State Consumer Disputes Redressal Commission
N I A Co vs Garg Medico on 7 March, 2022
Cause Title/Judgement-Entry STATE CONSUMER DISPUTES REDRESSAL COMMISSION, UP C-1 Vikrant Khand 1 (Near Shaheed Path), Gomti Nagar Lucknow-226010 First Appeal No. A/2006/1819 ( Date of Filing : 31 Jul 2006 ) (Arisen out of Order Dated in Case No. of District State Commission) 1. N I A Co a ...........Appellant(s) Versus 1. Garg Medico a ...........Respondent(s) First Appeal No. A/2744/2014 ( Date of Filing : 31 Dec 2014 ) (Arisen out of Order Dated 12/06/2006 in Case No. C/12/2003 of District Gorakhpur) 1. M/S Garg Medicos Gandhi NGAR gOLGHAR Gorakhpur ...........Appellant(s) Versus 1. NIA Co mANDALIYA pRABANDHAK sUMER SAGAR Gorakhpur ...........Respondent(s) BEFORE: HON'BLE MR. JUSTICE ASHOK KUMAR PRESIDENT HON'BLE MR. Vikas Saxena JUDICIAL MEMBER PRESENT: Dated : 07 Mar 2022 Final Order / Judgement
सुरक्षित राज्य उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग, उ0प्र0, लखनऊ।
अपील संख्या - 2744/2014 (जिला उपभोक्ता आयोग, गोरखपुर द्वारा परिवाद संख्या- 12/2003 में पारित निर्णय/आदेश दिनांक 12-06-2006 के विरूद्ध) मेसर्स गर्ग मेडिको, गांधी नगर, गोलघर, गोरखपुर द्वारा प्रोपराइटर राजन अग्रवाल।
अपीलार्थी बनाम दि न्यू इण्डिया एस्योरेंस कम्पनी लि0 द्वारा मण्डलीय प्रबन्धक, सुमेर सागर गोरखपुर।
...........प्रत्यर्थी एवं अपील संख्या-1819/2006 दि न्यू इण्डिया एस्योरेंस कम्पनी लि0 द्वारा मण्डलीय प्रबन्धक, सुमेर सागर गोरखपुर।
.अपीलार्थी बनाम मेसर्स गर्ग मेडिको, गांधी नगर, गोलघर, गोरखपुर द्वारा प्रोपराइटर राजन अग्रवाल।
. प ्रत्यर्थी समक्ष:- माननीय न्यायमूर्ति श्री अशोक कुमार, अध्यक्ष माननीय श्री विकास सक्सेना सदस्य अपीलार्थी मै० गर्ग मेडिको की ओर से : विद्वान अधिवक्ता श्री आलोक रंजन प्रत्यर्थी बीमा कम्पनी की ओर से : विद्वान अधिवक्ता श्री जफर अजीज दिनांक- 31-03-2022 माननीय न्यायमूर्ति श्री अशोक कुमार , अध्यक्ष द्वारा उदघोषित निर्णय
उपरोक्त दोनों अपीलें, अर्थात् अपील संख्या-2744/2014 एवं अपील संख्या-1819/2006 जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग, गोरखपुर द्वारा परिवाद संख्या-12/2003, मैसर्स गर्ग मेडिको बनाम न्यू इण्डिया एस्योरेंश कम्पनी लि0 में पारित निर्णय/आदेश दिनांक 12-06-2006 के विरूद्ध धारा-15 2 उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम 1986, के अन्तर्गत राज्य आयोग के समक्ष योजित की गयी हैं। उपरोक्त् दोनों अपीलें एक ही निर्णय एंव आदेश के विरूद्ध योजित की गई हैं, इसलिए दोनों अपीलों का निस्तारण एक ही निर्णय द्वारा किया जा रहा है।
परिवाद पत्र के तथ्य संक्षेप में इस प्रकार हैं कि परिवादी का बीमा शाप कीपर्स इंश्योरेंश पालिसी के अन्तर्गत दिनांक 08.09.2000 से दिनांक 07-09-2001 तक की अवधि के लिए कराया गया था। दुकान का बीमा 5,00,000/-रू० (पांच लाख रूपये) के लिए किया गया था जिसके लिए 2591/-रू० प्रीमियम की धनराशि अदा की गयी। दिनांक 15-12-2000 को एक छात्र अस्पताल में डाक्टर आनन्द त्रिपाठी की देखरेख में भर्ती हुआ, उसकी मृत्यु दिनांक 18/19-12-2000 की रात्रि में हो गयी जिससे नाराज होकर दिनांक 19-12-2000 को 1.30 बजे दोपहर के समय कुछ व्यक्तियों ने आकर अस्पताल प्रांगण में तोड़फोड़ कर अस्पताल में स्थापित दुकान में क्षति पहॅुचायी। तोड़-फोड़ एवं लूट किये जाने की घटना की सूचना उसी दिन थाना कैन्ट में दी गयी जिसके आधार पर रिपोर्ट पंजीकृत की गयी। तोड़-फोड़ एवं लूट की सूचना बीमा कम्पनी को भी दी गयी और बीमित धनराशि 5,00,000/-रू०(पांच लाख रूपये) दिलाए जाने की मांग की गयी। इस पर बीमा कम्पनी द्वारा सर्वेयर नियुक्त किया गया और उन्हें दिनांक 01-04-2000 से दिनांक 19-12-2000 तक बैलेंस शीट वर्ष 1999-2000 स्टाक का स्टेटमेंट जो बैंक में भेजा जाता है उसे प्राप्त कराया गया। उक्त प्रपत्रों द्वारा उनको बताया गया कि घटना के समय कुल 4,95,471/-रू० की क्षति हुयी परन्तु सर्वेयर द्वारा अनुचित ढंग से धनराशि पर सुलह करने की बात की गयी जिसे परिवादी ने इन्कार कर दिया।
3तदोपरान्त विपक्षी कम्पनी द्वारा दिनांक 14-09-2001 को पत्र भेजकर परिवादी को सूचित किया गया कि 26,319/-रू० पर क्लेम निर्धारित किया गया है जिसे परिवादी द्वारा लेने से इन्कार कर दिया गया एवं बीमित धनराशि 5,00,000/-रू० प्रदान किये जाने की मांग की गयी जिसे विपक्षी बीमा कम्पनी ने देने से इन्कार कर दिया। अत: विवश होकर परिवादी ने परिवाद जिला आयोग के समक्ष प्रस्तुत किया।
विद्वान जिला आयोग ने परिवाद स्वीकार करते हुए निम्न आदेश पारित किया है:-
"वादी का वाद स्वीकार कर विपक्षी दि न्यू इण्डिया इंश्योरेंश कम्पनी लि0 को निर्देश दिया जाता है कि वह वादी की दुकान का बीमा शाप कीपर्स इंश्योरेंश पालिसी के अन्तर्गत करने के आधार पर दुकान में हुयी क्षतिपूर्ति के लिए 4,75,000/-रू० का भुगतान वादी को करें और इसके साथ वाद प्रस्तुत करने की तिथि दिनांक 06-01-2003 से भुगतान तक 06 प्रतिशत वार्षिक ब्याज व 1000/-रू० वाद व्यय का भुगतान भी करें। "
विद्वान जिला आयोग के निर्णय एवं आदेश से क्षुब्ध होकर विपक्षी बीमा कम्पनी दि न्यू इण्डिया इंश्योरेंश कम्पनी लि0 ने उपरोक्त अपील संख्या-1819/2006 प्रस्तुत की है।
विद्वान जिला आयोग के समक्ष विपक्षी दि न्यू इण्डिया एश्योरेंश कम्पनी लि0 की ओर से आपत्ति प्रस्तुत की गयी जिसमें परिवादी की दुकान का बीमा होना एवं घटना की सूचना विपक्षी बीमा कम्पनी को दिया जाना स्वीकार किया गया है तथा क्षतिपूर्ति के मद में 26,319/-रू० क्लेम निर्धारित किया जाना भी स्वीकार किया गया है। विपक्षी बीमा कम्पनी द्वारा यह भी कहा गया है कि परिवादी ने गलत ढंग से लूट की घटना को दिखाते हुए 4 5,00,000/-रू० की मांग की है जो उचित नहीं है। विपक्षी बीमा कम्पनी के सर्वेयर द्वारा सर्वे करने के उपरान्त क्षतिपूर्ति के मद में 26,319/-रू० क्लेम निर्धारित किया गया। विपक्षी बीमा के विद्वान अधिवक्ता का कथन है कि बीमा कम्पनी द्वारा सेवा में कोई कमी नहीं की गयी है।
विद्वान जिला आयोग ने उभय-पक्ष के अभिकथनों पर एवं पत्रावली पर उपलब्ध समस्त प्रपत्रों पर विचार करने के उपरान्त अपने निष्कर्ष में यह अंकित किया है कि दोनों पक्षों के बीच विवाद शाप कीपर्स इंश्योरेंश पालिसी के अन्तर्गत विपक्षी बीमा कम्पनी ली गयी 5,00,000/-रू० की पालिसी की देयता के सम्बन्ध में है। परिवादी के अनुसार 4,95,471.95 पैसे की क्षति हुयी और विपक्षी बीमा कम्पनी द्वारा 26,319/-रू० क्लेम निर्धारित किया गया जो परिवादी के मानक के अनुसार बहुत ही कम है।
विद्वान जिला आयोग ने पत्रावली पर उपलब्ध समस्त प्रपत्रों का परिशीलन करने के उपरान्त यह पाया कि विपक्षी बीमा कम्पनी द्वारा जो 26,319/-रू० की देयता निर्धारित की गयी वह अत्यन्त ही कम है विद्वान जिला आयोग द्वारा परिवादी की दुकान में हुयी तोड़-फोड़ एवं क्षति हेतु 4,75,000/- रू० क्षति आकलित करते हुए विपक्षी बीमा कम्पनी से परिवादी को दिलाए जाने हेतु आदेशित किया है। अत: जिला आयोग ने परिवादी द्वारा प्रस्तुत परिवाद को स्वीकार करते हुए उपरोक्त आदेश पारित किया है।
अपील की सुनवाई के समय अपीलार्थी मैसर्स गर्ग मेडिको की ओर से विद्वान अधिवक्ता आलोक रंजन उपस्थित हुए एवं बीमा कम्पनी की ओर से विद्वान अधिवक्ता श्री जफर अजीज उपस्थित हुए।
हमारे द्वारा उभय-पक्ष के विद्वान अधिवक्ताद्व्य के तर्कों को सुना और पत्रावली पर उपलब्ध समस्त प्रपत्रों का गहनता से परिशीलन किया।
5अपील संख्या- 2744/2014 सर्व श्री मैसर्स गर्ग मेडिको द्वारा इस न्यायालय के सम्मुख प्रस्तुत की गयी है जिसमें उपरोक्त अपीलार्थी सर्व श्री मैसर्स गर्ग मेडिको द्वारा प्रस्तुत अपील को स्वीकार करने हेतु तथा विपक्षी दि न्यू इण्डिया एश्योरेंश कम्पनी लि0 द्वारा देय धनराशि पर ब्याज एवं हर्जाना की धनराशि प्राप्त कराए जाने हेतु निवेदन किया गया है।
अपील संख्या-1819/2006 दि न्यू इण्डिया एश्योरेंश कम्पनी लि0 द्वारा इस न्यायालय के समक्ष विद्वान जिला आयोग द्वारा पारित निर्णय को अपास्त करने तथा प्रस्तुत अपील संख्या-1819/2006 को स्वीकार करने हेतु प्रस्तुत की गयी है।
हमारे द्वारा उभय-पक्ष के विद्वान अधिवक्ताद्व्य को सुना गया। चॅूंकि दोनों अपीलें एक ही न्याय निर्णय द्वारा विद्वान जिला आयोग गोरखपुर परिवाद संख्या-12/2003 में पारित निर्णय/आदेश दिनांक 12-06-2006 के विरूद्ध योजित की गयी हैं अत: दोनों ही अपीलों का निस्तारण एक साथ इस निर्णय के द्वारा किया जा रहा है।
जहॉं तक अपील संख्या- 2744/2014 सर्व श्री मैसर्स गर्ग मेडिको द्वारा प्रस्तुत अपील का प्रश्न है अर्थात उक्त अपील संख्या- 2744/2014 निर्विवाद रूप से विद्वान जिला आयोग द्वारा पारित प्रश्नगत निर्णय एवं आदेश दिनांक 12-06-2006 के विरूद्ध 08 वर्ष की अवधि व्यतीत होने के पश्चात प्रस्तुत की गयी है।
प्रस्तुत अपील के साथ अपीलार्थी द्वारा विलम्ब माफी प्रार्थना-पत्र भी प्रस्तुत नहीं किया गया है साथ ही अपीलार्थी के विद्वान अधिवक्ता द्वारा यह भी स्पष्ट रूप से कथन नहीं किया जा सका कि जो अनुतोष विद्वान जिला आयोग द्वारा परिवादी को प्रदान किया गया है वह किस दृष्टि से अनुचित है।
6अपीलार्थी सर्व श्री मैसर्स गर्ग मेडिको द्वारा कुल 500,000/-रू० दिलाए जाने की मांग की गयी जब कि विपक्षी दि न्यू इण्डिया एश्योरेंश कम्पनी लि0 द्वारा सर्वेयर रिपोर्ट के अनुसार 26,319/-रू० की देयता स्वीकार की गयी। विद्वान जिला आयोग द्वारा उक्त के विरूद्ध सर्व श्री गर्ग मेडिको अपीलार्थी को क्षतिपूर्ति के मद में कुल धनराशि 4,75,000/-रू० दिये जाने हेतु आदेश पारित किया गया साथ ही 06 प्रतिशत वार्षिक की दर से ब्याज भी परिवाद प्रस्तुत करने की तिथि अर्थात दिनांक 06-01-2003 से भुगतान की तिथि तक प्रदान किये जाने का आदेश पारित किया गया है तथा वाद व्यय के रूप में रूपये 1000/- की देयता भी निर्धारित की गयी है।
पत्रावली पर उपलब्ध आदेश फलक से यह स्पष्ट होता है कि उपरोक्त अपील संख्या- 2744/2014 मैसर्स गर्ग मेडिको में इस कारण से विलम्ब रहा क्योंकि उसे विपक्षी दि न्यू इण्डिया एश्योरेंश कम्पनी लि0 द्वारा प्रस्तुत अपील संख्या- 1819/2006 के साथ सूचीबद्ध करने हेतु दिनांक 11-05-2015 को आदेशित किया गया।
हमारे मत से जहॉं तक सर्व श्री मैसर्स गर्ग मेडिको की ग्राह्यता का प्रश्न है वह कदापि ग्राह्य नहीं हो सकती क्योंकि उपरोक्त अपील 08 वर्ष की लम्बी देरी अवधि के पश्चात प्रस्तुत की गयी है, अतएव उपरोक्त अपील संख्या- 2744/2014 सर्व श्री मैसर्स गर्ग मेडिको बनाम दि न्यू इण्डिया एश्योरेंश कम्पनी लि0 निरस्त किये जाने योग्य है।
जहां तक विपक्षी बीमा कम्पनी द्वारा प्रस्तुत अपील संख्या- 1819/2006 का प्रश्न है उक्त अपील समयावधि में प्रस्तुत की गयी है जिसमें इस न्यायालय द्वारा अन्तरिम आदेश दिनांक 14-08-2006 को पारित किया गया जिसमें अपीलार्थी बीमा कम्पनी से 50,000/-रू० उनके द्वारा बैंक ड्राफ्ट 7 के माध्यम से जिला आयोग, गोरखपुर के समक्ष एक माह की अवधि में जमा किये जाने हेतु आदेशित किया गया है साथ ही विद्वान जिला आयोग गोरखपुर द्वारा पारित निर्णय एवं आदेश दिनांक 12-06-2006 का अनुपालन अगली तिथि तक स्थगित किया गया है। उपरोक्त अन्तरिम आदेश वर्तमान में क्रियाशील पाया गया।
अपील संख्या- 1819/2006 बीमा कम्पनी दि न्यू इण्डिया एश्योरेंश कम्पनी लि0 की ओर से उपस्थित विद्वान अधिवक्ता श्री जफर अजीज द्वारा कथन किया गया कि विद्वान जिला आयोग गोरखपुर द्वारा बिना किसी उचित आधार के जो 4,75,000/-रू० की देयता हेतु आदेशित किया गया है वह पूर्णत: अनुचित है। बीमा कम्पनी के विद्वान अधिवक्ता द्वारा कथन किया गया कि जब सर्वेयर द्वारा कुल क्षति 26,319/-रू० का क्लेम निर्धारित किया गया तब उसके विरूद्ध 4,75,000/-रू० की देयता निर्धारित किये जाने के आदेश को उचित नहीं कहा जा सकता है।
हमारे द्वारा उभय-पक्ष के विद्वान अधिवक्ताद्व्य के तर्कों को सुना गया तथा विद्वान जिला आयोग द्वारा पारित निर्णय/आदेश का परिशीलन करने के उपरान्त हम पाते हैं कि विद्वान जिला आयोग द्वारा जो 4,75,000/-रू० की क्षतिपूर्ति दिलायी गयी है वह अत्यधिक है जबकि पत्रावली पर ऐसा कोई सुसंगत प्रपत्र यह स्पष्ट नहीं करता है कि उपरोक्त 4,75,000/-रू० की क्षति सर्व श्री मैसर्स गर्ग मेडिको को अस्पताल में हुए तोड़-फोड़ की घटना के कारण कारित हुयी हो।
8समस्त तथ्यों को दृष्टिगत रखते हुए तथा यह कि अपील संख्या-2744/2014 मैसर्स गर्ग मेडिको बनाम दि न्यू इण्डिया एश्योरेंश कम्पनी लि0 विलम्ब से प्रस्तुत की गयी है जो प्रथम दृष्टया पेशबन्दी के कारण प्रस्तुत की गयी है, हमारी राय में विद्वान जिला आयोग द्वारा पारित निर्णय एवं आदेश दिनांक 12-06-2006 पूर्णतया उचित नहीं प्रतीत होता है, अत: इसे संशोधित करते हुए प्रस्तुत अपील संख्या- 2744/2014 निरस्त किये जाने योग्य है एवं अपील संख्या- 1819/2006 दि न्यू इण्डिया एश्योरेंश कम्पनी लि0 बनाम मैसर्स गर्ग मेडिको आंशिक रूप से स्वीकार किये जाने योग्य है तदनुसार विद्वान जिला आयोग द्वारा पारित निर्णय एवं आदेश निम्न प्रकार से संशोधित किये जाने योग्य है-
आदेश प्रस्तुत अपील संख्या- 1819/2006 दि न्यू इण्डिया एश्योरेंश कम्पनी लि0 बनाम मैसर्स गर्ग मेडिको आंशिक रूप से स्वीकार की जाती है तथा जिला आयोग द्वारा पारित निर्णय एवं आदेश को संशोधित करते हुए जिला आयोग द्वारा प्रत्यर्थी सर्व श्री गर्ग मेडिको को क्षतिपूर्ति के मद में प्रदान की गयी धनराशि 4,75,000/-रू० के स्थान पर 1,50,000/-रू० की देयता निर्धारित की जाती है तथा दि न्यू इण्डिया एश्योरेंश कम्पनी लि0 को आदेशित किया जाता है कि वह परिवादी मैसर्स गर्ग मेडिको को परिवाद प्रस्तुत करने की तिथि दिनांक 06-01-2003 से भुगतान की तिथि तक 06 प्रतिशत वार्षिक की दर से ब्याज भी अदा करें।
अपील संख्या-2744/2014 सर्व श्री मैसर्स गर्ग मेडिको बनाम दि न्यू इण्डिया एश्योरेंश कम्पनी लि0 निरस्त की जाती है।
चॅूकि प्रस्तुत अपील संख्या-1819/2006 में अन्तरिम आदेश को दृष्टिगत रखते हुए आक्षेपित धनराशि अपीलार्थी दि न्यू इण्डिया एश्योरेंश कम्पनी लि0 द्वारा जमा की गयी है अतएव आदेशित किया जाता है कि उक्त जमा धनराशि पर अर्जित ब्याज की गणना कर उपरोक्त धनराशि इस आदेश के अनुपालन में प्रत्यर्थी सर्व श्री गर्ग मेडिको को 02 माह की अवधि में प्राप्त करायी जावे।..
9उभय-पक्ष अपना-अपना वाद व्यय स्वयं वहन करेंगे।
आशुलिपिक से अपेक्षा की जाती है कि वह इस आदेश को आयोग की वेबसाइड पर नियमानुसार यथाशीघ्र अपलोड कर दें।
(न्यायमूर्ति अशोक कुमार) (विकास सक्सेना) अध्यक्ष सदस्य कृष्णा-आशु० कोर्ट नं०1 [HON'BLE MR. JUSTICE ASHOK KUMAR] PRESIDENT [HON'BLE MR. Vikas Saxena] JUDICIAL MEMBER