Lok Sabha Debates
Regarding The Prime Minister Crop Insurance Scheme. on 9 August, 2016
Sixteenth Loksabha an> Title: Regarding the Prime Minister Crop Insurance Scheme.
श्री दीपेन्द्र सिंह हुड्डा (रोहतक) : अध्यक्ष महोदय, प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के क्रियान्वयन पर हरियाणा के किसानों में व्यापक रोष, नाराजगी और विभिन्न शंकाओं की तरफ सरकार का ध्यान आकर्िषत करना चाहता हूं। इस योजना के क्रियान्वयन के बाद हरियाणा में किसान पूछ रहा है कि इससे किसान का भविष्य सुरक्षित हुआ है या निजी बीमा कंपनियों का भविष्य सुरक्षित करने का काम सरकार ने किया है। किसानों की सहमति के बिना और बिना उसके संज्ञान में लाए जबर्दस्ती किसानों के खातों से बीमे का प्रीमियम काटा जा रहा है। मैं एक उदाहरण देना चाहता हूं ...(व्यवधान) झझर में एक किसान के खाते से बीमा के रूप में चालीस हजार रुपये काट लिए गए, इसी प्रकार से झझर में एक किसान ने पत्र लिखकर कहा है कि उसने अपनी जमीन में कोई फसल नहीं बोई, लेकिन उसके खाते से ढ़ाई हजार रुपये फसल बीमा प्रीमियम के नाम पर काट लिए गए। प्रीमियम की दर बहुत ऊंची है, 505 रुपये प्रति एकड़ के हिसाब से धान के लिए काटे जा रहे हैं। अगर किसान के पास छह एकड़ है और वह लोनी किसान है और उसने केवल दो एकड़ में ही बुआई की है तो छह एकड़ का प्रीमियम काटने का काम सरकार कर रही है। सरकार द्वारा इस योजना के माध्यम से मुआवजा मिलता था, उससे पूरी तरह से अपना पल्ला झाड़ने का काम किया है, अब मुआवजा भी निजी कंपनियों के माध्यम से दिलाया जाएगा। इसमें गांव को इकाई माना गया है किसान को इकाई नहीं माना गया है। अगर आपने लाइफ इश्योरेंस कराया है और आपका पूरा परिवार का नुकसान होगा तभी मुआवजा दी जाएगी। इसमें जब तक पूरे गांव का नुकसान नहीं होगा तब तक किसानों को उसका मुआवाज नहीं दिया जाएगा।...(व्यवधान)। मेरी मांग है कि इसको वापस लिया जाए और इस योजना की कमियों को दूर करके दुबारा लाया जाए और इसका नाम भी बदला जाए। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना का नाम बदल कर रिलायंस फसल बीमा योजना किया जाए, इसमें प्रधानमंत्री का नाम बदनाम हो जाएगा। किसान*योजना के नाम से इसको लागू किया जाए।