Lok Sabha Debates
Discussion Regarding Terrorism In The Country Including Attack On Ram Janam ... on 4 August, 2005
Title: Discussion regarding terrorism in the Country including attack on Ram Janam Bhoomi Complex at Ayodhya. – Laid.
15.24 hrs. DISCUSSION UNDER RULE 193 प्रो. विजय कुमार मल्होत्रा (दक्षिण दिल्ली) : अध्यक्ष जी, हमारे देश और विदेशों में आतंकवाद की जिस तरह की घटनाएं सामने आई हैं, उन घटनाओं से सारा देश दहल उठा है और विश्वभर में आतंकवाद के कारण ऐसी स्थिति पैदा हुई है कि सारा विश्व इस पर चिंता का अनुभव कर रहा है।
अध्यक्ष महोदय, अयोध्या में पांच जुलाई को कुछ आतंकवादी पहुंच गए। उन्होंने राम मंदिर के ऊपर आक्रमण करने का प्रयास किया और पांच जुलाई को राम मंदिर में हमारे सैनिक बलों की सजगता की वजह से, वे आंतकवादी मारे गए। यदि राम मंदिर काम्पलैक्स में कोई घटना हो जाती तो उसकी प्रतक्रिया की कल्पना हम कर सकते हैं। अयोध्या ऐसा स्थान है, जिस प्रकार से मक्का-मदीना, वैटिकन सिटी धार्मिक स्थल हैं, वैसे ही यह स्थान हिंदुओं का धार्मिक सर्वोच्च स्थान है। यह सौ करोड़ से अधिक हिन्दुओं के लिए सर्वोच्च श्रद्धा स्थान है। सात जुलाई को लंदन में बम विस्फोट हुए थे, जिसमें अनेक लोग मारे गए थे। २३ जुलाई को मिरुा के बम धमाकों में बहुत से लोगों की जानें चली गई थीं।
अध्यक्ष जी, २४ जुलाई को उग्रवादियों ने अमरनाथ मार्ग के रास्ते को उड़ा दिया। १६ जुलाई को आत्मघाती पकड़े गए। उसके बाद २१ जुलाई को श्रीनगर में स्कूल के बाहर बम विस्फोट हुआ। पाकिस्तान समर्थित आतंकवादी गुट हिजबुल मुजाहिदीन ने उसकी जिम्मेदारी ली। उस हमले में अनेक लोग आतंकवादियों के शिकार हुए। २९ और ३० जुलाई को लाल चौक पर आतंकवादियों ने आत्मघाती हमला करके पांच लोगों को मार दिया। आठ पत्रकारों को बहुत ज्यादा चोटें आईं। उनमें से कुछ घायल स्थिति में हैं और कुछ की चिन्ताजनक स्थिति है।
अध्यक्ष जी, इस समय आतंकवाद सारे देश और विश्व में चिन्ता का विषय बना हुआ है। जब यहां आतंकवाद की घटनाएं हुईं, तो विश्व ने इतना ध्यान नहीं दिया, लेकिन जब अमरीका और ब्रिटेन में आतंकवाद की घटनाएं हुईं, तो विश्वव्यापी प्रचार हुआ और एक स्वर से पूरी दुनिया ने आतंकवादी घटनाओं पर चिन्ता प्रकट की। हमारे प्रधान मंत्री जी ने कहा कि आतंकवादी घटनाओं की निन्दा करने में, उनका मुकाबला करने में हम अमरीका के साथ हैं। हम आतंकवाद के खिलाफ अमरीका के साथ मिलकर लड़ना चाहते हैं और हमने अमरीका के साथ आतंकवाद के विरुद्ध अपनी प्रतिबद्धता दर्शाई। ब्रिटेन के श्री टोनी ब्लेयर के साथ आतंकवाद के विरुद्ध वैश्विक लड़ाई में भी हम शामिल हैं। ब्रिटेन और अमरीका की घटनाएं निन्दनीय हैं। संपूर्ण विश्व की आतंकवाद के प्रति बहुत चिन्ता है। उनका चिन्तित होना स्वाभाविक है। यद्यपि मैं जानता हूं कि अमरीका और ब्रिटेन ने भारत के आतंकवाद के ऊपर या पश्चिमी के देशों ने भारत में की जा रही आतंकवादी गतवधियों के ऊपर, वैसा ध्यान नहीं दिया, जैसा कि दिया जाना चाहिए था, तथापि हम वैश्विक आतंकवाद का सामना करने में उनके साथ हैं।
महोदय, अमरीका ने ही पाकिस्तान को सहायता देकर तालिबान को पैदा किया। पाकिस्तान को हर प्रकार की सहायता दी जिससे वहां हजारों और लाखों की संख्या में तालिबान पैदा हुए। ब्रिटेन ने भी ऐसे आतंकवादी ग्रुपों को प्रश्रय दिया। अमरीका एवं ब्रिटेन के आतंकवाद के मुकाबले, भारत में आतंकवाद की सबसे ज्यादा घटनाएं हुईं और सबसे ज्यादा हम प्रभावित हुए हैं। पिछले वर्ष तक ६० हजार और इस वर्ष संभवत: आतंकवाद की घटनाओं में मरने वाले लोगों की संख्या ८० हजार हो गई होगी। इतने सैनिक बल चार युद्धों में नहीं मारे गए। जितने आतंकवाद के कारण मारे गए हैं तथापि किसी भी पश्चिमी देश ने उसके बारे में चिन्ता व्यक्त नहीं की, यह बात कष्टदायक है।
महोदय, प्रधान मंत्री जी ने कहा है कि आतंकवाद के प्रति दोहरी नीति नहीं होनी चाहिए, परन्तु क्या यह सही नहीं है कि जब हम अमरीका में जाते हैं और वहां आतंकवाद के विरुद्ध वैश्विक युद्ध के लिए अपील करते हैं और जब हम जाकर कहते हैं कि आतंकवाद के खिलाफ लड़ना चाहिए, परन्तु भारत में हम क्या कर रहे हैं, उसे भी देखना चाहिए। मुझे बहुत दुख के साथ कहना पड़ता है कि इस बारे में हमारी दोहरी नीति है।
15.28 hrs. (Shrimati Sumitra Mahajan in the Chair) अध्यक्ष महोदय, इस सरकार ने अपने राजनीतिक स्वार्थों के चलते पिछले एक साल में आतंकवाद के खिलाफ लड़ी जा रही लड़ाई को बहुत धीमा किया है। आतंकवाद के खिलाफ जैसा संघर्ष करना चाहिए था, वैसा संघर्ष राजनीतिक स्वार्थों के चलते इस सरकार ने नहीं किया। मैं आपके सामने दो-तीन उदाहरण रखना चाहता हूं। इस समय सारी दुनिया में मांग हो रही है कि आतंकवाद के खिलाफ कठोर कानून बनना चाहिए। अमरीका में सख्त कानून पहले से ही था, उसने उसे और और ज्यादा सख्त किया जिसका समर्थन, सारे अमरीका के, सभी राजनीतिक दलों के, सारे सांसदों ने, एक स्वर से किया। ब्रिटेन में जो ०७-०७-२००५ की घटना हुई, उससे पहले ब्रिटेन ने एक बहुत सख्त कानून बनाया। बहुत कड़ा कानून बनाने के बाद, उसने कहा कि इसमें मानवाधिकार के हनन की बात नहीं है। यदि ब्रिटेन के खिलाफ आतंकवादी हमला होता है, तो हम आतंकवाद के खिलाफ और कड़ा कानून बनाएंगे। इसी तरह का कानून स्पेन में बनाया गया। यू.एन.ओ. ने कहा कि सारी दुनिया में ऐसे कानून बनने चाहिए। सारी दुनिया ने आतंकवाद विरोधी कानून बनाए, लेकिन भारत में जिस आतंकवाद के कारण ८० हजार लोग मारे गए, जिसमें विश्व के सबसे ज्यादा लोग मारे गए ।, यह ऐसा अभागा देश है, ऐसा बदकिस्मत देश है, जिसमें आतंकवाद के खिलाफ एक ही कानून था, वह पोटा का था और उसको ही समाप्त कर दिया, पोटा कानून को ही हमने निरस्त कर दिया है। आतंकवाद के खिलाफ एकमात्र जो कानून हिन्दुस्तान में था, बजाय इसके कि आप उसको ज्यादा सख्त बनाते, आप आतंकवादियों के दिलों में उसका एक खौफ पैदा कर देते, उनको डर लगता, त्रास लगता, उसके बजाय आपने पोटा को ही निरस्त कर दिया। यह आपका पहला अपराध है, जो इस एक साल में आपने किया है। हम आपको कठघरे में खड़ा करना चाहते हैं कि आप ८० हजार लोगों के मारे जाने के बाद दुनिया भर में जाकर आतंकवाद के खिलाफ वैश्विक लड़ाई में शामिल होने की घोषणा करने के बाद भारत में आपने क्या किया ? जो एकमात्र कानून था, पोटा का कानून उसे आपने वापस ले लिया।
यहां पर मैग्नाकार्टा मानवाधिकारों की बात की जाती है। मानवाधिकार मानवों के लिए होते हैं। जहां पर बच्चों को रेत-रेत कर मारा जाये, बच्चों के स्कूल में बम फेंक दिया जाये, स्त्रियों को मार डाला जाये, सैनिक बलों की हत्या की जाये और उसके बाद अयोध्या में जाकर हमारे श्रद्धा केन्द्र राम मंदिर पर हमला कर दिया जाये। फिर आप कहें कि मानवाधिकारों के लिए हमने पोटा को निरस्त कर दिया है, तो आपसे यह कहना चाहता हूं, जो बहुत बड़ा देश के साथ आपने पाप किया है, वह पोटा को निरस्त करने का है।
दूसरी बात मैं यह कहना चाहता हूं कि पाकिस्तान द्वारा इन दिनों जितनी घटनाएं हुई हैं, मैं उनमें से सिर्फ पिछले दो महीने की घटनाओं का ही उल्लेख कर रहा हूं। अयोध्या में राम मंदिर पर हमला हुआ। हमारी सरकार ने यह कहा और मैंने होम सैक्रेटरी का बयान पढ़ा है कि इसमें पाकिस्तान का हाथ है। उसमें पाकिस्तानी संस्थाओं का हाथ है । हमारे चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ कहते हैं कि तीन हजार पाकिस्तानी घुसपैठिये और तीन हजार आतंकवादी कश्मीर में आने की कोशिश कर रहे हैं, घुसपैठ कर रहे हैं। इन दिनों जितनी घटनाएं कश्मीर में हुई हैं, सबमें पाकिस्तान का हाथ आप बता रहे हैं, सब में कहा जा रहा है कि पाकिस्तान की आतंकवादी संस्थाओं का हाथ है। आई.एस.आई. सारी दुनिया में आतंकवाद को फैलाने की कोशिश कर रही है। वह भारत में भी सबसे अधिक कोशिश कर रही है। हर एक घटना के पीछे गृह मंत्री जी और अधिकारियों ने बयान दिये हैं कि पाकिस्तान का हाथ है, पाकिस्तानी आतंकवादियों का हाथ है तो आपने पाकिस्तान के विरुद्ध क्या कुछ कदम उठाये हैं, इस संबंध में पाकिस्तान से क्या बात की है?
जब शिमला समझौता हुआ था, उसमें तब यह कहा गया कि पाकिस्तान आतंकवाद को खत्म करेगा। मेरे पास श्री अटल बिहारी वाजपेयी जी का उस समय के पाक प्रधानमंत्री शरीफ के साथ का बयान है, जिसमें यह कहा गया कि पाकिस्तान आतंकवाद को खत्म करेगा और पाकिस्तान आतंकवाद को खत्म करने के लिए वचनबद्ध है । मुशर्रफ ने अटल जी के साथ संयुक्त बयान में कहा कि पाकिस्तान की धरती को हम किसी कीमत पर आतंकवाद के लिए इस्तेमाल नहीं होने देंगे। परन्तु पिछले एक वर्ष में पाकिस्तान के साथ जो समझौते हुए, चाहे वह समझौता हमारे प्रधानमंत्री के साथ हुआ, चाहे वह समझौता हमारे विदेश मंत्री के साथ हो, चाहे वह समझौता हमारे अधिकारियों के साथ हुआ, किसी एक समझौते में भी पाकिस्तान को हमने आतंकवाद खत्म करने के लिए नहीं कहा है। पाकिस्तान को आतंकवाद को खत्म करने के लिए न कहना, पाकिस्तान में मुशर्रफ को याद न दिलाना कि तुमने कहा था, तुमने वायदा किया था कि तुम्हारी धरती से आतंकवाद नहीं चलेगा । उसके बजाय हमारे बयान क्या आ रहे हैं। शिवराज पाटिल जी का बयान है कि पाकिस्तान में आतंकवादी अड्डे कायम हैं। प्रणव मुखर्जी साहब का सिर्फ आज का ही बयान है, जिसमें उन्होंने कहा है कि जुलाई-अगस्त में पाकिस्तान से आतंकवादियों का आना बढ़ गया है और कश्मीर में आतंकवादी घटनाओं में वृद्धि हुई है और पाकिस्तान उसके पीछे है। आपका बयान भी है, शिवराज पाटिल साहब का बयान भी है। प्रधानमंत्री जी ने भी वहां जाकर कहा कि पाकिस्तान अगर इसी तरह की हरकत करता रहेगा तो बातचीत में कठिनाई पैदा होगी, मगर एक बार भी आपने पाकिस्तान के राष्ट्रपति को संबोधित कर या किसी अंतरराष्ट्रीय मंच पर जाकर पाकिस्तान के नाम से निंदा की कि पाकिस्तान हिन्दुस्तान में क्या कर रहा है? ब्रिटेन की घटना के बाद मुशर्रफ साहब हिल गये। उन्होंने अपने यहां बहुत से कदम उठा लिये और सारे मदरसों को बंद करना शुरू कर दिया। मदरसों से विदेशियों को निकालना शुरू कर दिया।
आपका दूसरा अपराध यह है कि आपने पाकिस्तान को एक बार भी आतंकवाद बंद करने की चेतावनी नहीं दी । उसको उसके वायदे याद नहीं दिलाये और पाकिस्तान के प्रति अत्यंत नरम नीति रखी। मैं रोज बयान देखता हूं कि आतंकवादी घटनाएं हो रही हैं, गोलियां चल रही हैं, बम फेंके जा रहे हैं और यह कहा जा रहा है कि इसमें पाकिस्तान का हाथ है परन्तु साथ ही यह शब्द भी जोड़ दिए जाते हैं कि हमारी बातचीत जारी रहेगी। हमारा शांति समझौता जारी रहेगा, शांति की वार्ता जारी रहेगी यानी पाकिस्तान कुछ भी कर ले, पाकिस्तान राम जन्म भूमि पर हमला कर दे, पाकिस्तान कश्मीर के अंदर स्कूलों में बम फेंक दे, पाकिस्तान लाल चौक, बादशाह चौक पर हमारे सारे पत्रकारों की हत्या करने का प्रयास करे तब भी शांति वार्ता जारी रहेगी। उसमें कोई अंतर नहीं पड़ेगा। हमारी बातचीत चलती रहेगी। हमारी तेल की पाइप लाइन बनाने का प्रयास भी चलता रहेगा। यह कौन सा तरीका है आंतकवाद खत्म करने का ।
पाकिस्तान से आपको यह बात कहने में क्या कठिनाई है कि तुमने जो वायदे किये थे, उसे पूरा करो। क्यों नहीं आपने कहा कि जो आपके यहां अड्डे कायम हैं, उसे नष्ट करो आप दोनों के बयान हैं, प्रधान मंत्री जी का बयान है कि आतंकवाद का पूरा का पूरा इन्फ्रास्ट्रक्चर पाकिस्तान के अंदर कायम हैं। पाकिस्तान ने आतंकवादी अड्डों को नष्ट नहीं किया, उसके इन्फ्रास्ट्रक्चर को खत्म नहीं किया। क्यों नहीं उनसे बात करते हुए, वार्ता करते हुए इस बात को बलपूर्वक कहा जाये कि पहले इन्फ्रास्ट्रक्चर खत्म करो, अपने अड्डे बंद करो और अगर अड्डे बंद नहीं करेंगे, अगर ये घटनाएं चलती रहेंगी, तो पाकिस्तान से बातचीत का कोई मतलब नहीं होगा ? किसी तरह की बातचीत या शांति वार्ता उस कीमत पर नहीं हो सकती कि हम पाकिस्तान के लिए सारी सुविधाएं खोलें और पाकिस्तान इस प्रकार की नृशंस घटनाएं करता रहे। इसलिए मैं कहना चाहता हूं कि आपका दूसरा अपराध है पाकिस्तान के आतंकवाद के बारे में ढुलमुल नीति अपनाने का ।
तीसरा अपराध जिसका मैं उल्लेख करना चाहता हूं, वह यह है कि दुनिया भर में आतंकवाद कहां से पैदा हो रहा है ? यह बात थोड़ी गंभीर है। इसको अन्यथा कोई न ले परन्तु पाकिस्तान आतंकवाद पैदा करने की फैक्ट्री है। वह फैक्ट्री क्या है ? वह है पाकिस्तान के अंदर चलने वाले अनेक मदरसे और भारत में चलने वाले ऐसे मदरसे, आतंकवाद के कारखाने हैं । एक टॉस्क फोर्स ऑन बॉर्डर मैनेजमैंट बनी थी। मैं उसके कुछ शब्द आपके सामने रखना चाहता हूं।
"The Task Force has noted with concern the rapid spread of madrasas and mosques in border areas on almost all borders. Most of these constructions have come up without any formal approval of the competent local authorities..
In several cases, considerable foreign funds have become available to these institutions through non-banking institutions. Efforts at Talibanisation of Muslims and their education is a matter of concern which should not be dismissed light-heartedly."
टॉस्क फोर्स में आगे यह कहा है क "With total emphasis on the study of fundamentalist education in utter disregard of other systems of education…..This instruction lies on the worldview of managers running these institutions that nothing valuable, worth assimilation, exists outside of these studies and beyond these languages.
There has been mushrooming and visible growth of mosques and madrasas all along our international borders. The intriguing thing is that these have come up where there is very small or no population of the minority community and that madrasas and mosques have sprung up on both sides of the border as if in unison. These institutions could be construed as Islamic infrastructure and have a potential for intelligence encirclement of India.
On the Indo-Bangladesh border, growth of madrasas and mosques is taking place along with a shift in demographic composition due to illegal immigration of large number of people from Bangladesh into the border districts in India.
On the Indo-Nepal border, madrasas and mosques have sprung up on both sides in the Terai region, accompanied by four-fold increase in the population of the community in the region. There are 343 mosques, 300 madrasas and 17 mosques-cum-madrasas within 10 kilometres of the border in the Indian side. "
नेपाल सीमा पर भी इन मदरसों का जिक्र है। टॉस्क फोर्स ने कहा है कि भारत अपने विनाश पर इस तथ्य की अवहेलना कर सकता है ।
It further says:
"In the Rajasthan sector of the India-Pakistan border, there are 129 madrasas… registered with the Wakf Board. There are large number of unregistered madrasas in the border belt. The growth of madrasas in this belt has been higher than in other places in the State."
About the Gujarat sector, again the same thing is repeated. Then they say:
"Indo-Bangladesh border has seen the most rapid growth of madrasas and mosques. "
Furnishing State-wise figures, the Task Force recorded that on the Indian side, in close proximity to the border, there are now 905 mosques and 439 madrasas. The figure alone should shake us out of our stupor. Then, it further says:
"Talibanisation of madrasas is taking place due to spread of fundamentalist ideology in these institutions. …… Madrasas in some places are reported to be sheltering ISI agents and subversive elements."
यह आपकी टॉस्क फोर्स कह रही है कि आईएसआई एलीमेंट्स और सबमर्सिव एलीमेंट्स वहां है और इसके अलावा, it also says:
"Indoctrination of young children and planting of fundamentalist strains in their minds in madrasas would pose serious problems to our polity in future."
अध्यक्ष महोदय, बुद्धदेव आचार्य जी, वेस्ट बंगाल के चीफ मनिस्टर साहब ने एक जगह भाषण देते हुए ये शब्द कहे। The hon. Chief Minister of West Bengal, Shri Budhadeb Bhattacharya remarked in an interview to a web daily that some madrasas in the State had become the base for anti-national elements. He said:
"What I mean to say is that these madrasas should be affiliated to the Madrasa Board, and are teaching Arabic and theology. Some anti-national elements are operating from these madrasas. …."
पाकिस्तान में मदरसे रजिस्टर्ड हो रहे हैं। पाकिस्तान में मुशर्रफ ने कहा कि हर मदरसे को रजिस्टर्ड होना पड़ेगा। मुझे मोरक्को, टयूनीशिया और अल्जीरिया जाने का मौका मिला था। वहां उन्होंने अपने यहां सब मदरसों का अनिवार्य रजिस्ट्रेशन कराया और वहां क्या पढ़ाया जाएगा, इसको भी तय किया । लेकिन भारत में क्या स्थिति है ? हिन्दुस्तान में मदरसों के संबंध में किसी प्रकार का कोई कानून नहीं है, कोई नियम नहीं है। मुशर्रफ जब कहता है कि मदरसों में पढ़ने वाले १४०० विदेशी जो बाहर से आते हैं और आने के बाद यहां तालीबान बनते हैं, उन सबको मदरसे से निकाल दिया। उन सबको पाकिस्तान मदरसे से निकाल रहा है। आज सुबह के अखबारों में है कि सिंध ने भी कह दिया कि उनके यहां के सब मदरसों से विदेशी चले जाएं । लेकिन हमारी बदकिस्मती यह है कि हमारे यहां उनके लिए दरवाजे खुले हैं। पाकिस्तान से निकलेंगे तो हमारे यहां आ जाएं, भारत में कहीं भी आ जाएं। जो थोड़ा-बहुत नियंत्रण पहले था और मदरसों को कहा जा रहा था कि मदरसों को रजिस्टर्ड कराएं। मदरसों को कहा जा रहा था कि उनमें आधुनिक शिक्षा दें और उनसे यह कहा जा रहा था कि उनमें कोई आईएसआई के एजेंट तो नहीं हैं, इसकी मोनीटरिंग करें, वह सब आपने बंद कर दिया। इस सरकार ने आने के बाद एक साल में मदरसों की जो पहले जांच होती थी, उन पर निगाह रखी जाती थी, उस जांच को भी बंद कर दिया। मैं यह कहना चाहता हूं कि यह तीसरा अपराध था जो इस सरकार ने किया। मदरसों को खुला छोड़ दिया कि जो चाहे यहां पर आकर तालीबान पैदा करे और जेहादी फैक्टरियां लगाए और आतंकवादी बॉम्ब बने। यह तीसरा अपराध है जो इस सरकार ने किया।
चौथा अपराध यह है क वहां पर पंजाब में आतंकवाद खत्म हो गया था। आतंकवाद पूरी तरह खत्म हो गया था। पंजाब में ८००० से ज्यादा लोग मरे थे। वहां से लाखों की संख्या में लोग निकले आए थे । अकालियों और भाजपा के गठबंधन के बाद पंजाब में आतंकवाद खत्म हो गया था लेकिन पंजाब में इस आतंकवाद को पैदा किसने किया था ?…( व्यवधान)
कुँवर मानवेन्द्र सिंह (मथुरा) : भाजपा के समय में ही तो …( व्यवधान)
MADAM CHAIRMAN : No cross-talks please. Nothing will go on record.
(Interruptions)* … प्रो. विजय कुमार मल्होत्रा (दक्षिण दिल्ली) : पंजाब में आतंकवाद कांग्रेस पार्टी ने पैदा किया था। कांग्रेस ने भिंडरावाले को अकाली पार्टी के मुकाबले में खड़ा किया और भिंडरावाले को मदद देनी शुरू की। जब वह भस्मासुर बन गया और पंजाब के अंदर हजारों निर्दोष मार डाले गये। ..* परन्तु भिंडरावाले को पैदा करने का पाप उस समय आप लोगों ने किया था। अब क्या हो रहा है? उस दिन मैंने इस सवाल को पूछा था कि खालिस्तान का सबसे बड़ा अड्डा कहां है? इसके अड्डे पाकिस्तान में चल रहे हैं, कनाडा में चल रहे हैं, अमेरिका में चल रहे हैं। खालिस्तान का सबसे बडा अड्डा कनाडा में चल रहा है, वहां के एक प्रमुख गुरुद्वारे में पटि्टयाँ लगी हुई हैं जिन पर ‘खालिस्तान जिन्दाबाद’ लिखा हुआ है, खालिस्तान के नाम पर वहां धन इकट्ठा किया जा रहा है। पंजाब का मुख्यमंत्री वहां जाता है, वहां जाकर उनसे सरोपा लेता है, उनकी तारीफ करता है। अगर पंजाब का कांग्रेस पार्टी का मुख्यमंत्री खालिस्तान के अड्डों में जाकर सरोपा लेगा और उनके साथ खड़ा होगा तो पंजाब में आतंकवाद क्यो नहीं फैलेगा?
महोदय, मेरे पास जो सूचनाएं हैं, अगर मैं उनको पढ़ना चाहूं तो बहुत समय लगेगा। पंजाब में फिर से आतंकवाद पैदा हो रहा है, कहां से आ रहा है यह आतंकवाद? दिल्ली के अन्दर सिनेमाहालों में जिन लोगों ने बम फेंके, वे कौन लोग हैं, कहां रह रहे थे? पंजाब में रह रहे थे। इस सरकार का समर्थन करने वाले लोगों के घरों में वे खालिस्तानी आतंकवादी बैठे हुए हैं। अकाली पार्टी को नष्ट करने के लिए आप हिन्दुस्तान को नष्ट कर रहे हैं? अकाली पार्टी को नुकसान पहुंचाने के लिए आप हिन्दुस्तान को नुकसान पहुंचा रहे हैं? आप उन लोगों को सहारा देकर पंजाब में फिर से आतंकवाद बढ़ जाए, उसकी * Not Recorded.
आप साजिश को बढ़ावा दे रहे हैं। अगर पंजाब में आतंकवाद पैदा होगा तो उसके लिए यूपीए और कांग्रेस पार्टी जिम्मेदार होगी। यह आपका चौथा अपराध है, आपका चौथा पाप है जो आप पंजाब में आतंकवाद को जिन्दा करने की कोशिश कर रहे हैं।
इसके पहले उस दिन भी बहस हो चुकी है, मैं उसमें नहीं जाना चाहता हूँ। आईएमडीटी का क्या हुआ? यहां चार करोड़ बंगलादेशी घुसपैठिए हमारे देश में हैं, उनमें से १० लाख के करीब बांग्लादेशी घुसपैठिए दिल्ली में आ गए हैं और वे १० लाख लोग दिल्ली में रह रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट के चार निर्णय और दिल्ली हाईकोर्ट के चार निर्देश इस विषय पर आ चुके हैं। न्यायालय का निर्देश है कि बंगलादेशियों को यहां से निकाला जाए। अब यह प्रश्न उठाया जा रहा था कि सुप्रीम कोर्ट हमारे मामलों में दखल दे रहा है। सुप्रीम कोर्ट हमारे मामले में क्यों दखल दे रहा है । इसमें न्यायालय क्यों आ रहा है? आप चार करोड़ बांग्लादेशियों को देश में और दस लाख बांग्लादेशियों को दिल्ली में बनाए रखेंगे और कहेंगे कि न्यायालय क्यों दखल दे रहा है? न्यायालय में आप गए थे कि बंगलादेशियों को निकालना मुश्किल है, हम उनको नहीं निकाल पाएंगे। कोर्ट ने झाड़ लगाई है कि यदि आप सरकार नहीं चला सकते हैं, अगर विदेशियों को हिंदुस्तान में आने से नहीं रोक सकते तो आपको शासन चलाने का क्या अधिकार है? सारे देश की सीमाओं पर बांग्लादेशियों को बैठाए रहेंगे और फिर सोचेंगे कि चूंकि असम में चुनाव होने वाले हैं, अगर ये बांग्लादेशी चले गए तो कांग्रेस को कौन वोट देगा? इसलिए बांग्लादेशियों को हिन्दुस्तान में बनाए रखेंगे, आईएमडीटी के समाप्त होने पर, कोई दूसरा तरीका ढूंढेंगे। यह देश के हितों के खिलाफ है। यह देश के हितों की हत्या है, जो कि आप कर रहे हैं१ यह आपका पांचवां अपराध है।
कुँवर मानवेन्द्र सिंह (मथुरा) : आपके कार्यकाल में कितने बांग्लादेशियों को निकाला गया?
प्रो. विजय कुमार मल्होत्रा : इसके साथ ही जो नक्सलाइट समस्या है, जो माओवादी हिंसा है, आंतरिक सुरक्षा को जो अन्य खतरे हैं वे भी हमारे सामने हैं। इस विषय में मैं एक अखबार में जो लेख छपा था, मैं उसे यहां पढ़ना चाहूंगा :
"पिछले सप्ताह जेहाद अयोध्या तक आ पहुंचा। श्रीराम जन्मभूमि धवस्त होते-होते बची तो केवल कुछ सीआरपी के जवानों की बहादुरी के कारण। आतंकवादी हमले का उद्देश्य था साम्प्रदायिक हिंसा भड़काना, जो फिलहान पूरा नहीं हुआ, लेकिन बला अभी टली नहीं है। "
"प्रधानमंत्री जी ने जरूरत से ज्यादा शरीफाना अंदाज में आतंकवाद का द्ृढ़ता से सामना करने का वायदा दोहरा दिया। राजनीतिक समति की आपातकालीन मीटिंग भी बुला ली गयी। बस इतना ही किया गया। अगर कोई और आतंकवादी होते तो सरकार की इस बुजदिल कायराना प्रतक्रिया से उनका हौसला कितना ज्यादा बढ़ जाता।" रात को मीटिंग हुई परन्तु वह मीटिंग इसके लिए नहीं हो रही थी, बल्कि इस लिए हो रही थी कि किस प्रकार से बिहार में विधानसभा को भंग किया जाए। श्री मनमोहन सिंह जी के राज में हर किस्म की आतंकवादी हिंसा बढ़ी है।
लेख में आगे कहा है कि "हर किस्म का आतंकवाद, चाहे वह नक्सली हो, खालिस्तानी हो, जेहादी हो, मानव बम हो, ये सब आतंकवाद की अंधेरी दुनिया से निकल-निकल कर सामने आ रहे हैं। पंजाब में भी शांति भंग होने का खतरा पैदा हो रहा है।…( व्यवधान)
कुँवर मानवेन्द्र सिंह (मथुरा) : मुझे इस पर एतराज है। जब एनडीए की सरकार थी, उस समय आतंकवाद की घटनाओं में क्या वृद्धि नहीं हुई थी? जम्मू-कश्मीर में राम मंदिर पर हमला हुआ, अक्षरधाम मंदिर पर हमला हुआ, संसद भवन पर हमला हुआ, लाल किले पर हमला हुआ, यह सब आपके ही राज में हुआ था। आपके समय में ही आतंकवाद सबसे ज्यादा फैला और आप हर मोर्चे पर विफल रहे। अब प्रधान मंत्री जी पर मिथ्या आरोप लगा रहे हैं।
सभापति महोदया : मानवेन्द्र जी, आप बैठ जाएं, क्योंकि वह ईल्ड नहीं कर रहे हैं।
प्रो. विजय कुमार मल्होत्रा: हमने पोटा खत्म नहीं किया था, हमने बांग्लादेशियों को बिठाए रखने के लिए आईएमडीटी एक्ट को बनाए रखने की बात नहीं की थी। हमने पंजाब में खालिस्तानी पैदा नहीं किए थे। हमने पाकिस्तान को यह कहा था कि जब तक उनके यहां से आतंकवाद खत्म नहीं होगा, हम वार्ता में हिस्सा नहीं लेंगे।…( व्यवधान)
SHRI RAVICHANDRAN SIPPIPARAI (SIVAKASI): What is the use of POTA?
सभापति महोदया : वह ईल्ड नहीं कर रहे हैं इसलिए आप बैठिए। किसी के भाषण में टोका-टाकी नहीं होनी चाहिए। जब आपका समय आएगा, तब आप अपनी बात कहें।
प्रो. विजय कुमार मल्होत्रा : पंजाब में शांति कायम हुए करीब एक दशक हो गया है, फिर यह खालिस्तानी मानव बम कहां से पैदा हो रहे हैं…( व्यवधान) मैं पेपर नहीं पढ़ रहा हूं, सिर्फ आर्टिकल पढ़ रहा हूं। लेखक लिखता है कि "मेरा मानना है कि आतंकवाद की वापसी का सबसे बड़ा कारण मनमोहन सिंह सरकार है। …* पिछले सप्ताह अयोध्या में जो आत्मघाती हमला हुआ, उसके उपरांत प्रधान मंत्री को चिंता इस बात की थी…( व्यवधान)
कुँवर मानवेन्द्र सिंह (मथुरा) : यह शब्द अससंदीय है, इसे निकाल दिया जाए।
*Expunged as ordered by the Chair.
सभापति महोदया : अगर कोई शब्द असंसदीय होगा, तो वह रिकार्ड से निकाल दिया जाएगा। मैं उसे देख लूंगी। आप बीच में न बोलें। मल्होत्रा जी, आप चेयर को एड्रैस करें।
प्रो. विजय कुमार मल्होत्रा : मनमोहन सिंह जी को या इस सरकार को चिंता इस बात की नहीं थी कि अयोध्या में राम जन्म भूमि को नुकसान पहुंचा या नहीं। उन्हें चिंता इस बात की थी कि कहीं इसका फायदा संघ परिवार या दूसरे लोग न उठा लें। इस बात से ये लोग चिंतित थे। फिर हुर्रियत के लोगों को बिना परमिट के, बिना पासपोर्ट के कैसे पाकिस्तान जाने दिया?…( व्यवधान) अगर आप इजाजत दें तो बोलूं…( व्यवधान)
प्रो. रासा सिंह रावत (अजमेर) : ये लोग चिल्ला कर क्या कहना चाहते हैं?
सभापति महोदया : इस तरह से टोका-टाकी करना, कोई सही तरीका नहीं है। जब आपको बोलने का अवसर मिलेगा, तब आप अपनी बात कहें, लेकिन बीच में न बोलें।
श्री अवतार सिंह भडाना (फरीदाबाद) : अटल जी ही सबसे पहले पाकिस्तान गए थे और आपने ही वार्ता पहले शुरू की थी।
प्रो. विजय कुमार मल्होत्रा : जब हमने शांति वार्ता की थी, तो मुशर्रफ साहब से यह लिखवाया था कि पाकिस्तान की धरती से आतंकवाद खत्म होना चाहिए। हमने इनकी तरह से नहीं किया था।…( व्यवधान)
श्री सुरेन्द्र प्रकाश गोयल (हापुड़) : कारगिल वार आपके समय ही हुई थी।…( व्यवधान)
प्रो. विजय कुमार मल्होत्रा : इस सरकार ने पाकिस्तान के साथ बातचीत में आतंकवाद की बात करना ही बंद कर दिया।
सभापति महोदया, हुर्रियत के लोग बिना परमिट, बिना पासपोर्ट हिंदुस्तान के बाहर जाते हैं और वहां जाकर हिंदुस्तान के खिलाफ जहर उगलते हैं, अपशब्द कहते हैं, जैहादियों को तैयार करते हैं। इसलिए कश्मीर के अंदर आपकी नीति के कारण ही हालात बिगड़ रहे हैं।
सभापति महोदया, मैं यह कहना चाहता हूं कि हिंदुस्तान में इस सरकार ने एक वर्ष में जिस-जिस तरह से आतंकवाद को बढ़ावा मिला है, उसका कारण है कि इन्होंने अपने राजनीतिक हितों के लिए, राजनैतिक स्वार्थों के लिए, आपने देश के हितों के साथ गद्दारी की है। कुछ सीटें इन्हें प्राप्त हो जाएं, इसलिए ये नक्सलवादियों से समझौता करते हैं, इसलिए आसाम में बंगलादेशियों से समझौता करते हैं, कर्नाटक और आंध्राा प्रदेश में नक्सलाइट्स के साथ मिलकर चुनाव लड़ते हैं और सारे देश की आंतरिक सुरक्षा को खतरे में डालते हैं। …( व्यवधान)
सभापति महोदया : अगला स्पीकर आपकी तरफ का है, क्या उसको बोलने नहीं देना है। कृपा करके आप बीच में टोका-टाकी न करें। यह कोई तरीका नहीं है, आप बैठ जाइये।
प्रो. विजय कुमार मल्होत्रा : यूपीए सरकार के आने के बाद यहां पर अनेक घोषणाएं की गयीं, मनिमम प्रोग्राम के बारे में घोषणा की गयी कि आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई जारी रहेगी, लेकिन आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई लड़ने के बजाए आप भारतीय जनता पार्टी से लड़ना चाहते हैं, आप लड़ना चाहते हैं हिंदुत्व की शक्तियों से, आपका निशाना इस तरफ है, आपका निशाना आतंकवाद नहीं है। मैं यूपीए सरकार और माननीय प्रधान मंत्री पर चार्ज लगाता हूं कि उन्होंने अपनी सीटों के लिए, राजनैतिक स्वार्थों के लिए, देश को बर्बादी के कगार पर लाकर खड़ा कर दिया है, आतंकवाद के घेरे में ला दिया है। देश के १५० जिलों को नक्सलवादियों के हाथों में, सारे असम को बंगलादेशियों के हाथों में, पंजाब को खालिस्तानियों के हाथों में और बाकी देश को आतंकवाद के साये में ले आये हैं। …( व्यवधान) मैं बलपूर्वक कहना चाहता हूं क राम जन्मभूमि पर चाहे हजार आतंकवादी आ जाएं, राम मंदिर निर्माण को रोकने की कोशिश सारी कांग्रेस और उसके सहयोगी दल कितना भी कर लें, राम जन्मभूमि पर राम मंदिर बनेगा और उसको दुनिया की कोई ताकत रोक नहीं सकती। …( व्यवधान) देश को इस प्रकार से आप नष्ट न करें और अपने राजनैतिक स्वार्थों के लिए देश के हितों की बलि न दें। …( व्यवधान)
अध्यक्ष महोदया, अंत में मैं केवल इतना ही कहना चाहता हूं कि एक वर्ष में जो कुछ इन्होंने किया, उसको देखते हुए, आने वाली पीढि़यां यह न कहें कि एक वर्ष में यूपीए की सरकार ने आतंकवाद को प्रोत्साहन दिया और देश को आतंकवाद के घेरे में लाकर के खड़ा कर दिया। आने वाली पीढि़यां जयचंद की तरह से और मीरजाफर की तरह से आपको याद न करें, इस पर आप विचार करें ।
डॉ. राजेश मिश्रा (वाराणसी) : सभापति महोदया, मैं आपका आभारी हूं कि इस महत्वपूर्ण विषय पर आपने हमें बोलने का मौका दिया। सबसे पहले तो हम पांच जुलाई २००५ को जो अयोध्या में आतंकवादियों के प्रवेश की कोशिश को हमारी पैरा-मलिट्री फोर्स ने मार गिराने का काम किया, मैं उन बहादुर सिपाहियों को बधाई देना चाहता हूं। यह पहली बार हुआ है हिंदुस्तान में कि पांच आतंकवादी मार गिराये गये। …( व्यवधान)
16.00 hrs. डॉ. राजेश मिश्रा : हमारा अगला वाक्य तो सुन लीजिए।…( व्यवधान) उसके बाद बोलिएगा।
प्रो. एस.पी.सिंह बघेल (जलेसर) : इससे पूरी फोर्स का मनोबल गिरेगा।
डॉ. राजेश मिश्रा : महोदया, मुझसे एक वाक्य छूट रहा था, छूट नहीं रहा था, बल्कि मैं उसी पर बोलने जा रहा था कि हमारे पैरा मिलेट्री फोर्स, पुलिस और पीएसी की फोर्स ने मिलकर, ऐसा हिन्दुस्तान के अंदर पहली बार हुआ कि पांच-पांच आतंकवादी मार गिराए गए, जबकि वहां बहुत पब्लिक खड़ी थी, वहां पर मौजूद किसी भी व्यक्ति को कोई नुकसान नहीं हुआ, कोई डिस्टर्ब नहीं हुआ। महोदया, शायद इससे ज्यादा आतंकवादियों के ऊपर …( व्यवधान) आप चुप रहिए, हमें बोलने दीजिए।
सभापति महोदया : मैं सदन के सदस्यों से प्रार्थना करना चाहती हूं। यहां पर सभी को समय मिलना है। हर पार्टी को समय मिलना है, फिर हम क्यों बीच-बीच में बच्चों की तरह हरकत करते हैं? सभी को अपना-अपना समय मिलेगा, तब अपनी बात रखिएगा।
डॉ. राजेश मिश्रा : महोदया, मैं अपनी पुलिस और पैरा मिलेट्री फोर्स को इसके लिए बधाई देना चाहता हूं। महोदया, मैं अभी सम्मानित मल्होत्रा जी के विचार सुन रहा था, जो इस सदन के काफी वरिष्ठ नेता हैं, हम लोग तो नए सदस्य हैं। मुझे ऐसा महसूस हो रहा था कि आदरणीय मल्होत्रा जी जब आतंकवाद, उग्रवाद और अयोध्या के कांड पर बहस चलाएंगे, तो ईमानदारी के साथ हिन्दुस्तान में आतंकवाद को कैसे रोका जाए, इस पर बात करेंगे, लेकिन मुझे उनकी बातों को सुनकर बड़ा ताज्जुब हुआ। मुझे लगा कि सदन के अंदर या बाहर राजनीति करने के लिए और वोट लेने के लिए यदि बीजेपी और एनडीए के लोग साम्प्रदायिकता की बात करते हैं, तो समझ में आता है कि ये इससे वोट चाहते हैं। लेकिन जब आतंकवाद और उग्रवाद में सांप्रदायिक बातों को घुसेड़ने लगते हैं, तो ऐसा महसूस होता है कि ये इस पर चर्चा नहीं करना चाहते, बल्कि इसमें भी इनको कहीं न कहीं वोट की लालच और झलक दिखाई पड़ रही है, इसलिए ये इस पर बहस करना चाहते हैं। मैं सम्मानित मल्होत्रा जी से जानना चाहता हूं कि क्या उन्हें मंदिर मुद्दे पर चर्चा करनी है, आपने तो १२-१३ साल मंदिर बनवाया, लोगों का विश्वास आप पर कैसे होगा, यह आप का काम है, हमारा काम नहीं है। मैं इतना जरूर कहूंगा कि आज तक नेताओं और सरकारों पर यह आरोप लगता रहा है कि इन्होंने जनता से फलाँ बात का वायदा करके वोट मांगा था और इन्होंने जनता का धोखा दिया, लेकिन आप पर तो यह आरोप लगा कि आपने सिर्फ जनता को धोखा नहीं दिया, बल्कि जब सरकार में आए, तो भगवान को भी धोखा दिया। अब आप खुद इसकी सफाई दीजिए कि आप इसकी सफाई कैसे दे सकते हैं? यह हमारे लिए चिंता का विषय नहीं है, यह आपके लिए चिंता का विषय हो सकता है। हम आदरणीय मल्होत्रा जी की बात सुन रहे थे, सारे मदरसे, सारी मस्जिदें, जितनी इन्हें हिन्दुस्तान या हिन्दुस्तान के बार्डर पर दिखाई पड़ती हैं, उनमें आतंकवादी, उग्रवाद और न जाने कौन-कौन पलते हैं, ऐसी चर्चा कर रहे थे…( व्यवधान) महोदया, मैं कहना चाहता हूं कि कहीं पर मंदिर हो, मस्जिद हो, विद्यालय हो या मदरसा हो, जहां भी कोई व्यक्ति अपना सिर झुकाता है। कोई अपना सिर मंदिर में झुकाता है, कोई अपना सिर मस्जिद में झुकाता है, कोई अपना सिर गुरूद्वारे में झुकाता है।
योगी आदित्यनाथ (गोरखपुर) : काशी विश्वनाथ के बारे में कुछ बोलिए।…( व्यवधान)
डॉ. राजेश मिश्रा : मैं बोलूंगा, आप बैठ जाइए। आप क्यों चिंतित है? आप सरकार में रहकर कुछ नहीं कर पाए। हम सरकार में रहकर उसे कर रहे हैं। आप सुनने का हौसला रखिए।…( व्यवधान)
महोदया, बड़ा ताज्जुब होता है जब शिक्षा देने की जगह पर आतंकवादी घुसते हैं। जहां लोग अपना सिर झुकाते हैं, वहां इन्हें आतंकवादी नजर आते हैं। हम सामने बैठे लोगों से पूछना चाहते हैं कि क्या आपने कभी सोचा है कि आतंकवाद हिन्दुस्तान में इतनी तेजी से कब से पनपना शुरू हुआ है? हम आतंकवाद पर चर्चा करते हैं तो हमें कष्ट होता है। हमने अपने दो-दो महबूब नेताओं, श्रीमती इन्दिरा गांधी और श्री राजीव गांधी को आतंकवादियों से लड़ते हुए खोया है। आप आतंकवाद की बात करते हो। आप वह दिन याद करें जिस बोईंग विमान का अपहरण किया गया जो काठमांडू से दिल्ली आ रहा था, जिसे आतंकवादियों ने कंधार में उतारा था। आप कल्पना करिए कि शायद हिन्दुस्तान में इससे ज्यादा शर्मनाक दिन कोई दूसरा नहीं हो सकता है कि आतंकवादियों के सामने पूरे भारत की सरकार सरैंडर करती है। यह शर्म की बात है कि पूर्व सरकार के विदेश मंत्री अपने साथ बड़े-बड़े आतंकवादियों को जहाज में बैठा कर, जेल से छुड़वा कर, कंधार में सरैंडर करते हैं और उस जहाज को छुड़वाने का काम करते हैं। क्या इससे ज्यादा शर्म की दूसरी बात हो सकती है? …( व्यवधान)
16.07 hrs. (Shri Arjun Sethi in the Chair) शायद हिन्दुस्तान के लोकतंत्र में इससे ज्यादा दूसरा कोई शर्मनाक दिन नहीं हो सकता जब हिन्दुस्तान के पूर्व विदेश मंत्री, अपने ही जहाज में बड़े-बड़े आतंकवादियों को जेल से छुड़वा कर, खुद साथ बैठा कर ले जाते हैं और सरैंडर करते हैं। वह अंडर हैंड क्या-क्या देते हैं? हम यह सुनते हैं कि सोना-चांदी दिया गया, पैसा दिया गया लेकिन हमने देखा कि आतंकवादियों को जेल से छुड़वा कर भेजा गया। मैं कहना चाहता हूं कि वही काला दिन आजाद हिन्दुस्तान के लोकतंत्र में था, जहां से आतंकवाद तेजी से पनपने का काम करता है, यह चर्चा करते हैं कि अयोध्या में राम मंदिर बनना चाहिए। राम मंदिर का ठेकेदार कोई दल नहीं हो सकता। देश के करोड़ों नौजवान जो हिन्दू हैं, वे हो सकते हैं। उसमें किसी दल की मोहर नहीं लग सकती। हम भी पूजा करना जानते हैं लेकिन अगर हम पूजा करते हैं तो दिल से करते हैं, हम राजनीतिक स्वार्थ के लिए पूजा नहीं करते हैं, हम आध्यात्मिक हैं, इस नाते पूजा करते हैं, हम वोट मांगने के लिए कभी पूजा नहीं करते हैं। …( व्यवधान)
आप अयोध्या की घटना की चर्चा करते हैं, जहां सारे सारी आतंकवादी १० मिनट में ढेर हो जाते हैं। आपको वह दिन याद नहीं है कि इसी हिन्दुस्तान के लोकतंत्र में, जहां आत्मा बसती है, संसद, वहां आपके जमाने में आतंकवादी चले आते हैं। आपको उनकी चिन्ता नहीं सताती है। आपको उस समय बड़ा अच्छा राज समझ में आता था। आप मंदिरों के ठेकेदार बनते हैं। अक्षरधाम मंदिर में आतंकवादी घुस जाते हैं। कितने लोग मारे जाते हैं क्या उस समय आपके पास इसका जवाब था? गुजरात में चुनाव होते हैं। आप उसी के नाम पर वोट मांगने लगते हैं। हिन्दुस्तान में आतंकवाद जो बढ़ा है …( व्यवधान)
प्रो. विजय कुमार मल्होत्रा : अध्यक्ष महोदय ने पार्टी लीडर्स की मीटिंग बुलायी है। मैं उसमें जा रहा हूं। …( व्यवधान)
MR. CHAIRMAN : Nothing will go on record except the speech of Shri Mishra.
(Interruptions)* … डॉ. राजेश मिश्रा : महोदय, मैं कहना चाहता हूं कि संसद में आंतकवाद पर चर्चा हो रही है। शायद आजाद हिन्दुस्तान में यह पहली बार हुआ होगा कि एक तरफ पूर्ववर्ती सरकार पाकिस्तान से दोस्ती कर रही थी और बस सेवा बहाल कर रही थी तथा दूसरी तरफ आजाद हिन्दुस्तान की पहाड़ियों पर विदेशी चढ़ते हैं। यह पहली बार हुआ कि हमारी पहाड़ी, हमारी राइफल, हमारी सर-जमीन पर पाकिस्तानी सैनिक चढ़ते हैं। वे हमारे सैनिकों पर गोली चलाते हैं।
* Not Recorded.
इससे ज्यादा शर्म की दूसरी कोई बात हो सकती है और आप आज आतंकवाद की चर्चा करते हैं। आज आतंकवाद सिर्फ हिन्दुस्तान में ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया में है। दुनिया के सबसे शक्तिशाली देश अमरीका और ब्रिटेन हैं, श्रीलंका का आतंकवाद आपने अपनी नजरों से देखा है। आज पूरी दुनिया में आतंकवादी गतवधियां जिस तरह से तेज हो रही हैं, हम कहना चाहते हैं एनडीए को, कि सियासत नहीं होनी चाहिए, मिलजुल कर बात होनी चाहिए, जब तक मिलजुल कर बात नहीं होगी, सही रास्ते की तलाश नहीं होगी तब तक आतंकवाद को जड़ से उखाड़ कर नहीं फेंक सकते।
महोदय, पंजाब के अंदर, मिलेजुले लोग, जिनके जमाने में आतंकवाद चरम सीमा पर था, मैं यूपीए और वहां की सरकार को बधाई देना चाहता हूं जिसने आतंकवाद को घ्वस्त किया। जब तक मिलजुल कर आतंकवाद पर कोई पहल नहीं करेंगे, हम सियासत नहीं करेंगे, सांप्रदायिकता को नजदीक नहीं आने देंगे तब तक ईमानदारी से आतंकवाद से मुकाबला नहीं किया जा सकता।
महोदय, आज अयोध्या, काशी और मथुरा की सुरक्षा एक अहम समस्या है। मेरा निर्वाचन क्षेत्र है वाराणसी, और पुराणों में उसका नाम काशी है लेकिन आज उसका नाम वाराणसी है, बनारस है। हमारे सम्मानित गृहमंत्री जी यहां बैठे हैं, हम कहना चाहते हैं कि अयोध्या, काशी और मथुरा, जो हिन्दुस्तान के महत्वपूर्ण स्थल हैं, उनकी सुरक्षा के लिए कुछ भी कीजिए, पूरा हिन्दुस्तान आपके साथ है। हो सकता है कुछ लोग सियासत के नाम पर आपके साथ न हों लेकिन पूरा हिन्दुस्तान आपके साथ है लेकिन इसके साथ निश्चित रूप से मैं एक अनुरोध करूंगा कि अयोध्या का जो स्थान है वह पहाड़ी टीले पर है, वहां की सुरक्षा करना आसान है। काशी में बाबा विश्वनाथ जी का मंदिर है, वहां पर पच्चीस हजार मकान हैं। बनारस अपने आप में सबसे पुराना शहर है, गलियों का शहर है, वहां सड़कें कम और गलियां ज्यादा हैं। विश्वनाथ जी का जो मंदिर है उसके अगल-बगल में करीब बीस से पच्चीस हजार मकान हैं, छोटी-छोटी गलियां हैं, इन गलियों के माध्यम से लोग विश्वनाथ जी के दर्शन करते हैं। इसके बगल में सटी हुई मस्जिद है, वहां लोग नमाज अदा करते हैं। हम माननीय मंत्री जी से कहना चाहते हैं कि आप सुरक्षा के जो भी इंतजाम कर रहे हैं, कीजिए लेकिन एक बात को जरूर खयाल में रखिए कि जो मंदिर है, जो मस्जिद है, उसके अगल-बगल में बीस हजार मकान हैं, जो लोग वहां रहते हैं, उन मकानों के सामने उनकी दुकानें हैं जो उनकी जीविका है। वहां जिस तरह की पाबंदियां लगाई जा रही हैं, यदि रास्ते को ही रोक दिया गया तो वहां रहने वाले लोग बेघर हो जाएंगे, वहां जो दुकानदार हैं वे खाने के बिना मर जाएंगे और जो दर्शनार्थी और वे लोग जो नमाज अदा करने जाते हैं, नमाजी हैं वे दर्शन नहीं कर पाएंगे, नमाज अदा नहीं कर पाएंगे। इसलिए आप सुरक्षा से समझौता मत कीजिए लेकिन दर्शनार्थियों को, नमाजियों को, वहां के दुकानदारों और वहां के लोगों को कोई कष्ट नहीं होना चाहिए। जब से अयोध्या में ५ जुलाई की घटना हुई है और जिस तरह से अयोध्या, काशी और मथुरा का सुरक्षा कवच तेज किया गया, उसी समय से वहां के दुकानदारों के लिए, वहां के रहने वाले लोगों के लिए, बाबा विश्वनाथ जी के मंदिर के पुजारी और बगल की मस्जिद के हाफिज, सारे लोग आंदोलन की राह पर आए हैं क्योंकि सबको दिक्कत हो रही है। एक-एक या दो-दो पास इश्यू होते हैं और जिस तरह से लोग दर्शन जाते हैं, उनको दिक्कत होती है। नमाज अदा करने में दिक्कत हो रही है, वहां रहने वाले लोगों को रिश्तेदारों से मिलने में दिक्कत हो रही है। दुकानदारों को अलग तरह की दिक्कत है, आज उनके सामने पेट का सवाल है, अपने परिवार को पालने का सवाल है। इसलिए मैं माननीय गृहमंत्री जी अनुरोध करना चाहूंगा कि सुरक्षा के नाम पर समझौता कोई न हो लेकिन दर्शनार्थियों, नमाजियों, वहां रहने वाले लोगों और दुकानदारों को किसी तरह की दिक्कत नहीं हो। हमें पूरा विश्वास है कि यूपीए सरकार ने, वर्तमान सरकार ने एक नमूना पेश किया, अयोध्या में पांच मिनट के अंदर पांच आतंकवादियों को मारा गया…( व्यवधान) यूपीए सरकार में प्रदेश सरकार नहीं है क्या?…( व्यवधान)
सभापति महोदय, हम वे लोग नहीं हैं जिनके जमाने में आतंकवादी पार्लियामेंट में अंदर चले आयें और उसके बाद सीना खोलकर कहें कि हम आतंकवादियों के खिलाफ लड़े हैं। इन्हीं शब्दों और विश्वास के साथ कि हमारी वर्तमान सरकार आतंकवादियों से लड़ने का हौसला रखती है और निश्चित रूप से पूरे हिन्दुस्तान से आतंकवाद का खातमा करेगी।
MR. CHAIRMAN : Shri Sunil Khan, before you speak, I would just like to inform the hon. House that there are about 20 Members to speak and the time allotted is only two hours. So, I would like to request the Members that they should keep in mind the time allotted to them so that we can conclude the discussion on time.
SHRI SUNIL KHAN (DURGAPUR): How much time is allotted to my party?
MR. CHAIRMAN: Nineteen minutes. You may speak now.
श्री सुनील खां : सभापति महोदय, मैं आज जिस विषय पर बोलने के लिये खड़ा हुआ हूं, वह न केवल हिन्दुस्तान में बल्कि सारे अंतर्राष्ट्रीय जगत में आतंकवाद से रिलेटेड है। आज आं आदमी को रोटी,कपड़ा और मकान, शिक्षा और रोज़गार चाहिये और इसमें आम लोगों की सहमति हो सकती है लेकिन दुनिया में किसी का शोषण न हो, अगर ऐसा वातावरण हम बना लें तो आतंकवाद पैदा नहीं होगा। हमारी अपोजीशन पार्टी के मैम्बर श्री मल्होत्रा ने कहा कि हमने आतंकवाद खत्म करने के लिए पोटा बनाया और हम आतंकवाद को खत्म कर सकते हैं लेकिन हमने देखा है कि उनके सहयोगी पार्टी के नेता ने उसका विरोध किया। उस समय श्री वाइको, एम.डी.एम.के. नेता थे, जब पोटा के खिलाफ बोले तो उन्हें अरैस्ट किया गया। यह सही बात है और ऐसा हो गया…( व्यवधान)
MR. CHAIRMAN: Please sit down. Mr. Khan, you please address the Chair.
श्री सुनील खां : सभापति महोदय, वह अलग पार्टी के थे और उन्हें अरैस्ट किया गया था। कानून का विरोध करते हुये आदमी पकड़ा जाता है। एक और मिसाल हमारे सामने है। बी.जे.पी. सरकार ने एक १३ साल के बच्चे को आतंकवादी कहकर पकड़ा, आतंकवाद के नाम पर ८० साल के आदमी को पकड़ा,लेकिन जो असली आतंकवादी था, वह नहीं पकड़ा गया। अभी हमारे समाजवादी पार्टी के नेता ने कहा कि उत्तर प्रदेश में पांच आतंकवादियों को खत्म किया । ऐसा ही करना चाहिये, जो सही बात है।
सभापति जी, एन.डी. ए. सरकार ने होटल सैंतूर को बेच दिया गया। यहां तक कि पब्लिक सैक्टर की सम्पत्ति को बेचने के लिये आमादा रहे। इन लोगों ने जो कुछ किया, उससे आतंकवाद ज्यादा हो रहा था। इन्होंने धर्म के नाम पर अयोध्या में क्या काम किया। धर्म के नाम पर ये लोग आतंकवाद फैला रहे हैं। हम सब लोगों ने आजादी की लड़ाई एक साथ लड़ी थी। लेकिन इन लोगों ने क्या किया। भारत में ज्यादा से ज्यादा हिन्दू रहते हैं। लेकिन इन लोगों ने धर्म के नाम पर फासीवाद फैलाया और इसी कारण आज आतंकवाद फैल रहा है। लेकिन ये सब हम अपने देश में नहीं चलने देंगे। यदि हम लोग फासीवाद को खत्म करेंगे तो हम लोग अपने पैरों पर खड़े हो सकेंगे। …( व्यवधान) वर्ष २००१ में मैं एक डेलीगेशन के साथ आस्ट्रेलिया गया था। जब संसद शुरू हुई तो अमरीका के प्रेसीडैन्ट ने बोला कि तुम ऐसा कोई कानून बनाओ, तब हम सोचेंगे कि तुम लोग आतंकवाद के विरुद्ध हो। तब इन लोगों ने पोटा बना दिया। जो अमरीका ने बोला, वही इन्होंने कर दिया।
सभापति महोदय, जब अमरीका ने इराक के विरुद्ध युद्ध की घोषणा की थी, उस समय जो प्रधान मंत्री थे , उन्हें स्टेटमैन्ट देने में दो दिन का समय लग गया था। हमने कहा कि जो स्वतंत्र राष्ट्र हैं, उनके विरुद्ध यदि कोई बाहर का देश युद्ध की घोषणा करता है तो हम लोग उसके विरुद्ध हैं, हमारा राष्ट्र भी उसके विरुद्ध है। यही भारत की नीति है। इसलिए हम लोगों ने कहा कि स्टेटमैन्ट दीजिए तो वाजपेयी जी को उसमें दो दिन का समय लग गया। अमरीका के प्रेसीडैन्ट को उन्होंने फोन किया और पता किया कि हम कैसी लैंग्वेज यूज करेंगे। अंग्रेजी लैंग्वेज हम इस तरह से यूज करेंगे कि अमरीका सोचेगा कि हम उसके साथ हैं और हिन्दी में भारतीय लोग सोचेंगे कि इराक के विरुद्ध अमरीका ने जो युद्ध की घोषणा की है, हम उसके विरुद्ध हैं। यह बहुत शर्म की बात है। मैं यहां कुछ आंकड़े रखकर बताना चाहता हूं कि आतंकवाद पहले से अधिक कैसे फैला है। आप देखें कि वर्ष २००१ में ४५२२, वर्ष २००२ में ४०८०, वर्ष २००३ में ३४०१ और वर्ष २००४ में यह घटकर २५६५ हो गया। इस तरह से वर्ष २००४ में यह कम हो गया। हमे यह सोचना चाहिए कि आतंकवाद से देश में फासीवाद कायम हो जाता है।
स्वामी विवेकानंद जब वह अमरीका गये तो उन्होंने क्या कहा था। सारे अमरीकन्स ने कहा था कि भारत ऐसा शानदार देश है। उनसे पहले लोग लेडीज एंड जैन्टलमैन बोलते थे। लेकिन विवेकानन्द जी ने अपने संबोधन में सिस्टर्स एंड ब्रदर्स बोला था। ऐसा कहकर उन्होंने दुनिया के लोगों को एक नई रोशनी दी थी। लेकिन ये लोग क्या बोलेंगे। जो एक धर्म के प्रतीक के रूप में गेरुआ पहनते हैं। लेकिन इस गेरुए को पहनकर इन्हें बहुत गुस्सा आता है। जो गेरुआ पहनता है, उसे देश के बारे में अच्छा सोचना चाहिए। ये लोग गेरुआ पहनते हैं, माथा मुंडन करते हैं, खड़ाऊं पहनते हैं। लेकिन उसके बाद आप लोग क्या करते हैं, आप आम आदमी के विरुद्ध चले जाते हैं। आप कैसे साधु हैं। क्या साधु ऐसा होता है। साधु हमेशा आम आदमी की भलाई करता है।…( व्यवधान)
MR. CHAIRMAN : Yogi Aditya Nath, please sit down. Shri Sunil Khan is not yielding.
… (Interruptions)
श्री सुनील खां : हमारे देश में थोड़ी बहुत कांग्रेस से भी गलती हुई है। राम मंदिर के समय ईंट की पूजा की थी, जो नहीं करनी चाहिए थी। ठीक है जो गलत था वह इंट्रोस्पैक्शन हो गया। मैं कहना चाहता हूं कि अगर हम लोग आम सहमति से देश के कानून को आतंकवाद के विरुद्ध लागू करेंगे तो देश में आतंकवाद कम हो जायेगा।
आज भारत की कम से कम ३२ करोड़ जनसंख्या गरीबी रेखा के नीचे जीवनयापन करती है। इसके लिए सरकार ने साल में कम से कम सौ दिन का रोज़गार देने की योजना चलाई है जिसके अंतर्गत आप ११ हजार करोड़ रुपये १५० जिलों के लिए देंगे लेकिन समूचे भारत में जितनी ऐसी जनता है, उसके लिए कम से कम ४० हजार करोड़ रुपये की जरूरत है। हमारे यहां १,३०,००० करोड़ रुपये एन.पी.ए. में हैं। उसमें एम.पीज़ भी हैं। जिन लोगों ने इनकम टैक्स नहीं दिया, यदि उसका ५० प्रतिशत भी भारत सरकार ले तो वह ४० हजार करोड़ रुपये बनता है। अगर गरीब लोगों को सौ दिन का काम एक साल में मिल जाएगा तो गरीबी रेखा के नीचे रहने वाले लोग आतंकवाद से नहीं जुड़ेंगे।
महोदय, आज दुनिया में अमेरिका जैसे देश चाहते हैं कि उनका ही सामान हम खरीदें। डब्लू.टी.ओ. के मैम्बर वे भी हैं और हम भी हैं, लेकिन अमेरिका, फ्रांस, जापान और जर्मनी ने एक मसौदा तैयार किया है बाय अमेरिकन ऐक्ट, बाय फ्रैन्च एक्ट, बाय जापान एक्ट, इसलिए सैन्ट परसैन्ट माल वे लोग आपको बेचने नहीं देंगे। Why are you not making our own ‘Buy-Indian Act’ to protect our own home/ domestic industry? ऐसा करने से जब आम जनता यह समझ जाएगी कि यह देश मेरा देश है, इस देश में रोज़ी-रोटी, मकान, स्वास्थ्य, शिक्षा सब कुछ मिलेगी तो आतंकवाद कभी नहीं फल सकता है। हमारे पश्चिम बंगाल के बार्डर पर पूरी बॉर्डर फैन्िंसग नहीं है। मैं कहना चाहता हूं कि पूरे देश के इंटरनेशनल बॉर्डर पर फैन्िंसग ठीक तरह से हो और बॉर्डर सिक्यूरिटी फोर्सेज़ को मज़बूत बनाया जाए, इस ओर मैं रक्षा मंत्री जी का ध्यान दिलाना चाहूंगा।
महोदय, कुछ दिन पहले हम उत्तरांचल गए तो हमने देखा जिसका जिक्र आज एक तारांकित प्रश्न में भी है कि नवशूद्र पश्चिम बंगाल में अनुसूचित जाति में हैं लेकिन उत्तरांचल में वे अनुसूचित जाति में नहीं हैं। उनको रिजर्वेशन नहीं मिलता। जो लोग ईस्ट पाकिस्तान से आए और रीहैबलिटेट हुए, उनको भी रिज़र्वेशन नहीं मिलता। बंगाल के बार्डर पर क्या होता है कि बीएसएफ द्वारा कुछ अच्छे आदमियों को भी पकड़ लिया जाता है, हालांकि सब अधिकारी ऐसा नहीं करते। अगर वे उनसे सहमत नहीं होते तो कहते हैं कि आप आतंकवादी हैं। अगर इसको रोकने के लिए भी हम कानून बना सकें तो हमारे देश में आतंकवाद नहीं फैलेगा।
इतना कहते हुए मैं अपनी बात समाप्त करता हूं।
...( व्यवधान)
सभापति महोदय : स्वाईं साहब, आप बैठ जाइए।
...( व्यवधान)
MR. CHAIRMAN: Nothing will go on record.
(Interruptions)* … श्री रामजीलाल सुमन (फ़िरोज़ाबाद) : सभापति महोदय, देश और दुनिया में जो आतंकवादी घटनाएं हुई हैं, और खासकर अयोध्या में, उस सवाल को लेकर यह सदन चर्चा कर रहा है। मल्होत्रा जी अपना भाषण करने के बाद चले गए।
प्रो. रासा सिंह रावत (अजमेर) : स्पीकर साहब ने मीटिंग बुलाई है। वहां गए हैं।
श्री रामजीलाल सुमन : ठीक है, लेकिन यहां नहीं हैं।
काफी लंबी तकरीर उन्होंने की, लेकिन निराशाजनक थी जिसमें कोई तथ्य नहीं थे। यह और बात है कि जो बात उन्होंने की, वह मात्र एक बहाना था। सही मायनों में बीजेपी का मकसद एक बार फिर अयोध्या को हवा देना है और यही मकसद इस सदन में आतंकवाद पर चर्चा कराए जाने का था।
जहां तक समाजवादी पार्टी का सवाल है, १३वीं लोकसभा में श्री मुलायम सिंह जी सदन के सदस्य थे और उस समय भी आतंकवाद पर चर्चा हुई थी। आतंकवाद के मामले में हमारा द्ृष्टिकोण बिलकुल स्पष्ट था और सभी मानते हैं कि यह किसी सरकार की समस्या नहीं है, यह पूरे देश की समस्या है। हम लोगों ने उस समय भी कहा था कि पूरे देश को मिल कर आतंकवाद से लड़ना चाहिए। श्री मल्होत्रा जी जिस प्रकार से तकरीर कर रहे थे, उससे ऐसा लग रहा था कि सिर्फ सवा साल में ही यह समस्या पैदा हो गई है और जब यह सरकार में थे, तब इस प्रकार की कोई समस्या नहीं थी। आतंकवाद आज ही पैदा हो गया है। यह किसी भी कीमत पर न्यायसंगत नहीं है और यह दर्शाता है कि जब यह सरकार में थे तब इनके मानक दूसरे थे और आज जब ये सरकार में नहीं हैं तो इनका बातें करने का तौर-तरीका बदल गया है। यह समस्या केवल हिन्दुस्तान की नहीं है। लंदन में ७ जुलाई और २१ जुलाई को और चार साल पहले न्यूयार्क के विश्व व्यापार केंद्र पर जो आतंकवादी हमला हुआ, उससे यह समस्या पूरी दुनिया की समस्या बन गई है। जैसा हमारे रक्षा मंत्री जी ने कल राज्यसभा में स्वीकार किया कि जून और जुलाई के महीने में आतंकवादी घंटनाएं और बढ़ी हैं और यह भी सही है कि जनवरी, २००४ में जो वायदा श्री परवेज मुशर्रफ ने किया था कि आतंकवाद के लिए हम पाकिस्तानी जमीन का इस्तेमाल नहीं होने देंगे, उस वायदे को पूरा करने का काम श्री परवेज मुशर्रफ ने नहीं किया।
* Not Recorded.
सभापति महोदय, इन लोगों ने कहा कि आतंकवादी घटनाएं बढ़ रही हैं। हमारे कांग्रेस के मित्र बोल रहे थे तो उन्होंने अमरनाथ यात्रा, रघुनाथ मंदिर, चिरारे शरीफ, हजरत बल दरगाह, कंधार विमान कांड का जिक्र किया और इसी संसद पर हमले का जिक्र किया। श्री मलहोत्रा ने कहा क हमारे पास आतंकवाद से लड़ने का एक सबल हथियार पोटा था और सरकार ने उसे भी खत्म कर दिया है। जब इस सदन में पोटा पर चर्चा हुई थी, उस समय भी हम लोगों ने कहा था कि टाडा का अनुभव हमारे पास है और आप पोटा कानून बना रहे हैं। टाडा के तहत तमाम बेगुनाह लोग गिरफ्तार हुए, लेकिन ९० फीसदी लोगों पर सरकार कोई आरोप सिद्ध नहीं कर पाई। आप जो पोटा कानून बना रहे हैं ये आपने राजनीतिक विरोधियों के खिलाफ इस्तेमाल करेंगे और अक्लियत के लोगों के खिलाफ इस्तेमाल करेंगे, और यही हुआ। गुजरात में क्या हुआ, कितने ही बेगुनाह आदमी पोटा में बंद हैं। सांप्रदायिक तत्वों ने नंगा नाच किया, अक्लियत के लोगों को पोटा में गिरफ्तार करने का काम हुआ और जो समीक्षा समति बनी थी, उस समति ने कहा कि ये जो लोग पकड़े गए हैं, ये बेगुनाह हैं और इनको छोड़ा जाए, लेकिन गुजरात की सरकार ने आज तक उन लोगों को नहीं छोड़ा है। इन लोगों ने पोटा का इस्तेमाल अक्लियत के लोगों और अपने विरोधियों के खिलाफ हथियार के रूप में किया और मुझे खुशी है कि वह पोटा कानून खत्म हुआ।
सभापति महोदय, मैं आपकी मार्फत खास तौर से अयोध्या की बात को कहना चाहूंगा। उत्तर प्रदेश विधान सभा में अयोध्या कांड को ले कर विस्तार से चर्चा हुई और क्या-क्या आरोप बीजेपी के लोगों ने सरकार पर नहीं लगाए। पिछली सरकार के गृह राज्यमंत्री का आरोप है कि अगर उत्तर प्रदेश के विवादित स्थल अयोध्या परिसर की ठीक देखभाल सरकार नहीं कर सकती है तो उसे हिंदुओं के हवाले कर दे। जब वह सरकार में गृह राज्यमंत्री थे। उन्हीं के सामने तमाम घटनाएं हुई थीं। वहां पर सुरक्षा की कमियां गिनाई गईं। पूरे हिन्दुस्तान के वातावरण को खराब करने की कोशिश की गई, लेकिन मैं देश की जनता को बधाई देना चाहता हूं कि बीजेपी ने जो वातावरण बिगाड़ने की कोशिश की, वह उस कोशिश में कामयाब नहीं हो पाई। जिन-जिन सूबों में इनकी सरकार थी, वहां आंदोलन कराने की कोशिश की गई। इंदौर के हवाई अड्डे पर कब्जा करने का काम बीजेपी के लोगों ने किया। लेकिन कुल-मिला कर पूरे देश के लोगों ने जो प्रतक्रिया दिखाई, उस प्रतक्रिया का सीधा-सादा मतलब यह हुआ कि देश के लोग मंदिर के सवाल पर इन लोगों के बहकावे में आने वाले नहीं हैं और देश की जनता ने बता दिया।
अयोध्या के विवादास्पद परिसर में पांच लोग एक मार्शल जीप से आए। जीप से नीचे उतरने के बाद, मार्शल जीप को विस्फोट से उड़ा दिया और बैरीकेड में सुराग बनाकर अधिकृत परिसर में घुस गए। उन्होंने सी.आर.पी.एफ., उत्तर प्रदेश पुलिस और पी.ए.सी. के लोगों पर फायर किए और ग्रेनेड फेंके। आतंकवादी परिसर में घुस तो गए, लेकिन मैं धन्यवाद देना चाहता हूं उन सुरक्षा बलों को, जिन्होंने अपनी जान की बाजी लगाकर उनको जिन्दा नहीं रहने दिया, उन्हें मार गिराया। आधे घंटे में ही इस संपूर्ण कार्रवाई को अंजाम दे दिया गया और एक भी सुरक्षाकर्मी नहीं मरा।
जिस समय आतंकवादियों ने जीप को उड़ाया, उस समय रास्ते में जा रहे एक रमेश पांडे नाम के व्यक्ति की मृत्यु हो गई। दर्शनों के लिए जा रही श्रीमती शांति देवी और एक किशन स्वरूप, घायल हुए। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि जब यह घटना हुई, तो राज्य सरकार को, उत्तर प्रदेश की पुलिस को, तथ्यों के बारे में कोई जानकारी नहीं थी, लेकिन केन्द्रीय सुरक्षा बलों और प्रदेश सरकार की सुरक्षा एजेंसियों ने अपने मेहनत के बलबूते घटना का पर्दाफाश किया और पूरी अधिकृत जानकारी प्राप्त कर ली गई कि आतंकवादी कहां से आए थे, उनकी किन-किन ने इमदाद की, उनका ठिकाना कहा था, यह पूरा चिट्ठा खोलने का काम किया। इसके लिए उत्तर प्रदेश पुलिस बधाई की पात्र है। मैं उसकी सराहना करता हूं।
सभापति महोदय, बी.जे.पी. के लोगों ने कहा कि वहां जीप कैसे चली गई। मैं बताना चाहता हूं कि परिसर के पास अनेक धर्मशालाएं एवं मकान हैं जहां लोग रहते हैं। पहले वहां जीप नहीं जाती थी। लोग वहां अपने वाहनों के साथ जाना चाहते हैं। इसलिए इन्हीं लोगों ने, हिन्दू संगठनों ने वहां इसका भारी विरोध किया और कहा कि जो लोग वाहन लेकर दर्शन करने आना चाहते हैं, उन्हें अपने वाहन लेकर आने दिया जाए। चूंकि विवादास्पद परिसर के चारों तरफ अनेक मकान और धर्मशालाएं बनी हुई हैं, इसलिए वाहनों पर प्रतिबन्ध लगाना ठीक नहीं है। यह सवाल हमने नहीं उठाया, इन्हीं ने उठाया।
सभापति महोदय, इन लोगों ने दूसरा सवाल उठाया कि सुरक्षा बलों में कुछ कमी कर दी गई। मैं बताना चाहता हूं कि उत्तर प्रदेश के पुलिस महानिदेशक जब फैजाबाद गए, तो वहां अनेक संगठनों एवं पत्रकारों ने यह ज्ञापन दिया कि अयोध्या परिसर में सुरक्षा बलों की भारी तैनाती से कठिनाई और व्यवधान पैदा होता है। इसलिए इसमें आंशिक कमी कर दी जाए। पुलिस महानिदेशक ने कहा कि मुझे इस बारे में जानकारी नहीं है, लेकिन फिर भी आपके ज्ञापन को अयोध्या परिसर की सुरक्षा के लिए बनी समति को मैं विचारार्थ प्रस्तुत करुंगा ।
सभापति महोदय, बी.जे.पी. के नेता श्री लालजी टंडन ने, उत्तर प्रदेश विधान सभा में बहस शुरू करते हुए सबसे पहले यही आरोप लगाया कि सुरक्षा बलों में कमी कर दी गई। ये लोग असत्य और मनगढ़ंत आरोप लगाने में तो माहिर हैं। कुल मिलाकर, मेरे पास पूरे दस्तावेज हैं। जिस दिन से यह घटना हुई है, उसके बाद से उत्तर प्रदेश की पुलिस, सुरक्षा बलों और खुफिया संस्थानों ने कितना आलीशान काम किया, उसकी मिसाल नहीं है। श्री नन्द किशोर और मुख्य आरक्षी श्री सुल्तान सिंह को एक-एक लाख रुपए और श्रीमती शान्ति देवी तथा श्री किसन स्वरूप को ५०-५० हजार रुपए उत्तर प्रदेश के माननीय मुख्य मंत्री जी ने दिए हैं।
सभापति महोदय, इस सदन में हम आए दिन पुलिस की निन्दा करते हैं। हर बात पर पुलिस की आलोचना करते हैं। पुलिस के तौर-तरीकों की आलोचना करते हैं, लेकिन यदि कहीं पुलिस अच्छा काम करे, तो उसकी हौसला अफजाई भी करनी चाहिए। इसीलिए उत्तर प्रदेश के मुख्य मंत्री ने पी.ए.सी. के २२ कर्मियों को आउट ऑफ टर्न प्रमोशन देने का काम किया है। वहीं सुरक्षा में लगे जिन पुलिसकर्मियों ने अच्छा काम किया है, उनको २५ लाख रुपया देने की घोषणा की है।…( व्यवधान)
श्री मोहन सिंह (देवरिया) : घोषणा नहीं की, दे दिया।
श्री रामजीलाल सुमन : दे दिया। मैं बस दो मिनट में समाप्त करता हूं। मैं एक ही निवेदन आपके मार्फत करना चाहूंगा और वह यह है कि यदि ये अयोध्या के सवाल पर बोलते हैं तो इनकी परेशानी मेरी समझ में आती है। लालकृष्ण आडवाणी जी यहां नहीं हैं, वरना मैं उनसे फरियाद करता, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ उनके बारे में क्या कहता है और दूसरे हिन्दू संगठन क्या कहते हैं, वह एक अलग सवाल है, लेकिन मैं एक बात जरूर कहना चाहूंगा, इनका किस हद तक दोहरा आचरण है। जब ये यहां बैठते थे, उप-प्रधानमंत्री थे और गृह मंत्री थे तो बात कहते थे कि अयोध्या विवाद के दो ही हल हैं, या तो हिन्दू-मुसलमान आपस में बात कर लें या अदालत के फैसले को मान लिया जाये। लेकिन जब ये रायबरेली की अदालत में गये तो लालकृष्ण आडवाणी जी फरमाते हैं कि मन्दिर तो वहीं बनेगा।…( व्यवधान) स्वामी जी, आप चुप रहिये, बाबा लोग ज्यादा नहीं बोलते।…( व्यवधान)
MR. CHAIRMAN : Swamy Ji please.
श्री रामजीलाल सुमन : ये लोग अभी सबक सीखने को तैयार नहीं हैं। विजय कुमार मल्होत्रा जी, एक जज्बाती सवाल पर लालकृष्ण आडवाणी जी की रथयात्रा से लेकर आप किसी तरह से ताकत में आ गये। मैं आपके मार्फत निवेदन करना चाहूंगा कि राजनीतिक भावनाओं को भड़काकर नहीं हो सकती, राजनीति भूख से, प्यास से, किसानों की समस्याओं से, बेरोजगारी से, लाचारी से जुड़ी समस्याओं पर होती है। दुनिया और हिन्दुस्तान के बुनियादी सवालों पर आपकी ताकत में इजाफा नहीं हुआ था, जज्बात से हुआ था। भावनाओं को आधार बनाकर एक लम्बे समय तक ताकत में नहीं रह सकते और इसलिए उत्तर प्रदेश विधान सभा के जो उप चुनाव हुए हैं, उनसे आप सबक सीखने को तैयार नहीं हैं। एक विधान सभा क्षेत्र को छोड़कर कहीं आपकी जमानत नहीं बची। आप रोज़ अयोध्या का नारा लगाते हैं, मन्दिर वहीं बनेगा, कुछ समय के लिए लोग आपके चक्कर में फंस गये थे, गलतफहमी दूर कर लीजिएगा, दोबारा लोग आपके चक्कर में आने वाले नहीं हैं। आप गलतफहमी का शिकार हो सकते हैं…( व्यवधान) मैं खत्म कर रहा हूं।
लालकृष्ण आडवाणी जी अगर यहां होते तो मैं उनसे प्रार्थना करता कि बी.जे.पी. का सत्ता में आने का जब इतिहास लिखा जायेगा तो कहा जायेगा कि आडवाणी जी रथ लेकर निकले थे, हिन्दू भावनाओं को भड़काया । लेकिन मल्होत्रा जी, बी.जे.पी. के पतन का इतिहास भी जब लिखा जायेगा तो लिखा जायेगा कि आडवाणी जी अध्यक्ष थे, वही प्रतिपक्ष के लीडर थे, उसी समय बी.जे.पी. की दुर्गति हुई, लिहाजा आप जितनी जल्दी उनको छुट्टी दे सको, आपकी बड़ी कृपा होगी, यह मेरा संदेश आप उन तक पहुंचा दें।
MR. CHAIRMAN : Please conclude.
श्री रामजीलाल सुमन : मैं अपनी बात खत्म कर रहा हूं। मैं एक प्रार्थना और करना चाहूंगा। श्री शिवराज पाटिल जी, गृह मंत्री यहां बैठे हैं, हम बधाई देना चाहेंगे कि उत्तर प्रदेश सरकार को काफी सहयोग और समर्थन गृह मंत्री जी ने दिया है और जो वस्तुस्थिति थी, उसको समझा और अयोध्या में जो वक्तव्य दिया, हम उनके वक्तव्य की दाद देते हैं, उनका शुक्रिया अदा करते हैं, धन्यवाद ज्ञापित करते हैं, लेकिन गृह मंत्री जी जरा मेरी तरफ देखिये। मेरी आपसे प्रार्थना है कि आपके जो छोटे मंत्री हैं, राज्य मंत्री जी हैं, ये उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष भी रहे, मानो धरती फाड़कर चले आये। इनको ज्यादा बोलने की आदत है। ये हिन्दुस्तान के गृह राज्य मंत्री हैं। गृह राज्य मंत्री फरमाते हैं कि उत्तर प्रदेश सरकार की सुरक्षा में कोई चुक रह गई। मैं आपके मार्फत निवेदन करना चाहूंगा, कांग्रेस पार्टी को यह नहीं भूल जाना चाहिए कि आप यहां जो बैठे हुए हैं, उसमें कहीं न कहीं समाजवादी प्रार्टी का योगदान है। उत्तर प्रदेश में आप आज बी.जे.पी. को रोक नहीं सकते तो पूरी जिंदगी फिर आप ताकत में नहीं आ सकते। कितनी कमी है, १० ही लोग तो आप बी.जे.पी. से ज्यादा हैं, बार-बार उत्तर प्रदेश सरकार की आलोचना करना, मुलायम सिंह जी पर हमला, मैं कांग्रेस पार्टी के मित्रों से कहना चाहूंगा कि आप रोज हमले करो, मुलायम सिंह यादव जैसी शख्सियत पर आपके हमलों से कोई असर नहीं पड़ने वाला है, यह गलतफहमी आपको भी दूर कर लेनी चाहिए । गृह मंत्री जी आपको कहना चाहिए कि गृह राज्यमंत्री का हर बात पर बोलना ठीक नहीं है। आप एक जिम्मेदार पद पर हैं, मेरी सलाह है, एक बहुत ही मशहूर शेर है:
‘ऐसी-वैसी बातों से तो अच्छा है, खामोश रहो, या फिर ऐसी बात करो, जो खामोशी से अच्छी हो।’ जायसवाल जी को ज्यादा बोलने की बीमारी है, गृह मंत्री जी मेरा आग्रह है कि आप इस बीमारी को बन्द कराइये।
अयोध्या में जो कुछ हुआ निश्चित रूप से उत्तर प्रदेश की सरकार ने एक शानदार काम किया है और जहां तक आतंकवाद का सवाल है, मल्होत्रा जी से मेरा निवेदन है कि इस नाजुक मसले को सियासी मसला न बनाएं। मुझे अभी तक याद है पिछली लोक सभा में जब चर्चा होती थी तब समाजवादी पार्टी उनका साथ देने को तैयार थी, पूरा देश, पूरी संसद सरकार के साथ थी, क्योंकि हम लोग देश के साथ हैं। आज आप उत्तर प्रदेश सरकार की आलोचना करते हैं, मुलायम सिंह जी की व्यवस्था में खामियां और चूक निकालते हैं। मुलायम सिंह यादव के मुख्यमंत्री पद पर रहते हुए अयोध्या में चूक हुई, सुरक्षा व्यवस्था में चूक हुई लेकिन जब संसद पर हमला हुआ था, उस समय तो …..* लगातार झूठ बोलने का काम और तथ्यों से परे बयानबाजी ये लोग करते रहे हैं।
अंत में मैं यही आग्रह करना चाहूंगा कि इनको सद्बुद्धि आए। यह अनावश्यक रूप से आलोचना न करें बल्कि रचनात्मक, सकारात्मक तथा तथ्यों पर बातें करें। कोई ऐसा काम न करें जिससे देश की एकता को खतरा पैदा हो। अंत में मैं आपके माध्यम से आग्रह करना चाहूंगा कि उत्तर प्रदेश में जिन सुरक्षाकर्मियों ने अपनी जान हथेली पर रख कर आतंकवादियों को मार गिराया, यह हमारा राष्ट्रीय धर्म है कि उन सुरक्षाकर्मियों को प्रोत्साहित करें। उत्तर प्रदेश की विधान सभा ने इस आशय का एक प्रस्ताव पास किया है और मैं समझता हूं कि उसी तरह का प्रस्ताव लोकसभा से भी पास होना चाहिए, जिन लोगों ने अपनी जान की परवाह किए बिना आतंकवादियों को मार गिराया। हिंदुस्तान के इतिहास में जितनी जल्दी इस घटना का पर्दाफाश हुआ था, उतनी जल्दी किसी अन्य घटना का पर्दाफाश नहीं हुआ है। उत्तर प्रदेश की सरकार को और जो सुरक्षा बल हैं, चाहे देश के हों या प्रांत के हों हमें सबका शुक्रिया अदा करना चाहिए, उनकी हौंसला अफजाई करनी चाहिए।
इन्हीं शब्दों के साथ मैं अपनी बात समाप्त करता हूं।
* Expunged as ordered by the Chair.
श्री देवेन्द्र प्रसाद यादव (झंझारपुर) : सभापति महोदय, आज सदन में न केवल राष्ट्रीय बल्कि अंतरराष्ट्रीय महत्व के विषय पर चर्चा हो रही है। इस तरह के आतंकवादी हमलों पर चाहे वे धार्मिक स्थलों पर हों, अयोध्या पर हो, संसद पर हो, लालकिले पर हो, अक्षरधाम मंदिर पर हो या हिजबुल दरगाह पर हो या चरारे शरीफ पर हो आतंकवादी हमलों को एक नजरिए से देखना चाहिए। पूरे देश को एकजुट हो कर आतंकवाद के खिलाफ एक आवाज उठानी चाहिए। श्री मल्होत्रा जी ने नियम १९३ के अधीन प्रस्ताव को अयोध्या सहित देश में जो आतंकवाद है, उस पर चर्चा का विषय उठाया है, लेकिन प्रस्ताव को रखने की जो आपकी अप्रोच है, जो विषय है, उसमें कुछ और ही झलक रहा है।, जबकि यह विषय किसी दल से जुड़ा हुआ नहीं है। यह राष्ट्र का सवाल है। आपने लंदन में हुए बम धमाकों का जिक्र किया और आपने कहा था कि पूरा पकिस्तान हिल गया था, लेकिन आपके यहां हमला होता है तो नहीं हिलता है। यह सब नजरिया आपने दिया है। इसमें आपकी क्या मंशा है? आप क्या चाहते हैं? यह मेरे लिए समझना मुश्किल हो गया है। आतंकवादी हमले के पीछे जो मंशा रही है, उससे आप भी सहमत नहीं हैं और जो आतंकवादी हमलों का एक सिलसिला चला है, चाहे वह एनडीए के शासनकाल में हो, या हाल ही में हुए हमलों में इनकी क्या मंशा है। धार्मिक स्थानों खास कर के अयोध्या में जो कि लम्बे समय से धार्मिक समुदायों के बीच विवाद का विषय बना हुआ है, इस पर राजनीतिक रोटी नहीं सेंकनी चाहिए। जो विषय उठाया गया है, वह ठीक है लेकिन इस नजरिए को दूसरी तरफ मोड़ना, इस बहस के साथ इंसाफ नहीं है।
इस बहस को यदि सार्थक बनाना है, सही मायने में आतंकवाद के खिलाफ पूरे देश को एकजुट करना है, खड़ा करना है तो इस तरह की संकीर्ण एप्रोच नहीं देनी चाहिए जो एप्रोच आपने बहस में दी है। अगर आप इरादे में सफल होते क्योंकि आप जानते हैं कि यदि आतंकवादी अयोध्या में हमला करने में सफल हो जाते, तो वे इस देश के साम्प्रदायिक सौहार्द को बिगाड़ने में कामयाब हो जाते। इससे आपके काफी लोग खड़े हो जाते और खड़े भी हो गये थे।
मैं सीआरपीएफ के उस जवान को धन्यवाद देना चाहता हूं जिसने पांचों आतंकवादियों को मार गिराया, उनके मनसूबों को चूर-चूर कर दिया और उनको कामयाब नहीं होने दिया। उसकी बहादुरी की चर्चा भी आज होनी चाहिए। …( व्यवधान) पीएसी और केन्द्रीय रिजर्व पुलिस बल के जवानों की तैनाती तथा उनकी मुस्तैदी से आतंकवाद की साजिश को विफल करने में हम सफल हो गये। उस मुठभेड़ में सभी आतंकवादी मारे गये। मेरा कहना है कि अगर कोई आतंकवादी जिंदा पकड़ लिया जाये, यहां पर गृह मंत्री जी बैठे हुए हैं, मैं उनको एक सजेशन देना चाहूंगा कि इनमें से एक आतंकवादी को जिंदा भी पकड़ा जाये ताकि उनके ठिकाने वगैरह का पता लग जाये। केन्द्रीय रिजर्व पुलिस बल के जवानों को आतंकवाद से निपटने से लिए जो प्रशिक्षण दिया जाता है, उसमें यह ट्रेनिंग दी जाये ताकि उनके ठिकाने वगैरह का पता लगाने में जो इतना समय लगता है, वह कम लगे।
आतंकवादी हमले को जिस तरह से नाकामयाब किया गया, यह अफसोस की बात है क्योंकि जिस समय पूरा देश अयोध्या में हुए हमले पर चिंतित था, स्तब्ध था कि यह क्या हो रहा है, उस समय दोनों कम्युनिटीज के करोड़ों लोगों की भावनाएं इस जगह से जुड़ी हुई थीं, जब यह घटना हुई तब आपकी पार्टी क्या कर रही थी ? मैं अखबार नहीं पढ़ना चाहूंगा, अखबार पढ़ना भी नहीं चाहिए। मैं सिर्फ अखबार की हैडिंग कोट कर रहा हूं। "BJP for resignation of Home Minister Shivraj Patil" . यह बीजेपी है। आप उस हादसे पर राजनीतिक रोटी सेंक रहे थे। जब समूचे देश को खड़ा करने की जरूरत है, यह दल का सवाल नहीं है, कोई सीमा नहीं है, सम्पूर्ण देश को आतंकवाद के खिलाफ एकजुट करने की बात है। उस समय मोटे अक्षरों में छपता है कि "BJP for resignation of Mulayam Singh Yadav; Party to hold protest demonstration at Jantar Mantar today" आपने देश भर में प्रदर्शन करने का सिलसिला शुरू कर दिया। इस घटना का राजनीतिक लाभ आप उठा रहे थे। …( व्यवधान) मुझे यह देखकर बहुत आश्चर्य हुआ। जब श्री विजय कुमार मल्होत्रा जो बोल रहे थे, तो मैं बहुत ध्यान से सुन रहा था। बीच में स्पीकर की मीटिंग थी इसलिए मैं चला गया। उन्होंने कहा कि राजनीतिक स्वार्थ के लिए आतंकवाद के खिलाफ यूपीए सरकार में संघर्ष कमजोर हुआ है। राजनीतिक स्वार्थ किसका है ? आतंकवाद घटना के बाद कौन राजनीतिक स्वार्थ कर रहा है ? वह आप कर रहे थे, आपका संघ परिवार कर रहा था, विश्व हिन्दू परिषद कर रहा था, आरएसएस के लोग कर रहे थे और बीजेपी के नेता कर रहे थे। …( व्यवधान)
सभापति महोदय : राम कृपाल जी, आप बीच में मत बोलिये। आपकी पार्टी से मैम्बर बोल रहे हैं इसलिए आप मत बोलिये। आप बैठ जाइये।
...( व्यवधान)
श्री देवेन्द्र प्रसाद यादव : ये लोग एक ही पक्ष से लाभ नहीं उठा रहे थे। न केवल साम्प्रदायिक सद्भाव बिगाड़ने का काम, जब देश में शांति बनाये रखने की जरूरत थी, देश को आतंकवाद के खिलाफ एकजुट करना था, उस समय आप यह लाभ उठा रहे थे। दूसरे पहलू पर भी आप राजनीतिक लाभ उठा रहे थे। वह दूसरा पहलू यह था कि माननीय आडवाणी जी जो प्रतिपक्ष के नेता हैं, उनकी थोड़ी जिन्ना वाली छवि बन गयी थी। जिन्ना को सेक्युलर कहने और पाकिस्तान में जिन्ना वाले बयान के जरिये जो छवि बन गयी थी, उसे सुधार रहे थे। वे अपने को उदार औंर सहिष्णुता की छवि बनाने में लगे हुए थे लेकिन अचानक अयोध्या की वारदात के बाद वह क्या जवाब देते हैं ?
उन्होंने पलटा मार दिया।
श्री प्रभुनाथ सिंह (महाराजगंज, बिहार) : अयोध्या पर भाषण दीजिए।…( व्यवधान)
श्री देवेन्द्र प्रसाद यादव : अयोध्या पर ही भाषण है। अयोध्या में मंदिर वहीं बनाएंगे, यह नारा हो रहा है।…( व्यवधान) पूरे देश भर में प्रदर्शन हुआ और अयोध्या जब गये तो वहां इनकी पार्टी की पूरी हवा निकल गई। वहां इन्हें कोई जनता का समर्थन नहीं मिला, वहां कहीं कुछ नहीं था। पूरे देश भर में इन्होंने आंदोलन का आयोजन कर दिया। इनकी पूरी हवा उसमें निकल गई। मैं इसीलिए इस बात को कहना चाहता हूं कि जो परिस्थिति आपने कायम की है, आप लोग जानबूझकर और इन्होंने इतना ही नहीं किया, प्रदर्शन और जुलूस का आयोजन किया और पूरे देश में इनकी टॉय-टॉय फिस हो गई क्योंकि यह इश्यू तो सम्पूर्ण देश का है। साम्प्रदायिक सौहाद्र उभारकर या हिन्दू-मुसलमान को बांटकर, देश को राजनीतिक पार्टी के आधार पर बांटकर आतंकवाद का मुकाबला नहीं किया जा सकता है। आतंकवाद का मुकाबला तभी होगा जब देश के अंदर हम मजबूत साम्प्रदायिक सौहाद्र को बनाए रखेंगे, तभी दुश्मन का मुकाबला हम कर सकते हैं। इसीलिए मैंने इस बात का जिक्र किया।
गृह मंत्री जी से बीजेपी इस्तीफा मांग रही है। माननीय गृह मंत्री जी से और उत्तर प्रदेश के मुख्य मंत्री जी से कौन बीजेपी इस्तीफा मांग रही है, यह मैं आपको बताना चाहता हूं। एनडीए के शासनकाल में जो आतंकवादी हमले हुए थे, एनडीए के शासनकाल में ३० मार्च २००२ को कश्मीर में रघुनाथ मंदिर पर हमला हुआ था। २४ सितम्बर २००२ को गुजरात के अक्षरधाम मंदिर पर किये गये हमले में ३० लोगों की हत्या हुई। एनडीए के शासनकाल में जो आतंकवादी हमले हुए हैं, मैं बताना चाहता हूं कि उसमें बड़े सक्षम लोग रहे हैं। वे बड़े जोर से आतंकवाद के खिलाफ मुकाबला कर रहे थे औऱ इनका जोर देखिए कि कैसा जोर था। ये आतंकवाद के खिलाफ जो संघर्ष कर रहे थे, उसे कमजोर कर रहे थे। २४ नवम्बर २००२ को पुन: रघुनाथ मंदिर पर आतंकवादी हमले में ९ लोग मारे गए और ५० लोग घायल हुए। १३ दिसम्बर २००१ में संसद पर अभूतपूर्व हमला हुआ जिसमें हमारे सुरक्षा कर्मी मारे गए। इसी संसद पर हमला हुआ। मल्होत्रा जी यहां बैठे हुए हैं और मैं पूछना चाहता हूं कि उस समय इन्हें इस्तीफा याद नहीं आया। उस समय माननीय लाल कृष्ण आडवाणी जी गृह मंत्री थे। बीजेपी का चाल-चरित्र और चेहरा सब दोहरा है। यह दोहरा मापदंड नहीं चलेगा। नैतिकता का तकाजा था तो आपको भी इस्तीफा देना चाहिए था तब आपमें इस्तीफा मांगने का नैतिक साहस और नैतिक ताकत होनी चाहिए थी। इस सवाल पर एकतरफा इस्तीफा की मांग कर रहे हैं। आतंकवादी यह नहीं देखता कि कौन सी सरकार है, कौन नहीं है। आतंकवादी यह नहीं देखता कि धार्मिक स्थल हिन्दू का है या मुसलमान का है। चरारे-शरीफ पर भी हमला हुआ था। आतंकवादी हिन्दू औऱ मुसलमान धार्मिक स्थलों पर हमला करने का अपना टार्गेट बनाए हुए हैं। इसीलिए आतंकवादी का लक्ष्य दोनों सम्प्रदायों की धार्मिक भावनाओं को भड़काकर, देश की साम्प्रदायिक एकता को भंग करके देश को अस्थिर करने की उनकी मंशा रहती है। इसलिए इसमें एकजुट दिखाई देने की जरूरत है और इसीलिए इसमें हम केवल सरकार पर जिम्मेदारी थोपकर हम इस बहस के साथ न्याय नहीं कर सकते। अभी इन्होंने कहा, …( व्यवधान)
श्री प्रभुनाथ सिंह : हम आपके विचार से सहमत हैं।
श्री देवेन्द्र प्रसाद यादव : प्रभुनाथ जी तो वैसे भी विचार से सहमत होंगे ही क्योंकि हम प्रभुनाथ जी से यही निवेदन करेंगे कि हादसे से राजनीति करने वाले जो लोग हैं, जो आरएसएस और विश्व हिन्दू परिषद की नाराजगी को दूर करने के लिए इनका पैंतरा बदल रहा है, ये इसमें साथ नहीं है। चूंकि आप सैकुलर पार्टी के रहे हैं। मल्होत्रा जी यहां पर बैठे हैं।
सभापति महोदय, मैं दो-तीन बातें और कहकर अपनी बात समाप्त करूंगा। इस आतंकवाद के विषय में सदन को चर्चा करके एक संकल्प लेना चाहिए। संकल्प पहले भी हुआ है लेकिन आतंकवाद के खिलाफ एक कठोर संकल्प होना चाहिए। लेकिन आतंकवाद को जिस तरह से परिभाषित किया जा रहा है, आतंकवाद को भेदभाव की द्ृष्टि से देखा जा रहा है, यह इस देश के लिए बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण है। चूंकि इन्होंने मदरसों के बारे में चर्चा की है, मैं नहीं कहता हूं, चाहे आतंकवाद या कट्टरपंथी ताकत या विचारधारा जिधर भी हो, चाहे हिन्दू औऱ मुसलमान का हो लेकिन मैं समझता हूं कि इस पर नजरिये को साफ रखना चाहिए।
17.00 hrs. सभापति महोदय, आप आसन पर बैठे हैं। आप डा. राम मनोहर लोहिया जी से काफी प्रभावित हैं। डा. राम मनोहर लोहिया ने कभी कहा था कि बहुसंख्यक की साम्प्रदायिकता, अल्पसंख्यक की साम्प्रदायिकता से ज्यादा खतरनाक होती है। कट्टरपंथ में भेद करने की बजाए हमें उसे समाप्त करने के लिए प्रयास करना चाहिए। यदि बहुसंख्यक आतंकवादी हो जाएगा, यदि उसकी मानसिकता साम्प्रदायिकता भड़काने वाली हो जाएगी तो यह देश कैसे बचेगा? इसलिए मैं आपसे निवेदन करना चाहता हूँ कि इस देश में लोकतंत्र नहीं बचेगा, संविधान नहीं बचेगा, देश की यह सर्वोच्च लोकतांत्रिक संसद नहीं बचेगी, ये लोग तो धर्म संसद की कल्पना कर रहे हैं और भारत के संविधान को भी बदलने का रिहर्सल समीक्षा आदि करने के रूप में कर चुके हैं। लेकिन इस देश की जनता इसे कैसे स्वीकार करेगी जिसने आजादी और लोकतंत्र के लिए अपना लहू बहाया है, जो लोकतंत्र और संसदीय लोकतंत्र में आस्था रखती है, जो भारतीय संविधान में आस्था रखती है और जो इस सर्वोच्च लोकतांत्रिक संसद में आस्था रखती है, उस जनता का क्या होगा?
यहां मदरसों की बहुत चर्चा की गयी है। मदरसों की आप पूरी जांच कीजिए, आपको इसका अधिकार है। उनमें कोई गलत काम नहीं होना चाहिए। लेकिन मैं जानना चाहता हूँ कि आज शिशु विद्या मन्दिरों में क्या हो रहा है? मैं आपसे यह निवदेन करना चाहता हूँ, क्योंकि आपको इसकी जानकारी होगी कि शिशु विद्या मन्दिरों में कौन सी किताबें पढ़ाई जा रही हैं उनका सिलेबस क्या है? वहां जो सिलेबस पढ़ाया जा रहा है, वह इतिहास को तोड़-मरोड़कर पढ़ाने वाला है, साम्प्रदायिकता को भड़काने वाला इतिहास पढ़ाया जाता है। इसलिए शिशु विद्या मन्दिरों को प्रतिबंधित किया जाना चाहिए और जो लोग इनसे जुड़े हुए हैं, उनको रोका जाना चाहिए। कट्टरपंथ पर सम्यक रूप से विचार करने की जरूरत है। इस देश में जब भी फण्डामेण्टलिज्म सिर उठाएगा, आतंकवाद बढ़ेगा। इसलिए कट्टरपंथ का सफाया करके ही आतंकवाद का मुकाबला किया जा सकता है।
इन्होंने पोटा का जिक्र किया है। मल्होत्रा जी पोटा को लेकर बड़े चिन्तित हैं कि पोटा खत्म हो गया। आपके हाथ से जनादेश चला गया। अब जनादेश सेक्युलर लोगों के हाथ में आया, यूपीए के हाथ में आया और यूपीए ने पोटा को खत्म कर दिया। पोटा का ९९ से १०० प्रतिशत तक दुरूपयोग किया गया। इसे एक राजनीतिक हथियार बनाकर प्रयोग किया गया है। महोदय, आपको याद होगा कि इसी बेंच पर श्री वाइको बैठते थे। श्री वाइको जैसे सांसद को पोटा के तहत बन्द किया गया और झारखण्ड में ८० साल के बूढ़े गरीब व्यक्ति को बन्द किया गया। वहां एक खास कम्युनिटी के बच्चों और गरीबों को बन्द किया गया।
17.03 hrs. (Shri Ajay Maken in the Chair) गुजरात में जितने अल्पसंख्यक लोग थे, उनको खासकर टारगेट बनाकर, बन्द करने के लिए, हथियार के रूप में इसका प्रयोग किया गया। अभी भी उनमें से दो सौ-ढाई सौ लोग जेलों में बन्द हैं जो अभी न्यायिक प्रक्रिया में फंसे हैं। ये लोग यहीं से तय कर लेते थे कि इस कम्युनिटी पर पोटा लगाना है, गरीबों, अल्पसंख्यकों पर पोटा लगाना है। गरीबों और अल्पसंख्यकों को पोटा लगाकर बंद कर दिया जाता था। पोटा के लिए इनको बड़ी चिन्ता है। पोटा नहीं यह आरएसएस के लोगों का लोटा था जिस लोटे से ये लोगों की पिटाई करते थे। पिटाई करने के लिए ही यह लोटा बनाया गया था श्री राम कृपाल यादव (पटना) : महोदय, यह लोटा नहीं पिटाई करने के लिए आरएसएस का सोंटा था।
श्री देवेन्द्र प्रसाद यादव : हाँ, यह लोटा और सोंटा दोनों था।
सभापति महोदय : आप अपनी बात कन्क्लूड कीजिए।
श्री देवेन्द्र प्रसाद यादव : महोदय, मैं यह कहना चाहता हूँ कि फण्डामेंटलिज्म के सफाए के लिए यह सरकार कृतसंकल्पित है। जिस तरह के नारे दिए जा रहे हैं, जो चर्चा की जा रही है वह इसलिए कि हमारी पाकिस्तान के साथ जो शांति प्रक्रिया चल रही है, उसमें बाधा आए। मैं समझता हूँ कि देश में साम्प्रदायिक सद्भाव के लिए हम लोग एकजुट रहेंगे। आतंकवाद के खिलाफ जो ग्लोबल फिनोमेनन में एक आवाज उठायी जा रही है, मैं नहीं जानता कि उसमें कितने देश इमानदारी से शामिल हैं, लेकिन हिंदुस्तान पिछले दो-तीन दशकों से इस आतंकवाद से लड़ रहा है और हिंदुस्तान ने आतंकवाद के विरूद्ध सबसे ज्यादा कुर्बानी दी है। हमारा देश, जो दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है, आतंकवाद के खिलाफ शुरू से ही कृत-संकल्पित रहा है और मैं यही कहना चाहता हूँ कि आतंकवाद के खिलाफ लड़ने की जिम्मेदारी सिर्फ सरकार पर ही नहीं छोड़ी जा सकती, इसमें विपक्ष समेत सभी लोगों को देश के इस सर्वोच्च सदन में आतंकवाद के खिलाफ संयुक्त रूप से एक संकल्प पारित करना चाहिए।
आतंकवाद के खिलाफ किसी खास व्यक्ति को जिम्मेदार ठहरा कर हम आतंकवाद का मुकाबला नहीं कर सकते, इसका मुकाबला हम सब लोगों को मिलकर करना होगा। इसलिए हम सब सदन में मिलकर एक संकल्प लें कि हम आतंकवाद के खिलाफ हैं और उसका कड़ा मुकाबला करेंगे। हमारा देश आतंकवाद का मुकाबला करने में सब तरह से सक्षम है, चाहे हमारी इंटेंलिजेंस हो या बोर्डर पर तैनात हमारे जवान हों। सिर्फ जरूरत है हम सब लोगों के संकल्पित होने की और इस तरह से हम उसका मुकाबला कर पाएंगे। हम लोग देश के अंदर आपसी सौहार्द और सद्भाव को मजबूत बनाकर भी आतंकवाद का मुकाबला कर सकते हैं। देश के अंदर यदि किसी प्रकार से सद्भावना का माहौल बिगड़े, तो उसका ईमानदारी से मुकाबला किया जा सकता है।
सभापति जी, इन्हीं शब्दों के साथ मैं अपनी बात समाप्त करता हूं।
सभापति महोदय : धन्यवाद । श्री मित्रसेन यादव।
प्रो. विजय कुमार मल्होत्रा : यूपीए से पांच सदस्य बोल चुके हैं, हमारी तरफ से दो तो बोलने चाहिए।
सभापति महोदय : मल्होत्रा जी, आप जानते हैं कि पूरा राउंड हो जाए, उसके बाद दोबारा आपकी तरफ से बोलेंगे। यह एक प्रक्रिया है, जिसे तोड़ा नहीं जा सकता।
श्री मित्रसेन यादव (फैजाबाद) : सभापति जी, जिस प्रकरण पर चर्चा हो रही है, वह मेरे लोक सभा क्षेत्र में आता है। मुझे वहां से तीसरी बार जनता ने प्रतनधित्व करने का मौका दिया है। आज जिस विषय पर चर्चा हो रही है, यह कितना महत्वपूर्ण है, यह मैं बताना चाहता हूं। मैं आपको यह जानकारी देना चाहता हूं कि हमारे देश का कोई ऐसा धर्म नहीं है, जिसका वहां तीर्थ-स्थल न हो। मुसलमानों की वहां मजारें हैं, उनके धर्म गुरूओं के रहने के नाते उसे खुर्दमक्का कहा जाता है। बुद्ध जी वहां १२ बरस तक रहे। उनके प्रचारकों ने बौद्ध धर्म का प्रचार किया। हिन्दुओं का तीर्थ-स्थल तो वह है ही। जैनियों का सबसे बड़ा मंदिर वहीं है और सूफियों का वहां पवित्र स्थान है। इतना ही नहीं, वहां सभी जातियों के मंदिर हैं। इसलिए अयोध्या किसी एक धर्म की नहीं, सभी धर्मों की तीर्थ-स्थली है। इस नाते वहां सभी धर्मों के लोग पूर्ण आस्था और विश्वास के साथ उसे अपना तीर्थ-स्थल मानते हैं।
अभी १५ जुलाई को वहां आतंकवादी हमला हुआ। उसके पीछे हमें गहराई से देखने की कोशिश करनी चाहिए। हमले के बाद देश के गृह मंत्री जी वहां गए थे। मुझे कहने में यह तकलीफ हो रही है कि इन्होंने उस समय अपने साथ वहां के किसी जनप्रतनधि को नहीं लिया। यहां तक कि वहां की नगरपालिका के चेयरमैन को, विधायक को, एम.एल.सी. को या एम.पी. को, किसी को भी साथ लेकर यह जानने की कोशिश नहीं की कि आखिर असलियत क्या है। केवल अधिकारियों के भरोसे रहे। दरअसल जो हमला हुआ..
गृह मंत्री (श्री शिवराज वि. पाटील) : आप कह रहे हैं कि कोई नहीं था। मैं आपको बताना चाहता हूं कि वहां के मंत्री जी मेरे साथ थे।
श्री मित्रसेन यादव : मुझे इसकी जानकारी नहीं है।
श्री शिवराज वि. पाटील : जानकारी नहीं है, तो इस तरह से नहीं कहना चाहिए। पहले जानकारी लें, फिर कहें।
प्रो. राम गोपाल यादव (सम्भल) : हमारी प्रदेश सरकार के मंत्री अवधेश प्रसाद जी साथ चल रहे थे। वह वहीं के हैं।
श्री मित्रसेन यादव : वह अयोध्या के नहीं हैं। सरकारी अधिकारियों ने इन्हें जो कुछ बताया, उसी पर इन्होंने निर्भर किया। यहां तक कि अगर महामहिम राज्यपाल हस्तक्षेप नहीं करते, तो एफआईआर भी दर्ज नहीं होती।
इसलिए मैं आपसे कहना चाहता हूं कि आतंकवादी उसमें इस तरह से घुसे थे जैसे दर्जनों बार अयोध्या में आये हों और उनको अयोध्या की गलियों की जानकारी थी। इस हमले के पीछे पूरी साजिश और शरारत है। हमले को असफल करने में, हमारी केन्द्रीय सुरक्षा बल की महिला बटालियन ने सबसे पहले पहल की, उनका मुकाबला किया। उसके बाद ११वें पीएसी के जवानों ने मुकाबला किया। केन्द्रीय सुरक्षा बल के जवानों ने भी उस खतरे का मुकाबला करने का काम किया है, लेकिन एफआईआर में उनको छोड़ दिया गया है। इस खतरे से बचाने के लिए आज तक जो भी लोग अपनी पीठ ठोक रहे हैं वे ठोक लें। माननीय मल्होत्रा जी, आप इस प्रकरण में अपनी राजनीति जोड़ते हों तो जोड़ लें, लेकिन इस प्रकरण से हमारी तो जिंदगी जुड़ी हुई है।
जिन लोगों ने ६ दिसम्बर को मस्जिद ढहाई, गलत तरीके से लोगों की भावनाओं को उभारा, उस पर मैं कहना चाहता हूं कि मस्जिद को ढहाकर कोई अच्छा काम नहीं हुआ। इससे दुनिया में हमारा मान और प्रतिष्ठा गिरी है। लेकिन आज अपनी राजनीति को पनपाने के लिए आपके बड़े से बड़े नेता असत्य बोलते हैं।
श्री संतोष गंगवार (बरेली) : अयोध्या की पहचान किसके लिए है, मंदिर के लिए है या मस्जिद के लिए है?
श्री मित्रसेन यादव : आपके बड़े से बड़े नेता मस्जिद गिराने की घटना में शामिल थे लेकिन आज आपके नेताओं ने इस बात से इंकार किया है और कहा है कि ६ दिसम्बर को वे वहां नहीं थे। माननीय लालू प्रसाद जी पर और दूसरे नेताओं पर आप आरोप लगाते हैं, लेकिन क्या आपके नेताओं ने संविधान की धज्जियां उड़ाकर जुल्म नहीं किया, क्या वे सजा के हकदार नहीं हैं, क्या माननीय कल्याण सिंह जी को सजा नहीं हुई? आप भी उतने पाक-साफ नहीं हैं जितना कि आप दूसरों पर उंगली उठाते हैं। इस घटना के पीछे कुछ न कुछ साजिश है। आपका विश्व-हिंदू परिषद का एक डेलीगेशन २१ जुलाई को माननीय गृह मंत्री जी और महामहिम राज्यपाल जी से मिला और उसने मांग की कि इस परिसर की सुरक्षा के लिए और जमीन अधिगृहीत की जाए और वहां की आबादी का हिस्सा अधिगृहीत कर लिया जाए। आपने २.७७ एकड़ जमीन का हिस्सा अधिगृहीत किया था जिसे सुप्रीम कोर्ट ने वैधता दे दी। उसके बाद सन् १९९३-१९९४ में आपने संसद में कानून बनाकर ७७ एकड़ जमीन को अधिगृहीत कर लिया - उसका आपने क्या किया? आपने कहा था कि वहां पर वाचनालय, ग्रंथालय बनेगा और लोगों की जन-सुविधाओं के लिए जमीन का उपयोग होगा। लेकिन ऐसा एक भी काम उस अधिगृहीत की हुई ७७ एकड़ जमीन में नहीं हुआ। आपने जो कानून बनाया है, आप उसे पढ़कर देख लीजिए।
मैं माननीय गृह मंत्री जी से निवेदन करुंगा कि ७७ एकड़ जमीन जो अधिगृहीत हुई है उसे जिस नीयत से अधिगृहीत किया गया, जन-सुविधाओं का काम वहां होना चाहिए। अगर ऐसे ही आपको जमीन का अधिग्रहण करना है तो काशी में अधिग्रहण कीजिए। आपने वहां प्रतिबंध लगाया है। वहां पर लोगों को रहने और अपनी दुकानें चलाने में मुश्किल हो गयी है। क्या आप सुरक्षा के नाम पर चाहते हैं कि लोगों का वहां पर जीना मुश्किल हो जाए और लोग अपनी रोजी-रोटी चलाने में मुश्किलों का सामना करें।
माननीय गृह मंत्री जी, आप जानते हैं कि अयोध्या के लाखों लोगों की जिंदगी तीन-चार मेलों पर निर्भर करती है जो धार्मिक मेले होते हैं, वे मेले चाहे हिंदुओं के हों या मुसलमानों के हों। जिस एरिया को आप अधिगृहीत करने के लिए कह रहे हैं उसमें सबसे ज्यादा मुसलमान रहते हैं।
मुसलमान का क्या मतलब है? क्या उसके पीछे यह मंशा है कि मुसलमानों की वजह से यह हमला हुआ। अगर उनके पीछे यह मंशा है, तो आप के मंदिर की सारी कार्यवाही जो होती है, चाहे वह खड़ाऊ बनाना हो, लंगोटा बनाना हो या कोई और काम हो, आपके मंदिर या हनुमान गढ़ी का सारा काम मुसलमान ही करते हैं, इस बात को आप क्यों छोड़ देते हैं। यदि वे न हों, तो आपके काम न हों। इसलिए हम आपसे कहना चाहते हैं कि जो और जमीन अधिग्रहण की बात है, उस संबंध में मेरा निवेदन माननीय गृहमंत्री जी आपसे है कि अधिग्रहण की जमीन कतई आगे न बढ़ाई जाए और जो २.७७ एकड़ जमीन है, उसी को सुरक्षित रखा जाए। आपने इतना बड़ा घेरा बना दिया है कि जिसको बगैर सुरक्षाबल लगाए उसकी सुरक्षा हो ही नहीं सकती, इसलिए अगर आप २.७७ एकड़ जमीन की सुरक्षा चाहते हैं, तो आप उसको बिना घेरे के तहत कीजिए, जिससे आयोध्या में आने वाले दर्शनार्थियों और नागरिकों की जिंदगी दूभर न हो। उनके दैनिक क्रिया व कार्यों में बाधाएं न पड़ें। उनके जीवन-स्तर में किसी प्रकार का व्यवधान न पैदा हो। आतंकवाद के नाम पर यह नहीं किया जा सकता कि पूरी आयोध्या की जनता को चाहे वह हिंदू हों, मुसलमान हों, उनको नागरिक अधिकारों से वंचित कर दिया जाए, उनको प्रतिबंधित कर दिया जाए। ये लोग चाहते हैं कि पूरी तरह से अयोध्या में प्रवेश निषेध कर दिया जाए। यहां लोगों का आना-जाना बंद हो जाए। मेरा आपसे निवेदन है कि इसके पीछे बीजेपी की जो मंशा है, सांप्रदायिक शक्तियों का जो खेल है, उससे आपको बचने की कोशिश करनी चाहिए।
सभापति महोदय : आप कंक्लयूड करिए।
श्री इलियास आज़मी (शाहाबाद) : इनको बोलने दीजिए। ये अयोध्या के सांसद हैं।
श्री मित्रसेन यादव : मैं दूसरी बात यह कहना चाहता हूं कि वहां के लोग कतई झगड़ा नहीं चाहते हैं। आज तक इतिहास है कि मुसलमान ने किसी हिन्दू को और किसी हिन्दू ने किसी मुसलमान को चाकू तक नहीं है, इस लड़ाई में किसी हिन्दू या मुसलमान का नाखून तक नहीं कटा है, अगर ऐसा हो तो बताइए। वहां सांप्रदायिक सौहार्द इतना अच्छा है कि वहां आदमी नहीं मर सकता। वहां पर जो कुछ हुआ है वह राजनीति के नाते और भारतीय जनता पार्टी के नाते हुआ है, दूसरी ताकतों सांप्रदायिक शक्तियों के नाते हुआ है। कहीं कुछ नहीं होगा, हम आपको गारंटी देते हैं। आप राजनीतिक दखलंदाजी को रोक दीजिए। आप लोकसभा के सभी संप्रदाय के लोगों की और सभी पार्टी के लोगों की एक कमेटी बनाइए। अगर समति बैठने के बाद मसला हल न हो जाए, तो आप मुझे जो कहना हो, कहिएगा। पूरे हिन्दुस्तान …( व्यवधान)
सभापति महोदय : धन्यवाद, यादव जी, आप अपना भाषण समाप्त करिए।
श्री मित्रसेन यादव : महोदय, मैं आपके माध्यम से दो ही निवेदन गृहमंत्री जी से कहना चाहता हूं, एक तो उस झगड़े को समाप्त करने के लिए दोनों संप्रदायों के लोग सहमत है, और इसे खत्म करने के लिए तैयार हैं। सिर्फ आप की पहल होनी चाहिए कि आप उस मसले को अंदरूनी तौर पर समझकर कैसे हल कराएंगे? इसके लिए वहां के लोग सहमत हैं।
तीसरी बात, जो ये लोग चाहते हैं कि और जमीन अधिगृहीत करके मुसलमानों को विस्थापित किया जाए, झगड़े को और बढ़ाया जाए, वहां बारूद की चिंगारी छिनगाई जाए, इसको रोकने के लिए आप कतई अधिग्रहण करने की कोशिश नहीं करिएगा, वरना उसके गंभीर नतीजे भुगतने पड़ेंगे। जिन लोगों ने सुरक्षा में अपनी जानें गवाईं हैं, पहल की है, उन्हें पुरस्कृत किया जाए।
सभापति महोदय : मित्रसेन जी, समय-सीमा में रहिए, धन्यवाद।
श्री मित्रसेन यादव : इन शब्दों के साथ मेरा आपसे निवेदन है कि आयोध्या की राजनीति को पूरे हिन्दुस्तान के पैमाने पर सभी धार्मिक तीर्थस्थलों के नाम पर वहां शांति कायम करने के लिए जो कदम उठा सकते हैं और उनका उठाना भी बहुत जरूरी है, जिससे हिन्दू-मुसलमान सारे संप्रदाय के लोगों की एकता तथा लोगों में सौहार्द बना रहे और देश में शांति और अमन कायम हो सके।
श्री शिवराज वि. पाटील : महोदय, पांच बजकर बीस मिनट हो चुके हैं। यह डिबेट कब तक चलेगी? इसका रिप्लाई आज होना है या कल होना है? मुझे छ: बजे एक बहुत अहम मीटिंग में जाना है। हमने यह तय किया था कि छ: बजे तक हाउस चलेगा। अब आपका जैसा आदेश होगा, वैसा करेंगे।
सभापति महोदय : आप इसका रिप्लाइ वैसे तो कल भी कर सकते हैं, क्योंकि बहुत सारे स्पीकर्स की लिस्ट अभी और शेष है, अभी १५ स्पीकर्स और हैं। आप हाउस की कंसेंट लेकर इनका रिप्लाई कल भी कर सकते हैं।
श्री शिवराज वि. पाटील: मुझे उसमें कोई दिक्कत नहीं है। जैसा आप और सदन कहेगा, मैं वैसा करूंगा लेकिन बात यह है कि हमने इस सदन में ड्राउट और फ्लड़ पर तीन दिन चर्चा की है। उसकी चर्चा का उत्तर चार-पांच दिन से पैडिंग है। अगर ऐसा ही होने वाला है तो और बात है।
सभापति महोदय : आज इसके ऊपर सारी चर्चा कनक्लूड करके, कल रिप्लाई हो जाएगा।
श्री शिवराज वि. पाटील: मुझे ६ बजे जाने की इजाजत दी जाए।
सभापति महोदय: आज जितने भी स्पीकर्स बोलना चाहें, अपने आप को कनफाइन करें। मेरा सभी स्पीकर्स से निवेदन है कि चार-पांच मिनट तक अपनी बात को सीमित रखें। सभी १५ स्पीकर्स कनफाइन करके बोलें और रिपीट न करें।
श्री प्रभुनाथ सिंह : अगर आज रिप्लाई नहीं होना है तो छ: बजे हाउस को एडजर्न कीजिए। कल बाकी स्पीकर्स को बुला कर उत्तर दिलवाइए। आज जितने मैम्बर्स बोलेंगे, अगर मंत्री जी नहीं होंगे तो वह उत्तर क्या देंगे? मंत्री जी को छ: बजे जाना है। आप छ: बजे हाउस को एडजर्न कीजिए।
सभापति महोदय: कल प्राइवेट मैम्बर्स बिजनेस है।
श्री शिवराज वि पाटील: स्टेट मनिस्टर साहब यहां बैठेंगे। अगर यह चर्चा कल गई तो फिर ऐसे ही लम्बी हो जाएगी।
सभापति महोदय: हम डिसकशन आज ही कनक्लूड करेंगे। वह इसके आगे न जाए। कल मनिस्टर साहब का रिप्लाई हो जाएगा।
प्रो. विजय कुमार मल्होत्रा : हमारी पार्टी का जो टाइम तय है, उसमें से हमें समय नहीं मिलता। …( व्यवधान) २८ पार्टियां हैं। क्या हमारी पार्टी की २८ पार्टियों के बाद बारी आएगी?…( व्यवधान)
सभापति महोदय: मल्होत्रा जी खड़े हैं। आप बीच में क्यों बोल रहे हैं?
…( व्यवधान)
सभापति महोदय: किस तरीके से, किस बारी से लेना है, यह निर्णय बिजनेस एडवाइजरी कमेटी लेती है। आप खुद उसके मैम्बर हैं। यह वहां तय हुआ है।
प्रो. विजय कुमार मल्होत्रा : हरेक पार्टी का टाइम तय होता है।
सभापति महोदय: नैक्स्ट नेम आपकी पार्टी के मैम्बर का है। यह बिजनेस एडवाइजरी कमेटी में तय हुआ है और उसी के आधार पर सब को मौका दिया जा रहा है। इसके बाद आपकी पार्टी का मैम्बर बोलने वाला है।
श्री संतोष गंगवार : हमारी पार्टी का एक भी मैम्बर नहीं बोला है।
श्री प्रभुनाथ सिंह : एक इधर से और एक उधर से बोलने की परम्परा रही है।
सभापति महोदय: अब प्रो. के. एम. कादर मोहिदीन अपना भाषण तमिल में देंगे।
PROF. K.M. KHADER MOHIDEEN (VELLORE) : Hon. Chairman, let me commence my speech in the name of graceful and gracious Almighty God. This august House is now discussing the menace of terrorism especially in the light of the terrorist attack in Ayodhya recently. Terrorism is taking its ugly head not only in our country but it is also becoming a rampant global phenomenon. I have got a rare opportunity to participate in this discussion and I would like to thank the Chair for providing me with an opportunity. I do not partake in this discussion as a Muslim. I speak on behalf of the people of Tamil Nadu and on behalf of all the forty members, the people’s representatives from Tamil Nadu. I speak in this august House as a soldier of Dr. Kalaignar Karunanidhi. During the last general elections, our leader Dr. Kalaignar elaborated in the election manifesto that we would strive to usher in a humanistic communal harmony establishing a secular government. We have a Government that glorifies humanitarianism and social harmony in a secular canvas. We have a Union Government under the stewardship of our Prime Minister Dr. Manmohan Singh. Our UPA led by Mrs. Sonia Gandhi has ensured a secular Government. Last month’s terrorist attack in Ayodhya might have led to a serious carnage and series of riots had there been a different Government other than the United Progressive Alliance Government which is at the helm of affairs at the Centre now. There could have been riots and violence and bloodshed had there not been this secular Government now. We might have witnessed communal riots and bloodshed as we had seen on earlier similar occasions. It could have created a situation where we might have been put to shame and our country might have been forced to have its head hung in shame. Fortunately such a cruel recurrence did not take place. The credit for this non-eruption must go to the Union Government of the UPA and the Uttar Pradesh Government. They must be congratulated and their watchful vigor must be appreciated.
* Translation of the speech originally delivered in Tamil.
I would like to record my appreciation while congratulating the security forces and the police personnel who prevented any untoward incident in the Ayodhya complex.
My esteemed colleague Prof. Vijay Kumar Malhotra in his speech gave an illustration with graphic description of the incident at Ayodhya. Bhagawad Gita says that any deliberation must be based on Sathyam, Priyam, Hitham and Mitham. The sloka says that truth, camaraderie, amiability and mirth must be there in any verbal presentation. These found form the basis of any argument to be advanced or in a point to be mooted on in a discussion or in any dialogue. Mr. Malhotra’s speech had less of Sathyam (truth), much less of Priyam (camaraderie) and a sparse Hitham (amiability) and almost nil spread of Mitham (mirth). He was levelling charges and coming out with accusations. He went to the extent of saying that this had happened only because of the repeal of POTA. He said that the tentacles of terrorism is spreading and continuing. But POTA was only providing a quota to terrorism. POTA was not found to be effective to curb the menace of terrorism. By way of enacting a stringent law we cannot stem the rot and terrorism cannot be wiped out from the country. This is the truth we have witnessed from the history. We the people of this country live as Muslims, Hindus, Sikhs and Christians in this land. We are not merely the citizens of this country. We are all brethren. All our religions are repeatedly trying to impress upon us this underlying truth. All of us are the descendants of the same parents. We are the progenies of the same parents. We all belong to the same family. We are talking of ‘Vasudhaiva Kutumbakam’. Kalidasa’s Raghuvamsam talk of Parvathi-Parameshwar that is of the common parentage and universal brotherhood. ‘Adam-Havva’ is the early parent described in the Holy Quran. According to the Holy Bible ‘Adam-Eve’ are our ancestral early parents. Thirukkural talks of Adhi and Bhagawan in the couplet, "Akara Muthala Ezhuthellam Adhi Bhagawan Muthatrey Ulagu". Ancient Tamil literature talks of world as one family in the context of global village and universal brotherhood. All the religions of this land and of the world emphasize that all the people of this world are the descendants of same parents. We have many religions and culture but we all belong to that common universal brotherhood. We must not divide people in the name of religion. We must not give rise to disputes on the basis of religion. With that we may be able to nip in the bud the growth of terrorism. We should not differentiate terrorism as Islamic terrorism, Hindutva terrorism and Sikh terrorism. We cannot categorize them that way. Every religion may have some extremists. It is not the fault of the religion. Among Hindus there could be communalists. Among Muslims there could be extremists. Among Sikhs there could be some who uphold terrorism. Just because some terrorists seek umbrage there the entire community cannot be branded as terrorists. This is totally unjustified. It would be a baseless premise.
Shri Malhotra in his speech stated that terrorist camps are found in the Madarsas in Pakistan. He did not stop at that. I do not know about Pakistan. But I can strongly refute his allegation that Madarsas in our Indian soil, well within out boundaries, are used as training grounds for terrorism. Sir, I am proud to share the fact with you that I grew up in a Madarsa. I am a product of Madarsa with its formulative influence. I can vouchsafe that hatred and terrorism were never taught to us in Madarsas. In Madarsas, mostly in masjids and in majlis, I have only witnessed common prayers being offered for the common good. I follow this noble tradition. We are taught in Madarsas that God is one, we all belong to same family and must uphold universal brotherhood. We are given percepts to do good and avoid evil and sin. Nothing on violence, hatred and terrorism are discussed or taught in Madarsas. To the best of my knowledge and I can vouchsafe for that while reiterating that no Madarsa in Tamil Nadu for that reason no Madarsa in our country spreads or preaches violence and terrorism. With all emphasis at may command I would like to reiterate that terrorism is not taught in any of our Madarsas. To make a wild allegation that negative teachings are there in Madarsas is wrong and condemnable. I request you not to make such baseless charges and try to paint a tainted picture of an entire community. We will not be doing justice to a community.
I would like to add few more points before I could conclude. All those who spoke ahead of me emphasised a factual point very clearly that we belong to a rich heritage, culture and tradition in this country. We have a long tradition of spiritual gurus, religious leaders, social and religious reformers, sages and saints, rishis and munis who preached compassion and love and universal brotherhood. They all stressed the need to live as one family. We must live up to that tradition of upholding fraternity in our coexistence. Only then we would have paid true tribute to all the great men of this soil who preached peaceful coexistence. Only then, we would have fulfilled our duty before the self and the country. We must continue to stride the path of peace and unity. From time immemorial we have a tradition to live in peace. From the time of Buddha, Ramakrishna Paramahamsa and many other Hindu saints we have been upholding the spirit of tolerance. Our country must continue to follow their teachings and follow that traditional path. The Sikh Guru Baba Nanak was admired and accepted by men from all religions. He was a friend to a Hindu, Comrade to a Muslim while emerging as a Sikh Guru. He showed right path to all and remained an accepted spiritual Guru. It is because of this country’s rich heritage and tradition. That rich culture must continue to remain with us. We must not stray away from that right path. Now a days, we fail to think of that tradition and tend to ignore it. That way we may give scope for hatred, violence and terrorism. Why should we resort to violent means and path of terrorism? It is our bounden duty to help one another to take to their chosen path. We must ensure a Hindu to be a good Hindu, a Muslim to be a good Muslim and a Christian to be a good Christian. Let us peacefully coexist. We must think in terms of the unity and integrity of this country and every one of us must contribute to our natural life. We must think of common good and we must make our country proud. It must earn a name with pride among the comity of nations. Ours is a vast, big, great country. Our thought and action should be befitting the rich heritage and tradition of this country has. I urge upon you all to live up to the expectations of the great men, great preachers and great teachers of this country. Let us make the country proud by shunning hatred, violence and dividing of men and minds. Our hon. Prime Minister stated in his speech while addressing the UN General Assembly that….
MR. CHAIRMAN : Please conclude. We are having shortage of time. You are encroaching upon other Members’ time. Please conclude now, otherwise I am going to call the next speaker.
PROF. K.M. KHADER MOHIDEEN : At the UN, our Prime Minister stated that the world needs peace, harmony, coexistence and development. These are but four pillars for ensuring a better world. These four pillars are vital for the continuum of our Indian national life. Swami Vivekananda said that our country must emerge as a Navyug India with our coming together leaving aside the caste and creed barriers. He emphasised it effectively to register it in our collective conscience. Swami Vivekananda wanted this country to emerge as a classless, casteless, creedless society. He said we must have a Vedantic brain and an Islamic body to give rise to a brave new nation. We must strive to usher in an era where such a nation is built.
Hon. Leader of the Opposition Shri Advani had been to Pakistan recently. He created history there. During that historic visit he had participated in functions marking the renovations and reopening of temples that were desecrated as a fall out of December 1992 Ayodhya incidents and the razing of Masjid structure at Ayodhya. Our Leader of Opposition got a rare opportunity to open the renovated temples. I want to make a request here and now to Shri Advaniji. The razed Babri Masjid must be reconstructed and Shri Advani must throw open that place of worship again as a symbol of communal harmony. It will send right signals throughout the world to uphold universal brotherhood. I want him to create a conducive atmosphere here and we must be privy to it. Men must come together. Souls must come closer. Hearts must come nearer. Minds must meet one another. We must work unitedly for communal harmony and peaceful coexistence.
We people meet one another, but the mind does not meet the mind of another. Let the minds of ours meet today, tomorrow, day after tomorrow for the greatness and glory of this country. Let us pray for that, work for that and strive for that.
योगी आदित्यनाथ (गोरखपुर) : सभापति महोदय, मैं आपको धन्यवाद देता हूं कि आपने श्री राम जन्मभूमि अयोध्या पर ५ जुलाई को जो आतंकी हमला हुआ था, उस पर चल रही बहस में मुझे बोलने का अवसर प्रदान किया। श्री राम जन्मभूमि अयोध्या तथा सम्पूर्ण देश में आतंकवाद से संबंधित चर्चा को श्री विजय कुमार मल्होत्रा जी ने प्रारम्भ किया है। मुझे तमाम वक्ताओं के विचारों को सुनने का अवसर प्राप्त हुआ। मुझे तुलसीदास जी द्वारा रचित रामचरितमानस की कुछ पंक्तियां याद आ गईं -
"जासु राज प्रिय प्रजा दुखारी, सो नृप अवसि नरक अधिकारी।"
वर्तमान परिप्रेक्ष्य में ये पंक्तियां कितनी सार्थक हैं, हम सबको स्वयं इसका चिंतन करना होगा। हम लोग यहां आतंकवाद पर चर्चा कर रहे हैं। आतंकवाद के लिए हम अमरीका जैसे राष्ट्र की आलोचना करते हैं कि वह आतंकवाद पर दोहरे मानक तैयार कर रहा है, लेकिन जब हम स्वयं भारत के परिप्रेक्ष्य में आतंकवाद की बात करते हैं तो पिछले १५ वर्षों के अंदर जितनी क्षति भारत को आतंकवाद के कारण उठानी पड़ी है, संभवत: विश्व के किसी अन्य देश को उतनी क्षति नहीं उठानी पड़ी है। पिछले १०-१२ वर्षों के अंदर ७५ हजार से अधिक नागरिक, साढ़े सात हजार से अधिक सैनिक, अर्द्धसैनिक और पुलिस के जवान जिस देश ने खोये हों, जिस देश में आज भी आतंकवाद अनेक रूपों में मौजूद हो, चाहे वह जम्मू-कश्मीर सहित सम्पूर्ण देश में पाकिस्तान द्वारा प्रायोजित आतंकवाद हो या फिर चाहे पूर्वोत्तर के राज्यों में वभिन्न उग्रवादी संगठन हों, जिन्हें देश के अंदर और बाहर दोनों तरफ से समर्थन प्राप्त है, उनकी गतवधियां हों, चाहे भारत के अंदर फैला हुआ वामपंथी आतंकवाद हो, जिसने पिछले एक वर्ष के अंदर भारत के १५ राज्यों में तेजी से अपना विस्तार किया है। मैं यहां यह कहना उचित समझता हूं कि पिछले एक वर्ष के अंदर वामपंथी आतंकवाद, जो नक्सलवाद के रूप में अपनी गतवधियों को फैला रहा है, इसकी राष्ट्र विरोधी गतवधियां, समाज विरोधी गतवधियां पिछले एक वर्ष में तेजी से फैली हैं। एक वर्ष पहले आठ राज्यों के मात्र ५४ जिलों तक जो आतंकवाद सीमित था, आज वह आतंकवाद नक्सलवाद के रूप में १५ राज्यों के लगभग २०० से अधिक जिलों के अंदर फैल चुका है। अब तक इस नक्सलवाद की चपेट में आकर भारत के १५००० से अधिक बेकसूर नागरिक मारे गए हैं और ५५०० से अधिक पुलिस और अर्द्ध सैनिक बलों के जवान इसकी चपेट में आ चुके हैं। यह सब कुछ जब हम अपनी आँखों से देखते हैं तो हमें कहीं न कहीं अहसास होता है लेकिन जब एक मंच पर एकजुट होकर उसका मुकाबला करने की बात आती है तो कहीं न कहीं वोट बैंक की राजनीति हम सबकी एकता में बाधक बनती है। ऐसे बहुत से कारण हैं जो आज भी आतंकवाद से मुकाबला करने में हम सबको रोकते हैं।
महोदय, भारत के अंदर आतंकवाद के दो कारण हैं। एक मज़हबी कट्टरता जिसे हम धार्मिक कट्टरता नहीं कह सकते, धर्म और मज़हब में अंतर होता है और जब हम धर्म और मज़हब में अंतर महसूस नहीं कर पाते हैं तो भ्रमित हो जाते हैं और वह भ्रम की स्थिति कहीं न कहीं आतंकवाद को बढ़ाने में, उसे प्रेरित और प्रोत्साहित करने में सहायक होती है। आज एक तरफ मज़हबी कट्टरता को हम प्रेरित और प्रोत्साहित कर रहे हैं और दूसरी तरफ भारत की सांस्कृतिक विरासत को हर प्रकार से नष्ट-भ्रष्ट करने के लिए उस पर चौतरफा हमला भी वभिन्न राजनीतिक दलों द्वारा, इस देश में चंद वोटों के लिए, चंद लोगों के तुष्टिकरण के लिए और सत्ता में बने रहने के लिए किया जा रहा है। आंध्रा प्रदेश में कांग्रेस की सरकार ने आंध्रा प्रदेश में नौकरियों में मुस्लिमों के लिए पांच प्रतिशत आरक्षण की घोषणा की। हाई कोर्ट ने उस पर रोक लगा दी। आर्डिनैन्स के माध्यम से पांच प्रतिशत आरक्षण आंध्रा प्रदेश में एक वर्ग विशेष को खुश करने के लिए लागू किया गया। हर व्यक्ति जानता है कि भारत के विभाजन का कारण द्विराष्ट्रवाद रहा है, जो असंवैधानिक काम है। इससे अलगाववाद बढ़ेगा, अराजकता बढ़ेगी। दो वर्गों में आपस में जो समन्वय स्थापित होना चाहिए था, वह अलगाववाद की स्थिति को पैदा करेगा, लेकिन आंध्रा प्रदेश में मुस्लिम आरक्षण लागू हो गया। केन्द्र की यूपीए सरकार जहां कश्मीर के आतंकवादियों पर किसी प्रकार की लगाम कसने में असफल हुई है, पूर्वोत्तर के राज्यों में उल्फा का आतंकवाद बढ़ा है। मणिपुर में पिछले ४५ दिनों से नाकेबंदी है और यह सरकार कुछ नहीं करती है। देश में आई.एस.आई. का जाल फैल रहा है, नक्सलवाद और माओवाद तेजी से फैल रहा है। हमारा पड़ोसी देश नेपाल पूरी तरह से इसकी चपेट में आ गय़ा है लेकिन नेपाल की आर्थिक नाकेबंदी के साथ हर प्रकार की पाबंदी हम नेपाल पर लगा रहे हैं। यहां अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में केन्द्र सरकार द्वारा ५० प्रतिशत सीटों के रिज़र्वेशन की घोषणा करके पुन: अलगाववादी तत्वों को उकसाने का काम किया जा रहा है जो देश के विभाजन के लिए जिम्मेदार रहे हैं। आप कैसे आतंकवाद को नियंत्रित करेंगे, कैसे उस पर नकेल डालेंगे? क्या आप इस मज़हबी कट्टरवाद को रोक नहीं सकते हैं? ब्रिटेन पर हमला हुआ तो उसने वहां के मदरसों को स्पष्ट चेतावनी दे दी कि ब्रिटेन में रहना है तो ब्रिटेन के कानून के अनुसार रहना पड़ेगा लेकिन यहां संसद पर हमला होता है, जम्मू-कश्मीर की विधान सभा पर हमला होता है, अक्षरधाम मंदिर पर हमला होता है, रघुनाथ मंदिर पर हमला होता है, राम जन्मभूमि पर हमला होता है, प्रतदिन नरसंहार होता है, सैनिक छावनियों पर हमले होते हैं, लेकिन इस सबके बावजूद हम स्वीकार नहीं करते हैं कि आतंकवादी कौन हैं? हम लोग स्वीकार नहीं करते हैं कि आतंकवादियों का मकसद क्या है? क्या आतंकवादियों का मकसद सिर्फ रोटी-रोजी और मकान है? क्या ये आतंकवादी किसी सामाजिक क्रांति को लेकर आए हैं या केवल भारत के खिलाफ, भारत की एकता और अखंडता के खिलाफ सशस्त्र संघर्ष के लिए आए हैं। मैं समझता हूं कि वार्ता से नहीं या शांति से नहीं, बल्कि इन सब को कुचल कर हम इसका मुकाबला कर सकते हैं। उसके लिए जिस प्रकार की एकता की आवश्यकता होनी चाहिए थी, वह अभी दिखाई नहीं दे रही है क्योंकि जब हम आतंकवाद के खिलाफ बोलते हैं तो कुछ लोगों को लगता है कि हम ओसामा बिन लादेन के खिलाफ बोल रहे हैं, मुल्ला उमर के खिलाफ बोल रहे हैं। उन्हीं लोगों को लगता है कि यह इस्लाम पर प्रहार हो रहा है। यहीं पर हम गलती करते हैं और मजहबी कट्टरवाद को रोकने का प्रयास नहीं हो रहा है बल्कि उसे बढ़ाने का प्रयास हो रहा है। चाहे अलिगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में मुस्लिम आरक्षण के कारण ऐसा हुआ हो, चाहे आंध्रा प्रदेश में मुस्लिम आरक्षण के नाम पर हो रहा हो, उस कट्टरता को बढ़ाने का प्रयास हो रहा है। इसी का परिणाम है कि ऐसी हरकतें और इस प्रकार की गतवधियां बढ़ रही है।
आतंकवाद बढ़ने का दूसरा कारण विदेशी विचारधारा भी है। भारत के अंदर साम्यवादी विचारधारा विदेशी विचारधारा है। किस लोकतंत्र में इनका विश्वास है? किस प्रकार से इन लोगों के द्वारा नरसंहार हो रहा है? आज यहां पर हमारे माननीय सांसद श्री डी.पी. यादव जी बोल रहे थे। मुझे आश्चर्य होता है कि अभी माओवादियों ने इनके एक सांसद के घर पर हमला किया। क्या इनकी हिम्मत नहीं थी कि ये लोग संसद में उस बात को रख सकें, क्योंकि इनको लगता है कि अगर ये माओवाद के खिलाफ बोलेंगे तो फिर न जाने इनके कितने वोट खिसक जाएंगे। यही कारण है कि यहां पर किसी मुद्दे पर जब चर्चा होती है तो उसे स्पष्ट रूप से ईमानदारी से स्वीकार करने की क्षमता इन लोगों में नहीं है और आतंकवाद का मुकाबला आप दोहरे मापदंडों से नहीं कर सकते हैं। यह बात हम सब को स्वीकार करनी पड़ेगी। जिस प्रकार की स्थिति अयोध्या के अंदर पैदा हुई, पांच जुलाई को राम जन्म भूमि पर हमला हुआ, यहां मैं यह भी बताना चाहता हूं कि महोदय, अयोध्या पर यह पहला हमला नहीं हुआ है, इससे पहले भी अयोध्या पर अनेक हमले हो चुके हैं और उन सब हमलों को अयोध्या ने झेला है। अयोध्या का इतिहास आस्था और प्रतिकार का इतिहास रहा है। इस देश के करोड़ों-करोड़ हिंदुओं की सात पवित्र जगहों में से एक पवित्र जगह अयोध्या को माना जाता है। ये सातों पवित्र नगरियां अयोध्या, मथुरा, काशी, कांची अवंतिका, पुरी, द्वारावति चैव सप्तेता मोक्ष दायिका, यानि ये सभी सात नगरियां हिंदुओं की पवित्र नगरियां हैं। शास्त्रों के अनुसार इन सात नगरों में प्रमुख स्थान अयोध्या का है।…( व्यवधान)
सभापति महोदय : आप मुझे देख कर बोलिए।
...( व्यवधान)
सभापति महोदय : जो बगैर परमिशन के बोल रहे हैं, वह रिकार्ड में नहीं जाएगा।
...( व्यवधान)
सभापति महोदय : आप मुझे संबोधित करें।
...( व्यवधान)
योगी आदित्यनाथ : मैंने शास्त्रों की बात कही है। मैंने कांग्रेस की बात नहीं कही है। सात नगरियों में तीन प्रमुख - अयोध्या, मथुरा और काशी हैं और तीनों स्थानों से जुड़े हुए सांसदों को हम लोगों ने देखा है। दो सांसदों के विचार हमने सुने हैं और हो सकता है कि तीसरे सांसद के विचार भी सुनने का हमें मौका मिले। उनके विचार किस रूप में आते हैं, यह हर व्यक्ति जानता है, क्योंकि बहुत से लोग ऐसे हैं जिन्हें अपने अंदर की अभिव्यक्ति को स्वतंत्र रूप से अभिव्यक्त करने की इजाजत आज भी स्वतंत्र भारत में नहीं मिली है, क्योंकि यदि वे आंतरिक अभिव्यक्ति को व्यक्त कर देंगे तो कहीं उनकी नौकरी न चली जाए, इस बात की आशंका उनको हमेशा रहती है। इसलिए वे हमेशा किसी न किसी बंधन में बंधे रहते हैं। सच्चाई को वे न स्वीकार कर सकते हैं और न सच्चाई को उनकी ओर से किसी प्रकार की स्वीकार्यता मिल सकती है। काशी के बारे में हमारे माननीय सांसद ने यहां स्पष्ट नहीं किया कि काशी का इतिहास कहां से है। अयोध्या के इतिहार के बारे में भी माननीय सांसद कह रहे थे तथा हमारे मित्र ने पीछे कहा कि इन्होंने सभी प्रमुख धार्मिक स्थलों, मजहबों के नगरों के रूप में अयोध्या को चिन्हित किया है।
उन्होंने पूछा कि ये किस पार्टी से हैं - हमने कहा कि जिस प्रकार वभिन्न धर्मों और नगरों से होते हुए कुछ लोग अन्त में अयोध्या में टिक गए और राम से जुड़ गए, वैसे ही वभिन्न पार्टियों से होते हुए आज ये बहुजन समाज पार्टी में हैं लेकिन कल किस पार्टी में होंगे, उस बारे में कुछ नहीं कह सकता हूं। अपने को सैकुलर बनाने के लिए, हम किसी भी हद तक जा सकते हैं जिससे हममें सच्चाई को भी स्वीकार करने की क्षमता नहीं रहती है। हम इस बात को भी स्वीकार नहीं कर सकते कि वास्तव में अयोध्या में हमले का इतिहास क्या है।
महोदय, बाबर कौन था? बाबर एक विदेशी आक्रान्ता था और मध्य युग में राम जन्मभूमि के पवित्र स्थल पर, जहां रामलला का मंदिर बना था, बाबर के आदेश पर उसके सिपहसालारों ने, मंदिर को तोड़कर वहां एक ढांचा खड़ा कर दिया। ढांचे को खड़ा करने के बाद, जिस प्रकार से आस्था और प्रतिकार का लम्बा इतिहास हमें अयोध्या में देखने को मिलता है, मैं समझता हूं कि वर्तमान में उस पर ज्यादा चर्चा करना आवश्यक नहीं है। आज अयोध्या के बारे में जिस प्रकार की स्थितियां सामने आई हैं, उनको देखते हुए, मैं आपसे केवल यही कहना चाहता हूं कि सुरक्षा के तीन जोन अयोध्या में हैं - एक ग्रीन जोन है, जिसके अन्तर्गत पूरी अयोध्या आती है, दूसरा येलो जोन है, जो अधिगृहीत परिसर से प्रारम्भ होता है और तीसरा रैड जोन है, जिसमें जहां रामलला विराजमान हैं, और उसके आसपास का क्षेत्र आता है।
महोदय, आतंकवादियों ने दो जोन पार कर लिए थे - ग्रीन और यैलो। यहां हमारे जो सांसदगण हैं, मैं उनसे कहना चाहता हूं कि जब आतंकवादी अयोध्या गए थे और उन्होंने ग्रीन जोन पार कर लिया था, यैलो जोन पार कर लिया था, उस समय सुरक्षा बलों के जवानों के सामने भ्रामक स्थिति क्यों पैदा हुई - वे किस पार्टी का झंडा जीप पर लगाकर गए थे, किस पार्टी का झंडा लेकर आतंकवादी अंदर गए थे, …( व्यवधान)
श्री अशोक प्रधान (खुर्जा) : सभापति जी, इनको इसलिए परेशानी हो रही है क्योंकि आतंकवादी समाजवादी पार्टी का झंडा लिए हुए थे। …( व्यवधान)
योगी आदित्यनाथ : महोदय, समाजवादी पार्टी के लोगों का यह कहना कि उत्तर प्रदेश के डी.जी.पी. को एक सप्ताह पहले हिन्दू संगठनों ने एक प्रतिवेदन दिया था और मांग की थी कि सुरक्षा बलों में कमी की जाए, बिलकुल गलत है। मैं आज भी दावे के साथ कहता हूं कि किसी भी प्रकार का कोई आवेदन किसी भी हिन्दू संगठन ने डी.जी.पी. पुलिस को अयोध्या में सुरक्षा बलों में कमी करने अथवा तलाशी लेने में कमी करने के सम्बन्ध में नहीं दिया था, बल्कि हमने तो एक सप्ताह पहले परिसर की सुरक्षा बढ़ाने की मांग की थी। हिन्दू संगठन के लोगों ने उत्तर प्रदेश के प्रमुख अधिकारियों से कहा था और अधिगृहीत परिसर के जो रिसीवर हैं उन्हें एक प्रतिवेदन देकर मांग की थी कि अयोध्या परिसर की सुरक्षा बढ़ाई जाए। इस संबंध में उनका वक्तव्य आया था कि "सुरक्षा की जो व्यवस्था है, वह अधिक है। इसमें कमी लानी चाहिए।" यह वक्तव्य उत्तर प्रदेश के एक वरिष्ठ अधिकारी का है।
महोदय, अयोध्या परिसर पर हमले के बाद दो प्रतक्रियाएं आईं। जिस दिन हमला होता है, उस दिन माननीय गृह मंत्री वहां जाते हैं, लेकिन उत्तर प्रदेश के मुख्य मंत्री को वहां जाने की फुर्सत नहीं मिलती। वे वहां नहीं गए। उन्होंने कहा कि हमले तो होते रहते हैं और इस प्रकार के हमले का जवाब सुरक्षा बल के जवानों ने दे दिया। उसके बाद विधान सभा में जब जर्चा हुई, जिस चर्चा की बात यहां हमारे समाजवादी पार्टी के माननीय सदस्य ने की । उ.प्र. के मुख्यमंत्री ने विधान सभा में कहा कि अगर मुख्य मंत्री अयोध्या जाते, तो आतंकवादियों का मनोबल बढ़ता - मैं समझ नहीं पाया कि यदि मुख्य मंत्री महोदय अयोध्या जाते, तो आतंकवादियों का मनोबल कैसे बढ़ता - क्या वे आतंकवादियों से मिले हुए थे, जो उन्हें देखकर आतंकवादियों का मनोबल बढ़ता ? जब गृह मंत्री वहां गए, तो क्या आतंकवादियों का मनोबल बढ़ा? जब इस प्रकार की परिस्थितियां पैदा होती हैं, …( व्यवधान)
सभापति महोदय : माननीय सदस्य, योगी आदित्य नाथ के भाषण के अतरिक्त किसी भी माननीय सदस्य का भाषण रिकॉर्ड पर नहीं जाएगा।
...( व्यवधान)
योगी आदित्यनाथ : महोदय, जब इस प्रकार का व्यक्ति सांवैधानिक प्रमुख के पद पर बैठा हुआ हो, तो अंदाजा लगाया जा सकता है कि उनकी स्थितियां क्या हैं, ये लोग क्या साबित करना चाहते हैं और किस हद तक जाना चाहते हैं।
महोदय, अयोध्या में राम जन्मभूमि पर हमला पहली बार नहीं हो रहा है। अभी श्रमजीवी एक्सप्रैस में बम विस्फोट हुआ था। उत्तर प्रदेश के मुख्य मंत्री वहां चले गए, क्योंकि श्री लालू प्रसाद, रेल मंत्री जी को वह नीचा दिखाना चाहते थे, जिससे कि लालू प्रसाद जी, किसी प्रकार अपने को अपमानित महसूस करें, क्योंकि रेल मंत्री के नाते उनकी नैतिक जिम्मेदारी थी कि रेलों में किसी प्रकार की दुर्घटना न हो।
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री वहां पहुंच जाते हैं, लेकिन अयोध्या नहीं पहुंचते हैं, क्योंकि करोड़ों-करोड़ हिन्दुओं की भावनाओं के साथ यह कुठाराघात हुआ था, उनकी आस्था पर प्रहार हुआ था। बार-बार हिन्दुओं को अपमानित करने की जो परम्परा राजनैतिक क्षेत्र में चली हुई है, उसमें कहीं न कहीं विराम तो लगना ही चाहिए। इसलिए मैं आपसे निवेदन करना चाहता हूं कि केन्द्रीय गृह सचिव का एक बयान आया है। केन्द्रीय गृह सचिव ने एक बात कही है और बहुत महत्वपूर्ण बात उन्होंने कही है, उसमें उन्होंने कहा था कि हम लोगों ने मई माह में ही इस बात की सूचना उत्तर प्रदेश सरकार को दे दी थी। हमने उत्तर प्रदेश सरकार को सूचना दे दी थी कि प्रमुख मंदिरों पर हमले हो सकते हैं, प्रमुख धार्मिक स्थलों पर हमले हो सकते हैं, श्री वी.के. दुग्गल, गृह सचिव, भारत सरकार ने इस प्रकार की बातें कही हैं। उन्होंने तत्काल कहा था। उस सब के बावजूद अयोध्या उत्तर प्रदेश में है, मथुरा उत्तर प्रदेश में है और काशी उत्तर प्रदेश में है, उसके बाद भी श्रीराम जन्मभूमि अयोध्या की सुरक्षा न हो पाना केवल हिन्दू भावनाओं के साथ खिलवाड़ करना है। उत्तर प्रदेश में श्रीराम जन्मभूमि की व्यवस्था दोहरी है। केन्द्र सरकार ने जब से स्थान अधिग्रहित किया है, वहां पर केन्द्र और प्रदेश सरकार, दोनों की ही सुरक्षा में श्रीराम जन्मभूमि अयोध्या चल रही है। मैं आपसे केवल यही कहना चाहता हूं कि उत्तर प्रदेश की जो सुरक्षा व्यवस्था है और श्रीराम जन्मभूमि की जो सुरक्षा व्यवस्था है, वहां पर सी.आर.पी.एफ. रैड जोन की व्यवस्था देखती है, यैलो जोन की व्यवस्था पी.ए.सी. के अधीन है और ग्रीन जोन को उत्तर प्रदेश पुलिस देखती है। अब जो लोग यहां पर बधाई देने की बात करते हैं, स्वयं अनुमान लगाया जा सकता है, ग्रीन जोन पार हो गया, उसके लिए कौन जिम्मेदार है, यैलो जोन पार हो गया, उसके लिए कौन जिम्मेदार है, रैड जोन पर सी.आर.पी.एफ. के जवानों ने बहादुरी का काम किया था और आतंकवादी जिस सज़ा के हकदार थे, वह काम बहादुर जवानों ने करके दिखाया, इसलिए सी.आर.पी.एफ. के जवान तो बधाई के पात्र हैं, लेकिन अनावश्यक रूप से अपनी पीठ थपथपाने का काम जबरदस्ती कुछ लोगों के द्वारा किया जा रहा है। अगर उन वक्तव्यों को यहां पर रख दिया जाये, जो वहां पर स्थानीय नागरिकों ने दिये थे तो एक मैं समझता हूं कि बहुत लोग मुंह दिखाने लायक ये लोग इस सदन में सब के बीच में नहीं बच पाएंगे। इसीलिए मैं कहना चाहता हूं कि सी.आर.पी.एफ. के जवानों ने बहादुरी से सामना किया था…( व्यवधान)
सभापति महोदय : अब आप समाप्त करें।
योगी आदित्यनाथ : हम बधाई देना चाहते हैं, सी.आर.पी.एफ. के जवानों को कि सी.आर.पी.एफ. के जवानों ने वहां पर जिस बहादुरी का काम किया था और आतंकवादियों को ऐसी मौत मारा था, जिसके वे सही में हकदार थे। निश्चित ही वे इसके लिए बधाई के पात्र हैं।
इसके साथ ही मैं आपके माध्यम से एक बात और कहना चाहता हूं कि आज हम लोगों को स्वीकार करना पड़ेगा कि देश में आतंकवाद बढ़ा है । हम यह कहना चाहते हैं कि आतंकवाद का मुकाबला दोहरे मानक से नहीं हो सकता है । …( व्यवधान)
सभापति महोदय : आपकी पार्टी के दूसरे और मैम्बर्स को भी बोलना होगा, उनका समय कट जायेगा।
योगी आदित्यनाथ : मैं अपनी पार्टी की तरफ से पहला सदस्य बोल रहा हूं। अन्य लोगों को, जो छोटे-छोटे दल हैं, उन लोगों को आधा घण्टा बोलने की आपने अनुमति दी है।
सभापति महोदय : आपके २० मिनट से ज्यादा हो गये, मल्होत्रा जी भी ३४ मिनट बोल चुके हैं, मैंने आपको ज्यादा समय दिया है। अब आप समाप्त कीजिए।
योगी आदित्यनाथ (गोरखपुर) : मैं सदन से कहना चाहता हूं कि एक और प्रकरण सामने आया है, वह सलमान खान से सम्बन्धित, दाऊद इब्राहिम से, अंडरवल्र्ड से जिसका सम्बन्ध हो, ऐसे कितने दोहरे मानक हम तय करेंगे। संजय दत्त के घर से ए.के.४७ की स्िंप्रग मिलती है, लेकिन संजय दत्त टाडा में बन्द होते हैं। ऐसा होना चाहिए, क्योंकि मुम्बई में बम विस्फोट से सम्बन्धित लोगों के उनसे किसी न किसी प्रकार के सम्बन्ध थे, तभी वे बन्द हुए थे। भरत शाह, उसी टेप से सम्बन्धित मामले में बन्द हुए। भरत शाह, जो फिल्म निदेशक थे, वे बन्द होते हैं तो सलमान खान कौन से खेत की मूली है कि आज उनपर कोई कार्रवाई सरकार नहीं करती, महाराष्ट्र की सरकार कार्रवाई नहीं करती और केन्द्र की सरकार चुप रहती है। आज भी उनके बारे में वहां के गृह मंत्री इस बात को विधान सभा में स्वीकार करते हैं कि सलमान खान के सम्बन्ध अंडरवल्र्ड से हैं। उनकी जो फोन पर बातचीत हुई है और जो टेप हुई है, वह सही है। उस सब के बावजूद केवल एक वर्ग विशेष से जुड़े होने के नाते एक प्रिवलेज उसे भारत के अन्दर मिल गया कि उसकी हर जायज-नाजायज गतवधियों को भारत के अन्दर जारी रहने दिया जाना चाहिए। आतंकवाद का मुकाबला इन दोहरे मापदण्डों से नहीं हो सकता है। जब सब पर एक कानून लागू होगा, यह तभी हो सकता है और जिस प्रकार के बयान वभिन्न आतंकवादी संगठनों को बचाने के लिए वर्तमान में आ रहे हैं, उत्तर प्रदेश सरकार और तत्कालीन एन.डी.ए. की सरकार ने सिमी पर प्रतिबन्ध लगाया था। एक ए.डी.एम. पाठक की हत्या इस संगठन ने कानपुर के अन्दर की थी और तमाम राष्ट्र विरोधी गतवधियों के मेरे पास आंकड़े हैं। भारत और नेपाल के सीमावर्ती क्षेत्रों में, पिछले १० वर्षों के अन्दर मात्र नेपाल की सीमा से १० किलोमीटर के अन्दर, ३५० से अधिक नये मदरसे और मस्जिदें बनी हैं।
18.00 hrs. एक अनुमान के अनुसार २९० मदरसे बने हैं और ३३० नई मस्जिदें बनी हैं। मैं केवल उत्तर प्रदेश की नेपाल से लगी सीमा के बारे में बोल रहा हूं। ये सब अवैधानिक तरीके से बिना किसी परमीशन से, बिना किसी रजिस्ट्रेशन के बने हैं। उनकी आय के रुाोत क्या हैं और किस उद्देशय से बनाए गए हैं?…( व्यवधान)
MR. CHAIRMAN : Just a minute. There are still 14 speakers. If the House agrees, shall we extend the timing by one hour?
SEVERAL HON. MEMBERS: Yes.
MR. CHAIRMAN: The time of the House is extended by one hour.
योगी आदित्यनाथ : बिना किसी उद्देश्य के अगर मज़हबी कट्टरपंथियों के लिए और प्रशिक्षण केन्द्रों के रूप में इन मदरसों का प्रयोग होगा तो इन पर प्रतिबंध लगाना ही चाहिए। एक समान शिक्षा भारत के अंदर लागू की जानी चाहिए। इन पर राष्ट्रीय विचारधारा की शिक्षा को लागू करना चाहिए। चाहे जहां तक सहायता देने की बात है, इनकी गतवधियां अगर राष्ट्रभक्ति से प्रेरित होगी, भारत के प्रति ईमानदार होंगी और भारत की परम्पराओं से जुड़ी हुई होंगी तो मैं समझता हूं कि इसका समर्थन किया जाना चाहिए, लेकिन अगर इनकी गतवधियां राष्ट्रविरोधी हों तो इन पर कहीं न कहीं प्रतिबंध लगाना चाहिए। सिमी के ऊपर तत्कालीन एनडीए की सरकार ने प्रतिबंध लगाने का प्रयास किया था। उत्तर प्रदेश की सरकार ने जब सिमी पर प्रतिबंध लगाया था, तब किन लोगों ने इसका विरोध किया था। आज जब श्रमजीवी एक्सप्रेस में विस्फोट हुआ, तब कौन लोग मारे गए थे, मजदूर, किसान लोग मारे गए थे। सिमी के खिलाफ अभी तक वक्तव्य नहीं दिया गया है, सिमी के खिलाफ कोई नहीं बोल सकता और इस सब के बावजूद जब हम लोग आतंकवाद के खिलाफ दोहरे मानक तय करते हैं तो आतंकवाद उससे बढ़ेगा ही, कम नहीं होगा। …( व्यवधान)
सभापति महोदय : आप अपनी बात को समाप्त कीजिए। आपकी पार्टी के दो स्पीकर और हैं, जिनका समय आप कम कर रहे हैं।
योगी आदित्यनाथ : मैं आपसे केवल यह कहना चाहता हूं कि आतंकवादी हमले के पश्चात जिस प्रकार की सूचनाएं आयीं, उसमें केन्द्रीय गृह सचिव कुछ बोल रहे हैं और उत्तर प्रदेश के गृह सचिव और डीजीपी कुछ और कह रहे हैं, प्रधान मंत्री और केन्द्रीय गृह मंत्री कुछ और कहते हैं और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री कुछ और कहते हैं। उससे पता लगता है कि सेना, अर्द्धसैनिक बलों, पुलिस और खुफिया एजेंसियों में किसी प्रकार का कोई समन्वय नहीं है। आखिर आतंकवाद का मुकाबला भारत कर रहा है। पूरा भारत आईएसआई की चपेट में है, कट्टर इस्लामिक संगठनों की चपेट में है। पाकिस्तान और बांग्लादेश में प्रशिक्षण केन्द्र चल रहे हैं। नेपाल आईएसआई का अड्डा बन चुका है। भूटान के अंदर उल्फा की गतवधियों को जिस प्रकार से एनडीए की सरकार के समय में नेस्तनाबूत किया गया था, लेकिन वर्तमान सरकार उस पर नियंत्रण करने का कोई प्रयास नहीं कर रही है। अंतर्राज्यीय अपराध और माफिया लोग जिस प्रकार से उभर रहे हैं, इन सबके खिलाफ सेना, अर्द्धसैनिक बलों, पुलिस और खुफिया एजेंसियों के बीच में समन्वय आवश्यक हैं। केन्द्र की पिछली सरकार ने एक हजार करोड़ रूपये पुलिस के आधुनिकीकरण पर प्रति वर्ष खर्च करने की बात कही थी, लेकिन एक भी पैसा खर्च नहीं किया जा रहा है। आतंकवादियों के पास एके-४७, एके-५६, मशीनगन, रॉकेट लांचर्स, हेण्ड ग्रेनेड और आडीएक्स तथा और भी खतरनाक विस्फोटक हैं लेकिन हमारे सिपाहियों के पास मात्र थ्रीनोटथ्री की पुरानी राइफलें हैं। उनके पास जंग लगी हुई राइफलें हैं। हमारे सिपाही कैसे उनका मुकाबला कर पाएंगे? कोई नेटवर्क सेना, अर्द्धसैनिक बलों, पुलिस और खुफिया एजेंसियों के बीच में नहीं है, जबकि आतंकवादियों/उग्रवादियों तथा माफिया गिरोहों का एक मजबूत नेटवर्क है। उनके पास मादक द्रव्यों और तस्करी के माध्यम से ऊल-जलूल पैसा आ रहा है।…( व्यवधान)
सभापति महोदय : आपके और स्पीकर्स भी बोलने वाले हैं। आप उनका समय क्यों ले रहे हैं।
...( व्यवधान)
योगी आदित्यनाथ : केन्द्र सरकार ने पुलिस आधुनिकीकरण पर जो एक हजार करोड़ रुपये खर्च करने की बात कही थी, राज्य सरकारें ईमानदारी से उसे खर्च करें और आतंकवाद के लिए दोहरा मानक तय न करके हमें अपनी मानसिकता में बदलाव लाना पड़ेगा।…( व्यवधान) उन्होंने समय-समय पर यह प्रयास किया है। तालिबान के नाम पर जो हो रहा है, हम इसे कतई मंजूर नहीं कर सकते। अगर इस्लाम तालिबान के रूप में आता है, तो हम विरोध करेंगे। अगर बाबर जैसे लोग आक्रांताओं के रूप में आएंगे तो हम विरोध करेंगे। अगर इस्लाम, बाबर अन्यायी के रूप में आता है तो उसे नेस्तनाबूत करने के लिए भारत का एक-एक जवान खड़ा होगा। हम इस विश्वास के साथ आतंकवाद का मुकाबला राजनैतिक मतभेदों से ऊपर उठकर करें। मुझे विश्वास है कि राम जन्म भूमि परिसर पर हुए हमले के लिए उन दोषियों के खिलाफ कार्यवाही होगी जिन्होंने वहां सुरक्षा व्यवस्था में कोताही बरती है। सरकार इसे ईमानदारी से करेगी। अब तो सबने स्वीकार कर लिया है कि वह राम जन्म भूमि का स्थल है। अब राम मंदिर का मार्ग भी प्रशस्त करें।
चौधरी विजेन्द्र सिंह (अलीगढ़) : सभापति महोदय, आपने मुझे बहुत ही महत्वपूर्ण चर्चा पर बोलने का मौका दिया। मैं आतंकवाद पर बोलने से पहले माननीय मल्होत्रा जी से एक बात कहना चाहूंगा कि आतंकवाद आखिर है क्या? इस गरिमामयी सदन में कई बार आतंकवाद पर चर्चा हुई। बड़े-बड़े विद्वानों ने अपने विचार व्यक्त किए। मैं उन शब्दों को दोहराना नहीं चाहूंगा, मैं उन बिन्दुओं पर सबका संज्ञान दिलाना चाहूंगा, जो अभी तक उद्ृत नहीं किए गए हैं। राजनैतिक उद्देश्य के लिए, धार्मिक उन्माद के लिए या अपने अन्य किसी उद्देश्य के लिए जब उदंडता की जाती है, वही आतंकवाद कहलाता है। आतंकवाद का पहला पहलू हिंसा है। माननीय मल्होत्रा जी चले गए हैं, एनडीए के साथी बैठे हैं। क्या ये बताएंगे कि हिंसा कब पैदा हुई, इसका जन्म कब हुआ, कहां हुआ? हिन्दुस्तान की आजादी से पहले जहां हिन्दू-मुसलमान एक थे और आजादी की लड़ाई लड़ रहे थे, उस समय आतंकवाद नहीं था। जिस समय देश को आजादी मिली, राजनैतिक उद्देश्यों के लिए, स्वार्थ पूर्ति के लिए जिन्नाह ने अलग देश की मांग की, उस समय हिन्दू-मुसलमानों में कत्ले-आम हुए, खून बहा। उस समय आतंकवाद की नींव पड़ी थी, उस समय इस देश में आतंकवाद के बीज पड़े थे। उससे भी पहले आतंकवाद को तब सहारा दिया गया जब नाथू राम गोडसे ने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी को गोली मारी उस समय इस देश में आतंकवाद का जन्म हुआ था। यही नहीं, वे आप जैसे ही लोग हैं, आप ही उनके सहारे कभी-कभी यहां कुर्सियों पर आकर बैठते हैं, जिसका नाम आरएसएस है। आरएसएस का दूसरा नाम ही आतंकवाद है, ऐसा कहने में मुझे कोई संकोच नहीं है।…( व्यवधान)
प्रो. रासा सिंह रावत : सभापति महोदय, जो संगठन यहां नहीं है, उसका नाम नहीं लिया जाए। इसे कार्यवाही से निकलवाना चाहिए। यहां आरएसएस का नाम लिया गया है।…( व्यवधान)
सभापति महोदय : प्लीज़, आप बैठिए। पहले भी संगठन का नाम लिया जाता रहा है।
...( व्यवधान)
चौधरी विजेन्द्र सिंह : जम्मू-कश्मीर के लाल चौक पर हिंसा फैलाने की कोशिश की गई। वहां से हिंसा को बढ़ावा मिला था। जब इन्होंने जम्मू-कश्मीर से लेकर कन्याकुमारी तक रथ यात्रा निकाली थी, उससे हिंसा का माहौल बना था, पूरे देश में आग भड़की थी। वह काम राजनैतिक उद्देश्य की पूर्ति के लिए किया गया था। इससे भी ज्यादा आतंकवाद को बढ़ावा तब मिला जब १९९२ में आपने अयोध्या में वह कांड किया। उस कांड के बाद हिन्दू-मुसलमानों के बीच दरार पड़ी, लोगों की धार्मिक आस्थाओं को चोट पहुंची और उससे आतंकवाद का जन्म होना शुरू हो गया।…( व्यवधान) ये जितने भी कृत्य थे, ये हिंसात्मक थे और हिंसा को जन्म देने का काम आपने किया।…( व्यवधान) हिंसा को बढ़ावा देने का काम आपने किया, एनडीए ने किया।…( व्यवधान) मल्होत्रा जी यहां नहीं हैं। उन्होंने कहा था कि एक साल के कार्यकाल में आतंकवाद की जितनी घटनाएं घटी हैं, उतनी हमारे कार्यकाल में नहीं घटी।…( व्यवधान)
सभापति महोदय : विजेन्द्र सिंह जी, आप मुझे सम्बोधित कीजिए।
...( व्यवधान)
चौधरी विजेन्द्र सिंह : मैं आपके माध्यम से निवेदन करना चाहता हूं कि रघुनाथ मंदिर पर ३० मार्च, २००२ को आतंकवादी हमला एनडीए गवर्नमैंट के कार्यकाल में हुआ था, जिसमें सात आदमी मारे गये थे। पांच जुलाई को दूसरा हमला हुआ। २५ नवम्बर २००२ को १२ आदमियों की हत्या की गयी। जम्मू-कश्मीर की विधान सभा पर एनडीए गवर्नमैंट के कार्यकाल में हुआ। एक अक्टूबर, २००१ को ३३ आदमियों की हत्या हुई। इसके बाद अमरनाथ यात्रियों पर आतंकवादियों का हमला लगातार हुआ। १ अगस्त, २००० को ४८ व्यक्तियों की हत्या हुई॥ २० जुलाई, २००० को १३ आदमियों की हत्या हुई। ३० जुलाई, २००२ को दो आदमियों की हत्या हुई। ६ अगस्त, २००२ को नौ आदमियों की हत्या हुई। ये सब घटनाएं आपके कार्यकाल, यानी एनडीए गवर्नमैंट के कार्यकाल में हुई। यह आतंकवादी घटनाओं का रिकार्ड है। …( व्यवधान)
प्रो. रासा सिंह रावत : आज तो आपका राज है। …( व्यवधान)
सभापति महोदय : आप मुझे सम्बोधित करके बोलिये।
...( व्यवधान)
चौधरी विजेन्द्र सिंह : सभापति महोदय, जम्मू रेलवे स्टेशन पर आतंकवादी हमला ६ अगस्त को एनडीए गवर्नमैंट के कार्यकाल में हुआ, जिसमें ११ आदमियों को फिर मौत के घाट उतारा गया। कोलकाता में अमेरिकन सैंटर पर २२ जनवरी, २००२ को आतंकवादी हमला एनडीए गवर्नमैंट के कार्यकाल में हुआ जिसमें पांच आदमियों की हत्या हुई और २० लोग घायल हो गये। जम्मू में कालूचक जगह पर १३ मई २००२ को आतंकवादी हमला हुआ, जिसमें ३० आदमियों को मौत के घाट उतारा गया। ये तमाम रिकार्ड एनडीए गवर्नमैंट के कार्यकाल में, यानी आपके समय के हैं जबकि आप कहते हैं कि एनडीए गवर्नमैंट ने आतंकवाद को रोकने का बहुत प्रयास किया। गुजरात में गांधी नगर स्थित अक्षरधाम मंदिर में जिस समय आतंकवादी हमला हुआ, उस समय आप ही सत्ता में थे। २४ सितम्बर, २००२ को २९ व्यक्तियों की हत्या हुई और १७ व्यक्ति घायल हुए। इसके साथ-साथ इससे भी बड़ी घटना देश की सबसे बड़ी महा पंचायत, विश्व की मानी हुई संसद पर आतंकवादी हमला हुआ। आपने पांच जुलाई को अयोध्या की घटना पर पूरे देश को बंद करने का आहवान किया।
18.13 hrs. (Shri Varkala Radhakrishnan in the Chair) आपने उस समय एक बार भी देश में बंद का आहवान नहीं किया। आपकी नैतिकता, आपका सिद्धांत, आपका ईमान, आपका चरित्र होता और आप वास्तव में देश के हित में होते तो आपको उस समय देश में बंद का आहवान करना चाहिए था।
मैं एक बात और कहना चाहता हूं कि आप आतंकवाद से लड़ने के लिए हमें रास्ता बताते हैं। यदि आप आतंकवाद से लड़ना चाहते थे तो जिस समय कश्मीर में चुनाव हुआ, तो आपने वहां चुनाव क्यों नहीं लड़ा ? जब पंजाब में चुनाव हुए तब आपने चुनाव का बहिष्कार क्यों किया? इसके साथ-साथ कारगिल की जो इतनी बड़ी घटना घटी थी, वह भी आपकी सरकार की देन थी। क्या आपका समस्त इंटेलीजैंस सो रहा था? आपको नहीं मालूम था कि वहां आतंकवादियों की किस तरह की गतवधियां चल रही है? उस समय आप क्या कर रहे थे? हजारों लोगों की जानें गयीं, हत्यायें हुईं, देश बर्बाद हुआ, उसके बाद भी आप कहते हैं कि हमने आतंकवाद का मुकाबला किया था। …( व्यवधान)
प्रो. रासा सिंह रावत : १९६२ में जब चीन का हमला हुआ, तब कौन सी सरकार थी ? …( व्यवधान)
चौधरी विजेन्द्र सिंह : मैं बताऊंगा। आप बैठिये। मल्होत्रा जी यहां से चले गये हैं। वह बड़े विद्वान और सीनियर हैं। …( व्यवधान) आप बैठे रहिये। अयोध्या में जिस समय आतंकवादी घटना घटी थी, पूरे देश में हजारों मंदिर टूटे थे, हजारों मस्जिदें टूटी थीं। …( व्यवधान)
MR. CHAIRMAN : Time is over. On no condition the House will be extended after 7 o"clock. There are five or six Members more to speak. Members must cooperate and limit their speeches up to five minutes. Beyond five minutes, I will not allow Members to continue their speeches.
चौधरी विजेन्द्र सिंह : अभी तो हमने बोलना शुरू किया है। उस समय देश में मंदिर-मस्जिद का ऐसा विवाद पैदा किया गया जो आज तक थमा नहीं है। आपने अपनी राजनीतिक स्वार्थ पूर्ति के लिए उसे प्रकाश में रख दिया।…( व्यवधान) मल्होत्रा जी बहुत लम्बा बोले हैं। उनके एक-एक सदस्य ने बहुत टाइम लिया है इसलिए आप मुझे भी समय दीजिए। मल्होत्रा जी ने एक बात कही थी कि यूपीए सरकार आतंकवाद को रोकने में सक्षम सिद्ध नहीं हुई, मैं इस का विरोध करता हूं। …( व्यवधान)
MR. CHAIRMAN: Please conclude. There cannot be endless speeches.
चौधरी विजेन्द्र सिंह : किसी भी आतंकवादी घटना को रोकने के लिए सरकार की वैदेशिक नीति सबसे बड़ा काम करती है। अभी-अभी हमारे प्रधान मंत्री जी ने आतंकवाद पर सहमति बनाने के लिए पड़ोसी देश की यात्रा की थी। अभी अमेरिका, लंदन में जो घटनाएं घटीं, उससे पूरे देश की नजर आतंकवाद के खिलाफ हुई और उस पर सबकी सहमति बनी। सबने हमारे प्रधान मंत्री से एक वायदा किया कि हम आतंकवाद को रोकने के लिए आपके साथ हैं। यही कारण है कि इस पर दबाव बना है लेकिन सबसे बड़ा आतंकवाद देश की आतंरिक हिंसा को रोकना है। …( व्यवधान)
श्री प्रभुनाथ सिंह : सभापति महोदय, मेरा व्यवस्था का प्रश्न है। हाउस में कोरम नहीं है। …( व्यवधान)
चौधरी विजेन्द्र सिंह : प्रभुनाथ सिंह जी, हमें बोलने दीजिए। हम नये लोग हैं।…( व्यवधान)
MR. CHAIRMAN : Are you insisting?
श्री प्रभुनाथ सिंह : जी हां। आप नियम-कानून रोजाना दिखाते हैं। सदन में कोरम नहीं है।…( व्यवधान)
MR. CHAIRMAN: He has asked for quorum. Please be seated. Now the quorum bell will be rung and nothing will go on record during the ringing of quorum bell.
The bell is being rung --
MR. CHAIRMAN : Now, we have quorum.
Shri Bijender Singh, you may please continue. Please remember that the time is very limited. So, you may conclude as quickly as possible.
चौधरी विजेन्द्र सिंह : महोदय, आतंकवाद का एक अन्य पहलू है जातिवाद और धार्मिकतावाद। वर्ष १९९२ में अयोध्या में जो घटना हुई, उससे धार्मिक कट्टरवाद पैदा हुई। …( व्यवधान) मैं भाजपा के अपने साथियों से पूछना चाहता हूँ कि इस देश की आबादी एक अरब आठ करोड़ है, जिनमें से लगभग ८४ प्रतिशत हिन्दू हैं और १५ प्रतिशत मुस्लिम आबादी है। पूरे विश्व में कुल मुस्लिम आबादी १२० मलियन है। इस तरह भारत विश्व में सर्वाधिक मुस्लिम आबादी वाला देश है। जब सर्वाधिक मुस्लिम आबादी इस देश में है तो क्या आप उनको इस देश से निकाल सकते हैं? जब यह एक यथार्थ सत्य है तो क्या आप हिन्दूओं और मुसलमानों के बीच विवाद पैदा करके, धार्मिक कट्टरवाद पैदा करके अयोध्या में मन्दिर बनाना चाहते हैं?
क्या ऐसा मंदिर बनाना चाहते हैं, जहां खून की होली होती हो, जहां इन्साफ और इन्सानियत न हो और जहां जनता के, किसानों के विकास के लिए खर्च किए जाने वाले पैसे को १२-१३ महीनों के बाद चुनाव पर खर्च किया जाए? टार्गेट भी आतंकवाद का पहलू है। इनका उद्देश्य आतंकवाद को रोकना नहीं है, इनका उद्देश्य कुर्सी को हथियाना है, यही इनका टार्गेट है। हमें वह दिन याद हैं, जब इसी सदन में इनके सिर्फ दो सांसद थे। बाद में अयोध्या की घटना के बाद ये लोग सत्ता में आए थे। इनका टार्गेट यह नहीं है कि इस मुल्क में आतंकवाद मिटे, इनका तो टार्गेट कुर्सी हथियाना है। धमार्ंधता की आंधी चलाकर, आपस में टकराव पैदा करना और भाईचारे को समाप्त करना इनका टार्गेट है।
सभापति जी, यहां मल्होत्रा जी नहीं हैं। उन्होंने अपनी बात कहते हुए यह कहा था कि सरकार कानून का पालन नहीं करती।
योगी आदित्यनाथ : आपके पूर्व मुख्य मंत्री ने अपनी आत्मकथा में क्या लिखा है, वह भी पढ़ लें। उन्होंने कहा है कि कांग्रेस के लोग दंगा कराते हैं।
चौधरी विजेन्द्र सिंह : १९९२ में अयोध्या में ढांचा गिराने के बाद उस समय आपकी पार्टी के मुख्य मंत्री कल्याण सिंह जी ने कहा था कि हम कोर्ट के किसी आदेश का पालन नहीं करेंगे। भले ही हम कंटेम्प्ट आफ कोर्ट में चले जाएं, लेकिन हम राम का मंदिर वहीं बनाएंगे। जिस जिन्ना ने हिन्दुस्तान का बंटवारा करके दो देश बनाए, तभी सबको मालूम हो गय़ा था कि उनका उद्देश्य राजनीतिक था और जिस मानसिकता से बंटवारा हुआ, उसी जिन्ना को आपने सेक्युलर कहा। अभी तीन दिन पहले रायबरेली कोर्ट में आपके लोगों को दोष पत्र जारी किया गया। सीबीआई ने आपको दोषी करार दिया, तो आपके नेता ने वहां क्या कहा था, यह सबको मालूम है। इससे साबित होता है कि दोहरा मापदंड आपका है, यूपीए सरकार का नहीं है।
मैं यूपीए सरकार को बधाई देना चाहता हूं, सोनिया जी और मनमोहन सिंह जी को बधाई देना चाहता हूं कि हमारी पार्टी ने नैतिक सिद्धांतों के तहत सेक्युलर विचारधारा से आतंकवाद को मिटाने के लिए दूसरे देशों में जाकर सहमति बनाई और राय ली। हमारा पड़ोसी मुल्क, जहां आतंकवाद पनप रहा है, उस पर भी प्रेशर डवलप किया कि वह ऐसा न करे। इसके साथ देश में भाईचारे को बढ़ावा देने के लिए दोनों देशों के बीच बसों के मार्ग खोले गए, रेल सेवा शुरू की जा रही है, क्योंकि आतंकवाद को अगर कोई रोक सकता है, तो वह दोनों देशों की जनता रोक सकती है। दोनों देशों की जनता के बीच भाईचारे की भावना आतंकवाद को बढ़ने से रोक सकती है। इस तरह से हमारी सरकार ने आतंकवाद रोकने के लिए कई प्रयास किए हैं।
अयोध्या में जो पांच तारीख को आतंकवादियों द्वारा हमला किया गया, उस विषय पर यहां चर्चा शुरू करते हुए मल्होत्रा जी ने कहा कि केन्द्र सरकार उसमें फेल रही है। केन्द्र सरकार और राज्य सरकार की एक कोर्डिनेशन कमेटी होती है। उस कमेटी की मीटिंग पिछली २३ मई को हुई थी। केन्द्र सरकार की इंटेलीजेंस एजेंसी ने रिपोर्ट दी थी कि हमले की कुछ आशंका है। केन्द्र सरकार ने राज्य सरकार को कहा था कि जहां-जहां धार्मिक स्थल हैं, वहां सिक्योरिटी बढ़ाई जाए, क्योंकि इस तरह की सूचनाएं मिल रही हैं। इस तरह देखा जाए तो हमने अपना दायित्व निभाया है।
हम सीआरपीएफ और पीएसी को बधाई देना चाहते हैं, जिन्होंने चंद मिनटों में ही आतंकवादियों के तमाम मंसूबों को कामयाब नहीं होने दिया और मुल्क को आग में झोंकने से बचा लिया। इन्हीं शब्दों के साथ मैं मल्होत्रा जी ने जो बातें कहीं हैं, उनसे सहमत नहीं हूं और यूपीए सरकार को बधाई देना चाहता हूं कि उसने स्वच्छ मानसिकता से, सेक्युलर भावना से आतंकवाद को रोकने के लिए भरसक प्रयास किया है, जिससे ऐसी घटनाओं में कमी आई है और आगे भी आएगी।
इसके साथ ही मैं अपनी बात समाप्त करता हूं।
MR. CHAIRMAN : Shri Anant Gudhe, I would request you to be brief. You may conclude your speech within five minutes. Otherwise, we will not be able to complete the discussion today.
श्री अनंत गुढ़े (अमरावती) : सभापति महोदय, फिर से एक बार सदन में देश में हुए आतंकवादी हमले पर चर्चा हो रही है। अयोध्या में प्रभु रामचन्द्र जी के जन्म स्थान पर ५ जुलाई को जो आतंकवादी हमला हुआ, उसकी मैं निंदा करता हूं। हमारे जिन सुरक्षाकर्मियों ने इस हमले को नाकाम किया, उन्हें मैं बधाई देना चाहता हूं। हमारा देश और सारी दुनिया आज आतंकवाद से जूझ रही है।
हम तो कई सालों से आतंकवाद से लड़ते आ रहे हैं लेकिन खतरा दिनोंदिन बढ़ता ही जा रहा है। सभापति जी, मेरा सवाल यह है कि हम इस आतंकवाद को क्यों नहीं रोक पा रहे हैं। लंदन में चार बम-विस्फोट होते हैं तो पाकिस्तान के सारे मदरसों की चैकिंग हो जाती है और पाकिस्तान के मदरसों से आतंकवादी पकड़े गये हैं। हमारे देश में आतंकवादी पनप रहे हैं और बढ़ रहे हैं। कितने मदरसे अनुमति लेकर चलाए जाते हैं, कितने मदरसों को पर्मिशन है। एक साल में मदरसे की बिल्िंडग तैयार हो जाती है। बिल्िंडग के लिए पैसा कहां से आता है? लेकिन हमारी सरकार ने इसे जानने की कभी कोशिश नहीं की। इनको पैसा जनता नहीं देती है, पैसा बाहर से आता है, उग्रवादियों से पैसा आता है।
THE MINISTER OF WATER RESOURCES (SHRI PRIYA RANJAN DASMUNSI): Mr. Chairman, Sir, I would like to draw your kind attention to an important thing. It is most inappropriate to make a general comment against all the madarsas without any substance. In this very House, during a Half-an-hour Discussion, during the NDA regime, I raised a question whether the Government can name even one madarsa which is indulging in terrorist activities. … (Interruptions) The Minister could not reply. … (Interruptions)
श्री अनंत गुढ़े : ऐसा तो सभी कहते हैं। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री जी ने भी कहा है। …( व्यवधान)
योगी आदित्यनाथ : बाहर से पैसा आता है। …( व्यवधान)
SHRI PRIYA RANJAN DASMUNSI: From MPLAD Funds, I give money for madarsas after verifying and checking that they are doing good work. … (Interruptions)
प्रो. रासा सिंह रावत : ये लोग जानबूझकर डिस्टर्ब कर रहे हैं। …( व्यवधान)
श्री अनंत गुढ़े : मदरसों की बात पर ये लोग चिढ़ जाते हैं। …( व्यवधान)
श्री पवन कुमार बंसल (चण्डीगढ़) : स्वामी जी के आश्रमों में टैरेरिज्म है।…( व्यवधान)
श्री अनंत गुढ़े : खुद पाकिस्तान के राष्ट्राध्यक्ष ने कहा है। वहां उनके ऊपर पाबंदी लगाई गई है, बंगला देश में पाबंदी लगाई है। यहां पर आतंकवाद को बढ़ावा दिया जा रहा है तो केवल वोटों की राजनीति के लिए बढ़ावा दिया जा रहा है। यहां पर एक माननीय सदस्य ने बोलते हुए कहा कि हमें यह सोचना चाहिए कि आतंकवाद को रोकने के लिए हमारे पास क्या रास्ता है? एनडीए सरकार पोटा क्यों लाई थी? देश में आतंकवादी जो फैल रहे हैं, जो समि का जाल फैल रहा है, उसको कंट्रोल करने के लिए पोटा लाया गया था। ये पोटा के विरोध में थे और अब ये मदरसों की बात कर रहे हैं। पोटा लगाने के बाद आतंकवादी गतवधियों में कटौती हुई थी।
…( व्यवधान) पोटा में, जो राष्ट्र के विरुद्ध काम करते हैं…( व्यवधान) आप बोलिए। जवाब देना है तो दें, हम सुनने को तैयार हैं।
MR. CHAIRMAN : Please conclude.
… (Interruptions)
MR. CHAIRMAN: Do not interfere and let him complete.
… (Interruptions)
MR. CHAIRMAN: No. I would like to remind you when a Member is speaking, no interruption is possible and admissible. At the same time, if he is yielding you can only ask. Other remarks or interruptions will not come into picture and will not go on record.
You can finish your speech.
… (Interruptions)
MR. CHAIRMAN: Why should there be an interruption? Let him complete.
श्री अनंत गुढ़े : सभापति महोदय, हमारे कांग्रेस के एक मित्र ने कहा कि आतंकवाद को रोकने के लिए क्या करना चाहिए। माननीय अटल जी जब प्रधानमंत्री थे, एनडीए की सरकार थी, तब पोटा कानून लाया गया था। अब इन्होंने पोटा को रद्द कर दिया है और जितने आतंकवादी थे, सभी को छोड़ दिया है। जब क्रिकेट मैच हुआ, उसमें आतंकवादी कहां से आए थे? मेरा यह सवाल माननीय गृहमंत्री जी से है कि हिन्दुस्तान और पाकिस्तान के बीच जब क्रिकेट मैच हुआ और पाकिस्तान से क्रिकेट मैच देखने के लिए लोग भारत आए, उनमें से कितने पाकिस्तानी थे जो वापस गए और कितने यहीं पर रह गए हैं? आज भी ११३ लोग गायब हैं। उनका पता नहीं हैं, उनके पासपोर्ट का भी पता नहीं है, हमें उनका एड्रेस भी नहीं मिला है। वे लोग यहां पर आतंकवाद फैलाते हैं और ये आतंकवादी यहां के मदरसों की मदद करते हैं। वहां का पैसा इस प्रकार यहां आता है और हमारे देश में आतंकवाद मदरसों में बढ़ रहा है। …( व्यवधान)
SHRI PAWAN KUMAR BANSAL : This is again a baseless allegation.
MR. CHAIRMAN: Your time is over. Please conclude.
श्री अनंत गुढ़े : सभापति महोदय, यदि एक स्वतंत्रता सेनानी, सावरकर की कविता पढ़ाई जाती है तो उसे भगवाकरण का नाम दिया जाता है और यहां मदरसों में धार्मिक शिक्षा दी जाती है, विदेशी भाषाएं पढ़ाई जाती हैं, क्या वह गलत नहीं है? उसके बारे में मत बोलो, उसके बारे में मत कहो, यह कहा जाता है।
सभापति महोदय, जब तक सिमी और मदरसे यहां पर चल रहे हैं तब तक यहां से आतंकवाद खत्म नहीं हो सकता। हमें वोटों की राजनीति घर में छोड़कर इस देश की सुरक्षा के लिए आगे आने की जरूरत है। अगर हम ऐसा नहीं करेंगे, अगर पाकिस्तान बंदिश लगा सकता है, बांग्लादेश बंदिश लगा सकता है तो हिन्दुस्तान मदरसों पर बंदिश क्यों नहीं लगा सकता। यदि हमें देश में आतंकवाद को रोकना है तो मदरसों पर बंदिश लगाने की जरूरत है।
SHRI SANTASRI CHATTERJEE (SERAMPORE): Will the hon. Member kindly cite one instance of madrasas where this is going on?
SHRI PAWAN KUMAR BANSAL : This is ridiculous.
MR. CHAIRMAN: Please conclude.
श्री अनंत गुढ़े : महोदय, हमारी नीति क्या है, यह हमें निश्चित करना चाहिए। हम संसद सत्र में आतंकवाद पर चर्चा करते हैं, अयोध्या के मामले पर चर्चा करते हैं लेकिन सही मायने में इसे मिटाने के लिए हमारी कोई कोशिश नहीं रहती है। हमारी कोशिश केवल वोटों की राजनीति में होती है। हमें इसे बन्द करना चाहिए। हमें वोट मिले या नहीं, हम एकजुट होकर आतंकवाद का विरोध करें, केवल हमारे मदरसे दोषी हैं, अगर हम केवल इस बारे में सोचते रहे तो कभी भी हिंदुस्तान से आतंकवाद खत्म नहीं हो सकता है, जबकि यह चर्चा बार-बार होती रहती है।
डॉ. प्रसन्न कुमार पाटसाणी (भुवनेश्वर) : महोदय, मैं कहना चाहता हूँ कि :
"शंक शंख चक्रस्य, क्रटिकुण्डलम, सपीतवस्त्रम, सरसीरूहेक्षणम, सहारवक्षस्थल कौस्तूभात्यम नवामि विष्णु सिरसा चतुर्भुजं॥ "
‘Oh! my Lord, thy conch is committed for peace, ringing for the peace in the war field; Oh! my Lord, thy chakra – the wheel of progress, the wheel of prosperity; Oh! my Lord, thy sword to protect me, to protect the society, to protect the poor people, to protect the country.
Oh my Lotus, Oh my Red Corolla, when the sun rises in the high cosmos, the petals of the lotus open to embrace the sun. Oh thy petal, padma, padam, vashistam, sakthi, the system, havan cha, tat putra, parasarancha, byasam, sukham, Gowdapadam, Mahantam, Govindam, Jogindram, Motasya Sisyam – I honour. I honour the holy traditional masters of any religion. What I mean by religion is realising the Self within. First I am a man. Then, I am a Christian. First, I am a man and then I am a Muslim and then a Hindu. The term Hindu itself is a highest honour. One who knows how to honour a Muslim is a true Hindu. The highest doctrine of philosophy is that. One who knows the art of how to honour a Christian, one who knows how to honour a Muslim is a true Hindu. That is the doctrine of philosophy.
One can tell me that I am a Christian, a Muslim. I am wearing a lungi and having a moustache. So, I am a Muslim. I am also a Christian because I worship the Cross within me, because I am wearing the Swastika. It is just like a Cross. Therefore, I am a human being. I am wearing the saffron dress. It means the colour of the rising sun during the Brahma Muhurtam to colour the entire cosmos. The colour of sun during the Brahma Muhurtam is like the saffron. So, I am wearing the Brahma Muhurtam to colour the entire cosmos. The cosmos can be transferred into the cosmic oneness. I believe thy trishul. One can do like this. It is a cross if it is like this. If you can do like this, it becomes like a cross. This is trishul. You put it like this. You separate both the sides of the trishul and it can convert itself into a Cross. Put the elbow like this and put above the Ardhachandra, the Moon. Then, it is converted into Allah. In Urdu, it is called Allah. The letter "A" means Akhand, Anant, abundant and unbounded state of consciousness. "La" means Langala. It means ploughing the field. Through thy Akhand, one can attain enlightenment. That is called the Annamaya Kosa. In Bharat, the atma is like this. The soul is Ayodhya. The letter "Ah" means Akhand, Anant and unboundedness. By that, one can attain the blissful state. Where there is no war, it is called Ayodhya. There is no war.
In the Treta Yuga, the Lord was called Ram. In the Dwapara Yuga, He was called Krishna. The word "Ram" itself is containing a bucketful of cosmic vibration. And the very same Ram of the Treta Yuga was born as Krishna in the Dwapara Yuga. "Ra’ means anant, brahma. In the Kali Yuga, the same Krishna is called Jagannath, the Lord of the Universe. The Lord of the Universe, during the rule of the Mughals, was attacked by Kalapahad. It means a mountain of Battalions. The battalions appeared like a mountain and attacked Lord Jagannath but could not succeed. They could not harm the Lord.
In the age of science, the scientists could not catch God because He is the all-pervading Brahma. You cannot catch God through science. In the age of science, they failed to catch God.
Terrorism is having no ism. They declare jehad. It is a beautiful word. It is the highest doctrine. Jehad means the fight and the struggle for a noble cause. It is a supreme philosophy of religion to protect the humanity, to protect the human beings. But it is being mis-utilised by the terrorists. For one who knows how to come in contact with the Highest Being, then the science of living would come to the palm. The brutal terrorists do not know the art of how to love humanity. The brutal terrorists kill, butcher the children, the old ones and they are butchering the entire humanity. Particularly, in America, they bombed the World Trade Centre to hammer the world economy. You cannot dispel the cloud from the upper firmament. Likewise, you cannot dispel your holy thoughts from the mind. Mind is eternal. Mind is roopam, paramo brahmam, a state of consciousness etc. It is knowledge which is structured in every creation. Within that state of consciousness, the impulse of creation is hidden. That is why we are called namami, Samishan, Nirvan, roopam, bibu, God, vyapakam, brahma beda, sorupam. By creation, we have come to this world as human beings. One who knows the art of how to surrender the mind and the soul, he would save the humanity.
We are thy Krishna, we are Brahma, we are Veda and we are Swaroopa. In Amarnath, Muslims are also worshipping. In South Kerala also Muslims are worshipping. There is no difference between Hindus and Muslims. We have come to this world as a human being. Therefore, we love humanity. We love Muslims, we love Christians, we love Buddhists and we also love Jainism. First we are human beings. These terrorists are terrorising the entire world.
MR. CHAIRMAN : Please conclude.
DR. PRASANNA KUMAR PATASANI : When these terrorists are terrorising the whole world, how can we catch them? We can catch them through INTERPOL. We can catch them through the red corner notices issued by the INTERPOL. Some extradition treaty must be encouraged and spread all over the world to catch and arrest the terrorists so that the countries, where they are taking refuge, can hand over them. But, how will they be arrested? Are you arresting them? Hon. Prime Minister very proudly announced that in India there is not a single terrorist but I feel one thing. One terrorist appeared in the newspaper in Surat in Gujarat State.
There are two types of thoughts. One is ‘supporting thought’ and the other is ‘damaging thought’ Within the peripherals of supporting thought daya, kama and karuna come. Under the damaging thoughts, krodha, jealousy and hatred comes. India is representing the supporting thought. Pakistan is representing the damaging thought. Pakistan is the playground of terrorists. It is birth ground of terrorists. Britain and America are encouraging Pakistan, they are patronising Pakistan. So, they are reciprocating this damaging thought. Every action has an opposite reaction. They want to suppress India. It is a political dogma. It is a self-created conspiracy of American people to suppress India. They are harbouring Pakistan to suppress India. India can grow within one decade as we have every potentiality. You can say that in this age of science India can grow, rule and cover the entire world. According to Vivekananda and Aurobindo, this is a very scientific approach. I would like to tell one thing to this august House. Let us be determined, not in writing, not in telling, not in delivering but in reality. Let us be determined; let us be committed to catch these terrorists. They have also attacked on parliament – the temple of modern democracy. What about their dead bodies? You have taken the dead bodies. After taking the dead body there should be some rituals, havans, ceremonies and you did not do that. Therefore, we lost two great personalities. One is Shri Balayogi, the former Speaker of the Lok Sabha and the other one is Shri Krishan Kant, the former Vice-President of India. Both were the Presiding Officers of both the Houses. Likewise five dead bodies have been found in Ayodhya. We do not know how to perform their rituals, prayers, havans and yajna. That will harm the country. In future there is a possibility of terrorist attack again and again as it happened in London, Egypt and Indonesia. Even in Jagannath car festival, more than ten lakh people are congregating every year. So, there is a possibility of attack there but as long as Lord Jagannath is there, I believe nobody can harm us. Beyond that there is another place which is Jaguleipatna in my constituency and thy Lord Jagannath is having sword in the hand and conch in the hand. It is called padma pada poorna paani vigraha. A lot of Muslim people also visit there and pray and join in the car festival. Hindus and Muslims are worshipping and there is another place in my constituency Kaipadar. Both Hindus and Muslims are worshipping the peera. We pray to every God. We are honouring Muslims, we are honouring Christians, we are honouring Buddha and we honour every other religion. We are secular.
So with these words, let me conclude with my heartiest thanks to you that you have given me an opportunity to speak.
MR. CHAIRMAN : All right.
Shri C.K. Chandrappan. Please be brief.
SHRI C.K. CHANDRAPPAN (TRICHUR): Sir, I will be brief.
Sir, I was wondering why Mr. Malhotra has raised this discussion because it is a discussion on terrorism and also on the developments of Ayodhya. Probably, while raising the discussion, he appeared like a doctor who is applying life-saving medicines to a patient who is critically ill – anxiety, concern and everything was there on his face. I think he wanted to somehow raise the morale – the sagging morale – of BJP by raising this discussion and creating a kind of frengy.
Now, everybody knows in this country that when BJP – NDA – was in power, this Parliament was attacked, and POTA was there. We know POTA was there when Akshardam Temple incident happened. Now, the Review Committees are presenting their Reports. The country is looking aghast seeing how it was misused. But he was trying to say that POTA is a panacea for fighting terrorism. They could in-fight terrorism when they were in power, even with Pota in their hands.
Now, this country had the experience of various kinds of terrorists. Just after our Independence, we lost the Father of our Nation, Mahatma Ji; a terrorist killed him. We all know who was that terrorist. Two of our Prime Ministers were killed. This country lost many things. Who are those terrorists? Terrorists were there from the days of the massacre of Mahatma Gandhi. We could see that the terrorists are those religious fanatics who have such ideas of intolerance, who could intolerate anything they did not like. So, they killed Mahatma Ji – ‘the Man of Peace’, and that continued throughout. I have no time to explain all that. Sir, now what is happening here is that they want again to incite a kind of communal tension in this country.
Sir, a few weeks ago, when Mr. Advani was visiting Pakistan, he made a statement "The day the Babri Masjid was attacked, demolished, that was the saddest day in his life." I do not know whether he said it sincerely. He gave a certificate to Jinnah that he was ‘secular’. Now, what is happening here? While initiating this discussion, Mr. Malhotra said that we will, at any cost, build the Ram Temple in Ayodhya. Is it so easy? Mr. Malhotra’s Party was in power for more than five years. Could they do that? It was not that they did not want it. He said: "It is Mecca; it is Vatican; and it is everything." He said that hundred crores of Hindus in this country are behind it. These are all big talks. How many votes did the BJP get of the Hindus? Had the people – the Hindus – in this country were as fanatic as Mr. Malhotra wanted them to be; then BJP would have been seated there in the ruling benches. They would have been in power. But the Hindu masses of this country are not the disciples of Godse.
They are not the followers of the BJP. That is why they are sitting in the Opposition benches despite the talk of ‘India Shining’ and everything, but India was not shining.
Sir, after the RSS had denounced Shri Advani, there was a cartoon. I do not know whether you had seen that or not. The cartoon showed that in front of the Parliament, like the Bhishmapitamah who was lying on a bed of arrows, Shri Advani was brought to the Parliament when the Session started and Shri Advani was shown lying on a bed of arrows and he says, ‘attack’ and we saw the attack of Prof. Vijay Kumar Malhotra here. The point is, the RSS is denouncing the BJP and the BJP cannot stand on its own. Prof. Vijay Kumar Malhotra wants to again create the frenzy of Ayodhya and he said: ‘we will liberate Ram Janma Bhoomi and we will build a temple there.’ They think that kind of madness should be created again. With that madness they will again try to mobilise people and try to come back to power. But I must tell them with all respect that this is again an illusion. The people of this country, even the Hindus of this country, are more intelligent than the leadership of the RSS and BJP.
Sir, this discussion is a very insincere discussion. They did not want to discuss the real question of terrorism. He raised the question of naxalites. Everybody knows it is related to the question of poverty, it is a question related to unemployment and it is a question related to land reforms. If we want to find a solution to the naxalite problem, we have to tackle those problems which incite those people. If we want to create communal harmony in this country, then let RSS and BJP learn to live in peace and harmony with the 15 per cent Muslims in this country. We cannot think of an India where the Muslims will be driven out and then we will have peace and we will not have terrorism. If we want to live in peace without terrorism, we will have to tackle the problems of poverty, unemployment etc. on the one side and on the other side we should try to solve the problem of religious frenzy created by people by putting one religion against another.
With these words, I conclude and I oppose this Motion.
श्री धर्मेन्द्र प्रधान (देवगढ़) : सभापति महोदय, राम जन्मभूमि परिसर में आतंकवादी हमले सहित देश में बढ़ रहे आतंकवाद के बारे में श्री विजय कुमार मल्होत्रा जी ने सदन में चर्चा को शुरू किया है। सिर्फ देश में यदि हम आतंकवाद की समीक्षा और विश्लेषण करें तो तीन विशेष दिशाएं हमारे ध्यान में आती हैं। हमें स्वीकार करना पड़ेगा कि आज विश्व में मजहबी आधार पर ध्राुवीकरण बढ़ रहा है। इसके अतरिक्त चाहे अमरीका में वल्र्ड ट्रेड सैन्टर पर हमला हो, लंदन और इजिप्ट में विस्फोट हो, भारत में भी इसका सम्पर्क है। भारत में भी जेहादी आक्रमण और आतंकवाद बढ़ रहा है। जिस प्रदेश से मैं आता हूं, सी.पी.एम. के वरिष्ठ सदस्य, श्री चंद्रप्पन जी ने नक्सली हिंसा के बारे में एक मुद्दा उठाया। हमारी पार्टी के नेता योगी आदित्यनाथ जी ने उस विषय पर थोड़ी रोशनी डाली है। मैं उस विषय को आगे बढ़ाना चाहता हूं। मैं कहना चाहता हूं कि आज देश में नक्सली हिंसा का प्रारूप क्या है। अभी चंद्रप्पन जी और बाकी तमाम कांग्रेसी मित्र इस देश में आतंकवाद के बारे मे बता रहे थे, उसकी समीक्षा कर रहे थे और उसे हिन्दु-मुस्लिम तक सीमित कर रहे थे। मैं इस देश की सर्वोच्च पंचायत में उजागर करना चाहता हूं।
19.00 hrs. मैं आपके माध्यम से पूछना चाहता हूं कि बंगाल में पिछले २८ साल से वामपंथियों का शासन है फिर भी वहां आज गरीबी क्यों है? केरल में लंबे समय तक आपका शासन चला, क्या वहां से गरीबी दूर हो गई? मैं एक घटना बताना चाहता हूं। …( व्यवधान) जब समय की पाबंदी होती है तो सदन में अव्यवस्था भी होती है। हमें जो समय दिया जाता है, उसमें हमें ठीक से सुना जाए। मैं जिस चुनाव क्षेत्र से आता हूं, वह आदिवासी और वनवासी इलाका है। पिछली ७ जुलाई को वहां तथाकथित माओवादियों ने नक्सलवादियों ने पांच आदिवासियों की हत्या कर दी। मैं इस सदन में उनसे पूछना चाहता हूं कि जिन्होंने आजादी के ५७ सालों में से ५० साल केन्द्र शासन की बागडोर संभाली, जिन्होंने बंगाल में २८ साल शासन संभाला, एक जन्मेजय माझी, उम्र ३७ साल, बंगारी तिकरा गांव, संभलपुर जिला का रहने वाला था, उसकी हत्या क्यों कर दी गई? उसका गुनाह था कि उसे सरकार की ओर से इंदिरा आवास योजना का लाभ मिला। नक्सलवादियों की पाबंदी थी कि कोई सरकारी सहायता वहां न ले। चंद्रप्पन जी मुझे जवाब दें। …( व्यवधान) आप मुझे समय दें, मैं अपनी पार्टी का दूसरा ही वक्ता हूं। मेरी पार्टी इस सदन में दूसरा बड़ा प्रमुख विरोधी दल है। अगर हम कहें कि नक्सलवादी हिंसा के पीछे सामाजिक आधार है तो वह हमारी गलती होगी। आंध्रा प्रदेश में पिछले चुनावों में एक मुख्य मंत्री पर भी जानलेवा हमला हुआ। …( व्यवधान)
MR. CHAIRMAN : The allotted time is over. Either the House has to adjourn or the time has to be extended. Is it the wish of the hon. Members that the time of the House is extended?
THE MINISTER OF STATE IN THE MINISTRY OF DEFENCE AND MINISTER OF STATE IN THE MINISTRY OF PARLIAMENTARY AFFAIRS (SHRI BIJOY HANDIQUE): Sir, the time should be extended because there is other business also.
श्री राम कृपाल यादव : सभापति जी, सबको बोलने दीजिए। …( व्यवधान)
MR. CHAIRMAN: All right. The time of the House is extended till the list of speakers with me is over.
… (Interruptions)
MR. CHAIRMAN: There will be Special Mentions immediately after that, so the time cannot be fixed now.
श्री अविनाश राय खन्ना (होशियारपुर) : पंजाब की समस्या को डिसकस किये बिना आतंकवाद पर चर्चा पूरी नहीं होगी। पंजाब से एक भी एम.पी. अभी नहीं बोला। हम बताना चाहते हैं कि पंजाब में क्या हो रहा है। कृपया आप पंजाब के एम.पीज़ को भी समय दीजिए।
MR. CHAIRMAN: Yes. Shri Pradhan, please conclude now.
श्री धर्मेन्द्र प्रधान : सभापति महोदय, आंध्रा प्रदेश में पिछले चुनावों में कांग्रेस ने नक्सलियों के साथ समझौता किया। वहां एक मुख्य मंत्री पर जानलेवा हमले के बावजूद राजनीतिक समझौता हुआ। जब यूपीए सरकार बनी तो इस देश के गृह मंत्री हैदराबाद जाकर नक्सली हिंसा से प्रभावित राज्यों के मुख्य मंत्रियों की बैठक करते हैं। वे कहते हैं कि यह राज्य का अंदरूनी मामला है, राज्य की निजी समस्या है। इसमें केन्द्र का हस्तक्षेप जरूरी नहीं है। एक साल के बाद अनुभव हो रहा है कि आंध्रा प्रदेश में सशस्त्र नक्सलियों के साथ बातचीत की गई है। एक साल बहुत समय होता है। आज बंगाल में बुद्धदेव भट्टाचार्य जी का स्टेटमैंट क्या आता है कि भारत के नक्सलवादियों का नेपाल के माओवादियों के साथ संपर्क है। आज इस संसद में समीक्षा की जाती है कि नक्सलवाद गरीबी के कारण है। उग्रवाद का दूसरा चेहरा नक्सली हिंसा है जो हमें समझना चाहिए और इस पर आम सहमति बनानी चाहिए। उड़ीसा जैसे प्रांत में १४ जिले इससे प्रभावित हैं, जिनके बारे में भारत सरकार को कुछ चिन्ता करनी चाहिए।
महोदय, उड़ीसा को नक्सलवाल और उग्रवाद से लड़ने के लिए जो बजट चाहिए, वह बजट सात करोड़ रुपयों से कम का नहीं होना चाहिए। बीच में एनडीए के शासन में बजट की राशि ठीक थी लेकिन यूपीए की सरकार ने आकर बजट को घटा दिया। बजट को फिर से बढ़ाया जाना चाहिए।
सभापति महोदय, मैं कुछ सुझाव इस विषय पर देना चाहता था, उन्हें मैं लिख कर दे दूंगा, लेकिन अंत में मैं अपना वक्तव्य समाप्त करते हुए कहना चाहता हूं कि कांग्रेस को विशेषकर जो इनकी साम्यवादी और उग्रवाद की समीक्षा है, उसके तहत ये देश की सुरक्षा को बाद में लेते हैं। मैंने अपने भाषण को नक्सली हिंसा तक सीमित रखा है। ऐसी अनगिनत समस्याएं गिनाई जा सकती है। आज कांग्रेस को, साम्यवादियों को अपनी नीतियां स्पष्ट करनी चाहिए, तभी देश से उग्रवाद समाप्त हो सकता है।
श्री प्रभुनाथ सिंह (महाराजगंज, बिहार) : महोदय, अयोध्या मंदिर पर जो आतंकवादी हमला हुआ, आज उस पर सदन में हम लोग चर्चा कर रहे हैं। यह निश्चित ही गंभीर चर्चा है और इस चर्चा में सदन एक दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप करने पर और मुख्य घटना को छोड़ कर और धर्म के नाम पर उलझता जा रहा है। मैं केवल दो-तीन बिंदुओं पर बात करके अपनी बात समाप्त करूंगा। अयोध्या में जो घटना घटी है, यह सभी जानते हैं कि वह आतंकवादी घटना है। आतंकवादियों का अयोध्या जैसी पवित्र जगह पर बने मंदिर पर हमला करने का क्या मनसूबा था? यह देश भी मानता है कि उनका एक मात्र उद्देश्य था कि देश में इस प्रकार की घटना करके हिंदुओं की भावनाओं को उत्तेजित करना और देश में सांप्रदायिक तनाव को फैलाना और आतंकवाद की घटना कोई पहली बार देश में घटित नहीं हुई है। आतंकवाद इस देश में काफी समय से जड़ जमाए हुए है और आतंकवाद की समस्या इस देश की समस्या नहीं है, बल्कि दुनिया की समस्या बन चुकी है। दुनिया के लोग आतंकवाद से मुकाबला करने के लिए एकजुट भी हो रहे हैं और इस पर काफी वार्ताएं भी हो चुकी हैं, लेकिन एक बात समझ में नहीं आती कि दुनिया के लोग आतंकवाद का मुकाबला करने के लिए, आतंकवाद को समाप्त करने के लिए एकजुट हो रहे हैं। अमन चैन बहाल करने के लिए एक जुट हो रहे हैं, लेकिन आतंकवादी इतने मजबूत हैं और उनकी इच्छाशक्ति इतनी मजबूत है कि दुनिया के एक जुट होने के बावजूद भी आतंकवादियों से मुकाबला करने के लिए हम सक्षम नहीं हो पाए हैं और आतंकवाद का जन्म भारत में उसी दिन हो गया था जिस दिन इस देश का बंटवारा हुआ था। आज भारत का हिस्सा कश्मीर है और पाकिस्तान के कब्जे में चला गया है, जो आतंकवाद का गढ़ बना हुआ है और वही आतंकवाद का प्रशिक्षण केंद्र है और आतंकवादियों की घुसपैठ वहीं से हो रही है। आतंकवाद की मूल जड़ वहीं पर है।
हम सरकार पर दोषारोपण नहीं करना चाहते हैं, चाहे वह पिछली सरकार हो या आज की सरकार हो। हम यह मान कर चलते हैं कि पिछली सरकार की नियत भी आतंकवाद को समाप्त करने की थी। इस देश में अमन चैन कायम किया जाए और आज की सरकार की नियत भी यही है कि अमन चैन स्थापित किया जाए। हम सरकार की नियत पर शंका नहीं करना चाहते हैं। हमारी सरकार पाकिस्तान से वार्ता का आपसी संबंध सुधार का आज भी प्रयास जारी है लेकिन पिछले अनुभवों से हमें सिखना चाहिए। आतंकवाद की घटनाएं दिन-पर-दिन बढ़ रही हैं। पिछली सरकार में भी कई घटनाएं घटी थीं। चाहे वह अक्षरधाम की घटना हो, चाहे रघुनाथ मंदिर की घटना हो, चाहे जम्मू-कश्मीर विधान सभा की घटना हो। सेना का जहां कैंप होता है, वहां भी आतंकवादी घटनाएं होती है और आतंकवादी घटना लोकसभा देश की सबसे बड़ी पंचायत में, घटी थी।
सभापति महोदय, उस घटना को हमने अपनी आंखों से देखा है इसलिए अब घटना घटते-घटते जम्मू-कश्मीर सीमा से ले कर नेपाल की सीमा में प्रवेश करता जा रहा है। इस देश के किसी एक हिस्से में आतंकवाद नहीं है, बल्कि पूरा देश इससे ग्रसित है।
सभापति महोदय, आतंकवाद के साथ-साथ उग्रवाद भी चल रहा है। उससे कोई प्रदेश खाली नहीं है। इसलिए मैं आपके माध्यम से कहना चाहता हूं कि भाषण और एक दूसरे पर आरोप प्रत्यारोप करने से आतंकवाद और उग्रवाद का मुकाबला हम नहीं कर सकते हैं। योगी आदित्य नाथ जी ठीक बोल रहे थे कि हमारे ही एक माननीय सदस्य श्री सीता राम सिंह जी या उनके बेटे उस दिन यदि घर पर होते, जिस दिन उग्रवादियों ने उनके घर पर हमला किया, तो वे जिन्दा नहीं बचते।
महोदय, आजकल नेपाल में भारत विरोधी और भड़काऊ भाषण दिए जाते हैं। यही नहीं, वहां के रेडियो और टेलीविजन से भी इसी प्रकार के भाषण दिए जाते हैं। नेपाल माओवादियों का गढ़ बन चुका है। माओवादी आतंकवाद पर पहली बार यहां चर्चा नहीं हो रही है या पहली बार हमला नहीं हुआ है। इस पर लोक सभा में पहले भी चर्चा चलती रही है और देश के अनेक भागों में माओवादी हमले होते रहे हैं। लोक सभा के पिछले सत्र में भी माओवादी आतंकवाद पर चर्चा हुई थी। न तो पिछली सरकार ने और न इस सरकार ने नेपाल से बातचीत कर के कोई मजबूत पहल इस समस्या के समाधान हेतु नहीं की जिस कारण अभी तक हम माओवादियों से मुकाबला करने का साधन नहीं जुटा पाए हैं।
सभापति जी, मैं दो-तीन बातें कह कर अपनी बात समाप्त करूंगा। यहां जब भी मंदिर बनाने की बात चलती है, तो हिन्दू और मुसलमानों की संख्या बताई जाती है। एक साथी ने ठीक ही कहा कि जो आतंकवाद यहां बढ़ रहा है, उसके लिए वोट की राजनीत जिम्मेदार है। हम नहीं कहते हैं कि भारतीय जनता पार्टी जो बोलती है, वह ठीक बोलती है। बी.जे.पी. भी वोट की खातिर ही बोलती है। कांग्रेस और आर.जे.डी. के लोग तो मुसलमान और हिन्दुओं का ऐसा समीकरण बनाते हैं कि उन्हें थोक में मुसलमानों के वोट मिलते हैं और कम्युनिस्टों की बात तो छोड़ दीजिए, वे तो कौम को ही नष्ट करने वाले लोग हैं। …( व्यवधान)
MR. CHAIRMAN : Please hear me. About seven speakers are left. Unless the Members agree to speak five minutes each, we will have to sit till midnight.
श्री प्रभुनाथ सिंह : सभापति जी, हमें दो मिनट तो बोलने दीजिए। …( व्यवधान)
MR. CHAIRMAN: After this discussion, we will have to take up ‘Zero Hour’, which will be for more than an hour.
श्री प्रभुनाथ सिंह : सभापति जी, ठीक है। मैं अपने भाषण को बीच-बीच में काट कर अपनी बात जल्दी पूरी कर दूंगा।
सभापति जी, इस देश में मंदिर निर्माण और मंदिर-मस्जिद का विवाद बहुत दिनों से चलता आ रहा है जिसके कारण देश में हमेशा तनाव का वातावरण बना रहता है। अभी माननीय सदस्य बोल रहे थे कि अयोध्या में सौहार्द का वातावरण है, आपसी तनाव नहीं है, लेकिन बीच-बीच में खासकर जब ६ दिसम्बर आता है, तो तनाव का वातावरण पैदा कर दिया जाता है।
महोदय, एक बार श्री चन्द्र शेखर जी कह रहे थे कि यदि दो महीने हमारी सरकार और रहती, तो अयोध्या का राम जन्मभूमि का विवाद हमेशा के लिए समाप्त हो जाता, लेकिन दो महीने पहले ही उनकी सरकार चली गई। यदि ऐसा है, तो मैं माननीय गृह मंत्री जी से अनुरोध करूंगा कि इस प्रकार की संचिका गृह मंत्रालय में जरूर होगी, उसे ढुंढ़वाया जाए और पता लगाया जाए कि ऐसा क्या फॉर्मूला था, जिससे दो महीने में विवाद समाप्त हो सकता था। मेरा निवेदन है कि गृह मंत्री जी को इस बात की पहल करनी चाहिए और उस फॉर्मूले पर काम करना चाहिए।
महोदय, जब राम का मंदिर बनाने की बात उठती है और जब हमारे देवेन्द्र प्रसाद यादव बोलते हैं, तो लोग हंगामा करते हैं। मैं उनसे पूछना चाहता हूं कि राम का जन्म भारत में हुआ था, इस बात को पूरी दुनिया जानती है और भारत के ग्रंथ कहते हैं कि राम का जन्म अयोध्य़ा में हुआ था। जब ऐसा है और यह सर्ववदित है, तो फिर राम का मंदिर यदि भारत में नहीं बनेगा, तो क्या पाकिस्तान में बनेगा ? इसके साथ-साथ मैं यह भी कहना चाहता हूं कि जिस तरह से भारतीय जनता पार्टी के लोग कहते हैं कि मंदिर यहीं बनेगा, अंगुली दिखा कर कहते हैं कि राम का मंदिर यहीं बनेगा, तो उसे देखकर लगता है कि जब भगवान राम का जन्म हुआ था तो ये लोग नाल काटने के लिए वहां बैठे हुए थे।
इसलिए यह विवाद का विषय नहीं होना चाहिए। अगर राम का भगवान के रूप में श्रद्धा के द्ृष्टिकोण से हम देखते हैं, पूजा करने के द्ृष्टिकोण से देखते हैं तो अयोध्या का एक-एक कण राम का कण है और उस द्ृष्टिकोण से वहां मन्दिर और मस्जिद का विवाद समाप्त करके सामाजिक सद्भाव कायम करने का प्रयास करना चाहिए।…( व्यवधान) मैं अपनी बात दो मिनट में खत्म करूंगा।
19.16 hrs. (Mr. Deputy-Speaker in the Chair) महोदय, पोटा कानून के विषय में एक चर्चा चली थी। आज देवेन्द्र जी पोटा कानून के खिलाफ बोल रहे थे और यह बोल रहे थे कि उसका बहुत दुरुपयोग हुआ है। लेकिन हमें जहां तक स्मरण है कि जिस दिन पोटा कानून बना था तो हम और देवेन्द्र जी उसके खिलाफ तो बोले थे, लेकिन हम लोगों ने उसके पक्ष में वोट दिया था और आपने भी दिया था। हम यह कहना चाहते हैं कि ऐसा भी कहीं होता है कि कहीं कानून में त्रुटि रह जाये तो उसकी अनुपालना करने वाले पदाधिकारी कोई गलती कर दे, इसलिए कानून ही समाप्त कर दिया जाये। अगर किसी थाने में चोरी, डकैती और हत्या की घटनाएं बढ़ जायें तो उस थाने को ही समाप्त कर दिया जाये। उस थाने को समाप्त किया जायेगा या उसमें जो पदाधिकारी पदस्थापित होगा, अगर वह गलती करेगा तो उनको चुस्त-दुरुस्त किया जायेगा या उनको हटाकर किसी सक्षम पदाधिकारी को वहां पर पदस्थापित किया जायेगा? हम यह कहते हैं और हम यह भी मानकर चलते हैं कि कोई कानून आतंकवाद से नहीं लड़ सकता है। हमारे सीआर.पी.सी. और आई.पी.सी. में सब कुछ लिखा हुआ है, लेकिन जो पोटा कानून बना था, उसमें कहीं से कमी नहीं थी। आतंकवादियों का मनोबल तोड़ने के लिए वह सक्षम था। उन पर एक बहुत प्रभाव पड़ा हुआ था और जैसे ही यह सरकार बनी, पोटा कानून को समाप्त कर दिया तो निश्चित तौर पर उससे आतंकवादियों का मनोबल बढ़ाने का काम हुआ है। इसलिए उस कानून को समाप्त करके कोई बहुत-बड़ी उपलब्धि इस सरकार ने हासिल कर ली हो, ऐसी बात नहीं है। यह तो एक वोट की राजनीति है। अगर किसी सम्प्रदाय या जाति के खिलाफ किसी ने काम किया, आपकी सरकार बनी थी, आप उसकी जांच करवा लेते। जिन लोगों ने गलत तरीके से पोटा का इस्तेमाल किया, उन पर कार्रवाई करते, उन पर मुकदमा करते, उनको आप जेल भेज देते, लेकिन कानून को कमजोर करके आपने कौन सी उपलब्धि हासिल कर ली, इस पर हम चाहेंगे कि गृह मंत्री जी जरा अपना विचार दें। एक अन्तिम बात है…( व्यवधान)
SHRI A. KRISHNASWAMY (SRIPERUMBUDUR): POTA was misused in Tamil Nadu*. We cannot compare POTA with Cr.P.C. and IPC. POTA is a strong law. We should not compare this with Cr.P.C and IPC.
श्री प्रभुनाथ सिंह : हमने कहीं नहीं कहा कि पोटा का दुरुपयोग हो तो उसकी प्रशंसा होनी चाहिए। हम तो कहते हैं कि जिन लोगों ने पोटा का दुरुपयोग किया, उसकी जांच कराकर उन पर कार्रवाई करनी चाहिए, जिन लोगों ने दुरुपयोग किया। अगर * के राज में पोटा का दुरुपयोग हुआ तो * पर कार्रवाई होनी चाहिए, * Not Recorded.
हमने उसकी प्रशंसा नहीं की। लेकिन जिस हुकूमत में आप बैठे हुए हैं, ये किसी पर कार्रवाई नहीं करेंगे। आज ये * से दोस्ती किए हुए हैं।* ये गिरगिट की तरह रंग बदलने वाले लोग हैं।
...( व्यवधान)
MR. DEPUTY-SPEAKER: Do not interrupt. Please sit down.
Since they are not present in the House, their names will be expunged from the record.
श्री प्रभुनाथ सिंह : आप लोग भरम में जिन्दा मत रहिये। हम सिर्फ एक बात कहकर अपनी बात समाप्त कर देंगे। हम यह कहना चाहते थे कि जो अयोध्या मंदिर की सुरक्षा के लिए तीन चरणों में पुलिस की प्रतनियुक्ति हुई थी, लेकिन हम यह मानते हैं कि आतंकवादी गतवधियों से मुकाबले के लिए उस सुरक्षा की व्यवस्थी नहीं की गई थी। वह सुरक्षा की व्यवस्था मौब को रोकने के लिए की गई थी, भीड़-भाड़ को रोकने के लिए की गई थी। जबकि भारत सरकार की खुफिया रिपोर्ट पहले से थी कि अयोध्या मंदिर पर कभी भी हमला हो सकता है तो हम गृह मंत्री जी से जवाब में यह जानना चाहेंगे कि वहां पर जो प्रतनियुक्ति उन्होंने की थी, वह प्रतनियुक्ति मौब को रोकने के द्ृष्टिकोण से की गई या आतंकवादियों का मुकाबला करने के द्ृष्टिकोण से की गई? वहां की पुलिस की जितनी प्रशंसा की थी। हमारे योगी महाराज मुलायम सिंह जी के विषय में बोल रहे थे। योगी जी, एक बात हम कहेंगे कि मुलायम सिंह की क्षमता पर कोई सवाल नहीं उठता है। इसलिए हम यह कहना चाहते हैं कि आपने रेल दुर्घटना की चर्चा की, वह जिम्मेदारी रेलवे की बनती थी, लेकिन उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री होने के बावजूद एक-एक मरीज की अस्पताल में उचित व्यवस्था कराना, मरे हुए लोगों को अपनी तरफ से मुआवजा देकर काम करने के लिए तो जितना धन्यवाद दिया जाये, वह कम होगा। हम कहेंगे कि राजनैतिक भावना से आप मुलायम सिंह जी की शिकायत नहीं करके आगे आप भी मुलायम सिंह जी को धन्यवाद देने का काम कीजिएगा तो ज्यादा अच्छा होगा। …( व्यवधान)
MR. DEPUTY-SPEAKER: Mr. Shailendra Kumar, please sit down.
… (Interruptions)
MR. DEPUTY-SPEAKER: That is not to be recorded.
(Interruptions)* … * Not Recorded.
श्री प्रभुनाथ सिंह : उपाध्यक्ष महोदय, हम अपनी बात समाप्त करते हुए आपसे यह कहना चाहते हैं कि गृह मंत्री जी अन्त में एक सवाल का उत्तर देंगे कि उन्होंने किस ढंग से पुलिस की प्रतनियुक्ति की थी?
साथ ही, मैं उन पुलिसकर्मियों की भूरि-भूरि प्रशंसा करता हूं ओर बधाई देता हूं जिन्होंने साहस का परिचय देते हुए एक-एक आतंकवादी को चुन-चुनकर मार गिराया, राम की मूर्ति को बचा लिया और देश में साम्प्रदायिक तनाव होने की सम्भावना को रोककर, साम्प्रदायिक तनाव को समाप्त किया है।
इन्हीं शब्दों के साथ मैं अपनी बात समाप्त करता हूं।
MR. DEPUTY-SPEAKER: Shri Surendra Prakash Goyal. You have only five minutes to speak. You can see the watch.
श्री सुरेन्द्र प्रकाश गोयल (हापुड़) : उपाध्यक्ष महोदय, आपने मुझे बोलने का मौका दिया, उसके लिए मैं आपका आभारी हूं। आतंकवाद देश के लिए ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया के लिए एक अभिशाप है। मैं इस चर्चा को सुन रहा हूं। श्री मल्होत्रा जी ने बड़ी कलाकारी से नियम १९३ के अधीन प्रस्ताव लाने का काम किया है। उसके पीछे उनकी भावना आतंकवाद से लड़ने की कम थी और अयोध्या मंदिर का मुद्दा उठाने की ज्यादा थी। हमारे प्रधानमंत्री जी विदेशों में गए थे। वहां भी आतंकवाद का मुद्दा उठा था और उन्होंने वहां अपने राष्ट्र की बात रखने का काम किया था। लेकिन भारतीय जनता पार्टी की तरफ से यह मुद्दा राजनीति से प्रेरित होते हुए उठाया गया है। मैं सबसे पहले अयोध्या के मामले पर उत्तर प्रदेश के उन पुलिसकर्मियों तथा केन्द्रीय पुलिस बलों को बधाई देता हूं। इस मसले पर चर्चा के समय मैं लखनऊ विधान सभा में सौभाग्य से मौजूद था और मैंने वहां देखा कि भारतीय जनता पार्टी के लोगों ने जिस तरह से आलोचना का एक तरीका बनाया था, उसी का प्रारूप आज यहां भी देखने को मिल रहा है। यहां भी आतंकवाद पर चर्चा कम और वोटों को बढ़ाने और घटाने पर ज्यादा हुई है। हमें यह ढूंढना होगा कि यह आतंकवाद किस माध्यम से आया है। जब विवादित ढांचा ढहाया गया, दुनिया के देशों में इससे मंदिरों का विनाश हुअ्स था।
उपाध्यक्ष महोदय : ओवेसी जी, आप बैठ जाएं। It is not to be recorded.
(Interruptions)* … श्री सुरेन्द्र प्रकाश गोयल : लेकिन बीजेपी के लोग इस बात को मानने को तैयार नहीं हैं। अभी जिन्नाह का जिक्र आया। आडवाणी जी ने उनको सर्टफिकेट दिया था। वही जिन्नाह, जिन्होंने पाकिस्तान बनाने का काम किया था, १९३५-३६ में बिजनौर से मुस्लिम लीग के टिकट पर चुनाव लड़े थे। बाद में मुस्लिम लीग को छोड़कर जब मोहम्मद इब्राहिम साहब कांग्रेस पार्टी में शामिल हो गए थे तो जिन्नाह जी ने उनको चैलेंज किया था, उस चैलेंज को उन्होंने स्वीकार किया और त्याग पत्र देकर कांग्रेस पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़ा था और पहले से भी अधिक मतों से जीते थे। जिन्नाह जी को विपक्ष के नेता सैक्यूलरिज्म का सर्टफिकेट देकर आते हैं और देश में फिर से एक उन्माद खड़ा करने का काम करते हैं।
सही मायने में आतंकवाद न पोटा से हटेगा और न ओटा से हटेगा, यह द्ृढ़संकल्प से हटेगा। देश के तमाम कानून अपने आप में सक्षम हैं। अभी प्रभुनाथ जी ने कहा था कि कानून को हटाने से कोई हल नहीं निकलता है। मैं आपके माध्यम से प्रभुनाथ जी को बताना चाहता हूं कि १९७७ में जब इमरजेंसी लगी थी, उस इमरजेंसी के दरम्यान हो सकता है कि कुछ गलत काम हुए हों, कई लोगों का उत्पीड़न हुआ हो, लेकिन जो फार्मूला अप्लायी किया गया था, उसे हमारा देश ही नहीं बल्कि दुनिया का हर देश मानता है।
* Not Recorded.
चाहे वह जनसंख्या का मामला हो, चाहे प्रौढ़ शिक्षा या दहेज का मामला हो, कोई भी ऐसा कानून नहीं था जिसके तहत ये देश को बढ़ाना चाहते थे। लेकिन इन उन्मादियों ने एक आन्दोलन छेड़ दिया था। उस आन्दोलन के परिणामस्वरूप ये १९७७ में सत्ता में आए और १९८० में फिर गायब हो गए। बहुत सी चीजें होती हैं जिनमें अधिकारियों के माध्यम से या कुछ ऐसी ताकतों के माध्यम से कानून को खत्म करके उन लोगों के प्रति कोई कार्यवाही नहीं करते। मेरा आपसे अनुरोध है कि इसका राजनीतिकरण न किया जाए। हमारे सम्मानित नेता चाहे किसी दल के हों, किसी धर्म या जाति के हों, आपस में बैठकर आतंकवाद पर सही दिशा लेकर कार्य करें।
मेरे साथियों ने तमाम आंकड़े गिनाए हैं, वे मेरे पास भी लिखे हुए हैं। मैं उन आंकड़ों में नहीं जाना चाहता। अक्षरधाम हो, रघुनाथ मंदिर हो या पार्लियामैंट हाउस हो, मैं पूछना चाहता हूं कि इन्होंने पूरे देश के अंदर भारत बंद की कॉल, अयोध्या बंद की कॉल, प्रदेश बंद की कॉल दी थी, जब हमले हुए, क्या तब इन्होंने एक भी कॉल दी थी। मुझे याद है जब जम्मू कश्मीर में कोई घटना होती थी तो आज के माननीय विपक्षी दल के नेता जंतर-मंतर पर दस आदमी लेकर सरकार के विरोध में बैठ जाते थे। जब यह सत्ता में आए तो जंतर-मंतर को भूल गए। वहां के जो पंडित आज यहां शरणार्थी बने हुए हैं, ये उनके वायदे भी भूल गए। इसलिए आतंकवाद खत्म नहीं हो पा रहा है। यदि आतंकवाद को खत्म करना है तो निश्चित तौर पर तमाम दल के नेताओं को एक कमेटी में सहमति लेनी होगी, उसमें वोट के लिए राजनीति नहीं करनी होगी कि अगर हम मंदिर का मुद्दा उठाएंगे तो हिन्दू हमारे साथ आ जाएंगे, मस्जिद का मुद्दा उठाएंगे तो मुस्लिम हमारे साथ आ जाएंगे। हिन्दू और मुसलमान इस देश की जान हैं, एक शरीर हैं, उन्हें कदापि कोई अलग नहीं कर सकता।
प्रभुनाथ सिंह जी पता नहीं कौन सी कलाकारी करते हैं। वे काफी पुराने सीनियर नेता हैं। हरेक को खुश करते हैं - बीजेपी में बीजेपी को खुश और लालू जी के पास गए तो लालू जी को खुश और अभी मुलायम सिंह जी को खुश कर दिया, कहा कि रेल मंत्री जी का दायित्व था लेकिन मुलायम सिंह जी पहले पहुंच गए। मैं कहना चाहता हूं कि जो नजदीक है, पहले वही पहुंचेगा। मेरे पड़ोस में कोई रहता है, अगर मेरे साथ कोई घटना घटती है तो पड़ोसी पहले आएगा, रिश्तेदार बाद में आएंगे। मुलायम सिंह जी वहां गए, उन्होंने अच्छा काम किया। लेकिन जो नजदीक होगा, वह पहले पहुंचेगा। वहां लालू जी भी गए थे और स्टेट मंत्री जी भी घटनास्थल पर गए थे। उन्होंने जो काम किया, वह मानवता है और जब हम राजनीति में हैं तो हमारा दायित्व भी बनता है कि जो भी जल्दी पहुंचे, वह उपचार करे।
मैं अंत में पुन: लखनऊ की सरकार को बधाई देता हूं कि हमारे जवानों ने आतंकवाद का डटकर मुकाबला किया। अभी एक आरोप लगा था कि पाटील साहब जा सकते हैं, तो क्या मुख्य मंत्री नहीं जा सकते। यह उनका इंटरनल मामला है, इसका राजनीतिकरण क्यों करते हैं। बहुत से माफिया ऐसे हैं जो हर बात में राजनीतिकरण करने का काम करते हैं और अपना उल्लू सीधा करने का काम करते हैं। मैं पुन: मल्होत्रा जी से अनुरोध करूंगा कि किसी भी मुद्दे का राजनीतिकरण न करें। वे यहां एक तुर्रा छोड़कर भाग गए, उसके बाद सुनने के लिए तैयार नहीं हैं। वे यहां आएं और उन्होंने जो बात कही है, उसे सुनने का काम करें।
SHRI KINJARAPU YERRANNAIDU (SRIKAKULAM): Thank you, Mr. Deputy-Speaker, Sir.
Today, we are discussing a very important matter regarding terrorism in the country including the attack on the Ram Janmabhoomi complex at Ayodhya. The country has been witnessing cross-border terrorism since two decades. This is not the first time; the July 5, 2005 attack at the Ayodhya is the last of such incidents. There have been several other major terrorist attacks in our country like the attack on Indian Parliament, the attack on the Jammu and Kashmir Legislative Assembly, the attack on Akshardham temple and the attack on Raghunath temple. So, such attacks have been happening.
Every time, after the attack only the Government is issuing instructions of high alert to all the States and after some time they are forgetting it. This is the menace that we are facing since two decades. It is not only in this year but we are suffering this for two decades, particularly in Jammu and Kashmir.
Since 1990, 61,935 incidents took place and 12,542 civilians were killed and 4,116 special force constables were killed. Some terrorists were also killed. But so many civilians were killed in Jammu and Kashmir and throughout the country. This is not a national issue but an international issue which happened in America and which recently happened in London. This is the top-most priority item for this Government.
What is happening after the UPA Government came into power 14 months ago? I am not blaming anybody and I am not politicising the issue. India is a peace-loving country. There is a blatant effort to disturb peace and this is the main aim and objective of them. What did Gen. Musharraf say? He had given an assurance to our former Prime Minister, Shri Atal Bihari Vajpayeeji : "Our territory will not be used for the terrorist activities". But what happened now? What is our relationship between Pakistan and India? Why are we not controlling this cross-border terrorism? These are the issues before all of us. We have to put in more efforts to combat terrorism in our territory. Irrespective of the political parties, the need of the hour for all of us is to combat terrorism. That is the principle now.
Shri V.P. Singh’s Government was there; in 1991 Congress Government was in power; after that, the United Front Government came into power and then the NDA was in power and now the UPA is in power. For every Government the issue is common. Every Government wanted to control cross-border terrorism in our country. There is no second opinion. But the things are not moving in that direction. So, we have to think about it.
In this very House, for the last ten years, in every Session, we are discussing this issue in one way or the other. We discussed some attacks and some other most important things and we are now discussing this situation. At the time of demolition of the Babri Masjid on 6th December, 1992 my Party, Telugu Desam, condemned the issue. Even the 5th July, 2005 attack on Ram Janmabhoomi by the terrorists was also condemned by us. All these incidents are condemnable. But construction of temple at Ayodhya is not the issue. That is pending in the court. Nobody has to discuss it. It is not to be discussed. What can we do? It was so for the NDA Government. There is no right to construct the temple there. That matter is pending in the court. We have to wait for the court’s pronouncement. In the meanwhile, the aggrieved parties can sit together and discuss and come to a consensus and evolve a common thing and then they can go in for construction. But that issue is now pending in the court. It is sub judice. At this time, we are not to discuss about the construction of Ram temple. That will precipitate the issue. We have to respect all the religions. We have to take all religions in one path with love and affection and not to create hatred between different religions.
According to my Party, the Government should adopt measures to control cross-border terrorism and for this it has to concentrate on three issues. One is curbing infiltration. That is the most important thing. Today our colleague, Kumari Mamata Banerjee has also raised the issue. She has given a notice for Adjournment Motion regarding infiltration. Most of the people from Nepal, Bangladesh and Bhutan are coming. The people are coming and the terrorists are coming crossing the LoC etc. The first and foremost thing is curbing infiltration and fencing the international border. That is the foremost thing. We have to execute the work on war footing. We are sanctioning the money. But we have not been achieving the targets. We are not completing the work as early as possible. We have to fence the international border on a war footing and with this we can reduce cross-border infiltration of terrorists into India.
The third one is enhancing intelligence capabilities. That is also the foremost thing. If this three-point formula is adopted by the Government of India - curbing infiltration, fencing of international border and enhancing intelligence capabilities - and improvements are made in these areas, we can curb totally cross-border terrorism on our soil.
These are my suggestions to this Government.
MR. DEPUTY-SPEAKER: Now Shri Ram Kripal Yadav will speak. If you want to speak, you will have to go to your seat. Or, you seek permission to speak from this seat.
श्री राम कृपाल यादव : महोदय, मुझे यहीं से बोलने की अनुमति प्रदान करने की कृपा करें।
उपाध्यक्ष महोदय : आपके पास अपनी बात कहने के लिए केवल पांच मिनट हैं। कृपया इसी समय सीमा में अपनी बात कहिए।
श्री राम कृपाल यादव : उपाध्यक्ष महोदय, मैं आपका बहुत आभारी हूँ कि आपने मुझे इस गंभीर और महत्वपूर्ण विषय पर बोलने का अवसर प्रदान किया है।
महोदय, आज सदन जिस मुद्दे पर चर्चा कर रहा है, वह है आतंकवाद का मुद्दा। यह आज केवल हमारे देश की समस्या नहीं है, यह अन्तर्राष्ट्रीय स्तर की समस्या है और सभी लोग इस पर चिन्तित हैं। क्या वजह है कि आतंकवाद बढ़ता ही जा रहा है और लगभग हर देश इसकी लपेट में आ रहा है, खासतौर से हमारा देश। कई वर्षों से हम आतंकवाद से जूझ रहे हैं, हमारे सैनिक और निर्दोष व्यक्ति मर रहे हैं। इस समस्या की तह में जाने की आवश्यकता है कि क्या वजह है कि भारतवर्ष में आज आतंकवाद बढ़ता ही जा रहा है। सभी राजनीतिक दलों के लोग इसके लिए चिन्तित हैं, लेकिन मुझे लगता है कि जब से बाबरी मस्जिद की शहादत हुई, उसके बाद से देश में आतंकवाद का एक दौर चला है और वह दौर रूक नहीं रहा है। हमारा देश पूरी दुनिया के सामने उस समय शर्मसार हो गया था जब बाबरी मस्जिद की शहादत हुई थी। सभी लोगों ने इस बात को महसूस किया था कि यह गलत काम किया गया है, चाहे इसे करने वाले लोग कोई भी रहे हों। जिन लोगों ने इसे किया है, वे सामने हैं, दोषी पाए गए हैं, आरोपित हैं और चार्जशीटेड हैं। मैं उनमें से किसी का नाम नहीं लेना चाहता हूँ लेकिन सभी जानते हैं कि श्री आडवाणी जी भी उसमें शरीक थे।
महोदय, मैं समझता हूँ कि आतंकवाद की शुरूआत इसी घटना से हुई और इस देश में जब तक साम्प्रदायिक भावनाएं रहेंगी और द्ृष्टिकोण साफ नहीं होगा, तब तक देश में आतंकवाद रूकने वाला नहीं है। मैं इसे साफ तौर पर कहना चाहता हूँ। आज उस पक्ष में बैठे हुए भारतीय जनता पार्टी के लोगों ने खास तौर पर एक समुदाय के ऊपर टारगेट करने का काम किया। क्या इस देश में रहने वाले हर मुसलमान को शक के द्ृष्टिकोण से देखा जा सकता है? क्या हर मस्जिद या मदरसे को शक के द्ृष्टिकोण से देखा जा सकता है या टारगेट बनाया जा सकता है? अगर ऐसा होगा तो आतंकवाद कैसे रूक सकेगा? अगर इस देश की इतनी बड़ी आबादी पर, उसके चरित्र पर, उसकी देशभक्ति पर प्रश्नचिन्ह लगाया जाएगा तो देश में आतंकवाद नहीं रूकेगा। यह वही देश है जहां राष्ट्रपति पद पर एक मुसलमान व्यक्ति पदासीन हैं। क्या उनको शक के द्ृष्टिकोण से देखा जा सकता है? यहां पर अब्दुल हमीद जैसे व्यक्ति ने देश की सुरक्षा के लिए अपनी जान की बाजी लगा दी और पाकिस्तान के टैंक को ध्वस्त करने का काम किया था।
क्या वे मदरसे में नहीं पढ़े थे, क्या मस्जिद में कभी नमाज अता करने नहीं गए थे? यह मैं भारतीय जनता पार्टी के साथियों से पूछना चाहता हूं, जो मुसलमानों को कटघरे में रखने का काम करते हैं। इस में करीब १७ करोड़ मुसलमान हैं। आजादी के बाद अगर ये लोग चाहते तो पाकिस्तान जा सकते थे। उस समय टू-नेशन थ्योरी की बात चल रही थी। लेकिन इन सभी मुसलमानों ने हिन्दुस्तान की सरजमीं को अपना वतन समझा और उसकी सेवा करने का काम किया। आज भी ये लोग उसके विकास में, रक्षा में, सुरक्षा में राष्ट्रीय भावना के अंतर्गत काम कर रहे हैं। आपने कहा कि सभी मदरसे आईएसआई की गतवधियों का अड्डा बन गए हैं और वहां आतंकवादी गतवधियां चल रही हैं। मैं पूछना चाहता हूं कि आरएसएस द्वारा संचालित शिशु विद्या मंदिरों में ट्रेनिंग दी जा रही है, क्या वहां कट्टरपंथियों को बढ़ावा नहीं दिया जा रहा है, क्या उससे देशभक्ति की भावना पैदा होती है इसलिए आपको यह द्ृष्टिकोण बदलना पड़ेगा। देशी हो या विदेशी हो, सबको एक द्ृष्टिकोण से देखना पड़ेगा। आपको एक मापदंड रखना होगा। चाहे कोई हिन्दू हो, मुसलमान हो, सिख हो या ईसाई हो, अगर वह आतंकवादी गतवधियों में लिप्त है, तो वह एक आतंकवादी है और उससे कड़ाई से निपटना होगा।
कई माननीय सदस्यों ने सदन में एक बात कही, मैं भी उससे सहमत हूं कि हमारे देश की सीमाएं जबर्दस्त रूप से सील होनी चाहिए। पाकिस्तान में आतंकवाद को फैलाने का जो प्रशिक्षण दिया जा रहा है, उससे कड़ाई से निपटने की आवश्यकता है। मैं समझता हूं कि इस देश को इस मामले में अगुआ बनकर यह काम करना चाहिए और पाकिस्तान पर दबाव डालना चाहिए कि वह इन प्रशिक्षणों को बंद करे, क्योंकि एक-एक भारतीय अमन और चैन पसंद करने वाला है। जब तक देश में सौहार्द का वातावरण उत्पन्न नहीं होगा, भाईचारे का माहौल पैदा नहीं होगा, आपसी संदेह के कटघरे में एक-दूसरे को खड़ा करते रहेंगे, तब तक देश में अमन-चैन नहीं बन पाएगा। आज स्थिति यह पैदा हो गई है कि हम लोग एक-दूसरे पर संदेह पैदा कर रहे हैं। इससे देश की एकता और अखंडता पर चोट हो रही है। आज चिंता का विषय है कि देश रहेगा या नहीं रहेगा।
आपकी सरकार छ:-सात साल तक रही, तब कहां गई थीं आपकी नीतियां, कहां गया था आपका सिद्धांत? अब आप कह रहे हैं कि जो घुसपैठ हो रही है, तो उस समय आप इसे बंद करते। आपने मदरसों की चर्चा की, लेकिन आपने अपने शासन काल में एक भी मदरसे की जांच-पड़ताल नहीं की और यह नहीं कहा कि अमुक जगह आतंकवादी गतवधियां चल रही हैं या अमुक मस्जिद में उनको संरक्षण दिया जा रहा है। अगर उस समय आपने ऐसा कुछ किया होता, तो हम समझते कि वास्तव में आप अब ठीक कह रहे हैं। लेकिन आपने ऐसा नहीं किया। कोई साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किया और अब कह रहे हैं कि सारे मुसलमान आतंकवादी गतवधियों में लिप्त हैं।
उपाध्यक्ष महोदय, आपके राज्य पंजाब में भी आतंकवाद था। मैं धन्यवाद देना चाहता हूं पंजाब की जनता को कि उसने कड़ाई से उसका मुकाबला किया और वापस अपने राज्य में अमन-चैन बहाल करने का काम किया। मैं पंजाब के किसानों और मजदूरों को धन्यवाद देना चाहता हूं, हर राजनीतिक दल का भी शुक्रिया अदा करना चाहता हूं कि उन्होंने सौहार्द की भावना का परिचय दिया।
जब तक इस देश में कट्टरपंथी राजनीतिक गतवधियां रहेंगी, तब तक देश एक साथ नहीं हो सकेगा, आतंकवाद नहीं रोका जा सकेगा। आरएसएस जैसी संस्थाएं त्रिशूल लेकर लोगों को डराने-धमकाने का काम करेंगी, तो हम आतंकवाद नहीं रोक पाएंगे। इस देश में सामप्रदायिकता का जो जहर फैला जा रहा है, उसे रोकना पड़ेगा।
उपाध्यक्ष जी, मैं आपके माध्यम से माननीय प्रधान मंत्री जी, माननीय गृह मंत्री जी व सभी राजनैतिक दलों के लोगों के निवेदन करना चाहूंगा कि देश के विकास के लिए, देश में अमन व शांति के लिए कार्य करें और हमारे विपक्ष के लोग राजनैतिक गोटियां सेकना बंद करें, इतिहास को मिटाना बंद करें।
हमारे देश में सभी धर्मों, जातियों और भाषा के मानने वाले लोग रहते हैं और सभी को छूट है कि वे अपने-अपने धर्मों को मानें। इस देश में करोड़ों की संख्या में हिंदू हैं लेकिन आपको मैनडेट नहीं मिला। इसलिए अपने द्ृष्टिकोण को बदलें और भारत के संविधान को कलेजे से लगाएं और अपने मन को दूसरों के प्रति स्वच्छ रखें। सभी लोगों को इकट्ठा करने का काम करें और धर्म के नाम पर गंदी राजनीति न करें। गुजरात जैसी घटनाएं दुबारा न हों, तभी देश बचेगा। सभी राजनीतिक लोगों से मैं कहना चाहता हूं कि वे आज संकल्प लें कि मिलकर आतंकवाद का मुकाबला करेंगे और उसे कंट्रोल करने का काम करेंगे।
श्री अविनाश राय खन्ना (होशियारपुर) : मैं आपका आभारी हूं कि आपने मुझे इस महत्वपूर्ण इश्यू पर बोलने का मौका दिया। माननीय मंत्री जी, आप इधर ध्यान दें, किताब बाद में पढ़ लेना।
माननीय उपाध्यक्ष जी, अयोध्या के बारे में माननीय आदित्यनाथ जी ने बड़े विस्तार से बात की है और मैं उनकी बातों का समर्थन करता हूं और ज्यादा डिटेल में न जाते हुए उस घटना की निंदा करता हूं। हमने पंजाब में १० वर्षों तक आतंकवाद को झेला है। मैं उस समय एक विद्यार्थी था जब पंजाब में आतंकवाद शुरू हुआ था। मुझे एहसास है कि आतंकवाद क्या होता है। मुझे पता है कि आतंकवाद की भावना फैलनी शुरू हो जाए और केन्द्र की सरकार और राज्य की सरकार किसी विशेष समुदाय से भेदभाव करती है तो वहां के लोगों के मन में स्टेट के प्रति और केन्द्र के प्रति कुछ न कुछ रोष पैदा होता है और पंजाब में ऐसा ही हुआ। कल हमारे भाई नवजोत जी बोल रहे थे और उनकी बात का सभी लोगों ने समर्थन किया कि अमृतसर के लिए एक स्पेशल इकोनोमिक जोन की घोषणा हुई लेकिन अभी तक इम्प्लीमेंटेशन नहीं हुआ। माननीय अटल बिहारी वाजपेयी जी जब इस देश के प्रधान मंत्री थे तब भटिंडा में रिफाइनरी दी गयी लेकिन अभी तक उस पर भी इम्प्लीमेंटेशन नहीं हुआ। जब भी पंजाब को कुछ देने की बात होती है तो केन्द्र सरकार अपने हाथ खींच लेती है। पंजाब के साथ हमेशा भेदभाव हुआ है लेकिन पंजाब के लोगों ने एकजुट होकर उस आतंकवाद का मुकाबला किया और आतंकवाद को वहां से उखाड़ फैंका। लेकिन दुख की बात है कि पंजाब के मुख्यमंत्री सरदार बेअंत सिंह जिनको लोगों ने प्यार दिया और कहा कि वे शांति के प्रतीक हैं, उनका कत्ल करने वाले आतंकवादी जो एक साल तक जेल में रहे, हाई-सिक्योरिटी जेल से भागकर अपने घर भी जाते थे और चंढीगढ़ के आसपास रहते थे, लेकिन सरकार उन्हें पकड़ने में नाकाम रही। उसका क्या नतीजा हुआ? उसका नतीजा यह हुआ कि आतंकवादियों ने फिर से इकट्ठा होना शुरू किया और उस आग के ऊपर वहां के मुख्यमंत्री ने तेल डालने का काम किया। वह कैनेडा गए और उस जगह भाषण दिया, उस गुरुद्वारे में भाषण दिया, उस बैनर तले भाषण दिया जहां लिखा था कि "खालिस्तान जिन्दाबाद" जब पंजाब के लोगों ने आवाज उठायी तो क्या जवाब आया? मेरी अनशेडयूल्ड वजिट थी। एक मुख्यमंत्री जिसे जैड सिक्योरटी मिली है, क्या वह अनशेडयूल्ड वजिट में जाएगा? फिर बयान आया, मैंने वह पढ़ा नहीं, लेकिन मैं जो बातें कहना चाहता हूं, मंत्री जी कृपया नोट करें। उनका वहां जाना और भाषण देना, इसके बाद दिल्ली के सिनेमा घरों में बम ब्लास्ट होना और पंजाब में मानव बम का पकड़े जाना, इन चीजों का क्या संबंध है? इसकी जानकारी और रिपोर्ट, जब माननीय गृह मंत्री मेरी बात का जवाब दें तो इसका जरूर जवाब दें क्योंकि सारा पंजाब यह जानना चाहता है कि इन बातों का क्या लिंक है? इतना ही नहीं, एक तरफ एक पार्टी के अध्यक्ष अमृतसर में भाषण देते हैं तो उनके खिलाफ राष्ट्रद्रोह का मुकदमा दर्ज होता है, उनको गिरफ्तार करके जेल भेज दिया जाता है और दूसरी तरफ उसी प्रदेश के मुख्यमंत्री खालिस्तान के बैनर नीचे भाषण देते हैं लेकिन उसका कुछ नहीं किया जाता है। उसे सेफगार्ड करने के लिए केन्द्र आगे आता है, उसकी पार्टी आगे आती है। ये दोहरा मापदंड क्यों? इतना ही नहीं मुख्यमंत्री उन आतंकवादियों से कहते हैं कि वह बहुत जैंटलमैन हैं। आतंकवादी कहते हैं कि पंजाब के मुख्यमंत्री जैसा कोई भी अच्छा आदमी नहीं है। इन बातों का क्या संबंध है?
अभी यादव जी कह रहे थे कि किसी समस्या की जड़ को पकड़ना चाहिए। जड़ यह है कि जब किसी राज्य के साथ अन्याय होगा, वहां के लोगों के साथ अन्याय होगा तो वहां विरोध की भावना पैदा होगी। महोदय, वहां की सरकार ने जब एसजीपीसी के अध्यक्ष के चुनाव थे तो बुरी तरह लोगों और एसजीपीसी के मैम्बर्स को डरा कर, उस संस्था पर कब्जा करने की कोशिश की, लेकिन केन्द्र सरकार के दखळ के कारण कामयाब नहीं हो सकी। अब भी धार्मिक संस्थाओं में दखल अन्दाजी देने का काम चल रहा है।
वहां के एसएचओज जो थानों में तैनात हैं, अगर उनके पास से नाजायज हथियार मिलेंगे तो जो देश और लोगों की सुरक्षा करने के लिए हैं, वे भी नाजायज हथियार रखेंगे। ऐसी स्थिति में उस प्रदेश की सुरक्षा क्या होगी? आज तक इस बात पर किसी ने ध्यान नहीं दिया।
एक और बात पंजाब के लोगों के मन में है। जब पंजाब आतंकवाद को झेल रहा था तो देश के पूर्व प्रधान मंत्री श्री इन्द्र कुमार गुजराल ने ऐलान किया था कि पंजाब के ऊपर ८५०० करोड़ रुपए का कर्ज माफ किया जाता है। पंजाबियों ने उनको अपनी आंखों के ऊपर बैठाया। हमारी पार्टी के न होते हुए उनको वहां के चुनाव में जीत दिलवाई । उन्हें एक बड़े समारोह में सम्मानित किया लेकिन आज इस बात पर शंका व्यक्त की जा रही है कि वह लोन माफ हुआ या नहीं? मैं अनुरोध करूंगा कि मैंने पंजाब के मुख्यमंत्री के बारे में जो बात कही है, वहां की घटनाओं के बारे में जो बात कही है, उसका यहां जरूर जवाब दिया जाए। जब-जब केन्द्र ने पंजाब को कुछ दिया उसे ऑनर नहीं किया गया। वे कारण सदन को बताने होंगे। इन्हीं शब्दों के साथ आपको बहुत-बहुत धन्यवाद देता हूं।
SHRI ASADUDDIN OWAISI (HYDERABAD): Mr. Deputy-Speaker, Sir, the Initiator of this debate has spoken on many points. I would like to read over here that in similar situations, there had been different reactions by the BJP. This was stated by the then Union Home Minister and now the Leader of the Opposition while he was speaking at the Inaugural Session of the Annual Conference of the Directors-General of Police in New Delhi in October 2002. I quote:
"Often I find it perplexing when critics ask us, after every fresh incident of terrorism, why it happened. Some people in the media quickly, indeed routinely, rush to the conclusion that this is yet another instance of ‘intelligence failure’. I urge them to exercise restraint. Such uninformed, and sometimes motivated criticism, demoralises intelligence agencies and security forces. It also creates confusion in the minds of the common people. The critics do not know under what trying, sometimes impossible, conditions our agencies have to work to ferret out information and pursue the culprits."
This was stated by the then Home Minister.
When the incident at Ayodhya took place, all of us condemned it. I condemned it especially because it was an attack on the mosque. Now the statement that was issued by the Leader of the Opposition is that a befitting reply should be given. When he was the Home Minister, he had stated that in his statement. Now when he is the Leader of the Opposition, he says that a befitting reply should be given. At the same time, when attack took place at Akshardham temple, a resolution was passed by the BJP on September 26, 2003. The Resolution said:
"Rising above narrow political and partisan considerations, the nation has to be more vigilant to frustrate the evil designs of the enemy. Let us join hands to strengthen the fabric of social harmony and unity to a degree that no one can dare to breach. The need of the hour is for a change in the mindset for promoting solidarity."
What did the BJP say when the attack took place on Ayodhya? It is not an attack on the Hindu faith. What is the difference between terrorist attacks? Terrorist attack is a terrorist attack. This shows the duplicity in the behaviour of the BJP and the Sangh Parivar. They speak in one language when in power and when the power is taken away from them because of their hypocrite policies, they resort to such means. The attack on Ayodhya is condemnable. I would like to point out that as far as Muslims of India are concerned, we have clearly stated that whatever is the verdict given by the Court, we would abide by it whether it comes in our favour or it goes in favour of the opposite parties. We would completely abide by it. These parties have used innuendoes by stating that Muslims are responsible for the attack on Ayodhya. How is it in our interest? There is already a status quo, there is an order of the Supreme Court over the make-shift temple. The vicious design of the Sangh Parivar is to construct a permanent temple over there. That is why, we are demanding that a proper inquiry should be initiated by the Home Department. The CBI inquiry cannot be ordered because the State Government will not accept it. Let a high level inquiry be ordered because as far as Muslims are concerned, it is not in their interest to harm that make-shift temple. The status quo is already there. Now in six to eight months time, a complete judgement will be delivered by the Court.
Moreover, I would like the hon. Home Minister, when he replies, to see that a high level inquiry should be ordered. We also want to know why within 18 hours the attackers were buried. If they were Muslims, why were their bodies not given to wash according to the last rituals of the Muslims? Why were they not given kafans? They were taken to burial at 4.30 in the morning. They were buried not by the Muslims but by the police people over there. There has to be a proper inquiry into the whole incident and a high level inquiry should be ordered. Moreover, writ should be given to the CRPF. I would request through you, to the Government that the outer ring should also be placed under the control of the Central Reserve Police Force or the CISF or the ITBP. The credit should go to the CRPF.
Another thing is that the Government should stop the activities of Vishwa Hindu Parishad and Sangh Parivar. They are making a demand that an area of 100 metres around Babri Masjid should be given to them. There are eight to ten houses within the 100 metres of this make-shift temple wherein Muslims are still living over there.
20.00 hrs. They are being threatened day in and day out, so that once they are removed, they can continue their plan or they can do whatever they want. But this should be stopped immediately.
Secondly, Sir, Prof. Malhotra has talked about the visit of Hurriyat leaders. I do not hold a brief for Hurriyat leaders. Prof. Malhotra said that they have gone over there. But I would like to ask him that when their own Prime Minister Mr. Atal Bihari Vajpayee was questioned that whether the talk with Hurriyat leaders would take place within the ambit of our Indian Constitution, he stated that ‘इन्सानियत के दायरे में बात होगी’ I would like to know from my colleagues from the BJP that when a Prime Minister has taken a solemn oath to uphold the Constitution, how does this ‘इन्सानियत के दायरे ’ come over there? This shows the duplicity of their policy.
Thirdly, about the Madrasas, I would like to assure the hon. Members from the BJP that we will continue to build Madrasas and Masjids, not in hundred but in thousands. They cannot stop us. But I would like to invite all these people to come along with me and see. They can take anyone and randomly choose any Madrasa on their own time, and I will come along with them. They can see themselves what is being taught over there. They can show us in which Madrasa, terrorism is being taught.
Sir, there is a difference between Madrasas of India and Madrasas of Pakistan; that is very clear. No Indian Madrasa imparts teaching of hatred. What are the teachings we are imparting over there? The teachings which are imparted over there is to make them good human beings, is to make them nationalists.
In 1857, the freedom war was started by whom? It was by the fatwa of these Madrasas. Who was Allama Fazalia Kairabadi? He was Aalim. He was the one who issued fatwa to fight against Britishers. But Sir, my friends on the other side, have forgotten the role Madrasas have played in the Independent struggle. They were not there at that time. Their ideologues were not there at that time. इनकी पैदाइश आजादी के बाद की है। The war of Independence was fought by all those people and not by them.
Lastly, Sir, terrorism is a menace. It is a global phenomenon, let us accept it. To tackle it, we have to ensure that socio-economic steps are taken. Yes, it is a fact that there is a high level of unemployment and a high level of illiteracy among the Muslims. What is the Government going to do about them? Yes, Madrasas need to be modernised; there is no problem. Already a scheme of the HRD is there. Their own Minister, who has lost the last election, had spent so much of money on the modernisation of Madrasas. These are the steps, which need to be taken. The Government has to approach this problem on a humanitarian angle. They should not get carried away by the propaganda of Western Media or the Sangh Pariwar media.
Therefore, Sir, we have to approach it in a proper way. This is a global phenomenon. We have to take it head on. For doing all this, a proper policy is required to be followed. A community cannot be ostracised. There might be some bad elements. But the whole community cannot be blamed for it.
MR. DEPUTY-SPEAKER: Now, Shri Shailendra Kumar. You have to speak only for five minutes. You can see the watch.
श्री शैलेन्द्र कुमार (चायल) : उपाध्यक्ष महोदय, आपने मुझे अयोध्या और देश में आतंकवाद के बारे में बोलने के लिये समय दिया, उसके लिये मैं आपका आभारी हूं।
उपाध्यक्ष महोदय., यहां विपक्ष कोई सुनने वाला नहीं है और किसे सुनायें क्योंकि उन लोगों के पास सुनने की क्षमता नहीं है। जब बी.जे.पी. के लोगों का भाषण हो रहा था, ऐसा लगता था कि हिन्दुओं के ठेकेदार वही हैं। भगवान राम उन्हीं के हैं और वे असली हिन्दू हैं और हम नकली हिन्दू हैं। हमारे राम हमारे दिल में हैं जबकि उनके राम साम्प्रदायिक वोटों में हैं। मैं यह भी कहना चाहता हूं कि जब उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी की सरकार थी और श्री मुलायम सिंह जी वहां के मुख्य मंत्री थे, तो इन लोगों ने वहां चढ़ाई की थी। हमारे मुख्य मंत्री जी ने कहा था कि वहां परिन्दा भी पर नहीं मार सकता, तब एक ईंट का भी नुकसान नहीं हुआ। उसके बाद चुनाव हुआ तो वे लोग कह रहे थे कि मुलायम सिंह जी की सरकार चली जायेगी। चूंकि प्रदेश का मुख्यमंत्री राजा होता है, इसलिये श्री मुलायम सिंह जी ने राजधर्म का पालन किया। ये लोग बड़ी-बड़ी बातें करते हैं, *…..
उपाध्यक्ष महोदय : यह शब्द रिकॉर्ड में नहीं जायेगा।
श्री शैलेन्द्र कुमार (चायल) : उपाध्यक्ष जी, मैं दूसरी बात यह कहना चाहता हूं कि जब विवादित ढांचा गिराया गया, उस समय प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री कल्याण सिंह जी थे। उन्होंने सर्वोच्च न्यायालय में शपथ-पत्र दिया था कि वे उसकी हिफाज़त करेंगे लेकिन उनके समय में विवादित ढांचा गिराया गया। *….
MR. DEPUTY-SPEAKER: These words may be expunged from the records.** बी.जे.पी. के लोगों को इस बारे में सोचना चाहिए।
दूसरी बात मैं कहना चाहता हूं कि इससे भी बड़ी-बड़ी घटनाएं मंदिरों में हुई हैं, लेकिन क्या कारण हैं कि केवल अयोध्या का ही नाम लिया जाता है। अभी मित्रसेन यादव जी ने कहा कि वहां अमन-चैन और शांति है, यह बात सत्य है। वहां मंदिर के इर्द-गिर्द जितनी भी दुकानें लगी हैं, उनमें हमारे मुसलमान भाई चुन्नी तथा प्रसाद के आइटम्स बेचते हैं, उनका कारोबार करते हैं। उनसे ये लोग यह सामान क्यों खरीदते हैं। इतना ही नहीं, उनसे प्रसाद आदि खरीदकर दर्शन करते हैं, वैसे कहते हैं कि हम बहुत बड़े कट्टरवादी हैं। मैं इस बात को कंडैम करता हूं।
* Not Recorded.
**Expunged as ordered by the Chair इसके अतरिक्त अभी जो आतंकवादी हमला हुआ है, उसे टैकल करने के लिए मैं प्रदेश सरकार और अपने मुख्य मंत्री जी को बधाई देना चाहता हूं। उन्होंने समय रहते स्थिति पर काबू पा लिया। उस वक्त हमारे सदन के पूर्व केन्द्रीय मंत्री, श्री बलराम सिंह यादव की अंत्येष्टि हो रही थी, मुख्य मंत्री जी वहां पर मौजूद थे, तभी अयोध्या में हमला हुआ था। उन्होंने वहां की घटना पर निगरानी रखते हुए आतंकियों को आधा घंटे के अंदर मार गिराने का काम किया था, कोई कैजुअल्टी नहीं हुई तथा पब्लिक का कोई आदमी भी नहीं मारा गया। इसके लिए उन्हें बधाई देनी चाहिए, लेकिन ये लोग कंडैम करते हैं कि वे वहां नहीं गये।
उपाध्यक्ष महोदय, श्रमजीवी एक्सप्रेस की दुर्घटना हुई, उसकी चर्चा इन्होंने की। वहां मानवता मारी जा रही थी। बेकसूर और निर्दोष लोग मारे जा रहे थे, इसलिए वहां पर मुख्य मंत्री का जाना आवश्यक था। अभी यहां पोटा की बात कही गई। पोटा इन्होंने लागू किया था। इन्होंने पोटा आतंकवाद के लिए लागू नहीं किया था, राजनैतिक विद्वेष की भावना से इन्होंने पोटा लगाया था और विरोधियों को परेशान करने का काम किया था। एक जाति, समुदाय को अलगाववाद से जोड़ने की बात ये लोग कहते हैं। मैं याद दिलाना चाहता हूं कि देश की आजादी में किन लोगों ने कुर्बानी की थी। अभी हमारे साथियों ने कहा कि वीर अब्दुल हमीद गाजीपुर के रहने वाले थे, जिन्होंने पाकिस्तानी पैटन टैंकों के छक्के छुड़ा दिये थे। देश की आजादी में हिन्दू, मुस्लिम, सिख, ईसाई, फारसी सभी लोगों ने अपनी कुर्बानी दी थी, इसलिए इस देश में सभी को रहने का अधिकार है, सबको खाने, कमाने का अधिकार है। ये लोग केवल हिन्दुओं के ठेकेदार बनकर एक जाति, समुदाय को लेकर अलगाववाद की बात करते हैं। इस बात की मैं पुरजोर भत्र्सना करता हूं।
महोदय, आरक्षण के नाम पर मुस्लिम यूनिवर्सिटी में हिन्दू भी पढ़ते हैं और मुस्लिम भी पढ़ते हैं। अगर कमजोर और गरीब मुसलमानों को वहां कोई आरक्षण देने की बात कही गई है तो इन्हें मलाल क्यों होता है। इसके अलावा मदरसों के बारे में उल्टा-सीधा कहा जाता है, बार-बार मदरसों का नांम लिया जाता है। मैं कहता हूं कि पूरे हिन्दुस्तान में अगर एक भी मदरसे में कहीं कुछ गलत काम होता है तो ये नाम बतायें। ये मदरसों की बात करते हैं, भारतीय जनता पार्टी ने जगह-जगह पर सरस्वती शिशु मंदिर खोले हैं, उन सबकी जांच कराई जाए कि वहां ये लोग क्या पढ़ाते हैं। उनमें ये हिन्दुओं के छोटे-छोटे बच्चों को भड़काने का काम करते हैं। मैं आपके माध्यम से सरकार से मांग करता हूं कि सरस्वती शिशु मंदिरों की जांच होनी चाहिए।
अंतिम बात मैं कहना चाहता हूं कि रायबरेली में जो बाबरी मस्जिद या राम मंदिर है, हम लोग उसे विवादित ढांचा कहते हैं, हम लोग कभी बाबरी मस्जिद या राम मंदिर का नाम नहीं लेते हैं, हम उसे विवादित ढांचा कहते हैं। वहां बी.जे.पी. के तमाम बड़े नेता *…गये और वे कोर्ट की नजर में दोषी पाये * Expunged as ordered by the Chair.
गये। वहां इन्होंने पब्लिक मीटिंग में यह कहा है कि मंदिर वही बनेगा। आज यदि देखा जाए तो पूरे हिन्दुस्तान में साम्प्रदायिकता और आतंकवाद को बढ़ावा देने का कोई काम कर रहा है तो बी.जे.पी. के लोग ये काम कर रहे हैं, इनके संगठन के लोग ये काम कर रहे हैं। इसकी भी जांच होनी चाहिए। मैं अधिक कुछ न कहकर यहीं पर अपना भाषण समाप्त करता हूं। चूंकि आपने मुझे बहुत कम समय दिया है, मैं उसी समय के अंदर अपनी बात समाप्त करते हुए आपको बहुत-बहुत धन्यवाद देता हूं।
उपाध्यक्ष महोदय : जो हाउस के मैम्बर नहीं है, उनके नाम रिकार्ड पर नहीं जायेंगे।
श्री मदन लाल शर्मा (जम्मू) : ऑनरेबल डिप्टी स्पीकर सर, मैं आपका मश्कूर हूं कि आपने मुझे डा.विजय कुमार मल्होत्रा जी द्वारा धारा १९३ के तहत उठाई गई चर्चा, जो हाउस में साढ़े चार घंटे से चल रही हैं, उस पर बोलने का मौका दिया। इस देश में दहशतगर्दी और राम जन्मभूमि पर पिछले दिनों जो हमला हुआ, उस पर हमारे बहुत ही मौअज्जिज मैम्बरान ने अपने-अपने ख्यालात का इजहार किया है।
दहशतगर्दी क्या है, उसका सबसे पहले तजुर्बा ऑनरेबल डिप्टी स्पीकार साहब को है क्योंकि सबसे पहले पंजाब दस साल तक दहशतगर्दी की चपेट में रहा। मैं भी इस हाउस का एक ऐसा बदकिस्मत मैम्बर हूं जो रियासत जम्मू कश्मीर से ताल्लुक रखता हूं और पिछले १५ सालों से सबसे ज्यादा दहशतगर्दी रियासत जम्मू-कश्मीर में रही है जिसकी वजह से सारा देश चिन्तित है।
आज सुबह मल्होत्रा जी ने जब बात शुरू की तो मुझे दुख हुआ क्योंकि सही मायनों में अगर दहशतगर्दी के खिलाफ इस हाउस में बहस करनी थी तो पूरी ईमानदारी, दियानतदारी, और वतनपरस्ती का जज्बा रखकर करनी चाहिए थी। उन्होंने वह बात कम की और सियासत ज्यादा की। उन्होंने इस तरफ इशारा करके इसकी ज़िम्मेदारी कांग्रेस और यूपीए सरकार पर डाली। यह एक ऐसी मिसाल है कि जिस पार्टी ने सालों साल की जद्दोजहद के बाद इस मुल्क हिन्दुस्तान को अंग्रेज़ों की गुलामी से आज़ाद करवाया, जिस पार्टी ने एक योजनाबद्ध तरीके से पांच साला मंसूबे के तहत इस मुल्क की ४५ साल खिद्मत की, तरक्की की, और कितने ही लोगों ने उसके लिए कुर्बानियां दीं, आज उस पार्टी पर उग्रवाद की ज़िम्मेदारी सौंपी जाए तो दिल को ठेस पहुंचती है। देश के लोग सुनते होंगे कि ये क्या कह रहे हैं। अगर किसी प्रैस कानफ्रैन्स में वे यह बात कहते, किसी पब्लिक जलसे में कहते तो वह सारे देश में नहीं जाती, लेकिन उन्होंने एक बात आखिर में कह दी, जब वह कनक्लूड कर रहे थे कि हम मंदिर वहीं बनाएंगे। आप लोगों को समय मिला और इस मुल्क हिन्दुस्तान पर आपने आठ वर्ष हुकूमत की, तब यह मुद्दा आपने ठंडे बस्ते में डाल दिया। अब जब आपका सारा जनाधार, आपकी मकबूलियत सारे देश में कम हो रही है तो आज फिर आपको महसूस हो रहा है कि हम कहीं के नहीं रहेंगे। इस देश के अंदर बहुत सारे लोग ऐसे हैं जो जज्बाती भी हैं, जो मज़हबी बातों को ज्यादा सुनते हैं, इलाकाई बातों के भड़कावे में आते हैं। जात-पात के चक्कर में आकर वे कहीं भी वोट डाल देते हैं। आज ये महसूस करते हैं कि अपनी इस बात के ज़रिये वे कई स्टेटों में आने वाले इलैक्शनों में इसका फायदा उठाएंगे, लेकिन मुझे नहीं लगता कि ऐसा होगा क्योंकि हमारा मुल्क देवी-देवताओं की धरती है, एक सेक्यूलर मुल्क है। दुनिया का कोई ऐसा देश नहीं है जिसमें इतनी मुख्तलिफ भाषा बोलने वाले लोग रहते हों। इस देश की १०८ करोड़ की आबादी में जहां न हमारा खाना मिलता है, न लिबास मिलता है, न भाषा मिलती है, न कल्चर मिलता है, फिर भी मैं कहता हूं कि जिस किस्म के इनके बेहूदा हरकात हैं, सियासी वकाफ़त के लिए जो हथियार ये इस्तेमाल करते हैं, हमारी डोगरी भाषा में कहा जाता है कि इस देश की किश्ती को लोहे और लकड़ी की चादर से बांधा हुआ है लेकिन हम कोई कमी नहीं छोड़ रहे इसमें छेद करने की। सही मायनों में अगर हम सेक्यूलर हैं और इस देश में अमन और एकता चाहते हैं तो मैं इनको कहना चाहता हूं कि ईमानदारी की बात करो, सियासत की बात मत करो, वोटों की राजनीति मत करो और उन लोगों पर भी रहम करो जो लोग १५ सालों से मुश्किल में हैं, जिनके हर घर के एक इंसान की जान उसमें तलब हुई है।
हमारे बावर्दी लोगों की, चाहे वे बीएसएफ, सीआरपीएफ या दूसरी पैरामिलेट्री फोर्सेज़ में हैं, दर्जनों लाशें आज मुल्क में कश्मीर से आती हैं। अगर आपको इस बात की जरा भी चिंता है और आप फिकरमंद हैं, इस देश की सलामती और एकता को कायम रखने का जज्बा रखते हैं तो हमें ईमानदारी से पार्टीबाजी और पालटिक्स से ऊपर उठकर एकमन बना लेना चाहिए। जो भी आज उस तरफ बैठे हैं, वे भी इस तरफ आ सकते हैं। हम सियासत भी कर सकते हैं, यह देश भी तरक्की कर सकता है, इस देश की बेरोजगारी भी दूर हो सकती है, गुर्बत भी दूर हो सकती है। जो पालटिक्स में पार्टियों की जिम्मेदारियां होती हैं, जो वायदे और बातें करके हम आते हैं, उन्हें हमें पूरा करना चाहिए। हमारा एक बहुत बड़ा सदन है। उसके अंदर हम इस किस्म की बातें कर रहे हैं। देश के लोग हमें देखते हैं और सुनते हैं - वे क्या कहेंगे? हम क्या कह रहे हैं? वे सोचेंगे कि इस देश के जिम्मेदार लोग, हमारे द्वारा चुने हुए नुमाइंदे इस किस्म की फिरकापरस्त बातें करते हैं, जो देशद्रोही भी नहीं करते। ऐसी बातें अगर हम यहां पर करेंगे, तो कैसे एक अच्छा सिग्नल अपनी जनता को दे सकते हैं।
माननीय उपाध्यक्ष जी, दो-तीन बातों का जिक्र करके मैं आपसे रुखसत चाहूंगा, लेकिन मुझे लगता है कि जैसे आज इन्होंने आंकड़े दिए हैं, यहां कोई रेस लगी हुई है। मैं उस बात का जवाब नहीं दे रहा हूं कि इनके वक्त में, जब ये छ: वर्ष के लिए बरसर-ए-इक्तिदार थे, इन्होंने देश के ऊपर हुकूमत की। उस वक्त के आंकड़े क्या कहते हैं, कितने हादसे हुए, कौन-कौन से मंदिर पर हमला हुआ…( व्यवधान)
उपाध्यक्ष महोदय : आप आठ मिनट से बोल रहे हैं।
श्री मदन लाल शर्मा : कौन सी असेम्बली के ऊपर हमला हुआ, इस संसद पर हमला हुआ, मैं उस बारे में नहीं कहूंगा कि कितने लोग इनके वक्त में मारे गए, लेकिन पिछले एक वर्ष से जब हमारी यूपीए की सरकार वरसर-ए-इक्तिदार आयी, आज कितने हादसे हो रहे हैं, कितने लोगों की जानें जा रही हैं। यह राजग और यूपीए के आंकड़ों में कंपटीशन नहीं है। हम कोई अच्छी बातें यहां नहीं कर रहे हैं, लेकिन हमें चिंता होनी चाहिए कि यह सारा कुछ कैसे बंद हो सकता है। मुझे एक फिरकापरस्ती की बू आई। उस तरफ बैठे हुए लोगों ने अपनी तकरीर दी है और कहते हैं कि दोस्त बदलते हैं, पड़ोसी नहीं बदलते। जब इस मुल्क हिन्दुस्तान के अंदर अट्ठारह करोड़ मुसलमान रहते हैं, वे कोई दूसरा मुल्क नहीं बनाने जा रहे हैं। वे पाकिस्तान नहीं जाना चाहते हैं। वोटों की राजनीति करके अपने पड़ोसियों के दिल पर, उनके जख्म पर नमक छिड़क रहे हैं। मैं यहां रहता हूं और अकेला हूं, मेरा भाई जम्मू-कश्मीर में रहता है। अगर मुझे तकलीफ होगी, तो सबसे पहले मेरा पड़ोसी ही काम आएगा, मेरा भाई तो दूसरे दिन पहुंचेगा। जब ये बातें हम सोचकर चलेंगे, तभी हम अच्छे संबंध स्थापित कर सकते हैं। आज इन सारे लोगों ने यही बातें कहीं। इसलिए मैं कहना चाहता हूं और निंदा करता हूं कि जो हादसा हो गया, राम जन्मभूमि पर हमला हो गया, उसकी मैं मजम्मत करता हूं और जिन लोगों ने बरबरियत कार्यवाही करके, जो बहुत बड़ा खून खराबा इस देश के अंदर होने वाला था, उसे रोक दिया, पैरामिलेट्री फोर्सेज के लोगों ने, राज्य पुलिस के लोगों ने, उन सभी को मुबारकबाद देना चाहता हूं। लेकिन इन लोगों को मैं कहना चाहता हूं कि आपने न सिर्फ इस घटना को हवा देनी चाही, मैं पढ़ रहा था कि इनके एक मुख्यमंत्री ने बाई आर्डर एडमनिस्ट्रेशन को हिदायत दी और खुद जयपुर शहर के अंदर बंद कराने की कोशिश की और मैं समझता हूं कि दंगा करवाने में इन्होंने कोई कसर नहीं छोड़ी। आखिर में, अगर आप समय देते तो मैं दो बातें और कहना चाहता था और आंकड़े भी पेश कर देता। मैं आपका मशकूर हूं कि आपने मुझे इस डिबेट में हिस्सा लेने का मौका दिया।
MR. DEPUTY-SPEAKER: Reply to this debate will be given by the Government either tomorrow or on any other day as per the Government Business.
Now, the House shall take up matters of urgent public importance Shri Dharmendra Pradhan – Not present Shri Anant Gudhe – Not present.
Shri Prabhunath Singh – Not present.
Shri Rajender Kumar – Not present.
Shri Basu Deb Acharia – Not present.