Lok Sabha Debates
Shri Ram Vilas Paswan Called The Attention Of The Deputy Prime Minister Regarding ... on 22 August, 2003
14.05 hrs. CALLING ATTENTION TO THE MATTER OF URGENT PUBLIC IMPORTANCE
(i) Situation arising due to floods in Bihar and steps taken by the Government in regard thereto.
Title: Shri Ram Vilas Paswan called the attention of the Deputy Prime Minister regarding situation arising due to floods in Bihar and steps taken by the Government in this matter.
श्री राम विलास पासवान (हाजीपुर) : सभापति महोदय, मैं उप प्रधान मंत्री जी का ध्यान अविलम्बनीय लोक महत्व के निम्न विषय की ओर दिलाता हूं और प्रार्थना करता हूं कि वह इस संबंध में वक्तव्य दें :
" बिहार में बाढ़ के कारण उत्पन्न स्थिति तथा इस संबंध में सरकार द्वारा उठाय गए कदम।"
उप प्रधान मंत्री तथा गृह मंत्रालय तथा कार्मिक, लोक शिकायत और पेंशन मंत्रालय के प्रभारी (श्री लालकृष्ण आडवाणी) : सभापति महोदय, माननीय सदस्य श्री राम विलास पासवान, श्री रामचन्द्र पासवान और श्री राजेश रंजन ने बिहार में बाढ़ से उत्पन्न स्थिति और इस बारे में सरकार द्वारा उठाये गए कदमों संबंधी मुद्दा उठाया।
२. बिहार सरकार ने सूचित किया है कि चालू मानसून के दौरान ३८ में से १८ जिले अलग-अलग स्तर पर बाढ़ से प्रभावित हुए। बिहार सरकार ने सूचित किया है कि बाढ़ के कारण ७९ लोग मारे गए, २.८७ लाख हैक्टेयर क्षेत्र में फसल प्रभावित हुई और १२८६० मकान क्षतिग्रस्त हुए।
३. राज्य सरकार ने, प्रभावित लोगों को राहत उपलब्ध कराने के लिए आवश्यक कदम उठाने हेतु सभी बाढ़ प्रवण जिलों के समाहर्ताओं को निर्देश जारी किए हैं। मृतकों के नजदीकी रिश्तेदारों को अनुग्रहपूर्वक अदायगी सहित प्रभावित क्षेत्रों में बचाव और राहत उपाय करने के लिए जिला प्राधिकारियों को पर्याप्त धन आबंटित किया गया है। बिहार सरकार ने बचाव और राहत अभियानों के लिए २७५७ नावें तैनात की हैं। राज्य सरकार ने सूचित किया है कि ३२ राहत शविर स्थापित किए गए हैं। इसके अतरिक्त, १८५ राहत वितरण केन्द्र, ३५८ स्वास्थ्य केन्द्र और १५१ पशु चकित्सा केन्द्र स्थापित किए गए हैं। २१ अगस्त तक वितरित की गई मुफ्त राहत निम्न प्रकार से है :
गेहूं ३०७०७ क्विन्टल बना-बनाया आहार १९४० क्विन्टल नमक ४.६२ क्विन्टल गुड़ २२१.९८ क्विन्टल पोलीथीन शीट ४५०२४ मीटर नकद अनुदान १०८.७४ लाख रु.
४. बाढ़ सहित प्राकृतिक आपदाओं की स्थिति में राहत प्रदान करना मुख्यतया संबंधित राज्य सरकारों का काम है। भारत सरकार, जहां कहीं आवश्यक होता है, संभारिकी तथा वित्तीय सहायता प्रदान करके राज्य सरकारों के प्रयासों में सहयोग करती है। इस प्रयोजनार्थ राज्य सरकारों को आपदा राहत नधि (सी.आर.एफ.) आबंटित की जाती है जिसमें भारत सरकार तथा राज्य सरकार द्वारा ३:1 के अनुपात में अंशदान किया जाता है। हमारा तीन हिस्सा और उनका एक हिस्सा। गंभीर किस्म की प्राकृतिक आपदा आने की स्थिति में राज्य सरकार को निर्धारित प्रक्रिया का पालन करके राष्ट्रीय आपदा आकस्मिक नधि (एन.सी.सी.एफ.) से अतरिक्त सहायता प्रदान की जाती है।
५.१८ अगस्त, २००३ को राज्य सरकार से प्राप्त रिपोर्टों के अनुसार, १ अप्रैल, २००३ की स्थिति के अनुसार राज्य के पास सी.आर.एफ. में १०५.७६५४ करोड़ रुपये की शेष राशि उपलब्ध थी। केन्द्र सरकार राज्य के साथ लगातार संपर्क बनाए हुए है और आज की तारीख तक राज्य के पास सी.आर.एफ. में पर्याप्त धनराशि उपलब्ध है।
६. गृह मंत्रालय बिहार सहित देश के वभिन्न भागों में बाढ़ के कारण पैदा हुई स्थिति का लगातार प्रबोधन कर रहा है।
७. मैं माननीय सदस्यों को आश्वस्त करना चाहूंगा कि सी.आर.एफ./ एन.सी.सी.एफ. के लिए निर्धारित मानदंड़ों और प्रक्रिया के अनुसार, बिहार सरकार को, मांगी गयी हर संभव सहायता प्रदान की जाएगी।
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...( व्यवधान)
श्री रघुनाथ झा (गोपालगंज): सभापति महोदय, बिहार का मामला बहुत व्यापक है।…( व्यवधान)
MR. CHAIRMAN : Please sit down. You have not given notice.
श्री राम विलास पासवान:सभापति महोदय, मैं बहुत-बहुत धन्यवाद देना चाहता हूं कि स्पीकर साहब ने इस मुद्दे को लिया है और सदन में डिस्कशन का मौका दिया है। आप जानते हैं कि बिहार ही नहीं बल्कि देश के बहुत सारे हिस्से हैं जहां प्रति वर्ष बाढ़ से अरबों-खरबों रुपये की तबाही होती है और हजारों लोग मरते हैं। बिहार की एक विनाशलीला यह है कि पहले जब पानी आता था तो तीन-चार दिनों में निकल जाता था लेकिन अब जब पानी आता है तो काफी समय तक ठहरता है। नदी की गहराई भी कम हो गई है। इसका नतीजा है कि जो समतल एरिया है, वहां तेजी से पानी फैलने लगता है।
राष्ट्रीय सिंचाई आयोग के मुताबिक पूरे देश में ४५० लाख हेक्टेयर भूमि बाढ़ से प्रभावित होती है जिसमें से अकेले बिहार में ७८ लाख हेक्टेयर भूमि बाढ़ से प्रभावित होती है। इसका सबसे बड़ा कारण है कि नेपाल और हिमालय पर्वत की श्रृंखला से जो नदियां निकलती हैं, जिनमें कोसी, गंडक, बूढ़ी गंडक, घघरिया और बागमती हैं, ये सारी नदियां नेपाल से बिहार की ओर आती हैं और गंगा में मिल जाती हैं।
सभापति महोदय, बिहार में तटबंध का निर्माण १९५३ में शुरू हुआ और अभी तक कोसी, गंडक, ब्रहमानंद, बागमती और सोन नदी पर कुल मिलाकर ३,४५४ किलोमीटर तटबंध बना है, लेकिन बिहार की ७८ लाख हेक्टेयर जमीन में से केवल २८.५३ लाख हेक्टेयर जमीन पर सुरक्षा तटबंध का निर्माण किया गया है और शेष में अभी तक सुरक्षा की कोई व्यवस्था नहीं है। तटबंध जब बन रहा था, उस समय कहा गया था कि इससे बाढ़ से मुक्ति मिलेगी, सिंचाई की समुचित व्यवस्था होगी, बिजली का उत्पादन होगा, उद्योग-धंधों का जाल बिछेगा लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं हो पाया।
१४.१२ hrs.(Mr. Deputy Speaker in the Chair) मैं स्वयं ढाई महीने तक पैदल, नाव, ट्रेन और गाड़ी से प्रभावित इलाकों में गया था। बिहार का ऐसा कोई जिला नहीं था जहां मैं स्वयं नहीं गया। वहां लोगों की दुर्दशा देखने लायक थी। श्री रामचंद्र पासवान भी मेरे साथ थे, और भी साथी थे। कहीं नाव की व्यवस्था नहीं थी। वहां लोगों को हैजे की बीमारी हो गई जिसके कारण सैंकड़ों लोग मर गए। लोगों के आवागमन का मार्ग बिल्कुल अवरुद्ध हो जाता है। कहीं नेशनल हाईवेज़ कट जाते हैं। केन्द्र से मंत्री हवाई सर्वे करके चले आए, स्टेट के मंत्री हवाई सर्वे करके चले आए, लेकिन हर साल इसी तरह की तबाही होती है। हमको तीन नदी पार करके अपने घर जाना पड़ता है।
हमारा घर घघरिया नदी से १५ किलोमीटर दर पड़ता है लेकिन उस १५ किलोमीटर जाने में हमें सात घंटे लग जाते हैं। इसलिए मैं कहना चाहता हूं कि बाढ़ के समय लोगों का जनजीवन इतना नर्क हो जाता है जिसका कोई हिसाब नहीं है। इसके दो तरीके हैं - एक जिसमें तात्कालिक राहत कार्य होते हैं और दूसरा जिसमें परमानैंट सौल्यूशन होता है। जैसा मैंने कहा कि बहुत सारी नदियां ऐसी हैं जिनके परमानैंट सौल्यूशन का एक ही तरीका है कि जो नदियां नेपाल से निकलती हैं, उन सारी नदियों के ऊपर तटबंध का निर्माण किया जाए जिससे पानी को वहां रोक कर जब जरूरत पड़े, उससे हम बिजली भी उत्पन्न कर सकते हैं।
अंग्रेजों के जमाने में एक वेवल कमेटी बनी थी जिसने एक सुझाव दिया था लेकिन हमको मालूम नहीं है कि वह अब किस स्थिति में है। मैं सरकार से कहना चाहता हूं कि सिर्फ कोसी नदी का मामला ही नहीं है, कोसी का अलग मामला है, कोसी, कमला, बागमती और गंडक, जो चारों अंतर्राष्ट्रीय नदियां हैं, जब तक नेपाल सरकार से इस बारे में समझौता नहीं होता, तब तक समस्या का कोई स्थायी समाधान नहीं होने वाला है। क्या नेपाल सरकार के साथ इस संबंध में कोई बातचीत हुई है या बातचीत चल रही है और यदि चल रही है तो उसकी प्रगति क्या है ?
दूसरे, जहां तक सेंट्रल टीम भेजने की जो बात है, आपने कहा कि मेरे पास आंकड़े हैं, पिछले तीन साल के क्या आंकड़े हैं ? एक सवाल के जवाब में आपने बतलाया है कि कितना पैसा बिहार सरकार ने मांगा और कितना एनसीसीएफ द्वारा जारी किया गया तथा कितना सीआरएफ द्वारा जारी किया गया? पिछले दो साल से एनसीसीएफ द्वारा दो साल से पैसा नहीं दिया गया और नीचे यह लिखा गया है कि कल सीआरएफ के अनतर्गत जो धन उपलब्ध था, अब एनसीसीएफ से कोई सहायता अनुमोदित नहीं की गई है। मैं जानना चाहता हूं कि इस बार जो फ्लड आई है, उसकी जांच के लिए क्या कोई सेंट्रल टीम गई है या नहीं गई है और पिछले तीन वर्षों में एनसीसीएफ, नेशनल कैलेमिटी कंटिंजेंसी फंड और कैलेमिटी रिलीफ फंड के तहत कितनी राशि बिहार सरकार को दी गई है और उसमें से कितनी खर्च हुई है?
हमारे यहां एक तरफ बाढ़ होती है, एक तरफ सुखाड़ होती है और इन दोनों के बाद एक बड़ी भारी समस्या जल जमाव की समस्या है जहां पानी सालभर जमा रहता है। मेरे निर्वाचन क्षेत्र में लाखों एकड़ भूमि में हमेशा पानी भरा रहता है और पानी निकालने का कोई तरीका नहीं है। उत्तरी बिहार में ही अकेले ९ लाख हेक्टेअर जमीन है जहां हमेशा जल जमाव रहता है औऱ एक लाख हेक्टेअर जमीन अकेले मुकामा में नीतीश कुमार जी का निर्वाचन क्षेत्र है वहां पानी का जमाव रहता है। कुल मिलाकर २५ लाख एकड़ जमीन है जहां जल जमाव की समस्या है। मैं सरकार से जानना चाहता हूं कि सरकार इस जल जमाव की समस्या से मुक्ति दिलाने के लिए क्या कदम उठा रही है? क्या राज्य सरकार के द्वारा कोई प्रस्ताव आया है या नहीं आया है और यदि नहीं आया है तो केन्द्र सरकार अपने स्तर से कुछ कर सकती है या नहीं और यदि राज्य सरकार द्वारा कोई प्रस्ताव आया है तो वह प्रस्ताव क्या है? मैं दो-तीन बिन्दुओं पर सरकार का जवाब चाहता हूं।…( व्यवधान)जो पहला मैम्बर होता है, उसको जवाब मिल जाता है, फिर उसके बाद …( व्यवधान)
उपाध्यक्ष महोदय : आपको कॉलिंग अटैंशन का मतलब मालूम है?
…( व्यवधान)
श्री राम विलास पासवान: पहले होता था। अच्छा, ठीक है।…( व्यवधान)
उपाध्यक्ष महोदय : हर मैम्बर को एक क्लेरफिकेशन पूछने की इजाजत होती है। अभी दो औऱ सज्जन हैं। उसके अलावा Additionally as a special case, पहले इजाजत दे दूंगा। बाधन करने के लिए आप रैस्ट्रेन कीजिएगा।
…( व्यवधान)
श्री रामचन्द्र पासवान (रोसेड़ा):उपाध्यक्ष महोदय, मैं आपको धन्यवाद देता हूं कि आपने मुझे बोलने का मौका दिया। अभी जैसा कि राम विलास पासवान जी ने बताया, यह बहुत ही गंभीर मामला है। बिहार के अधिकांश भागों में बाढ़ है। जहां बाढ़ नहीं भी है, वहां सुखाड़ है। इस तरह से बाढ़ और सुखाड़ से काफी लोग पीड़ित हैं। हम आपके माध्यम से सरकार से जानना चाहते हैं कि पिछले तीन वर्षों में बाढ़ और सुखाड़ से कितने लोगों का नुकसान हुआ है और कितने लोग मरे हैं?जैसा कि हम आपको अवगत कराना चाहते हैं कि मेरा निर्वाचन क्षेत्र दरभंगा और समस्तीपुर दोनों जिलों में आता है और मेरा क्षेत्र कोसीकला और बलान कमला नदी से घिरा हुआ है जिसमें साल में से ८-९ महीना पानी रहता है। अगले साल भी बाढ़ जो आई, मेरे क्षेत्र में जितनी भी रोड थी, मकान थे, जहां कोई देख नहीं सकते है कि कहां पर गांव था और कहां घर था। इस तरह की समस्या आज भी हमारे क्षेत्र में बनी हुई है। हम आपके माध्यम से सरकार से कहना चाहते हैं कि पुहियादर्जा का जो बांध है जो पुहियादर्जा १४ कि.मी. से जुटा हुआ है, जिसके चलते आज हमारे क्षेत्र में आपनी साल भर जमा रहता है। यह मामला मैं शून्य काल में एक नहीं दो बार इस सदन में उठा चुका हूं। मैंने कहा था कि शेष १४ किलो मीटर छूटा हुआ जो भाग है, उसमें अविलम्ब बांध बांधा जाए, जिससे लाखों एकड़ जमीन जो पानी में डूबी रहती है, उसको निजात मिल सके। मैं गृह मंत्री जी से जानना चाहता हूं कि कितने एकड़ जमीन जल जमाव से प्रभावित है और वहां के किसानों को आप क्या राहत देना चाहते हैं ? इसके अलावा वहां के लोगों को कृषि ऋण हर साल परेशान कर रहा है। एक तरफ बाढ़ है, दूसरी तरफ सुखाड़ है। एक तरफ राज्य सरकार का कहर है, दूसरी तरफ केन्द्र सरकार का कहर किसानों पर ढहाया जा रहा है। इसलिए वहां के किसानों को ऋण से मुक्ति दिलानी चाहिए। मेरा जो क्षेत्र बाढ़ से प्रभावित है, उसके बारे में मैंने कल भी सदन में जोरदार ढंग से मामला उठाया था। लेकिन मैंने देखा कि हमारे दूरदर्शन के राष्ट्रीय चैनल पर जिस पर सरकार का अंकुश है, सूचना और प्रसारण मंत्रालय के अंतर्गत आता है, उस चैनल में संसद समीक्षा में मेरा कहीं नाम नहीं आया।
उपाध्यक्ष महोदय : आप स्पेसफिक प्रश्न पूछें, नहीं तो मैं राजेश रंजन जी का नाम पुकारूंगा।
श्री रामचन्द्र पासवान : आप मुश्किल से हमें समय देते हैं और जब हम बोलते हैं तो फिर कहते हैं कि जल्दी खत्म कीजिए।
उपाध्यक्ष महोदय : कालिंग एटेंशन का यही मतलब है कि एक स्पष्टीकरण पूछें।
श्री रामचन्द्र पासवान : मैं कहना चाहता हूं कि संसद समीक्षा को या बंद कर दिया जाए या यदि कोई सदस्य सदन में बोलता है तो उसका भी समाचार आना चाहिए। इसके अलावा मैं यह कहना चाहता हूं कि बाढ़ प्रभावित इलाकों के स्कूली बच्चों की फीस माफ होनी चाहिए।
श्री राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव (पूर्णिया):उपाध्यक्ष महोदय, मैं आपको धन्यवाद देता हूं कि आपने मुझे ध्यानाकर्षण प्रस्ताव में बोलने का मौका दिया। मैं आपके संरक्षण में खड़ा हुआ हूं। यहां पर उप प्रधान मंत्री जी भी मौजूद हैं। ५६ वर्ष से नहीं, बल्कि सैंकड़ों वर्षों से बिहार के १८ जिले बाढ़ से प्रभावित रहते हैं। कई बार योजनाएं बनीं, लेकिन जब तक हाई डैम या नेशनल डैम जैसी चीज नहीं बनती या नेपाल से वार्ता करके समुचित कदम नहीं उठाए जाते, तब तक उत्तरी बिहार के लोगों को बाढ़ की समस्या से निजात नहीं मिल सकती। केन्द्र सरकार को बिहार सरकार ने लखित रूप में जो राहत देने की जानकारी दी है, उसको देखकर मुझे आश्चर्य होता है। मैं पिछले साल की अलाटमेंट की बात कहना चाहता हूं। भारत सरकार की गाइडलाइन है कि एक क्िंवटल गेहूं या अनाज बाढ़ प्रभावित लोगों को दिया जाएगा, लेकिन वहां कुल २५ किलो ही अनाज ही प्रति परिवार को दिया गया है। इसी तरह से भारत सरकार की गाइडलाइन थी कि २०० रुपए प्रत्येक परिवार को दिए जाएंगे और इसके लिए केन्द्र सरकार ने ७४ करोड़ रुपए वहां भेजे। लेकिन उसमें से केवल १४ करोड़ रुपए ही वहां पर बंटे हैं। बाकी का पैसा कहां गया, पता नहीं है।
७९ लोगों के मारे जाने की बिहार सरकार ने खबर दी है, जबकि हकीकत यह है कि वहां ४५० लोग मारे गए हैं। इसके अलावा मात्र ३०० लोगों को ही ५०,००० रुपए मुआवजे के रूप में दिए गए हैं, जबकि भारत सरकार की गाइडलाइन है कि एक लाख रुपया दिया जाएगा। ३०० लोगों को पैसा देने की सूचना लखित रूप से दी है। जो आपने खाद, बीज सत्यापित करने का आग्रह किया था, अभी राम विलास पासवान जी बता रहे थे ३४०० किलो मीटर रिंग बांध है, १३ साल के अंदर इस बांध की कोई मरम्मत नहीं की गई। नए बांधों का निर्माण करने की तो बात ही छोड़ दें। पिछले साल जहां बाढ़ आई थी, इस साल भी वहीं आई है। इस वजह से बांधों में व्यापक रूप से क्षति हुई है और वे टूट गए हैं। अभी यहां सीतामढ़ी और सीवान की बात हो रही थी, कल मैंने मदन प्रसाद जायसवाल जी से बात की तो पता चला कि बेतिया, मोतिहारी में भी कमला-बलान, गंडक, महानंदा के अलावा कई नदियों में बाढ़ आई है। बिहार की आधी आबादी यानि चार करोड़ लोग हर साल बाढ़ से प्रभावित होते हैं। वहां पर डेढ़ करोड़ परिवारों के पुनर्वास के लिए जो राशि यहां से दी गई, उसका कोई उपयोग नहीं किया गया। इस तरह से देखा जाए तो पता चलता है कि आपकी गाइडलाइंस क्या हैं और वहां की सरकार ने क्या रिपोर्ट भेजी है। आपने ७० करोड़ रुपए के करीब वहां भेजे, लेकिन उसमें से केवल १४ करोड़ रुपए ही खर्च किए गए।
उपाध्यक्ष महोदय : अब आप समाप्त कीजिए।
श्री राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव : उपाध्यक्ष महोदय, मैं कोई स्पीच नहीं दे रहा हूं, केवल स्पष्टीकरण पूछ रहा हूं। उप प्रधान मंत्री जी, आप स्वयं पूरे देश को जानते हैं, इसमें कहने की जरूरत नहीं है। लेकिन जो हाई डैम की योजना थी, जो कई प्रधानमंत्रियों के समय से चली आ रही है, उस योजना का क्या हुआ?इसी तरह से नेपाल से वार्ता करनी थी, उसका क्या हुआ ? नेपाल से हमारा इस सम्बन्ध में कोई समझौता नहीं हुआ। इसलिए वहां पर बांध नहीं बने, जिसके कारण बालू और मिट्टी नहरों में आ गई और पानी का स्तर ऊपर हो गया। इस वजह से पानी पूरे एरिया में फैल गया, क्योंकि सिल्िंटग नहीं हो पाई है। इसलिए बिहार के बारे में कोई स्थाई समाधान सोचा जाए। हर साल हम लोग यहां राजनीति न करें, हर साल बाढ़ पर यहां न बोलना पड़े इसलिए हाई डैम बनाकर वहां की समस्या का समाधान किया जाए। मेरा यह कहना है कि बिहार सरकार जो राहत के बारे में असत्य प्रमाण और रिपोर्ट दे रही है, उसकी यहां से एक कमेटी द्वारा जांच कराई जाए। इसके अलावा जो किसान बाढ़ से प्रभावित हुए हैं, उनके ऋण माफ किए जाएं। भारत सरकार कुछ उदार बने। बिहार के किसानों का ऋण माफ हो, क्योंकि किसान तो बाढ़ और सुखाड़ से मारे जा रहे हैं। इन्हीं शब्दों के साथ मैं अपनी बात समाप्त करता हूं और फिर आग्रह करता हूं कि वहां के लिए कोई स्थाई समाधान निकाला जाना चाहिए।
उपाध्यक्ष महोदय : चूंकि कालिंग एटेंशन में नियम के अनुसार तीन सदस्यों का ही नाम है, लेकिन आज आखिरी दिन है और स्पेशल केस में मैं आपको भी मौका दे रहा हूं। आप सिर्फ स्पष्टीकरण पूछें।
श्री प्रभुनाथ सिंह : हमें भी एक प्रश्न पूछने का मौका दें।
उपाध्यक्ष महोदय : अब इस पर डिबेट तो नहीं हो सकती।
श्री देवेन्द्र प्रसाद यादव (झंझारपुर) : उपाध्यक्ष महोदय, मैं आपको धन्यवाद देना चाहता हूं कि आपने विशेष तौर पर हमें इस पर बोलने का मौका दिया। मैं आपको स्मरण दिलाना चाहता हूं, गृह मंत्री जी भी यहां मौजूद हैं, ९ दिसम्बर, २००२ को संसद के सामने लाखों किसानों का मार्च हुआ था। इसी सवाल को लेकर चर्चा हुई थी। बिहार में छ: महीने बाढ़ रहती है तो छ: महीने सुखाड़ रहता है। उत्तरी बिहार की यह नियति हो गई है। मैं इस पर चर्चा नहीं करना चाहता कि राज्य सरकार से जो रिपोर्ट आई है, उसमें क्या राहत दी गई है और क्या सहायता हुई है। उप प्रधान मंत्री जी ने सदन को यह बात बताई है। माननीय रामविलास पासवान जी और राजेश जी ने आपको बताया कि क्या समस्या है, तो मैं समस्या पर नहीं, मैं उसके कारण पर सवाल करना चाहता हूं। यहां पर वाटर-रिसोर्स मंत्री जी भी बैठे हुए हैं। इन्होंने मुझे एक पत्र लिखा कि हमने ३० करोड़ रुपया स्थाई समाधान के लिए, डीपीआर बनाने के लिए, जो हाई-लेवल डैम होगा, उसके लिए दिये हैं। भारत सरकार का पत्र डीओ नं. २६-९३-२००२-ईआर मुझे मिला। इसमें कहा गया है कि सप्तकोसी का मामला, कोसी, बारमती, गंडक से पूरे उत्तर बिहार के १८ जिलों के साढ़े तीन करोड़ लोग प्रभावित होते हैं। अभी कोसी के संबंध में माननीय मंत्री जी ने जो जवाब दिया है उसमें आपने कहा है कि सप्तकोसी हाई लेवल डैम बहुद्देशीय परियोजना, सप्तकोसी स्टोरेज और डायवर्सन योजना के संबंध में संयुक्त योजना कार्यालय खोला जाएगा।
उपाध्यक्ष महोदय, हम यह जानना चाहते हैं कि क्या यह बात सही है कि भारत और नेपाल के बीच अक्टूबर २००१ में आयोजित संयुक्त विशेषज्ञ दल की चार बैठकों में सप्तकोसी हाई लेवल बहुद्देश्य परियोजना और सप्तकोसी स्टोरेज एंड डायवर्सन योजना के संबंध में संयुक्त निरीक्षण रिपोर्ट को अंतिम रूप दिया गया था। क्या यह सही बात है कि अन्य बातों के साथ-साथ क्षेत्रीय जांच कार्य शुरू करने और संयुक्त विस्तृत परियोजना शुरू करने के लिए एक संयुक्त परियोजना कार्यालय स्थापित करने का निर्णय लिया गया था और ७ ज्वाइंट कार्यालय नेपाल भाग में जहां वाटर इनकैचमेंट एरिया है खोलने का निर्णय हुआ था। आप कह रहे थे कि नेपाल और भारत की वार्ता क्या हुई है। मैं कहना चाहता हूं कि जो वार्ता हुई हो उसके निर्णयों का भी अनुपालन नहीं हो रहा है। क्या यह बात सही है कि नेपाल के विराट नगर में डविजनल कार्यालय चतरा, जनकपुर, बराय, कुरेल, लाहान और काठमांडु में संपर्क कार्यालय खोलने का निर्यण हुआ था। हम यह जानना चाहते हैं कि हाई लेवल डैम कोसी के संबंध में और बहुद्देश्य डैम सप्तकोसी हाई बांध और सप्तकोसी स्टोरेज और डायवर्सन का अध्ययन करने हेतु जो संयुक्त विस्तृत परियोजना तैयार करने के लिए क्या सरकार ने इस १०वीं योजना में ३० करोड़ रुपये की धनराशि का प्रावधान किया है। यह कार्यालय कब स्थापित होगा क्योंकि ८ महीने हो गये हैं। इस कार्यालय के खुलने में विलम्ब क्यों हो रहा है। स्थाई समाधान के लिए, जेपीओ, डीपीआर बनाने के लिए जो पैसा दिया, क्या वह अब रिलीज हुआ है। यह मैं जानना चाहता हूं।
श्री रघुनाथ झा (गोपालगंज):माननीय उपाध्यक्ष जी, बिहार और विशेषकर उत्तर बिहार में प्रतिवर्ष बाढ़ से नुकसान होता रहा है। ऐसे अवसर पर हमें जननायक कपूरी ठाकुर जो बिहार में विपक्ष के नेता होते थे और जो मुख्यमंत्री भी रहे, वे कहा करते थे कि जब तक भारत सरकार, नेपाल सरकार और बिहार सरकार तीनों मिलकर इस बाढ़ समस्या का कोई निदान नहीं निकालती, तब तक बिहार की गरीबी, गारद और गुरबत मिटने वाली नहीं है। चाहे जमीन हो, खेती हो या आप सड़क बनाएं, पुल बनाएं, स्कूल बनाए, सब हर साल बर्बाद होती रहेंगी, अगर ये तीनों मिलकर कोई योजना नहीं बनाते हैं। महोदय, नेपाल एक अंतर्राष्ट्रीय देश है और हमारा मित्र है। नेपाल से आने वाली नदियों से बिहार, उत्तर प्रदेश और बंगाल के हिस्सों को निकसान होता है। जिस तरह से भारत सरकार भुकम्प और तूफान से दूसरी जगह मदद करती है। हम समझते हैं कि यदि बिहार सरकार अपना सारा बजट लगा दे, तो भी बिहार सरकार के बूते की बात नहीं है कि वह इस समस्या का निदान कर दे। जब तक भारत सरकार नेपाल सरकार से कारगर ढंग से बात नहीं करेगी, स्थायी समाधान नहीं ढूंढेगी, तब तक जो क्षति होती है, उसकी भरपाई क्या भारत सरकार करना चाहती है?
दूसरी बात, गत वर्ष बिहार के मुख्य मंत्री ने सभी दलों के नेताओं के साथ प्रधान मंत्री जी से मिलने का काम किया था। हमारे मित्र, श्री देवेन्द्र प्रसाद यादव जी स्पैसफिक कोसी नदी के बारे में प्रश्न उठा रहे थे, लेकिन उत्तर बिहार में गोपालगंज से लेकर किशनगंज तक बूढ़ी गंडक, बागमती, अदवारा, कमलाबालान, फरेहा, महानन्दा, कोसी आदि ऐसा कोई भी तटबन्ध नही है, जो बाढ़ से क्षत-विक्षत नहीं होता है। इसलिए जब तक नेपाल सरकार से सामयिक रूप से डैम बनाने के लिए हाई-लैवल पर बात नहीं होगी, तब तक इस समस्या का निदान नहीं हो सकता है। मैं कृषि विभाग की स्थायी समति में भी हूं और वहां भी इस विषय पर बार-बार चर्चा होती है। उस प्रतनधिमंडल को प्रधान मंत्री जी ने आश्वासन दिया था कि काठमाण्डु में इसके संबंध में सम्पर्क कार्यालय खोला जाएगा। मैं पूछना चाहता हूं कि इसमें क्या प्रगति हुई है? इस सदन में हम लोग बाढ़ की समस्या के सवाल को उठाते हैं और हम लोगों ने इस विषय पर सदन की कार्यवाही भी बन्द करने का भी काम किया है, लेकिन हमें कोई ठोस परिणाम नहीं मिला है। संयोग की बात है कि उप प्रधान मंत्री जी और जल संसाधन मंत्री जी सदन में उपस्थित हैं। हम चाहते हैं कि इस संबंध में ठोस कार्यवाही का आश्वासन बिहार की जनता को मिले। मैं श्री राम विलास पासवान जी को भी बधाई देता हूं कि उन्होंने इस प्रश्न को सदन में उठाया।
SHRI ADHIR CHOWDHARY (BERHAMPORE, WEST BENGAL): Sir, geographically, West Bengal is adjacent to Bihar. Bihar is our immediate neighbour. Therefore, their spill-over effect, originating in Bihar, has to be faced by us. Sir, West Bengal is very much destined to face, on the one hand onslaught of flood and, on the other hand erosion. Bhagirathi River is the only discharge channel which receives entire water from Chotanagpur plateau. On the other side, such additional water from Farakka used to get discharged through this channel also. Therefore, Sir, the district Murshidabad, Nadia and Maldah are under the spincer attack of flood and erosion. Here, the Deputy Prime Minister is available. So, seizing the opportunity I would like to draw his attention to the fact that now the main flow of river Ganga tends to merge river Pagla and Mahananda. That means, in the near future, the main flow of river Ganga will be merged with Pagla only to flow to Bangladesh by circumventing the Farakka Barrage project. So, Sir, in the near future, we will see that Farakka barrage will stand on barren land, on dry bed. The West Bengal Government is always resorting to the plea that the Central Government is showing step-motherly treatment to that particular State Government. Whenever we raise some questions regarding flood, regarding erosion, they always blame the Central Government for not having the required fund. So, I would like to ask the hon. Minister how much fund he has allotted to the State Government last year in regard to flood management and also for erosion. The property worth Rs.4,000 crore has been devoured by the fierce erosion of River Padma and Ganga.
Now, at present, every day one after another village is being wiped out by erosion. It has already assumed not only national proportion but also international proportion. Both the State Government and the Central Government are totally indifferent to the perennial problem of West Bengal, Bihar and other States. … (Interruptions)
MR. DEPUTY-SPEAKER: What is your clarification?
SHRI ADHIR CHOWDHARY: I would like to know how much fund has been allotted to the State Government of West Bengal in regard to flood management and erosion; also how much fund the State Government has proposed to the Central Government. That is all.
डॉ. रघुवंश प्रसाद सिंह (वैशाली):उपाध्यक्ष महोदय, बिहार के माननीय सदस्य श्री राम विलास पासवान जी और अन्य माननीय सदस्यो ने बाढ़ का विषय उठाया। यह एक बहुत अच्छा मौका है जब बिहार की पीड़ा के बारे में सभी सदस्य एक जैसी बात कह रहे हैं वरना इधर से कुछ कहा जाता था और उधर से कुछ और कहा जाता था। वहां हर साल बाढ़ आती है और यह वहां के लोगों की स्थायी पीड़ा है। इसकी स्थायी समाधान किया जाना चाहिए। वहां की जन-आकांक्षा को पूरा किया जाए। रिजर्व बैंक की कुंवर सेन कमेटी इसकी जांच करने के लिए वहां गई थी। उसने जांच करके कहा कि चूंकि अन्तर्राष्ट्रीय नदियों से बिहार बरबाद होता है, इसलिए राज्य सरकार के बस में इस बाढ़ का समाधान नहीं है। भारत सरकार इसके स्थायी समाधान के लिए भारत-नेपाल समझौता सहित क्या कार्रवाई करेगी? आप इंटर-लकिंग ऑफ रिवर में लगे हैं। आप देश भर की नदियों को जोड़ रहे हैं। जो देश भर की नदियां होंगी, उनमें से कहां सरप्लस पानी है, कहां बाढ़ से बरबादी होती है, क्या उनका आपके पास कोई हिसाब-किताब है? सरकार को मालूम है कि बिहार में १० लाख हैक्टेयर जमीन जल जमाव से पीडित है। इसे लेकर जनता त्राहि-त्राहि कर रही है। उस जमीन में पानी भरा रहता है। वहां कोई फसल नहीं होती है। वहां मछली भी नहीं होती। इसके लिए इन्होंने क्या व्यवस्था की है? आप इस बारे में राज्य सरकार की क्या मदद करेंगे? बिहार में बाढ़ से हर साल बरबादी होती है, इनफ्रास्ट्रक्चर की बरबादी होती है, नेशनल हाईवे बरबाद होते हैं, आवागमन ठप्प हो जाता है, सीतामढ़ी, मुजफ्फरपुर, शिवहर के रास्ते चौपट हो जाते हैं और पुल टूट जाते हैं। जिन गरीबों के घर पानी में बह कर बरबाद हो जाते हैं, आपने उनके पुनर्वास के लिए क्या व्यवस्था की है? मैं ये संक्षिप्त सवाल इनसे पूछना चाहता हूं।
श्री प्रभुनाथ सिंह (महाराजगंज, बिहार) : उपाध्यक्ष महोदय, यहां माननीय सदस्यों ने हर वर्ष बिहार में बाढ़ से हो रही परेशानी के संबंध में अपनी चिन्ता जाहिर की है। यह चिन्ता पहली बार नहीं हुई है। जब भी संसद का मानसून सत्र चलता है तो बाढ़ के सीजन में हर वर्ष बिहार के सदस्य ही नहीं, दूसरे प्रान्तों जैसे बंगाल के सदस्य और इसके अलावा जहां-जहां बाढ़ आती है, वे उसे लेकर चिन्ता व्यक्त करते हैं। इसमें किस तरह की कठिनाई सामने आती है, इसका वर्णन लोगों ने किया है। उस कठिनाई की परिस्थिति में एक हास्यास्पद स्थिति यह सामने आती है कि एक तरफ लोग बाढ़ से परेशान रहते हैं, वैसी परिस्थिति में दूसरी तरफ राज्य सरकार, केन्द्र सरकार सहानूभूति के तौर पर बाढ़ की स्थिति देखने के लिए जब हैलिकॉप्टर से भ्रमण करते हैं तो जब नीचे बाढ़ से पीडित लोग हैलिकॉप्टर देखते हैं । वे लोग किस भाषा का इस्तेमाल करते हैं कि हैलिकाप्टर में बैठे हुये नीचे के लोगों केें मन की पीड़ा क्या जाने? बाढ़ से पीड़ित लोग कष्ट में हैं, वे आनन्द से हैलीकाप्टर में बैठे हुये है। मैं आपके माध्यम से सरकार से जानना चाहता हूं कि बाढ़ नहीं आये, इसके लिये सरकार ने क्या योजना बनायी है, उसके स्थायी समाधान के लिये अभी तक जो प्लानिंग किया गया है, उसमें क्या क्या तय किया गया है?
उपाध्यक्ष जी, मेरा दूसरा सवाल यह है कि जैसा माननीय सदस्य ने कहा कि क्या नेपाल से इस संबंध में वार्ता हुई है। नारायणी नदी, जिसकी धार काफी तेज होती है, उससे कई जगह कटाव हो जाता है। बाढ़ के समय पानी बढ़ जाता है, बांध के किनारे रहने वाले लोग कट जाते हैं। इससे न केवल एक जिला बल्कि कई जिले प्रभावित रहते हैं…( व्यवधान)
उपाध्यक्ष महोदय : आप सवाल पूछिये।
श्री प्रभुनाथ सिंह : उपाध्यक्ष जी, हम सवाल ही पूछ रहे हैं। केवल एक मिनट में पूछ लेते हैं। बाढ़ से लोगों की सुरक्षा करना राज्य सरकार का काम होता है। ऐसी स्थिति में क्या केन्द्र सरकार बांधों की सुरक्षा के लिये राज्य सरकार से परामर्श कर कोई फार्मूला तय करेगी? दूसरे जो बांध टूटे हुये हैं, उनमें से पानी रिसता रहता है उनकी मरम्मती के लिये क्या बिहार सरकार ने कोई योजना केन्द्र सरकार को भेजी है या प्लानिंग कमीशन में योजना पैंडिंग है? क्या बिहार सरकार से बातचीत करके राज्य सरकार को केन्द्र सरकार पैसा मुहैय्या करायेगी? आपने मुझे समय दिया, उसके लिये धन्यवाद।
श्रीमती रेनु कुमारी (खगड़िया) :उपाध्यक्ष महोदय, मैं अपने साथियों की बात से अपने को सम्बद्ध करते हुये मुख्य बिन्दुं की तरफ आपके माध्यम से सरकार का ध्यान खींचना चाहती हूं। उत्तर बिहार में हर साल बाढ़ आती है और प्रदेश की करोड़ों रुपये की क्षति होती है। बिहार सरकार बाढ़ पीड़ित लोगों की सहायता करने में सक्षम नहीं होती। जो राहत पैकेज पीड़ित लोगों को जाता है, वह उन्हें नहीं मिलता है। जैसे प्लास्टिक शीट की बात की जाये तो नियम इतना जटिल है कि लोगों को मिलता नहीं। मैं सरकार से जानना चाहती हूं कि बाढ़ के स्थायी. समाधान के लिये सरकार ने क्या कदम उठाये हैं। प्रत्येक वर्ष बूढ़ी गंडक, कोसी से जमीन का कटाव होता है, किसानों की जमीन कटती है, उसे रोकने के लिये सरकार क्या करने जा रही है? क्या हमारी सरकार नेपाल सरकार से वार्ता करेगी। बाढ़ की स्थिति में किसानों का कर्ज माफ होना चाहिये जो नहीं हो रहा है। हम सब जानते हैं कि बिहार में हर वर्ष सुखाड़ होता है। उत्तर बिहार बाढ़ से पीड़ित है तो मध्य बिहार सुखाड़ से ग्रस्त रहता है। मैं उप प्रधान मंत्री जी से जानना चाहूंगी कि उनके पास इन समस्याओं के समाधान के लिये क्या योजना है? अभी रघुवंश बाबू कह रहे थे कि हर साल १० लाख हैक्टेयर भूमि जलप्लावित हो जाती है। बिहार पिछड़ा राज्य है, क्या सरकार बिहार की इन समस्याओं से निपटने के लिये कोई आर्थिक पैकेज जल्दी देने की कोशिश करेगी?
MR. DEPUTY-SPEAKER: Dr. Nitish Sengupta, do you also want to associate with this?
DR. NITISH SENGUPTA (CONTAI): Yes, Sir.
MR. DEPUTY-SPEAKER: You have to ask a very short clarification.
DR. NITISH SENGUPTA : It will be very short.
Mr. Deputy-Speaker, Sir, I thank you for giving me this opportunity. I simply wish to say that this problem of water logging and flooding, affecting Bihar, portions of Uttar Pradesh and portions of West Bengal, is part of a big hydrological and geological phenomenon. You know that till the 18th century, the river Kosi was actually flowing into Brahmaputra.
During the floods, the River Kosi abandoned its course and started flowing into the River Ganga. Similarly, the River Teesta was flowing into the River Ganges but now it is flowing into the River Brahmaputra. We need to have a comprehensive plan with the help of hydrologists, geologists and other experts from India, Nepal and Bangladesh to find a permanent solution because piece-meal solutions will not help us.
कुंवर अखिलेश सिंह:उपाध्यक्ष महोदय, नेपाल से भारत में प्रवेश करने वाली नदियों की बाढ़ की विभीषिका से प्रति वर्ष उत्तर प्रदेश और बिहार में लाखों हैक्टेअर भूमि के साथ-साथ बड़े पैमाने पर जन-धन की क्षति हो रही है। १३वीं लोक सभा में आदरणीय जल संसाधन मंत्री ने बाढ़ की चर्चा को जो उत्तर दिया था, उसमें कहा था कि भारत और नेपाल का एक संयुक्त कार्य दल गठित करके नेपाल से भारत में प्रवेश करने वाली नदियों की बाढ़ की विभीषिका से बचने का इंतजाम किया जायेगा। मैं जानना चाहता हूं कि उस संयुक्त कार्य दल का अब तक क्या परिणाम रहा है और क्या आपने कोई कार्य योजना बनाई है।
मैं एक दूसरी बात की ओर भी आपका ध्यान आकर्षित करना चाहता हूं कि वर्ष १९९८ में जब गोरखपुर रीजन में बड़े पैमाने पर बाढ़ की भयंकर विभीषिका आई थी तो आदरणीय प्रधान मंत्री श्री अटल बिहारी वाजपेयी जी गोरखपुर आये थे और उन्होंने स्वयं जनता से वायदा किया था कि पूर्वी उत्तर प्रदेश और बिहार को बाढ़ की विभीषिका से बचाने के लिए पुख्ता इंतजाम किया जायेगा। माननीय प्रधान मंत्री जी ने जनता से जो वायदा किया था, उस वायदे को पूरा करने की दिशा में क्या आपने कोई कार्य योजना बनाई है।
श्री दिनेश चन्द्र यादव (सहरसा):उपाध्यक्ष महोदय, बाढ़ की समस्या पर जो ध्यानाकर्षण प्रस्ताव श्री रामविलास पासवान जी द्वारा लाया गया है, उसके लिए हम उन्हें धन्यवाद देते हैं। माननीय उप-प्रधान मंत्री जी से बाढ़ की समस्या पर माननीय सदस्यों द्वारा जो क्लेरफिकेशंस पूछे गये हैं, उनसे हम भी अपनी भावनाएं जोड़ना चाहते हैं। हमारी पीड़ा यह है कि जिस इलाके में हम लोग रहते हैं, मुख्य रूप से वह बाढ़ प्रभावित इलाका है। नेपाल से जो कोसी नदी निकलती है, वह सबसे पहले हमारे निर्वाचन क्षेत्र सुपौल और सहरसा से गुजर कर गंगा में और फिर समुद्र में मिलती है। हम माननीय उप-प्रधान मंत्री जी से जानना चाहते हैं कि बाढ़ की समस्या के निदान के लिए जब भी यहां चर्चा होती है तो सरकार की तरफ से बताया जाता है कि हम यह-यह कार्य कर रहे हैं, लेकिन जो निर्णय होता है, उसका कार्यान्वयन नहीं हो पाता है। इसलिए मेरा निवेदन है कि कोई ठोस योजना सरकार बनाये और बाढ़ के स्थायी निदान के लिए हाई डैम सप्तकोसी पर बने। इस दिशा में सरकार क्या कर रही और इस समस्या का निदान सरकार जल्द से जल्द कब तक करेगी? क्या इस संबंध में सरकार ने कोई ठोस निर्णय लिया है, यही मैं जानना चाहता हूं।
MR. DEPUTY-SPEAKER: Shri Nikhil Kumar Chowdhury will be the last hon. Member to speak on this issue.
SHRI SANSUMA KHUNGGUR BWISWMUTHIARY (KOKRAJHAR): Sir, I will be the last to speak.
श्री नखिल कुमार चौधरी (कटिहार) : उपाध्यक्ष महोदय, बाढ़ की समस्या पर आपने मुझे बोलने का मौका दिया, इसके लिए मैं आपको धन्यवाद देना चाहता हूं और साथ-साथ श्री रामविलास पासवान जी को भी बधाई देना चाहता हूं जिन्होंने यह गंभीर विषय आज सदन में रखा है। मैं जिस क्षेत्र से आता हूं वह बाढ़ से प्रभावित इलाका है। गंगा, कोसी, कमला, महानंदा और गंडक इन सारी नदियों में आने वाली बाढ़ की त्रासदी से बिहार हर साल परेशान होता है। लेकिन सरकार द्वारा जो भी राहत दी जाती है, उसका समुचित लाभ लोगों को नहीं मिल पा रहा है। मैं जानना चाहता हूं कि क्या केन्द्र सरकार ने कोई ऐसी योजना बनाई है जिससे बाढ़ से प्रभावित लोगों को सरकारी राहत का समुचित लाभ प्राप्त हो सकते।
दूसरी बात मैं कहना चाहता हूं कि इन नदियों के कारण वहां कटाव भी हो रहा है और कटाव ने वहां लोगों का जीवन दूभर कर दिया है। यदि प्रभावित लोगों को देखें तो पता चलता है कि जो कल तक अच्छी स्थिति में थे, आज वे भिखारी बनकर सड़क पर घूम रहे हैं। कटाव में जो पैसा खर्च किया जा रहा है, उसके निदान के लिए आज तक राज्य सरकार ने कुछ नहीं किया है।
उपाध्यक्ष महोदय : आप सवाल पूछिये, भाषण मत कीजिए।
श्री दिनेश चन्द्र यादव : मैं माननीय मंत्री जी से जानना चाहता हूं कि क्या इस दिशा में राज्य सरकार ने कोई निर्देश जारी किया गया है या उसके साथ बातचीत करके इसका कोई समुचित हल निकालने की दिशा में प्रयास किया जा रहा है। जो पैसा कटाव से निदान के लिए दिया जा रहा है, क्या उससे वहां कोई कटाव निरोधी कार्य जल्दी होने की योजना है। यही मेरा प्रश्न है।
श्री सानछुमा खुंगुर बैसीमुथियारी: इस पर बोलने का मुझे भी मौका मिल जाता तो अच्छा होता।
MR. DEPUTY-SPEAKER: Shri Bwiswmuthiary, this is a Calling Attention on floods in Bihar. Please try to understand.
SHRI SANSUMA KHUNGGUR BWISWMUTHIARY (KOKRAJHAR): Sir, hon. Members from outside the State of Bihar have also spoken on this issue.
श्री राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव : यह आज का पेपर है जिसमें लिखा है कि गोपालगंज और मधुबनी में रैड एलर्ट घोषित किया गया है। आज उस जगह की यह स्थिति है जहां मुख्य मंत्री का घर भी है।
MR. DEPUTY-SPEAKER: Shri Rajesh Ranjan alias Pappu Yadav, please hear the hon. Deputy Prime Minister.
… (Interruptions)
श्री लालकृष्ण आडवाणी : उपाध्यक्ष महोदय, मैं समझता हूँ कि सदन आपका आभारी रहेगा कि आपने विषय की गंभीरता को पहचानकर परंपरा से हटकर भी न केवल जिन तीन माननीय सदस्यों ने इस ध्यानाकर्षण की सूचना दी थी, उनको, किन्तु और भी कई सदस्यों को चिन्ता प्रकट करने का अवसर दिया। उन सबका सार चिन्ता थी। अधिकांश जो सदस्य बोले, मैंने देखा कि १२ सदस्य बोले, उनमें से दो बंगाल के थे, एक उत्तर प्रदेश के थे और बाकी प्राय: बिहार के थे। असम के एक सदस्य बोलना चाहते थे, वह नहीं बोल पाए। मैं मानता हूँ कि हिन्दुस्तान में अगर कोई दो प्रांत जो प्रतिवर्ष बाढ़ से सबसे अधिक प्रभावित होते हैं वे बिहार और असम हैं।
SHRI ADHIR CHOWDHARY : Including West Bengal. … (Interruptions)
SHRI L.K. ADVANI: I know that. I am only talking of those States which are affected the most. … (Interruptions)
SHRI ADHIR CHOWDHARY : It is a perennial problem. … (Interruptions)
MR. DEPUTY-SPEAKER: Please listen to the hon. Deputy Prime Minister.
… (Interruptions)
श्री लालकृष्ण आडवाणी : सबका ध्यान इस बात पर ज्यादा था कि बाढ़ से स्थायी मुक्ति कैसे मिले। बाढ़ के लिए राहत प्रतिवर्ष केन्द्र सरकार देती है, प्रदेश सरकार भी देती है। उसके जो आंकड़े मैंने दिये हैं, वे स्वाभाविक रूप से जो प्रदेश सरकार से मुझे मिले, वही मैंने दिये हैं। उनको भी चुनौती दी गई है। हमारे पप्पू जी ने कहा कि ये आंकड़े सही नहीं हैं। मुझे लगता है कि गलत नहीं होंगे - खासकर मरने वालों की संख्या। कोई ऐसा नहीं करेगा कि ३००-४०० लोग मर जाएं और वे केवल ७९ बताएं। ऐसा नहीं होता। पिछले साल बहुत से लोगों की मृत्यु हुई। मेरे पास चार सालों के जो आंकड़े दिये गये हैं, उसमें २००३ में ७९ का आंकड़ा है लेकिन पिछले साल २००२ में बिहार सरकार ने बताया है कि ४५१ लोग मारे गए। इसलिए उसमें कहीं मतभेद हुआ होगा और आप जिनको इस साल का गिनते होंगे, वे पिछले साल के होंगे, लेकिन इसमें असत्य नहीं होगा। इसलिए मैं मानता हूँ कि जो आंकड़े प्राय: वहां से भेजे गये हैं और जो मैंने सदन के सामने रखे हैं, वे सही हैं। लेकिन यह बात सही है और इसकी चिन्ता होनी चाहिए कि इससे स्थायी मुक्ति कैसे हो।
श्री राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव : एक छोटी सी बात मैं जानकारी के लिए बताना चाहता हूँ। …( व्यवधान)
उपाध्यक्ष महोदय : राजेश रंजन जी, आप प्लीज़ बैठिये।
...( व्यवधान)
MR. DEPUTY-SPEAKER: You have all raised very serious questions. The hon. Deputy Prime Minister is answering. Please listen to him.
… (Interruptions)श्री राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव : आंकडा गलत दिया है और रुपये कम दिये हैं। उसकी जांच करवा लीजिए।…( व्यवधान)
श्री लालकृष्ण आडवाणी : मैं पता लगवा लूँगा। आपने कहा है तो मैं जरूर उसके बारे में भी जानकारी करने की कोशिश करूँगा लेकिन मैं जानता हूँ कि १९७४ में, आज से लगभग ३० साल पहले, एक राष्ट्रीय बाढ़ आयोग बना था, जिसने बहुत सी सिफारिशें कीं। उन सिफारिशों को हरेक स्टेट को भेजा गया है। यह बात सही है कि हमारी सरकार की व्यवस्था के अंतर्गत बाढ़ के मामले को अब तक प्रमुखता से आज भी जल संसाधन मंत्रालय देखता है, लेकिन जहां भी संकट आता है, आपदा आती है, तो आपदा निवारण कोष से मदद ली जाती है। इससे पहले भी आपदा निवारण की जितनी समस्याएं होती थीं -- सूखा, बाढ़ या भूकंप, वे सब की सब हमारा कृषि मंत्रालय देखता था। लेकिन दो वर्षों में चिन्ता और विचार करके यह निर्णय हुआ कि डिज़ास्टर मैनेजमेंट का कार्य स्थायी रूप से हो और इसे गृह मंत्रालय के पास रखा जाए। इसलिए पहली बार मैं बाढ़ के विषय पर उत्तर दे रहा हूँ क्योंकिDisaster management has been shifted to the Ministry of Home Affairs. … (Interruptions)
15.00 hrs. अध्यक्ष महोदय, इसीलिए हमारे यहां एक डिपार्टमेंट स्पेश्यली बनाया है और उसमें भी हम कोशिश कर रहे हैं कि केवल जब आपदा आए, तब उसका निवारण करें, उसके बजाय आपदा को एंटीसिपेट कर के एक स्थाई व्यवस्था बनाने की कोशिश की जा रही है। इसका अनुभव, गुजरात का होने के कारण, वहां आए भूकम्प के बाद हुआ। हमारी तैयारी पूरी नहीं थी। इसलिए भूकम्प के बाद हमें जो करना चाहिए था, वह भी हम नहीं कर सके। हमने अपने कुत्तों को सिर्फ यह प्रशिक्षण दिया था कि कहां पर गांजा है, कहां पर भांग है और कहां पर चरस है, इसकी पहचान करके हमें बताएं। हमने अपने कुत्तों को यह प्रशिक्षण नहीं दिया कि कहीं यदि कोई आदमी जीवित दब गया है, तो उसकी वे पहचान बता सकें कि यहां आदमी दबे होने की संभावना है। इसलिए हमें ऐसे कुत्ते स्विटजरलैंड से मंगाने पड़े। वे इस बात के अभ्यस्त थे कि कहां आदमी दबा पड़ा है। वहां बर्फ काफी गिरती है। बर्फ में जीवित आदमी दब जाते हैं। वहां कुत्तों को इस बात का प्रशिक्षण दिया जाता है कि वे बर्फ में जाकर खोजें कि आदमी कहां-कहां दबे हैं। अब हमने भी अपने यहां कुत्तों को इसी प्रकार का प्रशिक्षण देना प्रारम्भ कर दिया है। अब हम अपने यहां डिजास्टर मैनेजमेंट बनने के कारण कई चीजें कर रहे हैं।
अध्यक्ष महोदय, इसीलिए जब मुझे कल काल अटेंशन की सूचना मिली, तो उसी समय मैंने अपने साथी मंत्री, जो कि जल संसाधन मंत्रालय संभालते हैं, जो इससे पहले जवाब भी देते रहे हैं, मैंने उनसे आग्रह किया कि आप भी सदन में आइए, क्योंकि खासतौर से बिहार के संबंध में, लोग अवश्य पूछेंगे कि नेपाल से हमारी क्या बातचीत हुई है और बातचीत के आधार पर जो कार्यान्वयन होना है और आगे के बारे में हमने क्या सोचा है, उसके बारे में आप बता सकें। महोदय, यदि आपकी अनुमति हो और सदन चाहे, तो मैं उनसे निवेदन करूंगा कि वे इसके बारे में जवाब दें।
THE MINISTER OF WATER RESOURCES (SHRI ARJUN CHARAN SETHI): Mr. Deputy-Speaker, Sir, some hon. Members, especially Shri Ram Vilas Paswan, have raised the problem of flood in Bihar and other hon. Members have raised the problem of flood in other different States like West Bengal, Uttar Pradesh etc. I would like to remind, and especially the hon. Members hailing from Uttar Pradesh, Uttaranchal, Bihar, West Bengal, that I have addressed a letter to each of the hon. Members hailing from these States giving the details of the specific measures that the Ministry of Water Resources have taken to mitigate the sufferings of the people in these States. I am sure, all of them must have received the letter. In this letter I have mentioned the details about the steps we have taken to mitigate the sufferings due to floods and river bank erosions.
Hon. Members, Shri Ram Vilas Paswan, Shri Rajesh Ranjan alias Pappu Yadav, Shri Devendra Prasad Yadav, Shri Ram Chandra Paswan and other Members who have participated in this debate have raised about specific measures the Government has taken and how to find a permanent solution to this problem of flood as well as drought in this country.
I would like to just remind the hon. Members that our hon. Prime Minister, as well as hon. Deputy Prime Minister and also the hon. President of India have taken keen interest in the scheme of inter-linking of rivers. Our friend, Dr. Raghuvansh Prasad Singh, in a sarcastic manner said – ‘you are thinking of inter-linking of rivers and you are not doing anything so far as the flood and drought in Bihar and other parts are concerned’. As has already stated by the hon. Prime Minister not once but many times, and also by the hon. President of India and the hon. Deputy Prime Minister who have stated it on a number of times that unless we have this kind of a project – it may take a number of years in getting it at implemented and may require very large sums of money – but no flood or no drought problem can be mitigated in the country without this project.
SHRI ADHIR CHOWDHARY : Still it is controversial. Furthermore, States are not agreeing to your proposal. In all the States, whatever is being done, you are doing it in pursuance of the Supreme Court directions.
SHRI ARJUN CHARAN SETHI : Please listen to me. You have mentioned that the hon. Supreme Court has intervened, yes they have also directed the Government of India.
SHRI ADHIR CHOWDHARY : But, the States are not agreeing to it.
SHRI ARJUN CHARAN SETHI : So, for permanent solution, the Government as a whole; my Ministry, as well as the other Ministries are co-ordinating these schemes so that this can be implemented soon, so that this problem can be mitigated.
SHRI ADHIR CHOWDHARY : It is a utopia.
SHRI ARJUN CHARAN SETHI : You may say that it is a utopia.
SHRI ADHIR CHOWDHARY : I am not saying, but many experts are saying so.
MR. DEPUTY-SPEAKER: Please, Shri Adhir Chowdhary. Another Calling Attention is also there to be taken up.
SHRI ARJUN CHARAN SETHI : If we are serious in dealing with this kind of problems then we should be serious in our approach, and we should be serious in consideration on this aspect. I do not say that it can be implemented in a very short period of time. But, ultimately, it is the only solution before us.
Sir, so far as Bihar is concerned, Shri Paswan has raised a couple of queries. He asked as to what you have done about Mokama Taal, and how you are going to solve the drainage problem of Mokama Taal in Bihar? Similarly, he has raised what are the permanent measures that the Government has taken to control the floods of Sun Kosi, Gandak, Kamla, Bagmati, etc.?
Sir, as I have stated earlier, we are having constant interaction with the Government of Nepal because we all know these rivers originate from Nepal. So, unless we have co-ordination, and unless we have any kind of agreement with Nepal, this problem cannot be solved. … (Interruptions)
SHRI ARJUN CHARAN SETHI : आप पहले मेरी पूरी बात सुन लीजिए।
MR. DEPUTY-SPEAKER: That is why I say that you must have patience.
SHRI ARJUN CHARAN SETHI : He is very keen. He has asked me a question. I have all the details with me. I will certainly reply to all the queries.
उपाध्यक्ष महोदय : इस तरह बीच में टोका-टाकी न करें। Another Calling Attention is also there. I have to take up that Calling Attention also.
SHRI ARJUN CHARAN SETHI : Sir, with your permission, I would like to read the measures that we have taken so far as having a permanent kind of solution in Bihar is concerned.
Sir, about Sapta Kosi High Dam Multipurpose Project, and Sun Kosi Storage-cum-Diversion Scheme, he has asked whether the Liaison Office has been opened in Nepal or not. I would like to answer that question.
The proposal for setting up of the Joint Project Office in Nepal for taking up field investigations and preparation of Detailed Project Report, estimated to cost Rs. 29.34 crore, as considered and recommended for approval by the Committee of PIB in its meeting held on 3rd February 2003, has since been approved.
The administrative approval and financial sanction for the subject scheme was issued vide this Ministry’s order dated 7th March 2003. The sanction for redeployment of Indian personnel in the JPO, that is, Joint Project Office, and for pay and allowance has been issuedvide order dated 24th April 2003 and 1st July 2003.
The Joint Project Office (JPO) on Sun Kosi and Sapta Kosi at Biratnagar and Liaison Office at Kathmandu would be in operation for a period of 30 months from the date of its opening or until the completion of the DPR, whichever is earlier. The Divisional Offices at Dharan and Janakpur; and Sub-Divisional Offices at Biratnagar, Chatara, Kurule, and Lahan would be in operation for a period of 24 months and 18 months respectively, from the dates of their opening.
These are the specific steps that we have taken, and from these you can imagine in what speedier manner we are taking steps to open these offices, and to have the Data Project Report also on Sapta Kosi High Dam Multipurpose Project.
Similarly, the staff requirement -- as was jointly agreed -- comprises of a total of 142 officials, out of which 100 officials are from Nepal, and 42 officials are from India who are to carry out field investigations and studies.
The project, as per the feasibility report prepared by CWC in 1981, will inter alia have 269 metres high dam with an installed capacity of 3,300 MW and irrigation benefits accruing both to India and Nepal. The project which was estimated to cost Rs. 4,074 crore at 1981 price level is now estimated to cost Rs. 24,600 crore which, in addition to Kosi Multipurpose Project, will also include Sun Kosi Diversion scheme as well.
The fifth meeting of the Joint Team of Experts on Sapta Kosi was held during 24th-27th June, 2003 in which it was agreed to set up the JPC by August, 2003. An amount of one crore rupees has been provided in the budget estimate for the year 2003-04.
These are the specific steps we have taken in respect of these two rivers, that is, Sapta Kosi and Sun Kosi. Similarly, we are taking specific measures in respect of Kamla-Bagmati. … (Interruptions)
SHRI RAGHUNATH JHA : What about Bagmati?
MR. DEPUTY-SPEAKER: Shri Jha, I have got another Calling Attention Notice to be taken up after this. Why do you hear him?
SHRI RAM VILAS PASWAN : Sir, his reply is very important.
MR. DEPUTY-SPEAKER: That is true, but let him complete his reply.
श्री प्रभुनाथ सिंह : उपाध्यक्ष महोदय, यह मूल सवाल है, इसका जवाब आना चाहिए।
उपाध्यक्ष महोदय : मंत्री जी को कम्पलीट करने दें, उसके बाद सवाल पूछें।
SHRI RAGHUNATH JHA : What about Gandak and Bagmati?
MR. DEPUTY-SPEAKER: There is one more Calling Attention Notice to be taken up after this.
SHRI ARJUN CHARAN SETHI: So far as Buri Gandak are concerned, the talks are on with Nepal. A Joint Team has been constituted which will shortly visit Nepal for discussions and for preparing a Detailed Project Report.
श्री प्रभुनाथ सिंह : उपाध्यक्ष जी, हम जानना चाहते हैं कि यह बातचीत का सिलसिला तो लगातार चल रहा है, क्या कोई अनुमान लगाया जा सकता है कि कितने दिन वार्ता के बाद इसका रिजल्ट निकलेगा, वार्ता तो आजादी के बाद से चल रही है, इसका रिजल्ट निकलने की सम्भावना कितने दिन में बन सकती है?
DR. NITISH SENGUPTA : There is a very good Hydrological Simulation Centre at Pune.
MR. DEPUTY-SPEAKER: Dr. Sengupta, this is a Calling Attention Notice and it cannot be converted into a discussion under Rule 193. There is a limitation in terms of time. There is one more Calling Attention Notice that is slated for today. How do I take it up? Today being the last day, I would request the hon. Minister to give in writing whatever details the Members have asked for, that is, what action you have taken on this issue. Otherwise, I will not be in a position to complete this discussion on this Calling Attention Notice. There is one more Calling Attention Notice to be taken up today.
SHRI ARJUN CHARAN SETHI: To arrive at a consensus between different States within the country, it takes not months but a number of years. Here, we are having discussions with another country, that is, Nepal. Therefore, to arrive at a consensus, it will certainly take time. When we are finding it difficult to arrive at a consensus between different States within the country, it will certainly take more time, where it pertains to another country.
One hon. Member asked, "What about Kamla and Bagmati?" As I have already stated, talks are going on with the Nepal Government. Though they have certain reservations, we are still having discussions with them. However, no definite conclusion has yet been reached.
SHRI RAM VILAS PASWAN : What about waterlogging?
SHRI ARJUN CHARAN SETHI: Hon. Members, you are all senior Members. Primarily, this subject is in the State List.
SHRI RAM VILAS PASWAN : But you are my friend.
SHRI ARJUN CHARAN SETHI: I might be your friend, but it is the State Government which has to initiate the proposal. Unless they initiate the proposal, I cannot impose anything on them.
SHRI RAM VILAS PASWAN : Have they not sent the proposal?
SHRI ARJUN CHARAN SETHI: Especially for MokamaTaal… (Interruptions)
SHRI RAM VILAS PASWAN : I am not talking about the waterlogging in one lakh hectares in Mokama Taal, which falls within the constituency of Shri Nitish Kumar, but I am talking about the waterlogging in nine lakh hectares.
SHRI ARJUN CHARAN SETHI: They have not submitted any scheme yet. Only one proposal has come to us from the Bihar Government and that is for Mokama Taal.
MR. DEPUTY-SPEAKER: Mr. Minister, whatever details that the Members have asked for, you may please send them in writing later.
डॉ. रघुवंश प्रसाद सिंह :उपाध्यक्ष महोदय, वाटर लागिंग खत्म करने के लिए क्या आपके पास कोई योजना है ? …( व्यवधान)
SHRI ARJUN CHARAN SETHI: I have already stated that it is up to the State Governments. They have to initiate the proposal; they have to make the estimate. If they do not submit a proposal, I cannot do anything.
डॉ. रघुवंश प्रसाद सिंह :स्टेट गवर्नमैंट के पास पैसा नहीं है। …( व्यवधान)
MR. DEPUTY-SPEAKER: Hon. Minister, you can send in writing to the hon. Members the details they have asked for.
SHRI ARJUN CHARAN SETHI: I will take only one minute, Sir.
So far as erosion of river banks in West Bengal, Bihar, Uttar Pradesh and Uttaranchal is concerned, we have the office of Ganga Flood Control Commission (GFCC) situated at Patna. They are having constant monitoring. … (Interruptions)
SHRI ADHIR CHOWDHARY : What is the quantum of money earmarked for West Bengal on this issue?
MR. DEPUTY-SPEAKER: He will send the information to you in writing.
SHRI ADHIR CHOWDHARY : Sir, please ask him to do so. … (Interruptions)
MR. DEPUTY-SPEAKER: I have already asked him to do that. Mr. Minister, send the details the hon. Members have asked for, in writing.
SHRI ARJUN CHARAN SETHI: Sir, this is a Calling Attention on Bihar only. However, many Members have raised other issues.
MR. DEPUTY-SPEAKER: Not many, only four-five Members have raised their issues.
SHRI ADHIR CHOWDHARY : Sir, the problem of rivers is not confined only to Bihar. It is an all-pervading issue.… (Interruptions)
SHRI ARJUN CHRAN SETHI: You had better approach your State Government. … (Interruptions)
उपाध्यक्ष महोदय : राम विलासपासवान जी, आपके सवाल का जवाब दे दिया है फिर आप क्यों खड़े हो रहे हैं ?
...( व्यवधान)
श्री राम विलास पासवान: उपाध्यक्ष महोदय, फुइया-दरजिया के बारे में मंत्री जी ने जवाब नहीं दिया है।
…( व्यवधान)
उपाध्यक्ष महोदय : आपके बाकी प्रश्नों का जवाब लखित में आ जायेगा..
...( व्यवधान)
MR. DEPUTY-SPEAKER: Item No.22. – Shri Chandrakant Khaire.
… (Interruptions)
MR. DEPUTY-SPEAKER: Nothing will go on record except Shri Khaire now.
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