पर आज मीटर गेज की ट्रेन चल रही है। पिपावा ऐसा पोर्ट है जिसको ज्यादा से ज्यादा डैवलप किया जा सकता है। यदि पिपावा की ओर ध्यान दिया जाए तो वह दूसरा कांडला जैसा पोर्ट बन सकता है। यदि बोटा-अहमदाबाद मीटर गेज का कनवर्शन ब्राड गेज में किया जाए तो अहमदाबाद से पिपावा जुड़ सकता है। सोमनाथ मंदिर बहुत अच्छा मंदिर है और इस लोक सभा में मेरे सामने बैठने वाले मित्रों ने वहां से एक रैली भी निकाली थी। देश के लोगों का ध्यान खींचने के लिए सोमनाथ से एक रैली निकाली कि हम ऐसा करेंगे, लेकिन वहां के लिए एक ट्रेन भी नहीं दी गई। इस सरकार ने सोमनाथ का ब्राडगेज कनवर्शन करके वहां के लिए ट्रेन निकाली है। इसके लिए भी मैं मंत्री जी को धन्यवाद देना चाहता हूं।

महोदय, आंध्रा प्रदेश के हैदराबाद में गुजरात के करीब पांच लाख लोग रहते हैं। हैदराबाद से अहमदाबाद के लिए हफ्ते में तीन दिन ट्रेन चलती है। मैं राठवा जी और वेलू जी से कहूंगा कि हफ्ते में तीन दिन जो ट्रेन चलती है, उसको डेली किया जाए। अभी पिछले दिनों मैं हैदराबाद गया था। वहां के गुजरात समाज ने कहा कि आप ऐसा करा दें तो इससे बहुत सुविधा लोगों को हो सकती है। हैदराबाद और अमहदाबाद के बीच जो ट्रेन अभी हफ्ते में तीन दिन चलती है, उसको रोज़ चलाया जाए।

माननीय सभापति जी, रेलवे क्रासिंग के कई छोटे-छोटे प्रश्न हैं। इस मंत्रालय में तीनों मंत्रियों ने जो काम शुरू किया है, वह बहुत अच्छे तरीके से किया है। जहां-जहां छोटी-छोटी क्रासिंग की मांग संसद सदस्यों ने की है, उसके लिए भी कुछ न कुछ सुविधा दी जाए। मैं मंत्रालय का ध्यान इस ओर भी दिलाना चाहता हूं कि मुम्बई जैसे बड़े स्टेशन पर यदि कोई संसद सदस्य जाकर कहते हैं कि हमें यहां जाना है तो कोई ध्यान अधिकारियों की ओर से नहीं दिया जाता है। ब्यूरोक्रैट्स को भी थोड़ा सीधा करना पड़ेगा। मैं रेल मंत्री जी से कहूंगा कि जब संसद सदस्य वहां जाते हैं तो उनकी रिस्पैक्ट की जानी चाहिए।

संसद सदस्य से कैसे बात करनी चाहिए, उन्हें कहां बैठाना चाहिए, इसके लिए आवश्यक निर्देश जारी होने चाहिए । हम लोगों के लिए रेलवे स्टेशनों पर कमरा तक नहीं है । दिल्ली स्टेशन पर वेटिंग रूम अच्छा होना चाहिए । अच्छे वेटिंग रूम की सुविधा होनी चाहिए । जब बाहर से लोग दिल्ली में आते हैं तो भूमि के अनधिकृत अधिग्रहण के कारण लोगों को रेलवे स्टेशन से बाहर जाने में परेशानी का सामना करना पड़ता है । रिक्शे वाले और दूसरे लोगों द्वारा गलत ढंग से भूमि का अधिग्रहण किया गया है जहां से पैदल बाहर जाना भी मुश्किल है । इस समस्या को दूर करने के लिए भी इंतजाम करना चाहिए जिससे यात्री जल्दी-से-जल्दी स्टेशन से बाहर निकल सकें । लोग बहुत उम्मीद से दिल्ली में आते हैं लेकिन जब स्टेशन से बाहर निकलते हैं तो उन्हें काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है । रेल मंत्रालय को लोगों को सुविधा देने के लिए काम करना चाहिए । रेल मंत्री जी ने राजधानी ट्रेन को सभी राज्यों में चलाने के लिए जो काम किए हैं उसके लिए मैं उनका अभिनंदन करता हूं।

मेरे संसदीय क्षेत्र में श्री राठवा जी ने कम्प्यूटर द्वारा बुकिंग का नया ट्रेंड शुरू किया है वह राजुलाधोला और सार्वकुंडला में भी शुरू किया जाए । महुआ-राजुलाधोला में भी शुरू किया जाना चाहिए । श्री राठवा जी जो स्पेशल ट्रेन लेकर आए थे उस पर लोगों ने बहुत खुशी जाहिए की है । ये ट्रेन बांद्रा के साथ, दिल्ली के साथ वेलगाना और मैसाना के साथ जोड़ी जानी चाहिए । इसके बीच में ब्राड गेज लाइन बदलने का काम चल रहा है वह अमरेली से दिल्ली तक जोड़ी जाए । रेल मंत्री जी ने बहुत अच्छा बजट पेश किया है और गुजरात के लिए यूपीए सरकार ने और श्रीमती सोनिया जी ने सोचा है । पहली बार गुजरात की ओर ध्यान दिया गया है । मैं श्रीमती सोनिया गांधी और माननीय प्रधानमंत्री जी को अभिनंदन देना चाहता हूं कि उन्होंने अच्छा रेल बजट दिया है ।

सभापति महोदय : श्री रघुनाथ झा । पहले आप अपनी सीट पर चले जाइए ।

श्री रघुनाथ झा (बेतिया) : महोदय, विशेष परिस्थिति में बोलने की इजाजत दे दें ।

MR. CHAIRMAN : It is not a precedent, आप बोल सकते हैं ।

श्री रघुनाथ झा : सभापति महोदय, मैं रेल मंत्री जी द्वारा प्रस्तुत इस बजट का समर्थन करता हूं और मैं दो-चार बिंदुओं पर निवेदन करना चाहता हूं । रेल मंत्री जी ने दो बजट अपनी कार्य अवधि में पेश किए हैं उसमें सबसे अच्छा काम किया है वह यह है कि उन्होंने न तो रेल किराया बढ़ाया है और न ही माल भाड़े में वृद्धि की है । इसके बावजूद भी रेलवे की आमदनी बढ़ी है, यह सबसे प्रशंसनीय काम है । इसके लिए हम रेल मंत्री जी को बधाई देना चाहते हैं । महोदय हमारे बिहार में एक सप्तक्रांति ट्रेन मुजफ्फर पुर से दिल्ली के बीच में चलती है । पटना बिहार की राजधानी है । नार्थ बिहार के अंदरूनी इलाके से पटना का कोई कनेक्शन नहीं है । हम चाहते हैं कि पटना से सोनपुर तक ट्रेन को आगे बढ़ा दिया जाए । सोनपुर तक ट्रेन आए और वहीं से जाए तो इससे नार्थ बिहार के लोगों को फायदा मिल सकता है । आप बस वालों से भी बात कर लो । पटना के टिकट पर जो रेल चार्ज करे उसमें बस का किराया भी हो । पटना, हाजीपुर या सोनपुर के लिए एक घंटा सुबह में ट्रेन का समय बढ़ा दिया जाए ।

दूसरी बात यह है कि, रेलवे के पदाधिकारी दर्शक दीर्घा में बैठे हुए हैं, हम चाहते हैं कि नार्मल पीरियड में २५०-३०० लोगों की द्वितीय श्रेणी या तृतीय श्रेणी में वेटिंग चलती है ।

महोदय, पीक सीजन में ७००-८०० तक वेटिंग लिस्ट हो जाती है। हम लोगों ने पहले भी माननीय मंत्री जी को लिखा और अब फिर प्रार्थना करना चाहते हैं कि इसमें सैकिंड ए.सी. के २ डिब्बे, थर्ड ए.सी. के दो डिब्बे और जनरल क्लास के चार डिब्बे जोड़ दिए जाएं, तो उस इलाके के लोगों को बहुत फायदा होगा।

महोदय, दूसरी बात यह है कि हमारे यहां पटना से तीन राजधानी एक्सप्रेस रेलगाड़ियां चलती हैं। पटना राजधानी सप्ताह में दो दिन चलती है, दो दिन कोलकाता राजधानी चलती है और तीन दिन गुवाहाटी राजधानी चलती है। गुवाहाटी राजधानी गाड़ी पटना होकर आती है और ऊधर हाजीपुर होकर नॉर्थ बिहार में चली जाती है। हम निवेदन करना चाहते हैं कि पटना राजधानी को डेली कर दीजिए। वह डेली दिल्ली से पटना और पटना से दिल्ली तक आए-जाए। गुवाहाटी राजधानी उधर जाती है, वह पांच दिन छपरा और बलिया हो कर जाती है, जाए, लेकिन दो दिन के लिए नॉर्थ बिहार के लोगों को भी राजधानी के दर्शन करा दीजिए और दो दिन वह मुजफ्फरपुर और गोरखपुर होकर चलाई जाए। इस प्रकार से हम किसी नई राजधानी को चलाने की मांग नहीं कर रहे हैं बल्कि जो राजधानी पहले से चल रही है, उन्हीं में थोड़ी घटाबढ़ी कर के जैसा हमने सुझाव दिया है, वैसा कर दीजिए। इससे बिहार की जनता को बहुत सहूलियत हो जाएगी।

महोदय, हमारे यहां उत्तर बिहार और दक्षिण बिहार का रेल से कोई मेजर कनैक्शन नहीं है। उधर मोकामा बहुत दूर हो जाता है। पटना में गंगा पर ब्रिज बन रहा है। मुंगेर में गंगा पर ब्रिज बन रहा है, लेकिन इनकी गति बहुत धीमी है। यदि पैसे की कमी है, तो पैसे की व्यवस्था की जाए और इन दोनों पुलों का निर्माण समय-सीमा के अंदर किया जाए। इससे हमारे इलाके को बहुत लाभ होगा।

महोदय, तीसरी बात मैं कहना चाहता हूं कि जयनगर, दरभंगा, नरकटियागंज छोटी लाइन को बड़ी लाइन १० वर्षो से अधिक से बनाया जा रहा है । दरभंगा ब्राडगेज रेल लाइन है वहां से कहीं भी जाया जा सकता है। इसी प्रकार नरकटियागंज भी ब्रॉडगेज लाइन है। वहां से कहीं भी जाया जा सकता है, लेकिन बीच में यह छोटा सा हिस्सा छोटी रेल लाइन का है। यह बीच का मिसिंग लिंक का हिस्सा भी, यदि ब्रॉडगेज लाइन कर दिया जाए, तो यह बहुत बड़ी सुविधा हमारे इलाके के लोगों को मिल सकती है। यह छोटी लाइन बन तो रही है, लेकिन बहुत धीमी गति से बन रही है। जब श्री राम विलास पासवान, रेल मंत्री थे, तब से यह लाइन बन रही है। तब से अब १०-११ साल हो चुके हैं, लेकिन जयनगर से दरभंगा और दरभंगा से सीतामढ़ी तक ही मिट्टी का कार्य भी पूरा नहीं हुआ है। पुल-पुलियों के निर्माण का कार्य भी पूरा नहीं हुआ है। यदि इसी गति से इसका निर्माण कार्य चलता रहा, तो इसमें २०-२५ वर्ष लग जाएंगे। अभी तक १०-११ वर्ष तो लग चुके हैं। यदि २०-२५ वर्ष बाद आप उसे पूरा भी करेंगे, तो उसका विशेष फायदा नहीं होगा, ऊपर से कास्ट भी बहुत बढ़ जाएगी। इसलिए हमारी प्रार्थना है कि उसका निर्माण कार्य समय-सीमा के अंदर पूरा किया जाए। इसी प्रकार से ३८-४० किलोमीटर की दूरी मुजफ्फरपुर और सीतामढ़ी के बीच में है। वहां भी नई रेल लाइन टाइम पर नहीं बन रही है। इसलिए मेरा निवेदन है कि उसे भी टाइम पर बनाया जाए। इसे भी शुरू हुए १० वर्षों से अधिक हो गए।

महोदय, हमारे यहां रेल-ओवर ब्रिज पहले से स्वीकृत हैं। सुगौली, रक्सौल, मोतीहारी, बेतिया, नरकटियागंज, बगहा की स्वीकृति और घोषणा हो चुकी है। बिहार में कुल ३२ रेल ओवर ब्रिज बनने हैं, लेकिन मंत्री महोदय ने अभी जिन दो का शिलान्यास किया उनका भी काम चालू नहीं हुआ है। अभी मंत्री जी ने रक्सौल में एक शिलान्यास किया, वह भी शुरू नहीं हुआ है। सुगौली एक इम्पौर्टेंट जगह है। यहां अंग्रेजों के जमाने में संधि हुई थी। इसलिए वह बहुत महत्वपूर्ण स्थान है, लेकिन वहां भी ओवर ब्रिज नहीं है। इसलिए वहां घंटा-डेढ़ घंटा जाम लगा रहता है। वहां दो एन.एच. है। वहां दो-दो ट्रेनें आती हैं। एक रक्सौल साइट से और दूसरी मोतीहारी साइड से, लेकिन रेल ओवर ब्रिज नहीं होने के कारण डेढ़-दो घंटे जाम प्राय: लगा रहता है। यही हालत नरकटियागंज की है। सुगौली एक ऐतिहासिक स्थान है। वहां संधि हुई थी।

उसका नाम ‘सुगौली’ है, लेकिन रेलवे ने उसका नाम ‘सगौली’ लिखा हुआ है। यदि इस सगौली को सुगौली कर दिया जाए, तो ठीक रहेगा। वहां के लोगों की यह भावना है कि सगौली को सुगौली किया जाए। रकसौल से मुजफ्फरपुर एंव हाजीपुर तक दो गाडियां मात्र आधा घंटा के अन्दर भागती हैं। जो गाडी रकसौल से मुजफरपुर तक जाती है उसका चलने का समय ६ बजे प्रात: है। इसे ८ बजे रकसौल से चलाएँ तो मोतिहारी जिला मुख्यालय में आने जाने में आम जनता को सहुलियत मिलेगी। इतना ही कहकर मैं अपनी बात समाप्त करता हूं और आपका धन्यवाद करता हूं कि आपने हमें मौका दिया।

श्री ब्रजेश पाठक (उन्नाव) : माननीय सभापति महोदय, रेल बजट पर कटौती प्रस्ताव पर चर्चा में भाग लेने के लिए आपने मुझे इतने महत्वपूर्ण विषय पर बोलने का मौका दिया इसके लिए मैं आपको बहुजन समाजवादी पार्टी की तरफ से धन्यवाद ज्ञापित करता हूं। माननीय रेल मंत्री जी दो बजट प्रस्तुत कर चुके हैं।

बहुजन समाज पार्टी की तरफ से मैं उन्हें हार्दिक धन्यवाद देता हूँ कि उन्होंने न तो मालभाड़ा बढ़ाया और न ही यात्री किरायों में वृद्धि की है। महोदय, जब माननीय मंत्री जी ने अपना पहला रेल बजट प्रस्तुत किया था तो काफी बढ़ा-चढ़ाकर बातें कही थीं। उसमें मटठा, दूध, खादी और कुल्हड़ का जिक्र किया था। किन्तु इस बात को एक साल बीत चुका है लेकिन न कहीं मटठा नजर आता है, न ही कुल्हड़, खादी की बात तो जाने दीजिए, हम जिस रेल में यात्रा करते हैं, उसमें जो चादरें दी जाती हैं, उनकी क्या हालत है, यह किसी से छिपी नहीं है। गंदी चादरों को दोबारा पैक करके दे दिया जाता है। माननीय रेल मंत्री जी छात्र राजनीति से निकले हुए हैं और छात्र नेता कभी झूठ नहीं बोलता है, बेशक उस काम के करने में देर हो सकती है। पटना विश्वविद्यालय से निकलकर माननीय रेल मंत्री जी ने यह मुकाम हासिल किया है। मैं उनसे अपील करना चाहता हूँ कि उन्होंने जो घोषणाएं अपने बजट में की हैं उनको सूचारू रूप से पूरा करें। दूसरे अन्य रेल मंत्रियों की तरह साबित न हों। उन्होंने जो बातें कही है, चाहे रेलवे में भ्रष्टाचार के बारे में या जो नौकरशाह समय से काम नहीं करते हैं, चाहे खन्ना समति की सिफारिशें रही हों। यदि खन्ना समति की समति की सिफारिशें समय से लागू की जातीं तो दुर्घटनाएं रोकी जा सकती थीं। अभी हमारे माननीय श्री विनोद खन्ना जी के निर्वाचन क्षेत्र में दुर्घटना हुई थी। चाहे रेलवे की सम्पत्ति का सवाल है। रेलवे सम्पत्ति पर अभी भी माफिया लोग काबिज हैं। इसके बारे में मैंने कई बार रेलवे मंत्री को लखित में बताया था और आदेश भी हुआ था, लेकिन लखनऊ में जो अधिकारी बैठे हुए हैं या रेलवे बोर्ड में जो अधिकारी बैठे हैं, लगता है कि वे कान में तेल डालकर बैठे है। माफिया लोग रेलवे की जमीन पर काम्प्लैक्स बंदूक के बल पर बना चुके हैं, लेकिन उसको खाली कराने के लिए किसी को फुर्सत नहीं है। वहां के डीआरएम ने रिपोर्ट दी कि सब कुछ नियमानुसार किया जा रहा है। आपको वदित होगा, मैंने अपने शिकायती पत्र में यह भी बताया था कि जिन लोगों ने रेलवे की जमीन पर या कालोनी पर कब्जा किया हुआ है उनका मतदाता सूची में नाम है। उनके यहां टेलीफोन कनैक्शन लगा हुआ है। मैंने पूछा कि वे कैसे रह रहे हैं, तो हमको सरकार की ओर से जवाब दिया जाता है कि उनका नाम निर्वाचक नामावली में किस प्रकार से आया इसके लिए इलैक्शन आफिस को लिख दिया गया है। रेलवे का आरक्षण केन्द्र चार बाग में बना हुआ है। वहां पर बिजली की निर्बाद्ध आपूर्ति के लिए जनरेटर लगाया गया है। लेकिन उस जनरेटर का एक मोटा तार उनके यहां भी लगा हुआ है। इन अवैध रूप से रहने वाले लोगों के यहां पुलिस के लिए शेड बना हुआ है। पूरी कालोनी अवैध कब्जे में है, केवल चार बाग को छोड़कर। मैं इसकी लखित सूचना तीनों मंत्रियों को कई बार दे चुका हूँ। लेकिन कहीं कोई सुनवाई नहीं हुई। मुझे तो ऐसा लगता है कि रेल विभाग के अधिकारी रेलवे की सम्पत्ति को लुटवाने में पूरी तरह से सक्रिय हैं। कहीं किसी तरह का प्रयास नहीं किया जा रहा है।

हमारे जनपद उन्नाव में चैतपुर रेलवे स्टेशन है। वहां पर पिछले १५ दिन से ट्रैक की मरम्मत का काम चल रहा था। ढाई फीट की रेलवे ट्रैक गायब पायी गई। शाम को सात-साढ़े सात बजे का समय था सात-आठ साल के बच्चों ने खेलते हुए देखा की रेल की पटरियां वहां पर नहीं है। उन लोगों ने अपनी सूझबूझ का परिचय दिया और घास-फूस जलाकर रेलवे ट्रैक पर आग लगा दी। ड्राइवर ने उसको देखा गाड़ी रूक गई। उसके बाद उसकी मरम्मत की गई। तब तीन-चार घण्टे के बाद पुन: वह ट्रैक चालू हो सका। मैं मौके पर गया और उन बच्चों को सम्मानित किया। लेकिन रेलवे का कोई अधिकारी या जिलाधिकारी मौके पर नहीं आया। मैंने जब डीआरएम से बात की तो उन्होंने कहा कि अगर उनको सम्मानित किया गया तो ऐसी घटनाएं बार-बार होंगी और लोग हम से क्लेम करेंगे। महोदय, हिन्दुस्तान के लोग कैसे बचेंगे। वे बच्चे गरीब, दलित घर में पैदा हुए हैं। वे पांचों बच्चे पासी समाज के हैं। लेकिन उनके घर तक कोई अधिकारी नहीं गया क्योंकि वे दलित बिरादरी से हैं। मैं आपके माध्यम से अपील करना चाहता हूँ कि इस पूरे प्रकरण की जांच करवायी जाए। वहां की पटरियां गायब हुईं या जानबूझकर गायब करवायी गयीं। इस पूरी घटना की जांच करवायी जानी चाहिए। इन बच्चों को वीरता पुरस्कार के लिए नामित किया जाना चाहिए। जो पुरस्कार बच्चों को २६ जनवरी को राष्ट्रपति जी के द्वारा दिया जाता है, उनको उसके लिए नामित किया जाए। मैं आपसे भी आग्रह करता हूँ कि उनको रिकमन्ड करके सम्मानित किया जाए। यह भूल-चूक किन लोगों के माध्यम से हुई? उन लोगों को दंडित किया जाना चाहिए।

समय-समय पर जब भी रेल विभाग की चर्चा होती है, हमने उन्नाव जनपद मुख्यालय पर वभिन्न ट्रेनों का ठहराव देने की मांग की है। वहां पर कई एक्सप्रैस गाड़ियां बगैर रुके चली जाती हैं चाहे पुष्पक एक्सप्रैस हो, गोमती एक्सप्रैस हो, मरूधर एक्सप्रैस हो, लखनऊ-भोपाल एक्सप्रैस हो या चेन्नई एक्सप्रैस हो।, हमने ऐसी मांग की थी। छोटे-छोटे स्टेशनों पर ये ट्रेन रुकती है लेकिन उन्नाव जो कि उत्तर प्रदेश का जनपद मुख्यालय है, कानपुर जो औद्योगिक राजधानी है और लखनऊ उत्तर प्रदेश की राजधानी है, उन दोनों के बीच स्थित है, वहा एक-दो मिनट का स्टापेज देने से आपका कोई नुकसान होने वाला नहीं है। इससे आपके राजस्व में वृद्धि ही होगी। अभी कहा जा रहा है कि प्लेटफार्म नम्बर दो पर सिगनल का काम कम्प्लीट है लेकिन प्लेटफार्म नम्बर एक पर कम्प्लीट नहीं है। इस बारे में रेल मंत्री जी ने भी लिखा था कि ट्रेन रोकी जाये लेकिन रेलवे के अधिकारीगण रेल मंत्री जी के आदेशों का पालन नहीं कर रहे। वे कान में तेल डालकर बैठे हुए हैं क्योंकि हमारे अंदर उन अधिकारियों से काम लेने की क्षमता नहीं है।

मैं आपके माध्यम से मंत्री महोदय को आगाह करूंगा कि आप अपने अधिकारियों पर कसौटी कसिये और उन्हें कहिये कि जो आदेश दिया जाये, उसका पालन होना चाहिए। हमारे यहां अचलगंज स्टेशन बहुत पुराना स्टेशन है। वहां २०-२५ साल पहले चोरी-डकैती हुई थी जिसकी वजह से वह स्टेशन बंद कर दिया गया। मतलब फोड़े का इलाज यह है कि टांग को काटकर निकाल दीजिए। अगर टांग में फोड़ा है तो टांग नहीं निकाली जानी चाहिए। अगर ट्रेन में चोरी-डकैती हुई है तो वहां पर सुरक्षा के बंदोबस्त किये जाने चाहिए। वहां स्टेशन को बंद कर दिया गया। वहां पर रेलवे का कोई कर्मचारी नहीं बैठता।

हमारा एक दूसरा महत्वपूर्ण सवाल है कि कानपुर से बालामऊ एक पैसेंजर गाड़ी अंग्रेजों के जमाने से चलती है। उसकी स्पीड इतनी कम है कि साइकिल वाला भी उसे क्रॉस कर जाता है। हमने कई बार रेलवे को लखित में अनुरोध किया कि कानपुर से बालामऊ एक्सप्रैस ट्रेन की स्पीड बढ़ाई जाये ताकि साइकिल वाले उसे क्रॉस न कर सकें। इसी तरह एक ट्रेन आबिदा एक्सप्रैस चलाई गयी जो कानपुर से चलकर बालामऊ, सीतापुर होते हुए दिल्ली को जाती थी लेकिन हिन्दुस्तान का दुर्भाग्य है कि बड़े नेता लोग उसे खींचकर अपनी ओर ले गये। हमारा जो ट्रैक है, वह बगैर एक्सप्रैस ट्रेन के रह गया। मैं आपसे अनुरोध करना चाहता हूं कि उस ट्रेक पर एक एक्सप्रैस गाड़ी चलाई जाये चाहे आबिदा एक्सप्रैस चलाई जाये या कोई नयी गाड़ी चलाई जाये। अंग्रेजों के जमाने में हरदोई उन्नाव और कानपुर को जोड़ने के लिए रेलवे ट्रेक था। अभी कानपुर उन्नाव और माधोगंज तक रेलवे ट्रेक है लेकिन माधोगंज से हरदोई तक जोड़ने के लिए रेलवे ट्रैक कहां चला गया, ट्रेन कहां चली गयी, किसी को पता नहीं जबकि रेलवे जमीन है, रेलवे ट्रैक है। मैं आपके माध्यम से मंत्री जी से अनुरोध करना चाहूंगा कि हरदोई मुख्यालय को जोड़ने के लिए एक रेलवे ट्रैक डाला जाये और एक ट्रेन चलाई जाये।

हमारे गृह राज्य मंत्री जी सदन में नहीं है। स्टेशन उन्नाव की सरजमीं पर है। उसका नाम कानपुर पुल बायां किनारा है जबकि वह शुकलागंज में है। उसका जनपद मुख्यालय उन्नाव है और नाम कानपुर का है। मैं आपके माध्यम से रेल मंत्री जी से आग्रह करना चाहता हूं कि शुकलागंज जो स्टेशन है, उसका नाम कानपुर पुल बायां किनारा काटकर पुन: शुकलागंज स्थापित किया जाये जो उन्नाव जनपद की धड़कन है। मंत्री जी इस समय सदन में नहीं हैं। हमने ढेर सारी कटौती प्रस्ताव रखे हैं। रेल विभाग की जो कमियां हैं, उनको मैंने आपके सामने रखा है। उऩ पर आप विचार कीजिए, गहन अध्ययन कीजिए। अगर मैं कहीं गलत हूं तो मैं आपका साथ देने के लिए तैयार हैं। मैं सरकार के समर्थन में हूं। लेकिन हम चाहते हैं कि अधिकारियों की गलत नीतियों का प्रभाव हमारी सरकार पर न पड़ने पाये। सरकार को बचाने का प्रयास होना चाहिए। सरकार की इज्जत, सरकार की प्रतिष्ठा को धूमिल करने वालों को दंडित किये जाने का काम आप लोगों को करना चाहिए। मैं इन्हीं बातों के साथ अपनी बात समाप्त करना चाहता हूं और आपसे पुन आग्रह करता हूं कि आप रेल विभाग के अधिकारियों को निर्देश दें कि उन्नाव जनपद मुख्यालय पर हमने जिन ट्रेनों को रोके जाने की मांग की है, रेलवे की सम्पत्ति पर जो अवैध कब्जे हैं तथा लालू जी ने जो कुल्हड़, खादी, दूध की बात की है, वह सब कहां चली गयी। मंत्री जी ने रेल बजट सदन में रखते समय एक महत्वपूर्ण बात कही थी कि रेलवे ट्रक पर छितरायेगा नहीं। मेरा कहना है कि छितराने की व्यवस्था आबाद रूप से चल रही है। मैं उचित नहीं समझता कि सदन में इसे स्पष्ट किया जाये कि वह छितारायेगा नहीं। वह छितराता है उसे रोका जाये या लालू जी कहें कि वह व्यवस्था पूरी नहीं हो सकती। इन्हीं शब्दों के साथ मैं अपनी बात समाप्त करता हूं और विश्वास दिलाता हूं सरकार को, माननीय रेल मंत्री को कि बहुजन समाज पार्टी उनके हर बढ़ते कदम के साथ है, उनकी मदद के लिए है।

SHRI A. KRISHNASWAMY (SRIPERUMBUDUR): Sir, every year we are participating in the discussion on the Railway Budget and the Demands for Grants for Railways. For the last six years, I have been watching here the speakers who are participating in the discussion on the Railway Budget but I do not think their effort has been fulfilled.

Sir, I just want to mention two or three points briefly about our long-pending demands and about Salem Division of Tamil Nadu. For the past 50 years, after the bifurcation of the State, our people have been agitating to have a divisional office in Salem which is very much an industrial and an agricultural area. Our people from eight districts in Tamil Nadu have to go to Palghat district in the State of Kerala. We met our hon. Railway Minister, Shri Lalu Prasad and we met Veluji also regarding this. Before the Budget, they told that our need would be fulfilled. But we did not get any response from the Treasury Benches. Our hon. Leaders, Dr. Kalignar and Dr. Ayya Ramadoss have also written a letter to the Railway Minister to have a Railway Division in Salem. Hence, we request the hon. Minister, though our hon. Minister of State for Railways is from our State, that he may look into the matter and expedite the creation of Salem Division.

Salem-Karur new line should be taken up speedily on a fast track with adequate allotment of fund. This new line is highly remunerative with rate of return exceeding 14 per cent. So, I request the hon. Minister to bring a new line from Salem to Karur.

Then I request the restoration of Mettur-Salem line which has been closed for passenger traffic about 15 years back. This area is developing fast. So many colleges and so many factories are coming there. So, I request the hon. Minister to restore the Mettur-Salem new line. Also, I request electrification of Trichy and Madurai sections and conversion of Dindigul-Madurai section from meter-gauge to broad-gauge.

Tamil Nadu is one of the States which is making so much of profits in the Railway Department. Also, it has got so many kilometres of meter-gauges. These should be converted into broad-gauge. Not only Dindigul-Madurai but also Villupuram to Katpadi, Villupuram to Kumbakonam and Tirunelveli to Thiruchendur sections should be converted into broad-gauge from meter-gauge.

One thing I want to say in this House is that this year our State has got only Rs.450 crore. Our State is one of the States which has formed the Government at the Centre. We have got 40 MPs out of 40 seats from Tamil Nadu and Pondicherry. That is the reason to have a UPA Government here. But our State has been ignored and only Rs.400 crore has been sanctioned in the Railway Budget. We seek from the Ministry that if Rs.2,500 crore has been sanctioned to our State, 50 per cent of the work will be fulfilled in our State. Only four or five years back, the Ministry of Surface Transport started laying roads from the Golden Quadrilateral Scheme from North to South and from East to West. They had done a miraculous job. They had finished all the work very speedily. People are very happy. But for the past 100 years, we are fighting to have bridges. We are agitating to have basic amenities in the railways. Even for providing drinking water in the railway platform, Member of Parliament has to speak on the floor of the House. The basic amenities are very poor. They had only laid the shelter now. In the past two or three years, they had made the shelter but public announcement system has not been placed. Most of the railway platforms are under low level. So accident occurs and so many young and old men used to lose their lives.

Particularly, in my constituency at Senchi Panapakkam-Sevvapet, year after year, when they put railway track, automatically, the platform goes down. So, the platform should be raised. In this regard, so many times, I have written letters to the General Manager, and to the Ministry but no action has been taken. The hon. Minister also visited my constituency, particularly the Annanoor. In that area, for two days, the lift bearer gate was not lifted. There was some technical fault. So many vehicles were not able to move from this side to that side. I spoke to a Railway official, Dr. D. R. Jayaraman, and informed him about the fault and the situation there. But no action was taken. There is no respect of the MPs before the Railway officers. This is very poor.

For the past one year, no meeting with the MPs has been conducted. The Railway Department used to conduct such meetings wherein they received grievances from the MPs. They used to rectify those grievances. For the past one year, I am waiting for that meeting. At least in Southern Railway, they have not conducted any meeting. The Minister should look into this.

In Chennai, there is a MRTS Scheme. From my college days, I am watching this scheme. It is progressing very slowly. Right now, it is from Chennai Beach to Velachery. For the past 15 to 20 years, they are working on this Scheme. Immediately, funds should be sanctioned for this Scheme. This should be connected to the St. Thomas Mount. Then only we can clear the traffic. From St. Thomas Mount also, there was a scheme to connect Villivakkam. If it comes through one circle, we can clear the maximum traffic. The Minister has to take keen interest in this MRTS Scheme.

In the Budgets 2004-05 and 2005-06, for Tamil Nadu, no ROB and RUB has been sanctioned. Whatever were sanctioned 3 or 4 years back, have not been constructed. Till today, they have not started any work. More than 20 to 30 bridges are yet to be constructed.

MR. CHAIRMAN : Please conclude.

SHRI A. KRISHNASWAMY : A lot of injustice is caused to Tamil Nadu for the past 2 to 3 years by not sanctioning any ROB and RUB to the State. Even if it is sanctioned, for every year, they sanction only Rs. 50 lakh or Rs. 30 lakh only. The estimated cost of a bridge is approximately Rs.12 crore or Rs. 15 crore. What is the use of sanctioning Rs. 50 lakh or Rs. 40 lakh? There should be some application of mind while sanctioning the amount.

When the Minister of Surface Transport can construct 8 kms. of road per day, why cannot the Railway do the same? Hon. Minister of Finance has proudly spoken about this in his Budget speech. Shri T. R. Baalu, the hon. Minister has also spoken about their performance.

15.58 hrs. [Dr. Laxminarayan Pandey in the Chair)] I urge the hon. Minister to concentrate on the conversion of metre gauge to broad gauge in Tamil Nadu. He should also concentrate on doubling the Chennai-Arakkonam section, which is a very important section. It leads to Bangalore and Mumbai. Till Chennai Tiruvallur, we have a four track. Arakkonam comes under the constituency of the hon. Minister. I request the Minister to take keen interest in putting third and fourth track, which will clear the traffic in the suburban area. I also request him to have a Railway Station in Nemlicherry. It is a long pending demand.

I would also request to have a stoppage at Avadi or at least at Tiruvallur for the express and passenger trains so that the passengers may get down at Avadi and to go to the city. By doing that, traffic congestion can be minimised. So, I request the hon. Minister to give more funds to our State which will be beneficial for all round development.

   

16.00 hrs. SHRI KHAGEN DAS (TRIPURA-WEST): Mr. Chairman, Sir, I rise to speak in support of the Railway Budget, 2005-06 but I am constrained to say that our reaction to the proposals in the Budget is not an unmixed one.

While broadly welcoming the Budget, I could say that it lacks any innovative measures to address the requirements of the railway system. The lack of adequate budgetary support would result in a failure to address the concerns and aspirations of a large number of regions and the people of the country.

It was also feared that the rationalisation of freight would only lead to further inflation but in spite of that the new initiatives attempted by the hon. Minister of Railways are commendable.

Due to paucity of time, I am confining myself to the conditions of the North-Eastern States. All hon. Members of the House know very well that the North-Eastern region has for long been neglected, for years together. The region is isolated from the rest of the country. Even after 57 years of Independence, six of the seven State capitals of the region are not connected by rail. So, I strongly demand allocation of more funds so that the various on-going projects could be completed, survey for new projects could be taken up, new railway lines could be laid, existing single lines could be converted into double lines, gauge conversion could be speeded up and renewal of tracks and electrification could be undertaken.

The people of the North-Eastern States are dependent on railways. All the essential commodities and construction materials are to be brought from different parts of the country. So, it is urgently necessary to provide adequate rakes for movement of these essential commodities and materials.

Coming to the State of Tripura in particular, I am constrained to mention that the progress of the on-going Kumarghat-Agartala project is not up to the expectation. Here, I would like to thank the hon. Prime Minister for declaring three projects, namely, Lumding-Silchar gauge conversion work, Kumarghat-Agartala project and Jiribum-Imphal project, as national projects and making provision for additional funding. I would request the hon. Minister of Railways to direct the appropriate authorities to ensure timely completion of these projects. The milestone schedule submitted to the hon. Prime Minister is not being strictly adhered to.

In the Kumarghat-Agartala project, work for one tunnel, namely, Tunnel No. 2, is yet to be started. This might delay the project. This has to be seriously looked into. The gauge conversion survey between Kumarghat and Badarpur has been completed and the report is pending with the Railway Board awaiting sanction of work since 1999. In 1998-99, the Agartala-Subroom new BG line survey had been sanctioned.

For economic development of the region and for easy connectivity to Chittagong Port in Bangladesh, preliminary survey has been completed. Updating of survey has also been probably completed. It is strongly demanded that works relating to Agartala-Subroom Project should be sanctioned and funds should be allocated for the year 2005-06. Finally, I would urge the Railway Minister to address the important issues raised by me and take suitable measures in the interest of the people of North-Eastern Region and the country as a whole.

With these words, I support the Demands for Grants for 2005-06.

श्री अविनाश राय खन्ना (होशियारपुर) : सभापति महोदय, मैं कम से कम तीन बार रेलवे के ऊपर बोल चुका हूं। मैंने कुछ सुझाव माननीय रेल मंत्री जी को दिये थे जिसमें पैसा कम और काम ज्यादा तथा लोगों को भी फायदा हो सकता है, परन्तु पता नहीं किन कारणों से रेलवे का ध्यान मेरे उन सुझावों की ओर नहीं गया है। मैं माननीय रेल मंत्री जी को एक बात के लिए धन्यवाद देना चाहता हूं कि जो स्वर्ण-शताब्दी अमृतसर से दिल्ली तक आती थी उसमें फगवाड़ा से चार एमपीज भी चड़ते थे, उसका ठहराव आपने फगवाड़ा में किया, उसके लिए धन्यवाद। लेकिन जो शताब्दी अमृतसर से दिल्ली के लिए आती है और दिल्ली से वापस अमृतसर जाती है उसमें कम से सम ८-९ सांसद आते हैं। दिल्ली पहुंचते-पहुंचते ग्यारह सवा ग्यारह बज जाते हैं, जिसके कारण सेशन में पहुंचने में काफी देरी हो जाती है। अगर गाड़ी के पहुंचने का समय १५-२० मिनट कम कर दिया जाए तो हम लोग रात में आने के बजाए सुबह उससे आ सकते हैं और लोगों को भी फायदा पहुंच सकता है। दूसरी बात यह है कि जिस भी स्टेशन पर गाड़ी रुकती है तो उसके बारे में, उसके इतिहास के बारे में एनाउंसमेंट होती है। सरहंद शहर का देश के इतिहास में बहुत महत्वपूर्ण स्थान है। दसवें गुरू साहब के दो शहजादे वहां जिंदा दीवार में चिनवा दिये गये थे। स्टेशन आने पर केवल इतना कहा जाता है कि सरहंद आ गया, जो यात्री नये गाड़ी में चढ़े हैं उनका धन्यवाद। सरहंद की हिस्टरी के बारे में कुछ चर्चा हो जो तो रेलवे को नुकसान भी होने वाला नहीं है और हमारी भावनाओं की कद्र भी हो सकती है।

माननीय रेल मंत्री जी, मैंने रेल बजट भाषण बड़े ध्यान से पढ़ा और मैंने भी कुछ शेर नोट किये थे लेकिन माननीय वर्मा जी ने बोल दिये। मेरा कहना यह है कि पंजाब को देने की बात जब भी आती है तो सभी मंत्रालयों का हाथ पीछे चला जाता है। कम्प्युटराइज्ड इंक्वायरी के बारे में मुझे यह कहना है कि दो बजे के बाद बहुत से स्टेशनों पर कंप्यूटर्स काम नहीं करते हैं क्योंकि उनका समय आठ बजे से दो बजे तक होता है और बुकिंग कराने जाते हैं तो कंप्यूटर खराब रहता है।

ऐसी हालत में टिकट कहां से बुक कराएं? इसे एश्योर करने के लिए कृपया इन अनुदान की मांगों में इसका प्रॉवीजन करें। जब कम्प्यूटर सिस्टम खराब होता है, तो जिन लोगों को टिकट बुक करानी है, वे बुक नहीं करा पाते हैं। वे देखते रहते हैं कि कब सिस्टम ठीक होगा तो टिकट लेंगे और पता नहीं सीट मिलेगी या नहीं या वेटिंग में आएगी। इसलिए कोई ऑल्टरनेटिव सिस्टम होना चाहिए ताकि इनक्वायरी और टिकट बुकिंग में कोई अड़चन न आए।

मैं एक छोटा सा उदाहरण देना चाहता हूं। मेरे निर्वाचन क्षेत्र में दसुवा एक स्टेशन है। वहां आठ से दो बजे तक बुकिंग होती हैं। जम्मू तवी से दिल्ली तक एक ट्रेन गुजरती है लेकिन वहां के लोग आपके द्वारा दी गई सुविधाओं का फायदा उठा नहीं पाते हैं। कृपया कम्प्यूटर की बुकिंग का समय सुबह आठ से आठ तक किया जाए ताकि लोग ज्यादा से उस सुविधा का फायदा उठा सकें।

होशियारपुर, जहां से मैं चुन कर आया हूं, वहां के रेलवे स्टेशन पर डीएमयू आती है लेकिन उसकी सीढि़यां प्लेटफार्म से इतनी ऊंची हैं कि किसी बुजर्ग या बीमारी आदमी को अगर उतरना है तो दो व्यक्ति उन्हें उतारने के लिए चाहिए ताकि उन्हें चोट न आए। उस प्लेटफार्म का रैनोवेशन इस हिसाब से हो ताकि गाड़ी प्लेटफार्म के साथ लगे और गाड़ी उतरने और चढ़ने वालों को तकलीफ न हो।

आनन्दपुर साहिब का पंजाब में बड़ा महत्व है। वहां एक गांव अखरेटा है। मैंने पहले अपने बजट भाषण में भी कहा था कि वहां रेलवे फाटक सिर्फ वीआईपीज के लिए खुलता है। आम जनता को १५ किलोमीटर का सफर तय करके अपने गांव जाना पड़ता है। किसानों के खेत भी फाटक के उस पार हैं। उनके घर एक तरफ हैं। उन्हें अगर फसल लानी है तो १५-२० किलोमीटर घूम कर आना पड़ता है। बच्चों को एक-दो किलोमीटर का सफर तय करना पड़ेगा अगर वह फाटक खुला होगा लेकिन फाटक बंद होने से १५ किलोमीटर घूम कर स्कूल जाना पड़ता है। वहां फाटक है और रेलवे का स्टाफ बैठा है। वह फाटक केवल वीआईपीज के लिए क्यों खुलता है? वहां नया फाटक बनाने की जरूरत नहीं है। अगर वह फाटक लोगों के लिए खोल दिया जाए तो लोग आपको आशीर्वाद देंगे और हमें भी अगले बजट को पेश करते समय कुछ और मांगों को रखने की इच्छा होगा। छोटे-छोटे काम नहीं हो पा रहे हैं। बार-बार बोल कर ऐसा लगता है कि हम अपनी बात का वजन घटा रहे हैं।

किस्मत से मैं जिस क्षेत्र होशियारपुर से आता हूं, मैं वहां से लोक सभा का मैम्बर हूं और तीन राज्य सभा के मैम्बर हैं। एक हमारी सहयोगी पार्टी अकाली दल का और दो कांग्रेस के मैम्बर्स हैं। वहां का वीआईपी कोटा जिसे एचक्यू कोटा कहते हैं, सिर्फ दो टिकटों का है। चार एमपीज हैं और टिकट रिजर्वेशन के लिए कोटा दो टिकटों का है। अगर चार एमपी किसी को ऑब्लाइज करना चाहें तो नहीं कर सकते। कृपया वह कोटा बढ़ा कर कम से कम १०-१२ टिकटों का किया जाए ताकि हम उस कोटे का फायदा ज्यादा से ज्यादा लोगों को दे सकें।

इसी तरह से एक महत्वपूर्ण स्थान फगवाड़ा है। वहां ट्रैफिक बहुत हो गया है। एनडीए के समय वहां के लिए फ्लाई ओवर मंजूर हुआ था लेकिन किन्हीं कारणों से वह फ्लाई ओवर पूरा बना नहीं है। कुछ बन गया है लेकिन काम रुका है। ज्यों-ज्यों काम डिले करेंगे, उसकी कॉस्ट ऑफ कनस्ट्रक्शन बढ़ती जाएगी। उन कारणों को फाइंड आउट करें जिन के कारण फ्लाई ओवर का काम बंद पड़ा है। आप उसे पूरा कराने की कोशिश करें।

इसी तरह से टांडा और दसुवा दो शहर हैं। वहां ट्रैफिक काफी बढ़ चुका है। अमृतसर से लेकर दिल्ली तक आने-जाने वाले जितने भी फोर व्हीलर्स हैं - ट्रक बस और कारें, वे यहां चलती हैं लेकिन ट्रैफिक बढ़ जाने से बहुत तकलीफ होती है। वहां जम्मू से लेकर दिल्ली तक की गाड़ियां काफी आती-जाती हैं। हर समय वह फाटक बंद रहता है। इससे ट्रैफिक खड़ा रहता है जिससे लोगों को काफी परेशानी होती है। यदि उन दो जगहों पर फ्लाई ओवर का प्रॉवीजन हो जाए तो लोगों को काफी सुविधा होगी।

इससे मेरे इलाके का काफी काम हो जाएगा ।

मैं आपके माध्यम से एक निवेदन और करना चाहता हूं, देश भर में मोस्ट बैकवर्ड डिस्टि्रक्ट का सैलेक्शन हुआ था और १३३ डिस्टि्रक्ट सैलेक्ट हुए थे जिनमें होशियारपुर भी एक डिस्टि्रक्ट था। होशियारपुर बहुत पिछड़ा हुआ इलाका है क्योंकि वहां पहाड़ियां भी हैं, पीने के पानी की कमी है, खेती के लिए पानी की भी कमी है। मैं चाहता हूं कि आप होशियापुर में कारखाना लगाएं जिससे वहां के लोगों को रोजगार मिल सके और जो ट्रेंड है कि विदेशों में जाकर लोग मजदूरी करते हैं, वह बंद हो जाए और लोग अपने क्षेत्र में रोजगार पा सकें। इसके साथ ही मैं ज्यादा समय न लेते हुए सभापति महोदय को धन्यवाद देता हूं और आशा करता हूं कि मैंने जो मांगें बिना पैसे के खर्च की आपको बताई हैं, उन पर ध्यान दिया जाएगा।

महोदय, एक बात और कहकर मैं अपनी बात समाप्त करूंगा । जालंधर से एक गाड़ी, जिसका नाम शायद सहारनपुर एक्सप्रैस है, सुबह चार बजे चलती है । जालंधर से होशियारपुर की दूरी ४० किलोमीटर है, वहां रेल ट्रैक बना हुआ है। होशियारपुर इंडस्टि्रयल एरिया है, वहां सोनालिका ट्रैक्टर फैक्ट्री है, हॉकिन्स कुक्कर की फैक्ट्री है, जेसीटी और महावीर स्पिनिंग मिल्स हैं, अगर वह गाड़ी होशियारपुर से दिल्ली चले तो काफी इम्प्लाइज उस ट्रेन से फायदा ले सकते हैं । आपको सिर्फ वह गाड़ी जालंधर के बजाय होशियारपुर शुरू करनी होगी । मैंने लिस्ट पढ़ी है जिसमें रेल मंत्री जी ने इतनी नई रेलगाड़ियां शुरू की हैं और बहुत को एक्सटेंड भी किया है । मुझे आशा है कि माननीय रेल मंत्री जी जब भाषण देंगे तो इस गाड़ी को भी एक्सटेंशन में डालेंगे तो होशियारपुर पर आपकी बहुत कृपा होगी और आपका बहुत धन्यवाद होगा । मैं एक बार फिर माननीय सभापति महोदय को धन्यवाद देता हूं कि मुझे बोलने का समय दिया ।

SHRI K.S. RAO (ELURU): Sir, we have a Railway Minister who is supposed to be the common man"s leader. At least, he has presented himself as a common man"s leader. We have the Minister of State, Shri Velu who has come from Services, is supposed to be a very sharp and a disciplined administrator. We have also got the Railway Board which is very interesting and about which we are proud. Unlike in other Ministries, most of the Railway Board is filled with professionals, not like other Ministries. Naturally, with this background, we expect something fantastic in the Railways. As my other colleague said, we do not find anything innovative. It has become a routine affair. It has become so routine that from my childhood days I have been seeing that whenever I go to any major platform, repairs are being carrying out and if they are breaking something here, they will be constructing something somewhere in the very platform. Most of the money is being spent only for breaking something or carrying out some repair here or replacing something there. Nothing is permanent as far as platforms are concerned.

We are very happy that in the Railway Budget, you have contained the fares. We appreciate and admire that. Similar is the case with passenger fares and freight rates also where you have only rationalised; not increased. Naturally, we admire you for these two things. But when we ask as to what will be the new lines you are planning, as to what are the additions you are making; and as to what are the extra assets you are bringing into the Railways, you say that there is a constraint of resources.

If the hon. Minister and the Railway Board were to have a dedication, a determination, then they do not require any budgetary support. We all agree that Railways are the means of transport of the common man. Sir, 80 per cent of its revenue comes from passenger fares, more particularly from the second-class passengers and only 20 per cent comes from the upper class passengers as also the goods traffic. When Shri Praful Patel, the Minister of State for Civil Aviation could think of purchasing aeroplanes costing Rs.50,000 crore, what is it that is coming in the way of the Railways? Is it a question of Budget allocation or finding a revenue of Rs.50,000 crore for meeting the transport needs of the richer sections of society? If he does not find any problem in this, what is the problem they are having in this? What does it require for laying an extra line? Do you have to import technology from anywhere? It is just a question of acquisition of land, utilizing the manpower and the natural resources which are available there like stones or cement and construct a bridge by using iron ore, convert it into rails and putting it there. This way, they can provide employment; they can create assets and convert the natural resources into a finished product. In that process, only some currency is required for recycling purpose. It does not burden anybody and they can get it.

Now, at a time when the country was limiting itself only to the frontiers, when it was not exposed to the multinationals or globalization, this thinking might be difficult. When the globalization is setting in, soft loan is available in the world at two per cent rate of interest. We are proud that the country is rated very high in international financial sector. They are prepared to give us loan at two per cent rate of interest and we can raise Rs.50,000 crore. I was told that 240 on-going projects requiring about Rs.46,000 crore are pending because of delay. By the time these railway lines are completed, our grandsons will come.

Today, you please think of road transport. Do they have funds? Having realised that traffic has increased in the country, the Government have decided to widen the road by making it four-lanes, six-lanes or eight-lanes. They have increased the price of diesel by Re.1 and allocated it to the road sector. When they found that it was not sufficient, we, as Members of the Consultative Committee attached to the Ministry of Shipping, Road Transport and Highways, suggested to them that if they could not find money, then they should take it as loan. Even then if they are not able to find it, they could go in for BOT. There are umpteen number of companies, domestic companies and corporate sector which are ready to invest money. They increased their toll collection to raise their assets.

Similarly, let the Railway Board Members think in an analytical manner to find out in what way they can attract private funds. There is no dearth of money. All that is required is planning, dedication and determination to create assets in this country, to help the common man. A rich man can reach a place in one hour, whereas a common man who has to travel a distance of 60 kilometres in a passenger train that passes between mofussil stations, it takes six hours. They do not know at what time, the train comes, at what time the train reaches and they do not know where the train will be stuck up in between. The poor man has to suffer everywhere. Why should we not help the rural people, the poor man, the common man by creating these assets? It is not difficult. It is only a question of application of mind or planning. I am of the definite opinion that there has not been a proper planning in Railways at any time and more particularly after globalization.

Please think of it. If the present Board Members were to be traditional, if they cannot think in terms of modern things in a changing atmosphere, in a changing climate, how would we have improvements in the Railways?

Sir, if you see, even small countries are growing like anything. But a big country like ours is still stagnating in the same old way. We say that we started with 34 kilometres in 1853 and now we have covered 61,000 kilometres of the railway lines. All right. But how many kilometres have we added in the last one or two decades? It is nothing. Why? The reason cited is that the Railways are short of money. What do we mean by short of money? It means, currency. How does it come? It comes by converting the human sweat into money, into an asset. But we are not converting the human sweat into money because there is no employment opportunity. We are not motivating people to work. We are not allowing them to sweat. We are not planning. We are not giving them the opportunity.

Sir, I would humbly ask the hon. Railway Minister as to how many people are employed in the country. Why do they not plan and utilise the services of people and make a route? A railway line between Hyderabad and Vizag can cut the distance of travelling by 300 kilometres. By doing this, how much saving will be there? It would save a lot of time and money.

Sir, how much money we are wasting by importing oil? It is Rs. 70,000 crore. Now, internationally, it is accepted that the Indians are the most intelligent, capable and respected all over the world. Even the Germans and Americans have agreed that we are superiors. I am happy to know this. While 10 to 15 years back, people thought that India was the poorest country with 200 to 300 dollars per capita income. Their concept was wrong. Now, their per capita income is Rs. 10,000 or Rs. 15,000. With the changed thinking, the purchasing power is taken as a basic unit.

Sir, three days back, I read in the newspaper that this country is the fourth richest in the entire world.

MR. CHAIRMAN : Please conclude now.

SHRI K.S. RAO : Sir, I am just concluding.

So, my main point here to you, Mr. Railway Minister is please think of improvements in the railways. If necessary, you may call for some Advisors. You convene some Conference. You take suggestions from different walks of life including persons from Chambers of Commerce and Industry, and Federation of Indian Industries, where ample number of brilliance would be there to advise you to improve the Railways. I do not want to find fault with this Ministry.

But unless proper checks and motivations are there, unless right people are recognised for their work, and culprits are punished without delay, you would not be creating a right culture in the Railways, and thereby leading to insufficiency and corruption.

When a woman member of a Self-Help Group were to take Rs. 1,000 as loan, she was asked to pay an interest of 8 per cent in addition to the principal amount, whereas we have given you assets worth more than Rs. 3 lakh crore; and should you not generate wealth of your own, and construct new lines and capital assets, Mr. Railway Minister?

MR. CHAIRMAN: Mr. Rao, please conclude. There are still 25 speakers to participate in the debate, and we have time constraint.

SHRI K.S. RAO: So, here, I humbly request the hon. Minister to adopt an innovative approach instead of continuing in the same traditional and routine manner. I wish history would call his name and recognise him as a Minister who has brought in a substantial change in the working of the Ministry of Railways. We all want his name to be recorded in the history to be remembered forever.

With these few words I conclude.

श्री आलोक कुमार मेहता (समस्तीपुर) : माननीय सभापति महोदय, रेल मंत्रालय की अनुपूरक अनुदान की मांगों पर बोलने के लिए आपने मुझे मौका दिया, इसलिए मैं आपको धन्यवाद देता हूं। मैं आपके माध्यम से कहना चाहता हूं कि आदरणीय लालू जी देश, के सफलतम रेल मंत्री हैं, ऐसा कहने में मुझे कोई अतिश्योक्ति नजर नहीं आती।

इस रेल बजट में माननीय रेल मंत्री जी द्वारा रेलवे की आय बढ़ाकर और रेलवे की परिसंपत्तियों का बेहतर इस्तेमाल करके जनता के ऊपर से बोझ कम करने की कोशिश सबसे सराहनीय कदम कहा जाना चाहिए। यह एक अच्छा प्रयास है जो आगे के लिए भी ट्रैन्ड बनाता है और जनता पर बोझ कम करके, सैल्फ रैवेन्यू जनरेशन करके एक अच्छा नमूना हम भविष्य के लिए भी बना सकते हैं।

इस बजट में रेल के विकास का विकेन्द्रीकरण किया गया है। देश के वभिन्न हिस्सों में विकास की किरण पुंज पहुंचाने की कोशिश की गई है। इसके लिए भी हम माननीय रेल मंत्री जी को धन्यवाद देना चाहते हैं। लोग बेकार ही बिहार को बदनाम करते हैं। अभी हमारे पूर्ववक्ता ने इस तरह की टिप्पणी की। बिहार को इसके माध्यम से थोड़ा कम भी मिला और पूरे देश को यदि हमारे माननीय रेल मंत्री जी के बजट से ज्यादा मिला तो उसके लिए हम खुश हैं और अपने रेल मंत्री जी का धन्यवाद करना चाहते हैं।

संपर्क क्रांति के माध्यम से देश के सुदूर इलाकों से दिल्ली को जोड़ने की जो कोशिश की गई है, उसके लिए भी रेल मंत्री जी धन्यवाद के पात्र हैं। दरभंगा से संपर्क क्रांति की घोषणा की गई, उसका उद्घाटन किया गया और हरी झंडी दिखलाई गई। पूरी दरभंगा कमिश्नरी की ओर से, हमारी कांस्टीटयूएंसी समस्तीपुर की जनता की ओर से वे धन्यवाद के पात्र हैं। समस्तीपुर के निवासियों को लिछवी एक्सप्रैस के रूप में आपने जो उपहार दिया है, उसके लिए लोग आपके प्रति आभार व्यक्त करते हैं और इसे जल्दी से जल्दी शुरू करने की गुजारिश भी करते हैं। समस्तीपुर स्टेशन के पास १९वीं सदी में निर्मित एक रेलवे वर्कशाप के आधुनिकीकरण एवं विस्तारीकरण की परियोजना की घोषणा माननीय रेल मंत्री जी ने समस्तीपुर में की थी, लेकिन अभी तक उसमें क्या प्रगति हुई है, यह मालूम नहीं है। उसे याद दिलाने के लिए वहां की जनता की भावनाओं को मैं आपके सामने रखना चाहता हूं कि उसे जल्दी से जल्दी शुरू किया जाए।

नीतीश कुमार जी और जार्ज साहब की बातें बार-बार कही जाती हैं, जब कभी कुल्हड़ और खादी की बात आती है। इतिहास में पहली बार घोषणा की गई और इस घोषणा पर अमल किया गया। इस बात को नकारने की कोशिश बिल्कुल ही ढपोरशंखी बातें हैं, बार-बार जो कहा जाता है कि नीतीश जी ने घोषणा की थी, जार्ज साहब ने घोषणा की थी। आपकी घोषणाओं का कार्यान्वयन भी आप हमसे चाहते हैं? ऐसी उम्मीद आपको नहीं करनी चाहिए। यह विशुद्ध रूप से यूपीए सरकार की घोषणा थी और पहली बार उस पर अमल किया गया। गांधी के सपनों को साकार करने की सफल कोशिश की गई, इसके लिए हम माननीय रेल मंत्री जी को धन्यवाद देना चाहते हैं, जिन्होंने इसे मज़बूती से आगे बढ़ाया। यह बात ज़ाहिर है कि पहली बार इसे इंप्लीमैंट किया गया है, पहली बार नीति और नीयत में संगत बैठी है, तब इसका कार्यान्वयन हो रहा है। इसलिए उसमें कुछ कठिनाइयां भी सामने आ रही हैं।

कुल्हड़ और खादी की क्रय प्रक्रिया को और ज्यादा सरल बनाया जाए ताकि कुटीर और लघु उद्योगों के मेहनती उद्यमियों को सीधे जनता को सामान बेचने का मौका मिल सके । दूध-दही और अन्य सामग्रियों के स्टॉल लगाने की प्रक्रिया को सरल किया जाए । पटना से प्रतदिन राजधानी ट्रेन चलाई जाए। समस्तीपुर में भौला टॉकेज के पास तथा डीएमआर चौक के पास दो ओवर-ब्रिज जरूर बनाए जाने चाहिए। इससे वहां पर बहुत बड़ी समस्या का समाधान होगा और ३२ नंबर गुमटी पर ब्रिज बनाया जाना अत्यावश्यक है क्योंकि वहां घंटों लोगों को जाने के लिए इंतजार करना पड़ता है और ट्रैफिक के कारण बहुत लम्बी लाइन लग जाती है ।

वहां पर विद्यापति एक ऐतिहासिक और धार्मिक स्थल है । वहां की महत्ता इसी बात से जानी जाती है कि वे एक महाकवि और शिव भक्त थे और उनके अंतिम समय में उनकी मान्यता वाली बहुत कहानियां वहां के बारे में कही जाती हैं । वहां पर पर्यटन विभाग का भी कार्यालय है और ऐतिहासिक और पुरातात्विक द्ृष्टि से भी वहां का महत्व है । विद्यापति नगर स्टेशन की बजाए वहां का नाम विद्यापतिधाम स्टेशन कर दिया जाना चाहिए । इस बात की घोषणा माननीय मंत्री जी ने पिछली एक बैठक में की थी इसलिए मैं यह बात उनको याद दिलाना चाहता हूं । एक ट्रेन डीएमयू की बहुत ज्यादा मांग है । हाजीपुर, पटौरी, मेहदीनगर, बछुआरा, समस्तीपुर से होते हुए दरभंगा जाने वाली एक डीएमयू ट्रेन शुरू की जाए । इस ट्रेन की बहुत ज्यादा मांग है । समस्तीपुर, ताजपुर, महुआ, हाजीपुर के लिए नई लाइन बिछाने की मांग है । रेल मंत्री जी ऊजयारपुर, विद्यापतिनगर, पटौरी स्टेशनों का आधुनिकीकरण व विस्तारीकरण किया जाए । माननीय मंत्री जी बथुआ और बसरिया के लिए एक हॉल्ट की चिर-प्रतक्षित मांग है । इसके लिए प्रक्रिया जल्द शुरू की जाए ।

सभापति महोदय : आप अपनी बात संक्षेप में समाप्त कीजिए ।

श्री आलोक कुमार मेहता : इसके लिए आवेदन भी दिया गया है कि वहां पर हॉल्ट बनाया जाए । समस्तीपुर, जनकपुर में रेलवे गुमटी की अत्यंत आवश्यकता है इसलिए शीघ्रातिशीघ्र इस दिशा में कार्यवाही की जाए । लोगों को आठ-दस किलोमीटर घूम कर जाना पड़ता है ।

इन्हीं शब्दों के साथ मैं माननीय रेल मंत्री जी द्वारा की गई घोषणाओं और उनके द्वारा अच्छा बजट, जनहित के बजट को पेश किया गया है । इसके लिए तमाम पार्टियों और जनता की तरफ से प्रशंसा करता हूं और इस रेल बजट का समर्थन करता हूं ।

श्री लालू प्रसाद : मेरा माननीय सदस्यों से अनुरोध है कि छह बजे केबिनेट की बैठक है और उपाध्यक्ष महोदय के बेटे की शादी है । माननीय सदस्यों को आपत्ति न हो तो वे अपने लखित सुझाव दे दें । ऐसा पहले भी होता आया है ।

सभापति महोदय : श्री भँवर सिंह, आप अपने निर्धारित स्थान पर नहीं हैं । आप कम समय में अपनी बात समाप्त कीजिए ।

श्री भँवर सिंह डांगावास (नागौर) : महोदय, मैं आपकी अनुमति से बोलना चाहता हूं । मैं रेल बजट के ऊपर बहस पर भाग लेते हुए माननीय रेल मंत्री महोदय से कहना चाहता हूं कि तीसरी बार ५०-५५ कि०मी० की रेल योजना जिस पर अंग्रेजों के समय से सर्वे होता आ रहा है और आपने भी सर्वे करवाया है । आपके पिछले बजट में भी साफ लिखा हुआ है कि इसे अपडेट सर्वे के लिए बजट में रखा गया है ।

सभापति जी, उस लाइन का काम शुरू होना तो दूर रहा, उसका नाम भी इस वर्ष के बजट में नहीं है। अजमेर से पुष्कर की स्वीकृति आपने दी है और इस रेल का काम भी शुरू हो गया है, पुष्कर, अजमेर और मेड़ता बहुत महत्वपूर्ण स्थान हैं। अजमेर ख्वाजा साहब की दरगाह है। पुष्कर में हिन्दुओं का बहुत बड़ा तीर्थस्थान है और मेड़ता भक्त मीरा का जन्मस्थान है। मेड़ता से पश्चिम और दक्षिणी भारत को जीरा और सरसों हमेशा जाती है। मेड़ता बहुत बड़ी कृषि मंडी है। वहां पशु-मेला भी लगता है। वहां से पशु भी पुष्कर से होकर पूरे भारत में जाते हैं। अगर हम मेड़ता को पुष्कर से जोड़ते हैं, तो उत्तरी भारत और पश्चिमी राजस्थान का सीधा लिंक अजमेर होकर दक्षिणी भारत से हो जाता है। इससे आम जनता को बहुत सहूलियत होगी और रेलवे को लाभ होगा, अन्यथा अभी मेड़ता रोड से फुलेरा होकर अजमेर जाना पड़ता है या जोधपुर से लूनी होकर मारवाड जंक्शन होकर अजमेर आना पड़ता है। इस रेल लाइन की मैं खासतौर से प्रार्थना करना चाहता हूं कि इसे प्राथमिकता के आधार पर बनाया जाए।

महोदय, मेड़ता रोड का रेलवे प्लेटफार्म बहुत लम्बा है। जो पैसेंजर प्लेटफार्म नंबर ३ और ४ पर उतरते हैं, उन्हें एकमात्र पुल होने के कारण प्लेटफार्म पार करने में बहुत कठिनाई होती है। पहले एक पुराना पुल था। वह प्लेटफार्म ऊंचा होने से, पुल नीचा पड़ने के कारण शायद रेलवे ने हटाया होगा। वह तो ठीक किया, लेकिन मेरी प्रार्थना है कि वहां एक पुल और बनाया जाए ताकि पैसेंजर आसानी से इधर से ऊधर आ-जा सकें। इसी प्रकार टेलीफोन की सुविधा प्लेटफार्म नंबर १ पर है, लेकिन जो यात्री प्लेटफार्म नंबर ३ और ४ से यात्रा करते हैं, उनके लिए टेलीफोन की कोई सुविधा नहीं है। मेरी प्रार्थना है कि प्लेटफार्म नं. ३ और ४ पर भी टेलीफोन की सुविधा प्रदान की जाए।

महोदय, मैंने गेज परिवर्तन की प्रार्थना गत वर्ष भी की थी और इस वर्ष के बजट में भी की, लेकिन कुछ नहीं हुआ। डेगाना से रतनगढ़ तक गेज परिवर्तन के आदेश अगर आप देंगे, तो बेहतर रहेगा। मैं सिर्फ दो ठहरावों की मांग कर रहा हूं। सिकन्दराबाद से बीकानेर गाड़ी आती है और वापस बीकानेर से सिकन्दराबाद जाती है। वहां एक मुंडवा बहुत बड़ा व्यापारिक केन्द्र है, लेकिन यह रेल वहां नहीं रुकती है। मूंगा के बहुत व्यापारी सिकन्दराबाद और हैदराबाद रहते हैं। व्यापारिक गतवधियां भी बहुत ज्यादा हैं। इसलिए मेरी मांग है कि इस रेल का, मुंडवा रेलवे स्टेशन पर दो मिनट का ठहराव दिया जाएगा, तो अति उत्तम रहेगा। इसी प्रकार एक बहुत बड़ा धाम है। अब मैं तीर्थ स्थान की बात कर रहा हूं। हमारा दरिया महाराज का रैन के अंदर बहुत बड़ा धार्मिक स्थान है, लेकिन रैन में कोई भी द्रुत गति की रेल नहीं रुकती है। मैं प्रार्थना करूंगा कि कोई भी द्रुत गति की एक रेलगाड़ी रैन में रोकी जाए अर्थात्, उसे दो मिनट का ठहराव वहां दिया जाए। मैं इतना ही कहकर, आपका धन्यवाद करता हूं और अपनी बात समाप्त करता हूं।

कुँवर मानवेन्द्र सिंह (मथुरा) : आदरणीय सभापति महोदय, मैं आपका ह्ृदय से आभार व्यक्त करता हूं कि आपने मुझे इस अवसर पर बोलने की अनुमति प्रदान की। मैं रेल बजट पर आए कट मोशन्स का घोर विरोध करता हूं और रेल बजट का स्वागत करता हूं। माननीय रेल मंत्री जी ने यह दूसरा बजट प्रस्तुत किया है। इन रेल बजटों के दौरान सबसे बड़ी बात यह रही है कि रेल के किराए और मालभाड़े में कोई भी वृद्धि नहीं की गई है। किराए में वृद्धि न करने का दूरगामी प्रभाव पड़ता है। रेलों के किराए बढ़ाने से हर चीज के दाम बढ़ते हैं, लेकिन रेलों के किराए और मालभाड़े में वृद्धि न कर के रेल मंत्री जी ने बहुत साहस का काम किया है। इसका दूरगामी प्रभाव पड़ेगा। रेलों के किराए और मालभाड़े में वृद्धि नहीं करने के लिए मैं माननीय रेल मंत्री श्री लालू प्रसाद जी, दोनों रेल राज्य मंत्रियों, श्री आर. वेलु और श्री नारनभाई रठवा तथा संबंधित रेल विभाग के अधिकारियों का देश की जनता की ओर से हार्दिक आभार व्यक्त करता हूं। उन्होंने बहुत सुन्दर बजट पेश किया है। इस रेल बजट में कई अद्वितीय सुविधाएं प्रथम बार दी गई हैं। बेरोजगार नवयुवकों को केन्द्र सरकार की नौकरियों के चयन के लिए साक्षात्कार के लिए जाने हेतु दूसरे दर्जे में यात्रा करने की सुविधा तथा किसानों व दुग्ध उत्पादकों को प्रशिक्षण लेने के लिए यात्रा करने हेतु किराए में ५० प्रतिशत की छूट दी गई है। इसी प्रकार विद्यार्थियों और दुर्घटनाओं से प्रभावित लोगो के लिए जो सुविधा प्रदान की गई है, वह बड़ी सराहनीय उपलब्धि इस रेल बजट की रही हैं॥ यह एक बड़ी सराहनीय उपलब्धि इस रेल बजट की रही है । इसके अलावा कुछ आरक्षण अनुसूचित जातियों और जनजातियों तथा पिछड़ी जातियों के सभी वर्गों की सेवाओं में प्रतनधित्व सुनिश्चित करने के लिए विशेष अभियान चलाने का जो विशेष प्रयास किया जा रहा है, वह भी अद्वितीय एवं सराहनीय है । मैं उसके लिए माननीय मंत्री जी को विशेष बधाई देता हूं । देश में बुक स्टाल और सभी खान पान के स्थानों पर इन्हीं गरीब वर्ग के लोगों के लिए या जो हमारी फौजी भाइयों की विधवाओं के लिए २५% से ४९.५% आरक्षण दिया गया है वह बड़ा सराहनीय कदम है । अभी हमारे साथी श्री रॉव ने रेल के विकास के लिए पैसे की कमी का जिक्र किया है । मैं उनकी भावनाओं और प्रस्तावों से अपने आपको जोड़ता हूं । रेल के अन्य साधनों से पैसा जुटा कर हम रेल का विकास कर सकें, इसका भरपूर प्रयास किया जाना चाहिए । मथुरा भगवान राधा कृष्ण की जन्मभूमि है और मेरा यह सौभाग्य है कि मैं वहां का प्रतनधित्व करता हूं और माननीय मंत्री जी भी उन्हीं के वंशज हैं तथा उन्होंने कहा कि मथुरा हमारा गुरुद्वारा है और वे वहीं से निकले हैं । मैंने माननीय मंत्री जी से आग्रह किया था और मैं इसके लिए उनका आभार प्रकट करता हूं कि उन्होंने मथुरा से इलाहबाद के लिए ट्रेन चलाकर हमारी मांग को पूरा किया है । उसके साथ-साथ माननीय मंत्री जी आपको स्मरण होगा कि मैंने कोलकाता के लिए एक ट्रेन चलाने की मांग की थी क्योंकि आजादी के पहले एक ट्रेन तूफान मेल चला करती थी । इसलिए मेरा आपसे विशेष आग्रह है कि आप दिल्ली से मथुरा, इलाहबाद होते हुए पटना और कोलकाता के लिए एक ट्रेन चलाने की कृपा करें जिससे वहां के लोगों को सुविधा हो सके क्योंकि मथुरा एक तीर्थस्थल है और करीब एक करोड यात्री मथुरा आते-जाते हैं । उनकी सुविधा का आपको ध्यान रखना चाहिए । मेरे क्षेत्र की मांग थी कि ताज एक्सप्रैस को कोसी स्टेंशन पर रुकवाया जाए और दो नए स्टेशनों को बनवाने की मांग थी जिनमें सेमरी देवी का एक धार्मिक स्थान है जहां पर नवरात्रों के दिनों में अस्थायी स्टेशन बनाया जाता है । मेरी आपसे मांग है कि वहां पर स्थायी स्टेशन बनवाया जाए । दूसरा एक स्थान चौमा है । वहां पर भी एक स्थायी स्टेशन बनवाया जाए । तीन फ्लाईओवर मथुरा, दिल्ली, कोलकाता हाइवे पर प्रस्तावित किए हैं । इस रूट पर करीब प्रतदिन १८० गाड़िया निकलती हैं । वहां पर सैकड़ों किसान और तीर्थ यात्री जो बरसाना जाते हैं या गोवर्धन जाते हैं या राधाकुंड जाते हैं या नंद गांव जाते हैं वे सभी इस रूट से जाते हैं उनके लिए वहां पर फ्लाईओवर की अत्यंत आवश्यकता है । छातापुर जो नंद गांव, बरसाना, गोवर्धन जाने का एक मुख्य मार्ग है । दूसरा मार्ग छटीकरा है जो वृंदावन, राधाकुंड, गोवर्धन, बरसाना एवं नंद गांव से दिल्ली को जोड़ता है । तीसरा मथुरा शहर में एक स्थान मछली मार्किट है वह मार्ग मथुरा से अलीगढ़ और हाथरस, राजस्थान के भरतपुर से हो कर दिल्ली को जोड़ने का प्रमुख मार्ग है वहां पर सारे शिक्षण संस्थान हैं । हमारा कोर मुख्यालय वहां पर है । वहां पर कचहरियां भी हैं । उनको जोड़ने वाला यह मार्ग प्रमुख है ।

मैं आपसे आग्रह करना चाहता हूं कि इन तीनों पर फ्लाईओवर बनाने का प्रावधान रखा जाये। चूंकि वहां दो करोड़ यात्री आते हैं इसलिए वहां पर सभी आने-जाने वाली ट्रेनों को रोका जाये जिससे आने वाले यात्रियों को सुविधा मिल सके। मगर विशेष रूप से ए.पी. एक्सप्रैस, शताब्दी एक्सप्रैस, हबीबगंज ट्रेन जो अभी-अभी चलाई गयी है, उनको रोका जाये। मैं कई बार से ईएमयू की मांग करता आ रहा हूं। आगरा से दिल्ली के लिए ईएमयू ट्रेन की व्यवस्था की जाये जिससे दिल्ली ही नहीं बल्कि दिल्ली के आस-पास सबरबन डिवीजन बनाकर २०० किलोमीटर के एरिया का प्रावधान किया जाये जहां ईएमयू. ट्रेन चले ताकि दिल्ली में जो लोग आकर ठहरते हैं, वह प्रैशर कम हो सके। मथुरा स्टेशन के वैस्ट साइड में बहुत पापुलेशन बढ़ गयी है। वहां पर प्लेटफार्म, बुकिंग आफिस, रिटायरिंग रूम, पार्किंग व सडक आदि सारी सुविधाएं उपलब्ध कराई जायें। मथुरा एक तीर्थस्थल है। जैसा मैने अभी कहा कि करोड़ों यात्री हर वर्ष वहां आते हैं। मैंने मथुरा स्टेशन को अपग्रेड करने की बात की थी। जब स्वर्गीय श्री माधव राव सिंधिया रेल मंत्री थे और बंसी लाल जी कैबिनेट मंत्री थे तब भी हमने मांग की थी कि उसको अपग्रेडेशन होना चाहिए। आज भी मथुरा …( व्यवधान)

सभापति महोदय : कृपया समाप्त करिये।

...( व्यवधान)

कुँवर मानवेन्द्र सिंह : मैं दो मिनट में अपनी बात समाप्त कर रहा हूं। …( व्यवधान)

सभापति महोदय : दो-दो मिनट करके बहुत समय हो गया है। अभी बहुत से माननीय सदस्य बोलने वाले हैं।

...( व्यवधान)

कुँवर मानवेन्द्र सिंह : वहां पर प्लेटफार्म भी पूरे नहीं हैं। उनको पूरा बनाना चाहिए और मथुरा का अपग्रेडेशन होना चाहिए। मैंने एक नयी रेलवे लाइन बनाने के लिए आग्रह किया था। …( व्यवधान)

सभापति महोदय : अभी माननीय रेल मंत्री जी भी बोलेंगे। उनको भी उत्तर देना है। इसके अलावा और भी बहुत से माननीय सदस्य बोलने वाले हैं इसलिए अब आप समाप्त कीजिए।

...( व्यवधान)

कुँवर मानवेन्द्र सिंह : छाता, शेरगढ़, नौझील, बाजना, टेटीगांव, मांट, राया, महाबन, गोकुल, बलदेव, सादाबाद, हाथरस आदि के लिए नयी रेल लाइन देने के लिए हमने आपसे मांग की है। मेरा आपसे आग्रह है कि माननीय मंत्री जी मेरा निवेदन स्वीकार करेंगे। इन्ही शब्दों के साथ आपका बहुत-बहुत धन्यवाद।

SHRI M. SHIVANNA (CHAMARAJANAGAR): Mr Chairman Sir, at the outset I would like to congratulate hon. Railway Ministers Shri Lalu Prasad Yadavji, Shri Veluji and Shri Rathwaji for presenting an excellent Railway Budget this year. I am happy to support the Demands for Grants pertaining to the Ministry of Railways for the year 2004-05.

16.53 hrs. [Shri Devendra Prasad Yadav in the Chair] Karanataka has been neglected by the Railway Ministry for a long time. Therefore, I request the hon. Shri Laluji to do some favour to Karnataka.

Chamarajapet-Mettupalyam is the railway line which has to be completed immediately. Hon. Shri Laluji has promised to come to my constituency and inaugurate this railway line. He would be visiting Chamundi Hills and Mysore city also. The Budget allocation should be increased from rupees one crore to at least two crore to complete it early.

Another important railway line which has to be doubled is Mysore-Bangalore line. From Bangalore to Ramanagaram the work is almost completed. Now from Ramanagaram to Mysore it should be expedited. This line should be electrified as these two are very important cities.

Bangalore is the Silicon city of India. The roads are very narrow and accidents are taking place everyday. Hence Metro Rail for Bangalore should be taken up immediately.

Sir, there are two railway lines that are being considered by this Ministry. Bangalore-Chamarajanagar railway line – (1) Bangalore via Kanakapura, Malavalli, T. Narasipura Bannur and Chamarajanagar-Mettupalyam, (2) Bangalore via Kanakapura, Malavalli, Kollegel, Yalandur-Chamarajanagar Mettupalyam. Out of these two lines it is for the hon. Minister and his Ministry to choose the best one.

*Translation of speech originally delivered in Kannada.

Sir, I wish the hon. Railway Ministers all the best in their ventures particularly for encouraging village industry and handicrafts. I thank you once again and with these words I conclude my speech.

सभापति महोदय : जो भी माननीय सदस्य अपनी स्पीच सदन के पटल पर ले करना चाहते हैं, वे ले कर सकते हैं।

श्री महेश कनोडीया (पाटन) : सभापति जी, आपने मुझे बोलने का मौका दिया है, इसके लिए मैं आपका धन्यवाद करता हूं। मैं आपके माध्यम से माननीय रेल मंत्री जी द्वारा प्रस्तुत रेल बजट का विरोध करने के लिए खड़ा हुआ हूं। मैं अपने क्षेत्र उत्तर गुजरात में पाटन के लिए ब्रॉड गेज के लिए आपसे कई बार कह चुका हूं। इसके पहले भी मैंने कहा है। मैं विरोध इसलिए कर रहा हूं कि यह बजट शब्दों का मायाजाल है और असत्य का पुलिंदा जैसा लगता है। उसका सबसे बड़ा उदाहरण गुजरात के साथ किया गया रेल संबंधी अन्याय है और जो मेरा वीरमगाव-भीलड़ी प्रोजेक्ट है, श्री नीतीश कुमार जी ने १९९९ में जिसे सैंक्शन किया था जिसमें मेहसाड़ा से वीरमगाम-भीलड़ी तक ब्रॉड गेज बनाने का काम था। आपके बजट में वीरमगाम से मेहसाड़ा तक का उल्लेख किया गया है लेकिन मेहसाड़ा-पाटन से भीलड़ी का कोई जिक्र नहीं किया गया है। उसे छुपाया गया है। क्यों छुपाया गया है ? जब वह सैंक्शन्ड हो चुका है और उसके लिए धनराशि भी बजट में आबंटित की गई है लेकिन यह काम क्यों नहीं हो रहा है ? पाटन शहर ऐतिहासिक और धार्मिक शहर है। वहां पर जसमा, उदर और शितराज और बड़े-बड़े ऐतिहासिक किस्से बन गये हैं। वहां के एक तालाब में पानी नहीं आता था तो एक सती का श्राप लगा था तब एक वीरमाया नामक बुनकर ने अपना मस्तक दिया था जिससे वहां पर पानी आया था।

17.00 hrs. आज भी दूर-दूर से लोग इस स्थान पर दर्शन करने आते हैं। यद्यपि आपने इस प्रोजेक्ट को पूरा किए जाने का वचन दिया था, फिर भी इसे इस साल के बजट में नहीं लिया गया है। वचन तो वचन होता है, उसका पालन किया जाना चाहिए।

" रघुकुल रीति सदा चलि आई, प्राण जाए पर वचन न जाई। "

महोदय, आज जनता जागरूक हो चुकी है, वह सब समझने लगी है।

श्री लालू प्रसाद : अब आपका काम हो जाएगा।

श्री महेश कनोडीया : माननीय मंत्री जी, आपको बहुत-बहुत धन्यवाद, लेकिन आज देश की जनता बहुत जागरूक हो गयी है और वायदा पूरा न होने पर वह हमें कभी माफ नहीं करेगी। मैं विनम्रतापूर्वक माननीय मंत्री जी से निवेदन करना चाहता हूँ कि यदि आप अधूरे पड़े इस प्रोजेक्ट को पूरा करेंगे तो आप जब भी मुझे बिहार में आमन्त्रित करेंगे, मैं अलग-अलग आवाजों में गाकर सभी को खुश कर दूंगा।

   

SHRI B. MAHTAB (CUTTACK): *Sir, I rise to participate in the discussion on the Demands for Grants of Railways for 2005-06. On earlier occasions I have drawn the attention of this House towards the Lakadeiscal attitude of the Railway Ministry towards Orissa and today again I would draw the attention towards the neglect of the Railway Ministry and UPA Government shown to Orissa.

We have repeatedly appealed before the Railway Minister to create a special corpus of funds to expedite the implementation of rail projects which are considered vital for the State. Interestingly, atleast three of the rail projects identified by the Orissa Government are Daitari-Banspani which is 155 km, Haridaspur-Paradeep, which is 82 km stretch and doubling of Cuttack-Baranga line which is only 10 kms and the second rail bridge over river Mahanadi. All these projects have been taken up for implementation by the Rail Vikas Nigam Limited ( RVNL).

As the Government is aware that some parts of the work between Banaspani and Keonjhar, around 50 kilometers, on the Daitari-Banaspani project has been completed. However, these being single line projects, I emphasise the need for upgrading them into double-line networks.

What has also been upsetting us is that the 90 km long Angul-Duburi-Sukinda Road single line project was sanctioned several years ago but there has been hardly any progress so far.

Another project of interest to us is to clear the bottleneck between Cuttack-Baranga rail line because of the want of construction of rail bridge over Kuakhai and Kathjodi river. This should be taken up with top priority.

The extension of the Naupada-Gunupur rail line of 90 kms. currently undergoing gauge conversion be extended to Thuruvali, of another 70 kms.

Orissa is now poised for an industrial resolution. To be more specific, a steel making revolution is in the offing. Several big names, both national and     *The Speech was laid on the Table.

international, have shown definite interest in launching projects in the State"s iron ore belt, the largest in the country. Some of them already have signed MOUs. As many as 25 MOUs have already been signed. The implementation of these projects will require movement of an additional 50 million tonnes of traffic, both raw materials and finished projects. If the projects being contemplated by the Tatas, Essar, Sterlite and Posco are taken into account, the figure it is estimated, will jump to 100 million tonnes. Therefore, my anxiety is to have bettter connectivity to move larger volumes of freight which will bring in more revenue to the Railways. Threfore it is necessary to form a corpus fund of the size of atleast Rs.3000 crore which can be invested periodically for the development of connectivity in Orissa.

Recently Orissa Government has identified three belts in the State where iron and steel and sponze iron units are to come up in a big way. These include the Barbil-Duburi belt, the Cuttack-Dhenkanal belt and the Sambalpur-Jharsuguda-Rourkela belt. The Kalahandi-Bolangir belt, rich in bauxite deposits, holds out the promise of major aluminium projects. Big names such as L&T, Aditya Birla Group, Vedanta and BHP Billiton are already floating tenders in this connection.

I am aware that Railways generally prefer to puruse a cautious and conservative approach in matter of new projects. It will not be interested in projects unless convinced of their traffic potential. Very understandbly so. However, inquiries with the East-Coast Railways reveal that work on several projects is ongoing though the levels of progress vary widely, from land acquisition to near commissioning.

The construction of new broad gauge lines including Daitari-Banaspani of 155 kms with an estimated cost of Rs.590 crore, Lanjigarh-Junagarh of 56 kms with an estimated cost of Rs.67 crores, Haridaspur-Paradeep line of 82 kms with an estimated cost of Rs. 340 crores, Sukinda Road-Angul line of 90 kms with a cost of estimate of Rs.415 crores, Talcher-Bimlagarh line of 154 km with a cost of Rs.727 crore and Khurda Road-Bolangir line of 290 kms with an estimate of Rs. 700 corres are of importance. Save the Talcher-Bimlagarh and Khurda Road-Bolangir lines, which are to facilitate passenger movement, primarily , all other projects are desigend to boost freight movement.

The doubling projects are of importance. The most critical is the construction of the second bridge on the Mahanadi, Kathajodi and Kuakhai river connecting Cuttack from all sides.

Paradeep needs free connectivity. Unless this major port is connected by Haridaspur-Paradeep rail line, freight traffic will not improve. Dhamra Port is coming up. So also Gopalpur minor port is in the process of developing into a major port. Therefore, connecting Gopalpur directly with Talcher via Narasinghpur has become essential. Steps should be taken in this regard.

I would repeat again that as Orissa is poised for an industrial revolution of sorts, especially in steel and a huge spurt in freight movement likely in the next couple of years, Railway Ministry should come up with special central funding for some of this vital connectivity in a time bound manner.

With these words, I conclude.

   

SHRIMATI TEJASWINI SEERAMESH (KANAKAPURA): Mr. Chairman, Thank you. I rise to support the UPA Government"s Supplementary Demands for Grants on Railways. I would like to compliment the UPA"s Chairperson, Shrimati Sonia Gandhi ji, our humble Prime Minister, Dr. Manmohan Singh ji, the champion of downtrodden, the Railway Minister, Shri Lalu Prasad Yadav ji and the humble Minister of State for Railways, Shri Velu, who comes from the cultured down South. They all made this Railway Budget very meaningful. This Budget keeps the common people"s interests in view.

I would like to make some observations to make it more meaningful. To me the Indian Railways is like a wide screen which reflects the Indian National Movement. We can recall how Gandhiji used to travel by train and inspiring lakhs of common people to participate in the freedom struggle. Trains also became the target of the enemy forces when the country was divided into two. A lot of atrocities occurred in the same trains when this great nation was divided into India and Pakistan.

Many films were made drawing inspiration from trains. Dr. Rajkumar and Kamala Hassan have acted in many such films. Railway is the symbol of lovers, it is the symbol of culture and civilization. It is the common mode of transport of the true Indians. There is no meaning in simply talking about the Railways without understanding the importance of the Railways. It is the common people"s mode of transport. We should give a lot of importance and make observations towards making it more efficient and safe. Today, there is a need to improve the safety measures of the railway stations. Women and children love to travel by trains, which is the most comfortable mode of transport. Common people, from Kashmir to Kanyakumari, can travel by train. Elite people can travel by air, but common people cannot travel by air. So, we must improve and increase the efficiency of the Railway staff, right from Coolie to the Station Master. We must protect women, children and physically challenged from the eve teasers and gangsters.

I hope the Ministry is competent enough to deal with such situations. Lalu ji and Velu ji are very brave names and they are very much committed to this cause. I request them to make it more efficient.

There is a need to increase wagons and goods trains. It is because I heard these days even loaded trucks are made to travel by trains because of the hike in diesel prices, road toll and bridge toll. Travelling by trains is cheaper even for the loaded trucks. So, there is a great need to increase goods trains and wagons. … (Interruptions)

As far as the new lines are concerned, though our Minister has given a lot of importance to my State, Karnataka, we need more. You can go through the list. Lalu ji is kind enough to give us more facilities. I can go through all the projects. There is Kottur-Ariyar-Arpanahalli new line.

This facility my State will have only after getting new lines and doubling of the lines. If there is a shortage of money in the Ministry, please raise some Soft Loans. You cannot neglect the Indian Railways. So, do not hesitate to raise some Soft Loans from the international financial institutions to construct the new lines and all that.

I come from Kanakpura Constituency. My people are very downtrodden. There is no irrigation facility, and farmers are suffering due to continuous drought since the last four years. If you introduce the new line from Bangalore-Mettupalyam via Kanakpura and Malavally, it will be a great support for our people for introducing new industrial venues. This will also help the farmers to transport the crops and agricultural products. Please give importance to Karnataka and help complete all our pending projects with the Central Ministry.

* Sir, I would like to lay down the list of Rail Projects for Karnataka State.

First of all, I wish to take up some of the important Railway Projects which have cost sharing with Government of Karnataka. These include Kotturu to Harihar via Harpanahalli (New Line), Bangalore to Kengeri with electrification (Doubling), Kengeri to Ramanagaram (Doubling), Bijapur to Gadag (Gauge Conversion) and Hassan to Mangalore (Gauge Conversion).

The project for Hassan to Mangalore (Gauge Conversion) is through equity participation.

Soft loan can be raised for some other important projects. These include important projects like Hassan to Bangalore via Shravanabelagola (New Line), Kadur - Chikmagalur – Sakleshpur (New Line), Bangalore – Satyamangalam via Kanakapura (New Line), Hubli to Ankola (New Line), Chamarajnagar to Mettupalayam (New Line), Munirabad to Mahboobnagar via Raichur (New Line), Bidar to Gulbarga (New Line), Mysore to Chamarajnagar (Gauge Conversion), Shimoga to Talguppa (Gauge Conversion), Yashwanthpur to Tumkur (Doubling), Hospet to Toranagallu (Doubling) and Bangalore – Whitefield – KR Puram (Quadrupling Bangalore).

I would like to request, through you, Mr. Chairman, to the hon. Railway Minister to introduce a new line as a gift to my constituency people who basically belong to the farming community. This new line is Bangalore to Mettupalayam via Kanakapura-Malavally-Chamrajnagar.

Now, I would like to say a few words about Karnataka in Railway Budget 2005-06. Two new lines are to be completed during the year 2005-06. They are Hassan - Shravanabelagola of Bangalore – Hassan and Bangalore – Nelamangala of Bangalore – Hassan.

   

*….* This portion of the speech was laid on the Table.

A few new trains were announced in this year’s Railway Budget. These include Madgaon – Mangalore Jan Shatabdi Express (6 days a week), Chennai-Bangalore Shatabdi Express (6 days a week), Mangalore-Shravanabelagola Passenger (after completion of line), Yashwantpur-Mangalore Express (via Mysore) after gauge conversion, Yashwantpur-Mangalore Express (via Arsikere) after gauge conversion, Hubli-Chikjajur Passenger (daily) and Belgaum-Miraz Passenger – 2 Pairs (5 days a week).

There are some trains, which need to be extended during the year 2005-06. These include Mysore-Thanjavur Express to Kumbakonnam (after gauge conversion), Kacheguda-Shri Sathyasai Prashnathi Nilayam Express to Yashwantpur, Jaipure-Bangalore Express to Mysore (after doubling) and Sanghamitra Express from Rajendranagar, Patna to Bangalore City.

Frequency for Howrah-Yashwantpur Express should be increased from bi-weekly to daily with diversion via Tirupati.

New surveys may be carried out about Gauge conversion of Kolar-Chickballapur, Kotturu-Chitradurg via Jagalur, Bangalore-Mettupalayam and Kanakpura-Malavally.

A new concrete sleeper plant at Harihar has been announced and the project, namely, doubling of lines – Mangalore to Shoranpur have been expedited. Some doubling lines are near completion like Thornagallu-Hospet, Hagari-Bellary and Bangalore-Bidadi. Gauge conversion lines like Bijapur-Basavanabagewadi of Sholapur – Gadag and Saklesh-Subramania Road of Hassan-Bangalore are nearing completion.

With humble thanks, I would like to conclude.*         श्री आनंदराव विठोबा अडसूल (बुलढाणा) : सभापति जी, यहां रेल मंत्री जी और उनके दोनों सहयोगी रेल राज्य मंत्री जी भी बैठे हैं। मैं जब पहली बार ११वीं लोक सभा में चुन कर आया था, तो मैंने अपने निर्वाचन क्षेत्र के लोगों की भावना और जरूरत को ध्यान में रखते हुए रेल बजटों पर रात को दो-तीन बजे, जब भी मुझे मौका मिला, अपनी मांगों को रखा। दुर्भाग्य से अभी तक मुझे कोई यश नहीं मिला। मैं महाराष्ट्र के विदर्भ क्षेत्र से आता हूं, जो अत्यंत पिछड़ा हुआ क्षेत्र है। मेरे निर्वाचन क्षेत्र बुलढाणा में कोई औद्योगिक विकास या इरीगेशन के साधन नहीं हैं और न ही कोई अच्छे रास्ते हैं। इसलिए वहां के लोगों की बहुत दिनों से मांग है कि उस क्षेत्र में एक रेलमार्ग होना चाहिए। अंग्रेजों के जमाने में १९२६ में उसका सर्वे हुआ था। वह मार्ग जलाना से सेगांव है। जलाना साउथ सेंट्रल रेलवे का बड़ा स्टेशन है और सेगांव सेंट्रल रेलवे का स्टेशन है। दोनों को जोड़ने के लिए करीब १५० किलोमीटर की दूरी है। अगर यह रेल लाइन बनती है तो मराठवाड़ा के नौ जिले और विदर्भ के ११ जिले जुड़ जाएंगे। लोगों को इससे सुविधा होगी और उससे आदान-प्रदान होगा। जैसे कहा जाता है कि पहले अंडा या पहले मुर्गी, उसी तरह यह भी है कि विकास पहले या रेलवे पहले। जहां रेल जाती है, वहां अपने आप विकास हो जाता है, क्योंकि वहां औद्योगिकरण हो जाता है। इसलिए हमारे क्षेत्र विदर्भ और मराठवाड़ा के लोगों की मांग है कि वहां यह रेलमार्ग होना चाहिए। मैंने इस मांग को कई रेल बजटों और रेलवे की अतरिक्त मांगों पर चर्चा के समय भी उठाया है। लेकिन मुझे अभी तक इसका यश नहीं मिला।

अगर आपको फंड रेज करना है, तो जैसे कोंकण रेलवे के लिए आपने बॉण्ड्स के माध्यम से नधि जमा की थी, उसी तरह से वहां के लिए भी १०० करोड़ रुपए से ऊपर की राशि हम जमा कर सकते हैं। लेकिन मेरा निवेदन है कि यह रेलमार्ग बनना चाहिए।

मुझे रेल मंत्री जी से और उनके दोनों सहयोगी राज्य मंत्रियों जी से उम्मीद है कि वे इसे पूरा करेंगे। मैंने इस मांग को नियम ३७७ के माध्यम से भी सदन में रखा था। लेकिन मुझे बताया गया कि यह रेलमार्ग वायबल नहीं है। मुझे आश्चर्य हुआ कि रेलवे सर्विस इंडस्ट्री है या इनकम इंडस्ट्री है। रेलवे को सर्विस इंडस्ट्री होना चाहिए। रेलवे के माध्यम से विकास होता है । इसलिए यह रेलमार्ग होना जरूरी है। रेल मंत्री जी ने अभी थोड़ी देर पहले एक माननीय सदस्य के भाषण के बाद तुरंत जवाब दिया था कि हम इसे पूरा करेंगे।

मैं आपसे उम्मीद करता हूं आप यह कार्य रेल मार्ग को ध्यान में रखकर करेंगे।

 

मैं दो छोटी-छोटी बातें और कहना चाहता हूं। सेगांव गजानंद महाराज का तीर्थ-क्षेत्र माना जाता है और वहां तीर्थ के लिए लाखों लोग आते हैं लेकिन रेल मार्ग के कारण वहां पर आधा किलोमीटर की लम्बी लाइन लग जाती है लेकिन वहां पर अभी तक ओवर-ब्रिज का निर्माण नहीं हुआ है। मेरी मांग है कि वहां पर एक ओवर-ब्रिज का निर्माण शीघ्र कराया जाए। इसी तरह से नांदुरा ताल्लुका क्षेत्र है और वह हाई-वे पर पड़ता है और वहां पर भी ओवर-ब्रिज न होने के कारण लोगों को बड़ी असुविधा का सामना करना पड़ता है। वहां पर भी एक ओवर-ब्रिज होना चाहिए। मैं मुम्बई शहर में रहता हूं और कांदिवली मेरे क्षेत्र में पड़ता है। वहां कांदिवली में चार-पांच साल से आधा ब्रिज बन चुका है लेकिन आधा नहीं बना है, यह समझ में नहीं आता है। वहां लागत लग चुकी है, इसलिए अगर वहां आप आधा हिस्सा भी पूरा करेंगे तो लोग आपको धन्यवाद करेंगे।

सभापति जी, आपने मुझे समय दिया, इसके लिए धन्यवाद।

श्री भानु प्रताप सिंह वर्मा (जालौन) : सभापति जी, मैंने पहले भी अपनी कुछ मांगे रखी थीं, लेकिन उन पर कोई ध्यान नहीं दिया गया। अब मैं फिर से अपनी कुछ मांगे माननीय मंत्री जी के समक्ष रख रहा हूं। हमारे यहां उत्तर-मध्य रेलवे के झांसी डविजन में ८ जंक्शन से कौंची स्टेशन तक शटल जाती है लेकिन कुछ दिनों से उस शटल का टाइम-टेबल बदल दिया गया है। टाइम-टेबल बदलने का मतलब क्या है, समझ में नहीं आता है। अगर यात्रियों की सुविधा के लिए टाइम-टेबल बदला जाए तो ठीक है लेकिन टाइम-टेबल बदलने के कारण यात्रियों को जंक्शन पर आकर तीन-चार घंटे रुककर ट्रेन मिले तो इस असुविधा के लिए कौन जिम्मेदार है? पहले यात्रियों को आधे घंटे में ही ट्रेन मिल जाती थी और वे मुम्बई, लखनऊ और इलाहाबाद के लिए चले जाते थे। लेकिन अब उन्हें दो-तीन घंटे इंतजार में बैठना पड़ता है। मैं पूछना चाहता हूं कि आखिर अधिकारियों ने टाइम-टेबल चेंज क्यों किया। मैंने इस बारे में माननीय मंत्री जी को भी लिखकर दिया था कि टाइम-टेबल के समय को पहले की तरह ही रखा जाए। अगर समय पहले की तरह रखेंगे तो लोगों को सुविधा होगी और राजस्व में वृद्धि होगी। लेकिन फिर भी समय पहले वाला नहीं रखा गया है। मेरा माननीय मंत्री जी से अनुरोध है कि समय को पहले की भांति रखा जाए, जिससे यात्रियों को असुविधा न हो। मुझे ऐसा लगता है कि कहीं अधिकारी इस शटल को घाटे में दिखाकर बंद करने का कोई योजना तो नहीं बना रहे हैं। कौंच स्टेशन के अगल-बगल वाली जमीन पर कहीं माफियाओं की नजर तो नहीं है। कहीं ऐसा तो नहीं है कि अधिकारियों ने भूमाफियाओं से सांठ-गांठ कर ली हो और समय चेंज होने से रेलवे को राजस्व का लाभ नहीं होगा और जमीन को भूमाफियाओं को कब्जा करने के लिए छोड़ देंगे। समय चेंज होने के कारण जनता बड़ी उत्तेजित है और धरने व प्रदर्शन करने के लिए तैयार है। डीआरएम से भी मैंने इस विषय में बात की है लेकिन अधिकारियों ने मेरी बात पर कोई ध्यान नहीं दिया है।

हमेशा देखने में आता है कि एक्सीडैंट्स ज्यादा हो रहे हैं और वे रात को १२ बजे से सुबह पांच बजे के बीच होते हैं। इसका क्या कारण है? उसका प्रमुख कारण यह है कि जिस स्टेशन मास्टर की डयूटी होती है …( व्यवधान) मैं एक महत्वपूर्ण बात रख रहा हूं।

कंपनी कार्य मंत्रालय के राज्य मंत्री (श्री प्रेमचंद गुप्ता) : आप लिख कर दे सकते हैं।

सभापति महोदय : आप बोल चुके हैं। आप सप्लीमैंटरी डिमांड्स के समय भी बोल सकते हैं। आज समय का अभाव है।

श्री भानु प्रताप सिंह वर्मा : मैं अभी पूरा नहीं बोला हूं।

*माननीय महोदय जी, उत्तर मध्य रेलवे के झांसी डिवीजन में झांसी से करीब ६ बजे एक इंटरसिटी चलायी जा रही है, वह करीब १० बजे कानपुर पहुंचती है। यह १० बजे से ६ बजे शाम तक कानपुर में खड़ी रहती है। मेरी रेल मंत्री से मांग है कि इस इंटरसिटी को इलाहाबाद तक बढ़ाया जाये तथा इसको मोठ स्टेशन पर रोका जाये।

महोदय, मैं आपके माध्यम से रेल मंत्री जी से मांग करता हूं कि झांसी डिवीजन में एट जंक्शन से कोच तक शटल करीब १०० साल से ज्यादा समय से चल रही है। अभी करीब ६ माह से समय बदल दिया गया है, जिससे यात्रियों की संख्या कम हो गयी है। मुझे लगता है कि यह शटल जब घाटे में चलेगी तो बंद करने की कोई योजना तो नहीं बनायी जा रही है क्योंकि इस समय झांसी डिवीजन में एक अधिकारी कोंच स्टेशन के पास मदारी ग्राम के निवासी हैं उनके द्वारा इस शटल का समय बदला गया है। मुझे शंका है कि इन अधिकारी की कोंच के भूमि माफियाओं से सांठगांठ तो नहीं चल रही है कि शटल घाटे में दिखाकर स्टेशन कोंच को बंद कर रेलवे की जगह को कब्जा करना चाहते हों।

मेरी आपसे मांग है कि शटल का समय पूर्ववत किया जाये, जिससे यात्रियों को लाभ मिले तथा रेलवे विभाग को राजस्व का लाभ मिल सके। माननीय रेल मंत्री जी एट जंक्शन पर कोचीन एवं पुष्पक एक्सप्रेस को रोका जाये। माननीय मंत्री जी मोठ स्टेशन पर कुशीनगर एवं इंटरसिटी ट्रेन को रोका जाये। दिल्ली से पूर्वोत्तर की ओर जो ट्रेनें चलती हैं, उन में से चार पांच गाड़ियों को दिल्ली से झांसी कानपुर होते हुए किन्हीं पांच गाड़ियों को आने जाने के चलायी जाये। ग्वालियर, आगरा, झांसी, उरई के यात्री पूर्वोत्तर तथा दिल्ली से सीधे जुड़ जायेंगे।

माननीय मंत्री जी कोंच स्टेशन को कम्प्यूटरीकृत किया जाये, जिससे करीब ३०० ग्रामों के यात्रियों को इसका लाभ मिल सके। माननीय रेल मंत्री जी मेरे लोक सभा क्षेत्र में कालपी स्टेशन एक तीर्थस्थान है, जहां महर्षि व्यास जी की कर्मभूमि तथा तपोभूमि है, जहां पर हमेशा लाखों यात्री दर्शन करने आते हैं। अत: मेरी रेल मंत्री से मांग है कि कालपी स्टेशन पर भी कोचीन एवं पुष्पक एक्सप्रेस को रोका जाये, जिससे दर्शन हेतु यात्री कालपी स्टेशन पर उतर सके।*       *The portion of the speech was laid on the Table .

श्री मित्रसेन यादव (फैजाबाद) : सभापति महोदय, आपने मुझे बोलने का समय दिया, इसके लिए मैं आपका आभारी हूं। मैं समझ रहा हूं कि समय कम है इसलिए ज्यादा समय नहीं लूंगा। कुछ सुझावों के साथ अपनी बात समाप्त करूंगा। वैसे यह विभाग भारत सरकार का सबसे बड़ा विभाग है। देश के अरबों लोगों को इस कोने से उस कोने तक पहुंचाने का इससे बढ़ कर कोई साधन नहीं है इसलिए इस विभाग को बजट के बारे में कोई चिन्ता नहीं करनी चाहिए। जब इस विभाग के बजट के बारे में कोई चर्चा की जाती है तो हमें तकलीफ होती है। जिस विभाग को पैसा देने के लिए देश की जनता स्टेशनों पर भीड़ लगाए खड़ी है उस विभाग के पास बजट की क्या कमी हो सकती है? देश की जनता को एक कोने से दूसरे कोने तक पहुंचाने के लिए अगर साधनों की कमी है तो आप उसे दूर कीजिए। देश की जनता रेल विभाग को करोड़ों-अरबों रुपया देने के लिए तैयार है। इसलिए माननीय मंत्री जी के पास बजट की कमी नहीं होनी चाहिए। जिस विभाग को करोड़ों लोग अरबों रुपए देने को तैयार हों, स्टेशनों पर भीड़ लगाए खड़े हों और टिकट न मिलने पर वापस चले जाते हों, वहां बजट की कोई चर्चा करना ठीक नहीं होगा।

अयोध्या-फैजाबाद एक तीर्थ स्थल है। बिहार से जितनी गाड़ियां आती हैं वे गोरखपुर से सीधे पश्चिम को चली जाती हैं। सरयू नदी पर पुल बना जिस पर अरबों रुपए लगे लेकिन वहां से कोई भी गाड़ी नहीं गुजरती है। मेरी मांग और सुझाव है कि बिहार, हरियाणा, पंजाब और दिल्ली को आने वाली जितनी भी गाड़ियां हैं, उनमें से कुछ गाड़ियों को गोरखपुर से फैजाबाद जो पुल बन गया है, फैजाबाद-अयोध्या होकर डाइवर्ट कर दें तो लोगों को सुविधा होगी और रेल विभाग को लाभ होगा। इससे अच्छी कोई बात नहीं होगी।

बाराबंकी से फैजाबाद मुश्किल से सौ किलोमीटर की दूरी है। उसका दोहरीकरण और विद्युतीकरण कर दिया जाए तो काफी लोगों को सुविधा मिल जाएगी। पूर्वाचल से बहुत से लोग अहमदाबाद, सूरत नौसारी, भड़ौच और मुम्बई जैसे औद्योगिक शहरों में जाते हैं जिससे उनके बच्चों को रोटी मिलती हैं। वे लोग ट्रेन की छतों में बैठ कर जाते हैं। मेरी गुजारिश है कि अयोध्या-फैजाबाद से भी ऐसी ट्रेनें जो लखनऊ तक सीमित रहती हैं, वे फैजाबाद तक बढ़ा दें तो पूवार्ंचल के बहुत से लोग जो अहमदाबाद, मुम्बई, सूरत, नौसारी, भड़ौच, बड़ोदरा जाते हैं उनको सुविधा हो जाएगी। अभी उन्हें वहां जाने में बहुत मुश्किल होती है। आप एक ट्रेन इलाहाबाद के थ्रू भेजते हैं। उसके समय में परिवर्तन कर दें तो वहां की जनता को सुविधा होगी।

यात्रियों को जो असुविधाएं होती हैं, उनको दूर करने का प्रयास किया जाना चाहिए। असुविधाओं में सबसे बड़ी दिक्कत यह है कि स्टेशनों में चोरियां, छीना-छपटी और लूटपाट होती हैं। ट्रेनों में जो चाय और पानी लेकर घूमते हैं, उनको भी यह दिक्कत झेलनी पड़ती है। इसके साथ-साथ बड़ी-बड़ी दुर्घटनाएं भी होती हैं। इन सब चीजों पर ध्यान दिया जाना चाहिए। रेल के साथ बहुत से लोगों की जिन्दगी जुड़ी है।

कुल्हड़ों पर भी बहुत से लोगों की नजर लगी है। आप अपने कुल्हड़ पर भी नजर ऱखे हैं लेकिन उनके घड़ों पर भी नजर रखें। …( व्यवधान)

सभापति महोदय: आपका समय समाप्त हो गया है। अब आप बैठ जाएं।

डॉ. राजेश मिश्रा (वाराणसी) :महोदय, मैं आपका बहुत आभारी हूं कि आपने मुझे रेल बजट की डिमांडस फॉर ग्रांटस के बारे में बोलने का अवसर दिया है। मैं रेल बजट की डिमांडस फॉर ग्रांटस के समर्थन में बोलने के लिए खड़ा हुआ हूं । मैं माननीय श्री लालू प्रसाद जी, श्री राठवा जी और श्री वेलू जी को बधाई देना चाहता हूं।

महोदय, सामने के बैंच से तमाम चर्चाएं होती है कि रेल मंत्रालय ने अपने वायदे को नहीं निभाया है । मैं कहना चाहता हूं कि विकास की प्रक्रिया एक साल या एक-दो दिन में पूरी नहीं होती, यह अनवरत चलने वाली प्रक्रिया है । जब आप चर्चा करते हैं कि ११वीं लोकसभा में भी हमने कहा था, वह पूरा नहीं हुआ, १२वीं लोकसभा में भी पूरा नहीं हुआ । आपको खुद अपने गिरेबान में झांक लेना चाहिए कि ११वीं, १२वीं और १३वीं लोकसभा में किसकी सरकार थी और आपके मंत्रियों ने इसे क्यों पूरा नहीं किया । मैं सम्मानित रेल मंत्रीगण को बधाई देना चाहता हूं कि उन्होंने विक्लांगों, नौजवान बेरोजगारों के लिए, जब वे इंटरव्यू देने के लिए जाएं, तो टिकट फ्री किया है ।

महोदय, ये कुल्हड़ की बात कहते हैं । हम जिस ट्रेन से जाते हैं तो हमें कुल्हड़ दिखाई देते हैं, पता नहीं उधर के लोगों को शीशे के गिलास ही क्यों दिखाई देते हैं । यह हमारी समझ में नहीं आता जबकि हमें तो कुल्हड़ ही दिखाई पड़ते हैं । हम माननीय रेल मंत्रीगण को बधाई देना चाहते हैं कि उन्होंने रेलवे के यात्री भाड़े और माल-भाड़े में कोई वृद्धि नहीं की । आपने अपने रुाोतों से रेलवे की आय बढ़ायी है और निश्चित रूप रेलवे की आय बढ़ी है।

महोदय, मैं माननीय रेल मंत्री जी को इसलिए भी बधाई देना चाहता हूं कि उन्होंने जम्मू-कश्मीर में ट्रेन चलाने की प्रकिया प्रारंभ की है । सबसे बड़ी बात है कि पाकिस्तान में भी ट्रेन चलाए जाने की प्रक्रिया प्रारंभ होने वाली है, निश्चित रूप से यह बहुत ही मजबूत कदम है । इससे भारत और पाकिस्तान के संबंध सुधर रहे हैं, इसमें रेल मंत्री जी का विशेष योगदान है।

मैं आपके माध्यम से माननीय रेल मंत्रीगण को दो-तीन सुझाव देना चाहता हूं । काशी हिंदुस्तान का एक तीर्थ स्थल है, वहां से सवा सौ किलोमीटर पर प्रयाग तीर्थ स्थल है । आज की तारीख में वहां सिंगल लाईन है। पांच से छ: घंटे में ट्रेन प्रयाग और काशी के बीच में जाती है, अगर यह डबल लाईन हो जाए …( व्यवधान)

सभापति महोदय : आप समय का ध्यान रखें ।

डॉ. राजेश मिश्रा : मैं कहना चाहता हूं कि प्रयाग और काशी को डबल लाईन से जोड़ दिया जाए तो जो दूरी चार घंटे की है उसे डेढ़ या दो घंटे में पूरा किया जा सकता है । इसके अतरिक्त वाराणासी उत्तर भारत का सबसे बड़ा कपड़ा उद्योग का केंद्र है । यहां से बंगलौर के लिए एक सीधी ट्रेन होनी चाहिए । वाराणासी से कोलकाता के लिए जो ट्रेन है वह इनडायरेक्ट होकर आती है जिसमें पांच-छ: घंटे ज्यादा समय लगता है । हमारा अनुरोध है कि वाराणासी से कोलकाता डायरेक्ट ट्रेन होनी चाहिए।

MR. CHAIRMAN : Please conclude now.

डॉ. राजेश मिश्रा : महोदय, वाराणासी में स्लीपर का कारखाना है । मेरा अनुरोध है कि स्लीपर के कारखाने को अपग्रेड किया जाए ।…( व्यवधान) सभापति महोदय, मैं आपको बहुत धन्यवाद देता हूं कि आपने मुझे बोलने का अवसर दिया ।

श्री हरिभाऊ राठौड़ (यवतमाल) : महोदय, मैंने श्री लालू प्रसाद जी से मांग की थी कि गीतांजली एक्सप्रैस का सहगांव में स्टॉप दिया जाए । मैं बड़े प्रेम और आदर के साथ उनको धन्यवाद देता हूं कि उन्होंने स्टॉप दे दिया और इसके लिए उनकी बहुत प्रशंसा भी हुई है । तरुण भारत लीडिंग पेपर में श्री लालू प्रसाद जी का फोटो एक तरफ और रेल का फोटो एक तरफ दिया गया, पूरी स्टोरी दी गई और इतिहास बना दिया । यहां सत्ताइस साल पहले ट्रेन चली थी और महाराष्ट्र में गजानन महाराज जो एक श्रद्धा स्थल है, उन्होंने कहा कि सहगांव को दर्शन देने आई है । माननीय श्री लालू प्रसाद जी, मुझे याद है मैं कन्सलटेटिव कमेटी का मैम्बर हूं, आपने कहा कि भारतीय रेल को विश्व में नंबर एक पर ले जाना चाहता हैं । जब तक मेरे डिस्टि्रक्ट में रेल नहीं आएगी तो नंबर एक पर रेल कैसे जाएगी?

महोदय, मैंने पूसर-वर्धा-नांदेड़ की एक लाईन के बारे में सुझाव दिया था ।

माननीय मंत्री जी को याद है। यह कहा गया था कि इस प्रोजैक्ट में ४६० करोड़ रुपये लगना है, यह बहुत मुश्किल है, यह रेल मंत्री जी बता रहे हैं। अगर हम विश्व में नंबर-एक पर जाना चाहते हैं तो आप विदर्भ और मराठवाड़ा को देखिये। रेल के इतिहास में उत्तर प्रदेश से रेल मंत्री हुये हैं, दक्षिण भारत से रेल मंत्री हुये हैं लेकिन हमारा महाराष्ट्र हमेशा दुर्लक्षित रहा है। इस ओर ध्यान दिया जाये।

सभापति जी, मैंने रेलवे स्टेशन पुसर का सुझाव दिया है जहां तोरादेवी संत समागम का श्रद्धा स्थान है। यहां पूरे देश से लोग आते हैं। महाराष्ट्र में नान्देड़ में गुरु गोविन्द सिंह जी की ३००वीं जयन्ती वर्ष २००७ में मनाने जा रहे हैं और महाराष्ट्र सरकार ने नान्देड़ के ब्युटीफिकेशन के लिये ७०० करोड़ रुपया दिया है। इसलिये मैं रेल मंत्री श्री लालू प्रसाद जी, श्री राठवा, श्री वेलु से रिक्वैस्ट करूंगा कि वे इस ओर ध्यान दें।

महाराष्ट्र सरकार ने बस भाड़ा बढ़ा दिया है जबकि रेल का किराया कम है। इससे रेल की अहमियत बढ़ गई है। महाराष्ट्र में शकुन्तला रेलवे स्टेशन पर अभी तक ब्रटिश मालिकाना है, उसे आजाद कर दीजिये। लालू प्रसाद जी ने रेल का भाड़ा कम किया है, उसके लिये धन्यवाद।

श्री मुंशी राम (बिजनौर) : महोदय, मैं राष्ट्रीय लोक दल चौ० अजीत सिंह की पार्टी की ओर से रेल बजट का सर्मथन करता हूं आपके माध्यम से माननीय रेल मंत्री जी से अनुरोध करता हूं कि मैं पं०उ०प्र० की बिजनौर लोक सभा क्षेत्र का प्रतनधित्व करता हूं मैं लोक सभा में, निम्न अनुरोध कई पत्रों द्वारा माननीय मंत्री जी से कर चुका हूं परन्तु मा० मंत्री जी द्वारा किसी भी पत्र का कोई उत्तर नहीं दिया गया जम्मू तवी-हावड़ा लाइन पर मौजमपुर जंक्शन जो कि मुरादाबाद-दिल्ली लाइन के गजरौला जंक्शन को जोड़ता है, जहां डाइवर्जन की आवश्यकता है मौजुमपुर जंक्शन से गजरौला जंक्शन के मध्य इकहरी लाइन अंग्रेजी शासन के समय की है, जिसकी दोहरीकरण करने की काफी आवश्यकता है। बिजनौर, चांदपुर रेलवे स्टेशनों के दोनों ओर रेलवे क्रासिंग को मानव चलित के स्थान पर हाइड्रोलिक चौडा गेट बनाये जाना यैंतायैंत के अवरोध को समाप्त करेगा।

बिजनौर से उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ केर् ौलए एक अतरिक्त ट्रेन की आवश्यकता की मांग भी कर चुका हूं क्योंकि बिजनौर रेलवे स्टेशन से आसपास मेरठ, मुजफ्फरनगर जिलों के यात्री भी बिजनौर स्टेशन से लखनऊ जाना चाहते हैं। अत: एक नयी ट्रेन बिजनौर से लखनऊ केर् ौलए चलायी जाये। उत्तरांचल एवं पं० उत्तर प्रदेश से देश के पश्चिम एवं उत्तर दिशा केर् ौलए कोई सीधी रेल गाड़ी नहीं है। अर्थात इस ओर हरिद्वार से सीधी रेल गाड़ी चेन्नई, आंध्राा, मुम्बई केर् ौलए चलायी जाये।

उत्तरांचल की राजधानी देहरादून को नैनीताल से जोड़ने वाला राष्ट्रीय राजमार्ग द्भ ७४ पर रेलवे स्टेशन के समीन नगीना, नजीबाबाद के पास क्रासिंग पर फ्लाइ ओवर बनाये जाने की भी मांग कर चुका हूं। परन्तु, माननीय रेल मंत्री जी द्वारा उपरोक्त आवश्यक मांगों की अनदेखी की है, जो कि सभी मांगे क्षेत्र की सबसे बड़ी आवश्यकता है।

मैं माननीय मंत्री जी से आपके माध्यम से अनुरोध करूंगा कि उपरोक्त आवश्यकताओं को पूर्ण करेंगे।

       

*The speech wasw laid on the Table.

श्री दाहयाभाई वल्लभभाई पटेल (दमन और दीव) : : सभापति जी, माननीय रेल मंत्री जी ने जो रेल बजट दिया है, उसके लिये मैं उनका, श्री वेलु जी का और श्री राठवा जी का धन्यवाद करता हूं।

मैं रेल संबंधी कुछ बातें आपके ध्यान में लाना चाहता हूं। दक्षिण गुजरात में वापी रेलवे स्टेशन को ए ग्रेड का दर्जा दिया गया है लेकिन सुविधा कुछ भी नहीं दी गई है। उस स्टेशन पर कोई रिटायरिंग रूम नहीं है, प्लेटफार्म नं. १ से दूसरे प्लेटफार्म पर जाने के लिये ओवरब्रिज नहीं है। वापी रेलवे स्टेशन पर डेली कलेक्शन ७ से १२ लाख रुपये है फिर भी ये सुविधायें नहीं दी गई हैं। दूसरी सब से आवश्यकता वहां फास्ट ट्रेनों के स्टापेज की है। अवन्तिका, अवध, स्वराज और जनता एक्सप्रेस वहां नहीं रुकती हैं। मेरा निवेदन है कि ऐसी फास्ट ट्रेनों का स्टापेज दिया जाये।

एशिया के नं. १ वापी, दमन दियु और दादरा इंडस्टि्रयल शहर है जहां बहुत सारी इंडस्ट्रीज हैं। वहां लाखों की संख्या में वर्कर्स आते हैं। उन वर्कर्स के आने जाने के लिये MEMU ट्रेनें बढ़ाई जानी चाहिये। मेरा सुझाव है कि दमन से नासिक के लिये एक नई रेल लाईन बनायी जाये जो वाया वापी-सिलवासा होकर जाये।

सभापति जी, मुम्बई राजधानी और अगस्त क्रान्ति एक्सप्रैस ट्रेनों में स्टाफ का अलग-अलग ड्रेस है। मेरा निवेदन है कि यह एक प्रकार का ड्रेस होना चाहिये। इसके अतरिक्त वापी से आगे बलीठा रेलवे फाटक है जहां ट्रेफिक ज्यादा रहता है। इसलिये इस फाटक पर रेल ओवर ब्रिज की डिमांड है।

श्री सुरेश चन्देल (हमीरपुर, हि.प्र.) : माननीय सभापति महोदय, रेल बजट की अनुपूरक अनुदानों की मांगों पर आपने मुझे बोलने का समय दिया, इसके लिए मैं आपको धन्यवाद देता हूं। माननीय रेल मंत्री जी ने अपने बजट भाषण में देश में ४६ नई ट्रेनें चलाने, २७ ट्रेनों के मार्ग का विस्तार करने और १० ट्रेनों के फेरों में वृद्धि करने की घोषणा की थी। मंत्री महोदय ने रेल किराया न बढ़ाकर लोगों को राहत देने की कोशिश की है, उसके लिए मैं मंत्री जी को धन्यवाद देता हूं। चूंकि समय का अभाव है, इसलिए मैं ज्यादा भूमिका पर न जाते हुए मंत्री महोदय का ध्यान हिमाचल प्रदेश की तरफ आकर्षित करना चाहता हूं।

सभापति महोदय : आप केवल सुझाव दे दीजिए।

श्री सुरेश चन्देल : महोदय, हिमाचल प्रदेश ५७ सालों के बाद भी आज रेलों के विकास की द्ृष्टि से बहुत पिछड़ा हुआ है। मैं मंत्री जी के ध्यान में लाना चाहता हूं कि हिमाचल प्रदेश के रिकांगपियो में बैठकर पूरे देश की रेलों का नक्शा बना था। लेकिन इस बात का दुर्भाग्य है कि जहां सारे हिंदुस्तान की रेलों के विकास का नक्शा खींचा गया था, वही स्थान आज रेलों के मामले में सबसे ज्यादा उपेक्षित है। इसके मैं आपको दो-तीन उदाहरण देना चाहता हूं। वर्ष १९७३ में एक मात्र ब्रोड गेज लाइन मेरे निर्वाचन क्षेत्र में बननी प्रारम्भ हुई थी। वर्ष १९७३ में उसकी घोषणा हुई थी और कहा गया था कि यह पांच साल में बनकर तैयार हो जायेगी। लेकिन आज २००५ के आते-आते अभी तक यह केवल ३२ किलोमीटर ही बनी है। इसके अलावा कोई नई रेलवे लाइन हिमाचल प्रदेश में नहीं बनी है। इसलिए मेरा मंत्री महोदय से निवेदन है कि आज तक हिमाचल प्रदेश की जो उपेक्षा हुई है, उसे ध्यान में रखते हुए हिमाचल प्रदेश तथा मेरे संसदीय क्षेत्र की तरफ विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है।

देश के ५२ शक्तिपीठों में से तीन शक्तिपीठ नैना देवी, ज्वालादेवी और मां चिन्तपूर्णी मेरे चुनाव क्षेत्र में पड़ते हैं, जहां लाखों लोग हर साल आते हैं। इन यात्रियों को बसों के द्वारा वहां आने में बहुत कठिनाई होती है। मेरा निवेदन है कि इन स्थानों को जोड़ने के लिए कोई बहुत लम्बे ट्रैक बनाने की आवश्यकता नहीं है। आनंदपुर साहब से नैना देवी को जोड़ने के लिए १८-२० किलोमीटर लम्बा ट्रैक बनाने की आवश्यकता है। इसी तरह से रानीताल से ज्वालादेवी को जोड़ने के लिए मात्र १६ किलोमीटर का ट्रैक बनाना पड़ेगा। वहां से आगे दियोटसिद्ध तक इसे जोड़ने का मैं आपसे आग्रह करता हूं। क्योंकि वहां भी देश के कोने-कोने से लाखों लोग आते हैं। इसलिए मेरा मंत्री महोदय से निवेदन है कि इन शक्तिपीठों के धार्मिक महत्व को ध्यान में रखते हुए शीघ्र ही उपरोक्त नई लाइनों की व्यवस्था करने की कृपा करें।

अंत में मैं एक निवेदन और करना चाहता हूं कि ऊना से एक जनशताब्दी ट्रेन जरूर चलाई जाए, क्योंकि एक शताब्दी ट्रेन चंडीगढ़ से चलती है, जनशताब्दी ट्रेन भी वहां से चलती है, लेकिन हमारे क्षेत्र से भी एक जनशताब्दी ट्रेन प्रारम्भ की जाए। इन्हीं शब्दों के साथ मैं अपना वक्तव्य समाप्त करता हूं और आशा करता हूं कि मैंने मंत्री जी से जो निवेदन अपने वक्तव्य में किये हैं, उन पर माननीय रेल मंत्री जी अवश्य ध्यान देंगे।

SHRI J.M. AARON RASHID (PERIYAKULAM): Mr. Chairman, Sir, I rise to support this Railway Budget. Our hon. Railway Minister, Shri Laluji has brought a very good Railway Budget to suit the common and poor commuters and small traders by not raising the passenger fare and goods fare and by giving free passes to students who attend the Government interviews. One good thing that our hon. Railway Minister has done to avoid demurrage and other things is that 24 hour railway booking counter has been opened to take the luggages. In my constituency Bodinaickanur–Madurai, broad gauge was announced by the hon. Railway Minister but work has not yet started. Bodinaickanur, Cumbum, Gudalore are the main places for spices particularly pepper, cardamom, cotton, mangoes, coconut, tea, coffee etc. I have already requested the hon. Railway Minister to put a booking counter for small spice traders. Otherwise, they have transport the same to Madurai or Coimbatore for their booking. They are facing a lot of hurdles from sales tax, road tax, enforcement and other officials. To avoid these hurdles… (Interruptions)

MR. CHAIRMAN : Please conclude your speech. There is time constraint.

SHRI J.M. AARON RASHID : Should I lay my speech, Sir?

MR. CHAIRMAN : No, please conclude.

SHRI J.M. AARON RASHID : So, I request the hon. Railway Minister Laluji to open a spices booking counter at Bodinaickanur. The pilgrims to Ayyappan Temple are suffering a lot. Laks and lakhs of pilgrims are coming here from the whole of India. They are going round more than 150 km. in jungles and up hills. It is a difficult task for them.

MR. CHAIRMAN : Mr. Rashid, please conclude.

SHRI J.M. AARON RASHID : Should I lay my speech, Sir?

MR. CHAIRMAN : Yes.

*SHRI J.M. AARON RASHID : If the hon. Railway Minister extends this line to Theni, Bodinaickanur, Gudalore to Appayyan Temple, it will give lot of relief to the commuters, particularly pilgrims from all over India. I request Bodinaickanur–Madurai meter gauge to be converted immediately into broad gauge. More than 1800 km. MG route is there in Tamil Nadu alone. I request the hon. Minister to convert the same into Broad Gauge.

India is number one iron ore exporting country to China, Japan, Korea and other countries. As the demand goes up, the dalals of the exporters are exploiting the situation of the railway rake box bookings.

The exporters are placing the Box-N wagons indents in block and creating artificial demands. The genuine and actual mine owners, small exporters are not able to get box-N and rakes to move their iron ore to the loading ports by rail. They have to pay big price to advance booking Box-N rakes. They have to pay a sum of Rs. 500 only for booking of rail rakes. This is being a small amount in Southern Railway/South Western Railway, the dalals and the so-called exporters create artificial indent. The parties and the middlemen are minting money by creating artificial demand of Box-N rakes at the Railway Division at Chennai Port. If the party wants to place an indent, he has to pay full deposit as the entire freight is to be paid in advance. Sir, if this procedure is adopted in all the Railway Zones, the artificial demand for Box-N rakes could be reduced immediately. All over India the Railway will be able to create the genuine demands. Please give attention to this to avoid artificial Box-N rakes demands and middlemen’s interference.*     *….* This speech was laid on the Table.

श्रीमती जयाबेन बी. ठक्कर (वडोदरा) : सभापति जी, सबसे पहले मैं आम लोगों को राहत पहुंचाने वाले बजट के लिए मंत्री जी का धन्यवाद करती हूँ। मैं अपने क्षेत्र की कुछ बातें रखना चाहूंगी। बड़ौदा मेरा निर्वाचन क्षेत्र है। अहमदाबाद जाते हुए पहला स्टेशन बाजवा है जहां आईपीसीएल रिफाइनरी है और कई पीएसयूज़ हैं। पब्लिक सैक्टर से उत्पन्न माल की ढुलाई का काम भी वहीं होता है। वहां जो रेल फाटक है, वह हर दस मिनट के बाद २० मिनट तक बंद रहता है। वहां बड़े-बड़े कंटेनर्स चलते रहते हैं जिसके कारण लोगों को बहुत मुश्किल होती है। इसको रेल मंत्रालय ने पैंडिंग प्रोजैक्ट में दिया हुआ है। उसको जल्दी शुरू कराने के लिए मेरी प्रार्थना है। उसमें एक बात मैं ध्यान में लाना चाहूंगी कि स्टेट गवर्नमैंट और सैन्ट्रल गवर्नमैंट की जो ५०:५० प्रतिशत की भागीदारी होती है, उसको यदि केन्द्र सरकार पूरा वहन करती है तो ज्यादा सहूलियत होगी।

शयाजी नगरी ट्रेन वर्षों से कामकाजी लोगों को सूरत, बलसाड़ तक पहुंचाने का काम करती थी। उसको कच्छ तक एक्सटैन्ड करने के बाद दिक्कतें बढ़ गई हैं। मेरे पास बहुत सारे लोगों के पत्र भी आते हैं। लोग कहते हैं कि इस को शयाजी नगरी ट्रेन को पहले की तरह शुरू किया जाए और कच्छ के लिए एक नयी ट्रेन शुरू की जाए। …( व्यवधान)

तीसरी बात मैं कहना चाहती हूं कि वड़ोदरा-अहमदाबाद-मुम्बई रेलवे के नक्शे पर हाइयैस्ट यूटलिटी ट्रैक है और इस कारण वहां एक एडीशनल ट्रैक की आवश्यकता है। मैं मांग करती हूं कि वहां एक तीसरा ट्रैक एडीशनल दिया जाए। विश्वामित्री जो पहले से ही एक्सटैन्ड किया हुआ है, वह अच्छा रेलवे स्टेशन है। उसका भी उपयोग ठीक से किया जा सकता है। बाजवा का भी उपयोग किया जा सकता है जिससे भारण कम हो सकता है। हजीरा पोर्ट एक ऐसा पोर्ट है जिसमें आईओसी वगैरह जो चार पीएसयूज़ काम कर रहे हैं, उस लाइऩ को हिन्टरलैन्ड तक बढ़ाना चाहिए।

 

श्री गणेश प्रसाद सिंह (जहानाबाद) : *माननीय रेल मंत्री द्वारा २००५-२००६ के रेल बजट के अनुदानों की मांग को पूर्णरूपेण समर्थन करते हुए मैं निम्नांकित सुझाव लखित रूप में समयाभाव के कारण सभापति महोदय के निदेशानुसार सभा पटल पर रखता हूं।

मेरे संसदीय निर्वाचन क्षेत्र जहानाबाद के अंर्तगत पटना-गया रेल खंड के बीच टेहेटा एवं जहानाबाद के बीच नियाजीपुर हाल्ट की नितांत आवश्यकता है। क्योंकि टेहेटा एवं जहानाबाद स्टेशन की दूरी १० कि०मी० से अधिक है तथा इस क्षेत्र के गरीब, किसान मजदूर एवं आम जनता की मांग सालों से चली आ रही है। नियाजीपुर हाल्ट की स्थापना से इस क्षेत्र के सैंकड़ों गावं के वासी को सभी सुविधा मिलेगी।

पटना-गया रेल खंड के अंर्तगत जहानाबाद स्थित जहानाबाद-अरवत रोड में रेल लाइन के ऊपर पुल की आवश्यकता है। लाइन के नीचे एक काफी पुराना पुल है, जिसमें हमेशा दुर्घटना होते ही रहती है।

अत: इस सदन के माध्यम से माननीय रेल मंत्री जी से आग्रह करना चाहता हूं कि व्यापक जनहित में उक्त वर्णित सुझाव को स्वीकार करते हुए कार्यान्वित कराने का शिघ्रातिशीघ्र निदेश दें।

*The speech was laid on the Table.

 

श्री अवतार सिंह भडाना (फरीदाबाद) : सभापति जी, मैं आपके माध्यम से माननीय रेल मंत्री जी का ध्यान अपने निर्वाचन क्षेत्र फरीदाबाद की एक बहुत बड़ी समस्या की तरफ दिलाना चाहता हूं। फरीदाबाद से लाखों लोग रोज़ दिल्ली आते हैं। जीडीपी-४ पैसेंजर शटल जो दिल्ली से पलवल तक जाती है, उसको होडल-कोसीकलां तक एक्सटैन्ड करने के संबंध में मैंने कई बार मंत्री जी से प्रार्थना की। प्रार्थनाएँ तो बहुत कीं परंतु एक भी प्रार्थना पर अभी तक ध्यान नहीं दिया गया। …( व्यवधान)

सभापति महोदय : आप लिखकर मंत्री जी को दे दें।

श्री अवतार सिंह भडाना : मेरा निवेदन है कि उस शटल को मंत्री जी होडल-कोसीकलां तक एक्सटैंड करने की मेहरबानी करें। यह करीब १२ बजे दिल्ली से चलती है और १ बजे पलवल पहुंचती है। इसी प्रकार एक गाड़ी एसएऩपी-३ के स्थान पर आगरा पैसेंजर को दिल्ली तक भेजने की मांग है जिससे यात्रियों को ज्यादा सुविधा होगी। मैं निवेदन करता हूँ कि मंत्री जी इऩ दोनों मांगों पर ध्यान दें।

 

श्री जसवंत सिंह बिश्नोई (जोधपुर) : सभापति जी, आपने मुझे बोलने का अवसर दिया, इसके लिए मैं आपका धन्यवाद करता हूँ। सबसे पहले मैं अपनी ओर से रेल राज्य मंत्री राठवा जी को धन्यवाद देना चाहूंगा कि उन्होंने जनसंपर्क क्रांति एक्सप्रैस जोधपुर से शुरू की। मैं खास तौर से अपने लोक सभा निर्वाचन क्षेत्र जोधपुर के संबंध में तीन-चार सुझाव देना चाहूंगा।

फुलेरा से जोधपुर २४० कि.मी. की लाइऩ है, जिस पर आटो सिगनल प्रणाली नहीं होने से वहां पहुंचने में डेढ़ घंटा अधिक समय लगता है। कृपया आटो सिगनल प्रणाली की सुविधा वहां प्रदान कराएं। जोधपुर राजस्थान का बहुत बड़ा शहर है जहां की आबादी लगभग २५ लाख है। वहां बासनी रेलवे स्टेशन, भगत की कोठी रेलवे स्टेशन, प्रताप नगर, चौपासनी हाउसिंग बोर्ड रेलवे स्टेशन और बीजेएस में आरक्षण कार्यालय खोलने की मांग बहुत समय से की जा रही है। कृपया वहां आरक्षण कार्यालय खोले जाएं।

* मेरे लोक सभा निर्वाचन क्षेत्र जोधपुर के रेलवे स्टेशन पर दो द्वार हैं लेकिन दूसरे द्वार पर आरक्षण की सुविधा नहीं है। कृपया वह सुविधा प्रदान कराने की कृपा करें। मानव रहित फाटक पुन: चालू करने की बाबत भी मैं मंत्री महोदय का ध्यान आकृष्ट करना चाहता हूँ। बिलाडाबर रेलवे लाइन स्वीकृत करने के संबंध में भी मैं निवेदन करता हूँ। इसके अतरिक्त फलौरी, पोकरण, शेरगढ़, बाड़मेर नई रेलवे लाइन स्वीकृत करने के संबंध में मैं निवेदन करना चाहता हूँ जिनका सर्वे भी हो चुका है। मैं निवेदन करना चाहता हूं कि राजस्थान जन संपर्क क्रांति एक्सप्रैस का समय बदला जाए एवं इसको पुरानी दिल्ली से शुरू किया जाए। मैं मांग करता हूं कि जोधपुर-पूना के बीच नई रेल सेवा शुरू की जाए। मंडारे एक्सप्रैस जो जोधपुर से दिल्ली के बीच चलती है, उसका रेवाड़ी ठहराव निरस्त किया जाए।

महोदय, मेरे ये सुझाव आम जनता और रेल मंत्रालय के हित में हैं। मैं उम्मीद करता हूं कि रेल मंत्री महोदय इन पर अवश्य कार्रवाई करेंगे।*             *….*This portion of the speech was laid on the Table.

श्री रविन्दर नाइक धारावत (वारंगल) : महोदय, मैं ज्यादा समय नहीं लूंगा । रेल मंत्री जी से पिछली कंसल्टेटिव कमेटी की मिटिंग में बात हुई थी जिसमें मैंने वारांगल एरिया जो तेलेंगाना में काफी पिछड़ा हुआ इलाका है, वहां पर काफी समस्याएं हैं । महोदय, मैं माननीय मंत्री जी की द्ृष्टि में लाना चाहता हूं कि जो प्रोपोजल कंसल्टेटिव कमेटी की मिटिंग में हमने दिया है, उसे वह स्वीकार करके उसका समाधान करेंगे ।

सभापति महोदय : श्री रामकृपाल यादव जी आप लिख कर दे दीजिए ।

श्री लालू प्रसाद : आप कुछ देना चाहते हैं ।

प्रो. रासा सिंह रावत (अजमेर) : मैं माननीय रेल मंत्री जी से अनुरोध करना चाहूंगा कि अजमेर के पास बयाबर नगर की आबादी सवा लाख के लगभग है और वहां पर आश्रम एक्सप्रेस जो दिल्ली से अहमदाबाद जाती है उसका एक मिनट का स्टापेज देने के लिए प्रार्थना करना चाहता हूं ।

सभापति महोदय : रेल मंत्री जी आप बोलिए । माननीय सदस्य उस समय अनुपस्थित थे इसलिए उन्हें समय नहीं दिया जा सकता है । यह परंपरा नहीं है । इनको सदन के समय के प्रति एटेंटिव रहना चाहिए । मंत्री जी आप बोलिए ।

SHRI TATHAGATA SATPATHY (DHENKANAL): Hon. Chairman, Sir, I am grateful to you for giving me this opportunity to speak. I would request the hon. Railway Minister to consider the case of Orissa with responsibility and care. Orissa needs a Rajdhani Express starting from Bhubaneshwar to Delhi via Dhenkanal and Sambalpur. We have an average of 15.03 kms. per thousand kms. of Railway line whereas all over the country, it is above 19 kms. Orissa is a rich State with a lot of minerals. Railways can make a lot of money from the State of Orissa. I would request the Minister to consider the case of Orissa separately to ensure that it gets its dues and the rightful place on the Railway map.

SHRI IQBAL AHMED SARADGI (GULBARGA):* Sir, I would like to compliment the UPA Government and the Railway Ministry for concessions being given to the farmers, milk producers, rural-based people and for the unemployed youth. This is a pro-common man Budget wherein fares have not been increased.

Sir, my Constituency Gulbarga is centrally located from Bombay, Bangalore, Chennai and Hyderabad Railway Lines. There is a long pending demand of Hyderabad Karnataka region to set up a Divisional Railway Headquarters (DRM Office) at Gulbarga. About 21 hon. Members of Parliament have given a representation in this regard. There is a considerable incoming and outgoing railway traffic from Gulbarga Railway Station. Hence, I would like to request to set up a DRM Office at Gulbarga.

Sir, ongoing railway line from Bidar to Gulbarga is a very important project. It connects Hyderabad Karnataka region to Delhi. This new railway line reduces five hours journey from Gulbarga to New Delhi. The Budget allocation for this ongoing project is earmarked only Rs. 4.5 crore, whereas during the last year Budget, Rs. 15 crore have been allotted. I want to request the hon. Minister, through you, Sir, to allot Rs. 50 crore to get the project completed expeditiously.

Sir, I want to request the hon. Railway Minister to set up a Railway workshop at Gulbarga which would be very helpful to provide employment to youths and for the development of Hyderabad Karnataka backward area.

I again humbly request the hon. Railway Minister, through you, Sir, to include Sedam, Chitapur, Wadi and Nalwar Railway stations for renovation.

Once again, I whole-heartedly support the Railway Budget and compliment the hon. Railway Minister for the presentation of pro-common man Railway Budget. Thank you for giving me this opportunity to express my views.

 

*The speech was laid on the Table.

श्री खारबेल स्वाईं (बालासोर) : हम दागी मंत्री को नहीं सुनेंगे, इसलिए सदन से वॉक आउट करते हैं ।

17.43 hrs [At this stage, Shri Kharbela Swain and some hon. Members left the House] श्री लालू प्रसाद : महोदय, मैं सबसे पहले उन सभी माननीय सदस्यों का आभार प्रकट करना चाहता हूं जिन्होंने रेल बजट २००५-०६ के लिए सदन में प्रस्तुत अनुदान की मांगों पर हुई चर्चा में भाग लिया और अपने बहुमूल्य विचारों से मुझे और सदन को अवगत कराया । मुझे प्रसन्नता है कि अधिकतर सदस्यों ने रेल बजट की सराहना की है एवं माननीय सदस्यों ने अनेक सुझाव भी दिए हैं । मैं सदन को आश्वस्त करना चाहूंगा कि माननीय सदस्यों की ओर से जो भी सुझाव आए हैं, उन पर गंभीरतापूर्वक विचार किया जाएगा ।

महोदय, वर्ष २००५-०६ के रेलवे बजट की संसद की स्थायी समति द्वारा गहन समीक्षा की गई है और समति ने अपनी रिपोर्ट सदन में प्रस्तुत कर दी है । स्थायी समति द्वारा कई उपयोगी सुझाव दिए गए हैं । इन सभी सुझावों पर गंभीरतापूर्वक विचार करके त्वरित कार्रवाई की जाएगी और इससे समति को अवगत कराया जाएगा ।

जैसा कि माननीय सदस्यों को ज्ञात है, रेलवे कन्वेंशन कमेटी, २००४ ने अपने पहले प्रतिवेदन में वर्ष २००४-०५ हेतु रेल मंत्रालय द्वारा सामान्य राजकोष को देय लाभांश दर को ७ परसेंट से घटाकर ६.५ परसेंट करने की अनुशंसा की है । मैं इस अनुशंसा के लिए कन्वेंशन कमेटी को हार्दिक धन्यवाद देता हूं । मैं इस अनुशंसा का समर्थन करने के लिए वित्त मंत्रालय का भी आभारी हूं । मुझे सदन को यह सूचित करते हुए हर्ष है कि रेलवे की अच्छी वित्तीय हालत के मद्देनजर रेल मंत्रालय अपनी आस्थगित लाभांश दायिताएं मूल रूप से संसद के द्वारा स्वीकृत ९ वर्षों के बजाय ८ वर्षों में ही निपटा देगा * महोदय, चालू वर्ष के लिए बजट प्रस्तुत करते समय अपने बजट भाषण में मैंने वित्तीय वर्ष २००४-०५ के दौरान रेलवे की उत्कृष्ट उपलब्धि के बारे में सदन को अवगत कराया था ।

सभापति महोदय, मुझे सदन को बताते हुए प्रसन्नता हो रही है कि रेलवे ने २००४-०५ में लगभग ६०२ मलियन टन माल का लदान किया, जो कि बजट अनुमानों में निर्धारित लक्ष्य से २२ मलियन टन अधिक है। यह लदान २००३-०४ के लदान से ४५ मलियन टन, यानी ८ प्रतिशत अधिक है। इस प्रकार अनेक वर्षों के बाद माल परिवहन के क्षेत्र में रेलवे की भागीदारी बढ़ी है, हालांकि वर्ष २००४-०५ के वित्तीय परिणाम अभी अपेक्षित हैं फिर भी फरवरी, २००५ के वास्तविक आंकड़ों के अनुसार माल यातायात आमदनी में संशोधित लक्ष्य पर आधारित बजट अनुपात से १८७ करोड़ रुपए से अधिक आमदनी दर्ज की गई है। यात्रियों की संख्या में भी ६ प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है एवं यात्री आमदनी का संशोधित लक्ष्य भी प्राप्त होने की संभावना है। अत: कुल यातायात आमदनी संशोधित अनुमानों में निर्धारित लक्ष्य से लगभग २०० करोड़ रुपए अधिक होने की आशा है जो २००३-०४ में दर्ज की गई कुल आमदनी से ३९७० करोड़ रुपए यानी ९ प्रतिशत अधिक है। मुझे पूरा यकीन है कि हम संशोधित अनुमानों में निर्धारित ९१.२ प्रतिशत के ऑपरेटिंग रेश्यो के लक्ष्य को प्राप्त करने में सफल होंगे। इस प्रकार हाल ही में समाप्त हुए वर्ष २००४-०५ में रेलवे को उत्कृष्ट उपलब्धियां हासिल हुई हैं और इसके लिए मैं सभी रेलकर्मियों और रेल उपयोगकर्ताओं को हार्दिक बधाई और धन्यवाद देता हूं।

महोदय, हम वर्ष २००४-०५ की उपलब्धियों से संतुष्ट होकर बैठने वाले नहीं हैं। हमें रेलवे को और अधिक ऊंचाईयों पर ले जाना है ताकि इसे विश्व की सर्वोत्तम रेल प्रणालियों में गिना जा सके। वस्तुत: यह है कि -

" प्रथम चरण है नए स्वर्ग का है मंजिल का छोर इस जन-मंथन से उठ आई पहली रतन हिलोर "

गत २५-३० वर्षों में भारतीय रेल पर ट्रेक संरचना को सुद्ृढ़ एवं आधुनिकीकृत करने में भारी निवेश किया गया है। इस कार्य में पिछले वर्ष सकल आधार पर लगभग ३,८५० करोड़ रुपए एवं पिछले २० वर्षों में ३४,२५० करोड़ रुपए खर्च किए गए हैं। अब स्वर्णिम चतुर्भुज एवं उसके विकर्ण मार्गों पर ९० पाउंड की रेल, कास्ट आयरन स्लीपर प्राय: बदल दिए गए हैं। रोलिंग स्टाक क्षमता का पूरा लाभ भारतीय रेल को प्राप्त करने के उद्देश्य से गत वर्ष हमने अधिकतर वैगनों की भार वहन क्षमता में २ टन की बढ़ोतरी की थी। जिन मार्गों से कच्चा लोहा एवं अन्य खनिज पदार्थों का परिवहन बंदरगाहों एवं कारखानों में किया जाता है उन मार्गों पर उपलब्ध ट्रेक संरचना को सुद्ृढ़ एवं आधुनिकीकरण करने का कार्य जारी है। इन कच्चा लौह खनिज वाले मार्गों पर यात्री गाड़ियां भी अपेक्षाकृत कम चलती हैं। अत: हमने एक पायलट प्रोजैक्ट के अंतर्गत ऐसे कुछ चयनित मार्गों पर सभी माल गाड़ियों का एक्सल लोड २१.३२ टन से बढ़ाकर २२.३२ टन कर के वैगनों की माल वहन क्षमता बढ़ाने का निर्णय लिया है। हमने बोरीबंद मालों के परिवहन के लिए बी.सी.एन. एवं बी.सी.एन.ए. वैगन की वहन क्षमता को भी बढ़ाकर क्रमश: ६० एवं ६२.८ टन प्रति वैगन करने का निर्णय लिया है। इस निर्णय से भारतीय रेल की माल वहन क्षमता में लगभग २ प्रतिशत की वृद्धि होगी और ५०० करोड़ रुपए की अतरिक्त शुद्ध आय होने की संभावना है। यह निर्णय मुझे सर्वेश्वर दयाल सक्सेना की उन पंक्तियों का स्मरण कराता है, जिनमें उन्होंने कहा है-

"हम असमर्थताओं से नहीं सम्भावनाओं से घिरे हैं, हर दीवार पर द्वार बन सकता है और हर द्वार से पूरा का पूरा पहाड़ गुजर सकता है। "

महोदय, विश्व भर में रेल को ऊर्जा की खपत की द्ृष्टि से किफायती एवं पर्यावरण के अनुकूल परिवहन के साधन के रूप में मान्यता दी गई है। रेल परिवहन में ऊर्जा खपत ट्रक की तुलना में एक चौथाई से भी कम होती है। हमने पिछले कुछ वर्षों में सड़क परिवहन के सवार्ंगीण विकास की ओर तो विशेष ध्यान दिया और उसमें भारी निवेश किया है, लेकिन रेल परिवहन में उतना निवेश नहीं किया गया है जितना कि परिवहन की बढ़ती हुई मांगों को पूरा करने के लिए जरूरी है।

वर्ष २००४-०५ के बजट भाषण में की गयी घोषणाओं के कार्यान्वयन पर भी वर्ष के दौरान कड़ी नजर रखी गयी थी और ज्यादातर घोषणाएं कार्यान्वित की जा चुकी हैं और शेष पूरा होने के अंतिम चरणों में हैं। सिर्फ दो गाड़ियों को छोङकर सभी गाडियां चलाई जा चुकी हैं। इनमें से एक गाड़ी आमान परिवर्तन के पश्चात् जुलाई के अंत तक तथा दूसरी गाड़ी मुख्य रेल संरक्षा आयुक्त की स्वीकृति मिलने के बाद चला दी जायेगी।

महोदय, माननीय प्रधान मंत्री जी ने इसी माह तेरह तारीख को ऊधमपुर स्टेशन से उत्तर संपर्क क्रांति एक्सप्रैस को हरी झंडी दिखाकर ५५ किलोमीटर लम्बी जम्मू तवी-ऊधमपुर रेल लाइन की शुरूआत की है और इस प्रकार यूपीए सरकार ने स्वर्गीय इंदिरा गांधी के सपने को साकार करके दिखाया है। ऊधमपुर से आगे बारामूला तक की रेलवे लाइन के निर्माण का कार्य भी जोरों से चल रहा है और इसे भी निर्धारित लक्ष्य के अनुसार पूरा किया जायेगा। कविवर राम नरेश त्रिपाठी जी के शब्दों में --

जब तक पहुंच न लेंगे तब तक न सांस लेंगे वह लक्ष्य सामने है पीछे नहीं टलेंगे।

मथिलांचल की आम जनता की मांग का आदर करते हुए हमने दरभंगा और दिल्ली के बीच चलाई गयी सम्पर्क क्रांति एक्सप्रैस को अब सुपरफास्ट गाड़ी के रूप में सप्ताह में दो दिन के बजाय प्रतदिन चलाने का निर्णय लिया है। बजट प्रस्तुत करते समय मैंने घोषणा की थी कि दिल्ली-मुजफ्फरपुर के बीच चलने वाली सप्त क्रांति एक्सप्रैस का विस्तार दरभंगा तक किया जायेगा। चूंकि दिल्ली-दरभंगा के बीच शुरू की गयी संपर्क क्रान्ति को सुपरफास्ट गाड़ी के रूप में प्रतदिन चलाने का निर्णय लिया गया है इसलिए अब सप्त क्रांति का विस्तार दरभंगा तक नहीं किया जायेगा। २००५-०६ के बजट भाषण में की गयी घोषणाओं को भी क्रियान्वित करने के लिए प्रक्रिया शुरू कर दी गयी है और मुझे माननीय सदस्यों को बताते हुए प्रसन्नता हो रही है कि कई घोषणाओं को मूर्त रूप देने के लिए निर्देश जारी किए जा चुके हैं। सभी घोषणाओं को जल्दी से जल्दी क्रियान्वित करने के लिए कड़ी नजर रखी जा रही है।

अध्यक्ष महोदय, मैं माननीय सदस्यों द्वारा उनके निर्वाचन क्षेत्रों तथा राज्यों में चल रही चालू परियोजनाओं के जल्दी से जल्दी न पूरा हो पाने के संबंध में व्यक्त की गई चिंता से पूरी तरह सहमत हूं। महोदय, चालू परियोजनाओं को पूरा करने के लिए लगभग ४६००० करोड़ रुपये की आवश्यकता है। इनमें से दोहरीकरण, विद्युतीकरण, महानगरीय परिवहन परियोजना, आमान परिवर्तन, सामरिक महत्व, राष्ट्रीय परियोजनाओं एवं थ्रू-पुट संवर्धन की लंबित योजनाओं को बजटीय सहायता, बजटेतर पहल एवं आंतरिक संसाधनों से पूरा करने का हर संभव प्रयास किया जा रहा है। संबंधित क्षेत्रों के सामाजिक-आर्थिक विकास के उद्देश्य से ली गयी अन्य योजनाओं को पूरा करने के लिए ‘सुदूर क्षेत्र रेल संपर्क योजना’ का विस्तृत प्रस्ताव लगभग तैयार हो गया है और शीघ्र ही हम इसे सरकार के विचार्राथ प्रस्तुत करेंगे। हम सभी लंबित योजनाओं को समयबद्ध तरीके से पूर्ण करने के लिए प्राथमिकता क्रम भी निर्धारित कर रहे हैं।

चूंकि इन योजनाओं के पूरा होने से संबंधित क्षेत्र एवं राज्यों के सवार्ंगीण विकास में मदद मिलेगी इसलिए मैंने मुख्यमंत्रियों से भी इन योजनाओं के क्रियान्वयन में आर्थिक सहयोग देने का अनुरोध किया है। माननीय सदस्यों को मैं आश्वस्त करना चाहूंगा कि इन प्रयासों के जरिए हम सभी चालू परियोजनाओं को जल्दी से जल्दी पूरा करने की कोशिश करेंगे ताकि रेलवे जनता की आकांक्षाओं के अनुरूप अपनी प्रगति और विकास को बनाए रखें।

हालांकि मैंने माननीय सदस्यों द्वारा उठाए गए सभी मुद्दों को अपने इस उत्तर में शामिल करने का प्रयास किया है, पर हो सकता है कि कुछ मुद्दे छूट गये हों। मैं इन मुद्दों के बारे में उन्हें पत्र लिखकर वस्तुस्थिति से शीघ्र अवगत करा दूंगा। माननीय सदस्यों द्वारा रेल बजट को दिए गए व्यापक समर्थन के लिए मैं उनको एक बार पुन: धन्यवाद देते हुए अपनी बात समाप्त करता हूं तथा सदन से अनुरोध करता हूं कि वह रेलवे की वर्ष २००५-२००६ के लिए प्रस्तुत अनुदान की मांगों तथा इससे संबंधित वनियोग विधेयक को अपनी स्वीकृति दें।

 

… (Interruptions)

MR. CHAIRMAN : Please take your seat. Nothing will go on record.

(Interruptions)* … श्री लालू प्रसाद : आप रुक गये हैं इसलिए आपका काम हो जायेगा।

MR. CHAIRMAN : A number of cut motions have been moved by Members for the Demands for Grants (Railways) for 2005-2006. Shall I put all the cut motions to the vote of the House together or does any hon. Member want any particular cut motion to be put separately?

The cut motions were put and negatived.

MR. CHAIRMAN : I shall now put the Demands for Grants (Railways) for 2005-2006 to vote.

The question is :

"That the respective sums not exceeding the amounts shown in the fourth column of the Order Paper be granted to the President of India out of the Consolidated Fund of India, to complete the sums necessary to defray the charges that will come in the course of payment during the year ending the 31st day of March, 2006, in respect of the heads of demands entered in the second column thereof against Demand Nos. 1 to 16."

The motion was adopted.

 

MR. CHAIRMAN : I shall now put the resolution moved by Shri Lalu Prasad to the vote of the House.

The question is :

"That this House approves the recommendations contained in Paras 45, 46, 47, 48, 49, 50, 51 and 53 of the First Report of Railway Convention Committee (2004) appointed to review the rate of dividend payable by the Railway Undertaking to General Revenues etc., which was presented to the Lok Sabha on 21st December, 2004."

The resolution was adopted.