Lok Sabha Debates
Members Of The House Made A Submission Regarding Unlawful And Arbitrary Verdict ... on 11 April, 2017
Sixteenth Loksabha an> Title: Members of the House made a submission regarding unlawful and arbitrary verdict of Pakistan Military Court imposing death sentence on former naval officer.
श्री मल्लिकार्जुन खड़गे (गुलबर्गा) : अध्यक्ष महोदया, यह बहुत ही महत्वपूर्ण विषय है, सभी लोग इसके लिए चिंतित हैं, सरकार भी चिंतित होगी और सारा देश चिंतित है कि पाकिस्तान में भारतीय जासूस होने के आरोप में मार्च, 2016 को गिरफ्तार किये गये, श्री कुलभूषण जाधव, जो भारतीय नौसेना के पूर्व अधिकारी हैं, को मौत की सजा सुनाई गई है। इसका ऐलान सोमवार को किया गया है। इंटर-सर्विसेज पब्लिकेशन रिलेशंस ने कहा है कि फील्ड जनरल कोर्ट मार्शल ने जाधव को मौत की सजा सुनाई है। सेना प्रमुख कमर जावेद बाजवा ने इसकी पुष्टि भी की है और आईसीपीआर ने संक्षिप्त बयान में भी कहा है कि भारतीय नौसेना के अधिकारी जाधव भारत की खुफिया एजेंसी, रिसर्च एंड ऐनालाइसिस विंग से जुड़ा था, जो हुसैन मुबारक पटेल नाम का इस्तेमाल करता था, ये सारी ’झूठी’ बातें हैं और इन बातों को लेकर उन्होंने उसका कोर्ट मार्शल करके, जो अब मिलिट्री में नहीं है, उसका उनसे कोई वास्ता नहीं है, लेकिन फिर भी उसको फांसी की सजा दी जा रही है और वे कह रहे हैं कि यह रॉ का एजेंट है, स्पाइ है, यह सरासर ’झूठ’ है। इसके बावजूद भी सरकार क्यों चुप बैठी है, मुझे मालूम नहीं पड़ रहा है। ...(व्यवधान) आप मेरी बात सुनिए।...(व्यवधान)
माननीय अध्यक्ष :यह झगड़े का विषय नहीं है। इससे सभी लोग चिंतित हैं।
…( व्यवधान)
श्री मल्लिकार्जुन खड़गे :अध्यक्ष महोदया,अगर कानून और न्याय के मूल सिद्धांतों का पालन नहीं होता है तो भारत के लोग इसे सोची-समझी हत्या समझेंगे। यह बेहद महत्वपूर्ण मामला है कि हमारे उच्चायोग तक को इसकी जानकारी नहीं दी गयी कि कुलभूषण जाधव का ट्रायल चल रहा है। जाधव का अपहरण ईरान से किया गया था, पाकिस्तान द्वारा किसी तरह की राजनीतिक पहुंच नहीं दी गयी। अगर उनको फांसी दी जाती है तो हम इसे एक सोची-समझी हत्या, मर्डर कहेंगे।
पाकिस्तान के रवैये का इससे भी अंदाजा लगाया जा सकता है कि भारत की तरफ से उसके पठानकोट के हमले में शामिल होने के पूरे सबूत दिये जा रहे थे, वहां की एजेंसियों को भारत में जांच करने की इजाजत तक दी गयी, जबकि पाकिस्तान में हमारे अधिकारियों को जाधव से मिलने तक नहीं दिया गया, वकील भी रखने नहीं दिया गया और एक साल में 13 बार उन्होंने कोशिश की, उसके बावजूद भी उनको नकारा गया। कुलभूषण जाधव मामले में पाकिस्तान ने अंतर्राष्ट्रीय कानूनों का पालन नहीं किया है। भारत ने जाधव को वकील मुहैया कराने की पेशकश की, लेकिन पाकिस्तान ने इससे इंकार कर दिया।महोदया, यदि पाकिस्तान कुलभूषण जाधव को फांसी देता है, तो भारत को इसे हत्या समझना चाहिए और उसी तरह रिएक्ट करने की सरकार में ताकत भी होनी चाहिए।
मैं एक बात और कहना चाहता हूं कि आप बिना इनविटेशन पाकिस्तान के प्रधान मंत्री की बेटी की शादी में जाते हो, क्या इस बारे में आप बातचीत नहीं कर सकते थे?...(व्यवधान) क्या डायरेक्टली उन्हें मिल नहीं सकते थे, क्या टेलीफोन पर आप बात नहीं कर सकते थे?...(व्यवधान) विदेश मंत्री तथा सभी लोगों को भारतीय नागरिक को बचाने की कोशिश करनी चाहिए।...(व्यवधान) अगर कुलभूषण जाधव को बचाया नहीं जाता है, तो मैं समझूंगा कि यह सरकार की कमजोरी है और यह भारत की कमजोरी होगी।...(व्यवधान)
रसायन और उर्वरक मंत्री तथा संसदीय कार्य मंत्री (श्री अनन्तकुमार):महोदया, मैं खड़गे जी से कहना चाहता हूं कि ऐसे राजनीति नहीं करनी चाहिए।...(व्यवधान) गृह मंत्री जी जरूर जवाब देंगे, विदेश मंत्री भी जवाब देंगी, लेकिन ऐसी ओछे तरीके की राजनीति नहीं करनी चाहिए।...(व्यवधान) कुलभूषण जाधव के साथ हम सभी हैं, पूरा हाउस उनके साथ है।...(व्यवधान)
माननीय अध्यक्ष : खड़गे जी, आप बैठ जाएं। मंत्री जी मना नहीं कर रहे हैं।
श्री निशिकांत जी।
…( व्यवधान)
श्री निशिकान्त दुबे (गोड्डा) : अध्यक्ष महोदया, भारतीय नागरिक के साथ जो भी घटना घटित हुई है, उसके लिए मैं सोच रहा था कि सभी सांसद और सारा देश एक साथ खड़ा हो कर उस नागरिक के साथ अपनी सहानुभूति प्रकट करेगा और पाकिस्तान पर अटैक करेगा।...(व्यवधान) लेकिन कांग्रेस के मित्रों ने देश के लिए हल्की राजनीति करने का प्रयास किया है, यह देश के लिए दुर्भाग्यपूर्ण घटना है।...(व्यवधान) भारत सरकार की नीतियों के कारण पाकिस्तान पूरी दुनिया के फोरम में अलग-थलग पड़ गया है। ब्रिटेन की संसद ने भारत का पक्ष लेते हुए पाकिस्तान को कहा कि गिलगित बाल्टिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में तुम गलत काम कर रहे हो और गिलगित बाल्टिस्तान को अलग राज्य घोषित नहीं कर सकते हो।...(व्यवधान) आतंकवादी घटनाओं से सारे विश्व को परेशानी हो रही है और पूरी दुनिया में भारतीय प्रधान मंत्री जी के नेतृत्व में भारत की अपनी अलग पहचान बनी है।...(व्यवधान) इस वजह से भारत को बदनाम करने के लिए एक साजिश के तहत पाकिस्तान ने, जहां कि कानून व्यवस्था नाम की चीज नहीं है, जहां न्यायपालिका नाम की चीज नहीं है, वहां ऐसा अन्यायपूर्ण कदम उठाया जा रहा है।...(व्यवधान) हमारे प्रधान मंत्री के नेतृत्व में देश में मजबूत सरकार बनी है, इसलिए पूरी दुनिया आज पाकिस्तान को आतंकवादी राष्ट्र घोषित करने के लिए इकट्ठा है। इस वजह से पाकिस्तान ने कुलभूषण जाधव को बिना न्यायपालिका का सहारे दिए, बिना भारत सरकार को विश्वास में लिए ऐसा कदम उठाया है।...(व्यवधान) हमने 13 बार कोशिश की कि हमारे लोग कुलभूषण जाधव के साथ मिलें।
मेरा भारत सरकार से आग्रह है कि जिस तरह से हमारे नागरिक को पाकिस्तान ने प्रताड़ित करने का काम किया है और उसे फांसी की सजा दी है। इस बारे में भारत सरकार एक्शन ले और पाकिस्तान को आतंकवादी राष्ट्र घोषित करे। पूरी पार्लियामेंट एक सोच के साथ एक रेजोल्यूशन पास करे कि पाकिस्तान हमारे नागरिक को बाइज्जत बरी करे।...(व्यवधान)
माननीय अध्यक्ष : श्री भैरों प्रसाद मिश्र, डॉ. किरीट पी. सोलंकी, श्री शिव कुमार उदासि, श्री देवजी एम. पटेल और श्री अश्विनी कुमार चौबे को श्री निशिकांत दुबे द्वारा उठाए गए विषय के साथ संबद्ध करने की अनुमति प्रदान की जाती है।
…( व्यवधान)
माननीय अध्यक्ष : मैं सबकी भावना समझती हूं। हम सभी कुलभूषण के साथ हैं, लेकिन हम सही बात करें, इसके लिए हम प्रयास करें।
…( व्यवधान)
माननीय अध्यक्ष : मंत्री जी, इस बारे में उत्तर देंगे। सरकार उत्तर देने के लिए तैयार है। खड़गे जी, हर बात पर गुस्सा मत कीजिए।
…( व्यवधान)
माननीय अध्यक्ष : खड़गे जी, गुस्सा पाकिस्तान पर कीजिए, सरकार पर नहीं।
…( व्यवधान)
श्री असादुद्दीन ओवैसी (हैदराबाद) : अध्यक्ष महोदया, मैंने इस विषय में एडजर्नमेंट मोशन भी दिया है। मैं आपके जरिए हुकूमत से इस बात का मुतालबा करता हूं कि हुकूमत को बहुत गंभीरता से इस बारे में सोचना पड़ेगा और पूरी कोशिश करनी चाहिए कि हमारे हिंदुस्तानी शहरी की जान बचाई जाए। यह बात बिलकुल सही है कि 13 मर्तबा हमने कोशिश की, लेकिन उन्होंने काउंसेलर सर्विस नहीं दी। पाकिस्तान की मिलिट्री अदालत एक अदालत नहीं है, बल्कि एक बनाना अदालत है, जहां बिना किसी एविडेंस के, बिना किसी प्रूफ के उन्होंने फैसला दिया है। यकीनन हमारे हिंदुस्तान के शहरी को धोखा देकर ईरान से पकड़कर लाए और सारी दुनिया के सामने इस तरह का नाटक कर रहे हैं।
मैं सरकार से इस बात का मुतालबा करता हूं कि आपके पास बहुत बड़ी ताकत है, आपके पास इन्फ्लुएंस है, लेकिन आप इन्फ्लुएंस का इस्तेमाल क्यों नहीं कर रहे हैं? मैं यहां सियासत नहीं कर रहा हूं। आपको मालूम था कि इस तरह का फैसला आने वाला है, इसलिए बेहद जरूरी है कि क्या सरकार हिंदुस्तानी शहरी को बचाने की पूरी कोशिश करेगी या नहीं, क्योंकि यह एक बाइज्जत शहरी है और इनकी जान बचाना हम सभी की जिम्मेदारी है।
महोदया, मैं फिर से मुतालबा करता हूं कि इनकी जान बचाई जाए। सरकार अपना इन्फ्लुएंस इस्तेमाल करे, चाहे वह इंटरनेशनल इन्फ्लुएंस हो और सरकार इन्हें वापिस लाने की पूरी कोशिश करे।
श्री जय प्रकाश नारायण यादव (बाँका) : माननीय अध्यक्ष महोदया, आपने मुझे बोलने का अवसर दिया, इसके लिए मैं आपको धन्यवाद देता हूँ।
कुलभूषण जाधव को पाकिस्तान ने सज़ा-ए-मौत की सज़ा दी है। पाकिस्तान आतंक की फैक्ट्री चला रहा है और आतंकियों का गढ़ बन चुका है और लगातार चेतावनियों के बावजूद भी वह सुधरने वाला नहीं है। स्थिति बहुत ही भयानक है और पाकिस्तान का रवैया बहुत ही खतरनाक है। वह गलतियों पर गलतियाँ करता जा रहा है। भारतीय नागरिक को फांसी की सज़ा दी गयी है। ऐसा ही सरबजीत सिंह के साथ भी किया गया था। पाकिस्तान आतंकियों को पालता है, यह सर्वविदित है। फर्ज़ी केस बनाकर कुलभूषण जाधव को सज़ा दी गयी है। जासूसी का असत्य आरोप लगाया गया है, जिसके लिए न ही कोई वकील की व्यवस्था हुई और न ही कोई सुनवाई हुई और फांसी की सज़ा दे दी गयी। यह बहुत ही खतरनाक है।
वहाँ का हाफिज़ सईद, जो सबसे बड़ा आतंकी है, उसको तो वह गुलदस्ते में रखता है और हमारे नागरिक को मौत की सज़ा दी जाती है। इससे बढ़कर और क्या हो सकता है। इसलिए मैं भारत सरकार से मांग करता हूँ कि इस दिशा में कठोर से कठोर कार्रवाई की जाए।
PROF. SAUGATA ROY (DUM DUM): Madam, I join the other Members in condemning the order by a Military Court in Pakistan about the death sentence on Shri Kulbhushan Jadhav. Since the Pakistan Government did not and was not able to prosecute him in a normal Court, his trial was held secretly in a Military Court. So far, Pakistan has not produced any proof of his involvement in any espionage activity. In fact, it is said that he was arrested from Tehran which has no connection to Pakistan. Shri Kulbhushan Jadhav was a former Navy Commando who had retired and was having a legitimate business in Iran. Had he been involved in espionage activities, he would not have had an Indian Passport that he was carrying. We condemn this attitude of the Pakistan authorities. We are happy that the Foreign Secretary Dr. S. Jaishankar has issued a demarche to Pakistan and has totally criticized this very wrong step by the Pakistani authorities. This shows that Pakistan which harbours so many terrorists like Hafiz Saeed, the Jamiat-ulama-i-Hind and Masood Azhar who was released from India, is taking a vindictive action against Indians. The Indian Government has held back the release of some Pakistani prisoners on this ground. The Government must realize that the whole country is behind it in criticizing this. We condemn this.
SHRI BAIJAYANT JAY PANDA (KENDRAPARA): Madam, this news of death sentence on Shri Kulbhushan Jadhav in Pakistan in secret, without following the norms of justice, is yet another example of that country’s shameful behaviour. This is an issue on which the whole House stands united. This is not a question as to whether any of us is a part of the Government or the Opposition. We are all Indians. We must recognize that Pakistan is not a normal country. It is not a normal country because the foreign policy of that country is not run by the elected Government. It is run by their military establishment particularly when it comes to India. This is a deliberate provocation by their military establishment to continue to destabilize relations with us.
In this, we must all stand united and that our dealings with Pakistan must be on multiple fronts. We must respond to this provocation with strength; we must separately deal with their elected government and their civil society; and we must take up the case not just of Kulbhushan Yadav but all such injustices in the World Court and in places like the United Nations.
श्री विनायक भाऊराव राऊत (रत्नागिरी-सिंधुदुर्ग) : महोदया, भारत के खिलाफ पाकिस्तान की नापाक हरकतें और बदतमीजी करने के प्रकार बढ़े हैं। इसका उदाहरण कुलभूषण जाधव है। कुलभूषण जाधव हमारे सतारा जिले के निवासी थे और वे मुंबई में भी कई वर्षों से रहते थे। पाकिस्तान ने बलूचिस्तान में उनको पकड़ने के बाद जिस तरह से उनके साथ बर्ताव किया, उसे देखने के बाद कुलभूषण जाधव के परिजनों ने भारत सरकार के साथ संपर्क किया और भारत सरकार ने कई बार पाकिस्तान से संपर्क कर के कुलभूषण जाधव को हर तरीके की मदद देने का प्रयास किया।
महोदया, पाकिस्तान एक ऐसा देश है जिसे उसी की भाषा में सबक सिखाने की जरूरत है। आज हिन्दुस्तान के सामने ऐसी जरूरत आई है। मुझे खुशी हो रही है कि कल कुलभूषण जाधव को पाकिस्तान में फाँसी की सजा सुनाए जाने के बाद भारत सरकार ने पाकिस्तान के यहाँ बंद कैदियों को छोड़े जाने के अपने फैसले पर तुरंत रोक लगा दी है, इसके लिए मैं भारत सरकार का अभिनंदन करता हूँ। मैं एक बार फिर विनती करता हूँ कि कुलभूषण को छुड़ाने के लिए भारत सरकार प्रयास करे। जब हमारे चंदू चौहान को हिन्दुस्तान वापस लाने का प्रयास भारत सरकार के माध्यम से हुआ था, तब हम लोगों ने उसका अभिनंदन किया था। वैसा ही प्रयास कुलभूषण जाधव को छुड़ाने के लिए भारत सरकार को करना चाहिए। कुलभूषण जाधव को छोड़ने के लिए यदि पाकिस्तान सही तरीके से नहीं मानता है, तो उसे सबक सिखाने की कोशिश भारत सरकार के माध्यम से होनी चाहिए। धन्यवाद।
माननीय अध्यक्ष : कुँवर पुष्पेन्द्र सिंह चन्देल, श्री ओम बिरला, श्री रवीन्द्र कुमार जेना एवं श्री भैरों प्रसाद मिश्र को श्री विनायक भाऊराव राऊत द्वारा उठाए गए विषय के साथ संबद्ध करने की अनुमति प्रदान की जाती है।
DR. A. SAMPATH (ATTINGAL): Madam Speaker, we all stand by the side of Shri Kulbhushan Jadhav. The whole nation is with him. This is a question of our nation’s pride. An innocent citizen has been kidnapped from another country by another country flouting all norms of natural justice. If there is any justice at all, I would like to know what kind of justice the Government of Pakistan provides to its citizens and to the citizens of other nations. We all believe in the rule of law. I am not criticizing anybody but I wonder whether Pakistan is being run by terrorists or by ISI or by the elected government. This is not only the sad plight of an Indian citizen in Pakistan but this is an unlawful act being committed by a foreign government on the Government of India. It is an unlawful act against the citizens of India. On behalf of CPI(M), I would express our sincere solidarity to Shri Kulbhushan Yadav.
माननीय अध्यक्ष : सद्भावना प्रकट करो। इतना लंबा मत बोलो।
Shri P.K. Biju and Shrimati P.K. Shreemathi Teacher are permitted to associate with the issue raised by Dr. A. Sampath.
SHRI N.K. PREMACHANDRAN (KOLLAM): Thank you, Madam Speaker, for giving me this opportunity to speak on this very important issue.
Madam, Mr. Kulbhushan Yadav was arrested on March 3, 2016. From then and till 31st of March, 2017, 13 attempts were made by the Government of India to get consular access to Shri Jadhav. In spite of the international conventions being very clear and specific in this regard, even consular access to a person who has been taken into custody has not been provided. It is a violation of the principles of natural justice. I strongly condemn the unlawful, unjust, illegal, arbitrary act of the Field General Court Martial in Pakistan. Madam, you may kindly see that Shri Jadhav has been tried under Section 59 of the Pakistan Army Act of 1952 and under Section 3 of the Official Secrets Act of 1923. Even under the provisions of these Acts the accused has the right of defence but even the right to contest his case has been denied to him. I fully support the version and the response of the Government of India that this is a premeditated murder by the Pakistan Army. The entire nation should stand united to condemn this.
For last one year, he was in custody. I am not making any criticism, but unfortunately we have not been able to bring the matter into the public domain so as to build up public consensus and concern so that the issue can be brought up in the international fora. … (Interruptions)
SHRI SIRAJUDDIN AJMAL (BARPETA): Hon. Speaker Madam, the Government of Pakistan should get a very clear message that there are 125 crore Kulbhushans in this country and we are not going to take this lying down because this is going to be the beginning of their oppressive measures. Pakistan has been carrying out many terrorist activities and this is the first time we have got official proof. I think we should nail them.
श्री तारिक अनवर (कटिहार): अध्यक्ष महोदया, मैं अपने आपको सदन की भावना से जोड़ता हूं। कुलभूषण जाधव जी महाराष्ट्र के सांगली जिले के रहने वाले हैं। जिस प्रकार से उनको फांसी की सजा सुनाई गई है। मैं समझता हूं कि कोई भी सभ्य समाज इस बात को स्वीकार नहीं करेगा कि बगैर किसी सहायता के, चाहे वह कोर्ट की सहायता हो, वकील की सहायता हो या अन्य किसी सहायता को प्रदान किए बिना ही सज़ा सुनाई जाए। किसी प्रकार की सहायता पाकिस्तान सरकार द्वारा उनको नहीं प्रदान की गई। हम इस बात की मांग करते हैं कि इसके खिलाफ भारत सरकार सख्त कदम उठाए। यदि जरूरत पड़े तो अंतर्राष्ट्रीय मंच पर भी पूरी ताकत के साथ इस मुद्दे को उठाया जाए, क्योंकि यह मामला किसी एक व्यक्ति का नहीं है, बल्कि पूरे देश की भावना इससे जुड़ी है। मैं समझता हूं कि पाकिस्तान ने अपने नापाक इरादों या नापाक कार्यों पर पर्दा डालने के लिए इस तरह का कदम उठाया है। इसका विरोध पूरी ताकत के साथ कठोरता से होना चाहिए।
DR. M. THAMBIDURAI (KARUR): Hon. Speaker Madam, today we have read the news that the military court in Pakistan has sentenced Indian national Kulbhushan Jadhav to death for alleged involvement in spying and other activities. This is because Pakistan has become a terrorist State. We know very well that India is suffering a lot because of terrorist activities instigated by Pakistan. We want some kind of peaceful atmosphere and we are trying for it, but they are misusing that and indulging in terrorist activities as a result of which our people are suffering. Even our Indian citizens who are living there are not in safe condition. Kulbhushan Jadhav is an Indian citizen. On some ground, they arrested him and gave him death sentence. This is unethical and incorrect. I am condemning this step of Pakistan. I would request the Government of India to take necessary action and see that this kind of incident shall not take place again. I would request our Embassy and other people to take necessary action and save our Indian citizens.
श्री कौशलेन्द्र कुमार (नालंदा) : मैडम, कुलभूषण जाधव को पाकिस्तान की कोर्ट ने जो सज़ा-ए-मौत सुनाई है। मैं उसका विरोध करते हुए कुलभूषण जाधव के साथ हूं और पूरा हिन्दुस्तान उसके साथ है। मैं माननीय गृह मंत्री जी और प्रधान मंत्री जी से मांग करता हूं कि कुलभूषण जाधव एक हिन्दुस्तानी है। हम तमाम हिन्दुस्तानी आज उसके साथ हैं, जैसे भी हो आप उसको भारत लाने का प्रयास कीजिए, धन्यवाद।
SHRI KONDA VISHWESHWAR REDDY (CHEVELLA): Hon. Speaker Madam, the death sentence on Kulbhushan Jadhav is illegal, arbitrary and senseless. On this issue, the entire nation stands in solidarity behind the Government. He was not a spy; he was kidnapped and was sentenced to death. In many countries, politicians play to the gallery. But in Pakistan, even the judiciary seems to be playing to the gallery. Which gallery are they playing to? There are so many issues in Pakistan, like hunger and malnutrition. I do not think even the Pakistani galleries will be impressed by this sentence. How did we treat Ajmal Kasab? We gave him every possible legal remedy before the final sentence. On one side, we have Ajmal Kasab’s case, on the other side, we have an arbitrary and senseless sentence that was handed over to Kulbhushan Jadhav. We all stand in solidarity; the nation stands in solidarity.
श्री अनुराग सिंह ठाकुर (हमीरपुर): अध्यक्ष महोदया, मैं सदन से सहमत हूं कि जिस तरह से भारतीय नागरिक श्री कुलभूषण जाधव, जो एक निर्दोष व्यक्ति है, जिस तरीके से पाकिस्तान ने उसे अगवा करके रॉ का एजेंट दिखाते हुए फांसी की सजा देने की बात कही है, यह पहली घटना नहीं है। इससे पहले चाहे सरबजीत सिंह हो, चमेल सिंह हो या अब कुलभूषण जाधव हो, पाकिस्तान के आतंकवादी एक ओर निर्दोष भारतीयों को मारते हैं, वहीं दूसरी ओर पाकिस्तान की सरकार निर्दोष भारतीयों को अगवा करके उन्हें इस तरह से फांसी की सजा देने का काम करती है। मैं समझता हूं कि यहां उसकी पूरी तरह से आलोचना करनी चाहिए। इससे पूर्व में भी सदन के सारे सदस्यों ने आतंकवाद के विषय और पाकिस्तान की हरकतों को लेकर एकजुटता दिखाई है और हम सबने इकट्ठे होकर यहां से रिजोल्यूशन पास किया है। चाहे वह कश्मीर की बात हो, पी.ओ.के. की बात हो, चाहे सरबजीत सिंह की बात हो या चमेल सिंह की बात हो, सदा भारतीय सांसद और यह सदन इकट्ठा नजर आया है और मैं समझता हूं कि आज एक बार फिर यह इकट्ठा नजर आना चाहिए। 125 करोड़ भारतीयों की आवाज पाकिस्तान क्या, पूरी दुनिया भर में जाए कि पाकिस्तान एक आतंकवादी देश है और उसकी इस तरह की हरकतों को हम मंजूर नहीं करेंगे। मैं समझता हूं कि इसके स्पष्ट संकेत पूरी दुनिया में जाएं, आप सबके माध्यम से मैं ऐसे एक रिजोल्यूशन का निवेदन करना चाहता हूं।
माननीय अध्यक्ष : श्री भगबंत खुबा तथा श्री प्रताप सिम्हा को श्री अनुराग सिंह ठाकुर द्वारा उठाए गए विषय के साथ संबद्ध करने की अनुमति प्रदान की जाती है।
DR. SHASHI THAROOR (THIRUVANANTHAPURAM): Thank you very much, Madam. I will keep it very short.
I obviously associate myself strongly with what all our colleagues have said and I would not repeat those points but I have one additional point. The unity of this House and the unity of this country must be translated internationally. The fact is that we prefer not to internationalise our problems with Pakistan but this is one time when what Pakistan is doing is not only an assault on India; it is also an assault on the bonds of international law and international conventions that affect everybody.
There are certain countries that finance and arm the Pakistani military. Those countries must be told by us that if this could be done to an Indian today, it can be done to one of their nationals tomorrow. The extremely important thing for us is to uphold the principles. This gentleman was denied consular access which is a basic right thirteen times. The Geneva Conventions have been violated by Pakistan if they had done this under laws of war even though we are not at war with Pakistan.
This is an extremely serious matter of global resonance. I hope that we will convey our support to the Government as well as urge the Government to take this up in world forums as well.
Thank you, Madam Speaker.
SHRI E.T. MOHAMMAD BASHEER (PONNANI): Thank you, Madam. I fully endorse the views expressed by learned friends.
This House should wholeheartedly condemn the attitude of Pakistan. I express my solidarity with the Government of India in tackling such issues.
Thank you.
गृह मंत्री (श्री राजनाथ सिंह) : अध्यक्ष महोदया, श्री कुलभूषण जाधव को जो फांसी की सजा पाकिस्तान में दी गई है, उसको लेकर पूरे सदन ने केवल चिंता ही व्यक्त नहीं की है, बल्कि पूरे सदन ने आक्रोश व्यक्त किया है। कुलभूषण जाधव को जिस तरीके से फांसी दी गई है...(व्यवधान) जाधव बोलते हैं, मैं जाधव ही बोल रहा हूं। कुलभूषण जाधव को जिस तरीके से फांसी दी गई है...(व्यवधान)
प्रो. सौगत राय: अभी फांसी नहीं दी गई है, फांसी का आदेश दिया गया है।
श्री राजनाथ सिंह : फांसी का आदेश दिया गया है...(व्यवधान) फांसी दिये जाने का आदेश किया गया है,...(व्यवधान) फांसी दिये जाने का जो फैसला लिया गया है, उससे केवल सदन ही नहीं, बल्कि सारा देश चिंतित है। जहां तक कुलभूषण जाधव का प्रश्न है, जैसा सभी सम्मानित सदस्यों ने बतलाया कि वह इंडियन नेवी के एक रिटायर्ड ऑफिसर हैं और उसके बाद चाबहार, ईरान में वह एक छोटा-मोटा बिजनेस करते थे और स्थानीय ईरानी सिटीजन उनका पार्टनर भी था। उस बिजनेस के सिलसिले में ही वह अक्सर तेहरान और चाबहार आया-जाया करते थे। मार्च, 2016 में पाकिस्तान की सिक्युरिटी एजेंसीज के द्वारा उन्हें किडनैप कर लिया गया और उसे पाकिस्तान मीडिया के समक्ष भारतीय एजेन्सीज के स्पाई के रूप में प्रस्तुत किया गया। पाकिस्तानी मीडिया को ब्रीफ करते समय पाकिस्तान की अथॉरिटी ने ही कुलभूषण जाधव के संबंध में यह कहा है कि कुलभूषण के पास एक वैलिड इंडियन पासपोर्ट मिला। अब यह बात समझ में नहीं आती कि यदि कुलभूषण जाधव के पास वैलिड इंडियन पासपोर्ट मिला है तो वह स्पाई कैसे हो सकता है। लेकिन फिर भी कुलभूषण जाधव का स्पाई होना, मैं मानता हूं कि जब उनके पास वैलिड इंडियन पासपोर्ट था तो इसका प्रश्न ही नहीं खड़ा होता और यह पाकिस्तान के एक्शन को सीधे एक्सपोज करता है।
भारतीय हाई कमीशन ने बार-बार पाकिस्तान से भी अनुरोध किया था कि हमको काउंसलर एक्सेस दिया जाना चाहिए, लेकिन भारतीय हाई कमीशन के द्वारा बार-बार अनुरोध किए जाने के बावजूद जो काउंसलर एक्सेस दी जानी चाहिए थी, वह नहीं दी गई है। पाकिस्तान द्वारा बगैर काउंसलर एक्सेस के इस सैंटेंस को मैं स्ट्रांगली कहना चाहता हूँ कि यह जो फांसी की सजा सुनाई गई है, भारत सरकार उसे स्ट्रांगली कंडेम करती है। मैं सदन को यह भी आश्वस्त करना चाहता हूँ कि जो लॉ एण्ड जस्टिस के बेसिक नॉर्म्स होते हैं, उनको बिना ध्यान में रखे, यह फांसी की सजा कुलभूषण जाधव को सुना दी गई है। मैं सदन को आश्वस्त करना चाहता हूँ कि चाहे इसके लिए जो भी करना पड़े, भारत सरकार वह करेगी और कुलभूषण जाधव के साथ न्याय होगा। मैं सदन को इतना आश्वस्त करना चाहता हूँ। ...(व्यवधान)
महोदया, इस संबंध में डिटेल्ड जानकारी, 12 बजे के बाद हमारी एक्सटर्नल अफेयर्स मिनिस्टर भी आएंगी और इस संबंध में वे विस्तृत जानकारी देंगी। ...(व्यवधान)
SHRI N.K. PREMACHANDRAN: Madam, the House has to pass a Resolution condemning the issue. … (Interruptions)
HON. SPEAKER: She will come to the House.
…( व्यवधान)
SHRI JYOTIRADITYA M. SCINDIA (GUNA): Madam, we should pass a Resolution… (Interruptions)
माननीय अध्यक्ष : प्रश्न नंबर 521।
श्री जनक राम जी।
…( व्यवधान)
भारी उद्योग और लोक उद्यम मंत्री (श्री अनन्त गंगाराम गीते): मैडम, इस विषय पर सदन का रेज़ोल्युशन ले लेते। ...(व्यवधान)
श्री अनुराग सिंह ठाकुर: मैडम, सदन ने एक प्रस्ताव पारित किया है कि पाकिस्तान को एक आतंकवादी देश घोषित किया जाए।...(व्यवधान)
माननीय अध्यक्ष : यह ऑलरेडी है। यह पूरे सदन का प्रस्ताव भी है और इसीलिए मैंने सभी को बोलने दिया है कि पूरा सदन साथ में है।
…( व्यवधान)
माननीय अध्यक्ष : विदेश मंत्री जी को आने दीजिए, वे 12 बजे स्टेटमेंट देंगी, ज़रा रुको तो सही। अभी कोई सांसदों की सेना ले कर थोड़े ही जाना है। प्लीज़ बैठिए।
…( व्यवधान)
माननीय अध्यक्ष : आप बैठिए न।
…( व्यवधान)
HON. SPEAKER: Only the hon. Member’s Supplementary will go on record.
…(Interruptions)…* _________ SUBMISSION BY MEMBERS ... Contd.
(i) Re : Unlawful and arbitrary verdict of Pakistan Military Court imposing death sentence on former naval officer, Shri Kulbhushan Jadhav विदेश मंत्री (श्रीमती सुषमा स्वराज) : माननीय अध्यक्ष जी, आज सुबह इस सदन में प्रश्नकाल के दौरान बहुत वेदना, आक्रोश और चिन्ता के साथ श्री कुलभूषण जाधव को पाकिस्तान के मिलिट्री कोर्ट द्वारा मृत्यु दण्ड सुनाये जाने का मामला उठाया गया। सबसे पहले मैं सांसद साथियों द्वारा सदन में व्यक्त की गयी भावनाओं के साथ स्वयं को और सरकार को संबद्ध करते हुए यह कहना चाहूँगी कि अब यह मामला केवल सदन और सरकार का नहीं है, बल्कि इससे पूरा देश चिन्तित है।
मेरे वरिष्ठ सहयोगी श्री राजनाथ सिंह जी ने इस केस के संबंध में सदन में थोड़े तथ्य रखे थे। मैं आपके माध्यम से इससे संबंधित एक विस्तृत विवरण सदन में रखना चाहूँगी।
I would like to inform the House that Shri Jadhav, who was doing business in Iran, was kidnapped and taken to Pakistan. The exact circumstances are unclear and can only be ascertained if we had consular access to him. Accordingly, from the time his abduction was known, our High Commission in Islamabad has continuously pressed Pakistani authorities for such access. Although this is provided for by international law and is deemed as norm in the international relations, the Government of Pakistan did not permit this. That itself should tell us much about the strength of the case against Shri Jadhav.
Hon. Members would also recall that a senior Pakistani leader has himself expressed doubts about the adequacy of evidence in this case.
Madam Speaker, earlier this year, the Pakistan Government sought our assistance to obtain evidence and other materials for this investigation process. In doing so, they levelled ridiculous charges against senior Indian officials, who had no connection to this issue. Thereafter, they linked providing consular access to our acceptance of their position. Nevertheless, in the hope that some forward movement could be made, our response was constructive. We pointed out that consular access to Shri Jadhav would be an essential prerequisite in order to verify the facts and understand the circumstances of his presence in Pakistan.
Madam Speaker, given this exchange, it is extraordinary that yesterday a decision is suddenly announced awarding a death sentence in this case when previous exchanges with India itself underlines the insufficiency of evidence. To make matters even more absurd, three hours after the death sentence was announced, the Indian High Commission received an official communication from the Foreign Ministry of Pakistan reiterating the Pakistani proposal for conditional consular access. That tells us a lot about the farcical nature of the alleged proceedings, which have led to an indefensible verdict against an innocent kidnapped Indian citizen.
Madam Speaker, our position on this matter is very clear. There is no evidence of any wrong doing by Shri Jadhav. He is the victim of a plan that seeks to cast aspersions on India to deflect international attention from Pakistan’s well-known record of sponsoring and supporting terrorism. Under these circumstances, we have no choice but to regard this sentence, if carried out, as an act of premeditated murder.
Madam Speaker, yesterday the Foreign Secretary conveyed our position to the High Commission of Pakistan. Let me state clearly that the Government and people of India would view very seriously the possibility that an innocent Indian citizen is facing death sentence in Pakistan without due process and in violation of basic norms of law, justice and international relations. I would caution the Pakistan Government to consider the consequences of our bilateral relationship, if they proceed on this matter.
Madam Speaker, I have been in touch with the parents of Shri Jadhav and we are extending our fullest support to them in this difficult situation. A strong sense of solidarity expressed by this House will give them more courage and strength at this time.
Thank you.
ORAL ANSWERS TO QUESTIONS (Q. 521) श्री जनक राम : महोदया, पाकिस्तान द्वारा कुलभूषण जाधव जी के साथ जो कुछ हुआ है, पूरा सदन उनके साथ है। ग्रामीण क्षेत्रों में एक चर्चा सुनने के लिए हम नौजवानों को मिलती है कि जब गीदड़ की मौत आती है, तो वह शहर की तरफ भागता है। वही हाल पाकिस्तान का है। ...(व्यवधान)
माननीय अध्यक्ष:आप गुस्सा मत करिए, प्रश्न पूछिए।
…( व्यवधान)
श्री जनक राम : महोदया, हम प्रश्न की तरफ आना चाहते हैं। जिस देश के प्रधान मंत्री चट्टानी इरादे वाले नरेंद्र मोदी जी हैं, जिस देश के गृह मंत्री राजनाथ सिंह जी हैं, तो पाकिस्तान के काले कारनामों और मंसूबों को कभी भारत सरकार सफल नहीं होने देगी। जहां तक सवाल है, विपक्ष में बैठे आदरणीय खड़गे साहब, मैं बिहार से आता हूँ और बिहार में आए दिन पत्रकारों की हत्याएं हो रही हैं। हम सदन में बोलते हैं और दूर-दूर तक मिनटों में दिखाए जाते हैं, देश-दुनिया देखती है, चाहे प्रिंट मीडिया हो या इलैक्ट्रॉनिक मीडिया हो, उनके माध्यम से दिखाया जाता है, लेकिन बिहार में जो सरकार चल रही है, वह कुछ नहीं कर रही है। माननीय मंत्री जी ने विस्तार से उत्तर दिया है, उनके प्रति हृदय से हम आभार प्रकट करते हैं।...(व्यवधान) पत्रकार लोकतंत्र के चौथे स्तंभ हैं, ऐसे में पत्रकारों पर हो रहे हमले चिंता का विषय हैं। मैं आपके माध्यम से माननीय मंत्री जी से जानना चाहता हूँ कि तीन वर्षों में जिन पत्रकारों की हत्याएं हुई हैं, उनमें से अब तक कितने मामलों में दोषियों को सजा दी गई है? साथ में हम सदन को यह बताना चाहेंगे कि मेरे लोक सभा क्षेत्र के पड़ोसी जिले सीवान में राजदेव रंजन यादव, ब्रजेश किशोर समस्तीपुर, धमेंद्र सिंह आदि पत्रकारों की हत्याएं हो चुकी हैं, लेकिन बिहार सरकार चिर निद्रा में सोई हुई है। हम सरकार से यह जानना चाहते हैं कि कितने हत्यारों को कड़ी से कड़ी सजा दी गई है?
श्री हंसराज गंगाराम अहीर :अध्यक्ष महोदया, जो प्रश्न पूछा गया है कि पत्रकारों पर हमले बढ़ रहे हैं, इसका जवाब हम दे चुके हैं कि हम गृह मंत्रालय के माध्यम से मीडियाकर्मियों पर हमलों का रिकार्ड राष्ट्रीय अपराध रिकार्ड ब्यूरो द्वारा आईपीसी की धारा 325, 326, 326क और 326ख के अंतर्गत रखते हैं। सन् 2014-15 में अपराधों में जो कमी आई है, उसका हमने यहां पर ब्यौरा दिया है। सन् 2014 में 114 अपराध हुए थे, जो कि गंभीर थे, उसमें 32 अपराधियों को गिरफ्तार किया गया था। सन् 2015 में ऐसे सिर्फ 28 अपराध ही दर्ज हुए हैं।उसमें टोटल 41 अपराधियों को पकड़ा गया है। पर्टिकुलरली माननीय सदस्य ने सिवान के राजदेव रंजन की हत्या होने के मामले को लेकर प्रश्न पूछा है, इसमें मैं इतना ही बताना चाहूँगा कि इसकी पूरी जाँच के लिए राज्य सरकार की सिफारिश के अनुसार सीबीआई के माध्यम से यह जाँच चल रही है। जो भी घटनाएँ होती हैं, चाहे वे किसी भी राज्य में हों, चाहे बिहार में हों या अन्य किसी राज्य में घटनाएं हों, वहाँ की स्थानीय पुलिस इन मामलों को देखती है। केन्द्र सरकार इसमें हस्तक्षेप नहीं करती है। जहाँ भी पत्रकारों पर ऐसे हमले होते हैं, वह राज्य सरकार का मामला होता है।
श्री जनक राम : महोदया, मैं आपके माध्यम से माननीय मंत्री महोदय से जानना चाहता हूँ कि अपने कर्तव्य का निर्वहन करते हुए जो पत्रकार अपने प्राणों की आहूति दे देते हैं, उनके परिवारों को राहत और पुनर्वास के लिए सरकार की क्या योजना है? घर की रोजी-रोटी कमाने वाला जब इस दुनिया से चला जाता है तो उसके बच्चे अनाथ हो जाते हैं और उसकी विधवा को दर-दर की ठोकरें खानी पड़ती हैं। क्या ऐसे पत्रकारों के परिवारों से किसी एक आश्रित को सरकारी नौकरी देने का प्रावधान या ऐसे परिवार के भरण-पोषण के लिए कोई नियमित मासिक आर्थिक सहायता देने का सरकार कोई विचार कर रही है? क्या मजीठिया आयोग को सरकार लागू करने का निर्णय ले रही है? धन्यवाद।
माननीय अध्यक्ष : आपकी बात आ गयी है। अब आप बैठिए।
श्री हंसराज गंगाराम अहीर : महोदया, माननीय सदस्य ने जो प्रश्न पूछा है, इसमें मैं इतना बता देना चाहता हूँ कि जो भी पत्रकारों पर हमले होते हैं या किसी पत्रकार को अपनी जान गँवानी पड़ती है, जिस भी कम्पनी या आर्गेनाइजेशन में ये एम्प्लॉई होते हैं, उस एम्प्लॉई को मुआवजा देने का प्रावधान सम्बन्धित आर्गेनाइजेशन का होता है। अपने देश में या किसी राज्य में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है कि पत्रकारों की ऐसे हत्या होने के बाद उनके परिवार को कुछ मुआवजा अलग से दिया जाये। ऐसा कोई प्रावधान नहीं है, लेकिन उनकी भावनाओं को देखते हुए हम समझते हैं कि एक इमोशनल ग्राउंड पर वे चाहते हैं कि ऐसा कोई प्रावधान हो, लेकिन ऐसा कोई प्रावधान नहीं है।
DR. A. SAMPATH: Thank you, Madam Speaker.
Madam Speaker, we all know that the Media is the Fourth Estate and is one of the pillars of our democracy. The question that my learned friend and I have asked is very important. I would like to know whether the number of attacks on journalists are on the rise in recent years. Here, in the reply the hon. Minister has given the State and Union Territory-wise cases registered (CR) and persons arrested (PAR) for attack on media persons under Sections 325, 326, 326A and 326B of IPC. What about Sections 302 of IPC and 307 of IPC? The learned Members of this House who have a background of legal profession very well know about Sections 302 and 307 of IPC. They have not been mentioned in the reply. They are very serious crimes under Indian Penal Code.
Madam Speaker, this is a very important issue. This data pertains to 2014 and 2015. What about the data of 2016? Can the Minister give the latest data for the calendar year 2016? It is shameful that crimes have not been reported by certain States. I am referring to Sl. No. 29 in the answer given by the hon. Minister about CR and PAR of a particular State. I am not mentioning the name of that State. But, if the law and order is a State subject and attacks on the journalists is on the rise, how can the Government of India allow a particular State to not to report crimes against the journalists and the Media? We are saying that the Media and the journalists have the freedom. They have the Right to Freedom of Speech and Expression under Article 19 (1) (A) of the Constitution of India. We are actually limiting the scope of the Press freedom. … (Interruptions)
माननीय अध्यक्ष: आपका प्रश्न हो गया है। आरोप-प्रत्यारोप नहीं, आप प्रश्न पूछिए।
श्री हंसराज गंगाराम अहीर :अध्यक्ष महोदया, माननीय सदस्य ने स्वयं यह स्वीकार किया है कि यह स्टेट का मामला होता है, इसलिए इसके बारे में सारा डाटा हमने कभी नहीं रखा था। वर्ष 2014 में आदरणीय मोदी जी की सरकार के आने के बाद से, वर्ष 2014 से इन अपराधों का डाटा रखा जा रहा है। वर्ष 2015 का डाटा दिया गया है। वर्ष 2016 में हुए इन अपराधों का डाटा जून तक आ जाएगा। इसमें एन.सी.आर.बी. काम करती है।
इन्होंने पत्रकारों पर होने वाले हमलों के बारे में जो चिंता प्रकट की है, उससे हम सहमत जरूर हैं, लेकिन ये सारे मामले स्टेट गवर्नमेंट के अंडर होने के कारण यहां पर हम उनके बारे में अधिक जानकारी दे नहीं पाएंगे।
SHRI P.R. SUNDARAM: Madam, the safety of media persons who are covering sensitive news is a matter of concern. Hon. Minister had informed this House last year that the State Governments are responsible for protecting journalists. But the work of journalists is not limited within the States. They work across the country.
Therefore, I would like to know whether the Government will come forward to bring any legislation for giving protection to journalists from attacks by unscrupulous elements. If so, the details thereof and if not, what kind of alternative actions have been taken by the Government in this regard.
श्री हंसराज गंगाराम अहीर :अध्यक्ष महोदया, पत्रकार भाइयों के लिए जो ‘भारतीय प्रेस परिषद’ है, इसके माध्यम से इन सारे अपराधों का संज्ञान लिया जाता है और यह अपने-अपने तरीके से ‘सुओ-मोटो’ कार्रवाई करने के लिए या अपराध दर्ज़ करने के लिए संबंधित स्टेट में प्रयास करती है। ‘भारतीय प्रेस परिषद’ की एक उप-समिति ने गृह मंत्रालय को अपनी कुछ सिफारिशें भेजी थीं, लेकिन अभी तक हमने उन सिफारिशों को स्वीकार नहीं किया है। देश में जो ‘इंडियन पीनल कोड’ है, उसके अंतर्गत पत्रकारों के साथ-साथ सभी नागरिकों के लिए उसमें मौज़ूदा कानून पर्याप्त माने गए हैं और उससे अलग हट कर किसी एक विशेष व्यवसाय के लिए हम लोग अलग कानून नहीं बना सकते हैं। इसलिए, हमारे देश में जितने भी गम्भीर अपराध या कुछ भी मामले होते हैं तो इस ‘इंडियन पीनल कोड’ के अन्तर्गत हमारे स्टेट्स में और सभी ज़गहों पर उस पर कार्रवाई होती है।
सी.आर.पी.सी. की धारा - 154 के अन्तर्गत एक और प्रावधान यह भी है कि अगर कोई पत्रकार या कोई नागरिक कम्प्लेंट करता है और अगर पुलिस स्टेशन में वह दर्ज़ नहीं की जाती है तो सी.आर.पी.सी. की धारा - 166 के अन्तर्गत उस संबंधित पुलिस अधिकारी पर कार्रवाई की जाती है, जिसमें उसे दो सालों की सज़ा भी हो सकती है। इसलिए सभी पत्रकारों और नागरिकों की सुरक्षा रहे, इसके लिए हमारे ‘इंडियन पीनल कोड’ में पहले से ही प्रावधान है।
श्री ओम प्रकाश यादव: अध्यक्ष महोदया, जैसा कि हमारे पूर्व के साथियों ने कहा कि पत्रकार हमारे लोकतंत्र के ‘चौथे स्तम्भ’ हैं। हमारे संसदीय क्षेत्र बिहार के सीवान में ‘हिन्दुस्तान’के ब्यूरो चीफ राजदेव रंजन की हत्या कर दी गयी। वे एक निर्भीक पत्रकार थे। आज उनका परिवार भुखमरी के कग़ार पर है।
मैं आपके माध्यम से माननीय मंत्री जी से जानना चाहता हूं कि ऐसे पत्रकार, जिनकी हत्या हो जाती है और जिनका परिवार भुखमरी की समस्या से ग्रसित है, उनके बाल-बच्चों की पढ़ाई-लिखाई की समस्या उत्पन्न हो जाती है, उनकी विधवा के लिए, मदद की गुहार लगाने के लिए सरकार के सिवा कोई और नहीं है तो क्या ऐसे पत्रकारों के परिवारों को आर्थिक सहयोग देने या उस परिवार के किसी आश्रित को एक सरकारी नौकरी देने का कोई प्रावधान है? अगर है, तो यह कब तक मिलेगा?
श्री हंसराज गंगाराम अहीर:अध्यक्षा जी, इसके बारे में मैं पहले ही जवाब दे चुका हूं, लेकिन सम्मानित सदस्य ने उस पत्रकार के परिवार के प्रति जो भावनाएं प्रकट की हैं, उनका हम भी सम्मान करते हैं। मैं फिर से यह कहूंगा कि संबंधित ऑर्गेनाइजेशन के माध्यम से इनके परिवारों को जो कुछ मुआवज़ा मिलना चाहिए था, वह संबंधित ऑर्गेनाइजेशन देता है। इसमें अभी तक ऐसा कोई प्रावधान नहीं है कि संबंधित परिवार के किसी सदस्य को नौकरी के लिए सरकार सिफारिश करे या ऐसा प्रावधान करे।
SHRI BAIJAYANT JAY PANDA: Madam, though the number of attacks on journalists has gone up and down, it is worrisome. Even 41, which is the latest, puts us in the category of countries which are in a different category of non-democracies and unstable countries.
We get two types of standard responses from the Union Government. One is that this is a State subject. Of course, it is a State subject. Another is, as the hon. Minister has said, that the existing laws are adequate for the protection of citizens including journalists. But the reality is that these attacks are happening and there is a demand for new laws. For example, recently there was an attack on doctors. That was in Mumbai but it happens everywhere. It happens in my State and everybody’s State. So, there has been demand for laws for special categories like doctors and journalists because the current laws probably are not adequate.
My question to the hon. Minister is this. Will the hon. Minister modernising some of these laws, or at least the rules by which the laws are implemented? Just yesterday we saw that a court summon was issued on Whatsapp which is a messaging app, which means the court themselves today are looking at modernising their processing. Will the hon. Minister commit to reviewing these laws and modernising at least the rules, if not the laws?
श्री हंसराज गंगाराम अहीर:अध्यक्षा जी, माननीय सदस्य ने प्रश्न पूछा है कि क्या विद्यमान कानून में कुछ बदलाव लाने का विचार चल रहा है। फिलहाल मैं कहूंगा कि अभी हमारा ऐसा कुछ विचार नहीं है, लेकिन विद्यमान कानून से हम सभी लोगों को सुरक्षा दे सकते हैं, ऐसा हमें लगता है। इसके बावजूद भी कई बार अमेंडमेंट आता है और यह सतत प्रक्रिया मानी जा सकती है। इस बारे में कभी ऐसा अवसर आने पर चेजेंज आ सकते हैं, मैं इतना ही कह सकता हूं।
माननीय अध्यक्ष: श्री दद्दन मिश्रा जी, कृपया शॉर्ट क्वेश्चन पूछिए, अब बहुत समय हो गया है।
श्री दद्दन मिश्रा : माननीय अध्यक्षा जी, धन्यवाद। पत्रकारों के उत्पीड़न एवं हत्याओं के मामले में उत्तर प्रदेश भी पीछे नहीं रहा है। उत्तर प्रदेश में वर्ष 2015 में पंचायत चुनाव के दौरान जिस तरह से लोकतंत्र एवं आदर्श आचार संहिता की धज्जियां उड़ायी गई थी, उसी श्रृंखला में हमारे संसदीय क्षेत्र के जनपद बलरामपुर में चुनाव के दौरान ब्लॉक प्रमुख पर जानलेवा हमला कर सत्ता पक्ष के द्वारा…* किया जा रहा था, जिसका स्थानीय पत्रकारों ने कवरेज करने का प्रयास किया था। परिणामस्वरुप, प्रदेश सरकार के एक मंत्री के पुत्र एवं उसके समर्थकों द्वारा पत्रकारों के ऊपर जानलेवा हमला किया गया था, जिसमें बहुत सारे पत्रकार घायल हुए थे और वे मरणासन्न स्थिति में थे।
माननीय अध्यक्ष: आपका प्रश्न क्या है?
श्री दद्दन मिश्रा: पत्रकारों का एक प्रतिनिधिमंडल हमारे माननीय गृह मंत्री जी से भी मिला था और माननीय गृह मंत्री जी ने उन्हें न्याय दिलाने का भरोसा भी दिलाया था। संघीय ढांचे की मर्यादा के अनुरूप प्रदेश सरकार को कार्रवाई करने के लिए लिखा था, जिसका हमें रिप्लाई भी आया था। चूंकि इस घटना में प्रदेश सरकार के एक मंत्री के पुत्र शामिल थे, इसलिए इस बारे में कोई कार्रवाई न करके सिर्फ लीपापोती ही की गई थी।
माननीय अध्यक्ष: बस बहुत हो गया, अभी आप क्या पूछना चाहते हैं?
श्री दद्दन मिश्रा: अब चूंकि उत्तर प्रदेश में भी कानून का राज चलाने वाली एक सरकार आ गई है।...(व्यवधान)
HON. SPEAKER: It seems you do not have any question to ask.
श्री हंसराज गंगाराम अहीर: अध्यक्षा जी, अभी माननीय सदस्य ने जो प्रश्न पूछा है, वह स्टेट का मामला है, फिर भी हमारे माननीय गृह मंत्री जी ने प्रदेश सरकार को एक चिट्ठी भेजी है और उस पर क्या कार्रवाई हुई है, यह जरूर पूछा जाएगा।
(Q. 522) SHRI KOTHA PRABHAKAR REDDY: Madam Speaker, I would like to know whether the Government is aware that nearly 46 lakhs people are dependent on fishery cultivation. The Government of Telengana has taken up many fishery development projects in the State. Various welfare schemes are being introduced for the benefit of fishermen. What are the steps being taken by Government of India for the benefit of fishermen and also what incentives are sops are being provided for the fishermen and the details thereof?
श्री सुदर्शन भगत : अध्यक्ष महोदया, माननीय सदस्य महोदय ने अपने राज्य के बारे में मत्स्य पालन विकास के बारे में चिंता व्यक्त की है। हमारे पास राज्य सरकार की तरफ से जो प्रस्ताव आया था, उसके आधार पर तेलंगाना राज्य में मत्स्य पालन के विकास के लिए कई प्रकार के कार्यक्रम चल रहे हैं, इनमें विशेष रूप से मछली उतारने के लिए केंद्रों का निर्माण हो रहा है, नए तालाबों का निर्माण हो रहा है, मछली हैचरी की स्थापना हुई है, मछली ब्रीड बैंक की स्थापना हुई है तथा मछली बीजपालन यूनिट की स्थापना हुई है। इसी प्रकार से मछली बीज पालन हेतु आवक लागत और मछली कल्चर हेतु आवक योजना आदि का काम चल रहा है।...(व्यवधान) मैं तेलंगाना के संदर्भ में ही कह रहा हूं। वहां पर मत्स्य पालन के विकास के लिए कई योजनाओं का कार्य चल रहा है।
SHRI KOTHA PRABHAKAR REDDY: Madam Speaker, as of now, the Government of Telengana is buying the seeds from the neighbouring States and supplying to the fishermen. I would like to know if the Central Government would come forward to bear the cost of seeds and provide financial assistance to the fishermen.
कृषि औरò किसानकल्याण मंत्री (श्री राधा मोहन सिंह) : महोदया,केन्द्र सरकार बीज उपलब्ध नहीं कराती है, बल्कि इसके लिए धनराशि देती है। विभिन्न योजनाओं के तहत तेलंगाना राज्य सरकार को तीन वर्षों के अंदर 31 करोड़ रुपये की राशि दी गई। 31 करोड़ रुपये में से इस वित्तीय वर्ष में 14 करोड़ 83 लाख रुपये राशि दी गई।
SHRI DUSHYANT SINGH: Madam Speaker, I would like to ask a specific question to the hon. Minister.
Our Prime Minister has talked about the White Revolution and also the Blue Revolution to increase fish production in our country. What is the policy of the Union Government to encourage fisheries to increase the Blue Revolution in not only one State but with respect to all the States of India? How are they promoting that? Is it by way of having technological expertise from countries like Israel or countries where there is such a cultivation of fisheries which will help our country to grow forward?
श्री राधा मोहन सिंह : महोदया, नीली क्रांति की घोषणा आदरणीय प्रधानमंत्री जी ने की और उसके बाद देश के अंदर, जो इनलैंड फिशरीज, मैरीन फिशरीज की तरह अलग-अलग योजनायें चल रही थीं, सबको एक छतरी के नीचे लाया गया और नीली क्रांति के जरिए, मुख्य रूप से जो हमारा फोकस है, वह है जल कृषि और मत्स्यिकी संसाधनों की क्षमता के दोहन पर ध्यान केन्द्रित करना और इस प्रकार से देश की निर्यात आय में भारतीय मत्स्यिकी के योगदान को बढ़ाना। यह मछुआरों और मछलीपालकों की आय में भी वृद्धि करेगा। हमने पांच वर्षों के लिए अभी जो कार्यक्रम शुरू किया है, अभी हमारा वर्ष 2016-17 का लक्ष्य 118 लाख टन का था, वर्ष 2015-16 में 107 लाख टन उत्पादन हुआ था और मुझे पूरा विश्वास है, अभी एक महीने के अंदर रिपोर्ट आएगी, कि हम इस लक्ष्य को भी प्राप्त करेंगे और वर्ष 2019-20 आते-आते हमारा लक्ष्य 150 लाख टन उत्पादन करने का है। इसी दृष्टि से हम तमाम योजनाओं को एक छतरी के नीचे लाए हैं और 5 वर्षों के लिए 3,000 करोड़ रुपये की राशि इसके लिए अनुमोदित की गई है।
SHRI K.C. VENUGOPAL: Madam, the Government of India is assisting the State Governments for construction of fishing harbours. In my constituency, there are two fishing harbours. One is in Thottappally and the other one is in Azhikkal, Kayamkulum. They have been constructed with the assistance of the Central Government. But due to design issue, both the fishing harbours are not functioning properly. One more new fishing harbour at Arthungal is under construction. That harbour is also facing the same issue.
Madam, the Government of Kerala has conducted a study in this connection by IIT, Chennai. They have given a detailed report correcting this design. After receiving the report, the Government of Kerala has sent a request to the Government of India that they should support the State by giving an additional amount for proper functioning of the three harbours at Thottappally, Azhikkal and Arthungal. They are in my constituency. This is not only the issue of my constituency. This is a common issue for all of us.
The Government of India has now cut the allocation from 80 per cent to 50 per cent. I have already met the hon. Minister twice in this regard. He is a very good Minister.
My plea to the hon. Minister is to consider my request, as far as the fishing harbours in my constituency are concerned.
श्री राधा मोहन सिंह : महोदया, जहां तक माननीय सदस्य ने फंडिंग पैटर्न की बात की है, तो मैं उनके ध्यान में लाना चाहता हूं कि वर्ष 2009-10 से 2013-14 तक जो फंडिंग पैटर्न था, उसमें भारत सरकार 50 प्रतिशत और राज्य सरकार प्रतिशत देती थी। वर्ष 2014-15 में भी वही पैटर्न रहा, इसके बाद 2016-17 में भी यही पैटर्न है। इसमें कोई बदलाव नहीं किया गया है।
जो उत्तर-पूर्व के राज्य हैं, उनका 75-25 का अनुपात था, उसको बढ़ाकर 80-20 किया गया है और यूटी के लिए 100 पर्सेंट किया गया है। अन्य सहायताओं के पैटर्न का जहां तक सवाल है, तो मछुआ आवास के लिए जहां पहले वर्ष 2009-10 से 2013-14 तक 50,000 रुपये प्रति यूनिट दिया जाता था, उसको बढ़ाकर 2014-15 में 75,000 रुपये किया गया। आज उसे एक लाख 20 हजार रुपये किया गया है।...(व्यवधान) मैं आपको सभी योजनाओं का फंडिंग पैटर्न बता रहा हूं। हमने राज्य सरकार की योजनाओं का बताया कि उसमें 50-50 दोनों का था और वह आज भी लागू है। आवास योजना में बढ़ा है। बैन पीरियड, जिसमें हम बचत से राहत कोष मछुआरों को देते हैं, उसमें वर्ष 2009-10 से 2013-14 तक सौ-सौ रुपये प्रति माह था। उसे बढ़ाकर 2014-15 में 900 रुपये प्रति माह किया गया। आज उसे 1500 रुपये प्रति माह किया गया है। इन दो चीजों में बढ़ोतरी हुई है और बाकी 50-50 का पैटर्न आज भी चालू है।
माननीय अध्यक्ष:गजानन कीर्तिकर जी।
बंगाल में तो हर घर में पौंड है।
…( व्यवधान)
श्री गजानन कीर्तिकर: महोदया, नवगठित तेलंगाना राज्य को मत्स्य पालन के विकास के लिए निधि की निश्चित ही आवश्यकता है और वह उसे मिलनी चाहिए। महाराष्ट्र को गठित हुए 56 वर्ष बीत चुके हैं, परन्तु इतने वर्षों बाद भी राज्य के मत्स्य पालन व्यवसाय में आवश्यक वृद्धि नहीं हुई है। मेरे संसदीय क्षेत्र में आने वाले वर्सोवा खाड़ी/बीच में मलबे की सफाई होनी जरुरी है। ...(व्यवधान) मलबा सफाई के लिए ड्रेजिंग कार्पोरेशन ऑफ इंडिया ने सर्वे किया है। मत्स्य पालन की वृद्धि के लिए यह जरूरी है। जमा मलबा हटाने हेतु किमान 80 करोड़ रुपये का आवंटन केन्द्र सरकार को नीली क्रान्ति योजना से करना चाहिए।...(व्यवधान)
HON. SPEAKER: Please ask the question.
श्री गजानन कीर्तिकर: साथ ही वर्सोवा मछुआरा बंदर जेट्टी की मरम्मत करने के लिए 310 करोड़ रुपये की निधि की आवश्यकता है।...(व्यवधान) अत: मैं माननीय मंत्री जी से जानना चाहता हूं कि क्या केन्द्र सरकार मलबा सफाई एवं वर्सोवा बंदर की मरम्मत के लिए उपरोक्त निधि नीली क्रान्ति योजना के तहत आवंटित करेगी?
श्री राधा मोहन सिंह : अध्यक्ष महोदया, हमने आदरणीय गडकरी जी के साथ 2-3 बैठकें की हैं। निश्चित रूप से तटीय राज्यों के अंदर जो इफ्रास्ट्रक्चर है, अब मंत्रालय भी तैयार हो गया है और इसके लिए ज्यादा धनराशि मुहैया होगी, लेकिन तटीय राज्यों के अंदर 12 समुद्री मील में जो ट्रेडीशनल मछुआरे मछली मारते हैं, अब उसमें मछली नहीं है। डीप फिशिंग के लिए हमारे मछुआरों के पास कोई वैसल्स नहीं हैं, क्योंकि उसकी कीमत कम से कम 80 लाख रुपये है। इस दृष्टि से ब्लू रैवोल्यूशन के अंतर्गत माननीय प्रधान मंत्री जी के निर्देश में हमने डीप सी फिशिंग को बढ़ावा देने के बारे में तय किया है। इसके लिए 18 से 24 मीटर या इससे अधिक लम्बाई की डीप सी फिशिंग नौका, जो कीमती होती है, उसमें भारत सरकार 50 प्रतिशत की सहायती करेगी। तमिलनाडु सरकार से जानकारी आई है कि वह 10 प्रतिशत की मदद करेगी। हम बाकी राज्यों के सम्पर्क में भी हैं, लेकिन उत्पादन बढ़े और इसके लिए सबसे ज्यादा जरूरी डीप सी फिशिंग वैसल्स हैं, जो बहुत कीमती होता है। वह हमारे मछुआरों को प्राप्त हो, इसके लिए हमने डीप फिशिंग पॉलिसी की घोषणा कर दी है और उसे चालू करेंगे।
SHRI SURESH C. ANGADI: Madam Speaker, thank you. The State of Karnataka is facing drought continuously for the last three years. Hon. Prime Minister, Shri Narendra Modi ji, has introduced the Fasal Bima Yojana. The Government of Karnataka has appointed the insurance companies. But these insurance companies are refusing to pay the claims made by the farmers on technical grounds.
So, I would request the hon. Minister to direct the State Government to settle the issues of farmers. … (Interruptions)
माननीय अध्यक्ष : यह प्रश्न फिशरीज़ के बारे में है। You are asking about farmers.
… (Interruptions)
HON. SPEAKER: The Question relates to fisheries. If the hon. Minister wants to reply, then it is alright.
श्री राधा मोहन सिंह : अध्यक्ष महोदया, देश में मछुआरा बीमा योजना भी चलती है।...(व्यवधान) इसके लिए पहले प्रीमियम राशि ज्यादा थी। हमने उसे भी कम किया है। उसके नार्म्स पहले से तय हैं, हम निश्चित रूप से इस बारे में राज्य सरकार से बात करेंगे और जो डिजर्व करते हैं, उनको भुगतान कराएंगे।
12.00 hours श्री मोहम्मद सलीम: मैं बंगाल से आता हूं, जहां लोग फिश खाते हैं। मेरा सवाल बड़ा स्पष्ट है। मंत्री जी ने कहा कि फिशरमैन के घर के लिए राशि बढ़ाई है, लेकिन आप तेलंगाना के सवाल के उत्तर में देखेंगे, वे जो भी घोषणाएं कर रहे हैं, उस मद में पैसा नहीं दिया जाता है। जब आप फिशरमैन को नहीं बचाएंगे तो फिशिंग नहीं बच पाएगी। फिशरमैन के लिए स्पैसिफिक योजना में बंगाल को कितना पैसा दिया है?
श्री राधा मोहन सिंह : महोदया, मैं बंगाल के विषय में बताना चाहूंगा, तेलंगाना के विषय में जिन योजनाओं के उत्तर को मैंने पटल पर ले किया है, उसका योजनावार विवरण है, लेकिन पश्चिम बंगाल का जहां तक सवाल है, इसमें बंगाल के लिए 774 लाख रुपये की राशि इस वर्ष जारी की गई है। योजनावार विवरण हम आपको अलग से उपलब्ध करा देंगे।
श्री राम चरित्र निषाद :मैडम, मैं अपने मंत्री जी और प्रधानमंत्री जी को बधाई देता हूं कि देश की आजादी के बाद भी आज तक विदेशों में फिशरीज डे मनाया जाता था। 24 नवम्बर, 2014 को पहली बार इंडिया में फिशरीज डे मनाया जाना लगा, मैं इसके लिए माननीय मंत्री जी और प्रधानमंत्री जी को बधाई देता हूं।
आज मछुआरों के लिए एक विकास बोर्ड है, 20 करोड़ मछुआरों की समस्या है। एक फिशरीज बोर्ड हैदराबाद में है। मैं चाहता हूं कि इस बोर्ड को माननीय मंत्री जी दिल्ली लेकर आएं। जो बोर्ड है उसमें किसी पॉलिटिकल व्यक्ति को चेयरमैन बनाइए तभी निषाद समाज का भला होगा, तभी वे इसे रोजी-रोटी का जरिया बना पाएंगे। बहुत-बहुत धन्यवाद।
श्री राधा मोहन सिंह : महोदया, फिशरीज बोर्ड में पॉलिटिकल व्यक्ति को चेयरमैन बनाने का जहां तक सवाल है, जो अभी उसके नार्म्स हैं, उसके तहत यह संभव नहीं है। जहां तक बोर्ड के मुख्यालय को हैदराबाद से बाहर ले जाने का प्रश्न है, मैं माननीय सदस्य के ध्यान में लाना चाहता हूं कि यदि हम ऐसा करेंगे तो नारियल विकास बोर्ड का ऑफिस जो केरल में है, उसे भी लाना पड़ेगा, कई स्थान पर बोर्ड उन इलाकों में स्थित है, इससे भारी आर्थिक क्षति होगी।
मैं इस अवसर पर आंध्र प्रदेश के माननीय सांसदों से निवेदन करना चाहता हूं कि जब से आंध्र प्रदेश अलग हुआ है, तब से लगातार यह कह रहे है कि इसे वहां से हटाकर विजयवाड़ा या दूसरा ऑफिस खोल दें, जो संभव नहीं है, यह हैदराबाद में हैं और वहीं रहेगा।
वर्ष 2014-15 में विकलांगता के लिए बीमा राशि एक लाख रुपये थी, उसे अब दो लाख रुपये किया गया है, आंशिक विकलांगता जो पहले 50 हजार रुपये थी, उसे 1 लाख रुपये किया गया है, पहले दुर्घटना में चोट लगने पर एक पैसा नहीं मिलता था, उसे दस हजार किया गया है।
12.03 hours PAPERS LAID ON THE TABLE