State Consumer Disputes Redressal Commission
Bank Of Baroda vs Dinesh Kumar Gupta on 25 January, 2018
Cause Title/Judgement-Entry STATE CONSUMER DISPUTES REDRESSAL COMMISSION, UP C-1 Vikrant Khand 1 (Near Shaheed Path), Gomti Nagar Lucknow-226010 First Appeal No. A/1090/2017 ( Date of Filing : 20 Jun 2017 ) (Arisen out of Order Dated 25/05/2017 in Case No. C/07/2009 of District Fatehpur) 1. Bank Of Baroda Fatehpur ...........Appellant(s) Versus 1. Dinesh Kumar Gupta Fatehpur ...........Respondent(s) BEFORE: HON'BLE MR. JUSTICE AKHTAR HUSAIN KHAN PRESIDENT HON'BLE MR. Mahesh Chand MEMBER For the Appellant: For the Respondent: Dated : 25 Jan 2018 Final Order / Judgement
राज्य उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग, उ0प्र0, लखनऊ।
मौखिक अपील संख्या- 1090/2017 (जिला उपभोक्ता फोरम, फतेहपुर द्वारा परिवाद संख्या- 07/2009 में पारित निर्णय और आदेश दिनांक 25-05-2017 के विरूद्ध) 1- ब्रांच मैनेजर, बैंक आफ बड़ौदा, खागा ब्रांच, किशुनपुर रोड, खागा जिला फतेहपुर, यू0पी।
2- जोनल मैनेजर, बैंक आफ बड़ौदा, जोनल आफिस, गुमटी नं० 5, जिला कानपुर नगर, यू0पी0।
अपीलार्थी/विपक्षीगण बनाम दिनेश कुमार गुप्ता, पुत्र श्री शिवबालक गुप्ता, निवासी (ब्राहामण टोला) अर्धिकांथ गढ़ी वार्ड नं० 3 नई बस्ती, कैनाल रोड, खागा जिला फतेहपुर यू0पी0 प्रत्यर्थी/परिवादी माननीय न्यायमूर्ति श्री अख्तर हुसैन खान, अध्यक्ष।
माननीय श्री महेश चन्द, सदस्य अपीलार्थी की ओर से उपस्थित : विद्वान अधिवक्ता, श्री अनिल कुमार मिश्रा प्रत्यर्थी की ओर से उपस्थित : विद्वान अधिवक्ता, श्री राघवेन्द्र प्रताप सिंह दिनांक - 23.04.2018 मा0 श्री न्यायमूर्ति अख्तर हुसैन खान , अध्यक्ष द्वारा उदघोषित निर्णय परिवाद संख्या 07/2009 दिनेश कुमार गुप्ता बनाम मुख्य प्रबन्धक, जोनल कार्यालय बैंक आफ बड़ौदा व एक अन्य में जिला फोरम फतेहपुर द्वारा पारित निर्णय और आदेश दिनांक 25-05-2017 के विरूद्ध यह अपील धारा 15 उपभोक्ता सरंक्षण अधिनियम के अन्तर्गत आयोग के समक्ष प्रस्तुत की गयी है।
आक्षेपित आदेश के द्वारा जिला फोरम ने परिवाद विपक्षीगण के विरूद्ध आंशिक रूप से स्वीकार करते हुए निम्न आदेश पारित किया है:-
"परिवादी का परिवाद विपक्षीगण के विरूद्ध आंशिक रूप से स्वीकार किया जाता है। विपक्षीगण को आदेशित किया जाता है कि परिवादी को चेक संख्या 249395 की धनराशि मु0 12,658/- रू० जमा करने की तिथि 08-10-2005 से अंतिम अदायगी की 2 तिथि तक 8 प्रतिशत साधारण वार्षिक ब्याज के साथ निर्णय की तिथि से एक माह के अन्दर संयुक्त से या पृथक-पृथक अदा करें तथा आर्थिक, मानसिक शारीरिक क्षति व परिवाद व्यय के मद में मु0 5000/- रू० भी निर्धारित अवधि में परिवादी को अदा करें। साथ ही पूर्व में परिवादी द्वारा उक्त खाते में तत्कालीन जमा धनराशि मु0 1,161, रू० भी नियमानुसार अदा करें। पत्रावली दाखिल दफ्तर हो।"
अपील की सुनवाई के समय अपीलार्थी/विपक्षीगण की ओर से विद्वान अधिवक्ता श्री अनिल कुमार मिश्रा और प्रत्यर्थी/परिवादी की ओर से विद्वान अधिवक्ता श्री राघवेन्द्र प्रताप सिंह उपस्थित आए।
हमने उभय पक्ष के विद्वान अधिवक्तागण के तर्क को सुना है और आक्षेपित निर्णय और आदेश तथा पत्रावली का अवलोकन किया है।
अपील के निर्णय हेतु संक्षिप्त सुसंगत तथ्य इस प्रकार हैं कि प्रत्यर्थी/परिवादी ने परिवाद जिला फोरम के समक्ष इस कथन के साथ प्रस्तुत किया है कि विपक्षी बैंक की खागा ब्रांच में उसका बचत खाता संख्या 14210100007366 है जिसमें उसने विपक्षी बैंक आफ बड़ौदा के म्यूचुअल फंड का प्राप्त चेक नंम्बर 249395 मु0 12,658/- रू० दिनांक 08-10-2005 को जमा किया लेकिन उसके खाते में चेक की धनराधि क्रेडिट नहीं हुयी। इस बात की जानकारी उसे दिनांक 24-03-2008 को नई पासबुक प्राप्त होने पर हुयी। तब उसने दिनांक 25-03-2008 को इसकी लिखित सूचना विपक्षी बैंक को दिया और उक्त रकम पर ब्याज जमा कर शीघ्र प्रदर्शित करने का निवेदन किया। तब विपक्षी संख्या 2 शाखा प्रबन्धक, खागा ने इन्ट्री कराने का आश्वासन दिया। परन्तु उक्त जमा रकम दिनांक 05-05-2008 तक उसके खाते में प्रदर्शित नहीं की गयी। तब उसने अधिवक्ता के माध्यम से विपक्षीगण को नोटिस भेजा और कोई कार्यवाही न होने पर परिवाद जिला फोरम के समक्ष प्रस्तुत किया।
विपक्षी संख्या 1 और 2 की ओर से लिखित कथन जिला फोरम के समक्ष प्रस्तुत किया गया है जिसमें कहा गया है कि बैंक खाते के अनुसार वादी के खाते में 3 कम्प्युटर द्वारा प्रविष्टि की गयी है। लिखित कथन में विपक्षीगण की ओर से कहा गया है कि प्रत्यर्थी/परिवादी के अनुसार कथित धनराशि 2005 में जमा की गयी है जबकि उसने परिवाद 2009 में प्रस्तुत किया है। लिखित कथन में यह भी कहा गया है कि याची द्वारा जो भी चेक जमा किया जाता है वह कलेक्शन में भेज दिया जाता है और कलेक्शन प्राप्त कर खाते में रकम जमा की जाती है। याची के कथित चेक कलेक्शन प्राप्त नहीं हुआ है। याची ने चेक बैंक में जमा किया है तो इंडेम्निटी बांड देने के उपरान्त ही दूसरा चेक बैंक के नियमों के अनुसार दिया जा सकता है। इंडेम्निटी बांड हेतु याची को अवगत कराया गया किन्तु उसके द्वारा इन्डेम्निटी बांड नहीं दिया गया है। विपक्षीगण की सेवा में कोई त्रुटि नहीं है।
जिला फोरम ने उभय पक्ष के अभिकथन एवं उपलब्ध साक्ष्यों पर विचार करने के उपरान्त यह निष्कर्ष निकाला है कि प्रत्यर्थी/परिवादी चेक संख्या- 249395 की जमा धनराशि 12,658/- रू० जमा करने की तिथि दिनांक 08-10-2005 से अंतिम अदायगी की तिथि तक 8 प्रतिशत साधारण वार्षिक ब्याज सहित विपक्षीगण से पाने का अधिकारी है। इसके साथ ही जिला फोरम ने यह भी माना है कि मानसिक व शारीरिक कष्ट एवं वाद व्यय हेतु 5000/- रू० भी प्रत्यर्थी/परिवादी को दिया जाना उचित है।
जिला फोरम ने यह भी माना है कि पूर्व में प्रत्यर्थी/परिवादी द्वारा जमा धनराशि 1,161/- रू० भी नियमानुसार उसे विपक्षी अदा करें। अत: जिला फोरम ने उपरोक्त प्रकार से निर्णय और आदेश पारित किया है।
अपीलार्थी के विद्वान अधिवक्ता का तर्क है कि अपीलार्थी/विपक्षी बैंक ने सेवा में कोई त्रुटि नहीं की है। अपीलार्थी/विपक्षीगण का बैंक प्रत्यर्थी/परिवादी को चेक प्रत्यर्थी/परिवादी द्वारा इन्डेम्निटी बांड देने पर देने को तैयार रहे हैं। परन्तु प्रत्यर्थी/परिवादी द्वारा इन्डेम्निटी बांड नहीं दिया गया है इस कारण चेक जारी नहीं किया गया है और भुगतान नहीं किया जा सका है। बैंक ने सेवा में कोई त्रुटि नहीं की 4 है। अपीलार्थी बैंक के विद्वान अधिवक्ता का तर्क है कि अपीलार्थी बैंक अब भी प्रत्यर्थी/परिवादी को चेक इन्डेम्निटी बांड देने पर उसे देने को तत्पर और तैयार हैं।
प्रत्यर्थी/परिवादी के विद्वान अधिवक्ता का तर्क है कि वह इन्डेम्निटी बांड देने को तैयार रहा है परन्तु जानबूझकर अपीलार्थी बैंक ने उसका भुगतान नहीं किया है। जिला फोरम का निर्णय उचित और विधि सम्मत है।
हमने उभय पक्षके तर्क पर विचार किया है।
स्वीकृत रूप से प्रत्यर्थी/परिवादी ने चेक के माध्यम से जो 12,658/- रू० अपने सेविंग एकाउंट में जमा किया है वह प्रत्यर्थी/परिवादी के खाते में क्रेडिट नहीं हुआ है और उसका भुगतान प्रत्यर्थी/परिवादी को नहीं मिला है। अत: ऐसी स्थिति में प्रत्यर्थी/परिवादी अपीलार्थी/विपक्षी बैंक से चेक की उपरोक्त धनराशि 12,658/- रू० ब्याज सहित पाने का अधिकारी है।
जिला फोरम ने जो 08 प्रतिशत वार्षिक की दर से ब्याज दिया है हमारी राय में वह उचित नहीं है। ब्याज प्रत्यर्थी/परिवादी को उसी दर से दिया जाना उचित है जो उसके उपरोक्त खाते में जमा धनराशि पर देय है। अत: जिला फोरम का निर्णय तदनुसार संशोधित किये जाने योग्य है।
जिला फोरम ने जो 5000/- रू० वाद व्यय व क्षतिपूर्ति के मद में प्रदान किया है वह अधिक है। हमारी राय में प्रत्यर्थी/परिवादी को वाद व्यय के रूप में 2000/- रू० दिया जाना उचित है।
उपरोक्त निष्कर्ष के आधार पर अपील आंशिक रूप से स्वीकार की जाती है और जिला फोरम द्वारा पारित आक्षेपित निर्णय और आदेश संशोधित करते हुए अपीलार्थी बैंक को आदेशित किया जाता है कि वह प्रत्यर्थी/परिवादी को चेक संख्या 249395 की धनराशि 12,658/- रू० प्रत्यर्थी/परिवादी के उपरोक्त बचत खाते में जमा धनराशि पर देय ब्याज की दर से चेक जमा करने की तिथि से अदायगी की तिथि तक ब्याज सहित प्रत्यर्थी/परिवादी को अदा करें। साथ ही प्रत्यर्थी/परिवादी को अपीलार्थी/विपक्षीगण 5 2000/- रू० वाद व्यय भी अदा करें। इसके साथ ही जिला फोरम ने जो प्रत्यर्थी/परिवादी के खाते में पूर्व जमा धनराशि 1,161/- रू० के भुगतान का आदेश किया है उसका भी पालन अपीलार्थी बैंक करें।
वर्तमान अपील में उभय पक्ष अपना-अपना वाद व्यय स्वयं वहन करेंगे।
अपीलार्थी द्वारा धारा 15 उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम के अन्तर्गत जमा धनराशि अर्जित ब्याज सहित जिला फोरम को इस निर्णय के अनुसार निस्तारण हेतु प्रेषित की जाए।
(न्यायमूर्ति अख्तर हुसैन खान) (महेश चन्द) अध्यक्ष सदस्य कृष्णा, आशु0 कोर्ट नं01 [HON'BLE MR. JUSTICE AKHTAR HUSAIN KHAN] PRESIDENT [HON'BLE MR. Mahesh Chand] MEMBER