Lok Sabha Debates
Discussion On The Demands For Grants (Railways), No. 1 To 16 Under The Control Of ... on 26 April, 2016
Sixteenth Loksabha an> Title: Discussion on the Demands For Grants (Railways), No. 1 to 16 under the control of Ministry of Railway for 2016-17.
HON. CHAIRPERSON: The House will now take up discussion and voting on Demands for Grants (Railways) 2016-17.
Hon. Members present in the House whose Cut Motions to the Demands for Grants in respect of the Budget (Railways) for the year 2016-17 have been circulated may, if they desire to move their Cut Motions, send slips to the Table within 15 minutes indicating the serial numbers of the Cut Motions they would like to move. Only those Cut Motions, slips in respect of which are received at the Table within the stipulated time, will be treated as moved.
A list showing the serial numbers of Cut Motions treated as moved will be put up on the Notice Board shortly thereafter. In case any member finds any discrepancy in the list, they may kindly bring it to the notice of the Officer at the Table immediately.
“That the respective sums not exceeding the amounts shown in the fourth column of the Order Paper be granted to the President of India out of the Consolidated Fund of India, to complete the sums necessary to defray the charges that will come in course of payment during the year ending the 31st day of March 2017, in respect of the heads of Demands entered in the second column thereof against Demand Nos. 1 to 16.” श्री मल्लिकार्जुन खड़गे (गुलबर्गा) : सभापति महोदय, मैं आज बहुत दिनों के बाद बोल रहा हूँ। रेलवे डिमांड फॉर ग्रांट्स, यह विषय बहुत ही महत्वपूर्ण है। इसकी चर्चा बजट के समय भी हुई थी, लेकिन आज मैं उतने विस्तार से नहीं बोलूंगा, क्योंकि मैं बहुत सी ऐसी चीजें सदन के सामने रखना चाहूंगा जिसके बारे में प्रभू जी ने अपने बजट में कुछ कहा था और उसका रिजल्ट क्या हुआ और कौन से कौन से सैक्टरों में कमियां हैं, उसके बारे में मैं बताने की कोशिश करूंगा। कभी-कभी ऐसा होता है कि जब हम ज्यादा भरोसा, यानि प्रॉमिसिस करते हैं लेकिन एंथुज़िएज्म में इंप्लिमेंटेशन कम होता है। उसी का नतीजा आज इन दो साल में मैं रेलवे के ऊपर देख रहा हूँ।
खासकर 66 हजार किलोमीटर जो भारतीय रेल का नेटवर्क है, शायद यह सारे विश्व में सबसे बड़ा रेल नेटवर्क है। इस नेटवर्क में कम से कम 7,112 रेलवे स्टेशंस हैं और भारतीय रेल से एक साल में करीब 840 करोड़ लोग प्रवाह करते हैं और प्रतिदिन कम से कम 2 करोड़ 30 लाख लोग इसमें सफर करते हैं। यह एक बहुत ही महत्वपूर्ण डिपार्टमेंट है। यह कोशिश तो सभी लोगों की होनी चाहिए, इसे मैं मानता हूँ, लेकिन कितने हद तक सरकार कर सकती है या डिपार्टमेंट कर सकता है, उसका सोच समझकर अगर आश्वासन देते तो बहुत अच्छा था। कभी-कभी तालियाँ या टेबल थपथपाने के लिए बहुत सी चीजें यहाँ कही जाती हैं, लेकिन बाद में जब रिजल्ट देखा जाता है तो वहाँ पर उस नतीजे में कुछ भी नहीं रहता।
अब मैं रेल सेफ्टी की बात करता हूँ, क्योंकि बार-बार हमेशा यहाँ टीका-टिप्पणी होती थी। प्रधान मंत्री जी हमेशा यह कहते हैं कि भारतीय रेल देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ की हड्डी है। हम इसे मानते हैं और सभी इसे मानते हैं, इसमें कोई शक नहीं है, परन्तु यह रीढ़ की हड्डी टेढ़ी क्यों हो गई है? इसकी वजह क्या है? प्रभु साहब को तो एक विशेष, मैं समझता हूँ कि he is a privileged man. उनको तो राज्य सभा से लाकर यहाँ पर रेलवे मिनिस्टर बनाया गया, क्योंकि उनकी एफिशिएंसी को, उनकी कोशिशों को देखते हुए शायद बीजेपी के नेता और देश के प्रधान मंत्री जी ने उन्हें बनाया है। ठीक बात है। हम उनका स्वागत करते हैं।
श्री भर्तृहरि महताब (कटक) : डाउट नहीं है, शायद नहीं, यही हैं।
श्री मल्लिकार्जुन खड़गे : यही हैं, यह हकीकत है, ठीक बनाएंगे, इसीलिए इन्हें लाए हैं। मैंने शायद इसलिए कहा, क्योंकि मेरा अनुभव उनके साथ नहीं था। उनका हो सकता है, आपका हो सकता है तो अनुभव की बात भी होती है, मेरा अनुभव अब पिछले दो साल से शुरू हो गया है और इस दो साल में देश के लिए, मेरे राज्य के लिए और हमारे इलाके के लिए क्या किया है, यह भी बताना जरूरी रहता है। मैं एक छोटी सी चीज उनके सामने रखना चाहता हूँ कि वर्ष 2013-2014 में यूपीए के समय में 54 लोग दुर्घटना में मरते थे तो अब वर्ष 2015-2016 में मरने वालों की संख्या 64 हो गई है। यह आपके स्टॉर्ड क्वेश्चन का उत्तर है, यह मेरा नहीं है। मैं एलिगेशन नहीं लगा रहा हूँ। आपने जो उत्तर इस सदन में दिया है, उसी से मैंने इसे लिया है। दुर्घटनाओं की संख्या बढ़ रही है, लोग मारे जा रहे हैं, आपके आने के बाद तो इप्रूवमेंट होना चाहिए था, क्योंकि हर चीज जो भी हम करते थे, यूपीए सरकार ने या 60 साल में आपने क्या किया, खासकर के ऐसा आप नहीं बोलते थे, लेकिन आपके सारे सपोर्टस, दोस्त लोग, आपके जितने भी समर्थक हैं, वे लोग कहते थे कि 60 साल में इस देश में कुछ नहीं हुआ। सभी कुछ उन्होंने ही किया है। मैं उनको याद दिलाना चाहता हूँ, जैसे फोर लेन रोड्स का अटल बिहारी वाजपेयी जी को हम क्रेडिट देते हैं, उनके जमाने में यह शुरू हुआ तो वैसे ही जो 66 हजार किलोमीटर रेल लाइन है। इसको यूनीगेज में अगर लाने की किसी ने कोशिश की तो वह कांग्रेस पार्टी ने की और नरसिंहराव के ज़माने में वह शुरू हुआ। कभी किसी ने इस पर बोला है? 66 हजार किलोमीटर तब से शुरू हुआ और आज यूनीगेज में कन्याकुमारी से अगर एक ट्रेन निकलती है तो कटरा तक जाती है, कोलकाता से निकलती है तो पंजाब तक पहुंचती है। यह इतना बड़ा जो नैटवर्क हमने करके दिया, वैसे तो हर गवर्नमैंट में होता ही है। लेकिन कुछ नहीं हुआ, कुछ नहीं हुआ, ऐसा बोलने वाले लोग बहुत हैं, उनको मैं आँकड़ा बता रहा हूँ। ...(व्यवधान) आप सुनिये। ...(व्यवधान)
मैं बताना चाहता हूँ कि हमने नैरो गेज से यूनीगेज करके सारे देश में इस नैटवर्क को फैलाने का काम किया। दूसरी बात, मैं आपको और बताना चाहता हूँ कि राष्ट्रीय रेल संरक्षण कोष का आपने जो वायदा किया था दिसम्बर 2015 में, 1 लाख करोड़ का सुरक्षा फंड बनाने के लिए कमेटी का गठन किया। हम जानना चाहते हैं कि इस आरआरएस की कमेटी में कितना पैसा आया, कितना जमा हुआ और इस सुरक्षा पर कितना फंड अब तक मिला है और खर्च हुआ है।
तीसरी बात रेलवे डैप्रिसियेशन रिज़र्व फंड की है। मैं आपको याद दिलाना चाहता हूँ कि रेलवे डैप्रिसियेशन रिज़र्व फंड के अप्रोप्रियेशन में 50 परसेंट से भी अधिक काट दिया। 2014-15 और 2015-16 में क्रमशः 7775 करोड़ और 7900 करोड़ रुपये का आबंटन था। वह घटाकर 2015-16 में आप उसे 5500 करोड़ पर लाए और 2016-17 के लिए आपने 3200 करोड़ रुपये रखे। आप देखिए अगर डेप्रिसियेशन रिज़र्व फंड नहीं रहेगा तो आप दुरुस्त कैसे करेंगे, ट्रैक को ठीक कैसे रखेंगे, सारी चीज़ें जो समय पर ट्रेन निकलनी है, रोकना है, स्टेशन है, इन सारी चीजों के लिए अगर आपका फंड घट रहा है, उसकी क्या वजह है। आप कहते थे कि हम आने के बाद बहुत कुछ करने वाले हैं। मैं यह पूछ रहा हूँ और ये आंकड़े आपके हैं, मेरे नहीं हैं। 7775 करोड़ से घट गया और 7900 से घटकर 5500 तक आ गया और 2016-17 में तो 3200 पर आ गय। यह आपका अचीवमैंट है। रेलवे की संपत्ति का नवीकरण करना है तो जरूरी है कि इस फंड में ज्यादा पैसा होना चाहिए, लेकिन जब पैसा कम हो रहा है तो आप कैसे अपनी संपत्ति को सुरक्षित रख सकते हैं, यह बड़ा सवाल है। हो सकता है कि इन बुनियादी ढाँचों के लिए या इसको दुरुस्त करने के लिए आपके पास और कौन सा तरीका है, मुझे मालूम नहीं, लेकिन आज लोगों को तो आप गुमराह कर रहे हैं कि यह सरकार आने के बाद बहुत कुछ काम कर रही है और हम सबसे आगे हैं, लेकिन मैं आपके बजट फिगर से ही बता रहा हूँ कि आपने जितना कहा था, वैसे आप नहीं चल रहे हैं और उस ढंग से आपका काम नहीं हो रहा है। दूसरी तरफ, एक और बात है कि जो आपरेशनल खर्च है, उसके लिए भी पैसा होना चाहिए। उसमें भी आप किस ढंग से इसको जुटा रहे हैं, आज तक किसी को मालूम नहीं हुआ।
चौथी चीज़ रेलवे डेवलपमेंट फण्ड के बारे में है। डिविडेंड्स देने के बाद जो राशि बचती है, वह रेलवे डेवलपमेंट फण्ड में रखी जाती है। वर्ष 2015-16 में उसकी बजट राशि 5,750 करोड़ रुपए से घटा कर 1,323 करोड़ रुपए रखी गयी, यानी कि इसमें 77औ की कटौती हो गयी। आप किस अंदाज से बोल रहे हैं कि आप बहुत ही डेवलप कर रहे हैं, आपके आने के बाद तेजी से काम हो रहा है? अगर तेजी से काम होता है तो क्या वह बिना पैसे के होता है, बिना बजट के होता है? किसी भी डेवलपमेंट के लिए पैसा तो होना चाहिए। लेकिन, आप इसमें घटाते ही जा रहे हैं और दूसरी तरफ आप बोल रहे हैं कि आप काम कर रहे हैं। वर्ष 2016-17 में 2,515 करोड़ रुपए का फण्ड रखा गया था और वर्ष 2015-16 के मुकाबले आपने इसमें 50औ रिडय़ूस किया। वर्ष 2015-16 में आपने जो रखा था, अगर उसे वर्ष 2016-17 से कम्पेयर करें, तो उसका 50औ फण्ड आपने रेलवे डेवलपमेंट के लिए कम किया, ये आपके आंकड़े दिखाते हैं। इस क़िताब में भी ये सारी चीज़ें मिलेंगी।
अब कैपिटल फण्ड है। इसमें भी 25औ की कटौती हो गयी। 7,615 करोड़ रुपए के मुकाबले वर्ष 2016-17 के लिए 5,750 करोड़ इयरमार्क्ड था, यानी पहले 7,615 करोड़ रुपए था, जिसे घटाकर आपने 5,750 करोड़ रुपए रखा। इसमें भी कमी है।
अब डेट सर्विस फण्ड को देखें, तो इसमें 75औ की कटौती हो गयी। डेट सर्विस फण्ड में भविष्य में लोन के इंटेरेस्ट को रि-पे करना या पे कमीशन के मुताबिक सैलरी देना इत्यादि जो भी कमिटेड लाएब्लिटीज हैं, उसको फुलफिल करने के लिए, उसे सुलझाने के लिए पैसा रखा जाता है। लेकिन, इसमें 900 करोड़ रुपए घटाकर आपने 214 करोड़ रुपए रखा। पहले डेट सर्विस फण्ड में 900 करोड़ रुपए था। आज उसे कम करके 214 करोड़ रुपए रखा गया है। इसमें 75औ की कमी हुई। ये जो चीज़ें हैं, इन्हें मैं आपके सामने इसलिए रख रहा हूं क्योंकि यह कहा जा रहा था कि यह रेलवे बजट बहुत अच्छा है। मैं दो सालों से इसे इसीलिए सुन रहा था कि अगर किसी को इस पर टीका-टिप्पणी भी करना है तो हमारे पास कहने के लिए सारी चीज़ें और सारे अस्त्र तैयार होने चाहिए। ये सारी चीज़ें आप ने दी। आपके द्वारा दिए हुए जो आंकड़े हैं, मैं उसी के आधार पर बोल रहा हूं।
जहां तक रेलवे लाइंस की डबलिंग की बात है, तो इसमें भी पिछले साल के मुकाबले 25औ की कटौती हो गयी। वर्ष 2015-16 में 7,113 करोड़ रुपए था। अब वर्ष 2016-17 में 4,782 करोड़ रुपए है। इसका मतलब इसमें 34औ की कटौती की गयी। इसका मतलब डबलिंग में, डेप्रिशिएशन में, रिज़र्व फण्ड में, हर चीज़ में आप इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए कमी करते ही गए। यह कमी इसलिए होते आई क्योंकि आप हमेशा पी.पी.पी. मोड की बात करते हैं, आप कहते हैं कि बाहर से इंवेस्टमेंट आ रहा है, जापान से आ रहा है, रूस से आ रहा है, फ्रांस से आ रहा है, लेकिन वह कहां है, यह मालूम तो होना चाहिए। अगर वह है, तो फिर इस कटौती की जरूरत नहीं थी। हर चीज़ में आप कटौती करके डेवलपमेंट कर रहे हैं। यह कैसे डेवलप होगा? क्या अलाउद्दीन का चिराग है आपके पास? खुल जा सिमसिम बोले तो खोलकर वहां से पूरा खजाना बाहर लेकर आएंगे। यह है क्या?
रोलिंग स्टॉक, इसमें भी कम से कम जो एलोकेशन आपने किया है, इसमें भी आपने कटौती की है। पिछले साल का एलोकेशन 2,066 करोड़ रुपए था, तब रिवाइज्ड एस्टीमेट बढ़ाकर लास्ट ईयर 7,496 करोड़ रुपए किया, लेकिन 2016-17 में 5,448 करोड़ रुपए, यानी कम कर दिया। आपको मालूम था कि रिवाइज्ड बजट में ही आप 7,496 करोड़ रुपए रखे थे, लेकिन इस साल फिर घटाकर उससे ज्यादा रखने के बजाए, आप उसमें कटौती करके 5,498 करोड़ रूपए रख दिए। आपके रोलिंग स्टॉक में भी कमी है।
इसके बाद कैपिटल एक्सपेंडिचर है। कोई विकास बिना फंड से होता नहीं है। मोदी सरकार ने विकास का शोर फैला दिया, लेकिन कैपिटल एक्सपेंडिचर में भारी कटौती कर दी।
HON. CHAIRPERSON: You have taken enough time. Now you have a few minutes more. Please conclude.
SHRI MALLIKARJUN KHARGE : No, I have a number of things to tell them. I am not provoking the Railway Minister. I am not telling them anything otherwise. I am telling them whatever figures are available and how they are diverting the attention of the people without doing anything.
HON. CHAIRPERSON: All right, you continue for a few minutes.
श्री मल्लिकार्जुन खड़गे : थैंक यू सर। कैपिटल एक्सपेंडिचर में भारी कटौती कर दी। ट्रैक रिन्यूअल्स, सिगनल्स, टेलीकॉम, गेज़ कन्वर्जन्स, ये सारी चीजें इसमें आती हैं। लेकिन इसमें कुछ नहीं हुआ। यह क्या है? आप मार्केटिंग ज्यादा करते हैं। काम से भी मार्केटिंग, कहना ज्यादा, करना कम।
रेवेन्यू और एक्सपेंडिचर में 2016-17 में टोटल रेवेन्यू का लक्ष्य 10 पर्सेंट अधिक रखा गया था। मजेदार बात यह है कि 2015--16 में कुल इंकम 9 पर्सेंट, रखा आपने 10 पर्सेंट, आया आपको 9 पर्सेंट। यह कैसे संभव होगा जब हर काम को आप करने वाले हैं? 2016-17 में टोटल एक्सपेंडिचर को आपने 1,71,060 करोड़ रुपए दिखाया है, जो रिवाइज्ड एस्टीमेंट में 2015-16 का 13 पर्सेंट अधिक है, लेकिन आपकी इंकम 2015-16 में टोटल एक्सपेंडिचर बजट एस्टीमेट से 11,573 करोड़ रुपए घट गई है। एक तरफ फीगर्स आप ज्यादा बता रहे हैं, दूसरी तरफ जो आपका रेवेन्यू है, वह घट गया है, कम हो गया है, लेकिन आप कह रहे हैं कि हम बढ़ा रहे हैं।
महोदय, वर्ष 2015-16 का net surplus decreased from Budget Estimates by 20 per cent, that is, Rs.11,400 crore. कम से कम 20 पर्सेंट इसमें घट गया। टोटल प्लान एलोकेशन में 15 पर्सेंट कम कर दिया गया और जब प्लान एक्सपेंडिचर में कम होता है, तो डेवलपमेंट नेचुरली कम होता है। ये सारी चीजें एक तरफ हैं और दूसरी चीज एक्स्ट्रा बजटरी रिसोर्सेज, यूजुअली गवर्नमेंट ऑफ इंडिया भी कुछ पैसे देती थी, बाहर से भी आप इनवेस्टमेंट लाते थे। आप बाहर के बजट का जो वादा कर रहे हैं कि प्राइवेट लोग इसमें इनवेस्टमेंट करेंगे, उसके तहत भी 2015-16 में करीब 40,572 करोड़ रुपए आपका ईबीआर था, आने वाला था, लेकिन आया कितना, 30,893 करोड़ रुपए। यानी दस हजार करोड़ रुपये कम आये। आपने इस सदन को भरोसा दिया था, लेकिन वह दस हजार करोड़ रुपये के काम ठप गये, क्योंकि पैसा ही नहीं है। इसके ऊपर आप क्या कर रहे हैं? इसको किस ढंग से निभा रहे हैं, हम इसको जानना चाहते हैं? इसके बाद में आप बेंगलुरू गये। अनंत कुमार जी यहां बैठे हैं, उसको कितना पैसा मिला है, यह वही जानते हैं। अभी तक उसको एक पैसा भी नहीं मिला है, वहां काम शुरू भी नहीं हुआ। अभी तक रेल मंत्रालय ने एक भी पैसा देना तय नहीं किया है, लेकिन खुद प्रभु साहब वहां देख कर आये, इसलिए मैं उनका धन्यवाद करता हूं, उन्होंने कम से कम उसे देखा। ...(व्यवधान)
श्री भर्तृहरि महताब : आप उन्हें प्रोवोक कर रहे है।
श्री मल्लिकार्जुन खड़गे : अनंत कुमार जी जल्दी प्रोवोक नहीं होते हैं, वे पहले प्रोवोक होते थे, मोदी साहब के आने के बाद थोड़ा ठंडा हो गये।...(व्यवधान) यह मुश्किल हो गया।...(व्यवधान) वह पहले जरा चलता था।...(व्यवधान)
रसायन और उर्वरक मंत्री (श्री अनन्तकुमार): जब अटल बिहार वाजपेयी जी देश के प्रधानमंत्री थे तो उन्होंने ’नम्मा बेंगलुरू मेट्रो’ को बनाने की इजाजत दी। उन दिनों मैं शहरी विकास मंत्री था। हमने, मुंबई, बेंगलुरू, हैदराबाद, अहमदाबाद और लखनऊ मेट्रो का डीपीआर करवा दिया। मेट्रो के लिजेंड श्रीधरन को ’नम्मा बेंगलुरू मेट्रो’ का कंसल्टैंट भी बनाया। आज के दिन में खास कर माननीय प्रधानमंत्री जी, नरेन्द्र भाई मोदी जी ने उसके सीईओ, खरोला जी के साथ डायरैक्टली बात किया, मुख्यमंत्री जी ने बात नहीं की और भारत सरकार ने साढ़े तीन हजार करोड़ रुपये दिये है।
श्री मल्लिकार्जुन खड़गे : आप कह रहे हैं कि नम्मा बेंगलुरू मेट्रो को साढ़े तीन हजार करोड़ रुपया दिया गया, अगर खजाने का पता देते तो कम से कम वहां...(व्यवधान) देने का वायदा अलग बात है।...(व्यवधान)
श्री अनन्तकुमार : आपके मुख्यमंत्री जी ने धन्यवाद भी दिया है। ...(व्यवधान)
श्री मल्लिकार्जुन खड़गे : क्या पैसा रिलीज किया गया है?...(व्यवधान)
श्री अनन्तकुमार : खड़गे साहब को आंकड़ा नहीं मालूम है। ...(व्यवधान) वह कर्नाटक से दूर हो गये हैं। सिद्दारमैय्या जी के मुख्यमंत्री बनने के बाद, खड़गे साहब को वहां से हटा कर यहां भेज दिया।...(व्यवधान)
श्री मल्लिकार्जुन खड़गे : आप कुछ भी नहीं बोल सकते हैं, क्योंकि वह खुद ही बेंगलुरू से रिप्रजेंट करते हैं। जब अटल बिहारी वाजपेयी जी के समय से यह चल रहा है और अभी तक काम नहीं हुआ तो उसके जिम्मेदार आप ही हैं। ...(व्यवधान) I am on my leg. ...(व्यवधान) हमने देश को बनाया है। आप एक ही बात बोलते रहते हैं।...(व्यवधान) इस देश को बनाने वाले हम हैं।...(व्यवधान) हमने देश को बनाया है।...(व्यवधान) इसलिए तो डेमोक्रेसी जिंदा है और आप लोग यहां पर बैठे हैं। ...(व्यवधान) डेमोक्रेसी नहीं रहती और यही हिटलरशाही चलती तो आप में से एक भी नहीं दिखते। ...(व्यवधान) अगर बचे-खुचे हैं तो हमारी वजह से बचे हैं। ...(व्यवधान) नम्मा बेंगलुरू मेट्रो की बात हो गयी।...(व्यवधान)
इसके बाद मैंने दस लेटर्स लिखे होंगे। खासकर, प्रभु जी इधर ध्यान देंगे। आपकी दया भी किसी चीज पर होनी चाहिए। वर्ष 2014-15 में मैंने तीन रेलवे डिविजन के लिए लिखा था और यहां एनाउंस भी किया था। उसके लिए बजट में प्रावधान नहीं किया गया - उनमें जम्मू-कश्मीर में एक डिविजन, सिलचर में एक डिविजन और गुलबर्ग, कर्नाटक में एक डिविजन। इन तीन डिविजन्स के लिए हमने यहां कोशिश की, उन्हें जमीन भी दी गई। मैंने इस बारे में दस बार पूछताछ की और लैटर भी लिखा। लेकिन प्रभु साहब किससे डर रहे हैं, मुझे मालूम नहीं है। इसमें क्या डर है। इसमें हरेक की डिमांड आई, सब लोग पूछेंगे। इसका मतलब यह नहीं है कि आपने जो वायदे किए हैं, उन्हें पूरा न कर सकें। अगर आपको दिया तो वह ऐसे बोलेगा, अगर ऐसे सोचेंगे तो डैवलपमैंट ही नहीं होगी। एक भी ट्रेन मत छोड़िए, एक भी स्टेशन मत बनाइए, एक भी डिवीजन मत कीजिए।...(व्यवधान)
माननीय सभापति : खड़गे जी, अब आप समाप्त कीजिए।
…( व्यवधान)
श्री मल्लिकार्जुन खड़गे : मैं पांच मिनट में खत्म करता हूं।...(व्यवधान) आप लोग डिस्टर्ब करते हैं।...(व्यवधान) हमने इन सारी चीजों के बारे में दो-तीन बार लिखकर दे दिया है। मैं सिर्फ कर्नाटक स्टेट के बारे में बोलने के बजाए दूसरी बोतें बोलूंगा क्योंकि कर्नाटक के बारे में मैंने उन्हें लिखकर दिया है और अनंत कुमार जी कर्नाटक से ही आते हैं, कैबिनेट में जोर लगाकर हमारे काम चाहे मैसूर का टर्मिनल हो, बंगलुरू के डबलिंग के बारे में हो, इलैक्ट्रिफिकेशन के बारे में हो, ये सारे काम वे लोग करेंगे।
हमने जर्मनी के साथ मिलकर वहां बोगी फैक्ट्री के बारे में तैयारी की थी। फर्स्ट फेज़ के लिए पैसा रिलीज हो गया क्योंकि आरबीएल में पैसा रखा गया था। लेकिन सैकिंड फेज़ के लिए अब तक कोई पैसा नहीं आया, वह काम शुरू नहीं हुआ। अगर सैंक्शंड वर्क के लिए भी काम तेजी से नहीं हुआ तो हम किसे बोलें। आपको और गडकरी साहब को इतना पैसा मिल रहा है क्योंकि आप हमेशा बोलते हैं।...(व्यवधान)
माननीय सभापति :खड़गे जी, प्लीज़ आप समाप्त कीजिए।
…( व्यवधान)
श्री मल्लिकार्जुन खड़गे : डीजल पर जो एक्साइज़ डय़ूटी डालकर उन्हें पैसा दे रहे हैं, इसीलिए वे खुद कह रहे हैं कि इफ्रास्ट्रक्चर बढ़ाने के लिए पैसे आ रहे हैं। जब इतना पैसा आ रहा है तो ये काम रुक क्यों गए, किसने रोका। क्या डर से रुक गए? क्या आप करना नहीं चाहते? मैं औपोजिशन का हूं, क्या इसलिए नहीं करना चाहते? मैं पूछना चाहता हूं क्योंकि आपने दो साल तक कोई पॉलिटिक्स नहीं की, मैं मानता हूं। लेकिन चुप बैठना भी पॉलिटिक्स करना है। खामोश रहना भी एक तरह की पॉलिटिक्स है। इसीलिए मैं आपसे अपील करता हूं कि हमने यूपीए सरकार में जो चीजें की थीं, उन्हें जल्दी से जल्दी आगे बढ़ाइए, तभी बंगलुरू में टर्मिनल बनाने का मसला भी हल हो जाएगा जिसे सौ करोड़ रुपये देकर सरकार को जमीन दे दी। कर्नाटक पहला ऐसा स्टेट है जो 50 प्रतिशत शेयर देने के लिए तैयार हुआ। उसके बाद केरल, उसके बाद तेलंगाना और उसके बाद महाराष्ट्र हुआ। ...(व्यवधान)
माननीय सभापति :आप सब बातें बोल चुके हैं, बार-बार रिपीट मत कीजिए।
…( व्यवधान)
श्री मल्लिकार्जुन खड़गे : मैं रिपीट नहीं कर रहा हूं। क्या मैंने 50 प्रतिशत की बात रिपीट की है?...(व्यवधान)
माननीय सभापति :आप बार-बार एक ही बात कह रहे हैं।
…( व्यवधान)
श्री मल्लिकार्जुन खड़गे: आप मुझे बताइए। This is wrong. I do not agree for that. बुलेट ट्रेन मुम्बई से अहमदाबाद, ठीक है, बुलेट ट्रेन नाम रखिए या कुछ भी रखिए। उस पर आपका एक लाख करोड़ रुपये खर्च करने का प्लान है यानी एक किलोमीटर के लिए कम से कम 200 करोड़ रुपये चाहिए। अगर एक किलोमीटर के लिए 200 करोड़ रुपये हैं, जब आप आर्डिनरी ट्रैक बनाएंगे तो उसमें 10 से 12 करोड़ रुपये लगते हैं। आज के दिन जब जमीन की कीमत बढ़ गई है, बहुत हुआ तो 20 करोड़ रुपये हो जाएंगे। लेकिन आप एक तरफ 200 करोड़ रुपये खर्च करके 1 किलोमीटर की लाइन बना रहे हैं और उसके लिए जापान से पैसा आ रहा है। इंस्टीटय़ूट ऑफ मैनेजमेंट अहमदाबाद ने स्टडी करके दिया है कि अगर बुलेटन ट्रेन या हाई स्पीड ट्रेन बनानी है तो उसमें कम से कम रोज 100 बार 88,000 से लेकर 1,18,000 लोग यात्रा करेंगे तभी यह इकोनॉमिकली फिजिबल होगा, नहीं तो नहीं होगा। क्या आप इसके लिए तैयार हैं? अगर उसी पैसे को जहां अभी रेल नेटवर्क नहीं है उस जगह इस पैसे का उपयोग करेंगे तो 500 के बजाए 5000 किलोमीटर रेल नेटवर्क बन सकता है। आप इस तरह से सोचिए। जब जरूरत होगी तब हम करेंगे, जब भूखे हैं तो कम से कम पेट भरने के लिए जो आवश्यक है वह दीजिए, उसके बाद बाकी की चीजें कीजिए, चाहे हाई स्पीड ट्रेन हो या बुलेट ट्रेन या डबल बुलेट ट्रेन हो इसीलिए जो बुलेट ट्रेन का आइडिया है।
HON. CHAIRPERSON: The next speaker is Yogi Adityanath.
… (Interruptions)
SHRI MALLIKARJUN KHARGE: No, I am sorry. … (Interruptions) I have to complete it.
HON. CHAIRPERSON: I think that you have completed.
… (Interruptions)
SHRI MALLIKARJUN KHARGE: I am completing. What is this? … (Interruptions) Sir, I would like tell you that I did not speak for two years on this subject. You can verify it from your records. I am speaking today because … (Interruptions)
HON. CHAIRPERSON: I am not here to verify. I request you to please conclude.
… (Interruptions)
SHRI MALLIKARJUN KHARGE: Sir, I will conclude. महोदय,बुलेट ट्रेन सिर्फ अहमदाबाद से मुंबई जाने वाली है, इससे आगे नहीं आने वाली है। ये आइडियाज लोगों को गुमराह करने के लिए ठीक है लेकिन सामान्य जनता को पहले सहुलियतें दीजिए, उसके बाद बाकी की चीजें हो सकती हैं। बहुत सी ट्रेनों में स्वच्छ भारत अभियान चला है, आप बहुत सी चीजें कर रहे हैं। मुंबई से उडान ट्रेन निकलती है, उसमें जाकर स्वच्छता देखिए, बेडसीट देखिए क्योंकि मैं खुद मुंबई से बंगलौर तक ट्रेवल करता हूं, सोलापुर से बंगलौर देखिए उसमें एक फर्स्ट क्लास बोगी थी उसे भी निकाल दिया। वह डिवीजन प्लेस है, 6 डिस्ट्रीक्ट का हेडक्वार्टर है। हम लिखते रहते हैं उसके बाद भी उसका असर नहीं होता। हमारे जैसे लोगों के लिखने से भी असर नहीं होता तो बाकी नागरिक का क्या होगा।
रेल मंत्री (श्री सुरेश प्रभु): आम आदमी के लिए फर्स्ट क्लास निकल गया उसके लिए आप चिंता कर रहे हैं, बहुत-बहुत धन्यवाद।
श्री मल्लिकार्जुन खड़गे : यह मैं भी बोल सकता हूं। वहां पर हाई कोर्ट के जजेज हैं, डिवीजनल कमीशनर हैं। जो पहले से हैं वह क्यों निकाल दिया? क्या उसको निकालने के लिए कहा? Do not exploit in the name of poor. We know about poverty. You might have come recently in this field, but we also know about it. Hence, do not irritate us by telling this. आप उडान लीजिए, सोलापुर ट्रेन लीजिए, नादेड़-बंगलौर, इसमें सारे पुराने बोगियों को डाल देते हैं, रिजेक्टेड बोगी लगा देते हैं। इस पर ध्यान देने के लिए हमने कई बार लिखा। उस पर भी कोई एक्शन नहीं हुआ। हालांकि फोन करने पर मिलते हैं, लेकिन नीचे क्या होता है मुझे नहीं मालूम। आप जवाब देते हैं, आपका खत मिला, हम इसे देख रहे हैं। लेकिन उसका कुछ भी नतीजा नहीं निकलता। किसी भी चीज को आज प्रैक्टिकल तौर पर रिस्पॉन्स नहीं मिल रहा है, काम नहीं हो रहा है।
महोदय, इसलिए मैं ज्यादा वक्त नहीं लूंगा, क्योंकि आप बहुत शान्त रहते थे, लेकिन पता नहीं आज क्या बात हो गई कि आप बहुत नाराज हो गए।
HON. CHAIRPERSON : You have continued to speak and have taken more time than what has been allotted to you.
SHRI MALLIKARJUN KHARGE: Sir, it is because I am the first speaker. Secondly, I am speaking for the first time on the Railway Budget. I wanted to mention many other things, but unfortunately time is not there.
HON. CHAIRPERSON: All right, please conclude your speech now.
SHRI MALLIKARJUN KHARGE : I hope Shri Prabhu will act now and, at least, he will do something according to the figures that I have given now. Whatever projects are pending in Karnataka, Andhra, Telangana and in other States should be completed. आंध्र प्रदेश और तेलंगाना को अभी आप एक ही समझें। वहां जाकर आप देखें, यदि वहां कुछ कमियां हैं, तो Every six months or three months, you can go to those places and review the progress along with the State Chief Ministers or by calling the Ministers in-charge of infrastructure, तभी यह काम हो सकता है, नहीं, तो नहीं हो सकता। पेपर में बहुत बड़ा एडवर्टाइजमेंट देकर और बयानबाजी करने से कुछ नहीं होने वाला है। इसलिए मैं आप से फिर एक बार अपील करता हूं कि कृपया इन कामों को पर्सोनली देखें, Whatever I have said, I request you to personally take up all of them. With these words, I conclude my speech. Thank you.
CUT MOTIONS योगी आदित्यनाथ (गोरखपुर): सभापति महोदय, मैं माननीय रेल मंत्री जी द्वारा प्रस्तुत भारतीय रेल की वर्ष 2016-17 की अनुदान मांगों का समर्थन करने के लिए खड़ा हुआ हूं।
माननीय प्रधान मंत्री जी के नेतृत्व में रेल मंत्री जी द्वारा पिछले दो वर्षों के दौरान भारतीय रेल के विकास में किया गया प्रयास सराहनीय है और मुझे उनके इन प्रयासों पर यजुर्वेद की ये पंक्तियां याद आती हैं - “वयम् राष्ट्रे जाग्रताम् पुरोहिता” , यानी राष्ट्र की उन्नति हम सबका कर्तव्य है और इस भाव के साथ जो प्रयास माननीय रेल के द्वारा यहां पर देखने को मिला, सचमुच उसकी सराहना सभी पक्षों को करनी चाहिए। इसमें कोई संदेह नहीं कि भारतीय रेल इस देश की परिवहन की रीढ़ है। रेल इस देश के सामाजिक और आर्थिक विकास के साथ-साथ संपूर्ण राष्ट्रीय एकात्मता की प्रतीक भी है।
महोदय, यह पहली बार देखने को मिल रहा है कि राजनीतिक संकीर्णताओं से ऊपर उठकर के एक व्यावहारिक और दूरदर्शी सोच के साथ रेल मंत्रालय द्वारा कार्य प्रारम्भ किया गया है। जो प्रयास इस समय भारतीय रेल द्वारा प्रारम्भ हुए हैं, वे माननीय प्रधान मंत्री की उस सोच को प्रदर्शित करते हैं, जो उनके द्वारा भारतीय रेल को, भारत की अर्थव्यवस्था के स्तम्भ के रूप में प्रस्तुत करने का एक प्रयास है।
महोदय, मैं पिछले 17-18 वर्षों से इस सदन में भारतीय रेल की विकास यात्रा को देख रहा हूं और इसमें कोई दो राय नहीं कि राजनीतिक संकीर्णताओं से रेल बजट कभी उबर नहीं पाया था, लेकिन पिछले दो बार के रेल बजट को हम सब ने देखा है और इस बात को महसूस किया है कि जो इस देश के हित में और जो अंतिम आम आदमी के हित में है और राजस्व की दृष्टि से जो लाभकारी है। भारतीय रेल के हित में जो योजनाएं हैं, उन्हीं को ध्यान में रखकर उन राजनीतिक संकीर्णताओं से उभरने का प्रयास एक व्यावहारिक सोच, दूरदर्शी सोच के साथ प्रारम्भ हुआ है। इससे पहले यह होता रहा है कि अनुपयोगी योजनाओं पर पैसा जाता था, लेकिन राजस्व और आम जन की दृष्टि से जो योजनाएं महत्वपूर्ण थीं, वे उपेक्षित रह जाती थीं। पहली बार ये चीजें देखने को मिली हैं कि आम जन और राजस्व के हित में जो महत्वपूर्ण योजनाएं हैं, उन्हें प्राथमिकता देने का प्रयास हुआ है। उसी का परिणाम है कि भारतीय रेल में जो परिवर्तन दिखाई दे रहा है, उसे आम जन महसूस कर रहा है। क्या इससे पहले कभी आम आदमी, एक सामान्य यात्री अपनी समस्या के बारे में किसी रेल मंत्री से चर्चा कर सकता था? आज देश के किसी भी कोने में यात्रा करने वाला व्यक्ति अपनी समस्या को रेल मंत्री के सामने कुछ ही मिनटों में प्रस्तुत कर सकता है और कुछ ही मिनट में उसकी समस्या का समाधान होता दिखाई देता है। उसके पास सहायता पहुंचती है। क्या यह भारतीय रेल के विकास या भारतीय अर्थव्यवस्था के स्तंभ के रूप में भारतीय रेल को प्रस्तुत करने का एक अभिनव प्रयास नहीं है?
सभापति महोदय, माननीय खड़गे जी जिन बातों की यहां चर्चा कर रहे थे, उन्हें सुनकर मुझे आश्चर्य होता है। ख़ड़गे जी खुद रेल मंत्री रहे हैं और रेल मंत्री के रूप में उन्हें विरासत मिली थी। रेल में जिस प्रकार से लेनदेन का कार्य होता था, उस विरासत को उन्होंने बहुत नजदीक से देखा था और उसे महसूस भी किया होगा। लेकिन आज कोई इस प्रकार की चर्चा मंत्रालय या रेलवे बोर्ड पर नहीं कर सकता। आज आम नागरिक, आम यात्री भी अपनी समस्या को रेल मंत्री तक पहुंचा सकता है और कुछ ही क्षणों में उस समस्या का समाधान होता हुआ भी दिखाई देता है। यह पहली बार देखने को मिला है। हम माननीय रेल मंत्री जी द्वारा किये जा रहे प्रयासों का स्वागत करते हैं और उनके सराहनीय प्रयासों को हम सबको एक सिरे से स्वीकार करना चाहिए।
महोदय, भारतीय रेल के सामने चुनौतियां हैं। ये चुनौतियां अचानक नहीं, बल्कि हमें विरासत में प्राप्त हुई हैं। पिछले 60 वर्षों में भारतीय रेल को राजनीतिक संकीर्णताओं के तहत सोच का प्रतीक बना दिया गया था। अनुपयोगी योजनाओं पर पैसा दिया गया, लेकिन वे योजनाएं आज तक पूरी नहीं हो पायीं। रेल में भ्रष्टाचार को बढ़ावा दिया गया। इसका दृश्य यूपीए सरकार के दूसरे कार्यकाल में तब देखने को मिला था जब उस समय के रेल मंत्री को स्वयं उस भ्रष्टाचार की चपेट में आना पड़ा था। वह दृश्य भी इस देश ने देखा है। जो चुनौतियां हम सबके सामने हैं, उनमें सुरक्षा और संरक्षा, समयबद्धता, स्वच्छता, रेल परियोजनाओं की शुचिता और पारदर्शिता के साथ पूरा होना, ये चार प्रमुख चुनौतियां हमारे सामने हैं। आपने इस वर्ष और पिछले वर्ष के रेल बजट में देखा होगा कि इन सभी चुनौतियों को रेल बजट में भरपूर स्थान दिया गया है। इनसे निपटने के लिए हम क्या-क्या कदम उठाने जा रहे हैं, उसके परिणाम भी हम सबको दिखाई दे रहे हैं। पहली बार बिना यात्री किराया बढ़ाये हुए, बिना मालभाड़ा बढ़ाये हुए डीजल और बिजली से कटौती करके, किसी यात्री पर अतिरिक्त भार दिये बगैर अपने नये स्रोत और संसाधन तलाश करके भारतीय रेल एक बेहतर काम करने का प्रयास कर रही है।
महोदय, यह स्थिति तब है जब पूरी दुनिया आर्थिक मंदी के दौर से गुजर रही है। मंत्रालय पर सातवें वेतन आयोग का दबाव है। उन सबके बावजूद एक अच्छा प्रयास करने के बाद भी अगर हमारे विपक्षी मित्र इन बातों को स्वीकार नहीं कर पा रहे हैं, तो मुझे लगता है कि कहीं न कहीं इसमें उनकी कुंठा ही झलकती है।
माल भाड़े में निरंतर गिरावट हुई है। अगर आजादी के बाद और अब के रेश्यो को देखा जाए तो रेल की आय का प्रमुख स्रोत रेल भाड़े में लगातार होती गिरावट चिंता का विषय रहा है। इस दृष्टि से भारतीय रेल के पुनर्गठन, पुनर्निर्माण और पुनरुद्धार के प्रयास मंत्रालय द्वारा प्रारंभ हुए हैं, हम सबको इसका स्वागत करना चाहिए।
माननीय रेल मंत्री जी ने जो कार्य योजना तैयार की है। नव सृजन, नव मानक और नव संरचना की कितनी अनूठी योजना है। राजस्व में बढ़ोतरी के लिए केवल किराए पर ही निर्भर न रहकर अन्य स्रोतों को, माल भाड़ा की परंपरागत सोच को बदलने और राजस्व के नए स्रोतों का दोहन करने पर बल देने, नव मानक में रेलवे की कार्य कुशलता को बढ़ाने का प्रयास और नव संरचना के अंतर्गत सहकारिता, सृजनात्मकता पर विशेष बल दिया गया है। ये सभी स्वागत योग्य प्रयास हैं। भारतीय रेल की सीमित क्षमता और गति के अवरोधों से मुक्त करने, आम जन की आकांक्षाओं पर उतरने और शानदार, यादगार बनाने के लिए भारतीय रेल को पर्यावरण के अनुकूल बनाने, सामाजिक प्रतिबद्धताओं को पूरा करने और आर्थिक सृदढ़ता के लिए जो प्रयास भारतीय रेल में वर्तमान में प्रारंभ हुए हैं, वे सभी सराहनीय हैं।
मिशन 2020 की बात कही गई है, उसमें बहुत सी बातें हैं, जैसे आवश्यकता के अनुसार आरक्षण उपलब्ध कराना, विश्वसनीय सेवा, प्रतिबद्धता के साथ मालगाड़ियों को समय सारणी के अनुसार चलाना, संरक्षा रिकार्ड में पर्याप्त सुधार के लिए उच्च स्तरीय तकनीक का इस्तेमाल करना, बिना चौकीदार वाले समपार फाटकों को चौकीदार सहित करना, समय पालन लगभग 95 फीसदी तक पहुंचाना, मालगाड़ियों की औसत रफ्तार 50 किलोमीटर तक बढ़ाना, मेल/एक्सप्रैस गाड़ियों की रफ्तार 80 किलोमीटर तक बढ़ाना, स्वर्णिम चतुर्भुज और सेमी हाई स्पीड का कुशलतापूर्वक संचालन, रेल गाड़ियों में बॉयो शौचालय लगाने का प्रयास। माननीय खड़गे जी बात कह रहे थे कि हम घोषणा किए जा रहे हैं लेकिन कुछ नहीं हो रहा है। मुझे लगता है उन्ह वर्ष 2014-15, 2015-16 और इस वर्ष के रेल बजट को देखना चाहिए। 139 योजनाएं जो पिछले वर्ष की थी, उनको मंत्रालय ने तय समय पर पूरा किया। वह इसके लिए रेल मंत्री जी को बधाई देने के बजाय जिस तरह से आरोपित कर रहे हैं, मुझे लगता है कि कभी लोगों को लगता है कि हम जो बोलेंगे वही सच होगा। लेकिन खड़गे जी का असत्य कथन पकड़ा गया जब माननीय अनंत जी ने बैंगलुरु मेट्रो के बारे में असत्य कथन एक बार पुनः सबके सामने प्रस्तुत किया।...(व्यवधान)
श्री मल्लिकार्जुन खड़गे : कौन सा असत्य ? ...(व्यवधान) सैंक्शन होना अलग बात है।...(व्यवधान)
श्री अनन्तकुमार:सैंक्शन ही नहीं हुआ, 3500 करोड़ रुपए बैंगलुरु मेट्रो को मोदी सरकार ने दिए हैं।...(व्यवधान) सिद्धरामैय्या जी को दिया है, इनको पता नहीं है तो हम क्या करें?
HON. CHAIRPERSON: Nothing unparliamentary will go on record. I will find out the allegations and I will take appropriate action.
योगी आदित्यनाथ : माननीय सभापति जी, जो सच्चाई है, मैं वही बोल रहा हूं। बैंगलुरु मेट्रो को सैंक्शन पिछली एनडीए सरकार ने दिया था। माननीय अनंत कुमार जी उस समय शहरी विकास मंत्री थे। ...(व्यवधान) यही नहीं 2004 से 2014 तक कांग्रेस ने देश में राज किया है, कांग्रेस नेतृत्व की यूपीए सरकार थी। उन 10 वर्षों में कांग्रेस ने बैंगलुरु मेट्रो को क्यों पैसा नहीं उपलब्ध करवाया?
HON. CHAIRPERSON: Nothing unparliamentary will go on record. I will find out the allegations and I will take appropriate action.
योगी आदित्यनाथ: माननीय सभापति जी, जो सच्चाई है, मैं वही बोल रहा हूं। बैंगलुरु मेट्रो को सैंक्शन पिछली एनडीए सरकार ने दिया था। माननीय अनंत कुमार जी उस समय शहरी विकास मंत्री थे। ...(व्यवधान) यही नहीं 2004 से 2014 तक कांग्रेस ने देश में राज किया है, कांग्रेस नेतृत्व की यूपीए सरकार थी। उन 10 वर्षों में कांग्रेस ने बैंगलुरु मेट्रो को क्यों पैसा नहीं उपलब्ध करवाया?
15.00 hours जब मोदी जी के नेतृत्व में पुनः भारतीय जनता पार्टी की एनडीए सरकार आई है, तब साढ़े तीन हजार करोड़ रुपए बैंगलुरू मेट्रो को दिए गए हैं। स्वाभाविक रूप से इसका श्रेय मोदी जी के साथ-साथ माननीय रेल मंत्री को और श्री अनंत कुमार जी को तो जाता ही जाता है लेकिन यह दुर्भाग्यपूर्ण बात है कि कर्नाटक से आने वाले सदस्य को यह जानकारी नहीं है कि बैंगलुरू मैट्रो को कोई पैसा दिया गया है। यह बहुत चिंता का विषय है क्योंकि ये रेल मंत्री रह चुके हैं।...(व्यवधान)
SHRI MALLIKARJUN KHARGE: The record should not be wrong.
HON. CHAIRPERSON : I have already remarked it.
…( व्यवधान)
श्री मल्लिकार्जुन खड़गे : सबर्बन मेट्रो की बात चल रही है। हमारे यहां रेल पहले से ही चल रही है, इसके लिए आप क्या करने वाले हैं। बैंगलुरू में पहले से मेट्रो रेल चल रही है, क्या वह आपकी वजह से चल रही है।...(व्यवधान) हमारा कहना है कि सबर्बन रेलवे के लिए जो घोषणा की गई थी, वह पूरी नहीं की गई है। ये कह रहे हैं कि आप मिनिस्टर थे, आपको मालूम नहीं है। हमें मालूम है और मालूम होने के बाद ही हमने कहा है कि सबर्बन रेलवे के लिए पैसा नहीं आया है।
योगी आदित्यनाथ : मैंने बैंगलुरू मेट्रो की ही बात कही है। माननीय सदस्य द्वारा कहा गया कि घोषणाएं हुई हैं और इनके लिए फंड कहां से आएगा। मुझे लगता है कि आज भारतीय रेल इस बात के लिए निश्चिंत है कि एक ऐसा रेल मंत्री है जिसने फंड की समस्या से रेल मंत्रालय को पूरी तरह मुक्त किया है। यही नहीं है, बल्कि हमें इस बात की भी जानकारी होनी चाहिए कि भारतीय जीवन बीमा निगम ने लगभग डेढ़ लाख करोड़ रुपए के निवेश की सहमति रेल मंत्रालय को पहले ही दे दी है। अन्य संस्थानों से भी फंड की व्यवस्था हो रही है और मुझे लगता है कि सरकार जो घोषणाएं कर रही है, पूरी जिम्मेदारी के साथ सरकार उन योजनाओं को पूरा करेगी। पहली बार यह देखने को मिला है कि भारतीय रेल 2500 किलोमीटर अतिरिक्त बड़ी लाइन चालू करने की अपनी महत्वाकांक्षी योजना से आगे निकली है। इससे पहले इस लक्ष्य को कभी प्राप्त नहीं किया जा सका था। सरकार ने तय किया था कि हम 2500 किलोमीटर की बड़ी रेल लाइन का निर्माण करेंगे और उस लक्ष्य से भी आगे जाकर सरकार ने पिछले वर्ष से 30 प्रतिशत अधिक उस लक्ष्य को प्राप्त किया है और वर्ष 2016-17 के लिए इस लक्ष्य को 2800 किलोमीटर रखा है। अगर हम पिछले छह वर्षों के रेल लाइन के रिकार्ड को देखें तो प्रतिदिन 4.3 किलोमीटर प्रतिदिन के औसत के मुकाबले भारतीय रेल ने 7 किलोमीटर की रफ्तार से बड़ी लाइन के निर्माण में सफलता प्राप्त की है। आगामी वर्ष के लिए वर्ष 2017-18 में 13 किलोमीटर प्रतिदिन, वर्ष 2018-19 के लिए 19 किलोमीटर प्रतिदिन का लक्ष्य रखा है, जिसमें क्रमशः वर्ष 2017-18 में 9 करोड़ श्रम दिवस और वर्ष 2018-19 में 14 करोड़ श्रम दिवस रोजगार के सृजन की व्यवस्था को इसके साथ जोड़ने का प्रयास किया है।
15.04 hours (Shri Hukmdeo Narayan Yadav in the Chair) महोदय, रेलवे लाइन के विद्युतीकरण का मुद्दा बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि यह पर्यावरण की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है। अब तक पिछले वर्ष सर्वाधिक 1600 किलोमीटर रेलवे लाइन का विद्युतीकरण हुआ है और यही लक्ष्य वर्ष 2016-17 में 1800 किलोमीटर का रखा है। क्या यह सरकार की गतिशीलता और प्रगतिशीलता को नहीं दर्शाता है। फ्रेट कोरीडोर का जो कार्य प्रारम्भ हुआ है, उसकी प्रगति जहां सराहनीय है, वहीं पहली बार यह प्रयास हुआ है कि नार्थ-ईस्ट जो अब तक उपेक्षित था, यहां के सुदूर क्षेत्रों में त्रिपुरा, मिजोरम, मणिपुर, अरूणाचल प्रदेश के साथ-साथ जम्मू-कश्मीर के उधमपुर, श्रीनगर, बारामूला आदि जगहों को रेल लिंक से जोड़ने का कार्य प्रारम्भ हुआ है और भारतीय रेल को सफलता प्राप्त हुई है, वह अत्यंत सराहनीय प्रयास है। हम सभी को उसका स्वागत करना चाहिए। माननीय सदस्य ने यह भी कहा कि सरकार ने अन्य बड़े क्या कार्य किए हैं।
अभी बिहार में मेक इन इंडिया के तहत 40 हजार करोड़ रुपये की लागत से दो रेल इंजन कारखानों के निर्माण का कार्य प्रारंभ हुआ है। मेक इन इंडिया, जो माननीय प्रधानमंत्री जी की एक महत्वाकांक्षी योजना है, में यह कार्य प्रारंभ हुआ है। यह भारत में औद्योगिक गति प्रदान करने के साथ-साथ रोजगार के नये अवसर पैदा करने, भारतीय रेल के कामकाज में सौ प्रतिशत पारदर्शिता हो, इसके लिए उन्होंने सोशल मीडिया का बेहतर तरीके से उपयोग किया है। पहली बार रेलवे बोर्ड से जोनल महाप्रबंधकों तक अधिकार को हस्तांतरित किया गया है। वे ताकतवर हुए हैं और उनके कार्य को शुचिता और पारदर्शिता को माननीय रेल मंत्री जी ने सुनिश्चित किया है। यह पहली बार देखने को मिला है कि रेलवे बोर्ड से जोनल महाप्रबंधकों के पास अधिकार गया है। यह अत्यंत महत्वपूर्ण बात है।
हम सबको इस बात से प्रसन्नता होती है कि दुर्घटनाओं की दर लगातार कम हुई हैं और भारतीय रेल जिस संरक्षा की चुनौती से जूझ रही थी, जो एक अत्यंत महत्वपूर्ण चुनौती थी, जिसमें पिछले वर्ष दुर्घटनाओं में 20 प्रतिशत की कमी आयी है। यानी संरक्षा रिकार्ड पहले से बेहतर हुआ है। इसके साथ-साथ, माननीय रेल मंत्री के द्वारा जापान और कोरिया के साथ मिलकर ज़ीरो एक्सीडेंट की पॉलिसी को लागू करने का प्रयास भारतीय रेल ने किया है। हम सबको इसका स्वागत करना चाहिए। भारतीय रेल में जो अधिकतर दुर्घटनाएँ होती थीं, वे बिना चौकीदार के समपार फाटकों के कारण होती थीं। बिना चौकीदार के समपार फाटक किसकी देन है? 60 वर्षों तक इस देश में जिसने सर्वाधिक शासन किया हुआ है, उन्हीं लोगों के कारण आज तक समपार फाटकों पर चौकीदार नहीं रख पाये हैं। वे ही सर्वाधिक दुर्घटनाओं के कारण बनते थे। यह पहली बार प्रयास हुआ है कि पिछले वर्ष 350 समपार फाटकों को चौकीदार युक्त किया गया और इसके साथ-साथ एक हजार बिना चौकीदार वाले लेवल क्रासिंग को समाप्त किया गया तथा इस बार इस लक्ष्य को और अधिक बढ़ाने का प्रयास हुआ है। मुझे लगता है कि आने वाले समय में, वर्ष 2016-17 के दौरान देश में सभी समपार फाटकों को समाप्त करने, उन पर आरओबी बनाने, आरयूबी बनाने या उनको चौकीदार युक्त बनाने का, माननीय रेल मंत्री जी का जो प्रयास है, वह उनके ज़ीरो एक्सीडेंट पॉलिसी को अमलीजामा पहनाने का एक बेहतर प्रयास हो सकता है, जिसका हम सबको यहाँ पर स्वागत करना चाहिए।
माननीय रेल मंत्री जी ने जो महत्वपूर्ण घोषणाएँ की हैं, आप अक्सर देखते होंगे कि रेलवे में अनारक्षित यात्रियों की स्थिति बहुत खराब होती थी। आज उनके लिए प्रयास किया गया है। अंत्योदय एक्सप्रेस और दीनदयालु डिब्बे को प्रारंभ करने की घोषणा की गयी है। देश के आमजन ने इसको स्वीकार किया है। सवारी डिब्बों में आरक्षित यात्रियों के लिए भी व्यवस्था दी गयी है। तीन प्रकार की रेल गाड़ियों को चलाने की व्यवस्था दी गयी है- हमसफ़र, तेजस और उदय रेलगाड़ियाँ। ये महत्वपूर्ण रेल गाड़ियाँ हैं, जो भारतीय रेल को विश्वस्तरीय सेवा प्रदान करने का एक प्रयास है। हम सबको यह नहीं भूलना चाहिए कि रेलवे के शौचालयों में पिछले एक वर्ष के दौरान 17 हजार बॉयो शौचालय लगाये गये और आगामी वर्ष के लिए इसका लक्ष्य 30 हजार जैव शौचालय लगाने का लक्ष्य रखा गया है। यह जो प्रयास है, वह माननीय प्रधानमंत्री जी के स्वच्छ भारत अभियान के साथ जुड़ा है। रेलवे के द्वारा किया गया यह प्रयास ""स्वच्छ रेल और स्वच्छ भारत"" के प्रयास को कहीं न कहीं एक मजबूती प्रदान करता है।
रेल यात्रियों को सुरक्षित यात्रा करने के लिए यात्री बीमा के रूप में एक बेहतर प्रयास है। इसमें अनेक प्रयास किये गये हैं जैसे रेलवे विश्रामालयों को घंटे के हिसाब से आवंटित करने, जननी सेवा और स्मार्ट सवारी डिब्बों का प्रस्ताव, रेलवे के ढांचागत विकास के लिए किये जा रहे प्रयास, जिसमें निर्माण, परिचालन और अनुरक्षण में सौ फीसदी तक प्रत्यक्ष विदेशी निवेश की अनुमति दी गयी है और उसके लिए किये जाने वाले प्रयास, जैसे उपनगरीय गलियारा परियोजना, हाई स्पीड ट्रेन का परिचालन, डेडीकेटेड फ्रेट लाइनें, ट्रेन सेटो सहित इंजन और सवारी डिब्बों के निर्माण और अनुरक्षण की सुविधा, रेल विद्युतीकरण, सिगनल प्रणाली, फ्रेट टर्मिनल, पैसेंजर टर्मिनल, रेललाइन से संबंधित औद्योगिक पार्क की अवसंरचना और द्रुत गति परिवहन प्रणाली, आदि अनेक ऐसी योजनाएं हैं जिनमें विश्व बैंक आदि संस्थानों से भी सहयोग लेने की प्रक्रिया भारतीय रेल ने प्रारम्भ की है। मुझे लगता है कि भारतीय रेल को विश्वस्तरीय रेल सेवा बनाने का जो माननीय रेल मंत्री जी का प्रयास है, हम सभी को उसकी सराहना करनी चाहिए और उसे स्वीकार करना चाहिए।
महोदय, इसके साथ आम यात्री और आम नागरिक को ध्यान में रखकर, बिना यात्री किराए और माल भाड़े को बढ़ाए हम आम जन को कैसे राहत दे सकते हैं, इसके लिए आय बढ़ाने के जो विभिन्न तरीके मंत्रालय ने तलाशे हैं, मुझे लगता कि वे अत्यंत स्वागत योग्य हैं, जिनमें खाली भूमि पर और रेलवे स्टेशनों पर खाली स्थानों के वाणिज्यिक उपयोग के लिए स्टेशनों का पुनर्विकास, रेल पथों के आस-पास की भूमि को बागवानी तथा वृक्षारोपण के लिए पट्टे पर देना, सौर ऊर्जा उत्पादन के लिए भूमि का मौद्रीकरण, डाटा-सॉफ्टवेयर जैसी सॉफ्ट परिसम्पत्तियों तथा भारतीय रेल द्वारा निशुल्क मुहैया कराई जा रही सेवाओं में मौद्रीकरण, वेबसाइट्स और ई-कॉमर्स गतिविधियां बढ़ाना, विज्ञापन राजस्व बढ़ाने और को-ब्रांडिंग के लिए एजेंसियों के साथ साझेदारी करने के लिए स्टेशनों, ट्रेनों और बड़े स्टेशनों के बाहर एवं रेल पथों के आस-पास की भूमि पर विज्ञापन देना, कन्टेनर ट्रेन ऑपरेटरों के लिए सैक्टर खोलने सहित मौजूदा पार्सल नीति को उदार बनाकर पार्सल कारोबार की ओवरहालिंग, पार्सलों की आनलाइन बुकिंग और ई-कॉमर्स जैसे बढ़ते सेक्टरों के लिए रेल सेवाओं का विस्तार करना शामिल हैं।
महोदय, हम सभी को इसे स्वीकार करना चाहिए कि एक प्रबंधन के अंतर्गत संचालित भारतीय रेल दुनिया के सबसे बड़े उपक्रमों में से एक है। लगभग 13 लाख रेल कर्मचारियों की कार्यकुशलता के लिए, उन्हें प्रशिक्षित करने के लिए जो प्रयास होने चाहिए थे, उनका अभाव था। पहली बार हुआ है जब इस दिशा में किसी रेल मंत्री ने सोचा है और जो प्रयास इस दिशा में प्रारम्भ हुए हैं, हम सभी उनका स्वागत करते हैं। मैं इसके साथ माननीय रेल मंत्री जी का ध्यान आकर्षित करूंगा कि लोको पायलट से जुड़ी हुई कुछ समस्याएं हैं, जो उन लोगों ने ज्ञापन के माध्यम से मंत्रालय को पहले भी प्रेषित की थी। रेलवे के जो जूनियर और सीनियर सेक्शन इंजीनियर्स हैं, वे ग्रेड बी स्केल देने की मांग बहुत दिनों से करते आ रहे हैं। मुझे लगता है कि जहां आप उनको प्रशिक्षित करने का प्रयास कर रहे हैं, पहली बार रेलवे विश्वविद्यालय बनाने की प्रक्रिया प्रारम्भ हुई है, उनके लिए नए-नए ट्रेनिंग क्रार्यक्रम और प्रशिक्षण की व्यवस्था हो रही है, उनकी स्किल डेवलपमेंट के जो कार्यक्रम प्रारम्भ हुए हैं, वे स्वागतयोग्य हैं, वहीं पर कार्यरत रेल कर्मचारियों की समस्याओं का समयबद्ध ढंग से समाधान हो, इस बारे में भी प्रयास करना चाहिए।
महोदय, मैं माननीय रेल मंत्री जी को धन्यवाद दूंगा कि इन्होंने देश में बिना किसी भेदभाव के, देश में प्रत्येक व्यक्ति की आवश्यकता के अनुरूप योजनाएं घोषित की हैं। मैं गोरखपुर से आता हूं, जो पूर्वोत्तर रेलवे का मुख्यालय भी है। आश्चर्य होगा कि वहां पर कभी लोको इलेक्ट्रिक कारखाना स्वीकृत हुआ था, लेकिन उसको वहां से दूसरी जगह ट्रांसफर कर दिया गया। मैं रेल मंत्री जी को धन्यवाद दूंगा, वह गोरखपुर पहुंचे, गोरखपुर पहुंचने के बाद उन्होंने वहां की समस्याएं पूछीं। वहां हम लोगों ने, सभी जनप्रतिनिधियों ने समस्याएं रखीं, फिर उन्होंने एक लोको इलेक्ट्रिक शेड गोरखपुर को प्रदान किया। मैं माननीय रेल मंत्री से अनुरोध करूंगा कि वह स्वयं चलकर उस लोको इलेक्ट्रक शेड का भूमिपूजन करके शुभारम्भ करें। इसके लिए मैं वहां की जनता की ओर से आपको धन्यवाद दूंगा। बहुत सारी योजनाएं हैं, मुझे लगता है कि वर्ष 2002-03 में जैसी स्थिति बैंगलुरु मेट्रो की थी, वैसी ही गोरखपुर में पूर्वोत्तर रेलवे से जुड़ी हुई थी। गोरखपुर, आनन्दनगर, नौतनवा, नौगढ़, बढ़नी, बलरामपुर से गोण्डा मीटरगेज लाइन को ब्रॉडगेज लाइन बनाने कि योजना चल रही थी, वर्ष 2003 में तत्कालीन रेल मंत्री ने उसका शिलान्यास किया था। उसके लिए इन लोगों ने दस वर्षों तक पैसा नहीं दिया और उसका परिणाम यह हुआ कि जब पुनः भारतीय जनता पार्टी की सरकार आई, उसके 1075 करोड़ रुपये देकर ब्रॉडगेज की पूरी कार्रवाई को प्रारम्भ करके माननीय रेल मंत्री जी ने उस कार्य को पूरा किया।
मैं माननीय रेल मंत्री से अनुरोध करूंगा कि आपने अपने समय में मुंबई के लिए एक साप्ताहिक ट्रेन दी थी और एक पैसेंजर ट्रेन है। उस पैसेंजर ट्रेन की गति बहुत स्लो है। अगर वह सुबह सात बजे गोरखपुर से चलती है तो लखनऊ पहुंचते-पहुंचते उसे रात्रि के दस बज जाते हैं। मुझे लगता है कि इसकी स्पीड को बढ़ाने की आवश्यकता है और इस रूट पर कुछ अन्य पैसेंजर ट्रेन को चलाने की आवश्यकता है। इसका एक महत्वपूर्ण स्टेशन शोहरतगढ़ है। वहां इनके स्टॉपेज की व्यवस्था की जाए। भारत और नेपाल के सीमावर्ती क्षेत्र पर यह रेल लाइन चलती है। यह रेल लाइन दो स्थानों पर नेपाल की छूती है, नौतनवा के पास सोनोली और बढ़नी जो कि भारत में है और कृष्णानगर जो नेपाल में है, उसके छूती है।
मैं आपको धन्यवाद देना चाहूंगा कि आपने उन क्षेत्रों को टच किया है, जिनको कभी कोई छूता नहीं था। सहजनवा से बांसगांव होते हुए दोहरीघाट, चूंकि उस क्षेत्र से हमारे रेल राज्य मंत्री जी परिचित हैं, तो स्वाभाविक रूप से उनकी वहां विशेष कृपा थी तो उन्होंने वहां सहजनवा से बांसगांव होते हुए दोहरीघाट की रेल लाइन स्वीकृत की। साथ ही साथ खलीलाबाद से मैदावल होते हुए बांसी, डुमरियागंज, बलरामपुर, श्रावस्ती और बहराइच के लिए एक नई रेल लाइन स्वीकृत की है। बहुत दिनों से मांग हो रही है, आनंदनगर से महाराजगंज जिला मुख्यालय होते हुए धुधला तक रेल लाइन बिछाने की, क्योंकि एकमात्र जिला मुख्यालय है जो रेल लाइन से नहीं जुड़ा है। लेकिन उस पर कार्य तत्काल प्रारम्भ हो इसकी हम मांग करेंगे। मैं आपको धन्यवाद दूंगा कि आपने गोरखपुर में तिहरी रेल लाइन बिछाने की स्वीकृति दी है। मैं आपसे अनुरोध करना चाहूंगा कि पूर्वात्तर रेलवे का मुख्यालय होने के नाते बहुत भारी लोड है। गोरखपुर केवल एक महानगर नहीं है। पूर्वी उत्तर प्रदेश की तीन करोड़ की आबादी, पश्चिमोत्तर बिहार और नेपाल की तराई की लगभग पांच करोड़ की आबादी शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार इत्यादि के लिए गोरखपुर पर निर्भर करती है। प्रदेश की राजधानी लखनऊ जाना हो या फिर उन्हें दिल्ली आना हो या मुम्बई या कोलकाता जाना हो, गोरखपुर जंक्शन बहुत महत्वपूर्ण है और गोरखपुर जंक्शन पर ही पूरा लोड है। मैं माननीय रेल मंत्री जी को धन्यवाद दूंगा कि उनके प्रयास से गोरखपुर में उत्तर दिशा में भी उन्होंने कुछ काउंटर दिए हैं, वहां बहुत अच्छा मार्ग बन चुका है, बहुत अच्छे कार्य वहां हो गए हैं। मैं अनुरोध करना चाहूंगा कि गोरखपुर जंक्शन के बाहर ठेला, खोमचा और रेहड़ी लगाने वाले बड़ी संख्या में है। स्टेशन की इस खूबसूरती को, गोरखपुर जंक्शन को सबसे लम्बे जंक्शन का सौभाग्य रेल मंत्रालय के द्वारा प्राप्त हुआ है। वहां की फालतु भूमि के वाणिज्यिक उपयोग की आपने बात की है। मुझे लगता है कि इन सभी ठेला, खोमचा और रेहड़ी लगाने वालों का पुनर्वास करके उनसे राजस्व को बढ़ा सकता है। वहां रेलवे की सुंदरीकरण का कार्य भी हो सकता है। इस योजना को स्वीकार करने की आप कृपा करें। साथ ही साथ गोरखपुर पर जो लोड है, उसको देखते हुए आपने दिल्ली से आगरा के बीच में सेमी-बुलेट ट्रेन चलायी है। यह पहली बार हुआ है इस तरह की ट्रेन देश में चली है। मुम्बई और अहमदाबाद के बीच बुलेट ट्रेन भविष्य में चलने वाली है। हम लोग चाहेंगे कि इसके बाद दिल्ली-गोरखपुर के बीच प्रयोग हो। दिल्ली-गोरखपुर के बीच में बुलेट ट्रेन चले, इसके लिए मैं आपके माध्यम से मंत्री जी से अनुरोध करना चाहूंगा। गोरखपुर से अन्य स्थानों के लिए मेरा अनुरोध होगा। हम लोगों की प्रयागराज और अयोध्या जाने में समस्या होती है। हम लोग अयोध्या के बारे में जब बात करते हैं तो कुछ लोगों को बुरा लग जाता है।
मेरा अनुरोध है कि पूर्वी उत्तर प्रदेश का हाई कोर्ट इलाहाबाद में है साथ ही साथ वहां प्रयागराज भी है और कुम्भ के अवसर पर करोड़ों की संख्या में वहां श्रद्धालु जाता है। यहां जो इंटरसिटी चलती है, उसको वहां जाने में 10 से 12 घंटे लगते हैं। अगर गोरखपुर से वह ट्रेन वाया अयोध्या होते हुए इलाहाबाद तक इंटरसिटी चले, जैसे लखनऊ से गोरखपुर के बीच इंटरसिटी चलती है तो एक बेहतर प्रयास होगा। इसके साथ ही साथ आपने पिछली बार इस बात को कहा था कि गोरखपुर में पटना के पास वर्षों से पुल बन रहा था, इस सरकार के आने के बाद वह प्रारम्भ हुआ। माननीय प्रधानमंत्री जी की उपस्थिति में उसका उद्घाटन करके रेल मंत्रालय ने उसका लोकार्पण किया है। अब गोरखपुर से कोलकाता की दूरी काफी कम हो जाएगी। गोरखपुर-कोलकाता के बीच एक सुपर फास्ट ट्रेन चलाने की व्यवस्था, साथ-साथ गोरखपुर से जो देहरादून ट्रेन जाती है, वह सप्ताह में तीन दिन जाती है। लोग हरिद्वार जाते हैं, हरिद्वार एक धाम है। साथ-साथ देहरादून तक वह ट्रेन चलती है, बड़ी संख्या में लोगों का आवागमन है। अगर वह सप्ताह में सातों दिन चले तो यह एक बेहतर प्रयास होगा। आपके नेतृत्व में जो प्रयास हुए हैं, भारतीय रेल को विश्वस्तरीय सेवा प्रदान करने की दिशा में, हम सब उनका स्वागत करते हैं और हमें विश्वास है कि जो प्रयास आपने किया है इन दो वर्षों में माननीय प्रधान मंत्री जी के नेतृत्व में वह एक सराहनीय प्रयास है और उस सराहनीय प्रयास के लिए मैं आपको बार-बार बधाई देता हूं और विश्वास व्यक्त करता हूं कि भारतीय रेल अपनी विश्वस्तरीय सेवाओं के माध्यम से भारतीय परिवहन की रीढ़ बनकर पूरे आमजन को अपनी सेवाओं से संतुष्ट करेगी।
महोदय, आपने मुझे बोलने का अवसर दिया, इसके लिए मैं आपको धन्यवाद देते हुए अपनी बात समाप्त करता हूं। धन्यवाद।
श्री मुलायम सिंह यादव (आज़मगढ़) : सभापति महोदय, मैं भाषण नहीं दूंगा, रेल मंत्री शायद चले गये, आप ही हमारी तरफ से उन्हें बता देना। 1996-97 में माननीय देवेगौड़ा साहब प्रधान मंत्री थे और रामविलास पासवान जी रेल मंत्री थे। मैनपुरी में घोषणा की यह जो रेलवे लाइन इटावा-मैनपुरी है, इसे आगे गजरौला तक बढ़ाने की बात थी, लेकिन मैंने कहा कि इतना ही हो जाए। पूरे उत्तर प्रदेश में केवल मैनपुरी और उधर आजमगढ़ बड़ी लाइन से वंचित है। अब आजमगढ़ हो गया, लेकिन अभी तक मैनपुरी नहीं हो पाया। बहुत प्रयास करने के बाद रामविलास जी ने प्रयास किया, तब यह इटावा-मैनपुरी रेलवे बनी। वहां तीन बहुत बड़े पुल थे, क्वारी, कमला और यमुना, तीन नहरें भी थीं तथा और भी छोटी-मोटी नहरें थी, उनके भी पुल हमारी सरकार ने खुद तैयार कराये। फिर बंसल साहब ने यहां घोषणा की कि यह रेलगाड़ी केवल वहीं तक नहीं जायेगी, बल्कि वहां से इटावा, ग्वालियर होकर मुम्बई तक जा सकती है। यह बहुत महत्वपूर्ण रेलवे थी। उन्होंने कहा कि जून के महीने में रेल चल जायेगी। 2010-11 में यह बन जायेगी और जून में हम आपकी रेलगाड़ी चला देंगे। अब इस बात को कितने साल हो गये। प्रभु जी से मैंने कहा, मुझे खुशी हुई कि इनके बजट में यह कहा गया कि हम अधूरे काम पहले करेंगे और नये काम बाद में करेंगे। इसका मैंने स्वागत किया। उन्होंने यह बहुत अच्छा निर्णय लिया कि पहले अधूरे काम पूरे कर देंगे, तब रेलवे के नये काम शुरू करेंगे। मुझे खुशी हुई कि हमारा भी अधूरा काम है, हमारे यहां रेलगाड़ी चल जाए, बस इतना ही है, कुछ ज्यादा नहीं हैं, क्योंकि हम नहरों और बड़ी-बड़ी नदियों के सारे पुल बना चुके हैं और ऊपर से होकर निकले और जहां कमी देखी तो वहां भी पुल बना दिया। लेकिन जून में 2010-11 में गाड़ी चलाना चाहते थे, लेकिन अभी तक वह गाड़ी नहीं चली। माननीय रेल मंत्री, प्रभुजी यहां नहीं हैं, हम उन्हीं की वजह से चले आए कि वह होंगे। उन्होंने बजट पेश किया तो मैं दोहराना चाहता हूं कि उन्होंने कहा कि हम पुराने काम करेंगे। हमें खुशी हुई कि यदि पुराने काम ही पूरे हो जाएं तो बहुत बड़ा काम देश का हो जायेगा, भले ही हमारे इटावा-मैनपुरी का नहीं होगा।
महोदय, हमारा लखनऊ में जो रेसिडेंस है, उसके सामने रेलवे का सबसे बड़ा अधिकारी रहता है। यह पुरानी बात है, अब शायद वह रिटायर हो गये। मैंने पूछा वजह क्या है, आप भी प्रयास कर रहे हैं, वह बोले हां कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि कहना मत, यह राजनीतिक मामला है। राजनीतिक मामला क्यों है, बोले कि आपके मामले की वजह से, क्योंकि मुलायम सिंह का क्षेत्र पड़ता है, मैनपुरी लोक सभा क्षेत्र है, इटावा विधान सभा क्षेत्र है, जहां से 11 बार जीते, बीच-बीच में सरकारें बर्खास्त होती रहीं, हमें इस्तीफा देना पड़ता था, यहां पार्लियामैन्ट में छठी बार आ गये।
आज हम केवल यही कहना चाहते हैं। सभापति महोदय, आप हमारी बात पहुंचा देना। मिश्रा जी बैठे हैं, मिश्रा जी बात पहुंचा देना कि इतने लोगों ने वायदे किए हैं। किसानों की कितनी जमीनें गई। कितना उत्तर प्रदेश सरकार ने अपना पैसा खर्च किया। इन बड़ी-बड़ी नदियों पर पुल बनाया, नहरें बनाना, तीन बड़ी नहरों पर बनाया, लेकिन रेल अभी तक नहीं चली। सन् 2003-04 तक सब कुछ हो चुका है। आप कार्यवाही में देख लीजिएगा, बंसल साहब ने कहा था कि जून में रेलगाड़ी चल जाएगी। वर्तमान रेल मंत्री जी से मैं पर्सनली मिला। उन्होंने अच्छा आश्वासन दिया। उन्होंने बजट पेश किया, मैंने कहा कि अच्छा बजट पेश किया है। इससे विकास हो जाएगा, पुराने काम हो जाएंगे। सही है कि पुराने जो अधूरे काम पड़े हैं, पहले आप उनको करा दीजिए तो भी बहुत बड़ा काम हो जाएगा। मैंने सोचा कि हमने प्रयास किया है, उससे हमारा भी काम हो जाएगा। यह काम कोई सैफई के लिए नहीं है। यह जरूर है कि सैफई गांव से एक-डेढ़ किलोमीटर हो रेलवे लाइन कर निकलती है। लेकिन ग्वालियर से मुंबई चली जा रही है। आज हिंदुस्तान के अंदर रेलवे लाइन से कोई वंचित है तो मैनपुरी वंचित है। मैं सबके सामने इसलिए कह रहा हूँ कि देश में इतना वंचित कोई जिला नहीं है, जितना मैनपुरी है। एक छोटी लाइन है, उस पर रेल सवेरे आती है और शाम को वापस लौट जाती है। पैसेंजर रेल हर जगह रूकती है तो कोई उमसें बैठता नहीं है। सब बस से जाते थे कि जल्दी पहुंच जाएंगे। रेल से तो पहुंचेंगे छह घंटे में और बस से पहुंच जाएंगे, एक डेढ़ घंटे में।
सभापति जी, इसलिए आपसे मेरा आग्रह है, मिनिस्टर साहब बैठे हैं, मिश्रा जी बैठे हैं, पीछे भी मिनिस्टर बैठे हैं, बरेली क्षेत्र से मिनिस्टर भी बैठे हैं। बरेली से मैं एमएलए भी रह चुका हूँ। इनको पता है और चीफ मिनिस्टर भी रह चुका हूँ। इसलिए आज हम कहना चाहते हैं, इतना ही चाहिए। लंबा-चौड़ा भाषण नहीं करना चाहता हूँ। खड़गे साहब ने बड़ा-लंबा चौड़ा भाषण दे दिया है। उधर से महंत जी ने दे दिया है। पहले हम इनको साधू कहते थे, अब तो जब से चार्ज मिल गया है, इनको हम महंत कहेंगे। महंत दूसरे थे, अब ये हो गए हैं। महंत जी भी सब चीजें अच्छी बोल गए हैं। इसलिए हमारी अपील आपसे भी है। आप सभापति हैं। आपके समक्ष दो मिनिस्टर भी बैठे हैं। आपसे ही आग्रह है कि प्रदेश सरकार का इतना रुपया लग चुका है। फिर उसके बाद कुछ रेलवेज़ का पैसा लगा है। एक बार पांच साल तक एक रूपया नहीं दिया। ममता बनर्जी से मैंने बहुत आग्रह किया तो पचास करोड़ रूपये दिए। पचास करोड़ रूपये से रेलवे लाइन बिछाने के लिए क्या हो जाएगा। लाइन के लिए डेढ़-दो सौ करोड़ रूपये दे दीजिए ताकि बन जाए। अब आपसे हम यही आग्रह करेंगे, मंत्रियों से भी करेंगे कि यह क्या वजह है। हम लोग आंदोलन नहीं करना चाहते हैं। वर्ना तो अब तक बन जाता। इतना भयंकर आंदोलन चलता कि मुश्किल हो जाती। सब कहते हैं कि वजह क्या है? हमारी खेती भी गई, सब कुछ चला गया लेकिन रेल चल ही नहीं रही है, जब कि रेलवे लाइन बिछ चुकी है, सब पुल बन चुके हैं, लेकिन रेल अभी तक नहीं चली है। अब हमें कोई आश्वासन मिल जाता तो अच्छा रहता। मंत्री जी बैठे हैं, वे कुछ आश्वासन दे दें। मंत्रीमंडल में सबकी सामुहिक जिम्मेदारी कही जाती है, तो जो मंत्री है, वह भी आश्वासन दे सकता है। कोई आश्वासन दे दें कि इतने दिन में आप चला देंगे। बंसल साहब तो जून में चला कर चले गए। उन बेचारों को हटा दिया। पहले भांजे के मामले में कोई दिक्कत आई। उनका कोई दोष नहीं था। मुझे पता है कि वे अच्छे आदमी थे। उनके भांजे ने गलती की थी, भांजे ने गलती की तो उनको हटना पड़ा। अब आप कोई आश्वासन दे दीजिए। हम रेलवे मंत्री जी से जा कर कहेंगे। हम अभी प्रधान मंत्री जी से नहीं कहना चाहते हैं। अब सोच रहा हूँ कि अगर चल जाता है तो ठीक है।
एक बार हम प्रधान मंत्री से भी मिलकर कहें कि यह देखिए और फिर अधूरे काम पूरे करने की घोषनाएँ सदन करता है। यह अच्छा है। हम यह नहीं कहते, तारीफ है माननीय प्रभु जी रेल मंत्री अधूरे काम पूरे करने के लिए कहते हैं तो हमारा किया हुआ प्रयास भी कामयाब हो जाएगा। इसलिए मेरी अपील है, हमें कोई भाषण नहीं देना है, कोई मंत्री उठकर कहे कि यह रेलवे लाइन हम मिलकर के चलवा देंगे तो मुझे बड़ी खुशी होगी।
माननीय सभापति: जिन माननीय सदस्यों को लिखित भाषण देना है, वे सभा पटल पर अपना वक्तव्य रख दें।
माननीय तापस मंडल जी।
श्री धर्मेन्द्र यादव (बदायूँ) : माननीय राज्य मंत्री बैठे हैं, मंत्री जी कुछ कहिए।
माननीय सभापति : आपने कहा, उन्होंने सुना, अब वे कहना चाहेंगे तो हम थोड़े ही रोकेंगे।
रेल मंत्रालय में राज्य मंत्री (श्री मनोज सिन्हा) : जिसने आपको आश्वासन दिया, वह चला गया तो हमें क्यों विदा करने पर आप उतारू हैं?
माननीय सभापति : आपके प्रस्ताव पर विचार करेंगे।
श्री मनोज सिन्हा : उन्होंनेआपको आश्वासन दिया हुआ था। आप हमें विदा करने पर क्यों उतारू हैं? हम पूरी जानकारी करके आपको कल बताएंगे।
माननीय सभापति :ठीक है, मंडल जी अब आप बोलिए।
श्री मुलायम सिंह यादव : जानकारी क्या करेंगे, हमारे सामने सबसे बड़े अधिकारी ने बताया था।
श्री मनोज सिन्हा : कल 12 बजे के पहले आपको बता देंगे।
माननीय सभापति : ठीक है, कल आपको बता देंगे। मंडल जी, आप बोलिए।
श्री मुलायम सिंह यादव : कल बता देंगे, यह बोलिए कि कल चलवा देंगे। क्या आपका यह अधिकार नहीं है?
DR. TAPAS MANDAL (RANAGHAT): Mr. Chairman, Sir, thank you allowing me to speak on this subject. West Bengal is deprived of getting any viable project from this Railway Budget 2016-17. West Bengal got nothing. At the very initial stage itself, when the Budget was presented, our leader, Kumari Mamata Banerjee expressed her anguish over that. West Bengal has got only two dedicated freight corridors and nothing else. The Minister has allocated very meagre amount for the on-going projects in West Bengal. For some projects the money allocated is as low as Rs. 1,000. So, our Party and our people demand that justice be done for the people of West Bengal. You have done so many things for the other parts of the country. So, please do something, announce some projects for the people of West Bengal.
Earlier, when Kumari Mamata Banerjee, our leader was the Railway Minister, she announced a lot of projects for West Bengal. Those projects have been neglected in the present Budget. If it is not possible to do this time, please do it next time, when you will present the Budget for the next year so that the on-going projects, viable projects, expansion projects, railway based industries can get justice from the Union Budget. This is my first appeal to the Union Minister.
The second issue is regarding my constituency. Ranaghat is my Lok Sabha constituency. It is nearer to Kolkata. There is a huge and long-pending demand for construction of motorable subway. But the Railway Ministry took a decision to construct a subway for pedestrians and that subway is almost on the verge of completion.
My request to the Union Minister is to look into this. I wrote many letters to him. I raised this issue many a time in Parliament. However, the Government and the Minister had not paid attention. Conversion of pedestrian subway to motorable subway is very important for the city of Ranaghat, which is divided by the railway stations. One part has no facilities but the other part has all the public amenities like hospitals, banks, schools, colleges, etc. are there So, the eastern part where no such important facilities are there, patients are facing great problem. Please ensure conversion of subway meant for pedestrians into motorable subway so that ambulances can come on time and critical patients can have treatment in hospitals.
There are local trains that are bound to Sealdah and Howrah Stations. I had requested earlier to increase the frequency of the local trains. During the peak office hours, frequency is less. The daily passengers and office-goers - `daily passengers’ in Bengali are known as `daily sandas’ are travelling in inhuman conditions. In a seat meant for three persons, at least five or six passengers sit; huge crowd is there in each and every compartment of local trains. So, in order to give some comfort to the office-goers, please try to increase the number of local trains during the peak office hours. This is my request.
Please increase the number of compartments from 9 to 12. Almost all the stations are expanded and can accommodate 12 compartments but trains are running with only nine compartments. If you increase the compartments from nine to 12, then, more number of passengers can be accommodated and they can reach their destination safely.
There are lots of unmanned level crossings in my constituency. I wrote on this many a time to the Minister, raised the issue in the House also at least four or five unmanned level crossings can be looked into and can be implemented. Please do the needful so that we can avoid accidents.
The Central Government had announced last year to establish an AIIMS at Kalyani, which is an upcoming and planned city in West Bengal, about 55 kms. from Kolkata Airport. Kalyani city may be connected through metro railway from Barrackpore. Up to Barrackpore, there is a metro railway line proposed for which work is initiated. When one of our leaders, Shri Dinesh Trivedi was the Railway Minister, he allotted some money for evaluating the possibility of developing the metro railway from Barrackpore to Kalyani. Please do the needful so that the patients, doctors and huge sections of people can travel safely in the coming years through metro railway from Barrackpore to Kalyani.
Sir, Nabadwip Dham is the birth place of Mahaprabhu Chaitanya. It is one of the important tourist destinations in this country. It has a very old railway station. I would request the Government to make this station as a model railway station and give justice to the people of Nabadwip and all the tourists who are travelling to visit Nabadwip Dham.
Chakdaha is another important railway station. It is a locality with a population of more than 50,000 people and at least 30,000 people are travelling to Kolkata by train by Ranaghat-Krishna Nagar Local, Gidhi Local or Santipur Local. So, I demand that a new Chakdaha Local Train should be introduced from Chakdaha to Sealdah during office hours so that the office goers and the common people can get a safe journey towards the Capital of the State.
Regarding other announcements made by the hon. Railway Minister, we welcome all those announcements. We know that he has made many new proposals and even announced bullet trains for the rest of the country except West Bengal. So, we hope that there would be a time when the Union Railway Minister would give justice, give some new projects to the State of West Bengal so that the people of West Bengal would feel happy and bless the Railway Minister. Thank you.
*SHRI RAMESHWAR TELI (DIBRUGARH): The Railway Budget, 2016 presented by the Hon. Railway Minister Shri Suresh Prabhuji is undoubtedly a welcome step by the Government. I whole heartedly thank the Railway Minister for presenting such a people friendly budget which will contribute to the rapid economic development of the country. Railways, as we all know, is an important medium through which we can expect speedy economic development of every nook and corner of our country. With increased Railway network, obviously there will be an increase in trade and commerce as well as industrial growth which will further boost our country’s economy. And a resurgent economy will certainly enhance India’s dignity and prestige among the comity of nations.
I would like to thank the Hon. Railway Minister especially for his effort to improve the Railway network in the North-Eastern States. I wish to mention here that during the UPA rule, when it came to infrastructure projects, India’s North-East had often been ignored. The States were not well connected as the rest of the country and development had often been an issue. But with the Railway Budget proposal of 2016, it is certain that the North-Eastern States will no longer remain under developed. I appreciate the Railway Minister for increasing the allocation of the North East Frontier Railway (NFR) to Rs. 40,000 crore from Rs. 35,065 crore. Moreover, the announcement made by the Railway Minister in his budget speech that better connectivity to the North Eastern States is of utmost importance for the Railways really deserve Kudos. As a matter of fact, this year’s budget has lot to offer for North East region and I am sure our people will join me in praising the Railway Minister for his genuine concern for the development of this region.
I would like to take this opportunity to request the Railway Minister to initiate appropriate action for electrification of railway lines which has been a long pending demand of the people of Assam.
I would also like to request the Hon. Railway Minister to re-open Bogapani Railway Station in Tinisukia district of Assam which had been closed several years back. The re-opening of the Railway station at Bogapani will go a long away in helping the railway commuters who are in great distress due to the sudden closure of the station. One more request, I wish to make to the Hon. Railway Minister is to extend the Railway line from Lekhapani to Jairampur in Tinisukia district of Assam. It is worth mentioning here that Assam’s Tinisukia town is a hub of business and industrial activities. People from various parts of the country visit this important town for various business related activities. I, therefore, request the Railway Minister to develop Tinisukia Railway Station into a Model station with all modern facilities like wifi etc. To conclude, I once again congratulate the Railway Minister for presenting a people friendly budget.
*SHRI PRASANNA KUMAR PATASANI (BHUBANESWAR) : I am grateful to the Minister that as per our demand he has sanctioned the Demands for Grants. Though the allocation is not sufficient to mitigate the railway problem in our state, but our concern may not be materialized until and unless you intervene for immediate execution on war footing. As per my demand, he has allowed me to sign the MOU pertaining to Kurda Bolangir railway line. As per request, Railways have been connecting from Kurda, Bolgarh, Begunia and Rajsunakeda. Rest of the railway line is also completed upto Naiagarh. As he has managed the train with well quipped and good platforms, the same needs to be repeated from Naiagarh to Daspalla and KBK area. I hope it may be completed as per commitment in the inaugural meeting at Begunia and Bolgarh.
Recently, the Minister had been to Bhubaneswar station to inaugurate Wi-Fi facilities. He might have perceived the difficulties of platforms. His predecessor had already announced to make Bhubaneswar as world class station. In Puri also, the Nabakalabara festival of Lord Jaganath is already over. The world class station target of Puri and Bhubaneswar are not materialized. I pray honestly and solicit immediate cooperation in granting a good sum of grants to promote Bhubaneswar and Puri as declared earlier.
I like to draw the attention of the Minister for Mono Rail and Metro at Bhubaneswar. I am again and again reminding him for his kind immediate action to start the work from Cuttack to Bhubaneswar and from Bhubaneswar to Puri via Kurda, Jatini and direct Puri to Konark. While I was member of Standing Committee, Urban Development (UD), I prayed for survey work that is not yet over. This work should have been started on war footing to avoid traffic congestion and to promote tourism.
Presently, railway catering system is not well managed and supply of items of food needs to be instructed by the Minister as well as the passenger amenities for the safety and security of passengers should be provided. I am also requesting Hon'ble Prime Minister Modiji to start a bullet train from Bhubaneswar to Delhi on priority basis. Therefore don't ignore our State and the bullet train that I have been demanding. No. 1 would be our State Odisha because Prime Minister has announced Bhubaneswar the No. 1 smart city of country.
The flyover work of my constituency and the respective flyovers from Satyanagar to Shahidnagar to Pokaripur are taking lot of time for completion and the Pokaripur flyover is highly delayed. Apart from that some of the flyovers I prayed for at Nirakarapur and Bhusaldapur and Kuhudi needs to be expanded and made full fledged platform immediately for the greater interest of the public. Whatever grant you have allotted should not be shifted to other states or lapsed.
*PROF. RICHARD HAY (NOMINATED): In the Plan Head, New Lines, S.R. Angamaly-Sabarimala Project, it is found that no outlay has been allocated for 2016-17.
The Thalassery-Mysore Line, about which I spoke in the Parliament has not been allocated any funds for the conduct of survey.
The Budget allocation to Netravati Mangalore Central pending work has only been allocated a paltry sum, which would not cover the entire costs. Thalassery Railway Station, SR requires facelift and more facilities as requested to G.M.(SR) as an Adarsh Station. The pedestrian path from the new bus stand to the Railway -I platform premises is not yet taken up by the Railways even though the Inspector of Railways was convinced. There is no retiring room, toilet in the First platform, new two train stoppages, refreshment cafeteria, etc. Thalassery Railway station has been deprived of several facilities by the S.R. which may kindly be looked into.
The electrification of Kannur to Mangalore has to be completed on a war footing as this would improve the functioning of the railways and save the cost of operation in this sector.
*श्री सुभाष रामराव भामरे (धुले) : मैं रेल मंत्री का आभारी हूं । मेरा संसदीय क्षेत्र उत्तर महाराट्र में आता है, मेरा क्षेत्र पिछडा है और हमारे क्षेत्रों की 40 साल से मांग है कि मनमाड, धुले, इंदौर नई रेल लाईन का प्रोजेक्ट मंजूर हो और बजटीय प्रोविजन हो । श्री प्रभु जी मेरे क्षेत्र की दिक्कते जानते हैं और उन्होंने इस नयी रेल लाईन प्रोजेक्ट को मंजूरी दे दी है और महाराट्र गर्वनमेंट के साथ समझौता करके रेलवे इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कम्पनी स्थापित की है और इस प्रोजेक्ट के लिए 9969 करोड़ का प्रावधान किया है और साथ में प्रोजेक्ट पूरा करने की मंशा जाहिर की है । मैं उनका अभिनन्दन करता हूं ।
SHRI RABINDRA KUMAR JENA (BALASORE): Mr. Chairman, Sir, first of all I thank you for giving me this opportunity to speak on the Demands for Grants of Railways for the year 2016-17.
Sir, we have several reasons to thank the hon. Railway Minister Shri Suresh Prabhu and the hon. Minister of State for Railways Shri Manoj Sinha for the various steps that they have taken in the Railway Budget, including allocation of about Rs. 4,600 crore to Odisha. In fact, the Railway Minister has gone on record to say that justice has not been done to Odisha in the past and so they have taken action to make good the losses, which we have suffered, to a large extent. The hon. Minister of Railways is one such Railway Minister who has received lots of praise cutting across party lines when we discussed the Railway Budget and obviously we also thank him for the nice Railway Budget that he has presented.
Having said that, let me come to some critical analysis of the Railway Budget and the Railways per se. The Indian Railways is, in fact, in ICU. I am pained to say that, but this is the fact of life. When I say that it is in ICU, one factor that demonstrates this is that the operating ratio of Railways is 92 per cent meaning thereby the Railways has to spend 92 paise to have one rupee of revenue. This is a very difficult and a deadly situation for any organisation to operate.
The Railway Minister has given several doses. I can term that he has possibly given certain paracetamol tablets to take the Railways out of ICU. But the Railways need a major surgery; paracetamol will not help to take the Indian Railways out of ICU. Why do I say so? If a surgery is not done today to revive the Railways, possibly history will not forgive us because today we have got one of the best situation in the country to tackle the problems faced by the Indian Railways. First, we have a stable Government till 2019, we have a Prime Minister who is committed to revive Railways and more so, we have a Railway Minister and his Minister of State for Railways who are committed and very keen to revive the Railways. Added to this, we have a situation where the country is not going to see possibly six Railway Ministers in five years. So, this is a stable situation. Unless we do this, history may not forgive us.
Let me substantiate why do I say it is in ICU by more factual position. Sir, 50 per cent of the revenue of Railway in its operating expenditure goes towards the staff cost itself. This is a very deadly situation. I mean, we have to pray God to set the organization. Secondly, world-over, all successful Railways have a revenue of 30 to 40 per cent from its non-core activities, whereas in India it is just 2 per cent. This is not a very healthy situation from finance point of view. We have got Mr. Prabhu who is one of the best Accountants in the country as ever seen possibly but we do not have an accrual system of accounting in Railway. What does it mean? We do not know what is the liability of Railway standing over today. Many liabilities may crop up tomorrow.
The Seventh Pay Commission has already put a big hole in the pocket of Railway by taking out close to Rs. 36,000 crore. They have to pay it; they have no choice. Added to this, the Railways have to pay dividend for gross budgetary support. It is a very funny situation. One way, you take gross budgetary support; other way, you pay dividend. What is this system? Can you not look at reviving the system? In several countries, the ratio of passenger fare to the freight rate hovers around 120 to 130 per cent. It is just the reverse in India; it is just 30 per cent. So, this is another critical situation which the Indian Railway has got.
The Indian Railway, which has got 66 per cent of its revenue from freight, depends only on 10 bulk commodities. That is, it is too much dependent on small bulk commodities and this can pose a threat tomorrow. Now, what is the result because of all these problems? The result is that the Railway is losing its share of traffic revenue year after year from Independence till today. Post-Independence, it was 89 per cent; today it is just 30 per cent. This is a very delicate situation for everybody who is running Railway and for the countrymen as a whole. This needs a real outlook. So, what needs to be done? The Railway had to undergo a serious structural change. Do you need a Railway Board in its present form or you need to revive it?
The Railway Minister has spoken about land monetisation. World over, when the land monetisation has been done on a much larger scale, it has revived Railway. So, this is one area where the Minister needs to look into their land monetisation on a very aggressive basis. You need to run it as a good operator. The Railway need not have to become a good mineral water manufacturer. Mineral water manufacturing can be better done by somebody else. The Railway needs to concentrate its energy on its core activity.
Next is advertisement revenue. Advertisement revenue, which can be a bulk portion of the entire revenue, is very meager today. The beauty in advertisement revenue is that we have got incremental cost but much larger revenue. So, this could be another area where the Railway needs to take it up. Then, the Railway needs to introspect whether it has to do hospitals, clubs, hotels or somebody else can do it better. So, these are a couple of suggestions which I thought I will place before the hon. Railway Minister to see that something is done structurally to revive Railway which is in ICU in my opinion.
I come from Balasore constituency of Odisha which falls in the northern part of Odisha. We come from or we belong to South Eastern Railway. Consistently, year after year, decade after decade, we have been suffering untold misery. Even in the last Railway Budget also, the quantum of allocation which we got for our part is really meager. There could be any reason; I am not going into the reason. I would just like to put it before the hon. Railway Minister; Shri Sinha ji is sitting here. Here is a list of issues which I have brought to the notice of your officials of South Eastern Railway and I will submit it to you. Please see, what is the kind of response we get. Either they choose not to respond or to write why it cannot be done. This is our suffering. So, I would sincerely urge upon you to kindly take us out of South Eastern Railway till, at least, our demand for a Division at Balasore is met. This is a very sincere demand and we would urge upon you to really look at it with all seriousness.
Next, you have given two elevated corridors for Mumbai, one for Delhi and suburban line for Ahmedabad, Hyderabad, Chennai and Bengaluru. Why not one for Bhubaneswar, Sir? Bhubaneswar is the hottest destination in the country today under the Chief Ministership of our hon. Chief Minister Shri Naveen Patnaik ji. It is number one smart city. Our hon. Chief Whip says that you give one to Odisha and one to Bihar as well. I will definitely go by his whip; he is our Chief Whip.
Then, I have been demanding for a passenger train in Nilgiri in my constituency. People have been waiting for the last 40 years. Your goods train is running over there. We have been demanding for a passenger train so that, at least, two lakh tribal people will get benefited. It is a small request but we have been languishing from here and there. We would request you to look at it. It is not a big investment per se.
Having said that, I will come to a couple of other demands which we have got from the State of Odisha and one of them is the Digha-Jaleswar Railway line. It has been languishing for almost 10 years to 12 years. The budgeted cost of this project is Rs. 635 crore. We have been getting not more than Rs. 1 crore or Rs. 2 crore. This is one of the lifelines of North Odisha. So, we would like to request you to look into it and make some serious budgetary provisions. Then, there is Digha- Baliapal-Basta, the North Odisha Rail Corridor. You have been extremely kind to approve that and we would request you to expedite that project. That will really give a big fillip to the economic situation of our area. We have requested for one train from Balasore to Ahmedabad. In Gujarat and Ahmedabad, almost 10 lakh people stay from our region. We have also requested for one more train from Balasore to Rourkela and one Jan Shatabdi from Kolkata to Bhubaneswar. We have also demanded to name Balasore Railway Station in the name of Fakir Mohan Senapati who is the saviour of Odiya language. He is said to be the man who has saved our Odiya language from the onslaught of others.
We have demanded for a Paschimbad unmanned level crossing where a lot of deaths are happening and a lot of accidents are happening. It is a meagre cost. We would request you to look into that.
We have got a couple of other demands like Rajdhani Express from Bhubaneswar to New Delhi via Sambalpur for which all the hon. Members from Odisha have made their submissions. We want a flyover at NH 42 at Boinda. We also want a new train from Bhubaneswar to New Delhi via Sambalpur in the name of late Shri Biju Patnaik. Our colleague Shri Nagendra Pradhan has made a specific request. He has already made a request to Shri Suresh Prabhu ji and Manoj Sinha ji. Then we have got another demand for Bhubaneswar – Paradip region. It is coming up very fast. The train must be named in the name of Adikabi Sarala Das. That is what our submission is.
We are also requesting for connecting roads from Cuttack to Paradip Road with over-bridges and platforms at all respective places. Creation of new railway division at Jharsuguda and stoppage of Amravati Express at Jaleswar are some of our demands. We want a skill development centre at Koraput which was declared in 2013 but the work has not been taken at Sitapalli Wagon Manufacturing Workshop which we need to take up. Establishment of Lanjigarh Maintenance Workshop was declared but there is newspaper report which says that the Railways is going to take it out from Odisha. Kindly do not do that. It is the sincere request of all members from BJD and from the State of Odisha. If Lanjigarh is not suitable, put it in any other place in Odisha but not beyond Odisha. That is our very sincere request. Then, we want an Express Train from Jagdalpur to New Delhi and a daily train from Koraput to Bhubaneswar. We request you to expedite the work of SPV which has been formed by the Railway Ministry and the Government of Odisha.
With this, I must thank you for giving me time and thank the hon. Railway Minister for his patient hearing. Thank you.
*KUMARI SUSHMITA DEV (SILCHAR): As a first time Member of Parliament, the very first issue I raised was about communication to and from my constituency.
The burning issue was the delay in completion of the Broad Gauge line from Silchar to Lumding.
The train services have commenced but this monsoon has already disrupted the services in the DIMA HASAO section.
Further, due to poor condition of highways people are land locked. I also demand more frequent train services from Silchar to Upper Assam (Dibrugarh etc.) and more importantly to South India (Chennai).
I am deeply concerned about the security of passengers where there are landslides during monsoon. More significantly, the service on the trains for passengers. No food or water is available between Silchar and Guwahati.
I hope all matters will be looked into immediately. Thank you.
*श्री कौशल किशोर (मोहनलालगंज) ः जनपद लखनऊ के ईटौंजा रेलवे स्टेशन से लगभग 35 हजार एम.एस.टी. के यात्री व लगभग इतने ही अन्य यात्रियों का लखनऊ आना जाना है । उक्त ईटौजा रेलवे स्टेशन को हाल्ट बनाने की घोाणा की गई है । जिसके कारण वहां की जनता व यात्रियों में काफी जनाक्रोश है। कइ बार धरना व प्रदर्शन भी हो चुका है ।
इसलिए उक्त इटौजा रेलवे स्टेशन को हाल्ट बानाने की योजना निरस्त करके रेलवे जंक्शन ही बनाया जाये । लखनऊ के हरौनी रेलवे स्टेशन पर मात्र एक प्लेटफार्म है जबकि वहाँ से रोजाना लगभग 60 से 65 हजार दैनिक यात्री व मजदूर, छात्रों का आना जाना है । गाड़ियां समय से न चलने के कारण मजदूरों की मजदूरी व छात्रों की पढ़ाई छूटती है । स्टेशन की हालत बद- से बदतर है हरौनी स्टेशन पर कम से कम तीन प्लेटफार्म, टीन शेड, शौचालय की व्यवस्था व पीने के पानी की व्यवस्था करना जरूरी है । अतः इस मांग को भी शामिल करके शीघ्र पूरा किया जाये । इसके अलावा हरौनी रेलवे स्टेशन क्रॉसिंग पर ओवर ब्रिज का भी निर्माण किया जाये । जनपद लखनऊ के मोहनलाल गंज रेलवे स्टेशन व निगोहा स्टेशन व मलिहाबाद रेलवे स्टेशन व दिलावरनगर स्टेशन पर लखनऊ की तरफ आने वाली कम से कम दो-दो एक्सप्रेस गाड़ियों का स्टापेज सुबह के समय तथा लखनऊ से वापसी में भी शाम के समय दो-दो एक्सप्रेस गाड़ियों का स्टॉपेज जरूर निर्धारित किया जाये जिससे लाखों दैनिक यात्रियों को रोजाना आने जाने की सुविधा प्राप्त हो जायेगी ।
*श्री ए.टी. नाना पाटील (जलगांव)ः मैं अपने माननीय रेल मंत्री सुरेश प्रभु द्वारा संसद में पेश किए गए रेल बजट का समर्थन करता हॅं। यह पहली बार हुआ है कि माननीय रेल मंत्री जी ने समाज के सभी वर्गों की अपेक्षाओं को ध्यान में रखते हुए एक अत्यंत ही संतुलित बजट पेश किया है। लगातार पिछले तीन सालों न तो यात्री भाड़े में बढ़ोत्तरी की गई है और न ही मालभाड़े में बढ़ोत्तरी की गई है। यात्री भाड़े में बढ़ोत्तरी न किए जाने से जहां देश के आम नागरिकों तथा विशेष रूप से गरीब वर्ग के लोगों को बड़ी राहत मिली है वहीं दूसरी ओर मालभाड़े में बढ़ोत्तरी न किए जाने के कारण महंगाई पर रोक लगेगी तथा आम जरूरतों की चीज़ों की कीमतों को बढ़ने में मदद मिलेगी, क्योंकि आम जरूरत की अधिकांश चीज़ों की ढुलाई रेलवे द्वारा ही की जाती है।
चार नई ट्रेनें- अंत्योदय, तेजस, हमसफर और उदय चलाने का निर्णय निश्चय ही सराहनीय है। हमारे अधिकांश गरीब आम यात्री बिना आरक्षण के ही यात्रा करते हैं। पूरी की पूरी अंत्योदय एक्सप्रेस अनारक्षित होगी, इससे इन यात्रियों को दूर-दराज की यात्रा करने में काफी सहूलियत होगी।
माननीय रेल मंत्री जी के मिशन 2020 में सम्मिलित निम्नलिखित लक्ष्य जहां एक ओर यात्रियों के सफर को आसान बनाएंगे,वहीं दूसरी ओर उनकी सुरक्षा भी सुनिश्चित होगी-
1. 2020 तक हर यात्री को मिलेगा कंफर्म टिकट।
2. 2020 तक ट्रेनों में बॉयो टॉयलेट लगाए जाएंगे।
3. 2020 तक मानवरहित फाटक खत्म किए जाएंगे।
4. 2020 तक बड़ी लाइनों के लक्ष्य पूरे होंगे।
5. 2020 तक 95 फीसद ट्रेनों को समय से चलाने का लक्ष्य।
माननीय रेल मंत्री जी ने रेल बजट में समाज के सभी वर्गों का पूरा-पूरा ख्याल रखा है। जहां एक ओर उन्होंने महिलाओं के सीट आरक्षण कोटे में बढ़ोत्तरी की है, वहीं दूसरी ओर वरिष्ठ नागरिकों के लिए भी सीट आरक्षण कोटे में बढ़ोत्तरी की है। इससे महिलाओं और वरिष्ठ नागरिकों को रेलों में आरक्षण सुनिश्चित करने में अत्यधिक मदद मिलेगी।
रेल मंत्री का यह बजट हमारे माननीय प्रधानमंत्री के इस विज़न को साकार करने में काफी हद तक कामयाब होगा कि तेजी और कुशलता के साथ काम हो। मुझे पूरी आशा है कि रेल मंत्री जी के नेतृत्व में भारतीय रेलवे 2020 तक बड़ी लाइनों के काम को पूरा करने का लक्ष्य को हासिल करने में अवश्य ही कामयाब होगा।
यहां मैं रेल बजट की निम्निलिखित खास बातों का उल्लेख करना चाहूंगा जो निश्चय ही सराहनीय हैं-
· पैसेंजर ट्रेनों की रफ्तार 80 किलोमीटर प्रति घंटा होगी · सोशल मीडिया रेलवे के लिए शिकायतों का प्लेटफार्म · हर बड़े स्टेशन पर सी.सी.टी.वी. सर्विलांस · अंत्योदय और हमसफर ट्रेन चलेंगी, जिनकी रफ्तार 130 किलोमीटर प्रति घंटा की होगी · 139 पर फोन करके टिकट कैंसिल किए जाने की सुविधा होगी · संचालन अनुपात 92 फीसदी हासिल करने की कोशिश करेंगे अर्थात् रेलों को समय पर चलाने के लिए हर संभव प्रयास किए जाएंगे · रिटायरिंग रूम की बुकिंग ऑनलाइन होगी · सभी स्टेशनों पर वाई-फाई उपलब्ध कराएंगे · मौजूदा वित्त वर्ष की समाप्ति तक 17 हज़ार अतिरिव्त जैविक शौचालय चालू होंगे
उपरोव्त सभी बातों को देखते हुए कहा जा सकता है कि माननीय रेल मंत्री जी ने आम आदमी की जरूरतों को ध्यान में रखकर रेल बजट बनाया है तथा सबसे ज्यादा ध्यान कस्टमर सर्विस और रेल यात्रा को हाईटेक बनाने पर दिया है।
इस अवसर पर मैं अपने जलगांव संसदीय क्षेत्र की रेल से संबंधित निम्नलिखित कतिपय समस्याओं की ओर सरकार का ध्यान आकर्षित करना चाहूंगा। बढ़ते यातायात के कारण मेरे जलगांव क्षेत्र में आम जनता को निम्नलिखित लेवल क्रॉसिंगों पर अत्यधिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है तथा घंटों ट्रैफिक जाम रहता है तथा यहां ऊपरी पुल बनाए जाने की तत्काल आवश्यकता है-
1. काजगांव, भदगांव में कि.मी. 347/12-14 पर लेवल क्रॉसिंग संख्या 126,
2. कजगांव में कि.मी. 422/4-5 पर लेवल क्रॉसिंग संख्या 149 मंजूर किया है।
3. दुध फेडरेशन पर कि.मी. 304/8-9 पर लेवल क्रॉसिंग संख्या 148 मंजूर किया है।
4. शिवाजीनगर में कि.मी. 420/9-11 पर ऊपरी पुल का पुनर्निर्माण जल्द से जल्द मंजूर करे।
हालांकि रेलवे उपरोव्त ऊपरी पुलों को शेयरिंग आधार पर बनाने के लिए तैयार है परंतु स्थानीय निकाय व राज्य सरकार पिछले कई सालों के लगातार सूखे के कारण वित्तीय संकट में है तथा उव्त पुलों के निर्माण हेतु अपना हिस्सा देने में असमर्थ है। अतः मेरा रेल मंत्री जी से अनुरोध है कि यात्रियों को होने वाली कठिनाइयों को देखते हुए उव्त ऊपरी पुलों का निर्माण रेलवे अपने कोष में से करवाने का कष्ट करें।
कुछ समय पहले रेलवे ने मेरे जलगांव क्षेत्र में जलगांव, धारणगांव, चालीसगांव, पछोरा और अलमनेर स्टेशनों को मॉडल स्टेशनों के रूप में विकसित करने की घोषणा की थी, परंतु अभी तक इस पर काम चालू नहीं हुआ है। मेरा रेल मंत्री जी से अनुरोध है कि इन स्टेशनों को मॉडल स्टेशनों के रूप में विकसित करने का काम जल्द से जल्द चालू किया जाए।
मेरे संसदीय क्षेत्र से कतिपय रेलों की विभिन्न स्टेशनों पर ठहराव के बारे में अनुरोध प्राप्त हुए हैं जिनका ब्यौरा निम्नलिखित है। इन सभी अनुरोधों को मैं पत्र के माध्यम से पहले ही रेल मंत्रालय को भेज चुका हॅं।
रेल का नाम ठहराव स्टेशन हुतात्मा एक्सप्रेस नागरदेओला और महास्वाद सेवाग्राम एक्सप्रेस नागरदेओला महाराष्ट्र एक्सप्रेस नागरदेओला विदर्भ एक्सप्रेस पचोरा अमरावती एक्सप्रेस पचौरा और चालीसगांव महानगरी एक्सप्रेस चालीसगांव सचखंड एक्सप्रेस चालीसगांव पुणे-पटना एक्सप्रेस जलगांव, चालीसगांव और पचौरा गोवा एक्सप्रेस चालीसगांव कर्नाटक एक्सप्रेस चालीसगांव नवजीवन एक्सप्रेस धारणगांव पुरी-अहमदाबाद एक्सप्रेस पचौरा नागपुर-पुणे गरीब रथ जलगांव और चालीसगांव माननीय रेल मंत्री जी से मेरा अनुरोध है कि वह मेरे जलगांव क्षेत्र के निवासियों की उपरोव्त मांगों पर सहानुभूतिपूर्वक विचार कर उल्लिखित ट्रेनों के अपेक्षित स्टेशनों पर ठहराव अनुमोदित करने का कष्ट करें।
मैं जलगांव की जनता की ओर से माननीय मंत्री जी का हार्दिक धन्यवाद करता हॅं कि उन्होंने जनता की परेशानियों को ध्यान में रखते हुए पांपोर में रेल फाटक संख्या 147 पर ऊपरी पुल के निर्माण हेतु रेल बजट में 50 करोड़ रूपयों का प्रावधान किया है।
मैं एक बार पुनः माननीय रेल मंत्री जी को एक संतुलित रेल बजट पेश करने के लिए धन्यवाद करता हॅं तथा रेल बजट का समर्थन करता हॅं।
श्री श्रीरंग आप्पा बारणे (मावल): माननीय सभापति महोदय, रेल विभाग की अनुदान मांग पर मैं अपनी बात आपके माध्यम से सदन में रखना चाहता हूं। मैं रेल मंत्री श्री सुरेश प्रभु जी का और रेलवे राज्य मंत्री मनोज सिन्हा जी का हार्दिक अभिनंदन करता हूं कि देश के इतिहास में पहली बार रेल का अच्छा बजट इस सदन में पेश हुआ है। महाराष्ट्र में पुणे शहर सबसे ज्यादा ग्रोथ के साथ बढ़ने वाला शहर है। इस शहर से लगकर हिंजवड़ी आई.टी. पार्क तथा चाकण और तलेगांव, इंडस्ट्रीयल क्षेत्र है। आज पुणे के करीब बहुत ट्रैफिक जाम की समस्या होती है। अगर उपनगरीय रेल पुणे के करीब हो तो यह समस्या दूर हो सकती है। मुंबई में उपनगरीय रेल सेवा चलती है। कई बार रेल में प्रवास कर रहे यात्री को अधूरी सुविधा का सामना करना पड़ता है। अगर लोकल ट्रेन की संख्या मुंबई में बढ़ाई जाती तो पूरे भारत में सबसे ज्यादा लोकल में प्रवास करने वालों की संख्या मुंबई में है और जो आमदनी रेल विभाग को मिलती है, वह भी सबसे ज्यादा मुंबई से ही मिलती है। अगर वह संख्या बढ़ाई जाती तो रेलवे प्रवासियों को अधिक सुविधा मिल सकती थी। जैसे पुणे-लोनावाला लोकल ट्रेन चलती है। अगर पुणे के करीब शहरों में उपनगनीय रेल सेवा चले तो लोगों को ज्यादा से ज्यादा सुविधा प्राप्त हो सकती है। गए बजट में कर्जत-पनवेल नई रेल की घोषणा की गई थी। लेकिन अब तक उसमें काम शुरू नहीं हुआ। रेल मंत्री जी ने घोषणा की है। मैं मांग करता हूं कि उसका काम जल्दी से जल्दी शुरू किया जाए। पुणे-लोनावाला के बीच तीसरे ट्रेक की घोषणा भी गए बजट में हुई। उसका सर्वे भी पूरा हो गया है, लेकिन आज तक काम चालू नहीं हुआ। मैं उसे जल्दी चालू करवाने की आशा रखता हूं। मुम्बई-पुणे के बीच अगर सैमी हाई स्पीड ट्रेन चलाई जाती तो आज मुम्बई और पुणे दो शहर एक होते। दोनों शहरों की आबादी दिन-प्रतिदिन बढ़ती जा रही है। अगर हाई स्पीड ट्रेन चलती तो कई लोग नौकरी के लिए पुणे से मुम्बई जाते। सभी रेलवे स्टेशन प्लेटफार्मों पर सुविधा का अभाव दिखाई देता है। अगर प्लेटफार्मों पर सुविधा दी जाएगी तो यात्रियों को दिक्कत नहीं होगी।
पिम्परी-चिंचवण शहर में चिंचवण के पास अगर सब जंक्शन बन जाता तो यात्रियों को सुविधा हो जाती। हाल ही में पुणे के करीब हड़पसर में सब जंक्शन की घोषणा की गई है। लेकिन पुणे और मुम्बई के बीच चिंचवण आता है। अगर चिंचवण में सब जंक्शन बन जाए तो लोगों को और सुविधा मिल सकती है।
तलेगांव, हिंजवड़ी, मुलशी होते हुए रोहा रायगढ़ होते हुए कोंकण मार्ग को जोड़ता है। अगर उसमें नए मार्ग जोड़े जाएं तो वहां के लोगों को सुविधा होगी। देश के विभिन्न क्षेत्रों से नौजवान पुणे शहर में रोजगार और शिक्षा के लिए आते हैं। लेकिन वहां रेलवे में जरूरी सुविधाओं की कमी है। वहां बेसिक सुविधा बढ़ाने की जरूरत है।
पुणे से मुम्बई जाने वाली ट्रेन के फेरों में बढ़ोतरी किए जाने की जरूरत है। ट्रेनों को गंदगी मुक्त करने की जरूरत है एवं सभी प्लेटफार्म और रेलवे स्टेशनों पर साफ-सफाई रखने की आवश्यकता है।
मेरे चुनाव क्षेत्र में कर्जत के करीब माथेरान हिल स्टेशन है। ब्रिटिश काल से वहां छोटी ट्रेन चलती है। इस बजट में उस ट्रेन के इंजन के लिए प्रावधान रखा गया है। लेकिन उसके रेलवे स्टेशन और पटरी के सुधार के लिए अगर काम किया जाए तो पर्यटकों को सुविधा मिल सकती है।
मेरे चुनाव क्षेत्र में तलेगांव छोटा शहर है। गेट नम्बर 41 पर अगर सबवे बना दिया जाए तो लोगों को आने-जाने में सुविधा होगी।
सबसे ज्यादा अपघात मुम्बई में लोकल ट्रेन में होते हैं। सरकार को उन पर ध्यान देने की आवश्यकता है। रेल प्रवास करने वाले प्रवासियों की सुविधा के बारे में रेल विभाग को ज्यादा ध्यान देने की आवश्यकता है। हर साल रेल गाड़ियां बढ़ाने की घोषणा होती है जबकि रेलवे को यात्रियों की सुविधा पर ध्यान देने की आवश्यकता है। रात के समय छोटे-छोटे गांवों में रेल पर पथराव होता है। इससे यात्रियों को बहुत दिक्कत होती है। कई बार यात्री जख्मी भी हो जाते हैं। मैं मांग करता हूं कि छोटे गांवों में सुरक्षा बढ़ाई जाए। धन्यवाद।
SHRI THOTA NARASIMHAM (KAKINADA): Hon. Chairperson, Sir, thank you for giving me this opportunity to speak a few words on the Demands for Grants of the Ministry of Railways.
15.59 hours (Shri Anandrao Adsul in the Chair) I would like to take this opportunity to thank the hon. Railway Minister, Shri Suresh Prabhu ji, for sanctioning a sum of Rs.50 crore for my constituency, Kakinada of Andhra Pradesh in the last Budget on the prestigious Kakinada-Pithampuram mainline. Likewise, I would also like to thank the hon. Railway Minister for the grants conferred on Kakinada-Kotipalli-Narsapur railway line, for which a sum of Rs.200 crore has been sanctioned.
16.00 hours Sir, the Union Railway Minister has taken proper care to increase the overall potentiality of the Railways without compromising the quality of services and security of passengers.
Our Chief Minister Shri Nara Chandrababu Naidugaru praised the overall Railway Budget saying that it is balanced with focus on rural and agricultural development though our State did not get our due share from the Centre.
Sir, I congratulate Mr. Suresh Prabhuji on keeping focus on safety and security of passengers and laying emphasis on providing amenities, which are laudable. No hike in passenger fares is a big relief to the poor. Construction of 17,000 bio-toilets, allocation of 33 per cent berth reservation to women, 50 per cent lower berth reservation to senior citizens with an increased quota for them, ease of booking tickets and cancellation facility through ‘139’ helpline number, GPS-based digital display in coaches for showing upcoming stations, all major stations to be brought under CCTV surveillance in a phased manner, Deen Dayal coaches for long distance trains for unreserved passengers, IRCTC to manage catering service and local cuisine of choice made available to passengers, children’s menu, baby foods, baby boards to be made available for travelling mothers, are all most welcome steps.
Similarly, public-private partnerships, involvement of private parties in development of stations and other railway projects are also very welcome measures.
Sir, the Budget looks futuristic. At the same time, it is welfare-oriented also. Most importantly, no additional burden has been put on the common man. Instead, efforts have been made to provide more services to them. All these decisions of the Railway Minister will certainly be applauded by the people.
Sir, I would now touch upon the issues pertaining to Andhra Pradesh.
I am thankful to the Union Railway Minister for his announcement of dedicated freight corridor from Kharagpur to Vijayawada, and the emphasis on port connectivity would auger well for commerce and trade in the country. This will be helpful for the industrial and commercial development of North and Central Andhra Regions. Further emphasis on port connectivity will also help our State, which is focussing on the port-based development.
Sir, there were several requests from the State of Andhra Pradesh but they did not find any mention at all in the Railway Budget.
The much anticipated separate railway zone for the State did not materialise. Establishing a new railway zone with Vishakhapatnam as the headquarters is proposed in the Bifurcation Act, but there is no mention of it in the Railway Budget.
Similarly, there was no mention of a double-decker train between Vishakhapatnam and Vijayawada, or any originating express trains from Vishakhapatnam to Tirupati, Chennai, Varanasi, Howrah or Bengaluru. Also, now new trains from Vijayawada or Guntur were announced to other Metros/South Indian cities.
Sir, as we all know, Vijayawada is a fast growing city. There is a need for a satellite station there, but no proposal was made in the Budge, which is disappointing.
Our hon. Chief Minister immediately spoke with the hon. Finance Minister, Arun Jaitleyji and reminded him that it is the Centre’s responsibility to rescue our State. He explained to him how our State has been facing the troubles due to the bifurcation. Our Chief Minister has been explaining our State’s critical financial position. It is the Centre’s responsibility to fulfil all the promises made during the State bifurcation. Hence, the Centre should support us financially till we grow on par with the neighbouring States. I am sorry to say that still we are not granted our due share either in the Railway Budget or in the General Budget.
There are several pending projects in Andhra Pradesh. Due to paucity of time, I am not mentioning all those details on the floor of the House. But no mention was made of them in the Railway Minister’s Budget Speech, excepting some nominal funding, which was proposed for the ongoing survey. Doubling works need to be taken up in several places, but there is no clarity about allocations to them.
Mr. Chairman, Sir, the division of Andhra Pradesh has brought so many unforeseen difficulties. Hence, I would request the hon. Railway Minister to be liberal to Andhra Pradesh till we restore ourselves to the main track. There is a growing feeling in the minds of the people of Andhra Pradesh that the helping hand has not been extended to Andhra Pradesh in this Railway Budget.
I would request the hon. Railway Minister to pay his fullest attention to the pending issues of Andhra Pradesh and extend a helping hand to the people of Andhra Pradesh.
The State of Andhra Pradesh has made some requests to the Railways. These are mentioned below:-
(i) Establishment of a separate Railway Zone with Visakhapatnam as headquarters. The same was also mentioned in the 13th Schedule of the Andhra Pradesh Reorganisation Act, 2014;
(ii) Introduction of a double decker express train between Visakhapatnam and Vijayawada;
(iii) Introduction of originating express trains from Visakhapatnam to Tirupati, Chennai, Varanasi, Howrah and Bengaluru;
(iv) Construction of four new platforms at Visakhapatnam Railway Station;
(v) Establishment of Metro Rail facility in Visakhapatnam, Vijayawada, Guntur and Tenali Metropolitan area;
(vi) Establishment of rapid rail connectivity from the new capital of Andhra Pradesh to Hyderabad and other cities;
(vii) Connectivity from Amravati, the new capital of Andhra Pradesh, to Guntur, Vijayawada and major South Indian cities through high speed trains;
(viii) Release of funds for the Guntur – Chittoor Railway line which is estimated to cost Rs. 1350 crore;
(ix) Introduction of express trains from Vijayawada to Mumbai and Bengaluru;
(x) Diversion of four pairs of express trains to Visakhapatnam instead of stoppage at Duvvada which include the Howrah – Yeshvantpur Duronto, Howrah-Yeshvantpur AC, Howrah – Prashanti Nilayam and Kamakhya – Chennai.
(xi) Stoppage of Coromandel Express and Howrah – Kanyakumari Express at Vizianagaram and 11 other express trains at Srikakulam Road station;
(xii) Improvement of passenger amenities at Anakapalle and Yelamanchili stations; and (xiii) Opening of reservation counters at Chodavaram and Madugula.
*श्री रवीन्द्र कुमार पाण्डेय (गिरिडीह)ःरेलों की अनुदान मांग 2016-17 पर अपने निर्वाचन क्षेत्र की प्रमुख समस्याओं पर सरकार का ध्यान आकृष्ट कराना चाहता हॅं, जो निम्नवत हैं-
1 गिरीडीह संसदीय क्षेत्र के अंतर्गत जैनियों का सबसे बड़ा विश्व प्रसिद्ध तीर्थस्थल पार्श्वनाथ है, जिसे मधुबन के नाम से जाना जाता है। मेरे द्वारा पारसनाथ से गिरीडीह वाया मधुबन को रेल लाईन से जोड़ने की मांग वर्षों से की जाती रही है। केंद्र सरकार द्वारा वर्ष 2012-13 के बजट में इसके सर्वे प्रस्ताव को शामिल किया गया था। परंतु अब तक सर्वे की शुरूआत नहीं हुई है।
2. पूर्व मध्य रेलवे के अंतर्गत नेताजी सुभाष चन्द्र बोस जंक्शन, गोमो के समीप रेलवे समपार पर ऊपरी सड़क पुल का निर्माण। (वर्ष 2012-13 में स्वीकृत ऊपरी सड़क पुल का शिलान्यास तत्कालीन रेल राज्य मंत्री मा. श्री अधीर रंजन चौधरी जी के द्वारा 22.2.2014 को ऑनलाईन किया गया था, परंतु आज तक ऊपरी सड़क पुल निर्माण कार्य शुरू नहीं हो सका है।)
3. गिरिडीह-कोडरमा रेल लाईन के शेष भाग कावाड़ से गिरिडीह तक रेल लाईन का कार्य शीघ्र पूरा करने की आवश्यकता।
4. गिरिडीह में रेक प्वाइंट के निर्माण करने की आवश्यकता। (गिरिडीह में रोज़ाना काफी मात्रा में लौह अयस्क आता है) रेल प्वाइंट के निर्माण से रेलवे को काफी राजस्व की प्राप्ति होगी।
5. बोकारो रेलवे स्टेशन एवं पुनदाग के बीच राधागांव रेलवे स्टेशन से हज़ारीबाग जिला (अब रामगढ़ जिला) के माईल स्टेशन तक नई रेल लाईन बिछाने की आवश्यकता। (इसके लिए वर्ष 1986 में सर्वे हुआ था) धनबाद से नई दिल्ली के बीच एक्सप्रेस/सुपरफास्ट ट्रेन, गिरिडीह से रांची वाया मधुपुर जन शताब्दी अथवा ई.एम.यू. ट्रेन, तथा धनबाद से मुम्बई के लिए एक्सप्रेस/सुपरफास्ट ट्रेन चलाने की आवश्यकता है।
पूर्व मध्य रेल के गोमो-बरकाकाना रेलखण्ड पर बोकारो थर्मल एवं गोमिया स्टेशन के बीच स्वांग, तथा गिरिडीह-मधुपुर रेलखण्ड पर महेशमुण्डा स्टेशन-फलजोरी हॉल्ट के बीच सिजुआ में हॉल्ट का निर्माण किया जाए।
गिरिडीह रेलवे स्टेशन के बगल में झरियागादी गांव के पास रेलवे क्रॉसिंग का निर्माण करने की जरूत है। (अंग्रेजों के समय से यहां क्रॉसिंग था।) चन्द्रपुरा स्टेशन पर (कोयलांचल एवं डी.भी.सी. क्षेत्र का महत्वपूर्ण स्टेशन) 18605-18606 (रांची-जयनगर एक्सप्रेस), 18103-18104 (टाटानगर-अमृतसर एक्सप्रेस), 12825-12826 (रांची-नई दिल्ली सम्पर्क क्रांति एक्सप्रेस), और 12831-12832 (धनबाद-भुवनेश्वर गरीब रथ) का ठहराव दिया जाए। साथ ही, पारसनाथ स्टेशन पर (जैनियों के तीर्थ स्थल मधुबन का प्रमुख स्टेशन) 12938-12939 (हावड़ा-गांधीधाम एक्सप्रेस), गोमिया स्टेशन पर 19413-19414 (कोलकाता-अजमेर अहमदाबाद एक्सप्रेस), एवं महुदा स्टेशन पर 15021-15022 (गोरखपुर-शालीमार एक्सप्रेस) का भी ठहराव दिया जाए।
आद्रा से खानूडीह मेमू ट्रैन का विस्तार गोमो तक किया जाए।
प्रगति के पथ पर देश की लाइफ लाइन भारतीय रेल के वर्ष 2016-17 के बजट का मैं समर्थन करता हॅं।
SHRI B. VINOD KUMAR (KARIMNAGAR): The hon. Railway Minister, Suresh Prabhu Ji, while presenting the Railway Budget, has expressed a strategy of Nav Arjan, Nav Manak and Nav Sanrachna, which means new revenues, new norms and new structure.
Sir, I am an optimist. Definitely, he should have a new strategy. Also the need of the hour is to change the norms. I expect from the Railway Minister that by changing the present norms, the functioning of the Railways may change in a positive manner.
Sir, I will give one example. Due to simple decisions, such as stopping a train or naming a train or renaming a train, a lot of time is being spent. Very recently, when the State of Andhra Pradesh was bifurcated into two States, that is, Andhra Pradesh and Telangana, a train from Hyderabad to New Delhi was earlier named as Andhra Pradesh Express. The Members of Parliament from both the States requested to change the name of the train but it took one year and ten months for the Railways to change the name. Such simple decisions are taking years together. I do not know how this Ministry will function. The need of the hour is to change the norms.
The Minister, while presenting the Budget, expressed that the operating ratio for the year 2016-17 will be 92 per cent. Probably, he might have assured us in this august House to say that he had good revenues. Of course, eight per cent is too short. But the analysts mentioned that in the given situation, that is, as per the Seventh Pay Commission, approximately Rs. 36,000 crore burden will be on the Railways. So, by calculating all these things, the operating ratio will be around 120 per cent. So, in the given circumstances, the Railway Minister should plan how he is going to implement the ambitious programme of laying new lines across the country.
Sir, the Railway Minister has not mentioned about how he is going to improve the revenue receipts. Anyhow, on behalf of my Party, Telangana Rashtra Samiti, we are going to support and vote in favour of the Demand for Grants of the Railway Budget.
Sir, at the same time, with regard to the other idea which he had expressed, that is, the PPP model, it is not a new model. I think in the year 1989, the Railway Act was amended for having such programmes. Particularly, the Rail Land Development Authority was constituted in the year 2006. In spite of all these ideas, even now nothing happened, particularly in the Railways with regard to Public-Private Participation in utilizing the valuable lands which the Railways have. But nothing happened, except this. Though they have 43,000 hectares of land, only 100 hectares of land was given under PPP. So, it is a failure. For the last two decades, the experience of the Railways with this PPP model is a failure. But the hon. Railway Minister has not given new ideas. What are his new ideas? He expressed about the new strategies and new ideas but on this front, I hope the Railway Minister will clarify.
HON. CHAIRPERSON: Please conclude.
SHRI B. VINOD KUMAR: Please give me two minutes.
With regard to the other important issues, he has come up with an idea of joint venture with the State Governments. My State Government, that is, the Government of Telangana and my Chief Minister, Mr. K. Chandrasekhar Rao is the first Chief Minister in this country to sign an agreement with the Railways under this ambitious programme of joint venture. My State Government has acquired land for many railway lines. The expenditure on the land was incurred by our Government and we are trying to hand over those lands but they have not come forward yet for laying of the railway lines.
With regard to the new trains which he has announced, UDAY, Tejas, Humsafar, Antyodaya Expresses, he has not mentioned about from which place to which place these trains will be introduced.
Coming to the other most important issues with regard to my State, under the AP State Re-organization Act, they assured that one more Railway Division will be announced in the State of Telangana, that is, in Kazipet. But no announcement has been made since the last two years. They also assured us under the AP Re-organization Act that they will set up a coach factory as well as a wagon factory in Kazipet. In 1984, when I was a student leader in Warangal in Kakatiya University, at that time the foundation stone was to be laid by the then Prime Minister, Shrimati Indira Gandhi. Unfortunately, she was assassinated. Later on, under Rajiv Gandhi-Longawal Accord, that coach factory was transferred or set up in Punjab at Kapurthala. But till date, after three decades, nothing happened in the State of Telangana, particularly in Kazipet. The hon. Minister has to assure us in this House about this.
I have only two more submissions. With regard to the execution of the world class railway station at Secunderabad and also with regard to the tourist express trains connecting all the tourist destinations in the five southern Indian States, beginning and ending at Secunderabad, which may be named as Southern Splendour, I had made a request earlier. We also requested to connect a train between Hyderabad and the new State capital of Andhra Pradesh, that is, Amaravati, that is, by a bullet train. Let the Telugu people of both the States have a connecting train from Hyderabad to the new capital, that is, Amaravati.
Lastly, with regard to the ROBs and RUBs in the State of Telangana, my State Government has come forward to pay some amount under annuity basis to the Railways to construct these RUBs and ROBs but nothing is happening from the other side, from the Railway Ministry.
Sir, ultimately, you are not giving me time. Anyhow, I support the Railway Budget on behalf of my Party and we vote in favour of this Demand for Grants. Thank you, Sir.
श्री सतीश चंद्र दुबे (वाल्मीकि नगर): सभापति महोदय, आपने मुझे रेल बजट पर बोलने का अवसर प्रदान किया, उसके लिए मैं आपका अत्यंत आभारी हूं। माननीय रेल मंत्री श्री सुरेश प्रभु जी ने 25 फरवरी को वर्ष 2016-17 का रेल बजट पेश किया। उस बजट में काफी संतुलन था। जनता काफी उत्साहित रही है। महिलाओं का आरक्षण, महिलाओं के लिए हैल्पलाइन, विक्लांगों के लिए आरक्षण, उनके अनुकूल शौचालय बनवाना, नन्हें-मुन्हें बच्चों के लिए ट्रेन में दूध की व्यवस्था करना आदि तमाम सुविधाएं उपलब्ध हैं।
गांधी जी की कर्मभूमि चम्पारण रही है, मैं वहीं से आता हूं। जेपी आंदोलन की वहीं से शुरुआत हुई थी। यह वाल्मिकि महर्षि की धरती है। वर्षों तक राज करने वाले लोग, जिन्होंने गांधी जी के नाम को भुलाने का काम किया है। चम्पारण रेल के विकास के मामले में काफी पीछे रहा है। जब एनडीए की सरकार आई, चाहे माननीय अटल जी की सरकार हो चाहे मोदी जी की सरकार हो, चम्पारण को हमेशा कुछ न कुछ मिला है। अगर माननीय अटल जी की सरकार नहीं होती तो चम्पारण के लोग दिल्ली आने के लिए नाव का सहारा लेते। तब लोग पनिवाहा या उत्तर प्रदेश से चढ़ते थे। माननीय अटल जी की सरकार ने इतना बड़ा काम किया, माननीय अटल जी की सरकार ने ही गोरखपुर से मुजफरपुर को बड़ी लाइन में तब्दील किया था। इस बार के बजट में गोरखपुर से मुजफरपुर लाइन के दोहरीकरण की बात आई है। पनिवाहा से मुजफरपुर की केवल चर्चा है, मैं माननीय मंत्री जी से आग्रह करता हूं कि पनिवाहा से गोरखपुर का दोहरीकरण किया जाए नहीं तो यह लाइन आधी अधूरी रह जाएगी, काम पूरा नहीं हो पाएगा और चम्पारण के लोगों का सपना अधूरा रह जाएगा।
हमारे क्षेत्र से जुड़ी बहुत सी डिमांड्स हैं। उम्मीद उसी से की जाती है, जहां से कुछ मिलने वाला होता है। मैं अपने क्षेत्र की बात बताता हूं, 1996 से नरकटियागंज रेल ओवर ब्रिज का काम लंबित था, 12 अप्रैल को माननीय रेल राज्य मंत्री मनोज सिन्हा जी ने शिलान्यास किया है। इस रेल बजट में बगाह में दो ओवर ब्रिज मिले हैं जो आज की तारीख में जो टेंडर प्रक्रिया में है। आदर्श स्टेशन चयनित हुए हैं, बगाह, नरकटियागंज, रामनगर के लिए धन मुहैया कराया जाए और इन स्टेशनों को आधुनिक ढंग से बनाया जाए। अंग्रेजों के जमाने में जो स्टेशन बने, खैरपोखरा, भैरोगंज, साठी स्टेशन जर्जर स्थिति में हैं। इनकी व्यवस्था भी सुदृढ़ होनी चाहिए।
मान्यवर, सबसे बड़ी सोचने वाली बात यह है कि अंग्रेजों के जमाने में नरकटियागंज जंक्शन था, वहां वाशिंग पिट था, वहां से जयनगर, ठोरी, मुजफरपुर और बगाह के लिए ट्रेन जाती थी, लेकिन पूर्व सरकार ने वाशिंग पिट वहां से हटाकर दूसरी जगह कर दिया इस कारण वहां से ट्रेन बनकर नहीं चलती है। यह केवल एक जंक्शन और एक स्टेशन के रूप में कायम होकर होकर रह गया है। मेरा अनुरोध है कि यहां वाशिंग पिट की व्यवस्था की जाए।
बगाह बिहार का सबसे अंतिम बार्डर है। यहां से जिला मुख्यालय तक जाने के लिए दिन में कोई ट्रेन नहीं है। मैं आपसे आग्रह करना चाहता हूं कि बगाह से बेतिया तक डीएमयू ट्रेन चलाई जाए और दिन में दो फेरे लगें ताकि काम करने वाले लोग जिला मुख्यालय तक जा सकें। पाटलीपुत्र के लिए बगाह से एक ट्रेन दी जाए जो रात में 12 बजे के बाद चले, सुबह पाटलीपुत्र पहुंचे और पाटलीपुत्र से शाम को चले और रात को 12 या एक बजे पहुंचे। माननीय मंत्री जी से बहुत उम्मीद है कि बगाह में यह समस्या आती है कि जब यहां से ट्रेन चलेगी तो धुलाई के लिए उसे बाहर भेजना पड़ेगा। समस्तीपुर डिवीजन की बात मैं कहता हूं, जिस डिवीजन में नरकटिया और बगहा है, उतनी जमीन किसी दूसरे स्टेशन के पास नहीं है। मैं आपसे आग्रह करता हूं कि यहा भी ट्रेनों को साफ करने की व्यवस्था कराई जाए।
महोदय, दो ओवर ब्रिज हमारे क्षेत्र के लिए बहुत महत्वपूर्ण हैं। पहला बेतिया में छावनी है जो पारित हो चुका है लेकिन बिहार सरकार एनओसी नहीं दे रही थी इसलिए बनने में देरी हुई लेकिन आज से एक महीना पहले एनओसी बिहार सरकार ने दे दी है इसलिए छावनी में ओवर ब्रिज का काम शुरू करवाया जाए। दूसरा ओवर ब्रिज बगहा चीनी मिल के सामने बनाने की जरूरत है जो सेमरा रोड से जाता है, वहां भी ओवर ब्रिज सैंक्शंड है, लेकिन बिहार सरकार के एनओसी न देने के कारण यह काम लम्बित था। इसके लिए भी एनओसी मिल चुकी है, इस काम को भी जल्दी शुरू करवाया जाए। कभी नरकटियागंज में लोको शेड हुआ करता था, लेकिन दुर्भाग्यवश वहां से लोको शेड हटा दिया गया। नरकटियागंज से 15 किलोमीटर की दूरी पर बितयारो आश्रम है जहां से सत्याग्रह की शुरूआत हुई। हमारी सरकार और पूरा हिंदुस्तान सत्याग्रह के 100 वर्ष मनाने जा रहा है लेकिन नरकटियागंज की धरती से अनेकों चीजों को हटा दिया गया है। आज नरकटियागंज विकास के मामले में बहुत पीछे है। मैं सरकार से आग्रह करता हूं कि चम्पारण सत्याग्रह ट्रेन चलाई जाए जो दिल्ली आए। चम्पारण मोतीहारी में ही आता है, हम इस सुविधा से वंचित नहीं रहेंगे। हम महात्मा गांधी सत्याग्रह के नाम से हम शताब्दी मनाने जा रहे हैं, इस नाम से ट्रेन को निश्चित रूप से चलाया जाए।...(व्यवधान)
माननीय सभापति : अब आप बैठ जाएं। अगर कुछ शेष रह गया है तो मंत्री जी को लिख कर दे दीजिएगा।
SHRI MD. BADARUDDOZA KHAN (MURSHIDABAD): Hon. Chairman, Sir, I am thankful to you for giving me a chance to speak.
महोदय, मैंने खड़गे जी और योगी आदित्य नाथ जी की बात सुनी। आदित्य नाथ जी को मैं कहना चाहूंगा कि हमें यह सोचना चाहिए कि पहले ग्राउंड फ्लोर बने। अगर ग्राउंड फ्लोर होगा तभी फर्स्ट फ्लोर या ऊपर की मंजिले बना सकेंगे। मैं कहूंगा कि भारत की साढ़े छह हजार किलोमीटर की रेलवे लाइन है जिसके तहत एक तिहाई ही विद्युतीकरण हुआ है। सरकार को सबसे पहले इस बात को महत्व देना चाहिए ताकि फॉरेन मार्केट से जो आयल आता है, उसकी बचत हो सके। इस बात पर गंभीरता से चर्चा होनी चाहिए।
महोदय, इसके अलावा रेलवे मिनिस्टर ने कहा है कि हम एक्सपेंडिचर बढ़ाएंगे, रेवेन्यु बढ़ेगा तो हम ज्यादा लाइन बिछाएंगे। मैं सोचने पर मजबूर होता हूं कि यह काम कैसे होगा। मंत्री जी ने आशा की है कि इसी साल रेवेन्यु 10 परसेंट बढ़ेगा लेकिन पिछले साल भी इस तरह ही सोचा गया था और रेवेन्यु घट गया। इसी साल मंत्री जी ने आशा की है कि 13 प्रतिशत एक्सपेंडिचर बढ़ेगा। अगर हम पिछला साल देखें तो पता चलेगा कि एक्सपेक्टिड एक्सपेंडिचर सात प्रतिशत कम हो गया। आशा तो बहुत की है लेकिन वह आशा कहां से पूरी होगी। आप ओपरेटिंग रेश्यो देखिए। मंत्री जी ने लिखा है कि यह 92 परसेंट तक इंक्रीज हो जाएगा। यह ऑपरेटिंग रेशियो जितना बढ़ेगा, सरप्लस उतना ही कमेगा, इंवेस्टमेंट कमेगा, तो पैसा कहाँ से आएगा। फिर इसके ऊपर एक सेवेन्थ पे कमीशन का बोझ है। मंत्री जी के सिर पर इसका बोझ है। इसके लिए कहाँ से पैसा आएगा यह सोचना चाहिए। सरकार बजट से जो पैसा देती है, वह नहीं बढ़ता है। जनरल बजट से जो पैसा आया, ज्यादातर तो नहीं बढ़ा। इसलिए पैसा कहाँ से आएगा, यह सोचने की बात है।
मैं पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद जिले से आता हूँ, इसलिए मैं वहाँ की कुछ बातें कहना चाहता हूँ। मैंने बहुत बार इसी सदन से बहुत बार इस बात को कहा, रेलवे मंत्री से भी मिला, मैंने कहा कि हमारी तरफ भी थोड़ा ध्यान दीजिए। आप दूसरी तरफ ध्यान देते हैं, वह अच्छा है, मैं उसका विरोध नहीं करता हूँ, अच्छा काम तो करना ही चाहिए, लेकिन हमारी तरफ भी थोड़ा ध्यान देना चाहिए। मैंने एक नयी रेल लाइन के लिए मांग की है। बहरामपुर से कृष्णा नगर वाया डोमकल, चलंगी और करीमपुर, सियालदह डिवीजन के अंतर्गत, का सर्वे का किया जाए। पहले सर्वे होगा, तभी नयी लाइन बन सकेगी। मैं इसकी मांग करता हूँ। मेरी दूसरी मांग यह है कि हावड़ा से फरक्का वाया कटवा जो रेल लाइन है, का विद्युतीकरण करने के लिए फण्ड एलॉट करना चाहिए। तीसरा, मंत्री जी ने सब-अरबन एरिया के लिए एलिवेटेड कॉरिडोर की बात कही है, इसके लिए मैं उनको धन्यवाद देता हूँ। यह होना चाहिए। यदि लाइन बढ़ाने के लिए जगह नहीं है, यदि कोई म्यूनिसिपल एरिया है, सब-अरबन एरिया है, तो उसके लिए लाइन एलिवेट करना है, मंत्री जी ने इसे मुम्बई में करने की बात कही है। लेकिन कोलकाता भी एक क्राउडेड सिटी है। वहाँ जो भी ट्रेन्स आती हैं, वे बहुत क्राउडेड होती हैं। पैसेंजर जब यात्रा करते हैं, तो ऐसा नहीं लगता है कि वे इंसान हैं। पता नहीं वे किस तरह से जाते हैं। इसलिए मेरी मांग है कि एक एलिवेटेड ट्रेन लाइन दमदम से सियालदह तक होनी चाहिए। इसके लिए भी फण्ड एलोकेट करना चाहिए।
मैं अंत में कहना चाहता हूँ, हमारे यहाँ यह बहुत ही दुख की बात है, भागीरथी नदी के ऊपर एक रेलवे ब्रिज है, ब्रिज बन चुका है, पैसे खर्च हो चुके हैं, लेकिन रास्ते के ऊपर थोड़ा-सा डिस्प्युट हो गया है, कुछ लोगों ने यह डिमांड किया कि मुझे नौकरी चाहिए। इस कारण से यह काम रुक गया। लेकिन राज्य सरकार को तो इसे लेना है। राज्य सरकार भी एक्वायर नहीं कर रही है। पिछले पाँच वर्षों से यह ब्रिज तैयार होकर खड़ी है, उसमें आगे कुछ काम नहीं हो रहा है। इस प्रकार से वह ब्रिज बिल्कुल खत्म हो जाएगा। इसके लिए मैं मंत्री जी से आग्रह करूँगा कि वे कृपया इसे देखें।
बहरामपुर एक डिस्ट्रिक्ट सिटी है। सिटी में दो रेलवे ओवर ब्रिज बनाने के लिए फण्ड एलॉट हो गया है। फण्ड एलॉट हुए दो वर्ष हो गये हैं। राज्य सरकार से नो ऑब्जेक्शन लेटर नहीं मिल रहा है, इसीलिए उसका काम नहीं हो रहा है। इसके लिए तो केन्द्र सरकार और राज्य सरकार को कोई रास्ता ढूंढना होगा क्योंकि इससे तो आम आदमी का ही नुकसान हो रहा है। मैं मंत्री जी से इसका हल ढूंढने के लिए आग्रह करूँगा।
पश्चिम बंगाल के दार्जिलिंग में वर्ल्ड हेरिटेज में एक टॉय ट्रेन है। रेल मंत्री जी ने कोलकाता में कहा कि मैं यूनेस्को से बात करके इसके डवलपमेंट के लिए काम करूँगा। बजट आ गया और बजट में इसके विकास के संबंध में कोई योजना नहीं है। इसलिए मैं रेल मंत्री जी से रिक्वेस्ट करूँगा कि इस टॉय ट्रेन के लिए इस बजट में कुछ स्पेशिफिक एलॉटमेंट रहना चाहिए। इतना कहकर ही मैं अपनी बात समाप्त करता हूँ। धन्यवाद।
*श्रीमती जयश्रीबेन पटेल (मेहसाणा)ः रेल मंत्री माननीय श्री सुरेश प्रभु जी रेल मंत्रालय की अनुदान मांगों का जो प्रस्ताव लेकर आए हैं, मैं उनका पुरज़ोर समर्थन करती हॅं।
इसके तहत मेरे निर्वाचन क्षेत्र और गुजरात की कुछ वाजिब मांगों को रेल मंत्रालय के समक्ष रखती हॅं। रेल मंत्रालय कृपया इस पर गौर करें।
गुजरात में सभी जगहों से लंबी दूरी की सूरत-मुंबई-पूना की ट्रेनें चलती हैं। सिर्फ उत्तर गुजरात में मेहसाणा, पाटन, बनासकांठा, साबरकांठा, अरावली जिले पड़ते हैं, वहां से सूरत, मुंबई, पूना और दक्षिण भारत में जाने के लिए कोई सीध रेल सेवा नहीं है। सभी ट्रेनें अलग राज्यों से आती हैं। उत्तर गुजरात के लोगों का मुंबई, पूना, सूरत में कारोबार और सामाजिक तौर पर आना-जाना लगा रहता है। पाटन में तो रानकीवाव जो वर्ल्ड हैरिटेज में समाहित है, वहां विदेशी पर्यटकों का आना-जाना रहता है और मोढेरा में विश्व विख्यात सूर्य मंदिर है।
मेहसाणा, जो ऑयल, मिल्क, इंडस्ट्रियल सिटी कहलाती है और ऊंझा जो एशिया की सबसे बड़ी मसाला मंडी है, वहां व्यवसायिकों का दुनिया भर से आना-जाना रहता है। मेहसाणा, जो नोर्थ गुजरात की राजधानी कहलाती है, वहां पर नीचे दी गई इस प्रकार की ट्रेनों का स्टॉपेज नहीं है-
1. 19107/19108 अहमदाबाद-उधमपुर-अहमदाबाद
2. 19269/19270 मुजरपुर-पोरबंदर-मुजरपुर (मोतिहारी)
3. 12245/12246 जयपुर-बांद्रा-जयपुर (गरीब रथ) मेहसाणा जो "ए" दर्जे का रेलवे जंक्शन है, उसे देखते हुए उपरोव्त चारों गाड़ियों का स्टॉपेज मिलना बहुत जरूरी है तथा इस प्रकार की ट्रेनों को जो सप्ताह में एक दिन ही चलती हैं, उन्हें रोज़ाना किया जाए जो मेहसाणा से गुजरती हैं।
1. 19565/19566 ओखा-देहरादून-जयपुर-ओखा
2. 19573/19574 जयपुर-ओखा-जयपुर
3. 19579/19580 दिल्ली-राजकोट-दिल्ली पश्चिम रेलवे का मुख्यालय चर्चगेट मुंबई में है, उसे अहमदाबाद गुजरात में लाया जाए। वलसाड, अहमदाबाद (गुजरात क्वीन) को पाटन-मेहसाणा तक बढ़ाया जाए। गाड़ी नं. 16501/16502 अहमदाबाद-बैंगलोर-अहमदाबाद (13 घंटे तक अहमदाबाद में रूकती है) वह हर मंगलवार को 03.45 को आती है और शाम को 18.00 बजे छूटती है। उस ट्रेन को पाटन तक बढ़ाया जाए, क्योंकि दक्षिण राज्यों की ओर जाने के लिए एवं साइप बाबा (शिर्डी) तक आवागमन में सहुलियत रहे तथा धार्मिक श्रद्धालुओं को पर्यटन का लाभ मिल सके।
गाड़ी नं. 22452/22451 चंडीगढ़-बांद्रा-चंडीगढ़ जो सप्ताह में दो दिन के लिए अप-डाउन करती है, उसे चंडीगढ़ से पूना या अम्बईन्डोरा तक बढ़ाया जाए, तो हिमाचल प्रदेश में स्थित श्री गुरू गोविंद सिंह, आनंदपुर साहिब, माता नैना देवी, माता ज्वालामुखी, चिंतपूर्णी माता जैसे धार्मिक स्थल पड़ते हैं, वहां आने-जाने की सहूलियत रहे। भारतीय सुरक्षा बल, अर्ध लक्षकारी बल, ओ.एन.जी.सी. तथा निजी कंपनियों में काम करने वाले कर्मचारियों और अफसर जो गुजरात में बड़ी मात्रा में रहते हैं, को वतन में आने-जाने के लिए सहूलियत बढ़ेगी। अहमदाबाद स्थित चांदखेड़ा, जिससे उत्तर गुजरात तथा सौराष्ट्र के पैसेंजरों को आने-जाने में बड़ी सहूलियत मिलेगी, इसके लिए स्टेशन पर सुविधा और दायरा बढ़ाया जाए।
रामदेवरा (राजस्थान) जो बड़ा धार्मिक स्थल है, वहां गुजरात के लोगों को आने-जाने में सहूलियत मिले, इसके तहत अहमदाबाद से स्पेशल ट्रेन चलाई जाए।
मणिनगर तथा साबरमती जो अहमदाबाद के उत्तर दक्षिण में पड़ते हैं, वहां अहमदाबाद के ट्रैफिक के कारण अहमदाबाद के पूर्व-पश्चिम में रहने वाली जनता को स्टॉपेज और स्टेशनों का दायरा बढ़ाने से सहूलियत मिलेगी और कालूपुर, अहमदाबाद में रेलवे स्टेशन पर बोझ हल्का होगा।
भारत के सभी राज्यों की राजधानी को दिल्ली तक सीधी रेल सेवा से जोड़ा गया है, सिवाय गुजरात की राजधानी गांधीनगर को छोड़कर, जो एक महानगर निगम भी है। मेरी मांग है कि वहां रेल सुविधा बढ़ायी जाए और वहां राजधानी, आश्रम एक्सप्रेस जैसी गाड़ियों से अप एं डाउन के लिए जोड़ा जाए।
गुजरात के छोटे-छोटे कई रेलवे स्टेशनों को सिर्फ वाणिज्यिक हेतु के तौर पर बंद किया गया है। जैसे कि मेरे क्षेत्र मेहसाणा स्थित वेनपुरा, शंखलपुर, देउसना, अनखोल, छत्राल स्टेशन जो रेल प्रशासन द्वारा बंद किए गए हैं, उनको पुनः कार्यान्वित किया जाए।
उत्तर गुजरात की जनता के लिए पालनपुर/मेहसाणा, सूरत तक सीधी इंटरसिटी रेल चलाई जाए।
मेहसाणा-तारंगा गेज परिवर्तन के लिए धनराशि रिलीज कर दी गई है, इसके तहत विसनगर इकाई के बीच में से रेल पटरी पड़ती है और एपीएमसी वाला समपार छोटा पड़ता है, इसको चौड़ा करने की अनुमति दी जाए और पूरी धनराशि केंद्रीय सहायता से मिले।
अहमदाबाद-कटरा एक्सप्रेस (19415) और विवेक एक्सप्रेस (मुंबई बांद्रा से जम्मूतवी) को नियमित रूप से चलाए जाने की आवश्यकता है।
गुजरात सरकार द्वारा रेल मंत्रालय को कोल परिवहन के लिए मालभाड़े में सुयोजन का जो प्रस्ताव किया गया है, उसे स्वीकार किया जाए।
गुजरात राज्य में दिल्ली-मुंबई इंडस्ट्रियल कॉरिडोर के तहत नई रेलवे लाइन का निर्माण तथा द्वीमार्गीकरण की लंबित दरख्वास्तों पर ध्यान दिया जाए।
गुजरात से होकर जाने वाली नई ट्रेनों की लंबित डिमांड पर गौर किया जाए।
रेलवे बजट 2015-16 में गुजरात को जो सुविधाए मिली हैं उनके क्रियान्वयन को आगे बढ़ाया जाए।
पायलट प्रोजेक्ट पर जो ट्रेनों की गति बढ़ाई गई है इसका फायदा देश के सभी 16 जोन को पहुंचाने की कोशिश की जाए।
माँ, माटी और मानुष के तौर पर गुजरात के जनजातीय इलाके वाले खेडब्रहम्मा, दाता, तारंगा हिल, अम्बाजी और राजस्थान के आबूरोड को जोड़ने वाली नई रेल परियोजना के तहत सर्वे कराया जाए और उसे जल्द से जल्द मंजूरी दी जाए। जिससे इन जनजातीय इलाकों को विकास की पटरी पर लाया जा सकेगा।
मैं आशा रखती हॅं कि रेलवे मंत्री जी मेरी इन मांगों पर गौर करेंगे।
*श्री वीरेन्द्र कुमार चौधरी (झंझारपुर)ःसर्वप्रथम मैं माननीय रेल मंत्री को धन्यवाद देता हॅं जिन्होंने देश में प्रथमवार इस तरह का अच्छा रेल बजट पेश किया है। मैं झंझारपुर लोकसभा क्षेत्र, बिहार से आता हॅं। मेरे संसदीय क्षेत्र में करीब 120 कि.मी. छोटी लाइन है, जिसके आमान-परिवर्तन के लिए बार-बार मंत्री जी से पत्र के माध्यम से प्रश्न के माध्यम से आवाज उठाता रहा हॅं। तब इस बार 16-17 के बजट में आमान-परिवर्तन के लिए पैसा दिया गया है, लेकिन काम की शुरूआत नहीं की गयी है। मैं सरकार के माध्यम से माननीय मंत्री जी से आग्रह करता हॅं कि सकरी से निर्मली और झंझारपुर से लौकहा आमान-परिवर्तन का कार्य यथाशीघ्र शुरू करवाया जाये, साथ ही, जयनगर रेलवे स्टेशन के एन.एन.-104 और एन.एच.-105 पर रेल ऊपरी पुल बनाया जाये और जयनगर को अंतर्राष्ट्रीय स्टेशन का दर्जा दिया जाये। यदि सकरी से निर्मली आमान-परिवर्तन का कार्य हो जायेगा, तो गुवाहाटी से चलने वाली सभी गाड़ियों की दूरी 200 कि.मी. घट जायेगी। इसलिए यह कार्य जनहित में जरूरी है।
श्री रमेश चन्द्र कौशिक (सोनीपत) :सभापति महोदय, मैं सबसे पहले आपके प्रति आभार व्यक्त करना चाहूंगा कि आपने मुझे वर्ष 2016-17 के लिए रेल की अनुदान मांगों पर अपने विचार रखने की अनुमति प्रदान की है। मैं माननीय रेल मंत्री जी के प्रति आभार प्रकट करता हूं कि उन्होंने एक बहुत अच्छा बजट इस बार दिया है, जिसमें पुराने रुके हुए कामों और जो योजनाए दस-बीस साल से रुकी हुई थीं, उनको भी पूरा करने का निश्चय किया है। इसके साथ ही माननीय प्रधानमंत्री जी के स्वच्छ भारत अभियान को भी भारतीय रेलवे पर पूरी तरह से लागू किया है और रेलों में आज सफाई एवं खाने-पीने की व्यवस्था में सुधार हुआ है। मैं माननीय रेल मंत्री जी से अपने क्षेत्र के बारे में निवेदन करूंगा कि सोनीपत-घुवाणा-जींद रेलमार्ग पर अभी तक रेलगाड़ी का संचालन शुरू नहीं हुआ है, जबकि रेललाइन बिछ चुकी है और ट्रायल हो चुका है। इसलिए मैं प्रार्थना करूंगा कि उसे जल्दी से जल्दी शुरू किया जाए। सोनीपत में एक रेल कोच फैक्टरी लगाने की घोषणा पिछले दिनों माननीय रेल मंत्री जी ने की थी, उसके लिए मैं माननीय रेल मंत्री जी को धन्यवाद देता हूं और उनसे निवेदन करता हूं कि उसका काम भी जल्दी शुरू किया जाए। हमारे क्षेत्र में सोनीपत रेलवे स्टेशन पर शाने-पंजाब ट्रेन (12497-12498) का ठहराव किया जाए, क्योंकि वहां से बहुत से लोग अमृतसर, अम्बाला और पंजाब की तरफ जाते हैं। इससे वहां के लोगों के लिए सुविधा हो जाएगी। सोनीपत और जींद को आदर्श स्टेशन का दर्जा दिया जाए। वहां पर 50 हजार से ज्यादा यात्री प्रति दिन दिल्ली के लिए सफर करते हैं। वहां जिन ट्रेन्स में 16 कोचेज हैं, उनकी संख्या बढ़ाकर 20 की जाए और जिनमें 20 कोचेज हैं, उनको बढ़ाकर 22 और 24 कोचेज किए जाएं, ताकि यात्रियों को सुविधा मिल सके। रोहतक से जुलाना और जींद रेलमार्ग के विद्युतीकरण का काम शुरू हुआ है, मैं माननीय रेल मंत्री जी से प्रार्थना करूंगा कि जल्दी से जल्दी उसे पूरा किया जाए। इसके साथ-साथ जींद-सपीतों-पानीपत-घुवाणा-रोहतक लाइन का भी विद्युतीकरण का काम शुरू किया जाए।
जिस तरह से माननीय रेल मंत्री जी ने स्पीड ट्रेन्स को बढ़ावा दिया है और आगरा के लिए जो सेमी बुलेट ट्रेन चलाई है, इसी तरह की ट्रेन दिल्ली से चण्डीगढ़ के लिए भी होनी चाहिए क्योंकि चण्डीगढ़ पंजाब और हरियाणा की राजधानी है और लोगों का बहुत ज्यादा आना-जाना लगा रहता है। इसके साथ ही माननीय रेल मंत्री जी से एक निवेदन करना चाहता हूं कि रेलवे की जो जमीनें पड़ी हैं, उन पर जो नाजायज कब्जे हो रहे हैं, उनको हटाकर वहां कॉमर्शियल एक्टीविटीज शुरू की जाएं ताकि रेलवे की आमदनी बढ़ सके। आज रेलवे का खर्च ज्यादा है और आमदनी दिन प्रतिदिन घटती जा रही है। इस तरफ भी सरकार को पूरा ध्यान देना चाहिए क्योंकि आमदनी के बिना आगे के काम होना मुश्किल होगा। माननीय रेल मंत्री जी को धन्यवाद देता हूं, उन्होंने कहा है कि अगले साल तक ट्रेन्स की स्पीड़ काफी बढ़ाएंगे, जिनकी स्पीड 90 किलोमीटर प्रति घण्टा है, उनको बढ़ाकर 110 किलोमीटर प्रति घण्टा करेंगे और 110 किलोमीटर प्रति घण्टा स्पीड वाली ट्रेन की स्पीड बढ़ाकर 140 किलोमीटर प्रति घण्टा करेंगे। इसके लिए मैं सरकार के प्रति आभार व्यक्त करता हूं कि आज रेलवे में बहुत तेजी से काम हो रहा है और पुराने प्रोजेक्ट्स पर भी तेजी से काम हो रहा है। इस वर्ष में भी कई प्रोजेक्ट्स पूरे होने हैं।
आपने मुझे बोलने के लिए समय दिया, उसके लिए आपको धन्यवाद देता हूं।
SHRI VARAPRASAD RAO VELAGAPALLI (TIRUPATI): Sir, we compliment the hon. Minister for the very innovative Budget. I also compliment him and thank him for awarding so many things to my constituency, Tirupati. One new train has been started from Shirdi to Tirupati, and I thank you for the same. However, the issue which we have been raising or requesting is that the train instead of being routed through Kadapa and Guntakal, the train may be routed through more potential areas like Gudur, Nellore and Vijayawada so that the entire Andhra Pradesh could be covered. This point may be taken into consideration.
We also have been awarded two subways, and RoB also has been sanctioned to us. More importantly, Nadikudi-Srikalahasti new track has been awarded and I thank you for the same. So many good things are happening and new trains are also getting started.
We have the Andhra Pradesh Express which goes via Vijayawada. Coming from Visakhapatnam, it covers one part of Andhra Pradesh, but there are other parts of Andhra Pradesh, like Tirupati, Gudur, Nellore and Guntur. Therefore, in the past, it has happened that whenever the State is too big, it was split into two trains. First half could come from one-third of the State and the other half could come there and both could be joining at Vijayawada so that the entire Andhra Pradesh is covered because it is named as Andhra Pradesh Express. That would be appropriate if half the train goes from Tirupati via Nellore and Gudur. I thank you for that.
We have been asking for another thing. The State Reorganisation Act has provided a separate new Railway Zone at Vizag. Already more than two years are over. There is no reason why a small thing like this is pending. Recently, one ardent supporter by name Shri Gudivada Amarnath is on fast unto death for creation of a separate Railway Zone at Vizag. Therefore, I would request the hon. Minister to take this into consideration seriously.
Another thing that has been pending for a long time is about the modernisation of Tirupati Railway Station. It has been pending for almost two decades. Tirupati is an important place. It has been promised that it would be made into a world class railway station. So, appropriate credit could be given to Tirupati also.
Another important thing that I want to mention and which is beneficial to all of us is about the meeting of the General Manager. The meeting of the General Manager is becoming a very routine one. Whenever the General Managers call for an annual meeting with MPs, they are not applying their minds. They are not considering our request adequately. Therefore, what we would request is that whenever there is a meeting of the General Managers and the MPs, they should apply their minds, they should get into the field and consider our requests generously.
Another thing is about level crossings. These days, they are discontinuing level crossings at many places. For example, we are asking for level crossings at different places like Sullurpet, Doravarisatram and Venumala. They are telling that the money has to be mobilised by the local resources. That is impossible. Therefore, since the level crossings are replaced by the sub-ways, the cost has to be borne by the Railway Department. That is very important.
The net revenues of Railways are falling down from Rs.19,000 crore to Rs.18,000 crore. That needs to be considered. More importantly, the Pension Fund has increased from Rs.34,000 crore to Rs.42,000 crore. If this trend is not taken into consideration, in the long run, as was mentioned by the earlier speakers, more than 60 per cent of the revenues would go towards only the staff salaries and pension. That needs to be addressed by the Railway Minister.
Similarly, the Debt Service Fund has come down from Rs.3,700 crore to Rs.214 crore. That needs to be addressed as to how it came down to that level. Secondly, the operating ratio is steadily deteriorating. This year again, it has gone from 90 per cent to 92 per cent. If anything goes beyond 100 per cent, it will be extremely difficult later. It might be that the surplus would fall. So, the deterioration of the operating ratio needs to be corrected.
Freights have not been increased. While we appreciate this certainly, the investment would be very difficult later. That also needs to be considered. Another thing is that only half of the fund commitment has been absorbed by the Seventh Pay Commission. The remaining half of the fund commitment has not been absorbed in this Budget. It is heartening that cargo has been taken into consideration because it is a real bread-winner. You want to construct terminals and so many other things. What is missing is this. There is no doubt that you are considering the passengers. But cargo also is contributing more than 60 per cent to our revenues. But the importance of cargo has not been considered by the helpline. That also needs to be considered.
With this, I thank you very much. Once again, the modernisation of Tirupati Railway Station should be taken on war footing.
*SHRI D.K SURESH (BANGALORE RURAL): The Railway is the lifeline of India, which connects the east to west, south to north. It connects the entire country irrespective of rural or urban differences. Indian Railway is a commonly used mode of public transportation in the country. During 2014-15, it carried 8,224 million passengers as against 8,397 million in 2013-14, which is 173 billion passenger carried less than over last year. Passenger earnings also increased by Rs. 5,657.35 crore (15.45%) in comparison with 2013-14. The passenger earnings in 2014-15 was Rs. 42,189.60 crore. The passenger revenue in terms of earning as per passenger kilometre for different classes also increased gradually. In spite of the gradual increase in number of passenger and passenger revenue, the ticketless travel also increased gradually. As a national common carrier transporting passenger and goods over its vast network, Indian Railways has always played a key role in India's social and economic development.
It must be a cheap and affordable means of transportation for millions of passengers. As a carrier of bulk freight viz. ores and minerals, iron and steel, cement, mineral oils, food grains and fertilizers, containerized cargo etc., the importance of Indian Railways for agriculture, industry and the common man is well recognized. I hope the Government will do the needful for electrification of all the existing lines and also to convert the existing meter gauges to broad-gauge to uniform the entire rail network of the country.
During the past two decades there were more than a dozen new railway lines announced for the State of Karnataka in the various railway budgets presented by different Governments. But till date not a single project is completed. So, I request the Hon'ble Minister to allocate more funds to complete all those pending projects in the State of Karnataka.
One of the pending railway line passing through my Lok Sabha Constituency is Bengaluru-Satyamangalam line. It was announced twenty years ago with an estimated cost of Rs. 901 crores. But so far it is not seen the light of the day. I would like to request hon. Railway Minister to provide the Budgetary allocation for the railway line between Chamarajanagar and Bangalore via Kanakapura and Kollegal. This new railway line is both economically viable and a socially desirable project for the Indian Railways.
I would also urge the Hon'ble Minister to take steps to strengthen the existing railway tracks, construction of Railway Over Bridges and Railway Under Bridges to mitigate the congestion of huge traffic particularly in Urban areas of the country and to avoid railway frequent accidents constructing Barricades in strategic places.
I would like to impress upon the hon'ble Railway Minister to expedite the suburban railway project to Bengaluru city to fulfill the needs of sub-urban railway transportation. It has been over 10 years since the city has been demanding a suburban rail and it has been held up owing to lack of funds for the project. If it is implemented, it will address the immediate concerns of congestion in the city and also help Bengaluru retain its position as a preferred business destination.
The trains running between Bengaluru and Mysore on this railway line, particularly during peak hours, there is a huge rush as student, laborers, traders and employees of private sector and public sector and Government employees prefer to travel on trains. So increase the frequency of trains to facilitate commuters on the railway line.
I urge the hon'ble Minister for Railways to consider the demands of my people to have a direct train connectivity between the Bengaluru city station and the Kempegowda international airport, introduction of a speed train on the Chennai-Bengaluru-Mysuru route, early completion of the Bengaluru-Hassan railway line.
Time-bound completion of Bengaluru-Mysuru track doubling, introduction of a high-speed express trains between Bengaluru-Mysuru, extension of double track work from Bangarpet to Mulbagal and Chittor on the Bengaluru-Tirupati line. The railway budget has not made any commitment in this regard.
A new MEMU train service (6 days) was announced between Bengalore and Ramanagara which falls in my parliamentary constituency. Even though the electrification work on this line has been completed, it has not been commissioned even after more than a year. The electrification work has been completed until Channapatna, but the plan is to provide service only up to Ramanagara. I request the Union Government to complete this electrification immediately and also extend the MEMU services up to Channapatna. There is a need to introduce more Holiday Special Trains from Bangalore to Mysore to meet the growing demand.
I would like to ask the Railway Minister about the so called Automobile Freight Train Operator Scheme (AFTO). As per the information, the present AFTP is impractical and it never meets the demand. Kindly upgrade the facility to tap the freight transportation of commodities like fertilizers, molasses, edible oil, caustic soda, chemicals, petrochemicals, alumina, bulk cement and fly ash, etc. The rail co-efficient is traditionally very slow, a new scheme needs to be launched to attract private investment in special purpose wagon required for transportation of these commodities.
For the speed up of Passenger Reservation System, Information Technology continued to be the focus area for improvement in passenger services and efficiency in train Operations. Government has to open thousands of new Computerized Reservation Offices in each nook and corner of the country, even if there is no rail connectivity. Besides this, railway has to open computerized unreserved ticketing system in all railway stations irrespective of its class and grade to enable the general public to access their tickets without standing on long queues. Government has to launch enough services to enable enough online tickets as per requirement with high speed.
The high demand for wagons for freight traffic has to be addressed by the railway board. The present hardship to avail enough wagon for freight traffic is very horrible. For this, railway has to enhance the existing Electronic Reservation of Wagon Demand many fold. The proposed Mobile Application of train enquiry on Windows and Android platforms to provide train running position to passengers needs to be implemented immediately with updated information.
Railways should be a model to function as paperless office to all other government departments. All Divisions and Zonal Offices must implement Biometric system for more effective functioning of the offices. The Railway User's Amenities should be practical as per the decisions taken by Railway User's Consultative Committees of Divisional Level and Zonal level.
Railway has to launch intensive mechanized cleaning of coaches in the coaching depots, though professional agencies is the only solution for the very dilapidated and ugly condition of the lakhs of coaches of Indian Railway. Our Prime Minister is always talking about Swachh Bharat, if anyone sees the interiors of Indian Railway Coaches, the entire nation will be blamed. For this, railway should use high pressure jet cleaners, floor scrubbers, vacuum suction cleaners, etc. The Government has to introduce Automatic Fire and Smoke Detection System in all premier trains like Rajdhani, Sampark Kranti, Satabdi and other Super Fast Trains to avoid fire in running trains. Government needs to implement the proposed catering policy in all trains to avail neat and clean food items in a hygienic ambience in all long running trains to raise the overall impact of Indian Railways, which generates thousands of employment to Indian youths. To avoid the huge crowd of passengers, Government has to implement MRTS projects in almost all the metropolitan cities.
I am very afraid of the frequent train accidents, whether it is light or heavy. It is reported that 43% of train accidents are due to the failure of railway staff. The unmanned railway crossings are one of the major reasons for train accidents. It is pertinent to say that the construction of road over bridges or road under bridges is the only solution to avoid the railway accidents due to unmanned level crossings.
The Government should give more attention to implement Train Protection and Warning System to alert the train drivers about the dual signal passing. The Train Collision Avoidance System installed in all the major lines will be more helpful to avoid the accidents and collisions.
श्री शरद त्रिपाठी (संत कबीर नगर): अधिष्ठाता महोदय, मैं आपका आभारी हूं कि आपने मुझे बोलने का अवसर दिया है।
महोदय, आज भारत की संस्कृति के मेल का आधार भारतीय रेल ही है। लेकिन खेद के साथ कहना पड़ रहा है कि इस रेल के साथ अब तक केवल ओट का खेल होता रहा है। लेकिन हमारी वर्तमान सरकार, जिसके मुखिया श्री नरेन्द्र भाई मोदी जी हैं, उनके नेतृत्व में हमारे माननीय मंत्री, श्री सुरेश प्रभु जी, माननीय मंत्री, श्री मनोज सिन्हा जी ने विपरीत परिस्थितियों में इस रेल को विश्वस्तरीय रेल बनाने के प्रयास शुरू किये। जबकि परिस्थितियां ऐसी हैं कि आजादी के बाद यात्रियों की संख्या बीस गुना बढ़ी, माल भाड़ा नौ गुना बढ़ा। लेकिन रेलवे का नेटवर्क मात्र सवा दो गुना बढ़ा। इसमें कितनी असमानता है। ऐसी परिस्थिति में केवल आंकड़ों के आधार पर हमारे रेल मंत्रियों ने कार्य नहीं किया, बल्कि उन्होंने वास्तविक रुप से कार्य करके दिखलाने का भरपूर प्रयास किया। जिसके आधार पर हम गर्व के साथ कह सकते हैं कि यदि पिछले साल के सबसे ज्यादा आमान परिवर्तन, दोहरीकरण, नई रेल लाइन का विस्तार तथा तिहरीकरण को जोड़ दिया जाए तो आजादी के बाद इतने कम समय में 2500 किलोमीटर नई लाइन बनाकर हमारी वर्तमान सरकार के मंत्री महोदय ने भारतीय रेल के बजट के अवसर पर एक इतिहास बनाने का काम किया है। 2016-17 का बजट हमारे माननीय रेल मंत्री महोदय लेकर आए हैं और इतना ही नहीं 1500 किलोमीटर विद्युतीकरण का नेटवर्क जो हमारी वर्तमान सरकार ने स्थापित किया है, यह भी अब तक का एक बहुत ही अभूतपूर्व कार्य इतने कम समय में किया गया है। आज पहली बार हमें यह गर्व होता है कि हम विश्व के विकसित देशों के समकक्ष आ गये हैं। नई दिल्ली से आगरा तक की ट्रेन 160 किलोमीटर प्रति घंटा की स्पीड से माननीय रेल मंत्री जी ने चलाने का जो कार्य किया, ऐसी व्यवस्था अब तक सिर्फ चार देशों में थी कि जहां इतनी हाई स्पीड से ट्रेने चल रही थीं, आज हमने पांचवे देश के रूप में भारतीय रेल को एक नया आयाम देने का कार्य करके दिखाने का काम किया है और यह सिर्फ कागजों में नहीं है।
महोदय, बात हो रही थी कि बजट कहां से आयेगा। निश्चित ही हमारी रेल की परिस्थितियां विपरीत हैं। 942 ऐसे रेलवे खंड हैं, जिनका संचालन सौ प्रतिशत क्षमता से ज्यादा हो रहा है। जैसे कि अगर वहां 150 की डिमांड है तो 200 चल रही है और जहां 200 की डिमांड है, वहां 250 चल रही है। फिर भी ऐसी परिस्थितियों में हमारे माननीय मंत्रीगणों ने इसके आधुनिकीकरण पर सबसे अधिक खर्च किया है। जो भी परियोजनाएं लम्बित थीं, बिना किसी भेदभाव के उन्होंने खर्चा किया है। अभी हमारे विपक्ष के माननीय सांसद मिले और उन्होंने कहा कि वह पूर्वोत्तर राज्य से आते हैं। उन्होंने बहुत ईमानदारी से कहा कि हम लोगों को लग रहा है कि आज भारत का रेल मंत्री पूर्वोत्तर राज्य का रेल मंत्री है, अगर वोट की राजनीति हमारी सरकार के मंत्री महोदय द्वारा की जाती तो अब तक इस बजट में सर्वाधिक पैसा पूर्वोत्तर राज्यों के विकास के लिये दिया गया है, जैसे कि हमारी सरकार का यह प्रमुख कर्तव्य है। इसके अलावा हमारी वर्तमान सरकार के मुखिया की एक अवधारणा है कि हम पूरे देश को एक समान आधार पर देखते हैं, पूरे देश की सारी समस्याओं को समान आधार पर देखते हैं और उसके लिए हमने कार्य करके दिखाने का भी प्रयास किया कि पूर्वोत्तर राज्यो में जो इतना बड़ा बजट हमारी सरकार ने देने का काम किया। इतना ही नहीं औसत निवेश अब तक यह अपने आपमें एक वास्तविक रिकार्ड है और यह केवल कागजों में नहीं है। अब तक प्रति वर्ष हमारी सरकार आने के पहले जो अधिकतम निवेश था, वह चालीस हजार करोड़ रुपये प्रतिवर्ष था। पिछले वर्ष हमारी सरकार के आने के बाद यह एक लाख करोड़ रुपये प्रति वर्ष हुआ और इतना ही नहीं, वर्तमान समय में 1 लाख 21 हजार करोड़ रुपये का निवेश हमारी वर्तमान सरकार ने रेलवे में करके अपने आपमें एक कीर्तिमान स्थापित करने का काम किया है।
महोदय, पिछले साल जो अब तक हमारे यहां रेल का जो नॉन-टिकटिंग रेवेन्यू आता था, इसमें विश्व में औसत 10 से 15 प्रतिशत तक की बढ़ेतरी है। औसत जो दस प्रतिशत नॉन-टिकटिंग, पार्सल इत्यादि से हम रेवेन्यू कलैक्ट करते हैं, इसके आधार पर जो विश्व की सफल रेल हैं, उसमें उनका दस प्रतिशत योगदान है। लेकिन हमारी सरकार ने पांच प्रतिशत का लक्ष्य पूरा कर लिया है और आने वाले समय में दस प्रतिशत से ऊपर का लक्ष्य निर्धारित करके हमारी सरकार जैसा कार्य कर रही है, मैं समझता हूं कि हम विश्व से सफलतम रेलवे का कीर्तिमान स्थापित करने का काम कर रहे हैं।
माननीय सभापति:आप समाप्त कीजिए, अगले मैम्बर को बोलना है।
श्री शरद त्रिपाठी: बस एक मिनट और लूंगा, महोदय, आपने अब लाल झंडी दिखा दी है, अभी तो ट्रेन चली है। मुझे एक मिनट और दे दीजिए। मैं जिस संसदीय क्षेत्र संत कबीर नगर से आता हूं, उसे आजादी के बाद पहली बार हमारे माननीय रेल मंत्री जी ने जो तोहफा दिया है, खलीलाबाद स्टेशन से चलकर बांसी, डुमरियागंज होते हुए उतरौला,श्रावस्ती, बहराइच तक जो विशेष सौगात रेल मंत्री जी ने दी है, मैं अपने संसदीय क्षेत्र की तरफ से इनका हार्दिक स्वागत करता हूं और बधाई देता हूं। जो सहजनवा से दोहरीघाट के लिए इन्होंने रेल दी है, उसके लिए भी मैं बधाई देता हूँ और मैं इनसे आग्रह करूंगा कि अकबरपुर से गोविंद साहब होते हुए, राम नगर होते हुए और दोहरीघाट में एक नई रेलवे लाइन अगर हमें दे देंगे तो मैं अपने पूरे संसदीय क्षेत्र और उधर के चार-पांच माननीय सांसदों की तरफ से विशेष रूप से इनको बधाई दूंगा।
संतकबीर नगर के माध्यम से मेरा संसदीय क्षेत्र जाना जाता है। वहां से कबीर साहब के नाम पर एक रेलगाड़ी चलवा दें तो बहुत अच्छा होगा ...(व्यवधान)
माननीय सभापति : अब आप अपनी बात समाप्त करें।
*साध्वी सावित्री बाई फूले (बहराइच)ः आदरणीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में हमारी सरकार के माननीय रेल मंत्री सुरेश प्रभु जी ने एक प्रगतिशील, दूरगामी और भविष्योंमुखी बजट प्रस्तुत किया है, जिसके लिए मैं उन्हें बधाई देते हुए बजट का समर्थन करती हॅं।
मेरा संसदीय क्षेत्र बहराइच, उत्तर प्रदेश में नेपाल का सीमावर्ती जिला है जहां से बड़ी संख्या में लोग रोज़गार, व्यापार और शिक्षा के लिए देश के कोने-कोने में जाते हैं। आज़ादी के 67 साल बाद भी यह क्षेत्र बड़ी लाइन द्वारा देश एवं प्रदेश की राजधानी से नहीं जुड़ सका है और क्षेत्र की जनता यात्रा के लिए पूरी तरह से सड़क मार्ग पर निर्भर है।
7 जून 2002 को अटल जी की सरकार में तत्कालीन रेल मंत्री श्री नीतीश कुमार जी ने पूर्वोत्तर रेलवे के गोंडा जंक्शन को बहराइच और नेपाल से जोड़ने वाली छोटी लाइन को बड़ी लाइन करने के कार्य का शिलान्यास किया था, जो योजना कांग्रेस नीत यू.पी.ए. सरकार के उदासीन रवैये के कारण ठन्डे बस्ते में पड़ी हुई थी। विगत 22 नवंबर को गोंडा जंक्शन से बलरामपुर बढ़नी होते हुए गोरखपुर जाने वाली बड़ी लाइन को माननीय मंत्री जी ने जनता के लिए समर्पित किया था और गोंडा बहराइच लाइन पर कार्य शीघ्र शुरू करने की घोषणा भी की थी। इस बजट में आपने गोंडा जंक्शन को बहराइच होते हुए नेपाल की सीमा पर रूपेडिहया से जोड़ने वाली छोटी लाइन के आमान-परिवर्तन के लिए आवश्यक धनराशि आवंटित की है। जिससे रेल सुविधा से वंचित सभी नागरिक लाभान्वित होंगे। परंतु खेद के साथ कहना पड़ रहा है कि विभागीय अकर्मण्यता एवं अज्ञात प्रशासनिक कारणों से आज 6 महीने बाद भी इस प्रखंड पर कोई कार्य प्रारंभ नहीं हुआ है जिससे क्षेत्रीय जनता में संशय की स्थिति बनी हुई है। मेरा अनुरोध है कि वर्षों से लंबित इस खंड पर कार्य जल्द ही पूरा करवाकर क्षेत्रवासियों को विकास के प्रति हमारी प्रतिबद्धता को लेकर भरोसा दिलाया जा सके। गोंडा से बहराइच नानपारा जंक्शन होते हुए मैलानी जंक्शन और नेपालगंज रोड जाने वाली इस लाइन को शीघ्र बड़ी लाइन में बदला जाए जिससे नेपाल के सीमावर्ती एवं अविकसित तराई क्षेत्र को देश के अन्य शहरों से जोड़ा जा सके। साथ ही, नेपाल देश के नेपालगंज शहर को जोड़ने वाली अंतर्राष्ट्रीय महत्व की रेल लाइन से व्यापार एवं पारस्परिक सम्बन्ध को और बढ़ावा दिया जाये।
मैं माननीय रेल मंत्री जी से बहराइच और जरवल रोड स्टेशन को रेल लाइन से जोड़कर सीधे प्रदेश की राजधानी लखनऊ से जोड़ने की योजना हेतु तत्काल घोषणा करने की भी मांग करती हॅं। साथ ही, जरवल रोड स्टेशन का नामकरण "जरवल रोड-बहराइच" रखकर सभी मेल/एक्सप्रेस और सुपरफास्ट ट्रेनों का ठहराव दिया जाए जिससे बहराइच, भिनगा, नेपाल और अंतर्राष्ट्रीय पर्यटन की दृष्टि से महत्वपूर्ण बौद्ध तीर्थ श्रावस्ती और कर्तानियाघाट वाइल्ड लाइफ सेंक्चुरी के लिए स्थानीय नागरिक और पर्यटक सीधे सड़क मार्ग से आगे की यात्रा कर सकेंगे।
गोंडा-मैलानी प्रखंड पर अधिकांश रेलवे स्टेशन जंगली क्षेत्र में पड़ते हैं। मेरा अनुरोध है कि जंगल के बीच में स्थित ककरहा स्टेशन को हटाकर, जहां यात्री नहीं पहॅंच पाते हैं, बलछा चौराहा पर स्टेशन की स्थापना की जाए एवं गाड़ी का ठहराव दिया जाए। इस प्रखण्ड पर पिछली सरकार के कार्यकाल में गायघाट हाल्ट का उद्घाटन भी किया गया था किंतु आज तक वहां ट्रेन नहीं रूक रही है। आपसे अनुरोध है कि इस हेतु आवश्यक निर्देश जारी करें।
बहराइच, श्रावस्ती, बलरामपुर, सिद्धार्थनगर जनपदों से रोज़ाना हज़ारों यात्री रेल संपर्क के अभाव में वर्तमान में गोंडा स्टेशन से ट्रेन पकड़ते हैं। परंतु कई महत्वपूर्ण ट्रेनों के ठहराव न होने के कारण बाकी ट्रेनों में भारी भीड़ रहती है क्योंकि अधिकांशतः सभी गाड़ियां बिहार और पूर्वोत्तर राज्यों से पहले ही भरकर चलती हैं और लम्बी दूरी तय करके यहां से गुजरती है और उनमें इस क्षेत्र के यात्रियों के लिए मांग के अनुरूप आरक्षित सीटों की व्यवस्था नहीं है। मेरी आपसे मांग है कि बलरामपुर जनपद स्थित लाखों लोगों की आस्था का प्रतीक देवीपाटन शव्तिपीठ के नाम पर बढ़नी-तुलसीपुर-बलरामपुर-गोंडा मार्ग पर दिल्ली के लिए "देवीपाटन एक्सप्रेस" नाम से एक दैनिक ट्रेन चलाई जाए, जिससे देवीपाटन/बस्ती मंडल के तराई क्षेत्रवासी रेल सुविधा का लाभ उठा सकें।
भारत रत्न श्रद्धेय अटल बिहारी वाजपेयी जी के सम्मान में उनकी जन्मस्थली ग्वालियर से उनके पहले संसदीय क्षेत्र बलरामपुर (तत्कालीन गोंडा जनपद) तक एक नयी रेलगाड़ी ""सुशासन एक्सप्रेस"" चलाई है। वर्तमान में इस गाड़ी का संचालन सप्ताह में केवल एक दिन ही हो रहा है। क्षेत्रवासी चाहते हैं कि इस ट्रेन के और फेरे (विशेषकर सप्ताहांत में) बढ़ाये जायें तथा इसकी वापसी के समय को सुबह 9.30 बजे के बजाय शाम में निर्धारित किया जाए जिससे गोंडा/देवीपाटन मंडल के 5-6 जिलों के यात्रियों को इसके संचालन का पूरा लाभ मिल सके।
जैसा कि मैंने पहले भी कहा है कि बहराइच, श्रावस्ती, बलरामपुर, सिद्धार्थनगर जनपदों से रोज़ाना हज़ारों यात्री रेल संपर्क के अभाव में वर्तमान में गोंडा स्टेशन से ट्रेन पकड़ते हैं। परंतु कई महत्वपूर्ण ट्रेनों के ठहराव न होने के कारण बाकी ट्रेनों में भरी भीड़ रहती हैं। इस बारे में हमारा निवेदन है कि बिहार संपर्क क्रांति, सप्तक्रांति एक्सप्रेस, अमृतसर-सहरसा गरीब रथ एक्सप्रेस, उदयपुर-न्यू जलपाईगुड़ी एक्सप्रेस, नयी दिल्ली-नहरलागुन ए.सी. एक्सप्रेस आदि समस्त सुपरफास्ट/एक्सप्रेस ट्रेनों का गोंडा स्टेशन पर ठहराव दिया जाए, जिससे यात्रियों को ट्रेनों के और अधिक विकल्प और सुविधा मिल सकें।
पूर्वांचल के मुख्य वाणिज्यिक एवं व्यावसायिक केंद्र गोरखपुर और पूर्वांचल के निवासियों की जनभावना का ख्याल करते हुए आपसे विशेष अनुरोध है कि दिल्ली से गोरखपुर के लिए राजधानी एक्सप्रेस ट्रेन चलायी जाये। वर्तमान में रोज़ाना नयी दिल्ली से लखनऊ तक ए.सी. एक्सप्रेस का विस्तार गोंडा-बस्ती होते हुए गोरखपुर तक किया जाए और सप्ताह में 3 दिन नयी दिल्ली से बरसता लखनऊ-वाराणसी-बलिया-छपरा होते हुए डिब्रूगढ़ जाने वाली राजधानी एक्सप्रेस को सप्ताह के बाकी 4 दिन बरसता गोंडा-गोरखपुर-छपरा चलाया जाए।
मैं पुनः माननीय रेल मंत्री जी को बधाई देते हुए माननीय उनसे अनुरोध करती हॅं कि उपरोव्त बिंदुओं पर ध्यान दें और क्षेत्र की प्रस्तावित रेल योजनाओं के लिए धनराशि आवंटित करें एवं अधूरे कार्य को शीघ्र ही पूरा कराएं।
श्री अरविंद सावंत (मुम्बई दक्षिण) : माननीय सभापति महोदय, रेल अनुदान की मांगों पर आपने मुझे बोलने का अवसर दिया है, जिसके लिए मैं आपको धन्यवाद देता हूँ। शुरू में ही माननीय रेल मंत्री सुरेश प्रभु जी और हमारे मनोज सिन्हा साहब को बहुत-बहुत बधाई और धन्यवाद देता हूँ कि बहुत सालों के बाद बड़ा अच्छा बजट आया है। पिछली बार हम भी थोड़े नाराज़ थे। लेकिन मुंबई शहर में जो सुविधाएं दी गई हैं, खास कर एलिवेटिड ट्रेन की बात कही गई है, उसकी मैं बहुत दिल से सराहना करता हूँ। 75 लाख यात्री रोज़ाना उस रेल से सफर करते हैं, घुटन सी महसूस करते हैं, अगर वह एलिवेटिड ट्रेन का प्रोजेक्ट न होता तो आगे चलकर क्या होता यह भगवान ही जानता। रेल मंत्री जी का नाम प्रभु है, प्रभु ने जाना और वह काम किया, उसके लिए उनको खास तौर पर धन्यवाद देता हूँ। लेकिन एक बात और कहता हूँ कि आपने जो एलिवेटिड ट्रेन दी है, वह चर्चगेट से विरार तक दी है और दूसरी मुंबई छत्रपति शिवाजी टर्मिनस से पनवेल दी है। लेकिन एक और भी महत्वपूर्ण चीज़ आपसे रह गई है। वह है मुंबई छत्रपति शिवाजी टर्मिनस से कल्याण तक, वहां भी सबसे ज्यादा यात्री रहते हैं। वहां ही ज्यादा दुर्घटनाएं होती है। दुर्भाग्यवश वह कैसे रह गया, मुझे नहीं मालूम, लेकिन वह बात रह गई है। क्योंकि छत्रपति शिवाजी टर्मिनस - पनवेल रूट से भी ज्यादा अगर जरूरत है तो छत्रपति शिवाजी से लेकर कल्याण तक की जरूरत है।
सभापति महोदय, मैं एक और मांग करता हूँ, सिन्हा आप मुंबई में आए, हमारे चेयरमैन साहब भी आए, आप जानते हैं कि दुर्घटना होती है, पानी गिरता है, बारिश गिरती है तो गाड़ियां रूक जाती हैं। अब जब लोकल ट्रेन रूक गई तो दो स्टेशनों के बीच में रूक गई तो पानी भर जाता है। पानी भर गया दो-दो घंटा गाड़ियां वहीं रूक जाती हैं। उसमें सबसे ज्यादा तकलीफ हमारी महिला यात्रियों को होती है। आपसे मेरी हाथ जोड़ कर प्रार्थना है। हमने कभी यह सोचा नहीं है। हमारा जो अनुसंधान और अनुसंकल्प है, डिजाइनिंग वाला जो वर्कशॉप है, उन्हें कहें कि महिलाओं के कंपार्टमेंट के लिए, लोकल ही क्यों न हों अगर गर्भवती महिला जा रही है, उम्रदराज महिला यात्रा कर रही है, गाड़ी दो पटरियों पर खड़ी है, नीचे बारिश का पानी भरा है, जेंट्स तो कूद कर जा सकते हैं, हमारी महिलाएं नहीं कूद सकती हैं। उसके लिएटॉयलेट की सुविधा की जाए। डिजाइनिंग की ओर ज्यादा जान बूझ कर ध्यान आकर्षित कर रहा हूँ। मैं दो-तीन चीजें थोड़ी हट कर बोलता हूँ। जब हम ट्रेन में सफर करते हैं तो दोनों तरफ देखते हैं कि बहुत ज्यादा कचरा रहता है। कोई भी स्टेशन नज़दीक आए तो और भी कचरा रहता है। महानगर निगम कहेगा कि वह हमारा कचरा नहीं है तो उठाएगा कौन? हम स्वच्छता अभियान चला रहे हैं, सिर्फ टॉयलेट के लिए नहीं है, स्वच्छता सब जगह हो। मुझे लगता है कि रेल में सक्शन पंप वाली गाड़ी चले तो वह कचरा खींच सकती है। मैंने यह भी देखा है कि कंपार्टमेंट में काम करने वाले जो हाऊस कीपिंग के बच्चे होते हैं, वे भी सारा कचरा जमा करते हैं, इधर-उधर देखते हैं और रात को दरवाजा खोल कर बाहर फेंक देते हैं। हमारी कोंकण रेलव में जाओ तो सारा प्लास्टिक दिखेगा। बिस्किट, चॉकलेट, बॉटल, पानी की बॉटल, आदि सब गंदा गिरा हुआ अनाज, प्लास्टिक की थाली, थर्माकोल की थाली आदि सब पड़ी रहती है। इस पर भी मैं ज़रा आपका ध्यान आकर्षित कर रहा हूँ क्योंकि यह चीज़ अलग है। बाकी सब गाड़ी की मांग करते हैं, लेकिन मैं स्वच्छता के बारे में मांग कर रहा हूँ।
दूसरी एक मांग मैं यह कर रहा हूँ कि हमारी मुंबई में कई सारे पुराने स्टेशंस हैं, जिनका नाम अंग्रेजों ने रखा था। अब सैंडस्ट रोड़ स्टेशन है, उसका नाम है डोंगरी, वहां पुलिस स्टेशन डोंगरी है, एरिया डोंगरी है, लेकिन स्टेशन का नाम सैंडडस्ट ग्रीन है। कॉटन ग्रीन काला चौकी एरिया है। पुलिस स्टेशन का नाम काला चौकी, एरिया का नाम काला चौकी, पोस्टल का नाम काला चौकी, लेकिन टेशन का नाम कॉटन ग्रीन है। रेरोड़ को घोड़पदी एरिया कहा जाता है। डॉकयार्ड माज़गांव कहा जाता है। करीरोड़, लाल बाग का राजा आपने तो सुना है, वह तो लालबाग का राजा है। करीरोड़ का नाम लाल बाग होना चाहिए। अंग्रेजों के रखे नाम हम कब तक चलाते रहेंगे?चरनी रोड़ है, गिरगाँव जैसा है, ग्रांट रोड़ पर गामदेवी है, बॉम्बे सेन्ट्रल को हम जगन्नाथ शंकर सेठ जी, जिन्होंने यह रेल, देश की पहली रेल मुम्बई में शुरू हुई ठाणे तक, छत्रपति शिवाजी टर्मिनल ठाणे तक, उसे शुरू करने वाले जगन्नाथ शंकर सेठ जी हैं। उनका नाम आज भी कहीं नहीं है। वन्दनीय हिन्दू हृदय सम्राट शिव सेना प्रमुख बाला साहब ठाकरे जी ने उस वक्त माँग की थी कि विक्टोरिया टर्मिनस को दाना शंकर सेठ का नाम दिया जाए, लेकिन राजनीति खेली गई, छत्रपति शिवाजी का नाम है तो कोई विरोध करने वाला नहीं था। अभी हम कहते हैं कि इस माँग पर भी ध्यान देने की आवश्यकता है। हमने एक और चीज स्पेलिंग की देखी, जैसे मैं शिवड़ी में रहता हूँ, तो मराठी में शिवड़ी, हिन्दी में सिवरी, इंग्लिश में SEWRI अब यह स्पेलिंग कहाँ है, हमारे शिवड़ी नाम की स्पेलिंग कहाँ जा रही है। मैं यह भी चाहता हूँ कि इसके ऊपर ध्यान दिया जाए। मनोज सिन्हा, मनोज ही रहेगा, वह हिन्दी में हो, अंग्रेजी में हो, वह किसी भी भाषा में हो, मनोज ही रहने वाला है, उसका कुछ और कर देंगे तो बड़ी गड़बड़ हो जाएगी, तो मनोज ही रहना चाहिए। उसी तरह से मेरी यह भी माँग है।
नांदेड़ के बारे में सालों से माँग है, आप जानते हो, नांदेड़ साउथ सेन्ट्रल में जाता है, उसका प्रशासकीय सारा अधिकार उधर है। सिन्हा साहब इसके ऊपर ज्यादा ध्यान दें। पिछले 20-25 साल से वहाँ के लोग झगड़ा कर रहे हैं। नांदेड़ जो स्टेशन है, वह सेन्ट्रल रेलवे के प्रशासकीय अधिकारियों के अन्तर्गत आएगा तो और अच्छा काम होगा। परेल में अपनी एक वर्कशॉप है, अपने रेल के कर्मचारी दुर्घटना से मारे जा रहे हैं, परेल से लेकर दूसरी तरफ जो एलपिस्टन है, वहाँ तक एंड टू एंड ब्रिज की आवश्यकता है। उसी तरह से लालबाग में, खर रोड़ से लेकर लालबाग तक, शिवड़ी में भी उसी तरह एंड टू एंड ब्रिज की आवश्यकता है। रेल के कर्मचारी जिन क्वार्ट्स में रहते हैं, उनके क्वार्ट्स बहुत गन्दे हैं। मैं जानता हूँ कि रेल की आमदनी कम हो रही है, लेकिन रेलवे कर्मचारियों के क्वार्ट्स के बारे में ध्यान दीजिए।
आपका महत्वपूर्ण मुद्दा, जिसके बारे में चेयरमैन साहब भी लड़ते रहते हैं, नौकर भर्ती, अब जब हमारे पास रेल में भर्ती है तो वहाँ के जो लोग हैं, उनको उसमें भर्ती नहीं किया जाता है। ग्रुप-सी और ग्रुप-डी में भी वहाँ के लोकल लोग भर्ती नहीं हो सकते हैं। वही झगड़ा है। मैं आपसे प्रार्थना करता हूँ की रीजनल इम्प्लॉयमेंट एक्सचेंज के थ्रू, उनके माध्यम से कम से कम ग्रुप-सी और ग्रुप-डी में आप भर्ती करें। आखिर में मैं आपको बधाई देते हुए, खास बधाई इसलिए देता हूँ, क्योंकि बिना किराया बढ़ाए हुए आपने यह सारी डेवलपमेंट की बात की, मैं उसके लिए आपको बधाई देता हूँ। धन्यवाद, जय हिन्द-जय भारत।
*SHRI ARKA KESHARI DEO (KALAHANDI): Railways is one of biggest undertakings criss crossing the country from North to South, East to West. I am very thankful to Hon. Railway Minister for budgetary allocation for developing railways in my Parliamentary constituency – Kalahandi, in the State of Odisha. Kalahandi is located in the Western Odisha region which is comparatively less developed than the coastal districts of the State.
I express my concern on the railway security as some incidents have already occurred recently. So technology may be upgraded in order to ensure the security of the railway passengers. Timely running of trains reduces losses of railways as delay enhances the expenditure of the railways. Track modernization, conversion of unmanned railway stations into manned railway stations, dedicated freight corridors, improvement in railway stations, and amenities of passengers must be addressed on priority.
I request Hon. Railway Minister to take up following railway projects of my parliamentary constituency during the current financial year 2016-17:-
(a) A new railway line from Kanta-banji to Khariar to be taken up during the financial year 2016-17, as the survey has already been done.
(b) Opening up wagon repair factory at Narla. (c) Extension of railway line from Junagarh to Ampani. (d) Running of good trains upto Junagarh to collect farm products like paddy, directly from the farmers. With this, I conclude my speech.
श्री जय प्रकाश नारायण यादव (बाँका) : महोदय, रेलवे की वर्ष 2016-17 की अनुदान माँग पर जो बहस हो रही है, मैं कटौती प्रस्ताव पर बोलने के लिए खड़ा हुआ हूँ। भारतीय रेल का पहिया देश की जीवन रेखा है, यह सर्वविदित है, इसे दोहराने की बात नहीं है और सड़क से, जलमार्ग से, हवाई मार्ग से हम यात्रियों की उतनी सेवा नहीं कर सकते हैं, जितना हम रेल मार्ग से करते हैं। माल भी ढोते हैं और इन्सान की आवाजाही भी रेल मार्ग से होती है। इसलिए इसको बेहतर बनाना, इसकी सुरक्षा का, इसकी संरक्षा का, इसका नेटवर्क बेहतर हो, इसमें लाखों कर्मचारी कार्य करते हैं, फिर भी रेलवे उदासीन क्यों है, इसमें यह उदासीनता क्यों पनपी है? इधर ज्यादा पनपी है, यात्रियों की संख्या में कमी हुई है, कर्मचारी उदास हैं, दुर्घटनाएं बढ़ी हैं, खान-पान का स्तर भी घटा है। यह ठीक बात है। यही रेल थी, कभी आदरणीय लालू जी, तत्कालीन रेल मंत्री थे, उसको गोल्डन पीरियड़ कहा जाता है। उस समय रेलवे का कमाऊ घोड़ा कहा जाता था और दुधारू गाय कहा जाता था। रेल का किराया घटाया गया और रेलवे का मुनाफा बढ़ाया गया, कोई एक बेटा इस काम को किया तो उसका नाम लालू यादव है, दूसरा नहीं है। फिर किया तो श्री नीतीश कुमार जी किए। मनोज सिन्हा जी तो हमारे बगल के हैं और हमारे घर के भी हैं, इसलिए वे कुबूल भी करते हैं, लेकिन कुबूल नहीं करते, उसके कई कारण हैं। अच्छी बात है। इसके साथ-साथ जो मुनाफा है, उसको बढ़ाया, हमने कहा। आप मेक इन इन्डिया की बात करते हैं, बहुत अच्छा है, नारा अच्छा लगता है, लेकिन जो इन्डियन रेलवे है और जो हमारा जहाज है, एयर इन्डिया है, बीएसएनएल है, तीनों पीछे जा रहे हैं।
यह मेक इन इंडिया नहीं, बैक इन इंडिया में जा रहा है। आप मानें या न मानें लेकिन यह स्थिति पैदा हो रही है। जनसंख्या बढ़ती जा रही है, रेलगाड़ियों को बढ़ाना है, लेकिन रेल का दीवालियापन देखिए कि इसका अस्तित्व खराब होता जा रहा है। 2016-17 में 32 हजार करोड़ का घाटा आ रहा है। बुलेट ट्रेन जो आपका सफेद हाथी साबित होगा, उसके लिए मैं कहना चाहूँगा कि भिखारी और फरारी, यह नहीं होता है। अभी आप साधारण ट्रेन चलाइए, शताब्दी ट्रेन चलाइए, राजधानी चलाइए। जो माननीय सदस्य कहते हैं, उनकी बात मानकर डीएमयू और छोटी छोटी ट्रेन चलाइए। फिर जब साधन आएँगे तो बुलेट ट्रेन चलाइएगा, मेक इन इंडिया की चर्चा कीजिएगा। इसके लिए 70 हजार करोड़ ऋण जो आपको लेना पड़ रहा है, यह अपने पैर में कुल्हाड़ी मारने के बराबर है।
सभापति जी, हम कुछ अपने क्षेत्र की बात करना चाहेंगे। एक तो भागलपुर में डीआरएम कार्यालय की बात है। उसी समय जमीन उपलब्ध नहीं हुई। जिस समय आदरणीय लालू प्रसाद यादव जी तत्कालीन रेल मंत्री थे, उन्होंने इसकी घोषणा की और ज़मीन दिलवाई। वहाँ सर्वे हुआ और जगह दी गई। इसलिए हम आपसे आग्रह करते हैं कि उस इलाके से भी आप आते हैं, इसलिए ख्याल रखेंगे। इसके साथ साथ भागलपुर होकर जो राजधानी चली या कोई अच्छी ट्रेन चले जसीडीह में, आप राजधानी को एक दिन और बढ़वाइए। बांका स्टेशन से नई इंटरसिटी चलाने के लिए हम माननीय रेल राज्य मंत्री जी से आग्रह करेंगे। वर्तमान जो इंटरसिटी है, उसमें एसी टू टियर लगाया जाए। बांका में वाशिंग पिट बनाई जाए, विक्रमशिला को बांका तक बढ़ाया जाए। सुल्तानगंज, बांका, मुंगेर, जमुई, जमालपुर, भागलपुर और क्यूल स्टेशन को बेहतर बनाया जाए। बिहार की लंबित परियोजनाओं पर राशि दी जाए। इसके साथ-साथ जो अभी मुंगेर का रेल पुल हुआ, इसके लिए आपने यात्रियों पर टैक्स लगा दिया है। आपने रेल पुल बनाया, यात्री चल रहे हैं, उस पर आपने टैक्स लगा दिया है। यात्रियों में हाहाकार मचा हुआ है। रोज़ परेशानी हो रही है। यही दीघा में किया गया है। इसीलिए हम माननीय मंत्री जी से आग्रह करेंगे कि इस टैक्स को आप लौटाइए। जहाँ तक इसके साथ साथ कई अन्य सवालों की बात है...(व्यवधान) सभापति जी, दो तीन मिनट समय और दीजिए।
माननीय सभापति : समय कम है, एक मिनट में अपनी बात खत्म कीजिए।
श्री जय प्रकाश नारायण यादव : सभापति जी, बरियारपुर-इवेली-खड़गपुर-लक्ष्मीपुर-बरहट-मननपुर रेलखंड का निर्माण कार्य तत्काल प्रारंभ किया जाए। बांका-लक्ष्मीपुर-खैरा से होकर बरहट-नवादा के बीच नई रेल लाइऩ चलाई जाए। बांका, सुल्तानगंज और क्यूल स्टेशन के विषय में हम चर्चा कर चुके हैं कि इनको अच्छा स्टेशन बनाया जाए। भागलपुर और जमालपुर रेलवे स्टेशन पर रैम्प और एलीवेटर का निर्माण किया जाए। पूर्व रेलवे के अंतर्गत आई.आर.आर.ई. जमालपुर स्पेशल क्लास रेलवे अप्रेन्टिस एस.आर.ई. का शिक्षण और प्रशिक्षण जारी रखा जाए, इसे बंद नहीं किया जाए। इसके साथ साथ जो कई ऐसी रेलवे लाइन हैं, जिनको मंजूरी दी गई थी, उन रेलवे लाइन को तत्काल चालू करने के लिए बांका, लखीपुर, खैरा से होकर बढ़त, नवादा के बीच नई रेल लाइन को चालू किया जाए, उसमें राशि दी जाए। जमालपुर रेलवे अस्पताल का आधुनिकीकरण किया जाए।
इसके साथ साथ जमालपुर में रेलवे पहिया कारखाना और कंक्रीट प्लेटफार्म स्थापित करने का काम किया जाए। इसके साथ-साथ नई दिल्ली-हावड़ा राजधानी एक्सप्रैस को जसीडीह से दो दिन के लिए चलाया जाए। कुम्भ एक्सप्रैस को जमुई स्टेशन पर रोका जाए। सुल्तानगंज रेलवे स्टेशन पर नई ट्रेन दी जाए। बिहार में लंबित रेल परियोजनाओं का कार्य धनराशि देकर पूरा किया जाए। जमालपुर रेलखंड ऋषिकुंड हाल्ट का निर्माण किया जाए। यह कई ऐसे सवाल हैं जिनके साथ हमारी जो रेल परियोजनाएँ हैं जो उस समय आदरणीय लालू जी के समय में और माननीय नीतीश जी के समय में योजनाएँ स्वीकृत हुई थीं, मैं माननीय रेल राज्य मंत्री जी से आग्रह करूँगा कि इस रेल परियोजना में राशि देकर इसे पूरा कराया जाए और बांका में एक नई इंटरसिटी शुरू की जाए और एक और गाड़ी उस रास्ते पर शुरू की जाए। यही कहकर मैं अपनी बात समाप्त करता हूँ।
17.00 hours श्रीमती रंजीत रंजन (सुपौल) : सभापति जी, आपने मुझे रेलवे की डिमांड्स फॉर ग्रांट्स पर बोलने का मौका दिया है, इसके लिए मैं आपको धन्यवाद देती हूं।
महोदय, जब माननीय प्रधान मंत्री जी ने अपना पदभार ग्रहण किया था तो उन्होंने कहा था कि चार साल विकास को समर्पित रहेंगे और पांचवे साल वे राजनीति करेंगे। दूसरी तरफ, हमारे जो रेल मंत्री जी हैं, सुरेश प्रभु जी, मनोज जी, इनसे बहुत उम्मीद थी कि ये एक विजन वाला रेल बजट लेकर आएंगे। लोगों ने बहुत उम्मीद रखी थी। इस वक्त रेल में भारी संकट है। लगभग छः से आठ लाख करोड़ रुपए का फण्ड पुरानी लम्बित योजनाओं के लिए चाहिए। रेल मंत्री जी ने कहा भी कि वे किसी नयी योजना की घोषणा नहीं करेंगे, बल्कि पुरानी योजनाओं को क्रियान्वित करेंगे। लेकिन उनकी कथनी और करनी में हम लोगों को जो लगातार अन्तर दिख रहा है, वह बार-बार सामने आ ही जाता है।
17.01 hours (Shri Hukum Singh in the Chair) रेलवे द्वारा पहले यह कहा गया कि रेल बजट में नयी ट्रेनों की घोषणाएं नहीं होंगे, लेकिन तब भी रेल बजट में स्टेशनों का सौन्दर्यीकरण, कुली का सहायक के तौर पर सिर्फ नाम परिवर्तन कर देना, रेल कर्मचारियों के यूनीफॉर्म में बदलाव, ऑनलाइन शिकायत के लिए हेल्पलाइन नम्बर, रेल डिब्बों में ज्यादा चार्जिंग प्वायंट समेत एफ.एम. संगीत की सुविधा देने की घोषणा की गयी।
रेलवे की हालत सरकारी बैंकों से अधिक जर्जर है। इसका सही विवरण मेरे ख्याल से रेल बजट में नहीं आया है। इस वक्त मंत्री जी इसमें कठोर कदम उठाते और रेलवे की जो तस्वीर है, उसे बदलने में उनकी भूमिका अहम हो सकती थी। इसके बजाय रेल बजट में वर्ष 2020 तक वेटिंग खत्म करने, 95औ ट्रेनों के समय से चलने की जो खोखली घोषणाएं थीं, उसके अलावा हम लोगों को इसमें कुछ नहीं मिला।
महोदय, मैं एक-दो आंकड़े रखना चाहूंगी। किस तरह आपने आंकड़ो में हेर-फेर किया और किस तरह आप एक राजनीतिक बजट लेकर आए, उसे खड़गे साहब सामने लेकर आए। मैं दो-तीन बातें कहना चाहूंगी।
एक, मैं कहना चाहती हूं कि हमारे देश में जनसंख्या के मुकाबले रेलवे लाइनें कितनी कम हैं। दूसरा, ट्रैकों की सुरक्षा के बारे में मैं दो-चार प्वायंट्स कहना चाहूंगी। अमेरिका में 2,23,000 किलोमीटर रेलवे लाइन है। वहां पर रेल प्राइवेट कंपनी चलाती है। चीन में 1,21,000 किलोमीटर रेलवे लाइन है। वहां रेल भारत की तरह ही वहां की सरकार चलाती है। इस 1,21,000 किलोमीटर रेलवे लाइन में 65,000 किलोमीटर, यानी आधे से ज्यादा रेलवे लाइन पर ट्रेनें बिजली से चलती हैं। वहां प्रत्येक 11,000 लोगों पर एक किलोमीटर रेलवे लाइन है। रूस में 86,000 किलोमीटर रेलवे लाइन है। वहां भी रेल सरकारी है। उस 86,000 किलोमीटर में से 50,000 किलोमीटर की रेलवे लाइन पर ट्रेनें बिजली से चलती हैं। वहां पर 1659 लोगों पर एक किलोमीटर रेलवे लाइन है और हमारे यहां 65,808 किलोमीटर रेलवे लाइन है, जिसमें से मात्र 26,269 किलोमीटर रेलवे लाइन पर ट्रेनें बिजली से चलती हैं। हमारे यहां प्रत्येक 18,390 लोगों पर एक किलोमीटर रेलवे लाइन है।
दूसरी तरफ, प्रधान मंत्री जी बुलेट ट्रेन की बात करते हैं, जापान से कर्ज़ लेने की बात करते हैं। हमारा बजट 1.5 लाख करोड़ रुपए का है और 98,000 करोड़ का बजट केवल बुलेट ट्रेन में है। इसका परिणाम यह है कि हमारे यहां जो मिडिल क्लास है, उनको कंफर्म टिकट नहीं मिलती है। मज़दूरों की बात तो हम लोग छोड़ ही दें। मजदूर तो टिकट ही नहीं ले पाते हैं और उन्हें सीट भी नहीं मिलती है। वे शौचालयों में बैठ कर आते हैं। जिस स्वच्छता की बात हम और आप बैठ कर यहां पर करते हैं और बजट देने के बाद बहुत आश्वस्त हो जाया जाता है कि सब सफाई कर दी। अगर आज भी हम लोग पैसेंजर ट्रेनों को देखें, जिस पर लेबर क्लास चढ़ता है, वहां पर शौचालयों का प्रयोग एक तो इस कारण से नहीं होता है कि वहां पर लोग बैठे होते हैं। ज्यादातर महिलाएं अपने बच्चों को और खुद को, अगर उनकी बेटियां रेलवे में सफर कर रही होती हैं, अगर छः-सात घंटे का सफर है तो उन्हें यह कह दिया जाता है कि उन शौचालयों का यूज नहीं करना, नहीं तो कई बीमारियां और इंफेक्शन महिलाओं और बच्चों को लग जाती हैं। यह हमारा धरातल है।
हम खाने की क्वालिटी की बात करते हैं। माननीय रेल मंत्री जी ने ही शायद राज्य सभा में यह कहा था कि राजधानी एक्सप्रेस में जो कम्बल दिए जाते हैं, उनकी तीन महीने तक धुलाई नहीं होती है। क्या यह सच है? इसे लोक सभा को भी बताने की बहुत जरूरत है।
दूसरा है ट्रैकों की सुरक्षा। सुरक्षा भारतीय रेल की सबसे बड़ी चिंता का विषय है। जो ट्रैकों की सुरक्षा है, भारतीय रेल प्रत्येक साल औसतन 20 मेजर कॉलीजन, 350 डीरेलमेंट और लगभग 80 लेवल क्रॉसिंग दुर्घटना का सामना करती है।
हमारे बहुत सारे सदस्य बोल रहे थे कि हमने सारी दुर्घटनाएं बंद कर दीं, यह एक ऐतिहासिक बजट है। जो डेटा है, जो सर्वे है, इन दुर्घटनाओं का प्रमुख कारण है, पुराने हो चले रेल लाइन, कोच, पुराने पुल और पुराने सिग्नल सिस्टम, जिसकी कोई बात नहीं की गई। खन्ना रेलवे सेफ्टी कमेटी की रिपोर्ट के अनुसार लगभग 25 फीसदी रेल लाइन इतनी पुरानी हो चुकी है कि उन्हें तुरन्त बदलने की जरूरत है।
रिपोर्ट बताती है कि भारतीय रेल में 34,000 ओवर एज्ड वैगन हैं, 1,322 ओवर एज्ड कोच और 1,560 ऐसे स्टेशन हैं जहां के सिगनल ओवर एज्ड हो चले हैं लेकिन इन्हें बदलने के लिए रेलवे कामयाब नहीं हो पाया है। 262 से ज्यादा रेल पुल खराब की श्रेणी में रखे जा चुके हैं, लेकिन उन पर परिचालन अभी भी चल रहा है, तो आप एक्सीडेंट की घटनाएं कैसे रोकेंगे? 2 लाख रेल पुल में से 56 हजार पुल 80 साल से ज्यादा पुराने हैं तो आप रेलवे की घटनाएं कैसे रोकेंगे? ओवर क्राउड और सुरक्षा ये दो ऐसे मसले हैं, जो भारत के लिए गंभीर मुद्दे हैं।
माननीय सभापति : श्री अरूण कुमार।
श्रीमती रंजीत रंजन: महोदय, मैं दो-तीन लाइन और बोलूंगी। कुल 292 रेल दुर्घटनाओं में से 200 रेल दुर्घटनाओं का प्रमुख कारण क्या है, रेलवे स्टाफ की लापरवाही।
माननीय सभापति : आप लिखकर दे दीजिए।
श्रीमती रंजीत रंजन: क्या हाई स्पीड ट्रेन के लिए हमारा रेल विभाग पूरी तरह से तैयार है? ...(व्यवधान) एक तरफ इतने सारे रिकार्ड हैं, तो क्या हाई स्पीड ट्रेन के लिए हमारा स्टाफ, हमारा रेलवे तैयार है? रेल संचालन में सुरक्षा को लेकर लापरवाही और जो इतनी सारी गलतियां हो रही हैं, उसको कौन संभालेगा? मैं इतना ही कहना चाहूंगी कि रेल प्रोटेक्शन वार्निंग सिस्टम, रेल कॉलीजन एवाइडेंस सिस्टम जैसे अत्याधुनिक स्वचालित तकनीकों को अपने परिचालन व्यवस्था में जल्द से जल्द शामिल करने की जरूरत है, न कि चीप पॉपुलेरिटी की जरूरत है। मैं सिर्फ यही कहूंगी कि दुनिया में सबसे तेज रफ्तार ट्रेन चीन में चलती है, पर उनको वित्तीय नुकसान हो रहा है। जापान और स्पेन में भी तेज रफ्तार अधिकतम 350 किलोमीटर ही है। ...(व्यवधान)
माननीय सभापति :आप लिखकर दे दीजिए।
…( व्यवधान)
माननीय सभापति : यह तो मुझे भी पता है कि महिला हैं। हम भी जानते हैं।
…( व्यवधान)
श्रीमती रंजीत रंजन : ट्रेनों का लेट होना, इसका एक महत्वपूर्ण कारण चेनपुलिंग है, लेकिन उसकी ओर कोई ध्यान नहीं दिया जाता है। क्या उसमें कोई कड़ी सजा की व्यवस्था आप करने जा रहे हैं। मैं इसके साथ ही बोलना चाहूंगी कि 2 करोड़ 40 लाख लोग रोज रेल में सफर करते हैं, उनको बुलेट ट्रेन की जरूरत नहीं है, एक्स्ट्रा ट्रैक की जरूरत है, एक्स्ट्रा रेलवे लाइन की जरूरत है। साथ ही, बिहार को इस बार आपने एक भी प्रीमियम रेल या एसी कार नहीं दी। एक्सप्रेस रेल भी एक ही मिली और डीएमयू तथा पैसेंजर रेल भी एक-एक ही मिली। जो बिहार की आबादी और उनकी संख्या के हिसाब से बहुत कम है। उसके अनुसार ही जो मैंने इसमें कटौती में मिलाया है ...(व्यवधान) बनमनखी में बिहारीगंज तक आमान परिवर्तन की अति आवश्यकता है। इसके लिए निधि की बहुत जरूरत है। मधेपुरा, सिंहेश्वर, त्रिवेणीगंज होते हुए भीमनगर तक नई रेलवे लाइन बिछाने की आवश्यकता है। सरायखां-निर्मली से रेलवे लाइन का निर्माण कार्य शीघ्र पूरा किए जाने की आवश्यकता है। ...(व्यवधान) (इति) माननीय सभापति : अरूण जी,आप बोलिए।
…( व्यवधान)
डॉ. अरुण कुमार (जहानाबाद) : माननीय सभापति जी, आपने मुझे बोलने का मौका दिया, इसके लिए मैं आभार व्यक्त करता हूं। ...(व्यवधान) एक क्रांतिकारी बजट माननीय रेल मंत्री श्री सुरेश प्रभु और मनोज सिन्हा जी ने पेश किया, उससे लोगों में एक विश्वास पैदा हुआ है। विपक्ष के लोगों ने जो आंकड़ा पेश किया है, सचमुच उसी आइने में उन्हें देखने की जरूरत है। जब उसमें झांककर देखेंगे तो निश्चित तौर से रेलवे में एक बीमार रेल व्यवस्था को जन्म दिया है, उसके कारक कौन हैं, इन्हें साफ-साफ पता चलेगा।
माननीय सांसद जयप्रकाश जी बिहार के बारे में बोल रहे थे और पूर्व मंत्री जो दुनिया में एक मानक स्थापित किये हैं, उन पर मैं सिर्फ एक उदाहरण देना चाहूंगा कि माननीय पूर्व मंत्री श्री लालू प्रसाद यादव जी अपने क्षेत्र मधेपुरा में एक साइनबोर्ड लगा दिया, उनको बधाई देना चाहिए था कि माननीय नरेन्द्र मोदी जी की सरकार ने 40,000 करोड़ रुपये का इंवेस्टमेंट करके, उनके उस ठिकाने को एक नया विस्तार दिया।...(व्यवधान) खड़गे साहब को यह बात समझ में नहीं आयेगी,...(व्यवधान) लेकिन निश्चित तौर से जो चीजें लंबित पड़ी हुयी थीं, जो अव्यवस्था थी,...(व्यवधान) जिस रेलवे को बीमार बनाया, ...(व्यवधान) रेल की प्रगति की जो दर थी, निश्चित तौर पर दुनिया के पैमाने में हम पिछड़े हैं, उसका कारण भी ये लोग खूब समझते हैं। इसलिए निश्चित तौर से इस सरकार ने, एन.डी.ए. की सरकार ने एक क्रांतिकारी कदम उठाया है, लोगों में विश्वास पैदा हुआ है। जिन तरीकों से मॉडर्नाइज करने का प्रयास किया है और एक फाइनैंशियल कॉन्सट्रैंट रहने के बावजूद जो संकल्प लिये हैं और जिस गति से रेलवे में इलेक्ट्रिफिकैशन का प्रसार हो रहा है, जिस तरीके से आमान परिवर्तन हो रहा है, जिस तरीके से हम डेडीकेटेड फ्रेटकॉरिडोर को बनाने का संकल्प लिया है, निश्चित तौर से हमें एक नयी ऊंचाई पर ले जाने में रेलवे की बड़ी भूमिका है। रेलवे ने जो एक बड़ा काम करने का संकल्प लिया है, उसके लिए हम सरकार को बधाई देना चाहते हैं।
अभी जयप्रकाश जी बहुत लंबा डिमांड गिना रहे थे। निश्चित तौर से पूर्व रेल मंत्री जी ने बांका और भागलपुर पर ध्यान नहीं दिया। इसलिए मनोज सिन्हा जी को बार-बार उस लंबे चाटर्ड और डिमांड्स को पढ़ रहे हैं। पिछली बार भी उन्होंने पढ़ा। निश्चित तौर पर इस सरकार ने समेकित रूप से राष्ट्रीय आवश्यकता को ध्यान में रख कर बजट बनाया है। नॉर्थ-ईस्ट सुरक्षा की दृष्टि से भी बहुत महत्वपूर्ण था लेकिन वह नेगलिजेंस का शिकार हुआ था। निश्चित तौर से सरकार ने वोट की चिंता नहीं की, राष्ट्र की चिंता की और नॉर्थ-ईस्ट जैसे रिमोट इलाके में भी इस विस्तार को एक नयीं ऊंचाई देने का प्रयास किया गया है? इसलिए जो आज हमारे पास कॉस्ट्रैंट है, हमारा ऑपरेटिंग रेश्यो बहुत बढ़ा हुआ है। इसके लिए हमें आर्थिक संसाधनों पर भी विचार करना होगा। इसके लिए हमें भाड़े में भी बढ़ोत्तरी करने का संकल्प लेना चाहिए। चूंकि, आज आबादी बहुत बड़ी है, उसके लिए हम कैसे सुविधा मुहैया करे, प्रोफेशनल तरीके से, सिर्फ वोट की दृष्टि से और पॉपुलरिटी की दृष्टि से चीज को मानक बना कर नहीं चलना चाहिए। हमारी आबादी जिस रेश्यो में बढ़ी है, यह ट्रांसपोर्टेशन का सबसे बड़ा सैक्टर है। इस सैक्टर को मजबूती देने के लिए निश्चित तौर पर रेलवे ने एक नये संकल्प के साथ काम शुरू किया है और इसकी गति को मजबूती देने की आवश्यकता है। ...(व्यवधान)
हमारे यहां बिहटा से अरवल, अनुग्रह नारायण रोड, रेलवे लाइन माननीय तारीक साहब के घर से गुजरती है। हम चाहते हैं कि माननीय मंत्री जी उस पर ध्यान दें और उस रेलवे लाइन का निर्माण हो। इस्लाम, हुल्लासगंज, खिजरसराय, मानपुर रेल पथ भी सर्वे में है, इसके भी निर्माण का कार्य हो। चेन्नै से गया एक ट्रेन सप्ताह में एक दिन चलती है, यदि इस ट्रेन को चैन्नै से विस्तारित करके तिरुपति कर दें, क्योंकि इस इलाके के लोग तिरुपति हजारों की संख्या में जाते हैं और इस ट्रेन को सप्ताह में दो दिन किया जाये।
इसी के साथ मैं सरकार के इस प्रगतिशील बजट का समर्थन करता हूं।
* श्री भैरों प्रसाद मिश्र (बांदा) : मैं रेल मंत्रालय द्वारा जो अनुदान मांगे 2016‑17 के लिए प्रस्तुत की गई हैं, मैं उनका समर्थन करता हूं । सरकार ने एक अच्छा एवं दूरदर्शी बजट लाकर सराहनीय कार्य किया है । बजट में हर वर्गों का ध्यान रखा गया है । बुजुर्गों, महिलाओं एवं बच्चों की सुविधाओं का विशेा ध्यान रखा गया है । मेरे संसदीय क्षेत्र से गुजरने वाली झांसी‑माणिकपुर व खरेडा‑भीमसेन लाइन को दोहरीकृत एवं विद्युतीकरण के लिए जो आपने बजट में प्रस्ताव किया है उसके लिए आपको मैं बधाई देता हूं । इसमें यथाशीघ्र बजट देकर इसका शुभारम्भ भी आप करेंगे यह मैं आशा करता हूं ।
मेरे क्षेत्र में वदौसा एवं खुरहेड व अर्तरा में कुछ गाड़ियों के स्टापेज के प्रस्ताव आपके यहां लम्बित हैं । कृपया वहां शीघ्र ही स्टापेज देने हेतु निर्देश देने की कृपा करें । चित्रकूट‑कानपुर इंटर सटी को लखनऊ तक बढ़ाने व उसमें चेयरकार लगाने हेतु यथाशीघ्र निर्देश दिए जाएं । खजुराहो‑उदयपुर इंटरसिटी को मानिकपुर ग्रामीण एवं चित्रकूट द्वार हाल्ट स्टेशन को यथाशीघ्र को तीर्थ सर्किट एवं पर्यटन सर्किट में शामिल कर विशेा ट्रेनें चलायी जायें । जनरल डिब्बे ट्रेनों में और बढ़ाए जाएं । तुलसी एक्सप्रेस एवं चम्बल एक्सप्रेस के फेरे बढ़ाए जाएं । इसी के साथ मैं रेलवे द्वारा प्रस्तुत अनुदान मांगों का समर्थन करते हुए अपनी बात को विराम देता हूं ।
*श्री जनार्दन सिंह सीग्रीवाल (महाराजगंज) ः मैं माननीय रेल मंत्री श्री सुरेश प्रभु जी एवं राज्य मंत्री श्री मनोज सिन्हा जी का बेहद आभारी हूं कि इन दोनों के सक्षम नेतृत्व में रेल मंत्रालय नयी उंचाईयों को प्रापत कर रहा है । यह वाऩ महात्मा गांधी के चम्पारण सत्याग्रह का शताब्दी वाऩ है । चम्पारण के लोग रेल मंत्रालय से काफी उम्मीदें लगाये हुए हैं । मेरा आपसे अनुरोध होगा कि इन मांगों को पूरा करके चंपारण को नई उंचाई प्रदान करें ।
1. चम्पारण से नई दिल्ली के बीच में एक नई सुपरफास्ट एक्सप्रेस दी जाए
2. सुगौली-रमगढ़वा के बीच में शीतलपुर ढाला पर मैन्ड रेलवे क्रासिंग की स्थापना करना। यहां काफी लोग दुर्घटना में मर चुके हैं ।
3. आदापुर में फुटओवर ब्रिज की स्थापना करना ।
4. 4 बजे शाम को मोतिहारी से रक्सौल के लिए एक ट्रेन के टाइमिंग को एडजस्ट करने का भी मैं आपसे अनुरोध करता हूं ।
5. मैं आपसे यह भी मांग करता हूं कि चैलाहा हाल्ट पर सभी पैसेंजर ट्रेनों का ठहराव हो।
6. इसके अलावा चनपटिया रेलवे स्टेशन का उच्चीकरण एवं छौड़ादानों में सभी एक्सप्रेस ट्रेनों के ठहराव की भी मैं मांग करता हूं । मेरे यहां बेतिया से मझौलिया के बीच में गनौली हॉल्ट की मांग काफी दिनों से लंबित है । अभी यहां के 2 हजार से ज्यादा लोंगों ने हस्ताक्षरयुक्त अभियान चलाकर हॉल्ट बनाने की मांग की है ।
मेरा पूरा विश्वास है कि एनडीए के इस कार्यकाल में ये सभी मांगें आप जरूर पूरी करेंगेफ जिससे चम्पारण का उद्धार हो सके ।
श्री दुष्यंत चौटाला (हिसार) : सभापति महोदय, आपने मुझे डिमांड्स फार ग्रांट्स (रेलवेज) पर बोलने का मौका दिया, इसके लिए धन्यवाद। अगर पिछले साल की बात से शुरू करें तो जब बजट आया तो देश ने बहुत उम्मीदें रखीं क्योंकि बुलेट ट्रेन, हाई स्पीड ट्रेन आदि अनेक मुद्दों पर चर्चा की गई। किसानों के लिए भी दूध की ट्रेन चलाने की बात की गई, मंडियों तक सब्जियां पहुंचाने के लिए स्पेशल ट्रेन चलाने की बात की गई। लेकिन आज बात कहीं न कहीं सीमित होकर रह गई है। रेलवे स्टेशन डैवलप करने की बात की गई। यहां मंत्री जी बैठे हुए हैं। मैं उनसे आग्रह करूंगा कि सब चीजें ट्रैक पर चलती रहेंगी।
मैं अमरीका का इतिहास बताना चाहूंगा कि वहां आज के दिन भी सड़कें रेल से ज्यादा बेहतर हैं। मुझसे पूर्व वक्ता बता रहे थे कि वहां दो लाख किलोमीटर की रेलवे लाइन है। वहां ट्रकों की बड़ी-बड़ी कम्पनियों ने कभी रेलवे लाइन नहीं बढ़ने दी क्योंकि इससे उनका मुनाफा कम हो रहा था। कहीं हमारे देश में भी इस तरह रेल की प्रगति पर रोक लगने का काम न हो क्योंकि आज के दिन भी रेलवे की सबसे ज्यादा कमाई पब्लिक ट्रांसपोर्ट से है। हमारे खुद के एक विभाग ने पीडीएस के सिस्टम को ट्रांसपोर्टेशन ऑफ व्हीट और राइस को रोकने का काम किया तो रेलवे को उसका कहीं न कहीं भुगतान करना पड़ा। आज अगर फर्टिलाइजर का ट्रांसपोर्ट बंद हो जाएगा तो रेलवे को उसका नुकसान भी सहना पड़ेगा। हमें ऑल्टरनेटिव वे सोचने पड़ेंगे कि हम रेलवे को किस तरह मुनाफे में लाने का काम करें।
हमने जिस तरह चीजें ऑनलाइन करने का काम किया है, उससे बहुत सुविधा मिली, लेकिन कनैक्टिविटी की वजह से पैसेंजर्स को निरंतर दिक्कतें भी आती है। यह बहुत अच्छी सुविधा है कि मैं टिकट बुक कराता हूं, अगर ट्रेन डिले है तो मेरे मोबाइल पर उसकी कन्फर्मेशन आ जाती है। मैं सरकार को इसके लिए बधाई दूंगा।
हमने जहां दो मंजिल ऊपर चढ़कर एक प्लैटफार्म से दूसरे प्लैटफार्म जाने के लिए रास्ते बनाने का काम किया है, सरकार जरूर संज्ञान में ले। मैंने अपने देश में बहुत कम जगह देखा है कि सेम लैवल क्रॉसिंग होती है। लेकिन जहां ट्रेनों की ज्यादा आवाजाही होती है, वहां यह पॉसीबल नहीं है। अगर आप वहां सेम लैवल क्रॉसिंग नहीं कर सकते तो अंडर रेलवे लाइन क्रॉसिंग सुविधा उपलब्ध कराने का काम कीजिए। हमारे ऐसे बहुत से स्टेशन्स हैं जहां इलैक्ट्रॉनिक ऐलिवेटर्स या ऐसक्लेटर्स नहीं हैं। किसी बुजुर्ग के लिए दो मंजिल चढ़ना आसान नहीं है।
मुझे पिछले दिनों यहां से दो बार बीकानेर जाने का मौका मिला। आधे रेलवे स्टेशन ऐसे हैं जिनमें हर प्लैटफार्म पर टॉयलैट्स की सुविधा xÉcÉÓ cè* U:-U: {ãÉè]{ÉEÉàÉÇ cé +ÉÉè® ABÉE xÉà¤É®, U: {É® ]ÉìªÉãÉè]¤ÉxÉÉ ®JÉä cé* ABÉE BªÉÉÎBÉDiÉ BÉEÉä VÉÉxÉä àÉå¤ÉcÖiÉ ºÉàɺªÉÉ +ÉÉiÉÉÒ cè*àÉéºÉ®BÉEÉ® ºÉä +ÉÉOÉc BÉE°ôÆMÉÉ ÉÊBÉE càÉÉ®ä nä¶ÉàÉå |ÉiªÉäBÉE {ãÉè]{ÉEÉàÉÇ {É® ]ÉìªÉãÉè]¤ÉxÉÉxÉä BÉEÉ BÉEÉàÉ BÉEÉÒÉÊVÉA* +ÉÉ{É º´ÉSUiÉÉ BÉEÉÒ ¤ÉÉiÉ BÉE®iÉä cé* ªÉc ºÉ¤ÉºÉä +ÉcàÉ àÉÖqÉ cè* <ºÉä +ÉÉ{ÉBÉEÉÒ ºÉ®BÉEÉ® +ÉÉMÉä ãÉä VÉÉxÉä BÉEÉ BÉEÉàÉ BÉE®ä* àÉä®äºÉcªÉÉäMÉÉÒºÉÉlÉÉÒ£ÉÉÒàÉÉxÉiÉä cÉåMÉä ÉÊBÉE ºÉÉÆºÉn BÉEÉÒ ®äãÉ´ÉäÉÊ´É£ÉÉMÉ ºÉäºÉ¤ÉºÉä¤É½ÉÒÉÊbàÉÉÆb ]ÅäxÉ BÉEä º]Éì{ÉäVÉ BÉEä ¤ÉÉ®äàÉå cÉäiÉÉÒ cè* +ÉMÉ® c® ºÉÉÆºÉn BÉEä {ÉÉºÉ BÉEÉä]É +ÉÉ VÉÉA iÉÉäàÉÖZÉä ãÉMÉiÉÉ cè ÉÊBÉE ´Éä¶ÉiÉɤnÉÒ +ÉÉè®®ÉVÉvÉÉxÉÉÒ ]ÅäxÉ BÉEÉä UÉä]ä ºÉä UÉä]ä º]ä¶ÉxÉ {É® âóBÉE´ÉÉxÉä BÉEÉ BÉEÉàÉ BÉE®åMÉä* àÉ़ आग्रह करूंगा कि हमारे हरियाणा के बिल्कुल बीच से एक ट्रेन किसान ऐक्सप्रैस आती है। ...(व्यवधान)
माननीय सभापति : दुष्यंत जी, अब आप कनक्लूड कीजिए।
…( व्यवधान)
श्री दुष्यंत चौटाला: सभापति महोदय, मेरे पास पांच मिनट हैं। अभी एक मिनट ही खत्म हुआ है, चार मिनट बाकी हैं। मैं प्यार से अपनी बात रख रहा हूं।...(व्यवधान)
माननीय सभापति :यह हरियाणा का तोल नहीं है। आपके चार मिनट हो गए हैं और एक मिनट बाकी है।
…( व्यवधान)
श्री दुष्यंत चौटाला: हम किसान ऐक्सप्रैस की बात करते हैं। पिछले चार सालों से फाइल कभी नार्दन रेलवे, कभी नार्थ वैस्टर्न रेलवे के बीच पड़ी है। आज उस रेल में 11 डिब्बे हैं। अगर सुबह उस ट्रेन में चढ़ जाएं तो पैसेंजर आपकी गोद में आकर बैठ जाता है, चाहे आप एसी चेयर में बैठे हों। मैं आग्रह करूंगा कि आप उसे बीकानेर डिवीजन में ट्रांसफर कराने का काम करें जिससे उसकी सफाई प्रॉपर तौर पर हो जाएगी और साथ ही उस ट्रेन में 11 से 17 डिब्बे करने का काम कर पाएंगे।
मेरे लोक सभा क्षेत्र से कनेक्ट होते हुए चार रेलवे लाईन विभाग द्वारा प्रोजेक्टेड है, हिसार-अगरोहा के लिए आपने इस बजट में प्रोपोज किया है उसके लिए 10 लाख रुपये का प्रावधान किया है इस राशि में रेलवे के सर्वे के अतिरिक्त कुछ नहीं हो पाएगा। आप उसके लिए एक्सेस ग्रांट जारी करने का काम करें। बहुत लंबे समय से महम-हिसार-हांसी रेलवे लाईन पेन्डिंग है उसे भी पूरा काम करवाने का काम करें। जब एनडीए की सरकार बनी थी उस समय दो रेलवे लाईन प्रोपोज की गई थी। उकलाना-नरवाना जो चंडीगढ़-हिसार-सिरसा को कनेक्ट होती है, उसे आप कम्पलीट कराएं। हिसार-हांसी-जिंद जिसे चंडीगढ़ का दूसरा अल्टरनेटिव रास्ता मान सकते हैं उस रेलवे लाइन को कम्पलीट करवाने का काम करें। शताब्दी भटिंडा के लिए शुरू तो की गई लेकिन उसका रूट बल दिया गया। मैंने विभाग से इस बारे में बार-बार आग्रह किया है कि सप्ताह में एक दिन शताब्दी को दिल्ली भाया रोहतक -भिवानी-सिरसा होते हुए भटिंडा शुरू कराएं तो मैं आपका आभारी रहूंगा। धन्यवाद।
डॉ. किरिट पी. सोलंकी (अहमदाबाद) : सभापति जी, मैं डिमांड फॉर ग्रांट्स 2016-17 पर बोलने के लिए अनुमति देने के लिए आपका आभारी हूं। मैं इसके समर्थन में खड़ा हुआ हूं। जहां तक भारतीय रेलवे का सवाल है भारतीय रेलवे सिर्फ एक जगह से दूसरी जगह पहुंचाने का काम नहीं करती है बल्कि भारत को एक जगह से दूसरी जगह जोड़ने का कार्य करती है। हमारी सरकार के प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र भाई मोदी जी के नेतृत्व में माननीय मंत्री श्री सुरेश प्रभु जी और मनोज सिन्हा जी ने जो रेल बजट प्रस्तुत किया है इससे भारतीय रेलवे का मॉर्डनाइजेशन होने वाला है। इस रेल बजट से भारतीय रेल आधुनिकीकरण की दिशा में जाने वाली है और इसका रिज्वुएनाइशन होने वाला है। अगर हम पहले के रेल बजटों की बात करें तो उसमें बड़ी-बड़ी घोषाएं होती थीं, इंटरनेशनल स्टेशन बनाने की बात होती थी लेकिन धरातल पर कोई भी बात नहीं उतरती थी। रेल मंत्री जी ने 139 योजनाएं व परियोजनाएं जिनकी घोषणा पूर्व के रेल बजट में किया गया था उसको मेटेरियलाइजेशन का काम किया है। उसको क्रियान्वयन का काम किया है। मैं उनका बहुत-बहुत अभिनंदन करता हूं।
मैं गुजरात प्रदेश के अहमदाबाद क्षेत्र से आता हूं। मैं प्रधानमंत्री जी और रेल मंत्री जी का शुक्रगुजार हूं कि भारत की पहली बुलेट ट्रेन अहमदाबाद से मुंबई के लिए गुजरेगी यह सिर्फ बातें नहीं है न ही वायदा है। इस बजट में इसके लिए 500 करोड़ रुपये का आबंटन किया गया है और जापान के साथ एमओयू करके 98,000 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। जापान की ओर से सिर्फ 1औ ब्याज की दर से लोन मिलने वाला है। जहां तक सब-अर्बन ट्रेन का सवाल है, कई सब-अर्बन में मैट्रो का प्रावधान किया गया है। अहमदाबाद में मैट्रो बन रहा है क्योंकि अहमदाबाद की जनसंख्या तेजी से आगे बढ़ रही है और मास ट्रांसपोर्ट के लिए इको फ्रेंडली ट्रांसपोर्ट की घोषणा की गई है इसके लिए मैं सरकार का आभारी हूं। पहली वर्ल्ड क्लास रेलवे यूनिवर्सिटी गुजरात के वड़ोदरा में स्थापित होने वाली है इसके लिए भी मैं सरकार का बहुत-बहुत धन्यवाद करता हूं। जहां तक मैट्रो ट्रेन का सवाल है, मैट्रो ट्रेन जहां से गुजरती है वहां की कई कॉलोनियों को हटाया जाता है, उसे डिमोलिश किया जाता है। रेल मंत्रालय ने रेलवे लाइन की बगल की अहमदाबाद मैट्रो के लिए आबंटन करके अहमदाबाद के लोगों का बहुत फायदा कराया है इसके लिए भी मैं सरकार का बहुत-बहुत आभारी हूं। जहां तक गुजरात का सवाल है, गुजरात के पास बहुत लंबा समुद्री तट है, यह लगभग 1600 किलोमीटर लंबी है, वहां कई सारे इम्पॉर्टेंट पोर्ट हैं। इन पोर्टों को पीपीपी के माध्यम से रेलवे को जोड़ने का कार्य किया है इसके लिए मैं सरकार का बहुत-बहुत आभार व्यक्त करता हूं।
महोदय, जहां तक रेलवे स्टेशनों के ब्यूटीफिकेशन का सवाल है, हमारे द्वारिकाधीश जी के द्वारिका रेलवे स्टेशन के ब्यूटीफिकेशन के लिए इस रेल बजट में जो आबंटन किया गया है, उसके लिए मैं सरकार के प्रति बहुत आभारी हूं और सामख्याली मुंद्रा रेलवे लाइन के विद्युतीकरण के लिए बजट में जो प्रावधान किया गया है, उसके लिए भी मैं रेल मंत्री के प्रति आभार व्यक्त करता हूं।
महोदय, मैं अपना एक मुद्दा कह कर, अपनी बात समाप्त करूंगा। जहां तक वेस्टर्न रेलवे का सवाल है, मैं बताना चाहता हूं कि इसके नेटवर्क का लगभग 80 प्रतिशत भाग गुजरात से होकर गुजरता है और तकरीब 75 से 80 परसेंट की आमदनी गुजरात से मिलती है। इसलिए गुजरात के लोगों की बहुत समय से मांग चली आ रही है कि वेस्टर्न रेलवे का जोनल हैडक्वार्टर अहमदाबाद में बनाया जाए।
महोदय, इस बारे में मैं रेल मंत्री जी से विनती करता हूं कि वेस्टर्न रेलवे के, चर्च गेट, मुम्बई के हैडक्वार्टर को हटाए बिना, उसके दो पार्ट करें और अहमदाबाद, वडोदरा, राजकोट और भावनगर डिवीजन को लेकर, अहमदाबाद में एक तटीय वेस्टर्न रेलवे का निर्माण किया जाए। इससे गुजरात के लोगों को बहुत सुकून मिलेगा। हमारी यह डिमांड बहुत समय से चली आ रही है। आपने मुझे बोलने का अवसर दिया, इसके लिए मैं आपका बहुत-बहुत धन्यवाद करता हूं।
* श्री अजय मिश्रा टेनी (खीरी) : 2016‑17 के रेल बजट ने देश के लोगों में न केवल बेहतर सेवाओं की उम्मीद जगायी है बल्कि लोगों का विश्वास एनडीए सरकार के प्रति बढ़ाया है । मैं अनुदान मांगों का समर्थन करते हुए अपने लोक सभा क्षेत्र लखीमपुर खीरी (उ.प्र) के लिये निम्नलिखित मांगों पर सरकार के प्रभावी निर्णय व कार्यो को पूरा करने की मांग करता हूं ।
1. लखनऊ ‑ लखीमपुर ‑पीलीभीत रेल मार्ग का अमान परिवर्तन का कार्य शीघ्र पूरा कराया जाये ।
2. मैलानी ‑बहराईच रेल लाइन पर अमान परिवर्तन का काम शीघ्र शुरू किया जाये ।
3. पलिया ‑निघासन बेलरॉया नयी रेल लाईन का सर्वे किया जाये ।
4. लखीमपुर जिले की सभी मानव रहित रेलवे क्रासिंग पर बैरियर या वैकल्पिक व्यवस्था की जाये ।
5. लखनऊ ‑लखीमपुर रेल मार्ग पर स्थित ओयल रेलवे स्टेशन को कायम रखा जाये ।
6. गोला गोकरन नाथ रेलवे स्टेशन पर रैक पांईट शीघ्र बनाकर काम शुरू किया जाये ।
7. लखीमपुर रेलवे स्टेशन को स्मार्ट रेलवे स्टेशन जैसा विकसित किया जाये ।
श्री कौशलेन्द्र कुमार (नालंदा) : सभापति महोदय, आपने मुझे रेलवे की अनुदान मांग, वर्ष 2016-17 पर चर्चा में भाग लेने का मौका दिया, बहुत-बहुत धन्यवाद।
माननीय रेल मंत्री जी ने दिनांक 25 फरवरी, 2016 को दूसरा रेल बजट प्रस्तुत किया था और अब अनुदान मांग लेकर आए हैं। मैं रेल मंत्री जी को कुछ घोषणाओं के लिए धन्यवाद देता हूं। जैसे पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए तीर्थ-स्थलों में मेरे संसदीय क्षेत्र के बिहार शरीफ रेलवे स्टेशन को सौंदर्यीकरण के लिए अनुमोदित किया गया है। इसके लिए मैं उनका आभारी हूं। वरिष्ठ नागरिकों को ज्यादा निचली सीट देना और महिलाओं को और अधिक सीट देना, ये सब स्वागतयोग्य कदम हैं। वैसे देखा जाए, तो इस बजट में जो आम नागरिक रेल पर निर्भर हैं, उन्हें कुछ नहीं मिला। रेलवे देश की लाइफ-लाइन कहलाता है, लेकिन आज वह दिवालिएपन के कगार पर है।
मैं, माननीय मंत्री जी के ध्यान में लाना चाहता हूं कि बिहार से पहले भी दो रेल मंत्री रहे हैं। एक हमारे नेता, नीतीश कुमार जी के कार्यकाल में रेलवे का किराया युक्तिसंगत था और उन्होंने सुरक्षा पर अधिक बल देकर तकनीकी इंटर-लॉकिंग सिस्टम अपनाकर, रेलवे को दुर्घटनामुक्त करने के उपाय लागू किए। इसी प्रकार दूसरे रेल मंत्री, श्री लालू प्रसाद यादव जी के समय में पूरे पांच साल रेलवे मुनाफे में रही और किराया भी नहीं बढ़ाया गया। उन रेल मंत्रियों से भी शिक्षा लेने की जरूरत है कि रेलवे को कैसे सुधार जाए। उनके 10 वर्ष के कार्यकाल को देखा जाए।
माननीय रेल मंत्री जी, यहां उपस्थित हैं। मैं उनसे भी अनुरोध करूंगा कि राजनीति में वैचारिक मतभेद हो सकता है, लेकिन आपने जो अच्छे काम किए, उनके लिए मैंने आपको बधाई दी और पहले रेल मंत्रियों ने जो अच्छे काम किए, उसके लिए उन्हें भी बधाई देता हूं और आपसे निवेदन करना चाहता हूं कि आज उनसे शिक्षा लेने की जरूरत है।
महोदय, श्री नरेन्द्र मोदी जी अब कह रहे हैं कि हम हाईस्पीड यानी बुलेट ट्रेन चलाने जा रहे हैं। उनके इस प्रस्ताव का हम स्वागत करते हैं, लेकिन आप यह भी देखिए कि बुलेट ट्रेन चलाकर आप कितने लोगों को उससे सफर कराएंगे, यह भी आपको बताना चाहिए? उसकी लागत को देखते हुए, उससे सफर करना बहुत महंगा होगा और आम जनता उससे दूर रहेगी।
महोदय, आज यहां रेल मंत्री जी बैठे हैं, लेकिन प्रधान मंत्री जी यहां उपस्थित नहीं हैं। मैं उन्हें बताना चाहता हूं कि देश आज बहुत विकट परिस्थितियों से गुजर रहा है और जिस तरीके से रेलवे को लगातार घाटा हो रहा है, उससे साफ जाहिर है कि रेलवे कहीं न कहीं दिवालियापन के कगार पर है। इसलिए मैं कह रहा हूं कि रेलवे को घाटे से उबारने के लिए पिछले रेल मंत्री से शिक्षा लेनी चाहिए।
मैं मंत्री जी के ध्यान में लाना चाहता हूं कि हम लोग कई बार राजधानी एक्सप्रैस से सफर करते हैं, लेकिन राजधानी एक्सप्रैस की हालत बहुत खराब है। उसमें चूहे और कॉक्रोच होते हैं। उसमें गंदगी रहती है। सफाई की हालत बहुत ही खराब है। शौचालय बहुत गंदे रहते हैं। पहले फर्स्ट ए.सी. में एक साबुन की टिकिया मिलती थी, जो दो रुपए की होती थी। अब वह भी बन्द कर दी गई है। आप रेलवे का जिस प्रकार से किराया बढ़ा रहे हैं, उसे देखते हुए पब्लिक को भी सुविधा मिलनी चाहिए।
सभापति महोदय, मैं अपने संसदीय क्षेत्र की कुछ बातें यहां रखना चाहता हूं। जिस तरह से सांसदों के लिए दो फर्स्ट एसी और एक सीट सैकिंड एसी सीट की व्यवस्था है, उसी तरह पीए के लिए भी थर्ड एसी में एक सीट मिलनी चाहिए, क्योकि जब सांसद अपने संसदीय क्षेत्र से यहां आता है तब पीए को भी कई प्रश्न वगैरह डालने के लिए आना होता होता है। इसलिए मैं आग्रह करना चाहता हूं कि उसके लिए भी एक सीट की व्यवस्था होनी चाहिए। अभी यहां मेघवाल जी नहीं बैठे हैं। उन्होंने भी पन्द्रहवीं लोक सभा में इस बात को रेज किया था। आज एनडीए की सरकार है, इसलिए निश्चित रूप से पीए के लिए भी एक सीट थर्ड एसी में मिलनी चाहिए।
सभापति महोदय, मैं बिहार के कुछ मुद्दे यहां उठाना चाहता हूं। राजगीर-हिसुआ-तिलैया तक 46 किलोमीटर लाइन है, जो दो स्टेट्स बिहार और झारखंड को जोड़ती है। इस्लामपुर से नटेसर 21 किमी एवं नेउरा-दनियांवा-बिहार शरीफ-बड़बीघा-शेखपुरा लाइन में दनियावां से बिहार शरीफ चालू हो गया है लेकिन दनियांवा से नेउरा आज तक चालू नहीं हुआ। मैं इस बारे में भी मंत्री जी से अनुरोध करना चाहता हूं। ...(व्यवधान)
माननीय सभापति : कौशलेन्द्र कुमार जी, अब आप अपनी बात समाप्त कीजिए।
श्री कौशलेन्द्र कुमार: सभापति महोदय, पटना से अहमदाबाद तक चलने वाली गाड़ी हफ्ते में एक दिन चलती है। मेरा अऩुरोध है कि उसे डेली चलाया जाये। द्वारका एक्सप्रैस भी हफ्ते में एक दिन चलती है। उसे भी डेली चलाया जाये। ...(व्यवधान)
सभापति महोदय, मैं अपने संसदीय क्षेत्र की कुछ मांगें माननीय मंत्री जी के सामने रखना चाहता हूं। इस्लामपुर से पटना तक अभी एक ही डीएमयू ट्रेन चलती है। मेरा अनुरोध है कि इसमें डीएमयू का एक और रैक दिया जाये जिससे वहां के लोगों को सुविधा हो सके। दूसरा, इस्लामपुर एक महत्वपूर्ण व्यापारिक स्थल है जहां व्यापारी जहानाबाद से झारखंड तक गल्ला ले जाते हैं। लेकिन वहां आवागमन की काफी दिक्कत है। मेरा अनुरोध है कि वहां माल गोदाम बनाया जाये। राजगीर से बिहार शरीफ और दनियांवा होते हुए एक डीएमयू गाड़ी चलती है। वहां एक और डीएमयू गाड़ी की व्यवस्था करायी जाये।
मंत्री जी, आपने अभी दनियांवा से बिहार शरीफ तक गाड़ी चालू की है। मेरा अनुरोध है कि राजगीर पर्यटक स्थल है इसलिए बिहार शरीफ और दनियांवा होते हुए एक डीएमयू गाड़ी की व्यवस्था की जाये।
ऒश्रीमती रेखा वर्मा (धौरहरा) ः मैं अपने क्षेत्र की समस्याओं से मंत्री जी को अवगत कराना चाहती हूं।
1. मैं यहां गोलागोकरन नाथ वाया मोहम्म्द शाहजहाँपुर होते हुये फरूखा बाद नई रेल लाइन बिछाने के लिए मंत्री जी अपनी स्वीकृति प्रदान करे, क्योंकि इस रेल लाइन के बिछ जाने से बहुत सारी जनता को सुविधा हो जायेगी। यह रेल लाइन पहले भी स्वीकृत हुई थी, पर किसी कारण बस इसे रोक दिया गया था आज हमारी सरकार है और मेरी पूरी उम्मीद है कि मंत्री जी इस पर पूरा ध्यान देंगें ।
2. ट्रेन नं.54075-54076 दिल्ली पैसेन्जर जो सीतापुर से दिल्ली के लिए चलती थी बिना सूचना के सीतापुर स्टेशन से हटाकर शाहजहांपुर से दिल्ली जाने लगी। यह बहुत ही पुरानी गाड़ी थी, लोगों को बहुत असुविधा होती है । इसे पुनः सीतापुर चलाया जाये और कोई गाड़ी सीतापुर से दिल्ली के लिए नहीं है। इसलिए मंत्री जी से अनुरोध है कि इसे पुनः सीतापुर से चलाया जाए। यह जनता की मांग है ।
3. मेरी लोक सभा 29 धौरहरा (यूपी) में कम्पूयटर आरक्षण सुविधा हमारी पांचों विधानसभा में नहीं है । जनता को 60 किलोमीटर जाना पड़ता है । टिकट लेने के लिए हमारी लोक सभा की पांचों विधान सभा में एक-एक आरक्षण केन्द्र खोलने की मांग मैं मंत्री जी से करती हूं। इससे जनता को बहुत ही सुविधा होगी ।
4. हमारी लोक सभा में कोई भी अच्छा अस्पताल नहीं है अतः मैं मंत्री जी से अनुरोध करती हूं कि हमारी महोली विधान सभा में एक रेलवे का अस्पताल खोला जाए । जिससे रेलवे कर्मचारियों के अतिरिक्त आम जनता भी इसका लाभ उठा सके । यह एक बहुत ही सराहनीय कार्य होगा ।
5. हमारी लोक सभा 29 धौरहरा (यूपी) चार रेलवे स्टेशन भैगलगंज, जे.भी. गंज, हरगांव एवं महोती में एक भी विश्राम गृह नहीं है । अतः यात्रियों को बाहर खुले में इंतजार करना पड़ता है! वहां पर शौचालय की ठीक व्यवस्था नहीं है मेरा मंत्री जी से अनुरोध है कि उक्त व्यवस्थायें करवाने का कट करें ।
6. मेरे लोक सभा क्षेत्र में बहुत ही महत्वपूर्ण स्टेशन है, झरेखापुर मेरे संज्ञान में आया है कि इस स्टेशन का नव निर्माण होना है। परंतु एक वाऩ से अधिक समय बीत चुका है। कार्य अभी तक शुरू नहीं हुआ है ।
मेरा मंत्री जी से अनुरोध है कि निर्माण कार्य तुरंत शुरू करवाने का कट करें और मेरी तथा मेरे क्षेत्र की जनता की इच्छा है कि माननीय मंत्री जी कार्य प्रारंभ कर इसका उद्घाटन अपने कर कमलों से करने का कट करें एवं हमें अनुग्रहित करें ।
*श्रीमती अंजू बाला (मिश्रिख) : मैं माननीय रेल मंत्री जी का ध्यान अपनी लोक सभा निर्वाचनप क्षेत्र मिश्रिख के कस्बा सण्डीला की ओर आकर्िात करना चाहती हूं। सण्डीला से काफी श्रद्धालु मां वैणों देवी के दर्शन हेतु जम्मू आते‑जाते रहते हैं। लेकिन सण्डीला रेलवे स्टशन पर जम्मू आने‑जाने वाली रेलगाड़ियों का ठहराव न होने के कारण यहां के श्रद्धालुओं को मा वैणों देवी की यात्रा के दौरान जम्मू आने‑जाने में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है जिस कारण श्रद्धालुओं को तथा आम जनता में अत्यधिक रोा व्यापत है । इसलिए मैं माननीय रेलमंत्री जी से अनुरोध करना चाहती हूं कि सण्डीला से जम्मू आने‑जाने हेतु सण्डीला रेलवे स्टेशन पर अमरनाथ एक्सप्रैस का ठहराव सुनिश्चित कराने का कट करें ।
मैं माननीय रेलमंत्री जी को धन्यवाद भी देना चाहती हूं कि आपने मेरा क्षेत्र विधानसभा बालामऊ जो मेरे लोक सभा क्षेत्र में आता है उसमें ओवरब्रिज दिया है । परन्तु मेरी एक बहुत पहले से मांग रही है कि मेरे लोक सभा क्षेत्र में विधानसभा सण्डीला है जिसमें ओवरब्रिज की मांग में पहले भी बहुत बार कर चुकी हूं परन्तुं उस और कोई ध्यान नहीं दिया गया । रेलमंत्री जी मैं आपसे फिर मांग करती हूं कि आप सण्डीला में ओवरब्रिज बनाने की कृपा करें क्योंक वहां पर धंटो जाम की स्थिति रहती है । एक बार फाटक बंद होने पर कई ट्रेन गुजरती हैं इसलिए बहुत बार रास्ते में ही महिलाओं को दम तोड़ना पड़ा क्योंकि गर्भवती महिलाओं को ही सब सहन करना पड़ता है इसलिए वे उसी फाटक के पार दम तोड़ देती है । इसलिए माननीय मंत्री जी इस ओर ध्यान दें ।
माननीय मंत्री जी को मैं यह कहना चाहती हूं कि मैंने अपने लोक सभा क्षेत्र "बिलेग्राम मल्लावा " और "बिल्हौर " विधानसभा को अपग्रेड करने की मांग की थी । परन्तु वह भी अभी तक नहीं हुआ । मैं आप से मांग करती हूं कि मरे क्षेत्र की ओर ध्यान दें । माननीय मंत्री जी मम्लाबा स्टेशन पर यात्रियों के पीने के लिए पानी की व्यवस्था नहीं है और न ही ठहरने की टिन शेड की व्यवस्था है ।
अतः मैं मांग करती हूं कि मल्लावा रेलवे स्टेशन का अतिशीघ्र उच्चीकरण किया जाये तथा स्टेशन पर यात्री सुविधाएं उपलब्ध करायी जायें । मेरी मांग है कि मेरी लोक सभा "मक्षिख " जो मेरे विधान सभा मिश्रिख के नाम से जानी जाती हे जो एक पवित्र स्थान है यहां पर कई पवित्र स्था है जैसे दधीचि जो महर्िा थे और कई मंदिर हैं यहां पर लोग दूर‑दूर से आते हैं । मैं अपनी लोक सभा के रेलवे स्टेशन "नैमीशराण और मिश्रिक का सौंदर्यीकरण की मांग करती हूं क्योंकि यहां लाखों श्रद्धालु हर वाऩ आते हैं । उन्हें स्टेशन पर बहुत ही दिक्कतों का सामना करना पड़ता है अतः मैं माननीय मंत्री जी को बहुत बधाई देना चाहती हूं कि आपने बहुत अच्छा बजट लाया है जिसका हम समर्थन करते हैं ।
*श्री सुधीर गुप्ता (मंदसौर) : वर्ष 2016 में प्रस्तुत रेल बजट निश्चित ही देश के विकास के नये मानक प्रस्तुत करेगा। इस हेतु माननीय रेल मंत्री सुरेश प्रभु जी व रेल राज्य मंत्री मनोज सिन्हा जी धन्यवाद के पात्र हैं। मैं अपने संसदीय क्षेत्र की बहुत सी मांगों को समय-समय पर रखता रहा हूं जो आपके विभाग के संज्ञान में है। इस पर आप कार्य करेंगे ही, ऐसी आशा रखता हूं कि आज अनुपूरक मांगों को रखते समय मेरे संसदीय क्षेत्र की निम्न मांगों को प्राथमिकता प्रदान करेंगे।
रतलाम नीमच रेलवे मार्ग का दोहरीकरण। नीमच चित्तौड़गढ़ रेलवे मार्ग दोहरीकरण जो आपने उद्घोिात किया, पर कार्य शीघ्र प्रारम्भ हो। रतलाम चित्तौड़गढ़ मार्ग का विद्युतीकरण का कार्य शीघ्र प्रारम्भ करें। सुवासरा मंदसौर, मंदसौर प्रतापगढ़, रामगंजमंडी नीमच, नीमच सिगोली कोटा जावरा नागदा, उक्त सभी मार्ग पर सर्वे कार्य चल रहा है। कृपया सर्वे समय पर पूर्ण करवाकर रेलवे का निर्माण कार्य प्रारम्भ करवाएं। शामगढ़ रेलवे स्टेशन पर बना बेस किचन शीघ्र प्रारम्भ करवाएं।
ट्रेनों को चलाने के मेरे पूर्व में दिए गए समस्त आग्रह गम्भीरता से पूर्ण करने का प्रयास करें। मेरे संसदीय क्षेत्र के समस्त रेलवे स्टेशनों पर आवश्यकतानुसार समस्त सुविधाएं प्रदान करें। जैसे बायो टायलेट सुविधा, पीने के पानी की व्यवस्था, डिजिटल डिस्प्ले बोर्ड, स्वच्छ भारत मिशन के तहत सुविधाएं उपलब्ध कराते हुए प्लेटफार्मों को स्वच्छ बनाए रखने के प्रयास सुनिश्चित करें।
मैं सरकार द्वारा प्रस्तुत रेलवे बजट का अनुमोदन करता हूं व समर्थन करता हूं।
*श्री राहुल कस्वां (चुरू)ःमाननीय रेल मंत्री जी ने आमजन की भावनाओं को ध्यान में रखते हुए वर्ष 2016-17 का रेल बजट जो प्रस्तुत किया, वह एक ऐतिहासिक बजट है, जो रेल व जनहित में है। मेरे संसदीय क्षेत्र में 8 नई रेल लाईन के सर्वे की घोषणा की गई है, जिसके लिए बहुत-बहुत धन्यवाद। साथ ही निवेदन करना चाहूंगा कि माननीय रेल मंत्री जी द्वारा की गई घोषणाओं के लिए धनराशि उपलब्ध करायें एवं चुरू संसदीय क्षेत्र में ग्रामीण रास्तों पर आर.ओ.बी. पर होने वाले व्यय का भुगतान रेल द्वारा किया जाए। इस प्रस्ताव को शामिल करते हुए रेल की नीति में संशोधन किया जाए। इसके अलावा मेरे संसदीय क्षेत्र के निम्नांकित कार्यों को शामिल कर उन्हें पूर्ण करवाने की कृपा करें।
1. पिछले रेल बजट में उत्तर-पश्चिम रेलवे के सादुलपुर जं. के पूर्व साइड में रेल समपार सी. 142 पर रेल ओवर ब्रिज की स्वीकृति प्रदान की थी, उसके लिए मात्र 5 लाख रूपये का आवंटन किया गया था। चालू वित्तीय वर्ष में इस पर होने वाले व्यय का पूर्ण प्रावधान किया जाए एवं अविलंब कार्य चालू किया जाए।
2. चुरू-सीकर रेल लाईन के आमान-परिवर्तन का कार्य स्वीकृत किये हुए काफी समय हो गया। उसके लिए इस बजट में होने वाले संपूर्ण व्यय का प्रावधान किया जाए और अगले वित्तीय वर्ष तक इसका कार्य पूर्ण किया जाए।
3. सीकर-जयपुर रेल लाईन के आमान-परिवर्तन की घोषणा इस वित्तीय वर्ष में करते हुए इसके लिए इस पर होने वाले संपूर्ण व्यय का प्रावधान किया जाए, एक वर्ष में इस कार्य को पूर्ण किया जाए।
4. रतनगढ़-सरदारशहर रेल मार्ग के चालू आमान-परिवर्तन का कार्य शीघ्र पूर्ण किया जाए।
5. बांद्रा-जम्मूतवी विवेक एक्सप्रेस, बांद्रा-हिसार, हावड़ा-जैसलमेर साप्ताहिक गाड़ियों को प्रतिदिन किया जाए/ फेरे बढ़ाए जाये।
6. जोधपुर-दिल्ली सराय रोहिल्ला सप्ताह में दो दिन चलने वाली गाड़ी संख्या 14705/14706 को प्रतिदिन करते हुए इसे हरिद्वार या रूड़की तक बढ़ाया जाए।
7. पैसंजर गाड़ी संख्या 54011/54012 का विस्तार सादुलपुर जंक्शन तक किया जाये।
श्री राजेश रंजन (मधेपुरा) : सभापति महोदय, आजादी के 67 साल बाद यह देखा गया है कि भारतीय विद्वान अर्थशास्त्री गरीब और अमीरी में बड़ा फर्क करते चले गये। आज अमीरी और गरीबी का पैमाना अर्थशास्त्रियों के ही कारण है। उसी तरह देश की राजनीतिक व्यवस्था ने आम आदमी और खास आदमी में भी बड़ा फर्क किया। इस देश में आम आदमी का कभी सम्मान नहीं हुआ। हमेशा खास आदमी का ही सम्मान हुआ है। चाहे लोक तंत्र हो या कोई भी व्यवस्था है, उसने खास आदमी का ही सम्मान किया। आम आदमी के लिए कभी कोई व्यवस्था नहीं बनी। आप बुलेट ट्रेन चलाएं, क्योंकि दुनिया की गति में जाना बहुत जरूरी है। लेकिन कहावत है कि ‘बिना भोजन के भजन नहीं हो सकता।’ आम आदमी की मुस्कुराहट के बिना बुलेट ट्रेन की कल्पना करना भारत के लिए दुखदायी होगा। आप बुलेट ट्रेन चलाएं, सपनों की लंबी उड़ान भरें, उसमें कोई दिक्कत नहीं है। आपका प्रयास बहुत सार्थक होता है और उसका मैसेज भी पेपर्स में आता है।
सभापति महोदय, कहा जाता है कि आत्मनिर्भर हैं। सुरेश जी, प्रधान मंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी ने कई बार कहा है कि हिन्दुस्तान में बाबू और पदाधिकारी कभी भी संघीय व्यवस्था को आत्मनिर्भर नहीं रहने देंगे। मैं आज कोई भाषण नहीं देना चाहता। मैं पूछना चाहता हूं कि क्या आप वोट से गाइड होते हैं या वोट आपसे गाइड होता है? आज भी पदाधिकारी राजा और महाराजा की तरह चलता है। एक सैक्रेट्री का क्या प्रोटोकाल है और एक जन प्रतिनिधि का क्या प्रोटोकाल है, आपका जीएम जिस ठाठ से चलता है, जिस स्टेशन पर उसकी बोगी लग जायेगी, उस स्टेशन पर पैसेंजर ट्रेन दिन भर नहीं लग सकती।
आप आत्मनिर्भर की बात कहते हैं। एक जीएम जब एक शहर में जाता है तो पांच करोड़ रुपया एक विजिट में खर्च होता है। आपके पदाधिकारी सैक्रेट्री और मैम्बर एमपी को कौड़ी समझते हैं।
मैं चार बातें पूछना चाहता हूं। पहली बात, बिलो पावर्टी लाइन स्टुडेंट्स एग्जाम देने जाते हैं, क्या आपकी सरकार उनके लिए सरल, सुलभ, फ्री या मिनिमम कॉस्ट पर सुविधा देगी ताकि गरीब और वंचित वर्ग का बच्चा एक जगह से दूसरी जगह एग्जाम देने जा सके। दूसरी बात, बिलो पावर्टी लाइन के गरीब, जो खास तौर पर संक्रमण बीमारी से ग्रसित हैं, किडनी, कैंसर की बीमारी से पीड़ित या प्रेगनेंट महिला एक शहर से दूसरी जगह जाते हैं, क्या इनके लिए सरल, सुलभ व्यवस्था करेंगे? क्या इनके लिए विशेष व्यवस्था के तहत फ्री पास देंगे ताकि गरीबी रेखा से नीचे रहने वाले लोग, जिनके पास पैसा नहीं है, जो पप्पू यादव या अन्य सांसदों से पैसे लेकर इलाज कराने जाते हैं, वे इलाज करा सकें। क्या हिंदुस्तान में गरीब रोज मरते रहेंगे? क्या ऐसी कोई व्यवस्था माननीय सुरेश प्रभु जी गरीबों के लिए करेंगे?
तीसरी बात, चाहे जिस जाति, धर्म या समुदाय के गरीब लोग हों, जो धार्मिक स्थलों पर जाना चाहते हैं, 60 साल से ऊपर गरीबी रेखा से नीचे समाज के वंचित वर्ग के लोगों के लिए कोई खास व्यवस्था करेंगे ताकि वे सामाजिक, आध्यात्मिक और धार्मिक ताकत से हिन्दुस्तान को गौरवान्वित कर सकें? चौथी बात, सबसे महत्वपूर्ण है, और वह है हिन्दुस्तान में महिलाओं के लिए व्यवस्था। पैसेंजर ट्रेन में एक डिब्बे में कई गुना ज्यादा लोग होते हैं। पखाना के आगे भी 20 मजदूर झूले लगाकर बैठे रहते हैं। बिहार में एक डिब्बे में मजदूर 20-40 झूले लगाकर यात्रा करते हैं।
माननीय सभापति: कृपया अपनी बात समाप्त करें।
श्री राजेश रंजन : मेरा आग्रह है कि बुलेट ट्रेन चलाने से पहले हिन्दुस्तान में अर्थ की व्यवस्था करें। कहीं बहुत देर न हो जाए, प्रभु जी। मेरा आग्रह है कि आम आदमी के सफर के लिए ट्रेन को उस दृष्टि से देखा जाना चाहिए। हिन्दुस्तान के इतिहास में यदि प्रगति की ओर बढ़ना चाहते हैं तो आम आदमी तक पटरी की व्यवस्था करें। अभी कई साथियों ने कहा कि पटरी की व्यवस्था कैसे हो। यह सबसे ज्यादा आवश्यक है कि गांव-गांव तक पटरी की व्यवस्था हो और प्रत्येक प्लेटफार्म पर शौचालय की व्यवस्था हो।
*श्री रविन्दर कुशवाहा (सलेमपुर)ः माननीय अध्यक्ष जी, माननीय रेल मंत्री ने वाऩ 2016-17 को जो रेल अनुपूरक बजट प्रस्तुत किया है वह अत्यंत ही संतुलित, विकासपरक एवं सराहनीय है । बजट में अधिकांश प्रावधान ऐसे हैं जिनका दूरगामी परिणाम निकलेगा । ऐसी स्थिति में माननीय रेल मंत्री के समक्ष मैं कुछ ऐसी मांगों को प्रस्तुत करना चाहता हूँ जिनको पूर्वांचल एवं मेरे संसदीय क्षेत्र के विकास हेतु अतिशीघ्र पूरा किये जाने की आवश्यकता है । इन मांगों की पूर्ति जनहित के साथ ही रेलवे के हित में भी है ।
1. पूर्वोत्तर रेलवे के भटनी जंक्शन से वाराणसी रेलखंड के दोहरीकरण का अधूरा कार्य लंबे समय से लंबित पड़ा है । अतः इसे शीघ्र पूरा करने के साथ ही इस रेलखंड का विद्युतीकरण कराया जाय।
2. भारतीय रेलवे में नई दिल्ल-लखनऊ-गोरखपुर-छपरा-बरौनी रेल खंड एक पुराना एवं महत्वपूर्ण रेल खंड है जो उत्तर प्रदेश और बिहार की सघन आबादी वाले क्षेत्रों से होकर गुजरती है । परिणामस्वरूप इस रूट की रेल-गाड़ियों में अत्यधिक भीड़ होती है क्योंकि यात्रियों की संख्या की तुलना में इस रूट पर रेलगाड़ियों की संख्या कम है । इतना ही नहीं इस रूट पर राजधानी अथवा दूरंतो जैसी रेल गाड़ियां भी नहीं चलाई गई हैं जबकि एक दर्जन से अधिक सांसद और सैकड़ों जनप्रतिनिधि और विशिट यात्री यात्रा करते हैं । अतः इस रूट पर इन गाड़ियों के संचालन के साथ ही देवरिया सदर स्टेशन पर ठहराव सुनिश्चित कराया जाए ।
3. गोरखपुर-छपरा रेल खण्ड के भाटपार रानी रेलवे स्टेशन के पास, बेलपार-पश्चिम ढाला नं. 112 पर ओवरब्रिज का निर्माण ।
4. भटनी-वाराणसी रेल खण्ड के बिल्थरा रोड रेलवे स्टेशन के दक्षिणी समपार के मधुबन रोड ढाला नं. 19 बी. पर आंवर ब्रिज का निर्माण ।
5. सलेमपुर, बिल्थरा रोड, भटनी, भाटपार रानी रेलवे स्टेशनों का सौंदर्यीकरण एवं इन स्टेशनों पर डीलक्स शौचालय का निर्माण कराये जाने के साथ ही शुद्ध पेयजल की व्यवस्था ।
6. भटनी रेलवे स्टेशन पर पहले के बने वाश-पिट को पुनः चालू कराया जाये ।
7. छपरा-बलिया रेल खण्ड के रेवती, सहतवार स्टेशन के प्लेटफार्म की ऊंचाई बढ़ाया जाये ।
8. भटनी-वाराणसी रेल खंड पर सलेमपुर और पीउकोल स्टेशनों के बीच पूर्व में प्रस्तावित समपार का निर्माण कार्य पूरा कराया जाये ।
*श्री अर्जुन लाल मीणा (उदयपुर): मैं माननीय रेल मंत्री श्री सुरेश प्रभु एवं रेल राज्य मंत्री श्री मनोज सिन्हा के बजट का समर्थन करता हूं एवं मेरे संसदीय क्षेत्र उदयपुर की प्रमुख मांगें रेल मंत्री के सामने प्रस्तुत करता हूं ।
1. उदयपुर से उज्जैन (म.प्र) पर्यटन सर्किल घोिात किया जाये एवं उस अनुरूप समस्त सुविधाएं एवं ट्रेनें दी जायें ।
2. डूंगरपुर से बांसवाडा रतलाम (म.प्र) रेल लाइन को शीघ्र रेल बजट में प्रावधान किया जाये ।
3. उदयपुर सीटी से अजमेर हरिद्वार तक रेल चलाई जाये ।
4. उदयपुर से वैणोदेवी‑ पूजा एक्सप्रेस को अजमेर से उदयपुर तक जोड़ा जाये ।
*श्री चन्द्र प्रकाश जोशी (चित्तौड़गढ़): मैं माननीय रेल मंत्री श्री सुरेश प्रभु एवं रेल राज्य मंत्री श्री मनोज सिन्हा द्वारा प्रस्तुत रेल बजट का समर्थन करता हूं एवं मेरे संसदीय क्षेत्र की प्रमुख मांगें स्वीकृति हेतु रेल मंत्री के समक्ष प्रस्तुत करता हूं ।
1. उदयपुर से उज्जैन (म.प्र) पर्यटन सर्किल घोिात किया जाये एवं उस अनुरूप समस्त सुविधाएं एवं ट्रेनें दी जायें ।
2. नीमच से बड़ी सइडी एवं मावली से मरवाड़ जो रक्षा की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण मार्ग है, उसको स्वीकृत किया जाए।
3. चित्तौड़गढ़ से कोटा का दोहरीकण किया जाए।
4. नीमच से रतलाम एवं महु तक दोहरीकण किया जाए।
5. मन्दसौर से प्रतापगढ़ मार्ग तक का शीघ्र सर्वे करवाया जाए।
*श्री गजेन्द्र सिंह शेखावत (जोधपुर) : माननीय नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में जब भारत में सत्ता का युग परिवर्तनकारी परिवर्तन हुआ तो रेल, जो कि भारत के दिल की धड़कन है, भारत को एक सूत्र में बाँधने वाले अनेक कारकों में से एक है, की स्थिति दयनीय थी, लगातार घाटों एवं अपने राजनीतिक हितों को साधने के लिए रेल के संसाधनों के अदूरदर्शी-अपारदर्शी-अव्यावहारिक निर्णयों से लगभग रूग्णावस्था तक पहुँच गई थी। ऐसे में माननीय प्रधान मंत्री जी के मार्गदर्शन में जिस प्रकार से वर्तमान सरकार के रेल मंत्रियों ने कार्य किया है, रेल की पटरी पुनः पटरी पर आती प्रतीत हो रही है।
वर्षों से अधूरी पड़ी अनेक परियोजनाओं को पुनर्जीवित करने की दिशा में ठोस कदम उठाए गए हैं, जिनका परिणाम दिखाई देने लगा है तथा गर्त में पड़े रेलवे के संसाधन पुनः परिणामदायक बनने लगे हैं। रेल को ज्यादा से ज्यादा जनउपयोगी एवं सुविधाजनक बनाने की दिशा में अभूतपूर्व काम हुआ है। रेल के आधुनिकीकरण व गति में वृद्धि की दिशा में ठोस कदम बढ़ाए गए हैं।
मैं जोधपुर का प्रतिनिधित्व करता हूँ। पश्चिमी राजस्थान के लाखों लोग सुदूर दक्षिण भारत में व्यवसाय के लिए रहते हैं तथा उन्होंने उन राज्यों की अर्थव्यवस्था में अभूतपूर्व योगदान दिया है किन्तु दुर्भाग्य से जोधपुर को चेन्नई एवं बैंगलुरू से जोड़ने वाली दोनों रेलें जब से प्रारम्भ हुई हैं, वे अभी भी साप्ताहिक ही हैं। हमारे लाखों प्रवासियों की सुविधा के लिए करबद्ध निवेदन है कि कृपया इन रेलों के फेरे बढ़ाएं तथा अधिक रेलें प्रारम्भ करें। धन्यवाद।
श्री दद्दन मिश्रा (श्रावस्ती) : माननीय सभापति जी, मैं माननीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी के कुशल मार्गदर्शन में माननीय रेल मंत्री सुरेश प्रभु जी और रेल राज्य मंत्री मनोज सिन्हा जी ने प्रगतिशील, दूरगामी बजट लेकर आए हैं, इसके लिए मैं माननीय रेल मंत्री जी का बहुत आभार व्यक्त करते हुए अनुदान की मांगों का समर्थन करता हूं।
यह बजट कर्ज में डूबे संसाधन विहीन रेलवे में नई आशा और विश्वास का संचार करेगा। इस रेल बजट में भारतीय रेल के लिए अच्छे दिन लाने के लिए मजबूत आधारशिला रखी गई है। देश की जनता के सपने और अपेक्षाओं को पूरा करने के लिए आधारभूत ढांचे और क्षमता निर्माण की तरफ विशेष ध्यान दिया गया है। यात्रियों की सुखद यात्रा के लिए खानपान सेवा में सुधार, कैटरिंग, मनोरंजन, साफ-सफाई, महिला यात्री सुरक्षा, सीसीटीवी कैमरे, डिस्पोजल बिस्तर, ऑन लाइन जनरल टिकटिंग, पेपर लैस टिकट, महिलाओं के लिए आरक्षित सीटों में वृद्धि, गन्तव्य आने की पूर्व सूचना देने की व्यवस्था आदि नई घोषणाएं अत्यंत सराहनीय हैं। साधारण दर्जे के यात्रियों के लिए विशेषतः अंत्योदय ट्रेन और दीन दयाल कोच समाज के गरीब एवं वंचित वर्गों की यात्रा की सुविधा हमारी सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
सभी ट्रेनों की औसत गति 80 किलोमीटर किया जाना अत्यंत सराहनीय कदम समय की मांग के अनुरूप है। हमसफर, तेजस और उदय नाम से तीन नई ट्रेनों की श्रेणी की घोषणा स्वागत योग्य है। यह एक प्रगतिशील बजट है जो भारतीय रेल की वर्तमान जर्जर हालत की कायापलट करके शेष भारत निर्माण में रेल की भमिका और मजबूत बनाएगा।
महोदय, यह रेल बजट पूरे देश की आकांशाओं के अनुरूप होने के साथ-साथ हमारे संसदीय क्षेत्र के लोगों की आशाओं को पूरा करने वाला बजट है। हमारे संसदीय क्षेत्र की बहुत पुरानी मांग श्रावस्ती को रेल लाइन से जोड़ने की थी, क्योंकि बहुत-सी सरकारें आईं और गईं तथा बहुत से वायदे किए गए लेकिन किसी ने भी पूरा करने का काम नहीं किया।
हमारे रेल मंत्री जी ने 22 नवम्बर को ब्राड गेज के लोकापर्ण के अवसर पर हमारे संसदीय क्षेत्र की एकमात्र बड़ी गोंडा रेल लाइन का लोकापर्ण देश के अभूतपूर्व प्रधानमंत्री श्री अटल बिहारी वाजपेयी के सम्मान में करने के समय स्थानीय जनता के तमाम प्रस्तावों पर विचार करने का आश्वासन दिया था, हमें कहते हुए गर्व हो रहा है कि उस आश्वासन पर त्वरित कार्रवाई करते हुए तुरंत आगामी बजट में न सिर्फ जो पुरानी मांग बहराइच, भिनगा, श्रावस्ती, बलरामपुर, डोमरियागंज होते हुए खलीलाबाद तक न सिर्फ नई रेल लाइन बनाने की घोषणा की अपितु उस पर बजट का भी प्रावधान किया। मैं अपने क्षेत्रवासियों की तरफ से मंत्री जी को कोटि-कोटि धन्यवाद देते हुए मांग करता हूं कि जल्द से जल्द बजट आबंटित करके काम शुरू किया जाए। हमारे क्षेत्र में इस घोषणा से हर्ष और उल्लास का वातावरण देखते ही बन रहा है। इतने पटाखे चलाए गए कि बाजारों में पटाखे खत्म हो गए, इतनी मिठाइयां बांटी गईं कि दुकानों में मिठाइयां कम पड़ गईं।
इसके साथ हमारी एक ओर मांग है कि बहराइच से भिनगा तक जो लाइन जा रही है इसे अगर तुलसीपुर तक जोड़ दिया जाए ता सीमावर्ती क्षेत्र को कवर किया जा सकेगा। मैंने रेल चर्चा के दौरान कहा था कि आज चाइना हमारे समक्ष एक चुनौती बनकर खड़ा है। चीन नेपाल सीमा पर पहाड़ों के अंदर रेल लाइन का नेटवर्क बिछाता जा रहा है और हम अभी तक मैदानों में रेल लाइन बिछा नहीं पाए हैं। बहराइच भिनगा रेल लाइन की घोषणा हुई है, उसे तुलसीपुर तक बढ़ाया जाए ताकि सीमावर्ती क्षेत्रों से जोड़ा जा सके। हमारे संसदीय क्षेत्र में जो एकमात्र रेल लाइन गोंडा-बढ़नी लाइन है पिछले बजट में सर्वाधिक 910 आरओबी की घोषणा मंत्री जी ने की थी, लेकिन अफसोस के साथ कहना पड़ रहा है कि इसमें हमारे क्षेत्र को एक भी आरओबी नहीं मिला है।
माननीय सभापति : आप अपनी बात समाप्त कीजिए।
श्री दद्दन मिश्रा: हमारी मांग है कि तीन-चार आरओबी की मांग की है, उसे जल्द से जल्द पूरा किया जाए।
माननीय सभापति : आप बैठ जाएं। जो मुद्दे शेष रह गए हैं, उन्हें आप मंत्री जी को लिखकर दे दीजिएगा।
*श्री नाना पटोले (भंडारा-गोंदिया)ःमेरे निर्वाचन क्षेत्र के भंडारा-गोंदिया में स्थित रेलवे स्टेशन एवं लाईनों के सुधार के संदर्भ में गेंदिया से बल्लारशा सिंगल लाईन को डबल किया जाए, जिससे रेल यातायात में रूकावट न आये। रेलवे लाईनों के नीचे बनाये गये अंडर पास जो कि 200 से 250 करोड़ रूपयों में बनकर तैयार होते हैं, अंडर पास जमीन से नीचे गहराई में होने के कारण बरसात का पानी जमा होता है, जिससे लेकर यातायात में व्यवधान और दुर्घटना की संभावना बढ़ जाती है, इसलिए अंडर पास को सुधारने की आवश्यकता है।
कई स्टेशनों पर मीटरगेज के लिए जो प्लेटफॉर्म बनाये गये थे, वह आज भी ब्रॉडगेज लाईनों पर यथास्थिति में हैं। ब्रॉडगेज लाईन बनने के बाद आज तक किसी भी तरह का विकास नहीं हुआ है। इस कारण दुर्घटनाओं में लगातार बढ़ोत्तरी हो रही है। अतः प्लेटफॉर्म के आधुनिकीकरण की शीघ्र आवश्यकता है।
भंडारा रेलवे स्टेशन जिला स्तर पर एक अच्छा विकसित स्टेशन होना चाहिए जो कि आज तक उसका विकास नहीं हो पाया। भंडारा स्टेशन के पास माल गोदाम के लिए अलग लाईन आवश्यक है। यदि यह संभव न हो तो मालगोदाम के लिए अलग से तुमसर में लाईन की व्यवस्था की जाए। साथ ही, भंडारा स्टेशन पर सभी सुपरफास्ट ट्रेनों के स्टॉपेज होने की व्यवस्था अति आवश्यक है।
नागपुर को रेलवे का अलग से जोन बनाया जाए, जिससे मध्य भारत में रेल विकास में गति दी जा सके। गोंदिया से विदर्भ रिजन में स्थित शेगांव स्टेशन, जो कि संत गजानन महाराज संस्थान काफी प्रख्यात है, इसके दर्शनार्थ हज़ारों लोग दर्शन हेतु रोज आते-जाते हैं। इस हेतु शेंगांव से गोंदिया, गोंदिया से शेंगांव एक इंटरसिटी ट्रेन शीघ्र आवश्यकता है। भंडारा जिले में एक रेलवे हॉस्पिटल यहां के रेल कर्मियों की संख्या को देखते हुए अति आवश्यक है। भंडारा-गोंदिया-तुमसर-तिरोड़ा और परिसर के रेल स्टेशनों का विकास एवं सौंन्दर्यकरण और यात्री सुविधा निर्माण की अति आवश्यकता है।.
*डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक (हरिद्वार)ःसंपूर्ण विश्व के साथ गर्वित भारत ने पहली बार इस बात को महसूस किया है कि अर्थ व्यवस्था या रेलवे का आर्थिक प्रबंधन हो, सर्वत्र एक नया परिवर्तन दिखा है। एक ऐसा नया परिवर्तन जिसे प्रत्येक भारतीय के मन में एक नई आशा, उत्साह का संचार किया है। स्वाधीन भारत के 67 वर्षों के इतिहास में समृद्ध, श्रेष्ठ, गौरवमयी, भारत के निर्माण की प्रक्रिया में रेलवे को मिली उच्च प्राथमिकता से हर देशवासी के मन में नयी ऊर्जा, नये उत्साह और नयी स्फूर्ति का संचार हुआ है। मेरा पूर्ण विश्वास है कि पिछले वर्ष की भांति इस वर्ष भी यशस्वी प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में सुशासन, गरीबी उन्मूलन, सामाजिक आर्थिक परिवर्तन, रोजगार सृजन का नया अध्याय लिखने में यह रेल बजट महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के लिए कृतसंकल्प है। चाहे वह पर्यटन का क्षेत्र हो, नयी सामाजिक पहल हो, मानव संसाधन विकास हो, ऊर्जा और पर्यावरण संरक्षण और प्रबंधन की बात हो, या फिर संसाधन जुटाने का प्रश्न हो, अथवा प्रबंधन प्रणालियों में गुणात्मक सुधार की बात हो, सर्वत्र उन्होंने श्रेष्ठ प्रबंधन की छाप छोड़ी है। विभिन्न क्षेत्रों में मा. रेल मंत्री की दूरदर्शिता, नियोजन क्षमता, नेतृत्व और अद्भुत प्रखरता का परिचय दिया है। यही कारण है कि विभिन्न स्तरों पर उनको कुशल प्रबंधन के लिए सम्मानित किया गया है।
शायद देश के तथा विश्व के इतिहास में पहली बार हुआ होगा कि देश के 1000 रेलवे स्टेशन स्वच्छ पेयजल, शौचालय, प्रतीक्षालय से युव्त होंगे। वर्ष 2009 से यह कार्य प्रांरभ हुआ था और 2014-15 तक 946 स्टेशनें को आदर्श स्टेशन में बदला गया है यानी कि पांच साल के कार्य को एक साल में ही पूरा किए जाने की पहली बार निगरानी तंत्र स्थापित किया जाएगा जो जोनल एवं बोर्ड स्तर पर हैं। पूरी तरह से जवाबदेह पारदर्शी निविदा प्रक्रिया के तहत सभी टेंडर ई-प्लेटफॉर्म पर आ गए हैं एवं पूरी प्रक्रिया को ऑनलाइन बनाया जा रहा है। हाईस्पीड बुलेट ट्रेन के लिए सॉफ्ट लोन 0.1 प्रतिशत की दर से 79,000 करोड़ रूपये जापान से मिलेंगे।
स्पेशल किस्म की चार तरह की ट्रेनें चलाने का प्रस्ताव इस बजट में किया गया है जो कि एक सराहनीय कदम है ।
(1) हमसफर - इसमें गरीब रथ की तरह सिर्फ एसी-3 कोच होंगे तथा बोगियों में खान-पान की व्यवस्था भी होगा ।
(2) अन्त्योदय - इसमें अनारक्षित कोच ही होंगे।
(3) तेजस - यह गाड़ी 130 कि0मी0 प्रतिघंटे की स्पीड से चलेगी। इसमें लोकल खासियल वाला खाना ऑनबोर्ड मिलेगा तथा वाई-फाई की सुविधा भी होगी।
(4) उदय - इसमें उत्कृष्ट डबल डेकर एयरकंडीशंड यात्री ट्रेन बिजी रुट्स पर ओवरनाइट चलेंगी। इसके अलावा, हर एक ट्रेन में 120 लोअर बर्थ सीनियर सिटिजंस के लिए आरक्षित होंगी। इसमें पोर्टेबल वाटर सर्किट तथा मोबाइल चार्जिंग प्वाइंट की व्यवस्था होगी।
रेल मंत्रालय द्वारा नये राजस्व की प्राप्ति के लिए सदैव किराया बढ़ाने का सहारा लिया है। रेलवे ने मालढुलाई के क्षेत्र में नया बाजार प्राप्त करने की कोशिशें की हैं। राजस्व के नए स्रोत जुटाने के लिए रेलवे द्वारा विशेष प्रयास किए गए हैं। रेलवे के सभी संसाधनों का उपयोग अधिक से अधिक मुनाफा कमाएं, इस मंशा के साथ अंतरर्राष्ट्रीय मानकों के तहत सभी खरीद करने का फैसला किया गया है। सहयोग, संवाद, कल्पनाशीलता को बढ़ावा देने की मंशा से रेलवे ने कई कदम उठाए हैं ।
वर्ष 2016-17 में राजस्व जुटाने के लिए एक लाख 84 हजार आठ सौ बीस करोड़ का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा गया है। कुल मिलाकर कुछ नया करने की धारणा को धरातल पर लाते हुए माल और सवारी गाड़ियों की अधिक गति, समयबद्धता, स्वर्ण चतुर्भुज पर तेज गति की गाड़ियां, जीरो वेस्ट डिस्चार्ज, प्रौद्योगिकी से सुरक्षा की सुनिश्चितता आदि पर जोर दिया गया है।
मेरा सदैव से यह मानना रहा है कि किसी भी महत्वाकांक्षी योजना के लिए एक विजन और मिशन की आवश्यकता होती है। माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के कुशल नेतृत्व में और रेल मंत्री जी की दूरदर्शी सोच के चलते हम रेलवे के माध्यम से देश को सर्वोच्च शिखर पर ले जाने के लिए संकल्पित हैं।
रेल केवल अवस्थापना से जुड़ी परिवहन व्यवस्था नहीं है बल्कि, भारत माता का धमनी तंत्र है जो प्रत्येक भारतीय को चाहे वह सूदूरवर्ती अरुणाचल प्रदेश में रहता हो या श्रीनगर, कश्मीर या कन्याकुमारी में, सभी को आपस में एकता के सूत्र में पिरोता है।
कुल मिलाकर, रेल मंत्रालय कम, घोषणा मंत्रालय ज्यादा हो गया था। नित नई घोषणाएं होती थी परन्तु उन्हें क्रियान्वित किए जाने के लिए समुचित साधन जुटाने में सब मौन रहते थे। देशवासियों से यह छलावा आखिर कब तक होगा। यह उनके अद्भुत प्रबंधन क्षमता का ही कमाल है कि जहां एक भी पैसा रेल किराया न बढ़ा हो, वही व्यापक संसाधन जुटाए गए हैं। चार नई ट्रेनों की घोषणा इस रेल बजट में की गयी है और सबसे बड़ी बात है कि 8700 करोड़ रुपये बचाकर अपने आप में (cost compression) कास्ट कंप्रेशन की नयी मिसाल प्रस्तुत की है।
हमेशा विलंब से चलने के लिए बदनाम भारतीय रेल के लिए 95 प्रतिशत ऑनलाइन लक्ष्य रेल परिचालन में आने वाले आमूलचूल परिवर्तन की ओर स्पष्ट संकेत करता है।
इस बजट से पहली बार ऐसा अहसास हुआ है कि देश में रेलवे की बागडोर एक ऐसे संवेदनशील मंत्री के हाथ में है जो सभी लोगों की चिंता करता है। चाहे वह आर्थिक रुप से पिछड़े वर्ग की बात हो या वरिष्ठ नागरिकों की, सभी की रेल यात्रा सुविधाजनक हो, इसका विशेष ध्यान मंत्री जी ने इस बजट में रखा है। दीनदयाल उपाध्याय जी के एकात्म मानवतावाद और अन्त्योदय के विचार को प्राथमिकता देते हुए रेल मंत्री जी ने पिछड़े उपेक्षित व गरीबों का इस बजट में विशेष ध्यान रखा है।
मैं पूरे देश को अवगत कराना चाहता हूं कि रेलवे के विकास की जो भविष्यगामी योजना मा0 मंत्री ने तैयार की है वह निश्चित रुप से भारतीय रेलवे का कायाकल्प कर देगी। अगले पांच वर्षो में हम अपनी प्रतिदिन यात्रियों को ले जाने की क्षमता को 50 प्रतिशत बढाने की व्यवस्था कर रहे हैं अर्थात् 2019 तक हम प्रतिदिन अपनी रेलगाड़ियों में तीन करोड़ से अधिक यात्रियों को यात्रा की सुविधा दे पाएंगे। अगर देखा जाये तो आप कनाडा, बोत्सवाना, ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, नेपाल, भूटान सरीखे देशों को अपनी ट्रेन में एक दिन में यात्रा करा सकते हैं। प्रति दिन यात्री संख्या की बात की जाये तो यह अपनी तरह का विश्व का सबसे बड़ा रेलवे नेटवर्क होगा।
मा0 मंत्री जी, आपने जहां संपूर्ण देश के लिए, हर वर्ग के लिए कुछ न कुछ किया है, वहीं मेरा विनम्र निवेदन है कि मेरे दुर्गम पर्वतीय आपदाग्रस्त प्रदेश की रेलवे की परियोजनाओं के लिए इस बजट में समुचित व्यवस्था करने की कृपा करेंगे। अत्यंत संवदेनशील और सामरिक रूप से महत्वपूर्ण उत्तराखंड आपकी ओर आशा भरी निगाहों से देख रहा है। जैसा कि मैंने पूर्व में आपको आग्रह किया था, उत्तराखंड धार्मिक, सांस्कृतिक एवं सामरिक और पारिस्थितिकी की दृष्टि से अत्यन्त संवेदनशील राज्य है। देश की सुरक्षा और अस्मिता की रक्षा के लिए अपना सर्वस्व न्यौछावर करने वाला यह प्रदेश पिछले कई दशकों से रेलवे विकास के मामले में उपेक्षा का दंश झेल रहा है ।
मेरा अनुरोध है कि चारधाम यात्रियों को लाभ पहुंचाने हेतु एवं देश-विदेश के पर्यटकों को सुविधा प्रदान करने हेतु ऋषिकेश-कर्णप्रयाग लाइन पर अविलंब कार्य प्रारम्भ किया जाये । जैसा कि आप अवगत हैं कि यह योजना पिछले कई वर्षों से लंबित है।
इसके अतिरिव्त, ऋषिकेश-डोईवाला के बीच सीधा संपर्क स्थापित करने हेतु लाइन बिछाने हेतु शीघ्र अति शीघ्र कार्य प्रारंभ किया जाये। इससे न केवल क्षेत्रीय जनता को लाभ होगा वहीं विभिन्न पर्वो पर हरिद्वार, ऋषिकेश आने वाले लाखों श्रद्धालु लाभान्वित होंगे । 2016 में आने वाले अर्द्धकुंभ की सफलता के लिए यह परियोजना अत्यंत महत्वपूर्ण है। मैं अवगत कराना चाहता हॅं कि यह योजना पिछले कई वर्षों से लंबित पड़ी है।
मेरा यह भी आग्रह है कि देववंद से झबरेड़ा होते हुए रुड़की रेल मार्ग पर कार्य प्रारम्भ कराया जाये। आपको अवगत कराना चाहता हूं कि इस मार्ग पर भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया प्रारंभ होकर कई किसानों को मुआवजा मिल चुका है।
लक्सर क्षेत्र की जनता की लंबे समय से चली आ रही मांग पर लाहौरी एक्सप्रेस को एथल बुजुर्ग स्टेशन पर हाल्ट प्रदान करने की कृपा करें, ताकि श्रद्धालु विभिन्न तीर्थस्थलों पर सुगमतापूर्वक जा सकें। दुर्भाग्य से यह हॉल्ट हाल ही में वापस लिया गया है।
हरिद्वार-ऋषिकेश क्षेत्र को गढवाल, कुमांऊ के पर्वतीय अंचलों से जोड़ने एवं उ0प्र0 एवं उत्तराखंड के मध्य रेल संपर्क मार्गो को सुदृढ करने हेतु देहरादून, हरिद्वार, नजीबाबाद एवं कोटद्वार स्थित स्टेशनों का उन्नयन किया जाये तथा रेलमार्ग को दोहरीकरण करने के काम में तेजी लायी जाये ।
मेरा अनुरोध है कि हरिद्वार से कोटद्वार होते हुए रामनगर रेललाइन को स्वीकृत किया जाये ताकि गढ़वाल और कुमाऊँ के मध्य की यात्रा सुगम और सुविधाजनक हो सके। इस रेलवे लाइन से समय व पैसा दोनों की बचत होगी।
मैं निवेदन करना चाहता हूं कि टनकपुर-बागेश्वर रेल मार्ग के कार्य में तेजी लायी जाये जिससे न केवल क्षेत्रीय जनता लाभान्वित होगी बल्कि नेपाल जाने वाले यात्रियों को सुविधा के साथ सामरिक महत्व की अन्य योजनाओं को क्रियान्वित करने में सुगमता हो सकेगी । नेपाल के साथ द्विपक्षीय व्यापार को भी इससे बढ़ावा मिलेगा। भारत-नेपाल संबंधों को सुदृढ़ करने में यह मील का पत्थर साबित होगा।
जैसा कि आपको ज्ञात है हरिद्वार क्षेत्र सम्पूर्ण विश्व की आध्यात्मिक राजधानी है । ऐसे में देश विदेश से लाखों लोग यहां आते हैं। मुम्बई, जयपुर, कलकत्ता, बैंगलूर आदि महानगरों से हरिद्वार एवं हल्द्वानी-काठगोदाम के लिए तेज गति की गाड़ियां चलाई जांए जिससे प्रवासी उत्तराखंडी, तीर्थयात्री और पर्यटक सुगमता पूर्वक हरिद्वार और ऋषिकेश के अतिरिव्त कुमाऊँ क्षेत्र में आ सकें।
हरिद्वार आने वाली सभी गाड़ियों को रायवाला होते हुए ऋषिकेश तक भेजा जाए, ताकि हरिद्वार क्षेत्र में यातायात की विगड़ती व्यवस्था में सुधार लाया जा सके।
हरिद्वार जिले, देहरादून जिले की सभी रेलवे क्रासिंग पर ओवरहेड ब्रिज बनाएं जाएं ताकि इन क्षेत्रों में यातायात के जाम से लोगों को निजात मिल सके और यह क्षेत्र दुर्घटना मुव्त बनाया जा सके। यह क्षेत्र यातायात को नियंत्रित करने में प्रभावी भूमिका निभाएगा।
हरिद्वार के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व को देखते हुए देश के सभी मुख्यालयों से हरिद्वार के लिए रेल सम्पर्क उपलब्ध कराने हेतु रेल गाड़ियां चलाई जाएं ।
एक बार पुनः मैं माननीय मंत्री जी को विकासोन्मुखी रेल बजट पर बधाई देना चाहता हूं तथा आशा प्रकट करता हूं कि समृद्ध सर्वश्रेष्ठ भारत का सपना साकार होगा ।
श्री राजीव सातव (हिंगोली) : महोदय, यहां रेल मंत्री जी बैठे हैं, मैं उन्हें धन्यवाद देना चाहूंगा कि मराठवाड़ा में जो भीषण स्थिति थी, उससे निपटने के लिए रेल द्वारा पानी भेजा है, उसके लिए मैं मंत्री जी की सराहना करता हूं। मैं सदन का ध्यान आकृष्ट करना चाहता हूं कि संत नामदेव जी की जो कि देश के बड़े संतों में से एक हैं, उनकी 725वीं वर्षगांठ मनाने जा रहे हैं। पंजाब से हर रोज हजारों की तादाद में लोग यहां आते हैं लेकिन आज तक रेलवे की कोई लाइन या ट्रेक बना नहीं पाए हैं। अगर ऐसा हो जाए तो यह देश के लिए बहुत बड़ी उपलब्धि हो सकती है।
दूसरी मांग जैसा मेरे शिव सेना के साथी अरविंद सावंत जी ने रखी और हम सभी इससे सहमत हैं कि नांदेड का जो डीआरएम आफिस है, वह सिकंदराबाद से बायफरकेट करके मुम्बई को अगर सैंट्रल रेलवे से जोड़ेंगे तो आने वाले समय में काम करने में बहुत आसानी होगी। मैं पिछले दो साल से एक मांग सदन में रख रहा हूं। रेलवे यूनिवर्सिटी के बारे में मेरी मांग थी। मेरा कट-मोशन भी था और उस समय श्री नायडु जी ने यह बात कही थी कि गोपीनाथ मुंडे जी के नाम से रेल यूनिवर्सिटी के बारे में हम विचार करेंगे। आप बड़ोदरा रेल यूनिवर्सिटी लेकर गए, इसमें कोई परेशानी की बात नहीं है लेकिन आप और भी नई रेल यूनिवर्सिटीज बनाने जा रहे हैं इसलिए मेरी आपसे विनती रहेगी कि गोपीनाथ मुंडे जी को हम भाजपा के नेता के रूप में ही नहीं बल्कि वे हम सभी के नेता थे, ऐसा मानते हैं। उनके सम्मान में आपकी तरफ से एक स्मारक अगर हिंगौली में रेल यूनिवर्सिटी के रूप में बन जाए तो मैं आपके प्रति आभारी रहूंगा।
महाराष्ट्र में तीर्थस्थलों का जो सर्किट है चाहे माहुर है, औंडा है, पर्लिवेजनाथ है, 12 ज्योतिर्लिंगों में से शहर है। योगी आदित्यनाथ जी मुझसे सहमत होंगे कि ये सभी सर्किट्स तीर्थस्थलों से जोड़ने की जरूरत है और इसके लिए वहां रेल की कनेक्टिविटी होना जरूरी है। मेरी मंत्री जी से विनती रहेगी कि इसके लिए आपकी तरफ से कोई न कोई प्रावधान होना चाहिए।
माननीय सभापति : आप अपनी बात समाप्त कीजिए।
श्री राजीव सातव: महोदय, खंडवा के ब्राडगेज के बारे में कहना चाहता हूं। अगर जावड़ेकर जी और मंत्री जी चाय पर चर्चा करें तो यह बात समाप्त हो सकती है। अगर पर्यावरण मंत्री जी से इस बारे में ग्रीन सिग्नल मिल जाए तो काम पूरा हो सकता है।
महोदय, हिंगौली मॉडल स्टेशन बनाने जा रहे हैं। मैं सांसद निधि भी देने के लिए तैयार हूं। मेरी डीआरएम और जीएम से भी बात हुई है। अगर रेलवे की तरफ से इसमें पहल हो जाए तो जितनी निधि लग रही है, उसकी आधी निधि सांसद निधि से मैं खर्च करने के लिए तैयार हूं। मेरी आखिरी मांग है कि हाली-डे स्पेशल में जीएम आफिस से करीब 800 के करीब ट्रेनें जाती हैं। कम से कम 50 ट्रेनें हमारे एरिया से जाएं, यह मांग मैं रखना चाहूंगा।
*SHRIMATI SUPRIYA SULE (BARAMATI): Indian Railways is one of the largest organizations in the world responsible for commercial activity. Its long existence is an indicator of robustness of the organization. As a prime mover of bulk commodities and passengers across more than 7000 stations, it plays a huge role in India's economic progress.
Railways in India are a tool for development, equity and integration of all parts to the mainstream. It is rightly referred to as 'the lifeline of the Indian economy' as it facilitates industrial and economic development by transporting materials such coal, iron ore, fertilizers and foodgrains. It touches the lives of people in both tiny villages and urban metropolises.
Indian Railways (IR) is currently facing two crucial problems that is affecting their revenues. These two problems are - poor growth in freight loading and passenger traffic.
The Government had expected gross traffic receipts of Rs. 1.83 lakh crore in Financial Year 2016, instead it garnered revenues of just Rs. 1.67 lakh crore. Now, this year, the Government expects revenues at Rs. 1.84 lakh crore, which is a 10 percent growth on Rs. 1.67 lakh crore.
Similarly, as far as passenger traffic goes, the Government had expected revenues to come in at Rs. 50,175 crore in Financial Year 2016, but it has come in at Rs. 45,384 crore. The Government now expects to see revenues at Rs. 51,012 crore in Financial Year 17.
The Government expected revenues from goods traffic at around Rs. 1.21 lakh crore in Financial Year 16. But this has come in at just Rs. 1.13 lakh crore. The revenue target from freight traffic for Financial Year 17 has been set at Rs. 1.18 lakh crore, which is lower than the Financial Year 16 targeted revenue.
Ahead of the Budget for 2016-17, the Railway Minister acknowledged that subdued freight volume is a major problem area for railway finances, apart from the impact of implementation of the 7th Pay Commission's recommendations.
In the previous budget, IR had targeted an ambitious 7.7 percent growth in freight volumes for 2015-16. In budget last year, the Government has estimated freight traffic to grow to 1,186 million tonnes in 2015-16 from 1,101 MT the previous year. Of the incremental target of 85 MT, 42 MT was to come from coal, the largest component of the Railways' commodity traffic basket. Also, an additional nine MT was to come from iron ore and seven MT from cement.
However, cumulative growth in freight loading during April 2015- January 2016 stood at 0.9 per cent, the lowest ever. Lack of demand of key commodities such as coal, cement, iron ore and containers is to be blamed for sluggish volumes. Also, while freight rates of IR were hiked last year, lower fuel prices made other modes of transport cheaper. Therefore, a shift to other modes of transport also ate into its market share in freight transport. This dismal freight growth is staring at Indian Railways in the face. I would urge the Government to explain this overestimation of freight growth.
A point worth noting is that in the last 15 years, railway loading has increased on average 7% every year. While sluggishness in railway loading can be attributed to subdued economy, the reality is that we have had several years in the past when GDP growth was less than 5%.
For 2016-17, freight loading and freight earning growth is targeted at 4.5 per cent and 5.4 per cent, respectively. These figures are again dependent on whether the industrial demand improves in the coming months. We look forward to seeing how and when the Government lives up to the promise to expand the freight basket and rationalize the current tariff structure.
During April-December 2015, passenger traffic on IR declined by 1.9 per cent as compared to the same time last fiscal. Because of a steep cut in air fares and raining discounts, India's middle class which traditionally preferred distance trains is now open to the quicker and affordable air travel. This trend is likely to continue in the next fiscal as well which means railway passenger bookings will be under pressure. However, the targeted growth of 12.4 per cent in passenger earnings is very optimistic.
When Indian Railways could have provided better intermodal facilities at airports, they did not, despite having railway lines along many airports in the country. Now many transport options including luxury buses and taxis operate directly from and to airports and provide way better connectivity to and from nearby towns.
The dining cars are another open scam. On long-distance trains, everybody knows that they are used mostly for private business and at best for hot-cooked meals for IAC passengers; other meals are picked up from middle stations and kept in the doorways of coaches, next to the toilets, to be served to passengers.
There was an increase in Tatkal fares by 33 per cent in December, 2015. They increased the upper class rail fares by 4 percent in November , 2015. The Tatkal cancellation fares were also increased in the same month. Now, in the budget it was mentioned that there will be no fare hike.
More than two lakh vacancies are to be filled in the Railways. Nothing has been mentioned for filing these posts. Certain posts are important for ensuring safety of passengers and rail infrastructure.
The Railway Minister assured a "Zero Accident Regime". In 2013-14, 118 persons were injured and 54 persons were killed in rail accidents, while in 2015-16, the number of injured has gone upto 136 and those killed to 64. Immediate steps need to be taken to reduce the number of accidents in the railways. The budgetary allocation for replacing aged assets has gone down from Rs. 5,500 crore to Rs. 3200 crore while appropriating funds. This is not in the interest of passenger safety. There are 10,000 unmanned crossings all over the country.
Apart from installation of CCTV cameras, it is very important that these CCTV camera actually function and the CCTV footage is actively monitored. Apart from that, steps need to be taken to increase safety in overnight trains and in ladies coaches.
The Budget announced Antyodaya Express and Deen Dayal Coaches, in memory of former Jan Sangh leader Deen Dayal Upadhyay. These will be long-distance, fully unreserved, superfast train service for the common man, to be operated on dense routes. I believe these are just new names for Duronto and Garib Rath expresses started by the UPA. Hamsafar, Tejas and Uday services also look like repackages of old trains and facilities.
The Budget mentioned: We will exploit new sources of revenue so that every asset, tangible or non-tangible, gets optimally monetized. I would urge the Government to be more specific and explain what new sources of revenue the Ministry is looking at.
It is very important to focus on these alternate revenue sources for expansion and modernization of Indian Railways. Increasing freight and passenger fares shouldn't be the only avenues for increasing railway revenues. The effect of constantly rising freight prices has been visible in the decreasing share of railways in goods transport. Getting more non-fare revenue - from advertising, for instance - is another priority area for railways, though the progress on this has been slow and information from the Government less.
There has been no real ground work done in the stations meant to be developed as adarsh stations. I would urge the Government to look into this scheme and conduct a ground study of what all civic amenities have actually been provided and maintained under this scheme.
I would now like to list down issues which are of utmost importance to common passengers and determine their railway experience :
Unclean stations : The bigger the station, the filthier it is, with water and garbage on platforms and human excreta on the tracks.
It is a big put off for travelers who have only learnt to live with situation since it simply hasn't changed at many stations despite the ongoing Swachh Bharat Abhiyan. Its a major drain on the resources too, but even money hasn't been able to make a difference. Western Railways alone reportedly spends nearly Rs. 3.5 crore every year to keep its stations as well as trains clean. Last December, the National Green Tribunal slammed a fine of Rs. 5 lakh on the railways for failing to keep the New Delhi Station's tracks clean. The NGT said that it was beyond comprehension why railways failed to perform a merely supervisory function since contractors had been engaged for cleaning tracks and platforms. The tribunal also warned that it will impose a fine of Rs. 1 lakh per day if things don't change.
Unclean toilets on trains :Stinking toilets have been the bane of the railways for a long time. The Railway Minister announced in the 2016-17 budget the cleaning of toilets by request through SMS. Only time will tell whether this will work or not.
The conventional toilets' basic design has itself been problematic. That itself leads to stench and filth in the toilets apart from the dumping of faecal matter directly on to the tracks. The IR has been experimenting with various technologies to counter this particular problem, because of which Indian trains now have three different kinds of toilets, the conventional ones, bio-toilets and Control Discharge Toilets.
The latest stress is on "bio-vaccum toilets" that send the flushed-out waste into a tank underneath the coach. The tank contains bacteria that turn faecal matter into water and gas, which is then discharged on the ground or tracks. Let us hope this new technology will free the toilets on our trains from stench and filth.
Train delays : Any frequent traveler on India's trains will find it hard to instinctively agree to the Government's claim that it turns 78% trains on schedule. The Government gets this number by calculating punctuality after a train has completed its journey. It does not factor in delays before completion, which is a major error since many trains run late on several hours and make up for the delays towards the end, reaching the destination on time. Most common factors that delay trains include capacity constraints because of increasing traffic, weather conditions like fog and rains, heavy road traffic at level crossings and run-over cases at these crossings.
IR has also admitted that equipment failure like signal malfunction, rolling stock breakdown, overhead equipment failure etc contributes to punctuality loss in a big way. However, railway engineers do not accurately report all such instances.
Food on trains : Some of IR's longest routes stretch up to 72 hours, underlining the need for good catering facilities on-board. Even for shorter distances, it is common for passengers to travel for 12 to 20 hours at a stretch several times a year. However, the quality of the food and drinks that railways makes provision for leaves much to be desired.
The menu is standard and the food is of low-quality. Tales of uncooked chapatis, semi-cooked rice, stale veggies and infection-inducing chicken curry are common. A visit to the pantry coach is bound to kill any appetite right away. IR has recently begun tying up with restaurants, taking orders on-board and picking them up at stations. It is still at early stages and makes no difference on direct routes that have only technical stops.
Lastly, I would want to request the Indian Railway to consider following demands for Maharashtra and Baramati Constituency:
1. Women's coaches started decades ago. We are witnessing one women coach in all the passenger trains. With changing time, number of women passenger has increased considerably, I request to consider increasing number of woman coaches in passenger trains.
2. At present, Pune-Lonavala suburban zone is functional. Pune is the 7th Metropolitan city in the country. However, the horizons of Pune are expanding rapidly due to heavy influx of people from all regions of the country due to heavy influx of people from all regions of the country due to employment opportunities and good educational facilities. As such, Pune is growing rapidly towards Lonavala, Daund, Saswad and Jejuri areas. People prefer to stay in sub-urban areas due to comparatively cheaper availability of land and residential premises in the suburban areas. In view of this, it has become necessary to declare Pune-Daund section as suburban zone similar to Pune-Lonavala section to provide DMU services to the commuters from this region under Pune Division.
3. Daund Junction is a railway junction on the Mumbai-Chennai railway line located in Pune district in Maharashtra. Daund junction is a major stop for Passenger trains and is a major freight hub. Just like Lonavala many people travel from Daund to Pune City for work. This route was proposed for convenience of people of Daund and the villages like Patas/Kadethan/Kedgaon/Khutbav/Yevat/Uruli Kanchan/Loni/Manjri/ Hadapsar on this route. Instead of suburban trains, four shuttle trains operate on this route between Pune and Daund and though trains like Pune-Baramati shuttle, Pune-Manmad passenger, Pune-Nizamabad passenger and two shuttle trains between Pune to Solapur are useful but they are insufficient for people on this route to access Pune City.
4. MST (Monthly Season Ticket) is issued only up to 150 km. We strongly request to increase the limit up to 500 km so that it will be beneficial to the passengers.
5. The doubling between Daund-Manmad is also now very necessary as the electrification work is almost completed. Presently there is a single track and many of the Superfast and Express trains run daily in between this section causing very heavy traffic, due to the holy place of Shri Sai Baba at Shirdi.
6. The Baramati is nearby Daund and Pune. It will become very affordable to travel by train if the triangle of Daund, Baramati and Phaltan gets connected. Some of the trains will pass through this route towards Kolhapur side and will save time and money. Hence it is very necessary to do the Second Track along with electrification between Daund-Baramati.,
7. There is a need to re-develop the Jejuri Railway Station the holy place of Maharashtra under Indian Railway Stations Development Scheme.
*कुँवर पुपेन्द्र सिंह चन्देल (हमीरपुर): विगत 25 फरवरी, को 2016-17 को रेल बजट हमारे माननीय नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व वाली राजग सरकार के रेल मंत्री माननीय सुरेश प्रभू जी ने प्रस्तुत किया है वह देश को सही दिशा में ले जाने वाला बजट है, रेल देश को मजबूती से जोड़ रखने वाला विभाग है जो कम से कम खर्च पर देशवासियों को सुव्यवस्थित, सुरक्षित आवागमन का यथा सामर्थ्य संसाधन सुलभ कराता है।
डिमांड फॉर ग्रांट्स पर चर्चा पर मुझे आपने सम्मिलित किया, आपका प्रकट करता हूं। अनेक माननीय सदस्यों ने विस्तार से बजट की मांगों पर चर्चा की है। मैं किसी भी बात को दोहराकर सदन का महत्वपूर्ण समय व्यर्थ न करते हुए सीधे अपने संसदीय क्षेत्र की मांगों की ओर माननीय रेल मंत्री जी का ध्यान आकर्िात करना चाहता हूं।
सर्वप्रथम मैं माननीय प्रधानमंत्री जी रेल मंत्री जी एवं रेल राज्य मंत्री जी का अपने संसदीय क्षेत्र के समक्ष माननीय नागरिकों की ओर से आपाक अंतर्मन से आभार प्रकट करता हूं कि आपने हमारी बहुत बड़ी मांग, बहुप्रतीक्षित मांग महोबा-चरखारी-राठ-उरई नई रेलवे लाईन को 2016-17 के रेल बजट में शामिल करके मरे हमीरपुर संसदीय क्षेत्र की जनता पर उपकार किया है। साथ ही साथ, आपने झांसी-मानंदपुर एवं खैरादा-भीसने रेलवे लाइन का दोहरीकरण किया है उक्त संपूर्ण 411 किमी के खंड का दोहरीकरण 2016-17 के बजट में शामिल करके मेरे ऊपर मेरे क्षेत्र के सम्मानित नागरिकों के ऊपर उपकार किया है, पुनः आपका आभार प्रकट करता हूं।
उत्तर प्रदेश में सर्वाधिक बजट मेरे हमीरपुर महोबा तिदंवारी संसदीय क्षेत्र को रेल मंत्रालय ने देकर अकालग्रस्त बुन्देलखंड के हमारे अन्नदाता किसानों के चेहरे पर प्रसन्नता का कारण दिया है, उम्मीद की किरण जगाने का काम किया है। समयाभाव के कारण अंत में केवल यह मांग करते हुए हमें अपनी बात पूर्ण करनी है कि उक्त दोनों कार्य शीघातिशीघ्र प्रारंभ करने की दिशा में संबंधित अधिकारियों को निर्देशित करने का कट करें जिससे कि इसी वाऩ कार्य प्रारंभ होने की आवश्यकताएं पूर्ण हो सकें और 4-5 वाऩ के अंदर डबल लाइन एवं महोबा चरखारी राठ उरई नई रेलवे लाइन बनकर तैयार हो सके और मेरे क्षेत्र के नागरिक नई रेल लाइन एवं नई ट्रेनों की सुविधा प्राप्त कर सकें।
माननीय मंत्री जी अंत में निम्न मांगों को रखना चाहता हूं, जिन्हें पूर्ण करवाकर शीघ्र सुविधा प्रदान करने का कट करें।
· खुजराहों से महोबा मरौंध-खैरादा-रागौल-सुमेरपुर-कानपुर होकर लखनऊ तक नई ट्रेन चलाई जाए।
· उज्जैन से अयोध्या तक एक नई ट्रेन वाया भोपाल टीकमगढ़ छतरपुर महोबा मौदहा हमीरीपुर कानपुर लखनऊ चलाई जाए।
· खुजराहों से नई दिल्ली एक नई ट्रेन चलाई जाए। · बेतवा एक्सप्रेस, गरीब रथ, तुलसी एक्सप्रेस, चम्बल एक्सप्रेस को दैनिक किया जाए।
पुनः धन्यवाद देकर अपनी बात पूर्ण करता हूं कि आपने मेरे क्षेत्र को 90 किमी की नई रेल लाइन हेतु 1800 करोड़ रुपये एवं दोहरीकरण 411 किमी हेतु 3000 किमी करोड़ रुपये देकर हमारे हमीरपुर की जनता का सपना पूरा करके उपकार किया है।
रेल मंत्री (श्री सुरेश प्रभु): सभापति जी, सबसे पहले आपको और हमारे जिन साथियों ने रेलवे की डिमांड्स फॉर ग्रांट्स पर अपने विचार रखे हैं, मैं उन सबको धन्यवाद देता हूँ।
हम सब लोग जानते हैं कि रेलवे इस देश की सम्पदा है और इस नाते सबका हक बनता है कि रेल ठीक तरह से कैसे चले, इस पर अपने विचार रखे। पप्पू यादव जी तो इस पर और ज़ोर देना चाहते हैं, यह अच्छी बात है।
मैं समझता हूँ कि रेलवे को ठीक करने के लिए एक स्ट्रैटजी की जरूरत है। सभी लोगों के समर्थन की आवश्यकता है और राजनीति से हटकर रेलवे की ओर देखने की भी जरूरत है। इसलिए रेलवे को ठीक तरह से चलाने के लिए प्रधानमंत्री जी के मार्गदर्शन में दो वर्षों से इस ओर लगातार काम करने का प्रयास किया है। मुझे यह कहने में खुशी है कि हमारे देश के ये पहले प्रधानमंत्री हैं, जो पूरी तरह से रेलवे को लेकर देश का विकास कैसे हो सकता है, इस बारे में सोच रहे हैं।
इसलिए आज मैं जिस विषय पर बात करूँगा, वह केवल आज के लिए ही करने वाली बात नहीं है। हमारे पास पाँच वर्षों का एक क्लीयर कट प्लान है। इसके साथ ही, यह केवल पाँच वर्षों तक ही सीमित नहीं है। आगे आने वाले पाँच-दस वर्षों में रेल किस प्रकार से चलेगी, उसके बारे में भी हम कार्रवाई कर रहे हैं। जैसे कि योगी आदित्यनाथ जी ने कहा कि विज़न 2030 पर भी काम शुरू है और वह विज़न क्या है, उसे मैं आपको सिर्फ एक मिनट में बताना चाहता हूँ। श्री खड़गे साहब ने सही कहा कि बहुत-से प्रोजेक्ट्स की शुरुआत की गयी, उनका एलान किया गया, उनके लिए हम बजट में प्रोवीज़न करने में असमर्थ रहे। उसके कारण ऐसे बहुत-से प्रोजेक्ट्स हैं, जो समय पर पूरे नहीं हो पाये। उसकी वजह यह भी है कि हमने जब एलान किया तो हमने सोचा कि शायद यह मेरे लिए अच्छा प्रोजेक्ट है। इसमें गलत कुछ नहीं है। हर सांसद, जो यहाँ पर चुनकर आता है, वह चाहता है कि मेरे चुनाव क्षेत्र में कुछ काम हो और यह सही भी है। लेकिन, देश के सामने जो नक्शा होना चाहिए कि रेलवे किस तरह से बढ़े, उसके लिए पूरी तरह से कैसी प्लानिंग हो, उसे करने में हम आज तक सफल नहीं रहे। इसलिए हम वर्ष 2030 का प्लान बना रहे हैं। यह प्लान कैसे बनेगा? यह प्लान सिर्फ रेल मंत्रालय में नहीं बनेगा। इसे बनाने के लिए सभी राज्य सरकारें, सभी सांसद, देश में रहने वाले हमारे जो अलग-अलग स्टेक होल्डर्स हैं, उसमें सभी को सम्मिलित करके हम रेलवे का यह प्लान बनाएंगे। जब यह प्लान बनेगा तो वह सिर्फ पाँच साल तक ही सीमित नहीं रहेगा, यह 2030 का प्लान होगा। यह देश के लिए देश का प्लान होगा। इसे हमारी सरकार जरूर बनाएगी, लेकिन हम देश के प्लान के तहत उसे पूरे देश के सामने रखेंगे। इसके लिए मैंने एक प्लान बनाने की शुरुआत की है। इसके लिए मैं सबको धन्यवाद देना चाहता हूँ कि आप सबने इसमें सम्मिलित होकर मुझे अच्छे-अच्छे सुझाव दिये। उन सुझावों के ऊपर किस तरह से कार्रवाई की जाए, इसके बारे में हम जरूर सोचेंगे। मुझे मालूम है कि यह बजट जब हमने बनाया तो जैसा कि मैं कह रहा था कि जिस तरह से हम काम कर रहे हैं, यदि इसी रफ्तार से, इस दिशा में हम काम करते रहेंगे तो हमारी जो उम्मीदें हैं, जिनके बारे में सभी लोगों ने चर्चा की, उसे हासिल करने में हम सफल रहेंगे। यह असलियत है। आज भी आप देखेंगे कि लोगों की मांग और उसकी आपूर्ति में बहुत बड़ा अंतर है। आज लोगों की जितनी डिमाण्ड्स हैं, हम उनको पूरा नहीं कर पाए हैं। इसलिए हमें किसी भी हालत में नए तरीके से सोचना होगा, इसीलिए बजट में हमने कहा था कि हम कुछ नया करेंगे और नया करने के लिए हमने कहा था कि अगर करेंगे तो चलो मिलकर करेंगे। हमने यह नहीं कहा था कि हम ही करेंगे, आप देखते रहिए। हम सब मिलकर इसे नया बनाने के लिए कुछ काम करेंगे और उसका मकसद है - re-organize, re-structure and rejuvenate the Indian Railways. उसके लिए हमने ऑब्जेक्टिव्स भी रखे थे, मैं सारी बातें दुबारा नहीं बताना चाहता हूं, लेकिन न्यू रेवेन्यूज आने चाहिए, न्यू नॉर्म्स होने चाहिए और न्यू स्ट्रक्चर्स भी बनाने चाहिए। इसीलिए बजट में हमने कई अलग-अलग चीजों पर बातचीत की थी, मैं उसको दुबारा नहीं कहना चाहता हूं, लेकिन यही कहना चाहता हूं जो बातें इस बजट में कही गयी हैं और जो पिछले बजट में कही गयी थीं, उनमें कुछ फर्क तो जरूर है। लेकिन इनमें एक तरीके का थीम भी है, जिसे लेकर हम चल रहे है। वह थीम है - रेल को ठीक करना। इसीलिए हमने बजट में कहा था कि पिछले बजट में हमने जो बातें कही थीं, जिनका जिक्र आदित्यनाथ जी ने किया था, कि हमने जो बातें कही थीं, उन पर क्या एक्शन लिया गया, उससे अवगत कराने के लिए पहले ही सदन में एक्शन टेकेन रिपोर्ट दी है। रेल के इतिहास में पहले एक्शन टेकेन रिपोर्ट नहीं दी जाती थी, उसे देने का काम हमने इस बार किया है।
मैं मानता हूं कि यह हमारा उत्तरदायित्व है कि लोगों को पता भी चलना चाहिए कि किस तरह से हम काम कर रहे हैं। इसके लिए हमने 139 प्वाइंट्स पर क्या किया है, वह बताया है। इसी तरीके से 25 फरवरी को बजट सदन के सामने प्रस्तुत हुआ, आप सभी ने उसका स्वागत किया, उसके लिए धन्यवाद देता हूं। उस बजट पर 26 फरवरी को हमारे चेयरमैन रेलवे बोर्ड और रेलवे बोर्ड के सभी सदस्यों ने मीटिंग करके प्रत्येक एक्शन प्वाइंट पर किस तरह से काम हो सकता है, उसके बारे में काम करने की शुरूआत भी की। इसलिए मुझे लगता है कि हमने जिन सात मिशन्स की बात की है, उनमें से पहला है - मिशन 25 टन एक्सल लोड है, जिससे उसी रोलिंग स्टॉक पर हम ज्यादा से ज्यादा माल वहन कर सकेंगे, उससे हमारा रेवेन्यू बढ़ेगा। मिशन जीरो एक्सीडेंट, जो खड़गे साहब ने कहा कि एक लाख करोड़ रुपये का मैं बताता हूं कि क्या हुआ। मिशन पेस, जिसमें प्रोक्योरमेंट और कन्ज्मप्शन एफिशिएंसी भी आनी चाहिए। जब तक हम कॉस्ट कटिंग नहीं करेंगे, सिर्फ रेवेन्यू बढ़ाएंगे और खर्च ऐसे ही चलता रहेगा तो शायद यह सिलसिला कभी खत्म नहीं होगा और हम कभी सफल नहीं हो पाएंगे। इसीलिए हमने प्रोक्योरमेंट और कन्ज्मप्शन एफिशिएंसी पर ध्यान दिया। मिशन रफ्तार, हाई स्पीड ट्रेन्स किस तरह से चलें। इसमें हमने यह कहा था कि सिर्फ बुलट ट्रेन ही नहीं, देश में चलने वाली आम ट्रेन की भी स्पीड कैसे बढ़े। ...(व्यवधान)
मैं बुलट ट्रेन के बारे में बताता हूं। लेकिन सब कुछ बढ़े, यह भी हमारी राय है। मिशन 100 साइडिंग और फ्रेट टर्मिनल और मिशन बियॉण्ड बुक कीपिंग। मैं समझता हूं कि आप सभी के साथ मिलकर कर सकते हैं। हम लोग क्या करते हैं? We are representing the people of India. Each person wants to know how the money earned by the Government is spent for the people. So, we need to change the country’s system. We must go for the outcomes and not just be interested to know that whether we have spent the money or not. Therefore, outcome oriented accounting that is what we should initiate and for that, we have launched some mission and also mission capacity utilization. फिर मिशन कैपेसिटी यूटिलाइजेशन है। मुझे खुशी है कि इन सभी चीजों पर हमने कार्रवाई करने की शुरूआत की है। मैं यह नहीं कहूंगा कि 25 फरवरी को बजट पेश हुआ और आज हमने पूरा खत्म कर दिया। यह एक साल का बजट है, लेकिन उसकी शुरूआत जरूर हुई है। जैसे एक चीनी फिलोसॉफर ने भी कहा है :
“First step is the beginning of a long march.” अगर पहला स्टेप नहीं करेंगे तो लाँग मार्च तक कैसे जाएंगे। इसलिए हमने स्टेप्स की शुरूआत की है। खड़गे साहब ने पूछा था कि आपने काम क्या किया है, सब हम लोगों ने किया था। खड़गे जी, मुझे खशी होती यदि आप सब काम करके छोड़ते तो मेरे लिए कुछ भी नहीं रहता और लोगों की शिकायत भी नहीं रहती। सब पूरा का पूरा काम देश में खत्म हो गया होता तो कितनी अच्छी बात होती। लेकिन यह बात भी सही है कि लोगों की मांग बढ़ती रहती है, उसके लिए काम करते रहना होगा। आपने जो किया, वह भी अच्छा है, लेकिन और भी अच्छा करने की हम कोशिश कर रहे हैं। इसलिए मैं आपसे कहना चाहता हूं कि हमने वर्ष 2015-16 में 973 किलोमीटर की डबलिंग की थी। मैं अपने सरकार की बात बता रहा हूं, पीछे की बात नहीं कह रहा हूं। वर्ष 2016-17 में हमने 1600 किलोमीटर डबलिंग का काम किया। पिछले साल हमने 813 किलोमीटर न्यू लाइन्स का काम किया। गेज कन्वर्जन में हमने 1042 किलोमीटर काम किया, अगले साल में हमारा टारगेट थोड़ा कम है क्योंकि गेज परिवर्तन का काफी काम भी पूरा हो रहा है। So, this is the reality that we are actually doing something. मैंने जो फिगर्स बोली थी, उसमें 2015-16 एक्चुअल और 2016-17 प्रोजेक्टेड फिगर्स हैं। इसमें कुछ मिस्टेक हो गयी। वर्ष 2014-15 में हमारे पास डबलिंग प्रोजेक्ट्स पर 3881 करोड़ रुपये खर्च किये थे, वर्ष 2015-16 में हमने उसके लिए 9007 करोड़ रुपये का प्रावधान किया। उसको हमने बढ़ाकर 9 हजार करोड़ रुपये किया और वर्ष 2016-17 में 25119 करोड़ रुपये का प्रावधान है। So it is not coming down. In fact, it has increased manifold, and, therefore, it is not correct to say that doubling has come down. It is, in fact, 250 per cent more than the previous year.
Electrification, last year in 2014-15 in our own Government, was Rs.1,391 crore. The physical achievement was Rs.1,375 crore. In 2015-16, we increased the amount to Rs.2,265 crore and increased the physical achievement to 1,730 kilometres. In 2016-17, the target is 2,000 kilometres and increased the allocation to Rs. 3396 crore. So, this is the reality. I will come to Capex a little later.
खड़गे साहब ने पूछा था about depreciation fund, etc. I will explain to you. Rs.1 lakh crore safety fund is something which we mooted in about 3-4 months back. You are right. I will tell you why it is necessary. The idea is that if we can remove the unmanned level crossing, which is one of the main reasons for accidents, we will be able to reduce the fatalities, casualties in a big way. To do that, we need a kind of non-lapsable fund because the work that goes on does not end necessarily within the financial year. It is going beyond. So, we are thinking of creating this fund. We have already sent the proposal to the Ministry of Finance. We are trying to leverage this with some sort of a security surcharge. But we will definitely be working on that, and this is something which I am sure, all of you would also like to support. This will be a major thing that can help us to do this.
In this year itself we are setting up Shreshta, a dedicated research and development organization to invest in future. Today’s problem can be addressed by today’s strategy but those problems will also get aggravated if we do not invest enough in future at today’s time, and, therefore, we are working on it. We are also creating a Railway Planning and Investment Organisation. Also, we are thinking about restructuring the organisation by merging some of the cadres. Reorganisation of the Railway Board, delegation of powers—all of this is necessary to meet the new challenges of Railways. We have very good people. We have talented, committed and dedicated people but they must work as a team and if the organizational structure is coming in the way, we must find out the ways of doing it. That is why, we are doing it.
We are also working on expanding freight basket. We are also rationalising tariff structure, and for the first time, as he mentioned, we did not increase even the freight rate because normally the freight was always the casualty because we wanted to increase the revenue, the freight had to pay for it, and, as a result of which it was like losing a golden egg giving hen because we are losing the revenue from freight. So, we have decided to reduce it and also review the primary rules for making projects.
I am very happy to say that many of these things are now already under functioning. I wanted to mention something now before I give the figures to Kharge Saheb. He had asked me a very valid point regarding depreciation fund and development fund. I will tell you about that. But what has happened is, all these funds were created many, many years ago, probably, 50-60 years ago. We are following the same system. Now what has happened is, let me explain to you about development fund or depreciation fund, whatever it is. Development fund is used for some of the developmental works like traffic facilities, etc. But now if you only confine yourself to doing developmental work from development fund, then we cannot spend any amount of money. Most of the development now takes place out of capital expenditure. So, what you should really compare is not the development fund alone. But you must compare the entire basket of how we are going to incur the capital expenditure and that has improved dramatically. Next year the provision is Rs.1,21,000 crore. So, I am sure you will be happy to know that.
I will come to the Capex. But before that, I have only two points which many of the Members mentioned. We are starting for the real poor common people of India Antyodaya Express which will be fully unreserved super fast service. We are already working on the planning of it, how that should be branded and how the product should look like but this will be to benefit the common people of India. We are also starting Deen Dayalu coaches which will be unreserved coaches with potable water and higher number of mobile charging points. Hum Safar is fully air-conditioned third AC service with optional choice for meals. हम जो खाना खिला रहे हैं, वही खाने की जरूरत नहीं है, अगर आपको खाना खाना है तो उसके अलग से दाम देने पड़ेंगे। इसके दाम टिकट में इनक्लूड नहीं होंगे।
18.00 hours Tejas will really be showcasing the future travel in India. It will operate at the speed of 130 kilometres and above per hour. It will be one service provided ensuring accountability and improved customer satisfaction. Hamsafar and Tejas will work on cost recovery basis. Obviously, this will be a little premium product.
हमारी दिल्ली टू आगरा गतिमान ट्रेन चल रही है। उदय ट्रेन रहेगी, जो ओवरनाइट डबल डैकर एयरकंडीशन यात्री एक्सप्रैस रहेगी और उसमें हमारी कैरिंग कैपेसिटी चालीस प्रतिशत से ज्यादा होगी। यह भी हम सब कर रहे हैं। मुझे पता है कि इसका फायदा हमारे देश के लोगों को होगा, जो आम जनता सफर करती है, उन्हें होगा।
माननीय सभापति : माननीय मंत्री जी, एक मिनट रुकिये। क्योंकि छः बज गये हैं, जब तक यह बजट पास न हो जाए, तब तक के लिए सदन का समय बढ़ा दिया जाए, क्या आप लोग इससे सहमत हैं?
अनेक माननीय सदस्य : सहमत हैं।
श्री सुरेश प्रभु : सर, खड़गे साहब कह रहे हैं कि अभी पास कर दीजिए। जिस तरह से लोगों ने कहा कि 400 स्टेशन का रीडैवलपमैन्ट करने के लिए हमने बात की थी। मुझे यह कहने में खुशी है कि पहला टेंडर हमने हबीबगंज का इश्यू कर दिया, काम की शुरूआत हो जायेगी, साथ ही छः-सात स्टेशंस के लिए काफी एडवांस काम हो रहा है, बाकी के जो 400 स्टेशंस हैं, उनके लिए राज्य सरकारों के साथ बात हुई है। गुजरात, महाराष्ट्र जैसे बहुत से राज्य उसमें आगे आने के लिए तैयार हैं। ओडिशा ने कहा है कि हम उसमें आने के लिए तैयार हैं, कर्नाटक के सीएम के साथ भी उसके बारे में बातचीत हुई है।
देश की पहली रेल युनिवर्सिटी बनाने के लिए हमने काफी काम किया है और देश की पहली रेल यूनिवर्सिटी हम वडोदरा में बना रहें हैं, जहां आज हमारा एग्जिस्टिंग इंफ्रास्ट्रक्चर है, बहुत अच्छा इंफ्रास्ट्रक्चर है, यह वहां कम से कम कास्ट में बनेगी। यह काम करने का भी हमने तय किया है।
उसी तरह से अलग-अलग जगहों पर जो हमारे तीर्थस्थान हैं, वहां भी रेल को अच्छी तरह से चलाने, जोड़ने और उस पर काम करने की जरूरत है, उसके लिए भी हमने काम करने की शुरूआत की है। इसके कुछ और भी सुझाव होंगे, जैसा कि आपने कहा, ऐसे सुझावों पर भी हम जरूर विचार करेंगे।
खड़गे साहब ने कैपिटल एक्सपेंडिचर के बारे में पूछा था। मैं कहना चाहता हूं कि इस साल हमने आलमोस्ट 94 हजार करोड़ रुपये का कैपिटल एक्सपेंडिचर किया है और उसमे हमने डबलिंग प्रोजैक्ट के ऊपर, जैसा मैंने कहा कि नई लाइंस के ऊपर रोड सेफ्टी वर्क्स पर ज्यादा से ज्यादा खर्चा यहां हुआ है। मुझे यह कहने में खुशी है कि आपको पता होगा कि जो रेल का इंफ्रास्ट्रक्चर है और खर्चा करने की जो क्षमता है, वह काफी मात्रा में सीमित भी हैं, क्योंकि अभी तक रेल ने 40-45 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा खर्चा कभी नहीं किया। यदि हमने इतनी बड़ी मात्रा में खर्चा करना है तो उसके लिए अलग-अलग स्ट्रक्चर की भी जरूरत होगी। हमने ग्लोबल प्रैक्टिसेज को ध्यान में रखते हुए जो हमारे इरकॉन, कोंकण रेलवे, राइट्स और आरवीएनएल जैसे पीएसयूज हैं, इन सभी को हमने कहा कि आप भी यह काम इम्पलिमैन्ट कीजिए और उसके लिए हमने उन्हें मोबिलाइजेशन एडवांस भी दिया है। एडवांस इंटरनेशनल प्रैक्टिस है, कांट्रैक्ट देते हैं तो उसका एडवांस भी देते हैं। इस तरह से वह काम आगे आने वाले दिनों में ज्यादा बढ़ता रहेगा और मुझे खुशी है कि यदि हम इसी तरह से काम करेंगे तो बहुत सारे लोगों की जो अपेक्षाएं हैं, उन्हें पूरी करने में हम कामयाब रहेंगे।
सर, डेप्रिसिएशन रिजर्व के बारे में खडगे साहब ने पूछा था। In 2014-15, while the appropriation was Rs.7,975 crore, expenditure was Rs.7,287 crore. Last year, 2015-16, the appropriation was Rs.5,700 crore and the expenditure is Rs.7,300 crore. This year, 2016-17, you are right that the appropriation is Rs.3,400 crore but we are going to spend Rs.7,160. The balance of Rs.4,000 crore will be met through sale of scrap. As you know, there are certain rules, which govern this.
Let me just go to the next point which you mentioned is Development Fund.
SHRI MALLIKARJUN KHARGE (GULBARGA): I can see only the Budget. I cannot expect as to what you are going to do outside the Budget. So, I just mentioned whatever you have given in the Budget. If you are going to get money from outside this, I do not know about that.
SHRI SURESH PRABHU: I am not blaming you. I am just trying to explain it to you. This is not a scoring of point that I am right or you are wrong. I am not saying like that. I am just telling you the reality. Therefore, I would like to go to the Development Fund.
Sir, core railway development is normally undertaken through CAPEX. Development Fund was a concept which was devised maybe decades ago. At that time, the only money that was available for spending on capital expenditure was Development Fund. Now, we have gone through a huge evolution. We are now spending Rs. 1,21,000 crore for CAPEX. What is the Development Fund? Please do not misunderstand me. The idea is not to … (Interruptions) I am just telling. … (Interruptions) But do not draw the conclusion that it is inadequate to meet the demand.
What I am saying is that the total demand is far in excess. Even if you provide another Rs. 5,000 crore, as you are saying, it is not going to be enough. We need Rs. 1,21,000 crore. That is why, we are providing it in a different way and we are doing that. I am saying that the CAPEX source has increased by 63 per cent in 2015-16 and I expect it to rise further by 25 per cent. It is a major source which takes care of development.
The same thing is there with respect to the rolling stock. You said that less provision is made for the rolling stock. Sir, I want to tell you the number. There was a provision of Rs. 16,490 crore for rolling stock in 2014-15. In 2015-16, it was Rs. 19,088 crore. In 2016-17, it is Rs. 27,278 crore. Where is it coming from? It is coming essentially from EBR, extra-budgetary resources, like bonds etc. It is not like that now. We realized it a long time back, including in your time, that for rolling stock financing, we have to find out some sources outside the Budget. That is why, we went to IRFC. The IRFC is finding funding for this. Therefore, we are trying to do it from these sources. So, in 2016-17, Rs. 21,830 crore will be spent from IRFC money. This is the total amount and that is why, it is mentioned here.
If you look at the overall CAPEX number, in 2014-15, the GBS was Rs. 30,121 crore which increased to Rs. 37,745 crore in 2015-16 and in 2016-17 – my colleague Finance Minister has been very kind – we have gone to Rs. 45,000 crore and we are hoping to even increase it. Internal resources, which were Rs. 15,347 crore in 2014-15, have gone up to Rs. 16,574 crore in 2015-16 and it is almost the same at Rs. 16,675 crore for 2016-17. EBR has dramatically improved from Rs. 11,000 crore to Rs. 39,476 crore this year and to Rs. 59,325 crore next year. So, please try to understand the amount of money we are spending on this and to make this happen, I want to tell Shri Kharge – if he wants, only one number – that in 2013-14, the year this Government was formed, the opening balance in the Depreciation Fund was Rs. 16 crore. If you are saying that we are doing something which should have been done more, you may please look at the Depreciation Fund which has gone up from Rs. 16 crore to Rs. 1,021 crore in 2014-15 and Rs. 1,777 crore this year. Please try to understand that these are the challenges, but do not try to find that this is not done. This is the problem of the Railways and we have to solve it together. Therefore, we must work on it. If you want numbers, these are the published numbers in the Budget itself.
Sir, some hon. Members, including Shrimati Supriya Sule, asked why we should not do more RUBs and ROBs. From 2009 to 2014, the average number of ROBs/RUBs that were constructed were 762 per year. We increased it to 1,024. In fact, on unmanned level crossings, from 2009 to 2014, 1,139 were eliminated. We increased it to 1,253 in 2015-16. This is what we are trying to do to find out how we can actually increase it.
Shri Kharge, you did not raise this point, but just for the information of the House, I may tell why it is necessary to raise the money from extra-budgetary resources. Sir, you yourself pointed out about the Railway finances. I told you the opening balance of Depreciation Fund for 2013-14. This money is not sufficient to meet the growing demand. How do you find more money? Can we increase the passenger fare to that extent? Can passengers pay Rs. 1,21,000 crore a year? Can we put that burden on the freight handlers and make it more uncompetitive and thereby, lose our share? We have to find out money not only from internal sources and not only from GBS because even GBS money is borrowed by the Finance Ministry from the market. We have to find out money which Railways can raise and Railways can service. It is not the Railways only which is doing it. Even the Metro, which you talked about, is raising money from the market. All infrastructure projects need money from the market and therefore, we are doing it.
But what is the global issue here? In Germany, the liability of loan is far far more than ours. The Indian Railways ratio is not even 17 per cent including the future borrowings. In Germany, it is 31.53 per cent; in France, it is 55.91 per cent; in Russia, it is 19 per cent; of course, in Japan, it is 32.4 per cent; and in China it is huge. In fact, I do not want to mention the number, but I am telling you this point because we are doing everything to make it possible to make sure that we raise money, create infrastructure and make Railways better. It is because if we do not do anything, then we can answer that question. Suppose, we do not do anything at all, then will the Railways be better? We have to find money to do something. You have asked for money for your State. Obviously, where is the money going to come from? Therefore, when the Kerala Chief Minister met me, he told me that we want money from whatever source because we cannot get it. Where do you get the money? You have to get money from somewhere and that is why we are spending this money on the States. I will come to it later as to how much more the States have got more than any time else.
So, to make this happen, there have been certain old practices of governing, which we need to revisit. I am announcing today that we will be reviewing the financing norms for project financing to bring them in line with best practices. We are introducing the concept of equity IRR and debt service coverage ratio to ensure that returns are evaluated in a holistic manner. Today, when we do the so-called IRR calculation, we say that this particular line is okay, but signalling will not be an IRR. Now, tell me this. Can you run a Railway without signalling? I was giving an example to some of my colleagues that if we construct a 30-storeyed building, then for each apartment you can calculate the IRR and say that each apartment is an IRR because I can sell and get money. But can you sell an apartment after the 10th floor without an elevator? On elevator, one will say that I cannot calculate IRR because elevator is not part of the apartment. Can you sell an apartment in that building? So, we are revisiting all these issues. I am sure that Shri Kharge will agree because this is a practice that even you followed. So, we are trying to change it to make it better and do it.
Another point came up and Shri Kharge very eloquently mentioned about high-speed Railway. First of all, I want to make one point clear. High-speed Railway has many components. So, we are trying to increase the speed of all Railway operations. When we started Gatiman, nobody said that Gatiman is at the expense of other trains. When we are starting Humsafar or Tejas, it is not going to be at the expense of other trains. The idea is to increase the average speed of all the trains.
How do you do it? When we move the traffic of goods from present tracks to dedicated freight corridor, the capacity will increase. We are investing this capital expenditure for removing bottlenecks; for augmenting capacity; and for making signalling better. I know how my friends in UP and Bihar are suffering because all the trains coming from Kolkata to Delhi get delayed because they pass through one of the most congested networks in the world. Therefore, to decongest it, we need to invest money. So, once all this happens, this will be actually increasing the speed of those common people who are suffering today.
I would like to ask one more thing. We have never talked about bullet trains or we started it only recently, but we are blamed for it. Why are the common people suffering? Is it because of bullet train? If bullet train is the cause of the problem, then why were they suffering even before the bullet trains were announced? So, it means that this is a completely independent project and this has nothing to do with the average person. In fact, that is our priority, that is, to increase the speed of the trains. … (Interruptions)
So, what we are doing is that we are definitely trying to increase the average speed of all the trains including passenger trains. We want to make sure that they travel in a much better way. This is our priority. Our priority, as the Prime Minister says, is the commonest of the common man and we will try to work for them. While we do this high-speed Railway project, I thank the then hon. Prime Minister, Dr. Manmohan Singh, who signed a MoU with the Japanese Prime Minister and he said that we must start a high-speed Railway in India and for that they commissioned a feasibility study. So, I must compliment your Government for doing it. … (Interruptions) I think that at that time you must have taken into consideration the concerns of the common man and that is why you signed the MoU. Therefore, having signed it, our Government came to power and we said and decided that we will take this idea forward. We commissioned a study and the study gave us a Report. This was a joint study by JICA and the Indian Government, which has talked about the feasibility of this project. Feasibility can be calculated on many counts – economic analysis, financial analysis, environmental analysis and social analysis, and on all these parameters they have concluded that this project will be viable if we finance it by a very low cost of interest. We need a soft loan for this. How soft a loan can be? वह कहते हैं ना कि मेरी साड़ी आपकी साड़ी से कितनी सफेद है, तो इससे अच्छा और सॉफ्ट लोन क्या मिल सकता है, मुझे बताइए। 50 साल का लोन, 15 साल के बाद लोन रीपेमेन्ट शुरु होगा, रेट ऑफ इंटरस्ट 0.1 परसेंट, यह हमारी सरकार ने नैगोशियेट किया। हमारी सरकार इसको लाई, हमारी सरकार इसके लिए चिन्ता करती है, इसके लिए हमने किया। और हमने सोचकर किया कि यह देश के हित में है। मुझे पूरा विश्वास है आपकी सरकार भी देश के हित में नहीं होती तो वह साइन ही नहीं करती। इसलिए मैं विश्वास रखता हूँ कि हमने देश को आगे ले जाने के लिए यह किया। मुझे मालूम है कि जैसे माधोपुरा में प्रोजैक्ट बना तो कुछ लोगों का कहना है कि हमने शुरूआत की।
जब देश 1947 में स्वतंत्र हुआ, उस समय भी हमने कहा था जब फ्रीडम एट मिडनाइट मिला, तो हमने कहा था कि हम देश को डैवलप्ड देश बनाएँगे, लेकिन यदि वह बनता तो हमारे पास काम नहीं होता। नहीं बना है इसलिए बना रहे हैं, कोशिश कर रहे हैं। सबको साथ देना चाहिए। उसके लिए हमने कहा है कि सबका साथ सबका विकास। इसके लिए हाई स्पीड रेलवे के लिए यह स्टैंडअलोन प्रोजैक्ट है। इस प्रोजैक्ट का पैसा दूसरे प्रोजैक्ट में नहीं लगाया जा सकता है।
आप मुझे अनुमति देंगे तो मैं आपको बताना चाहता हूँ। एक पब्लिक ईवैन्ट में मुझे किसी ने यही सवाल पूछा क्योंकि सब लोग पूछते हैं। उसने पूछा कि यह जो 1 लाख करोड़ रुपये हैं, यह दूसरी जगह क्यों नहीं लगाते हैं। मैं आपकी अनुमति से इस पर बोलना चाहता हूँ। मैंने कहा कि एक लड़की का पिता कह रहा है कि मेरी लड़की से शादी कीजिए तो मैं आपको एक लाख रुपये दे दूँगा। लड़के ने सोचा कि 1 लाख रुपये वैसे ही मिलने वाले हैं। वह दूसरी लड़की से जाकर शादी करता है, तो क्या 1 लाख रुपये उसको पिताजी देंगे? ...(व्यवधान) तो यह जो 1 लाख करोड़ रुपये हमें मिलने वाले हैं, यह सिर्फ अलग प्रोजैक्ट के लिए हैं। यह 1 लाख करोड़ रुपये सिर्फ बुलेट ट्रेन के लिए है, उसका सैल्फ फाइनेंसिंग माडल है और उसका लाभ सिर्फ मुम्बई-अहमदाबाद के लोगों को नहीं होगा। एक वैल्यू सिस्टम बनेगा, इको सिस्टम बनेगा, वह जो टैक्नोलाजी हमारे पास आएगी, वह पूरे देश में रेल के विकास में काम आएगी। हमने जापान के साथ जो समझौता किया, वह पहले नहीं था। हमने कहा कि इस प्रोजैक्ट के साथ-साथ पूरे रेल का नैटवर्क डैवलप करने के लिए आप हमें मदद कीजिए। हमने यह बात की। उसके लिए उन्होंने इस बात को भी माना। हमने कहा कि उनकी जो रिसर्च आर्गनाइज़ेशन है, उस रिसर्च एंड डैवलपमैंट आर्गनाइज़ेशन को हमारे साथ मिलकर काम करना चाहिए। इस बात को भी उन्होंने माना। मैं इसीलिए कहता हूँ कि यह जो समझौता है, यह सिर्फ बुलेट ट्रेन तक सीमित नहीं है, इसका लाभ देश के पूरे रेल नैटवर्क को आगे लाने के लिए होगा। इसलिए यह जो टैक्नोलाजी आएगी, वह पूरे देश के रेल विकास में काम आएगी।
सभापति जी, इसी तरह से जो अनफिनिश्ड प्रोजैक्ट्स हैं, उनको भी हम पूरा करने की कोशिश करेंगे। आपको कहने के लिए खुशी है कि पिछले कुछ महीनों में हमने काफी कोशिश की। वर्ष 2014-15 में हमारे यहाँ 135 एक्सीडैंट्स हुए। हमें खुशी है कि पिछले साल में उसकी संख्या 107 तक नीचे आई। आपको याद होगा कि अगस्त महीने के आस-पास काफी हादसे हुए थे। मैंने सभी जनरल मैनेजर्स की मीटिंग बुलाई। मैंने कहा कि आप जाकर पूरी तरह से सेफ्टी आडिट कीजिए। जहाँ-जहाँ पर कमियाँ हैं, उनको दूर कीजिए और करने के लिए जो भी धन की ज़रूरत है, वह हम आपको देंगे। इसके बाद टचवुड, भगवान की दुआ से, आप सबके सहयोग से एक्सीडैंट्स में भी बहुत कमी आई है। ज्यादा एक्सीडैंट्स जो होते हैं, वे अनमैन्ड लैवल क्रासिंग्ज़ पर होते हैं और अनमैन्ड लैवल क्रासिंग को दूर करने के लिए हमने जैसे कहा हमने सेफ्टी सैस लगाकर एक नया काम करने की शुरूआत की है।
खड़गे जी देश के नेता हैं, कर्नाटक के नेता हैं, वैसे तो मैं चाहता हूँ कि मुख्य मंत्री भी होने चाहिए। खड़गे साहब ने अच्छी तरह से काम करके हमको अच्छा बताया कि वर्ष 2012-13 में 683 करोड़ कर्नाटक के प्रोजैक्ट्स को दिये थे। वर्ष 2012-13 में मैं मंत्री नहीं था। वर्ष 2013-14 में कर्नाटक के लिए 909 करोड़ दिये थे। उस समय भी मैं दुर्भाग्य से मंत्री नहीं था। 2014-15 में मोदी जी की सरकार आई। हमने उस धन को बढ़ाकर 1315 करोड़ किया और 2015-16 में we have provided Rs. 2,496 crore. In this year’s Budget, we have provided Rs. 2,779 crore. This amount is possible to be provided. Now, I will come to other States. This amount is possible because we are raising resources from Extra Budgetary Resources and that is how we are trying to do it.
Sir, please give me a few minutes to give you the details. This year, the Budget has provided for Rs. 2,823 crore for Andhra Pradesh. It is more than 100 per cent as compared to 2013-14. In Assam and North-East, it was only Rs.2,330 crore in 2013-14 which has become Rs.5,340 crore. In Bihar, in 2013-14, it was Rs.1,244 crore – Shri Arun Kumarji was right in saying this – and now it has gone up to Rs.3,171 crore. In Chhattisgarh, it has gone up from Rs.379 crore in 2013-14 to Rs.1,738 crore. I can go on and on, if you permit me. But the idea is that we have increased the allocation to each and every State exponentially and not incrementally. This is because we realise that even this is not sufficient. The railway network has to increase dramatically. We must put in more efforts with more money. Therefore, we really need to put all this.
We fully understand that there are so many aspirations, so many requirements. I would have been the happiest man if I could fulfil all of them. Unfortunately, we have limited resources and unlimited demand. Like a mother who has many children, she cannot give food to everybody. So, she tries to give something to everybody. This is what I am trying to do. I am trying to be a good mother to make sure that everybody is properly taken care of, as my friends from Odisha will agree, that is a State which has not even demanded as much as we gave it to them because we realise that that State has been wronged in the past. We would like to do that. We will make sure that. खड़गे साहब ने बेंगालुरू के बारे में कहा है। It is our commitment to Bengaluru. बेंगालुरू में सब-अर्बन ट्रेनों के लिए we will work with the State Government. The Chief Secretary of Karnataka Shri Arvind Jadhav came and met me recently. I am going to take it forward and make sure that this happens. I would really request you to please wholeheartedly support this Demands for Grants so that we can go forward and spend this money.
श्री मल्लिकार्जुन खड़गे :सर, आज प्रभु जी ने सविस्तार से उत्तर दिया, लेकिन उन्हें यह मानना पड़ा कि उन्होंने बजट में जो फिगर्स दिए थे, वे ठीक थे। लेकिन, पैसा कहां से वे लाएंगे, किस सोर्स से उसे जमाएंगे, उन्होंने उसे एक्सप्लेन किया। इसका मतलब यही है कि हमने इस सदन को जो बताया था, वह ठीक था। उसमें कोई गलती नहीं थी।
दूसरी चीज़, मैं जापान से लोन लेने के विरोध में नहीं हूं। समस्या यह है कि किसी इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए, रेल के लिए या किसी सड़क के लिए या सिंचाई विभाग के लिए, चाहे वर्ल्ड बैंक का लोन हो, चाहे एशियन डेवलपमेंट बैंक का लोन हो या किसी भी देश से लोन हो, इसमें सामान्यतः वे लोग इंटरेस्ट तो कम रखते हैं, लेकिन उसमें कंसल्टेशन फीस रखते हैं। वे एम.ओ.यू. में यह करते हैं कि जो यहां पर इंटरेस्ट वे नहीं निकाल सकते, तो लोगों को दिखाने के लिए वे कहते हैं कि वे फ्री में दे रहे हैं, लेकिन वे यह कहते हैं कि मशीनरी हमारे पास से खरीदना चाहिए, कॉन्ट्रैक्टर्स उनके रहने चाहिए इत्यादि। मैं इंफ्रास्ट्रक्चर का मंत्री था। मैंने खुद ही इसका विरोध किया। बहुत से लोग, जो पहले विश्व बैंक, एशियन डेवलपमेंट बैंक से लोन लेते थे, मैंने उन्हें यही कहा कि अगर आप घोड़े की नाल फ्री मिल रही है, ऐसा समझ कर घोड़ा खरीदने गए तो वह बहुत महंगा होता है। इसलिए कभी-कभी देश के हित में हमें रि-थिंक करना चाहिए। मैं एक रेलवे प्रोजेक्ट के बारे में नहीं बोल रहा हूं। हमें सभी रेलवे प्रोजेक्ट्स के बारे में रि-थिंक करना चाहिए। हमारी लोकल एस्टीमेट के तहत हम कितना कर सकते हैं या उनके एस्टीमेट के तहत हमें कितना महंगा पड़ेगा, इसका आकलन बहुत जरूरी है। इसलिए प्रभु जी, मोहब्बत हमारे साथ और शादी जापान के साथ मत करिए।
श्री सुरेश प्रभु :सर, मैं खड़गे साहब को धन्यवाद देता हूं कि उन्होंने हमारा ध्यान इस ओर आकर्षित किया। वे अनुभव के आधार पर बोल रहे थे। उनके समय में सरकार ने डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर का लोन एप्रूव किया। वह जापान से एप्रूव किया। उस समय जो उसका इंटरेस्ट था, वह इस समय के इंटरेस्ट से बहुत ज्यादा था और उसमें 50 साल का रि-पेमेंट भी नहीं था।
शहरी विकास मंत्री, आवास और शहरी गरीबी उपशमन मंत्री तथा संसदीय कार्य मंत्री (श्री एम. वैंकैय्या नायडू) : उनकी आपत्ति यही है कि उनकी शादी हो चुकी है जापान से, आप दोबारा उनके साथ जाकर शादी करना चाहते हैं, इसलिए आपत्ति हो रही है। ...(व्यवधान)
श्री सुरेश प्रभु :खड़गे साहब, इसके लिए मैं आपको धन्यवाद देता हूं कि आपके अनुभव के आधार पर ही हम सीख रहे हैं। आपने शायद कुछ गलती की होगी, जैसा कि आपने कहा, मैं नहीं कहता हूं कि गलती की थी, लेकिन आप मान रहे थे, तो गलती की स्थिति दोबारा न बने, इसके लिए हम प्रयास कर रहे हैं और आपको धन्यवाद देता हूं। ...(व्यवधान)
माननीय सभापति : आप कुछ कहना चाहेंगे क्या? काफी विस्तार से उत्तर आ गया है। कुछ पूछना हो तो पूछ लीजिए।
SHRI BHARTRUHARI MAHTAB (CUTTACK): The reply to the discussion on Railway Budget became a duel between Mr. Kharge and Mr. Prabhu. In the reply of course the Minister revealed certain things which were not revealed to the nation earlier relating to the agreement on the bullet train as we all call it. One question was asked by Mr. Kharge relating to consultation fee that was there. But the revelation in the Minister’s speech was relating to the technology transfer that is going to occur because of this high speed train and how Indian Railways will be benefited. I would like to understand how we are going to take advantage of this technology transfer and at what cost.
Consultation fee or equipment that is going to be utilized in this bullet train is one thing. But the technology transfer is for all time to come. I would be happy if our Indian Railways live up to that expectation and also take advantage of that situation. But I am apprehensive that that comes with a certain cost. What is that cost? Whether it is in-built or is it separate? And how is it going to be implemented? I would like to understand that.
श्री सुरेश प्रभु : एक तो यह पहला एग्रीमेंट होगा, जैसा कि डेडीकेटेड फ्रेट कोरीडोर का भी खड़गे साहब को पता है कि नार्मली,this is called Overseas Development Assistance (ODA). As you must be knowing, the concept of ODA is that rich countries are supposed to give money at a very concessional rate of interest to developing countries. We are the single largest recipient of ODA in the world from Japan. Japanese loans have been taken in the past. This is the first time we insisted that the prime contractors, the lead contractors will be very limited as far as Japanese are concerned. The main lead contractors can also be Indian.
The second thing we insisted was that most of the things that will be done will be made in India barring some things. If we had the technology, then we have no need to sign an agreement with Japan. We cannot take risk with the security and such aspects. But most of the things will be made in India at least. I want to confirm that figure whether it is 75 per cent or 85 per cent because I do not want to give wrong information.
The whole idea is that in an unprecedented way, major contractors will be from India and, therefore, this will be really helping us. In fact from Japan we will be importing only 13 per cent. Just imagine! This is an unprecedented agreement that we have signed and I thank the Prime Minister for it. It is because of his personal relation with Japanese Prime Minister and the respect that he enjoys globally that this has happened.
Technology transfer for rolling stock and other critical items will happen in India. This is the best possible deal we could have got. In fact I will tell you something. Some of the Japanese friends were saying that they did not know how India could get such a fantastic deal from Japan. This is something we should definitely take into consideration.
SHRI BHARTRUHARI MAHTAB: What is the cost in figures that we are going to pay?
SHRI SURESH PRABHU: That is what I told you. If you want, you will definitely have it. What I am saying is, as far as India is concerned it is the best. Also, there are two projects that are coming up at Madhepura and Marhowra. One is for electric locomotives and the other is for diesel locomotives. The cost at which we have got state of the art technology is the lowest in the world. The technology is the best in the world. More or less 100 per cent will be manufactured not in any other place but in Bihar, a State which needs industrialization. The benefit will also come to Odisha, an adjoining State. Because it will come up in Eastern India, the ecosystem will develop.
So, my submission is that we will definitely take into account all your concerns and all your ideas. But what we are doing is in the best interest of India.
HON. CHAIRPERSON: Hon. Members, a number of Cut Motions have been moved by Members to the Demand for Grants (Railways) for 2016-17. Shall I put all the Cut Motions to the Vote of the House together or does any hon. Member want any particular Cut Motion to be put separately?
SHRI BHARTRUHARI MAHTAB : Hon. Chairperson, I want to press the Cut Motions moved by me. I may be allowed to do so.
HON. CHAIRPERSON : Please mention the particular Cut Motion no.
SHRI BHARTRUHARI MAHTAB: I have around 24 Cut Motions. If you allow me, then I will just mention them.
HON. CHAIRPERSON : Shri Mehtabji, please take your seat. I have got the sequence with me. Shri Jai Prakash Narayan Yadav, are you pressing your Cut Motions? आप अपने कट मोशन का नम्बर बता दीजिए।
… (Interruptions)
HON. CHAIRPERSON : Only Cut Motion no. and nothing else will go on record. You have already spoken in detail. You just give the number and only the number will go on record.
...(Interruptions)... * श्री जय प्रकाश नारायण यादव (बाँका) : मैं कट मोशन नम्बर के बाद अपनी बात कहूंगा। …( व्यवधान)
माननीय सभापति : मैं आपसे रिक्वेस्ट कर रहा हूं कि एक प्रेसक्राइब्ड प्रोसिजर दिया हुआ है, आप पहले विस्तार से अपनी बात सदन में रख चुके हैं। आप केवल कट मोशन का नम्बर दे दीजिए। Please give me the number.
श्री जय प्रकाश नारायण यादव: सभापति महोदय, ...* माननीय सभापति : आप कट मोशन का नम्बर बतायेंगे, वही रिकॉर्ड में जायेगा, बाकी बातें रिकॉर्ड में नहीं जायेगी।
…( व्यवधान)
श्री जय प्रकाश नारायण यादव : सभापति महोदय, ...* माननीय सभापति : माननीय जयप्रकाश जी आप ने बड़े विस्तार से अपनी बात सदन में रखे थे। जो प्रोसिजर है, उस प्रोसिजर को आप प्रोसिजर को फौलो कीजिए, आप नम्बर बता दीजिए। आप सहयोग करेंगे तो अच्छा रहेगा।
…( व्यवधान)
श्री जय प्रकाश नारायण यादव : सभापति महोदय, ...* माननीय सभापति : अगर आप कट मोशन का नम्बर नहीं बतायेंगे तो हम आगे बढ़ेंगे।
…( व्यवधान)
श्री जय प्रकाश नारायण यादव : सभापति महोदय, हमारे कट मोशन का क्रमांक 1, 2, 3, 5, 13, 16, 19, 20, 21, 24, 25, 30, 42, 46, 48, 52, 55, 56, 57, 62 और 64 है। हम इसे एक साथ प्रेस करते हैं।...* HON. CHAIRPERSON : I shall now put the Cut Motions no. 1 to 64 moved by Shri Jai Prakash Narayan to the Vote of the House.
The cut motions were put and negatived.
श्री जय प्रकाश नारायण यादव : मैं डिविजन की मांग करता हूं।...(व्यवधान)
माननीय सभापति : क्या आप डिविजन की मांग कर रहे हैं?
श्री जय प्रकाश नारायण यादव : सभापति महोदय, मैं आपसे विनती करता हूं कि यह मेरा अधिकार है।...(व्यवधान) मैं डिविजन की मांग कर रहा हूं।
HON. CHAIRPERSON : Let the lobbies be cleared.
Now, the Lobbies have been cleared. The procedure has to be completed; the formalities have to be completed.
The Secretary-General.
SECRETARY-GENERAL: Kind attention of hon. Members is invited to the following points in the operation of the automatic vote recording system.
Before a Division starts, every hon. Member should occupy his or her own seat and operate the system from that seat only. When the hon. Speaker says, ‘Now Division’, the Secretary-General will activate the voting button whereupon red bulbs above display boards on both sides of the hon. Speaker’s Chair will glow and a gong sound will be heard simultaneously. For voting, hon. Members may kindly press the following two buttons simultaneously only after the sound of the gong – and I repeat, only after the sound of the gong.
The red button in front of the hon. Member on the head of the phone plate and any one of the following buttons fixed on the top of the desk of the seat – ‘Ayes’, green colour; ‘Noes’, red colour; ‘Abstain’, yellow colour.
It is essential to keep both the buttons pressed till another gong is heard and the red buttons above the plasma display are off.
Hon. Members may please note that their vote will not be registered if buttons are kept pressed before the first gong and if both buttons are not kept simultaneously pressed till the second gong.
Hon. Members can actually see their votes on display boards installed on either side of the hon. Speaker’s Chair. In case a vote is not registered, Members may call for voting through slips.
HON. CHAIRPERSON: I shall now put the cut motion Nos. 1 to 64, moved by Shri Jai Prakash Narayan Yadav, to the vote of the House.
The cut motions were put and negatived.
श्री शैलेश कुमार (भागलपुर): सभापति महोदय, हमारे कट मोशन का क्रमांक 65 से 95 तक है। हम इसे एक साथ प्रेस करते हैं।
HON. CHAIRPERSON: I shall now put the cut motion Nos. 65 to 95, moved by Shri Shailesh Kumar, to the vote of the House.
The cut motions were put and negatived.
श्री राजेश रंजन : सभापति महोदय, मेरा कट मोशन नम्बर 96, 97, 98, 99, 100 से लेकर 163 तक है। मैं इसे एक साथ प्रेस करता हूं।
माननीय सभापति : रिकार्ड में कट मोशन के क्रमांक के अलावा कुछ नहीं जाएगा।
...(व्यवधान)
HON. CHAIRPERSON: I shall now put the cut motion Nos. 96 to 163, moved by Shri Rajesh Ranjan, to the vote of the House.
The cut motions were put and negatived.
SHRIMATI RANJEET RANJAN: I am pressing cut motions Nos.164 to 172.
HON. CHAIRPERSON: I shall now put the cut motion Nos. 164 to 172, moved by Shrimati Ranjeet Ranjan, to the vote of the House.
The cut motions were put and negatived.
SHRI BHARTRUHARI MAHTAB: Chairman, Sir, though there are 24 amendments to be moved, I am only pressing one amendment that is relating to an assurance which the Minister had given at Bhubaneswar. I just want him to confirm it here.… (Interruptions)
HON. CHAIRPERSON: You may just mention the number.
SHRI BHARTRUHARI MAHTAB: It is relating to a wagon factory at … (Interruptions)
HON. CHAIRPERSON: You may just mention the number only.
SHRI BHARTRUHARI MAHTAB: That is what I am saying, it is relating to a wagon maintenance workshop in Kalahandi. He has assured these two.
माननीय सभापति : आप केवल कट मोशन का नम्बर बता दीजिए।
SHRI BHARTRUHARI MAHTAB: After the assurance of the hon. Minister, I am not insisting my cut motions.
माननीय सभापति : श्री दुष्यंत चौटाला।
…( व्यवधान)
श्री दुष्यंत चौटाला : मैं निवेदन करना चाहता हूं कि...(व्यवधान)
माननीय सभापति : आप केवल कट मोशन का नम्बर बता दीजिए।
…( व्यवधान)
श्री दुष्यंत चौटाला: बहुत लंबे समय से मांग है...* माननीय सभापति : कट मोशन के क्रमांक के अलावा कुछ भी रिकॉर्ड में नहीं जायेगा।
…( व्यवधान)
माननीय सभापति : क्या आप कट मोशन प्रेस करेंगे?
श्री दुष्यंत चौटाला: मैं अपना कट मोशन विथड्रा विड्रा करता हूं।
HON. CHAIRPERSON : Shri Md. Badaruddoza Khan, are you pressing your cut motion Nos. 230 to 232?
SHRI MD. BADARUDDOZA KHAN (MURSHIDABAD): I am pressing.
HON. CHAIRPERSON: I shall now put cut motion Nos. 230 to 232 moved by Shri Md. Badaruddoza Khan to the vote of the House.
The cut motions were put and negatived.
HON. CHAIRPERSON: I shall now put all the other cut motions which have been moved together to the vote of the House.
The cut motions were put and negatived.
HON. CHAIRPERSON: I shall now put the Demands for Grants (Railways) for 2016-2017 to the vote of the House.
“That the respective sums not exceeding the amounts shown in the fourth column of the Order paper be granted to the President of India out of the Consolidated Fund of India, to complete the sums necessary to defray the charges that will come in course of payment during the year ending the 31st day of March, 2017, in respect of the heads of Demands entered in the second column thereof against Demand Nos. 1 to 16.” The motion was adopted.
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