State Consumer Disputes Redressal Commission
U.P.S.R.T.C. vs Balmukund Singh on 3 May, 2017
Cause Title/Judgement-Entry STATE CONSUMER DISPUTES REDRESSAL COMMISSION, UP C-1 Vikrant Khand 1 (Near Shaheed Path), Gomti Nagar Lucknow-226010 First Appeal No. A/825/2015 (Arisen out of Order Dated 31/01/2015 in Case No. C/41/2008 of District Deoria) 1. U.P.S.R.T.C. Gorakhpur ...........Appellant(s) Versus 1. Balmukund Singh Deoria ...........Respondent(s) BEFORE: HON'BLE MR. JUSTICE AKHTAR HUSAIN KHAN PRESIDENT For the Appellant: For the Respondent: Dated : 03 May 2017 Final Order / Judgement राज्य उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग, उ0प्र0, लखन ऊ अपील संख्या- 825 /2015 (मौखिक) (जिला उपभोक्ता फोरम,देवरिया द्वारा परिवाद संख्या-41/2008 में पारित आदेश दिनांक-31.01.2015 के विरूद्ध) उ0प्र0 रोडवेज (परिवहन निगम) द्वारा सामान्य प्रबन्धक/रीजनल मैनेजर, गोरखपुर (उ0प्र0) जनरल/रीजनल मैनेजर, उ0प्र0 रोडवेज, देवरिया जिला देवरिया। प्रदीप कुमार सिंह(कंडक्टर) यू0पी0 रोडवेज देवरिया जिला-देवरिया। दिवाकर शुक्ला(ड्राईवर) बस संख्या- यू0पी0 53 टी 6427 यू0पी0रोडवेज देवरिया। ..............अपीलार्थीगण/विपक्षीगण बनाम बाल मुकुन्द सिंह पुत्र श्री आर0एन0सिंह, मकान नम्बर 349 वार्ड नम्बर-2 मु0 राम नाथ देवरिया (दक्षिणी) जिला देवरिया पिन नं0-274001 ..........प्रत्यर्थी/परिवादी समक्ष:- 1.
माननीय न्यायमूर्ति श्री अख्तर हुसैन खान, अध्यक्ष।
अपीलार्थी की ओर से उपस्थित : श्री ज्ञान सिंह चौहान की सहयोगनी सुश्री मनीषा झा, विद्वान अधिवक्ता ।
प्रत्यर्थी की ओर से उपस्थित : कोई नहीं। दिनांक: 05.10.2017 मा0 न्यायमूर्ति श्री अख्तर हुसैन खान, अध्यक्ष द्वारा उदघोषित निर्णय
परिवाद सं0- 41/2008 बाल मुकुन्द सिंह बनाम उ0प्र0 परिवहन निगम व 3 अन्य में जिला फोरम देवरिया द्वारा पारित निर्णय और आदेश दिनांक 31.01.2015 के विरूद्ध यह अपील धारा-15 उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम के अंतर्गत आयोग के समक्ष प्रस्तुत की गयी है।
आक्षेपित निर्णय और आदेश के द्वारा जिला फोरम ने परिवाद स्वीकार करते हुए निम्न आदेश पारित किया है:-
"यह परिवाद विपक्षीगण के विरूद्ध इस प्रकार एवार्ड किया जाता है क वे एक माह में साईकिल का मूल्य 1535/-रू0 दो हजार रूपये शारीरिक/मानसिक कष्ट हेतु तथा दो हजार रूपये वाद व्यय सहित परिवादी को प्रदान करें। असफल रहने पर इस अवधि के बाद इस पर 10% वार्षिक ब्याज विपक्षीगण द्वारा परिवादी को देय होगा।"
जिला फोरम के निर्णय से क्षुब्ध होकर यह अपील उपरोक्त परिवाद के विपक्षीगण उ0प्र0 परिवहन निगम व 3 अन्य की ओर से प्रस्तुत की गयी है।
अपील की सुनवाई के समय अपीलार्थी की ओर से विद्वान अधिवक्ता श्री ज्ञान सिंह चौहान की सहयोगिनी सुश्री मनीषा झा उपस्थित हुयी है। प्रत्यर्थी की ओर से नोटिस के तामीला के बाद भी कोई उपस्थित नहीं हुआ है। अत: अपीलार्थी के विद्वान अधिवक्ता के तर्क को सुनकर तथा पत्रावली का अवलोकन कर अपील का निस्तारण किया जा रहा है।
अपील के निर्णय हेतु संक्षिप्त सुसंगत तथ्य इस प्रकार है प्रत्यर्थी/परिवादी ने परिवाद जिला फोरम के समक्ष इस कथन के साथ प्रस्तुत किया है कि दिनांक 25.12.2017 को बैतालपुर देवरिया से वह गोरखपुर के लिए उ0प्र0 परिवहन निगम की बस संख्या- यू0पी0 53 टी 6427 से यात्रा कर रहा था। उसके साथ बच्चों की साईकिल थी जो 1535/-रू0 में उसने खरीदी थी और साईकिल उसने बस के अंदर कन्डेक्टर विपक्षी संख्या-03 के कहने के अनुसार रखा, पर चौरी-चौरा में बस रूकने पर एक आदमी ने उसकी साईकिल को बस से उतार लिया। तब उसने विपक्षी संख्या-03 परिचालक से कहा और शोर मचाया, परन्तु काफी दूर जाकर बस खड़ी होने से वह व्यक्ति साईकिल लेकर गायब हो गया, काफी तलाश करने पर नहीं मिला।
परिवाद-पत्र के अनुसार प्रत्यर्थी/परिवादी का कथन है कि बस के गोरखपुर पहुंचने पर विपक्षी संख्या- 01 से प्रत्यर्थी/परिवादी ने शिकायत की, तब विपक्षी संख्या- 03 ने उसके समक्ष घटना स्वीकार की। प्रत्यर्थी/परिवादी ने घटना की सूचना थाना कैन्ट में दी, परन्तु घटना स्थल थाना चौरी चौरा का बताकर रिपोर्ट नहीं लिखी गयी। तब दूसरे दिन प्रत्यर्थी/परिवादी ने घटना की सूचना पुलिस अधीक्षक को दिया तथा विपक्षी संख्या- 02 को भी घटना की सूचना दिया। परिवाद-पत्र के अनुसार विपक्षी संख्या- 03 बस का परिचालक और विपक्षी संख्या- 04 बस का ड्राईवर है।
उपरोक्त कथन के साथ प्रत्यर्थी/परिवादी ने परिवाद प्रस्तुत कर साईकिल की क्षतिपूर्ति विपक्षीगण से दिलाए जाने की याचना की है।
विपक्षीगण ने लिखित कथन प्रस्तुत किया है जिसमें कहा है कि दिनांक 25.12.2007 को बैतालपुर में कोई सवारी नहीं बैठी थी और न कोई साईकिल उस समय बुक की गयी थी। लिखित कथन में कहा गया है कि परिवाद गलत तथ्यों के साथ प्रस्तुत किया गया है।
जिला फोरम ने उभयपक्षों के अभिकथन एवं उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर यह माना है कि प्रत्यर्थी/परिवादी ने दिनांक 25.12.2007 को बस से यात्रा का टिकट प्रस्तुत किया है अत: जिला फोरम ने यह माना है कि प्रत्यर्थी/परिवादी की साईकिल बस से कथित रूप से गायब हुई है जो परिचालक की सेवा में कमी और लापरवाही है। अत: जिलाफोरम ने परिवाद स्वीकार करते हुए उपरोक्त प्रकार से आदेश पारित किया है।
अपीलार्थीगण के विद्वान अधिवक्ता का तर्क है कि जिला फोरम द्वारा पारित आदेश साक्ष्य और विधि के विरूद्ध है और त्रुटिपूर्ण है। अत: निरस्त किए जाने योग्य है।
मैंने अपीलार्थी के विद्वान अधिवक्ता के तर्क पर विचार किया है। जिला फोरम के निर्णय के अवलोकन से यह स्पष्ट है कि जिला फोरम ने उभयपक्ष के अभिकथन एवं उपलब्ध साक्ष्यों की सही विवेचना की है और जिला फोरम ने जो यह निष्कर्ष निकाला है कि प्रत्यर्थी/परिवादी ने बस से कथित समय पर यात्रा की है और उसके पास टिकट है, वह सही है। अत: जिला फोरम ने प्रत्यर्थी/परिवादी के कथन पर विश्वास कर कोई गलती नहीं की है। अत: यह मानने हेतु उचित और युक्तिसंगत आधार है कि प्रत्यर्थी/परिवादी की बच्चों की साईकिल जिसका मूल्य 1535/-रू0 था, बस से प्रत्यर्थी/परिवादी की यात्रा के दौरान गायब हुयी है। ऐसी स्थिति में जिला फोरम ने साईकिल का मूल्य 1535/-रू0 अपीलार्थी/विपक्षीगण को प्रत्यर्थी/परिवादी को अदा करने हेतु जो आदेशित किया है वह उचित है। जिला फोरम ने जो 2,000/-रू0 वादव्यय प्रत्यर्थी/परिवादी को दिलाया है वह भी उचित है। जिला फोरम ने 10% की दर से जो ब्याज दिया है वह अधिक है। ब्याज दर कम कर 6% किया जाना उचित है।
जिला फोरम ने मानसिक कष्ट हेतु जो 2,000/-रू0 प्रत्यर्थी/परिवादी को प्रदान किया है उसे अपास्त किया जाना उचित है।
उपरोक्त निष्कर्षों के आधार पर अपील आंशिक रूप से स्वीकार की जाती है और अपीलार्थी/विपक्षीगण को आदेशित किया जाता है कि वे इस निर्णय की तिथि से एक माह के अंदर प्रत्यर्थी/परिवादी को 1535/-रू0 अदा करें और यदि इस अवधि में वे यह धनराशि प्रत्यर्थी/परिवादी को अदा नहीं करते हैं तो इस धनराशि 1535/-रू0 पर वे परिवाद प्रस्तुत करने की तिथि से अदायगी की तिथि तक 6% वार्षिक की दर से ब्याज भी अदा करेंगे। अपीलार्थी/विपक्षीगण, प्रत्यर्थी/परिवादी को जिला फोरम द्वारा प्रदान की गयी वाद व्यय की धनराशि 2000/- भी अदा करेंगे।
जिला फोरम ने जो 2000/-रू0 शारीरिक व मानसिक कष्ट हेतु प्रत्यर्थी/परिवादी को क्षतिपूर्ति प्रदान की है, उसे अपास्त किया जाता है।
अपील में उभयपक्ष अपना-अपना वादव्यय स्वयं वहन करेंगे।
धारा-15 उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम के अन्तर्गत अपील में जमा धनराशि अर्जित ब्याज सहित जिला फोरम को इस निर्णय के अनुसार निस्तारण हेतु प्रेषित की जाए।
(न्यायमूर्ति अख्तर हुसैन खान) अध्यक्ष सुधांशु श्रीवास्तव, आशु0 कोर्ट नं0-1 [HON'BLE MR. JUSTICE AKHTAR HUSAIN KHAN] PRESIDENT