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Lok Sabha Debates

Combined Discussion On Statutory Resolution Regarding Disapproval Of ... on 3 December, 2004

nt> 14.49 hrs. STATUTORY RESOLUTION RE: DISAPPROVAL OF PREVENTION OF TERRORISM (REPEAL) ORDINANCE PREVENTION OF TERRORISM (REPEAL) BILL, 2004 STATUTORY RESOLUTION RE: DISAPPROVAL OF UNLAWFUL ACTIVITIES (PREVENTION) AMENDMENT ORDINANCE AND UNLAWFUL ACTIVITIES (PREVENTION) AMENDMENT BILL, 2004 Title: Combined discussion on Statutory Resolution regarding Disapproval of Prevention of Terrorism (Repeal) Ordinance, 2004 (No. 1 of 2004) and Disapproval of Unlawful Actvities (Prevention) Amendment Ordinance, 2004 (No. 2 of 2004); passing of Prevention of Terrorism (Repeal) Bill, 2004 and Unlawful Activities (Prevention) Amendment Bill, 2004.

MR. DEPUTY-SPEAKER: The House will now take up item Nos. 18 to 21 together. केवल मूव करें।

श्री रामजीलाल सुमन (फ़िरोज़ाबाद) : मैं मूव नहीं कर रहा हूं, मैं दो मिनट में अपनी बात समाप्त कर दूंगा।

उपाध्यक्ष महोदय : आपको बाद में भी बोलना है, इसलिए कह रहा हूं।

श्री रामजीलाल सुमन : मैं दो मिनट में समाप्त कर दूंगा।

उपाध्यक्ष महोदय, मैं निरनुमोदन नहीं अनुमोदन करना चाहता हूं और इस अवसर पर कहना चाहता हूं कि इस पोटा कानून को समाप्त करने के लिए सरकार जो अध्यादेश लाई है, समाजवादी पार्टी उसका स्वागत करती है। समाजवादी पार्टी ही पोटा जैसे कानून की मुखर विरोधी रही है। जब इस तरफ के लोग इस पोटा कानून को बनाने के लिए उतावले थे, उस समय भी हमारा कहना यह था…( व्यवधान)

श्री संतोष गंगवार (बरेली) : यह आप बाद में बोलें।

श्री रामजीलाल सुमन : बाद में क्यों बोलूं। अब मैं आपके कहने से बाद में नहीं बोलूंगा। इस मामले में तो कम से कम हम और यह साथ-साथ हैं।

उपाध्यक्ष महोदय : एक्सैप्शंस सब जगह हैं।

श्री रामजीलाल सुमन : मैं संक्षेप में बता रहा हूं कि जब श्री संतोष गंगवार और उनके साथी यह पोटा कानून बनाने के लिए बहुत उतावले थे, उस समय भी समाजवादी पार्टी का यह मानना था, क्योंकि टाडा का तजुर्बा हमारे सामने थ॥ टाडा कानून का बेतहाशा दुरुपयोग हुआ था। लिहाजा इस संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता कि पोटा कानून बनने के बावजूद या तो अक्लियतों के खिलाफ इसका इस्तेमाल होगा ,और राजनैतिक विरोधियों के खिलाफ इसका इस्तेमाल होगा।

   

उपाध्यक्ष महोदय, हमारी जो शंका थी, वह शंका सही साबित हुई। मकसद था कि पोटा कानून बनाने के बाद देश में जो आतंकवादी गतवधियां चल रही हैं, उन पर हम विराम और अंकुश लगाएंगे, लेकिन झारखंड में पोटा का दुरुपयोग हुआ आदिवासी बच्चों और महिलाओं के खिलाफ, गुजरात में पोटा का दुरुपयोग हुआ अकलिय़त के खिलाफ और उत्तर प्रदेश में राजनैतिक विरोधियों के खिलाफ इसका इस्तेमाल हुआ। मैं यही निवेदन करना चाहता हूँ कि हम इसका अनुमोदन करते हैं और यह अनौपचारिक प्रस्ताव है। इस सवाल पर हम सरकार के साथ हैं। मैं इसे प्रस्तुत करता हूँ।

MR. DEPUTY-SPEAKER: Now, the hon. Minister will move the Motion for consideration of the Bill.

श्री प्रभुनाथ सिंह (महाराजगंज, बिहार) : उपाध्यक्ष जी, माननीय सदस्य ने प्रस्ताव तो पढ़ा ही नहीं है, फिर मंत्री जी कैसे बोल सकते हैं। इनसे कहें कि पहले प्रस्ताव तो पढ़ें।

श्री मोहन सिंह (देवरिया) : उपाध्यक्ष महोदय, चूंकि हम लोगों की मंशा इसका अनुमोदन करने की है, परंतु प्रस्ताव पढ़ना एक औपचारिकता है, माननीय सदस्य इसकी शब्दावली भी पढ़ दें।

MR. DEPUTY-SPEAKER: Shri Ramji Lal Suman, you have to move the Resolution.

श्री रामजीलाल सुमन : उपाध्यक्ष महोदय, मैं प्रस्ताव करता हूँ :--

" कि यह सभा राष्ट्रपति द्वारा २१ सितम्बर, २००४ को प्रख्यापित आतंकवाद निवारण (निरसन) अध्यादेश, २००४ (२००४ का संख्यांक १) का निरनुमोदन करती है। "

MR. DEPUTY-SPEAKER: Now, the Minister has to move that the Bill be taken into consideration.

THE MINISTER OF HOME AFFAIRS (SHRI SHIVRAJ V. PATIL): Sir, I beg to *move:

"That the Bill to repeal the Prevention of Terrorism Act, 2002, be taken into consideration. "

* Moved with the Recommendation of the President.

श्री राजीव रंजन सिंह ‘ललन’(बेगूसराय) : उपाध्यक्ष महोदय, मैं प्रस्ताव करता हूँ:--

" कि यह सभा राष्ट्रपति द्वारा २१ सितम्बर, २००४ को प्रख्यापित वधविरुद्ध क्रियाकलाप (निवारण) संशोधन अध्यादेश, २००४ (२००४ का संख्यांक २) का निरनुमोदन करती है। "

MR. DEPUTY-SPEAKER: Now, the Minister has to move that the Bill be taken into consideration.

SHRI SHIVRAJ V. PATIL: Sir, I beg to move*:

"That the Bill further to amend the Unlawful Activities (Prevention) Act, 1967, be taken into consideration. "

श्री राजीव रंजन सिंह ‘ललन’: उपाध्यक्ष महोदय, वधविरुद्ध क्रियाकलाप (निवारण) संशोधन विधेयक, २००४ इस सदन में विचार करने के लिए लाया गया है। इसके पहले पूर्व की जो राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन की सरकार थी, वह वर्ष २००१ में प्रिवैन्शन ऑफ टैररिज्म ऑर्डिनेन्स लाई और उसके बाद २००२ मे उसे दोनों सदनों की संयुक्त स्वीकृति मिली और उसने कानून का रूप लिया। जब एनडीए सरकार ने इस कानून को रोकने का फैसला किया, उस समय पूरे देश में आतंकवाद सिर उठाकर चारों तरफ देख रहा था और यहां तक उसकी पराकाष्ठा थी कि संसद पर भी हमला हुआ था, लेकिन जब 14.54 hrs (Shri Varkala Radhakrishnan in the Chair) एनडीए की सरकार इस कानून को लाई तो आज की कांग्रेस पार्टी जो उस समय विपक्ष में थी और आज यूपीए सरकार का नेतृत्व कर रही है, इस सरकार ने खुलकर उस कानून का विरोध किया। आज जब यह कांग्रेस पार्टी सरकार में आई तो शायद इनको लगा कि इसकी आवश्यकता अभी भी देश को है और इसकी आवश्यकता देश को है। लेकिन चूंकि उन्होंने उस समय इसका विरोध किया था, तो उसको जस्टिफाइ करने के लिए पुराने पोटा कानून को खत्म करके नया कानून अनलॉफुल एक्टिविटीज़ प्रिवैन्शन बिल २००४ लाई है।

सभापति महोदय, हालांकि इस कानून की आवश्यकता थी, क्योंकि यू.एन.ओ. ने भी अपने प्रस्ताव के जरिए, वभिन्न देशों से, वभिन्न राष्ट्रों से अनुरोध किया है कि अपने-अपने देश में ऐसे कानून बनाए जाएं जिससे आतंकवादियों पर काबू पाया जा सके और आतंकवादी गतवधियों को रोका जा सके, लेकिन उस समय की सरकार ने इसका विरोध किया। आज उसके जस्टीफिकेशन के लिए यह कानून लाया गया है। यह कानून अनलॉफुल एक्टीविटीज प्रिवेंशन एक्ट, १९६७ में मामूली सुधार के लिए अध्यादेश के माध्यम से लाया गया है।

महोदय, जो १९६७ का ओरिजनल एक्ट है, उसमें संशोधन कर के यह क्लॉज जोड़ा जा रहा है कि पुलिस ऑफीसर के सामने जो स्वीकृति बयान होता है, उसे आधार नहीं बनाया जाएगा। फोन टेपिंग के मामले में भी कुछ संशोधन किया गया है। इसी प्रकार जो एक वर्ष की नजरबन्दी का अधिकार था, उसमें भी कुछ संशोधन किया गया है और उन्हें जमानत पाने का हकदार बना दिया गया है।

महोदय, आज पूरे देश में जो स्थिति है, वह ठीक नहीं है। पूरे देश में आतंकवाद व्याप्त है, चाहे वह जम्मू-कश्मीर का भाग हो, चाहे पूर्वोत्तर राज्यों के हिस्से हों। आज पूरे देश में, चारों तरफ हमारे जो बार्डर्स हैं, पड़ोसी देशों के साथ जो हमारी सीमाएं हैं, वहां आतंकवाद सिर उठा रहा है। ऐसी स्थिति में इस कानून को खत्म कर के, सीधा नया कानून बनाना ठीक नहीं है। इससे आतंकवादियों को प्रोत्साहन मिलेगा, आतंकवादी गतवधियों में बढ़ोत्तरी होगी और आतंकवादी गतवधियों को रोकना मुश्किल हो जाएगा।

महोदय, आज आतंकवाद से निपटने की आवश्यकता है। यह राष्ट्र-हित का सवाल है। इस सवाल पर पूरे देश को एकजुट होना चाहिए। पूर्व के अहसास को, अपनी गलतियों को दुरुस्त कर के उसमें जो संशोधन लाना चाहिए था, लेकिन ऐसा न कर के उसे खत्म किया जा रहा है और एक नया कानून लाया जा रहा है, जो ठीक नहीं है। इसका अर्थ यह है कि पूरे देश में आतंकवादी गतवधियों पर जो अंकुश लगा था, काबू पाया जा रहा था, पूर्व सरकार ने उन पर जो नियंत्रण पाया था, वह नियंत्रण खत्म होगा। अब वे लोग धीरे-धीरे आगे बढ़ने का काम करेगे और आतंकवादी संगठन फिर से सिर उठाने लगेंगे।

महोदय, आज देश को, आतंकवाद से निपटने के लिए एक प्रभावी कानून की आवश्यकता है। एक ऐसे छिद्र-विहीन कानून की आवश्यकता है, जो आतंकवाद पर काबू पा सके, लेकिन हमारे वर्तमान कानून में इतनी पेचीदगियां हैं, जिनका फायदा उठाकर लोग, साधारण कानून के तहत लाभ उठा लेते हैं और निकल जाते हैं। उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हो पाती है। हमारे देश में प्रशासनिक व्यवस्था में खामी है। उसमें भ्रष्टाचार और पक्षपात मौजूद है। इन खामियों का फायदा उठाकर आतंकवादी लोग छूट जाते हैं। इसलिए मेरा निवेदन है कि आतंकवादियों से निपटने के लिए सख्त से सख्त कानून की आवश्यकता है। राष्ट्रीय लोकतांत्रिक गठबंधन की सरकार ने पोटा के रूप में ऐसा ही कानून बनाया था, जिसे आज आप खत्म करने का काम कर रहे हैं। जो संशोधन सदन में माननीय गृह मंत्री जी द्वारा प्रस्तुत किया गया है, उससे देश में ऐसी परिस्थिति बनेगी जिससे आतंकवादी संगठन सिर उठाने लगेंगे।

महोदय, मैं आपके माध्यम से सरकार से अनुरोध करना चाहता हूं कि उस समय वर्तमान सरकार विपक्ष में थी, इसलिए उसने इसका विरोध किया। उस समय चूंकि आप विपक्ष में थे, इसलिए आपका कर्तव्य था और आपने उसका विरोध किया, लेकिन देश हित में, राष्ट्र हित में कानून को लाया गया था। इसलिए यह सरकार भी इसे अपनी प्रतिष्ठा का सवाल न बनाए। इस कानून को वापस ले ले और फिर से पोटा का कानून लाए। पोटा के पुराने कानून को लाते समय, उसमें कुछ सावधानियां बरतने की आवश्यकता है। उसका कोई राजनीतिक दुरुपयोग नहीं होना चाहिए। अभी जैसी श्री रामजी लाल सुमन ने चर्चा की, पुराने कानून में जो कमियां हैं, उन्हें दूर कर के, देश में आतंकवाद पर अंकुश लगाना आवश्यक है। इसलिए मेरा अनुरोध है कि आज देश-हित में, राष्ट्र-हित में अपनी प्रतिष्ठा को सवाल न बनाकर, राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखकर पोटा के कानून को साधारण संशोधनों के साथ फिर से इस सदन में लाइए।

MR. CHAIRMAN : Motions moved:

"That this House disappproves of the Prevention of Terrorism (Repeal) Ordinance, 2004 (No. 1 of 2004) promulgated by the President on 21st September, 2004."
"That the Bill to repeal the Prevention of Terrorism Act, 2002, be taken into consideration."
"That this House disapproves of the Unlawful Activities (Prevention) Amendment Oridinance, 2004 (No. 2 of 2004) promulgated by the President on 21st September, 2004."
"That the Bill further to amend the Unlawful Activities (Prevention) Act, 1967, be taken into consideration."
           

* Moved with the Recommendation of the President.

15.00 hrs. श्री लक्ष्मण सिंह (राजगढ़) : आदरणीय सभापति महोदय, मैं इस विधेयक का विरोध करता हूं और इसलिए करता हूं क्योंकि कांग्रेस पार्टी ने टाडा लागू किया था। जब टाडा लागू किया तो पोटा हटाने का काम कांग्रेस पार्टी जो कर रही है, यह ठीक नहीं है। कांग्रेस पार्टी के एक नहीं, दो-दो नेता प्रधानमंत्री बने और आतंकवाद के शिकार हुए। मैं सोनिया गांधी जी का आदर करता हूं, लेकिन उनकी पहचान यह है कि वह गांधी परिवार की बहू हैं। आज कम से कम उन्हें इस बारे में सोचना चाहिए और यह जो इतनी जल्द बाजी दिखा रहे हैं, यह ठीक नहीं है। ऐसी क्या मजबूरी है कि पोटा हटाना जरूरी है?मैं आपकी अनुमति से जागरण समाचार-पत्र में से कुछ पढ़ना चाहूंगा। इसमें खबर छपी कि पांच सांसदों ने पोटा खत्म करने की सलाह दी। मैं माननीय गृह मंत्री जी का बहुत आदर करता हूं। उन्हें मैंने हमेशा अपने बड़े भाई के रूप में माना है और मानूंगा, लेकिन यह समाचार पढ़ कर मुझे बहुत दुख हुआ। इसमें लिखा है कि भारत, पाकिस्तान के आपसी संबंध इतने करीबी नहीं हो पाए हैं कि वे भारत के अंदरूनी मामलों पर सरकार को सलाह देने लगें। लेकिन बुद्धवार को कुछ ऐसा ही हुआ, पाकिस्तान के संसद सदस्यों के एक प्रतनधि मंडल ने पोटा कानून को लेकर अपनी आपत्ति जाहिर की। आश्चर्यजनक बात यह थी कि गृह मंत्री, श्री पाटील जी को दखल के इस प्रयास पर कोई असुविधा महसूस नहीं हुई। इस समाचार को पढ़ कर मुझे बहुत दर्द हुआ। पाकिस्तान से संबंध अच्छे करिए, इसमें आपत्ति नहीं है। अटल जी तो स्वयं सांसदों के साथ बस में बैठ कर पाकिस्तान गए थे, लेकिन पाकिस्तान के सांसद आकर एक इशारा करें और उस इशारे पर अगर हमारी सरकार चलती है तो यह बहुत गलत बात है।

सभापति महोदय, पोटा कानून इसलिए लाया गया कि संयुक्त राष्ट्र की जो सुरक्षा परिषद है, उसने जो प्रस्ताव १३७३ पारित किया कि आतंकवाद के खिलाफ सब देशों को इस तरह के कानून बनाने चाहिए। हमें यह नहीं भूलना चाहिए, गुलाम नबी आज़ाद जी यहां बैठे हैं, यह वही सुरक्षा परिषद, संयुक्त राष्ट्र है, जिसकी वजह से आज कश्मीर भारत का अंग है। अगर संयुक्त राष्ट्र में उस समय प्रस्ताव पारित नहीं हुआ होता तो आज काश्मीर भारत का अंग नहीं होता और उसी संयुक्त राष्ट्र की सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव को आपने गंभीरता से नहीं लिया, इस पर हमें बहुत आपत्ति है। यह कहा जा रहा है कि पोटा लाने के पीछे राजनीतिक उद्देश्य था, ऐसा नहीं है। यह जब लाया गया था तब चुनाव नहीं हो रहे थे। एक चुनी हुई एनडीए की सरकार अटल जी के नेतृत्व में बैठी हुई थी और देश की बिगड़ती कानून-व्यवस्था को लेकर देश के अंदर जो खतरे थे, उन्हें लेकर जब हम उनके आतंकवादी अड्डों को नष्ट कर रहे थे तो स्वाभाविक था कि उधर से भी कार्यवाही होती। हमारी संसद तक पर हमला हुआ और इसीलिए पोटा का कानून लाया गया था, लेकिन आज इस पोटा के कानून को आप जो बदल रहे हैं इसके पीछे जरूर राजनीतिक उद्देश्य है क्योंकि चुनाव के पहले आपने कहा था कि हम सरकार में आएंगे तो पोटा का कानून बदलेंगे। इसलिए     राजनीतिक उद्देश्य आपका है, एनडीए सरकार का नहीं था। एक बात यह कही जाती है कि पोटा का कानून केवल मुसलमानों के खिलाफ था, ऐसा नहीं था। क्या वाइको मुसलमान थे, वे पोटा में बंद हुए।…( व्यवधान)

       

SHRI RAVICHANDRAN SIPPIPARAI (SIVAKASI): It was because of their relations with the Tamil Nadu State Government, Shri Vaiko was arrested… (Interruptions)

SHRI LAKSHMAN SINGH : Shri Vaiko was supporting the NDA Government. …( व्यवधान)

SHRI RAVICHANDRAN SIPPIPARAI : Why was he arrested? He was arrested because he was supporting NDA and they did not give him any support.

SHRI LAKSHMAN SINGH : Let me complete my speech. Shri Atal Bihari Vajpayee did not interfere. उन्होंने उस समय वाइको जी का समर्थन नहीं किया, क्योंकि एन.डी.ए. सरकार का कोई राजनैतिक उद्देश्य नहीं था, इसलिए जो भ्रम फैलाया जा रहा है, इस भ्रम से हमें उबरकर आना चाहिए। आज पोटा कानून को...…( व्यवधान)

SHRI RAVICHANDRAN SIPPIPARAI : Why did people of Tamil Nadu punish NDA?

SHRI LAKSHMAN SINGH : I will talk about Tamil Nadu also. I have got enough details with me. Let me complete my speech.

MR. CHAIRMAN : Nothing will go on record except Shri Lakshman Singh’s speech.

(Interruptions)* …* Not Recorded श्री लक्ष्मण सिंह : पोटा कानून से राज्य सरकारों को कितनी मदद मिली। आज राज्य सरकारों ने बहुत सारे लोगों को पोटा कानून के तहत अपनी गिरफ्त में लिया। एक भ्रम यह फैलाया जाता है कि पोटा ड्रेकोनियन लॉ है। जब हम बच्चे थे, तब ड्रैकुला के किस्से सुनते थे कि बहुत बड़ा राक्षस था, पोटा को ड्रेकोनियन लॉ बताया गया, लेकिन यह सवाल के जवाब में रघुपति जी का बयान है कि पिछले दो वर्षों मेंकेवल ५७३ लोगों को पोटा कानून के अन्दर बन्द किया गया। १०० करोड़ की आबादी में से केवल ५७३ लोगों को बन्द किया गया और इनमें से १२० जम्मू कश्मीर में थे। अगर हम आंकड़े देखें, जो राज्य सभा में रघुपति जी ने दिये हैं तो महाराष्ट्र में ७१, झारखण्ड में ६४, दिल्ली में ४८, आन्ध्रा प्रदेश में ३६, यू.पी. में २९, तमिलनाडू में २७, सिक्किम में ४, हिमाचल प्रदेश में २, केवल ५७३ लोगों को पोटा के अन्दर बन्द किया गया।…( व्यवधान) गुजरात में भी हैं, सभी हैं। यह कहां से ड्रेकोनियन लॉ हो गया।

संसदीय कार्य मंत्री तथा शहरी विकास मंत्री (श्री गुलाम नबी आज़ाद) : आपने गुजरात नहीं पढ़ा।

श्री लक्ष्मण सिंह : गुजरात भी है।

श्री गुलाम नबी आज़ाद : वहां कितने हैं?

श्री लक्ष्मण सिंह : इसमें लिखा हुआ है, गुजरात में १७२ थे। यह ठीक है, इसमें क्या है। ये तो आंकड़े हैं, आपके मंत्री ने ही दिये हैं। यह भ्रम जो फैलाया जा रहा है कि पोटा लगते ही पता नहीं क्या हो गया, बहुत अत्याचार हो रहा है, ऐसा नहीं था। जो लोग देश को तोड़ने की बात करते थे, जो देश में आतंकवाद फैलाते हैं, उनको वित्तीय सहायता देते थे, जो देश में अवैध हथियार लाकर आतंक फैलाते थे। जिन्होंने मुम्बई में बम फोड़कर कितने ही लोगों की हत्या कर दी। उनके खिलाफ यह पोटा कानून लाया गया था।

यह जो बिल आज आपने पेश किया है, उसमें आपने एक साल का सनसैट पीरियड दिया है। वह सनसैट पीरियड क्या है, आप अपने जवाब में बताएंगे तो हमें पता लगेगा कि सनसैट पीरियड क्या है।

रिव्यू कमेटीज पोटा केसेज में रिव्यू करेंगी। रिव्यू कमेटीज में कौन लोग रखे हैं, रिव्यू कमेटी में एक सज्जन हैं, जो पोटा के केसेज को रिव्यू करेंगे और अगर वे कहेंगे तो ही उसे सजा मिलेगी, नहीं तो वह छूट जायेगा, उसके खिलाफ कोई मामला नहीं बनेगा, सब मामले हटा दिये जाएंगे, सब मामले ड्राप कर दिये जाएंगे। उनका मैं नाम नहीं ले रहा, लेकिन वे नागरिक उड्डयन मंत्रालय के पूर्व सचिव हैं, यानि नागरिक उड्डयन मंत्रालय के एक पूर्व सचिव हैं, जो पोटा की रिव्यू कमेटी में हैं, जो यह तय करेंगे कि देश में पोटा लगना चाहिए कि नहीं लगना चाहिए। हमारे देश में आतंकवाद से ६० हजार लोग मारे गये हैं, दो प्रधानमंत्री मारे गये हैं, एक पूर्व जनरल मारे गये हैं। आज भी लोग मर रहे हैं, हमारे सैनिक, हमारे जवान मारे जा रहे हैं। अभी पढ़कर बताया गया कि आज भी सोपोर में जवान मारे गये हैं। काश्मीर में जो लोग मरे, उनमें से अधिकतर मुसलमान थे। बहुत अच्छा होता और अच्छा होगा कि जो ६० हजार लोग मरे हैं, हमारे जवान मरे हैं, फौजी मरे हैं, उनके किसी एक परिवार के सदस्य को जो पढ़ा-लिखा हो, उसको रिव्यू कमेटी में रखें। उसको मालूम है कि आतंकवाद का दर्द क्या है। वे रिव्यू कमेटी में रहेंगे। मुम्बई में बम ब्लास्ट में जो लोग मरे हैं, उनके परिवार के किसी आदमी को रखिए तो रिव्यू कमेटी का कुछ अर्थ होगा नहीं तो इस रिव्यू कमेटी का कोई अर्थ नहीं है।

अभी हमारे डीएमके के साथी कुछ बोल रहे थे।…( व्यवधान)अब वे श्री वाइको के पार्टी के हैं या डीएमके की पार्टी के हैं। …( व्यवधान)

SHRI RAVICHANDRAN SIPPIPARAI : Why do you unnecessarily change the Party’s name?

श्री लक्ष्मण सिंह : ठीक है कि वाइको की पार्टी वाले होंगे। श्री राजीव गांधी की दुदार्ंन्त हत्या हुई। जब श्री राजीव गांधी की हत्या हुई, उसके ऊपर जैन आयोग बैठाया गया। जैन आयोग ने अभी अपनी रिपोर्ट भी नहीं दी कि उसके पहले ही चुनाव करा कर सरकार गिरा दी गयी ...* आज मुझे दर्द होता है। …( व्यवधान)

SHRI A. KRISHNASWAMY (SRIPERUMBUDUR): You are wrong.

SHRI LAKSHMAN SINGH : The Government was pulled down because of this Jain Commission. … (Interruptions) All right, I have got some facts. I am going to quote from the Jain Commission’s Report. Sir, can I have your permission please? … (Interruptions)

SHRI BIKRAM KESHARI DEO (KALAHANDI): Sir, we want your protection.

SHRI A. KRISHNASWAMY : That word may be expunged. … (Interruptions) This may be expunged.

SHRI LAKSHMAN SINGH : I am just trying to establish my point. … (Interruptions)

MR. CHAIRMAN: Nothing will go on record except the speech of Shri Lakshman Singh.

(Interruptions) …** *Expunged as ordered by the Chair ** Not Recorded     SHRI LAKSHMAN SINGH : But I am quoting from paragraph 19 of page 86 of the Jain Commission’s Report. … (Interruptions)

MR. CHAIRMAN: You can have your say afterwards. Let him complete.

… (Interruption) SHRI LAKSHMAN SINGH : "Allegations were raised by Shri K. Ramamurthy and Shri Mani Shankar Aiyar that the DMK party had, on 21st May, 1991, fixed a meeting at Sriperumbudur to be addressed by Shri M. Karunanidhi and this meeting was cancelled under suspicious circumstances … (Interruptions)

MR. CHAIRMAN: You can have your say only when he finished. Please resume your seat.

… (Interruptions)

MR. CHAIRMAN: If there is any objectionable statement, it will be removed.

SHRI LAKSHMAN SINGH : I am quoting from the Jain Commission’s Report. … (Interruptions)

MR. CHAIRMAN: Please sit down.

… (Interruptions)

MR. CHAIRMAN: I will look into it.

… (Interruptions)

15.12 hrs. (At this stage, Shri Ravichandran Sippiparai came and stood on the floor near the Table.) MR. CHAIRMAN: You please go to your seat.

… (Interruptions)

MR. CHAIRMAN: If there is any objectionable statement, that will not be recorded.

15.12-1/4 hrs. (At this stage, Shri Ravichandran Sippiparai went back to his seat.) MR. CHAIRMAN: I assure you that if there is any objectionable statement, that will not be recorded. Please go to your seat.

… (Interruptions)

SHRI LAKSHMAN SINGH : It is a recorded statement. … (Interruptions)

MR. CHAIRMAN: Please go to your seats.

… (Interruptions)

SHRI LAKSHMAN SINGH : I am reading from paragraph 19 of page 86 of Jain Commission’s Report. It was alleged in an article written by Shri Mani Shankar Aiyar. … (Interruptions)

MR. CHAIRMAN: What for are you replying? If there is any objectionable statement, that can be removed.

… (Interruptions)

SHRI A. KRISHNASWAMY : It is irrelevant. … (Interruptions)

श्री लक्ष्मण सिंह : सभापति महोदय, मैं यह कह रहा था कि आज कांग्रेस पार्टी ने डीएमके से समर्थन लिया है। कांग्रेस पार्टी ने उसी डीएमके के बारे में श्री राजीव गांधी हत्याकांड मे क्या कहा था ?

This is what I said. This statement is made by no less a person than Shri Mani Shankar Aiyar who is a Minister in the Government. This is a deposition given by Shri Mani Shankar Aiyar. He says, "I know the meeting ground at Sriperumbudur. That is near the bus stand. I have read reports in the Press, and it has been personally confirmed to me by the then TNCC President, that this ground had been booked by the DMK for a meeting on 21.5.1991 which was inexplicably cancelled at the last moment…."

"The meeting was to be held in the evening. The then TNCC President, Shri K. Ramamurthy publicly stated that at a meeting on 21.5.1991 near the Apollo Hospital, Chennai, the son of the DMK leader …"

(Interruptions)

SHRI A. KRISHNASWAMY : Sir, in what way is it connected to POTA? This is irrelevant. … (Interruptions) This is in no way connected. He is misleading the House by speaking irrelevant things. … (Interruptions)

SHRI LAKSHMAN SINGH : Further he has said:

"the son of the DMK leader, Thiru M.K. Stalin, made a speech in which he urged the DMK cadres to remain behind doors that evening as some incident was likely to take place."

… (Interruptions)

Sir, what was that incident? It was that Shri Rajiv Gandhi was assassinated and today these people are sitting here with the support of the DMK. … (Interruptions) Now, they want to withdraw POTA. … (Interruptions)

SHRI A. KRISHNASWAMY : You belong to the party which supports the Jayalalithaa Government. … (Interruptions) She has arrested Shankaracharya, a Hindu leader. Why are you sitting here? … (Interruptions) You go to Tamil Nadu and talk to her. … (Interruptions) She has arrested a Hindu leader.

SHRI RAVICHANDRAN SIPPIPARAI : You were in Congress. At that time, you voted against POTA. … (Interruptions)

SHRI A. KRISHNASWAMY : This is all irrelevant. … (Interruptions)

SHRI LAKSHMAN SINGH : All right, I will not talk about it. Please sit down. … (Interruptions)

MR. CHAIRMAN : If it is found objectionable, it would be removed from the record. If there is any objectionable matter, it would not find a place in the record. It would be expunged. Why do you worry?

… (Interruptions)

MR. CHAIRMAN: Hon. Member, please do address the Chair. Please do not get disturbed.

… (Interruptions)

SHRI LAKSHMAN SINGH : Sir, I am talking about something else. … (Interruptions)

MR. CHAIRMAN: Hon. Member, I have said that if there is something objectionable, I will remove it from the record. Now, that issue is over. You may please resume your speech.

… (Interruptions)

SHRI A. KRISHNASWAMY : Sir, whatever he has spoken is irrelevant. … (Interruptions)

SHRI LAKSHMAN SINGH : I am not talking about the DMK now.

MR. CHAIRMAN: There can be no discussion on this any more. The matter is over.

… (Interruptions)

श्री लक्ष्मण सिंह : सभापति महोदय, मैं आपकी अनुमति से बताना चाहता हूं कि श्री प्रकाश सिंह जी, जो असम के डीजीपी रहे हैं, उत्तर प्रदेश के डीजीपी रहे हैं, बार्डर सिक्युरिटी फोर्स के डीजीपी रहे हैं, तीन-तीन महत्वपूर्ण पदों पर जो रहे हें, उन्होंने पोटा के बारे में क्या लिखा है ---

"One reason for removing POTA is, India has a tradition of foreign invasions from time to time. From the time of Alexander to the Pak intrusion in Kargil, the tradition must be kept up. The foreign mercenaries who are causing mayhem in J&K should not feel any let or hindrance in their marauding campaign. So, POTA should be removed."

Secondly, he says:

"Political considerations have always been more important than national. So, POTA should be removed."

I am not saying this. He is the Director-General of BSF.

MD. SALIM (CALCUTTA - NORTH EAST): He is a former Director-General, just as you are a former Congress Member.

SHRI LAKSHMAN SINGH : All right, I stand corrected. He is a former Director-General of the BSF. He has served in Assam and in U.P. Thirdly, he says:

"What does it matter if the Aksai Chin is lost or even if the Valley slips out of our hands? So, remove POTA."

Then, he says:

"Terrorists killed one of our ex-Prime Ministers and a former Army Chief. No less than 60,000 lives have been lost. How does it matter to the Government? Remove POTA."

… (Interruptions)

SHRI RAVICHANDRAN SIPPIPARAI : ...*So, why do you talk about terrorism? … (Interruptions)

Then, he says:

"The human rights of terrorist must be safeguarded. The armed forces personnel serve to die only. "

That is why, POTA should be removed.

Then he says:

"Bin Laden sharanam gachchami! Masood Azhar sharanam gachchami! Salahuddin sharanam gachchami! "

MR. CHAIRMAN : Shri Lakshman Singh, please conclude.

… (Interruptions)

SHRI LAKSHMAN SINGH : Lastly, TADA was used in Gujarat by Shri Chimanbhai Patel. Against whom? He arrested 19,000 people who were connected with Amul Dairy movement. सरदार पटेल ने जो मूवमेंट चालू किया है, एक अमूल्य जैसा संस्थान खड़ा करके दिया है। सरदार पटेल जिनको कांग्रेस पार्टी पूरी तरह भूल चुकी है। उस महान व्यक्ति ने सहकारिता का आंदोलन खड़ा किया था, उनके १९,००० सदस्यों को चमन भाई पटेल जब कांग्रेस के मुख्य मंत्री थे, उन्होंने उनको लेकर ‘टाडा’ में बंद किया था।…( व्यवधान)अंत में, मैं कहना चाहूंगा और शिवराज पाटील जी से मैं हाथ जोड़कर निवेदन करूंगा कि इसको आप वापस ले लीजिए। इसको लागू करने से देश में आतंकवाद बढ़ेगा। आप एक साल का जो संसैट पीरिएड दे रहे हैं, शिवराज पाटील साहब, आप ध्यान रखिए, यह देश में कहीं आतंकवाद का सनराइज पीरिएड न हो जाए।

*Expunged as ordered by the Chair श्री मधुसूदन मिस्त्री (साबरकंठा) : सभापति महोदय, सबसे पहले तो मैं इस सरकार को यह बिल लाने के लिए खूब बधाई देता हूं क्योंकि यह दिन मेरे लिए और इस देश के सभी सविल लिबर्टीज के जो ग्रुप हैं, उनके लिए और जो बेसिक हयूमन राइट्स के अंदर मानते हैं, उनके लिए सबसे बड़ा खुशी का दिन है और इसके लिए मैं सरकार को खूब बधाई देता हूं। मुझे बड़ी हैरानी होती है, मेरे दोस्त को वहां से सुनते हुए आज…( व्यवधान)

श्री लक्ष्मण सिंह : आपको हैरानी होती है लेकिन मुझे गर्व है।…( व्यवधान)

श्री मधुसूदन मिस्त्री : मुझे हैरानी होती है क्योंकि हमारे यही साथी जब हम वहां बैठते थे तो‘पोटा’के विरोध के अंदर ये हमारे साथ थे।…( व्यवधान)

श्री लक्ष्मण सिंह : सभापति महोदय, मैं कभी ‘पोटा’ के खिलाफ नहीं बोला। रिकार्ड उठाकर देख लीजिए। पाटील साहब गवाह हैं।…( व्यवधान)

श्री मधुसूदन मिस्त्री : आपका बिल्कुल अलग सा चेहरा वहां से मुझे दिखाई दे रहा है। आपकी सीट नहीं बदली। आप पहले जहां थे, वहीं पर हैं और आपके दो चेहरों में से कौन सा चेहरा सही है, वह आप बता दीजिए क्योंकि आप हमारे साथीदार थे और आपने इसी सदन के अंदर जब हम‘पोटा’ का विरोध करते थे, तब आप हमारे साथ थे। भले ही आप मना करिए। उससे कोई फर्क नहीं पड़ेगा।…( व्यवधान)

MR. CHAIRMAN: Shri Madusudan Mistry, please address the Chair.

SHRI MADHUSUDAN MISTRY : Yes, Sir. I am coming to him. I am just trying to highlight the two faces of the hon. Member. When they were on the other side what they were saying and what they are saying now. … (Interruptions)

MR. CHAIRMAN: Shri Ramdas Athawale, please resume your seat.

… (Interruptions)

MR. CHAIRMAN: Shri Madhusudan Mistry, please address the Chair.

… (Interruptions)

SHRI MADHUSUDAN MISTRY : I think, these people are guilty. … (Interruptions) The Member who has spoken on POTA for more than two hours here – I am referring to Shri Vaiko — has been arrested under the same Act. इन्हीं के लाये हुए कानून के अंदर उनको अरेस्ट किया गया और आज भी वही परिस्थिति है लेकिन ये लोग इन्हीं की सरकार के अंदर वह नहीं कर सके।…( व्यवधान)मैं बहुत खुश हूं कि यह सरकार इसको लाई है। गुजरात के अंदर क्या हुआ?

श्री लक्ष्मण सिंह : BÉDªÉÉ cÖ+ÉÉ ?

श्री मधुसूदन मिस्त्री : आपको जरा तीखा लगेगा। मुझे बताइए कि इनकी सरकार का एक भी आदमी,…( व्यवधान) Who had led the mobs in killing the minority people, has he ever been arrested in POTA? Not only that the DSP has deposed before the Commission sayingजब एक मनिस्टर ने भावनगर का जो डीएसपी है, जो उस वक्त था, उसको एक मनिस्टर ने फोन किया कि आपने ५-५ मेजोरिटी के लोगों को मारा, एक भी माइनॉरिटी का क्यों नहीं मारा ? उस बात का जवाब दें। Not only that. मैं आपको बताता हूं…( व्यवधान)

श्री पी.एस. गढ़वी (कच्छ) :यह बिल्कुल असत्य कह रहे हैं।…( व्यवधान)

SHRI MADHUSUDAN MISTRY : It is so difficult to listen. विक्टीम कौन हुआ, सबसे पहले माइनोरटीज वाले इसका शिकार बने।…( व्यवधान) Sir, I am not yielding. They have to listen. They should have the patience to listen.

MR. CHAIRMAN : You address the Chair.

SHRI MADHUSUDAN MISTRY : Sir, I am addressing you. I am not telling them. The unfortunate part is that they do not have the patience to listen. That is unfortunate. जिन्होंने कभी हिस्सा नहीं लिया, जो जवान लड़के थे, कभी मॉब के अंदर नहीं थे, जिन्होंने किसी को नहीं मारा था, ऐसे लोगों को पोटा के अंदर अरेस्ट किया गया। एक ही पार्टी के जिन लोगों ने और उस पार्टी के संलग्न संगठन के लोगों ने मॉब को लीड किया, जिन्होंने आगजनी की और लोगों को मारा, उनमें से किसी पर भी पोटा लगाकर उसे अरेस्ट नहीं किया गया।…( व्यवधान) मुझे पता है आपको सुनना कठिन होगा। लेकिन आप सारे उदाहरण देख लें। आपको पता चल जाएगा कि पोटा का सबसे ज्यादा दुरुपयोग गुजरात के अंदर हुआ है। किसी को भी अरेस्ट करना हो, आईएसआई से लिंक करके केस बना दो और अरेस्ट कर दो। उस वक्त के उप प्रधान मंत्री और आज विपक्ष के नेता आडवाणी जी के निर्वाचन क्षेत्र में और एक ही पार्टी के दूसरे सदस्यों के निर्वाचन क्षेत्रों में ऐसे कई लोगों को अरेस्ट किया गया। लेकिन इनकी पार्टी के लोगों ने जो हिंसा की, किसी को भी अरेस्ट नहीं किया गया। आज भी वहां लोगों को नहीं छोड़ा जा रहा है। आज भी लोग दहशत में हैं। बाहर आकर वे लोग कह नहीं सकते कि हमें बचाएं, क्योंकि बाहर आकर अगर हयूमन राइट्स कमीशन के वकील से शिकायत करेंगे तो उन लोगों को और परेशान किया जाएगा। ऐसी परिस्थिति उस राज्य में है और वहां अल्पसंख्यक लोगों के साथ ऐसा बर्ताव किया जा रहा है, जिनके भविष्य को लेकर कोई बात साफ नहीं है। …( व्यवधान)मैं ईल्ड नहीं कर रहा हूं। All the facts are coming, one by one, before the Commission. इनका कोई भी ऐसा आदमी नहीं है, जो आकर बोल सके कि नहीं अब किसी पर पोटा नहीं लगाया जाएगा, ऐसा नहीं है। ऐसी परिस्थिति गुजरात के अंदर हो रही है कि जिसको जब चाहे पोटा में अरेस्ट कर दो। कोई आदमी बेल नहीं ले सकता, किसी भी आदमी को खाना नहीं दे सकते, उसके परिवार वाले आपसे नहीं मिल सकते। चार-चार, पांच-पांच दिन तक उससे किसी को बात नहीं करने दी जाती। जिसको अरेस्ट किया जाता है, उसके परिवार वाले परेशानी की हालत में इधर-उधर घूमते रहते हैं। यह परिस्थिति पूरे राज्य में इनके शासन की वजह से हो रही है। Let me just tell them. I am just telling you. No person who is in the minority group feels safe even now, in their regime. जो डिपोज़ हो रहे हैं, वे अधिकारी लोग कह रहे हैं,They took over possession of the control room during those days. I want to know why can they not be arrested under POTA by this Government.इनके जो मंत्री थे, उन्होंने पूरे कंट्रोल रूम पर कब्जा कर लिया और कहा कि कहां पुलिस भेजनी है, कहां नहीं भेजनी है, ये लोग तय करेंगे। इस कानून के अंतर्गत ऐसी बातें वहां हुई थीं और हो रही हैं। इस कानून का सबसे ज्यादा क्रास मिसयूज गुजरात में हुआ है।

मैं आज की केन्द्र सरकार का अभिनंदन करना चाहता हूं कि उसने इस कानून को खत्म करके दूसरा कानून पेश किया है। गुजरात में कल हयूमन राइट्स के लोग आएंगे और इस नए कानून का समर्थन करेंगे। इस बारे में वहां एक बड़ी मीटिंग होगी।

MR. CHAIRMAN : Shri Madhusudan Mistry, you may continue your speech later. It is now time for Private Members’ Business.

SHRI MADHUSUDAN MISTRY : Yes, sir.

__________   MR. CHAIRMAN : We will now take up Private Members’ Business – introduction of Bills.