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Lok Sabha Debates

Combined Discussion On Statutory Resolution Disapproving The Railways ... on 5 March, 2008

> Title: Combined discussion on Statutory Resolution disapproving the Railways (Amendment) Ordinance, 2008; Railways (Amendment) Bill, 2008; General Discussion on the Budget (Railway) 2008-09; Demands for Grants in respect of Budget (Railways) 2008-09; Supplementary Demands for Grants in respect of Budget (Railways) 2007-08 and Demands for Excess Grants in respect of Budget (Railways) 2005-06.

 

SHRI PRABODH PANDA (MIDNAPORE):  I beg to move:

“That this House disapproves of the Railways (Amendment) Ordinance, 2008 (No.2 of 2008) promulgated by the President on 31 January, 2008. ” … (Interruptions)
   
* Moved with the recommendation of the President THE MINISTER OF RAILWAYS (SHRI LALU PRASAD):  Sir, I beg to move:
“That the Bill further to amend the Railways Act, 1989, be taken into consideration.”   MR. DEPUTY-SPEAKER: Motions moved:
“That this House disapproves of the Railways (Amendment) Ordinance, 2008 (No.2 of 2008) promulgated by the President on 31 January, 2008. ”   “That the Bill further to amend the Railways Act, 1989, be taken into consideration.”   “That the respective sums not exceeding the amounts shown in the third column of the Order Paper be granted to the President of India out of the Consolidated Fund of India, on account, for or towards defraying the charges during the year ending the 31st day of March, 2009, in respect of the heads of Demands entered in the second column thereof against Demand Nos. 1 to 16.”   “That the supplementary sums not exceeding the amounts shown in the third column of the Order Paper be granted to the President of India, out of the Consolidated Fund of India, to defray the charges that will come in course of payment during the year ending the 31st day of March, 2008, in respect of the heads of Demands entered in the second column thereof against Demand Nos. 10, 12, 14, 15 and 16.”   “That the respective excess sums not exceeding the amounts shown in the third column of the Order Paper, be granted to the President of India, out of the Consolidated Fund of India, to make good the excess on the respective grants during the year ended the 31st day of March, 2006, in respect of the heads of Demands entered in the second column thereof against Demand Nos. 4,6,10 and 16.”   श्री हरिन पाठक (अहमदाबाद)  :  उपाध्यक्ष महोदय, धन्यवाद। मेरा गला ठीक नहीं है।
उपाध्यक्ष महोदय: आहिस्ता-आहिस्ता ठीक हो जाएगा।[rep15]  श्री हरिन पाठक : महोदय, 2008 का रेल बजट सम्माननीय लालू जी ने अपने चिर-परिचित अंदाज से सदन में और देश के सामने रखा। व्यक्तिगत रूप से मेरे उनके साथ बहुत मधुर सम्बन्ध हैं। उनकी अपनी एक खास शैली है। कई सालों से, कई दशकों से गरीबों के लिए वे लड़ते-जूझते हैं।
          जब बजट यहां रखा गया तो सब प्रभावित हो गये। चारों तरफ वाहवाही हो गये, यहां तक कि आज प्रधानमंत्री भी खुश हो गये, मगर मुझे बड़े दुख के साथ जो हमारे कुछ पत्रकार बन्धु भी उस दिन थोड़े प्रभाव में आ गये थे। 28 तारीख के बाद फिर जब लोगों की समझ में आने लगा कि असली बजट के पीछे क्या चालाकी या क्या महत्वपूर्ण उन्होंने अपना हुनर दिखाया है, जो कि असली बजट में नहीं है। आप दूसरे दिन के अखबार उठा लीजिए, बाद में पता चल जायेगा। एक के बाद एक खबरें हैं, 10 साल में दम तोड़ देगी भारतीय रेलवे। मैं नाम नहीं लूंगा, रेलवे बोर्ड के पूर्व चेयरमैन का स्टेटमेंट है, सफर होगा थोड़ा महंगा, दैनिक यात्रियों को अंगूठा दिखाया। मैं वही बात कहने जा रहा हूं। करीबन पिछले 20-25 दिन से मैं इस पर लगातार अभ्यास कर रहा था, इसलिए मैंने पार्टी से भी कहा था कि मुझे इस पर बोलने का मौका दिया जाये। पार्टी का मैं इसके लिए धन्यवाद करता हूं। मैं लोगों से मिला, ट्रेन में सफर किया, स्टेशनों पर जाकर देखा, उसके बाद मैं आपके सामने कुछ तथ्य रखने जा रहा हूं। हो सकता है, मेरी जानकारी में कहीं पर अगर कोई अनुचित बात हो, जो कि उन्होंने मुझे ठीक तरह से न समझाया हो या मेरे संज्ञान में ठीक तरह से न आया हो तो मैं कहता हूं कि माननीय रेल मंत्री जी मुझे दुरुस्त करें।
          खोखली घोषणाओं से रेलवे का काम नहीं हो सकता। लालू जी, मैं प्राथमिक चीज आपसे यही अपील करूंगा और मुझे उम्मीद थी, इसलिए मैंने चार वाक्य आपके बारे में कहे। आप हम लोगों की तरह जमीन से जुड़े हैं, किसान, मध्यम वर्ग के लिए कई सालों से हम सब लोग लड़ते आये हैं, आप भी लड़ते आये हैं। अगर उनके बारे में सोचेंगे तो या तो आपको आपके अधिकारियों ने गुमराह किया, मैं बाद मैं उस पर आऊँगा। उसी दिन रात को आपका इण्टरव्यू मैं एक टी.वी. चैनल पर देख रहा था, जब रिजर्वेशन की मर्यादा दो महीने से तीन महीने कर दी। उसके क्या परिणाम होंगे, मैं बाद में बताऊंगा। तब आपने तुरन्त कह दिया कि मुझे पता नहीं है, मैं दिखवा लूंगा। 90 दिन इन एडवांस रिजर्वेशन, कैसे लोगों की जेबों से पैसे पिछले दरवाजे से निकाले जाते हैं, उसकी यह व्यवस्था है।
          दूसरी बात मेरी यह है, रेल मंत्री जी, आखिर हमारा उद्देश्य क्या है? सारे आंकड़े आपके सामने मौजूद हैं, आप और हम सब लड़ते हैं। देश की कुछ सेवाएं ऐसी हैं, जो मुनाफे के लिए नहीं चलाई जातीं, आम आदमी की सुविधाओं के लिए हैं। ये मल्टीनेशनल कम्पनियां नहीं हैं। इसमें जो लोग सफर करते हैं, चाहे स्टेट ट्रंसपोर्ट हो, किसानों की सब्सिडी का मसला हो, रेलवे हो, उसमें हमारा उद्देश्य है कि हम आम आदमी को उस सुविधा का ज्यादा से ज्यादा लाभ दें।[R16]  ताकि वह बेचारा एक जगह से दूसरी जगह जा सके।  पिछले तीन-चार सालों में आदरणीय मंत्री जी, आपको आपके अधिकारियों ने गुमराह किया। हम उद्देश्य से भटक गए।  सात हजार करोड़, वर्ष 2005-06 में 14 हजार करोड़, फिर 25 हजार करोड़ रूपए, हम पैसा कमाने के लिए रेल नहीं चलाते हैं ...( व्यवधान) अगर आप कहें तो बैठ जाउं।
उपाध्यक्ष महोदय : रनिंग कमेंट्री मत कीजिए। आपको भी बोलना है और आपकी पार्टी के माननीय सदस्य         बोलने वाले हैं।
...( व्यवधान)
उपाध्यक्ष महोदय : ये लालू जी की तारीफ कर रहे हैं।
श्री हरिन पाठक  : महोदय,घोषणाओं से काम नहीं होगा, उनका अमलीकरण करना होगा।  दो साल पहले आपने घोषणा की कि कुल्हड़ में स्टेशनों पर चाय मिलेगी, ट्रेनों में चाय मिलेगी और जो गांव में इसे बनाने वाले गरीब कुम्हार हैं, उन्हें रोजी-रोटी मिलेगी।  मुझे तो किसी भी ट्रेन या स्टेशन पर चाय का कुल्हड़ नजर नहीं आता है।  मुझे किसी ने बताया कि मंत्री जी की केबिन में अभी है, यह वहां तक रहा है, अब जरा आप उसे बाहर निकालिए।  वह बाहर नहीं है।
          तीसरी घोषणा की थी कि खद्दर या खादी जिसे गांव का बुनकर बुनता है, उसे प्रमोट करने के लिए, रेल की बेड शीट्स खादी की होगी, कर्टेन खादी के होंगे।  मुझे नहीं लगता है कि वे ट्रेनों में लगे हैं।  यहां सिर्फ बातें करेंगे और सीधा ध्यान अधिकारियों पर नहीं देंगे, तो घोषणा सिर्फ घोषणा रह जाएगी। इस बार आपने कहा, मैं इस पर बाद में आउंगा, यह अच्छी बात है और मैं इसका स्वागत करता हूं। पहली बार हुआ है कि जो हमारे कुली भाई हैं, जो सामान उठाते हैं, उन्हें नौकरी देने की बात कही गयी है और मैं उसका समर्थक हूं। 
          करीब 20-22 साल पहले, अहमदाबाद कारपोरेशन के द्वारा संचालित ट्रंसपोर्ट सुविधा थी, जैसे यहां दिल्ली ट्रंसपोर्ट है, वैसे एएमटीएस ट्रंसपोर्ट की सुविधा थी, वहां मैंने पहला काम किया कि गरीब को उसकी रोजी-रोटी मिले और करीब 500 गरीब लोगों को वहां मैंने रोजी-रोटी दी। आपने इस बारे में सोचा है, लेकिन मेरे मन में एक शंका पैदा हुयी है।  आप उस शंका का निराकरण करिए और उसे दुरूस्त करिए। हमारे यहां 16 हजार 6 सौ मैंड क्रासिंग्स हैं और 18 हजार 2 सौ अनमैंड क्रासिंग्स हैं। पहला प्रश्न तो यह है कि अगर चार साल में मंत्री जी आपने मुनाफा कमाया, 7 हजार करोड़ रूपए, 14 हजार करोड़ रूपए, 20 हजार करोड़ रूपए, तो जो ये अनमैंड क्रासिंग्स हैं, अगर उन पर आप ध्यान देते, तो वर्ष 2001 में जो अनमैंड क्रासिंग पर दुर्घटनाएं घटीं, झा जी, वह 15 प्रतिशत थीं, जबकि वर्ष 2006-07 में दुर्घटनाएं 37 प्रतिशत बढ़ीं।  इतने लोगों की जान बचा पाते, आपके पास पैसा है, आप ठोक-ठोक कर सरप्लस बता रहे हैं कि 20 हजार करोड़ रूपए कमाए, ...( व्यवधान) इस साल 25 हजार करोड़ हो गया है। इसे पहले कर देते, तो कम से ये दुर्घटनाएं 37 प्रतिशत तो नहीं हुयी होंती।  कोई बात नहीं, नहीं किया, देर आए दुरूस्त आए और अब किया।  मैं अभिवादन करता हूं।  मैं सिर्फ एक बात आपके ध्यान में माननीय मंत्री जी लाना चाहता हूं कि गैंगमैन को हम गेटमैन बनाएंगे। गैंगमैन के काफी स्थान रिक्त हैं। जहां तक मेरा थोड़ा-बहुत अनुभव है, मैं रेलवे में काम नहीं करता मगर जैसे कहा कि हम लोगों के बीच रहते हैं। गैंगमैन का काम भी टैक्नीकल है। वह पटरियां चैक करता है, फिश प्लेट्स चैक करता है, बोल्ट वगैरह चैक करता है। गेटमैन का काम भी टैक्नीकल है। ध्यान से सुनिए। मैं सिर्फ परियोजना में सुधार करना चाहूंगा। अगर यह दोनों काम टैक्नीकल हैं, कुली भाइयों को जरूर बनाइए, लेकिन इसमें कोई प्रावधान नहीं है कि उन्हें इन दोनों कामों के हुनर सिखाने चाहिए। उनका काम अलग है, वे बेचारे सिर पर बोझ उठाते हैं, वे गरीब हैं। यदि हम उन्हें गैंगमैन या गेटमैन बना देते हैं, तो उन्हें गेटमैन का टेलीफोन रिसीव करना पड़ेगा कि फाटक कब बंद करना है। गेटमैन की बहुत जिम्मेदारियां होती हैं, उसके बहुत टैक्नीकल आस्पैक्ट्स हैं। मैं चाहूंगा कि आप हमारे कुली भाइयों को नौकरी के साथ प्रशिक्षण का काम भी दीजिए, वर्ना उन्हें समझ में नहीं आएगा कि गेटमैन को क्या-क्या काम करना पड़ता है। मेरी आपसे यह प्रार्थना है।
          मैं दूसरी बात यह कहना चाहूंगा, जैसे मैंने कहा कि हमारा उद्देश्य सेवा का है। स्टेशन पर जो गंदगी है, आप यात्री डिब्बों में जाइए, उनकी जो हालत है, आदमी ट्रेन में बैठ नहीं सकता। मैं अगर मजाक में कह दूं तो ट्रेन में बहुत बड़ा आतंकवाद फैल गया है। मैंने उसे भुगता है। राठवा जी, यह आतंकवादी हाथ में नहीं आते, आतंकवादी ट्रेन में भाग जाते हैं। यह आतंकवादी कौन हैं? यह आतंकवादी चूहे हैं। पिछले साल मेरी बाय-पास सर्जरी हुई। डाक्टर ने मना किया और कहा कि आप अभी हवाई जहाज में कम सफर कीजिए क्योंकि प्रैशर बढ़ेगा। आप ट्रेन से जाइए। मैं राजधानी ट्रेन से अपने अटैंडैंट और परिवार के साथ 5-6 बार गया। चूहा मेरे फर्स्ट एसी कोच में था।...( व्यवधान) वह भी बिना टिकट ट्रैवल कर रहा था। वे बेचारे उसे ढूंढ रहे थे, लेकिन वह नहीं मिला। मुझे उस चूहे के काटने के डर से पूरी रात जागना पड़ा।...( व्यवधान) चूहा गोडाउन में घुस जाता है, कुछ भी खा लेता है। अगर मैं कुछ और बोलूंगा तो झा साहब नाराज़ हो जाएंगे। चूहा गोदाम में जाकर क्या-क्या खा जाता है।...( व्यवधान) मैं बिल्लियां लेकर कहां घूमूं। मैं सीधा-सादा शिक्षक आदमी हूं। मैं जो कह रहा हूं, वह सब सत्य है। स्वच्छता पर ध्यान दीजिए, लेकिन उस पर आप ध्यान नहीं दे पा रहे हैं।
          अब मैं जो चालाकी बता रहा हूं, राठवा जी, अधिकारियों ने आपको गुमराह किया है। मैं पूरे सदन का समर्थन चाहूंगा। मैं राजनीतिक बात नहीं करता। आज पूरे सदन को पता चलेगा कि पिछले दो सालों से देश में रेलवे के नाम पर आम आदमी को  कैसे पिछले दरवाजे से लूटा जा रहा है, मैं उसका उदाहरण देने जा रहा हूं। यदि गलत हो तो मुझे रोकिए। मैं व्यक्तिगत आरोप नहीं लगाता। या तो मंत्री जी को पता नहीं है। वह गरीब रथ है। हमने गरीब रथ में ट्रैवल करवा दिया। जो आम आदमी स्लीपर क्लास में जाता था, उसे थर्ड एसी में ट्रैवल करवा दिया। हमने रूटीन थर्ड एसी से उसका किराया कम कर दिया। क्या सदन को मालूम है? मालूम होगा कि गरीब रथ की कोच की कैपेसिटी वही  है। पहले 64 बर्थ थीं। अब उसी बर्थ में, उसी कोच में, उतनी ही विड्थ एंड लैन्थ में 82 बर्थ कर दी गईं, यानी 18 बर्थ बढ़ा दी गईं। मुर्गी की तरह बेचारे पैसेंजर।[N17]  चाहे वह गरीब ही हो, लेकिन उसे रात भर सफर करना है। अब कोच वही, लेकिन उसमें 64 बर्थ की जगह 82 बर्थ हैं। अब ये कहते हैं कि हमने गरीबों को ए.सी. ट्रेन में बैठाया।  इसके साथ-साथ उसमें टायलेट भी चार ही हैं। यह चालाकी की गयी है।  मुझे आपसे यह उम्मीद नहीं थी, क्योंकि आप गरीबों के साथ जुड़े हुए हो। अब डेढ़ दिन का सफर है  और सफर में 64 बर्थ पर 82 आदमी बैठें। ...( व्यवधान) मैं आपको नहीं कह रहा हूं। ...( व्यवधान) यह गलत है। अगर मैं कहता हूं कि सुविधा मिलनी चाहिए। ...( व्यवधान)  गोयल जी, आपको दुख हो रहा है, तो जिस दिन आप रेल मंत्री बनेंगे, उस दिन मैं भाषण नहीं दूंगा। यहां ट्रेजरी ब्रेंचों पर कोई नहीं है। राठवा जी, आप अपनी जगह उनको रेल राज्य मंत्री बना दीजिए, ताकि उनको तकलीफ न हो। ...( व्यवधान) आप सुन लीजिए। गरीब रथ में आपने बर्थ बढ़ा दी। दूसरी बात जो मै कहना चाहता हूं, वह अखबार में है। You have converted all Express and Mail Trains into Super Fast Trains. बसुदेव आचार्य जी बहुत अच्छी तरह से जानते हैं। यह दूसरी चालाकी है। ...( व्यवधान) कुछ करना नहीं है, सिर्फ चालाकी करनी है। सारी मेल ट्रेनों के बोर्ड बदल दिये हैं। अब प्लेस सेम, डेस्टीनेशन सेम, डिस्टेंस सेम, स्टॉपेज सेम, कोच सेम है। आधा-पौना घंटा कम करने की घोषणा की जाती है, लेकिन देश में ट्रेन कभी भी समय पर नहीं गयी है। दो घंटे से लेकर 24 घंटे तक ट्रेन डिले है, लेकिन आपने उसे सुपर फास्ट ट्रेन बना दिया। इस तरह किराया भी बढ़ गया। स्लीपर में 150 रुपये और ए.सी. में 300 से 350 रुपया बढ़ गया। अब यह कहते है कि प्रॉफिट हो रहा है। किसी का ध्यान इस तरफ नहीं गया। इनका ध्यान भी नहीं गया। अभी भी वाह-वाही चल रही है। प्रधान मंत्री जी का भी ध्यान नहीं गया कि कितनी ट्रेनें हैं। मेरे पास जो आंकड़ें हैं, मैं उस पर बाद में आऊंगा, तकरीबन 200 ट्रेनें हैं। अब जनरल कोच में 10 रुपये, स्लीपर कोच में 20 रुपया और ए.सी. कोच में  25 से लेकर 50 रुपये पर पैसेंजर आटोमेटिक बढ़ गया जबकि सेम जर्नी और सेम डेस्टीनेशन है। देश के साथ यह क्या हो रहा है? पूरे सदन को इतना गुमराह किया जा रहा है। कहीं पर भी इस बात का उल्लेख नहीं है। आपने दो-तीन परसेंट किराया कम किया है। मैं इस पर बाद में आऊंगा। अब वह किराया कैसे कम किया, यह भी सदन को पता चलना चाहिए। उसमें भी  आम जनता और सांसद के साथ खिलवाड़ हुआ है। इन्होंने पाकेट से पैसे निकाल लिये हैं। यह क्या बात है? ट्रेनों के बोर्ड बदल देने से, नाम बदल देने से आम आदमी की जेब से पैसा निकल गया जबकि सुविधा के नाम पर शून्य है। 
          दूसरी बात बहुत गंभीर है। बसुदेव आचार्य और मेरे सभी साथी इस पर बहुत डिटेल में बात करेंगे--वह है तत्काल स्कीम। माननीय मंत्री जी, आप प्रॉफिट दिखाने के लिए ऐसा मत करिये। मैंने पहले कहा कि उद्देश्य क्या है। What is the purpose of Indian Railways?  हमने वह सूत्र लिखा हुआ है। जब हम ट्रेन में बैठते हैं, तो सूत्र लिखा होता है कि आपकी यात्रा मंगलमय हो और हम आपकी  सुखद एवं सुरक्षित यात्रा की कामना करते हैं। अब मंगलमय होगी यात्रा?  अब 64 की बर्थ में 82 लोगों को बैठाना कहां तक ठीक है। उस ट्रेन में टायलेट की भी उचित व्यवस्था नहीं है। इस तरह जेब से पैसे निकाल लेना है।  इसके बाद तत्काल योजना आती है। तत्काल योजना का मतलब है कि आदमी को इमर्जेसी हो, तो उन्हें टिकट मिल जाये। Somebody has an emergency to go. पहले तत्काल योजना एक-आध दिन के लिए शुरू हुई थी यानी आप 24 घंटे में टिकट ले लो। कुछ पैसे ज्यादा दो, तो आपको कन्फर्म टिकट मिल जायेगी। आपको जानकर ताज्जूब होगा कि पहले यह एक दिन था लेकिन अब जनवरी से, मैं सदन का ध्यान आकृष्ट करना चाहूंगा।[MSOffice18]    30 से 40 प्रतिशत कोचेज को तत्काल के लिए रिजर्व कर दिया गया है। देखिए कि इसमें कितनी बड़ी होशियारी की गयी है। मान लीजिए अगर 100 सीटें हैं तो उनमें से 40 सीटें तत्काल के लिए रिजर्व हो गयी हैं जिनके लिए आम आदमी को पैसा देना पड़ेगा। दूसरी बात यह है कि तत्काल टिकट बुक कराने के लिए समय बढ़ाकर पांच दिन कर दिया गया है। मैं इसका मतलब समझने में मैं नाकाम हूं कि क्या तत्काल पांच दिन पहले से हो सकता है। इसमें भी अनलिमिटेड वेटिंग लिस्ट होती है।  आप इस तरह से जनता का पैसा मत लूटिए, मेरे ख्याल से अगर आप तत्काल के नाम पर अधिक पैसा ले रहे हैं तो उसमें वेटिंग लिस्ट नहीं होनी चाहिए और अगर हो भी तो वह अनलिमिटेड नहीं होनी चाहिए। तत्काल में लोगों को स्लीपर क्लास के लिए 150 रूपए और एसी क्लास के लिए 300 रूपए अतिरिक्त देने होते हैं, चाहे टिकट कंफर्म हो या नहीं।...( व्यवधान)
श्री रघुनाथ झा (बेतिया): देने वालों को कोई तकलीफ नहीं है, आपको तकलीफ हो रही है।
उपाध्यक्ष महोदय : प्लीज, रनिंग कमेंटरी मत कीजिए।
श्री हरिन पाठक (अहमदाबाद)  : झा साहब, आप समृद्ध परिवार से हैं, लेकिन मैं एक गरीब परिवार से आता हूँ, जिन लोगों को तकलीफ है, उन्हीं लोगों ने मुझे बताया है। लेकिन अगर जनता को लूटने में आपको खुशी हो रही है तो लूटिए। इसे पांच दिन पहले से बढ़ाकर दस दिन कर दीजिए।
          इस तरह तत्काल कोटे के लिए 100 में से 30 सीटें रिजर्व हो गयीं। उसमें भी कोई गारंटी नहीं है कि आपको कंफर्म टिकट मिलेगा या नहीं।  अगर आपने सामान्य तरीके से बुकिंग कराई है, तत्काल टिकट नहीं लिया है, उस स्थिति में अगर आपका टिकिट वेटिंग में है और आप यात्रा नहीं कर पाते हैं, आपकी ट्रेन छूट जाती है तो आपको पैसा रिफण्ड होता है। लेकिन तत्काल में ऐसा नहीं होता है, वहां पैसे चले जाते हैं।  आप लोग ध्यान से सुनिए, सभी को पता चल जाएगा कि यह बजट क्या है।  तत्काल का एक उदाहरण आपको देता हूं - दिल्ली से लखनऊ एसी सेकण्ड क्लास का सामान्य किराया 830 रूपए है, अगर तत्काल में बुकिंग कराते हैं तो किराया 1130 रूपए होता है। इसके लिए पार्लियामेंट में नहीं आए, मेजें नहीं थपथपाई गयीं। तीन-चार प्रतिशत कटौती की गयी तो उसके लिए मेजें थपथपाई गयीं, वाहवाही लूटी गयी।  लेकिन इसके बारे में किसी को पता नहीं है। प्रधानमंत्री जी को भी पता नहीं है कि देश की जनता को किस तरह से लूट जा रहा है। दिल्ली से लखनऊ तक सेकण्ड ऐसी में सामान्य किराया 830 रूपए है, तत्काल में 1130 रूपए देने होते हैं, यह 40 प्रतिशत बढ़ोत्तरी है। इसी तरह थर्ड एसी में सामान्य किराया 604 रूपए, तत्काल में 904 रूपए देने होते हैं, इसमें बढ़ोत्तरी हो 70 प्रतिशत, स्लीपर क्लास में दिल्ली से लखनऊ का किराया 235 रूपए है, तत्काल में इसके लिए 485 रूपए देने होते हैं, इस तरह इस श्रेणी के किराए में 100 प्रतिशत बढ़ोत्तरी हो गयी। यह लूट पिछले दो साल से चल रही है।[R19]  आम आदमी की, गरीब आदमी की जेब से यह पैसा जा रहा है और उसे लूटा जा रहा है। मैं दूसरा उदाहरण देना चाहता हूं। दिल्ली-देहरादून सेकंड स्लीपर क्लास का आम किराया 166 रुपए है और तत्काल में टिकट लेना हो तो 316 रुपए देने होंगे। इसका मतलब यह हुआ कि 90 प्रतिशत अधिक पैसा आपको देना होगा। जब हमने रेल चलाई तो मुझे नहीं लगता कि हमारा यह उद्देश्य था कि हम लोगों को लूटें। रेलवे का उद्देश्य तो आम आदमी को सुविधा मुहैया कराना होना चाहिए। अभी हमने सदन में दो दिन आम आदमी और गरीब आदमी की सुविधाओं और समस्याओं पर चर्चा की थी। हमने कहा था कि हमारा देश एक है, चाहे अहमदाबाद हो, दिल्ली हो या मुम्बई हो या अन्य कोई जगह हो, सब लोग एक से दूसरी जगह आ-जा सकते हैं और रह सकते हैं। गांवों से लोग इन्हीं बड़े शहरों में आते हैं, जबकि शहरों से गांवों में कम ही लोग जाते हैं। वे लोग जब अपने घर जाएं तो हमारा कुछ मेनडेटरी, हमारा प्राथमिक हक बनता है कि हम अपना लाभ न देखें, उनकी सुविधाएं देखें। यह उनका नागरिक होने का भी हक है, जो हमने उनसे छीनने का काम किया है।
          अब मैं एक और महत्वपूर्ण बात कहना चाहता हूं। तत्काल में और क्या किया गया है, बसुदेव जी इस बारे में डिटेल से बताएंगे। रेलवे में चार्जिंग की, वह भी डेस्टीनेशन टू डेस्टीनेशन की बताना चाहता हूं। अहमदाबाद एक ट्रेन आती है जोधपुर से बांद्रा की। मैं अहमदाबाद से बैठता हूं तो मुझे जोधपुर से मुम्बई का टिकट लेना होगा।
THE MINISTER OF STATE IN THE MINISTRY OF EXTERNAL AFFAIRS (SHRI E. AHAMED): There is a profit of Rs. 24,000 crore.… (Interruptions)
श्री हरिन पाठक :  ऐसे ही लूटते रहो लोगों को, ये योजनाएं आपको ही मुबारक हों अहमद साहब और धन्यवाद है आपको कि ऐसे ही देश को लूटते रहो, फिर खुश होते रहो, मेजें थपथपाते रहो। गरीबों का पैसा है, लूटते रहो।...( व्यवधान)
MR. DEPUTY-SPEAKER: Nothing should be recorded. 
(Interruptions)* … श्री हरिन पाठक : सत्य बहुत कड़वा लगता है और बहुत दिनों के बाद सत्य सामने आ रहा है। अभी तो इस पर और भी माननीय सदस्य कहेंगे। लूटना शुरू हो गया, लालू जी चले गए, एक फिल्म का गाना है, क्योंकि वह भी शेरो-शायरी करते हैं...( व्यवधान)
श्री रघुनाथ झा : आप तो रेलवे का निजीकरण करना चाहते थे।...( व्यवधान)
MR. DEPUTY-SPEAKER: Nothing should be recorded. 
(Interruptions)* … श्री हरिन पाठक : हमने कभी रेलवे के निजीकरण की बात नहीं कही। ...( व्यवधान)
MR. DEPUTY-SPEAKER: No running commentary.
… (Interruptions)
श्री हरिन पाठक : हो सकता है मेरी हिन्दी ठीक न हो, लेकिन आपकी तो है।...( व्यवधान)
MR. DEPUTY-SPEAKER: No running commentary.  Nothing will go on record.
(Interruptions)* … उपाध्यक्ष महोदय: गोयल जी आप बैठ जाएं।
श्री रतिलाल कालीदास वर्मा (धन्धुका): ये ऐसे बोलते हैं तो कहना पड़ेगा कि हमें तो लूट लिया मिलकर यूपीए वालों ने, लालू जी ने और राठवा जी ने।...( व्यवधान)
 
* Not recorded MR. DEPUTY-SPEAKER: Nothing should be recorded. 
(Interruptions)* … श्री हरिन पाठक : गोयल जी, अगर मेरे इस शब्द से आपको तकलीफ हुई है तो मैं खेद व्यक्त करता हूं।...( व्यवधान) यहां पान खाना मना है। आप बाहर जाकर पान खाएं। ...( व्यवधान)
श्री सुरेन्द्र प्रकाश गोयल (हापुड़): मैं पान नहीं खा रहा हूं।
श्री हरिन पाठक : उपाध्यक्ष जी, लालू जी ने उस दिन ठीक कहा था, जब वह एक टीवी चैनल के सामने बैठे थे और लोगों के प्रश्नों का उत्तर दे रहे थे।...( व्यवधान)
MR. DEPUTY-SPEAKER: Nothing should be recorded. 
(Interruptions)* … श्री हरिन पाठक : एक बच्चे ने लालू जी से पूछा था कि क्या आपको पता है कि आरक्षण अब 60 के बजाए 90 दिन का हो गया है। इस पर इन्होंने जवाब दिया कि मैं इसकी जांच कराऊंगा। मैं यह कहना चाहता हूं कि 90 दिन का रिजर्वेशन बहुत लम्बा पीरियड है। इससे किसी को जाना है तो उसे 90 दिन पहले प्लानिंग करनी होगी। अगर टिकट कैंसिल कराना हो तो कैंसलेशन चार्जेज भी अधिक लगेंगे। पहले 60 दिन का रिजर्वेशन था, लेकिन अचानक जनवरी में उसे 90 दिन का कर दिया गया। आपने ठीक कहा कि मैं इसे देखूंगा।...( व्यवधान)
MR. DEPUTY-SPEAKER: Nothing should be recorded. 
(Interruptions)* … रेल मंत्री (श्री लालू प्रसाद): इसमें कम्पल्शन नहीं है कि आपको करना ही है। आप तो आरएसएस से जुड़े हैं।
      
 * Not recorded श्री हरिन पाठक : मैं मानता हूं कि मेरी मातृ संस्था आरएसएस है। मुझे इसका सदस्य होने पर गर्व है। ...( व्यवधान) I am proud to be RSS Swayamsevak....( व्यवधान)
MR. DEPUTY-SPEAKER: You should behave in a proper way.  I feel sorry for that.
श्री हरिन पाठक :मैंने जो भी सीखा है, आरएसएस से सीखा है और मुझे इस पर गर्व है।...( व्यवधान)[R20]  श्री लालू प्रसाद  :  बहुत अच्छी बात है। लेकिन हम आरएसएस के विरोधी हैं। रेल के मामले में दुनिया य़थार्थ को स्वीकार कर रही है और आरएसएस जैसे कट्टरपंथी संगठन ने अपने पेपर ऑरगेनाइजर के संपादकीय में जो पॉजिटिव लिखा है, उनसे क्या आपका कोई रिश्ता नहीं है। उसमें उन्होंने हमारी भूरि-भूरि प्रशंसा की है और यथार्थ को स्वीकार किया है।
श्री हरिन पाठक   :  लालू जी, मैंने आपको बधाई दी है लेकिन जो कुछ उसमें गड़बड़ी है उसे दुरुस्त करने के लिए कहा है।
श्री लालू प्रसाद : उसमें उन्होंने हमारी भूरि-भूरि प्रशंसा की है और आप उनके सेवक होकर उल्टी बात कर रहे हैं।
श्री हरिन पाठक   :  भूरि-भूरि प्रशंसा करने के बाद, उसमें जो कमी रह गयी है, उस ओर मैं आपका ध्यान आकर्षित कर रहा हूं। भूरि-भूरि प्रशंसा तो मैंने पहले कर दी है। लेकिन उसमें जो कमी है, कमजोरी है उसे आपको सुधारना चाहिए। ...( व्यवधान)
MR. DEPUTY SPEAKER:  He has the right to speak on the Railway Budget.
… (Interruptions)
श्री हरिन पाठक   :  कमियों को अगर हम दूर नहीं करेंगे, तो सच्चाई लोगों के सामने नहीं आयेगी। आपने अपने भाषण के समय उस रात कहा था कि मैं दिखवा लूंगा। मैं दुबारा रिपीट करता हूं। जैसे “तत्काल” रिजर्वेशन आप पांच दिन का कर दिया है। इसे भी दिखवा लीजिए, इससे कितना नुकसान आम आदमी को हो रहा है। आपने फर्स्ट एसी में 7 प्रतिशत, सैकिंड एसी में 4 प्रतिशत, 300 किलोमीटर की दूरी तक एक रुपया, 300 किलोमीटर से 500 किलोमीटर की दूरी के लिए तीन रुपया, 600 किलोमीटर तक तीन रुपया, 700 किलोमीटर तक चार रुपया छूट की घोषणा की थी। इस पर आरक्षण शुल्क और विकास अधिभार शामिल नहीं है। मैं आपसे करबद्ध प्रार्थना करुंगा कि मेरी सोच में अगर कहीं खामी हो तो आप जरुर उसे अपने प्रवचन में बता दीजिएगा। मुझे बताया गया है कि सारी छूट 7 प्रतिशत, 4 प्रतिशत आदि छूट पॉपुलर ट्रेनों में नहीं दी जाएगी या कम दी जाएगी। पीक-सीज़न में नहीं दी जाएगी। लीन पीरियड, 15 जुलाई से 15 सितम्बर तक यानी दो महीने तक का है। इसमें सत्य क्या है यह आप सदन को बताइयेगा और पूरे 10 महीनों में कितनी छूट मिलेगी, यह मैं आप पर छोड़ देता हूं। आपने जो घोषणा की है उसमें पूरे साल में कितनी छूट मिलेगी? पॉपुलर ट्रेनों की संख्या 450 है, उनमें छूट मिलेगी या नहीं मिलेगी और यह 7 प्रतिशत मिलेगी या 2 प्रतिशत मिलेगी, यह आप अपने भाषण में बता दीजिएगा। टाइम्स ऑफ इंडिया तथा इंडियन एक्सप्रेस ने लिखा है कि “Air fare cut has a rider. You pay less only for three months.” इस पर काफी आर्टिकल्स आये हुए हैं, फिर भी आप स्पष्ट कर दीजिएगा, मुझे संतोष हो जाएगा कि यह एक साल के लिए छूट है या केवल दो महीने के लिए है।
          आदरणीय मंत्री जी, आप इसका उद्देश्य रखिये कि ट्रेनों में सुविधाएं बढ़ें, आम आदमी की सुविधाएं बढ़ें, जनरल कोचेज काटे न जाएं क्योंकि आज उन्हें मजबूरन जनरल कोचेज में से निकल करके स्लीपर कोचेज में बैठना पड़ता है। अभी उनकी क्षमता इतनी नहीं बढ़ी है। मैं आर्थिक सर्वेक्षण में जाना नहीं चाहता हूं, अगर बजट स्पीच में मुझे चांस मिलेगा तो उस समय मैं इस पर बोलूंगा। उसके लिए आप जिम्मेदार नहीं हैं। लेकिन जो तीन-चार बातें मैंने कही हैं, रिजर्वेशन, तत्काल योजना तथा गरीब रथ में लोगों को जो तकलीफ होती है उन पर आप विचार कीजिए। मुझे यह भी बताया गया है कि यह जो छूट आपने दी है वह नये कोचेज के लिए है।[r21]  उसका भी आप स्पष्टीकरण दीजिए। अभी 225 या 226 नए कोचिज़ है। बाकी    तीन-चार साल के बाद बनेंगे। क्या माननीय मंत्री जी सदन को बताएंगे कि यह छूट सभी कोचों में दी जाएगी या सिर्फ 225 या 226 कोचों में दी जाएगी?
          मैं गुजरात से आता हूं। गुजरात का देश के विकास में अपना एक स्थान है। गुजरात का 90 प्रतिशत से भी ज्यादा विस्तार पश्चिम जोन में होता है। लालू जी आपके आंकड़े बताएंगे कि देश भर के सभी जोन में सबसे ज्यादा प्रति वर्ष इनकम होती है, पश्चिम जोन की और इस बार 5700 करोड़ रुपए की हुई है। किसी दूसरे जोन की इतनी इनकम नहीं होती है। अहमदाबाद डिवीजन (Division) की 1885 करोड़ रुपयों की इनकम हुई है। फिर भी गुजरात के साथ अन्याय हो रहा है।
          मेरी तीन-चार बड़ी-बड़ी मांगे हैं। बाकी की मांगे समय को अन्य सदस्यों के लिए बचाते हुए मैं सभापटल पर रख दूंगा। पश्चिम रेलवे का 90 प्रतिशत से ज्यादा का हिस्सा गुजरात में है, इसका हैडक्वार्टर अहमदाबाद या गांधी नगर में लाया जाए। दूसरी मांग है, श्री राठवा जी को मालूम है और शायद आपको भी पता होगा कि अहमदाबाद सबसे ज्यादा कमाई देने वाला सैक्टर है। आपने एयर कंडिशन ट्रेन भी दे दी, मेरी मांग थी कि आप अहमदाबाद से अमृतसर की ट्रेन दें। अहमदाबाद से इलाहबाद, लखनऊ की तरफ जाने वाली ट्रेन दें और इस तरफ आप जरूर ध्यान दीजिएगा। एक ट्रेन मिली, वह भी अहमदाबाद से मुम्बई के लिए, वह भी सैंट्रली एसी ट्रेन, जो कि पैसे वाले लोगों के लिए है।
          अहमदाबाद, जो आपको 1885 करोड़ रुपयों की आमदनी देता है, उसके लिए प्रार्थना करूंगा कि आप जो चार स्टेशन विश्व स्तरीय बनाना चाहते हैं, वैसे ही अहमदाबाद स्टेशन को भी, क्योंकि देश भर के लोग अहमदाबाद रहते हैं और सफर करते हैं, विश्व स्तरीय, हर प्रकार की सुविधा वाला स्टेशन बनाएं। भरुच, दाहेज, रुपांतर, दिल्ली और मुम्बई की बीच की बात मैंने छोड़ दी। थर्ड ट्रेक का हमने सर्वे किया है। बजट का भी प्रावधान किया था और पैसा कमाने की बहुत संभावना है। रेलवे को बहुत पैसा मिलेगा। मुम्बई और अहमदाबाद के बीच तीसरी लाइन डालने के बारे में आप सोचिए। सर्वे किया जा चुका है। उसे कार्यान्वित कीजिए।
          गुजरात से संबंधित अहमदाबाद, गांधीनगर, साबरमति, मणिनगर के लिए यदि आप इन छोटी-छोटी मांगों को स्वीकार करेंगे, तो मैं आपको धन्यवाद दूंगा। मैं ज्यादा समय न लेते हुए सिर्फ इतना कहूंगा कि यह जो पिछले दरवाजे से देश में रेलवे के गरीब रथ में हो रहा है, तत्काल योजना में, रिजर्वेशन में, ट्रेनों को मेल से सुपरफास्ट बनाने में, सुविधाओं पर ध्यान कम है, स्टेशनों की स्थिति बदतर है, इस तरफ आप ज्यादा ध्यान दीजिए, आम आदमी की तरफ आप ज्यादा ध्यान दीजिए। मैं पूछता हूं कि प्रथम श्रेणी एसी में कौन सफर करता है? या तो सांसद होंगे, रेल के बड़े-बड़े कर्मचारी होंगे, काफी कम लोग पैसा खर्च करके फर्स्ट क्लास एसी में जाते हैं। गरीब लोग जो जनरल कोच में, स्लीपर कोच में यात्रा करते हैं, उनकी संख्या बढ़ाइए। आप जनरल कोच की ट्रेनें दौड़ाइए जिस में आम आदमी यात्रा करता है। आप गांव से आते हैं। गांव से शहर को जोड़ने वाली वाली जो इंटर स्टेट ट्रेन्स हैं, उनकी फ्रीक्वैंसी बढ़ाइए। उपनगरीय रेल सेवाओं के बारे में आप चूक गए हैं। रेलवे की 40 परसेंट मुख्य सेवाएं उपनगरीय सेवाओं से जुड़ी हैं। अगर कोई गाजियाबाद से दिल्ली आएगा तो ट्रेन पकड़ेगा या विरार, बान्द्रा, बोरिवली, कांदीवली, मणिनगर, वटवा, महसाणा, पाटन से आएगा तो पहले ट्रेन पकड़ेगा, फिर मेन ट्रेन पकड़ेगा। बजट में उपनगरीय सेवाओं की तरफ ध्यान देना चाहिए था। उपनगरीय सेवाओं को और मजबूत करिए, सुविधाजनक करिए, ज्यादा रियायतें दीजिए और वहां नई लाइन्स डालिए।
          अंत में यही कहूंगा कि मैंने जो-जो बातें कही हैं, आप उन पर गौर करिए। मुझे आपसे बहुत उम्मीद है क्योंकि आप जमीन से जुड़े हैं और मैं इस बात को फिर कह रहा हूं कि पैसा कमाइए, अच्छी बात है, आईएमए में जाइए, विदेशों में जाइए, हमें इस बात का गर्व है। विदेशों से लोग यहां सीखने के लिए आते हैं, हमें इस पर गर्व है लेकिन गरीब आदमी की जेब से पैसा निकाला जाता है, आप वह मत कीजिए। रेलवे को दुरुस्त करिए, फिर अपना मैनेजमेंट देखिए, आपका नाम पूरी दुनिया में रोशन हो जाएगा अगर आप ऐसा-वैसा काम बंद करेंगे। ...( व्यवधान) अभी आपको बहुत आगे जाना है। कहां जाना है यह तो लोग तय करेंगे। ...( व्यवधान)इस तरफ भी आना है। ...( व्यवधान) यह आगे इस तरफ या उस तरफ जरूर जाएंगे। ...( व्यवधान)
          मैंने रेलवे के बारे में जो सुझाव दिए हैं. आप उन पर ध्यान दें।
Sir, with your permission, about some of the demands and requests of the people of Gujarat and Ahmedabad, I lay the remaining speech on the Table of the House mentioning these demands. मैं आपकी अनुमति से उन्हें टेबल पर ले कर रहा हूं ताकि वह लालू जी के पास डिटेल में पहुंच जाए। बहुत-बहुत धन्यवाद।
*With your permission I wish to lay on the Table of the House some of the genuine demands and requests for the development of Railway facilities in the State of Gujarat:
1. Broad Gauge linkages to minor ports of Gujarat i.e. Hazira, Dahej, Bedi and Porbandar .  RITIES has prepared a report and made recommendations to the Ministry of Railway.
2..  Gauge conversion of Bharuch - Dahej railway line.
4.     Gauge conversion of Ahmedabad - Udaipur railway line - kindly allocate substantial funds for the development.
5.      Surat - Hazira new railway line
6.     Gauge conversion of rail lines - (i) Ankleshwar - Rajpipla, (ii) Surendranagar -Dhangadhara, (iii) Ahmedabad - Mehsana - Taranga - Ambaji (Ahmedabad - Mehsana is Broad-gauge), (iv) Bhavnagar - Mahuva, (v) Patan - Bhiladi, (vi) Bhavanagar - Dhora -Surendarnagar, (vii) Dhasa - Jetalsar, (viii) Vankaner - Bhuj - Nalia and (ix) all Narrow gauge railway lines under the jurisdiction of Vadodara Railway Division.
 

*….* This part of the speech was laid on the Table.

7. Construction of new railway lines - (i) Viramgam - Sankheshwer, (ii) Daman - Nasik, (iii) Nadiad - Tarapur - Kheda - Matar, (iv) Godhra - Dahod - Indore - Devas, (v) Tarapur - Mahemdavad, (vi) Ahmedabad - Khedbhrma - Ambaji, (vii) Mahesana - Harij

- Radhanpur, (viii) Vejalpur - Botad, (ix) Rajkot - Jaipur - Marwad and (x) Porbandar -

Porbandar Port.

8.      Gauge conversion to Bhiladi - Samdari railway line

9.      Construction of missing link between Patan and Bhiladi (Broad Gauge Line)

10. Development of rail linkages for DMIC - Doubling of Broad Gauge rail line: (i) Bharuch - Samni - Dahej, (ii) Surendranagar - Botad - Dhasa - Rajula - Pipavav, (iii) Siirendranagar -- Mehsana - Viramgam and (iv) Palanpur - Bhildi - Samakyali -Gandhidham - Mundra. Gauge Conversion of existing MG/NG rail line; (i) Dahej -Samni - Bharuch, (ii) Ahmedabad - Botad - Bhavnagar, (iii) Viramgam - Samakhyali, (iv) Navlakhi - Malia - Rajkot, (v) Mehsana - Viramgam, (vi) Viramgam Surendranagar, (vii) Samakyali - Gandhidham - Kandla and (viii) Gandhidham - Anjar -Mundra. Gauge Conversion of existing MG/NG rail line; (i) Bhavnagar - Adhelal -Dholera - Vataman - Petlad. (ii) Dholera - Bhimnath and (iii) Khambhat to Kbambhat Port.

11.   Providing facility of Double Stack Container on Kandla - Bhatinda railway line

12.   Augmentation of facilities of trains/increase in coaches in various railway lines

13.   Maninager (Ahmedabad – Rly Station)       The following trains must be given stoppage

1.   9309/9310            -           Shanti Express

2.   9059         -           Intercity

3.   2934         -           Karmavati Express

4.   9031         -           Kutch Express

5.   2942         -           Okha-Gauhati Express

6.   9570         -           Banaras Express

7.   2474         -           Sarvodaya Express

8.   9005         -           Saurastra Express

9.   9110         -           Gujarat Queen at Vatva Station*                                                                                                                       MR. DEPUTY-SPEAKER : Before I request the next hon. Member to speak, to be very frank, I have a list of more than 60 names of the hon. Members. अगर 60-65 मैम्बर्स को बोलने का समय दिया तो मेरे ख्याल में हम इसे 4-5 दिन तक खत्म नहीं कर सकेंगे। इसलिए मेरी रिकवैस्ट है those hon. Members who want to give their written speeches, they can lay the speech on the Table of the House. मैंलालू जी विनती कर रहा हूं।

…( व्यवधान)

श्री लालू प्रसाद: लिखित में स्पीच देने से वह रिकॉर्ड में आती है।

उपाध्यक्ष महोदयः  क्या आप उसे कंसिडर करेंगे?

श्री लालू प्रसादः जो मैम्बर्स ओरली भाषण करते हैं, हम उसे संक्षेप में नोट करते हैं। इसलिए अच्छा होगा अगर वे लिखित में दें।

उपाध्यक्ष महोदयः  मेरी सैकिंड रिकवैस्ट है कि मैम्बर्स भाषण देते समय आधा-आधा घंटा न लगाएं। अच्छा होगा अगर बहुत ब्रीफ में पांच-सात मिनट में सुझाव दें।

मैंने सभी के लिए कहा है, अकेले निखिल कुमार जी को नहीं कहा है, सिर्फ निखिल कुमार जी से विनती नहीं की है, मैंने सभी से रिक्वेस्ट की है। मेरा फर्ज बनता है कि मैं हाऊस को बताऊं कि मेरे सामने एकच्युल प्रॉब्लम क्या है क्योंकि इसका हल आप ढूढ़ लेंगे।

 

श्री निखिल कुमार (औरंगाबाद, बिहार) : मैं आपकी बात को ध्यान में  रखूंगा और मेरी यही कोशिश रहेगी कि मैं बहुत ज्यादा देर न बोलूं।

          Mr. Deputy-Speaker, Sir, as I speak today on the Rail Budget, I cannot but feel that there is a certain environment of happiness in the whole country. There is an environment of happiness, a feel good environment as you could see from the statement made by the hon. Foreign Minister the other day about our relations with other countries, especially our neighbours. This morning too, our worthy and hon. Prime Minister referred to our relations with other countries and particularly made a mention to our extreme and earnest desire to have peaceful and friendly relations with Pakistan.

          Sir, our Prime Minister also referred this morning to the General Budget that was presented the other day by our hon. Finance Minister and almost the entire country is over-joyed at the provisions made under it to waive the debts of farmers and this debt-waiver is going to cost us Rs. 60,000 crore. Questions were raised as to where this amount is to come from. I cannot do better than recall the hon. Prime Minister’s clarification this morning and he made a superb clarification which must have satisfied everyone.

          There is an unmistakeable impression that this country is marching along. There is a different feeling all over the country that Indians are becoming assertive. They will remain polite and courteous, they will remain civilised and they will be gentle and civil, but not when they encounter boorish behaviour, when they encounter uncultured behaviour, and this was most ably demonstrated by the performance of our sportsmen, whether it is in the field of tennis, whether it is in the field of football or, most importantly, whether it is in the field of cricket. Only the other day the junior Team India won the World Cup in cricket and became world champion and yesterday the senior Team India beat those who are the world champions and who had hitherto remained unbeaten on their own home-ground. I pay tribute to our cricketers, especially one of them who has borne the brunt of the most uncivil conduct and abusive behaviour and what not. I refer to Harbhajan Singh. He ultimately had the last laugh.

I am saying all this only to illustrate that this country is changing, this country is marching along and this is because of the economic health of the country and this economic health of the country today was best reflected in our General Budget. 

उपाध्यक्ष महोदय : लालू प्रसाद जी, यह आपकी तारीफ है, जिससे उन्होंने लिंक किया है।

SHRI NIKHIL KUMAR : This has been reflected best in our General Budget about which a question was raised where the Government is going to find Rs. 60,000 to waive the debts of farmers.

MR. DEPUTY-SPEAKER : Are you speaking on Rail Budget or General Budget?

SHRI NIKHIL KUMAR : Sir, I will come back. Kindly give me a couple of minutes.

          It is against this background, Sir, that our Railway Minister presented his Budget for the next financial year. I was hearing Shri Harin Pathak. उन्होंने बहुत सी बातें कही हैं, यह भी कहा है कि तारीफ करते हैं लेकिन कुछ आलोचनाएं भी [r22] कीं।

15.00 hrs. लेकिन मैं माननीय लालू जी की तारीफ ही तारीफ करूंगा। इसमें हरिन बाबू की जो आलोचनाएं थी, उनसे मेरी कोई सहमति नहीं है। ऐसा क्यों है? मेरे पास इस समय लालूजी का एड्रैस है। यह एक ऑल इनक्लूसिव बजट है। यह ‘ऑल इनक्लूसिव’ एक ऐसा टर्म है जो आजकल हम लोग बराबर सुनते हैं और हर किसी से सुनते हैं। आज सवेरे इसका जिक्र हमारे माननीय प्रधान मंत्री जी ने किया था कि अगर इस मुल्क को तरक्की करनी है तो उसे ऑल इनक्लूसिव डवलपमैन्ट करना होगा। लालू जी ने अपने बजट में हर क्षेत्र को, हर सैक्शन को तवज्जो दी है। मिसाल के तौर पर मैं सिर्फ दो चीजें बताना चाहता हूं, जो उन्होंने विद्यार्थियों के लिए की हैं - फ्री मंथली सीजन टिकट फॉर स्टूडैंट्स, फिफ्टी परसैन्ट कनसैशन फॉर लेडीज सीनियर सिटीजन्स और अशोक चक्र अवार्डीज को कनसैशन भी दिया है। इसके अलावा उन्होंने हैल्थ संबंधी बातों पर भी ध्यान दिया है। एड्स अफैक्टिड पर्सन्स तथा मदर-चाइल्ड हैल्थ के बारे में भी उन्होंने तवज्जो दी है। उन्होंने शेडय़ूल्ड कास्ट्स और शेडय़ूल्ड ट्राइब्स पर भी ध्यान दिया है, अदर बैकवर्ड कास्ट्स कैंडीडेट्स के अपाइंटमैन्ट पर भी ध्यान दिया है। यानी कि माइनोरिटीज वैलफेयर सैल बनाकर इन्होंने एक ऑल इनक्लूसिव बजट पेश किया है। ये सब इन्होंने क्यों किया? ये सब इन्होंने इसलिए किया है क्योंकि यूपीए सरकार की नीति ऑल इनक्लूसिव डवलपमैन्ट की है। ऑल इनक्लूसिव डवलपमैन्ट में हमारे माननीय रेल मंत्री जी ने हर सैक्शन को, हर मुद्दे को अपने ध्यान मे रखा है और उन पर तवज्जो दी है। इसके लिए मैं उन्हें बधाई देता हूं और उनकी सराहना करता हूं।

          उपाध्यक्ष महोदय, ये सब तो सामाजिक बातें हुईं। लेकिन जब रेल के परिचालन की बात आती है तो उस पर हम लोगों को ध्यान देकर यह देखना है कि क्या रेल मंत्री जी ने उस पर ध्यान दिया है या नहीं।

उपाध्यक्ष महोदय : आप एक मिनट रुकिये।

श्री निखिल कुमार  :  सर, आप मेरी बात सुन लें।

उपाध्यक्ष महोदय : आप एक मिनट रुकें।

श्री निखिल कुमार  :  सर, मैं पहला स्पीकर हूं।

उपाध्यक्ष महोदय : आप पहले मेरी बात सुन लें कि मैं क्या कहना चाहता हूं।

श्री निखिल कुमार  :  आप बराबर पहले रोक देते थे, मैंने समझा कि आप आज फिर रोक रहे हैं।

MR. DEPUTY-SPEAKER : Shri Nikhil Kumar, please wait for a minute.

… (Interruptions)

MR. DEPUTY-SPEAKER : Mr. Pallam Raju, I feel sorry to mention this, but you are reading newspaper in the House, which is not permissible. I would request the hon. Members that they should not sit in the House and read newspaper.

… (Interruptions)

THE MINISTER OF STATE IN THE MINISTRY OF DEFENCE                 (SHRI M.M. PALLAM RAJU) : Sir, I apologize, but it was something related to the Railway Budget. … (Interruptions)

MR. DEPUTY-SPEAKER : Shri Nikhil Kumar, now you can continue your speech.

… (Interruptions)

उपाध्यक्ष महोदय : आप कोट कर सकते हैं।

श्री निखिल कुमार  :  जहां तक रेलों के परिचालन का सवाल है। रेलों की सुरक्षा पर तवज्जो देना एक ऐसा मुद्दा है, जिस पर आज तक रेल मंत्रालय ने अगर ध्यान दिया तो उतना सक्षम ध्यान नहीं दिया था, यह अनमैन्ड रेलवे क्रासिंग का मुद्दा है। मैं लालू जी के भाषण को बहुत ध्यान से सुन रहा था, जिस दिन वह बजट पेश कर रहे थे। उन्होंने आंकड़े दिये और उन आंकड़ों से पता लगा कि इस मुल्क में अनमैन्ड रेलवे क्रासिंग्स की संख्या भयंकर है और वहीं पर एक्सीडैन्ट्स होते हैं। उन एक्सीडैन्ट्स को रोकने के लिए जो रेल मंत्री जी ने इस बजट में जो प्रावधान किये हैं, वे बहुत अच्छे और सामयिक हैं और इसके लिए मैं उनकी तारीफ करता हूं। मैं इस बजट की तारीफ इसलिए भी करता हूं कि जो फ्रेट रेट्स होते हैं, वे अमूमन हर रेल बजट में बढ़ते जाते हैं और सारी दुनिया जानती है कि आजकल हिन्दुस्तान में इंफ्रास्ट्रक्चर पर बड़ी तवज्जों दी जा रही है। सड़कें बन रही हैं और बड़ी चौड़ी-चौड़ी सड़कें बन रही हैं। प्राइम मिनिस्टर्स गोल्डन क्वाडीलेटरल रोड्स की प्रोजैक्ट्स पूरे मुल्क मे चल रही हैं। इन सड़कों के बनने से रोड्स से जो फ्रेट ट्रंसपोर्ट होगा, वह कहीं ज्यादा बेहतर तरीके से हो सकता है और इसलिए वह रेल को एक चैलेंज पेश करेगा तो बावजूद उसके अगर रेल मंत्रालय ने उस चैंलेज को सही ढंग से लिया है और फ्रेट के रेट को कम किया है तो मैं यह समझता हूं कि यह एक किस्म का करिश्मा है। लालू जी ने कहा था कि पिछले साल उन्होंने कुछ लाइनें पढ़ी थीं कि पिछले साल हमने जादुई छड़ी चलाई थी या कुछ ऐसा कुछ कहा था, लेकिन इस बार हम कुछ और कर रहे हैं, तो यह इस बजट की खूबी है और इसके लिए मैं उनकी तारीफ करता हूं[b23] । 

          मैं इस बात की भी मैं तारीफ करता हूं कि उन्होंने नई ट्रेनें चलाई हैं, बहुत जगहों पर जहां ट्रेनें जिन मंजिल तक चल रही थीं, उन्हें आगे बढ़ाया है और सबसे जरूरी बात यह है कि नई रेलें चलाने के लिए कुछ रेलवे लाइनों का सर्वेक्षण शुरु कराया है। मैं उम्मीद करता हूं कि जब यह सर्वेक्षण का कार्य पूरा हो जाएगा तो उस पर नई ट्रेनें चलेंगी। ये सारी बातें उन्होंने अपने बजट में शामिल की हुई है। सबसे बड़ी बात यह है कि रेल का किराया हम देखते आए हैं कि केवल पिछले साल लालू जी ने नहीं बढ़ाया लेकिन आम जो भी रेल मंत्री होता है, वह रेल भाड़ा जरूर बढ़ाता है और उसके लिए वह तमाम दुनियाभर की जस्टिफिकेशन देता है कि इसलिए बढ़ाया गया। लेकिन लालू जी ने इस साल रेल भाड़ा नहीं बढ़ाया। रेल भाड़ा नहीं बढ़ाया, यह बड़ी बात नहीं हुई, इन्होंने क्या किया है कि उस रेल भाड़े को कम कर दिया और इसके लिए मैं उनको हार्दिक धन्यवाद और बधाई देता हूं। कैसे यह करिश्मा किया है, यह वह और उनके मंत्रालय वाले जानते हैं। लेकिन बजट में उन्होंने इस चीज का जो जिक्र किया है, उसकी मैं पूरी प्रसंसा करता हूं। हरिन जी,  आपने यह प्रशंसा नहीं की थी। इसलिए मैं आपकी तरफ से प्रशंसा कर देता हूं।

MR. DEPUTY-SPEAKER : Let there be no running commentary please.

श्री निखिल कुमार  :  आपने कहा है कि मैं ज्यादा देर न बोलूं तो मैं तीन मुद्दों पर माननीय रेल मंत्री जी का ध्यान आकर्षित करना चाहूंगा और मुझे पूर्ण विश्वास है कि वह इन तीनों मुद्दों पर ध्यान देंगे और हमारे अनुरोधों को मानेंगे। एक यह है कि रेल अमेंडमेंट बिल इंट्रोडय़ूस किया है और इसमें इन्होंने यह कहा है:

“The amount of compensation shall be based on market value of land. In addition to the market value, solatium at the rate of 60 per cent shall invariably be paid to the land owners in consideration of… etc., etc.”   यह अमेंडमेंट बिल काबिल-ए-तारीफ है और मैं इसलिए कह रहा हूं क्योंकि मैं इसका स्वयंभोगी हूं। अब कैसे स्वयं भुक्तभोगी हूं, इसका जिक्र लालू जी ने अपनी बजट स्पीच में किया है। अब से कोई 18-19 साल पहले तत्कालीन बिहार के मुख्य मंत्री जी ने एक बिजली परियोजना की परिकल्पना हमारे क्षेत्र में नवीनगर में की थी। उस समय जो परिकल्पना की गई थी, वह 2200 मेगावॉट की थी। उस पर बहुत दिनों तक कुछ काम नहीं हुआ। वर्ष 1999 में जब तेरहवीं लोक सभा बनी, तब उस पर काम शुरु कराने की बात की पहल की गई और बड़ी मेहनत की गई और मेहनत कराते जब वह 13वीं लोक सभा भंग हुई, उस समय तक यह तय हो गया था कि यह एक ज्वाइंट वेंचर रेलवे और पॉवर मंत्रालय के बीच में होगा लेकिन दोनों के बीच में जो समझौता होना चाहिए था, उसमें एक अड़चन पड़ी हुई थी और वह बात पूरी नहीं हो पाई। इसलिए हम लोग समझते थे कि यह बात अगली सरकार करेगी। अगली सरकार हम लोगों की आई और उसमें लालू जी रेल मंत्री बन गये। इन पर हम लोगों का भरोसा था कि वह जो दिक्कत पहले से पड़ी हुई थी, उसको ये दूर करेंगे और हमारे भरोसे पर ये खरा उतरें और वाकई उस अड़चन को दूर किया। पिछले साल फरवरी, 2007 में पहले से रेल मंत्रालय और बिजली मंत्रालय के बीच में झगड़ा चला आ रहा था, वह झगड़ा दूर हुआ। हालांकि 2200 मेगावॉट की बात होनी थी लेकिन अंत में 1000 मेगावॉट के सुपर थर्मल पॉवर प्रोजेक्ट को नवीनगर, औरंगाबाद में भारत सरकार ने खड़ा करने की बात मान ली। कैबिनेट कमेटी ऑफ इकोनॉमिक अफेयर्स ने इसे अपनी स्वीकृति दी औऱ इसके लिए हम भारत सरकार और लालू जी को बधाई देते हैं कि उन्होंने इस समझौते को अमली जामा पहनाया। अब इसका इस कानून के साथ क्या संबंध है? वह यह है कि हजारों एकड़ जमीन का अधिग्रहण इस बजट के लिए होना है। इस जमीन में कुछ आवासीय जमीन है और कुछ कृषि संबंधी जमीन है। अब इनका अधिग्रहण होना है तो आप जानते हैं कि अधिग्रहण के मामले में बंगाल में हमने कितनी बातें देखी हैं- खून-खराबा हुआ, सिंगूर में भी और नंदीग्राम में भी अप्रिय घटनाएं हुईं। वैसी ही कुछ स्थिति नवीनगर में बनने वाली थी, वहां पर किसानों ने एक संघर्ष समिति गठित की और उस समिति ने इस बात को आगे बढ़ाया कि जो भी उनकी जमीन अधिग्रहित होने वाली है, उसका उनको उचित मुआवजा मिलना चाहिए। अगर उनको उचित मुआवजा मिलेगा तो वह मान जाएंगे।[r24]            इसीलिए मैं कहता हूं कि यह जो कानून अभी लालू जी लाने जा रहे हैं, हालांकि यह रेलवे अमेंडमेंट बिल है, लेकिन यह नवीनगर का रेल और बिजली मंत्रालय का ज्वाइंट वेंचर है, उसके लिए जमीन के अधिग्रहण में यह कानून रहेगा और इसलिए मैं इसकी सिफारिश करता हूं। हालांकि मैं रेल बजट पर बोल रहा हूं लेकिन मुझे बताया गया है कि यह बिल भी इसमें पेश हो गया है तो इस पर भी मैं अपने विचार दे रहा हूं। इस बिल पर हम अपना समर्थन देते हैं और मैं इस सदन से अनुरोध करता हूं कि इसे अपना समर्थन दे और इसे पास करें। मैं समझता हूं कि नवीनगर को इससे फायदा होगा बल्कि और जगह भी जहां रेल मंत्रालय अपनी जमीन का अधिग्रहण करेगी, उसमें इसे फायदा होगा। इसमें जो 60 प्रतिशत की बात कही गई है, यह अपने आप में अनूठा प्रावधान है और इसके लिए मैं समझता हूं कि सारे मुल्क को यह बात मान लेनी चाहिए क्योंकि उनके भले की बात है और इस कानून को अपना समर्थन देना चाहिए।
          दूसरी चीज यह है कि पिछले महीने मुम्बई और मुम्बई के अलावा महाराष्ट्र में कुछ अप्रिय घटनाएं घटीं, जिसकी चर्चा इस सदन में हो चुकी है और वे अप्रिय घटनाएं उत्तर भारतीयों के खिलाफ घटीं थीं और उत्तर भारतीयों में भी विशेषकर ध्यान उन लोगों की तरफ दिया गया था जो बिहार से आते हैं या पूर्वी उत्तर प्रदेश से आते हैं और उसके बाद वहां से बिहारियों का पलायन हुआ। मैंने स्वयं उनको देखा है और मैं पटना रेलवे जंक्शन पर मिला हूं और जो उन्होंने तकलीफें बयान की, उससे हम लोगों को काफी दुख हुआ है, तकलीफ हुई है। हम जहां महाराष्ट्र सरकार से अनुरोध करते हैं कि इन लोगों को वापस वहां जाने के लिए आश्वासन दें कि उनकी सुरक्षा का वाजिब इंतजाम होगा। लालू जी के सामने मैं कहना चाहता हूं कि अभी भी वहां बहुत सारे लोग बिहार के काम करते हैं और रहते हैं और अपनी रोजी-रोटी कमाते हैं। आज एक-दो-तीन नहीं लाखों लोग रहते हैं और वे लोग जब छुट्टियों में या किन्हीं विशेष मौकों पर घर आते हैं तो वे लोग एक विशेष ट्रेन का इस्तेमाल करते हैं। वह विशेष ट्रेन राजेन्द्र नगर एक्सप्रैस मुम्बई के विक्टोरिया टर्मिनल यानी छत्रपति शिवाजी ट्रमिनल से चलती है और पटना के राजेन्द्र नगर टर्मिनल पर आती है। मैरा उनसे अनुरोध यह है कि इस ट्रेन को बढ़ाकर वह दरभंगा तक ले जाएं तो जो लोग उत्तर बिहार वाले मुम्बई और महाराष्ट्र में रहते हैं, उनके लिए यह बहुत लाभदायक होगा, उनको सुविधा प्रदान होगी। इसलिए अगर हमारा यह अनुरोध वह मान लेते हैं तो उनके लिए बहुत राहत मिलेगी। यह मैंने लालू जी को चिट्ठी भी लिखी है। अगर उनको यह चिट्ठी नहीं मिली है तो मैं दुबारा उसकी कॉपी उनको दे दूंगा लेकिन इस पर ध्यान दें। दूसरी चीज, मेरा क्षेत्र बिहार का औरंगाबाद है और यह उग्रवाद से ग्रसित है। इसे लालू जी से ज्यादा कोई नहीं जानता। उसमें जो ग्रेंड कॉर्ड होकर ट्रेन निकलती है, उस पर सारी ट्रेनें रात में जाती हैं। लिहाजा जो हमारे यात्री हैं, वे अगर उन ट्रेनों से जाएं तो उतरते ही वहां पर एक रफीगंज रेलवे स्टेशन है  और वहां से वे अपने घरों को जाने के लिए रात में ही किसी सवारी का इस्तेमाल करते हैं या पैदल जाते हैं। वह पूरा ग्रामीण इलाका है और वह उग्रवाद से ग्रसित है। मैं कह रहा था कि बजाए रफीगंज में उतरने के लिए अगर प्रावधान हो जाए कि एक बीच में बसारतपुर-गोडीहा हॉल्ट खोल दें जिसके लिए मैंने लालू जी से चिट्ठी लिखकर अनुरोध किया है, उसका मैं उन्हें स्मरण कराता हूं और दुबारा अनुरोध करता हूं कि इस अनुरोध को वह कृपया मान लें।[r25]            बसारतपुर गोड़िया हाल्ट की स्थापना कर दें। इस से व्यापक रूप से गामीण जनता का फायदा होगा। उनके मन में जो असुरक्षा की भावना व्याप्त है, वह निकल जायेगी। जब ट्रेन इस स्टेशन पर पहुंचेगी तो दो मिनट का स्टापेज देने की जरूरत है। मैं रेल मंत्री जी को आश्वस्त करना चाहूंगा कि  वह यश के भागी बनेंगे और हम उनका तहेदिल से शुक्रिया अदा करेंगे।
          उपाध्यक्ष जी, माननीय रेल मंत्री जी को याद होगा कि पिछले अक्तूबर में उन्होंने एक नई रेल लाइन बिछाने के लिये शिलान्यास किया था और मैंने उन्हें चिट्ठी भी लिखी थी कि डेहरी-ऑन-सोन से बिहटा तक रेलमार्ग बनाये जाने का सर्वेक्षण कराया जाये। मेरी बात मानकर उस क्षेत्र का सर्वेक्षण कराया जिसके लिये मैं उन्हें धन्यवाद देता हूं लेकिन उस शिलान्यास के बाद उस पर आज तक कोई कार्यवाही नहीं हुई है। मुझे पता चला है कि  रेलवे बोर्ड का कहना है कि औरंगाबाद से बिहटा तक यह रेल लाईन बनेगी लेकिन इस का रेल बजट में कहीं जिक नहीं है। मेरा आग्रह है कि जहां उन्होने अन्य जगहों के लिये ध्यान दिया है, इस खंड के लिये भी कार्यवाही करें। वह फिर से इस कार्य के यश के भागी बनेंगे।
          उपाध्यक्ष जी, अंत में किसानों के लिये एक बात कहना चाहूंगा कि गया से फर्टिलाइजर आता है लेकिन अनुग्रह नारायण नगर स्टेशन पर रेट पाइंट्स नहीं होने से किसानों को परेशानी होती है। मेरा आग्रह है कि वहां रेट पाइंट्स बनाये जाने से किसानों का हित होगा। माननीय रेल मंत्री जी उस इलाके की वास्तविकता से वाकिफ हैं, आशा है कि वह मेरे अनुरोध पर ध्यान देंगे।
          उपाध्यक्ष जी, मैं एक बार फिर से माननीय रेल मंत्री और यू.पी.ए. सरकार को धन्यवाद देता हूं कि इस बार उन्होंने इतना शानदार रेल बजट बनाया है।
                                                                                     
*SHRI SUGRIB SINGH (PHULBANI) : Sir, I rise here against the Budget presented by the Hon'ble Minister for Railways because Orissa had been neglected by the Railway Minister that is why they have made a budgetary allocation of only Rs. 972 crore against the demand of Rs. 1330 crore raised by the state. Out of the above allocation the major portion of the funds allocated for the railway in the state was meant for electrification and doubling of inter-state railway lines and aimed at earning more revenue while only a token amount of money was allocated for the completion of ongoing projects like - only Rs.32.4 crore has been allocated for the Khurda -Bolangir railway line against the requirement of more than Rs. 700 crore similar treatment has been given to Lanjigarh - Junagarh railway line and only Rs.35 crore has been allocated against the requirement of Rs. 120 crore.
Our state govt, has submit a number of projects for incorporation in the Railway Budget but not a single proposal has been considered by the Ministry of Railways. I am unable to understand why Orissa had been negelected in the pre and post independence ear in the Railway and the present Hon'ble Railways Minister has repeated the same. Sir, my state is generating a revenue of more than Rs. 6000 crores per annum for the Railways. The South East Central and East Cost Railways are two leading profitable railway zones but when considering the railway density in route kms. per one thousand sq km figures the state of mine are among the states with low rail densities. This indicates that the Indian Railways is not only using profit earned from zones in tribal areas to subsidize various other zones and has discriminated against the areas from which it makes the most profit.
Railway have always played an important role in the economic development and rapid social transformation in the country but has forgot the poor and backward state like Orissa. The KBK region had been neglected and the demand of the state to link naxal affected areas like Jaypore, Malkangiri, Nuapada, Gunupur, Kandhamal and Therubali had been ignored. The Railway Ministry did   * Speech was laid on the Table not accept the proposal to link even the district headquarter of Phulbani (Kandhamal), Kendrapara and Malkangiri with rail link and to run some new trains. I have also several time requested the Hon'ble Minister from different platforms that Khandmal District is not going to get the benefit of Khurda - Bolangir railway line and requested to please link Khandmal with Berhampur and approve the same. I do not understand the reasons as to why Indian Railways is not giving special attention to the tribal areas of Orissa and KBK project as it plans to in regard to the frontier areas of North east and J & K. This area is farther from the mainstream of India than even most of North east and J & K, shares many attributes such as remoteness and presence of extremism, is among the most backward economically and yet contributes a lot to the Railway earning.
I may also mention here that the announcements made in the last year budget by the Hon'ble Ministry in regard to Orissa are not even completed so far. The Ranchi - Bhubaneswar Grib rath announced in the last budget have yet to be introduced by the Indian Railways. I not only hope but confident that Hon'ble Ministry will definitely fulfill his announcements in regard to New Trains made, in last year and also in the current Budget in respect of Orissa Sir, I once again request the Hon'ble Railway Minister to change their old policies and kindly allocate at least a sum of Rs. 500 crore for new ongoing Khurda - Bolangir railway line and allocate at least Rs. 100 crore for Lanjigarh -Junagarh railway line and also consider the setting up of new link to Khandmal ( Phulbani)  with Berhampur and approve the same for survey in the current financial year.*     MR. DEPUTY-SPEAKER: Shri Basudeb Acharia, please be very brief.
SHRI BASU DEB ACHARIA (BANKURA) : I will get my party’s time.
MR. DEPUTY-SPEAKER: I agree with that. आचार्य जी, कल दूसरे सदस्य शोर मचा रहे थे, कि हमारा समय ले लिया। इसलिये आप समय का ध्यान रखें।
श्री बसुदेव आचार्य :  अगर आप समय नहीं देंगे तो मैं नहीं बोलूंगा।
उपाध्यक्ष महोदय :  आप बोलें लेकिन आपकी पार्टी का जितना टाइम है, उसमें मुझे एतराज नहीं है अगर आपके लोग कम्पैल न करें क्योंकि आपकी पार्टी के 5 लोगों के नाम आये हैं। आपकी पार्टी के 56 मिनट हैं।
श्री बसुदेव आचार्य :  लेकिन उन 5 में से  2 यहां नहीं हैं।   From my party, I have only two Members.
MR. DEPUTY-SPEAKER: I have five names from your party. The time allotted is 56 minutes.
SHRI BASU DEB ACHARIA :  They will come on Monday. They would speak on Monday on Tuesday because the time of the House would be extended further.
MR. DEPUTY-SPEAKER: I agree with you.
श्री बसुदेव आचार्य :  उपाध्यक्ष जी, हमें हमारा टाइंम दीजिये।
          उपाध्यक्ष जी, हम तो श्री लालू जी को पूरा अभिनन्दन देना चाहते थे लेकिन नहीं दें सकेंगे। यू.पी.ए. सरकार के पांच साल का यह अंतिम रेल बजट है, फिर कहां समय मिलेगा क्योंकि फरवरी में बजट पेश नहीं कर पायंगे...( व्यवधान)
श्री सुरेन्द्र प्रकाश गोयल : तब वोट ऑन अकाऊंट होगा।
श्री बसुदेव आचार्य :  उस समय वोट ऑन अकाऊंट आयेगा, रेल बजट बाद में होगा।  
He has not increased the passenger fare in the Budget. There is some reduction, a nominal reduction rather. But what is happening is, even after the presentation of Budget, in the media review, every time - this is our experience  - for changing the classification, the freight rate is also revised.   Very recently, this year in January, on 2nd, the classification in the case of cement clinker  and iron ore has been changed.  Thereby, the freight rate has been increased. [r26]            This happened last year also in the case of steel and coal – by changing the classification, the freight rate is also changed. This has been mentioned by Shri Harin Pathak and the Standing Committee on Railways also strongly recommended this. When 200 Express Trains were upgraded to Superfast Trains, only nomenclature was changed and there was no improvement in the services.
          The criterion which was fixed 25 years back; if the average speed of the Express Train in 55 KM per hour, then that train will be declared as a Superfast Train. When was it fixed? 25 years back. During these 25 years, there have been lots of improvements. All the wooden sleepers, steel sleepers were replaced by concrete sleepers. The tracks had also been replaced; track renewal had also been done. So, what we had recommended is this – in order to declare an Express Train as a Super Fast Train, the minimum speed should be 75 KM per hour. But that has not been agreed to.
          The relief was given only to the daily commuters. After we took up this issue, the relief was given only to the daily commuters. There has not been any change in the departure and the arrival time of the trains; there were no passenger amenities that have been improved, but the passengers ought to pay more for travelling in Super Fast Trains. The nomenclature was only changed.
          Similarly, in 2001-02, safety surcharge was levied, when SRSF was created with Rs.17,000 crore. Out of this amount of Rs.17,000 crore, Rs.12,000 crore came from the Central Exchequer and Rs.5,000 crore came from the passengers, by levying safety surcharge. This safety surcharge was for five years during the Tenth Five Year Plan. So, for five years, safety surcharge was levied. After the expiry of five years in 2006-07, this safety surcharge was converted as developmental surcharge – from Re.1 to Rs.100. That is the surcharge, whereas after the expiry of five years, this safety surcharge should have been withdrawn.
          Eighty five per cent of the common passengers travel in second class. They could have got much relief much more than what Shri Laluji has announced as relief to the passengers by reducing the fare nominally. [MSOffice27]  Sir, it is indeed a fact that after many-many years because of taking certain innovative measures the Railway Ministry is earning surplus.  But the surplus which has been announced is not the real surplus.  You have to deduct the dividend and liability.  There is also a change in the accounting system.  The lease charge is now not shown in the ordinary expenses thereby it has an impact on the operating ratio.  The operating ratio has also been reduced to 76 per cent. But there is a surplus.  Why there is a surplus. The question is whether it will sustain or not.
For the last three years about 9 to 10 tonnes, more than the carrying capacity, is being allowed to be carried by the freight train.  A Committee was constituted which examined whether it has any impact on the permanent rake and the rolling stock.  It has its impact on the permanent rake.  So, the gain which we have today with the same number of rake, with the same rolling stock, we are getting more revenue.  We are carrying more freight.  This is not a temporary gain.  It will have impact on the track condition and in future you will have to face problem.  That aspect has to be taken care of.
More thrust has been given to public-private partnership.  Left Parties have our principle stand.  This as also the earlier budget is not isolated from the policy of economic reform which has been pursued by this Government. The Railway Minister in his speech has stated that for the 11th Five year Plan, the Railways need Rs.2,50,000 crore for modernisation.  We also want that railway system should be modernised.  We have a number of age old signalling systems today.  Even after spending thousand crores for replacement and modernisation of signalling system we find age old signalling system in some sections.  All the signalling systems have not been replaced by the modern signalling system.  We need money but whether the Railways also has the potentiality to increase its surplus, to increase its revenue.  The thrust in the Tenth Five Year plan was to increase the market share of the Railways. Where do we stand today?  The market share of the Railways during Tenth Five Year Plan has not been increased as it was expected.  Today, the market share in case of freight train is only 35 per cent.  The bulk traffic is coal, iron ore and steel.  Iron ore means ore for the export mainly and also for the steel plant.[R28]  Today, 89 million tonnes of iron ore is being exported.  There is a demand for ban on the export of iron ore. Out of 89 million tonnes of iron ore, the Railways share is about 40 million tonnes in one Railway, i.e., South-Eastern Railway.  In spite of that, the Railways would surpass its target of 785 million tonnes.  The Railways are expected to reach 790 million tonnes.  In spite of that, market share has not increased.  There is scope to increase the market share by increasing Railways own share.  The Railways can earn money therefore there is no need for inviting private sector in the Railways.  What is happening today?  The container traffic is the cream traffic.  A substantial percentage of container traffic is now going to the private sector.  The Railway Minister, Shri Laluji has announced that the number of trains to be operated during 2008-09 by the private parties will be increased substantially.  So, the percentage of container traffic also will be increased.  Now four stations would be modernised and upgraded to the world class standard by spending Rs.15000 crore.  What will be the role of the private sector?  I would like to know whether these stations fall under the core activities of Railways or not.  It is because station means not only the building and the platform but also the operation of the Railway system.  So, should we agree to hand over the core sector of the Railways to the private sector or not? 
Prior to 2003-04, at least, 70 per cent of the catering system including departmental catering was with the Railways.  Now the internal catering system has been privatised.  The IRCTC was created to privatise the catering system. They took it over and handed it over to the private sector.  The catering system in the Railways was started as a passenger amenity activity. Now there is a commercial outlook. The Railways want to earn money out of catering system by handing over the entire catering system to the private sector. What is happening now?  If Rs.25,000 was the licence fee, now it has been increased to Rs.2 lakh and from Rs.50,000 to Rs.5 lakh.  There is no justification.  What is happening is that the workers who were engaged by the private contractor are getting only Rs.20 or Rs.25 or Rs.30.  They are not even getting the minimum wages.  The erstwhile workers who were engaged by the old contractor, all are thrown out of their jobs.  Even the departmental employees who even did not opt to become the employees of IRCTC were deemed to the employees of IRCTC and now they have no place in the Railways.  Such is the happening. 
          The Railways have 16 good printing presses. Now the Ministry of Railway has decided to close down all the 16 printing presses.  Out of these 16 presses, six are located in the State of West Bengal.  During NDA regime, the Central Government decided to close down 13 printing presses.  When there was a change in the Government and the UPA Government came to power, the decision to close down 13 printing presses of Central Government was reversed and all the printing presses are now being modernised.[R29]    What will happen now?  The printing work will be handed over to private printing presses and there are 5000 employees engaged in printing presses who will be declared as surplus. 
There are a large number of vacancies.  The Railway Minister has admitted it and during his period also, there has been reduction in the staff strength.  Today, we have 14,6400 employees in the Railways putting together ‘A’, ‘B’, ‘C’ and ‘D’ grade employees.  Even in the safety category, there are a large number of vacancies.  In every zonal railway, in the case of running staff, shortage is to the extent of 30 per cent to 40 per cent.  What is happening?  Drivers and assistant drivers who are called as pilots and assistant pilots are to work for more than 16 to 17 hours whereas Shri Lalu Prasad Yadav does not know the situation in each and every zonal railway.  
There was an agreement long back, in 1973, when Shri Lalit Narayan Mishra was the Railway Minister that the duty hours of running staff, from sign on and sign off, should be ten hours.   This has been blatantly violated.  The regulation regarding hours of employment is violated in the Railways.  If the drivers are to work for more than 16 to 17 hours, there will be  human failure.  He has said that human failure has to be eliminated including the upgradation of technology thus reducing mechanical failure also.
I welcome the decision to recruit licensed porters.  लाइसेंसधारी कुलियों के लिए उन्होंने जो किया है, वह बहुत वर्षों की मांग थी कि कुलियों को रेलवे में बहाल किया जाए। लेकिन जो समस्या होगी, उसका भी समाधान करना है। लाइसेंसधारी कुलियों के लिए तो घोषणा हो गई, लेकिन अगस्त 2004 के महीने में लालू जी ने मुझे एक खत लिखकर कोयला इंजन में काम करने वाले मजदूरों की बहाली के लिए भी उन्होंने कहा था। उसी भाषा का प्रयोग उन्होंने किया था, जिसका प्रयोग उन्होंने अपने भाषण में किया था। मुझे टेलीफोन करके बोले कि दादा हमने गरीबों के लिए काम कर दिया है। मैं यह सुनकर बहुत खुश हुआ। उनके पास चिट्ठी भी आ गई। 300-400 के लगभग स्क्रीनिंग भी की गई। इसके बाद बोलने लगे कि दादा आप तो हजारों को ले आए हैं, हम कितनों को देंगे। हमने कहा कि हजारों नहीं हैं, ज्यादा से ज्यादा 200-300 ही होंगे। लेकिन आपने खुद जो आर्डर दिया है, उसके ऊपर यदि अमल नहीं होता है, तो यह सही नहीं होगा। यह बहुत अच्छा काम हुआ है Licensed porters will be given a chance to become railway employees and the cases of erstwhile coal and ash workers should also be considered alongwith licensed porters.  
          Now, I was saying as to how we can improve our market share.  There are certain bottlenecks. Even after modernisation, even after spending Rs. 17,000 crore, our average speed in the case of freight trains is 24 kilometres.
15.39 hrs.                       (Shri Varkala Radhakrishnan in the Chair)  In the case of passenger trains, it is 42 kilometres per hour.  If we can increase it by 10 per cent, we can release the capacity. What is happening today?   Even after track renewal, after replacement of concrete sleeper, the average speed is not being increas[MSOffice30] ed.

As a result of that the capacity which is required to be augmented is not being done.  I am saying this because railways will face challenges.  When we achieved Independence in 1947, we had 53,000 kilometres of railway track.  After sixty years of our Independence, our achievement is only 10,000 kilometres of railway track.  Today, we have only 63,000 kilometres of railway track.  China, in 1949, had 11,000 kilometres of railway track only. Today, they have 46,000 kilometres. Every year they are constructing 1,000 kilometres.  They are adding new lines.  But in our country, for the year 2007-08, the addition is only 186 kilometres. Although the projection of the Tenth Five Year Plan for new line is 1,310 kilometres, at the end of the Tenth Five Year Plan the addition is only 920 kilometres.  That means per year, our achievement is less than 1,000 kilometres.

          The same is the case with doubling. Doubling is required for capacity augmentation.  When a new line is constructed it is a single line.  It is called “One Engine Line.”  When the traffic increases, when it reaches the saturation point, there is a need to convert it to double line.  But the target for doubling also has not been achieved.  Then, how will we be able to increase the capacity and thereby increase our market share?  This year also, the allocation for new line has been slashed.  The allocation of money for new line has been reduced. Last year, in 2007-08, it was Rs. 2,681.21 crore.  For this year, it has been reduced to Rs. 1,700 crore. 

          We have a large number of pending projects. More than 200 projects are pending. A White Paper was presented to this House.  Under Remote Sampark Yojana, some projects were identified for connecting the remote areas with railway infrastructure.  Why is railway line needed? Why do we demand expansion of railway network? Economic development and industrialisation are closely connected with railway infrastructure. Where there is no railway line, CD ratio is much less.  We need world class stations. But what should be our priority?  Our priority should be towards expansion of railway network.  The remote areas should be connected.  If the allocation for expansion of railway network and for new lines is reduced, then what are we going to do with the surplus which is being generated every year to the tune of Rs. 8,000 crore or Rs. 13,000 crore or Rs. 20,000 crore? What will you do with the surplus money if that money is not utilised for the expansion of railway network?[MSOffice31]  We need a railway network. Recently, I visited one place which is a centre of iron-ore. It is Barbil-Barsuan. You will be surprised to know the plight of the passengers. I boarded a train at quarter past five of the clock. In the early morning when I came to the Station, there was no platform. I was told that in one station, in one siding, the earning is Rs.242 crore. I told the General Manager of South-Eastern Railway that he should spend at least rupees one crore each year for the development of that station. There is no platform. There is no passenger shed.

Sir, he stated that there are four or five categories of platforms like A, B, C, D, E and F. Now, the hon. Railway Minister has decided to raise the platforms of A and B categories. Why should there be four categories of platforms? We recommended that there should be two categories of platforms – high level and low level ones.

          Passengers are passengers. Passengers may be of E or F category. But the basic minimum passenger amenities should be provided to all the passengers. You will see that in the E or F category, there is no passenger shed. Only a tree is planted. Every year, the branches are cut. बैठने का सीमेंट का एक चबूतरा है, बोलते हैं कि वही हो गया पैसेंजर शेड, पैसेंजर एमिनिटीज। After track renewal, the track level becomes higher than the platform. So, there should be another category of platform whose level should be lower than the track. Low level and high level categories should be there.  There should be the fourth category of platform lower than the track. Because of the concrete sleeper, the track bevel becomes higher than the platform. My suggestion is that enough money should be allocated for the new lines. Some time-bound programme should be taken up to complete all the pending projects. These are very much necessary.

          The State of Orissa, four years back, used to get Rs.325 crore. Only the year before last, it was doubled to Rs.600 crore. This year also, the same allocation has been made. There has not been any increase. We recommended Rs.1200 crore but out of that Rs.1200 crore, we got only Rs.687 crore. लालू जी ने उसको दो गुना किया है। पहले तो हम बराबर देखते थे कि 300-350 करोड़ से ज्यादा उड़ीसा के लिए नहीं होता था।...( व्यवधान)

श्री भर्तृहरि महताब (कटक) : कांग्रेस के जमाने में 90 करोड़ था।

श्री बसुदेव आचार्य : हां, 90 करोड़। Puri is a very important place. It is connected with a single line!  डबल लाइन हो रहा है, उसका काम कब से चल रहा है, वह खत्म नहीं हो रहा है। लालू जी आप सो रहे हैं, सुन नहीं रहे हैं।  ...( व्यवधान) आप जरा इसके ऊपर ध्यान दें। जो यह प्रोजेक्ट है, हर जगह के लिए बहुत जरूरी है।  ...( व्यवधान) हम पुरी भी गए थे, हमें पुरी अच्छा लगता है। बगल में एक गांव है, चित्रपट रघुराजपुर।    I like Puri very much. That is why, I mention about Puri and Barbil.

MR. CHAIRMAN :  You have taken thirty minutes. Please conclude.

SHRI BASU DEB ACHARIA  :  I have not come to my State as yet.

MR. CHAIRMAN : You are the Chairman of the Standing Committee on Railways. You can put in all your ideas in the Report. There is always a chance of doing that. That will be taken into consideration.

… (Interruptions)

SHRI BASU DEB ACHARIA  :  Let me come to my State. … (Interruptions)

MR. CHAIRMAN :  He has been given thirty minutes. Why do you stand up?

SHRI BASU DEB ACHARIA :  From Barbil, to reach the district headquarters of Keonjhar, it takes about seven hours. Laying 20 km. of railway line will serve the purpose.… (Interruptions)

MR. CHAIRMAN : Only 12 hours have been allotted. There are 60 hon. Members to speak.

श्री बसुदेव आचार्य :  साठ हैं, तो क्या है?  This is Railway Budget.[R32]  Sir, now I will come to my State.  We had a meeting when we found that in this year’s Budget, West Bengal has been ignored.  There are only two or three proposals for doubling and that too will depend on contribution from Haldia Port. Then there is a fourth line for which we have been asking for the last 20 years line.  It is the Panskura-Kharagpur line.  We have been asking for that for the last 20 years. Laluji has sanctioned this year only the fourth line and two weekly trains mainly for West Bengal.  Now, Kolkata suburban has daily passenger traffic of 28 lakhs together in Sealdah and Howrah. For the last seven or eight years, the suburban services had not been increased.  This year, I am happy that he has announced 300 services for Mumbai suburban.  We also want that.  I have also written to him.  But, why should Kolkata not get more rakes?  Why Kolkata still has 9 car rake?  Eighty per cent of the rakes in suburban areas are 9 car rakes, whereas eighty per cent of rakes in Mumbai are 12 car rakes. 

          Why has Kolkata only 3 terminals?  Earlier, there were two terminals.  After we put pressure on the Government, another terminal was sanctioned for Kolkata.  Laluji inaugurated that terminal.  I also went along with him.  It is a very good terminal.  But, in South-eastern Railways, they do not have their own terminal.  There is an additional platform in Howrah station that has been constructed exclusively for the South-eastern Railways.  Shalimar which was conceived in 1980s to be a full-fledged terminal with 12 platforms, has got only 2 platforms today.  So there is a proposal to have a terminal either at Majerhat or Satrarache.  So, the State Government will be consulted when the location will be there.  There is a proposal to have a separate terminal for suburban Mumbai.  Suburban Mumbai has a separate terminal, namely, Church Gate.  Similarly, Kolkata also should have a separate terminal at Solgura near Howrah.  Then the problem of Kolkata suburban can be addressed properly.  Kolkata metro’s extension up to Goriah is taking place and we are expecting that by 2009, it would be completed and it would be open for traffic.   For extension from Dumdum to Dakshinashwer, for that the Report has been submitted.  We want that the State Government’s share because the State Government has agreed to share the cost of construction of the extension of metro. So that should also be sanctioned. No new line projects have been sanctioned for the last four years in West Bengal, not a single new line. Sir, take for instance Jhargram-Purulia.  Purulia is in my district, but Jhargram is in West Midnapore.  Then, there is Bankura.  After delimitation, that area will come in my constituency.  From Jhargram to Purulia, the entire belt is tribal. There are extremist activities also bordering Orissa and Jhargram.  लालू जी हमारे वहां कई बार आए थे, वे जानते हैं।[MSOffice33] [MSOffice34]            So, that line will solve the purpose of backward areas. The rate of return is – 6 per cent. For the expansion of railway network we should not be very strict on the rate of return that it should be 14 per cent. When the interest rate is 7 per cent, why should the rate of return should be 14 per cent in the case of railways? Then there is another consideration that if the project is not remunerative, it should be socially desirable. Otherwise, in the North East, in certain areas no project can be taken up if we go strictly by the rate of return. Laluji will also agree with me on this point.

          Sir, a large number of industries are coming up in our area. The capacity of steel production will reach 29 million tonnes in the steel plants. Power generation will reach 6,000 MW by the end of the 11th Five Year Plan. There are cement plants in West Midnapore, Purulia and Bankura. So, if this is updated, then I am sure that this project would be remunerative because in 2005 the survey was updated. At that time the rate of return was – 6 per cent, now it will be plus. Then, there is a small single line section between Burnpur and Aasonsol. ISSCO is being expanded and its capacity will reach 2.5 million tonnes. The capacity of Durgapur Steel Plant is being augmented to 3 million tonnes. But in between there is a single line section for which survey has been completed and the report has been submitted. The rate of return for this line is 54 per cent, but it has not found place in the Railway Budget. I would request the Railway Minister that this should also be considered.

          Sir, when Laluji went to Krishnanagar to inaugurate the Krishnanagar-Lalgola section electrification, he made an announcement.

MR. CHAIRMAN  : There are 9 speakers from the CPI (M) and it has been allotted 56 minutes out of which you have already taken 40 minutes. So, please be brief and conclude soon.

SHRI BASU DEB ACHARIA  : Sir, I will finish within five minutes.

MR. CHAIRMAN : There are nine speakers from your party.

SHRI BASU DEB ACHARIA : And that includes your name also and that is why you are asking me to conclude!           Sir, Laluji announced the running of Hazaar Dwari Express in Murshidabad. As you know, Murshidabad is famous for Siraj-ud-daula. Last year was the 250th year of the War of Plassey. In the memory of Siraj-ud-daula who fought for the independence of our country, we requested Laluji to announce the running of Hazaar Dwari Express. He also agreed and he announced it. वह किसी के नाम पर नहीं होगा इसलिए हजारद्वारी के नाम पर उन्होंने घोषणा कर दी। उस समय सदन चल रहा था इसलिए उन्होंने मुझसे पूछा कि क्या यह हम कर सकते हैं? हमने कहा कि यह पालिसी मेकर नहीं है  इसलिए आप कर सकते हैं। उन्होंने उसे कर दिया, लेकिन बजट में वह वीकली ट्रेन है जबकि हमने डेली ट्रेन के लिए कहा था। अब टूरिस्ट लोगों के लिए क्या हो रहा है? ...( व्यवधान) इन्होंने कहा है कि हम डेली ट्रेन करने के लिए बोल देंगे।

          Sir, during the freedom struggle, there was the Tewaga Peasant Movement in West Bengal. एक ट्रेन--कोलकाता-बालूघाट-तिवाया एक्सप्रैस का उन्होंने उद्घाटन किया। वह ट्रेन भी तीन दिन है। From the district headquarters, there is only one train coming to Kolkata and that too it runs only for three days in a week. That means, the people from Dakshin Dinajpur will get a chance to come to Kolkata only for three days in a week. I would request the Railway Minister that this train should be made a daily train.

          Then, Jalpaiguri is not only a district headquarters but it is also a divisional headquarters and a Circuit Bench of the Kolkata High Court also will be inaugurated soon at Jalpaiguri. There is no direct train from Jalpaiguri to Kolkata, three or four coaches come to a station, another set of four coaches come to another station and then they are all attached to another train and that comes to Sealdah. I am not asking for a new train. There is a Superfast Train from Sealdah to New Jalpaiguri. So, I would request the hon. Railway Minister to extend it up to Haldibadi so that the demand of the people of Jalpaiguri district can be met.[R35]    16.00 hrs. [r36] He has assured that he would definitely examine it.

          There is no electrification project in this. We have asked for two electrification projects.  One is from Rampurhat to Khana and another is from Pandeshwar to Sathia.  If the survey is completed then the electrification process can be done.

          Lastly, I would like to say that he will be the first Railway Minister who took initiative for the democratic functioning of the unions in the Railways.  उन्होंने मुझसे कहा था कि हम सीक्रेट बैलट सिस्टम इंट्रोडय़ूस करना चाहते हैं, मैंने कहा कि यह बहुत अच्छा है, हम पिछले कई सालों से, हर बजट में इसकी मांग करते आ रहे हैं। I used to demand the introduction of secret ballot for recognition of unions. उन्होंने इनिशिएटिव लिया।  Railway has production units, CLW, DLW, RCF, ICF, etc.  These are factories.  लालू जी, वह एक कारखाना है, वहां पर कोई रिकग्नाइज्ड यूनियन नहीं है। Kolkata Metro has no recognised union.  आपने बहुत से सराहनीय काम किए हैं, इसलिए आप जो प्रोडक्शन यूनिट्स हैं, where there is no recognised union, they had to go to the court. उनको कोर्ट में जाना पड़ा कि हम लोगों ने क्या गलती की है, हम लोग भी रेलवे के भाग हैं।  15-20 सालों से वह मामला चल रहा है, उस मामले में कहा गया कि वह प्रोजेक्ट है, कंस्ट्रक्शन कंपनी है। मेरी आपसे मांग है कि वहां भी यूनियन होनी चाहिए क्योंकि आपने बहुत से सराहनीय कदम उठाए हैं।

I sincerely hope that Laluji will definitely extend the secret ballot system to all the production units.  I would like to know why the workers of the production units and Metro Railway should be deprived of the democratic rights to have their recognised union. Thank you, Sir, for giving me time to speak a few words on this Budget. 

                                                                                       

श्री शैलेन्द्र कुमार (चायल)  : महोदय, आपने मुझे वर्ष 2008-09 के रेल बजट पर बोलने का अवसर दिया, इसके लिए मैं आपका आभारी हूं।

          सबसे पहले मैं लालू प्रसाद जी को धन्यवाद और बधाई देना चाहूंगा कि अपने रेलमंत्रित्व काल में पांचवीं बार रेल बजट उन्होंने प्रस्तुत किया है और पूरे रेल विभाग को 25,000 करोड़ रूपए के मुनाफे वाला बजट दिया है। यहां वर्ष 2005-06, 2007-08 की सप्लीमेंटरी डिमाण्ड्स तथा वर्ष 2008-09 की जनरल डिमाण्ड्स और 1979 के रेल अधिनियम में संशोधन करने वाले एक विधेयक को एक साथ चर्चा करने के लिए लिया गया है। सप्लीमेंटरी डिमाण्ड्स से ऐसा लगता है कि हम लोग अगला बजट नहीं देख पाएंगे क्योंकि उस समय हम लोग अपने-अपने चुनाव में लगे रहेंगे।  लालू प्रसाद जी ने रेल बजट में कहा है कि रेलवे की रेल करेगी विमान को फेल। यहां हमारे दोनों रेल राज्यमंत्रीगण बैठे हैं, मैं उनसे कहना चाहूंगा कि सबसे पहले अगर रेल ने विमान को फेल करना है तो पूरे देश के रेलवे ट्रैक की दशा पर ध्यान देना होगा।[R37]            मेरे खयाल से बहुत से ऐसे ट्रैक्स हैं, जो अंग्रेजों के ज़माने से, आज़ादी के पहले के बने हुए हैं और उन पर हमारी रेलगाड़ियां दौड़ रही हैं। उनकी मरम्मत और देखभाल करने की जरूरत है। इसी तरह से इन ट्रैक्स पर बहुत से पुल और छोटी-छोटी पुलियां हैं, जिन पर रोज तेज गति से ट्रेंस चलती हैं, उन्हें भी ठीक करने की जरूरत है। इसके अलावा बहुत सी रेल लाइनें अभी तक विद्युतीकृत नहीं हुई हैं। उनका भी विद्युतीकरण जरूरी है, जिससे डीजल की खपत कम हो और बिजली से तेज गति से ट्रेंस चलें। इससे दुर्घटनाओं में भी कमी आएगी। ...( व्यवधान)

MR. CHAIRMAN : Now the House is in Session; there should be no discussion between Members.  That will amount that it is a market place; that cannot be.

… (Interruptions)

श्री शैलेन्द्र कुमार : रेल मंत्री जी ने एक बात कही है कि - मुसाफिर होगा रेल का राजा। मैं कहना चाहूंगा कि आपने रेल बजट में बहुत सारी घोषणाएं की है। जरूरत इस बात की है कि सभी एक्सप्रेस ट्रेंस में जनरल बोगियों की संख्या बढ़ाई जाए, क्योंकि रेलगाड़ियों में 60 से 70 प्रतिशत लोग जनरल बोगियों में यानि सामान्य श्रेणी में यात्रा करते हैं। हर एक्सप्रेस ट्रेन में दो-चार या अधिकतम् छः डिब्बे ए.सी. के होते हैं, बाकी जनरल होते हैं। इसलिए सभी मेल और एक्सप्रेस ट्रेंस में जनरल बोगियों की संख्या और बढ़ाई जाए, इससे भार कम होगा और रेलवे की दशा में भी सुधार होगा।

          आपने अपने रेल बजट में गरीब रथ के बारे में भी जिक्र किया है। मेरा मानना है कि यह ट्रेन गरीबों के लिए नहीं है, क्योंकि यह सारी ट्रेन ए.सी. थर्ड क्लास है और इसका किराया सामान्य श्रेणी से 25 प्रतिशत अधिक है। आपने इस तरह की दस नई रेलगाड़ियां चलाने की बात कही है। इससे ज्यादा महत्व की बात यह होगी कि आप सेकंड क्लास और सामान्य श्रेणी की रेलगाड़ियां अधिक संख्या में चलाएं, जिससे ज्यादा से ज्यादा लोगों को सुविधा होगी।...( व्यवधान) सेकंड क्लास के यात्री को आरक्षण कराने में ज्यादा सुविधा होती है।

          मैं रेल मंत्री जी को धन्यवाद देना चाहूंगा कि उन्होंने इस बार भी यात्री किराए और माल भाड़े में वृद्धि नहीं की है, जबकि ए.सी. फर्स्ट एंड सेकंड में 15 से 20 प्रतिशत किराए में कमी की है। लेकिन वहीं उन्होंने सामान्य श्रेणी के किराए में कोई कमी नहीं की है, वह करनी चाहिए थी, तब जाकर ट्रेन में सफर करने वाले 70फीसदी लोगों को फायदा होता। यह हमारी आपसे मांग है, अगर हो सके तो आप अपने उत्तर में इसकी घोषणा करें।

          आपने शिक्षित बेरोजगारों को टिकट वितरण एजेंसी देने की बात भी अपने रेल बजट में कही है। यूपीए सरकार ने बेरोजगारों को काम देने के लिए कई योजनाओं की घोषणा की है और राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम भी बनाया है। लेकिन आपने जिन शिक्षित बेरोजगारों को टिकट वितरण की एजेंसी देने की बात कही है, उसमें मेरा  कहना है कि उन्हें इतना कमीशन अवश्य मिलना चाहिए कि वे कम से कम अपने परिवार का भरण-पोषण कर सकें। इसकी व्यवस्था आपको करनी होगी और इसे प्रत्यक्ष रूप से दर्शाना भी होगा।

          सभी एक्सप्रेस ट्रेंस में भोजन और बिस्तर की बात भी रेल बजट में मंत्री जी ने कही है। इलाहाबाद से नई दिल्ली और नई दिल्ली से इलाहाबाद जो प्रयागराज ट्रेन चलती है, वह रात को चलती है। अधिकतर सब यात्री सोते हुए जाते हैं, लेकिन उसमें पेंट्री कार होना जरूरी है, जिससे कम से कम चाय तो लोगों को मिल सके। आपने अपने पिछले रेल बजट में कुल्हड़ में चाय देने की बात कही थी, लेकिन वह कहीं दिखाई नहीं देती है। इसी तरह आपने ट्रेंस में खादी की चादर और बिस्तर देने की बात भी कही थी, वह भी कहीं दिखाई नहीं देती है। इस पर आपको विशेष ध्यान देना चाहिए। कुल्हड़ और खादी को सख्ती से लागू किया जाए, तो जो समाज के दबे-कुचले और उपेक्षित लोग हैं, जिनका यह काम है, उन्हें सीधे इससे फायदा होगा। लखनऊ शताब्दी ट्रेन को 150 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से दौड़ाने की बात भी आपने कही है।[R38]  मैं कहना चाहूंगा कि 150 किलोमीटर के बजाए चाहे आप 200 किलोमीटर रफ्तार कर दीजिए, लेकिन उसके बीच में जो ट्रैक और पुलिया हैं उनकी मरम्मत करने की व्यवस्था भी आपको करनी पड़ेगी। ...( व्यवधान) जो पुलिया पुरानी हैं उनकी मरम्मत की सख्त जरुरत है। टिकटों के लिए 800 नये अनारक्षित केन्द्र खोलने की बात आपने कही है। मैं मांग करना चाहूंगा कि मेरे क्षेत्र में मनौली, सिराथू, खागा और कूंडा जनपद प्रतापगढ़ में महत्वपूर्ण स्टेशन हैं। वहां पर कंप्यूटर आरक्षण केन्द्र अगर आप खोल दें तो मेरे ख्याल से यात्रियों को बड़ी सुविधा मिलेगी।

          इस बजट में 55 नयी रेलगाड़ियां आपने चलाने की बात कही है। मैं देख रहा था कि इसमें उत्तर प्रदेश की घोर उपेक्षा हुई है। माननीय रेल मंत्री जी से जब पूछा गया तो उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश से होकर सब ट्रेनें गुजरती हैं इसलिए उत्तर प्रदेश के लिए नयी ट्रेन की कोई आवश्यकता नहीं है। विजय भाई से मैं कहना चाहूंगा कि जहां से ट्रेन शुरू होती है और जहां खत्म होती है वहां से ट्रेन चले, तभी माना जाना चाहिए कि नयी ट्रेन आपने चलाई है। उत्तर प्रदेश की उपेक्षा हुई है, इस बात को माना जाए और सब सदस्यों की जो डिमांड आयेंगी, उन पर आपको विचार करने की जरुरत है। ...( व्यवधान) 24 गाड़ियों की बात आप कहते हैं, तो क्या 24 गाड़ियां का उत्तर प्रदेश में स्टोपेज है, कितने स्टोपेज आप वहां दे रहे हैं, कितनों में आरक्षण की व्यवस्था आप कर रहे हैं, यह देखने की बात है। आरक्षण की सुविधा आपने नहीं बढ़ाई है, इसलिए उत्तर प्रदेश की उपेक्षा आप कर रहे हैं, यह आपको मानना पड़ेगा। अगर आप 190 यात्री ट्रेनों में डिब्बे बढ़ाएंगे, तो मेरा आपसे निवेदन है कि 70-75 प्रतिशत सामान्य लोग जो सैकिंड-क्लास में यात्रा कर रहे हैं, उनके लिए सैकिंड क्लास की बोगियां बढ़ाई जाएं। 

          आज किसी भी स्टेशन पर आप चले जाइये, जो एक नम्बर प्लेटफार्म होता है उसको बड़े राजकीय तरीके से सजाया जाता है, उसकी सफाई होती है लेकिन जो और प्लेटफार्म होते हैं उनकी लम्बाई भी कम होती है और वहां सफाई की व्यवस्था भी नहीं होती है। इस बात को आपको मानना पड़ेगा। एक नम्बर प्लेटफार्म पर सफाई की व्यवस्था इसलिए होती हैं क्योंकि वहां से टिकट क्लेक्टर, एसएस, एसएम आदि का कमरा होता है, आरपी,जीआरपी के कार्यालय होते हैं। उनको सजाना भी चाहिए लेकिन उसी तर्ज पर जो और प्लेटफार्म्स हैं उन प्लेटफार्म्स का भी आप विस्तार करें, बैठने की व्यवस्था करें, चाय-पानी और सफाई की व्यवस्था करें तो ठीक रहेगा। बहुत सी ऐसी जगह हैं जहां एसी बोगी में यात्रा करने वाले लोगों को जमीन पर उतरना पड़ता है, वहां प्लेटफार्म नहीं होता है। वहां प्लेटफार्म बनाने की जरुरत है, क्योंकि वहां बहुत सी महत्वपूर्ण ट्रेनें आकर रुकती हैं।

          महिलाओं और छात्रों के लिए आपने इस बजट में व्यवस्था की है, इसके लिए मैं आपको धन्यवाद देना चाहूंगा। एक मांग मैं राज्य मंत्री जी से करना चाहूंगा कि जो शिक्षित बेरोजगार है चाहे वह हाई-स्कूल पास हों, इंटर-मीडिएट पास हों, ग्रेजुएट या पोस्ट-ग्रेजुएट हों, उनके लिए भी टिकट में कंसेशन करने की व्यवस्था इस बजट में होनी चाहिए, तभी जाकर हमारा बजट अच्छा साबित होगा।

          इसी प्रकार से आपने क्षेत्रीय रेलों में अल्पसंख्यक कल्याण कक्ष खोले जाने की व्यवस्था की है, लेकिन विस्तार से इस बारे में कुछ नहीं दिया गया है। मैं चाहूंगा कि जब माननीय मंत्री जी का जवाब आये तो क्षेत्रीय रेलों में अल्पसंख्यक कल्याण कक्ष खोले जाने की क्या व्यवस्था होगी, उसे विस्तार से बताएंगे।

          लाइसेंसधारी कुलियों को गेंगमैन दूसरी-क्लास(डी) के पद पर जो आपने पोस्ट किया है, इसकी डिमांड बहुत दिनों से थी।[r39]               मेरा निवेदन है कि इसको तत्काल लागू कर दें। ऐसा न हो कि यह केवल घोषणा रह जाए। उनको सम्मान मिले, अच्छा वेतन मिले और सही मायने में वे अपना जीवन व्यतीत कर सकें, अपने परिवार का भरण-पोषण कर सकें, यह व्यवस्था करने की जरूरत है। बिना फाटक के कोई रेलवे क्रासिंग नहीं रहेगा, यह बहुत दिनों से मांग की जा रही थी। यह अच्छी बात है कि रेल संरक्षा की पहली बार आपने इस बजट में बात की है। जहां रेलवे फाटक नहीं है, वहां बहुत सी दुर्घटनाएं होती हैं। जब फाटक से टू व्हीलर, फोर व्हीलर गुजरते हैं, तो रेल दुर्घटनाएं होती हैं।

          दूसरी बात रेल मंत्री जी आपके संज्ञान में लाना चाहता हूं कि नार्थ सेंट्रल रेलवे, जो एनसीआर रेलवे है, मुगल सराय से दिल्ली तक, मेरे खयाल से आपने बहुत कंजूरी बरती है, मैं चाहूंगा कि एनसीआर के प्रति आप अपनी दरियादिली दिखा कर ज्यादा से ज्यादा बजट का प्रावधान करें, ताकि यात्रियों को ज्यादा से ज्यादा सुविधाएं मिल सकें।

          इस बजट को देखने से मुझे ऐसा लगा जैसे हमारी रेल निजीकरण की तरफ बढ़ रही है। हमारा बजट ऐसा न हो कि हमारी रेल निजीकरण की तरफ उन्मुख हो, इस पर रोक लगाने की जरूरत है। जहां तक आपने ऑन लाइन रिजर्वेशन की बात कही है, वहीं दूसरी तरफ आपको यह भी सोचना पड़ेगा कि ई-टिक्टिंग को कैसे वापिस किया जा सकेगा? कैसे मुसाफिर ई-टिक्टिंग को लौटाएगा? मेरे खयाल से ई-टिक्टिंग के द्वारा आपने मुसाफिरों के गले में डायरेक्ट फंदा डालने का काम किया है। इसे भी आप कम से कम बजट में क्लियर करें।

          सभापति जी, हमारे संसदीय क्षेत्र मनौरी, भरवारी से कानपुर की दूरी 156 किलोमीटर है, जबकि मैं मांग करता हूं कि वहां से एमएसटी जो पास बनता है, उसे 150, 160, या 170 रुपए कर दें, क्योंकि केंद्रीय राज्य सरकार के जितने भी हमारे कर्मचारी या अधिकारी हैं, व्यवसायी हैं या औद्योगिककर्मी हैं, जो इलाहाबाद से प्रतापगढ़ कानपुर तक यात्रा करते हैं, उनके लिए जहां से वे चाहें वहां से एमएसटी पास बनाने की व्यवस्था आप कर दें, तो मेरे खयाल से इससे रेल को राजस्व प्राप्त करने में फायदा मिलेगा। जनसाधारण व एक्सप्रेस ट्रेनों में जनरल बोगी बढ़ाने की बात मैंने आपसे कर दी है। इलाहाबाद से यशवंतपुर के लिए ट्रेन चलाए जाने की मैं मांग करता हूं। तुलसी एक्सप्रेस, जिसके हफ्ते में कुछ दिन हैं, उसे नियमित चलाए जाने की मैं मांग करता हूं। बांदा और कानपुर के बीच नियमित ट्रेन चलाई जाए, क्योंकि कानपुर एक औद्योगिक महानगर है, इससे लोगों को रोजगार मिलेगा। कानपुर-महोबा के लिए पैसेंजर ट्रेन चलाने की आवश्यकता है। महोबा बुंदेलखंड एरिया में है, वहां बहुत गरीबी है, गुरबत है, सूखा एरिया है। वहां किसान बेहाल है और आत्महत्या कर रहा है, इसलिए इस ट्रेन को प्राथमिकता से देखा जाए। इलाहाबाद से बंगलौर के लिए कोई ट्रेन नहीं है, जबकि इलाहाबाद से बहुत से लोग हैं साउथ इंडिया में बंगलौर जाते हैं। आईटी कालेज में बहुत से छात्र पढ़ते हैं, उनकी बहुत दिनों से इस ट्रेन की मांग है। इलाहाबाद दिल्ली के लिए प्रयागराज ट्रेन आपने चलाई है। इस ट्रेन में बहुत मुश्किल से आरक्षण मिल पाता है। इसलिए मेरी मांग है कि इलाहाबाद से दिल्ली के बीच में एक नई ट्रेन चलाने की व्यवस्था करें। कानपुर और झांसी मार्ग का विद्युतीकरण तत्काल कराया जाए, यह बहुत दिनों से लम्बित है। प्रयागराज एक्सप्रेस में केवल एक ही एसी फर्स्ट की बोगी है। चूंकि इलाहाबाद में हाई कोर्ट भी है, जजिज़ यात्रा करते हैं, इस कारण जब हमारे सदस्य यात्रा करते हैं तो उन्हें एसी बोगी में जगह ही नहीं मिल पाती है, जबकि एक एक्ट्रा बोगी का ट्रायल भी हो चुका है। मैं चाहूंगा कि प्रयागराज एक्सप्रेस 2417 उधर से चलती है और 2418 इधर से चलती है, उसमें फर्स्ट क्लास की एक बोगी लगाई जाए।

          सभापति जी, एक बहुत ही महत्वपूर्ण बात बताना चाहूंगा कि आजकल रेल से जब लोग यात्रा करते हैं और जब वह उतरता है तो जहरखुरानी की शिकायतें मिल रही हैं। इन शिकायतों से पूरा अखबार भरा रहता है।[R40]            जब वे ट्रेन से उतर कर अपने घर की ओर जाते हैं तो जहर-खुरानी के शिकार होते हैं। हमारे यहां रेलवे ट्रैक पर आए दिन दो-चार लाशें मिलती हैं। हत्या करके लोग फेंक देते हैं या ट्रेन से धकेले जाते हैं। मेरे ख्याल में आपके पास दो फोर्स आरपीएफ और जीआरपी है। आप आरपीएफ में पांच हजार की भर्ती करने जा रहे हैं। जहर खुरानी पर रोक लगे। रेलवे ट्रैक पर जो लाशें मिलती हैं, वे भी किसी के बेटे होंगे, किसी बहन के भाई होंगे, किसी का पति होगा, किसी के घर का मुखिया होगा। इसको गम्भीरता से लेने की जरूरत है। इलाहाबाद से लखनऊ के बीच केवल 200 किलोमीटर की दूरी है लेकिन लोग बस से जाना पसन्द करते हैं। मैं चाहूंगा कि इस रूट के रेलवे ट्रैक को ठीक किया जाए। ये महत्वपूर्ण नगर हैं। इलाहाबाद, लखनऊ प्रदेश के मुख्यालय हैं और लखनऊ राजधानी है, जहां हाई कोर्ट की एक बैंच भी है। वहां ज्यादा लोग ट्रैवल करते हैं। इसे गम्भीरता से देखने की जरूरत है।

          गैस्ट हाउस और रिटायरिंग रूम्स में कम से कम एमपीज लोगों को प्राथमिकता दी जाए। तमाम ऐसे स्टेशन हैं जहां प्रकाश और पीने के पानी की व्यवस्था नहीं है। वहां कभी-कभी रात में ट्रेन रुकती है तो बिल्कुल अंधेरा होता है। वहां चोरी, डकैती और राहजनी भी होती है। चाहे छोटे या बड़े स्टेशन हों, वहां प्रकाश और पीने के पानी की व्यवस्था होनी चाहिए। रेलवे कॉलोनियों की हालत भी बहुत बदतर है। वहां रेल के कर्मचारी रहते हैं। वहां बिजली और पेय जल की व्यवस्था होनी चाहिए, बच्चों की शिक्षा की व्यवस्था होनी चाहिए।

          मेरे संसदीय क्षेत्र भरवारी रेलवे क्रॉसिंग में बहुत जाम रहता है। वहां रोही बाई-पास के लिए 6 करोड़ रुपए राष्ट्रीय सम विकास योजना के आज भी पड़े हैं। उत्तर प्रदेश सरकार उसे आज भी देना चाहती है। मैं चाहूंगा कि उस पर ऊपरिगामी सेतु बनाया जाए ताकि कोशाम्बी जनपद के मुख्यालय मंगलपुर में लोग आसानी से जा सकें। भरवारी, सेरातू, कोशाम्बी जंक्शन को बड़ा स्टेशन बनाया जाए। चूंकि वह नया जनपद है। वहां अच्छी-अच्छी ट्रेनों का ठहराव होना चाहिए। मेन लाइन मुगलसराय से दिल्ली ट्रैक पर चित्रकूट और बांदा के लिए चूंकि खजुराहो, चित्रकूट और कोशाम्बी धार्मिक स्तर पर बहुत महत्व रखते हैं इसलिए नया ट्रैक बनाया जाए ताकि विदेशी भी वहां जा सकें।

MR. CHAIRMAN  : You can lay it on the Table of the House. Please conclude.

श्री शैलेन्द्र कुमार  : जनपद प्रतापगढ़ में चिंकूला एक रेलवे क्रॉसिंग है। वहां ऊपरिगामी सेतु मंजूर हो गया है। मैं चाहूंगा कि आप इसका शिलान्यास करवा दें। नई दिल्ली से रायबरेली की जो नई ट्रेन चली है, आपने उसे बढ़ा कर प्रतापगढ़ तक किया है। मैं चाहूंगा कि वहां हरी झंडी दिखा कर इसका शुभारम्भ जल्दी करा दें। इन्हीं बातों के साथ मैं अपनी बात समाप्त करता हूं।

MR. CHAIRMAN : About the local issues and all these matters you can give it in writing.

श्री शैलेन्द्र कुमार   : माननीय मंत्री जी ने जो रेल बजट प्रस्तुत किया है, उनको विशेष तौर पर बधाई देना चाहता हूं और रेल बजट का समर्थन करता हूं।                                     

MR. CHAIRMAN : I now call Shri Raghunath Jha to speak. Shri Jha, please be brief. About the local issues, you can give it in writing. 

श्री रघुनाथ झा (बेतिया) : सभापति महोदय, मैं अपने आप को गौरवान्वित महसूस करता हूं कि हमारे दल के नेता माननीय लालू प्रसाद जी ने पांचवा बजट सदन में प्रस्तुत किया और पिछले चार वर्षों में जो भी बजट आया, उनके करिश्माई नेतृत्व, योग्यता, और कार्यशैली का फल था कि न उन्होंने यात्री किराए में वृद्धि की, न माल भाड़े में वृद्धि की बल्कि वर्तमान बजट में कटौती करके और 25 हजार करोड़ रुपए का मुनाफा दर्शाने का काम किया है, इसके लिए मैं रेल बजट और लालू जी के नेतृत्व का पुरजोर स्वागत करता हूं।

          महोदय, मुझे लालू जी के साथ 20 वर्षों तक काम करने का मौका मिला है। बिहार की राजनीति में भी मैं उनके साथ था। 1988 में बैंगलोर में जब जनता दल का निर्माण हुआ था, भिन्न-भिन्न दल के लोग, जनता दल, लोक दल के लोग आए थे, उसमें स्वर्गीय नेता बीजू पटनायक जी भी थे।  जब जनता दल का निर्माण हुआ और 1990 के चुनाव में बिहार की जनता ने अपना मत देकर गरीब के बेटे को बिहार की गद्दी पर बैठाने का काम किया, तो जो व्यक्ति गरीबी झेलकर गरीबी की समस्या को जानते हुए इतने महत्वपूर्ण पद पर आया, उसने गरीबों के लिए कदम उठाना आरंभ किया, उस समय अभिजात्य  वर्ग के लोगों ने किस तरह विरोध किया, इसकी गवाह सारी दुनिया है। मेरी बातों को कोई अन्यथा न ले, जिन लोगों ने इस देश के अमन और चैन को, इस देश के संविधान को, इस देश की एकता और अखंडता को खंडित करने का काम किया था, ऐसे लोगों को जेल के शिकंजे में बंद करने का काम इस गरीब के बेटे ने किया था। यही कारण था कि बिहार में तरह-तरह के केस के भंवर जाल में इनको फंसा कर रखने का काम किया। मैं समझता हूं और महसूस करता हूं कि यही रेल मंत्री लालू प्रसाद यादव देश में विगत चार वर्षों से इतने बड़े रेल साम्राज्य को इतना चमका सकते हैं, इतना आगे बढ़ा सकते हैं, सारी दुनिया में अपना नाम कमा सकते हैं, पिछले चार वर्षों में 68 हजार करोड़ रुपए का मुनाफा देश को करा सकते हैं, देश का सर्वांगीण विकास कर सकते हैं लेकिन बिहार में सरमाएदारों ने हमें बाधा पहुंचाने का काम किया है।   अपना जमाना आप बनाते हैं अहले दिल, ये वो नहीं कि जिसको जमाना बना गया” इन्होंने अपनी मेहनत, मशक्कत, ताकत और शक्ति से कामयाबी तक पहुंचने का काम किया है। लेकिन बिहार एक फ्यूडल सोसाइटी रहा है, यह बात सही है कि जमींदारी उन्मूलन बिहार में सबसे पहले हुआ था। यह बात भी सही है कि बिहार आज हिंदुस्तान का सबसे गरीब प्रांत बना हुआ है। मैं आज के भाषण में बताना चाहता हूं कि इसमें केंद्र सरकार भी बहुत बड़ी हिस्सेदार रही है। जिस समय झारखंड हमसे अलग नहीं हुआ था, हमारे मिनरल्स, माइन्स, जंगल, बड़े-बड़े उद्योग-धंधे चाहे सरकारी क्षेत्र में हो या निजी क्षेत्र में, इनमें किसी का हेडक्वार्टर कोलकाता, मुम्बई या दिल्ली में बनाकर हमें हमारा जो हिस्सा मिलना चाहिए था, उससे महरूम किया गया इसलिए हमने विकास नहीं किया। लेकिन सबसे बड़ी बात नेपाल से आने वाली नदियों के बारे में है। यहां हर साल नदियों से उत्तर बिहार को नुकसान होता है, इस तरह से कॉम्पलेक्स स्टेट को चलाना साधारण बात नहीं है। उस स्टेट को विकास की गति देने में रेल की महत्वपूर्ण भूमिका है। माननीय रेल मंत्री जी ने सारे देश में रेल सेवाओं का विस्तार किया है, नई फैक्ट्रियां खोली हैं, नए वैगन बनाने के कारखाना लगाये हैं और बिहार में इसकी हिस्सेदारी मिली है, हम इसका स्वागत करते हैं। इस वक्त माननीय रेल मंत्री जी हमारे बीच में नहीं हैं, यहां रेल राज्य मंत्री और अधिकारीगण बैठे हैं लेकिन जो चंपारण, शिवहर और सीतामढ़ी हैं, खास तौर से चंपारन जहां से चार लोकसभा की सीट आपकी झोली में दी है, जो गांधी जी की कर्मभूमि है आज सबसे बड़ा गरीबी का इलाका है जो परेशानी और फटेहाली में है।

आपने दस गरीब रथ दिए लेकिन हमें गरीब रथ नहीं दिया है - क्यों?[r41]  उस इलाके के लोग टकटकी लगाकर अपने नेता की तरफ ध्यान से देखते हैं कि आपके इशारे पर हमने आपकी झोली में लोक सभा के चार-चार सदस्य दिये, आपके रास्ते पर हम चल रहे हैं तो हमें एक गरीब रथ मुजफ्फरपुर, बेतिया, बगहा, मोतिहारी, गोरखपुर, कानपुर से होते हुए दिल्ली तक देने का काम कीजिए। यह वहां के लोगों की डिमांड है।

          महोदय, मैं दूसरी बात कहना चाहता हूं कि रेल बजट में जहां आपने नई गाड़ियों को और वैगन को प्राथमिकता दी है, इनकी झड़ी लगाई है, दस-दस को गरीब रथ दिये, रेल मंत्री जी, जब आप उत्तर दें तो एक गरीब रथ उस इलाके को भी देने का काम कीजिए। उत्तर बिहार के लोग सबसे अधिक गरीब हैं। इसलिए उस हिस्से को आप एक गरीब रथ देने का काम जरूर कीजिए।

          मैं एक कमेटी के सिलसिले में गुजरात गया था। गुजरात के हमारे माननीय सदस्य बैठे हैं। गुजरात से उस समय श्रीमती भावनाबेन चिखलिया रेलवे कन्वैंशन कमेटी की चेयरपर्सन थीं। मैं भी उस कमेटी का सदस्य था। ...( व्यवधान) राणा जी तो उस इलाके के नेता हैं। उन्होंने हमारा परिचय गुजरात के लोगों से कराया तो गुजरात के भाइयों ने मुझसे कहा कि महात्मा गांधी की यह जन्मभूमि और कर्मभूमि चम्पारण, जहां से राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने देश के आंदोलन की अगुवाई की थी, शुरूआत की थी, ये दोनों रेल से जुड़े हुए नहीं हैं। आपके यहां के रेल मंत्री हैं, आपसे आग्रह है कि आप रेल मंत्री जी को कहिये कि कर्मभूमि से जन्मभूमि को जोड़ें। मैं रेल मंत्री जी को बधाई देना चाहता हूं कि इन्होंने मोतिहारी का नाम बापूधाम मोतिहारी स्टेशन रखा। जहां पहली बार महात्मा गांधी, उस समय के मोहनदास करमचंद गांधी किसानों पर हुए अत्याचार से किसानों में जो हाहाकार था, उसके लिए वह चम्पारण गये थे और जिस प्लेटफार्म नम्बर दो पर ये लोग उतरे थे, उस पर महात्मा गांधी की आदमकद प्रतिमा लगाई और उसी रोज बापूधाम मोतिहारी से पोरबंदर तक गाड़ी सप्ताह में एक दिन उन्होंने खोलने का आदेश दिया और वह ट्रेन चालू है। ...( व्यवधान)

डॉ. वल्लभभाई कथीरिया (राजकोट) : उसे हफ्ते में दो बार करने के बारे में बोलिये।

श्री रघुनाथ झा : मैं डेली के लिए मांग कर रहा हूं...( व्यवधान) आप दो बार के लिए कह रहे हैं, मै डेली के लिए मांग कर रहा हूं कि उस ट्रेन को आप डेली कीजिए और वह लांगर रूट से गुजर कर दिल्ली तक आती है, कृपा करके उसे शॉर्टर रूट से ...( व्यवधान) लखनऊ से कानपुर दिल्ली से ...( व्यवधान)

MR. CHAIRMAN : Mr. Jha, you do not have time to respond to him. Therefore, do not answer him.

… (Interruptions)

श्री रघुनाथ झा (बेतिया) : इधर-उधर चलाने से काम नहीं चलेगा।

MR. CHAIRMAN : Hon. Member, Mr. Jha, please address the Chair.

… (Interruptions)

MR. CHAIRMAN : Please look at me and speak.

… (Interruptions)

MR. CHAIRMAN : If you look here and there, then you will stray away from your points. Therefore, you should face me and speak. Please do not look at them. If you look straight and speak, then you will not be in trouble.

… (Interruptions)

श्री रघुनाथ झा : गोरखपुर से कानपुर वाया लखनऊ से दिल्ली तक और दिल्ली से पोरबंदर तक डेली चलाने की व्यवस्था कीजिए। इसका स्टापेज हमारे इलाके का बगहा है, हमारे इलाके का रामनगर जो हरिनगर स्टेशन के नाम से जाना जाता है, हमारे इलाके का चनपटिया है, इन स्टेशनों पर इसका ठहराव किया जाए। मड़ुआडीह, बनारस तक एक बापूधाम ट्रेन चलती है। अभी वह ट्रेन हफ्ते में तीन दिन जाती है। हम मांग करते हैं कि उसे भी प्रतिदिन किया जाए, क्योंकि वहां से अधिकतर लोग पढ़ने के लिए और इलाज के लिए बनारस जाते हैं। बगहा, हरिनगर और चनपटिया में उसका स्टापेज नहीं है, इसलिए हमारी मांग है कि इस ट्रेन का ठहराव आप उपरोक्त स्टेशनों पर करने का काम कीजिए।      

          महोदय, 29 फरवरी को जब बजट पेश हुआ तो उसी रोज शाम को मैं अपने क्षेत्र वापस जा रहा था। माननीय सदस्य आदित्यनाथ जी भी मेरे साथ थे, अभी यहां मौजूद नहीं हैं। आदित्यनाथ जी गोरखपुर उतर गये और मैं अपने संसदीय क्षेत्र बेतिया जा रहा था। नरकटियागंज स्टेशन से बगहा और बेतिया स्टेशन तक सारे कुलियों ने जुलूस बनाकर हमें अबीर और रंग से रंग दिया, चूंकि रेल मंत्री जी ने कुलियों को चतुर्थ श्रेणी में नौकरी देने की बात कही थी। यहां तो न पर्चा है, न खर्चा है और गांव-गांव में चर्चा है, घर-घर मे चर्चा है। मुझे एक बात से बहुत दुख होता है, हम भी सार्वजनिक जीवन में बहुत दिनों से हैं[b42] । 

          महोदय, मैं यहां अपनी तारीफ करने के लिए नहीं बोल रहा हूं। लेकिन 37-38 वर्षों से विधान सभा और लोक सभा का सदस्य होने के साथ-साथ मैं मंत्री भी रहा हूं, लेकिन जिस बात को हम लोग खुद उठाते रहे हैं, हमारे विपक्ष के लोग उठाते रहे हैं कि किसानों का कर्जा माफ हो, रेल में सुविधा हो, गरीबों को मदद दी जाए लेकिन जब रेल मंत्री घोषणा कर रहे थे, तब इनकी भाव-भंगिमा और चेहरा सभी देख रहे थे। इसी तरह से जब वित्त मंत्री जी घोषणा कर रहे थे तो मैं सोच रहा था कि भई, आप अपना चेहरा और भाव-भंगिमा ऐसी क्यों कर रहे हैं, क्या देश की जनता टी.वी. पर नहीं देख रही है? लेकिन पेट में दर्द इन लोगों को होने लगा। आज ही माननीय प्रधान मंत्री जी जब आप ही के सब सवालों का जवाब दे रहे थे, तथ्य के आधार पर और आंकड़ों के आधार पर वह जवाब दे रहे थे लेकिन बीच में बराबर टोकाटोकी हो रही थी। हमारा कहना है कि आपको फिर मौका मिलेगा। आपके पास यदि तथ्य हैं तो आप उन्हें जुठला सकते हैं लेकिन प्रधान मंत्री को हम बोलने नहीं देंगे, विपक्ष के नेता को बोलने नहीं देंगे, ऐसा होता रहता है। इसलिए हमारा कहना है कि इस तरह की टोका-टोकी नहीं होनी चाहिए।

           इसलिए लाइसेंसधारी कुलियों  को जो इन्होंने चतुर्थ श्रेणी में लाने का जो फैसला किया है, उसका हम स्वागत ही नही करते हैं बल्कि देश के तमाम लोग इस निर्णय का स्वागत करते हैं।

          अल्पसंख्यकों और उर्दूभाषियों को ग्रुप डी में, नौकरी में, रिक्रूटमेंट बोर्ड में और सभी रेलवे की कमेटियों में अल्पसंख्यकों को प्रतिनिधित्व देने का फैसला भी स्वागत योग्य है। लेकिन अल्पसंख्यकों का नाम सुनकर ही लोग भड़क जाते हैं। 14 प्रतिशत उनकी देश में आबादी है। उनको आप इगनोर करके राजनीति कैसे करिएगा? समाज का अगर वह हिस्सा है तो उसे हिस्सेदारी कैसे नहीं दीजिएगा? इसलिए हम आज रेल मंत्री को इस बात के लिए बधाई देना चाहते हैं।

MR. CHAIRMAN : Please conclude now. I am helpless because there is a long list of speakers. Please conclude now.

श्री रघुनाथ झा (बेतिया) : महोदय, छपरा जिसका खुद हमारे रेल मंत्री जी प्रतिनिधित्व करते हैं, सीवान, गोपालगंज और छपरा से हाजीपुर की दूरी 40 कि.मी. है और इसका डीआरएम बनारस है, इसका जोन 300 कि.मी. है।  वह हमारे बिहार का हिस्सा है और इतने नजदीक में सटा हुआ है। ...( व्यवधान) रेल राज्य मंत्री जी आप लिख लीजिए क्योंकि यहां रेल मंत्री जी नहीं हैं। हमारा कहना है कि छपरा, सीवान और गोपालगंज को हाजीपुर जोन में लाया जाए। वह रहते तो नोट कर लेते। फिर हमारा कटिहार, गुवाहाटी जोन में है। मालदा तो डिवीजन है, गुवाहाटी जोन है। हमारे यहां से इंटरसिटी चलती है। लेकिन एम.पी. हैं, विधायक हैं, उन्हें  पटना आने के लिए उनको पटना आने के लिए कोई अच्छी गाड़ी नहीं है। हमारे वहां बीस एमएलएज हैं। वे पटना आते हैं, उनको कोई आने के लिए सुविधा नहीं है। आम जनता के लिए एसी चेयर कार लगाई गई। ए.सी. चेयर कार तीन दिन-पहले शुक्रवार, शनिवार और रविवार को बंद कर दी गई, जिस रोज हम लोगों का पार्लियामेंट और असेम्बली बंद होती है लेकिन जिस दिन हम लोग अपने क्षेत्र में जाएं और राज्य के हैडक्वार्टर में आएं, उसी रोज बंद है। हम लोग क्या 300 कि.मी. और 250 कि.मी. रोड से जाएं? इसलिए अगर उस रोज बंद करने की जरुरत नहीं है तो दूसरे वर्किंग डे में लगा दें।

           अब हम अपनी डिमांड पर आ रहे हैं। सप्तक्रंति एक्सप्रैस हमारे यहां से चलती है और पहले 12 बजे मुजफ्फरपुर से खुलती है। उसके आगे वैशाली भी 12 बजे से खुलती है, वह छपरा रूट से गोरखपुर आती है, सप्तक्रंति बेतिया के रूट से गोरखपुर जाती है। वैशाली के गोरखपुर से लेकर दिल्ली तक 9 स्टॉपेज हैं और सप्तक्रंति का स्टॉपेज नहीं है। गोरखपुर से लेकर वैशाली के पीछे-पीछे उस ट्रेन को चलना पड़ता है। इसलिए रोज 3-4 घंटे यहां लेट पहुंचती हह। पहले वह 5 बजे खुलती थी, उसको इन लोगों ने 6 बजे कर किया। [r43]  [s44]            मैं अभी बेतिया गया था। ट्रेन 10 बजे पहुंचनी चाहिये थी लेकिन वह दिन में डेढ़ बजे पहुंची। इसलिये हम लोग बार बार इस बात की मांग कर रहे हैं कि सप्तक्रान्ति ट्रेन यहां से 4 बजे चलाइये ताकि लोग मुज़फ्फरपुर में 11 बजे पहुंच जायें। इसी तरह से वैशाली एक्सप्रेस आगे हो जाये। अभी सप्तक्रान्ति ट्रेन में फर्स्ट क्लास का 10 बर्थ है। एक कूपे है और दो केबिन हैं। यह ट्रेन मुज़फ्फरपुर से खुलती है जहां से 4-4 एम. पी. लोग आते हैं। गोरखपुर के कोटे में  कूपे दे दिये गये। जब ट्रेन मुज़फ्फरपुर से चलती है तो कूपा भी वहां से देना चाहिये और चीर सीटों के केबिन में से दो बर्थ गोरखपुर से होनी चाहिये न कि कूपा ।

एक कूपा, एक केबिन एवं दूसरे केबिन में दो बर्थ गोर     खपुर के कोटे में दिया जाए।

          सभापति जी, सप्तक्रान्ति ट्रेन में नार्मल पीरियड में 200-250 लोगों का वेटिंग लिस्ट रहता है, आप पता लगवा लीजिये। मैं शुरु से इस बात की मांग कर रहा हूं कि इसमें एसी-2 टीयर लगा दीजिये, एसी-3 टीयर न लगाकर एक जनरल डिब्बा लगा दीजिये जिससे वहां के लोगों आराम मिले। इसी तरह मडवाडीह-बापूधाम के बारे में कहा गया है। रक्सौल नरकटियागंज...( व्यवधान)

MR. CHAIRMAN  : You can place it on the Table.

श्री रघुनाथ झा  : मैं खत्म ही कर रहा हूं।

MR. CHAIRMAN : Shri Kashi Ram Rana.

श्री रघुनाथ झा  : सभापति जी, नरकटियागंज  से सुगौली के लिये शटल गाड़ी चलाई जाये क्योंकि सुबह 8 बजे ट्रेन के बाद सायं 6 बजे जाती है ..(Interruptions)** … MR. CHAIRMAN : Nothing will go on record.

श्री रघुनाथ झा  : मुजफ्फरपुर से नई दिल्ली वाया नरकटियागंज गरीबरथ चलायी जाये।

MR. CHAIRMAN : Shri Kashi Ram Rana, you start speaking. He will not stop.

श्री रघुनाथ झा  : मुजफ्फरपुर से गोरखपुर भाया नरकटियागंज तक लाईन का दोहरीकरण किया जाये जो कि विगत रेल बजट भाषण में है।

 MR. CHAIRMAN : The train will stop but he will not stop.

श्री रघुनाथ झा :   बापूधाम-मोतिहारी पोरबंदर तक की गाड़ी प्रतिदिन किया जाये, बगहा, हरिनगर एवं चेनपटिया में इसका ठहराव किया जाये। ..  (Interruptions) …**     *…* This part of the speech was laid on the Table.

** Not recorded MR. CHAIRMAN : It is not going on record. Why are you reading it? Place it on the Table.

श्री रघुनाथ झा  : मुजफ्फरपुर- सीतामढ़ी नई रेल लाईन बनायी जाये...(Interruptions)** … MR. CHAIRMAN : You need not read it. You place it on the Table.

Thank you, at last you stopped.

* श्री रघुनाथ झा : दरभंगा-नरकटियागंज वाया सीतामढ़ी अमान परिवर्तन कराया जाए। यहां के मुख्य अभियन्ता कार्य विरोधी है, बाधा उपस्थित करते है। अबिलम्ब उन्हें हटाया जाये।

          मोतिहारी-सीतामढ़ी वाया शिवहर लाईन का शिलान्यास हो गया है उसे सर्वे कराकर कार्य प्रारम्भ कराया जाए।

          नरकटियागंज मोतिहारी जंक्शन पर ब्रोड-गेज के लिए वाशिंग पीट बनाया जाए। मीटर गेज का वाशिंग पीट पूर्व से वहां कार्यरत्त है।

          रक्सौल वाया मोतिहारी चलने वाली सवारी गाड़ी - 523 अप जो 6.15 बजे खुलती है ठीक उसके 0.30 मीटर बाद ही इन्टरसीटी खुलती है। दोनों के बीच 0.30 मीटर का अन्तर है। आग्रह है कि समय परिवर्तन करते हुए 523 को 8 बजे रक्सौल से खोला जाए।

          चमुआ हाल्त को क्रासिंग स्टेशन बनाया जाए।

          नरकटियागंज, भिखनाढोरी के बीच पचरुरिवया तथा हरिनगर के बीच टेढुकुईया हाल्ट बनायी जाए।

          सीतामढ़ी, रक्सौल के बीच ढेंग स्टेशन पर एक्सप्रेस गाड़ी का ठहराव कराई जाए।

          5227 एवं 5228 यशवन्तपुर - मुजफ्फरपुर को रक्सौल तक बढ़ाने की बात की जिसकी स्वीकृति प्राप्त है। परन्तु अभी तक ज्यों का त्यों पड़ा है। इसमें विलम्ब का क्या कारण है।

          अतएव महोदय मैं आपके माध्यम से माननीय रेलमंत्री जी से आग्रह करना चाहूँगा कि मेरे द्वारा उठाये गए उक्त क्षेत्र की जनता की समस्याओं पर गंभीरतापूर्वक विचार करते हुए, जनहित में इन समस्याओं का निदान कराया जाए।

          बौद्धगया के रेल सम्पर्क के लिए इस्लामपुर से वाया मानपुर बोद्धगया छूटा हुआ रेल बनाया जाए।

          बख्तियारपुर राजगीर लाइन को दोहरी करण् किया जाए ताकि पावापुरी , नालन्दा, राजगीर जानेवालों को सुविधा हो।

          पटना से किऊल, पटना से बक्सर तीसरी लाइन बिछायी जाए।

          रक्सौल - सीतामढ़ी रेलवे के बीच नकरदेई, आदापुर, छौड़ादानों, बनकटवा स्टेशनों से गन्ना किसान अपने खेत के गन्ने को मालगाड़ी से रीगा चीनी मिल में भेजते हैं। परन्तु मालगाङी के डिब्बों के अभाव में गन्ना किसानों का गन्ना खेत में ही सूख रहा है।

          अतः आवश्यकतानुसार गन्ना किसानों के लिए मालगाड़ी के डिब्बे उपलब्ध कराये जायें। *                                                                                                                         श्री काशीराम राणा (सूरत)  : सभापति महोदय, आपने मुझे रेल बजट पर बोलने का समय दिया , उसके लिये आपका बहुत-बहुत धन्यवाद।

          माननीय रेल मंत्री श्री लालू प्रसाद जी ने वर्ष 2008-09 का रेल बजट प्रस्तुत करते हुये बताया है कि इस वर्ष रेल को 25 हजार करोड़ रुपये का मुनाफा होने वाला है।[s45]           इतना ही नहीं, बहुत सारी नई ट्रेनें भी शुरू करने की घोषणा की है, कई ट्रेनों का एक्सटैंशन करने की तथा उनकी फ्रीक्वैन्सी बढ़ाने की भी घोषणा माननीय मंत्री जी ने की है। मैं इसका स्वागत करता हूँ। मैं इनका अभिनन्दन भी करता और धन्यवाद भी करता यदि यह बजट बैलैन्स्ड बजट होता। सब राज्यों के साथ रेल सुविधाओं के बारे में न्याय होता तो मुझे लगता कि रेल मंत्री जी धन्यवाद के पात्र होते। लेकिन जब हम रेल बजट को देखते हैं तो हमें लगता है कि इसमें पार्शियैलिटी की गई है, चाहे बिहार हो या और राज्य हों, कहीं ज्यादा ट्रेनें देना, एक्सटैन्शन देना, फ्रीक्वैन्सी बढ़ाना, लेकिन जहां पर जरूरत है, वहां पर रेल सुविधाएं देने में माननीय लालू जी इतने उत्साहित नहीं दिखे। चाहे उन्होंने गुजरात में तीन नई ट्रेनें दीं - सूरत-मुजफ्फरपुर और छपरा के ट्रेन दी, अहमदाबाद-मुम्बई के लिए एक एयरकंडीशंड ट्रेन दी, कामाख्या-गांधीधाम की ट्रेन दी, लेकिन दो ट्रेन ऐसी हैं जो आमान परिवर्तन की कंडीशन के साथ दी हैं। अब आमान परिवर्तन कितने सालों में होगा, वह तो माननीय लालू प्रसाद या भगवान जानें। हमसे पहले हरिन भाई ने कहा कि जिस तरीके से गुजरात का औद्योगिक विकास हो रहा है और जिस प्रकार से  रोज़ी रोटी कमाने के लिए गुजरात के बाहर से लाखों लोग सूरत और अहमदाबाद में आकर बसे हैं, उनके लिए रेल सुविधा चाहिए तो रेल बजट में जब हम उसकी स्टडी करते हैं, तब देखते हैं कि उसमें बहुत कुछ नहीं दिया है। दिया है लेकिन बहुत कम दिया है। जो ज्यादा देने की गुंजाइश थी, उसको देने से इंकार किया है। मैं फिर भी मांग करूंगा कि इतना बड़ा गुजरात देश को अच्छी रेवेन्यू देने वाला, रेलवे को रेवेन्यू देने वाला है, इसके प्रति यदि आप ऐसा ही अन्याय करते रहेंगे तो मुझे नहीं लगता कि चाहे 25हजार करोड़ रुपये का मुनाफ़ा हो, फिर भी रेलवे की जो भी इमेज है, वह अच्छी नहीं बन पाएगी।

          सभापति जी, हमें अपने रेल मंत्री जी को उनकी होशियारी के लिए एप्रिशियेट करना पड़ेगा। उन्होंने इस तरीके से बजट बनाया है कि आम आदमी को पता नहीं चलता है कि उसके ऊपर कितना बोझ पड़ा है। पिछले बजट में उन्होंने क्या किया कि बिना स्पीड बढ़ाए फास्ट ट्रेनों को सुपरफास्ट बनाकर लोगों से ज्यादा फेयर ले लिये। लोगों को उस समय पता नहीं चला, बाद में पता चला। तत्काल के बारे में हरिन भाई ने बिल्कुल सही बात की कि लोगों को लूटने का धंधा तत्काल द्वारा चलाया जा रहा है। मैं एक बहुत सीरियस बात पर ध्यान आकृष्ट करना चाहूँगा कि ज्यादा से ज्यादा जो मुनाफा आया है, जो वैगन लोड हमने बढ़ाया, पहले था 20.3 मीट्रिक टन हम एक वैगन में लोड करते थे, अब उसको बढ़ाकर 8 टन का लोड उसमें और डाल दिया है। इससे क्या नुकसान होता है? चाहे हमें आमदनी होती है, मुनाफा होता है, लेकिन इसका नुकसान क्या होता है? अभी जो 14 मई, 2007 को सीएजी की रिपोर्ट आई, उसमें उन्होंने  लिखा है कि जो हमारा ट्रैक है, वैगन में भारी लोड डालने से ट्रैक पर फ्रैक्चर हुआ है और आगे भी फ्रैक्चर होगा। वैल्डिंग में ब्रेकेज आ रहा है और इंजन के जो कपलिंग हैं, उसमें भी क्रैक्स देखने को मिलते हैं। इससे इतना बड़ा नुकसान होगा कि जो ट्रैक ब्रिटिश समय में बना था, आज हम उसके बेस को नुकसान पहुँचाने जा रहे हैं। मैं सोचता हूँ कि मुनाफा 5000 करोड़ रुपये कम हो लेकिन इस प्रकार से यदि वैगन लोड बढ़ाया गया तो आने वाले दिनों में रेलवे ट्रैक्स की हालत, पैसेंजरों की सलामती, उनकी सेफ्टी और सिक्यूरिटी की हालत बहुत बिगड़ेगी। [h46]            इसलिए मेरी माननीय लालू जी से रिकवेस्ट है कि आप अपनी एफिशिएंसी बढ़ा कर अवश्य मुनाफा करें हमें कोई इतराज़ नहीं है, लेकिन ट्रेक को नुकसान पहुंचा कर, वैगन में भारी लोड डाल कर, इस प्रकार से देश का नुकसान कम से कम न करें, पैसेंजर्स की जान के साथ ऐसा खिलवाड़ न करें, ऐसी मेरी आपसे विनती है।

          मान्यवर, बहुत सारी योजनाएं घोषित की जाती हैं, लेकिन अभी-अभी एक रिपोर्ट देखने में आई हए कि घोषणाएं होती रहती हैं, लेकिन उनका इम्प्लीमेंटेशन कब होता है? ट्रेनों की घोषणाएं हो रही हैं कि बहुत सारी ट्रेनें चलेंगी, लेकिन साल बीत जाने पर भी ट्रेनें नहीं चलतीं। आज भी चार ट्रेनें ऐसी हैं, जो गत वर्ष घोषित की गईं, लेकिन चालू नहीं हुईं। इसी प्रकार से 296 ऐसे प्रोजेक्ट्ट हैं, जो करीब 61487 करोड़ रूपये की लागत के हैं। ये 296 प्रोजेक्ट अभी भी पैंडिंग हैं। इनकी घोषणा की गई, लेकिन इसके इम्पलीमेंटेशन का कोई चिन्ह अभी तक हमें देखने को नहीं मिलता। इसलिए मैं कहना चाहूंगा कि आप घोषणा जरूर करें, जितना हो सके, उतनी घोषणाएं करें, अगर इसी प्रकार होता रहा तो ऐसी कई योजनाएं पैंडिंग हैं - जैसे योजना 61 हजार करोड़ की है, वह योजना कब आएगी, कब पूरी होगी, इसका पता नहीं चलता। मैं आशा करता हूं कि जो पैंडिंग प्रोजैक्ट्स हैं, उन्हें आप बिना विलम्ब किए  तुंत इम्प्लीमेंट करेंगे ।

          मान्यवर, मैं इस बारे में एक उदाहरण देना चाहूंगा कि सन् 2008-09 के बजट में डबलिंग के लिए एक हजार किलोमीटर तय किया है। इसमें इतनी सारी योजनाएं हैं, इसमें हमारे उजना-जलगांव के डबलिंग की बात भी की गई है। वहां से इतनी सारी ट्रेनें जाती हैं, लेकिन डबल ट्रेक न होने की वजह से ये ट्रेनें इतनी इर्रेगुलर एवं डिले हो रही हैं कि इन ट्रेनों का कोई मतलब नहीं रह गया है। इसलिए मेरा आग्रह है कि आप इस काम को जल्द पूरा करें।

          मान्यवर, वर्ल्ड क्लास रेलवे स्टेशन्स बनाने की बात की गई, इस बारे में घोषणाएं की गईं। इससे पहले मॉडल स्टेशन घोषित किए गए, लेकिन कई स्टेशन्स ऐसे हैं जो अभी तक मॉडल नहीं बने। सूरत उसका उदाहरण है। सूरत ऐसा शहर है जहां चालीस लाख की आबादी है। वहां इतना इंडस्ट्रियल ग्रोथ है, उसे मॉडल स्टेशन घोषित किया गया, उसे वर्ल्ड क्लास स्टेशन में लाना चाहिए था। उसे वर्ल्ड क्लास में भी नहीं डाला, उसे वर्ल्ड क्लास में डालना चाहिए और जल्दी इम्प्लीमेंट करना चाहिए। इससे पहले जो मॉडल स्टेशन बनाने की बात की गई थी, उसे भी पूरा करें। मुझे लगता है कि इससे पैसेंजर्स और शहर के विकास में बहुत सहायता मिलेगी।...( व्यवधान) नवसारी हमारी कांस्टीटय़ूंसी में डायमंड का बहुत बड़ा सेंटर है। वहां भी मॉडल स्टेशन की घोषणा की गई, लेकिन वह घोषणा घोषणा ही रही - जैसे 296 प्रोजैक्ट्स पैंडिंग हैं, ऐसी ही हालत उसकी है। उसे जल्दी मॉडल स्टेशन बनाया जाए। रेल राज्य मंत्री जी जब उजना में आए थे तब उन्होंने घोषणा की थी कि उजना स्टेशन एक टर्मिनल स्टेशन हो जाएगा, लेकिन अभी तक कुछ नहीं हुआ। उसे अभी तक टर्मिनल स्टेशन नहीं बनाया। मुझे उम्मीद है कि उन्होंने जो घोषणा की है, उस  घोषणा को वे तुंत पूरा करें।[rep47]            मान्यवर, सूरत और साउथ गुजरात में लाखों सिख भाई रहते हैं। अभी अभी नांदेड़ में गुरु ग्रंथ साहिब का त्रि-शताब्दी महोत्सव मनाया जाने वाला है। रेल मंत्री जी ने अपने बजट में स्पेशल ट्रेनों की घोषणा की है। इससे पहले हमने रेल मंत्री जी से मांग की थी कि नांदेड, जहां पर गुरु ग्रंथ साहिब का त्रि-शताब्दी महोत्सव मनाया जा रहा है, सूरत से लेकर एक स्पेशल ट्रेन या परमानेंट ट्रेन वहां के लिए चलाई जाए, लेकिन अभी तक इस बारे में कुछ नहीं किया गया है। यह घोषणा जरूर की गई है कि मनमाड़ और मदुरै का एक्सटेंशन करके ओखा तक ले जाया जाएगा, उसके अंदर नांदेड़ आ गया है तो मुझे इसकी जानकारी नहीं है। यदि ऐसा हुआ है तो इसकी जानकारी भी मुझे दें, आपका बहुत-बहुत धन्यवाद होगा।

          मान्यवर, मैं ऐसी ही एक दो बातें और कहना चाहता हूं, जो रेलवे और मेरे क्षेत्र सूरत से संबंधित हैं। हमने गरीब रथ चलाया, गरीब लोगों के लिए चलाया, यह बहुत अच्छी बात है। लेकिन जो गरीब इसमें जाते हैं, उनके लिए इस गरीब रथ में पैंट्रीकार भी नहीं है। अहमदाबाद से आश्रम एक्सप्रेस चलती है, पूरी रात ट्रेन चलती है, लेकिन उसमें भी पैंट्रीकार नहीं है। उसमें पैंट्रीकार लगाई जाए। इतना ही नहीं विकलांग लोगों के लिए भी इस ट्रेन में कंसेशन दिया जाए, ताकि विकलांग भी उसका लाभ ले सकें।  अन्य ट्रेनों में कंसेशन दी गई है, लेकिन गरीब रथ में नहीं दी गई। इसका प्रावधान भी किया जाए।

          मान्यवर, यह कैसा रेलवे है? यह कैसा मज़ाक लोगों के साथ किया गया है कि शताब्दी ट्रेन अहमदाबाद और मुम्बई के बीच चलती है, उसकी विंडो पर एडवर्टाइज़मेंट लगाया गया है। जब हम हवाई यात्रा करते हैं तो एनाउन्सर कहते हैं आप अपनी विंडो खुली रखिए ताकि बाहरी दृश्य आप साफ देख सकें। लेकिन शताब्दी की पूरी विंडो पर एडवर्टाइज़मेंट लगाई गई है, उसके कारण हम बाहर का दृश्य नहीं देख सकते कि कौन सा स्टेशन आया है, वह कुछ नहीं देख सकते हैं। इस तरह की एडवर्टाइज़मेंट को, जिनको थोड़े से मुनाफे के लिए लगाया गया है, उसे बंद किया जाए।

          सभापति महोदय, सम्पर्क क्रान्ति एक्सप्रेस का सूरत में स्टॉपेज होना चाहिए। इतना ही नहीं जहां-जहां से सम्पर्क क्रान्ति गुजरती है, वहां के मेन स्टेशन पर उसका स्टॉपेज होना चाहिए। हमारे सूरत में केरल और साउथ इण्डिया के लाखों लोग रहते हैं, इसलिए त्रिवेन्द्रम और निजामुद्दीन के मध्य जो ट्रेन चलती है, उसका स्टॉपेज सूरत में होना चाहिए।

          महोदय, सूरत में लाखों लोग अलग-अलग प्रान्त के हैं। उसके लिए जो रेल सुविधा होनी चाहिए, वह नहीं है, जैसे राजस्थान के लाखों लोग वहां रहते हैं, लेकिन उनके लिए एक ही ट्रेन चल रही है। हमारे यहां आध्र के लोगों के लिए विजयवाड़ा और हैदराबाद के लिए ट्रेन चलाई जाए। इससे लोगों को सुविधा होगी। उत्तर भारत के लिए सूरत से दिल्ली की सीधी ट्रेन चलाई जानी चाहिए। इतना ही नहीं सूरत में नार्थ गुजरात के लोगों के लिए मेहसाणा-पालनपुर तक एक नई ट्रेन गुजरात क्वीन से एक  घंटे बाद चलाई जाए। इससे यात्रियों को सुविधा होगी।

          आखिर में मैं कहना चाहता हूं कि सूरत के प्लेटफार्म नंबर तीन पर दादा भगवान संस्था, जो कि राष्ट्रीय और अन्तर्राष्ट्रीय स्तर की संस्था है, इनके संत को इस प्लेटफार्म के ऊपर ज्ञान प्राप्त हुआ था, मेरी मांग है कि उस प्लेटफार्म पर एक छोटा बुक स्टॉल बनाया जाए। मैं आशा करता हूं मेरी मांगों को पूरा किया जाएगा। आपको मुझे बैठाने में जो तकलीफ हुई है और आपने मुझे बोलने का मौका दिया, इसके लिए मैं आपको धन्यवाद देता हूं।

श्री सुरेन्द्र प्रकाश गोयल (हापुड़): मान्यवर सभापति महोदय, आपने मुझे रेल बजट पर बोलने का मौका दिया, मैं आपका आभार व्यक्त करता हूं। मैं रेल बजट के समर्थन में बोलने के लिए खड़ा हुआ हूं।

          इसके साथ ही साथ माननीय रेल मंत्री लालू यादव जी ने जो ऐतिहासिक बजट पेश किया है, उसके लिए मैं माननीय रेल मंत्री लालू यादव जी को, उनके सहयोगी मंत्रियों को व साथ ही 14 लाख रेलकर्मियों और अधिकारियों को भी हार्दिक बधाई देना चाहता हूं। कोई भी काम, चाहे छोटा हो या बड़ा हो, बिना अपने सहयोगियों के पूरा नहीं हो पाता। यह ऐतिहासिक बजट पूर्व में 2005, 2006, 2007 के लाभ को बढ़ाते हुए 2008 में निरन्तर बढ़ोत्तरी करके 25 हजार करोड़ रुपये के लाभ तक पहुंचा है, सब ने, देश के हर वर्ग ने इसकी सराहना की है। एक ऐसे वर्ग को, जो सदियों से हमारा बोझा उठाता है, उनको उचित मान-सम्मान देकर सरकारी नौकरी देने का उन्होंने काम किया है।

          अभी एन.डी.ए. के कुछ लोग आरोप लगा रहे थे, हमारे पंडा जी पता नहीं कहां चले गये, वे बड़े रोचक तरीके से इसका विश्लेषण कर रहे थे। मैं पूछना चाहता हूं कि रेल मंत्री जी ने जो तमाम कुलियों को काम दिया तो कितना बड़ा एम्पलायमेंट दिया। उनकी जगह नये कुली काम करेंगे और जो गेटमैन हैं, वे अपनी जगह जाएंगे। तमाम पिछड़ी, अगड़ी, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजातियों की जो रिक्तियां हैं, जो बैकलॉग है, उसको भरने की जो घोषणा की है, मैं माननीय रेल मंत्री जी को इसके लिए हार्दिक बधाई देता हूं।

          मुझे बड़ा सुखद आश्चर्य हो रहा था, जब रेल मंत्री जी अपना रेल बजट भाषण पढ़ रहे थे तो विपक्ष के लोग उस भाषण को, उस बजट को सुनने में व्यवधान पैदा कर रहे थे। क्यों कर रहे थे, क्योंकि रेल मंत्री जी ने एक ऐतिहासिक काम यू.पी.ए. की सरकार में, माननीय मनमोहन सिंह जी के नेतृत्व में, सोनिया गांधी जी के नेतृत्व में  जो रेल बजट पेश करके किया, उससे उनको तकलीफ हो  रही थी, इतना अच्छा   17.03 hrs. (Shri Devendra Prasad Yadav in the Chair) बजट, ऐतिहासिक बजट आखिर रेल मंत्री जी ने क्यों पेश किया। आखिर में वे खीजकर सदन छोड़कर भी चले गये। लेकिन हमारे बहादुर रेल मंत्री जी ने बजट भाषण पढ़ा और दुनिया को जताया कि देश के ही नहीं, दुनिया के इतिहास में उन्होंने एक गौरवपूर्ण कार्य किया है। आज देश के ही नहीं, विदेश के लोग भी यहां रेल मंत्री जी से शिक्षा प्राप्त करने आते हैं, यह अपने आपमें एक ऐतिहासिक कदम है। बिना भाड़ा बढ़ाये, चाहे वह रेल का भाड़ा हो, चाहे माल भाड़ा हो, अपने सहयोगियों के साथ सहयोग लेकर उन्होंने आमदनी बढ़ाने का काम किया।

          साथ ही साथ कई सौ ट्रेनों को बढ़ाने का काम, नये ट्रैकों के निर्माण का कार्य, प्लेटफार्मों को ऊंचा करने के लिए, पुराने सिग्नलों को बदलने के लिए, फुट ओवरब्रिज के लिए, रोड ओवरब्रिजेज़ के लिए ऐसी थैली खोली है, जिसकी आवश्यकता थी और जो बहुत दिनों से लोगों की मांग थी, मैं इसके लिए भी उन्हें बधाई देना चाहता हूं।

          साथ ही साथ बेरोजगार नौजवानों को एक ऐसे आयाम पर पहुंचाने के लिए रेलवे के रिजर्वेशन टिकट की एजेंसियां, चाहे वे मोबाइल के माध्यम से हो, चाहे गली-मौहल्ले के अन्दर काउंटर लगाकर हो, चाहे पैट्रोल पम्प पर हो, यह नये रोजगार खोलने का एक रास्ता दिखाया है।[R48] [p49]            रेलवे रिजर्वेशन पर जो लंबी-लंबी कतारें लगी रहती हैं, उनको खत्म करने की जो पहल की गयी है, वह भी निश्चित तौर पर एक बधाई का कार्य है।  साथ ही साथ रेलवे स्टेशनों पर एस्केलेटर और लिफ्ट मशीनों की जो घोषणा की है, इससे हमारे जो सीनियर सिटीजंस हैं, उनको भी तकलीफ कम होगी और वे अपनी यात्रा को सुलभ बना सकते हैं।   इससे भी बड़ा ऐतिहासिक काम हुआ है, बारहवीं क्लास तक के बच्चे जो धन के अभाव में गावं से शहरों में पढ़ने के लिए नहीं जा सकते, उनको फ्री-पास देने का काम किया है, साथ ही साथ चौदहवीं क्लास तक बेटियों के लिए, जिनके मां-बाप उनके रेल का भाड़ा बरदाश्त नहीं कर सकते थे कि हमारे बच्चे पढ़ने कैसे जाएंगे, शिक्षा तो  मुफ्त मिल सकती है, बहुत सी जगह लोग दे रहे हैं, सर्वशिक्षा अभियान के तहत भारत सरकार भी दे रही है, लेकिन रेल का भाड़ा न होने की वजह से वे शिक्षा के भवन में नहीं जाते थे। रेल मंत्री जी और तमाम सहयोगियों ने जो ऐतिहासिक काम किया, वह दुनिया के किसी मुल्क में नहीं हुआ है। माननीय रेल मंत्री जी ने उन्हें जो छूट देने का काम किया और फ्री-पास देने का काम किया, इसके लिए मैं उन्हें बधाई देता हूं।  हमारे यहां जो बुजुर्ग महिलाएं हैं, उनको तीस प्रतिशत से पचास प्रतिशत का जो कंसेशन देने का काम किया है, वह भी एक ऐतिहासिक काम है। महोदय, अभी पांडा जी पूछ रहे थे और मेरे एक साथी भी पूछ रहे थे कि रेल को मुनाफे में लाने की क्या जरूरत है?  भारत सरकार 11 प्रतिशत दे रही है, 89 प्रतिशत अपने साधनों से ये इकट्ठा कर रहे हैं। एक तरफ हम सुविधा मांगते हैं, अभी राणा साहब भी मांग कर रहे थे कि यहां रेल रोको, यहां रेल दो, यहां प्लेटफार्म ऊंचा करो, यहां सिगनल दो, यहां वर्ल्ड लेवेल का स्टेशन दो, सभी मांगेंगे, आमदनी के लिए पूछेंगे कि क्यों आमदनी बढ़ायी? इसके लिए कोई नहीं कहेगा। खर्चा चाहिए, लेकिन आमदनी नहीं चाहिए। माननीय रेल मंत्री जी ने इसका भी एक उदाहरण पेश किया है, बैलेंस करते हुए, जहां खर्चा बढ़ाने का काम किया है, वहां दोनों हाथों से जन-सुविधाओं को भी बांटने का काम किया है - चाहे वह गरीब रथ के माध्यम से हो, चाहे प्लेटफार्म के माध्यम से हो, चाहे नये-नये सफाई उपकरणों के माध्यम से हो, चाहे नए डिजाइन के इंजनों के माध्यम से हो, चाहे वैगन का उत्पादन बढ़ाने के माध्यम से हो, चाहे डीजल और इलेक्ट्रिक इंजनों का उत्पादन बढ़ाने के माध्यम से हो, ऐसे तमाम काम किए गए हैं।  उस पैसे को लालू यादव जी अपने घर नहीं ले जा रहे हैं, ये दोनों रेल मंत्री भी बोरे में भरकर घर नहीं ले जा रहे हैं, न ही रेलकर्मी घर भरकर ले जा रहे हैं और न अधिकारी वर्ग भरकर ले जा रहे हैं।  पैसे की जो आमदनी हो रही है, वह किस तरह से री-इन्वेस्टमेंट करके रेल में जन-सुविधाओं को पहुंचाने के लिए काम किया जाए, क्योंकि रेल एक ऐसा साधन है जो जन सुविधाओं को पूरा करने का काम करता है।

          मान्यवर, मैं कुछ अपने संसदीय क्षेत्र के संबंध में मांग करना चाहता हूं।  मेरा क्षेत्र गाजियाबाद दिल्ली से लगा हुआ है, हापुड़ लोकसभा क्षेत्र, यहां पर गढ़ से दिल्ली तक हजारों आदमी आते हैं।  एक डीएमयू जो यहां खाली खड़ी हुयी है, उसे प्रतिदिन चलाने के लिए मैं मांग करता हूं जिससे एक कनेक्टिविटी बन जाए और लोगों को यहां आने का एक सुगम रास्ता मिल जाए। 

          दूसरी बात, माननीय रेलमंत्री जी ने अपनी घोषणा के अनुसार साहिबाबाद से नई दिल्ली एक ईएमयू चलवाने का कार्य किया था, जो 1 जुलाई, 2007 से चल रही है, लेकिन उधर से वह नहीं चलती है। मेरा अनुरोध है कि वह गाड़ी वहां जाकर कहीं खड़ी होती होगी और सुबह फिर वापस आने के लिए और ले जाने के लिए आती है, अतः मेरा अनुरोध है कि आप उस रेलगाड़ी को दोनों तरफ से चलवाने की कृपा करें। गाजियाबाद और साहिबाबाद से नयी गाड़ियां चलाने की भी मैं मांग करता हूं। इसी तरह शाहदरा-सहारनपुर रेलवे लाइन पर बन्थला स्टेशन के पास गेट नं. 8ए - 3टी पर आरओबी की भी मांग करता हूं। इसी के साथ-साथ हाफिज-बैठा जहां कभी फाटक हुआ करता था, मुरादनगर से जो पाइपलाइन गयी, उसकी वजह से फाटक बंद कर दिया गया है, जिससे लाखों लोगों को नुकसान हो रहा है, मेरा अनुरोध है कि हाफिज-बैठा पर भी एक आरओबी बनवाने की कृपा करें। [p50]                  आरओबी हनुमानपुरी, साहिबाबाद स्टेशन पर अंडरपास, राधाकुंज, ब्रजविहार अंडरपास, हनुमानपुरी मोदीनगर अंडरपास, भूपेन्द्रपुरी फुटओवर ब्रिज को बाहर से बाहर जोड़ना, ब्रजघाट ऐतिहासिक जगह है, वहां अंडरपास, सिम्भावली फुटओवर ब्रिज को बाहर से बाहर करवाने की भी कृपा करने का कष्ट करें ताकि लोगों को इसका लाभ मिल सके।

          इन्हीं शव्दों के साथ मैं पुन: माननीय रेल मंत्री जी और यूपीए सरकार के नेतृत्व को हार्दिक बधाई देता हूं।

*SHRI BIKRAM KESHARI DEO (KALAHANDI): At the outset, I would thank Shri Lalu Prasadji as a just administrator as he has brought a turn around in the Railways and now the Railways is running with substantive profit which stands at a whooping Rs.25,000 crores.

But I would like the Hon'ble Minister to recollect his first speech in the beginning session of the 14th Lok Sabha, where he had promised to take Railways to the far uncovered area, of which KBK region is a classical example in the State of Orissa.

The Indian Railways is the largest Railway in the world with the largest Railway Network, in the meantime a lot of modernization has taken place, but the speed of the Train has not gone up. The Khanna Report on modernization of Bridges is a long cry and old BNR Bridges should be replaced.

Orissa is a State with a lot of mineral wealth predominantly Iron Ore and Bauxite but twice the rate of Iron Ore freight has gone up, thereby creating a situation in growth of Steel Industry. So this should be reduced.

Though passenger amenities are being upgraded, the security of the passengers is a prime responsibility of the Railways though R.P.F. and other agencies. But this has failed, as robbery and snatching in stations is happening more frequently.

 

Private Sector may be encouraged but they should also participate in improving the infrastructure in stations, and passenger amenity facility.

   

* Speech was laid on the Table.

I also thank the Hon'ble Minister for sanctioning two survey projects name Junagarh to Ambagura and Kantabanji to Navrangpur in the KBK area. I request adequate funds may be granted for the same so that the survey could be completed within a year, so that funds could be placed in ensuing financial years.

The doubling of line from Titlagarh to Raipur and Titlagarh to Sambalpur, will become one of the highest earning projects when completed linking 6 Steel Plants and 3 Aluminum Smelters in the port connectivity at Vizag Port and Gopalpur Ports.

My only request would be to make Train No.2807-2808 (Samota Express) a daily from from Nizzamuddin to Visakapatnam, and providing SLIP Coaches AC III Tier and two General, one SL with Inter City Express Bhubaneswar to Raipur, or Inter City Express Bhubaneswar to Bolangir in the East-Coast Railways, as this will link the entire KBK with State Capital Bhubaneswar.

     

SHRI N.N. KRISHNADAS (PALGHAT): Sir, I rise to support the Budget proposals made by the hon. Minister of Railways for the year 2008-09.  At the outset, I must express my gratitude to hon. Minister of Railways, Shri Lalu Prasad, his colleagues and the officers for proposing a new coach factory in Kerala.  The hon. Chief Minister and the people of Kerala have already conveyed their gratitude to them. 

          Hon. Members who spoke before me have already covered the important points.  The general approach of my Party has already been put forth by our leader Comrade Basudev Acharia in his speech.  Due to time constraint I am straightaway coming to some other important matters. I welcome certain proposals made by the hon. Minister in his Budget speech regarding concessions for senior citizens, girl students, soldiers, etc.            Indian Railways is a great symbol of our national unity and integrity.  It should express its appreciation to the artists and writers by giving concessions to them.  I would request the hon. Minister to give concessions to the performing artists who are having national accreditation and writers who have won national level awards.  It is because cultural groups are playing a crucial role in our national unity and integrity by their performance.  They are moving across the country.  They are performing through music and dance cutting across all the differences and barriers.  So, they should be encouraged to increase their activities.  The Indian Railways should provide the maximum concessions to them.  I think some concessions are there.  But it should be increased because, as I said, the Indian Railways is a symbol of our nation’s unity and integrity. 

          Now, let me come to certain points related to development projects in my State of Kerala.  I had already expressed my hearty congratulations and gratitude to the Railway Ministers.  The Government of Kerala had already identified thousand acres of land for setting up of the proposed coach factory in Palghat, which is my constituency.  I would request the hon. Minister to speed up the process for making it a reality at the earliest.  For this purpose, I would request the Ministry to send a team immediately to visit the land proposed by the State Government, prepare the DPR, make the feasibility study and also the MoU with the State Government for setting up this project at the earliest. 

          Railway infrastructure is more important.  New lines have to be constructed to develop the rail network.  We are proud of our rail network.  It is the biggest rail network in the world.  To meet the increasing demand, we should construct new lines.  Several surveys for construction of new lines are announced in the Budget proposals.[MSOffice51]   In our State also, several surveys have been completed but no one has seen the reality. For example, there is a proposal. A survey has been conducted to construct a new railway line from Kollangodu to Thrissur in the Palakkad Division of Southern Railway. The survey proposal is there. I do not know how it is happening. I am asking the two hon. Railway Ministers of State who are here to take note of this thing. According to the survey report, 59 kms is the distance to be covered. Rs.303.76 crore is the cost for the construction of this railway line. The funny thing is about its return. The return will be minimal in the initial stages. How can we expect it? What is the methodology or modality for making the feasibility study? How can we assume, before the construction of a railway line, what would be the return in this particular line?  I will take another ten minutes only.

MR. CHAIRMAN : No. Other hon. Members want to speak. How can I give you more time?

SHRI N.N. KRISHNADAS : Let me continue my speech. This is the thing.

MR. CHAIRMAN: You can lay the rest of your speech on the Table of the House.

SHRI N.N. KRISHNADAS : I am formulating a very important point. As everybody knows, in the Cochin Port, there is an International Container Terminal which is under construction. It is expected that it will be completed by 2009. After completing the Cochin International Container Terminal, there should be a special traffic corridor from Cochin to Tuticorin, from Cochin to Chennai. This connection will be made between Thrissur and Kollangodu. This rail route will connect important pilgrim centres like Guruvayoor, Palani, Madurai and Rameswaram; and important tourist centres of Nelliyampathy, Parambikulam wild life sanctuary and Kodaikanal.  We can utilize this as a special traffic corridor through Thrissur-Chennai-Tuticorin also. So, at any cost, this line should be feasible and sufficient funds may be allotted in this particular Budget itself for the construction of that line.

          The second point is about gauge conversion. I will take only two minutes. Gauge conversion from Pollachi to Palakkad in the Palakkad Railway Division may be adopted and sufficient funds  may be allotted for this gauge conversion in this particular Budget itself. 

          A proposal is there for the electrification from Shoranur to Mangalore which is the northern part of Kerala. For the electrification project, the feasibility study should be included. There must be speeding up of the feasibility study. You should make it a reality. Electrification between Shoranur and Mangalore may be done at the earliest.

          Survey for a new line from Nilambur to Nanjangodu is there. Actually, a proposal was there in the last Budget itself. Survey has been started. Unfortunately, without any reason, this survey was stopped. So, that may be included.

          The other thing is about some Multiple Electrical Engine Units. It is feasible between Coimbatore and Cochin, Trivandrum to Cochin, Calicut and Mangalore. It will be a Diesel Multiple Unit because electrification is not possible. That is the thing.

          Next, I come to ROBs. About 60 ROBs are under construction for the last ten years in different parts of Kerala. I am particularly pointing out LC 49, 50 and 159. This also may be completed within the stipulated time.

          This is my last point. I am concluding with this. During the time of setting up of the Salem Division, there was an understanding that there would be no compulsory transfer of employees to the Salem  Division from the Palakkad Division. But now some orders are coming making compulsory transfer. So, the hon. Railway Ministers and the officers concerned may note this point. Do not do this compulsory transfer. This is deadly against the understanding arrived at while setting up of the new Railway Division at Salem.[R52]  So, this also may be considered.

MR. CHAIRMAN : Please take your seat now. 

… (Interruptions)

SHRI N.N. KRISHNADAS : There is a Railway hospital in Palghat Division.  But, no facility is provided there. 

Now, my last point is regarding railway staff quarters.  They were built years back during the British period itself. Now, they are in dilapidated condition. They may also be taken care of.  With these words, I conclude my speech.  Thank you.

 

श्री आनंदराव विठोबा अडसूल (बुलढाना) : महोदय, आपने मुझे बोलने का मौका दिया, इसके लिए मैं आपको धन्यवाद देता हूँ। मैं रेल मंत्रालय को धन्यवाद देना चाहूंगा कि बहुत से नए रेल मार्गों का निर्माण हुआ है, बहुत से रेल मार्ग प्रस्तावित हुए हैं, नई रेलगाड़ियां चलने लगी हैं, कुछ गाड़ियों का विस्तार किया गया है, गरीब रथ चलाए गए हैं और यह सब करते हुए भी भाड़े में कोई वृद्धि नहीं की गयी है। इसके लिए रेलमंत्री जी और रेल मंत्रालय धन्यवाद के पात्र हैं।

          महोदय,  मैं एक महत्वपूर्ण रेल मार्ग का प्रस्ताव यहां रखना चाहता हूं।  यह रेल मार्ग महाराष्ट्र के सोलापुर से शुरू होकर मध्य प्रदेश के बुरहाणपुर तक जाता है।  अगर इस मार्ग का निर्माण हुआ तो दक्षिण पूर्व रेलवे के सोलापुर से शुरू होकर, दक्षिण मध्य रेलवे से जालना में जोड़ा जाएगा, मलकापुर में मध्य रेलवे से और मध्य प्रदेश के बुरहाणपुर में यह उत्तर रेलवे से जोड़ा जाएगा। इस तरह यह रेल मार्ग चार प्रमुख रेलवे मार्ग को जोड़ेगा। इस क्षेत्र में सात जिले आते हैं, जहां से 8 लोक सभा सदस्य और 42 विधायक आते हैं।  इस क्षेत्र में सोलापुर जिले के दो हिस्से आते हैं, उस्मानाबाद, बीड, जालना, बुलढाणा और बुरहानपुर आते हैं। अगर सोलापुर के यात्रियों को दिल्ली की ओर जाना हो तो उसका रूट ऐसा है कि शोलापुर, दौंड, नगर, मनमाड और भुसावल होकर बुरहाणपुर जाना पड़ता है, लेकिन अगर इस मार्ग का निर्माण  होता है तो सोलापुर, तायलवाड़ी, तुलजापुर, उस्मानाबाद, ऐरसी, कलंब, केज, मेकनुर, इमामपुर, बीड़, घेवराई, अंबड, जालना, देऊलगांवराजा, चिखली, बुलढाना, मुल्ताणा, मलकापुर और बुरहानपुर के क्षेत्र इससे जुड़ सकेंगे।  आज सोलापुर और बुरहाणपुर के मध्य 700 किलोमीटर की यह दूरी है वह 250 किलोमीटर तक कम हो जाएगी। दुर्भाग्य की बात है कि ये सात जिले पिछड़े और सूखा प्रभावित जिले हैं, वहां कोई बड़ी इंडस्ट्री नहीं है, अगर यह रेल मार्ग बनेगा तो वहां छोटे-मोटे उद्योग आएंगे, इससे वहां बेरोजगारों को रोजगार मिलेगा।  इससे आगे महत्वपूर्ण बात यह है कि इस रेल मार्ग  के बनने से कुछ धार्मिक स्थल और पर्यटन स्थल भी अपने आप विकसित हो जाएंगे।  इस मार्ग के बनने से रेल यात्रियों को सुविधा मिलेगी, उनकी यात्रा पर कम खर्च आएगा। साउथ से नॉर्थ की ओर आने वाले यात्री कम खर्च और कम समय में यात्रा कर सकेंगे। लोगों को अगर किसी तीर्थस्थान या पर्यटन स्थल पर जाना है तो इससे उनको सुविधा होगी। [R53]  सोलापुर में एकरुख, नान्नज, उजनी, वैलापुर उसके साथ जो धार्मिक स्थल हैं। इसके अलावा बाले, बार्शी, पंढरपुर, मंगलवेढा, अरण, अक्कलकोट, कुडल, वरकुटे, दहीगाव, नाझरे, शिवपुरी, वडवल, चिकलठाण और उसके आगे उस्मानाबाद में जो पर्यटन स्थल हैं। फिर नागझरी, रामलिंग और जो तीर्थ स्थल हैं, अणदूर, सोनारी, डोमगाव, तुलजापूर, रामलिंग भूम, कुंथलगिरी, येरमाला, सिद्धेश्वर, रामकुंड परडा, नलदुर्ग तक लोगों को पहुंचने में सुविधा होगी। इसी तरह बीड जिले में सौताडा और नायगाव हैं। यहां पर जो पर्यटन स्थल हैं, जो धार्मिक स्थल हैं राक्षसभुवन, धारुर, बीड, अंबाजोगाई, परली वैजनाथ, केज, गेवराई, धारुर आदि जगहों पर भी लोगों को आने-जाने में सुविधा हो जाएगी। मैं जिस क्षेत्र से आता हूं उसका नाम बुलढाणा है। बुलढाणा में जो पर्यटन स्थल हैं सिंहराजा और लोणार, जो पांच क्रेटर्स हैं, उनमें से जो तीन नम्बर का क्रेटर लुणार में आता है, उसके साथ गरडगर, नागझरी, थल, देऊलगावराजा, मेहकर, सैलानी दर्वा अगर रेल मार्ग से जुड़ जाते हैं तो वहां के पूरा एरिया पर्यटन स्थल के रूप में विकसित हो जाएगा और वहां के धार्मिक स्थलों पर भी जाने के लिए यात्रियों को सुविधा होगी। रेल मार्ग हो जाने से वहां पर छोटे-मोटे उद्योग लगेंगे, जिससे बेरोजगारी को कम करने में मदद मिलेगी। इसी तरह से इस पिछड़े हुए इलाके का विकास करने में यह रेल मार्ग सहायक सिद्ध होगा।

          यहां पर दोनों रेल राज्य मंत्री जी बैठे हैं। मैं उनसे विनती करना चाहता हूं कि आप इस पर गौर करें। वहां पर रेल मार्ग होने से एक तो अंतर भी घटेगा और दूसरे वहां यातायात में भी सुविधा होगी। इसके अलावा साउथ से लोगों को सीधे दिल्ली की तरफ आने में कम पैसे खर्च करने पड़ेंगे। इसलिए यह नया प्रस्ताव मैं आपके सामने रख रहा हूं।

          मैं दो-तीन बातें और कहना चाहूंगा।  आपके द्वारा इस रेल बजट में 16 रेलगाड़ियों का विस्तार किया गया है। मैंने पहले भी इस सम्बन्ध में दो प्रस्ताव आपके सामने रखे थे। इस बार भी आपके ध्यान में लाना चाहता हूं कि नासिक से भुसावल एक पैसेंजर ट्रेन जाती है, वह बनडेरा या अमरावती तक जाएगी तो लोगों को काफी सुविधा हो जाएगी। इसी तरह सूरत - भुसाबल और बनडेरा के बीच एक पैसेंजर ट्रेन चलती है, उसका भी विस्तार अगर अमरावती या बनडेरा तक हो जाएगा तो मेरे चुनाव क्षेत्र में जो 100 किलोमीटर का परिसर आता है, वहां के गरीब लोगों को सुविधा होगी। दो स्टेशन के बीच एवरेज रेल भाड़ा छः रुपए होता है, जबकि बस का भाड़ा उसी दरमियान 25 रुपए आता है। इतना फर्क है। इसलिए मैं कहना चाहता हूं कि जो एक पैसेंजर ट्रेन चलती है, वह काफी नहीं है। अगर दो पैसेंजर ट्रेन का आप विस्तार करेंगे और बनडेरा तक ले जाएंगे तो भुसावल से लेकर बनडेरा तक जो 150 किलोमीटर का परिसर है, वहां के आम लोगों को सुविधा मिलेगी।

          मैं अंत में सेफ्टी के बारे में कहना चाहता हूं, जिसका जिक्र काफी होता है। मैंने इस सम्बन्ध में एक प्रस्ताव पहले भी आपके सामने रखा है और आज फिर रख रहा हूं। नांदुरा  में जो रेलवे क्रासिंग है, वहां पर वाहनों की काफी भीड़ होती है, जिस वजह से लोगों को काफी असुविधा का सामना करना पड़ता है। अगर वहां ओवरब्रिज बना दिया जाए तो लोगों को काफी सुविधा हो जाएगी।

सभापति महोदय : अब समाप्त करें।

श्री आनंदराव विठोबा अडसूल : मैं दो मिनट में अपनी बात समाप्त करूंगा। अमरावती से नरखेड़ रेल मार्ग का निर्माण कार्य पांच साल से चल रहा है। इसके लिए 234 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया था। अभी तक 134 करोड़ रुपए लग चुके हैं। अगर बाकी बचे 100 करोड़ रुपए और मिल जाएं तो वह रेल मार्ग पूरा हो जाएगा। इसके बन जाने से अमरावती से नरखेड़ के लोगों को काफी सुविधा होगी और साथ ही जो गुजरात की तरफ जाने वाले लोग हैं, उन्हें भी सुविधा होगी।

          सभापति महोदय, मैंने जिन मुद्दों को यहां रखा है, आपके द्वारा रेल मंत्री जी से विनती करता हूं कि वह अवश्य ही इन पर गौर करेंगे।

                                                                                                         

[R54]      श्री कैलाश बैठा (बगहा) : सभापति जी, आज मैं यूपीए सरकार के माननीय रेल मंत्री श्री लालू प्रसाद जी द्वारा पेश किए गये रेल बजट के विषय में अपनी पार्टी की तरफ से बोलने के लिए खड़ा हुआ हूं। यह पूरी तरह लोक लुभावना चुनावी बजट है, जिसमें पिछले चार बजटों में कही गयी कई बातों को दोहराया गया है।

          यह रेल बजट आगामी लोक सभा के आम चुनाव एवं विभिन्न राज्यों में होने वाले विधान सभा के चुनावों को ध्यान में रखकर बनाया गया है। रेल मंत्री जी ने खुद ही अपने बजट को इन्द्रजाल बताया है, जबकि पिछले बजट को जादू-टोना बताया है। अब मैं पेश किए गये रेल बजट की कमियों पर आता हूं।

          माननीय रेल मंत्री जी ने रेल यात्रियों की सुरक्षा का कोई ध्यान इस बजट में नहीं रखा है। पिछले बजट में भी ढीली सुरक्षा व्यवस्था को स्वीकार करते हुए उन्होंने स्टेशनों पर डोर फ्रेम, मेटल डिटेक्टर, स्क्रीनिंग सिस्टम, डिस्पोजल उपकरण तथा विस्फोटकों का पता लगाने वाली मशीनें लगाने की बात कही थी, लेकिन हुआ कुछ नहीं और यही बातें इस बजट में भी दोहराई गयी हैं। पुराने रेलवे ट्रेकों एवं जर्जर पुल-पुलियों पर गाड़ियों को चलाकर यात्रियों की सुरक्षा के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है।

17.32 hrs. (Shri Varkala Radhakirshnan in the Chair)           वर्ष 2000-2001 में रेलवे क्रासिंगों पर जहां 15 प्रतिशत दुर्घटनाएं हुईं, वहीं वर्ष 2006-2007 में 40 फीसदी दुर्घटनाएं हुई हैं। पिछले दो वर्षों में किसी भी रेलवे क्रासिंग पर फाटक नहीं बनाया गया है। जबकि हर बजट में ऐसे करने की बात कही जाती है।

          ट्रेनों में चोरी-डकैती की समस्या आये दिन बनी रहती है। इसे रोकने का कोई ठोस उपाय बजट में नहीं बनाया गया है।

          सभापति जी, जहां तक रोजगार की बात है, पिछले बजट में यह वायदा किया गया था कि रेलवे का काम सुचारू रूप से चलाने के लिए 18 हजार पदों पर शीघ्र भर्तियां की जायेंगी, लेकिन अब तक मात्र नौ हजार ही भर्तियां की गयी हैं।

          महिलाओं का दिल जीतने के लिए रेल मंत्री जी ने रेलवे की नौकरियों में महिलाओं को पांच से दस फीसदी आरक्षण देने की बात की है, जबकि महिलाओं की आबादी 50 फीसदी है। इस लिहाज से कम से कम 20 से 25 प्रतिशत आरक्षण महिलाओं को दिये जाने चाहिए।

          बिहार की हमारी सरकार ने पंचायत चुनाव में और शिक्षकों के नियोजन में महिलाओं को 50 प्रतिशत आरक्षण देकर देश को एक नयी दिशा देने का काम किया है। [r55]       देश में पहली बार साप्रदायिक आधार पर रेल बजट बनाया गया है। इसमें अल्पसंख्यकों का तुष्टिकरण किया गया है। उन्हें रोजगार में प्राथमिकता दी जाए, लेकिन साप्रदाय के नाम पर रेलवे में प्रकोष्ठ की स्थापना करना न्याय संगत नहीं है। कहने को रेलवे ने बड़ी कमाई की है, लेकिन उसका लाभ आम जनता को मिलता नहीं दिख रहा है। आज भी स्टेशनों पर साफ-सफाई, पीने का पानी तथा शौचालय की बुरी हालत है। प्रमुख गाड़ियों में भोजन की खराब क्वालिटी को सुधारने के लिए रेल बजट में कुछ नहीं कहा गया है।

          कई प्रमुख गाड़ियों में पेंट्रीकार की व्यवस्था नहीं है तथा साफ-सफाई का भी बुरा हाल है। रेलवे स्टेशनों पर साधारण टिकट के लिए लम्बी लाइनों से निजात पाने का इस बजट में कोई उपाय नहीं किया गया है। टिकट के लिए धक्के खाने एवं दलालों से बचने के लिए इंतजार करने की बात पिछले बजटों से की जा रही है।

MR. CHAIRMAN : You can place it on the Table.

श्री कैलाश बैठा : महोदय, प्लेटफार्म टिकट, प्लेटफार्म तथा डिब्बों में पेयजल तथा कस्बाई एवं छोटे स्टेशनों पर रात में रोशनी की व्यवस्था के बारे में बजट में कुछ नहीं कहा गया है।

          रेल मंत्री ने अपना पहला रेल बजट प्रस्तुत करते हुए अपने को मिट्टी से जुड़ा व्यक्ति बताते हुए जो बातें कही थीं, उस दिशा में कोई काम नहीं हुआ और कुल्हड़, खादी, लस्सी, मट्ठा, सिल्वट मसाला आदि स्टेशन तथा गाड़ियों से गायब हैं।

MR. CHAIRMAN: Hon. Member, you can place it on the Table so that the time can be saved.

श्री कैलाश बैठा  : सभापति महोदय, नए सदस्य का थोड़ा सा साथ दीजिए।

MR. CHAIRMAN: My dear friend, you can place it on the Table.

श्री कैलाश बैठा : रेल मंत्री जी ने किराए में कमी की बात कह कर लोगों में अच्छा भ्रम फैलाया है। दिल्ली एवं गुड़गांव के दैनिक यात्रियों के किराए कम नहीं किए गए तथा उनके लिए अतिरिक्त ट्रेनों की व्यवस्था नही की गई। साधारण श्रेणी के यात्रियों के लिए 50 रुपए तक के किराए में मात्र एक रुपए की रियायत दी गई है। जबकि एसी के किराए में अच्छी रियायत दी गई है। स्लीपर क्लास के लोगों को झुनझुना थमाया गया है।

MR. CHAIRMAN: You need not read; you can place it on the Table so that the time can be saved.

श्री कैलाश बैठा  : इन्हें सिर्फ नए डिजाइन के कोचों में थोड़ी रियायत दी गई है। नए डिजाइन के डिब्बों में आठ सीटें बढ़ा कर उनसे प्राप्त आमदनी को ही दो प्रतिशत की छूट के रूप में समायोजित किया गया है। थर्ड एसी के विशेष डिब्बों में दो प्रतिशत की छूट दी गई है। जबकि विशेष डिब्बों वाली गाड़ियां गिनती की हैं और उनका पता आम जनता को भी नहीं है।

          ई-टिक्टिंग मुसाफिरों के गले में फंदे के समान है। इसमें किराया भी ज्यादा लग रहा है और यदि किसी कारण से यात्रा रद्द होने पर यात्री उसे लौटाना चाहे तो उसकी कोई व्यवस्था नहीं है।

          यह पूर्णतः ठेके का बजट है, जिसमें रेलवे की वित्तीय सेहत के साथ समझौता किया गया है। सरकार के लोक लुभावन फैसलों से वर्ष 2008-09 में खर्च बढ़ेगा और इसका खामियाजा अगली सरकार को भुगतना होगा और रेलवे को पिछले साल जहां 20 हजार करोड़ रुपए का लाभ हुआ था, इस वर्ष इस लाभ में कमी आ सकती है।

          सभापति महोदय, रेल मंत्री जी ने अपने बजट भाषण के दौरान जोर-जोर से दोनों हाथ उठाकर रेलवे को हुए मुनाफे की बात कही है, लेकिन उन्होंने पर्याप्त संसाधन होने के बावजूद केवल साढ़े तीन सौ किलोमीटर नई रेल लाईन बिछाने, 2150 किलोमीटर लाईन के आमान परिवर्तन और एक हजार किलोमीटर लम्बी लाईनों के दोहरी करण का न्यूनतम लक्ष्य इस बजट में रखा है।

MR. CHAIRMAN: Please conclude.

Shri Kailash Baitha, you can lay the rest of your written speech on the Table.  Now, you please take your seat.

          Shri Ganesh Singh.

… (Interruptions)

MR. CHAIRMAN: Shri Kailash Baitha, I have already told you that you can lay the rest of your written speech on the Table.

… (Interruptions)

 *श्री कैलाश बैठा  : रेल बजट में पंजाब, हरियाणा, जम्मू कश्मीर व हिमाचल के लोगों के लिए कोइ नई परियोजना नहीं दी गई है। बिहार में भी उनका बजअ उनके संसदीय क्षेत्र तक सीमित है। बजट में बंगाल की भी अनदेखी हुई है, जिस कारण हमारे बंगाली वामपंथी साथियों को अपनी ही समर्थित सरकार के रेल बजट का बहिष्कार करना पड़ा।

          देश की राजधानी दिल्ली में खस्ताहाल जन-सुविधाओं के बावजूद उसके समाधान हेतु मात्र 70 लाख रुपये उपलब्ध कराये गये है। वहीं दिल्ली मेन स्टेशन के विकास के लिए अनुमानित लागत 7 करोड़ 92 लाख रुपये है। जबकि इस मद में मात्र 20 लाख दिये गये है। दिल्ली स्टेशन की इमारत के निर्माण की अनुमानित लागत 36 करोड़ 53 लाख रुपये है, जिसमें सिर्फ 6 करोड़ रुपये उपलब्ध कराया गये है। रूटों के विस्तार के बारे में भी बजट में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है।

          पिछले रेल बजअ में स्टेशनों पर कबीर के दोहे लिखवाने की बात कही गई थी, जिसका आज तक पालन नहीं किया गया है। माननीय पूर्व रेलमंत्री श्री नीतीश कुमार द्वारा स्वीकृत रेल परियोजनाओं को ठंडे बस्ते में डालकर नित्य नई घोषणाएं हो रही हैं, जिस पर काम भी होगा या नहीं, इस पर संदेह है। बिहार में अतिमहतवाकांक्षी रेल परियोजना हाजीपुर-सुगौली रेल मार्ग की  भी काफी धीमी प्रगति है। शायद ही देश में कोई गाड़ी समय से चलती हो।

          माननीय रेलमंत्री जी ने अपने बजट में कुछ अच्छी बातें भी की हे जैसे - वरिष्ठ नागरिकों, तथा असाध्य रोगियों, के किराये में और अधिक छूट तथा छात्र-छात्राओं को कालेज व सक्ल जाने के लिए मुफ्त मासिक सीजन टिकट देने की जो घोषणा की गई है वह प्रशंसनीय है।

          और अब अंत में मैं अपने संसदीय क्षेत्र की कुछ समस्याओं का उल्लेख करते हुए माननीय रेल मंत्री जी से मांग करता हूं कि इसे अनुपूरक बजट में शामिल करने की कृपा करें-

          बगहा, नरकटियागंज एवं हरिनगर सम्पार गेटों पर फ्लाई ओवर ब्रिज की पिछले साल स्वीकृति दी गई, लेकिन आज तक इस पर काम शुरु नहीं हो पाया है। अतः जनहित में इस ओवर ब्रिज का निर्माण अबिलम्ब कराया जाय।

          नरकटियागंज में वाशिंग पिअ की बात हर बजट चर्चा में उठाई जाती है, लेंकिन इस पर रेल मंत्री जी का ध्यान नहीं जाता।

   

*…..*  This part of the speech was laid on the Table.

          मरूवाडीह बापूधाम एक्सप्रेस का ठहराव राजनीतिक कारणों से बगहा एवं रामनगर में नहीं दिया गया, जबकि यह दोनों महत्वपूर्ण स्टेशन हैं। अतः मेरी पुरजोर मांग है कि उक्त गाड़ी का ठहराव बगहा एवं रामनगर में सुनिश्चत किया जाए।

          बाल्मीकनगर कपरपूरा तक टोकन लेस सिस्टम होना चाहिए ताकि गाड़ियां नियत समय पर चल सकें। साथ ही मुजफ्फरपुर से बाल्मीकनगर होते हुए गोरखपुर तक रेलवे लाईन का दोहरीकरण कार्य किया जाना चाहिए, ताकि गाड़ियों का आवागमन संतुलित किया जा सके।

          पनियाहवा-छितौनी-तम्कुही रोड रेल लाईन के निर्माण कार्य, जयनगर-नरकटियांगज आमानपरिवर्तन कार्य, तथा नरकटियागंज-गौनाहा-भिखनाठोढ़ी आमान परिवर्तन कार्य की प्रगति संतोषजनक नहीं है, इसमें तेजी लायी जाए।

          मुजफ्फरपुर बा रास्ता नरकटियांगंज- गोरखपुर एक गरीब रथ एक्सप्रेस चलाये जाने की आवश्यकता है, जिस पर विचार होना चाहिए।

          वाल्मीकनगर से बेतिया तक के सभी स्टेशनों पर जो यात्री शैड बने है वह उपर्याप्त है बरसात के दिनों में यात्रियों को काफी परेशानी होती है उसका विस्तान किए जाने की नितान्त आवश्यकता है। तथा यात्री सुविधाओं जैसे पेयजल, शौचालय, रोशनी आदि का समुचित व्यवस्था करने की जरूरत है। इन्ही बातों के साथ मैं अपनी बात को समाप्त करता हूँ। आपने मुझे बोलने का मौका दिया इसके लिए धन्यवाद। *     MR. CHAIRMAN:  Nothing will go on record.

(Interruptions)* … MR. CHAIRMAN:  Now, Shri Ganesh Singh.

           

* Not recorded   श्री गणेश सिंह (सतना)  : सभापति महोदय, सबसे पहले मैं आपको धन्यवाद देता हूं कि आपने मुझे रेल बजट पर बोलने का मौका दिया। माननीय रेल मंत्री जी पांचवी बार रेल बजट प्रस्तुत करते हुए बहुत प्रसन्न हो रहे थे लेकिन शायद इस बात को नजरअन्दाज कर रहे थे। वह जब पांचवी बार सदन के भीतर बजट प्रस्तुत कर रहे थे तब देश के कई राज्यों के माननीय सांसद उनके प्रस्तुत किए गए रेल बजट पर असहमति व्यक्त कर रहे थे। पश्चिम बंगाल, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, उडीसा, बिहार, आध्रप्रदेश, उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र प्रदेश के सभी सांसदों ने रेल मंत्री जी के बजट का विरोध किया। मुझे पहली बार ऐसा लगा कि यह  बजट पूरा असंतुलित है। बजट में सभी क्षेत्रों का बराबर ख्याल नहीं रखा गया और लगातार नई-नई घोषणाएं उन्हीं क्षेत्रों के लिए हुई हैं जहां पहले के चार बजटों में नए कामों की स्वीकृतियां दी गई थीं। यह सही बात है कि रेल का नेट वर्क देश में बढ़ा है। 14 लाख कर्मचारी रेल विभाग के पास हैं, डेढ़ करोड़ यात्री रोज अपनी यात्रा तय करते हैं, 11 हजार से अधिक ट्रेन्स हैं लेकिन जहां एक ओर नई तकनीक की ट्रेन देने की बात हो रही है, वहीं दूसरी तरफ बहुत बड़ी संख्या में पुराने डिब्बे, पुरानी लाइनें, टूटे-फूटे स्टेशन देश के भीतर  देखने को मिलेंगे जिन की संख्या 70 फीसदी से ज्यादा है, वहां पेय जल नहीं है, बैठने की व्यवस्था नहीं है, पैदल ब्रिज नहीं हैं, दूसरे-तीसरे-चौथे प्लेटफार्म की जो जरूरत है, वह नहीं बन पाए हैं। मुझे लगता है कि रेल बजट प्रस्तुत करते समय जिन सभी बातों का  ख्याल रखना चाहिए था, वह नहीं रखा गया। मंत्री जी ने एक बात और कही कि हम लगातार पांचवीं बार फायदे का बजट प्रस्तुत कर रहे हैं। मैं मानता हूं कि 25 हजार करोड़ रुपए के फायदे का बजट है लेकिन इन्होंने जो कहा कि पहले के रेल मंत्रियों ने ठीक काम नहीं किया, रेलवे में बड़ा वित्तीय संकट था लेकिन उन्होंने किसी भी बजट में यह उल्लेख नहीं किया कि रेल विभाग की पुरानी वित्तीय स्थिति क्या थी? उन्होंने आरोप लगा कर कह दिया कि हमने बहुत अच्छा काम किया है लेकिन पहले वालों ने सब गड़बड़ किया, मुझे ऐसा लगता है कि उनकी यह बात ठीक नहीं है।

          महोदय, रेलवे की आमदनी का जरिया पार्सल के माध्यम से, विज्ञापन के माध्यम से और लैंड लीज के माध्यम से बताया गया है। मैं मानता हूं कि रेलवे के पास आज बहुत जमीन है। अगर  रेलवे अपनी जमीन का कमर्शियल उपयोग करे तो वह सदैव फाय़दे में रहेगा लेकिन गांवों में कहावत है कि अपनी सम्पत्ति को बेच कर यदि कोई बेटा अपने को कहता है कि वह धनवान हो गया है तो वह उचित नहीं कहा जाता। घर का बेटा वही ठीक माना जाता है जो खुद सोर्स ऑफ इनकम इकट्ठी करे, अन्य तरह से मेहनत करके आय अर्जित करके पूंजी को बचाने का काम करे लेकिन यहां उल्टा हो रहा है। यहां हम अपनी जमीन को कमर्शियल उपयोग के लिए दे रहे हैं। उससे जो आमदनी हो रही है, उसे रेलवे का फायदा बता रहे हैं।[a56] [a57]   मैं मानता हूं कि रेल यात्रियों के किराए में वृद्धि नहीं हुई है लेकिन नई 200 गाड़ियां जिन्हें सुपरफास्ट बनाकर चलाया गया, उन गाड़ियों में यात्रियों के ऊपर अधिभार लगाने का काम तो किया गया लेकिन उनको सुविधाएं नहीं दी गई। मैं आज भी कई ऐसी सुपरफास्ट गाड़ियों का नाम ले सकता हूं, जो मेरे क्षेत्र में महाकौशल एक्सप्रेस और रीवा से नई दिल्ली चलने वाली सुपरफास्ट एक्सप्रेस है, इनके डिब्बों की हालत देखिए, इनकी स्थिति इतनी खराब है कि कभी भी बड़ी दुर्घटना हो सकती है। बाथरूम में जाओ तो ऐसा लगता है कि पांव नीचे चला जाएगा। अगर बच्चे ट्रेन में अकेले टहलना चाहें तो बच्चों को अकेले छोड़ नहीं सकते। ट्रेन में आवाज़ इतनी भयंकर आती है कि आप सो नहीं सकते। ऐसी ट्रेनों को हम दुनिया की नंबर वन ट्रेन बनाने जा रहे हैं। खानपान की जो व्यवस्था  है, उसका तो गजब का हाल है। जितने यहां अवैध वेंडर्स ट्रेन में देखने को मिलेंगे उतने कहीं नहीं मिलेंगे। विज्ञापनों की रेलवे स्टेशन नुमाइश बन गए हैं, बड़ी-बड़ी कंपनियों के विज्ञापन वहां लगे हुए हैं जिससे लोग रास्ता भूल जाते हैं। मैं कई बड़े शहरों का नाम बता सकता हूं कि लोग स्टेशन जाने का रास्ता भूल जाते हैं, वहां विज्ञापन के बड़े-बड़े होर्डिंग लगे हैं, इससे रेलवे की वास्तविकता अपने आप खोती चली जा रही है। आज रेलगाड़ियों में डिब्बा बंद सामान प्लास्टिक के बर्तनों में बिक रहा है, अब लालू जी के वो नारे कहां गए - कुल्हड़ लाएंगे, खादी के तकिए के कवर और चादर देंगे। अगर ट्रेन के परदे देखेंगे तो उल्टी होती है। वहां कॉकरोच, खटमल और चूहों ने पूरी तरह से अपना घर बना लिया है। रात में आप कोई खाने का सामान छोड़ दीजिए, थोड़ी देर बाद पता चलेगा कि वह गायब हो गया, वह किधर गया पता नहीं चलेगा, यह स्थिति है। मैं कहना चाहता हूं कि आज रेलवे 14 लाख कर्मचारी काम कर रहे हैं लेकिन जो फील्ड में कर्मचारी काम कर रहे हैं, उनकी क्या हालत है? वे जंगल, पहाड़ों में अकेले रात में डय़ूटी करते हैं, कभी उन्हें डाकू उठा कर ले जाते हैं तो कभी कोई आकर धमकाता है लेकिन इनकी सुरक्षा की कोई व्यवस्था नहीं है। वे पेड़ के नीचे किसी तरह से रात गुजारते हैं, हम उनको आज तक मकान बनाकर नहीं दे सके। हम ए क्लास का रेलवे स्टेशन दिल्ली को बना सकते हैं यह ठीक बात है, मुम्बई, चैन्नई और कोलकाता को बना सकते हैं, उचित है लेकिन जो वास्तविकता है उसे स्वीकार नहीं कर रहे। टाइम बाउंड कार्यक्रम क्या इन सुधारों के लिए नहीं चलाए जा सकते। मंत्री जी कह रहे हैं  कह रहे हैं कि सब सुविधाएं प्राइवेटाइजेशन में दे रहे हैं। आप प्राइवेटाइजेशन में दे दीजिए, जहां-जहां आपने प्राइवेटाइजेशन में दिया वहां की हालत देख लीजिए, आज क्वालिटी कंट्रोल पूरी तरह से खत्म हो चुका है और पूरी तरह से मुनाफे की दृष्टि से काम होता जा रहा है। रेलवे सिर्फ मुनाफा कमाने के लिए नहीं बना था, रेलवे देश को जोड़ने वाली एक बहुत बड़ी संस्था है। रेलवे से हमारा देश पूरी तरह से एकजुट है अगर इसे मुनाफे का धंधा बनाने में लग जाएं और सुविधाओं को ध्यान में न रखें तो  इसे सफलता नहीं कहा जा सकता। अभी सुप्रीम कोर्ट ने भी कह दिया है कि सड़कों के माध्यम से माल भाड़े की ढुलाई 30 या 35 टन से ज्यादा नहीं होगी। अभी हमारे एक मित्र भाषण में बता रहे थे कि रेलवे को फायदा पहुंचाने के लिए माल ढुलाई में ओवरलोडिंग कर रहे हैं तो ट्रैक तो कहीं न कहीं तो गड़बड़ होगा ही। ये ट्रैक 100 या 150 वर्ष पहले के हैं, इनमें आधुनिक तरीके का काम किया नहीं है और हम उम्मीद कर रहे हैं कि यह ज्यादा माल ढुलाई का काम करेगा। एक तरफ सुप्रीम कोर्ट कह रहा है कि रास्ते में चलने वाले ट्रकों की ओवरलोडिंग बंद हो और दूसरी तरफ रेलवे की ओवरलोडिंग बढ़ती चली जा रही है, इस तरह से यह दोहरा मापदंड कैसे चलेगा। इसलिए मैं कहता हूं कि इस मामले में बहुत गंभीरता से लालू जी को विचार करना चाहिए।

          मैं अपने क्षेत्र की कुछ बातें कह कर अपनी बात समाप्त करूंगा। मैं आज पूरी तरह से कह सकता हूं कि हम अपने क्षेत्र की छोटी-छोटी बातों के लिए अधिकारियों से मिलते हैं, हमने रेल का चक्का जाम भी किया है और माननीय रेल मंत्री जी से कई बार निवेदन कर चुके हैं लेकिन कुछ नहीं कर पाए। हमारे यहां चित्रकूट तीर्थस्थल है, जहां भगवान राम 12 वर्ष रहे और मैहर में शारदा माता की शक्तिपीठ है। इन दोनों तीर्थ स्थलों में करोड़ों आदमी वर्ष भर आते हैं, हमने छोटी सी डीएमयू गाड़ी मांगी थी लेकिन वह आज तक नहीं मिली। रीवा से दिल्ली चलने वाली ट्रेन आठ-दस घंटे लेट होती है, हमने कहा कम से कम उसका तो समय परिवर्तित कर दें और सुबह नौ बजे तक पहुंचाने की व्यवस्था करें। इस तरह महाकौशल एक्सप्रेस जो जबलपुर से चलकर निजामुद्दीन आती है, उसका समय परिवर्तन करके आठ-नौ बजे तक दिल्ली पहुंचाने की व्यवस्था करें लेकिन आज तक वह भी नहीं किया। अभी इन्होंने एक ट्रेन दी, हमने मांग की कि इसे रीवा-सतना से मुम्बई चलाया जाए और आपने जबलपुर से चलाने की घोषणा कर दी। हम इसका स्वागत करते हैं लेकिन इसे सतना से चलाया जाए। चूंकि सतना बहुत बड़ा औद्योगिक क्षेत्र है।[r58]   जिनका रोज का आना-जाना मुम्बई से है। मुम्बई हमारे लिए एक मैडिकल सैन्टर भी है और एक व्यापारिक केन्द्र भी है। वहां जाने के लिए जबलपुर से मुम्बई जो ट्रेन आपने स्वीकृत की है, हम चाहते हैं  कि उसे सतना से चलाया जाए। इसी तरह राजकोट एक्सप्रैस के लिए पूर्व रेल मंत्री, श्री नीतीश कुमार जी ने सतना में जाकर एक बड़ी सभा में घोषणा की थी कि राजकोट को हम कटनी से सतना तक पहुंचायेंगे। लेकिन कटनी में दस घंटे वह ट्रेन खड़ी रहती है फिर भी वह आज तक हमें नहीं मिली। सतना एक ऐसी जगह है, जहां से सारी जगहों के लिए, चाहे वह कोलकाता की गाड़ियां हों, चाहे पटना और बिहार की गाडियां हो, बनारस की गाड़ियां हो, सब सतना से होकर दक्षिण की तरफ जाती हैं। लेकिन ये गाड़ियां यहां खड़ी तो होती हैं, तेल और पानी हमारे यहां से लेती हैं, लेकिन हमारे यहां यात्रियों के जो आरक्षण कोटे थे तथा वीआईपी कोटे थे, वे सारी ट्रेनों में खत्म कर दिये गये। मैं नहीं जानता ऐसा क्यों हुआ। वे सारे आरक्षण के कोटे, जो अप और डाउन दोनों दिशाओं में चलने वाली गाड़ियों में थे, उन्हें फिर से बहाल किये जाए, यह मेरी मांग है।

          महोदय, मैं निवेदन करना चाहता हूं कि जो रेलवे स्टेशन हमारे लोक सभा क्षेत्र में हैं, हम लगातार उनके लिए लड़ते रहे हैं कि वहां पेयजल की व्यवस्था हो जाए, वहां शौचालय बन जाएं, वहां बैठने की व्यवस्था हो जाए, फुट ओवर ब्रिज बन जाएं, लेकिन आज तक इनमें से कोई काम नहीं हुआ। मैं कहना चाहता हूं कि एन.एच. मैहर में आपकी रेलवे लाइन क्रास होती है। हमने पिछली बार भी आपसे निवेदन किया था, लेकिन बजट में प्रावधान करने के बावजूद भी ओवर ब्रिज बनाने की स्वीकृति नहीं दी गई।  लेकिन हम राष्ट्रीय राजमार्ग एवं भूतल परिवहन मंत्रालय को धन्यवाद देते हैं, जिन्होंने बी.ओ.टी. में उसे बनाने की स्वीकृति दे दी है मैं निवेदन करना चाहता हूं कि मैहर में अंडरब्रिज बनाने के लिए अपने खर्चे से  रेलवे अपनी स्वीकृति दे दे, ताकि लोगों को सुविधा मिल सके। हमने कहा था कि लगरगवा के पास गोवरांव मोड़ पर एक रेलवे फाटक बनाया जाए। आप एक तरफ कहते हैं कि हम फाटक में चौकीदार बैठा रहे हैं, हम फाटक को बनाने का काम करने जा रहे हैं। लेकिन इस गांव की जमीन-जायदाद  रेलवे के उस पार है।  तथा रेलवे लाइन की ऊंचाई इतनी अधिक है कि लोगों को तीस किलोमीटर का चक्कर मारकर जाना पड़ता है। मैंने मांग की थी कि वहां अंडरब्रिज बनाना संभव नहीं है तो फाटक लगा सकते हैं, इसके लिए लगातार वहां की जनता मांग करती रही है।

          मैं निवेदन करना चाहता हूं कि सतना से अकेले सीमेंट तथा लाइम स्टोन की लदान सात हजार करोड़ से ज्यादा होती है। हर वर्ष इनको हमारा क्षेत्र सात हजार करोड़ रुपये देता है। लेकिन सुविधा के नाम पर इन्होंने कुछ नहीं दिया। मध्य प्रदेश के साथ इस तरह का सौतेला व्यवहार रेलवे के द्वारा होगा, ऐसी उम्मीद हमने कभी नहीं की थी। लालू जी से हम कई बार व्यक्तिगत रूप से मिलकर भी निवेदन कर चुके हैं कि मध्य प्रदेश देश का हृदय स्थल है। चारों तरफ की ट्रेनें वहां से होकर गुजरती हैं। हमारी राज्य सरकार आपके रेलवे ट्रैक को जितनी सुरक्षा देने का काम करती है, उतना शायद कोई नहीं देता। मैं निवेदन के साथ कहना चाहता हूं कि मध्य प्रदेश के साथ सौतेला व्यवहार बंद होना चाहिए। खास तौर पर सतना के साथ, जिस लोक सभा क्षेत्र से मैं आता हूं, उसके बारे में मैं अभी लिखित रूप से भी दूंगा, चूंकि समय कम है। इसलिए मेरे क्षेत्र की जो वास्तविक समस्याएं हैं और हमारी मांगे हैं, उन्हें मैं लिखित में भी देने का काम करूंगा।  आपने मुझे बोलने का समय दिया, इसके लिए मैं आपको धन्यवाद देता हूं।

           *यात्री सुविधाए लगातार प्राइवेट लोगों को दी जा रही है, जिससे क्वालिटी खत्म होती जा रही है।

          लालू जी ने स्वदेशी, तथा लोगों को रोजगार देने की बात कही थी।

          लेकिन कुल्हड, खादी के चादर, परदे मठा, दही, का उपयोग होने वाला था वह सब खत्म हो गया।

          निजी कम्पनियों को प्लास्टिक बंद सभी खाद्य पदार्थों को स्टेशनों में तथा गाड़ियों में बेचने की अनुमति दी जा रही है।

          इन्ही कारणों से करोडो लोगो के हाथ से छोटे-छोटे धन्धे छुट गये।

          कई गाड़ियां पिछले वर्ष 40 तथा इस बार 63 ट्रेने चलाए जाने का निर्णय लिया गया है।

          इनमें अधिकांश वही रुट है जहां हर वर्ष नये ट्रेन दी जाती रही है।

          मैं किसी राज्य का विरोध नहीं कर रहा हूँ लेकिन मध्य प्रदेश की लगातार उपेक्षा की गई है यह उल्लेख जरुर कर रहा हूं।

          मैंने रीवा से सतना होते हुए मुम्बई की ट्रेन मागी थी जो नहीं मिली।

          मैने चित्रकुट से मैहर के बीच डी.एम.यू चलाने की मांग की थी यहां वर्षों से करोडो तीर्थयात्री आते जाते है लेकिन नहीं मिली।

          राजकोट एक्सप्रेस जो कि कटनी में 10 घन्टे खड़ी रहती है 100 किलो मीटर सतना तक बढ़ाये जाने की मांग की थी नहीं की गई।

          कटनी से इलाहाबाद           रीवा से मानिकपुर झांसी तक  लाइन का दोहरी करण तथा विघुतीकरण करने की लगातार मांग की है। परन्तु नहीं हुआ।

          मैहर में ओवर ब्रिज की मांग की थी रेलवे ने नही बनाई लेकिन भूतल परिवहन विभाग ने बी.ओ.टी में बनाने की स्वीकृति पिछले वर्ष दे दी ।

          अब मैं रेलवे से मैहर में एन.एच रेलवे कोसिंग पर अडर ब्रिज बनाने की मांग करता हूं।

          सतना से मैहर के बीच लगरगंवा के पास गावेरांव मोड़ एवं मैहर के वार्ड-10 करया पानी रेलवे क्रासिंग पर फाटक लगाने की मांग पर आज तक विचार नहीं किया गया।

   

* …….* This part of the speech was laid on the Table.

          जबलपुर मुम्बई गरीब रथ को रीवा से चलाया जाये तथा सप्ताह में 3 दिन किया जाए।

          रीवा इलाहबाद नयी डी.एम.यू चलाई जाये           सतना से चलने वाली अप एवं डाऊन दिशा की और चलने वाली गाड़ियों को पूर्व में सभी श्रेणियों में आरक्षण वी.आई.पी कोटा था जो वर्तमान में खत्म कर के जबलपुर कर दिया गया है पुनः बहाल किया जाये।

          दुर्ग गोरखपुर दुर्ग कानपुर से प्रतिदिन किया जाए।

          रीवा से नई दिल्ली चलने वाली गाड़ी समय परिवर्तित कर सुबह 9 बजे तक दिल्ली पहुचाया जाए।

          जबलपुर से हजरत निजामुददीन चलने वाली महाकौशल एक्सप्रेस का समय परिवर्तन कर दिल्ली 9 बजे तक पहुचाया जाए।

          रीवा से भोपाल चलने वाली एक्सप्रेस को हबीवगंज तक बढाया जाये           मझगवा जैतवारा सतना मैहर में चौथा प्लेट फार्म व पैदल पथ बनाया जाए खुरहा, लगरगंवा, मदनपुर रेलवे स्टेशनों की ऊंचाई बढ़ाई जाए।

          खन्ना पंजारी में हाबड़ा जैतवारा में कामयनी वगहाई में रीवा से जबलपुर के बीच चलने वाली इन्टरसिटी का उचेहरा, अकहरा, मुकैठी में स्टापेज दिया जाए।

          सतना-रीवा मिर्जापुर नये रेल लाइन बनाई जाए।

          5 वर्ष में लालू जी ने गरीब का शब्द बहुत इस्तेमाल किया लेकिन गरीब को कुछ मिला नहीं।

          200 एक्सप्रेस गाड़ी सुपर फास्ट बनायी गई लेकिन सुविधा न के बरबार है उल्टे किराया बढ गया।

          ट्रेन के डिब्बे आऊटडेटेड है।

          राज्य सीमा पुलिस जी.आर.पी. जो रेलवे की सुरक्षा मे रहती है उनके परिवार को रियायती पास दिया जाए।

          देश की सङको में ओवर लोड न्यायालय ने बंद कर दिया है।

          लेकिन लालू जी ने माल गाड़ियों में लदान बढ़ा दिया है। इस पर भी रोक लगनी चाहिए           रेल लाइन के बीच पहले लोहे के स्पीलर लगते थे अब उनकी जगह सीमेन्ट के स्लीपर लगाये जा रहे है जो लोहे के स्लीपर लगे थे उन्हे निकाल कर बेचे गये है उनमें व्यापक भष्ट्राचार किया गया है उसकी जांच होनी चाहिए।

          पिछली बार रिटन रिजवेशन पर जो 15 रुपये का अधिभार दिया गया था उसे वापस नहीं लिया गया।

          रेलमंत्री जी ने जो यात्रियों से रियायत देने की बात कही है। लेकिन इसे वापस नहीं किया गया।

          छात्राओं को, महिलाओ को, उर्दू जानने वालों को, एडस पीडित को, दी जाने सुविधा स्वागत योग्य है परन्तु छात्रों को वंचित रखना गलत है           एडस पीडित के अलावा केन्सर पीडित, किडनी, हार्ट, एवं आख पीड़ितो से रेलवे में 50 प्रतिशत की छुट दी जाए।

          अखबारों ने लिखा है कि 70 प्रतिशत घोषणाओं पर अभी तक नहीं हुआ।

          किराया ना बढ़ाकर ऊपरी आलोचनाओ से रेल मंत्री जी ने अपने को बचा लिया । लेकिन           रेलवे जी दुर्घटनओं में कमी नहीं आ रही है जहर खुरानी लूट छीना छपटी आम हो गयी है।

          सफाई सुरक्षा और अच्छा भोजन एवं अच्छे चाय-पानी में व्यापक सुधार किये जाने की जरुरत है।*                                                                                                           MR. CHAIRMAN : Shri S.K. Kharaventhan to speak now. The time allotted to you will end at 6 p.m. Please be brief. I have given you time.

SHRI S.K. KHARVENTHAN (PALANI): Thank you, Sir. I will finish within 6 o’ clock.

          First of all, I want to thank the Chair for giving me this opportunity to participate in the discussion on Railway Budget 2008-2009 and also with respect to the Railways (Amendment) Bill, 2008. First of all, I want to thank our hon. Minister of Railways Shri Laluji and also the hon. Minister of State for Railways Shri Veluji for sanctioning a new project in my constituency connecting Erode and Palani and also Dindigul – Villupuram doubling and electrification and allocating sufficient funds for gauge conversion of Dindigul – Coimbatore line.

          My friend hon. Shri Ganesh Singh who spoke before me, elaborately criticized this Budget. I want to put forth certain facts before this august House.

          Due to the hard work put forth by our hon. Ministers, we had a cash surplus. In the year 2005 it was only Rs. 9,000 crore. In the year 2006 it raised to Rs. 14,000 crore and in 2007 it raised to Rs. 20,000 crore. In the year 2008 it is Rs. 25,000 crore. Also, the operating ratio has increased to 78 per cent. [k59]            Furthermore, I want to submit that Gross Traffic Receipt (GTR) was Rs. 10,000 crore in the year 1988-89. During those days, it was highly appreciated by the Railway officials. The GTR for 2007-08 would be Rs. 72,755 crore and for the year 2008-09, it is put at Rs. 81,901 crore. It is a great achievement of our Railway Minister and also the Railway authorities.

          For your information, I may also tell that the Railways are earnings by carrying freight traffic in goods trains. During the NDA regime in the year 2003-04, the Railways carried 557.39 MT of freight traffic. For the year 2004-05, the figure is 602.10 MT; for 2005-06, it is 666.51 MT; for 2006-07, it is 727.75 MT; and for the year 2007-08, it would be 790 MT. It is another great achievement. In the year 2007-08, the Railways would be carrying freight traffic of 790 MT and passenger traffic of 7,058 crore. So, the Railways are providing all the services for the poor masses of this country.     During 1950-51, the number of coaches was 13,109 while in the year 2006-07, the figure stood at 39,896. It is a great achievement of this Government.

          Further, in this year’s Rail Budget, the hon. Minister has allocated Rs. 1,730 crore for new lines, Rs. 2,489 crore for gauge conversion and Rs. 626 crore for electrification. He has allocated Rs. 650 crore of metropolitan transport projects alone. On the social security side, the Railway Minister has given 50 per cent concession to ladies aged 60 or above, and to all senior citizens. He has also given free monthly season tickets for girls up to degree course and boys up to 12th class. He has also provided 50 per cent concession for AIDS patients.  He has reduced the passenger fares by 7 per cent in AC-I class and 4 per cent in AC-II class.

          At this juncture, I want to mention certain facts about the important schemes, more particularly for Tamil Nadu. Sriperumpudur is one of the important towns neighbouring Chennai. It is hub for the car industries and cellphone industries. There is also a famous Vardharajan Temple there. It is also the birthplace of  Saint Ramanujar. Moreover, it is a place where our great leader Shri Rajiv Gandhi was unfortunately assassinated. There is a long-pending demand to connect Avadi and Sriperumpudur.  The survey for the new line was ordered on 27.12.1995 and the survey report was submitted on 34.1997. It runs about 25.6 kilometres only and would cost Rs. 60.11 crore. The rate of return is 14.05 per cent. In this regard, I would also like to mention that in the year 1992, the Railway Board had fixed the benchmark for sanctioning a new line at 14 per cent. I would submit that it is not possible for a new line to reach 14 per cent. This condition for sanctioning a new line has to be totally scrapped. They are following the 1992 system. It cannot be implemented.

          Further, Dindigul is one of the famous places in South India. Dindigul-Coimbatore line is connecting in-between Pollachi and Palghat in Kerala also. It is connecting two States also. During 2007, only an amount of Rs. 30 crore was allocated for gauge conversion and now an amount of Rs. 65 crore has been allocated. This will not be sufficient. So, more money has to be allocated. 

          Another important project connecting Karnataka and Tamil Nadu is Chamrajnagar-Sathyamangalam line. That is pending. So, that project is also to be cleared.

          Now, I want to mention certain facts in respect of my constituency Palani. In my constituency, Erode-Palani is an important route. There is one Engiyur Bridge. This railway over-bridge was ordered three or four years back. Ninety per cent of the construction work is over and only 10 per cent work is pending. Due to that, people are not able to cross that railway line. A large number of people are going to Palani Hill Temple. There are other temples also. So, this work has to be completed immediately.

          Near Chennimalai, there is SIPCOT industry. Nearly 2,500 industries are there. Coimbatore-Salem line is going in-between SIPCOT industries and Chennimalai. Thousands of people are going to factories by crossing the railway line. There, the railway over-bridge has to be sanctioned.[SS60]  18.00 hrs. [r61]            I am asking for another new survey as Tirupur is the hub of hosiery industry. Every year, the Government of India is getting benefited to the tune of Rs. 11,000 crore by way of exports.

          Karur is another textile city. It is having thousands of powerloom industries. On the way, there are famous places called Kangeyam and Vellakoil. A new survey has to be sanctioned connecting Tirupur, Kangeyam, Vellakoil and Karur.

          Dindigul, my district headquarters, is the hub of textile mills having 132 textile mills. Another important town nearby Rameshwaram is Karaikudi. Karaikudi and Dindigul have to be connected by a new Railway line, and it has to be sanctioned. These are all important matters concerning my constituency.

          On behalf of the people of Tamil Nadu, I want to thank our hon. Railway Minister Shri Lalu and Shri Velu for allocating Rs. 903 crore for Tamil Nadu; Rs. 51 crore for new main-lines; Rs. 475 crore for gauge conversion; and Rs. 231 crore for doubling.

          I once again request the hon. Minister Shri Lalu and Shri Velu to allocate sufficient funds for completion of the Erode- Palani new projects, and immediately take up the location survey and land acquisition.

          I once again thank the hon. Railway Minister Shri Lalu, Shri Velu and Shri Rathwa for taking effective steps for the success achieved by the Railways. They have also introduced the Railway Amendment Bill, 2008. This would make it easier for land acquisition instead of following the old Act. Therefore, we welcome this amendment.

          With these words, I am thanking you and concluding my speech.

                                                                                                 

MR. CHAIRMAN: Hon. Members, it is 6 o’clock now. This discussion will continue on Monday also.

          If the House agrees, then I will take up Zero Hour now.

SEVERAL HON. MEMBERS : Yes, Sir.

MR. CHAIRMAN: I would be permitting the Members to speak only for one minute each. Shri M. P. Veerendra Kumar.