Lok Sabha Debates
Discussion On The Motion Of Thanks On The President’S Address To Both Houses Of ... on 24 February, 2015
Sixteenth Loksabha an> Titel: Discussion on the Motion of Thanks on the President’s Address to both Houses of Parliament assembled together on 23.02.2015 moved by Shri Anurag Singh Thakur and seconded by Shri Nishikant Dubey (Discussion not concluded).
HON. SPEAKER: Now, we will take up Item No. 10 – Shri Anurag Singh Thakur.
श्री अनुराग सिंह ठाकुर (हमीरपुर): माननीय अध्यक्ष जी,मैं निम्नलिखित प्रस्ताव करता हूं:-
“कि राष्ट्रपति की सेवा में निम्नलिखित शब्दों में एक समावेदन प्रस्तुत करता हूं:-
‘कि इस सत्र में समवेत लोक सभा के सदस्य राष्ट्रपति के उस अभिभाषण के लिए, जो उन्होंने 23 फरवरी 2015 को एक साथ समवेत संसद की दोनों सभाओं के समक्ष देने की कृपा की है, उनके अत्यंत आभारी हैं’।” माननीय अध्यक्ष जी,मैं आपका आभार प्रकट करना चाहता हूं कि आपने मुझे राष्ट्रपति अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव लाने के लिए समय दिया है और मैं अपनी पार्टी का भी आभार प्रकट करना चाहता हूं जिसने आज मुझे अपनी बात रखने का अवसर दिया है। 14वीं, 15वीं और अब 16वीं लोक सभा में कई बार राष्ट्रपति जी का अभिभाषण सुनने को मिला और बहुत सारी बातें अलग-अलग सरकारों की सुनने को,जानने को और देश के सामने रखने को मिलीं। मैं अपनी बात रखने से पहले चाणक्य जी की उस बात को कहना चाहूंगा जो उन्होंने कहा था कि कोई भी काम करने से पहले अपने आप से तीन सवाल पूछें-मैं क्या कर रहा हूं,इसका परिणाम क्या होगा और क्या मैं सफल हो पाऊंगा?आप इनका सही उत्तर तभी पाएंगे जब आप गहराई से इसके बारे में सोचेंगे।
वर्ष 2014में भी देश के सामने एक ऐसा समय आया कि देश में उस समय भ्रष्टाचार,महंगाई,बेरोजगारी और तरह तरह की समस्याएं सामने थीं। लेकिन आशा की किरण इस देश की महान जनता ने आदरणीय मोदी जी में देखी। सन् 2014के लोक सभा के चुनाव में 30वर्षों के बाद अगर किसी एक राजनैतिक दल को पूर्ण बहुमत मिला तो वह आदरणीय मोदी जी के नेतृत्व में भारतीय जनता पार्टी को मिला। लोगों ने धर्म और जाति से ऊपर उठकर भारतीय जनता पार्टी के पक्ष में वोट दिया और जो आशा हमारी पार्टी से हिंदुस्तान की महान जनता को है,पिछले नौ महीनों में हमारे काम-काज को देखकर यह स्पष्ट दीखता है कि हमने उनकी आशाओं और आकांक्षाओं पर खरा उतरने का हर संभव प्रयास किया है। पिछली सरकार में शायद कहीं न कहीं जनता के साथ संवाद की कमी थी और माननीय प्रधान मंत्री जी ने आते ही उस कमी को पूरा करने का प्रयास किया। जनता और सरकार के बीच में जो एक दूरी नजर आती थी,वह उन्होंने अपने ऑनलाइन प्लेटफार्म के माध्यम से माई गवर्नमैन्ट डॉट इन से देश के सामने लोगों को अपनी बात और प्रधान मंत्री जी और सरकार से जुड़ने का अवसर दिया। शायद इस देश के लोग और हमारी पीढ़ी रेडियों को भूल चुकी थी। लेकिन देश की जनता से बात करने का उसे भी एक माध्यम बनाया गया। आज अगर भारत में लोगों से जुड़ने के लिए या सबसे सफल कार्यक्रम कोई रेडियो पर देखा जाए तो ‘मन की बात’के माध्यम से प्रधान मंत्री जी ने उसकी भी शुरूआत की और केवल प्रधान मंत्री जी ही ने नहीं,बल्कि अमरीका के राष्ट्रपति भी आए तो उन्होंने भारत की जनता के साथ अपनी बात रखने की एक बहुत बड़ी शुरूआत वहां की। हमारी सरकार के सामने जो सबसे बड़ी चुनौती यह थी कि जो भारत की छवि पिछले कुछ वर्षों में बन गई थी,उसे कैसे बदला जाए। महंगाई,बेरोजगारी,भ्रष्टाचार लगातार जिस तरह से भारत के हालात बनते चले जा रहे थे,देश को बचाने के लिए देश के सामने सरकार का अच्छा काम करना बहुत जरूरी था और सत्ता में आते ही जिस बात के लिए हमारे प्रधान मंत्री जी जाने जाते थे,गुड गवर्नेन्स और डैवलपमैन्ट मॉडल के लिए,सुशासन और विकास की राजनीति के लिए,गुजरात में कई वर्षों तक करने के बाद देश को भी उसका लाभ मिले,जिस तरह से देश की जनता ने सोचा था,उसी तरह से माननीय प्रधान मंत्री जी ने करने का प्रयास किया। सबसे बड़ी जरूरत छवि और सोच को बदलने की थी। मैं यही कहना चाहूंगा -“सोच को बदलो तो सितारे बदल जायेंगे,नजर को बदलो तो नजारे बदल जायेंगे,मंजिल पानी हो तो किश्तियां मत बदलना,दिशा को बदलो तो किनारे बदल जायेंगे।” 67वर्षों में हिन्दुस्तान की गरीब जनता,आधे से ज्यादा आबादी और परिवारों के बैंक खाते तक नहीं थे,अर्थव्यवस्था के साथ उनके जुड़ने का कोई चारा तक नहीं था। शायद उन्हें आजादी के जो सपने दिखाये गये थे,उन्हें 67वर्षों में पूरा नहीं किया गया। लाल किले की प्राचीर से प्रधान मंत्री जी ने जब निर्धनता उन्मूलन के लिए वित्तीय समावेश की बात कही,तब शायद हममे से अधिकतर लोग समझ नहीं पाये,लेकिन चंद ही दिनों में जब प्रधान मंत्री जन धन योजना की शुरूआत की गई और मात्र छः महीने का लक्ष्य रखा गया,तब भी शायद लोगों को लगता था कि क्या यह हो पायेगा,क्या यह संभव होगा?लेकिन छः महीने का समय भी उसके लिए ज्यादा समय था,हमारी सरकार ने विश्व रिकार्ड बनाया है,छः महीने से कम समय में 13.2करोड़ नये बैंक खाते खोलकर हिंदुस्तान में लगभग हर परिवार को बैंक के साथ जोड़ा है। 11.5करोड़ से ज्यादा रुपये डैबिट कार्ड दिये गये और जो बैंकों को एक चिंता थी कि कहीं उन बैंक खातों में कुछ जमा नहीं होगा। हालांकि माननीय प्रधान मंत्री जी ने कहा था कि कोई पैसा भी जमा नहीं होगा,तब भी आप बैंक खाता खुलवा सकते हो। आपको किसी की गारंटी की जरूरत नहीं है। इसके बावजूद हिंदुस्तान की महान जनता ने प्रधान मंत्री जी पर विश्वास रखते हुए बैंक खाते भी खुलवाये और उनमें 11हजार करोड़ रुपये पिछले छः महीनों में जमा हुए हैं। यह अपने आप में बहुत बड़ी उपलब्धि है। जो शायद दुनिया में कोई देश सोच नहीं सकता था,हमारी सरकार ने मात्र 6महीनों के कार्यकाल में कर के दिखाया है। यही नहीं,मैं बैंकों के अधिकारियों का भी आभार प्रकट करना चाहता हूँ,जिन्होंने दिन-रात एक कर के इस काम को पूरा किया है। वित्त मंत्रालय के लोगों ने माननीय प्रधान मंत्री जी की सोच को आगे बढ़ा कर उस लक्ष्य को पूरा किया है। जो 60साल मे नहीं हो पाया,वह हमने 6महीने में कर दिखाया है। शायद इसी के लिए माननीय मोदी जी को जाना जाता है।
देश की गरीब जनता को आजादी के समय के बाद लगता था कि अंग्रेज़ चले गए,शायद अब सर ढंकने के लिए छत मिल जाएगी,अपना घर मिल जाएगा,लेकिन 67वर्षों में भी उनको सर ढंकने के छत या घर नहीं मिल पाया और शायद इसी कमी को ले कर बहुत सी सरकारें आईं और चली गईं। बड़े-बड़े वादे होते गए। लेकिन माननीय प्रधान मंत्री जी ने कहा है कि ‘Housing for all’ by 2022. यानि हम अपनी आजादी की 75वीं वर्षगांठ मानाएंगे तो हिंदुस्तान के हर परिवार के पास अपना घर होगा और इस सपने को भी हम पूरा कर के दिखाएंगे। आखिर वह गरीब जो घर बनाने का सपना देखता है,जब मेरा कोई मित्र दूसरी तरफ से यह कहता है कि पैसा कहां से आएगा,चिंता मत कीजिए,पैसे की कमी गरीब के घर के लिए नहीं आने देंगे,एक-एक व्यक्ति को घर बना कर देगी तो मोदी सरकार बना कर देगी। हम इसको पूरी जिम्मेदारी के साथ कहते हैं। हम इसको पूरी जिम्मेदारी के साथ कहते हैं और हमने राज्यों की सरकारों को आवास कार्यक्रम की रूपरेखा तैयार करने के लिए कहा है। एफडीआई को उदार बनाया है। हाऊसिंग लोन में कर संबंधी प्रोत्साहन में बढ़ोत्तरी की है। शायद इससे आपको जानकारी मिल जाएगी कि इससे क्या-क्या लाभ मिलने वाला है। मैं यह कहना चाहता हूँ कि हमने सन् 2022तक कहा है,जो 67वर्षों में नहीं कर पाए,वह 7वर्षों में कर दिखाएंगे,इस बात का विश्वास दिलाने आया हूँ। यही नहीं,जब अपना घर होगा,अपना भारत मज़बूत हो रहा होगा,तो वहीं पर स्वच्छ भारत का सपना जो माननीय प्रधान मंत्री जी ने देखा है,एक स्कूल के बच्चे से ले कर,आज एक सांसद तक,उसको अपना संकल्प बना कर चला हुआ है। From a child to a celebrity, to a common man, everyone has acknowledged it, appreciated it; and has pledged to work for the Clean India Mission.
मुझे लगता है कि यह देश में पहली बार हुआ जब किसी प्रधान मंत्री ने अपने देश को साफ रखने के लिए अपने हाथ में झाड़ू भी उठाया,एक बार नहीं कई बार उठाया और देश को साफ करने का प्रयास किया है। शायद बहुत सारे लोग उस समय भी उंगली उठाते थे कि आखिरकार इससे क्या होगा,लेकिन जब प्रधान मंत्री जी ने स्कूल के बच्चों से बात की तो आपको जान कर प्रसन्नता होगी कि शायद बड़े बुज़ुर्गों में उतना बदलाव नहीं आया,लेकिन आज के बच्चे देश को बदलने के लिए तैयार हो गए हैं,वे अपने माँ-बाप को भी रोकते हैं और अपने देश को साफ-सुथरा रखने के लिए तैयार हैं। जब स्मृति ईरानी जी ने सभी सांसदों को चिट्ठी लिखी कि हमें अपने हर स्कूल में बच्चों के लिए शौचालय बनाने हैं और बेटी के लिए विशेष तौर पर बनाना है तो मुझे सदन में खड़े हो कर यह कहते हुए प्रसन्नता होती है कि पूरे देश में मेरा लोक सभा क्षेत्र,हमीरपुर एक ऐसा क्षेत्र है,जहां पर पिछले पांच वर्षों में मैंने अपने हर स्कूल में शौचालय की सुविधा बना कर दी है। मुझे आशा है कि 15अगस्त, 2015 तक हर स्कूल में शौचालय बनाने का जो लक्ष्य रखा गया है,जो हम पिछले 60वर्षों में नहीं कर पाए,वह हम इकट्ठे मिल कर अगले 6महीने में कर के देंगे,इस बात का भी मैं आप सबसे आश्वासन चाहता हूँ।
यह बैज,जो मैं यहां पर लगा कर खड़ा हूँ,वह बेटी बचाओ,बेटी पढ़ाओ का बैज है। इसकी शुरूआत कहां से हुई?माननीय प्रधान मंत्री जी ने हरियाणा के ही एक शहर से इस प्रोग्राम की शुरूआत की थी। यह लड़ाई हमें कन्या भ्रूण हत्या के खिलाफ लड़नी है कि इस हत्या को रोका जाए,बेटी को पैदा होने का अवसर दिया जाए,बेटी को अच्छी शिक्षा दी जाए,बेटी को समाज में वे सभी सुविधाएं दी जाएं,जिसकी वह हकदार है,इस सोच को बदलने की जरूरत है और सोच बदलने की शुरूआत माननीय प्रधानमंत्री जी ने कर दी है। इस देश में कुछ लोग आजादी के 67वर्षों के बाद भी महिलाओं को कमजोर समझते हैं। मैं कहना चाहता हूँ कि-सोचो ना समझो लाचार है औरत,जरूरत पड़े तो तलवार है औरत,माँ है,बहन है,पत्नी है,हर जिम्मेदारी के लिए तैयार है औरत। जरूरत है तो केवल एक अवसर देने की और हमारी सरकार वह अवसर दे रही है।
सुकन्या समृद्धि खाता,एक लघु बचत योजना हमारी सरकार शुरू करने जा रही है। इससे बच्चियों को न केवल उनके जीवन में समृद्धि लाने के लिए,बल्कि उनकी अच्छी शिक्षा हो और बेटी को आगे बढ़ने का पूरा अवसर मिले,तो मुझे पूर्ण आशा है कि इस कार्यक्रम के माध्यम से पूरे देश भर की बेटियों को आगे बढ़ने का अवसर मिलेगा।
हमारे प्रधानमंत्री जी ने जिस विस्तार से ऊर्जा की जरूरतों का जिक्र किया,उसने देश को नई ऊर्जा दी है। कल्पना कीजिए,ऊर्जा के सात घोड़ों पर सवार बिजली जब सबकी पहुँच में होगी तो क्या नजारा होगा। इसके लिए प्रयास आरम्भ हो चुके हैं। मैं कई बार सोचता हूँ कि पिछली सरकारों और हममें अंतर क्या है?फर्क यह है कि इनकी सोच मेगावॉट तक सीमित थी,हम गीगावॉट के लिए प्रयासरत हैं। मैं यह कहना चाहता हूँ कि 67वर्षों के बाद आज भी लगभग 28करोड़ लोग यानी कि साढ़े 5करोड़ से ज्यादा परिवार बिजली के बिना रहते हैं,उनके घरों में बिजली नहीं है। देश भर में लोड शेडिंग,पॉवर कट,ये आम समस्यायें हर राज्य की बन गई हैं। इससे बच्चों की पढ़ाई पर प्रभाव पड़ता है। युवाओं के लिए रोजगार नहीं होते,क्योंकि उद्योग 24घंटे नहीं चल पाते हैं। इंडस्ट्रियल प्रोडक्शन पर फर्क पड़ता है। हमारी सरकार ने इसीलिए प्रयास किया है कि 24गुना 7यानी लगातार 24घंटे,सातों दिन,पूरे 365दिन देश में बिजली मिले,उसके लिए हमारी सरकार लगातार प्रयासरत है। उसी दिशा में जो हमने काम किया है,उसके कुछ आँकड़े मैं आपको सामने रखना चाहता हूँ। थर्मल बेस्ड जो हमारी इलेक्ट्रिसिटी जनरेशन होती है,जून 2013से लेकर 2014तक 15.8प्रतिशत उसमें वृद्धि हुई है। कोयले से बनने वाली बिजली में जून और नवम्बर 2014के बीच में 8.4प्रतिशत की वृद्धि हुई है और कुल मिलाकर 50परसेन्ट हमारी कैपेसिटी में बढ़ोत्तरी हुई है। अभी भी अगर आप देखें कोयले का आवंटन जो पिछली सरकार के समय हुआ था,इस सदन और सदन के बाहर उस पर बहुत सारी चर्चा हुई। बड़े घोटाले के रूप में उसको देखा गया,लेकिन तब यह कहकर मजाक में टाल दिया जाता था कि जीरो लॉस हुआ है।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद जब ये कोल आवंटन रद्द हुए तो 204ब्लॉक्स को आवंटित करने के लिए हमने ई-ऑक्शन का,एक पारदर्शी तरीके का,ताकि निष्पक्ष और पारदर्शी ऑक्शन हो,हमारी सरकार ने जिस पारदर्शी ढंग से इस ऑक्शन को अपनाया,उसके नतीजे आप सबके सामने हैं। मैं सदन को जानकारी देना चाहता हूँ कि 204में से अभी तक केवल 18कोल ब्लॉक्स का आवंटन हुआ है,जो ऑक्शन हुए हैं,उससे एक लाख दो हजार करोड़ रूपया अब तक हमने इकट्ठा किया है।
महोदया, 204 कोल ब्लॉक्स में से अभी मात्र 18ब्लॉक्स की ई-ऑक्शन हुई है और उससे भी 1.2लाख करोड़ रूपए अभी तक इकट्ठे हुए हैं। मुझे इससे ज्यादा कुछ नहीं कहना है। पिछली बार जब बांटे गए थे तो उसमें देश को कितना नुकसान हुआ था। हम देश का लुटा हुआ खजाना आज देश में वापस लेकर आए हैं। घर की चिन्ता छोड़ दीजिए,अगर 204में से 18ही 1.2लाख करोड़ रुपये ला सकते हैं तो जब पूरे 204बँट जाएँगे तो सोचिए कि कितने लाख करोड़ रुपये आएँगे। हर घर में बिजली भी आएगी और हर घर बनाने के लिए पैसा भी आएगा। यही नहीं,इनसे हमारी जो फ्यूल कॉस्ट है,उसमें भी कमी आएगी और 37हज़ार करोड़ रुपये तक उसमें कमी आएगी। इसका सीधा-सीधा लाभ पूर्वी राज्यों को मिलेगा। ओडिशा,झारखंड,वैस्ट बंगाल,छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों को इसका सीधे तौर पर लाभ मिलने वाला है। अगर कुल मिलाकर देखें तो अलग अलग राज्यों में -ओडिशा को अब तक 515करोड़ रुपये,मध्य प्रदेश को 35588करोड़ रुपये,पश्चिम बंगाल को 11203करोड़ रुपये,महाराष्ट्र में 1602करोड़ रुपये,झारखंड में 12622करोड़ रुपये और छत्तीसगढ़ में 47553करोड़ रुपये,और कुल मिलाकर 1,09,084करोड़ रुपये अब तक इकट्ठे हुए हैं। इसमें पावर टैरिफ में कंसैशन क्या होगा,वह भी लगभग 37हज़ार करोड़ रुपये का होगा। आप अंदाज़ा लगाइए,बिजली सस्ती भी मिलेगी और 24घंटे भी मिलेगी और देश का खजाना जो कल तक लुट गया था,जो कोयले की खदानें थीं,वे आज सोने की खदानों से ज्यादा महंगी बिक रही हैं। यह किया है तो मोदी सरकार ने किया है और सही मायने में अच्छे दिन आ गए हैं। यही नहीं,मेरे हरियाणा के भाई कह रहे हैं,काफी वर्ष वहाँ पर रहे,लेकिन वहाँ पर 24घंटे बिजली मिल नहीं पाई लेकिन हम आपको 24घंटे बिजली देंगे। ...(व्यवधान)यह जो 37प्रचालित खदानें हैं ...(व्यवधान) इससे कोयले की खदानों का उत्पादन बढ़ेगा,आयात बिल घटेगा,विदेशी मुद्रा भंडार सुदृढ़ होगा और कोयला उपकर का संग्रह बढ़ेगा जिसका उपयोग स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन और गंगा के कायाकल्प के लिए किया जाएगा। इसके अतिरिक्त भारत के विनिर्माण को नई गति मिलेगी,आर्थिक वृद्धि की प्रेरणा मिलेगी और स्टैन्डर्ड विद्युत संयंत्रों की अनेक समस्याओं का समाधान होगा और बैंकों के एन.पी.ए. अकाउंट्स में भी कमी आएगी। यानी कि एक काम में आपने पारदर्शिता लाई,देश के खजाने में वृद्धि हुई,बिजली 24घंटे मिलने की शुरूआत होगी और साथ ही साथ रोज़गार भी मिलेगा। अच्छे काम अच्छे मन से किए जाएँ तो उसके अच्छे रिज़ल्ट भी आते हैं और वह अच्छे दिन भी लाते हैं,इससे पता चलता है। ...(व्यवधान) अगर आप बार-बार ऐसे कहेंगे तो मैं यही कहूँगा -
“अभी न पूछो हमसे मंज़िल कहाँ है, अभी तो हमने चलने का इरादा किया है, न हारे हैं न हारेंगे कभी, यह किसी से नहीं, खुद से वादा किया है।” महोदय,भारत गाँवों में बसता है और हममें से अधिकतर सांसद गाँवों से चुनकर आते हैं। मनरेगा की बात कई बार यहाँ पर की गई। हमारी सरकार ने प्रयास किया है कि कृषि का आधारभूत ढाँचा सुदृढ़ करने के लिए मनरेगा का भी ढाँचा सुदृढ़ किया जाए और 60प्रतिशत आधारभूत ढाँचा इसके माध्यम से वहाँ पर खड़ा हो पाए। गाँवों में रहने वाले किसान के बेटे को प्रशिक्षण कैसे दिया जाए,तो इसके लिए हमने हुनरमंद भारत,यानी स्किल इंडिय़ा कैम्पेन के अंदर प्रशिक्षण देने की शुरूआत की है। दीनदयाल उपाध्याय ग्रामीण कौशल योजना की शुरूआत की है और इसी के माध्यम से गाँवों के लिए दीनदयाल उपाध्याय अंत्योदय योजना की शुरूआत भी हमने गांवों के लिए की है। गाँवों के बारे में हमारी सरकार पूरी तरह से प्रतिबद्ध है और यह इसी बात से पता चलता है जब माननीय प्रधान मंत्री जी ने शुरूआत में ही कहा था कि हर सांसद को आदर्श ग्राम योजना के साथ जुड़ना होगा। मैंने तो अपने लोक सभा क्षेत्र में गाँव धेला को चुन लिया है। मैं आशा करता हूँ कि आप लोगों ने भी अपना-अपना गाँव चुन लिया होगा। जब हर सांसद एक-एक गाँव आदर्श गाँव के रूप में बनाना शुरू करेगा,हर विधायक भी इसकी शुरूआत करेगा,जिला परिषद् का सदस्य भी करेगा...(व्यवधान)जिला परिषद का सदस्य भी हर गांव को आदर्श गांव बनाने की शुरूआत करेगा,हम यहां से शुरूआत करेंगे...(व्यवधान)मुझे यह लगता था कि जब मैं गांव की बात करता हूं तो मेरे शहर से चुने जाने वाले मित्र भी कहेंगे कि हां,हिन्दुस्तान के गांवों में भी विकास होना चाहिए। सड़क,पानी और शिक्षा की सुविधा होनी चाहिए...(व्यवधान)जो प्रधानमंत्री जी की सोच है,उसको पूरा करना चाहिए...(व्यवधान)देश के हर गांव को आदर्श बनाना चाहिए। मैं आप सब से सहयोग मांगने आया हूं और आशा करता हूं कि आप सब सहयोग करेंगे। पैसा आता है,लेकिन सोच सही होनी चाहिए। प्रधानमंत्री जी सही सोच के साथ चले हैं,हम उनके साथ चलेंगे और देश में आदर्श गांव का निर्माण करके दिखाएंगे।
मित्रो,यही नहीं,इस वजह से जो पलायन होता है,गांव का युवा,गांव का नौजवान जब पढ़ने-लिखने के बाद पलायन करता है,शहर में नौकरी ढूंढने के लिए आता है तो इससे पलायन पर भी रोक लगेगी। जब उसके अपने गांव में सुविधा होगी,अच्छी शिक्षा मिलेगी, सड़क और पानी की सुविधा मिलेगी,रोजगार के लिए उसको परीक्षण दिया जाएगा तो निश्चित तौर पर बहुत सारी समस्याओं का समाधान हो पाएगा।
मित्रो,हमने शुरू में ही कहा था कि सबका साथ,सबका विकास। आप निश्चिंत रहिए,जब सबका साथ,सबका विकास की बात की जाती है तो आप सब के लोक सभा क्षेत्र में भी भरपूर विकास होगा। हमारी सरकार मैक्सिमम गवर्नेंस,मिनीमम गवर्नमेंट के नारे पर काम करती है। यह हमारी कार्यपद्धति है और शायद इसीलिए मैं आज यहां खड़ा होकर गर्व के साथ कह सकता हूं कि हमारी सरकारें चाहे गुजरात की हो,मध्य प्रदेश की हो,छत्तीसगढ़ की हो या अन्य किसी राज्य में जहां भी भारतीय जनता पार्टी की सरकारें हैं। आदरणीय मोदी जी ने गुजरात में आज से 12साल पहले शुरूआत की थी और कृषि के क्षेत्र में भी 12परसेंट से ज्यादा विकास दर हासिल की है और वह लगातार दस वर्षों तक होती रही। उसको देख कर मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ आगे बढ़ा है। मध्य प्रदेश तो 18परसेंट से ज्यादा आगे निकल गया है। आइए,इकट्ठे मिलकर अपने-अपने राज्यों में शुरूआत करें। किसानों को सम्पन्न करें। गांव को आदर्श बनाने का प्रयास करें। इससे गांव में रहने वाले किसान को लाभ मिल पाएगा।
हम टेक्नोलॉजी के माध्यम से गांव को जोड़ना चाहते हैं। डिजीटल इंडिया मिशन कोई छोटा प्रोग्राम नहीं है ढाई लाख गावों को पहले चरण में जोड़ा जाएगा। हमारी सरकार इसके लिए पूरी ताकत के साथ लगी हुई है। आप अंदाजा लगाइए कि गांव में रहने वाला व्यक्ति जब बीमार होता है और वह पीएचसी पर जाता है। लेकिन डॉक्टर वहां उपलब्ध नहीं होता है तो उसकी क्या हालत होती होगी?बहुत सारे लोग मेरे और आपके क्षेत्र में बड़े अस्पताल तक पहुंचते-पहुंचते दम तोड़ देते हैं। उनकी हालत क्या होती होगी?एक गर्भवती महिला अपने पेट से एक बच्चे का जन्म देने का इंतजार कर रही होती है। कभी बच्चा पेट में मर जाता है और कभी हमारी गर्भवती बहन की मृत्यु हो जाती है। क्या हम नहीं चाहते हैं कि समय पर सभी को इलाज की सुविधा मिले?आखिरकार अगर हमें गांव में स्वास्थ्य की सुविधा को अच्छा करना है,शिक्षा की सुविधा को अच्छा करना है,तो सभी को मिलकर यह काम करना होगा। आप अपना पक्ष रखिए,मैं अपना पक्ष रखूंगा।
डिजिटल इंडिया के माध्यम से,टेक्नोलोजी के माध्यम से ई-लर्निंग,ई-गवर्नेंस,ई-फार्मिंग,ई-मेडिसिन क्यों नहीं हो सकता है। जब किसान को रीयल टाइम डाटा मिलेगा और उसे पता चलेगा कि किस समय पर किस चीज की खेती करनी है,कौन-सा बीज बोना है,मार्केट में किस प्रोडक्ट की क्या कीमत मिलने वाली है,कब सामान बेचना है,मार्केट लिंकेज प्रोपर होगी तो निश्चित तौर पर टेक्नोलोजी का वहां लाभ होगा। जब गांव में पढ़ने वाले विद्यार्थी के लिए टीचर नहीं होते होते और वर्चुअल क्लास रूम के माध्यम से,अच्छे शिक्षक के माध्यम से गांव के पिछड़े से पिछड़े क्षेत्र में रहने वाले बच्चे को अच्छी शिक्षा देंगे,तो निश्चित तौर पर गांव में पढ़ने वाला बच्चा भी शहर के साथ पढ़ने वाले बच्चे के साथ कंधे से कंधा मिलाकर उसे चुनौती दे सकेगा। जब हम ई-गवर्नेंस की बात करते हैं या ट्रांसपेरेंसी की बात करते हैं,तो शायद आज विपक्ष में बैठे लोगों को चुभता होगा,लेकिन हम पारदर्शिता में विश्वास रखते हैं और ई-आक्शन इसका सबसे बड़ा नमूना होगा,जिसके कारण एक लाख नौ हजार करोड़ रुपया इकट्ठा हुआ है।
जब ये सब एक-एक करके होगा तो डिजीटल इंडिया मिशन के अंतर्गत इन सब का लाभ मिलने वाला है। मुझे लगता है कि आप हमें इसमें सहयोग करेंगे। mygov.in - यह जो ऑनलाइन प्लेटफॉर्म है,इस पर देश के लोग अपनी बात प्रधान मंत्री जी के सामने रखते हैं,मंत्रियों के सामने रखते हैं। स्वच्छ भारत मिशन,नमामि गंगे,प्रधान मंत्री जन धन योजना,नीति आयोग जैसे कार्यक्रमों के लिए देश भर के लोगों ने अपने विचार रखे हैं। मुझे लगता है कि टेक्नोलॉजी का जो बहुत बड़ा लाभ मिलता है,हमें उसका लाभ उठाना चाहिए। अगर भारत को नॉलेज-बेस्ड इकोनॉमी बनाना है तो हमें डिजीटल इंफ्रास्ट्रक्चर को और सुदृढ़ करना होगा,टेक्नोलॉजी का लाभ उठाना होगा और कहीं-न-कहीं जो हम पिछले 67वर्षों में कमी देखते आ रहे हैं,उस कमी को पूरा करना होगा।
मुझे आज यहां खड़े होकर यह कहते हुए खुशी हो रही है कि जो विकास दर पिछले दस वर्षों में गिरती चली जा रही थी,वह ठीक हो रही है। अटल जी वर्ष 1998में आए तो 3.8औ से लेकर 8.2औ पर विकास दर छोड़ कर गए। पिछली यूपीए सरकार ने उसे 4.5फीसदी पर लाकर खड़ा कर दिया। आज मैं यहां पर खड़ा होकर कहता हूं कि नौ महीने के अंदर हमने विकास दर को 7.4फीसदी पर लाकर खड़ा कर दिया है।
मित्रो,महंगाई दर,जिसे पिछले लगातार दस वर्षों में आप कम नहीं कर पाए,मैं आदरणीय प्रधान मंत्री जी और वित्त मंत्री जी का आभार प्रकट करना चाहता हूं कि हमारी सरकार ने नौ महीने के अंदर महंगाई दर को सबसे कम करके दिखाया है। आखिर यह क्यों हुआ?यही तो अच्छे दिनों की शुरूआत है,है या नहीं है?...(व्यवधान)विकास दर बढ़ रही है,महंगाई दर कम हो रही है और फूड इंफ्लेशन तो सबसे कम है। Food inflation is at record low. अगर इतना कम फूड इंफ्लेशन है तो अपने आप में यह पता चलता है कि महंगाई कितनी कम हुई है।
पूंजी बाजार की बात की जाए तो पूंजी बाजार यह संकेत देता है कि इस सरकार के आने के बाद बाज़ार का सेंटीमेंट क्या है। जिस दिन मोदी जी ने शपथ ली है,बाजार का सेंटीमेंट बहुत अच्छा है और पूंजी बाजार ऊंचाई के स्तर पर लगातार चल रहा है।...(व्यवधान)
मित्रो,ये लोग जो बार-बार छींटाकशी करते हैं,मैं उन्हें यही कहना चाहता हूं - “चांद का दाग देखने वालों,अपने दामन के दाग भी देखो।” यही नहीं,जो दुनिया भर की कंपनियां यहां आयी थीं,उन्हें आपने पिछले दस वर्षों में चलता कर दिया। Ease of doing business was not there in the country. काम करने की सरलता यहां पर बिल्कुल नहीं थी। भ्रष्टाचार का बोलबाला था। अब कौन-कौन से टैक्स किस-किस मंत्रालय में लगते थे,मैं उस पर नहीं जाना चाहता हूं। फाइल आगे नहीं बढ़ती थी,वह हमने नहीं कहा,वह आपकी ही एक पूर्व मंत्री ने आपके ही एक नेता का नाम लिया है।...(व्यवधान)अब वह नेता है या नहीं है,यह चिंतन आपको करना है। चिंता उस समय देश को होती थी,चिंतन करना आपकी जरूरत है,आपको करना चाहिए। जब आपकी पूर्व मंत्री इस तरह की बातें करती हैं तो देश की जनता यह जानना चाहती है कि आखिर कौन व्यक्ति उस समय किस तरह का टैक्स लगाया करता था,ताकि फाइल आगे मूव करे,आगे बढ़े और विदेशी कंपनियां वापस चली जाती थीं। हिन्दुस्तान की कंपनियां भी विदेश में पैसा लगाने पर मज़बूर हो जाती थीं।
रेट्रोस्पेक्टिव टैक्स एक और दुविधा थी। आपके एक निर्णय के कारण पूरी दुनिया भर में भारत की छवि बदली। यह किसी भी नयी सरकार के लिए एक बहुत बड़ा कदम था,मुश्किल कदम था कि आखिरकार हाई कोर्ट की जजमेंट के बाद उसे चुनौती दे या न दे,लेकिन हिन्दुस्तान में निवेश आए,दुनिया भर की नज़रें हिन्दुस्तान की तरफ हों,हिन्दुस्तान को एग्रेसिव्ली प्रोमोट किया जाए कि यहां पर निवेश हो,रोज़गार मिले,मेक इन इंडिया प्रोग्राम को बल मिले। हमारी सरकार ने वह कदम भी उठाया और पूरी दुनिया को सही संदेश देने का प्रयास किया है। उसके लिए मैं माननीय प्रधान मंत्री जी के प्रति बहुत-बहुत आभार प्रकट करता हूं।
मित्रो,अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर जिस किसी भी सम्मेलन में माननीय प्रधानमंत्री जी गए हों,वहां पर भारत की अमिट छाप छोड़कर आए हैं। चाहे वह काले धन का विषय हो,हमने हिंदुस्तान की जनता से वादा किया था कि हम सत्ता में आएंगे तो विदेशों में पड़ा काला धन वापस लेकर आएंगे। हमारी प्रतिबद्धता इससे नजर आती है कि सत्ता में आते ही शपथ में लेने के बाद पहली कैबिनेट मीटिंग में एसआईटी का गठन करके काला धन वापस लाने का प्रयास हमने शुरू कर दिया है,इसकी शुरूआत कर दी है। ...(व्यवधान)यही नहीं,इंटरनेशनल प्लेटफार्म पर भी ...(व्यवधान)
आदरणीय अध्यक्ष महोदया,मैं चाहूंगा कि टोकाटाकी न करें। मैं यही कहूंगा कि आओ एक-दूसरे का गम बांटे,कुछ हमारी सुनो,कुछ अपनी कहो। ...(व्यवधान)आपको भी अपनी बात कहने का अवसर मिलेगा। हमने काले धन की बात देश के अंदर एसआईटी का गठन करके की है। सुप्रीम कोर्ट उस पर नजर रखे हुए है। लगातार जितनी तेजी के साथ हमने काम किया है,काश आपने पिछले 10वर्षों में किया होता तो आज वह सारा पैसा हिन्दुस्तान में वापस आ गया होता।...(व्यवधान)
मोदी जी की सरकार के प्रयासों ने विश्व में भारत की समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर और परम्पराओं को मान्यता दी है। संयुक्त राष्ट्र की आम सभा में प्रधानमंत्री जी के आह्वान पर ठीक 75दिन में संयुक्त राष्ट्र ने 11दिसम्बर, 2014 को 193 देशों में से रिकॉर्ड 177सह-समर्थकों के साथ 21जून को अन्तर्राष्ट्रीय योग दिवस के रूप में घोषित करने का ऐतिहासिक निर्णय लिया। मैं अपनी ओर से,आदणीया अध्यक्षा जी,आपकी ओर से और पूरे सदन की ओर से माननीय प्रधानमंत्री जी का बहुत-बहुत आभार प्रकट करता हूँ। जिस सोच के साथ प्रधानमंत्री जी ने भारत की उस खराब छवि को बदलने का प्रयास किया,उसमें हमें बहुत सफलता मिली है। भ्रष्टाचार के दाग भारत के ऊपर लगे थे,पॉलिसी पैरालाइसिस था,इनडिसाइसिवनेस थी,निर्णय लेने की पुरानी सरकार में क्षमता नहीं थी और हिन्दुस्तान की जनता आपसे मुक्ति चाहती थी। जो अच्छे दिनों की बात हमने कही थी,लोग कहते थे कि बहुत हुई भ्रष्टाचार की मार,अबकी बार मोदी सरकार,बहुत हुई महंगाई की मार,अबकी बार मोदी सरकार,वह सही मायने में पिछले 9महीनों में देखने को मिला है। अब महंगाई धरातल पर है और विकास दर लगातार बढ़ रही है। मेक इन इंडिया प्रोग्राम को बल मिल रहा है और स्किल इंडिया कैम्पेन को भी हम आगे बढ़ा रहे हैं।
अगर आप खेलों की बात देखें तो पंडित मदन मोहन मालवीय शिक्षण और प्रशिक्षण प्रोग्राम,राष्ट्रीय मिशन के अन्तर्गत इसकी शुरूआत की गई है। वैज्ञानिक सोच को विकसित करने के लिए राष्ट्रीय आविष्कार अभियान चलाया जा रहा है,ताकि बच्चों में वैज्ञानिक सोच बढ़ सके और हम नई इनोवेशंस कर सकें। यह सोच अगर पहले कभी की गई होती तो इसमें और बल मिलता। हमारे दूर-दराज के क्षेत्रों में शिक्षा की पहुंच को सुनिश्चित करने के लिए,उत्तर-पूर्व क्षेत्र के विद्यार्थियों पर विशेष ध्यान देते हुए ईशान विकास और ईशान उदय नामक योजनाओं की शुरूआत की गई है। खेलों में भारत ज्यादा से ज्यादा मेडल जीते,इसके लिए टार्गेट ओलंपिक पोडियम स्कीम की शुरूआत की गई है। एक सौ करोड़ रूपए का कॉर्पस फंड बनाया गया है। नेशनल स्पोर्ट्स डेवलपमेंट फंड के अंतर्गत ओलंपिक, 2016 और 2020 में हम ज्यादा मेडल जीत सकें,इसके लिए कमेटी का गठन किया गया है। इसमें 75से ज्यादा खिलाड़ियों को वर्ष 2016के लिए चुन लिया गया है,ताकि वर्ष 2016के ओलंपिक में हम मेडल जीत सकें और वर्ष 2020के लिए भी ज्यादा से ज्यादा प्रयास करें। लक्ष्य ओलम्पिक पोडियम के बारे में,मैं यहां पर बार-बार बात कह रहा हूं,छोटे बच्चों पर कैसे ध्यान दिया जाए,इसलिए टैलेन्ट रिसर्च प्रोग्राम,उसकी भी सोच अगर किसी ने रखी है ताकि 8साल से 12साल के बच्चों को जिनमें टैलेन्ट है, "कैच देम यंग'यानि कि उनको किशोरावस्था में प्रशिक्षण दिया जाए ताकि वे भारत के लिए मैडल जीत सके,उसकी शुरुआत भी हमारी सरकार ने की है। "हुनर है तो कल्याण है',यह बहुत जरूरी है। हिन्दुस्तान में अधिकतर कम्पनियों में देखा जाए तो लाखों पद रिक्त पड़े हैं लेकिन करोड़ों नौजवान हाथों में डिग्री लेकर बेरोजगार घूम रहे हैं। शायद हमारे एजुकैशन में और इंडस्ट्री की रिक्वायरमेन्ट में थोड़ा अन्तर है। शायद जो पढ़ाया जाता है वह इंडस्ट्री के डिमाण्ड के एकॉर्डिंग नहीं है। स्किल डेवलपमेन्ट कैसे की जाए,इंडस्ट्री के अनुसार उसको कैसे तैयार किया जाए,चाहे वह ग्रामीण क्षेत्र से हो या शहरी क्षेत्र से हो,उसके लिए भी हमारी सरकार ने न केवल एक नए मंत्रालय का गठन किया है बल्कि उसके अन्तर्गत पूरे देश भर में करोड़ों नौजवानों को प्रशिक्षण देने की एक नई शुरुआत की है। मैं देश भर की युवाओं की तरफ से प्रधानमंत्री जी का आभार प्रकट करता हूं।
मित्रो,जब किसानों की बात आती है तब हम में से बहुत सारे लोगों ने पिछले सत्रों में सूखे पर और बाढ़ पर कई-कई घंटों तक चर्चा की,लेकिन शायद इस 66वर्षों में किसी ने नहीं सोचा होगा कि आज भी हमारे देश का किसान मौसम पर,बारिश पर और भगवान भरोसे क्यों रहता है,क्योंकि उनके खेतों तक सिंचाई की सुविधा नहीं है,वहां तक पानी की पाइप लाइन नहीं पहुंचती है,ड्रिप इरिगैशन की सुविधा नहीं है। शायद गुजरात में माननीय प्रधानमंत्री जी ने करके दिखाया है,वाटर हार्वेस्टिंग जो कर के दिखाई थी,कृषि के विकास दर में जो वृद्धि लाकर दी थी,उसका लाभ आज देश को मिल सकता है और इसकी शुरुआत उन्होंने सबसे पहले की है। उन्होंने इसके लिए "सॉइल हेल्थ कार्ड स्कीम'से शुरुआत की है जिसके लिए 500करोड़ रुपए का कॉरपस रखा गया है और "प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना" की भी शुरुआत की गई है ताकि किसानों के खेतों तक सिंचाई योजना के माध्यम से पानी पहुंच सके। इसके लिए भी मैं माननीय प्रधानमंत्री जी का बहुत-बहुत आभार प्रकट करता हूं। जब तक सॉइल की गुणवत्ता नहीं पता लगेगी तब तक शायद संभव नहीं है कि किस क्वालिटी के सॉइल से किस खेत में क्या किया जा सकता है?हमारे देश के किसानों को उसका लाभ भी मिलेगा और निश्चित तौर पर आने वाले वर्षों में उसका लाभ किसानों को मिलने वाला है। ...(व्यवधान)
"मेक इंन इंडिया" प्रोग्राम में एम.एस.एम.इज. का बहुत बडा सहयोग होता है। पूरे देश में करोड़ों लोगों को रोजगार देने वाली उद्योग,उसको भी बल देने के लिए हमारी सरकार ने कई कदम उठाए हैं। इसमें से 21समूहों को कला कौशल और सार्वजनिक सुविधाओं के लिए 965गतिविधियों के जरिए प्रदान किए जा रहे हैं। यही नहीं,देश के युवाओं को अच्छी शिक्षा के साथ-साथ प्रशिक्षण मिले,इन सब के लिए हमने जो काम किया है,उससे देश को लाभ मिलेगा।
मैं अपनी बात को समाप्त करने से पहले एक-दो बातों की ओर आपका ध्यान आकर्षित करना चाहता हूं। "मेक इन इंडिया" प्रोजेक्ट को सफल बनाने के लिए क्या-क्या करना है? "मेक इन इंडिया" इस सरकार का एक फ्लैगशिप प्रोग्राम है,जिसकी चर्चा आज दुनिया भर में होती है,लेकिन चर्चा तो वापस शुरू हो गई है,लोग आकर्षित भी होने शुरू हो गए हैं। छवि को बदलने की सबसे पहले जरूरत थी। रेट्रोस्पेक्टिव टैक्सेज न लगाए जाएं,जी.एस.टी. को लागू किया जाए। हिन्दुस्तान में ईज ऑफ डूइंग बिजनस हो और पावर सप्लाई 24घंटे हो ताकि ज्यादा से ज्यादा उद्योग लग सकें। हम उद्योगों के लिए स्किल्ड मैन पावर लाकर दें और इसके साथ-साथ डिजिटल इफ्रास्ट्रक्चर पूरे देश में खड़ा करें। भ्रष्टाचार मुक्त भारत हो और सुशासन देश में आए,येसब "मेक इन इंडिया" को सफल बनायेंगे। मैं यह कहना चाहता हूं कि इन सब कामों पर हमारी सरकार ने काम शुरू कर दिया है। उसके नतीजे भी आपको देखने को मिल रहे हैं। शायद इसीलिए पूरी दुनिया में चर्चा हो रही है और बड़े-बड़े उद्योगपतियों ने कहा है कि इस सरकार में जो सबसे बड़ी बात है कि ऊपर के स्तर पर,चाहे प्रधानमंत्री जी हों या बड़े मंत्री हों,किसी से आज कोई उम्मीद नहीं करता कि कोई फाइल मूव करनी है तो कोई टैक्स देना पड़ेगा।
15.00 hrs हमारे यहां आप वाला टैक्स हमने खत्म कर दिया है,ईज़ ऑफ डुइंग बिजनस शुरू कर दिया है। यही नहीं,यहां हमारे जम्मू कश्मीर और आंध्र प्रदेश के दोस्त भी बैठे हुए हैं। कश्मीर में जो आपदा आई,वह शायद हम सबके लिए एक बहुत बड़ी चुनौती थी। हुदहुद में भी जो हुआ,वह भी बहुत बड़ी आपदा थी।...(व्यवधान)लेकिन जिस तरह से आपदा आने के बाद प्रधान मंत्री जी स्वयं कश्मीर गए और वहां भारतीय सेना ने जिस तरह दिन-रात एक करके काम किया है,वह काबिले तारीफ है वर्ना वहां हजारों लोगों की जान जा सकती थी। सरकार के काम-काज के कारण जम्मू कश्मीर की जनता ने उसका धन्यवाद किया है,आंध्र प्रदेश की जनता ने धन्यवाद किया है और ओड़िसा की जनता ने भी उसका धन्यवाद किया है। अब कश्मीरी पंडितों के रीहैबिलिटेशन के लिए हमने 60हजार से अधिक कश्मीरी पंडित परिवारों के पुनर्वास का काम शुरू कर दिया है। उसके लिए मैं सभी कश्मीरी पंडितों की और से और सदन की ओर से प्रधान मंत्री जी आपका बहुत-बहुत आभार प्रकट करता हूं।
स्मार्ट सिटीज़ हमारी सरकार का एक बहुत बड़ा कार्यक्रम है। वह जल्द ही शुरू होने वाला है। उसका लाभ भारत के सौ से ज्यादा शहरों को मिलेगा। लेकिन सौ स्मार्ट सिटीज़ को देखकर कई और सिटीज़ स्मार्ट होंगी और उनकी सुविधाएं भी बढ़ेंगी। मुझे पूर्ण विश्वास है कि जिस तरह इस सरकार ने नौ महीने में काम किया है,मित्रो,अभी यह शुरुआत है,अभी बहुत-कुछ करना बाकी है। मैं केवल इतना ही कहना चाहता हूं कि हम सबको अपना-अपना य़ोगदान देना है। जब भगवान राम सेतु का निर्माण कर रहे थे तब एक गिलहरी भी अपने दोनों हाथों से मिट्टी उठाकर वहां जाकर डालती थी। भगवान राम ने पूछा कि तुम्हें यह सब करने की जरूरत क्यों है। उसने कहा कि मुझे भी राम काज करना है,मुझे भी अपना योगदान देना है। इस देश को मजबूत भारत,एक भारत,सर्वश्रेष्ठ भारत बनाने के लिए हम सबको अपनी-अपनी ओर से राम काज करना है। 125करोड़ की जनता के लिए हमारी सरकार वचनबद्ध,कटिबद्ध है। मैं यही कहना चाहता हूं कि यह सरकार गरीबों,नौजवानों,पिछड़ों,मजदूरों और अल्पसंख्यक किसानों की है। इन सबके काम के लिए हमारी सरकार प्रतिबद्ध है।
आपने मुझे राष्ट्रपति जी के अभिभाषण पर बोलने का मौका दिया,मैं आपका बहुत-बहुत आभार प्रकट करता हूं।
श्री निशिकान्त दुबे (गोड्डा) : अध्यक्ष महोदया,मैं आपका,माननीय प्रधान मंत्री जी और अपनी पार्टी के प्रति आभारी हूं कि उन्होंने श्री अनुराग सिंह ठाकुर द्वारा प्रस्तावित प्रस्ताव का अनुमोदन करने के लिए मुझे खड़ा किया है। कल राष्ट्रपति जी का अभिभाषण हुआ और लगातार अखबारों,टेलीविजन चैनल पर सब पोलीटिकल पार्टीज़ के लोग जो ऑपोजिशन में हैं,हारकर बैठे हुए हैं,शायद उन्हें करने के लिए कोई काम नहीं है,कह रहे हैं कि कुछ नहीं है,बेकार है,किस तरह का अभिभाषण है। मैं उन लोगों से पूछना चाहता हूं कि आजादी के इतने वर्षों बाद क्या आज देश में रोटी,कपड़ा और मकान की समस्या नहीं है। यदि कोई सरकार बात करेगी तो वह रोटी,कपड़ा और मकान की बात करेगी या नहीं।
15.04 hrs ( Hon. Deputy Speaker in the Chair) क्या हम भगवान की बात नहीं करेंगे?यदि ब्रह्मा,विष्णु,महेश भगवान हैं,यदि ईसा मसीह भगवान हैं,पैगम्बर मोहम्मद भगवान हैं तो हम उनकी बात नहीं करेंगे तो किसकी बात करेंगे। क्या हम नदी-नाले की बात नहीं करेंगे कि गंगा का क्या होगा,यमुना का क्या होगा?क्या हम नदी बदल देंगे,क्या हम शहर बदल देंगे कि दिल्ली में क्या होगा,मुम्बई में क्या होगा,पटना में क्या होगा,बनारस में क्या होगा,रांची में क्या होगा?क्या हम पड़ोसी बदल देंगे कि पाकिस्तान में क्या होगा,बंगलादेश में क्या होगा?आखिर क्या बात करें जिससे आपको लगे कि बहुत बढ़िया बात हो गई,बहुत अच्छी बात हो गई सरकार चल रही है।
हमारे प्रधानमंत्री जी हमेशा कहते हैं कि मैं छोटा आदमी हूं,छोटे-छोटे काम करना चाहता हूं और यदि आपको इस अभिभाषण में छोटा-छोटा काम नहीं दिखाई देता है तो यह आपका दोष है,लेकिन बाद में मैंने रिअलाइज किया कि मैं किन लोगों से पूछने की बात करता हूं,राष्ट्रपति जी के अभिभाषण में कहा गया है कि आप लोगों को शांत रहना चाहिए।
HON. DEPUTY SPEAKER: Shri Dubey, please address the Chair.
Hon. Members, do not make any commentary because you will have the opportunity to speak.
… (Interruptions)
PROF. SAUGATA ROY (DUM DUM): This is not a comment, Sir, this is reality.
HON. DEPUTY SPEAKER: Whatever is the reality, you can speak about it when the time comes for you to speak. I will give sufficient time to you.
Shri Dubey, please address the Chair.
श्री निशिकान्त दुबे : उपाध्यक्ष महोदय,एक संस्कृत में कहावत है,पिण्डे-पिण्डे मतिर्भिना कुण्डे नवं पयः;जातो जातो नवाचारौ नवा वाणी मुखे मुखे,पिण्ड-पिण्ड में मति की भिन्नता होती है,एक जगह से दूसरे जगह की मति भिन्न हो जाती है,एक कुएं का पानी दूसरे कुएं के पानी से अलग होता है। एक सप्रदाय दूसरे सप्रदाय के बारे में अलग आकलन रखता है। ...(व्यवधान)लोगों की जो वाणी है,बेटे की,बाप की,चाचा की,भतीजे की,दूसरे समाज की सबों की वाणी में फर्क होता है। मैंने इन लोगों से ज्यादा उम्मीद पाल ली थी। ये लोग इसी तरह की भाषा बोलते रहेंगे,इसलिए मुझे वेद-पुराण से सीख लेनी चाहिए। भ्रष्टाचार की बात अभी अनुराग सिंह ठाकुर जी कह रहे थे,एक कहावत है बुरा जो देखन मैं चला बुरा न मिलए कोई,जो दिन खोजा आपना मुझसे बुरा न कोई। आप करप्शन की बात कह रहे हैं,जिसके कारण पूरी की पूरी कांग्रेस खत्म हो गई और देश के लोगों ने माननीय प्रधानमंत्री जी के नेतृत्व में भारतीय जनता पार्टी को इतना बड़ा समर्थन दिया। इसी सदन में वर्ष 2009में …* का मामला मैंने उठाया था,इसी सदन में उठाया था,लेकिन कांग्रेस के किसी आदमी को साहस नहीं हुआ कि वह उसके ऊपर केस कर पाए।
HON. DEPUTY SPEAKER: The name will not go on record.
श्री निशिकान्त दुबे: इसी सदन में कांग्रेस के वित्त मंत्री जी ने कहा कि किसी भी मेंबर ऑफ पार्लियामेंट का ब्लैक मनी से कोई लेना देना नहीं है। क्या एचएसबीसी की जो लिस्ट छप रही है उसमें कांग्रेस के मेंबर ऑफ पार्लियामेंट का नाम नहीं है। यह बात मैंने सदन में उठाई थी। चूंकि वह अब संसद सदस्य नहीं हैं,इसलिए मैं उनका नाम नहीं लेना चाहता हूं,लेकिन किसी ने इसके ऊपर ध्यान नहीं दिया। आज देश कह रहा है कि एक एमपी दूसरे एमपी को बचाने का प्रयास कर रहा है। लोग इस सरकार को लाए और कांग्रेस पार्टी का इस देश में क्या हुआ,वह बताने की आवश्यकता नहीं है। आज के अखबार में,अभी जो पूरा जासूसी का मामला चल रहा है,यह प्रधानमंत्री जी के कमिटमेंट को दिखाता है। जिस दिन वह पहली बार प्रधानमंत्री बने थे और भारतीय जनता पार्टी के सांसदों को संबोधित किया था तो उन्होंने कहा था कि इस देश में 300-400लोग हैं। जब आप मेंबर ऑफ पार्लियामेंट बन कर आते हैं तो वह आपको एयरपोर्ट से रिसिव कर लेता है,सुबह से चाय पिलाने से लेकर रात के सुलाने तक का काम करता है। इन लोगों को पकड़ने की आवश्यकता है,इन लोगों से दूर रहने की आवश्यकता है। यही कारण है कि आज इस तरह के जासूसी कांड में लोग पकड़े जा रहे हैं। प्रधानमंत्री जी के आदेश पर आईबी,सीबीआई,दिल्ली पुलिस एक्शन ले रही है। आपने क्या किया,माननीय वीरप्पा मोइली जी मंत्री रहे हैं। वर्ष 2013का मेरे पास लेटर है,इसी तरह की एक घटना कॉरपोरेट अफेयर्स मिनिस्ट्री में भी हुई थी,रिबॉक कंपनी की पूरी फाइल गायब हो गई थी,उसमें जो एक्युजड था,उसको बिना एफआईआर के आपने फ्री कर दिया। यह पटियाला कोर्ट का आर्डर है,जिसे मैं आपके लिए लेकर आया हूं। राष्ट्रपति के अभिभाषण में भ्रष्टाचार हटाने की बात है तो आपको लगता है कि कुछ नहीं है। यदि कुछ नहीं है तो इसका फैसला जनता करेगी। दूसरा सवाल यह है कि अभी ब्लैकमनी पर बड़ी चर्चा हुई। अभी माननीय अनुराग सिंह ठाकुर ने कहा कि एसआईटी क्या कर रही है?मानननीय प्रधान मंत्री जी जब जी-20से लेकर अलग-अलग प्लेटफार्म पर जाते हैं तो क्या बात करते हैं?लेकिन अलग-अलग चर्चा होती है कि ब्लैकमनी आयेगी या नहीं आयेगी?उस दिन मेरे भाषण को भी तोड़-मरोड़ कर पेश किया गया। मैंने कहा था कि आप जब कम्पनियों पर टैक्स लगाते हैं तो वह रेट्रोस्पेक्टिव टैक्स लगाते हैं,लेकिन जब आप दूसरी कंट्री के साथ समझौता करने जाते हैं तो प्रॉसपेक्टिव समझौता करते हैं। जब आप प्रॉसपेक्टिव समझौता करते हैं तो क्या स्विटजरलैंड जैसा देश आपके लिए वेट करेगा कि तीन साल बाद भारत सरकार आयेगी और उसे हम सारा नाम दे देंगे?
यदि आप गरीबी हटाने की बात करते हैं तो मैं आपको बैंक के नैशनलाइजेशन की बात बताना चाहता हूं। यदि आप अपने गिरेबां में झांकने का प्रयास करेंगे ...(व्यवधान)जब बैंक नैशनलाइज्ड हो रहा था तो इंदिरा जी ने क्या कहा?उनका यह स्टेटमैंट बहुत फेमस है,जो उन्होंने इसी पार्लियामैंट में बोला है। उसे मैं कोट कर रहा हूं। उस दिन मैं बोल रहा था तो सोनिया जी बड़ी नाराज हो रही थीं।
उन्होंने कहा --
There has been serious imbalance in the development of banking facilities as between different regions in the country. There is urgent need to expand banking facilities in the States which are under-banked. Even in the developed States, banking facilities are confined to the urban areas, especially to the metropolitan areas, to the comparative neglect of semi-urban and rural areas. यह बड़ा इम्पोर्टैंट है और कल्याण बनर्जी साहब,आपके लिए बहुत इम्पोर्टैंट है। उन्होंने कहा --
The State-wise credit and deposit ratio has shown that it is very low in several States such as Assam, Bihar, Rajasthan, Odisha, Uttar Pradesh, Madhya Pradesh, Haryana, Punjab etc. उनका यह भाषण 29जुलाई, 1969 का है। आज हम 46साल बाद इसी सदन में यह बात कर रहे हैं। यहां ओडिशा के सांसद बैठे हुए हैं। मैं उनसे पूछना चाहता हूं कि वहां सीडी रेशियो क्या है?मैं झारखंड और बिहार के बारे में जानता हूं कि सीडी रेडिशो आज भी उतना ही है। ...(व्यवधान)कल्याण बनर्जी साहब,आप बताइये कि बंगाल में क्या है?नार्थ ईस्ट के स्टेट में क्या है?क्या कोई कांग्रेस से सवाल पूछ रहा है कि ब्लैकमनी के बारे में प्रधान मंत्री ने कहां कहा?उन्होंने बाहर कहा। इस सदन में जो बात प्रधान मंत्री जी कहते हैं,उस बात की क्या कोई वैल्यू है?इन 46सालों में सीडी रेशियो वहीं का वहीं है और आप हमसे सवाल पूछ रहे हैं और कह रहे हैं कि आप जवाब दीजिए। ...(व्यवधान)
श्री मल्लिकार्जुन खड़गे (गुलबर्गा) : आप भाषण कीजिए। ...(व्यवधान)
श्री निशिकान्त दुबे : हम भाषण ही कर रहे हैं और भाषण करने के लिए ही आये हैं। ...(व्यवधान)
उपाध्यक्ष महोदय,अब मेक इन इंडिया की बात है,जिसके लिए अनुराग जी ने बड़े विशेष तौर पर आग्रह किया। ...(व्यवधान)मेक इन इंडिया में हमारा कम्पीटिशन किससे है? ...(व्यवधान)कांग्रेस सरकार रिटेल में एफ़डीआई ले आयी और इसके बाद इनका मुख्य उद्देश्य यह था कि हम मल्टी ब्रांड एफडीआई ले आयें। आप दुनिया के किसी भी स्टोर जैसे टिस्को,किंग फिशर,वॉलमार्ट के स्टोर पर जाइये,वहां आपको केवल चाइना का माल ही नजर आयेगा। आपने अपने उद्योग के लिए क्या किया?सिचुएशन यह है कि हमारा मुकाबला यदि चाइना से है,मैं वर्ष 1980की बात बताना चाहता हूं कि वर्ष 1980में चाइना का जीडीपी हमसे कम था। उसका 339यूएस डालर था और हमारा 354यूएस डालर था। वर्ष 1980में वह हमसे नीचे था और उसके बाद ऐसी क्या सिचुएशन हो गयी कि आज चाइना वर्ल्ड की दूसरी बड़ी इकोनॉमी मानी जाती है?आज हमारा कम्पीटिशन उससे है। आप डिफैंस में एफडीआई लेकर आ रहे हैं तो क्या आपको अंदाजा है कि बाहर डिफैंस में लोगों को कितना पैसा दे रहे हैं?हमारा स्मॉल स्केल इंडस्ट्री डाउन हो रही है,क्या इसका आपको अंदाजा है?हमारी टॉय इंडस्ट्री पूरी की पूरी खत्म हो गयी,क्या इसका आपको अंदाजा है?इलैक्ट्रानिक इंडस्ट्री पूरी खत्म हो गयी,क्या इसका आपको अंदाजा है?यदि लोगों को रोजगार देना है,यदि हमें चाइना से आगे बढ़ना है,यदि देश को दुनिया में आगे करना है तो मेक इन इंडिया के अलावा और कोई उपाय नहीं है। यदि आप करेंगे,तो मैं आपको बताऊँ कि आपने तो महात्मा गांधी को भी भुला दिया। महात्मा गांधी ने क्या कहा था?उन्होंने कहा था…( व्यवधान) आप उनके बारे में बड़ी बातें कहते हैं। महात्मा गांधी को जीते-जी कैसे मारा, यह मैं उनकी किताब से पढ़ रहा हूँ। उन्होंने कहा- " बड़े पैमाने पर औद्योगीकरण का अनिवार्य परिणाम यह होगा कि ज्यों-ज्यों प्रतिस्पर्धा और बाजार की समस्याएं खड़ी होंगी, त्यों-त्यों गांवों का प्रकट या अप्रकट शोषण होगा, इसलिए हमें अपनी सारी शक्ति इसी प्रयत्न पर केन्द्रित करनी चाहिए कि गांव स्वयं पूर्ण बनें और वस्तुओं का निर्माण और उत्पादन अपने उपयोग के लिए करें। " क्या आप ऐसा कर पा रहे हैं? क्या गांवों का विकास हो पा रहा है? क्या मेक इन इंडिया में आपने कोई बड़ा काम कर दिया? मैंने बताया कि आपके समय में केवल इंपोर्ट पर कंसंट्रेट किया गया था। इसलिए आपने तो महात्मा गांधी को भी मार दिया और आप हमें कह रहे हैं कि इसमें आपको कोई चीज नज़र नहीं आ रही है। इसके बाद मैं आपको बताऊँ कि राष्ट्रपति के अभिभाषण में क्या-क्या चीजें हैं। …( व्यवधान) अभी "नमामि गंगे " की बात हुई, इसमें गंगा को साफ करने की बात हुई। प्रधानमंत्री सिंचाई योजना के अंतर्गत सभी किसानों के खेतों में पानी जाएगा, सभी को पीने का पानी मिलेगा। गंगा से संबंधित एक बड़ा लम्बा-चौड़ा प्रोजेक्ट हमारे पूर्व प्रधानमंत्री श्री राजीव गांधी जी ने शुरू किया था। मैं माननीय श्री राजीव गांधी जी का बयान पढ़ना चाहूँगा। उन्होंने गंगा एक्शन प्लान पर वाराणसी में जो बोला था, उसे मैं पढ़ रहा हूँ। …( व्यवधान) Shri Rajiv Gandhi’s speech announcing Ganga Action Plan on June 14, 1986. कृपया सुनिये!उपाध्यक्ष महोदय, उन सांसदों को थोड़ा चुप कराया जाए, उनके पास धैर्य नहीं है। …( व्यवधान)
“Today on the banks of the Ganga, fed by the mighty snows of Himalayas and stretching down 2,500 kilometres to the Bay of Bengal to the Indian Ocean, we see the area of India which sustains one-third of its population and half its irrigated land. The properties of the waters of the Ganges are well known. The Ganges is the symbol of our prosperity, our culture, our heritage, our civilisation, and our philosophy. Many of our religions link to the Ganga; and perhaps most of all it is the holder of our spirituality and our tradition.” ऐसा उन्होंने कहा और जब उन्होंने अपना भाषण कंक्लूड किया, तो उन्होंने कहाः “When our Government came into power, we started the work immediately and by December, it was passed and we have the loan from the World Bank and now the tenders are happening and it is our hope that very soon the work will begin and we will see that it will be built very soon.” वर्ष 1986 के बाद वर्ष 2015 में यदि प्रधानमंत्री जी को, हमारी सरकार को गंगा को साफ करने की आवश्यकता हो रही है, तो मैं कांग्रेस को और इसे समर्थन देने वालों सांसदों से पूछना चाहता हूँ कि क्या गंगा साफ हो गयी है? वह पैसा कहाँ गया? उस वक्त दो हजार करोड़ रुपए खर्च हुए थे गंगा एक्शन प्लान में। …( व्यवधान) क्या किसी भी शहर में एक भी सीवरेज सिस्टम काम कर रहा है? राष्ट्रपति के अभिभाषण में यदि इस तरह की बातें हैं, तो वह आप लोगों को नहीं दिखायी दे रहा है। …( व्यवधान) यदि आप लोगों को नहीं दिखायी दे रहा है, तो मैं क्या करूँ। …( व्यवधान)
इसके बाद मैं स्वच्छ भारत अभियान की बात कहता हूँ। …( व्यवधान) मैं कह रहा हूं कि कौन-कौन से मुख्य प्वाइंट हैं, छोटी-छोटी बातें हैं, जिसे इन लोगों को दिखायी देने की आवश्यकता है। …( व्यवधान) स्वच्छ भारत अभियान और गोकुल ग्राम के बारे में कहा गया …( व्यवधान) जब राष्ट्रपति जी का अभिभाषण चल रहा था, तो कहा गया कि अक्तूबर, 2019 का डेट प्रधानमंत्री जी ने क्यों फिक्स किया? यह इसलिए फिक्स किया गया है क्योंकि दो अक्तूबर, 2019 में महात्मा गांधी जी की 150वीं जयंती है।
महात्मा गांधी जी के नाम पर जो पोलिटिकल पार्टी राजनीति करती है,उसको मैं बताना चाहूंगा कि महात्मा गांधी जी ने स्वच्छता के बारे में क्या कहा था। उन्होंने कहा था:
“एक गांव के कार्यकर्ता को सबसे पहले गांव की सफाई और आरोग्य के सवाल को अपने हाथ में लेना चाहिए। यूं तो ग्रामसेवकों को किंकर्त्तव्यविमूढ़ बना देने वाली अनेक समस्याएं हैं, पर यह समस्या ऐसी है जिसकी सबसे अधिक लापरवाही की जा रही है। फलतः गांव की तन्दुरूस्ती बिगड़ती रहती है और रोग फैलते रहते हैं। अगर ग्रामसेवक स्वेच्छापूर्वक भंगी बन जाएं तो वे प्रतिदिन मैला उठाकर उसका खाद बना सकते हैं और गांव के रास्ते बुहार सकते हैं। वे लोगों से कहें कि उन्हें पाखाना-पेशाब कहां रखना चाहिए, किस तरह की सफाई रखनी चाहिए, उससे क्या लाभ हैं और सफाई न रखने से क्या-क्या नुकसान होता है। गांव के लोग उसकी बात चाहे सुनें या न सुनें, वह अपना काम बराबर करता रहे।” यह बात महात्मा गांधी जी ने लिखी है। महात्मा गांधी जी के नाम पर आप लोगों ने राजनीति करते हुए कभी झाड़ू नहीं उठाई,अब तक किसी प्रधान मंत्री जी ने झाड़ू उठाने का काम नहीं किया। आज हमारे माननीय प्रधान मंत्री जी ने झाड़ू ही नहीं उठाई,जिस काम को सबसे बुरा काम कहा जाता था,आज उस काम में,प्रधान मंत्री जी के स्वच्छता अभियान में देश का बड़े से बड़ा उद्योगपति,मीडिया हाउस,बड़े से बड़े लोग जुड़ना चाहते हैं और यही हमारी सरकार का कमिटमेंट है। यही हमारी उपलब्धि है। यह इन लोगों को नहीं दिखाई दे रहा है।
अब मैं शिक्षा के बारे में बताना चाहूंगा,बहुत अच्छा है कि यहां लोहियावादी लोग भी बैठे हुए हैं,वे कांग्रेस को बहुत समर्थन देते हैं। 16मार्च, 1965 को इसी सदन में लोहिया जी नो-कांफिडेंस मोशन पर भाषण दे रहे थे। क्या लड़ाई चल रही थी?लड़ाई यह चल रही थी कि जवाहर लाल नेहरू जी प्रत्येक दिन अपने ऊपर कितना पैसा खर्च करते हैं। लोहिया जी ने कहा कि वह 25,000रुपये रोज खर्च करते हैं। लोहिया जी कह रहे थे कि गरीबों को प्रति दिन तीन आना मिलता है और तत्कालीन प्रधान मंत्री जी ने इसी सदन में कहा -नहीं,प्लानिंग कमीशन की रिपोर्ट कह रही है कि तीन आना नहीं मिलता है,बल्कि 15आना मिलता है। लड़ाई क्या है गरीबों की?एक तरफ लोहिया जी कह रहे हैं कि तीन आना मिलता है और दूसरी तरफ नेहरू जी कह रहे हैं कि 15आना मिलता है और 25,000रुपये वह रोज खर्च करते थे।...(व्यवधान)
SHRI MALLIKARJUN KHARGE: Hon. Deputy-Speaker, Sir, I would request you to ask the hon. Member to speak on the President’s Address only. Let him not go 40 years back and quote certain things.… (Interruptions)
श्री निशिकान्त दुबे: उपाध्यक्ष महोदय,खड़गे साहब हमेशा खड़े हो जाते हैं।...(व्यवधान)
उन्होंने कहा कि यूनिफार्म प्राइमरी होना चाहिए। मैं शिक्षा के बारे में बोल रहा हूं,मैं किसी अन्य चीज पर नहीं हूं। जवाहर लाल नेहरू जी की मर्जी है,वह जितना चाहें उतना पैसा खर्च करें,हमें उनसे क्या लेना-देना है। वह चले गए,उन्होंने देश के विकास के लिए बड़ा योगदान दिया,हमारे दिल में उनके प्रति सम्मान है। मैं सिर्फ यही बता रहा हूं कि लोहिया जी ने क्या कहा,लोहिया जी ने 16मार्च, 1965 को कहा कि यूनिफार्म प्राइमरी स्कूल होना चाहिए। यहां जितने लोहियावादी बैठे हैं,विभिन्न प्रदेशों में शिक्षा उनका विषय है। किन्होंने-किन्होंने यूनिफार्म प्राइमरी स्कूल बना दिए?दूसरी बात उन्होंने कही कि सभी लोग रेलवे के तृतीय दर्जे में यात्रा करें। यह बात उन्होंने पार्लियामेंट में कही है। ऐसे कितने लोहियावादी हैं जो ट्रेन के तृतीय दर्जे में सफर करते हैं?हवाई जहाज से नीचे कितने लोग यात्रा करते हैं?उन्होंने कहा था कि इंग्लिश लिट्रेचर को एबॉलिश कर देना चाहिए। आज यहां इंग्लिश लिट्रेचर की बात छोङिए,यहां जो थर्ड लैंग्वेज 22भाषाओं में से एक होनी चाहिए,उसके बदले जर्मन भाषा के लिए लड़ाई हो रही है कि जर्मन भाषा तृतीय भाषा क्यों नहीं हो। यह शिक्षा की हालत है। यही कांग्रेस की हालत है और यही इन समाजवादियों की हालत है। मैं यह कह रहा हूं कि आप उनसे सीखें। हमारे माननीय प्रधान मंत्री जी ने,हमारी सरकार ने कम से कम शिक्षा व्यवस्था के बारे में सोचा कि कैसे गरीब आदमी पढ़ेंगे। यदि सेंट्रल यूनिवर्सिटी खुल रही है तो उसमें जो लूपहोल्स थे,उनको ठीक करने का प्रयास हो रहा है। यहां शिक्षा मंत्री स्मृति ईरानी जी बैठी हैं,मैं उनसे आग्रह करूंगा कि बजट में भी गरीब बच्चे,जो एजुकेशनली बैकवर्ड डिस्ट्रिक्ट्स से आते हैं,हमारे जैसे डिस्ट्रिक्ट से आते हैं,उनके लिए कैसे के.जी. से पी.जी. तक की पढ़ाई की व्यवस्था होगी,उसके लिए आप माननीय प्रधान मंत्री जी और वित्त मंत्री जी को कुछ कहेंगे तो मुझे लगता है कि अच्छा होगा।
मैं यह कह रहा हूं कि आप लोगों सुनना ही नहीं आता है। आप लोग हमेशा हम से नाराज़ हो जाते हैं। लेकिन मैं उन्हीं लोगों को कोट कर रहा हूं जिनके बारे में यहां काफी चर्चा हुई है कि इस बार केवल श्यामा प्रसाद मुखर्जी जी के बारे में बात हुई,दीनदयाल उपाध्याय जी के बारे में बात हुई,अटल बिहारी वाजपेयी जी के बारे में बात हुई। मैं तो केवल नेहरू जी,इंदिरा जी और राजीव जी की ही बात कह रहा हूं और महात्मा गांधी की बात कह रहा हूं। आप न तो महात्मा गांधी की बात सुन रहे हैं,न इंदिरा जी की बात सुन रहे हैं और न राजीव जी की बात सुन रहे हैं। नेहरू जी ने जो कहा था,उसे राजीव जी ने वर्ष 1986-87के बजट भाषण में कोट किया था। राजीव जी ने नेहरू जी के भाषण को कोट करते हुए कहा था-
“Do not imagine that with minus technological progress, we are going to deal with the problem of unemployment. If India is to advance, India must advance in science and technology and India must use the latest technique.” यदि हमारे राष्ट्रपति जी के अभिभाषण में तीस मीटर टेलीस्कोप की बात हो रही है,प्रधानमंत्री जी उसे कर रहे हैं तो उन्हें कुछ नया दिखाई नहीं देता है। हम तो आपकी बात ही कह रहे हैं कि जो काम नेहरू जी नहीं कर पाए। नेहरू जी ने वर्ष 1960-62में जो कहा था,वह काम हम आज करने का प्रयास कर रहे हैं। हम काम कहां से लाएंगे,क्योंकि जो काम पहले से हैं जैसे रोटी,कपड़ा और मकान,वही काम तो हमें आज पूरा करना है।...(व्यवधान)
श्री दीपेन्द्र सिंह हुड्डा (रोहतक) : महोदय, मेरा प्वाइंट ऑफ ऑर्डर है।
HON. DEPUTY SPEAKER: Under what Rule?
श्री दीपेन्द्र सिंह हुड्डा: Rule 352 says that a Member while speaking shall not utter defamatory words. यह कह रहे हैं कि यह नहीं कर पाए वह नहीं कर पाए। इनको यह कहते हुए कितनी देर हो गयी है।...(व्यवधान)
HON. DEPUTY SPEAKER: What is defamatory in it? That is not a point of order. It is not defamatory. Please take your seat. Your leader will reply to it.
… (Interruptions)
श्री निशिकान्त दुबे: उपाध्यक्ष जी,केवल संसद में समय-समय पर दिए गए पूर्व प्रधानमंत्रियों के और महात्मा गांधी जी द्वारा लिखी गई किताब में से ही अपनी बात उद्धृत कर रहा हूं। यदि वह डिफेमिट्री है,तो उन्हें डिफेमिट्री लगता होगा। मुझे बड़े लोगों की बात हमेशा ज्ञान देती है। मैं तो उन बातों से सीखने का प्रयास करता हूं और आप लोगों को भी सिखाने का प्रयास कर रहा हूं कि आप लोग जो भूल गए हैं,उसे सीखने का प्रयास कीजिए। मैं सीडी रेश्यो ठीक कर रहा हूं।
महोदय,प्रधानमंत्री जी हमेशा कहते हैं कि जननी जन्म भूमि स्वर्गादापि गरीयासी भूमि...(व्यवधान)
HON. DEPUTY SPEAKER: I have already given my ruling. It is not defamatory. When your leader speaks, he will reply.
… (Interruptions)
श्री निशिकान्त दुबे: उपाध्यक्ष महोदय,इन्हें अपने नेता की बात डिफेमिट्री लगती है। जो-जो कहा गया है राष्ट्रपति जी के अभिभाषण में मैं उसी को पढ़ रहा हूं।...(व्यवधान)
श्री मल्लिकार्जुन खड़गे:आप कितनी बार उसी बात को कहेंगे?...(व्यवधान)जॉर्ज फर्नांडिस आपके साथ थे। क्या उस वक्त नहीं थे?आपने छः साल में क्या किया?...(व्यवधान)आप इस तरह से बातें मत बोलिए,आपको राष्ट्रपति के अभिभाषण पर जो बोलना है,वह बोलिए।...(व्यवधान)
HON. DEPUTY SPEAKER: Please sit down.
श्री निशिकान्त दुबे : महोदय, ‘जननी जन्मभूमिश्च स्वर्गादापि गरीयसी’,इस देश में सबसे बड़ी मुश्किल यह है कि हम अपने देश के बारे में ही नहीं जानते हैं,......(व्यवधान) * उपाध्यक्ष जी,मैं अपने शब्द वापस ले लेता हूं।...(व्यवधान)
HON. DEPUTY-SPEAKER: Please take your seats.
… (Interruptions)
HON. DEPUTY-SPEAKER: Please take your seats. You have raised your point. I will make my observations.
Shri Dubey, when you are speaking please try to be somewhat cautious. When you are saying that, that is not a good thing. Do not say all these things.
… (Interruptions)
श्री निशिकान्त दुबे: उपाध्यक्ष जी,यदि मेरी बात से तकलीफ हुई है तो मैं माफी मांग रहा हूं। क्या अब माफी से भी कोई बड़ी बात है?क्या इस पर फांसी दे देंगे?...(व्यवधान)
HON. DEPUTY-SPEAKER: I have expunged that word.
… (Interruptions)
श्री निशिकान्त दुबे: मैं यह कह रहा हूं कि अपने कल्चर के बारे में,अपने इंडियननैस के बारे में हमको एक दूसरे की भाषा के बारे में जानकारी नहीं है। मैं यही कहना चाहता हूं।
HON. DEPUTY-SPEAKER: That part is expunged and that is all.
… (Interruptions)
HON. DEPUTY-SPEAKER: Shri Ramachandran, please take your seat. I have already expunged that portion. Please take your seat.
श्री निशिकान्त दुबे: उपाध्यक्ष जी,ये लोग मेरा समय बर्बाद कर रहे हैं।...(व्यवधान)सर,मैं यही कह रहा हूं कि इस देश को जानने के लिए टय़ूरिज्म पर,इस सरकार ने,माननीय प्रधान मंत्री जी ने बहुत ज्यादा फोकस किया है। हमेशा इन लोगों के साथ क्या ऐसा होता है कि मैं देर करता नहीं,देर हो जाती है। कोई माइन्स और मिनरल्स अब इस देश को न रोजगार दे रहे हैं न पैसा दे रहे है। पूरी दुनिया में यह बात सिद्ध हो गई है कि यदि सिंगापुर आगे जा रहा है,स्विटजरलैंड आगे जा रहा है,यदि लंदन में पैसा आ रहा है,पेरिस में पैसा आ रहा है तो टय़ूरिज्म से ही सबसे बड़ी सुविधाएं क्रिएट होती हैं। टय़ूरिज्म के ऊपर इस सरकार ने सबसे ज्यादा कांसनट्रेट किया है। लेकिन टय़ूरिज्म को ही इन लोगों ने नैगलेक्ट किया। टय़ूरिज्म के बारे में मैं यहां बताना चाहता हूं कि नेहरू जी ने कहा,...(व्यवधान)फिर मैं नेहरू जी को ही कोट कर रहा हूं।...(व्यवधान)नेहरू जी ने कहा Welcome a tourist, and send back as a friend. यह नेहरू जी ने कहा। “अतिथि देवो भव:” नेहरू जी ने वही बातें कहीं जो हमारी सभ्यता संस्कृति में है लेकिन इन्होंने आज तक टय़ूरिज्म पर फोकस नहीं किया। इन्होंने टय़ूरिज्म के ऊपर 1945में एक कमेटी बनाई जो सर जोन के नेतृत्व में बनी और जब भारत आज़ाद हुआ तो 1949में माननीय प्रधान मंत्री जी ने एक टय़ूरिज्म ट्रैफिक कमेटी बनाई कि कैसे कम से कम इंटरनल टय़ूरिज्म का और एक्सटर्नल टय़ूरिज्म का फ्लो होगा। इनको कमेटी बनाने का बड़ा शौक है क्योंकि ये रिटायर्ड ब्यूरोक्रेट्स से उल्टा-सीधा काम कराते हैं तो कहीं न कहीं कमेटी बनाएंगे जिससे कि वे भी प्रसन्न रहेंगे जिसको प्रधान मंत्री जी ने खत्म किया। उसके बाद 1958में आज़ादी के 11साल बाद टय़ूरिज्म पहली बार एक विभाग बना और 1963में एल.के.झा. साहब के नेतृत्व में एक कमेटी बनाई गई तथा 1966में इन्होंने आईटीडीसी बना दिया। वर्ष 1966में टय़ूरिज्म एंड सिविल एविएशन मिनिस्ट्री का गठन हुआ। उसके बाद 1986में जब राजीव गांधी जी प्रधान मंत्री जी थे,उन्होंने देश के लिए सोचने का काम किया क्योंकि फिर यह था कि पैसा कहां से लाओगे,पैसा कहां से आएगा?फिर यह हुआ कि जहां चाह,वहां राह। यह पार्लियामेंट की बिल्डिंग यदि देखते हैं तो किसी आर्कीटैक्ट ने इस पार्लियामेंट की कल्पना की होगी कि किस तरह से पार्लियामेंट बनाएंगे। इसीलिए देश बनाने के लिए जो माननीय प्रधान मंत्री जी की कल्पना है,उसी का यह सबसे बड़ा उदाहरण है कि श्री राजीव गांधी जी ने भी यह इसके पहले बनाया था और 1986में एक कमेटी बनी थी,जो बतायेगी कि क्या करेगी। 1986की कमेटी की रिपोर्ट आ गई और 29साल में टूरिज्म में फ्लो नहीं हो पाया,टूरिस्ट्स बढ़ नहीं पा रहे हैं,हम अपने देश को जोड़ नहीं पा रहे हैं। 12ज्योतिर्लिंग कहते हैं,ज्योतिर्लिंग सर्किट नहीं बढ़ रहा है,शक्तिपीठ नहीं बच पा रहा है। कहां-कहां जैनियों के तीर्थस्थल हैं,वहां टूरिस्ट्स नहीं बढ़ पा रहे हैं।
HON. DEPUTY SPEAKER: Please wind up now.
श्री निशिकान्त दुबे : सर,अभी मैं पांच-सात मिनट में वाइंड अप करूंगा,अभी हमारे पास काफी समय है। इसीलिए मैं कह रहा हूं और यही कारण है कि किस तरह से लोगों को रोजगार मिलेगा,किस तरह से टूरिस्ट्स आयेंगे,कैसे इस देश में पैसा आयेगा,इसके लिए माननीय प्रधान मंत्री जी ने इस राष्ठ्रपति के अभिभाषण में कहा है।
इसके बाद सबसे इम्पार्टेंट कोऑपरेटिव फैडरलिज्म है,जिसकी बात माननीय प्रधान मंत्री जी ने कही है। यह बड़ा इम्पार्टेंट है और यह सबके समझने वाली बात है कि इस देश में जब भारत का संविधान बन रहा था,कांस्टीटुएंट असैम्बली की डिबेट है,उस डिबेट में मैं आपको बताऊं कि महात्मा गांधी जी ने कहा था कि ग्राम स्वराज होना चाहिए,ग्राम को बढ़ना चाहिए,इसके लिए इस पर काफी डिबेट हुई और डिबेट होने के बाद माननीय अम्बेडकर जी,जो कि कांस्टीटुएंट असैम्बली की प्रारूप समिति के अध्यक्ष थे और नेहरू जी चाहते थे कि सारी की सारी पावर कंसन्ट्रेटिड हो जाए,डिबेट का पार्ट है और इसमें सरदार वल्लभ भाई पटेल जी ने कहा कि नहीं फैडरलिज्म होना चाहिए और उसी फैडरलिज्म के आधार पर कोऑपरेटिव फैडरलिज्म का नारा आगे बढ़ा और मैं आपको बताऊं कि कोआपरेटिव फैडरलिज्म पर सबसे पहले कैबिनेट मिशन आया और कैबिनेट मिशन के बाद ...(व्यवधान)उपाध्यक्ष जी,दीपेन्द्र जी को यह पता नहीं है कि भारत और पाकिस्तान का जो बंटवारा हुआ,वह ब्रिटेन की संसद में तय हुआ था और भारत और पाकिस्तान डोमेनियन स्टेट बने थे,सॉवरेन स्टेट नहीं बने थे। इसका मतलब यह नहीं है कि हम लोग सॉवरेन कंट्री नहीं है। इतिहास को जानने की समझ होनी चाहिए। लेकिन इन लोगों को समझना नहीं आता। कैबिनेट मिशन आया और कैबिनेट मिशन के बाद जब हमने उसके रिक्मैंडेशन को नहीं माना तो मैं आपको बताऊं कि करुणानिधि जी जब तमिलनाडु के मुख्य मंत्री बने तो उस वक्त पूरी पार्टी एक ही थी। उन्होंने 1969में राज मन्नार कमीशन बनाया। इसके बारे में उपाध्यक्ष महोदय मुझसे ज्यादा आपको पता होगा और राज मन्नार कमीशन ने यह कहा कि जो आर्टिकल 2है,आर्टिकल 3है,आर्टिकल 249है,आर्टिकल 250है,आर्टिकल 252है,आर्टिकल 253है,इसके बारे में एबोलिशन के लिए एक कमेटी होनी चाहिए और खत्म होना चाहिए। उसके बाद जो बंगाल के हमारे मित्र है, 1977 में मेमोरेंडम ऑफ स्टेट-सैंटर रिलेशन के लिए वैस्ट बंगाल असैम्बली ने एक रिजोल्यूशन पास किया और उसको कहा कि सैंटर ज्यादा प्रभाव दे रहा है,सलीम साहब ऐसा हुआ था या नहीं,आप बताइये कि बंगाल ने ऐसा कहा था कि नहीं,जब सीपीएम की सरकार आई तो उन्होंने यह बात कही थी। उसके बाद 1988में सरकारिया कमीशन बना और सरकारिया कमीशन की रिक्मैंडेशन के बाद भी जब चीजें नहीं हुई तो जब माननीय वाजपेयी जी के नेतृत्व में हमारी सरकार आई तो 2002में उसने एनसीआरडब्ल्यूसी बनाया और उसके बाद जब आप लोग उससे भी संतुष्ट नहीं हुए तो श्री एम.एम.पुंछी के नेतृत्व में इसी कांग्रेस सरकार ने 2007में एक कमेटी बनाई जिसने 2010में अपनी रिपोर्ट दी।
आज नीति आयोग की बात हो रही है,कोऑपरेटिव फैडलरिज्म की बात हो रही है तो जब राज्य में सभी जगह हंगामा चल रहा है,देश में हंगामा चल रहा है,सभी राज्य चाहते है कि उन्हें सॉवरेन स्टेट माना जाए। अभी फाइनैन्स कमीशन की जो रिपोर्ट आई है,उसमें ज्यादा से ज्यादा राजस्व उनके पास कैसे जाए,इसके लिए माननीय प्रधान मंत्री जी ने व्यवस्था की है तो कोआपरेटिव फैडरलिज्म के आधार पर नीति आयोग बनेगा कि नहीं बनेगा। एक मामूली ब्यूरोक्रेट आप प्लानिंग कमीशन में बैठा देते हैं और उसके सामने जितने राज्यों के मुख्य मंत्री हैं,वे बैगर की तरह गिड़गिङाने जाते हैं कि आप हमें पैसा दे दीजिए,आप हमें पैसा दे दीजिए। वह भी इलैक्टिड बॉडी है और हम भी इलैक्टिड बाडी हैं और इसीलिए कोऑपरेटिव फैडरलिज्म का यह सवाल आया है,क्योंकि एनसीटीसी एक मुद्दा है,आरपीएफ एक मुद्दा है,क्योंकि यदि रेलवे ट्रैक पर आदमी मर जाते हैं तो वह केस कौन रजिस्टर करेगा,इस तरह के कई एक्ट हैं और यही कारण है कि सरकार ने कोऑपरेटिव फैडरलिज्म की बात कही है। ...(व्यवधान)उसका कारण यह है कि जो Constitutional scheme of Centre-State relations है,जो economic and financial relations है, जो unified and integrated domestic market harmonization of commodity taxes है, जिसके लिए जीएसटी आ रहा है,local government and decentralized government, criminal justice, national security and Centre-State cooperation जिसके लिए मैंने एनसीटीसी की बात की है जिसके लिए नैचुरल रिसोर्स,जिसके लिए माननीय अनुराग सिंह ठाकुर साहब ने कहा कि नैचुरल रिसोर्स है,जिसके लिए अभी आप समझिए कि 18ब्लॉक में,एक-दो लाख करोड़ रूपये आ गए,हमको लगता है कि दस लाख करोड़ रूपये आ जाएगा।
वह स्कैम जो है, 1 लाख 86 हज़ार करोड़ रूपये से ज्यादा था। उसके बाद एंवायरमेंट का क्या होगा,लैण्ड का क्या होगा?जिस लैण्ड एक्ट की ये बात कर रहे हैं,लैण्ड एक्ट में इन्हीं के मुख्य मंत्री लोग लगातार कहते रहे हैं कि किस तरह से उसमें संशोधन होना चाहिए,किस तरह से चीजें होनी चाहिए। इसके बारे में डिटेल बातचीत होगी। इसके बाद इंफ्रास्ट्रक्चर डिवेल्पमेंट और मेगा प्रोजेक्ट किस तरह से लगेंगे,क्योंकि एक राज्य दूसरे राज्य को पानी देने के लिए तैयार नहीं होता है। आपको पता है कि कावेरी अथॉरिटी,कृष्णा अथॉरिटी कितने दिनों से बनी हुई हैं। उसी तरह से सोशल,इकॉनमिकल और ह्युमन डिवेल्पमेंट है,इन सारी चीजों को प्रधान मंत्री जी ने साथ रखा,ध्यान दिया और इसके बाद उन्होंने यह डिसाईड किया कि किस तरह से कोऑपरेटिव फैड्रलिज्म की चीज़ आगे बढ़ेगी।
अंत में,मैं नहीं चाहता था,लेकिन मुझे लगता है कि मुझे फिर से नेहरु जी को कोट करना पड़ेगा। 13अक्टूबर, 1949 को यूएस कांग्रेस में उन्होंने भषण दिया था। अभी प्रधान मंत्री जी जब आए,जो हिस्टॉरिकल यात्रा थी,ओबामा जी के साथ,पुतिन जी के साथ,जिंगपिंग जी के साथ,कोई चीज़ मानने के लिए तैयार नहीं है,लेकिन यह हिस्टॉरिकल स्पीच जो है, 13 अक्टूबर, 1949 की है,जो कि माननीय नेहरु जी ने यूएस कांग्रेस में दी थी। उसकी कुछ ही पंक्तियां मैं पढ़ना चाहूँगा। ...(व्यवधान)उन्होंने कहा कि -
“India is more developed industrially than many less fortunate countries and is reckoned as the seventh or eighth among the world’s industrialized nations. But this arithmetical distinction cannot conceal the poverty of the great majority of our people.” यह उन्होंने सन् 1949 में कहा था।
“To remove this poverty by greater production, more equitable distribution, better education and better health is the paramount need and the most pressing task before us and we are determined to accomplish this task.” इसके बाद आप समझिए कि 67साल के बाद भी हम उसको पूरा नहीं कर पाए हैं। रोटी,कपड़ा और मकान दे नहीं पाए हैं। इसीलिए माननीय प्रधान मंत्री जी जो कहते हैं,उनका जो विज़न है कि -
“ ऊँ सह नाववतु। सह नौ भुनक्तु।
सह वीर्यं करवावहै।
तेजस्वि नावधीतमस्तु मा विद्विषावहै ।। ” सभी का कल्याण हो, सभी के पेट में रोटी जाए, सभी को कपड़ा मिले, सभी को मकान मिले और इस देश का विकास हो। इन्हीं छोटी-छोटी बातों को ले कर यह राष्ट्रपति जी का अभिभाषण है। सबका साथ, सबका विकास, एक भारत श्रेष्ठ भारत। इन्हीं शब्दों के साथ मैं अपनी बात समाप्त करता हूँ।
HON. DEPUTY-SPEAKER: Shri Nishikant Dubey, have you seconded the Motion?
श्री निशिकान्त दुबे: सर, मैंने सैकेंड कर दिया है।
HON. DEPUTY-SPEAKER: Motion moved:
“That an Address be presented to the President in the following terms:- ” “That the Members of the Lok Sabha assembled in this Session are deeply grateful to the President for the Address which he has been pleased to deliver to both Houses of Parliament assembled together on February 23, 2015’.” श्री मल्लिकार्जुन खड़गे (गुलबर्गा) : महोदय,संसद के समक्ष भारत के राष्ट्रपति के अभिभाषण पर यहाँ जो भाषण हुए,उसे श्री अनुराग सिंह ठाकुर जी ने मूव किया और निशिकान्त दुबे जी ने सेकेंड किया। इस भाषण पर उन्होंने लगभग एक घंटा पैंतालीस मिनट चर्चा की। जब यह भाषण हो रहा था तो वे बार-बार यही कहते थे कि सबका साथ,सबका विकास और इसी स्लोगन के साथ उन्होंने अपने भाषण की शुरूआत भी की। इसमें जितने भी प्रोग्राम्स कोट किए गए हैं,चाहे डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के नाम से हों,दीन दयाल उपाध्याय जी के नाम से हों या चाहे अटल जी के नाम से हों,उन सभी कार्यक्रमों के बारे में उन्होंने बताया है। यहाँ पर जो चर्चा हुई,अगर इस भाषण के ऊपर ही वह चर्चा सीमित रहती तो बहुत अच्छा होता। खासकर अनुराग ठाकुर जी ने जब बात की,उस वक्त किसी भी सदस्य ने उनको इंट्रप्ट नहीं किया,क्योंकि उन्होंने बहुत कम,उन्होंने केवल एक या दो शब्द कंट्रोवर्शियल कहे होंगे,जिसे सदन के सदस्य सुन रहे थे। प्राइम मिनिस्टर भी यहाँ मौजूद थे,उन्होंने भी सुना होगा और सीनियर लीडर आडवाणी जी भी उपस्थित हैं,उन्होंने भी सुना होगा। निशिकान्त दुबे जी का मुझे समझ में नहीं आ रहा है कि वे इस भाषण पर बात कर रहे थे कि या इस सदन में जो भी डिबेट हुई,उनके बारे में वे चर्चा कर रहे थे,मुझे मालूम नहीं हुआ।...(व्यवधान)शायद इस बार जरा आपकी तैयारी कम थी,ऐसा मुझे महसूस हुआ। आप हमेशा स्टैस्टिक्स के साथ आते थे,लेकिन इस बार कम स्टैस्टिक्स और ज्यादा कोटेशन आपने कह दीं। ठीक है,मैं आपकी इस बात को छोड़ता हूँ। छोटी-छोटी बात को आप उछालने की कोशिश मत कीजिए,कभी-कभी वह आप ही के ऊपर आता है। आपने नेहरू जी के बारे में कहा,रोटी-कपड़ा-मकान के बारे में कहा,गाँधी जी की कुटीर व्यवस्था,स्मॉल स्केल इंडस्ट्रीज के बारे में कहा,ये सारी चीजें कहते हुए आपकी मंशा यही थी कि आप लोगों ने कुछ नहीं किया और सारा कुछ इन 9महीनों में ही हुआ है,जितना कुछ भी हुआ है,वह सिर्फ इन 9महीनों में ही हुआ है। मैं याद दिलाना चाहता हूँ और प्राइम मिनिस्टर जी भी इस बात को मानेंगे कि बस्ती एक दिन में बस्ती नहीं बनती है,बस्ती बसते-बसते बस्ती बनती है और देश भी बनते-बनते देश बनता है। एक दिन में कोई नहीं बना सकता,एक साल में कोई नहीं बना सकता,इसमें सालों-साल लगते हैं,मेहनत करनी पड़ती है,कोशिश करनी पड़ती है। हमारे बुजुर्गों ने अपनी कोशिश की है और हो सकता है कि चन्द चीजें उन्होंने कीं,...(व्यवधान)आप लोग खामोश होकर बात सुनिए,हमने आपकी बात सुनी थी,हमने कोई इंटरफेअर नहीं किया।...(व्यवधान)आप जिस जगह बसे हैं,वहीं पर बसे रहिए। मेरा कहना यह है कि कोई देश एक दिन में नहीं बनता है,इसे बनाने में कई दिन लगे,कई साल लगे और कई योजनाएं हम अमल में लाए। इसीलिए आज इस देश में प्रजातत्र जिन्दा है। इसीलिए इस देश में बदलाव को लोग स्वीकार करते हैं।
आज यहाँ आपकी सरकार आ गई है,क्योंकि यहाँ प्रजातंत्र और लोकतंत्र की बुनियाद ठीक थी,इसी की वजह से आप यहाँ आकर आज बैठे हैं। अगर इस बुनियाद का ढाँचा बदल जाता है,संविधान का ढाँचा बदल जाता है,तो आप सभी स्वीकार करते हैं,लेकिन अगर ऐसा कुछ होता तो आज इतने सब लोग जो चुनकर आए हैं,वे नहीं दिखते। अगर दिखते हैं तो इसको मजबूत बनाने की कोशिश हमारे सभी पुरखों ने की -पंडित जवाहर लाल नेहरू से लेकर,महात्मा गांधी जी से लेकर,लोहिया जी से लेकर,अटल बिहारी वाजपेयी तक सभी लोगों ने कोशिश की है,लेकिन आप बार-बार कहते हैं कि 65साल में कुछ नहीं हुआ,हमने कुछ नहीं किया,सिर्फ जो हो रहा है,वह नौ महीने में ही हो रहा है। यह जो बात है कि सब कुछ नौ महीने में हो रहा है,मैं कहना चाहता हूँ कि डिलीवरी पीरियड भी नौ महीने नौ दिन का होता है,लेकिन अभी आप ऐसी कोशिश करके लोगों में भ्रम पैदा कर रहे हैं कि सारी चीजें हमने ही बनाई हैं,इस देश में जो कुछ भी एवलेबल है या अस्तित्व में है,वह हमारा है,और किसी का नहीं है,यही बार-बार कह रहे हैं और कोटेशन से हमारे नीतीश साहब ने उसी ढंग से प्रस्ताव किया।
श्री निशिकान्त दुबे : नीतीश नहीं निशिकांत।
श्री मल्लिकार्जुन खड़गे :जी हाँ,निशिकांत जी। सॉरी। वे हमारे अच्छे दोस्त हैं और आप भी अच्छे दोस्त हैं।
मैं आपके सामने चंद बातें रखना चाहता हूँ जो आपने अपने भाषण में रखी हैं कि इस देश को किस दिशा में आप ले जाना चाहते हैं। हम भी यह जानते हैं कि कोई चीज़ चंद दिन में नहीं होती,चंद महीनों में नहीं होती। इसको सालों लगते हैं,लेकिन इस बात को हम महसूस करते हैं लेकिन आप महसूस नहीं करते हैं। आप कुछ भी बोल देते हैं। आप यह भी कह देते हैं कि सौ दिन में काला धन वापस लाऊँगा और 15-15लाख रुपये आपके बैंकों में डालूँगा। जो कहना है उसको सोच समझकर कहना चाहिए और जो हो सकता है वही बात आप जनता के सामने रखें तो वह बहुत दिन चलती है।
आज एग्रीकल्चर की बात मैंने यहाँ की। यह पैरा 7और 10में जो आपने कहा कि एग्रीकल्चर और एग्रीकल्चरल लेबरर्स के लिए बहुत कुछ काम इस सरकार ने किया है,ऐसा आपने दावा किया है। इसमें खासकर आपके आने के बाद बहुत सी योजनाओं की नींव डाली है और वह शुरू करने वाले हैं लेकिन मज़दूरों के लिए जो कृषि कार्मिक हैं और जो छोटे किसान हैं और बाकी के किसान हैं,उनके लिए हमने एक स्कीम तैयार की थी मनरेगा स्कीम,और आपको मालूम है कि वह यहाँ पर बहुत चर्चित विषय है। इसके बारे में लास्ट टाइम भी हमने कोशिश की थी और यहाँ पर अच्छी चर्चा हुई। मनरेगा में जो एग्रीकल्चरल लेबरर्स हैं,उनको सौ दिनों के काम की गारंटी देनी चाहिए और उनके जो वेजेज़ हैं,उनको गारंटी देने के लिए,ताकि दूसरे किसान उनको एक्सप्लाइट न करें और उनके वेजेज़ को नीचे न आने दें तो कम से कम वह फलें फूलें। उनके लिए यह सौ दिन की स्कीम तैयार की गई थी लेकिन आपकी सरकार आने के बाद जो आप हमेशा प्रो-फार्मर कहते हैं,प्रो इंडस्ट्रियलिस्ट तो आप हैं ही,लेकिन इस मनरेगा का एक ही आँकड़ा मैं आपके सामने रखना चाहता हूँ। सितम्बर तक आपको 24676करोड़ रुपये खर्च करने थे क्योंकि लास्ट ईयर इसी पीरियड में सितम्बर तक 24676करोड़ रुपये खर्च किए गए थे। इस साल आपने जो पैसा खर्च किया और स्कीम के तहत रिलीफ दिया,वह हर राज्य को 13618करोड़ रुपए दिए गए जबकि 24676करोड़ रुपए खर्च होने थे। सभी राज्यों को 11हजार करोड़ रुपए कम दिए गए और जो रुपया लेबर्स को वेज़ेज़ के रूप में देते थे,उसमें कमी आई।...(व्यवधान)जब आपने अपनी बात कह दी है,तो आप मुझे भी सदन में बिना रोक-टोक के बोलने दें। मैं मनरेगा की बात कहना चाहता हूं। कर्नाटक से आपको कितने लैटर आए हैं कि वहां कम से कम 1300करोड़ रुपये की डिमांड बाकी है। बहुत-से राज्यों में अभी तक वेज़ेज़ बाकी हैं और आप कह रहे हैं कि आप किसानों की भलाई कर रहे हैं,खेतिहर मजदूरों की बात कर रहे हैं।
आप रोजगार गारंटी की बात कह रहे हैं लेकिन आपने पूरा पैसा कहां खर्च किया है। आज एग्रीकल्चर की यह हालत है कि आप पैसा रिलीज नहीं कर रहे हैं और दूसरी तरफ कह रहे हैं कि आपके रेवेन्यु डेफिसिट को फिलअप करने के लिए यह पैसा रिलीज नहीं किया है। अगर ज्यादा पैसा रिलीज कर दिया,तो वहां ज्यादा कोताही होगी इसीलिए किसी ढंग से इस स्कीम को रोकने की कोशिश कर रहे हैं। कुछ राज्यों में शायद ज्यादा पैसे दिए होंगे,लेकिन मेरे पास शिकायत आई है कि बहुत से राज्यों में मनरेगा का जितना पैसा जाना चाहिए था,उतना नहीं दिया गया। अब तक कितना पैसा दिया गया,कितने लोगों को रोजगार मिला। चार करोड़ के करीब परिवार मनरेगा के तहत काम करते थे,लेकिन आज उनकी संख्या डेढ़ करोड़ के लगभग हो गई है और उन्हें भी पेमेंट नहीं मिल रही है। आप बाद में यह कहेंगे कि आपके पास डिमांड नहीं है,इसलिए ज्यादा पैसा नहीं चाहिए। अगर आप काम पर जाने वालों को पैसा नहीं देंगे,तो काम पर कौन जाएगा। आप उन मजदूरों के वेज़ेज़ कट कर रहे हैं ताकि वे कम तनख्वाह पर काम करने के लिए मजबूर हों। आपकी स्पीच के पैरा 7और 10में जो आपने कहा है उसके विरुद्ध आप चल रहे हैं।
आज हंगामा हुआ और बाहर बहुत सी संस्थाएं लैंड एक्विजिशन के बारे में एजिटेशन कर रही हैं। लैंड एक्विजिशन एक्ट सर्वसम्मति से हुआ था। बीजेपी के बड़े नेताओं ने उसमें हिस्सा लिया था। श्रीमती सुषमा स्वराज,जेटली साहब तथा अन्य बड़े नेताओं के सुझाव से ही यह बिल बना था। जब वर्ष 2013का कानून सबकी सम्मति से पास हुआ,वर्ष 2014में उसे इम्प्लिमेंट किए बिना उसका नतीजा देखे बिना आप आर्डिनेंस लाए।
16.00 hrs उस ऑर्डिनैंस में जो किसानों का कंसेन्ट था,वह भी आपने निकाल दिया। पांच सालों तक अगर कोई वह लैंड यूटिलाइज नहीं करता है तो उसे वापस लेने का प्रावधान था। जब तक प्रोजेक्ट चलता है,तब तक देने का आपने उसमें वायदा किया। मैं आपको बहुत-से आंकड़े देता हूं कि किस तरह का पहले का एक्ट था और आज का एक्ट है और आप किसानों की बात करते हैं। अगर आप किसानों की बात करते हैं तो आपने उस एक्ट को क्यों बदला?आपको किसने कहा?केवल कॉरपोरेट को,इंडस्ट्रीज को बढ़ावा देने के लिए?हम भी चाहते हैं इंवेस्टमेंट आए। हम भी चाहते हैं इंडस्ट्री बढ़े। इसका मतलब यह नहीं है कि किसी का हक छीन कर किसी और को मिले। आप इसके बारे में सोच कर और इसके बारे में सबकी राय लेकर अमेंडमेंट के साथ आ सकते थे। लेकिन,आपने किसी से पूछा नहीं,इसके बारे में किसी की राय नहीं ली। एकदम जब पार्लियामेंट का सेसन खत्म हुआ तो दूसरे दिन ऑर्डिनैंस निकालने की शुरूआत की। आपने छः ऑर्डिनैंस निकाले। दूसरी तरफ आप डेमोक्रेसी की बात करते हैं। जितने भी बड़े नेता हैं,आप उनके भाषणों को कोट करते हैं,लेकिन आप कभी भी डेमोक्रैटिकली चलने की बात नहीं करते हैं। डेमोक्रैटिकली चलने के लिए आपके पास टाइम था। आपके जेटली साहब की स्पीच पढ़िए। उन्होंने ही पहले यह उठाया था कि इसे इंडियन कंस्टीटय़ुशन के आर्टिकल 123के तहत लाना क्या जरूरी था?अब वे यह बात क्यों नहीं उठा रहे हैं,यह मेरी समझ में नहीं आ रहा है। वे यही कहते थे कि Article 123 says that if there is urgency, there is inevitability, there is very urgent requirement, then only such an Ordinance should be issued. यह उन्होंने ही कहा था,लेकिन आज वे बदल गए,यू-टर्न ले लिया। अब आप किसानों की बात कर रहे हैं। आप जो बात करते हैं,उसमें कुछ मेल-जोल होना चाहिए। आपके यहां से सब यही कहते हैं कि हम करने वाले हैं,हम करेंगे। ठीक है आपके पास मेजॉरिटी है। इसीलिए यह आपके दिमाग़ में है कि इतनी मेजॉरिटी रखकर हम क्यों ऑपोजीशन की सुनें,क्यों किसानों की सुनें,क्यों मज़दूरों की सुनें?एक बार हमें मैनडेट मिला है तो हम जो चाहेंगे,करते रहेंगे,यह शायद आपका इरादा होगा,लेकिन यह ठीक नहीं है। डेमोक्रेसी में ऐसा इरादा रखना,ऐसी नीयत रखना,यह ठीक नहीं है। इससे देश को भी लाभ नहीं होगा और आगे चलकर आपको भी इसका लाभ नहीं होगा। यह किसानों के प्रति आपकी हमदर्दी है। सिर्फ ये दो ही प्वायंट्स मैं इसमें बताना चाहता था।
फिर आपका ‘स्वच्छ भारत अभियान’है।...(व्यवधान)यह आपके गवर्नमेंट की योजना है।...(व्यवधान) हमारी ‘निर्मल भारत’की योजना थी। आपने इस ‘निर्मल भारत’की योजना को ‘स्वच्छ भारत अभियान’में बदल दिया। उसका नामांतर कर दिया। अगर नाम बदलने से पूरा भारत स्वच्छ होता है तो उसे बदल दीजिए। इसका सिर्फ नाम बदल देने से क्या फायदा होगा?यह केवल लेबल चेंज करने जैसा है,क्योंकि इसे कांग्रेस ने बनाया है,यह यूपीए सरकार ने बनाया है। इसलिए आपने यह बोलने की कोशिश भी नहीं कि पहले ‘निर्मल भारत अभियान’था और हम उसको ‘स्वच्छ भारत अभियान’बना रहे हैं। आपने सोचा कि अगर आपने बोल दिया तो यह यूपीए सरकार का एजेंडा हो सकता है। इन सबको भुलाने के लिए आपने ऐसा किया। इसलिए ऐसी चीज़ों से,नाम बदलने से कुछ नहीं होता। जो कोयला होता है,तो कोयले को साबुन से कितना भी धोएं,उसका कालापन नहीं जाता है।...(व्यवधान)कोयले को अगर जलाएंगे,तभी वह सफेद होता है।...(व्यवधान)वैसा ही केवल नामांतर से कुछ नहीं होगा।...(व्यवधान)
कोयले की बात जब आएगी तो हम आपकी भी बातों का उत्तर देंगे। Do not worry; we are not going to escape. जब बिल आएगा,तो हम उसे फेस करेंगे,उसके बारे में बतायेंगे,घबराइए मत। आप समझ लें कि हमें डराने की और ब्लैकमेल करने की कोशिश न करें। हम डरने वाले नहीं हैं। जब यह आएगा,तो देखेंगे। कोयला विधेयक आएगा,देखेंगे,माइन्स विधेयक आएगा,देखेंगे,लैंड एक्वीजिशन एक्ट आएगा,देखेंगे,जितने भी एक्ट आएंगें,हम यहीं रहकर सुनेंगे,आपकी बात सुनेंगे और अपनी बात भी सुनवाएंगें।
स्वच्छ भारत अभियान में आपने कदम उठाए,लेकिन क्या स्थिति है?हाथ में झाडू,लेकिन विचार में कचरा। सभी के हाथ में झाडू दिया,सभी ऑफिसर्स,सभी लोगों को दिया। विचार में कचरा इसीलिए बोल रहा हूँ कि इस देश में आपकी पार्टी के नेता लोग,आपके एम.पी. लोग और आपके संघ,संस्था के लोग ऐसा एक माहौल इस देश में क्रिएट कर रहे हैं कि देश को तोड़ने की बात कर रहे हैं,समाज को तोड़ने की बात कर रहे हैं। कोई कहता है चार बच्चे पैदा कर लो,कोई कहता है कि दस पैदा करो,कोई कहता है .......*कोई कहता है रामजादे,यह क्या है?अगर आपको ऐसे स्टेटमेंट शोभा देते हैं,इनसे अगर आप खुश हैं तो यह आपकी मर्जी है। इससे अगर समाज में बुराई आती है,अगर इससे डिवीजन होता है,लोगों के मन में कुछ शंका पैदा होती है तो यह देश के लिए भी खतरा है,आपकी गवर्नमेंट के लिए भी खतरा है। इसीलिए मैं यह कहना चाहता हूँ कि विचारों में पक्का होना चाहिए। यह ठीक है कि स्वच्छ भारत अभियान आपने प्रारंभ किया है,वह बात और है,लेकिन जो विचारों में कचरा है,पहले उसे निकालिए। अगर उसे निकाल दिया तो भारत स्वच्छ हो जाता है। ...(व्यवधान)सबको सम्मान दीजिए और सम्मान लीजिए।
बहुत सी जगह टॉयलेट्स की समस्या भी स्वच्छ भारत स्कीम में है। इसमें एक समस्या है कि हमारे देश में आप कितना भी कहें,लोग बाहर कहेंगे,अंदर कहेंगे कि हम सब एक हैं,एक धर्म के हैं,लेकिन जब हम गांव में जाते हैं,किसी मोहल्ले में जाते हैं,वहां पर हर एक की जाति रहती है। शमशान में जाइए,आदमी मरता है तो वे कहते हैं कि इस शमशान में इसे यहां मत गाड़ो,यह हमारा है,इस जाति का है। टॉयलेट की भी वैसी ही बात है। अगर आप टॉयलेट किसी गांव के लिए बनायेंगे,तो वे दूसरों को कॉमन टॉयलेट में नहीं आने देते हैं। अगर आपको इसे करना है तो इसकी भी योजना डालनी चाहिए कि मोहल्ले के अंदर,हर कार्नर में किस ढंग से इसे करना है,उसके बारे में भी सोचना चाहिए। यह कहना ईजी है कि हम सब एक हैं। इस देश में हजारों सालों से हम देख रहे हैं कि छुआछूत,जातीयता,ये सारी चीजें है। आपको बेहतर मालूम है,क्योंकि आप घूमे हैं,स्वयं सेवक के नाते काम किए हैं,देहात के माहौल को जानते हैं। अभी भी कोई पैसे वाला शेडय़ूल कास्ट है या गरीब शेडय़ूल ट्राइब है तो उसे अभी भी गांव में नहीं छूते हैं और उसे चाय नहीं पिलाते हैं। ...(व्यवधान)आप सुन लीजिए। ...(व्यवधान)बहुत सी जगह अनटचेबिलिटी है। अनटचेबिलिटी होने की वजह से ही एक्ट है। यह जो अनटचेबिलिटी है,अभी भी विलेजेज में एग्जिस्टिंग में है। मैं एक बार नहीं,सौ बार बोलता हूं कि अनटचेबिलिटी है। मैं यह कहना चाहता हूं कि इस देश में हजारों सालों से वह चलते हुए आया है तो वह एक दिन में बंद नहीं होगा। मैं आपको दोष नहीं दे रहा हूं। मैं यह कह रहा हूं कि इस देश से ऐसी प्रथा को दूर करने के लिए आपको सोचना होगा,चाहे वह टॉयलेट का हो,श्मशान का हो या किसी और चीज का हो। आप क्यों बार-बार गुस्से में आते हैं,मुझे यह समझ में नहीं आता है।
मैं आपका बहुत सम्मान करता हूं। आप बार-बार बहुत जगहों पर कहते हैं कि मैं एक चाय की दुकान लगा कर आगे आया हूं और अमेरिकी प्रेजिडेंट ने बोला,सब लोगों ने बोला इसीलिए आपके लिए गौरव की बात है। आप चाय बनायेंगे तो आपकी चाय पीने वाले लोग हैं लेकिन अगर मैं चाय बनाऊंगा तो मेरी चाय भी कोई नहीं पीयेंगे,...(व्यवधान)मेरी चाय पीने की तो छोड़ें,नजदीक आने नहीं देते,और आपकी दुकान में भी नहीं आ सकता,ऐसी स्थिति इस देश में है। इसको हमें मानना पड़ेगा। ...(व्यवधान)इस समस्या का समाधान एक दिन में नहीं निकलेगा,लेकिन इसके लिए सभी को कोशिश करनी चाहिए। ...(व्यवधान)हम बार-बार यही बात बोलते गए कि इससे कुछ होने वाला नहीं है। इसको एक डिटरमाइन,इसके लिए एक कमिटमेन्ट होना चाहिए,उस कमिटमेन्ट के तहत ही उन्हें काम करना चाहिए। इसीलिए हम एक एक्ट लाए - प्रिवेन्शन ऑफ एट्रोसिटीज एक्ट, ...(व्यवधान)वह उसका ऑर्डिनैंस लाये थे। आपने उसको नहीं रखा। उसके बाद आपका रिजर्वेशन इन परमोशन फॉर शेडय़ुल कॉस्ट,वह एक्ट भी नहीं आया। इसीलिए जो चीजें शेडय़ुल कास्ट और शेडय़ुल ट्राइब के लिए जरूरी हैं,वे पेन्डिंग है। ...(व्यवधान)जिन चीजों के लिए वेट कर सकते थे,...(व्यवधान)आप ठहर सकते हैं,वे आप पहले ला रहे हैं।...(व्यवधान)मेरा कहना यह है कि जों चीजें जरूरी हैं,उनका विरोध भी हो सकता है। हमने रिजर्वेशन परमोशन में जो एक्ट लाए,वह राज्य सभा में पास हुआ लेकिन वह लोक सभा में पास नहीं हो सका। प्रिवेन्शन ऑफ ऐट्रोसिटीज ऑन एस.सी./एस.टी. वह भी हमने इंट्रोडय़ूस किया था। वह भी डेफर किया। अब वह कहां है,उसका पता भी नहीं है। हमारे सामने ये चीजें हैं और सरकार उन्हें जरूरी नहीं समझ रही है। कोई उनके बारे में नहीं सोच रहा है। इन चीजों के बारे में सोचने की जरूरत है। ऐसी चीजों को लाना आपका कर्तव्य है। आप इनके बारे में भी सोचिए।
फूड सिक्योरिटी एक्ट हो,राइट टू एजुकैशन हो,राइट टू फूड हो या राइट टू इंफॉरमैशन हो,ऐसी चीजें इसलिए लायी गईं कि समाज में सभी को एक अच्छा दर्जा मिले,उनकी सेहत अच्छी रहे। आज गरीबों को फूड सिक्योरिटी एक्ट से फायदा हो। 40प्रतिशत लोग बिलो पॉवर्टी लाइन हैं,उन सभी को फायदा हो। आज फूड सिक्योरिटी से कम से कम 67प्रतिशत लोगों को फायदा हो। अगर उसमें कटौती की गई तो नेचुरली 67प्रतिशत उससे वंचित हो जायेंगे। उनके लिए यू.पी.ए. ने और सभी लोगों ने मिल कर कानून बनाया है। उस कानून का कोई मकसद नहीं रहेगा और लोगों की हेल्थ की स्कीम खराब हो जायेगी। फिर इस देश में सारे लोग अनहेल्दी हो जायेंगे,उनमें प्रोटीन की कमी हो जायेगी। मैं यह चाहता हूं कि इसको धक्का नहीं लगाइए,इसको हाथ नहीं लगाइए,इसको कन्टीन्यू कीजिए,चाहे कितना भी प्रेशर आये। सोशल सेक्योरिटी के प्रोग्राम बहुत महत्वपूर्ण हैं। अगर आप डेवलपमेन्ट के साथ-साथ सोशल सेक्योरिटी के प्रोग्राम को,इंक्लूजिव ग्रोथ को नहीं देखेंगे तो निश्चित रूप से इस देश का उद्धार होने वाला नहीं है। अगर सिर्फ चंद अमीर लोग फायदा उठाएंगे और गरीबों को कुछ नहीं मिलेगा तो वे यही कहेंगे कि सारी डैमोक्रेसी सिर्फ अमीरों के लिए हैं,लोकतंत्र अमीरों के लिए है गरीबों के लिए नहीं है। अगर यह भावना पैदा हो गई तो कल इस देश में इसका अलग रूप हो सकता है। मेरा आपसे निवेदन है कि कोई कुछ भी कहे लेकिन इसमें कोताही न बरतें,इसे कंटीन्यू करना चाहिए। इस एक्ट को मजबूती के साथ रखने की कोशिश होनी चाहिए।
जन-धन योजना पहले से चली आ रही है। आधार कार्ड भी बनाया गया था।...(व्यवधान)ठीक है,इसका भी लेबल चेंज कर दिया।...(व्यवधान)मैं आपको एक आंकड़ा देता हूं। इस देश में 77करोड़ एकाउंट्स खोले गए हैं जिनमें जमा राशि 10लाख से बढ़कर 30लाख करोड़ तक है। उसमें गरीबों के जो एकाउंट्स खोले गए थे,आधार के नाते हों या मनरेगा की स्कीम में हों,उस योजना में भी कम से कम 13करोड़ नए एकाउंट्स खोले गए हैं। लेकिन पहले जो थे,उनमें कम से कम 7करोड़ एकाउंट्स ऐसे थे जो मनरेगा में पेमैंट लेने के लिए खोले गए थे। लेकिन किसी को यह बात मालूम नहीं हो रही है क्योंकि मनरेगा स्कीम के तहत जो लोग बैनीफिट लेते थे,ऐसी 13-14स्कीम्स आधार कार्ड से जुड़ी हुई थीं और बैनीफिट्स ट्रांसफर कर रहे थे। यही नहीं,दूसरी योजनाएं जैसे हाउसिंग,स्कालरशिप आदि उससे घट रही थीं। इसमें फंक्शनल केवल 28प्रतिशत हैं,बाकी 72प्रतिशत नान-फंक्शनल हैं यानी कोई एकाउंट नहीं,कोई ऑपरेशन नहीं है। अगर 15-15लाख रुपये मिलें तो हो सकता है कि वे भी फंक्शनल बन जाएं। लोग इंतजार कर रहे हैं,हम भी इंतजार कर रहे हैं और आप भी उस एकाउंट में 15-15लाख रुपये डालने के लिए बहुत इच्छुक हैं। जैसे आपने अपने चुनावी भाषण में कहा,शायद मुझे लगेगा कि आप निश्चित रूप से इसकी व्यवस्था करेंगे और जो 72प्रतिशत लोग इन-ऑपरेटिव हैं,वे ऑपरेटिव हो जाएंगे।...(व्यवधान)
आपने अभिभाषण के पैरा 2में रिलीजियस टॉलरैंस की बात रखी है। आपको मालूम है और आपने बहुत दिनों बाद अपनी चुप्पी विज्ञान भवन में तोड़ी। जब हम यही बात राज्य सभा और लोक सभा में रिमाइंड करा रहे थे,जब बहुत से नेता धर्म के बारे में,किसी धर्म को छेड़ने के बारे में,चर्च अटैक के बारे में और माइनॉरिटीज पर अटैक के बारे में बोल रहे थे,उस वक्त हमने यह आवाज उठाई थी। अगर आप उसी वक्त कह देते तो वे शांत हो जाते। आपको छह ऑर्डिर्नेस लाने की जरूरत नहीं होती,उसमें बहुत से ऑर्डिनेंस निकल सकते थे,उन्हें सुलझा सकते थे। आप और ऑपोजिशन मिल कर उसको ठीक कर सकते थे। लेकिन वह क्यों रुक गया?क्योंकि आप नहीं आए,आपने बताया नहीं। हम आपका मुंह खुलवाने के लिए कोशिश करते रहे,जैसा गांधी जी का सिद्धांत था,मैं बुरा नहीं सुनूंगा,बुरा नहीं देखूंगा,बुरा नहीं कहूंगा। मैं पार्लियामेंट नहीं आऊंगा,पार्लियामेंट में नहीं सुनाऊंगा और आपको नहीं देखूंगा। ...(व्यवधान)अगर ऐसा होता,यह ठीक हो जाता,लेकिन वह नहीं हो सका। बाहर बहुत सारे नेता भाषण कर रहे हैं,उनको आप ही रोक सकते हैं,दूसरा कोई नहीं रोक सकता,क्योंकि या तो वह पार्लियामेंट मेंबर हैं या आपके विचारों में आस्था रखने वाले लोग हैं या आपके विचारों से जुड़े हुए लोग हैं। वे प्रधानमंत्री की बात सुनते हैं क्योंकि आप ही के नाम से ये लोग चुन कर आए हैं,बीजेपी के नाम से नहीं आए हैं। इसलिए वे मोदी जी का इन्सट्रक्शन चाहते हैं। इसमें तो आपकी सहमति हैं न? ...(व्यवधान)। उनके नाम से चुन कर आए हैं,इसलिए उनकी बात भी चलती है,उनका रिट भी चलता है। उस वक्त अगर यह कह देते तो ऐसी घटनाएं नहीं घटती,ऐसी घटनाएं इस देश में नहीं होती थीं। मुख में राम बगल में छुरी नहीं होना चाहिए। ...(व्यवधान)अगर कुछ करना है तो इसे आप बंद कराइए,नहीं तो आप बोलते रहिए,मैं सुनते रहता हूं,इससे देश का नुकसान होता है,कम से कम दो-तीन महीने से नुकसान हुआ। दो-तीन महीने से जितने भी एक्ट पास होने वाले थे,वे नहीं हो सके। इसलिए इसके बारे में भी आपको इन्सट्रक्शन देना चाहिए। आपके माध्यम से या होम मिनिस्ट्री के माध्यम से ऐसा होना चाहिए। अगर ओपेनली ऐसा बोलते हैं तो इससे देश का माहौल खराब होता है,समाज का माहौल खराब होता है,समाज बिगड़ी हुई स्थिति में पहुंच जाता है,उसका असर देश पर भी पड़ता है,सरकार पर भी पड़ता है। इसीलिए बार-बार आरएसएस के नेता भी कह रहे हैं कि मोदी साहब की सरकार को धक्का लगें,वैसी बात मत करो। ऐसे निर्देश भी आपको मिल रहे हैं। शायद आपने बहुत सारे पेपर्स में देखा होगा। ...(व्यवधान)मेरा जो प्रोबल्म हो वह मैं बता रहा हूं,ये सारी चीजें हैं। सोशलिज्म और सेक्युलरिजम,आज नायडू साहब ने क्लीयर कर दिया है कि उसमें कोई चेंज नहीं है,जो प्रिएम्बल में शब्द हैं उसमें कोई बदलाव नहीं है। यह हमारी मंशा है,इस बारे में कोई चिंता करने की जरूरत नहीं है,उन्होंने ठीक बात कहा। आर्टिकल 25जिसका जिक्र आपने विज्ञान भवन में किया। उसके अनुसार सरकार को चलने की कोशिश करनी चाहिए। आर्टिकल 25की याद अमेरिका के प्रेसिडेंट आकर दिलाते हैं,इसमें लिखा है कि यहां पर हर फेथ,हर रिलीजन को समान दृष्टि से देखना चाहिए। यह संविधान कहता है। ...(व्यवधान)अगर बाहर का आदमी होकर यह बात कहता है,हम उस पर क्या कहें। सारी चीजें आपकी खामोशी की वजह से हुई हैं। आप इसको किस ढंग से दुरुस्त करते हैं। दूसरे देश का प्रेजीडेंट आकर हमें रिमाइंड कराता है कि तुम्हारे देश के संविधान में ऐसा लिखा है,इसलिए हमें सब धर्मों को समानता की दृष्टि से देखना चाहिए। ...(व्यवधान)अगर दूसरे देश का प्रेजीडेंट हमें याद दिलाता है तो उससे क्या होता है,?हमारा संविधान सर्वश्रेष्ठ है और हम उसे इम्प्लीमैंट करेंगे। इस बारे में किसी को कहने की जरूरत नहीं है,यह मैसेज उसी वक्त आपको देना चाहिए था। ...(व्यवधान)
HON. DEPUTY SPEAKER: Kharge ji, bringing in the name of a person from outside when he is not a Member of the House is not necessary.
… (Interruptions)
SHRI MALLIKARJUN KHARGE: I referred to him as the President.… (Interruptions)
HON. DEPUTY SPEAKER: Do not try to bring in the name of the President. This is what I want to say.
… (Interruptions)
SHRI MALLIKARJUN KHARGE: If it is unparliamentary, I will improve it. I do not have any objection to that. Then, I would say only President because on 26th January the President of America came here as the Chief Guest.… (Interruptions)
HON. DEPUTY SPEAKER: That is all right. But whatever we say, it should be within our limit because we should not be having a debate on the name of the President of other country. That is the point that I want to say.
… (Interruptions)
श्री मल्लिकार्जुन खड़गे:यहां पर जो घटनाएं घट रही थीं,उन्होंने उसकी सूचना ली,फिर यह कहा। यह अच्छी बात नहीं है,क्योंकि इस देश के लिए हमारा संविधान सुप्रीम है और हमारे प्रधान मंत्री जी जो कहते हैं,वह इस देश के लोगों को ठीक लगता है। हमें दूसरों से सबक सीखने की आवश्यकता नहीं है,लेकिन आपने उसे टालरेट किया। आपने उन्हें बुलाया,लेकिन वह यह बात कहकर चले गये। अमेरिकी प्रेजीडेंट जाते-जाते एक बम डालकर चले गये। अब आपको इसे सुधारना है। ...(व्यवधान)मैं यह इसलिए कह रहा हूं,क्योंकि जो नेता लोग आपके आगे-पीछे रहते हैं,उन्होंने इस वातावरण को क्रिएट किया है। आप इसे समाप्त करने की कोशिश कीजिए,नहीं तो वे सब मिलकर आपको समाप्त कर देंगे। ...(व्यवधान)
इसके बाद एजुकेशन और स्किल डेवलपमैंट की बात आती है। आपको मालूम है कि एजुकेशन और स्किल डेवलपमैंट में पहले एक अभियान चला था,खासकर आरटीई एक्ट आने के बाद 25परसेंट पिछड़े वर्ग के छात्रों के लिए इसे आरक्षित किया गया था। इससे कम से कम 2,14,561लोगों को प्राइमरी और 1,76,361लोगों को अपर प्राइमरी में मदद देने के लिए स्कूल खुलें। आज 96परसेंट स्कूल आपरेशनल हैं। लेकिन उन बच्चों में देश भक्ति के साथ-साथ साइंटिफिक टैम्परामेंट लाने के लिए जो सिलेबस था,उसे भी आहिस्ता-आहिस्ता गायब करने का काम चल रहा है,क्योंकि एक साजिश हो रही है। अगर उस ढंग से चलेंगे,तो बहुत मुश्किल होगा। इस देश में वे बार-बार कह रहे थे,लेकिन पंडित जवाहर लाल नेहरू जी के साथ-साथ सभी बड़े लीडर्स मानते थे कि इस देश में साइंटिफिक टैम्पर को कायम रखना चाहिए और जो चीजें,अंध-श्रद्धा है,उसे हटाना चाहिए। लेकिन शिक्षण में ऐसी चीजें लाना ठीक नहीं है। अगर अंध-श्रद्धा की बात है,जिसे आपने एक्सपेरीमेंट नहीं किया,उसकी बात हम आज करेंगे,तो उससे कोई फायदा होने वाला नहीं है। जो आने वाली जेनरेशन है,उसे हम इग्नोरेंट कर रहे हैं और अपने तत्व ज्ञान बताकर उन्हें और भी इग्नोरेंट बनाकर भेज रहे हैं। इसलिए मैं चाहता हूं कि साइंटिफिक टैम्परामेंट लाने के लिए बच्चों में साइंस,मैथेमेटिक्स पर ज्यादा जोर देकर एजुकेशन को बढ़ावा देना चाहिए,नहीं तो हर कोई आदमी अपनी बात करेगा। मैं आपसे कहना चाहता हूँ कि छः यूनिवर्सिटीज हैं,मेरे पास छः केन्द्रीय नई यूनिवर्सिटीज का ही आंकड़ा है,आज तक सेन्ट्रल यूनिवर्सिटीज के वाइस चांसलर नहीं हैं नौ महीने से। पहले तीन महीने तो इलेक्शन में गये,लेकिन अब एक साल से वहाँ पर वाइस चांसलर नहीं हैं। मेरे संसदीय क्षेत्र के बारे में भी एक बार मैंने आपसे कहा था कि सेन्ट्रल यूनिवर्सिटीज में यदि एक साल वाइस चांसलर न हों,तो क्या एजुकेशन आप दे रहे हैं?इसके अनेको उदाहरण हैं।
अब स्किल डेवलपमेंट की बात आती है। यह तो पहले से ही शुरू है। इसके लिए दो हजार करोड़ रुपए का डिपॉजिट यानी रिज़र्व फंड रखा गया था। उसमें लगभग 65विभागों को इकट्ठा किया गया और वे एम.एस.एम.ई. के तहत चलते थे। आपने उसका अलग से विभाग बनाया,यह अच्छी बात है। एक नौज़वान साथी को आपने स्किल डेवलपमेंट की जिम्मेदारी सौंप दी है। लेकिन अब तक नौ महीने में कितने स्किल डेवपलपमेंट सेन्टर शुरू हुए हैं?क्योंकि नौ महीने के समय में इसे शुरू करने में दिक्कत नहीं है। आपने कितने लोगों को ट्रेन्ड किया,मैं यह नहीं पूछ रहा हूँ। इसके ऊपर कितनी धनराशि खर्च हुई?यदि आपकी नीयत ठीक है,यदि आप स्किल डेवलपमेंट में आस्था रखते हैं,तो नौज़वानों को ट्रेनिंग दीजिए। ट्रेनिंग की अवधि तीन महीने की है,छः महीने की है,नौ महीने की है और एक साल की भी है। मैं एक उदाहरण बताता हूँ,पिछले 50वर्षों में पाँच हजार आई.टी.आई. इस देश में थे। जब मैं लेबर मिनिस्टर बना,तो चार साल में पाँच हजार नये आई.टी.आई. खोले। ये स्किल डेवलपमेंट के लिए खोले गये,जहाँ कम से कम एक मेकैनिक,एक इलेक्ट्रीशियन,एक फीटर,एक सेनेट्री आदि की ट्रेनिंग दी जा सके।
स्किल डेवलपमेंट के लिए हमने एक पैरा-मेडिकल कॉलेज भी खोला। पिछले नौ महीने से उसे देखने वाला नहीं है। मैंने दो-तीन बार इसका जिक्र आपसे से भी किया है,आपको पत्र भी लिखा। मैडम सोनिया जी ने भी उसे देखा है। बहुत-से नेतागण वहाँ आये थे और श्री अनन्त कुमार जी और श्री सदानन्द गौड़ा जी ने भी उसे देखा है। सभी लोगों ने देखा है,इसके बावजूद पैरा-मेडिकल कॉलेज बन्द करने की बात हो रही है,नर्सिंग कॉलेज बन्द करने की बात हो रही है। यह तो लेबर विभाग का पैसा है। ई.एस.आई.सी. में यदि हेल्थ के लिए मेडिकल कॉलेज और सुपर स्पैशियलिटी हॉस्पीटल्स नहीं बनाएंगे,आपने तो वाराणसी में,जब रेलवे का एक फंक्शन था,तो उस वक्त घोषणा की कि मैं रेलवे की तरफ से चार इंजीनियरिंग कॉलेजेज खोलूँगा। इन्हें खासतौर पर स्किल डेवलपमेंट की जिम्मेदारी सौंपी जाएगी। जब इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार है,सिर्फ कर्नाटक में ही नहीं,यह आध्र प्रदेश में है,कोयम्बटूर में है,चेन्नै में है,कोलकाता में है,शायद पटना में वह खत्म होने को है,हिमाचल प्रदेश में है,हर जगह है,उसका इस्तेमाल नहीं हो रहा है। यदि ऐसा सोचा जा रहा है कि यह पिछली सरकार की है,इसलिए सरकार इसे नहीं चलाना चाहती है,तो यह ठीक नहीं है। आपने आश्वासन दिया है कि इन सभी तेरह-चौदह जगहों पर जो सेन्टर्स चल रहे हैं,उनको हम चलाएंगे और उन्हें देखेंगे। अपनी तरफ से इसे एम्स को दीजिए क्योंकि वहाँ पर पैसा लगाने के बजाए,वहाँ पर तो इंफ्रास्ट्रक्चर रेडिमेड है,उनको देकर वहाँ पर सुपर स्पैशियलिटी हॉस्पीटल्स बनाइए। ई.एस.आई.सी. में कम से कम 28हजार करोड़ रुपए का रिजर्व फंड है,हर साल उनके पास पैसा आता है और उसी में से खर्च करना है। एक स्टेट,जो सेन्ट्रल ई.एस.आई.सी. को कंट्रीब्यूट करती है,उसमें से 30पर्सेंट पैसा भी खर्च नहीं करती है। 70प्रतिशत रिजर्व फण्ड भी चला गया। यह स्थिति है,इसीलिए पिछली सरकार ने यह कदम उठाया था। एक तरफ स्किल डेवलपमेंट को प्रोत्साहन देने के लिए पैरामेडिकल इंस्टीटय़ूशन्स,नर्सिंग इंस्टीटय़ूशन्स और लेबर की हेल्थ केयर के लिए अच्छे सुपरस्पेशियलिटी हॉस्पिटल और मेडिकल कॉलेज इसीलिए बनाए गए थे कि वहां पर कम से कम 24घण्टे लेक्चरर्स-प्रोफेसर्स रहते हैं और वह आदमी किसी कारपोरेट हॉस्पिटल में न जाएं। लेकिन आज वह वहीं का वहीं है। अब तक दो मंत्री बदल गए हैं,बोलते हैं कि नेक्सट रि-शफल अप्रैल में होगा,लेकिन आप उसको बना सकते हैं,इस दिशा में काम कर सकते हैं,ऐसा मैं महसूस करता हूं। इसमें इतना बड़ा इनवेस्टमेंट करके आपके पास दो इंस्टीटय़ूशन्स हैं -चेन्नई और कोयम्बटूर में,लेकिन इसके बावजूद इसकी तरफ ध्यान नहीं जा रहा है। स्किल डेवलपमेंट सेंटर्स की बहुत से राज्यों में आपने फाउंडेशन डाली है,एलॉटमेंट किया है,लेकिन उन पर काम शुरू नहीं हुआ है। स्किल डेवलपमेंट सेंटर की फाउंडेशन हो गयी,लेकिन उस पर काम शुरू नहीं हुआ। क्यों शुरू नहीं हुआ?उसके लिए पैसे नहीं हैं,क्या बात है?इसके बारे में आपको सोचना चाहिए। कहते हैं यह किया,वह किया,लेकिन जो हाथ में है,उसे नहीं कर रहे हैं,भाषण देने से पेट नहीं भरता है। भूखे पेट से खुदा भी याद नहीं आता,पेट भरे तो खुदा भी याद आता है। इसीलिए लोगों का पेट भरने,स्किल डेवलपमेंट,हुनर सिखाने का आपने जो वायदा किया है,वह वायदा पूरा कीजिए। उसके बाद कितने लोग इम्प्लायबल हैं,कितने लोग तैयार हैं,कितने लोगों को रोजगार मिलता है,यह मालूम होगा। उसी वक्त जीडीपी ग्रोथ का भी कोई फायदा है। ...(व्यवधान)
HON. DEPUTY SPEAKER: Please wind-up your speech.
SHRI MALLIKARJUN KHARGE: Sir, only three more points I will mention, and I will leave the other points. ...(व्यवधान)
आपने जो बातें इस स्पीच में कही हैं,मैं उनसे बाहर नहीं जा रहा हूं। ...(व्यवधान)पेट्रोल और डीजल प्राइसेज में इंटरनेशनल मार्केट में 50प्रतिशत कट हुआ,उसका रेट 125डॉलर से 50डॉलर तक आ गया तो नैचुरली उतना ही रिडक्शन पेट्रोल और डीजल के दामों में होना चाहिए। आपने क्या किया?आपने शुरू में दाम घटाए,लेकिन बाद में आपने रेवेन्यू को एड करने के लिए कस्टम्स एंड एक्साइज डय़ूटी लगा दिया।...(व्यवधान)सुनिए,अगर रेट बढ़ जाता तो आप भी कम नहीं कर सकते थे। यह सब बोलने की बात है।...(व्यवधान)
श्री अनुराग सिंह ठाकुर (हमीरपुर): हमने आम आदमी को फायदा दिया है। ...(व्यवधान)
श्री मल्लिकार्जुन खड़गे :हमारा कहना है कि 50प्रतिशत कम हुआ,लेकिन देश में प्राइसेज 50प्रतिशत कम नहीं हुए,एक्साइज और कस्टम्स डय़ूटी लगाकर वह पैसा सरकार ने लिया। आज इससे कम से कम 17000करोड़ रुपये का फायदा सरकार को हुआ,लेकिन कस्टमर्स को उसका कोई फायदा नहीं हुआ,कन्ज्यूमर को उसका फायदा नहीं हुआ। इसीलिए आप यह जो बोल रहे हैं कि 17प्रतिशत कम किया,वह इंटरनेशनल मार्केट की देन है। आप हमेशा कहते हैं कि मेरी किस्मत अच्छी है और अच्छी किस्मत वालों को चुनिए। आपने कहा था कि आपकी किस्मत अच्छी है,इसलिए इंटरनेशनल मार्केट में दाम घट गए हैं,इसलिए आपने 17प्रतिशत कमी की,लेकिन आपको प्राइसेज 50प्रतिशत कम करना चाहिए था। इस बात को आप मानिए। आपको यह बेनिफिट कन्ज्यूमर को देना चाहिए था,कन्ज्यूमर को कोई फायदा नहीं मिला।
अब जीडीपी ग्रोथ की बात है,उसके बारे में आपने बहुत से आंकड़े दिए हैं,लेकिन आपकी 7.4प्रतिशत की जीडीपी ग्रोथ है,उसका बेस क्या है?किस बेसिस पर यह 7.4प्रतिशत आया है? 2004-05 के आधार पर ग्रोथ सिर्फ 0.4प्रतिशत है। हमारे वर्ष 2004-05का और आपके वर्ष 2011-12के जो बेस पॉइंट हैं,आप उस देख लीजिए। वर्ष 2004-05और वर्ष 2011-12की कीमतें देख कर आप जीडीपी ग्रोथ की अनुमान लगा सकते हैं।...(व्यवधान)हमारे समय में वर्ष 2011-12के अनुमान से चले तो ग्रोथ 6.9है और उससे देखा जाए तो जो आप 7.9ग्रोथ की बात कर रहे हैं,उसमें सिर्फ 0.5परसेंट की ग्रोथ का अंतर है।...(व्यवधान)मैं यह पूछना चाहता हूं कि जीडीपी की ग्रोथ के साथ कितना रोजगार बढ़ा,कितना इनवेस्टमेंट आया और कितने लोगों को नौकरी मिली?जब जीडीपी ग्रोथ होती है तो आप आंकड़ा देखिए कि कितने लोगों को नौकरी दी है?...(व्यवधान)आपने बताया कि कितनी नौकरियां बढ़ गई हैं,लेकिन यह नहीं बताया कि कितने लोगों को नौकरियां मिली हैं।...(व्यवधान)आपका रोजगार में कोई इजाफा नहीं हुआ,इनवेस्टमेंट में ज्यादा इजाफा नहीं हुआ। इसके बावजूद आपने 7.4ग्रोथ रेट का आंकड़ा दिया है क्योंकि आप वर्ष 2011-12से कम्पेयर कर रहे हैं। अगर उससे कम्पेयर करें तो 6.9का प्रीवियस आंकड़ा है। आप लोगों को,देश को गुमराह मत कीजिए। आप लोगों को सच बताएं। आपको कोई रोकने वाला नहीं है। अगर सच्चाई की बात करेंगे तभी देश के लिए अच्छा होगा।...(व्यवधान)
अंत में मैं कहना चाहता हूं कि आपने कहा था कि 33प्रतिशत आरक्षण महिलाओं को दिया जाएगा लेकिन इस बार लगता है कि आप उसे भूल गए हैं या वह विषय छूट गया है या प्रिंट नहीं हुआ है,यह बात मुझे मालूम नहीं है। 33प्रतिशत विमन रिजर्वेशन का क्या हुआ?
मैं आपको ये सारी चीजें इसलिए बता रहा हूं कि आपका कहना अलग है,लेकिन इम्प्लिमेंट करना या न करना अलग बात है। आज इम्प्लिमेंट करने में बहुत फर्क है। जैसे कथनी और करनी में फर्क कहते हैं,वैसे ही हो रहा है। मैं एक ही बात आपको बताऊंगा।...(व्यवधान)
‘जख्म तीखे लगे, रूह चिल्ला पड़ी, दर्द उनको हुआ और घाव हमें लगा।
दुनियाभर के इंसानों का यही कहना है, सबके हक में अमन और चैन से जिंदा रहना है।
पास न आने दो नफरत के तुफानों को, प्यार की आज जरूरत है, सब इंसानों को।
प्यार की मिट्टी से पैदा लयकार तो होगी, सदियों की सोई दुनिया बेदार तो होगी।’ इसलिए आप नफरत पैदा करने की दुनिया मत बनाओ। अमन की दुनिया बनाओ,मोहब्बत की दुनिया बनाओ और आप अपने सभी लोगों को कहिए,आपके जितने भी चाहने वाले हैं,उन्हें कहिए कि ऐसा मत कीजिए। यह दुनिया के लिए अच्छा नहीं,देश के लिए भी अच्छा नहीं है और मेरे लिए भी अच्छा नहीं है। आपने मुझे बहुत वक्त दिया,इसीलिए आपका धन्यवाद। मैंने जो मुद्दे उठाए,उन्हें प्रधानमंत्री जी गंभीरता से लें क्योंकि पहली बार प्रधानमंत्री जी यहां कम से कम तीन घंटे से बैठे हैं। जब प्रधानमंत्री जी ने सुना है,तो स्वाभाविक है कि वे इसके ऊपर एक्ट करेंगे,ऐसा मैं सोचता हूं।
HON. DEPUTY SPEAKER: Kharge Ji, I want to make once again the point which I raised. The Parliament is supreme. We may make observations outside. We must not take advantage and debate those issues here. This is what I feel.
SHRI MALLIKARJUN KHARGE: As the Prime Minister, if he speaks something outside, I have to speak on that thing. … (Interruptions)
HON. DEPUTY SPEAKER: I am not talking about the Prime Minister. I am telling with regard to the President of America. With regard to the President of America, he made some reservations. This is what I feel. It is left to you. I feel personally that the name of the President of America must be removed. We can say as the President of America . … (Interruptions)
HON. DEPUTY SPEAKER:You can say whatever you want to say. But I personally feel that his name should not be used. You have every right to speak. It is up to you. If you feel that the name of the President of America be recorded, then I have no objection.
… (Interruptions)
HON. DEPUTY SPEAKER: You are Opposition Leader. You have a right to speak. You have many points to speak. But taking the name of the person who is not in this House is not correct. I feel that this is not correct. Therefore, I feel that his name should be removed . … (Interruptions)
HON. DEPUTY SPEAKER: If you feel that his name should be in the record, then I do not have any objection.
SHRI MALLIKARJUN KHARGE : Sir, I correct it by referring to him as the President of America. … (Interruptions)
HON. DEPUTY SPEAKER: The name will be removed. But the term “the President of America” will be there.
SHRI MALLIKARJUN KHARGE: I am thankful to you. Still I have got three points. If you allow me, I will speak.
HON. DEPUTY SPEAKER: You can speak whatever you want.
SHRI MALLIKARJUN KHARGE: I have three or four points. Our Prime Minister has also heard. It is not my intention to hurt anybody. The country is supreme. That is why, I said that if U.S President reminds us our own constitution, it will not give a good message.
HON. DEPUTY SPEAKER: That is what, I am telling.
SHRI MALLIKARJUN KHARGE: One should restrain from acting.
HON. DEPUTY SPEAKER: Whatever you are saying is correct.
SHRI MALLIKARJUN KHARGE: So, with all these remarks, I am thankful to you. You have given sufficient time to me to express my views. I am thankful to you once again.
TEXTS OF AMENDMENTS DR. P. VENUGOPAL (TIRUVALLUR): Thank you Sir for giving me an opportunity to speak on the Motion of Thanks on the President’s Address 2015.
At the outset, I thank our guiding force and our able leader Puratchi Thalaivi Amma for enabling me to participate in this discussion. The House is now discussing the customary address by the President to both the Houses of Parliament spelling the policies of this Government.
His Excellency, the President of India has underlined the point that our Parliament is the sanctum sanctorum of democracy. While saying that, he has also stated that this Government will endeavour to ensure smooth conduct of Parliament and enact progressive laws. Arriving at consensus can always enable smooth conduct of business. I would like to impress upon the Government that efforts to arrive at a common view must be given priority. For instance, the GST Bill which calls for a constitution amendment is before this House. That enactment will have far and wide consequences that may cut into the vitals of our spirit of cooperative federalism. Time and again, our leader Amma has been stressing on the need to arrive at a consensus. This is necessary to ensure the financial management of the State Governments. We need to arrive at a common view on Revenue Neutral Rates, compensation methodology and threshold. Fiscal autonomy of the States must be respected so that our federal structure is not affected.
Hon. President in his Address has stated that petrol price has been decreased by more than Rs.17 a litre. We must have a reality check. This has happened just because the crude oil prices in the international market have fallen drastically. When a consumer in America can get about four litres of petrol, that is, a gallon at a cost of one dollar, that is, Rs.61, the cost of petrol is still costlier in our country. In the global economic scenario, we need to wake up to the reality. Oil import bill has come down and the Union Government has increased the excise duty while State Governments get reduced Sales Tax collection. Similarly, we must see that our Indian electronics import bill is also not left to the mercy of the tax regime. Inverted duty structure puts the domestic electronic hardware manufacture sector at a tremendous disadvantage. Ironically, the finished products can be imported duty free. When 65 per cent of the domestic demand for the electronic components is met by imports, we find duty levied on them is affecting our manufacturing sector.
We are talking about ‘Make in India’ inviting the foreign companies with incentives. At the same time, we must help our domestic manufacturers to survive. Only then, there can be a level playing field. Increasing the share of manufacturing in the economy of Tamil Nadu was an important goal in the Vision 2023 Document of our revered leader. The aim of our Government of Tamil Nadu is to make our State, the most favoured manufacturing investment destination in India and one of the top three investment destinations in Asia.
With a total outlay of Rs.1,83, 819 crore in both node infrastructure and trunk infrastructure, the Madurai-Thoothukudi Industrial Corridor Project Development Company is being established. When the Union Government spreads red carpet to foreign companies, they may also do well to take note of the proposed industrial ventures of our State.
Hon. President said that the Government is fully committed to river linking with due consultations with the States’ concerned. The Union Government is still expected to spell out before the hon. Supreme Court its implementation plan of the inter-linking of rivers. It is also to be noted that the Union Government is yet to honour the directions of the Supreme Court based on the final order of the Cauvery Water Disputes Tribunal.
Our national unity must not be threatened by Inter-State River Water Disputes and all of us must uphold the rule of law and respect the judicial verdicts. I would urge upon the Centre to impress upon all the stake-holders to realise this.
When it comes to our External Affairs, our President stated that India’s destiny is linked with our neighbourhood. Instead of referring to issues like the resettlement and reconciliation in Sri Lanka or the unfriendly act of frequent attacks on Indian Tamil fishermen, our President talks about the deeper political, economic and security relations with Japan, USA and also China along with Russia. While talking about Look East Policy anchored in our relations with Southeast Asia, the President talks about extending it to Australia and the Pacific Islands. The mention of Sri Lanka and the vexed issue of not completing the rehabilitation programme have been avoided. This is necessary because India has funded heavily for the resettlement programme.
Our Tamil Nadu under the dynamic leadership and guidance of our revolutionary leader has reversed the trend of child sex ratio through our bold initiatives like Cradle Baby Scheme and Girl Child Protection Scheme. This has made Tamil Nadu to be a leader in the welfare and protection of girl children and women. When there is a decline in the child sex ratio in the national scene, the Union Government seeks to focus on saving and educating the girl child. I urge upon the Union Government to declare Tamil Nadu as a model State for this path-breaking initiative. Since 2001, 5.26 lakh girl children have been covered under the Girl Child Protection Scheme with an outlay of Rs.865.39 crore. Tamil Nadu is now a pioneering State in promoting female education and increasing the age of girls at marriage.
Hon. President referred to India as the fastest growing large economy in the world and we are moving towards GDP growth of 7.4 per cent. At this juncture, I want to suggest to this Government that they must not rely entirely on cooked up figures. I say this because recently many of the newspapers have rebuked this Government for the claim they made that we have achieved 6.9 per cent growth rate.
In a vast country like ours with 125 crore mouths to be fed, our food security is entirely dependent on our farmers. Our beloved President stated Annadata Sukhibhava, which means those who provide food must live long with adequate security and protection. He also states that it is one of our fundamental values. This has been reiterated long back by the Tamil Saint Poet Thiruvalluvar:
Suzhanrum yerpinnathu ulagam athanaal Uzhandum uzhave thalai This reference has been made when the President wanted to say that his government attaches enormous importance to the well-being of farmers. I must point out here that Tamil Nadu Village Habitation Improvement (THAI) Scheme implemented from May 2011 with an allocation of Rs.2390 crore till date aims at improving the basic amenities in the rural areas benefiting farmers and agricultural workers.
Union Government’s ambitious Digital India Programme to ensure service-oriented, transparent governance has been spelt out in this Address. I would like to state here that our State of Tamil Nadu has already taken a lead in this Information Technology initiative. Further, infrastructure development for this IT sector and other sectors is to be expanded. We are on the lookout for adequate funds. I urge upon the Centre to extend a special financial package to Tamil Nadu to translate into action the policies we evolve and spell out.
With this I conclude. Thank you.
PROF. SAUGATA ROY (DUM DUM): Hon. Deputy Speaker Sir, I rise to speak on behalf of All India Trinamool Congress on the Motion of Thanks and I stand here in support of my amendments. I shall not try to counter the arguments given by the ruling party Members Shri Anurag Singh Thakur and Shri Nishikant Dubey because they are ministerial hopefuls and they spoke with an eye to the next reshuffle. So their point should not be taken seriously.
I think at this stage, this Article 87 according to which the President makes his special Address to Parliament should be facially thought of because actually the Article makes a person speak what he does not believe in, that is the President’s Speech. The President’s speech has quoted various persons and announced schemes in new names. They include quotes from Shyama Prasad Mukherjee and Deendayal Upadhyay. The President’s Speech does not have any quotation from Gandhiji, Jawaharlal Nehru, Rabindranath Tagore or Swami Vivekananda. These two persons were only leaders of the BJP; they were not national leaders. Why should they be quoted in the President’s Speech? Also, there is a new scheme announced in the name of Nanaji Deshmukh. He was not even a leader of BJP and a new scheme has been announced by the President in his name. I strongly object to that.
The President’s Speech mentions some new steps. The Government has been busy in dismantling old structures and repackaging old schemes. They have dismantled the Planning Commission and jettisoned the planning process without any consensus and consultation with the States. But nobody till now knows what the NITI Aayog is supposed to do, how the Plan funds to the States will be distributed. They have discontinued the Jawaharlal Nehru National Urban Renewal Mission for the towns but the urban development mission has not yet been finalized. Nobody knows what the smart cities stand for. So the whole Government seems to be work in progress; nothing has been finalized. The Government has only repackaged the old schemes. The Accelerated Irrigation Benefit Programme has become the Pradhan Mantri Krishi Sinchai Yojana; the Nirmal Bharat Abhiyan has become the Swachch Bharat Mission; the Prime Minister’s financial inclusion programme which was in 12th Plan document has become Pradhan Mantri Jan Dhan Yojana; the Rajiv Gandhi Grameen Vidyutikaran Yojana has become the Deendayal Upadhyaya Gram Jyoti Yojana; the Ganga Action Plan has become Namami Gange.
In this House, I had objected for all new schemes being named after Nehrus or Gandhis. I wanted a scheme in the name of Netaji. But the new Government does not think Netaji’s name should be there. They have new schemes only in the name of small leaders of their party. In the name of Pandit Deendayal Upadhyaya we have 3 schemes in his names- Deendayal Upadhyaya Gram Jyoti Yojana, Deendayal Upadhyaya Grameen Kaushalya Yojana and Deendayal Upadhyaya Antyodaya Yojana. So in the name of one leader of their party who is not even a national leader, they have named three schemes.
This Government which the President called ‘my Government’ is a Government of packaging and photo opportunities. The Prime Minister dresses up in Rs 10 lakh suit and he is photographed wielding a broom and then he is followed by film actors. There are only photo opportunities, only advertisements but no content in this Government. What is happening down below is another story. The Prime Minister does not stop with photo opportunities. He also gives soundbytes, "मन की बात "यह तो पूरा फिल्म एक्टर जैसा हुआ,यह प्रधानमंत्री का काम नहीं होता है।
I want to say that the Government came into power with a clear majority, raising high hopes among the people. The P.M. promised to bring back all the black money stashed abroad and put in Rs. 15 lakh in every householder’s account. In that hope, a large number of accounts were opened under the Pradhan Mantri Jan-Dhan Yojana but eight months later these hopes are belied. रुपया वापस लाए क्या? Now, people have reacted. आपके नॉन फुलफिलमैंट ऑफ प्रॉमिसेज़ से लोगों ने आठ महीने में रियैक्ट किया। दिल्ली में सातों लोक सभा सीट आपको मिली थीं,लेकिन केवल तीन सीटें आपको इस बार विधान सभा में मिलीं। I have never heard that the number of MLAs of a party is less than the number of MPs in the city of Delhi, the national capital. This is your condition today… (Interruptions)
In Bihar, they tried to prevent Shri Nitish Kumar from becoming Chief Minister but they could not. In West Bengal, the BJP was third in a Parliamentary bye-election proving that all their big talk and visit of the BJP President have not created any impact in our State. … (Interruptions)
Please introspect, Mr. Anurag Thakur, why your popularity is coming down so badly. You have to introspect; not only must some leader from the Congress but you also introspect. … (Interruptions)
HON. DEPUTY-SPEAKER: Why are you making a commentary?
… (Interruptions)
PROF. SAUGATA ROY: Sir, another reason for the Ruling Party’s sharp fall in popularity, as mentioned in the President’s Address, is the intolerance of the Ruling Party’s people. In this House, we have heard an apology by a lady Minister for her intemperate comment against minorities. We have also heard an apology of a Member of the Ruling Party for praising Gandhiji’s assassin. There have been attacks on Churches in Delhi and there have been riots in Trilokpuri. After all this, the Prime Minister gives a statement calling for tolerance. The next day after his statement, the General Secretary of the Vishwa Hindu Parishad spoke about continuing ghar vapsi. This has created fear in the minds of the minorities; and look at what has happened.
The Government has spoken of new metros in Ahmedabad and Nagpur. The Government’s thought process runs from Ahmedabad to Nagpur, which is the RSS’s headquarters. What has the General Secretary of the RSS said yesterday? He said that Mother Teresa did social work to convert people into Christianity. … (Interruptions) For an internationally recognised social worker who has got the Nobel Prize for Peace, the General Secretary of the RSS says this. I would not have commented but in this House I heard the Law Minister who was here just a little while ago here say that he was proud to be from RSS. So, is he proud of the RSS General Secretary’s statement calling Mother Teresa names? That is a point, I hope the Ruling Party will clarify.
I want to remind you that I came to this House in 1977 as a young boy. I used to sit just here. Next to me was a Member called Ehsan Jaffri. He was an MP from Ahmedabad. He is no longer there. I do not find him because he was killed during the Gujarat riots in Gulburga Society, one kilometre from the Chief Minister’s Office. Who was the Chief Minister? Our Prime Minister was the Chief Minister. I do not want a situation in which such a thing happens again. If it has to happen, the Trinamool Congress people are prepared to sacrifice their lives to preserve communal harmony in the country. " सरफिरोशी की तमन्ना आज हमारे दिल में है,देखना है जोर कितना बाजुए कातिल में है। "जो लोग ऐसा करते हैं,उन्हें हम देख लेंगे कि कैसे वे कम्युनल रायट्स करते हैं।
Sir, the UPA Government had lot of problems. It was bedevilled by scams but it enacted some very good pro-people legislation like the Right to Information Act, Right to Education Act, the new Land Acquisition Act and the Food Security Act. Now, in the interest of the corporate, this Government has brought an Ordinance which will take away five types of projects from social impact assessment. In the former Act, during the UPA’s regime, after five years if the project was not built, it would be given back to the original owner. That has been removed in the interest of helping corporate. We strongly oppose the new amendment brought to the Land Acquisition Act. They have tried to kill the Act through this amendment.
Food security is another important step taken by the UPA Government. Now, BJP MP Shri Shanta Kumar has given a Report of a Committee saying that the food subsidy should come down to 40 per cent. This Government does not care for the poor and hungry. It is only constantly talking about increasing ease of doing business. Sir, I saw a statement by Shri Deepak Parekh. He has said that nothing has changed on the ground. Citing delays the HDFC Bank, of which he is a Chairman, faced in obtaining approval, Mr. Parekh said that he had seen no improvement in the ease of doing business. Today, some capital in HDFC Bank took more time, this time than earlier years, to get approval. There is ease of doing business only for Shri Adani. When the Prime Minister went to Australia, the State Bank Chairman flew to Australia just to give one billion dollar loan to Adani.… (Interruptions) I am saying Adani in general. I am saying that only to give him one billion dollar loan the State Bank Chairman flew down to Australia. This is a Government of corporate. These people are against the poor people.
Lastly, I wish to say that our Party has always opposed indiscriminate entry of Foreign Direct Investment in vital sectors of the economy. We have opposed FDI in retail. Now, it seems that the Prime Minister’s ‘Make in India’, as mentioned in the President’s Address, means entry of FDI. The Government proposes hundred per cent FDI in Railways; 49 per cent in Defence and 49 per cent in insurance and entry of FDI in the housing sector. We opposed these proposals in the interest of the country’s security and our quest for self-reliance. They are even going to privatise the airport. They are going to de-rationalise coal mines. That is the way in which the Government is proceeding. But as you know coal industry had a total strike protesting against this privatisation. The working class will protest against the way in which the Government is going.
I would like to say that education has been a victim of the Government’s effort at saffronisation. A person with doubtful credentials has been made Chairman of the Indian Council for Historical Research (ICHR).
Now Prof. Amartya Sen has resigned from the chancellorship of the Nalanda University citing Government interference in the University autonomy. There is also a danger signal that instead of developing scientific temper amongst students, the Prime Minister is talking about plastic surgery done on Ganesha’s neck. Now if the Prime Minister mistakes myths for real science or surgery, then what will the people learn and what will students learn in his ‘Man ki Baat’.
Sir, I shall end with two small points. The Government has been lucky to have international fall in crude oil prices with the coming of American shale oil in the market. But the full benefit has not been passed on to the consumers and the Government has used the windfall to make up for its budget deficit. I may mention in this regard that the whole speech does not mention anything about health and the National Rural Health Mission. In our State, we have started Fair Price Shops in all the hospitals.
Lastly, the President’s Speech denotes a shift in foreign policy. It does not mention SAARC or BRICS, i.e., Brazil, Russia, India, China and South Africa but calls American President’s visit historic. The need for Non-Aligned Movement in the present uni-polar world and need to face challenges posed by terrorist forces like ISIS and Al-Qaeda are left out and after all the bonhomie, the Prime Minister calling the American President by name surprising anybody. What happens? The American President goes back and gives us a lecture on maintaining tolerance in this country. This country, under the present Government, has kowtowed to the Americans.
Finally, I would like to say that let the BJP realise that its popularity graph is falling. They should get their act together and restrain the hot heads and fringe elements and lunatic fringe of the Party from doing things which are communal. Let them remember that this is a country which offers unity in diversity. This is a country which has a composite culture not merely a Hindu culture. They have got a majority but let them remember what Tagore said. He said:
“Esho he arjo, esho anarjo, Hindu Musalman Esho esho aaj tumi ingraj, esho esho Christian Esho Brahman, shuchi kori mon dharo haath shabakar Esho he potit, hok oponit shab apoman bhar Jaar obhisheke esho esho tara, Mangalghat hoyni je bhara Shabar paroshe pobitro kara teerthonire, Aji bharoter mahamanaber sagartire.” In this Bharat teertha, let the people unite and let all divisive forces be defeated. With that, I end my speech.
SHRI BHARTRUHARI MAHTAB (CUTTACK): At times smiles are also very deceptive but Mr. Rudy has a very encompassing personality. No doubt, Kalyanda is always impressed by him.
Hon. Deputy Speaker, Sir, I stand here to participate in the discussion on Motion of Thanks on the President’s Address. The Resolution was moved by my friend, Shri Anurag Singh Thakur. When he was speaking, many of us have marked that repeatedly he was saying, ‘mitro, mitro and mitro. I was really bit surprised - I am a friend of his - because none of us who are sitting on this side ever stood up and said that we are not your mitro. We are not your friends but we are your opponents. We are not adversaries, of course, but we are not your friend. Nobody stood up and said that. Kalyanda would never say that. But I expected somebody from this side would have said it but nobody said that. That shows his encompassing personality, especially, when the Leader of the Opposition, the manner in which he appreciated Anurag ji’s speech is something praiseworthy.
Sir, I would start by saying what many of us have already said. Four names have been pronounced by the hon. President when he addressed both the Houses of Parliament yesterday. It had two quotations. The first name was of Shyama Prasad Mukherjee whose quotation stated that the strength of India is its rich spiritual and civilizational heritage. Second was a quotation of the former Prime Minister Shri Atal Bihari Vajpayee, whose quotation was -- poverty has multiple effects besides impacting our economy. Names of three other stalwarts were taken while mentioning schemes, missions or yojanas. They are Nanaji Deshmukh schemes; three other schemes in the name of Deen Dayal Upadhyay and also the name of Madan Mohan Malaviya were taken on the National Mission on Teachers and Teacher’s Training. Towards the end of the speech, which was prepared by this Government, in respect of Non-Resident Indians, Prabasi Bharatiya, the hon. President mentioned the name of the Father of the Nation, Mahatma Gandhi. The second last paragraph, the 57th paragraph to be precise. This was supposed to be visionary. The question is, was it anything new? What we have heard during the last nine months of this Government have been diligently mentioned – be it Pradhan Mantri Jan Dhan Yojana, Swachh Bharat Mission, Skill India, National Institute for Transforming India or NITI Aayog, Make in India, Smart City, Namami Gangey and Act East Policy. What I miss here is the assurance that the Government had given in last June to the people of the Eastern Region of this country that “highest priority will be accorded to bring Eastern Region on par with Western Region in terms of physical and social infrastructure”. There is no reiteration of this assurance, nor was it reflected in the Supplementary Budget that was passed last year, other than the Budget of the last fiscal. We hope, and can only hope that in this year of 2015 necessary steps would be taken to keep the word that was given by this Government. Nothing has changed much except the Government in Bihar. Odisha has become Congress-mukt. Jharkhand has had a BJP led Government. West Bengal is as it was. So, why was there no mention of Eastern Region?
Sir, I would mention about three to four points. I am not going to deal with the majority of the issues that has already been mentioned. I would broadly touch upon certain issues that this Government has tried to venture into. The first is the Prime Minister’s Jan Dhan Yojana. The Government says that the intention is to provide universal access to banking facilities. The coverage is close to 100 per cent with a record of 13.2 crore new bank accounts. This I am quoting from the speech of the hon. President. It is definitely an ambitious programme to expand financial inclusion but all are not new account holders, or first time account holders. When more than 50 per cent of our population do not have access to banking institutions, how can it be said that coverage has been near to 100 per cent with 13.2 crore bank accounts and that too when all are not new account holders?
THE MINISTER OF STATE OF THE MINISTRY OF SKILL DEVELOPMENT AND ENTREPRENEURSHIP AND MINISTER OF STATE IN THE MINISTRY OF PARLIAMENTARY AFFAIRS (SHRI RAJIV PRATAP RUDY): They are all families.
SHRI BHARTRUHARI MAHTAB : Thank you for reminding me. RBI has done an investigation on the request of the Finance Minister. You go through that report and you will come to know what the actual status of this is. But this has been said by the President. This Government has said this in the President’s Address to the whole country. Please find out the status of the respective banks who have claimed it including SBI. Please find it out and you will come to know it.
People are attracted towards this because it has insurance cover, it has RuPay debit card but glitches are there and seamless transfer of funds to these accounts relating to direct benefit transfer programme is not happening everywhere.
Accidental insurance coverage is non-functional. Pahal Scheme has been made and all this has been linked only to Aadhaar enrolment which has its own nuances. I am not going into the benefit of Aadhaar or the other way round.
During the last discussion, I had said that Odisha needs brick and mortar branches because villages there are far and wide. There are Left Wing extremists affected areas where people need this support of opening zero sum account where transfer can be more seamless. But those people are yet to be covered by this Jan Dhan Yojana.
Swachhta is the second point which I would like to deliberate upon. It is an article of faith for this Government. This was declared from the Lal Quila on 15th August by our Prime Minister. He said that all Vidyalayas will have toilets and this is achievable. As Shri Anurag Thakur’s constituency has, all schools have toilets and so also, many other Members may claim that their respective schools also have toilets. Construction is achievable. In my district, Cuttack, the District Education Officer and the RWSS Executive Engineer, there are two of them, say that all Government schools have toilets. When I was meeting them under the Vigilance and Monitoring Committee, I wanted to find out because for the last five to six years, we have been trying to establish toilets in every school so that the number of girl students will grow. They said, “Sir, all schools have toilets. All girls schools have toilets. All co-education schools have toilets.” But when I asked them as to whether they were being used or not, they looked at each other’s face.
Visiting the Banaras Hindu University on 4th February, 1916, Mahatma Gandhi in his address had said:
“I visited the Viswanath Temple last evening. If a stranger dropped from above on to this great temple, would he not be justified in condemning us? Is it right that the lanes of our sacred temples should be as dirty as they are? If even our temples are not models of cleanliness, what can our self-government be? We do not know elementary laws of cleanliness? We spit everywhere. The result is indescribable filth.” This was Mahatma Gandhi’s speech in Banaras Hindu University in 1916. In the last 98 years, things have only worsened. Nevertheless, the Prime Minister must be lauded for flagging swachchata as a priority. But more than intentions, we must look at ways to implement it.
Since Independence, public service structure in the country has been to maintain control rather than transform. The consequences of this are apparent. The three levels of Government together employ about 185 lakh persons. The Central Government employs around 34 lakhs. All the State Governments taken together employ another 72.18 lakhs. The quasi-Government agencies account for a further 58.14 lakhs and at the local government level, a tier which has the most interface with the common citizens, there are only 20.53 lakh employees.
This simply means we have five persons ordering us for every one supposedly serving us. What this translates into is that when you build toilets you won’t have enough people to clean them. So, why would I blame the district education officer, the executive engineers or even the teachers of my district? Where are the people to clean them?
The Prime Minister has done well by impressing upon the people about the need to keep their surroundings clean. People must not litter and dispose them at convenient places. The job of lifting the garbage from there and dispose it in the appropriate place is the work of the Government. Building toilets at public places and in institutions and impressing upon people to use them is laudable, no doubt. But keeping them working and clean is the job of the State. Shouldn’t the Government turn its focus on why the Government fails to deliver services in India? Only then can we make swachhta a reality.
Then, I come to the National Institution for Transforming India. While passing through that famous street, we see it is written NITI Aayog. It is National Institution for Transforming India and yet you call it a Commission. Is it an Institution or a Commission or is it both? How can you say it as an Institution in the name itself and also call it an Aayog? From the little grammar that I have learnt in school days, I can say this is not grammatically correct. What is aayog in Hindi is commission in English. Are we so poor in translation? Or are we unable to understand the meaning of institution that it has to be called a aayog even though it is an institution? Nobody has uttered a word about this. I do not know why.
There is a story in Mahabharata about the king of Nahusha. By his tapasya he attained the throne of Indra. He became so arrogant that he asked all the learned people to carry him on their shoulders. When they were carrying him on their shoulders, he was very happy and he said, “kim badhathi panditha:” Perhaps he was not that conversant in Sanskrit. But he wanted to say this. He wanted to prove that he was Indra and that whatever he says is true and correct. The learned pandits who were carrying Nahusah on their shoulders said, “तव बाधती बाधते “. Your weight is not hurting us but it is your speech, your wrong grammar in Sanskrit which is hurting us. King Nahusha said, “kim badhathi”. “Badhathi” is not a right word in Sanskrit.
Similarly, there is a श्रमेव जयते. That is also incorrect in Sanskrit. In Satya meva Jayate, ‘satyameva’ comes there. I think there are enough Sanskrit scholars in the ruling Party. They can understand this and they can correct it because that is a wrong grammar which we are repeating. It has been repeated in the hon. President’s Address also.
It is said:
“The underlying spirit of NITI is to foster the spirit of cooperative federalism so that the Union and the State Governments come on a platform to forge a common national agenda for development with thrust on empowering the impoverished.” It is said that that the Planning Commission had already withered away its relevance. NITI would be a more contemporary body. It would be advisory in character and the Finance Ministry will do the allocation of funds. Is it not that the Finance Ministry be focused on market-based development than looking into the development of weaker States? This is a question which many Chief Ministers in the Chief Ministers’ Conference have raised and it is also being discussed by different economists.
Next, the Planning Commission has been abolished. But have you abolished planning? I am not repeating the Aayog here deliberately. When NITI is to foster the spirit of cooperative federalism, will it have a role in deciding on the Fourteenth Finance Commission’s Report? Already, today the hon. Finance Minister has placed the Fourteenth Finance Commission’s Report and the Government’s view on that.
Sir, Odisha has been insisting on the Special Category Status. When Government is considering to provide Special Category Status to Andhra Pradesh because of the earlier Government’s commitment, can you ignore the cause of Odisha, Bihar and the other weak States which have been agitating for the Special Category Status for quite some time? It was interesting to hear today that the Mover of the Motion of Thanks on the President’s Address, who belongs to Himachal Pradesh, which enjoys the Special Category Status and another weak State is Jharkhand the hon. Member from that was seconding the same Motion, they have not mentioned about the future of the Special Category Status. How will the planning structure happen? How will the funds flow to the weak States after NITI has come into force? I want to say categorically that our Party, the BJD, will actively partner the Union Government in the successful implementation of national priority and inclusive growth like Swachch Bharat, Make in India, Skill India, Digital India, Housing-For-All, Smart Cities and Jan Dhan Yojana. We believe that the thrust of these programmes represents the shared vision of national development. Odisha has formulated and implemented similar programmes at the State level successfully.
Next, MAMATA Scheme which is a Direct Cash Transfer Scheme for Pregnant Women and Mission Sakthi which is an organization of Women’s Self-Help Groups in the State are covering five million women.
Yes, I would like to mention that an idea of cooperative federalism is also being mooted. Gradation of States is going to be done so that accordingly investments would flow. Is this the way how cooperative federalism will work? Is this the way “Sabka Saath, Sabka Vikas” will work? You are grading different States and accordingly investments will flow. How can this happen? When the battalion marches, some are in the front, some are in the back. If the battalion is to be more cohesive, those who are in the back need to be supported first, not by gradation, not by competition. With gradation, competition, the battalion will not be a cohesive unit. Our country is large and varied. It has to have a planning structure that Pandit Jawaharlal Nehru envisaged in the beginning of independent India… (Interruptions) He wrote his mind in the letters to the Chief Ministers. Here, I have a book “Letters for a Nation” from Jawaharlal Nehru to his Chief Ministers covering the period from 1947 to 1963.
HON. DEPUTY-SPEAKER: All are remembering Pandit Jawaharlal Nehru now! … (Interruptions)
SHRI BHARTRUHARI MAHTAB: It is because we are dealing with planning. It was during Netaji Subash Chandra Bose’s presidency in 1938 that Jawaharlal Nehru became the Chairman of the Planning Committee that was formed in the Haripura Congress.
This is history. That is how at that time the Congress in the AICC session made a resolution. Next April, the Congress is having the AICC session. I would quote here because confusion was there then because a number of Ministries did not know what the other Ministry was doing; there were identical programmes also being implemented by respective Ministries. The Prime Minister in writing letters to the Chief Ministers stated:
“Planning is essential for this because otherwise we waste our resources which are very limited. Planning does not mean a mere collection of projects or schemes, but a thought-out approach of how to strengthen the base and pace of progress so that the community advances on all fronts. In India we have a terrible problem of extreme poverty in certain large regions, apart from the general poverty of the country. We have always a difficult choice before us; whether to concentrate on production by itself in selected and favourable areas, and thus for the moment rather ignoring the poor areas, or try to develop the backward areas at the same time, so as to lessen the inequalities between regions.” My apprehension is, the manner in which this Government is progressing, inequalities will multiply. I further quote:
“That national plan need not and indeed should not have rigidity; it need not be based on any dogma; but should rather take the existing facts into consideration. It may, and, I think, in present-day India it should, encourage private enterprise in many fields, though even that private enterprise must necessarily fit in with the national plan and have such controls as are considered necessary.” How prophetic these words are! Here, I would just mention my anxiety that in 1972, when Planning Commission was entrusted with the job of monitoring Ministries job, thereby sanctioning the programmes. In a way, allocations of funds started. It was not there during Jawaharlal Nehru’s time. It started after 1972-73. That is what Anurag ji, and also Nishikant ji stated – why would Chief Minister run to Planning Commission? This started after 1972-73, and that needed correction. But doing away with planning is like throwing away the bathwater along with the baby. That should not happen. I hope this Government will consider this.
Make States partner of development, and competing Governments of States cannot be partners. There would not be any cooperation. When I was trying to find out where this idea of `competitive governance’ came from, I came to know that it is the idea by Prof. Albert Breton who is from Canada. He has written a number of books and that is an idea which has already been tested in the Western countries. His idea is that Governments are internally competitive. They are competitive in their relations with one another, and in their relations with other institutions in society, that, like them, supply consuming households with goods and services.
Are we going to inculcate a Western idea which does not fit into our system? We believe and for thousand years, this society has believed that we understand cooperation – Samabhav. If somebody is weak, if somebody is poor, the whole village supports that family but the manner in which this `competitive governance’ is now being put forth will bring in disaster to this country.
Another important issue that I would like to mention here is that the existing Central Schemes, Odisha has not received the budgeted amount because of arbitrary cuts.
The Accelerated Irrigation Benefit Programme and PMGSY are cases in point where we are not receiving our due share resulting in incomplete projects, delays and cost overruns. Even the infrastructure projects also have been delayed and thousands of crores of rupees – I was told by our State Government more than Rs. 6,700 crore – has not flowed in which was committed by this Government to our State and repeated requests have fell on deaf ears.
Sir, Odisha is rich in mineral resources. But our State is not getting its due benefit from this mineral wealth. We strongly favour settlement of all major mineral concessions through a transparent process of competitive bidding. We hope that auction of coal blocks will give reasonable revenue to the States. However, we are deeply disappointed that some of the provisions in the recent Bill or the previous Ordinance of the MMDR Act. While it does provide for auctions of mines, the provision of deemed extension under Section 8A severely restricts the number of leases that can come up for auction during the next five years. … (Interruptions)
HON. DEPUTY SPEAKER: Please don’t disturb him.
SHRI BHARTRUHARI MAHTAB : We suggest that no further extension be given to leases that have completed 50 years and all such leases be settled afresh through auction.
Sir, Odisha is the largest contributor to the earning of Indian Railways. But the railway route length and rail density in Odisha is much below the national average. We urge the Government of India to make enhanced provision for all the on-going railway projects.
I would also like to say that the Government of Odisha – our party has also come out with the manifesto on this – has given top priority to provide pucca houses to all those who have kutcha houses in rural areas. We have faced Phailin, Hudhud cyclones and also the Super Cyclone of 1999. The lesson that we have learnt is that once you have a pucca house, at least the people are safe. That is how, those houses in the areas which were affected by the Super Cyclone of 1999 have become pucca now. But those houses which are in the Southern part of our State have still remained kutcha houses and that is why there is a very prospective programme of converting all kutcha houses into pucca houses. The Union Government also has a similar programme. This involves, as per our calculation in Odisha, a huge cost of Rs. 30,000 crore over the next five years. If it is reflected in the coming Budget, that will be a great thing.
The KBK region in Odisha is a very neglected and impoverished area and that area needs special support. Special Central Assistance is required for that area to develop. It is highly rich in minerals and forests. But at the same time, the people have to migrate to other States to earn their livelihood and, I think, that area needs special attention.
Sir, I would not mention in detail about MMDR Act, but I would only mention the last point here. What type of mischief is played? That is a very harsh word. But the mistakes need to be corrected. I would mention here that there was a Point of Connection (PoC) charge since 2011 and this relates to the Power Ministry. Odisha is unduly burdened with additional transmission tariff. The purpose of this PoC charge is to make transmission tariff to be sensitive to distance. Odisha is purchasing power from Talcher, which is in the central part of Odisha, Farakka and Kahalgaon and the rate is 24 paise per unit, 26 paise per unit and 28 paise per unit. But Delhi is also purchasing power from those same three units and their rate is less than the rate at which Odisha is purchasing. How can this happen? But this has happened during UPA’s time.
I believe that, as it is said in the Constitution, the first line ‘India, that is Bharat..’, it is Indian National Congress and yours is Bharatiya Janata Party. Is there any difference? It is Indian and you are Bharatiya. But make a difference now. Correct the mistakes. Then only, Odisha will be with you. We have made Odisha congress-mukt.
We want to stand with you to make the nation progress. That is what the commitment is which BJD has been giving. In that respect, I want to conclude my speech by saying that Odisha wants development, wants to be a part of the developing process. In that respect I would say, adequate support should be also extended by this Government to us. Thank you.
श्री अरविंद सावंत (मुम्बई दक्षिण) : महोदय, आज मैं बहुत खुश हूं कि माननीय राष्ट्रपति जी के अभिभाषण पर अपने विचार प्रकट करने के लिए मैं यहां खड़ा हूं। सुबह मैंने अनुराग जी का भाषण सुना, निशिकांत दुबे जी का भाषण सुना, कांग्रेस के नेता का भाषण सुना, मुझे याद आई कि जब पहली बार अभिभाषण हुआ था तो मैंने कहा था - दुख भरे दिन बीते रे भइया, अब सुख आयो रे, रंग नया जीवन में लायो रे। फिर जब मैंने राष्ट्रपति जी का अभिभाषण सुना, पढ़ा तो मुझे वे सारे रंग उनके भाषण में दिखने लगे। आज मैंने देखा कि सरकार कदम उठा रही है, लेकिन कुछ चीजें हमारे मन में हैं, जिनको मैं स्पष्ट रूप से यहां प्रकट करूंगा। जब राष्ट्रपति जी के अभिभाषण में डाक्टर श्यामा प्रसाद मुखर्जी के लफ्जों का उच्चारण किया गया कि the greatest strength of India is her rich spiritual and civilizational heritage. आज ऐसा दिन था कि हरेक जन महात्मा गांधी और नेहरू जी की बात कर रहे थे। महात्मा गांधी जी ने कहा था कि spiritualise the politics. पॉलिटिक्स को स्पिरिचुलाइज करने की बजाय हमारे विपक्ष के लोग दोहरी नीति अपना रहे हैं। हमने वसुधैव कुटुंबकम् की बात थी। जब वसुधैव कुटुंबकम् की बात आती है तो उसको लेकर हमारा देश उसकी नींव डालेगा। उस दृष्टि से हमारी सरकार कदम उठा रही है।
सबका साथ-सबका विकास,इस सोच को लेकर जब हमारी सरकार से एक-एक कदम उठाना शुरू किया तो मुझे दो-तीन चीजों का बड़ा गर्व और अभिमान महसूस हुआ। जन धन योजना के बारे में सोचा भी नहीं था कि इस योजना को लेकर हम गांव के हर किसान तक पहुंच जाएंगे। बैंक के अधिकारियों-कर्मचारियों ने सरकार की विचारधारा को लेकर जिस ढंग से प्रयास किया,गांव-गांव में गए और 11000करोड़ रुपये से भी ज्यादा राशि मिली,यह कोई छोटी बात नहीं है। जिनको लगता है कि अच्छे दिन आए या नहीं आए,उनको मैं कहना कहना चाहता हूं कि देखो भाई,नींव तो डाली है,अब इमारत खड़ी करनी है। डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर प्रोग्राम,पहल आया,उसमें हमारे जो गैसधारक नागरिक हैं,उन्हें थोड़ी असुविधा हो रही है। यहां रूडी साहब बैठे हैं तो मैं कहूंगा कि लोग क्या प्रैक्टिकल डिफिकल्टी महसूस करते हैं,आप अगर अपने सांसदों से बात करेंगे,महिला सांसदों से बात करेंगे तो बताएंगे कि गैस के लिए पूरा पैसा भरना पड़ रहा है। जब बैंक से रिटर्न आएगा तो वे भी पूरी रकम नहीं देते हैं,बैंक कहती है कि 50प्रतिशत दे देंगे। उसके एग्जीक्यूशन में कुछ तकलीफ हो रही है,मैं उसकी ओर आपका ध्यान आकर्षित कर रहा हूं। स्वच्छ भारत योजना के लिए मैं प्रधान मंत्री जी की दिल से सराहना करता हूं। वर्ष 1995में हमारी सरकार आई,वंदनीय हिन्दू हृदय सम्राट शिवसेना प्रमुख बाला साहब ठाकरे जी के आशीर्वाद से आई। उस चुनाव के पहले हमारी शिवसेना के प्रमुख के साथ मैं प्रचार के लिए घूमता था। जब हम प्रचार के लिए गांवों में सभा करने के लिए जाते थे तो देखते थे कि महिला अंधेरे में बैठी हुई है,गाड़ी का प्रकाश देखते ही खड़ी हो जाती थी। हमें इतना बुरा लगता था कि हमें शर्म से सिर को नीचे करना पड़ता था। मुझे उद्धव जी ने कहा कि यह क्या है,मैंने कहा कि सर इनके घर में शौचालय नहीं है। ये अंधेरे का इंतजार करते हैं कि जब अंधेरा हो जाएगा,तब रास्ते पर आ कर शौच करते हैं। यहां महिला और पुरुष दोनों आते हैं,एक-एक जोन हो जाते हैं। जब हमारी सरकार सत्ता में आई तो पहला प्रावधान यह किया कि घर में शौचालय हो। हमारी सरकार ने साढ़े चार हजार रुपया अपनी तरफ से दिया और कहा कि हर घर में शौचालय हो,इस विचारधारा से मेरी सरकार जब सत्ता में आई है और इस विचारधारा को ले कर आगे जा रही है। मुझे इसके लिए बहुत गर्व हो रहा है लेकिन इसके लिए हमें तीन-चार चीजों को ध्यान में रखना पड़ेगा। एक चीज ऐसी है कि जब हम घरों के टायलेट की बात करते हैं तो गांवों की रचना को भी हमें ध्यान में रखना होगा। घर बहुत सटकर हैं। हमारे कोंकण में तो प्रश्न नहीं उठता है क्योंकि घर अलग-अलग हैं,अपने-अपने प्रांगण हैं,जगह बहुत है,लेकिन जब हम अपने मराठवाड़ा और विदर्भ में देखते हैं तो घर एक दूसरे से सटकर हैं और वहां शौचालय की सुविधा घरों में करना उनके लिए मुश्किल हो जाता है। अब दो चीजें हैं एक गांव की रचना और दूसरी बात पानी की व्यवस्था की है। अकाल पड़ा है। पीने के लिए पानी नहीं है,तो शौचालय की बात कहां से आती है। इसे भी सरकार को विचार में लाना होगा। अब नए तरीके के टायलेट्स आते हैं,जैसे जहाज के अंदर होते हैं,हवा की या बैकटीरिया की बात होती है,क्या उसके ऊपर विचार कर सकते हैं,इसे भी आप देख लीजिएगा।
उसके माध्यम से मैं कहना चाहता हूं कि हाउसिंग फार आल,जब पक्के घरों की बात आती है मैंने हर बार कहा है,मैंने एक बार जीरो ऑवर में मांग भी की थी कि मुम्बई शहर को अगले पांच सालों में पचार हजार करोड़ रुपया सरकार की तरफ से दिया जाए। हमारे साथी शेट्टी साहब ने सुबह कहा था कि रेलों की पटरियों के साथ घर हैं,बीपीटी की जगह पर झुग्गी-झोपड़ियां हैं,सरकार की जगह पर झुग्गी-झोपड़ियां हैं,डिफेंस की जगह पर झुग्गी-झोपड़ियां हैं। राज्य सरकार वर्ष 1995में एक कानून लाई,उस कानून के तहत इन सारी झुग्गी-झोपड़ियों को नियमित किया गया। आने वाली सरकार वर्ष 2000में कानून न लाकर एक नीति लाई और झुग्गी-झोपड़ी को नियमित किया। आज सारी झुग्गी-झोपड़ियां मुम्बई शहर में पचास प्रतिशत से ज्यादा लोग झुग्गी-झोपड़ी में रहते हैं। मेरी आपसे प्रार्थना है कि आपने पक्के घरों का वायदा किया है। जो वायदा किया है,उसे निभाना पड़ेगा। हमें विश्वास है कि आदरणीय प्रधानमंत्री जी जो वादा करते हैं,उसे पूरा करके रहेंगे। मैं प्रावधान चाहता हूं कि इसके लिए ज्यादा से ज्यादा राशि मुम्बई शहर के लिए देंगे।
लेण्ड एक्विजीशन के कानून में क्रिटीकल शब्द का उल्लेख किया गया है। यह क्रिटीकल शब्द बहुत आवश्यक है। क्योंकि आपको यदि विकास करना है तो जमीन आपको लेनी ही पड़ेगी। इसके कारण सारे देश में भय निर्माण हुआ है। हम लोग इंडेक्स देखते हैं कि शेयर मार्किट का इंडेक्स कितना बढ़ा है और उससे खुश हो जाते हैं। मैं कहना चाहूंगा कि मार्किट का इंडेक्स हमारे लिए इम्पोर्टेंट नहीं है। केवल .05परसेंट लोग ही मार्किट वाले होते हैं। हमारा इंडेक्स किसानों का इंडेक्स होना चाहिए। जिस दिन हमारा किसान खुश होगा,वही हमारा इंडेक्स होगा और वही हमारी खुशी होगी। मैं चाहता हूं कि किसानों का इंडेक्स क्या कह रहा है?क्या देश के किसान खुश हैं?हमारे यहां तो किसान आत्महत्या कर रहे हैं। हमारे यहां कृषि मंत्री जी आए थे। उन्होंने उसमें रुचि ली थी और उन्होंने कहा भी था कि हमारी तरफ से भी गलती हुई थी कि सरकार की तरफ से सही समय पर प्रस्ताव नहीं आया था। लेकिन जब प्रस्ताव आ गया है तो भी आत्महत्याएं अभी भी रुकी नहीं हैं। कृषि मंत्री जी बहुत ध्यान देकर उस पर काम करने की कोशिश कर रहे हैं। लेकिन इसके लिए एग्रीकल्चर का ढांचा ही बदलना पड़ेगा। जब किसान देखता है कि मार्किट में कॉटन का भाव बढ़ गया है। मार्किट में सोयाबीन को ज्यादा भाव मिल रहा है,शुगर को ज्यादा भाव मिल रहा है तो किसान उसी को उपजाने लगता है। अब जब उसकी मार्केट में उपलब्धि ज्यादा हो जाती है तो उसका भाव गिर जाता है और किसान फिर बेचारा भिखारी बन जाता है। इसलिए इसके लिए भी एक प्लानिंग होनी चाहिए कि किस तरह से किसान खेती करे,कितनी खेती करे और कहां करे। इसके लिए हमें जांच और इसमें संशोधन करना पड़ेगा।...(व्यवधान)
HON. DEPUTY SPEAKER: Shri Arvind Swanat, you can continue your speech tomorrow.
SHRI ARVIND SAWANT: All right, Sir.
HON. DEPUTY SPEAKER: The House stands adjourned to meet again tomorrow at 11 a.m. 18.00 hrs The Lok Sabha then adjourned till Eleven of the Clock on Wednesday, February 25, 2015/Phalguna 6, 1936 (Saka).