Chattisgarh High Court
Ashok Chaturvedi vs State Of Chhattisgarh on 12 September, 2023
HIGH COURT OF CHHATTISGARH, BILASPUR
Order Sheet
MCRC No. 5653 of 2023
• Ashok Chaturvedi Son Of Harivansh Chaturvedi, Aged About 51 Years
Resident Of R/1, Sector -2, Agroha Colony, Police Station D.D. Nagar, Tahsil
And District - Raipur, Chhattisgarh.
---- Petitioner
Versus
• State Of Chhattisgarh Through Station House Office, Economics Offence
Wing Raipur, District - Raipur, Chhattisgarh.
---- Respondent
MCRC No. 5654 of 2023 • Ashok Chaturvedi S/o Harivansh Chaturvedi, Aged About 51 Years R/o R/1, Sector-2, Agroha Colony, Police Station D.D. Nagar, Tahsil And District Raipur Chhattisgarh.
---- Petitioner Versus • State Of Chhattisgarh Through Station House Office, Ant Corruption Bureau Raipur Chhattisgarh.
---- Respondent MCRC No. 5657 of 2023 • Ashok Chaturvedi S/o Harivansh Chaturvedi Aged About 51 Years Resident Of R/1, Sector -2, Agroha Colony, Police Station D.D. Nagar Tahsil And District - Raipur Chhattisgarh.
---- Petitioner Versus • State Of Chhattisgarh Through Station House Office, Economic Offence Wing Raipur District Raipur Chhattisgarh.
---- Respondent 12/09/2023 आवेदक द्वारा श्री अभिषेक सिन्हा, वरिष्ठ अधिवक्ता सह श्री हिमांशु सिन्हा, आशुतोष पाण्डेय एवं सुश्री खुशबू दबु े, अधिवक्तागण ।
उत्तरवादी/शासन द्वारा श्री राघवेन्द्र प्रधान, अतिरिक्त महाधिवक्ता । उपरोक्त तीनों मामले धारा-439 दण्ड प्रक्रिया संहिता, 1973 के तहत नियमित जमानत वास्ते प्रस्तुत किये गये हैं जो दिनाँक-09/08/2023 से लंबित है । पिछली सुनवाई तिथि दिनाँक-31/08/2023 को अंतरिम जमानत आवेदन पर विचार ना करते हुए, अंतिम सुनवाई वास्ते इस निर्देश के साथ रखा गया था कि शासन-पक्ष आवेदक का स्वास्थ्य परीक्षण Medical-Board से करा सकता है और अनावश्यक स्थगन पर अंतरिम जमानत आवेदन पर भी सुनवाई की जा सकती है ।
आज न्यायालयीन समय तक शासन-पक्ष से उपस्थित विद्वान अतिरिक्त महाधिवक्ता, अंतिम सुनवाई के लिए पूर्ण रूप से तैयार नहीं थे । इसके साथ- ही-साथ जिला चिकित्सालय, रायपुर के डॉक्टर द्वारा दिनाँक- 08/09/2023 की OPD पर्ची में आवेदक का X-Ray के साथ ही MRI कराने का जो सुझाव दिया गया था, वह MRI रिपोर्ट पेश नहीं की गयी है । चिकित्सा अधिकारी, केन्द्रीय जेल, रायपुर के पत्र दिनाँक-09/09/2023 के अनुसार MRI हेतु आवेदक को डी०के०एस० सुपरस्पेशलिटी हॉस्पिटल, रायपुर भेजने के लिए गार्ड की भी मांग की गयी थी, किन्तु MRI रिपोर्ट प्रस्तुत नहीं हुई है ।
जिला मेडिकल-बोर्ड, जिला चिकित्सालय, रायपुर के Medical Certificate के अनुसार आवेदक का X-Ray करवाया गया है । जिसके LS Spine में Low Backach पाया गया है और ईलाज की सलाह दी गयी है । आवेदक के अनुसार, उक्त मेडिकल-बोर्ड में कोई Orthopedic या Neurosurgeon नहीं था । इस प्रकार, आवेदक को जो Spine में तकलीफ है और जिस बाबत् MRI की सलाह दी गयी थी, वह जांच शासन पक्ष की ओर से पूरी नहीं हो रही है और आवेदक को प्रतिदिन Steroids का उपयोग करना पड़ता है । उपरोक्त स्थितियों को दृष्टिगत रखते हुए तीनों ही मामलों में आवेदक पक्ष ने अंतरिम जमानत आवेदन पर सुनवाई का निवेदन किया गया, जिसे स्वीकार किया गया ।
तीनों ही मामलों में आवेदक के अंतरिम जमानत आवेदन पर उभयपक्ष को सुना गया और अभिलेखों का परिशीलन किया गया ।
MCRC NO.-5653/2023:-
यह मामला थाना-राज्य आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो, रायपुर, छत्तीसगढ़ के अपराध क्रमाँक-02/2020 अंतर्गत धारा-11 भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 से संबंधित है । जिसके अनुसार, अभियोजन मामला इस आशय का है कि आवेदक जो लोक सेवक है वह छत्तीसगढ़ पाठ्य पुस्तक निगम का महाप्रबंधक रहा है । मेसर्स होप इंटरप्राईजेज काे छत्तीसगढ़ पाठ्य पुस्तक निगम से वर्ष 2017-18 में दर निविदा के नाम से लगभग 5 करोड़ रूपये का कार्य मिला । आवेदक के पुत्र आदित्य चतुर्वेदी के बैंक खाते में भिन्न-भिन्न तिथियों में कुल 34 लाख रूपये जमा कराये गये । इस प्रकार, आवेदक द्वारा अपने पद का उपयोग करते हुए संबद्घ व्यक्ति से प्रतिकर के बिना सम्यक लाभ प्राप्त किया गया ।
MCRC NO.-5654/2023:-
यह मामला थाना-राज्य आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो, रायपुर, छत्तीसगढ़ के अपराध क्रमाँक-16/2020 अंतर्गत धारा-13(1)(बी) एवं धारा-13(2) भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 यथा संशोधन 2018 से संबंधित है । जिसके अनुसार, अभियोजन मामला इस आशय का है कि आवेदक द्वारा शासकीय सेवा के दौरान अपने एवं अपने आश्रित सदस्यों के नाम से 96.77 प्रतिशत एवं उसकी पत्नी सह-अभियुक्त के द्वारा उसकी सेवा अवधि के दौरान 84.28 प्रतिशत असमानुपाति सम्पत्ति अर्जित की गयी ।
MCRC NO.-5657/2023:-
यह मामला थाना-राज्य आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो, रायपुर, छत्तीसगढ़ के अपराध क्रमाँक-19/2020 अंतर्गत धारा-7(सी), 13(2) भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 यथा संशोधन 2018 एवं धारा-420, 467, 468, 471, 120 बी भा०दं०सं० से संबंधित है । जिसके अनुसार, अभियोजन मामला इस आशय का है कि आवेदक अशोक चतुर्वेदी द्वारा अपने वरिष्ठ अधिकारियों के फर्जी हस्ताक्षर किये गये हैं, जिसमें सह-अभियुक्तगण के द्वारा कूटरचित निविदा प्रपत्र तैयार किये गये और अन्य निविदाकारों की जानकारी और सहमति के बिना उनकी ओर से निविदा रकम जमा की गयी ।
आवेदक पक्ष के विद्वान अधिवक्ता का तर्क इस आशय का है कि आवेदक गिरफ्तारी दिनाँक-30/06/2023 से अभिरक्षा में है । दो मामलों में अभियोग-पत्र भी पेश हो चुका है । एक मामले में अभियोग-पत्र पेश होना शेष है । किन्तु, उपरोक्त तीनों ही मामलों में अभी-तक आवेदक के विरूद्घ शासन की ओर से अभियोजन की स्वीकृति नहीं मिली है । आवेदक गम्भीर रूप से अस्वस्थ है जिसे ऑपरेशन की आवश्यकता है उसे प्रतिदिन Steroids का उपयोग करना पड़ता है । शासन द्वारा अभियोजन की अनुमति दिये बगैर मामले में आगे कोई कार्यवाही हो पाना संभव नहीं है । ऐसी दशा में, लम्बे समय तक आवेदक को जेल में रखा जाना उचित नहीं है । अतः उसके स्वास्थ और उपरोक्त तथ्यों को दृष्टिगत रखते हुए अंतरिम जमानत पर छोड़ा जाये ।
तर्क के समर्थन में, इस न्यायालय द्वारा पूर्व में MCRC No.- 7421/2022, Pankaj Shukla v. State of CG में पारित आदेश दिनाँक- 23/08/2022, MCRC No.-6023/2022, Renuka Prasad Nagpure v. State of CG में पारित आदेश दिनाँक-13/07/2022, MCRC No.- 897/2022, Gurjinder Pal Singh v. State of CG में पारित आदेश दिनाँक-12/05/2022 तथा माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा S.L.P. (Crl.) No.-3529/2009, Sukhwant Singh & Ors. v. State of Punjab में पारित आदेश दिनाँक-18/05/2009 का हवाला दिया है ।
शासन पक्ष की ओर से उपस्थित विद्वान अतिरिक्त महाधिवक्ता ने अपराध को गंभीर बताते हुए अंतरिम जमानत आवेदन का विरोध कर तर्क दिया है कि शासन द्वारा आवेदक का उचित रूप से उपचार कराया जा रहा है । अतः उसे अंतरिम जमानत आवेदन पर ना छोड़ा जाये ।
प्रस्तुत न्यायदृष्टांतों के अनुसार, संविधान के अनुच्छे द-21 व 22 के अनुसार प्रत्येक व्यक्ति को दैहिक स्वतंत्रता का अधिकार है । पर्याप्त कारणों के बिना उसे निरोध में लम्बे समय तक रखा जाना उचित नहीं पाया गया है । मेरे समक्ष के इस मामले में, शासन-पक्ष को यह अवसर भी दिया गया था कि आवेदक का उचित रूप से Medical-Board द्वारा जांच करवाया जाकर वस्तु- स्थिति पेश की जाये , किन्तु पूर्ण वस्तु-स्थिति पेश किया जाना दर्शित नहीं हो रहा है ।
आवेदक करीब ढाई माह से अभिरक्षा में निरूद्घ है । दो मामलों में अभियोग-पत्र पेश हो चुका है । सह-अभियुक्तगण को अग्रिम जमानत पर बताया गया है । एक मामले में अभियोग-पत्र पेश होना शेष है । अभी-तक किसी भी मामले में आवेदक को अभियोजित किये जाने बाबत् शासन की ओर से अनुमति नहीं मिली है । उपरोक्त अवस्था में, आवेदक के स्वास्थगत कारणों को देखते हु़ए और जमानत आवेदन के अंतिम निराकरण में समय लगने की संभावना को देखते हुए, आवेदक को तीनों ही मामलों में अंतरिम जमानत पर छोड़ा जाना उपयुक्त पाया जाता है ।
अतः आवेदक का तीनों मामलों में प्रस्तुत अंतरिम जमानत आवेदन स्वीकार कर आदेशित किया जाता है कि वह प्रत्येक मामले के लिये संबंधित न्यायालय में 1,00,000/- (एक लाख रूपये) का मुचलका और इतनी ही राशि का सक्षम जमानत संबंधित न्यायालय की संतष्टि ु योग्य प्रस्तुत करें तो इन नियमित जमानत आवेदनों के अंतिम निराकरण तक उसे अंतरिम जमानत पर छोड़ा जाये ।
प्रकरण अंतिम सुनवाई हेतु दो सप्ताह पश्चात् सूचीबद्घ किया जाये ।
सही/-
(संजय कुमार जायसवाल) पोमन न्यायाधीश