State Consumer Disputes Redressal Commission
Union Bank Of India vs Mohd. Kavi on 9 December, 2024
Cause Title/Judgement-Entry STATE CONSUMER DISPUTES REDRESSAL COMMISSION, UP C-1 Vikrant Khand 1 (Near Shaheed Path), Gomti Nagar Lucknow-226010 First Appeal No. A/2008/2053 ( Date of Filing : 31 Oct 2008 ) (Arisen out of Order Dated in Case No. of District Ghazipur) 1. Union Bank Of India Ghazipur ...........Appellant(s) Versus 1. Mohd. Kavi a ...........Respondent(s) BEFORE: HON'BLE MR. SUSHIL KUMAR PRESIDING MEMBER HON'BLE MRS. SUDHA UPADHYAY MEMBER PRESENT: Dated : 09 Dec 2024 Final Order / Judgement (मौखिक) राज्य उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग , उ0प्र0, लखनऊ अपील संख्या- 2053/2008 Union Bank of India Versus Mohd. Kavi adult S/O Abdul Razzak समक्ष:- 1.
माननीय श्री सुशील कुमार, सदस्य।
2. माननीय श्रीमती सुधा उपाध्याय, सदस्य।
उपस्थिति:-
अपीलार्थीगण की ओर से उपस्थित: श्री राजेश चड्ढा, विद्धान अधिवक्ता प्रत्यर्थी की ओर से उपस्थित: कोई नहीं दिनांक :09.12.2024 माननीय श्री सुशील कुमार , सदस्य द्वारा उदघोषित निर्णय
1. परिवाद संख्या-95/2007, मु कवी बनाम युनियन बैंक आफ इण्डिया व अन्य में विद्वान जिला आयोग, गाजीपुर द्वारा पारित प्रश्नगत निर्णय/आदेश दिनांक 16.09.2008 के विरूद्ध प्रस्तुत की गयी अपील पर केवल अपीलार्थी के विद्धान अधिवक्ता के तर्क को सुना गया। प्रत्यर्थी की ओर से कोई उपस्थित नहीं है। प्रश्नगत निर्णय/आदेश एवं पत्रावली का अवलोकन किया गया।
2. जिला उपभोक्ता आयोग ने परिवाद स्वीकार करते हुए अंकन 15,000/-रू0 परिवादी के खाते में जमा करने का आदेश 10 प्रतिशत ब्याज के साथ पारित किया है।
3. परिवादी का कथन है कि उसके द्वारा दिनांक 12.04.2001 को अंकन 15,000/-रू0 कैश विपक्षी बैंक में अपने खाता सं0 2464 में जमा किया गया था, जिसकी रसीद विपक्षी बैंक द्वारा दी गयी थी, परंतु यह राशि खाते या पासबुक में जमा नहीं की गयी, इसी राशि को जिला उपभोक्ता आयोग ने जमा करने का आदेश पारित किया है।
4. अपील के ज्ञापन में वर्णित तथ्यों तथा मौखिक तर्कों का सार यह है कि परिवादी द्वारा कभी भी धनराशि जमा करने की रसीद उपलब्ध नहीं करायी गयी और परिवादी के बैंक खाते में यह धनराशि कभी भी जमा नहीं हुई। जिला उपभोक्ता आयोग ने जब इस बिन्दु पर विचार किया तब केवल यह कथन किया कि परिवादी के पास धन जमा करने की रसीद है, परंतु यह कथन नहीं किया कि यह रसीद जिला उपभोक्ता आयोग के समक्ष प्रस्तुत की गयी है, उस रसीद को प्रस्तुत करने वाले दस्तावेज की संख्या का भी कोई उल्लेख नहीं किया गया है, केवल परिवादी के पास रसीद होने का तात्पर्य यह नहीं है कि यह तथ्य स्थापित है कि अंकन 15,000/-रू0 परिवादी द्वारा जमा किये गये हैं, यदि परिवादी के खाते में अंकन 15,000/-रू0 जमा नहीं हैं तब इस जमा की रसीद को प्रस्तुत करना आवश्यकता था, इसलिए जिला उपभोक्ता आयोग आयोग द्वारा साक्ष्य की गलत व्याख्या पर अपना निष्कर्ष पारित किया है, इसी प्रकार धनराशि वर्ष 2001 में जमा करने का कथन किया है, जबकि परिवाद वर्ष 2007 में प्रस्तुत किया गया है, जो समयावधि से बाधित है। इस मध्य परिवादी का खाता वर्ष 2004 में डोरमैंट हो चुका था, इसलिए यह परिवाद समयावधि से भी बाधित है, जैसाकि डब्लू एस में कथन किया गया है, जिसका कोई खण्डन नहीं है। अत: यह परिवाद समयावधि से बाधित है। तदनुसार अपील स्वीकार होने योग्य है।
आदेश अपील स्वीकार की जाती है। जिला उपभोक्ता आयोग द्वारा पारित निर्णय/आदेश अपास्त किया जाता है।
उभय पक्ष अपना-अपना व्यय भार स्वंय वहन करेंगे।
प्रस्तुत अपील में अपीलार्थी द्वारा यदि कोई धनराशि जमा की गई हो तो उक्त जमा धनराशि मय अर्जित ब्याज सहित अपीलार्थी को यथाशीघ्र विधि के अनुसार वापस की जाए।
आशुलिपिक से अपेक्षा की जाती है कि वह इस निर्णय एवं आदेश को आयोग की वेबसाइट पर नियमानुसार यथाशीघ्र अपलोड कर दे।
(सुधा उपाध्याय)(सुशील कुमार) सदस्य सदस्य संदीप सिंह, आशु0 कोर्ट 2 [HON'BLE MR. SUSHIL KUMAR] PRESIDING MEMBER [HON'BLE MRS. SUDHA UPADHYAY] MEMBER