Lok Sabha Debates
Discussion On The Constitution (Scheduled Castes) Orders (Amendment) Bill, ... on 23 March, 2017
Sixteenth Loksabha an> Title: Discussion on the Constitution (Scheduled Castes) Orders (Amendment) Bill, 2017.t HON. DEPUTY SPEAKER: Now, we are taking Item No. 8 - the Constitution (Scheduled Castes) Orders (Amendment) Bill, 2017.
Hon. Minister, do you want to say anything?
सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्री (श्री थावर चंद गहलोत) : उपाध्यक्ष महोदय, मैं प्रस्तावकरता हूं कि संविधान (अनुसूचित जातियां) आदेश, 1950 का ओडिशा राज्य में अनुसूचित जातियों की सूची को उपान्तरित करने और संविधान (पांडिचेरी) अनुसूचित जातियां आदेश, 1964 का और संशोधन करने वाले विधेयक पर विचार किया जाए।
महोदय, संवैधानिक प्रावधान के अनुसार अनुसूचित जाति और जनजाति में अगर किसी का समावेश करना हो या आज जो विद्यमान है, उसको विलोपित करना हो तो एक प्रक्रिया है आर्टिकल 341 और 342 में, उसके अनुसार राज्य सरकार को केन्द्र सरकार के पास प्रस्ताव भेजना होता है और केन्द्र सरकार उसको रजिस्ट्रार जनरल ऑफ इंडिया को राय के लिए भेजती है। यदि वह उसको क्लीयर कर देते हैं तो उसको एससी कमीशन के पास हम भेजते हैं और वहां से भी क्लीयर हो जाता है तो बिल बनता है। वह बिल कैबिनेट के पास जाता है। कैबिनेट की स्वीकृति के बाद वह संसद में आता है। इन सब प्रक्रियाओं का अनुपालन करने के बाद यह बिल सदन में आया है, इसमें कोई बहुत लम्बी चौड़ी बात नहीं है, केवल दो बातें हैं। ओडिशा राज्य सरकार ने अनुसूचित जातियों की सूची में सुआलगिरि समुदाय को क्रम संख्या 79 पर सबाखिया के पर्यायवाची के रूप में समावेशन का प्रस्ताव किया है। इस प्रस्ताव पर अनुमोदित क्रियाविधियों के अनुसार भारत के महारजिस्ट्रार और राष्ट्रीय अनुसूचित आयोग ने अपनी सहमति दी है।
दूसरा प्रस्ताव पांडिचेरी संघ राज्य क्षेत्र के नाम को पुड्डूचेरी के रूप में परिवर्तित किए जाने के परिणामस्वरूप संविधान (पांडिचेरी) अनुसूचित जातियां आदेश, 1964 में संघ राज्य क्षेत्र का नाम पांडिचेरी से पुड्डूचेरी करने के संबंध में। इस विधेयक को भी इस सदन में दिनांक 10.03.2017 को पुरःस्थापित किया गया था। मैं माननीय सदस्यों ने अनुरोध करना चाहता हूं कि वह इस पर विचार व्यक्त करते हुए इसे पारित करने में सहयोग दें।
श्री मल्लिकार्जुन खड़गे (गुलबर्गा) : महोदय, यह बहुत छोटा बिल है और सिर्फ दो जातियों को सिनोनिम्स की तरह शेडय़ूल्ड कास्ट लिस्ट में इनक्लूड करने का प्रस्ताव रखा गया है। दूसरा पांडिचेरी का नाम बदलकर पुडूचेरी नाम रखने का प्रावधान किया गया है। ये दोनों अमेंडमेंट बिल बहुत छोटे हैं और इन पर कोई कंट्रोवर्सी भी नहीं है। हम सभी इस बिल का सपोर्ट करते हैं। लेकिन सपोर्ट करते हुए मैं सदन के और सरकार के ध्यान में लाना चाहता हूं, क्योंकि यह जरूरी है। मैं किसी एक सरकार पर आक्षेप नहीं लगाना चाहता हूं। यह सभी की जिम्मेदारी है कि शेडय़ूल्ड कास्ट की लिस्ट बनाते वक्त बहुत सावधानी बरतनी चाहिए। लेकिन आजकल ऐसा देखने को मिल रहा है कि पार्टी बेसिस पर जातियों को रिकमण्ड करते हैं। अगर किसी कम्यूनिटी को अपनी तरफ लुभाना है, चाहे वह क्राइटेरिया फुलफिल करती है या नहीं, उसको रिकमण्ड करके भेज देते हैं। राज्य सरकार के द्वारा रिकमण्ड करने के बाद नेशनल कमीशन में सब तरह के प्रैशर डालकर रिकमण्ड कराया जाता है। जब नेशनल कमीशन से अप्रूव हो जाता है तो सरकार पर दबाव डालकर कैबिनेट से उसको पास कराया जाता है। चाहे वह किसी की भी सरकार हो, चाहे मेरी गवर्नमेंट हो, चाहे उनकी हो या किसी की भी गवर्नमेंट हो। हमेशा प्रेशर टैक्टिक्स से शेडय़ूल्ड कास्ट्स और शेडय़ूल्ड ट्राइब्स की लिस्ट बनती गई। अगर बैकवर्ड क्लास की लिस्ट बनती गई तो जो असल में वंचित लोग हैं, जो depressed, suppressed, disregarded लोग हैं, उनकी हालत क्या होगी? उनको आप किस तरह का रक्षण देने वाले हैं?
इसीलिए मैं थावर साहब से रिक्वेस्ट करता हूं कि आप तेरी-मेरी गवर्नमेंट न करें या पिछले 60-70 साल में क्या किया गया, इन बातों को छोड़ दीजिए। आज के दिन इन समस्याओं को हल करने के लिए और इन लोगों की रक्षा के लिए हम क्या कर सकते हैं, यह एक बड़ा प्रश्न है। इसलिए जो शेडय़ूल कास्ट के लिए आर्टिकल 341 है, इसमें यह स्पट रूप से कहा जाता है, “The president may with respect to any State or Union Territory, and where it is a State, after consultation with the Governor thereof, by public notification, specify the castes, races or tribes or parts of or groups within castes, races or tribes which shall for the purposes of this Constitution be deemed to be a Scheduled Caste in relation to that State or Union Territory, as the case may be.” So, this is the condition. Second is: “Parliament may by law include in or exclude from the list of Scheduled Tribes specified in the notification issued...” इसका कारण क्या है? बहुत सी जगह ऐसा भी हो रहा है कि जब दलितों में, खासकर अस्पृश्यों में एक यूनिटी आती है, एक पॉलिटिकल फोर्स बनता है, तो वहां के राज्य के नेता लोग साजिश करते हैं। वे यह साजिश करते हैं कि इन कम्यूनिटियों की यूनिटी को तोड़ना है, तो इसमें किसी और को जोड़ो। हमारे देश में एक स्टेट में अगर एक जाति शेडय़ूल्ड कास्ट लिस्ट में है, तो दूसरी स्टेट में वह बैकवर्ड लिस्ट में है और तीसरी स्टेट में वह शेडय़ूल्ड ट्राइब्स की लिस्ट में है। यह इसलिए है कि उन राज्यों में उनकी इकोनॉमिक परिस्थिति, सोशल स्टेटस और अनटचेबिलिटी को देखकर पहले उनको उन लिस्ट्स में किया गया था। हो सकता है एक कम्यूनिटी एक राज्य में टचेबल हो सकती है, किंतु वह दूसरे राज्य में अनटचेबल हो सकती है। इस चीज को ध्यान में रखना जरूरी है। ऐसा न हो कि एक जगह वह कम्यूनिटी शेडय़ूल्ड कास्ट में है, इसीलिए उसे सारे देश में शेडय़ूल्ड कास्ट में लाएं। इसका मकसद यह नहीं है। इसमें आपको एक इकोनॉमिक स्टेटस, सोशल स्टेटस और एडूकेश्नल स्टेटस देखना होगा। पॉलिटिकली कौन सी कम्युनिटी इन इनग्रेडिएंट्स के साथ कितनी पॉवरफुल है, यह देखना भी जरूरी है, क्योंकि आजकल हम देखते हैं कि हर राज्य में एजिटेशन हो रहा है। जो कम्यूनिटी पॉवरफुल हैं, जिनके पास लैण्ड है, पैसा है और जिनके पास एडूकेशन है, वे भी इस लिस्ट में जाने की दौड़ में हैं। इसीलिए इस मुद्दे पर गंभीरता से सोचना जरूरी है।
बहुत बार हम गलती कर जाते हैं। मैंने पहले ही बोला कोई भी सरकार हो, गलती ऐसी होती है कि कोई एक दलित वर्ग किसी पॉलिटिकल पार्टी के खिलाफ है तो उसको या तो डिलीट करने के लिए रिकमेंड किया जाता है, नहीं तो उनके काउंटर में किसको हम लिस्ट में डालें जिससे उनकी मदद हो जाए। अगर इस ढंग से हम पॉलिटिकली इस्तेमाल करते गए तो जो लोग सच में सोशली, इकोनॉमिकली, एडूकेश्नली बैकवर्ड हैं, उनकी हालत क्या होगी? इस बात पर ध्यान देना जरूरी है। हालत तो सुधारनी होगी चाहे वह एडूकेशन हो, चाहे क्राइम रेट्स हों, चाहे कुछ भी हो। मैं बता सकता हूं, क्योंकि दलितों के ऊपर अत्याचार होते आए है, हो रहे हैं, अभी भी कंटीन्यू हैं। हमेशा क्या होता है, हम वाद-विवाद करते हैं, चर्चा करते हैं और जब आपके सामने आंकड़े रखते हैं तो आप भी उन्हें तोड़-मरोड़ कर फिर आंकड़े रखते हैं। हम लोग आंकड़ों के झगड़ों में ज्यादा जाते हैं, लेकिन मूलभूत प्रश्न यह है कि इनकी समस्या कब हल होगी, इस पर ध्यान देना जरूरी है और इस तरीके से ही इसे सुलझाना होगा।
मैं एक चीज आपके नोटिस में लाना चाहता हूं कि जब कांस्टीटय़ूशन फ्रेम किया गया या कांस्टीटय़ूशन के पहले भी 1935 में हिंदुस्तान में ब्रिटिशर्स ने एक रूल दिया था, उस 1935 के रूल में यही था - I am referring to Section 26 of the First Schedule of the Government of India Act, 1935. यह रिजर्वेशन आज नहीं आया। This reservation has not come now. It came after a great fight. Dr. Babasaheb Ambedkar and Mahatma Gandhi Ji had a compromise and it is called the “Poona Pact”. In that “Poona Pact”, they agreed to give certain percentage of reservation to the Dalits, the Scheduled Castes, the suppressed and those who are untouchables. For them, he has agreed to give reservation.
In the 1935 Act, the “Scheduled Castes” have been defined as:
“Scheduled Castes means such Castes, race or tribes or parts of or groups within such Castes, races or tribes being Castes, races, or tribes, or parts of or groups which appear to his Majesty in Council to correspond to the classes of persons formerly known as the depressed classes as His Majesty in Council may feel.” अब वह मैजेस्टी चली गई, उसके चले जाने के बाद यह मैजेस्टी आ गई, डेमोक्रेसी में हम लोग आ गये। हमारे आने के बाद ओरिजनली जो 1935 में एक डेफिनिशन का तरीका था या उसके बाद गांधी जी या डा.बाबासाहेब अम्बेडकर के बीच में जो एग्रीमैन्ट हुआ था, उसमें भी जो इनग्रेडिएंट्स थे, उसमें जो क्राइटीरिया थे, उन क्राइटीरिया के अनुसार अगर हम नहीं चलेंगे तो यह बढ़ता चला जायेगा। आज 18 परसैन्ट है, 20 परसैन्ट है, क्योंकि संविधान में यह है, “in proportion to the population, reservation should be given”. Then, similarly, in proportion to the population, seats should be reserved in Parliament and Assemblies. So, what is happening is that more number of people who do not deserve are entering and, therefore, the population is increasing. Heartburning is there for other people because they are thinking that something has been snatched away from them. Why is it so? It is because if there are 30 seats, in general, and if the population goes up to 20 or 22 per cent, then 22 seats will go; 22 सीटें उसको जायेंगी, तब ये बाकी के लोग कहेंगे कि कुछ हमारा जा रहा है। यह कोई फिक्र नहीं करता कि किन सर्कम्सटांसेज में, किस वातावरण में इसे सरकार ने स्वीकार किया। उस वक्त भी एग्रीमैन्ट हुआ और आज भी कोई भी सरकार हो, रिजर्वेशन को जो एक प्रोत्साहन दे रही है, वह इसी वजह से दे रही है, क्योंकि उनकी हालत अभी भी बिगड़ी हुई है।
कभी-कभी आपकी पार्टी में भी यह बार-बार आता है और दूसरे लोग भी कहते हैं कि कितने सालों तक देना है। संविधान में दस साल था। अभी बीस साल हो गये, पचास साल हो गये और कितने दिन इन्हें देना है। अगर ऐसा है तो पहले समाज में सुधार लाओ, अस्पृश्यता खत्म करो, सबको लैवल प्लेइंग ग्राउंड दो, सभी लोग एक हैं, ऐसा सोचकर चलो। तब आप ठीक कर सकते हो। हमारे पास ग्रेडेशन सिस्टम है। जैसे सीढ़ियां हैं, वैसी आपकी सोसाइटी है। नीचे एक सीढ़ी है, ऊपर एक सीढ़ी है, बीच में एक सीढ़ी है और सबके ऊपर एक सीढ़ी है। जैसे मैं यहां बैठा हूं, सर, आप वहां बैठे हैं। यह ऊपर-नीचे है, मैं कम्पेयर नहीं कर रहा हूं, यह मैं समझाने के लिए कह रहा हूं। जैसे ये सीढ़ियां हैं, हमारे देश में समाज की व्यवस्था भी ऐसे ही बनी है। इसे ठीक कीजिए। आर्थिक तौर पर अगर गैर-बराबरी है तो हम मानेंगे, क्योंकि इकॉनमिकली इनइक्वैलिटी हर जगह है। दुनिया में सभी के लिए इकॉनमिकली इक्वैलिटी नहीं हैं। कम से कम सोशल इक्वैलिटी तो ले कर आओ। जब तक आप सोशल इक्वैलिटी नहीं ले कर आएंगे, तब तक इस समस्या का हल नहीं होगा। इसीलिए डॉ. बाबा साहब अंबेडकर ने यह कहा था कि पॉलिटिकल डैमोक्रेसी कितनी महत्व की है। ...(व्यवधान)
श्री भर्तृहरि महताब (कटक) : आज लोहिया जी का जन्मदिन है। सामाजिक समरसता की बात वे भी कहते थे। आप जिन स्टेप्स का उदाहरण दे रहे हैं, वे भी कहते थे। ...(व्यवधान)
श्री मल्लिकार्जुन खड़गे : जी हाँ, लोहिया जी का जन्मदिन है तो लोहिया के लोग भी कुछ नहीं बोले। आपको भी बोलना चाहिए था। जनता पार्टी के लोग भी नहीं बोले हैं। आपने मुझे याद दिलाया है, इसके लिए आपका धन्यवाद और मैं उनको भी याद करता हूं। लेकिन आखिरी में कहता हूँ कि डॉ. राम मनोहर लोहिया जी, डॉ. बाबा साहब अंबेडकर जी से मिलना चाहते थे। शायद उधर के बहुत से लोगों को मालूम होगा, जो जनता पार्टी में थे, तो मिल कर उनसे बातचीत करना चाहते थे और पत्र व्यवहार भी हुआ था। लेकिन वे मिल नहीं पाए। एक जगह बैठ नहीं पाए, इसीलिए आगे का जो एजेंडा है, वह तय नहीं हो सका। डॉ. बाबा साहब अंबेडकर ने यह बात स्पष्ट कही थी। उन्होंने आब्ज़र्व किया था कि ः-
“We must do, is not to be content with the mere political democracy. We must make our political democracy, a social democracy as well. Political democracy cannot last unless there lies at the base of it, social democracy. What does social democracy mean? It means a way of life which recognizes liberty, equality and fraternity as the principles of life. These principles are not to be treated as separate items in the trinity. They form a union of trinity in the sense that to divorce one from the other is to defeat the very purpose of democracy. A liberty cannot be divorced from equality and equality cannot be divorced from liberty nor can liberty and equality be divorced from fraternity. Without fraternity, liberty and equality could not become a natural course of things. It will require a constable to enforce them. We must begin by acknowledging the fact that there is a complete absence of two things in the Indian society. One of these is equality of social plain, we have in India a society based on the principles of graded inequality, which means elevation of some and degradation of others. On the economic plain, we have a society in which we have immense wealth as against many who live in abject poverty.” यह स्थिति इस देश की है। इस देश की व्यवस्था में ऐसा है। लेकिन इन सबके बावजूद भी मुझे समझ में नहीं आ रहा है कि बुद्धिजीवी लोग, जो विद्वान लोग हैं और खास कर पॉलिटिकल इंटलैक्चुअल्स हैं और पॉलिटिकल नॉलेज जिनके पास है, वे ह्युमैनिटी की बात करते हैं, ह्युमन राइट्स की बात करते हैं, ऐसे लोग भी हमेशा कहते हैं कि आरक्षण क्यों होना चाहिए, क्यों प्रमोशन होना चाहिए। अरे! प्रमोशन और रिज़र्वेशन इसीलिए होना चाहिए कि जब तक आप लोग कम से कम इस देश में रहने वाले 24औ लोगों को अपने साथ में नहीं लेंगे, तो आपकी जीडीपी भी नहीं बढ़ेगी, समाज में स्थिरता भी नहीं रहेगी, डैमोक्रेटिक स्थिरता भी नहीं रहेगी और डैमोक्रेसी भी नहीं बचेगी। यह तो बाबा साहब ने सन् 1949 में स्पष्ट कहा था कि अगर इस देश में डैमोक्रेसी को टिकाना है, डैमोक्रेसी के तहत इस देश को चलाना है, तो आज न कल इकॉनमिक-सोशल इक्वैलिटी को लाना जरूरी है। नहीं तो, they will blow this system. They will agitate and this will go against them.
Therefore, I am suggesting this in the interest of the country and in the interest of society. Just talking about something or one man or the other man coming to power is a different thing. But unless you make the society one, unless you ensure social justice and social democracy, you are not going to achieve anything. I would urge that while recommending inclusion of Scheduled Caste communities in the list you should verify all these things. चंद दफा यह होता है कि आपकी पार्टी के लोग प्रेशर डालते होंगे, या हम डालते होंगे, लेकिन आप उसको मत देखिए। देश के हित में, समाज के हित में कौन सा अच्छा है, वही हमें करना चाहिए। ये बातें कहते हुए मैं सपोर्ट तो इस बिल को कर रहा हूँ, लेकिन एक बात मैं आपके ध्यान में लाना चाहता हूँ, खासकर जिन लोगों के मन में यह है कि शेडय़ूल कॉस्ट के लोग बहुत एडवान्टेज ले रहे हैं, यह बोलने की बात है। वैसे बोलने के लिए अन्य बहुत से मुद्दे हैं, एक सेक्रेटरी नहीं है, एक ज्वाइंट सेक्रेटरी नहीं है, आप देखिए पूरा सेक्रेटेरिएट जितना भी है या ऑल इन्डिया में देखिए, एक-दो सेक्रेटरीज भी नहीं हैं, एक-दो ज्वाइंट सेक्रेटरीज नहीं हैं। अगर आप आँकडे निकालकर देखेंगे तो आपको यह मालूम होगा। जब ऐसी स्थिति है, रिजर्वेशन को रखना भी जरूरी है, साथ ही साथ इसको क्वालिटेटिव बनाना भी महत्वपूर्ण है। मैं यही कहूँगा कि -
“तेरगी को रोशनी कहते हुए अच्छा नहीं लगता, यानी अंधेरे को रोशनी कहते हुए अच्छा नहीं लगता, मुझे गम को खुशी कहते हुए अच्छा नहीं लगता, लहू इंसानियत का जो यहाँ दिन-रात पीते हैं, उन्हें अब आदमी कहते हुए भी अच्छा नहीं लगता।” डॉ. किरिट पी. सोलंकी (अहमदाबाद) : महोदय, आपने मुझे संविधान (अनुसूचित जातियाँ) आदेश (संशोधन) विधेयक, 2017 पर बोलने की अनुमति दी है। यह बहुत ही महत्वपूर्ण विधेयक है। इसके लिए मैं आपका और अपनी पार्टी का बहुत-बहुत आभारी हूँ। यूँ तो यह जो संशोधन है, यह बहुत ही छोटा है, ओडिशा में क्रम 79 पर सबाखिया, सुआलगिरि और स्वालगिरि इन तीन जातियों को जोड़ने का इसमें प्रस्ताव रखा गया है। इसका दूसरा बिन्दु यह है कि पांडिचेरी के स्थान पर पुडुचेरी शब्द का इसमें समावेश करने का है।
महोदय, मैं इस बात का स्मरण दिलाना चाहता हूँ कि इस देश के संविधान निर्माता, जिन्होंने इस देश का संविधान बनाया था और भारत के लिए जिन्होंने इतनी बड़ी कुर्बानी दी थी, वे भारत रत्न डॉ0 बाबा साहब अम्बेडकर को आजादी के बाद जो सम्मान मिलना चाहिए, वह सम्मान देने में हमसे कहीं चूक हुई है। मैं हमारे प्रधान मंत्री जी और हमारी सरकार का बहुत-बहुत अभिनन्दन करता हूँ और उनका आभार व्यक्त करता हूँ कि पिछले तीन साल से हमारी सरकार के द्वारा जो कार्य किये गये हैं, हमारे प्रधान मंत्री जी ने पार्लियामेंट के अन्दर कहा था कि यह सरकार गरीबों के लिए रहेगी, यह सरकार दलितों के लिए रहेगी। गरीबों और दलितों के लिए हमारे नरेन्द्र मोदी जी ने, हमारे मंत्री श्री थावर चंद गहलोत जी ने अनेक योजनाएँ बनायी हैं, मैं उनका अभिनन्दन करता हूँ। बाबा साहब अम्बेडकर को सम्मान नहीं दिया गया था मगर मुझे स्मरण है, मैं गुजरात के अहमदाबाद से प्रतिनिधित्व करता हूँ। हमारे प्रधान मंत्री जी जब तत्कालीन गुजरात के मुख्यमंत्री थे, तब उन्होंने सुरेन्द्र नगर शहर में संविधान की यात्रा निकाली थी और यह यात्रा हाथी की अम्बाडी पर संविधान को रखकर, लाखों लोगों के बीच रखकर प्रधान मंत्री खुद दो किलोमीटर उसमें चले थे। यह सोच बताती है कि हमारे प्रधान मंत्री जी का संविधान के प्रति किस प्रकार का आदर है।
जब वर्ष 2014 में नई लोक सभा का गठन हुआ तो हमारे प्रधानमंत्री जी ने संविधान के विषय पर दो दिनों की चर्चा रखी थी। मैं समझता हूं कि भारत के आज़ाद होने के बाद संविधान पर ऐसी चर्चा किसी ने नहीं की थी और उस चर्चा के ज़रिए कई लोग उस पर बोले थे। हमारे विपक्ष के लोग भी बोले थे और बाबा साहब के बारे में जो बातें बताई गयी थीं, उनमें से कुछ बातें ऐसी भी थीं कि हम भी वे बातें नहीं जानते थे। इस बात के लिए मैं प्रधानमंत्री जी का बहुत-बहुत ऋण स्वीकार करता हूं, भारत सरकार का बहुत-बहुत ऋण स्वीकार करता हूं।
प्रधानमंत्री जी ने 26 नवम्बर को ‘संविधान दिवस’ की जो घोषणा की है, यह संविधान के प्रति उनकी आस्था का प्रतीक है। जहां तक बाबा साहब अम्बेडकर का सवाल है, उनके स्मारक का सवाल है, भारत के आज़ाद होने के बाद दिल्ली या अन्य ज़गहों पर उनके जो स्मारक बनने चाहिए थे, वे नहीं बने थे। हमारे प्रधानमंत्री जी और हमारा ही विचार करने वाली सरकारों ने पांच स्मारक यानी कि पंचतीर्थ का निर्माण किया है, चाहे वह बाबा साहब अम्बेडकर की महू में जन्म स्थली हो चाहे कोई और स्थान हो। पिछली बार जब बाबा साहब अम्बेडकर की 125वीं जयन्ती की शुरूआत हुई थी तो भारत के प्रधान मंत्री महू गए थे। मैं समझता हूं कि अगर कोई प्रधानमंत्री बाबा साहब की जन्मस्थली पर गए थे तो वह हमारे नरेन्द्र मोदी जी गए थे।
बाबा साहब ने नागपुर में जहां दीक्षा ली थी यानी कि दीक्षा भूमि, जब महाराष्ट्र में हमारी सरकार थी तो उस दीक्षा भूमि का निर्माण नितिन गडकरी साहब ने किया था। इसके बाद 26, अलीपुर रोड, जहां बाबा साहब अम्बेडकर ने अंतिम सांसें ली थी, उसका पुनरुद्धार करने का फैसला भी अटल जी की सरकार ने किया था। इसके बाद दस सालों में यू.पी.ए. सरकार में इसके बारे में किसी प्रकार की कोई भी प्रगति नहीं हुई थी।...(व्यवधान) नरेन्द्रभाई मोदी जी द्वारा, इस सरकार द्वारा 200 करोड़ रुपये की लागत से वहां एक बहुत बड़ा, बाबा साहब की गरिमा के अनुरूप एक मेमोरियल बनाने का कार्य चल रहा है। बाबा साहब अम्बेडकर का जहां अंतिम संस्कार किया गया था, दादर की चैत्य भूमि पर, उसका भी निर्माण कार्य किया गया। अभी-अभी इन्दु मिल की ज़मीन को लेकर वहां बाबा साहब अम्बेडकर का एक बहुत ही भव्य स्मारक बनाने का शिलान्यास हमारे प्रधानमंत्री जी ने किया था। बाबा साहब अम्बेडकर लंदन में जहां रहते थे, जो निजी सम्पत्ति थी, उस सम्पत्ति को भी खरीदकर हमारी सरकार ने वहां बाबा साहब का मेमोरियल बनाने का काम किया है। मैं सरकार का अभिनंदन करता हूं, मैं सरकार को बधाई देता हूं कि बाबा साहब अम्बेडकर के जीवन को लेकर पंचतीर्थ बनाने का जो फैसला किया है, आने वाली पीढ़ी को उससे बहुत बड़ी प्रेरणा मिलेगी।
अभी-अभी खड़गे जी बोल रहे थे कि बाबा साहब अम्बेडकर ने जो पूना पैक्ट किया था, उसकी वज़ह से आरक्षण आया था। मैं इस बात को दोहराना चाहता हूं कि आरक्षण किसी ने नहीं दिया था। अगर किसी ने आरक्षण दिया था तो उसने बाबा साहब अम्बेडकर के प्रयत्नों से दिया था, गांधीजी की सम्मति से यह दिया गया था। अगर कोई सरकार या कोई विपक्षी दल ऐसी बात कहता है कि उन्होंने आरक्षण दिया है तो मैं मानता हूं कि वह सत्य नहीं है। हमें बाबा साहब अम्बेडकर की वज़ह से आरक्षण मिला था।
हमारे प्रधानमंत्री जी ने नोटबंदी का जो फैसला लिया था, बाबा साहब अम्बेडकर ने ‘प्रॉब्लम ऑफ रुपीज़’ में यह स्पष्ट लिखा था कि समय-समय पर काले धन को समाप्त करने के लिए, पैरेलल इकोनॉमी को समाप्त करने के लिए विमुद्रीकरण के फैसले लिए जाने चाहिए। इतने सालों में किसी ने भी बाबा साहब के मार्गदर्शन का पालन नहीं किया। अगर किसी ने उसका पालन किया तो हमारे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी ने उसका पालन किया है और लोगों ने उसको स्वीकार भी किया है। अभी-अभी पांच राज्यों में हुए चुनावों से वह पता चलता है।
बाबा साहब अम्बेडकर ने यह भी कहा था कि किसी भी देश को आगे बढ़ने के लिए, किसी भी राज्य को आगे बढ़ने के लिए इलेक्ट्रीफिकेशन, यानी पावर जेनरेशन करना चाहिए। मुझे इस बात का संतोा है कि 100औ पावर गुजरात में नरेन्द्रभाई ने प्रस्थापित किया था। उसकी वज़ह से एक ‘गुजरात मॉडल’ बना था और उस गुजरात मॉडल को पूरे देश ने स्वीकारा है, यह वर्ष 2014 के चुनाव से सिद्ध हो जाता है। मेरे कहने का मतलब यह है कि जिन-जिन रास्तों पर चलने के लिए बाबा साहब अम्बेडकर ने जो मार्गदर्शन किया था, यह सरकार, नरेन्द्र मोदी जी की सरकार उसी रास्ते पर चल रही है। इसी का हमें संतोष है। अगर देश को आगे ले जाना है, देश को विकसित देश की श्रेणी में ले जाना है तो बाबा साहब का विचार आज भी सार्थक है, चाहे वह रोड कनेक्टिविटी की बात हो, चाहे वह रिजर्व बैंक की बात हो, चाहे अन्य कोई भी बात हो, यह बाबा साहब के रास्ते पर चलने की बात है। अभी जो करेंसी की बात आई है, पहले करेंसी नकद में आई करती थी, चाहे वह सिक्के में हो, चाहे नोट के स्वरूप में हो। इस प्रकार की करेंसी पर हमारे देश के बड़े‑बड़े नेताओं के फोटो छपते थे। इसका हमें बहुत आनंद है और हम इसका सम्मान भी करते हैं। जो भीम एप है वह बाबा साहब अंबेडकर के नाम पर लाया गया है। हमारे प्रधानमंत्री जी ने भीम एप को शुरू कर एक संकेत दिया है, एक फैसला दिया है कि बाबा साहब एक बहुत बड़े राजनीतिज्ञ थे, एक बहुत बड़े अर्थशास्त्री थी, एक बहुत बड़े सोशल रिफॉर्मर थे। अब हम लोग उनके रास्ते पर चलने वाले हैं। मैं अपनी वर्तमान सरकार को बहुत‑बहुत बधाई देता हूं।
हमारी सरकार इस बिल को लेकर आई है। मैं माननीय मंत्री जी का आभार व्यक्त करना चाहता हूं। मैं इस बिल के समर्थन में बोलने के बाद अपनी बात को समाप्त करता हूं। मैं कुछ चंद बातों को कहते हुए अपनी बात समाप्त करना चाहता हूं;
"अगर भीम दलितों में पैदा न होते, अगर भीम दलितों में पैदा न होते; यूं ही डूब जाती दलितों की नैया, अगर भीम दलितों में पैदा न होते।"
SHRIMATI PRATIMA MONDAL (JAYANAGAR): Thank you, hon. Deputy Speaker Sir, for giving me this opportunity to speak on the Constitution (Scheduled Castes) Orders (Amendment) Bill, 2017.
It is nearly 70 years since the country has got its freedom and almost 70 years since our Constitution came into being. But it is a matter of regret that even after so many years the policy of reservation has had little impact on the lives of the Scheduled Castes and the Scheduled Tribes people.
These socially deprived people live a precarious life unable to still fulfil the bare necessities of life. The age-old caste system is the main cause of the social inequalities in our country. It has largely contributed in keeping a large portion of India’s population backward. The caste and creed based divisions still dominate in service, marriage, education, employment, and general social interactions in our country. We should therefore make all efforts in every form to fight back so that all of us live in a society that encourages liberty, equality and fraternity irrespective of caste which our Constitution promises.
Although our Constitution has provisions for reservation for these socially deprived people, they have benefited from these reservations only in a limited way. We need to put effort to make these people become a part of the mainstream society. We should attempt to help the weak grow strong – not to let the weak become weaker – and give them a level-playing field with all members of society. Hence, to echo what Dr. B.R. Ambedkar said, our efforts must be aimed to help “break the chains once and forever”.
The Bill under discussion aims to strengthen the efforts by including in part 13, entry 79 of the Order, Sabakhia, Sualgiri, along with Swalgiri as Scheduled Castes in the State of Odisha. It is a commendable step forward. The Bill also aims to replace Pondicherry by Puducherry at both places where it occurs in the Order.
However, under the financial memorandum the Bill brings out that due to non-availability of Caste-wise data a precise estimate of expenditure, which would have to be incurred, is not possible. It is evident that with the inclusion of more Castes under the Scheduled Castes category the Government will require more funds to make sure that every such member is enabled to access all opportunities and facilities. So, I would like to request the hon. Minister, through you, Sir, that the Government may consider it beneficial to revise the fund allocation towards the welfare of the Scheduled Castes and Scheduled Tribes people.
Sir, our hon. Chief Minister, Kumari Mamata Banerjee has introduced a unique SikhashreeScheme to encourage the Scheduled Castes and Scheduled Tribes students towards education as also for their social upliftment. The Government of West Bengal has already issued more than 11 lakh Caste certificates and an online procedure has also been introduced to expedite the process. Sir, the time has come to provide quality education to our children from the nursery level as only through education our children can make a good future.
With these words, I would like to conclude my speech. On behalf of my Party, I wholeheartedly support this Bill. Thank you.
DR. KULMANI SAMAL (JAGATSINGHPUR): Sir, I rise to speak in support of the Constitution (Scheduled Castes) Orders (Amendment) Bill, 2017.
The Bill seeks to include Sualgiri and Swalgiri Castes in the Scheduled Castes List of Odisha. These communities were found to be synonymous with Sabakhia Caste which is already included in the List.
Persons belonging to Swalgiri Caste were not getting benefits due to them and the Odisha Government had proposed their inclusion in the Scheduled Castes List. I thank the Social Justice Minister, Shri Thawar Chand Gehlot for accepting our demand and including this community in the List. This small amendment will ensure the progress of lakhs of people in Odisha.
I would like to take this opportunity to speak about the need to educate our children, especially those belonging to the backward classes. In India we pay very little attention to primary education. It forms the foundation of human character. We still do not have good teachers to help in building good human character. This problem becomes worse when you go further down the social ladder.
It is a sad truth that one in two Indian students cannot read books meant for Class three and below. The ASER survey 2016 shows that proportion of class 5 children who can read a class 2 level text fell to 47.8 per cent in 2016 from 48.1 per cent in 2014. Our primary education system is getting worse and it should worry us. This is happening despite our implementing the Right to Education Act and providing universal education in the country.
The problem of enrollment might have been solved but the problem of bad teaching quality remains and plagues our society. We need to think hard about making our children more capable of going out into the world and becoming the best people possible. The goal of turning them into good people, who contribute to the betterment of this nation, can only be achieved if good quality education reaches the lowest of the low in our social ladder that is the Scheduled Castes and the Scheduled Tribes.
I urge the Government to have targeted programmes to improve quality of education given especially to this section of society. Most of them even cannot afford to go to a private school. It would require a major intervention from this Government to do well and to achieve their dreams.
With these words, I would once again like to thank this Government for including the Sualgiri and Swalgiri castes in the SC list in Odisha as well. Thank you, Sir.
श्री विनायक भाऊराव राऊत (रत्नागिरी-सिंधुदुर्ग) : उपाध्यक्ष महोदय, एक महत्वपूर्ण बिल लाया गया है, मैं उसका समर्थन करने के लिए खड़ा हुआ हूं। मैं सबसे पहले मंत्री महोदय गहलोत जी को धन्यवाद दूंगा कि पिछले कई वर्षों से अपने हक के लिए जो समाज झगड़ रहा था, मांग कर रहा था, कई बार आंदोलन कर रहा था, उन्हें न्याय देने का एक महत्वपूर्ण काम इस विधेयक के माध्यम से हो रहा है।
राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग ने इस समाज की मांग पर गंभीरता से गौर किया। मैं छत्तीसगढ़, हरियाणा, केरल, ओडिशा और पश्चिम बंगाल की राज्य सरकारों को धन्यवाद दूंगा कि उन्होंने इन जातियों को न्याय देने के लिए केन्द्र सरकार को प्रस्ताव भेजा। केन्द्र सरकार ने उस पर गंभीरता से ध्यान देकर इस विधेयक के माध्यम से उन्हें न्याय देने का काम किया। इस विधेयक पर बोलते हुए मैं माननीय मंत्री जी का ध्यान आकर्षित करना चाहता हूं कि हमारे महाराष्ट्र में खेड़े गांव में पहाड़ी में कई दुर्गम गांवों में निर्जन बस्ती में रहने वाले कई लोग हैं जिन्हें धनगर कहा जाता है। वे बकरे तथा कई और जानवरों को संभालते हैं। धनगर में आखिर शब्द ‘र’ की जगह धनगड़ हुआ। धनगड़ समाज को न्याय मिला। उन्हें अनुसूचित जाति में सम्मिलित किया गया, देश में उन्हें जो सहूलियत मिलनी चाहिए, वह मिलनी शुरू हो गई। लेकिन कई राज्य सरकारों में ‘ड़’ की जगह ‘र’ रह गया, ओरिजनल अक्षर ‘र’ था। मैं मंत्री महोदय से विनती करूंगा कि जिन राज्य सरकारों ने धनगर और धनगड़, एक अक्षर के फर्क से लाखों की संख्या में दुर्गम बस्ती में रहने वाले लोगों को अनुसूचित जाति का फायदा देने के लिए जो विधेयक लाना चाहिए, वैसा प्रस्ताव महाराष्ट्र की राज्य सरकार से मंगवाकर उन्हें न्याय देने की कोशिश कीजिए।
मैं एक और बात की ओर आपका ध्यान आकर्षित करना चाहता हूं। मुम्बई या कोस्टल एरिया मछुआरों की बस्ती है। पिछले कई वर्षों से वहां मछुआरों का व्यवसाय चलता है। उन पारम्परिक मछुआरों को अनुसूचित जाति में शामिल करने की मांग है। उन्हें महादेव कोली का सम्मान मिले और अनुसूचित जाति में सम्मिलित करने का राज्य और केन्द्र सरकार के माध्यम से प्रस्ताव तैयार हो। पिछले कई वर्षों से यह मांग है। यह मांग भी ऐसे ही पूरी हो जाए ताकि प्रधान मंत्री जी का जो सपना है कि गरीबों के घर तक विकास जाना चाहिए, उन्हें सहूलियत मिलनी चाहिए और वर्षों से उनके घर में जो गरीबी बैठी है, उसका निर्मूलन हो सके, वह पूरा हो सके। धनगर और महादेव कोली इन दोनों समाज को न्याय देने की कोशिश कीजिए। धन्यवाद।
श्री विनोद कुमार सोनकर (कौशाम्बी) :उपाध्यक्ष महोदय, आपने मुझे एक बहुत ही महत्वपूर्ण बिल पर बोलने की अनुमति दी, इसके लिए धन्यवाद। भारत के संविधान के अनुच्छेद 341 और 342 के उपबंधों के अनुसार विभिन्न राज्यों और संघ क्षेत्रों के संबंध में वर्ष 1950 के दौरान अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजातियों की सूची अधिसूचित की गई थी। इन अधिसूचियों को समय-समय पर रूपांतर किया जाता रहा है। समय-समय पर अनुसूचित जातियों को अनुसूचित जनजातियों में और अनुसूचित जनजातियों की कुछ जातियों को अनुसूचित जातियों में रूपांतर के लिए राज्य सरकार से प्रस्ताव आते रहते हैं। इस पर केंद्र सरकार विचार करती रहती है। उसी क्रम में 1950 की अनुसूची के भाग 13 में उड़ीसा में प्रविट 69 के स्थान पर सबसखिया, सुआलगिरी और सुयालगिरी का प्रस्ताव लाया गया है। संविधान के पाण्डिचेरी अनुसूचित जातियों आदेश संख्या 1964 में पाण्डिचेरी शब्द के स्थान पर पुडुचेरी शब्द का प्रस्ताव किया गया है। निश्चित रूप से इसे करने से वहां की जनजातियां को लाभ मिलेगा।
माननीय उपाध्यक्ष जी, पूना पैक्ट के माध्यम से अनुसूचित जातियों को आरक्षण मिला, बहुत संघर्ष और त्याग के बाद मिला था। बाबा साहेब जी संघर्षों से राउंड टेबल काफ्रेंस में अनुसूचित समाज के लिए दो वोट का अधिकार लाए। हमें बहुत कुर्बानी और त्याग के बाद आरक्षण मिला है। माननीय सदस्य सोलंकी जी कह रहे थे कि कुछ लोग प्रचार करते हैं कि आरक्षण किसी ने दिया है। मैं कहना चाहता हूं कि आरक्षण बड़ी कुर्बानी और त्याग के बाद मिला है। आरक्षण की समय सीमा दस साल निर्धारित की गई थी। दस साल का समय यह सोचकर निर्धारित किया गया था कि इस समाज के लोगों के साथ अगर न्याय किया गया तो दस साल में अनुसूचित समाज के लोग विकास की मुख्यधारा में आ जाएंगे। संविधान निर्माताओं की भावना और सोच थी कि अगर इसे पूरी ईमानदारी और निठा के साथ लागू किया तो अनुसूचित समाज दस साल में विकास की मुख्यधारा में आ जाएगी। इसे पूरी ईमानदारी और निठा के साथ लागू नहीं किया गया, इस कारण आजादी के 70 साल बाद भी समाज अभी भी अपेक्षित और पिछड़ा है। आरक्षण लागू करने की सबसे बड़ी दुर्भावना अगर कहीं देखने को मिली है, तो अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय इसका जीता जागता उदाहरण है। आजादी के समय देश में तीन विश्वविद्यालयों को केंद्रीय विश्वविद्यालय घोिषत किया गया - हिंदू विश्वविद्यालय वाराणसी, दिल्ली विश्वविद्यालय, अलीगढ़ विश्वविद्यालय। बीएचयू और दिल्ली विश्वविद्यालय सभी प्रकार के आरक्षण को मानता है, चाहे शैक्षिक हो, कर्मचारियों की बात हो या नॉन शैक्षिक हो, अलीगढ़ पिछले 70 सालों से इस बात को नहीं मानता है।
माननीय उपाध्यक्ष जी, सदन के माध्यम से अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय का निर्माण हुआ, देश के पैसे से अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय चलता है लेकिन यही विश्वविद्यालय किसी प्रकार का आरक्षण नहीं देता है, न तो अनुसूचित जाति समाज को देता है और न ही बैकवर्ड क्लास को देता है। माननीय खड़गे जी कह रहे थे कि इसे पूरी ईमानदारी के साथ लागू किया जाना चाहिए। उत्तर प्रदेश में बहुजन समाज पार्टी लगातार अनुसूचित समाज की बात करती रही। माननीय मुलायम सिंह जी, सपा के लोग बैकवर्ड की बात करते रहे। इन्होंने 70 साल में कभी इस बात की मांग नहीं रखी, अगर इस बात को ईमानदारी से मांगा जाता तो दलितों का नुकसान शायद न होता। हम लक्ष्य दस साल में प्राप्त कर सकते थे।
माननीय उपाध्यक्ष जी, मैं माननीय मंत्री जी से अनुरोध करता हूं, यह बात सही है कि जब चुनाव आता है, उस समय राज्य सरकारें अपने राजनैतिक लाभ के लिए शैक्षिक, सामाजिक और आर्थिक सम्पन्न जातियों को शामिल करने का प्रयास करती हैं। देश में लगातार नौकरियां घट रही हैं, जब इन जातियों को बढ़ाया जाएगा तो अनुसूचित समाज का नुकसान होगा। देश के सर्वोच्च् न्यायालय ने 50 परसेंट से ज्यादा सीमांकन कर रखा है, इससे आगे आरक्षण मिल ही नहीं सकता है। मेरा माननीय मंत्री से अनुरोध है कि जब भी इस तरह का प्रस्ताव आए, इस पर बहुत गंभीरता से विचार किया जाए, क्योंकि इससे अनुसूचित समाज को दिनों दिन बहुत नुकसान हो रहा है।
आपने मुझे महत्वपूर्ण बिल पर बोलने का मौका दिया, इसके लिए मैं आपका धन्यवाद करता हूं।
DR. RAVINDRA BABU (AMALAPURAM): Hon. Deputy-Speaker, Sir, thank you for giving me this opportunity to participate in this discussion.
I, on behalf of the Telugu Desam Party, fully support the Bill. There is a small doubt arising out of this Bill. Why is there a demand for inclusion of a caste in the list of Scheduled Castes? The very demand of any caste to be included in the list of Scheduled Castes means the persons belonging that particular caste will get reservation. This is one benefit that they will get. But the percentage of reservation for people belonging to Scheduled Castes and Scheduled Tribes is fixed – it is 15 per cent for SC and 7.5 per cent for STs. जितनी कास्ट्स उसमें आयेंगी, उतने ही केक डायलूट हो जायेंगे और दूध कम हो जायेगा।
Sir, my first demand in this context would be to increase the percentage of reservation for the people belonging to the Scheduled Castes and Scheduled Tribes in proportion to their population. I would like to request the hon. Minister and also the hon. Members of this august House to strive for increasing the percentage, from 15 to 20 or 22 per cent in proportion to their population, of reservation through a Constitution amendment.
Scheduled Castes does not mean a single class. There are a number of castes amongst the Scheduled Castes. They number more than thousand. Of late, there is a tendency on the part of everyone to sub-classify them and sub-categorise them. It is being done, maybe, for reasons of political benefit or maybe for some other benefit, I have no idea. The slogan of our hon. Prime Minister is national integration. जो होता है, वह नैशनल डिसइन्टीग्रेशन होता है।
Sir, the concept of caste is a very dangerous thing. There is caste system prevalent only in India. In every other country we see rich and poor, black and white, but the peculiar thing in India is that even though I look like any other person, but I am being referred to as a person belonging to the Scheduled Castes and I am to be kept outside the village and will be deprived of any kind of social interaction. For example, a girl belonging to Scheduled Castes cannot marry a Hindu boy or upper caste boy. There are four varnas. It is a vertically split society. Even within castes there are thousand other sub-castes. If this is the social fabric of India, then how is the country going to be united and integrated?
Sir, there are a lot of hostility towards people belonging to Scheduled Castes and Schedule Tribes. इनको रिजर्वेशन है, इसलिए कुछ भी मार्क्स मिलें, इन्हें मेडिकल कालेज में सीट मिल जायेगी, इंजीनियरिंग में सीट मिल जायेगी, आईएएस बन जायेगा। कोई बात नहीं, क्योंकि इसके लिए एससी में पैदा होना अच्छा है। मैं पूछना चाहता हूं कि कितने आईएएस और आईपीएस सैक्रेट्रीज बने, कितने जजेज बनें? एससी कम्युनिटी के कितने मैनुफेक्चरर्स हैं। How many people are doing business from people belonging to the Scheduled Castes community? How many traders are there from this community? How many people from this community are owners of industries? How many of them are owning aircraft and TV channels? The percentage of share in the economic pie of the country is very negligible. But outside everybody talks very ill of reservation. इसका रिजर्वेशन है, इसलिए तुम्हें पढ़ने की जरूरत नहीं है। तुम पढ़ो या न पढ़ो, तुम्हें सीट मिल जायेगी।But statistics does not say that. Statistics say something different. There are no Secretaries and Joint Secretaries in the Government of India from the people belonging to Scheduled Castes community. There are no judges in the Judiciary from the Scheduled Castes community. There is a new case emerging. There are so many judgments coming from the Supreme Court against reservation. The case of Nagarajan is coming up for reservation in promotion. There is an urgent need to revisit and relook at the entire reservation policy in the country. We have to seek justice for the people belonging to the Scheduled Castes and Scheduled Tribes once for all. It is because we are striving for national integration. These are the people who should be integrated with the mainstream of the country for achieving social democracy which will finally lead to political democracy.
Thank you.
PROF. A.S.R. NAIK (MAHABUBABAD): Mr. Deputy-Speaker, Sir, thank you for giving me this opportunity. On behalf of TRS party, I whole-heartedly support the Constitution of the Scheduled Caste Order Bill, 2017. मैं आपके जरिये मंत्री जी से रिक्वैस्ट करना चाहूंगा कि आप आजादी के 70 साल बाद आज इस कम्युनिटी को कैसे आइडेंटिफाई करना चाहते हैं?Till today thousands of cases are pending with the Department of Social Justice and the National Commission of Scheduled Caste and Scheduled Tribes. Till today about cases of 159 castes of Scheduled Tribes are pending with the Department of Social Justice.
15.00 hours आज एक कम्यूनिटी को इनक्लूड करने के लिए, उस पर एक स्टिग्मा होता है, उस स्टिग्मा के साथ ही एक कम्यूनिटी एससी लिस्ट या एसटी लिस्ट में इनक्लूड की जा सकती है। 70 साल में इससे कितना बेनिफिट फोरगो हुआ, इस पर मंत्री जी को सोचना चाहिए। क्यों आज ऐसा हो रहा है? आज एक कम्यूनिटी के इसमें इनक्लूड होने के साथ दूसरी कम्यूनिटी वाले समझ रहे हैं कि हरेक जाति के लोग रिजर्वेशन के लिए एलिजिबल हैं। That is not correct. There is a specific guideline. There is a specific stigma to include a particular community or a particular caste. For example, a community wants to get included in the SC list, what is the criteria for it? The criteria are untouchability and life style and they should be away from the society. If you want to include any community in the ST list, the criteria is the origin race. It should be done on the basis of the origin race. They should not have the lipi for their language. Their dress code is separate, their life style is separate and their folk culture is separate. These are all the characters which are there. In spite of it, after 70 years, if you are allowing it, then those who are eligible are already getting deprived. Under-privileged people are not recognised. But those who want to rule the country are also asking for reservation. It is a shame on the part of our community. What to do in that situation? There is a specific guideline. ‘ I would like to inform the House that nearly 30 per cent of the SC and ST population is spread over in this country. What is the reservation for them? Only 15 per cent reservation is there for SCs and 7.5 per cent is there for STs. Whenever you want to include a community in the already existing list, I would request the hon. Minister to inform us as to the reservation that is being given to them is. How much percentage are you including in the existing percentage? Why are you not making any amendment to increase the percentage? Without increasing the percentage, if you want to include a community in the list, then it is a burden on the existing communities. Already, we are not getting sufficient benefits. There are thousands of backlog posts. Others are thinking that we are a burden in the country. We are pests in the country. This is not good.
Your Government is appreciated by everybody. At least, you can fast track it to involve the communities which are eligible. In Telangana, our Chief Minister has issued a specific guideline regarding the sub-Plans. How we can develop the State? There is a reservation policy in Parliament. I am representing a reserved parliamentary constituency. What is the difference between reserved and unreserved parliamentary constituencies? There is no difference. But what are others thinking? Since we are from reserved constituencies, we are looting the Government. I am asking the hon. Minister and he may respond when he replies. I am also getting Rs. 5 crore as MPLAD funds and other non-reserved constituencies are also getting it. Are there any scientific parameters with the Government? You are giving ten years of reservation but is there any scientific parameter for it? About 70 per cent of the students are drop-outs in this country. The literacy rate is 39 per cent. Others are asking as to why we want reservation. It is our right and it is a constitutional obligation. Nobody can give it because it is a constitutional obligation. It is mandatory for them to give it.
Whenever you want to include any community, what is the percentage of the community which you would like to include in the existing list? Along with it, you can kindly enhance the reservation percentage also.
There is a hitch here as regards Supreme Court that 50 per cent should not be crossed. Then how can you include that community when the existing percentage cannot exceed 50 per cent? Then how can you include any other community? When you want to complete it, you can promulgate an Ordinance in Parliament and you can exceed 50 per cent. You are supreme in this aspect. Parliament is supreme. Thank you, Sir.
श्री रत्न लाल कटारिया (अम्बाला) : माननीय उपाध्यक्ष जी, थावरचंद गेहलोत जी ने जो संविधान संशोधन पेश किया है, जातियों के आदेश से संबंधित अमेंडमेंट का जो प्रस्ताव रखा है, मैं उसका समर्थन करने के लिए खड़ा हुआ हूं। आजादी के बाद डॉ. भीमराव अम्बेडकर के सपनों का भारत बनाने का जो पहला प्रयत्न हुआ, वह श्री अटल बिहारी वाजपेयी जी ने किया। जब उन्होंने जो भी यादें बाबा साहेब भीमराव अम्बेडकर जी से जुड़ी थीं, उन सभी स्थानों को अन्तर्राष्ट्रीय स्तर का बनाने का प्रयत्न किया। मुझे याद है कि लालकिले पर एक बहुत बड़ी दलित रैली हुई थी, उसमें वाजपेयी जी ने बोलते हुए कहा था कि मेरा शासन डॉ. भीमराव अम्बेडकर के द्वारा बनाये गये संविधान के अनुसार चलेगा। उसी का अनुसरण करते हुए, आज जननायक भारतमाता के लाल नरेन्द्र मोदी जी ने पिछले तीन वर्षों के अंदर जो भी कदम उठाये हैं, उन सब कदमों का दरवाजा भारत के गरीबों के दरवाजे पर जाकर खुलता है, जिसमें 80-90 प्रतिशत से ज्यादा एससी और एसटी के लोग आते हैं।
मैं अभी पहले भी यहां पर इस महान सदन में अपने माननीय सदस्यों के विचार सुनता रहा हूं। आज भी बहुत सी सामाजिक बुराइयों के बारे में यहां पर बातचीत हुई है, लेकिन मैं कहना चाहता हूं कि मेरा जो मातृ संगठन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, जिसके बारे में कई बार विपक्ष के लोग आरोप लगाते रहते हैं, उसकी पिछले साल नागौर के अंदर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की एक प्रतिनिधि सभा की बैठक हुई थी। उस बैठक में देश के अंदर सामाजिक समरसता लाने के लिए एक प्रस्ताव पास किया गया था कि अगर हिन्दुस्तान के अंदर सब लोग एक समान कुंआ, समान मंदिर और समान शमशान रखें तो इससे देश में समरसता लाने का कार्य सम्पन्न होगा। इसी तरह से जो भी योजनाएं चल रही हैं, चाहे वे जन-धन की योजना हो, इसका दरवाजा भी गरीबों के दरवाजे पर जाकर खुल रहा है, चाहे वह उज्ज्वला योजना हो या ई.डी. बल्व बांटने का काम हो, चाहे वह बाबा साहेब भीमराव से संबंधित जो पंचतीर्थ हैं, ये सारी वे योजनाएं हैं जो नरेन्द्र मोदी जी ने न केवल बाबा साहेब अम्बेडकर की आइडियोलॉजी को सम्मान किया बल्कि देश के अंदर 27 करोड़ एस.सी. और एस.टी. के लोगों के कल्याण का जो बीड़ा मोदी जी ने उठाया है, आज वह सारे देश के अंदर रंग ला रहा है और हिन्दुस्तान सारी दुनिया में एम.डी.जी. गोल और ससटेनेबल गोल्स को प्राप्त करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। इन्हीं शब्दों के साथ मैं इस बिल का समर्थन करता हूं। धन्यवाद।
SHRI JITENDRA CHAUDHURY (TRIPURA EAST): Hon. Deputy-Speaker, Sir, I, on behalf of my Party, extend support to this Bill which will include one community in the list of Scheduled Castes in Odisha and also the rectification of the name.
Taking advantage of participating in this debate, I would like to flag some issues. The Hon. Minister of Social Justice is present here. In this 16th Lok Sabha, in most of the seats Members belonging to the ruling party have been elected. I would like to draw their attention also. अभी जो हमारे एक साथी ओडिशा से बोले कि यह जो एस.सी. जो लिस्ट में शामिल हो रहे हैं, नयी कम्युनिटी शामिल हो रही है, इसको हम क्या फायदा देंगे, क्योंकि टोटल प्रतिशतता में कोई वृद्धि नहीं होगी। There is nothing which has been added there. So, it will be a burden on them.
Secondly, today a number of people are saying that Scheduled Castes, Scheduled Tribes, and backward communities are getting more facilities and that they are enjoying better opportunities. If you come to the current financial year, the budget of SCs is supposed to be 4.63 per cent, which accordingly comes to about Rs.1 lakh crore. But in this General Budget, it has made a provision of only Rs.52,393 crore, which is only 50 per cent of the due. Similar is the case of the STs budget. 2.39 फीसदी रखा था, लेकिन 31920 करोड़ रुपए मिला है। यह राशि भी आधे से कम है। बजट में कहा गया कि एससी और एसटी को आरक्षण तथा सुविधाएं देंगे, लेकिन बजट में बहुत कम राशि आबंटित की गई है, तो कैसे इनका विकास होगा। बजट में एसटी और एसटी सब-प्लान को हटाया गया। जिस वजह से ये लोग बैकवर्ड हैं और इनके लिए बनाई गई स्कीम्स का जो टार्गेट था, पूरी राशि न मिलने की वजह से इन योजनाओं को इम्प्लिमेंट करने में बहुत कठिनाई आएगी।
माननीय मंत्री श्री गहलोत जी सदन में उपस्थित हैं, मैं उनका ध्यान आकर्षित करना चाहता हूं कि एससी और एसटी के छात्रों का पिछले साल का पोस्ट मैट्रिक स्कॉलरशिप का 12 हजार करोड़ रुपये बकाया हैं। आप आरक्षण दे रहे हैं, लेकिन राशि में कटौती हो रही है - how come would this happen? I would like to suggest to the hon. Minister that both for the welfare of SCs and STs, there should be legislation not only to include in the List but there should also be a legislation to the effect that the Sub-Plans of SCs and STs should be made mandatory and compulsory both at the level of Central and State Governments so that we can take care of the welfare and ensure benefits to the SCs and STs communities.
With these words, I conclude, Sir.
*SHRI CHARANJEET SINGH RORI (SIRSA): Hon. Deputy Speaker Sir, I rise to speak on the Scheduled Caste Orders Amendment Bill on behalf of my party INLD.
I support this Bill. Today is 23rd March. It is the Martyrdom Day of the freedom fighters Shri Bhagat Singh, Rajguru and Sukhdev. On this occasion, I pay my regards to these great freedom fighters.
Sir, the Almighty God created all human beings as equal. However, some divisive elements who believed in the philosophy of Manu, classified and segregated people into different castes. Dalits are being discriminated against. All kinds of atrocities are being perpetrated on Dalits in different States. Dalits feel that they are leading a life of slavery.
Hon. Deputy Speaker Sir, I hail from Haryana and 90 per cent children belonging to SC&ST communities studying in government schools hail from very poor families. Earlier the Congress party was at the helm of affairs for 10 years. These students find themselves at the receiving end. No teachers are there in government schools. These students do not have books.
The school buildings are in a dilapidated condition. This is because mostly students belonging to Dalit community are studying in these government schools. So, these schools are a picture of neglect. Untouchability is being brazenly practised in these schools.
Hon. Deputy Speaker Sir, the Haryana Government must ensure that these government schools are provided all facilities. For the last 10 years, these Dalit students are suffering. Their future is at stake.
I would like to thank the present government for the positive steps taken by it regarding the board exams.
Hon. Deputy Speaker Sir, the reserved seats are not being filled. There is no reservation in promotion. The Dalit employees are being victimized.
HON. DEPUTY SPEAKER : Please wind up.
SHRI CHARANJEET SINGH RORI : I and on behalf of my Party support this bill. Thank you.
श्री वीरेन्द्र कश्यप (शिमला) : माननीय उपाध्यक्ष महोदय, माननीय मंत्री जी ने संविधान (अनुसूचित जातियाँ) आदेश (संशोधन) विधेयक, 2017 पेश किया है। उसमें दो संशोधन हैं। मैं इस विधेयक का समर्थन करने के लिए और इसके पक्ष में बोलने के लिए खड़ा हुआ हूँ।
यहाँ पर यह बात हुई है, जिसकी शुरुआत श्री खड़गे जी ने की है, वे कांग्रेस के एक बड़े, कद्दावर-दलित नेता हैं। उन्होंने दो-तीन बातें कही हैं। यह बात ठीक है, जैसा उन्होंने कहा कि यदि हम दलितों के उत्थान के लिए आरक्षण चाहते हैं या हमारे समाज में जो दलित हैं, वंचित हैं, पिछड़े लोग हैं, यदि हम उनके बेनिफिट की कोई बात करते हैं, तो इसके लिए सभी को बैठकर कोई निर्णय करना चाहिए। परंतु निर्णय लेते-लेते आज 70 वर्ष बीत गये। आप कहेंगे कि आपने फिर वही बात कर दी। उन वर्षों में आपका ही राज रहा। मैं कहना चाहता हूँ कि इन 70 वर्षों में जो भी सरकारें आयीं, पॉलिटिकल पार्टीज़ ने अनुसूचित जाति के लोगों का, दलितों का …* उनको सिर्फ वोट बैंक तक ही सीमित रखा गया। उन्होंने उनके लिए जो भी योजनाएँ बनाई गईं, उनको कभी धरातल पर नहीं उतारा गया। ...(व्यवधान)
SHRI ADHIR RANJAN CHOWDHURY (BAHARAMPUR): Sir, what is this? He is making wild allegations? It should be deleted from the records… (Interruptions)
HON. DEPUTY-SPEAKER: I will see to it. If there is anything objectionable, that will be deleted.
श्री वीरेन्द्र कश्यप (शिमला) : यही कारण है कि आज दलित समुदाय कांग्रेस पार्टी से पूरी तरह से हट गया है। इसके पीछे जो वास्तविकता है, मैं वह कहना चाहता हूँ। श्री नरेन्द्र मोदी जी की सरकार आयी है,उसने सामाजिक समरसता की बात की है।
HON. DEPUTY-SPEAKER: Hon. Member, please conclude, now. We have to take up the Private Members’ Business at 3.30 p.m. श्री वीरेन्द्र कश्यप : सामाजिक समरसता के लिए हमारी सरकार जो योजनाएँ ला गयी हैं, मैं उनको दोहराना नहीं चाहता हूँ। बाबा साहब डॉ. भीमराव अम्बेडकर जी के सम्मान के लिए क्या किया गया, मैं उसे दोहराना नहीं चाहता हूँ। लेकिन मैं मंत्री जी का जरूर धन्यवाद करना चाहता हूँ कि उन्होंने इस बार शिडय़ूल्ड कास्ट सब-प्लान की राशि बढ़ायी है। पिछली बार आबंटित 38833 करोड़ रुपये की राशि को बढ़ाकर 52,393 करोड़ रुपये किया गया है। उसी तरह से ट्राइबल सब-प्लान की राशि को भी 24005 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 31,920 करोड़ रुपये किया गया है। यह बहुत अच्छी बात है क्योंकि अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के लोगों के लिए जब तक पैसा नहीं मिलेगा, वे आर्थिक तौर से आगे नहीं बढ़ेंगे, तब तक सामाजिक तौर पर उनका स्थान वही रहेगा।
एट्रोसिटीज एक्ट में अमेंडमेंड किया गया है। आज भी हमारे दलित समुदाय के लोगों को पानी भरने नहीं दिया जाता है, दूल्हे को घोड़े पर नहीं बैठने दिया जाता है। उनके साथ बहुत-सी ज्यादतियाँ होती हैं। यह एट्रोसिटीज ऐक्ट लाने के लिए मैं मंत्री जी को धन्यवाद देना चाहता हूँ और अपनी सरकार को भी मुबारकवाद देना चाहता हूँ।
HON. DEPUTY SPEAKER: We have to take Private Members’ Business at 3.30 p.m. श्री कौशलेन्द्र कुमार (नालंदा) : उपाध्यक्ष महोदय, आपने अनुसूचित जातियों के संशोधन विधेयक, 2017 की चर्चा में मुझे बोलने का जो मौका दिया है, उसके लिए आपका धन्यवाद। सरकार अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति कानून, 1950 में समय-समय पर संशोधन करती रही है। इसके इतने संशोधनों के बाद भी इन समुदायों की आर्थिक स्थिति आज भी दयनीय बनी हुई है। आज आजादी के 68 वर्ष बीत जाने के बाद भी आज छुआ-छूत व्याप्त है। इन समुदायों के लोगों को आज भी मंदिरों में नहीं जाने दिया जाता है। सन् 2011 में आर्थिक सर्वेक्षण हुआ था। यहाँ ‘उजाला योजना’ की चर्चा भी हो रही थी। मैंने एक दलित परिवार के यहाँ जाकर देखा कि उन सभी लोगों का इस योजना से नाम ही कटा हुआ है। लोगों को ‘उजाला योजना’ कोई लाभ नहीं मिल रहा है। सरकार द्वारा लोगों के लिए जन-धन योजना तो खोली गई, परंतु उनके खातों में पंद्रह लाख रुपये नहीं दिए गए है।
महोदय, मैं सरकार से कहना चाहता हूँ कि वह यह बताए कि उसके समय में प्रधान मंत्री कार्यालय में कितने दलितों के बच्चे हैं? सरकार को यह भी बताना चाहिए कि हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में दलितों के कितने बच्चे जज बने हैं। सरकार यह भी बताए कि दिल्ली में आई.ए.एस. और आई.पी.एस. में दलितों की संख्या कितनी है?...(व्यवधान)
HON. DEPUTY SPEAKER: Hon. Member, please wind up.
श्री कौशलेन्द्र कुमार : महोदय, चर्चा थोड़ी गड़बड़ा कर इधर से उधर चली गई है। बिहार में मछुवारा और माली जाति के लोग, जो दलित से भी दलित हैं, उन्हें भी इस समुदाय में लाया जाए ताकि उन्हें इसका लाभ मिल सके।
माननीय उपाध्यक्ष : श्रीमती कमला पाटले।
श्रीमती कमला पाटले (जांजगीर-चाम्पा):उपाध्यक्ष महोदय, आपने मुझे इस महत्वपूर्ण बिल पर बोलने का जो अवसर दिया है, उसके लिए आपका धन्यवाद। मैं इस देश के माननीय प्रधान मंत्री जी को भी धन्यवाद देना चाहती हूँ जिन्होंने अनुसूचित जाति, अनुसूचित जन जाति एवं अन्य पिछड़े वर्गों के विकास को ‘सबका साथ, सबका विकास’ के माध्यम से आगे बढ़ाया है। अनुसूचित जातियों तथा अनुसूचित जन जातियों में उनके विकास के लिए महत्वपूर्ण योजनाएँ बनाई गई हैं। इन योजनाओं का फायदा इन प्रदेशों में रह रहे इन जातियों के लोगों को मिलेगा। आज उनकी शिक्षा-दीक्षा के लिए उनकी सामाजिक और आर्थिक निगरानी करने की जरुरत है। देश में वंचित समाज की भागीदारी के बिना समग्र विकास का सपना नहीं देखा जा सकता है। विभिन्न राज्य सरकारों ने अपने-अपने राज्यों में कुछ जातियों को अनुसूचित जाति की सूची में शामिल करने का आग्रह किया है।
उपाध्यक्ष महोदय, इस संबंध में मेरा विचार है कि सूची में उन्हीं जातियों को शामिल किया जाए जो अनुसूचित जातियों से मेल खाती हैं। जिन लोगों का रहन-सहन सामाजिक रीति-रिवाज जैसी मात्रात्मक त्रुटि के कारण छूट गया है, उन लोगों को इसमें शामिल किया जाए।
उपाध्यक्ष महोदय, अब मैं अपने संसदीय क्षेत्र के बारे में कहना चाहूँगी। अनुसूचित जाति वर्ग की बालिकाएँ गाँव से आकर मेट्रिक तक की पढ़ाई करती हैं। जब वे बालिकाएँ कॉलेज की पढ़ाई करने के लिए ग्रामीण क्षेत्रों से शहरी क्षेत्रों में आती हैं, तो डिस्ट्रिक्ट लेवल पर उनके रहने के लिए कोई व्यवस्था नहीं होती है। इस कारण उनकी शिक्षा छूट जाती है। मेरा आपसे आग्रह है कि ऐसी कन्याओं के लिए डिस्ट्रिक्ट लेवल पर होस्टल खोले जाएँ जहाँ रहकर ये कन्याएँ अपनी कॉलेज की पढ़ाई पूरी कर सकें। इसके साथ ही साथ मेरे संसदीय क्षेत्र जांजगीर-चाम्पा में अनुसूचित जाति के छात्रों के लिए छात्रावास नहीं हैं। इसके लिए भी मैं माँग करती हूँ।
उपाध्यक्ष महोदय, मेरे लोकसभा क्षेत्र में गिरोदपुरी धाम है, जो महान संत गुरू घाँसीदास बाबाजी की जन्म स्थली है। वहाँ हमारी राज्य सरकार के माननीय मुख्य मंत्री श्री रमन सिंह जी ने कुतुब मीनार से भी ऊँचा जय स्तंभ का निर्माण कराया है। हर वर्ष 18 दिसंबर को इनका जन्म दिवस मनाया जाता है। इस दिन पूरे प्रदेश में छुट्टी रहती है। गुरू घाँसीदाज बाबाजी की अनुयायी संतानें पूरे देश में रहती हैं। मैं यह माँग करती हूँ कि केंद्र स्तर पर इस दिन को छुट्टी घोिषत की जाए।
उपाध्यक्ष महोदय, मैं एक मिनट का समय और लूँगी। छत्तीसगढ़ राज्य के अनुसूचित जाति के सूची कम्राँक 14 में दर्ज सतनामी, रामनामी और सूर्यवँशी को अलग पृथक क्रमाँक किया जाए। इससे हमारी छत्तीसगढ़ की सरकार भी सहमत है और इस पर कार्यवाही करने के लिए तैयार है। इतना बोलकर मैं अपनी वाणी को विराम देती हूँ। धन्यवाद।
माननीय उपाध्यक्ष : श्री धर्म वीर गांधी।
श्री धर्म वीर गांधी (पटियाला) : महोदय, मैं आपका आभारी हूं कि आपने मुझे इस महत्वपूर्ण बिल पर बोलने का अवसर दिया।
मैं दो-तीन बातें यहां रखना चाहता हूं। दलितों की हिन्दुस्तान में जो स्थिति है, उसका यदि निष्कर्ष निकाला जाए, जिसके बारे में बाबा साहब भीम राव अम्बेडकर ने दो सेन्टेंस में कहा था। जिसे उन्होंने देखा, जिसको उन्होंने अपने जीवन जीया है। उससे उन्होंने दो निष्कर्ष निकाले हैं कि दलितों की इस देश में बुरी हालत के दो कारण हैं, पहला ब्राह्मणवाद और दूसरा, पूंजीवाद। इसके अलावा उन्होंने कहा था कि अगर दलितों का उत्थान करना है, उनके साथ भेदभाव को यदि खत्म करना है, उनके साथ गैर बराबरी को खत्म करना है, उनके साथ हो रही बेइंसाफी को खत्म करना है तो उसके लिए पढ़ो, जुड़ो और संघर्ष करो। इसके अलावा दूसरा कोई रास्ता नहीं है।
इसके साथ ही मैं उन लोगों के बारे में भी कहना चाहता हूं जो मैरिटोक्रेसी की बात करते हैं कि मैरिट के साथ-साथ कुछ होना चाहिए। उनके बारे में मेरा कहना है कि आप जो डफ्फर एलिट हैं, जो उच्च वर्ग के लोग हैं, जो पूंजीपति हैं, जो पैसे वाले लोग हैं, उनके बच्चे मैनजमेंट कोटा के नाम पर, एनआरआई कोटा के नाम पर, कोई एग्जाम भी नहीं देते हैं, उनके लिए हर यूनिवर्सिटी में, हर मेडिकल कॉलेज में, इंजीनियरिंग कॉलेज में सीट मिल जाती है, इसके खिलाफ आवाज़ बुलन्द क्यों नहीं करते हैं। दलित लड़के कम से कम एग्जाम में तो बैठते हैं, 33 परसेंट नंबर तो लाते हैं, क्वालीफाई तो करते हैं। लेकिन जो डफ्फर एलिट है वह तो क्वालीफाई भी नहीं करती है, फिर भी वह डॉक्टर बनता है, आईएएस बनता है, इंजीनियर बनता है, सब कुछ बनता है।
इसका एक सॉल्यूशन है, जो मैंने अब तक के अपने 65 साल के जीवन काल में सोचा है कि अगर भारत में जातिवाद को खत्म करना है, अगर भारतवाऩ में वर्ण व्यवस्था और भेदभाव को खत्म करना है तो उसके लिए एक ही रास्ता है दलितों के लिए उच्च शिक्षा। दसवीं तक दिमाग के किंवाड़ नहीं खुलते, लेकिन जब बच्चा मेडिकल कॉलेज में जाता है, इंजीनियरिंग कॉलेज में जाता है, तब उसका दिमाग रोशन होता है।
SHRI Y.V. SUBBA REDDY (ONGOLE): At the outset, I congratulate the Government for bringing the proposed legislation, the Constitution (Scheduled Castes) Amendment Bill 2017.
Article 17 of the Constitution of India seeks to abolish untouchability and to forbid all such practices. It is basically a statement of principal that needs to be made operational with ostensible objectives to remove humanitarian and multi-faceted harassments meted out to dalits and to ensure that their fundamental and socio-economic, political and cultural rights are protected and to establish a bias free society.
The amendment brought by the Government proposes certain modification in the list of Scheduled Castes by way of inclusion of certain communities, like sualgiri/swalgalities caste modification and removal of area restriction in respect of certain communities in Odisha. The proposal is hoped to have changes in the Central list of other Backward Classes, consequent upon inclusion of certain castes or parts thereof in the list of Scheduled Castes. This proposed amendment will also be entitled to the benefits of reservation in services and admission in the educational institutions and is hoped to provide certain privileges/concessions to the members of these communities.
However, there is a need for proper revision in the list of Scheduled Castes so that the deprived communities in the country are not left behind. There are even certain tribes that have not been included in the list of Scheduled Castes. It would be better for the Scheduled Caste communities if one time system is evolved to prepare a proposal in consultation with the States so that all such castes that have been left out are included in the List of Scheduled Castes. There is a need for the Government to conduct a caste-wise survey.
There is also a need for revision of this list in Andhra Pradesh after the bifurcation of the State. Inclusion of budaga jangam community is required by demanding entry 9, in Part I of Schedule-I, section 2(1) of the Constitution SC/ST Order (Second Amendment) Act 2002. There are certain nomads and tribes including raj gond tribe that have been found in Guntur, Vijaywada and Ananthpur of Andhra Pradesh that are vulnerable lot and needs to be included in the list for certain benefits as per the Constitution.
HON. DEPUTY SPEAKER: Now we have to take up the Private Members’ Business. We will extend the time by another 10-15 minutes till we pass this Bill.
SEVERAL MEMBERS: Yes, Sir.
HON. DEPUTY SPEAKER: Now, Shri Rajesh Ranjan, you take only two minutes.
श्री राजेश रंजन (मधेपुरा) : मेरा आग्रह है कि मान्यवर, धर्मेन्द्र जी ने जो बात कही कि व्यवस्था, पूंजीवाद और धर्मवाद। बाबा साहब अम्बेडकर या महात्मा फूले ने जो सबसे बड़ी चोट की थी और पेरियार साहब ने कहा कि गरीबी अगर खत्म करनी है तो मंदिर, मठ, अंधविश्वास, आडम्बर और कर्मकांड को मिटा देना पड़ेगा। इस बात पर इन्होंने सबसे ज्यादा चोट की थी। भाग्य और भगवान के फेर में गरीब और दलितों को मत पढ़ाइए। जो शोषण करने वाले लोग हैं, उन्हीं से सबसे ज्यादा वोट लेते हैं और उन्हीं को सबसे ज्यादा राज देते हैं। मेरा आग्रह यह है कि सावित्री बाई फूले, महात्मा फूले और संत रविदास, इन लोगों को आप पाठय़क्रम में जोड़िए, क्योंकि सावित्री बाई फूले ने सबसे पहले एडूकेशन को लेकर हिन्दुस्तान में क्रांति की थी। मैं चाहूंगा कि पेरियार को व इनको पाठय़क्रम में डालिए।
दूसरा आग्रह यह है कि रोजगार छीन लिया गया है। जैसे चमार का रोजगार है, कुम्हार का है रोजगार है। उनके रोजगार को कंपल्सरी कीजिए। आप किसी भी कीमत पर न्यायालय में आरक्षण को कंपल्सरी कीजिए, प्राइवेट स्कूलों में एडूकेशन को 30 प्रतिशत कीजिए। आपके पास बिहार की एक लिस्ट आई हुई है, मैं सिर्फ उसके बारे में बता देना चाहता हूं (बिन्द, बेलदार, चाई, तियर, खुलवट, सुरहिया, गोढ़ी, वनपर, केवट, नोनिया, सुर्जापुरी, कुलहया और शेरशाबादी) मेरा आग्रह है कि आप इनको अनुसूचित जाति में लीजिए, लेकिन बजट को मत काटिए। कल्याण छात्रावास के बजट को आप प्राथमिकता दीजिए। अनुसूचित जनजाति और दलित के एडूकेशन और उसके इकोनॉमिकल फ्रीडम को आप बढ़ावा दीजिए। बगैर एडूकेशन और बगैर आर्थिक क्रांति के आप अनुसूचित जनजाति के सम्मान को नहीं बढ़ा सकते। इसीलिए मेरी आपसे विनती है कि आप इस पर कार्य कीजिए। लगातार जे.एन.यू. में दलितों पर जुल्म हो रहा है, लगातार जे.एन.यू. में दलितों को मारा जा रहा है। आप उनको संरक्षित कीजिए।
डॉ. यशवंत सिंह (नगीना) : आपने संविधन के अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति आदि संशोधन विधेयक 2017 पर बोलने का मौका दिया। मैं इस संशोधन को लाने के लिए माननीय मंत्री जी को भी धन्यवाद देना चाहता हूं। महोदय, मैं आपका ध्यान कुछ बिंदुओं पर आकर्षित करना चाहता हूं। हम हर साल अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति की कुछ न कुछ जातियों को इनक्लूड करते रहते हैं। क्या हम उन सुविधाओं के बारे में भी सोचते हैं जो हम अनुसूचित जाति के लोगों को दे रहे हैं, क्या वे उनके लिए काफी हैं? क्या 70 साल से जो सुविधाएं अनुसूचित जाति के लोगों को सरकारें देती आ रही हैं, क्या वे अभी तक उद्देश्य पूरा कर पाई हैं? या हम दूसरी जाति से उन्हीं जाति में इनक्लूड करके कुछ भूखों के बीच में और नए भूखे पैदा करने के लिए नई जातियां इनक्लूड कर रहे हैं। इस पर सरकार को विचार करने की जरूरत है। महोदय, देखा गया है कि 70 साल के बाद भी आज तक जितनी ऊंची कैटेगरी की वैकेंसीज निकलती है, ‘नॉट एफीशियेंट’ कहकर पोस्ट को खाली रखा जाता है। अगर 70 साल में भी ये सरकारें अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति के लोगों को उस लेवल तक नहीं पहुंचा पातीं, जहां वे शिक्षा में दूसरों के बराबर हों, तो इसके लिए सरकार जिम्मेवार है।
मेरा यह भी कहना है कि आजकल प्रदेश सरकारों का यह फैशन चल गया है कि वे अपने राजनीतिक फायदे के लिए कुछ जातियों को बार-बार अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति में इनक्लूड करने का काम करते हैं। उत्तर प्रदेश में समाजवादी सरकार के माध्यम से दो बार तेहरे जातियों को गुमराह किया गया। उनको बार-बार अनुसूचित जाति का सर्टिफिकेट प्रदेश में मिलता है, जिसे कोर्ट बाद में खारिज करता है। उनके साथ खिलवाड़ किया जाता है।
मान्यवर, एक और विडम्बना देखने को मिली है। इस बार उत्तर प्रदेश का चुनाव था। अखबार में एक एडवर्टाइज आया कि अनुसूचित जाति की महिला अगर किसी मुस्लिम व्यक्ति व्यक्ति से बिना दहेज की मांग के शादी करना चाहती है तो भी वह व्यक्ति शादी करने के लिए तैयार हो जाता है। यह एक गंभीर संमस्या है। अनुसूचित जाति की सीटों पर गरीब परिवार की महिला से शादी करके, उसका झूठा सर्टिफिकेट बनवाकर अनुसूचित जाति के राजनीतिक अधिकारों को छीनने का प्रयास किया जा रहा है। ऐसे उदाहरण दिन-प्रतिदिन सामने आ रहे हैं। यह हमारे अधिकारों पर कुठाराघात है। हम सरकार से इस बात को भी कहना चाहते हैं कि जो ऐसे माध्यम से इंटरकास्ट शादी करते हैं, उन्हें नौकरियों में प्रमोशन दे, उन्हें नौकरियों में बढ़ावा दे, लेकिन इंटरकास्ट शादी करने वाले लोगों को राजनीतिक फायदा न मिले, यह संशोधन किया जाए। धन्यवाद।
श्री थावर चंद गहलोत : उपाध्यक्ष महोदय, अभी तक 17 माननीय सदस्यों ने इस संक्षिप्त बिल पर अपने विचार रखे हैं। इसमें बहुत सारे विाय आए हैं और वे विाय ऐसे हैं, जो बिल से बहुत दूर हैं, वे बिल से संबंधित विषय नहीं हैं, परंतु अनुसूचित जाति, जनजाति वर्ग के लोगों की समस्याओं से संबंधित हैं। परंतु बिल में जो विाय है, मैं उससे संबंधित ही जवाब देने की कोशिश करूंगा। आदरणीय खड़गे साहब ने जो चिंता व्यक्त की है, वह चिंता वाजिब है। देश की आजादी के बाद बाबा अम्बेडकर जी की सोच पर जो सोच बनी, वह सही दिशा में नहीं थी, अब सही प्रयास करने की आवश्यकता है। अपना देश बहुसमाज, बहुजातियों का देश है, इसमें समता, समन्वय और समानता लाने की महती आवश्यकता थी। इस प्रकार का वातावरण बनाने की कोशिश करनी चाहिए थी, हालांकि कोशिश की भी गई है, परंतु आज भी इस प्रकार का प्रयास और तेज करने की आवश्यकता है। चूंकि इस प्रकार के विाय बड़े सैन्सिटिव होते हैं। किसी एक वर्ग के हित में अगर बोलते हैं तो दूसरे वर्ग को वह बात गले नहीं उतरती है। दूसरे वर्ग की हित की बात करते हैं तो तीसरे वर्ग के गले नहीं उतरती है। हमारी जो सोच है, वह सबके उत्थान की बजाय मैं, मेरा परिवार और मेरा समाज तक ही सीमित होने लगी है। जबकि हमें अपनी को सोच व्यापक बनाने की आवश्यकता है। हमारी संस्कृति - वसुधैव कुटुंबकम् की रही है, जीयो और जीने दो की रही है, एक-दूसरे के कटों को दूर करने की रही है, सबके साथ समान व्यवहार करने की रही है। परंतु इसमें कहीं न कहीं थोड़ी बहुत कमी आ रही है, इसलिए इसे ठीक करने की आवश्यकता है। यह किसी एक सरकार के या किसी एक व्यक्ति के भरोसे नहीं हो सकता है।
हमने श्री नरेन्द्र मोदी साहब के नेतृत्व में इन तीन वर्षों में इस प्रकार का वातावरण बनाने की कोशिश की है और सक्रियता से की है, व्यावहारिक की है, कानून बनाकर भी की और बहुत सारी योजनाएं बनाकर उन पर अमल करने का प्रयास करके भी की है। खड़गे साहब ने यह कहा कि आजकल जातियों को जोड़ने और घटाने के लिए राजनीतिक आधार पर सोचा जाता है, दबाव के आधार पर सोचा जाता है। इस बात में सत्यता हो सकती है, मैं उनसे असहमति व्यक्त नहीं करता हूं। परंतु कोई राज्य मान लो अगर इस आधार पर प्रस्ताव कर देता है तो यह संसद उस आधार को ध्यान में रखकर काम करेगी, क्योंकि सारे देश का प्रतिनिधित्व करने वाले माननीय सदस्य यहां होते हैं और वे उसमें सुधार करके ही निर्णय करते हैं। इसलिए अभी तक जो परम्परा रही है, व्यवस्था रही है, कानूनी प्रावधान रहा है, जो प्रक्रिया रही है, उसी प्रक्रिया को आधार बनाकर आज भी इस प्रकार के विषयों पर निर्णय किया जा रहा है। हमने कोई नये नियम नहीं बनाये हैं। देश की आजादी के बाद जब 1950 में अनुसूचित जातियां संबंधित आदेश जारी हुए, तब से बीच में कई बार संशोधन हुए और वे इसी पद्धति से, इसी प्रक्रिया से हुए हैं। यह बात ठीक है कि वातावरण बनाने की आवश्यकता है कि राजनीतिक दबाव में या और किसी दबाव में लाभ-हानि को ध्यान में रखकर ऐसा करने की बजाय जाति समाज के साथ, गरीबों के साथ न्याय देने की सोच के आधार पर इस प्रकार के प्रस्ताव बनने चाहिए।
महोदय, मैं इस अवसर यह भी कहना चाहूंगा कि यहां बहुत सारे माननीय सदस्यों ने कहा कि अनुसूचित जाति वर्ग के लोगों के साथ अन्याय, अत्याचार और आपराधिक घटनाएं बढ़ रही हैं। उनको न्याय मिले, पीड़ित परिवार को आर्थिक सहायता भी मिले, इस प्रकार की व्यवस्था करने के लिए कानून को सख्त करने का प्रयास भी किया है। अनुसूचित जाति एवं जनजाति अत्याचार निवारण कानून सन् 1989 से बना हुआ है। उसको सख्त करने के लिए इसी संसद ने पिछले साल ही एक कानून बनाया है और उस कानून पर इंप्लिमेंट करने का प्रयास भी कर रहे हैं। उसमें बहुत सारी आपराधिक बातें, जो पहले नहीं थीं, उनको भी जोड़ने का काम किया है। जैसे पहले जो कानून बना हुआ था, उसमें किसी का अगर मुँह काला कर दे, किसी की मूंछ काट दे, किसी का सिर मूंड दे, किसी को जूते का हार पहना दे, किसी को नंगा कर के निर्वस्त्र कर के घुमा दे, और उसके साथ अनेक प्रकार के अन्याय या अत्याचार करे, फिर भी वह अपराध की श्रेणी में नहीं आता था। एक बात और थी कि दस साल से अधिक की सजा का आईपीसी की धाराओं में जो प्रावधान है, वही उस एट्रोसिटीज़ एक्ट के अंतर्गत आते थे। एट्रोसिटीज़ एक्ट में अब सभी धाराएं, उसमें लागू होती हैं। इस कारण से हमने कानूनी सशक्तता लाने का प्रयास किया है। सामाजिक, आर्थिक, शैक्षणिक तथा राजनीतिक सशक्तिकरण के लिए भी अनेक प्रकार की योजनाएं बनाई हैं और उन योजनाओं पर इंप्लिमेंट करने का काम हम कर रहे हैं। उन्होंने रिज़र्वेशन की बात भी कही। जब तक, जिस आधार को ध्यान में रख कर के आरक्षण संबंधी प्रावधान संविधान में किए गए हैं, वे विामताएं जारी रहने तक भारतीय जनता पार्टी की यह सरकार, एनडीए की यह सरकार आरक्षण की पक्षधर है और भविय में रहगी, इसमें कसी को कोई शंका करने की आवश्यकता नहीं है।
किरीट सोलंकी साहब ने योजनाओं की जानकारी दी है। आदरणीया प्रतिभा मंडल जी ने कहा जातियों की संख्या बढ़ेगी, इसलिए बजट में बढ़ोत्तरी करने की मांग उन्होंने की है। जातियों की संख्या बढ़वाने के लिए प्रस्ताव राज्य सरकार भेजती है। राज्य सरकार बजट बनाते समय इन सब बातों का ध्यान रखती है। केंद्र सरकार भी बजट बनाते समय इन सब बातों का ध्यान रखती है। हमारा प्रयास है कि गुणवत्तापूर्ण अच्छी शिक्षा, इन वर्गों के लोगों को भी मिले। हम इसके लिए छात्रवृत्ति भी देते हैं। कोचिंग की सुविधा भी देते हैं। कोई विदेश जा कर पढ़ना चाहता है तो, उनको भी इस प्रकार की सुविधाएं देते हैं। ...(व्यवधान) इस प्रकार की सारी सुविधाएं हम देने का प्रयास कर रहे हैं। मैं इस अवसर पर महापुरुााो की जयंती और परिनिर्वाण दिवस पर उत्सव आयोजित करने के लिए उनकी जयंती मनाने के लिए, उनके महापरिनिर्वाण दिवस पर कोई कार्यक्रम करने के लिए, उनको याद करने के लिए, उनकी सोच को प्रचारित करने के लिए, पहले ऐसा कोई प्रावधान नहीं था, परंतु हमारी सरकार ने निर्णय लिया है कि अगर कोई बाबा साहब अंबेडकर जी की जयंती मनाता है, ज्योतिबा फूले साहब की जयंती मनाता है, रविदास जी की या कबीरदास जी की जयंती मनाता है, ऐसे जो महापुरुा हैं, जिन्होंने इन वर्गों के लिए काम किया है, मृत्यु दिवस पर और जन्म दिवस पर अगर कोई आयोजन करना चाहता है तो हम उनको पांच लाख रूपये तक की आर्थिक सहायता भी देते हैं। इस प्रकार की व्यवस्था पहले नहीं थी। ...(व्यवधान) उनमें संत रविदास जी हैं, कबीरदास जी हैं और छत्तीसगढ़ के गुरू घासीदास भी हैं, केरल के भी महापुरूष हैं, वे सभी नाम मुझे अभी याद नहीं हैं, परंतु ऐसे लगभग एक दर्जन महापुरूषों की जयंती और पुण्यतिथि मनाने के लिए अगर कोई एनजीओ या सामाजिक संगठन, रजिस्टर्ड संस्थाएं आयोजित करती हैं, तो उसके लिए हम आर्थिक सहायता देते हैं। कुल मिला कर हमने इस प्रकार का वातावरण बनाने की कोशिश की है कि समाज में संवाद हो, समन्वय हो, समता का वातवरण बने और आगे जा कर वह समरसता का रूप ले ले। ...(व्यवधान) हमने बाबा साहब अंबेडकर जी की 125वीं जयंती की वर्षगांठ माने का भी निर्णय लिया है। साल भर भिन्न-भिन्न प्रकार के आयोजन किये। अम्बेडकर साहब ने जहाँ-जहाँ जाकर पढ़ाई की थी, उन स्थानों पर, उन यूनिवर्सिटीज में भी 100 स्टूडेन्ट्स को अपने यहाँ से भेजा था, भारत सरकार के हमारे संस्थान के खर्चे की तरफ से उन्हें भेजा गया था। वहाँ उन्होंने पैनल डिस्कस किया, अपने विचार व्यक्त किये, उनके विचार सुने। यहाँ भी इस प्रकार के आयोजन हम निरन्तर कर रहे हैं। कुल मिलाकर अम्बेडकर साहब ने देश में देशभक्ति का जज्बा जगाने के लिए जो प्रयास किये थे, उस प्रकार का वातावरण बनाने का प्रयास हम भी कर रहे हैं।
मैं एक और खुशी की बात यह कहना चाहता हूँ कि प्रधानमंत्री जी ने हमें कहा कि जहाँ-जहाँ अम्बेडकर जी से सम्बन्धित मान बिन्दु हैं, स्थान हैं, उनको तीर्थ के रूप में घोिषत करने की कोशिश कीजिए। हमने तय किया कि अम्बेडकर जी की जन्म स्थली इन्दौर जिले के महू में है, उसका नामकरण भी महू के बजाय अम्बेडकर नगर हो गया है। सरकारी राजस्व रिकॉर्ड में भी और रेलवे के रिकॉर्ड में भी उसका यह नामकरण हो गया है। उनकी जन्म स्थली को एक तीर्थ स्थल घोिषत किया। शिक्षा स्थली लन्दन, जहाँ जाकर के अम्बेडकर साहब ने अध्ययन किया था और 24 से अधिक विशेष प्रकार की डिग्रियाँ हासिल करने का काम किया था, दुनिया में एक रिकॉर्ड बनाया था, उसको भी राष्ट्रीय स्मारक घोषित किया। फिर उन्होंने जहाँ दीक्षा ली थी, नागपुर में उन्होंने दीक्षा ली थी, उस दीक्षा भूमि पर भी एक समिति ने स्मारक बना रखा था। नितिन गड़करी साहब जब भाजपा-शिवसेना की सरकार में लोक निर्माण मंत्री थे, उस समय उसको विस्तारित करने के लिए उन्होंने मदद की थी और अब लगभग पौने तीन सौ करोड़ रुपये के लगभग की राशि से उसका और विस्तार करने की कार्य-योजना भी महाराष्ट्र की सरकार बना रही है। मेरे मंत्रालय के अम्बेडकर फाउन्डेशन की ओर से हमने 9 करोड़ रुपये से ज्यादा की धनराशि वहाँ कुछ मोडिफिकेशन और कुछ विस्तार करने के लिए दी है। अम्बेडकर जी की जहाँ मृत्यु हुई थी, 26 अलीपुर रोड़, उसको भी राष्ट्रीय स्मारक घोषित किया है और वहाँ भव्य स्मारक बनाने का निर्णय लिया है। 100 करोड़ रुपये की लागत से वह बनने वाला है। देश के प्रधान मंत्री महोदय के हाथों से उसका भूमि पूजन हो गया है। वहाँ काम चल रहा है, कोई भी वहाँ जाकर के देख ले। इसके साथ ही साथ चैत्य भूमि, जहाँ अम्बेडकर साहब का अन्तिम संस्कार किया गया था। अब वह अन्तिम संस्कार वहाँ क्यों हुआ था, दिल्ली में क्यों नहीं हुआ, इसके बारे मैं कुछ कहने की आवश्यकता महसूस नहीं करता हूँ, पर तत्कालीन सरकार ने उनका अन्तिम संस्कार दिल्ली में करने के लिए दो मीटर जगह भी देना उचित नहीं समझा था और बाध्य होकर उनका अन्तिम संस्कार वहाँ किया गया था। उस अन्तिम संस्कार स्थल पर किसी प्रकार की कोई सुविधा देने की सरकार की योजना नहीं बनी थी, परन्तु महाराष्ट्र सरकार ने, देवेन्द्र फड़णवीस साहब वहाँ के मुख्यमंत्री हैं, उन्होंने पास की इन्दु मिल की जमीन को अधिग्रहित किया और उस चैत्य भूमि का और विस्तार करने का निर्णय लिया। लगभग 350 करोड़ रुपये से ज्यादा की लागत का वहाँ भव्य स्मारक बनाने का निर्णय हुआ। माननीय प्रधान मंत्री जी के हाथों उसका भूमि पूजन हुआ है और वहाँ निर्माण कार्य भी चल रहा है।
हमने यह महसूस किया, हम यह महसूस करते हैं कि देशवासियों को अम्बेडकर जी की सही सोच समझने का अवसर मिलना चाहिए। इस कारण से अम्बेडकर जी की सोच पर अनुसन्धान होना चाहिए और अनुसन्धान करने के लिए कोई संस्थान भी होना चाहिए। यह जो 15 जनपथ है, हमने वहाँ 192 करोड़ रुपये की लागत से अम्बेडकर इंटरनेशनल स्टडी सेन्टर बनाने का निर्णय लिया, उसका काम तेज गति से चल रहा है और मैं सदन को आश्वस्त करता हूँ कि इस साल के अन्त तक, दिसम्बर तक वह काम पूरा हो जायेगा। अगले साल 14 अप्रैल के पहले उसका लोकार्पण भी हो जायेगा। यह स्टडी सेन्टर बनने से लाभ यह होगा, बहुत सारे लोग सोचते हैं कि अम्बेडकर जी देशभक्त नहीं थे, मैं कहता हूँ कि वे देशभक्त थे, उन्होंने इस प्रकार के काम किये। वे ब्रिटेन और अमेरिका में पढ़े, उनके पास 24 से अधिक उच्चस्थ डिग्रियाँ थीं, अगर देशभक्ति का जज्बा उनके मन में नहीं होता तो वहाँ तो ऐसा कोई खराब वातावरण नहीं था, काले-गोरे का भले ही चल रहा होगा, परन्तु जातिवाद, छुआछूत और अनेक प्रकार की विामताएँ तो वहाँ नहीं थीं। अगर वे चाहते तो वे वहां पर नौकरी कर सकते थे, लाखों रुपए महीने उस समय भी कमा सकते थे, स्वयं और परिवार एशो-आराम की जिन्दगी जी सकते थे, परन्तु देश में जो विामताएं थीं, उन्होंने उन विषमताओं को दूर करने का संकल्प लिया और वे वहां से इस देश में आए और देश में आकर इन सब समस्याओं का समाधान करने का प्रयास किया।
जब कई बार ऐसे विषय आए, जैसे तालाब से पानी नहीं पीने देना तो उनके शुभचिंतकों ने कहा कि साहब, किसलिए झगड़ा करते हो, हम दूसरा तालाब बना देते हैं। जैसे मन्दिर प्रवेश पर रोक लगाना, उस समय उन्हें सुझाव दिया गया कि हम लोग अलग-से मन्दिर बना लेते हैं। स्कूल में पढ़ने न देने की बात हुई तो उन्हें सुझाव दिया गया कि हम अलग-से स्कूल बना लेते हैं। पर, उनकी यह सोच थी और उन्होंने यह कहा था कि अलग चीज़ें बनाना समस्या का समाधान नहीं है। हम अलग मन्दिर बना लेंगे, भगवान वही होंगे, उनकी प्राण-प्रतिष्ठा भी उसी ढंग से होगी। वह कोई चमत्कारिक मूर्ति हो सकती है, परन्तु फिर यह बात होने लगेगी कि यह इनका मन्दिर है, यह उनका मन्दिर है। भगवान का मन्दिर सबके लिए है, प्राकृतिक तालाब सबके लिए है और इन सब चीज़ों का लाभ सबको लेने का अधिकार है। इस कारण से उन्होंने इस प्रकार का कोई काम करने की कोशिश नहीं की।
अभी एक माननीय सदस्य ने अपने भाषण में कहा कि यह मन्दिर और उनके कारण यह सब गड़बड़ी थी। एक बार मैं एक टी.वी. चैनल के पैनल डिस्कशन में गया। वहां दो लोग और थे। कहीं कुछ घटना हो गयी थी तो पहले से एंकर ने पूछा कि यह जो घटना हो गयी है, उसके बारे में आपको क्या कहना है। उन्होंने कहा कि जितने भी देश में मन्दिर हैं, उन्हें बम से नष्ट कर देना चाहिए। पर, उसका समाधान यह नहीं है। वास्तव में, ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ की भावना को अम्बेडकर जी ने सही समझा और उस आधार पर वातावरण बनाने की उन्होंने कोशिश की।
उपाध्यक्ष महोदय, मैं एक नहीं, ऐसे अनेक उदाहरण दे सकता हूं। परन्तु, जैसा आपने बताया, बिल का उद्देश्य लिमिटेड है, इसलिए इसे वहीं तक सीमित रखना चाहिए।
महोदय, माननीय सदस्यों ने जो समस्याएं बताई थीं, मैं फिर उनकी ओर आता हूं। धनकड़ जाति की समस्याएं हैं। राज्य सरकार से इस संबंध में कोई प्रस्ताव नहीं आया है।
श्री अरविंद सावंत (मुम्बई दक्षिण) : सर, वह आया है।
श्री थावर चंद गहलोत : नहीं, यह नहीं आया है। हमारे पास रिकॉर्ड में नहीं है।
इसी प्रकार से, जिसने भी किसी जाति का नाम इसमें जोड़ने की बात कही है, मैं उनसे निवेदन करना चाहूंगा कि उन राज्यों से कोई प्रस्ताव नहीं आया है। विनायक भाऊराव राऊत जी ने जो मांग की है, उस संबंध में महाराष्ट्र से किसी तरह का कोई प्रस्ताव नहीं आया है। इसी प्रकार से, कौशलेन्द्र कुमार जी, जो बिहार से हैं, उन्होंने जिन जातियों का उल्लेख किया है, इस संबंध में उनके यहां से भी कोई प्रस्ताव नहीं आया है।
अनेक बातों की ओर इसमें ध्यान दिलाया गया है, जैसे आरक्षण का प्रतिशत बढ़ना चाहिए। आरक्षण का प्रतिशत बढ़ाने की इच्छा तो सबकी रहती है। यह सांवैधानिक मंशा भी है कि जातियों की पॉपुलेशन के अनुसार आरक्षण की सुविधा उन्हें मिलनी चाहिए। परन्तु, सुप्रीम कोर्ट का इस संबंध में एक निर्णय है और उस निर्णय के आधार पर 50औ से ज्यादा आरक्षण नहीं होना चाहिए। सांवैधानिक प्रावधान के अंतर्गत आज 49.5औ लोगों को मिल रहा है। उस निर्णय के कारण अब आरक्षण को किसी प्रकार से बढ़ाने की गुंजाइश नहीं है। कुछ माननीय सदस्य यह कह सकते हैं कि संसद को तो यह अधिकार है, यह प्रावधान करना चाहिए। पर, आज की परिस्थिति में इस आशय का कोई प्रस्ताव मेरे मंत्रालय में विचाराधीन नहीं है।
मैं आज के इस अवसर पर एक निवेदन और करना चाहता हूं। जितेन्द्र चौधरी जी ने सब-प्लान की बात कही। सब-प्लान को रिलीज करने का जो नियम-कानून, क़ायदा बना हुआ है, वह कोई आज का, नया नहीं है। जब से इस कानून के अन्तर्गत सब-प्लान की व्यवस्था की गयी है, तब से वही परंपरा आज भी है। पर, मैं इतना कह सकता हूं कि किसी भी सरकार के टाइम 15औ धनराशि रिलीज नहीं की गयी थी।
श्री जितेन्द्र चौधरी (त्रिपुरा पूर्व) : सर, आप इस बारे में कानून लाइए।
श्री थावर चंद गहलोत : यूपीए सरकार के समय नौ से साढ़े नौ प्रतिशत से ज्यादा कभी भी नहीं हुई। श्री नरेन्द्र मोदी साहब देश के प्रधान मंत्री बने, उन्होंने मझे इस मंत्रालय का दायित्व दिया। मैं आपको आश्वस्त करके कहता हूं, आप आँकड़ों का मिलान कर लें। हमारी सरकार ने 12 प्रतिशत और 13 प्रतिशत के बीच में धनराशि दी और इस बार यह खुशी की बात है कि 52 हजार करोड़ रूपये से ज्यादा की धनराशि इस योजना में दी है, पहले की तुलना में इसमें 30 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। यह ऐतिहासिक बढ़ोतरी हुई है।
अब मांग आती है कि धनराशि पॉपुलेशन के हिसाब से दी जाए। पॉपुलेशन के हिसाब से धनराशि देने का निर्णय पिछली सरकार ने कई साल पहले किया था। भारत सरकार के 62 मंत्रालय हैं, उनमें से 26 मंत्रालय को सब‑प्लान पर धनराशि देने का प्रावधान किया है। उन्हीं 29 मंत्रालयों के माध्यम से आज हम इस धनराशि का प्रावधान कर रहे हैं। पिछले साल कम हुई थी, उसका उल्लेख उन्होंने किया है। मैं पिछले टाइम भी जवाब दे चुका हूं। भारत सरकार ने 14वें वित्त आयोग की रिपोर्ट को स्वीकार किया है और इसका परिणाम यह हुआ कि हम राज्य सरकारों को पहले भारत सरकार के खजाने का 32 प्रतिशत पैसा देते थे। श्री नरेन्द्र मोदी साहब ने संघीय ढांचे को मजबूत करने के लिए, राज्यों की आर्थिक स्थिति मजबूत करने के लिए, राज्यों का विकास होगा तो देश का विकास होगा, इस बात को ध्यान में रखकर धनराशि में 10 प्रतिशत की बढ़ोतरी की। अब 32 प्रतिशत के बजाय 42 प्रतिशत धनराशि देने की शुरूआत की है। इसके अतिरिक्त नगरीय निकायों में विकास के लिए पाँच प्रतिशत अधिक धनराशि दी, दो प्रतिशत पंचायती राज व्यवस्था के लिए दी और इन योजनाओं के क्रियान्वयन के लिए जो खर्च होता है, उसके लिए भी दो प्रतिशत दी। इस प्रकार कुल मिलाकर 17 प्रतिशत धनराशि पहले की तुलना में ज्यादा भारत सरकार ने राज्यों को देने का काम किया। इसके कारण भारत सरकार के 26 मंत्रालय प्रभावित हुए थे। जो बजट प्रावधान हुआ था, उसमें कमी हुई थी। इस कारण से वह धनराशि 30 हजार करोड़ रूपये से 38 हजार करोड़ रूपये के आसपास थी, परंतु पहले जितनी स्वीकृति होती थी, उतना खर्च भी नहीं हो पाता था। हमने 38 हजार करोड़ रूपये का प्रावधान किया था, परंतु जब खर्च किया तो यह 40 हजार करोड़ रूपये के आस पास की धनराशि थी। यह गुण‑दोा सामने दिखलाई दे रहा है। पहले प्रावधान होता था, कागजों में पड़ा रहता था, मौके पर खर्च नहीं होता था, लेकिन हमने जितना मंजूर किया, उससे ज्यादा खर्च किया। हमने मौके पर विकास कार्य करने का प्रयास किया है।
मैं आज इस अवसर पर बहुत ज्यादा कहूंगा तो आप कहेंगे कि समय ज्यादा ले रहे हैं, परंतु मेरे पास कहने के लिए तो बहुत कुछ है। जो बच्चे विदेशों में जाकर पढ़ते हैं, उनको हमने ओवरसीज स्कॉलरशिप दी है। अगर कोई विशेष प्रकार की डिग्री या पीएचडी वगैरह हासिल करता है तो उसको फेलोशिप योजना के अंतर्गत पैसा देते हैं। आईएएस, आईपीएस और आईएफएस आदि की कोचिंग के लिए, जो एक रेट के पढ़ाई करने वाले छात्र‑छात्राएं हैं, उनको भी हम आर्थिक सहायता देते हैं। इस प्रकार की अनेक योजनाएँ हैं, उन सब योजनाओं का लाभ हम संबंधित छात्र‑छात्राओं को देने का प्रयास कर रहे हैं। हमने डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर स्कीम लागू की है, इससे लिकेज़ रूका है। सही छात्र‑छात्राओं को छात्रवृत्ति मिल रही है। जो एक जगह से नहीं तीन‑चार जगहों से छात्रवृत्ति लेते थे, बेईमानी करते थे। हमने ऐसे कृत्य करने वालों पर रोक लगाने का काम किया है। हमने कुल मिलाकर चहूंमुखी विकास करने की दृिष्ट से अनेक योजनाएं बनाई है। मुझे इस बात की खुशी है कि अनुसूचित जाति व जनजाति वर्ग के हितों की सुरक्षा करने में हम सफलता प्राप्त कर रहे हैं। हम लोग श्री नरेन्द्र मोदी साहब के मार्गदर्शन में इन वर्गों का तेज गति से विकास करेंगे। समता, समन्वय, संवाद बिठा कर समरसता का वातावरण बनाने की कोशिश करेंगे। इसमें आप सभी का सहयोग अपेक्षित है। मैं ऐसी प्रार्थना करते हुए निवेदन करता हूं कि इस विधेयक को पारित किया जाए। धन्यवाद।
16.00 hours SHRI K.H. MUNIYAPPA(KOLAR): The population of SCs and STs in Karnataka, I think Ananthkumar-ji is well aware of this fact, is 24.1 per cent. Today a budget of Rs.24,000 crore has been given. I want to know from the Government … (Interruptions)
THE MINISTER OF CHEMICALS AND FERTILIZERS AND MINISTER OF PARLIAMENTARY AFFAIRS (SHRI ANANTHKUMAR): Sir, the Minister has completed his reply.
HON. DEPUTY SPEAKER: He wanted to seek a clarification.
SHRI K.H. MUNIYAPPA : Anathkumar-ji, you are Minister of Parliamentary Affairs. You have to intervene and you have to help us.
According to the total budget of Rs.6 lakh crore, the Government of India has to provide Rs.1,50,000 crore for the welfare of SCs and STs. There is a social obligation. They are educationally and socially backward. At the same time, the budget allocation should be increased according to the population.
I am in the Consultative Committee for the last 25 years. During our Government also we made this request. Navodaya School type residential schools should be established in all districts exclusively for the SC and ST population. Instead of spending huge money, you spend money for the residential schools in each of the 700 districts of the country, it will be more useful for the people belonging to SCs. If quality education is provided to them, they will come to the mainstream of society. This is one of the most important areas I would like to highlight.
During the UPA Government, there were a dozen Ministers - five Cabinet Ministers and seven State Ministers. How many Ministers are there in this Government? You are talking a lot but you have not given proper representation. As Dr. Ambedkar said, if there is no proper representation in the Government, how can you ensure justice for that section? …(Interruptions)… SHRI JITENDRA CHAUDHURY (TRIPURA EAST): Sir, with due respect to the hon. Minister, he mentioned that this time again the allocation has been enhanced. I would like to give some data within a minute. According to Jadhav guidelines, the Budget allocation for the SCs should be 4.63 per cent which comes to about Rs.99,394 crore; but you allocated only Rs.52,393 crore. Similarly, in the Tribal Affairs, according to Jadhav guidelines the recommended Budget is 2.39 per cent which comes to Rs.51,307 crore; but you allocated only Rs.31,920. Yes, it is enhanced from the previous financial year but it is not according to the proportion of the population. The Minister of Tribal Affairs and the Minister of Social Justice are here. I would urge upon to them take care of this.
श्री थावर चंद गहलोत : महोदय, जो बिंदु अभी उठाए, मैंने उनका जवाब दिया है। पिछली सरकार ने जो नियम-कानून बनाये थे, उसी के आधार पर हम एससी सब-प्लान की राशि आबंटित कर रहे हैं। मैं यह कह रहा हूं कि हमने पहले से तीन गुना धनराशि बढाकर दी है। ये कहां के और कौन से आंकड़े पढ़ रहे हैं, उन आंकड़ों से मैं सहमत नहीं हूं।
जहां तक आदरणीय मुनियप्पा साहब ने बताया, मैं यह कह सकता हूं कि उन्होंने कर्नाटक का उदाहरण दिया है तो मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, हिमाचल प्रदेश, आदि कई ऐसे प्रदेश हैं, जो कर्नाटक की तुलना में इन वर्गों के हितों के लिए ज्यादा बजट प्रावधान करते हैं। मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और ये राज्य पॉपुलेशन की मांग से भी ज्यादा करते हैं। जब उनके साथ बैठक हुई थी, मैं उन सब विषयों की तरफ नहीं जाना चाहता, कुछ बात इन्होंने भी स्वीकार की थी कि कर्नाटक में जो हो रहा है, वह ठीक नहीं हो रहा है। अगर मैं उन सब बातों का उल्लेख करूंगा, तो एक दिन आप अलग से इस पर चर्चा रखवा दें।
माननीय सदस्यों ने कुछ और बातें उठायीं। मैं मुनियप्पा साहब से पूछना चाहूंगा। वे हमारे वर्ग के शुभचिंतक हैं। इनकी सरकार के समय अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय केन्द्रीय विश्वविद्यालय की लिस्ट में है। उसे अल्पसंख्यक विश्वविद्यालय घोषित करके अनुसूचित जाति, जनजाति आदि सब वर्गों के लोगों का आरक्षण संबंधी प्रावधान और जो-जो सुविधाएं मिलती थीं, वे सब बंद क्यों हो गईं?...(व्यवधान) दिल्ली में जामिया मिलिया इस्लामिया विश्वविद्यालय है। वह भी केन्द्रीय सूची में है, केन्द्रीय विश्वविद्यालय है। केन्द्रीय विश्वविद्यालय होने के बाद भी उसे अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थान यूनिवर्सिटी घोषित किया गया और वहां भी अनुसूचित जाति, जनजाति वर्ग के लोगों की सब सुविधाएं बंद कीं। इनकी सरकार ने किया, इनके समय में हुआ।...(व्यवधान) अगर वे इस प्रकार की छोटी-मोटी बातें रखना चाहते हैं, तो मेरे पास सैकड़ों उदाहरण हैं, राज्यवार भी हैं। मैं आपके आशीर्वाद से ये सब जवाब देने के लिए तत्पर हूं।...(व्यवधान) क्या वे आज भी यह बताने के लिए तैयार हैं कि उनकी पार्टी इन दोनों विश्वविद्यालयों में अनूसूचित जाति, जनजाति और पिछड़े वर्ग के लोगों को पहले जो सुविधाएं मिलती थीं, वे दिलवाने का समर्थन करेंगे?...(व्यवधान)
श्री अनन्तकुमार : अभी हाउस को आश्वस्त कीजिए।...(व्यवधान) अभी बोलिए।...(व्यवधान)
श्री थावर चंद गहलोत : जामिया मिलिया इस्लामिया विश्वविद्यालय में 22 हजार लोगों को जो सुविधाएं मिलती थीं, मेरी जानकारी के अनुसार उन्हें वे सुविधाएं देनी बंद हुई हैं। क्या वे आश्वस्त करेंगे कि उनकी पार्टी वहां आरक्षण संबंधी प्रावधानों का अधिकार देगी?...(व्यवधान)
आजादी के बाद 60 सालों तक जो सरकारें रही हैं, विशेषकर कांग्रेस सरकार रही, उन्होंने अनुसूचित जाति, जनजाति और अल्पसंख्यक वर्ग के लोगों को पॉकेट वोट बनाकर रखा, उनका उपयोग चुनाव में किया, परन्तु उनके हित संरक्षण की कार्य योजना नहीं बनीं। आज आंकड़े देख लीजिए। ये कभी-कभी सच्चर कमेटी का उदाहरण देते हैं। मुस्लिम समाज की यह स्थिति है। कौन जिम्मेदार है? 60 साल उन्होंने राज किया। अनुसूचित जाति वर्ग और जनजाति वर्ग के लोगों की आर्थिक, सामाजिक, शैक्षणिक, राजनीतिक स्थिति कमजोर है। किसके कारण है? जिम्मेदार वे हैं।...(व्यवधान) हमने इन तीन वााॉ में कर्तव्य और ईमानदारी से इन वर्गों के हित के लिए अनेक योजनाएं बनाकर उन्हें इम्प्लीमैंट करने का काम किया है।
HON. DEPUTY SPEAKER: The question is:
“That the Bill further to amend the Constitution (Scheduled Castes) Order, 1950 to modify the list of Scheduled Castes in the State of Odisha and to amend the Constitution (Pondicherry) Scheduled Castes Order, 1964, be taken into consideration.” The motion was adopted.
HON. DEPUTY SPEAKER: The House shall now take up clause by clause consideration of the Bill.
Clauses 2 and 3 HON. DEPUTY SPEAKER: The question is:
“That Clauses 2 and 3 stand part of the Bill.” The motion was adopted.
Clauses 2 and 3 were added to the Bill. Clause 1, the Enacting Formula and the Long Title were added to the Bill. श्री थावर चंद गहलोत : महोदय, मैं प्रस्ताव करता हूं “कि विधेयक पारित किया जाए”।
HON. DEPUTY SPEAKER: The question is: “That the Bill be passed.” The motion was adopted.
16.09 hours