State Consumer Disputes Redressal Commission
Dr Praveen Gupta vs Km Sonwati on 21 November, 2023
Cause Title/Judgement-Entry STATE CONSUMER DISPUTES REDRESSAL COMMISSION, UP C-1 Vikrant Khand 1 (Near Shaheed Path), Gomti Nagar Lucknow-226010 First Appeal No. A/2003/36 ( Date of Filing : 06 Jan 2003 ) (Arisen out of Order Dated in Case No. of District State Commission) 1. Dr Praveen Gupta Moradabad ...........Appellant(s) Versus 1. Km Sonwati Moradabad ...........Respondent(s) BEFORE: HON'BLE MR. SUSHIL KUMAR PRESIDING MEMBER HON'BLE MRS. SUDHA UPADHYAY MEMBER PRESENT: Dated : 21 Nov 2023 Final Order / Judgement (सुरक्षित) राज्य उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग , उ0प्र0, लखनऊ अपील सं0- 36/2003 (जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग प्रथम, मुरादाबाद द्वारा परिवाद सं0- 149/2000 में पारित निर्णय व आदेश दिनांक 03.12.2002 के विरुद्ध) Dr. Praveen Gupta, Madhur Hospital, Islam Nagar Road, Bahjoli, Tehsil Chandausi, District- Moradabad. ...........Appellant Versus 1.
Km. Sonwati, aged about 11 years, Minor, D/o Sri Virendra Kashyap, R/o. Village- Dhoom Nagar, Tehsil- Bilari, District-Moradabad, Through Guardian and Nest Friends (1) Sri Virendra Kashyap, R/o. Village Behta Jaisingh, Post-Bahjoi, District Moradabad (2) Smt. Bhagwan Dei, W/o Sri Ramdas, R/o Village-Dhoom Nagar, Tehsil-Bilari, District Moradabad.
2. Dr. Pradeep Lohia, Lohia Hospital, A-27, Lajpat Nagar, Moradabad.
.........Resondents समक्ष:-
मा0 श्री सुशील कुमार, सदस्य।
मा0 श्रीमती सुधा उपाध्याय, सदस्य।
अपीलार्थी की ओर से उपस्थित : श्री वी0पी0 शर्मा, विद्वान अधिवक्ता। प्रत्यर्थी सं0- 1 की ओर से उपस्थित : श्री आलोक सिन्हा, विद्वान अधिवक्ता। प्रत्यर्थी सं0- 2 की ओर से उपस्थित : श्री आर0एन0 सिंह, विद्वान अधिवक्ता। दिनांक:- 04.01.2024 मा0 श्री सुशील कुमार , सदस्य द्वारा उद्घोषित निर्णय
परिवाद सं0- 149/2000 कुमारी सोनवती बनाम डॉ0 परवीन गुप्ता, मधुर हॉस्पिटल व एक अन्य में जिला उपभोक्ता आयोग प्रथम, मुरादाबाद द्वारा पारित निर्णय एवं आदेश दि0 03.12.2002 के विरुद्ध यह अपील योजित की गई है।
विद्वान जिला उपभोक्ता आयोग ने परिवाद विपक्षी सं0- 1 के विरुद्ध स्वीकार करते हुये अंकन 1,00,000/-रू0 की क्षतिपूर्ति का आदेश 18 प्रतिशत ब्याज के साथ पारित किया है।
परिवाद के तथ्य संक्षेप में इस प्रकार हैं कि प्रत्यर्थी सं0- 1/परिवादिनी दि0 27.06.2000 को पेड़ से गिर गई थी जिसके कारण दाहिने हाथ में चोट आयी थी। दि0 27.06.2000 को अपीलार्थी/विपक्षी सं0- 1 ने एक्सरे करने के पश्चात फैक्चर होना बताया था। प्लास्टर चढ़ाया तथा दवायें देकर प्रत्यर्थी सं0- 1/परिवादिनी को घर भेज दिया गया, परन्तु प्लास्टर चढ़ाने के बाद प्रत्यर्थी सं0- 1/परिवादिनी के हाथ में असहनीय पीड़ा हो गई जिसके कारण प्रत्यर्थी सं0- 1/परिवादिनी को पुन: अपीलार्थी/विपक्षी सं0- 1 के क्लीनिक पर ले जाया गया। प्लास्टर काटने के बाद देखा गया कि हाथ में नीचे से ऊपर तक फफोले पड़े हुये थे। अपीलार्थी/विपक्षी सं0- 1 ने बताया कि केमिकल एवं पाउडर तथा दवाओं का गलत प्रभाव हुआ है और प्लास्टर की कोई आवश्यकता नहीं है। अपीलार्थी/विपक्षी सं0- 1 द्वारा 1800/-रू0 फीस ली गई थी। फफोले बढ़ते गये। दि0 29.06.2000 को गैंगरीन होना बताकर हाथ काट दिया गया और इस तिथि को अंकन 20,000/-रू0 प्राप्त किये। अपीलार्थी/विपक्षी सं0- 1 की लापरवाही के कारण प्रत्यर्थी सं0- 1/परिवादिनी हमेशा के लिये अपंग हो गई।
अपीलार्थी/विपक्षी सं0- 1 ने अपने लिखित कथन में 80/-रू0 लेकर एक्सरे करना स्वीकार किया है, परन्तु यह कथन किया कि वह न तो आर्थोडिक सर्जन है और न ही प्लास्टर चढ़ाने का या हड्डी जोड़ने का कार्य करता है। उसने प्रत्यर्थी सं0- 1/परिवादिनी के हाथ पर कोई प्लास्टर नहीं चढ़ाया था और न ही प्लास्टर काटा था तथा न ही कोई दवा दी थी। प्रत्यर्थी सं0- 1/परिवादिनी के हाथ में पट्टी पहले से चढ़ी थी। गैंगरीन बनने में 7-8 दिन का समय लगता है।
प्रत्यर्थी सं0- 2/विपक्षी सं0- 2 ने अपने लिखित कथन में कहा है कि सर्वप्रथम प्रत्यर्थी सं0- 1/परिवादिनी के पिता द्वारा किसी अन्य डॉक्टर को दिखाया गया। बाद में प्रत्यर्थी सं0- 2/विपक्षी सं0- 2 के अस्पताल में भर्ती किया गया तथा अनुरोध किया गया कि पहले दवाओं के माध्यम से हाथ ठीक करने का प्रयास किया जाये, परन्तु दवाओं से कोई लाभ नहीं हुआ। इसलिये जीवन बचाने के उद्देश्य से दि0 05.07.2000 को हाथ काटा गया।
हमने अपीलार्थी के विद्वान अधिवक्ता श्री वी0पी0 शर्मा एवं प्रत्यर्थी सं0- 1 के विद्वान अधिवक्ता श्री आलोक सिन्हा तथा प्रत्यर्थी सं0- 2 के विद्वान अधिवक्ता श्री आर0एन0 सिंह को सुना। प्रश्नगत निर्णय व आदेश तथा पत्रावली पर उपलब्ध समस्त अभिलेखों का सम्यक परीक्षण एवं परिशीलन किया।
पक्षकारों के साक्ष्य पर विचार करने के पश्चात विद्वान जिला उपभोक्ता आयोग द्वारा यह निष्कर्ष दिया गया कि प्रत्यर्थी सं0- 2/विपक्षी सं0- 2 के शपथ पत्र के अनुसार प्लास्टर कड़ा बांधने के कारण खून संचार बन्द हो गया तथा सैप्टिक एवं गैंगरीन हो गया था जिसके कारण प्रत्यर्थी सं0- 1/परिवादिनी का हाथ काटा गया। तदनुसार प्रत्यर्थी सं0- 2/विपक्षी सं0- 2 का कोई दायित्व नहीं माना गया, परन्तु अपीलार्थी/विपक्षी सं0- 1 द्वारा उचित रूप से प्लास्टर न चढ़ाने के कारण उपेक्षा का दोषी मानते हुये उपरोक्त आदेश पारित किया गया।
इस निर्णय एवं आदेश को इन आधारों पर चुनौती दी गई है कि विद्वान जिला उपभोक्ता आयोग ने साक्ष्य के विपरीत प्रश्नगत निर्णय पारित किया है। उसके द्वारा केवल एक्सरे किया गया, कभी भी प्लास्टर नहीं चढ़ाया गया न ही कभी प्लास्टर काटा गया। प्रत्यर्थी सं0- 1/परिवादिनी दि0 27.06.2000 को पेड़ से गिर गई थी, परन्तु एक्सरे कराने के लिये दि0 27.06.2000 को ही बुलाया गया जो बैंडेज किसी अन्य व्यक्ति द्वारा लगाया हुआ था। प्रत्यर्थी सं0- 2/विपक्षी सं0- 2 ने भी अपने शपथ पत्र में उल्लेख किया था कि प्रत्यर्थी सं0- 1/परिवादिनी के पिता ने बताया था कि किसी पहलवान से बैंडेज लगवाया गया था।
विद्वान जिला उपभोक्ता आयोग द्वारा यह निष्कर्ष दिया गया है कि डॉ0 परवीन गुप्ता ने एक्सरे करना स्वीकार किया। एक्सरे करने के पश्चात जब उनके द्वारा यह पाया गया कि मरीज का हाथ टूटा हुआ है तब उनके द्वारा यदि स्वयं प्लास्टर नहीं चढ़ाया गया तब सक्षम डॉ0 के समक्ष प्लास्टर चढ़ाने हेतु प्रकरण रेफर करना चाहिये था, परन्तु रेफर करने का कोई उल्लेख एक्सरे रिपोर्ट पर मौजूद नहीं है और बाद में रिफरेंस दस्तावेज तैयार किया गया। डॉ0 परवीन गुप्ता द्वारा ही प्लास्टर चढ़ाया गया। विद्वान जिला उपभोक्ता आयोग द्वारा दिया गया यह निष्कर्ष साक्ष्य पर आधारित है। डॉ0 परवीन गुप्ता द्वारा इस प्रकार का कोई साक्ष्य विद्वान जिला उपभोक्ता आयोग के समक्ष प्रस्तुत नहीं किया गया कि वह प्लास्टर चढ़ाने के लिये कुशल डॉक्टर हैं। यदि यह तथ्य भी माना जाये कि पेड़ पर से गिरने के पश्चात किसी नीम हकीम से प्लास्टर चढ़वाया गया था तब भी अन्तिम अवसर का सिद्धांत अपीलार्थी/विपक्षी सं0- 1 के पास मौजूद था, क्योंकि उनके द्वारा एक्सरे किया गया था। एक्सरे करने के पश्चात उन्हें सक्षम डॉक्टर के समक्ष प्रस्तुत करने के लिये रिफरेंस करना चाहिये था। विद्वान जिला उपभोक्ता आयोग ने यह भी निष्कर्ष दिया है कि एक्सरे किसके द्वारा किया गया उसका नाम भी एक्सरे रिपोर्ट पर अंकित नहीं है, परन्तु इस एक्सरे स्लिप पर डॉ0 परवीन गुप्ता का नाम है, किन्तु रिफरेंस संदर्भ मौजूद नहीं है। अर्थात डॉ0 गुप्ता द्वारा एक्सरे से उनके द्वारा प्लास्टर चढ़ाया गया। तदनुसार विद्वान जिला उपभोक्ता आयोग द्वारा पारित प्रश्नगत निर्णय/आदेश में हस्तक्षेप करने का कोई आधार प्रतीत नहीं होता है। अत: प्रश्नगत निर्णय व आदेश पुष्ट किये जाने योग्य एवं अपील खारिज किये जाने योग्य है।
आदेश अपील खारिज की जाती है। विद्वान जिला उपभोक्ता आयोग द्वारा पारित प्रश्नगत निर्णय व आदेश की पुष्टि की जाती है।
अपील में उभयपक्ष अपना-अपना वाद व्यय स्वयं वहन करेंगे।
प्रस्तुत अपील में अपीलार्थी द्वारा यदि कोई धनराशि जमा की गई हो तो उक्त जमा धनराशि अर्जित ब्याज सहित सम्बन्धित जिला उपभोक्ता आयोग को यथाशीघ्र विधि के अनुसार निस्तारण हेतु प्रेषित की जाये।
आशुलिपिक से अपेक्षा की जाती है कि वह इस निर्णय व आदेश को आयोग की वेबसाइट पर नियमानुसार यथाशीघ्र अपलोड कर दें।
(सुधा उपाध्याय) (सुशील कुमार) सदस्य सदस्य शेर सिंह, आशु0, कोर्ट नं0- 3 [HON'BLE MR. SUSHIL KUMAR] PRESIDING MEMBER [HON'BLE MRS. SUDHA UPADHYAY] MEMBER