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Lok Sabha Debates

The Speaker Made References To The Passing Away Of Shri Ram Krishna Yadav, Member ... on 16 March, 2020

Seventeenth Loksabha > Title: The Speaker made references to the passing away of Shri Ram Krishna Yadav, Member of the 9th Lok Sabha, Shri Tapas Paul, Member of the 15th and 16th Lok Sabhas, and Smt. Krishna Bose, Member of the 11th, 12th and 13th Lok Sabhas.

माननीयअध्यक्ष:माननीयसदस्यगण,मुझे सभा को हमारे तीन पूर्व सदस्योंसर्वश्रीराम कृष्ण यादव, तापस पाल तथा श्रीमतीकृष्णाबोस के दु:खद निधन के बारे में सूचित करना है।

…(व्यवधान)

माननीयअध्यक्ष:श्रीराम कृष्ण यादव उत्तर प्रदेशके आजमगढ़ संसदीयनिर्वाचनक्षेत्रसे 9वीं लोक सभा के सदस्य थे । वे कृषि संबंधीसमिति के सदस्य थे । श्रीराम कृष्ण यादव का निधन 25जनवरी, 2020 को 82 वर्षकी आयु में लखनऊ, उत्तर प्रदेशमें हुआ ।

श्रीतापस पाल पश्चिमबंगाल के कृष्णानगरसंसदीयनिर्वाचनक्षेत्रसे 15वीं तथा 16वीं लोकसभाके सदस्य थे। इससे पूर्व,वे दो बार पश्चिमबंगाल विधान सभा के सदस्य भी रहे । श्रीपाल एक सक्रियसंसदविद्थे, जिन्होंनेविभिन्नसंसदीयसमितियोंके सदस्य के रूप में अपनी सेवाएंप्रदानकी। श्री तापस पाल एक विख्यातफिल्म अभिनेताथे, जिन्होंनेबांग्ला,हिन्दीऔर उड़िया भाषाओंमें 400 से अधिक फिल्मोंमें अभिनय किया और उन्हेंकई फिल्म पुरस्कारोंसे भी सम्मानितकिया गया । श्रीतापस पाल का निधन 18फरवरी, 2020 को 61 वर्षकी आयु में मुम्बईमें हुआ ।

श्रीमती कृष्णा बोस पश्चिमबंगाल के जाधवपुरसंसदीयनिर्वाचनक्षेत्रसे 11वीं, 12वींऔर 13वीं लोक सभा की सदस्य रहीं । श्रीमतीकृष्णाबोस ने विदेशीमामलोंसंबंधीसमिति के अध्यक्षके रूप में तथा विभिन्नसंसदीयसमितियोंके सदस्य के रूप में अपनी सेवाएंप्रदानकीं ।  एकजानी-मानी शिक्षाविद्,श्रीमतीबोस ने लगभग चार दशकों तक विभिन्नशैक्षणिकसंस्थानोंमें अध्यापनका कार्य किया और अनेक पुस्तकेंभी लिखीं ।श्रीमतीकृष्णाबोस का निधन 22फरवरी, 2020 को 89 वर्षकी आयु में कोलकातामें हुआ।

           अपनेपूर्व साथियोंके निधन पर गहरा शोक व्यक्तकरते हुए, यह सभा शोक-संतप्तपरिवारोंके प्रति अपनी संवेदनाएंव्यक्तकरती है।

          अब यह सभा दिवंगतआत्माओंके सम्मानमें कुछ देर मौन खड़ी रहेगी।

  11.02 hrs (The Members then stood in silence for a short while.) _________     …( व्यवधान)

 

SHRI T. R. BAALU (SRIPERUMBUDUR): Sir, the House should discuss the petroleum price rise and coronavirus issues before taking up any other matter. …(Interruptions)

 

श्री अधीर रंजन चौधरी (बहरामपुर): कोरोना वायरस को लेकर सदन में…(व्यवधान)

 

माननीय अध्यक्ष : प्रश्न काल ।

…( व्यवधान)

माननीय अध्यक्ष : प्रश्न संख्या 301.

…( व्यवधान)

 

माननीय अध्यक्ष : एक मिनट, कृपया शांत हो जाइए ।

…( व्यवधान)

 

माननीय अध्यक्ष : बालू जी, कोरोना वायरस पर पहले भी चर्चा हुई थी। अगर आप ध्यानाकर्षण या नियम के तहत नोटिस लगाएंगे ।

…( व्यवधान)

 

श्री अधीर रंजन चौधरी : सर, प्रधान मंत्री जी ।…(व्यवधान)

 

माननीय अध्यक्ष : नो, जिस विभाग से संबंधित विषय है, उस विभाग के मंत्री जवाब देंगे।

…( व्यवधान)

माननीय अध्यक्ष : नो, गलत तर्क ।

…( व्यवधान)

SHRI T. R. BAALU : We want to discuss these two issues. It was not a discussion on coronavirus. …(Interruptions) It was only a discussion on the statement. We have to discuss the hike in petroleum prices also. …(Interruptions)

माननीय अध्यक्ष : सर, वह दो बार जवाब दे चुके हैं। अगर आप फिर जवाब चाहेंगे, तो वह आपको जवाब देंगे।

…( व्यवधान)

SHRI KODIKUNNIL SURESH (MAVELIKKARA): A serious situation is going on in this country. Where is the Prime Minister? …(Interruptions)

 

माननीय अध्यक्ष : अदूर प्रकाशजी, आप प्रश्नकाल चलने दें। प्रश्नकाल एक महत्वपूर्णकाल होता है, आप इसे चलने दें।

…( व्यवधान)

 

माननीय अध्यक्ष : जिस विभाग से संबंधितविषय है, वही मंत्रीजवाब दिया करेंगे।

…( व्यवधान)

SHRI KODIKUNNIL SURESH : The Prime Minister has not come to the House. This is a very serious situation. …(Interruptions)

SHRI T. R. BAALU: Sir, the petroleum price hike should be taken up for discussion. …(Interruptions)

11.04 hrs ORAL  ANSWERS TO QUESTIONS माननीय अध्यक्ष : प्रश्न काल, प्रश्न संख्या 301 , एडवोकेट अडूर प्रकाश I   (Q. 301) ADV. ADOOR PRAKASH : Sir, according to the Fifth Report of the Standing Committee on Labour, whichwas presented to this august House on 13th March, 2020, 70 per cent of allocated fund only is used during the financial year 2019-20. …(Interruptions)

SHRI T. R. BAALU: Sir, this is the most important issue. What is the reaction?

माननीय अध्यक्ष : बालू जी प्लीज,प्रश्नकाल बहुत महत्वपूर्णकाल है।

…( व्यवधान)

ADV. ADOOR PRAKASH : Most surprisingly, only 60 per cent of the funds have been utilised for the National Career Service Scheme. …(Interruptions)

          Out of the Revised Estimate of Rs. 11,184.09 crore, only Rs. 9,130.50 crore have been utilised. The Committee has expressed its concern on non-utilisation of Rs. 2,053.59 crore. …(Interruptions)

          Whenever there is a question on unemployment, economic slowdown, and the job losses in various sectors, the Government is not ready for a clarification on the real situation. The Government is deliberately avoiding such questions on crucial issues.

Many times, it has been admitted that there is no survey conducted and the data is not available on such matters. The issue of unemployment is growing and it will further escalate with the disinvestment policy of the Government. Growing unemployment among educated youth is a great concern.

According to the reply given in the Kerala Legislative Assembly last week, there are 45,913 engineers and 8,753 doctors who are jobless in Kerala. Similar or worse is the case in other States also. My specific question is whether the Government would set a targeted scheme for providing employment for the educated youth in the country.

श्री संतोष कुमार गंगवार : सर, माननीय सदस्य ने केरल की  जो जानकारी दी है, उसके ऊपर मैं टिप्पणी नहीं करना चाहूंगा, पर हमारी सरकार आदरणीय प्रधान मंत्री जी के नेतृत्व में पूरी तरह से सक्रिय है कि कैसे हम बेराजगारी को दूर करें। उसके हम ऐसे कदम बढ़ा रहे हैं जिससे आज लोगों को प्रधान मंत्री जी के प्रति विश्वास हो रहा है और रोजगार के अवसर भी मिल रहे हैं। मैं इतना ही कह सकता हूं कि हमने इतनी अधिक योजनाएं चलाई हैं कि हम इम्प्लायमेंट ही नहीं, ऐसे व्यक्ति तैयार कर रहे हैं, जो खुद रोजगार दें। उसके हिसाब से काम हो रहा है और हम इसमें ज्यादा पैसा खर्च करने का काम कर रहे हैं ।…(व्यवधान)

ADV. ADOOR PRAKASH : Sir, the promise of the BJP in their 2014 manifesto was creation of 25 crore jobs in the next ten years but after their completion of six years in Government, the unemployment rate has reached 7.7 per cent today. So, I would like to know whether the Government is ready to conduct an update survey to review the situation and release a white paper on unemployment in the country.

श्रीसंतोषकुमारगंगवार:माननीयअध्यक्षमहोदय,रोज़गारके अवसर निरंतरबढ़ रहे हैं। हमारी जानकारीके हिसाब से इसमें कोई शिकायतनहीं है और एक कायदे से हम इस सन्दर्भमें कदम उठाकर कार्रवाईभी कर रहे हैं।

          जहाँ तक श्वेत पत्र जारी करने की आवश्यकताहै, माननीयसदस्य जो भी चाहेंगे,हम उनको जानकारीदेंगे,लेकिन हमारा मानना है कि केन्द्रके जो आठ सेक्टर्सहैं, उनमें करीब 6.16 लाखरोज़गारकी वृद्धिहुई है। वास्तवमें यह अपने आप में प्रदर्शितकर रहा है कि हमारे देश में रोज़गारके अवसर लगातारबढ़ रहे हैं। केवल कंस्ट्रक्शनसेक्टरही ऐसा सेक्टरहै, जिसमेंकुछ कमी नजर आ रही है, नहीं तो, हर क्षेत्रमें रोज़गारके अवसर बढ़ रहे हैं। यदि कोई आवश्यकजानकारीहोगी, तो मैं इसकी जानकारीदूँगा।

श्रीअरविंदसावंत : माननीयअध्यक्षजी, आप जानते हैं कि पुरानेसमय में हमारे यहाँ एम्प्लॉयमेंटएक्सजेंजेजहोते थे, ये आज भी हैं, सिर्फ ताला नहीं लगा है, हमारे पास कम्पल्सरीनोटिफिकेशनऑफ एम्प्लॉयमेंटएक्सचेंजएक्ट भी है। ये जो डाटा दे रहे हैं, ये कहाँ से लाते हैं, यह पता नहीं है। किसी भी एम्प्लॉयमेंटएक्सचेंजमें अन-एम्प्लॉयडयूथ रजिस्टरनहीं कर रहा है या उनको कम्पल्सरीरजिस्ट्रेशननहीं करनी पड़ रही है।

          आजकल दो तरह के लोग हैं, जो कांट्रैक्टपर लोगों को ले रहे हैं, अध्यक्षमहोदय,खास करके मैं आपका ध्यान आकर्षितकरना चाहता हूँ, आप खुद जानते हैं कि जेट एयरवेजबंद पड़ी है, किंगफिशरबंद पड़ी है, ऐसी कई कम्पनियाँबंद पड़ी हैं, नोकियाबंद है। इससे और बेरोज़गारीबढ़ी है। इन बेरोज़गारोंके लिए हमारे पास कोई व्यवस्थानहीं है और न ही हमारे पास इनका डेटा है। इसलिए आपके माध्यमसे मेरी माँग है कि एम्प्लॉयमेंटएक्सचेंजेजको पुनर्जीवितकरें। रोज़गारमिले, तो भी चलेगा,लेकिन अगर रियल डाटा मिले, तो पता चलेगा।राजनीतिकरूप से कहा गया कि 25 करोड़ लोगों को जॉब्स देने वाले थे, उसका क्या हुआ, यह अलग बात है। मैं पूछना चाहता हूँ कि क्या आप एम्प्लॉयमेंटएक्सचेंजको पुनर्जीवितकरेंगे?सभी को वहाँ जाकर कम्पल्सरिलीरजिस्टरकरना होगा। कांट्रैक्टरही क्यों न हों, जो रिक्रूटकरेंगे,कम्पल्सरीनोटिफिकेशनएक्ट के तहत वे भी एम्प्लॉयमेंटएक्सचेंजको जानकारीदें कि हमारे पास इतने-इतने रोज़गारलेने वाले हैं, तब इसका पता चलेगा।जितनी कम्पनियोंमें रिट्रेंचमेंट्सहुए, उनका कुछ नहीं हो रहा है, उनके बारे में सरकार क्या कदम उठा रही है? जब रियल डेटा आएगा, तब ही आप कह सकेंगेकि हम इतने रोज़गारदे पाए हैं। क्या सरकार इस पर कदम उठाएगी?

श्रीसंतोषकुमारगंगवार:सर,मैं आपके माध्यमसे माननीयसदस्य की जानकारीमें लाना चाहता हूँ कि विभिन्नराज्य सरकारोंके द्वाराही एम्प्लॉयमेंटएक्सचेंजेजमें पंजीकरणहोते हैं और उसके अनुसारवर्ष 2015 में 4.33 करोड़, 2016 में 4.34 करोड़और 2017 में 4.24 करोड़लोगों ने अपने पंजीकरणकरवाए थे। लेकिन इससे आगे बढ़कर श्रम मंत्रालयने नेशनल कैरियरसर्विसप्रोजेक्टशुरू किया है, इसमें एम्प्लॉयमेंटएक्सचेंजेजको मॉडर्नाइजकरने की योजना पर हम लोग काम कर रहे हैं। एनसीएसके तहत देश में लगभग 200 एम्प्लॉयमेंटएक्सचेंजेजको मॉडल कैरियरसेन्टरके रूप में परिवर्तितकिया जा रहा है। यह काम शुरू हो गया है और 116 सेन्टर्सबन चुके हैं। इसमें लोगों का पंजीकरणऔर पंजीकरणके बाद हम क्या मदद कर सकते हैं, लेकिन इसमें हमें एक दिक्कतयह आती है कि पंजीकरणहो जाने के बाद ‘मुझे नौकरी मिल गई है’, यह सूचना कोई नहीं देता है। इस कारण इसमें गड़बड़ी हो जाती है। हमारा मानना है कि हम पूरी सक्रियताके साथ काम कर रहे हैं और राज्योंके साथ मिलकर इसके बारे में एक सही योजना बनाने का काम कर रहे हैं ।…(व्यवधान)

श्रीअरविंदसावंत:आप डेटा देंगे,तो पता चलेगा कि कितने लोगों को नौकरी मिल गई है।…(व्यवधान)

माननीयअध्यक्ष:माननीयमंत्रीजी, जो माननीयसदस्य अपने आप खड़े हो जाएं, आप उनका जवाब मत दीजिए ।

SHRI A. RAJA : Sir, everybody knows that the current unemployment rate is the highest in the last 45 years.  The unemployed youth in the urban areas is almost 24 per cent, and we need not talk about the rural areas where the percentage is much higher.

          I went through the answer which was given by the hon. Minister. He wanted to rely upon the status which was given by the State Governments and the Labour Bureau, initiated by revamped Quarterly Employment Survey.

          In this regard, I would like to submit to the hon. Minister the measures that have been taken in the Budget. The hon. Finance Minister -- as per the assurances given -- wants to promote the National Infrastructure Pipeline Programme, which is a welcome measure. Of course, the hon. Finance Minister wants to spend Rs. 102 lakh crore to boost employment in the country through the National Infrastructure Pipeline Programme. In this regard, I have two questions to ask.

I would like to know from the hon. Minister whether the Ministry is going to have bilateral talks with the hon. Finance Minister on how this National Infrastructure Pipeline Programme can further be boosted by giving another Rs. 100 crore, as suggested by various quarters.

          A very painful exercise has been undertaken by the various State Governments. I have come across one such exercise in Tamil Nadu itself. One female post-graduate student, who did M.Sc. in Mathematics in the Madras University, has got a sweeper job in the Madras Municipal Corporation. I repeat a Postgraduate female student in Mathematics has got a sweeper post in the Madras Municipal Corporation. I think this type of social stigma is going all over the country. …(Interruptions) Moreover, a person who has passed B.E. Mechanical Engineering with the MBA, has got Khalasi job in the Railways. What are the measures the Government is going to take to address this panic issue? Let me know it from the hon. Minister.

माननीय अध्यक्ष: माननीय सदस्य, अपना क्वेश्चन शॉर्ट में पूछिए ।

…( व्यवधान)

श्री संतोष कुमार गंगवार: स्पीकर सर, इस दिशा में हमारी सरकार बहुत सतर्क है। बजट 2020-21 में डायरेक्ट और इनडायरेक्ट, दोनों रूप से रोज़गार कैसे पैदा हो, इस दिशा में हमने काम किया है। शिक्षा और कौशल विकास के लिए वर्ष 2020-21 में 99 हज़ार करोड़ रुपये और कौशल विकास के लिए हमने तीन हजार करोड़ रुपये दिए हैं ।

इस बात को समझते हुए, जो माननीय सदस्य बता रहे हैं, एक बात हमारी भी समझ में आती है कि लोग पढ़ाई करने के बाद वह नौकरी चाहते हैं, जो लगता है कि उनके योग्य नहीं है। इस संदर्भ में आप सुझाव दीजिए कि ये कदम उठाए जाएं कि इस क्लास के लोग इस नौकरी के लिए अप्लाई न करें? …(व्यवधान)क्या हम सबको यह निर्देश देने का काम करें? …(व्यवधान)

श्री अधीर रंजन चौधरी : मंत्री जी, लाखों लोग मजबूरी में अप्लाई करते हैं। …(व्यवधान)

श्री संतोष कुमार गंगवार: जो अप्लाई करते हैं, वे बताते नहीं हैं कि उनकी क्वॉलिफिकेशन क्या है? …(व्यवधान)इस बात का, जो आपने सुझाव दिया है, हम इसका ध्यान रखेंगे। …(व्यवधान) मुझे मालूम है कि हमारे यहां बहुत ज्यादा पढ़े-लिखे लोग हैं। …(व्यवधान)

SHRI KALYAN BANERJEE : In the concept of employment …(Interruptions). Shri Suresh Ji, kindly allow us also to speak. In the concept of employment, the relationship between the employer and the employee is a basic thing. Now, you are talking about different schemes where there is no relationship between employer and employee. Unless employees are appointed on a permanent basis, you cannot say that a contractual employee is an employee at all. The contractual employees come and go. The reduction has already been pointed out. How much reduction is there?

          Through you, I want to put a very short question to the hon. Minister. In view of the concept of the relationship between the employee and the employer, how many jobs are going to be created within one year in this country by the Central Government?

श्री संतोष कुमार गंगवार: स्पीकर सर, हमारी सरकार रोज़गार देने के लिए बहुत सक्रिय है। …(व्यवधान)हम बहुत अधिक रोज़गारदे रहे हैं। …(व्यवधान)हम खाली रोज़गारनहीं दे रहे हैं, हम व्यक्तिको, नौजवानको इस योग्य बना रहे हैं कि वह रोज़गारदेने वाला बने। …(व्यवधान)इसके लिए हमने जितनी भी योजनाएंशुरू की हैं, वे सही ढंग से काम भी कर रही हैं और लोगों को उनका लाभ भी मिल रहा है। …(व्यवधान)  मेराआपसे आग्रह है कि कृपया इसको देखने की कोशिश करें। …(व्यवधान)  इसकाम के लिए हम अच्छी संख्यामें पैसे भी खर्च कर रहे हैं। …(व्यवधान)

 

माननीय अध्यक्ष: सुरेश जी, क्या आप प्रश्न पूछना चाहते हैं?

…( व्यवधान)

माननीय अध्यक्ष: आप हल्ला करना चाहते हैं या प्रश्न पूछना चाहते हैं?

…( व्यवधान)

SHRI KODIKUNNIL SURESH : I am demanding a discussion under Rule 193.

माननीय अध्यक्ष: अभी कोई डिबेट नहीं होगी। आपको प्रश्न पूछना है तो पूछिए। हल्ला बंद कीजिए, सिर्फ प्रश्न पूछिए।

…( व्यवधान)

   

माननीय अध्यक्ष: मैं सिर्फ प्रश्न पूछने के लिए आपको अलाऊ कर रहा हूं।

…( व्यवधान)

माननीय अध्यक्ष: क्वेश्चन नंबर – 302 (Q. 302)   एडवोकेट अजय भट्ट : माननीय अध्यक्ष जी, मैंने माननीय मंत्री जी से प्रश्न पूछा था कि क्या उत्तराखंड में धार्मिक स्थलों को किसी धार्मिक सर्किट से जोड़ा गया है और यदि जोड़ा गया है तो ब्यौरा क्या है? उत्तराखंड में विभिन्न धार्मिक स्थलों को धार्मिक सर्किटों से कब तक जोड़े जाने की कोई योजना है या संभावना है? धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए केन्द्र सरकार द्वारा अन्य क्या कदम उठाए गए हैं? मंत्री जी का जो जवाब आया है, उसमें “स्वदेश दर्शन” और “प्रसाद”, इन दो योजनाओं के अंतर्गत ही हम देते हैं। जिसमें “स्वदेश दर्शन” के अंतर्गत परिपथ विरासत में वर्ष 2016-17 में कुमायूं मंडल के कटारमल, जागेश्वर-बैजनाथ-देवीधुरा पर 79.13 करोड़ रुपये और प्रसाद योजना में वर्ष 2015-16 में केदारनाथ का एकीकृत विकास पर 34.78 करोड़ रुपये और प्रसाद में ही वर्ष 2018-19 में बद्रीनाथ जी धाम के विकास पर 39.24  करोड़ रुपये देना बताया गया है ।

          मान्यवर, मैं आपके माध्यम से माननीय मंत्री जी से यह जानना चाहता हूं कि देवभूमि विश्व प्रसिद्ध धाम गंगोत्री, यमनोत्री, केदारनाथ और बद्रीनाथ हैं। यहीं पर हेमकुंड साहब, नानकमत्ता, पांवटासाहब और कलिया सृप हैं। पवित्र कैलाश मानसरोवर पैदल यात्रा भी यहीं से जाती है। यहां स्वामी विवेकानंद जी ने कई जगहों पर अपनी यात्राएं की हैं। मायावती आश्रम आज उनका प्रमुख कार्यालय है। जिन्होंने ‘An Autobiography of a Yogi’ किताब पढ़ी होगी, उसमें महावतार बाबा जी की गुफा का जिक्र आया है वह द्वाराहाट के पास पांडखोली स्थान पर है, जहां देश-विदेश से काफी मात्रा में पर्यटक आते हैं। सीता माता जहां धरती में समायी थी, वहीं सीतांश्यों नामक जगह मिली है।

माननीय अध्यक्ष : माननीय सदस्य, यह प्रश्न काल है और प्रश्न काल में भाषण नहीं दिया जाता है, प्रश्न पूछा जाता है।

एडवोकेट अजय भट्ट: सर, मैं इसी पर प्रश्न पूछ रहा हूं। हम लोग वहां एक-एक ईंट लेकर सीता माता का मंदिर बनाने जा रहे हैं। त्रियुगी नारायण, जहां शिव-पार्वती का विवाह हुआ था। वहां आज तक धुना जल रहा है और आज भी वहां विवाह होते हैं। मान्यवर, मैं आपके माध्यक्ष से पूछना चाहता हूं कि हम चीन से लगे हुए क्षेत्र में रहते हैं और हमारे वहां पलायन बहुत बड़ी मात्रा में हो रहा है, बेरोजगारी की स्थिति बनी हुई है। क्या माननीय मंत्री कोई ऐसा सर्किट डेवलप करेंगे कि वहीं के लोगों को रोजगार मिल सके और यह जगह राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय मानचित्र पर आ सके?

श्री प्रह्लाद सिंह पटेल : माननीय अध्यक्ष महोदय, उत्तर में जो बात कही थी, उसी को माननीय सदस्य ने कहा है। जिन स्थानों के नाम को इन्होंने उल्लेखित किया है, यह स्वाभाविक है कि वे महत्वपूर्ण स्थान हैं और सरकार भी उत्तराखण्ड को देवभूमि मानती है। लेकिन जो योजनाएं हमारे पास राज्य सरकार की तरफ से प्रस्तावित होती हैं, हम उन्हीं में पैसा देते हैं। मैं एक नई जानकारी उनको देना चाहूंगा कि बद्रीनाथ जी के धाम के विकास में और केदारनाथ जी धाम के विकास में राज्य सरकार ने भी अपनी एक योजना बनायी है और उसमें भारत सरकार अपना सक्रिय योगदान कर रही है। दूसरा, गंगोत्री और यमुनोत्री तीर्थ यात्रा अवसरंचना विकास वर्ष 2019 में प्रस्तावित है, इस पर राज्य सरकार से जैसे ही डीपीआर आएगी तो इस पर विचार हो सकता है। जिन स्थानों के बारे में माननीय सदस्य ने कहा है, योग महोत्सव और टिहरी महोत्सव में लगातार भारत सरकार अपनी तरफ से सहयोग करती है।

माननीय अध्यक्ष : माननीय सदस्य, आपका उत्तर आ गया है । डॉ. शशि थरूर, आप शॉर्ट में प्रश्न पूछ लें ।

DR. SHASHI THAROOR : Thanks Mr. Speaker, Sir. I am not asking about Uttarakhand but about the policies in relation to spiritual circuits because, in fact, in the previous Lok Sabha, the Minister for Tourism had mentioned a significant grant from the Swedesh Darshan Scheme for Kerala.  The issue was that they were going to cover 133 religious places.   This would have included all religions, ranging from the great Anand Padmanabhan Kshetram in my constituency of Thiruvananthapuram to various Christian shrines and the oldest mosque outside Arabia.

माननीय अध्यक्ष : पर्यटनपर आज पूरे दिन चर्चा होनी है, तब आप चर्चा कर सकते हैं ।

DR. SHASHI THAROOR: The question is this.  What is the Government doing to fulfil these announced intentions in terms of identifying the specific designations under the Spiritual Circuit Scheme? As you have mentioned about Uttarakhand, the same logic applies to other places in the country.   Have funds been allocated and been disbursed for this?  There seem to have been significant delays when it comes to my State.  I do not know the situation with regard to other States.  Will it be even-handed to all religions?

माननीय अध्यक्ष : माननीय सदस्यगण, आप आसन को संबोधित करके ही बोला करें। मंत्री जी की तरफ, इधर-उधर, या कोई ऊपर प्रेस की तरफ संबोधित करके न बोला करे ।

…( व्यवधान)

डॉ.शशिथरूर : अध्यक्षमहोदय,मैं आपके माध्यमसे ही पूछना चाहता हूं।…(व्यवधान)

श्री प्रह्लाद सिंह पटेल : अध्यक्ष महोदय, मूलतः यह प्रश्न तो उत्तराखंड के धार्मिक पर्यटन को लेकर था। माननीय सदस्य, एक वरिष्ठ सदस्य हैं और उन्होंने यह प्रश्न केरल के मामले में पूछा है। केरल में अनेक योजनाएं चल रही हैं। लेकिन वह जिस योजना की बात कर रहे हैं, उसमें भारत सरकार की तरफ से गलती नहीं है, जिससे योजना में विलंब हुआ है। वह अच्छी तरह से यह जानते हैं कि वहां पर राज्य सरकार का जो एक ट्रस्ट है, वहां पर उसके प्रतिबंध के कारण काम शुरू नहीं हुआ है। बाकी जितनी भी योजनाएं हैं, वे लगातार चल रही हैं। केरल में काफी बड़ी संख्या में ‘स्वदेश दर्शन’ और ‘प्रसाद’ की योजनाएं चल रही हैं।…(व्यवधान)

श्रीहसनैनमसूदी:जनाब,कुछ अर्से पहले एक सूफी सर्किटका ऐलान किया गया था। माननीयमंत्रीजी, क्या सदन को यह बताना चाहेंगेकि उस बारे में क्या प्रोग्रेसहुई है? क्योंकिउस सूफी सर्किटका ज्यादालाभ जम्मू-कश्मीरको मिलता था, लेकिन उसके बारे में कोई चर्चा ही नहीं हो रही है और न ही हमें यह मालूम है कि वह किस दिशा में जा रहा है।

श्री प्रह्लाद सिंह पटेल : अध्यक्ष महोदय, मैं इस प्रश्न के लिए माननीय सदस्य को धन्यवाद देता हूं । मैं आपके माध्यम से उनको यह बताना चाहता हूं कि मैं खुद दो बार जम्मू-कश्मीर होकर आया हूं। पहले सूफी सर्किट का पैसा वहां गया था, लेकिन वह भी अच्छी तरह से जानते हैं कि तब वहां पर क्या परिस्थितियां थीं । लेकिन पिछले चार-पांच महीनों में या पिछले एक वर्ष में जिस तेजी के साथ वहां पर काम हुआ है, उसकी जानकारी उनको भी होगी । सूफी सर्किट के काम में, चाहे वह ‘प्रसाद’ की योजना हो, चाहे ‘स्वदेश दर्शन’ की योजना हो, वैसे भी माननीय प्रधान मंत्री जी के निर्देश से जम्मू-कश्मीर और लेह-लद्दाख को सूफी सर्किट के अलावा पर्वतीय सर्किट के रूप में प्राथमिकता है और उसके परिणाम बहुत तेजी के साथ सामने आ रहे हैं ।

(Q. 303)   श्रीमतीरक्षानिखिलखाडसे : अध्यक्षमहोदय,आपका धन्यवाद ।मैं आपके माध्यमसे मंत्रीजी से यह पूछना चाहती हूं कि औरंगाबादमें सेन्ट्रलगवर्नमेंटका जो आर्कियोलॉजीडिपार्टमेंटहैं, उसके अंडर ही हमारे उत्तर महाराष्ट्रके सभी जिले आते हैं। वहां के सभी सांसदोंने मांग रखी थी कि अजंता-एलोरा के साथ ही पाटणादेवी,चांगदेवऔर चोपड़ा,जो ये महत्वपूर्णस्थल हैं, वहां के डीपीआरके लिए फंड्स अलॉट किए जाएं। मैं आपके माध्यमसे माननीयमंत्रीजी से यह पूछना चाहती हूं कि वहां के लिए कब तक फंड्स अलॉट होंगे,जिसके माध्यमसे वहां का डीपीआरतैयार हो सके और वहां का डेवलेपमेंटशुरू हो सके ।

श्री प्रह्लाद सिंह पटेल : माननीय अध्यक्ष महोदय, शनिवारवाड़ा जिसमें लाइट एंड साउंड की व्यवस्था है, वह प्रोटेक्टेड मान्यूमेंट है और वह एएसआई का मान्यूमेंट है। लेकिन माननीय सदस्या बाकी जिन स्थानों की बात कर रही हैं, वे एएसआई के मान्यूमेंट्स नहीं हैं। अगर राज्य सरकार प्रस्ताव देती है, तो हम अपनी योजना में चाहे वह ‘प्रसाद’ हो, या ‘स्वदेश दर्शन’ हो, उसमें हम शामिल करते है। जहां तक उन्होंने जिस कार्यालय की बात की है, अगर उनका कोई सुझाव होगा, तो हम एएसआई के संगठन को अपनी तरफ से निर्देशित करेंगे कि वह उस पर सकारात्मक तरीके से विचार करे। जहां तक अजंता-एलोरा का सवाल है, वह विश्व प्रसिद्ध स्थान है। उस पर सरकार और एएसआई का सारा का सारा फोकस पूरी तरह से होता है ।

श्रीमतीरक्षानिखिलखाडसे : महोदय,आपने जो उत्तर दिया है, वह ठीक है। लेकिन मैं यह पूछना चाहती हूं कि हमने डीपीआरके लिए जो भी मांग रखी थी, वहां के आफिसर्सने अभी तक उस पर कोई भी कार्रवाईनहीं की है। अगर आपके माध्ययसे वह कार्रवाईजल्द से जल्द हो जाती है, तो काफी अच्छा होगा ।

श्री प्रह्लाद सिंह पटेल : माननीय अध्यक्ष जी, मैं तत्काल उसकी जानकारी लेकर, माननीय सदस्या को भिजवा दूंगा।

SHRI BHARTRUHARI MAHTAB: The hon. Minister is aware about the heritage structure of Konark, the Black Pagoda as it is known throughout the world, constructed in the 13th century needs preservation, conservation and also upgradation because of climatic impact.

          Some 100 years ago, sand was filled into the part of the structure because the main structure had collapsed. Repeated meetings have been conducted by DG, ASI along with different other officers for conservation of that great temple.

          I want to know from the hon. Minister about the specific steps being taken for conservation of the Konark Temple, which is actually getting depleted every day because of the sea wind.

श्री प्रह्लाद सिंह पटेल :माननीय अध्यक्ष जी, महताब जी काफी वरिष्ठ सदस्य है और जानकार भी हैं। मैं उनका इस प्रश्न के लिए धन्यवाद भी करता हॅूं । मूलत: इस प्रश्न से वह हटकर है, लेकिन चूंकि पिछले महीने ही 26 से ले कर 28 तक, दो दिनों के लिए वहां पर कोणार्क मंदिर को ले कर बकायदा एक गोष्ठी हुई थी। जिसमें एएसआई के अधिकारी थे, साइंटिस्‍ट्स थे, इतिहासकार थे, राज्य सरकार के कोणार्क मंदिर के सदस्य थे, उनकी भी उपस्थिति थी । मैं भी उस कार्यक्रम में गया था। डायरेक्टर जनरल, एएसआई उस कार्यक्रम में गई थीं, उन्होंने वहां के माननीय मुख्य मंत्री से मुलाकात भी की है। दो बातें हैं, जिसमें ओडिशा हाईकोर्ट ने एक निर्देश भी दिया था कि इस पर चर्चा होनी चाहिए कि वहां पर रेत निकाली जाए या न निकाली जाए । मैं आपके माध्यम से सदन को जानकारी देना चाहता हॅूं कि आईआईटी कानपुर ने उस पर सर्वेक्षण किया है, एएसआई ने भी सर्वेक्षण किया है, विमर्श के बाद बहुत सारे प्रस्ताव उसमें आए हैं। आम तौर पर जो सहमति बनती दिखती है, उस दिन का इंतजार करता हॅूं, ताकि मैं सदन में रख पाऊं कि वह रिपोर्ट आएगी । लेकिन पिछली बैठक जब हुई थी, तब भी इस बात पर आम सहमति थी कि रेत निकाली जानी चाहिए । रेत निकालने के तरीके पर मतभेद है और इसलिए आईआईटी कानपुर की जानकारी, एएसआई प्लस राज्य सरकार के जो एक्सपर्ट्स हैं, उनकी सहमति के बाद जो रिपोर्ट आएगी, मैं आपके माध्यम से सदन के सामने रखूंगा और उसके बाद जो कार्यवाही होगी, सरकार करेगी ।

माननीय अध्यक्ष :श्री प्रतापराव पाटिल चिखलीकर – उपस्थित नहीं ।

          अब उनको बोलना कि प्रश्न पूछने के लिए अपना नाम लिखा कर चले गए हैं, इस सीजन में उनका नंबर सप्लीमेंट्री में नहीं आएगा ।

          श्री विनायक राऊत जी ।

श्री विनायक भाउराव राऊत :अध्यक्ष महोदय, महाराष्ट्र के पर्यटन क्षेत्र में जहां-जहां विकास करने की आवश्यकता है, उसके बारे में एक अच्छा प्रश्न श्रीमती रक्षा खडसे जी ने पूछा है । मैं आपके माध्यम से मंत्री महोदय से जानकारी लेना चाहता हॅूं कि महाराष्ट्र में छत्रपति शिवाजी महाराज के कार्यकाल के सैकड़ों किले आज भी हैं। जैसे सिंधुदुर्ग में समुद्र के अंदर सिंधुदुर्ग किला है, शिवनेरी है, वहां ऐसे कई किले हैं, आपके उत्तर में आपने जो सुविधा देने के लिए कहा है, ऐसी कोई भी सुविधा आज तक एक भी किले के ऊपर नहीं है । मैं विनती करना चाहता हॅूं कि क्या सिंधुदुर्ग जिले में समुद्र के अंदर जो सिंधुदुर्ग किला है, उसकी मरम्मत के लिए, यानी पानी की लहरों से उसका जो नुकसान हो रहा है, उसकी तरफ गंभीरता से ध्यान देने की आवश्यकता है । उसके लिए आप केन्द्र सरकार के माध्यम से, जिले के संवर्धन के लिए क्या उपाय-योजना कर रहे हैं और साथ-साथ आने वाले पर्यटकों के लिए भी जो सुविधा देने की आवश्यकता है, वह देने की व्यवस्था आप कैसे कर रहे हैं?

श्री प्रह्लाद सिंह पटेल :माननीय अध्यक्ष जी, माननीय सदस्य को मैं जानकारी देना चाहता हॅूं कि रायगढ़ के किले को लाइट एण्ड साउंड के लिए सैद्धांतिक रूप से सहमति मिली है। दूसरा, सिंधुदुर्ग किले की आप जो बात कर रहे हैं, अण्डर वॉटर आर्किलोजी के बारे में एएसआई ने फिर से कोशिश शुरू की है और जो आपकी भावना है, मुझे लगता है कि हम उसमें जल्दी सफल होंगे।

DR. T. SUMATHY (A) THAMIZHACHI THANGAPANDIAN:  Sir, I would like to tell the hon. Minister, through you, that recently the Ministry has proposed to bring important sites of worship, nearly 7,000 temples in Tamil Nadu, under the Centrally Protected areas like the monuments or the architecture. Our Party President, Mr. M.K. Stalin, has strongly protested against it saying that it would definitely affect the sentiments of the  people of Tamil Nadu because each State has its own cultural nuances attached with the temples and the locales of the temples. I understand that archaeology, everything is important, but a temple is a living organism, and it is not only a place of worship.  So, I would like the Minister to understand the sentiments of Tamil Nadu people; and request him to just think over it and take back this announcement.

श्री प्रह्लाद सिंह पटेल: अध्यक्ष जी, मैं माननीय सदस्या को धन्यवाद देता हूँ कि चीजें कैसे मन से गलत हो जाती है, जिसका सबसे अच्छा सबूत है । मुझे लगता है कि इसी सदन में मैंने यह बात कही थी कि तमिलनाडु एकमात्र ऐसा राज्य है, जिसने 7,000 मंदिरों को सूचीबद्ध किया। कहीं एएसआई का, भारत सरकार का उनको कब्जे में लेने का सवाल ही पैदा नहीं होता । जब तक राज्य सरकार किसी भी स्मारक को देने के लिए सहमत न हो, भारत सरकार या एएसआई इस पर कब्जा नहीं करती है। मुझे समझ में नहीं आता कि इतने श्रेष्ठ नेताओं का, जिनका वे नाम ले रही हैं, मैं नाम लेना नहीं चाहता, वे सदन के सदस्य नहीं हैं। लेकिन उसके बाद विरोध करने की बात कहाँ से आई, मैं आश्चर्यचकित हूँ ।

मैं आपके माध्यम से सदन को आश्वास्त करना चाहता हूँ कि जब भी कभी एएसआई की सूची में किसी भी स्मारक का नाम जोड़ा जाता है, तो वह राज्य सरकार की सहमति के बगैर नहीं होता। अगर तमिलनाडु की तारीफ करने में उनको आपत्ति है, तो फिर मुझे कुछ कहना नहीं है। क्योंकि 7,000 मंदिरों की सूची तमिलनाडु ने बनाई है, यह सच्चाई है। उसके बाद पुडुचेरी में वहाँ के जो उपराज्यपाल हैं, उन्होंने बनाई है । इसलिए मुझे लगता है कि तमिलनाडु के लोगों को ऐसे भ्रमों में नहीं आना चाहिए, बल्कि स्पष्ट है कि एएसआई की सूची अपनी जगह अलग है। लेकिन यह सच है कि इस देश में अगर आज भी लगभग हजारों वर्ष पुराने ऐसे मंदिर हैं, जिनको अगर एएसआई सूची में शामिल करें, तो वह जो संख्या 3,671 है, वह 10 हजार पार हो जाएगी। मुझे नहीं लगता कि तमिलनाडु को इस पर आपत्ति होनी चाहिए, बल्कि इसके लिए तो बधाई देनी चाहिए ।

SHRIMATI SUPRIYA SADANAND SULE : Sir, the hon. Minister talked about Shaniwar Wada of Pune which is in a fair state of conservation.   Fair state of conservation is not good enough.  The hon. Minister in his reply said that there is a Light and Sound Show.  Light and Sound Show does not mean conservation. We need help in this regard. Even Shri Raut talked about the position of the forts.  A lot of times the State is willing to spend some amount of money but we do not get permission for it.  Look what we have done in Humpi.  Humpi is a world heritage site which is almost getting destroyed.  The same thing is happening in Pune.  Can the Archaeological Survey of India step in and help the States more? It is because files go from the States to the Archaeological Survey of India but they do not get cleared.  Even if they have to build a small toilet there, it is a challenge. And, with the permission of the Minister, I would say that Light and Sound Show is not conservation.  It is only a small addition. It does not conserve the monument.  I would request the hon. Minister to kindly throw some light on this aspect. 

श्री प्रह्लाद सिंह पटेल: अध्यक्ष जी, यह फर्क माननीय सदस्या को भी पता है, मुझे भी पता है कि लाइट एंड साउंड संरक्षण की परिधि में नहीं आता। लेकिन जो बात उन्होंने कही है कि राज्य सरकार अगर वहां पर कोई धन देना चाहती है, कोई भी माननीय सदस्य अगर किसी एएसआई के स्मारक पर धन खर्च करना चाहे, तो उसको अनुमति है। यदि ऐसा कोई विषय है, तो आप ध्यान में लाइए। मैं भी पूछ कर आपको जवाब दूँगा। लेकिन मैं आपको आश्वस्त करता हूँ, एएसआई कभी अवरोध नहीं बनेगी । राज्य सरकार पैसा दे या सांसद पैसा दे, हम वहाँ लगाने के लिए तैयार हैं। उत्तर प्रदेश के हमारे बहुत सारे सांसदों ने एएसआई के मॉन्यूमेंट्स पर खर्चा करने की अनुमति मुझसे मांगी है, क्योंकि वहाँ पर सांसदों का पैसा ही खर्च नहीं हो पाता है । उन्होंने मुझसे कहा है, तो मैंने कहा कि आप हमको डीपीआर भी दीजिए । हम एएसआई के अधिकारियों को सहमति भी देंगे ।

श्रीकपिलमोरेश्वरपाटील: अध्यक्ष महोदय, आपका धन्यवाद । मेरेलोक सभा क्षेत्र में शाहपुर तहसील में एक किला है, जहाँ पर शिवाजी महाराज के गर्भ संस्कार हुए हैं। अभी वह जीर्ण अवस्था में है। उसको अच्छी अवस्था में लाना बहुत जरूरी है । मैं आपके माध्यम से मंत्री महोदय से पूछना चाहूँगा कि जहाँ पर शिवाजी महाराज जैसे व्यक्ति को गर्भ संस्कार मिले हैं, ऐसे किले को पुनर्जीवित करने के लिए केन्द्र सरकार के माध्यम से कोई योजना चलाई जा रही है? यह मैं आपके माध्यम से जानना चाहूँगा ।

श्री प्रह्लाद सिंह पटेल: माननीय अध्यक्ष जी, शिवाजी महाराज के जितने किले थे, महाराष्ट्र की सरकार ने उन सब को मिलाकर एक विधिवत प्रपोजल बनाया था। लेकिन मैं आपके माध्यम से माननीय सदस्य को एक निवेदन करना चाहता हूँ कि यदि एएसआई का मॉन्यूमेंट है, तो सीधे तौर पर हम उस पर कोई न कोई, अगर कोई माननीय सदस्य कहे या बाकी कोई कहे, तो हम उस पर काम करते हैं। लेकिन अगर वह हमारा मॉन्यूमेंट नहीं है और किसी योजना का हिस्सा है, तो फिर वह हमारी किसी स्कीम में आना चाहिए। चाहे वह ‘प्रसाद’ या ‘स्वदेश दर्शन योजना’ हो। अगर राज्य सरकार कोई ऐसा प्रस्ताव भेजती है, तो भारत सरकार उस पर विचार करती है।

          अभी पहले माननीय सदस्या ने कहा था । मैं आपके माध्यम से उनको जानकारी देना चाहता हूं कि शनिवारवाड़ा में कोई भी प्रपोजल एएसआई के पास स्टेट गवर्नमेंट का नहीं आया है।

SHRIMATI KANIMOZHI KARUNANIDHI: Sir, in his reply to Supriya Suleji, the hon. Minister had said that he will allow the State Governments to provide funds to build inside the protected monuments. I think, nothing should be done inside the protected monuments without the permission of the ASI. The hon. Minister should give us a clarification on that. We have to protect these monuments, and we cannot allow new buildings to come up inside the protected monuments.

श्री प्रह्लाद सिंह पटेल : महोदय, मुझे लगता है कि तमिलनाडु में कुछ चीजों को लेकर बड़ा भ्रम है। मैं आपके माध्यम से फिर रिपीट करना चाहता हूँ कि राज्य सरकार हो या कोई संसद सदस्य हो।…(व्यवधान)आप मुझे बोलने देंगे,तो ठीक रहेगा।एएसआई अपने नॉर्म्सके आधार पर काम करती है। हम राज्य की एजेंसियोंको स्मारकोंमें काम करने का कई बार मौका नहीं देते हैं । अगर साथ-साथ काम करने की बात आती है, तो कई बार हम सहमति देते भी हैं । मुझे लगता है कि एएसआई के इन पैमानोंका आधार ही इसलिए है कि उसकी मान्यतान सिर्फ देश में है, बल्कि देश के बाहर है। अगर आपका कोई ऐसा मामला होता है, आप ध्यान में लाइए, एएसआई कभी अड़ंगानहीं बनती और न कभी अड़ंगा बनेगी,यह मैं आश्वस्तकरना चाहता हूँ ।

 

(Q. 304)   श्री रमापति राम त्रिपाठी : महोदय, माननीय मंत्री जी ने जो उत्तर दिया है, मैं उसके लिए आपके माध्यम से उनको धन्यवाद देता हूँ । मेरा सवाल है कि समग्र शिक्षा कार्यक्रम का क्या उद्देश्य है और सरकार उन उद्देश्यों की पूर्ति में कहाँ तक सफल हुई है?

डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक : श्रीमन्, जो समग्र शिक्षा है, समग्र शिक्षा का जो उद्देश्य है, वह अंतिम छोर तक के बच्चे को स्कूल तक लाना है और उसके बाद उसका विकास करना है। गुणवत्तायुक्त स्कूलों की शिक्षा सार्वभौमिक स्तर पर पहुँचाना, पुस्तकालयों के लिए दृढ़ता से काम करना, स्कूलों को अनुदान देना, 10 प्रतिशत स्वच्छता का काम करना, माध्यमिक और वरिष्ठ विद्यालयों को वार्षिक अनुदान देना है। कुल मिलाकर सर्व शिक्षा अभियान के तहत यदि हम देखेंगे तो उन उद्देश्यों की पूर्ति की दृष्टि से जहाँ हम उनके उच्चीकरण के लिए पैसा देते हैं, नए स्कूलों को खोलने के लिए पैसा देते हैं, इसके अतिरिक्त कक्षा कक्षों के लिए पैसा देते हैं, शौचालयों के निर्माण के लिए पैसा देते हैं। इतना ही नहीं, सर्व शिक्षा अभियान के तहत जो सबके लिए शिक्षा अधिकार अधिनियम है, उसके तहत बच्चों को, जो गरीब बच्चे हैं, उन्हें फ्री वर्दी देते हैं, यातायात की सुविधा देते हैं, फ्री पाठ्य-पुस्तकें देते हैं ।

          श्रीमन्, इस दिशा में हम काफी कुछ समग्र शिक्षा अभियान के तहत काम कर रहे हैं। देश के अंदर, पीछे के समय में जो हमारा सम्पूर्ण बजट है, यदि उसे देखेंगे तो जहाँ वर्ष 2016-17 में 26,697 करोड़ रुपये था, इस समय वह बढ़कर के 38,750 करोड़ रुपये हो गया है । इन्हीं सब गतिविधियों को संरक्षित करने के लिए और उन गतिविधियों को बढ़ाने के लिए राज्य सरकारों को हम मदद करते हैं ।

श्री रमापति राम त्रिपाठी: महोदय, मैं माननीय मंत्री जी से जानना चाहता हूँ कि विशेषकर अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, पिछड़ा वर्ग और उपेक्षित वर्ग की बालिकाओं की शिक्षा के लिए सरकार ने क्या कदम उठाए हैं और वह आगे क्या करने वाली है?

डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक : श्रीमन्, मुझे यह कहते हुए खुशी है कि इस समय हमारा जो जीआर है, वह छात्रों की अपेक्षा छात्राओं का बहुत अच्छा है। वह बढ़ा है और ऐसा इतिहास में पहली बार हुआ है। हम स्कूली शिक्षा से लेकर उच्च शिक्षा तक और तकनीकी शिक्षा से लेकर विभिन्न प्रकार की शिक्षाओं में बालिकाओं की शिक्षा के लिए बहुत कटिबद्ध, प्रतिबद्ध हैं।

        माननीय सदस्य ने जिस बात की चिंता की है कि ग्रामीण क्षेत्र में और विशेषकर अनुसूचित जाति, जनजाति, पिछड़ा वर्ग की बालिकाओं की दृष्टि से क्या कर रहे हैं, तो जो अत्यंत पिछड़े क्षेत्र हैं, उन क्षेत्रों में हमारे अभी तक 4,881 कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय हैं। उन बीहड़ क्षेत्रों में, जहाँ केवल बालिकाओं के लिए हैं, इस समय 6,18,138 बालिकाएं उनमें शिक्षा ग्रहण कर रही हैं। यदि माननीय सदस्य के मन में यह था कि एस.सी., एस.टी., तो मैं उनको आपके माध्यम से बताना चाहता हूँ कि 17 लाख यानी 28 प्रतिशत तो इसमें एस.सी. हैं, 25.17 प्रतिशत एस.टी. हैं और 35.45 प्रतिशत ओबीसीज हैं। इनमें 4.33 प्रतिशत मुस्लिम बालिकाएं भी हैं, जबकि बीपीएल में 6.79 प्रतिशत बालिकाएं हैं।

श्री रितेश पाण्डेय : महोदय, बहुत-बहुत धन्यवाद। मंत्री जी ने यह कहा है कि बालिकों के जो नम्बर्स हैं, वे बालकों की अपेक्षा बढ़ गए हैं। क्या यह सच नहीं है कि बालकों को अब ज्यादातर प्राइवेट संस्थानों में भेजा जा रहा है, क्योंकि वहाँ की शिक्षा को ज्यादा अच्छा समझा जाता है और जिसकी वजह से बालिकाओं के नम्बर सरकारी संस्थानों में जा रहे हैं, जिन्हें अभिभावक उस लेवल पर नहीं समझते, जो प्राइवेट स्कूल्स को समझते हैं। क्या माननीय मंत्री जी यह बताने की कृपा करेंगे कि क्या वे इस चीज पर भी जाँच कराएंगे और यदि यह पाया जाता है तो क्या इन स्कूलों को और बेहतर किया जाएगा? क्या इसमें स्कूल क्वालिटी असेसमेंट प्रोग्राम लागू करने की कोई एक नीति बनेगी, जिससे हम लोग यह सुनिश्चित कर सकें कि बच्चों की पढ़ाई प्राइवेट संस्थानों की तुलना में बराबरी पर चल रही है या नहीं?

डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक: श्रीमन्, जो मैंने अभी आंकड़ा दिया है, वह बालक और बालिकाओं का समग्र तरीके से दिया है। जहाँ तक माननीय सदस्य का प्रश्न है कि प्राइवेट स्कूलों में छात्र जाते हैं और सरकारी स्कूल में बालिका ही रहती है, ऐसा नहीं है। सबके लिए शिक्षा अधिकार अधिनियम के तहत 25 प्रतिशत प्राइवेट स्कूलों में भी इनके लिए स्थान है और पीछे के समय में 1,100 करोड़ रुपये प्रतिपूर्ति के रूप में उन प्राइवेट स्कूलों में, जो 25 प्रतिशत प्रवेश देना उनके लिए अनिवार्य है, उनको कर रहे हैं। जहाँ तक गुणवत्ता सुधार की बात है, यह एक सतत प्रक्रिया है, हाँ हमने नीति बनाई है कि हम लगातार गुणवत्ता को बढ़ाएंगे । उसके लिए बाकायदा नई शिक्षा नीति में हम मसौदा लाए हैं और अभी भी हम लगातार उसकी समीक्षा करते हैं ।

श्री मोहनभाई सांजीभाई देलकर : महोदय, बहुत-बहुत धन्यवाद ।

          महोदय, मैं माननीय मंत्री जी से जानना चाहता हूँ कि समग्र शिक्षा अभियान बहुत ही महत्वपूर्ण योजना है। इसके अंतर्गत जो सारे अध्यापकों को नियुक्त किया जाता है, उनकी नियुक्ति भारत सरकार के दिशा-निर्देश अनुसार होती है। जब उनको नियमित करने की बात आती है तो वहाँ का प्रशासन या सरकार उन्हें नियमित नहीं करती है और यह कहते हैं कि यह तो एक योजना है। ये अध्यापक 5-6-10 सालों तक काम करते हैं और उसके बाद उन्हें नियमित नहीं किया जाता है। ये सारी नियुक्तियाँ भारत सरकार के दिशा-निर्देश अनुसार होती है। यह उनके साथ अन्याय होता है। मैं सरकार और खासकर मंत्री महोदय से यह जानना चाहता हूँ कि ऐसे सारे अध्यापक, जिनकी नियुक्ति समग्र शिक्षा अभियान के दिशा-निर्देश अनुसार हुई है, सारे कानूनों के तौर पर हुई है, क्या उन सारे अध्यापकों को नियमित करने के बारे में भारत सरकार और माननीय मंत्री जी ने कुछ सोचा है? यह मैं भारत सरकार से जानना चाहता हूँ। बहुत-बहुत धन्यवाद।

डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक : श्रीमन्, समग्र शिक्षा अभियान के तहत राज्य और केंद्र का मिलकर होता है। हम इन पदों पर 60:40 के अनुपात में नियुक्ति करते हैं। शिक्षा राज्यों का विषय है, तो उनको मालूम है कि 60 प्रतिशत यदि केंद्र करता है तो 40 प्रतिशत उनको करना है ।…(व्यवधान)

          श्रीमन्, ऐसी जो भी नियुक्ति होती है, वह केवल उतने तक ही होती है। राज्य सरकार उसको विधिवत, भारत सरकार का यह कहना नहीं है कि आप उसको विधिवत नियुक्त मत कीजिए और बहुत सारे राज्यों ने विधिवत नियुक्तियाँ की हैं ।…(व्यवधान)

श्री मोहनभाई सांजीभाई देलकर : महोदय, मैं माननीय मंत्री जी से कहना चाहता हूँ कि केन्द्र शासित प्रदेश सीधे केन्द्र सरकार के अधीन होते हैं ।…(व्यवधान)

श्री कौशलेन्द्र कुमार: माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं आपके माध्यम से मंत्री जी से जानना चाहता हूं कि इन्होंने कहा है कि केन्द्रीय विद्यालय राज्य सरकार की सूची के आधार पर खोले जाते हैं। कई ऐसे जिले हैं जहां केन्द्रीय विद्यालय नहीं हैं। हमारे संसदीय क्षेत्र नालंदा में दो केन्द्रीय विद्यालय हैं और वहां के सभी लोग एक केन्द्रीय विद्यालय और खुलवाना चाहते हैं, जहां पर आर्मी के लगभग 250परिवार रहते हैं। वहां पर इसके लिए जमीन भी उपलब्ध है ।

        मेरे संसदीय क्षेत्र राजगीर में आर्मी का ट्रेनिंग सेन्टर है। वहां पर करीब 250-300परिवार हैं, जो केन्द्रीय विद्यालय से वंचित रह जाते हैं । मैं मंत्री जी से जानना चाहता हूं कि क्या आप राजगीर में एक केन्द्रीय विद्यालय खोलना चाहते हैं?

डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक: श्रीमन्, यह सही है कि केन्द्रीय विद्यालयों के प्रति आकर्षण है। केन्द्रीय विद्यालयों का स्तर बहुत अच्छा हुआ है। पूरे देश के अन्दर सभी स्थानों से उसकी मांग होती है। लेकिन, केन्द्रीय विद्यालयों को खोलने की एक प्रक्रिया है। जहां 500से अधिक केन्द्रीय कर्मचारी होते हैं और उसके बाद जब इसके लिए आवेदन होता है तो चुनौती पद्धति के तहत उसे देखा जाता है।

        माननीय सदस्य का प्रस्ताव आया होगा तो उस पर कार्रवाई हो रही होगी। इसके लिए तय मानकों के अन्तर्गत जो प्रस्ताव आते हैं, वहां हम केन्द्रीय विद्यालय खोलने की कोशिश करते हैं ।

SHRIMATI APARAJITA SARANGI: Hon. Speaker, Sir, under the Right to Education Act, a huge number of schools have come up.  Within one kilometre radius, primary schools; within three kilometres, upper primary schools; and within five kilometres radius, high schools have come up.

          Sir, although these schools have come up in large numbers everywhere but in Odisha and in my Constituency, in fact, not much has been done as far as infrastructure development is concerned and as far as teachers’ availability is concerned.

          So, I would like to ask the hon. Minister as to what has been done with regard to infrastructure development and the teachers’ availability as far as the new schools are concerned.  Also, has there been an impact assessment of the Right to Education Act?

डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक: श्रीमन्, समग्र शिक्षा अभियान और शिक्षा का अधिकार अधिनियम के तहत, जब से यह शुरू किया गया है, उसमें जहां तक अवस्थापनाओं का विषय है, उसमें 3,12,000प्राथमिक विद्यालयों के भवनों के निर्माण की स्वीकृति दी गई है। 18,98,000अतिरिक्त कक्षा-कक्ष की स्वीकृति दी गई है। 2,46,000स्कूलों को पेयजल की सुविधा के लिए दी गई है जबकि शौचालयों के लिए 10,90,000को दिए गए हैं। जो नए स्कूल हैं, उसके लिए 3.64लाख को दी गई है। यह तो प्राथमिक विद्यालयों के लिए है।

          श्रीमन्, अगर माध्यमिक विद्यालयों में देखेंगे तो 12,837नए भवन बनाए गए हैं। अतिरिक्त कक्षा-कक्ष 55,533दिए हैं जबकि माध्यमिक विद्यालयों में 72,155शौचालय दिए हैं और पेयजल की सुविधा 12,263को दी गई है ।

        अवस्थापनाओं के लिए भारत सरकार लगातार धनराशि देती है ।

 

(Q. 305) SHRI RAHUL GANDHI : Hon. Speaker, Sir, the Indian economy is going through a very difficult period.  Our banking system is practically not working anymore.  Banks are failing, and I suspect, more banks are going to fail as a result of the current global situation. 

          The central cause of this failure of the banks and one of the central causes of unemployment is hollowing out, is the stealing of money from our banks by a large numbers of people.  I had asked a very simple question: who are the top 50 wilful defaulters? मैंने पूछा था कि हिन्दुस्तानमें सबसे बड़े 50विलफुलडिफॉल्टर्सकौन हैं? मुझे कोई जवाब नहीं दिया गया। घुमा-फिराकरकुछ और बोला है। मगर जो हमने 50 नाम हमने  मांगेहैं  ।

माननीय अध्यक्ष: आप प्रश्नपूछिए ।

श्रीराहुलगांधी : मुझेथोड़ा बोलने दीजिए,सेट तो करने दीजिए ।

माननीय अध्यक्ष: सेट नहीं करें, आप मूल प्रश्नपूछिए ।

…( व्यवधान)

माननीय अध्यक्ष: आप वकील न बनें।

…( व्यवधान)

श्रीराहुलगांधी : प्रधानमंत्रीजी कहते हैं कि जिन लोगों ने हिन्दुस्तानके बैंकोंसे चोरी की है, उनको मैं पकड़-पकड़ कर वापस लाऊंगा तो मैंनेप्रधानमंत्रीजी की सरकार से उनके 50नाम पूछे और उसका जवाब नहीं मिला ।

          मेरा पहला सवाल यह है कि उनके 50नाम क्या हैं?

श्री अनुराग सिंह ठाकुर: माननीयअध्यक्षमहोदय,मैं माननीयसांसद के प्रश्नका उत्तर देना     चाहूंगा ।…( व्यवधान)

SHRI RAHUL GANDHI: Why is the Finance Minister not answering? …(Interruptions)

श्री अनुराग सिंह ठाकुर: माननीयअध्यक्षमहोदय,जिस तरह खराब दृष्टिसे सवाल पूछा गया, मुझे लगता है …( व्यवधान)

SHRI ADHIR RANJAN CHOWDHURY : Why is she not responding? …(Interruptions)

माननीय अध्यक्ष: आप उत्तर सुनिए। यहांपर सदन में अधिकतमजवाब राज्य मंत्रीदेते हैं ।

…( व्यवधान)

श्री अनुराग सिंह ठाकुर: सर, यह समझना बहुत आवश्यकहै कि आखिर क्या हुआ? यह कब हुआ, कैसे हुआ?…( व्यवधान)अगर इतनी भूमिकाबांध कर इस बात को कहा गया है तो मुझे लगता है कि चूंकि इन्हेंपता है कि कमियांकहां हैं, इसलिए ये उत्तर सुनना नहीं चाहते हैं ।…( व्यवधान)अगर सवाल पूछा है तो जरा उत्तर भी सुनिए ।…( व्यवधान)

वर्ष 2010-14 तकजो ग्रॉस एडवांसदिए गए थे, उनमें से कितने फ्रॉड होते थे, कितने डिफॉल्टहोते थे, वह ग्रॉस एडवांसका 0.64 प्रतिशतहै, जो कम होकर वर्ष 2018-19 में 0.18 प्रतिशतरह गए और वर्ष 2019-20 मेंकम होकर 0.08 प्रतिशतरह गए। यह क्यों हुआ, क्योंकिइनके समय जो एडवांसदिए जाते थे, जो क्रेडिटदी जाती थी, उसकी एवरेज ग्रोथ रेट 18प्रतिशतथी। इसके साथ-साथ फ्रॉड होते थे । लेकिन,हमारी सरकार ने आकर उसकी एसेट क्वालिटीरिव्यूकरवाई,देश को एक्चुअलएन.पी.ए. बताया भी, बैंकोंकी रीकैपिटलाइजेशनभी की । अगर बैंक पी.सी.ए. फ्रेमवर्कसे बाहर भी आए, तो वे नरेन्द्रमोदी जी की सरकार के समय आए ।

यहजो 50 विलफुलडिफॉल्टर्सकी बात है तो सर, इसमें छिपानेकी कोई बात नहीं है । लेकिन,अगर माननीयसांसद जी ने अपना प्रश्नस्वयं लिखा होगा तो उन्हेंजरूर इसकी जानकारीहोगी । मैं यह भी कहना चाहता हूं कि 50 विलफुलडिफॉल्टर्सके फ्रॉड और डिफॉल्टके पैसे जितने बैंकोंमें थे, इसकी जानकारीइसमें दी गई है। सी.आई.सी. की वेबसाइटपर सारे विलफुलडिफॉल्टर्सके नाम दिए जाते हैं। 25लाख रुपये से ज्यादाका विलफुलडिफॉल्टरकोई भी होगा, उसकी जानकारीवहां पर दी जाती है ।…( व्यवधान)इसमें छिपानेवाली कोई बात नहीं है ।…( व्यवधान)

सर,मैं यह इसलिए कहना चाहता हूं कि कुछ लोग अपने किए गए पापों को दूसरे के सिर पर मढ़ना चाहते हैं । वह हम होने नहीं देंगे।…( व्यवधान) 25 लाखरुपये से ज्यादावालों के विलफुलडिफॉल्टर्सकी जानकारीवेबसाइटपर उपलब्धहोती है और जो एक करोड़ रुपये से ज्यादाके डिफॉल्टर्सहैं, उनकी भी जानकारीहोती है ।…( व्यवधान)अगर आप नाम सुन कर जानना चाहते हैं तो सारे के सारे नाम पढ़ कर मैं आपके सामने देने के लिए तैयार हूं, सभा-पटल पर रखने के लिए भी तैयार हूं ।…( व्यवधान)इसमें छिपानेवाली कोई बात नहीं है ।…( व्यवधान)

महोदय,इनकी सरकार के समय पैसे लेकर लोग विदेश भाग गए थे । अगर किसी ने आई.बी.सी. कानून बनाया तो वह नरेन्द्रमोदी जी की सरकार ने बनाया ।…( व्यवधान)अगर एन.सी.एल.ए.टी. के आई.बी.सी. प्रोसेसके पहले और बाद में जो 4,80,000 करोड़ रुपये की रिकवरीबैंकोंसे हुई, वह मोदी जी की सरकार के समय हुई। पैसा इन्होंनेबांटे और उसे वापस लाने का काम हमारी सरकार ने किया है ।…( व्यवधान)

दूसरा,यह जो फ्यूजिटिवइकोनॉमिकऑफेन्डर्सबिल है, इसे हमारी सरकार लाई।…( व्यवधान) इनकेसमय जो भगोड़े पैसे लेकर भाग गए थे, अगर उनकी प्रॉपर्टीजब्त की तो वह हमारी सरकार ने की ।…( व्यवधान)

महोदय,मुझे कुछ लोग सदन में आवाज मारकर कह रहे हैं कि जरा पोर्ट्रेटऔर पेंटिंगकी बात करो ।

12.00 hrs मैं इसे राजनीतिक रूप नहीं देना चाहता कि पेन्टिंग किसने किसको बेची, मैं वह भी कह सकता था। किसके खाते से पैसा कहां गया …(व्यवधान) हम लोग राजनीति नहीं कर रहे हैं । लेकिन एक वरिष्ठ सदस्य द्वारा पूरे भारतीय बैंकिंग व्यवस्था पर प्रश्नचिन्ह खड़ा करना दिखाता है कि उनकी नासमझी कितनी है । जब देश के लोगों को बैंकिंग व्यवस्था पर पूरा विश्वास व्यक्त करने के लिए माननीय वित्त मंत्री जी ने कहा कि हर बैंक सुरक्षित है,यस बैंक के हर डिपोजिटर्स का पैसा सुरक्षित है। …(व्यवधान) हमारी सरकार ने रीकंन्स्ट्रक्शन के लिए तीन दिन के अंदर कदम उठाए, हमारे वित्त मंत्री जी और प्रधान मंत्री जी ने कदम उठाए । ये इनकी सरकार नहीं कर पाई,फोटोग्राफ में पूर्व वित्त मंत्री जी नजर आए, इनके लोगों की पेन्टिंग बिकी, लेकिन हम लोग वहां पर नहीं गए । …(व्यवधान)

माननीय अध्यक्ष: प्रश्नकाल का समय बारह बजे तक के लिए होता है, मैंने पूरा समय दिया है।

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