State Consumer Disputes Redressal Commission
N I Co vs Sharafat Ali on 9 November, 2017
Cause Title/Judgement-Entry STATE CONSUMER DISPUTES REDRESSAL COMMISSION, UP C-1 Vikrant Khand 1 (Near Shaheed Path), Gomti Nagar Lucknow-226010 First Appeal No. A/2004/670 (Arisen out of Order Dated in Case No. of District State Commission) 1. N I Co A ...........Appellant(s) Versus 1. Sharafat Ali A ...........Respondent(s) BEFORE: HON'BLE MR. Udai Shanker Awasthi PRESIDING MEMBER HON'BLE MR. Gobardhan Yadav MEMBER For the Appellant: For the Respondent: Dated : 09 Nov 2017 Final Order / Judgement
राज्य उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग, उ0प्र0, लखनऊ।
सुरिक्षत अपील सं0-६७०/२००४ (जिला मंच, कानपुर नगर द्वारा परिवाद संख्या-१०२/२००२ में पारित प्रश्नगत निर्णय एवं आदेश दिनांक २८-०८-२००३ के विरूद्ध) नेशनल इंश्योरेंस कं0लि0 द्वारा असिस्टेण्ट मैनेजर (टेक्नीकल) रीजनल आफिस, हजरतगंज, लखनऊ। ............ अपीलार्थी/विपक्षी।
बनाम शराफत अली निवासी ८२/१७, रेलवे रोड, कलैक्टरगंज, कानपुर।
............ प्रत्यर्थी/परिवादी। समक्ष:- १- मा0 श्री उदय शंकर अवस्थी, पीठासीन सदस्य। २- मा0 श्री गोवर्द्धन यादव, सदस्य। अपीलार्थी की ओर से उपस्थित : श्री अशोक मेहरोत्रा विद्वान अधिवक्ता। प्रत्यर्थी की ओर से उपस्थित : कोई नहीं। दिनांक :- ३०-११-२०१७. मा0 श्री उदय शंकर अवस्थी , पीठासीन सदस्य द्वारा उदघोषित निर्णय
प्रस्तुत अपील, जिला मंच, कानपुर नगर द्वारा परिवाद संख्या-१०२/२००२ में पारित प्रश्नगत निर्णय एवं आदेश दिनांक २८-०८-२००३ के विरूद्ध योजित की गई है।
संक्षेप में तथ्य इस प्रकार हैं कि प्रत्यर्थी/परिवादी के कथनानुसार परिवादी का वाहन संख्या-यू.पी. ७८ एन-३२५९ अपीलार्थी बीमा कम्पनी से दिनांक २७-०३-१९९८ से दिनांक २०-०३-१९९९ तक बीमित था। दिनांक २०-०७-१९९८ को लगभग ११.०० बजे लखनऊ रोड पर बन्थरा के पास यह वाहन दुर्घटनाग्रस्त हो गया। वाहन में आयी क्षति की क्षतिपूर्ति हेतु बीमा दावा अपीलार्थी बीमा कम्पनी को प्रेषित किया गया। अपीलार्थी बीमा कम्पनी द्वारा सर्वेयर नियुक्त किया गया जिन्होंने क्षति ४१,३३५/- रू० आंकलित की तथा ३४,७३०.५० रू० भुगतान योग्य बताया किन्तु अपीलार्थी द्वारा भुगतान नहीं किया गया। दिनांक ०३-०१-२००१ को अपीलार्थी द्वारा सूचित किया गया कि प्रश्नगत वाहन की कथित दुर्घटना के समय चालक के पास वैध ड्राइविंग लाइसेंस नहीं था। अत:
-२-बीमा दावा की अदायगी नहीं की गई। प्रत्यर्थी/परिवादी द्वारा अपीलार्थी को नोटिस प्रेषित की गई किन्तु फिर भी अपीलार्थी द्वारा क्षतिपूर्ति की अदायगी नहीं की गई। अत: क्षतिपूर्ति की मय ब्याज अदायगी हेतु परिवाद जिला मंच के समक्ष प्रेषित किया गया।
अपीलार्थी की ओर से जिला मंच के समक्ष कोई प्रतिवाद पत्र प्रस्तुत नहीं किया गया। परिवाद की सुनवाई अपीलार्थी के विरूद्ध एक पक्षीय की गई।
परिवादी द्वारा प्रस्तुत की गई साक्ष्य के अवलोकन के उपरान्त विद्वान जिला मंच ने परिवादी का परिवाद स्वीकार करते हुए अपीलार्थी बीमा कम्पनी को निर्देशित किया कि वह परिवादी को निर्णय के ०२ माह के अन्दर ३४,७३०.५० रू० तथा ५००/- रू० वाद व्यय का भुगतान करें। निर्धारित अवधि में भुगतान न किए जाने पर परिवाद योजित किए जाने की तिथि से १० प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी भुगतान करना होगा।
इस निर्णय से क्षुब्ध होकर यह अपील योजित की गई।
हमने अपीलार्थी के विद्वान अधिवक्ता श्री अशोक मेहरोत्रा के तर्क सुने तथा अभिलेखों का अवलोकन किया। प्रत्यर्थी की ओर से विद्वान अधिवक्ता श्री अजय शुक्ला उपस्थित हो चुके हैं किन्तु तर्क प्रस्तुत करने हेतु प्रत्यर्थी की ओर से कोई उपस्थित नहीं हुआ।
अपीलार्थी के विद्वान अधिवक्ता द्वारा यह तर्क प्रस्तुत किया गया कि प्रश्नगत मामले में जिला मंच द्वारा समन अपीलार्थी बीमा कम्पनी के ब्रांच आफिस भेजा गया। ब्रांच आफिस से समन अधिवक्ता की नियुक्ति हेतु डिवीजनल आफिस भेजा गया। यद्यपि डिवीजनल आफिस द्वारा श्री ए0के0 पाण्डेय को पैरवी हेतु नियुक्त किया गया किन्तु डिवीजनल आफिस द्वारा भेजी गई नोटिस उन तक नहीं पहुँची, अत: जिला मंच में प्रतिवाद पत्र प्रस्तुत नहीं किया जा सका और परिवाद की सुनवाई एक पक्षीय कर ली गई। अपीलार्थी की ओर से यह तर्क भी प्रस्तुत की गई कि प्रत्यर्थी/परिवादी के बीमा दावे के निस्तारण हेतु सर्वेयर की नियुक्ति की गई। सर्वेयर द्वारा क्षतिपूर्ति का आंकलन ३४,७३०/- रू० किया गया। इस बीच प्रश्नगत वाहन की कथित दुर्घटना के समय चालक के ड्राइविंग लाइसेंस का सत्यापन श्री टी0 मल सर्वेयर द्वारा कराया गया। जांच के मध्य -३- यह तथ्य प्रकाश में आया कि कथित दुर्घटना के समय प्रश्नगत वाहन वैध लाइसेंसधारी चालक द्वारा नहीं चलाया जा रहा था। प्रश्नगत वाहन चालक के पास एल0एम0वी0 लाइसेंस था और उसमें भी टी0वी0 (पी0ई0) का पृष्ठांकन दिनांक २६-११-१९९८ को सम्बन्धित पंजीयन अधिकारी द्वारा किया गया। दुर्घटना की तिथि दिनांक २३-०७-१९९८ को उक्त लाइसेंस एल0एम0वी0 प्राईवेट के लिए वैध था। प्रश्नगत वाहन वाणिज्यिक उपयोग हेतु था। क्योंकि कथित दुर्घटना के समय वाहन चालक के पास एल0एम0वी0 प्राईवेट वाहन चलाने का ही लाइसेंस था, अत: वाणिज्यिक वाहन चलाने का लाइसेंस वाहन चालक के पास न होने के कारण कथित दुर्घटना के समय वैध लाइसेंसधारी चालक द्वारा वाहन न चलाए जाने के कारण बीमा पालिसी की शर्तों का उल्लंघन के कारण परिवादी का दावा स्वीकार नहीं किया गया। अपीलार्थी द्वारा सेवा में कोई त्रुटि नहीं की गई।
जहॉं तक प्रश्नगत परिवाद की सुनवाई एक पक्षीय किए जाने का प्रश्न है मात्र इस आधार पर कि प्रश्नगत परिवाद की सुनवाई अपीलार्थी के विरूद्ध एक पक्षीय की गई, प्रश्नगत निर्णय को त्रुटिपूर्ण नहीं माना जा सकता। महत्वपूर्ण प्रश्न यह है कि अपीलार्थी को सुनवाई का अवसर जिला मंच द्वारा प्रदान किया गया अथवा नहीं। प्रश्नगत निर्णय के अवलोकन से यह विदित होता है कि अपीलार्थी द्वारा तामील के बाबजूद प्रतिवाद पत्र प्रस्तुत नहीं किया गया।
अपील के आधारों में स्वयं अपीलार्थी द्वारा यह स्वीकार किया गया है कि जिला मंच द्वारा प्रश्नगत परिवाद के सन्दर्भ में समन अपीलार्थी द्वारा ब्रान्च आफिस को भेजा गया था। ब्रान्च आफिस द्वारा अधिवक्ता की नियुक्ति हेतु डिवीजनल आफिस को सूचना भेजी गई। डिवीजनल आफिस से श्री ए0के0 पाण्डेय को पैरवी हेतु नियुक्त किया गया किन्तु डिवीजनल आफिस द्वारा भेजी गयी सूचना उन्हे प्राप्त नहीं हो सकी। इस प्रकार स्वयं अपीलार्थी यह स्वीकार करते हैं कि विद्वान जिला मंच द्वारा प्रश्नगत परिवाद के सन्दर्भ में सूचना अपीलार्थी को प्रेषित की गई थी। ऐसी परिस्थिति में परिवाद की सुनवाई एक पक्षीय किया जाना त्रुटिपूर्ण नहीं माना जा सकता।-४-
अब महत्वपूर्ण प्रश्न यह है कि प्रश्नगत निर्णय विधिक रूप से त्रुटिपूर्ण है अथवा नहीं ?
जहॉं तक अपीलार्थी के इस तर्क का प्रश्न है कि कथित दुर्घटना के समय प्रश्नगत वाहन वैध लाइसेंसधारी द्वारा नहीं चलाया जा रहा था। अपीलार्थी द्वारा अपील मेमो के साथ श्री तारकेश्वर मल सर्वेयर द्वारा प्रश्नगत वाहन के चालक के ड्राइविंग लाइसेंस के सन्दर्भ में प्रस्तुत सर्वे आख्या की फोटोप्रति अपील मेमो के साथ संलग्नक-६ के रूप में दाखिल की गई है। इस अभिलेख के अवलोकन से यह विदित होता है कि सर्वेयर ने जांच के मध्य लाइसेंसधारी अथारिटी देवरिया से अभिलेखों की जांच के उपरान्त यह आख्या प्रेषित की कि वाहन चालक श्री नमो नारायण शुक्ला का चालक अनुज्ञप्ति सं0-१५७३९/डी0आर0ए0/९६ था। यह अनुज्ञप्ति एल0एम0वी0 प्राईवेट वाहन के सन्दर्भ में लाइसेंसिंग अथारिटी देवरिया द्वारा जारी किया गया था जिसमें दिनांक २६-११-१९९८ को टी0वी0 (पी0ई0) का पृष्ठांकन किया गया जिसकी वैधता दिनांक २६-११-१९९८ से २५-११-२००१ तक थी जबकि कथित दुर्घटना दिनांक २३-०७-१९९८ की बताई गई।
मोटर वाहन अधिनियम की धारा-२(२१) के अन्तर्गत लाइट मोटर व्हीकल को निम्नप्रकार से परिभाषित किया गया है :-
'' "light motor vehicle" means a transport vehicle or omnibus the gross vehicle weight of either of which or a motor car or tractor or road-roller the unladen weight of any of which, does not exceed 7,500 kilograms. '' इस प्रकार ७,५०० किलोग्राम भार से कम के वाहन लाइट मोटर व्हीकल की श्रेणी में माने जायेंगे।
अपीलार्थी ने अपील मेमो के साथ श्री अशोक कुमार सिंह सर्वेयर की आख्या प्रस्तुत की है जिसमें प्रश्नगत खाली वाहन का भार ७,२०० किलोग्राम अंकित है।
सिविल अपील सं0-५८२६ सन् २०११ मुकुन्द देवगन बनाम ओरियण्टल इंश्योरेंस कं0लि0 के मामले में मा0 उच्चतम न्यायालय की खण्ड पीठ ने इस सन्दर्भ में मा0 उच्चतम न्यायालय द्वारा दिए गये विभिन्न निर्णयों में अन्तर्विरोधी मत व्यक्त किए -५- जाने के कारण प्रकरण वृहद् पीठ को सन्दर्भित किये जाने हेतु मा0 मुख्य न्यायाधीश से अनुरोध किया। तद्नुसार वृहद् पीठ मा0 मुख्य न्यायाधीश द्वारा गठित की गयी। वृहद् पीठ द्वारा इस मामले में दिए गये निर्णय दिनांकित ०३-०७-२०१७ द्वारा यह निर्णीत किया गया है :
'Light motor vehicle' as defined in section 2(21) of the Act would include a transport vehicle as per the weight prescribed in section 2 (21) read with section 2 (15) and 2 (48). Such transport vehicles are not excluded from the definition of the light motor vehicle by virtue of amendment Act No. 54/1994.
A transport vehicle and omnibus, the gross vehicle weight of either of which does not exceed 7,500 kg would be a light motor vehicle and also motor car or tractor or a road roller, 'unladen weight' of which does not exceed 7,500 kg and holder of a driving licence to drive class of "light motor vehicle" as provided in secction 10(2)(d) is competent to drive a transport vehicle or omnibus, the gross vehicle weight of which does not exceed 7,500 kg or a motor car or tractor or road-roller, the "unladen weight" of which does not exceed 7,500 kg. That is to say, no separate endorsement on the licence is required to drive a transport vehicle. A licence issued under section 10 (2) (d) continues to be valid after Amendment Act 54/1994 and 28.3.2001 in the form.
The effect of the amendment made by virtue of Act No. 54/1994 w.e.f. 14.11.1994 while substituting clauses (e) to (h) of section 10 (2) which contained "medium goods vehicle" in section 10 (2) (e), medium passenger motor vehicle in section 10(2)(f), heavy goods vehicle in section 10(2)(h) with expression 'transport vehicle' as substituted in section 10(2)(e) related only to the aforesaid substituted classes only. It does not exclude transport vehicle, from the purview of section 10(s)(d) and section 2(41) of the Act i.e. light motor vehicle.
The effect of amendment of Form 4 by insertion of "transport vehicle" is related only to the categories which were substituted in the year 1994 and the procedure to obtain driving licence for transport vehicle of class of "light -६- motor vehicle" continues to be the same as it was and has not been changed and there is no requirement to obtain separate endorsement to drive transport vehicle, and if a driver is holding licence to drive motor vehicle, he can drive transport vehicle of such class without any endorsement to that effect.
The bench observed: " When a driver is authorized to drive a vehicle, he can drive it irrespective of the fact whether it is used for a private purpose or for purpose of hire or reward or for carrying the goods in the said vehicle. It is intended by the provision of the Act, and the Amendment Act 54/1994."
मा0 उच्चतम न्यायाल की वृहद् पीठ द्वारा दिए गये उपरोक्त निर्णय के आलोक में हमारे विचार से अपीलार्थी के विद्वान अधिवक्ता का यह तर्क स्वीकार किए जाने योग्य नहीं है कि कथित दुर्घटना के समय प्रश्नगत वाहन वैध लाइसेंधारी द्वारा नहीं चलाया जा रहा था। विद्वान जिला ने स्वयं अपीलार्थी के सर्वेयर द्वारा क्षति के किए गये आंकलन को स्वीकार करते हुए उसी धनराशि की अदायगी हेतु आदेशित किया है। अपील में बल नहीं है। तद्नुसार अपील निरस्त किए जाने योग्य है।
आदेश अपील निरस्त की जाती है। जिला मंच, कानपुर नगर द्वारा परिवाद संख्या-१०२/२००२ में पारित प्रश्नगत निर्णय एवं आदेश दिनांक २८-०८-२००३ की पुष्टि की जाती है। इस आयोग द्वारा पारित आदेश दिनांक २८-१२-२००७ के अनुपालन में यदि कोई धनराशि जिला मंच में जमा की गई हो तो उक्त धनराशि देय धनराशि में समायोजित की जाए।
इस अपील का व्यय-भार उभय पक्ष अपना-अपना स्वयं वहन करेंगे।
उभय पक्ष को इस निर्णय की प्रमाणित प्रति नियमानुसार उपलब्ध करायी जाय।
(उदय शंकर अवस्थी) पीठासीन सदस्य (गोवर्द्धन यादव) सदस्य प्रमोद कुमार वैय0सहा0ग्रेड-१, कोर्ट नं.-३.
[HON'BLE MR. Udai Shanker Awasthi] PRESIDING MEMBER [HON'BLE MR. Gobardhan Yadav] MEMBER