State Consumer Disputes Redressal Commission
O I Co vs Tarak Nath Saw on 28 March, 2017
Cause Title/Judgement-Entry STATE CONSUMER DISPUTES REDRESSAL COMMISSION, UP C-1 Vikrant Khand 1 (Near Shaheed Path), Gomti Nagar Lucknow-226010 First Appeal No. A/2012/2392 (Arisen out of Order Dated in Case No. of District State Commission) 1. O I Co a ...........Appellant(s) Versus 1. Tarak Nath Saw a ...........Respondent(s) BEFORE: HON'BLE MR. Ram Charan Chaudhary PRESIDING MEMBER HON'BLE MR. Mahesh Chand MEMBER For the Appellant: For the Respondent: Dated : 28 Mar 2017 Final Order / Judgement राज्य उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग , उ0प्र0 लखनऊ। अपील संख्या:- 2392 /201 2 (सुरक्षित) (जिला मंच देवरिया द्वारा परिवाद संख्या 387/2002 में पारित आदेश दिनॉंक 25.07.2012 के विरूद्ध) The oriental Insurance Company Limited Regional Office, Jeevan Bhawan, 43, Hazratganj, District-Lucknow through its Manager and on behalf of Branch Manager the O.I.C. Limited Branch and District-Deoria. ............अपीलार्थी/विपक्षी। Versus Tarak Nath Shah son Late Nathai resident of Tehsil Road, Rudra Pur, Post and Tehsil - Rudra Pur, District-Deoria. ............प्रत्यर्थी/परिवादी समक्ष 1.
माननीय श्री राम चरन चौधरी, पीठासीन सदस्य।
2. माननीय श्री महेश चन्द्र, सदस्य।
अपीलार्थी की ओर से उपस्थित : विद्वान अधिवक्ता श्री वासुदेव मिश्रा।
प्रत्यर्थी की ओर से उपस्थित: विद्वान अधिवक्ता श्री यू0के0 श्रीवास्तव।
दिनॉंक 25.05.2017 माननीय श्री राम चरन चौधरी , पीठासीन सदस्य द्वारा उद्घोषित निर्णय प्रस्तुत अपील जिला मंच, देवारिया द्वारा परिवाद संख्या 387/2005 में पारित प्रश्नगत निर्णय दिनॉंकित 25.07.2012 के विरूद्ध योजित की गयी है।
संक्षेप में तथ्य इस प्रकार हैं कि प्रत्यर्थी/परिवादी ने यामाहा क्रक्स मोटर साइकिल इंजन नं-के0ए0 156055 चेसिस नं0 0265 के0ए0 156055 खरीदा जिसका पंजीयन संख्या यू0पी0 52/जी-1017 है। उक्त वाहन का बीमा विपक्षी सं0 1 से दि0 11.08.2003 को करवाया। परिवादी का कथन है कि दिनॉंक 18.09.2003 को परिवादी का लड़का नित्यानन्द उक्त मोटर साइकिल पर अपनी पत्नी श्रीमती अंजू को बैठाकर अपनी ससुराल ग्राम भैंसही, थाना-अहिरौली जा रहा था कि अचानक रास्ते में उक्त वाहन दुर्घटनाग्रस्त हो गया। जिस कारण परिवादी के पुत्र की मृत्यु हो गयी, तथा उसकी पत्नी को काफी चोटें आयीं। दुर्घटनाग्रस्त वाहन को ठीक कराने के लिए परिवादी ने विपक्षीगण से संपर्क किया, परन्तु कोई कार्यवाही नहीं की गयी। परिवादी ने अपने अधिवक्ता के माध्यम से कानूनी नोटिस भेजा। दुर्घटना के समय परिवादी के पुत्र की सोने की चैन, पाकेट के रूपये व चालक अनुज्ञप्ति जो वर्ष 1999 में संभागीय परिवहन अधिकारी, गोरखपुर से बनी थी व अन्य कागजात चोरी हो गयी। विपक्षीगण ने वाहन की मरम्मत नहीं करायी। न ही वाहन की कीमत का भुगतान किया अत: यह परिवाद जिला मंच के समक्ष उपरोक्त अनुतोष हेतु योजित किया गया।
विपक्षीगण द्वारा लिखित कथन दाखिल करते हुए कहा गया कि उक्त वाहन का बीमा दि0 11.08.2003 से 10.08.2004 तक की अवधि के लिए किया गया था। परन्तु वाहन चालक नित्यानन्द की चालन अनुज्ञप्ति परिवादी द्वारा विपक्षीगण को उपलब्ध नहीं करायी गयी, जिस कारण मोटर वाहन अधिनियम के प्रावधानों के अन्तर्गत कोई क्लेम देय नहीं है। पक्षकारों द्वारा अपने कथन के समर्थन में शपथ पत्र एवं अन्य प्रलेखीय साक्ष्य दाखिल किये गये।
विद्वान जिला मंच ने परिवादी का परिवाद स्वीकार करते हुए विपक्षीगण को आदेशित किया कि वह वाहन की बीमित धनराशि 32000.00 रूपये का 75 प्रतिशत अर्थात 24000.00 रूपये मय 09 प्रतिशत ब्याज दुर्घटना की तिथि से वास्तविक अदायगी तक एक माह में परिवादी को अदा करने के आदेश पारित किये गये तथा मानसिक, शारीरिक, क्षति के रूप में 2000.00 रूपये एवं वाद व्यय के रूप में 2000.00 रूपये भी परिवादी को एक माह में अदा करने के आदेश पारित किये ये। उपरोक्त आदेश के अनुपालनोपरान्त प्रश्नगत वाहन विपक्षीगण का होगा यह भी आदेश पारित किया गया। उपरोक्त आदेश से क्षुब्ध होकर यह अपील योजित की गयी।
इस संबंध में अपील का अवलोकन किया गया। जिला मंच देवरिया के आदेश दिनॉंकित 25.07.2012 का अवलोकन किया गया। विपक्षी के द्वारा दाखिल लिखित बहस का अवलोकन किया गया। वाद पत्र में वादी द्वारा कहा जा चुका है कि घटना की सूचना प्राप्त होने के बाद परिवादी करीब तीन घंटे देरी से पहुँचा तब उसके पुत्र का मृत शरीर थाने पर पहुँच चुका था, तथा उसके पुत्र के पास कुछ सामान शेष नहीं था।
विपक्षी की तरफ से जो प्रतिवाद पत्र में कहा गया है कि परिवादी ने जानबूझ कर अपनी बीमित मोटर साइकिल अपने पुत्र को चलाने के लिए दी जिसके पास ड्राइविंग लाइसेंस नहीं था, और वाहन स्वामी द्वारा बीमा पालिसी का उल्लंघन कर वाहन चलाया जा रहा था। पालिसी शर्तों के अनुसार दावा देय नहीं था। अत: निरस्त कर दिया गया। इसलिए बहस के समय अपीलकर्ता की ओर से कहा गया कि ड्राइविंग लाइसेंस न होने के कारण बीमा कम्पनी की कोई जिम्मेदारी नहीं बनती थी। इसलिए उसका क्लेम निरस्त किया गया। प्रत्यर्थी की ओर से मौजूदा अपील ड्राइविंग लाइसेंस की फोटोप्रति दाखिल नहीं की गयी है और अपीलार्थी की ओर से इस संबंध में लिखित बहस में कहा गया है कि प्रत्यर्थी ने जहॉं से ड्राइविंग लाइसेंस बनवाया था वहॉं से दूसरी प्रति आसानी से प्राप्त कर सकता था, लेकिन कोई कापी प्राप्त नहीं की गयी और न ही दाखिल की गयी। यह भी कहा गया कि जिला फोरम ने जिस नजीर का सहारा लिया है वह इस केस में लागू नहीं होती है और अपीलकर्ता की ओर से निम्न नजीर प्रस्तुत की गयी- (2009) 2 सुप्रीम कोर्ट केस 523 नेशनल इन्श्योरेंस कमपनी लिमिटेड बनाम मीना अग्रवाल Allowing the appeal, the Supreme Court . The State Commission and the National Commission have not practically indicated any reason for coming to the conclusion that there was no fundamental breach of the terms of the policy. Both the State Commission and the National Commission observed that the vehicle was being driven by a person who did not have a valid driving licence. In addition to that the vehicle which was insured for personal use was used for commercial purposes.
Orders of the State Commission and the National Commission are unsustainable and set aside.
इस प्रकार तथ्यों एवं परिस्थितियों में हम पाते हैं कि दुर्घटना के समय परिवादी के पुत्र नित्यानन्द के पास वाहन चलाने के लिए कोई ड्राइविंग लाइसेंस नहीं था और बीमा कम्पनी ने क्लेम खारिज करके सेवा में कोई त्रुटि नहीं की है। इस संबंध में विद्वान जिला मंच द्वारा जो निर्णय पारित किया गया है वह निरस्त किये जाने योग्य है। अपील स्वीकार किये जाने योग्य है।
आदेश प्रस्तुत अपील स्वीकार की जाती है। जिला मंच द्वारा पारित निर्णय/आदेश दिनॉंकित 25.07.2012 अपास्त किया जाता है। उभयपक्ष अपना अपना अपीलीय भार स्वयं वहन करें।
(राम चरन चौधरी) (महेश चन्द्र) पीठासीन सदस्य सदस्य प्रदीप कुमार, आशु0 कोर्ट नं0 2 [HON'BLE MR. Ram Charan Chaudhary] PRESIDING MEMBER [HON'BLE MR. Mahesh Chand] MEMBER