Lok Sabha Debates
Discussion And Voting On Demands For Grants In The General Budget Relating To The ... on 26 April, 2000
hrs. Discussion and voting on Demands for Grants in the General Budget relating to the Ministry of Home Affairs with reference to Demand Nos. 45 to 49 and 99 to 103.
MR. SPEAKER: The House will now take up discussion and voting on Demand Nos. 45 to 49 and 99 to 103 relating to the Ministry of Home Affairs.
Hon. Members present in the House whose cut motions to the Demands for Grants have been circulated may, if they desire to move their cut motions, send slips to the Table within 15 minutes indicating the serial numbers of the cut motions they would like to move. Those cut motions only will be treated as moved.
"That the respective sums not exceeding the amounts on Revenue Account and Capital Account shown in the fourth column of the Order Paper, be granted to the President out of the Consolidated Fund of India, to complete the sums necessary to defray the charges that will come in course of payment during the year ending the 31st day of March, 2001, in respect of the heads of demands entered in the second column thereof, against Demands Nos. 45 to 49 and 99 to 103. "
____________________________________________________________ *Moved with the recommendation of the President.
MR. SPEAKER : Now, we go on to the discussion, Shri Rajesh Pilot to initiate the discussion.
श्री राजेश पायलट (दौसा) : अध्यक्ष महोदय, आज हम गृह मंत्रालय की मांगों पर बहस कर रहे हैं। गृह मंत्रालय देश के लिए और सरकार के लिए एक तरह से देश की नब्ज होती है, सरकार की भी नब्ज होती है। जिस तरीके से एक डाक्टर मरीज की नब्ज देख कर बता देता है कि मरीज की हालत ठीक है या नहीं, उसी तरह देश के गृह मंत्रालय की हालत देख कर पता चल जाता है कि देश सही चल रहा है या नहीं। गृह मंत्रालय सिर्फ कानून और नियमों से नहीं चलता, इकबाल से भी चलता है। इस मंत्रालय में जो भी अधिकारी हों या पोलटिकल लोग हों, साथी हों, जो वे कहें वह देश में लागू हो, ऐसी परम्परा हमारे देश में रही है। किसी जमाने में गृह मंत्रालय का कोई अंडर सेक्रेट्री या सेक्रेट्री किसी राज्य में टेलीफोन किया करता था तो वहां शोर मच जाता था कि गृह मंत्रालय को पता चल गया है इसलिए आधा काम तो वैसे ही ठीक हो जाता था। लेकिन आज हालत बदल गई है। मैं किसी एक पार्टी या व्यक्ति को इसके लिए जिम्मेदार नहीं मानता। मैं भी गृह मंत्रालय में मंत्री रहा हूं। लेकिन जो इकबाल गृह मंत्रालय में था, वह धीरे-धीरे कम होता जा रहा है। उसका असर देश की कानून व्यवस्था पर भी पड़ा है।
गृह मंत्रालय ने अपनी वार्षिक रिपोर्ट सदन के सामने रखी है। गृह मंत्री जी पहली गृह मंत्री बनकर संसद, कश्मीर और नार्थ-ईस्ट में बोले थे और हर समस्या पर बहुत मजबूती से स्पष्टीकरण दिया था। पहली बार जब कश्मीर गए थे तो बड़ी मजबूती से इन्होंने अपनी बात को कहा था। मैं वे लफ्ज रिपीट नहीं करना चाहता, वे मेरे भी गृह मंत्री हैं। उस समय अखबारों ने इनकी तुलना सरदार पटेल से की थी कि सरदार पटेल का जमाना आने वाला है। कई अखबारों में इस बारे में सम्पादकीय भी आए। जब ये नार्थ-ईस्ट गए तो वहां भी बड़ी द्ृढ़ता से इन्होंने कहा था। लेकिन हालत किसी से छिपी नहीं है कि देश की कानून व्यवस्था की स्थिति कैसी है।
हालत यह है कि यह सरकार की रिपोर्ट है। स्टैंडिंग कमेटी की रिपोर्ट जो सरकार को दी है, उसमें इंसीडेंटवाइज स्टेट को आप देख लीजिए। मैं सारे इंसीडेंट नहीं लूंगा। लेकिन एस.सी. एस.टी. जो हमारे देश का एक वीकर सैक्शन है, उनकी हालत से पता चलता है कि कानून व्यवस्था देश में कैसी चल रही है। यह सही है कि कानून व्यवस्था स्टेट का विषय है और हम प्रांत पर डाल देते हैं लेकिन जब सारे देश का नक्शा देखा जाता है तो उसमें देश की बात कही जाती है। अगर यू.पी. की हालत खराब होगी तो हम कह सकते हैं कि यू.पी. की हालत खराब है। लोग हिन्दुस्तान को हिन्दुस्तान के जरिए देखते हैं। मैं सदन का ज्यादा समय नहीं लूंगा। Incidents of crimes committed against Scheduled Castes during 1999. मैं एक साल का विवरण दे रहा हूं। उत्तर प्रदेश में एस.सी. से संबंधित ६१२२ और एस.टी. से संबंधित ४३९० इंसीडेंट्स हुए हैं। करीबन २९१७९ इंसीडेंट्स एस.सी. और एस.टी. पर एक साल में हुए हैं। आज सुबह भी चर्चा हुई थी। कुछ सवाल जवाब में बहस हुई थी। कल खुद गृह मंत्री जी जवाब दे रहे थे कि किस तरह से एस.सी., एस.टी. और कमजोर वर्ग का और क्रिश्चियन का एक तरह से विश्वास सा हटा है। हालत इस देश में यह हुई थी कि हमें कांस्टीटयूशन. कानून अमेंड करके यह जारी करना पड़ा कि जो एस.सी. औऱ एस.टी. पर अत्याचार होंगे, उनके खिलाफ स्पेशल क्लॉज लाकर हम एक्शन लेंगे। आज उसके आने के बावजूद भी देश में २९१७९ इंसीडेंट्स हमारे वीकर सैक्शन पर हुए हैं। उसका कारण क्या है ? मैंने कहा कि इकबाल का कारण है। आज देश में बीमारी उगाई जाती है। जब बीमारी केंसर हो जाती है तो सब हाथ खड़े करते हैं कि यह तो केंसर हो गया, इसका कोई इलाज नहीं है। फिर उसमें दूसरा, तीसरा इलाज चलता है। बीमारी जब बोई जाती है, तो उस समय सख्त कदम नहीं उठाये जाते। माननीय गृह मंत्री जी बुरा नहीं मानें। आज के अखबार को पढ़ें। कोई जरूरत नहीं थी वी.एच.पी. के सिंघल साहब को कि वह भाषण करें और यह बताएं कि १६ जून को राम अवतार जी का हम स्टेचू राम जन्मभूमि पर स्थापित कर देंगे, डेट भी दे दी। अब पन्द्रह जून तक देश में टेंशन बढ़ती रहेगी। सरकार की तरफ से कोई सख्त जवाब नहीं आया। पहले भी ऐसे होता था। यह गृह मंत्री जी के हाथ में नहीं है। कोई नागरिक यह बयान दें तो उसे पकड़ लें और कहें कि ऐसा बयान आपने क्यों दे दिया ? मैं मानता हूं लेकिन पहले ऐसे कदम उठते ही एक कदम उठता था और देश में शोर हो जाता था कि कोई कानून को अपने हाथ में ले नही सकता। लोग डरते थे। आज वह डर खत्म हो गया है। इससे इकबाल गिरा है और कानून व्यवस्था गिरती चली जा रही है। गृह मंत्री जी ने शुरु में एक बयान दिया था। अगर मैं गलत हूं तो गृह मंत्री जी मुझे याद दिला दें। जब आप गृह मंत्री जी बने थे तो आपने कहा था कि आई.एस.आई. एक्टिविटीज बढ़ रही हैं। हमने भी इस बात को शेयर किया था चाहे इंडो नेपाल बॉर्डर की बात हो, कश्मीर की हो, नॉर्थ ईस्ट की हों। हमने भी सख्ती और खोज करने की कोशिश की थी और सख्त कदम उठाए थे लेकिन गृह मंत्री जी ने कहा था कि मैं आई.एस.आई. पर व्हाइट पेपर लेकर आऊंगा और देश के सामने रखूंगा। हमने उस बात का स्वागत किया था कि देश के सामने अगर आए तो गतविधयां सबके सामने आएं। आज हम हर बात आई.एस.आई. पर डाल देते हैं। गांव में यह भी मजाक हो गया। जो बात है, आई.एस.आई. ने कराई है। हम इतने कमजोर नही हो गए हं कि आई.एस.आई. हमारे देश में आकर हमें नुकसान पहुंचा जायें और हमें पता भी न चले। हमारे सिस्टम, हमारे इंस्टीटयूशन बहुत मजबूत हैं। लेकिन दुख की बात है कि हम लोगों ने सिस्टम को या तो कमजोर कर दिया या इंटरफेअरेंस करके इंस्टीटयूशन को डायलूट कर दिया। है और उसके कारण नतीजे उतने नहीं आ रहे हैं। पता नहीं उस व्हाइट पेपर की क्या स्टेज है। एक-दो बार मैंने बयान पढ़े कि अभी हम सोच रहे हैं शायद अंदर एळायंसेज में आपकी पॉलिसीज में हो। मुझे याद है जब आपने इंडियन एयरलाइन्स का मैनीफैस्टो जारी किया था, उसमें भी इस बात का जिक्र है, इसलिए मैं चाहूंगा कि आज गृह मंत्री जी बयान दें और जो भी एक्टिविटीज नजर में हैं, देश के सामने साफ रखें। देश इसमें मदद करेगा क्योंकि देश भी इस बात से चिंतित है। ये गतवधियां क्यों बढ़ रही हैं चाहे वह दक्षिणी भारत की बात हो चाहे नैक्सेलाइट की हो। इनमें बढ़ावा मिला है और यह अखबारों की खबर नहीं है। आपकी वार्षिक रिपोर्ट है जो गृह मंत्री जी के मंत्रीलय ने दी है। उन्होंने खुद इस बात को माना है और कहा है।
"The Left Wing extremist violence in the country remained almost at the same level during the period January-September, 1999 as compared to the corresponding period of 1998. However, the number of killings in extremist violence registered a slight increase."
लेफ्ट्स एक्स्ट्रीमिज़्म बढ़ा एलटीटीइ की एक्टीविटीज़ सदरन पार्ट में आपसे छिपी नहीं हैं, किस तरीके से चल रही हैं, किस तरीके से उनकी एक्टीविटीज़ बढ़ी हैं। उन्हें गृह मंत्री जी मेरे से ज्यादा जानते होंगे, लेकिन इस बारे में दो बातें हुईं। पहला कारण यह है कि एक तो स्टेट पुलिस, जो भी हमारे प्रांतों की पुलिस है, क्या कारण है, इस बारे में यह गृह मंत्रालय को सोचना पड़ेगा। आज इनमें गिरावट क्यों आ रही है। आज पंचायत के चुनाव होते हैं तो सीआरपी बुलाते हैं। हर स्टेट गवर्नमेंट कहती है कि सीआरपी भेज दीजिए। हमारे स्टेट के मनिस्टर, वीआईपीज़ भी कहते हैं कि पैरा मलिट्री फोर्स की सिक्योरिटी दे दीजिए और जितने भी आज तक स्टेट लेवल के चुनाव हुए हैं, हम हर जगह पैरा मलिट्री फोर्स भेज कर चुनाव करवा रहे हैं। यह एक अच्छी निशानी नहीं है, अच्छी दिशा सूचक नहीं है। पहले स्टेट में पुलिस अपने आप मजबूत हुआ करती थी। पुलिस का अपना काम होता था और आज सेंट्रल पैरा मलिट्री फोर्स जाकर स्टेट पुलिस का काम करे। सीआरपी की हालत यह है कि उन्हें पता नहीं कि किस स्टेट में खाना खाना है और अगले दिन सुबह का नाश्ता उन्हें कौन से स्टेट में खाना है। यह हालत हमारी पैरा मलिट्री फोर्स की हो गई है। मैं समझता हूं कि स्टेट पुलिस के दो कारण हैं। पहला, इन लोगों की ट्रेनिंग देना, मुझे खुशी है कि धर्मवीर कमीशन ने जो रिकोमेंडशन दी थी, उन्हें हम लागू करने की कोशश कर रहे हैं गृह मंत्री जी, हमने भी कोशिश की थी, हम नहीं कर पाए। मुझे पूर्ण उम्मीद है कि आप इसे चालू करके लागू कर दें तो आधी पुलिस की तकलीफ इससे भी दूर हो जाएगी। स्टेट पुलिस की जो आरमरी है, उनकी ट्रेनिंग है, उनकी आम्र्स की माडर्नाइजेशन है, यहां तो एक स्कीम जरूर है। लेकिन मैं देख रहा था कि यहां से बहुत मीगर अमाउंट गया। अब की बार मैंने देखा कि सौ करोड़ रुपए स्टेट माडर्नाइजेशन के लिए इन्होंने रखे हैं। उसमें नार्थ-ईस्ट का अलग है, लेकिन जब तक स्टेट पुलिस की माडर्नाइजेशन नहीं होगी, उनकी जिम्मेदारी उन पर नहीं छोड़ी जाएगी, तब तक न स्टेट पुलिस का मनोबल ऊपर उठेगा और न उनमें एकाउंटेबिल्टी आएगी और जब तक स्टेट पुलिस में एकाउंटेबिल्टी नहीं आएगी, सारे देश की जिम्मेदारी पैरा मलिट्री फोर्स पर छोड़ी जा रही है वह देश के एवं प्रांतों के हित में नहीं है और भविष्य के हित में भी नहीं है। हम कहां तक इतनी पैरा मलिट्री फोर्सेस लेंगे। आज अगर आप फीगर्स देखें, आज से दस साल पहले की पैरा मलिट्री फोर्स और आज की पैरा मलिट्री फोर्स कहीं ४० प्रतिशत और कहीं ६० प्रतिशत इनक्रीज है और पैरा मलिट्री फोर्स बढ़ाते जा रहे हैं। स्टेट पुलिस का दायित्व उतना ही कम होता चला जा रहा है। वे जिम्मेदारी से बचते जा रहे हैं, यह अच्छा कारण नहीं है। मैं समझता हूं कि कुछ स्टेट पुलिस ने अच्छे इंस्टीटयूट सेटअप करके सुधार किया। महाराष्ट्र ने एक अच्छी ट्रेनिंग अकादमी चलाई थी। आंध्रा प्रदेश में उनकी ट्रेनिंग और जिस तरह स्टेट पुलिस को उन्होंने इंटरनल सिक्योरिटी दूसरे मसलों पर अच्छी तरह से तैयार की, मैं चाहता हूं कि गृह मंत्रालय ऐसा कोई सेमिनार करके सारे स्टेट को बुला कर उन लाईनों पर, जिन लाईनों पर आंध्रा प्रदेश जैसी पुलिस, महाराष्ट्र, Karnataka has, to a great extent, done very well. इन सबको लेकर हम एक माडल बना कर स्टेट पुलिस को मजबूत करें और यह भी देखें कि जो स्टेट्स को जरूरत है, कुछ आम्र्स की बात होती हैं, जिसमें गृह मंत्रालय मदद कर सकता है। मैं जब गृह मंत्रालय में था तो हम जितनी आम्र्स काश्मीर में कंफिसकेट करते थे, हम स्टेट्स को दे दिया करते थे, क्योंकि उन्हें कब तक, कितने दिन म्युजियम में रखेंगे और आम्र्स भी रस्टिड हो जाती थीं तो हम स्टेट्स में नोमिनल रेट्स पर बांट दिया करते थे। अगर एके -४७ देनी हो तो हम हजार-१५०० रुपए नोमिनल रखते थे और स्टेट में बांट दिया करते थे, उससे भी स्टेट पुलिस को एक मदद मिली थी।
जहां तकर दिल्ली पुलिस का जिक्र है, क्योंकि दिल्ली पुलिस डायरेक्ट होम मनिस्ट्री के अंडर में है। गृह मंत्रालय के आधीन है और दिल्ली पुलिस का अब जितना काम बढ़ गया है, जिस तरीके से उनकी डयूटियां, उनका टास्क बढ़ा है, संख्या भी बढ़ी है लेकिन सुविधाएं उतनी नहीं बढ़ा पाए। एकत पुलिस का जवान दिन भर काम करता है और शाम को ऐसी कालोनी में जाकर अपने बच्चों के साथ रहता है, जहां एंटी सोशल एलीमेंट्स तथा दूसरे तरह के एलीमेंट्स होते हैं, फिर 15.33 hours (Dr. Raghuvansh Prasad Singh in the Chair ) उनके साथ मिल जाते हैं। मैंने अखबारों में रिपोर्ट पढ़ी कि किस तरह से सिपाही गलत काम करते हुए पकड़े गए हैं, क्योंकि उस वक्त उनके आसपास की सोसायटी ऐसी होती है कि उसमें वे मिल जाते हैं। इसलिए हमेशा जैसे फोर्सेस में थोड़ा सेग्रीगेशन करके उन्हें अलग रखा करते थे, इसलिए दिल्ली पुलिस ने बहुत दिनों से कोशिश की थी, हमने उनकी अलग एकोमोडेशन कराने की शुरुआत की थी। मैंने कहीं पर एक रिपोर्ट में पढ़ा है कि आज शायद उनके १४ प्रतिशत के करीब दिल्ली पुलिस वालों की एकोमोडेशन नहीं है। पुलिस ने एक हाउसिंग कार्पोरेशन बनाई और एक प्रपोजल दिया।
लेकिन सीपीडब्ल्यूडी नहीं चाहती कि पुलिस कॉरपोरेशन काम करे। कई जगहों पर स्टेट्स में पुलिस कॉरपोरेशन ने घर बनाये हैं, मैं नहीं समझ पाता कि सीपीडब्ल्यूडी को इसमें क्या एतराज है। पुलिस कॉरपोरेशन अपने पैसे से मकान बनाए तो सीपीडब्ल्यूडी को नाराजगी नहीं होनी चाहिए। दिल्ली पुलिस का कल्चर, उसकी ट्रेनिंग, उसका वातावरण बदलने के लिए कुछ ठोस प्रयास होने चाहिए। दिल्ली देश का केन्द्र है और इस पर सारे देश की नजर रहती है। यहां गृह मंत्रालय है, संसद है, बड़े-बड़े ऑफिस हैं, सब कुछ है। इसलिए दिल्ली पुलिस पर खासतौर से गौर किया जाये।
मैंने स्टैंडिंग कमेटी की रिपोर्ट पढ़ी। उसमें लिखा है कि बी.एस.एफ. में कई प्रपोजल पैंडिंग हैं। बी.एस.एफ. की १५ बटालियन ऐसी हैं जिनके हैड-क्वार्टर्स ही नहीं हैं। उन्होंने नार्थ-ईस्ट में, पंजाब में, कश्मीर में अच्छा काम किया है। सैकिंड लाइन ऑफ डिफेंस की होते हुए भी वह मलिटेंसी से लड़ती रही। बी.एस.एफ. ने भी ज्यादातर वही काम किया है जो डिफेंस फोर्सेज कर रही हैं। मिलजुल कर उनका काम चल रहा है, खुशी की बात है की अच्छे सहयोग के साथ चल रहा है। मैंने एक योजना उस समय प्रपोज की थी कि जम्मू में हम जैसे आर्मी के अलग से फैमलीज क्वार्टर्स बना रहे हैं वैसे ही बी.एस.एफ के लिए भी इस तरह की कंस्ट्रक्शन करें जिससे उनका परिवार जम्मू या आसपास के स्थानों पर रह सके तथा जवान और अधिकारी १५-२० दिन में अपने घरवालों से मिलने जा सकें। इससे उनका मनोबल ऊंचा बना रहता है। पता नहीं अब वह स्कीम कहां तक पहुंची है।
सीआरपीएफ के बारे में मैं इतना ही कहूंगा कि अगर देश में किसी फोर्स की उपयोगिता सर्वाधिक ९८.५ प्रतिशत है तो वह सीआरपीएफ की है। लॉ एंड आर्डर के लिए वे जिस भी प्रदेश में गये, उन्होंने वहां चुनौती भरा काम किया है। जहां भी चुनौती वाला काम होता है वहां उन्हें भी भेजा जाता है। इसलिए सारे देश में उनकी मांग बढ़ी है। नार्थ-ईस्ट वालों की तो हमेशा डिमांड रहती है कि सीआरपीएफ भिजवा दीजिए। इनकी उपयोगिता को देखते हुए इनके जो प्रौजेक्ट्स पैंडिंग पड़े हैं उन्हें दिखवाने की कोशिश करें।
सभापति जी, गृह मंत्रालय के अंतर्गत जो इंस्टीटयूशंस हैं वे बहुत पुराने हैं, चाहे आईबी के हों, इंवैस्टीगेशन के हों या गृह मंत्रालय ही क्यों न हो। गृह मंत्रालय का एक वह भी पीरियड था जब सरदार पटेल जी कश्मीर पर नोट लिखा करते थे अगर मैं गलत नहीं हूं तो Shri Menon was the Home Secretary. वह दूसरा नोट लिखा करते थे। गृह मंत्री लिखा करते थे I do not agree. मैनन साहब फिर लिखा करते थे In the national interest, this is my submission or note. वह नोट कैबिनेट में जाया करता था और फिर कैबिनेट डिसाइड करती थी। यह गृह मंत्रालय का औचित्य था। ये इंस्टीटयूशन्स थे तभी इकबाल चल रहा था। इंटैलीजेंस ब्यूरो एक इंस्टीटयूशन है। मैं इनके बारे में कुछ कमजोरी की बात कह रहा हूं, लेकिन गृह मंत्री जी, आज इन्हें संभालने की जरूरत है। उसे संभालने की जरूरत है। उसमें सब कुछ हो गया है, आज उन बातों का जिक्र करने की जरूरत नहीं है। कई घटनाएं हुई हैं जहां हमारी फैल्योर दिखी हैं। कारगिल पर सारा देश कह रहा है कि पाकिस्तान को सबक सिखा दिया लेकिन आज बैठकर घर में देखने का वक्त है कि यह हुआ कैसे? आज तो हम इस बारे में सोच सकते हैं। हम आपस में राजनीतिक लड़ाई लड़ सकते हैं लेकिन देश को तो अंधेरे में नहीं रख सकते कि देश में यह खामियां क्यों हुईं? उन्होंने रिपोर्ट नहीं दी, उन्हें पता ही नहीं लगा और मलिट्री इंटैलीजेंस भी और आपकी रॉ भी और आई.बी. भी नहीं बता पाई और अगर बता पाई तो उस पर एक्शन नहीं हुआ। कोई तो गलती हुई। अगर दोनों सही थे तो उसके बाद भी ऐसी गलती हो गयी।
इंद्रजीत गुप्ता जी के जमाने में पुरलिया में एक एयर-ड्रापिंग हुई। ये सब ऐसी घटनाएं हैं जिनसे इन इंस्टीटयूशंस को मजबूत करने का मौका मिलता है। इंस्टीटयूशन्स को मजबूत करके, उन खामियों को दूर किया जा सकता है। मैं सिर्फ इतना ही कहूंगा कि इसको संभालने की आज जरूरत है और नार्थ-ईस्ट में हमने ७-८ स्टेट्स में सुधारने की शुरूआत की थी। जब तक खबर सही चैनल पर पहुंचती है काफी इंसीडेंट्स हो जाते हैं।
हमने डे-टुडे कोऑर्डिनेटिंग रखी थी। वहां एक ज्यौंट कंट्रोल रूम खोला था। वह आई.बी. के सुपुर्द किया था जिससे हर किसी को एक दूसरे का पता रहे। आज नागालैंड में क्या हो रहा है, मिजोराम के मुख्यमंत्री को पता नहीं। आज मिजोराम में क्या हो रहा है, असम के मुख्यमंत्री को पता नहीं है। नॉर्थ ईस्ट मलिटैंसी और इनसर्जेंसी से भरा है। हमने इसलिए शुरुआत की थी कि सारी स्टेटस में पता रहे। अगर मलिटैंट्स नागालैंड से निकले हैं तो मणिपुर जाने से पहले थोड़ा आइडिया मणिपुर सरकार और वहां के अधिकारियों को रहे कि ये इनसीडैंट्स होने वाले हैं। हमारी ऐसी प्रिकॉशनरी एप्रोच थी। अब पता नहीं वह चीज कहां तक पहुंची है? वह चल रही है या नहीं? मुझे खबर है कि वह स्लो चल रही है। पैसे की कमी को देखते हुए हमने जिस तरह इसे किया, वैसे आपको करना चाहिए। शिलौंग में कंट्रोल रूम खोल दिया था। हॉट लाइन चीफ मनिस्टर्स को दे दी थी। इससे जो इनसिंडैंस होने वाले थे, वे रुक गए थे। पता नहीं वह किस स्टेज पर है? मुझे मोटा-मोटा याद है कि वह उतनी चल नहीं रही है। मैं पिछली बार शिलौंग गया था तो लोगों के मन में था कि ऐसे इनसिडैंट्स हो रहे हैं और उनकी ठीक से मॉनिटरिंग नहीं हो रही है।
दो विषय जो जम्मू-कश्मीर और नॉर्थ ईस्ट के हैं, मैं उनके बारे में इस हाउस में बार-बार कहता रहा हूं। मैं यह बात इसलिए नहीं कहता रहा हूं कि हम सत्ता से बाहर हैं और आडवाणी जी गृह मंत्री हैं। जब हम सरकार में थे तब भी कहते थे। हमने १९९६ में भी कहा था कि हालत सुधारने के लिए प्रयास करने चाहिए। यदि अब की बार कश्मीर खराब हो गया तो इसे सम्भालना मुश्किल हो जाएगा। मैं कश्मीर होकर आया हूं। अभी चिट्टीसिंहपुरा में जो डैथ्स हुई तो मैं कश्मीर गया था। ऐसी बात नहीं है कि मैं विपक्षी सांसद की तरफ से बोल रहा हूं। मैं भारतीय नागरिक होने के नाते गृह मंत्री को चेतावनी दे रहा हूं और चिंता व्यक्त कर रहा हूं। आज कश्मीर बदल रहा है और अब की बार बदल गया तो मैं नहीं जानता कि आप उसे सम्भाल पाएंगे या नहीं? वह आज बहुत गिरावट में है। वहां राज्य सरकार चुन कर आई। हमने सोचा था कि केन्द्र और राज्य सरकार में कोऑर्डिनेशन होगा तो सुधार होंगे। जब हमारी यहां सरकार थी तो वहां राज्य सरकार नहीं थी। हमें अधिकरियों से काम लेना पड़ता था। मैं हर महीने वहां किस लिए जाता था? मैं वहां जाकर स्थिति नहीं सुधारता था। मैं वहां सारे काम ठीक नहीं करता था लेकिन वहां एक चैनल खुला था। मैं कश्मीरी और दूसरे भाइयों से बात करता था। एक रास्ता निकलता था। मैं आज सच्चाई से बता रहा हूं। पिछले दो साल से आप कह रहे हैं कि स्थिति सुधर रही है। उसका नुकसान यह हुआ कि फोर्सिज में लोग कहने लगे कि नेता लोग सुधार रहे हैं तो सुधारने दो। सच्चाई यह है कि पिछले दो साल से इनफिल्ट्रेशन बढ़ रहा है। स्टैंडिंग कमेटी की रिपोर्ट में माना गया है कि इनफिल्ट्रेशन बढ़ा है। कूपवाड़ा, बारामुल्ला, उरी सैक्टर में इनफिल्ट्रेशन बराबर बढ़ रहा है। कारण यह है कि जो कोआर्डिनेशन होना चाहिए था, स्टेट गवर्नमैंट, फोर्सिज और सैट्रल गवर्नमैंट का, वह अच्छा नहीं हो सका जिससे इस पर चैकमेट हो सकता। डिफेंस मनिस्टर जब जवाब दे रहे थे तो मैंने उनसे सवाल पूछा था। उन्होंने कहा था कि हमारी फौज का उत्साह बराबर है लेकिन इनसिडैंट्स सच्चाई दर्शाते हैं। पहले भी एक इनसिडैंट हुआ था, आर्मी कंटोनमैंट के बादामीबाग में एक इनसिंडैंट हुआ था। उसमें एक मेजर जनरल की डैथ हो गई थी। उसके कुछ कारण थे लेकिन आज तक बी.एस.एफ. के मेन गेट पर सुसाइड स्कॉयड जा रही हैं। वह पहले भी बनी थी लेकिन वे एफेक्टिव नहीं हो पाई। पिछले दिनों टेलविजन में देख रहे थे कि किस तरह बी.एस.एफ. के हैड क्वार्टर को खाली करवाना पड़ा क्योंकि चार आदमी घुस गए थे और बाकी बी.एस.एफ. का सामान बड़ी मुश्किल से बाहर निकाला गया। वहां हालत चिंताजनक है। वह दो तरीके से है - एक तो हमारा नैट इंटैलिजैंस कमजोर नजर आ रहा है और दूसरा जो कोऑर्डिनेशन था, वह खत्म हो गया। हमने पैरामलिट्री फोर्सिज, आर्मी सविल एथॉरिटी का एक कोआर्डिनेशन सैंटर बना दिया था। यूनिफाइड कमांड दोनों कोर की अलग-अलग कर दी गई थी। उस समय इसके चेयरमैन गवर्नर थे। आज चीफ मनिस्टर हैं। मैं पढ़ रहा था कि चीफ मनिस्टर उसके चेयरमैन बनाए हैं। बड़ी मुश्किल से पैरामलिट्री फोर्स को मनाया था कि आप आर्मी के साथ लग कर काम करो। वह कह रहे थे कि हमारे क्षेत्र अलग-अलग बांट दो और एकाउंटेबिल्टी कर दीजिए। उनका सुझाव भी ठीक था लेकिन हम कोऑर्डिनेशन चाह रहे थे। वह कोऑर्डिनेशन आज ठीक नहीं चल रहा है। इसे आलोचना के रूप में मत लें। इसे देश के इंटरस्ट के नाम पर लें और पता करें कि क्यों कोऑर्डिनेशन ठीक नहीं चल रहा है? आज आर्मी की खबर बी.एस.एफ. के पास नहीं जा रही है और बी.एस.एफ. की खबर आर्मी के पास नहीं जा रही है। यही कारण है कि इनसिडैंट सोपोर में हुए हैं। मैं स्टैंडिग कमेटी की रिपोर्ट पढ़ रहा था। उसके चेयरमैन श्री प्रणव मुखर्जी हैं। चिट्टीसिंहपुरा में जब इनसिंडैंट हुआ १०-१२ घंटे तक वहां डी.सी. नहीं गए। The Deputy Commissioner of a District does not visit the site where 36 people have been killed.
क्या लोगों का मॉरेल रहेगा? जिस दिन अनंतनाग में यह इंसीडेंट हुआ था , मैंने वहीं कहा था कि जो मारे गये हैं, उनकी शक्लें सारे देश को दिखाओ क्योंकि इससे हमारी फौजों की क्रडिब्लिटी गिरती है। जिस दिन हमारी फौजों या पैरा मलिट्री फोर्सेज की क्रेडबलिटी गिर जायेगी, उस दिन कश्मीर बिलकुल १९८९-९० जैसा हो जायेगा। जब वे दबा दिये गये थे, उस समय मैंने कहा था कि यह गलत हुआ है, बैठकर इसको साफ करो। जो लोग मारे गये हैं, वे टैरेरिस्ट्स थे या नहीं, अगर हमारे भाई कहते हैं कि इनकी शक्लें दिखाओ तो इनकी पहचान कराओ। हमने कानून बनाया था, हमने गाइडलाइन्स बनाई थीं कि कभी भी कोई भाई पकड़ा जाएगा, पुलिस को किसी को भी ले जाने का हक है, पुलिस या मलिट्री किसी को कस्टडी में रख सकती है लेकिन २४ घंटे के अंदर उसके परिवार को बता दे कि आपका भाई पकड़ा गया है और हमारी कस्टडी में है। लेकिन आज पुलिस या पैरा मलिट्री फोर्सेज सात-सात दिन नहीं बता रही है। अगर आज मेरे बेटे को फौज पकडकर ले जाये और मुझे सात दिन पता नहीं चले कि मेरे बेटा किस केस में पकड़ा गया है तो आप मेरे गुस्से को, अपने गुस्से को देख सकते हैं। इस देश में प्रजातंत्र है। मैं मानता हूं कि देश के हालात बुरे हैं लेकिन हालात ठीक करने के लिये सच्चाई की जरूरत है। अगर टैरेरिस्ट है तो टैरेरिस्ट है, चाहे वह किसी का बेटा ही क्यो न हो। यह बात यहां साफ करनी चाहिये कि इस डिस्क्रेडबलिटी के चलते बड़ा नुकसान हो जायेगा। बार्डर ऐरियाज में फौज को लोग भगवान मानते हैं। फौज अपने साथ साथ दवाइयां, खाना-पीना और कपड़े लेकर चलते हैं और मिल जुलकर काम करते हैं। अगर वातावरण बिगड़ जायेगा तो कश्मीर बहुत डफिकल्ट हो जायेगा। वातावरण के लिये सच्चाई हमें हमेशा आगे रखनी पडेगी।
सभापति महोदय, जहां तक कश्मीर की हालत का सवाल है, माननीय गृह मंत्री जी ने अपनी रिपोर्ट में खुद पढ़ा होगा कि अप्रैल, १९९९ से अब तक शायद ही एक या दो महीना ऐसा निकला होगा जब वहां इंसीडेंट न हुआ हो। सभापति महोदय, इस रिपोर्ट में बाकायदा तारीखें दी हुई हैं कि कितने कितने आदमी मारे गये, कितने कितने इंसीडेंट्स कहां कहां हुये हैं। मैं ये सारे तथ्य देकर सदन का समय खराब नहीं करना चाहता लेकिन मैं एक बात कहना चाहता हूं कि मलिटेंसी सुपीरियर हुई है जबकि पहले सुपीरियर नहीं थी। हम पहले ५ मलिटेंट्स के पीछे एक जवान खोया करते थे लेकिन आज तीन मलिटेंट्स के पीछे हमारा एक जवान अपनी जान दे रहा है। इस प्रकार मलिटेंसी सुपीरियर हुई है। उन लोगों के पास एम्युनिशन अच्छा है। मैं अखबारों में पढ़ रहा था कि कहीं से वे लोग रॉकेट लांचर ले आये हैं। सोपोर में रॉकेट लांचर से अटैक किया गया और कहीं कहीं मिसाइल्स भी ला रहे है। इसमें कुछ न कुछ सच्चाई तो है। हम मानते हैं जब आप कह रहे हैं कि इसके पीछे पाकिस्तान की फ्रस्टेशन है लेकिन उनकी फ्रस्टेशन के पीछे हम ढील नहीं दिखा सकते। हमें और सख्ती से उनके खिलाफ काम करना चाहिये और हमें सख्ती से मलिटेंसी पर काबू पाना चाहिये, यही मेरी प्रार्थना है।
सभापति महोदय, सरकार की नीति के तहत कश्मीर में मलिटेंट्स ने सरंडर किया था। मैंने उनके गांव में जाकर कहा कि आप लोग बंदूक छोड़ दो, मैं तुम लोगो को नौकरी दिलाऊंगा। मुझे एक इंसीडेंट याद है जब मैं कुछ लड़कों को दिल्ली में लेकर आया और उनको एक गैस्ट हाउस में ठहराया ताकि किसी प्राइवेट फर्म से बात करके उन लोगों को नौकरी दिलाने की कोशिश करूं । वे लोग ८ दिन तक वहां रुके रहे लेकिन मैं उनको नौकरी नहीं दिला सका। वे मेरे पास आये और कहने लगे कि पायलट साहब, हमें नौकरी दिलवाओ। दरअसल मैं उन लोगो को यहां से दूर बंगलौर भेजकर नौकरी दिलाना चाहता था ताकि वे देश के दूसरे हिस्से में आराम से रह सकें और कुछ नया सीखें। नौकरी न मिलने की सूरत में वे कहने लगे कि आप जल्दी करवाइये क्योंकि हमारी उंगली फड़क रही है। उन्होंने मुझे यह सब उर्दू में कहा था और साथ में बोले कि उन लोगों को बंदूक चलाने की आदत पड़ गई है। मेरा कहने का मतलब यह है कि उन लोगों के मन में ऐसी फीलिंग्ज थीं। जम्मू कश्मीर सरकार के पास ऐसे दो-ढाई हजार लोगों की पूरी लिस्ट है जिन्होंने सरंडर किया था। अब किसी न किसी तरीके से उनकी मदद की जा रही है और मीगर अमाउंट दिया जा रहा है। मैं चाहूंगा कि माननीय गृह मंत्री वह फाइल मंगवा लें और उन लोगो के लिये कुछ ऐसा करें ताकि वे दुबारा गलत रास्ते पर न जायें। उनके लिये एम्पलायमेंट का कोई रास्ता निकाल दें ताकि वे गलत रास्ते पर न जा सकें।
सभापति महोदय, मेरा दूसरा सुझाव यह है कि जब तक कश्मीर के माइग्रेंट्स वापस नहीं जायेंगे, हम दुनिया में कितना ही शोर क्यों न मचायें, कश्मीर में नार्मैल्सी नहीं आ सकती। वहां से ५०-६० हजार परिवार निकाले गये हैं। जब तक ये वहां नहीं जायेंगे, नार्मैल्सी नहीं आ सकती। मैं चाहता था कि डिफेंस और होम मनिस्ट्री के बजट में ऐसा एलोकेशन कर दें , श्रीनगर में बादामी बाग ऐरिया में उन माइग्रेंट्स के लिये क्वार्टर बना दें ताकि उनका सरकार के प्रति कांफिडेंस पैदा हो सके। वे अभी गांवों में नहीं जायेगे। जो छटीसिंहपुरा में इंसीडेंट हुआ है, उससे वे गांव में वापस नहीं जायेंगे लेकिन अगर बादामी बाग कंटोनमेंट एरिया जैसे सेफ प्लेस में उन्हें ऱख दिया जाये तो ठीक रहेगा। वहां से उन लोगों को आहिस्ता-आहिस्ता गांवों में भेजा जाये। जब ये लोग गांवों में चले जायें तो वे मकान मलिट्री के काम आ जायेंगे।
फिर उन्हें सैपरेट फैमिली क्वार्टर्स में बदल सकते हैं। हमारा पैसा भी बर्बाद नहीं जायेगा। यह हमारा सुझाव है, उस पर सरकार क्या कर रही है, कहां तक पहुंची है। इसके अलावा हमने हर डिस्टि्रक्ट हैडक्वार्टर पर एक कैन्टोनमैंट की प्लानिंग की थी जो खासकर हम डोडा एरिया में चाहते थे। उसके लिए पैसा भी सैंक्शन था, प्लानिंग से भी निकाला गया था। डोडा में कैन्टोनमैंट बहुत जरूरी है। मेरी खबर है कि काम कहीं चालू हुआ है। यह देश के हित में भी है, इलाके के हित में भी है और फौज के हित में भी होगा। हमने यह प्लान भी बनाया था कि वहां हमारी फौज के परिवार भी रहेंगे तो उससे वहां एक संतुलन बना रहेगा। उस विषय पर सरकार क्या कर रही है।
सभापति महोदय, अगली बात मैं कश्मीर के बारे में कहना चाहता हूं जो राज्य सरकार से डेवलपमैंट कोऑर्डीनेशन और राज्य सरकार की स्कीम का मामला है। मैं जानता हूं कि यह प्रांत की बात है। वहां चुनी हुई सरकार है अत: गृह मंत्रालय वहां ज्यादा इंटरफियर नहीं कर सकता है। लेकिन जब तक आप वहां विकास नहीं लायेंगे, गृह मंत्रालय वहां कुछ नहीं कर पायेगा। जब वहां विकास आ जायेगा तो लोगों में एक भावना पैदा हो जायेगी कि उनके इलाके और उनके भले की बात हो रही है और वे लोग आगे बढ़कर आपको सपोर्ट करेंगे, समर्थन करेंगे। इसलिए मेरी प्रार्थना है कि डेवलपमैंट स्कीम्स का जिन तरीकों से भी काम हो सकता है, उनमें आप कोऑर्डीनेट करें।
सभापति महोदय, हमारे देश का एक दूसरा भाग नॉर्थ ईस्ट है। अभी हमारे एक भाई नियम ३७७ के अधीन वहां का मामला उठा रहे थे। नार्थ ईस्ट की एक बहुत पुरानी और लम्बी तकलीफ चली आ रही है - यह आज की बात नहीं है, उसमें कुछ शुरूआत हुई थी, मुझे पता है। नागा टाक्स किस स्टेज पर हैं, यह गृह मंत्री जी सदन को जरूर बतायें। आज दो साल हो गये हैं। वहां एक अच्छी शुरूआत हुई थी और मुझे खुशी है कि खपलान ग्रुप ने ऑफर किया है, पता नहीं उसका एन.एस.सी.एन.आई. पर क्या फर्क पड़ा है। आइजैक मूबा ग्रुप उसे मान रहा है या नहीं मान रहा है, उस पर गृह मंत्रालय का क्या विचार है। अगर ये दोनो ग्रुप बैठा दिये जाएं और नगालैंड में शांति आ जाए तो सारे नॉर्थ ईस्ट को एक शांति की लहर मिलेगी, चूंकि सारी बुनियाद यही है।
सभापति महोदय, मैं कई बार बता चूका हूं कि बंगला देश के कॉक्स बाजार जैसी जगह पर सभी आम्र्स डम्प होते हैं, वहां समुद्र का किनारा है जहां से ये कॉक्स बाजार से होते हुए त्रिपुरा, मिजोरम, मणिपुर और आसाम तक जाते हैं। हमें खबर है कि अब एन.एस.सी.आई. अपने इलाके के लिए ही नहीं और भी मलिटेन्ट्स आउटफिट्स के लिए आम्र्स खरीदती है। इससे उन्हें पैसा मिलता है, इसलिए यह उनका बिजनेस हो गया है। क्या सरकार नागा टाक्स में किसी हद तक पहुंची है, यदि पहुंची है तो इन ट्रैक्स पर क्या रिस्टि्रक्शंस लगाई हैं, क्योंकि इसमें हमारे कई जवान खो चुके हैं, पिछले दो-तीन महीनो में जैसी अखबारों में रिपोट्र्स हैं। इसलिए नागा टाक्स पर क्या प्रोग्रेस है।
सभापति महोदय, दूसरा मुद्दा बोड़ो का है। हमारे बोड़ोलैंड के भाई कहते हैं कि एक काउंसिल बनाई थी, उनकी बोड़ोलैंड की मांग थी। हमने कहा कि काउंसिल के द्वारा डेवलपमैंट का काम करो, विकास करो और उसके बाद अपने इलाके को अपने हाथों से इंडिपेंडेन्ट ऑटोनोमस बनाया जाए, जिससे उनमें एक कान्फीडेन्स आये। लेकिन दुख के साथ कहना पड़ता है और उसमें मैं भी उतना ही भागी हूं कि यह प्रयोग उतना सफल नहीं हो पाया। यह गृह मंत्रालय और आसाम गवर्नमैंट के बीच में अटक गया। कल मुझे एक ऑर्डर दिखला रहे थे जिसमें ए.जी.पी. के दूसरे मैम्बर्स, एम.एल.एज., वगैरह नोमिनेट कर दिये हैं और बोड़ो कोंसिल वाले वहां पर कम है। उससे लोगों में एक दूसरी फीलिंग्स जायेगी। मैंने अखबार में पढ़ा कि बोड़ो ने बात करने की कोशिश की है तो उसमें इस बात का जरूर विचार करे, चूंकि आसाम में उल्फा और बोड़ो दोनो के कम्बीनेशन से सारा आसाम खराब होता है। इसलिए मेरी प्रार्थना है कि बोड़ो से पीस टाक्स को जारी रखें और उसका कोई समाधान करके इस इलाके में शांति लाने की कोशिश करें।
जहां तक नॉर्थ ईस्ट के विकास की बात है, मैं समझता हूं कि इसके बारे में कई बार जिक्र हो चुका है। ये पांच-सात हमारी ऐसी स्टेट्स हैं जो बहुत सैंसटिव है, लेकिन वे विकास में पीछे रही है। अब एक शुरूआत हुई है और अच्छी शुरूआत हुई है। वहां एक्स प्राइम मनिस्टर गौड़ा जी गये थे, उससे पहले राजीव जी गये थे। उन्होंने अलग से नॉर्थ ईस्ट काउंसिल बनाकर एक शुरूआत की थी और उन्हें एक इंडिपेंडेंट आर्गेनाइजेशन बनाकर, उनके ऊपर ही सारे फैसले छोड़े थे। मेरी प्रार्थना है कि उसमें रोड्स और रेलवेज पर भी विचार करें। कहीं-कहीं रोड्स और रेलवे के कनेक्शंस नहीं हैं। अभी श्री सोमनाथ चटर्जी कह रहे थे कि पहले वहां एयर कनेक्शन ज्यादा थे। वे एयर कनेक्शंस दोबारा रिवाइव किये जाए, क्योंकि यही एक सहारा उन कैपिटल्स को जोड़ने का है।
सभापति महोदय, मैं एक बात सी.पी.एम.एफ., सैंट्रल पैरा मलिट्री फोर्सेज की अकोमोडेशन की भूल गया। इनकी अकोमोडेशन की बहुत दिनों से चर्चा चल रही है और उन्होंने एक हजार करोड़ रुपए का प्रोजेक्ट कई बार दिया। आपने उन्हें अपनी मनिस्ट्री की तरफ से ६४ करोड़ अलॉट किये हैं। प्रोजेक्ट एक हजार करोड़ की हो और आप उसमें ६४ करोड़ अलॉट करें तो यह एक बहुत ही मामूली सम है।
सभापति महोदय, ज्यादातर हर स्टेट में, नार्थ-ईस्ट में, जो सेंटर्स खुल रहे हैं, उनको देखकर आप प्रायर्टी देकर काम करें। स्टेट रीआर्गेनाईजेशन की हर प्रदेश में कुछ मांग हो रही है। यू.पी. और बिहार की मांग सबके सामने है। हम लोग महाराष्ट्र गए वहां भी यह मांग थी। हम आसाम में गए वहां भी बोडोलैंड की मांग थी। राज्यों के पुनर्गठन के बारे में कई बार बहस हुई है। उसके ऊपर एक कमेटी भी बैठी, लेकिन कोई निर्णय नहीं हुआ। जब इन बातों को देखते और अखबारों में पढ़ते हैं, तो इससे हमारे फैडरल सिस्टम की जो शक्ति है वह कम होती है। उनकी भावनाओं को ध्यान में रखते हुए इस बारे में एक निर्णय करना चाहिए जिससे राज्यों के पुनर्गठन के बारे में निर्णय हो सके और रोजाना के झगड़े बन्द हों और जो हम एक-दूसरे के खिलाफ बोलते हैं और उससे देश की जनता का जो नुकसान होता है, वह भी बन्द हो जाएगा। मुझे उम्मीद है कि जो रिपोर्ट आई है या आगे के लिए भी सरकार जो सोचे, उसे अंतिम निर्णय के रूप में स्वीकार करे ताकि रोजाना के झगड़े बन्द हों।
सभापति महोदय, सी.आर.पी.एफ. ग्रुप सेंटर सिलचर के बारे में एक बार बात चली थी, लेकिन अंतिम निर्णय नहीं हुआ। उसमें त्रिपुरा और आसाम दोनों का हिस्सा है। मैं अंतिम बात कहकर अपनी बात समाप्त करना चाहता हूं. गृह मंत्रालय ऐतबार है और जब ऐतबार खत्म हो जाता है, तो देश में कमजोरी आ जाती है। मुझे उम्मीद है कि अडवाणी जी सीनियर और सीजंड हैं, उन्हें देश के बारे में पता भी है। आज देश देख रहा है। कुछ ऐसी समस्याएं हैं जिनके बारे में कठोर निर्णय करना है और उन कठोर निर्णयों को करने में कोताही नहीं बरतनी चाहिए और देश का मनोबल ऊंचा तथा मजबूत बना रहना चाहिए।
अध्यक्ष महोदय, जैसा मैंने शुरू में कहा, बीमारी को शुरू से ही जड़ से काट देना चाहिए। यदि बीमारी को शुरू में ही काट दिया जाएगा, तो वह कैंसर में तब्दील नहीं होगी। सिंघल साहब को दोष देने की जरूरत नहीं है। आज आप में से कोई नहीं बोलेगा, लेकिन परसों हमारे यहां से कोई बोल देगा और फिर आपके यहां से कोई बोलेगा, फिर झगड़ा शुरू होगा। आपके एन.डी.ए. का मैनीफैस्टो है, उसका प्रोग्राम है। नहीं तो क्या होगा कि कोई एक बयान कोचीन से, बंगलौर से और मद्रास से आएगा और एक नई बीमारी शुरू हो जाएगी।
मुझे उम्मीद है कि गृह मंत्री महोदय, इन बातों पर ध्यान देंगे। इन्हीं शब्दों के साथ मैं अपनी बात समाप्त करता हूं।
CUT MOTIONS डॉ. मदन प्रसाद जायसवाल (बेतिया): माननीय सभापति महोदय, गृह मंत्रालय के बजट वर्ष २०००-२००१ के पक्ष में बोलने के लिए मैं खड़ा हुआ हूं। गृह मंत्री के रूप में माननीय आडवाणी जी हैं। एन.डी.ए. की सरकार माननीय अटल बिहारी वाजपेयी जी के नेतृत्व में चल रही है। जब राजेश पायलट जी बोल रहे थे, तो मैं सोच रहा था कि वे हमारे भू.पू. गृह मंत्री रहे हैं इसलिए कुछ ऐसी बातों का उदाहरण अवश्य देंगे, जो इस सरकार की उपलब्धियों की ओर इंगित करेगी। मैं सबसे पहले तो माननीय प्रधान मंत्री जी और गृह मीं जी को बधाई देना चाहता हूं क्योंकि उनके आने के बाद दंगे बहुत कम हुए हैं। इसमें मैं किसी को दोष नहीं देना चाहता हूं, लेकिन यह सत्य है कि पूर्व में जितने दंगे होते थे, उनसे एन.डी.ए.की सरकार के शासन में कम दंगे हुए हैं। मेरे पास आंकड़े हैं। मैं उसके बारे में आंकड़े दे सकता हूं। जब से माननीय प्रधान मंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार बनी है, जब से माननीय आडवाणी जी गृह मंत्री बने हैं, तब से दंगों में भारी कमी आई है। मैं बहुत पुराने आंकड़े नहीं देना चाहता हूं। मैं १९९६ से आंकड़े दे रहा हूं। १९९६ में ७२८ दंगे हुए, २०९ लोग मारे गए और २०५७ घायल हुए। १९९७ में ७२५ दंगे हुए, २६४ लोग मारे गए, २५०३ लोग घायल हुए. १९९८ में ६२६ दंगे हुए, २०७ लोग मारे गए और २०६५ घायल हुए।
16.00 hrs. इसी दिसम्बर महीने मे यानी ६.१२.९९ को एक प्रश्न पूछा गया था कि वर्तमान वर्ष में कितने दंगे इस देश में हुए? वह आंकड़े मात्र १५ हैं। यह सबसे बड़ी उपलब्धि है। मैं सोच रहा था कि जब माननीय राजेश पायलट जी बोलेंगे तो दंगों में जो कमी आई है, उसका भी उल्लेख करेंगे। लेकिन आप लोगों के बीच में सबसे बड़ी परेशानी यह है कि श्री अटल बिहारी जी की सरकार में दंगें क्यों नहीं हो रहे। यही सबसे बड़ी परेशानी है। …( व्यवधान)
श्री रामदास आठवले (पंढरपुर) : दंगे करने वाले लोग ही इधर आ गये हैं। …( व्यवधान)
डा. मदन प्रसाद जायसवाल : आज जो सबसे बड़ी उपलब्धि है, उसका कहीं भी जिक्र नहीं है। जब देश आजाद हुआ था तो विरासत में हमें इस देश का बंटवारा मिला था। भारत और पाकिस्तान के रूप में दो देशों का बंटवारा हुआ। जब अंग्रेज यहां से गये तो विरासत में ऐसी बातें छोड़ गये जो देश के टुक़ड़े-टुकड़े कर देतीं। अगर उस समय के गृह मंत्री सरदार वल्लभ भाई पटेल न होते तो पता नहीं इस देश की क्या दुर्दशा होती। अंग्रेजों ने सारे रजवाड़ों को फ्री कर दिया कि वे चाहें तो पाकिस्तान में चले जायें, हिन्दुस्तान में चले जाये या इंडिपैंडेंट हो जायें।
मैं हैदराबाद के निजाम की बात करना चाहूंगा। उस समय के गृह मंत्री सरदार वल्लभ भाई पटेल ने अंग्रेजों द्वारा दिया गया चैलेंज स्वीकार किया। वे देश को जिस अवस्था में लाये, वह सबको मालूम है। आज हम उसका उदाहरण देते हैं। मैं किसी पर आरोप नहीं लगाना चाहता लेकिन पिछले ५० वर्षों में जिन लोगों का राज था, उन लोगों ने हमें विरासत मे क्या दिया? उन्होंने हमें आतंकवाद दिया। अल्पसंख्यकों की चर्चा मैं बाद में करूंगा लेकिन जब कश्मीर के अल्पसंख्यकों की बात आती है तो क्या ये अल्पसंख्यक हिन्दू नहीं हैं? क्या ये अल्पसंख्यक मुसलमान नहीं हैं, ईसाई नहीं हैं। कश्मीर में हमारे हिन्दू अल्पसंख्यक हैं, जबकि सब जगह हमारे मुसलमान भाई अल्पसंख्यक हैं, कहीं-कहीं ईसाई अल्पसंख्यक भी हैं। हमें आपके द्वारा आतंकवाद विरासत में मिला है।
नार्थ ईस्ट में आपने डेवलपमैंट के लिए कोई कार्रवाई नहीं की जिसका नतीजा यह हुआ कि हमें वहां इंसर्जैंसी मिली। राज्यों के बंटवारे हो गये। असम सात टुकड़ों में जरूर बंट गया लेकिन क्या आज पूर्वोत्तर क्षेत्र अशांत नहीं है? आज नेपाल के बॉर्डर पर जो घटनायें घट रही हैं, उस तरफ मैं माननीय गृह मंत्री जी का ध्यान आकृष्ट करना चाहूंगा क्योंकि मैं नेपाल के बॉर्डर क्षेत्र से आता हूं।
श्री लाल कृष्ण आडवाणी जी हमारे गृह मंत्री बने हैं। आप लोगों ने हमें विरासत में पिछले ५० वर्षों की व्यवस्था दी है। कश्मीर में हिन्दुओं का पलायन किसके समय में हुआ? जब वहां से हिन्दू भागे तब वहां किसका राज था? वहां से ब्राहमणों का पलायन किसके राज में हुआ? जब उनका पलायन हुआ और वे दिल्ली की सड़कों पर मारे-मारे फिरते थे तब किसी भी प्रधान मंत्री ने उनसे बात करने की हिम्मत नहीं की। उनके दुख दर्दों को सुनने के लिए, उनकी व्यवस्था करने के लिए कोई भी प्रधान मंत्री नहीं गया। वहां के ब्राहमण जो आज अपने घरों में नहीं लौट पाये, वह किनके राज में हुआ?
आज कश्मीर की बात हो रही है। राजेश पायलट जी ने डोडा की बात कर रहे थे। हम उनसे सहमत हैं कि डोडा में अवश्य कन्टोनमैंट खोला जाना चाहिए। मैं सोच रहा था कि आप इस घटना के बारे में भी जिक्र करेंगे, लेकिन आपने नहीं की। इसी १३ तारीख को डोडा में एक घटना घटी जिसमें ६ हिन्दू लड़कों को वहां की पुलिस पकड़कर ले गयी। उन्हें बंद करके रखा गया। जहां हिन्दुओं का वर्चस्व है, वहां कभी भी ऐसी घटना नहीं घटी। वहां ६ हिन्दुओं के गुप्तांगों को काट लिया गया। वे पुलिस के पदाधिकारी थे जिन्होनें ऐसा काम किया। मैं गृह मंत्री जी का ध्यान इस तरफ भी आकृष्ट करना चाहूंगा कि वहां के पुलिस अधिकारियों ने उनके गुप्तांगों को काट लिया।
उसको रोस्ट किया गया और रोस्ट करके उनके सामने खाया गया। उसमें एक व्यक्ति मर गया और पांच व्यक्ति आज भी अस्पताल में पड़े हुए हैं। क्या इस सदन में उसकी चर्चा नहीं होनी चाहिए, इसलिए कि वे हिन्दू हैं? उन हिन्दुओं के साथ घटना घटी है, इसलिए आप नहीं बोलेंगे। यदि मुसलमान के साथ, ईसाई के साथ घटना घटे तो हमें भी दुख होता है।
कुंवर अखिलेश सिंह (महाराजगंज, उ.प्र.) : इसके लिए कौन जिम्मेदार है, वहां आप की ही सरकार है।
डॉ. मदन प्रसाद जायसवाल : जिस समय प्रभुनाथ सिंह जी ने और हम लोगों ने यह प्रश्न उठाया कि बिहार में राजनैतिक हत्याएं हो रही हैं, तो आपने कहा कि यह प्रदेश का मामला है। वधि व्यवस्था प्रदेश का मामला है, यह आप मत उठाइये। जब उस प्रदेश में वधि व्यवस्था के बारे में, वहां की पुलिस द्वारा की गई कार्रवाई की बात मैं कर रहा हूं तो आप कह रहे हैं कि गृह मंत्री को कहिये। क्या वधि व्यवस्था गृह मंत्रालय के हाथ में है। यह राज्यों की व्यवस्था है, इसलिए गृह मंत्रालय…( व्यवधान)
कुंवर अखिलेश सिंह : इसको आप देखिये। जम्मू कश्मीर की जो सरकार है, उसके आपका ही समर्थन प्राप्त है। …( व्यवधान)
डॉ. मदन प्रसाद जायसवाल : मैं यील्ड नहीं कर रहा हूं।
सभापति महोदय : अखिलेश सिंह जी, बैठिये। मैंने आपको इजाजत नहीं दी है, कृपा करके आसन ग्रहण कीजिए। …( व्यवधान)
श्री प्रवीण राष्ट्रपाल (पाटन) : वहां की बात भी होनी चाहिए, सभी हत्याओं की बात होनी चाहिए।
डॉ. मदन प्रसाद जायसवाल : मैं गृह मंत्री जी का ध्यान इसलिए आकर्षित करना चाहता था कि इसकी जांच होनी चाहिए और जो पुलिस के पदाधिकारी उनको पकड़कर ले गये थे, जिन लोगों ने इस तरह का इनहयूमन काम किया है, यह पाकिस्तान की तरह काम हुआ है। कारगिल के युद्ध में जब हमारा एक मिग विमान गिराया गया तो हमारे एक पायलट के साथ भी इसी तरह की व्यवस्था की गई। उसके गुप्तांग भी काटे गये, उसे जीवित मारा गया। उसी तरह की घटना कश्मीर की पुलिस छ: हिन्दुओं के लड़कों के साथ करे, यह जांच का विषय है। मैं आज माननीय गृह मंत्री जी से मांग कर रहा हूं कि इस विषय को लेकर जांच करें और दो दोषी पदाधिकारी हैं, उन्हें उचित सजा मिलनी चाहिए, उन्हें भारी से भारी सजा इसके लिए मिलनी चाहिए। यह इतनी बड़ी दुर्भाग्यपूर्ण घटना है, जिसके बारे में मैं सोच रहा था कि माननीय पायलट जी इसकी भी चर्चा करेंगे। कश्मीर की चर्चा मैं भी शुरू करना चाहता हूं। पायलट जी, कश्मीर में हमारी पार्टी का बलिदान है। डा. श्यामा प्रसाद मुकर्जी को हम लोगों ने कश्मीर में खोया है। इस सदन में हम दो थे, आज दो से बढ़कर यह स्थिति हो गई कि माननीय अटल बिहारी वाजपेयी प्रधान मंत्री और माननीय आडवाणी जी हमारे गृह मंत्री हैं। आपको इस बारे में सोचना चाहिए कि हम दो से बढ़े हैं। आपको अपनी गलतियों की तरफ देखना चाहिए कि आप लोगों ने कहां गलतियां की हैं और आपने हमें कहां से कहां लाया है। हमारी पार्टी ने डा. श्यामा प्रसाद मुकर्जी के रूप में उस जगह पर बलिदान दिया है। उस समय जब हमने यह कहा कि एक विधान, एक निशान और एक प्रधान हमारा नारा है, उस समय दो संविधान चलते थे, दो प्रधान मंत्री हुआ करते थे, दो झंडे हुआ करते थे। हमारे डा. श्यामा प्रसाद मुकर्जी का बलिदान है, कश्मीर को लेकर। आज कश्मीर को लेकर जो बात हुई है, उसमें आज कश्मीर और पूरे देश में आई.एस.आई. का जाल बिछा हुआ है। आज आई.एस.आई. की तरफ से जो घटनाएं घट रही हैं, उसके बारे में भी मैं कुछ कहना चाहूंगा, लेकिन आज हिन्दू अल्पसंख्यकों की बात मैं कर रहा हूं। केवल कश्मीर की बात मैं नहीं करना चाहता, मैं उन स्थानों की बात करना चाहता हूं, जहां पर हिन्दू सही मायनों में गांवों में जहां वे अल्पसंख्यक के रूप में हैं, उन स्थानों पर, जब मैं बिहार विधान सभा में विधायक था तो चम्पारन के ढाका के स्थान पर मैं जांच करने के लिए गया था। वहां मुस्लिम आबादी है, केवल सात घर नोनिया परिवार के हैं, जो अति पिछड़ी जातियों में आते हैं, जो नमक बनाने वाली जाति होती है, उसको नोनिया कहा जाता है। उन सात परिवारों ने होली के समय होली गाई और होलिका का दहन किया। उसकी एवज में वहां के दूसरे वर्ग के लोगों ने उनके घरों में आग लगा दी और उन्हें आग में जीवित फेंक दिया गया। यह किसके साथ घटना घटी है, इसके बारे में आप कहीं कोई चर्चा नहीं करिएगा ?
अभी हाल ही में पूर्णिया जिले में संथालों के साथ घटना घटी। वहां जहां मुस्लिम बाहुल्य क्षेत्र है, करीब १२ संथालों के घरों को जला कर उन्हें भी उसमें जीवित फेंक दिया गया। मैं केवल कश्मीर के हिन्दू अल्पसंख्यकों की बात नहीं कर रहा हूं, अन्य जगह भी हिन्दू अल्पसंख्यक हैं। लेकिन ऐसी घटनाएं वहां नहीं घटती हैं जहां हिन्दू ९० प्रतिशत और मुस्लिम भाई दस प्रतिशत होते हैं।
इंडिया इंटरनेशनल सेंटर में हमारे एक मित्र हैं। वे सेमिनार आयोजित करने में बड़े माहिर हैं। उन्होंने एक सेमिनार आयोजित किया। भारतीय जनता पार्टी के सांसद होने के नाते मुझे भी उसमें बुलाया। उन्होंने कहा कि आप भी इसमें भाग लें। उसका विषय था -‘Secularism in India, its meaning, its importance and its relevance’. इस विषय को लेकर जमाते इस्लामिक और अन्य मुस्लिम संगठनों के लोगों ने भी अपने विचार व्यक्त किए। जब मेरी बारी आई तो मैंने कहा कि यह पूरी चर्चा ही बेमानी है। जब तक इस देश में हिन्दू बहुसंख्यक रहेगा, यह देश सेक्युलर रहेगा। इसको धर्म निरपेक्षता से कोई नहीं हटा सकता है। यह सारी चर्चा धर्म निरपेक्षता पर की जा रही है, यह बेमानी है।
देश का बंटवारा क्यों हुआ। ऐसा नहीं था कि पाकिस्तान से हिन्दू लोगों को भगा दिया जाएगा, क्योंकि वहां मुसलमान मैजोरिटी में थे। जिन्ना साहब ने सोचा था कि हिन्दुस्तान में रहते हुए, जवाहर लाल नेहरू जी के रहते हुए वे कभी इस देश के प्रधान मंत्री या राष्ट्रपति नहीं बन पाएंगे, इसीलिए उन्होंने देश का बंटवारा करा कर पाकिस्तान को जन्म दिया। यह कभी विचारधारा नहीं थी कि वहां से हिन्दुओं को भगा दिया गया, यदि ऐसा होता तो यहां से मुसलमानों को भगा दिया गया होता। आजादी के बाद हमारे देश में मुसलमानों की संख्या दस गुना बढ़ी है। जबकि पाकिस्तान में जो हिन्दू थे, उनका क्या हुआ, वे कहां गए, कुछ पता नहीं है। इसलिए यदि इस देश में लोकतंत्र है तो वह हिन्दुओं की वजह से है, यदि इस देश में धर्म निरपेक्षता है तो वह हिन्दुओं की वजह से है। जबकि ऐसा नहीं होने पर हमारी बगल में ही दो देश पाकिस्तान और बंगला देश बन गए।…( व्यवधान) मैं कह रहा हूं, मेरी बात सुन लीजिए।…( व्यवधान)
सभापति महोदय, मुझे आपका संरक्षण चाहिए।…( व्यवधान)
श्री जे.एस. बराड़ (फरीदकोट) : सभापति महोदय, मेरा व्यवस्था का प्रश्न है। माननीय सदस्य यह फरमा रहे हैं कि लोकतंत्र और धर्म निरपेक्षता केवल हिन्दुओं की वजह से इस देश में कायम है। यह ठीक है कि उनका इसमें योगदान है, लेकिन जो अल्पसंख्यक हैं, उनका भी योगदान है, जो उन्होंने इसको बरकरार रखा है इसलिए इनके ये रिमार्क एक्सपंज होने चाहिए।
सभापति महोदय : मैं देखूंगा।
डा. मदन प्रसाद जायसवाल : आज पाकिस्तान में क्या है। आज वह एक इस्लामिक राष्ट्र बन गया है। वहां लोकतंत्र नहीं है। जिस दिन यहां अटल बिहारी वाजपेयी जी प्रधान मंत्री पद की शपथ ले रहे थे, उस दिन पाकिस्तान में फौजी शासन कायम हो रहा था।
कुंवर अखिलेश सिंह : ये क्या समझाना चाहते हैं, ये पड़ौसी देश नेपाल के किनारे रहने वाले हैं। क्या उसी हिन्दू राष्ट्र की बात कर रहे हैं, जबकि वहां तो कई सौ साल तक राजशाही का राज रहा है।
डा. मदन प्रसाद जायसवाल : यह देश इसलिए लोकतांत्रिक और धर्म निरपेक्ष है कि यहां हिन्दू बहुसंख्या में हैं। बंगला देश जब आजाद हुआ १९७१ के युद्ध के बाद तो वहां के शेख मुजीबुर्रहमान ने कहा था कि उनका भी देश सेक्युलर होगा। लेकिन वहां क्या हुआ, बंगला देश भी इस्लामिक देश हो गया है। वहां की फौज ने एक बार प्रशासन में दखल दिया और शेख साहब मारे गए। जब तक इस देश में हिन्दू बहुमत में हैं, यह देश सेक्युलर और डेमोक्रेटिक रहेगा। जब पायलट जी बोल रहे थे, वे आई.एस.आई. की चर्चा कर रहे थे।
जो आई.एस.आई. की गतवधियां हैं, हमारे गृह मंत्री जी अवश्य चिंतित हैं। हम लोग भी प्रतीक्षा कर रहे हैं कि आई.एस.आई. पर श्वेत पत्र कब आएगा। हम उसे देखना चाहते हैं। मैं जिस क्षेत्र से आया हूं, वह नेपाल का बॉर्डर है। मेरे चुनाव में पाकिस्तान ने पांच सौ रुपये के नकली नोट चलाये। मेरे विरोधियों के द्वारा इतने नोट बांटे गये कि मुझे लगा कि मुझे हरा देने की पूरी व्यवस्था कर दी गई है। नेपाल के माध्यम से पांच सौ रुपये के इतने नोट पाकिस्तान से आ रहे हैं। आपका १९९३ का, जिस समय पायलट जी यहां के गृह मंत्री जी थे, मुम्बई में बम विस्फोट हुआ औऱ वह व्यक्ति इतने दिनों के बाद हमारे रक्सोल में पकड़ा गया। दाउद इब्राहिम के गिरोह के तीन व्यक्ति हमारे रक्सोल में पकड़े गये। इस पूरे इलाके में आई.एस.आई. का जाल बिछा हुआ है। मैं गृह मंत्री जी से मांग करता हूं कि आप बॉर्डर डैवलपमेंट की बात कर रहे हैं। क्या बॉर्डर डैवलपमेंट पाकिस्तान या बंगलादेश का होगा या बिहार का और उत्तर प्रदेश का वह इलाका जो नेपाल के साथ जुड़ा हुआ है, उस इलाके का भी बॉर्डर डैवलपमेंट होगा ? होना चाहिए। आज पिछले दस वर्षों में गृह मंत्रालय की कंसलटेटिव कमेटी की रिपोर्ट है, पिछले दस वर्षों में २९१५१ नागरिक आई.एस.आई. के द्वारा इस देश के मारे गये हैं। ५१०१ हमारे अर्ध सैनिक बल और सेना के बल के लोग मारे गये हैं। करीब २००० करोड़ रुपये की सम्पत्ति सरकारी और निजी सम्पत्तियों का नुकसान हुआ है। इस देश में ४६००० करोड़ रुपया बाढ़ और सड़कों के निर्माण पर खर्च हुआ है। १८५०० करोड़ रुपया हम उनके फेंसिंग औऱ काउंटर टेरेरिस्ट एक्टिविटीज पर खर्च किया है। यह पिछले दस वर्षों का ब्यौरा है। ५१९०० आर.डी.एक्स.इस देश में आई.एस.आई. के द्वारा लाया गया जिसमें मात्र ४५७५० कि.ग्रा. पकड़ा गया। पता नहीं यह टिप ऑफ दि आइस वर्ग है या क्या है। जिस तरह से इस देश में आर.डी.एक्स. आया, मैं उसके बारे में नहीं जाना चाहता। मैं इसके लिए किसी को दोषी भी नहीं बनाना चाहता ।
कुंवर अखिलेश सिंह : मंत्री जी को ही आरोपित कर रहे हैं। इनकी सेना बॉर्डर पर क्या कर रही है ?
डा. मदन प्रसाद जायसवाल : मैं उसको दोष नहीं देना चाहता। मुम्बई और कलकत्ता के बम विस्फोट में आर.डी.एक्स कहां से आया ? किस जहाज से लाया गया औऱ उस समय किनका राज था ? मैं आरोप भी नहीं लगाना चाहता औऱ न ही मैं उसमें जाना चाहता, लेकिन मैं इन बातों को रखना चाहता हूं। पिछले दस वर्षों में ७१२५ पाकिस्तानी और विदेशी इंफिल्टेटर्स इस देश में आ गये। यह सारी व्यवस्था आपने हमें विरासत में दी है। जो यह सरकार इस बात की वय्वस्था कर रही है और हमारे गृह मंत्री जी को जो विरासत में मिला है, इसका सारा निदान निकलेगा। बिहार पर आज चर्चा चल रही थी। सभापति महोदय, आप जब इधर होते हैं तो बेसी नाराज हो जाते हैं। आप जब वहां होते हैं तो सही मायने में निष्पक्ष हो जाते हैं।
सभापति महोदय : निष्पक्ष कुर्सी है।
डा. मदन प्रसाद जायसवाल : आज जब चर्चा चल रही थी तो प्रभुनाथ सिंह ने बूटनसिंह की हत्या के बारे में चर्चा की। पिछली लोक सभा में भी जब एक विधायक की हत्या की गई औऱ एक विधायक नहीं तीन विधायक बिहार के मारे गये और सभापति जी, उसमें से दो तो आपकी पार्टी के थे। आज अभी जो गुरुदास चर्टजी मारे गए। विजय सिंह सोये कांग्रेस के बारहवी लोक सभा के सदस्य रहे, वे बिहार में मारे गये। बृज बिहारी प्रसाद आपके मंत्री रहे हैं और बिजली मंत्री आप बिहार के थे औऱ उसके बाद बृज बिहारी प्रसाद बिहार के बिजली मंत्री हुए, वह मारे गये, देवेन्द्र दुबे मारे गये। पूर्णिया के सी.पी.एम. के विधायक अजीत सरकार मारे गये।
बिहार में जो घटनाएं घट रही हैं उस और मैं आडवाणी जी का ध्यान आकर्षित करना चाहूंगा और इन सब बातों को विधान सभा में उठाया जाता है तो वहां भी मार-पीट हो रही है। बिहार की ऐसी दुर्दशा हो रही है।... (व्यवधान) कभी-कभी मेरा सिर भी शर्म से झुक जाता है, जब मैं कहता हूं कि मैं बिहार का हूं।
महोदय, एक शोक प्रस्ताव आया थे कि इस पर जो भी घटनाएं घटीं, जिसका भी कसूर हो, किन यह बड़ी दुर्भाग्यपूर्ण घटना घटी है। मैं इस विषय में और कुछ नहीं कहना चाहता। इसमें कौन-कौन कसूरवार है, लेकिन बिहार में क्या हुआ। हमारे मंत्री जी यहां बैठे हुए हैं, उन पर हमला हुआ, जब यह अपने क्षेत्र में गए। यह अस्पताल में भर्ती हुए, वहां की पुलिस को कार्यवाही करनी चाहिए थी, उन्होंने नहीं की। गृह मंत्री जी ने बीएसएफ का प्लेन उनकी चकित्सा के लिए भेजा। उन्हें प्लेन से लाया गया और दिल्ली में उनकी चकित्सा हुई लेकिन आज तक उस आदमी को गिरफ्तार नहीं किया गया।
महोदय, जब प्रधानमंत्री जी खगड़िया गए थे, मैं भी गया था। विधान सभा के चुनाव में गया था और उसी समय शरद यादव जी और नीतीश कुमार जी दोनों हैलीकाप्टर से आए। जिस जगह पर भाषण देने के लिए गए हुए थे वहां लोगों ने उनके हैलीकाप्टर पर ईंट और पत्थर गिराए। वे लोग जीवित बच कर आ गए, लेकिन बिहार में पुलिस की कोई कार्यवाही नहीं हुई। बिहार में आज नेपाल के बार्डर पर क्या हो रहा है। उस बार्डर से आज आम्र्स की इतनी बड़ी एके ४७, पिस्तोल वहां से आ रहे हैं। मैं मंत्री जी से आग्रह करूंगा, देश की सुरक्षा को लेकर आईएसआई के एजेंटों द्वारा कराया जा रहा है और जब इस तरह की बात होती है तो मैं मंत्री जी से निवेदन करूंगा कि कृपया सुरक्षा को लेकर भी जो यह घटनाएं घटी हैं, पुलिस के द्वारा क्या कार्यवाही की गई, कम से कम इस बारे में भी हमें जानकारी मिलनी चाहिए। ... (व्यवधान) आपने कहा था कि वधि व्यवस्था राज्य का मसला है, इसे यहां नहीं उठाया जाना चाहिए। अब जब मैं इस विषय पर चर्चा कर रहा हूं।... (व्यवधान) मंत्री जी से मेरा अनुरोध है कि सुरक्षा को लेकर भी वह कार्यवाही करें। आज कोई भी सांसग, विधायक बिहार का सुरक्षित नहीं है। मैं खुद कोई सुरक्षा लेकर नहीं चलता। हमारे कुछ सांसद, विधायकों को जरूर सुरक्षा चाहिए, उन्हें सुरक्षा दी जानी चाहिए। जिस तरह बिहार में राजनीतिक हत्याएं हो रही हैं, यदि मंत्री जी हमारे ऊपर ध्यान नहीं देंगे तो किसी दिन और लोगों की भी हत्याएं होंगी। अभी हमारे विधान सभा के चुनाव में मेरे क्षेत्र में सात लोग मारे गए, बूथ केप्चर करने गए हुए थे, उसमें से एक आदमी ऐसा था, जो इंडिया मोस्ट वांटेड था। मैं पुलिस को बधाई देना चाहूंगा कि पुलिस ने तत्परता के साथ कार्यवाही की, बूथ लूटेरे केवल दो बूथ लूट पाए थे कि उन्हें पकड़ लिया। सैंट्रल पुलिस गई हुई थी, लेकिन यह घटना घटी। उसमें इंडिया मोस्ट वांटेड था, उसके ऊपर एक लाख रुपए का इनाम था। गुजरात, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल में उसके ऊपर केस थे। आज मैं सुरक्षा की बात कर रहा हूं।
सभापति महोदय, गृह मंत्रालय के अंतर्गत राजभाषा हिंदी भी है। जब देश आजाद हुआ और संविधान बना तो कहा गया कि हिंदी देश की राजभाषा होगी। लेकिन हिंदी की दुर्दशा को देखकर बहुत पीड़ा होती है। मैं माननीय गृह मंत्री जी से अनुरोध करूंगा कि हमारे जो सांसद अहिंदी भाषी क्षेत्रों से आते हैं उनके लिए हिंदी सिखाने की व्यवस्था की जाये जिससे हम उनके साथ विचारों का आदान-प्रदान हिंदी में कर सकें।
श्री अनिल बसु (आरामबाग) : आप भी तमिल सीखिये।
डा. मदन प्रसाद जायसवाल : हम सीखने के लिए तैयार हैं और मैं तो बंगला रिफ्यूजीज के साथ रहा हूं, इसलिए बंगला भी जानता हूं। सभापति महोदय, जम्मू-कश्मीर की बात चल रही थी। मैंने डोडा के बारे में बोला। पिछली जो घटनाएं घटी हैं उनसे पूरे सदन को चिंता है। अप्रैल ३०, १९९९ को masked gunmen raided the home of a Muslim trader, a suspected informer of the Kashmir Police in the frontier district of Kupwara and shot dead nine of his family members, including two women and a teenaged girl. On 29th June, 1999, suspected Kashmir separatists gunned down at least 15 Hindu migrant labourers in the village 70 kilometres south of Srinagar a day after the shooting of 18 Muslim villages belonging to three families. On 1st July, 1999, suspected Kashmir separatists gunned down nine Hindu villagers in another attack in Southern Kashmir. On 19th July, 1999, heavily armed Kashmir extremists, suspected to be the members of the banned Laskar-e-Toiba outfit, entered the Hindu-majority Lihota village in Doda district, 250 kilometres north of Jammu and killed 15 people. On 28th and 29th February, 2000, the militants had gunned down members of Hindu families. On 20th March, 2000, suspected Kashmir militants massacred 36 Sikhs.
३६ भाई हमारे वहां मारे गये। आज इन सब बातों को लेकर पूरा देश चिंतित है और मैं गृह मंत्रालय की मांगों का समर्थन करते हुए माननीय गृह मंत्री जी से अनुरोध करूंगा कि इन सारी व्यवस्थाओं को जिस तरह से माननीय सरदार पटेल ने उस समय सुधारा था, आज आप भी सुधारे, जो हमें कांग्रेस के लोगों द्वारा विरासत में मिली हैं।
SHRI NIKHILANANDA SAR (BURDWAN): Mr. Chairman Sir, I am sorry to express my inability to support the Demands for Grants moved by our hon. Home Minister.
Sir, the fate of this country largely depends upon the functioning of this Ministry. It is because there are so many wings under it. They are National Security, Internal Security, Central Police Forces, Centrally Administered Territories, Safety of Minorities, Rehabilitation, Repatriation, Official Language and other things stretching up to the Freedom Fighters’ pensions.
Now, we are to see the performance or the functioning of this Ministry. The entire country is just above volcano because the condition of the border areas evokes more and more anxiety.
It is not only so in the States facing Pakistan but also throughout the country, especially in the border areas of the North-Eastern States. The Nepal border touching Uttar Pradesh, Bihar, West Bengal, Bhutan and also the Bangladesh border are becoming tense. If there is good coordination among the State Police and the various Central Forces, then, we can achieve so many things.
Sir, you will be amazed to note that this morning only one of the hijackers, who hijacked the Indian Airlines Plane from Kathmandu, was arrested in West Bengal near the Bangladesh border. But there is lack of coordination. Here, I mean the inter-State relation. There are many such lacunae. Further, the Pakistan ISI agency is engaged in subversive activities throughout the country, especially in the northern border areas. It has already been mentioned that fake currency notes are being circulated and it is creating a lot of problems and more anxiety. Moreover, the situation in Punjab is especially becoming alarming.
In the internal sphere, we see that there is growing insurgency and ethnic conflicts in Assam, Tripura, Manipur, Nagaland and throughout the North-Eastern States. The imperialist agents are very much active in these areas. They are trying their level best to destabilise the entire nation. The Left extremists have increased their activities in different States from Bihar to Maharashtra including Orissa, Andhra Pradesh and Madhya Pradesh. The other subversive activities like caste clashes are also rampant in Bihar, Uttar Pradesh and Tamil Nadu. In this way, the entire national scene is not at all safe and clear. Besides all these things, there is another evil, mainly the communal violence, which is pushed through in a more calculated manner backed by the major party ruling at the Centre. That is a matter of great sorrow for us. The demands for the enactment of the Places of Worship Bill, the Declaration of Religious Cities etc. have been organised in a calculated way. This has been done mainly by the Sangh Parivar , especially the RSS, which our hon. Prime Minister has termed as his Athma, the soul. This is a grim reality which exists today.
The Home Ministry consists of mainly five wings. Out of them, the Central Police Forces and the Delhi Police are very important. What is their performance? We see that in the border areas, our Intelligence Bureau is so efficient that the foreign intruders captured our bases and started a permanent base there! To push them back, hundreds of martyrs had to lay down their lives. It happened last year. The Subramaniam Committee has already pointed out the deficiency in this matter.
Regarding the Delhi Police, the less said the better.
We know that modernisation to a large extent is taking place in Delhi Police. Seventeen new police stations have come up but still one lakh thirty and thousand cases are pending in the courts. Every year 20,000 cases are added to it. This is the position.
As far as deaths in police custody are concerned, in the whole country, Delhi is the highest. Common people in Delhi are shocked. Shri Advani had been praised and described as an `Iron Man’. Delhi Police is going on increasing his reputation as Home Minister. But what happened in Jamia Millia University a few days back? What was the performance of Police in students’ hostel, in university campus? What happened? Imam was also not spared. Delhi Police is not ready to spare even the Members of Parliament also. We have heard Shri Rajiv Pratap Rudi the other day about his vivid experience, his experience at the hands of Delhi Police.
I remember, in this connection, the activities of Shrimati Sushma Swaraj, the then Chief Minister. She used to pass through the streets of our National Capital at the dead of night. One gentleman asked her, "What was the reason?" Do you know what was the reply she gave? She replied that she followed medieval emperors to know the conditions of the people at the dead of night. She was true in her reply because not only she, it is her party which want to push not only Delhi to the medieval period but also the entire country to the medieval period. That is their target. Shrimati Sushma Swaraj nicely said it.
The Ministry conducts rehabilitation programme. What is the performance of the rehabilitation programme? What happened to the Kashmiri Pandits? Are they back in the Valley? Now, the target has been the Sikh community. Now, they are fleeing from Kashmir. The position is that the rehabilitation programme is a superb failure.
I want to say something about the role of Governors. What happened in this regime? What do we see regarding the selection and appointment of Governors? Now, what qualifications are required to become a Governor? Nothing! The only qualification is that he should be the staunch follower of the BJP. We have seen how one Governor appointed a person as Chief Minister, ignoring all the democratic principles. This took place in Bihar.
According to the Government, the Governor does not require any form of advice from the Council of Ministers. This type of functioning is going on in this regime. Sir, I would like to question. Is the Government serious in maintaining communal harmony? What is going on in the country? Their lieutenants in different organisations are shouting for Hindutva, leaving aside all the principles of secularism.
The minorities are gradually becoming panicky. The Muslims and the Christians are being made the targets of attack. We all know what happened at Surat, Dang, and Valsad and also near Agra only a few days back. You will be astonished to know that one MP belonging to the BJP had publicly supported the murderer of Dr. Graham Staines, the Australian Missionary who was burnt alive. … (Interruptions)
श्री अनन्त नायक (क्योंझर) : यह असत्य है, यह गलत बोल रहे हैं।…( व्यवधान)
SHRI NIKHILANANDA SAR: It has appeared in the newspapers.
Now, religious conversion is also taking place in the country.
Sir, I would like to draw the attention of the House as to how the bureaucrats of the Ministry of Home Affairs are functioning. We all know that the Standing Committees have been formed to go into the details about the functioning of different Ministries of the Government of India. All the officers are bound to supply the materials in order to satisfactorily answer the queries made by the hon. Members. But in the Standing Committee on Home Affairs, the officers have submitted misleading and confusing reports. I would request the hon. Home Minister to look into this matter, because they cannot mislead the Standing Committee, which functions as a mini-Parliament.
Then, we all realise the danger posed by the imperialist forces. The present Government is a mere tool in the hands of imperialists. We are being dictated by foreign powers. The WTO, the IMF and the World Bank are dictating our economic agenda. So, our country’s economic sovereignty is completely lost.
Sir, the common people are in turmoil and this Government is saying that dependence on Central Police forces is on the increase. What can the State Governments do? For example, let us take the case of Tripura. There is turmoil throughout the North-East and the only exception is Tripura, where there is a solidarity move of tribal and non-tribal people. The State of Tripura has international borders on three sides. When there is some trouble, how can a small State Government cope with the situation? They are pressing hard for sending more Central Police forces to the State, but the deployment of Central Police forces is very less in comparison to the need. So, in whatever way we look at, we are at a loss to understand the whole functioning of the Home Ministry. The dependence on the Central Police forces is increasing because the basic problems of the people are not being solved. Until and unless the miseries of the common people are not wiped out, more and more dependence on the Central Police forces will be there. At present, though there are State Governments, it seems that there is only one Government in the country and that is the Union Government. No doubt, more and more budget provision is required for this Ministry, but there is an increase of 40 per cent in the budget provision within a period of two years.
It will ultimately lead to a Police State. With these words of caution, I conclude my speech.
SHRI M.V.V.S. MURTHI (VISAKHAPATNAM): Mr. Chairman, Sir, I rise to support the Demands for Grants for Home Affairs. The present Minister of Home Affairs, Shri Advani, is rated as the strong man of India. We all agree that if this country is not being protected in his hands at the present juncture, none else can do this job. This is the message which the people from East to West, and from South to North convey. Today, I should say that the country is passing through a very critical stage. The root cause for any developmental work in the country is the internal security. Unless there is an absolute peace in internal security, this country cannot prosper.
What is happening in most of the States? Formerly, the ISI activities were only in the north. Now, these have travelled all the way to the South. We find them in Hyderabad, Bangalore and at other places. LTTE have travelled from South to North. The naxalite activity became a menace in the South. You see any of the States like Madhya Pradesh, Orissa, Andhra Pradesh and Maharashra today. Many of the legislators and Members of Parliament cannot go to their constituencies in Andhra Pradesh and Madhya Pradesh. Then, to what extent, today are we having this internal security? Most of the Ministers’ bungalows and legislators’ bungalows in their villages were blown off in Andhra Pradesh. A very valuable colleague of ours - former Home Minister, present Panchayat Minister - was killed by naxalites in Andhra Pradesh. The same fate occurred to another valuable Minister in Madhya Pradesh.
Then, what is the security? Where are we going? If these affairs continue like this, I am sure, we will be leading to a disaster and a grave situation. The internal security is to be the most important factor rather as compared to the other issues. If there is peace at home, the other things will move smoothly.
Sir, Mr. Advani is a very senior Member in politics and is a very valuable colleague of us. If this is not being controlled at his end, nobody else can do this job. Do not leave the menace of naxalism to the States. The Chief Ministers, day in and day out ask him to give this thing or that thing. Do not treat this matter as a law and order situation in the States. The law and order situation is different. It arises in a street corner. It arises somewhere in a village. This could be treated as a law and order situation, and any State Police can take action. If something goes wrong in a university, if something goes wrong in a cinema hall, and if something goes wrong in a market, he can control this law and order situation. But Police Stations have been blown off. The railway stations have been blown off. Telephone booths were blown off. The telephone exchanges were blown off. Unless this is controlled, we cannot see a developmental activity in this country. We cannot eradicate poverty. Poverty is one of the root causes. Perhaps these extremist activities, inter alia, unless you tackle them, unless you control this, you cannot eradicate poverty. Today, the youths are misled. They are all educated. They are going by the propaganda of these extremists and are joining the naxalite activities.
They are joining the Naxalite activities. They have no job or work to do. We are facing all these problems today.
The Central Para-military forces, like CRPF, etc. have to be trained properly. Day in and day out intensive training has to be given to them. These forces had been deployed in Andhra Pradesh, but they had committed some atrocities on the tribals there, so, immediately they had been withdrawn. If the police itself is resorting to these activities and committing atrocities on women how can we believe them and trust them?
Today, if you go to a police station, you will find that the police has become only a spectator. They have been provided with obsolete armoury and very poor training is given to them. The moment they see any Naxalite or even if they see a toy pistol they flee away from the scene. The Naxalites are taking all the arms and getting into the forests easily. This is a reality today. We have to tackle the situation on a very fast track. Intensive training is required and tackling these issues have to be taken over by the Central Government.
I would request the hon. Minister not to leave it to the States. If you say that the States will tackle the situation and that it is their problem to solve then, there will be nothing for the Central Government to solve. The police should be equipped with the latest armoury and given proper training, no matter whatever is the amount to be spent on this because internal security is the foremost important thing in this country to save this country from fragmentation.
All successful countries are having a very high internal security and peace. That is why these countries are developing in a planned manner. Our country has very rich mineral resources, talented personnel, pool of technical personnel and so on. If all of these is put together and if internal security is provided and protected then no country can beat us.
I would like to say on something of recent origin. Political adversaries are being eliminated in all the States. In the Zero Hour today this issue was raised by many of my colleagues. No one wants to see one's political adversary. There is no tolerance and this has also to be tackled keeping in view the internal security.
Our Intelligence Wings have to be made very effective. We have so many agencies like RAW, CBI, etc. But what is happening is that very freely fake currency is circulated in the country. We cannot go to the market with a Rs.500 currency note. No one accepts them. There are notice boards in some markets where it is stated that they do not accept Rs.500 notes. Recently, two days back, in a small village, Annaparthi, in Andhra Pradesh, hundred rupee fake notes worth Rs.2.2 crore were seized. If that is to be taken on a random basis, a parallel currency of fake notes is running in this country. Unless this problem is solved we cannot control the price rise in the country as everything is being inflated.
Sir, the hon. Home Minister knows all these things and I need not even mention all these things to him. He is a very seasoned, very reputed and a very senior politician, Minister and administrator in this country. I have been given to understand that the Home Ministry has asked for a 30 per cent increase in the Demands, but I would say that he should ask for 100 per cent extra Grants. There can be a cut in all other Grants but to maintain the internal security more Grants should be given to see that peace and tranquility is maintained in this country. Our people can do wonders if they live in peace and tranquility.
With these words, I support the Demands for Grants of the Ministry of Home Affairs.
श्री राम सागर रावत (बाराबंकी) : सभापति महोदय, मैं आपकी अनुमति से गृह मंत्रालय की चर्चा में भाग लेने के लिए खड़ा हुआ हूं।
गृह मंत्रालय, जिसका नाम लेने से सुरक्षा जैसी बात मन और मस्तिष्क में आती है, लेकिन आज क्या सुरक्षित है, लोग सुरक्षित हैं, महिलाएं सुरक्षित हैं, अल्पसंख्यक सुरक्षित हैं या सीमाएं सुरक्षित हैं, सुरक्षित क्या है ? एक तरीके से जिधर भी निगाह डालेंगे, सुरक्षा तो है ही नहीं, हर तरफ असुरक्षा दिखाई देगी।
आज चर्चा की शुरूआत में आदरणीय राजेश पायलट जी ने दलितों पर जो अत्याचार हुए हैं, उनके आंकड़े दिये हैं कि देश की परधि को देखते हुए पिछले वर्षों से बहुत बढ़े हैं। कोई भी ऐसा प्रदेश नहीं है, जहां पर दलितों पर अत्याचार और घटनाएं न बढ़ी हों। उत्तर प्रदेश, जहां बी.जे.पी. का राज है, वहां दलितों पर, चाहे सुरक्षा का सवाल हो, प्रत्येक जिला में असुरक्षा है। यहां तक है कि दूसरे प्रदेशों में तो घटना होती है तो उसकी रिपोर्ट लिखी जाती है, लेकिन उत्तर प्रदेश में अगर दलितों पर अत्याचार होता है, कोई घटना घटती है तो उसकी रिपोर्ट भी नहीं लिखी जाती। …( व्यवधान) मैं बता रहा हूं, आप जांच करवा लीजिए। मैं आंकड़े दे रहा हूं और घटना की चर्चा भी कर रहा हूं।
हमारे स्वयं के जनपद बाराबंकी में थाना दरियाबाद में १७ मार्च को एक शत्रोहन नाम का दलित, जो अपने खेत की रखवाली के लिए गया हुआ था, वहां के सवर्ण जाति के लोगों ने लाठी, बल्लम, फरसा लेकर उसके ऊपर हमला किया। ये तो दो घंटे में पता लगा लेंगे, गृह मंत्री हैं। उसकी हत्या करने के लिए उसके हाथ पैर काटकर कुंए में डाल दिये। जिस छप्पर के नीचे वह लेटा था, उसमें आग लगा दी और चौकी के लोग कहने लगे कि कोई बुझायेगा नहीं, आग को बुझाने भी नही दिया। वहां कई हजार लोग इकट्ठे हो गये। देखा गया तो कटी हुई उसकी डैड बॉडी कुंए से बरामद हुई। उसकी लड़की, उसका पुत्र शव परीक्षण में ले जाना चाहते थे, लेकिन उसको वहां नहीं जाने दिया गया। उसके बाद उसकी लड़की, लड़का सब दरियाबाद थाना गये। वे घटना की रिपोर्ट लिखवाना चाहते थे, लेकिन उनकी रिपोर्ट नहीं लिखी गई। उसने स्पेशल इन्क्वायरी में प्रार्थना-पत्र दिया, वह भी जाकर बाराबंकी में पहुंच गये। आज स्थिति यह है कि उसको धमकी भी मिली है। उसने गांव छोड़ दिया है। उसको कहा गया है कि तुमने इस बात को उठाने की हिम्मत कैसे की। मैं नहीं जानता कि उत्तर प्रदेश का जो पुलिस विभाग है, उसको वहां सुरक्षित रख पायेगा या नहीं रख पायेगा। यह स्थिति उत्तर प्रदेश की है।
सफदरजंग थाने में दलित महिला को पीटा गया, उसे नंगा करके घुमाया गया। ये घटनाएं तो हो ही रही हैं, लेकिन हम कहेंगे तो आप कहेंगे कि विषयान्तर जा रहे हैं। हमारे यहां ३,०९६ अनुसूचित जाति के जो मकान हैं, पिछले वर्ष, आपके जमाने में ही गये थे, वहां पर कोई भी ऐसा ब्लाक अधिकारी नहीं है, जिसने ५००० रुपये न लिये हों। उसके लिए लोगों ने थाने में मुकदमा लिखवाना चाहा तो थाने में मुकदमा नहीं लिखा गया। वहां के ब्लाक प्रमुख और हम स्वयं तहसील मुख्यालय पर धरने पर बैठे।
17.00 hrs. लेकिन अधिकारियों में कोई चेतना नहीं थी, ट्रांसफर भी नहीं किया गया। अभी वहां चुनाव हुए थे, कितने सांसद वहां से आए हैं, उनको पता है कि कैसे दलितों के नाम पर फर्जी एफिडेविट बनाए गए, कैसे इसे बनाने में लूट हुई। उत्तर प्रदेश का कोई भी सदस्य खड़े होकर कह दे कि इस प्रकार की लूट वहां नहीं हुई।
अभी आगरा में क्या हुआ। नेता विरोधी दल ने जिक्र किया था तो वाजपेयजी ने क्षमा मांगी थी, इससे काम नहीं चलेगा। यदि अल्पसंख्यकों के ऊपर हमले हो रहे हैं, उसका कारण आडवाणी जी आप हैं। चाहे मुसलमान हो, चाहे ईसाई हो, इसकी शुरूआत आपके यहां से हुई है। अभी पायलट जी ठीक कह रहे थे कि उकसा-उकसा कर बयान दिए जा रहे हैं। मैं कहना चाहता हूं चाहे पंजाबी हो, ईसाई हो, मुसलमान हो, सबको सुरक्षा मिलनी चाहिए। बकरीद के अवसर पर हमारे यहां असौरी गांव थाना कोठी में नमाज पढ़ने के लिए जमात खड़ी थी। वहां हैदर लड़के को तहसीलदार पकड़ कर ले गया, उसको नमाज भी नहीं पढ़ने दी। पूछा तो कहा गया कि तुम्हारे ३०० रुपए बकाया हैं। एक को मारो, दूसरे पर दहशत पैदा हो, ऐसी बात हो रही है। जब मैंने टेलीफोन किया कि क्या हो रहा है और फिर मैं थाने पहुंचा तो कहा कि छोड़ दिया जाएगा। जब छोड़ा गया तो कहा गया कि हमारा आदमी रुपए ले जा रहा था, उससे ले लिए, वापस नहीं किए इसलिए चालान कर दिया। मुसलमानों में, ईसाइयों में कहीं कोई सुरक्षा नहीं है। किस तरीके के भाषण हो रहे हैं, किस तरीके की राजनीति हो रही है इसलिए सभापति जी मैं आपसे कहना चाहता हूं कि जो असुरक्षित हैं, चाहे अल्पसंख्यक हों, महिलाएं हों, दलित हों, जितने आपके समय में ये असुरक्षित हुए हैं, पहले उतने कभी देखने को नहीं मिले।
१७.०३ बजे(डा. लक्ष्मी नारायण पाण्डेय पीठासीन हुए) मैं चौथी बार लोक सभा में आया हूं, तीन बार विधान सभा में रह चुका हूं। मैं विधान सभा की बात नहीं कर रहा, यह महिलाओं, दलितों और अल्पसंख्यकों की बात है। यह देश के पैमाने की बात है। क्या सुरक्षित है, यह कह पाना बड़ा मुश्किल है। एक तरीके से पूरे देश में अल्पसंख्यकों में असुरक्षा की भावना व्याप्त हो गयी है। सीमाओं की क्या हालत है। सीमाएं किस तरीके से हैं। अभी एक जहां के अपहरण की घटना का जिक्र नेता विरोधी दल ने किया। जब नाम ले लिया कि फलां-फलां लोग अपहरणकर्ता हैं, जो हमारी बहनों और भाइयों पर संगीन लिए खड़े थे, उनके परिवार वालों की पहचान हो गई थी तो सरकार क्यों नहीं उनको कह सकी कि इसका परिणाम बुरा होगा, जिससे आगे से कोई ऐसा काम करने की हिम्मत नहीं करता। चाहे कश्मीर हो या असम हो, वहां की सीमाएं असुरक्षित हैं। असम में किस तरीके से जातीयता के नाम पर तनाव पैदा हो रहा है। कोई भी दिशा बची नहीं है। इसलिए मैं कहूंगा कि आज केवल वोट लेने के लिए कह दिया कि हम सूबों का बंटवारा कर देंगे। लोग सूखे से मर रहे हैं, उनका इंतजाम नहीं हो रहा है, किसान कमजोर होता जा रहा है, पानी नहीं दे पा रहे हैं और ये सूबे बांटने चले हैं। सूबे बांटने में कितना पैसा लगेगा, क्या इसके बारे में कभी सोचा है। इससे पहले जहां जिले बांटे थे, क्या वहां कमिश्नर ने सारे आफस बना दिए हैं, तो सूबे बांटने से कितना पैसा खर्च होगा, यह नहीं सोचा। आपकी इसमें कोई दिलचस्पी नहीं है। केवल बंटवारा करना चाहते हैं जिससे वोट मिल जाएं। राज्यों का पुनर्गठन किस तरीके से होगा, वहां अफसरों के कार्यालय कैसे बनेंगे।
उनका रख-रखाव कैसे होगा ? उस पर कितना खर्च आ रहा है ? उसके बारे में इस सरकार की कोई सोच नही हैं। जाति, धर्म और सूबे के बंटवारे के नाम पर राजनीति चल रही है। आप क्या करना चाहते है? आप कितना बंटवारा करना चाहते हैं ? जो बंटवारे की नीति है, आमने-सामने करने की नीति है, यह देश के लिए बहुत शर्मनाक और खतरनाक है। अगर सरकार का यही रवैया रहा तो जो पैसा किसानों पर औऱ दलितों पर उन्हें समाज के हालत सुधार होने के लिए लगाना चाहिए, जो पैसा सूखा राहत कार्य में लगाना चाहिए, सरकार वह नहीं कर पाएगी। केवल ओट की रोटी सेंकने का काम करेगी। भाषा के नाम पर भारतीय जनता पार्टी बड़े लम्बे समय से नारा लगाती आ रही थी लेकिन जब अवसर आया तो प्रधान मंत्री जी तक को रोकना पड़ रहा है कि आप भारतीय भाषा, हिन्दी भाषा में बोलें। आडवाणी जी को मैं सुन रहा हूं, जितनी हिन्दी आती है, उतनी अंग्रेजी आती है लेकिन अंग्रेजी बहुत पसन्द है। इनके बहुत से ऐसे मंत्री हैं जो हिन्दी जानते हैं लेकिन अंग्रेजी में बोलते हैं। हम जानना चाहते हैं कि सरकार की भाषा के बारे में क्या नीति है ? देश में खास तौर से, दलितों पर, अल्पसंखेयकों पर जो असुरक्षा बनी है, यह सरकार की जिम्मेदारी है। मैं उस जिम्मेदारी का एहसास कराते हुए अपेक्षा करता हूं कि सरकार के रवैये में परिवर्तन होगा और सरकार देश के लिए सही दिशा में काम करेगी।
श्री राजेश पायलट : माननीय सदस्य ने आज दो घटनाओं का जिक्र हाउस में कर दिया जो हाउस के रिकार्ड में रहेंगी। एक घटना में तो एक हरिजन के हाथ पैर काट दिये गये और दूसरी घटना में एक वीकर सैक्शन की महिला को नंगा करके परेड कराई गई। मैं गृह मंत्री जी से प्रार्थना करूंगा कि दोनों घटनाओं की रिपोर्ट पार्लियामेंट मे जरूर पेश करें जब भी रिपोर्ट आए जिससे देश को पता पड़े कि घटनाएं सच्ची हैं और यदि घटनाएं सच्ची हैं तो उन पर क्या एक्शन हुआ ?
डा. जसवंतसिंह यादव (अलवर) : आपके दौसा में एक जनजाति की महिला को नंगा करके घुमाया गया। उसकी भी रिपोर्ट मंगवाइए।
MR. CHAIRMAN : No, I am not allowing you.
गृह मंत्री (श्री लाल कृष्ण आडवाणी) : वह घटना कहां की थी ? क्या पहली घटना बाराबंकी की थी ? दूसरी कहां की घटना थी ?
सभापति महोदय : स्थान का नाम बता दीजिए।
श्री रामसागर रावत : दलित के बारे में मैंने जिस घटना का जिक्र किया है, वह थानादरियाबाद ग्राम रानीगाय है और जो आदमी प्रभावित हुआ है, वह थाने का चौकीदार शत्रोहण नाम का है। जो दलित महिला का मैंने जिक्र किया, वह सफदरगंज थाने की बात बताई है। मैंने दोनों घटनाओं का जिक्र कर दिया है। दोनों घटनाएं बाराबंकी की हैं।
श्री लाल मुनी चौबे (बक्सर) : सभापति महोदय, जब-जब देश संकट की घड़ी में फंसता है तो पटेल की याद आ जाती है और पटेल की दूरदर्शति की प्रति छाया मस्तिष्क की धमनियों में दौड़ने लगती है। पटेल की द्ृष्टि भविष्य के प्राचीर को भेद कर दूर तक देखती थी। उसका परिणाम हुआ कि हैदराबाद, तिब्बत और जम्मू-काश्मीर। हैदराबाद तो पटेल ने सुलझा लिया, लेकिन जब जम्मू-काश्मीर और तिब्बत की तरफ बढ़े तो राजनीतिक अड़ंगा हिमालय की तरह खड़ा हो गया और इस देश को हमेशा-हमेशा के लिए संकट के घेरे में घेर दिया। जम्मू-काश्मीर और तिब्बत, अगर पटेल की बात मानी गई होती, तो आज हमारी जो दुर्दशा नार्थ-ईस्ट, जम्मू-काश्मीर में हो रही है, जो घूसपैठिये भारत में घूस रहे हैं वह नहीं होती। ... (व्यवधान)
MR. CHAIRMAN : He is not yielding. Please resume your seat.
… (Interruptions)
श्री लाल मुनी चौबे : मैंने आपको गाली तो नहीं दी, किसी असंसदीय शब्द का प्रयोग नहीं किया है।
सभापति महोदय : आप उनकी बात का उत्तर मत दीजिए, आप इधर देख कर बोलिए।
श्री लाल मुनी चौबे : महोदय, कारगिल का युद्ध हुआ। बहुत बड़ा हादसा हुआ, जब अटल जी लाहौर पहुंचे।... (व्यवधान) ये पटेल के बारे में सुनना नहीं चाहते, पटेल इनके दुश्मन नम्बर एक हैं।... (व्यवधान) आप बैठिए।
SHRI PAWAN KUMAR BANSAL (CHANDIGARH): Sir, he is nobody to tell me like this. … (Interruptions) आपके कहने से कभी नहीं बैठेंगे।
MR. CHAIRMAN : I am regulating the House. Shri Chaubey may please continue and address the Chair.
श्री पवन कुमार बंसल : इनको मालूम होना चाहिए कि पार्लियामेंट में बात कैसे की जाती है।
सभापति महोदय : चौबे जी, आप भी संयम में रह कर बोलिए।
श्री लाल मुनी चौबे : महोदय, मैं कह रहा था कि जब लाहौर में अटल जी गए थे, एक सदभावना यात्रा थी, पाकिस्तान ने बुलाया था। उस समय एक हादसा काश्मीर में हुआ, बहुत लोग मारे गए। हमें अच्छी तरह याद है कि उसके कुछ समय बाद कारगिल में हमला हो गया और जब हमारी सेना लड़ने लगी, इसकी दो घटनाएं मुझे याद हैं, इन्होंने कहा कि पाकिस्तान के लोगों ने कैसे घुसपैठ की। यह घुसपैठ है और यह तब हुआ जब यह लाहौर जा रहे थे। मैं आपसे पूछता हूं या सदन से जानना चाहता हूं जब विरोधी पक्ष के लोग विरोध करते हैं कि १९९४ में जब श्रीनगर के लालचौक पर झंडा नहीं फहराया जा रहा था, वह किस के भय से नहीं फहराया जा रहा था। वहां कौन था जो लालचौक पर झंडा नहीं फहराने देता था। वे कहां के लोग थे, जो चरारे-शरीफ को जला रहे थे और जब एकता यात्रा की बात हुई, महोदय, गृह विभाग बड़ा विशाल विभाग है। इसमें सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक सारी चीजों का समावेश होता है। मैं सामाजिक बातों पर आता हूं, जब एकता यात्रा हुई, सदभावना यात्रा निकली तो भारतीय जनता पार्टी ने सदभावना यात्रा में कहा कि मैं श्रीनगर के लालचौक पर २६ दिसम्बर को राष्ट्रीय झंडा फहराऊंगा।
श्री लाल मुनी चौबे : डेट याद कर लीजिए। उस यात्रा का नाम एकता यात्रा था।
श्री राजेश पायलट : जम्मू से आप कैसे श्रीनगर गये और वहां कैसे झंडा फहराया, इस बात को आप मत भूलो।
श्री लाल मुनी चौबे : मैं कैसे गया, यह महत्वपूर्ण नहीं है। महत्वपूर्ण यह है कि लाल चौक पर आप झंडा नहीं फहरा रहे थे, आपका आधिपत्य वहां से समाप्त हो गया था।
श्री राजेश पायलट : लाल चौक पर पहले भी झंडा फहरता था, अब भी फहरता है और आगे भी फहराता रहेगा। लेकिन जिस तरह से आपने वहां पर राजनीति की थी वह बहुत ही शर्मनाक बात थी …( व्यवधान)
श्री पवन कुमार बंसल : कांग्रेस ने वहां जाने में मदद की थी, उसकी वीडियो है।…( व्यवधान)
श्री लाल मुनी चौबे : सभापति महोदय,उस समय भारी संख्या में सारे भारत से लोग आये थे और इन्होंने इस बात पर बहुत हंगामा किया था। इन्होंने कहा था कि देश की सद्भावना खत्म हो जायेगी, जो वहां जा रहे हैं वे दंगाई लोग जा रहे हैं। मैं पूछता हूं कि एकता यात्रा से समाज कहां टूटता है, वह तो एकता यात्रा थी। कोई कहे कि पायलट जी, हमारे घर में खाना खाइये, तो इसमें कहां दुश्मनी झलकती है। जब हम एकता यात्रा कर रहे थे तो क्या देश में दंगा भड़क रहा था। कहां दंगा हुआ? उस समय जिनकी सरकार थी और जो जम्मू-कश्मीर में नहीं रह गयी थी, जहां यह झंडा नहीं फहरा सकते थे, इन्होंने कहा कि इतने लोग मत जाइये। इस बात के कहने की क्या जरूरत थी? हम श्रीनगर जा रहे थे, अपने ही देश में जा रहे थे, लाल चौक जा रहे थे…( व्यवधान) सरकार ने कहा और सेना के माध्यम से कहा । उस समय हमारे माननीय आडवाणी जी और अटल जी जम्मू में थे।…( व्यवधान) मैं तो उन ५० लोगों में जिन्होंने झंडा फहराया।…( व्यवधान) इसमें जाइयेगा तो पीछे जाना पड़ेगा और आप टिक नहीं पायेंगे।…( व्यवधान) मैं कह रहा था कि जहां भ्रष्टाचार की बात है, जहां घुसपैठियों के आने की बात है, यह इन्होंने शुरू की है। घुसपैठिये तभी आये थे। इन्होंने बताया नहीं, चरारे-शरीफ की मस्जिद में आग लगवा दी, तब रोज हत्याएं होती थीं…( व्यवधान)
श्री पवन कुमार बंसल : आग लगवा दी, आप हाउस में क्या बोल रहे हैं। Sir, I object to it. He should not use such words. … (Interruptions) Please look into those words. He must know what he speaks. … (Interruptions) इन्होंने कहा है कि आग लगवा दी। आप इन्हें रोकिये।
सभापति महोदय : मुझे लगेगा तो मैं उनको रोक दूंगा, आप बैठ जाइये।
श्री सत्यव्रत चतुर्वेदी (खजुराहो) : इन्हें मालूम नहीं है कि ये क्या बोल रहे हैं।
सभापति महोदय : अगर मेरी अनुमति होगी तो आप बोलियेगा। असंसदीय शब्द होंगे तो मैं उनको कार्यवाही से निकलवा दूंगा।
श्री लाल मुनी चौबे : इस सदन में भिंडरवाले की बात चली थी। उसने जो-जो किया, उससे श्री हरमंदिर साहब में ऑपरेशन ब्लू-स्टार हुआ और पंजाब में हत्याओं का तांता लग गया। उस समय लग रहा था कि पंजाब देश से अलग हो जायेगा। यह किसने किया था? उस समय अखबार के पहले पन्ने पर लोग पढ़ते थे कि पंजाब में बस से उतार कर १७ लोग मार दिये गये…( व्यवधान)
सभापति महोदय : चौबे जी, कृपया मूल विषय पर आकर संदर्भ में बोलिये, विस्तार में उनकी चर्चा मत कीजिए।
श्री पवन कुमार बंसल : कांग्रेस के प्रधान मंत्री ने हिंदुस्तान के लिए अपनी जान दे दी। उनके लिए आप यह बोल रहे हो।…( व्यवधान) आपके लोग आतंकवादियों को लेकर गये थे छोड़ने के लिए। …( व्यवधान)
सभापति महोदय : चौबे जी, आप मूल विषय पर आइए। आप कृपया गृह मंत्रालय से संबंधित विषय पर बोलें।
(व्यवधान)
सभापति महोदय: मैंने इन्हें उन्हें बता दिया है कि वह मूल विषय पर बोले।
श्री पवन कुमार बंसल: यह जिस प्रधान मंत्री का जिक्र कर रहे हैं इन्हें यह मालूम नहीं कि उन्होंने हिन्दुस्तान के लिए शहादत दे दी और अपनी जान भी दे दी।... (व्यवधान)
सभापति महोदय: चौबे जी, आप गृह मंत्रालय से संबंधित विषय तक अपने को सीमित रखिए।
श्री लाल मुनी चौबे: मैंने पहले आग्रह किया कि राजेश जी अपने भाषण में बड़ी मुलायमियत से कह रहे थे और उनकी फीलिंग है कि हमने बड़ा पाप किया है। उनकी आलोचना में कोई तर्क ही नहीं था। वह अपराधबोध से ग्रसित हैं। आर्थिक, सामाजिक, राजनैतिक क्षेत्र में गृह विभाग अपने आप में जाना जाता है। ... (व्यवधान) मैं दावे के साथ कहता हूं कि ५२ वर्ष में जब दूसरे पटेल सामने आए और सारी दिशाएं शान्त होने लगी तब इन्हें भय होने लगा। प्रधान मंत्री जी के नेतृत्व में विकास की दर बढ़ा गई, औद्योगिक विकास की दर बढ़ गई।... (व्यवधान)
सभापति महोदय: कृपया समाप्त करें क्योंकि और भी माननीय सदस्य बोलने वाले हैं।
मेजर जनरल(सेवा निवृत्त) भुवन चन्द्र खंडूडी हमारी पार्टी को जो समय दिया है उसमें १० मिनट फालतू हैं। आप वह समय उन्हें दे दें।
सभापति महोदय: इन्हें बोलते हुए लगभग १५ मिनट हो चुके हैं।
श्री लाल मुनी चौबे: मैं कह रहा था कि देश की विकास दर बढ़ने लगी और देश के खजाने पर जब विदेशी मुद्रा का भंडार बढ़ गया, सारी दुनिया में भारत की विदेश नीति का पताका फहराने लगा तो इन्हें कुछ होने लगा।... (व्यवधान)
SHRI RAJESH PILOT : Sir, there should be some restriction, and he has to report the factual position.… (Interruptions)
MR. CHAIRMAN: I am regulating the House, but please do not disturb him.
SHRI RAJESH PILOT Sir, it is a very sensitive subject. He must try to give the factual position.
श्री लाल मुनी चौबे: यह इनकी लाचारी है। जब देश आगे बढ़ता है तो ये पीछे भागते हैं...(व्यवधान) जब दीपक जलता है तो यह पानी डालते हैं और मल्हार अलापते हैं। हम आगे बढ़ रहे हैं। जो आतंक और दहशत देश में थी, पिछले दो सालों में वहां क्या हुआ है? यहां अनुसूचित जाति और दलितों के बारे में आंकड़े पढ़े जा रहे थे जो दिसम्बर, १९९९ तक थे। उसके बाद के आंकड़े उपलब्ध नहीं है। मेरे पास भी आंकड़े हैं लेकिन मैं उनकी जरूरत नहीं समझता। मैं यह जरूर कहूंगा कि भ्रष्टाचार किसकी देन है? यह आप लोगो ने दिया है। आपने गांव और शहर को आपस में लड़ा दिया है। गांव और शहर में लोग जिस तरह से रह रहे हैं उनके रहन-सहन में जमीन आसमान का अंतर है। शहर में रहने वालो के पास अच्छी सड़कें, अच्छे अस्पताल, अच्छे स्कूल्स और घर पर बिजली की सुविधा है जबकि गांव वालो के पास न सड़कें हैं, न पीने के लिये पानी है, न पढ़ने के लिये अच्छे स्कूल्स हैं। वहां बच्चे पैड़ों की छांव में बैठकर पढ़ते हैं। उनके पास ब्लैक बोर्ड नहीं है, वे जमीन पर बैठते हैं। वे लोग ठंड में मरते हैं, लू से मरते हैं । उन लोगों को किसी प्रकार की कोई सुविधा नहीं है। यदि किसी को हार्ट की बीमारी है तो गांव वालो को उसे २० कि.मी. दूर ले जाना पड़ता है भले ही इस बीच में वह मर जाए । इस प्रकार की गांव और शहर के लोगों में दूरी है।
श्री सत्यव्रत चतुर्वेदी ; सभापति महोदय, पता नहीं कहां से कहां लोग ऐसे बोलने के लिये आ गये। गृह मंत्रालय की मांगों पर बोलना चाहिये।
श्री लाल मुनी चौबे ; क्योकि आप जैसे लोग यहां नहीं आते थे, इसलिये आपको आश्चर्य हो रहा है। मैं बता रहा हूं कि पिछले ५२ साल में आपने क्या क्या किया जिससे इस प्रकार गांव और शहर के लोगों में अंतर आ गया। मैं सुरक्षा की बात बता रहा था और ये लोग चिढ़ गये। लोगो को लगा कि ये बाते नहीं होनी चाहिये तो ये लोग संसद में चिकनी-चुपड़ी बातें करने लगे और चापलूसी करने लगे। कुछ लोग मंत्रियों के पास जाते हैं। यदि मंत्री गलत कर रहे हैं तो नियमो का उल्लंघन करके उसको दूसरी तरफ प्रवाहित कर देते हैं। ऐसे लोगो का ज़माना है। चूंकि ये लोग गांव में नहीं रहते, इसलिये वहां की बात सुन नहीं सकते। इनको बात सुनने की आदत नहीं है।
सभापति महोदय, गांवों में आंत्रशोध, हैजा महामारी फैल रही है। वहां अस्पताल नहीं है, ये लोग इस बात को नहीं सोच सकते। मध्य प्रदेश और बिहार में यही हो रहा है। वहीं ऐसे सारे कांड होते हैं। राजस्थान में भी यही हो रहा है। मैं व्यक्तिगत रूप से कुछ नहीं कहूंगा लेकिन इतना जरूर कहूंगा कि जो शहर में साधन सम्पन्न लोग हैं, उन पर टैक्स क्यों नहीं लगाया जा रहा है? यहां बिजली के बदले, अच्छी सड़कों के बदले, स्कूलों के बदले जो तमाम चीजें मुहैया होती हैं... (व्यवधान)
श्री राजेश पायलट ; हम तो गांव की ताईद करते हैं। आप यह काम करो और टैक्स लगाओ।
श्री लाल मुनी चौबे ; मैं कह रहा हूं कि ऐसे लोगों पर टैक्स लगाया जाये और जो टैक्स की धनराशि आये, उसे गांवों के विकास के लिये खर्च किया जाये। आप यह कहो कि यदि गांव छोड़कर शहर आओगे तो टैक्स लगेगा। सभापति महोदय, इन लोगों को केवल आलोचना करनी आती है और पिछले दो साल के शासन की ये ५० वर्ष तक शासन करने वाले आलोचना कर रहे हैं। मैं उन कई बातो को यहां नहीं कहना चाहता क्योंकि ये लोग सुन नही सकेंगे। इसका कारण यह है कि इन लोगों में सुनने की क्षमता नहीं है। जरूरत इस बात की है कि आप दिमाग लगाकर हमारी बात ध्यान से सुनें, उत्तेजित मत होइये। आप फासिस्ट लोगों के साथ रह रहे हैं । आप फासिस्टवाद में रहिये या डेमोक्रेसी में रहिये।
MR. CHAIRMAN : Your time is over. Please conclude now.
(t3/1730/bks/vbr) MR. CHAIRMAN : I am requesting hon.Members to speak on the Demands pertaining to the Ministry of Home Affairs which the House has taken up. They may quote the number of the Demand and speak on that Demand.
श्री लाल मुनी चौबे : डिमांड पर केवल मैं ही बोला हूं. और जो बाकी लोग अब तक बोले हैं। आप मेरे साथ ऐसा क्यों कर रहे हैं। मैंने बता दिया है कि इस विभाग का बड़ा आयाम है और उस आयाम में ये तमाम चीजें आती हैं। मैं डिमांड करता हूं कि यह जायज है और डिमांड पास हो।
MR. CHAIRMAN: Kindly conclude now. I am calling another hon. Member to speak.
श्री लाल मुनी चौबे : मैं आपसे यह कह रहा हं कि अभी जो सरकार देश को प्रगति की ओर ले जा रही है, उसमें ये लोग सहायता करें। अगर इन्हें भारत में रहकर याद न आता हो तो हमें याद करना चाहिए कि दुनिया का सबसे ताकतवर आदमी थोड़े दिन पहले भारत आया था और राजस्थान में उसकी अभिव्यक्ति भारत की महिलाओं के बीच, दूध बेचने वाली कोऑपरेटिव्स के बीच अपने आप उजागर हुई। उसने कहा कि अगर कहीं जनतंत्र है तो भारत में है।
MR. CHAIRMAN: Now I am calling Shri Priya Ranjan Dasmunsi. Please resume your seat. This is too much.
श्री लाल मुनी चौबे : भारत में लोकतंत्र है, दुनिया में और कही नहीं है। यहां बहुत से धर्मों और जातियों के लोग रहते हैं। लेकिन यहां अब तक संघर्ष नहीं हुआ। उन्होंने भारत में आकर आश्चर्य व्यक्त किया और इसका श्रेय गृह मंत्री के नेतृत्व को है, श्री अटल बिहारी वाजपेयी जी के नेतृत्व को है। तुम लोगों के सामने कोई क्िंलटन नहीं आया, ये लोग तरसते रह गये। कई प्रधान मंत्रियों को निमंत्रण नही मिला। शायद चार-पांच को मिला, बाकी को नहीं मिला। अगर मैं आपसे इन बातों को कह रहा हूं और आपको लगता हो कि यह असंसदीय है, तो आप कहिये। लेकिन मेरे मन को ठेस मत पहुंचाइये। मैं विवेकहीन नहीं हूं। आप इतने लोगों के बीच में बार-बार मुझे बैठने के लिए कह रहे हैं। आप मेरे समय से पहले ही ऐसा कह रहे हैं। आपने यह नहीं देखा कि कितनी टोका-टाकी हुई और मुझे लोगों ने बोलने नहीं दिया। क्या ये बातें आपकी समझ में नही आ रही हैं।
सभापति महोदय : मैं तो आपसे अनुरोध कर रहा हूं कि अब आप समाप्त करें और माननीय सदस्य श्री दासमुन्शी को बोलने दें।
श्री लाल मुनी चौबे : आप मुझे माफ करें, ** SHRI RAJESH PILOT : It should not go on record.
MR. CHAIRMAN: I requested the hon. Member again and again. Please co-operate.
सभापति महोदय : उन्होंने अब खत्म कर दिया है।…( व्यवधान)
श्री लाल मुनी चौबे : कुछ समय पहले एक मीटिंग हुई थी। उसमें स्पीकर साहब से कन्सेन्सस हुई थी और यह नियम है कि अगर सदस्य को न जंचे तो वह अपनी प्रतक्रिया व्यक्त कर सकता है। .** MR. CHAIRMAN: Shri Ramsagar Rawat, please sit down.
श्री हरीभाऊ शंकर महाले (मालेगांव) : सर, कल भी ऐसा हुआ था।…( व्यवधान)
सभापति महोदय : कृपया आप बैठिये, दासमुन्शी जी आप बोलिये।
मेजर जनरल (सेवानिवृत्त) भुवन चन्द्र खण्डूरी : मैं आपसे निवेदन कर रहा हूं कि अंत में इन्होंने जो शब्द कहे हैं, उन्हें रिकार्ड से निकाल दिया जाए।
सभापति महोदय : जो असंसदीय शब्द हैं और ऐसे शब्द हैं जो अनुचित हैं, उन्हें कार्यवाही से निकाल दिया जायेगा।
---------------------------------------------------------------------------------------------------
*Expunged as ordered by the Chair.
SHRI PRIYA RANJAN DASMUNSI (RAIGANJ): Mr. Chairman, Sir, I rise to oppose the Demands for Grants of the Ministry of Home Affairs not merely for the sake of opposing it but to justify my opposition in opposing it.
Shri L.K. Advani is not only a distinguished Minister. He is a very respectable leader of the country by his own merit and right. But the manner in which, out of enthusiasm, somebody tried to compare Shri Advani with Sardar Vallabhbhai Patel, I think, is neither adding glory to Shri Advani nor to Sardar Patel.
If I may trace the history after hearing the speech of the distinguished Members of the NDA comparing the two Ministers of Home Affairs, I would humbly submit that Sardar Patel had chosen the course of fighting the British Empire, standing solidly by Gandhiji and Pandit Nehru, having a long-term vision for India and serving the Ministry as a humble servant. I do not like to undermine Shri Advani but I would like to submit through you to all the Members of the NDA not to compare the two leaders in this manner. This is unfair and not proper. … (Interruptions)
SHRI VAIKO (SIVAKASI): What is wrong in it?
SHRI PRIYA RANJAN DASMUNSI : Shri Vaiko, please do not interrupt me. … (Interruptions)
डॉ. जसवन्त सिंह यादव (अलवर): आडवाणी जी की तुलना सरदार पटेल से क्यों नहीं कर सकते, इसमें क्या बात है?…( व्यवधान)
श्री प्रियरंज दासमुंशी : देखिए, जब आपके दल के लोग भाषण कर रहे थे, तब हमने आपके लोगों को नहीं टोका। अब आप मुझे क्यों टोक रहे हैं? यह ठीक नहीं है। आपको मुझे नहीं टोकना चाहिए।…( व्यवधान)
डॉ. जसवन्त सिंह यादव : आडवाणी जी के नेतृत्व में क्या कमी है?…( व्यवधान)
SHRI PRIYA RANJAN DASMUNSI : I only feel pity for Shri Advani.
SHRI S.S. PALANIMANICKAM (THANJAVUR): You should be happy about it. … (Interruptions)
SHRI PRIYA RANJAN DASMUNSI : Shri Advani, all through his life, lived, felt and preached certain values and the last message of his was the rath yatra to Ayodhya. He is now suffocating uncomfortably in the Ministry of Home Affairs, compromising all the values that he preached. … (Interruptions)
SHRI VAIKO : Sardar Patel had also suffocated. … (Interruptions)
SHRI PRIYA RANJAN DASMUNSI : I have read more history than you have. … (Interruptions)
SHRI VAIKO : You are the master. I am not like you.
SHRI PRIYA RANJAN DASMUNSI : I have read a little more than you have. I can claim that because that was my subject and not yours. … (Interruptions)
SHRI VAIKO : You are happy boasting about yourself. … (Interruptions)
SHRI PRIYA RANJAN DASMUNSI : I consider this Government helpless and directionless, having no vision in the Ministry of Home Affairs to understand the present situation in the context of past history.
The hon. Prime Minister, by his truthfulness, courage and submission to truth, did rightly confess yesterday that by going to Lahore he had to reach Kargil. It is not Shri Atal Bihari Vajpayee who is responsible for this. It is the Ministry of Home Affairs which is responsible for this. The responsibility of the Ministry of Home Affairs is not to look after the internal security affairs alone but also to keep the overall perspective in its vision to see that the Government is not derailed and the Cabinet is not misinformed or misled.
The Kargil Report has been submitted. The Ministry of Home Affairs has set up a committee immediately after that. What are the news reports that are coming now? Why did Shri Vajpayee have to admit yesterday that his glorious journey to Lahore ended at Kargil? It was not because of the Opposition, it was not because of I, she or he, but was because of your own agencies. The Kargil Report says that the intelligence has failed. The news reports in The Times of India of the 24th April and the Sandhya Times of the 25th April say that agencies had reported long before the trip to Lahore but it was not taken care of and the Prime Minister was not sufficiently briefed. When the hon. Prime Minister was crossing the Wagah border, the Minister of Home Affairs should have whispered into his ear that this was the report. Your Ministry failed to advice the Prime Minister before his trip to Lahore. I consider you failed there. I consider you lacked the vision. You have no cohesion in your Ministry. You have no co-ordination in your Ministry.
This is the way the country is being run. The failure of ‘Lahore to Kargil’ paid the price. Now, we are paying homage to the great jawans, cutting across party lines. It is they who protected our nation. What a costliest price they had to pay! If this report was taken seriously, at least, their parents would have felt that their sons were dead; they were martyrs; they had got Param Vir Chakra or Ashok Chakra; but had there been a proper feedback of the intelligence reports in time, mightbe, their sons could have killed two more enemies, long before the Prime Minister reached Lahore. This is where they have failed. This is what they have to take note of. It is not a criticism of any individual. … (Interruptions)
AN HON. MEMBER: We are reminded of the Chinese debacle.
SHRI PRIYA RANJAN DASMUNSI : Yes. During the time of Chinese betrayal, Pandit Nehru said that he trusted them as friends, but he failed. You should know that Shri V.K. Krishna Menon resigned and Shri Y.B. Chavan took over Office. … (Interruptions) It is not Shri George Fernandes who resigned; it is not Shri Advani who resigned. That was the tradition and you should know that tradition. … (Interruptions) Yes. He offered to resign. You should go through the proceedings of the past to know what Panditji said at that time. Please do not try to back track. When you were in Congress with me in Youth Congress, I taught you all those things. Why are you now talking like this? … (Interruptions)
जब आप यूथ कांग्रेस में थे तब हमने आपको सिखाया था। …( व्यवधान)
Mr. Chairman, Sir, I am not yielding to the Chief Whip of the BJP. … (Interruptions) In the Report of the Home Ministry, there is a mention about communal situation in one of the paragraphs. Though it did not elaborately say as to what had happened in Gujarat or what had happened in the rest of the country, I admire the Home Minister for at least having acknowledged one fact. I would read two lines from it. It says:
"Graham Steward Staines, the Australian Missionary and his two sons, in the intervening night of January 22-23 were killed; the issue also took an international dimension, damaging, to some extent, the secular and tolerant image of the country. "
It is the admission that the country’s secular and tolerant image had been damaged in the estimation of the whole world. I admire him for recording the truth. … (Interruptions) Please do not talk on party lines. I am talking about something else.
Shri Advani is a responsible Home Minister. He had elaborated in many paragraphs. In paragraph 9.9, it says that the voluntary organisations are encouraged to undertake activities in the cause of national integration and communal harmony. Sir, through you, I would draw the attention of the Home Minister to this. Shri Lal Muni Chaubey has just now said many things. He took part in the JP Movement, had gone to jail. I admire his courage.
I have a document with me, written to the hon. Prime Minister. Who wrote it? It was a voluntary institution founded by Jaya Prakash Narayan, the Gandhian Institute of Studies, Benaras. That man cried, cried and cried, and appealed to the Prime Minister to protect that institution since the grants are being stopped because of the perpetual activities of the RSS nominee in the institution. He cried and cried. I am only stating the facts. It is Vimla Prasad who wrote it to the Prime Minister and to the Security Adviser, Shri Brijesh Mishra, only a few days ago. Even Shri Chandra Shekhar also wrote in this regard. This is the fact. What is happening?
Sir, through you, I would like to address the entire House. I did say that he could not implement what he preached; and he was suffocated. They are implementing it.
श्री मनोज सिन्हा (गाजीपुर) : गांधी विद्या संस्थान का मामला क्या गृह मंत्रालय से संबंधित है?
…( व्यवधान)
श्री प्रियरंजन दासमुंशी : गृह मंत्रालय की रिपोर्ट के पैरा नम्बर ९.९ पर कहा गया है।
…( व्यवधान) कम्युनल हारमनी के पैराग्राफ में वालंटिरी इंस्टीटयूशन के बारे मे कहा गया है।
…( व्यवधान)
श्री मनोज सिन्हा : गांधी विद्या संस्थान की ग्रांट के संबंध का मामला क्या गृह मंत्रालय से संबंधित है ? …( व्यवधान)
श्री प्रियरंजन दासमुंशी : मैं आपको हिन्दी में समझा रहा हूं। …( व्यवधान)
श्री मनोज सिन्हा : जब श्री लाल मुनि चौबे जी बोल रहे थे तब आपके पक्ष के कई सदस्यों ने कहा कि …( व्यवधान) मंत्रालय की अनुदान मांगों पर चर्चा हो। …( व्यवधान) आसन से भी यह बात कही गयी। …( व्यवधान) आपने गांधी विद्या संस्थान की अनुदान रोक दी गई है, इसको उठाया है। मैं आपसे जानना चाहता हूं कि क्या इसका संबंध गृह मंत्रालय से है? …( व्यवधान)
श्री प्रियरंजन दासमुंशी : कृपा रके आप ध्यान से सुनिए। जब मंत्री जी इसका जवाब देंगे तब वह इसका स्पष्टीकरण कर देंगे।
Kargil was the first blunder. It happened due to Intelligence lapse. The next blunder was the hijacking of IC-814. We find that Indian Ambassador is happy that Bill Clinton has certified that things are going on well. Please do not get enamoured by these things. Try to understand what is happening. In the Home Ministry’s report there is a mention about National Security Guards. It is said that they are specially trained in counter hijacking operations. What were they doing on that day when the plane landed at Amritsar for 45 minutes? Was the Prime Minister informed about it immediately? Did Intelligence give any indication that ISI activities are at an extreme point in Kathmandu? Did Intelligence give any indication or information to the effect that hijacking can take place? No. Shri L.K. Advani is being compared with Sardar Patel. Sardar Patel forced the British and the Maharajas to kneel down before this nation. But Shri L.K. Advani forced Shri Jaswant Singh to kneel down before the hijackers in Kandahar. That is the difference. These are two different models. Try to understand that. Do not try to compare. Yesterday, the hon. Prime Minister rightly argued on the issue of Constitution. The Constitutional matters are very important. When the issue comes up, we will speak about it. The magazine that I am having now is BJP Today. Shri L.K. Advani has given an interview to this magazine. Hon. Home Minister is not an ordinary M.P. He is not a party official. He is the Home Minister of this country. If he wants to offer his comments about the Constitution, is it not the privilege of the House to listen to his views first? Before the Panel was appointed, he gave an interview to this magazine on the issue of Constitutional review.
We always accuse the Government on the issue of hidden agenda and it does always feel bad about it. This magazine, BJP Today has printed a preamble which is different from the preamble mentioned in the Constitution. In the Constitution it is mentioned as, `Sovereign, Socialist, Secular, Democratic Republic’, but this magazine’s preamble is `Sovereign, Democratic Republic’. This magazine has not printed the preamble as mentioned in the Constitution.
श्री रघुनाथ झा (गोपालगंज) : इसका क्या मतलब है?
श्री प्रियरंजन दासमुंशी : मतलब यह है कि यही एजेण्डा आप प्लीड करना चाहते हैं। आप दोनों का फर्क देखिये न। आप कांस्टीटयूशन ऑफ इंडिया और बी.जे.पी. टुडे का प्रिएम्बल देखिये। इसे आप खुद देखिये न। यह क्या है? यह असत्य है? इसी में आडवाणी जी ने इण्टरव्यू देकर कहा कि कांग्रेस ने इसलिए ज्यादा दिन राज किया, क्योंकि प्रपोर्शनल रिप्रेजेण्टेशन सब छोटी पार्टियों को नहीं मिला। अगर प्रपोर्शनल रिप्रेजेण्टेशन का मॉडल बनता तो देश की तस्वीर कुछ दूसरी होती।
Home Minister cannot give his official views anywhere except in Parliament, because he is the Home Minister. He is not a party office bearer. Since he is the Home Minister, he has to ensure the confidence of all sections of the people of this country. I am not challenging his bona fide. His party magazine published a preamble which is not the preamble of the Constitution. In that magazine he has given an interview.
SHRI TRILOCHAN KANUNGO (JAGATSINGHPUR): Mr. Chairman, I am on a point of order. The preamble printed in the magazine is the preamble of the original Constitution.
MR. CHAIRMAN : Kindly quote the rule, otherwise you cannot raise the point of order.
… (Interruptions)
MR. CHAIRMAN: I am not allowing you.
… (Interruptions)
MR. CHAIRMAN: It will not go on record.
(Interruptions)*
----------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------
*Not Recorded.
श्री रामानन्द सिंह (सतना) : आपने इमर्जेंसी लगाकर तब यह किया था…( व्यवधान) यह जो आप पढ़ रहे हैं, यह ओरिजनल नहीं है, आपने चेंज की थी…( व्यवधान)
श्री प्रियरंजन दासमुंशी : आप कहें कि कौन सी सही है। जो मौजूदा प्रिएम्बल है या जो आपकी है, आपको उसमें लिखना चाहिए कि हमारी भारतीय जनता पार्टी इमर्जेंसी के पहले जो प्रिएम्बल थी, उस पर अमल करेगी, सच कहने में क्यों डरते हैं। …( व्यवधान)
श्री रामानन्द सिंह : आपने इमर्जेंसी लगाकर संविधान संशोधन किया…( व्यवधान)
SHRI PRIYA RANJAN DASMUNSI (RAIGANJ): I will repeat what I have said. I have not drawn any analogy.… (Interruptions)
SHRI BIKRAM KESHARI DEO (KALAHANDI): Sir, I am on a point of order.
MR. CHAIRMAN: Please quote the rule.
SHRI BIKRAM KESHARI DEO : I would like to raise a point of order under Rule 376 of the Rules of Procedure of the House. My point of order is, the hon. Member has produced two documents.… (Interruptions) He has shown the original Constitution as adopted by the Constituent Assembly… (Interruptions)
MR. CHAIRMAN: What is your point of order?
SHRI BIKRAM KESHARI DEO : The hon. Member is trying to misquote the document. In the original Constitution, the word ‘democracy’ was there in the Preamble of the Constitution. During the emergency, this was altered in the House by the brute majority of the Congress Party.… (Interruptions)
MR.CHAIRMAN: I have not allowed it.
SHRI RAJESH PILOT : The Constitution was amended by the Parliament. If they have any objection they can… (Interruptions)
SHRI VAIKO : At that time, most of the Members were behind the bar.… (Interruptions)
MR. CHAIRMAN: I have not allowed his point of order.
SHRI BIKRAM KESHARI DEO : At that time Shri Vajpayee was in jail. Most of the Members were in jail.… (Interruptions)
MR. CHAIRMAN: Please sit down. This is not a proper way.
… (Interruptions)
श्री रामानन्द सिंह : उस वक्त विपक्ष के सारे नेता जेल में थे…( व्यवधान) आपने इमर्जेंसी लगाकर संविधान संशोधन किया।
सभापति महोदय : रामानन्द सिंह जी, आप बैठिए, आप बार-बार इंटरप्ट करते हैं, यह ठीक नहीं है।
SHRI PRIYA RANJAN DASMUNSI : Mr. Chairman, Sir, if the BJP Party has any objection to the insertion of the word ‘secularism’ in the Preamble of the Constitution during the emergency, they may have. I do not mind it. I only wanted to tell, what they still consider as `the Preamble’ and what we consider as ‘the Preamble’.
MR. CHAIRMAN: This is not the proper way.
… (Interruptions)
SHRI PRIYA RANJAN DASMUNSI : Sir, now the hon. Minister has said that he is initiating talks with the Hurriat for Kashmir. I welcome his mission and wish its success. On the matters of Jammu and Kashmir, on the matters of internal security in North East and for that matter in the entire country, we do feel that going above party line, we should evolve a consensus and cooperate the Government irrespective of the party in the Government. That is our stand and there will be no change on this stand. We do consider that on matters dealing with the terrorists, ISI, and other extremist groups in whatever manner the Government seeks cooperation in Parliament, all parties are prepared to give their cooperation.
Now, I would like to draw your attention to the intelligence failure on the other front. Very recently, in North Bengal, a camp of an extremist group had been exposed which was situated near Jalpaiguri bordering Nepal only due to Bangla News Channel – Khas Khabor. Only after it was exposed the police got alert along with the Bengal Government and the Government of India. They did not know that extremists were working in that area.
Now, I am trying to draw his attention to one more thing. I want to know from the hon. Home Minister whether any coordination meeting of the Chief Minister’s own intelligence, Central intelligence and the military is held on a daily basis on Kashmir. Is there any such coordination meeting held every day of IB, RAW, and other agencies to discuss as to what is happening inside as well as outside the border? Had these things been done, that kind of lapse could have been noticed in time? Our complaint is that coordination is not taking place.
Now, naxalite problem is there. Sir, I request the hon. Home Minister to control the naxalite problem which he has to plan. When this movement first started in Bengal, I was a student leader. I had seen that the naxalite problem came on the surface because of the exploitation of the land where the poorest of the poor was deprived of the due share of the land. Where there is aggressive land reform, where the due share of the land is given to the poor, the naxalite problem did not prevail there. I have seen the most affected place with naxalite movement was Midnapur. I was there for four nights and I found that the villages where I went some of our own party Members and others had huge acres of land thereby depriving the due share of land to the poor. I reported this matter to the then Prime Minister, late Indira Gandhi that if such elements continued no party can stop the naxalite movement in the country. This was one of the ethics. So, this social issue should also be addressed. I oppose this. I am a victim of the naxalite movement. My hand is still not straight. But I also share the concern of the poorest of the poor in the agricultural fields. So, while you tackle the naxalite problem please talk to the Chief Minister whether in his area aggressive land reforms have taken place or not, whether in those areas, poorest of the poor got the benefit of land reforms or not. This is one of the issues.
Sir, now I want to draw the attention of the hon. Minister to another matter. Sir, political murders are taking place in the country be it Bengal or be it Bihar. Unless some collective effort involving the Chief Ministers and the Home Minister is made, I do not know what will be the end result of this thing. More than 20,000 Congress workers lost their lives in our State, in Bihar, and in other parts of the country. देखिए, आप अगर चीफ व्हिप होकर टोकेंगे तो हम बैठ जाते हैं।
MAJ. GEN. (RETD.) B.C. KHANDURI : I have learnt it from you only. You are like a jumping jack in the box. You are getting up all the time. I am learning this from you… (Interruptions)
SHRI PRIYA RANJAN DASMUNSI : I never interrupt you. I am not yielding to you… (Interruptions)
MAJ. GEN. (RETD.) B.C. KHANDURI : You also get up like the way I am doing. The way I am behaving, you also behave like that all the time… (Interruptions)
SHRI PRIYA RANJAN DASMUNSI (RAIGANJ): You came to Parliament from the Army and I have come here from the field… (Interruptions).
Sir, I would request the hon. Home Minister to call a meeting of all the party leaders to discuss the issue of political murders to understand this problem and note down the points. After that, when he finds time to call the meeting of the Chief Ministers or the State Home Ministers, please see that this issue is addressed properly.
18.00 hrs. This is not a problem of one political party or the other. Everyone is suffering. A person may leave our party and join yours. But, when he dies, I also cry like you do. It is not a question of political pleasure to see a political worker belonging to any party anywhere in the country dying.
Finally, I would request the hon. Home Minister not to take it personally. I have the highest regards for him. मैंने एक दिन कहा था कि आडवाणी जी को हम बीजेपी के नेता के रूप में देखना चाहते थे। वही रथ यात्रा, वही रामरथ, तो उनकी नीति के ऊपर उनको जो श्रद्धा है, उसके लिए मैं उनका बहुत आदर करता हूं, भले ही उनके साथ मेरा पुराना डिफरेंस हो। लेकिन उसी फिलिंग को रखना और होम मनिस्टर की कुर्सी पर बैठना, ये दोनों बातों का आपस में मेल नहीं हो सकता है। You are suffocating yourself. जब आडवाणी जी ने बंगाल से रथ यात्रा निकाली थी तो मैंने सुना था कि आडवाणी जी राम रथ यात्रा लेकर अयोध्या जा रहे हैं। उनके तीन लक्ष्य थे - अयोध्या. मंदिर और हिन्दुत्व। हमें किसी ने कहा कि रथ लेकर चलो। मैंने कहा कि अगर तुम हिन्दू मां हो तो राम, कृष्ण को सुनो, लाल कृष्ण को नहीं। रामकृष्ण जी ने कहा कि जितना भी पथ हो, चाहे अयोध्या की तरफ का हो या मक्का का हो, पथ एक ही होता है। इसलिए हिन्दू की बात सुनो, राम-कृष्ण जी की सुनो, आडवाणी जी को वोट देकर बी.जे.पी. की मदद करो। मैंने कहा था कि आडवाणी जी को हिन्दुत्व की तस्वीर मत बनाओ। मैं यह इसलिए कह रहा हूं कि आज आपकी मनिस्ट्री में, आपके नेतृत्व में जो आफिसर काम करते हैं, उनको डर होता है। मैं निष्पक्ष रूप से काम करू, सेकुलरिज्म के लिए काम करू तो मेरा दिल को चोट नहीं पहुंचेगी। हम आपको नेता की कुर्सी पर आदर के साथ बैठना पसन्द करते हैं लेकिन जब आप मनिस्ट्री में बैठ जाते हैं तो मुझे डर लगता है... (व्यवधान) इतना ही मेरा नम्र निवेदन है।
श्री रघुनाथ झा (गोपालगंज) : महोदय, सदन में गृह मंत्री जी द्वारा प्रस्तुत गृह विभाग के मांग के समर्थन में मैं खड़ा हुआ हूं। इस सदन में काफी समय से इतने संवेदनशील और महत्वपूर्ण विषय पर माननीय सदस्यों ने अपने-अपने विचारों को रखा है। लेकिन आज वक्त का तकाजा है कि जो देश के हालात हैं कि हमारे बार्डर पर घटनाएं हो रही हैं। जिस तरह आईएसआई का प्रवेश हो रहा है, उग्रवादी संगठनों का नार्थ-ईस्ट में हो या जम्मू-काश्मीर में हो, उन्हें बाहर से मदद मिल रही है। ऐसे समय में हमें पार्टी स्तर से ऊपर उठ कर सही बात करनी चाहिए। सरकार को सुझाव देना चाहिए था, मैं राजेश पायलट जी की बातों को सुन रहा था। हमारे मित्र मुंशी जी ने भी अपनी बातों को रखा, अंत में उन्होंने कुछ अच्छा सुझाव दिया है जिस पर सरकार को गौर करना चाहिए। लेकिन इस देश के सारे हालात इस स्थिति में पहुंचे हैं, इसके लिए अगर कोई जवाबदेह है तो वे विपक्ष के लोग कांग्रेस पार्टी के हैं। पायलट जी तो होम मनिस्टर भी रहे हैं। इन्होंने जो हालात इस देश के किए हैं, इन्होंने देश के हालात को बिगाड़ा है। इसत बात को ईमानदारी से उन्हें स्वीकार करना चाहिए, लेकिन वह स्वीकार नहीं करते। इस बात को कहने में मुझे कोई हिचकिचाहट नहीं है कि इस देश को सरदार पटेल के बाद ठीक ही गृह मंत्री, आडवाणी जी मिले हैं। जिनके दिल में देश की समस्याओं के निदान करने की कसक है और इसके लिए प्रयासरत भी हैं। हम नहीं मानते कि सौ प्रतिशत कोई आदमी सफल होता है। इतने कम दिनों में हम यह बात कहें कि वह सब चीजों में सफल हो गए, यह भी हम नहीं मानते। इसमें सभी का सहयोग चाहिए।
महोदय, हम माननीय राजेश पायलट जी को याद दिलाना चाहते हैं और पूछना चाहते हैं कि जम्मू-कश्मीर की समस्या, नार्थ-ईस्ट की समस्या, बाबरी-मस्जिद की समस्या, स्वर्ण-मंदिर की समस्या किस की पैदा की हुई है। आपके कामों का फल आज आडवाणी जी को भुगतना पड़ रहा है, उनका निदान उनको खोजना पड़ रहा है। इस मौके पर आपकी तरफ से पोजटिव सुझाव आने चाहिए थे कि देश की जो परिस्थिति है, भिन्न-भिन्न राज्यों की जो समस्याएं हैं और बार्डर की जो स्थिति है उसको हम कैसे सुधार सकें।
माननीय गृह मंत्री जी, आपका पुलिस का कानून, पुलिस रैगुलेशन एक्ट अंग्रेजों द्वारा १८६१ में बनाया गया था। उस समय देश गुलाम था और अंग्रेजों ने अपनी आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए उसे बनाया था। लेकिन आज देश के हालात बदले हैं और दलितों, अल्पसंख्यकों, पिछड़े वर्ग के लोगों में आकांक्षाएं जगी हैं। उनको जो अधिकार मिले हैं उनपर विचार करने के लिए यह आवश्यक है कि उस एक्ट में सुधार लाया जाये।
नार्थ-ईस्ट में टैरेरिस्ट के द्वारा जो घटनाएं हो रही हैं और उनको रोकने के लिए जो खर्च हो रहा है उसको भारत सरकार वहन कर रही है और वह इसके लिए बधाई की पात्र है। माननीय आडवाणी जी, वहां की स्थिति को और सुधारना होगा। लेकिन आज बिहार की स्थिति आंध्रा और नार्थ-ईस्ट से भी बदतर है।
आई.एस.आई. का नेपाल के रास्ते से प्रवेश हो रहा है। खुले रूप से ५०० रुपये का जाली नोट आ रहा है। माननीय मदन जायसवाल जी ठीक कह रहे थे कि आप उस इलाके के बाजार में चले जाइये, वहां धड़ल्ले से यह काम किया जा रहा है। पुलिस लाचार है, थाने में आधुनिक हथियार नहीं हैं, लेकिन जो आतंकवादी और नक्सलवादी हैं, क्रमिनल हैं, उनके पास आधुनिक हथियार नेपाल के रास्ते से अपने मुल्क में आ रहे हैं। इसलिए आपसे मैं प्रार्थना करूंगा कि सीमा पर अच्छी चौकसी होनी चाहिए।
नेपाल से हमारे अच्छे संबंध रहे हैं लेकिन आज नेपाल इन सारी आतंकवादी गतवधियों का अड्डा बना हुआ है। नेपाल के रेडियो और टी.वी. पर भी भारत-विरोधी प्रचार होता है। पाकिस्तान का उनके साथ सीधी संबंध है। मैं चाहता हूं कि सरकार का ध्यान इस ओर जाये और सरकार पूरी मुस्तैदी से इस काम को रोकने के लिए कदम उठाए।
आज हमारे देश में जिस तरह से सड़कों को घेर कर मंदिर-मस्जिद बन रहे हैं और वहां से राजनीति की जा रही है, वह गलत है। बिहार में तो कोई भी सड़क सुरक्षित नहीं है। कहीं जाइये तो आप पाएंगे कि हनुमान जी की मूर्ति लगा दी। पुलिस थाणे से लेकर रजिस्ट्री ऑफिस तक, सब जगह यह हो रहा है।
उत्तरप्रदेश में कानून बना, उसका विरोध हुआ। ऐसा राजस्थान, वैस्ट बंगाल में कानून बना। यह ठीक कानून है। किसी को इस बात की इजाजत नहीं मिलनी चाहिए। जहां मन किया वहां मंदिर खड़ा कर दिया और जहां सरकारी जमीन मिली, वहां मंदिर, मस्जिद बना दिया। ऐसी राजनीति नहीं होनी चाहिए। इस राजनीति को बंद करने की आवश्यकता है।
जम्मू -कश्मीर के बारे में सारा राष्ट्र चिंतित है। गृह मंत्री काफी संवेदनशील होकर उस इलाके का बार-बार दौरा करते रहे हैं। वहां दस वर्षों में २० हजार से अधिक लोग मारे गए हैं। वहां जिस तरह स्थिति दिनोंदिन खराब हो रही है, उसके लिए सर्वदलीय बैठक बुलाई जाए और लोगों को कॉनफिडेंस में लिया जाए। स्थिति का पूरी तरह मुकाबला किया जाए। वहां से पहले कश्मीरी पंडितों का भगाया गया और दूसरी बार सिखों पर हमला हुआ। वैली में ऐसी परिस्थिति पैदा की जा रही है कि वहां के लोगों को बाहर किया जाए और वे उस जगह को छोड़ दें। हमें पार्टी लाइन से ऊपर उठ कर इस पर सोचना चाहिए और उसे बचाने का प्रयास करना चाहिए।
अभी मुंशी जी बिहार के बारे में बोल रहे थे। वहां जब से विधान सभा के चुनाव हुए, वहां लगभग ढ़ाई सौ राजनीतिक हत्याएं हुई। वहां एम.एल.ए. मारे गए। वे किसी एक पक्ष के नहीं मारे गए। वहां के लोगों को मदद मिलनी चाहिए। हमने गृह मंत्री जी से प्रार्थना की और कहा कि हमारे सांसद प्रभुनाथ सिंह जी को सुरक्षा प्रदान की जाए। उनके ऊपर कई बार जानलेवा हमला हुआ। उनकी सुरक्षा की व्यवस्था का काम होना चाहिए। जिस तरह वहां राजनीतिक घटनाएं हो रही हैं चाहे कांग्रेस के लोग मारे जाएं या दूसरे मारे जाएं। बाबन सुमरई जो बिहार में मंत्री हैं, वह कांग्रेस पार्टी के हैं, उनके छोटे भाई की हत्या कर दी गई। हमारे जिले के जो अध्यक्ष थे, उनकी हत्या हो गई। जितनी भी राजनीतिक हत्याएं हुई है, हम चाहते हैं कि उनकी सी.बी.आई. से जांच करवाई जाए। इससे वास्तविकता सामने आएगी। कई लोग इसकी सी.बी.आई. से जांच करवाना नहीं चाहते हैं। हम चाहते हैं कि इन सब की जांच सी.बी.आई. से करवाई जाए। वास्तविकता का पता लग जाएगा।
बिहार में बहुत दिनों से झारखंड राज्य बनाने के नाम पर विवाद चल रहा है। इसके गठन के लिए वहां की विधान सभा ने एक प्रस्ताव पारित किया। मुझे सदन में यह बात कहने में कोई हिचकिचाहट नहीं है कि हमारी कमिटमैंट थी कि छोटे राज्य बनें। हमने उस आधार पर मत दिया। आज मेरा क्वश्चन था कि उत्तर बिहार में हर साल नेपाल की नदियों से भयंकर बर्बादी होती है। इससे इनफ्रास्ट्रक्चर खराब हो जाता है, सड़कें, खेत और जमीनें बरबाद हो जाती हैं लेकिन उसके खर्चें की भरपाई भारत सरकार नहीं करती। भारत सरकार इसकी भरपाई करे। बिहार विधान सभा ने जो पैकेज के रूप में एक प्रस्ताव पास किया है, अगले १० वर्ष तक बिहार के इस बंटवारे के बाद उसे जो हानि होने वाली है, उसमें केन्द्र सरकार मदद करे। गृह मंत्री जी ने जिस तरह बिहार में उदारता थिखाने का काम किया है, प्राय: सभी पार्टियों ने केवल एक पार्टी छोड़ कर सभी ने इसका समर्थन किया है। हमारे पास अब कुछ नहीं बचेगा। उत्तर बिहार की जितनी शूगर फैक्टि्रयां हैं, वे प्राय: सभी खराब हो गई। वहां की जूट इंडस्ट्री और कागज इंडस्ट्री खत्म हो गई।
मध्य बिहार की सारी फैक्टरियां समाप्त हो गई हैं, खाद के कारखाने खत्म हो गये हैं। जो शेष बिहार बचा है, मैं चाहूंगा कि पैकेज देकर बिहार को मजबूत करने का काम किया जाये। इन्हीं शब्दों के साथ मैं अपनी बात समाप्त करता हूं और गृह मंत्रालय की मांगों का समर्थन करता हूं।
श्री राशिद अलवी (अमरोहा); चेयरमैन साहब, मैं अपनी पार्टी, बहुजन समाज पार्टी की तरफ से बोलने के लिए खड़ा हुआ हूं।
देश की आज जितनी हालत खराब है, उतनी आजादी के बाद कभी नहीं थी। होम मनिस्टर साहब इस देश के सीनियर पौलिटीशियन हैं, मैं उनकी इज्ज़त भी करता हूं। I feel myself too junior to give any suggestion. I have to criticise him. लेकिन मेरी यह जिम्मेदारी बनती है कि मैं इस हाउस में देश की स्थिति सही सही और ईमानदारी के साथ रखूं।…( व्यवधान) .. आप लोगों की टोकने की आदत है क्योंकि आप सच्चाई बर्दाश्त नहीं कर पाते हैं। जितना होम मनिस्ट्री को पैसा चाहिये, उससे ज्यादा पैसा इस देश के अंदर टैरेरिज्म को खत्म करने, पुलिस बल बढ़ाने और इस देश में आई.एस.आई. की एक्टिविटीज को खत्म करने के लिये खर्च किया जाता है। मेरी यह पक्की राय है कि इस देश के अंदर पिछले ५२ सालों से जिस तरह टैरेरिज्म फैला है, उसके लिये सियासतदां जिम्मेदार हैं। यह मुमकिन नहीं कि टैरेरिज्म हमारी गलतियों से बढ़ता चला जाये। यदि हम देखें तो इस देश के अंदर जो काम हो रहा है, उसमें सारी जिम्मेदारी आई.एस.आई. की बतायी जाती है। मैं वाजेह और सख्त अलफाज़ में कहना चाहता हूं कि आई.एस.आई. की एक्टिविटीज को खत्म करने के लिये, आई.एस.आई. के एजेंट्स को खत्म करने के लिये, जितने सख्त से सख्त कानून आप बना सकें, इस हाउस को बनाने चाहिये। हम उसके खिलाफ नहीं लेकिन साथ ही साथ मैं यह भी कहना चाहूंगा कि आई.एस.आई. के नाम पर इस देश में गलत काम नहीं होना चाहिये कि जो काम सरकार नहीं कर सकती, जो गलत काम सरकार करती है, उसकी सारी जिम्मेदारी आई.एस.आई. के ऊपर डालकर लोगों को गलत मैसेज दिया जाये।
चेयरमैन साहब, मैं एक वाकया जरूर बताना चाहूंगा कि मेरी कांस्टीटुयंसी अमरोहा यहां से १५० किलोमीटर की दूरी पर है। वहां के एक गांव सिलारपुर में ग्रुपबंदी होती है। वहां दिल्ली की पुलिस सादे वेश में कार से आई, जिसका लोगों को .पता नहीं था कि यह पुलिस है या कोई डाकू है और मेन रोड से एक आदमी को पकड़कर ले गई। सारे इलाके के अंदर शोर हो गया कि एक आदमी का किडनैप कर लिया गया है और उसके मुखालिफ लोगो ने उसे जान से मार दिया । इसका नतीजा यह हुआ कि उसकी मुखालिफ पार्टी के लोग उसके घर के चार लोगों को पकड़कर खेत में ले गये और उन्हे गोली मार दी गई। मैं होम मनिस्टर साहब को बताना चाहता हूं कि इस देश की पुलिस किस तरह से काम कर रही है। मैंने डी.आई. जी. से बात की तो मुझे बताया गया कि दिल्ली की पुलिस आई थी और उस आदमी को पकड़कर ले गई। लेकिन वे चार लोग बेगुनाही में मारे गये। उनके मासूम बच्चों के मुस्तकबिल का क्या होगा, उसके लिये कौन जिम्मेदार है। वहां से आदमी ले जाकर बंद कर दिया गया और कहा गया कि वह आई.एस.आई. का एजेंट है। क्या यह पुलिस के काम करने का तरीका है? यदि होम मनिस्टर चाहेंगे तो मैं पूरी तफसीलात दे सकता हूं।
लेकिन क्या इस तरीके से हिंदुस्तान के अंदर पुलिस कार्रवाई करेगी कि एक बेगुनाह आदमी को लेकर चल दे। मैं यह नहीं कहता कि वह बेगुनाह था, मुमकिन है वह गुनाहगार हो, लेकिन क्या पुलिस सादे कपड़ो में जायेगी, किसी भी आदमी को पकड़कर ले आयेगी और रास्ते में जितने पुलिस स्टेशंस पड़ेंगे किसी को इत्तिला नहीं देगी कि उसे गिरफ्तार किया है या नहीं किया । दिल्ली में आकर कह देंगे कि निजामुद्दीन के इलाके से, जामा मस्जिद के इलाके से इसे गिरफ्तार किया है, यह आई.एस.आई. का एजेंट है, इसलिए बंद कर दिया है। इन तरीकों से टैरेरिज्म बढ़ेगा, घटेगा नहीं।
सभापति महोदय, मैं जामिया मलिया का वाकया जरूर बयान करना चाहता हूं। होम मनिस्टर साहब ने इस बारे में बयान भी दिया है। लेकिन मैं बहुत अदब से कहना चाहता हूं कि होम मनिस्टर साहब आप इस देश के होम मनिस्टर है। चाहे कोई हिंदू हो, मुसलमान हो, ईसाई हो, या किसी भी मजहब का हो, उसकी जिंदगी और उसके माल की हिफाजत करना आपकी जिम्मेदारी है। आप उनके बाप के समान है। जामिया मलिया के वे मासूम बच्चे अपने हॉस्टल में बैठे हुए इम्तिहान की तैयारी कर रहे थे। मुझे इस बात की बहुत तकलीफ है कि होम मनिस्टर साहब को वहां जाना चाहिए था और जाकर उन लड़कों से एक बाप की हैसियत से मिलना चाहिए था। उन बच्चों को अगर प्यार की जरूरत थी तो उन्हें प्यार देना चाहिए था। उनके जख्मों पर प्यार का मरहम लगाना चाहिए था। लेकिन होम मनिस्टर साहब ने ऐसा नहीं किया। रोज वे बच्चे पार्लियामेंट स्ट्रीट पर आते हैं, अपना मुतालबाद रखते हैं, अपना डिमांस्ट्रेशन करते हैं। पुलिस कभी टीयर गैस छोड़ती है, कभी डंडे मारती है, कभी उनके खिलाफ कोई केस रजिस्टर्ड कर देती है और वे बच्चे शाम को वापिस अपने घर चले जाते हैं। क्या इसी तरीके से यह देश चलेगा, क्या इसीलिए हमने देश के लिए आजादी मांगी थी। क्या इसीलिए इस देश के अंदर १५० साल तक हमारे आबा-ओ-अजदाद ने जंग लड़ी थी। मैं होम मनिस्टर साहब को बताना चाहता हूं और बी.जे.पी. के लोगों को बताना चाहता हूं कि वे इस देश की जंगे आजादी की लड़ाई की तारीख पढ़ें। सारे महरौली के पेड़ आज भी गवाह है। उन पेड़ों के गुद्दों के ऊपर अंग्रेजों ने फांसी के फंदे बनाकर इस देश के लोगों को फांसी दे दी, क्योंकि वे हिंदुस्तान की आजादी चाहते थे। बहादुरशाह जफर मार्ग के किनारे बना हुआ खूनी दरवाजा इसलिए खूनी दरवाजा कहलाता है क्योंकि हमारे आबा-ओ-अजदाद को उस खूनी दरवाजे के अंदर फांसी दी गई थी, क्योंकि वे हिंदुस्तान की आजादी चाहते है। क्या हिंदुस्तान की आजादी इसलिए चाहिए थी कि हमारे मासूम बच्चे हॉस्टल में पढ़ेंगे तो वहां पुलिस डंडा फेरेगी। क्या आजादी इसलिए चाहिए थी कि सिर्फ मुसलमान होने की वजह से उन्हें आई.एस.आई. का एजेंट बता दिया जायेगा। सर, मैं बहुत तकलीफ से कहना चाहता हूं - तू इधर-उधर की न बात कर, ये बता कि काफिले क्यों लुटे, हमें राहजन से गरज नहीं, तेरी रहबरी का सवाल है ।
सभापति महोदय, हमें इससे गरज नहीं है कि आई.एस.आई. क्या कर रही है। हमें गरज इस बात से है कि हमारी जिंदगी और माल की हिफाजत होनी चाहिए। हमारे साथ ईंमानदारी का सलूक होना चाहिए।
कश्मीर के अंदर …( व्यवधान) देश की सुरक्षा की चिंता जितनी आपको है, उससे ज्यादा हमें है। मैं कोई कंट्रोवर्सल बात नहीं कह रहा हूं। मैं कहना चाहता हूं कि बी.जे.पी. की सरकार इस देश के अंदर इसलिए बनी थी क्योंकि अयोध्या के अंदर राम का मंदिर बनाना था। सारे देश में हिंदू और मुसलमान के बीच में एक दीवार खड़ी कर दी गई। हिदू, हिंदू हो गया था, मुसलमान, मुसलमान हो गया था। कुछ लोग बाबरी मस्जिद की बात करने लगे, कुछ लोग राम मंदिर की बात करने लगे। जिस दिन यह सरकार बनी, उसने पहले दिन यह ऐलान कर दिया कि जब तक यह सरकार रहेगी, तब तक अयोध्या के अंदर … ( व्यवधान) जिस दिन यह सरकार बनी, उसी दिन ऐलान कर दिया कि जब तक सरकार रहेगी, तब तक अयोध्या के अंदर राम के मंदिर की कोई चर्चा नहीं होगी। रामायण के अंदर आया है - मुनि नहीं यह निश्चर घोरा है। यह राम का नाम नहीं लेते, ये तो घोर राक्षस हैं जो राम का नाम बेचना चाहते हैं। राम के नाम से सत्ता चाहते हैं। राम की इज्जत हम आप लोगों से ज्यादा करते हैं। हमारे सीने में धड़कने वाले दिल को चीरोगे तो उसके अंदर राम की तस्वीर मिलेगी।…( व्यवधान)
१८.२४ बजे(श्री देवेन्द्र प्रसाद यादव पीठासीन हुए) श्री बृज भूषण शरण सिंह (गोंडा) : आप समर्थन करिये। आपने कहा है कि आप राम की हमसे ज्यादा इज्जत करते हैं तो आप राम मंदिर का समर्थन करिये।…( व्यवधान)
श्री राजेश पायलट : ये मस्जिद तोड़ने के पहले प्रार्थना करते कि वहां मंदिर बने…( व्यवधान)
यह बात आपको पहले कहनी चाहिए थी।…( व्यवधान)
श्री जसवंत सिंह यादव : आप बाबर को जिन्दा रखना चाहते हैं, लेकिन उसका इस देश के लिए क्या योगदान है।.....(व्यवधान)
मेजर जनरल (सेवानिवृत्त) भुवन चन्द्र खंडूड़ी : मैं बताना चाहता हूं कि हमारा घोषणापत्र चुनाव से पहले बना था। मैं तो आपको सुधार रहा हूं। उस समय यह नहीं था।…( व्यवधान)
श्री राशिद अल्वी (अमरोहा): सर हम और मेरी पार्टी जितनी हिन्दू कम्केयुनलिज्म खिलाफ है उतनी ही मुस्लिम कम्ज्मयुनलिज्म के खिलाफ है। हमारी यह पक्की राय है कि इस देश में सैकुलरिज्म होना चाहिए। यह देश सैकुलरिज्म देश ही रह सकता है। इस देश के अंदर जितने मजहब के मानने वाले हैं, उतने दुनिया में कहीं भी नहीं हैं। अगर हम इस देश को सैकुलर नहीं रखेंगे और इस देश को हिन्दू राष्ट्र बनाना चाहते हैं, तो जब कांस्टयूएंट एसैम्बली बनी और उसके मैम्बरान ने जो विचार किया, यदि उन्होंने विचार किया होता, तो इस देश को हिन्दू राष्ट्र बनने से दुनिया की कोई ताकत नहीं रोक सकती थी, लेकिन कांस्टीटयूएंट एसैम्बली के लोगों ने हिन्दू राष्ट्र बनाने की कल्पना भी नहीं की थी। यह उनकी बहुत ऊंचे दर्जे की सोच थी। मौलाना आजाद ने इसी सदन में कहा था कि किसी भी देश् की कयादत के लिए जरूरी है कि उसके पास तफक्कुर भी हो और तदब्बुर भी हो। यानी फोरसाइटनैस भी हो और थॉट भी हो। कांस्टीटयूएंट एसैम्बली के मैम्बरों ने बहुत सोच विचार कर के इस देश् को सैकुलर बनाया था।…( व्यवधान)
श्री चिन्मयानन्द स्वामी (जौनपुर): इस शब्द का समावेश भारत के संविधान के प्रीएम्बल में १९७७ में हुआ। उससे पूर्व प्रीएम्बल में यह शब्द नहीं था।…( व्यवधान)
सभापति महोदय: स्वामी जी, आप कृपया बैठे-बैठे न बोलिए और अल्वी जी आप क्रास टाक्स न कीजिए।...( व्यवधान)
श्री राशिद अल्वी : तो क्या यह हिन्दू राष्ट्र था?
सर इन लोगों को यह भी पता नहीं है कि यह देश १९४७ से सैकुलर देश है, तो मैं इन्हें पढ़ाने या समझाने में असमर्थ हूं।…( व्यवधान)
स्वामी चिन्मयानन्द : मैं यह बताना चाहता हूं कि सैकुलर शब्द को भारत के संविधान के प्रीएम्बल में सन् १९७७ में जोड़ा गया। उससे पूर्व भारत के संविधान के प्रीएम्बल में सैकुलर शब्द नहीं था।( व्यवधान)
सभापति महोदय: आप अपना भाषण जारी रखिए। टोका-टाकी में न पड़िए और आप मुझे मुखातिब होकर बोलिए।
श्री राशिद अल्वी : सर, यह सैकुलर देश है और मैं जानता हूं कि सरकारी कोलीशन पार्टनर्स का सैकुलरिज्म से बैर है। इसलिए मेरी बात उन्हें अच्छी नहीं लगेगी और यह भी हमारे देश की बदकिस्मती है कि इस देश के अंदर कौन कब सैकुलर हो जाए, कब इधर बैठते हैं और सैकुलरिज्म की जिन्दा बात करते हैं और कब उधर चले जाते हैं और जब उधर चले जाते हैं, तब भी सैकुलर कहलाते हैं और इधर आते हैं, तो भी सैकुलर कहलाते हैं। मैं किसी कोलीशन पार्टनर का नाम नहीं लेना चाहता हूं, लेकिन मैं बिना नाम लिए यह जरूर कहना चाहता हूं कि वे इस पर विचार करें। यह सरकार का सवाल नहीं है, यह देश का सवाल है। सरकारें आती-जाती हैं, मनिस्टर बनते हैं बिगड़ते हैं, लेकिन जब तक हम लोग ईमानदारी के साथ यह नहीं सोचेंगे कि देश कैसे मजबूत हो, तब तक देश मजबूत नहीं हो सकता।
इस देश की आजादी को 52 साल हो गये हैं। इस देश के अंदर अंग्रेजों ने जो पुलिस सिस्टम छोड़ा था, वह आज तक चला आ रहा है। जब कोई इनीशियेटिव नहीं लेगा …( व्यवधान) मैं सभी बातें अच्छी कह रहा हूं. आप सुनिये। जब तक कोई इनीशियेटिव नहीं लेगा तब तक कोई तब्दीली नहीं आयेगी। इंग्लैंड का पुलिस सिस्टम कुछ और है और हमारा पुलिस सिस्टम दूसरा है। हमारा सिस्टम इसलिए बनाया गया था ताकि एक आदमी जिले के अंदर एस.पी. बना दिया जाये, कलैक्टर बना दिया जाये और वह अंग्रेजी सिस्टम के बिहाफ पर डंडा चलाने का काम करे। आज भी वही काम हो रहा है। कलैक्टर की कोठी ५ एकड़ में फैली हुई है, एस.पी. की कोठी पांच एकड़ में फैली हुई है, लेकिन गरीब आदमी उसकी कोठी के दरवाजे तक नहीं जा सकता। वह बचकर चलता है। वह अपने आपको हयूमन बिंग से बड़ा समझता है। इस हाउस के अंदर कितने एम.पीज. ने शिकायत की है, जिनके साथ उन्होंने मिसबिहेव किया है। यह खता एस.पी. की नहीं है। यह खता सिस्टम की है। सरकार को इस सिस्टम को बदलना पड़ेगा। जिस तरीके से थानेदार की भर्ती हो रही है, पुलिस वालों की भर्ती हो रही है, आई..पी.एस. और एस.पी. की भर्ती हो रही है. मैं सरकार से कहूंगा कि इन सबको बदल दो। पुलिस में एंट्री के लिए एक इम्तहान लीजिए जिस तरह इंग्लैंड में होता है। पहले सिपाही की भर्ती होनी चाहिए। वह पढ़ा-लिखा होना चाहिए, समझदार होना चाहिए। ऐसा नहीं होना चाहिए कि जो दुनिया में कोई काम न करता हो, उसे सिपाही बना दें और यह सोचकर चलें कि यह बेईमानी और करप्शन करेगा।
सभापति महोदय : अब आप समाप्त करिये।
श्री राशिद अल्वी : मैं अपनी पार्टी से अकेला बोल रहा हूं इसलिए मुझे थोड़ा और समय दीजिए। मैं पांच मिनट में अपनी बात समाप्त करूंगा।
सभापति महोदय : आपकी पार्टी के नौ मिनट हैं।
श्री राशिद अल्वी : मैं चाहूंगा कि होम मनिस्टर साहब इनीशियेटिव लें, इस पुलिस सिस्टम को बदलें और एक बेहतर पुलिस सिस्टम लायें।
हमारे लिए जेल मैनुअल हिन्दुस्तान की आजादी से पहले बना था। आज भी वही जेल मैनुअल है। मुझे पार्लियामैंट में यह कहते हुए शर्म आती है कि आज भी हमारे जेल मैनुअल में यह लिखा हुआ है कि अंग्रेज जेलर की यूनीफार्म क्या होगी और हिन्दुस्तानी जेलर की यूनीफार्म क्या होगी? हम ५२ सालों में इतना समय नहीं बचा पाये कि उस जेल के कानून को अमैंड कर पाते। आज भी इस देश का कानून है कि यूरोपियन जेलर की यूनीफार्म अलहदा हो और हिन्दुस्तानी जेलर की यूनीफार्म अलहदा हो।
आज कांस्टीटयूशन को रिव्यू किया जा रहा है लेकिन इस बात पर तव्वजो नहीं दी जा रही। आप पूरे कांस्टीटयूशन को बदल देंगे, पूरे कांस्टीटयूशन के अंदर संघ आईडियोलॉजी भर देंगे लेकिन यह तव्वजो नहीं देंगे कि जो कानून हमें बदलना है, उसे किस तरह से बदला जा सकता है। जेल मैनुअल आज भी इस देश का कानून है। यूरोपियन प्रिजनर्स को जेल में बियर भी मिल जाती है और एल्कोहल भी मिल जाती है जबकि हिन्दुस्तानी प्रिजनर्स को पाबंदियों के अलावा और कुछ नहीं मिलता। यह अंग्रेजों का कानून है। आज भी इस देश का वही कानून है, जो हमारे लिए शर्मनाक है। …( व्यवधान) एक-एक करके सभी समर्थन करेंगें, आप चिन्ता न करें। इसको बदलना चाहिए। होम मनिस्टर ने बयान दिया है कि वह आई.एस.आई. पर एक व्हाइट पेपर देंगे। मैं कहना चाहूंगा कि वह व्हाइट पेपर जल्द से जल्द आना चाहिए।
मेरे पास जो आंकड़ें हैं, उसके हिसाब से इस देश के अंदर १९९६ में ३७,६७१ मर्डर हुए, १९९७ में यह बढ़कर ३७,९४३ हो गये, १९९८ के अंदर ३८,५८४ हो गये। इन सब आंकड़ों से पता चलता है कि दिन- ब-दिन देश की स्थिति खराब होती जा रही है। इस देश के अंदर १९९६ में १४,८४६ रेप केसेज हुए, १९९७ में १५,३३० और १९९८ में १५,१५१ केसेज हुए। इस तरह रेप के केसेज के अंदर वृद्धि होती जा रही है। इसी तरह १९९६ में २०,८४८, १९९७ में २१,८९८ और १९९८ में २३,५२० किडनैपिंग हुई। आप देखें कि लगातार किडनैपिंग, मर्डर और रेप में बढ़ोत्तरी हो रही है। इसी तरह आप डकैती और रॉबरी के आंकड़ें देखें तो १९९६ में २२,७८७ और १९९८ में ४३,८३० केस हुए। रेप हो, मर्डर हो या डकैती हो, सब चीजों के अंदर बढ़ोत्तरी हो रही है। यह तीन साल के आंकड़ें हैं, जो मैं पेश कर रहा हूं।
इसमें लगातार वृद्धि हो रही है, जिससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि होम मनिस्टर साहब की परफोरमेंस कैसी है।
मैं हाउस का ज्यादा वक्त नहीं लेना चाहता, सिर्फ इतनी दरख्वास्त करना चाहता हूं कि सरकार को इनीशिएटिव लेकर पुलिस के सिस्टम को ठीक करना चाहिए। पुलिस का सिस्टम ठीक होगा तो उससे पूरे देश को रिलीफ मिलेगी। धन्यवाद।
SHRI RAJESH PILOT : Sir, there are 26 more Members to speak. If you could fix the time of the reply of the hon. Home Minister, then we can adjust our schedule accordingly. … (Interruptions)
MAJ. GEN. (RETD.) B.C. KHANDURI : I do not know about the number of speakers but what has been agreed upon is about the time. As per the decision taken in the BAC, within six hours we have to finish it. We have started the discussion at 1520 hours. … (Interruptions) We are sticking to the time and not the number of speakers. When the time is over, the list of speakers will automatically gets over. … (Interruptions)
SHRI SURESH KURUP (KOTTAYAM): How can that be? That is not the practice in the House. … (Interruptions)
MAJ. GEN. (RETD.) B.C. KHANDURI : I am just informing you the decision taken in the Business Advisory Committee. … (Interruptions) This is not my decision. This is the decision of the Speaker and the members of the BAC. … (Interruptions)
कुंवर अखिलेश सिंह : ऐसा नहीं है, बिजनेस एडवाइजरी कमेटी में छ: घंटे का समय निर्धारित किया गया था, उसको बढ़ाया भी जा सकता है, अगर माननीय सदस्य इस पर बोलना चाहते हैं। …( व्यवधान)
श्री सानछुमा खुंगुर बैसीमुथियारी (कोकराझार) : सभी को बोलने का मौका देना होगा। सीनियर लोगों को मौका देने से काम नहीं चलेगा।…( व्यवधान)
मेजर जनरल (सेवानिवृत्त) भुवन चन्द्र खण्डूरी : जो वहां पर तय हो गया है, मैं वह बता रहा हूं कि हर पार्टी का समय निश्चित किया गया था…( व्यवधान)
SHRI SURESH KURUP : Who are you to say all these things? … (Interruptions)
MAJ. GEN. (RETD.) B.C. KHANDURI : I am amazed that you are asking this question. I am informing the decision taken in the BAC. … (Interruptions)
कुंवर अखिलेश सिंह : आप भारतीय जनता पार्टी के सचेतक हैं, आप उतना कहिये।…( व्यवधान)
SHRI SURESH KURUP : Let the Home Minister say. … (Interruptions)
MAJ. GEN. (RETD.) B.C. KHANDURI : Please listen to me. Why are you getting agitated? … (Interruptions)
सभापति महोदय : आप बैठ जाइये। आप लोग अपना स्थान ग्रहण कीजिए, समाधान हो रहा है।
MAJ. GEN. (RETD.) B.C. KHANDURI : I am merely conveying the decision taken in the BAC. This is not my decision. … (Interruptions)
PROF. A.K. PREMAJAM (BADAGARA): Some Members are being denied the opportunity. … (Interruptions)
श्री राजेश पायलट : पहले से छ: घंटे का समय फिक्स है, जो मुझे स्पीकर के यहां से बताया गया है, टेंटेटिवली १० बजे होम मनिस्टर साहब का जवाब रख लेते हैं। अगर एक्सटेंड करना होगा तो कल १२ बजे, क्वश्चन ऑवर के बाद रखेंगे।
SHRI E. AHAMED (MANJERI): All the Members, whether they belong to major parties or smaller parties, must be allowed to speak. You must take the views of the smaller parties also. You must take the views of different sections of this House. You must not only take the views of the major parties like BJP and Congress, but you must also take the views of the smaller parties. … (Interruptions)
सभापति महोदय : अहमद साहब, आप अपना स्थान ग्रहण कीजिए। आप बैठिये, आप चेयर को सुनिये। छ: घंटे समय का जो कार्य मंत्रणा समति ने निर्णय किया था, उसके तहत नौ बज कर १५ मिनट पर समय पूरा हो जाता है। इसलिए सभी दलों के माननीय सचेतक अपने-अपने दल के सदस्यों को समय सीमा के अन्दर बोलने के लिए कहें। हमको कोई आपत्ति नहीं है, यह समय सीमा के अन्दर समाप्त हो जायेगा।
कुंवर अखिलेश सिंह : माननीय सभापति महोदय, यह तो सही है कि छ: घंटे का समय निर्धारित हुआ था। संयोग से आप भी बी.ए.सी. के मैम्बर हैं। उसमें यह तय हुआ था कि जो नये सदस्य होंगे, जो छोटे-छोटे दल होंगे, उनको भी बोलने का अवसर प्रदान किया जायेगा। समय तो आपने एलाट जरूर किया है …( व्यवधान)
सभापति महोदय : अखिलेश जी, बराबर यह परम्परा है कि सदन में जो छोटे ग्रुप्स हैं और भी माननीय सदस्य हैं, उनको भी समय मिलता रहा है, मिलता रहेगा।
श्री चिन्मयानन्द स्वामी (जौनपुर) : माननीय सभापति जी, मैं पहले आपका धन्यवाद करता हूं कि आपने इस गृह मंत्रालय की बजट चर्चा में मुझे बोलने का मौका दिया।
मैं सबसे पहले पूर्व गृह राज्य मंत्री माननीय श्री राजेश पायलट का धन्यवाद करता हूं कि उन्होंने बड़े सकारात्मक सुझाव दिये, लेकिन लगता है कि उन्होंने आज जो अखबार पढ़ा, वह जल्दी में पढ़ा।
जिस बयान की चर्चा से उन्होंने अपनी बात शुरू की, वह बयान जयपुर में एक माडल बन रहा है, उसको अयोध्या में कारसेवकों द्वारा ले जाने की बात है, और कुछ नहीं है। इसलिए पूरी जानकारी नहीं होने के कारण उन्होंने इस बयान को आधार बनाया है। मैं कहना चाहता हूं कि ऐसा कोई बयान नहीं आया है कि राम जन्मभूमि पर मूर्ति स्थापित की जा रही है। वह सिर्फ एक माडल लाने की बात हुई है। प्राय: ऐसा होता है कि हम अखबारों में छपी हुई बातों को सदन में उठा देते हैं, जिससे उत्तेजना निर्मित होती है। इसलिए मैं सब सम्मानित सदस्यों से आग्रह करूंगा कि कम से कम जब हम देश में साम्प्रदायिक सद्भाव लाने के लिए प्रयत्नशील हैं और सभी चाहते हैं कि सद्भाव निर्मित हो, एक ऐसा वातावरण देश में बने जिससे देश विकास की ओर, समृद्धि की ओर बढ़े, उस समय उन उत्तेजनात्मक बातों से बचने की कोशिश करनी चाहिए। इसके साथ ही जो भी बयान आते हैं उन पर गम्भीरता से नजर डालनी चाहिए।
अभी प्रियरंजन दासमुंशी जी ने कहा कि गृह मंत्री जी के विभाग में तालमेल नहीं है। हमें अच्छी तरह याद है, जिस तालमेल की ओर वे अंगुली उठा रहे हैं, कम से कम जब पायलट जी गृह मंत्रालय में राज्य मंत्री थे और श्री एस.बी. चव्हाण गृह मंत्री थे, तब उनके बीच में कितना तालमेल था, उस पर गौर किया होता तो शायद यह सवाल नहीं उठाते। जिस बात की ओर दासमुंशी जी ने बार-बार ध्यान आकृष्ट करने की कोशिश की वह है लाहौर बस यात्रा और कारगिल का युद्ध। मै उनको बताना चाहता हूं कि शिमला समझौता १९७२ में हुआ था। क्या तभी से छद्म युद्ध की यात्रा शुरू नहीं हुई थी। उसके बाद तो यह सिलसिला जारी है, प्रॉक्सी वार चली है, आतंकवाद की आंधी चली है। उसमें कितने लोगों की कुर्बानियां हुई हैं, कहा नहीं जा सकता। इस देश के दो-दो प्रधान मंत्री और एक मुख्य मंत्री, संयोग से दोनों प्रधान मंत्री और मुख्य मंत्री आपकी ही पार्टी के थे, देश के सम्मानित नेता थे, उस आतंकवाद में आहूति की भेंट चढ़ गए। देश आतंकवाद का शिकार हुआ, वह आज तक मुक्त नहीं हो पा रहा है। हमें आतंकवाद को खत्म करना है तो गम्भीरता से इसके बारे में आम राय बनानी चाहिए। सबसे बीच में सामंजस्य बनाने की कोशिश करनी चाहिए।
सभापति महोदय, अभी कुछ दिन पहले एक रैली हुई। उसमें एक बड़े मजहबी नेता ने बयान दिया कि मैं आई.एस.आई. का एजेंट हूं। अगर पायलट जी ने उस बयान की निंदा की होती तो मुझे बड़ा अच्छा लगता। लगता है कि उन्होंने वह बयान नहीं पढ़ा, जिसमें यह था कि किसी की हिम्मत हो तो मुझे गिरफ्तार करे, लेकिन उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हुई।
श्री राशिद अलवी : मैं उसको एप्रशिएट नहीं करता हूं, लेकिन उस बयान की भावना यह है कि सबको आई.एस.आई. का एजेंट बताया जा रहा है।
सभापति महोदय : श्री अलवी आप बीच में न बोलिए, आपकी बात रिकार्ड में नहीं जा रही है।
...( व्यवधान)...(कार्यवाही वृत्तान्त में सम्मिलित नहीं किया गया।) श्री चिन्मयानन्द स्वामी : अगर अलवी साहब उनकी वकालत कर रहे हैं तो हमें कोई एतराज नहीं है। मैं निवेदन करना चाहता हूं कि हमारे माननीय नेता राजेश पायलट और अलवी जी उस बयान का उल्लेख करते कि उस बयान से जो उत्तेजना पैदा हुई है, उसका नतीजा क्या हुआ है।
अभी धार्मिक स्थल विधेयक को लेकर रघुनाथ झा जी ने अच्छी बात कही है। ऐसा विधेयक लाना बहुत आवश्यक था, क्योंकि नेपाल की तराई में जो कुछ हो रहा है, उससे वे सब लोग अवगत हैं जो वहां की यात्रा करते हैं। हमारे सांसद ब्रज भूषण शरण सिंह जी यहां बैठे हैं, उन्नहोंने वहां की यात्रा की थी। उनको पता है कि किस तरह से वहां धार्मिक स्थलों के बीच आई.एस.आई. अपनी जड़ें जमाने की कोशिश कर रही है। क्या हम उदाहरण के रूप में नहीं बता सकते कि बंगाल में माल्दा और दीनाजपुर जिले में पिछले पांच साल में पांच किलो मीटर की बैल्ट में एक हजार मस्जिदें बनी हैं। अनायास ही इतना उत्साह उमड़ा कि वहां इतनी मस्जिदें बन गईं।
श्री राशिद अलवी : एक भी मस्जिद का नाम बता दें जिसमें आई.एस.आई. की गतवधियां चल रही हों ?
श्री चिन्मयानन्द स्वामी : मैं मस्जिद का नहीं, जिले का नाम बता रहा हूं, आप पता लगा लें।
श्री प्रियरंजन दासमुंशी : दीनाजपुर मेरे क्षेत्र में है, माल्दा से अलग है।
श्री चिन्मयानन्द स्वामी : हम नहीं कहते कि उनका उससे सम्बन्ध है या नहीं।
लेकिन मेरा यह कहना है मस्जिदें बनी हैं। अभी सुनते जाइए। धर्म स्थल विधेयक जब मध्य प्रदेश में बना तो किसी को परेशानी नहीं हुई, जब राजस्थान में बना तो किसी को परेशानी नहीं हुई, बंगाल में बना तो भी किसी को परेशानी नहीं हुई लेकिन जब उत्तर प्रदेश में बनाया गया तो परेशानी हुई और परेशानी इस सीमा तक हुई कि राजेश जी, सलमान खुर्शीद जी को समझाइए, उन्होंने कहा कि अगर यह विधेयक पारित हो गया, लागू हो गया तो हम एक हजार मदरसे नेपाल की तराई में बनाएंगे। अगर वह कम्प्यूटर स्कूल बनाते तो ज्यादा अच्छा रहता। इस तरह की बातें अखबारों में उछलती हैं और जब ये बातें अखबारों में आती हैं तो हम लोग उनकी तह तक नहीं जाते। केवल उस पर प्रतक्रिया व्यक्त करते हैं। जब यहां प्रतक्रिया व्यक्त की जाती है तो चाहे कितनी ही महत्वपूर्ण खबर क्यों न हो, वह महत्वपूर्ण बन जाती है। अलवी साहब कह रहे थे कि स्वाधीनता के बाद इस देश की हालत ऐसी खराब ही नहीं हुई थी जैसी आज खराब हुई है। पता नहीं कि माननीय मायावती जी के साथ जो बीती थी, वह इन्हें याद है या नहीं है ? उस समय कौन सी अच्छी स्थिति थी ? किस स्थिति में उनकी दुर्दशा हुई थी ? मैं कहना चाहता हूं कि आबादी के साथ लॉ एंड ऑर्डर जैसी कुछ समस्याएं होती है। उन बिंदुओं पर चर्चा होनी चाहिए जिनकी शुरुआत माननीय राजेश जी ने की थी। वे महत्वपूर्ण चर्चाएं हैं। आई.एस.आई. पर श्वेत पत्र आना चाहिए। साथ में यह भी होना चाहिए कि विदेश से जो बहुत बड़ी मात्रा में इस देश में धन आ रहा है, पिछले दस साल में दस हजार करोड़ डॉलर पैसा इस देश में आया है, माननीय गृह मंत्री जी के रिकार्ड में यह सब बातें हैं। वह पैसा किस काम के लिए आ रहा है ? क्या वह पैसा जिस काम और जिस क्षेत्र के लिए आ रहा है, क्या उसी क्षेत्र औऱ उसी काम में लग रहा है ? इसकी भी जांच होनी चाहिए। जो पैसे आ रहे हैं, उनका भी एक श्वेत पत्र लाया जाना चाहिए, ऐसी मैं गृह मंत्री जी से मांग करूंगा। उनको भी सबके सामने लाना चाहिए कि उस पैसे का उपयोग कहां हो रहा है, किस काम में हो रहा है ?
कल बड़े जोर से आगरा की घटना को लेकर चर्चा हो रही थी। मैं कहता हूं कि इस तरह की जो घटनाएं होती हैं, उनकी जांच होनी चाहिए। जो दोषी पाए जाएं, उनको सजा मिलनी चाहिए लेकिन बिना जांच के सदन को अपने कब्जे में ले लेना और सदन की कार्यवाही रोकना अच्छी बात नहीं है। मैं जानता हूं कि पूरे देश में क्रिश्चियन स्कूल का एक नैट वर्क है, शिक्षा के क्षेत्र में अच्छा काम कर रहे हैं। लेकिन कहीं-कहीं किन्हीं स्कूलों में कुछ झगड़े हो जाते हैं औऱ वे झगड़े कभी धार्मिक और साम्प्रदायिक रूप ले लेते हैं। वे स्कूलों के झगड़े होते हैं जो एडमिशन और कक्षा में पढ़ाई को लेकर होते हैं। इन झगड़ों को कोई राजनीतिक रंग नहीं दिया जाना चाहिए बल्कि उसकी जांच करके स्कूल के स्तर पर उनका हल करने की कोशिश करनी चाहिए। आगरा की घटना ऐसी ही एक घटना है, मैं सारी जानकारी लेने के बाद कह रहा हूं।
मैं माननीय गृह मंत्री जी का ध्यान आकर्षित करना चाहूंगा कि गाजियाबाद में गाजियाबाद विकास प्राधिकरण की उपाध्यक्षा एक मिस लोरेटोवासा उन्होंने क्या किया, जितनी बाल्मीकि बस्ती थीं, वहां जाकर कहा कि अगर आप क्रिश्चियन बनते हैं तो पांच हजार रुपये क्रिश्चियन मिशनरीज से मिलेंगे और स्कूल आपको दे दिया जाएगा। अच्छा हुआ कि उत्तर प्रदेश के मुख्य मंत्री ने उन्हें पद से हटा दिया है। इस प्रकार की बात आज अधिकारियों में आ रही है। अधिकारी आज साम्प्रदायिकता के आधार पर सोचने लगे हैं और इस पर काम करने लगे हैं। मैं नहीं मानता कि देश में ऐसी कोई परिस्थिति है कि साम्प्रदायिक तनाव पैदा हो। साम्प्रदायक तनाव की परिस्थितियां माननीय आडवाणी जी ने समाप्त कर दी हैं। इस परिस्थिति में कोई साम्प्रदायिक दंगा इस देश में नहीं हो सकता चाहे वह ग्राहम स्टेन्स का मामला हो चाहे वह मध्य प्रदेश में ननों का मामला हो और चाहे हरियाणा और आगरा का मामला हो, सख्ती से निष्पक्षता से जांच करवाना जिस व्यक्ति के स्वभाव में है, अगर उस व्यक्ति का नाम लिया जा सकता है तो इस समय हमारी सरकार में एक नाम है और वह श्री लाल कृष्ण आडवाणी जी हैं। उनका स्वभाव ही निष्पक्षता है, वह कभी पक्ष नहीं लेते। मुंशी जी परेशान हो रहे थे जब लोगों ने उन्हें पटेल कह दिया। इतना कहने पर परेशानी नहीं होनी चाहिए। इसी देश के बेटा हो। एक नेता ने कहा था-Indira is India, India is Indira. तब आप कहां थे ? लगता है कि तब आपका जन्म राजनीति में नहीं हुआ था, तब आप नहीं बोल पाये थे। तब आपको परेशानी समझ में नहीं आय़ी थी। लेकिन यह बात अपने लोगों को आदर देने के लिए कही जाती है।
हमारी भावना है, हम किसी को कुछ भी कह सकते हैं। आज कितने लोगों के नाम राम पर, अब्दुला पर हैं और कितनों के मोहम्मद पर हैं।...(व्यवधान) मैं आपसे कहना चाहता हूं कि अब भी वक्त है, आप अपनी गलतियों पर नजर डालें। आपने जो पिछले ५० सालों में गलतियां की हैं, उनसे उभरिए। अगर उन गलतियों से नहीं उभरेंगे तो न अपने को बचा पाएंगे और न देश को बचा पाएंगे। चाहे वे गलतियां आपकी हों या हमारी हों, हम सबको उन गलतियों पर नजर डालनी चाहिए, अपनी गलतियों को दूर करने का प्रयास करना चाहिए। पुरूलिया का कांड किस के समय में हुआ था। पुरूलिया में हथियार किस के समय में गिराए गए थे। पुरूलिया में हथियार गिरा था और वह हथियार बिहार में गिरा था, वह हथियार आज तक बरामद नहीं हो पाया। आज भी अखबारों में आ रहा है कि वह अपराधियों के पास पहुंच गए हैं।...(व्यवधान) हम अपनी गलती मानते हं, आपकी तरह अपनी गलतियों को दूसरों पर नहीं थोप रहे हैं। पुरूलिया में हथियार गिरे थे और हथियार गिराने वाले बड़े आराम से चले गए थे। वे किस की हुकूमत से गए थे। उस समय किस की सरकार थी, वह हथियार आज तक बरामद नहीं हो पाए। राज्य सरकारें पुलिस व्यवस्था में, सुरक्षा व्यवस्था में, कार्यक्रम में अपनी भूमिका निभाती हैं। केन्द्र के साथ कितना सहयोग कर रही हैं। आज बिहार में अगर अपराध बढ़े तो आश्चर्य क्या है। अगर आर्थिक द्ृष्टि से चार्जशीटेड महिला मुख्य मंत्री बनेगी तो उसके शासन में अपराधों में प्रोत्साहन मिलता है तो इसमें आश्चर्य की क्या बात है, वह तो मिलेगा।...(व्यवधान)
आप सुन लीजिए। जब आडवाणी जी पर आर्थिक अपराध का आरोप लगा था तो उन्होंने पार्लियामेंट से इस्तीफा दिया था और तब तक पार्लियामेंट नहीं आए थे, जब तक अपराध मुक्त नहीं हो गए थे। उन्होंने एक आदर्श प्रस्तुत किया था। आप भी कुछ सीख लो।...(व्यवधान) तुम्हारे पास सीखने के लिए कुछ नहीं है।...(व्यवधान)
श्री राजेश पायलट आदर्श वाली बात कहोगे तो चार्ज कोई भी हो- चाहे आर्थिक हो या दूसरा हो।...(व्यवधान) वह चार्ज ही है।...(व्यवधान)
श्री चिन्मयानन्द स्वामी मैं आदर्श की बात नहीं कह रहा हूं।...(व्यवधान) मैं निवेदन करना चाहता हूं, आज स्थिति यह है कि आपने पहल की है। पूर्वोत्तर परिषद बना कर शिक्षा के क्षेत्र में, प्रगति और उद्योग के क्षेत्र में तथा हर क्षेत्र में वहां के लोगों को रोजगार देने की पहल की जा रही है, यह सकारात्मक कदम है। लेह-लद्दाख में बहुत से लोग रहते हैं, उन्हें कुछ दिक्कतें आ रही हैं। उन्हें अपने रोजमर्रा के काम में दिक्कते आ रही हैं, आपको इनको देखना चाहिए। वहं रहने वाले बोद्ध, अल्पसंख्यक अगर परेशान हैं तो उनकी परेशानी दूर करनी चाहिए। अभी-अभी पायलट जी अच्छी बात कह रहे थे कि उन्हें आबाद करने की व्यवस्था की जानी चाहिए, लेकिन दिक्कतें आ रही हैं। अगर वे अपनी जमीन के, घर के कागज चाहते हैं, जिसमें उनका रेवेन्यू रिकार्ड हो तो वह नहीं मिलता। उन्हें उपलब्ध नहीं कराया जाता, उसमें दिक्कतें पैदा होती हैं। इसलिए इन दिक्कतों को दूर करने की जरूरत है, इन्हें दूर किया जाए।
महोदय, आर्थिक पिछड़ेपन को दूर करने के लिए पंडित जवाहर लाल नेहरू ने एक पटेल आयोग बनाया था, जिसमें पूर्वी उत्तर प्रदेश के जिलों के पिछड़ेपन को दूर करने के लिए उपाय सुझाए थे, वह रिपोर्ट पता नहीं कहां पड़ी हुई है। वह रिपोर्ट लाई जानी चाहिए। उत्तर प्रदेश का पूर्वी हिस्सा अभी बहुत पिछड़ा हुआ है, उसके पिछड़ेपन को दूर करने के लिए पटेल आयोग की सिफारिशें क्या हैं, वे सामने लाई जानी चाहिए, जिससे पिछङापन दूर हो। हमारे मित्रों ने जो सुझाव दिए हैं, वे महत्वपूर्ण हैं, लेकिन यहां व्यक्तियों और दलों में बंट कर विचारों को सीमित नहीं करना चाहिए, विचारों के बीच में एक सामंजस्य बनना चाहिए और सदन को एक संदेश देना चाहिए कि हम देश की अंदरूनी सुरक्षा को बनाए रखने में एक साथ हैं।
MR. CHAIRMAN : Shri P.H. Pandiyan, before you start, I would like to draw your attention that you have only six minutes’ time.
SHRI P.H. PANDIYAN (TIRUNELVELI): Mr. Chairman, I thank you very much for having given me this opportunity to express my views on the debate on Demand Nos. 45 to 49 and 99 to 103 relating to the Ministry of Home Affairs. An amount of Rs. 13,326.98 crore is being voted in favour of Ministry of Home Affairs and the largest chunk of the Budget is going to the Police Department. I would like to say that protection of life and property is the duty of the police. What grammar is to language, police is to society. If there is a grammatical error, you cannot convey the meaning. To elucidate that, I would say that in the various incidents that have been taking place for the last two or three years, the actual protection of life and property accorded under the Constitution is being done by the police. In 1978, Dharamvira Commission was appointed. It submitted one Report in 1978, one in 1979, one in 1980 and one in 1981. All those Reports have not been implemented by the Centre or the States. The Report of the Commission indicated a fixed tenure for the Directors-General of Police. According to the Report of the Commission, if a Director-General of Police is appointed, he has to serve for four years.
Even in the Report of the Standing Committee, there is only one reference at page 127 to the Dharamvira Commission Report and police reforms. I would like to quote. It says:
"The Committee notes response of the Home Ministry and direct the Ministry to keep it informed in detail of the progress made in the matter from time to time. "
From 1978 to till date, that Commission’s Reports have not been implemented. What is the reason for the delay? Is there any inconvenience to the Government of India or to the Governments of some States? Sir, I would urge the Home Minister – I think, he would have been in that Ministry in 1978 or 1979 when this Report was presented before Parliament – to implement the Dharamvira Commission’s recommendations immediately to preserve the independence of the police. Police should be independent. State means police. Without police, a State is not a State. If you abolish police, a State is not a State. If you go back to the Greek history, the word polis means State. A State can run without any other Department but not in the absence of police. So, police should be independent.
Under the Criminal Procedure Code, detection of crime, investigation of crime and launching of prosecution is the duty of the police. The court believes the police. They take statement of the accused, the court believes that statement and proceed with the trial. The police makes the charge-sheet and the charge is framed based on the charge-sheet filed by the police. We do not have any Judicial Police here. We have policemen and that is all. Only in France, they have Judicial Police, they have an Examining Magistrate to place the real facts, not concocted facts, before the court. But here, the police is a powerful weapon at the hands of the ruling party whether it is Centre or the State because the police is supposed to be independent.
We follow the Continental System of Criminal Jurisprudence wherein is the presumption of innocence.
19.00 hrs. An accused is presumed to be innocent until he is found guilty. Now you have brought so many legislations wherein it is said that in regard to presumption of guilt, one has to prove one's innocence, be it in foreign exchange violation case, income tax case or narcotic drugs case. Slowly we have drifted from this continental model to the French model of jurisprudence. It is high time, the laws that are not applicable to the citizens of India have to be written off. IPC is enough; the other Acts are not at all necessary because it includes all offences. Lord Macaulay, from his experience, drafted the IPC with great wording. The Code of Criminal Procedure is sufficient.
The Central Government has forgotten the Inquiry Commission Act, 1952. This was passed by Parliament to look into complaints against high constitutional functionaries. The Khairnar Commission, Das Commission, Kuldeep Commission and the Sarkaria Commissions were appointed to inquire into allegations against former Chief Ministers. Now, an ordinary DSP can arrest a Chief Minister, and he can frame charges. In the famous Bakshi Mohammed Case, in 1954, the Supreme Court declared that the Chief Ministers are a class by themselves. Shri Bakshi Mohammed moved the Supreme Court saying that he has been singled out, and that the other Ministers have not been asked to appear before the Commission. The Supreme Court said that the Chief Ministers are a class by themselves. Therefore, my submission is that the same protection should be given to high constitutional functionaries.
Then, there are sporadic incidents of violence all over the country. Why has the Constitution afforded protection to the minorities? The majority is already protected under the Constitution. The minorities alone have to be protected, and that is the spirit and letter of the Constitution. Minorities can ask for concessions, and the majority can take it for themselves. These sporadic incidents of violence claimed so many lives of Christians, Nuns and Priests; and they have not stopped.
We have now a civilised society, but the methods of crime are very uncivilised. Therefore, these uncivilised methods of crime need uncivilised methods of meting out punishment.
We have abolished corporal punishment. On the other day, while participated in a meeting of the Home Affairs Committee, I was talking to Maj. Gen. (Retd.) Khanduri. There was a punishment called "cashiering". This punishment used to be imposed by a Court Marshal between 1947-50. That punishment is imposed on anybody who stealthily committed a theft of the rationed food stocks. That punishment is no longer carried out now in the military organisation even in India. When a person had committed that crime, then he would be asked to parade in an assembly. Then, two military Generals would come on two horses from one side, and another two would come from the opposite side.
One person took away the sword from the guilty officer and removed the upper part of his dress and another person removed the lower part of his dress. Then he was asked to go out of that place. That was the punishment given for that crime because it affected the whole society. So, in a civilised society, we have come to understand that what was illegal yesterday is legal today and what was immoral yesterday is moral today.
MR. CHAIRMAN : Please conclude.
SHRI P.H. PANDIYAN : Sir, we are ten Members and I am the only person speaking from my Party. And there are many Members, even independent Members, who get more time than this.
An hon. Member referred to the Jain Havala case. My views are different on this. An Inquiry Commission has to be first instituted; it has to submit its findings; and on the basis of those findings a constitutional functionary can be asked to explain the situation. This is the method adopted under the Judges Inquiry Act, 1968. No High Court judge or Supreme Court judge is directly booked. A Committee of three judges is appointed first; they inquire into the case; they submit their report; the report is tabled in the Parliament; a discussion is held in Parliament; and after that the judge is asked to explain his position. Similarly, a high constitutional functionary should not be treated like an ordinary citizen. The law says, ‘whoever’; IPC says ‘whoever’ – it may be a Minister or it may be an ordinary citizen. But in a democratic set up where there is a Ruling Party and an Opposition which are used to level allegations at each other, on that score no motives can be attributed while filing an FIR. FIR is not a final document. Based on FIR or a charge sheet, no Minister can be asked to resign. Since the hon. Home Minister had established a precedence in the 12th Lok Sabha, we are following that. What is a charge sheet? It is the property of the police officer. It is presented before the court of law and then the judge, without even applying his mind, asks the agencies to frame charges. The Home Minister had established that precedence and that is why that applies to him even now. Whether it is an FIR or a charge sheet, it has no relevance at all to a high constitutional office.
The Election Commission has commented as to a person who is charge-sheeted can be allowed to contest election or he can be asked to refrain from contesting. That is not the business of the Election Commission. The Chief Election Commissioner has issued a statement, even when the Parliament is in session, that 15 per cent reservation for women can be conceded to by the Government. Who is the Chief Election Commissioner to say that? After all he is only an appointee under the Constitution. The sovereignty of this House should prevail over all other constitutional authorities.
I would say that there are certain lacunae in the present IPC. In 1988, the Supreme Court had said that there should be rationalising and narrowing down of judges’ discretion. In the case of Bhajan Singh vs State of Punjab, 1980, the then Chief Justice P.N. Bhagwati had said that. Indian Penal Code (Amendment) Bill, 1978 lapsed due to the dissolution of Lok Sabha. That Bill says that judges should have limited discretion in choosing life and death sentences. That Act was passed by Rajya Sabha but it has not seen the light of the day in Lok Sabha till date.
The Bill of 1978 is there. If that Bill is brought about, judicial discretion can be regularised. In that way, the duty of the Parliament would be fulfilled and the powers of the Parliament would be exercised while imposing or choosing the punishment.
With these words, I have to support it because this is a Demand and the amount has to be given to the Demand. I have to support it constitutionally. So, I support it.
श्री अनन्त गंगाराम गीते (रत्नागरि) : सभापति महोदय, आपने मुझे बोलने का समय दिया, इसके लिए मैं आपको धन्यवाद देता हूं। कल सदन में राष्ट्रपति जी के अभिभाषण पर आये धन्यवाद प्रस्ताव पर प्रधानमंत्री जी का बहुत ही सुन्दर भाषण हुआ और जब देश की सुरक्षा का मामला आया, तब प्रधान मंत्री जी ने कहा कि देश की सुरक्षा हमारे लिए सर्वोपरि है। प्रधान मंत्री जी की इस बात से हम सभी सहमत हैं। चूंकि आज सीमा पर बहुत बड़ा खतरा पाकिस्तान से है। नियंत्रण रेखा के ऊपर बार-बार हमले हो रहे हैं, नियंत्रण रेखा को पार करने की भी कोशिश हो रही है। जितनी देश की सीमाओं की सुरक्षा महत्वपूर्ण है, उतना ही महत्वपूर्ण मामला आंतरिक सुरक्षा का है। देश में कई प्रांत हैं जहां आतंकवाद काफी बढ़ा हुआ है और आई.एस.आई. के जरिये यहां आतंकवाद को बढ़ावा देने का काम बार-बार पाकिस्तान कर रहा है। एक ओर सीमा पर हमला किया जाता है, नियंत्रण रेखा को भंग करने की कोशिश की जाती है और दूसरी ओर हमारे देश के भीतर ही आतंकवाद को बढ़ावा देकर, यहां कम्युनल दंगे करवाकर, पूरे देश की शांति को तोड़ने की, पूरे देश की वित्तीय स्थिति को बिगाड़ने का एक षडयंत्र पाकिस्तान की ओर से किया जा रहा है। इसलिए मैंने कहा कि जितनी सीमा की सुरक्षा सर्वोपरि है, देश की सुरक्षा सर्वोपरि है, उतनी ही आंतरिक सुरक्षा भी महत्वपूर्ण है। इसलिए जब हम अनुदान की मांगों पर चर्चा कर रहे हैं तो मैं वित्त मंत्री जी से प्रार्थना करूंगा कि गृह मंत्रालय को ज्यादा से ज्यादा वित्तीय सहायता देने की आवश्यकता है।
आज देश में जो कानून और व्यवस्था की स्थिति है, वह चिंताजनक है। जब से इस सत्र की शुरूआत हुई है, हर दिन शून्यकाल में किसी न किसी हत्या पर हम सदन में चर्चा करते आये हैं। देश के हर राज्य में आज यह चिंता का विषय बना हुआ है। जो संगठित गुनाहगार हैं, उनकी ताकत दिन-ब-दिन बढ़ती जा रही है। जब हम गृह मंत्रालय की मांगों पर चर्चा कर रहे हैं तो हमें इसकी जड़ में जाने की आवश्यकता है कि क्राइम क्यों बढ़ते चले जा रहे हैं।
सभापति महोदय, कौन लोग इसके पीछे हैं। आज हमारे देश में घुसपैठियों की संख्या दिन ब दिन बढ़ती जा रही है। जब हमारी सरकार ने, महाराष्ट्र की सरकार ने, मैं महाराष्ट्र से आता हूं, बंगला देशी घुसपैठिए जो मुम्बई के अंदर आ गए हैं, उन्हें बाहर निकालने की कोशिश की, तो इस सदन में विरोध किया गया।…( व्यवधान)
श्री अजय चक्रवर्ती (बसीरहाट): यह गलत बात है।…( व्यवधान)
श्री अनंत गंगाराम गीते : यह गलत नहीं, बल्कि हकीकत है।…( व्यवधान)
श्री अनिल बसु (आरामबाग): वह मेरे क्षेत्र का आदमी था। उसके ऊपर हमला हुआ था।…( व्यवधान)
श्री अनंत गंगाराम गीते : जिन बंगलादेशी लोगों को बाहर निकालने का काम हमारी मुम्बई की पुलिस ने किया और पश्चिम बंगाल में पहुंचाने का काम किया, उन पुलिस कर्मियों के ऊपर हमला किया गया।…( व्यवधान)
श्री रूप चन्द पाल (हुगली): मैंने सर्टफिकेट दिया था। वह हमारे जिले का है। हुगली जिले का है।....( व्यवधान)
श्री अनिल बसु: उन लोगों ने जो काम किया वह बहुत गलत काम किया।…( व्यवधान)
श्री अनंत गंगाराम गीते : जो सही काम कर रहे हैं, वह देश की जरूरत है। वह काम सिर्फ हमारे यहां महाराष्ट्र में ही नहीं बल्कि पूरे देश में होना चाहिए और घुसपैठियों को बाहर निकाला जाना चाहिए। जहां-जहां घुसपैठिए हैं उन सबको बाहर निकालने की आज सख्त जरूरत है। …( व्यवधान)
पहले आप मुझे पूरा सुन लीजिए। मैं जो बात कह रहा हूं, उसे सुन लीजिए, उसके बात आप जो कहना चाहें, वह कहें।…( व्यवधान)
श्री अनिल बसु : मुम्बई पुलिस कमिश्नर की रिपोर्ट पढ़ लीजिए। उन्होंने लिखा है कि शिव सैनिक अपराध बढ़ा रहे हैं।…( व्यवधान)
श्री अनंत गंगाराम गीते : सभापति महोदय, अल्वी जी बोलकर चले गए। देश में हजारों बलात्कार की घटनाएं हुईं, दंगे हुए जिनका यहां जिक्र किया गया। जो मुलजिम हैं, उनकी जांच कराइए और यह मालूम कीजिए कि झगड़े-फसादात करने वाले, बलात्कार करने वाले, हत्याएं करने वाले लोग कौन हैं, कौन से धर्म के हैं। वह सत्यता भी सदन के सामने लाने की जरूरत है। यह भी बताने की जरूरत है कि मुजरिमों में हिन्दू कितने हैं और मुस्लिम कितने हैं।…( व्यवधान)
गृह मंत्री (श्री लाल कृष्ण आडवाणी): अपराधी, अपराधी है। वह किसी जाति या धर्म का नहीं।…( व्यवधान)
सभापति महोदय: अपराधी की कोई जाति नहीं होती।
श्री अनंत गंगाराम गीते : सभापति जी, अपराधी वे हैं जिनको इस देश से कोई लगाव नहीं होता। जिनको इस भूमि से कोई प्यार नहीं है। जो लोग बाहर से आए हैं और घुसपैठिए बनकर आए हैं। वे लोग यहां खुले आम अपराध कर रहे हैं। आज हालात ये हो गए हैं कि ऐसे लोगों से पांच हजार रुपए देकर किसी की भी हत्या करवा लो। आप बड़े-बड़े शहरों में देख लो। गैंगस्टर हैं जो हत्याएं करते हैं। आप उन्हें सिर्फ पांच हजार रुपए दो और किसी की भी हत्या करवा लो। ऐसी भयावह स्थिति हो गई है। ये कौन लोग हैं, इसकी जांच करने की आवश्यकता है। आज उन्हीं लोगों के कारण क्राइम बढ़ते जा रहे हैं।…( व्यवधान)
श्री अनिल बसु : यह इन्फर्मेशन आपके पास कैसे आई कि पांच हजार रुपए में हत्या की जा रही है। क्या आपने किसी को पैसे दिए?…( व्यवधान)
श्री अनंत गंगाराम गीते : यह इन्फर्मेशन अखबारों में छपती है। रोजाना इस प्रकार की खबरें पढ़ने को मिल जाएंगी। यही बात हर हत्या के पीछे होती है। जो हत्यारे हैं, जो गैंगस्टर हैं, वे पांच हजार रुपए में किसी की भी जान ले लेते हैं।
सभापति महोदय, यहां पर जब लाल कृष्ण आडवाणी जी की जब हमारे एक मित्र ने सरदार पटेल के साथ तुलना करनी चाही, तो कांग्रेस के लोगों ने आपत्ति की।
यह तो आपत्ति करेंगे। आज उनके नेता कौन हैं ? मुझे किसी पर टीका-टिप्पणी यहां पर नहीं करनी है लेकिन आज इनकी हालत डूबते को तिनके का सहारा जैसी हालत है। …( व्यवधान) बेचारे तो है ही। डूबते को तिनके का सहारा है। आज इनके नेता श्रीमती सोनिया गांधी हैं। …( व्यवधान) मैं उन पर कोई व्यक्तिगत टिप्पणी नहीं कर रहा हूं। …( व्यवधान)
श्री अनंत गंगाराम गीते : मैंने कुछ गलत नहीं कहा। …( व्यवधान)
क्या सोनिया गांधी आपकी नेता नहीं हैं। …( व्यवधान) सोनिया जी गांधी नहीं हैं या कांग्रेस की नेता नहीं हैं। …( व्यवधान) मैंने क्या गलत बोला है। …( व्यवधान)
सभापति महोदय : आप विषय पर बोलिये।
श्री अनंत गंगाराम गीते : सभापति जी, यह तो असली महात्मा गांधी जी को भूल गये हैं। …( व्यवधान) जब देश आजाद हुआ तब महात्मा गांधी जी ने कहा था कि अब देश आजाद हो गया, कांग्रेस को बर्खास्त करो। …( व्यवधान) इन्होंने नहीं माना। आज जनता इन्हें बर्खास्त कर रही है तब इन्हें सोनिया गांधी की जरूरत पड़ रही है। …( व्यवधान)
SHRI PABAN SINGH GHATOWAR (DIBRUGARH): It should be deleted from the records. … (Interruptions)
सभापति महोदय : जो अनुदान की मांग है, आप उसी पर बोलिये।
…( व्यवधान)
श्री अनंत गंगराम गीते : सभापति जी, मैंने कुछ गलत नहीं कहा। …( व्यवधान)
सोनिया गांधी इनकी नेता हैं और वह गांधी हैं। इसमें क्या गलत है।…( व्यवधान)
श्री पवन सिंह घाटोवार : सोनिया जी के बारे में आप क्यों बोलेंगे। …( व्यवधान)
SHRI RUPCHAND PAL : Sir, you have to delete it; you may please expunge it. … (Interruptions)
श्री अनंत गंगाराम गीते : हमने कोई टीका-टिप्पणी नहीं की है। …( व्यवधान)
सभापति महोदय : आप सदन संचालन में व्यवधान मत डालिए। आप बैठ जाइये ।
आप आसन ग्रहण कीजिए। टोका-टाकी मत कीजिए। …( व्यवधान)
श्री अनिल बसु : मैं बाला साहब के बारे में कुछ भी बोल सकता हूं लेकिन बोलना अच्छा नहीं है। …( व्यवधान)
सभापति महोदय : आप बैठ जाइये। …( व्यवधान)
श्री अनंत गंगाराम गीते : हमने क्या गलत कहा है। …( व्यवधान)
सभापति महोदय : जब गीते जी बोल रहे थे तब मैं उनको बार-बार कह रहा था कि वह विषय पर बोलिये। आप लोग जब बीच में टोका-टाकी करते हैं तो इससे सदन का संचालन करने में दिक्कत हो रही है। इसलिए मेरा निवेदन है कि आप अपने विषय पर बोलिये और सन को मुखातिब करके बोलिये।
श्री अनंत गंगाराम गीते : मैं विषय पर ही बोल रहा हूं। …( व्यवधान) जब सरदार पटेल जी के साथ तुलना की गई तो वहां से आपत्ति की गई इसलिए मुझे संदर्भ देना पड़ा। अब इनके पास कोई सरदार पटेल नहीं रहा। आज आपके पास कौन सरदार पटेल है? आप किसका आदर्श लेने वाले हैं।
…( व्यवधान)
सभापति महोदय : आपका समय समाप्त हो गया है इसलिए अब आप कन्कलूड कीजिए। आप अपने समय का ख्याल कीजिए।
श्री अनंत गंगराम गीते आज बड़े-बड़े शहर हैं खास तौर पर बड़े शहरों के अंदर यह गुनाहगारी बहुत बढ़ गई है। पिछले तीन महीने के अंदर खासतौर पर मुम्बई में शिवसेना के पांच कार्यकत्ताओं की हत्या हो गई। पुलिस के कार्य में राजनीति हस्तेक्षेप बहुत बढ़ गया है। …( व्यवधान)
वह पहले से है। हम आपकी बात से सहमत हैं कि पहले से है। वही गलत है और जो गलत है, वही हम यहां पर कह रहे हैं।
सभापति महोदय : आप दूसरे माननीय सदस्यों को प्रबोक मत कीजिए। यह ठीक नहीं है।
श्री अनंत गंगाराम गीते : मैं आपको एड्रेस कर रहा हूं। राजनीतिक हस्तक्षेप बहुत बढ़ गया है। तीन महीने के अंदर पांच हत्यायें शिव सेना के कार्यकत्ताओं की हो गई। एक भी मुजरिम आज तक पकड़ा नहीं गया है।
हमारे महाराष्ट्र के होम मनिस्टर बयान देते हैं कि हम किन-किन लोगों को सुरक्षा देंगे। यदि होम मनिस्टर ही कह दें कि हम सुरक्षा नहीं दे सकते हैं तो गेंगस्टर को कौन रोकेगा, क्राइम को कौन कंट्रोल करेगा ?
यही कारण है कि राजनैतिक हस्तक्षेप बहुत बढ़ता जा रहा है। पुलिस पर राजनैतिक दबाव आ रहा है। पुलिस राजनैतिक दबाव में काम कर रही है। पुलिस को राजनैतिक दबाव में काम नहीं करना चाहिए, क्योंकि सुरक्षा की जिम्मेदारी उनकी है, आम आदमी की सुरक्षा की जिम्मेदारी पुलिस पर है। यह महत्वपूर्ण मंत्रालय है।
हमारा देश अलग-अलग प्रान्तों में बंटा हुआ है, अलग-अलग भाषाओं में बंटा हुआ है, अलग-अलग जाति धर्म में बंटा हुआ है, इसलिए जो आन्तरिक सुरक्षा है, उसकी सबसे ज्यादा जिम्मेदारी गृह मंत्रालय पर है, पुलिस पर है।
सभापति महोदय : अब आप अपना भाषण समाप्त करिये।
श्री अनंत गंगाराम गीते : पुलिस को निष्पक्ष होकर अपनी जिम्मेदारी पूरी करनी चाहिए। मैं यहां पर गृह मंत्री जी से एक प्रार्थना करने जा रहा हूं कि आज मजहब के नाम पर, धर्म के नाम पर दंगे करवाने की कोशिश की जाती है। यहां पर जातीय भावना, धार्मिक भावनाओं का उकसाने का काम होता है। … ( व्यवधान) आप अखबारों में पढ़ रहे हैं कि वह कौन कर रहा है।
सभापति महोदय : आप अपना भाषण समाप्त करिये। मैं नैक्स्ट माननीय सदस्य को बुला रहा हूं।
श्री अनंत गंगाराम गीते : मैं एक मिनट में खत्म कर रहा हूं। मुझे दुख इस बात का है कि आज सदन के अन्दर भी इस देश का जो सबसे बड़ा घटक है, उसको उकसाने में, उसको गाली देने में, उसको नीचा समझने में, रेस लगी हुई है। जो भी विपक्ष में खड़ा होता है, वह सबसे बड़े घटक को दोषी ठहरा रहा है। इस देश के अन्दर जो कुछ भी हो रहा है, उसके लिए जिम्मेदार सिर्फ हिन्दू है। और क्या हो रहा है? यही बातें हो रही हैं। …( व्यवधान) इस सदन के अन्दर कहा जा रहा है कि जो भी इस देश के अन्दर हो रहा है, उसे बहुसंख्यक हिन्दू कर रहा है। यदि बहुसंख्यकों के बारे में इतनी घृणा आप पैदा कर रहे हैं और इस घृणा को बढ़ाओगे तो यह उतनी ही तेजी से बढ़ने वाली है। ये बहुसंख्यक हिन्दू इस देश के हैं, इसीलिए इस देश के अन्दर खुशहाली है, इसीलिए इस देश के अन्दर धर्मनिरपेक्षता भी है। मैं पूरी तरह जायसवाल जी से सहमत हूं। दूसरी तरफ मुलायम सिंह जी जैसे नेता हैं, जो हिन्दू होते हुए भी पाकिस्तान को २००० करोड़ रुपये की मांग यहां पर कर सकते हैं।
सभापति महोदय : आपका समय समाप्त हुआ।
श्री अनंत गंगाराम गीते : इस देश के जो बहुसंख्यक हिन्दू हैं, उनके माथे पर ऐसा इल्जाम लगाना, ऐसा कलंक लगाना सही नहीं है। यही कहकर मैं अपनी बात समाप्त करता हूं।
SHRI P.R. KYNDIAH (SHILLONG): Mr. Chairman, Sir, while participating in the discussion relating to the Demands for Grants of the Home Ministry, I would like to make a reference to the recent attacks in Mathura and Agra, on the Christian priests, nuns and a group of people who came from Hyderabad. Copies of Bible were also burnt. This has created a sense of shock and bewilderment, particularly to the Christian community. I come from North-East.
I come from North-East where we have a sizeable segment of Christians. In the three States of Meghalya, Mizoram and Nagaland, they are in majority. There is today a feeling of insecurity, a feeling of frustration among Christians. We know that the Christians constitute only about 21 million of the population. It works out to be about 2.4 per cent of the total population of the country. I have proof also of its being a very disciplined community which has devoted itself largely to the social and educational upliftment of the people of this great land. They never indulge in communal activities. They are today suffering from a sense of extreme insecurity. There are many ways in which their feelings can be expressed but I would not like to go into the details. I would only like to tell the Home Minister that for a variety of reasons they feel suppressed. They feel insecure. They sometimes wonder as to what is happening to this great country which is known for its tolerance, which has a heritage of harmonious living. I would request the Home Minister to take immediate steps to punish the culprits who are responsible for these atrocious acts.
I would also like to state that we concur with the statement of the Prime Minister where he has said that this cannot happen in a country like India. I think the communal organisations which have perpetrated these communal acts has brought a slur to the name of this country. I believe the Home Minister has a duty to clear this issue by taking stringent action against the Organisation. As you know very well, newspapers have reported about the activities of the Bajrang Dal in this connection. It is for the Minister to act. In order to instil confidence among the Christians, we would like to get a clear statement from the Minister on this issue My request is : Firstly, the Government should ensure that the police and the district administration do not deny permission for holding prayer meetings and healing ministires. They feel suffocated because now the District Administrators do not allow them to hold these meetings. Secondly, the Department of Post and the Registrar of Newspaper harass the Christians’ owned magazines and newspapers. This hate campaign against the Christians must end. I know very well the problems that the Christians face, particularly when visa laws are discriminately used against Christian missionaries and Christian visitors who are routinely denied permission to enter the country. A number of such cases have come to my notice. I would also like to say that FCRA should not be misused to harass the Christian NGOs and Church organisations. These are a few things on which I would like to give my comments. The Home Minister came to Shillong along with the Prime Minister and other Ministers You had discussion about the security scenario in the North-East and about its development. At that time, it was also felt that there is a need for modernising and upgrading the police force in order to combat insurgency and militancy. But I am surprised to find that while the policy commitment of the Government – you are aware of which – is that ten per cent of the allocation should be earmarked for the non-lapsable pool head, some of the Ministries have already done that. But in the case of police, out of Rs.8034 crore only Rs.257 crore were earmarked for lump sum fund for the North-East and Sikkim which works out to about 3.93 per cent. Some other Ministries have given 10 per cent. But many Ministries have not even put a single paise. I would request you to look into this matter as it is a very important matter and it has to be reflected in the Budget.
Now I would like to say something on this new provision which gives lump sum fund for the North-East States and Sikkim. Sir, Sikkim is yet to become a part of the North Eastern Council. In the last session, the North Eastern Council (Amendment) Bill was placed in the Rajya Sabha. Now, it has lapsed. Now, we do not know what is the state of affairs. I can only say that the Members from Sikkim met yesterday. They feel very unhappy as this has taken such a long time. We have formed North-East MPs Forum cutting across party lines. We feel that it is a very important body for the development of the North-East. Keeping in mind the security scenario, I feel that decision on NEC should brook no delay.
I would like to bring to the attention of the Home Minister to the other matters concerning North-East as a whole. I do not know what is the strategy of peace in the North-East. You have stated that there are three States – Mizoram, Meghalaya and Arunachal Pradesh – which are peaceful. But, of late, there is a very disturbing trend. We had a small militant outfit even in Mizoram when I was the head of the State, we had taken steps to consolidate peace. But today there are abductions of persons by a militant outfit known as Riang Liberation army. About nine persons were abducted. They have not been traced for the last one month. The Home Minister of Mizoram had to resign. But it was not accepted. That is a different matter.
I would like to raise here another matter which is very important. I have come across a news item in the Hindustan Times which is titled `Bhutan King did visit ULFA camp, confirms Assam Govt’. It says:
"We have definite proof that the King visited ULFA camps located in Bhutan on several occasions and had long discussions with the militants. He even had breakfast with the militants on at least three occasions ."
This is a serious matter. We have very good friendly relations with Bhutan. We want to maintain that relationship. But this goes against our relationship. It came as a shock to us.
It is there that ULFA is having its camps. We would like to know from the Minister the latest about this.
The other matter which had been raised by my colleague this morning is about the killing of 28 poor villagers in Karbi Anglong by a Karbi outfit. Generally however, I feel that now there is a fatigue among the insurgents and a groundswell for peace. This is the time for us to enlarge the peace areas and constrict the militant areas. We have to act now because we cannot afford to lose time.
A point that I am able to see very clearly is, the ISI is also playing a disturbing role. There is no doubt about it. We know this for a fact. My question to the hon. Home Minister is why our Intelligence agencies cannot match the strength or the cunningness of the ISI. Why have we failed? I think it is time that we apply our mind to this problem. Our Intelligence agencies should be geared up in order to combat what ISI is doing in the Northeast or Kashmir or in other areas. Flooding of fake notes into our country and so many other things are being done. I think it is a big challenge. I leave it to him because he is an experienced person.
Lastly, I would like to say a few words about Meghalaya, the State I represent. It is by and large a peaceful State. But we have a few insurgent outfits, as you know very well. The State hon. Home Minister who talked to me this morning told me that he had sent a proposal for getting the fourth police battalion and also for modernising the force I concur fully with his views. The hon. Home Minister himself had mentioned earlier about giving identity cards to the people living in the border areas in the entire Northeastern region to prevent infiltration. It is a very important proposal. What has happened to it? The hon. Home Minister himself had initiated it which we appreciated. Every person who lives in the border areas should carry an identity card with him.
With these words, I conclude.
SHRI SUDIP BANDYOPADHYAY (CALCUTTA NORTH WEST): Mr. Chairman Sir, I rise to support the Demands of Grants pertaining to the Ministry of Home Affairs - Demands No.45 to 49 and 99 to 103. I will concentrate my speech only on the part related to our region in general and our State in particular.
The whole country is worried about the ISI activities. I was surprised to see one day Shri Buddhadev Bhattacharya, the Home Minister and Deputy Chief Minister of West Bengal silently coming out of the North Block after secretly discussing the ISI activities taking place in West Bengal. People were anxiously waiting to know the outcome of the discussions. But, to our utter surprise, our acting Chief Minister did not hold any Press Conference nor did he publicly explain what discussions took place between him and the Home Minister of India.
What we are now apprehending is that Siliguri, the gateway of the Northeastern Region has become the paradise for ISI activities. In fact, West Bengal itself is becoming the paradise for ISI activities.
Sir, West Bengal has its border with Bangladesh and Nepal. If Central Government does not intervene in the matter of ISI activities in the State of West Bengal, then the whole country will have to face the consequences due to them. You had been to Bengal just three days back. When our acting Chief Minister was asked as to why he was not going to meet the Home Minister of the country….… (Interruptions)
SHRI RUPCHAND PAL : I do not know what you mean by saying ‘acting Chief Minister’. He is the Deputy Chief Minister there.
SHRI SUDIP BANDYOPADHYAY : Sir, when Shri Jyoti Basu is not there, he acts as the Chief Minister. So, in that way, he is the acting Chief Minister. He uttered certain comments that he did not want to meet any charge-sheeted Home Minister of the country going to Cooch Behar. But this man, very silently, met you in the North Block. That is the dubious and hypocratic character of this political party which should not be taken for granted. … (Interruptions)
SHRI ANIL BASU : Sir, he is saying something about a person who is not present to defend himself. This is against the etiquette of Parliament and the conduct rules of the House.… (Interruptions)
SHRI SUDIP BANDYOPADHYAY : Sir, I do not want to expose this hypocratic man whose talks are big. Please remain silent. Otherwise, your party will expel you. … (Interruptions)
By saying that law and order is a State subject, for how many days shall we have to wait? In a State where parliamentary democratic system is going to be challenged and the Opposition parties are not being allowed to launch any political movements – when the political parties are launching meetings to address the public, the police officials are attacking the dais – for how many days should we wait hearing that the law and order situation is a State subject? If the rights of launching political movements are curbed in a State, I want to know whether the Central Government would keep mum or interfere in the matter. I want a clarification on this point here. If a Minister carries arms in his car and when he suddenly gets arrested, he leaves the car and his brother gets arrested with the car, then would the Central Government inquire into the matter as to whether this allegation is true or not or keep quiet saying that law and order is a State subject? … (Interruptions)
SHRI RUPCHAND PAL : Sir, I would ask for a clarification from the Chair. Has any hon. Member the right or the licence to waste the time of the House in such a manner making irrelevant, meaningless and baseless allegations?
SHRI SUDIP BANDYOPADHYAY : So, Sir, I demand that the Central Government should inquire into whether the Minister was arrested with arms by the State Police alongwith the brother of the Minister. … (Interruptions) This matter should be inquired into immediately without further delay. This has to be investigated. There is a CPI(M)-led Government in West Bengal which is encouraging massacres like the instance of the Minister’s car and ruining the democratic set-up of our State..… (Interruptions) There is a Rapid Action Force (RAF) controlled by the Central Government. The State of West Bengal has also formed their own Rapid Action Force. Is it constitutional or unconstitutional? The State Government has set up its own RAF by deploying their own party candidates, with the same uniform of the RAF which is controlled by the Central Government. These people and that Government are using the RAF. Is it not a reason for the State Government to be brought under President’s rule?
This state of affairs is going on unnoticed. I would urge upon the hon. Minister to take note of this. In the name of popularity, this regime is going on for the last 24 years in the State. The democratic set up of the State has been totally ruined. So, the RAF issue is to be detected without further delay.
Trade Union rights have been given to the Police forces. The Police are organising trade unions under the banner of the CPM in the Lal Bazar Police Headquarters where the Chief Minister is going to address the meetings. Is it permissible?… (Interruptions) Is it permitted by the Central Government to allow the Police forces to form their own unions in their own home State? I would like to know whether the Chief Minister can enter the Police Headquarters, address the police and encourage to curb the democratic rights of the Opposition.… (Interruptions) This is the state of affairs which is going on there.… (Interruptions)
MR. CHAIRMAN : Please come to the point.
SHRI SUDIP BANDYOPADHYAY : Sir, in the last three years, 250 Trinamul and BJP workers have been brutally killed. For this heinous activity of that Government, we demand investigation by the Union Government.
These people are dreaming of making West Bengal as the headquarters of the International Communist Party. … (Interruptions) You take it for granted.
DR. RAM CHANDRA DOME (BIRBHUM): What is wrong in that?
SHRI SUDIP BANDYOPADHYAY : After the collapse of the Soviet Union, the Marxist Community Party people, in their meetings, have adopted a decision that they would make West Bengal the headquarters of the International Communist Party. Today or tomorrow, they are going to announce it.… (Interruptions)
SHRI AJOY CHAKRABORTY : This is a fact. We are proud of it.… (Interruptions)
SHRI SUDIP BANDYOPADHYAY : These are the people who do not believe in the principles of Parliamentary Democracy. They are going to ruin the Parliamentary Democratic System in the country. These people are telling that the BJP is communal. I would request the Congress people to recollect one thing. To remove the late Shri Rajiv Gandhi from the Prime Ministership, Shri Jyoti Basu fell at the feet of Shri Atal Bihari Vajpayee and addressed a public meeting in Sahid Minar Maidan holding their hands together. Then, the BJP was not communal. What will be the reply to that?… (Interruptions SHRI AJOY CHAKRABORTY : Sir, is it the subject matter of the discussion now?
MR. CHAIRMAN: Shri Sudip Bandyopadhyay, please come to the subject. Please conclude now.
SHRI SUDIP BANDYOPADHYAY : They describe and mention about communalism repeatedly. So, these are the issues. The Police have become trigger happy. In the whole country, the Police have introduced rubber bullets and water cannons. West Bengal is a State which killed 14 of our Trinamul Youth Congress workers at a rally in a single day in one incident by police firing aiming at their heads.… (Interruptions)
DR. RAM CHANDRA DOME : Who is responsible for that?
SHRI SUDIP BANDYOPADHYAY: Is it a State subject? In West Bengal, they do not use rubber bullets. They have no water cannons with them. They are lagging behind. They have no capacity to tackle the extremists. Once four extremists in the Purulia District resisted the whole State Police Administration. The total Police Administration has been politicised. The whole Government have become totally arrogant. They are trying to curb the Parliamentary Democratic System in the country.
Do not forget the communists* They are ruining the Parliamentary Democracy in the State. If they are not taken to task in time, then India will have to face the consequences for that. We are taking care of them. The Trinamul and the BJP, with the Mahajot proposal, want to see that they are removed in the next election. The people of West Bengal will take care of them.
I would urge upon the hon. Home Minister not to neglect their activities and see that these Communists, Marxists in particular, are taken to task.
__________________________________________________________________ *Expunged as ordered by the chair डा. रघुवंश प्रसाद सिंह (वैशाली); सभापति महोदय, गृह मंत्रालय देश के लिये बहुत अहम विभाग है। जैसा कि शुरु में श्री पायलट ने कहा कि गृह मंत्रालय का इकबाल घट रहा है। मुझे भी यही मालूम है कि यह समाप्त हो गया है और है ही नहीं। मैं एक बात का उदाहरण देना चाहता हूं कि किसी भी सरकार की संस्कृति इससे जानी जाती है कि एक सिपाही सड़क पर या कहीं किसी जगह पोस्टेड है, वह किस तरह से लोगो के साथ व्यवहार करता है, उससे सरकार की अहमियत, प्रशासन की क्षमता, ये सब जाने जाते हैं। जब से हवाई अड्डे पर सी.आई.एस.एफ. का डेपूटेशन हुआ है, हम नहीं जानते कि पटना या दिल्ली हवाई अड्डे पर एक एम.पी. का कड़ाई से जांच किया जाता है। पहले मशीन द्वारा किया जाता है, फिर बक्सा खोला जाता है। जब हवाई जहाज पर चढने जाते हैं तो लोग धूप में लाइन में लगे रहते हैं। एक बैंच वहां रखा हुआ होता है जहां उनकी फिर से जांच की जाती है। एअरपोर्ट अथारिटी कहती है कि सी.आई.एस.एफ. हमारे बस में नहीं है। हम नहीं जानते कि यह सरकार की तरफ से इंस्ट्रक्शन है या कोई और बात है लेकिन संसद सदस्यों का इस तरह से हयुमलिएशन किया जाता है। मंत्री या सासंद में डिसक्रमिनेशन है या बदमाशी करते हैं, हमे इसकी जानकारी नहीं है। इस मामले में भले आदमी का हयुमलिएशन किया जाता है। इसमें माननीय सदस्यों की मर्यादा का सवाल है जिसे मैं उठा रहा हूं। भला आदमी उसमें बोलता नहीं है। हम लोग जनता के काम के लिये जाते हैं, हम नहीं जानते कि यह अच्छी चीज है और इसके लिये निर्देश दिया गया है कि कड़ाई से जांच की जाये। यदि ऐसा करने से आतंकवाद समाप्त हो जायेगा, तो हम सहमत हैं और तैयार हैं। किसी जगह ऐसी घटना के घटित होने पर भले आदमी को परेशान किया जाये, उचित नहीं लगता। इसके अलावा एक जगह पुलिस की वर्दी में डकैती हो गई तो सब पुलिस वालों से कह दिया गया कि वर्दी पहनने की जरूरत नही। क्या एक घटना के कारण कानून बदल दिया जाये?
सभापति महोदय : आप सुझाव दे सकते हैं।
डा. रघुवंश प्रसाद सिंह ; हम तो ध्यान आकर्षित कर रहे हैं कि अगर माननीय सदस्यों की गर्दा से देश आगे बढ़ने वाला हो तो गर्दा को उड़ा दिया जाये।
20.00 hrs. नहीं तो उसमें क्या निदेश है। एयरपोर्ट अथॉरिटी कहती है कि सी.आई.एस.एफ. बेलगाम है, हमारे कहने में नहीं है। वह गृह विभाग के कहने में है। इसलिए मैं माननीय गृह मंत्री जी का ध्यान इस ओर आकृष्ट करता हूं। श्री शरद यादव जी को मैं कह चुका हूं। श्री गुप्त, राज्य मंत्री हैं, उन्हें भी मैं कह चुका हूं। लेकिन हम लोगों को समझ में आता है, उन लोगों को समझ में नहीं आता होगा। यदि यही मर्यादा ठीक है तो हमें और सदन के सभी माननीय सदस्यों को समझ में आता होगा। यदि उसी से ज्यादा मर्यादा, प्रतिष्ठा होने वाली है तो अब हमें कुछ नहीं कहना है, अब हम लोग ट्रेन से ही जायेंगे और कितना अपमान सहेंगे।
सभापति महोदय, दूसरी बात मैं कहना चाहता हूं कि उधर के जितने वक्ताओं ने आडवाणी जी की ज्यादा प्रशंसा की है, ज्यादा खुशामद के वाक्य कहे हैं। लेकिन उन्हें समझ में नहीं आया कि वे कहां बोल रहे हैं, कह रहे हैं कि आई.एस.आई. देश भर में छा गई। अब आई.एस.आई. को रोकना किसकी जिम्मेदारी है। यह गृह मंत्रालय की सबसे बड़ी विफलता है। इससे भारी और विफलता क्या हो सकती है कि सत्ता पक्ष के अधिकांश माननीय सदस्यों ने स्वीकार किया है कि आई.एस.आई. देश भर में छा गई है, देश में आ गई है। देश में सब जगह कांड हो रहे हैं। यह किसकी विफलता है, किसकी जिम्मेदारी है। आप इन लोगों का कोई प्रशिक्षण शविर कराइये और बताइये कि यह गृह मंत्रालय की जिम्मेदारी है या हमारी जिम्मेदारी है या माननीय सदस्यों की जिम्मेदारी है। आई. एस.आई. पर आप लोगों ने बहुत कहा है।
सभापति महोदय, इसके बाद मैं कहना चाहता हूं कि दिल्ली पुलिस देश की राजधानी की पुलिस है, यहां से देश भर में रोशनी फैलती है। एक महीने से वकील लोगो को मारते-मारते सुजा दिया, उनका माथा फाड़ दिया, आंख से उन्हें नहीं दीख रहा है। वकील लोगों की इतनी जबरदस्त पिटाई की। वकील लोग हिंसक थे, अपराधी थे, कौन थे। क्या देश की आजादी में वकीलों ने अग्रणी भूमिका अदा नहीं की। जामिया मलिया में क्या हुआ, कहते हैं कि अपराधी को खोजने के लिए गये थे और वहां पढ़ने वाले भले छात्रों को बुरी तरह से मारा, जाली केस करके, फरेब करके उन्हें जेल में बंद कर दिया। उधर से श्री रूडी विलाप कर रहे थे, अखबार में छापा तो कहते हैं कि मार खाये हैं और यहां आये तो कहते हैं कि मार नहीं खाये हैं। लेकिन उनका जो सिक्युरिटी का कर्मचारी था, उसे बुरी तरह से मारा, वह अस्पताल में था। इस तरह से पुलिस जुल्म हो रहा है। हम कैसे समझें कि गृह मंत्रालय बड़ा दुरुस्त काम कर रहा है। कोई हमें समझाये, हमारी समझ में नहीं आता है। एक महीने में यह घटनाए हुई हैं। यदि इसमें और घटनाएं जोड़ी जाएं तो उसमें और समय लगेगा।
सभापति महोदय, देश में आतंकवाद बढ़ रहा है क्या इससे कोई इनकार कर सकता है। जम्मू-कश्मीर में जो आतंकवादी घटनाएं हो रही हैं, उनमें आतंकवादियों का एक सोफ्ट टारगेट होता है और एक हार्ड टारगेट होता है। सोफ्ट टारगेट में छत्ती सिंहपोरा में निर्दोष सिखों को मारा गया। क्या कभी सिखों पर जम्मू-कश्मीर में हमला हुआ था, कभी नहीं हुआ था। जिस दिन श्री क्िंलटन आये, सलामी दी गई, उस दिन छत्ती सिंहपोरा में निर्दोष सिखों को कत्ल किया गया। यह सोफ्ट टारगेट था, इसे पुलिस, प्रशासन नहीं रोक सकता है। लेकिन क्या आतंकवादी सोफ्ट टारगेट में ही सफल हुए हैं - नहीं, हार्ड टारगेट में भी इनके बी.एस.एफ. के कैम्प में आतंकवादी घुस गये और उनके घुसने के बाद इनको उसमें आग लगाकर आतंकवादियों पर काबू पाना पड़ा। ये इनकी विफलता और कमजोरी है और इसी कारण आतंकवाद का मनोबल बढ़ा है।
सभापति महोदय, देश में जम्मू-कश्मीर का आतंकवाद, सीमा पर आतंकवाद और विदेशी आतंकवाद है। आतंकवाद को प्रोत्साहन मिल रहा है डोडा में और जगह-जगह कत्लेआम होता है, हिंसा होती है, यह बर्दाश्त के बाहर की चीज है। नार्थ ईस्ट में पहले से उग्रवाद बढ़ रहा है। बिहार, आंध्रा प्रदेश और मध्य प्रदेश में वामपंथी उग्रवाद है। वहां वामपंथी लोग उग्रवादी है। इस पर काबू करने के लिए राज्य सरकार की पुलिस को ट्रेनिंग मिलनी चाहिए और केन्द्र सरकार उसकी पूरी हिफाजत करे, मदद करे। कहीं एथनिक प्रॉब्लम है, नार्थ ईस्ट में जन मूल की लड़ाई है। इन सब पर नियंत्रण पाना चाहिए, हम लोग उसमें सहयोग देने के लिए तैयार हैं। अंतिम बात मैं कहना चाहता हूं...
सभापति महोदय : आप तो बिना जैस्चर के भी स्पीच कर सकते हैं, आपकी क्षमता है।
डा. रघुवंश प्रसाद सिंह : सभापति महोदय, मैं अंतिम बात कहना चाहता हूं। माननीय गृह मंत्री जी होशियार आदमी हैं, इनकी याददाश्त भी अच्छी है। इसी सदन में इन्होंने कहा था कि बिहार में दुराई कमेटी ने सी.बी.आई. के खिलाफ जांच की थी।
सभापति महोदय, उन्हें कसूरवार पाया गया। उनके ऊपर कार्रवाई होनी चाहिए, उस कार्रवाई को कलकत्ता हाइकोर्ट ने रोका। जब सदन में सवाल उठा, माननीय गृह मंत्री जी ने कहा कि हम कानूनी राय लेकर सुप्रीमकोर्ट में जाएंगे। अभी तक हम लोगों को जानकारी नहीं हुई है कि कानूनी राय ली गई या नहीं, अगर ली गई और निगेटिव आई, तो ठीक बात है, लेकिन सदन को जानकारी देनी चाहिए। यदि कानूनी राय ली ही नहीं गई, तो मेरा इनके ऊपर आरोप है कि इन्होंने सी.बी.आई. के गलत काम को ठीक करने के लिए और सी.बी.आई. को बचाने के लिए, अपील नहीं की और इस प्रकार से सी.बी.आई. को गलत काम करने के लिए बचाने का काम किया है।
नंबर दो, दुनिया के इतिहास में क्राइम विज्ञान के इतिहास में जांच करके देखा जाए कि किसको एप्रूवर बनाया गया, खासकर केन्द्र सरकार ने देवेश चांडक को जिन्होंने ४०० करोड़ रुपए निकाले, उनको एप्रूवर बना लिया। अनादि साहू कानून के जानकार हैं, अभी तक के अपराध विज्ञान के इतिहास में ऐसी घटना नहीं मिलेगी जिसमें ९०० करोड रुपए के घोटाले में ४०० करोड़ जिन्होंने निकाले, उन्हें एप्रूवर बना लिया जाए। उन्हें क्या-क्या सहूलियतें दी गईं, यह सबको मालूमहै। जब उन्हें बरी कर दिया, तो उनके ऊपर डी.ए. केस चलाया।
सर, डिसप्रपोर्सनेट असैट केस कितने का चलाया, २७ लाख रुपए की संपत्ति इनकम टैक्स वभाग ने रिपोर्ट की। इनकम टैक्स विभाग ने ही फिर कहा कि नहीं ४२ लाख रुपए की संपत्ति है। उसकी अपील इनकम टैक्स कोर्ट में है, लेकिन ४२ लाख मानकर डिसप्रपोर्सनेट असैट का केस चलाया गया। उसमें भी अंतिम निर्णय नहीं हुआ है और फिर उसमें जिनसे मदद ली गई, कहा गया था कि उनसे हमने कुछ राशि ली है, उन्हें भी कोर्ट में घसीटा गया।
अब हम यह सवाल उठाना चाहते हैं हवाला केस में माननीय आडवाणी जी और जसवन्त सिंह जी सब पर मुकदमा चला था, ये सब लोग कोर्ट से छूट गए, लेकिन डिसप्रपोर्शनेट असैट का केस इनके ऊपर क्यों नहीं चलाया गया? दोहरे मापदंड, सी.बी.आई. को दोहरे मानदंड अपनाए गए। मैंने ये चार सवाल उठाए हैं और माननीय गृह मंत्री जी से मैं अपील करता हूं कि यदि न्याय, न्याय है और गृह मंत्रालय की शाख है, सी.बी.आई. की शाख है, तो मेरे इन चारों सवालों का उत्तर दें। मैं सदन में उनका उत्तर सुनने के लिए अंतिम समय तक उपस्थित रहूंगा।
श्री विजय गोयल (चान्दनी चौक): माननीय सभापति महोदय, राजेश पायलट जी ने गृह मंत्रालय पर बहस के दौरान कानून व्यवस्था की स्थिति पर प्रहार करते हुए कुछ आंकड़े दिए और बताया कि अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजातियों के ऊपर कितने अत्याचार हुए। मुझे मालूम नहीं उन्होंने कौन सी रिपोर्ट से वे आंकड़े दिए। गृह मंत्रालय की रिपोर्ट में कहीं भी वे आंकड़े नहीं हैं। उन्होंने कहा कि अनुसूचित जाति के ६१२२ और अनुसूचित जनजाति के ४३९० लोगों पर अत्याचार हुए और कुल मिलाकर ११ हजार लोगों पर अत्याचार की बात कही। मैं अपने कांग्रेसी सांसदों और डा. रघुवंश प्रसाद सिंह को बताना चाहता हूं कि जब १९९७ में गुजराल साहब की सरकार को वे सपोर्ट कर रहे थे, तो राष्ट्रीय अनुसूचित जाति एवं जनजाति आयोग की रिपोर्ट के अनुसार २६३८८ अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति के भाइयों पर अत्याचार की घटनाएं हुईं थीं और १९९६ में जब देवेगौड़ा जी की सरकार थी, तब ३१४०० लोगों के ऊपर अत्याचार की घटनाएं हुईं और १९९५ में जब राजेश जी एवं उनके लोग थे तब ३२९९४ अत्याचार की घटनाएं हुई थीं। जब से एन.डी.ए. की सरकार आई है, तब से ये घटनाएं बहुत कम हुई हैं।
जो रोग इस देश के अंदर कैंसर के रूप में फल-फूल रहा था जिसके कारण लाखों लोग बर्बाद हो रहे थे, जिसके अंदर दुकानें, आभूषण आदि सब बिक रहे थे, महिलायें सड़कों, दुकानों पर खड़ी रहती थी, जिसमें स्कूलों के बच्चे लाइन लगाकर टिकटें खरीद रहे होते थे और बाबू दफ्तरों के अंदर काम नहीं करते थे, वह लाटरी बंद कराने वाला और कोई नहीं था--श्री लालकृष्ण आडवाणी और उनका गृह मंत्रालय था। उस लाटरी के कारण लाखों लोग बचे हैं। जब आतंकवादी दस-बीस लोगों को भून देते हैं, हम जब शैडयूल्ड कास्ट्स की बात करते हैं, जब उग्रवादियों के मरने-मारने की बात करते हैं, उस समय हम यह नहीं सोचते थे कि यह लाटरी विष का काम कर रही थी, धीरे-धीरे लोगों को मार रही थी जिसके कारण लोग आत्महत्यायें और हत्यायें कर रहे थे, बर्बाद हो रहे थे, वह लाटरी बंद कराने का काम किसी और ने नहीं किया था--बी.जे.पी. की सरकार ने किया था।
मैं सदन को कहना चाहता हूं कि ५० साल के अंदर इस देश में एक सामाजिक बुराई जो जड़ से उखड़ी है, वह लाटरी है और जिसको लाल कृष्ण आडवाणी जी ने उखाड़ कर फेंका था। जिस समय सरकार आई, उसके कुछ ही महीनों के अंदर लाटरी के ऊपर बिल आया और पास किया गया। उसके लिए मैं सदन के अंदर सब दलों को भी बधाई देना चाहता हूं। मैं चाहता हूं कि सदन में इसी तरीके से सभी दल काम करें । सामाजिक बुराइयों के खिलाफ, देश की एकता के बारे में, देशभक्ति के बारे में, संस्कारों के बारे में, सब लोग एकजुट होकर काम करें तो कोई कारण नहीं है कि यही गृह मंत्री और गृह मंत्रालय आई.एस.आई. को भी इस देश से जड़ से उखाड़ फेंकेगा। इस बात का मैं विश्वास दिलाना चाहता हूं।
मुझे नहीं पता कि पहले कौन से गृह मंत्री ऐसे थे जो हर सीमा पर जाया करते थे। हो सकता है कि वे जाते होंगे किन्तु मैने देखा कि हमारे गृह मंत्री एक-एक बॉर्डर पर गये। सिक्किम में चीन से लगा नाथवला पोस्ट पर गये। उत्तर में माना चौकी का उन्होंने वजिट किया। अमृतसर में भारत पाक सीमा के बागहा बॉर्डर पर गये। पश्चिम में कच्छ की सीमा पर गये। तीन बागहा में बंगलादेश लगे बॉर्डर पर गये। कश्मीर में भारत पाक सीमा पर गये। डिफेंस मनिस्टर सियाचीन तक जाकर पहुंच गये। जब कारगिल में लड़ाई चल रही थी तब प्रधान मंत्री स्वयं कारगिल के अंदर गये। यह और कोई सरकार नहीं कर सकती थी केवल बी.जे.पी. सरकार कर सकती थी।
आप मेरे से पूछना चाहते हैं कि बी.जे.पी. की सरकार ने क्या काम किये हैं, तो एक-से एक काम आप देखते जायेंगे। मैं गृह मंत्री जी से एक निवेदन करना चाहता हूं कि आप जिस समय इन सीमाओं पर जाते हैं, उस समय सांसदों के वभिन्न ग्रुपों को वहां ले जाये तो उनकी भी संवेदनशीलता बढ़ेगी और वह उस चीज को पहचान पायेंगे चाहे वह सूखा हो, लड़ाई हो, कच्छ हो, कारगिल हो या आतंकवाद का एरिया हो। जिस समय हम गृह मंत्रालय की स्थायी समति में थे, उस समय मुझे नार्थ ईस्ट में जाने का मौका मिला। मिजोरम, मेघालय, त्रिपुरा, मणिपुर आदि सब स्टेटों का हमने वजिट किया। मुझे लगता है कि जो यहां बैठकर महसूस नहीं होता था, वह वहां जाकर महसूस हुआ कि किस तरीके से आतंकवाद फैल गय़ा है। पायलट जी अभी बैठे हुए थे। वे कहने लगे कि सवाल इस बात का है कि यह बीज कब बोया गया। मैं भी वही बात कहता हूं कि जो बीज आपकी सरकारों ने पिछले १५ साल के अंदर आतंकवाद का बोया, उसको बी.जे.पी.को धीरे-धीरे काटने और जड़ से उखाड़ने में समय लगेगा। इसलिए मैं आपको कहना चाहता हूं कि यह जो बीज फल-फूल रहा है, इसको अकेले कोई नहीं काट सकता है। आप समझें कि केवल सरकार ही यह काम करेगी तो ठीक नहीं है।
आज सारे सदन के अंदर हरेक पार्टी का यह कर्तव्य बनता है कि कम से कम जो मसले देश के हैं, उनके अंदर एकजुट होकर काम करें। नार्थ ईस्ट में जब मेरी यात्रा हुई तो मैं देखता था कि वहां खुले आम एक्सटोर्शन था। आंतकवादी, उग्रवादी लोग एक्सटोर्शन करते थे। कोई व्यापारी काम नहीं कर सकता था और उनकी चटि्ठयां आती थी। चटि्ठयों के अंदर यह लिखा होता था कि हर मास इतने रुपये जाने चाहिए। यानी पूरा एक नेट सिस्टम बनाया हुआ था। मुझे बताया गया कि सरकारी कर्मचारियों से भी पैसा वसूला जाता था। मैंने पूछा कि इतने सारे सरकारी कर्मचारियों से कैसे पैसा वसूला जाता होगा तो उन्होंने बताया गया कि कैशियर ही उनके दस परसेंट पैसे काट लेते थे। उसके बाद पता चला कि यही उग्रवादी, आतंकवादी लोगों ने बैंकों से कहा कि हमें इस बैंक के अंदर से पैसे निकाल कर दो तो बैंकों ने कहा कि हम तो सरकारी हैं। हम कैसे पैसे निकालकर दे सकते हैं, तो उसका एक दूसरा तरीका अपनाया गया ताकि बैंक चल सकें । इसलिए इनको लोन दे दिया जाये, जो कभी वापिस न हो। मैं कहना चाहता हूं कि नार्थ ईस्ट की जो स्थिति भयानक है, जो फैंसिंग बॉर्डर हैं, वह नार्थ ईस्ट के अंदर खुले हुए हैं।
२०.१४ बजे(डॉ. रघुवंश प्रसाद सिंह पीठासीन हुए) इसलिए वहां पर और भी ज्यादा काम करने की जरूरत है। मैं यह भी कहना चाहता हूं कि जिस प्रकार पैरा मलिट्री फोर्सिस को, सुरक्षा बलों के प्रति गृह मंत्रालय ने एकजुटता दिखाई है, मुझे लगता है कि हम नार्थ ईस्ट की स्थिति पर काबू पा लेंगे।
मैं बताना चाहता हूं कि आई.आई.एस.का जाल पूरे देश के अंदर फैला है, एक तरफ हमारे जो विपक्षी दल हैं, वे इस बात के लिए क्रिटीसाइज करते हैं और सरकार के ऊपर यह आरोप लगाते हैं कि आप हर आरोप आई.एस.आई. पर लगा रहे हैं। दूसरी तरफ मैं कहता हूं कि यह आई.एस.आई. दो साल के बी.जे.पी. सरकार में नहीं आई है। आई.एस.आई. का पन्द्रह साल से जाल बुना जा रहा है. उसको रोकने का कर्तव्य कांग्रेस और दूसरी पार्टियों की सरकारों के ऊपर था और वह चाहती तो उसको रोक सकती थी।
आज आई.एस.आई. का जो जाल है, उसे कोई नकार नहीं सकता है। आज इस सबसे लड़ने की जरूरत है। मैं रिपोर्ट देख रहा था, आज भी हम रिपोर्ट देखें तो इस साल के अन्दर गृह मंत्रालय की रिपोर्ट में बताया गया है कि कश्मीर में ही १९९८ में जहां ९९९ आतंकवादियों को मारा गया था, वहां १९९९ में १०८२ आतंकवादियों को मारा गया है।
मैं पांच मिनट लूंगा। मुझे पता नहीं था कि आप इतनी जल्दी घंटी बजा देंगे, इसलिए मैं केवल जरूरी मुद्दों को ले लूंगा। आप स्वयं जब बोल रहे थे तो कम से कम आपने १५-२० मिनट लिये, उतने में से पांच मिनट मुझे समय जरूर दीजिए।
मैं कहना चाहता हूं कि कांग्रेस केवल आलोचना करे, विपक्ष केवल आलोचना करे, उससे काम चलने वाला नहीं है। यही गृह मंत्रालय है, जिसने आई.एस.आई. के १८ मोडयूल ठिकानों को समाप्त किया है। पर मैं यह भी गृह मंत्री जी को कहना चाहता हूं कि आज सुरक्षा बलों को आधुनिकीकरण की आवश्यकता है, माडर्न गजेटरी देने की आवश्यकता है। आज तो ऐसा समय है कि बायनोकुलर की रीडिंग से हम वार्तालाप का पता कर सकते हैं, इसलिए हमें इंटेलीजेंस बेस्ड होना चाहिए, न कि मैनपावर बेस्ड होना चाहिए। मैं यह कहना चाहताहूं कि मैं उस क्षेत्र चांदनी चौक से आता हूं, जो बहुत संवेदनशील क्षेत्र है, जहां की एक तिहाई पोपुलेशन मुस्लिम भाईयों की है। यहां पर किसी भी विषय को उठा देना बहुत आसान होता है, लेकिन वहां पर भुगतना बहुत मुश्किल होता है। मुझे आज तक समझ में नहीं आया कि धर्मस्थल विधेयक के अन्दर हर्जा क्या था। वह किसी एक धर्मस्थान के लिए नहीं था, किसी एक धर्म के लिए नहीं था, वह सब धर्मों के लिए था कि सरकार से पूछकर बनाया जाये। उससे पहले मध्य प्रदेश और राजस्थान के अन्दर खुद कांग्रेस की सरकारों ने उसको पास किया हुआ था। मैं जानना चाहता हूं, सोनिया गांधी जी ने इसी सदन के अन्दर अपना स्टेटमेंट दिया था कि मध्य प्रदेश और राजस्थान के अन्दर हम इस पर पुनर्विचार करेंगे। क्या उन्होंने अभी तक यह पुनर्विचार करने की बात की है, इसलिए दोमुंही बात नहीं चलेगी। मैं यह कहना चाहता हूं कि चांदनी चौक से मैं बी.जे.पी. से होने के नाते, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का सदस्य होने के नाते, एक हिन्दू होने के नाते वहां से विजयी हुआ हूं, इसलिए कि मुझे हिन्दू और मुसलमान दोनों का प्यार मिला है। हिन्दू तो कभी साम्प्रदायिक हो ही नहीं सकता। जब हम छोटे थे तो वहीदा रहमान, दिलीप कुमार, मीना कुमारी, इन सब की फिल्में देखते थे तो क्या हम यह कहते थे कि ये मुसलमान हैं, इसलिए हम इनकी फिल्म नहीं देखेंगे। आज संजय खान, फिरोज खान, सलमान खान, शाहरुख खान, आमिर खान, अब्दुल खान, इन सारे खानों की फिल्म देखने के लिए जब लोग जाते हैं तो वे हाल के अन्दर जो लोग बैठे होते हैं, वे मुसलमान नहीं, ९५ परसेंट वहां पर हिन्दू देख रहे होते हैं। मौहम्मद अजहरुद्दीन जब क्रिकेट के मैदान के अन्दर छक्का मार रहा होता है तो स्टेडियम के अन्दर ताली बजाने वाले ९५ परसेंट आदमी हिन्दू होते हैं। जिस समय मैं सवेरे उठता हूं तो उस समय मेरे कानों के अन्दर बिस्मिल्लाह खान का शहनाई वादन बजता है तो मैं उसको बन्द नहीं कर देता। इसलिए मैं बताना चाहता हूं कि सदन में इन चीजों को उठाना बहुत आसान है, पर कांस्टीट्वेंसी में जाकर उसको भुगतना बड़ा मुश्किल होता है। इसलिए कम से कम इन चीजों को साम्प्रदायिक रंग न दें, यह मैं चाहता हूं।
दिल्ली पुलिस और दिल्ली नगर निगम दोनों गृह मंत्रालय के अधीन हैं। दिल्ली पुलिस में नया चेंज आया है और काफी हद तक सुधार हुए हैं। इसके अन्दर कह नहीं सकते, लॉ एंड ऑर्डर की सिचुएशन काफी सुधरी है। किन्तु आज भी नगर निगम के अन्दर और दिल्ली पुलिस के अन्दर भ्रष्टाचार बहुत है। आप दिल्ली के अन्दर देखते हैं, लगातार बिल्िंडग बन रही हैं, अनऑथोराइज्ड कंस्ट्रक्शंस हो रहे हैं, अनऑथोराइज्ड मार्केट्स बन रहे हैं। आज एक जे.ई. सैल्यूलर लेकर घूमता है, एक ए.ई. होंडा के अन्दर घूमता है। मैं चाहता हूं कि गृह मंत्री जी इसके लिए कम से कम यह करें कि आज इतने सालों के अन्दर ब्यूरोक्रेसी इतनी फल-फूल क्यों गई और कम से कम ऊपरी ओहदों के ऊपर ब्यूरोक्रेट्स बैठे हुए हैं, उनसे सम्पत्ति डिक्लेयर करने के लिए कहा जाये। मैं चाहता हूं कि दिल्ली पुलिस का आधुनिकीकरण और नवीकरण होना चाहिए। अब लट्ठ मारकर क्राइम डिटेक्शन नहीं कर सकते। आपको क्राइम डिटेक्शन करने के लिए कैडर फॉर साइंटिस्ट्स बनाना चाहिए। आपको क्राइम डिटेक्शन करने के लिए नये उपयोग, कम्प्यूटर और दूसरे साधनों का उपयोग करना चाहिए।
अन्त में मैं एक बात कहता हूं कि दिल्ली को राज्य का दर्जा देने की आवश्यकता है। मुझे तो आज तक यह भी नहीं मालूम कि दिल्ली नगर निगम को गृह मंत्रालय के अधीन क्यों रखा गया है। दिल्ली वभिन्न निकायों के कारण मरी जा रही है। सी.पी.डब्लू.डी., पी.डब्लू.डी., डी.डी.ए., एम.सी.डी., एन.डी.एम.सी. जैसे निकाय हैं, इसलिए गृह मंत्री जी को चाहिए कि इसको अर्बन डवलपमेंट मनिस्ट्री के अन्दर रखा जाये। पोलटिकल पावर यहां रखी जाये, किन्तु सविक पावर वहां दी जाये और दिल्ली को राज्य का दर्जा जल्द से जल्द दिया जाये।
इस बात की मांग करते हुए मैं आपका आभार व्यक्त करता हूं कि आपने मुझे बोलने का मौका दिया। धन्यवाद।
श्री सुल्तान सल्लाऊद्दीन ओवेसी (हैदराबाद) : जनाब चेयरमैन साहब, मैं आपका मशकूर हूं कि आपने मुझे बोलने का वक्त दिया। मुझे कम से कम वक्त में बहुत कुछ कहना है। मैं सिर्फ इतना कहना चाहताहूं कि इस वक्त हिन्दुस्तान में अक्लियतों में काफी से ज्यादा बेचैनी पैदा हो चुकी है और वे अपने आपमें गैरमहफूज तसव्वुर करते हैं।
यह एक हकीकत है। इसलिए हकीकत है कि बहुत से ऐसे वाक्यात रुनुमा हो गए हैं कि उनके लिए कहना भी मुश्किल है और बताना भी मुश्किल है। लेकिन बाज पार्टियों ने आगे बढ़कर उन हकायत को बताया। मैं आपके सामने एक मिसाल रखूं, यकीनन अगर आई.एस.आई. गलत काम कर रही है, गड़बड़ी मचा रही है तो उसको फांसी दीजिए, गोली मारिए, हमें कोई हमदर्दी नहीं है। लेकिन असल को नहीं पकड़ना, गरीब लोगों को गोली मार दी जाती है। सविल लिबर्टीज ने अपनी रिपोर्ट शाय की, जिसमें यह कहा कि आंध्रा प्रदेश में जकतियाल के अंदर एक गरीब आदमी जो बस स्टैंड पर कंघे और फाउंटेन पैन बेचता था, उसको गोली मार दी गई और वहां पर पिस्तौल डाल दिया गया। यह कहा गया कि यह आई.एस.आई. का एजेंट था। जब लोगों ने जाकर तहकीकात की और अपनी रिपोर्ट पेपर में शाय की तो बता लगा कि इस तरीके से पुलिस वहां पर पहुंचना नहीं चाहती, बल्कि यह चाहती है कि किसी को खासकर यह बता दिया जाए कि यह हो रहा है। आप अंदाजा कीजिए कि वहां पर दो मनिस्टर खत्म कर दिए जाते हैं, लेकिन पुलिस को उसका पता नहीं चलता कि क्या हो रहा है। इसी तरीके से अगर आप और आगे बढ़ें तो आपके सामने आएगा कि जामिया मलिया में जो वाक्या हुआ, आगरा में जो वाक्या हुआ, डांग में हुआ और दीगर मुकामात में जो वाक्यात हो रहे हैं, जिसकी वजह से एक बेचैनी और इस्तराफ पैदा हो चुका है। वे चाहते हैं कि इसकी हकीकत तहकीकात की जाए।
आपने अक्लियती कमीशन बनाया। क्या उस कमीशन ने आगरा का या गुजरात का या दीगर मुकामात पर जाकर दौरा किया ? आपने अपना कौमी एजेंडा बनाया और बताया कि इसके सिवा कुछ नहीं है। लेकिन यह मुतावाजी हुकूमत भी चल रही है, वह है बजरंग दल और विश्व हिन्दू परिषद की। वे मसाइल को खड़ा करते हैं और आप खामोश तमाशाई बने रहते हैं। आप इन पर क्यों नहीं रोक लगाते, क्यों खामोश बैठे हैं। आज टाडा में लोग गिरफ्तार होते हैं, उनके लिए जमानत नहीं है। लेकिन श्री कृष्ण कमीशन की रिपोर्ट आती है और मुकदमात नहीं चलाया जाता है। आखिर यह जो दो तरफा पालिसी चल रही है, यह कब तक बर्दाश्त होती जाएगी, यह नाकाबिले बर्दाश्त होती जा रही है। श्री कृष्म कमीशन की रिपोर्ट को लागू नहीं करते, लेकिन टाडा में फंसे हुए जो लोग है, उनके लिए टाडा का कानून तो बर्खास्त हो गया, लेकिन मुकदमात चल रहे हैं। जज ने भी एतराज किया कि हर वक्त फेहरिस्त पेश कर रहे हैं, हर वक्त उसमें तब्दीली करते हैं ताकि उनके मुकदमें चलते रहें और वे सड़ते रहें। यह अजीबो-गरीब किस्म के हालात पैदा हो रहे हैं, जिसकी वजह से मैं चाहूंगा तमाम तदवात कीजिए और इनको खत्म करने की कोशिश कीजिए। क्योंकि यह हालात रहेंगे तो जाहिर है कि अक्लियतों के अंदर बेइंतहा बेचैनी और अपने आप को गैर तसव्वुर महसूस करेंगे। जहां तक नैक्सलाइट का मसला है, मैं यह बात भी कहूंगा कि इस मसले को आप टेबल पर बैठकर हल कीजिए। यह याद रखिए आपको खबर नहीं है कि नैक्सलाइट का मसला कितना आगे बढ़ता जा रहा है। आप आखिर उनसे क्यों नहीं बातचीत करते हैं। आज देहातों के अंदर जाकर देखें तो पता चलेगा कि वहां पर मुतावाजी हुकूमत कायम है और अवाम उनका साथ देती है। इस वजह से देती है कि आपने जो वहां हैल्थ सैंटर कायम किए हैं वहां आपका कोई आदमी नहीं है, लेकिन ये लोग वहां जाकर पूरा इंतजाम करते हैं। इस तरह से वे उनकी हमदर्दी हासिल करते हैं। जमीन की तकसीम नहीं की गई, कानून लागू हुआ, लेकिन आज तक कोई काम नहीं हुआ। इसलिए मैं समझता हूं इस मसले को टेबल पर बैठकर हल किया जो तो यह यकीनन हल हो सकता है, आपको भी इससे आसानी होगी और शहरे हैदराबाद, आंध्रा प्रदेश और पूरे हिन्दुस्तान की जनता अमन और चैन की सांस लेगी। अक्लियतों के ताल्लुक आपका काम है कि इनके मसाइलों को पूरी तरह से देखें और उनके साथ नाइंसाफी नहीं होने पाए।
*SHRI HOLKHOMANG HAOKIP (OUTER MANIPUR): Thank you, Mr Chairman Sir. I want to focus on three important things only and my speech will be very short and to the point. Since it is my maiden speech I would like to speak in Manipuri language.
Sir, to bring about a peaceful settlement in the North-east it is high time to take some concrete steps. In this direction, Government of India is negotiating with both the factions of NSCN after declaring cease-fire, it is a right step. While going for an amicable settlement with the NSCN the territorial integrity of other north-eastern States should not be violated; if the territorial integrity of the States is violated there is an impending danger of culminating more problems rather than bringing a solution. Negotiating only with NSCN cannot bring peace and tranquility in the region. There are other insurgent organisations in the north east; more than 20 organisations are operating in the region. Some other important organisations are ULFA, PLA, UNLF, KNA, KCP, PREPAK, KYKL, Bodo outfits and Tripura outfits. For a lasting peaceful settlement in the region Centre ought to negotiate with all these outfits by declaring cease-fire. Here I want to mention about the Home Minister’s press statement that I came across in the Telegraph and the Assam Tribune, that there is likely to have a unilateral cease-fire. People supported it. Now people are fed up of violence. In Manipur we are facing 16 militant organisations. There is no life at all for us. We cannot move freely. Everywhere Manipur Rifles and Assam Rifles personnel are deployed.
People in the entire North-east want peace. They really appreciate and support the cease-fire and subsequent negotiations which are taking place between the Centre and the insurgents. On the other hand, the State Governments, NGOs and political parties can play a crucial role to bring the insurgent organisations to the negotiating table. Sir, another important thing is that after the cease-fire and __________________________________________________________________*Translation of the speech originally delivered in Manipuri.
while the negotiation is taking place the insurgents are still indulging in extortion, demanding ransom and procuring arms. This should not be allowed. There is no meaning of cease-fire if they are allowed to collect money or extort money and purchase guns and ammunitions.
If someone asks why there is insurgency in the North-east, the answer to this question is not easy. However, I am not wrong to say that insurgency is largely due to under-development, abject poverty, vast unemployment, ethnic identity crisis and historical distinction.
Sir, I will shorten my speech. Sir, if it is the intention of the Ministry of Home Affairs to declare unilateral cease-fire, the people will support them and will be very happy about it. The over-stressing of the Armed Forces, specially the Assam Rifles, the Army and the CRPF, should be stopped. Sometimes we use them. The Army, the CRPF and the BSF are meant for some other purposes. I think we have misused our forces.
Lastly, Sir, regarding Jammu and Kashmir, the Centre had reimbursed the money spent on counter-insurgency operations. I request you to do the same for the North-eastern States.
SHRI AJOY CHAKRABORTY (BASIRHAT): Thank you, Sir, for the opportunity given. The Ministry of Home Affairs is the backbone of the entire Government and of the country. But, nowadays, our backbone is being fractured. Under the leadership of the strongest man of the B.J.P. and the strongest Home Minister of the Government of India, the spirit of secularism and national integrity is being destroyed and demolished. The law and order situation is deteriorating day by day. Pakistan wants to destabilise and weaken our country. The ISI activities and their infiltration are growing day by day. … (Interruptions)
SHRI SUDIP BANDYOPADHYAY : It is particularly so in West Bengal. … (Interruptions)
SHRI AJOY CHAKRABORTY : Please do not interrupt. When I say something irrelevant, then you interrupt. I am not saying anything irrelevant.
SHRI SUDIP BANDYOPADHYAY : Why should I not speak? … (Interruptions)
SHRI AJOY CHAKRABORTY : Sir, just now I have received information that this morning one ISI agent has been arrested from West Bengal.
SHRI SUDIP BANDYOPADHYAY : It may be from the CPI headquarters. … (Interruptions)
SHRI AJOY CHAKRABORTY : Sir, I am told he was arrested from within the North 24 Paraganas district and Basirhat. Sir, Basirhat is my homeland and it is my constituency also. After getting that information I am very much suffering from agony. That fellow was already arrested by the West Bengal Police. The Government of West Bengal has been very capable and very much cautious to combat and deal with the situation.
Sir, the Home Minister of West Bengal came to meet with the Union Home Minister Shri L.K. Advani. He discussed the problems elaborately. Both the Home Ministers – of the Union and of the State – discussed the matter seriously.
My esteemed friend, Shri Sudip Bandyopadhyay just now told before the House that the West Bengal Home Minister silently went to the North Block.
SHRI SUDIP BANDYOPADHYAY : Yes. … (Interruptions)
SHRI AJOY CHAKRABORTY : Sir, henceforth I would suggest that whenever the Home Minister of the State, in order to oblige Shri Sudip Bandyopadhyay, goes to the North Block, he should go in a big procession, by beating the drums, and with loud speakers and band parties. … (Interruptions) He should inform everybody also. He should also inform Shri Sudip Bandyopadhyay to join the band party. … (Interruptions) I do not know whether Shri Sudip Bandyopadhyay has forgotten that this is the Indian Parliament. He spoke in such a manner as if he is speaking in the West Bengal Assembly.
I do not pass any remarks, but I am very much sympathetic to him. … (Interruptions)
SHRI SUDIP BANDYOPADHYAY : This is the first time they are facing such challenges! … (Interruptions)
SHRI AJOY CHAKRABORTY : I urge my friend not to mix this matter with politics because it is a question of life and death of our country. Not only in West Bengal, the ISI activities are growing, but infiltration of ISI people is also growing in all the bordering States. The ISI activities are growing not only in the bordering States but also in all the cities of our country. So, we, the Central Government and the State Government, should combat their activities together along with the city police, and stop them. … (Interruptions)
I draw the attention of the Home Minister to insurgency activities going on in the North-East and Jammu and Kashmir. The people who are belonging to the insurgent groups are killing people in our country and after that, they are taking shelter in the neighbouring countries. They are getting arms and ammunition and in-house training from Pakistan. My suggestion is that replying them with arms and ammunition alone cannot solve the problem. Until and unless we do not isolate the people belonging to the insurgent groups from the common people of our country, this problem cannot be solved. We should appreciate the families and the people living in the North-East and Jammu and Kashmir. They are feeling themselves as second-class citizens of our country. So, we should start development work and we should start such work that they can feel themselves as living in India and come to the mainstream. Without any reservation towards the people of the North-East and without the development of the North-East, that problem cannot be solved. Same is the case with naxalite groups, extremist groups. Their activities are growing in Bihar, Andhra Pradesh, Orissa, Madhya Pradesh and Maharashtra. Without the implementation of the real land reforms, without giving land to the tiller, that problem cannot be solved. Some people are enjoying huge chunks of land and the others are not having even a single hectare of land. So, without implementation of the land reforms, this problem cannot be solved.
Then, I would submit before the Home Minister about law and order problem in Delhi because Delhi Police is under the control of the Ministry of Home, Government of India. Delhi Police must be equipped with more sophisticated weapons in comparison to police of other States. What is happening in Delhi? Everyday, crimes are growing in Delhi. The cases of murder, dacoity, loot, arson and rape are increasing. The ISI activities are also growing in Delhi.
I would also request the Home Minister to follow the recommendations of Sarkaria Commission regarding appointment of Governors. The first pre-condition recommended by the Commission is that the Governor should be an apolitical man, but this Government is violating that recommendation of the Sarkaria Commission regarding appointment of Governors.
I would suggest to the Home Minister to repeal the Police (Regulation) Act and to repeal the Jail Code.
Lastly, I oppose the Demands for Grants of the Ministry of Home Affairs.
SHRI G.M. BANATWALLA (PONNANI): Mr. Chairman, Sir, in the limited time at my disposal, it is not possible for me to indulge into any analytical exposition of the working of the Home Ministry. I will, therefore, rest content with placing a few points before you, before the House and before our Home Minister.
At the very outset, Sir, I would like to draw the attention of the hon. Home Minister of the Government to widespread and intense agitation, protest and resentment against the U.P. Regulation of Public Religious Buildings and Places Bill, 2000. I hope, the Government will have an affirmative and a positive response to this restlessness. I appeal to the Government to advise the President to withhold his assent to this Bill. I have written to the President, to the Prime Minister and the Home Minister, giving all the details. I do not want to go into all those details, but the Bill is an assault on the Constitution; it is an assault on religious freedom.
The background in which the Bill has come clearly shows that Muslims and other minorities are a target. We are told everyday that there is a spurt in the activities in the madrasas, the mosques and the masjids, and they have become centres of militant activities. Sir, such a baseless propaganda goes on -- not a single militant has ever been discovered from these sacred places of worship, like the masjids. But when such propaganda goes on, there are real apprehensions among the minorities that the intentions of the Government of U.P. are dubious and suspect. It is absolutely necessary to see that our minorities do not have this apprehension of a perpetual state of insecurity of its places of worship and madrasas.
MR. CHAIRMAN : Please conclude.
SHRI G.M. BANATWALLA : This is only one point that I have placed. There are other things also.
The cases against those responsible for the demolition of Babri Masjid are still pending before the courts. I express my total dissatisfaction against such a long delay. An FIR dated 5.10.1993 is still pending. On 27th August, 1994 the Special Judicial Magistrate found that a prima facie case existed and it necessitated trial by a Sessions Court.
MR. CHAIRMAN: Please conclude.
SHRI G.M. BANATWALLA : Sir, I have four cut motions. At least, I should be in a position to tell the House as to why they should be adopted. Sir, briefly I will run over the points.
On 9th September, 1997 the Additional Judge at Lucknow found a prima facie case for various charges against the accused, and the Sessions Judge ordered that all accused should be present in the court on 17th October, 1997 for framing of charges. Since then, the whole matter is simply in the air and not moving. Unfortunately, some of our Ministers are also accused before the Sessions Judge. Therefore, Sir, I appeal to the Prime Minister that it is necessary, and I emphasise, that a separate Committee be there in order to see that these cases are expedited, and those responsible for the heinous crimes are brought to book.
Sir, with respect to the Babri Masjid, the position of our Government is that it is the custodian of the site and is responsible to maintain the status quo. But there are statements, like responsible statements from even the Chief Minister of Uttar Pradesh, Press reports in the Indian Express, the Times of India and other newspapers, on 29th January, 2000 and I quote the Chief Minister as having said:
"Why should I stop Bajrang Dal and Vishwa Hindu Parishad from constructing a temple? Only if there is a law and order problem … "
Sir, we find that they are not concerned with the court orders, and want a peaceful construction of the temple on the site of Babri Masjid. The Government must move in the matter and take action against those who are coming forward, without any respect for the court orders, and clearly say that they will take no steps if any status quo is being changed.
There is a need for vigilance on the communal front. Anti-minority communal elements are vitiating the atmosphere. What has happened in Agra and what is happening in various other places are clear indications to this.
I will refer to a very heinous and inhuman incident that has taken place. In village Karari, District Koshahi, a heinous and reprehensible crime against humanity has taken place. A communal person went to the old graveyard there and dug up the graves. The bones and the remains of the dead bodies were carried in gunny bags and sent to the relatives of the people over there. Action be taken against such people who are vitiating the atmosphere.
Talking of the high-handedness of police, students of Jamia Millia are still on hunger strike. There is great tension over there. The Government must move swiftly and fast in order to see that the judicial inquiry is started; cases are withdrawn; and action is taken against the erring officers.
MR. CHAIRMAN : Please conclude.
SHRI G.M. BANATWALLA : After this last point I shall conclude. My Cut Motions are there which I am sure the House is going to accept.
There was a UNI release dated 12th April, 2000, about Assam. The release says:
"The Centre, the State and the All Assam Students Union (AASU) agreed to adhere to the 1951 census register of citizens. "
This amounts to putting the clock back. This will once again unleash persecution, harassment and bloodbath on the minorities. By this, the Assam Accord is sought to be given a go-by. The cut-off date of 1971 is being ignored. I will appeal to the Government to see that such a thing does not take place.
There are various Commissions of Inquiry which have submitted various reports. Based on their recommendations, action against the culprits has to be taken. There is the Srikrishna Commission Report in Maharashtra. Similarly, there was a Commission earlier which inquired into the incidents of Meerut and Maliana in Uttar Pradesh. Their recommendations have also to be taken up.
With these words, I commend my cut motions to the approval of this House.
श्री हरीभाऊ शंकर महाले (मालेगांव) : सभापति महोदय, आपने मुझे बोलने का समय दिया, उसके लिए मैं आपका आभारी हूं। सदन में इधर-उधर के सदस्यों नें बहुत खाना रखा, मैं उसमें ज्यादा समय नहीं लेना चाहता हूं। मैं उसमें थोड़ा नमक डालना चाहता हूं। जो गृहिणी होती है वह बहुत अच्छी तरह से रहती है, बाल-बच्चे संभालती है, धर्मपालन करती है और सबके साथ अच्छी तरह से बर्ताव करती है। कोई गलती करता है तो उसको एकाध हाथ भी मार डालती है। जिसे गृहिणी बोलते हैं, वही गृह मंत्री होता है। गृहिणी के समान महत्वपूर्ण गृह मंत्री होते हैं। गृह मंत्री की उपाधि देने से उन्हें बढ़ावा तो मिलता है, लेकिन गृह मंत्रालय की जो उपाधि होती है, उससे बढौतरी मिलती है और उस बढौतरी के हिसाब से वह एक बुजुर्ग आदमी हैं, अच्छे आदमी हैं, उन्हें देश के लिए अच्छा काम करना चाहिए, यही मेरी विनती है।
सभापति महोदय, एक टिहरी गांव हैं, उम्बरदा तहसील है और बलसाड जिला है और राज्य गुजरात है।
सभापति महोदय, उन्होंने स्वतंत्रता सेनानी होते हुए भी कभी सरकारी सहूलियत नहीं ली। उनके सुपुत्र प्रताप बसावे, ये कर्नल थे, उन्होंने दो बार पाकिस्तान के युद्ध में अच्छा काम किया, उनको राष्ट्रपति का सम्मान मिला, राष्ट्रपति ने पदक दिया, उन्होंने उम्बरदा गांव में महात्मा गांधी का नाम लेकर, महात्मा गांधी जी की जन्मभूमि में अच्छी तरह से संगठन किया और बंदरगाह होने वाला था, लेकिन महात्मा गांधी जी थे तब कड़ा विरोध किया और यह काम ठप्प हो गया। गुजरात में ऊम्बरदा में होने लगा। वह न होने देने के लिए उन्होंने कड़ा विरोध किया और वे पुलिस अधिकारियों के घरों में एक दिन चले गए और ४७ लोगों को उन पुलिस के लोगों ने जेल की कोठरी में डाल दिया, उनको खूब पीटा। बसावे जी इलाज कराने के लिए इधर-उधर गए। इलाज नहीं हो पाया। हिन्दूजा मुम्बई अस्पतालन में गए। मैं उनके घर गया। मैंने उनके पिताजी से मुलाकात की। वे रोने लगे। वे स्वतंत्रता सेनानी होते हुए भी उन्होंने देश से कोई सहूलियत नहीं ली और स्वतंत्रता सेनानी होने के बाद उनकी आज यह हालत है। क्या वे इसी बात को और इसी दिन और इसी समय को देखने के लिए लड़ाई लड़े? मेरे लड़के ने लोगों को मारा, पाकिस्तान के लोग मारे और गुजरात का जो प्रशासन है, पुलिस प्रशासन उसने इन लोगों को पीटा और इतना पीटा कि अब उनका इलाज कराने में भी कठिनाई आ रही है। उन्होंने बहुत क्रूरता दिखाई। मुझे इस बात को देखकर यह याद आता है-
"जा स्वासानो वायु, संगे ओलान्ढुनी भित्त सांगा आइला आमचा ह्ृदया तिल ख्ैंन्ता सांगा बेडी तूजी स बाढे या अन्धारात माते तुला।`` इसका हिन्दी में अर्थ यह है कि इधर जाइए जो दीवार है, उसको तोड़ने के लिए जाइए और हमारी भारत भूमि को संदेश दीजिए। हम यह बहुत अच्छा काम करेंगे, तो यह कार्य नहीं है।
सभापति जी यह पुलिस का प्रशासन ठीक नहीं है, मैं मांग करता हूं कि उनके खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई करनी चाहिए और मैं तो मुख्य मंत्री के इस्तीफे की भी मांग करता हूं।
सभापति जी, अब मैं कुछ अन्य बातों के बारे में कहना चाहता हूं। जनगणना के बारे में सोचना चाहिए, होम गार्ड में जो लोग हैं उनके सुधारि के लिए काम होना चाहिए। जनगणना हुए १० साल हो गए हैं। जो मैंने २५ कटौती सवाल दिए हैं, उन पर विचार किया जाए, ऐसी मेरी प्रार्थना है।
SHRI SURESH KURUP (KOTTAYAM):Sir, the Union Home Ministry in our federal set up symbolises the unity and integrity of our country. So, a review of the functioning of Home Ministry gives us an opportunity to look into the general health of our federal policies, the challenges faced by our country and the response of various political parties.
What has been the track record of the Ministry of Home Affairs during the last two years? It is being repeatedly trumpeted by the die-hards of the BJP, as already mentioned here, that our Minister of Home Affairs is the reincarnation of Sardar Patel and that he is here to lead a strong State. But what are the ground realities?
First of all, let me say that the rusted presence of the BJP in this Government cannot be compared to the iron pillars of the freedom movement in our country. One of the yardsticks to measure the success of a Government in a multi-religious country like India is the confidence it enjoys with the minority community in the country, whether it inspires confidence in the minority community. For the last two years, the minorities in this country are living under a constant threat. Let us admit it. They do not trust the Minister of Home Affairs. They do not have any confidence in this Minister of Home Affairs who conceived and executed the demolition of the Babri Masjid. Every day, some outfit of the Sangh Parivar repeats the threat that they would construct the Ram temple where the Babri Masjid stood. Nobody in the BJP or the Minister of Home Affairs has come forward to assure the minorities that they would be given all protection and that this temple would not be built at that site.
श्री रासा सिंह रावत (अजमेर) : हमारे पास भी लाखों अल्पसंख्यक हैं। आपका यह कहना गलत है कि सारा ठेका कामरेडो ने ले लिया है। …( व्यवधान)
SHRI SURESH KURUP : Our Minister of Home Affairs did not think twice to send a Central team to West Bengal to study the law and order situation in that State but he feigned inability to ask the Government of Gujarat to withdraw the controversial circular on the RSS. It took the combined pressure of the Opposition and also some of the alliance partners - we are thankful to them – and above all the resistance of the secular India to force the Government of Gujarat to withdraw from that diabolical move.
Let us see the pathetic situation of the Christian minorities which has already been mentioned here by the hon. Member from the North-East. They form only 2.5 per cent of our population. In Gujarat and Uttar Pradesh, they are the prime targets of the Sangh Parivar’s attack. What crime have they committed? They are entitled to live in this country. … (Interruptions)
श्री रासा सिंह रावत : केरल के अंदर कितने आर.एस.एस. कार्यकत्ताओं की हत्या कराई गई। …( व्यवधान)
SHRI SURESH KURUP : I have not interrupted any one of you.
The Christian minorities are entitled to live in this multi-ethnic country. They are entitled to preach and practise their religions. They are also entitled to run their own educational institutions. Unfortunately for the BJP, our Constitution - which they want to tamper with - guarantees these minorities these elementary things.
All over Northern India, they are repeatedly under attack. There is a set pattern in the attack. On the eve of their holy days, these attacks are made. On the last Christmas Eve and before that, it was in the Dangs district of Gujarat. Now, during the Easter eve, they have been attacked in Haryana and Agra. On the eve of every religious festival, they have been attacked. … (Interruptions)
श्री विजय कुमार गोयल (चांदनी चौक) : आप जो तथ्य बता रहे हैं, वह ठीक नहीं है। सदन के अंदर आप गुमराह कर रहे हैं। …( व्यवधान)
सभापति महोदय : आप क्यों खड़े हो रहे हैं। आप आसन ग्रहण कीजिए।
…( व्यवधान)
श्री विजय कुमार गोयल : सभापति जी, मैं कहना चाहता हं कि टू व्हीलर से जो एक्सीडैंट हुआ, उसको आप अननेससरी कोई और घटना बता रहे हैं। …( व्यवधान)
सभापति महोदय : इतने माननीय सदस्य क्यों खड़े हो गये हैं। यह नियम विरुद्ध है।
…( व्यवधान)
श्री विजय कुमार गोयल : ये लोग कुछ भी खड़े होकर बोल देते हैं …( व्यवधान)
जिसे हमें सहन करना पड़ता है। …( व्यवधान)
श्री रुपचन्द पाल : वह हाउस के अंदर भी मांगता नहीं है। …( व्यवधान)
२१.०० hrs. श्री विजय गोयल : यह कोई ठीक तरीका नहीं है। आप यहां पर खुद कम्युनलिज्म फैला रहे हैं।
SHRI SURESH KURUP : For the last two years, all over Northern India, they are being repeatedly attacked, especially on the eve of their festivals; thus, they are reminded that they are second class citizens in this country. The community as a whole feels isolated and the Government says that these are all isolated incidents. I do not know what the BJP is going to gain from this. As was mentioned by Shri Banatwalla, what is the attitude of this Government regarding U.P. Public Places and Religious Bill? Are they ready to advise the U.P. Government to withdraw from this diabolical move?
प्रो. रासा सिंह रावत (अजमेर) : वह मंदिर, मस्जिद, गुरुद्वारा सब के लिए है, केवल माइनोरिटीज के लिए नहीं है।…( व्यवधान)
SHRI SURESH KURUP : Our Home Minister repeatedly and proudly says that whatever goodness is there in him is only because of RSS. What does the new RSS Chief say? He says that the Hindu community in this country should get ready for an epic war with non-Hindus. I do not know whether the Home Minister is going to preside over this battle.
Now, it is the Sangh Parivar that decides what the Indian public should view and think. They do not want the film Water to be shot in India; they do not want the Pope to visit India; they do not want any Christian Missionaries like Graham Staines to work among the leprosy patients in India. What protection do the victims of Sangh Parivar get from this Union Home Minister who says that he owes everything in his life to the RSS? In all these attacks, the Bajrang Dal takes part and the Home Minister is the first person to come forward and exonerate the Bajrang Dal whenever their name comes up as part and parcel of those attacks.
Under the auspices of this Government, our Constitution is now being reviewed. Nobody in the Government or in the BJP has categorically stated the purpose of this review. We all know that some of the main functionaries of the BJP and some important members of this Committee had expressed their opinion that Presidential system is best suited for our country. It is also said that the Committee is thinking of recommending a fixed term for the Lok Sabha. I would like to ask what authority has this Committee got to review the Constitution. It is like reviewing motherhood that nurtures, sustains and brings us up in our lives. We owe our democracy and secularism to our Constitution. We owe our federal system to this Constitution. We owe everything, which our country is proud of to this great document. Any attempt – through the medium of the so-called Expert Committee – to suggest or to alter the basic principles of our democratic society will be the end of this Government. I am sure that not only we, but some alliance partners of this Government, as they did earlier, will also come forward to pressurise this Government to desist from this move.
Sir, now I am coming to a subject in which you have got interest.
सभापति महोदय : अब समाप्त कीजिए।
SHRI SURESH KURUP : Sir, things unheard of in the history of criminal jurisprudence are happening in this country. The CBI is being utilised to victimise the political opponents. A wife is being charge-sheeted for an alleged crime of the husband! This is most reprehensible. On all counts, whatever may be the basis, in regard to protection of dalits, minorities, in regard to using the police force against political opponents, this Government has failed. So, I oppose the Demands for Grants.
कुंवर अखिलेश सिंह (महाराजगंज, उ.प्र.) : माननीय सभापति महोदय, मैं आपका आभारी हूं कि आपने गृह मंत्रालय की अनुदान मांगों की चर्चा पर भाग लेने की मुझे अनुमति प्रदान की।
जब से गृह मंत्री जी इस बार गृह मंत्री की कुर्सी पर बैठे हैं, देश की आन्तरिक सुरक्षा को लगातार खतरा बढ़ता चला जा रहा है। जो सबसे शर्मनाक स्थिति का सामना देश को करना पड़ा है, वह काठमांडू से जिस विमान का अपहरण हुआ और कंधार तक हमारा विमान पहुंचा, काठमांडू से अमतृसर होते हुए कंधार तक जिस शर्मनाक स्थिति का सामना करना पड़ा है, उससे पूरे देश का सिर दुनिया के सामने शर्म से झुका है।
मैं यह कहना चाहता हूं कि यह पहली दफा नहीं हुआ है… इसके पूर्व भी आतंकवादियों को छोडने की बात सरकारों दवारा की गई है । ( व्यवधान) आप सही बात को सुनिए। पहले भी ऐसी घटनाएं हुई हैं…( व्यवधान)
सभापति महोदय : आप विषय पर बोलें।
श्री प्रियरंजन दासमुंशी : अगर विरोधियों के बोलने से इनको कोई आपत्ति होती है तो कल से फैसला कर लीजिए कि जब कोई डिमांड होगी तो हम नहीं आएंगे, यही बोलते रहेंगे।…( व्यवधान)
कुंवर अखिलेश सिंह : गृह मंत्री जी जब दूसरी बार इस सरकार के पदारूढ़ होने पर मंत्री बने तब से अब तक दो बार शर्मनाक स्थिति का सामना देश को करना पड़ा है। पहली स्थिति काठमांडू से कंधार तक जब विमान का अपहरण हुआ और पाकिस्तान ने जिस तरह शतरंज की गोटी बिछाई, उसमें निश्चित ही हमारे देश की राजनीतिक पराजय हुई है। विमान अपहरण के लिए पाकिस्तान ने हिन्दू राष्ट्र नेपाल का चयन किया। विमान अपह्ृत करके काठमांडू से लखनऊ होते हुए अमृतसर गया और वहां उतारा गया। उसके बाद भी हमारे देश की सुरक्षा एजेंसीज उन अपहर्ताओं को पकड़ने में और विमान यात्रियों को सकुशल देश में रोकने में कामयाब नहीं हो सकीं। मुझे यह कहने में संकोच नहीं है कि इस तरह की स्थिति पहले भी वर्ष १९८९-९० में आ चुकी है, जब इस देश के गृह मंत्री मुफ्ती मोहम्मद सईद साहब की बेटी के अपहरण में पांच अपहर्ताओं को छोड़ा गया था। उस समय भी आप सरकार को समर्थन दे रहे थे। अगर उस सवाल पर समर्थन वापस ले लिया होता तो शायद आपका राष्ट्रवादी चेहरा देश के सामने उजागर हो गया होता।…nskढढन आप नहित स्वार्थो की पूर्ति के लिये समर्थन देते रहे । ( व्यवधान) उस समय आप समर्थन दे रहे थे, हम नहीं थे, मैं नहीं था।
श्री चिन्मयानन्द स्वामी : आपके नेता थे।
कुंवर अखिलेश सिंह : मुझे कहने में संकोच नहीं है कि कंधार में जो घटना घटित हुई, व्यक्तिगत तौर पर गृह मंत्र जी उस बात से सहमत नहीं थे, मैं निजी जानकारी के आधार पर कहना चाहता हूं कि गृह मंत्री जी के जो विचार थे, वे सख्ती से पेश आने के थे। लेकिन प्रधान मंत्री जी के सामने गृह मंत्री जी बेबस और लाचार हो गए। इसलिए देश को शर्मनाक स्थिति का सामना करना पड़ा। दूसरी बार जब अमेरिका के राष्ट्रपति श्री बिल क्िंलटन भारत यात्रा कर रहे थे, उसी समय जम्मू-कश्मीर की घाटी में ३६ निर्दोष सिखों का कत्लेआम हुआ। निश्चित तौर पर इससे हमारी आंतरिक सुरक्षा की पोल खुल गई। हम कहना चाहते हैं कि उसके बाद जो शर्मनाक स्थिति हुई, वे ३६ निर्दोष हत्याओं के बदले, फिर निर्दोष हत्याएं हमारी सुरक्षा एजेंसीज ने कीं। अगर कोई डकैत डकैती डालने जाए, वह नहीं पकड़ा जाता है अगर उसकी जगह पर निर्दोष लोग पकड़े जाते हैं तो डकैत का मनोबल बढ़ता है, अपराधी का मनोबल बढ़ता है कि अगर हम अपराध करेंगे तो हम नहीं पकड़े जाएंगे, दूसरे लोग हमारी जगह पकड़े जाएंगे। इस तरह से अपराधों पर अंकुश नहीं लगा सकते। अगर कहीं अपराध घटित होते हैं तो उनके वास्तविक दोषियों के विरूद्ध जब तक दंडात्मक कठोर कार्रवाई नहीं करेंगे, तब तक अपराधों पर नियंत्रण नहीं कर सकते।
आज जम्मू-कश्मीर में फारुख अब्दुल्ला मुख्य मंत्री की कुर्सी पर बैठे हुए हैं और उनकी पार्टी यहां समर्थन कर रहीहै। उनके बेटे यहां सरकार में मंत्री बने हुए हैं। जम्मू-कश्मीर में लोगों का कत्लेआम हो रहा है तो उस सवाल पर भारतीय जनता पार्टी के लोग जम्मू-कश्मीर में जाकर हायतौबा नहीं मचाएंगे। वही फारुख अब्दुल्ला अगर संयुक्त मोर्चा की सरकार को समर्थन दे रहे होंगे या दूसरी पार्टी को दे रहे होंगे तब इनके द्वारा शोर मचाया जाएगा। यह दोहरी मानसिकता और दोहरा मानदंड बदलना होगा। आज ये बिहार, बंगाल की बात कर रहे हैं। मैं कहना चाहता हूं उत्तर प्रदेश पर आइए। वहां २२ जघन्य अपराधियों को मंत्रिमंडल की कुर्सी दे रखी है। १९९१ में जब कल्याण सिंह जी मुख्य मंत्री थे, उस समय जिन लोगों को कल्याण सिंह जी ने टाडा में बंद किया था, उन्हें आज केबिनेट मंत्री की कुर्सी पर बिठाया गया है। जिन्हें राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के तहत गिरफ्तार किया गया था, वे आज वहां राज्य मंत्री बने हुए बैठे हैं। मैं कहना चाहता हूं कि अभी उत्तर प्रदेश में अपराधियों को पकड़ने के लिए, मारने केलिए टास्क फोर्स का गठन किया गया है। उसमें अरूण कुमार जैसे ईमानदार आफिसरों की नियुक्ति हुई है। उससे कुछ सफलता भी हासिल हुई है।
रवीन्द्र कुमार सिंह जैसे बहादुर पुलिस इंस्पेक्टर को लखनऊ में हजरतगंज में मारा गया, लेकिन जिन लोगों ने उनकी हत्या की वे बिहार में जाकर एमएलए बन गए। सरकार के मंत्री जेल में जाकर उन अपराधी विधायकों का समर्थन हासिल करने के लिए रोज जेल में जाकर घुटने टेकते रहे, यह दोहरी मानसिकता बंद होनी चाहिए। तब जाकर अपराधों पर नियंत्रण होगा।... (व्यवधान)
महोदय, पुलिस रेगुलेशन एक्ट के अंतर्गत आपको परिवर्तन करना होगा। यह एक्ट अंग्रेजों के जमाने से बना हुआ है। अब अपराध की प्रकृत्ति बदल रही है।... (व्यवधान) मान्यवर, सीआरपीसी और आईपीसी में परिवर्तन होना चाहिए। आज दफा १०७, ११६ और १५१ के अंतर्गत क्या हो रहा है। जो निर्दोष गरीब आदमी हैं उनका १०७ और ११६ के अंतर्गत पुलिस चालान कर रही है। उन गरीब लोगों का पैसा बर्बाद हो रहा है, इसलिए दफा १०७, ११६ और १५१ समाप्त की जानी चाहिए। पुलिस के जो अधिकारी इसका दुरूपयोग करें उनके खिलाफ कठोर कार्यवाही की जानी चाहिए।... (व्यवधान)
महोदय, मैच फिक्िंसग का मामला सामने आया। आपको पुलिस के चरित्र पर भी नजर डालनी पड़ेगी। उत्तर प्रदेश में बलिया में निर्दोष छात्रों पर गोली चलाई, उनकी मौत हुई। मऊ में शराब खाने को हटाने के लिए इनकी पार्टी की समर्थक महिलाएं आंदोलन कर रही थी कि उनके ऊपर पुलिस ने निर्दोष लोगों के ऊपर लाठी, गोली चलाने का काम किया।... (व्यवधान) आजमगढ़ में निर्दोष लोगों के ऊपर गोली और लाठी चलाने का काम हुआ, यह चीज बंद होनी चाहिए। अभी नेपाल की सीमा पर आतंकवाद और आईएसआई की गतवधियों के बढ़ने की बात सभी माननीय सदस्यों ने कही। यह निश्चित तौर पर देश के लिए चिन्ता का विषय है। अगर आईएसआई अपने पंजे फैलाता रहा तो यह देश के लिए चिन्ता का विषय होगा, लेकिन अगर हम आईएसआई के नेटवर्क को समाप्त करने में कामयाब नहीं हो पा रहे तो यह हमारी खुफिया एजेंसियों की विफलता है।
महोदय, मैं गृह मंत्री जी से कहना चाहता हूं कि खुफिया एजेंसियों के नेटवर्क को आपको और मजबूत बनाना होगा और जो भारत तथा नेपाल की सीमा पर गतवधियों के बढ़ने की बात आई है, इस पर भी आपको पैनी द्ृष्टि डालनी होगी। मैं उत्तर प्रदेश में सुनौली, गोरखपुर से सुनौली, जो भारत से नेपाल जाने का विदेशी पर्यटकों के लिए उत्तर प्रदेश में मात्र एक अधिकृत मार्ग है, उस तरफ इशारा करना चाहता हूं। वहां इंस्पेक्टर रेंक की पोस्ट है। तीन बार वहां इंस्पेक्टर पोस्ट किए गए और उन तीनों इंस्पेक्टरों को हटा कर लगातार वहां सब इंस्पेक्टरों की नियुक्ति करके वहां धन दोहन करने का काम किया जा रहा है। सीमा की रखवाली के लिए उत्तर प्रदेश सीमा पुलिस का गठन किया गया है। आज पुलिस क्यों कामयाब नहीं हो पा रही है, क्यों तस्करी के कार्य को नहीं रोक पा रही है। आपने वहां ईमानदार अधिकारियों को नियुक्त नहीं किया है। पूरे देश में सीमावर्ती इलाकों की सुरक्षा के लिए एक केन्द्रीय बल का गठन करना पड़ेगा और केन्द्रीय बल को उस सीमा की रखवाली की जिम्मेदारी देनी होगी, तब जाकर हम इन गतवधियों पर रोक लगा पाएंगे। इन्हीं शब्दों के साथ मैं अपनी बात समाप्त करता हूं।
*SHRI K.H. MUNIYAPPA (KOLAR): Mr Chairman Sir, I want to speak in Kannada according to the wishes of the people of my constituency.
Sir, the Hon’ble Home Minister represents about 100 crores of people of this country who are expecting a lot from him. Hence there is a great responsibility on him. Terrorists’ groups like People’s War Group (PWG), naxalites, ULFA and others are creating serious problems not only to the economy of this country but also to the safety and security of the lives of the people. The atrocities of these groups are increasing day by day and the Government of India has utterly failed to curb these activities. The Government cannot control the situation through guns and force. They have to adopt entirely a new method.
Vinoba Bhave, the great leader of Bhoodan movement, has showed us the path. Land, property, etc., should be equally distributed among the people. Equality among the people must be maintained. Land reforms must be implemented very strictly throughout the country and that is one of the major solutions for ULFA and naxalite activities in this country.
Like Vinoba Bhave, Jaya Prakash Narayan has also contributed a lot to bring in equality among people. He took a firm stand regarding the social unrest in the country. His approach to the social problems was revolutionary. He achieved great success in convincing the agitated youths. He was able to restore peace and amity in the Chambal Valley area of Madhya Pradesh. His weapon was peace and non-violence. This approach has to be adopted by the Government of India also. The poorest of the poor, the depressed, educated, unemployed youths are joining these groups of naxalites, ULFA and others. The Centre should take keen interest in this matter and find out a permanent solution to this malady. It is their moral constitutional obligation to provide jobs to the educated youths of this country.
Mahatma Gandhi, the father of our nation, said, "India is to me the dearest __________________________________________________________________ *Translation of the speech originally delivered in Kannada.
country in the world not because it is my country but because I have discovered the greatest goodness in it." He not only preached this but also practiced. So much of goodness is in our country, young India. It requires proper guidance and for that we should follow the footsteps of Mahatma.
The recruitment method to the Industrial Security Force, Railway Protection Force, Reserve Police Force, Border Security Force and other forces is not at all convincing and justifiable. Representation to the Southern States in these forces is not even 25% while making selection to these forces representation should be given to all States according to their population (ratio).
Towards the end of 12th Lok Sabha the Hon’ble Prime Minister had given an assurance regarding DOPT Official Memorandum which was issued sometime ago. He had said that he would withdraw it and protect the people belonging to SC and ST. I therefore would like to remind him about his assurance to the SC and ST population of this country. He should act swiftly in this regard before it is too late.
Regarding clearing the backlog of SC and ST posts in Government jobs it appears that the Centre is keeping mum. Our late lamented leader Shri Rajiv Gandhi had taken steps to clear the backlog in quick session. Unfortunately, now under the NDA’s regime this process is moving at a snail’s pace. After Rajivji, Mr Narasimha Rao also had given top priority to clear the backlog. Now the NDA Government should become alert in this regard if they want to continue in power.
Clashes, murders are taking place in the name of religion. Who can forget the brutal murder of Mr Staines and his young urchins? Such people who dedicate themselves for the service of the downtrodden are murdered. What has happened recently near Agra? Such heinous acts should be stopped completely once for all.
ASATOMA SADGAMAYA TAMASOMA JYOTIRGAMAYA MRUTYORMA AMRITANGAMAYA. Leave all dharma and believe in Me. ‘Me’ is not any one dharma or religion. It means the super power. It does not refer to any caste, dharma, community or religion. One should introspect and try to realise the super power in ‘Me’. That alone will take us to the ultimate goal of our life.
According to Islamic teachings, if we have two rotis then we have to give one to the person who is hungry. This is how Islam religion teaches us to help the poor and the needy. It never tells us about caste, creed, colour and community.
Sir, you and the Hon’ble Members in this august House are aware of the story ‘The Lost Sheep and the Lost Coin’. If one sheep is lost out of hundred then Jesus goes in search of that lost sheep. So it is our moral duty to find out the one who goes in the wrong path and to correct him. Christianity spreads this message of love.
But unfortunately Sir, the BJP Government is politicising the issues in the name of Hindu religion. Manu Shastra, Varna Shastra (the 4 Varnas) have brought down the Hindu religion. Today the followers of Christianity are the largest in the world. Islam takes the second position and Hinduism is down below. At least now let this Government awake, arise and create a congenial atmosphere for maintaining peace and amity in the country. Let us spread the message of universal brotherhood.
Constitution is the property of all people in this country. Leaders of Hindus, Muslims, Sikhs, Christians, Jains, Buddhists and all other religions have rendered dedicated services to frame the Constitution under the noble guidance of Mahatma Gandhi. All are equal according to our Constitution. It provides freedom of speech and freedom to practice any religion to all the citizens of this country. If NDA tries to venture some experiments with the Constitution there will be bloodshed in the country. People of this country have not given mandate to BJP party. The NDA have constituted a Committee to review the Constitution. They are also making impervasive and irresponsible statements about our party leadership. I condemn this. They did not dare to bring this issue of Constitutional review to the Parliament. The members of this committee are not members of Parliament.
21.23 hours (Mr Speaker in the Chair) Mr Speaker Sir, now I am reminded of Ramayana. I do not hesitate to compare Shri Advaniji to King Ravanasura. He is trying to rob Constitution. Mr Chandra Babu Naidugaru sitting in Hyderabad is functioning like Vibheeshana. He is advising the Centre not to meddle with the Constitution. In Ramayana, Ravana was killed and Rama was crowned as the King of Ayodhya. Similarly, here, BJP will eat dust because they are meddling with the Constitution. Elections will be held and all the member parties of the NDA will be shown the door by the people. I recall, some years ago there were only two members of the BJP party in this august House. I am sure that history will repeat itself. Our Congress party under the able leadership of Smt. Sonia Gandhiji will come back with thumping majority to serve this great nation. She will be our Prime Minister to guide the destiny of the largest democracy of the world, India.
Sir, with these words, I thank you and conclude my speech.
श्री रामदास आठवले (पंढरपुर) : अध्यक्ष महोदय, मुझे गृह मंत्रालय की अनुदान मांगों पर बोलने का अवसर दिया जाए।... (व्यवधान)
MR. SPEAKER: Shri Athawale, please take your seat. Once your name had been called but you were not there at that time.
… (Interruptions)
SHRI SANSUMA KHUNGGUR BWISWMUTHIARY (KOKRAJHAR): Mr. Speaker, Sir, I want to speak on this subject. I must be given a chance to speak.… (Interruptions)
MR. SPEAKER: Your name had also been called but you were not there at that time. So, please take your seat.
SHRI SANSUMA KHUNGGUR BWISWMUTHIARY : At what time? Could I know of it? … (Interruptions)
MR. SPEAKER: Shri Athawale, please take your seat. You cannot speak now. It is already 9.25 p.m. … (Interruptions)
MR. SPEAKER: Please take your seat first.
SHRI SANSUMA KHUNGGUR BWISWMUTHIARY : I should speak. I must speak. … (Interruptions)
MR. SPEAKER: Now, the Home Minister will speak.
… (Interruptions)
SHRI SANSUMA KHUNGGUR BWISWMUTHIARY : I must be allowed to speak. … (Interruptions)
MR. SPEAKER: Do not disturb the proceedings of the House. Please take your seat.
… (Interruptions)
.
गृह मंत्री (श्री लाल कृष्ण आडवाणी ) : अध्यक्ष महोदय, मैं उन सभी सदस्यो का आभारी हूं जिन्होंने आज की बहस में भाग लिया है। मैं विशेष रूप से श्री पायलट का आभारी हूं जिन्होंने बहस का प्रारम्भ किया।
SHRI SANSUMA KHUNGGUR BWISWMUTHIARY : I should be allowed to speak. क्या मुझे पांच मिनट मौका नहीं दे सकते?
श्री लाल कृष्ण आडवाणी; उन्होने गृह मंत्रालय की आलोचना की लेकिन आलोचना का एक एक शब्द रचनात्मक था कि यह कमी है, उसे ठीक करना चाहिये।
SHRI SANSUMA KHUNGGUR BWISWMUTHIARY : Let me speak, Mr. Speaker.… (Interruptions)
MR. SPEAKER: Please take your seat. Do not disturb the proceedings of the House.
श्री लाल कृष्ण आडवाणी; सचमुच में यह समझता हूं कि अगर कोई भी इस बात को ध्यान में रखेगा कि इस सरकार की आयु केवल दो वर्ष की है तो स्वाभाविक रूप से यह अप्रोच होगी अन्यथा पूरी बहस इस बात पर होती रहेगी कि इन दो सालों की जो स्थिति है, वह क्यों पैदा हुई? अगर उसका विश्लेषण करेगा तो एक-दूसरे पर पाइंट स्कोर करेगा। इस कारण मैं सभी सदस्यों का धन्यवाद करता हूं जिन्होंने कुछ न कुछ सुझाव दिये कि यह करना चाहिये। इस बात को सभी ने स्वीकार किया कि संकट बहुत गंभीर है जिससे कोई इनकार नहीं कर सकता। मुझे विश्वास है कि अगर मै उठाकर पूर्व के जितने डिबेट्स हैं , उनको देखूं तो जितनी बार आई.एस.आई. का जिक्र हुआ है, उतनी बार पहले कभी नहीं हुआ। जहां तक मुझे स्मरण आता है कि पांच-छ; साल पहले जब मैं विपक्ष में था और कभी आई.एस.आई. का जिक्र करता था तो लोग कहते थे कि क्या बात करता है। It was supposed to be sacrilege even to mention the name of ISI. It was supposed to be communally provocative to mention the name of ISI. आई.एस.आई. की बात करना एक प्रकार से साम्प्रदायिकता भड़काना था या कुछ लोग मजाक उड़ाते थे। जब ये लोग किसी समय सी.आई.ए. का नाम ले आते थे, आप आई.एस.आई. का जिक्र कर लेते हैं, यह बात सही है कि जब कभी कहीं अपराध होता है, उसको आई.एस.आई. से जोड़ना उचित नहीं है। हर एक बात को विवेकपूर्ण ढंग से देखना चाहिये। यदि कहीं ज्यादती होती है और आप उस ओर ध्यान दिलायेंगे तो जरूर कार्यवाही की जायेगी। मैं एक बात यह बताना चाहता हूं कि श्री सुदीप ने दूसरे संदर्भ में व्यंग करते हुये कहा। मुझे बहुत खुशी हुई। जिस दिन पश्चिम बंगाल के गृह मंत्री मुझे मिलने आये और मिलते हुये कई बातों की चर्चा की लेकिन एक बात की उन्होंने शिकायत की और कहा कि आप अपने वक्तव्यों में आई.एस.आई. का जिक्र करते हैं, जम्मू कश्मीर का जिक करते हैं, पंजाब का जिक्र करते हैं, पूर्वोत्तर राज्यों का जिक्र किया है और कभी कभी तमिलनाडु का जिक्र करते हैं लेकिन पश्चिम बंगाल का जिक्र नहीं करते जबकि आपको पता होना चाहिये कि आई.एस.आई. ने पश्चिम बंगल में अपना जाल फैला रखा है। मैंने कहा कि जब आप कह रहे हैं तो आगे इसका ध्यान रखूंगा और जब कभी जिक्र करूंगा को इसका जिक्र भी करूंगा क्योंकि कभी कभी मुझे लगता है कि आपकी कहीं शिकायत हुई कि मैं कैसे नाम लेता हूं।
मैं क्यों नाम ले रहा हूं, चूंकि कुछ लोगों को शिकायत होती है। अर्थात् मैं यह मानता हूं कि इन दो सालों में एक बहुत बड़ी जो बात हुई है कि देश की सुरक्षा का मतलब केवल मात्र डिफैंस नहीं रहा हैं, देश की सुरक्षा का मतलब है आंतरिक सुरक्षा। कांस्टीटयूशन मेकर्स ने कभी भी यह कल्पना नहीं की थी कि यह स्थिति आयेगी कि गृह मंत्रालय की पूरी की पूरी चर्चा एक प्रकार से लॉ एंड ऑर्डर पर होगी, उन्होंने कभी नहीं सोचा होगा। आप लोगों को बहुत आश्चर्य होगा कि गृह मंत्रालय की मांगों पर सात साल के बाद चर्चा हो रही है। हर साल बजट पास होता है, लेकिन १९९३ में आखिरी बार गृह मंत्रालय की मांगों पर चर्चा हुई थी, जिसका अर्थ है कि सामान्यत: जिसे लोग गृह मंत्रालय का दायित्व मानते हैं, अर्थात लॉ एंड ऑर्डर, वह सबको पता है कि लॉ एंड ऑर्डर प्रदेश का काम है, यहां का काम नहीं है। लेकिन यह यहां का काम इसलिए हो गया है क्योंकि इन पिछले ६-८ सालों और एक प्रकार से १५ सालों में एक नया आयाम लॉ एंड ऑर्डर की स्थिति में जुड़ा है, जिसे हमें पहचानना और समझना चाहिए।
अध्यक्ष महोदय, १९७१ में पाकिस्तान से लड़ाई हुई और उस १९७१ की लड़ाई में पाकिस्तान को सेना के हाथों पराजय प्राप्त हुई। उसके बाद उन्होंने बैठकर सोच-विचार कर ८-१० सालों में एक नई रणनीति तैयार की। मैं कोई प्वाइंट्स स्कोर नहीं करना चाहता हूं। लेकिन मैं मानता हूं कि १९७१ के युद्ध के बाद अगर हमने उस युद्ध को स्थाई शांति के रूप में परिवर्तित करने का निश्चय किया होता तो उसकी पूरी संभावना थी, लेकिन हम चूक गये, देश चूक गया, देश का नेतृत्व चूक गया। हमने उस समय बहुत आलोचना की थी। लेकिन मैं मानता हूं आज उस आलोचना की आवश्यकता नही है।, गृह मंत्रालय को तो छोडिये सारे मंत्रालयों में और बाहर के बड़े-बड़े विद्वान लोग कहते हैं कि वास्तव में जम्मू-कश्मीर में आज जो परिस्थिति पैदा हुई है, देश भर में आज जो आतंकवाद की परिस्थिति पैदा हुई है It is because we missed an opportunity in 1971. उस समय अगर हम ठीक प्रकार का निर्णय करते तो स्थिति दूसरी होती। वह पुरानी बात हो गई। लेकिन उसके बाद मैं अपने अनुभव से बता सकता हूं। मैं कराची का निवासी हूं, मेरा जन्म कराची में हुआ था। वह हिस्सा आज पाकिस्तान में है। दूसरी बार मैं सरकार का हिस्सा बना हूं। मैं अभी के लिए दूसरी बार नहीं कह रहा हूं। पहले मैं मोरार जी भाई की सरकार में था। १९७७ से लेकर १९७९ तक में उनकी सरकार में था और फिर उसके बाद अभी सरकार में हूं। जब पाकिस्तान के निमंत्रण पर मुझे कराची जाने का अवसर मिला और मैं वहां गया था तो उस समय वहां जनरल जिया का सैनिक शासन था। चूंकि मैं उस समय सूचना एवं प्रसारण मंत्री था, दूरदर्शन ने पहली बार इंडिया और पाकिस्तान का जो क्रिकेट मैच कराची में हो रहा था, उसे टेलीवाइज किया था। मैं इसका जिक्र इसलिए कर रहा हूं कि वहां पर चारों ओर आर्मी की पिकेट्स लगी हुई थीं। सारे शहर में जहां देखो वहां आर्मी की पिकेट्स लगी हुई थी। मेरे साथ पाकिस्तान का एक अधिकारी था, जो मेरे साथ-साथ चलता था। लोग कौतुहलवश पूछते थे कि यह कौन हैं और जब उन्हें बताया जाता था कि यह भारत सरकार के एक कैबिनेट मंत्री हैं तो उन्हें ताज्जुब होता था कि इनके साथ कोई सिक्युरिटी नहीं है। यह १९७९ की बात है। लेकिन दस साल में इतनी स्थिति बदल गई। मैं गृह मंत्री तो आज हूं, सरकार में आज हूं। लेकिन आज ब्लैक कैट कमांडोज मेरे चारों तरफ इधर-उधर जाते हैं , जहां भी मैं जाऊं वे जाते हैं। ऐसी स्थिति हो गई है। आंतरिक सुरक्षा के वातावरण में इन ८-१० सालों में जो परिवर्तन आया है, हमें उसे पहचानना चाहिए। उसका प्रमुख कारण यह है कि पाकिस्तान ने निर्णय किया है वह युद्ध के मैदान में हमारी सेना का मुकाबला नहीं कर सकता, इसलिए कन्वैन्शनल वार की चिंता छोड़ो। लेकिन भारत के खिलाफ इस वह उसे जेहाद कहता है, वचित्र बात है वह उसे जेहाद कहता है।
अध्यक्ष महोदय, दुनिया के देशों में इंडोनेशिया को छोड़कर हिन्दुस्तान में सबसे अधिक मुसलमानों की जनसंख्या है और जिस देश में इंडोनेशिया को छोजडकर मुसलमानों की सबसे अधिक संख्या है उसके खिलाफ जिहाद करना, मैं समझता हूं कि पाकिस्तान की इस बात का करारा जवाब भारत के मुसलमानों की ओर से आना चाहिए। जिहाद की जो कल्पना है, वह दूसरी है और फिर उन्होंने यह निर्णय लिया है कि कन्वेंशनल वार की तरह से नहीं बल्कि लो-इंटेंसिटी वार, प्रॉक्सी वार की तरह उसको चालू रखेंगे। लोगों को घुसपैठ करके भेजेंगे, बम विस्फोट करके लोगों को मारेंगे। मैं इस बात को बल देकर कह सकता हूं कि कोई यह समझे कि कश्मीर पर कब्जा करना चाहते हैं, तो मैं कहना चाहता हूं यह तो उनके मंसूबों का एक छोटा सा अंश है। They would like to see this country disintegrate. वे इस देश को विघटित देखना चाहते हैं। नहीं, तो सारे हिन्दुस्तान में जाल बिछाने की क्या जरूरत है। एक जगह पर कंसन्ट्रेट करते, केवल जम्मू-कश्मीर में कन्सन्ट्रेट करते, लेकिन वैसा नहीं किया। बल्कि जितने सारे मलिटेंट और आर्गेनाइनजेशन हैं, जो नए-नए खड़े हो रहे हैं, उनका नैट वर्किंग करने की भी कोशिश करते हैं और इसीलिए उनके इस मन्तव्य को जानना चाहिए।
अध्यक्ष महोदय, कभी-कभी उनको लगता है कि भारत ने पाकिस्तान को स्वीकार नहीं किया है, यदि सचमुच में किसी ने स्वीकार नहीं किया था, तो हमने स्वीकार नहीं किया। हम भारतीय जनसंघ में थे। जब डा. श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने जनसंघ की स्थापना की थी, तो मुझे स्मरण आता है कि मैनीफेस्टो में हमने कहा था कि देश का विभाजन नहीं होना चाहिए और हम इस मत के हैं कि अखंड भारत की स्थापना होनी चाहिए। १९५२ के जनसंघ के मैनीफेस्टो में यह बात थी और इसमें से कुछ लोगों को लग सकता था कि इन लोगों ने पाकिस्तान के अस्तित्व को स्वीकार नहीं किया, लेकिन कुझ ही साल बाद, भारतीय जनता पार्टी तो बहुत बाद मं बनी, जनता पार्टी भी बात में आई, जो मेरे यहां सोशलिस्ट मित्र बैठे हैं, उस समय सोशलिस्ट पार्टी के नेता थे डा. राम मनोहर लोहिया। लोहिया जी ने एक दिन पं. दीन दयाल उपाध्याय से इस विषय में चर्चा की कि जो आप यह कहते हैं कि पाकिस्तान हमें अभी तक स्वीकार नहीं, इससे शायद गलतफहमी पाकिस्तान के लोगों को न हो, लेकिन जो भारत के मुसलमान में होती है। उनको इससे गलतफहमी जरूर होती है। उन्होंने कहा कि हमारा यह अभिप्राय नहीं है कि पाकिस्तान के ऊपर हमला किया जाए और उसको पुन: हिन्दुस्तान में मिला लिया जाए। हम तो यह मानते हैं कि देश का विभाजन जिस उद्देश्य से हुआ था वह पूरा नहीं हुआ। उद्देश्य यह था कि दंगे खत्म हो जाएं, कटुता खत्म हो जाएगी। एक बार हिन्दुओं का राज्य अलग बन जाए, दूसरी तरफ मुसलमानों का राज्य अलग बन जाए, तो सारे दंगे और कटुता खत्म हो जाएगी, सब ठीक-ठाक हो जाएगा, लेकिन वैसा नहीं हुआ। वस्तुस्थिति तो यह है कि कम्युनलिज्म भी समाप्त नहीं हुआ। पहले दो कम्युनिटीज के बीच में झगड़ा था, पाकिस्तान बनने के बाद दो देशों के बीच में झगड़ा पैदा हो गया, कटुता पैदा हो गई। इसीलिए पं. दीन दयाल उपाध्याय जी ने कहा था कि एक दिन ऐसा जरूर आएगा जब दोनों देशों की जनता यह सोचेगी कि हमको विभाजन से कोई फायदा नहीं हुआ और दोनों मिल जाएं और एक कनफैडरेशन बनाएं। लोहिया जी ने कहा कि यह बहुत अच्छी बात है। हम इसके ऊपर मिलकर सोचें और मिलकर बात करें। मुझे ध्यान आता है १९५६ में डा. लोहिया और पं. दीन दयाल उपाध्याय ने मिलकर अखंड भारत की कल्पना की और घोषणा की। अखंड भारत की उनकी कल्पना का अर्थ यह है कि India and Pakistan remaining as two sovereign States, they shall form a confederation of their own. यह कल्पना उन्होंने की थी। पुरानी बात है, लेकिन पुरानी बात होते हुए भी तब से लेकर मैं मानता हूं कि हमने भले ही अपने मन में स्वीकार कर लिया हो कि पाकिस्तान का अस्तित्व है।
लेकिन पाकिस्तान ने कभी भी सेक्युलर इंडिया को स्वीकार नहीं किया। इसलिए उनको लगता है कि यह देश ऐसा चलता रहेगा, इतनी बड़ी संख्या में यहां मुसलमान सुखी रहेंगे, ठीक रहेंगे तो यह पाकिस्तान के सारे परपस को सॉल्व नहीं करता। खासकर जब बंगलादेश अलग बन गया और इसमें कोई सन्देह नहीं कि बंगलादेश के बनाने में भारत ने, भारत की उस समय की सरकार ने, श्रीमती इंदिरा गांधी ने और हमारी सेना ने बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभायी। उसके बाद से उनके मन में एक प्रकार की खीज, प्रतिशोध की भावना है कि इनसे हमें प्रतिशोध लेना है, बदला लेना है और वह प्रतिशोध की भावना इस प्रकार से छत्तीससिंह पुरा जैसे कारणो में से प्रकट होती है। इस तथ्य को हमको समझना चाहिए। इसको पहचान करके, देश की सिक्योरिटी सर्वोपरि है, इसको मानकर चलना चाहिए। यह केवल कहने की बात नहीं है। समाजवादी पार्टी के लोग बैठे हैं। बनातवाला जी चले गये हैं। वे मुझे यह बताते कि यू.पी. के इस बिल में अमुक-अमुक चीज कांस्टीटयूशन के खिलाफ है। अमुक-अमुक चीज डिसक्रमिनेटरी है, वह मैं मान लेता और मैं कहता कि मत करो। लेकिन हमारा जो पोलटिकल मानस हो गया है, वह यह हो गया है कि अगर आडवाणी कोई गलत बात कहे तो उसको तुरंत बताओ और बनातवाला कोई बात कहे तो मत कहो, चुप रहो, वह बुरा मानेगा। यह मनो:स्थिति हमको त्यागनी चाहिए। Secularism in the true sense means being fair to all.
इसलिए मैं कहता हूं कि हिन्दुस्तान सेक्युलर स्टेट क्यों है? १९४७ की जिन परिस्थितियों में देश का बंटवारा हुआ, जिन परिस्थतियों में हमे आजादी मिली, शायद अखिलेश ने कहा या किसी और ने कहा कि १९४७ में हम आजाद हुए और १९५० में हमने संविधान बनाया, पाकिस्तान ने अपने को इस्लामिक राष्ट्र घोषित कर दिया, अगर तब भारत भी अपने को एक हिन्दू राष्ट्र घोषित करता तो दुनिया में कोई शिकायत नहीं होती। सब लोग कहते कि स्वाभाविक है, बेसिस ही यही था। The basis was Hindu and Muslim. कांग्रेस तो चाहती नहीं थी, कांग्रेस तो खिलाफ थी कि पार्टिशन मत करो, यूनाइटेड स्टेट रखो लेकिन मजबूरन उनको यह मानना पड़ा। ठीक है, मजबूरन मानना पड़ा तो यह हो गया। आखिर देश में बड़े-बड़े लोग थे। डा.अम्बेडकर जैसे इंसान ने कहा कि इसके कारण एक्सचेंज ऑ फ फेडरेशन हो जाना चाहिए। यह भी बात कही थी। वह किया नहीं तो अच्छा किया।
मैं मानता हूं कि हिन्दुस्तान को हम एक महजबी राज बनाते तो यह हिन्दुस्तान की संस्कृति, इतिहास और परम्परा के खिलाफ होता। हमारे नेताओं ने जो निर्णय किया, वह बिल्कुल सही किया। आप कांस्टीटयूंट असेम्बली की डिबेट उठाकर देख लीजिए। उसमें किसी हिन्दू महासभा के मैम्बर ने भी यह बात नहीं कही कि अब तो आप हिन्दुस्तान को महज़बी राज बना दो। It was unanimous. इक्का-दुक्का, इधर-उधर से कोई आवाज आई होगी। लेकिन जितना मैंने कास्टीटयूंट असेम्बली की डिबेट का अध्ययन किया है, The Constitution as was formed then reflected the people's will as a whole.
सारे के सारे, नहीं तो ये पोलटिकली कितने अलग-अलग थे। महात्मा जी और डा. अम्बेडकर एक दूसरे के कितने आलोचक थे। डा. मुखर्जी और पंडित नेहरू कितने एक दूसरे के आलोचक थे। It was that Government and that Constituent Assembly which gave us this Constitution, which gave India a Secular State. सेक्युलर शब्द भी लिखा लेकिन सेक्युलर शब्द लिखे बिना सेक्युलरिज्म की जो कल्पना है कि राज्य एक नागिरक और दूसरे नागरिक के बीच में उसके महज़ब के आधार पर भेदभाव नहीं करेगा, उस पर उन्होंने They voted down into the Constitution.
छोटे-छोटे प्वाइंट्स करना और किसी ने पुराना छाप दिया, हमारे बी.जे.पी. टूडे ने पुराने कांस्टीटयूशन को उठाकर छाप दिया जिसमें सोशललिज्म शब्द नहीं है, You may score a point but we are not really raising the level of debate. I feel sorry हमारे प्रियरंजन दासमुंशी ऐसी बात कहते।
SHRI PRIYA RANJAN DASMUNSI (RAIGANJ): I was not scoring a point but I think we should respond to the national debate. It creates reflection that is where I wanted to draw the hon. Minister's attention.
SHRI L.K. ADVANI: I would say that today when I read in that `Socialist State', I feel how do we call it `Socialist' that way.
हमारी पॉलिसीज में, गवर्नमेंट की पोलीसीज में, वह चाहे हमारी हो या आपकी हो, उसमें सोशलिज्म का कितना कंटेंट है, we have to think in terms of socialism in a very general sense, as Swami Vivekananda used it. विवेकानन्द जी ने कहा कि स्प्रीचुअल सोशलिज्म होना चाहिए। ठीक है, लेकिन मैं जिस बात पर आ रहा हूं, वह यह है कि इस रणनीति परिवर्तन के कारण आन्तरिक सुरक्षा और बाहय सुरक्षा के बीच की जो विभाजक रेखा है, वह समाप्त हो गई है। हमें पूरी देर चिन्ता करनी पड़ती है कि सीमा पर क्या हो रहा है, उसका यहां परिणाम क्या होगा और यहां जो हो रहा है, उसका सीमा पर क्या परिणाम होगा। गृह मंत्रालय के पास चूंकि बी.एस.एफ. है और बी.एस.एफ. तो सारी सीमा पर सेना के साथ-साथ काम कर रही है। चूंकि राजेश जी इस मंत्रालय में रहे हैं, इसलिए उनको उस बात का एहसास है कि कितनी कठिनाई है। किसी ने इस बात पर शिकायत की कि इस साल गृह मंत्रालय की मांगों को ३० परसेंट बढ़ा दिया गया है। मैं देखने लगा, मैंने कहा कि मुझे तो कहीं ३० परसेंट दिखाई नहीं दिया। अगर ३० परसेंट होता तो मुझे बहुत खुशी होती। मैंने देखा कि पिछले साल से नौ परसेंट बढ़ा है। हमारे टी.डी.पी. के सदस्य ने कहा कि आन्तरिक सुरक्षा की स्थिति ऐसी खराब है कि अगर सौ परसेंट भी बढ़ा देते तो भी मैं उसका समर्थन करता। हमारे मूर्ति जी बैठे हैं।
वास्तव में हम इस विषय में वित्त मंत्रालय से चर्चा कर रहे हैं, क्योंकि एक लोंग टर्म पर्सपैक्टिव हम पैरा मलिट्री फोर्सेज के बारे में भी डवलप करते हैं। हमारे एक मार्क्िसस्ट सदस्य ने बात कही कि त्रिपुरा की हालत बहुत खराब है, लेकिन आप वहां पर पैरा मलिट्री फोर्स नहीं भेजते। मैं बता सकता हूं कि शायद पैरा मलिट्री फोर्सेज कहीं पर नोर्थ ईस्ट में डिप्लॉयड हैं तो वे त्रिपुरा में ही हैं, और कहीं पर नहीं हैं। त्रिपुरा के मुख्य मंत्री के साथ मेरी लगातार बातचीत होती है। यों तो सभी के साथ होती है। मैं इस अवसर पर यह भी कहना चाहूंगा कि यह कल्पना करना कि पूरे का पूरा नोर्थ ईस्ट टरमोइल में है, तो ऐसा नहीं है। नोर्थ ईस्ट में आठ स्टेट्स अगर सिक्किम सहित माने जायें तो उनमें से चार स्टेट्स ऐसे हैं, जहां पर टरमोइल नहीं है, मिलीटेंसी नहीं है। सिक्किम में नहीं है और सिक्किम की बात तो ऐसी है कि मैं अभी आज से तीन दिन पहले गया, मैं कई वर्ष पहले वहां गया था, लेकिन मुझे देखकर ताज्जुब हुआ कि वहां पर आर्डिनरी क्राइम भी नहींहै, मिलीटेंसी नहीं है। इतना तो छोड़िये, लेकिन आर्डिनरी क्राइम जिसको कहते हैं, वह भी नहीं है। वहां के किसी एक पुलिस आफिसर ने कहा कि यहां पर तो कभी-कभी कोई मोटर ड्राइवर पीकर जरा इधर चला गया और टकरा गया तो वही लगता है कि एक कोई क्राइम तो आज मिल गया, किसी को पकड़ा। उसने गलती कर दी, डिं्रक करके ड्राइविंग की। सिक्किम, अरुणाचल प्रदेश, मेघालय और मिजोरम, ये चार प्रदेश ऐसे हैं कि जिनमें रिलेटिवली मलिटेंसी नहीं है। थोड़ी बहुत तो है, लेकिन बाकी चार स्टेट्स इससे इफैक्टिड हैं, जिनमें से भी हमने कोशिश की है। जैसे नागालैंड में इस समय मलिटेंसी उस उग्र रूप में नहीं है, जैसी आज सेकुछ साल पहले थी। हां, एक्सटोर्शन होता है, आज भी होता है, despite the so-called cease-fire, problems are there. प्राब्लम्स हैं, जिनको रिजोल्व करने की हम कोशिश कर रहे हैं। हमारी तरफ से इस अवसर पर मैं कहना चाहूंगा कि हम यह मानतेहैं कि मलिटेंसी का इलाज केवलमात्र सुरक्षा बल नहीं हैं। मलिटेंसी का इलाज एक तरफ तो विकास करना है, उस क्षेत्र के लोगों को रोजगार मिले, इसकी योजना जितनी बना सकें, बनाना और दूसरी बात कि जो उनकी लेजटिमेट ग्रिवांसेज हैं, जो उनकी कुछ वर्गों की वास्तविक शिकायत है, उनके साथ बातचीत करने की तैयारी रखना। वह बातचीत करने की तैयारी हम देश भर में, जहां पर भी उग्रवाद है, जहां पर भी मलिटेंसी है, उन सब के बारे में हमने, प्रधान मंत्री ने सार्वजनिक रूप से कहा हुआ है कि हम संविधान की चौखट के भीतर सबसे बात करने को तैयार हैं। वे केवल हिंसा छोड़ दें, हिंसा त्याग दें और संविधान की चौखट के अन्दर आकर बात करने को तैयार हों, यह हमारी शर्त है। मुझे खुशी है कि कांग्रेस पार्टी ने भी कहा कि हम उसका पूरा समर्थन करेंगे, आप इस दिशा में जितना बढ़ेंगे, उसका मैं स्वागत करता हूं।
दासमुंशी जी बैठे हैं, उन्होंने आई.एस.आई. का जिक्र करते हुए बहुत जोर से कहा कि वह उग्रवाद कर रही है, हिंसा फैला रही है, बम विस्फोट करवा रही है, उसके खिलाफ कोई भी सख्त से सख्त कानून बनाएं तो मैं उसका समर्थन करूंगा। मुझे सुनकर खुशी हुई। पिछले दो सालों में मैं मुख्यमंत्रियों से, गृहमंत्रियों से और पुलिस के आला अधिकारियों से व्यक्तिगत और सामूहिक रूप से मिलता रहा हूं। वे हमेशा कहते हैं कि जिन-जिन राज्यों में आतंकवाद का बहुत संकट है, वहां की सरकार के पास कोई कानून नहीं है उससे निपटने के लिए। वे कहते हैं कि आप कानून बनाइए, एक मजबूत सेंट्रल कानून बने जिसके सहारे हम इसका मुकाबला कर सकें। आखिर यह कोई साधारण चोर-डकैत तो हैं नहीं कि पकड़ लिया, गवाह पेश कर दिए और काम हो गया। इनके खिलाफ तो कोई गवाह आने को तैयार नहीं होता। इतना ही नहीं, हमें पंजाब का अनुभव है, जिस समय पंजाब में आतंकवाद शिखर पर था, उस समय कोई न्यायाधीश उनका केस लेने को तैयार नहीं होता था। इतनी बड़ी दिक्कत थी। मैंने कहा कि एक कानून बना था आतंकवाद को समाप्त करने के लिए, जब आतंकवाद अपनी पीक पर था, तब टाडा बना था। यह ठीक है कि इसका दुरूपयोग हुआ। इस बात से मैं इनकार नहीं करूंगा। यहां बैठे हुए सब लोगों को जानकारी न हो, टाडा के खिलाफ सबसे पहली कांफ्रेंस भारतीय जनता पार्टी ने गुजरात में की थी। टाडा का उपयोग वहां किसानों को पकड़ने केलिए हुआ था, जब किसान एक आंदोलन कर रहे थे। तब किसानों को पकड़-पकड़ कर जेलों में टाडा के तहत डाला गया था। टाडा में जेल में डालने से जमानत नहीं मिलती थी और कानून में तो मिल जाती है। इसलिए हमने अहमदाबाद में कांफ्रेस की थी, इंडियन टाडा कांफ्रेंस। लेकिन आगे चलते हुए टाडा खत्म क्यों किया, इसलिए नहीं कि उसका दुरूपयोग हो रहा था, इसलिए किया कि यह प्रोजेक्ट हो रहा था TADA is an anti-minority law. It was not an anti-minority law. TADA is intended to be used against terrorists, against those who take course to the cult of the bomb and it was abused. No doubt, it was abused by many Executives, many States in the country. जैसा मैंने आपको उदाहरण दिया कि हमने इसके खिलाफ आवाज उठाई थी। उस समय इसके अंदर पकड़े जाने वाले अल्पसंख्यक या बहुसंख्यक नहीं थे, वे तो किसान थे. It was allowed to lapse. वह खत्म हो गया। आज हम फिर से कहते हैं कि लाओ, मैं कहता हूं कि आज मेरी स्थिति नहीं है कि ऐसा कोई कानून लाऊं, क्योंकि वह बिना कांग्रेस पार्टी के सहयोग के राज्य सभा में पास नहीं हो सकता। इसलिए मैंने उन सबको कहा कि आज स्थिति ऐसी है कि इस विषय में कोई भी सेंट्रल कानून मैं नहीं बनाऊंगा। अगर आपको लगता है, after all, this is a subjct in the Concurrent List. You are empowered to do it. आप अपने-अपने राज्यों में करें, मुझे कोई आपत्ति नहीं है, आखिर तमिलनाडू ने किया है। कुछ लोगों को पसंद है, कुछ को नहीं, क्योंकि कुछ कहते हैं कि बहुत हार्ष है। मैंने कहा कि आप फैसला करें। I am not going to do it. But I wishl everyone realise it. कि यह प्राब्लम है और इसका हम मिलकर निराकरण नहीं करेंगे, फैसला नहीं करेंगे तो नहीं होगा। आज संसद की रचना ऐसी है, उसका गणित ऐसा है, pure arithmetic which compels me to talk Shri Rajesh Pilot, to Shri Priya Ranjan Dasmunsi and Shrimati Sonia Gandhi. मैं कहता हूं यह गणित न भी हो तो, तो भी यह देश इतना बड़ा है, देश की समस्याएं इतनी वविध हैं, मैं तो कहता हूं कि अगर हम कोई न कोई कंसेंसस, कोई न कोई रैपो विकसित नहीं करेंगे इंटर पार्टी में तो भला नहीं होगा। There will be a tendency to try to score political points on every issue. पसंद आए या न आए, अगर हमें लगता है कि महिलाओं का आरक्षण होना चाहिए, ठीक है, होना चाहिए, इनको दिखाएं। इसीलिए जितनी मात्रा में कंसेंसस विकसित हो सके, उतनी मात्रा में ही देश का भला होगा, राजनीति का भला होगा। आज की जो राजनीतिक स्थिति है, वह देश के हित में है। एक पार्टी का एकछत्र राज जब आता है उससे भला नहीं होता है।
मैं स्वयं कभी-कभी याद करता हूं कि पहली सरकार में जब मैं १९७७ में था, उस सरकार को स्पष्ट बहुमत प्राप्त था, उस समय लगभग एक ही पार्टी का बहुमत था, ठीक है, अकाली दल भी हमारे साथ था, लेकिन एक पार्टी का बहुमत होते हुए भी मैं मानता हूं कि वह पार्टी और वह सरकार जनता का इतना प्रतनधित्व नहीं करती थी, जितना आज की सरकार करती है, both in terms of geography as well as social equations. आपने कहा कि यह दोहरा मापदंड है, लेकिन मैं उसको दोहरा मापदंड नहीं मानता हूं। मुंशी जी मेरे साथ बड़ी सहानुभूति दिखाते रहे कि मैं यहां बैठे हुए सफोकेटेड फील करता होऊंगा, क्योंकि मैं जिन बातों को लेकर और इतने सारे देश में मैंने रथ यात्रा की, उसकी मैं बात ही नहीं करता हूं। यह फेज़ पहली बार नहीं आया है। We have worked under Shri Jai Prakash Narayan. Shri Jai Prakash Narayan used to be a bitter critic of Jan Sangh – not ordinary, not like you. आप तो हमारे साथ कभी-कभी बड़े उदार होते हैं, but Shri Jai Prakash Narayan was among those who accused us even of being responsible for Gandhiji’s murder. आज हमारे मित्र आठवले जी कह रहे थे। … (Interruptions) Everyone knows that Shri Jai Prakash Ji came to that point in १९७५, जब वह भारतीय जनसंघ के वार्षिक अधिवेशन में आकर हमें सार्वजनिक रूप से सम्बोधित करते हुए बोले, मुझे लोग कहते हैं कि जनसंघ के कार्यक्रम में मत जाओ। यह तो फासिस्ट हैं. कम्युनल हैं। अगर भारतीय जनसंघ फासिस्ट है तो मैं भी फासिस्ट हूं, ऐसा इन्होंने सार्वजनिक रूप से कहा। यह जो चेंज आया, वह इसलिए आया मुंशी जी, क्योंकि मैं कलकत्ता उन दिनों आया था और तब कलकता की सारी दीवारों पर, मेरे मार्कसिस्ट बंधुओं ने लिखा होगा, but it was plastered all over that जेपी और जनसंघ एक है। What was there common between us? Not ideology. What was common was our idealism, what was common was our desire to fight against corruption, what was common was our desire to fight for electoral reforms, for educational reforms. जिसके कारण हम साथ आए, जो आइडियलिज्म है, वह आज भी मुझे और आपको, मुझे और मार्कसिस्टों, मुझे और सोशलिस्ट पार्टी के लोगों को जोङ सकता है, उस पर जोर दें। यह अनटचेबिल्टी मत करिए कि मैं तो इन्हें छूंऊंगा भी नहीं। They are untouchables for me. जब मैं वहां गया था तो त्रिवेन्द्रम में एंटनी साहब ने एक वक्तव्य दिया। मैंने कहा कि एंटनी साहब से मैं ऐसा एक्सपेक्ट नहीं करता था, लेकिन कांग्रेस की कुछ मजबूरी है, क्या करें। So far as we are concerned, अगर हम किसी को अनटचेबल मानते होते तो हम यह सरकार न बना पाते और यह सत्ता के लिए नहीं बनाई गई है।
SHRI PRIYA RANJAN DASMUNSI : Why did you feel that Shri V.P. Singh was untouchable or who wrecked the Government of Shri V.P. Singh? We did not wreck the Janata Party Government brought by Shri Jai Prakash Narayan’s movement. We did not wreck the V.P. Singh Government. What happened inside?
SHRI L.K. ADVANI: I shall come to that. Shri Dasmunsi, if you topple my Government today, I would say that you are performing a legitimate function. That is not untouchability. Untouchability is something else. I am talking of political untouchability, and that political untouchability lesson I personally learnt way back in 1967. भारतीय जनसंघ का अधिवेशन कालीकट में हुआ था और पंडित दीन दयाल उपाध्याय who was the principal ideologue of the Party, was presiding over the session, and there was criticism. वहां आलोचना हुई कि पंडित जी को क्या हो गया। आपने यह क्या कर दिया, बिहार में आप और कम्युनिस्ट मिल कर सरकार में गए हैं, यह क्या कर दिया। कम्युनिस्टों को तो छूना नहीं चाहिए। They are untouchables. They should not be touched with the bargepole. पंडित जी ने जवाब दिया, उन्होंने कहा कि यह विडम्बना है कि हिन्दुस्तान में सार्वजनिक क्षेत्र में अस्पृश्यता को बुरा माना जाता है, अपराध माना जाता है, लेकिन राजनैतिक क्षेत्र में अगर अमुक व्यक्ति या पार्टी अमुक प्रकार की अस्पृश्यता का पालन नहीं करती तो वह खराब है। इसलिए अस्पृश्यता का पालन करना राजनैतिक क्षेत्र में एक गुण माना जाता है। उन्होंने कहा कि जनसंघ का कोई भी व्यक्ति किसी भी प्रकार की अस्पृश्यता में भाग न ले। पार्लियामेंट्री डेमोक्रेसी है और उसमें जितनी पार्टिया भाग लेती हैं, उनसे बात करके, मिल कर काम करना चाहिए। ऐसे इशुस पर, जिस पर आप समान हैं, उसमें कभी संकोच नहीं होना चाहिए।
22.00 hrs. उस द्ृष्टिकोण को लेकर आज तक हम चले हैं। धर्मवीर कमीशन के बारे में पांडियन जी ने कहा था। यह कमीशन १९७७-७८ में बना था और १९७८-७९ में उसकी रिपोर्ट आ गयी थी लेकिन अभी तक कुछ नहीं हुआ था। उसी रिपोर्ट में से आपने पढ़कर सुनाया। We will be reporting to the Standing Committee periodically about the developments taking place.
मुझे तो इस बात की खुशी है कि १९७८-७९ में भी सरकार हमारी थी जिसमें मैं था और वाजपेयी जी थे। उस समय जो धर्मवीर कमीशन बना उसकी रिपोर्ट को आज तक किसी ने छुआ नहीं।
श्री राजेश पायलट : कुछ उसमें से इम्प्लीमेंट भी हुआ है।
श्री लालकृष्ण आडवाणी : उसके कारण किसी को कोर्ट में जाना पड़ा। कोर्ट में गये और हम उसके बारे में सारी कार्यवाही कर रहे हैं। उसके बारे में आपको भी पता है, हमें भी पता है कि बहुत सारी कार्यवाही पैसे पर निर्भर है। हम अपने यहां तो व्यवस्था कर भी लें, क्योंकि हमारी पुलिस या पैरा-मलिट्री फोर्सेज जो हैं उनके बारे में हम कर भी लें लेकिन देश भर की पुलिस नहीं कर सकती। सारे स्टेट्स के लिए हम वह समस्या पैदा नहीं करना चाहेंगे जो पांचवें वेतन आयोग के कारण पैदा हो गयी। पांचवें वेतन आयोग की सिफारिशों को केन्द्रीय कर्मचारियों के लिए इम्प्लीमेंट कर दिया गया और उसके परिणामस्वरूप सारे राज्य सहायता के लिए कहने लगे। इसलिए हम वह नहीं कर सकते। We would not like to do that.
जहां तक पुलिस और कानून और व्यवस्था का सवाल है, देश में दिल्ली ही ऐसा हिस्सा है जिसके लिए गृह मंत्रालय सीधे तौर पर उत्तरदायी है। मैं कह सकता हूं कि पिछले डेढ़-दो साल में बहुत सारी बातें हुई हैं। एक छोटा राजन गैंग है, एक अश्वनी नायर गैंग है, एक छोटा शकील गैंग है, उनके बहुत सारे क्रमिनल पकङे गये, जिसके कारण बहुत सारे तथ्य सामने आये और बहुत सारे क्रमिनल पकड़े गये। दिलबाग सिंह नाम का एक आतंकवादी पकड़ा गया और बहुत सारी जानकारी उससे मिली। गणतंत्र दिवस पर उनकी आतंकवादी योजना को दिल्ली पुलिस ने विफल करने में सफलता पाई। एक टॉय-एक्सप्लोसिव डिवाइस उन्होंने इंवैंट किया था। वे बहुत सारे पकड़े गये। Thirty two kilograms of RDX was recovered. दस लाख रुपये की जाली करंसी पकड़ी गयी। पिछले साल कुछ दिक्कत थी लेकिन उसके बाद दिल्ली की पुलिस में परिवर्तन के परिणामस्वरूप सब लोगों को समाधान दिखाई देने लगा है और दिल्ली की स्थिति सुधर रही है। मैं यह नहीं कह रहा हूं कि सुधर गयी है, सुधर रही है।
इन दिनों मैच-फिक्िंसग की चर्चा सबसे ज्यादा हुई। इस मामले में दिल्ली पुलिस ने जो किया अगर वह स्कॉटलैंड यार्ड की पुलिस भी करती तो वह भी इस पर गर्व कर सकती थी। मैंच-फिक्िंसग के बारे में उसको नेल-डाउन करके सफलता पाना, जिससे अपराधी स्वयं स्वीकार कर ले कि मैंने वैसे तो नहीं लेकिन कुछ तो ऐसा किया है। मैं कह सकता हूं कि यह दिल्ली पुलिस की एक बड़ी सफलता है।
१९७१ की लड़ाई के बाद पाकिस्तान ने प्रोक्सी-वार की योजना अपनाई। पहले पंजाब में उसका परीक्षण किया, जो दस साल चला और बीच में ऐसा समय भी आया जिसके कारण निराशा की भाषा इस सदन में भी बोली जाती थी और वही भाषा पंजाब के संदर्भ में सारा देश भी बोलता था। लेकिन स्थिति सुधरी। उसे सुधारने में केन्द्र सरकार, पैरा-मलिट्री फोर्सेज और सेना ने योगदान किया। लेकिन मैं सारे स्टेट्स को कहा करता हूं कि अगर किसी ने सबसे ज्यादा योगदान किया तो वहां की पुलिस ने किया।
पंजाब की पुलिस ने किया। हमें उग्रवाद को काबू करना है। हमने कई स्टेट्स में पैरामलिट्री फोर्सिज की १० कम्पनियां दीं और तीन बटालियन्स भी भेजीं लेकिन इससे काम नहीं चलेगा। जिन स्टेट्स में इसकी जरूरत होगी, वहां हम उसे भेजेंगे। वे जितनी मात्रा में उपलब्ध होंगी, हम देंगे। हम उन्हें भेजते भी हैं। उसे किस लिए अपने पास रखेंगे? हमने उसे भेजा भी है लेकिन बेसिकली वहां की पुलिस, सी.आई.डी. और हमारी इंटैलिजेंस जब तक पूरी सतर्क नहीं होती और उसके लिए कमटिड नहीं होती तब तक काम नहीं होगा। हमें पंजाब का अनुभव ये सब बताता है। जम्मू-कश्मीर की स्थिति में सुधार आया है। वहां १९८९ से १९९६ तक कोई टूरिस्ट नहीं जाते थे। थोड़े विदेशी जाते थे लेकिन जिस दिन विदेशियों के अपहरण की घटना हुई, उसके बाद उनकी संख्या कम हो गई। Practically, tourism dried up.
वह १९९८ में फिर से रिवाइव हुआ। १९९७ में थोड़ा सा रिवाइवल हुआ और १९९८ में ऐसा रिवाइवल हुआ कि मैं मानता हूं कि 1998 has been the best year since 1989 from the point of view of capturing of militants, killing of militants and, above all, tourist traffic.
वहां इतना कुछ हो गया। कुल मिला कर मलिटैंसी पर इतना असर हुआ कि १९९८ के बाद लोकल मलिटैंट्स नहीं मिलते थे। १९९९ में भरमार हुई और सारे के सारे फॉरेन मिशनेरीज आने लगे। उनका संख्या अब लगभग ७० : ३० हो गई जो कुछ साल पहले ३० : ७० थी। ७० परसैंट फॉरेन मिशनेरीज और ३० परसैंट कश्मीरी मलिटैंट्स, यह जो फर्क पड़ा, मैं इसे बहुत बड़ा एचिवमैंट मानता हूं। मुझे लगता है कि उन्होंने कारगिल की योजना पहले भी बनाई होगी लेकिन प्रॉक्सी वार में उनकी पराजय हो रही है, उससे प्रेरित होकर भी उन्होंने कारगिल की योजना बनाई। Kargil was the result of the setback they suffered in the proxy war and the setback that Pakistan suffered in Kargil has led to accentuation of the proxy war.वह एक्सेटयूएशन हुआ। मैं उससे इंकार नहीं करूंगा। आपने सही कहा कि वे सॉफ्ट टारगेट्स ही नहीं हार्ड टारगेट्स ढूंढ लेते हैं और बी.एस.एफ. और आर्मी इनस्टॉलेशन्स पर हमला करते हैं। हमें इस बात को समझना चाहिए कि जो-जो टैरेरिस्ट स्टेट्स हैं actually, this terrorism is not sponsored by any individual; it is State sponsored terrorism.
वे अगर सिस्टेमैटिकली स्यूसाइड्स स्कवॉड पैदा करेंगे तो वे स्यूसाइड स्कवॉड बहुत कुछ एचिव कर सकते हैं। हमने हिन्दुस्तान में बहुत कुछ देखा है। मैं आज किसी को दोष नहीं दूंगा। उन्होंने हमारे पूर्व प्रधान मंत्री तक को मार दिया। It is the kind of suicide squads that LTTE developed that it became possible. That is not the failure of the Government, that is not the failure of anyone, but this hard reality must be recognised. इसलिए मैं अपने सुरक्षाकर्मियों से कहता हूं कि आप मेरी सुरक्षा करेंगे तो उन्हीं से करेंगे जो मुझे मार कर चले जाना चाहते हैं लेकिन अगर कोई स्यूसाइड स्कवॉड आएगा तो उससे आप क्या करेंगे? कुछ नहीं कर सकते। इसमें आपका कोई दोष नहीं है।
These are hard realities. Therefore, let us not try to undermine the moral of the security forces which are doing excellent work in Jammu and Kashmir and rest of the country. वे वहां बहुत बढि़या काम कर रहे हैं। अगर उन्हें बार-बार इन चीजों के आधार पर कहा जाएगा कि आपने फेल कर दिया, आप ऐसे हो गए. वैसे हो गए, सुरक्षाकर्मी किसी काम के नहीं है, ऐसे नहीं हैं, वैसे नहीं हैं, मैं समझता हूं कि हम ऐसा करके उनके साथ न्याय नहीं करेंगे। वे अगर कहीं गलती करते हैं तो उसके लिए उन्हें दंड दिया जाएगा। सामान्यत: मैं यह मानता हूं कि हमारे सैनिक और हमारे सुरक्षाकर्मी बहुत बढि़या काम कर रहे हैं। उसके साथ यदि हमें जनता का समर्थन मिलेगा, मुझे पूरा विश्वसा है कि जिस प्रकार कारगिल में पाकिस्तान की पराजय हुई वैसी इस प्रौक्सी वार में इनकी पराजय होगी।
इसके अलावा कई छोटे-छोटे विषय रह गए हैं... (व्यवधान)
श्री प्रियरंजन दासमुंशी: मैं किसी पार्टी के खिलाफ नहीं हूं लेकिन जरूरी तौर पर एक बात कहना चाहता हूं। West Bengal is under volcano. I come from North Bengal. The situation has gone to such an extent that if day to day coordination is not maintained, anything can happen any day in West Bengal, especially in the city of Calcutta and North Bengal.
SHRI L.K. ADVANI: I will keep track of whatever is happening in West Bengal.
आपने एक बात और कही थी, मैं उसके बारे में ध्यान रखूंगा। कुछ प्रदेशों में पॉलटिकल मर्डर हो रहे हैं। वहां पोलटिकल एडवर्सेरीज को मार दिया।
उस बारे में जो अफेक्टेड स्टेट्स हैं, उनके चीफ मनिस्टर्स, होम मनिस्टर्स या वहां के डायरेक्टर जनरल आफ पुलिस से जरूर बात करूंगा और इस बारे में चर्चा करूंगा।
SHRI SANSUMA KHUNGGUR BWISWMUTHIARY : What is the Government’s policy in regard to North-Eastern States? What is the policy in regard to Bodoland? Why has the Union Home Minister directed the Assam Government … (Interruptions)
SHRI PRIYA RANJAN DASMUNSI : What is the peace initiative of the Government in respect of NSCN and Hurriyat?
SHRI L.K. ADVANI: We have already released some of the leaders.
So far as Assam is concerned, I feel happy that the Bodo Liberation Tigers have come forth and declared that they commit themselves to the Constitution; that they would lay down arms; and that they were willing to talk to the Government in respect of their grievances.… (Interruptions)
SHRI RAJESH PILOT : Hon. Member Chaitanya has pointed out that drugs money is one of the factors for insurgency. The Vohra Committee was appointed to look into it and follow up action has to be taken. Could you enlighten the House whether the Government is following it up?
SHRI L.K. ADVANI: We are conscious of the fact that militancy in so far as western border is concerned is mainly financed by narco-terrorism. हम कांशिएस हैं और हम वोहरा कमेटी रिपोर्ट को फौलो अप करेंगे।
डा. रघुवंश प्रसाद सिंह(वैशाली); अध्यक्ष महोदय, इन्होंने हमारे द्वारा उठाये मुद्दे का उत्तर नहीं दिया, इसलिये विरोध स्वरूप मैं इस सदन से बहिर्गमन करता हूं।
२२.११ बजे ( तत्पश्चात् डा. रघुवंश प्रसाद सिंह तथा कुछ अन्य माननीय सदस्यों ने सदन से बहिर्गमन किया।) MR. SPEAKER: I shall now put all the cut motions moved to the Demands for Grants relating to the Ministry of Home Affairs together.
The cut motions were put and negatived.
MR. SPEAKER: I shall now put the Demands for Grants relating to the Ministry of Home Affairs to vote.
"That the respective sums not exceeding the amounts on Revenue Account and Capital Account shown in the Fourth column of the Order Paper be granted to the President, out of the Consolidated Fund of India, to complete the sums necessary to defray the charges that will come in course of payment during the year ending the 31st day of March, 2001, in respect of the heads of Demands entered in the Second column thereof against Demand Nos. 45 to 49 and 99 to 103 relating to the Ministry of Home Affairs."
The motion was adopted.
22.12 hours The Lok Sabha then adjourned till Eleven of the Clock on Thursday, April 27, 2000/Vaisakha 7, 1922 (Saka).
-------------