State Consumer Disputes Redressal Commission
N I A Co Ltd vs Smt. Babita & Oth on 3 August, 2017
Cause Title/Judgement-Entry STATE CONSUMER DISPUTES REDRESSAL COMMISSION, UP C-1 Vikrant Khand 1 (Near Shaheed Path), Gomti Nagar Lucknow-226010 First Appeal No. A/1365/2015 (Arisen out of Order Dated 27/05/2015 in Case No. C/85/2012 of District Shambhal) 1. N I A Co Ltd Moradabad ...........Appellant(s) Versus 1. Smt. Babita & Oth Shambhal ...........Respondent(s) BEFORE: HON'BLE MR. JUSTICE AKHTAR HUSAIN KHAN PRESIDENT For the Appellant: For the Respondent: Dated : 03 Aug 2017 Final Order / Judgement राज्य उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग, उ0प्र0, लखन ऊ अपील संख्या- 1365/2015 (सुरक्षित) (जिला उपभोक्ता फोरम, सम्भल द्वारा परिवाद संख्या- 85/2012 में पारित आदेश दिनांक 27.05.2015 के विरूद्ध) The New India Assurance Co. Ltd, having its Divisional Office at Civil Lines, Moradabad, through its Divisional Manager. ..............अपीलार्थी/विपक्षी बनाम Smt. Babita, Wife of Sri Pappi, daughter of Sri Daal Chandra, resident of Sambhal Road, Yadav Colony, Bahjoi, District- Sambhal. ..............प्रत्यर्थी/परिवादी Sambhal Surgical Medical Maternity Hospital & Stone Clinic, dr. A.K. Gupta, resident of Suraj Palza, Sambhal. Dr. Smt. Rupali Gupta, Wife of Dr. A.K. Gupta, resident of Suraj Plaza, Sambhal. ..........प्रत्यर्थीगण/विपक्षीगण समक्ष:- 1.
माननीय न्यायमूर्ति श्री अख्तर हुसैन खान, अध्यक्ष।
अपीलार्थी की ओर से उपस्थित : श्री आई0पी0एस0चड्ढा।
विद्वान अधिवक्ता ।
प्रत्यर्थीगण की ओर से उपस्थित : श्री नवीन कुमार तिवारी।
विद्वान अधिवक्ता ।
दिनांक: 13.10.2017 मा0 न्यायमूर्ति श्री अख्तर हुसैन खान, अध्यक्ष द्वारा उदघोषित निर्णय परिवाद सं0- 85/2012 श्रीमती बबिता बनाम सम्भल सर्जिकल मेडीकल मेटरनिटी हास्पिटल एण्ड स्टोन क्लीनिक व अन्य में जिला फोरम सम्भल द्वारा पारित निर्णय और आदेश दिनांक 27.05.2015 के विरूद्ध यह अपील धारा-15 उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम के अंतर्गत आयोग के समक्ष प्रस्तुत की गयी है।
आक्षेपित निर्णय और आदेश के द्वारा जिला फोरम ने परिवाद स्वीकार करते हुए निम्न आदेश पारित किया है:-
"परिवाद आंशिक रूप से विपक्षी संख्या-03 बीमा कम्पनी के विरूद्ध स्वीकार किया जाता है। विपक्षी संख्या-03 बीमा कम्पनी को आदेश दिया जाता है कि वह 1,20,000/-रू0(एक लाख बीस हजार) मय 9% वार्षिक ब्याज दौराना मुकदमा ता वसूली तथा 2000/-रू0 वादव्यय परिवादिनी को दो माह में अदा करें।"
जिला फोरम के निर्णय से क्षुब्ध होकर यह अपील उपरोक्त परिवाद के विपक्षी न्यू इण्डिया इंश्योरेंस कम्पनी लि0 ने प्रस्तुत की है।
अपीलार्थी की ओर से विद्वान अधिवक्ता श्री आई0पी0एस0चड्ढा तथा प्रत्यर्थी की ओर से विद्वान अधिवक्ता श्री नवीन कुमार तिवारी उपस्थित हुए हैं।
मैंने उभयपक्ष के विद्वान अधिवक्तागण के तर्क को सुना है और आक्षेपित निर्णय और आदेश तथा पत्रावली का अवलोकन किया है।
अपील के निर्णय हेतु संक्षिप्त सुसंगत तथ्य इस प्रकार है कि प्रत्यर्थी/परिवादिनी ने उपरोक्त परिवाद जिला फोरम के समक्ष विपक्षीगण सम्भल सर्जिकल मेडीकल मेटरनिटी हास्पिटल एण्ड स्टोन क्लीनिक, डॉ0 रूपाली गुप्ता और न्यू इण्डिया इंश्योरेंस कंपनी लि0 के विरूद्ध इस कथन के साथ प्रस्तुत किया है कि उसकी माता श्रीमती रामा देवी के पेट में दर्द की शिकायत रहती थी। अत: उसने अपनी माता को दिनांक 21.08.2012 को रिछारिया हास्पिटल काशीपुर जिला रूद्रपुर में दिखाया और अल्ट्रासाउंड कराया। अल्ट्रासाउंड की रिपोर्ट देखने के बाद परिवादिनी की माता के पेट में गांठ व पथरी होना बताया गया तथा बताया गया कि आपरेशन करना कठिन है, अन्य किसी डॉ0 से दिखा लें। तब परिवादिनी ने अपने एक परिचित व्यक्ति की सलाह पर अपनी माता श्रीमती रामा देवी को विपक्षी संख्या-01 के डॉ0 ए0के0गुप्ता को दिनांक 23.08.2012 को दिखाया। तब डॉ0 ए0के0गुप्ता ने परिवादिनी की माता की रिपोर्ट को देखकर बताया कि डरने की कोई बात नहीं है। उसकी माता का आपरेशन वह आज ही कर देंगे, परन्तु उस दिन परिवादिनी के पास रूपये न होने के कारण दिनांक 24.08.2012 को रूपये का इंतजाम कर वह अपनी मां के साथ विपक्षी संख्या-01 के क्लीनिक पर गयी और उसी दिन दिनांक 24.08.2012 को ही 10,000/-रू0 विपक्षी संख्या-01 के यहां जमा किया। तब विपक्षी संख्या-01 के डा0 ए0के0गुप्ता ने उसकी मां की पथरी का आपरेशन करने के साथ ही गॉंठ भी निकाल ली और उसे जांच के लिए डॉ0 लाल पैथालाजी भेज दिया तथा परिवादिनी से कहा कि उसकी मां अब कुछ ही दिन की मेहमान है। इसके साथ ही उन्होंने मां को हर चीज खिलाने की सलाह दी।
परिवाद-पत्र के अनुसार प्रत्यर्थी/परिवादिनी का कथन है कि आपरेशन के बाद उसकी मां की हालत और बिगड़ने लगी। तब प्रत्यर्थी/परिवादिनी व उसके भाई ने डॉ0 ए0के0गुप्ता व विपक्षी संख्या-02 डॉ0 रूपाली गुप्ता से मां की तबीयत खराब होने की बात बतायी तो उन्होंने कहा कि 10-15 दिन में ठीक हो जाएगी, परन्तु परिवादिनी की मां की तबीयत बिगड़ती गयी। तब परिवादिनी ने विपक्षीगण संख्या-01 और 02 से मां की छुट्टी करने का निवेदन किया। इस पर विपक्षी संख्या-01 के डॉ0 ए0के0गुप्ता और विपक्षी संख्या-02 डॉ0 रूपाली गुप्ता ने 35,000/-रू0 और दवाईयों के पर्चे छीनकर परिवादिनी को दिनांक 07.09.2012 को वापिस भेज दिया।
परिवाद-पत्र में प्रत्यर्थी/परिवादिनी ने कहा है कि उसकी मां का ऑपरेशन करने के बाद विपक्षी संख्या-01 के डॉ0 ए0के0गुप्ता ने खुला छोड़ दिया और वह जो कुछ खाती थी वह सब खुले हुए भाग से बाहर आ रहा था। उसके बाद दिनांक 07.09.2012 को ही परिवादिनी अपनी माता को के0के0हास्पिटल बरेली ले गयी। वहां पर डॉ0 ने चेकअप करने के बाद बताया कि विपक्षी संख्या-01 के डॉ0 ए0के0गुप्ता ने गलत आपरेशन कर दिया है जो खुला हुआ है। पुन: आपरेशन होगा, जिसमें 25000/-रू0 का खर्चा होगा।
परिवाद-पत्र के अनुसार प्रत्यर्थी/परिवादिनी का कथन है कि दिनांक 07.09.2012 को ही उसने अपनी मां को के0के0 हास्पिटल में भर्ती कराया और वहां पर उसकी मां दिनांक 07.09.2012 से दिनांक 12.09.2012 तक भर्ती रही। वहां पर उनके इलाज में 16,000/-रू0 खर्च हुए, परन्तु मां की हालत ठीक नहीं हुयी। अत: दिनांक 12.09.2012 को उन्हें डिस्चार्ज कर दिया गया। तब परिवादिनी अपनी मां को अलीगढ़ मेडिकल कालेज ले गयी। वहां भी डॉ0 ने बताया कि आपरेशन गलत हुआ है। उसके बाद परिवादिनी दिनांक 14.09.2012 को अपने भाई सुरेश, नीरज व ननद संसारवती के साथ विपक्षी संख्या-01 सम्भल सर्जिकल मैटरनिटी हास्पिटल एण्ड स्टोन क्लीनिक के डॉ0 ए0के0गुप्ता व विपक्षी संख्या-02 डॉ0 रूपाली गुप्ता के पास गयी और उनसे मां के गलत आपरेशन की बात की जिसपर वे दोनों भड़क गए तथा गाली-गलौज करने लगे और कहा कि वे रोज कई आपरेशन करते हैं। कुछ ठीक होते है तो कुछ खराब भी होते है। इसके साथ ही उन्होंने परिवादिनी व उनके साथ गए व्यक्तियों को धक्का देकर अस्पताल के बाहर कर दिया।
परिवाद-पत्र के अनुसार परिवादिनी की माता की दिनांक 15.10.2013 को मृत्यु हो गयी है।
परिवाद-पत्र के अनुसार प्रत्यर्थी/परिवादिनी की मां की मृत्यु विपक्षी गण संख्या-01 व 02 की लापरवाही और गलत आपरेशन से हुयी है। अत: उसने परिवाद जिला फोरम के समक्ष प्रस्तुत कर क्षतिपूर्ति की मांग की है।
जिला फोरम के समक्ष विपक्षी गण संख्या-01 व 02 ने संयुक्त लिखित कथन प्रस्तुत कर कहा है कि दिनांक 24.08.2012 को उन्होंने परिवादिनी से 10,000/-रू0 नहीं वरन् 4,000/-रू0 जमा कराया था। लिखित कथन में उन्होंने कहा है कि परिवादिनी जांच रिपोर्ट की प्रतीक्षा किए बिना उनकी सलाह के विपरीत अपनी मां की अस्पताल से छुट्टी कराकर भुगतान किए बिना ले गयी है और स्टाफ के साथ झगड़ा किया है। इसके विपरीत परिवाद-पत्र में किया गया कथन मिथ्या और गलत है।
लिखित कथन में विपक्षी गण संख्या-01 व 02 की ओर से कहा गया है कि यह कथन मिथ्या है कि मां का आपरेशन कर खुला छोड़ दिया गया था।
लिखित कथन में विपक्षी गण संख्या-01 व 02 की ओर से कहा गया है कि उन्होंने प्रत्यर्थी/परिवादिनी की मां के इलाज में लापरवाही नहीं बरती है। वास्तविकता यह है कि पथरी को यदि तत्काल शल्य क्रिया कर निकलवाया न जाए तो कैंसर होने की सम्भावना बढ़ जाती है। लिखित कथन में दोनों विपक्षी गण ने आगे कहा है कि परिवादिनी द्वारा जो जांच रिपोर्ट प्रस्तुत की गयी है उससे भी इस बात की पुष्टि होती है कि मरीज को पथरी के कारण उस स्थान पर कैंसर हो गया था।
लिखित कथन में विपक्षी गण संख्या-01 व 02 की ओर से कहा गया है कि परिवादिनी ने गलत कथन के साथ परिवाद प्रस्तुत किया है और जो क्षतिपूर्ति मांगी है वह अनुचित है और अधिक है।
विपक्षी संख्या-03 दि न्यू इण्डिया एश्योरेंस कं0लि0 जो वर्तमान अपील में अपीलार्थी है की ओर से भी लिखित कथन जिला फोरम के समक्ष प्रस्तुत किया गया है और कहा गया है कि उसके विरूद्ध परिवाद दायर करने का कोई कारण उत्पन्न नहीं हुआ है। यदि फोरम की राय में यह माना जाए कि प्रश्नगत इलाज में विपक्षी गण संख्या-01 व 02 के द्वारा जानबूझकर लापरवाही की गयी है तो उस स्थिति में भी विपक्षी संख्या-03 उत्तरदाता का कोई दायित्व किसी क्षतिपूर्ति की अदायगी का नहीं बनता है। विपक्षी संख्या-03 की ओर से लिखित कथन में यह भी कहा गया है कि प्रत्यर्थी/परिवादिनी उससे कोई अनुतोष पाने की अधिकारी नहीं है।
जिला फोरम ने उभपक्ष के अभिकथन एवं उपलब्ध साक्ष्यों पर विचार करने के उपरांत यह माना है कि विपक्षी गण संख्या-01 व 02 ने प्रत्यर्थी/परिवादिनी की मां रामा देवी के इलाज में पूर्ण सावधानी नहीं बरती है और उसके इलाज में कमी की है। इसके साथ ही जिला फोरम ने यह भी माना है कि पत्रावली पर ऐसा कोई सन्तोषजनक साक्ष्य नहीं है जिसके आधार पर यह माना जाए कि विपक्षी गण संख्या-01 व 02 ने जानबूझकर रामा देवी के आपरेशन व इलाज में लापरवाही बरती है अथवा वे कथित इलाज व आपरेशन करने के लिए सक्षम नहीं थे। अत: जिला फोरम ने सम्पूर्ण तथ्यों एवं परिस्थितियों पर विचार करने के उपरांत यह निष्कर्ष निकाला है कि प्रत्यर्थी/परिवादिनी को विपक्षी गण संख्या-01 व 02 से 1,20,000/-रू0 क्षतिपूर्ति दिलाया जाना उचित है। जिलाफोरम ने अपने निर्णय में यह भी उल्लेख किया है कि विपक्षी सं0-03 जो अब अपीलार्थी है के यहां विपक्षी गण संख्या-01 व 02 बीमित थे। अत: विपक्षी गण संख्या-01 व 02 की ओर से क्षतिपूर्ति की राशि विपक्षी सं0-03 अदा करने के लिए उत्तरदायी है। अत: जिला फोरम ने आक्षेपित निर्णय और आदेश उपरोक्त प्रकार से पारित किया है।
अपीलार्थी के विद्वान अधिवक्ता का तर्क है कि जिला फोरम द्वारा पारित आक्षेपित निर्णय और आदेश साक्ष्य और विधि के विपरीत है। विपक्षी गण संख्या-01 व 02 की ओर से प्रत्यर्थी/परिवादिनी की मां के इलाज और आपरेशन में लापरवाही किया जाना कदापि प्रमाणित नहीं है।
अपीलार्थी/ विपक्षी सं0-03 बीमा कंपनी के विद्वान अधिवक्ता का यह भी तर्क है कि यदि यह मान भी लिया जाए कि डॉ0 ने प्रत्यर्थी/परिवादिनी की मां के इलाज में लापरवाही की है तब भी अपीलार्थी/ विपक्षी सं0-03 बीमा कंपनी का कोई दायित्व क्षतिपूर्ति की अदायगी हेतु नहीं बनता है। अपीलार्थी बीमा कम्पनी के विद्वान अधिवक्ता का तर्क है कि प्रत्यर्थी/परिवादिनी की मां की मृत्यु दिनांक 15.10.2013 को हुयी है। इस बीच उसका कई अस्पतालों में इलाज हुआ है। अत: यह नहीं कहा जा सकता है कि प्रत्यर्थी/परिवादिनी की मां की मृत्यु परिवाद के विपक्षी गण संख्या-01 व 02 की लापरवाही का परिणाम है। अत: जिला फोरम ने प्रत्यर्थी/परिवादिनी की मां के इलाज में लापरवाही मानते हुए जो प्रतिकर धनराशि अपीलार्थी/ विपक्षी सं0-03 बीमा कंपनी को अदा करने हेतु आदेशित किया है वह अनुचित व अवैधानिक है। अत: जिला फोरम द्वारा पारित निर्णय और आदेश अपास्त किए जाने योग्य है।
अपीलार्थी/ विपक्षी सं0-03 बीमा कंपनी के विद्वान अधिवक्ता का यह भी तर्क है कि जिला फोरम ने जो प्रतिकर की धनराशि निर्धारित की है वह बहुत अधिक है और आधार-रहित है।
प्रत्यर्थी/परिवादिनी के विद्वान अधिवक्ता का तर्क है कि जिला फोरम द्वारा पारित निर्णय और आदेश साक्ष्य और विधि के अनुकूल है। जिला फोरम ने उपलब्ध तथ्यों की विस्तृत विवेचना के बाद यह माना है कि परिवाद के विपक्षी गण संख्या-01 व 02 जो अपील में प्रत्यर्थीगण संख्या-02 और 03 है, ने प्रत्यर्थी/परिवादिनी की मां के इलाज में पूर्ण सावधानी नहीं बरती है और जिला फोरम द्वारा विपक्षी गण संख्या-01 व 02 के विरूद्ध निकाले गए निष्कर्ष को दोनों डाक्टरों ने अपील प्रस्तुत कर चुनौती नहीं दी है। ऐसी स्थिति में दोनों डाक्टरों की लापरवाही के सन्दर्भ में जिला फोरम द्वारा निकाले गए निष्कर्ष को अपीलार्थी बीमा कम्पनी को चुनौती देने का अधिकार नहीं है और न ही अपीलार्थी बीमा कम्पनी यह कहने हेतु सक्षम है कि प्रत्यर्थी/परिवादिनी की मां के इलाज में विपक्षी गण संख्या-01 व 02 ने लापरवाही नहीं बरती है।
प्रत्यर्थी/परिवादिनी के विद्वान अधिवक्ता का तर्क है कि अपीलार्थी बीमा कम्पनी ने इस बात से इंकार नहीं किया है कि प्रत्यर्थीगण संख्या-02 और 03 का जो बीमा उसने किया था उसके अन्तर्गत प्रत्यर्थी/परिवादिनी की मां के इलाज में हुयी चूक के लिए देय धनराशि की भरपाई हेतु वह उत्तरदायी नहीं है और बीमा पालिसी से यह स्पष्ट है कि प्रत्यर्थीगण संख्या-02 और 03 द्वारा देय प्रतिकर की धनराशि की अदायगी हेतु बीमा कम्पनी उत्तरदायी है।
मैंने उभयपक्ष के तर्क पर विचार किया है। जिला फोरम ने उभयपक्ष के अभिकथन एवं उपलब्ध साक्ष्यों की विवेचना कर यह निष्कर्ष निकाला है कि विपक्षी गण संख्या-01 व 02 जो अपील में प्रत्यर्थीगण संख्या-02 और 03 है, ने प्रत्यर्थी/परिवादिनी की मां के इलाज में पूर्ण सावधानी नहीं बरती है। जिला फोरम के इस निष्कर्ष को विपक्षी गण संख्या-01 व 02 ने अपील प्रस्तुत कर चुनौती नहीं दी है। यह विपक्षी गण संख्या-01 व 02 ही स्पष्ट कर सकते है कि उन्होंने प्रत्यर्थी/परिवादिनी की मां के इलाज में पूर्ण सावधानी बरती अथवा नहीं, क्योंकि इस सन्दर्भ में जानकारी व्यक्तिगत रूप से उन दोनों के ही पास है और इसे वे दोनों ही स्पष्ट कर सकते हैं, परन्तु दोनों विपक्षीगण ने जिला फोरम के आदेश को अपील प्रस्तुत कर चुनौती नहीं दी है और बीमा कंपनी को विपक्षी गण संख्या-01 व 02 द्वारा प्रत्यर्थी/परिवादिनी की मां के किए गए इलाज की कोई व्यक्तिगत जानकारी नहीं हो सकती है।.
विपक्षी गण संख्या-01 व 02 द्वारा जिला फोरम के निर्णय को चुनौती न दिए जाने से उनकी इस सन्दर्भ में मौन स्वीकृति मानी जाएगी कि जिला फोरम का निष्कर्ष सही है कि प्रत्यर्थीगण संख्या-02 और 03 ने प्रत्यर्थी/परिवादिनी की मां के इलाज में पूर्ण सावधानी नहीं बरती है।
उपरोक्त विवेचना एवं सम्पूर्ण तथ्यों एवं परिस्थितियों पर विचार करने के उपरांत मैं इस मत का हूं कि जिला फोरम ने प्रत्यर्थी/परिवादिनी की मां के इलाज में पूर्ण सावधानी नहीं बरतने के कारण प्रत्यर्थी/परिवादिनी को जो प्रतिकर की अदायगी हेतु विपक्षी गण संख्या-01 व 02 को उत्तरदायी माना है वह इस अपील में अनुचित और विधि विरूद्ध नहीं कहा जा सकता है।
उपरोक्त विवरण से यह स्पष्ट है कि प्रत्यर्थी/परिवादिनी की मां का आपरेशन प्रत्यर्थी संख्या-02 के अस्पताल में दिनांक 24.08.2012 को किया गया है। प्रत्यर्थी/परिवादिनी की माता की मृत्यु दिनांक 15.10.2013 को एक साल से अधिक समय के बाद हुई है। इस बीच प्रत्यर्थी/परिवादिनी की माता का इलाज कई अस्पतालों में परिवाद-पत्र के अनुसार हुआ है अत: ऐसी स्थिति में विपक्षी गण संख्या-01 व 02 द्वारा प्रत्यर्थी/परिवादिनी की माता के आपरेशन या इलाज में की गयी लापरवाही को प्रत्यर्थी/परिवादिनी की माता की मृत्यु से नहीं जोड़ा जा सकता है। अत: सम्पूर्ण तथ्यों एवं परिस्थितियों पर विचार करते हुए मैं इस मत का हूं कि जिला फोरम ने जो प्रतिकर धनराशि 1,20,000/-रू0 निर्धारित की है, वह बहुत अधिक है। परिवाद-पत्र के अनुसार प्रत्यर्थी/परिवादिनी ने अपनी माता के इलाज हेतु 10,000/-रू0 प्रत्यर्थी संख्या-02 के यहां जमा किया था। जबकि प्रत्यर्थीगण संख्या-02 और 03 के अनुसार उन्होंने मात्र 4,000/-रू0 लिया था। अत: उभयपक्ष के अभिकथन एवं सम्पूर्ण तथ्यों एवं परिस्थितियों पर विचार करते हुए मैं इस मत का हूं कि जिला फोरम द्वारा निर्धारित प्रतिकर धनराशि 1,20,000/-रू0 को कम कर 60,000/-रू0 किया जाना उचित है। अपीलार्थी बीमा कम्पनी की ओर से यह नहीं कहा गया है कि प्रत्यर्थीगण संख्या-02 और 03 का बीमा उसने नहीं किया है। अत: प्रतिकर की धनराशि जिला फोरम ने जो अपीलार्थी/विपक्षी बीमा कम्पनी को अदा करने हेत आदेशित किया है वह विधि विरूद्ध नहीं कहा जा सकता है। जिला फोरम ने जो 2,000/-रू0 वादव्यय दिया है, वह उचित प्रतीत होता है। जिला फोरम ने 9 प्रतिशत वार्षिक की दर से भी ब्याज परिवाद प्रस्तुत करने की तिथि से अदायगी की तिथि तक दिया है। वह उचित प्रतीत होता है।
उपरोक्त विवेचना एवं ऊपर निकाले गए निष्कर्षों के आधार पर अपील आंशिक रूप से स्वीकार की जाती है और जिला फोरम द्वारा पारित आक्षेपित निर्णय और आदेश संशोधित करते हुए अपीलार्थी/विपक्षी बीमा कम्पनी को आदेशित किया जाता है कि वह प्रत्यर्थी/परिवादिनी को 60,000/-रू0 परिवाद प्रस्तुत करने की तिथि से अदायगी की तिथि तक 9 प्रतिशत वार्षिक की दर से ब्याज सहित अदा करे। इसके साथ ही अपीलार्थी/विपक्षी बीमा कम्पनी, प्रत्यर्थी/परिवादिनी को जिला फोरम द्वारा प्रदान की गयी 2,000/-रू0 वादव्यय की धनराशि भी अदा करेगी।
अपील में उभयपक्ष अपना-अपना वादव्यय स्वयं वहन करेंगे।
धारा-15 उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम के अन्तर्गत अपील में जमा धनराशि अर्जित ब्याज सहित जिला फोरम को इस निर्णय के अनुसार निस्तारण हेतु प्रेषित की जाए।
(न्यायमूर्ति अख्तर हुसैन खान) अध्यक्ष सुधांशु श्रीवास्तव, आशु0 कोर्ट नं0-1 [HON'BLE MR. JUSTICE AKHTAR HUSAIN KHAN] PRESIDENT