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Lok Sabha Debates

Resolution Regarding Renovation Of Buildings Located In The Vicinity Of Various ... on 28 July, 2017

Sixteenth Loksabha an> Title: Resolution regarding renovation of buildings located in the vicinity of various defence establishments (Discussion not concluded).

 

श्री गोपाल शेट्टी (मुम्बई उत्तर) : महोदय, मैं प्रस्ताव करता हूँ :

“इस तथ्य को ध्यान में रखते हुए कि-
(i) 1950 के बाद से, देश के प्रमुख शहरों जैसे मुंबई, दिल्ली, पुणे, बंगलौर     और चंडीगढ़ में स्थित विविध रक्षा स्थापनाओं में और उनके आस-पास    बड़ी संख्या में आवासीय भवनों का निर्माण हो चुका है, जो आज पूर्णतया    जीर्ण-शीर्ण अवस्था में हैं और उनके अविलंब पुनरूद्धार की आवश्यकता है;  
(ii) रक्षा मंत्रालय ने दिनांक 21 अक्तूबर, 2016 को सशस्त्र सेनाओं के प्रमुख     को जारी परिपत्र में रक्षा स्थापनाओं से एक निश्चित दूरी पर भवन निर्माण     के लिए“अनापत्ति प्रमाण-पत्र” (एनओसी) जारी करने के दिशा-निर्देशों में     संशोधन किया है; और  
(iii)उनकी रक्षा स्थापनाओं के आस-पास स्थित पुराने घरों और भवनों के     पुनरूद्धार पर भी प्रतिबंध लगाए जा रहे हैं।
 

  यह सभा उपरोक्त परिपत्र का सशस्त्र सेनाओं के अधिकारियों, विशेषकर नौसेना द्वारा अविलंब अनुपालन कराने के लिए सरकार से तत्काल कदम उठाने का आग्रह करती है ताकि रक्षा स्थापनाओं के आस-पास स्थित भवनों का समय पर पुनरूद्धार सुनिश्चित किया जा सके।”                     महोदय, आपका बहुत-बहुत धन्यवाद। एक बहुत ही महत्वपूर्ण विषय जो भवन निर्माण के संदर्भ में है, जिससे सिर्फ मुम्बई ही नहीं, बल्कि पूरे देश के देशवासी जिसकी वजह से हैरान-परेशान हैं। मिनिस्टर ऑफ डिफेंस, जो हमारी नेवी है, आर्मी है और नेवल फोर्स है, इनके एस्टैब्लिशमेंट के आजू-बाजू में, अगल-बगल में आने वाला जो भवन निर्माण का काम है, इसमें इनको बहुत दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। मैं आपको बताना चाहता हूँ कि वर्ष 2010 में मुम्बई शहर में आदर्श बिल्डिंग का घोटाला यूपीए सरकार के समय में सामने आया। यह घोटाला सामने आने के बाद यूपीए की सरकार के समय पर एम.ओ.डी., मिनिस्टर ऑफ डिफेंस ने वर्ष 2011 में एक सर्कुलर निकालकर, कंस्ट्रक्शन वर्क पर कुछ रिस्ट्रिक्शंस, कुछ बंधन लाने का काम किया।

          महोदय, मैं आदर्श के विषय में बहुत डिटेल में नहीं जाना चाहूँगा, क्योंकि वह आज का मेरा विषय नहीं है। वर्ष 2010 से वर्ष 2017, सात साल पूरे हो गए और मुझे पता नहीं कि इसका अंत कब आएगा, जो दोषी है, उनको दण्डित कब किया जाएगा? जो हमारे बेजवाबदार डिफेंस के अधिकारी हैं, हम डिफेंस एस्टैब्लिशमेंट का बहुत सम्मान करते हैं। मैं सबसे पहले इस बात को रखना चाहूँगा कि जो हमारे सिपाही हैं, सेना है, जो सरहद पर लड़ते हैं, जो 125 करोड़ देशवासियों की रक्षा करते हैं, उनका हम बहुत सम्मान कल भी करते थे, आज भी करते हैं और अपने जीवन के अंतिम क्षण तक उनका सम्मान करते रहेंगे। एयर कंडीशंड ऑफिस में बैठकर जो अधिकारी मनमाने ढंग से काम करते हैं, जो अपने देश के लोगों को हैरान-परेशान करने का काम करते हैं, उनको इस लोक सभा के माध्यम से उजागर करने का काम मैं और मेरे बाकी साथी इस रिजोल्यूशन के माध्यम से करने वाले हैं।       

          सभापति जी, यह बैक बे लैंड है, महाराष्ट्र की सरकार द्वारा इसका रीक्लेमेशन करके, भरणी करके वहाँ ज़मीन का निर्माण हुआ। एक बीएससी का डिपो वहाँ पर बना है और बाकी की ज़मीन पर आदर्श की बिल्डिंग खड़ी हुई है। 2010 से लेकर 2017 तक हमारे डिफैंस के लोगों ने यह ज़मीन स्टेट गवर्नमैंट की है या सैंट्रल गवर्नमैंट की है, इसका भी कोई खुलासा आज तक नहीं किया, मुझे पता नहीं कि कब होगा। लेकिन वह जब होना है, तब होगा। 2011 के सर्कुलर में एक रिस्ट्रिक्शन लाई गई कि डिफैंस लैंड के बगल के 500 मीटर तक की लैंड पर कोई भी नया काम-काज नहीं होगा। इसका असर क्या हुआ - इसका असर यह हुआ कि अगल बगल की जितनी भी ज़मीन थी, डैवलपर सामने आए, रीडैवलपमैंट के लिए एग्रीमैंट हुआ, बिल्डिंग्ज़ तोड़ी गईं, लोग शिफ्ट हो गए, मुम्बई महानगरपालिका ने बिल्डिंग का प्लान पास कर दिया और यह रिस्ट्रिक्शन आने के बाद एक-दो नहीं छः साल तक काम बंद रहा।

          सभापति जी, बहुत सारे लोग जो शिफ्ट हो गए, वे तो मर गए। पहले एक दो साल में बिल्डर्स ने लोगों को भाड़ा दिया, बाद में उन्होंने भी भाड़ा देना बंद कर दिया क्योंकि बिल्डर कितने दिन भाड़ा देगा? जो सीनियर सिटिज़न मेंरे ऑफिस में आकर प्रतिनिधियों के ऑफिस में जा जाकर रोते थे, वे हमको कहते थे, अभी पैंशन की बात यहाँ पर हुई। वे कहते थे कि हमें 10-12 हजार रुपये पैंशन आती है लेकिन हमें 20 हजार रुपये का भाड़ा देना पड़ता है। They have to spend Rs. 6,000 or Rs. 8,000 or Rs. 10,000 or even more from their own pockets to pay rent. वे अपनी बिल्डिंग में रहते थे। डैवलपमैंट का एग्रीमैंट हुआ, बिल्डिंग तोड़ी गई, मुम्बई महानगरपालिका ने परमीशन दी, मिनिस्ट्री ऑफ डिफैंस की कोई रिस्ट्रिक्शन नहीं थी। 1903 का जो हमारा एक्ट है, ब्रिटिश लोगों के ज़माने में बना हुआ था। उस एक्ट के हिसाब से काम चलता था लेकिन सर्कुलर आने के बाद काम बंद हो गया। 2014 में जब हमारी सरकार आई तो मेरे दो ही मकसद थे - एक एमओडी का सर्कुलर विदड्रा करना और आपको सुनकर आश्चर्य होगा कि हमारे मुम्बई शहर में 3500 लोग हर साल रेल से गिरकर कटकर मर जाते हैं और उतने ही लोग इंजर्ड होते हैं। इन दोनों मकसद को लेकर ही मैं इस लोक सभा में आया था। एक मकसद पर हमारे सुरेश प्रभु जी बहुत तेजी से काम कर रहे हैं, बहुत तेजी से काम हो रहा है। मैं उस विषय पर जाना नहीं चाहूँगा लेकिन मैं उनको धन्यवाद देना चाहूँगा। दूसरा विषय है एमओडी का रिस्ट्रिक्शन, इसके बारे में अरुण जेटली जी ने एक ही मिनट में कहा कि It is a fake, illegal and bogus circular,  इसको हम विदड्रा करेंगे, लेकिन कुछ दिनों के बाद जब अरुण जेटली जी का मंत्रिपद बदल गया, पर्रिकर जी आए, और स्वाभाविक है कि कोई भी जब नया मंत्री आता है तो उसको सैटल होने के लिए समय देना पड़ता है, हमने उनको सैटल होने के लिए थोड़ा समय दिया और लगातार मैं, किरीट सोमैया जी और मुम्बई के हमारे बाकी सारे एम.पीज़ उनके पीछे पड़े और एक सर्कुलर उन्होंने निकाला। उसको भी इन्होंने नहीं माना, उसमें भी करैक्शन करनी पड़ी और अंत में तीसरा सर्कुलर जो निकला, वह तीसरा सर्कुलर 21 अक्तूबर, 2016 को निकला। इस सर्कुलर में आर्मी, नेवी और एयरफोर्स तीनों का उल्लेख किया हुआ है। इतना ही नहीं, उसके साथ जो एनैक्सर पर्रिकर जी ने इतनी मेहनत करके निकाला, उस एनैक्सर ए में जो 193 स्टेशन पूरे देश भर में हैं, उनको परमीशन देनी चाहिए, यह उस सर्कुलर में लिखा हुआ है। एनैक्सर ए में जो 193 स्टेशंस हैं, उनको सिर्फ 10 मीटर की रिस्ट्रिक्शन डाली गई। दूसरा एक एनैक्सर बी है जिसमें 149 स्टेशन आते हैं। उसमें 100 मीटर की रिस्ट्रिक्शन डाली गई।

          सभापति जी, आपको आश्चर्य होगा कि पर्रिकर जी ने कितनी मेहनत करके यह सर्कुलर निकाला। यह जो 10 मीटर की रिस्ट्रिक्शन एनैक्सर ए में 193 स्टेशंस  के लिए है, उसके लिए भी यह लिखा है कि ये लोग भी आकर कंसर्न्ड ऑफिसर के पास परमीशन मांग सकते हैं। अगर वह नियम में बैठता है तो इनको भी परमीशन मिलेगी, लेकिन upto 10 metres, they need not require to visit any MoD officers to take NOC.  They can approach directly to the local municipal corporation and corporation will give them permission.  यह इतना क्लियर कट होने के बाद में एयरफोर्स का और आर्मी का क्लियर हो गया। I am thankful to Parrikar ji and the Ministry of Defence. महोदय, लेकिन, नेवल के लोगों ने इसमें एक टेक्नीकल प्वायंट निकाल दिया। वे कहते हैं कि यह सर्कुलर हम पर लागू नहीं है। I am surprised. मुझे आश्चर्य होता है। यह अनेक्सर में लिखा है। अनेक्सर में यह सब लिखा है कि किन-किन स्टेशंस को परमिशन देना है। वर्ष 1903 का जो डिफेंस एक्ट है, यह पहले से ही बहुत क्लियर है। It is very much specified there. इसमें नोटिफाइड एरिया है, अन-नोटिफाइड एरिया है। नोटिफाइड और अन-नोटिफाइड एरिया के हिसाब से कॉरपोरेशन के पास एक सूची है। उसके हिसाब से महानगर पालिका के लोग परमिशन देते हैं। यह सब ठीक-ठाक चल रहा था। इसमें कोई प्रॉब्लम नहीं थी। आदर्श बिल्डिंग की प्रॉब्लम आने के बाद, वर्ष 2011 का सर्कुलर निकलने के बाद ये सारी प्रॉब्लम्स स्टार्ट हो गयीं।

          सभापति जी, आपको आश्चर्य लगेगा कि इसमें सबसे बड़ा प्रॉब्लम यह है कि हमारे देश के लोग डिफेंस के अधिकारियों का बहुत सम्मान करते हैं। यह करना भी चाहिए, हम करते रहेंगे। लेकिन, सम्मान कब तक करना, कितना करना, मुझे लगता है कि आने वाले दिनों में पार्लियामेंट में यह तय करने की आवश्यकता है। आज हम जैसे मेम्बर ऑफ पार्लियामेंट जब वहां पर जाते हैं तो हमें भी परमिशन लेनी पड़ती है। यह अच्छी बात है, क्योंकि यू.पी.ए. सरकार के दिनों में हम सुनते थे कि वहां पर कोई भी आ सकता था, कोई भी जा सकता था। कॉन्ट्रैक्टर, उनके दलाल, उनके कमिशन एजेंट, ये सारे लोग डिफेंस के अधिकारियों के यहां जाते थे और वहां पर एक बहुत बड़ा बाज़ार जैसा लगा हुआ होता था। लेकिन, एन.डी.ए. की सरकार आने के बाद, मोदी जी की सरकार आने के बाद वहां बहुत सारे रिस्ट्रिक्शंस आए। मैं मानता हूं कि यह बहुत अच्छा है। हम लोगों को थोड़ी-सी परेशानी होती है, लेकिन देशहित में यह बहुत अच्छा है। वहां पर जो मिनिस्टर काम करते हैं, भामरे जी यहां बैठे हैं, तो इनको भी बहुत सुविधा होती है।

          मैं एक बार वर्ष 1998 में आया था। उन दिनों में अटल जी की सरकार थी। हमारे यहां कांदोली ईस्ट-वेस्ट क्रॉसिंग का एक ब्रिज बना था। इस ब्रिज को बनने से रोका गया। सौभाग्य से, उन दिनों मैं मेयर-इन-काउंसिल में डिप्टी मेयर था। मैं, हमारे वहां के मेयर नन्दू साटन जी, और उन दिनों के कमिश्नर गोखले जी, हम तीनों यहां पर आए। हमारे राम नाइक जी पेट्रोलियम मिनिस्टर थे और जॉर्ज फर्नाण्डीस जी डिफेंस मिनिस्टर थे। हमने यहां पर आकर चर्चा की। चर्चा करने के बाद जो उस समय अफसर थे, उनकी अलग स्टाइल थी। वे तो मिनिस्टर के सामने भी बैठते नहीं हैं और कहते हैं कि यह नहीं होगा, वह नहीं होगा। उससे आगे ये बात ही नहीं करते हैं।

          सभापति जी, उस ब्रिज का काम दस सालों तक बंद रहा। उसके बाद इन्होंने परमिशन दी। वह परमिशन इस प्रकार से दी कि वह जो फुटओवर या फ्लाईओवर ब्रिज है, उसके ऊपर एक आर.सी.सी. की दीवार बनाइए, ताकि वहां से जो गाड़ियां जाती हैं, तो गाड़ी वाले को डिफेंस लैंड के अन्दर क्या हो रहा है, यह दिखना नहीं चाहिए। उन दिनों, वर्ष 1998 में कॉरपोरेशन ने 10.50 करोड़ रुपये खर्च करके आर.सी.सी. की एक दीवार डाल दी। We made a RCC wall on that flyover. उसके तीन-चार सालों के बाद उस फ्लाईओवर ब्रिज के अंदर ‘कल्पतरू’ नाम से 32-फ्लोर्स की एक बिल्डिंग आ गयी। अब उस बिल्डिंग के अंदर से तो सब कुछ दिखता है कि डिफेंस लैंड के अंदर क्या हो रहा है। अब इस कल्पतरू बिल्डिंग को हमारे लोगों ने परमिशन दे दी। उसमें मुझे कोई प्रॉब्लम नहीं है। That was within the rule.

          महोदय, मैं एक ही विषय पर लडूंगा। आज बिल्डिंग बनाने की परमिशन मिलनी चाहिए, जब मैं इसके लिए आवाज़ यहां पर उठाता हूं तो कल्पतरू को किस प्रकार से परमिशन दिया, इसके बारे में मैं ऑब्जेक्शन नहीं उठाऊंगा। That was within the law.  It was not within the law. The wall which was asked to be constructed by spending crores of rupees was done at the behest of that officer and it was not as per the DC rule or any rule framed by the Corporation, State Government or the Central Government. उस अफसर को लगा, कॉरपोरेशन को भी लगा कि चलो, जान छुड़ा लो, दस-बारह करोड़ रुपये खर्च करके अगर यह प्रॉब्लम सॉल्व होता है तो कर लो।

          सभापति जी, ये अधिकारी इस प्रकार से काम करते हैं। मैं आगे और बताऊंगा तो आपको यह जानकर आश्चर्य होगा। इन दिनों यह परमिशन नेवल के लोग नहीं देते हैं। मैंने पिछले पार्लियामेंट सेशन में ज़ीरो आवर में जब यह मुद्दा उठाया तो उसके बाद कुछ परमिशंस देना इन्होंने चालू कर दिया। आज की तारीख में अगर इन्हें लगता है कि यह देना चाहिए तो ये देते हैं और अगर इन्हें लगता है कि यह नहीं देना चाहिए तो ये नहीं देते हैं।

श्री भर्तृहरि महताब (कटक) : महोदय, पहले एक मुख्यमंत्री रहा करते थे। उन्होंने ‘लॉ एण्ड ऑर्डर’ के बारे में एक अच्छी बात कही है। शायद हमारे मित्र को यह भी मालूम होगा कि लॉ क़िताब में होती है और ऑर्डर फाइल में रहती है।

श्री गोपाल शेट्टी :  सर, थैंक्यू फॉर द गाइडेंस। अधिकारियों को लगता है कि इनको परमिशन देना है, तो देना है तथा उनको नहीं देना है, तो नहीं देना है। इतनी बड़ी जो हमारी पार्लियामेंट है और आज जिस प्रकार से डिफेंस के अधिकारी मनमाने तरीके से काम करते हैं, इनको कोई पूछने वाला नहीं है। यह हमारा सबसे बड़ा प्रॉब्लम है। यह हमारी वेदना है, हमारा दर्द है।

          सभापति महोदय, जैसा कि मैंने बताया कि हम लोग जैसे मेम्बर ऑफ पार्लियामेंट को भी इनके ऑफिस में जाने के लिए कितनी परेशानी झेलनी पड़ती है, तो सामान्य व्यक्ति इनके ऑफिस के बगल से भी गुजर नहीं सकता है। इस प्रकार की स्थिति है। अब अगर कोई कोर्ट में जाता है, आदर्श के मामले में और बाकी जो वर्ष 2011 से लेकर वर्ष 2016 तक काम बंद था, तो बहुत सारे लोग कोर्ट में भी गए। अब कोर्ट का भी एक माइंड होता है। जैसा हम लोग डिफेंस के लोगों का सम्मान करते हैं, उसी प्रकार कोर्ट भी एकदम डायरेक्ट ऑर्डर नहीं देती है। कोर्ट द्वारा बहुत बार कहने तथा करेक्शन करने के बाद इन्होंने एक परमिशन दे दिया।

         

          अब, मैं आपको बताता हूं कि 9 मार्च, 2017 को उन्होंने एक परमिशन दे दिया और मैं उसको रिकॉर्ड पर लाना चाहता हूं।

“The Executive Engineer,   Building Proposal II,   Municipal Corporation of Greater Mumbai,   Near Raj Legacy Bldg.,   Paper Mill Compound,   L.B.S. Marg, Vikhroli (W),   Mumbai – 400083.

 

NOC-03/2017-NOC for proposed residential building on plot  bearing CTS NOS. 596, 596/1 to 6, 597, 597/1 to 7, 598, 598/1 to 3, 599A, 599A/1 to A/81, 601, 602, 602/1 to 9, 603, 604, 605, 605/1 to 17, 606, 606/1 to 83, 607/1 to 31, 607A & 607D of village Kanjur at LBS Marg, Kanjur(W), Mumbai.

 

1. Refer to this Headquarters letter WK/3031/NOC17 dated 09 Dec 16.

         

2. The restrictions around naval stations/area at Mumbai have been reviewed and “No Objection Certificate” is hereby issued for the proposed residential building on plot bearing CTS No. CTS 596, 596/1 to 6, 597, 597/1 to 7, 598, 598/1 to 3, 599A, 599A/1 to a/81, 601, 602, 602/1 to 9, 603, 604, 605, 605/1 to 17, 606, 606/1 to 83, 607/1 to 31, 607A & 607D of Village Kanjur at LBS Marg Kanjur Mumbai.

         

3. It may be noted that the proposed residential building on plot bearing CTS No. CTS 596, 596/1 to 6, 597, 597/1 to 7, 598, 598/1 to 3, 599A, 599A/1 to A/81, 601, 602, 602/1 to 9, 603, 604, 605, 605/1 to 17, 606, 606/1 to 83, 607/1 to 31, 607A and 607D of Village Kanjur at LBS Marg Kanjur Mumbai for which No Objection Certificate is issued, will be undertaken at your own risk, subject to the condition that the Department/Indian Navy/Ministry of Defence/Government of India is totally indemnified against any claim, whatsoever, under all circumstances. ”        यह एक परमिशन दे दिया गया। अब कुछ लोगों को मालूम पड़ा तथा जब उनको परमिशन नहीं देते थे, तो एक व्यक्ति ने कम्पलेंट कर दी कि आपने परमिशन कैसे दे दी? You will be surprised अब जो उन्होंने उसका उत्तर दिया है, यह भी जरा पढ़ने जैसा है।

“Issue – the project is in Ghatkopar suburb which is in the list of Part A of Annexure of MOD circular dated 21st October, 2016 and therefore, eligible for NOC from the Western Naval Command Mumbai.”   “Clarification – IHQ MOD(N)/ACNS(P&P) vide Fax WK/1000/ NOC/WL Dated 17th November, 2016 has clarified that the MOD letter dated 21st October, 2016 is applicable to Army only and hence not applicable to Navy. Therefore, the complainants claim is invalid.”       वे एक बार कहते हैं कि वर्ष 2016 का नेवी को अप्लिकेब्ल नहीं है और अब उसने आगे पूछा कि “And if suppose we accept the stand of the Western Naval Command that MOD circular dated 21st October, 2016 is not applicable to them, in this circumstance, we are supposed to be eligible for NOC as our plots fall at a distance of 168 metres which is in between the two plots situated at a 72 metres and 200 metres for which NOC was granted by the Western Naval Command.  More importantly, recently, NOC was granted by the Western Naval Command for the project situated at a distance of 36 metres at Kanjur Marg, Naval Base, LBS Road, Mumbai.”   36 मीटर में भी दे दिया। अब इसका उत्तर वे इस प्रकार से देते हैं।

 “The reason for denial of NOC was intimated to the headquarters, PWD vide letter dated 9th May, 17. Copy annexed for ready reference. All cases of NOC are processed strictly in accordance with MoD’s circular, dated 18th May, 2011, 18th March, 2015 and 17th November, 2015.”   अब इसका रेफरेंस देते हैं। Everything is on record. मैं तो कहूंगा कि आने वाले दिनों में जो बिल्डिंग के काम बंद हैं, उनको परमीशन तो मिलनी ही चाहिए। 2016 का जो सर्कुलर पर्रिकर साहब ने निकाला, वह बहुत ही क्लियर है। यह सर्कुलर निकालने के लिए महाराष्ट्र के हमारे मुख्यमंत्री देवेन्द्र फड़नवीस जी ने बहुत प्रयास किया। उन्होंने ज्वाइंट मीटिंग ली। हमारे वहां के एडवोकेट जनरल का ओपिनियन उन्होंने भेजा। यह सारा प्रोसेस होने के बाद 2016 का जो सर्कुलर निकला है, वह एकदम क्लियर कट है, जो तीनों हमारी आर्मी हैं, फोर्स हैं, उनके ऊपर एप्लीकेबल होता है। इसके बावजूद भी नेवी के लोग कहते हैं कि यह हमारे ऊपर एप्लिकेबल नहीं होता है। इसके बाद भी उनको लगता है कि इनको देना है, तो ये देते हैं, यह सरासर गलत है। इसलिए मेरी दो माँगें रहेंगी और मैं मानता हूँ कि बाकी सभी सदस्य इस विषय पर डिस्कशन करेंगे, वे इन दोनों माँगों को ही करने वाले हैं। एक तो लोगों को परमीशन मिलनी चाहिए और जो अधिकारी यह मनमानी करते हैं, उनके ऊपर कार्रवाई होनी चाहिए। उनके ऊपर एक्शन होना ही चाहिए। मिलिट्री के ऑफिसर्स के ऊपर एक्शन सेन्ट्रल गवर्नमेंट डायरेक्ट ले सकती है या फिर उनका जो भी प्रोविजन है, जो भी व्यवस्था है, उनके ऊपर एक्शन तो लेना ही पड़ेगा।

          महोदय, आजादी के पहले भी इस प्रकार की परिस्थिति नहीं थी। ब्रिटिश गवर्नमेंट के लोगों ने 1903 का एक्ट बनाकर किसको परमीशन मिल सकती है, किसको परमीशन नहीं मिल सकती है, नोटिफाइड एरिया कौन सा है, ये सारे प्रोविजन थे और उसके हिसाब से बिल्डिंग बनी है। आपने परसों देखा होगा कि घाटकोपर में एक बिल्डिंग गिरी, जिसमें 10 से ज्यादा लोग मर गये और बहुत सारे लोग घायल हो गये। अब 1947 के पहले या 1947 के बाद जो बिल्डिंग्स बनी हैं, उनको बने हुए आज 50, 60 से 70 साल हो गए हैं। अब बहुत सारी बिल्डिंग्स री-डेवलपमेंट के लिए जा रही हैं। जब ये सारी बिल्डिंग्स री-डेवलपमेंट के लिए जा रही हैं तो इनको परमीशन देने के लिए हमारे पास एक सिस्टम है।

          मैं आपके माध्यम से, इस सभागृह के माध्यम से मुंबई महानगर पालिका के जो कमिश्नर्स होते हैं, उनके बारे में अपनी भावना व्यक्त करना चाहूंगा, because Bombay Municipal Corporation is an autonomous body. They have their own Act. स्टेट गवर्नमेंट ने इनको एक्ट बनाकर काम करने के लिए दिया है। एक्ट स्टेट गवर्नमेंट का है, सेंट्रल गवर्नमेंट का 1903 का एक्ट है, उसके बावजूद भी 6 साल काम बंद रहा। हमारे म्युनिसिपल कोरपोरेशन के जो कमिश्नर होते हैं, वे आईएएस आफिसर्स होते हैं। इन आईएएस आफिसर्स के पास जब हम जाते हैं, तो बोलते हैं कि मिलिट्री वालों के साथ कौन झंझट करेगा? अरे बाबा, मिलेट्री वालों के साथ में कौन झंझट करेगा, तो आप आईएएस आफिसर क्यों बने, आप कमिश्नर क्यों बनते हैं? हम, इलेक्टेड लोग वहां बैठते, तो उसका कोई रास्ता निकालते। You are a Commissioner. What is the meaning of Commissioner? कमिश्नर को अपनी पॉवर का उपयोग करना चाहिए। मैं मानता हूं कि अजय मेहता जी हमारे अच्छे कमिश्नर हैं। मैंने बहुत सारे कमिश्नरों को देखा है, लेकिन अच्छा कमिश्नर किस काम का? लोगों की अगर प्रॉब्लम साल्व नहीं होती, तो कितना भी अच्छा कमिश्नर होगा, वह हमारे किस काम का है। 2016 का सर्कुलर बहुत ही क्लियर कट होने के बाद भी, पर्रिकर जी ने कहा कि आपको परमीशन लेने की कोई आवश्यकता ही नहीं है। उसके बावजूद मुझे समझ में नहीं आता कि मुंबई महानगर पालिका के कमिश्नर अजय मेहता जी क्यों नैवेल से फिर परमीशन के लिए पूछते हैं और वे न कहते हैं तो काम बंद कर देते हैं? कमिश्नर कहते हैं कि मैं तो कुछ नहीं कर पाऊंगा।  You are a responsible person. मुंबई शहर का अगर डेवलपमेंट का काम होगा और कोरपोरेशन की तिजोरी में पैसा कम आएगा तो डेवलपमेंट का काम नहीं हो पाएगा। थोड़ी देर के लिए डेवलपमेंट के काम को बाजू में रखिए, पैसा कम आता है, उसको भी बाजू में रखिए। जब एक प्लानिंग अथारिटी है, तो प्लानिंग अथारिटी का काम है कि लोगों को डेवलपमेंट परमीशन मिलनी चाहिए, यह देखने का काम करना चाहिए।

          मैं सभागृह के माध्यम से, लोक सभा के माध्यम से पूछना चाहूंगा कि हमारे मुंबई महानगर पालिका के कमिश्नर ने परमीशन लेने के लिए एक्स्ट्रा-आर्डिनरी प्रयास क्या किया, क्या उनका यह काम नहीं है? क्या वहां के नगर सेवक प्रयास करेंगे? जैसे मैं आज यहां पर भाषण करता हूं, वैसा नगर सेवक कारपोरेशन में भाषण करेंगे, एमएलएज जो होते हैं, वे विधान सभा में भाषण करेंगे, हम जो एमपीज हैं, हम यहां भाषण करेंगे, लेकिन कमिश्नर का क्या काम है? हमारे मुंबई महानगर पालिका के कमिश्नर भी, मैं ऐसा मानता हूं कि इसमें फेल हुए हैं। वे अपना काम-काज ढंग से नहीं करते हैं। He should fulfil his responsibility and do his work. मुंबई महानगरपालिका का कमीश्नर यहां फेल हुआ है। आने वाले दिनों में बिल्डिंग जर्जर होते जा रहे हैं, क्या लोग इन आफिसरों के लिए मरने के लिए पैदा हुए हैं, ऑफिसरों के मनमानी काम से हैरान और परेशान होने के लिए पैदा हुए हैं। इसका जवाब कौन देगा, बिल्डिंग खराब होती जा रही है, अपने पैसे से नई बिल्डिंग नहीं बना सकते। गवर्नमेंट का एक रुपये खर्च नहीं होता, डेवलपर्स आते हैं, टेंडर करके एग्रीमेंट करते हैं। सरकार ने डीसी रूल बनाया, नए-नए कायदे बनाए ताकि नई बिल्डिंग बन सके। आर्मी, डिफेंस और नेवी के लोग परमिशन नहीं देते इसलिए बिल्डिंग नहीं बन पाता, बिल्डिंग गिरती है और लोग मरते हैं। Who is answerable to all these questions? इसका जवाब कौन देगा?  वे लोग ऑफिस में बैठे हैं, मंत्री जी साढ़े तीन बजे से बैठे हैं, पांच बजे मेरा नंबर आया, मुझे पता नहीं कि कितना समय मुझे बोलने के लिए मिलेगा। वे यहां सब सुनते हैं, जो मनमानी काम करने वाले हैं वहां बैठे हैं, उन तक मेरी आवाज कैसे जाएगी इसका मुझे पता नहीं।

          193 और 149 स्टेशन के बारे में परिकर जी ने परमिशन निकाला हुआ है, मैं भाम्बरे जी से निवेदन करूंगा, वे महाराष्ट्र के मंत्री हैं, बहुत ही अच्छे मंत्री हैं, बहुत ही कम समय में उन्होंने पिक अप किया है। हम जब उनके पास जाते हैं तो वे विषय को समझते हैं लेकिन उनके पास सीमित अधिकार हैं और वे उसके हिसाब से काम करते हैं। मैं आपसे नया कुछ नहीं मांगता हूं, He was very much busy because of GST. हम लोगों ने भी उनको परेशान नहीं किया, इतना बड़ा रिफार्म इम्पलिमेंट करना था, देश के लोगों ने इसे स्वीकार कर लिया, अब धीरे-धीरे समय निकालेंगे, जो बाकी का काम है, नोटिफाइड एरिया में और करैक्शन करके और लोगों को परमिशन देने का है वह सेंकड फेज में होगा। उसमें मुझे कोई प्रोबल्म नहीं है। जो बिल्डिंग ओपन लैंड है उसमें परमिशन नहीं मिलेगा उसमें भी हमें कोई प्रोबल्म नहीं है, जमीनें खाली पड़ी हैं उन्हें खाली पड़े रहने दो।

          लेकिन जो बिल्डिंग टूटी हुई है और जर्जर है उनको हमें समय पर परमिशन देना पड़ेगा। मेरी मांग है कि पर्रिकर जी ने सर्कुलर निकाल कर परमिशन देने की व्यवस्था की है उसके बारे में मंत्री जी तुरंत निर्णय लें। लोक सभा सेशन समाप्त होने के पहले वे अगर इसे  कर देते हैं तो बहुत ही अच्छी बात होगी और हम उसका स्वागत करेंगे और जो सेंकड फेज का काम है वह भले ही बाद में करें उसमें समय भी लगेगा तो कोई प्रोबल्म नहीं है। वर्ष 2016 के सर्कुलर में जो प्रोविजन है, पर्रिकर जी ने इतनी मेहनत करके गए हैं उसके हिसाब से तुरंत होना चाहिए। कुछ लोगों के साथ एक ज्वाइंट मीटिंग करा दें  तो हम भी आ जाएंगे, डिफेंस सेक्रेटरी के साथ बातचीत करेंगे, प्रदीप जोशी जी, रियर एडमिरल चीफ स्टॉफ ऑफिसर परमिशन देते हैं और रोकते हैं, ले. कमांडर शिव प्रताप जी, ऐसे लोगों को बुलाइए तो हम उनके साथ भी डिस्कशन करेंगे। वे अगर बहुत सुपर नॉलेज के हैं, हम अगर गलती करते हैं और हमारी समझ में प्रोबल्म है तो हम उनका मार्गदर्शन भी स्वीकार करेंगे, उसमें हमको कोई प्रोबल्म नहीं है। उनको कितना समझ में आता है इसे जानने का हमें अधिकार है, हमको लोगों को फेस करना पड़ता है। हम सरकार या अधिकारियों के पास से नई चीज नहीं मांग रहे हैं। हम पर जो रिस्ट्रीक्शन डाला गया है, पर्रिकर जी के पास जाता था, उत्तर प्रदेश और देश के बाकी हिस्सों से लोग आते थे, Even they are not getting repair permission. देश आगे बढ़ रहा है, लोग पैसे कमा रहे हैं, नई-नई टेक्नोलॉजी आ रही है, ऐसे समय में इन अधिकारियों की मनमानी की वजह से अगर कोई अपना घर रिपेयर न कर सके, कोई नया घर न बना सके, उसकी वजह से परिस्थिति क्या होती है? हम सब इलेक्टेड रिप्रेजेन्टेटिव हैं हमको मालूम है, लोगों को अच्छा करने के लिए नहीं मिलता है तो पैसा कमाते हैं उससे शराब पीते हैं, जुआ खेलते हैं, लोगों का लाइफ खत्म हो जाता है। हम लोगों को नई दुनिया की ओर ले जाने का उपदेश देते हैं, नई-नई बातें करते हैं। एजुकेशन की बात करते हैं, आप पढ़ाई करके इंजीनियर बनो, लेकिन पैसा कमाकर करना  क्या है, वह घर तो रिपेयर नहीं कर सकता है? किसी भी व्यक्ति का स्टेटस पता उसके घर से चलता है। वह अपना घर ही नहीं बना पाता है, इस प्रकार की स्थिति है।

 

          सभापति महोदय, आपको आश्चर्य होगा, मुंबई शहर के  कमीशनर हैं, मैं 15 साल कॉरपोरेशन में काम करके आया हूं, बहुत सारे कमीशनरों को देखा हूं।  हम लोगों की जमीन ले लेते हैं, एक्वायर कर लेते हैं, कौड़ी के मोल में लेते हैं, लेकिन डिफेंस लैंड के डैवलपमेंट प्लान में जो रोड है, उसे बनाने की जगह मुम्बई महानगर पालिका के कमिश्नर नहीं लेते हैं। एमआरटीपी एक्ट, डैवलपमेंट कंट्रोल रूल, स्टेट लॉ होने के बाद भी डिफेंस से रोड की जगह नहीं लेते हैं इसलिए ट्रैफिक की प्राब्लम होती है। मेरे संसदीय क्षेत्र में मलाड में सबवे क्रास करके डिफेंस एस्टाबलिशमेंट के पास रोड बॉटलनेक हो जाता है। डीपी रोड की जगह मांगने के बाद भी नहीं देते हैं और कॉर्पोरेशन के कमिश्नर को जितनी फोर्स से मांगनी चाहिए मांगते नहीं हैं। 20, 40, 50 साल से उसी नैरो रोड से लोग आते हैं, जाते हैं। डॉ. राम बरोट काउंसलर हैं, 25 साल से जीत रहे हैं, इसके पीछे पड़े हैं और अभी भी लगे हुए हैं। मैंने कहा कि अब अपनी सरकार आई है, महाराष्ट्र में और केंद्र में, इसे कैसे भी करके करेंगे।

          महोदय, मैं एक बार अहमदाबाद गया था। वहां डिफेंस एस्टाबलिशमेंट आफिस के बाहर का गैटअप इतना अच्छा बनाया गया है कि उसे देखते ही गर्व होता है कि रास्ते में खड़े होकर सलाम करें, सैल्यूट करें। वहां इतना अच्छा लुक दिया है, लेकिन जब मैं अपने निर्वाचन क्षेत्र मलाड में देखता हूं कि रोड बॉटलनैक है और उस पर भी टैम्पल बनाया है। देश में बाकी सब लोग टैम्पल का सहारा लेकर रोड ब्लॉक करने का काम करते हैं, लेकिन यहां डिफेंस के अफसर टैम्पल का सहारा ले रहे हैं। इसके अंदर 100 एकड़ लैंड है, यहां बच्चों के पढ़ने के लिए एक क्लासरूम बनाया है। अंदर इतनी जगह पड़ी है और डीपी रोड पर क्लासरूम बना दिया, जगह नहीं दे रहे हैं। अगर यह जगह कार्पोरेशन को देते तो रोड चौड़ी हो जाती और डिफेंस एस्टाबलिश के गेट पर गैटअप आ जाता। यहां पर आते-जाते हुए लोगों को लगता कि क्या ये रक्षा करने वाले लोग हैं। मैं उनके बारे में जो सोचता हूं और वहां से जाने वाले लोग भी बॉटलनैक रोड के बारे में वही सोचते होंगे कि आर्मी, नेवल, एयर फोर्स के लोग रोड बड़ा करने के लिए जगह नहीं दे रहे हैं। कैसे काम चलेगा? मैं मानता हूं कि लोकसभा सबसे बड़ा मंदिर है। यह सुप्रीम कोर्ट से भी बड़ा मंदिर है, ऐसा कम से कम मैं मानता हूं। सुप्रीम कोर्ट के लिए जो भी मार्गदर्शन होता है, इसी मंदिर से होता है। अगर लोकसभा में भी बात करने के बाद इस तरह के अधिकारियों को एज़ पर रूल काम करने के लिए बाध्य नहीं करेंगे तो लोग कहां जाएंगे?

          महोदय, व्यावसायिक लोग हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट जाने से डरते हैं कि अगर हाई कोर्ट ने न कर दी तो सुप्रीम कोर्ट जाना पड़ेगा और अगर सुप्रीम कोर्ट ने न कर दी तो कहां जाएंगे। इस सुप्रीम कोर्ट में तो मेरे जैसा इलैक्टिड आदमी ही आ सकता है, वे नहीं आ सकते हैं। कभी-कभी सुप्रीम कोर्ट में जाने से व्यावसायिक लोग वंचित हो जाते हैं। महताब जी यहां बैठे हैं, आपको आश्चर्य होगा कि 2016 में मिनिस्टर आफ डिफेंस के सर्कुलर निकालने के बाद आर्मी के कुछ अफसर कोर्ट में गए, इसके विरोध में कोर्ट में गए। मैं सदन के माध्यम से जानना चाहता हूं कि उनको यह पावर किसने दी? एक बार मिनिस्टर आफ डिफेंस, म्युनिसिपल कमिश्नर जब कोई आदेश निकालता है तो सब अधिकारियों पर एप्लीकेबल होता है। डिफेंस सैक्रेट्री जब साइन करके कोई आदेश निकालते हैं तो सारे डिपार्टमेंट के लोगों पर लागू होता है, उनके लिए यह आदेश होता है। अगर उसके खिलाफ कोई कोर्ट में जाता है, मैं सदन के माध्यम से पूछना चाहता हूं कि डिफेंस सैक्रेट्री तब क्या करते हैं? अपने सुपीरियर के सर्कुलर के आदेश के विरोध में उनको कोर्ट में जाने की परमिशन किसने दी? वर्ष 1093 एक्ट में अमेंडमेंट अभी तक नहीं हुआ, इतने साल हो गए, 114 साल हो गए।  114 साल में एक भी अमेंडमेंट आप लोग नहीं लाए कि हमें अगल-बगल की जमीन चाहिए। आप ले लीजए, सारी जमीन ले लीजिए।

18.00 hours  आप 500 मीटर क्यों लेते हैं?  आप एक हजार मीटर ले लीजिए या जितना चाहिए, उतना ले लीजिए। आप लोगों को पैसे दे दें, तो वे वहां से दूर रहने के लिए चले जायेंगे। लेकिन आप एक्वायर भी नहीं करते, एक्ट में अमेंड भी नहीं करते। आप उन्हें पैसे भी नहीं देते, परमिशन भी नहीं देते, तो यह कैसे चलेगा? क्या इन्हें कोई नहीं पूछेगा?  मैं मानता हूं कि मेरे मतदान क्षेत्र के लोगों ने मुझे चुनाव जिताकर ये सारे सवाल पूछने के लिए यहां भेजा है। ...(व्यवधान)

          सभापति महोदय, मैं कहना चाहता हूं कि इस रेजोल्यूशन पर काफी समय बाद चर्चा करने का मौका मिला है। अगर आप इसे कन्टीन्यू करेंगे, तो मैं अपनी बात पूरी कर लूंगा, ताकि अगली बार नये वक्ता को बोलने का मौका मिले। ...(व्यवधान)

माननीय सभापति :   गोपाल शेट्टी जी, आप अपनी बात अगली बार कन्टीन्यू कीजिए।

…( व्यवधान)

HON. CHAIRPERSON: Now, it is already 6 o’clock. You can continue your speech next time it is taken up for discussion in the House.

… (Interruptions)

SHRI GOPAL SHETTY : Sir, I am not concluding my speech. … (Interruptions)

HON. CHAIRPERSON: Do you want to conclude your speech?

… (Interruptions)

SHRI GOPAL SHETTY : No, I was stating that I will conclude my today’s speech.

HON. CHAIRPERSON: Do you want to conclude now?

… (Interruptions)

SHRI GOPAL SHETTY : No, Sir. Now, there is no time. I will continue next time. … (Interruptions)मुझे इतना ही कहना है कि जब मैं अगली बार अपना भाषण देने के लिए खड़ा होऊं, उससे पहले अगर यह प्रॉब्लम सॉल्व करते हैं, तो सारे देश के लोगों की प्रॉब्लम सॉल्व होगी। मुझे केवल इतना ही कहना है। Otherwise, I am on my legs as far as this issue is concerned.

माननीय सभापति :   क्या आप अपनी बात अगली बार कन्टीन्यू करेंगे?

श्री गोपाल शेट्टी  :  मुझे अगली बार बोलना है। जब तक यह प्रॉब्लम सॉल्व नहीं होगी, तब तक मैं बोलता रहूंगा।

HON. CHAIRPERSON: Then, you will be given the first chance the next time this issue is taken up for discussion in the House.

… (Interruptions)

SHRI GOPAL SHETTY : Thank you, Sir.

SHRI BHARTRUHARI MAHTAB : Chairman, Sir, he is on his legs. On the next Friday also he will be on his legs. तब तक आप खड़े रहिए। ...(व्यवधान)

HON. CHAIRPERSON: The House stands adjourned to meet on Monday, 31st July 2017 at 11 am.

18.02 hours The Lok Sabha then adjourned till Eleven of the Clock on Monday, July 31, 2017 / Shravana 9, 1939 (Saka).

           

*ण्ड्ढ म्श्र्द अ र्ठ्ठद्धत्ड्ढड्ड ठ्ठडदृध्ड्ढ ण्ड्ढ दठ्ठर्ड्ढ दृढ ठ्ठ ग्ड्ढथ्र्डड्ढद्ध त्दड्डत्हठ्ठय्ड्ढद्म् ण्ठ्ठद्य् ण्ड्ढ र्द्वड्ढद्य्त्दृद र्ठ्ठद्म् ठ्ठहय्द्वठ्ठथ्न्र् ठ्ठत्ड्ढड्ड दृद ण्ड्ढ ढथ्दृदृद्ध दृढ ण्ड्ढ Hदृद्वम्ड्ढ डन्र् ण्ठ्ठद्य् ग्ड्ढथ्र्डड्ढद्ध.  

*Eदर्थ्त्द्म्ण् य्द्धठ्ठदथ्ठ्ठय्त्दृद दृढ ण्ड्ढ म्द्रड्ढड्ढहण् दृद्धश्र्त्दठ्ठथ्न्र् ड्डड्ढथ्त्ध्ड्ढद्धड्ढड्ड त्द घ्द्वदर्ठ्ठडत्.

* ग़्दृद्य् द्धड्ढहदृद्धड्डड्ढड्ड *ग़्दृद्य् द्धड्ढहदृद्धड्डड्ढड्ड