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Lok Sabha Debates

Discussion On Supplementary Demands For Grants-Second Batch For 2020-21 (Text ... on 18 March, 2021

Seventeenth Loksabha > Title: Discussion on Supplementary Demands for Grants-Second Batch for 2020-21 (Text motion were moved and Negatived). (Discussion concluded) माननीय सभापति : अब सभा में अनुदानों की अनुपूरक मांगों - दूसरा बैच 2020-21 को चर्चा तथा मतदान के लिए लिया जाएगा ।

          अनुदानों की अनुपूरक मांगों पर श्री हनुमान बेनीवाल के 9 कटौती प्रस्ताव परिचालित किए गए हैं । यदि माननीय सदस्य अपने कटौती प्रस्ताव प्रस्तुत करना चाहते हैं तो वे 15 मिनट के भीतर सभा पटल पर पर्ची भेज दें, जिनमें उन कटौती प्रस्तावों की क्रम संख्या लिखी हो,जिन्हें वे प्रस्तुत करना चाहते हैं ।

          प्रस्ताव प्रस्तुत हुआ :

“कि अनुदानों की अनुपूरक मांगों की सूची के सतम्भ 2 में मांग संख्या 1 से 11,13 से 15,17 से 20, 23 से 29, 31 से 34, 37 से 44, 46 से 54, 57 से 59, 61 से 65, 67 से 71, 73, 75 से 77, 79, 83 से 87, 90 से 92, 94, 95 और 97 से 101 के सामने दर्शाए गए मांग शीर्षों के संबंध में, 31 मार्च, 2021 को समाप्त होने वाले वर्ष के दौरान संदाय के क्रम में होने वाले खर्चों की अदायगी हेतु अनुदानों की अनुपूरक मांगों की सूची के स्तम्भ 3 में दर्शायी गयी राजस्व लेखा तथा पूंजी लेखा संबंधी राशियों से अनधिक   संबंधित अनुपूरक राशियां भारत की संचित निधि में से राष्ट्रपति को दी जाएं ।” श्री जसबीर सिंह गिल (खडूर साहिब) : सभापति महोदया, आपका धन्यवाद, क्योंकि आपने मुझे डिमाण्ड फोर ग्राण्ट्स पर बोलने का अवसर दिया है । मैं जब भी गवर्नमेंट का बजट डॉक्यूमेंट देखता हूं तो उसे देखकर ऐसा लगता है कि जैसे यह बजट देश के लिए नहीं, बल्कि कुछ चुनिंदा राज्यों के लिए आया है । इसमें अगर मैं शुरू करूं तो हाइवेज में तकरीबन 40-45 हजार करोड़ रुपये उन राज्यों के लिए रखे गए हैं, जहां इस समय असेम्बली इलेक्शन चल रहे हैं । मैं इसके खिलाफ नहीं हूं, मगर मेरा मानना है ‍कि कम से कम पंजाब को उसका हक मिलना चाहिए । हमारा जो शेयर है,जो टैक्स कलेक्शन है,वह नेशनल एवरेज से काफी ऊपर है । हम सेंट्रल टैक्सेस में जीएसटी में अपना हिस्सा डालते हैं । जब वापस देने की बारी आती है तो पंजाब, जो ऊपर से तीसरे-चौथे पायदान पर है,व नीचे से तीसरे-चौथे पायदान पर पहुंच जाता है,जो एक दुखदायी बात है । हमें इन्फ्रास्ट्रक्चर की बहुत जरूरत है,इनमें खासकर जो स्टेट्स या जो डिस्ट्रिक्ट्स, जिनका बॉर्डर इंटरनेशल बॉर्डर पर लगता है,उनमें से भी वे जिनका चाइना और पकिस्तान के साथ बॉर्डर लगता है । हमारी काफी जमीन है,जो बार्ब्ड वायर्स के दूसरी तरफ है,जो पाकिस्तान की तरफ है,वहां खेती का टाइम सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक रहता है ।
उससे पहले न कोई जा सकता है और न कोई उसके बाद जा सकता है । हमारे किसानों ने माननीय हाई कोर्ट और माननीय सुप्रीम कोर्ट तक वह केस लड़ा है । माननीय सुप्रीम कोर्ट ने दस हजार रुपए प्रति एकड़ पर ईयर उन्हें कंपैंसेशन देने के लिए ऑर्डर दिया, लेकिन मैडम बड़े अफसोस की बात है कि वर्ष 2019 के बाद अभी तक एक पैसा पिछले दो सालों का उन किसानों को नहीं दिया गया है । उसका कहीं भी जिक्र नहीं है ।
          मैडम, आज मैं मोदी जी को धन्यवाद देता हूं कि जिन्होंने सिख कॉरिडोर, गुरु नानक साहेब का करतारपुर साहिब कॉरिडोर को खोलने में योगदान दिया है,मगर उसकी कनेक्टिविटी बढ़ाने की जरूरत है । ब्यास से फोर लेन रोड, अमृतसर से टांडा रोड, मगर जब जमीन एक्वायर की जाती है,तो इतना कम रेट लगाया जाता है । इसलिए जो आदमी अपना घर-बार, अपनी जमीन छोड़ कर कहीं और जाएगा, तो हमें उनको उचित कंपैनसेशन देने का प्रावधान करना चाहिए ।
          आज नितिन गडकरी जी ने इलेक्ट्रिकल व्हीकल्स को बढ़ावा देने की बात कही है । हम बिल्कुल बिगनिंग स्टेज पर हैं । फिनलैंड और स्वीडेन ने वर्ष 2030 अपने टोटल फॉसिल फ्यूल पर चलने वाली गाड़ियों को बंद करने के लिए काम शुरू कर दिया है । इंगलैंड, यूके ने तकरीबन वर्ष 2030 तक 50 प्रतिशत फॉसिल फ्यूल से चलने वाली गाड़ियों को बंद करने का अपना लक्ष्य रखा है । मगर अफसोस की बात यह है कि हमारे यहां ईवीज की बात तो की जाती है,मगर उस पर इतनी ज्यादा ड्यूटी लगती है कि कार की कीमत कम और हमें उस पर ज्यादा ड्यूटी देनी पड़ती है,तो कहां से लोग ईवीज की तरफ आएंगे । जो गाड़ियां बाहर से मैन्युफैचर्ड हैं, उनको छोड़िए, प्रधान मंत्री जी ने आत्मनिर्भर भारत का नारा दिया है । जो इंडियन कंपनियां इलेक्ट्रिकल व्हीकल्स बना रही हैं, उनकी डयूटी कम से कम की जाए ताकि ज्यादा से ज्यादा ये गाड़ियां आ सकें ।
          मैडम, अमृतसर सबसे ज्यादा स्ट्रैटिजिकली, हिस्टॉरिकली, रिलीजियसली इम्पॅार्टेंट शहर है । मेरे साथी गुरजीत सिंह औजला जी वहां के माननीय सांसद हैं । वहां हमारा एयरपोर्ट है । यह एयरपोर्ट केवल पंजाब को ही नहीं, बल्कि हिमाचल, जम्मू-कश्मीर और कुछ राजस्थान के हिस्से को केटर करता है,मगर अमृतसर को पीछे रखा जा रहा है और दिल्ली को प्रमोट किया जा रहा है ।
मैडम, दिल्ली में हमें भीड़ को घटाने की जरूरत है,न कि भीड़ बढ़ाने की । बॉर्डर पर जैसे अमृतसर है,  वहां के एयरपोर्ट्स को और विकसित करने की जरूरत है,उन्हें तगड़ा करने की जरूरत है । वहां से कनाडा, अमेरिका, यूरोप, इंगलैंड, आस्ट्रेलिया, मिडल-ईस्ट के लिए फ्लाइट्स ज्यादा चलनी चाहिए । टूरिज्म एक बहुत बड़ी इंडस्ट्री है,यह दूसरे नंबर की एम्प्लॉयमेंट जेनरेशन वाली इंडस्ट्री है ।  इससे सबसे ज्यादा रेवेन्यू भी आता है,मगर हमारा फोकस टूरिज्म से कम होता जा रहा है । टूरिज्म के लिए सिर्फ गोवा नहीं है,इसके अलावा भी there is religious tourism. हमारे जो रामसर साइट्स हैं, हरिके वेटलैंड, हमारे यहां केशवपुर वेटलैंड है । हमारे अनुराग जी पंजाब के जालंधर में पढ़े हैं । उनको अच्छी तरह पता है कि we have Takhni wildlife sanctuary.
          इन्हें प्रमोट करने की जरूरत है । इसके लिए मैंने पहले भी कहा है । अमृतसर एक ऐसा शहर है,जहां दुनिया के कोने-कोने से लोग आते हैं, मगर एक रात रूकते हैं । आज आए रूके, सुबह गोल्डेन टेंपल में दर्शन किए और अगले दिन चले गए । बचे हुए को जोड़ने के लिए हमें वहां एक थीम पार्क डेवलेप करना होगा, एक होलिस्टिक डेवलेपमेंट की अप्रोच अपनानी होगी । वहां एक थीम पार्क करना चाहिए, इंटरनेशनल क्रिकेट स्टेडियम करना चाहिए । अगर हम वहां लोगों को दो दिन के लिए रोक लेते हैं, तो आप सोचिए कि इससे हमारी इकोनॉमी में कितना बड़ा योगदान होगा ।
          मेरी एक रिक्वेस्ट है,पंजाब एक लैंड लॉक स्टेट हैं । यहां पर काफी इंडस्ट्रीज थी । पहले हमने मिलिटेंसी का पीरियड देखा है,जो कि पाकिस्तान स्पॉन्सर्ड था । पंजाब के लोगों ने इसे झेला है । इसके बाद, आपने हिल स्टेट्स को टैक्स रिबेट दे दिया । यह बहुत बढ़िया किया, वे हमारे भाई हैं, उन्हें और रिबेट्स देनी चाहिए । पंजाब के बार्डर से लगे हुए 6 जिले हैं । अगर ध्यान से देखा जाए, तो पठानकोट, गुरदासपुर, अमृतसर, तरनतार, नफरोज़पुर और फाज़लका ये जम्मू-कश्मीर के साथ लगते हैं । इसके आगे देखा जाए, 4-5 राजस्थान के बार्डर के साथ लगते हैं और कुछ गुजरात के साथ लगते हैं । अगर आप इन स्ट्रिप को भी टैक्स रिबेट दे दें, तो हमारी इंडस्ट्रीज़ फिर से रिवाइव हो जाएगी और हमें नौकरियों के लिए बाहर नहीं भागना पड़ेगा ।
 
          आज पंजाब में ब्रेन ड्रेन हो रहा है । हमारे बच्चे जो बढ़िया पढ़े-लिखे हैं, अच्छी डिग्रियां ली हुई हैं, कोई आईआईएम में पढ़ता है,कोई आईआईटी में पढ़ता हैं, किसी ने इंजीनियरिंग की हुई है,तो किसी ने मेडिकल की हुई है । लेकिन उन्हें सबसे पहले आइलेट्स करना है और जहाज पकड़कर बाहर जाना है । उन्हें यहां पर अपना भविष्य सुरक्षित नहीं लगता है । अगर पंजाब में भी रिबेट्स दे दी जाती, तो हमारे बच्चे यही अपना भविष्य देखते ।
          सभापति महोदया, अमृतसर हैंडलूम्स के लिए मशहूर था,बटाला मशीन्स टूल्स के लिए मशहूर था । यहां हमारे अनुराग जी बैठे हैं, ये जालंधर से पढ़े हुए हैं । जालंधर स्पोर्ट्स गुड्स के लिए पूरी दुनिया में मशहूर था । वहां से वर्ल्ड क्लास स्पोर्ट्स गुड्स पूरी दुनिया में जाते थे । हमारे सांसद श्री रवनीत सिंह    बिट्टू जी,इनका अपना जो क्षेत्र है,आज कोई भी आदमी किसी भी कंपनी की जैकेट्स डाल ले,  चाहे वह जारा की हो,लुई वितो की हो,लेकिन उसे देखेंगे तो लुधियाना की मुहर लगी मिलेगी ।
          मैं वर्ल्ड ट्रेड सेंटर जो कि न्यूयॉर्क के मैनहट्टन में है,वहां गया था । जब सड़क पर चल रहे थे,तो वहां एक सीवरेज़ का मेन होल था और उस पर लिखा हुआ-था मेड इन लुधियाना । लुधियाना को मैनचेस्टर ऑफ इंडिया कहा जाता था । आज हमारा लुधियाना कहां गया? हमें सपोर्ट करने की जरूरत है । मेरी सरकार से यह गुजारिश है कि हमारी तरफ ध्यान दीजिए । पंजाब आपका बच्चा है,आप पंजाब के साथ स्टेप मदर की जैसा ट्रीटमेंट करना छोड़िये, पंजाब को अपनी बाहों में लीजिए, उसे सपोर्ट की जरूरत है ।
          आज आप ऐसे मुकाम पर हैं कि आप जो चाहे वह कर सकते हैं, क्योंकि इतनी बड़ी मेजोरिटी बहुत दिनों के बाद किसी पार्टी को मिली है । हमारे प्रधान मंत्री भी बहुत स्ट्रांग हैं, तो करें । हमें क्यों पीछे छोड़ा जा रहा है?मेरी सरकार से एक बहुत बड़ी गुजारिश है,हम एक लैंड लॉक स्टेट हैं । मशीन टूल्स, स्टील, साइकिल चाहे वह अंडमान निकाबार में चले या लेह-लद्धाख में जाए, साइकिल तो लुधियाना की ही चलेगी । चाहे वह ए-वन,हीरो या फायर फॉक्स की हो ।
          मैडम, हमारे यहाँ न तो आयरन ओर की खान है,न हमारे यहाँ कोई कोयले की खान है,हमें हर चीज झारखण्ड, ओडिशा आदि राज्यों से मंगवानी पड़ती है । हम कैसे कम्पीट करेंगे? जो अन-फिनिश्ड गुड्स हैं, जो रॉ-मटिरियल्स हैं, हम इनको वहाँ से मंगवाते हैं, इसलिए हमें रेलवे फेयर में सब्सिडी दी जाए ताकि हम दूसरों से कम्पीट कर सकें । कोई ओडिशा में है और कोई तीन हजार किलोमीटर दूर है,इससे भाग-दौड़ में ही हमारा दम निकल जाता है । इसलिए फेयर में आपको रियायत देनी होगी ताकि हम अच्छी तरह से अपनी इंडस्ट्रीज को चला सकें ।
          Madam, Health and education are the most important issues which we face. यह सभी जानते हैं कि कैंसर, डायबिटीज, हाइपर टेंशन से लोग बहुत बुरी तरह से ग्रस्त हो रहे हैं । मैं कह सकता हूँ कि हाइपर टेंशन और डायबिटीज लाइफ-स्टाइल डिजीजेज हैं, लेकिन कैंसर नहीं है । वहाँ कैंसर क्यों हो रहा है?हमने अपनी सेहत से खिलवाड़ करके देश का पेट भरा है । फसल ज्यादा उगाने के लिए दवाइयों और खादों का इस्तेमाल हुआ । उसका रिजल्ट क्या हुआ? उसका रिजल्ट यह हुआ कि देश का पेट भर गया और हम बिमारियों के कारण अपने बिस्तर पर आ गए । We need a proper cancer hospital and a research centre in Punjab which is very much important. यह प्राइवेट सेक्टर में नहीं, बल्कि गवर्नमेंट सेक्टर में होना चाहिए । प्राइवेट सेक्टर में तो कोई अमीर आदमी भी चला जाए, कोई मसौदी साहब वर्गे  चला जाए, तो वे उनके कपड़े भी उतार लेंगे, हम जैसे खेती करने वाले या जो गरीब किसान हैं, वे कहाँ जाएंगे?
          मैडम, मेरा यही निवेदन है कि हमारी तरफ खास ख्याल किया जाए । हम देश के साथ हैं, हम आगे चलकर गोली खाएंगे, आगे लड़ेंगे । हम देश का झण्डा ऊँचा रखेंगे । मगर हम लोगों पर आप कृपा-दृष्टि रखिए ।
          बहुत-बहुत धन्यवाद ।
श्री हनुमान बेनीवाल (नागौर): मैं प्रस्तुत करता हूँ:
(सांकेतिक) 83 कि रेल मंत्रालय (पृष्ठ 83) के संबंध में 100000 रूपये से अनधिक की राशि के अनुदान की अनुपूरक मांग में 100 रूपये कम किए जाएं।
 
श्री हनुमान बेनीवाल:
 
नागौर से फलौदी तक (राजस्थान) एक नई रेल लाईन स्वीकृत किए जाने की आवश्यकता। (1)   राजस्थान में मेदता-पुष्कर रेल लाईन स्वीकृत किए जाने की आवश्यकता। (2)   राजस्थान में डीडवाना से कुचामन तक एक नई रेल लाईन स्वीकृत किए जाने की आवश्यकता। (3)   राजस्थान के नागौर जिले के नागौर, मेदता रोड, डीडवाना और कुचामन रेलवे स्टेशनों पर लिफ्ट तथा स्वचलित सीढ़ीयां स्थापित किए जाने की आवश्यकता। (4)   नागौर और कुचामन के रास्ते 12467/12468 लीलन एक्सप्रेस चलाए जाने की आवश्यकता। (5)   मेदता और डीडवाना के बीच राजकीय राजमार्ग-39 पर मेदता रोड लेवल क्रॉसिंग के ऊपर सड़क ऊपरी पुल (आरओबी) का निर्माण किए जाने की आवश्यकता। (6)   नागौर-बीकानेर रेल लाईन का दोहरीकरण किए जाने की आवश्यकता। (7)   नवा शहर स्टेशन पर रेलगाड़ियों के ठहराव, जिसे पूर्व में रोक दिया गया था, का उपबंध किए जाने की आवश्यकता। (8)   नागौर, मेदता रोड, मुण्डवा और गोतान रेल स्टेशनों पर टिन शेड लगाए जाने की आवश्यकता। (9)     श्री तापिर गाव (अरुणाचल पूर्व): ऑनरेबल चेयरपर्सन,मैं सप्लीमेंटरी डिमांड्स फॉर ग्राटंस का समर्थन करने के लिए खड़ा हुआ हूँ ।
          आज हिन्दुस्तान में ‘मोदी है तो मुमकिन है’ का नारा केवल बाजार और गलियों में नहीं है, बल्कि इस पार्लियामेंट में भी कांग्रेस के ऑनरेबल मेम्बर ऑफ पार्लियामेंट ने मोदी जी की तारीफ करते हुए, इसकी उम्मीद जगाई है । मुझे गर्व है कि इस सदन में भी ‘मोदी है तो मुमकिन है’ का नारा है ।
          आदरणीय मोदी जी के नेतृत्व में आज हिन्दुस्तान में जो हो रहा है, उसकी शुरुआत मैं कहाँ से करूँ । एक साल पहले कोविड की महामारी में हम सब डरे हुए थे कि हम सब कैसे जिएं, इस देश को कैसे बचाएं,हिन्दुस्तान की 130 करोड़ पॉपुलेशन को कैसे बचाया जाए । यूएसए,यूके और यूरोपियन कंट्रीज में महामारी ने जैसा रूप लिया और उसके कारण जो मौतें दिखाई दे रही थीं, उससे हमारी आत्मा भी टूट चुकी थी कि हम कैसे करें । हमको पता ही नहीं था कि पीपीई किट क्या होता है, मास्क क्या चीज है, यह बहुत-से लोगों को पता नहीं था । लेकिन ‘मोदी है तो मुमकिन है’ का नारा सफल हुआ और एक साल भी नहीं,सिर्फ पाँच-छ: महीने के अंदर ही भारत पीपीई किट्स का सप्लायर बन गया । इससे हमारा देश भी आत्मनिर्भर बना और हमने दूसरे देशों को भी पीपीई किट्स और मास्क सप्लाई करने का मौका हासिल किया है ।
          मोदी   जी के नेतृत्व में हमारे भारत देश में आत्मविश्वास जगा है । हम हैल्थ के बारे में बोल रहे थे । पहले हैल्थ का बजट दो हजार करोड़ रुपये हुआ करता था । इस बार यह 137 परसेंट इन्क्रीज़ हुआ । 94,452 करोड़ रुपये का हैल्थ सेक्टर में इन्वेस्टमेंट हुआ है । जैसे ही कोविड का ऐलान हुआ, कोविड महामारी बढ़ी, हमारी फाइनेंस मिनिस्टर की ओर से 15 हजार करोड़ रुपये देश के लिए इमीडिएट रिलीफ के रूप में उपलब्ध कराए गए ।
          इसके बाद इस बजट में 35 हजार करोड़ रुपये का एलोकेशन हुआ है । इस 35 हजार करोड़ रुपये का प्रावधान करने के साथ-साथ आज हमने वैक्सीन भी बना ली है । आज हम सब इस सदन में और सदन के बाहर भी कोरोना की वैक्सीन लगवा रहे हैं । कोरोना की यह वैक्सीन देश भर में ही नहीं, बल्कि 100 से भी ज्यादा देशों में हम वैक्सीन के सप्लायर्स बने हैं । मोदी जी के नेतृत्व में हमारा भारत आत्मनिर्भर भारत बना है । आत्मनिर्भर भारत में 64,180 करोड़ रुपये का प्रोविजन हुआ है । इसे भी हमारे आत्मनिर्भर भारत में आगे बढ़कर क्रिसेन्ट गार्डन तक मोदी जी ने पहुंचा दिया ।
          सभापति महोदया, कभी-कभी मोदी जी का नाम लेने से बहुत तकलीफ हो जाती है । वे इंसान नहीं हैं, वे किसी के अवतार हैं, जो आज हमारे प्रधान मंत्री बनकर इस देश को सही दशा और दिशा में लेकर जा रहे हैं । इस पर हम हिन्दुस्तानियों को गर्व करना चाहिए । आज कांग्रेस के ऑनरेबल मेंबर ऑफ पार्लियामेंट ने जैसे मोदी जी की तारीफ की,जैसे उन पर विश्वास किया, ऐसे ही हम सबका आत्मविश्वास इस सदन में एकजुट होना चाहिए । …(व्यवधान)
श्री रवनीत सिंह (लुधियाना):आप चाहते हैं कि वे कांग्रेस में रहें? …(व्यवधान)
श्री तापिर गाव : अगर हम सब मिलकर हिन्दुस्तान को ऐसे ही आत्मनिर्भर बनाएं, तो हिन्दुस्तान और तरक्की करेगा और आगे बढ़ेगा । मैं लीडर ऑफ दि अपोज़ीशन को बताना चाहूंगा कि अगर आज मोदी जी नहीं होते, तो हमारे अरुणाचल प्रदेश में टू-लेन रोड्स कभी दिखाई नहीं देतीं । …(व्यवधान) आज जसीमोट से आगे मलारी और उससे आगे बॉर्डर तक,बोराहटी वैली तक मैं दो दिनों में पैदल जाकर आया हूं । उस जगह तक रास्ता बन गया है । हिमाचल से लेकर काला पानी तक,काला पानी के बारे में हम लोग सोचते थे कि यह अंडमान निकोबार में है,लेकिन नेपाल और इंडिया के बॉर्डर पर जो काला पानी है,वहां तक हमने सड़कें बनाई हैं ।
अब सिर्फ डेमचोक तक रास्ता बनाना बाकी है । इसके लिए मैं हमारी सरकार से भी रिक्वेस्ट करना चाहूंगा कि पौंगोंग लेक-चुशूल-थागा-लेह से जब डेमचोक जाते हैं, वहां हेमिस्फियर वाइल्ड लाइफ सेंचुरी है । वहां वाइल्ड लाइफ सेंचुरी होने के कारण हम वहां सड़कें नहीं बना सकते हैं, लेकिन देश की सुरक्षा के हित में हम थागा से लेकर डेमचोक तक सड़कें बनाने का प्रावधान करना चाहिए । अगर हम इसे भी कानून में देखें तो यह हमारी सिक्योरिटी और आर्म्ड फोर्सेज़ के लिए बहुत अच्छा होगा, ऐसा मैं सोचता हूं । हम सबके दादा यहां बैठे हैं । कोलकाता से सिलिगुड़ी तक स्पेशल फोर-लेन रोड सैंक्शन हुई है । …(व्यवधान) दादा, यह आपके यहां सैंक्शन हुआ है । …(व्यवधान)
महोदया, पश्चिम बंगाल, असम, त्रिपुरा और असम में चाय बागान हैं । चाय बागान में काम करने वाली लेबर पहले आत्महत्या करने पर मजबूर थी,लेकिन हजारों करोड़ रुपये देकर मोदी जी ने चाय बागान के लेबर्स में अपना विश्वास जगाया और इन लोगों को जीने का हक दिया । वेस्ट बंगाल, असम आदि राज्यों में चाय बागान में मजदूरों को जो तकलीफें थीं, उन्हें मोदी जी ने दूर करने का काम किया है । मोदी जी ने जो किया, वह भगवान, अल्लाह के रूप में किसी अवतार का ही काम है । टी लेबर्स को जीने का हक देने की शक्ति सिर्फ मोदी जी में ही है और मोदी जी ने यह काम किया है,जो तारीफ के काबिल है ।
          महोदया, 70 साल हो गए हैं हमारे अरुणाचल प्रदेश और पूर्वोत्तर राज्यों में ट्रेन क्या चीज है,हमें पता ही नहीं थी लेकिन मोदी जी के आने के बाद अरुणाचल प्रदेश, मणिपुर में उद्घाटन होगा । मिजोरम में रेलवे कनेक्टीविटी हो गई है और मोदी जी ने कहा है कि पूर्वोत्तर राज्यों से साउथ ईस्ट एशियन कंट्रीज को जोड़ना है इसलिए इस पालिसी के आधार पर हमारे यहां रेलवे कनेक्टिविटी हो रही है । इसके लिए 1 लाख 10 हजार करोड़ रुपये का फंड एलोकेशन हुआ है । सिक्किम, दार्जिलिंग में ब्रिटिश काल की टॉय ट्रेन चलती थी । लेकिन मोदी जी ने उस टॉय ट्रेन से आगे बढ़कर हिमालय में, पूर्वोत्तर राज्यों में, उत्तराखंड में, हिमाचल में ट्रेनों का जो एक्सटेंशन का काम किया है,वह तारीफ के काबिल है । मेन लाइन में जितनी सुपर फास्ट ट्रेन्स हैं, इनमें इलेक्ट्रिफिकेशन का काम आगे बढ़ रहा है,डबल लेन का काम आगे बढ़ रहा है ।
          महोदया, अब मैं वॉटरवेज़ की बात करना चाहता हूं । हमने सोचा ही नहीं था कि वॉटरवेज़ क्या होता है ।   आज नितिन गडकरी जी के नेतृत्व में जहां पानी नहीं है,वहां भी वॉटरवेज का हब बना रहे हैं ।…(व्यवधान) दादा, मैं आपको पूरा एक्सप्लेन करूंगा, आप एक मिनट इंतजार कीजिए । हर जगह प्रावधान किया गया है कि वॉटरवेज़ का एक प्रोविजन होगा । आज आप देखिए गंगा नदी में नेपाल तक वॉटरवेज़ का उपयोग कैसे हो,यहां गुड्स एंड पैसेंजर मूमेंट कैसे हो और ब्रह्मपुत्र नदी से बंगाल की खाड़ी से बांग्लादेश होते हुए अरुणाचल प्रदेश तक वॉटरवेज़ का प्रोविजन दिया है और देश की बड़ी नदियों में वॉटरवेज़ होगा, यह सपना मोदी जी के नेतृत्व में पूरा हो रहा है और आने वाले कल में वॉटरवेज़ की सुविधा आप देश में देखेंगे ।
          महोदया, डिफेंस हमारा एक बहुत बड़ा महत्वपूर्ण डिपार्टमेंट और मिनिस्ट्री है । रक्षा बजट में 18.8 परसेंट इंक्रीज किया गया है और आज हमारे इंटरनेशनल बार्डर पर गुजरात से लेकर कश्मीर तक और कश्मीर से लेकर अरुणाचल प्रदेश तक दुश्मनों का जो मूमेंट होता था,उसे रोकने के लिए और बार्डर पर हमारी सेना को जो सहायता दी जाती है,वह सब डिफेंस प्रोविजन्स में है । काश 1947 के बाद मोदी जी जैसा कोई प्रधान मंत्री होता, तो आज अरुणाचल प्रदेश में जो इंडिया-चाइना इश्यु है,लेह-लद्‌दाख में जो सेना इश्यु है और जम्मू-कश्मीर में पाकिस्तान के साथ इश्यु है,वह इतिहास में नहीं होता । इसके बावजूद आज मोदी जी के होने के कारण एलओसी, एलएसी, मैकमोहन लाइन आदि में इंटरनेशनल बार्डर तक जो रास्ता जाता है,वहां दो लेन की सड़क है,जो हमारे देश के हित में है और यह आगे भी बढ़ेगा । फाइनेंस मिनिस्ट्री और इंडस्ट्री मिनिस्ट्री की ओर से एमएसएमईज़ में या बिग प्रोडक्शन हाउसेज के लिए प्रोडक्शन लिंकेज 1 लाख 97 हजार करोड़ रुपये का एलोकेशन हुआ, जिससे प्रोडक्शन यूनिट्स या एमएसएमईज़ का जो भी प्रोडक्शन है,उसके लिंकेज के लिए इतना फंड एलोकेशन हुआ, यह समाज में और हर सोसाइटी में लोगों को आगे बढ़ने का मौका देगा ।
मैं इस सदन को बताना चाहता हूं कि पूर्वोत्तर राज्यों में आठ ऐक्चुअल लैंडलॉक्ड स्टेट्स हैं । इन आठों प्रदेशों को बांग्लादेश के बिना, म्यांमार के बिना, भूटान के बिना यदि हम सब मिलकर सहयोग करेंगे तो हमारा इकोनॉमिक डेवलपमेंट होगा । अभी कोविड महामारी के कारण बांग्लादेश से त्रिपुरा तक ट्रेन जाने का जो प्रॉविजन बनाकर रखा गया है,वह ट्रेन शायद जुलाई महीने से कलकत्ता से ढाका होते हुए त्रिपुरा और गुवाहाटी चलेगी । बे ऑफ बंगाल से त्रिपुरा तक जो महत्वपूर्ण ब्रिज बन गया है,इससे हम अपने बिजनेस को और आगे बढ़ाएंगे और पूर्वोत्तर राज्य इसके माध्यम से जुड़ेंगे । मैं चाहूंगा कि मोदी जी के नेतृत्व में पूर्वोतर राज्यों में सिक्किम सहित सात प्रदेशों में एम्स जैसे  हॉस्पिटल्स हों । 
सभापति महोदया, आज लीगल ऐस्पेक्ट्स और लीगल जस्टिस की बहुत ज्यादा सोशल इम्पॉर्टेंस है । हमारे यहां गुवाहाटी में हाईकोर्ट है । एफिलिएटेड हाईकोर्ट हर प्रदेश में है । मैं चाहता हूं कि भारत सरकार हर प्रदेश में एक-एक हाईकोर्ट बनाए ताकि इमिजिएट लीगल जस्टिफिकेशन उन प्रदेशों में हो सकें । यह मेरी मांग है ।
सभापति महोदया, मैं सरकार का आभारी हूं कि अगर मोदी जी नहीं होते तो हमारे अरुणाचल के पासीघाट में एयरपोर्ट नहीं होता । आज कलकत्ता से एयर इंडिया की फ्लाइट हमारे होम टाउन को जाती है । नागालैंड में एयरपोर्ट भी बनेगा । यह मणिपुर में है,आईजॉल में है,त्रिपुरा में है । हमने पिछले 70 सालों से अरुणाचल प्रदेश में एयरपोर्ट न होने का जो डिप्राइवेशन झेला, उसे हमारे मोदी जी ने भगवान के अवतार के रूप में आकर अरुणाचल में फ्लाइट सर्विस दी । सिक्किम में कोरोना महामारी के कारण कई फ्लाइट्स रुकी हुई हैं, जिनको शुरु करना है । इस सदन की ओर से मैं यह कहना चाहूंगा कि पूर्वोत्तर राज्यों में महाभारत युग से लेकर आज तक हम इतिहास से जुड़े हुए हैं । आज अरुणाचल प्रदेश में परशुराम कुंड है,शिवलिंग है । तवांग कस्बे के ल्हासा में विश्व का दूसरा सबसे बड़ा बौद्ध मठ है । पूर्वोत्तर राज्यों में सिक्किम में कृष्ण लीला और असम में अर्जुन के पुत्र बब्रुवाहन का स्थान आदि रिलीजियस टूरिज्म पॉइंट ऑफ व्यू से काफी प्रसिद्ध हैं । जेनेवा या किसी दूसरी कंट्री जाने की बजाय आप पूर्वोत्तर राज्यों में आइए । फ्लाइट की सुविधा और ट्रेन की सुविधा हो गई है । मोदी हैं मो मुमकिन है । आप हमारे पूर्वोत्तर राज्यों का भ्रमण कीजिए । इसके साथ ही मैं यह कहना चाहूंगा कि त्रिपुरा हमारा गेटवे होगा । अभी जुलाई-अगस्त महीने से कलकत्ता से ढाका होते हुए अगरतला, गुवाहाटी ट्रेन शुरू होगी । इसमें डबल लेन रेलवे हो ताकि लोग बे ऑफ बंगाल से होकर आसानी से पूर्वोत्तर राज्यों में बिजनेस कर सकें । अत: मैं पूर्वोत्तर के प्रत्येक प्रदेश में आप सबका स्वागत करता हूं ।आप रीलिजियस टूरिस्ट बनकर भी आइए, नेशनल टूरिस्ट भी बनकर आइए या अपने देश के उस हिस्से को देखने आइए ।
महोदया, मैं इन अनुदानों की अनुपूरक माँगों का समर्थन करते हुए आपको धन्यवाद देता हूँ । धन्यवाद ।
PROF. SOUGATA RAY (DUM DUM): Hon. Chairperson, thank you for giving me this opportunity. I rise to speak on the Supplementary Demands for Grants moved under article 115 (i) (a) of the Constitution along with 113 Part III. It would have been good if the hon. Finance Minister had been present here. But somehow or other I find that even during the Budget discussion she was not here most of the time, Of course, her very competent Minister of State, Shri Anurag Singh Thakur is present here and he can reply to us. But we would have felt happy if the hon. Finance Minister had stayed and listened to our problems.
          Madam, before I speak on the Supplementary Demands for Grants, my friend, the earlier speaker, did not speak much on the Demands but rather spoke on the Krishna Lila in Manipur and Parasuram Kund in Arunachal Pradesh. But that is alright. …(Interruptions) She is saying that nobody cared for them before Modi ji came to power. मोदी जी को समय कहाँ है?…(व्यवधान) वे तो रोज पश्चिम बंगाल जा रहे हैं ।…(व्यवधान) हिन्दुस्तान में 29 राज्य हैं ।…(व्यवधान) आज भी वे पश्चिम बंगाल में हैं ।…(व्यवधान)
माननीय सभापति : आप आसन के सम्मुख बोलिए ।
…( व्यवधान)
प्रो. सौगत राय : भारत के प्रधान मंत्री होकर हर टाइम बीस मीटिंग करेंगे, तो बाकी राज्यों का काम कब होगा?…(व्यवधान)
 
माननीय सभापति : आप इधर देखकर बोलिए ।
…( व्यवधान)
प्रो. सौगत राय : मोदी है तो कुछ भी मुमकिन नहीं है ।…(व्यवधान) उनको हारना है,इसलिए बार-बार जाना है ।…(व्यवधान) बार-बार जाएंगे, ज्यादा हारेंगे ।…(व्यवधान)
माननीय सभापति : सौगत जी,आप इधर बोलिए । आप इधर-उधर ध्यान देकर मत बोलिए ।
…( व्यवधान)
प्रो. सौगत राय : मोदी है तो मुमकिन नहीं होगा पश्चिम बंगाल में ।…(व्यवधान)
Madam Chairperson, I find that this Government is a cruel Government. There can be many Governments, लेकिन यह एक सरकार है,जिसे कोई सहानुभूति नहीं है । सारे देश की महिलाएं गैस के ऊंचे दाम से तड़प रही हैं । एलपीजी सिलेंडर अभी 845 रुपये का हो गया है । प्रधान मंत्री से लेकर कोई भी मंत्री इस बारे में एक भी बात नहीं बोलता है कि कब गैस का दाम कम होगा । इस बजट में भी माननीय वित्त मंत्री जी ने 2.5 रुपये प्रति लीटर पेट्रोल पर और 4 रुपये प्रति लीटर डीजल पर एग्रीकल्चर इंफ्रास्ट्रक्चर एंड डेवलपमेंट सैस लगाया है । What can be crueller? Petrol is selling at Rs. 91/- per litre; diesel is selling at Rs. 84 per litre. How will the country progress? There has not been a single word about this neither from the hon. Prime Minister, nor the Finance Minister. We are in a very bad situation. As the House is aware the Finance Minister only had spent last year and the fiscal deficit went up to 9.5 per cent of GDP and this year the Government is estimating that the fiscal deficit would be to the tune of 6.8 per cent. How can the economy of the country survive under such a condition? This Government is called the …*की सरकार । जो सब बेच रहे हैं । पंडित नेहरू, इंदिरा जी ने जो नेशनेलाइज्ड सेक्टर बनाया, इस सरकार ने उसको बेचना शुरू कर दिया । दो बैंक बेचेंगे, सारे देश में बैंक स्ट्राइक हो गई,सब बैंकिंग ऑपरेशन बंद हो गया, लेकिन सरकार को कोई होश नहीं है ।
एक नेशनलाइज्ड इंश्योरेंस कम्पनी बेचेंगे, उस पर भी आंदोलन चल रहा है । कोल में 100 परसेंट एफडीआई लाएंगे । एक-एक ट्रेन को बेच देंगे । ट्रेन का नाम अम्बानी एक्सप्रेस, अडाणी एक्सप्रेस होगा । एयरपोर्ट बेच देंगे । लाइफ इंश्योरेंस कारपोरेशन ऑफ इंडिया (एलआईसी) का आईपीओ बाजार में आ गया तो सरकार के पास क्या रहेगा? जितनी सरकार की प्रॉपर्टीज़ हैं, एयरपोर्ट बेचेंगे, कौन लेगा, अडाणी लेगा । अगर भारत संचार निगम लिमिटेड (बीएसएनल) कोलेप्स कर जाएगा, तो किसको नफा होगा? अम्बानी को जो जीयो चलाता है । देश में यह जो हो रहा है,यह देश को बेच देंगे और मुझे दु:ख है कि बीजेपी में बहुत लोग हैं, जो गरीब बैकग्राउंड से आते हैं, वह एक बार भी पूंजीपति को मदद करने की पॉलिटिक्स के खिलाफ नहीं बोलते हैं, आवाज नहीं उठाते हैं । सब की आवाज बंद है ।
          Madam, I just saw that around 31 broad asset classes mapped to ten Ministries or Central Government Departments were identified for strategic disinvestment.  These assets include toll road bundles मॉनीटाइज हो जाएगा । Ports, cruise terminals, telecom infrastructure, oil and gas pipelines, transmission towers, railway stations and sports stadium. एक अहमदाबाद में स्टेडियम बना लिया, मोदी जी जीते हुए अपने नाम में स्टेडियम बना रहे हैं । कोई मना नहीं करते हैं । Mountain railways, operational metro sections, warehouses and commercial complexes. मैडम, आप भी बिहार से आती हैं । वहां गरीब लोगों को अम्बानी, अडाणी के आगे बढ़ने से कोई लाभ नहीं होगा । आप थोड़ा बोलेंगी कि यह सरकारी सम्पत्ति बेचनी नहीं चाहिए । कोई बोलता नहीं है । सबसे क्रूएल जो है,आपने देखा होगा कि कोविड के समय जो माइग्रेंट लेबर थी,प्रवासी श्रमिक थे,उनको पैदल वापस आना पड़ा, क्योंकि मोदी जी ने चार घंटे टाइम देकर लॉकडाउन की घोषणा की और बोला कि थाली बजाओ, तीन हफ्ते में कोविड चला जाएगा । एक साल हो गया, अभी भी कोविड की सैकेंड वेव चल रही है । अभी सैकेंड वेव वापस आई है । जो माइग्रेंट लेबर हैं, उसके साथ जो बर्ताव किया गया, सबसे दु:खद है । दुनिया के बड़े-बड़े इकोनॉमिस्ट, अनुराग जी जानते हैं, अमर्त्य सेन, अभिजीत विनायक बनर्जी, सब ने बोला कि कुछ कैश ट्रांसफर करो । इसको कम से कम दस हजार रुपये दो,नहीं दिया । आप जानते हैं कि यूएसए में क्या किया? यूएसए में उन्होंने गरीब लोगों को हजार डॉलर से 1800 डॉलर डायरेक्ट बैंक में ट्रांसफर किया । हमारे मुल्क में हमने गरीब के हाथ में क्यों कोई पैसा नहीं दिया? गरीब के पास पैसा आता, वह खर्चा करते, इकोनॉमी रोल करती । इकोनॉमी तो रोल नहीं हुई । यह पहली बार है कि इकोनॉमी कांट्रेक्शन फेज में है और इसके बारे में किसी को चिंता नहीं है । ये बोलते रहते हैं कि मोदी है तो मुमकिन है । इकोनॉमी बंद हो जाएगी तो मोदी है तो मुमकिन होगा? यह कोई बात हुई । आप जमीन पर जहाज चला देंगे । मोदी है तो मुमकिन है ।…(व्यवधान)
वित्त मंत्रालय में राज्य मंत्री तथा कारपोरेट कार्य मंत्रालय में राज्य मंत्री (श्री अनुराग सिंह ठाकुर): आप बात भी कोई सुनना चाहोगे ।…(व्यवधान)
प्रो. सौगत राय : आप पूरा जवाब दीजिएगा ।…(व्यवधान)
 
श्री अनुराग सिंह ठाकुर : कैसे ट्रांसफर किया, अगर आप कहें तो मैं अभी भी बता सकता हूं । मुझे बताने में कोई दिक्कत नहीं है,आपत्ति नहीं है । इनके समय तो बैंक खाते भी नहीं खुले थे,हमने प्रधान मंत्री जनधन योजना में 41 करोड़ लोगों के बैंक खाते खोलने का भी काम किया । जब दुनिया के बड़े-बड़े देश डायरेक्ट बैंकों में पैसा ट्रांसफर नहीं करवा पाए, देश की 20 करोड़ से ज्यादा महिलाओं के खातों में 31 हजार करोड़ रुपये नकद कैश ट्रांसफर मोदी सरकार ने प्रधान मंत्री गरीब कल्याण योजना के माध्यम से करवाया । जो दिव्यांग थे,वृद्ध थे,विधवा थी,ऐसे तीन करोड़ के खातों में लगभग तीन हजार करोड़ रुपये हमने सीधे ट्रांसफर करवाये हैं । यही नहीं, एम्प्लॉयमेंट प्रोविडेंट फंड…(व्यवधान) मैं इसलिए कह रहा हूं कि अगर सुनना है तो मैं अभी कह देता हूं, लेकिन सदन को गुमराह करने का काम मत करिए ।
प्रो. सौगत राय : मैडम, क्या आप जानती हैं कि क्यों इतने जन-धन अकाउंट खुले हैं?
माननीय सभापति:सच बात बोलिए ।
प्रो. सौगत राय : मैडम, आप मेरी बात सुनिए । मैं आप ही के साथ हूं । इतने जन-धन अकाउंट खुलने का एक ही कारण है कि मोदी जी ने वादा किया था कि हर आदमी के अकाउंट में 15लाख रुपये जमा होंगे । विदेश से काला धन लाएंगे और अकाउंट में जमा होगा । एक पैसा भी मोदी जी की ओर से जमा नहीं हुआ है ।
श्री अनुराग सिंह ठाकुर : मैडम, मैं माननीय सदस्य को इतना ही बताना चाहता हूं कि हमने नौ करोड़ किसानों के खातों में 18 हजार करोड़ रुपये एक ही बटन दबाकर डाले हैं । लेकिन पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री जी ने अपने प्रदेश के किसानों की सूची नहीं दी,नहीं तो पश्चिम बंगाल के किसानों के खातों में भी पैसा चला जाता । यह दुर्भाग्य है कि इन लोगों ने नहीं किया । …(व्यवधान)
 
प्रो. सौगत राय : मैडम, यह जो बोल रहे हैं, इस पर एक तर्क हो सकता है कि 6 हजार रुपये साल में देकर बोल रहे हैं कि हम बहुत कुछ दे रहे हैं । हम “कृषक बंधु” में इससे ज्यादा रुपये दे रहे हैं …(व्यवधान) और ये चुनाव हो जाने के बाद 10 हजार रुपये किसान को प्रति एकड़ देंगे । ये लोग कभी नहीं दे पाएंगे । …(व्यवधान)
माननीय सभापति : आप लोग बैठ जाइए, इनको बोलने दीजिए ।
प्रो. सौगत राय : मैडम, साल में 6 हजार रुपये देकर ये बोल रहे हैं कि मोदी है तो मुमकिन है । हम लोगों ने बहुत कुछ किया है । …(व्यवधान)
माननीय सभापति : आपको भी बोलने का मौका मिलेगा और गलत बोलने पर सही जवाब आएगा । इसलिए आप लोग बैठ जाइए ।
प्रो. सौगत राय : मैडम, सवाल-जवाब नहीं होना चाहिए । मैं गरीब आदमी हूं,जनता का प्रतिनिधि हूं और मुझे थोड़ा बोलने दिया जाए । मैं जल्दी ही अपनी बात खत्म कर दूंगा । यह सप्लीमेंटरी डिमांड 6 लाख 28 हजार करोड़ रुपये की है और इसमें एडिश्नल एक्सपेंडिचर 4 लाख 12 हजार करोड़ रुपये का होगा । आप पूछ सकते हैं कि सप्लीमेंटरी डिमांड में इतना रुपया किसलिए खर्च हो रहा है । सबसे ज्यादा खर्च आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत यूरिया की सब्सिडी दी जा रही है जो 36 हजार करोड़ रुपये है । इम्पोर्टेड यूरिया के लिए 13 हजार करोड़ रुपये दिए जा रहे हैं । 49 हजार करोड़ रुपये ज्यादा सब्सिडी है । सबसे ज्यादा सब्सिडी नेशनल फूड सिक्योरिटी एक्ट के तहत प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना के तहत 2 लाख नेशनल स्मॉल सेविंग फण्ड से लोन दिया है और एफसीआई को 2 लाख 50 हजार करोड़ रुपये का दिया है । वही सप्लीमेंटरी डिमांड्स में आ रहा है । फ्री राशन देना अच्छी बात है । जब केन्द्र सरकार ने सब्सिडाइज्ड राशन देना शुरू किया था तो हमारे यहां तीन रुपये प्रति किलो चावल दिया जा रहा है, जबकि पश्चिम बंगाल सरकार दो रुपये प्रति किलो चावल दे रही है । हम लोगों ने यह वादा किया है कि हम जून महीने तक फ्री राशन पश्चिम बंगाल में देंगे । लेकिन मैं पश्चिम बंगाल का चुनाव इस लोक सभा के पटल पर नहीं लड़ना चाहता हूं । मैं पश्चिम बंगाल की सरजमीं पर पश्चिम बंगाल का चुनाव लड़ूंगा । मैं लोक सभा की सरजमीं पर इस सरकार की नाकामयाबियां उठाऊंगा,मैडम आप सुनते रहिएगा ।
          सरकार तीन हजार करोड़ रुपये जनरल इंश्योरेंस के लिए दे रही है, उसको केपेटलाइज करने के लिए । एक तरफ सरकार जनरल इंश्योरेंस कम्पनी को बेच रही है तो दूसरी तरफ केपेटलाइज कर रही है । यह …*की सरकार कर रही है । यह कब सीखेगी कि यह सही रास्ता नहीं है ।
माननीय सभापति : आपकी बात आ गयी है,आप बैठ जाइए ।
          श्री विनायक राउत जी ।
प्रो. सौगत राय : ये लोग 4 लाख करोड़ रुपये का जो खर्च करेंगे । मैडम,मैं खत्म कर रहा हूं ।
माननीय सभापति : आप सच बोलना है तो बोलिए, गलत बोलेंगे तो कैसे होगा?
प्रो. सौगत राय : मैडम, अंत में लोग दो-तीन बातें करके खत्म करते हैं ।
माननीय सभापति : आप सही बोलिए ।
 
प्रो. सौगत राय : मैडम, मैं वही बोल रहा हूं । अभी केन्द्रीय सरकार की जो हालत है कि 120 दिन से किसान विरोधी कानून को विद्ड्रा करने के लिए आंदोलन कर रहे हैं । सरकार उनसे डरती है,इसलिए फर्टिलाइजर सब्सिडी को कम नहीं किया है, एमएसपी को बंद नहीं किया है, यह सब उनके डर से है । लेकिन उनकी जो असल मांग है कि किसान विरोधी कानून को वापस लिया जाए, इसके बारे में यह सरकार चुप है । इस चुप्पी से नहीं चलेगा । प्रधानमंत्री क्यों चुप हैं? क्यों वह किसान से बात नहीं करते हैं? एक बार हम सुप्रिया जी के नेतृत्व में बॉर्डर पर गए थे ।
हम लोगों को किसानों से मिलने नहीं दिया गया । …(व्यवधान) वे 120 दिन से लड़ रहे हैं । …(व्यवधान) मैडम, आप भी तो किसान के पक्ष में हैं ।…(व्यवधान) आप क्यों नहीं पार्टी के अंदर बोलते हैं कि इस मांग को मान लेना चाहिए? …(व्यवधान) आप इसको जरा देखिए । …(व्यवधान) यह निर्दयी सरकार है । …(व्यवधान) आपको कोई हृदय नहीं है । …(व्यवधान)
माननीय सभापति : अब आप अपनी बात समाप्त कीजिए ।
…(व्यवधान)
प्रो. सौगत राय : 120 दिनों में कितने किसान मर गए हैं? …(व्यवधान) क्या आपको कोई दुख नहीं है? …(व्यवधान) क्या आपको कोई दिमाग नहीं है? …(व्यवधान) क्या आपको कोई दुख नहीं है? …(व्यवधान) आप लद्दाख से आए हैं । …(व्यवधान) दिल्ली बॉर्डर पर जा कर देखिए कि किसानों की क्या हालत है । …(व्यवधान) मैडम, मैं इस सप्लिमेंट्री डिमांड फॉर ग्रांट्स का समर्थन नहीं कर पाता हॅूं । …(व्यवधान)
माननीय सभापति: अब आप समाप्त कीजिए ।
…(व्यवधान)
प्रो. सौगत राय : मैडम, मेरा हो गया । …(व्यवधान) मुझे पता है कि इस पर बेनिवाल जी ने कट मोशंस दी हैं । …(व्यवधान) मैंने तो कट मोशंस भी नहीं दिए हैं । …(व्यवधान) बोला ठीक है । (व्यवधान) जो भी हो,करें । …(व्यवधान) देखिए, मैंने इतनी देर तक भाषण दिया । …(व्यवधान) अर्थमंत्री जी यहां पर नहीं हैं । …(व्यवधान)
माननीय सभापति: मंत्री लोग बैठे हुए हैं ।
…(व्यवधान)
प्रो. सौगत राय : मैं मानता हॅूं कि वे इस सदन के सदस्य नहीं हैं । …(व्यवधान) लेकिन वह तो फाइनेंस मिनिस्टर हैं । …(व्यवधान) उनको हाऊस का सामना करना चाहिए । …(व्यवधान) सुनने का,साहस उनको होना चाहिए । …(व्यवधान)
माननीय सभापति: ठीक है,बैठिए । आपकी बात पूरी हो गई है ।
…(व्यवधान)
प्रो. सौगत राय : मैडम, मैं फिर से बोलता हॅूं कि किसानों की मांग मान लीजिए । …(व्यवधान) किसान विरोधी कानून को विदड्रॉ कीजिए । जो सेस पेट्रोल डीजल पर है,वह विदड्रा कर लिजिए । …(व्यवधान) अंत में एलपीजी का प्राइस कम कीजिए । …(व्यवधान) इसलिए मैं जनता विरोधी और गरीब विरोधी सरकार का तथा इन सप्लिमेंट्री डिमांड का समर्थन नहीं करूंगा । …(व्यवधान)
श्री अनुराग सिंह ठाकुर:सभापति महोदय, मैं सदन का कीमती समय इसलिए लेना चाहूंगा,क्योंकि माननीय  सांसद ने एक टिप्पणी देश के वित्त मंत्री के बारे में की है । जबकि वे स्वयं पूर्व में मंत्री भी रहे हैं । वे यह भी जानते हैं कि जब दोनों सदनों का बिजनस चल रहा होता है,तो किसी न किसी मंत्री को एक हाऊस में,किसी को दूसरे हाऊस में रहना होता है । इंश्योरेंस के बिल पर दूसरे सदन में चर्चा चल रही है । माननीय वित्त मंत्री जी पूरी गंभीरता के साथ वहां पर भी हैं । यहां पर भी आपकी एक-एक बात का जवाब देने आएंगे । लेकिन आपके माध्यम से मैं सदन और देश को एक बात तो जरूर कहना चाहता हॅूं कि जो गुमराह करने का प्रयास यहां पर किया जाता है, जो पीडीएस का राशन था, वह तो मिला ही, आपदा के समय 80 करोड़ लोगों को आठ महीने तक पांच किलो गेहूं, चावल,दाल,चना देने का काम भी नरेंद्र मोदी जी की सरकार ने किया है, जो आज तक किसी सरकार ने नहीं किया है । …(व्यवधान) इसके अलावा भी जो इन्होंने कहा कि एफसीआई को एनएसएसएफ लोन देता था,यह पिछली सरकारों का एक रीति-रिवाज था । लेकिन हमारी सरकार ने आ कर एक नई प्रथा शुरू की कि एक्सट्रा बजट्री रिसोर्सेज़ को नहीं लेंगे । हम सारा अपने बजट पर दिखाएंगे । पारदर्शिता पहली बार आई है तो नरेंद्र मोदी जी की सरकार में आई है । आज से पहले नहीं थी । So I wanted to keep the record straight. क्योंकि माननीय सांसद सीनियर हैं । लेकिन सीनियोरिटी का लाभ उठा कर देश और सदन को गुमराह न करें तो यह अच्छा रहेगा । …(व्यवधान)
माननीय सभापति: दादा, बैठ जाइए ।
…(व्यवधान)
माननीय सभापति: यह सब कुछ रिकॉर्ड में नहीं जाएगा ।
…(व्यवधान)
माननीय सभापति: अब हो गया, आप बैठ जाइए ।
…(व्यवधान)
माननीय सभापति: श्री विनायक राऊत जी ।
…(व्यवधान)
श्री विनायक भाउराव राऊत (रत्नागिरी-सिंधुदुर्ग): माननीय सभापति जी,आपका धन्यवाद कि आपने मुझे इस विषय पर अपने विचार व्यक्त करने का मौका दिया है । वर्ष 2020-21 के लिए पूरक अनुदानों की मांगों – 1,20,205.75 करोड़ की ये जो मांगे सरकार ने इस सभागृह के सामने रखी हैं ।
15.00 hrs कोरोना होने के बावजूद भी जिस तरीके से लोगों को सरकार की तरफ से संरक्षण मिलना चाहिए था,एक आधार था,दुर्भाग्य से वह नहीं मिल रहा है । बढ़ती हुई महंगाई एक सबसे बड़ा कारण है । डीजल, पेट्रोल, गैस के ऊपर जिस तरीके से महंगाई बढ़ती जा रही है,उसका परिणाम आम आदमी के जीवन पर पड़ रहा है । इसलिए उनके लिए जीवन जीना मुश्किल हो गया है । खाद्य तेल की दरें तो बहुत बढ़ गईं । चना, चावल जैसी अगर आज कोई भी चीज बाजार में लेने जाते हैं तो आम आदमी की जेब में पैसे न होने की वजह से उनके पास जो पैसे हैं, उसमें से जो उन्हें खरीदना चाहिए, उसे वे नहीं खरीद पाते । इसलिए आज आम आदमी अपना जीवन कैसे जी सकेगा, यह एक बहुत बड़ी समस्या उसके सामने आ रही है । ऐसे समय में देश के आम आदमी को कैसे राहत दे सकें, लोगों को कैसे फायदा हो सके और उनका जीवन जीने में उन्हें कैसे राहत मिल सकती है,इसकी तरफ सरकार का जो ध्यान होना चाहिए, दुर्भाग्य से वह ध्यान इस बजट में नहीं आया और सप्लीमेंटरी बजट में भी यह ध्यान नहीं दिख रहा है । इसके लिए मैं सरकार से प्रार्थना करता हूं ।
15.01 hrs                      (Shrimati Meenakashi Lekhiin the Chair) महोदया, एक-दो दिनों में फाइनैंस बिल आएगा । उसके ऊपर हम लोग बात करेंगे, लेकिन बढ़ती हुई महंगाई पर काबू पाने के लिए सरकार असलियत में क्या करने वाली है,उसका जवाब अगर माननीय मंत्री महोदय अपने उत्तर में देते तो सारे सांसदों को और देशवासियों को एक अच्छा मौका प्राप्त हो सकता है ।

          सभापति महोदया, कोविड-19 का नाजायज फायदा कई विभागों ने लेना शुरू किया । उसमें से एक रेल विभाग भी है । रेगुलर ट्रेनें चलती हैं । पर, इन रेगुलर ट्रेनों को फेस्टिवल या विशेष ट्रेनों का दर्जा दिया । ट्रेन वही है,लेकिन सारी सुविधाओं में कटौती कर दीं । उसमें पानी नहीं, पैन्ट्री नहीं, पर्दे नहीं, कुछ भी नहीं हैं । लेकिन, कोविड के नाम पर उसके भाड़े में 30 प्रतिशत की बढ़ोतरी करके सारे देशवासियों को लूटने का काम रेल विभाग कर रहा है । यह आपको अनुभव है । हम ग्रामीण इलाके के लोग हैं । हमें अच्छी तरह से अनुभव है । इसके भाड़े में 30 प्रतिशत की बढ़ोतरी की गई । ट्रेन में पीने का पानी नहीं देते, लेकिन फिर भी 30 प्रतिशत बढ़ोतरी है । ये स्पेशल ट्रेनें कितने दिनों तक चलेंगी? अगर रेगुलर ट्रेनें चलाने की घोषणा शासन नहीं करता तो फिर स्पेशल ट्रेनों का दर्जा कम करे और उनका चार्ज रेगुलर ट्रेन फेयर की तरह ही होना चाहिए । आज लोगों को राहत देने की आवश्यकता है ।

          सभापति महोदया, आदरणीय अटल बिहारी वाजपेयी जी के कार्यकाल में प्रधान मंत्री ग्राम सड़क योजना के माध्यम से ग्रामीण विकास के लिए एक नए रास्ते का निर्माण किया गया । प्रधान मंत्री ग्राम सड़क योजना के माध्यम से पूरे देश में करोड़ों रुपये खर्च करके अच्छे रास्ते का निर्माण करने का एक प्रावधान किया गया है । हम बार-बार विनती करते आ रहे हैं । हम बार-बार हाउस में बोलते रहे कि प्रधान मंत्री ग्राम सड़क योजना के फेज-3 का जो प्रोग्राम है,इस सरकार को उसका क्रियान्वयन अच्छी तरह से करना चाहिए । सौभाग्य से फेज-3 को अनुमति दें, लेकिन निधि का जो प्रावधान करना चाहिए था,वह मेरे ख्याल से अभी तक नहीं हुआ । कई राज्यों में काम न होने की वजह से जिन राज्यों ने अच्छा काम किया है,उनको भी एक सजा दी और इसलिए उनका भी प्रोग्राम रुका हुआ था । हम लोगों ने यहां बात की और उसके बाद माननीय मंत्री महोदय जी और माननीय प्रधान मंत्री जी ने उस पर ध्यान देकर फेज-3 चालू करने का आदेश दिया । वह काम अभी हो रहा है । ग्रामीण क्षेत्रों में, पहाड़ी क्षेत्रों में अति दुर्गम इलाके होते हैं । लोगों को आज भी वहां पर आठ-आठ,दस-दस किलोमीटर पैदल चल कर जाना पड़ता है ।

          सभापति महोदया, मैं आपके माध्यम से माननीय मंत्री महोदय जी से विनती करता हूं । मैं उनका आदर करता हूं । वे बहुत डायनैमिक फाइनैंस मिनिस्टर हैं । वे बाकी किसी योजना में चाहे कटौती करें, लेकिन ग्रामीण विकास की जो योजनाएं हैं, चाहे वे प्रधान मंत्री ग्राम सड़क विकास योजना हो या एन.आर.एच.एम.हो,उन पर ध्यान दें । एन.आर.एच.एम.की आज भी हालत वही है । डिस्ट्रिक्ट हॉस्पिटल के लिए स्टेट गवर्नमेंट हर तरह से मदद करती है,लेकिन केन्द्र सरकार की आरोग्य के संबंध में जो-जो योजनाएं हैं, उनमें एन.आर.एच.एम.अत्यंत महत्वपूर्ण योजना है ।

          इसके साथ-साथ पूरे देश में हजारों की संख्या में 108 एम्बुलेंस चलाई जाती है,लेकिन दुभार्ग्य की बात है कि कई एक एजेंसीज को सारे देश की 108 एम्बुलेंस चलाने की व्यवस्था दी गई है । ऐसी मेरी जानकारी है,मुझे बाकी राज्यों के बारे में मालूम नहीं है । महाराष्ट्र में जितनी भी 108 एम्बुलेंस चलती हैं, वे एक ही एजेंसी को दी गई हैं । उसके पास न कोई ड्राईवर, न डॉक्टर, न नर्स और न कोई दवा है । वहाँ सैकड़ों की संख्या में 108 एम्बुलेंस गैरेज में पड़ी हैं । यह लोगों की सुविधा के लिए है,लेकिन उनको इसकी सुविधा नहीं मिल रही है । ऐसी उसकी अवस्था है । 108एम्बुलेंस की जो स्थिति है,उसका क्या महत्व है?आरोग्य की सुविधा में, खासकर कोरोना की सुविधा में 108 एम्बुलेंस को अच्छी तरह से चलाने की आवश्कता है । यह जिस एजेंसी को भी दिया गया है,अगर वह काम नहीं करती है तो सरकार के माध्यम से 108 एम्बुलेंस की सुविधा सारे देशवासियों को कैसे मिल सकती है,इसके ऊपर ध्यान देने की आवश्यकता है ।

          सभापति महोदया, इसके पहले सेन्ट्रल और स्टेट की कई स्कीम्स हैं, वह आज भी हैं । पहले ये सारे स्कीम्स 60-40 के रेशियो में चलती थीं । उसमें बाद सेन्ट्रल गवर्नमेंट कटौती लाई, हम 50:50 पर आ गए । अभी उसमें और कटौती करके 75 और 25 पर आ गए, यानी 75 स्टेट गवर्नमेंट का और 25 सेन्ट्रल गवर्नमेंट का हिस्सा है । जीएसटी का सारा पैसा सेन्ट्रल गवर्नमेंट के पास इकट्ठा हो रहा है । अगर शेयरिंग स्कीम में 75 परसेंट का बर्डेन स्टेट ले और 25 परसेंट केन्द्र सरकार ले तो यह अन्याय है । इसके ऊपर ध्यान देने की आवश्यकता है । कई शेयरिंग स्कीम्स जो स्टेट में इम्प्लीमेंट होती हैं, केन्द्र सरकार की तरफ से सही तरीके से आर्थिक सहयोग नही होने की वजह से वे बंद पड़ी हैं । राज्य सरकार इसे नहीं कर सकती, क्योंकि राज्य सरकार जिस जीएसटी के ऊपर निर्भर है,वह जीएसटी भी केन्द्र सरकार राज्य सरकारों को नहीं दे रही है । इसकी वजह से लोगों के हित के लिए जो भी योजनाएँ हैं, उनके ऊपर विपरित प्रभाव पड़ रहा है । इसलिए मैं आपके इस सप्लीमेंट्री डिमांड के माध्यम से माँग करना चाहता हूँ, विनती करना चाहता हूँ कि केन्द्र सरकार को एक बार फिर से ग्रामीण विकास का अध्ययन करने की आवश्यकता है । वह क्या कर सकती है,कैसा करने की आवश्यकता है,चाहे पूर्वोत्तर राज्य हो,चाहे देश के बाकी अन्य राज्य हो,पूर्वोत्तर राज्यों को आज भी 1910 के तहत मदद मिलती है,लेकिन यह मदद मिलने के बाद भी आज उन्हें कोई दूसरी सुविधा नहीं मिल रही है । हमें कई जगहों में जाने के बाद ऐसा मालूम हुआ है ।

          जम्मू-कश्मीर के लिए भी अनुदानों की माँगें मंजूर करते वक्त इसकी चर्चा होगी । मैं सबसे पहले धन्यवाद दूँगा कि धारा 370 रद्द करने के बाद जम्मू-कश्मीर देश का हिस्सा बन गया है । अखंड हिन्दुस्तान का जो सपना था,वह आदरणीय प्रधानमंत्री जी के माध्यम से साबित हुआ है । इसके लिए मैं उनको धन्यवाद देता हूँ । भविष्य में जम्मू-कश्मीर को सुधार के रास्ते पर चलाना चाहिए, विकास के रास्ते पर चलाना चाहिए । जम्मू-कश्मीर में पूरे देश का हित देखकर वहाँ के लोगों का ख्याल करना चाहिए ।  जम्मू-कश्मीर के लोगों को कैसे आर्थिक स्थिरता प्राप्त हो सकती है,इसके लिए इस बजट में जो कुछ भी दिया गया है,उससे भी ज्यादा देने की आवश्यकता है । इसके साथ-साथ मैं यह माँग करूँगा कि वहां आतंकवादियों का जो हमला हो रहा था,उनसे बचने के लिए कश्मीर के सारे पंडित पूरे देश में बिखर गए । आज भी उनकी पूरी पीढ़ी और जमीन उसी तरह से है ।

माननीय सभापति : राऊत जी, जम्मू-कश्मीर नेक्स्ट आइटम है,इसमें उसको जिक्र करने की जरुरत नहीं है । आप अपनी बात खत्म कीजिए । आपका समय पूरा हो गया है ।

श्री विनायक भाउराव राऊत : सॉरी, मैं उस बिल के ऊपर नहीं बोलूँगा, लेकिन यह फाइनैंस बिल है,जम्मू-कश्मीर राज्य के लोगों की जो आर्थिक स्थिति आज है,वह मैं आपको बता रहा हूँ ।

माननीय सभापति: अब आप रैप अप कीजिए ।

श्री विनायक भाउराव राऊत : वहाँ के जो कश्मीरी पंडित बिखर गए थे,उनको भी यहाँ सेटल करने की आवश्यकता है । इसकी मैं माँग कर रहा हूँ ।

          सभापति महोदया, आपके आदेश का मैं पालन करने वाला हूँ, लेकिन मैंने जो विचार रखा है,उस पर गंभीरता से सोचने की आवश्यकता है । आज देशवासी महँगाई से पूरे तरीके से ग्रस्त हो चुके हैं । सभी देशवासियों को राहत देने की आवश्यकता है । कोविड के नाम पर उनको फँसाने का काम नहीं करना चाहिए ।

SHRI MARGANI BHARAT (RAJAHMUNDRY): Thank you, Madam Chairperson, for allowing me to speak on the Supplementary Demands for Grants: Second Batch for 2020-2021.

          The House has given one more opportunity to ventilate our views on the budgetary proposals of the Finance Ministry after an exhaustive and extensive discussion that took place in the Budget Session. Now, we are in the stage of Supplementary Demands for Grants. There is a little more space to speak. I found some areas which are leftover, and I would like to touch upon them.

          Madam, I congratulate the Finance Minister for her daring act of giving more importance to fiscal deficit for the current fiscal year, and framing the budget proposals accordingly. It was expected to be around 6.8 per cent but due to this pandemic, it has raised to 9.5 per cent. Secondly, the capital expenditure is proposed to be Rs. 5.54 lakh crore, which is the highest ever, and the emphasis has been given on infrastructure, health, etc. It is remarkable. But I have a little concern whether the 4.5 per cent of fiscal target set at the end of the 15th Finance Commission’s Award period is achievable or not. I advise that we need to rein it, otherwise there will be a rise in inflation and its consequential impact on other things.

          The next point I wish to touch upon relates to the 15th Finance Commission. The State of Andhra Pradesh is getting less percentage of revenue through its share of taxes. In the 14th Finance Commission, it came down from 4.305 per cent to 4.111 per cent in the year 2020-21. In 15th Finance Commission, it has been further reduced to 4.04 per cent for 2021-26. So, just like Karnataka, Telangana, and Mizoram, the extra grants shall be granted to Andhra Pradesh also.

          Now, I come to the Andhra Pradesh Reorganisation Act 2014. The Andhra Pradesh Reorganisation Act was passed in the Parliament in February 2014. The Special Category Status to Andhra Pradesh was ensured on the floor of this House. However, Madam, the demand has not been fulfilled up till now. The former Prime Minister assured on the floor of the House that Special Category Status would be given to the State of Andhra Pradesh. Our hon. Chief Minister met the hon. Prime Minister and also the hon. Home Minister many times in this regard. So, I would request, through you, to extend the Special Category Status to the State of Andhra Pradesh. For the Andhra Pradesh State to progress, extending Special Category Status to it is a dire requirement. So, through you, I would request that the State of Andhra Pradesh should be given Special Category Status. If you see, according to the findings of the Comptroller and Auditor General, Rs. 18,400 crore has to be given to the State of Andhra Pradesh as a revenue deficit grant as per the State Re-organisation Act of 2014.

          Now, I come to the point of rural development. An amount of Rs. 7,000 crore has been demanded under the MGNREGA as per the AtmaNirbhar Bharat Abhiyan Package. But there are still some pending dues towards the State of Andhra Pradesh. Andhra Pradesh stood second in the country in providing employment to the people under MGNREGA, and stood first in clearing the wages of workers on time. Therefore, I put forward the request for early release of the pending amount of Rs. 3,700 crore to the State of Andhra Pradesh.

          Now, I want to speak about the National Disaster Response Fund. Recently, the State of Andhra Pradesh has been severely hit by Nivar Cyclone. It has caused a huge damage to the fishermen and the farmers. A Central team visited the State of Andhra Pradesh at that time and estimated that an amount of Rs.2255 crore would be required for restoration work. At present, there is a negative balance fund in the State Disaster Response Fund. Through you, I would request the Government of India to give financial support of Rs.2255 crore to the State.

          Now, let me come to the Supplementary Demands for Grants 2020-21 for the Ministry of Health. There has been a demand of Rs.2000 crore. I want to highlight the dilapidated condition of medical care in Andhra Pradesh. We do not have any tier-I city in the State of Andhra Pradesh. We are only having tier-II and tier-III cities. Due to the absence of tier-I cities, there is very little scope for private sector to offer superspeciality health services. We request the Government of India to support the medical care in the State by setting up medical colleges and public sector medical institutions. There is a proposal that 16 new medical colleges will be developed across the State. We are grateful to the Government of India that they have sanctioned three medical colleges but 13 more medical colleges are required to be sanctioned. In this regard, financial assistance is also very much needed in the State.

          I would like to mention about the revenue deficit of the State of Andhra Pradesh as per the State Reorganisation Act. An amount of about Rs.1,18,000 crore as Revenue Deficit Grant has been given to 17 States but the State of Andhra Pradesh has been left despite the fact that C&AG had already notified it in its remarks.

          Now, I would like to say a few words about the development assistance to the backward districts. The State Reorganisation Act of 2014 promised an annual grant of Rs.350 crore for Andhra Pradesh. We are having seven backward districts. An amount of Rs.50 crore for each backward district was to be sanctioned, as is mentioned in the Act. If we calculate it for six years, an amount of Rs.2100 crore should have been given to the State. But only Rs.1400 crore have been released so far. I request the Government to release the rest of the fund as early as possible. I would also request the Government to consider these seven backward districts of Andhra Pradesh at par with KBK districts of Odisha.

          Rashtriya Ispat Nigam Limited (RINL) is an entity of Visakha Steel Plant. The decision of 100 per cent strategic disinvestment of RINL alongwith the management control is a big concern for the steel plant. It provides employment to about 20,000 people directly. There is a saying ‘Visakha Ukku Andhrula Hakku’ which means ‘the pride of Andhra Pradesh’. Almost 32 people have sacrificed their lives in this protest earlier. I request the Government of India to consider not to disinvest RINL. Last year also, before COVID-19, RNIL made a profit of about Rs.200 crore. This is an asset for our country with a production capacity of 7.3 million tons per annum. Instead of opting for disinvestment, both the Central Government and the State Government should sit together and sort out the issue. I do not want to go into the details of why it started making losses. I would like to raise a few points. What is the necessity for taking a loan of Rs.22,000 crore at an interest rate of 14 per cent? Why do we not think about these things? Why has the Government of India not given captive mines to the RINL, Visakha Steel Plant?

          Why can there not be a proposal to merge it with SAIL? I have one more option with regard to RINL. As per the Andhra Pradesh Reorganisation Act, Andhra Pradesh would be given sanction of one steel plant. Why can the Government not think of sanctioning the existing RINL plant to the State of Andhra Pradesh so that the promise of the Central Government is fulfilled and the sentiments and emotions of Andhra Pradesh people shall also be carried? Why can the hon. Minister not think on these grounds and convince the hon. Prime Minister to sanction the existing RINL plant to the State of Andhra Pradesh?

          Coming to the Department of Consumer Affairs, Rs. 2,760 crore have been listed in the Demands for Grants for the Prime Minister Garib Kalyan Yojana.  I think, Rs. 4,000 crore is the sum due for rice distribution in our State.  As Shri Amitabh Kant of NITI Aayog has stated, sixty per cent of the economy was under 100 per cent lockdown for about three months at the time of COVID. So, we request the Union Government to release the pending dues of Rs. 4,282 crore to the State of Andhra Pradesh.  …(Interruptions)

          Madam, we are having more time. We are at par with TMC in terms of number.

HON. CHAIRPERSON : Your time was 10 minutes and you have already taken 11 minutes.

SHRI MARGANI BHARAT: Please give me two more minutes.

HON. CHAIRPERSON: I give you one more minute. Please wrap it up.

SHRI MARGANI BHARAT: Madam, now I come to the local body grants. The entire country has witnessed in the recent panchayat and municipal corporation elections that under the pragmatic and dynamic leadership of Y.S. Jagan Mohan Reddyji, we have got extra vote percentage of almost seven per cent than the general elections. In this regard, I would like to mention that the pending dues of the rural local bodies of last financial year, along with Rs. 1,312 crore recommended by the 15th Finance Commission for rural local bodies, are pending. Kindly clear that amount also.

          Now, I come to the creation of a new railway zone. After the bifurcation of the State of Andhra Pradesh, the South-Central Railway went to the State of Telangana. As was promised and as is mentioned in the Andhra Pradesh Reorganisation Act also, the South Coastal Railway Zone is also pending with the Government. I request, through you Madam, the hon. Minister to sanction the South Coastal Railway Zone in Visakhapatnam.

          In the Andhra Pradesh Reorganisation Act itself, the Polavaram Project was declared as a national project. After the revised estimations were arrived at, the Technical Committee and the Polavaram Project Authority has approved the escalation price of Rs. 55,548 crore. So, I request the hon. Finance Minister to approve the revised cost estimation. The cost has also gone up on account of increase in land acquisition. The revised land acquisition has gone up from 1.02 lakh acres to 1.55 lakh acres, which is a costly affair. I would request the hon. Minister to consider this also. The remaining dues of Rs. 1,650 crore have to be cleared at the earliest.

          When it comes to tourism, the Government of Andhra Pradesh has submitted 11 proposals worth Rs. 1,000.84 crore for sanction under Swadesh Darshan Scheme and PRASAD Scheme of the Ministry of Tourism. So, I would like to request the hon. Minister, through you Madam, to sanction these tourism projects under Swadesh Darshan Scheme and PRASAD Scheme.

          Madam, I thank you for giving me the opportunity to speak on these Supplementary Demands for Grants.

SHRIMATI SUPRIYA SADANAND SULE (BARAMATI): Thank you, Madam.

          I stand here on behalf of the NCP to speak on the Supplementary Demands for Grants. I do understand that this entire budget has come during exceptionally challenging times. Globally, the pandemic has really put every country, every State, every human being, and every family under absolutely unnatural pressures. I would like to thank Nitin Gadkari Ji for raising the issue this morning. He was very complimentary about the Government of Maharashtra, especially, the Finance Minister of Maharashtra for giving a very good budget during these challenging times. We are looking to work closer with this Government because cooperative federalism and supporting each other during these challenging times is really the need of the hour.

          I would like to just highlight a few points. I think the Government of Maharashtra and the Central Government could work together to deliver superior results to the people of the country who are really suffering in these challenging times. I would like to go back to a couple of points just to highlight them and reiterate them, which Prof. Ray spoke in his speech. He talked about fiscal deficit and he talked about monetizing land. We are not against monetizing. Somebody from the other side immediately corrected him and said: “आपके टाइम में हुआ था ।” जरूर हमारे टाइम में हुआ था । It was a very progressive policy that we had done of restructuring and trying out PPP models which would work. But I think, the concern that he was raising was that this time there is an extra aggressive effort to monetize, especially, in departments, namely, Railways, Telecom, Road, Power, Youth, Civil Aviation, Petroleum, Shipping and Ports. The hon. Minister should kindly clarify if even LIC is in this list.

I understand that a certain amount of disinvestment is the need of the hour when we are all in the global game. From what we read in the newspapers is that the Government is doing it aggressively. Why is this Government in such a big hurry with these 8 Departments and LIC which are all lucrative businesses for the Government? So, the Minister should kindly clarify this question. …(Interruptions)

प्रो. सौगत राय: सर, प्लीज आप अंत में बोलिएगा ।

SHRI ANURAG SINGH THAKUR: I just want to clarify that the LIC is not getting privatized. …(Interruptions)

HON. CHAIRPERSON: Since the Member asked for the clarification, I would allow the Minister to clarify.

… (Interruptions)

श्री अनुराग सिंह ठाकुर: मैडम, मुझे सिर्फ इतना ही कहना है कि एलआईसी का कोई प्राइवेटाइजेशन नहीं हो रहा है । उसका केवल पब्लिक इश्यू आने की बात हो रही है । दोनों में बहुत अंतर है ।

माननीय सभापति: आप आईपीओ की बात कर रहे हैं?

श्री अनुराग सिंह ठाकुर: जी मैडम, मैं आईपीओ की बात कर रहा हूं ।

SHRIMATI SUPRIYA SADANAND SULE: Still, the Government’s share would be diluted with the IPO. You are not selling it completely but it comes back to the same thing.

HON. CHAIRPERSON: But that is how money is raised.

SHRIMATI SUPRIYA SADANAND SULE: We have serious concerns about it. That is all we are trying to flag.

          The other point which Prof. Ray made, which the hon. Finance Minister also clarified is about the money given to the poor. I think the point which Prof. Ray was trying to make is, the amount of investment made in these accounts were started during the UPA. You were also a part of this House that time when Chidambaram Ji talked about every household and every citizen of India having an account. It was started at that time. Anyway, governance is a continuous process. It is not about ‘you did it, so we did it’. We started and it continued. We are very flattered that you took a few of our policies ahead. We are happy about it. But the point he was trying to make is Rs. 6,000 is not good enough. You gave Rs. 500 three times. It come to a total of Rs. 1,500 which is really not enough. So, I think the point he was trying to make was it is chicken feed. We need a lot more money to be invested in the system for the economy to boom. Otherwise, it is not going to take off.

          The other point he made was about petrol and diesel. I will not go into it. He has already spoken about it. But I would like to make a small intervention about LPG, which is very, very important. I am so glad that there is a lady sitting at the helm of affairs. So, she will probably understand this much faster than any other man. I do not want to get into the gender trap but we do balance our homes. I still remember the hon. Prime Minister had come for Ujjwala Yojana Programme to Maharashtra. It was a very big programme. We were also excited about it. अच्छे को तो अच्छा बोलना ही चाहिए, if he was doing it with the right intention. He had given 8 crore Ujjwala Yojana connections. A connection was given in Maharashtra. In this regard, a story was done by Mr. Krishna Kende. I would like to thank him because he did this story very effectively. He said there was a lady, called Ayesha Shaikh who lived in Ajanta. She said that सिलेंडर तो पहली बार मिल गया, लेकिन अभी उसका भाव 800 रुपये है । जिस घर में वह रहती है, उसका भाड़ा 600 रुपये है और सिलेंडर का भाव 800 रुपये है । अभी वह घर में रहे या सिलेंडर पर खाना पकाकर खाए । You need to clarify this stand. There is another lady Mandabaifrom Paithan. I am purposely giving the names. They are not hypothetical. This is about the Ujjwala Scheme. जब कैबिनेट मिनिस्टर हैकल कर रहे हैं, तो अब पालिर्यामेंटरी डेमोक्रसी में कुछ बचा ही नहीं ।

          So, this Mandabai from Paithan and Ayesha Shaikh from Ajanta were given certificates under the Ujjwala Yojana by the Government. So, I would like to seek this clarification from the Government. The hon. Minister of State for Finance in one of his interventions, I think, last week said that States must help and that the State Governments and the Central Government should work together in reducing petrol and diesel prices. The problem is the GST money has not come. So, States do not have money for their social welfare programmes.

हमारे जो गरीब हैं, शोषित हैं, पीड़ित हैं, वंचित हैं, उनके लिए जो सोशल सेक्टर प्रोग्राम्स हैं, आपने जो जीएसटी का पैसा नहीं दिया है,डिले किया है,उसकी वजह से उनके सारे प्रोग्राम्स रुके पड़े हैं । आज पैनडेमिक के कारण जो डिजिटल डिवाइड हो रहा है,उसमें हमारे पैसे नहीं जा पा रहे हैं । अगर सरकार को पेट्रोल और डीजल में भी दस पैसे मिल रहे हैं, अगर हम वह भी दे देंगे, तो स्टेट्स के पास खाने के लिए भी मुश्किल हो जाएगी ।

          So, I think this Government needs to be a little more emphatic and should really see the numbers before they ask us to make such interventions. So, I make a humble request to the hon. Minister to help us with this GST relief.

          Then, there is a very interesting speech which hon. Member from BJP, Shri Tapir Gao, made. He made some very interesting observations. He talked about vaccinations and he said that Prime Minister facilitated creation of vaccines under the Aatmanirbhar Bharat programme. I am very happy about it. It does not really matter who takes credit for it. But I just want to tell him that the companies that he talked about, which produced the vaccines under the Aatmanirbhar Bharat programme on the Prime Minister’s initiative, were all started in seventies. 

जब वर्ष 1970 में सीरम इंस्टीट्यूट बना था,वह कंपनी पुणे में है । एवरी चाइल्ड ग्लोबली, चाहे पोलियो ड्रॉप्स हो या कुछ और हो,ऐसी सभी वैक्सीन्स महाराष्ट्र के पुणे डिस्ट्रिक्ट में बनती हैं । जरूर आत्मनिर्भर भारत है,लेकिन यह 1980 वाला आत्मनिर्भर भारत है ।…(व्यवधान)

Since I am short of time, I do not want to get into the details. But I want to ask a pointed question to the hon. Minister. You have sanctioned Rs. 35,000 crore for vaccination. So, when we have enough vaccines available in India, why has this not become a full-fledged process? I want to ask him this. Why are we not going for universal vaccination which is the need of the hour? In States like mine, and Karnataka where you are ruling the cases are going up. So, why is universal vaccination not being encouraged when you have Rs. 35,000 crore already allocated?

          Then, the same Member was talking about Defence. I just want to flag it very quickly because I am short of time. In Defence – please get it on record – the money allocated for Air Force and Navy has gone down. It has not gone up.

          Then, Shri Bharat Margani talked about MNREGA. I think the hon. Finance Minister has already stated that the Government may increase the spending on MNREGA if the necessity arises. I would like to ask a pointed question that why have you not got in the Supplementary Demands for Grants when MNREGA is under this kind of pressure. The demand is there. Then, why is the Government not being pro-active? 

          We appreciate the interventions made by the Government. Three Departments worked exceptionally well during these challenging times. One was the Ministry of Railways, the Food Department and the Ministry of External Affairs. We are very grateful for the work they have done for us in feeding the poor. But there is no clarity in this Budget vis-à-vis FCI. The FCI will have to resort to further borrowing from NSSF, possibly to the tune of Rs. 150 crore. You see what is happening in Punjab and Haryana. There is so much unrest on this. But there is no clarity on FCI. So, I would request the hon. Minister to clarify this. I would request him to find a solution for cooperative federalism.

          I would like to ask a pointed question on health. Are you committed to universal vaccination in this country or not? I expect you to address that in your reply. Thank you for your indulgence. 

SHRI BHARTRUHARI MAHTAB (CUTTACK): Thank you Madam Chairperson. This is perhaps for the third time that we are discussing finance after the Indian economy was negatively impacted by the unprecedented health crisis in 2020-21.

          Today, I was going through a newspaper article which says, “Recovery continues, but losing tempo”. I think the hon. Minister during his reply to the debate today will spell out the reasons why the tempo that was seen some weeks earlier is losing its tempo.

          The main thing, while going though different aspects, surrounds 95 Departments and other sections of respective Ministries. I find most of the allocations are relating to how to meet the expenditure which has been impacted because of COVID-19. Here, the stimulus package is actually under discussion today when we are discussing about the Second Supplementary Demands for Grants and three four Ministries actually come to light. One is Department of Fertilizers where around Rs. 65,411 crore has been allocated. Another Department is Food and Public Distribution where around Rs. 3,00,000 crore has been allocated. The next is transfer to States especially devolution and also relating to GST.  The loan that was incurred by the Union Government through open window of RBI is around Rs. 1,22,000 crore. The allocations for Health and Family Welfare Department is Rs. 22,000 crore, for Road Transport and Highways, it is 16,222 crore, for Rural Development it is Rs. 33,000 crore. These are the major Ministries which have got the lion’s share. Here, I would like to mention that this second batch of Supplementary Demands for Grants for 2020-21  includes 79 grants and two appropriations. The main reason for high grants is mainly stimulus package. To maximize investment in road and transport, an additional Rs. 5,030 crore has been sought for investment in National Highways and Bharatmala Pariyojana. Another Rs. 4970 crore has been sought for road development and cash outgo of Rs. 3,457 crore. To augment health infrastructure is the best thing which this Supplementary Budget is dealing with because that has actually gone down.  So, I would like to tell that every State Government including the Central Government should invest more to develop our health infrastructure and Rs. 1497 crore has been granted under Pradhan Mantri Swasthya Suraksha Yojana despite the major part of it going to insurance sector. According to supplementary grants fresh cash allocation of Rs. 65,000 crore has been proposed for fertilizers. I will come to that aspect a little later. The Government has not increased the maximum retail price of urea which was raised from Rs. 4,830 to Rs. 5,310 per tonne in April, 2020. The fertilizer industries, however, be relieved to see its past subsidy payments dues getting cleared from the Centre in one shot. The revised estimate of fertilizer subsidy for 2020-21 to the tune of Rs. 1,33,947.30 crore in a way is much much above the originally budgeted amount of Rs. 71,309 crore. This is the amount that the industry expects from the Government. Of course, this a great relief being provided through this Supplementary Budget and that is a relief to the industry.

          Between October 2020 and January, 2021 the average landed cost, the cost plus freight price of imported urea has risen by around USD 46 per tonne. An interesting issue has come to light which I would like to share in this House. Until recently the Centre was following a `no denial policy’. It means anybody could purchase any quantity of subsidized fertilizers through Point of Sale machines that is available with the retailers. This allowed for bulk buying by even non-farmers.  I fail to understand what they were doing because most of the urea is neem coated. In August, 2020, a limit of 100 bags -- the most that a person could buy at a time -- was introduced. There were no curbs on how many times anybody could buy in a month or during a full crop season. From 15 January onwards this year, the Government has imposed an upper limit of 50 bags per month per person. Nobody can purchase more than this quantity of subsidized fertilizer in a given month against his or her Aadhaar. Against the background of ongoing agitation against the three farm laws, it is not surprising. But still, I think that we have to plug the loopholes as it is necessary.

          The second point here is that the Government is to infuse Rs. 3,000 crore capital into State-owned General Insurance Companies during the current quarter in a bid to improve their financial health. The capital infusion will enable the three public sector General Insurance Companies to improve their financial and solvency position; meet the insurance needs of the economy; absorb changes; and enhance the capacity to raise resources and improve risk management.

          Let us pause for a moment. It is because the most worrying news has come in February-March of this year. Maharashtra is again showing the biggest spike. Now is the time to step-up vaccination. My previous speaker just now mentioned : “Why not universalise it?”. Economy needs the working-age population to move freely, which means cohorts between 18 and 65 and working parents need school / colleges to stay open.

          The first worrying point is that rural consumption should tick along nicely. There are worries about urban consumption demand both from the working class and the white-collar class. The big deterrent is the job market. Three factors are crucial in it. One is re-employment chances of those who lost job in 2020 or are losing even now in 2021. Two, the service sector is still under-performing. Three, the level of discretionary demand for high value items for which though the demand is there, yet much will depend on wages and salaries.

          The second worry is the banking system’s capacity to supply short-term credit, which has to be in a very smooth way and about which we are not talking at all. The stimulus measures and reforms initiated by the Government and liquidity measures by the RBI are expected to support industrial activity and demand. Let us hope for the best. उम्मीद पर जिन्दगी कायम है । धन्यवाद ।

SHRI SAPTAGIRI SANKAR ULAKA (KORAPUT): Thank you, Madam Chairman, for giving me this opportunity to speak on the Supplementary Demands for Grants - Second Batch for 2020-2021.

          Before I start on the Supplementary Demands, let me just have a word about the Budget, which basically turned into an election manifesto where the focus was only on four States. There are about 25 other States, which did not find any mention in it.

          As regards these promises also, let me remind even Modi ji that when he went to Bihar in 2015, he said Rs. 70,000 crore, Rs. 80,000 crore, Rs. 1,25,000 crore. Again, if you look at the actuals, it only turned out to be Rs. 1,559 crore. So, again it is going to be a jumla in the Budget that they have successfully propagated, but the people are too clever to fall in this trap.

          Let me talk about the economy. The hon. Finance Minister had said that only thrice before has a Budget followed a contraction in the economy. Let me remind him that the economy contracted much before the COVID pandemic and the lockdown. If you see the GDP growth, it has been on a downward slide since the financial year 2017 with an 11-year low of 3.1 per cent even before the pandemic hit. The unemployment rate at that time was 6.1 per cent, which was really alarming. When the lockdown was announced by the hon. Prime Minister within four hours, he announced a Garib Kalyan Yojana valued at Rs. 2.76 lakh crore.

          Madam, to be honest, we are the people on the ground, we don’t see how the money has reached the people. The actual amount from this package, the maximum would be Rs.76,000 crore, which is mainly from the MGNREGA – the allocation of MGNREGA or the food subsidy under the PDS.  All this amount of Rs.2.7 lakh crore is nothing but another … (Not recorded) by this Government. About the Atmanirbhar package, first they announced that it is about Rs.27.1 lakh crore, 13 per cent of the GDP; and then Rs.29.87 lakh crore. Maybe, the Finance Minister can clarify as to what was the package and whether they are reshaping the budget which was considered as the Atmanirbhar package.

          On health and well-being, it was announced in the Budget with chest thumping – Rs.2.23,846 crore in BE 2021-22 but again when we look at the actuals, it was not more than Rs.60,000 crore. With health, sanitation, drinking water, nutrition and other things were added.

On disinvestment, this Government is hell-bent on disinvesting Air India, LIC and other things. Let me come back to a different point, the target for disinvestment was reduced by 16.67 per cent or Rs.1.7 lakh crore between BE 2020-21 and 2021-22. They have been targeting disinvestment but actually कुछ नहीं हो रहा है,एयर इण्डिया कोई खरीद नहीं रहा है । आप ट्राई कर रहे हैं । This is impacting the fiscal deficit. So, what they are doing is this.  They are just having the numbers but they don’t have a strategy or a plan. How are they going to disinvest? हम तो मना कर रहे हैं, लेकिन आप खुद बोल रहे हैं, डिसइन्वेस्ट कर रहे हैं । आप कैसे करेंगे, यह भी हमें बता दीजिए ।

एक सेस लगाया है । This is Agriculture Infrastructure and Development cess. Now, they are telling that this won’t impact the common man.  यह सेस लगाने से पहले आप देखेंगे कि पेट्रोल, डीजल के प्राइस ऑलरेडी बढ़ा चुके थे । It was around Rs.90. वह कम करके, फिर से सेस लगा दिया कि लोगों को पता नहीं चलेगा । This has again resulted in inflation. अभी एलपीजी का एग्जाम्पल दे रहे थे । I was in a meeting with the District Collectors. उसका प्राइस 840 रुपये हो गया है । Anganwadi Centres can’t afford the prices and finance the LPG. What we decided is this. डिस्ट्रिक्ट मिनरल फण्ड से हम एलपीजी गैस खरीदने के लिए पैसा देंगे । यह हाल है ।

On fiscal deficit, I understand that Corona was there; lockdown was there but we expected that it would be around eight per cent but it went up to nine per cent.

One important thing which I want to highlight here is that they also conducted off balance sheet borrowings to the tune of Rs.1.5 lakh crore annually by PSU agencies like NHAI, FCI. यह बहुत दिनों से चल रहा है । They would manage in the fiscal deficit. सडनली अब कोरोना है । They have offloaded without including it in the budget. But again, this is a strategy.

In the rural sector, MGNREGA was the only saving grace for the Government and we expected that the allocation for MGNREGA would cross Rs.1 lakh crore. But unfortunately, that was not to be. It is still around Rs.73,000 crore. सप्लीमेंट्री डिमाण्ड्स में अगर मनरेगा के लिए बढ़ा देते तो बहुत अच्छा होता ।

There was a colleague of mine who said the backward districts of Andhra Pradesh, if it is treated as KBK districts, it would be beneficial. केबीके डिस्ट्रिक्ट्स के लिए जो केन्द्र सरकार फाइनेंस कर रही थी,आपने 2015-16 से वह फण्ड बंद कर दिया है । केबीके डिस्ट्रिक्ट्स के लिए कोई फण्ड नहीं आ रहा है ।The Aspirational District framework is not at all working.

On the Ministry of Defence, an hon. Member was saying that we have increased its budget allocation.  But it was only increased by 1.4 per cent, which is really not sufficient. On pollution, the Government has allocated Rs.2,217 crore for 42 urban centres.  For one smart tower, it would cost around Rs.20 crore but again, they have reduced it.

About telecommunication, which is the most important thing, I say that we are living in two different worlds. मैं अपने एरिया रायगढा और कोरापुट जिलों की बात कर रहा हूं । We don’t have mobile towers. आप नेशनल एजुकेशन पॉलिसी लाइए, डिजिटल एजुकेशन लाइए, वन नेशन, वन मिशन, nothing will work because there is no mobile connection at all. If you look at the telecommunications, the Department was allocated Rs.58,737 crore, which is an increase of 40 per cent annually but they are not spending  the allocated budget. What they have done is this. The allocation towards the majority of the components of revival plan, which were meant to revive the BSNL and MTNL, they have shifted to the budget for 2021-22. So, we need a direction from the Government. यह कैसे करोगे?

          It is mainly the Universal Service Obligation Fund. Unless and until you do something proper for telecommunication, it is going to be a challenge. I will give you an example of my constituency. There is Lamtaput Block in my constituency. I have visited that village. It falls in the border area where Left-Wing Extremism exists. वहां के बच्चे पहाड़ पर जाएंगे और मोबाइल टावर का सिग्नल पकड़ेंगे । There are bear attacks. It is a danger to their lives. They cannot study. Why is the Government silent on this subject? I have raised this issue multiple times. आप वह कर लीजिए और आप वह नहीं कर पा रहे हैं तो उसे जीयो को दे दीजिए, कम से कम मोबाइल टावर वहां आए । That is the only demand which we have.

          The utmost fear today in the country is of gloom and doom. …(व्यवधान) हम नहीं चाहते हैं, हम चाहते हैं कि आप अपना काम करें । अगर आप वह नहीं कर पा रहे हैं, तो कुछ और बताइए । केवल चुप रहने से कुछ नहीं होगा ।…(व्यवधान)

श्री    अनुराग  सिंह ठाकुर:हम कंपनियों को देने की  बात  करते  हैं,  तो  आप  विरोध    करते    हैं ।…(व्यवधान)

 

श्री सप्तगिरी शंकर उलाका : हम उसका विरोध करते हैं । यह …*  सरकार है । आप जवाब दीजिए कि मोबाइल कनेक्टिविटी क्यों नहीं है? एफसीआई का क्या हाल है?

HON. CHAIRPERSON : Please, wrap it up.

SHRI SAPTAGIRI SANKAR ULAKA: If I get heckled like this, how will I complete my speech?…(Interruptions)

HON. CHAIRPERSON: Please do not get distracted, just focus on what you have to say and wrap it up.

श्री सप्तगिरी शंकर उलाका : आप इस बजट से बेरोजगारी का कैसे सॉल्युशन करेंगे, यह बताइए । आत्म निर्भर भारत ने क्या मैन्युफैक्चरिंग रेज किया है?…(व्यवधान) This is around 9.1 per cent. यह अभी की बात नहीं है,जब से मोदी सरकार स्टार्ट हुई है,यह तब से है । वर्ष 2014-19 तक माइन्स सिक्स पॉइंट वन (-6.1) परसेंट था । आपको कोरोना ने बचा दिया है । कोरोना के लिए सब कुछ हो रहा है । The utmost fear in the country today is of gloom and doom. One could hope that the BJP Government would come up with a package to stimulate demand. आप जब तक डिमांड नहीं करेंगे, हम लोग ‘न्याय योजना’ लाए थे । गरीब परिवारों को छ:-छ: हजार रुपए दे दें । आप फाइव ट्रिलियन डॉलर इकोनॉमी की बात कर रहे हैं, वह कहां गया? I am just wrapping up. This is my last submission. मैं अंत में शायरी बोल कर अपनी बात समाप्त करता हूं । अनुराग ठाकुर जी आप भी सुनिए :

“तू इधर-उधर की बात न कर, ये बता कि क़ाफ़िला क्यों लूटा मुझे रहज़नों से गिला नहीं, तेरी रहबरी का सवाल है ।”             This Government is …* श्री अजय टम्टा (अल्मोड़ा):सभापति महोदया, आपने वर्ष 2020-21 के दूसरा बैच पर चर्चा तथा मतदान पर बोलने का अवसर दिया है,इसके लिए मैं आपको बहुत-बहुत धन्यवाद देना चाहता हूं । साथ ही,जिस प्रकार से यशस्वी प्रधान मंत्री, नरेन्द्र भाई मोदी जी, माननीय वित्त मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण और एमओएस अनुराग ठाकुर जी के नेतृत्व में डिजिटल बजट के साथ-साथ आज अनुपूरक अनुदानों की मांगों पर चर्चा चल रही है । जैसा कि हम सभी लोग जानते हैं कि किस कठिनाई के काल खंड को पूरे विश्व और हम ने देखा है । एक साल तक हम ने उस समय को मीडिया के माध्यम से विभिन्न स्तरों से देखा है । यह 130 करोड़ की जनता का देश है । पूरे देश-दुनिया के लोग यह जानना चाहते थे कि अगर यह बीमारी भारत में आएगी तो भारत उससे कैसे निपटेगा?जिस तरह की हमारी रहन-सहन की व्यवस्थाएं हैं, यहां बहुत कठिनाइयां हैं, तो इस चुनौती का सामना करना पड़ेगा । यह हमारा सौभाग्य है कि नरेन्द्र भाई मोदी जी के मार्गदर्शन को देश की 130 करोड़ जनता द्वारा,उसमें पक्ष-विपक्ष एवं सभी लोग हैं,बॉर्डर एरिया से लेकर देश के पूरे भू-भाग में अक्षरश:पालन किया गया,जिसके कारण आज हम सभी लोग जिंदा हैं । हम लोग बहुत घबराए हुए थे कि क्या होगा? हम सभी के ध्यान में है कि जब भी इस प्रकार की बीमारी आती है,तो देश की व्यवस्थाओं का संचालन करने के लिए बहुत सारी कठिनाइयों का सामना भी करना पड़ता है,मगर उन सभी कठिनाइयों को सहजता के साथ,सरलता के साथ हर बार माननीय प्रधान मंत्री जी के मार्गदर्शन में, देश के सभी लोगों ने मिल कर इस प्रकार की भयावह स्थिति के समय में भी सभी को संभाला है । हर व्यक्ति के लिए भोजन से लेकर हर घर में पैसा आने तक की कठिनाइयों को दूर करने की कोशिश की गई है । जैसा कि अनुराग जी ने अभी कहा है कि हर व्यक्ति के खाते में पैसा भेजने का अवसर मिला है, किसी प्रकार की कोई कठिनाई नहीं हुई ।
          हम लोग सौभाग्यशाली हैं कि जब भी इस प्रकार की समस्याएं देश में उत्पन्न होती हैं, तो हम लोग देश की स्वास्थ्य सेवाओं को बड़ी गहराई से देखते हैं । पूरे देश में सारी सुविधाओं के साथ माननीय प्रधान मंत्री जी के नेतृत्व में माननीय स्वास्थ्य मंत्री जी ने बढ़ाने का काम किया है । सुविधाओं को सुसज्जित करने का काम किया है ।
          मेरा लोक सभा क्षेत्र एक बार्डर जिला है । चार जिले नेपाल, चाइना, तिब्बत से लगे हुए हैं । मेरे लोक सभा क्षेत्र में एक भी वेंटिलेटर नहीं था । आज मेरे लोक सभा क्षेत्र में 42 वेंटिलेटर्स हैं । उनके लिए प्रशिक्षित लोग भी हैं और अन्य लोगों को ट्रेनिंग भी दी जा रही है । डिजिटल एक्सरे की मशीनें नहीं थीं, आज लोगों को उसके लिए भी प्रशिक्षण दिया जा रहा है । मुझे ऐसा लगता है कि जो इतनी सारी समस्याएं आईं, उनके कारण हमारी स्वास्थ्य की सुविधाओं को वर्षों से जो दल इस देश में सत्ताधारी था,वह संभवत: समझ भी नहीं पाएगा कि इन सब को कितनी बेहतरी के साथ संभालने का अवसर हुआ है । माननीय प्रधान मंत्री जी के मार्गदर्शन में हम आने वाले समय के लिए भी पुष्ट हैं कि हम इस भयंकर बीमारी से जीतेंगे और देश को आगे बढ़ाने का काम भी करेंगे ।
          हम सौभाग्यशाली हैं कि इतनी कठिनाइयों में जब बजट रखने की स्थिति भी नहीं होती है,तब भी बजट रखा गया और आज अनुदानों पर अनुपूरक मांग भी आई हैं । मैं इसी दिशा में यह कहना चाहता हूं कि अनुपूरक मांगें चौतरफा विकास की दृष्टि हैं । अनुपूरक मांगों के केन्द्र में गांव और किसान हैं । आत्मनिर्भरता के रास्ते पर आगे बढ़ता हुआ, दुनिया में एक नया आत्मविश्वास भरने वाला है । इसमें गांव, गरीब, किसान, महिला, युवा, बुजुर्ग तथा कारोबारी ये सभी शामिल हैं । अनुपूरक मांगों में बुनियादी संरचनाओं का विकास है । सड़क, परिवहन, सुरक्षा, रक्षा सहित सभी आर्थिक शक्तियों को सुदृढ़ करने की बात भी अनुपूरक मांगों में आई है ।
          मैं बताना चाहता हूं और यह आप लोगों के भी ध्यान में है कि किस तरह गैस सिलिण्डर देने का काम हुआ है । देश के लोगों के लिए स्वास्थ्य में जो अच्छी सुविधाएं हो सकती हैं और सभी लोग आज की जीवनशैली के अंतर्गत जी सकते हैं, तो सभी को चूल्हा और गैस देने का काम किया गया है । संभवतः मेरा क्षेत्र करीब 85 प्रतिशत का वन क्षेत्र है । यह हम लोगों के लिए एक महत्वपूर्ण बात है कि पूरे देश में जो पानी, ऑक्सीजन और पर्यावरण है,वह कहीं न कहीं हिमालय क्षेत्र, नॉर्थ-ईस्ट, उत्तराखंड, जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश आदि पर भी उसका प्रभाव पड़ता है । इससे पर्यावरण पर दिक्कत नहीं आनी चाहिए । आज हमारी हर बहन के पास गैस के कनेक्शंस उपलब्ध हैं । उन सभी को भी इस अनुपूरक मांग के द्वारा सुविधाएं दी गई हैं ।
          इसके साथ ही मैं यह भी बताना चाहता हूं कि जहां हम किसानों की बात करते हैं, तो देश में पहली बार किसानों की आय बढ़ाने की चिंता माननीय प्रधान मंत्री जी ने की । उसका प्रतिफल भी मिला है । हमारे पास अन्न का भंडार है,हमारे पास किसी प्रकार की कमियां नहीं हैं । पहले दलहन, सब्जियों, कैश क्रॉप्स, हॉर्टिकल्चर्स आदि की कमियां रहा करती थीं । आज मेरे क्षेत्र में मैं जानता हूं कि वहां लोगों की आय बढ़ी है,उसका एक बड़ा स्वरूप देखने को मिला है ।
          6,000रुपये लोगों को कम लगता होगा, लेकिन जो छोटी जोत के किसान हैं, जिनके पास 2 नाली, 3 नाली या 4 नाली जमीन है और बहुत सारी जमीनें नहीं होने के बावजूद भी वह 6,000 रुपये के माध्यम से अपनी जमीन पर हल चला सकता है । जानवरों के कारण उसकी जो फसल खराब हो जाती थी,उसे वह बचा सकता है । उसके लिए वह 6,000 रुपये बहुत ही महत्वपूर्ण हैं । अगर हम बड़े-बड़े किसानों के नजिरये से देखेंगे, तो आप नहीं देख पाएँगे । वास्तव में गरीब किसानों के दिल को जीतने का काम अगर किसी ने किया है,तो वह श्री नरेन्द्र मोदी जी ने किया है ।
          मैं आपके माध्यम से यह बताना चाहता हूं कि आज ग्रामीण विकास नीति की राशि को 30,000 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 40,000 करोड़ रुपये करने का काम किया है । आज 250 के कलस्टर, जिन गांवों में लोगों ने कभी रोड नहीं देखी थीं, गाड़ियां नहीं देखी थीं, आज उनके घरों तक गाड़ियां और बस जाती हैं, जिन्हें कभी 8 -10 किलोमीटर पैदल जाना पड़ता था । अगर किसी को गांव से हाट या बाजार   जाना होता था,तो उसे 2 दिनों का समय लगता था,आज उसे 2 दिन का समय नहीं लगता है । मैं यह कहना चाहता हूं कि हम सभी को इस पर विचार करना चाहिए ।
          अभी दादा बोल रहे थे कि हम परेशान हैं । दादा हमारे मार्गदर्शक हैं, हम उनसे भी बहुत कुछ सीखते हैं । मैं उत्तराखंड राज्य का व्यक्ति हूं । उत्तराखंड राज्य में देश और दुनिया से लोग पर्यटक के रूप में आते हैं । प्राकृतिक सुंदरता उत्तराखंड और हिमालय से सटे सभी राज्यों में भरपूर है । लेकिन उत्तराखंड से कनेक्टिविटी अच्छी होने के कारण और दूरी कम होने के कारण आज पूरे देश से यहां टूरिस्ट आते हैं । हमारे पश्चिम बंगाल से भी लोग उत्तराखंड में आते हैं । जब मैं उनसे पूछता हूं, तो वे कहते हैं कि आपका राज्य बहुत सुंदर है । आज ऑल वेदर रोड के माध्यम से हम मैदान से पहाड़ों की चढ़ाई 2 से 3 तीन घंटों में पूरी कर लेते हैं, पहले 10 से12घंटे लग जाते थे ।
16.00 hrs मैं पूछता हूँ,क्यों?तो,वे कहते हैं,हम अपने राज्य से परेशान हैं । हम अपने राज्य की आठ-दस महीने की परेशानियों को दो-तीन महीने में दूर करने आ जाते हैं । यह पूरे देश भर के लोगों का है । यह ऑल-वेदर रोड है,भारतमाला है ।

        मैं पूरे सदन के सदस्यों से निवेदन करना चाहता हूँ कि आप उत्तराखण्ड राज्य आइए । आपको देश में स्विट्जरलैंड की तर्ज पर चार धाम के रोड्स मिलेंगे,जिनसे आप धामों के दर्शन करेंगे । धामों के दर्शन करते हुए,कुमांऊ,नैना देवी आदि के दर्शन करते हुए,आप 12 धामों के दर्शन करेंगे । ऐसा मेरा मानना है । आपको स्वयं ही एहसास हो जाएगा कि आजादी के बाद भारत का चित्रण और दर्शन वास्तव में श्री नरेन्द्रभाई मोदी जी के मार्गदर्शन से बदल रहा है । इसलिए हम यह कह सकते हैं कि मोदी जी हैं, तो मुमकिन है ।

        माननीय सभापति जी, मैं इस सत्र में बोल नहीं पाया हूँ, इसलिए अगर आप मुझे बोलने का थोड़ा और अवसर देंगे, तो मुझे अच्छा लगेगा ।

        मैं आपको विश्वास दिलाना चाहता हूँ कि मेरा लोक सभा क्षेत्र,जो कि एक बहुत ही महत्वपूर्ण लोक सभा क्षेत्र है । कैलाश मानसरोवर का मार्ग बॉर्डर का मार्ग है, जहाँ 20 साल से सड़कें नहीं बन पाई थीं । लेकिन आज हम पहली बार लिपुलेख दर्रे तक गाड़ी से जाते हैं । यह कनेक्टिविटी है । मैं कहता हूँ कि आज रेलवे की ऐसी स्थिति है, जिसके कारण समय की बहुत बचत हो रही है क्योंकि अच्छे ट्रैक्स बिछ गए हैं । आज हम कहते हैं कि पीलीभीत,भोजीपुरा और टनकपुर को जोड़ने वाला मेरा लोक सभा क्षेत्र पहली बार रेलवे-कनेक्टेड हुआ है,पहली बार मेरा लोक सभा क्षेत्र एयर-कनेक्टेड हुआ है । इसके कारण मैं आज कह सकता हूँ कि आप सीधे हिमालय में प्रवेश कर सकते हैं । आप दिल्ली से एक घंटे के अंदर पिथौरागढ़ के एरिया में जा सकते हैं ।

        इसलिए मेरा मानना है कि प्रधानमंत्री जी के विज़न को सफल करने के लिए हम लोग लगातार आगे बढ़ें ।

हम शिक्षा के क्षेत्र में भी बहुत आगे जा रहे हैं ।…(व्यवधान)

माननीय सभापति:थैंक यू, अजय जी ।

श्री मलूक नागर (बिजनौर):माननीय सभापति महोदया, आपका बहुत-बहुत धन्यवाद,आपने मुझे बोलने का मौका दिया ।

        हम देख रहे हैं कि सदन में अपने-अपने प्रदेशों की, अपने-अपने लोक सभा क्षेत्रों की बातें हो रही हैं । मैं कहना चाहता हूं कि पिछले दिनों शिव सेना के हमारे साथी लोग मांग कर रहे थे कि नागपुर से मुम्बई के लिए एक बुलेट ट्रेन जल्दी चलाई जाए । उसका क्या तरीका है, इसके बारे में उन लोगों ने जानकारी मांगी थी । मंत्री जी ने वक्तव्य दिया कि अहमदाबाद से मुम्बई तक बुलेट ट्रेन का काम चालू है और यह बहुत जल्दी देखने को मिलेगा । गुजरात की बात भी हो रही है,महाराष्ट्र वाले महाराष्ट्र की बात भी कर रहे हैं । हमारा प्रदेश उत्तर प्रदेश है, जहाँ देश की सबसे ज्यादा 80 लोक सभा सीटें हैं और जहाँ से माननीय प्रधानमंत्री जी चुनाव लड़ते हैं । उसे भी उनको जरूर कंसीडर करना चाहिए । यहाँ पर गिरिराज जी बैठे हैं, बिहार को भी साथ मिला लें, तो बहुत लम्बा-चौड़ा क्षेत्र हो जाता है । इसलिए यूपी और बिहार को जरूर कंसीडर करना चाहिए ।

        यहाँ इलाहाबाद है, जहाँ से देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू थे, यहाँ से प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी जी रही हैं,वहाँ एक छोटी-सी फ्लाइट एक ही बार जाती है । राजधानी लखनऊ में,जहाँ सरकार के लोग कई बार जाते रहते हैं ।…(व्यवधान) अमेठी को स्मृति ईरानी जी के लिए छोड़ रखा है ।…(व्यवधान)गिरिराज जी, मुझे माफ कीजिए,मुझे बोलने दीजिए ।…(व्यवधान)

        लखनऊ के लिए कोई ऐसी व्यवस्था हो ताकि वह देश की मुख्यधारा से जुड़ सके । अहमदाबाद,मुम्बई,दिल्ली,कोलकाता,मद्रास की तरह लखनऊ के बारे में भी सोचा जाए ।

        पश्चिमी उत्तर प्रदेश,जहाँ से मैं चुनाव जीतकर आया हूँ । हमारे साथियों की आंधी,जो पूरे गुजरात से उठी,पूरा गुजरात इनका, राजस्थान इनका, पूरा हरियाणा इनका, पूरी दिल्ली इनकी, मेरे बराबर वाली प्रधानमंत्री जी की सीट भी इनकी,  मेरी पहली सीट है, जहाँ मुझे बड़ी मुश्किल से छोड़ा है । पहले मैं कई बार हार चुका था । इसलिए मैं कहना चाहता हूँ कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश में, जहाँ से उत्तर प्रदेश के लिए मैक्सिमम रेवेन्यू जाता है,वहाँ से हमारे जितने भी साथी हैं,अभी राजेन्द्र अग्रवाल जी, संजीव बालियान जी, डॉ.सतपाल जी नहीं हैं, अगर ये लोग यहाँ पर होते, तो वे भी कहते । जितने भी एमएलए और एमपी चुनाव लड़ते हैं,वे सब लोग चुनाव में वायदा करते हैं कि अबकी बार चुनाव में जिता दो,हम मेरठ में हाई कोर्ट की स्थापना कराएंगे ।

        अभी तक केवल इमरजेंसी केसेज़ ले रखे थे । अब वहां से लोग इलाहबाद जाते हैं । यह बहुत बड़ी समस्या है, जो कि देश की आजादी के तुरंत बाद से ही शुरू हो गई थी । मैं कहना चाहता हूं कि सरकार इस ओर सहानुभूतिपूर्वक सोचे । 27 एमपी और 143 एमएलएज़ पश्चिमी उत्तर प्रदेश से जीतकर आते हैं,इसलिए वहां हाई-कोर्ट की स्थापना जरूर कराई जाए ।

        अभी हस्तिनापुर की बात हो रही थी । हस्तिनापुर के बारे में बहुत लोगों को इस बात की जानकारी नहीं होगी,उन्हें पहली बार जानकारी मिलेगी कि हस्तिनापुर और चंडीगढ़ की नींव पूर्व प्रधान मंत्री माननीय जवाहरलाल नेहरू जी ने एक ही दिन रखी थी । चंडीगढ़ से हमारे साथी डिम्पा साहब यहां बैठे हैं,बिट्टू जी भी बैठे हैं । वहां तो बढ़िया डेवलपमेंट हो गया,लेकिन इन कांग्रेसियों ने पिछले 70 वर्षों में कभी भी हस्तिनापुर के बारे में कुछ नहीं सोचा । हस्तिनापुर के चारों तरफ करीब 3-3.5 लाख पिछड़े गुर्जर हैं, जिनके साथ थोड़े जाट, पाल,सैनी और कश्यप हैं, यादव बहुत कम हैं । इन लोगों की वजह से उस पर ध्यान नहीं दिया,वोटे ले लिए,सरकार बना ली,पिछड़े हुए 54 परसेंट,तुम जहां जाते हो जाओ,उनके बारे में कांग्रेस ने कभी नहीं सोचा ।

        हम साथियों को धन्यवाद देना चाहते हैं । इन्होंने पिछले बजट में करीब 750 करोड़ रुपये हस्तिनापुर के लिए रखे हैं । मैं एक बात और कहना चाहता हूं कि ये 750 करोड़ रुपये भी वहां के हिसाब से कम हैं । वहां और ध्यान दिया जाए,क्योंकि पूरे वर्ल्ड में आप कहीं भी जाएं, चाहे यूके में जाओ, यूरोप में जाओ,यूएस में जाओ,वर्ल्ड के किसी भी कोने में पहुंच जाओ, तो लोग हस्तिनापुर के बारे में कहते हैं कि वहां महाभारत के अर्जुन,भीम,भगवान कृष्ण जी थे, लेकिन वहां जाकर देखो तो केवल टूटे हुए अवशेष मिलते हैं । वहां कला परीक्षितगण है, जहां राजा नैन सिंह थे,जो गुर्जर थे । उनके वंशज हैं, वह किला अभी भी है । वहां बराबर में एक कस्बा है । वह कस्बा मेरी लोक सभा में आता है,इसलिए मुझे पता है ।

राजेन्द्र अग्रवाल जी का लोक सभा क्षेत्र पूरा मेरठ है । मेरठ की हस्तिनापुर विधान सभा,जहां की मैं बात कर रहा हूं,वह मेरी लोक सभा का हिस्सा है, इसलिए मैं उसके बारे में जानता हूं । मैं वहां से विधायक रहा हूं । मैं कांग्रेस से विधायक रहा हूं,इसलिए इन्हें इच्छी तरह से जानता हूं । मैं विधायक रहा हूं,मैंने यूथ-कांग्रेस में भी काम किया है, मैं इनका साथी रहा हूं । मैं यह कहना चाहता हूं कि हस्तनापुर से अगर आप सीधी ट्रेन मुंबई ले जाएं,तो बहुत अच्छी बात है । नागपुर से सुप्रिया जी बैठी हैं, अगर ये ट्रेन को मुंबई लो जाएं तो बहुत अच्छी बात होगी, लेकिन कम से कम आप दिल्ली से हस्तनापुर को जोड़ दीजिए, जहां भगवान कृष्ण जी रहे,जो ऐतिहासिक जगह है,जिससे पूरे वर्ल्ड के टूरिस्ट आकर हस्तिनापुर देख सकें और कह सकें –अच्छा,यह हस्तिनापुर है, जिसके बारे में पिक्चर्स और टेलीविजन में पूरे भव्य तरीके से दिखाया जाता है,ताकि पयर्टक और विदेशी लोग हमारे देश और हमारे प्रदेश उत्तर प्रदेश में आ सकें । इससे लोगों को रोजगार,रेवेन्यु मिलेगा और सारी चीज़ें अच्छी होंगी ।

महोदया,मैं बस एक बात कह के अपनी बात पूरी करूंगा । पूरे उत्तर प्रदेश में आज बात हो रही है कि देश की इकोनॉमी कैसे संभले,बुरी हालत हो गई है । कहीं पर उपक्रम बेचे जा रहे हैं,कहीं पर ब्याज के खर्चे उपक्रम बेचकर पूरे किए जा रहे हैं । हमारे देश में बुनकरों,जो खासकर उत्तर प्रदेश में बहुत बड़ी संख्या में हैं । जैसे नगीना से हमारे साथी गिरीश जी बैठे हैं,गाजीपुर और पूरे उत्तर प्रदेश में बड़ी संख्या में बुनकर हैं । राजेन्द्र अग्रवाल जी मेरठ से आते हैं, मुजफ्फर नगर से संजीव बालियान जी हैं । मुजफ्फर नगर में मेरी दो विधान सभाएं पड़ती हैं । वहां बहुत ज्यादा बुनकर हैं । अगर इन बुनकरों के लिए कोई ऐसी सुविधा दे दी जाए, जैसे कि एक्सपोर्ट करने के लिए इनको कुछ रिलैक्सेशन,एग्जम्पशन्स दे दिए जाएं । सरकार की जो पॉलिसीज़ हैं, इनके लिए जो इन्सेन्टिव्स हैं, वे भी कुछ बढ़ा दिए जाएं, जिससे बाहर के देशों की मुद्रा हमारे देश में आ सके, हमारे देश की इकोनॉमी ठीक हो सके । अकलियत के लोगों का, हिन्दू जुलाहों का और दलित समाज के जो दबे-कुचले लोग हैं,जो मजदूरी कर के अपना काम काम चलाते हैं और बहुत सारे लोग जो कपास पैदा करते हैं,उनको भी इससे बढ़ावा मिलेगा ।

मैं आपके माध्यम से यही कहना चाहता हूं कि सरकार सहानुभूतिपूर्वक देश और उत्तर प्रदेश के बारे में सोचे और जो किसान आज बहुत परेशान हैं, जो तड़प रहे हैं, उन्हें बुलाकर उनसे सहानुभूतिपूर्वक बात की जाए और कोई हल निकाला जाए और उत्तर प्रदेश के बारे में भी सोचा जाए,ताकि यह लगे कि हमारा यह देश सारे प्रदेशों से मिलकर बना है । हम उत्तर प्रदेश को भी उसी का हिस्सा मानते हैं । गुजरात और महाराष्ट्र की तरह ही उत्तर प्रदेश को भी समझा जाए । आपका बहुत-बहुत धन्यवाद ।

माननीय सभापति :आपने हस्तिनापुर से लेकर इंद्रप्रस्थ तक की बात की है ।

DR. DNV SENTHILKUMAR  S. (DHARMAPURI): Vanakam, Madam Chairperson.  Thank you for giving me this opportunity to speak on the Supplementary Demands for Grants - Second Batch for 2020-2021.

          The Report of the Fifteenth Finance Commission recommends 41 per cent share for States in Central Government’s tax revenue in 2020-21.  We have already seen one per cent tax cut from that. The Fifteenth Finance Commission also recommends 1.72 per cent of the share in Central Government’s tax revenue for the State of Tamil Nadu.  It implies that out of every Rs.100 of Centre’s tax revenue in 2020-21, Tamil Nadu will be receiving only Rs. 1.72.  This is very low.  There is a huge disparity when compared with the BJP-ruled States like Uttar Pradesh, which receives around 7.35 per cent of the share.

          The farming community in the State of Tamil Nadu is disappointed as the Union Budget has failed to address the issue of one-time farm loan waiver by the Centre.  No effective step has been announced for fixing remunerative prices for agriculture produce.  There is no major irrigation scheme to convert rainfed farmlands into irrigated farms. There is a long-pending demand for constituting a National Disaster Compensation Fund for farmers.  This has also not been addressed. The MSP has not been fixed as per the recommendations of the M.S. Swaminathan Commission.

          I would request the Central Government to construct airports at Hosur, Ramanathapuram, Kanyakumari and Vellore districts in Tamil Nadu under the UDAN Scheme.  The Government may also set up Central Leather Parks in the districts of Dindigul, Vellore, and Chennai.  The Government should also take steps to safeguard the lives of 10 lakh people who are engaged in factories producing safety matches and fire-crackers in Sivakasi. 

          Under MGNREGA, the Government should increase the number of mandays from the present 100 days to 150 days and the daily wages may also be increased to Rs.300.  We also recommend that not only village panchayats but towns should also be included in MGNREGA Scheme.

          I would request the Union Government to remove the entrance fee for all the Central Government exams for Scheduled Caste and Scheduled Tribe students.  There was no fee earlier but now for the Central Government exams they have got a fee structure.  I would urge upon the Government to look into it and remove the fee structure.  The Government should also give 27 per cent reservation in admission of students as well as in the appointment of teachers in Central Government institutes like IIT.  Respecting the recommendation given by the Mandal Commission, the Government should guarantee OBC reservation in all Central Government institutes.  The Government should amend the NMC Bill, and respect the reservation laws enacted by the States with respect to medical admission. 

          The MPLAD Scheme should be restored.  I think Members across all Party lines will agree that we need it for the development of our constituencies.  I would also request the Government to increase the MPLAD fund by another Rs.5 crore.

          Coming to my constituency Dharmapuri, on the Thoppur Ghat section a lot of accidents occur every month.  We have been representing to the Government for a very long time that these roads should be expanded and bridges should be constructed. There is a long-pending demand for four-lane road between Thoppur and Bhavani via Mecheri.  This should also be considered. 

          Hogenakkal, a natural fall, is a good tourist spot which has to be upgraded to an international tourist centre.  A swimming pool of an Olympic size should be constructed so that those who have great diving skills can make use of it.  Vathalmalai, Mettur as well as Chitheri may also be upgraded as important tourist centres.  There are many Ghat sections like Kalasapadi, Arasanatham and Erimalai where roads have not yet been constructed.  They should also be looked into.

          Thank you, Madam, for giving me this opportunity.

श्री राहुल कस्वां (चुरू):सभापति महोदया, आपने डिमांड फॉर ग्रांट्स 2021-22 पर बोलने के लिए मुझे मौका दिया इसके लिए धन्यवाद । डीएफजी के माध्यम से एडीशनल एक्स्पेंडिचर 6 लाख 28हजार करोड़ रुपये के आसपास पेशकश की गई है,जिसमें नेट कैश आउट फ्लो लगभग 4 लाख 12 हजार करोड़ रुपये के आसपास होगा । अगर हम बात करें तो फूड एंड पब्लिक डिस्ट्रिब्यूशन के अंदर काफी प्रावधान किए गए हैं । मैं वित्त मंत्री महोदया और हमारे देश के प्रधान मंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी को इस बात के लिए बहुत-बहुत धन्यवाद देना चाहता हूं कि कोरोनाकाल के समय जब दुनिया जूझ रही थी, तब ऐसे समय में देश के 80 करोड़ गरीब लोगों को 5 किलो अनाज बांटा गया । सोसाइटी में इसका जबर्दस्त इम्पैक्ट पड़ा । मेरे संसदीय क्षेत्र चुरू के काफी लोग पूरे देश के अलग-अलग कोनों में रहते हैं । उस समय बहुत समाजसेवी लोग भी निकलकर आए और उनके द्वारा जो सपोर्ट सिस्टम क्रिएट किया गया,उसके लिए मैं उनको भी धन्यवाद करना चाहता हूं ।

        महोदया,जब भी फूड एंड पब्लिक डिस्ट्रिब्यूशन सिस्टम की बात चलेगी तो हम राजस्थान की बात इसमें अवश्य करना चाहेंगे । राजस्थान में भारत सरकार ने एमएसपी की परचेजिंग पर 22 से ऊपर फसलों को नोटिफाई कर रखा है । बाजरा भी इसमें से एक फसल है, जिसकी न्यूट्रीशियस वैल्यू काफी ज्यादा मानी जाती है । पूरे देश में बाजरे का उत्पादन सबसे ज्यादा राजस्थान में होता है । भारत सरकार ने बाजरे को हमेशा प्रमोट करने की बात कही है । इसकी एमएसपी जब 1300 से 1400 रुपये हुआ करती थी, तब इसे 2150रुपये तक ले जाने की बात की गई । इसके पीछे का लॉजिकल रीजन यही था कि न्यूट्रीशियस वैल्यू होनी चाहिए ताकि हम पब्लिक डिस्ट्रिब्यूशन सिस्टम में बाजरे को इन्क्लूड करें और व्हीट तथा राइस के साथ रिप्लेस्मेंट करने की कोशिश करें ।

सभापति महोदया, इस संबंध में भारत सरकार ने राजस्थान सरकार को तीन-तीन बार पत्र लिखे, पर राजस्थान की सरकार,जो सोती हुई सरकार है,उसने आज तक एक भी सेंटर नहीं खोला । चुनाव के समय राहुल गांधी जी ने बड़ी-बड़ी बातें कही थीं । लोग काफी अचंभित हुए थे कि किसानों का सारा कर्जा माफ कर दिया जाएगा, लेकिन 10 परसेंट के ऊपर सरकार आज तक बढ़ नहीं पाई । जब केंद्र सरकार ने राजस्थान के किसानों को सहायता देने की बात की तो कांग्रेस सरकार द्वारा एक भी सेंटर न खोले जाने के कारण राजस्थान के किसान,जिनकी बाजरे की इतनी जबर्दस्त पैदावार हुई थी,वह फसल 1200से 1300 में बिक गई । इसकी बजाए पड़ोस में हरियाणा के अंदर जहां शत-प्रतिशत खरीद हुई,वहां 2150 के रेट पर खरीद की गई । मैं हमेशा इस बात को सोचता हूं कि जब सरकार सपोर्ट सिस्टम बनाती है तो स्टेट गवर्नमेंट को कॉपरेट करना चाहिए । मेरे एक मित्र ने हमेशा यह बात कही है कि सेंट्रल गवर्नमेंट और स्टेट गवर्नमेंट में कॉपरेशन साथ-साथ चलना चाहिए । जब स्टेट से कॉपरेशन मिलेगा ही नहीं,तो सेंट्रल गवर्नमेंट की स्कीम्स कभी लागू नहीं हो पाएंगी । जहां प्रोक्योरमेंट की बात की जाती है, 2019-20का जो टार्गेट था, वह राजस्थान में 17 लाख टन था,लेकिन प्रोक्योरमेंट 14 लाख टन हुई । अगर ऐसा ही रहा तो किसान को अपनी फसल की सही कीमत कहां मिल पाएगी । आजकल किसानों की एक समस्या चल रही है, जिस पर सरकार बात करने के लिए तैयार है,लेकिन कांग्रेस की सरकार,जो राजस्थान में बैठी हुई है,उसने किसी भी रूप में किसानों को सहायता प्रदान नहीं की है ।

सभापति महोदया, मैं आपके माध्यम से माननीय मंत्री जी को बताना चाहता हूं कि राजस्थान में ग्‍वार नामक एक फसल काफी मात्रा में पैदा की जाती है, जिसको आज तक एमएसपी में शामिल नहीं किया गया । दोनों फसलें,ग्वार और मोठ,जिनकी सबसे अधिक पैदावार राजस्थान में होती है, उनके लिए मैं चाहता हूं कि इस बजट में दोनों फसलों को शामिल किया जाए ताकि किसानों को इसका फायदा हो । एक बहुत ही ऐतिहासिक और इस देश में परिवर्तन करने वाली स्कीम है,जिसका नाम है जल, जीवन मिशन । मैं माननीय प्रधान मंत्री जी को इसके लिए धन्यवाद देना चाहता हूं । राजस्थान में पीने के पानी की हमेशा किल्लत रहती है । ऐसी स्थिति में जल,जीवन मिशन योजना को लागू करके एक बहुत ऐतिहासिक काम किया गया है । हमारे देश के प्रधान मंत्री जी ने यह सपना देखा है कि वर्ष 2024 तक इस देश के 90 प्रतिशत घरों में पीने का पानी नल से पहुंचे । राजस्थान के चुरू की 85 प्रतिशत भूमि सलाइन वाटर से प्रभावित रहती है । राजस्थान सरकार को भी इसके लिए पहल करनी चाहिए थी । इस हेतु केंद्र सरकार द्वारा टॉप प्रायॉरिटी पर राजस्थान सरकार को इसके लिए फंडिंग प्रोवाइड की गई । केंद्र सरकार द्वारा 1605 करोड़ रुपया इसके लिए सैंक्शन किया गया है, लेकिन वर्ष 2019-20में राजस्थान सरकार द्वारा इस पर मात्र 620 करोड़ खर्च किए गए । पैसे का अभाव नहीं है । पैसा एक्स्ट्रा पड़ा हुआ है, लेकिन स्टेट गवर्नमेंट की पैसा खर्च करने की नीयत नहीं है । मेरे जिले में 11 सौ करोड़ रुपये के ऊपर की धनराशि सैंक्शन हो चुकी है, पर टेंडर प्रक्रिया में पड़ा हुआ है,जिसमें छ:-छ: महीने लग जाते हैं । पीने का पानी नहीं है । गर्मी का मौसम आ रहा है । चुरू वह जगह है, जहां गर्मी में तापमान 50 डिग्री सेल्सियस से ऊपर हो जाता है । इसके साथ ही साथ,पीने के पानी की भी काफी समस्या रहती है । इस ओर राज्य सरकार का कोई ध्यान नहीं है । वहां के विधायकों ने एक ही काम कर रखा है । वे अपनी गाड़ियों में पत्थर भरकर रखते हैं । जहां मौका मिलता है,वहीं पत्थर लगा देते हैं । न वे किसी अधिकारी का ध्यान रखते हैं,न किसी और का । जल, जीवन मिशन को मजाक बनाकर रख दिया है । राज्य सरकार के खुद के पैसे खर्च नहीं हुए और उसने भारत सरकार द्वारा दिए हुए पैसे का 50 प्रतिशत भी खर्च नहीं किया,लेकिन राज्य सरकार के विधायकों के पास पत्थर लगाने की कमी नहीं है । इस मामले में वे अव्वल नंबर पर चल रहे हैं । हर लोकल विधायक की गाड़ी में पत्थर पड़े रहते हैं । मौका मिलते ही लगा देते हैं । न सुबह देखते हैं, न शाम देखते हैं, बस पत्थर लगा देते हैं ।

          मैं सरकार से इस बात के लिए अनुरोध करना चाहूँगा कि राज्य सरकारों को प्रेशराइज किया जाना चाहिए कि जब ऐसी महत्वपूर्ण योजना है,जहाँ भारत सरकार पेमेंट दे रही हो,उसमें आप काम न करें तो कैसे काम चलेगा ।

          महोदया, ग्रामीण विकास के अंदर मैं कहना चाहूँगा कि प्रधान मंत्री ग्रामीण सड़क योजना एक बहुत ही ऐतिहासिक योजना है । अभी प्रधान मंत्री ग्रामीण सड़क योजना के बारे में बहुत बात हुई है ।

          महोदया, मुझे सिर्फ 5 मिनट का समय दीजिए ।

माननीय सभापति : आप दो मिनट में अपनी बात पूरी कीजिए ।

श्री राहुल कस्वां : महोदया, मुझे सिर्फ 2 मिनट का समय दीजिए । मेरा इतना ही कहना है कि प्रधान मंत्री ग्रामीण सड़‍क योजना के अंदर जो तीसरा चरण चला है,उसके अंदर मेरे निर्वाचन क्षेत्र में 225 किलोमीटर सड़क बन रही है । कहीं न कहीं आज की तारीख में राजस्थान बहुत बड़ा क्षेत्र है और 225 किलोमीटर से कुछ नहीं होता है । मेरे निर्वाचन क्षेत्र की लम्बाई 340 किलोमीटर है । आज तक पंचायत से पंचायत आपस में जुड़ी हुई नहीं हैं । प्रधान मंत्री ग्रामीण सड़क योजना में ऐसा प्रावधान होना चाहिए कि हम डायरेक्टली पंचायत टू पंचायत को जोड़ने का प्रावधान करें । साथ ही साथ आरयूबीज की बहुत बड़ी डिमांड है । राजस्थान में पिछले 5 साल में वसुन्‍धरा जी की सरकार ने मेरे लोक सभा क्षेत्र में 32 आरयूबीज की सैंक्शनिंग की और कांग्रेस की 2.5 साल की सरकार मात्र एक आरयूबी सैंक्शन कर पाई है । इसके बिना वहाँ लोगों को बहुत परेशानी हो रही है ।

          साथ ही साथ रूरल डेवलपमेंट के अंदर आवारा पशुओं की बहुत बड़ी समस्या किसान फेस कर रहे हैं । खेतों के अंदर तारबंदी करनी पड़ती है । अगर उस तारबंदी का खर्चा रूरल डेवलपमेंट मिनिस्ट्री द्वारा दिया जा सके तो उनको बहुत बड़ी सहायता मिलेगी । मेरा आपसे कहना है कि प्लांटेशन के अंदर तारबंदी की बात तो मैं अवश्य करूँगा ।

          मिनिस्ट्री ऑफ रोड एंड ट्रांसपोर्ट के अंदर बहुत अच्छा कंस्ट्रक्शन का काम हो रहा है । बीते हुए 5 सालों के अंदर भारत सरकार ने नए एडिशनल 45 हजार किलोमीटर्स जोड़े हैं । मेरे निर्वाचन क्षेत्र के अंदर प्रिंसिपली अप्रूव्ड नेशनल हाइवेज एक बहुत बड़ा इश्यू है । मेरे निर्वाचन क्षेत्र में वर्ष 2017-18 के अंदर प्रिंसिपली अप्रूव्ड हाइवे, जो सिरसा से नोहर होते हुए, साहवा, तारानगर, चुरू के लिए एनएच की घोषणा की गई । डीपीआर तैयार है,उसका पैसा भारत सरकार द्वारा दिया गया, पर प्रिंसिपली अप्रूव्ड हाइवेज के ऊपर अभी हम फोकस नहीं कर पा रहे हैं । उनके ऊपर फोकस नहीं होगा तो वे हाइवेज प्रोजेक्ट रूक जाते हैं । हम फोर लेनिंग को सिक्स लेनिंग कर रहे हैं, पर अगर हम पैरलेल रूट्स को प्रमोट करेंगे तो कहीं न कहीं उन तक विकास भी पहुँचेगा । मैं भारत सरकार से ऐसी उम्मीद करता हूँ । मैं माननीय मंत्री महोदय से निवेदन करना चाहूँगा कि मेरे निर्वाचन क्षेत्र की सबसे बड़ी डिमांड सिरसा से चुरू हाइवे की रही है । उसके लिए आप इस बजट के अंदर स्पेशल प्रावधान करने का कार्य करेंगे । अंत में, मैं एक बात और कहना चाहूँगा । मैं आपसे केवल दो मिनट का समय चाहूँगा ।

माननीय सभापति : कस्वां जी, दो मिनट का समय नहीं है । अब आप समाप्त कीजिए ।

श्री राहुल कस्वां : महोदया,मैं अंतिम लाइन बोलकर अपनी बात समाप्त करता हूँ । प्रधान मंत्री जी की एक बहुत ही महत्वपूर्ण योजना परंपरागत कृषि विकास योजना है,जिसके तहत आर्गेनिक फार्मिंग को प्रमोट करने के लिए लोगों ने वर्मीकम्पोस्ट के बहुत सारे पिट्स हमारे निर्वाचन क्षेत्र में बनाए हैं । उनकी पेमेंट वर्ष 2018से पेंडिंग पड़ी हुई है । उसमें भी राज्य सरकार का शेयर बाकी रहता है । मैं निवेदन करता हूँ कि जो ऐसी पेंडिंग योजनाएं हैं, जिन पर किसानों ने इंप्लीमेंट कर दिया,कंस्ट्रक्शन कर लिया,उनके पैसे देने का काम करें ।

        महोदया,आपने मुझे बोलने का मौका दिया, इसके लिए आपका बहुत-बहुत धन्यवाद ।

HON. CHAIRPERSON: Now, Shri Nama Nageswara Rao.

          Before Mr. Rao starts speaking, not more than five minutes will be allocated to anyone. On third minute, I will ring the first bell and by fifth minute, you all have to wind up.

SHRI NAMA NAGESWARA RAO (KHAMMAM): Thank you Chairperson for giving this opportunity to speak on the Supplementary Demands for Grants. इसमें करीब-करीब 6.18 लाख करोड़ रुपये की डिमांड है । इसमें देखने से पता चलता है कि majority of the amount फर्टिलाइजर्स की सब्सिडी के बारे में है,फूड की सब्सिडी के बारे में है,स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के लिए है और इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए है । इसकी अभी पूरे देश में जरूरत भी है । स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण में तो कोविड की वजह से बहुत जरूरत है । कोविड के कारण हम लोग पिछले एक साल से बहुत दिक्कत में थे और अभी-अभी थोड़ा कोविड से बाहर आ रहे हैं । स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण को जो दिया है,उसकी तो रिक्वायरमेंट है । इसके साथ-साथ इंफ्रास्ट्रक्चर के डेवलपमेंट की भी देश को काफी जरूरत है । अभी देश में कहीं भी देखने से कम से कम सड़कों का डेवलपमेंट दिखाई पड़ता है । नेशनल हाइवे का डेवलपमेंट हो,एनएचआईडीसीएल का हो,इंफ्रास्ट्रक्चर का डेवलपमेंट काफी दिखाई पड़ रहा है और इसके लिए भी फंड की रिक्वायरमेंट है ।

          पिछले साल इसी महीने में पार्लियामेंट चल रही थी,उसके बाद देश में लॉकडाउन हुआ । पिछले साल से हम लोगों ने काफी कुछ सफर किया है,इकोनॉमी सफर हुई है,हम लोगों के जीवन पर भी काफी इफेक्ट पड़ा है । केंद्र सरकार और राज्य सरकारों का भी काफी रेवेन्यू फॉल हुआ है । अभी इकोनॉमी थोड़ी पिकअप हो रही है । अगर अभी देखें तो कि इस मंथ का पिछले मंथ से जीएसटी का रेवेन्यू वगैरह भी इम्प्रूव हुआ है,इंडिस्ट्रयल का भी पिक-अप हो रहा है । अगर पिछले दो वर्ष से कम्पेयर करें तो आज आईईएक्स में पावर का जो सेल करते हैं, पावर की पर यूनिट 5 रुपये 27 पैसे हुई है । पिछले दो साल से पावर की डिमांड नहीं रहती थी । इसका मतलब है कि अभी इकोनॉमी थोड़ी पिक-अप हो रही है,उसका यह एक इंडिकेटर है । उसी तरह से सेंटर को डेवलपपिंग स्टेट्स को भी सपोर्ट करना चाहिए । अगर डेवलपिंग स्टेट्स में देखें तो Telangana is one of the developed States. अगर पूरी कंट्री में रेवेन्यू का परसेंटेज वाइज देखें तो तेलंगाना से जो रेवेन्यू का परसेंटेज आता है,उसमें हम लोग टॉप में रहते हैं । जब हम उतना रेवेन्यू जनरेट कर रहे हैं, उतना टैक्सेशन सेंट्रल गवर्नमेंट को दे रहे हैं, उसी तरह से डेवलपिंग स्टेट्स को सपोर्ट की काफी रिक्वायरमेंट है । हमारे स्टेट के काफी पेंडिंग प्रोजेक्ट्स भी हैं और पेंडिंग पेमेंट्स भी हैं । हमने पेंडिंग पेमेंट्स के बारे में काफी चिट्ठियां लिखी हैं, अभी उस लिस्ट को पढ़ने में काफी टाइम लगेगा । मैडम, आपने हमारे टाइम को लिमिट कर दिया है । उसको हमने रिटन में भी दिया है,हमारे चीफ मिनिस्टर साहब ने दिया है और हमारे कंसर्न्ड मिनिस्टर ने दिया है । हमारे स्टेट का लगभग 3 हजार करोड़ रुपये का पेमेंट्स आना है,उसको दे दें ।

          हमारे पेंडिंग प्रोजेक्ट्स पेमेंट की वजह से थोड़े धीरे चल रहे हैं । सेंट्रल गवर्नमेंट को जो सपोर्ट करना था,उसके लिए आप सपोर्ट करें । उसके साथ-साथ इकोनॉमी डेवलप करने के लिए, कंट्री को डेवलप करने के लिए स्टेट्स का रोल काफी इम्पोर्टेंट है । अभी-अभी हमारे राजस्थान के एक मित्र ने अपनी बात कही । उधर पैसा बहुत कुछ दिया है । वहां खर्च नहीं होता है । राजस्थान की गवर्नमेंट दूसरी है । अगर ऐसा कुछ है,तो आप फंड्स तेलंगाना को भेज दीजिए । फाइनेंस मिनिस्टर साहब, आप बैठे हैं, ऐसी जो भी स्टेट अगर खर्च नहीं करती है,उस पैसे को खर्च करने के लिए, तेलंगाना डेवलप करने के लिए, हम लोग रेडी है । तेलंगाना छ:  साल का,छोटी उम्र का स्टेट है,इस स्टेट को सपोर्ट करने के लिए, पेंडिंग पेमेंट्स पूरी रिलीज करने के लिए मैं आपके माध्यम से गवर्नमेंट से डिमांड करते हुए इस डिमांड को हम लोग सपोर्ट कर रहे हैं ।

SHRI HASNAIN MASOODI (ANANTNAG): Hon. Chairperson, on 5th August, 2019 an assault was made on the special status of the then State of Jammu and Kashmir. It was nothing less than a betrayal. I will not go into it. I will not dilate on that. But it has pushed the Union Territory of Jammu and Kashmir to the bottom on the barrel. The then State of Jammu and Kashmir was ahead of half of the other Indian States …(Interruptions)

HON. CHAIRPERSON : If the focus is Jammu and Kashmir, then the next item is about that.

SHRI HASNAIN MASOODI : Jammu and Kashmir was ahead of half of the other Indian States in human development index. The focus is on food processing, tourism, and industries. The Union Territory of Jammu and Kashmir produces three million metric tonnes of fresh fruits and there is provision of just 3 per cent for commercial processing of the fresh fruits. Also, cold storage facility is only 5 per cent. I would use this occasion to make a request. इसमें बढ़ोतरी की जाए, ताकि हमारा जो यातायात की परेशानी की वजह से,नेशनल हाइवे की परेशानी की वजह से जो फूड एक्सपोर्ट नहीं हो पा रहा है,उसकी प्रोसेसिंग हो जाए और उससे जो हमारी अनएम्प्लॉयमेंट बढ़ रही है,उसको हम डील कर सकें ।

इसके अलावा टूरिज्म हमारा बैकबोन है । आज से दो साल पहले अवंतीपोरा का एयरपोर्ट डिफेंस एयरपोर्ट से सिविलयन में ट्रांसफर किया गया था । उसके लिए आज तक कुछ नहीं किया जा रहा है,अवंतीपोरा का एयरपोर्ट सिविलयन ऑपरेशनल में बनाया जाए । अगर वह बनाया जाएगा तो पर्यटन में थोड़ी और ज्यादा बेहतरी आ जाएगी, बल्कि अमरनाथ यात्रा के हवाले से और बाकी साउथ कश्मीर में जो पहलगाम और दूसरी जगहों का टूरिज्म है,उसमें भी थोड़ी बढ़ोतरी होगी तथा एक रिलीफ होगा ।

इंडस्ट्री तो बढ़ी तेजी के साथ क्लोज हो रही हैं । एक हजार से ज्यादा इंडस्ट्रीज क्लोज हुई हैं, इनक्लूडिंग प्रेस्टीजियस जम्मू एंड कश्मीर सीमेंट्स । उसकी तरफ तवज्जो की जरूरत है । Of late, Shri Anurag Thakur has been making frequent visits to Kashmir. लेकिन शिकारा राइड करने का मतलब यह नहीं है कि सब कुछ ठीक है । मामला बिलकुल ठीक नहीं है । आप कश्मीर को कंवर्ट कर सकते हैं हेल्थ टूरिज्म, पिलग्रिमेज टूरिज्म और एकडेमिक टूरिज्म के हवाले से । सारा बोस्टन स्टेट सिर्फ एकेडेमिया पर निर्भर है । इसकी कोई वजह नहीं है कि कश्मीर को इस तरह से प्रोग्रेस में लाएं, फोकस में लाएं । इसके अलावा एक इंटरनेशनल क्रिकेट स्टेडियम की जरूरत है,क्योंकि क्लाइमेट के हिसाब से सबसे अनुकूल जगह है । जम्मू-कश्मीर में जो क्रिकेट बेट बनाया जाता है,वह पूरे विश्व में इस्तेमाल होता है । क्रिकेट की हमारी जो सेलेब्रिटीज हैं, वे उस बेट को इस्तेमाल करते हैं । इन सारी चीजों पर तवज्जोह देने की जरूरत है । सबसे बड़ी समस्या ट्रांसपोर्ट की है,एनएच-44 की है । हम बार-बार इस बात को कहते हैं । इस समय दिल्ली से श्रीनगर का हवाई किराया दुबई से ज्यादा है । सड़क 15 दिन से बंद है,कोई जा नहीं सकता है । इस कारण से एयर फ्लाइट पर निर्भर करना पड़ता है और उसका  किराया दुबई से ज्यादा है । जब तक आप इसके अल्टरनेटिव्ज पर गौर नहीं करेंगे, हमारी पांच टनल्स हैं, उन पर इनिशिएल प्रोग्रेस हुई हैं । कहीं डीपीआर बनी है,कहीं पर सर्वे हुआ है । एक स्मिथन वाली है,कापरन वाली है,एक राजधानी पास है गुरेज वाली, एक साधना पास है,इन पर फोकस करने की जरूरत है । हमें जो नुकसान हुआ है,यह अलग बात है । हम पर जो आक्रमण हुआ है,हम उसको जायज तरीके से लड़ेंगे । लेकिन आपने जो पुश किया है,तरक्की की दौड़ में हमें पीछे कर दिया है । जम्मू-कश्मीर बहुत पीछे हो गया है,उसकी तरफ तवज्जोह हो और उसकी किसी प्रोग्रेस को हम आने वाले दिनों में विटनेस कर पाएं । मैं यह गुजारिश करूंगा कि जहां तक एक पैकेज की बात है,टूरिज्म को वापस पटरी पर लाने के लिए पेकेज की बात इसमें कहीं नहीं दिख रही है । सिर्फ कॉस्मेटिक्स होते हैं, कहीं शिकारा राइड की बात होती है,कहीं साइकिल रेस की बात होती है,खेलो इंडिया खेलो की बात होती है,लेकिन हो नहीं रहा है,तो उसकी तरफ तवज्जोह देने की जरूरत है । बहुत-बहुत शुक्रिया ।

SHRI E.T. MOHAMMED BASHEER (PONNANI): Madam, while participating in the discussion on the Supplementary Demands for Grants, I wish to submit a very humble suggestion with regard to the Prime Minister’s National Relief Fund.

 In the PMNRF, there is a component to help the cancer patients and kidney ailment patients. A portion of the Fund is set aside for them.  Allotment to that Fund is meagre.  We, MPs, are getting a lot of petitions on this issue as the number of patients are increasing as you know very well but, unfortunately, we are not in a position to get it. 

So, I humbly suggest that the hon. Minister and the Government may show sympathy on them and get more allocation to this Fund. This is my first submission.

Secondly, when we are making policies and programmes, we must foresee their consequences. We have proposed a new Policy with regard to fishermen, namely, National Policy on Fisheries.  I would like to say that our fishermen are having expertise in deep sea fishing. What we are doing by this is, we are opening our sea for multinationals.  What will happen to our fishermen then?  We have to think very seriously on this matter. I am saying not to put our Indian fishermen into difficulty.  We may require foreign investments and such things but if we bring this kind of reforms spoiling the very livelihood of the Indian fishermen, that is a dangerous thing.  I humbly appeal to the Government to desist from this kind of a thing. 

          Following your footprints, the Kerala Government is also doing the same thing. They are also opening up our sea for these multinationals. Foreign vessels, fish holds, ships, and other things are coming here. They will process and they will transport fish from the sea itself. That will adversely affect the very existence of our fishermen. So, it has to be done in a very careful manner. The Government should withdraw this kind of a proposal. That is what I want to submit.

          There are many other things. I do not want to take much of your time. But one thing is there. Last Session, we passed three legislations on agricultural reforms. We warned then that it will create a lot of confusion among the farmers. Unfortunately, that is coming as a storm. Unfortunately, the Government is not listening to them. When our people are fighting for a cause, the Government should at least give them a sympathetic listening as to what best the Government can do. Of course, there may be limitations. But you have to take a positive line as far this agitation is concerned.

           You have made many reforms in the financial sector also. One thing is to be noted. For every reform whether it is financial, social or whatever it may be, three ingredients are there. One is social stability, the other one is a congenial atmosphere, and a mentality of coexistence. But, unfortunately, what is happening in our country? The unity of our country is also facing a challenge. I am not criticising the Government. India should stand united. But, unfortunately, things are going from bad to worse. This kind of difference of opinion is developing. What is our pride? It is our secularism. Secularism means that State will have no religion. But, unfortunately, some kinds of partisan attitudes are taken on the part of the Government. What I am humbly submitting in this, let India remain united. The Government should not inspire any kind of division among the people. That is a very essential ingredient for the growth of India. For economic development and social development, this kind of ingredient should be adhered to.

          With these few words, Madam, I conclude. Thank you very much.

डॉ. एस. टी. हसन (मुरादाबाद):  मैडम,मैं आपका ध्यान मुरादाबाद के एक्सपोर्ट और कॉटेज इंडस्ट्रीज़ की तरफ दिलाना चाहता हॅूं । मैडम,मुरादाबाद शहर तमाम दुनिया में ब्रास सिटी के नाम से जाना जाता है । शायद ही कोई ऐसा देश हो और ऐसा घर हो,जहां पर मुरादाबाद के बने हुए डेकोरेटिव आइटम्स न रखे हों । यह एक्सपोर्ट हमारे मुरादाबाद से तकरीबन साढ़े नौ हजार करोड़ रुपये का हुआ करता था ।   लेकिन पिछले पांच साल में यह कम होते-होते साढ़े पांच हजार करोड़ रुपये पर आ गया है ।

        मैडम,सबसे बड़ी समस्या जो हमारे सामने आ रही है,वह जीएसटी की आ रही है । मैं अनुराग भईया से कहना चाहूंगा कि आज की तारीख में मुरादाबाद का तीन सौ करोड़ रुपये का जीएसटी रिफंड बाकी है जो नहीं मिल पा रहा है । जो एक-एक,दो-दो करोड़ रुपये के एक्सपोर्टर्स हैं, वे कैसे अपना काम चलाएंगे?बैंक के लोन उनके बढ़ जा रहे हैं । वे आगे नहीं बढ़ सकते हैं । एक स्कीम फोकस हुआ करती थी । वह आपने खत्म कर दी है । उसकी जगह एक दूसरी स्कीम आई है । लेकिन उस स्कीम में इनसेंटिव रेट अभी तक तय नहीं हुए हैं । मेरी आपसे रिक्वेस्ट है कि उस स्कीम में कम से कम दस पर्सेंट इनसेंटिव रेट्स तय कर दिए जाएं । मैं जानता हॅूं कि हमारी बहुत सी मजबूरिया हैं, लिमिटेशंस हैं, डब्ल्यूटीओ का मसला है । लेकिन हम चीन, वियतनाम और कंबोडिया से कैसे कंपीट करें । चीन ने हमारा मार्केट कैप्चर कर लिया है ।

        मैडम,आज रॉ मटीरियल के रेट्स,लॉकडाउन के बाद 40 पर्सेंट तक बढ़ गए हैं । एक्सपोर्टर्स ने जो ऑर्डर लिए,वे कैसे सप्लाई करें, क्योंकि रेट बहुत बढ़े हुए हैं । मेरी गुजारिश है कि रॉ मटीरियल के ऊपर भी कुछ न कुछ सब्सिडी केंद्र सरकार की तरफ से दी जाए,ताकि एक्सपोर्ट को बूस्ट मिल सके ।

महोदया, मैं आपको यह भी बताना चाहूंगा कि पूरे देश के अन्दर एक्सपोर्टर्स के 30,000 करोड़ रुपये जी.एस.टी.रिटर्न्स के बाकी हैं । आखिर ये एक्सपोर्ट कहां जाएंगे? छोटे-छोटे जो आर्टिजन्स हैं, वे कहां जाएंगे? मुरादाबाद में छोटे-छोटे बहुत-से आर्टिजन्स हैं । उन्हें एन.जी.टी.परेशान कर रहा है,पॉल्यूशन वाले परेशान कर रहे हैं । उनकी भट्ठियां एक अँगीठी से बड़ी नहीं होती । मेरी आपसे और सरकार से रिक्वेस्ट है कि सेन्ट्रल मुरादाबाद को पूरा औद्योगिक क्षेत्र घोषित कर दिया जाए, ताकि उन छोटे-छोटे आर्टिजन्स से यह न कहा जाए कि मुरादाबाद से बाहर जाकर अपना कारोबार करो । यह मुमकिन नहीं है । कोई उसे बनाता है,कोई छीलता है,कोई पॉलिश करता है । उनकी पूरी फैमिली इसमें लगी हुई होती है । हम अपने स्तर पर कुछ कर सकते हैं । हम रेल के किराए में कम कर सकते हैं, ताकि एक्सपोर्टर्स को बूस्ट मिल सके । हम इंसेंटिव दे सकते हैं । हम एक्सपोर्टर्स के इन्कम टैक्स में कमी कर सकते हैं और हमारी भी यह रिक्वेस्ट है कि एक्सपोर्टर्स पर एक फ्लैट इन्कम टैक्स हो । यह 10 प्रतिशत से ज्यादा नहीं होना चाहिए । आर्टिजंस की भट्ठियों को पीएनजी गैस सप्लाई की जाए । मैं हमारे पेट्रोलियम मंत्री जी का शुक्रगुजार हूं कि वे मुरादाबाद में पीएनजी गैस की सप्लाई दे रहे हैं । लेकिन, इन भट्ठियों को पीएनजी गैस सब्सिडाइज्ड रेट्स पर मिलें तो उनकी प्रोडक्शन कॉस्ट कम होगी और एक्सपोर्ट बूस्ट होगा । मेरी आपसे यही दरख्वास्त है कि मुरादाबाद के आर्टिजंस को,मुरादाबाद के हैंडीक्राफ्ट्स को बचाने के लिए ज्यादा से ज्यादा इंसेन्टिव्स दिए जाएं और उनकी मदद की जाए ।

श्री मोहनभाई कुंडारिया (राजकोट):माननीय सभापति महोदया, मैं माननीय वित्त मंत्री जी द्वारा लाई गई अनुपुरक मांगों को सपोर्ट करने के लिए खड़ा हुआ हूं ।

          महोदया, नरेन्द्र मोदी जी की सरकार ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास’ के आधार पर चल रही है । उसके आधार पर हर विभाग में बजट का एलॉटमेंट हो रहा है ।

          महोदया, जो लोग यह बात करते हैं कि किसानों के साथ अन्याय हो रहा है तो मैं यह कहना चाहता हूं कि भारत के सभी किसान अन्नदाता हैं । उन्हें अलग-अलग राज्यों में बाँटना नहीं चाहिए । हर किसान के लिए बात करनी चाहिए । मैं गुजरात के किसान की बात कर रहा हूं । गुजरात में नर्मदा बाँध का काम वर्ष 2008 में पूर्ण हो गया । वर्ष 2008 से 2014 तक गुजरात सरकार ने,उस समय हमारे मुख्य मंत्री नरेन्द्र मोदी जी थे,उस समय उन्होंने तत्कालीन भारत सरकार को पत्र लिखा, रु-ब-रु आकर बात की कि हमें बाँध का दरवाजा चढ़ाने की मंजूरी चाहिए क्योंकि इससे गुजरात के किसानों के खेतों में पानी मिलेगा, उन्हें ज्यादा आवक होगी । पर, आठ सालों तक यूपीए की सरकार ने वह दरवाजा चढ़ाने की मंजूरी नहीं दी थी । अगर किसानों के साथ हमदर्दी है तो वह काम क्यों नहीं किया था?

          माननीय सभापति महोदया, यूपीए की सरकार ने एक बार किसानों के लोन्स माफ करने के लिए 70,000 करोड़ रुपये दिए थे । हमारे नरेन्द्र भाई की सरकार हर साल किसानों के खाते में पैसे डाल कर पाँच सालों में 70,000 करोड़ रुपये से ज्यादा रुपये किसानों की योजना में डाल रही है ।

          सभापति महोदया, गुजरात के साथ हमेशा अन्याय किया गया था । आज़ादी के 70 सालों में राजकोट से दिल्ली और दिल्ली से राजकोट तक की फ्लाइट की सुविधा भी नहीं दी गई थी । हमारी सरकार आई और अब राजकोट में इंटरनेशनल एयरपोर्ट का काम हो रहा है । राजकोट से दिल्ली फ्लाइट मिली है । राजकोट जाने के लिए रेलवे की डबल लाइन के लिए बहुत सालों से प्रयत्न किए जा रहे थे,पर इस सरकार ने 1500 करोड़ रुपये अहमदाबाद से राजकोट तक डबल लाइन के लिए पैसे दिए हैं । उसका काम चल रहा है । वह एक साल में पूर्ण होने वाला है । अनेक योजनाओं के माध्यम से जो पहली सरकारों ने गुजरात के साथ अन्याय किया था,इस सरकार ने उसके साथ न्याय किया ।

          माननीय सभापति महोदया, जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के दस किसान बैठकर बात कर रहे थे कि जम्मे-कश्मीर से यह धारा-370 कब हटेगी, तो एक आदमी ने बोला कि जो गुजरात के सी.एम.हैं, नरेन्द्र मोदी जी,जब वह बड़ा प्रधान बनेगा तो उसके पास उसकी चाबी है । उसने कहा कि सात मंजिला के मकान में एक तिजोरी है । उसमें जो चाभी है,अगर वह उसमें से निकालेगा तो फिर वह धारा-370 हटेगी । लोगों को इतना विश्वास था कि जब नरेन्द्र मोदी बड़ा प्रधान बनेगा तो देश की उन्नति होगी, किसानों की उन्नति होगी और धारा-370 हटेगी ।

          माननीय सभापति महोदया, कोरोना की बात कर रहे हैं तो उसमें राशि की बात कर रहे थे कि भारत में यह कम है तो दूसरे देशों को क्यों देना चाहिए ।

मानवता के आधार पर किसी की मदद करना हर मानव का फर्ज है । इस फर्ज के आधार पर दूसरे देशों में भारत से राशि देकर उनकी मदद की जा रही है । खासकर मैं वही बात कर रहा हूँ, कोरोना  के  टाइम में हमारा गुजरात एक ऐसा राज्य है,जहाँ भारत के हर राज्य के लोग काम कर रहे थे । उन लोगों को अपने गाँव जाने के लिए ट्रेन की सुविधा उपलब्ध करवायी गयी । उनको रास्ते में खाने के लिए टिफिन उपलब्ध करवाया गया । उनके साथ जो बालक थे,उनको खेलने के लिए खिलौना दिया गया । इस प्रकार से गुजरात के लोगों ने राहत पहुँचाने का प्रयत्न किया था ।

          महोदया, खासकर इस बजट के अंदर अगर हम मनरेगा की बात करें तो मनरेगा में वर्ष 2014 से पहले 30,000 करोड़ रुपये खर्च हो रहे थे । अभी हमारी सरकार ने मनरेगा की राशि दोगुना करके 60,000 करोड़ रुपये कर दी है । ग्रामीण क्षेत्र में ज्यादा काम करके हमारी गवर्नमेंट ने लोगों को विकास की यात्रा में जोड़ने का काम किया है । सबका साथ, सबका विकास और सबका विश्वास के साथ हमारी सरकार काम कर रही है ।  सरकार की जो पूरक अनुदानों की माँगें है,उनका मैं सपोर्ट कर रहा हूँ ।

श्री हनुमान बेनीवाल (नागौर): सभापति महोदया, सदन में आज वर्ष 2020-21 की पूरक अनुदान की माँगों के दूसरे बैच से जुड़ी चर्चा चल रही है । इस विषय पर आपने मुझे सदन में बोलने का मौका दिया, इसके लिए आपका धन्यवाद ।

          सभापति महोदया, वर्ष 2020-21 की पूरक अनुदान की माँगों के दूसरे और अंतिम बैच में 79 अनुदान माँगें और 2 विनियोग हैं । इसमें 628379.99 करोड़ रुपये के सकल अतिरिक्त व्यय को अधिकृत करने के लिए संसद का अनुमोदन माँगा गया है ।

          महोदया, आज एसएससी पर 27.79 करोड़ रुपये की माँग पर अनुदान माँगा गया है,लेकिन मैं आपके माध्यम से देश तथा सरकार को अवगत कराना चाहूँगा और पूछना भी चाहूँगा कि पिछले 3-4 वर्षों में कौन-कौन सी भर्तियों को एसएससी ने पूरा करवाया है,क्योंकि पुरानी परीक्षाओं के परिणाम, अधूरी भर्तियों को लेकर विगत वर्ष सोशल मीडिया पर बेरोजगार छात्रों ने बहुत बड़ा आंदोलन चलाकर भी सरकार का ध्यान आकर्षित किया था ।

          महोदया, युवा मामले और खेल मंत्रालय से जुड़े विषय के बारे में मैं आपके माध्यम से माँग करूँगा  कि मेरे गृह जिले नागौर में 3 बीघा से अधिक जमीन युवा छात्रावास के लिए आवंटित की गई हैं ।  केन्द्रीय सार्वजनिक निर्माण विभाग उसके पक्ष में रिपोर्ट भी बनाकर भेज चुका है । इसके लिए नागौर में 2 करोड़ रुपये यूथ होस्टल के लिए बजट आवंटित किया जाए । साथ ही साथ सेंथेटिक ट्रैक, इंडोर स्टेडियम सहित अन्य खेल सुविधाएं वहाँ दी जाए । देश में हरियाणा, पंजाब, राजस्थान तथा उत्तर प्रदेश से सबसे ज्यादा ग्रामीण प्रतिभाएं आगे आती हैं और हिन्दुस्तान का नाम रौशन करती है ।

          राजस्थान की जनसंख्या घनत्व व ग्रामीण क्षेत्र की आबादी में आर्थिक व कमजोर वर्ग की संख्या ज्यादा होने के बावजूद राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा योजना के अंतर्गत पात्रों की संख्या विकसित राज्यों की तुलना में काफी है,इसलिए इसको बढ़ाने के लिए केन्द्र सरकार विचार करे ।

          सभापति महोदया, आज सबसे बड़ी समस्या जो मिडिल क्लास के लोगों के साथ है,वह पेट्रोल-डीजल की कीमत है । यह सही है कि वर्ष 2014 और 2019 में देश के अंदर एकतरफा लहर चली और भारतीय जनता पार्टी का ग्राफ बढ़ा । पहले एनडीए के सहयोग से ग्राफ बढ़ा और फिर बिना एनडीए के सहयोग से ही बीजेपी 303 पर पहुँच गई । लेकिन, पेट्रोल-डीजल को लेकर हर आम आदमी बात कर रहा है । राजस्थान के अंदर हमारे साथ यह परिस्थिति रही है कि पंजाब, दिल्ली और हरियाणा के अंदर डीजल-पेट्रोल सस्ता है । हमारे यहाँ हनुमानगढ़, गंगानगर है,जहाँ से सांसद निहाल चंद जी आते हैं । इन्होंने प्रयास भी किया था । वहाँ वर्ष 2011 में आईओसी का एक डिपो खुला था,उसे भी बंद कर दिया गया । उस डिपो को चालू किया जाए । देश में सबसे ज्यादा डीजल-पेट्रोल हनुमानगढ़ व गंगानगर में ढाई रुपये ज्यादा है । वहाँ पेट्रोल-डीजल सबसे ज्यादा महँगा है ।

          सभापति महोदया, वर्ष 2014 में जब सरकार बनी, तब कच्चे तेल की कीमत 106.85 डॉलर प्रति बैरल थी । अगर आज जनवरी 2021 की बात करें तो यह घटकर 57.49 प्रति बैरल हो गई ।  कच्चे तेल की कीमत घट रही है,  क्रूड की कीमत आधी हो जाने के बावजूद भी कर वसूली दोगुनी चालू कर दी गई । सरकार मूल उत्पादन शुल्क, विशेष उत्पादन शुल्क व सड़क तथा सुविधा उपकर सहित लिए जाने वाले अन्य करों को कम करके पेट्रोल-डीजल की कीमत को कम करें, ताकी मध्यम वर्ग के लोगों को राहत मिले । यह मेरी आपके माध्यम से सरकार से माँग रहेगी ।

          सभापति महोदया, सरकार ने राष्ट्रीय महिला सुरक्षा मिशन के तहत फास्ट ट्रैक विशेष अदालत पर अतिरिक्त व्यय को पूरा करने की बात कही है । मैं आपके माध्यम से बताना चाहूँगा कि हमारे राजस्थान के 57 पॉक्सो कोर्ट में 6800 केस लंबित पड़े हैं । केवल जनवरी 2021 में राजस्थान में 519 दुष्क्रम के केस दर्ज हुए, लेकिन अब तक चालान महज 15 मामलों में हुआ है ।

इससे अपराधियों के हौसले बुलंद होते हैं । आप पिछले 15 दिन के अंदर देखिए । ऐसा लगता है कि देश के अंदर जो बलात्कार हो रहे हैं, जयपुर उनकी राजधानी बन गई है । सबसे ज्यादा बलात्कार जयपुर के अंदर हो रहे हैं, आईसीयू के अंदर, अस्पताल के अंदर, बेड पर ये अपराध हो रहे हैं । यहां पर बैठे हुए मेरे कांग्रेस के साथियों से कहना चाहूंगा कि वहां आपकी सरकार तो टूट रही है,लेकिन कम से कम सरकार को पाबंद तो करो कि विधायकों को खुश करने के बजाए, कानून व्यवस्था पर भी ध्यान दें, क्योंकि रेप को लेकर राजस्थान देश में बदनाम हो गया ।

          राजस्थान में त्वरित न्याय के लिए नवीन न्यायालयों की स्थापना के लिए हाई कोर्ट ने अनुशंसा की । उन न्यायालयों की स्थापना के लिए, वित्तीय मदद के लिए भारत सरकार के समक्ष प्रस्ताव भेजा है,उस पर भी सरकार ध्यान दे । चूंकि यह देश की सबसे बड़ी पंचायत है,तो हम यहां डिमांड  कर सकते हैं । आज हमारे राजस्थान के अंदर हाई कोर्ट में न्यायाधीशों के बहुत से पद खाली हैं । जिस समाज से मैं आता हूं, जाट, मेघवाल, मीणा, गुर्जर, यादव, इस जाति का एक भी हाई कोर्ट का जज राजस्थान के अंदर नहीं है । वहां सबसे बड़ी पॉपुलेशन इन जातियों की है । आरक्षण के अंदर भी इस मामले को ध्यान में रखते हुए पिछड़े वर्ग के जजों की नियुक्ति भी राजस्थान के अंदर की जाए, ताकि हम लोगों को लगे कि हमारे साथ भी न्याय होगा । यह न्याय कब होगा? इसे तो आप लोग ही करेंगे ।

          रेल मंत्रालय के मेरे कटौती प्रस्ताव थे । इसमें मेडता-पुष्कर रेल लाइन परियोजना के लिए बजट जारी करने की मांग करता हूं । मंडोर एक्सप्रेस, जो जोधपुर से चलकर जयपुर, दिल्ली आती है,उसका नाम वीर तेजाजी महाराज के नाम से करने की मैं मांग करता हूं । स्टेशनों पर यात्री भार के नियमों में शिथिलता देकर संसदीय क्षेत्र नागौर जिले के डीडवाना, मकराना, कुचामन, लाडनू, नावा, खाटू, मेडता, गोटन, मुंडवा व नागौर आदि स्टेशनों पर स्वचालित सीढ़िया लगाने, विश्राम गृह, टीन शेड के विस्तार आदि कार्यों की मांग करता हूं ।

          लीलण एक्सप्रेस, 12467/12468 का संचालन बीकानेर से नागौर होते हुए जयपुर मार्ग पर जल्द से जल्द शुरू किया जाए ।

माननीय सभापति : हनुमान बेनीवाल जी, आप रेलवेज़ पर बोल चुके हैं ।

श्री हनुमान बेनीवाल : मैडम, यह सप्लीमेंट्री डिमांड का है । मैंने सप्लीमेंट्री रेलवे पर दिया था ।

माननीय सभापति : अब आप समाप्त करिए ।

श्री हनुमान बेनीवाल : वर्ष 2020 व वर्तमान वर्ष में नागौर जिले के कूचामन, खाटू व नावा स्टेशनों पर जिन ट्रेनों का ठहराव बंद किया गया, जनहित में उनका ठहराव पुन: चालू किया जाए ।

          सभापति जी,अगर आप परमिशन दें, तो 30 सेकेंड और बोल दूं । मुझे सड़क परिवहन पर बोलना है । आप जब कहती हैं तो मैं बैठ जाता हूं ।

माननीय सभापति : नहीं बेनीवाल जी, आपको एक मिनट एक्स्ट्रा मिल चुका है ।

श्री सुरेश पुजारी (बारगढ़): सभापति जी,मैं सप्लीमेंट्री डिमांड्स फॉर ग्रांट्स के सपोर्ट में बोलने के लिए खड़ा हुआ हूं । बजट सैशन से पहले हम लोग लगभग एक साल तक कोविड-19 की महामारी से गुजरे । नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में गरीब कल्याण योजना में लाखों करोड़ रुपये केंद्र सरकार ने खर्च किए । As the economy of this country was adversely affected for a period of one year because of COVID-19, रेवेन्यू कहां से होगा? I think, the present Finance Minister was the only Finance Minister in the history of Indian democracy who presented the Budget in an adverse situation. यह बाद में मुझे पता चला कि in spite of the fact that the economy of this country was adversely affected. देश के किसानों की मेहनत आखिर में रंग लाई । गवर्नमेंट ऑफ इंडिया के पास बजट बनाने के लिए और यह सप्लीमेंट्री बजट भी पेश करने के लिए रेवेन्यू आ गया ।

इस संदर्भ में, मैं यह इसलिए उल्लेख कर रहा हूं क्योंकि आज ओडिशा के किसान बहुत परेशान हैं । ओडिशा में लाखों क्विंटल धान मंडियों में पड़ा हुआ है । I again repeat that more than one lakh quintal of paddy is still lying for sale in various markets of Odisha. किसान को धान बेचने के बाद पैसा मिल जाता तो वे बीज खरीदते और रबी की खेती शुरू करते ।   आज लेकिन लोग मंडी में बैठे हुए हैं, अगर वे नहीं बैठेंगे तो चोरी हो जाएगी, चूहा धान खा जाएगा, अगर बारिश हुई तो पूरा खत्म हो जाएगा । वहां हजारों किसान बैठे हुए हैं । चार दिन हो गए हैं, ओडिशा विधान सभा भी बंद है । ओडिशा में टोकन सिस्टम शुरू किया गया है । आप किसान को टोकन देते हैं, वह टोकन सरकार के कारण लैप्स हो जाती है इसलिए अनाज बेचना संभव नहीं हो पाता है ।

          टोकन के बारे में अलग-अलग प्रदेश से यहां आए सांसदों से मैंने इस बारे में पूछा कि क्या आपके प्रदेश में टोकन सिस्टम है?उनके प्रदेश में नहीं है । उसके बाद मैंने इनक्वायरी की,मुहम्मद बिन तुगलक जिस समय सुल्तान था,उस समय भी टोकन सिस्टम नहीं था,अभी शुरू हुआ है । इसीलिए मैं यह सब बोल रहा हूं ।

          हम लोग एक एकड़ में चालीस क्विंटल धान पैदा करते हैं लेकिन बेचने के समय सरकार उन्नीस क्विंटल लेने के लिए तैयार है बाकी का किसान क्या करेगा? इरिगेटेड एरिया में उन्नीस क्विंटल और नॉन-इरिगेटेड एरिया में तेरह क्विंटल ।

Madam, we fought for the nation 28 years before 1857. This means that we fought for the nation before India fought for herself. Now, the time has come when the entire nation should stand behind the farmers of Odisha; the entire Parliament should stand behind the farmers of Odisha; and the Central Government should also stand firmly behind the farmers of Odisha and ensure that the entire paddy lying in the market yard of Odisha is sold and the farmers are relieved from the pain caused by the Government of Odisha in the State.

Thank you.

DR. R.K. RANJAN (INNER MANIPUR): Madam, I rise here to support the Supplementary Demands for Grants – Second Batch for 2020-2021.

          During the COVID-19 pandemic, the Finance Ministry provided ample opportunity to achieve our national economic goals with the principle of AtmaNirbhar Bharat. This is really a good approach of our hon. Prime Minister, Shri Narendra Modi, Shrimati Nirmala Sitharaman, and also Shri Anurag Singh Thakur.

          Now, I would like to draw the kind attention of this august House towards a very important issue. As we all are aware, Manipur is the gateway of Modiji’s Act-East Policy. However, the State has been extremely suffering due to its landlocked geographical location which is prone to insurgency. This is the State where the indigenous land rights resources conflict with the general land law. The development process is derailed and is below zero level. Therefore, our road density is far below the national road density. We need more funds for infrastructural development. So, it is needed to give 50 per cent of the funds for infrastructure development to the State PWD. The border road, along the international boundary with Myanmar at close proximity needs to be constructed. By doing this, we will be able to stop cross border drug trafficking, smuggling of small arms, and even the insurgency activities in the border area.

          Some funds need to be allocated for the development of wetland in the State, including the Loktak Lake which is a Ramsar site. In order to attract more tourists to visit Loktak Lake, we need to develop a lake city with floating market in the Loktak Lake. Besides these, eco museum and wet land parks, should be promoted at that site with full support of livelihood activities.

          Next, we need to conserve Sangai. This species is available only in Kaibul Lamjao National Park. To conserve this species, we need a national project like Project Tiger. Moreover, it is also very important to conserve Ponies in Manipur. It is because the world-famous game, Polo originated from this species. So, we need a national project for its conservation. 

17.00 hrs           The State of Manipur also needs educational infrastructure to be developed and institutes like IIMs and AIIMS should be established there. The state of existing NIT in Manipur is very poor and shabby. So, we need enough fund for our educational institutes.

          There is also a need for revival of Jiribam tea estate in Manipur. I hope, all of us are aware that tea has its origin from Manipur. Exploration of hydrocarbons from the Barak river should be done through the agencies like ONGC and Oil India and not through private companies.  

          Madam, I have a very specific request to the hon. Finance Minister. Before the BJP Government came to power in Manipur, there was a 15-year rule by the Congress. Under their rule, the State had undergone a deficit of Rs.3871 crore and, therefore, it is has become very difficult for the present Government to take up any development project.

          I would like to say that COVID-19 has badly affected my State and its people. I would humbly request the Central Government to implement the 7th Pay Commission Report from 1st April, 2020.

          At the present moment, the State Government is implementing four Externally Aided Projects (EAP) with a total project cost of Rs.5316 crore. Another six new EAP proposals with a total project cost of Rs.4874 crore are in the pipeline and we are waiting for their approval from the Ministry of Finance.

          Madam, through you, on behalf of the people of Manipur, I would like to urge the Central Government that we need a Special Economic Package of Rs.40,567 crore so that the State itself can take-off its development and growth. Thank you very much for giving me this opportunity. 

कुमारी प्रतिमा भौमिक (त्रिपुरा पश्चिम):माननीय सभापति जी, आपने मुझे सप्लीमेंटरी डिमांड्स पर बोलने का मौका दिया, इसके लिए मैं अपनी और अपनी पार्टी की तरफ से धन्यवाद करती हूं । मोदी जी के कारण डैवलपमेंट मैपिंग में नार्थ-ईस्ट रिकोग्नाइज्ड है । मोदी जी नार्थ-ईस्ट को न्यू इंजन के तौर पर एक्ट ईस्ट के रूल पर काम कर रहे हैं । हमने आज तक कभी नहीं देखा कि किसी प्रधान मंत्री ने एनईसी की बैठक को संबोधित किया है । हमारे माननीय प्रधान मंत्री जी ने पहली बार एनईसी की बैठक को संबोधित किया । अब होम मिनिस्टर भी हर साल जाकर एनईसी को डैवलप करने के लिए,न्यू इंजन को गति देने के लिए काम कर रहे हैं । इसी भरोसे को लेकर बहुत कुछ किया जा रहा है । बीजेपी सरकार की तीसरी वर्षगांठ के अवसर पर 9 तारीख को मोदी जी ने 3500 करोड़ रुपये के प्रोजेक्ट्स में किसी का शिलान्यास किया और किसी का उद्घाटन किया ।

        महोदया,लॉकडाउन के समय सब बातें कर रहे थे । कुछ कम्युनिस्ट लोगों ने कहा कि दीया जलाकर और थाली बजाकर कुछ नहीं होगा,लेकिन जब वैक्सीन का टाइम आया तब चोरी-चोरी छुपकर खुद पहले वैक्सीन लगाई ।

मैं आपके माध्यम से माननीय प्रधान मंत्री और वित्त मंत्री जी से अनुरोध करती हूं कि त्रिपुरा में एम्स जैसा अस्पताल स्थापित करें । हमारा राज्य नार्थ-ईस्ट में सिल्चर,करीमगंज,मिजोरम और त्रिपुरा के अलावा म्यंमार और बांग्लादेश सटा हुआ है । हम कोविड वैक्सीनेशन सबको फ्री दे रहे हैं । मैं रिक्वेस्ट करती हूं कि हमारी स्टेट में एम्स जैसा बड़ा अस्पताल बने । इससे सबको सुविधा मिलेगी ।

        किसान की आय दोगुनी करने के लिए माननीय प्रधान मंत्री जी की मुहिम है,इसमें हमारा राज्य आगे चल रहा है । पिछले तीन सालों में हमारे राज्य ने एग्रीकल्चर में 13.7की ग्रोथ दर्ज की है । यह छोटा राज्य है, लेकिन मेन आधार एग्रीकल्चर है । इस हिसाब से यहां कृषि विश्वविद्यालय की स्थापना करना बहुत जरूरी है । मैं आपके माध्यम से माननीय मंत्री जी से कृषि विश्वविद्यालय की स्थापना का अनुरोध करती हूं ।

        इसके अलावा टूरिज्म की दृष्टि में नार्थ्-ईस्ट बहुत अच्छी स्थिति में है । महाभारत के टाइम से ही नार्थ-ईस्ट का बहुत बड़ा पार्टिसिपेशन था । क्योंकि, महाभारत में जो युद्ध होते थे,उसके लिए हाथी नार्थ-ईस्ट से ही जाता था । नार्थ-ईस्ट की जियोग्राफी उत्तर प्रदेश की जियोग्राफी के बराबर है,लेकिन हमारी जनसंख्या बहुत कम है । यहां पर नैचुरल ब्यूटी बहुत अच्छी है । पर्यटन की दृष्टि से हम लोग बहुत अच्छी स्थिति में हैं । आदरणीय मोदी जी ने टूरिज्म को बढ़ावा देने के लिए माता त्रिपुरेश्वरी मंदिर को इस साल 37.84 करोड़ रुपये दिए हैं । माता त्रिपुर सुन्दरी के नाम से त्रिपुरा को जाना जाता है । मैं आपके माध्यम से अनुरोध करना चाहती हूं कि उनाकोटी को इंटरनेशनल हेरिटेज में शामिल करने का प्रयास किया जाए । इसके अलावा, हमारा राज्य बांग्लादेश की तीन दिशाओं से घिरा हुआ है,इसलिए वहां सैनिक स्कूल की स्थापना की जाए ।

          पाइनएपल हमारे राज्य का स्टेट फ्रूट है । पहले भी था । लेकिन, हम लोगों को पाइनएपल से अपनी इकोनॉमी को आगे लेकर जाना है । अभी हमारे यहां से पाइनएपल दुबई में जाता है । पहले यहां सेंट्रल गवर्नमेंट का पाइनएपल का एक नेरामैक फूड प्रोसेसिंग सेंटर था । कुमारघाट में उसको दोबारा शुरू किया जाए ।

          खेल-कूद में हमारा स्टेट अच्छा है । दीपा कर्माकर हमारे स्टेट से आती हैं । ‘खेलो इंडिया’ के माध्यम से हमारे स्टेट के छोटे प्लेयर को अच्छी जगहों पर जाकर खेलने का मौका मिल रहा है । मैं चाहती हूं कि हमारे राज्य में दो स्पॉर्ट्स कॉम्पलेक्स बनें, एक सोनामुरा में और दूसरा उदयपुर में । इसके अलावा, हॉकी का भी एक नेशनल स्टेडियम बने । क्योंकि हॉकी के जो नेशनल प्लेयर्स हैं, वे हमारे स्टेट से भी आते हैं ।

          दो जगहों पर आधुनिक बस स्टैंड बनाया जाए । क्योंकि वहां माताबारी का डेवलपमेंट हो रहा है । 9 तारीख को बांग्लादेश के प्रधान मंत्री और हमारे देश के प्रधान मंत्री जी,दो देशों के प्रधान मंत्री जी ने मैत्री सेतु का उद्घाटन किया है । इसके तहत अभी नार्थ-ईस्ट में गेटवे ‍त्रिपुरा है । म्यांमार और बांग्लोदश के आस-पास सभी जगहों पर रोड बन रहे हैं । इसलिए, मैं अनुरोध करना चाहती हूं कि हमारे स्टेट में एक आधुनिक बस स्टैंड बने ।

          सभी राज्यों में एक महिला यूनिवर्सिटी है । इसलिए, हमारे स्टेट में भी एक महिला यूनिवर्सिटी बनाई जाए । इसके लिए मैं आपके माध्यम से माननीय मंत्री जी से अनुरोध करती हूं । अभी वे यहां बैठे हुए हैं । धन्यवाद ।

श्री देवजी पटेल (जालौर):धन्यवाद सभापति महोदया, आज मैं सप्लिमेंटरी डिमांड्स फॉर ग्रांट के समर्थन में बोलने के लिए खड़ा हुआ हूं । मैं आदरणीय प्रधान मंत्री जी और माननीय वित्त मंत्री जो को धन्यवाद देता हूं,क्योंकि उन्होंने जिस हिसाब से इस देश को संभाला, कोरोना महामारी हमारे देश में आई और उसके बाद अर्थव्यवस्था को वापस पटरी पर लाने के लिए उन्होंने जो दिशा-निर्देश और कार्य किए, उससे व्यापारी,आम जन, किसान सबको लाभ मिला । मैं खुद एक किसान परिवार से आता हूं और व्यापार से भी संबंध रखता हूं । जिस हिसाब से किसान को ‘प्रधान मंत्री सम्मान निधि योजना’के तहत छ: हजार रुपये दिए जाते हैं या मेरे क्षेत्र में ‘प्रधान मंत्री फसल बीमा योजना’ के माध्यम से लाखों रुपये का जो किसानों का नुकसान हुआ, उस नुकसान की भरपाई के लिए यह एक अच्छी योजना सफल साबित हुई ।

        महोदया,कई बार मेरे यहां टिड्डियों ने हमला किया, मुझे लगा कि किसान बर्बाद हो जाएंगे,लेकिन,उस किसान ने जो प्रधान मंत्री फसल बीमा करवाया था, उससे उसको लाभ मिला । छ: हजार रुपये की किस्त सभी किसानों में खातों में पहुंची । अगर हम खाद-बीज को देखें,तो नीम कोटेड यूरिया के माध्यम से हमारे यहां किसान को ब्लैक मार्केटिंग न करनी पड़े, चूंकि मेरा पूरा क्षेत्र कृषि क्षेत्र है और उस कृषि क्षेत्र में पहले बहुत ब्लैक मार्केटिंग होती है,लेकिन उस ब्लैक मार्केटिंग को भी रोकने का कार्य हुआ ।

        डेयरी के माध्यम से डेयरी उद्योग को बढ़ावा दिया गया । उस उद्योग के माध्यम से मेरे यहां एक श्वेत क्रांति आई, जिससे हमारे क्षेत्र की महिलाएं अपना रोजगार और अपना घर चलाने में सफल हुईं । मैं डेयरी के कर्मचारियों को भी धन्यवाद दूंगा, क्योंकि उन्होंने इस कोरोना महामारी में भी डेयरी को सफलतापूर्वक आगे बढ़ाया और डेयरी चलती रही,जिससे उनका रोजगार हुआ और रोजगार के माध्यम से उनके घर में पैसे की आवक शुरू हुई । मैं पिछले कई दिनों से व्यापारियों से चर्चा कर रहा था,मैं माननीय वित्त मंत्री जी को धन्यवाद दूंगा कि जिस हिसाब इन्होंने जीएसटी के पूरे समीकरण को संभालकर रखा है और जीएसटी ने 1,20,000 करोड़ रुपये क्रॉस किया है,यह व्यापारियों के लिए बहुत अच्छा है । व्यापारियों की जो अर्थव्यवस्था है,उस अर्थव्यवस्था को बनाए रखने में यह सफल साबित हुआ है । इन्होंने 20 लाख करोड़ रुपये का पैकेज देकर जिस हिसाब से इस देश को संभाला है,अगर हम उस हिसाब से भी देखें, तो सभी वर्गों के लिए यह एक लाइफ लाइन बनी है और उस लाइफ लाइन की मदद से भारत देश आज विश्व में वापस अपनी अर्थव्यवस्था को लेकर खड़ा हुआ है और वह आगे बढ़ रहा है ।

          सभापति महोदया, आपने देखा होगा कि फाइनेंस को व्यवस्थित करने के लिए, फाइनेंस के माध्यम से सभी व्यवस्थाओं और एक-एक विभाग को संभालने के लिए जो कार्य किए गए हैं, वे कार्य बहुत सराहनीय हैं । लेकिन मैं आपके सामने मेरे क्षेत्र और राजस्थान के कुछ विषय जरूर रखना चाहूंगा । जैसे मैं कृषि क्षेत्र से आता हूं । हम एमएसपी के बारे में भी चर्चा करते हैं । हमारे यहां सरसों की फसल होती है,आपने सरसों का अच्छा रेट दिया है । अभी उसके लिए 54 का रेट मिल रहा है,जिससे हमारे यहां के किसान खुश हैं । हमारे यहां जीरे की भी फसल होती है । अगर उस जीरे के लिए भी एमएसपी का रेट नक्की हो,ताकि हमारे यहां का उत्तम क्वॉलिटी का जीरा बिकेगा और ईसबगोल भी बिकेगा, जिसका लाभ किसानों को मिलेगा ।

          सभापति महोदया, आपने देखा होगा कि डेयरी के अंदर जो दूध है,पिछली बार यहां पर एक चर्चा हुई थी । जब भाजपा की सरकार नहीं आई थी,उस समय जब दूध का भाव बढ़ा था,तो मध्यम वर्ग पर बोझ आ गया था,ऐसी कोई चर्चा हुई थी । आप सबको ज्ञात है कि जो किसान है,वह एक-दो गाय या एक-दो भैंस रखकर जिस हिसाब से कृषि आधारित फसल करता है,उसी हिसाब से यह पशुपालन भी कृषि पर आधारित है । वह कृषि के साथ एक जगह पर कहीं न कहीं मैच करता है । लेकिन दूध का रेट नहीं मिलने के कारण जो हमारा किसान है,उस किसान को कहीं न कहीं समस्या होती है । जब हम मध्यम वर्ग की चर्चा कर रहे हैं, हमें उसमें भी उसका जरूर ध्यान रखना चाहिए । लेकिन किसानों को दूध का रेट भी मिलना चाहिए, इसके लिए डेयरी उद्योग को और बढ़ावा देना चाहिए, ताकि हमारा डेयरी उद्योग फले-फूले और वह आगे बढ़ सके ।

          गुजरात के अंदर अमूल डेयरी है,बनास डेयरी है । हम राजस्थान में देखें, तो वहां पर सरस डेयरी है । लेकिन सरस डेयरी के अंदर हमें बोनस नहीं मिलता है । केन्द्र सरकार एक सिस्टम तय करे और उस सिस्टम के माध्यम से किसानों को हर जगह पर एक समान बोनस मिलना चाहिए, क्योंकि बनास डेयरी 22 प्रतिशत बोनस दे रही है और सरस डेयरी 3 प्रतिशत बोनस दे रही है । अब 22 कहां और 3 कहां? हम फंसे हुए हैं । इसलिए मेरा आपके माध्यम से माननीय वित्त मंत्री जी से यह निवेदन है कि हमें इस सिस्टम को भी देखना चाहिए ।

मेरे क्षेत्र की कुछ मांगें भी हैं । यहां पर सम्माननीय अनुराग जी बैठे हुए हैं । मैं इनसे जरूर निवेदन करना चाहूंगा । हमारे जोधपुर में एक एम्स है । जालौर-सिरोही में एक छोटा-सा कॉलेज दे दिया जाए, तब शायद हमारा भी भला हो जाएगा, क्योंकि वह टीएसपी का एरिया है और बहुत समस्या वाला है । शायद अनुराग जी वहां पर बात कर रहे हैं, लेकिन यह आपके माध्यम से चला जाएगा तो मेरे लिए फायदेमंद होगा । 

सभापति महोदया, मुझे आपने बोलने का मौका दिया है,तो मेरी एक डिमांड और है । मेरा जो सिरोही जिला है,वह रेल लाइन से नहीं जुड़ा हुआ है । जैसे हनुमान बैनीवाल जी ने कहा था । मुझे रेल मंत्रालय के नियंत्रणाधीन अनुदानों की मांगों पर बोलने का मौका नहीं मिला था । लेकिन मैं आपके माध्यम से जरूर अनुरोध करना चाहूंगा कि उसके लिए पहले 1,500 करोड़ रुपये का एक डीपीआर बना था,अगर उसके ऊपर कार्रवाई होगी, तो मेरा सिरोही जिला भी उससे जुड़ जाएगा । हमें शिक्षा के क्षेत्र में एक जवाहर नवोदय विद्यालय मिल जाए, तो शायद वहां के गरीबों का भी भला हो जाएगा । मेरी ऐसी दो-चार डिमांड्स हैं । मैं आपके माध्यम से माननीय मंत्री जी से जरूर निवेदन करना चाहूंगा ।

मैं आपसे यह भी अनुरोध करूंगा कि आपकी व्यापारियों के लिए जो स्कीम है,उस स्कीम के अंदर बैंकों के माध्यम से जो लोन मिल रहा है,उस लोन को कुछ हद तक थोड़ा लिबरल करना चाहिए, ताकि व्यापरियों को बैंकों से आसानी से लोन मिल सके । अगर व्यापारियों को आसानी से लोन मिलेगा, तो व्यवसाय बढ़ेगा और अगर उसका व्यवसाय बढ़ेगा, तो जरूर रोज़गार उपलब्ध होगा । अगर रोज़गार उपलब्ध होगा, तभी हम जो सोच रहे हैं कि हमें गरीबी मिटानी है,तभी हम उस गरीबी को मिटा पाएंगे । मैं आपसे यही अनुरोध करना चाहूंगा । 

श्रीमती हेमामालिनी (मथुरा):सभापति महोदया, धन्यवाद । मैं डिमाण्ड्स फॉर ग्रांट्स पर बोलना चाहूंगी कि मेरे संसदीय क्षेत्र मथुरा के लिए भी कुछ दिया जाए । रिलीजियस टूरिज्म सेन्टर होने के नाते यहां पर बहुत सारे लोग आते हैं । हम बहुत सारा काम करना चाहते हैं, लेकिन फंड की कमी की वजह से कर नहीं पाते हैं । जैसे – तीर्थ स्थल हैं, उनकी सफाई करवानी है,लाइट लगवानी है और यमुना की सफाई करवाने के लिए फंड नहीं होने की वजह से बहुत प्रॉब्लम होती है । इन सब चीजों को मद्देनजर रखते हुए हम चाहेंगे कि मथुरा के लिए कुछ स्पेशल ग्रांट दी जाए । आज अयोध्या में बहुत कुछ हो रहा है । वैसे ही मेरे संसदीय क्षेत्र मथुरा में भी हो जाए तो बहुत खुशी होगी । हमारे मथुरावासी खुश होंगे और भगवान कृष्ण का आशीर्वाद भी मिलेगा ।

श्री रविन्दर कुशवाहा (सलेमपुर):सभापति महोदया, धन्यवाद । मैं डिमाण्ड्स फॉर ग्रांट्स के समर्थन में बोलने के लिए खड़ा हुआ हूँ । ऐसे तो कोरोना काल में हमारे प्रधान मंत्री जी के नेतृत्व में देश के अन्दर बहुत बड़ा काम हुआ है । आज वैक्सीन होने के कारण देश की सरकार इस बीमारी पर रोक लगाने की दिशा में आगे बढी है । मैं स्वास्थ्य के दृष्टिकोण से यह कहना चाहूंगा कि खासकर उत्तर प्रदेश में बहुत अच्छी व्यवस्था है । माननीय प्रधान मंत्री जी के नेतृत्व में पिछली बार एक योजना बनी थी कि हर संसदीय क्षेत्र में एक मेडिकल कॉलेज की स्थापना की जाएगी । इस परिप्रेक्ष्य में उत्तर प्रदेश में तमाम मेडिकल कॉलेजों की स्थापना की गई है और बहुत तेजी से हम मेडिकल कॉलेज बनाने की दिशा में अग्रसर हैं । मैं सदन के माध्यम से मेरे संसदीय क्षेत्र सलेमपुर और बलिया की ओर सदन का ध्यान आकृष्ट कराना चाहूंगा । खासकर बलिया जिला मुख्यालय ऐसा है,जो गंगा के किनारे अंतिम छोर पर पड़ता है । उसके बाद बिहार की सीमा शुरू हो जाती है । बलिया ऐसा एक जिला है,जहां पर गंभीर रोग से पीड़ित होने के बाद बीमार आदमी को सीधे बनारस जो 180 किलोमीटर दूर है या छपरा जो 180 किलोमीटर दूर है या फिर गोरखपुर ले जाना पड़ता है । लगभग 200 किलोमीटर की दूरी पर लोगों को लेकर जाना पड़ता है । इस बीच तमाम लोग काल कवलित हो जाते हैं । भारत सरकार की गाइडलाइन है कि जिला मुख्यालय पर ही मेडिकल कॉलेज की स्थापना होगी । इसके लिए मैं सरकार से अनुरोध करूंगा कि गाइडलाइन में छूट देते हुए हमारे यहां सिकन्दरपुर विधान सभा क्षेत्र के अंतर्गत पुर-पकड़ी ग्राम सभा में 40 एकड़ जमीन मेडिकल कॉलेज के नाम से उपलब्ध है तो गाइडलाइन में छूट देते हुए वहां पर मेडिकल कॉलेज की स्थापना की जाए ।

          हमारे यहां पर एक और दिक्कत है । हम लोग भ्रमण करते हैं तो तमाम जगहों पर देखते हैं कि स्वास्थ्य केन्द्र बने हैं, बिल्डिंग खड़ी है,लेकिन वहां न तो स्टाफ है,न डॉक्टर है और न ही कोई फार्मासिस्ट है । बिल्डिंग बनकर तैयार है,लेकिन उसमें घास फूस जमा है । उसका काम नहीं हो पा रहा है । सरकार ने मेडिकल कॉलेज के माध्यम से काम किया है,जिससे हमारे तमाम लड़के डॉक्टर बनें । सरकार इस दिशा में अग्रसर है,लेकिन यह काम जल्दी से जल्दी हो ताकि सभी स्वास्थ्य केन्द्र चालू किए जा सकें ।

 

श्री अनुराग सिंह ठाकुर:सभापति महोदया, धन्यवाद । मैं सबसे पहले सभी माननीय सांसदों का आभार प्रकट करता हूँ । जसबीर सिंह जी से लेकर कुशवाहा जी तक का अभार प्रकट करता हूँ, जिन्होंने आज की सप्लीमेंट्री डिमाण्ड्स फॉर ग्रांट्स में अपना योगदान दिया है और अलग-अलग विषयों को प्रमुखता से उठाया है ।

मैं इस बात के लिए भी आभार प्रकट करता हूं कि आपदा के समय केन्द्र सरकार ने मोदी जी के नेतृत्व में देश के सभी राज्यों के लिए, देश के 138 करोड़ भारतीयों के लिए कदम उठाए हैं, जिसकी भूरि-भूरि प्रशंसा लगभग सभी राजनीतिक दलों के माननीय सदस्यों ने की है । इसके ‍लिए में उनके प्रति आभार प्रकट करता हूं । यही एक कारण भी है कि आज हम आप सबके बीच सप्लीमेंटरी ‍डिमाण्ड्स का सेकण्ड और फाइनल बैच लेकर आए हैं । उसमें कुल मिलाकर 79 ग्राण्ट्स और दो एप्रोप्रिएशन्स की बात हम कर रहे हैं । इसमें हम जो कुल मिलाकर अतिरिक्त खर्चे की बात कर रहे हैं, वह लगभग 6 लाख 28 हजार 379 करोड़ रुपये है और इसमें से नेट कैश आउटगो लगभग 4 लाख 12 हजार 653 करोड़ रुपये है । इसमें से हम जो कैश आउटगो की बात कर रहे हैं, वह लगभग 3 लाख 79 हजार 699 करोड़ रुपये है,जिसमें से रेवेन्यु सेक्शन के अंतर्गत यह पूंजी आएगी और इसके अलावा, कैपिटल सेक्शन के अंतर्गत 32 हजार 964.48 करोड़ रुपये रखे गए हैं । 

          महोदया, मैं यह भी कहना चाहता हूं कि जो कुल मिलाकर एडिशनल कैश आउटगो है,वह 4 लाख 12 हजार 653.48 करोड़ रुपये है,जिसमें से technical supplementary to be matched by surrender of savings of the Ministries/Departments or by enhanced receipts and recoveries is Rs. 2,15,725 crore और टोकन सप्लीमेंटरी 151 लाख रुपये है । कुछ माननीय सांसदों ने इसमें यह भी कहा कि मनरेगा में क्या होगा, बाकियों में क्या होगा? मैं यह कहना चाहता हूं कि जब आपदा थी,इसमें ज्यादा पैसा क्यों देना पड़ा? जो 2020-21 के बजटरी एस्टीमेट्स थे,उस समय मनरेगा के लिए 61 हजार करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया था । आपको याद होगा कि पिछले साल लगभग इसी समय के दौरान जब लॉकडाउन हुआ, उसके बाद देश भर में पहले दो-तीन महीनों में काम एक तरह से ठप्प पड़ा था । जब करोड़ों प्रवासी मजदूर वापस अपने राज्यों में गए,उनको रोजगार के अवसर मिल सकें, अन्न और धन की कमी न हो, इसलिए मनरेगा का बजट उस समय भी बढ़ाया गया । मनरेगा के लिए 61 हजार करोड़ रुपये के साथ-साथ 40 हजार करोड़ रुपये की एडिशनल ग्राण्ट दी गई । कुल मिलाकर 1 लाख 11 हजार 500 करोड़ रुपये इसके लिए हम लेकर आए हैं । हमने उसमें एक और काम यह किया कि उसमें जो दिहाड़ी थी,उसे 182 रुपये से बढ़ाकर 202 रुपये कर दी ताकि किसी गरीब को पैसे की कमी न आए, उनको वहां पर रोजगार के अवसर भी मिलें । इसके लिए, इसके ऊपर रिकॉर्ड बजटरी प्रावधान किया गया । 1 लाख 11 हजार 500 करोड़ रुपये से ज्यादा का प्रावधान इसमें किया गया । एक अन्य बात, जो हालांकि इस सप्लीमेंटरी डिमाण्ड्स से नहीं जुड़ी है,लेकिन मनरेगा से जुड़ी हुई है कि इस साल के बजट में भी माननीय वित्त मंत्री जी ने 73 हजार करोड़ रुपये का प्रावधान मनरेगा के लिए रखा है । कुल मिलाकर, इसके माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर मिलें और विकास भी हो,उसके लिए प्रावधान किया गया ।

17.23 hrs                       (Hon. Speaker in the Chair)           महोदय, जहां तक डिफेंस के कैपिटल सेक्शन की बात है,उसमें 20 हजार 626 करोड़ रुपये के कैश आउटगो की बात हम कर रहे हैं । आपको पता है कि जबसे मोदी सरकार आई है,उससे पूर्व में बुलेट प्रूफ जैकेट्स नहीं खरीदी गई थीं, हमने रिकॉर्ड बुलेट प्रूफ जैकेट्स भी खरीदीं । लड़ाकू विमान, जो नहीं खरीदे गए थे,हमने वह भी खरीदने का काम किया । यहां तक हमने राफेल विमान भी खरीदने का काम किया । माननीय रक्षा मंत्री जी यहां बैठे हैं, राफेल विमान लाने का काम भी किया, सीमा पर भारतीय सेना को मजबूत करने का काम भी किया और जब चीन अतिक्रमण की भूमिका में था,तब पहले माननीय प्रधानमंत्री जी ने और फिर रक्षा मंत्री जी ने बॉर्डर पर जाकर अपने सैनिकों का मनोबल बढ़ाया । तब वहीं पर हमने यहां अपना कैपिटल आउटगो भी बढ़ाया है,ताकि भारतीय सेना को उपकरणों की कोई कमी न हो और उसमें किसी तरह से कोई कमी न आए । हमने सेना को मजबूत करने का काम किया और उसके लिए प्रावधान भी किया ।

          सर,आज सुबह सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री माननीय श्री नितिन गडकरी जी यहां उत्तर दे रहे थे,मुझे नहीं लगता है कि पूरे सदन में उनसे कोई मतभेद रखता होगा,क्योंकि हर सांसद के क्षेत्र के लिए सड़कों का एक जाल देश में बिछाने का काम नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में नितिन गडकरी जी ने किया है । इसमें 10 हजार करोड़ रुपये का प्रावधान रोड ट्रांसपोर्ट एंड हाइवेज के कैपिटल सेक्शन के लिए किया गया है ।

          इसके अलावा फर्टिलाइजर्स की बात की है । भर्तृहरि महताब जी यहां पर कह रहे थे और उन्होंने कहा कि जो फर्टिलाइजर्स कंपनीज की पेमेंट की पेंडेंसी थी । हमने उसको भी करते हुए, उसमें 65,411.53 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है,ताकि इस कुल में से 64,598 करोड़ रुपये फर्टिलाइजर्स प्लांट्स को पेमेंट हो सके, जिससे हमारे देश के किसानों को फर्टिलाइजर्स मिलने में आगे कोई दिक्कत न हो, न कोई प्लांट बंद हो और न ही किसानों को कोई दिक्कत आए ।

          सर,इसी तरह से इसमें कुछ एडिश्नल अमाउण्ट है,जो प्रधान मंत्री गरीब कल्याण योजना के माध्यम से है । दादा, जो आप पूछ रहे थे । वह इसलिए भी था कि अन्न और धन की कमी न आए । यह हमने आपादा के समय किया । उस समय हमने यह नहीं सोचा कि कितना खर्चा आएगा । मन में यह संकल्प लेकर चले थे कि देश का गरीब से गरीब व्यक्ति भी भूखे पेट न सोए और यह नरेन्द्र मोदी जी की सरकार ने किया । हमने 80 करोड़ लोगों को 8 महीने तक अन्न देने का काम किया और धन देने के लिए भी कोई कमी नहीं छोड़ी । मैंने पहले भी कहा कि जो देश का किसान है,अन्नदाता है,वह देश के करोड़ों लोगों का पेट भरने का काम करता है । उनके लिए भी जो किश्त अभी जून, जुलाई में आनी थी,नरेन्द्र मोदी जी के निर्देश पर 9 करोड़ से ज्यादा किसानों के खाते में 18 हजार करोड़ रुपये एक ही दिन में, एक ही मिनट के अंदर सारा ट्रांसफर कर दिया गया । जो 20 करोड़ बहनें, जो गरीब थीं, उन्हें शायद मनरेगा की दिहाड़ी में नहीं लगा पाए, ये काम-काज पर नहीं जा पाईं, सेल्फ हेल्फ गुप्स नहीं चला पाईं, लेकिन मोदी जी ने कहा कि पहले तीन महीने तक उनके खातों में पैसे डालते रहिए । बहन सुप्रिया जी ने कहा, हो सकता है कि 500 रुपये कम हो,लेकिन उस गरीब के बारे में देखिए, जिसके घर में अन्न में भी आया और धन भी आया, दवाई भी मुफ्त में मिली, इलाज कराने का अवसर पाया । वह तो उस समय शायद पूर्व की सरकारें न पहुंचा पातीं, लेकिन हमने बैंक खाते खोले और खातों में पैसे डालने का काम भी मोदी सरकार ने करके दिखाया । आज आपको 31 हजार करोड़ रुपये कम लग सकते हैं ।

प्रो. सौगत राय (दमदम) : आपने इतना सा किया, कैश असिस्टैंस क्यों नहीं किया? सभी को कैश असिस्टैंस देना चाहिए । यह दिया, वह दिया, लेकिन कैश नहीं दिया । …(व्यवधान)

श्री अनुराग सिंह ठाकुर : मैं इन सबका उत्तर देने के लिए सक्षम हूं । माननीय स्पीकर महोदय, मैं आभारी हूं कि सौगत राय जी ने यह बात कही है । मैं इस पर बिल्कुल राजनीतिक उत्तर नहीं देना चाहता था और अभी भी नहीं देना चाहूंगा, लेकिन इतना जरूर कहना चाहूंगा कि अन्न भी केन्द्र सरकार ने भेजा, लेकिन कुछ राज्यों की सरकारों ने यहां तक मन छोटा किया कि उन्होंने उस अन्न की बोरियों पर भी अपने मुख्य मंत्री की फोटो छापकर, अपने नाम छापकर राजनीतिक लाभ लेने का काम किया । …(व्यवधान) हमने गरीब के पेट की भूख को देखा, उसके दर्द को समझा और उसके दर्द को दूर करने का काम किया । कुछ लोग राजनीतिक रोटियां सेंकते रहे । यह उनको ही मैं देता हूं कि आप अपनी राजनीतिक रोटियां सेंकिए, लेकिन जल्द ही उसका रिजल्ट भी आने वाला है ।

          सर,उसी राज्य के एक माननीय सांसद ने कहा कि कैश नहीं दिया । इनके जमाने में बैंक खाता नहीं होता था । मनरेगा योजना में शुरूआत में देखिए कि क्या हुआ? उसमें दिहाड़ी लगाते थे,मस्टर रौल भरा जाता था,गरीब पसीना बहाता था,लेकिन पैसा उसके हाथ में नहीं जाता था । इसे सिस्टम में कौन खाता था?हमारी सरकार आई,हमने आधार कार्ड बनवाए, जन-धन खाते खोले, डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर कराने का काम शुरू किया और लाखों-करोड़ों रुपया केन्द्र की सरकार का भी बचाया । वह पैसा जिसके हक में जाना चाहिए था,खाते के माध्यम से उसके खाते में डालने का काम भी मोदी सरकार ने किया ।

यह कैश की बात करते हैं, कट मनी की बात करते हैं । हम न कैश की बात करते हैं और न कट मनी की बात करते है । हम अधिकार देने का काम आधार के माध्यम से करते हैं । इसलिए मैं कहना चाहता हूं कि कैश क्या होता है,…(व्यवधान) मैं यह कहता हूं कि जिन बहनों के बैंक खाते में पैसा गया, क्या उनको पैसे की मदद नहीं मिली ।…(व्यवधान)

सर,किसानों के खाते में एक नहीं, बल्कि तीन किश्तें, दो-दो हजार रुपए की तीन किश्तें छ:-छ: हजार रुपए गए हैं । वे देश के नौ करोड़ किसानों के खाते में गए हैं, लेकिन पश्चिम बंगाल की सरकार ने वहां के किसानों के हित को और हक को मारने का काम किया, वरना पश्चिम बंगाल के किसानों को भी    पैसा मिलता ।…(व्यवधान) इसके     लिए   कौन जिम्मेदार    है । ये    कैसे कैश की बात करते हैं ।…(व्यवधान)

प्रो. सौगत राय :  जब हम ने कहा कि हम वह देना चाहते हैं, आप राज्य सरकार को भेजिए, वह बोलें कि नहीं भेजेंगे, तो नहीं भेजा ।…(व्यवधान)

श्री अनुराग सिंह ठाकुर : सर,  केवल यही चेहरा जो आज तक पश्चिम बंगाल के लोगों ने किसान विरोधी सरकार का वहां पर देखा था,आज उन्हीं के माननीय सांसद ने दिखा दिया कि तृणमूल कांग्रेस की सरकार ने किसानों के खातों में पैसा डालने का विरोध किया और उसका समर्थन नहीं किया । यह दुर्भाग्यपूर्ण है । हम आज भी खुले मन से चाहते हैं कि जिस राज्य का एक भी किसान होगा,उसको मोदी सरकार खुले मन से मदद कर रही है, किसानों की आय को दोगुना करने का काम नरेन्द्र मोदी की सरकार करेगी । यही नहीं, इसके अलावा यह कहा गया कि एफसीआई के ऊपर कर्ज रहेगा ।

        सर,मैं एक बात पूरे सदन को कह दूं कि नेशनल स्मॉल सेविंग फंड के माध्यम से पहले फूड कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया के नाम पर कर्जा दिखाया जाता था,वहां से खरीद कर पब्लिक डिस्ट्रिब्यूशन सिस्टम के माध्यम से लोगों के बीच अन्न को बांटा जाता था । कभी इसको बजट में  फिस्‍कल डेफिशिट के रूप में नहीं दिखा जाता था । मोदी जी ने यह हिम्मत रखी और हमें कहा कि जो भी कर्जा हो, देश का जो बजट आता हो, उसको बिल्कुल पारदर्शिता के साथ लाना चाहिए । हम ने इस बार के बजट में जितना भी पैसा है,वह बजट में प्रावधान किया गया है । एक-एक खरीदारी वहीं से होगी और आगे दी भी जाएगी,इतना  पारदर्शी बजट आज से पहले नहीं कभी आया था । यह काम भी मोदी सरकार ने किया है । इसके अलावा भी एफसीआई की जो बॉरोइंग है, इसलिए इसमें लगभग 3,04,597.83 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है, ताकि गरीबों को भी अन्न दिया जा सके । जो इस कोविड के टाइम पर ज्यादा देना पड़ा । पब्लिक डिस्ट्रिब्यूशन के अलावा हम ने आठ महीने तक अन्न देने का काम किया है और एक तरह से एफसीआई को कर्ज से मुक्त करने का भी काम किया है । इसको इस दृष्टि से बिल्कुल न देखा जाए और यह भ्रम फैलाने का काम किया जाता है कि एफसीआई खरीद नहीं करेगी । अगर 138 करोड़ भारतीयों का पेट भरना है,तो खरीद करनी ही पड़ेगी । इसमें किसी को भ्रमित होने की आवश्यकता नहीं है । कुछ बातें जसबीर जी ने भी अपनी मांग में कही थी,वे अभी यहां नहीं हैं । हम ने उसे नोट भी किया है । उन्होंने पंजाब के हित की भी कुछ बात कही है ।

        सर,हम ने प्रधानमंत्री आवास योजना में भी दस हजार करोड़ रुपए अर्बन के लिए एडिशनल क्यों किया है, क्योंकि मोदी जी ने कहा है कि जब हम आजादी के 75 वर्ष मनाएंगे,तब आप ने वह कदम उठाया, आजाद भारत को,हम सभी माननीय सांसदों को एक नई पार्लियामेंट मिले, इसका काम भी आपने शुरू किया है,इसलिए मैं आपका और माननीय प्रधान मंत्री जी का बहुत-बहुत धन्यवाद और साधुवाद भी करता हूं । वहीं दूसरी ओर देश के गरीबों के लिए पक्का मकान सर ढ़कने के लिए मिले, जिनको 70 सालों में नहीं मिल पाया था, वर्ष 2022 तक देश के हर गरीब के पास पक्का मकान हो,हम ने यह भी प्रण लिया है और इसमें अर्बन क्षेत्र के लिए इस चीज का प्रावधान किया गया है । मुझे लगता है कि किसी को भी इसका विरोध नहीं करना चाहिए ।

        जब हम हेल्थ एंड फैमली वेलफेयर की बात करते हैं,तो 20,675 करोड़ रुपए का यहां पर क्यों प्रावधान किया गया है, क्योंकि आपदा के समय राज्यों को भी पैसे की आवश्यकता थी । लैब्स के नाम पर मात्र एक-दो लैब्स थीं,जहां पर कोविड का टेस्ट हो सकता था । आज पूरे देश भर में 23सौ से ज्यादा लैब्स हैं । हम एक दिन में लाखों टेस्ट कर पा रहे हैं ।

          उस समय हमारी क्षमता भी नहीं थी । पीपीई किट्स विदेश से इंपोर्ट करते थे,लेकिन किसी माननीय सांसद ने आत्मनिर्भर भारत के बारे में यह बात कही कि इसकी शुरूआत 1970 के दशक में हुई थी । मैं किसी के विरोध में नहीं जाना चाहता हूं । आज बहुत सारे लोग यह कहते हैं कि आत्मनिर्भर भारत हमने शुरू किया है,अगर आपने शुरू किया था,तो पीपीई किट्स आज तक क्यों नहीं बन पाई थीं । हमने शुरू किया तो,तीन महीनों के भीतर भारत के लोगों ने पांच लाख पीपीई किट्स एक दिन में बनाने की शुरूआत कर दी और दुनिया भर में एक्सपोर्ट करनी शुरू कर दी । यहां पर वेंटिलेटर्स बनाने की शुरूआत हो गई । यहां पर इंफ्रास्ट्रक्चर अपग्रेड करने की शुरूआत कर दी गई है । मैं इसे राजनीतिक रूप से नहीं ले जाना चाहता हूं, लेकिन कोविड की लड़ाई हम सबने एक साथ मिलकर लड़ी है । राज्यों की सरकारें, केन्द्र सरकार तथा सभी माननीय सांसदों ने एक साथ मिलकर यह लड़ाई लड़ी है । लेकिन अभी लड़ाई अधूरी है,कोरोना को हराना है,भारत को जीताना है ।

          इसलिए अगर यह प्रश्न उठाया गया है कि 35,000 करोड़ रुपये क्यों रखे गये हैं? क्या इससे सभी का टीकाकरण होगा? यह इसके प्रावधान में नहीं है । यह वर्ष 2021-22 के बजट में प्रावधान है । यह वर्ष 2020-21 की सप्लीमेंट्री डिमांड्स हैं, हम इसका दूसरा चरण लेकर आए हैं । मैं फिर भी कह दूं कि माननीय वित्त मंत्री जी ने अपने बजट भाषण में बहुत ही स्पष्ट कहा था कि देश को कोरोना मुक्त करना है । हमने बजट में 35,000 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है,अगर और आवश्यकता पड़ेगी, तो मोदी सरकार कोई कमी नहीं रखेगी । किसी के मन में शंका न रहे । टीकाकरण करवाएं । समय के साथ-साथ राज्यों से बातचीत करके डिसीजन लिए जा रहे हैं । निर्णय करने के बाद यह तय हुआ है कि 45 वर्ष से ज्यादा आयु वाले लोगों का जो टीकाकरण करना है,उसके भी मापदंड रखे गए कि कौन उसके अंतर्गत आ सकता है?जैसे ही यह लगेगा कि अगली उम्र वालों का टीकाकरण करने की आवश्यकता है,तो माननीय प्रधान मंत्री जी सभी राज्यों के मुख्य मंत्रियों से बात करके उस निर्णय को भी लेंगे । …(व्यवधान)

प्रो. सौगत राय : यूनिवर्सल इम्युनाइजेशन की जो बात हुई है, …(व्यवधान) उसे क्यों नहीं करते हैं? सभी लोगों को दीजिए ।…(व्यवधान)

श्री अनुराग सिंह ठाकुर: हमने केवल भारत के लिए ही नहीं किया है,बल्कि दुनिया के तमाम देशों की मदद करने का काम भी भारत ने किया है । पहले की कोई और सरकार होती,तो शायद दुनिया के किसी देश से वैक्सीन मांगती, लेकिन यह मोदी सरकार है,जिसने मेक इन इंडिया वैक्सीन को देश और दुनिया को देने का काम भी किया है । इसलिए इस विषय पर राजनीतिकरण न हो । हमने अपनी क्षमताओं को भी बढ़ाया है,आप भी अपनी क्षमता को थोड़ा बढ़ाइए ।…(व्यवधान)

श्री रवनीत सिंह : अभी सुप्रिया जी ने एक जुमले के बारे में बताया है ।…(व्यवधान)

श्री अनुराग सिंह ठाकुर: महोदय,केवल यही नहीं,इसके अलावा सीआरआइएफ के पैसे की जो बात एनएचएआई में की गई है,वह भी 6,220 करोड़ रुपये पूरे देश में सड़कें बनाने के लिए की गई हैं । सभी माननीय सांसद इन सब बातों से अवगत भी हैं । एक माननीय सांसद ने यह कहा कि पैसा हाथ में नहीं गया है । कोविड के समय किसी को बैंक की किस्त वापस नहीं देनी पडे़,इसके लिए सरकार ने एक महीने नहीं,बल्कि छ: महीने का मोरेटोरियम पीरियड बैंकों के माध्यम से दिलाया,ताकि लोगों पर किस्त का बोझ नहीं पड़े ।

        मैं इसके बाद व्यापार की बात करता हूं । मैं इसके लिए धन्यवादी हूं, क्योंकि बहुत से माननीय सांसदों ने इस बात का आभार भी प्रकट किया है, श्री नामा जी ने भी किया कि व्यापारी के पास पैसे की कमी नहीं आई । यह कमी क्यों नहीं आई? इमर्जेंसी क्रेडिटलाइन गारंटी स्कीम, ईसीएलजीएस के माध्यम से तीन लाख करोड़ रुपये का प्रावधान हमने मोदी सरकार के माध्यम से किया । इसमें मोदी सरकार की गारंटी थी कि किसी को अपनी जमीन,घर-जायदाद गिरवी नहीं रखनी पड़े । तीन लाख करोड़ रुपये मध्यम,लघु,सूक्ष्म तथा कुटीर उद्योग के व्यावसाइयों को भी देने का काम मोदी सरकार ने बैंकों के माध्यम से किया है । इसका इंट्रेस्ट रेट भी 7.50 से 9.25 परसेंट से नीचे ही रखा गया । उस समय लगभग 2,000,00करोड़ रुपये के इनकम टैक्स का रिफंड भी किया गया । टीडीएस, टीसीएस में 25प्रतिशत की कटौती गई । इसके अलावा पार्सल क्रेडिट गारंटी स्कीम में हजारों करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया । इसके साथ ही स्वामी फंड के माध्यम से रूके हुए हाऊसिंग प्रोजेक्ट्स को पूरा करने के लिए पैसे दिए गए । मैं इस संबंध में ज्यादा लंबा नहीं बोलना चाहता हूं, क्योंकि आपको अगला एजेंडा भी लेना है । लेकिन इतना जरूर कहूंगा कि ये पैसे उस समय खर्च किए गए हैं, जब देश को आवश्यकता थी । हमने फिसकल डेफिसिट नहीं देखा,हमने देश के लोगों की जान और देश की अर्थव्यवस्था को बचाने का काम किया और इसके साथ ही देश को आगे बढ़ाने का भी काम किया है । पिछले पांच महीनों की जीएसटी कलेक्शन देख लीजिए लगातार एक लाख करोड़ रुपये की जीएसटी कलेक्शन हिन्दुस्तान में हुई है ।

यह इसलिए हुई क्योंकि जो कदम हमने कोविड के समय में उठाए, उसके कारण इकोनॉमी की वी-शेप रिकवरी भी होनी शुरू हुई है । दुनिया भर की एजेंसीज ने कहा कि भारत वर्ष 2021-22 में डबल डिजिट ग्रोथ करेगा । यह शायद ही दुनिया के किसी देश को मिला हो,यह भारत को मिला क्योंकि श्री नरेन्द्र मोदी जी की सरकार ने सही कदम उठाए हैं ।

          मैं सभी माननीय सदस्यों का एक बार फिर आभार प्रकट करता हूँ कि उन्होंने इस चर्चा में अपना योगदान किया और इसका समर्थन किया है । मुझे पता है कि पाँच राज्यों में चुनाव चल रहे हैं, उसके बावजूद माननीय सदस्यगण अपना कीमती समय निकालकर यहाँ पर आए और समर्थन भी किया, इसके लिए सबका बहुत-बहुत आभार । …(व्यवधान)

माननीय अध्यक्ष: अब मैं वर्ष 2020-2021 के लिए अनुदानों की अनुपूरक मांगें – दूसरा बैच सभा के मतदान के लिए रखने से पहले वर्ष 2020-2021 के लिए अनुदानों की अनुपूरक मांगों पर श्री हनुमान बेनीवाल द्वारा अनेक कटौती प्रस्ताव प्रस्तुत किए गए हैं । मैं अब इन कटौती प्रस्तावों को सभा के समक्ष मतदान हेतु रखता हूँ ।

कटौती प्रस्ताव मतदान के लिए रखे गए तथा अस्वीकृत हुए ।

…( व्यवधान)

प्रो. सौगत राय : क्या वे सरकार के साथ नहीं हैं?…(व्यवधान)

माननीय अध्यक्ष: यह लोकतंत्र है और लोकतंत्र में सबको अपनी बात कहने और अपने विचारों की अभिव्यक्ति का अधिकार है ।

…( व्यवधान)

प्रो. सौगत राय : सरकारी दल से तो कट-मोशन नहीं दिया जाता है ।…(व्यवधान)

माननीय अध्यक्ष: वे सरकारी दल में नहीं हैं । आपको यह जानकारी रहनी चाहिए । आप वरिष्ठ सांसद हैं और वरिष्ठ सांसदों को यह जानकारी रहनी चाहिए कि अब वे सरकारी दल में शामिल नहीं हैं ।

…( व्यवधान)

माननीय अध्यक्ष: अब मैं वर्ष 2020-2021 के लिए अनुदानों की अनुपूरक मांगें – दूसरा बैच सभा के मतदान के लिए रखता हूँ ।

प्रश्न यह है:

“कि अनुदानों की अनुपूरक मांगों की सूची के स्तम्भ 2 में मांग संख्या 1 से 11, 13 से 15, 17 से 20, 23 से 29, 31 से 34, 37 से 44, 46 से 54, 57 से 59, 61 से 65, 67 से 71, 73, 75 से 77, 79, 83 से 87, 90 से 92, 94, 95 और 97 से 101 के सामने दर्शाये गए मांग शीर्षों के संबंध में 31 मार्च, 2021 को समाप्त होने वाले वर्ष के दौरान संदाय के क्रम में होने वाले खर्चों की अदायगी हेतु अनुदानों की अनुपूरक मांगों की सूची के स्तम्भ 3 में दर्शायी गयी राजस्व लेखा तथा पूंजी लेखा संबंधी राशियों से अनधिक संबंधित अनुपूरक राशियाँ भारत की संचित निधि में से राष्ट्रपति को दी जाएं ।” प्रस्ताव स्वीकृत हुआ ।