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Lok Sabha Debates

Further Discussion On Motion Of Thanks On President''S Address Moved By Smt. ... on 10 February, 2021

Seventeenth Loksabha > Title: Further discussion on Motion of Thanks on President's Address moved by Smt. Locket Chatterjee and seconded by Dr. Virendra Kumar on 8th February, 2021 (Amendment negatived and motion adopted).

माननीय अध्यक्ष:  आइटम नंबर -19   ।

……( व्यवधान)

माननीय अध्यक्ष:माननीय सदस्य,प्लीज  ।

*श्री तीरथ सिंह रावत (गढ़वाल):मैं महामहिम राष्ट्रपति जी के अभिभाषण का समर्थन करता हूं । जिस प्रकार महामहिम राष्ट्रपति जी ने अपने अभिभाषण में कर्म की प्रधानता का जिक्र किया है, वह आज सरकार के काम-काज और कार्य करने की शैली से चरितार्थ हो रहा है, आज हमारे देश का जनमानष पुनः कर्म प्रधान होकर आत्मनिर्भरता की ओर अग्रसर हो रहा है । यह सब माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी की प्रेरणा से ही सम्भव हो रहा है । मान्यवर पिछले एक वर्ष से सम्पूर्ण विश्व सहित हमारा देश भी कोरोना महामारी से जूझ रहा था । जहां इस अकल्पनीय भय से मानव जीवन में भयावह स्थिति पैदा हो गई थी,वहीं हमारी सरकार के निर्णयों एवं प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के सकारात्मक उद्बोधनों से देश की जनता को घोर निराशा एवं डर के वातावरण से उबारने का कार्य किया है । जिसका परिणाम है कि आज हम विश्व के अन्य देशों के मुकाबले नए सामर्थ्य के साथ उभर कर आये हैं । बीते एक वर्ष में हमारे सामने बहुत बड़ी चुनौती थी, एक ओर देश के नागरिकों के जीवन की रक्षा करनी थी, तो वहीं दूसरी तरफ हमें देश की अर्थव्यवस्था को भी संभाले रखना था । यह सरकार के सामने बड़ी चुनौती थी, लेकिन माननीय प्रधानमंत्री जी द्वारा लिए गए सटीक फैसलों एवं रिकार्ड आर्थिक पैकेजों की जो घोषणा हुई, उसका परिणाम था कि किसी भी असहाय एवं गरीब व्यक्ति को सम्पूर्ण देश के अन्दर भूखा नहीं सोना पड़ा । इस संकट की घड़ी में हमारी सरकार ने प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना के तहत 8 महीनों तक 80 करोड़ गरीब लोगों को 5 किलो अतिरिक्त अनाज प्रतिमाह निशुल्क देने का कार्य किया है । सरकार ने प्रवासी श्रमिकों,कामगारों, अपने घर से दूर कार्य कर रहे लोगों की चिन्ता करने के साथ-साथ एक देश एक राशन कार्ड की व्यवस्था देकर अनाज मुहैया करवाया ।

आज हमारे पास आत्मनिर्भर भारत के कई सार्थक उदाहरण हैं । कोरोना महामारी के दौरान देश में पीपीई किटों,टैस्ट किटों सहित प्राथमिक रोकथाम की दवाईयों का अपने पड़ोसी देशों सहित विश्व के कई बड़े मुल्कों को निर्यात किया है, आज हम याचक की नहीं दाता की भूमिका में विश्व पटल पर खड़े हैं । हमारे शास्त्रों में कहा गया है, ‘यं यं चिन्तयते कामं तं तं प्राप्नोति निश्चितम्’ । हमारी सरकार ने प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में जहां एक ओर देशवासियों को निराशा के भंवर से बाहर निकालने का काम किया है,वहीं निरंतर इस महामारी के स्थाई रोकथाम के लिए प्रयत्नशील चिंतन करते हुए,देश वासियों को दो वैक्सीन देकर आशा की नई किरण जगाई है । यही नहीं आज हम अपने पड़ोसी देशों सहित सम्पूर्ण विश्व में कोरोना वैक्सीन की खुराक को संजीवनी रूप में भेजकर मानव जीवन को बचाने का कार्य कर रहे हैं, जो कि हमारी संस्कृति का भी परिचायक है और यही आत्मनिर्भर भारत का भी ज्वलन्त उदाहरण है । बीते एक वर्ष में कारोना महामारी ने वैश्विक परिस्थितियों को बदलकर रख दिया,जिसमें प्रत्येक देश की प्राथमिकता उसके अपने देश के नागरिकों की जरूरतों को पूरा करना था, उससे भी यह समझ आया कि आत्मनिर्भर होना कितना आवश्यक है । हमने इस ओर प्रयास किया । अपनी प्रयोगशालाओं का नेटवर्क खड़ा किया । पीपीई किट,टैस्ट किट,वेंटिलेटर्स का निर्माण कर अपनी शोध क्षमता,वैज्ञानिक दक्षता और तकनीकी दक्षता को मजबूत कर विश्व पटल पर आत्मनिर्भता का परिचय दिया,जिसके लिए विश्वभर में हमारी प्रसंशा हो रही है, जो हमें गौरान्वित करता है ।

हमारी सरकार ने पिछले 6 वर्षों में अनेक क्षेत्रों में अभूतपूर्व कार्य किया है । स्वास्थ्य के क्षेत्र में आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के तहत करोड़ों गरीब परिवारों को 5 लाख रूपए तक का ईलाज मुफ्त सुनिश्चित किया । प्रधानमंत्री जनऔषधी केन्द्रों से सस्ती दवा उपलब्ध करवाई । देश में मेडिकल शिक्षा का विस्तार किया 22 नये एम्स स्थापित किये । मेडिकल कॉलेजों की संख्या में वृद्धि की,कृषि क्षेत्र में अभूतपूर्व परिवर्तन कर लघु एवं सीमान्त किसानों की पहचान कर किसान सम्मान निधि देकर नवाजने का कार्य किया है । सरकार ने ग्रामीण एवं शहरी गरीबों के लिए प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत पक्के मकान देकर उनके स्वाभिमान को उंचा उठाने का कार्य किया है । 21वीं सदी की आवश्यकता को देखते हुए हमारी सरकार ने इन्फ्रास्ट्रक्चर को बढ़ावा देकर सम्पूर्ण देश में गांव-गांव सड़क पहुंचाकर लोगों को सुगमता देने का काम किया है । आज हम लाखों गांवों को आप्टिकर फाइबर से जोड़कर डिजिटल इण्डिया की ओर अग्रसर हैं, लघु एवं कुटीर उद्योगों के विकास से भी हमने अर्थव्यवस्था को आधारभूत ताकत दी है, जल जीवन मिशन के तहत हर घर नल और नल में जल देकर लोगों को बहुत बड़े संकट से उबारने का कार्य किया जा रहा है । चाहे रक्षा क्षेत्र हो अन्तरिक्ष का क्षेत्र हो सरकार ने इन 6 वर्षों में अभूतपूर्व उपलब्धियां प्राप्त की, उज्जवला गैस, शौचालय और जनधन योजना के तहत गरीबों को बैंकों के द्वार दिखाकर सरकार ने गरीब बहन-बेटियों की गरिमा को बढ़ाने का कार्य किया है । ऐसे अनेक निर्णय हैं, जो लगभग हर क्षेत्र में लिए गए हैं । सरकार ने दिखाया कि अगर नियत साफ और इरादे बुलंद हो, तो वदलाव लाया जा सकता है । हर गरीब का घर रोशन हो इसके लिए ढाई करोड़ से अधिक बिजली के कनैक्शन निशुल्क दिए गए । गरीब के बिजली का बिल कम हो इसके लिए 36 करोड़ से ज्यादा एलईडी सस्ते बल्ब वितरित किए गए,सामाजिक सुरक्षा के लिए एक रुपया महीने के प्रीमियम में करोड़ों लोगों को प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना से जोड़ा गया,गरीबों को सबल मिले इसके लिए 330 रुपये में प्रधानमंत्री जीवन ज्योति योजना से जोड़ा गया,छोटे कामगार खेतीहर मजदूर गरीब लोगों को प्रधानमंत्री श्रम योगी मान धन योजना के अन्तर्गत पेंशन देने का कार्य किया गया,सरकार ने आर्टिकल 370 के प्रावधानों को हटाकर जम्मू-कश्मीर के लोगों को नए अधिकार प्रदान किए, नागरिकता संशोधन बिल पास कराया,सशस्त्र सेनाओं में महिलाओं की भागीदारी सुनिश्चित की,उच्चतम न्यायालय के निर्णय के बाद राम मंदिर निर्माण के लिए कार्य किया,डीबीटी के माध्यम से करोडो रुपये सीधे लाभार्थियों के खाते में ट्रांस्फर करना, बन्दे भारत मिशन के तहत 50 लाख भारतीयों को दुनिया के सभी हिस्सों से स्वदेश वापस लाने का कार्य किया । अनेक ऐसे काम हुए हैं, जिससे सीधे ही आम जनमानष दिलों को छुआ है, इतना ही नहीं भारत को आज वैश्विक समर्थन और सहयोग भी मिल रहा है, जिसका उदाहरण है कि हमने ऐतिहासिक वैश्विक समर्थन प्राप्त कर आठवीं बार सुरक्षा परिषद में स्थान प्राप्त किसा है और सौभाग्य से 2021 में हमारा देश ब्रिक्स में अध्यक्ष पद पर सुशोभित है । हमारी सरकार ने ऐसे अनेक अभूतपूर्व कार्य किए हैं,जिसके लिए मैं महामहिम राष्ट्रपति जी के अभिभाषण का पूर्ण समर्थन करता हूँ । धन्यवाद ।  

     

*श्री हरीश द्विवेदी (बस्ती): मैं माननीय राष्ट्रपति जी के अभिभाषण पर धन्यवाद का जो प्रस्ताव पेश हुआ है, उसका समर्थन करता हूँ । इसका अवसर देने के लिये मैं आपका और अपनी पार्टी का आभार व्यक्त करता हूँ । माननीय राष्ट्रपति जी का जो अभिभाषण होता है वह सरकार की नीतियों का रोडमैप होता है, जिसमे सरकार के आगामी कार्यो की रूपरेखा होती है साथ ही साथ सरकार की उपलब्धियों का ब्यौरा भी होता है । कोरोना महामारी के दौर में जहां सरकार के समक्ष एक ओर जनता के जीवन की सुरक्षा की चुनौती थी, वहीं दूसरी ओर आर्थिक सुरक्षा की भी चुनौती थी और हमारी सरकार ने दोनों ही मोर्चों पर सफल होकर दिखाया है । देश ने इस महामारी के दौर में, जान है तो जहान है, से लेकर जान भी और जहान भी, का सफर तय किया है । यह कोई साधारण उपलब्धि नहीं है । कोरोना महामारी के दौर में दुनिया के तमाम देशों के मुकाबले भारत में मृत्यु दर सबसे कम और रिकवरी रेट सबसे ज्यादा रही । आज हमारी अपनी स्वदेशी तकनीक पर विकसित दो-दो वैक्सीन कोवैक्सीन और कोवीशीलड भी आ चुकी है हमने अपने देश में 16 जनवरी से दुनिया के सबसे बड़ा टीकाकरण अभियान को तो आरम्भ किया ही साथ ही साथ दुनिया के 90 से ज्यादा देशों में इन वैक्सीन का निर्यात कर हम दुनिया के अग्रिम पंक्ति के देशों में शामिल हुए  । इस विषम परिस्थिति में यह हमारी सरकार की जनता के प्रति संवेदशीलता और प्रतिबद्धता का ही परिणाम रहा  । राष्ट्रपति जी ने अपने अभिभाषण में कहा की हमारी सरकार ने जितना काम शहरी क्षेत्रों में किया है, उतना ही काम ग्रामीण क्षेत्रों में भी किया है । अगर,सरकार ने एमएसएमई सेक्टर में काम किया है, तो नई शिक्षा नीति देने का कार्य भी हमारी सरकार ने ही किया है । हर क्षेत्र में महिलाओं की भागीदारी सुनिश्चित करने हेतु हमारी सरकार ने ठोस कदम उठाये हैं । अध्यक्ष महोदय, आदरणीय राष्ट्रपति महोदय जी ने ग्रामीण विकास को ग्रामीण विधुतीकरण से जोड़ते हुए कहा की हमारी सरकार ने ग्रामीण क्षेत्रों में फीडर सेपरेशन के लिये 3.5लाख करोड़ रुपये का प्रावधान अगले पांच सालों तक के लिये किया है । वह कितना स्वर्णिम क्षण होगा जब ग्रामीण क्षेत्रों के लिये अलग से और 24घंटे निर्बाध बिजली मिलने लगेगी, प्रधानमंत्री उज्जवला योजना की उपलब्धियों और परिणाम से हम सभी भली-भांति परिचित ही है ।

राष्ट्रपति जी ने बहुचर्चित आत्मनिर्भर भारत अभियान की चर्चा करते हुए कहा की आत्मनिर्भर भारत अभियान केवल भारत निर्माण तक ही सीमित नही बल्कि यह देश के प्रत्येक नागरिक का जीवन स्तर ऊपर उठाने और देश का आत्मविश्वास बढ़ाने वाला अभियान है  । उन्होंने आगे कहा की आत्मनिर्भर भारत का हम सभी का यह लक्ष्य आत्मनिर्भर कृषि से ही सफल होगा,इसी दिशा में हमारी सरकार ने पिछले वर्षों में बीज से लेकर बाजार तक सभी व्यवस्था को मजबूत करने हेतु ठोस कदम उठाये हैं  । भारतीय कृषि व्यवस्था और आधुनकि बन कर विस्तारित हो इसके लिए हमारी सरकार ने स्वामीनाथन समिति की सिफारिशों को लागू कर किसान भाइयों को लागत का डेढ़ गुना MSP देने का फैसला किया और हमारी सरकार ने न केवल रिकॉर्ड मात्रा में MSP पर अनाज खरीद बल्कि हर किसान को इसका लाभ पहुँचाने के लिये खरीद केन्द्रों की भी संख्या भी बढ़ाई है । महोदय हमारे प्रधानमंत्री जी की सूचना और प्रौद्योगिकी के प्रति झुकाव और देश को इस क्षेत्र में आगे बढ़ाने की चिंता किसी से छुपी नहीं है । देश को सूचना और प्रौदयोगिकी के क्षेत्र में आगे बढ़ाने के लिए हमारी सरकार कितनी संवेदनशील है इसका आईना सामने रखते हुए माननीय राष्ट्रपति महोदय ने कहा है कि आधुनिक तकनीक का भारत में विकास और प्रत्येक भारतीय तक तकनीक की आसान पहुंच करने हेतु सरकार प्रतिबद्ध है । महत्वकांक्षी"डिजिटल इंडिया अभियान" इसका ही उदाहरण है । कोरोना काल में इस अभियान ने अपनी महती भूमिका निभाई है,पिछले साल दिसंबर में लगभग चार लाख करोड़ से भी अधिक का यूपीआई के माध्यम से डिजिटल पेमेंट हुआ आज देश में 200 से ज्यादा बैंक यूपीआई व्यवस्था से जुड़े हुए हैं । उमंग एप पर देशभर के लोग 2 हजार से अधिक सेवाओं का लाभ ले रहे हैं । JAM (जनधन, आधार और मोबाइल) का लाभ इस देश को कितना हुआ है इसका उल्लेख करते हुए राष्टपति द्वारा कहा गया कि JAM (जनधन, आधार और मोबाइल) की वजह से देश के 1.80 लाख करोड़ रु० गलत हाथों में जाने से बचे हैं । "राष्ट्रीय डिजिटल हेल्थ मिशन" के माध्यम से चिकित्सा क्षेत्र में सेटेलाइट सिस्टम“नाविक" के माध्यम से समुद्री क्षेत्र में ई-विधान ऐप के माध्यम से देशभर की लोकतांत्रिक संस्थाओं के विकास में उल्लेखनीय प्रगति आएगी । आदरणीय अध्यक्ष जी देश की आधारभूत संरचनाओं के विकास पर जोर आदरणीय नरेंद्र मोदी जी की सरकार का हमेशा से रहा है, और इस दिशा में सरकार ने उल्लेखनीय प्रगति भी की है चेन्नई से पोर्ट ब्लेयर तक समुद्र के अंदर से फाइबर केवल की बात हो,सड़क विकास के क्षेत्र में अटल टनल हो या चार धाम सड़क परियोजनाओं सहित अनेक ऐसी परियोजनाएं हैं जिन्होंने देश का मस्तक ऊंचा किया है । सीमा सुरक्षा के प्रति हमारी सरकार कितनी सजग है इसका उदाहरण हमें हाल के दिनों में LAC पर दिए गए चुनौतियों से निपटने में सरकार द्वारा किए गए त्वरित कार्यवाही से मिलता है, हमारे सुरक्षा बलों ने देश को चुनौती देने वाले सभी प्रयासों का मुंहतोड़ जवाब दिया, इसके लिए मैं देश के सुरक्षा बलों को अपना शीश नमन कर प्रणाम करता हूं । उपरोक्त बातें सिर्फ आंकड़े नहीं अपितु माननीय प्रधानमंत्री जी व सरकार के आदर्श वाक्य सबका साथ, सबका विकास और सबका विश्वास का प्रतिबिंब भी है । अंत में, मैं माननीय राष्ट्रपति महोदय जी द्वारा दिए गए अभिभाषण व हम सभी का मार्गदर्शन करने हेतु उनका सादर धन्यवाद देते हुए, अपने और पार्टी ने राष्ट्रपति जी के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर मुझे जो अपनी बात रखने का अवसर दिया उसके लिए धन्यवाद देते हुए अपनी बात समाप्त करता हूं ।

     

*श्री हेमन्त तुकाराम गोडसे (नासिक):मैं महामहिम राष्ट्रपति के अभिभाषण पर अपनी बात रखना चाहता हूं ।

       हमारा देश प्रगति की दिशा में बढ़ रहा है और कोविड के काल में हम कोविड रोकने में सफल हुए ।

       महामहिम राष्ट्रपति जी के अभिभाषण में, कोविड-19का प्रादुर्भाव रोकना हो या देश की प्रगति की बात हो, हम कुछ बातों में ध्यान देते हैं । किसी विधेयक को लाने से पहले किसान और कामगार को विश्वास में लेते तो और बेहतर काम कर पाते, ऐसा मुझे विश्वास है ।

कोरोना हमारे देश में मार्च में आने से पहले 2 से 3 महीना चीन में शुरू हुआ था । वह संसर्गजन्य बीमारी है, यह हम जानते थे । अगर हम विदेश से आने वाले नागरिकों को तभी रोकते, उड़ान बंद कर देते तो शायद कुछ उसका प्रादुर्भाव कम होता और कम लोगों की जान जाती । 17 मार्च को महाराष्ट्र में लॉकडाउन हुआ तभी भी हमारी संसद चल रही थी और महामहिम राष्ट्रपति के यहाँ नाश्ता करने के आयोजन के कार्यक्रम कर रहे थे तभी हम कोविड-19 को गम्भीरता से लेते तो उसका प्रादुर्भाव कम रखने में यशस्वी होते ।

पिछले सत्र में तीन कृषि विधेयक लाये गए जिसके विरोध में देश के किसान उठ खड़े हुए । लगभग 70से 75 दिनों से किसान दिल्ली के बॉर्डर पर आन्दोलन कर रहे हैं,जिसमें छोटे बच्चों से लेकर 50 से 90 साल के बुजुर्ग भी शामिल हैं । उनका कहना है कि इन विधेयकों से हमारी सुरक्षा नहीं रहेगी ।

मैं यह पूछना चाहता हूं कि कायदा जनता के लिए होता है, मगर यह सरकार किसानों की आवाज नहीं सुन रही । वह अहंकार में किसान विधेयक वापस लेना नहीं चाहती लेकिन हमें यह भूलना नहीं चाहिए कि हम प्रभु श्रीराम की पावन भूमि में रहते हैं । यहाँ अहंकार के रावण को भी हरा दिया था । हमें इस विधेयक पर किसानों को विश्वास में लेकर पुनश्च विचार करना चाहिए | आज पेट्रोल, डीजल और गैस की कीमत इतनी बढ़ चुकी है कि उससे सामान्य नागरिक को घर चलाना मुश्किल हो गया है । आज कच्चे तेल का भाव 50प्रतिशत से 60 प्रतिशत कम हुआ है,  मगर पेट्रोल, डीजल का भाव दोगुना हो गया है, जिससे आम आदमी परेशान है ।

सांसद आदर्श ग्राम योजना असफल रही । महात्मा गांधीजी ने कहा था जब हमारे गावों का विकास होगा, तब सही हिसाब से देश का विकास होगा । इस धरती पर सांसद आदर्श ग्राम विकास योजना का आयोजन किया गया,परन्तु सांसद ग्राम योजना के विकास कामों के लिए कोई भी विशेष राशि का आयोजन नहीं किया गया और उन ग्राम विकास की रुपरेखा के कामों को भी प्राथमिकता नहीं दी जाती, इसीलिए यह योजना असफल है ।

पिछले सत्र में कामगार विधेयक में 29 कामगार विधेयक को सीधे 4कामगार विधेयक पर लाया गया । उससे भी कामगार वर्ग में घबराहट हुई है क्योंकि इस विधेयक में अब 300 कामगार से कम है तो कंपनी मालिक को अधिकार है । कम्पनी बंद करनी हो तो उसे बंद करने के लिये मान्यता की जरुरत नहीं है । अगर आन्दोलन करना है तो 60दिन पहले नोटिस देनी है और 14 दिनों के अन्दर संप नहीं कर सकते । ऐसा सख्त कानून कामगार वर्ग के खिलाफ किया गया है । इससे यह साबित होता है कि यह कानून कामगार वर्ग को गुलामगिरी की ओर ले जाएगा और कंपनी मालिक को और बड़ा बनाएगा ।

यही बात मैं आपके समक्ष रखना चाहता हूं ।

 

*SHRI ANTO ANTONY (PATHANAMTHITTA): The President's Address this year comes at a crucial time as we start off the session while our country and the world are recovering from a pandemic. Getting right into the topic, I must say the speech was well drafted keeping mind to hide all crucial existing crises that our country is facing currently.

India's economy was sick before the coronavirus crisis. It will still be unwell when the pandemic has passed. India's economy was already in the throes of a slowdown before the beginning of the pandemic - GDP grew at 4.2% in the 2019-20, its slowest pace in nearly a decade. India's per capita gross domestic product has taken a hit last year - so much so that it slipped below that of Bangladesh, according to the International Monetary Fund (IMF). According to IMF-World Economic Outlook (WEO), Bangladesh's per capita GDP in dollar terms is expected to grow 4% in 2020 to $1,888. On the other hand, India's per capita GDP is expected to decline 10.5% to $1,877 - the lowest in the last four years.

Even without the pandemic, the economy would have continued on the downward path that had begun in the first quarter of 2018-19 and continued for eight successive quarters. GDP growth has been declining since 2016, and investment since 2018. Annual vehicle sales reported in March 2020 (ie, almost entirely pre-lockdown) were lower than they had been a year earlier. As the Centre for Monitoring Indian Economy, an independent research firm, put it, industrial production went "from down to downer". The pandemic pushed the economy into an abyss: -23.9 per cent in Q1 of 2020-21 and -7.5 per cent in Q2. The current Finance Minister has the distinction of presiding over the first recession in four decades. The year 2020-21 will end with negative growth. None of the numbers estimated at the beginning of the year will be achieved. The revenue targets will be missed by a large margin, capital investment will take a hit, the revenue deficit will be close to 5 per cent and the fiscal deficit will exceed 7 per cent.

The Reality is that       the economy is in a recession, the recovery will be slow and painful, and the rate of GDP growth in 2021-22 (in constant prices) will be modest - no more than 5 percent; the current unemployment rates are - Rural: 9.2 per cent and Urban: 8.9 per cent. The level of unemployment in 2021-22 will remain high, most jobs that were lost will not come back and the rate of creation of new jobs will be small. The wage cuts in the organized sector may be restored but real wages will not grow in 2021-22; agriculture will grow at a satisfactory rate if the government does not arbitrarily disrupt the sector with anti-farmer laws and retrograde import/export policies for agricultural produce. The industry sector will not attract huge investments because of low savings rate, inadequate credit growth, protectionism, crony capitalism, encouragement of monopolies, a climate of distrust and vindictive administrative actions;      The services sector will achieve moderate growth because it will be technology-driven, but the growth rate of jobs in that sector will be low; exports and imports will be in the doldrums because of the protectionist policies and the world economy not fully recovering in 2021-22. the current rates of inflation are high and painful, but it is likely that any further increase in inflation may be contained by rate hikes by the RBI; because of the mishandling of the economy and the government's underwhelming response to the pandemic, economic inequalities have grown. A report by Oxford titled 'Inequality Virus' shows that the vast majority have lost incomes and livelihoods while a tiny few at the top have multiplied their wealth.

Seven years of the Modi Government have wrecked our economy and the prospects of high growth. Years of bad financial management mean the government's accounts were stretched pre covid, but disguised by fanciful expectations for tax receipts and windfalls from the divestment of government-controlled entities. Even previously plausible expectations are unfeasible now. Tax collections have tanked; nothing has been divested. Deficits, already huge, will swell even without further demands, which could arise from large-scale vaccinations and recapitalisation of the banking system. The repeated delay of a necessary clean-up of government-controlled banks meant the financial system entered the crisis in bad shape. Things have got worse as emergency rules have allowed companies to defer repayments and banks to pretend they were being made whole. At the same time, inflation, fed in part by the cash-starved government's levies on petrol, has been rising, adding to borrowing costs. The challenge for 2021 will be to manage a national bail-out with money that (unlike richer countries) India cannot print cheaply.

Dr Arvind Subramanian, former CEA, described the period 2004-2010 as the golden years of the Indian economy. The equivalent period of 2014-20 has witnessed the slow but inexorable descent into a deep hole. The conclusion of a recent study by Brookings using IMF and World Bank data is humiliating but not surprising at all: the biggest rise in poverty will be in India and India will overtake Nigeria and become the country with the largest number of poor people. That is the contribution of the Modi government at the end of seven years.

Looking ahead, we do not see a 'V' shaped recovery. We believe that the recovery, slow and painful, will still leave millions of households struggling to survive, and it will resemble more the letter 'K'. As a result, inequality will increase. Those who are behind will be pushed back further. We recognize that there are some imperatives that fall outside economic management such as (a) increase in expenditure on health infrastructure and (b) increase in defence expenditure.

India's GDP showing alarming downturn of 23.9% which is all time high in the past 40 years. These estimates are of formal sectors only if we add estimates of informal sector the contraction will be more drastic. To arrest the spread of coronavirus almost all the economies were under strict lockdown which influenced almost every sector and hence GDP. It is not just because of the stringent lockdown only but its roots submerge back in 2016 when government announces the demonetization of 500 and 1000 Rs. notes. The story is not ended here the other step of CGST implementation then came into the scene which destroy all the local market demand and supply badly. These two steps are like Arrowhead in the dark. Demonetization and GST have harsh effect on local market especially unorganized market which contributes almost 90 percent to the total employment of our economy.

 Indian Economy is one of the fastest growing economy in this decade, world's developed economies looking on us as we provide them best market. But GDP downfall takes us somewhere back to 45 years which is totally unpalatable when we are trying to take our economy towards the 5 trillion economy status. Due to the spread of coronavirus, millions of people lose their jobs, the millions who have been pushed back into poverty by the pandemnic. This number for India is said to be the largest among all countries, and will reverse the steady if slow decline in India's poverty headcount. Amidst the welter of the multiple goals of the Budget, be they macroeconomic or sector-specific, revenue targets or reform objectives, it is this cohort that must not be forgotten. Many millions of employed people who have lost their jobs and are yet to get them back. Others have slipped from salaried jobs into the informal job market and/or part-time work, and therefore continue to suffer loss of incomes. The biggest losers have been women. Their share in the job market was already small. Now even that share seems to have halved.

The Petrol prices are expected to hit a century. what is more shocking is the fact that during the Congress' regime, when we left power in May, 2014, the International crude oil prices were 108 dollars per barrel. It has come down to all most half, which is 55.52 dollar per barrel and despite the crude oil prices having fallen to almost half, the petrol and diesel prices have surprisingly gone up. As I have said petrol has gone up from Rs. 71.51 to 85.70 and diesel has increased whopping Rs 57.28 to 75.88. This is the increase of Petrol and Diesel prices and the sole reason. Why there is such an increase of petrol and diesel prices, is because the Central Government has increased the excise duty on diesel by 8 times and on petrol by 2-1/2 times. The additional excise burden to the common man, to the consumer is Rs. 23.78 per litre on petrol and Rs 28.37 per liter on diesel, which is 8 times 820% to be precise on diesel and 258% to be precise on petrol, this is the increase on excise duty on diesel and petrol because of which the burden has fallen on the common consumer. The Central Government has earned more than 20 lakh crore rupees from this additional excise. What we are saying is, that if the Central Government reduces the additional excise, withdraws the additional excise, which it has charged in the last six years, the petrol prices will fall down to Rs 61.92 and diesel price will fall down to Rs 47.51. and if the state government also reduces the tax petrol price could be Rs 35 and disel 30. So, the additional burden of excise is to the extent of 8 times on diesel and 2-1/2 times on petrol and this is the reason, why the petrol and diesel prices have gone all time high. Never in the past, in the history, the petrol and diesel prices were so high.

As far as the LPG is concerned, I would like to remind you that during our time we used to give 12 cylinders as subsidized for LPG that almost stands withdrawn. At the moment, the LPG in open market is around Rs. 700 per cylinder, whereas LPG in open market without subsidy during our time agas I have said 12 cylinders per year, the subsidized rate were much lower, the subsidized LPG cylinder has gone up from Rs 414 per cylinder to Rs 700. So, the Central Government should immediately withdraw the additional excise duty, which it has increased during the last six years.

The most important question now is, where has this more than 20 lakh crore rupees gone? The Central Government has collected through petrol and diesel excise more than 20 lakh crore rupees in last 6 years. So, where this huge amount has gone? Our Jawans, our Government employees, their DA is being cut. Our small entrepreneurs, our MSMEs, they are continuously under pressure from the bank to repay the loans and they are continuously under the pressure of the taxation authorities. There is huge unemployment across the country. The farmers are committing suicide, so where has this amount, this more than 20 lakh crore rupees amount has gone? Has it gone into the pockets of the friends of Mr. Narendra Modi, the 'Mitra Punjipatis' as we call. The friendly big 'Sarmaydars' as we call. So, where this money has gone? This is what the Congress Party wants to know from the Government. First of all, it should reduce the increase in excise on petrol and diesel, secondly the Congress Party wants to know where the 20 lakh crore rupees, which the Central Government has collected from the excise duty hike of diesel and petrol, where that money has gone? It is difficult to belive that the money has gone for constructing toilets as some of my friends say in media discussions.

India's crores of farmers are fighting a decisive battle to save their farms and fields, their lives and live-lihood, and their present and their future against a diabolical onslaught by the Modi Government determined to sacrifice their interests at the altar of a handful of crony industrialist friends. Lakhs of farmers have been forced to sit on Delhi's borders in bone-chilling cold, hailstorms and rains. Accordingto the farmers' organisations, 147 farmers have lost their lives. The Prime Minister and an arrogant BJP Gov-ernment refuse to feel their agony and anguish or listen to their cry for justice. Across the country, farm-ers and farm labourers have been protesting, taking out rallies, holding hunger strikes, conducting tractor yatras and extensive demonstrations, yet a tyrannical Government dismisses the angst of millions of farmers by branding them as 'anti-nationals' and worse. These three laws impinge upon the Constitutional rights of States and constitute the first step in dismantling the three pillars of the edifice of Food Security built up over the past decades – MSP, Public Procurement and PDS. the Three Agrarian Laws did not pass the test of Parliamentary Scrutiny as they were bulldozed by muzzling the voice of the opposition. Particularly in Rajya Sabha, the three laws were passed by Voice Vote in an unprecedented fashion as the Government did not have the requisite majority on the floor. Finally, these laws, when implemented, will affect every citizen of the country as pricing of all food products would be at the mercy of a handful of people. This is unacceptable in an inclusive India. There is only one demand of India's farmers and farm labourers - repeal the three objectionable laws. But the Government continues to side-step, malign, deceive and hoodwink the farmers by attempt-ing to tire out, intimidate and divide the farmers. Let the BJP Government understand one unequivocal truth - India's farmers shall neither bow down, nor be cowed down. the Modi Government should forthwith repeal the three Anti-Agriculture Laws.

Out of a whopping 30,000 new job seekers every day, only 500 can realistically expect to get a job. Not all of them can weather two more years of the same inattentiveness to job creation as out of the 12 million new job seekers every year, only 1.2 million have a tertiary education. The impact of ever-shrinking employment opportunities is falling disproportionately on women as 1% fewer of the female population of the country were employed a year into the BJP government than before it came to power, debunking Modi's claim that his is a pro-woman government.

The unfortunate truth of the speech is that the no consolence or importance was given to the poor and marginalised who constitute the majority of our country.

 Jai Bharat!                                                            *श्री सुनील कुमार सिंह (चतरा):मैं महामहिम राष्ट्रपति जी के अभिभाषण के समर्थन में अपने विचार रखता हूं ।

       उत्तराखंड के चमोली जिले में हिमस्खलन से उत्पन्न भीषण आपदा में हुए मृतकों के प्रति अपनी संवेदना व्यक्त करता हूँ और ईश्वर से प्रार्थना करता हूँ कि उनके शोक सम्पत परिवार को इस दुःख की घडी में संबल प्रदान करें । इस आपदा में घायल हुए लोगों को शीघ्र स्वास्थ्य लाम मिलें ।

देश में विगत महीनों में कोरोना महामारी के कारण हमारे छह (06) सांसद साथियों ने जान गंवाई । इसके अलावा सैकड़ों कोरोना वारियर्स एवं नागरिक काल के गाल में समा गए । मैं मृतकों के प्रति अपनी श्रद्धाजंलि अर्पित करता हूँ ।

भारत ने कोरोना के खिलाफ की लड़ाई को जनआंदोलन में बदला और आज देश दुनिया का सबसे बड़ा कोरोना वैक्सीनेशन का अभियान भी चला रहा है । आत्मनिर्भर भारत अभियान केवल भारत में निर्माण तक ही सीमित नहीं है, बल्कि यह भारत के हर नागरिक का जीवन स्तर ऊपर उठाने तथा देश का आत्मविश्वास बढ़ाने का भी अभियान है ।

माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में सरकार के समय पर लिए गए सटीक फैसलों से लाखों देशवासियों का जीवन बचा है । मैं इस अवसर पर देश के करोड़ों कोरोना वारियर्स को बधाई देना चाहता हूँ । इन कोरोना वारियर्स स्वास्थ्यकर्मी, सफाईकर्मी, पुलिस, डाक विभाग के कर्मचारी, रेलवे के कर्मचारी इत्यादि फ्रंट लाइन वर्कर्स की वजह से देश में कोरोना काल के संकट के समय में अपनी जान जोखिम में डालकर काम किया है । इन कोरोना योद्धाओं की वजह से हम इस संकट से उभर रहे है । आज देश में कोरोना के नए मरीजों की संख्या भी तेजी से घट रही है । संक्रमण से ठीक होने वालों की संख्या भी बहुत अधिक है ।

माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के कुशल नेतृत्व में हमने कोरोना के चुनौतियों का सामना कर उसके नियंत्रण में सफलता पाई है । लोग अनुमान लगा रहे थे कि देश में करोड़ों लोग संक्रमित हो जाएंगे और लाखों लोगों की जान चली जायेगी । आज दुनिया मानवता की रक्षा की दिशा में हमारे प्रयासों की सराहना कर रही है । इसका श्रेय माननीय मोदी जी के नेतृत्व के साथ -साथ पूरे देश को है । दुनिया चिंतित थी कि भारत इस संकट का कैसे सामना करेगा । भारत ने अपने कुशल नेतृत्व और बेहतर प्रबधन से दुनिया को यह संदेश दे दिया है कि नये भारत का उदय हो चुका है । कोरोना काल ने देश के संघीय ढांचे को मजबूती दी और सकारात्मक संघवाद की झलक देखने को मिली ।

भारत द्वारा वैश्विक जिम्मेदारी का जिक्र माननीय राष्ट्रपति द्वारा अपने अभिभाषण में किया गया है । आज भारत के वैज्ञानिकों ने अपनी प्रतिभा का परिचय देकर एक नहीं दो - दो कोरोना की वैक्सीन बनाने में सफलता प्राप्त की है तथा एक और वैक्सीन तैयार होने वाली है । भारत ने कोरोना की वैक्सीन अपने पड़ोसी देशों के साथ - साथ अन्य देशों को भी उपलब्ध करवाई है । “वसुधैव कुटुम्बकम' की भावना के साथ भारत ने अपने घरेलू जरूरतों को पूरा करने के साथ-साथ 150 से अधिक देशों को जरूरी दवाईयां की आपूर्ति करने का कार्य किया है । मैं इसके लिए माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी एवं स्वास्थ्य मंत्री श्री हर्षवर्धन जी को धन्यवाद एवं बधाई देता हूँ ।

यह सर्वविदित है कि पिछले कुछ वर्षों में चिकित्सा के क्षेत्र मे भारत में नई क्रान्ति देखने को मिली है । बीमारियों पर होने वाले खर्च में कमी देखने के साथ-साथ आयुष्मान भारत और प्रधानमंत्री जनअरोग्य योजना के तहत देश के लगभग 1.5 करोड़ गरीबों को 5 लाख रु तक का मुफ्त ईलाज मिल रहा है । इसी क्रम में प्रधानमंत्री भारतीय जन-औषधी योजना के तहत 7 हजार से अधिक किफायती दवाईयों की दुकानों से लाखों मरीज सस्ती दवाईयां खरीद रहे हैं । जिससे मरीजों का प्रतिवर्ष 3600 करोड़ रु की बचत हो रही है । वहीं चिकित्सा में इंफ्रास्ट्रक्चर को मोदी सरकार में बल मिला है । 22नए एम्स खेलने के साथ-साथ वर्ष 2014में मेडिकल कॉलेजों की संख्या 387 थी जो आज बढ़कर 562 हो गई है । जिससे ग्रेजुएट और पोस्टग्रेजुएट सीटों की संख्या50000 तक बढ़ गई है । पुरानी मेडिकल काउंसिल की व्यवस्था के स्थान पर नेशनल मेडिकल कमीशन की स्थापना की गई है ।

कृषि कानूनों के विरोध के बहाने को उचित नहीं ठहराया जा सकता है । लाल किले पर हुई घटना सुनियोजित साजिश है । यह राष्ट्रीय प्रतीकों पर प्रहार है । इसकी जाँच कर दोषियों को कड़ी सजा देनी चाहिए । तिरंगे और गणतंत्र दिवस जैसे पवित्र दिन का अपमान बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है, जो संविधान हमें अभिव्यक्ति की आजादी का अधिकार देता है, वही संविधान हमें सिखाता है कि कानून और नियम का भी उतनी ही गंभीरता से पालन करना चाहिए ।

सरकार ने स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों को लागू करते हुए लागत से डेढ़ गुना एम.एस.पी.देने का फैसला किया है । सरकार आज न सिर्फ एम.एस.पी. पर रिकॉर्ड मात्रा में खरीद कर रही है, बल्कि खरीद केंद्रों की संख्या को भी बढ़ा रही है । सरकार द्वारा लाए गए तीनों नए कृषि कानून बनने से पहले, पुरानी व्यवस्थाओं के तहत जो अधिकार थे तथा जो सुविधाएं थीं,उनमें कहीं कोई कमी नहीं की गई है, बल्कि इन कृषि सुधारों के जरिए सरकार ने किसानों को नई सुविधाएं उपलब्ध कराने के साथ-साथ नए अधिकार भी दिए हैं । इन कृषि सुधार कानूनों द्वारा किसानों की आय दुगुनी करने का हमारा संकल्प सिद्ध होगा । इन कृषि कानूनों के माध्यम से किसानों खासकर छोटी जोत वाले 86प्रतिशत किसानों के हितों की रक्षा होगी । यह आन्दोलन राजनीति प्रेरित है । आज तक विपक्ष यह नहीं बता पाया कि कथित काले कानूनों में काला क्या हैं?माननीय कृषि मंत्री श्री नरेन्द्र सिंह तोमर ने संसद के अन्दर और संसद के बाहर इन कानूनों से जुड़े सभी प्रश्नों का समाधान दिया है । सच्चाई यह है कि किसानों के हित में किये गये कार्यों से विपक्षी दलों में घबराहट है ।

विपक्ष खासकर कांग्रेस किसानों के नाम पर घड़ियाली आंसू बहाने का काम कर रही है । झारखण्ड में कांग्रेस का यह दोहरा चेहरा स्पष्ट रूप से नजर आया है । झारखण्ड सरकार के वित्त मंत्री जो प्रदेश कांग्रेस कमेटी के भी अध्यक्ष है, उन्होंने किसानों से धान की सरकारी खरीद नहीं करने का फरमान दिया । कांग्रेस को यह पता होना चाहिए कि झारखण्ड के उनके पार्टी के वित्त मंत्री के एक बयान ने किसानों की दुनिया उजाड़ दी । अभी भी जो वहां धान की खरीद हो रही है, वह सुचारू नहीं चल रहा है । खरीद केन्द्र हफ्ते में दो - तीन दिन ही मात्र खुलते है । सभी प्रखण्डों में खरीद केन्द्र नहीं खोला गया है । किसानों को अपनी फसल को औने-पौने भाव पर बिचौलिओं को बेचना पड़ रहा है । माननीय अध्यक्ष जी हम आपके माध्यम से कांग्रेस एवं विपक्ष के मित्रों से जानना चाहते है कि झारखण्ड के किसानों के प्रति उनकी नीति क्या है? क्या उन्होनें पूववर्ती राज्य सरकार द्वारा घोषित किसान सम्मान निधि को समाप्त नहीं कर दिया? सच्चाई है कि कांग्रेस सहित पूरा विपक्ष किसान के नाम पर देश को अस्थिर बनाना चाहते है और दुनिया की नजरों में बदनाम करना चाहते है ।

विदेशों में स्थित भारत विरोधी स्वरों को विपक्ष के इस गैर जिम्मेदार आचरण से मदद मिल रही है । सरकार भारत विरोधी भावनाओं को भड़काने में जुटी विदेशी एजेन्सियों की पहचान कर रही है । सोशल मीडिया के माध्यम से जो दुष्प्रचार चल रहा है उस पर कठोर नियत्रंण लगाना चाहिए ।

सरकार ने बीते 6 साल में किसानों के लिए बीज से लेकर बाजार तक कई सकारात्मक परिवर्तन किये हैं । सरकार ने माइक्रो-इरिगेशन की सुविधा को 42 लाख हेक्टेयर जमीन से बढाकर56 लाख हेक्टेयर से ज्यादा पर लागू कर दिया है । किसानों के कठिन परिश्रम से खाद्यान्न का जो उत्पादन वर्ष 2008-09में 234 मिलियन टन बढाकर वर्ष 2019-20 में 296 मिलियन टन हो चुकी है । छोटे एवं सीमान्त किसान 10 करोड़ से ज्यादा हैं । इन छोटे एवं सीमान्त किसानों को पीएम किसान सम्मान निधि के जरिये1,13,000 करोड रूपये सीधे भेजे जा चुके हैं । विगत 5 साल में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना से 90 हजार करोड़ रूपये की राशि मुआवजे के रूप में दी जा चुकी है ।

सरकार किसानों के लिए किसान उत्पादन संगठनों की स्थापना कर रही है । किसानों को नया बाजार देने के लिए 100 से ज्यादा किसान रेले चलाई जा रही हैं । एक लाख करोड़ रूपये के एग्रीकल्चर इंफ्रास्ट्रक्चर फंड की शुरूआत की गई है । 15 हजार करोड़ के पशुपालन अवसंरचना विकास कोष की स्थापना की गई । किसानों की सिंचाई की समस्या के समाधान के लिए प्रधानमंत्री कुसुम योजना के तहत 20 लाख सोलर पम्प देने का काम किया जा रहा है ।

कोविड़-19 की बाधाओं के बावजूद भारत ने अपने सभी साथी देशों से अपने सम्पर्कों और सम्बन्धों को मजबूत बनाने के साथ-साथ विभिन्न अन्तर्राष्ट्रीय सहयोगों फलस्वरूप सुरक्षा परिषद् में 8वीं बार सदस्यता प्राप्त की है । इसके अतिरिक्त भारत ने वर्ष 2021 के लिए ब्रिक्स में अध्यक्ष पद ग्रहण किया है । आज भारत दुनियाभर के निवेशकों के लिए आकर्षक स्थान बन कर उभरा है । अप्रैल से अगस्त, 2020 के बीच लगभग 36 अरब डॉलर का विदेशी निवेश भारत में दर्ज किया गया है ।

महामहिम राष्ट्रपति जी के अभिभाषण में सभी प्रमुख विषयों का समावेश किया गया है, चाहे वह देश की आन्तरिक सुरक्षा का हो, विदेश नीति का हो, आधारभूत सुविधाओं का हो, चिकित्सा, शिक्षा, सड़कों, किसानों की समस्या, किसानों की उत्पादकता व आय बढ़ाने या फिर डिजिटल इंडिया योजना के माध्यम से नए भारत निर्माण का हो । नए भारत के निर्माण में लिए गए निर्णयों से विश्व मंच पर भारत ने नई ऊंचाईया दर्ज की है । विश्व बैंक केEase of Doing Business की रैंकिग में भारत ने 65वें स्थान से 34वां स्थान प्राप्त किया है ।

आज हमारा देश टेक्नॉलोजी के मामले में विश्वगुरू बनता जा रहा है । सरकारी योजनाओं के सफल पारदर्शी क्रियान्वयन में भी टेक्नोलॉजी का अभूतपूर्व योगदान रहा है । आज सटीक डिलीवरी और डायरेक्ट बेनीफिट ट्रान्सफर से गरीबों तक योजनाओं का लाभ सुनिश्चित हो रहा है । यू.पी.आई. के माध्यम से 4 लाख करोड़ से भी अधिक धनराशी का डिजिटल पेमेंट हुआ है । वहीं दूसरी ओर जनधन खातों, आधार और मोबाईल की त्रिशक्ति से 1 लाख 80 हजार करोड़ रूपयों को गलत हाथों में जाने से रोका जा सका । अब गरीब के हक का कोई राशन छीन ना ले,इसके लिए राशन कार्डों को आधार से जोड़ा जा रहा है, अब तक इसका 90प्रतिशत कार्य पूर्ण भी कर लिया गया है ।

डिजिटल इंडिया मिशन के अन्तर्गत आज देश के 1.28 अरब लोगों के पास अपना आधार है । भारतनेट योजना से 6 लाख से अधिक गांवों को हाई स्पीड ब्रॉडबैंड से जोड़ा जा चुका है ।              इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग में भीभारत नेअभूतपूर्व प्रदर्शन किया है । वर्ष 2014 में भारत में मात्र मोबाईल बनाने वाली केवल 2 कम्पनियां थी । आजभारत विश्व में दूसरा सबसे ज्यादा मोबाईल उत्पादन करने वाला देश बनगया है ।

21वीं सदी की वैश्विक आवश्यकताओं और नई चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए शिक्षा के क्षेत्र को और अधिक बेहतर बनाने के लिए नवाचारों के माध्यम से नई शिक्षा प्रणाली लागू करने का कार्य मोदी सरकार द्वारा किया गया है । नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति में पहली बार छात्रों को अपनी रूचि के हिसाब से विषय पढ़ने की आजादी दी गई है । अब छात्र किसी भी कोर्स के बीच में विषय और स्ट्रीम बदल सकते है । सरकार द्वारा प्रारम्भ की गई ई-विद्या योजना से स्कूली शिक्षा के लिए दीक्षा ऑनलाईन पोर्टल को वन नेशन वन डिजिटल प्लेटफार्म के रूप में विकसित किया गया है । सरकार द्वारा कोरोना संकट के समय में जे.ई.ई. और नीट की परीक्षा का आयोजन करके छात्रों का एक साल व्यर्थ होने के बचाने का कार्य किया है । वर्तमान समय में वंचित वर्ग के 3 करोड़ 20 लाख से ज्यादा विद्यार्थियों को विभिन्न छात्रवृत्ति योजनाओं को लाभ मिल रहा है । जनजातीय छात्रों को बेहतर शिक्षा के लिए सरकार द्वारा 550 से अधिक एकलव्य आवासीय मॉडल स्कूल स्वीकृत किये जा चुके है ।

मेरे संसदीय क्षेत्र का अधिकांश हिस्सा आदिवासी क्षेत्र हैं । जहां विभिन्न जनजाति के हजारों परिवार रहते हैं । वहां शिक्षा के लिए पर्याप्त संसाधन भी नहीं हैं । पहाड़ी क्षेत्र व सड़कों के अभाव में यहां रहने वाले बच्चे एवं युवा पढ़ाई के लिए नजदीक कस्बों और शहरों की तरफ नहीं जा पाते,जिससे वे शिक्षा से वंचित हैं । भारत सरकार द्वारा इस क्षेत्र में एकलव्य विद्यालय सहित अन्य शिक्षण संस्थानों की स्थापना से यहाँ के लोगों का शैक्षणिक सुविधा उपलब्ध होगी ।

शिक्षा के साथ-साथ नौकरी की प्रक्रियाएं आसान करने के लिए ग्रप सी व डी की भर्ती के लिए साक्षात्कार प्रणाली को समाप्त कर पारदर्शिता लाने का कार्य मोदी सरकार द्वारा किया गया है । इसके अतिरिक्त सरकार द्वारा नेशनल रिक्रूटमेंट एजेन्‍सी कर गठन करके नौजवानों के नियुक्ति के लिए अलग-अलग परीक्षाओं से मुक्ति दिलाने का कार्य किया जा रहा है ।

सरकार देश में इन्फ्रास्ट्रक्चर पर काफी तेजी से बल दे रही है । इस क्रम में 110लाख करोड़ से अधिक की लागत से नेशनल इन्फ्रास्ट्रक्चर पाईपलाईन, भारतमाला परियोजना के अन्तर्गत 6 नए एक्सप्रेस-वे, 18 नए एक्सेस कंट्रोल्ड कोरिडोर का निर्माण चल रहा है । अभी हाल में पश्चिमी डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर सेक्शन को देश को समर्पित किया गया है । यह परियोजना देश को विकास देने के लिए यहां के उद्योगों को नई उंचाईयों तक पहुचाने का कार्य करेगी ।

अर्थव्यवस्था को संभालने के लिए रिकॉर्ड आर्थिक पैकेज की घोषणा के साथ ही सरकार ने इस बात का भी ध्यान रखा कि किसी गरीब को भूखा न रहना पड़े । प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना के माध्यम से 8 महीनों तक80 करोड़ लोगों को 5 किलो प्रतिमाह अतिरिक्त अनाज निःशुल्क सुनिश्चित किया गया । सरकार ने प्रवासी श्रमिकों, कामगारों और अपने घर से दूर रहने वाले लोगों की भी चिंता की । वन नेशन वन राशन कार्ड की सुविधा देने के साथ-साथ सरकार द्वारा उन्हें निःशुल्क अनाज उपलब्ध करवाने का कार्य भी किया गया है । इसके अतिरिक्त स्पेशल ट्रेनों का संचालन कर श्रमिकों को उनके घर वापसी पहुँचाने का कार्य किया है । यही नहीं महामारी के कारण शहरों से वापस आए प्रवासियों को उनके ही गांव में रोजगार देने के लिए 50करोड़ मैन डेज के बराबर रोजगार सृजन का कार्य भी किया । ठेला रेड्डी लगाने वाले लोगों के लिए सरकार द्वारा विशेष स्वनिधि योजना की भी शुरूवात की ।

मैं यह ज्ञात कराना चाहूँगा कि मोदी सरकार द्वारा श्रमिकों के जीवन में बदलाव लाने के उद्देश्य से 29 श्रम कानूनों को कम करके 4लेबर कोड बनाने का कार्य किया गया है । इन सुधारों के माध्यम से श्रम कल्याण का दायरा बढ़ने के साथ-साथ श्रमिकों को निश्चित समय पर मजदूरी मिलने और रोजगार के ज्यादा अवसर उपलब्ध हो सकेंगे । महिलाओं से जुड़े कदमों पर जानकारी देते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि मेरी सरकार ने महिलाओं को स्वरोजगार के नए अवसर देने के लिए कई कदम उठाए हैं । मुद्रा योजना के तहत अब तक 25 करोड़ से ज्यादा ऋण दिए जा चुके हैं, जिसमें से लगभग 70प्रतिशत ऋण महिला उद्यमियों को मिले हैं । इसके अतिरिक्त करीब 31हजार करोड़ रुपये गरीब महिलाओं के जन-धन खातों में सीधे ट्रांसफर कर उन्हें संबल प्रदान करने का कार्य भी सरकार द्वारा कोरोना संकट के दौरान किया गया है । श्रमिक कोड के माध्यम से सरकार द्वारा महिला श्रमिकों की अधिक और सम्मानजनक भागीदारी सुनिश्चित करने का कार्य किया जा रहा है ।

नए संसद भवन की जरूरत वर्षों से महसूस की जा रही थी । नए संसद भवन में सांसदों को कई नई सुविधाएं मिलेंगी । संसद की नई इमारत को लेकर पहले की सरकारों ने भी प्रयास किए थे लेकिन आजादी के 75वें वर्ष की तरफ बढ़ते हुए हमारे देश ने, संसद की नई इमारत का निर्माण शुरू कर दिया है । नए संसद भवन के बनने से अपने संसदीय दायित्वों को निभाने में हर सदस्य को अधिक सुविधा मिलेगी ।

पिछले साल जून में गलवान घाटी की हिंसक झड़प में हमारे 20 जवानों ने मातृभूमि की रक्षा के लिए अपना सर्वोच्च बलिदान दिया । हर देशवासी इन शहीदों के प्रति कृतज्ञ है । सरकार देश के हितों की रक्षा के लिए पूरी तरह सतर्क है । LACपर भारत की संप्रभुता की रक्षा के लिए अतिरिक्त सैन्यबलों की तैनाती भी की गई है ।

राष्ट्रपति ने अपने भाषण में मलयालम के श्रेष्ठ कवि वल्लथोल के श्लोक का भी जिक्र किया- भारतम् ऐन्ना पेरू केट्टाल अभिमाना पूरिदम् आगनम् अंतरंगम अर्थात, जब भी आप भारत का नाम सुनें, आपका हृदय गर्व से भर जाना चाहिए । वहीं,भाषण की शुरूआत में उन्होंने असम केसरी कवि अंबिकागिरि रायचौधरी की यह पंक्तियां भी दोहराई- ओम तत्सत् भारत महत, एक चेतोनात, एक ध्यानोत, एक साधोनात, एक आवेगोत, एक होइ जा, एक होइ जा (भारत की महानता परम सत्य है, एक ही चेतना में,एक ही ध्यान में, एक ही साधना में, एक ही आवेग में, एक हो जाओ, एक हो जाओ).

आइए, हम सब मिलकर प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के नए भारत के सपने को पूरा करने में उनका हाथ बटाएं । इसी के साथ मैं राष्ट्रपति जी को उनके द्वारा दिये गए अभिभाषण पर धन्यवाद प्रेषित करता हूँ ।

           

*डॉ. संघमित्रा मौर्य (बदायूं):मुझे इस देश के महामहिम राष्ट्रपति जी के अभिभाषण पर अपनी बात रखने का मौका देने के लिए मैं बहुत-बहुत आभार व्यक्त करती हूँ ।

       महामहिम राष्ट्रपति जी ने अपने अभिभाषण में एक कवि की कुछ लाइनों को पढ़ा था, जिसका अर्थ था- “भारत की महानता परम सत्य है । एक ही चेतना में, एक ही ध्यान में, एक ही साधना में, एक ही आवेग में, एक हो जाओ,एक हो जाओ” । महामहिम जी द्वारा कही गई यह लाइन बहुत कुछ कहती है । आज के परिवेश को देखते हुए, आज जहाँ हम सब कोरोना जैसी वैश्विक महामारी से लड़कर उस पर विजय प्राप्त करने का काम कर रहे हैं,वहीं विपक्ष ने सरकार की, वैज्ञानिकों की सराहना करने के बजाय समय-समय पर तीखे वार किए । इतना ही नहीं कुछ लोगों ने तो वैज्ञानिकों द्वारा बनाई गई कोरोना वैक्सीन पर भी सवालिया निशान लगा दिया, जो बेहद ही शर्मनाक है । इस वैश्विक महामारी से बचाव के लिए आदरणीय प्रधान मंत्री जी द्वारा जनता कर्फ्यू से लेकर लॉकडाउन तक जो भी कदम उठाये,निश्चित तौर पर वह दूरदर्शिता को प्रदर्शित करता है । आज हम सब सुरक्षित हैं तो उसका श्रेय यशस्वी प्रधान मंत्री जी को जाता है । आदरणीय प्रधान मंत्री जी ने सिर्फ जीवन ही नहीं बचाया,बल्कि उन्होंने “प्रधान मंत्री गरीब कल्याण योजना”के माध्यम से 8 महीने तक 80 करोड़ लोगों को 5 किलो प्रतिमाह अतिरिक्त अनाज नि:शुल्क सुनिश्चित किया । इतना ही नहीं, सरकार ने प्रवासी श्रमिकों की, कामगारों और अपने घर से दूर रहने वाले लोगों की भी चिंता की । “वन नेशन-वन राशन कार्ड”की व्यवस्था के साथ ही सरकार ने उन्हें नि:शुल्क अनाज मुहैया कराया और उनके लिए श्रमिक स्पेशल ट्रेनें चलवाकर प्रवासियों को उनके गाँव वापस लाकर गाँव में ही काम देने का “गरीब कल्याण रोजगार” अभियान छह राज्यों में आदरणीय प्रधान मंत्री जी के नेतृत्व में चलाया गया,जिसमें हमारा उत्तर प्रदेश भी शामिल है । इसमें सरकार ने रेहड़ी-पटरी वालों और ठेला लगाने वाले,जूता सिलने वाले,कपड़ा प्रेस करने वाले, खेतिहर मजदूर आदि भाई-बहनों की चिंता करके “विशेष स्वनिधि योजना”शुरू की ।

       “वंदे भारत मिशन”जो दुनिया का सबसे बड़ा अभियान है, इसके माध्यम से भारत ने दुनिया के सभी हिस्सों से लगभग 50 लाख भारतीयों को स्वदेश वापस लाने के साथ-साथ एक लाख से अधिक विदेशी नागरिकों को भी उनके अपने देश तक पहुँचाने का काम किया । आज यह देश आदरणीय प्रधान मंत्री जी के नेतृत्व में आगे बढ़ रहा है । इसका जीता-जागता उदाहरण कोरोना जैसी वैश्विक महामारी के दौरान देखने को मिला । जब पूरी दुनिया का हर देश, हर व्यक्ति इससे प्रभावित था तो हमारा भारत एक नए सामर्थ्य के साथ दुनिया के सामने उभरकर आया । आज भारत सिर्फ अपने देशवासियों को ही नहीं, बल्कि अन्य देशवासियों को भी सहयोग करने में सक्षम है । लगातार देश को आदरणीय मोदी जी के नेतृत्व में आगे बढ़ता देख विरोधियों (विपक्ष) की स्थिति ऐसी हो चुकी है कि वह आपा खो चुके हैं । वे खुद सही या गलत का निर्णय लेने में सक्षम नहीं हैं, बाहर कुछ बोलते हैं और घर में कुछ बोलते हैं । आज इस देश के अन्नदाता को आगे कर के जो घिनौना खेल खेला जा रहा है, वह बहुत ही निन्दनीय है । दरअसल गुस्सा तो असल में यह है कि आने वाले समय में हम जनता के बीच में जाएंगे कैसे? हमारी सरकार ने जो भी वादा किया, उसे पूरा किया । चाहे धारा 370 हो, चाहे 35ए हो, ट्रिपल तलाक हो, नागरिकता संशोधन बिल हो,किसान बिल हो या सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद अयोध्या के भव्य राम मंदिर के निर्माण की बात हो, आज किराए के टट्टुओं को लाकर उन्हें किसान बनाकर षडयंत्र रचने का काम कर रहे हैं । मैं विपक्ष से जानना चाहूँगी कि क्या कोई ऐसा किसान है, जो अपना खेत छोड़कर 75 दिन कहीं बाहर रह सकता है? असल में इसका जवाब होगा नहीं,क्योंकि अन्नदाता अपने खेत को छोड़कर 4 दिन के लिए भी बाहर नहीं रह सकता । उसको अपनी फसल की चिंता, पानी की चिंता, खाद की चिंता सताने लगती है । अन्नदाता को बदनाम करने के लिए विरोधियों ने कोई कसर नहीं छोड़ी । 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस के पावन पर्व पर जो हुआ, वह बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण है । जो हमारा संविधान हमें अभिव्यक्ति की आजादी का अधिकार देता है, वही संविधान हमें यह भी सिखाता है कि कानून और नियम का भी उतनी ही गंभीरता से पालन करना चाहिए,लेकिन वह नहीं होता है । किसानके नाम पर विपक्ष आपातकालीन स्थिति पैदा करना चाहता है, लेकिनयह तो धैर्य है आदरणीय प्रधानमंत्री जी का और गृह मंत्री जी का, जिन्होंने धैर्य रखते हुए शांति का संदेश देनेका काम किया ।

       आदरणीय मोदी जी के मार्गदर्शन में आज हमारा देश “आत्मनिर्भर भारत अभियान” के तहत आत्मनिर्भर भी हो रहा है । “एक जिला, एक उत्पाद” एवं “हुनर हाट” के माध्यम से लोगों की प्रतिभा को निखारने व उन्हें प्रोत्साहित करने का भी काम कर रही है । जिससे “वोकल फॉर लोकल” को बढ़ावा दिया जा सके और हमारा देश बाहर की नहीं, अपनी वस्तुओं का इस्तेमाल करके आगे बढ़ सके ।

       आदरणीय मोदी जी की सोच ही है जो आज हर किसी को आवासमिला । “स्वच्छ भारत” अभियान के तहत इज्जत घर देकरबहन-बेटियों की इज्जत की रक्षा करने का काम हुआ तो वहींदूसरी तरफ उज्ज्वला के माध्यम से मां-बहनों के स्वास्थ्य के प्रति चिंतित होकरउन्हें गैस कनेक्शन दिया तो दूसरी तरफ आयुष्मान भारत कार्ड के माध्यम से गरीबों के इलाजकी भी व्यवस्था की जिससे हर गरीब स्वस्थ होकर इस  देश के विकास में कदम से कदम मिलाकर आगे बढ़ सके ।हर किसी की सुविधा को ध्यान में रखते हुए “बाबा साहब की  प्रेरणा” से “जल जीवन मिशन” की महत्वाकांक्षी योजना पर काम कर रही है, इसके अंतर्गत हर घर जल पहुंचाने के साथ ही जल संरक्षण पर भी काम हो रहा है ।

       ऐसे यशस्वी प्रधानमंत्री जी की छवि को कुछ लोग धूमिल करने का भी प्रयास कर रहे हैं । ऐसे लोगों को अपनेदामन की धूल नहीं दिखाई दे रही है । यही कारण है कि एक माननीय सांसद ने चर्चा के दौरान माननीय प्रधान मंत्री जी के साथ एक दोषीकी फोटो की चर्चा की । वह शायद यह भूल गए कि मोदीजी अभी तक के सबसे लोकप्रिय प्रधान मंत्री हैं । हर कोई उनके साथ फोटो लेना चाहता है, उनसे मिलना और बात करना चाहता है । किसी के चेहरे पर नहीं लिखा होता कि वह चोर है या साहूकार । उन्होंने मध्य प्रदेश का हवाला देतेहुए चंदे की चर्चा की  ।उन्होंने सही से जानकारी नहीं की, नहीं तो ये बात नहीं कहते । हमारी पार्टी किसी से जबरदस्ती चंदा नहीं ले रही है । जो स्वेच्छा से दे रहा है, सिर्फ उससे ही ले रहे हैं, वह भी 10 रुपये से शुरुआत है । माननीय सांसद जी जिस पार्टी से आते हैं, उनकी मुखिया की तो एक लाख में मुंह दिखाई और चंदेकी शुरुआत 5 लाख से होती है । माननीय सांसद जी ने हाथरस में बालिका के साथ हुए अपराध की भी चर्चा की । निश्चित तौर पर बच्चियों और महिलाओं के साथ हो रहे जघन्य अपराध बहुत ही निंदनीय हैं । माननीय सांसद महोदय को मैं याद दिलाना चाहूंगी कि आप जिसके साथ गठबंधन करके इस संसदमें आए हैं उसी पार्टी के मुखिया ने 2014 में रेप जैसे मामले में यह बयानदिया था कि लड़केहैं, लड़कों से गलतियां हो जातीहैं । महोदय, ये ऐसे लोगों को एक तरफ बढ़ावा देते हैं दूसरी तरफ अपनी गलती सरकार के सिर पर थोपने का काम करते हैं । आज देश जागरुक हो चुकाहै । आपके बहकाने में अब नहींआने वाला । मैं दो लाइनों के साथ अपनी वाणी को विराम दूंगी ।

सौ-सौ धन्यवाद देती हूं, मैं आदरणीय मोदी जी को कांग्रेस ने तो इस देश को लूटा, सही आजादी तो दी मोदी जी ने ।

गरीबों का हक खाया कांग्रेस ने, उनका हक-अधिकार तो दिया मोदी जी ने ।

       सब के दु:खहर्ता, कल्याणकर्ता, विकासकर्ता ऐसे आदरणीय मोदी जी को मैं सौ-सौ धन्यवाद देती हूं । 

 

*SHRI KULDEEP RAI SHARMA (ANDAMAN AND NICOBAR ISLANDS): The Address by the hon. President of India to the country on the beginning of Budget Session has been mandated under Article 87 of the Constitution. The President Address is a medium by which the incumbent Government spells out its achievements and lays down the roadmap for future.  It also provides a brief detail about the schemes, policies and work done by the Government.

       However, the Presidential Address has missed out on several important issues which are plaguing the country today.   There was no mention about the job loss and adverse impact of corona, migrant labour crisis, falling GDP, border escalation with China resulting in death of our soldiers, protest by farmers over the farm laws and increasing inequality.

       I would like to put on record the following demands regarding Andaman and Nicobar Islands:

Increasing the budget of Andaman and Nicobar Islands from Rs. 5,300 crore to Rs. 10,000 crore.
Promotion of fisheries, tourism and IT in Andaman and Nicobar Islands by providing incentives and investment for developing processing infrastructure. 
Need to tackle unemployment in Andaman and Nicobar Islands and to provide unemployment allowance.
Increasing the salary and honorarium of Anganwadi and ASHA workers in the country, particularly, in Andaman and Nicobar Islands.
Providing subsidy on air travel on the lines of North East to residents of Andaman and Nicobar Islands and also to the tourists visiting the Islands.
Clearing the backlog of thousands of Government job vacancies, particularly, in Andaman and Nicobar Islands and Islanders must only be given jobs.
Early implementation of Flat Bay water supply project and Rutland project in Andaman and Nicobar Islands to resolve water crisis.
Regularizing work conditions of daily rated mazdoors working under the Andaman and Nicobar Administration.
Stopping the process of online recruitment for Government jobs in Andaman and Nicobar Islands.
Establishing a separate commission for women for Andaman and Nicobar Islands.
I oppose this Motion of Thanks to the Presidential Address because it does not take into consideration the importance of Andaman and Nicobar Islands and conveniently ignores their aspirations.
                                                                   
*ADV. ADOOR PRAKASH (ATTINGAL): The President’s Address to the Joint Session of the Parliament on 29th January, 2021 has completely ignored the real issues the nation is facing today.
The President’s Address emphasized that unity and dedication enabled the country to overcome multiple adversities. It exhorted, “In one single consciousness, one thought, one devotion, one inspiration, let us unite; let us unite”. Hon. President in the last year’s Address to the Parliament said that Government is of the firm view that mutual discussions and debates will strengthen democracy. But unfortunately, things are happening just against that view. Today we are witnessing that the Government is intolerant even to the peaceful protests. The freedom of expression is suppressed and sedition cases are being charged against media persons and political leaders.
The nation is witnessing the protest of farmers against farm laws. The President’s Address keeps silence on the biggest protest the nation witnessed in the recent years. There was not a single word to address the fear and concerns of protesting people. Everyone knows that agriculture is the backbone of our economy. Around 70% of rural households in the country depend on agriculture and allied activities. They are in utter distress after demonetization and majority of them are in debt today. The Government aims to double farmer’s income by the year 2022 but the Government is clueless on this promise almost at the end of the targeted time. Now the Government finds only solution to raise the farmer’s income in implementation of the farm laws.
The impact of COVID crisis was disastrous to the fishing sector in the country. The traditional fishermen are struggling for survival due to job loss and no income. No positive step has been taken by the Government to address their issues during the crisis period.
During the lockdown period, nation witnessed the painful return of migrants to their home towns. The President’s Address keeps silence on this as Government miserably failed to handle the situation at that time.
COVID crisis resulted in job loss for lakhs of Indian workers abroad and forced them to return to the country. This is going to be the biggest challenge but the Address keeps deliberate silence on this issue.
The Government is always boasting that strong foundation has been laid in the last six years, to make this decade India’s decade and this century India’s century. If so, what is the purpose of disinvesting the profit-making Public Sector Undertakings? The reality is that country today is facing recession and huge employment loss. Every sector of the economy is in crisis. Unemployment rate is the highest in the last 45 years.
In short, the President’s Address ignored the real issues and is nothing but a list of Government schemes. Neither the farmer, nor worker, youth, women or deprived section is happy about the Government.
 
*श्रीमती गीताबेन वी. राठवा (छोटा उदयपुर):महामहिम राष्ट्रपति जी ने अपने अभिभाषण में वर्ष 2020-21 में भारत को पूर्ण रूप से आत्मनिर्भर बनाने पर जोर देते हए कहा कि भारत आपदा में अवसर को तलाशते हुए आत्मनिर्भरता की ओर पूर्ण रूप से अग्रसर हो चला है  । आज भारतीयों की एकजुटता, साधना,देश को अनेक आपदाओं से बाहर निकालकर लाई है,देशवाशियों ने हर आपदा का डटकर सामना किया ।
महामहिम राष्ट्रपति जी ने अपने अभिभाषण में जनजातीय युवाओं का सामाजिक और आर्थिक विकास की बात रखे इसके लिए मैं महामहिम राष्ट्रपति जी का धन्यवाद करती हूँ  । उन्होने अपने अभिभाषण में कहा कि हमारी सरकार का मानना है कि सबसे ज्यादा वंचित वर्गों की यात्रा, गुणवत्ता युक्त शिक्षा से आरंभ होती है । सरकार की विभिन्न छात्रवृत्ति योजनाओं का लाभ ऐसे ही3 करोड़ 20 लाख से ज्यादा विद्यार्थियों को मिल रहा है । इनमें अनुसूचित जाति,पिछड़ा वर्ग,वनवासी एवं जनजातीय वर्ग और अल्पसंख्यक समुदाय के छात्र-छात्राएं शामिल हैं । सरकार का प्रयास है कि ज्यादा से ज्यादा पात्र और ज़रूरतमंद विद्यार्थियों को छात्रवृत्तियों का लाभ मिले । इसके साथ ही,अनुसूचित जाति के विदयार्थियों को दी जाने वाली पोस्ट मैट्रिक छात्रवृत्ति में केंद्र सरकार के हिस्से को भी बढ़ाया जा रहा है । इसी प्रकार जनजातीय युवाओं की शिक्षा के लिए हर आदिवासी बहुल ब्लॉक तक एकलव्य आवासीय मॉडल स्कूल के विस्तार का काम किया जा रहा है । अब तक इस प्रकार के साढ़े पांच सौ से ज्यादा स्कूल स्वीकृत किए जा चुके हैं ।
प्रधानमंत्री ई- विद्या के अंतर्गत स्कूली शिक्षा के लिए दीक्षा ऑनलाइन पोर्टल को वन नेशन वन डिजिटल प्लेटफोर्म के रूप में विकसित किया है  । विकास की दौड़ में पीछे रह गए देश के 112 आकांक्षी जिलों में हमारी सरकार प्राथमिकता के आधार पर विकास योजनाओं को लागू कर रही है | इसका बहुत बड़ा लाभ आदिवासी भाई बहनों को हो रहा है  ।
महामहिम ने कहा कि आज देश की स्वास्थ्य सेवाएँ गरीबों को आसानी से उपलब्ध हो रही है तथा आयुष्मान भारत -प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के तहत देश में 1.5 करोड़ गरीबों को 5 लाख तक का मुफ्त इलाज मिला है  । आज देश के 24 हज़ार से ज्यादा अस्पतालों में आयुष्मान योजना का लाभ लिया जा सकता है  । निश्चित तौर पर इससे देश में स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार बहुत तेजी से हो रहा होगा, सुरक्षा योजना के तहत सरकार ने 22 नए एम्स को मंजूरी दी है  ।
       महामहिम ने अपने अभिभाषण में कृषि के सन्दर्भ में बहुत कुछ कहा है उन्होंने कहा कि आज कृषि के लिए उपलब्ध सिंचाई के साधनों में व्यापक सुधार हो रहा है । कृषि को और लाभकारी बनाने के लिए मेरी सरकार आधुनिक कृषि इंफ्रास्ट्रक्चर पर भी विशेष ध्यान दे रही है । इसके लिए एक लाख करोड़ रुपए के एग्रीकल्चर इंफ्रास्ट्रक्चर फंड की शुरुआत की गई है । देश भर में शुरू की गई किसान रेल, भारत के किसानों को नया बाजार उपलब्ध कराने में नया अध्याय लिख रही हैं । यह किसान रेल एक तरह से चलता फिरता कोल्ड स्टोरेज है । अब तक 100 से ज्यादा किसान रेले चलाई जा चुकी हैं जिनके माध्यम से 38 हजार टन से ज्यादा अनाज और फल-सब्जियां, एक क्षेत्र से दूसरे क्षेत्र तक किसानों दवारा भेजी गई हैं ।
इसके अतिरिक्त पशुपालन की बात करें तो सरकार ने इसको प्रोत्साहित करने के लिए 15 हजार करोड़ के पशुपालन अवसंरचना विकास कोष की स्थापना की है, इस क्षेत्र में भी कृषि क्षेत्र की तरह ही किसान क्रेडिट कार्ड की सविधा दी गयी है इसके अतिरिक्त मछुआरों की आय बढ़ाने के लिए भी अगले पांच सालों में लाभदा 20 हजार करोड़ रूपये के निवेश की योजना है । किसानों की आमदनी बढ़ाने के लिए सरकार अन्नदाता को उदात बनाने का भी अभियान चला रही है । प्रधानमंत्री कसुन योजना के तहत किसान को 20 लाख सोलर पंप दिए जा रहे हैं । सरकार दवारा गन्ने के सीरे, मक्का, धन इत्यादि से स्नोल के उत्पादन को भी बढ़ावा दिया जा रहा है । पिछले 6 वर्षों में एथेनोल का उत्पादन 38 करोड़ लीटर से बढकर 190 करोड़ लीटर हुआ है ।
महामहिम ने अपने भाषण में गुजरात राज्य का भी जिक्र किय है. उन्होंने कहा गुजरात के हाजिर और घोघा के बीच शुरू की गई रो-पेक्स सेव हो या फिर केवड़िया और साबरमती रिवर फ्रंट के बीच सी प्लेन सेवा ये भारत में वाटर ट्रांसपोर्ट को नया आयाम दे रहीं हैं । दुनिया की सबसे ऊंची सरदार पटेल की प्रतिमा का गौरव अपने साथ रखने वाले केवड़िया से अब देश के अनेक शहर ट्रेन के माध्यम से जुड़ने लगे हैं ।
अतः मैं राष्ट्रपति जी का धन्यवाद करते हुए कहना चाहता हूँ की उन्होंने देश में चल रही योजनाओं तथा विकास कार्यों की व्याख्या करके देश को साफ सन्देश दिया है भारत जब विश्व पटल पर अपनी छाप छोड़ने को पूर्ण रूप से तैयार है और भारत को आत्मनिर्भर भारत बनने से अब कोई नहीं रोक सकता । धन्यवाद ।
         
*श्रीनिहालचन्द चौहान (गंगानगर):संसद के बजट सत्र की शुरुआत में माननीय राष्ट्रपति महोदय द्वारा अभिभाषण एक पुरानी और महतवपूर्ण संसदीय परम्परा रही है, जिसके माध्यम से केंद्र सरकार द्वारा किये जा रहे विकास कार्यों का लेखा जोखा और केंद्र सरकार का विजन देश के समक्ष रखा जाता है ।
पिछले6 वर्षों के कार्यकाल में हमारी केंद्र सरकार ने देश के प्रत्येक वर्ग के लिए केवल जनकल्याणकारी योजनाओं को बनाया ही नहीं है, बल्कि उन योजनाओं को प्रभावी ढंग से जरुरतमंद तक पहुँचाया भी है । और वर्तमान में भी हम इसी दिशा में आगे बढ़ रहे है ।
पहले की सरकारों के कार्यकाल में केंद्र सरकार से स्वीकृत सहायता का केवल छोटा सा हिस्सा ही जरूरतमंद तक पहुँच पाता था, लेकिन हमारी सरकार ने एक-एक पैसे का हिसाब रखा है और ये सुनिश्चित किया है कि जरूरतमंद को योजनाओं का ज्यादा से ज्यादा लाभ मिले ।
पिछले1 वर्ष से भारत ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया कोविड-19 महामारी से जूझ रही है,केंद्र सरकार द्वारा उचित समय पर उठाये गए आवश्यक व प्रभावी क़दमों के फलस्वरूप ही,हम आज बहुत से विकसित देशों से बेहतर स्थिति में है । केंद्र सरकार द्वारा इतने विशाल स्तर पर किये गए प्रबंधन को WHO सहित बहुत से विकसित देशों ने सराहा है । हमारे डॉक्टर,स्वास्थ्य कर्मियों, पुलिस व प्रशासन ने दुनिया को दिखा दिया है कि भारत किसी भी खतरे का डट कर सामना करने के लिए पूरी तरह से तैयार है ।
देश में महामारी से लड़ने के साथ-साथ हमारी केंद्र सरकार ने अन्य बहत से देशों की मदद भी की जो कि इस सरकार की कार्यकुशलता को जाहिर करता है । आज इस महामारी ने भारत के लोगों को एकज होकर किसी भी परिस्थिति से लड़ने और उस पर विजय पाने का साहस दिया है ।
माननीय प्रधानमंत्री जी ने देश के जनमानस को आत्मनिर्भरता का मन्त्र दिया है, जोकि भारत को एक बार फिर से विश्व गुरु बनने में बेहद अहम भूमिका निभाएगा  । माननीय प्रधानमंत्री जी के आह्वान पर आज देश एकजुट हो रहा है और तेजी से आत्मनिर्भरता की ओर अग्रसर हो रहा है । हमारे कुशल वैज्ञानिकों के बल पर आज हमने 2-2 कोरोना वैक्सीन बनाने में सफलता पाई है,साथ ही विश्व के सबसे बड़े स्तर पर लगभग 30 करोड़ लोगों को टीका लगाने का अभियान भी शुरू कर दिया है ।
एक ओर जहाँ दुनिया ने पूरे विश्व की अर्थव्यवस्था को चौपट कर दिया है, वहां भारतीय अर्थव्यवस्था तेजी से आगे की ओर बढ़ रही है, अनुमान के मुताबिक वित्तीय वर्ष 2021-22में हमारी GDPचीन से भी आगे लगभग 11 फीसदी रह सकती है ।
हमारी केंद्र सरकार की विभिन्न कल्याणकारी नीतियों और साहसिक क़दमों के बल पर आज एक नए भारत का निर्माण हो रहा है और हम सभी को उसका साक्षी बनने का गौरव प्राप्त हो रहा है । आज का भारत दुनिया में नई पहचान बना रहा है, वो खाद्यानों, सुरक्षा उपकरणों, स्वास्थ्य,शिक्षा, IT, स्पेस, इंफ्रास्ट्रक्चर आदि क्षेत्रों में आत्मनिर्भर बन रहा है ।
• कोरोना काल में विश्व का सबसे बड़ा 20लाख करोड़ रूपए के आर्थिक पैकेज की घोषणा ।
• प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना के अंतर्गत 8 महीनों तक देश के 80 करोड़ लोगों को 5 किलो प्रति माह अतिरिक्त अनाज निशुल्क दिया गया ।
• आत्मिनिर्भर भारत के तहत 2200 से अधिक प्रयोगशालाओं का निर्माण, हजारों वेंटिलेटर्स, PPE किट, टेस्ट किट और 2-2 वैक्सीन का निर्माण, वैज्ञानिक क्षमता और तकनिकी दक्षता का प्रमाण ।
• आयुष्मान भारत- प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के तहत देश में लगभग 1.5करोड़ गरीबों को लाख रूपए तक का मुफ्त ईलाज ।
• प्रधानमंत्री जन औषधि योजना- 7 हजार केन्द्रों पर गरीबों को सस्ती दवाइयों उपलब्ध हो रही है । कम कीमतों से मरीजों को सालाना लगभग 3600करोड़ रूपए की बचत हो रही है ।
• 2014 में 387मेडिकल कॉलेज के मुकाबले आज देश में 562 मेडिकल कॉलेज, 22 नए एम्स मंजूरी  । मेडिकल कॉलेजों में 50 हजार से ज्यादा सीटों की वृद्धि ।
• लागत से डेढ़ गुना MSPदेने का फैसला, खरीद केन्द्रों के संख्या में बढ़ोतरी, कोरोना काल में MSP पर रिकॉर्ड खरीद ।
• खाद्यान्न पैदावार में निरंतर बढ़ोतरी 2019-20 में296 मिलियन टन रिकॉर्ड पैदावार, फलों और सब्जियों में भी 320 मिलियन टन रिकॉर्ड पैदावार ।
• फसल बीमा योजना – बीते पांच वर्षों में 17,000 करोड़ प्रीमियम के एवज में लगभग 90,000करोड़ की राशि का मुआवजा ।
• 100 से ज्यादा किसान रेल चलाकर 38,000 टन से ज्यादा अनाज,फल व सब्जियों को एक स्थान से दूसरे स्थान समय पर भेजकर किसानों को अलग बाजारों से जोड़ा ।
• प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत 2 करोड़ से ज्यादा कागज के लिए बनाये व बर्ष 2012 में हर गरीब को पक्की छत के लिए प्रतिबद्ध ।
• "हर घर जल" को परिवारों को पानी की पाइपलाइन सप्लाई से जोड़ा जा चुका है ।
• PMGSY योजना के तहत लाख 6 लाख 4 हजार किमी सड़क निर्माण । तीसरे फेस में1 लाख 25 हजार करोड़ किसी सड़कों को अपग्रेड किया जाएगा ।
• सामाजिक व आर्थिक रूप से पिछड़े 3 करोड़ 20 लाख से ज्यादा विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति योजनाओं का लाभ ।
• देश में लगभग 11 करोड़70 लाख सॉयल हैल्थ कार्ड वितरित किए जा चुके थे । देश में 3887 कुल टेस्टिंग लैब (राजस्थान में कुल 20 – गंगानगर में 11 व हनुमानगढ़ में 07) 8752 मिनी टेस्टिंग लैब • सालाना3 करोड़ 70 लाख सैंपल टैस्ट किए जा रहे हैं, पहले1 करोड़ 78 लाख होते थे ।
• श्रीगंगानगर व हनुमानगढ़ जिलों में लगभग 11 लाख किसान लाभान्वित ।
पिछले6 सालों में हमारी सरकार ने एक भ्रष्टाचार मुक्त सरकार चलाई है, जोकि देश के समग्र विकास के लिए प्रतिबद्ध है । हमारी सरकार सबका विश्वास हासिल करने के साथ सबका साथ सबका विकास की राह पर आगे बढ़ रही है, जिसकी मंजिल है "एक भारत श्रेष्ठ भारत । मैं एक बार बार पुन: माननीय राष्ट्रपति जी को उनके अभिभाषण हेतु धन्यवाद देता हूँ ।
       
*श्रीमतीदर्शनाविक्रमजरदोश (सूरत): आदरणीय राष्ट्रपति महोदय द्वारा अपनी सरकार के पिछले 1 साल का लेखा-जोखा और आगामी वर्ष में देश के विकास का रोड मैप संसद के माध्यम से लोगो के सामने रखा गया है  । उस के समर्थन में बोलने के लिये खडी हुई हूँ ।
पिछला 1 साल भारत के इतिहास में महामारी से जंग को लेकर पहचाना जायेगा परंतु उसके साथ साथ यह साल मान्यवर नरेन्द्र भाई मोदी जी के नेतृत्व में  कुशलता से जिस प्रकार महामारी से संघर्ष किया गया एवं राजनैतिक इच्छा शक्ति के कारण किसी भी प्रकार की समस्या से चाहे वो कोरोना जैसी बडी हो या कश्मीर जैसी पुरानी हो उससे संघर्ष किया जा सकता है और उसे मात दी जा सकती है उसके लिये याद किया जायेगा ।
पिछले1 साल में पुरी दुनिया एक तरह से कोराना महामारी से आतंकित थी उस समय मान्यवर नरेन्द्र भाई मोदी जी के नेतृत्व में जिस प्रकार से अनेक मोर्चों पर एक साथ काम किया गया उससे पूरे विश्व में भारत का नेतृत्व एवं भारत की जनता के प्रति भारत देश के प्रति विश्वास एवं सम्मान में बढोतरी हुई है । ऐसी महामारी के वक्त जब विरोघ पक्ष सिर्फ टीका-टिप्पणी कर रहा था और लोगो के बीच कहीं दिखाई नही दे रहा था तब पूरी केन्द्र सरकार अविरत रूप से लोगों की सुरक्षा एवं स्वास्थ्‍य के लिए कार्यरत थी । बहुत बडी मात्रा में प्रवासी श्रमिकों का एक राज्य से दूसरे राज्य में जो आवागमन हुआ उस स्थिति को संभालने हेतु उस प्रवासी श्रमिक को उसके घर एवं गांव में ही रोजगार मिले एवं 8 महीनों तक 80 करोड़ लोगों को प्रति माह 5 किलो अतिरिक्त अनाज मिले यह सुनिश्वित किया गया  । प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना एवं गरीब कल्याण रोजगार योजना के कारण देश में बहुत बड़ी मात्रा में अराजकता फैलने से रोकने में सरकार कामयाब हुई  ।
इसके लिये सरकार के सभी अंग अभिनंदन के पात्र है  ।
हमें विरासत में यूपीए सरकार द्वारा जिस प्रकार से स्वास्थ्‍य सेवा एवं उससे संबंधित ढांचा मिला था उसमें देश में मास्क एवं वेन्टीलेटर का उत्पादन नहीं होता था पीपीई किट का उत्पादन नही होता था । ये जानते हुये भी विरोधी पक्ष केन्द्र सरकार के कार्यों की सराहने की बजाय उन पर टीका कर रही थी, उसे देश ने बहुत नजदीक से देखा है  । उस टीका की कोई चिंता न करते हुये वर्तमान सरकार ने सिर्फ अपने कार्य से उसका उत्तर दिया है और आगे भी देती रहेगी । दुनिया में स्वास्थ्‍य क्षेत्र में अग्रसर कहे जाने वाले देश जब लड़ाई हार रहे थे तब बहुत ही कम समय में 2200 से अधिक प्रयोगशाला का नेटवर्क बनाना, हजारों वेन्टीलेटर एवं पीपीई किट का निर्माण करते हुये, आत्मनिर्भरता हासिल करने के साथ वसुधैव कुटुम्बकम के मंत्र को साकार करते हुये आसपास के अन्य देशों को भी पहुंचाना, यह मानव जाति के लिये किये गये बडे़ काम के नाते इतिहास में दर्ज होने वाला है ।
यूपीए ने जब सत्ता छोड़ी उस दिन 387 मेडिकल कालेज देश में थे, वो संख्या आज 562 जितनी है और अंडर ग्रेजुएट एवं पोस्ट ग्रेजुएट चिकित्सा शिक्षा में 50 हजार सीटों की वृद्धि मोदी सरकार ने की है एवं 22 नये एम्स की रचना करके वर्तमान सरकार ने भविष्य के भारत के स्वास्थ्‍य को मजबूत एवं सुरक्षित करने की दिशा में बडे कदम उठाये हैं ।

         आत्मनिर्भर भारत की दिशा में दिया गया मंत्र सच्चे अर्थ में भारत को सभी क्षेत्र में सभी दिशा में आत्मनिर्भर बनाने की कोशिश को चरितार्थ करने वाला बन गया है । आज विश्व चाहे सैटेलाइट का क्षेत्र हो या स्वास्थ्‍य का क्षेत्र या सुरक्षा का क्षेत्र भारत को आशा एवं सम्मान की दृष्टि से देख रहा है  ।

        पशुपालन एवं मत्स्य पालन जैसे छोटे क्षेत्र को जिसे पूर्व सरकारों द्वारा नजर अंदाज किया गया था वैसे क्षेत्र में अगले 5 सालों में लगभग 20 हजार करोड़ रूपये का निवेश करने की योजना सरकार ने बनाई है  । अन्नदाता को ऊर्जादाता बनाने की दिशा में सरकार कार्यरत है । प्रधानमंत्री कुसुम योजना के तहत किसानों को 20 लाख सोलर पंप दिए जा रहे हैं| जिससे भविष्य में भारत की ऊर्जा शक्ति में बहुत बड़ी क्रांति आने वाली है  ।

      आत्मनिर्भर भारत में समाज के प्रत्येक तबके का अपना अलग महत्व है । देश की आधी आबादी इस से अछूती न रह जाये,इसलिए आत्मनिर्भर भारत में महिला उद्यमियों का विशेष ध्यान रखा जा रहा है । महिलाओं को स्वरोजगार हेतु नये अवसर देने के लिये मुद्रा योजना के तहत दिये गये ऋण से 70 प्रतिशत ऋण महिलाओं को दिया गया है  । तो दिनदयाल अंत्योदय योजना राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत 7 करोड़ से अधिक महिला उद्यमियों को 66 लाख स्वयं सहायता समूहों से जोड़ कर बैंकों के माध्यम से पिछले ६वर्षों में ३ लाख 40 हजार करोड़ रूपये का ऋण दिया गया है  । शायद हमारे विरोधी इस बात को पचा नही पा रहे हैं । क्योंकि उनकी सरकारों में इससे भी ज्यादा रकमों के भ्रष्टाचार होते थे जो पैसा मोदी सरकार ने सीधा लोगो के खाते में पहुंचा कर उन्हें विकास के लिये खड़ा करने का काम किया है  । मोदी सरकार ने महिलाओं के लिये विकास के नये द्वार खोल दिये हैं । वायु सेना के फाइटर स्ट्रीम या स्थानिक स्तर पर महिलाकर्मी की नियुक्ति, अंडर ग्राउन्ड माइन्स में तथा ओपन कास्ट माइन्स में रात्र‍ि में भी कार्य करने की अनुमति देकर उन्हें उड़ने के लिये नया आकाश प्रदान किया है तो दूसरी और 21वीं शताब्दी में देश के सामने अगले कुछ दशकों में आने वाले चेलेन्जेज को ध्यान में रखकर नई शिक्षा नीति की घोषणा करके निव से भारत को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है । नई शिक्षा नीति के कारण देश की आवश्यकता के अनुसार व्यक्ति निर्माण से समाज परिवर्तन एवं उससे राष्ट्र निर्माण करने की दिशा में मान्यवर प्रधानमंत्री जी के नेतृत्व में वर्तमान सरकार ने बहुत बड़ा कदम उठाया है । अगर भारत के इतिहास को देखें तो कई राज्य सरकारों को छात्र आंदोलनो के कारण अपनी सत्ता गंवानी पडी है । जिस के कारण आपात काल लगाकर भी लोकशाही की हत्या करते हुये इंदिरा जी की सरकार को कोई बचा नही पाया था । उसके मूल में अगर देखें तो शिक्षा एवं भ्रष्टाचार मुख्य मुद्दे थे । परंतु वर्तमान शिक्षा नीति को जिस तरह से शिक्षा क्षेत्र द्वारा स्वीकार किया गया है  । अगले दिनों में शिक्षा क्षेत्र में आमूल परिवर्तन लाते हुये मान्यवर नरेन्द्र भाई मोदी के नेतृत्व में भारत अपने रास्ते खुद बनाते हुये लोगों की आशा अपेक्षा पूर्ण करने का मंत्र सबका साथ सबका विकास, सबका विश्वास सूत्र के माध्यम से साकार करेंगे, साकार कर सकेंगे ऐसा मुझे विश्वास है । मैं आदरणीय राष्ट्रपति महोदय को संसद को मार्गदर्शन देने के लिये आभार प्रकट करती हूं एवं राष्ट्रपति के अभिभाषण के संदर्भ में अपना समर्थन प्रकट करती हूँ  ।

       

*श्री सुमेधानन्द सरस्वती (सीकर) : माननीय राष्ट्रपति महोदय द्वारा दिए गए अभिभाषण के धन्यवाद प्रस्ताव पर मुझे अपने विचार रखने का मौका दिया, इसके लिए मैं आपका आभार व्यक्त करता हूं ।

जिस तरह से कोरोना वैश्विक महामारी के दौर में माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में सरकार ने कोरोना महामारी के खिलाफ लड़ाई लड़ी और पूरे देश में हमारे प्रधानमंत्री जी के हर आह्वान पर एकजुटता दिखाई तथा इस महामारी का डटकर मुकाबला किया । इस महामारी के समय देश में कोई व्यक्ति भूखा न सोए । इसके लिए सरकार ने एक रिकॉर्ड आर्थिक पैकेज की घोषणा की । प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना के माध्यम से 8 महीने तक 80 करोड़ लोगों को 5 किलो प्रति माह अतिरिक्त अनाज निःशुल्क उपलब्ध कराया गया । सरकार ने प्रवासी श्रमिकों कामगारों को भी निःशुल्क अनाज उपलब्ध करवाया तथा श्रमिक स्पेशल ट्रेनें चलवाई । इसके साथ ही 31 हजार करोड़ रुपये गरीब महिलाओं के जनधन खाते में ट्रांसफर किए । उज्ज्वला योजना में गरीब महिलाओं को 14 करोड़ से अधिक मुक्त गैस सिलेंडर भी दिए । इसी के साथ माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी ने आत्मनिर्भर एवं लोकल फॉर वोकल अभियान चलाया और बहुत ही कम समय में 2,200 से अधिक प्रयोगशालाओं का नेटवर्क बनवाकर हजारों वेंटिलेटर, पी पी ई किट से लेकर टेस्ट किट बनाने में आत्मनिर्भरता हासिल की । यह सरकार के मजबूत इरादे का ही परिणाम है कि हमारे वैज्ञानिक और तकनीकी लोगों ने अपनी प्रतिभा का परिचय दिया है ।

इस कोरोना महामारी में हमारे देश ने अनेक देशों को कोरोना वैक्सीन की लाखों खुराक उपलब्ध कराई है और भारत के हजारों वर्ष पुरानी संस्कृति‘सर्वे संतु निरामया’ की भावना को आगे बढ़ाया है ।

 सरकार ने स्वास्थ्य के क्षेत्र में पिछले 6 वर्षों में बेहतरीन कार्य किए हैं, उनका बहुत बड़ा लाभ कोरोना संकटकाल में हमने देखा भी है ।

माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी का एक ही लक्ष्य है, मेरा प्रत्येक भारतवासी जो गरीबी के कारण अपना इलाज नहीं करा सकें, उनके लिए आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के तहत डेढ़ करोड़ गरीबों को 5 लाख रुपये तक का मुफ्त इलाज मिला है । इससे गरीब परिवारों के 30 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा का लाभ मिला है ।

यशस्वी प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी ने मेडिकल शिक्षा का भी विस्तार किया है । साल 2014 में देश में सिर्फ 387 मेडिकल कॉलेज थे, लेकिन आज देश में 562 मेडिकल कॉलेज हैं और चिकित्सा शिक्षा में 50,000 से ज्यादा सीटों की वृद्धि हुई है । देश में 22 नए एम्स को भी मंजूरी दी गई है ।

इस सरकार के समय कृषि क्षेत्र में भी विस्तार हुआ है । इस सरकार ने स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों को लागू करते हुए लागत से डेढ़ गुना एमएसपी भी दे रही है । सरकार एमएसपी पर रिकॉर्ड मात्रा में धान खरीद रही है, बल्कि खरीद केंद्रों की संख्या भी बढ़ा रही है । सरकार के इन प्रयासों के कारण ही परिश्रमी किसानों ने अपने परिश्रम से देश में रिकॉर्ड खाद्यान्न का उत्पादन किया है । वर्ष 2008 में जहां देश में 234 मिलियन टन खाद्यान्न की पैदावार हुई थी, वही 2019 में देश की पैदावार बढ़कर 296 मिलियन टन तक पहुंच गई । सब्जियों, फलों का उत्पादन भी 215 मिलियन टन से बढ़कर अब 320 मिलियन टन तक पहुंच गया । मैं इसके लिए देश के सभी किसानों का अभिनंदन करता हूं ।

इस दूरदर्शी सरकार ने कृषि क्षेत्र में हमारे जो छोटे और सीमांत किसान हैं, उनका भी विशेष ध्यान रखा है । उनकी छोटी-छोटी जरूरतों को मध्य नजर रखते हुए पीएम किसान सम्मान निधि के जरिए उनके खातों में लगभग एक लाख तेरह हजार करोड़ से अधिक रुपए ट्रांसफर किए जा चुके हैं । देश के छोटे किसानों को समर्थ किसानों की तरह बेहतर तकनीक, ज्यादा ऋण, पोस्ट हार्वेस्टिंग प्रोसेसिंग एवं मार्केटिंग की सुविधाएं सरकार दे रही है ।

कृषि को और लाभकारी बनाने के लिए यशस्वी प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में यह सरकार आधुनिक कृषि, इंफ्रास्ट्रक्चर पर भी विशेष ध्यान दे रही है । इसके लिए एक लाख करोड़ रुपये के एग्रीकल्चर इंफ्रास्ट्रक्चर फंड की शुरुआत भी की गई है ।

देश में किसानों के माल को एक स्थान से दूसरे स्थान पर पहुंचाने के लिए किसान रेल किसानों को नया बाजार उपलब्ध कराने में नया अध्याय लिख रही है । अब तक 100 से ज्यादा किसान रेल चलाई जा चुकी हैं,जिसमें38 हजार टन से ज्यादा अनाज और सब्जियां किसानों द्वारा एक स्थान से दूसरे स्थान तक भेजी गई है ।

सरकार किसानों की आय बढ़ाने के लिए डेयरी क्षेत्र में बुनियादी ढांचे की स्थापना और निवेश को प्रोत्साहित करने के लिए 15,000 करोड़ रुपये के पशुपालन अवसंरचना, विकास कोष की स्थापना भी की है । इसके लिए सरकार ने पशुपालन और मत्स्यपालन को भी कृषि क्षेत्र की तरह किसान क्रेडिट कार्ड की सुविधा दी है । इसके लिए अगले 5 सालों में लगभग 20,000करोड रुपये का निवेश करने की योजना है ।

यह सरकार गांव के उस दूर बैठे गरीब का भी ध्यान रख रही है, जिसको रहने के लिए पक्की छत तक नहीं थी । उनके लिए सरकार ने लगभग2 करोड घर बनाए हैं । वर्ष 2022तक हर गरीब को पक्की छत मिले इसके लिए प्रधानमंत्री आवास योजना की गति भी तेज कर दी गई है ।

प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी का विज़न है कि प्रत्येक घर को नल के माध्यम से जल मिले । इसके लिए जल जीवन मिशन की महत्वकांक्षी योजना पर सरकार काम कर रही है । इसके लिए सरकार ने अब तक लगभग 3 करोड़ परिवारों को पाइप वाटर सप्लाई से जोड़ा जा चुका है, जिसमें अनुसूचित जाति और जनजाति के भाई बहनों तथा वंचित वर्गों को प्राथमिकता भी दी गई है ।

मोदी जी के नेतृत्व वाली सरकार ने ग्रामीण सड़क नेटवर्क के विस्तार में भी बेहतरीन कार्य किया है । इसमें प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के अंतर्गत ग्रामीण क्षेत्रों में 6लाख 42 हजार किलोमीटर सड़कों का निर्माण कार्य पूरा कर लिया गया है । आगामी तीसरे चरण में ग्रामीण क्षेत्रों में स्कूलों, बाजारों तथा अस्पतालों को जोड़ने वाले 1 लाख 25 हजार किलोमीटर रास्तों को भी अपग्रेड किया जाएगा ।

केन्द्र सरकार ने भारत के लघु एवं कुटीर उद्योगों के विकास के लिए भी 3 लाख करोड़ रुपये की इमरजेंसी क्रेडिट गारंटी योजना, एमएसएमई के लिए 20 हजार करोड़ विशेष योजना है । सरकार ने महिला उद्यमियों के लिए मुद्रा योजना के तहत अब तक 25करोड़ से ज्यादा ऋण दिए जा चुके हैं,जिसमें70 प्रतिशत ऋण महिलाओं को मिले हैं । दीनदयाल अंत्योदय योजना के तहत 7 करोड से अधिक महिला उद्यमी एवं करीब 66लाख स्वयं सहायता समूह से जुड़ी हैं,जिनको पिछले 6 वर्षों में 3,40,000 करोड़ रुपये का ऋण दिया गया है ।

यशस्वी प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व सरकार ने वंचित वर्गों की सामाजिक और आर्थिक उन्नति के लिए3 करोड़20 लाख रुपये से ज्यादा विद्यार्थियों को विभिन्न योजनाओं में छात्रवृत्ति दी है । सबका साथ,सबका विकास, सबका विश्वास मंत्र के साथ ही सरकार ने दिव्यांगजनों, युवाओं, महिलाओं तथा मैन्युफैक्चरिंग के क्षेत्र में भी अतुलनीय कार्य किया है । भारतमाला परियोजना के पहले चरण में 6 नए एक्सप्रेस वे और 18 नए एक्सेस कंट्रोल कॉरिडोर का निर्माण कार्य भी चल रहा है । विगत वर्षों में कई ऐसे कठिन कार्य किए जिनको कर पाना अन्य सरकारों के लिए के लिए बहुत ही कठिन हो रहा था ।

देश के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व वाली सरकार ने सीमाओं को सुरक्षित करने के साथ-साथ रक्षा क्षेत्र में देश को आत्मनिर्भरता कि ओर आगे बढ़ाया है ।

इन्ही शब्दों के साथ मैं अपनी बात को विराम देता हूं एवं एक बार पुनः श्रीमती लॉकेट चटर्जी द्वारा रखे गये इस प्रस्ताव का समर्थन करते हुए माननीय राष्ट्रपति जी के प्रति धन्यवाद प्रकट करता हूं ।

       

*श्री जसवंतसिंह सुमनभाई भाभोर (दाहोद): मैं महामहिम राष्ट्रपति जी का धन्यवाद देता हूँ, जिन्होंने इनता उत्तम भाषण दिया । महामहिम राष्ट्रपति जी ने अपने अभिभाषण में भारत को पूर्ण रूप से आत्मनिर्भर बनाने पर जोर दिया है । भारत ने आपदा में अवसर को तलाश लिया है और आत्मनिर्भरता की और पूर्ण रूप से अग्रसर हो चला है । कोरोना महामारी के कारण शहरों से वापस आए प्रवासियों को उनके ही गाँव में काम देने के लिए हमारी सरकार ने गरीब कल्याण रोजगार अभियान चलाया । इसके साथ ही करीब 31 हजार करोड़ रुपये गरीब महिलाओं के जनधन खातों में सीधे ट्रान्सफर भी किए गए । देशभर में ‘उज्ज्वला योजना’की लाभार्थी गरीब महिलाओं को 14 करोड़ से अधिक मुफ्त गैस सिलेंडर भी मिले हैं । महामहिम ने यह भी कहा की इस महामारी के दौरान भारत ने बहुत ही कम समय में 2200 से अधिक प्रयोगशालाओं का नेटवर्क बनाकर , हजारों वेंटिलेटर का निर्माण करके,पीपीई किट से लेकर टेस्ट किट बनाने तक में आत्मनिर्भरता हासिल करके अपनी वैज्ञानिक क्षमता,अपनी तकनीकी दक्षता और अपने मजबूत स्टार्टअप इकोसिस्टम का भी परिचय दिया है । हमारे लिए यह और भी गर्व की बात है की भारत टीकाकरण अभियान के लिए दोनों वैक्सीन अपने ही देश में बना रहा है । इसके साथ ही अपने अलावा अन्य देशों को भी भारत वैक्सीन उपलब्ध करवा रहा है । महामहिम ने अपने अभिभाषण में कृषि के सन्दर्भ में बहुत कुछ कहा है, उन्होंने कहा कि आज कृषि के लिए उपलब्ध सिंचाई के साधनों में व्यापक सुधार आ रहा है । वर्ष 2013-14 में जहाँ 42 लाख हेक्टेयर जमीन में ही माइक्रो-इरीगेशन की सुविधा थी, वहीं आज 56 लाख हेक्टेयर से ज्यादा अतिरिक्त जमीन को माइक्रो इरीगेशन से जोड़ा जा चुका है  । वर्ष 2008-09 में जहाँ देश में 234 मिलियन टन खाद्यान्न की पैदावार हुई थी,वहीं साल 2019-20में देश में खाद्यान्न की पैदावार 296 मिलियन टन तक पहुँच गई है । छोटे किसानों को किस प्रकार लाभ मिल रहा है यह भी अपने भाषण में राष्ट्रपति जी ने बताया है । प्रधानमंत्री फसल बीमा का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा की 5 वर्षों में किसानों को 17 हजार करोड़ रुपये प्रीमियम के एवज में लगभग 90 हज़ार करोड़ रूपये की राशि मुआवजे के तौर पर मिली है । आज देश की स्वास्थ्य सेवाएँ गरीबों को आसानी से उपलब्ध हो रही है तथा आयुष्मान भारत - प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के तहत देश में 1.5 करोड़ गरीबों को 5 लाख तक का मुफ्त इलाज मिला है । आज देश के 24 हज़ार से ज्यादा अस्पतालों में आयुष्मान योजना का लाभ लिया जा सकता है । देश में स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार भी बहुत तेजी से हो रहा है । यदि देखा जाए तो साल 2014 में देश में सिर्फ 387 मेडिकल कॉलेज थे, लेकिन आज देश में 562 मेडिकल कॉलेज हैं । सुरक्षा योजना के तहत सरकार ने 22 नए एम्स को मंजूरी दी है ।

हम सब यह भली भांति जानते हैं की व्यापक विमर्श के बाद संसद ने सात महीने पूर्व तीन महत्वपूर्ण कृषि सुधार, कृषक उपज व्यापार और वाणिज्य विधेयक, कृषि कीमत आश्वासन और कृषि सेवा करार विधेयक और आवश्यक वस्तु संशोधन विधेयक पारित किए हैं । इन कृषि सुधारों का सबसे बड़ा लाभ 10 करोड़ से अधिक किसानो को मिलना शुरू हुआ है । कृषि को और लाभकारी बनाने के लिए देश भर में किसान रेल शुरू की गयी, यह किसान रेल चलता फिरता कोल्ड स्टोरेज है । अब तक देश में 100 से ज्यादा किसान रेलें चलायी जा चुकी हैं, जिनके माध्यम से 38 हज़ार टन से ज्यादा अनाज और फल सब्जियां एक क्षेत्र से दुसरे क्षेत्र तक किसानों द्वारा भेजी गई हैं । इसके अतिरिक्त गाँव के लोगों का जीवन सुधरे यह हमारी सरकार की प्राथमिकता है । इसका उत्तम उदाहरण 2014 से लेकर अब तक गरीब ग्रामीण परिवारों के लिए बनाये गए 2 करोड़ घर हैं । वर्ष 2022 तक हर गरीब को पक्की छत देने के लिए प्रधानमंत्री आवास योजना की गति को भी तेज किया गया है ।  साथ ही हर घर जल पहुँचाने के लिए भी हमारी सरकार जल जीवन मिशन नामक योजना पर काम कर रही है । इस अभियान के तहत अब तक तीन करोड़ परिवारों को पाइप वाटर सप्लाई से जोड़ा जा चुका है । इस अभियान में अनुसूचित जाति व जनजातियों के लोगों को प्राथमिकता के आधार पर पानी का कनेक्शन दिया जा रहा है । सरकार ने ग्रामीण सड़क नेटवर्क के विस्तार में भी सराहनीय काम किया है । प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत देश के ग्रामीण क्षेत्रों में 6 लाख 42 हज़ार किलोमीटर सड़क का निर्माण पूरा कर लिया गया है । साथ ही हर गाँव तक बिजली पहुंचाने के बाद देश के 6 लाख से अधिक गाँव को ऑप्टिकल फाइबर से जोड़ने के लिए भी अभियान चलाया जा रहा है । हमारे लघु उद्योग,कुटीर उद्योग का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा की देश के कुल निर्यात में इनकी भागीदारी लगभग 50 प्रतिशत है | MSMEs के लिए तीन लाख करोड़ रूपये की इमरजेन्सी क्रेडिट गारंटी योजना शुरू की गई है । इसके अतिरिक्त मुद्रा योजना के तहत अब तक 25 करोड़ से ज्यादा ऋण दिए जा चुके हैं, जिसमे से लगभग 70 प्रतिशत ऋण महिला उद्यमियों को मिले हैं । हमारी सरकार का मानना है कि सबसे ज्यादा वंचित वर्गों की सामाजिक और आर्थिक विकास की यात्रा गुणवत्तायुक्त शिक्षा से आरम्भ होती है, ऐसी छात्रवृति योजना का लाभ ऐसे ही तीन करोड़ 20 लाख से ज्यादा विद्यार्थियों को मिल रहा है । इसमें अनुसूचित जाति, पिछड़ा वर्ग वनवासी एवं जनजातीय वर्ग और अल्पसंख्यक समुदाय के छात्र-छात्राएं शामिल हैं । हमारी सरकार ने प्रधानमंत्री ई-विद्या के अंतर्गत स्कूली शिक्षा के लिए दीक्षा ऑनलाइन पोर्टल को वन नेशन वन डिजिटल प्लेटफोर्म के रूप में विकसित किया है । विकास की दौड़ में पीछे रह गए देश के 112 आकांक्षी जिलों में हमारी सरकार प्राथमिकता के आधार पर विकास योजनाओं को लागु कर रही है  । इसका बहुत बड़ा लाभ आदिवासी भाई बहनों को हो रहा है । जनधन खातों,आधार और मोबाइल की त्रिशक्ति ने लोगों को उनका अधिकार सुनिश्चित किया है । हमारी सरकार द्वारा राष्ट्रीय डिजिटल हेल्थ मिशन के जरिये चिकित्सा सेवाओं को डिजिटल बनाने की शुरुआत भी की गयी है  । इसके माध्यम से आने वाले समय मे देश के नागरिक डिजिटल अपॉइंटमेंट,डिजिटल रिपोर्ट के साथ डिजिटल हेल्थ रिकॉर्ड जैसी सुविधाओं का लाभ उठा सकेंगे ।

 हमारा अपना नेवीगेशन सेटेलाइट सिस्टम नाविक भी आज भारत का गौरव बढ़ा रहा है, इसका लाभ हज़ारों मछुवारे साथियों को मिल रहा है  । इसके अतिरिक्त हमारी सरकार ने श्रमेव जयते की भावना पर चलते हुए श्रमिकों के लिए 29 केन्द्रीय श्रम कानूनों को कम करके 4 लेबर कोड बनाये हैं । नए लेबर कोड हमारी महिला श्रमिको की अधिक और सम्मानजनक भागीदारी भी सुनिश्चित करते हैं । मैन्युफैक्चरिंग से जुड़े दस सेक्टर्स के लिए पहली बार देश में लगभग डेढ़ लाख करोड़ रूपये की प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव स्कीम लागू की गई है । इसके अतिरिक्त पशुपालन की बात करें तो सरकार ने इसको प्रोत्साहित करने के लिए 15 हज़ार करोड़ के पशुपालन अवसंरचना विकास कोष की स्थापना भी की है । इस क्षेत्र में भी कृषि क्षेत्र की तरह ही किसान क्रेडिट कार्ड की सुविधा दी गई है  । इसके अतिरिक्त मछुवारों की आय बढ़ाने के लिए भी अगले पांच सालों में लगभग 20 हज़ार करोड़ रुपये के निवेश कि योजना है । किसानों की आमदनी बढ़ाने के लिए सरकार अन्नदाता को उर्जदाता बनाने का भी अभियान चला रही है । प्रधानमंत्री कुसुम योजना के तहत किसानों को 20 लाख सोलर पंप दिए जा रहें हैं । सरकार द्वारा गन्ने के सीरे,मक्का,  धान इत्यादि से एथेनोल के उत्पादन को भी बढ़ावा दिया जा रहा है । पिछले 6 वर्षों में ऐथेनॉल का उत्पादन 38 करोड़ लीटर से बढ़कर 190 करोड़ लीटर हुआ है ।

       अत: मैं राष्ट्रपति जी का धन्यवाद करते हुए कहना चाहता हूँ कि उन्होंने देश में चल रही योजनाओं तथा विकास कार्यों की व्याख्या करके देश को साफ सन्देश दिया है । भारत विकास पथ पर अग्रसर है ।

                

*DR. SANJAY JAISWAL (PASCHIM CHAMPARAN): Before expressing my views, I would like to start with a quote which says – “जब हौसला भर लिया है ऊंची उड़ान का, तब फिजूल है देखना कद आसमान का” | ("When the courage is full of flying, then I am happy to see the sky").

This is exactly the story of India during the past one year. It is a country where we look out for one another, where we rise and fall as one, where we face our challenges, and celebrate our triumphs — together.

I would like to dedicate my speech to Madam June Dalziel Almeida, a Scottish virologist, who is credited with discovering the first human coronavirus — a family whose members include the severe acute respiratory syndrome coronavirus 2 (SARS-CoV-2), the virus at the centre of the COVID-19 pandemic. The medical fraternity, the frontline workers were at the forefront for fighting this greatest struggle in the history of mankind. I extend my special thanks to the scientists, doctors, nurses and other paramedical staff members for injecting hope and self-belief among masses of India.

The hon. President has delivered an historic Address delivered while the country is overcoming the COVID-19 pandemic. It has set India on the idea of self-reliance of the country, which our freedom fighters had envisioned, the dream of an empowered and free India. The President Address is not only the report of the achievements but also a blueprint of the future visions of the Government.

The country has witnessed an unparalleled and indomitable courage, spirit, endurance and discipline of our countrymen. Hence, I rise here in support of the Address made by hon. President of India, Shri Ramnath Kovind ji.

The hon. President has reiterated how our country had to come together over the last year to overcome multiple challenges and adversities, including COVID-19 pandemic, floods in various parts of the country, earthquakes, cyclones, locust attack and bird-flu.

We have come a long way since the onset of the pandemic, from being a net importer of PPE kits to becoming a net exporter and from having a handful of testing labs to now having around 2,364 labs across the country. India's vaccine manufacturing capability is a global asset and we are already witnessing testimony to that. Sir, even the United Nations has constantly appreciated the actions undertaken by the Government under the leadership of our hon. Prime Minister Shri Narendra Modi, along with helping our neighbouring countries.

Even the Committee on Health and Family Welfare, in “The Outbreak of Pandemic COVID-19 and its Management” report has lauded the efforts of the Government in handling the pandemic situation. It has categorically mentioned that, “The Government of India has adopted intersectoral proactive, pre-emptive and graded 2 response/policies and priorities by adopting various strategies, the contingent plan during various lockdown and unlock phases to combat the COVID-19. The Government had been proactive in regulating, restricting and even prohibiting in-coming international passengers' traffic through immigration check to contain the spread of COVID-19”.

India's greatest slogan, Vasudhaiva Kudumbakan (the world is one family), engraved in the Central Hall of our Parliament, calls for acceptance and respectful coexistence, and we have truly abided by that by supplying vaccines to so many countries. India has already undertaken the world's largest vaccination drive with an ambition to vaccinate 30 crore people in the next few months.

Our country has undertaken sublime reforms and affirmative steps during the pandemic. Starting from providing Shramik special trains for the migrant labourers to providing 'One Nation One Ration Card’, to make food grains available to all was a humongous step in the better interests of the nation.

The various initiatives of the Government coupled with the package of ‘Aatmanirbhar Bharat Abhiyaan' has made sure that the Government is focused on enhancing vibrant markets for providing multiple job opportunities and facilitating development. There has been a political will to bring reforms in sectors such as agriculture and health.

India's budget for the defence sector in 2021-22 is Rs 4,78,195 crore, whereas the same in the year 2014-15 during the Congress era was Rs 2,29,000 crore. The procurement could only happen in the Congress regime when there was a “deal”, whereas, now the procurement happens in the Cabinet Committee on Security chaired by hon. PM, Narendra Modi ji.

Our hon. President, during his speech, has elaborately explained the achievements of the Government in the field of healthcare. In the year 2014, there were only 387 medical colleges but today there are 562 medical colleges in the country I truly believe that India has a unique chance to create mass prosperity because structural opportunities, global opportunities and domestic opportunities combine to create a potent policy window. Our choices have reflected our hopes rather than our fears.

I would like to once again congratulate the Government and urge the hon. Prime Minister to march forward for enhancement of development in every field and prove themselves as an effective Government once again to the country in particular, and to the world in general.

Thank you! Jai Hind!                                                                        *श्रीमतीरंजनबेनभट्ट (वडोदरा): मैं महामहिम राष्ट्रपति महोदय के अभिभाषण का समर्थनकरती  हूं  । हमारे माननीय राष्ट्रपति जी ने कोरोना काल का जिक्र करते हुए कोरोना काल में राष्ट्र की प्रगति और उत्थान के लिए सरकार द्वारा किये गए विशेष कार्यों का उल्लेख किया है  । हमारी सरकार को कोरोना महामारी का जैसे ही संकेत मिला हमारे माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्रभाई मोदी जी ने जन-धन की हानि को रोकने के लिए लॉक डाउन करने का कदम उठाया, जिसको संपूर्ण देश के लोगों का सहयोग और भरपूर समर्थन मिला और यह एक जनांदोलन के रूप में परिवर्तित हो गया जिसका परिणाम यह हुआ कि विश्व के अन्य देशो की अपेक्षा भारत में इस महामारी का प्रकोप कम हुआ और मौतें भी कम हुईं  ।मैं इसके लिए सरकार का नेतृत्व करने वाले माननीय प्रधानमंत्री और जनप्रिय नेता श्री नरेन्द्रभाई मोदी जी का ह्रदय से आभार व्यक्त करती हूँ ।

कोरोना अभी तक पूर्ण रूप से समाप्त नहीं हुआ है फिर भी हमारी सरकार संपूर्ण कोरोना काल तथा दूसरी तरफ सीमा परपड़ोसियों का दबाव के बावजूद आर्थिक स्थिति की सुधार के लिए अनेक प्रशंसनीय कार्य किये जिसकी वजह से देश की आर्थिक स्थितिमें तेजी से सुधार हो रहा है  । इसके लिए भी मैं अपनी सरकार की प्रशंसा करती हूँ ।

हमारी सरकार कोरोना काल में गरीबों को कोई परेशानी न उठानी पड़े, इसके लिए गरीब कल्याण योजना की शुरुआत की,जिसके तहत गरीबों को निःशुल्क भोजन देने की व्यवस्था की गई ताकि देश के किसी भी गरीब दीन-दुखी को भूखा न रहना पड़े और मैं समझती हूँ कि पूरे देश में इसका सफलता पूर्वक निर्वहन किया गया इसके लिए भी सरकार की प्रशंसा करती हूँ ।

कोरोना काल में सबसे महत्वपूर्ण कार्य स्वास्थ एवं परिवार कल्याण विभाग से जुड़ा हुआ था और इसमें कोई संदेह नहीं कि हमारी सरकार का प्रत्येक विभाग चाहे वह मंत्रालय हो, अस्पताल हो या डिस्पेंसरी हो । शहरों से लेकर गाँव तक सभी लोगों ने अपनी पूरी क्षमता से कार्य किया है चाहे मरीजों की सेवा करने वाले डॉक्टर हों या नर्स हों या लैब में कार्य करने वाले अथवा मास्क बनाने वाले हों । सभी ने अपने पूरी जिम्मेदारी और मुस्तैदी के साथ शहर से लेकर गाँव तक कार्य किया है,उक्त सभी लोगों की प्रशंसा देश के सभी नागरिकों को करनी चाहिए जिनके कारण कोरोना महामारी को बढ़ने से रोका गया है । हम अपने वैज्ञानिकों को भी भूल नहीं सकते जिन्होंने इतने कम समय में अपने अथक प्रयासों से कोरोना की वैक्सीन तैयार की है । भारत में बनी वैक्सीन की देश के अलावा विदेशों में भी प्रशंसा हो रही है ।

आज भारत अपने देश के अलावा विश्व के कई देशों को वैक्सीन की आपूर्ति करने में सक्षम हो गया है जिसके कारण भारत का गौरव विश्व पटल पर और बढ़ा है,मैं इसके लिए भी अपनी सरकार की प्रशंसा करती हूँ । 

इसके अतिरिक्त स्वास्थ्य के क्षेत्र में हमारी सरकार ने काफी कार्यों को बढ़ावा दिया है, जैसे आरोग्य योजना,जेनेरिक दवाओं के केंद्र स्थापित करना,नए मेडिकल कालेज खोलना,पुराने मेडिकल कालेजों में सीटें बढ़ाना, नए एम्स की स्थापना इत्यादि कार्यों को क्रियान्वित करने के लिए मैं माननीय हर्षवर्धन जी का अभिनन्दन करती हूँ ।

हमारी सरकार,कोरोना काल के दौरान जो मजदूर शहरों से में गाँव में गए उन्हें गाँव में ही काम देने पर जोर दे रही है । गरीब महिलाओं और वरिष्ठ नागरिकों को आर्थिक मदद देने का कार्य हमारी सरकार ने बखूबी किया है । हमारी सरकार आत्मनिर्भरता बढ़ाने पर जोर दे रही है जिससे देश के सभी लोग आत्मनिर्भर हो सकें ।  छोटे किसानों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए स्वामीनाथन रिपोर्ट की सिफारिशें लागू कर किसानों को डेढ़ प्रतिशत एम.एस.पी. देने का निर्णय सरकार ने किया है, किसानों को उनके उत्पाद का सही मूल्य मिल सके इसके लिए खरीद केन्द्रों को बढ़ाने का निर्णय लिया गया है । किसानों के खेत को पानी मिल सके इसके लिए पहले पुरानी योजनाओं को पूरा करने का निर्णय लिया गया है  । खाद्यानों की उपलब्धता बढ़ रही है, छोटे किसानों को पी.एम. सम्मान योजना के द्वारा लाभ पहुंचाने का कार्य किया गया है  । देश के किसानों की आमदनी बढ़ाने के उद्देश्य से किसानों के हित में तीन नए कानूनों को लाया गया है, हमारी सरकार द्वारा स्वच्छता अभियान के अंतर्गत 10 लाख से ज्यादा शौचालय बनाये गए हैं  । किसानों के लिए पुराने सुधारों के साथ नए सुधार भी किये गए हैं ।

 देश में किसानों के लिए काफी संख्या में किसान रेल चलाई गई हैं जिससे किसानों के उत्पाद सस्ती दर पर कम समय में एक स्थान से दूसरे स्थान पर पहुँच सकें । इसके अतिरिक्त किसानों की आय बढाने के लिए अन्य स्रोत जोड़े गए हैं,जैसे- पशुपालन, मत्यस्य पालन आदि । अन्नदाता को ऊर्जादाता बनाने का भी प्रयास हमारी सरकार ने उनकी आय बढ़ाने के लिए किया है ।

ग्रामों की स्थिति सुधारने के लिए आदर्श गाँव की स्थापना करने की शुरुआत हमारी सरकार कर रही है  । जल-जीवन मिशन योजना के तहत हर घर को स्वच्छ जल पहुँचाने के प्रयास, को पानी देने के लिए प्राथमिकता से जोड़ा गया । जन-जाति को पानी देने के लिए प्राथमिकता से जोड़ा गया ।

लघु उद्योग,कुटीर उद्योग के द्वारा लोगों को आत्मनिर्भर बनाने का प्रयास, शिल्पकारों का विकास करके उनको देश - दुनियां से जोड़ने का कार्य, महिला उद्यमियों को आत्मनिर्भर बनाना, महिला सुरक्षा को सुद्रढ़ करना आदि के लिए मैं अपनी सरकार की प्रशंसा करती हूँ ।

शिक्षा के क्षेत्र को बढ़ावा देने की दृष्टि से नई शिक्षा नीति लागू की गई । इसके अतिरिक्त छात्रों को छात्रवृत्ति देना, एक लाख स्कूलों का विस्तार, नौजवानों हेतु नौकरी में कई परीक्षाओं को समाप्त करना,आधुनिक तकनीकी को बढ़ावा देना,डिजिटल बैंकिंग को बढ़ाना,नए संसद भवन का निर्माण व सांसदों को सुविधाएँ बढ़ाना, श्रमिकों के लिए नए सुधार, बैंको का विलय, कंपनियों की स्थापना, लोकल के लिए वोकल का प्रचार, नई रेल लाइन बनवाना, शहरों में गरीबों को मकान, 27 शहरों में मेट्रो शुरू कराना, विभिन्न जलमार्गों का निर्माण, पूर्वोत्तर और देश के कई राज्यों में आतंकवाद और नक्सलवाद समाप्ति तथा नक्सली हिंसा में भारी कमी हुई है ।

टीकाकरण अभियान,सेना को सशक्त बनाना,मेक इन इंडिया को गति प्रदान करना,पर्यावरण की सुरक्षा और सौर ऊर्जा को बढ़ावा देना,कश्मीर में धारा 370 को ख़त्म कर वहां के लोगों को और अधिकार दिलाना ।

राम मंदिर का निर्माण तथा उज्ज्वला योजना के माध्यम से लोगों को मुफ्त रसोई गैस कनेक्शन प्रदान करना आदि कार्य मेरी सरकार ने कोरोना काल के दौरान किये हैं ।

अतः, मैं एक बार पुनः माननीय प्रधानमंत्री जी की प्रशंसा तथा महामहिम राष्ट्रपति महोदय के अभिभाषण का समर्थन करती हुई अपनी बात समाप्त करती हूँ ।

   

*SHRI DNV. SENTHILKUMAR S. (DHARMAPURI): I am very grateful to you for giving me this opportunity to say a few words on the Motion of Thanks to the President's Address.

       On this occasion, I would like to emphasise on the importance of finding an amicable solution to the long going farmers’ protest. DMK has always been a pro-farmers party. I humbly request the Government to include Minimum Support Price in the Bill related to the farmers.

       The Government should remember the frontline warriors who lost their lives in the battle against COVID-19 and come forward to help and support their families.

       Regional languages should be given due importance in the respective States. Reservations for OBC and other backward classes, which have been implemented, should be continued and all institutes should adhere to the laws laid based on reservations. It is only then that social justice can be preserved and protected.

       Finally, I would request the Government that State autonomy should be protected in all respects. Thank you.

 

*SHRI DHANUSH M. KUMAR (TENKASI): While putting my views on the Motion of Thanks on the President’s Address, I would like to emphasise the importance of finding a solution to the farmers’ protest. Our party, DMK, has always extended support to the farmers’ grievances and urges the Government to give respect to the farmers and their demands and please consider to withdraw the agricultural Bills. These laws affect the farmers’ lives. Please give importance to fix minimum support price for agricultural produce.

       Regional languages should be given due importance in the respective States.

The Government should remember the frontline workers who lost their lives during COVID-19 pandemic, and also extend help and support to their families. 

The reservation, which has been implemented, should continue and all institutions should adhere to the laws laid, based on reservation, and hence, social justice should be preserved and protected.

                                                                      

*श्री रामशिरोमणि वर्मा (श्रावस्ती):मैं आज महामहिम राष्ट्रपति जी के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर अपने विचार व्यक्त करने का मौका देने के लिए बहुत आभारी हूं, साथ ही हमारी पार्टी की मुखिया बहन कुमारी मायावती जी का भी आभारी हूं कि उन्होंने मुझे इस योग्य समझा और विश्वास जताया कि मैं गरीब, मजलूम, दलित और पिछड़ों की आवाज इस सदन में रख सकूं ।

बहुत ही खेद के साथ कहना पड़ रहा है कि महामहिम राष्ट्रपति महोदय ने अपने अभिभाषण में अनुसूचित जाति, जनजाति एवं पिछड़ों,गरीबों व समाज के अंतिम वंचित तबके के लिए विकासोन्मुखी कार्यों का विवरण और उन कार्यों के लिए मद की व्यवस्था के बारे में कोई जिक्र नहीं किया गया है । इसी कड़ी में मैं जिस संसदीय क्षेत्र श्रावस्ती,उत्तर प्रदेश से निर्वाचित होकर आया हूं, जिसके अंतर्गत दो जनपद श्रावस्ती और बलरामपुर आते हैं, वे हर मायने में बहुत ही पिछड़े हैं और उत्तर प्रदेश के कुल 8 अति पिछड़े जिलों में से आते हैं । अभी भी यहां के लोग ज्यादातर झोपड़पट्टी में रहते हैं । यहां के लोगों को जीवन जीने के लिए मूलभूत बुनियादी सुविधाओं जैसे-स्वच्छ और पीने योग्य पानी, बिजली, सड़क,उच्च और गुणवत्तायुक्त शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं की भारी कमी है ।

 यहां प्रत्येक वर्ष बाढ़ आती है, जिस कारण लाखों लोगों की जान और माल की क्षति होती है । इन पिछड़े जिलों का सर्वांगीण विकास हो सके,क्षेत्र के लोगों के मूलभूत आवश्यकताओं को पूरा किया जा सके, इसकी महामहिम राष्ट्रपति जी ने अपने अभिभाषण में कोई चर्चा नहीं की है । वर्तमान सरकार किसानों की आय दोगुना करने का पिछले 7 सालों से दम भर रही है,लेकिन सरकार किसानों की आय दोगुना करने की बजाय, किसानों को ही समाप्त करने पर तुली हुई है कि न रहेंगे किसान,न आय की बात होगी । अभी हाल ही में लोकतंत्र के पर्व गणतंत्र दिवस के अवसर पर जिस प्रकार किसानों का चोला ओढ़कर उपद्रवी और अराजक तत्वों ने लाल किले पर हिंसा की, जिस प्रकार उनके द्वारा हिंसक मारपीट और तिरंगे का अपमान किया गया, उसकी मैं ही नहीं, अपितु हमारी पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्षा बहन कुमारी मायावती जी ने भी भर्त्सना की है और किसान आंदोलन के समय से ही किसानों के लिए लाए गए तीनों विवादास्पद विधेयकों को सरकार द्वारा वापस लिए जाने की बार-बार मांग की ।

मैं सरकार से कहना चाहता हूं कि जो किसानों की फसलों को बेचने के लिए कुछ दिनों का क्रय केंद्र बनाया जाता है, उसमें किसान समय के रहते अगर अपनी फसल को बेच नहीं पाते हैं तो उसका लाभ बिचौलिए उठाते हैं और किसान अपनी फसलों को उनको ओने-पौने दामों में बेचने को मजबूर हो जाते हैं । मैं चाहता हूं कि इस क्रय केंद्र को स्थाई किया जाए,ताकि किसान अपनी सुविधानुसार कभी भी निर्धारित मूल्य के तहत अपनी फसल को बेच सकें ।

महामहिम राष्ट्रपति जी ने अपने अभिभाषण में देश के अन्नदाता किसान जो आंदोलन में अपनी जान गवां बैठे हैं, उनके लिए किसी भी प्रकार का न ही आर्थिक सहयोग या किसी अन्य प्रकार का सहयोग देने की बात कही है । मेरी व हमारी बहुजन समाज पार्टी की मांग है कि किसान आंदोलन में अपनी जान गंवाने वाले किसानों को सरकार द्वारा उनके परिवार को कम से कम 20 लाख रुपये प्रति किसान और साथ ही उनके परिवार को एक-एक सरकारी नौकरी सरकार द्वारा उपलब्ध कराई जाए ।

महामहिम राष्ट्रपति महोदय ने अपने अभिभाषण में हम सभी सांसदों के क्षेत्रीय विकास निधि को सरकार द्वारा बंद करने के उपरांत क्षेत्र में विकास के कार्य कैसे करेंगे, इसके बारे में कोई उल्लेख नहीं किया है । आपके माध्यम से सरकार से अनुरोध है कि हम सभी सांसदों को बगैर क्षेत्रीय सांसद विकास निधि के विकास कार्यों को किए जाने के उपाय निश्चित रूप से बताएं, जिससे हम लोगों के विश्वास पर खरे उतर सकें,जिन्होंने अपना कीमती वोट देकर हम पर अपना विश्वास जताकर, क्षेत्र के विकास हेतु हमें इस सदन में भेजा है । मैं इन्हीं शब्दों के साथ अपनी बात को विराम देता हूं ।

*श्री सी.पी. जोशी (चित्तौड़गढ़): आज मुझे बजट वर्ष2021-22 के लिये प्रारंभ हुये इस सत्र के राष्ट्रपति महोदय जी के अभिभाषण के धन्यवाद प्रस्ताव पर अपना पक्ष रखने का अवसर प्रदान करने के लिए बहुत-बहुत आभार  ।

कोरोना वैश्विक महामारी के इस दौर में हो रहा संसद का यह संयुक्त सत्र बहुत महत्वपूर्ण है । नया वर्ष भी है, नया दशक भी है और इसी साल हम आजादी के 75वें वर्ष में भी प्रवेश करने वाले हैं । आज संसद के हम सभी सदस्य, हर भारतवासी के इस संदेश और इस विश्वास के साथ यहां उपस्थित हैं कि चुनौती कितनी ही बड़ी क्यों न हो,न हम रुकेंगे और न भारत रुकेगा ।

राष्ट्रपति महोदय जी ने कहा कि भारत जब-जब एकजुट हुआ है, तब-तब उसने असंभव से लगने वाले लक्ष्यों को प्राप्त किया है । आज हम भारतीयों की यही एकजुटता, यही साधना, देश को अनेक आपदाओं से बाहर निकालकर लाई है । एक तरफ कोरोना जैसी - वैश्विक महामारी, दूसरी तरफ अनेक राज्यों में बाढ़, कभी अनेक राज्यों में भूकंप तो कभी बड़े-बड़े सायक्लोन, टिड्डी दल के हमले से लेकर बर्ड फ्लू तक, देशवासियों ने हर आपदा का डटकर सामना किया । इतनी आपदाओं से, इतने मोर्चों पर, देश एक साथ लड़ा और हर कसौटी पर खरा उतरा । इस दौरान हम सब, देशवासियों के अप्रतिम साहस, संयम, अनुशासन और सेवाभाव के भी साक्षी बने हैं । महामारी के खिलाफ इस लड़ाई में हमने अनेक देशवासियों को असमय खोया भी । सरकार के समय पर लिए गए सटीक फैसलों से लाखों देशवासियों का जीवन बचा है । आज देश में कोरोना के नए मरीजों की संख्या भी तेज़ी से घट रही है और जो संक्रमण से ठीक हो चुके हैं उनकी संख्या भी बहुत अधिक है ।

जब हम बीते एक वर्ष को याद करते हैं तो हमें स्मरण होता है कि कैसे एक ओर नागरिकों के जीवन की रक्षा की चुनौती थी, तो दूसरी तरफ अर्थव्यवस्था की चिंता भी करनी थी । अर्थव्यवस्था को संभालने के लिए रिकॉर्ड आर्थिक पैकेज की घोषणा के साथ सरकार ने इस बात का भी ध्यान रखा कि किसी गरीब को भूखा न रहना पड़े ।

'प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना के माध्यम से 8 महीनों तक 80 करोड़ लोगों 5 किलो प्रतिमाह अतिरिक्त अनाज निशुल्क सुनिश्चित किया गया । सरकार ने प्रवासी श्रमिकों, कामगारों और अपने घर से दूर रहने वाले लोगों की भी चिंता की । वन नेशन-वन राशन कार्ड की सुविधा देने के साथ ही सरकार ने उन्हें निशुल्क अनाज मुहैया कराया और उनके लिए श्रमिक स्पेशल ट्रेनें चलवाईं ।

सरकार ने रेहड़ी-पटरी वालों और ठेला लगाने वाले भाइयों-बहनों के लिए विशेष स्वनिधि योजना भी शुरू की । इसके साथ ही करीब 31 हजार करोड़ रुपए गरीब महिलाओं के जनधन खातों में सीधे ट्रांसफर भी किए । इस दौरान देशभर में उज्ज्वला योजना की लाभार्थी गरीब महिलाओं को 14 करोड़ से अधिक मुफ्त गैस सिलेंडर भी मिले ।

इस दौरान भारत ने बहुत ही कम समय में 2200 से अधिक प्रयोगशालाओं का नेटवर्क बनाकर, हजारों वेंटिलेटर्स का निर्माण करके, पीपीई किट से लेकर टेस्ट किट बनाने तक में आत्मनिर्भरता हासिल करके अपनी वैज्ञानिक क्षमता, अपनी तकनीकी दक्षता और अपने मजबूत स्टार्ट-अप इकोसिस्टम का भी परिचय दिया है ।

हमारे लिए यह और भी गर्व की बात है कि आज भारत दुनिया का सबसे बड़ा टीकाकरण अभियान चला रहा है । इस प्रोग्राम की दोनों वैक्सीन भारत में ही निर्मित हैं । संकट के इस समय में भारत ने मानवता के प्रति अपने दायित्व का निर्वहन करते हुए अनेक देशों को कोरोना वैक्सीन की लाखों खुराक उपलब्ध कराई हैं । भारत के इस कार्य की विश्व भर में हो रही प्रशंसा, हमारी हजारों वर्ष पुरानी संस्कृति, सर्वे सन्तु निरामयाः की भावना के साथ जग-कल्याण की हमारी प्रार्थना, हमारे प्रयासों को और ऊर्जा दे रही है ।

सरकार द्वारा स्वास्थ्य के क्षेत्र में पिछले 6 वर्षों में जो कार्य किए गए हैं, उनका बहुत बड़ा लाभ हमने इस कोरोना संकट के दौरान देखा है । इन वर्षों में इलाज से जुड़ी व्यवस्थाओं को आधुनिक बनाने के साथ ही बीमारी से बचाव पर भी उतना ही बल दिया गया है । सरकार के प्रयासों से, आज देश की स्वास्थ्य सेवाएं गरीबों को आसानी से उपलब्ध हो रही हैं तथा बीमारियों पर होने वाला उनका खर्च कम हो रहा है । आयुष्मान भारत -प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के तहत देश में 1.5 करोड़ गरीबों को 5 लाख रुपए तक का मुफ्त इलाज मिला है । इससे इन गरीबों के 30 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा, खर्च होने से बचे हैं । आज देश के 24 हजार से ज्यादा अस्पतालों में से किसी में भी आयुष्मान योजना का लाभ लिया जा सकता है । इसी तरह प्रधानमंत्री भारतीय जन-औषधि योजना के तहत देश भर में बने 7 हजार केंद्रों से गरीबों को बहुत सस्ती दर पर दवाइयां मिल रही हैं । इन केंद्रों में रोजाना लाखों मरीज दवाई खरीद रहे हैं ।

देश में स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार के लिए मेडिकल शिक्षा का विस्तार भी अत्यंत आवश्यक है । साल 2014 में देश में सिर्फ387 मेडिकल कालेज थे, लेकिन आज देश में 562 मेडिकल कालेज हैं । प्रधानमंत्री स्वास्थ्य सुरक्षा योजना के तहत सरकार ने 22 नए 'एम्स' को भी मंजूरी दी है । राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग के साथ ही चार स्वायत्त बोर्ड का गठन कर केंद्र सरकार ने चिकित्सा शिक्षा के क्षेत्र में ऐतिहासिक सुधारों की नींव रखी है । इन्हीं सुधारों के क्रम में दशकों पुरानी मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया के स्थान पर नेशनल मेडिकल कमीशन की स्थापना की गई है ।

आत्मनिर्भर भारत अभियान केवल भारत में निर्माण तक ही सीमित नहीं है, बल्कि यह भारत के हर नागरिक का जीवन स्तर ऊपर उठाने तथा देश का आत्मविश्वास बढ़ाने का भी अभियान है । इन्हीं प्रयासों के क्रम में सरकार ने स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों को लागू करते हुए लागत से डेढ़ गुना न्यूनतम समर्थन मूल्य का फैसला भी किया था । आज कृषि के लिए उपलब्ध सिंचाई के साधनों में भी व्यापक सुधार आ रहा ।

राष्ट्रपति महोदय जी ने कहा की समय की मांग है कि कृषि क्षेत्र में देश के सभी किसानों में से 80 प्रतिशत से ज्यादा ये छोटे किसान ही हैं और इनकी संख्या 10 करोड़ से ज्यादा है । ऐसे किसानों के छोटे-छोटे खर्च में सहयोग करने के लिए पीएम किसान सम्मान निधि के जरिए उनके खातों में लगभग एक लाख तेरह हजार करोड़ से अधिक रुपए सीधे ट्रांसफर किए जा चुके हैं । प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना का लाभ भी देश के छोटे किसानों को हुआ है । इस योजना के तहत पिछले वर्षों में किसानों को 17 हजार करोड़ रुपए प्रीमियम के एवज में लगभग 90 हजार करोड़ रुपए की राशि, मुआवजे के तौर पर मिली है । व्यापक विमर्श के बाद संसद ने तीन महत्वपूर्ण कृषि सुधार, कृषक उपज व्यापार और वाणिज्य (संवर्धन और सरलीकरण) विधेयक, कृषि (सशक्तीकरण और संरक्षण) कीमत आश्वासन और कृषि सेवा करार विधेयक, और आवश्यक वस्तु संशोधन विधेयक पारित किए हैं । इन कृषि सुधारों का सबसे बड़ा लाभ भी 10 करोड़ से अधिक छोटे किसानों को तुरंत मिलना शुरू हुआ । कृषि को और लाभकारी बनाने के लिए सरकार आधुनिक कृषि इंफ्रास्ट्रक्चर पर भी विशेष ध्यान दे रही है । इसके लिए एक लाख करोड़ रुपए के एग्रीकल्चर इंफ्रास्ट्रक्चर फंड की शुरुआत की गई है । अब तक 100 से ज्यादा किसान रेलें चलाई जा चुकी हैं जिनके माध्यम से 38 हजार टन से ज्यादा अनाज और फल-सब्जियां, एक क्षेत्र से दूसरे क्षेत्र तक किसानों द्वारा भेजी गई हैं ।

सरकार ने पशुपालन और मत्स्यपालन को भी कृषि क्षेत्र की तरह ही किसान क्रेडिट कार्ड की सुविधा दी है । प्रधानमंत्री कुसुम योजना के तहत किसानों को 20 लाख सोलर पंप दिए जा रहे हैं । वर्ष 2022 तक हर गरीब को पक्की छत देने के लिए प्रधानमंत्री आवास योजना की गति भी तेज की गई है ।

सरकार 'जल जीवन मिशन' की महत्वाकांक्षी योजना पर काम कर रही है । इसके तहत हर घर जल पहुंचाने के साथ ही जल संरक्षण पर भी तेज गति से काम किया जा रहा है । प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के अंतर्गत देश के ग्रामीण क्षेत्रों में 6 लाख 42 हजार किलोमीटर सड़क का निर्माण पूरा कर लिया गया है । इस योजना के तीसरे चरण में ग्रामीण क्षेत्रों में बसावटों के साथ-साथ स्कूलों, बाजारों और अस्पतालों आदि से जोड़ने वाले 1 लाख 25 हजार किलोमीटर रास्तों को भी अपग्रेड किया जाएगा । गांवों में सड़कों के साथ ही इंटरनेट की कनेक्टिविटी भी उतनी ही अहम है । हर गांव तक बिजली पहुंचाने के बाद सरकार देश के 6 लाख से अधिक गांवों को ऑप्टिकल फाइबर से जोड़ने के लिए अभियान चला रही है ।

दीनदयाल अंत्योदय योजना – राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के अंतर्गत देश में आज 7 करोड़ से अधिक महिला उद्यमी करीब 66 लाख स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी हुई हैं । बैंकों के माध्यम से इन महिला समूहों को पिछले 6 वर्षों में 3 लाख 40 हजार करोड़ रुपए का ऋण दिया गया है ।

देश के ग्रामीण क्षेत्रों में कार्यरत महिलाओं के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए सरकार एक रुपए में 'सुविधा' सैनिटरी नैपकिन देने की योजना भी चला रही है । सरकार गर्भवती महिलाओं के मुफ्त चेक-अप की मुहिम एवं राष्ट्रीय पोषण अभियान चलाकर, उन्हें आर्थिक मदद देकर,गर्भवती माताओं एवं शिशुओं के स्वास्थ्य की रक्षा के लिए निरंतर प्रयत्नशील है । इसी का परिणाम है कि देश में मातृ मृत्यु दर 2014 में प्रति लाख 130 से कम होकर 113 तक आ गयी है । पांच वर्ष से कम आयु के बच्चों की मृत्यु दर भी पहली बार घटकर36 तक आ गई है, जो वैश्विक दर 39 से कम है ।

21वीं सदी की वैश्विक आवश्यकताओं और चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए सरकार ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति की घोषणा की है । राष्ट्रीय शिक्षा नीति में पहली बार छात्रों को अपनी रुचि के हिसाब से विषय पढ़ने की आजादी दी गई है । किसी कोर्स के बीच में भी विषय और स्ट्रीम बदलने का विकल्प युवाओं को दिया गया है । सरकार ने प्रधानमंत्री ई-विद्या के अंतर्गत,स्कूली शिक्षा के लिए दीक्षा ऑनलाइन पोर्टल को वन नेशन, वन डिजिटल प्लेटफॉर्म के रूप में विकसित किया है । विद्यार्थियों के हितों के लिए संवेदनशील सरकार ने जेईई और नीट परीक्षाओं का भी सफल आयोजन कर उनका एक साल व्यर्थ होने से बचाया है । सरकार का मानना है कि सबसे ज्यादा वंचित वर्गों की सामाजिक और आर्थिक विकास की यात्रा, गुणवत्ता युक्त शिक्षा से आरंभ होती है । सरकार की विभिन्न छात्रवृत्ति योजनाओं का लाभ ऐसे ही 3 करोड़ 20 लाख से ज्यादा विद्यार्थियों को मिल रहा है । ग्रुप सी और ग्रुप डी में इंटरव्यू समाप्त करने से युवाओं को बहुत लाभ हुआ है । सरकार ने नेशनल रिक्रूटमेंट एजेंसी का गठन करके नौजवानों को नियुक्ति के लिए कई अलग-अलग परीक्षाएं देने की परेशानी से मुक्त किया है । मुझे खुशी है कि संसद के दोनों सदनों ने श्रमेव जयते की भावना पर चलते हुए श्रमिको के जीवन में बदलाव लाने वाला निर्णय लिया है । 29 केंद्रीय श्रम कानूनों को कम करके 4 लेबर कोड बनाए हैं । इन श्रम सुधारों में राज्यों ने भी अगुवाई की है । इन सुधारों से श्रम कल्याण का दायरा बढ़ेगा, श्रमिकों को निश्चित समय पर मजदूरी मिल पाएगी और रोज़गार के ज्यादा अवसर तैयार होंगे । कुछ दिन पहले ही पूर्वी और पश्चिमी डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर के सेक्शंस,देश को समर्पित किए गए हैं । ये फ्रेट कॉरिडोर पूर्वी भारत में औद्योगीकरण को प्रोत्साहन देने के साथ ही रेल यात्रा में होने वाली अनावश्यक देरी को भी कम करेंगे । इस कोरोनाकाल में हम जब देश के भीतर आपदाओं से निपट रहे थे, तब हमारी सीमा पर भी देश के सामर्थ्य को चुनौती देने के प्रयास किए गए । भारत अपनी वैश्विक जिम्मेदारियों को इस कोरोनाकाल में भी जिस गंभीरता से निभा रहा है उसे आज दुनिया देख रही है । "वसुधैव कुटुम्बकम्' की भावना को चरितार्थ करते हुए भारत ने देश की घरेलू जरूरतों को पूरा करने के साथ ही 150 से अधिक देशों को जरूरी दवाइयों की आपूर्ति की । भारत, वैश्विक स्तर पर वैक्सीन की उपलब्धता को सुनिश्चित करवाने के लिए प्रतिबद्ध है । यह देश का गौरव बढ़ाने वाली बात है कि वंदे भारत मिशन, जो दुनिया में इस प्रकार का सबसे बड़ा अभियान है, उसकी सराहना हो रही है । भारत ने दुनिया के सभी हिस्सों से लगभग 50 लाख भारतीयों को स्वदेश वापस लाने के साथ ही एक लाख से अधिक विदेशी नागरिकों को भी उनके अपने देशों तक पहुंचाया है ।

आर्टिकल 370 के प्रावधानों के हटने के बाद जम्मू-कश्मीर के लोगों को नए अधिकार मिले हैं । नागरिकता संशोधन कानून संसद द्वारा पास किया जा चुका है । चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ के पद का लाभ देश को मिलना शुरू हो चुका है । सशस्त्र सेनाओं में महिलाओं की भागीदारी बढ़ रही है । उच्चतम न्यायालय के फैसले के उपरांत भव्य राम मंदिर का निर्माण शुरू हो चुका है ।

मुझे गर्व है कि सरकार पूरी निष्ठा और ईमानदार नीयत के साथ पिछले 6 वर्षों से इस दिशा में निरंतर काम कर रही है,फैसले ले रही है तथा उन्हें लागू कर रही है ।

इसी के साथ मैं बजट वर्ष 2021-22 के लिये संसद के संयुक्त सत्र में राष्ट्रपति महोदय के द्वारा दिये गये बजट अभिभाषण के धन्यवाद प्रस्ताव का सर्मथन करता हूं ।

   

माननीयअध्यक्ष : माननीय प्रधानमंत्री जी  ।

प्रधानमंत्री (श्री नरेन्द्रमोदी): दादा,ठीक हो? आदरणीय अध्यक्ष जी, मैं राष्ट्रपति जी के प्रेरक उद्बोधन पर आभार प्रस्ताव की चर्चा में शरीक होने के लिए और राष्ट्रपति जी का धन्यवाद करने के लिए कुछ बातें प्रस्तुत करूंगा । राष्ट्रपति जी का भाषण भारत के 130 करोड़ नागरिकों की संकल्प शक्ति का परिचायक है । विकट और विपरीत काल में भी यह देश किस प्रकार से अपना रास्ता चुनता है, रास्ता तय करता है और रास्ते पर अचीव करता हुआ आगे बढ़ता है, ये सारी बातें विस्तार से राष्ट्रपति जी ने अपने अभिभाषण में कही हैं । उनका एक-एक शब्द देशवासियो में एक नया विश्वास पैदा करने वाला है और हर किसी के दिल में देश के लिए कुछ करने की प्रेरणा जगाने वाला है और इसलिए हम उनका जितना आभार व्यक्त करें,उतना कम है । इस सदन में भी 15 घंटे से ज्यादा चर्चा हुई है । रात को 12-12 बजे तक हमारे सभी माननीय सांसदों ने इस चेतना को जगाए रखा है, चर्चा को जीवंत बनाया है, अधिक शार्पन किया है । इस चर्चा में भाग लेने वाले सभी माननीय सदस्यों का मैं हृदय से आभार व्यक्त करता हूं । मैं विशेष रूप से हमारी महिला सांसदों का आभार व्यक्त करना चाहता हूं, क्योंकि इस चर्चा में उनकी भागीदारी भी ज्यादा थी, विचारों की धार भी थी, रिसर्च करके बातें रखने का उनका प्रयास था और अपने आपको इस प्रकार से तैयार करके उन्होंने इस सदन को समृद्ध किया है, चर्चा को समृद्ध किया है और इसलिए उनकी इस तैयारी, उनके ये तर्क और उनकी सूझ-बूझ के लिए मैं विशेष रूप से महिला सांसदों का अभिनंदन करता हूं, उनका आभार व्यक्त करता हूं ।

       आदरणीय अध्यक्ष महोदय, भारत आज़ादी के 75वें वर्ष में है, एक प्रकार से हम अभी दरवाजे पर दस्तक दे ही रहे हैं । 75 वर्ष का पड़ाव हर हिन्दुस्तानी के लिए गर्व का विषय है और आगे बढ़ने के पर्व का भी है और इसलिए समाज व्यवस्था में हम कहीं पर भी हों, देश के किसी भी कोने में हों और चाहे सामाजिक-आर्थिक व्यवस्था में हमारा स्थान कहीं पर भी हो  । लेकिन हम सभी मिलकर आजादी के इस पर्व से एक नई प्रेरणा प्राप्त करके, नये संकल्प लेकर के वर्ष 2047 में, जब देश आजादी के सौवें वर्ष को मनाएगा,उन सौ साल की भारत की आजादी के 25 साल हमारे सामने आने हैं और इन 25 साल में हम देश को कहां ले जाने वाले हैं,दुनिया में इस देश की मौजूदगी कहां करनी है,यह संकल्प हर देशवासी के दिल में हो, ऐसा वातावरण बनाने का काम इस परिसर का है, इस पवित्र धरती का है, इस पंचायत का है ।

       आदरणीय अध्यक्ष जी, देश जब आजाद हुआ तो जो आखिरी ब्रिटिश कमांडर थे, वे जब यहां से गए तो आखिर तक वे यही कहते रहते थे कि भारत कई देशों का महाद्वीप है और कोई भी इसे एक राष्ट्र कभी नहीं बना पाएगा । ऐसी घोषणाएं हुई थीं । लेकिन भारतवासियों ने ऐसी आशंकाओं को तोड़ा । जिनके मन में इस प्रकार के शक थे, उनको समाप्त कर दिया । हमारी अपनी जिजीविषा यानी सांस्कृतिक एकता और हमारी परम्पराएं, आज विश्व के सामने एक राष्ट्र के रूप में हैं और विश्व के लिए आशा की किरण बनकर हम खड़े हुए हैं । यह हमारी 75 साल की यात्रा में सम्भव हो पाया है । कुछ लोग यह कहते थे- “India was a Miracle Democracy.” यह भ्रम भी हमने तोड़ा है । लोकतंत्र हमारी रगों में है, हमारी सांसों में एक प्रकार से बुना हुआ है । हमारी हर सोच,हर पहल, हर प्रयास लोकतंत्र की भावना से भरा रहता है । अनेक चुनाव आए, अनेक सत्ता परिवर्तन हुए, बड़ी आसानी से सत्ता परिवर्तन हुए और परिवर्तित सत्ता व्यवस्था को सभी ने हृदय से स्वीकार करके आगे बढ़ाया । 75 साल का यह क्रम लोकतांत्रिक मूल्यों के लिए रहा है । हमारा देश विविधताओं से भरा हुआ है । सैंकड़ों भाषाएं,हजारों बोलियां,भांति-भांति का पहनावा, क्या कुछ विविधताओं से भरा हुआ नहीं है और उसके बावजूद भी हमने “एक लक्ष्य-एक राष्ट्र”को करके दिखाया है ।

आज जब हम भारत की बात करते हैं, तो स्वाभाविक रूप से स्वामी विवेकानंद जी ने एक बात कही थी,जिसको मैं यहां पर स्मरण करना चाहूंगा । विवेकानंद जी ने कहा था- “Every nation has a message to deliver, a mission to fulfil, a destiny to reach.” यानी हर राष्ट्र के पास एक संदेश होता है, जो उसे पहुंचाना होता है । हर राष्ट्र का एक मिशन होता है, जो उसे हासिल करना होता है । हर राष्ट्र की एक नियति होती है, जिसको वह प्राप्त होता है । कोरोना के दरम्यान भारत ने जिस प्रकार से अपने आपको सम्भाला और दुनिया को सम्भलने में मदद की है,यह एक प्रकार से टर्निंग पॉइंट है । जिन भावनाओं और संस्कारों को लेकर, “वेद से विवेकानंद” तक हम पले-बढ़े हैं, वह है- “सर्वे भवन्तु सुखिन:” । इस “सर्वे भवन्तु सुखिन: सर्वे सन्तु निरामया:”को भारत ने इस कालखण्ड में करके दिखाया है । एक आत्मनिर्भर भारत के रूप में भारत ने जिस प्रकार से एक के बाद एक ठोस कदम उठाए हैं और जनसामान्य ने उठाए हैं, लेकिन जब हम उन दिनों को याद करते हैं,जब दूसरा विश्व युद्ध समाप्त हुआ था और दो विश्व युद्धों ने दुनिया को झकझोर दिया था ।

मानव जाति, मानव मूल्य संकट के घेरे में थे । निराशा छाई हुई थी । दूसरे विश्व युद्ध के बाद पोस्ट वर्ल्ड वॉर दुनिया में एक नया ऑर्डर,न्यू वर्ल्ड ऑर्डर ने आकार लिया । शांति के मार्ग पर चलने की शपथ हुई । सैन्य नहीं सहयोग, इस मंत्र को ले कर के दुनिया के अंदर विचार प्रबल होते गए । यूएन का निर्माण हुआ । इंस्टिट्यूशंस बने । भांति-भांति के मैकेनिज्म तैयार हुए, ताकि विश्व को पोस्ट वर्ल्ड वॉर के बाद एक सुचारू ढंग से शांति की दिशा में ले जाया जाए । लेकिन अनुभव कुछ और निकाला । अनुभव यह निकला कि दुनिया में शांति की बात हर कोई करने लगा । पोस्ट वर्ल्ड वॉर शांति की बातों के बीच भी, हर कोई, जिसकी ताकत थी, अपनी सैन्य शक्ति बढ़ाने लगा । वर्ल्ड वॉर के पहले दुनिया के पास जो सैन्य शक्ति थी, यूएन के बाद वह सैन्य शक्ति अनेक गुणा बढ़ गई । छोटे-मोटे देश भी सैन्य शक्ति की प्रतिस्पर्धा में आने लग गए । शांति की चर्चा बहुत हुई, लेकिन इस हकीकत को विश्व को स्वीकार करना होगा कि सैन्य शक्ति की तरफ बड़ी-बड़ी ताकतें और पुरजोर से चल पड़ीं । जितने इनोवेशन हुए, रिसर्च हुए, वे इसी कालखण्ड में,सैन्य शक्ति के लिए हुए ।

       पोस्ट कोरोना भी, एक नया वर्ल्ड ऑर्डर नज़र आ रहा है । पोस्ट कोरोना के बाद दुनिया में एक नया संबंधों का वातावरण शेप लेगा । हमें तय करना है कि हम वर्ल्ड वॉर के बाद एक मूकदर्शक के रूप में बदलती हुई दुनिया को देखते रहे और अपने आप को कहीं एडजस्ट हो सकते थे तो करने की कोशिश की । हमारे लिए वह कालखण्ड भी वैसा ही था ।

       लेकिन आज, पोस्ट कोरोना,जो नया वर्ल्ड ऑर्डर तैयार होगा और होना ही है,किस रूप का होगा,कैसा होगा,कौन उसको इनीशिएट करेगा, वह तो वक्त बताएगा । लेकिन दुनिया ने जिस प्रकार से संकट को झेला है,दुनिया इस पर सोचने के लिए मजबूर हुई है और होना है ।

       ऐसी स्थिति में भारत विश्व से कट कर नहीं रह सकता है । भारत एक कोने में गुजारा नहीं कर सकता है । हमें भी एक मज़बूत प्लेयर के रूप में उभरना होगा । लेकिन सिर्फ जनसंख्या के आधार पर हम दुनिया में अपनी मजबूती का दावा नहीं कर पाएंगे । वह एक ताकत है । लेकिन इतनी ताकत मात्र से नहीं चलता है । नए वर्ल्ड ऑर्डर में भारत को अपनी जगह बनाने के लिए, भारत को सशक्त होना पड़ेगा, समर्थ होना पड़ेगा और उसका रास्ता है आत्मनिर्भर भारत ।

       महोदय, आज फार्मेसी में हम आत्मनिर्भर हैं । हम दुनिया के कल्याण के काम आते हैं । भारत जितना आत्मनिर्भर बनेगा, और जिसकी रगों में “सर्वे सुखिन: भवन्तु”का मंत्र जड़ा हुआ है, वह जितना सामर्थवान होगा,उतना ही वह मानव जाति के कल्याण के लिए, विश्व के कल्याण के लिए एक बहुत बड़ी भूमिका अदा कर सकेगा । इसलिए हमारे लिए आवश्यक है कि हम आत्मनिर्भर भारत के इस विचार को बल दें । यह हम मान कर चलें कि यह किसी शासन व्यवस्था का विचार नहीं है । यह किसी राजनेता का विचार नहीं है । आज हिन्दुस्तान के हर कोने में “वोकल फॉर लोकल”-“वोकल फॉर लोकल”सुनाई दे रहा है और लोग हाथ लगा कर देखते हैं कि लोकल है । यह आत्मगौरव का भाव, आत्मनिर्भर भारत के लिए बहुत काम आ रहा है । मुझे विश्वास है कि हम सबकी सोच, हमारी नीतियां,हमारे निर्णय,भारत को आत्मनिर्भर बनाने के लिए जो भी आवश्यक बदलाव हो, उस बदलाव की ओर होने चाहिए । यह मेरा मत है ।    

इस चर्चा के अन्दर करीब-करीब सभी माननीय सदस्यों ने कोरोना की चर्चा की है । हमारे लिए संतोष का विषय है, गर्व का विषय है कि कोरोना के कारण कितनी बड़ी मुसीबत आएगी,इसके बारे में दुनिया में जो अनुमान लगाए गए थे, बहुत बड़े-बड़े एक्सपर्ट्स ने अनुमान लगाए थे । भारत में भी भय का एक वातावरण पैदा करने के भरसक प्रयास भी हुए थे । एक ‘अननोन एनेमी’ था,तो विश्वास से कोई कुछ नहीं कह सकता था, विश्वास से कोई कुछ कर भी नहीं सकता था । एक ऐसे ‘अननोन एनेमी’ के खिलाफ लड़ना और इतना बड़ा देश, इतना थिक्ली पॉपुलेटेड देश,इतनी कम व्यवस्थाओं वाला देश-दुनिया को शक होना स्वाभाविक था क्योंकि विश्व के बड़े-बड़े देश कोरोना के सामने घुटने टेक चुके थे । तब भारत कैसे टिक पाएगा?अगर एक बार भारत की हालत खराब हो गई तो विश्व को कोई नहीं बचा पाएगा,यह समीकरण भी लोग लगा रहे थे । ऐसे में ये 130 करोड़ देशवासियों की डिसिप्लिन,उनके समर्पण ने आज हमें बचा कर रखा है । The credit goes to 130 crore Hindustanis. इसका गौरवगान हमें करना चाहिए । भारत की पहचान बनाने के लिए यह भी एक अवसर है । हम अपने आपको कोसते रह कर कहें कि दुनिया हमें स्वीकार करे,यह कभी सम्भव नहीं होगा । हम घर में बैठ कर अपनी कमियों के साथ जूझेंगे, कमियों को ठीक करने का प्रयास करेंगे,लेकिन विश्वास के साथ विश्व के सामने जाने का तजुर्बा भी रखेंगे,तब जाकर दुनिया हमें स्वीकार करेगी । अगर आप अपने बच्चे को घर में नहीं स्वीकार करते हैं और चाहेंगे कि मोहल्ले में बच्चे को स्वीकार किया जाए तो क्या कोई स्वीकार करेगा?कोई स्वीकार नहीं करेगा । दुनिया का नियम है । इसलिए हमें इस बात को करना चाहिए ।

       श्रीमान् मनीष तिवारी जी ने एक बात कही । उन्होंने कहा कि भगवान की कृपा है, कोरोना में हम बच गए । मैं इस बात से, जरूर कुछ कहना चाहूंगा । यह भगवान की ही कृपा है, जिसके कारण इतनी बड़ी दुनिया हिल गई,हम बच गए । यह भगवान की कृपा है, क्योंकि वे डॉक्टर्स,वे नर्सेज़ भगवान का रूप बन कर आए । वे डॉक्टर्स,वे नर्सेज़ अपने छोटे-छोटे बच्चों को शाम को घर लौटूंगा,यह कह कर जाते थे और पन्द्रह-पन्द्रह दिनों तक लौट नहीं सकते थे । वे भगवान का रूप लेकर आए थे,इसीलिए हम कोरोना से जीत पाए क्योंकि ये जो हमारे सफाई कर्मचारी हैं,मौत और जिन्दगी का खेल उनके लिए भी था, लेकिन जिस मरीज के पास कोई नहीं जा सकता था, मेरा सफाई कामगार वहां जाकर उसको साफ करता था, साफ-सुथरा रखने का प्रयास करता था । भगवान का रूप इन सफाई कामगारों के रूप में आया था । वह एम्बुलेंस चलाने वाला ड्राइवर पढ़ा-लिखा नहीं था । उसे पता था कि मैं, जिसे लेकर जा रहा हूं,वह कोरोना पॉजिटिव है । वह एम्बुलेंस का ड्राइवर भगवान के रूप में आया था, हजारों की जिन्दगी बचाने । इसलिए भगवान का रूप ही था, जिसने हमें बचाया । लेकिन, भगवान अलग-अलग रूप में आए थे । हम उनकी जितनी भी प्रशंसा करेंगे, जितना हम गौरव गान करेंगे,देश की सफलता का जितना गौरव गान करेंगे, हमारे भीतर भी एक नई ताकत पैदा होगी । कई कारणों से जिन लोगों के भीतर निराशा फैल चुकी है, उनको भी मैं कहता हूं कि कुछ पल के लिए 130 करोड़ देशवासियों के इस पराक्रम को याद कीजिए,आपके अन्दर भी ऊर्जा आ जाएगी ।

       माननीय अध्यक्ष जी, यह कोरोना काल एक कसौटी का काल था, जिसमें सच्ची कसौटी तब होती है, जब संकट होता है,सामान्य स्थिति में यह बहुत जल्दी ध्यान में नहीं आता है । दुनिया के बड़े-बड़े देश, कोरोना में जो हुआ, वह तो है, लेकिन उन्होंने हरेक ने तय किया कि अपने नागरिकों को सीधे पैसे पहुचाएंगे,ताकि इस संकट की घंटी में उनके नागरिकों को भी मदद मिले । आपको जानकर ताज्जुब होगा कि दुनिया के बहुत सारे देश उस कोरोना, लॉकडाउन, कर्फ्यू, आशंका और इस वातावरण के कारण, चाहते हुए भी और खजाने में पाउण्ड और डॉलर के ढेर होने के बावजूद भी अपने नागरिकों तक नहीं पहुँच पाएं । बैंक बंद, पोस्ट बंद, व्यवस्थाएँ बंद, कुछ नहीं कर पाए । इरादा था, घोषणाएँ भी हुईं । यह हिन्दुस्तान है, जो इस कोरोना काल खंड में भी करीब-करीब 75 करोड़ से अधिक भारतीयों को राशन पहुँचा सकता है । आठ महीने तक राशन पहुँचा सकता है । यही भारत है,जिसने जनधन,आधार और मोबाइल के द्वारा 2 लाख करोड़ रुपये इस काल खंड में लोगों तक पहुँचा दिए । दुर्भाग्य देखिए, जो आधार,जो मोबाइल,ये जनधन एकाउंट इतना गरीब के काम आया, लेकिन कभी-कभी सोचते हैं कि आधार को रोकने के लिए कौन लोग कोर्ट में गए थे! कौन लोग सुप्रीम कोर्ट के दरवाजे खटखटा रहे थे! मैं कभी-कभी हैरान हूँ और आज मैं इस बात को बार-बार बोलूँगा ।   

 अध्यक्ष जी,मुझे क्षमा करना । …(व्यवधान)मुझे एक मिनट का भी विराम देने के लिए मैं आपका बहुत आभारी हूँ । …(व्यवधान)इस सदन में कभी-कभी अज्ञान भी बड़ी मुसीबत पैदा करता है ।…(व्यवधान)

माननीय अध्यक्ष जी, ठेले वाले, रेहड़ी-पटरी वाले को इस कोरोना काल खंड में धन मिले,उनके पैसे मिले,यह उनके लिए किया गया और ये हम कर पाएं हैं ।

आदरणीय अध्यक्ष जी, इस काल खंड में भी हमने अपनी अर्थव्यवस्था में रिफॉर्म का सिलसिला जारी रखा और हम इस इरादे से चलें कि भारत जैसी अर्थव्यवस्था को उबारने के लिए,बाहर लाने के लिए हमें कुछ महत्वपूर्ण कदम उठाने पड़ेगें । आपने देखा होगा कि डे वन से अनेक विधि से रिफॉर्म के कदम हमने उठाए । इसका परिणाम है, आज ट्रैक्टर हो, गाडियाँ हो, उसका रिकॉर्ड सेल हो रहा है । आज जीएसटी का कलेक्शन एवर हाइएस्ट हुआ है । ये सारे आँकड़े हमारी अर्थव्यवस्था में जोश भर रहे हैं । यह दिखाई दे रहा है कि नए जोश के साथ भारत की अर्थव्यवस्था उभर रही है । दुनिया के जो लोग हैं,उन्होंने यह अनुमान भी लगाया है कि करीब-करीब दो डिजिट वाला ग्रोथ अवश्य होगा । दो डिजिट की ग्रोथ की संभावनाएँ सभी पंडितों ने कही है । मुझे विश्वास है कि इसके कारण इस संकट के काल से भी, मुसीबतों के बीच से भी देशवासियों की अपेक्षा के अनुसार देश प्रगति करेगा ।

आदरणीय अध्यक्ष महोदय,इस कोरोना काल में तीन कृषि कानून भी लाए गए । यह कृषि सुधार का सिलसिला बहुत ही आवश्यक है, महत्वपूर्ण है और वर्षों से जो हमारा कृषि क्षेत्र चुनौतियाँ महसूस कर रहा है,उसको बाहर लाने के लिए हमें निरंतर प्रयास करना ही होगा । उसे करने की दिशा में हमने ईमानदारी से एक प्रयास किया है । जो भावी चुनौतियां,जिसको कई विद्वानों ने कहा हुआ है,कोई मेरे शब्द नहीं हैं, कृषि क्षेत्र की इन भावी चुनौतियों को हमें अभी से डील करना पड़ेगा और उसको करने की दृष्टि से हमने प्रयास किया है । मैं देख रहा था कि यहां पर जो चर्चा हुई और विशेषकर हमारे कांग्रेस के साथियों ने चर्चा की, मैं यह तो देख रहा था कि वे इस कानून के कलर पर तो बहुत बहस कर रहे थे,ब्लैक है कि व्हाइट है । अच्छा होता उसके कंटेंट पर चर्चा करते,अच्छा होता उसके इंटेंड पर चर्चा करते, ताकि देश के किसानों को भी सही चीज पहुंच सकती थी ।

दादा ने भी भाषण किया और मुझे लगता है कि दादा तो बहुत अभ्यास करके आए होंगे, बहुत अच्छी बात बतायेंगे,लेकिन वे ज्यादातर प्रधान मंत्री और उनके साथी बंगाल में यात्रा क्यों कर रहे हैं, कैसे कर रहे हैं,कहां जा रहे हैं, उसी में लगे रहे । दादा के ज्ञान से हम इस बार वंचित रह गए । खैर, चुनाव के बाद अगर आपके पास मौका होगा तो …(व्यवधान)यह कितना महत्वपूर्ण प्रदेश है, इसीलिए तो हम कर रहे हैं । हां, आप लोगों ने इसकोइतना पीछे छोड़ दिया, हम तो इसको प्रमुखता देना चाहते हैं । हम एक बात समझें, जहां तक आंदोलन का सवालहै, दिल्ली के बाहरहमारे जो किसान भाई-बहन बैठे हैं, जो भी गलत धारणायें बनाई गईं,जो अफवाहें फैलाई गईं, उसके शिकार हुए हैं । …(व्यवधान)

श्री अधीर रंजन चौधरी (बहरामपुर):मैं इसका विरोध करता हूं । अफवाह कैसे कह सकतेहैं?

श्रीनरेन्द्रमोदी: मेरा पूरा भाषण बोलने के बाद आप सब कीजिए । आपकोमौका मिला था ।…(व्यवधान)

श्रीअधीर रंजन चौधरी: अफवाह की बात आप कर रहे हैं । हमारा किसान क्या … * है, हमारा किसान बुद्धू है क्या, जोअफवाह में लोगों के फंस जाते हैं?

श्रीनरेन्द्रमोदी: आप तो ऐसे शब्द उनके लिए बोल सकते हैं, हम नहीं बोल सकते हैं ।…(व्यवधान) कैलाश चौधरी जी ने और …(व्यवधान)

माननीयअध्यक्ष : मैंने आपको पर्याप्त समय, पर्याप्त अवसर दिया था । आपने पूरी बात कही । उस समय किसी ने टोका-टोकी  नहीं की ।

…( व्यवधान)

माननीयअध्यक्ष : माननीय अधीर रंजन जी, प्लीज बैठिए ।

…( व्यवधान)

श्रीनरेन्द्रमोदी: देखिए, मैं आपकी कितनी सेवा करता हूं, आपको जहां रजिस्टर करवाना था, हो गया । …(व्यवधान)

श्रीअधीर रंजन चौधरी: प्रधान मंत्री जी आप सबके प्रधान मंत्री हैं । हिंदुस्तान के किसानों के भी आप प्रधान मंत्री हैं । …(व्यवधान)

श्रीनरेन्द्रमोदी: माननीय अध्यक्ष जी, आंदोलन कर रहे सभी किसान साथियों की भावनाओं का यह सदन भी और यह सरकार भी आदर करती है, आदर करती रहेगी और इसीलिए सरकार के वरिष्ठ मंत्री, जब यह आंदोलन पंजाब में था, तब भी और बाद में भी, लगातार उनसे वार्ता कर रहे हैं । ऐसा नहीं कि दिल्ली आने के बाद ही बात हुई  ।हम किसानों के प्रति सम्मान भाव के साथ वार्ता कर रहे हैं, आदर भाव के साथ कर रहे हैं । …(व्यवधान)   

श्री अधीर रंजन चौधरी : अध्यक्ष महोदय, क्या इसीलिए बार्डर पर कीलें लगा दी गई हैं? …(व्यवधान)

माननीय अध्यक्ष: आपका कुछ भी रिकार्ड में नहीं जा रहा है । माननीय मंत्री जी, प्लीज आप बैठ जाइए ।

श्रीनरेन्द्रमोदी: अधीर बाबू जी, क्या कुछ और कहनाहै?  …(व्यवधान) 

HON. SPEAKER: Please sit down.

श्रीनरेन्द्रमोदी: माननीय अध्यक्ष जी, बीच-बीच में ऐसा करना जरूरी होता है । जब पंजाब में आंदोलन चल रहा था, उस समय भी किसानों से लगातार बातचीत होती रही है । बातचीत में किसानों की शंकाएं क्या हैं, उसको ढ़ूढने का भी भरपूर प्रयास किया गया । उनसे लगातार कहा गया कि हम एक-एक मुद्दे पर चर्चा करें ।

नरेन्द्र सिंह तोमर जी ने राज्य सभा में इसे विस्तार से बताया भी है । हम क्लॉज वाई क्लॉज चर्चा करने के लिए तैयार हैं । हम मानते हैं कि अगर इसमें कोई कमी है और अगर सचमुच में इससे किसान का नुकसान होता है तो इसमें बदलाव करने में क्या जाता है । यह देश देशवासियों के लिए है,अगर कोई निर्णय करते हैं तो किसानों के लिए करते है । हम अभी भी इंतजार कर रहे हैं, अगर वे कोई स्पेसिफिक चीज बताते हैं और वह कन्विन्सिंग है तो हमें बदलाव करने में कोई संकोच नहीं है । …(व्यवधान)

 

माननीय अध्यक्ष: माननीय सदस्य, आप अपनी बात कह चुके हैं ।

…( व्यवधान)

माननीय अध्यक्ष: मैंने आपको पर्याप्त समय और अवसर दिया था, किसी ने टोका-टोकी नहीं की थी । माननीय सुरेश जी, बैठ जाइए । यह ठीक तरीका नहीं है ।

…( व्यवधान)

माननीय अध्यक्ष: प्लीज आप बैठ जाइए, आपको किसने बोलने के लिए कहा?

…( व्यवधान)

माननीय अध्यक्ष: श्री टी.आर. बालू जी,मैं आपको पर्याप्त समय और अवसर देता हूं । 

…( व्यवधान)

HON. SPEAKER: Please sit down. आपका कुछ भी नोट नहीं हो रहा है ।

…( व्यवधान)

श्रीनरेन्द्रमोदी: माननीय अध्यक्ष जी, ये तीनों कानून ऑर्डेनन्स के द्वारा लाए गए थे, बाद में पार्लियामेंट से पारित हुए । कानून लागू होने के बाद न देश में कोई मंडी बंद हुई है और न ही कानून लागू होने के बाद कहीं एमएसपी बंद हुई है । यह सच्चाई है, जिसे हम छुपा कर बातें करते हैं, जिसका कोई मतलब नहीं है । इतना ही नहीं,एमएसपी की खरीदी भी बढ़ी है और यह खरीदी नए कानून बनने के बाद बढ़ी है । …(व्यवधान)

माननीय अध्यक्ष: अधीर रंजन जी, प्लीज बैठिए । माननीय सदस्यगण,मैंने इस विषय पर बोलने के लिए आप सभी माननीय सदस्यों को पर्याप्त समय और अवसर दिया था । जब भी कोई प्रतिपक्ष का माननीय सदस्य या नेता बोलता था, मैंने सभी से कहा था कि सभी की बातें ध्यान से सुनें, किसी को टोका-टोकी न करें । रात को एक बजे तक जब सदन में अंतिम वक्ता था, मैंने सभी को पर्याप्त समय दिया है ।   मेरा आपसे आग्रह है, माननीय प्रधान मंत्री जी अपनी बात कह रहे हैं । आप अपनी बात कह चुके हैं,इसका जवाब माननीय प्रधान मंत्री जी दे रहे हैं ।

       मैं माननीय प्रधान मंत्री जी से आग्रह करूंगा कि वह जवाब दें ।

…( व्यवधान)

श्रीनरेन्द्रमोदी: माननीय अध्यक्ष जी, यह हो-हल्ला, यह आवाज़, ये रुकावटें डालने का प्रयास एक सोची-समझी रणनीति के तहत है । …(व्यवधान)और सोची-समझी रणनीति यह है कि जो झूठ फैलाया है, जो अफवाहें फैलाई हैं, उसका पर्दाफाश हो जाएगा! सत्य वहां पहुंच जाएगा तो उनका टिकना भारी हो जाएगा,इसलिए हो-हल्ला करते रहो,जैसा बाहर करते हैं वैसा अंदर भी करते रहो, यही खेल चलता रहा है, लेकिन इससे कभी भी आप लोगों का विश्वास नहीं जीत पाओगे,मानकर चलो । …(व्यवधान)

       माननीय अध्यक्ष जी, ऑर्डिनेंस के बाद पॉर्लियामेंट में कानून बनने के बाद मैं किसी भी किसान से पूछना चाहता हूं कि पहले जो हक उनके पास थे, जो व्यवस्थाएं उनके पास थीं,उसमें से कुछ भी इस नए कानून ने छीन लिया है क्या? इसकी चर्चा का कोई जवाब देता नहीं है । सब कुछ वैसा का वैसा पुराना है । क्या हुआ है,एक अतिरिक्त विकल्प व्यवस्था मिली है, वह भी क्या कम्पलसरी है? किसी कानून का विरोध तो तब मायने रखता है जब वह कम्पलसरी हो । यह तो ऑप्शनल है । आपकी मर्जी है यहां जाइए,आपकी मर्जी नहीं है, वहां जाइए । जहां ज्यादा फायदा हो, वहां किसान चला जाए,यह व्यवस्था की गई है । …(व्यवधान)अधीर रंजन जी,अब ज्यादा हो रहा है ।…(व्यवधान)

       अधीर रंजन जी,प्लीज़ अब ज्यादा हो रहा है । …(व्यवधान) मैं आपकी रिस्पेक्ट करने वाला इंसान हूं । मैंने पहले कह दिया, आपने जितना कहा, जहां रजिस्टर होना था, हो गया । …(व्यवधान)बंगाल में भी टीएमसी से ज्यादा पब्लिसिटी आपको मिल जाएगी, बाबा क्यों इतना? …(व्यवधान) दादा, देखो मैंने बता दिया,चिंता मत करो,मैंने बता दिया ।…(व्यवधान)अधीर रंजन जी,प्लीज़, अच्छा नहीं लगता है । …(व्यवधान)मैं इतना आदर करता हूं आपका,आज ऐसा क्यों कर रहे हैं? …(व्यवधान) आप पहले ऐसा नहीं करते थे । …(व्यवधान)हद से ज्यादा क्यों कर रहे हैं?

माननीय अध्यक्ष:अधीर रंजन जी और दादा, प्लीज़,बैठ जाइए ।

…(व्यवधान)

श्री नरेन्द्र मोदी:माननीय अध्यक्ष जी, नए कानून किसी के लिए बंधनकर्ता नहीं हैं, ये ऐसे कानून हैं,उनके लिए ऑप्शन है । जहां ऑप्शन है, वहां विरोध के लिए कोई कारण ही नहीं बनता है । हां, ऐसा कोई कानून जो थोप दिया हो, उसके लिए विरोध का कारण बनता है । …(व्यवधान)

       मैं देख रहा हूं,आंदोलन का एक नया तरीका है । क्या तरीका है?आंदोलनकारी जो होते हैं, ऐसे तरीके नहीं अपनाते । आंदोलनजीवी होते हैं, वे ऐसे तरीके अपनाते हैं, और वे कहते हैं कि ऐसा हुआ तो ऐसा होगा, ऐसा हुआ तो वैसा होगा । अरे भई जो कुछ हुआ ही नहीं,जो कुछ होना ही नहीं है, उसका भय पैदा करके …(व्यवधान)पिछले कई सालों से लगातार सुप्रीम कोर्ट का एक जजमेंट आ जाए, जिसका कोई निर्णय नहीं हुआ और एक दम से तूफान खड़ा कर दिया जाए, देश में आग लगा दी जाए,ये जो तौर-तरीके हैं, जो भी लोकतंत्र पर विश्वास करते हैं, जो भी अहिंसा में विश्वास करते हैं, उन सबके लिए चिंता का विषय होना चाहिए । यह सरकार की चिंता का नहीं, देश की चिंता का विषय होना चाहिए । …(व्यवधान) प्लीज़, आपको बाद में समय मिलेगा ।…(व्यवधान)

माननीय अध्यक्ष: यह तरीका ठीक नहीं है ।

…(व्यवधान)

श्री नरेन्द्र मोदी: माननीय अध्यक्ष जी, पुरानी मंडियों पर भी कोई पाबंदी नहीं है । इतना ही नहीं, इस बजट में इन मंडियों को आधुनिक बनाने के लिए, इनके इन्फ्रास्ट्रक्चर को सुधारने के लिए और बजट की व्यवस्था की गई है …(व्यवधान)उस बजट के माध्यम से ये जो हमारे निर्णय हैं, वह सर्वजन हिताय,सर्वजन सुखाय की भावना के साथ लिए गए हैं । …(व्यवधान)

माननीय अध्यक्ष: आप नेता है,आप ऐसे क्यों करते हैं? आप सीनियर व्यक्ति हैं ।

…(व्यवधान)

श्री नरेन्द्र मोदी: इस सदन के साथी भलीभांति इस बात को समझते हैं, कांग्रेस और कुछ दलों ने बड़े जोर-शोर से अपनी बात कही,लेकिन जिन बातों को लेकर उनको कहना चाहिए कि यह नहीं वह है, अपेक्षा यह होती है ।…(व्यवधान) वे इतना स्टडी करके आए हैं । …(व्यवधान) इतना ही नहीं,जो लोग ये कहते हैं । …(व्यवधान)

       मैं हैरान हूं कि पहली बार एक नया तर्क इस सदन में आया कि हमने मांगा नहीं था तो दिया क्यों? …(व्यवधान) हमने मांगा नहीं तो दिया क्यों? …(व्यवधान)  पहली बात है कि लेना न लेना आपकी मर्जी है । किसी ने किसी के गले मढ़ा नहीं है । ऑप्शनल है,एक व्यवस्था है और देश बहुत बड़ा है । हिंदुस्तान के कुछ कोनों में इसका लाभ होगा,हो सकता है किसी एक-आध कोने में न भी हो, लेकिन यह कम्पलसरी नहीं है, इसलिए मांगा और दिए का मतलब नहीं होता है । लेकिन मैं फिर भी कहना चाहता हूं, इस देश में दहेज के खिलाफ कानून बना, यह इस देश में कभी किसी ने मांग नहीं की, फिर भी देश की प्रगति के लिए कानून बना था ।…(व्यवधान)

       माननीय अध्यक्ष जी, ट्रिपल तलाक के खिलाफ कानून बने, यह किसी ने मांग नहीं थी, लेकिन प्रगतिशील समाज के लिए आवश्यक है इसलिए कानून हमने बनाए हैं । हमारे यहां बाल विवाह पर रोक,किसी ने मांग नहीं की थी कि कानून बनाओ, फिर भी कानून बने थे,क्योंकि प्रगतिशील समाज के लिए आवश्यक होता है । शादी की उम्र बढ़ाने के निर्णय, किसी ने मांग नहीं की थी, लेकिन प्रगतिशील विचार के साथ निर्णय बदलने पड़ते हैं । बेटियों को सम्पत्ति में अधिकार, किसी ने मांग नहीं की थी, लेकिन एक प्रगतिशील समाज के लिए आवश्यक होता है, तब जाकर के कानून बनाया जाता है । …(व्यवधान)शिक्षा को अधिकार देने की बात, किसी ने मांग नहीं की थी, लेकिन समाज के लिए आवश्यक होता है । बदलाव के लिए आवश्यक होता है,तब कानून बनते हैं । …(व्यवधान)क्या कभी इतने सुधार हुए? बदलते हुए समाज ने इसे स्वीकार किया कि नहीं किया,यह दुनिया पूरी तरह जानती है । …(व्यवधान)

       माननीय अध्यक्ष जी, आप जानते हैं, …(व्यवधान)

श्रीअधीर रंजन चौधरी: हमारी बात नहीं सुनी जा रही है, हम वॉकआउट करते हैं । …(व्यवधान)

माननीय अध्यक्ष: हमने आपको बोलने का पर्याप्त समय और अवसर दिया है । आपका यह तरीका ठीक नहीं है ।

(व्यवधान)

   

16.58 hrs At this stage, Shri Adhir Ranjan Chowdhury, Shri E.T. Mohammed Basheer and some other Hon. Members left the House.

श्री नरेन्द्र मोदी: माननीय अध्यक्ष जी,  हम यह मानते थे कि हिंदुस्तान की बहुत पुरानी पार्टी कांग्रेस पार्टी, जिसने करीब-करीब छ:दशक तक इस देश में एकछत्र शासन किया । इस पार्टी का यह हाल हो गया है कि पार्टी का राज्य सभा का तबका एक तरफ चलता है और पार्टी का लोक सभा का तबका दूसरी तरफ चलता है । ऐसी डिवाइडिड पार्टी,ऐसी कन्फ्यूज्ड पार्टी न खुद का भला कर सकती हैं और न देश की समस्याओं के समाधान के लिए कुछ सोच सकती है । इससे बड़ा दुर्भाग्य क्या होगा? …(व्यवधान)

       कांग्रेस पार्टी राज्य सभा में भी है । कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेता राज्य सभा में बैठे हैं,लेकिन वे बहुत आनंद और उमंग के साथ वाद-विवाद करते हैं, विस्तार से चर्चा करते हैं, अपनी बात रखते हैं और यहां कांग्रेस पार्टी का दूसरा तबका है । अब समय तय करेगा ।

17.00 hrs माननीय अध्यक्ष जी, ईपीएफ पेंशन योजना,हमें मालूम है,जब 2014 में मैं यहां पर आया, तो ऐसे केसेज मेरे सामने आए कि किसी को पेंशन 7 रुपये मिल रही थी, किसी को 25 रुपये, किसी को पचास रुपये और किसी को 250 रुपये । यही देश में चलता था । मैंने कहा कि इन लोगों का ऑटो रिक्शा में पेंशन लेने के लिए जाने का खर्च उससे ज्यादा होता होगा । इसके लिए किसी ने मांग नहीं की थी, किसी मजदूर संगठन ने मुझे आवेदन पत्र नहीं दिया था । उसमें से बाहर लाकर हमने मिनिमम 1000 रुपये देने का निर्णय लिया था । मुझसे किसी ने मांगा नहीं था । मुझे किसी भी किसान संगठन ने, इस देश के छोटे किसानों को कुछ पैसा मिले,इसकी व्यवस्था के लिए किसी ने मांग नहीं की थी,लेकिन हमने ‘प्रधान मंत्री सम्मान निधि योजना’के तहत, उनको सामने से धन देना शुरू किया ।

       माननीय अध्यक्ष जी, कोई भी आधुनिक समाज के लिए परिवर्तन बहुत आवश्यक होता है । हमने देखा है, जिस प्रकार से उस कालखंड में विरोध होता था,लेकिन राजा राम मोहन राय, ईश्वर चन्द्र विद्यासागर,ज्योतिबा फुले,बाबा साहब अम्बेडकर जैसे महापुरुष,ऐसे कितने अनगिनत नाम हैं, उन्होंने समाज के सामने उल्टे प्रवाह में सामने होकर समाज सुधार का बीड़ा उठाया था । व्यवस्थाएं बदलने के लिए बीड़ा उठाया था । कभी न कभी तो किसी को जिम्मेवारियां लेनी ही होती हैं । हां, ऐसी चीजों का शुरू में विरोध होता है । जब बात सत्य प्रतीत होती है, तो लोग इसको स्वीकार भी कर लेते हैं । हिन्दुस्तान तो इतना बड़ा देश है । कोई भी निर्णय शत-प्रतिशत सबको स्वीकार्य हो, ऐसा संभव नहीं हो सकता है । यह देश विभिन्नताओं से भरा हुआ है । किसी एक जगह पर वह बहुत लाभ करता होगा और किसी दूसरी जगह पर कम लाभ करता होगा, किसी जगह पर थोड़ा पहले का जो लाभ है, उसको वंचित करता होगा, लेकिन,ऐसी तो इतने बड़े देश में व्यवस्था नहीं हो सकती है । देश में जो निर्णय होते हैं, एक लार्जर इंट्रेस्ट के लिए होते हैं । ‘सर्वजन हिताय और सर्वजन सुखाय’निर्णय होते हैं और उसको लेकर हम काम करते हैं ।

       माननीय अध्यक्ष जी, इस सोच के साथ मेरा विरोध है कि जब यह कहा जाता है कि मांगा था क्या? क्या हम सामंतशाही हैं कि देश की जनता याचक की तरह हम से मांगे? उनको मांगने के लिए मजबूर करें? यह मांगने के लिए मजबूर करने वाली सोच लोकतंत्र की सोच नहीं हो सकती । सरकारें संवेदनशील होनी चाहिए । लोकतांत्रिक तरीके से जनता की भलाई के लिए सरकार को जिम्मेवारियां लेकर आगे आना चाहिए । इस देश की जनता ने ‘आयुष्मान योजना’ नहीं मांगी थी । लेकिन,हमें लगा कि गरीब को बीमारी से बचाना है, तो ‘आयुष्मान भारत’ योजना लेकर जाना चाहिए । इस देश के गरीब ने बैंक अकाउंट के लिए जुलूस नहीं निकाला था, कोई मेमोरेंडम नहीं भेजा था,हमने ‘जन-धन योजना’ बनाई थी और हमने ही जन-धन योजना से उसके खाते खोले थे । स्वच्छ भारत की मांग किसने की थी? लेकिन,देश के सामने स्वच्छ भारत को लेकर गए, मामला चल पड़ा । लोगों ने कहां कहा था कि मेरे घर में शौचालय बनाओ,किसी ने नहीं मांगा था । लेकिन,हमने 10 करोड़ घरों में शौचालय बनाने का काम किया । मांगा जाए, तभी सरकार काम करे, वह वक्त चला गया । यह लोकतंत्र है, सामंतशाही नहीं है । हमें लोगों की संवेदनाओं को समझकर सामने से देना चाहिए । नागरिकों को याचक बनाकर हम नागरिकों का आत्मविश्वास नहीं बढ़ा सकते हैं । हमें नागरिकों को अधिकार देने की दिशा में आगे बढ़ते रहना चाहिए । नागरिक को याचक बनाने से नागरिक का आत्मविश्वास खत्म हो जाता है । नागरिक का सामर्थ्य पैदा करने के लिए,उसका आत्मविश्वास पैदा करने के लिए हमारे कदम होने चाहिए और हमने इस दिशा में कदम उठाएं हैं । …(व्यवधान)

प्रो. सौगत राय (दमदम): अगर, किसान नहीं चाहता है, तो ये कृषि कानून रिपील क्यों नहीं कर देते? …(व्यवधान)

श्रीनरेन्द्रमोदी: एक मिनट सुनो दादा…(व्यवधान)दादा मैं वही कह रहा हूं …(व्यवधान) जो नहीं चाहता है, वह उसका उपयोग न करे । उसके पास पुरानी व्यवस्था है । …(व्यवधान)आप बुद्धिमान लोगों को यही छोटी-सी बात समझानी है कि उसको नहीं चाहिए, तो पुरानी व्यवस्था है । पुरानी व्यवस्था चली नहीं गई है ।

       माननीय अध्यक्ष जी, हम एक बात जानते हैं, हम सब इस बात से परिचित हैं कि जो ठहरा हुआ पानी होता है, वह बीमारी पैदा करता है । जो बहता हुआ पानी है, वह जीवन को उमंग से भर देता है । जो चलता है, चलता रहे, चलने दो । अरे यार, कोई आएगा, तो करेगा । ऐसे थोड़े चलता है । जिम्मेवारियां लेनी चाहिए, देश की आवश्यकता के अनुसार निर्णय करने चाहिए । स्टेटस क्वो, देश को तबाह करने में इस मानसिकता ने भी एक बहुत बड़ा रोल अदा किया है । दुनिया बदल रही है, कब तक हम स्टेटस क्वो - स्टेटस क्वो - स्टेटस क्वो ऐसे ही करते रहेंगे,तो मैं समझता हूं कि स्थितियां बदलने वाली नहीं हैं । इसलिए देश की युवा पीढ़ी ज्यादा इंतजार नहीं कर सकती है । लेकिन आज मैं एक घटना सुनाना चाहता हूं । उससे जरूर हमारे ध्यान में आएगा कि स्टेटस क्वो के कारण होता क्या है । यह करीब 40-50साल पुरानी घटना का किस्सा है । मैंने कभी किसी से सुना था । इसलिए उसकी तारीख-वारीख में इधर-उधर हो सकता है,लेकिन जो मैंने सुना था, जो मेरी स्मृति में है, मैं वह बता रहा हूं ।

       60 के दशक में तमिलनाडु में राज्य के कर्मचारियों की तनख्वाह बढ़ाने के लिए एक कमीशन बैठा था । राज्य के कर्मचारियों का वेतन बढ़े, यह उस कमीशन का काम था । उस कमेटी के चेयरमैन के पास एक लिफाफा आया, जिस पर टॉप सीक्रेट लिखा हुआ था । उन्होंने उसको देखा, तो उसके अंदर एक अर्ज़ी थी । उसमें लिखा था कि मैं बहुत साल से इस सिस्टम में काम कर रहा हूं, ईमानदारी से काम कर रहा हूं,लेकिन मेरी तनख्वाह नहीं बढ़ रही है । मेरी तनख्वाह बढ़ाई जाए । उसने ऐसी एक चिट्ठी लिखी थी । जिसने चिट्ठी लिखी थी,चेयरमैन ने उसको लिखा कि तुम कौन हो? तुम्हारा पद क्या है, वगैरह-वगैरह?तो उसने फिर दूसरा जवाब लिखा कि मैं सरकार में जो मुख्य सचिव का कार्यालय है,वहां सीसीए के पद पर बैठा हूं । मैं सीसीए के पद पर काम कर रहा हूं । फिर उन्होंने सोचा कि ये सीसीए क्या होता है?कुछ पता तो है नहीं । ये सीसीए कौन होता है? तो उन्होंने उसको दोबारा से चिट्ठी लिखी कि हमने सीसीए शब्द को कहीं देखा नहीं है, पढ़ा नहीं है, यह है क्या,हमें बताइए तो । तब उसने कहा कि साहब मैं बंधा हुआ हूं कि वर्ष 1975 के बाद ही मैं इस विषय का जिक्र कर सकता हूं । अभी नहीं कर सकता हूं ।

       चेयरमैन ने उसको फिर से लिखा कि ऐसा करो भाई कि वर्ष 1975 के बाद जो भी कमीशन बैठे,वहां जाना । आप मेरा सिर क्यों खा रहे हैं? तब उसको लगा कि यह मामला तो बिगड़ गया । उसने कहा कि ठीक है साहब,मैं बता देता हूं कि मैं कौन हूं । तब उसने उनको चिट्ठी लिखकर बताया कि साहब, मैं सीसीए के पद पर कई वर्षों से काम कर रहा हूं और मुख्य सचिव के कार्यालय में हूं । उसने बताया कि सीसीए का मतलब होता है - ‘चर्चिल सिगार असिसटेंट’ । यह सीसीए का पद है, मैं जिस पर काम करता हूं । ये है क्या? तो वर्ष 1940 में जब चर्चिल ब्रिटेन के प्रधान मंत्री बने थे, तो त्रिची से, हमारे यहां से उनके लिए सिगार जाती थी । जो सीसीए था, उसका काम यह था कि वह सिगार उन तक सही से पहुंची कि नहीं पहुंची,इसकी चिंता करना और इसके लिए एक पद बनाया गया था । उस सिगार की सप्लाई होती थी ।

       वर्ष 1945 में वह चुनाव हार गए । लेकिन फिर भी वह पद बना रहा और सप्लाई भी जारी रही । देश आज़ाद हो गया । देश आज़ाद होने के बाद भी यह पद कंटिन्यू था । चर्चिल को सिगरेट पहुंचाने की जिम्मेवारी वाला एक पद मुख्य सचिव के कार्यालय में चल रहा था । उसने अपने लिए कुछ तनख्वाह मिले,कुछ प्रपोज़ल मिले, इसके लिए उसने एक चिट्ठी लिखी थी । अब देखिए,ऐसा स्टेटस क्वो,अगर हम बदलाव नहीं करेंगे,व्यवस्थाओं को देखेंगे नहीं,तो उससे बड़ा उदाहरण क्या हो सकता है ।

       मैं जब मुख्य मंत्री बना था,तो एक रिपोर्ट आती थी कि आज कोई बैलून नहीं आया और कोई पर्चे नहीं फेंके गए । शायद यह सेकेंड वर्ल्ड वॉर के समय शुरू हुआ होगा । अभी-भी वह चलता था । यानी हमारी व्यवस्था में ऐसी चीजें घुसी हुई हैं । हमें लगता है कि भाई हम रिबन काटेंगे, दीया जलाएंगे, फोटो निकल जाएगी और हमारा काम हो गया । देश ऐसे नहीं चलता है । हमें जिम्मेवारी के साथ देश में बदलाव के लिए हर प्रकार की कोशिश करनी चाहिए । गलतियां हो सकती हैं । लेकिन अगर इरादा नेक हो, तो परिणाम अच्छे मिलते भी हैं । यह हो सकता है कि हमें एकाध में परिणाम न भी मिलें । आप देखिए,हमारे देश में एक समय था जब किसी को अपना सर्टिफिकेट सर्टिफाइड करवाना हो तो कॉर्पोरेटर,काउंसलर के बाहर सुबह क्यू लग जाती थी और जब तक ठप्पा न मारे, मजा है कि वह तो नहीं मारता था, लेकिन एक लड़का बाहर बैठता था जो सिक्का मार देता था । अब यह चल रहा था । मैंने कहा कि इसका क्या मतलब है? हम देश के नागरिकों पर भरोसा करें और मैंने आकर अटेस्ट करने वाली सारी प्रथाओं को खत्म कर दिया । इससे देश के लोगों को लाभ हुआ । हमें बदलाव के लिए काम करना चाहिए, सुधारों के लिए काम करना चाहिए । हमारे यहाँ पर इंटरव्यू होते थे । मैं अभी भी हैरान हूँ कि एक व्यक्ति एक दरवाजे से अन्दर आता है,तीन लोगों का पैनल बैठा होता है, वे उसका मुंह देखते हैं,उसका नाम भी पूरा नहीं पूछते और इसी तरह वह निकल जाता है । वह इंटरव्यू कॉल होता है और फिर ऑर्डर दिए जाते हैं । हमने कहा कि इसका क्या मतलब है? उसकी सारी एजुकेशन क्वालीफिकेशन को इकट्ठा करो,मेरिट के आधार पर कम्प्यूटर को पूछो, वह जवाब दे देगा । यह तीसरे और चौथे श्रेणी के लोगों के लिए इंटरव्यू का क्या माहौल बनाया हुआ है? लोग कहते थे कि सिफारिश के बिना नौकरी नहीं मिलेगी । हमने खत्म कर दिया । मैं समझता हूँ कि हम देश में चीजों को बदलें । बदलने से, असफलता के डर से अटककर रहना कभी भी किसी का भला नहीं करता है । हमें बदलाव करने चाहिए और हम बदलाव करने का प्रयास करते हैं ।

       माननीय अध्यक्ष जी, हमारे यहाँ खेती, हमारे यहाँ किसानी एक प्रकार से हमारी संस्कृति की मुख्य धारा का हिस्सा रही है । एक प्रकार से हमारी संस्कृति की प्रवाह के साथ हमारी किसानी जुड़ी हुई है । हमारे ऋषियों ने, मुनियों ने इस पर बहुत कुछ लिखा हुआ है । हमारे यहाँ कृषि के संबंध में ग्रंथ अवेलेबल हैं । बहुत सारे उत्तम अनुभव भी हैं और हमारे यहाँ राजा भी खेतों में हल चलाते थे । हम जनक राजा की बात तो जानते हैं । कृष्ण भगवान के भाई बलराम की बात हम जानते हैं । कोई भी बड़ा परिवार होगा, हमारे यहाँ किसानी और खेती, हमारे जैसे देश में सिर्फ कल्टीवेशन और क्रॉप नहीं है, बल्कि हमारे यहाँ एग्रीकल्चर एक प्रकार से समाज-जीवन के कल्चर का हिस्सा रहा है । हम उसी हिस्से को लेकर कह रहे हैं और यह हमारी संस्कृति ही है । हमारे पर्व हों,त्यौहार हों,हमारे गीत हों,सब चीजें फसल बोने के समय के साथ या फसल काटने के समय के साथ जुड़ी हुई रहती हैं । यह हमारे यहाँ पर परम्परा रही है । हमारे जितने लोकगीत हैं, वे भी किसानी से जुड़े हुए होते हैं, फसल से जुड़े हुए होते हैं और त्यौहार भी उसी से जुड़े हुए रहते हैं । हमारे देश की विशेषता देखिए,हमारे यहाँ किसी को आशीर्वाद देते हैं या शुभकामना देते हैं तो उसके साथ धन-धान्य शब्द उपयोग करते हैं । हमारे यहाँ धन और धान्य को अलग नहीं करते हैं । सिर्फ धन भी नहीं होता है और धान्य भी कोई शब्द नहीं होता है, धन-धान्य बोला जाता है । हमारे यहाँ धान्य का यह मूल्य, यह महत्व समाज जीवन का हिस्सा है और जो स्थितियां बदली हैं, उसे फिर से पटरी पर लाने के लिए प्रयास करने की आवश्यकता है ।

       मैंने राज्य सभा के अन्दर विस्तार से छोटे किसानों के संबंध में बात कही है । देश के 80-85 प्रतिशत वर्ग को उपेक्षित रखकर देश का भला नहीं कर सकते हैं । हमें उसके लिए कुछ सोचना ही होगा और बड़ी नम्रता के साथ सोचना होगा । मैंने गिनकर बताया है कि छोटे किसानों की कैसे उपेक्षा हुई है । किसानों के नाम पर हुई है । उसमें एक बदलाव बहुत जरूरी है और जब छोटा किसान जाग जाएगा तो जवाब आपको भी देना पड़ेगा यह मैं पूरी तरह समझता हूँ । हमारे यहाँ जैसे-जैसे आबादी बढ़ रही है,वैसे-वैसे जमीन का टुकड़ा छोटा होता जा रहा है । परिवार के अन्दर जमीन बँट जाती है । चौधरी चरण सिंह जी ने तो एक जगह पर यह कहा हुआ है कि हमारे यहाँ किसान की जमीन की मालिकी इतनी कम हो रही है कि एक स्थिति ऐसी आएगी कि अगर उसे अपने खेत में ही ट्रेक्टर को टर्न करना होगा तो वह नहीं कर पाएगा । इतना ही जमीन का टुकड़ा होगा । यह चौधरी चरण सिंह जी के शब्द हैं । ऐसी चिंता हमारे महापुरुषों ने हमारे सामने की है, तो हमें भी तो कुछ न कुछ व्यवस्थाएं करनी होंगी । आजादी के बाद हमारे देश में 28 प्रतिशत खेतीहर मजदूर थे । 28 परसेंट लैंडलेस लेबरर थे । 10 साल पहले जो सेंसेस हुआ उसके तहत खेतीहर मजदूर की जनसंख्या 28 से 55 परसेंट हो गई । अब यह किसी भी देश के लिए चिंता का विषय होना चाहिए कि 28 परसेंट से हमारा खेतीहर मजदूर 55 परसेंट पर पहुँच गया है और जमीन कम होने के कारण खेती से जो रिटर्न मिलना चाहिए, वह नहीं मिलने के कारण उसके जीवन में ये मुसीबतें आई हैं और वह किसी और के खेत में जाकर मजदूरी करने पर मजबूर हो गया है ।

दुर्भाग्य है कि हमारे देश में खेती में जो निवेश होना चाहिए, वह नहीं हो रहा है । सरकार उतना कर नहीं पा रही है, राज्य सरकारें भी नहीं कर पा रही है और किसान खुद भी नहीं कर पा रहा है, उससे जो कुछ भी निकलता है, बच्चों को पालने और पेट भरने में चला जाता है, इसलिए निवेश की बहुत बड़ी आवश्यकता है । जब तक हम निवेश नहीं लाएंगे,जब तक हम अपनी खेती को आधुनिक नहीं करेंगे,जब तक हम छोटे से छोटे किसान की भलाई के लिए व्यवस्थाएं विकसित नहीं करेंगे,तब तक हम देश के एग्रीकल्चर सेक्टर को ताकतवर नहीं बना सकते हैं । इसलिए, हमारा किसान आत्मनिर्भर बने,उसको अपनी उपज बेचने की आज़ादी मिले, उस दिशा में हमें काम करने की आवश्यकता है । हमारा किसान सिर्फ गेहूं और चावल तक सीमित रहे, उससे भी बात बनने वाली नहीं है । दुनिया में मार्केट क्या है, आज उसके लिए रिसर्च हो रहे हैं । उस प्रकार की चीजों का वह उत्पादन करे और उन चीजों को दुनिया के बाजार में बेचे । भारत की आवश्यकताएं हैं, हम बाहर से चीजें न लाएं । मुझे याद है,बहुत पहले जब मैं यहां नॉर्थ पार्ट में संगठन का काम करता था,मुझे फारूख साहब के साथ भी काम करने का काफी मौका मिला,तब मुझे हरियाणा का एक किसान अपने खेत में ले गया । उसने बड़ा आग्रह किया, तो मैं चला गया । उसकी छोटी सी जगह थी,शायद उसकी एक या दो बीघे जमीन थी, लेकिन बहुत प्रगति की थी । वह मेरे पीछे पड़ा कि आइए, आइए । मैंने कहा कि है क्या बात?फिर बोले कि एक बार आइए, तब देखिए । फिर मैं उसके यहां गया । करीब तीस-चालीस साल पहले की बात है, तीस साल हो गए । उन्होंने क्या किया, दिल्ली के फाइव स्टार होटल्स में जो चीजें, सब्जियां वगैरह विदेशों से लाते थे, उसने उसकी स्टडी की । अगर उनको छोटे कॉर्न चाहिए,उनको छोटे टमाटर चाहिए तो उसने अपनी उस छोटी सी जगह में, रिस्ट्रिक्टेड वातावरण के अंदर लोगों की मदद लेकर वह फसल तैयार की । मजा है कि दिल्ली के फाइव स्टार होटलों में उसका माल जाना शुरू हो गया । हमारे देश में थोड़ा सा बदलाव करें, क्या हमने कभी सोचा है कि स्ट्रॉबेरी,हम बाई एंड लार्ज मानते हैं कि वह ठण्डे प्रदेशों में होती है । मैं देख रहा हूं कि कच्छ के रेगिस्तान में स्ट्रॉबेरी हो रही है । मैं देख रहा हूं कि मध्य प्रदेश के अंदर, उत्तर प्रदेश के अंदर स्ट्रॉबेरी हो रही है । बुंदेलखण्ड में, जहां पानी की दिक्कत है,वहां हो रही है । इसका मतलब है कि हमारे यहां संभावनाएं हैं । हमारे किसान को हम गाइड करके इन नई-नई चीजों पर ले जाएंगे,मैं जरूर मानता हूं कि हमारे देश का किसान आगे आएगा । यह ठीक है कि उसका अनुभव ऐसा है कि उसे हिम्मत देनी पड़ती है, उसका हाथ पकड़ना पड़ता है, उसको साथ लेकर चलना पड़ता है और अगर वह चल पड़ता है तो वह कमाल करके दिखाता है । उसी प्रकार से,कृषि के अंदर जितना नया निवेश बढ़ेगा, मैं मानता हूं कि रोजगार के अवसर भी बढ़ने वाले हैं और दुनिया में हमें एक नया मार्केट भी मिल सकता है । हमारे यहां ग्रामीण अर्थव्यवस्था में सुधार के लिए एग्रो-बिज़  इंडस्ट्री की संभावनाएं भी बढ़ेंगी, इसलिए हमें इस पूरे क्षेत्र को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में जरूर काम करना चाहिए । कई विपरीत परिस्थितियों में भी हमारे किसान ने रिकॉर्ड उत्पादन किया है और कोरोना काल में भी रिकॉर्ड उत्पादन किया है । यह हम सबकी जिम्मेदारी है कि हमारे किसान की जो परेशानियां हैं, वे कम हों । उनके सामने जो चुनौतियां हैं,उनको कम करने के लिए हम कुछ कदम उठाएं और इन कृषि सुधारों से हम उस दिशा में कुछ न कुछ करने का प्रयास कर रहे हैं । हम किसानों को एक बराबरी का प्लेटफार्म दे पाएं, आधुनिक टेक्नोलॉजी दे पाएं, उनके अंदर एक नया आत्मविश्वास भर पाएं, इस दिशा में सकारात्मक सोच की बहुत आवश्यकता है । पुरानी सोच,पुराने मानदण्ड अगर किसानी का भला कर पाते तो बहुत पहले कर पाते । सेकण्ड ग्रीन रिवोल्यूशन की बातें हमने कर लीं, अब हमें नए तौर-तरीके लेकर आगे बढ़ने की जरूरत है । सबको इस पर चिन्तन करना चाहिए । यह राजनीति का विषय नहीं होना चाहिए । यह देश की भलाई के लिए बहुत आवश्यक है और मिल-बैठकर हमें उस पर सोचना चाहिए । सभी दल,चाहे सत्ता में हों या विपक्ष में, यह हम सबका दायित्व है और हम 21वीं सदी में, 18वीं सदी की सोच से अपने एग्रीकल्चर सेक्टर की चुनौतियों को पूरा नहीं कर सकते हैं । उसी को हमें बदलना होगा । कोई नहीं चाहता है कि हमारा किसान गरीबी के चक्र में फंसा रहे,उसको जिन्दगी जीने का हक न मिले । मैं मानता हूं कि उसको आश्रित न रहना पड़े, उसे पराधीन न रहना पड़े, सरकारी टुकड़ों पर पलने के लिए मजबूर न रहना पड़े, यह जिम्मेवारी भी हम सबकी है और उस जिम्मेवारी को निभाना है । हमारा अन्नदाता समृद्ध हो, हमारा अन्नदाता देश के लिए कुछ और ज्यादा देश के लिए कर सके तो बहुत अच्छा होगा ।

       सरदार वल्लभ भाई पटेल एक बात कहते थे, वह कहते थे – स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद भी यदि परतंत्रता की दुर्गंध आती रहे तो स्वतंत्रता की सुगंध नहीं फैल सकती । जब तक हमारे छोटे किसान को नए अधिकार नहीं मिलते, तब तक पूर्ण आजादी की उनकी बात अधूरी रहेगी । इसलिए बड़ा बदलाव करके हमें, हमारे इन किसानों को एक लंबी यात्रा के लिए तैयार करना होगा और हम सबको मिलकर करना होगा । कुछ गलत करने के इरादे से नहीं होना चाहिए, अच्छा करने के इरादे से होना चाहिए, किसी की भलाई करने के लिए होना चाहिए ।

       हमारी सरकार ने अगर आप हर कदम पर देखेंगे तो छोटे किसानों के लिए हमने बीज से बाजार तक पिछले 6 वर्षों में अनेक ऐसे इंटरवेंशन किए हैं, जो छोटे किसान की मदद कर सकते हैं,छोटे किसानों को लाभ दे सकते हैं । जैसे, डेयरी सेक्टर और कोऑपरेटिव सेक्टर,सशक्त भी हैं और उनका एक मजबूत वैल्यु चेन भी बना है । सरकार का दखल कम से कम है, फिर भी वह अपनी मजबूती पर आया है । हम धीरे-धीरे फल, फूल,सब्जी की तरफ बल दे सकते हैं और उसके बाद धान्य की तरफ बल दे सकते हैं, हम बहुत ताकतवर बना सकते हैं । हमारे पास मॉडल है, सफल मॉडल है । हमें उस सफल मॉडल का प्रयोग करना चाहिए,हमें उनको वैकल्पिक बाजार देना चाहिए ।

       हमने दूसरा महत्वपूर्ण कार्य दस हजार फार्मर प्रोड्यूसर ऑर्गेनाइजेशन का किया है । ये किसानों के लिए,छोटे किसानों के लिए एक बहुत बड़ी ताकत के रूप में उभरने वाले हैं । एफपीओज़ बनाने का महाराष्ट्र में विशेष प्रयोग हुआ है । कई और राज्यों ने भी, जैसे केरल में भी कम्युनिस्ट पार्टी के लोग काफी मात्रा में एफपीओज़ बनाने के काम में लगे हुए हैं । इसके कारण किसान अपना बाजार ढूंढने के लिए एक सामूहिक शक्ति के रूप में उभरेगा । इन दस हजार एफपीओज़ के बनने के बाद आप देखना, गांव के अंदर किसान छोटे हैं, बाजार की ताकत किसान डिक्टेट करेगा,वह बन जाएगी और किसान ताकतवर बनेगा, यह मेरा पूरा विश्वास है । इन एफपीओज़ के माध्यम से बैंक से पैसा भी मिल सकता है । वह छोटे-छोटे भण्डारण की व्यवस्था कर सकता है । अगर वह थोड़ी ज्यादा ताकत इकट्ठी करे तो छोटे कोल्ड स्टोरेज भी बना सकता है ।

हमने एक लाख करोड़ रुपया एग्रीकल्चर के इन्फ्रास्ट्रक्चर के लिए भी तय किया है और उसको हम स्वयं सहायता समूह, यानी इन सेल्फ हेल्प ग्रुप्स में भी करीब सात करोड़ बहनें जुटी हैं । गांव की बहनें,अल्टीमेटली वे किसान की ही बेटियां होती हैं,किसी न किसी खेती से जुड़े हुए परिवार की बेटियां होती हैं । वह नेटवर्क आज किसानों की भलाई में काम आ रहा है । वे इकोनॉमिक एक्टिविटी के सेंटर बनते जा रहे हैं । इनके द्वारा भी मुझे याद है,गुजरात में वलसाड जिले में आदिवासियों के पास जमीन भी काफी ऊपर-नीचे है, अनईवन लैंड है और बहुत छोटी जमीन है । हमने एक वाडी प्रोजेक्ट किया था । अब्दुल कलाम जी एक दिन अपना जन्मदिन वहां मनाने के लिए आए थे । उन्होंने कहा कि मुझे कोई प्रोटोकॉल नहीं चाहिए, मैं इन किसानों के साथ रहना चाहता हूं । वह बड़ा सक्सेसफुल प्रयोग था । उस आदिवासी बेल्ट के अंदर महिलाएं काफी काम करती थीं । मशरूम, काजू, वे गोआ की बराबरी का काजू पैदा करने लग गए थे और उन्होंने मार्केट प्राप्त किया था । छोटे किसान थे, छोटी जगह थी, लेकिन प्रयत्न किया तो परिणाम मिला और अब्दुल कलाम जी ने इसके विषय में लिखा भी है । उन्होंने आकर देखा था । मैं कहता हूं कि हमें नए प्रयासों की दिशा में जाना चाहिए ।  

       हमारे यहां दाल की कठिनाई थी । मैंने 2014 में आकर किसानों के सामने रिक्वेस्ट की । उन्होंने देश के अंदर हमें दाल की कठिनाइयों से मुक्त कर दिया और उनको बाजार भी मिल गया । मैं देख रहा हूं आजकल ऑनलाइन, ऑफलाइन,ई-नाम के द्वारा भी गांव का किसान भी अपना माल बेच रहा है ।

       हमने ‘किसान रेल’ का एक प्रयोग किया, इस कोरोना कालखण्ड का उपयोग करते हुए । यह ‘किसान रेल’और ‘किसान उड़ान’, इनसे भी अपने आप में बड़े बाजारों तक छोटे किसानों को पहुंचाने में एक बहुत बड़ी मदद मिली है । एक प्रकार से यह ट्रेन जो है, चलता फिरता कोल्ड स्टोरेज है । मैं सदन के सदस्यों से जरूर कहना चाहूंगा कि यह किसान रेल कहने को तो सामान ढोने वाली व्यवस्था है, लेकिन उसने दूर-सुदूर गांवों के छोटे किसानों को अन्य राज्य के दूसरे बाजार के साथ जोड़ दिया । अब देखिए, नासिक से किसान मुजफ्फरनगर के व्यापारी से जुड़ा और उसने क्या भेजा,उसकी ताकत बढ़ी हुई थी । उसने 30 किलो अनाज वहां से ‘किसान रेल’से भेजा और खर्चा कितना हुआ - 124 रुपए । उसको बड़ा बाजार मिल गया । यह तीस किलो इतनी छोटी चीज है कि शायद इसे कोई कुरियर वाला भी नहीं ले जाता, लेकिन यह व्यवस्था थी,तो यहां का किसान वहां तक जा कर अपना माल बेच पाया है । उसी प्रकार से उसको जो भी सुविधा मिलती है, मैंने देखा है कि किसी ने अंडे भेजे हैं । उसको अंडे भेजने में 60 रुपए खर्च हुए । उसके अंडे समय पर वहां पहुंच गए और उसका माल बिक गया । देवलाली के एक किसान ने सेवेन केजी कीवी को दानापुर भेजा । उसको कीवी भेजने में 62 रुपए खर्च हुए, लेकिन उसको सात किलोग्राम कीवी के लिए अच्छा बाजार मिला और दूसरे राज्य में जा कर मिला । ‘किसान रेल’ छोटी बात लगती है, लेकिन कितना बड़ा परिवर्तन कर सकती है, इसका हम नमूना देखते हैं ।

       माननीय अध्यक्ष जी, चौधरी चरण सिंह जी ने एक किताब लिखी है – भारत की अर्थनीति । ‘भारत की अर्थनीति’किताब में चौधरी साहब ने सुझाव दिया है – सारे देश को खाद्यान्न के लिए एक ही क्षेत्र मान लिया जाए । दूसरे शब्दों में, देश के एक भाग से दूसरे भाग में लाने-जाने पर कोई प्रतिबंध न हो । यह चौधरी चरण सिंह जी की किताब का कोट है । कृषि सुधारों,किसान रेल,इलेक्ट्रॉनिक प्लेटफॉर्म, ई-नाम, ये सारी चीजें हमारे देश के छोटे किसानों को एक बहुत बड़ा अवसर देने के प्रयास के रूप में हो रहा है ।

       माननीय अध्यक्ष जी, जो लोग इतनी बातें करते हैं,इतने सालों तक सरकार चलाई है,मैं नहीं मानता हूं कि उनको किसानों की दिक्कत का पता नहीं था या उनको समझ नहीं थी । उनको पता भी था और समझ भी थी । आज मैं उनको उन्हीं की बात याद कराना चाहता हूं, मैं जानता हूं कि वे मौजूद नहीं है, लेकिन देश के लिए समझना बहुत जरूरी है । मैं एक कोट पढ़ता हूं :-

“The State took initiative to amend their State APMC Act in the year 2005 itself providing for direct marketing, contract farming, setting up of a private market, consumer/farmer markets, e-trading, and notified the rules in 2007 to implement the amended provisions. In fact, 24 private markets have already come up in the State.” यह किसने कहा था,यह एपीएमसी एक्ट बदल दिया है, इस बात को कौन गर्व से कह रहा था, ऐसे 24 बाजार बन चुके हैं, इसका गौरव कौन कर रहा था,डॉ. मनमोहन सिंह जी के सरकार के कृषि मंत्री श्रीमान शरद पावर जी यह गर्व की बात कर रहे थे । मैं यह उनका कोट कह रहा हूं । अब आज एकदम से वे उल्टी बात कर रहे हैं । इसलिए शक होता है कि आखिर आपने किसानों को भ्रमित करने के लिए यह रास्ता क्यों चुना है? देश की मंडिया चल रही हैं, सिंडकेटिंग और कीमतों को प्रभावित करने वाले नेक्सस के बारे में जब उनसे एक सवाल पूछा गया था कि मंडियो वगैरह का नेक्सस है, इसके बारे में आप का क्या कहना है, तो शरद पवार का एक दूसरा जवाब है,वह भी बड़ा इट्रेस्टिंग है । उन्होंने कहा था कि किसानों के बचाव के लिए ही तो एपीएमसी रिफॉर्म को प्रमोट किया जा रहा है,ताकि किसानों को एपीएमसी मंडियों का विकल्प मिले । जब ज्यादा व्यापारी रजिस्टर्ड होंगे,तब स्पर्धा बढ़ेगी और मंडी में सांठ-गांठ इससे खत्म होगी । ये बात उन्होंने कही है और इसलिए मैं समझता हूं कि इन बातों को हमें समझना होगा । जहां इनकी सरकारें हैं, अलग-अलग सामने बैठे हुए मित्रों की,उन्होंने भी कम या अधिक मात्रा में इस कृषि क्षेत्र में रिफॉर्म करने का प्रयास किया है । हम तो वे हैं,जिन्होंने 1,500 कानून खत्म किए थे । हम प्रोग्रेसिव पॉलिटिक्स में विश्वास करते हैं । हम रिग्रेसिव पॉलिटिक्स में नहीं जाना चाहते हैं । भोजपुरी में एक कहावत है,कुछ लोग ऐसे हैं कि ‘न खेलब न खेले देब, खेलवे बिगाड़ब’अर्थात् न खेलूंगा,न खेलने दूंगा,मैं खेल को बिगाड़ कर रखूंगा ।…(व्यवधान)
श्री हनुमान बेनीवाल (नागौर):काले कानून खत्म करो ।…(व्यवधान)
श्रीनरेन्द्रमोदी: माननीय अध्यक्ष जी, देश का सामर्थ्य बढ़ाने में सभी का सामूहिक योगदान है । कश्मीर से कन्याकुमारी तक, कच्छ से लेकर कामाख्या तक, जब हर भारतीय का पसीना लगता है, तब जाकर देश आगे बढ़ता है । मैं कांग्रेस के साथियों को याद दिलाना चाहता हूं कि देश के लिए पब्लिक सेक्टर जरूरी है, तो प्राइवेट सेक्टर की भागीदारी भी उतनी ही आवश्यक है ।
       सरकार ने मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग को प्रोत्साहित किया, प्राइवेट पार्टियां आई,मैन्युफैक्चरर्स आए । आज गरीब से गरीब परिवार तक स्मार्ट फोन पहुंच रहा है । टेलीकॉम स्पर्धा को प्रोत्साहित किया गया, तो मोबाइल पर बात करना करीब-करीब जीरो हो गया और दुनिया में सबसे सस्ता डेटा आज हिन्दुस्तान में है । यहां तक की हमारी फार्मा इंडस्ट्री,हमारे वैक्सीन निर्माता क्या ये सारे सरकारी हैं? अगर आज भारत मानवता के काम आ रहा है, तो हमारे इस प्राइवेट सेक्टर का भी इसमें बहुत बड़ा रोल है,प्राइवेट एन्टरप्राइज़ का रोल है । हमें हमारे देश के नौजवानों पर भरोसा होना चाहिए । हमारे देश के नौजवानों पर भरोसा रखना चाहिए । इस प्रकार से कोसते रहेंगे,उनको नीचा दिखाते रहेंगे और हम किसी भी प्राइवेट एक्टिविटी को नकार देंगे,कोई जमाना होगा,जब सरकार सब कुछ करेगी । उस जमाने में जरूर हुआ होगा, किया होगा । आज दुनिया बदल चुकी है । समाज की अपनी ताकत है,देश के अंदर ताकत है । हर किसी को अवसर मिलना चाहिए । उनको इस प्रकार से बेईमान घोषित करना, उनके लिए गंदी भाषा का प्रयोग करना, ये कल्चर किसी जमाने में वोट पाने के लिए काम आया होगा । आज यह काम आने वाला नहीं है । मैंने लाल किले से बोला कि वेल्थ क्रिएटर भी देश के लिए जरूरी होते हैं, तभी तो वेल्थ बांटेंगे । गरीब तक वेल्थ बांटेंगे कहां से, रोज़गार कैसे देंगे और सब कुछ बाबू ही करेंगे, आईएएस बन गया, तो वह फर्टिलाइजर कारखाना भी चलाएगा । आईएएस हो गया, तो वह केमिकल का कारखाना भी चलाएगा । आईएएस हो गया, तो वह हवाई जहाज भी चलाएगा । हमने ये कौन सी बड़ी ताकत बना कर रख दी है? बाबुओं के हाथ में देश देकर हम क्या करने वाले हैं? हमारे बाबू भी तो देश के हैं, तो देश का नौजवान भी तो देश का है । हम हमारे देश के नौजवानों को जितना ज्यादा अवसर देंगे, मुझे लगता है उसे उतना ही लाभ होने वाला है ।
       माननीय अध्यक्ष जी, जब तथ्यों के आधार पर बात नहीं टिकती है,तो ऐसा होता है, जो अभी देखा । आशंकाओं को हवा दी जाती है, ये हो जाएगा,वो हो जाएगा और ये महौल आंदोलनजीवी पैदा करते हैं ।
        माननीय अध्यक्ष जी, किसान आंदोलन की पवित्रता और मैं बहुत जिम्मेवारी के शब्द प्रयोग करता हूं । मैं किसान आंदोलन को पवित्र मानता हूं और भारत के लोकतंत्र में आंदोलन का महात्मय है और रहने वाला है और जरूरी भी है । लेकिन जब आंदोलनजीवी पवित्र आंदोलन को अपने लाभ के लिए बर्बाद करने के लिए निकलते हैं, तब क्या होता है? कोई मुझे बताए कि तीन किसान कानून की बात हो और दंगाबाज़ लोग, जो जेल में हैं, संप्रदायवादी लोग जो जेल में हैं, आतंकवादी लोग जो जेल में हैं, नक्सलवादी लोग जो जेल में हैं, उनकी फोटो लेकर उनकी मुक्ति की मांग करना,यह किसानों के आंदोलन को अपवित्र करने का प्रयास है कि नहीं ।
       माननीय अध्यक्ष जी, इस देश में टोल प्लाजा सभी सरकारों की स्वीकार की हुई एक व्यवस्था है और उस टोल प्लाजा को तोड़ना, उस टोल प्लाजा पर कब्जा करना, उस टोल प्लाजा को न चलने देना,ये जो तरीके चले हैं, ये तरीके क्या पवित्र आंदोलन को कलंकित करने का प्रयास है कि नहीं? जब पंजाब की धरती पर सैकड़ों की तादाद में टेलीकॉम के टावर तोड़ दिए जाएं,क्या वह किसान की मांग से सुसंगत हैं? …(व्यवधान)
17.36 hrs At this stage, Shri Sudip Bandyopadhyay and Prof. Sougata Ray left the House.

किसान के पवित्र आंदोलन को बर्बाद करने का काम आंदोलनकारियों ने नहीं,बल्कि आंदोलन जीवियों ने किया हुआ है । इसलिए देश को आंदोलनकारियों और आंदोलन जीवियों के बीच फर्क करना बहुत जरूरी है और देश को इन आंदोलन जीवियों से बचाना,वह भी उतना ही जरूरी है । अफवाहें फैलाना, झूठ फैलाना, गुमराह करना और देश को दबोच कर रख देना । देश बहुत बड़ा है, देश के सामान्य आदमी की आशा-आकांक्षाएं बहुत हैं, हमें उनको लेकर आगे बढ़ना है और हम उस दिशा में प्रयास कर रहे हैं । देश में एक बहुत बड़ा वर्ग है । ये वर्ग, उनकी एक पहचान है, talking the right things. यानी हमेशा सही बात बोलना । सही बात कहने में कोई बुराई भी नहीं है, लेकिन इस वर्ग को ऐसे लोगों से नफरत और चिढ़ है,जो doing the right things पर चलते हैं । ये फर्क समझने जैसा है । Talking the right things की वकालत करने वाले, जब doing the right things की बात आती है, तो उसी के सामने खड़े हो जाते हैं । ये चीजों को सिर्फ बोलने में विश्वास करते हैं, अच्छा करने में उनका भरोसा ही नहीं है । जो लोग इलेक्टोरल रिफॉर्म की बात करते हैं, ‘वन नेशन वन इलेक्शन’की जब बात आती है, तो विरोध में खड़े हो जाते हैं । यही लोग जब जेंडर जस्टिस की बात आती है, तो बढ़-चढ़कर बोलते हैं, लेकिन अगर ट्रिपल तलाक खत्म करने की बात आती है,तो विरोध में खड़े हो जाते हैं । ये एन्वायरमेंट की बात करते हैं,लेकिन हाइड्रो पावर या न्यूक्लियर पावर के सामने जाकर झंडे लेकर खड़े हो जाते हैं,यह होना नहीं चाहिए, इसके लिए आंदोलन चलाते हैं, तमिलनाडु तो उसका भुक्तभोगी है । उसी प्रकार से जो दिल्ली में पॉल्यूशन को लेकर कोर्ट में जाकर रिट करते है, अपील करते हैं,पीआईएल करते हैं, दिल्ली के लोग, वही लोग पराली जलाने वालों के समर्थन में खड़े हो जाते हैं, तब समझ में नहीं आता है कि किस प्रकार से इस देश को गुमराह करने का इन लोगों का प्रयास है और उसे देश को समझने की जरूरत है ।

       मैं देख रहा हूं कि इन 6 सालों में विपक्ष के मुद्दे कितने बदल गए हैं । हम भी कभी विपक्ष में थे,लेकिन हम जब भी विपक्ष में थे, तो आपने देखा होगा कि देश के विकास के मुद्दों को लेकर, भ्रष्टाचार के मुद्दों को लेकर हम शासन में बैठे हुए लोगों को घेरते थे, हम आवाज उठाते थे, हम प्रयास करते थे । मैं हैरान हूं, आजकल विकास के मुद्दे की चर्चा ही नहीं करते हैं,मैं इंतजार करता हूं कि ऐसे मुद्दे उठाएं, ताकि हमें कुछ बोलने का मौका मिले कि हम क्या कर रहे हैं, लेकिन हमें वह मौका नसीब ही नहीं हो रहा है, क्योंकि इनके पास इन मुद्दों पर बोलने के लिए कुछ रहा नहीं है । इसलिए वे न कितनी सड़कें बनी पूछते हैं, न कितने पुल बने पूछते हैं, न बॉर्डर मैनेजमेंट में क्या हुआ है, कितनी पटरियां बिछी हैं, इन सारे विषयों पर उन्हें चर्चा करने में इंट्रेस्ट नहीं है ।

       माननीय अध्यक्ष जी, 21वीं सदी में इंफ्रास्ट्रक्चर का बहुत बड़ा महत्व है और भारत को आगे जाना है, तो इंफ्रास्ट्रक्चर पर बल देने की बहुत जरूरत है और आत्मनिर्भर भारत के रोडमैप के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर पर बल देना, यह समय की मांग है और हम सबको इसे स्वीकार करना होगा । इंफ्रास्ट्रक्चर मजबूत होगा, तभी देश की गति भी तेज होने वाली है, उसकी दिशाएं भी व्यापक होने वाली हैं । हमें इसीलिए प्रयास करना चाहिए । इंफ्रास्ट्रक्चर का मतलब है गरीब के लिए, मध्यम वर्ग के लिए अनेक नई संभावनाओं को इंफ्रास्ट्रक्चर जन्म देता है । नए अवसरों को जन्म देता है । रोज़गार के नए अवसर लेकर आता है । इकोनॉमी को मल्टीप्लायर इफेक्ट करने की उसकी ताकत रहती है और इसीलिए हमें इस बात पर बल देने की जरूरत है ।

इंफ्रास्ट्रक्चर का मतलब वोट बैंक का अवसर नहीं होता है । कागज पर घोषित कर देना कि यह रोड बनेगा,एक चुनाव जीत गए । कुछ दिन बाद वहाँ जाकर सफ़ेद पट्टी करवा दो,दूसरा चुनाव जीत लो । तीसरी बार वहाँ जाकर थोड़ी मिट्टी डाल दो । इंफ्रास्ट्रक्चर इस काम के लिए नहीं है । सचमुच में,जीवन बदलने के लिए और व्यवस्थाओं को बदलने के लिए हमें इंफ्रास्ट्रक्चर पर बल देने की आवश्यकता है । इसलिए बजट में इस पर 110 लाख करोड़ रुपए खर्च करने की अभूतपूर्व  योजना के साथ हम चल रहे हैं ।

       देश के 27 शहरों में मेट्रो ट्रेन,छ: लाख से ज्यादा गाँवों में तेज इंटरनेट,बिजली के क्षेत्र में ‘वन नेशन,वन ग्रिड’ के कांसेप्ट को साकार करने में हम सफल हुए हैं । सोलर पॉवर सहित रीन्यूएबल एनर्जी के मामले में दुनिया के पाँच शीर्ष देशों में भारत ने अपनी जगह बना ली है । दुनिया का सबसे बड़ा सोलर और विंड एनर्जी से संबंधित हाइब्रिड पार्क आज भारत में बन रहा है । विकास में हम एक नयी तेजी देख रहे हैं, हम एक नये पैमाने पर जा रहे हैं ।

       हमने देखा है कि जहाँ-जहाँ असमानता है, खासकर पूर्वी भारत में, हमें देश के पूर्वी भारत के विकास को उस स्थिति पर लाना होगा ताकि पश्चिम भारत की जो आर्थिक व्यवस्थाएं हैं, उनकी वह तुरन्त बराबरी करे, तो देश के प्रगति की संभावना बढ़ेगी । इसलिए हमने पूर्वी भारत के विकास पर विशेष बल दिया है । चाहे गैस पाइपलाइन बिछाने की बात हो, रोड बनाने की बात हो,एयरपोर्ट बनाने की बात हो, रेलवे लाइन बिछाने की बात हो या इंटरनेट कनेक्टिविटी की बात हो, हम सभी क्षेत्रों में आगे बढ़े हैं । इतना ही नहीं वॉटरवेज़ के द्वारा नॉर्थ-ईस्ट के राज्यों को जोड़ने का एक बहुत बड़ा भगीरथ प्रयास चल रहा है । मुझे लगता है, हमारा यह फोकस है कि देश को एक संतुलित विकास की तरफ ले जाना चाहिए । देश में एक भी क्षेत्र पीछे न रह जाए,उस प्रकार से विकास की अवधारणा को लेकर हमने आगे चलने का काम किया है । इसलिए ईस्टर्न इंडिया पर हम मिशन मोड में काम कर रहे हैं ।

       दर्जनों जिलों में सीएनजी, पीएनजी, सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन का जाल बिछाने में हम सफल हुए हैं । गैस पाइपलाइन पहुंचने के कारण फर्टिलाइजर के उत्पादन में भी तेजी आई है । फर्टिलाइजर के जो कारखाने बंद पड़े थे, उनको दोबारा खोलने की संभावना पैदा हुई है क्योंकि हमने गैस इंफ्रास्ट्रक्चर के ऊपर बल दिया,हमने उन पाइपलाइंस को लगाने के ऊपर बल दिया ।

       माननीय अध्यक्ष जी, हम कई वर्षों से डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर की बात सुनते आए हैं । लेकिन पहले डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर का क्या हाल था?जब उनको सेवा करने का मौका मिला था, तो सिर्फ एक किलोमीटर काम हुआ था । आज छ: साल में करीब-करीब छ: सौ किलोमीटर काम हुआ है यानी उस पर ट्रेन चलनी शुरू हो गयी है, उस पर माल ढोने का काम शुरू हो गया और वह सेक्शन काम कर रहा है ।

       यूपीए के समय में, अगर मैं बॉर्डर इंफ्रास्ट्रक्चर की बात करूँ, तो किसी भी देश की रक्षा के  लिए बॉर्डर इंफ्रास्ट्रक्चर बहुत महत्त्व रखता है । लेकिन उसके प्रति इतनी उदासीनता की गई, इतनी लापरवाहियाँ की गईं, देश के अन्दर हम उन विषयों की पब्लिकली चर्चा नहीं कर सकते हैं क्योंकि यह देश की सिक्युरिटी की दृष्टि से अच्छा नहीं है, लेकिन यह चिन्ता का विषय है । चूंकि वहाँ लोग नहीं हैं,वोट्स नहीं हैं,तो जरूरत महसूस नहीं हुई । ऐसा लगा कि फौजी आदमी जब जाएगा, तो जाएगा, देखा जाएगा, क्या होने वाला है?यह इसी सोच का परिणाम था । इतना ही नहीं, एक बार तो एक रक्षा मंत्री ने पार्लियामेंट में कह दिया था कि हम बॉर्डर पर इसलिए इंफ्रास्ट्रक्चर निर्माण नहीं करते हैं क्योंकि कहीं दुश्मन देश उस इंफ्रास्ट्रक्चर का उपयोग न कर ले । कमाल के हो भाई!इस सोच को बदलकर,जो अपेक्षाएं और आयोजन थे, उनका एक बहुत बड़ा हिस्सा हमने आज बॉर्डर इंफ्रास्ट्रक्चर की दिशा में पूर्ण किया है ।

       जहाँ तक एलएसी पर ब्रिजेज़ की बात है, मेरा अंदाज है कि ऑलरेडी लगभग 75 ब्रिजेज़ के काम एलएसी पर तेजी से चल रहे हैं ।

       हमने सैंकड़ों किलोमीटर रोड्स बनाए हैं । मैं चाहता हूँ कि हमारे सामने जो काम थे, उनमें से करीब-करीब 75 परसेंट काम को हमने पूरा भी कर लिया है और आगे भी हम इस काम को जारी रखेंगे ।

       इंफ्रास्ट्रक्चर के अलग-अलग क्षेत्र होते हैं । उसी प्रकार से आप देखें हिमाचल प्रदेश में अटल टनल है । उसका हाल क्या था? अटल जी के समय में जिसकी कल्पना की गई,लेकिन अटल जी के जाने के बाद वह किसी-न-किसी फाइल में लटका रहा, अटका रहा । एक बार छोटा-सा काम हुआ, फिर अटक गया ।

       ऐसे ही करते-करते समय चला गया । पिछले छ: सालों में हम इसके पीछे लगे और आज अटल टनल काम कर रहा है, देश की फौज भी आराम से, वहां से मूव कर रही है और देश के नागरिक भी मूव कर रहे हैं । …(व्यवधान)जो रास्ते,जो इलाके छ:महीनों तक बंद रहते थे, वे आज काम करने लगे है । …(व्यवधान)अटल टनल काम कर रहा है और इसी प्रकार से मैं यह बात साफ कहना चाहूंगा कि जब भी देश के सामने कोई चुनौती आती है, यह देश का सामर्थ्य है,हमारे देश के सुरक्षा बलों का सामर्थ्य है,देश को कभी नीचा देखना पड़े, ऐसी स्थिति हमारे फौज के जवान कभी नहीं आने देंगे,यह मेरा पूरा विश्वास है । …(व्यवधान)

       आज उनको जहां भी, जो भी जिम्मेदारी मिली है, वे बखूबी निभा रहे हैं । वे विपरीत प्राकृतिक परिस्थितियों के बीच में भी बहुत मुस्तैदी के साथ अपनी जिम्मेदारी निभा रहे हैं । हमें हमारे देश की सेना पर गर्व है, हमारे वीरों पर गर्व है, उनके सामर्थ्य पर हमें गर्व है । …(व्यवधान)देश हिम्मत के साथ अपने फैसले भी करता है और हम उसको आगे भी ले जा रहे हैं । मैंने कभी एक गज़ल सुनी थी । मुझे इसमें ज्यादा रुचि तो नहीं है, यह मुझे ज्यादा आता भी नहीं है, लेकिन उसमें लिखा था - 

मैं जिसे ओढ़ता-बिछाता हूं, वो गज़ल आपको सुनाता हूं ।

       मुझे लगता है कि ये जो साथी चले गए हैं,वे जिन चीज़ों के अंदर जीते हैं,पलते हैं, वे वही सुनाते रहते हैं । जो उनके कालखंड में उन्होंने देखा है, जो उनके कालखंड में उन्होंने किया है, उसी को वे कहते रहते हैं । इसलिए, मैं समझता हूं कि हमें अब चलना ही होगा,हमें बड़ी हिम्मत के साथ आगे बढ़ना ही होगा । मैंने कहा है कि पोस्ट-कोरोना का एक नया वर्ल्ड ऑर्डर जब हमारे सामने आ रहा है, तो भारत को कुछ नहीं बदलेगा की मानसिकता छोड़ देनी होगी । यह तो चलता है,चलता रहेगा कि मानसिकता छोड़ देनी पड़ेगी ।

इसमें 130 करोड़ देशवासियों का सामर्थ्य है । प्रॉब्लम्स होंगी,अगर मिलियन्स ऑफ प्रॉब्लम्स हैं, तो बिलियन्स ऑफ सॉल्युशन्स भी हैं । …(व्यवधान)यह देश ताकतवर है और इसलिए हमें अपनी संवैधानिक व्यवस्थाओं पर विशवास रखते हुए आगे बढ़ना होगा । …(व्यवधान)  मुझे विश्वास है कि हम इन बातों को लेकर आगे चलेंगे । यह बात सही है कि मिडिलमैन कल्चर खत्म हुआ है, लेकिन देश की मिडिल क्लास की भलाई के लिए बहुत तेजी से काम हो रहे हैं, जिसके कारण देश को आगे बढ़ाने में अब मिडिल क्लास का जो बल्क है, वह बहुत बड़ी भूमिका अदा करने वाला है । इसके लिए जो भी आवश्यक कानूनी व्यवस्थाएं करनी पड़ीं, वे कानूनी व्यवस्थाएं भी हमने की हैं ।

माननीय अध्यक्ष जी, एक प्रकार से विश्वास के साथ, एक प्रगति के वातावरण में देश को आगे ले जाने का निरंतर प्रयास चल रहा है । …(व्यवधान) मैं राष्ट्रपति जी का हृदय से आभारी हूं कि अनेक विषयों पर उन्होंने स्पर्श किया है । जिनका राजनीतिक एजेंडा है, वह उनको मुबारक, हम देश के एजेंडे को लेकर चलते हैं,देश के एजेंडे को लेकर चलते रहेंगे । …(व्यवधान) 

मैं फिर एक बार देश के किसानों से आग्रह करूंगा कि आइए,टेबल पर बैठकर,मिलकर समस्याओं का समाधान करें । इसी अपेक्षा के साथ राष्ट्रपति जी के भाषण को,राष्ट्रपति जी का धन्यवाद करते हुए मैं अपनी वाणी को विराम देता हूं ।

आपका बहुत-बहुत धन्यवाद ।

 

SHRI T. R. BAALU (SRIPERUMBUDUR): I would like to seek one clarification.…(Interruptions)

माननीय अध्यक्ष: माननीय सदस्य,आप सीनियर मेम्बर ऑफ पार्लियामेंट हैं, इसमें क्लैरिफिकेशन नहीं होता है ।

…( व्यवधान)

SHRI T. R. BAALU: We are walking out in protest. …(Interruptions)

17.49 hrs At this stage, Shri T.R. Baalu and some other hon. Members left the House.

माननीयअध्यक्ष: माननीय सदस्यगण, धन्यवाद प्रस्ताव पर सदस्यों द्वारा अनेक संशोधन प्रस्तुत किए गए हैं । अब मैं सभी संशोधनों को एक साथ सभा के सामने मतदान के लिए रखूंगा ।

संशोधन मतदान के लिए रखे गए तथा अस्वीकृत हुए ।

माननीय अध्यक्ष: अब मैं राष्ट्रपति जी के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव को मतदान के लिए रखता हूं ।

प्रश्न यह है:

“कि राष्ट्रपति की सेवा में निम्नलिखित शब्दों में एक समावेदन प्रस्तुत किया जाए :-
‘कि इस सत्र में समवेत लोक सभा के सदस्य राष्ट्रपति के उस अभिभाषण के लिए, जो उन्होंने 29 जनवरी, 2021 को एक साथ समवेत संसद की दोनों सभाओं के समक्ष देने की कृपा की है, उनके अत्यंत आभारी हैं’ ।”   प्रस्ताव स्वीकृत हुआ ।        
  ________ 17.50 hrs MATTERS UNDER RULE 377* माननीयअध्यक्ष: नियम 377 केअधीन मामले सभा पटल पर रखे जाते हैं । माननीय सदस्यगण, नियम 377 केअधीन मामलों को सभा पटल पर रख सकते हैं ।