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Lok Sabha Debates

Need To Provide Assistance From Crf/Ndrf To Rajasthan To Tackle Drought ... on 8 August, 2016

Sixteenth Loksabha an> Tilte: Need to provide assistance from CRF/NDRF to Rajasthan to tackle drought situation in districts of Rajasthan.

 

कर्नल सोनाराम चौधरी (बाड़मेर)ःमैं जिस क्षेत्र से लोक सभा का प्रतिनिधित्व करता हूं, वह क्षेत्र प्राकृतिक रूप से मरूस्थल है। यहां बरसात बहुत ही कम मात्रा में होती है। यह थार का रेगिस्तान कहलाता है। इस क्षेत्र का क्षेत्रफल 60000 कि.मी. है, जिसमें बाड़मेर जिले में लगभग 2253105 हैक्टेयर भूमि कृषि योग्य है। यहां सिंचाई के लिए कोई साधन या स्रोत उपलब्ध नहीं है। यहां का आमजन बरसात के पानी एवं बरसाती पानी पर होने वाली फसल पर पूर्णतया निर्भर है। बरसात के दिनों में जो पानी बरसता है, उसी का संरक्षण कर वर्ष भर उसका उपयोग स्थानीय लोग पीने के पानी के रूप में करते हैं तथा जो बरसात के पानी से फसल हो जाती है, साल भर उसी से गुजारा करते हैं एवं उसी फसल को बेच कर अपने सामाजिक कार्यों को करते हैं और दुःख-बीमारी में भी उसी अर्जित धन का उपयोग किया जाता है। इस क्षेत्र में कोई औद्योगिक इकाई नहीं होने से यहां का जीवन कृषि आधारित है। इस मानसून ने तो बाड़मेर-जैसलमेर के किसान की आशा ही तोड़ दी है। इस इलाके की मुख्य खरीफ फसल बाजरा की बुवाई का समय निकल चुका है और क्षेत्र में दो दिन पूर्व तक बरसात की एक बूंद भी नहीं पड़ी थी। गत बुधवार व गुरूवार को सिवाना, बालोतरा क्षेत्र में थोड़ी बरसात हुई है। क्षेत्र में बरसात के यदि आंकड़े देखें तो पूरे बाड़मेर जिले में 26.33 एम.एम. बरसात हुई है। 1 जनवरी, 2016 से 1.6.2016 तक 77.93 एम.एम. बारिश हुई है जबकि यहां का औसत 300 एम.एम. है। जिले के 5787781 हैक्टेयर जमीन में से मात्र 57 प्रतिशत भूमि पर स्पष्ट रूप से सूखा पड़ चुका है। अब 10-15 दिनों में बरसात हो जाये तो पीने के पानी और पशुओं के लिए चारा ही संभव हो पायेगा। ज्यादा से ज्यादा मूंग, मोठ की फसल हो सकती है। ऐसी स्थिति में गरीब, मजदूर किसान की हालत खराब हो जायेगी।

          ऐसी स्थिति से निजात दिलाने के लिए मेरा माननीय प्रधानमंत्री महोदय एवं संबंधित मंत्री महोदय से अनुरोध है कि भीषण अकाल से निपटने के लिए राज्य सरकार को सीआरएफ/एनडीआरएफ से अधिकाधिक सहायता प्रदान करायें ताकि सूखाग्रस्त क्षेत्र के लोगों को सूखा से राहत मिल सके। राजस्थान के जल संकट के स्थाई समाधान हेतु तापी नदी को नर्मदा से जोड़ने और नर्मदा नहर में पानी प्रवाह और यमुना नदी का पानी लूणी में प्रचुर मात्रा में प्रवाहित किया जाये।