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Lok Sabha Debates

Regarding Involvement Of Touts In Railway Recruitment Process. on 10 March, 2015

Sixteenth Loksabha an> Title: Regarding involvement of touts in Railway recruitment process.

श्रीअरविंद सावंत (मुम्बईदक्षिण) : महोदया, मैं एक अत्यंत ही गंभीर विषय को आपके माध्यम से रेल मंत्री जी के सामने रखना चाहता हूं। बेरोजगारी हमारे यहां एक जटिल प्रश्न है। 20 जून, 2013 को       * नाम के एक शख्स ने बताया कि मंत्री महोदय का रेलवे रिक्रूटमेंट में कोटा होता है। ऐसा कहकर दिल्ली में उन लोगों को बुलाया। दिल्ली में * नाम के शख्स से पहचान करा दी। नाम जानबूझकर ले रहा हूं क्योंकि जांच के लिए अच्छा होगा, ये बड़े लोग नहीं हैं,न विधायक हैं न नगर सेवक हैं।

माननीयअध्यक्ष :  नाम मत लीजिए।

श्रीअरविंद सावंत:  आप चाहें तो नाम निकाल दीजिए, मुझे कोई हर्ज नहीं है, इन दोनों व्यक्तियों ने कहा कि रेलवे की रिक्रूटमेंट के बारे में कल अर्जी लाकर देता हूं,अर्जी लाकर दी गई,  अर्जी लाकर देने के बाद बकायदा रेलवे रिक्रूटमेंट्स बोर्ड की तरफ से फोन आया कि आपने जो अर्जी भरी है वह स्वीकृत हुई है और आपको दो दिन में कॉल आ जाएगा। बाद में रेलवे रिक्रूटमेंट्स बोर्ड की साइट् से भी मेल आ गया कि आपका रिक्रूटमेंट्स फार्म मिला है। फिर उन्हें मेडिकल टेस्ट के लिए भेजा गया, रेलवे की अस्पताल में उनकी मेडिकल हुई। मेडिकल होने के बाद कृषि भवन में किसी आई.ए.एस. लेवल के किसी  अधिकारी ने इंटरव्यू ली,उनके पास कृषि भवन का इंट्री पास आज भी उपलब्ध है, आठ दिन बाद उन्हें अप्वाइटमेंट लेटर मिला। अप्वाइटमेंट लेटर मिलने के बाद उनसे कहा गया कि आपको ट्रेनिंग के लिए जाना पड़ेगा। चंदौसी, मुरादाबाद में ट्रेनिंग हुई,उनसे कहा गया कि आपको इलाहाबाद जाना पड़ेगा,फिर कलकता के दत्तुबाग में उनकी ट्रेनिंग हुई। बेसिक पेमेंट मिला,आई-कार्ड मिला, सर्विस बुक बनाया गया। उसके बाद तहसील से चरित्र प्रमाणपत्र लाने के लिए  कहा गया। तहसील से प्रमाणपत्र भी दिया गया। प्रमाणपत्र देने के बाद दानापुर बिहार में उनको तीन महीने स्टेशन पर ट्रेनिंग की डय़ूटी कराई गई,अप्रैंटिंस जैसी ट्रेनिंग कराई गई। दानापुर डिवीजन, ड्रेस कोड, नेम प्लेट,आई-कार्ड,पास, पेमेंट,पे-स्लिप सब दी गई, सब कुछ देने के बाद स्टेशन डय़ूटी का लेटर देने के लिए कहा गया, बिहार में अप्वाइटमेंट के लिए लेटर दे दिया गया। मेरे पास उनकी सारी फाइल है, आई-कार्ड है, रेलवे का ऑरिजनल लेटर है। इसमें महाराष्ट्र के 40 बच्चे हैं इसके अलावा और भी बहुत सारे लोग हैं जिन्हें फंसाया गया है,हरेक व्यक्ति से सात लाख रुपये लिए गए। जो लोग यह सब कर रहे थे वे आज कई महीने से गायब हैं, उनको पता चला कि अब फंस गए हैं,फंसने के बाद जांच शुरू हुई,* के लड़के से लेकर जो रेलवे का शख्स था, आज कोई नहीं मिलता है, सात लाख हरेक व्यक्ति से लिए गए हैं। मैं आपके माध्यम से रेल मंत्री जी से जांच के लिए अनुरोध करता हूं। अगर जरूरत पड़े तो सी.बी.आई. भी इसकी जांच करे। इन बच्चों को न्याय दें। ऐसी मांग जीरो ऑवर में मैं आपके माध्यम से करता हूं।                   

         धन्यवाद।