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State Consumer Disputes Redressal Commission

Smt Krishna Devi vs H B Arora on 7 July, 2015

  	 Daily Order 	    	       STATE CONSUMER DISPUTES REDRESSAL COMMISSION, UP  C-1 Vikrant Khand 1 (Near Shaheed Path), Gomti Nagar Lucknow-226010             First Appeal No. A/2008/532  (Arisen out of Order Dated  in Case No.  of District State Commission)             1. Smt Krishna Devi  a ...........Appellant(s)   Versus      1. H B Arora  a ...........Respondent(s)       	    BEFORE:      HON'BLE MR. Jitendra Nath Sinha PRESIDING MEMBER          For the Appellant:  For the Respondent:     	    ORDER   

राज्‍य उपभोक्‍ता विवाद प्रतितोष आयोग, उ0प्र0, लखनऊ।

सुरक्षित अपील सं0-५३२/२००८   (जिला मंच, गाजियाबाद द्वारा परिवाद सं0-२१/२००५ में पारित प्रश्‍नगत निर्णय/आदेश दिनांक ०८-०२-२००८ के विरूद्ध)   श्रीमती कृष्‍णा देवी पत्‍नी श्री पालू सिंह निवासी ग्राम नली, हुसैलपुर, डाकखाना व तहसील हापुड़, थाना-बाबूगढ़, जिला गाजियाबाद, उ.प्र.।

                                            ............    अपीलार्थी/परिवादिनी।

 

बनाम्

 

१. श्री एच0बी0 अरोड़ा डिप्‍टी जनरल मैनेजर, इलैक्ट्रिक सप्‍लाई डिवीजन, बी-२५१, संजय विहार, आवास विकास कालोनी, मेरठ रोड, हापुड़ जिला गाजियाबाद।

२. श्री आलोक कुमार सिंह जनरल मैनेजर, वैस्‍ट रीजन इलैक्ट्रिक सप्‍लाई कारपोरेशन लि., विक्‍टोरिया पार्क, मेरठ डिवीजन, मेरठ।

३. चेयरमेन, इलैक्ट्रिसिटी पावर कारपोरेशन लि., अशोक मार्ग, लखनऊ।

                                            ..............  प्रत्‍यर्थीगण/विपक्षीगण।

समक्ष:-

१-  मा0 श्री जितेन्‍द्र नाथ सिन्‍हा, पीठासीन सदस्‍य।
 
अपीलार्थी की ओर से उपस्थित  :- श्री नवीन चन्‍द्र श्रीवास्‍तव विद्वान अधिवक्‍ता।
प्रत्‍यर्थीगण की ओर से उपस्थित :- श्री इसार हुसैन विद्वान अधिवक्‍ता।
 
दिनांक : १६-०७-२०१५   मा0 श्री जितेन्‍द्र नाथ सिन्‍हा , पीठासीन सदस्‍य द्वारा उदघोषित निर्णय       यह अपील, जिला मंच, गाजियाबाद द्वारा परिवाद सं0-२१/२००५ में पारित प्रश्‍नगत निर्णय/आदेश दिनांक ०८-०२-२००८ के विरूद्ध योजित की गयी है, जिसके अन्‍तर्गत निम्‍नवत् आदेश पारित किया गया है :-
      '' परिवाद आंशिक रूप से स्‍वीकार किया जाता है। विपक्षी को निर्देशित किया जाता है कि विपक्षी रू० ७८,४०८/- तीन बराबर किस्‍तों में दो, दो माह के अन्‍तराल पर जमा करे। विपक्षी को यह भी निर्देशित किया जाता है कि वादिनी द्वारा प्रथम किस्‍त जमा कर दिये जाने के पश्‍चात् एवं संयोजन को अपने नाम अन्‍तरित करवाने हेतु औपचारिकताऐं पूर्ण कर देती है तो उसके एक माह के अन्‍तर्गत वादिनी को संजयोजन अन्‍तरित कर विद्युत आपूर्ति पुन: स्‍थापित करे। ''     -२-       इस प्रकरण के संक्षेप में तथ्‍य इस प्रकार हैं कि परिवादिनी के नलकूप पर उसके स्‍वर्गवासी ससुर के नाम दिनांक ०७-०४-१९८२ से पॉंच हॉर्स पावर का विद्युत संयोजन स्‍थापित था। ससुर की मृत्‍यु के उपरान्‍त परिवादिनी ने विपक्षी द्वारा भेजे गये रू० एक लाख पैंतालीस हजार एवं रू० २,०८,०५४/- के बिलों को संशोधित करवाने हेतु प्रार्थना पत्र तहसील दिवस में हापुड़ में प्रस्‍तुत किया, परन्‍तु वे संशोधति नहीं किये गये। परिवादिनी के अनुसार दिनांक ०७-०४-१९८२ से मार्च १९९४ तक मात्र रू० २२,००५/- विद्युत देय स्‍वरूप बनता है।
      विपक्षीगण की ओर से जिला मंच के समक्ष प्रस्‍तुत अपने प्रतिवाद पत्र में अभिवचित किया गया कि परिवादिनी के नाम प्रश्‍नगत विद्युत संयोजन नहीं है, अत: वह उपभोक्‍ता नहीं है और परिवाद पोषणीय नहीं है। विपक्षीगण की ओर से यह भी अभिवचित किया गया कि मार्च १९९४ तक परिवादिनी के ससुर ने मात्र ४०००/- रू० विद्युत शुल्‍क जमा किया था। परिवादिनी द्वारा एक मुश्‍त योजना के अन्‍तर्गत प्रार्थना पत्र दिया जाने पर उसके बिल को संशोधित कर रू० ७८,४०८/- निर्धारित किया गया जिसे परिवादिनी ने जमा नहीं किया। परिणामस्‍वरूप, दिनांक २८-०१-२००४ को प्रश्‍नगत विद्युत संयोजन विच्‍छेदित कर दिया गया। उभय पक्ष द्वारा प्रस्‍तुत प्रलेखीय साक्ष्‍यों एवं उनके तर्कों के आधार पर जिला मंच द्वारा उपरोक्‍त आदेश पारित किया गया, जिससे विक्षुब्‍ध होकर परिवादिनी/अपीलार्थी द्वारा प्रस्‍तुत अपील योजित की गयी है और इस आशय का अनुतोष चाहा है कि अपील स्‍वीकार करते हुए प्रश्‍नगत निर्णय/आदेश दिनांक ०८-०२-२००८ अपास्‍त किया जाय एवं प्रत्‍यर्थी/विपक्षी पक्ष को आदेशित किया जाय कि वह अपीलार्थी/परिवादिनी के पक्ष में प्रश्‍नगत विद्युत संयोजन को पुनर्स्‍थापित कर दें तथा प्रश्‍नगत परिवाद सं0-२१/२००५ में याचित अनुतोष को उसे प्रदान किया जाय।
      पीठ द्वारा अपीलार्थी के विद्वान अधिवक्‍ता श्री नवीन चन्‍द्र श्रीवास्‍तव एवं प्रत्‍यर्थीगण के विद्वान अधिवक्‍ता श्री इसार हुसैन को विस्‍तारपूर्वक सुना गया तथा पत्रावली पर उपलब्‍ध समस्‍त सुसंगत साक्ष्‍यों/अभिलेखों का भलीभांति परिशीलन किया गया।
      आधार अपील, पक्षकारान् के अभिवचनों एवं जिला मंच के प्रश्‍नगत निर्णय/आदेश   -३- के दृष्टिगत प्रारम्‍भ में ही इस आशय का उल्‍लेख करना उचित प्रतीत होता है कि जिला मंच के प्रश्‍नगत निर्णय में पारित आदेश के प्रभाग में प्रथम व द्वितीय लाइन में त्रुटिवश परिवादिनी की जगह शब्‍द विपक्षी का उल्‍लेख है।
      अपीलार्थी की ओर से आधार अपील में मुख्‍य रूप से यह अभिवचित किया गया है कि प्रत्‍यर्थी/विपक्षी विद्यत विभाग ने परिवादिनी/अपीलार्थी को गलत विद्यत बिल प्रेषित किये एवं इन बिलों में संशोधन के उपरान्‍त भी गलत धनराशियों का उल्‍लेख किया गया है और अपने अभिवचन के समर्थन में जिला मंच के समक्ष अभिलेख भी प्रस्‍तुत किये। जिला मंच के समक्ष प्रत्‍यर्थी/विपक्षी द्वारा परिवाद का विरोध किया गया और यह अभिवचित किया गया कि अविवादित रूप से प्रश्‍नगत विद्युत नलकूप संयोजन रामफल पुत्र भूरी के नाम स्‍वीकृत था। अत: परिवादिनी श्रीमती कृष्‍णा देवी को वर्तमान परिवाद योजित करने का अधिकार प्राप्‍त नहीं है एवं कृष्‍णा देवी विपक्षी/प्रत्‍यर्थी की उपभोक्‍ता नहीं है। यह भी अभिवचित किया गया कि भुगतान न होने के कारण दिनांक २८-०१-२००४ को प्रश्‍नगत विद्युत संयोजन विच्‍छेदित कर दिया गया था। इस सन्‍दर्भ में इस आशय का उल्‍लेख किया गया है कि प्रश्‍नगत कनेक्‍शन ग्राम प्रधान की रिपोर्ट के आधार पर काटा गया था। जिला मंच द्वारा संशोधित बिल के आधार पर परिवादिनी को किस्‍तों में धनराशि जमा करने हेतु निर्देश दिया गया तथा विपक्षी/प्रत्‍यर्थी को यह निर्देश दिया गया कि परिवादिनी द्वारा प्रथम किस्‍त जमा की जाने के पश्‍चात् एवं संयोजन अपने नाम अन्‍तरित करवाने हेतु आवश्‍यक औपचारिकताऐं पूर्ण करने के उपरान्‍त एक माह के अन्‍दर परिवादिनी के नाम संयोजन अन्‍तरित कर विद्युत आपूर्ति पुन: स्‍थापित कर दी जाय। वर्तमान प्रकरण में दौरान् बहस पक्षकारान् की ओर से यह बताया गया कि विद्युत आपूर्ति की जा रही है। अत: यह स्‍पष्‍ट है कि पुन: कनेक्‍शन वर्तमान प्रकरण में चालू कर दिया गया है एवं प्रत्‍यर्थी/विपक्षी की ओर से यह तर्क प्रस्‍तुत किया गया कि परिवादिनी की ओर से मूल बिजली कनेक्‍शनधारक की मृत्‍यु की तिथि नहीं बतायी गयी है और म्‍यूटेशन की औपचारिकताऐं भी इलैक्ट्रिसिटी सप्‍लाई कोड २००५ के क्‍लॉज ४.४४(जी) में दिये गये प्राविधानानुसार पूर्ण नहीं की गयीं हैं, जबकि इन औपचारिकताओं को पूर्ण करने हेतु जिला मंच द्वारा परिवादिनी/अपीलार्थी को निर्देशित भी किया गया है।
  -४-
वर्तमान बिलों के विवाद पर प्रत्‍यर्थीगण/विपक्षीगण के विद्वान अधिवक्‍ता द्वारा यह तर्क प्रस्‍तुत किया गया कि प्रश्‍नगत परिवाद बिना किसी स्‍पष्‍टीकरण के प्रश्‍नगत संयोजन के सन्‍दर्भ में आखिरी भुगतान के ०९ साल के बाद प्रस्‍तुत किया गया। प्रश्‍नगत कनेक्‍शन के बिलों की धनराशियॉं परिवादिनी/अपीलार्थी की ओर से भुगतान न किये जाने के कारण अभी तक बकाया हैं। उभय पक्ष के अभिवचनों को देखते हुए वर्तमान प्रकरण में यह भी  पाया जाता है कि बिलों में अंकित धनराशियों के सन्‍दर्भ में भी विवाद है। जिला मंच द्वारा उभय पक्ष के अभिवचनों पर विस्‍तार से विचार करते हुए बिलों की बकाया धनराशि के भुगतान के बाबत् उचित निष्‍कर्ष दिया जाना नहीं पाया जाता है, केवल अन्तिम संशोधित बिल के आधार पर आदेश पारित कर दिया गया है एवं संशोधित बिल भी त्रुटियॉं स्‍पष्‍ट रूप से परिलक्षित होती हैं। जनवरी २००४ से अक्‍टूबर २००४ तक का बिल ३२,७८५/- रू० का किस प्रकार आया है, क्‍योंकि स्‍पष्‍ट रूप से यह अभिवचित है कि दिनांक २८-०१-२००४ को प्रश्‍नगत विद्युत संयोजन का विच्‍छेदन कर दिया गया था। इस प्रकार वर्तमान प्रकरण में यह पाया जाता है कि उभय पक्ष के अभिवचनों के दृष्टिगत जिला मंच द्वारा मामले में स्‍पष्‍ट निष्‍कर्ष नहीं दिया गया है। अत: यह पाया जाता है कि प्रश्‍नगत निर्णय एवं आदेश दिनांक ०८-०२-२००८ को खण्डित करते हुए मामला जिला मंच के समक्ष इस टिप्‍पणी के साथ प्रतिप्रेषित कर दिया जाय कि वह पक्षकारान् को साक्ष्‍य एवं सुनवाई का सम्‍यक अवसर प्रदान करते हुए उभय पक्ष के तर्कों एवं प्रलेखीय साक्ष्‍यों के आधार पर गुणदोष पर त्‍वरित गति से परिवाद का निस्‍तारण करें।
परिणामस्‍वरूप, यह अपील स्‍वीकार की जाने तथा प्रश्‍नगत निर्णय/आदेश खण्डित करते हुए प्रस्‍तुत प्रकरण सम्‍बन्धित जिला मंच को प्रतिप्रेषित किया जाने योग्‍य है।
उपरोक्‍त के अतिरिक्‍त इस मामले में पीठ द्वारा स्‍वयं संज्ञान लेते हुए यह भी स्‍पष्‍ट किया जाना न्‍यायोचित प्रतीत होता है कि जब प्रश्‍नगत परिवाद जिला मंच, गाजियाबाद के समक्ष योजित किया गया था, उस समय जनपद हापुड़ अपने अस्तित्‍व में नहीं था और वाद कारण उत्‍पन्‍न होने का क्षेत्र जनपद गाजियाबाद में ही था। वर्तमान में जनपद हापुड़ अपने अस्तित्‍व में है और प्रश्‍नगत मामले का क्षेत्राधिकार भी जिला मंच, हापुड़ को वर्तमान में प्राप्‍त हो जाता है। ऐसी स्थिति में जिला मंच, गाजियाबाद को यह   -५- भी निर्देशित किया जाना न्‍यायोचित प्रतीत होता है कि दोनों पक्षों को अपने स्‍तर से सूचित करते हुए वह इस प्रकरण को सम्‍पूर्ण मूल पत्रावली/अभिलेखों सहित जिला मंच, हापुड़ को प्रेषित कर दें। तदोपरान्‍त जिला मंच, हापुड़ द्वारा उभय पक्ष को साक्ष्‍य एवं सुनवाई का सम्‍यक अवसर प्रदान करते हुए प्रश्‍नगत परिवाद का निस्‍तारण गुणदोष के आधार पर विधि अनुसार त्‍वरित गति से किया जाय।
आदेश प्रस्‍तुत अपील तद्नुसार स्‍वीकार की जाती है। जिला मंच, गाजियाबाद द्वारा परिवाद सं0-२१/२००५ में पारित प्रश्‍नगत निर्णय/आदेश दिनांक ०८-०२-२००८ खण्डित करते हुए प्रस्‍तुत प्रकरण सम्‍बन्धित जिला मंच को इस निर्देश के साथ प्रतिप्रेषित किया जाता है कि वे उभय पक्ष को साक्ष्‍य एवं सुनवाई का सम्‍यक अवसर प्रदान करते हुए प्रश्‍नगत परिवाद का निस्‍तारण गुणदोष के आधार पर विधि अनुसार त्‍वरित गति से किया जाना सुनिश्चित करें। जिला मंच, गाजियाबाद को यह भी निर्देश दिया जाता है कि वह दोनों पक्षों को अपने स्‍तर से सूचित करते हुए इस प्रकरण से सम्‍बन्धित सम्‍पूर्ण मूल पत्रावली/अभिलेखों सहित जिला मंच, हापुड़ को प्रेषित कर दें। तदोपरान्‍त जिला मंच, हापुड़ द्वारा उभय पक्ष को सूचित करते हुए उन्‍हें साक्ष्‍य एवं सुनवाई का सम्‍यक अवसर प्रदान करते हुए प्रश्‍नगत परिवाद का निस्‍तारण गुणदोष के आधार पर विधि अनुसार त्‍वरित गति से किया जाय।  
अपील व्‍यय उभय पक्ष अपना-अपना स्‍वयं वहन करेंगे।
उभय पक्ष को इस निर्णय की प्रमाणित प्रति नियमानुसार उपलब्‍ध करायी जाय।
इस आयोग के निबन्‍धक को निर्देशित किया जाता है कि इस निर्णय की एक-एक प्रमाणित प्रतिलिपि जिला मंच, गाजियाबाद एवं जिला मंच, हापुड़ को तद्नुसार अनुपालनार्थ तत्‍काल भेजी जाय।                                           
  
                                                  (जितेन्‍द्र नाथ सिन्‍हा)                                                     पीठासीन सदस्‍य                प्रमोद कुमार वैय0सहा0ग्रेड-१, कोर्ट-३.
 
      [HON'BLE MR. Jitendra Nath Sinha] PRESIDING MEMBER