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Lok Sabha Debates

Combined Discussion On Statutory Resolution Regarding Disapproval Of The Jammu ... on 13 February, 2021

Seventeenth Loksabha > Title: Combined discussion on Statutory Resolution regarding disapproval of The Jammu and Kashmir Reorganisation (Amendment) Ordinance (Ordinance No. 1 of 2021) and passing of The Jammu and Kashmir Reorganisation (Amendment) Bill, 2021.

 

माननीयअध्यक्ष : आइटम नम्बर 28 और 29 । जम्मू कश्मीर पुनर्गठन (संशोधन) विधेयक, 2021 ।

       सांविधिक संकल्प, श्री अधीर रंजन चौधरी जी ।

 

SHRI ADHIR RANJAN CHOWDHURY (BAHARAMPUR): I beg to move:

“That this House disapproves of the Jammu and Kashmir Reorganisation (Amendment) Ordinance, 2021 (Ordinance No. 1 of 2021) promulgated by the President on 7 January, 2021.”   THE MINISTER OF STATE IN THE MINISTRY OF HOME AFFAIRS (SHRI G. KISHAN REDDY):  Sir, On behalf of Shri Amit Shah, I beg to move:
“That the Bill to amend the Jammu and Kashmir Reorganisation Act, 2019, as passed by Rajya Sabha, be taken into consideration.”   माननीयअध्यक्ष : मंत्री जी, आप बिल के बारेमें हल्का सा बता दीजिए ।
 
श्रीजी. किशन रेड्डी: माननीय अध्यक्ष जी, जम्मू कश्मीर अमेंडमेंट एक्ट, 2019 के अनुसार जम्मू-कश्मीर को 31 अक्टूबर, 2019 से जम्मू एंड कश्मीर यू.टी. को विथ लेजिस्लेचर और लेह और कारगिल जिलों को मिलाकर लद्दाख को यू.टी. बनाते हुए विद्आउट लेजिस्लेचर को रेक्गनाइज किया गया । इन दोनों यूटीज का देश के साथ कम्पलीट इंटीग्रेशन के बाद हर एक भारतवासी का ‘वन नेशन, वन कांस्टिट्यूशन’ का सपना था, जिसको नरेन्द्र मोदी जी की सरकार ने पूराकिया है । इसके बाद होलिस्टिक डेवलपमेंट की जिम्मेदारी सरकार की बनतीहै । इसी दृष्टिकोण से पब्लिक वेलफेयर को हर लेवल पर होलिस्टिक डेवलपमेंट, विकास की ओर इन दो स्टेट्स को ले जाने के लिए हम प्रयास कर रहे हैं । मगर जो कैडर था, उसमें सिर्फ जम्मू-कश्मीर के आईएएस,आईपीएस और आईएफएस थे, क्योंकि आर्टिकल 370 के अब्रोगेशन के बाद लगभग 170 सेन्ट्रल एक्ट पहली बार हम जम्मू-कश्मीर में लागू कर रहे हैं । अलग-अलग डेवलेपमेंटल एक्टिविटीज़ जो 70 सालों से जम्मू-कश्मीर में नहीं हुई थीं,उनको निग्लेक्ट करते थे, पहली बार जम्मू-कश्मीर अब्रोगेशन के बाद अभी वहां पर डेवलेपमेंटल एक्टिविटीज़ इम्प्लीमेंट कर रहे हैं । इसके लिए चाहे सेन्ट्रली स्पॉन्सर्ड स्कीम्स हों, राज्य सरकार के अलग-अलग कार्यक्रम हों, इसके अतिरिक्त सोशल अपलिफ्टमेंट्स के प्रोजेक्ट्स हों, उनको एग्जीक्यूट करना जरूरी था । इसके लिए अलग-अलग स्कीमों के द्वारा कैडर स्ट्रेन्थ को बेहतर करने के लिए यूटी एडमिनिस्ट्रेशन का एक्सपीरियंस रखने वाले ऑफिसर्स बहुत जरूरी हैं ।
       जम्मू-कश्मीर का अग्मुट कैडर के साथ मर्ज़र करने के प्रपोज़ल से यूनियन टेरिटरी का जो भी कैडर है,चाहे वह आईएएस हो, आईपीएस हो, आईएफएस हो, उसको अग्मुट कैडर के साथ ऑल इंडिया सर्विस के अधिकारियों की सेवा लेने के लिए किया है । पहले यह ऑर्डिनेंस था,अभी इसे विधेयक के रूप में हम आपके सामने लाए हैं । इसके कारण जम्मू-कश्मीर में अलग-अलग एक्टीविटीज़ को बढ़ाने के लिए जो कैडर स्ट्रेन्थ कम थी, अभी सेन्ट्रल पूल, अग्मुट पूल से कैडर को ले सकते हैं । इसीलिए मैं आप सभी महानुभावों से इस विधेयक को पारित करने का अनुरोध करता हूं ।
माननीयअध्यक्ष : प्रस्ताव प्रस्तुत हुआ :
“कि यह सभा राष्ट्रपति द्वारा 7 जनवरी, 2021 को प्रख्यापित जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन (संशोधन)अध्यादेश, 2021 (2021 का अध्यादेश संख्यांक 1) का निरनुमोदन करती है ।” और “कि जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम, 2019 का संशोधन करने वाले विधेयक, राज्य सभा द्वारा यथापारित,पर विचार किया जाए ।”   श्रीअधीर रंजन चौधरी : महोदय, मेरी पहली आपत्ति यह है कि जो मंत्री जी कह रहे हैं, उसके लिए ऑर्डिनेंस लाने की क्याजरूरत थी? मैं यह नहींसमझ पा रहा हूं । Invoking and promulgating Ordinances at regular intervals does not augur well for the parliamentary democracy of our country. The Government can certainly promulgate Ordinances, but it should be preceded by an emergent or extraordinary situation.  If it goes on promulgating Ordinances at regular intervals, it shows that the Government is losing confidence and faith in the parliamentary democracy of our country.
       The fact is that the Government has promulgated the Ordinance in a very supercilious manner.  Without any reason or rhyme, you are simply indulging in the route of Ordinance. There lies our objection, and that is why I have moved a Statutory Resolution.
       You should not appear as a ‘Government of Ordinances’.  You can discuss the matter during the regular Sessions of the Parliament.  We had never objected to summoning of the Winter Session of Lok Sabha.
But it is the NDA Government which had not subscribed to the view expressed by us that Winter Session should be summoned because a number of issues were there to be discussed.
       सर,मसूदी साहब को बोलने के बाद इंटरवीन कर सकते हैं?
अध्यक्षमहोदय : आप दो मिनट बोल लीजिए ।
SHRI ADHIR RANJAN CHOWDHURY: The amendment to Section 13 provides for the applicability to the UT of Jammu and Kashmir all other Articles in addition to Article 239A of the Constitution, which refers to elected members of the Legislative Assembly applicable to UT of Puducherry. The parent Act already provides for the applicability of Article 239A which relates to the creation of Legislature or Council of Ministers, or both for certain Union Territories.
The second issue is with regard to merging of All India Services Cadres as has been mentioned by you. Our hon. Home Minister is also here. The Ordinance amends Section 88 sub-Section 2 by stating that all the officers of the existing cadre of Jammu and Kashmir shall be borne and become part of the AGMUT cadre and all future allocations of All India Services Officers for the Union Territory of Jammu and Kashmir and Union Territory of Ladakh, shall be made to AGMUT cadre. The Ordinance amends Section 88 sub-section 3 by stating that the officers so borne or allocated on AGMUT cadre shall function in accordance with the rules framed by the Central Government. The move will help to tackle the shortage of All India Services Officers in Jammu and Kashmir as has been argued by you owing to an earlier rule fixing the ratio of direct recruitments in civil services to promotees from Jammu and Kashmir State Civil Services (Kashmir Administrative Services) at 50:50 instead of 67:33 formula followed in other States.
Hon. Speaker, Sir, our point of contention is loud and clear.  इस सदन में बड़े धमाके के साथ धारा 370 को एब्रोगेट किया गया । 35ए को एब्रोगेट किया गया । आपने पूरे देश को यह सपना दिखाया कि हम जम्मू कश्मीर में स्वर्ग बनाने जा रहे हैं । सभी को नौकरी मिलेगी,काम मिलेगा,घूमने का मौका मिलेगा । आतंकवाद खत्म हो जाएगा और पाकिस्तान हमारे खिलाफ कोई कार्रवाई करने की कोशिश नहीं करेगा, वगैरह-वगैरह । लेकिन आज डेढ़ साल लगभग होने जा रहा है और अब आप कानून ला रहे हैं कि जम्मू-कश्मीर में कैडर नहीं है । आई.ए.एस., आई.पी.एस. और आई.एफ.एस. नहीं है,इसलिए आप बाहर से कैडर मांगना चाहते हैं । यही तो बात है । मुद्दा तो यही है कि ‘अगमुट’ से कैडर मांगना चाहते हैं, क्योंकि जम्मू-कश्मीर में कैडर नहीं है । आप यह जरूर स्वीकार करेंगे कि आपने बिना तैयारी के साथ 370 का एब्रोगेशन किया है । मेरा यह कहना है कि अगर आपने तैयारी के साथ किया होता तो डेढ़ साल बाद आपको कैडर की कमी महसूस नहीं होती ।
दूसरी बात यह है कि यह कैडर लोकल होना जरूरी है, क्योंकि जम्मू-कश्मीर एक ऐसा सेंसिटिव स्टेट है, जहाँ आम लोग सरकार की नौकरशाही पर भरोसा नहीं करते हैं । यह सरकार वहाँ पर ट्रस्ट डेफिसिट भुगत रही है । वहाँ पर काफी ट्रस्ट डेफिसिट है इसलिए मैं आपको सलाह के रूप में यह कहना चाहता हूँ कि लोकल ऑफिसर्स को ज्यादा से ज्यादा तैनात करना जम्मू-कश्मीर प्रशासन के लिए बेहतर होगा,क्योंकि आप आई.ए.एस., आई.पी.एस. और आई.एफ.एस. को ‘अगमुट’ से इम्पोर्ट करते हैं । वे वहाँ की भाषा नहीं जानते हैं, वहाँ का कल्चर नहीं जानते हैं, वहाँ का तेवर, रूप-रेखा नहीं जानते हैं । कश्मीर एक अलग किस्म का राज्य है ।  
वहां के जमीनी स्तरसे जिन व्यक्तियों की जान-पहचान है, who is very much acquainted with the cultural roots of that particular State, they should be entrusted for these jobs. इसलिए मैं यह कहनाचाहता हूं कि वहांट्रस्ट डेफिसिट गहरा होता जा रहा है और अब आप बाहर से आईएएस और आईपीएस अधिकारियों को ला रहे हैं,जो दो साल के बाद ट्रांसफर भी हो जाएंगे,तो इसमें आपको फायदा क्या होगा,इसकी आपको हमसे ज्यादा जानकारी जरूर है,लेकिन यह बात भी सही है कि इन लोगों के साथ आम लोगों का,जमीनी स्तर के लोगों के उतने ताल्लुकात नहीं रहते हैं । ‘अगमुट’कैडर वाले तीन स्टेट्स और यूनियन टेरिटरीज चलाते हैं और बहुतसे ऐसे स्टेट्स हैं, जहां अभी ‘अगमुट’कैडर है और वे खुद चाहते हैं कि उनकेस्टेट के लिए एक डेडिकेटेड कैडर होना चाहिए, जैसे अरुणांचल प्रदेश । आपने खुद कहा था कि जम्मू-कश्मीर से आज अनुच्छेद 370 और 35ए को एब्रोगेट करके हम स्थायी समाधान के रास्ते पर आगे निकलेंगे । यह बात आपने इस सदन के अंदर बताई थी,लेकिन अब जो काम हो रहा है,वह टेम्पररी है । यह टेम्पररी स्टेटस है । अब आगे इस ढंग से कैडरनियुक्ति के चलतेआप जिस दिशा में जा रहे हैं, उससे मुझे शक होताहै कि कब यह स्थायी बन्दोबस्त होगा?स्थायी बन्दोबस्त कब होगा? कब जम्मू-कश्मीर को स्टेटहुड मिलेगा?आपने जम्मू-कश्मीर में क्या किया है, आप हमसे ज्यादा जानते हैं । पहले बताइए कि जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 एब्रोगेट होने से पहलेकितने आईएएस,आईपीएस और आईएफएस ऑफिसर्स थे, अभी कितने हैं,आपको कितने ऑफिसर्स की जरूरत है और इस जरूरत को आप कैसे पूरा करेंगे?
हम लोग जम्मू-कश्मीर के लिए बड़े चिन्तित हैं । चिन्तित इसलिए हैं, क्योंकि जम्मू-कश्मीर में अभी तक सामान्य हालात पैदा नहीं हुए हैं । जम्मू-कश्मीर में मिलिटेंसी चलती है । जम्मू-कश्मीर में लोगों के अंदरडर है और वहांभय का माहौल अभी तक मंडरा रहा है । जम्मू-कश्मीर के हमारे पूर्व चीफ मिनिस्टर साहब फारूख अब्दुल्ला जी, मुफ्ती जी, उमर अब्दुल्ला साहब - सबको आपनेहिरासत में ले लिया । कितने अनगिनत लोग अभी भी जेल में सड़ रहे हैं, इसके बारे में हमारे सामने कोई तथ्य नहीं है । आप जम्मू-कश्मीर को हिन्दुस्तान का एक हिस्सा मानने के बाद भी, जो पहले से उसकाहिस्सा था, आपने सपने दिखाए थे, फिर भी आपनेउस समय सारे जम्मू-कश्मीर को एक कैदखाने में बदल देने की कोशिश की थी, आप याद करके देखिए । जहां जम्मू-कश्मीर में लाखों की तादाद में फौजें तैनात हुई थीं । जम्मू-कश्मीर में हर बीस, तीस या चालीस मीटर के बाद कंक्रीट की वॉल बनाई गई थी । जम्मू-कश्मीर में सारी इंटरनेट सेवाएं, सारे कम्युनिकेशन्स को बन्दकर दिया गया था, जैसे कि वह हिन्दुस्तान का एक अलग हिस्सा है । फिर भी आप जम्मू-कश्मीर में सामान्य हालत बहाल करने में नाकामयाब रहे । आप कह सकते हैं कि वहांडीडीसी चुनाव कराएगए हैं, लेकिन डीडीसी चुनाव में भी हमनेटी.वी. पर क्या देखा?  उम्मीदवार को आपकीसिक्योरिटी एक कैदखाने के अंदरबन्द करके रखती है । कितने सारे लोगों ने डीडीसी चुनाव में भाग लिया है और कितने भाग लेने में सफल नहीं हुए हैं, आपको यह जानकारी है, क्योंकि अनगिनत पोलिटिकल वर्कर्स, आपकी इस जबर्दस्ती डेमोक्रेसी को बहालकरने के मसले में जेल में, हिरासत में दिन गुजार रहे हैं ।
आपने बहुत सारी स्वच्छता लाने की कोशिश की । रोशनी स्कीम और रोशनी एक्टसे आपने बहुत सारे घोटाले निकालने की कोशिश की, क्योंकि वहांके हाई कोर्ट ने यह कहा था कि जो रोशनी स्कीम है, उसमें आप देखिए कि कहां घोटाले हुए हैं, लेकिन आपकी तरफ से, आप हाई कोर्ट गए और रोशनी स्कीम में जांच न हो, इसके लिए आपने वहां अपनी तरफ से जोर-शोर से कोशिश की । The DDC elections were marred by the detention of political leaders. The onslaught on nomads and the unidimensional discourse of the Roshini Scheme were all set on the tactics of the BJP Government at the Centre and they were employed to eliminate any chance of resurgence of its opponents in the erstwhile Himalayan State, particularly in the Muslim majority Kashmir valley.
The Lieutenant Governor of Jammu and Kashmir while participating in the IT 2020 Global Summit in November 05, 2020 said, ‘The young population is ready to be an entrepreneur and contribute to AtmanirbharJammu and Kashmir. We are devising a new path, new policies, and new technological tools to strengthen our business ecosystem.’ However, the pertinent question where is that newness is. There is unemployment, restriction, lost avenues, and total confusion.
श्री राजीव प्रताप रूडी (सारण):आप क्या बोल रहे हैं? सर, आप बिल पर बोलिए । …(व्यवधान) आप कुछ भी बोले चले जा रहे हैं ।
श्रीअधीर रंजन चौधरी : हम बिल पर ही तो बोल रहे हैं । रूडी जी, यह बिल का ही हिस्सा है । Giving the plea to retreat the forest land, the present Administration came down heavily on the nomads and stepped up its anti-encroachment drive depriving at least a score of Gujjar and Bakriwala families of their decade long dwellings. The demolition was more pronounced in Pahalgam, Anantnag and Badgaon districts. क्या गलत कह रहे हैं?रोशनी एक्ट लाए । हाई कोर्ट ने कहा कि रोशनी एक्ट इल्लीगल है । आपने जब देखा कि बीजेपी के कद्दावर नेता इसमें फंस जाएंगे,आप इसका विरोध करने लगे ।
हमारा यह कहना है कि जम्मू कश्मीर से अनुच्छेद-370 एब्रोगेट करने के बाद आपने जो सपना दिखाया था, वह सपना बहाल नहीं हुआ है और जम्मू कश्मीर सामान्य नहीं हुआ है । वहां नब्बे हजार करोड़ से ज्यादा का बिज़नेस खत्म हो चुका है । इसलिए हम चाहते हैं कि जम्मू कश्मीर को आप कब और कैसे सुधार करेंगे, आप खुद बताइए ।
       अमित शाह जी, आपने सदन के अंदर यह भी कहा था कि आप ब्राह्मणों को वापस ले जाएंगे । क्या आप आज तक एक पण्डित को वापस ले जाने में सफल हुए? आप कहते हैं कि हम गिलगित-बल्तिस्तान को वापस लाएंगे । वह तो बाद की बात है, लेकिन जो इंटरनली डिस्पैच्ड हुए हैं, जो अभी जम्मू कश्मीर घाटी में नहीं जा पाते हैं, कम से कम उन लोगों को तो ले जाइए और वहां बसाइए । वह आपके दम में नहीं है ।
       आपने इण्डस्ट्रियल सेक्टर को तीन हजार एकड़ जमीन दे दी है, लेकिन पण्डित लोगों को 200 से 300 एकड़ जमीन देने में आप कामयाब नहीं हुए हैं । इन पण्डित लोगों को आप सामने रखते हुए, वर्ष 2014 और वर्ष 2019 का जो इलेक्शन मेनिफेस्टो था,उसमें आपने वादा किया था कि आप पण्डितों को वापस ले जाएंगे । क्या आप ले जाने में सफल हुए, नहीं हुए । आप कम से कम यह बात तो कहिए कि मैंने वादा तो किया है,लेकिन रात गई तो बात गई, चुनाव गए तो वादा गया,आपको कम से कम यह तो बोलना चाहिए ।
महोदय, 70 साल के बाद जम्मू कश्मीर के आम लोगों को दो किस्म की तकलीफों का सामना करना पड़ा । एक तकलीफ तो यह है कि एब्रोगेशन के तुरंत बाद लॉकडाउन हो गया, दूसरा लॉकडाउन कोरोना के बाद हुआ । इन दोनों लॉकडाउन को झेलते हुए,जम्मू कश्मीर के लोगों के अंदर त्राहि-त्राहि मच चुकी है । इसलिए आप नई चीज़ सोचिए,नए सिरे से कश्मीर के मुद्दे को सोचिए,क्योंकि मैं यह अगमुट लाने का विरोध करता हूं, इसलिए कि आप ऊपर से एड हॉक मेजर क्यों लेते हैं, आप यह स्टेटहुड बनाकर दीजिए और आप स्टेटहुड में अपना कैडर बनाइए, तब हम मानेंगे कि आप स्टेटहुड की दिशा में जा रहे हैं ।   डीडीसी कर दिया है, लगता है कि स्टेटहुड की जरूरत नहीं है । इसलिए आप सदन के अंदर स्पष्टीकरण दें कि आपका मकसद क्या है, आप किस हालत में हैं और आप कहां जाना चाहते हैं । …(व्यवधान)
 
श्री हसनैन मसूदी (अनन्तनाग): स्पीकर साहब, मैं जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन (संशोधन) विधेयक, 2021 के विरोध में बोलने के लिए खड़ा हुआ हूं । माननीय प्रधान मंत्री और माननीय लॉ मिनिस्टर ने दो बातें कहीं है । यह कहा है कि हिन्दुस्तान,हमारा मुल्क मदर ऑफ डेमोक्रेसी है । हमारे कानून मंत्री जी ने कल सेपरेशन ऑफ पावर का जिक्र किया है । यह कानून दोनों कॉन्स्पेप्ट्स का वायलेशन है ।  5 अगस्त, 2019 को एक तरफा फैसले हुए, गैरकानूनी,गैरआइनी, किसी से पूछे बगैर फैसले हुए हैं । यह जम्मू-कश्मीर के सवा करोड़ लोगों के खिलाफ एक आक्रमण,एलान ए जंग से कम नहीं था । हम ने यह फैसला किया है कि हम जायज़ तरीके से इसका विरोध करेंगे । इसी विरोध के सिलसिले में माननीय सुप्रीम कोर्ट में एक नहीं, बल्कि 15 पेटिशंस दाखिल हुई हैं,उनमें इस कानून को एक असॉल्ट के तौर पर पेश किया गया है और यह कहा गया है कि ये सभी गैरआइनी हैं । माननीय सुप्रीम कोर्ट ने इसको कंसिडर करने के बाद हियरिंग के लिए फॉर्मली एडमिट किया और इसको एक काँस्टिटूएंट बेंच में भेज दिया । इसे वहां भेजने के बाद यह तवक्‍को की जाती है कि डेमोक्रेसी का जो प्रिंसिपल है कि इन इंस्टीटूशन रिस्पेक्ट हम एक दूसरे का रिस्पेक्ट करें । काँस्टिटूशनल प्रॉपरिटी और काँस्टिटूशनल मोरैलिटी जो तकाजा करती है, वह यह तकाजा करती है, तब तक हम उस सस्पेक्ट कानून को इम्प्लिमेंट न करें, जिसकी ज्यूडिशियल स्क्रूटनी माननीय सुप्रीम कोर्ट में हो रही है, क्या यह जायज है या नहीं ।  अगर हम ने याचिका दी है कि इस पर इम्प्लिमेंटेशन रोक दी जाए, मगर यह नहीं हुआ,लेकिन माननीय सुप्रीम कोर्ट ने यह टिप्पणी जरूर की है कि अगर ये कोई स्टेप उठाएंगे तो हम उसे वापस करने के लिए पावरलेस नहीं हैं । वहीं एग्जेक्यूटिव की तरफ से एक हिंट था कि आप ऐतराज कीजिए, आप इसको आगे इम्प्लिमेंट नहीं कीजिए । माननीय सुप्रीम कोर्ट के पास एक विकल्प था कि वह पहले दिन ही हमें यह कह दें कि आपकी याचिका में कोई दम नहीं है, लेकिन उसने ऐसा नहीं किया,बल्कि यह कहा कि पहली नज़र में इसमें दम है और पांच जजों के काँस्टिटूशनल बेंच को रेफर किया गया । उसके बाद जो पहला कानून है, उसको इम्प्लिमेंट नहीं करना चाहिए था, उसके बजाय माननीय सुप्रीम कोर्ट में दर्खावस्त देनी चाहिए थी कि वह एक्पीडाइट करे, सुनवाई करे और यह निर्णय दे कि क्या यह आइन के मुताबिक कदम उठाया गया है । हमारा यह मानना है कि जो 5 अगस्त को किया गया है,वह आइन का उल्लंघन है और आइन पर एसॉल्ट से कम नहीं है । इस पसेमंजर में यह जो बिल है, यह उसी का हिस्सा है, जो इम्प्लिमेंटेशन प्रॉसेस शुरू हो गया है । कल माननीय सुप्रीम कोर्ट का काँस्टिटूशनल बेंच कहे कि आपने जो पहला सेट-अप उठाया है,वही आइन के खिलाफ है, क्योंकि धारा 367 को, इंटरप्रेटेटिव क्लॉज को सब्सटेंटिव चेंज के लिए इस्तेमाल किया है । आपने आर्टिकल 3 का उल्लंघन किया है । आपने इसके बारे में स्टेट से नहीं पूछा है । आपके पास धारा 370 को खत्म करने का कोई अधिकार नहीं था । दूसरी बात यह है कि जम्मू-कश्मीर के आइन का क्या हुआ? क्या इस पार्लियामेंट को हक है कि वह उस आइन को खत्म करे,जिस आइन पर सारे मुल्क ने जम्मू-कश्मीर को मुबारक दी थी कि आपने यह आइन बनाया है । वह वहां के युवराज के ऑर्डर के तहत बनी है, वह ऑर्डर अपनी जगह पर मौजूद है । इस पार्लियामेंट के पास अख्तियार है कि वह आइन खत्म करे । वह एक काँस्टिटूएंट पावर है, उसको एक काँस्टिटूएंट असेम्बली ही खत्म कर सकती है । आप दिन ब दिन कंफ्यूजन की तरफ कदम बढ़ा रहे हैं, जो इसका मकसद है ।
       आज का जो अमेंडमेंट है, बिल्कुल खराब है । माननीय होम मिनिस्टर साहब ने जो 5 अगस्त को कहा था, इस फ्लोर पर जो वादा किया था कि यह रिस्टोर हो जाएगी, अगर वह रिस्टोर हो जाएगी तो इसमें 93वां अमेंडमेंट करने की क्या जरूरत है? एक लैजिस्लेजर  की कल्पना करने की क्या जरूरत है? यह सिग्नल ठीक नहीं जा रहा है । आप यह जानते हैं कि ग्राउंड पर क्या हो रहा है? एक साल में करीब 400 सिविलियन डेथ्स, करीब 100 एनकाउंटर्स, 20 आर्म्ड एनकाउंटर्स अर्बन एरियाज में,करीब 200 सिक्योरिटी फोर्स के जवान,उनमें से कुछ ऑफिसर्स भी शहीद हुए हैं । कहीं पर डेवलपमेंट का अता-पता नहीं है ।
क्या पहले डेप्यूटेशन पर ऑफिसर नहीं आते थे? अगर कभी हमारे यहां कम एलॉटमेंट होती थी तो क्या वह सप्लिमेंट नहीं होती थी?इसको अमेंड करने का क्या मकसद है?आप एक डेमोक्लस सोर्ड जम्मू के ऑफिसर पर रखना चाहते हैं । क्या आप मिजोरम जा सकते हैं? You are not part of it. आज की तारीख में हमारे जिले में 80 प्रतिशत पदों पर बाहर के ऑफिसर्स हैं ।
       जैसा कि चौधरी साहब ने कहा कि जो फंडामेंटल बातें हैं, जो ग्राउंड की रियलिटीज हैं,उनसे वे बेखबर होते हैं, कोई ग्राउंड के साथ कनेक्ट नहीं होता है । क्या इससे एडमिनिस्ट्रेटिव एफिशिएंसी बढ़ जाएगी । जो की-ऑफिसर होता है, उसको टोपोग्राफी के बारे में, वहाँ की अलग-अलग समस्याओं के बारे में पूरी अंडरस्टैंडिंग होनी चाहिए । क्या यहाँ 70 साल में नहीं किया जा सकता था, हम तो इंडियन एडमिनिस्ट्रेटिव सर्विसेज के पार्ट थे, जो हमारे यहाँ के ऑफिसर्स थे, वे या तो वहाँ के लोग क्वालिफाई करते थे या तो आप बाहर से एलॉट करते थे ।
       इसलिए मैं कह रहा हूँ कि क्लॉज 13 की कोई जरूरत थी ही नहीं, अगर हम इसे लेंगे against the backdrop of whatever was said by the hon. Home Minister on the floor of the House on 5th August, 2019. उसमें संशोधन करने की क्या जरूरत है?
       ज़नाब,कुल मिलाकर आप जम्मू-कश्मीर को अनसरटेंटी की तरफ ले जा रहे हैं । हमारा फ़र्ज है कि हम देश को कहें कि आप जो कुछ कह रहे हैं, वह मिस्ट्रुथ है,ज़मीनी सूरते हाल वह नहीं है । 550 दिनों में हिम्मत नहीं होती कि आप 4 जी रिस्टोर कर पाते । वह नहीं हुई । कहीं पर टूरिज्म का नामोनिशान नहीं है । आप बाहर से फ्रूट इम्पोर्ट कर रहे हैं ताकि हमें डिसएम्पॉवर करें, हमारे सेब को चुनौती दे रहे हैं ।
       सैंड माइनिंग का जो मामला है, वह तो एक बड़ा रैकेट बन गया है । माइंस एंड मिनरल्स कंसेसशन रूल्स जब बने थे,तो आपने ही विरोध किया था । आपकी सरकार में जो मेम्बर्स थे, उन्होंने ही इसका विरोध किया था । इससे तो जम्मू, कठुआ,उधमपुर के गरीब लोगों का रोजगार मारा   जाएगा । लेकिन अब वही हो रहा है । इसलिए ज़नाब,मैं इसका विरोध करता हूँ क्योंकि यह स्टेप एक रांग डायरेक्शन में है । इससे वहाँ के लोगों का कोई भला नहीं होने वाला है । जम्मू-कश्मीर देश के साथ था, कांस्टिट्यूशन की वजह से ही मैं यहाँ हूँ, लेकिन आज लोगों का कुछ भी भला नहीं हो रहा है ।
       ज़नाब,आपके जो अपने वायदे हैं, जो आपने 5 अगस्त को किए थे, उन वायदों को अमल में लाइए । होम मिनिस्टर साहब यहाँ बैठे हैं,उन्होंने कहा था कि पोजिशन री-इंस्टेड हो जाएगी । स्टेट का नहीं,हम कहते हैं कि 4 अगस्त की पोजिशन आप रिस्टोर कीजिए । अगर आप मिजोरम, मणिपुर जाकर वहाँ के लोगों को बधाई देते हैं,उनसे कहते हैं कि प्राइम मिनिस्टर साहब ने आईएलपी की सूरत में आपको एक उपहार दिया है, तो जम्मू-कश्मीर के लिए क्यों नहीं दे सकते हैं?
       ‘एक देश, एक कानून’की बात की जाती है । अगर आप बोडोलैंड पर समझौता करते हैं, वहाँ पर बोडो टेरीटरी के लिए 10 हजार स्क्वायर माइल्स जमीन देते हैं, तो वहाँ के लिए ‘एक देश,एक कानून’ की बात क्यों नहीं आती है? अगर हिन्दुस्तान का प्रधानमंत्री बोडोलैंड, मणिपुर या सेवन स्टेट्स में जमीन नहीं खरीद सकता है,तो जब जम्मू-कश्मीर की बात आती है, तो वहाँ इसे करने में क्या परेशानी है?
       ज़नाब,हमारे एस्पिरेशंस की रेस्पेक्ट कीजिए । आप जो नॉर्थ-ईस्ट में कर रहे हैं, उतनी हद तक तो हमारी ऑटोनॉमी थी नहीं । वहाँ आप आई.एल.पी. का प्रावधान कर रहे हैं । वहाँ जो आदमी जाएगा,उसको परमिट लेना पड़ेगा । उतनी ही देर तक उसे वहाँ रहना होगा, जितना परमिट में लिखा होगा । अगर सात दिन का होगा, तो सात दिन ही रुक सकता है । When it comes to Jammu and Kashmir, why should you look at it with a different angle? Why should there be any kind of discrimination? जम्मू-कश्मीर के लोगों के साथ इंसाफ कीजिए । जम्मू-कश्मीर के लोगों ने क्या लिया है, उन्होंने तो कंट्रीब्यूट किया है । अभी कुछ दिन पहले हमारे यहाँ का एक इंजीनियर उत्तराखण्ड में अपनी जान खो बैठा । वह एक सीनियर इंजीनियर था,वहाँ पॉवर प्रोजेक्ट बना रहा था । बशरत अहमद ज़रगर तो जम्मू-कश्मीर का था । उसकी जो मालियत है, उसमें एक घर लेने की भी व्यवस्था नहीं है ।
       ज़नाब,इसलिए जम्मू-कश्मीर के साथ इंसाफ कीजिए,उसकी उमंगों का रेस्पेक्ट कीजिए । जो सियासी एस्पिेरेशंस हैं, उनका रेस्पेक्ट कीजिए, तो यह मामला हल हो जाएगा । आप दूरियाँ मत बढ़ाइए ।
       जैसा कि मैंने पहले कहा, वहाँ के लोगों को गले लगाइए । जम्मू-कश्मीर आपके साथ खड़ा है,देश के साथ खड़ा है । लेकिन आप ही उसको दूर जाने के लिए पुश कर रहे हैं ।
       मेरी यही गुज़ारिश है कि आप इस कानून को वापस लीजिए । सुप्रीम कोर्ट की मानना करते हुए, उसकी रेस्पेक्ट करते हुए, जो कांस्टिट्यूशनली सस्पेक्ट लॉज हैं,उनको इम्प्लीमेंट मत कीजिए ।
       बहुत-बहुत शुक्रिया ।
   
डॉ. सत्यपाल सिंह (बागपत):अध्यक्ष महोदय, मैं आपका बहुत-बहुत धन्यवाद करता हूं । मैं जम्मू कश्मीर पुनर्गठन (संशोधन) विधेयक, 2021 के समर्थन में बोलने के लिए खड़ा हूं । महोदय, मैं सबसे पहले हमारे मित्र श्री अधीर रंजन चौधरी जी की जो चिंता है कि जम्मू कश्मीर का चहुमुखी विकास होना चाहिए, वहां अधिकारियों की कमी रही तो क्यों रही? मैं इस बारे में यह बोलना चाहता हूं कि कानून में यह जो संशोधन आया है, यह जम्मू कश्मीर के चहुमुखी विकास के लिए, उसके पूर्णत: देश के साथ इंटीग्रेशन के लिए आया है ।
अध्यक्ष महोदय, मैं अपनी बात अपने एक अनुभव से शुरू करना चाहता हूं । मैं वर्ष 2016 में स्टैंडिंग कमेटी ऑन होम अफेयर्स का सदस्य था, आज भी हूं । हमारी कमेटी कश्मीर के स्टडी टूर पर गई थी । श्रीनगर में हमारा जो वीआईपी कनवॉए था, जिस गाड़ी में मैं बैठा था, उसमें मेरे साथ एक लाइज़न ऑफिसर के रूप में एक पुलिस इन्सपैक्टर बैठा था । मेरी गाड़ी के सामने एक टैक्सी घुस   गई । मैंने इन्सपैक्टर से कहा कि यह कैसेहो सकता है? वीआईपी कनवॉए में एक टैक्सी कैसेघुस सकती है? पुलिस इन्सपैक्टर ने कहा कि सर, यह तो यहांपर आम बात है । वहां वीआईपी कनवॉए में कोई टैक्सी घुस जाए, तो यह एक आम बात है ।
11.56 hrs                  (Shri Bhartruhari Mahtab in the Chair)        सभापति महोदय, हम एक टूरिस्ट प्लेस पर गए, वहां कुछ लोगों ने मुझे पहचाना । हमारे गाजियाबाद-मेरठ के कुछ टूरिस्ट्स वहां थे । वे मुझे जानते, पहचानते हुए कि मैं एक पुराना पुलिस ऑफिसर हूं,वे मेरे पास आए । उन्होंने कहा कि सर, हम लोग जम्मू से एक टैक्सी लेकर यहां आए हैं । हम पहलगाम जा रहे थे, वहां से लगभग दस किलोमीटर पहले लोगों ने स्टॉप लगाकर रखा है, वहां के लोकल टूर ऑपरेटर्स,टैक्सी वालों ने वहां बैरिकेडिंग की हुई है । उन्होंने कहा है कि इस टैक्सी को छोड़ना पड़ेगा और हमारी टैक्सी लेनी पड़ेगी । महोदय,यह केवल एक टूरिस्ट स्पॉट की बात नहीं है । जम्मू कश्मीर में जितने भी टूरिस्ट स्पॉट हैं, सब जगहों पर यही हालत थी । कश्मीर के आईजी श्री जावेद मेरी जान-पहचान के थे, मैंने उनको फोन किया कि कुछ लोगों की यह शिकायत है कि वे दिल्ली की टैक्सी नहीं, जम्मू कश्मीर की टैक्सी लेकर यहां घूमने आए हैं, लेकिन हर टूरिस्ट स्पॉट पर जाने से लगभग पांच-सात किलोमीटर पहले वहां के लोग उनको जाने नहीं देते हैं, वे उन्हें गाड़ी बदलने के लिए मजबूर करते हैं । वे अपनी टैक्सी के मनचाहे पैसे वसूल करते हैं । वहां के आईजी ने मुझसे कहा कि सर, यहां तो बरसों से ऐसे ही चल रहा है, हमारे हाथ में कुछ नहीं है ।

आज यह जो बिल आ रहा है,इससे वहां के अधिकारियों को मालूम चले कि देश में क्या चलता है । देश के अंदर कानून का राज है,तो कैसे है । इस कश्मीर का चतुर्मुखी विकास हो, उसके लिए यह बिल आया है । मैं इसके लिए देश के यशस्वी प्रधान मंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी का और अपने माननीय गृह मंत्री श्री अमित शाह जी का बहुत-बहुत आभार व्यक्त करता हूं, उनको धन्यवाद देता हूं । इसे अंग्रेजी में ‘सीमलेस इंटीग्रेशन’ कहते हैं । जम्मू कश्मीर के लोगों का बाकी देश के लोगों के साथ कैसा संबंध हो, वर्ष 2019 के कानून में जो थोड़ी-बहुत कमी रह गई थी, उस कमी को दूर करने का यह एक प्रयत्न है । पिछले डेढ़ वर्षों में जिस प्रकार वहां इंफ्रास्ट्रक्चर,स्वास्थ्य और एजुकेशन के क्षेत्र में काम किया गया है, यह उस दिशा में एक प्रयत्न है ।

सभापति महोदय, जब जम्मू कश्मीर और लद्दाख का नाम आता है,तो एक तरफ मेरे मन में गौरव का भाव पैदा होता है, तो दूसरी तरफ दु:ख और ग्लानि का भाव भी आता है ।

       सभापति महोदय, तीन-चार दिन पहले हमारे विपक्ष के नेता अंग्रेजी में बोल रहे थे कि : “My heart bleeds. वे अच्छा भाषण दे रहे थे,कई लोगों ने कहा । मुझे भी लगता है, on the one hand I feel proud but on the other hand, my  heart also bleeds. जब जम्मू-कश्मीर के इतिहास की हम बात करते है और उसे भारत माता का माथा, भारत माता का भाल मानते हैं । उस चमकते हुए भाल की क्या हालत हुई, यह देखने की बात है । हमें इस बात का गर्व भी होता है कि पिछले 650-700 वर्षों से पहले जम्मू-कश्मीर की धरती पर जितने विद्वान और पंडित पैदा हुए, उतने देश के किसी भू-भाग में पैदा नहीं हुए । कल्हण जैसे इतिहासकार पैदा किए, जिसने लगभग तीन हजार वर्षों का इतिहास राजतरंगणी में लिखा । चरक, वाग्भट जैसेआयुर्वेद आचार्य पैदा किए । लगड जैसे वैदिक ज्योतिषविद पैदा किए । अभिनव गुप्त जैसे संहिताचार्य पैदा किए । पंच तंत्र लिखने वाले विष्णु शर्मा जैसे लेखक पैदा किए और कहा जाता है कि कश्मीर की एक-एक इंच भूमि तीर्थ भूमि थी, लेकिन बाद में क्या हो गया? आपको मालूम होगा, दुख और ग्लानि से सिर झुक जाता है, जब कश्मीर के अंदर एक काला रक्त रंजित इतिहास लिखा जाने लगा और वह इतिहास जब हमारे सामने आता है,तो बहुत दुख होता है । हमारे बहुत से माननीय सदस्यों को शायद ध्यान नहीं होगा,इस इतिहास की शुरूआत वर्ष 1339 से होती है,सुल्तान शाह मीर आते हैं । उसका पौत्र सिकन्दर  आता है । उसके बाद दाजी चक आता है, औरंगजेब आता है । जिस प्रकार वहां का सुल्तान बनने के बाद गैर मुस्लिमों का कत्लेआम चला, जिस प्रकार से धर्मांतरण किया गया, जिस प्रकार से मंदिर तोड़े गए, तब वहां के लोग वहां से भागने लगे । तब कश्मीर का एक काला इतिहास लिखा गया । गुरु तेग बहादुर जी भी वहां गए । हम उनकी 400वीं जयंती मना रहे हैं । वे कश्मीर के लोगों के समर्थन में खड़े हुए । फिर 1819 में महाराजा रंजीत सिंह आए,तब जाकर कश्मीर के लोगों को इन्होंने मुक्त कराया । लेकिन 480 वर्षों के इतिहास में वहां जो गैर मुस्लिम 100 प्रतिशत थे,वे धीरे-धीरे 10 प्रतिशत रह गए । एक रक्त रंजित इतिहास कश्मीर का रहा  है । 1819 से लेकर 1947 तक के कुछ समय वहां शांति रही । आजादी से पहले जब पूरे देश में ‘भारत छोड़ो आंदोलन’चल रहा था, उस समय कश्मीर के अंदर ‘राजा को भगाओ’ ‘राजा को निकालो’ का आंदोलन चल रहा था । 1947 के बाद भी कश्मीर में जिस प्रकार से कट्‌टरपंथ,जिस प्रकार से इस्लामीकरण, जिस प्रकार से अलगाववाद, जिस प्रकार से रुस्तम-ए-इस्लाम के नारे दिए गए कि किस प्रकार से वहां राज किया जाए और उस समय जिस प्रकार से भ्रष्टाचार का आलम था, उसे बयां नहीं किया जा सकता है । जो 480 साल के काल में नहीं हुआ, वह अब्दुल्ला, मुफ्ती और कांग्रेस के शासन में कश्मीर में हो गया । हजारों कश्मीरी पंडितों को मारा गया । अधीर रंजन चौधरी जी बोल रहे थे, मैं उनकी बात से सहमत हूं । हजारों पंडितों को मारा गया, उन्हें भगाया गया । उनकी लूट, कत्ल,बलात्कार किया गया । यह बात सही है कि उन्हें जो न्याय दिया जाना चाहिए था, वह हम अभी तक नहीं दे पाए हैं । यह एक प्रकार का नरसंहार था । यह बड़े दुख की बात है और हमारे माननीय सदन को जानना चाहिए कि नरसंहार किया गया,घर जलाए गए,बलात्कार किए गए लेकिन एक भी केस में किसी को सजा नहीं मिली । यह कितने दुख की बात है । इस प्रकार के अधिकारी वहां थे, इस प्रकार के शासक वहां थे,इसलिए वहां बदलाव करने की जरूरत थी ।

       महोदय,मैं एक और बात कहना चाहता हूं कि यह जो seamless integration देश के साथ नहीं हुआ, जहां 370 की धारा थी,उसके साथ-साथ एक और बात थी । सारे देश में जो ऑल इंडिया सर्विसेज के अधिकारी आते हैं, उसमें 67 परसेंट डायरेक्ट रिक्रूटमेंट होगा और 33 परसेंट राज्यों के अधिकारी भर्ती किए जाएंगे लेकिन कश्मीर में ऐसा नहीं हुआ । कश्मीर के लोगों ने बार-बार भारत सरकार से निवेदन किया कि हमारे अधिकारियों की 50 परसेंट नियुक्ति करो । उन्होंने कहा कि हम बाहर के अधिकारी नहीं चाहते हैं,हमारे कश्मीर के लोगों को प्रमोट किया जाए और ये सिलसिला वर्ष 1950 से लेकर दिसम्बर, 2013 तक चलता रहा । साल दर साल ऑल इंडिया सर्विसेज में राज्यों के अधिकारी 33 परसेंट थे, कश्मीर में 50 परसेंट किया गया । वहां आफिसर्स की कमी हो गई । आप रोशनी योजना की बात कर रहे थे । हाई कोर्ट ने उसका कॉग्निजेंस लिया ।

आपको मालूम होगा कि इस ‘रोशनी योजना’ के तहत जम्मू और कश्मीर के अंदर क्या हुआ? लाखों एकड़ फॉरेस्ट जमीन पर कब्जा कियागया, क्योंकि फॉरेस्ट कानून ही वहांलागू नहीं था । यह दुख की बात है कि सारे देश में फॉरेस्ट कानून लागू था, लेकिेन जम्मू-कश्मीर में यह लागूनहीं था । इसी कारण फॉरेस्ट की जमीनपर लोगों ने कब्जा कियाऔर सरकार ने इसमें उनकीमदद की । तत्कालीन मुख्य मंत्री जी, जिनका मैं नाम नहीं लूंगा, ने कहा कि इससेहम फीस लेंगे और 25 हजार करोड़ रुपये सरकार को मिलेंगे, लेकिन पीएसी और सीएजी ने अपनी रिपोर्ट में लिखा कि 25हजार करोड़ की जगह केवल 76 करोड़ रुपये मिले । बाकीरुपया कहां गया, उसका क्या हुआ?

महोदय, एक समुदाय विशेष के लोगों के बारे में मैं आपको बताना चाहता हूं कि जम्मू-कश्मीर में वर्ष 1994 में 3 मस्जिदें थीं और आज वहां पर 100से ज्यादा मस्जिदें हैं । अमरनाथ यात्रा के लिए केवल कुछ एकड़ जमीन की बात हुई थी । उस पर पूरे जम्मू-कश्मीर में कितना हो-हल्ला मचा । सरकार को अपनानिर्णय वापसलेना पड़ा और यहांपर हजारों एकड़ जमीन दी गई, लेकिनउस समय की सरकार ने कुछ नहीं किया । उस समय किस प्रकार का शासनजम्मू-कश्मीर में चल रहा था और किस प्रकार के अधिकारी वहां काम कर रहे थे ।

       महोदय, मुझे इस बात का गर्व है कि वर्ष 2019 में हमारे यशस्वी प्रधान मंत्री श्रीनरेंद्र मोदीजी के नेतृत्व में धारा-370 और 35ए को खत्म किया गया, जिसने अलगाववादियों, आतंकवादियों, बिचौलियों, भ्रष्टाचारियों, सत्ता पर काबिज लोगों और पाकिस्तानियों की नींदउड़ा दी । हमारे गृह मंत्री श्री अमित शाह जी भी धन्य हैं । वह तो इतिहास के लिए ‘अमिट शाह’ बन गए । उन्होंने धारा-370 लागू की ताकिजम्मू-कश्मीर का देश के साथ एकीकरण हो सके ।हम सब सांसदगण भी, जो इस माननीय सदन के सदस्य हैं, इस गौरवशाली इतिहास के भागीदार बन गए । इस बिल की जो मोटी-मोटी बातें हैं, मैं उन पर आता हूं ।

महोदय, हमारे श्री अधीर रंजन चौधरी जी कह रहे थे कि यह छोटा सा बिल है । सैक्शन-13 और सैक्शन-88 में थोड़े से बदलाव की बात है । जैसा कि मैंने पहलेकहा था, जम्मू-कश्मीर के कुछ अधिकारी इस बात को कहेंगे कि जम्मू-कश्मीर के लोगों को बाहर क्यों भेजा जाए? 13 स्टेट्स के अंदर3 स्टेट्स और 8 यूनियन टेरिटरीज के अंदरअधिकारियों का अदल-बदल हो सकता है । कितने अधिकारी जम्मू-कश्मीर के ऐसे होंगे जो दिल्ली नहींआना चाहते? कितने अधिकारी ऐसे होंगे जो चण्डीगढ़ या गोवानहीं जाना चाहते? आखिर वे अधिकारी क्यों नहीं जाना चाहेंगे? उनका परिवार भी जानाचाहेगा और वे भी जानाचाहेंगे, लेकिन सबसे बड़ी बात मैं यह कहनाचाहता हूं  कि कितना अत्याचार जम्मू-कश्मीर में हुआ और उसकेबावजूद किसीएक को भी सजा नहीं मिली । उसके पीछे सबसे बड़ा कारण यह था कि जम्मू-कश्मीर में जो कैडरथा, वहां के अधिकारियों को पता था कि इन्हीं पॉलिटीशियन्स, इन्हीं मंत्रियों के अधीनउनको सारा करियर बिताना है । अगर उनके पास कोई ऑप्शन होता कि वे दूसरी यूनियन टेरिट्री में जा सकतेहैं, वे दिल्ली, चंडीगढ़ आदि स्टेट्स में जाकर काम कर सकतेहैं, तो शायद वे इतनादबकर काम न करते । उन्होंने भारतीय संविधान की शपथ ली थी कि वे ईमानदारी से कानून का पालन करेंगे । अगर यह पहलेही हो गया होता तो इतनाबड़ा जनसंहार कश्मीर में नहीं हुआ होता ।

       महोदय, मैं कह रहा था कि जम्मू-कश्मीर में ऑल इंडिया सर्विसेज के अधिकारियों की कमी आई । वहां पर 54परसेंट ऑल इंडिया ऑफिसर्स की कमी है । मेरे पास पूरी डिटेल है । 390 सैंक्शन्ड अधिकारी थे, जिनमें से आईएएस के 137, आईपीएस के 147 और आईएफएस के 106पद सैंक्शन्ड थे, लेकिन वैकेंसी केवल 210 थीं । वहां50 परसेंट कश्मीर के अधिकारी होते हुए भी, 54 परसेंट की अतिरिक्त वैकेंसी निकली है । मेरे कुलीग्स वहां थे, हम लोग बात करते थे, काँफ्रेंस में मिलते थे । हर साल डीजी काँफ्रेंस होती है । मैं उनसे बोलता था कि आईपीसी, सीआरपीसी एविडेंस एक्ट वहां के अधिकारियों को मालूम ही नहीं है । ट्रेनिंग लेकर भी वे भूल गए । निर्भया कांड के बाद वर्ष 2012 में ‘पोक्सो एक्ट’ बना ताकि हम अपनेबच्चों को सेक्सुअल ऑफेंसेज से बचा सकें, लेकिन यह कश्मीर में लागू ही नहींहै । यह कितनी बड़ी शर्म की बात है, जैसे फॉरेस्ट एक्ट की बात मैंने आपसे कही थी । पब्लिक प्रॉपर्टी को कश्मीर के अंदर बहुत डैमेज किया गया । मुझे लगता है कि पत्थर फेंके जाते थे,पब्लिक प्रॉपर्टी को डैमेज किया जाता था, लेकिन देश की संसद में,उस समय जो माननीय सांसद यहाँ थे,उन्होंने देश के लिए डैमेज टू पब्लिक प्रॉपर्टी एक्ट कानून पास किया था, लेकिन वह कश्मीर के अंदर लागू ही नहीं है । इसलिए पब्लिक प्रॉपर्टी को नुकसान हो गया, क्योंकि वह कानून वहाँ लागू ही नहीं था । वहाँ हम ट्रांसपेरेंसी की बातें करते हैं, पारदर्शिता की बात करते हैं,सुशासन की बातें करते हैं, हम लोग भी ऐसे कानून लाना चाहते हैं । आरटीई एक्ट लागू नहीं हुआ । आरटीई एक्ट, आप लोगों की सरकार में लाए थे । राइट टू एजुकेशन,कंपलसरी एजुकेशन आपकी सरकार लाई थी, लेकिन वह कश्मीर के अंदर लागू नहीं था । बेनामी ट्रांजैक्शन एक्ट होता तो किस प्रकार से भ्रष्टाचार बढ़ता, लेकिन वह वहाँ लागू ही नहीं था । प्रिवेंशन ऑफ करप्शन एक्ट वहाँ पर लागू ही नहीं था । अगर आज इस देश में एक लाख 80 हजार करोड़ रुपये बचे हैं, जो गलत हाथों में जाते थे, इसका सबसे बड़ा कारण हमारा आधार कानून है, लेकिन वह कश्मीर के अंदर लागू नहीं था । 2.87 लाख करोड़ रुपये यूपीए सरकार ने जम्मू एंड कश्मीर की सरकार को दिए । वे कहाँ गए? कहाँ डेवलपमेंट हुआ? वहाँ डेवलपमेंट इसलिए नहीं हो पाया, क्योंकि आधार एक्ट जैसे कानून वहाँ पर लागू नहीं किए गए । सोशल जस्टिस के बारे में, राइट टू फेयर काम्पन्सेशन में किसानों की बातें हम कर रहे हैं,इस सदन में भी हम किसानों की बातें कर रहे हैं । किसानों की जमीन ले लो, कुछ भी करो, उनको उचित मुआवजा मिलेगा कि नहीं मिलेगा,क्योंकि इसके लिए वहाँ कानून लागू ही नहीं है । प्रोटेक्शन ऑफ चाइल्ड राइट्स एक्ट, एजुकेशन एक्ट की बात मैंने की, डाउरी प्रोहिबिशन एक्ट, दहेज का कानून लागू ही नहीं है, फेमिली कोर्ट्स एक्ट लागू ही नहीं है, इंडीसेंट रिप्रेजेंटेशन ऑफ वीमेन एक्ट वहाँ पर लागू ही नहीं है, शेड्यूल कास्ट, शेड्यूल ट्राइब के ऊपर कितना अत्याचार होता है, लेकिन वहाँ उसका कानून ही नहीं है । वहाँ पर कोई कानून लागू ही नहीं होता था । मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रैगनेंसी एक्ट लागू ही नहीं है । मुस्लिम वूमेन प्रोटेक्शन ऑफ राइट्स एक्ट वहाँ पर लागू ही नहीं है । प्रोवीजन ऑफ चाइल्ड मैरिज एक्ट वहाँ पर लागू ही नहीं है । इंप्लायमेंट प्रोवीडेंट फंड,हमारे लेबर क्लास के लोगों के प्रोवीडेंट फंड की हम रक्षा कर सकें. यह वहाँ पर लागू ही नहीं है । क्या इन अधिकारियों को इस बात का एक्सपोजर देने की जरूरत नहीं है? सारे देश के अंदर ये कानून लागू हैं । क्या जम्मू-कश्मीर, लद्दाख के अधिकारियों को यह बताने की जरूरत नहीं है कि देश के अंदर किस प्रकार का कानून चाहिए,कैसे देश के लोगों के लिए सुशासन लाया जाए, कैसे लोगों को सामाजिक न्याय दिया जाए?आज इस बात की जरूरत है । जब हमारे ये अधिकारी दूसरे कैडर में आएंगे,यूटी का कैडर जो मर्ज हुआ है,मैं कहता हूँ कि यह बहुत अच्छी बात है । एक-डेढ़ साल कोई बड़ी बात नहीं है । यह हुआ है, बहुत अच्छा हुआ है । वहाँ के अधिकारी बड़े खुश होंगे । उनको भी सीखने को मिलेगा । जब सीखने को मिलेगा तो हमारी जितनी भी डेवलपमेंटल एक्टिविटीज़ हैं,सेंटर से स्पांसर्ड जितनी स्कीम्स हैं, सोशल जस्टिस की जितनी स्कीम्स हैं, उनको अच्छी तरह से लागू किया जाएगा ।

मैं एक बात और कहना चाहता हूँ, क्योंकि मैं स्वयं अधिकारी रहा हूँ, इसलिए इस बात को कहना चाहता हूँ । बहुत बार किसी अधिकारी या किसी कर्मचारी को अगर हम डिपार्टमेंटल कोई सजा देना चाहते हैं, हम चाहते हैं कि हम उसका बाहर ट्रांसफर कर दें, लेकिन ट्रांसफर कर ही नहीं सकते थे,क्योंकि उसका कैडर नहीं था । आज सरकार के पास वह ऑप्शन खुलकर आया है कि अगर जम्मू-कश्मीर, लद्दाख के अंदर कोई अधिकारी सरकार के हिसाब से, कानून के हिसाब से अगर काम नहीं करेगा, तो उसकी बदली कल को अरुणाचल प्रदेश में हो सकती है, उसका ट्रांसफर अंडमान निकोबार में किया जा सकता है । उन अधिकारियों के पास यह मोरल राइट भी होगा । जहाँ राजनेताओं का विरोध करने की उनके पास ताकत आएगी, वहीं सरकार के पास भी यह ऑप्‍शन होगा कि अगर वे काम ठीक से नहीं करेंगे और सोचेंगे कि जम्मू-कश्मीर के अंदर, श्रीनगर में या लद्दाख में बैठे रहेंगे,तो उनकी पोस्टिंग गोवा के अंदर भी हो सकती है ।

मेरा कहने का मतलब है कि रिवार्ड और पनिशमेंट के हिसाब से, लोकहित में और सारे देश के अंदर एकरूपता आ सके, एक यूनिफॉर्मिटी आ सके कि सारे देश के अंदर जितने कानून हैं, वे जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के अंदर भी लागू रहेंगे । जिस प्रकार से सारा देश विकास की गति में आगे बढ़ रहा है और विकास की एक अच्छी यात्रा कर रहा है, लेकिन जो हमारा जम्मू एंड कश्मीर इतना पिछड़ गया, अपने कारण पिछड़ गया, हमारे राजनेताओं के कारण,अधिकारियों की कमी के कारण और उन अधिकारियों को इस प्रकार से कूपमंडूक बना दिया गया ।

मैं एक बात कहकर अपनी बात समाप्त करना चाहता हूँ कि तालाब में पानी होता है, समय के साथ-साथ पानी गंदा हो जाता है,कम भी हो जाता है, लेकिन नदी का बहता हुआ पानी,नदी का पानी पीने के काम भी आता है, इंडस्ट्री के भी काम आता है और बहते हुए पानी से हम ऊर्जा, बिजली बना सकते हैं । जो अधिकारी वहाँ तालाब की तरह बैठे थे या कूपमंडूक की तरह वहाँ पर बैठे थे,उनको एक बहुत बड़ा ऑप्शन हम दे रहे हैं, एक नेशनल एक्सपोजर दे रहे हैं । इससे उनका मेंटल होरिजन बढ़ेगा और वे आगे बढ़ेंगे । हम सब लोग मिलकर कश्मीर को आगे बढ़ाएंगे । हम लद्दाख का विकास करेंगे और इस देश का भी विकास होगा । वहां का अनुभव लेकर दूसरी जगह आएंगे, बाहर के अधिकारी वहां पर जाएंगे,तो इतना अच्छा सुशासन आएगा और वहां चहुंमुखी विकास होगा । मैं इतनी बात कहकर अपनी बात  समाप्त करना चाहता हूं ।

मैं पुन: इस बिल का समर्थन करते हुए अपनी बात को विराम देता हूं । धन्यवाद ।

 

DR. T. SUMATHY (A) THAMIZHACHI THANGAPANDIAN (CHENNAI SOUTH): Sir, I rise here to oppose the Jammu and Kashmir Reorganisation (Amendment) Bill, 2021.

       Sir, at the outset, I would like to express to this august House that I am deeply grieved and pained when I heard our hon. Prime Minister coining a term ‘andoloan jeevis’ in the context of our farmers’ protests.

       The phrase ‘Rights of Man’ by Delisle Burns has helped to create two great Republics of modern times in France and America. But our hon. Prime Minister has derogatively chosen another term, ‘andolan jeevi’ when it comes to the basic rights of our farmer brothers and sisters to protest and to show their resistance.

       Sir, coming to the discussion on the Bill, again this has given me an opportunity to be reminiscent of an old term. …(Interruptions) Sir, I am concentrating on the Bill only. I am coming to the Bill only.

THE MINISTER OF STATE OF THE MINISTRY OF DEVELOPMENT OF NORTH EASTERN REGION, MINISTER OF STATE IN THE PRIME MINISTER’S OFFICE, MINISTER OF STATE IN THE MINISTRY OF PERSONNEL, PUBLIC GRIEVANCES AND PENSIONS, MINISTER OF STATE IN THE DEPARTMENT OF ATOMIC ENERGY AND MINISTER OF STATE IN THE DEPARTMENT OF SPACE (DR. JITENDRA SINGH): Are you obsessed with andolan jeevi?

DR. T. SUMATHY (A) THAMIZHACHI THANGAPANDIAN: No, I have every right to express my grief. Now I am coming to the Bill.  …(Interruptions) I am not yielding. I have every right to express my grief and pain.

       Coming to the Bill, again, this has given me an opportunity to be reminiscent about an old term called the ‘Social Contract’ coined by Rousseau, which is back in vogue. It is also a two-word term on which the foundation of a democracy rests. It is a contract between the ruled and their rulers, where the ruled give up their freedom on an assurance by the ruler that their natural rights, namely, life, liberty, property and civil rights shall be protected.

       But when the Jammu and Kashmir Reorganisation Act, 2019 was implemented, the BJP Government has not only breached that contract but also it has buried the democracy. You have buried federalism. You have buried the rights of liberty as well as the civil rights of the people of Kashmir. This Bill, which seeks to replace the Ordinance, tries to solve the issue of All-India Service Officers in the two Union Territories created after the abrogation of article 370. I have a query in that to which I will be coming soon.

       When you promulgated that amendment, we were told that as soon as normalcy returned, the status of statehood will be restored. With this Bill, our hope is now gone. We thought that that was the last straw but now this is the last straw and you are going to be pinning up nail after nail after burying peace in Kashmir.

       In August, 2019, you not only bifurcated the State but reduced the status to that of a Union Territory thereby increasing the chance of a direct Central hand in the day-to-day management. I am reminded of the famous opening lines of Charles Dickens’ Tale of Two Cities, which said, “This is the best of times and this is the worst of times.” I would say this is the worst of times that India has ever witnessed in her pages of history. The BJP Government has imposed all the draconian laws. You have imposed CAA. You have imposed NRC. Now, you have the three draconian anti-farmer laws, which are hanging like a Damocles’ sword above your head. I am sure definitely you will have repercussions in the forthcoming elections.

I would like to quote the great Thiruvalluvar who said:

Kudi thazhi ik koal ottum manila mannan Adi thazhi nirkum ulagu        The meaning is, “A king, who would respect his subject’s opinion and rule for their benefits, will not only be respected but also be loved by the people.” …(Interruptions)
       Sir, I am coming to the Bill. Has the BJP Government opted for a referendum before revoking article 370? Has it cared to ask the opinion and consider their feelings? When you boast of a paperless budget, you are running a compassionless, commitment-less, dedication-less, visionless Government which has brought such draconian laws.
       Sir, there is a tendency of the Government to bypass this Parliament, to take away the people’s rights and follow the Ordinance route. And, this is the route. ....(Interruptions)
DR. JITENDRA SINGH: Sir, she is repeatedly saying that the Parliament has been bypassed. ....(Interruptions) Similarly, Mr. Hasnain Sahab had also said it. ....(Interruptions) This Bill was fully passed in this House and also in the other House. ....(Interruptions) You are abusing the sanctity of the Parliament. ....(Interruptions)
DR. T. SUMATHY (A) THAMIZHACHI THANGAPANDIAN: Sir, the DMK has always withstood on its principles of federalism and democracy. ....(Interruptions) Sir, our great leader Anna had evoked:
“We have a federal structure. That is why the framers of the Constitution wanted a federal structure and not a unitary structure, because many political philosophers have pointed out, India is so vast – in fact it has been described as a sub-continent – the mental health is so varied, the traditions so different, the history so varied that there cannot be a steel framed unitary structure here."
       Sir, by reducing the stature of Jammu and Kashmir from a State into a Union Territory, you have not only failed to bring the administration closer to the people but rendered a serious blow to our federalism.
       Sir, so far as this Bill is concerned, as I said, I have a query on the Bill. The Statement of Objects and Reasons of this Bill states:
Section 88 of the said Act provides that the members of the cadres of Indian Administrative Service, Indian Police Service and Indian Forest Service for the existing State of Jammu and Kashmir shall continue to function in the existing cadres. There is a huge deficiency of the officers of All India Services in the Union Territory of Jammu and Kashmir.”        Sir, I may be forgiven for my ignorance. But I would like to get a clear explanation of this phrase ‘huge deficiency’. What does this mean by ‘huge deficiency’? It is also supplemented by another sentence and, that is – “The developmental schemes, Centrally sponsored schemes and other allied activities suffer due to non-availability of All India Officers in the existing cadres of the Jammu and Kashmir as such there is a requirement of merging it with Arunachal Pradesh, Goa, Mizoram, Union Territories cadre so that the officers in this cadre can be posted in the Union Territory of Jammu and Kashmir to meet out any deficiency to some extent.”        Your Government boasts itself on pioneering ‘aatma-nirbharta’ or self-dependence. If there is huge deficiency of the officers in the Union Territory of Jammu and Kashmir to meet out any challenges, then why not put more efforts in making it more self-reliant from the local officers themselves? Why must we have to merge the cadre and have the region depend on other States?
       Here also, I am reminded of a quote by Rousseau, who said, “To form a State, not only the intelligent or the competent enter the contract, but all, both intelligent and the non-intelligent. As parties to agreement, all are equal though in other ways they are dissimilar. This is the meaning of political equality. How to make this real, it is difficult to say, but equality is not a chimera, and it is the duty of the Government to maintain equality, even appointing or even the maintenance of the cadre status.”        Sir, Section 3 of the Bill, which amends Section 88, says – “The officers so borne or allocated on Arunachal Pradesh, Goa, Mizoram and Union Territories cadre shall function in accordance with the rules framed by the Central Government.”        Here, the cat is out of the bag and skeletons come out of the cupboard because ‘rules framed by the Central Government’ is the key sentence wherein the federal rights of the States are put at stake and this is a nail on the coffin of the democracy and the federal structure.
HON. CHAIRPERSON : Please conclude.
DR. T. SUMATHY (A) THAMIZHACHI THANGAPANDIAN: Sir, if you are going to mandate this sort of modus operandi with a lot of brutal majority, what is the guarantee that tomorrow with the same modus operandi the Government would not bifurcate the States like West Bengal, Kerala and Tamil Nadu because I am sure they are going to lose in the electoral mandate?
       Sir, our party leader, M.K. Stalin has strongly opposed all these draconian laws and I also place it on record that I oppose this Bill vehemently. Let me conclude this by saying that John Locke, the father of Liberalism, had argued that the obligation to obey civil Government under the social contract was conditional upon the protection of the person. Sovereigns who violated these terms could be justifiably overthrown. Revolt is the right of the people. For when injustice becomes law, resistance becomes duty.
       Thank you very much.
 
HON. CHAIRPERSON: Prof. Sougata Ray.
SHRI RAJIV PRATAP RUDY : Dada, you have to speak better than her.
PROF. SOUGATA RAY(DUM DUM): No, I cannot. She is very good.
SHRI RAJIV PRATAP RUDY: You have to speak better than her. Otherwise, you will lose all ground. She is sitting next to you.
You sit to speak, not rise to speak.
PROF. SOUGATA RAY : Sir, I sit to speak, as advised by Mr. Rudy, on the Jammu and Kashmir Reorganisation (Amendment) Bill, 2021.
HON. CHAIRPERSON: I think, you have to move to the mike side.
PROF. SOUGATA RAY: I cannot move. Ms. Mahua is sitting next to me. What to do? …(Interruptions)
HON. CHAIRPERSON: Now, Mr. Rajiv Pratap Rudy will say that you have been unseated! … (Interruptions)
PROF. SOUGATA RAY: Yes, I have been shifted.
       Sir, I am very happy that the Home Minister is here to pilot the Bill. He has got relief from visiting the State of West Bengal for, maybe, electoral purposes. So, he has got some time in Delhi to look after the nation’s affairs. I am glad about it.
       Sir, the Bill is a minor Bill, as has been pointed out. …(Interruptions)यही तो दुख की बात है कि देश को नहीं देख कर, केवल पश्चिम बंगाल के पीछे पड़े हुए हैं ।…(व्यवधान) यही तो हमारा दुख है । …(व्यवधान) देश को देखिए । …(व्यवधान) देश बहुत बड़ा है । …(व्यवधान) वहां जा कर मोटुआ लोगों को समझाते हैं ‍कि हम तुम्हारे पक्ष में हैं, तुमको सिटीज़नशिप देंगे । …(व्यवधान) अभी तक नहीं दिया है । …(व्यवधान) तो यही समझाने के लिए जाते हैं । …(व्यवधान)
श्रीरमेश बिधूड़ी (दक्षिण दिल्ली):हमारी पार्टी बनाने वाले बंगाल के श्यामा प्रसाद मुखर्जी थे । …(व्यवधान)आप क्यादोगे? …(व्यवधान) जो आज दिया है,श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने दियाहै । …(व्यवधान)
प्रो. सौगत राय:बिधूड़ी जी, बैठो,तुम्हारा क्षेत्र तो दिल्ली शहर में है । …(व्यवधान) तुम बैठ जाओ । …(व्यवधान) यह बहुत बड़ा देश है । …(व्यवधान) तुम बैठो । …(व्यवधान)
       Sir, there are two amendments. One is to Section 13 where the Bill amends it by stating that in addition to Article 239A, any other provision of the Constitution which refers to elected Members of Legislative Assembly of a State is also applicable to the Union Territory of Puducherry, will also to the Union Territory of Jammu and Kashmir. The other amendment is to Section 88(2). The Ordinance amends it by stating that all the officers of the existing cadre of Jammu and Kashmir shall be borne and become part of the AGMUT Cadre and all future allocations of All India Service officers for the Union Territory of Jammu and Kashmir and Union Territory of Ladakh shall be made through the AGMUT – Arunachal Pradesh, Goa, Mizoram and Union Territories - Cadre.
       Before I speak on the Bill proper, let me repeat my earlier assertion in this House that abrogation of Article 370 was a wrong step. It disturbed the condition that happened at the time of partition, the accession of Jammu and Kashmir to India. It is in pursuance of BJP’s political agenda that they mentioned Shri Shyama Prasad. Of course, he was wrongly detained and died. He was a martyr. They are pursuing that agenda. It is not an agenda which really concerns the people of India.
       For the first time in the history of the country, the Home Minister abolished a State – what a draconian step – and made it into a Union Territory, took away the rights of the people of a State where there was an elected Assembly and made them into a Union Territory. They did it to Ladakh; one would have no objection, but doing it to Jammu and Kashmir is taking away the democratic rights of the people. Now, I want to ask the hon. Home Minister that almost two years after the event, what he has achieved.  Last year, there were 400 civilian deaths in Jammu and Kashmir; clashes with militants are going on; and development is at a standstill. Though the recently completed district-level elections were a good thing, that is the only good thing that has happened up till now, but the development that they promised has not happened.
       They have posted a …* who got defeated as an …*. …(Interruptions) I am not naming anybody. He is not the ideal man. …(Interruptions)
HON. CHAIRPERSON: No, still insinuation is there. This should not go on record.
PROF. SOUGATA RAY: Why?
HON. CHAIRPERSON: It is insinuation.
PROF. SOUGATA RAY: Have I named anybody, Sir?
HON. CHAIRPERSON: It is insinuation, you do not have to name anyone. It is insinuation. That should not be part of the record.
PROF. SOUGATA RAY: Alright, if you feel that way, Sir. They have not put a …*  if you like that.
       The situation in Jammu and Kashmir leaves much to be desired. 4G Internet was restored after 500 days. What a draconian step! The students had to study from homes due to pandemic. They did not have the facility of Internet and so they suffered and the Government has offered them no sops as to how their education would continue. It was not a wise step, may I repeat.
Though BJP may have implemented their divisive agenda, it has not been good for the country. This is not the way that you use your majority in Parliament to change the status quo which has been time-tested, time-honoured. I do not say that everything that happened after Independence was good. I do not think that arrest of Sheikh Abdullah in 1953 was a good step. I do not think that Kashmir was ruled in a very good way. But still, you had to arrest all the leaders of the national political parties, put them under house arrest. They have only been released now. Farooq Abdullah was in house arrest for so long, Omar was there, Mehbooba Mufti was there. Government did not come forward to say when they will be released. So, what has happened has not been good for the country.
       Sumathy when speaking referred to Charles Dickens in A Tale of Two Cities. It was the best of times, it was the worst of times, it was the spring of hope, it was the winter of despair. In Kashmir, this is the winter of despair and that is still lasting.
       Now, having said this, let me come to a few points in the Bill.
SHRI RAJIV PRATAP RUDY: There is beautiful snowfall in Kashmir these days. You have not seen that.
PROF. SOUGATA RAY: A beautiful garden was created on the banks of Dal Lake when Ghulam Nabi Azad was the Chief Minister. That is there but we miss all this.
SHRI RAJIV RANJAN SINGH ‘LALAN’ (MUNGHYR): You should visit Dal Lake. Have you gone to Kashmir, Dada?
PROF. SOUGATA RAY: I have gone so many times there. It is like home.
       Sir, what is happening is that J&K cadre officers are merged with the AGMUT. What is the reason cited? It is cited that there are not sufficient number of Indian Administrative Service, Indian Forest Service and Indian Police Service officers in Jammu & Kashmir cadre. According to the Government, the development was suffering. Centrally Sponsored Schemes were not being implemented. The Government has still not announced a new set of postings. We have learnt that most of the transfers are likely to be at SP level.
Since Jammu & Kashmir is a sensitive region, the senior cadre officers are likely to hold on to hometown. That is the guess. Now, this merger has been opposed by officers in Kashmir, though they have not come out in the open. A former senior IPS officer and retired Inspector General of Police, J&K,  …*  has asked the Central Government to revisit the decision to cut the quota for local officers in IAS and IPS in the recently formed Union Territory.
       Earlier, direct recruits were there and people went on promotion to these cadres. The extension of various Central laws to the UT of Jammu and Kashmir is expected to enhance the progress.  But the decision of the DoPT, implementing 67:33 ratio in All-India Services is bound to impede already retarded, rather negligible career progression of Kashmir Administrative Service and Kashmir Police Service officers.
       The Prime Minister has decided to lower the quota from the existing 50 per cent to 33 per cent of the local officers from State Services to IAS, IPS and Indian Forest Service in Jammu and Kashmir and Ladakh. It is a wrong step. A local officer told the Tribune, a daily published from Chandigarh, that 50:50 formula was introduced only to encourage local officers to enhance their chances of promotion and induction in the IAS and IPS. As you know, from the SP level, it is IAS.
       Earlier, the 50:50 formula was approved by UPA II. This 67:33 formula will seriously affect the promotion prospects and career prospects of Kashmir Administrative Service and Kashmir Police Service officers.
       I join my lady colleague, Shrimati Sumathy, in calling the abrogation of article 370 as draconian. I join her in opposing the Bill which was absolutely unnecessary. I join Shri Adhir Ranjan Choudhary in saying that this Ordinance was unnecessary, ill-timed, undemocratic and against the principles of the Constitution. Thank you.
 
डॉ. निशिकांत दुबे (गोड्डा):सर, यह कहा गया है कि जब बिल इंट्रोड्यूश होता है तो वह या तो स्टैण्डिंग कमेटी में जायेगा,या सेलेक्ट कमेटी में जाएगा, या सरकार हाउस में बिल लाएगी । बिल में जो कुछ भी लिखा हुआ है,उसमें आर्टिकल 370 का डिस्कशन नहीं कर सकते, 35-ए का डिस्कशन नहीं कर सकते ।
HON. CHAIRPERSON: I am sorry I do not agree with you.
SHRIMATI CHINTA ANURADHA (AMALAPURAM): Hon. Chairman, Sir, thank you for allowing me to speak on the Jammu and Kashmir Reorganisation (Amendment) Bill, 2021.
       On behalf of my Party, the YSR Congress, we support this Bill whole-heartedly and I would like to put forth our views on the Jammu and Kashmir Reorganisation (Amendment) Bill, 2021 that seeks to replace the Jammu and Kashmir Reorganisation (Amendment) Ordinance, which was promulgated on 7th January, 2021.
       At present, there is a huge deficiency of officers of All India Services in the Union Territory of Jammu and Kashmir. The development of welfare schemes, Centrally Sponsored Schemes and all other allied activities suffer due to non-availability of All India Services officers in the existing cadre of Jammu and Kashmir. As such there is an immediate requirement of merger with AGMUT so that the officers in the cadre can be posted in the Union Territory of Jammu and Kashmir to meet out any deficiency to some extent. In this manner, it seeks to amend Section 13 and Section 88 of the Jammu and Kashmir Reorganization Act, 2019. 
       Sir, in his special address on April 21, 1947, Sardar Patel Ji had outlined the task before civil servants in an independent India and laid down certain principles of `Surajya’ or good governance. He said and I quote: “Your predecessors were brought up in the traditions in which they kept themselves aloof from the common run of the people. It will be your bounden duty to treat the common men in India as your own.” Therefore, for building an environment that is conducive to development and prosperity, there has been a need to provide for a fresh face to the bureaucracy with recent reforms made with regard to the civil services in the country to make it people-centric and people friendly.
       In this regard, I would like to put forth certain suggestions. The Government’s Second Administrative Reforms Commission (ARC) which was constituted in 2005 finally submitted its report in the year 2009, highlighted several constraints to the development of a highly efficient, transparent and accountable Civil Service.  These included a mismatch between positions and skill sets, and recruitment that was not competency-specific.  Moreover, attracting talent and nurturing excellence, ensuring transparency and accountability along with participatory and representative decision-making were some issues that were needed to be addressed.
       Another important factor was relating to defined accountability. A large segment of delays in the bureaucracy has come from the fact that there is a long hierarchical decision-making structure with no clear decision-making rights defined.
       Before concluding about the bureaucracy, I would like to remind this House of the numerous persecutions faced by the Kashmiri Pandits in the erstwhile State. They were forced to flee their homes, jobs and livelihoods. I would request the Government to reserve at least five per cent jobs in all the public and private sectors in the Union Territory to sustain the livelihoods of this community.
       In this light, if this Bill is given assent to, it can be said, it will mark the beginning of the era of integration and the end of the era of isolation for the Union Territory of Jammu and Kashmir. Therefore, I convey my party’s support to this Bill.
       With these words, I conclude my speech.
HON. CHAIRPERSON: Thank you, Shrimati Chinta Anuradha. You have spoken on the Bill only. I would like to tell Mr. Nishikant Dubey Ji that the rule which was mentioned actually does not apply to the point that he was raising. But it should be borne in mind by all the speakers that we should confine our discussion to the Bill only. Let us not digress to other aspects.
       Shri Rajiv Ranjan Ji.
   
श्रीराजीवरंजन सिंह ‘ललन’ (मुंगेर):सभापति महोदय, यह बिल वास्तव में बहुत छोटा बिल है । यह बिल सीधे जम्मू और कश्मीर के विकास के साथ जुड़ा हुआ है । इस पर कई सदस्यों ने बात की, धारा 370 की बात की, 35(ए) की बात की । अब वह विधवा विलाप करने का समय नहीं है, विधवा विलाप करने की बात खत्म हो गई । हम लोगों ने भी धारा 370 परसमर्थन नहींकिया था, लेकिन आज वह कानून है । अगर हम प्रजातांत्रिक व्यवस्था में हैं और इस संसद ने उस कानून को पास किया और कानून बना दिया, तो वह कानून आज लागू है और उसको सबको स्वीकार करना चाहिए । अब यह विधवा विलाप की ही बात हुई । अभी जम्मू-कश्मीर के विकास की बात हो रही है और आप धारा 370 कीबात कर रहे हैं ।
       अभी हम हसनैन साहबकी बात सुन रहे थे । हसनैन साहब ने कहा किवहां के लोगों में विद्रोह है । कई और साथियों ने भी कहा, दादा ने भी कहा, कई क्वोट पढ़कर उन्होंने सुनाये । उन्होंने कहा कि वहां के अधिकारी कह रहे हैं कि उनका हक मारा जाएगा ।  
       इस बिल में भारतीय सेवा के अधिकारियों की बात है, लोकल अधिकारियों का हक कहां मारा जा रहा है? स्टेट सर्विस में जो रिक्रूटमेंट होती है, जो स्टेट सर्विस में रिक्रूट होंगे, उनका हक कहां मारा जा रहा है? कहीं का बात कहीं जोड़ दे रहे हैं, गाय का सिंग बैल में जोड़ दे रहे हैं, बैल का सिंग गाय में जोड़ रहे हैं । इसका क्या मतलब है?जब धारा 370 लागू थी, आजादी के बाद से आज तक कितना पैसा जम्मू-कश्मीर को दिया गया, जम्मू-कश्मीर पर यदि किसी ने शासन किया है तो क्षेत्रीय दलों ने किया या कांग्रेस पार्टी ने शासन किया । आज तक जम्मू-कश्मीर का विकास क्यों नहीं हुआ?
चौदहवीं और पन्द्रहवीं लोक सभा के सदस्य या उसके पहले राज्य सभा के सदस्य के रूप में हमें भी जम्मू और कश्मीर जाने का कई बार मौका मिला है । दादा,जम्मू और कश्मीर के डल लेक की बात कर रहे थे, उसके पहले क्या स्थिति थी? उसके बगल से आप क्रास नहीं कर सकते थे, डल लेक से बदबू आती थी । कश्मीर का सबसे सुंदर पर्यटक स्थल पहलगाम और गुलमर्ग है । आप श्रीनगर से पहलगाम और गुलमर्ग जाते तो तीन-चार घंटे का समय लगता था, कहीं सड़क नहीं था ।
आज अगर आदरणीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में सरकार ने वहां विकास करना शुरू किया है और विकास के हित में यूनियन टेरिटरी ऑफिसर्स की कमी को देखते हुए इसे मर्ज करने का फैसला किया है तो यह स्वागतयोग्य है । सदन के सभी सदस्यों  को इसका स्वागत करना चाहिए । आज हम क्या कर रहे हैं? आज वहां तेजी से विकास हो रहा है । हम वहां जाते रहते हैं । हम माता वैष्णो देवी का दर्शन करने भी जाते रहते हैं । वहां हम देखते हैं और पता करते हैं । जब वहां मल्लिक साहब गवर्नर थे,उस समय भी हम गए थे । वहां विकास हो रहा है और तेजी से विकास हो रहा है । उस विकास को गति देने के लिए केन्द्र सरकार यह बिल लायी है तो इस बिल का जितना भरपूर समर्थन किया जाए, वह उचित है । इसलिए आज हम इस बिल का समर्थन करते हुए सदन के बाकी माननीय सदस्यों से भी कहेंगे कि जम्मू और कश्मीर की स्थिति पर जब कभी चर्चा हो तो विधवा विलाप कीजिए,आज की तारीख में विधवा विलाप मत कीजिए । जम्मू-कश्मीर के विकास के साथ अपने-आप को जोड़ने का काम कीजिए । आज उसके भागीदार बनिए और इसी के साथ मैं इस बिल का समर्थन करता हूं ।
 
श्रीमलूक नागर (बिजनौर):सभापति महोदय, आपने मुझे बोलने का मौकादिया, धन्यवाद । मैं इस बिल का समर्थन करते हं । ।
सभापति महोदय, आज आप घंटीमत बजाना, मैं पार्टी की तरफ से अकेला बोल रहा हूं, आज प्लीज मुझे बोलने देना । अभी राजीव रंजन साहब बोल रहे थे, जहां आज पूरेदेश से बढ़िया लोगों को छांटकर आईएएस और आईपीएस ऑफिसर्स की देश हित में जरूरत है । वहां पिछले 70 सालों से दलितों, गरीबों, मजलूमों और पिछड़ों का हक छीना गया । आज उनकोहक दिलाने के लिए माननीय गृह मंत्री जी इस को बिल लेकर आए हैं कि देश के बढ़िया ऑफिसरों को वहांलगाया जाए तो इसमें भी इनको दिक्कत हो रही है । मुझे समझ में नहीं आता कि इनकोहो क्या गया है? अभी परसों रात मैंने बोला, किसानों के बारेमें कि बाहर कुछ बोलते हैं, सदन में बोल नहीं पाते हैं । उसके बाद राहुल गांधी जी आए तो सही और प्रोफेशनल की तरह बोल कर चले गए । हम लोगों को स्टूडेंट्स समझकर चले गए, यहां तुम भी स्टूडे्ट्स हो तो फिर सारे स्टुडेंट हैं । अगर तुम प्रोफेसर हो तो बाकी सारे भी प्रोफेसर हैं, सुनो और समझोताकि बढ़िया विपक्ष की भूमिका अदा कर सको ।
       माननीय वित्त मंत्री जी बोल कर गई हैं कि कांग्रेस द्वारा विपक्ष की भूमिका अदा नहीं की जा रही है । ऐसे में वह सदन में न बैठें जो मुख्य विपक्ष हो, वह अपने को कमजोर तो कर ही रहे हैं, हम भी विपक्ष हैं, हमें भी मार रहे हैं और हमारी भी बदनामी हो रही है, यह बहुत शर्म की बात है । बिट्टू जी मेरी तरफ कैड़ा-कैड़ा देख रहे हैं । बिधूड़ी जी दिल्ली के गुर्जर हैं और मैं पश्चिमी उत्तर प्रदेश का गुर्जर हूं । आप ऐसे कैड़ा-कैड़ा मत देखो । …(व्यवधान)
12.50 hrs                    (Shrimati Rama Devi in the Chair)        माननीय सभापति जी, मैं एक बात और कहना चाहता हूं । हमारी नेता कुमारी मायावती जी हैं और हम बढ़कर आगे तारीफ करते हैं और अगर गलत बात लगती है तो माननीय मोदी जी भी सामने बैठे होते हैं,अमित शाह जी अभी बैठे हैं,हम अपना विरोध वहां भी दर्ज करते हैं । हम बिल्कुल परवाह नहीं करते हैं । इसी क्रम में, मैं कहना चाहता हूं कि यहां लेह के सांसद बैठे हैं, इतना बढ़िया बोलते हैं कि सुनने में लगता है कि यह आदमी देशहित में बोल रहा है और इसे तो बिल्कुल ईनाम देना चाहिए । यह आदमी गरीबों के हित में, दलितों के हित में और पिछड़ों के हित में बोलता है । 370 के समय देश में तूफान आया था, अमित शाह जी ने गुर्जर बकरवाल के बारे में, गुर्जरों के बारे में, जम्मू-कश्मीर में बोला था । मैं तीन दिन पहले इनकी स्पीच सुन रहा था, गुर्जर बकरवाल के बारे में बोला, गुर्जर समुदाय के बारे में बोला तो मुझे लगा कि गुर्जरों और पिछड़ों के देश में और जम्मू-कश्मीर में 1947 की आजादी से अब जो हक छीने जा रहे थे, अब उनको मिलेंगे । गुर्जरों को उनका हक मिलेगा ।

       माननीय सभापति, हमारे सामने सत्यपाल जी  बैठे हैं । हमारे साथी हैं, बड़े भाई हैं । मुम्बई पुलिस में कमिश्नर रहे हैं । मेरठ में इनका और हमारा लोकसभा क्षेत्र मिलता है । इनका एक विधान सभा क्षेत्र मेरठ में है और मेरा भी है । आपने सारी बात की, जब गृहमंत्री जी कश्मीर के गुर्जरों के बारे में बोल सकते हैं, हम हमेशा जाटों के बारे में, यादवों,कश्यपों के बारे में बढ़ चढ़कर बोलते हैं, जम्मू-कश्मीर में 29.4 परसेंट गुर्जर बकरवाल हैं, अगर आप भी एक शब्द कह देते तो पूरे देश के गुर्जर आपके साथ हो जाते । इससे हमें भी बढ़िया लगता कि हम जाटों की बात बोलते हैं और हमारे लिए भी किसी ने कोई बात बोली है । हम बीजेपी के सांसदों की तारीफ खुलकर कर रहे हैं,ऐसे हम भी चाहते हैं कि सत्यपाल जी कुछ बोलते । सत्यपाल जी,धन्यवाद कि आपने खड़े होकर गुर्जरों का समर्थन किया ।

       कुमारी बहन मायावती जी दलितों, गरीबों,शोषितों की लड़ाई हमेशा लड़ती रही हैं । कांग्रेस दलितों के नाम पर ढोंग करके,उत्तर प्रदेश के गरीब घरों में राहुल गांधी जी और …* जाकर खाना खाकर दलितों को खुश करना चाहते हैं । जम्मू-कश्मीर में दलितों को 1947 से हक नहीं मिले हैं, सरकार उनको हक दिलाना चाहती है फिर भी ये विरोध कर रहे हैं तो एडमिट करो कि तुम दलितों,गरीबों, मज़लूमों,कमज़ोंरों और पिछड़ों के खिलाफ हो । खिलाफ हो या फेवर में हो, पहले इसका फैसला करो फिर विरोध करो ।

जम्मू-कश्मीर से संबंधित किसी भी बिल पर यहां खड़े होकर विरोध करते हैं । अगर विपक्ष में विरोध करना ही है तो इसका मतलब है कि तुम सरकार का विरोध नहीं कर रहे हो,तुम लोग गरीबों का विरोध कर रहे हो, तुम लोग पिछड़ों का विरोध कर रहे हो, तुम लोग मज़लूमों का विरोध कर रहे हो,तुम लोग अक्लियत के उन लोगों का विरोध कर रहे हो,जिनको आजादी से अब तक हक नहीं मिले   हैं । ये लोग अब कुछ और कहेंगे,जैसे बिट्टू जी ने इशारा किया,हम तो भाग नहीं रहे हैं लेकिन तुम अपना सोचो कि किधर को भागोगे ।

       एक बात और है, मैं सरकार से कहना चाहता हूं, चाहे लेह-लद्दाख हो या जम्मू-कश्मीर हो, देश की जितनी सीमा पाकिस्तान से मिलती है, ज्यादातर गांव मुस्लिम गुर्जर,गुर्जर बकरवाल के हैं । ये लोग हमेशा देश के लिए लड़ाई लड़ते हैं,देश हित में काम करते हैं ।

वे कई बार उग्रवादियों द्वारा नरसंहार किए जाते हैं । पिछड़े, दलितों में बाल्मीकि समाज आते हैं, जितने भी आते हैं, मैं सबके बारे में कह रहा हूं । वहां जो लोग हैं,आप चाहे उन्हें मुस्लिम गुज्जर कहिए या गुज्जर बकरवाल कहिए,वे हमेशा आतंकवादियों का डटकर विरोध करते हैं और लोहा लेते हैं । देश की सीमा पर रहकर पाकिस्तान को चने चबाते हैं । कांग्रेस ने 70 साल या 60 साल के करीब,जो हक छीना है,हम माननीय गृह मंत्री जी से चाहते हैं कि उन सीमा पर जितने गांव हैं, वहां एक ऐसी व्यवस्था करें कि हर गांव में दो पुलिस वाले और दो बीएसएफ के,यानी फोर्स के चार लोग रहें । उस गावं के लोगों के लिए ज्यादा से ज्यादा लाइसेंस बनवाए जाएं, जिससे उनमें एक सुरक्षा की भावना  आए । उनके लगे कि दिल्ली में बैठी भारत सरकार देश में हमारे बारे में सोच रही है । उन लोगों के पास खाने के लिए पूरे साधन हैं । वहां बहुत लोग ऐसे हैं, जो घुम्मक्कड़ हैं । …(व्यवधान) मैं आधी मिनट में अपनी बात खत्म कर रहा हूं । पहली बार मुझे अमित शाह जी के सामने बोलने का मौका मिला है । मुझे बोलने दीजिए । आज तक जिन्दगी में लगा, मैं पहली बार बोल रहा हूं । मैं कहना चाहता हूं कि वहां उनका दूध, पनीर और घी का काम है । उनका दूध सड़ता है, उनका पूरा घी नहीं बिकता है, इसलिए,मैं चाहता हूं कि एक ऐसा एसईजेड बने, जिसमें उनके बढ़िया तरीके से दूध के प्रोडक्ट बन सकें । उनके लिए एसईजेड बनाकर देश में या विदेश में बिक्री की सुविधा प्रदान की जाए । उन्हें ऐसा प्रोत्साहन दिया जाए, जिससे उनको लगे कि सरकार उनके बारे में बहुत अच्छा सोच रही है ।   

बहुत-बहुत धन्यवाद ।

   

SHRI BHARTRUHARI MAHTAB (CUTTACK): I stand here to deliberate on the Jammu & Kashmir Reorganisation (Amendment) Bill, 2021. Four things are to be said. The Jammu & Kashmir Reorganisation (Amendment) Ordinance was promulgated by the President of India on 7th January, 2021, just three weeks or so before the Budget Session commenced. The question always arose legally and constitutionally, is this Government or any Government competent enough to issue an ordinance? The issuance of an ordinance has to be immediate. There has to be some specific reason as to why an ordinance has come. Till now, I have not heard anything from the Government’s side that why it became expedient to bring an ordinance on 7th January when the House was going to meet on 29th January, 2021. What was the exigency? What was the immediate cause that an ordinance was necessary and that too relating to enhancement of the quota of IAS and IPS Officers? This needs to be explained.

       In addition to Article 239A, which says, ‘any other provision of the Constitution which refers to the elected members of a legislative assembly of a State and is applicable to the Union Territory of Puducherry will apply to the Union Territory of Jammu & Kashmir and also to the Union Territory of Ladakh’, when this is the provision, I feel no reason why there should be opposition to this Bill today. All the officers of the existing cadre of Jammu & Kashmir shall be borne and become part of the AGMUT Cadre, and all future allocations of All India Service Officers of the Union Territory of Jammu & Kashmir and the Union Territory of Ladakh shall be made to AGMUT Cadre.

I also do not find any reason to oppose this. “All the officers allocated on AGMUT Cadre shall function in accordance with the rules framed by the Central Government”. This is actually one of the major reasons why this has come into effect.

       As regards amending Section 88 of Jammu and Kashmir Reorganisation Act, 2019, I would like to mention what has been there in the Bill. Here I would like to mention that Article 370 of the Constitution has not been abrogated. It is not abolished but has been practically been put on hold. The provision that was there will not be in force.

       After the so-called abrogation of Article 370, Parliament was not in session and the President was satisfied that circumstances existed to promulgate this Ordinance. The question as to what were those circumstances that existed which rendered it necessary for him to take immediate action, needs to be answered. That needs to be explained.

       There are practically two sections in the Bill. First, Section 13 where the Act provides that Article 239A of the Constitution, which is applicable to the Union Territory of Puducherry, shall also apply to the Union Territory of Jammu and Kashmir. Article 239A provides for the Constitution of a Union Territory of Puducherry with a legislature which may be elected, or partly nominated and partly elected, or a Council of Ministers, or both with such Constitutional powers and functions in each case as may be specified in the law. This is there in Section 13.

The amendment is that in addition to Article 239A, any other provision of the Constitution which refers to the elected members of a legislative assembly of a State and is also applicable to the Union Territory of Puducherry will also apply to the Union Territory of Jammu and Kashmir and Union Territory of Ladakh. Here, it has been made clear, I hope the Minister will also explain, that there is a provision. It is not that by removing or making the State into a Union Territory that Assembly loses its nomenclature. Assembly will be there as Assembly is there in Puducherry. Assembly can also be formed in Jammu and Kashmir. In that respect, the conception that is being created that with the status of a State not being given to Jammu and Kashmir, the Assembly will not be there, is not correct. Assembly will be there and Assembly can be made there. Accordingly, as with the Assembly of Puducherry, the Assembly of Jammu and Kashmir also can function.

       Section 88(2) specifies that Members of the IAS, IPS and IFoS serving in the State of Jammu and Kashmir would continue to serve in the two Union Territories based on allocation decided by the Central Government. In future, postings of officers of the two Union Territories would be with Arunachal, Goa, Mizoram, Union Territory Cadre. This Bill amends it by stating that all the officers of the existing cadre of Jammu and Kashmir shall be borne and become part of the AGMUT cadre. All future allocations of All India Services for the Union Territory of Jammu and Kashmir shall be made as per the AGMUT cadre. There is no difference of opinion on this.

       In Section 88(3), the provisional strength, composition, and allocation of officers currently borne on the existing cadre of Union Territory of Jammu and Kashmir and Union Territory of Ladakh shall be such as the Lt. Governor of the Union Territory of Jammu and Kashmir may by order determine. This is the Section in the principal Act. The amendment is stating that officers so borne or allocated by AGMUT cadre shall function in accordance with the rules framed by the Union Government. This is the limited amendment that is before us for consideration. I find there is not much difference of opinion relating to this Bill on the existing extension of various Central laws to the Union Territory of Jammu and Kashmir and also to the Union Territory of Ladakh. The basic question which can be discussed today or is being discussed today is that with the extension of what has happened after the so-called abrogation of Article 370, whether all laws of the Union of India are now being implemented in Jammu and Kashmir.

       Has that brought peace and development and enhanced the quality of life in Jammu and Kashmir or Ladakh? This needs to be discussed. As many hon. Members have spoken and in future also will be speaking, there were a number of laws which were not being implemented in Jammu and Kashmir and today those laws are being implemented. I am just giving an instance. Corruption charges against political persons and officers in Jammu and Kashmir were not being probed by the Central Bureau Investigation. They were not given permission to go into that. Allegations against the officers or political persons were also being curtailed during earlier times. Now, those things are there. One can go into investigation and activities there. So, in a way, I would say development activities have been done in a rapid way. I am aware a large number of finances have also been provided to Jammu and Kashmir and to Ladakh. I would say the quality of life would also improve. But the concern here is that the DoPT is implementing the ratio of 67 to 33 in the All India Services. The question is whether it is going to impede an already retarded, rather negligible career progress of Kashmir Administrative Service and Kashmir Police Service officers? This is a question that the Government can explain to the people at large, both in Jammu and Kashmir and in the Union Territory of Ladakh. This did not happen in the 50s, 60s or 70s; this happened only during Mr. Omar Abdullah’s Chief Ministership that a specific provision was made that there will be 50 per cent officers from the Kashmir cadre who will be getting promotion and remaining 50 per cent will be from the All India Services care. This is the provision which was specifically made and now through this Bill, that amendment is going to be affected. Now, it will be as it is with other States in the ratio of 67 to 33; so also it will be with Jammu and Kashmir. In that respect, I would say it is one of the best decisions which the Government has taken. I would say this is just an extension of the amendment of Article 370 that was made in August 2019. Why did it take such a long time? I think the Government can tell us. Officers who are engaged in Union Territory cadre always prefer to stay in Delhi or at the most they want to be in Chandigarh. Nobody wants to go to Andaman and Nicobar, what to say about going to the North East States. Here, Goa is an extension of most of the officers who are in the Union Territory cadre. People of Jammu and Kashmir are also in that category as Goa, Mizoram and Arunachal.

I believe another problem may arise and I think the Government is aware of it, and that is that it is a border State. It has to fight onslaughts of terrorists. There are home-grown people also who indulge in arson.

माननीय सभापति : श्री नामा नागेश्वर राव जी ।

…(व्यवधान)

श्रीभर्तृहरिमहताब : मैडम, मैं कंप्लीट कर रहा हूँ । It has to be ensured that those officers who work in border States, that too in areas of Jammu and Kashmir and Ladakh, continue for a specific period of time. They should not be alarmed that after two or three years, they will be leaving that State and going to some other State. This is necessary because unless they are posted there for quite some time, they cannot build up rapport with the local officers who are engaged at the district level, taluka level or the sub-divisional level.

 

To have that command, it is not only for the police officer who will be the top most officer of the district, it is the District Magistrate, the Deputy Commissioner who will be actually managing the revenue affairs of that district.  They need to stay there for a continuous period of time so that they can build up rapport.  This apprehension needs to be removed that, yes, special attention also will be given to those officers who are placed from this cadre in those States, especially the border State of Jammu and Kashmir. 

       I need not go into some other historical aspects.  Thank you, Madam.

     

SHRI NAMA NAGESWARA RAO (KHAMMAM): Thank you, Madam, for giving me this opportunity to speak on the Jammu and Kashmir Reorganisation (Amendment) Bill, 2021.

मैडम, इस बिल के सेक्शन 13 में एक अमेंडमेंट है और सेक्शन 88 में एक अमेंडमेंट है । ये दोनों अमेंडमेंट्स जम्मू-कश्मीर के लिए जरूरी हैं । जम्मू-कश्मीर का जब बिल इंट्रोड्यूस किया गया था, जो अभी एक्ट बन गया है, जब उस बिल के बारे मे 2019 में बात की गई थी, उस समय हमारी पार्टी – टीआरएस पार्टी ने जमकर उसका सपोर्ट किया था । उसी तरह से अभी इन दोनों अमेंडमेंट्स को हम सपोर्ट कर रहे हैं । हमारे लीडर केसीआर साहब,तेलंगाना के चीफ मिनिस्टर साहब ने, जो तेलंगाना बना है, उसके बनने के बाद वहां जिस तरह से छ: सालों में डेवलपमेंट हुआ है, उसी तरह से जम्मू एंड कश्मीर बन गया है, उसके भी डेवलपमेंट की जरूरत है । उस डेवलपमेंट को मन में रखते हुए इन अमेंडमेंट्स की भी जरूरत है ।

       मैडम,मैं इस हाउस में एक बात बोलना चाहता हूं । जब 15वीं लोक सभा चल रही थी, उस समय यूपीए की गवर्नमेंट थी और फारूख अब्दुल्ला साहब भी उस टाइम में मिनिस्टर थे । हाउस चलने के टाइम में कंटीनिवसली जम्मू-कश्मीर में डिस्टर्बेंस हो रहा था, स्टर्न स्टोन पेल्टिंग होता था, करीब 300 लोग एक्सपायर हुए हैं । उसी टाइम में फारूख अब्दुल्ला साहब ने यह बताया था कि एक तरफ यहां हाउस चल रहा है और उधर काफी कुछ डिस्टर्बेंस हो रही है, उसके बारे में बात करनी चाहिए और उस डिस्टर्बेंस के बारे में सारे लीडर्स को उधर जाना चाहिए । इसके बाद सरकार ने यह डिसीजन लिया था,लीडर्स के साथ बात की थी । उस समय अपोजिशन में स्वर्गीय सुषमा जी भी थीं । मैं भी उस टाइम अपनी पार्टी का लीडर था । हम सबको लेकर चिदम्बरम साहब तीन दिनों के लिए जम्मू-कश्मीर गए थे । हमने वहां इसकी परिस्थिति देखी थी । अगर हम खुद एक होटल में हैं तो उस होटल से आगे जाने के लिए हम लोगों को एलाउड नहीं था । अभी ओवैसी साहब यहां नहीं हैं, उस टाइम में सीपीएम के सीताराम येचुरी और मैंने चिदम्बरम साहब को यह बताया कि साहब, आप सिक्योरिटी दीजिए या मत दीजिए, हम लोग यहां आकर होटल में बात करके रिटर्न होने वाले नहीं हैं, जरूर अंदर जाकर हम लीडर्स के साथ बात करना चाहते हैं । तब चिदम्बरम साहब ने यह बताया था कि नहीं, हम सरकार की तरफ से आपको प्रोटेक्शन नहीं दे पाएंगे,हम लोगों ने इधर ही बैठकर बात करने के लिए सोचा था और हम लोग इधर से ही सबसे बात करेंगे, जो नहीं आया, उसके पास हम लोग नहीं जाएंगे । मगर हम लोग रुके नहीं थे । येचुरी जी,ओवैसी साहब और मैं उन लीडर्स के पास गए थे । इसके बाद हमको सिक्योरिटी मिली, हम वहां गए, बात की । मैं इस बात का जिक्र यहां इसलिए करना चाहता हूं कि तब कंडीशन इस तरह की थी । अभी अच्छा हुआ है,स्टेट बन गया है । अब वहां इलेक्शन्स होंगे, उसका डेवलपमेंट होगा । अभी हमारे साउथ इंडिया से भी लोग जम्मू-कश्मीर जाकर इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट के लिए सोच रहे हैं । रीसेंटली दो-तीन लोगों ने मुझसे बात की थी । जम्मू में कुछ फूड इंडस्ट्रीज वगैरह के लिए इंडस्ट्रियल पॉलिसीज वगैरह स्टडी करने के बाद वे लोग अभी इंट्रेस्टेड हैं । जम्मू-कश्मीर ए पार्ट ऑफ इंडिया है ।

       वह इण्डिया में इण्डिया को सपोर्ट करने,जम्मू कश्मीर में हर चीज को सपोर्ट करने के लिए हम आपके माध्यम से बाकी लोगों को भी बोलना चाहते हैं । हमारी आखिरी एक रिक्वेस्ट है,होम मिनिस्टर साहब तो यहां नहीं हैं, मगर किशन रेड्डी साहब हैं,वह हमारी बात का जिक्र करके,उसका रिप्लाई कराएंगे । एपी रीऑर्गेनाइजेशन एक्ट, 2014 के अनुसार तेलंगाना बना है । अभी हमारे तेलंगाना में आईएएस, आईपीएस की शॉर्टेज है । जहां 208 आईएएस चाहिए थे, वहां अभी 136 हैं और आईपीएस की संख्या 140 थी, लेकिन वह 105 है । किशन रेड्डी साहब,हमारे तेलंगाना से मंत्री हैं । हम बहुत उम्मीद करते हैं कि वे इस शॉर्टेज को खत्म करेंगे । इसके साथ ही इस बिल को हमारी पार्टी सपोर्ट कर रही है ।

SHRI E.T. MOHAMMED BASHEER (PONNANI): Thank you very much for giving me this opportunity.

       The Jammu and Kashmir Reorganisation (Amendment) Bill is a simple Bill.  To a certain extent it is a fait accompli, involving merger of IAS, IPS, IFS, and so on of Jammu and Kashmir with the cadre of civil services officers of Goa, Mizoram and Arunachal Pradesh.  That is okay. 

       Madam, while we are discussing this issue, I would humbly appeal to the Government to have an introspection of what exactly has happened after the abrogation of Article 370 of the Constitution.  We have heard a number of claims from the Government’s side, like after abrogation of Article 370 J&K has become a paradise.  I would like to say with all the politeness that these are all exaggerated stories, and banalise kind of things.

       You have let two years elapse.  You could have done it much earlier. Backwardness is still there in J&K.  Fake encounters are still going on.  I am not denying application of certain Centrally sponsored schemes but serious attempts have not been made for redressing their genuine grievances. That exactly is the fact.

       I would just like to ask one thing.  When are you going to give back the statehood to them?  You have made a number of declarations that it will be done as soon as possible.  What is the time frame for that?  I would humbly request the Government that if it is an honest declaration, give an assurance before the House when you are going to give back statehood to J&K.         Employing local people as officers has some relevance.  Why are you transferring officers from other States like Goa, Mizoram, and so on to J&K?  The local nature of a particular State should be kept in mind while making transfers.  When you are transferring officers, please keep in mind that the officers so transferred should reflect the local ethos.  Trustworthiness and cooperation are important and that should also be maintained.

       As far as a clean administration is concerned, the integrity and impartial attitude of bureaucrats are its important ingredients. You are unnecessarily creating some confusion.  I do not want to say much about that.  Even in Lakshadweep some move is going on.  The Government may have some liking or disliking for officers but while posting officers it should not think that the officers should work as catalytic agents for implementing the Government policies.  There must be some criteria.  I would like to say that some bad signal, regarding the Government’s approach, is coming from Lakshadweep.

       Then, I would like to say one more thing. Now, what is happening? You are all saying that wonderful things are happening there. Things are going from bad to worse. I am going to conclude now. Still, they are having problems. So, what I am saying, in brief, is that instead of making tall talks, realise the ground realities. The Government should react according to the sufferings of the people. Instead of making some sugar-coated promises and doing propaganda, do things sincerely. That is what I want to say. Be real in all these kinds of things. These were the few words that I wanted to express. Thank you very much.

   

SHRI BRIJENDRA SINGH (HISAR): Hon. Chairperson, Madam, thank you for affording me this opportunity to speak on the Jammu and Kashmir Reorganisation (Amendment) Bill, 2021.

       I stand to speak in support of the Bill. I will confine myself to only Section 3 of this Amendment Bill which reads and I quote: “In section 88 of the principal Act, for sub-sections (2) to (6), the following sub-sections shall be substituted, namely:- (2)The members of the Indian Administrative Service, Indian Police Service and Indian Forest Service for the existing cadre of Jammu and Kashmir, shall be borne and become part of the Arunachal Pradesh, Goa, Mizoram and Union territories cadre (AGMUT) and all future allocations of All India Services Officers for the Union territory of Jammu and Kashmir and Union territory of Ladakh shall be made to AGMUT cadre for which necessary modifications may be made in corresponding cadre allocation rules by the Central Government.”        Madam, this Bill, which seeks to amend the Jammu and Kashmir Reorganisation Act of 2019, by itself is unexceptional. It simply means that once J&K and Ladakh have become UTs, under the IAS Cadre Rules of 1954, the merger with the UT cadre is only a logical corollary. This would apply mutatis mutandis to the IPS and IFS cadres as well. So, it is not just as if there is a shortage of Officers which the Government seeks to make up that this particular Amendment has been brought about. That is the argument which especially hon. Adhir Ranjan Chowdhury was making, कि समय पर याद क्यों नहीं आया कि वहां ऑफिसर्स की कमी थी । क्यों यह अभी याद आया है? ऐसा कुछ नहीं है, यह व्यवस्था की बात है । It is an institutional thing which simply flows out of the Act which was passed in 2019.

       The historic Jammu and Kashmir Reorganisation Act of 2019 sought to bring down the curtain on the unfinished agenda of Indian Independence. Of all the Princely States -- that had acceded to India with almost similar instruments of merger -- it was only Jammu and Kashmir which was accorded a status so special by virtue of Article 370 and Article 35A, that instead of bringing J&K into the national mainstream, it fostered over time a feeling of separateness and an identity distinct from the rest of India - a kind of sub-national identity. This identity is being bandied about by a lot of our friends from the Opposition. A lot of identities exist in India. India is a very diverse land. So, let us not even talk about distinctiveness of a particular region in India. Almost, every region in India has its own distinct identity. Now, this led to a vicious cycle of violence and terrorism that threatened India’s national security and internal peace.

       An Article that was supposed to be the instrument of J&K’s merger into the Indian Union, became the reason that prevented this very merger. That this temporary and transitional provision with respect to Jammu and Kashmir had to go at some point was clear to everyone. The incongruity of एक देश में दो विधान,दो प्रधान,दो निशान was visible to all but it needed a Syama Prasad Mukherjee to bring it to the national focus. The successive Governments in Delhi have sought to dilute the provisions of these Articles.

       It was said that status quo had to be maintained but status quo is never static. Status quo is active and that is why, the previous Governments also sought to dilute these provisions but none could muster the political will and the courage to overcome the vested interests which are developed over the last seven decades and do away with the constitutional anomaly.  It fell on our hon. Prime Minister, Narendra Modi Ji and our Home Minister Shri Amit Shah Ji to pick this challenge, bring in the J&K Reorganisation Bill, 2019, and put this agenda at rest for all times to come.  Let there not be any doubt about this. This issue as far as this country is concerned perhaps stands settled for good. The naysayers and the doomsday advocates were plenty. But over the last one and a half years, it is amply clear that a firm leadership backed by a national resolve can help sort out a seemingly intractable problem. Violence is receding. Development is on its course. वैसे भी अभी डेढ़ साल ही हुआ है, जिसमें से एक साल तो कोरोना ही खा गया, इसलिए थोड़ा सब्र रखिए । वहाँ पर हो रहे डेवलपमेंट की पूरी झलक आपको देखने को मिलेगी । उसके बारे में विस्तार से मंत्री जी बताएंगे,ऐसा मेरा मानना है । And most importantly, political activity is coming back to normal. Democracy and democratic form of governance is taking centre stage again which was evidenced in the successful conduct of the District Development Council elections. I must congratulate all the parties, which otherwise had opposed the Reorganisation Bill, that were all party to these elections.

       Now, this amendment is specifically dealing with the All India Services. Sardar Vallabhbhai Patel in the Constituent Assembly discussions in 1949 had stated and I quote:-

“The Union will go, you will not have united India if you have not a good All India Service.”        I agree that this was said when the Indian State was in its infancy and there were various fissiparous tendencies which were at work. But then the UTs of J&K and Ladakh are newly created administrative entities. I agree that hitherto there were All India Services which were working in the State of Jammu and Kashmir but now, a fresh beginning has to be made.  As was said by many other Members also, there are so many laws, almost 170 of them, which need implementation in that State. In any case, it must be recognised that there is a severe deficit of All India Service officers in Jammu and Kashmir. I will give just one example.  Dr. Satyapal Singh also referred to this. Against a sanctioned strength of 137 in the Indian Administrative Service, only 58 are in place and out of these 58, only 41 are in Jammu and Kashmir after adjusting for those on deputation. This whole talk is that 50 per cent which was the State Civil Services and which were filling up the All India Services ranks, it should be maintained and not reduced to 33. We can see from the facts in front of us. What the state of the Civil Services there is. This is evidently on account of conditions that have prevailed in the State for decades.  In spite of its natural charms, the State of Jammu and Kashmir was not a preferred option for young officers.  I bear testimony to this because I come from one of these administrative services.
       I will give another example. The AGMUT cadre which consists of three States and six Union Territories, now eight with the inclusion of Jammu and Kashmir and Ladakh, has almost 290 IAS officers with them. Except Delhi in terms of population, and Arunachal Pradesh in terms of size, all these States and Union Territories are fairly small. Chandigarh a city, which I had the honour of serving as deputy commissioner, is just about 12 lakh population and has a spread of about 15 kilometres by 14 kilometres. But it has 12 IAS officers and almost half a dozen IPS officers manning the services there.  After the passing of this Bill, the UTs of J&K and Ladakh will have access to this pool of All India Service officers that are allocated to AGMUT cadre. Furthermore, officers promoted to the All India Services from J&K State Services will be exposed to other parts of the country.
An argument was given why outsiders should be welcome in a State. Well, this is a very old argument and it has been settled for good. At the time of Independence also, All India Services were meant to cater to the requirements of the nation building and the progress and development of the nation and that is why, this service has a kind of attraction which it still does. मैं एक उदाहरण देना   चाहूंगा । जब मैं चंडीगढ़ में था, तो वहाँ के जो डीएसपीज हैं, वे एसपी नहीं बनना चाहते हैं क्योंकि एसपी बनने के लिए उन्हें आईपीएस में प्रमोट होना पड़ेगा और आईपीएस में प्रमोट होने का मतलब यह है, They will be part of the AGMUT cadre and so they will be transferable to all the other Union Territories and States which will be covered under the AGMUT cadre. So, let us not get into this argument कि लोकल आदमी की उसके क्षेत्र के प्रति, उसके प्रदेश के प्रति बहुत ज्यादा कमिटमेंट है । कमिटमेंट जरूर होगी, लेकिन एडमिनिस्ट्रेटिवली,जैसा कि सत्यपाल जी ने कहा था कि खड़ा पानी एक समय के बाद सड़ना शुरू हो जाता है, इसलिए उसमें प्रवाह रहना बहुत जरूरी है और उसको नया पानी मिलता रहना चाहिए । Also, the availability of increased number of officers with diverse and vast administrative experience, expertise and proven calibre can definitely help improve the administration of these newly formed UTs in these challenging times and speed up the economic development. यूटी कैडर में होने का एक और फायदा यह है, because of their access to Government of India they will have access to excess funds. That is what the general practice is in almost all the Union Territories. Needless to say, that the transfer of officers to and from across the country to Jammu and Kashmir and Ladakh will also help integration of J&K with the rest of the country.
I am not one of those who is a votary that All India Services are the steel-frame of India. Our steel-frame is our Constitution, our democracy, and the cultural ethos. But Indian Civil Services do play their part and there is no denying that post-Independence All India Services have brought about a stability, administrative uniformity, and a sense of belonging to a single unifying entity called India. This is only one element of the larger picture, but an important one nonetheless. It will take time, patience, huge amount of administrative skill, and political wisdom to achieve J&K’s integration with the Indian Union, politically, administratively, and emotionally. But it is a worthy endeavour that we all must strive for.
       Madam, Chairperson, with these words, I seek the support of this august House to pass this Bill. Thank you.
माननीयसभापति : श्री केसिनेनी श्रीनिवास – उपस्थित नहीं ।
 
SHRI N. K. PREMACHANDRAN (KOLLAM): Madam, Chairperson, thank you for giving me this opportunity to speak on the Jammu and Kashmir Reorganisation (Amendment) Bill, 2021.
       This is a consequential amendment to the Constitutional amendment that we passed in the year 2019. A big controversy has now cropped up and we also had challenged the constitutional validity of the legislation when it was considered and passed by this august House. It is for the first time in the history of India that a State has been divided into two Union Territories and the status of Statehood of a particular State has been lost. This has happened for the first time in the history of India. It was assured, when the Bill was considered and passed, by the hon. Home Minister that the Statehood character of Jammu and Kashmir would be restored when the law-and-order situation improves and things become normal. So, I would like to know from the hon. Home Minister as also from the Government of India about providing the Statehood status of Jammu and Kashmir. It is because it was an assurance given by the Government on the floor of the House that when normalcy would return, definitely this would be done. It means that normalcy has not returned to Jammu and Kashmir and it is the reason for which the Statehood character of Jammu and Kashmir is not being provided.
       With regard to the Bill, two amendments have been proposed. I have no objection or opposition to the proposed amendments because it is required and essential to set right the original Jammu and Kashmir Reorganisation Act of 2019. With respect to Section 13 of the Act, it is about all the elected representatives of the State Legislative Assembly and article 239A is being well explained and it is being applicable to Jammu and Kashmir along with Puducherry. The proposed amendment to Section 88 is regarding Administrative Service. The hon. learned Member who spoke is an experienced person in the field. It is a welcome step by the Government which seeks to provide sufficient and adequate administrative personnel in the Union Territories of Jammu and Kashmir and Ladakh. It is very much required so as to maintain the law and order situation and also for development of Jammu and Kashmir. We have no objection as far as these two amendments are concerned.  But the main question to be asked is about the real state of affairs of Jammu and Kashmir now. The news and views which we are getting through the media are not satisfactory and an alarming situation is still prevailing there.  That is the news which we are getting from the media and various reports.
       I would like to know the actual state of affairs in the State of Jammu and Kashmir now because the State of Jammu and Kashmir has got divided into two Union Territories, namely, Ladakh and Jammu and Kashmir.  I want to know about the law and order situation there. I do accept that the election of the local bodies has been held in a smooth way and it was absolutely a success of everybody.  Dr. Farooq Abdullah spoke on the Motion of Thanks to the President’s Address. The views and other reports which we are getting are not satisfactory. So, we would like to know the actual state of affairs, especially the law and order situation, also whether the civil rights and the fundamental rights of the citizens or the people of that State are being well protected and how they are being maintained.
       I would like to make a suggestion to this august House.   Last time also, we made a suggestion that an all-Party delegation, at least one representative from each political party, should visit the State of Jammu and Kashmir to have a first-hand information regarding the state of affairs of Jammu and Kashmir.  This is a suggestion which I would like to make.
As far as the amendments are concerned, we have no stringent opposition but still, I would urge upon the Government of India to bring back normalcy at the earliest by protecting the civil rights of the people residing there and also bring back the Statehood of Jammu and Kashmir.
       With these words, I conclude.
                                                                                       
श्री जामयांग शेरिंग नामग्याल (लद्दाख):सभापति जी, मैं जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन संशोधन विधेयक, 2021 के पक्ष में बोलने के लिए खड़ा हुआ हूं । मैं सबसे पहले माननीय प्रधान मंत्री, माननीय गृह मंत्री और एनडीए सरकार को धन्यवाद देना चाहूंगा कि इतना अच्छा बिल सदन में लाकर जम्मू-कश्मीर एवं लद्‌दाख में जितने भी कैडर्स चाहे आईएएस हो,आईपीएस हो,आईएफएस का हो,उन्हें AGMUT कैडर के साथ मर्ज करने का जो निर्णय होने जा रहा है,मैं उसका स्वागत करता हूं । इससे हमारे आफिसर्स की कार्य क्षमता बढ़ेगी, उनको एक्सपोजर मिलेगा,लोगों को अच्छे माहौल में काम करने का मौका मिलेगा । खास कर लद्‌दाख के लिए मैं कहना चाहता हूं कि यूटी बनने से पहले यहां दो डिस्ट्रिक्ट मैजिस्ट्रेट और दो एसएसपीज, ऑल इंडिया कैडर के थे, लेकिन आज उनकी जगह पर कम से कम 15-20 ऑल इंडिया लेवल के लोग वहां काम कर रहे हैं । यह जाहिर है कि ऐसे बार्डर इलाके चाहे लद्‌दाख हो, चाहे जम्मू-कश्मीर का हो या जहां भी हो, यह बार्डर इलाके की प्रोसपैरिटी,बार्डर इलाके की डेवलपमेंट और जो पिछड़े इलाके हैं, ऐसे इलाकों के लिए काम करने का मौका मिल रहा  है । आज यह निर्णय इसलिए होने जा रहा है क्योंकि मोदी सरकार चाहती है कि देश को डेफिशिएंसी से एफिशिएंसी की तरफ कैसे ले जाएंगे ।
मेरे पास जम्मू-कश्मीर कैडर का जो डेटा है,उसके मुताबिक आईएएस कैडर पोस्ट की संख्या 137 है, लेकिन अभी सिर्फ 59 आफिसर्स हैं और अभी 78 पद खाली हैं, यानी 56.93 परसेंट डेफिशिएंसी है । इसी तरह आईपीएस में 55.1 परसेंट डेफिशिएंसी है । इसी तरह आईएफएस में 48.11 परसेंट डेफिशिएंसी है । इस डेफिशिएंसी को मीट-अप करने की जरूरत है । इस डेफिशिएंसी की वजह से वहां सैंट्रल गवर्नमेंट की स्कीम्स को इम्प्लीमेंट करना हो या एडमिनिस्ट्रेशन को अच्छे तरीके से चलाना हो, इसमें बहुत प्रॉब्लम आ रही है । इन चीजों में जो डेफिशिएंसी है, उसे एफिशिएंसी में किस तरह कंवर्ट करेंगे, इसे ध्यान में रखते हुए यह बिल सदन में लाया गया है ।
       महोदया,यह  मर्ज होने के बाद चाहे लद्‌दाख यूटी हो,जम्मू-कश्मीर यूटी हो या अन्य यूटीज हों, जैसे अरूणाचल प्रदेश हो, मिजोरम हो, गोवा हो, इन जगहों के गवर्नेंस में एक यूनिफार्मिटी आएगी । इनके एडमिनिस्ट्रेशन में यूनिफार्मिटी आएगी और साथ ही हमारे अपने आफिसर्स को बाहर जाकर काम करने का मौका मिलेगा,जिससे लोगों की कार्यक्षमता बढ़ेगी, उन्हें एक्सपोजर मिलेगा,उनकी एफिशिएंसी बढ़ेगी । यदि ऐसा होगा, तभी एडमिनिस्ट्रेशन में इफेक्टिवनेस आएगी । मैं कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी जी को सुन रहा था । उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर एक अलग किस्म का राज्य  है । हमें यही मानसिकता तो बदलनी है । जम्मू-कश्मीर और लद्‌दाख अलग राज्य नहीं हैं, देश का अटूट अंग हैं । यह स्टेप लेने के बाद हमारे आफिसर्स अदर्स पार्ट ऑफ दि नेशन जाएंगे और दूसरे राज्यों से हमारे यहां आएंगे, तभी तो नेशनल इंटीग्रेशन बढ़ेगी, तभी तो देश में सशक्तिकरण का नारा स्थापित होगा । यदि अभी भी यह मानसिकता लेकर चलेंगे कि ये राज्य अलग हैं और बाकी राज्य अलग हैं, यह हमारे लिए ठीक नहीं है । हमें यही सोच बदलनी है, इसलिए हम कहते हैं कि सोच बदलो, देश बदलेगा । यहां हसनैन मसूदी जी लोकल आफिसर्स की अहमियत के बारे में कह रहे थे और कह रहे थे कि बाहर से जो लोग आएंगे,उन्हें वहां की भाषा नहीं पता,रहन-सहन का नहीं पता ।
       महोदया,मैं कुछ इंटरेस्टिंग फैक्ट्स आपके माध्यम से सदन के सामने रखना चाहता हूं । जब लोकल की बात आती है, तब सिर्फ अपने लोगों के ही लोकल होने की बात आती है । सदन में माननीय मंत्री जितेन्द्र सिंह जी बैठे हैं, वे इस बात का समर्थन करेंगे कि लद्‌दाख यूटी बनने से पहले वहां एक डिस्ट्रिक्ट मैजिस्ट्रेट की पोस्ट लेह और कारगिल में और एक एसपी की पोस्ट लेह और कारगिल में  थी । वहां इन्होंने कभी किसी लोकल को नियुक्त नहीं किया । तब उनका नारा कुछ अलग होता है । वे कहते हैं कि यह बार्डर का इलाका है, इसलिए यहां बाहर से आफिसर आना चाहिए, पता नहीं आप क्या कर बैठेंगे, जब टेरेरिस्ट एफेक्टेड डिस्ट्रिक्ट्स की बात आती है,वहां लोकल को इन्होंने डिस्ट्रिक्ट मैजिस्ट्रेट,डिस्ट्रिक्ट एसएसपी बनाकर रखा । हमने भी सोचा कि सुधार होगा । न तो टैरोरिज्म में सुधार आया और न क्षेत्र का विकास हुआ । ऐसे लोकल को रखकर क्या करेंगे? हमें एक साथ देश के साथ मिलकर चलना बहुत जरूरी है ।
       महोदया,मैं एक बात और कहना चाहूंगा,माननीय मोदी जी कहते हैं ‘वोकल फॉर लोकल’,यह लोकल का नारा तो अब शुरू हो रहा है । देश में जितने भी लोग हैं, वे इस देश के लोकल हैं । हम दूसरे राज्यों से आए आफिसर्स का वेलकम करना चाहते हैं,चाहे आईएफएस कैडर हो, आईएएस कैडर हो या आईपीएस कैडर हो । वे लद्‌दाख में आकर सेवा करें, तभी लद्‌दाख का विकास होगा, तभी बॉर्डर एरिया का विकास होगा । माननीय गृह मंत्री जी यहां बैठे हैं,मैं कहना चाहूंगा कि एक्सपीरिएंस्ड आफिसर्स देने की कृपा करें । उन्हें वैल एक्सपीरिएंस हो, उनकी वैल एफिशिएंसी हो,तब जाकर बॉर्डर इलाकों का विकास होगा । यूटी बनने के बाद मोदी सरकार ने इसे मुमकिन किया है, इसका हम स्वागत करते हैं । जब लोकल की बात हसनैन मसूदी जी करके गए, मैं कुछ इंटरेस्टिंग बातें आपके माध्यम से सदन के और माननीय गृह मंत्री जी के ध्यान में लाना चाहता हूं । जम्मू-कश्मीर बॉयफरकेट होने के बाद, अलग-अलग यूटी बनने के बाद हमारे बहुत सारे लोकल आफिशियल कश्मीर में तैनात हैं । जब हम कहते हैं कि उन्हें लद्‌दाख भेजो, तब वे कहते हैं कि अभी आफिशियली डिवाइड नहीं हुआ । जिन आफिसर्स का प्रमोशन ड्यू है, उन्हें प्रमोशन मिलना चाहिए लेकिन तब वे कहते हैं कि लद्‌दाख अलग यूटी बन गई है । वहां अभी भी कुछ लोग हैं, जो प्रमोशन में गड़बड़ी कर रहे हैं ।
       महोदया,जब लोकल को बढ़ावा देने की बात आती है, तो मैं एक बात जरूर आपके ध्यान में लाना चाहूंगा । जम्मू-कश्मीर में जो पिछड़े लोग हैं,दलित लोग हैं,खासकर वाल्मीकि समुदाय है, गोरखा समुदाय है, वेस्ट पाकिस्तान रिफ्यूजी हैं,इनको इन्होंने न स्टेट का (पीआरसी) परमानेंट रेजीडेंशियल सर्टीफिकेट दिया, न वोटिंग राइट दिया, न लैंड राइट दिया,आज किस मुंह से ये लोग लोकल की बात करते हैं । हालांकि वे सदियों से जम्मू-कश्मीर में बैठे हैं । आज मोदी सरकार ने यह निर्णय लेने के बाद, यूटी बनने के बाद, वाल्मीकि समुदाय हो, गोरखा समुदाय हो, वेस्ट पाकिस्तानी रिफ्यूजी हो,सबको वहां का डोमिसाइल सर्टिफिकेट दिया, वोटिंग राइट दिया, लैंड राइट दिया । अभी यहां हमारे बीएसपी के साथी,नागर साहब बोल रहे थे, वे बड़े दिल वाले हैं,वे अपोजीशन में बैठकर भी सरकार की तारीफ कर रहे हैं । यह अच्छी बात है, यह होना चाहिए और साथ में उन्होंने यह भी कह डाला कि कांग्रेस पार्टी खुद तो डूब चुकी है, हमको भी ले डूबी है, क्योंकि इनकी सोच ही ऐसी है । ये अलग-अलग स्टेज पर,अलग-अलग मतलब के लिए अलग-अलग बातें करते हैं । देश के नेशनल इंटीग्रेशन के बारे में तो यह कांग्रेस पार्टी सोच ही नहीं सकती है ।    
       मैं देख रहा था, जब महामहिम राष्ट्रपति जी उद्बोधन कर रहे थे, तब इन्होंने बायकॉट किया । बजट पर डिसकशन खत्म हो गया, तब ये लोग बजट पर बोलने के लिए आ गए । आज जम्मू-कश्मीर रीआर्गनाइजेशन एक्ट (अमेंडमेंट)का जो बिल यहां लाकर एजीएमयूटी कैडर में मर्ज होने की बात कर रहे हैं, तब ये लोग 370 की बात कर रहे हैं । इससे समझ आ रहा है कि यह पार्टी दिशाहीन पार्टी है । ये कंप्लीटली डायरेक्शन खो चुके हैं । इसलिए मैं समाजवादी वालों से, जितने भी अपोजीशन में अन्य दल बैठे हुए हैं,मैं उनसे रिक्वैस्ट करना चाहूंगा कि ऐसी पार्टी के साथ चलेंगे, ये खुद तो डूब चुके हैं, आपको भी ले डूबेंगे ।
       मैं ज्यादा न कहते हुए इस बिल का समर्थन करता हूं और अपेक्षा रखता हूं कि इस बिल के साथ-साथ लद्दाख का अलग से पब्लिक सर्विस कमीशन बनाकर लोकल ऑफिसर्स को इंडक्शन का अच्छा मौका मिलेगा । हमारे लद्दाख के ऑफिसर्स भी चाहते हैं कि वे गोवा में जाकर सर्व करें, अरुणाचल में जाकर सर्व करें, मिजोरम में जाकर सर्व करें । अदर स्टेट्स में जाकर क्या अच्छी-अच्छी चीजें चल रही हैं,वहाँ जाकर,उन्हें सीखकर हमारे स्टेट में लागू करें । अदर स्टेट्स के ऑफिसर्स भी हमारे स्टेट लद्दाख में आकर बार्डर इलाके का विकास करे । इस देश का, इस सरकार का “सबका साथ,सबका विकास और सबका विश्वास”का विजन है ।
आपने मुझे बोलने का समय दिया, इसके लिए आपका बहुत-बहुत धन्यवाद ।
श्रीमनीश तिवारी (आनंदपुर साहिब):महोदया, यह जो जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन (संशोधन) विधेयक लाया गया है, इसकी राजनीतिक मंशा इतनी सरल नहीं है । इसका मकसद बिल्कुल साफ है कि जो जम्मू-कश्मीर का विभाजन कियागया था, दो केन्द्र शासित प्रदेशों में उसका गठन किया गया था, उसको स्थायित्व देने का है ।
       मैं इस सदन को याद कराना चाहता हूँ कि जब जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन विधेयक लाया गया था, तो यह बात कही गई थी कि उससे अमन, शांति होगी, उससे देश में विकास होगा, जम्मू-कश्मीर में दूध और मधु की नदियाँ बहेंगी । पिछले 17 महीनों में जो हुआ है, वह उसके बिल्कुल विपरीत है । मैं आपको सिर्फ पाँच आंकड़े देना चाहता हूँ, जो इस चीज को प्रमाणित करते हैं । वर्ष 2004 सेलेकर वर्ष 2014 तकजब यूपीए की सरकार थी, जम्मू-कश्मीर में 550 सीज फायरवायलेशन हुए ।19 जून, 2018 को जब बीजेपी ने पीडीपी से समर्थन वापसलिया और वहाँ पर पहलेगवर्नर रूल, फिर राष्ट्रपति शासन और फिर लेफ्टिनेंट गवर्नर का राज लगा, तो वर्ष 2018 में 2,936 सीज फायर वायलेशन हुए । वर्ष 2019 में 3,299 सीज फायर वायलेशन हुए । वर्ष 2020 में 5,133 सीज फायर वायलेशन हुए । क्या यह अमन और शांति का पैमाना है?
       मैं आपको दूसरा आंकड़ा देना चाहता हूँ । यह कहा गया कि जम्मू-कश्मीर में बहुत विकास  होगा । कश्मीर में तो पिछले 17महीनों में कोई इंडस्ट्री आई नहींऔर जम्मू में जो इंडस्ट्री थी, वह भी बंद हो गई । जम्मू के तीन जिले हैं, कठुआ, सांबा और जम्मू, जोपंजाब के बगल में लगते हैं, उन्हीं में ले-देकर जम्मू-कश्मीर में इंडस्ट्री है । अब उसकीपरिस्थिति क्या है, जम्मू रीजन में 12,997 इंडस्ट्रियल यूनिट्स थे । आज सिर्फ 5,890 काम कर रहे हैं, 7,107 मतलब 60 प्रतिशत जम्मू की जो इंडस्ट्रीज़ हैं, वे पिछले दो वर्ष में बंद हो चुकी है । मानव अधिकार संगठन ने अनुमान लगाया है कि जब से विभाजन हुआ है, जम्मू कश्मीर का 40 हजार करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है और पहले 120 दिन में जो कश्मीर चैम्बर ऑफ कॉमर्स है, उसके अनुमान के अनुसार 17,877 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है । वहां पर जो पर्यटन इंडस्ट्री है,वहां पर जो हैंडीक्राफ्ट इंडस्ट्री है,वह पूरी तरह से बर्बाद हो गई है        अब मैं इंटरनेट पर आता हूं क्योंकि इंटरनेट इसलिए जरूरी है कि यह डिजिटल ऐज का स्टीम ईंजन है । 05 अगस्त, 2019 से लेकर मार्च, 2020 तक 213 दिन इंटरनेट बंद रहा और मार्च 2020 से लेकर आज तक 70 बार और इंटरनेट को बंद किया गया । जम्मू कश्मीर में जो बेरोजगारी दर है, वह 16.2 प्रतिशत है । देश में दूसरे नम्बर के ऊपर है ।
जम्मू कश्मीर में जो स्कूल्स हैं, वे अगस्त, 2019 से 14 मार्च, 2020 तक कोविड आने से पहले 202 दिन तक बंद रहे । मैं यह पूछना चाहता हूं कि यह किस तरह का विकास है? यह किस तरह की अमन-शांति है?आप यह किस तरह का वहां पर माहौल बना रहे हैं कि सीज-फायर वायलेशन्स बढ़ रहे हैं, इन्फिल्ट्रेशन बढ़ रही है, वहां पर जो लोग हैं,उनको कर्फ्यू के तहत रहना पड़ता है ।
सभापति महोदया, मैं आपके माध्यम से गृह मंत्री जी से अनुरोध करना चाहता हूं । मैं इस सदन को याद दिलाना चाहता हूं कि 09 अगस्त, 2019 को प्रधान मंत्री जी ने यह कहा था कि जम्मू कश्मीर के विभाजन की जो यह परिस्थिति है,यह टेम्परेरी परिस्थिति है और जल्द से जल्द जम्मू कश्मीर का जो स्टेटहुड है, उसको दोबारा से बहाल किया जाएगा ।
18 अक्टूबर, 2020 को हमारे गृह मंत्री जी ने सीएनएन नेटवर्क 18 को इंटरव्यू में यह बात कही, जो ग्रेटर कश्मीर अखबार में छपी कि: “There is no question of going back or restoration of Statehood of Jammu and Kashmir.” इन्होंने हिन्दी में कही होगी, मैंने अंग्रेजी में पढ़ी है ।

मैं सरकार से यह पूछना चाहता हूं कि आज 17 महीने हो गए, प्रधान मंत्री के स्तर पर, गृह मंत्री के स्तर पर दोबारा-दोबारा यह बात कही जाती है कि जम्मू कश्मीर के स्टेटहुड को वापस किया जाएगा और दूसरी तरफ जो जम्मू एंड कश्मीर का एडमिनिस्ट्रेटिव कैडर है, जो 1945 से चलता आ रहा है, उसको आप भंग करके एगमुट (AGMUT) कैडर में मर्ज कर रहे हैं । यह किस तरह का संदेशा भेज रहे हैं । क्या आपकी नीयत और नीति में फर्क है, क्या आपकी मंशा में फर्क है और अगर फर्क है तो देश को आप सीधा-सीधा बताइए कि हम जम्मू कश्मीर को वापस स्टेटहुड नहीं देंगे, उसको यूनियन टेरिटरी स्टेटस में ही रखना चाहेंगे । मैं सिर्फ एक आखिरी बात कहना चाहता हूं । माननीय अध्यक्ष जी भी यहां पर आ गए हैं ।

13.53 hrs                    (Hon. Speaker in the Chair) जो जम्मू कश्मीर पुनर्गठन कानून है, उसको संवैधानिक चुनौती दी गई है और एक संवैधानिक खंडपीठ के सामने वह मामला लंबित है । यह बात सही है कि उच्चतम न्यायालय ने उस कानून को स्टे नहीं किया है । लेकिन नैतिकता का तकाजा है कि ज्यूरिस्प्रूडेंस यह कहती है कि जब किसी कानून को,उसकी संवैधानिकता को चुनौती दी गई हो, तो उसको संशोधन करने के लिए जो कॉन्सीक्वेंशियल लेजिसलेशन है,उसको नहीं लाना चाहिए । मैं बहुत ही विनम्रता से गृह मंत्री जी से यह अनुरोध करना चाहता हूं कि जब तक उसकी कॉन्स्टीट्यूशनेलिटी डिसाइड नहीं हो जाती और मैं आपसे यह भी कहना चाहूंगा कि सरकार को उच्चतम न्यायालय में एक अर्जी लगानी चाहिए कि जल्द से जल्द डे-टू-डे सुनवाई करके उसकी कॉन्स्टीट्यूशनेलिटी पर फैसला करना चाहिए । जब तक कॉन्स्टीट्यूशनेलिटी पर फैसला नहीं होता, तब तक यह जो संशोधन विधेयक है, आपसे विनम्र अनुरोध है कि इसको आप वापस ले लीजिए । बहुत-बहुत धन्यवाद ।

माननीयअध्यक्ष : श्री जुगल किशोर शर्मा ।

     

श्री जुगल किशोर शर्मा (जम्मू):आदरणीय अध्यक्ष जी, मैं इस बिल के समर्थन में बोलने के लिए खड़ा हुआ हूं और उन सभी का आभारप्रकट करना चाहता हूं, जिन्होंने इस बिल का समर्थन किया है ।

       महोदय, मैं हैरान हूं कि जब भी कभी जम्मू-कश्मीर की बेहतरी की बात आती है तो नेशनल कांग्रेस और एनसीवाले तिलमिला उठते हैं, परेशान हो जातेहैं और रुकावट डालने का काम करते हैं । मैं देखता हूं कि जब भी कोई ऐसा कानून आता है, जिससे जम्मू-कश्मीर के लोगों को फायदा होता हो तो नेशनल कांग्रेस और नेशनल कांफ्रेंस वाले परेशान हो जातेहैं । मैं देख रहा था कि कांग्रेस और एनसीके लीडर को अपनीमानसिकता को बदलना चाहिए, क्योंकि जम्मू-कश्मीर अब बदल रहा है, जम्मू-कश्मीर विकास की ओर आगे बढ़ रहा है और जम्मू-कश्मीर के लोग एनसी और कांग्रेस वालों का समझ चुके हैं । अब वो आपके बहकावे में आने वाले नहीं हैं, क्योंकि एक के बाद एक कदम जम्मू-कश्मीर की बेहतरी के लिए उठाए जा रहे हैं । मैं आदरणीय प्रधानमंत्री जी और गृह मंत्री जी का आभार प्रकट करना चाहता हूं कि वे एक के बाद एक कदम जम्मू-कश्मीर की बेहतरी और विकास के लिए उठा रहे हैं । यह बिल जम्मू-कश्मीर की बेहतरी के लिए है, जम्मू-कश्मीर के विकास को तेजी मिलेगी । मैं नेशनल कांफ्रेंस और कांग्रेस के लोगों से पूछना चाहता हूं कि इस बिल के द्वारा क्यानुकसान जम्मू-कश्मीर के लोगों को होने वाला है, जिसका आप विरोध कर रहे हैं । यह वैसाही विरोध मुझे लगता है, जैसे आप किसान बिल का विरोध कर रहे हैं । आपके पास कोई तथ्य और आधारनहीं है, आपको विरोध करने के लिए विरोध करना है, इसलिए आप इस बिल का भी विरोध कर रहे हैं ।

       महोदय, जम्मू-कश्मीर में अब काम बढ़ गया है । अभी बहुत कुछ करने को है । बड़े-बड़े प्रोजेक्ट्स हैं और बड़े-बड़े प्रोजेक्ट्स जम्मू-कश्मीर में आ रहे हैं । सेंट्रल स्पोंसर्स स्कीम्स हैं । समय से प्रोजेक्ट पूरे करने हैं । समय से प्रोजेक्ट्स बने, पूरे हों और पूरीनिगरानी भी हो और जो प्रोजेक्ट बनता है, उसके लिए जो पैसाकेंद्र सरकार द्वारा दियाजाता है, वह प्रोजेक्ट पर पूरालगे । इस बिल के माध्यम से यह सब कुछ होने वाला है । आप देखेंगे ‍कि ऐसा ही होगा । मैं मिसाल के तौर पर आपको बताना चाहता हूं कि जम्मू-कश्मीर की शीतकालीन राजधानी जम्मू शहर के बीचों-बीच एक नदी बहती है । उसका विकास साबरमती नदी की तर्जपर करना था । इसका प्रोजेक्ट बना हुआ है, लेकिन अधर में लटका है । जब इसकीतहकीकात की गयी तो यह पाया गया कि ऑफिसर्स कम हैं ।एक-एक ऑफिसर्स के पास कई-कई डिपार्टमेंट्स हैं, कई प्रोजेक्ट्स हैं, समय की कमी की वजह से वे उन प्रोजेक्ट्स पर पूराध्यान नहीं दे पातेहैं, जिस वजह से प्रोजेक्ट्स अधर में लटक जाते हैं । इसलिए हमारे ऑफिसर्स वहां पूरे होने चाहिए, वह इस बिल के माध्यम से होंगे ।

       मैं अधीर रंजन जी और मसूदी साहब को यहांसुन रहा था । एक तरफ तो कहते हैं कि डीडीसी के चुनाव बहुत अच्छी तरह से हुए हैं और लोग खुश हैं । लेकिन दूसरी तरफ कहते हैं कि लोग परेशान हैं । मुझे यह समझ नहीं आता है कि आप कहना क्या चाहते हैं? डीडीसी के जो चुनाव हुए हैं, इसने हमें बताया है कि जम्मू-कश्मीर में अमन और शांति है । चुनावों के रिजल्ट ने भी बताया है कि लोग चाहते हैं कि जम्मू-कश्मीर में लोकतंत्र की बहाली हो । लोगों ने इसकास्वागत कियाहै, चुनावों में हिस्सा लिया है । बिना किसी घटना के ये चुनाव सम्पन्न हुए हैं । लाखों लोगों ने वोट डाला है और जम्मू में 70 वर्ष में पहली बार उन्हें अपने अधिकार मिले हैं । यह इस बात को दर्शाता है कि केंद्र सरकार द्वारा जो भी कदम जम्मू-कश्मीर के लिए उठाए जा रहे हैं, वे जम्मू-कश्मीर के विकास के लिए है ।

       महोदय, मैं बताना चाहता हूं कि जम्मू-कश्मीर के टूरिज्म को बढ़ावा देनेके लिए वीजे कानून बहुत जरूरी है । जम्मू-कश्मीर को बढ़ावा देनेके लिए और भी बहुत कुछ करने की जरूरत है । अगर जम्मू-कश्मीर में टूरिज्म बढ़ेगा तो जम्मू-कश्मीर में रोजगार बढ़ेगा । जम्मू-कश्मीर कैडर के अलावा और ऑफिसर्स लेने में, आप सब जानते हैं कि बड़ी परेशानी है और बड़े तरीके लेकर बीच से निकलना पड़ताथा, लेकिनवह सब कुछ अब नहींकरना होगा ।

 

       महोदय, मैं कहना चाहता हूं कि अब जम्मू-कश्मीर में आईएएस ऑफिसर्स की कमी नहीं रहेगी । इसका लाभ जम्मू-कश्मीर की बेहतरी के लिए होगा । जम्मू-कश्मीर का विकास तेजीके साथ आगे बढ़ेगा । इसलिए मैं इस बिल का समर्थन करता हूं और मैं चाहता हूं कि जम्मू-कश्मीर की बेहतरी और विकास के लिए यह कानून पास किया जाए और नेशनल कांफ्रेंस और कांग्रेस इस बिल का विरोध न करे, अन्यथा जो हालात आज आपके देश भर में और जम्मू-कश्मीर में हैं, इससे भी बदतरहालात में आप चले जाएंगे ।

       महोदय, आपने मुझे बोलने का मौकादिया, आपका बहुत-बहुत धन्यवाद ।

       

14.00 hrs श्री असादुद्दीन ओवैसी (हैदराबाद):स्पीकर सर, मैं इस‍ बिल की मुखालफत में खड़ा हूं । इसलिए खड़ा हॅूं, क्योंकि मेरी पार्टी की एक कनसिस्टेंट पोजिशन है कि जब इस हुकूमत ने दफा-370 को अपनी ब्रूट मेजोरिटी की ताकतकी बुनियाद पर, अनकॉन्स्टिट्यूशनल तरीके से इसकोखत्म किया, मैंने उस वक्तकहा था कि यह कॉन्स्टिट्यूशनल ब्रीच है, और मेरा यह कंटीन्यूअस मॉक ऑफ है । सर, मैं इस बिल की मुखालफत इसलिए भी करताहॅूं, क्योंकि इसी ऐवान में खड़े हो कर वजीरे दाखला ने कहा था कि यह हुकूमत, जल्द से जल्दरियासते जम्मू कश्मीर की स्टेटहुड को बहालकरेगी । आज आप अपने उस वादेसे मुनहरिफ हो रहे हैं, क्योंकि जब आप जम्मू कश्मीर कैडर को एमगुट में मिला रहे हैं तो इससेआपकी नीयत का साफ इज़हार होता है कि आपने जो उस ऐवान को उस वक्त वादा किया था कि जम्मू कश्मीर की रियासत को दोबारा बहाल किया जाएगा, वह सच्चाई पर मुबनी नहीं था । वे सिर्फ अलफ़ाज़ या जुमले थे ।

           सर, तीसरीबात यह है कि एक ऐसी रियासत जहां पर मुसलमान तनासुफ में ज्यादा हैं, मगर पहले से अफसरशाही में उनका तनासुफ बहुत कम था ।

           सर, मैं आपके सामने आदाव शुमार आपके सामने रखता हॅूं । सैक्रेटी की 24 पोस्ट्स हैं, जिनमें से सिर्फ पांचकश्मीरी मुसलमान हैं । आईएएस की 58 पोस्ट्स में से सिर्फ12 मुसलमान हैं, यानि 17.24 पर्सेंट हैं । सन, 2011 की मर्दुमशुमारी के मुताबिक जम्मू कश्मीर में 68.31 मुसलमानों की आबादी है और 28 फीसदी हमारे हिन्दु भाइयों की आबादी है । मगर अगर आप देखेंगे कि टायर-2 में दूसरे दर्जे के 523 इंतजामी अफसरान, जिसे कश्मीरी एडमिनिस्ट्रेटिव ऑफीसर्स सर्विस कहते हैं, 220 मुसलमान हैं, यानि 42.6 कश्मीरी मुसलमान हैं । सर, आइपीएस में 66 पोस्ट्स हैं, जिनमें से सिर्फ सात ही मुसलमान हैं । दूसरे दर्जे के अफसरान में 248 में से 108 यानि 43.54 फीसद मुसलमान हैं ।

           अब आप मुझे बताइए कि आप क्या करने जा रहे हैं? अच्छा सर, यहां  पर यह कहा गया कि कश्मीर बड़ा बैकवर्ड है । कश्मीर का खित्ता बैकवर्ड नहीं है । यह आपकीगलतफहमी है और आपके दिमाग में जो फीड किया गया है, वह नफरत की बुनियाद पर  है । सच्चाई यह है किइस खित्ते में गुरबत की सतह से नीचे का तनासुब 10.21 हैऔर पूरे भारत में 21.92 है ।

           मैं सरकार से जानना चाहता हॅूंकि आखिर आप कश्मीर की रियासत के स्‍टेटहुड को बहालकरेंगे या नहीं करेंगे । चौथी बात यह है कि आपके गलत फैसले की बुनियाद पर दूसरे ऐवानमें एक भी कश्मीरी रूकने पार्लियामान नहीं है । यह हमारे मुल्क की, भारत की तारीख में तीसरी मर्तबा ऐसा हुआ है । मेरा चौथा सवाल हुकूमत से यह है कि हम यह कहते हैं, आपका मानना सही है कि हमारे मुल्क में बाहर के दीगरमुमालिक को मदाखलत करने की कोई जरूरत नहीं है । मगर आप उनकोले कर गए न? आप तो यूरोपियन पार्लियामेंट के लोगों को ले कर गए । अब तीसरी मर्तबा यूरोप के सफीरों को 16 फरवरी को खबर है कि आप उनको ले कर जा रहे हैं । आखिर क्या यह हुडियाई नहीं है?  क्यों यूरोप के लोग कश्मीर जाएंगे? आप ऑल पार्टी के एक डेलिगेशन को ले कर जाइए । आप यूरोप के डेलिगेशन को कश्मीर ले कर जा रहे हैं । क्या आप चाह रहे हैं मदाखलत करना? इसको इंटरनेशनलाइज आप कर रहे हैं ।

           सर, मैं वजीरे दाखला से पूछना चाहता हॅूंकि आखिर कितने कश्मीर के बच्चे, आगरा की जेल में, बरेली की जेल में, अंबेडकर नगर की जेल में हैं?

           स्पीकर साहब, मैं आपकोएग्जाम्पल दे कर अपनी बात खत्म कर रहा हॅूं कि एक बिलाल अहमद कूपवाड़ा का बच्चा है, जो कि अमर सिंह कॉलेज श्रीनगर का है, वह श्रीनगर से 1600 किलोमीटर दूर जेल में है । उसका वालिद 25 हजार रुपये में अपनी गाय को बेच कर हाई कोर्ट में   गया । हाईकोर्ट ने फैसला दियाकि उस बच्चे को श्रीनगर ट्रांसफर करो और एग्जाम लिखाओ । आप उसको नहीं मानते हैं । एक और फैयाज है जो बरेली की जेल में है । उसका वालिद 35 हजार रुपये का कर्जा ले कर गया । अब आप बताइए । नवीजहै, जो बारामुला का रहनेवाला है, उसके वालिद जमीन बेच कर गए । आखिर कितने बच्चे पीएसए के तहत जेल में हैं? आप उनको कब छोड़ेंगे ।

           स्पीकर साहब, मैं आखिर में कह रहा हॅूं कि यहांपर जितनी नामनिहाज सेक्युलर पार्टियों ने हुकूमत के इस इकदाम की ताईदकी है, तैयार हो जाइए, यहहुकूम जो करती है, यह दोबारा दोहराएगी । हम तारीख में देखेंगे कि खुदान खास्ता चेन्नई को अहमदाबाद को बेंगलूरू को, हैदराबाद को, यूनियन टेरेट्री ये लोग बनाएंगे । कश्मीर में तो एक एग्जाम्पल बना दिए हैं । यहां तजुर्बा किया गया । आज ये सब बैठ कर तालीमार रहे हैं, जब लखनऊ यूटी बनेगा, जब बैंगलूरु यूटी बनेगा, जब मुंबई यूटी बनेगा, उस वक्त हाय-हाय करेंगे । आपकी यह कनसिस्टेंट पॉलिसी है ।

           सर, इसीलिए मैंने होम मिनिस्टर से जो सवालात किए हैं, मैं आपसे पूछना चाहता हॅूं । और यह टूजी से फोर जी कर के आपने अहसान नहीं किया है । यह अमेरिका के दबावमें आपने किया है । ब्रैड फेयरमैन से भारतके सफीर ने मुलाकात की । अमेरिका ने स्टटेमेंट दिया और आपनेदो दिन में 4जीको बहाल कर दिया । आप इस मसले को इंटरनेशनलाइज कर रहे हैं । यह गलत है और इससे कश्मीरी आवाम का का डिसएंपॉरमेंट होगा, एहनिलेशन बढ़ेगा ।

           शुक्रिया ।

 

جناب اسدالدین اویسی (حیدرآباد):  محترم اسپیکر صاحب، میں اس بِل کی مخالفت میں کھڑا ہوا ہوں۔ اس لئے کھڑا ہوں، کیونکہ میری پارٹی کی ایک کنسِسٹینٹ پوزیشن ہے کہ جب اس حکومت نے دفعہ370 کو اپنی بروٹ میجوریٹی کی طاقت کی بنیاد پر انکانسٹی ٹیوشنل طریقے سے اس کو ختم کیا، میں نے اس وقت کہا تھا کہ یہ کنسٹی ٹیوشنل بریچ ہے، اور میرا یہ کنٹینیوس موقف ہے۔ سر، میں اس بِل کی مخالفت اس لئے بھی کرتا ہوں کیونکہ اسی ایوان میں کھڑے ہو کر وزیرِ داخلہ نے کہا تھا کہ یہ حکومت، جلد سے جلد ریاستِ جموں و کشمیر کی اسٹیٹ ہوڈ کو بحال کرے گی۔ آج آپ اپنے اس وعدے سے مںحرف ہو رہے ہیں، کیونکہ جب آپ جموں و کشمیر  کیڈر کو ایم گُٹ میں ملا رہے ہیں تو اس سے آپ کی نیت کا صاف اظہار ہوتا ہے کہ آپ نے جو اس ایوان کو اُس وقت وعدہ کیا تھاکہ جموں وکشمیر  کی ریاست  کو دوبارہ بحال کیا جائے گا، وہ سچائی پر مبنی نہیں تھا۔ وہ صرف الفاظ یا جملے تھے۔        سر، تیسری بات یہ ہے کہ ایک ایسی ریاست جہاں پر مسلمان تناسب میں زیادہ ہے، مگر پہلے سے افسر شاہی میں ان کا تناسب بہت کم تھا۔        سر، میں آپ کے سامنے اعدادو شمار رکھتا ہوں۔ سیکریٹری کی 24 پوسٹس ہیں، جن میں سے صرف 5 کشمیری مسلمان ہیں۔ آئی۔اے۔ایس۔ کی 58 پوسٹس میں سے صرف 12 مسلمان ہیں، یعنی 17.24 فیصد ہے۔ سن 2011 کی مردم شماری کے مطابق جموں و کشمیر میں 68.31 مسلمانوں کی آبادی ہے اور 28 فیصد ہمارے ہندو بھائیوں کی آبادی ہے۔ مگر اگر آپ دیکھیں گے  کہ ٹائر-2 میں دوسرے درجے کے 523 انتظامی افسرن ، جسے کشمیری ایڈمِنسٹریٹیو آفیسرز سروس کہتے ہیں، 220 مسلمان ہیں، یعنی 42.6 کشمیری مسلمان ہیں۔ سر، آئی۔پی۔ایس۔  میں 66 پوسٹس ہیں، جن میں سے صرف 7 ہی مسلمان ہیں۔ دوسرے درجے کے افسران میں 248 میں سے 108 یعنی 43.54 فیصد مسلمان ہیں۔        اب آپ مجھے بتائیے کہ آپ کیا کرنے جا رہے ہیں؟ اچھا سر، یہاں پر یہ کہا گیا کہ کشمیر بڑا بیکورڈ ہے۔ کشمیر کا خطہ بیکورڈ نہیں ہے۔ یہ آپ کی غلط فہمی ہے، اور آپ کے دِماغ میں جو فیڈ کیا گیا ہے، وہ نفرت کی بنیاد پر ہے۔ سچائی یہ ہے کہ اس خطہ میں غربت کی سطح سے نیچے کا تناسب 10.21 ہے اور پورے بھارت میں 21.92 ہے۔        میں سرکار سے یہ جاننا چاہتا ہوں کہ آخر آپ جموں و کشمیر  کی ریاست کے اسٹیٹ ہوڈ کو بحال کریں گے یا نہیں کریں گے۔ چوتھی بات یہ ہے کہ آپ کے غلط فیصلے کی بنیاد پر دوسرے ایوان میں ایک بھی کشمیری رکن پارلیمنٹ نہیں ہے۔ یہ ہمارے ملک بھارت کی تاریخ میں تیسری مرتبہ ہوا ہے۔ میرا چوتھا سوال حکومت سے یہ ہے کہ ہم یہ کہتے ہیں، آپ کا ماننا سہی ہے کہ ہمارے ملک میں باہر کےدیگر ممالک کو مداخلت کرنے کی ضرورت نہیں ہے۔ مگر آپ ان کو لے کر گئے نہ؟ آپ تو یوروپین پارلیمنٹ کے لوگوں کو لے کر گئے۔ اب تیسری مرتبہ یوروپ  کے سفیروں کو 16 فروری کو خبر ہے کہ آپ لے کر جا رہے ہیں۔ آخر یہ ہوڈیائی نہیں ہے؟ کیوں یوروپ کے لوگ کشمیر جائیں گے؟ آپ آل پارٹی کے ایک ڈیلیگیشن کو لے کر جائیے۔ آپ یوروپ کے ڈیلی گیشن کو کشمیر لے کر جا رہے ہیں۔ کیا آپ چاہ رہے ہیں مداخلت کرنا، اس کو انٹر نیشنلائز آپ کر رہے ہیں۔        سر، میں وزیرِداخلہ سے پوچھنا چاہتا ہوں کہ آخر کتنے بچے جو کشمیر کے ہیں، آگرہ کی جیل میں، بریلی کی جیل میں، امبیڈکر کی جیل میں ہیں۔        محترم اسپیکر صاحب، میں آپ کو ایک مثال دے کر ختم کر رہا ہوں کہ ایک بِلال احمد کپواڑہ کا بچہ ہے، جو کہ امر سنگھ کالج، سری نگر کا ہے، وہ سری نگر سے 1600 کلومیٹر دور جیل میں ہے۔ اس کے والد  25 ہزار روپئے میں اپنی گائے کو بیچ کر ہائی کورٹ گئے۔ ہائی کورٹ نے فیصلہ دیا کہ اس بچے کو سری نگر ٹرانسفر کرو اور ایگزام لکھاوُ۔ آپ اس کو نہیں مانتے ہیں۔ ایک اور فیاض ہے جو بریلی کی جیل میں ہے۔ اس کے والد 35 ہزار روپئیے قرض لے کر گئے۔ نویزہے، جو بارہ مولہ کا رہنے ولا ہے، اس کے والد زمین بیچ کر گئے۔ آخر کتنے بچے پی۔ایس۔اے۔ کے تحت جیل میں ہیں؟ آپ ان کو کب چھوڑیں گے؟        اسپیکر صاحب، میں آخر میں کہہ رہا ہوں کہ یہاں پر جتنی بھی نام و نہاد سیکیولر پارٹیوں نے حکومت کے اس اقدام کی تائید کی ہے۔ تیار ہو جائیے، یہ حکومت تو کرتی ہے نہ، یہ دوبارہ دوہرائیگی۔ ہم تاریخ میں دیکھیں گے کہ خدا نہ خواستہ چینئی کو احمد آباد کو، بنگلوروں کو، حیدرآباد کو، یونین ٹیرٹری یہ لوگ بنائیں گے۔ یہ کشمیر میں تو ایک ایگزامپل بنا دئیے ہیں۔ یہاں تجربہ کیا گیا۔ آج یہ سب بیٹھ کر تالی مار رہے ہیں، جب لکھنو یو۔ٹی۔ بنے گا، جب بنگلورو یو۔ٹی۔ بنے گا، جب ممبئی یو۔ٹی۔ بنے گا اس وقت ہائے۔ہائے کریں گے۔ آپ کی یہ کنسِسٹینٹ پالیسی ہے۔        سر، اس لئے میں نے ہوم منسٹر سے جو سوالات کئے ہیں، میں آپ سے پوچھنا چاہتا ہوں۔ اور یہ 2جی سے 4جی کا آپ نے کوئی احسان نہیں کیا ہے۔ یہ امریکہ کے دباوُ میں آپ نے کیا ہے۔ بریڈ فیرمین  سے بھارت کے سفیر  نے ملاقات کی۔ امریکہ نے اسٹیٹمینٹ دیا اور آپ نے دو دن میں 4۔جی بحال کر دیا۔ آپ اس مسئلے کو انٹر نیشنلائز کر رہے ہیں۔ یہ غلط ہےہ اور اس سے کشمیری عوام کا ڈس امپاورمنٹ ھوگا ایلینیشن بڑھے ہوگا، بہت شکریہ سر۔۔                                                                        (ختم شد)     SHRI JASBIR SINGH GILL (KHADOOR SAHIB): Sir, the Union Government has planned the merger of J&K cadre of IAS, IPS and Indian Forest Service into the UT cadre. The J&K All-India Services ceased to exist for fresh inductees when the Modi Government recently re-categorised the State into two UTs, J&K and Ladakh, after scrapping article 370.

       According to the J&K Reorganisation Act, which came into force in October, 2019, the cadre was merged into the AGMUT cadre. The law, however, stated that the officers already serving in the J&K cadre would continue in the existing cadre.

       The cadre controlling authority of AGMUT is the Ministry of Home Affairs while that of other States, it is the Department of Personnel and Training. I think this merger will create more confusion and fear. There is no clarity on it. It will leave the serving officers confused and unsure about their future prospects.

       Our hon. Prime Minister and the hon. Home Minister have said on record in this House that the UT status of J&K is a temporary provision till the law and order situation improves in J&K. Then, what sense does it make to permanently merge the J&K cadre with the UT cadre?

       There is also a need to formulate a transfer policy for the officers to be transferred to Ladakh. It should be with the consent of the officers and it is not to make J&K and Ladakh another place of punishment posting for the officers who do not toe the Government line.

*Sir, I want to say something important.  Punjab has had a very close relationship with Jammu and Kashmir. Guru Tegh Bahadur ji sacrificed his life for the sake of Kashmiri Pandits.  Maharaja Ranjit Singh, the ruler of Punjab, had also ruled over Kashmir for forty years.  He helped develop Jammu and Kashmir and took it to new heights.

       In 1948-49, when tribals & Pakistani soliders attacked Kashmir and had almost captured Srinagar, then Sikh regiment soldiers gave the invaders a befitting reply and pushed them back.  They helped Kashmir remain out of the clutches of Pakistan.

       Sir, Punjabi speaking people comprise 2% of Kashmir’s population. In Canada, U.S.A. and U.K., Punjabi has been accorded the status of one of the official languages.  The Dogri language spoken by a large number of people in J&K is similar in nature to the Punjabi language.* HON. SPEAKER:  Hon. Member, please conclude.

SHRI JASBIR SINGH GILL:   Sir, I request the Hon. Home Minister Sir to grant Punjabi the status of an official language of Jammu & Kashmir so that the dignity of Punjabi speakers is maintained in the state.

       Thank you.    Jai Hind.

 

गृहमंत्री (श्री अमितशाह): माननीय अध्यक्ष जी, आज जिस बिल को लेकर श्री किशन रेड्डी जी आए, उस पर श्री अधीर रंजन चौधरी जी से लेकर जसबीर सिंह जी तक इस सदन के 18 सम्माननीय सदस्यों ने अपने-अपने विचार रखे । कुछ लोगों ने पक्ष में रखे, कुछ ने विपक्ष में रखे । कुछ लोगों ने तथ्यात्मक रखे,कुछ लोगों ने राजीनीतिक तरीके से रखे और मैंने सबको करीब-करीब ध्यान से सुना है । मैं जो नहीं सुन पाया, उसको मैंने यहाँ पर बैठकर नोट किया है । हमारे ऑफिसरों से भी जानकारी प्राप्त हुई और मेरे साथी एमओएस से भी प्राप्त हुई है । उसको मैंने पढ़ा है ।

       माननीय अध्यक्ष जी, मैं इस सदन के सभी सदस्यों को फिर से एक बार कहना चाहता हूँ कि कृपया जम्मू-कश्मीर की स्थिति को हम समझें । राजनीति करने के लिए ऐसा कोई बयान न दें,जिससे जनता गुमराह हो जाए ।

       माननीय अध्यक्ष जी, यहाँ कहा गया कि धारा 370 हटाने के वक्त जो वादे किए गए थे, उस दिशा में आपने क्या किया है । मैं जरूर इसका जवाब दूँगा । आपने मुझे जवाब देने का मौका भी दिया है । अभी धारा 370 हटे हुए 17 महीने हुए हैं और आप हमसे हिसाब माँग रहे हैं । 70 साल तक  आपने क्या किया है, क्या आप इसका हिसाब लेकर आए हैं? आपने 70 साल तक क्या किया है?अगर आप 70 साल ढंग से चलाते तो हमसे हिसाब माँगने का समय ही नहीं आता ।

       माननीय अध्यक्ष जी, उनको भी मालूम है कि धारा 370 हटने के बाद अभी तो वहाँ पर प्रशासन स्थिति को संभाल रहा था, इतने में कोविड आ गया । लगभग एक साल तक सब कुछ बंद रहा और आप हमसे हिसाब माँग रहे हैं । इसमें मुझे कोई आपत्ति नहीं है,मैं हिसाब देता हूँ । मैं पाई-पाई का हिसाब देता हूँ, एक-एक काम का हिसाब देता हूँ, एक-एक बात का हिसाब देता हूँ । मुझे उसमें कोई आपत्ति नहीं है । परंतु मैं इतना कहना चाहता हूँ कि जिनको पीढ़ियों तक शासन करने का मौका मिला,वे जरा अपने गिरेबान में झांक कर देखें कि हम हिसाब माँगने के लायक है या नहीं ।

       माननीय अध्यक्ष जी, धारा 370 को हटाने का मसला कोर्ट में है । मसूदी साहब हाई कोर्ट के जज रहे हैं,सुनने के लिए नहीं बैठे हैं,मगर मुझे रिकॉर्ड तो क्लियर करना ही पड़ेगा । उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट में मामला लंबित है । मनीष तिवारी जी ने भी कहा, लेकिन वह भी चले गए ।…(व्यवधान)

       माननीय अध्यक्ष जी, उनको कोर्ट का प्रोसीजर मालूम है । इस मामले में कोर्ट में लंबी बहस हुई और बाद में पाँच जजों की बेंच को यह मामला सौंप दिया गया । अगर इतनी अनकन्स्टिट्यूशनलिटी इसमें दिखाई पड़ती तो सर्वोच्च अदालत को कानून पर रोक लगाने का पूरा अधिकार था और वह रोक लगा देती । परंतु यहाँ पर कोई स्टे नहीं है, सर्वोच्च अदालत ने यह नहीं कहा है कि इस कानून का अमल नहीं हो सकता है । उन्होंने उसको विचाराधीन रखा ।  जब सर्वोच्च अदालत पूछेगी,तब हम जरूर जाएंगे और जवाब देंगे । इसमें सर्वोच्च अदालत निर्णय करेगी । मगर कहीं पर भी यह कानूनी स्थिति नहीं है कि इसका अमल नहीं हो सकता । इसके कारण हम जम्मू-कश्मीर के पूरे विकास को रोक कर बैठ जाए । वहाँ पर डेवलपमेंट के कामों को हम रोक कर बैठ जाए । माननीय सदस्य श्री तिवारी जी मुझे कह रहे हैं कि हम जाएं और सुप्रीम कोर्ट को अर्जी दें कि इसकी जल्दी सुनवाई  कीजिए ।

       माननीय अध्यक्ष जी, मैं उनको कहना चाहता हॅूं कि हम तो सुप्रीम कोर्ट के सामने है ही, एक पक्ष लेकर कि इस देश में धारा 370 नहीं होना चाहिए, इसलिए हमने इसे हटाया है । लेकिन,आप तो सुप्रीम कोर्ट के सामने ही नहीं हैं । ना हाँ और न ना, आप बीच का रास्ता लेकर चल रहे हैं और दोनों ओर बोल रहे हैं । यह तो आप भी सुप्रीम कोर्ट में जाकर कर सकते हैं कि जल्दी सुनवाई कीजिए । यह भी आपको मालूम है कि सुप्रीम कोर्ट आजकल वर्चुअल सुनवाई करता है । जिसमें 70, 80 और 100 वकील खड़े होंगे,पार्टियाँ इतनी होंगी, इसकी वर्चुअल सुनवाई संभव नहीं है । यह आपको भी मालूम है, इसलिए सुनवाई नहीं हुई । इसके एक बड़े हिस्से की सुनवाई हो चुकी है । पाँच जज का बेंच भी बन चुका है । जैसे ही सुप्रीम कोर्ट वर्चुअल सुनवाई की मोड से पुन: फिर से एक बार आमने-सामने की सुनवाई करेगा, तब जरूर सुप्रीम कोर्ट अपनी प्रायोरिटी के हिसाब से इसको सुनेगा । मगर तब तक हम कोई काम नहीं करें । यह किस प्रकार का उदाहरण इस सदन के अंदर दिए जाते हैं ।

माननीय अध्यक्ष जी, सदस्य टी. सुमति और काफी सारे सदस्यों ने कहा कि यह बिल लाने का मतलब ही है कि अब जम्मू-कश्मीर को स्टेटहुड नहीं मिलेगा । बिल को पॉयलट तो मैं कर रहा हूँ,लेकर मैं आया हूँ, मंशा मैंने स्पष्ट कही है,कहीं पर भी नहीं लिखा है कि स्टेटहुड इससे नहीं मिलेगा । आप कहाँ से ड्रॉ करते हो? अपने मन की आशंकाओं को जम्मू-कश्मीर की जनता पर क्यों थोप रहे हो? मैंने इसी सदन में कहा है और फिर से कहता हूँ कि इस बिल का जम्मू-कश्मीर के स्टेटहुड से कोई लेना-देना नहीं है । उपयुक्त समय पर जम्मू-कश्मीर को स्टेटहुड दिया जाएगा । यह कह रहे हैं कि स्टेटहुड ही देना है तो एगमुट में क्यों लेकर आए? जरा एगमुट कैडर को ही समझ लेते हैं । क्या अरुणाचल राज्य नहीं है, क्या गोवा राज्य नहीं है, मिजोरम राज्य नहीं है?ये सारे राज्य ही हैं । जरा ध्यान से पढ़ लेते तो इतनी फजीहत ही न होती । ये सारे राज्य हैं और एगमुट कैडर के अंडर में हैं,जहाँ पर विशेष प्रकार की भौगोलिक परिस्थिति होती है, एडमिनिस्ट्रेटिव परिस्थिति होती है, वहाँ पर अफसर भेजने पड़ते हैं और वे राज्य के विकास के लिए जाते हैं । जो अफसर एगमुट कैडर के हैं, वही मसूरी में ट्रेनिंग लेकर आते हैं, जहाँ जम्मू-कश्मीर कैडर के लोग पहले ट्रेनिंग लिया करते थे । यह ऑल इंडिया कैडर है और ओवैसी साहब इसका हिन्दू-मुस्लिम में विभाजन करते हैं । आपके मन में सब चीज हिन्दू-मुस्लिम है । ओवैसी जी, मैं तो आपको समझता हूँ । आप देश के अफसरान को भी हिन्दू-मुस्लिम में डिवाइड कर  दें । आपका क्या कांसेप्ट है? एक हिन्दू अफसर मुस्लिम जनता की सेवा नहीं कर सकता, एक मुस्लिम अफसर हिंदू जनता की सेवा नहीं कर सकता । हम किस प्रकार के  देश में आगे बढ़ने जा रहे हैं? अफसरों की संख्या को हिंदू-मुस्लिम में बांटेंगे और अपने आपको सेक्युलर कहते हैं । काहे का सेकुलरिजम? …(व्यवधान) हिंदू-मुस्लिम में अफसरों की संख्या बांटेंगे । इस तरह से तो कश्मीर के अंदर शांति नहीं नहीं होगी,ज्यादा चिंता होगी, ज्यादा उचाट होगा, संशय बढ़ेंगे । मेरा सभी से निवेदन है कि इस तरह से नहीं करना चाहिए । 

उन्होंने एक और ‍निवेदन किया कि टू जी से फोर जी विदेशियों के दबाव में किया है । ओवैसी साहब को मालूम नहीं है, जिसका वे समर्थन करते थे,वह यूपीए की सरकार चली गई है । यह नरेन्द्र मोदी की, भारतीय जनता पार्टी की सरकार है । इस देश के फैसले यह देश करता है । इस देश के फैसले इस देश की संसद करती है । कोई हम पर दबाव नहीं कर सकता । हमने उसको इसलिए रिस्ट्रिक्ट किया था कि कुछ संभलने के लिए समय चाहिए था । अफवाहें न फैलायी जाएं,इसके लिए समय चाहिए था । अधीर रंजन जी, आप हमें ही टू जी और फोर जी पूछ रहे हैं । आपने तो मोबाइल ही बंद कर दिए थे और 20 साल तक बंद कर दिए थे । वाजपेयी जी की सरकार ने आकर, टू जी,फोर जी छोड़ो,मोबाइल सर्विस ही बंद कर दी थी । उस वक्त सारे अधिकार कहां गए थे? मान्यवर,मैं आपके माध्यम से पूछना चाहता हूं कि उस वक्त सारे अधिकार कहां गए थे? जब विपक्ष में बैठते थे,तब अपने समय में क्या किया था, वह भी तो थोड़ा याद रखना चाहिए, वरना फिर सुननी पड़ेगी । मान्यवर, ये हमें टू जी और फोर जी का कह रहे हैं । मैं अभी भी कहता हूं कि सबसे बड़ा नागरिक का अधिकार है सुख और शांति से रहने का, सलामती के साथ रहने का,सलामती जहां नहीं होगी, वहां सारे अधिकारों का कोई मतलब नहीं है । यह नई फैशन शुरू हो गई है ।

       मान्यवर,मैं कहना चाहता हूं कि जो लोग यह कह रहे हैं कि हम विदेश के दबाव में आकर कह रहे हैं, मैं उनको पूछना चाहता हूं कि किसके दबाव के अंदर धारा 370 को इतने समय तक चालू   रखा । यह तो जरा बता दीजिए,किसका दबाव था,कौन प्रेशराइज करता था? अभी किसी ने  बड़े-बड़े साहित्यिक शब्दों के साथ कह दिया कि शासन का जनता से वादा था, एक एग्रीमेंट था ।  मैं एग्रीमेंट को बारीकी से पढ़ता हूं । मैं मानता हूं कि पूर्ववत सरकारों ने भी जो वादे किए हैं,उनको ध्यान से पढ़ना चाहिए और उन पर अमल करना चाहिए । धारा 370 के बारे में कहा गया कि धारा 370 और 35(ए), देश की सरकार का जम्मू-कश्मीर की जनता से एग्रीमेंट था ।    

यह एग्रीमेंट जरूर था,लेकिन हम लोग पढ़ने में टेम्परेरी शब्द भूल जाते हैं । यह टेम्परेरी था, जो लोग सत्रह महीने का मेरे से हिसाब पूछ रहे हैं कि स्टेटहुड कब दोगे, स्टेटहुड कब दोगे, हम जरूर देंगे । मगर मैं उनसे पूछना चाहता हूं, मैंने भी कहा है कि स्टेटहुड टेम्परेरी है । सत्रह महीने में ही हिसाब मांगते हैं, टेम्परेरी धारा 370 सत्तर सालों तक चली,उस वक्त हिसाब क्यों नहीं मांगते थे? टेम्परेरी प्रोविजन कब तक टेम्परेरी रहेगा । टेम्परेरी प्रोविजन को क्यों नहीं उखाड़ देते, क्यों कोई नहीं पूछता था क्योंकि वोट बैंक की राजनीति हो रही थी । यह सरकार वोट बैंक की राजनीति से नहीं चलती है । यह सरकार देश के हित में फैसला करती है । यह सरकार देश की भविष्य को सुधारने के लिए काम करती है ।

       हम आएंगे और जाएंगे,लोकतंत्र में जीतेंगे और हारेंगे,हम इसको ध्यान में रखकर देश के भविष्य को ताक पर नहीं रख सकते है और न ही हम रखना चाहते हैं । यह आपकी पॉलिसी है और आपको ही मुबारक हो ।

       मान्यवर,इन्होंने कहा कि लोकल ऑफिसरों का अधिकार चला जाएगा । मुझे भला कोई समझाए, देश भर में आईएएस व आईपीएस ऑफिसर भेजे जाते हैं तो क्या लोकल आफिसरों का अधिकार चला जाता है तो जम्मू-कश्मीर में कैसे चला जाएगा?

प्रो. सौगत राय : महोदय,आपने रेशियो बदल दिया है, 50-50से 67-73 कर दिया है ।

श्रीअमित शाह: माननीय अध्यक्ष महोदय, दादा ज्यादा पढ़ नहींसकते हैं, मैं समझ रहा हूं । देश भर में यही रेशियो है, बंगाल में भी यही रेशियो है ।

प्रो. सौगत राय : महोदय,कश्मीर में अलग था ।

श्रीअमित शाह: महोदय, अलग क्यों रखना? क्या कश्मीर देश का हिस्सा नहींहै? क्योंइसे अलग रखना । कश्मीरी युवा को देश के ऑल इंडिया कॉडरमें आने का अधिकार नहींहै? अगर स्कूलों में पढ़ाई होता और स्कूल न जला दिए गए होते, बच्चों को मदरसों में जाने के लिए मजबूर न करतेतो कश्मीर के बच्चे भी आईएएस और आईपीएस ऑफिसर बने होते । स्कूल किसके टाइम में जला दिए गए? आप मेरा हिसाब ले रहे हैं, मुझसे हिसाब मांग रहे हैं । इतने लोग मर गए और क्या-क्या हो गया? मनीष भाई, याद कीजिए, कांग्रेस का शासनक्या होता था, हजारों लोग मारे जाते थे और सालों तक कर्फ्यू रहता था, परिस्थितियों का आंकड़ों के आधार पर आकलनकीजिए, मैं इसमें नहींजाना चाहता क्योंकि इससे तू-तू, मैं-मैं होती है ।

       कश्मीर में शांति बहुत बड़ी चीज है । जो अशांति का समय था, मैं उसे अब याद नहीं करना चाहता हूं । भगवान करे, कभी ऐसी अशांति दोबारा न हो, न ही होगी क्योंकि अब हमारी सरकार है । मसूदी साहब कहते हैं, अस्सी प्रतिशत जगह पर डायरेक्ट रिक्रूटेड हैं, आपको डायरेक्ट रिक्रूटमेंट में भरोसा क्यों नहीं है? देश के हर राज्य की स्थिति है कि डायरेक्ट रिक्रूटेड ऑफिसर होते हैं । इसका प्रो-रेटा है, जब लोकल ऑफिसरों का प्रोमोशन होता है तो वह भी जगह लेते हैं । पूरे देश का एडमिनिस्ट्रेटिव इन्फ्रास्ट्रक्चर इसी के आधारहै । जम्मू-कश्मीर में चीप पोपुलेरिटी के लिए यह कहना कि अस्सी प्रतिशत ऑफिसर बाहर के हैं ।कोई बाहर का नहींहै, सभी भारत माता की संतान हैं और इसी भारत में जन्मे हुए हैं, बाहर का क्याहोता है?

       नई पेटन और नई फैशन विकसित की गई है, बाहर का है । दादा, मैं आपको नहीं कह रहा हूं । यह गलत रास्ता है । इस रास्ते से देश की भलाईनहीं होगी । मसूदी साहब कह रहे हैं कि आपनेबोडोलैंड को दे दिया, मणिपुर को दे दिया, कश्मीर को क्यों नहीं? मसूदी साहब, आप जरा सच बोलाकीजिए, आपजज हैं और सब कुछ पढ़ते हैं । सभी अकार्ड निकाल कर पढ़िए, किसी को अलग संविधान नहीं दिया है, किसी को अलग झंडा नहीं दिया है, किसी को धारा370 नहीं दिया है । वर्ष 1950 सेहमारा देश की जनतासे एक वादा था कि इस देश में दो विधान, दोनिशान और दो प्रधान नहींरहेंगे । आज हमने मोदी जी के नेतृत्व में इसको समाप्त कर दियाहै ।

मान्यवर, इन्होंने विकास की काफीसारी बातें कीं और मैं भी करना चाहता हूं । धारा 370 सेक्या मिला, गृह मंत्री जी इसकाहिसाब दें । आपने कहा है तो मैं हिसाब दे ही देता हूं । सबसे पहला काम हमारी सरकार के आने के बाद वहां पंचायती राज की शुरूआत हुई है, पुनर्स्थापना शब्द ठीक नहीं है ।

       जब देश का संविधान लिखा गया और संविधान की एडिटिंग का काम समाप्त हो गया तो डॉ. अम्बेडकर ने बहुत बड़ी स्टेटमेंट की थी । डॉ. अम्बेडकर के उस वाक्य को इस देश के लोकतंत्र को स्वर्ण अक्षरों में मंडित करके रखना चाहिए । उन्होंने कहा था- राजे अब रानी के पेट से पैदा नहीं होंगे,गरीब, दलित और पिछड़ों के वोट से पैदा होंगे,जबकि कश्मीर में अब तक राजे रानी के पेट से ही पैदा हुए । ये तीन परिवार के लोग ही शासन करते थे, इसीलिए उनको धारा 370 स्यूट करती थी ।

       मान्यवर,हमने पंचायत के चुनाव कराए । अभी डिस्‍ट्रिक्ट पंचायत के चुनाव हुए,लगभग 51.7 परसेंट वोटिंग हुई । कहीं पर भी गोली नहीं चलानी पड़ी । यहां शांतिपूर्ण मताधिकार का प्रयोग हुआ । कांग्रेस के शासन में चुनाव कैसे हुए थे, मैं इसमें जाना नहीं चाहता हूं,पुरानी बातों को याद नहीं करना चाहता हूं । परंतु कोई आरोप नहीं कर सकता है, हमारे विरोधी भी आरोप नहीं कर सकते कि चुनाव में घपला हुआ है,अशांति हुई है,अवसर का उपयोग किया है । सबने भय रहित होकर शांतिपूर्ण तरीके से मतदान किया है । 51 प्रतिशत मतदान पंचायत के चुनाव में हुआ है । जिन्होंने धारा 370 वापस लाने के आधार पर चुनाव लड़ा था,वे साफ हो गए । उनके साथ कश्मीर की जनता को मैंडेट भी नहीं रहा, चुनाव हारे हैं ।

 

       दिसंबर 2018 में पंचायत के चुनाव में 74 प्रतिशत लोगों ने वोट डाले । कश्मीर के इतिहास में इतना मतदान कभी नहीं हुआ । कुल 4483 सरपंच निर्वाचन क्षेत्रों में से 3650 सरपंच निर्वाचित हुए । 35029 क्षेत्रों में से 33000 पंच निर्वाचित हुए । अब वहां राजे रानी के पेट से नहीं जन्म लेंगे,मत पत्र से लेंगे,यह इसका सबसे बड़ा उदाहरण है । आज जो पंच बना है, सरपंच बना है, जिला पंचायत का सदस्य बना है कल एमएलए बनेगा,उसे किसी की कृपा की जरूरत नहीं है । जम्मू-कश्मीर की अवाम उसे अपना नेता बना लेगी । नए नेता चुनकर आएंगे जो विकास में माहिर हैं ।

       जम्मू-कश्मीर में जो चुनाव हुए हैं,मैं इसके लिए जम्मू-कश्मीर की जनता, सुरक्षा बल, चुनाव आयोग और जम्मू-कश्मीर के एडमिनिस्ट्रेशन को हृदय से देश के गृह मंत्री होने के नाते बहुत-बहुत बधाई देता हूं । माननीय मोदी जी ने जो करने की इच्छा रखी थी,उसे आप सबने मिलकर पूरा किया है । 

       हम चुनाव कराकर नहीं रुके, उनको अधिकार दिया,उनको बजट दिया गया । पहले 5000 रुपये भी सरपंच को सरकार से मांगने पड़ते थे, ऐसी स्थिति थी । आज हमने उनको स्थिरता प्रदान की है । पंचायतों को सुदृढ़ किया है । वहां पर अफसर भेजे जा रहे हैं । एडमिनिस्ट्रेशन के पूरे के पूरे 21 विषयों को पंचायतों के हवाले कर दिया है । उनके बैंक एकाउंट में लगभग 1500 करोड़ रुपये सीधे डालकर जम्मू-कश्मीर के गांवों के विकास का रास्ता प्रशस्त किया है ।

       उनको मध्याह्न भोजन योजना सौंपी गई,आंगनवाड़ी सौंप दी गईं, आईसीडीएस सौंप दिया गया,मनरेगा के काम की मॉनिटरिंग सौंप दी गई । अभी-अभी एलजी साहब ने निर्णय किया है,  खनन का अधिकार पंचायती राज संस्थानों को दे दिया । देश में ऐसा कहीं नहीं है । इससे वे आत्मनिर्भर होंगे और अपने गांवों का विकास करेंगे । डिसैंट्रलाइजेशन किया है, नीचे तक सत्ता को परकोलेट करने का काम धारा 370 हटाने के कारण हुआ है, जो 70 साल तक नहीं हो सका था ।

       माननीय अध्यक्ष जी, बीडीसी के अध्यक्ष को डीएम के समकक्ष स्थान दिया गया है । उग्रवादी घटना में मारे गए किसी भी निर्वाचित सरपंच, पंच और बीडीसी अध्यक्ष के लिए 25 लाख की राशि की व्यवस्था की गई है । उनकी क्षमता संवर्द्धन के लिए ट्रेनिंग का प्रोग्राम भी बनाया है, क्योंकि वे लोग काफी नए हैं । वहां परम्परा ही नहीं थी । वहां नई परम्परा स्थापित हो रही है । इनकी ट्रेनिंग के लिए बड़ी व्यवस्था की गई है । स्थानीय ईकाइयों के चुनाव भी कराए गए । मैं इसकी डिटेल में नहीं जाना चाहता ।

       माननीय अध्यक्ष महोदय,ये कहते हैं कि क्या फर्क आया है? फर्क मैं बताता हूं । पहले जम्मू और कश्मीर,जिसकी राजधानी श्रीनगर थी, वहां पर सारे अधिकार सेंट्रलाइज थे । अफसरान कभी गांव में नहीं जाते थे । केवल चुने हुए प्रतिनिधि और एमएलए जाते थे । हमने सारे राजपत्रित अधिकारियों को आवंटित पंचायत के अंदर दो दिन और एक रात का निवास करना कम्पलसरी कर दिया है । अब वे वहां जाकर जमीनी स्थिति देखने लगे हैं । यह उनका उद्देश्य है, उनको काम दिया गया है, वहां विकास के जो काम अटके हैं और जो कमियां हैं,उसकी लड़ी को जोड़ने का काम किया गया  है । उन्हें पंचायत को सशक्तिकरण करने का काम दिया गया है । प्रत्यक्ष रूप से वहां यह अभियान दो बार चला है । उसमें से लगभग 20 हजार छोटे-मोटे काम सामने आए हैं । उनमें से 18 हजार कामों के लिए स्वीकृति दे दी गई है । कहीं पुलिया बनानी थी,कहीं जोड़ता हुआ रोड बनाना था,कहीं तालाब बनाना था, तालाब तो था, मगर, उसमें पानी जाने के रास्ते भर गए थे, कहीं तालाब को सफाई करने की व्यवस्था नहीं थी, कहीं कूड़ादान नहीं था, कहीं बिजली का खंभा था, तार चोरी कर लिए गए थे, ऐसे 20 हजार से ज्यादा काम ढूंढ़े गए और 18 हजार कामों की स्वीकृति दी गई है  । वे विकास के रास्ते पर आगे बढ़ गए हैं । तीन बार यह कार्यक्रम हुआ है और बहुत सफल हुआ है । पूरे जम्मू और कश्मीर में इससे बड़ी जनभागीदारी नहीं हुई । पांच लाख से अधिक मृत्यु,जन्म, दिव्यांगता,अधिवास आदि के प्रमाण-पत्र वहीं मौके पर दिए गए । उन्हें जम्मू-कश्मीर की राजधानी में जाने की जरूरत नहीं पड़ी । ये निरंतर चलने वाले कार्यक्रम हैं । ये पूछते हैं कि हमने क्या किया है? इसलिए,मैं इनको बताता हूं । 50 हजार परिवारों को स्वास्थ्य बीमा के तहत कवर कर दिया गया है । रोजगार के अंदर लगभग 10 हजार युवाओं को कवर किया गया है, छह हजार नए काम शुरू किए गए और 4440 क्रिकेट और फुटबॉल की किट गांव में पहुंचकर बच्चों के हाथ में बंदूक की जगह क्रिकेट के बैट दिए गए । इसकी व्यवस्था हमने की है । ‘मेरा शहर, मेरा गौरव’ के तहत यह काम शहरी विकास के लिए भी किया है ।

       जहां तक विकास के काम को गति देने का सवाल है, मोदी जी जब से प्रधान मंत्री बने, तब से जम्मू-कश्मीर उच्चतम प्राथमिकताओं वाला क्षेत्र रहा है, क्योंकि जम्मू-कश्मीर ने बहुत सहा है । मैं उनके दर्द को कुछ शब्दों में यहां बयान नहीं कर सकता । उन्होंने बहुत सहा है । प्रधान मंत्री विकास पैकेज ‘पीएम योजना’की जो घोषणा हुई, उसका पुनर्निर्माण हुआ और मेगा विकास का जो पैकेज था,उसके तहत 58627 करोड़ रुपये के परिव्यय की 54 योजनाएं थीं । बाद में, उसको 26 परसेंट और बढ़ाया गया । 20 परियोजनाएं,जिनमें से सात केंद्र की थीं और 13 संघ राज्य की थीं । ये काफी हद तक पूरी हो चुकी हैं । 54 में से 20 परियोजनाएं पूरी हो चुकी हैं । बाकी 8 परियोजनाएं मार्च के अंत तक पूरी हो जाएंगी । इस प्रकार, हमने 54 में से 28 परियोजनाओं को पूरा करने काम कर दिया है । आईआईटी जम्मू ने अपने परिसर में काम शुरू कर दिया है । दोनों एम्स का निर्माण शुरू हो चुका है । जम्मू के रिंग रोड को हम वर्ष 2021 में पूरा कर देंगे । 8.45 किलो मीटर लम्बी बनिहाल सुरंग को इस साल खोलने की योजना है । सबसे बड़ी बात यह है,पीयूष भाई यहां बैठे हैं, वर्ष 2022 में हम कश्मीर की घाटी को रेलवे से जोड़ने का काम भी समाप्त कर देंगे । दादा जो काम 70 सालों में नहीं हुआ, वह अब हो रहा है । यह आपको मालूम होना चाहिए । चिनाब नदी पर 359 मीटर विश्व की सबसे ऊंची रेल पुल का निर्माण कार्य चालू है । यह अगले साल पूरा हो जाएगा । शहरी परिवहन के लिए लगभग 10599 करोड़ का डीपीआर तैयार कर दिया गया है । लाईट, रेल और ट्रांजिट सिस्टम को भी हम चार वर्ष में पूरा करेंगे । जम्मू और कश्मीर में उसके दो कॉरिडोर होंगे । परियोजना के डीपीआर को आकार दे दिया गया है ।

       मान्यवर,जम्मू-कश्मीर राज्य में हाइड्रो पावर की बहुत बड़ी संभावनाएं थीं । मगर उसका दोहन नहीं होता था,क्योंकि एडमिनिस्ट्रेशन ही ठीक से नहीं चलता था । आप जो कह रहे हैं कि हम ऐसा क्यों कर रहे हैं, क्योंकि वहां अफसर चाहिए । हम जम्मू-कश्मीर को मंथर गति से नहीं चलाना चाहते   हैं । हम जम्मू-कश्मीर के विकास को द्रुत गति से चलाना चाहते हैं । इसीलिए अफसर चाहिए, इसीलिए वहां अफसर भेजना चाहते हैं ।

मान्यवर, वहां पर प्रचुर मात्रा में जल संसाधन है । वहां लगभग 14,867 मेगावाट की जल विद्युत क्षमता तराशी गई है । उसमें से 70 सालों में 3,504 मेगावाट का दोहन किया गया है । मैं एक बार फिर से कहता हूं कि 14,000 मेगावाट में से 3,500 मेगावाट का दोहन हुआ है । जो अभी 17 महीने का हिसाब पूछते हैं, मैं उनको यह बताना चाहता हूं कि 70 वर्षों में 3,504 मेगावाट और सिर्फ 17 महीनों में 3,490 मेगावाट का काम हम शुरू कर चुके हैं । आपकी चार पीढ़ी ने जो काम किया है, हमने डेढ़ साल के अंदर वह काम किया है । आपको यह मालूम होना चाहिए । पिछले दो वर्षों में लगभग 3,000 मेगावाट की जो परियोजनाएं बंद पड़ी हुई थीं,उनको भी चालू करने का काम किया गया है । 3,300 मेगावाट की नई परियोजनाएं शुरू करेंगे । पाकल दुल 1,000 मेगावाट की है और कीरू 626 मेगावाट की है । सावलाकोट 1,856 मेगावाट, दुलहस्ती दूसरा चरण 258 मेगावाट,उरी (एक)दूसरा चरण 240 मेगावाट और छोटी पनबिजली योजनाएं लगभग 12 मेगावाट की हैं, जो 133 करोड़ रुपये की लागत से बनेंगी ।

       मान्यवर,मैं इतनी डिटेल में नहीं जाना चाहता था, मगर मुझे उकसा-उकसाकर हिसाब मांगा गया है । मैं भी क्या करता? इसलिए मैं डिटेल में बताना चाहता हूं । सबके लिए बिजली बन तो जाएगी, लेकिन पहुंचेगी कैसे? इसका डिस्ट्रीब्यूशन गांवों तक होना चाहिए, बाद में इसका डिस्ट्रीब्यूशन घरों तक होना चाहिए । इसलिए हमने ‘सौभाग्य योजना’के तहत जम्मू-कश्मीर के शत-प्रतिशत लोगों के घरों में बिजली पहुंचाने का लक्ष्य प्राप्त कर लिया है ।…(व्यवधान) हम कर चुके हैं । 3,57,405 ऐसे लोग थे जिनको 70 सालों से बिजली नहीं मिली थी, हमने इन 17 महीनों में उनको बिजली देने का काम किया है । ये हिसाब मांगते हैं ।…(व्यवधान) इस वर्ष 36 किलोमीटर लंबी 33 केवी लाइन बिछाकर एलओसी पर स्थिति केरन और मुंड़ियां जो कि अंतिम गांव हैं, हमने उनको भी बिजली से जोड़ने का काम पूरा कर लिया है । पहले वहां डीजल जेनरेटर से सिर्फ तीन घंटे सरकार की ओर से बिजली दी जाती थी, लेकिन अब 24 घंटे बिजली पहुंच सके, ऐसी व्यवस्था की गई है ।

       मान्वयर,बिजली के साथ एक चीज और जीवन की महत्वपूर्ण जरूरत है । ये फोर-जी को मानते हैं,बहुत महत्वपूर्ण है, लेकिन मैं यह मानता हूं कि जल बहुत महत्वपूर्ण है । जल जीवन के लिए बहुत महत्वपूर्ण है । कांग्रेस के हिसाब से फोर-जी जीवन के लिए बहुत महत्वपूर्ण है । मगर हमारी मान्यता अपनी जगह स्थिर है । फोर-जी भी जरूरी है,मगर जल अत्यंत जरूरी है । इसलिए सितंबर, 2022 तक सभी 18.16 लाख परिवारों को पाइप के द्वारा घर में पानी पहुंचाने की योजना पूरी कर ली जाएगी । जब मैं यह कह रहा हूं,तब पूछेंगे कि आप तो वर्ष 2022 की बात कर रहे हैं । अभी चार जिलों के शत-प्रतिशत घरों में पानी पहुंचाने का काम हम पूरा कर चुके हैं । वर्ष 2022 तक हम बाकी के जिलों का काम पूरा करेंगे । उसके साथ हमने विद्यालयों,आंगनबाड़ियों,शिक्षा संस्थानों और अस्पतालों को भी जोड़ने का काम किया है ।

       मान्यवर,हमने यह तय किया है कि वर्ष 2020-21 के अंदर ही 5,300किलोमीटर की सड़कों का निर्माण होगा, जिसमें 700 किलोमीटर की सड़क कश्मीर में और 4,600 किलोमीटर की सड़क जम्मू में बनेगी । हर गांव को वर्ष 2022 यानी आज़ादी के 75 साल तक सड़क से जोड़ने का काम भी हम जम्मू-कश्मीर में पूरा कर देंगे । इसका बजटरी प्रोविज़न भी हो गया है ।

       माननीय अध्यक्ष जी, ये हमेशा आर्टिकल 370 और 35ए जैसे झुनझुने पकड़ाते थे । न बिजली की बात करते थे, न पानी की बात करते थे, न नौकरियों की बात करते थे,न स्वास्थ्य की बात करते थे । जम्मू-कश्मीर के दुर्गम क्षेत्रों के अंदर जो लोग बसते हैं, उनकी स्वास्थ्य की चिंता तीन परिवारों ने क्या की है? मैं यह पूछना चाहता हूं कि आपने 70 साल तक शासन किया है, आपने जम्मू-कश्मीर की आवाम के स्वास्थ्य के लिए क्या किया है? आप उसका हिसाब लेकर आइए और हमारे एमपीज़ के साथ चर्चा कीजिए ।  

       मान्यवर,मैं सदन को गौरव के साथ बताना चाहता हूँ कि नरेन्द्र मोदी सरकार के कालखण्ड में और 17 महीनों में,ये 17 महीने, 17 महीने बोलते रहते हैं, इस दौरान हमने जम्मू कश्मीर में पीएमडीपी के तहत स्वास्थ्य मंत्रालय से 881 करोड़ रुपये की राशि ऑलरेडी भेज दी है, जिसमें से 754 करोड़ रुपये की राशि व्यय की गई है ।

       मान्यवर, 75 परियोजनाएं पूरी हो चुकी हैं और वर्ष 2022 तक 39 परियोजनाएं पूरी हो जाएंगी,श्रीनगर में 500 बिस्तरों वाला नया अस्पताल,जम्मू में 200 बिस्तरों वाला नया जच्चा-बच्चा अस्पताल, जम्मू में हड्डी व जोड़ के नए अस्पताल,जीएमसी जम्मू में 100 बिस्तर के आकस्मिक चिकित्सा ब्लॉक्स, जम्मू में बालक और बालिका छात्रावास का निर्माण,इसके तहत आता है । देश भर के 60 करोड़ गरीबों को मोदी सरकार ने ‘आयुष्मान भारत’ का आशीर्वाद देकर पाँच लाख रुपये तक का स्वास्थ्य फ्री ऑफ कॉस्ट दिया है ।

       मान्यवर,मसूदी साहब पूछते थे कि आपने जम्मू कश्मीर के साथ क्या किया है?क्या किया?एग्रीमेंट नहीं पढ़ते, शासन का जनता के साथ एग्रीमेंट होता है । अरे भाई, एग्रीमेंट तो कागज पर होता है,जम्मू कश्मीर तो हमारे दिल में है । देशभर के अन्दर पाँच लाख तक की स्वास्थ्य योजना,जो ‘प्रधान मंत्री आयुष्मान भारत योजना’ के नाम से जानी जाती है, ‘पीएम जय योजना’ के नाम से जानी जाती है, वह गरीबों के लिए है । प्रधान मंत्री जी जम्मू कश्मीर के लिए सेहत योजना को लेकर आए । उसके तहत जम्मू कश्मीर में कोई करोड़पति हो, रोडपति हो, सड़क पर रहने वाला हो या बड़े से बड़े महल में रहने वाला हो,हर एक को पाँच लाख तक की सुविधा आरोग्य के लिए देने का काम किया है ।

       मान्यवर,मैं देखता था । मैं वर्चुअल तरीके से कार्यक्रम में उपस्थित था । लोगों की आँखों में आँसू थे । एक बूढ़ी महिला, कश्मीर घाटी की माँ बता रही थी कि हमारी 70 सालों तक किसी ने चिंता नहीं की । नरेन्द्र मोदी जी ने आकर हमारी चिंता की और आज मुझे इलाज करवाने के लिए किसी व्यक्ति के सामने हाथ फैलाने की जरूरत नहीं है । मेरी सरकार वहाँ बैठी है,जो मेरा इलाज करवाएगी । मान्यवर,हमने हर एक व्यक्ति को ‘सेहत योजना’के तहत कवरेज देने का काम किया है और मैं मानता हूँ कि जम्मू कश्मीर बहुत कम राज्यों में से एक राज्य है, जिसका हर एक व्यक्ति ‘स्वास्थ्य योजना’के तहत कवर किया गया है ।

       मान्यवर,हम कोविड के‍खिलाफ लड़ाई भी इसी समय लड़े, जो 17 महीने का हिसाब मांगा जाता है, उसी दौरान लड़े और सबसे अच्छा कोविड़ प्रबंधन एलजी के नेतृत्व में जम्मू कश्मीर सरकार ने किया । टीकाकरण का काम भी बहुत स्मूथ तरीके से घाटी और जम्मू दोनों तरफ चल रहा है ।

मान्यवर, हमने एम्स की स्थापना की है । दो एम्स बनाने का काम किया है और लगभग 4 हजार करोड़ रुपये एम्स के लिए भारत सरकार ने यहाँ पर भेजे हैं । इसकी शुरूआत हो गई है । 7 नए मेडिकल कॉलेजों की स्थापना हुई है । 70 साल में तीन थे और 17 महीने में 7 कॉलेजेस हैं । अनंतनाग,बारामुला, राजौरी, डोडा,कठुवा, हंदवाड़ा और उधमपुर में 7 नए मेडिकल कॉलेजों की शुरूआत हुई है और हमने उनमें से पाँच मेडिकल कॉलेजों में बच्चों को, एक टेम्परेरी परिसर के अन्दर शिफ्ट व्यवस्था के आधार पर पढ़ाने का काम काज शुरू कर दिया है । किसी की राह नहीं देखी है । हम वर्ष 2022-23 तक दो मेडिकल कॉलेज भी चालू कर देंगे । जम्मू कश्मीर के लगभग-लगभग 1100 बच्चे डॉक्टर बनकर वहाँ के गरीबों की सेवा करेंगे । हमने ऐसी व्यवस्था की है । आप हमें पूछ रहे हो कि हमने क्या किया? क्या आपने कभी इतनी संवेदना के साथ काम किया था । मान्यवर, तीन परिवार धारा 370 का झुनझुना दिखाकर शासन करते रहे । आपने कितने सालों तक शासन किया? माननीय अध्यक्ष जी, जो असुविधाएं थी, जो कष्ट था, जो दुख था,उसको एड्रेस करने का इन्होंने कभी काम नहीं किया । अध्यक्ष जी,हम वहाँ पर एक बीएससी नर्सिंग कॉलेज भी चालू कर रहे हैं, उसकी मंजूरी दे दी गई है और हमने पाँच नए नर्सिंग कॉलेजों की स्थापना करने का प्लान रखा है । हमने राज्य कैंसर संस्थान भी शुरू किया है । एक श्रीनगर में है और दूसरा जीएमसी जम्मू में है ।

मान्यवर, केन्द्र सरकार ने अलग-अलग लगभग115 योजनाएं नरेन्द्र मोदी जी के शासन में आने के बाद इस देश के दलित, गरीब, पिछड़े, आदिवासी लोगों के लिए बनाई हैं, मगर उनका वहां पर इम्प्लीमेंटेशन नहीं होता था, जब से राष्ट्रपति शासन लगा, तब से लगभगहर घर को बिजली देनेका काम पूरा हो गया है । तीन लाख 57 हजार 405 लाभार्थियों को इसमें कवर किया गया है । पीएम उज्ज्वला योजना के तहत 12 लाख 60 हजार 685 माताओं को गैस का सिलेंडर देने का काम हमने पूरा कर दियाहै । उजाला योजना के तहत 79 लाख 54 हजार लाभार्थियों के घर में उजाला करने का काम हमने किया है । स्वच्छ भारत मिशन के तहत 100 प्रतिशत, शत-प्रतिशत घरों को आज ओडीएफ डिक्‍लेयर कर दियागया है । स्वच्छ भारत अभियान का शत-प्रतिशत इम्प्लीमेंटेशन हो गया है । एकीकृत सामाजिक सुरक्षा के लगभगआठ लाख लाभार्थी हैं, पहले 16 थे, अबआठ लाख हैं । एलपीजीडी बजट के लगभग31.77 लाख लाभार्थी हैं । केसीसी ऋण और प्रधानमंत्री किसान सम्मान  योजना का जो लक्ष्य दिया गया था, वह पूरा हो गया है, अब हर किसान को छ: हजार रुपये उसके बैंक एकाउण्ट में किसी बिचौलिए के बगैरमिल रहा है, ट्रांसफर हो रहा है । इसके अतिरिक्त 2019-20 में जो छात्रवृत्ति थी, उसका कवरेज इन 17महीनों में तीन गुना बढ़ा दिया गया है, अब आठ लाख छात्रों को डीबीटी के माध्यम से प्रीऔर पोस्ट छात्रवृत्ति मिल रही है । माननीय अध्यक्ष जी, चालू वर्ष के दौरान दिसम्बर, 2021 तक हमने लक्ष्य रखा है कि अन्य साढ़े 9 लाख लोगों को छात्रवृत्ति की कवरेज में लेकर आएंगे ।

       मान्यवर, मनीष जी ने कहा कि जम्मू में इतनी फैक्टरियां बन्द हो गई हैं और इसी कालखण्ड में बन्द हो गई हैं । मनीष जी, सिर्फ रिकॉर्ड क्लियर करने के लिए कह रहा हूं कि फैक्टरियां बन्द होने की रेंज18 साल की है । 18 साल में बन्द हुई सभी फैक्टरियों का आंकड़ा आपने17 महीनों के एकाउण्ट में डाल दिया है । वह रिकॉर्ड जरा क्लियर करना चाहिए । 18 साल में जितनी फैक्टरियां बन्द हुई हैं, उनका आंकड़ा इन्होंने 17 महीनों में डाल दिया है, इसलिए मैं रिकॉर्ड क्‍लियर कर दूं ।

       मान्यवर, अब ये कहतेथे कि 17 महीनों में क्या हुआ? जम्मू-कश्मीर के उद्योग के लिए सबसे बड़ी हर्डल यह थी कि यदि वहां कोई भी उद्योगपति उद्योग लगाना चाहे तो उसे भूमि नहीं मिल सकती थी । अनुच्छेद 370 हटाई, उसके बाद जमीन के कानून में हमने परिवर्तन किया और अब ऐसी स्थिति बनी है कि जम्मू-कश्मीर के अंदरउद्योग लग पाएं । छ: महीने पहले ही हमनेयह कार्य किया और कानून लाए हैं । अब भूमि मिल पाएगी, इसलिए उद्योग भी आएंगे । वहांउद्योग को आने के लिए सबसे अच्छा प्रोत्साहन पैकेज नरेन्द्र मोदी जी की अगुवाई में भारत सरकार ने एप्रूव कियाहै और जम्मू-कश्मीर सरकार ने भी इसको एप्रूव कर दियाहै ।

       मान्यवर, उनको मालूम है कि कोविड के कारणपूरे विश्व में मन्दी है । मनीष जी पंजाब से आते हैं, जरा पंजाब के आंकड़े लेकरआ जाएं, वहां आपकी सरकार है । राजस्थान के आंकड़े लेकरआ जाओ, छत्तीसगढ़ के आंकड़े लेकरआ जाओ, जहां तक मन्दी की बात है, इन सबसे जम्मू-कश्मीर के आंकड़े अच्छे हैं ।

मान्यवर, ये मन्दी की बात कर रहे हैं, मन्दी के बारेमें पूछ रहे हैं, पहले इंडस्ट्री लगती ही नहींथी । मैं उस पर बाद में आता हूं । आपके शासन में 12 साल तक सारे स्कूल बन्द रहे । पूरे स्कूल बन्द रहे और लाखों बच्चों का भविष्य अंधकारमय कर दियाऔर अब आज आप हमसे हिसाब मांग रहे हैं । तनिक ढंग से सोचिए कि हिसाब मांगना चाहिए कि नहींमांगना चाहिए ।

       मान्यवर, ये 4जीके बारे में बोलते हैं, आपने तो मोबाइल ही बन्द कर दिए थे । 4जी, 2जी, 1जी, ज़ीरो जी – कोई जी वहांनहीं था, मोबाइल ही बन्दथा, सिम कार्ड ही बन्दथा और आज ये हमसे हिसाब मांग रहे हैं?

       मान्यवर, हम जो योजना लेकरआए हैं, ये लोग जो यहांकहते हैं कि इंडस्ट्री नहीं आई, अब वहां जाकर अफवाह फैला रहे हैं कि आपकीजमीन चली जाएगी । मैं जम्मू-कश्मीर की आवामको आश्वस्त करना चाहता हूं कि किसीकी भी जमीन नहीं जानी है, सरकार के पास इतनी जमीन है कि जिसमें जम्मू-कश्मीर विकास कर पाए, वहां इंडस्ट्री आ जाए ।अब सरकार की वह जमीन कोई राज करने वाला छीन नहीं सकता है, यह नरेन्द्र मोदी की सरकार है । वह जमीन आपके विकास के लिए है, आपके राज्य के उद्योगों के लिए है । इस जमीन को कोई नहीं छीन पाएगा । एक लैंड बैंक बनाई है । मैं इस विषय पर आगे आता हूं । हम जो पैकेज योजना लाए हैं, इसके अंदर 28,400 करोड़ रुपये का वर्ष 2037 तक पूरा व्याप रखा है । इससे लगभग 4.5 लाख से अधिक लोगों को रोजगार मिलेगा । हम इसमें तीनों प्रकार की सहायता देने वाले हैं ।

       मान्यवर,जो उद्योग लगाएंगे,जो पूंजी लगाएंगे,जो उनकी वर्किंग कैपिटल होगी,उनको पांच सौ करोड़ रुपये तक के ऋण को 6 प्रतिशत ब्याज पर भारत सरकार देगी । इससे उनको उद्योग लगाने में बड़ी सहायता हो जाएगी । हमने जीएसटी के लिए भी पैकेज में बहुत सारा आयोजन किया है । उद्योग में जो उसके प्लांट और मशीनरी की वैल्यू होगी, उसके 300 प्रतिशत तक उसको जीएसटी रिफण्ड किया जाएगा, पूरा का पूरा 300 प्रतिशत । एक मायने में जैसे,वह 100 रुपये लगाएगा तो उसको सरकार 300 रुपये जीएसटी के माध्यम से वापस दे देगी । ये पूछेंगे कि इसको सब्सिडी क्यों नहीं बनाया है,हमने इसको सब्सिडी इसलिए नहीं बनाया है, जिससे कि फर्जी उद्योग न लगें । जीएसटी तभी भरा जाता है,जब उद्योग चलता है । जब उद्योग चलता है तो रोजगार मिलता है, उद्योग चलता है तो बिजली की खपत होती है,उद्योग चलता है तो बाकी एन्सिलरी इंडस्ट्रीज भी लगती हैं । जो उद्योग चलाएगा, उसको 100 रुपये लगाने पर 300 रुपये तक का जीएसटी रिफण्ड वापस दे दिया जाएगा ।

       मान्यवर,छोटे उद्योगों को कैपिटल इन्वेस्टमेंट पर सब्सिडी देने का प्रावधान किया है । मैंने  जो कहा है - लैंड बैंक,आपको आश्चर्य होगा कि 29,030 कैनाल का लैंड बैंक बनाया गया है, जो सरकारी है । जम्मू कश्मीर के किसी भी व्यक्ति की कोई जमीन नहीं जानी है । ये 29,030 कैनाल जो है,इतना ही है कि हम इनके लिए रोशनी लेकर आएंगे, रोशनी लाकर अंधेरा नहीं करेंगे । जो सरकारी जमीन थी, वह आपने रोशनी के नाम पर अपने चट्टों-बट्टों में बांट दी । हमने उसका लैंड बैंक बनाया और अब इंडस्ट्रीज को देंगे तो इंडस्ट्रीज इसके अंदर विकसित होंगी, रोजगार मिलेगा, बिजली की खपत बढ़ेगी,जीएसटी मिलेगा,रेवेन्यू मिलेगा । जम्मू कश्मीर एक आश्रित राज्य की जगह अपने आप आत्मनिर्भर राज्य बने, इस दिशा में हम आगे बढ़ रहे हैं ।

       मान्यवर,हमने ईज़ ऑफ डूइंग बिज़नेस को भी बहुत आगे बढ़ाया है,मैं इसके बारे में ज्यादा नहीं कहना चाहता हूं । युवाओं की नौकरियों के लिए हमने त्वरित भर्ती अभियान भी चालू कर दिया है । वर्ग चार में दस हजार रिक्तियां चिह्नित की गई हैं और 8,575 रिक्तियां सेवा चयन बोर्ड के माध्यम से विज्ञापित कर दी गई हैं । पहले इसमें बहुत चिट्ठियां चलती थीं । कितनी योग्यता है, इसके आधार पर नौकरियां नहीं देते थे, चिट्ठियों से नौकरियां बांटी जाती थीं । हमने इन सारी नौकरियों को सेवा चयन बोर्ड द्वारा ही विज्ञापन देकर भरने का निर्णय किया है । जो क्लास थ्री और क्लास फोर है, उसमें मेरिट के आधार पर ही नौकरी मिलेगी,कोई इंटरव्यू नहीं होगा । लगभग 14,161 पदों के लिए सेवा चयन बोर्ड ने विज्ञापन कर दिया है और 2,050 पदों के लिए लिखित परीक्षा शुरू हो गई है, यह मैं क्लास वन और क्लास टू की बात कर रहा हूं और इसमें 324 उम्मीदवारों का चयन कर दिया गया है । हमारा अंदाज है कि कुल मिलाकर वर्ष 2022 के पहले 25 हजार से ज्यादा सरकारी नौकरियों का सृजन करके 25 हजार युवाओं को हम पारदर्शिता के साथ नौकरी देंगे ।

       मान्यवर,बैक टू विलेज कार्यक्रम के तहत जम्मू कश्मीर बैंक को 15 हजार छोटे-छोटे ऋणों के मामले दिए गए हैं । ये मामले पहले भी दिए जाते थे,लेकिन सिर्फ सूची ही रह जाती थी । मुझे यह कहते हुए आनंद है कि लगभग 4,600 महिलाओं सहित 15 हजार मामलों में से 13 हजार मामलों को लोन देने का काम भी समाप्त कर लिया गया है और वे अपनी छोटी-छोटी इकाइयां चालू कर रहे हैं । युवा उद्यमों के लिए 242 करोड़ रुपये का लोन और दिया गया है । मिशन यूथ के तहत भी ढेर सारे काम किए हैं । उन्हें क्रिकेट और फुटबॉल की किट दी गई है । बहुत सी चीजें हैं,मैं इतनी डिटेल में नहीं जाना चाहता हूं ।

हम आविष्कार, नवाचार और इनक्यूबेशन एवं प्रशिक्षण केन्द्र  के माध्यम से क्षमता निर्माण के काम को आगे बढ़ा रहे हैं । श्रीनगर और जम्मू दोनों जगह ग्रामीण बीपीओ स्थापित किए जाएंगे और आईटी टावर्स भी बढ़ाए जाएंगे । जो हस्ताक्षर किए हैं, मुझे पूरा विश्वास है कि एक साल के अंदर वे आईटी टावर्स अपना काम करने लगेंगे । हम ने बहुत महत्वपूर्ण सुधार किए हैं,चाहे वह विद्युत का क्षेत्र हो,एडमिनिस्ट्रेशन का क्षेत्र हो या वित्तीय सुधार हो ।

मान्यवर, जम्मू-कश्मीर में सबसे बड़ी तकलीफ यह थी कि वहां कोई सुनवाई नहीं होती थी । जो सरकार आती थी, उनके लोगों की ही सुनवाई होती थी । अभी जम्मू-कश्मीर, एलजी ने अपने खुद के स्तर पर संस्थागत तंत्र और व्यक्तिगत बैठकें करके तहसील तक की सभी फरियादें जम्मू-कश्मीर,एलजी तक आ जाए,इस प्रकार का एक साइंटिफिक खाका तैयार किया है । इससे छोटे से छोटे व्यक्ति की फरियादों पर भी सुनवाई की जाएगी । इसलिए मैं यह कहता हूं, अम्बेडकर जी का एक महत्वपूर्ण वाक्य है कि राजे रानी के पेट से नहीं आने चाहिए,जनता के वोट से आने चाहिए । जब रानी के पेट से राजा आता है,तब जनता की दरोकार नहीं करता है,जनता की सरोकार भी नहीं करता है और न उनकी सुनवाई करता है । मगर जब वोटों से चुने हुए लोग वहां बैठते हैं, हमारे जम्मू-कश्मीर के एलजी पर दादा ने टिप्पणी की थी । मैं इतना ही कहना चाहता हूं कि अगर दादा, आप भी पार्टी न बदले होते, तो आप कई बार हार चुके होते । लोकतंत्र में हार-जीत होती रहती है ।…(व्यवधान) इसीलिए जीते हैं ।

       मान्यवर,एक अधिवास प्रमाण पत्र, डोमिसाइल सर्टिफिकेट, इसके लिए भी बहुत हो-हल्ला हुआ था कि नागरिकता चली जाएगी, बहुत लोग बाहर से यहां घुस जाएंगे,यह हो जाएगा,वह हो जाएगा । मैं कहता हूं कि अब तक 30.44 लाख व्यक्ति और परिवारों को प्रमाण पत्र दे दिए गए हैं । कहीं से कोई कम्प्लेन नहीं है और न कोई लाइन लगी है ।

       मान्यवर,हम नया भूमि कानून लाए तो उसमें भी यह था कि आपकी जमीन चली जाएगी । कोई मुझे बता दे कि किसकी जमीन चली गई है । बिहार में भूमि कानून नहीं है, तो कोई बंगाल से आकर बिहार की जमीन ले लेगा । मैं गुजरात से चुन कर आता हूं । गुजरात में कोई भूमि कानून नहीं है, तो महाराष्ट्र से आकर कोई गुजरात की जमीन खा जाएगा,ऐसा कैसे होगा,ऐसा नहीं होता है । कोई आदमी अपना घर छोड़ने के लिए तैयार नहीं है । उससे कुछ नहीं हुआ । आज इंडस्ट्री को आने का बहुत अच्छा वातावारण नए भूमि कानून के कारण बना है,जिसका जम्मू-कश्मीर की जनता ने भी स्वागत किया है ।

       मान्यवर,मैं विशेष उल्लेख करना चाहता हूं कि पाकिस्तान से आए हुए रिफ्यूजी,पश्चिम पाकिस्तान के रिफ्यूजी,पाकिस्तान अधिग्रहित कश्मीर से आए हुए रिफ्यूजी और 2642 वाल्मीकि परिवार, 792 गोरखा परिवार एवं 43 अन्य परिवार को भी डोमिसाइल सर्टिफिकेट दे कर उनके साथ सालों से जो अन्याय हुआ है, हम ने उसको समाप्त कर दिया । जो ह्यूमन राइट की बात करते हैं,ये दुनिया भर के लोगों के बोले हुए कोट-अनकोट यहां पर कोट करते हैं । कोट-अनकोट बहुत अच्छे हैं,क्योंकि किसी महान व्यक्ति ने बोले हैं, वह उनका कोट-अनकोट है । मगर जब आप पैर में पहनने वाला गहना कानों में पहन लेते हैं,तो अच्छा नहीं लगता है । जो कोट-अनकोट बोले गए हैं, वह हमारे शासन के लिए सुसंगत नहीं हैं । अन्याय और मानवाधिकार के लिए जितनी भी बातें होती हैं,वे हमारे शासन के लिए नहीं हैं । ये तीन परिवारों ने जो शासन किया है, उन्होंने मानवाधिकार का उल्लंघन किया । क्या मानवाधिकार कुछ लोगों के लिए सीमित है, पाकिस्तान से जो देश की सरहद में आए हैं, उनके लिए सीमित नहीं है, जो कश्‍मीरी पंडित भगा दिए गए हैं.उनके लिए सीमित नहीं है, इनके लिए नहीं है, जो सूफी-संत भगा दिए गए हैं,उनके लिए नहीं है, जो वाल्मीकि लोग वहां 70 सालों से मताधिकार का अधिकार प्राप्त नहीं कर रहे थे,उनके मानवाधिकार नहीं है । उनके लिए आपके मन में क्यों भावनाएं नहीं आती हैं । क्योंकि वह आपका वोट बैंक नहीं है । मानवाधिकार को वोट बैंक की नजर से देखना आपका काम है, हम मानवाधिकार को मानवाधिकार की दृष्टि से देखते हैं, चाहे कितना भी विरोध हो । आपको यह कहने का साहस नहीं है कि वाल्मीकि को वहां मताधिकार मिलना चाहिए । जो पाकिस्तान से शरण में आए हैं,उनको मताधिकार मिलना चाहिए,आपमें यह कहने का साहस नहीं है,क्योंकि आप चुनाव लड़ना चाहते हैं,चुनाव जीतना चाहते हैं ।

15.00 hrs वाल्मिकी माताओं की चौथी पीढ़ियाँ आ गईं, वाल्मिकी बच्चियों को नौकरी नहीं मिल सकती है, उनको इसका अधिकार नहीं है । इसलिए मानवाधिकार की बात के लिए आपके पास शब्द भी नहीं है और संवेदना भी नहीं है । लेकिन हमारे पास शब्द भी है, कृति भी है और संवेदना भी है ।

       मान्यवर,रोशनी जैसे कानून को रद्द कर दिया गया है, भ्रष्टाचार पर कार्रवाई हो रही है । पहले तो वहाँ भ्रष्टाचार के लिए कानून ही नहीं था । ये पूछ रहे हैं न कि धारा 370 क्यों हटी है,क्योंकि वहाँ पर रिज़र्वेशन नहीं था, वहाँ महिलाओं को अधिकार नहीं था, वाल्मिकी लोगों को अधिकार नहीं था, ट्राइबल्स को अधिकार नहीं था, ओबीसी को अधिकार नहीं था,भ्रष्टाचार पर रोक नहीं थी,क्योंकि भ्रष्टाचार करना था, इसलिए इस पर क्यों रोक लगाना? देश के ढ़ेर सारे अच्छे कानून वहाँ लागू किए गए । देहज के लिए वहाँ कोई कानून ही नहीं था और आप हमें समझा रहे हो कि धारा 370 को क्यों हटाया ।

       मान्यवर,पाक अधिकृत जम्मू-कश्मीर के लगभग 26,319 विस्थापित,युद्ध के समय आए हुए 5,300 विस्थापित,छम्ब के 10,065 विस्थापित,पश्चिमी पाकिस्तान के 5,764 विस्थापित,कश्मीरी प्रवासी,जिनके बारे में बहुत ही संवदेना के साथ श्री अधीर रंजन जी बता रहे थे, तो विस्थापित कश्मीरी पंडितों की संख्या 44 हजार है, यह मैं उनको बताना चाहता हूँ । यही नरेन्द्र मोदी जी के शासन में कश्मीरी पंडितों के हर परिवार को,जिनके पास राहत-कार्ड है, उनको 13 हजार रुपए प्रति माह सरकार देती है । ये हमारे समय में विस्थापित नहीं हुए, उस समय कांग्रेस का शासन था और वह उनकी सुरक्षा नहीं कर पाई । इसलिए वे अपने देश में ही विस्थापित होकर रह गए । उनको हम नि:शुल्क राशन देते हैं । पुनर्वसन अंग के रूप में कश्मीर घाटी में तीन हजार नौकरियाँ दे दी गई हैं  और छ: हजार लोगों को कश्मीर घाटी में घर के साथ हम वर्ष 2022 तक बसा देंगे । इससे हमारा वर्षों पुराना स्वप्न पूरा होगा । अधीर रंजन जी, हम तीन हजार लोगों को नौकरियाँ दे चुके हैं । अगर आपने 70 साल में एक भी नौकरी दी है, तो बताओ?हमने छ: हजार लोगों को घर बनाने की योजना के लिए जमीन भी आवंटित कर दी है और बजट का आबंटन भी हो गया है, इसकी प्रक्रिया चालू हो गई है ।

       प्रोफेशनल कॉलेजों में दाखिले के लिए देश भर में रिज़र्वेशन किया गया है । पहाड़ी-भाषी जनसंख्या के 1 लाख 74 हजार परिवारों को आरक्षण के नियमों में संशोधन करके चार प्रतिशत आरक्षण दिया गया है । यह धारा 370 हटने के कारण मिला है । अंतर्राष्ट्रीय सीमा के पास के गाँवों के 70 हजार लोगों के लिए मैं इसी सदन में बिल लेकर आया था, जिनको रिज़र्वेशन दिया गया है । पहले इनको रिज़र्वेशन नहीं दे सकते थे । 1.16 लाख बीपीएल परिवार के लोगों को अब 10 प्रतिशत आरक्षण का लाभ मिल रहा है, जो धारा 370 के कारण नहीं मिलता था । 1500 सफाई कर्मचारी परिवारों को पूरा अधिकार देने का काम किया गया है । आप हमसे पूछ रहे हैं कि हमने क्या किया है ।

       मान्यवर,धारा 370 के हटने से जम्मू-कश्मीर में अब किसी के साथ अन्याय हो, इस बात की संभावना को ही समाप्त कर दिया गया है ।

       शिक्षा,प्रशिक्षण और कैरियर के लिए भी ढेर सारे काम किए गए हैं । संवैधानिक और कानूनी मामलों में भी, जहाँ तक लद्दाख का सवाल है, मेरे युवा साथी नामग्याल जी यहाँ हैं, मैं इतना कहना चाहता हूँ कि वर्ष 2014-15 से 2019 तक 4,164 करोड़ रुपए की धनराशि जम्मू-कश्मीर सरकार के द्वारा लद्दाख में भेज दी गई है । हम कितना भी भेजें,उसका महत्व ही नहीं था । वह लद्दाख पहुंचता ही नहीं था । इसलिए वर्ष 2014 से 2019 के बीच में 4,164 करोड़ रुपए और 31.10.2019 से यानी धारा 370 हटने के बाद अधीर रंजन जी, 31.03.2020 तक 3,518 करोड़ रुपए हम भेज चुके हैं । जो पाँच साल में मिलता था, वह लद्दाख वालों को 17 महीने में मिला है ।

       मान्यवर,इतना ही नहीं,लद्दाख को दो नए डिग्री कॉलेज भी दिए गए हैं,नए एयरपोर्ट टर्मिनल और जिला अस्पताल के अपग्रेडेशन का काम शुरू हो गया है । सुमति जी, ये सब 17 महीने में ही हुए  हैं । लद्दाख में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए पांच नए टूरिस्ट सर्किट भारत सरकार ने बनाए हैं, पांच नए ट्रैकिंग-रूट्स भी खोले गए हैं । सुदूर क्षेत्रों में सब्सिडाइज़्ड हैलिकॉप्टर्स की व्यवस्था शुरू कर दी गई है, जिससे टूरिज़्म बढ़े । लद्दाख में लगभग 7,500 MW की क्षमता वाला देश का सबसे बड़ा सौर ऊर्जा यंत्र लगाने की कार्यवाही भी शुरू कर दी गई है । …(व्यवधान) यह लद्दाख के लोगों की लाइफलाइन होगी । …(व्यवधान) इससे ढेर सारे लोगों को रोजगार मिलेगा । …(व्यवधान)

       परंपरागत चिकित्सा प्रणाली को रिवाइव किया गया है । …(व्यवधान) नैशनल इंस्टीट्यूटऑफ सोवा-रिग्पा की स्थापना नवंबर, 2019 की कैबिनेट में कर दी गई है । …(व्यवधान) कारगिल हवाई अड्डे की व्यवहारिकता अध्ययन, फिजेबिलिटी स्टडी के लिए लद्दाख प्रशासन और विमानपत्तन विभाग का एग्रीमेंट हुआ है । मिशन फॉर इंटीग्रेटिड डेवलपमेंट ऑफ हॉर्टिकल्चर के तहत 28,870 ऐसे पौधे, जो ठंड में भी जिंदा रह पाएं, उनको लगाने का काम किया गया है । …(व्यवधान) ई-गवर्नेंस की दिशा में, जिससे गांवों तक ई-गवर्नेंस पहुंचे, इसके लिए ढेर सारी सुविधाएं,जैसे ई-स्टैम्प,ई-कोर्ट फीस शुरू कर दी है ।

       माननीय अध्यक्ष जी, माननीय प्रधान मंत्री जी द्वारा लद्दाख में एक सेंट्रल यूनिवर्सिर्टी का भी अनुमोदन कर दिया गया है । …(व्यवधान) विकास पैकेज के तहत जो 80 हजार करोड़ रुपये था,उसका उचित हिसाब भी लद्दाख को दिया गया है और सभी राज्यों में, जैसे गुजरात भवन होता है, यूपी भवन होता है, बिहार सदन होता है, लद्दाख को भी 70 वर्षों के बाद अपना भवन और यहां पर अपना सदन मिला है । …(व्यवधान)

       भारत सरकार की कई योजनाएं वहां थीं, उनमें लगभग 80 प्रतिशत कवरेज कर दिया गया है । रोड कनेक्टिविटी में सुधार के लिए 11 पुलों और 578 किलोमीटर रोड्स का काम हाथ में लिया गया है । जोजिला टनल का काम शुरू कर दिया गया है,रिमोट एरिया में टेलीकनेक्टिविटी के सुधार के लिए 80 सेट-फोन्स और 124 मास्ट्स स्थापित किए गए हैं । पावर इन्फ्रास्ट्रक्चर के लिए कारगिल और लेह में 500 KW के मिनी हाइड्रो प्रोजेक्ट्स स्थापित किए गए हैं, 11 KV की 66.25 किमी और 45 किमी एलटी लाइन बिछाई गई है, तीन गर्ल्स हॉस्टल्स बनाए गए हैं, कारगिल में 20 बेडेड अस्पताल बनाया गया है । ट्रेजरी सिस्टम की जगह पीएफएमएस लागू किया गया है, जिससे अनुकूलता हो । लेह में 1,000 MT का कोल्ड स्टोरेज बनाने का काम पूरा कर लिया गया है,ताकि इतने ठंडे प्रदेश के लोगों को कठिनाइयों का सामना न करना पड़े ।

       पशमीना गोट्स की संख्या में 17 महीने में 6 प्रतिशत वृद्धि दर्ज की है, जो रिकॉर्ड है । आज तक कभी इससे आगे नहीं बढ़ा गया । लद्दाख के पिछड़े क्षेत्र के लिए विकास पैकेज,लगभग 50 हजार करोड़ रुपये का पैकेज प्रधान मंत्री जी ने तय किया है,जो आने वाले दिनों में लद्दाख को मिलने वाला है ।

       मान्यवर,ये कह रहे हैं कि धारा-370 हटाने के बाद क्या किया?मुझे इतना ही कहना है कि आप धारा-370को राजनीतिक रूप से बोलने के बजाए, ये सारी चीज़ें जम्मू कश्मीर यूटी और लद्दाख यूटी की साइट पर सारी डिटेल्स थीं,अगर किसी ने स्टडी कर के बिल पढ़ा होता, तो शायद अब तक बिल पारित भी हो गया होता, न ये पूछते,न मैं जवाब देता । इन्होंने पूछा,इसलिए मुझे जवाब देना  पड़ा ।

       अभी भी मेरा इतना ही कहना है कि जम्मू कश्मीर और लद्दाख को हम राजनीति का हिस्सा न बनाएं । राजनीति करने के लिए बहुत सारी चीज़ें हैं । आ जाइए राजनीतिक मैदान में, दो-दो हाथ कर लीजिए,कोई नहीं डरता है । …(व्यवधान) यह देश का संवेदनशील हिस्सा है, उनको कई बार घाव लगे हैं । शंकाएं,कुशंकाएं उनके मन में पड़ी हैं,उन पर मरहम लगाना इस सदन का काम है,उसको कुरेदना हमारा काम नहीं है ।

       छोटी सी राजनीतिक इच्छापूर्ति के लिए हम कश्मीर को इस दृष्टि से न देखें । सबने कहा था कि प्रधान मंत्री जी ने वायदा किया था, गृह मंत्री ने वायदा किया था कि पूर्ण राज्य का स्टेटस वापस मिलेगा ।…(व्यवधान) मैं फिर से जम्मू कश्मीर के लोगों से वायदा करना चाहता हूं कि निश्चित रूप से मिलेगा । आपका विकास, जो अटक गया है, इन तीन परिवारों ने जिस विकास को रौंदकर रखा है, उसको पटरी पर चढ़ाकर,जैसे ही उचित परिस्थति होगी,जरूर जम्मू कश्मीर को पूर्ण राज्य का स्टेटस वापस देंगे । इसका इस बिल से कोई लेना-देना नहीं है । इस बिल से पूर्ण राज्य वापस आने की कोई भी संभावना समाप्त नहीं होती है । मैं इतनी स्पष्टता कर के फिर से एक बार जम्मू कश्मीर की आवाम और लद्दाख के लोगों से कहना चाहता हूं कि नरेन्द्र मोदी सरकार परिपत्रों से नहीं चलती है । नरेन्द्र मोदी सरकार कानूनों से नहीं चलती है,नरेन्द्र मोदी सरकार योजना से नहीं चलती है,नरेन्द्र मोदी सरकार भावना से चलती है और हम मानते हैं कि जम्मू-कश्मीर हमारा है, आप हमारे हो और यह पूरा देश आपका है । आपके साथ पूरा देश खड़ा है, इतना विश्वास देकर मैं अपनी बात को समाप्त करता हूं और पूरे सदन से विनती करता हूं कि कम से कम इस बिल को सर्वानुमत से हम पारित करें,इतना ही मेरा निवेदन है ।

 

श्रीअधीर रंजन चौधरी : अध्यक्ष जी, सुबह हमारे फाइनेंस मिनिस्टर ने सदन में अपनी स्पीच दी थी और दोपहर में हमारे गृह मंत्री ने अपनीबात रखी है । दोनों ही बजट स्पीच हैं, एक हिंदुस्तान की बजट और दूसरी आपके बयान के मुताबिक लगता है कि जम्मू-कश्मीर का बजट है । इसके साथ चार राज्यों में चुनाव हैं, इसकी झलक भी देखने को मिली, क्योंकि आप दिखाना चाहते हैं कि हम जम्मू-कश्मीर को नए तरीके से स्वर्ग बनाने जा रहे हैं । सुबह जब सूरजउगता है, उसके पहले थोड़ा अंधेरा रहता है और अंधेरे के बाद जब सूरज निकलता है, तो उससे पहले मुर्गी चिल्लाने लगती है । मुर्गी की यह सोच होती है कि हम चिल्लाते हैं, इसलिए सूरज उगता है । …(व्यवधान)

माननीयअध्यक्ष : माननीय गृह मंत्री जी कुछ बोलना चाहते हैं ।

…(व्यवधान)

श्रीअमित शाह: अध्यक्ष जी, जब मंत्री का भाषणसमाप्त होताहै, तब जो भी बिल को पायलट करते हैं तब मुद्‌दे पिन प्वाइंटेड बिल में से या भाषण में पूछने चाहिए । इसमें मुर्गी, अंडा, मुर्गा नहीं आता         है । …(व्यवधान)

माननीय अध्यक्ष : आप प्वाइंटेड बात पूछिए । आपका सांविधिक संकल्प है, आप उस पर पूछें ।

श्रीअधीर रंजन चौधरी : महोदय, यह सांविधिक संकल्प है, इसलिए इसमें राइट टू रिप्लाई है । मैं राइट टू रिप्लाई के अधिकार से बात रख रहा हूं । आपने घंटों अपना भाषण किया । आप हमेंभी दो-चार बातें रखने का मौकादीजिए । आप कहते हैं कि हम विरोधी को मौकादेते हैं ।

श्रीअमित शाह : मान्यवर, उनका बोलने का समय समाप्त हो चुकाहै ।…(व्यवधान) अधीर रंजन जी, मैं अपने पैरों पर खड़ा हूं और मेरा माइक भी चल रहा है ।

       महोदय, मैं जो बोला यदि उसमें से कोई मुद्‌दे उपस्थित हुए,तो ही ये बोल सकते हैं । बिल पर इनका भाषण समाप्त हो चुका है ।

श्रीअधीर रंजन चौधरी : आपने जो कहा, मैं उसी पर आता हूं । आपने कहा कि जम्मू-कश्मीर में बहुत तरक्की हो रही है, बिजनेस बढ़ रहा है, वगैरह-वगैरह । मैं आपकी सुविधा के लिए सरकारी हिसाब का जिक्र करनाचाहता हूं । The core sectors of the economy of Jammu and Kashmir have witnessed a steep decline after the abrogation of Article 370. Due to the communication blockade, curfews, and militant threats in the past five months alone after the abrogation, the economy of Kashmir lost INR 178.78 billion and more than 90,000 jobs in the sectors of handicraft, tourism and information technology. The horticulture sector is in distress, tourism is in shambles, and students are suffering because of the ongoing internet blockade. …(Interruptions) It is for the first time in the past 70 years that rural Kashmir is facing such a great degree of economic slowdown.

माननीयअध्यक्ष : माननीय सदस्य, बिल के सांविधिक संकल्प पर यदि आपको कोई आशंका है, तो निश्चित रूप से माननीय मंत्री जी क्लीयर करेंगे ।

श्रीअधीर रंजन चौधरी :  यदि अमितशाह जी यह कहेंकि मैं सुनना नहीं चाहता हूं, तो मैं नहीं   कहूंगा । यदि अमित शाह जी कहेंगे कि मैं सुनना चाहता हूं, तो मैं जरूर कहूंगा ।

माननीयअध्यक्ष : आप बिल पर बोलिए ।

श्रीअधीर रंजन चौधरी : माननीय मंत्री जी ने बहुत लम्बा भाषण दिया है ।…(व्यवधान)

श्रीअमित शाह : मान्यवर, यह गलत इंटरप्रटेशन हो रहा है कि मैं उनको सुनना नहीं चाहता । मैंने सभी सदस्यों को ध्यान से सुना है, इसी सीट पर बैठ कर सुना है और एक-एक बात को नोट किया है । …(व्यवधान) आप मेरी बात सुनिए । जब उनका बोलने का समय था, तब वे बोले नहीं । बाहर से किसी ने कागज भेज दिया कि इसे पढ़ो । अब उसे पढ़ रहे हैं । मान्यवर,सदन ऐसे नहीं चलता है । यदि मेरे भाषण में से कोई नया मुद्‌दा उपस्थित हुआ है,तो वे जरूर कहें । मुझे इसमें कोई आपत्ति नहीं है,क्योंकि यह सदन की प्रणाली है । जब उनके बोलने का समय था, तब वे इसे पढ़ते । अभी जो यह पढ़ रहे हैं,वह भी किसी सदस्य ने जरूर पढ़ा है,मुझे उनका नाम याद नहीं है, मेरी नोटबुक नीचे रखी हुई है । इस प्रकार से यदि वे कहें कि मैं उन्हें सुनना नहीं चाहता, यह सही नहीं है । मैं उन्हें सुनना चाहता हूं, लेकिन नियमों के तहत सुनना चाहता हूं । आप नियम तोड़कर नहीं बोल सकते हैं । …(व्यवधान) आप नियमों के तहत नहीं बोल रहे हैं ।

श्री अधीररंजन चौधरी : अमित शाह जी, आपकहते हैं कि कागजकहां से लाए हैं । आपका खुफिया तंत्र है, आप पता कर लीजिए कि मैं कहां से कागजलाया हूं ।…(व्यवधान)

माननीय अध्यक्ष : आप विषय पर बोलिए ।

…(व्यवधान)

श्री अधीररंजन चौधरी : आप जैसे सरकारी दस्तावेज मेरे पास नहीं हैं । हमने सदन के अंदरगुहार लगाई थी कि जम्मू-कश्मीर के आर्टिकल 370 एब्रोगेशन होने के बाद एक ऑल पार्टी डेलिगेशन जम्मू-कश्मीर जाए ।…(व्यवधान)

माननीय अध्यक्ष : यह विषय नहीं है ।

…(व्यवधान)

श्री अधीररंजन चौधरी : आपकी सरकार की हिम्मत नहींहुई कि एक ऑल पार्टी डेलिगेशन वहां  जाए । हम यूरोप से लातेहैं, दिल्ली में सारे एम्बेसडर्स को बुलाते हैं, लेकिन हमें नहीं बुलाते हैं ।

श्री अमितशाह: माननीय अध्यक्ष जी, इन्होंने यह बात ठीक नहीं कही है । ऑल पार्टी डेलिगेशन कभी भी जानाचाहे, जासकता है, चाहे आज चला जाए ।…(व्यवधान) आप जाएं,मैं कहां रोक रहा हूं । …(व्यवधान)

 

माननीय अध्यक्ष : माननीय गृह मंत्री जी, वहां जा कर आ चुके हैं ।

…(व्यवधान)

श्री अमितशाह : महोदय, मुझे रिकार्ड क्लीयर करना पड़ेगा, अधीर रंजनजी बताएं कि कब जाना चाहते थे? आपतब जाना चाहते थे, जब धारा 370 हटाई और आप मरहम लगाने नहीं जाना चाहते थे, बल्कि उकसाने के लिए जाना चाहते थे, इसलिए परमिशन नहीं मिली ।

माननीय अध्यक्ष : संसद की संसदीय समिति वहां वर्तमान में ही जाकरआई थी । मैंने उन्हें परमिशन दी थी ।

श्री अधीररंजन चौधरी : हम लोग ऑल पार्टी जानाचाहते हैं । आप यह बताइए कि पब्लिक सेफ्टी एक्ट और यूएपीए में कश्मीर घाटी में कितने लोगों को आपनेअरेस्ट कियाऔर जेल में डाला । …(व्यवधान)

माननीय अध्यक्ष : अधीर रंजन जी, आपसंकल्प वापसलेना चाहते हैं या नहीं?

श्री अधीररंजन चौधरी : अमित शाह जी, धारा 370 एब्रोगेट करने से पहलेजम्मू-कश्मीर की पर-कैपिटा इनकम हिंदुस्तान की एवरेज इनकमसे ज्यादा थी । आप इस तरह का बयानदेते हैं कि डल लेक मोदी जी ने बनाया है । पंडितों के बारेमें आपका ध्यान आकर्षित करना चाहता हूं । …(व्यवधान)

माननीय अध्यक्ष: अब मैं श्री अधीर रंजन जी द्वारा प्रस्तुत सांविधिक संकल्प को सभा के समक्ष मतदान के लिए रखता हूं ।

…(व्यवधान)

       

माननीय अध्यक्ष: प्रश्न यह है:

   “कि यह सभा राष्ट्रपति द्वारा 7 जनवरी, 2021 को प्रख्यापित जम्मू-कश्मीर       पुनर्गठन (संशोधन) अध्यादेश, 2021 (2021 का अध्यादेश संख्यांक 1) का       निरनुमोदन करती है ।” प्रस्ताव अस्वीकृत हुआ ।
…(व्यवधान)
माननीय अध्यक्ष: प्रश्न यह है:
   “कि जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम, 2019 का संशोधन करने वाले विधेयक,      राज्य सभा द्वारा यथापारित,पर विचार किया जाए ।” प्रस्ताव स्वीकृत हुआ ।
माननीय अध्यक्ष: अब सभा विधेयक पर खंडवार विचार करेगी ।
…(व्यवधान)
 
CLAUSE 2                      Amendment of Section 13 माननीय अध्यक्ष: श्री एन. के.प्रेमचंद्रन जी, क्या आप संशोधन संख्या 1 को प्रस्तुत करना चाहते हैं?
SHRI N. K. PREMACHANDRAN(KOLLAM) : Sir, I beg to move:
              “Page 1, line 8, -
                     after      “reference to”          

                     insert  “election and”.”               (1)   

    

माननीय अध्यक्ष: अब मैं श्री एन के प्रेमचन्द्रन जी द्वारा खंड 2 में प्रस्तुत संशोधन संख्या 1 को सभा के समक्ष मतदान के लिए रखता हूं ।
संशोधन मतदान के लिए रखा गया तथा अस्वीकृत हुआ ।
माननीय अध्यक्ष: प्रश्न यह है:
    “कि खंड 2 विधेयक का अंग बने ।” प्रस्ताव स्वीकृत हुआ ।
खंड 2 विधेयक में जोड़ दिया गया ।
खंड 3 और 4 विधेयक में जोड़ दिए गए ।
खंड 1, अधिनियमन सूत्र,उद्देशिका और विधेयक का पूरा नाम विधेयक में जोड़ दिए गए ।
 
माननीय अध्यक्ष: माननीय मंत्री जी अब प्रस्ताव करेंगे कि विधेयक को पारित किया जाए ।
SHRI G. KISHAN REDDY: Hon. Speaker, Sir, on behalf of Shri Amit Shah I beg to move:-
“That the Bill be passed.” माननीय अध्यक्ष: प्रश्न यह है:
    “कि विधेयक पारित किया जाए ।” प्रस्ताव स्वीकृत हुआ ।